RNI No. MAHBIL/2009/31730
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L. A. BILL No. XXXIX OF 2022.
A BILL
TO PROVIDE TO ESTABLISH AND INCORPORATE AND TO REGULATE THE ITM SKILLS UNIVERSITY, NAVI MUMBAI IN THE STATE, A SELF-FINANCED SKILLS UNIVERSITY, TO CREATE SKILLED AND EMPLOYABLE YOUTH, TO ENCOURAGE JOB CREATION AND TO PROMOTE DELIVERY OF QUALITY SKILLS EDUCATION, STARTUPS, INCUBATION, EMPLOYABILITY, TRAINING, COUNSELLING, APPRENTICESHIP TRAINING, ON-JOB TRAINING AND PLACEMENT IN AN INTEGRATED MANNER WITH INDUSTRY PARTNERSHIP, TO PROMOTE INCLUSIVE GROWTH BY FACILITATIN EMPLOYMENT AND PROVIDING SELF EMPLOYMENT GUIDANCE FOR THE YOUTH TO ENHANCE THEIR INCOMES, AND FOR MATTERS CONNECTED THERE WITH OR INCIDENTAL THERETO.
(१)
भाग सात-४२-१. एचबी--१४७४-१.
२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४विधानसभा का विधेयक क्रमांक ३९ सन् २०२२ ।
कौशलता और रोजगारक्षम युवाअों का निर्माण करने, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने और
दरजा कौशल शिक्षा देने को बढावा देने, नवीन व्यवसाय करना (स्टार्टअप), उद्भवन, रोजगार
र्िनमिति, प्रशिक्षण, समनुदेशन, शिक्षुता सेवारत प्रशिक्षण और उद्योग सहभागिता से एकात्मिक
रीत्या में नियोजन करने, रोजगार सुकर बनाने द्वारा, व्यापक वृद्धि को बढावा देने और युवाअों
को उनकी आय को बढाने के लिए स्व-रोजगार मार्गदर्शन का उपबंध करने, तथा उससे संबंधित
या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए स्व-वित्तपोषित कौशल विश्वविद्यालय के रूप में राज्य में
आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई स्थापित और निगमित करने और विनियमीत करने
के लिये उपबंध करने संबंधी विधेयक ।
क्योंकि कौशलता और रोजगार क्षम युवाअों का निर्माण करने, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने और दरजा कौशल शिक्षा देने को बढा़वा देने, नवीन व्यवसाय करना (स्टार्ट अप), उद्भवन, रोजगार र्िनमिती, प्रशिक्षण, समनुदेशन, शिक्षुता, सेवारत प्रशिक्षण और उद्योग सहभागिता से एकात्मिक रीत्या में नियोजन करने, रोजगार सुकर बनाने द्वारा व्यापक वृद्धि को बढ़ावा देने और युवाअों को उनकी आय को बढ़ाने के लिए स्व-रोजगार मार्गदर्शन का उपबंध करने, तथा उससे संबंधित या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए स्व-वित्तपोषित कौशल विश्वविद्यालय के रूप में राज्य में, आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई स्थापित और निगमित करना इष्टकर है, अत: भारत गणराज्य के तिहत्तरवे वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है:----
अध्याय-एक
प्रारम्भिक
१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई अधिनियम, २०२२ कहलाए । (२) यह ऐसे दिनांक से प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत कर सकें । संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भण ।
परिभाषाएँ । २. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,----
(क) " सहयोगी प्राध्यापक, " " सहयोगी सहयुक्त प्राध्यापक, " " सहयोगी सहायक प्राध्यापक, " या " व्यवसाय के प्राध्यापक, " का तात्पर्य, कोई व्य िउद्योग विनिर्माण और सेवा क्षेत्र औद्योगिक संघ, व्यापार, कृषि, वाणिज्य, सामाजिक, सांस्कृतिक, अकादमिक या किसी अन्य सहबद्ध क्षेत्र से है, जो इस प्रकार पदाभिहित किये जाने के दौरान विश्वविद्यालय के सहयोगी या सहयुक्त से है;
(ख) " शिक्षुता प्रशिक्षण " का तात्पर्य, शिक्षुता की संविदा के अनुसरण में की गई और शिक्षुता के विभिन्न प्रवर्गों के लिए जिसे अलग-अलग किया जाए ऐसे शर्तों तथा निबंधनों के अध्यधीन किसी उद्योग या संस्थापना में प्रशिक्षण के क्रम, से है ;
(ग) " प्राधिकरण " का तात्पर्य, इस अधिनियम द्वारा या के अधीन यथा विर्िनदिष्ट विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों से है ;
(घ) " प्रबंध मंडल बोर्ड " का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा २२ के अधीन गठित किये गये प्रबंधमंडल बोर्ड से है ;
(ङ) " परिसर " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय का वह क्षेत्र जिसके अधीन यह स्थापित किया गया है ;
(च) " उत्कर्षता केंद्र " का तात्पर्य, छात्रों, सेवांतर्गत कर्मचारियों, कार्यरत व्यावसायिकों के सुसंगत कौशल के सभी प्रकार मुहैय्या करने के लिये, उद्योग से सहयोग में स्थापित अद्यावत प्रशिक्षण या अनुसंधान केंद्र या उद्योग या समाज के लाभ के लिये और संयुक्त परियोजना हाथ लेने के लिये स्थापित किये गये से है;
(छ) " संघटक संस्था " का तात्पर्य, प्रायोजक निकाय द्वारा, स्थापित किये गये महाविद्यालय, विभाग या विद्यालय या केंद्र या संस्था से है, जो विश्वविद्यालय के विस्तार क्षेत्र के अधीन आता है ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ ३(ज) " कर्मचारी " का तात्पर्य, प्रायोजक निकाय या विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त किसी व्य िसे है और इसमें विश्वविद्यालय के अध्यापक, अधिकारियों तथा अन्य कर्मचारी शामिल होंगे ;
(झ) " फीस " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय या उसके महाविद्यालयों, संस्थांअों या, यथास्थिति, कौशल केंद्रों अध्ययन केंद्रों द्वारा किया गया धनीय संग्रहण, चाहे जिस किसी भी नाम से पुकारा जाए, छात्रों से किया गया से है, जो प्रत्यर्पणीय नहीं है ;
(ञ) " सरकार " या " राज्य सरकार " का तात्पर्य, महाराष्ट्र सरकार से है ;
(ट) " शासी निकाय " का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा २१ के अधीन गठित किये गये शासी निकाय से है ;
(ठ) " ऑनलाईन तथा दूरस्थ शिक्षण " का तात्पर्य, संसूचना के किन्ही दो या अधिक साधनों के समुच्चय द्वारा, जैसे, प्रसारण, दूरदर्शन प्रसारण, सूचना संसूचना प्राद्योगिकी, पत्राचार पाठयक्रम, ऑनलाईन सेमिनार, संपर्क कार्यक्रम तथा किन्हीं अन्य ऐसी प्रणाली - विज्ञान द्वारा प्रदान की गई शिक्षा से है ;
(ड) " अधिसूचना " का तात्पर्य, राजपत्र में प्रकाशित की गई अधिसूचना से है ;
(ढ) " राजपत्र " का तात्पर्य, महाराष्ट्र सरकार के राजपत्र से है ;
(न) " विहित " का तात्पर्य, इस अधिनियम द्वारा या के अधीन बनाए गए नियमों, या परिनियमों या अध्यादेशों या, यथास्थिति, विनियमों से विहित, से है ;
(त) " सेवारत प्रशिक्षण " का तात्पर्य, ऐसा तकनीक जिसमें, छात्रों और कर्मचारियों को उनके प्रत्यक्ष कार्यस्थल पर कार्य का निर्वहन करने के लिए सीधे अनुदेश दिए है, से है ;
(थ) " अध्यक्ष " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय के अध्यक्ष से है, जो विश्वविद्यालय का कुलपति भी होगा ;
(द) " विनियामक निकाय " का तात्पर्य कौशल शिक्षा के अकादमिक मानक सुनिश्चित करने के लिये मानक और शर्तें अधिकथित करने के लिये केन्द्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा स्थापित किये गये निकाय से है ;
(ध) " नियम " का तात्पर्य, राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से है ;
(न) " धारा " का तात्पर्य, इस अधिनियम की धारा से है ;
(प) " कौशल विभाग " का तात्पर्य, महाराष्ट्र सरकार के कौशल विभाग, रोजगार, उद्यमिता तथा नवपरिर्वतन विभाग, से है ;
सन् २०१३ का १८ ।
