RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ८, अंक १७ ] सोमवार, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ [पृष्ठे ८, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक २६
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
उच्चतर तथा तकनीकी शिक्षा विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित २४ नवम्बर २०२२। MAHARASHTRA ORDINANCE No. XIII OF 2022.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE YASHWANTRAO CHAVAN MAHARASHTRA OPEN UNIVERSITY ACT, 1989, THE KAVI KULGURU KALIDAS SANSKRIT VISHVAVIDYALAYA (UNIVERSITY) ACT, 1997 AND THE MAHARASHTRA PUBLIC UNIVERSITIES ACT, 2016
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १३, सन् २०२२।
यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९, कवि कुलगुरु
कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ और महाराष्ट्र लोक
विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश ।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
(१)
भाग सात-२६—१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान है, जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९, कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ और महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १९८९ का महा. २०। सन् १९९७ का महा. ३३। सन् २०१७ का महा. ६। अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते है, अर्थात् :—
अध्याय एक
प्रारम्भिक
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।
१. (१) यह अध्यादेश, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय, कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) और महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, २०२२ कहलाए। (२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा ।
अध्याय दो
यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९ में संशोधन।
२. (१) यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९ (जिसे इसमें आगे, " खुला विश्वविद्यालय अधिनियम " कहा गया है) की धारा १० की,-----
सन् १९८९ का महा. २० की धारा १० में संशोधन।
सन् १९८९ का महा. २०। (१) उप-धारा (१) के,-----
(क) खण्ड (क) में,-----
(एक) " समिति " शब्दों के स्थान में, " खोजबीन-नि-चयन समिति " शब्द रखे जायेंगे ;
(दो) उप-खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :----
" (एक) कुलाधिपति द्वारा नामनिर्देशित एक सदस्य, जो उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में का एक विख्यात व्यक्ित होगा और या तो शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कोई विख्यात विद्वान होगा या शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता होगा ; " ;
(तीन) उप-खण्ड (तीन) के पश्चात्, निम्न उप-खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----
" (चार) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया
जानेवाला एक सदस्य ;" ;
(ख) खण्ड (ग) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
" (ग) समिति पर नामनिर्देशित होनेवाले सदस्य ऐसे व्यक्ित होंगे जो विश्वविद्यालय के साथ किसी रीत्या में संबंधित नहीं है या विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय या किसी मान्यताप्राप्त संस्था से संबंधित नहीं है ; " ;
(ग) खण्ड (घ) में " तीन " शब्द अपमर्ाजित किया जायेगा ;
(२) उप-धारा (१घ) के,----
(क) खण्ड (क) के स्थान में, निम्न खण्ड रखा जायेगा, अर्थात् :-----
