महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ८, अंक १९] मंगळवार, डिसेंबर २०, २०२२/अग्रहायण २९, शके १९४४ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ३३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक २० दिसंबर, २०२२ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :---
L. A. BILL No. XXXII OF 2022.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA POLICE ACT AND THE MAHARASHTRA CINEMAS (REGULATION) ACT.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ३२ सन् २०२२।
महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) अधिनियम में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी विधेयक।
सन् १९५१ का २२। सन् १९५३ का ११।
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) अधिनियम में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के तिहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है, अर्थात् :---
अध्याय-एक
प्रारम्भिक
संक्षिप्त नाम । १. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र पुलिस और महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) (संशोधन) अधिनियम, २०२२ कहलाए।
(१)
भाग सात-३३-१. एचबी--२४७४-१.
२ द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् २०, २०२२/+ २९, ॅ १९४४अध्याय-दो
महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम में संशोधन ।
२. महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (जिसे इसमें आगे, इस अध्याय में "पुलिस अधिनियम" कहा गया है) की सन् १९५१ का २२। धारा ९०क की, उप-धारा (१) के, खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न खण्ड रखा जायेगा, अर्थात् :---
सन् १९५१ का २२ की धारा ९०क में संशोधन।
" (एक) प्रथम अपराध के लिए, ऐसे जुर्माने से, जिसे तीन हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा ; "। ३. पुलिस अधिनियम की धारा ११८ की, उप-धारा (१) के खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न खण्ड रखा जायेगा, अर्थात् :---
सन् १९५१ का २२ की धारा ११८ में संशोधन।
" (एक) पहले अपराध के लिए, ऐसे जुर्माने से, जिसे चार हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा ; "। ४. पुलिस अधिनियम की धारा १३१, के खण्ड (ख) का उप-खण्ड (दो) अपमर्ाजित किया जायेगा । सन् १९५१ का २२ की धारा १३१ में संशोधन।
अध्याय-तीन
महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) अधिनियम में संशोधन ।
सन् १९५३ का ११। सन् १९५३ का ११ की धारा ७ में संशोधन।
५. महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) अधिनियम (जिसे इसमें आगे, इस अध्याय में, "सिनेमा अधिनियम" कहा गया है) की धारा ७ की, उप-धारा (१) में " कारावास से दण्डित किया जायेगा " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले भाग तथा " प्रथम ऐसे अपराध के लिए " शब्दों से समाप्त होनेवाले भाग के लिए, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :-- -
" ऐसे जुर्माने से, जिसे पचास हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, और निरंतर अपराध करने के मामले में, जो प्रथम ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध होने के पश्चात्, अपराध निरंतर करता है, ऐसे प्रत्येक दिन के लिए पाँच हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सके ऐसे अधिक के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा "। सन् १९५३ का ११ की धारा ९ में संशोधन।
६. सिनेमा अधिनियम की धारा ९ की, उप-धारा (३) में, " कारावास से दण्डित किया जायेगा " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले भाग तथा " प्रथम ऐसे अपराध के लिए " शब्दों से समाप्त होनेवाले भाग के स्थान में, निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :-----
" ऐसे जुर्माने से, जिसे पचास हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सकेगा, और निरंतर अपराध करने के मामले में, जो प्रथम ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध होने के पश्चात् जिसके दौरान अपराध निरंतर करता है ऐसे प्रत्येक दिन के लिए पाँच हजार रुपयों तक बढ़ाया जा सके ऐसे, अधिकतर जुर्माने से दण्डित किया जायेगा "।द्धन्रु]क्ष् रू न् +रून् रू, ह्यरूदन् २०, २०२२/+ २९, ॅ १९४४ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।
भारत सरकार के अनुरोध पर, राज्य सरकार ने, नागरिकों के कारोबार में सहजता लाने और जीवनस्तर में सुगमता को बढ़ाने के उद्देश्य से छोटे अपराध करनेवाले नागरिकों के लिए कारावास की जोखिम को समाप्त करने के लिए सभी राज्य अधिनियमों और तद्धीन विरचित नियमों का व्यापक पुर्नविलोकन हाथ में लिया है ।
२. उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार ने संबंधित प्रशासकीय विभाग और प्राधिकरणों या तद्धीन संस्थाअों से परामर्श करने के पश्चात्, राज्य अधिनियमों या तद्धीन विरचित नियमों में विद्यमान कारावास उपबंधों का अपमार्जन करने या अल्पीकरण करने या अपराधों का प्रशमन करने के लिए उपबंध करने की सिफारिश करने के लिए अप्पर मुख्य सचिव (उद्योग) की अध्यक्षता के अधीन एक सचिव समिति गठित की है ।
तद्नुसार, ऐसे पुर्नविलोकन के पश्चात्, सरकार महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम (सन् १९५१ का २२) की धारा ९०क, ११८ और १३१ और महाराष्ट्र सिनेमा (विनियमन) अधिनियम (सन् १९५३ का ११) की धारा ७ और ९ में अंर्तविष्ट कारावास उपबंधों में संशोधन करना इष्टकार समझती है ।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है ।
मुंबई, दिनांकित १५ दिसंबर, २०२२ ।
देवेंद्र फडणवीस, उप-मुख्यमंत्री ।
(यथार्थ अनुवाद)
श्रीमती विजया डोनीकर, भाषा संचालक,
महाराष्ट्र राज्य ।
विधान भवन, नागपूर, दिनांकित २० दिसंबर, २०२२ ।
राजेन्द्र भागवत, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा ।
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