(फ) इस अधिनियम के अधीन स्थापित विश्वविद्यालय के संबंध में " प्रायोजक निकाय " का तात्पर्य, कंपनी अधिनियम २०१३ की धारा ८ के अधीन रजिस्ट्रीकृत कंपनी CIN No. U80301 एम एच २०२१ एनपीएल ३५४९७८, जिसका प्लॉट क्र. २५ और २६, संस्थात्मक क्षेत्र, सेक्टर ४, खारघर, नवी मुंबई, ४१० २१० में होगा ;
(ब) " राज्य " का तात्पर्य, महाराष्ट्र राज्य से है ;
(भ) " परिनियम ", " र्आडिनन्सो " तथा " विनियमों " का तात्पर्य, क्रमश: इस अधिनियम के अधीन बनाए गए विश्वविद्यालय के परिनियमों, र्आडिनन्सों तथा विनियमों से है ;
(म) " छात्र " का तात्पर्य, स्नातकोत्तर और पीएच डी उपाधि और अनुसंधान की उपाधि समेत विश्वविद्यालय में नामांकन किए गए व्यक्ित से है, जिसने विश्वविद्यालय द्वारा गठित उपाधि, डिप्लोमा या अन्य अकादमिक विशेषताअों के पाठयक्रम में प्रवेश लिया हो, इसमें अनुसंधान उपाधि भी सम्मिलित होगी ;
(य) " अध्ययन केंद्र " का तात्पर्य, विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किये जानेवाले ऑनलाईन तथा दूरस्थ शिक्षा समेत छात्रों द्वारा अपेक्षित सलाह, व्यावसायिक मार्गदर्शन और परामर्श के प्रयोजन के संदर्भ में या कोई अन्य किसी सहायता देने के लिए स्थापित तथा पोषित किये गये केंद्र से है ;
४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(यक) " कौशल केंद्र " का तात्पर्य, उद्योग, छात्रों, स्थानीय जनसंख्या तथा सभी पणधारियों के लाभ के लिये, कौशल प्रशिक्षण का उपबंध करने के लिये, विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित किए गये या उद्योग, औद्योगिक संघ, कार्पोरेट, कंपनीयाँ और व्यावसायिकों ने विश्वविद्यालय के पास विस्तारित किये गये केंद्र से है। (यख) " अध्यापक " का तात्पर्य, आचार्य, उपाचार्य, सहायक आचार्य, अनुबंध प्राचार्य, व्यवसाय प्राचार्य, उद्योग विशेषज्ञ या स्रोत व्य िया अन्य व्य िकोई जिससे विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रदान करना या अनुसंधान में मार्गदर्शन करना या पाठयक्रमानुसार अध्ययन करने के लिए छात्रों को किसी भी प्रारूप में मार्गदर्शन देना अपेक्षित है ;
(यग) " विश्वविद्यालय " का तात्पर्य, आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई से है ;
३. (१) यह विश्वविद्यालय आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई नाम द्वारा स्थापित होगा । विश्वविद्यालय का निगमन ।
(२) अध्यक्ष, कुलपति, शासी निकाय, प्रबंध मंडल, बोर्ड, अकादमिक परिषद और सभी अन्य व्ययिाँ, जो इसके पश्चात् ऐसे अधिकारी या सदस्यों जब तक कि वे ऐसे पद या सदस्यत्व निरंतर धारण करेंगे, इसके द्वारा आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई नाम द्वारा गठित और निकाय निगमित घोषित किया जायेगा ।"। (३) विश्वविद्यालय का, शाश्वत उत्तराधिकारी तथा सामान्य मुद्रा होगी और उ नाम पर या नाम द्वारा वाद चलाया जाएगा ।
(४) विश्वविद्यालय इस अधिनियम के अधीन स्थापित असहबद्ध विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा और वह इसमें प्रवेशित छात्रों को उनके उपाधि, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र की प्रदानगी करने के लिए किसी अन्य महाविद्यालय या संस्था से सहबद्ध नहीं होगा ।
(५) विश्वविद्यालय, आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, प्लॉट क्र. २४ और २५ संस्थात्मक क्षेत्र, खारघर, नवी मुंबई-४१० २१० में स्िथत होगा तथा उसका मुख्यालय होगा ।
४. विश्वविद्यालय के उद्देश्य यथा निम्न होंगे :---
विश्वविद्यालय के उद्देश्य ।
(क) विभिन्न स्तरों पर कौशल प्रविणता और सक्षमता के साथ अर्हताप्राप्त युवा विकसित करना ;
(ख) कार्यक्षेत्र में, अध्ययन, अध्यापन, क्षमता, योग्यता और कौशल विकास और उद्यमी प्रशिक्षण, कार्यक्षेत्र में विस्तृत श्रेणी में विशेषज्ञता जैसे कि क्षेत्र में समय समय पर जैसा कि विशेषज्ञता जिसमें अधिकतर नौकरी सृजित होने वाली है जैसे कि स्वचालित कपडा और साज सामान, विमानन और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, माध्यम और मनोरंजन, फिल्म, पूँजीगत माल, संसूचना डिझाईन, तकनीकी, प्रबंधन और उद्यमशीलता, कारोबार, बैंकिंग तथा बीमा, स्वास्थ्यसेवा, अतिथ्य, संभार तंत्र, क्रीडा, यात्रा तथा पर्यटन, जीवन विज्ञान अनुप्रयु और सृजित कला, मानविकी, विदा विज्ञान और कृत्रिम सूचना, ई-कारोबार, फुटकर चीजे बेचना, विश्लेषणात्मक, कृषि कारोबार, उद्योग ४.० से संबंधित उद्योग और रोजगार की संभाव्यता होनेवाले कौशल की प्रदानगी समेत अध्ययन के किसी अन्य क्षेत्रों से है ;
(ग) विकास के नए मार्गों के अविष्कार तथा सामाजिक पुर्ननिर्माण तथा स्थानांतरण के लिए नए शैक्षिक कार्यक्रमों की र्िनमिति तथा अभिनियोजित करना;
(घ) आवश्यक कौशल और आधार का उपबंध करके उद्यमीकर्ता तथा उद्यमशीलता सृजित करना ;
(ङ) कौशल शिक्षा के आधारित सक्षमता के लिए श्रेयांक संरचना विरचित करना ;
(च) शिक्षा, शिक्षा कौशल विकास तथा विकास के लिए अद्यतन सुविधाएँ संस्थित करना ;
(छ) अध्यापन तथा अनुसंधान कार्यान्वित करना तथा निरंतर गुणवत्ता शिक्षा कार्यक्रम प्रस्तावित करना ;
(ज) विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी और सामाजिक र्आथिक विकास में अनुसंधान और विकास के लिए तथा ज्ञान बाँटने और उसके उपयोजन के लिए उत्कर्ष केंद्रों की र्िनमिति करना ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ ५(झ) परीक्षाएँ या अन्य किसी मूल्यांकन पद्धतियों के आधार पर स्नातकोत्तर उपाधि, पीएचडी उपाधि, अनुसंधान उपाधि, उपाधियाँ, डिप्लोमाएँ, प्रमाणपत्र तथा अन्य अकादमिक विशेषताएँ गठित करना ;
(ञ) ऑनलाईन श्रेयांक पाठयक्रमों समेत चयन आधारित श्रेयांक प्रणाली पाठयक्रम का उपबंध करना ;
(ट) लाभप्रद रोजगार और उद्यमशिलता को महवपूर्ण विविध कार्यक्रमों के जरिए उच्चतर व्यावसायिक कौशल विकास और सेवारत प्रशिक्षण और उद्यमशीलता प्रशिक्षण का उपबंध करना ;
(ठ) भारत और विदेश में के अन्य उच्चतर शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थाअों के साथ संबंध, सहयोग तथा भागीदारी संस्थित करना ;
(ड़) रचनात्मक तथा ठेकेदारी के पालन पोषण और परिष्कार के लिए अकादमिक संरचनाएँ, अध्ययन पद्धतियों का ढाँचा, और कामकाज तथा निरंतन मूल्यांकन प्रक्रियाअों में सीवनहीनता की र्िनमिती के लिए नवप्रवर्तक दृष्टिकोण को संस्थित करना ;
(ढ) अध्ययनकर्ताअों को शिक्षा, प्रशिक्षण तथा अध्यापन स्रोतों की सुपुर्दगी के लिये नवीनतम सूचना, संसूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा दुर्गम छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखना ;
(ण) अध्यापन-अध्ययन शिक्षा-शास्त्र जो शैक्षिक तथा अध्ययन शिक्षाशास्त्र के बहुविध प्ररूपों का मेल है, (संमिश्र या दूरस्थ या ऑनलाईन या कौशल या अन्य) और सुपुर्दगी के लिये उपबंध करना और इसलिये, ' आभासी परिसर" का उपबंध करना, जहाँ छात्र अनुभवी संकायों और उद्योग सदस्यों के साथ विकसित और तैयार होने के लिये इकठ्ठा होंगे ।
(त) स्वयं-गति, स्वयं-शैली अध्ययन वातावरण के जरिए, भिन्न पाश्र्वभूमि, आयु वर्ग और सामाजिक- र्आथिक स्थिति तथा भौगोलिक स्थान का प्रतिनिधित्व करनेवाले व्यापक क्षेत्र के अध्ययनकर्ताअों को अध्ययन अवसर मुहैय्या करना ;
(थ) सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से कौशल शिक्षा में संमिश्र, या दूरस्थ या ऑनलाईन परिदान करना ;