(क) वह सक्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिक और संस्थागत प्रतिबद्धता का उच्चतम स्तर हासिल करनेवाला व्यक्ित होगा ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ ३(क-१) किसी विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कम से कम दस वर्षों के अनुभव या एक विख्यात अनुसंधान में प्रर्दशित अकादमिक नेतृत्व होनेवाले सबूत के साथ अकादमिक प्रशासकीय संगठन में दस वर्षों का अनुभव होनेवाला प्रख्यात परिषत्सदस्य होगा ; " ;
(ख) खण्ड (घ) में, " शैक्षिक अर्हताएँ " शब्दों के स्थान में, " अतिरिक्त शैक्षिक अर्हताएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) उप-धारा (१च) के पश्चात्, निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
" (१छ) यदि, कुलाधिपति द्वारा चयनित व्यक्ित, कुलपति के पद का प्रभार ग्रहण नहीं करता है तो, कुलाधिपति, एक नामिका से, शेष व्यक्ितयों में से एक अन्य यथोचित व्यक्ित का चयन कर सकेगा या वह उसी समिति से या तो एक नए नामिका को बुला सकेगा या ऐसी नई समिति से इसी प्रयोजन के एक नई समिति के गठन के पश्चात्, नए नामिका को बुला सकेगा । " ।
३. खुला विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा १०क के स्थान में, निम्न धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :--- सन् १९८९ का महा. २० की धारा १०क की प्रतिस्थापना। प्रति-कुलपति। " १०क. प्रति कुलपति होने के लिए प्रबंध बोर्ड को एक व्यक्ित की सिफारिश करना यह कुलपति का परमाधिकार होगा । प्रबन्ध बोर्ड, कुलपति की सिफारिश पर विश्वविद्यालय के लिए एक प्रति-कुलपति की नियुक्ित करेगा। प्रति-कुलपति ऐसे अवधि के लिए तथा ऐसे उपलब्धियों पर और सेवा की अन्य शर्तों पर नियुक्त किया जायेगा तथा परिनियमों द्वारा जैसा कि विहित किया जाए ऐसी शक्ितयों का प्रयोग करेगा और ऐसे कृत्यों का निर्वहन करेगा । "।
अध्याय तीन
कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ में संशोधन।
४. कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ (जिसे इसमें आगे, " संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम " कहा गया है) की धारा १२ की,-----
सन् १९९७ का महा. ३३।
सन् १९९७ का महा. ३३ की धारा १२ में संशोधन। (१) उप-धारा (१) के,-----
(क) खण्ड (क) में,-----
(एक) " समिति " शब्दों के स्थान में, " खोजबीन-नि-चयन समिति " शब्द रखे जायेंगे ;
(दो) उप-खण्ड (एक) के पश्चात्, निम्न उप-खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
" (एक) कुलाधिपति द्वारा नामनिर्देशित एक सदस्य जो, उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में का विख्यात व्यक्ित होगा और या तो राष्ट्रीय ख्याति का विख्यात विद्वान होगा या शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता होगा ; " ;
(तीन) उप-खण्ड (तीन) के पश्चात्, निम्न उप-खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----
" (चार) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित एक सदस्य ; " ;
(ख) खण्ड (ग) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
" (ग) समिति पर नामनिर्देशित किया गया सदस्य ऐसा व्यक्ित होगा जो विश्वविद्यालय के साथ किसी रीत्या में संबंधित नहीं है या उस विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय या किसी मान्यताप्राप्त संस्था से संबंधित नहीं है ; " ;
भाग सात-२६—१अ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ (ग) खण्ड (घ) में, " तीन " शब्द अपमर्ाजित किया जायेगा ;
(२) उप-धारा (३क) के,----
(क) खण्ड (क) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
" (क) वह सक्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिक और संस्थागत प्रतिबद्धता का उच्चतम स्तर हासिल करनेवाला व्यक्ित होगा ;
(क-१) किसी विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कम से कम दस वर्षों के अनुभव या एक विख्यात अनुसंधान में या प्रर्दशित अकादमिक नेतृत्व होनेवाले सबूत के साथ अकादमिक प्रशासकीय संगठन में दस वर्षों का अनुभव होनेवाला प्रख्यात परिषत्सदस्य होगा ; " ;