(द) छात्रों, संकाय सदस्यों तथा अन्यों के लिये विशिष्ट शिक्षा और अनुसंधान कार्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कुशलता तथा विनिमय कार्यक्रमों का संकल्पित, आरेखन, विकास तथा प्रदान करने के लिये, भारत या विदेश के अन्य महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थाअों, लाभकारी और गैर-लाभकारी संगठनों, निगमों उद्योग, वृत्तिक सहयोजनों या अन्य संगठनों के साथ सहयोग करना ;
(ध) बाजार की आवश्यकताअों के अनुरूप क्रियाशील प्रशिक्षण, वृत्तिक तथा कौशल आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करनेवाला अध्यापन अध्ययन शिक्षा-शास्त्र का उपबंध करना ;
(न) उभरते रुझानों को समझने के उद्देश्य से, श्रमिक बाजार आवश्यकताअों में अनुसंधान संचालित करना और यथोचित अभ्यासक्रम, पाठयक्रम तथा कार्यक्रम प्रस्तुत करना ;
( प ) रोजगार और उद्यमशीलता के उद्देश्य में शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा कौशल विकास के नविनतम नमुना को बढ़ावा देने के लिये, भारत या विदेश के सहयोग अनुसंधान और समर्थन हाथ में लेना ;
(फ) अध्यापकों, प्रशासकों और कार्यरत वृत्तिकों के लिये उच्च गुणवत्ता प्रशिक्षण, क्षमता र्िनमिति और विकास प्रणाली की डिझाईन करना और सुपुर्दगी करना ;
(ब) संयु कार्यक्रमों या पाठयक्रमों या अनुसंधान या विनिमय संकाय या सूचना या कार्यप्रणाली बाँटना कि प्रस्तुति करने लिये भारत के अन्य राज्यों या विदेशों से अन्य संस्थाअों या विश्वविद्यालयों या प्रयोगशालाअों या अभिकरणों या विख्यात संगठनों के साथ सहयोग करना और छात्रों के लाभ के लिये, उपकर या स्रोत या अनुदान या परामर्श देना या प्राप्त करना ;
(भ) पूर्व अध्ययन, कौशल उन्नति और पुन:कौशल की पहचान कराने के लिये सुविधा देना ;
६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(म) बहुविध प्रविष्टि तथा प्रस्थान के विकल्पों के लिये और विश्वविद्यालयों, अधिकार क्षेत्रों या विभागों के संपर्क में, चलन के लिये, क्रेडिट बैंकिंग और अंतरण प्रणाली सुविधा देना ;
(य) छात्रों को विश्वविद्यालय पाठयक्रमों से पारंपारिक, या संमिश्र, या दूरस्थ या ऑनलाईन शिक्षा और विभिन्न शिक्षा शास्त्र उपागम तथा प्रणाली के लिए यथोचित अन्य शिक्षा परिदान नमुना के जरिए प्रस्तुत विश्वविद्यालय पाठयक्रमों के ज़रिए छात्रों को आजीवन तथा निरंतर प्रशिक्षण का अवसर मुहैया करना ;
( यक) उत्पादकता निर्माण करने के उद्देश में, अनौपचारिक क्षेत्र तथा असंगठित कार्यबल को शिक्षा, प्रशिक्षण तथा कौशल विकास के अवसरों को मुहैया करना ;
(यख) लचिला तथा वैकल्पिक अध्ययन मार्ग मुहैया करना, जिससे बहुविध प्रवेश तथा बहुविध विकल्प को समर्थ बनाना ;
(यग) तकनीकी, व्यावसायिक और कौशल्य आधारित शिक्षा ले रहें छात्रों और डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा उच्चतर वृद्धि क्षेत्रों में डाक्टर कार्यक्रमों और लाभप्रद रोजगार के ज़रिए अपने युवाअों को तैयार करने के लिये विभिन्न विशेषज्ञता देने के लिए छात्रों को सीधी गतिशीलता मुहैया करना ;
(यघ) अध्ययन की लचिली तथा खुली प्रणाली मुहैया करना ;
(यङ) संकाय तथा प्रशिक्षकों, जो व्यावसायिक शिक्षा तथा कौशल्य प्रशिक्षण प्रदान करने में शामिल है के लिये शिक्षा शास्त्र तथा कौशल्य वृद्धि प्रशिक्षण तथा विकास कार्यक्रमों का संचालन करना ;
(यच) व्यापक रुप से उद्योग, संगठनों, अभिकरणों तथा संस्था को वृत्तिक तथा विकास सेवा मुहैया करना ;
(यछ) विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों साथ ही साथ अन्य छात्रों अभिकरणों, प्रशिक्षण, प्रदाताअों, संस्थाअों, उद्योग तथा संगठनाअों के लिए कौशल्य निर्धारण का उपक्रम हाथ में लेना । संकायों, प्रशिक्षकों, अभिकरणों, संस्थाअों तथा संगठनाअों के लिए कौशल्य निर्धारण के संचालन पर प्रशिक्षण आयोजित करना । कौशल्य निर्धारण, ऑनलाईन निर्धारण, संगणकीय निर्धारण या परीक्षणों और निर्धारण या परिक्षणों के कार्यान्वयन के लिये विकसित आवश्यक सॉफ्टवेअर, हार्डवेअर उपाय या अन्य प्रणाली या प्रक्रिया के शिक्षा शास्त्र में अनुसंधान करना ;
(यज) २१ वी सदी के लिये व्यगित और समाज के लिये अध्ययन, अध्यापन, अनुसंधान, मूल्यांकन, विकास, संगठन और सामाजिक र्आथिक सृजनता के लिये शासन और प्रबंधन के लिये आधुनिक और आधुनिकोत्तर प्रक्रिया, यंत्रणा और तकनीकी का उपयोग करना ;
(यझ) शासन, पाठयक्रम डिझाईन, कौशल प्रशिक्षण, नियोजन, प्रशिक्षण, सलाह, संयु परियोजना आदि के सभी पहलूअों में नवाचार प्रयोगशालाएँ, सेवारत प्रशिक्षण केंद्र, कार्यशालाएँ और सक्रिय सहभागिता ही स्थापना के ज़रिए उद्योग और उद्योग सघटनों भागिदारी के लिए प्रोत्साहित करना ;
(यञ) राज्य में तथा राज्य के बाहर विभिन्न स्थानों पर परिसर, कौशल केंद्रों, समुदाय महाविद्यालयों, अध्ययन केंद्रों, संसूचना केंद्रों, परिक्षण या परीक्षा केंद्रों, उत्कर्षता केंद्रों, विशिष्ट परिसर, विशिष्ट परिसरों आदि तथा देश में परिदान, छात्र सेवाअों और शिक्षा प्रसार, परामर्श, संसूचना और कौशल प्रशिक्षण सुकर करना ;
(यट) शिक्षा तथा कौशल आवश्यकताअों को समझने के उद्देश से, राज्य, राष्ट्रीय, आंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विभिन्न मंत्रालयों, राज्य निकायों, विभागों, अभिकरणों या कानूनी निकायों से सम्पर्क तथा सहयोग बनाना ;
(यठ) पाठयक्रम विकास, अध्यापक प्रशिक्षण, क्रियात्मक, अनुसंधान, कार्य पर प्रशिक्षण, कौशल मूल्यांकन आदि में सहभागी होने के लिये, उद्योगों के साथ आंतरक्रिया करना ;
(यड) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों का अनुकरण करने तथा बढावा देने के लिए आवश्यक या इष्टकर कार्यवाही हाथ में लेना ;
(यढ़) यह सुनिश्चित करना कि, विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र और अन्य अकादमिक विशिष्टताएँ के मानदण्ड उससे अनिम्न नहीं है जिसे सक्षम विनियामक निकाय द्वारा अधिकथित किया गया है।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ ७ ५. विश्वविद्यालय की, निम्न शक्ितयाँ और कृत्य होंगे, अर्थात् :----
शक्ितयाँ और कृत्य। (एक) अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान संबंधी, परम्परागत के साथ नए नवप्रवर्तक पद्धतियों, जिनमें ऑनलाईन शिक्षा पद्धति सम्मिलित है, के माध्यम से दिए जानेवाले पाठयक्रमों से संबंधित उपबंध करना तथा सभी उपायों (जिसमें पाठयक्रम को अपनाना तथा अद्यावत करना सम्मिलित है) को अपनाना ;
(दो) राष्ट्रीय कौशल्य अर्हता संरचना द्वारा यथा विर्िनदिष्ट या विश्वविद्यालय द्वारा जैसा कि परिभाषित किया जाए ऐसे राष्ट्रीय व्यावसायिक मानदण्ड के अनुसरण में विभिन्न स्तरों के लिए पाठयक्रम पॅकेज और श्रृंखला संरचना का विकास करना ;
(तीन) श्रृंखला संरचना और पाठयक्रम पॅकेज के समनुरुप जैसा कि कौशल विश्वविद्यालय ठिक समझे ऐसी कौशल शिक्षा, अध्यापन और अनुदेश के मानक और मापदंड परिभाषित करना ;
(चार) उपाधियाँ, डिप्लोमाएँ, बक्षिस, प्रमाणपत्र, पुरस्कार श्रेणियाँ, प्रत्यय तथा अकादमिक विशेषताअों को संस्थित और प्रदान करना ;
(पाँच) परीक्षाएँ संचालित तथा धारण करना ;
(छह) प्रशिक्षु प्रशिक्षण और सेवारत प्रशिक्षण समेत उनके कार्यक्रम और ध्येय प्राप्त करने के कार्यक्रम में छात्रों का नामांकन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करना ;
(सात) अन्य मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालयों, बोर्डों या परिषदों की उपाधियाँ, डिप्लोमाएँ, प्रमाणपत्रों के समतुल्य तथा समरूप उपाधियों, डिप्लोमाअों, प्रमाणपत्रों के लिए उपबंध करना ;
(आठ) ऑनलाईन श्रेयांक पाठयक्रमों समेत चयन आधारित श्रेयांक प्रणाली की सुपुर्दगी करना ;