(ख) खण्ड (घ) में, " शैक्षिक अर्हताएँ " शब्दों के स्थान में, " अतिरिक्त शैक्षिक अर्हताएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) उप-धारा (४) के,----
(क) विद्यमान परंतुक, के पूर्व, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----
" परंतु यदि, कुलाधिपति द्वारा चयनित व्यक्ित, कुलगुरु के पद का प्रभार ग्रहण नहीं करता है तो, कुलाधिपति, एक पॅनल से, शेष व्यक्ितयों में से एक अन्य यथोचित व्यक्ित का चयन कर सकेगा या वह उसी समिति से या तो एक नए पॅनल को बुला सकेगा या ऐसी नई समिति से इसी प्रयोजन के एक नई समिति के गठन के पश्चात् नए पॅनल को बुला सकेगा : " ।
(ख) विद्यमान परंतुक में, " परंतु, तथापि यह " शब्दों के स्थान में, " परंतु आगे यह कि " शब्द रखे जायेंगे ।
५. संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम की धारा १३ की उप-धारा (१) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी, अर्थात् :----
सन् १९९७ का महा. ३३ की धारा १३ में संशोधन।
" (१) सम-कुलगुरु के लिए व्यवस्थापन परिषद को एक व्यक्ित की सिफारिश करना यह कुलगुरु का परमाधिकार होगा । कुलगुरु की सिफारिश पर व्यवस्थापन परिषद, विश्वविद्यालय के लिए एक सम-कुलगुरु की नियुक्ित करेगी । "।
अध्याय चार
महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ में संशोधन।
६. महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ (जिसे इसमें आगे, " लोक विश्वविद्यालय अधिनियम " कहा गया है) की धारा ११ की,-----
सन् २०१७ का महा. ६। सन् २०१७ का महा. ६ की धारा ११ में संशोधन।
(१) उप-धारा (३) के,-----
(क) खण्ड (क) में,-----
(एक) " समिति " शब्दों के स्थान में, " खोजबीन-नि-चयन समिति " शब्द रखे जायेंगे ;
(दो) उप-खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :----
" (एक) कुलाधिपति द्वारा नामनिर्देशित सदस्य, जो उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में का एक विख्यात व्यक्ित होगा और या तो शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कोई विख्यात विद्वान होगा या शिक्षा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता होगा ; " ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ ५(तीन) उप-खण्ड (तीन) के पश्चात्, निम्न उप-खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :-----
"(चार) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किया जानेवाला एक सदस्य ;";
(ख) खण्ड (ग) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
"(ग) समिति पर नामनिर्देशित होनेवाले सदस्य ऐसे व्यक्ित होंगे जो विश्वविद्यालय के साथ किसी रित्या में संबंधित नहीं है या उस विश्वविद्यालय के किसी महाविद्यालय या किसी मान्यताप्राप्त संस्था से संबंधित नहीं है ;";
(ग) खण्ड (घ) में " तीन " शब्द अपमर्ाजित किया जायेगा ; (घ) खण्ड (च) के,----
(एक) उप-खण्ड (१) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
(एक) वह सक्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिक और संस्थागत प्रतिबद्धता का उच्चतम स्तर हासिल करनेवाला एक व्यक्ित होगा ;
(१-क) और किसी विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कम से कम दस वर्षों के अनुभव या एक विख्यात अनुसंधान में या प्रर्दशित अकादमिक नेतृत्व होनेवाले सबूत के अकादमिक प्रशासकीय संगठन में दस वर्षों का अनुभव होनेवाला प्रख्यात परिषत्सदस्य होगा ;"; (दो) उप-खण्ड (चार) में " शैक्षिक अर्हताएँ " शब्दों के स्थान में, " अतिरिक्त शैक्षिक अर्हताएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(२) उप-धारा (४) में,----
(क) विद्यमान परंतुक के पूर्व, निम्न परंतुक, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्,---
" परंतु, यदि कुलाधिपति द्वारा चयनित व्यक्ित, कुलपति के पद का प्रभार ग्रहण नहीं करता है तो, कुलाधिपति, एक पॅनल से शेष व्यक्ितयों में से एक अन्य यथोचित व्यक्ित का चयन कर सकेगा या वह उसी समिति से या तो एक नए पॅनल को बुला सकेगा ऐसी नई समिति से इसी प्रयोजन के एक नई समिति के गठन के पश्चात् नए पॅनल को बुला सकेगा : ";
(ख) विद्यमान परंतुक में, " परंतु यह कि " शब्दों के स्थान में, " परंतु आगे यह कि " शब्द रखे जायेंगे।
७. लोक विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा १३ की उप-धारा (६) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-----
सन् २०१७ का महा. ६ की धारा १३ में संशोधन। " (६) प्रति कुलपति होने के लिए प्रबंधक परिषद को एक व्यक्ित की सिफारिश करना यह कुलपति का परमाधिकार होगा। प्रबन्ध परिषद कुलपति की सिफारिश पर विश्वविद्यालय के लिए एक प्रति-कुलपति की नियुक्ित करेगा ।"।
८. लोक विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा १०९ की,-----
(१) उप-धारा (३) के खण्ड (छ) के पश्चात् द्वितीय परंतुक के स्थान में, निम्न परंतुक, रखा जायेगा,
सन् २०१७ का महा. ६ की धारा १०९ में संशोधन। अर्थात् :----
""परंतु आगे यह कि, सन २०२३-२०२४ के अकादमिक वर्ष के लिए उच्चतर अध्ययन के नए महाविद्यालय या संस्था शुरू करने के लिए आशयपत्र की माँग करने के लिए आवेदन करने का दिनांक बढाने के लिए संकाय बोर्ड द्वारा आवेदन की संवीक्षा करने और उसे राज्य सरकार को अग्रेषित करने६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ और राज्य सरकार द्वारा आशय पत्र देने के लिए नीचे दी गई तालिका के स्तंभ (२) में यथा विर्िनदिष्ट उप- धारा (३) के खण्ड (क)(ग) और (घ) में निर्देशित दिन या दिनांक उक्त तालिका के स्तंभ (३) में यथा उपबंधित उक्त दिन या दिनांक के रूप में पढ़ा जायेगा,----
तालिका
खण्ड
विद्यमान उपबंध में उपबंधित अकादमिक वर्ष २०२३-२४ के
दिन और दिनांक
लिए उपबंधित दिन और दिनांक (१)
(२)
(३)
(क) जिस वर्ष में आशय पत्र चाहा गया है उस वर्ष के पूर्वर्वति १५ जनवरी २०२३ को वर्ष के सितम्बर के अंतिम दिनांक के पूर्व। या के पूर्व।
(ग) जिस वर्ष में ऐसा आवेदन विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त हुआ है २८ फरवरी २०२३ को उस वर्ष के ३० नवम्बर को या के पूर्व।
या के पूर्व।
(घ) विश्वविद्यालय के सिफारिशों के पश्चात् ठीक पश्चात्र्वति १ अप्रैल २०२३ को वर्ष के ३१ जनवरी को या के पूर्व।
या के पूर्व।";
(२) उप-धारा (४) में, खण्ड (घ) के पश्चात्, द्वितीय परंतुक के स्थान में, निम्न परंतुक, रखा जायेगा, अर्थात् :-----
परंतु आगे यही कि, अकादमिक वर्ष २०२३-२४ के लिए अध्ययन के नए पाठयक्रम, विषय, संकाय अतिरिक्त विभाग या उपग्रह केंद्र शुरू करने की अनुमति माँगने के लिए आवेदन करने का दिनांक बढाने की दृष्टि से नीचे दी गई तालिका के स्तंभ (२) में यथा विर्िनदिष्ट उप-धारा (४) के खण्ड (क) में निर्देशित दिन या दिनांक उक्त तालिका के स्तंभ (३) में यथा उपबंधित उक्त दिन या दिनांक के रूप में पढ़ी जायेगी :-----
तालिका
खण्ड
विद्यमान उपबंध में उपबंधित अकादमिक वर्ष २०२३-२४ के
दिन और दिनांक
लिए उपबंधित दिन या दिनांक (१)
(२)
(३)
(क) जिस वर्ष में अनुमती चाही गई है उस वर्ष के पूर्वर्वति वर्ष १५ जनवरी २०२३ को के सितम्बर के अंतिम दिनांक के पूर्व।
या के पूर्व।""।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ ७
वक्तव्य ।
यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९ (सन १९८९ का महा. २०) की धाराएँ १० और १०क, कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ (सन् १९९७ का महा. ३३) की धाराएँ १२ और १३ और महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ (सन् २०१७ का महा. ६) की धाराएँ ११ और १३ कुलपति की नियुक्ति और प्रति-कुलपति की नियुक्ति करने के लिए पात्रता मानदण्ड और चयन समिती के गठन के लिए उपबंध करते है।