(नौ) लाभप्रद रोजगार, उद्दमशीलता, सेवारत प्रशिक्षण और प्रशिक्षु प्रशिक्षण के में प्रमुखता में कार्यक्रम की विभिन्नता के जरिए उच्चतर व्यावसायिक कौशल्य और प्रशिक्षण की सुपुर्दगी करना ;
(दस) उसकी कानूनी निकाय द्वारा यथा अनुमोदित कोई अकादमिक कार्यक्रम प्रस्तुत करना ;
(ग्यारह) परिसरों की स्थापना के लिए सभी आवश्यक उपाय करना ;
(बारह) मानद उपाधियाँ, जैसा कि विहित किया गया है, को संस्थित करना और प्रदान करना ;
(तेरह) विर्िनदिष्ट किए गए अनुसार फेलोशिप, छात्रावृत्ति, अध्येतावृत्ति संस्थित तथा अधिर्िनणित करना ;
(चौदह) समाज के शैक्षणिक रूप से पिछडे स्तर में, शैक्षणिक सुविधाअों को फैलाने के लिए विशेष उपाय करना ;
(पंद्रह) तकनीकी, प्रशासनिक तथा अन्य आवश्यक पदों का सृजन करना तथा उसमें नियुक्ितयाँ करना ;
(सोलह) पारस्पारिक प्रतिग्रा शर्ते और निबंधनों पर अनुसंधान परियोजनाअों का जिम्मा लेना ;
(सत्रह) परामर्शी सेवाअों का उपबंध करना ;
(अठारह) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार, विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को सम्पादित करने के लिए परिनियमों, र्आडिनन्सों, नियमों तथा विनियमों को विरचित करना ;
(उन्नीस) विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र तथा कर्मचारी के व्यक्ितत्व विकास के लिए पाठयक्रमेतर गतिविधियों को बढा़वा देना तथा प्रवर्तन करना ;
(बीस) सक्षम विनियामक निकाय के अनुदेशों के अनुसार व्यतिकारी के आधार पर देश के भीतर या बाहर अन्य विश्वविद्यालयों के मुकाबले में दोहरी उपाधियाँ, डिप्लोमाअों या प्रमाणपत्रों का उपबंध करना ;
८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(इक्कीस) विश्वविद्यालय विभिन्न शाखाअों में एकात्मिक पाठयक्रमों के लिए ऐसे उपबंधों को करना ;
(बाईस) राज्य सरकार, केंद्र सरकार तथा सक्षम विनियामक निकाय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निदेशों के अनुसार केन्द्रो, महाविद्यालयों, संस्थाअों, परिसर मुक्त केन्द्रों, तट मुक्त परिसर, अध्ययन केन्द्रोंें, कौशल केन्द्रों, परीक्षा केन्द्रों, उत्कर्षता केन्द्रों, सेटलाईट केन्द्रों की स्थापना करना ;
(तेईस) दान, बक्षिस, अनुदान, प्राप्त करना तथा किसी सम्पत्ति को जंगम या स्थावर, जिसमें राज्य के भीतर या बाहर के न्यास या विन्यास सम्पत्ति सम्मिलित है, विश्वविद्यालय के प्रयोजनों तथा उद्देश्यों के लिए र्अजित, धारण, प्रबंध तथा निपटान करना तथा जैसा कि विहित किया जाए निधि निवेशित करना ;
(चौबीस) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विभिन्न कार्यक्रमों या पाठयक्रमों के लिए, समय- समय से फीस संरचना विहित करना ;
(पच्चीस) ऐसे फीसों तथा अन्य प्रभार जैसा कि समय-समय पर विर्िनदिष्ट किया गया हों, के भुगतान की माँग तथा प्राप्त करना ;
(छब्बीस) पारस्परिक ग्रा शर्तों और निबंधनों पर अन्य संस्थाअों, उद्योग, उद्योग संघ से सहयोग लेना ;
(सत्ताईस) सक्षम विनियामक निकायों द्वारा विर्िनदिष्ट मानकों के अनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा कर्मचारियों का वेतन, पारिश्रामिक, मानदेय का अवधारण करना ;
(अठ्ठाईस) अतिरिक्त बा अध्यापन तथा विस्तार सेवाअों का आयोजन करना और उपक्रमित करना ;
(उनतिस) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के बीच अनुशासन विनियमित तथा प्रर्वतित कराना और ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना जैसा वह आवश्यक समझे ;
(तीस) विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य तथा साधारण कल्याण को बढावा देने के लिए व्यवस्था करना ;
(इकतिस) देश के भीतर के या बाहर के अन्य किसी विश्वविद्यालय, प्राधिकरण या संगठन या किसी सार्वजनिक या निजी निकाय से उस विश्वविद्यालय के उसी प्रकार के प्रयोजनों तथा उद्देश्यों को बढावा देने की दृष्टि से, ऐसे प्रयोजनों के लिए, जैसी करार पायी जाए, तथा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर जो विर्िनदिष्ट की जाए, सहयोग करना ;
(बत्तीस) विश्वविद्यालय द्वारा जारी किये गये अनुसंधान तथा अन्य कार्य, जिसमें पाठय-पुस्तकें सम्मिलित है, के मुद्रण, पुनमर्ुद्रण तथा प्रकाशन के लिए उपबंध करना ;
(तैंतिस) राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गए निदेशों का, विश्वविद्यालय की उपयर्ुक्त शक्ितयाँ, कर्तव्यों तथा जिम्मेदारियों के संदर्भ में, अनुपालन करना तथा कार्यान्वित करना ;
(चौंतिस) संबंधित उपाधि कार्यक्रम की सफल संपूर्णता के आधार पर, उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र तथा अन्य अकादमिक प्रविणता संस्थित करना और निर्धारण की बहुविध पद्धतियों के जरिए मूल्यांकित अकादमिक कार्य के लिये श्रेणी प्रदान करना ;
(पैंतीस) कार्यक्रम संरचना, पाठयक्रम, श्रेणी प्रणाली, अध्यापन-अध्ययन पद्धति, मूल्यांकन शिक्षा शास्त्र की रचना के लिये उपबंध बनाना और उद्योग आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान, विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किये गये कार्यक्रमों के संबंध में, सभी उपाय अंगीकृत करना ;
(छत्तीस) अध्यापन संवर्ग में तथा प्रशिक्षण के लिये नियुक्त किये जाने वाले अध्यापकों, कर्मचारीवृंद तथा उद्योग विशेषज्ञ या स्रोत व्यक्ितयों के लिये, न्यूनतम अर्हताअों के मापदण्ड विहित करना ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ ९(सैंतीस) उद्योग आधारित कौशल निर्धारण की रूपात्मकता, उद्योग आधारित परियोजना, आंतश्वासिता, कार्य पर प्रशिक्षण, तथा संबंधित किसी क्रियाकलाप के समेत मूल्यांकन प्रणाली-विज्ञान विहित करना ;
(अडतीस) कौशल विकास शिक्षा - शास्त्र के अनुरूप विकल्पाधारित श्रेय प्रणाली संस्थित करना जो छात्रों को बहुविध - प्रविष्टि-प्रस्थान तथा क्रेडिट बैंकिंग तथा सभी स्तरों पर अंतरित होने की सुविधा मुहैया करना ;
(उनतालिस) छात्रों तथा काम करने वाले व्यवसायिकों के लिये प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और उपाधि कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिये, खुले, दूरस्थ शिक्षा तथा निरंतर शिक्षा के विभाग स्थापित करना ;
(चालीस) सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति से कौशल शिक्षा में समिश्रण या ऑनलाईन उपाधि प्रदान करना ;
(इकतालिस) छात्रों और उद्योग की जरूरतों के अनुसार खुले तथा दूरस्थ अध्ययन कार्यक्रम शुरू करना ;
(बयालीस) कोई भूमि या भवन, परिसर या आधारभूत संरचना जिसे विश्वविद्यालय उसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये उचित समझे ऐसे आवश्यक या सुविधापूर्ण हो सके खरीदने, पट्टेपर लेने या अनुमति और अनुज्ञप्ति से ले सकेगा ;
(तैंतालिस) विश्वविद्यालय द्वारा पैश किये जानेवाले खुले तथा दूरस्थ अध्ययन कार्यक्रमों के लिये बहुविध प्रवेश चक्र संचालित करना ;
(चौवालीस) बहुविध-प्रविष्टि और बहुविध निकास, पूर्व अध्ययन की पहचान, क्रेडिट बैंकींग और अंतरण, क्रेडिट माफी तथा पाश्र्वीक गतिशीतला के लिये योजना तथा अन्य ऐसी योजना गठित करना, जो बरे़ पैमाने पर कौशल विकास को बढावा दे ;
(पैंतालीस) छात्रों को, समतुल्यता प्रमाणपत्र, पाठयक्रम छूट, सेतू पाठयक्रम, कौशल प्रतिचित्रण प्रमाणपत्र, लचिला अध्ययन मार्ग आदि का उपबंध करने के लिये पूर्व अध्ययन पहचान विभाग स्थापित करना ;
(छियालीस ) विश्वविद्यालय में अध्ययन करने वाले छात्रों के साथ-साथ तृतीय पक्ष निर्धारण के इच्छुक अन्य छात्रों, अभिकरणों, प्रशिक्षण प्रदाता, संस्थाअों, उद्योगों तथा संगठनों का कौशल निर्धारण करना ;
(सैंतालीस) रोजगार के अवसर और आकस्मिक काम की आवश्यकता जानने के लिये स्थानिय उद्योंगों से आंतरक्रिया करने और व्यवसाय परामर्श, के जरिए छात्रों को अपने या उनके पसंद का रोजगार चुनने में सहायता करने के लिये, व्यवसाय तथा नियोजन मार्गदर्शन कक्ष स्थापित करना ;
(अडतालिस) युवाअों को करियर मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करना।
(उनचास) विश्वविद्यालय के सभी या किन्ही उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये आनुषंगिक या सहायक हो, जैसा आवश्यक समझे सभी ऐसी बाते करने।
विश्वविद्यालय सब के लिए खुला रहेगा। ६. (१) भारत का कोई भी नागरिक, सिर्फ लिंग, धर्म पन्थ, वर्ग, जाति, जन्मस्थान, राष्ट्रीयता, धर्ामिक मान्यता या व्यवसाय या राजनीतिक या अन्य मत के आधार पर विश्वविद्यालय के किसी पद या उसके किसी प्राधिकरणों, निकायों या समितियों के सदस्यत्व या किसी पद पर की नियुक्ित, या किसी उपाधि, डिप्लोमा, प्रमाणपत्र या अन्य अकादमिक विशेष योग्यता या अध्ययन के पाठयक्रम में प्रवेश पाने के लिए अपर्वजित नहीं किया जाएगा।
(२) विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय विभागों, और संस्थाअों में छात्रों के प्रवेश के प्रयोजनार्थ, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, निरधिसूचित जनजातियों, (विमुक्त जातियों)। खानाबदोष जनजातियों, अन्य पिछडा वर्गों, विशेष पिछडा वर्गों, विकलांग व्यक्ितयों, र्आथिक और कमजोर वर्गों (इ डब्ल्यू एस ) आदि के आरक्षण के संबंध में सरकारी नीति तथा समय-समय पर जारी आदेशों को अंगीकृत करेगा। भाग सात-४२-२. एचबी--१४७४-२.
१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(३) विश्वविद्यालय, राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर यथा निर्देशित, समाज के गरीब वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के विभिन्न संवर्गों के कल्याण के संदर्भ में, राज्य सरकार की साधारण नीति को अंगीकृत करेगा।
७. विश्वविद्यालय, स्ववित्तपोषित होगा तथा राज्य सरकार से कोई अनुदान या अन्य वित्तिय सहायता पाने का हकदार नहीं होगा।
विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित होगा।
विन्यास निधि। ८. (१) प्रायोजित निकाय, विश्वविद्यालय के लिए, " विन्यास निधि " नामक एक स्थायी कानूनी निधि स्थापित करेगी, जिसमें कम से कम दस करोड रुपये समाविष्ट होंगे जिसे स्व-प्रेरणा से बढा़या जा सकेगा, परन्तु कम नहीं किया जायेगा।
(२) विन्यास निधि, इस अधिनियम, नियमों, विनियमों, परिनियमों या तद्धीन बनाये गये र्ऑडिनेन्स के उपबंधों के कडाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा निक्षेप के रूप में रखी जायेगी।
(३) सरकार को, इस अधिनियम के उपबंधों, नियमों, परिनियमों, र्ऑडिनेन्सों या तद्धीन बनाये गये विनियमों का उल्लंघन विश्वविद्यालय या प्रायोजक निकाय के मामले में, विन्यास निधि का अंशतः या संपूर्ण भाग विहितरित्या में समपत करने की शक्ित होगी।
(४) विन्यास निधि से आय, विश्वविद्यालय की मुलभूत सुविधा के विकास के लिए उपयोग में लाया जाएगा किंतु, विश्वविद्यालय के आवर्ती व्यय को पूरा करने के लिए उपयोग में नहीं लाया जाएगा।
(५) विन्यास निधि की राशि, विनिहित रखी जाएगी, जब तक विश्वविद्यालय का विघटन हो, सरकार द्वारा प्राप्त या प्रत्याभूत दीर्घकालिक सुरक्षा के रूप में शर्त के अध्यधीन की, यह निधि सरकार की अनुमति के बिना, नहीं निकाली जाएगी।
(६) दीर्घकालिक सुरक्षा के प्रमाणपत्र, सरकार की सुरक्षित अभिरक्षा में रखे जाएँगे ; तथा सरकार को, उप- धारा (३) में उल्लिखित प्रयोजनों के लिए, जमा राशि भुनाने का अधिकार होगा।
साधारण निधि। ९. विश्वविद्यालय, साधारण निधि के नाम से एक निधि स्थापित करेगा, जिसमें निम्न जमा किया जाएगा, अर्थात् :-
(एक) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त फीस और अन्य प्रभार ;
(दो) प्रायोजक निकाय द्वारा किया गया कोई अंशदान ;
(तीन) विश्वविद्यालय द्वारा परामर्श तथा अन्य कार्य से प्राप्त कोई राशि ;
(चार) वसीयतों, दान, विन्यासों, तथा कोई अन्य अनुदान, तथा ;
(पाँच) विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्त सभी अन्य राशियाँ।
१०. (१) सामान्य निधि का उपयोग, विश्वविद्यालय के कामकाज के संबंध में सभी व्यय जिसमें उपयोग। सामान्य निधि का उपयोग। आवर्ती या अनावर्ती व्यय पूरा करने के लिए किया जायेगा :
परन्तु, इस वर्ष के लिए कुल आवर्ती व्यय और कुल अनावर्ती व्यय के लिये सीमाअों के अधिक में व्यय विश्वविद्यालय द्वारा उपगत नहीं किया जायेगा, जिसे प्रबंधमंडल बोर्ड के पूर्वानुमोदन के बिना, प्रबंधमंडल बोर्ड द्वारा नियत किया जा सकेगा।
११. विश्वविद्यालय के निम्न अधिकारी होंगे, अर्थात् :-
विश्वविद्यालय के अधिकारी।
(एक) अध्यक्ष जो कुलाधिपति भी होगा ;
(दो) कुलपति ;
(तीन) संकायाध्यक्ष ;
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ ११(चार) रजिस्ट्रार ;
(पाँच) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी ;
( छह ) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक ; और
(सात) विश्वविद्यालय सेवा में ऐसे अन्य अधिकारी जिन्हें परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय के अधिकारियों के रूप में घोषित किया जाए।
अध्यक्ष। १२. (१) अध्यक्ष, पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रायोजित निकाय द्वारा नियुक्त किया जायेगा और एक अधिक अवधि के लिये पात्र होगा।
(२) अध्यक्ष के पद के लिए पात्रता और शर्ते कौशल्य विकास या उद्योग अनुभव के दस वर्षों से मान्यताप्राप्त विद्यालय से कम से कम स्नातक होगा।
(३) अध्यक्ष, विश्वविद्यालय का प्रमुख होगा।
(४) अध्यक्ष, शासी निकाय की बैठकों और उपाधि, डिप्लोमा या अन्य अकादमिक विशिष्ट उपाधियाँ प्रदान करने के लिए होनेवाले विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करेगा।
(५) अध्यक्ष को, निम्न शक्ितयाँ प्राप्त होंगी, अर्थात् :
(क) विश्वविद्यालय के कामकाज से संबंधित विश्वविद्यालय किसी अधिकारी या प्राधिकारी से कोई जानकारी या अभिलेख मांगना ;
(ख) कुलपति की नियुक्ित करना ;
(ग) इस अधिनियम की धारा १४ की उप-धारा ( ७ ) के उपबंधों के अनुसरण में, कुलपति को हटाना ;
(घ) ऐसी अन्य शक्ितयाँ जैसा परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट की जाए।
अध्यक्ष को हटाना। १३. अध्यक्ष को, प्रायोजक निकाय द्वारा उसके पद से हटाया जा सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि पदधारी, -
(क) विकृत चित्त का है और सक्षम न्यायालय द्वारा, उसे इस प्रकार घोषित ठहराया गया है ;
(ख) नैतिक अधमता से अन्तर्ग्रस्त किसी अपराध के लिए न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध ठहराया गया है ;
(ग) अनुन्मोचित दिवालिया हो गया है और सक्षम न्यायालय द्वारा इस प्रकार घोषित किया गया है ;
(घ) शारीरिक रूप से अनुपयुक्त है और दीर्घकालिन बीमारी या शारीरिक विकलांगता के कारण कार्य या पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ है ; या
(ङ) इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में जानबूझकर लोप या अस्वीकार करता है और सेवा संविदा के किन्ही निबन्धनों और शर्तों का या परिनियमों द्वारा अधिकथित किन्ही अन्य शर्तों का उल्लंघन करता है या उसमें निहित शक्ितयों का दुरुपयोग करता है या अध्यक्ष को पद पर बनाए रखने से विश्वविद्यालय के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है :