२. कुलपति की नियुक्ित के लिए और प्रति-कुलपति की नियुक्ति करने के लिए पात्रता मानदण्ड और चयन समिति के गठन के उपबंध विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा तत्पश्चात् उपांतरित किए गए है देखिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, १९५६ (सन् १९५६ का ३) के अधीन विरचित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्यापकों और अन्य अकादमिक कर्मचारिवृंद की नियुक्ती के लिए न्यूनतम अर्हताएँ और उच्चतर शिक्षा में मानक बनाए रखने के लिए अन्य उपाय) विनियम, २०१८ विरचित किया गया था।
३. उच्चतम न्यायालय ने, गंभीरदान के गढवी बनाम गुजरात सरकार और अन्य (सन् २०१९ की रिट याचिका (सिविल) क्रमांक १५२५ और प्राध्यापक (डॉ.) श्रीजीत पी. एस बनाम राजश्री एम. एस और अन्य (सन २०२२ की सिविल अपील क्रमांक ७६३४-७६३५) के मामलों में, हाल ही में यह ठहराया गया है की, कुलपति के पात्रता मानदण्ड और नियुक्ति हमेशा सुसंगत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियमों के अनुसार होंगी और राज्य अधिनियम यदि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियमों का एक हिस्सा है तो उसे संशोधित किया जाना चाहिए और जब तक वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम लागू रहेंगे तब तक वह अभिभावी होंगे।
४. राज्य में कतिपय विश्वविद्यालयों के कुलपति और प्रति-कुलपतियों का पदावधि पहले से ही अवसित हो चुका है और नई नियुक्ितयाँ प्रतीक्षित है।
५. उपयर्ुक्त को देखते हुए, विश्वविद्यालयों से संबंधित उक्त राज्य विधियों में अंर्तविष्ट कुलपति और प्रति-कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित विद्यमान उपबंधों का यथोचित संशोधन करना आवश्यक है ताकि उन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियमों के अनुरुप बनाया जाए।
६. महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम, २०१६ की धारा १०९ उच्चतर अध्ययन के नए महाविद्यालय या संस्था, नये अध्ययन पाठयक्रम, विषयों, संकायों, अतिरिक्त विभागों या उपग्रह केंद्रों को शुरु करने के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया में विभिन्न चरणों के लिए कतिपय समय-सीमा का उपबंध करती हैं।
अकादमिक वर्ष २०२२-२०२३ के लिए उच्चतर अध्ययन का नये महाविद्यालय या संस्था, अध्ययन के नए पाठ्यक्रम आदि शुरू करने के लिए अनुमति देने की प्रकिया में विभिन्न चरणों के लिए समय सीमा बढ़ाई गई थी। जिसके कारण अकादमिक वर्ष २०२३-२०२४ से नए महाविद्यालय या नये पाठ्यक्रम आदि, शुरू करने के लिए अनुमति की प्रक्रिया विर्िनदिष्ट समय-सीमा के भीतर कार्यान्वित नहीं हो सकी थी। इसलिए, अकादमिक वर्ष २०२३- २०२४ के लिए, उसके लिए विस्तारित समय-सीमा विर्िनदिष्ट करना इष्टकर समझा गया है।८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर ५, २०२२/अग्रहायण १४, शके १९४४ ७. चँूकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है, और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है की, ऐसी परिस्थितीयाँ विद्यमान है, जिनके कारण उन्हे इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र खुला विश्वविद्यालय अधिनियम, १९८९ कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (विश्वविद्यालय) अधिनियम, १९९७ और महाराष्ट्र लोक विश्वविद्यालय अधिनियम २०१६ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अंत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है। मुंबई,
भगतसिंह कोश्यारी,
दिनांक २४ नवम्बर २०२२।
महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
विकास चंद्र रस्तोगी, सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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