परन्तु, अध्यक्ष को, उक्त पद से हटाने के लिए, खंड (घ) और (ङ) के अधीन पुर्नपाठयक्रम लेने के पूर्व प्रायोजक निकाय द्वारा कारण दर्शाने का युक्ितयुक्त अवसर दिया जायेगा।
कुलपति। १४. (१) कुलपति, शासी निकाय द्वारा गठित किये गये तीन व्यक्ितयों के पैनल से परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा और उप-धारा (७) में अन्र्तविष्ट उपबंधों के अध्यधीन तीन वर्षों की अवधि के लिए पद धारण करेगा :
परन्तु, विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति, उसके लिए आवश्यक अर्हताएँ और अनुभव धारण करनेवाले व्यक्ितयो में से एक वर्ष की अवधि के लिए या नियमित रूप से जो भी पहले हो, के लिए प्रायोजक निकाय द्वारा नियुक्त किया जायेगा।
परंतु, तीन वर्ष की अवधि अवसित होने के पश्चात् कुलपति, तीन वर्ष के की एक अधिक अवधि के पूर्ननियुक्ति के लिए पात्र होगा ।१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ परन्तु आगे यह कि, कुलपति, अपने पद की तीन वर्ष की अवधि की तीन वर्ष की अवधि के अवसान के बाद भी, नवीन कुलपति के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बना रहेगा, तथापि, किसी मामले में, यह अवधि, एक वर्ष से अधिक नहीं होगी।
(२) कुलपति, विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यपालक और अकादमिक अधिकारी होगा और उसकी विश्वविद्यालय के कामकाज पर संपूर्ण अधीक्षण की शक्ितयाँ होगी और नियंत्रण रखेगा और विश्वविद्यालय के विभिन्न प्राधिकरणों के विनिश्चयों को निष्पादित करेगा।
(३) कुलपति, अध्यक्ष की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करेगा। (४) यदि, कुलपति की राय में, ऐसे किसी मामले में जिसके लिए इस अधिनियम द्वारा या के अधीन किसी अन्य प्राधिकरणों को शक्ितयाँ प्रदान की गई है, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक है तो, वह ऐसी कार्यवाही कर सकेगा जैसा कि वह आवश्यक समझे और तत्पश्चात्, शीघ्रतम अवसर पर अपनी कार्यवाही रिपोर्ट ऐसे अधिकारी या प्राधिकरणों को देगा जो सामान्यतया उस मामले का निपटान करता है :
परन्तु यदि संबंधित अधिकारी या प्राधिकरण की राय में ऐसी कार्यवाही कुलपति द्वारा नहीं की गई थी तब ऐसे मामले में अध्यक्ष को र्िनदिष्ट किया जायेगा जिसपर उसका निर्णय अंतिम होगा।
(५) यदि, कुलपति की राय में, विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरणों का निर्णय इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, र्आडिनेन्स, विनियमों या नियमों द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का उल्लंघन करता है या विश्वविद्यालय के हित पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तो वह अपने निर्णय का पुनरीक्षण करने के लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुरोध करेगा और प्राधिकरण, निर्णय का पूर्णतः या अंशत: पुनरीक्षण करने के लिए इनकार करता है या पंद्रह दिनों के भीतर कोई निर्णय लेने में असफल रहता है तब ऐसा मामला, अध्यक्ष को र्िनदिष्ट किया जायेगा और जिसपर उसका निर्णय अंतिम होगा।
(६) कुलपति, ऐसी शक्ितयों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जैसा परिनियमों या र्आडिनेन्स द्वारा विहित किया जाए।
(७) यदि किसी समय किये गये अभ्यावेदन पर या अन्यथा और ऐसी जाँच करने के बाद, जैसा आवश्यक समझा जाए, स्थिति इस प्रकार सर्मथित करे और यदि कुलपति का पद पर बने रहना विश्वद्यालय के हित में नहीं है तो अध्यक्ष, शासी निकाय के अनुमोदन से उसके लिए कारण दर्शाते हुए लिखित आदेश द्वारा आदेश में विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे दिनांक से उस पद को त्यागने के लिए कुलपति को कहेगा :
परन्तु, इस उप-धारा के अधीन कोई कार्यवाही करने के पूर्व कुलपति को सुनवाई करने का युक्ितयुक्त अवसर दिया जायेगा।
संकायाध्यक्ष। १५. (१) संकायाध्यक्ष, परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या और सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा।
(२) संकायाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के अकादमिक कार्यकलापों के प्रबंध में कुलपति को सहायता करेगा और विनियमों द्वारा विहित की जाए ऐसी शक्ितयों का प्रयोग करेगा और ऐसे कृत्यों का अनुपालन करेगा या अध्यक्ष और कुलपति द्वारा सोंपेगा।
रजिस्ट्रार। १६. (१) रजिस्ट्रार, परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसी रीत्या में और सेवा के ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर नियुक्त किया जायेगा।
(२) रजिस्ट्रार, विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी होगा। विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों के निर्णय के अध्यधीन उसे करार करने, संविदा करने, दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और विश्वविद्यालय की ओर से अभिलेख अधिप्रमाणित करने की शक्ित होगी, वह परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसी शक्ितयों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का अनुपालन करेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ १३ (३) रजिस्ट्रार, शासी निकाय, प्रबंध मंडल बोर्ड और अकादमिक परिषद का सदस्य सचिव होगा किन्तु, उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा।
(४) रजिस्ट्रार, विश्वविद्यालय के अभिलेख, सामान्य मुद्रा और ऐसी अन्य सम्पत्ति का अभिरक्षक होगा जैसा शासी निकाय उसके प्रभार में सुपुर्द करें।
(५) रजिस्ट्रार, इस अधिनियम द्वारा या के अधीन विहित किया जाए या परिनियमों द्वारा उसे प्रदान किया जाए या कुलपति द्वारा समय-समय से उसे समनुदेशित किया जाए ऐसी शक्ितयों का प्रयोग करेगा और ऐसे अन्य कार्यों का अनुपालन करेगा।
१७. (१) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक, परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या में और सेवा मूल्यांकन के ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
निर्धारण और मूल्यांकन निदेशकर। (२) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक, विश्वविद्यालय की परीक्षा और परीक्षण के संचालन और उनके परिणामों की घोषणा करनेवाला प्रभारी प्रधान अधिकारी होगा। वह कुलपति के अधीक्षण, निदेशन और मार्गदर्शन के अधीन अपने कृत्यों का निर्वहन करेगा।
(३) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक, विश्वविद्यालय का पूर्ण समय वैतनिक अधिकारी होगा और विश्वविद्यालय के कुलपति के निदेशन और नियंत्रण के अधीन सीधे कार्य करेगा। उसकी नियुक्ित, पाँच वर्षों की अवधि के लिए की जाएगी और वह पाँच वर्षों की केवल एक अवधि के लिए पुर्ननियुक्ित के लिए पात्र होगा। निदेशक के चयन के प्रयोजन के लिए अर्हता और अनुभव जैसा कि विहित किया जाए ऐसा होगा।
(४) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक, -
(क) परीक्षाअों के कलैंडर तैयार करना और पहले ही से घोषित करना ;
(ख) प्रश्नपत्रों के मुद्रण के लिए व्यवस्था करना;
(ग) परीक्षाअों और अन्य परीक्षणों के परिणामों की समय पर प्रकाशन की व्यवस्था करना ;
(घ) परीक्षाअों के संबंधित उम्मीदवारों, पेपर सेटर्स, परीक्षकों, अनुसीमकों या किसी अन्य व्यक्ितयों के विरूद्ध और परीक्षाअों के संबंध में कदाचार का दोषी पाये जाने पर जहाँ आवश्यक हो अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा ;
(ङ) विश्वविद्यालय परीक्षाअों के परिणामों का समय-समय पर पुर्नविलोकन करेगा और अकादमिक परिषद को उसपर रिपोर्ट अग्रेषित करेगा।
(५) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक, ऐसी शक्ितयों का प्रयोग और ऐसे अन्य कर्तव्यों का अनुपालन करेगा जैसा कि विहित किया जाए या उसे समनुदेशित किया जाए।
१८. (१) मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी, विश्वविद्यालय का प्रधान वित्त, लेखा और लेखा परीक्षा मुख्य मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारीर। वित्त तथा अधिकारी होगा।
(२) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी, परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे रीत्या और ऐसे निबन्धनों और शर्तों पर अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जायेगा।
(३) मुख्य वित्त तथा लेखाधिकारी, परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसी शक्ितयों का प्रयोग करेगा और ऐसे कर्तव्यों का अनुपालन करेगा।
अन्य अधिकारीर। १९. (१) विश्वविद्यालय, उसके कर्तव्यों के लिए आवश्यक समझे जाये ऐसे अन्य अधिकारियों की नियुक्ित करेगा।
(२) विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों की नियुक्ित की रीति, ऐसे अधिकारियों के सेवा के निबंधन और शर्तें, उनकी शक्ितयाँ और कृत्य परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किये जाए ऐसे होंगे।१४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ २०. विश्वविद्यालय के निम्न, प्राधिकरण होंगे, अर्थात् :
विश्वविद्यालय के प्राधिकरणर।
(क) शासी निकाय ;
(ख) प्रबंध मंडल बोर्ड
(ग) अकादमिक परिषद ;
(घ) निर्धारण और मूल्यांकन ; और
(ङ) विश्वविद्यालय के प्राधिकरण के रूप में परिनियमों द्वारा घोषित किया जाए ऐसे अन्य प्राधिकरण। शासी निकायर। २१. (१) विश्वविद्यालय का शासी निकाय, निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात्
(क) अध्यक्ष ;
(ख) कुलपति ;
(ग) प्रायोजक निकाय द्वारा नामर्िनदिष्ट पाँच व्यक्ित, जिनमें से दो प्रतिष्ठित शिक्षाविद् होंगे और शेष कौशल्य विकास में अनुभव के ५ वर्षे हो, उद्योग विशेषज्ञ होंगे ;
(घ) अध्यक्ष द्वारा नामर्िनदिष्ट विश्वविद्यालय के बाहर से एक विशेषज्ञ होगा ;
(ङ) कौशल्य विकास में ५ वर्ष के अनुभववाला राज्य सरकार द्वारा नामर्िनदिष्ट एक व्यक्ित ;
(च) विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार, शासी निकाय का स्थायी आमंत्रिति होगा किन्तु उसे मत देने का अधिकार नहीं होगा।
( २ ) शासी निकाय, विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्राधिकरण होगा।
(३) शासी निकाय को, निम्न शक्ितयाँ होगी, अर्थात् :-
(क) इस अधिनियम या परिनियमों, र्आडिनेन्स, तद्धीन बनाए गए विनियमों या नियमों द्वारा यथा उपबंधित ऐसी सभी शक्ितयों के उपयोग द्वारा, विश्वविद्यालय के कार्यो का सामान्य अधीक्षण दर्जा नियंत्रण और निदेशन और नियंत्रण का उपबंध करना ;
(ख) इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए परिनियमों, र्आडिनेन्स, विनियमों या नियमों की पुष्टि नहीं हैं के मामले में, विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकरणों के निर्णयों का पुर्नविलोकन करना ;
(ग) विश्वविद्यालय के बजट और वर्ाषिक रिपोर्ट को अनुमोदित करना ;
(घ) विश्वविद्यालय द्वारा अपनायी जानेवाली नीतियाँ अधिकथित करना ;
(ङ) विश्वविद्यालय के स्वैच्छिक परिनिर्धारण के बारे में सभी प्रयासों के बावजूद जब विश्वविद्यालय के सुचारू कार्यान्वयन करने की उद्भूत स्थिति शेष संभव नहीं होती हैं तब प्रायोजक निकाय को सिफारिशें करना; और
(च) ऐसी अन्य शक्ितयाँ जैसा कि परिनियमों द्वारा विहित किया जाए।
(४) शासी निकाय की, कलैन्डर वर्ष के प्रत्येक चार महीने में कम से कम तीन बैठकें होंगी।
(५) शासी निकाय के बैठकों की गणपर्ूति, पाँच सदस्यों से होगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ १५ प्रबंध मंडल । २२. (१) प्रबंधमंडल बोर्ड, निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-----
(क) कुलपति ;
(ख) प्रायोजक निकाय द्वारा नामर्िनदिष्ट शासी निकाय के दो सदस्य ;
(ग) कुलपति द्वारा नामर्िनदिष्ट किये जानेवाले चक्रानुक्रम द्वारा विश्वविद्यालय के दो संकायाध्यक्ष ;
(घ) तीन व्यक्ितयाँ शासी निकाय द्वारा नामर्िनदिष्ट जो शासी निकाय के सदस्य नहीं है; और
(ङ) शासी निकाय द्वारा नामर्िनदिष्ट अध्यापकों में से तीन व्यक्ितयाँ ।
(२) कुलपति, प्रबंध मंडल का अध्यक्ष होगा ।
(३) प्रबंध मंडल बोर्ड की शक्ितयाँ और कृत्य, ऐसे होंगे जिसे परिनियमों द्वारा विहित किया जाए ।
(४) प्रबंध मंडल बोर्ड, प्रत्येक दो महीनें में कम से कम एक बार बैठक लेगा ।
(५) प्रबंध मंडल बोर्ड के बैठक की गणपर्ूति पाँच सदस्यों से होगी ।
२३. (१) अकादमिक परिषद, कुलपति और ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगी जैसा कि परिनियमों अकादमिक परिषद । द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए।
(२) कुलपति, अकादमिक परिषद का पदेन अध्यक्ष होगा ।
(३) अकादमिक परिषद, विश्वविद्यालय की प्रधान अकादमिक निकाय होगी, और इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों, परिनियमों और र्आडिनेन्स के अध्यधीन विश्वविद्यालय के अकादमिक नीतियों का समन्वयन और सामान्य पर्यवेक्षण करेगा ।
(४) अकादमिक परिषद की बैठक के लिए गणपर्ूति, ऐसी होगी जैसा परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए।
निर्धारण और मूल्यांकन बोर्ड । २४. (१) परीक्षा बोर्ड, परीक्षाअों के संचालन और परीक्षाअों का आयोजन और परीक्षा लेने के बारे में नीति संबंधी निर्णय लेने, कौशल आधारित निर्धारण और महव के लिए योजना या नीति, निर्धारण और शिक्षा पद्धति में सुधार लाने, पेपर-सेटरों, परीक्षकों, अनुसीमकों उद्योगों से कौशल निर्धारको की नियुक्ित के लिए और निर्धारण और मूल्यांकन कराने के दिनांक की अनुसूची और परिणामों की घोषणा करने के दिनांकों की अनुसूची भी तैयार करनेवाला विश्वविद्यालय का प्रधान प्राधिकरण होगा । निर्धारण और मूल्यांकन बोर्ड, विश्वविद्यालय के परीक्षा केंन्द्रो, कौशल केन्द्रों अध्ययन केन्द्रों या विश्वविद्यालय से संबंधित किसी केंद्र में परीक्षाअों के संचालन का निरीक्षण और विनियमन भी करेगा ।
स्पष्टीकरण.---इस धारा और धारा ३८ के प्रयोजनों के लिए, "निर्धारण और मूल्यांकन की अनुसूची" की अभिव्य िका तात्पर्य, प्रत्येक पेपर का समय, दिन और दिनांक के प्रारभ्मण के बारे में दी गई ब्योरेवार तालिका से है, जो परीक्षा प्रणाली का हिस्सा है और जिनमें प्रात्यक्षिक परीक्षा के बारे में भी ब्यौरे सम्मिलित होंगे।
(२) निर्धारण और मूल्यांकन बोर्ड, निम्न सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-----
(क) कुलपति
. . अध्यक्ष ;
(ख) कुलपति द्वारा नामनिर्देशित, चक्रानुक्रम द्वारा विश्वविद्यालय . . सदस्य ;
के दो संकायाध्यक्ष विषय के प्राध्यापक
(ग) मूल्यांकन और निर्धारण बोर्ड द्वारा सहयोजित एक . . सदस्य ;
मूल्यांकन विशेषज्ञ
(घ) निर्धारण और मूल्यांकन निदेशक
. . सदस्य-सचिव ।
(३) निर्धारण और मूल्यांकन बोर्ड की शयिाँ, और कृत्य ऐसे होंगे, जैसा कि परिनियमों में विर्िनदिष्ट किया जाए ।
अन्य प्राधिकरण । २५. विश्वविद्यालय के अन्य प्राधिकरणों का गठन, शयिाँ और कृत्य ऐसे होंगे जैसा कि परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाएँ ।१६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ निरर्हताएँ । २६. कोई व्य,ि विश्वविद्यालय के किन्ही प्राधिकरणों या निकायों का सदस्य होने से निरर्ह होगा, यदि वह,-----
(एक) विकृत चित्त का है और सक्षम न्यायालय द्वारा, इस प्रकार घोषित किया गया है; या (दो) नैतिक अधमता से अन्र्तग्रस्त किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है; या
(तीन) निजी कोचिंग वर्गों को स्वयं चलाता है या जुडा हुआ है ; या
(चार) कहीं भी, किसी भी रूप में किसी परीक्षा के संचालन में अनुचित व्यवहार करने में जुडे होने या बढावा देने के लिए दंडित किया गया है ।
२७. विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय के कार्य या कार्यवाहियाँ केवल किसी रि िके या उसके गठन में त्रुटि के कारण द्वारा अविधिमान्य नहीं होगी ।
विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय की रिक्तियों संबंधी कार्यवाहियाँ अविधिमान्य नहीं होगी ।
अस्थायी रिक्तियों
को भरना ।
२८. किसी मामले में विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकरण या निकाय में सदस्य की मृत्यु, इस्तीफा या हटाये जाने के कारण कोई अस्थायी रि िपायी जाती है तो, यथा संभव शीघ्र, व्य िया निकाय द्वारा जिसे ऐसी रि िके स्थान में नियु या सदस्य को नामनिर्देशित किया गया है और अवधि के शेष भाग के लिए अस्थायी रि िको नियु या नामर्िनदिष्ट व्य िऐसी संस्था या निकास का सदस्य होना चाहिए जिसके लिए व्य िअस्थायी नियु िके लिए नियु किया गया या नामर्िनदिष्ट किया गया तो, जिस शेष पदावधि के लिए वह ऐसे प्राधिकरण या निकाय का सदस्य होगा, जिस स्थान के लिए रि िभरी जाती है वह सदस्य के रूप में पद धारण करेगा । समितियाँ । २९. (१) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों तथा अधिकारी ऐसे संदर्भों के निबंधनों से ऐसी समितियों द्वारा किये जानेवाले विर्िनदिष्ट कार्यों के लिए जैसा आवश्यक समझें समितियाँ गठित करेंगे ।
(२) ऐसी समितियों का गठन ऐसा होगा, जिसे परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट किया जाए ।
३०. (१) विश्वविद्यालय के प्रथम परिनियम, शासकीय निकाय द्वारा बनाये जायेंगे और उसके अनुमोदन के प्रथम परिनियम।
लिए सरकार को प्रस्तुत किये जायेंगे ।
(२) इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन और तद्धीन बनाए गए नियम, विश्वविद्यालय का प्रथम परिनियम निम्न सभी या किन्हीं मामलों के लिए उपबंध कराएगा, अर्थात् :
(क) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों तथा अन्य निकायों के गठन, शयिाँ और कृत्य समय-समय पर गठित किये जायेंगे ;
(ख) कुलपति की नियु िके निबंधनों और शर्तों तथा उसकी शयिाँ और कृत्य ;
(ग) संकायाध्यक्ष, रजिस्ट्रार तथा मुख्य वित्त तथा लेखा अधिकारी की नियु िकी रीति तथा सेवा के निबंधनों और शर्तों तथा उनकी शयिाँ और कृत्य ;
(घ) कर्मचारियों के नियु िकी रीति तथा सेवा के निबंधनों और शर्तों तथा उनकी शयिाँ और कृत्य ;
(ङ) कर्मचारियों, छात्रों तथा विश्वविद्यालय के बीच विवाद के मामले में माध्यस्थम् के लिए प्रक्रिया ;
(च) सम्मानिक उपाधियों को प्रदान करना ;
(छ) छात्रों को अध्यापन फीस अदायगी से छूट देने तथा उन्हें छात्रवृत्ति और अध्येतावृत्ति प्रदान करने के लिए संबंध में उपबंध ;
(ज) आरक्षित सीटों के विनियमन समेत विभिन्न पाठयक्रमों के प्रवेशों की नीति, सीटों की संख्या के संबंध में उपबंध ; औरमहाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ १७ (झ) छात्रों से प्रभारित किए जानेवाले फीस के संबंध में उपबंध ।
(३) सरकार, शासी निकाय द्वारा प्रस्तुत प्रथम परिनियम का विचार करेगी और यदि कोई हो, ऐसे उपांतरणों के साथ जैसा वह आवश्यक समझे, उसकी प्राप्ति की दिनांक से चार महिने के भीतर, उस पर उसका अनुमोदन देगी ।
(४) सरकार, राजपत्र में अपने अनुमोदन द्वारा प्रथम परिनियम प्रकाशित करेगी, उसके बाद, ऐसे प्रकाशन के दिनांक से पहला परिनियम प्रवृत्त होगा ।
३१. (१) इस अधिनियम के उपबंधों तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय पश्चात्वर्ती परिनियम । के पश्चात्वर्ती परिनियम, निम्न सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध करेंगें, अर्थात्
(क) विश्वविद्यालय के नए प्राधिकरणों का सृजन करना ;
(ख) लेखा नीति और वित्तीय प्रक्रिया ;
(ग) विश्वविद्यालय के प्राधिकरणों में अध्यापकों का प्रतिनिधित्व करना ;
(घ) नए विभागों का निर्माण और विद्यमान विभाग का उत्सादन या पुनःसंरचना करना ;
(ङ) पदकों तथा पुरस्कारों को संस्थित करना ;
(च) पदों के उत्सादन के लिए पदों तथा प्रक्रिया का सृजन करना ;
(छ) फीस का पुनरीक्षण ;
(ज) विभिन्न पाठयविवरण में सीटों की संख्या का परिवर्तन; और
(झ) परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन जो सभी अन्य मामले है । (२) विश्वविद्यालय के परिनियम, प्रथम परिनियम से अन्य शासी निकाय के अनुमोदन के साथ प्रबंध मंडल बोर्ड द्वारा बनाये जायेंगे ।
(३) प्रबंध मंडल बोर्ड, समय-समय से नये या अतिरि परिनियम बनाएगा या इस धारा में उपबंधित जिसे इसमें आगे ऐसी रीत्या बनाए गए परिनियमों में संशोधन या निरसन करेगा :
परंतु, प्रबंध मंडल बोर्ड, विश्वविद्यालय के किसी विद्यमान प्राधिकरण के किसी प्रतिष्ठा, शयिों या गठन पर प्रभाव डालने वाले कोई परिनियमों या परिनियम के किसी संशोधन नहीं बनाएगा जब तक ऐसा प्राधिकरण प्रस्ताव पर अपनी राय अभिव्य करने का अवसर नहीं देता है और इस प्रकार कोई राय लिखित में अभिव्य नहीं करता है तब तक होगा तथा उसका शासी निकाय द्वारा विचार किया जाएगा ।
(४) प्रत्येक ऐसे परिनियम या परिनियम में परिवर्धन या किसी संशोधन या परिनियम के निरसन सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होंगे :
परंतु, कोई भी परिनियम विद्या परिषद से परामर्श के बिना, विद्यर्ाथियों के अनुशासन और शिक्षा का स्तरमान, शिक्षा तथा परीक्षा पर प्रभाव डालने वाले प्रबंध मंडल बोर्ड द्वारा नहीं बनाए जाएंगे ।
प्रथम र्आडिनेन्स । ३२. (१) विश्वविद्यालय के प्रथम र्आडिनेन्स, कुलपति द्वारा बनाए जाएँगे जो कि शासी निकाय द्वारा अनुमोदित किये जाने के बाद, उनके अनुमोदन के लिए सरकार को प्रस्तुत किए जाएँगे ।
(२) इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों या परिनियमों के अध्यधीन, विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए जैसे उसे उचित समझे शासी निकाय के अनुमोदन के साथ प्रबंध मंडल बोर्ड ऐसे प्रथम र्ऑडिनेन्सेस बनाएगा और ऐसे र्ऑडिनेन्सेस निम्न सभी या किन्हीं मामलों के लिए मुहैया कराएगा, अर्थात् :
(क) विश्वविद्यालय में विद्यर्ाथियों के प्रवेश तथा उनके ऐसे नामांकन ;
(ख) विश्वविद्यालय में उपाधियों, डिप्लोमा और प्रमाणपत्रों के लिए अधिकथित किए जाने वाले ;
(ग) उपाधियों, डिप्लोमा, प्रमाणपत्रों तथा अन्य अकादमिक विशिष्टताअों को प्रदान करना, उनके लिए न्यूनतम अर्हताएँ वही होंगी तथा मंजूर करने और प्राप्त करने से संबंधित वही अर्थ होगा ;
भाग सात-४२-३. एचबी--१४७४-३.
१८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(घ) अध्येतावृत्ति, छात्रवृत्ति, वृत्तिका, पदक और पुरस्कारों को प्रदान करने के लिए शर्तें ;
(ङ) कार्यालय की शर्तें और नियुक्ित की रीति और परीक्षा निकाय के कर्तव्य, परीक्षकों तथा अनुसीमकों समेत परीक्षाअों का संचालन ;
(च) विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठयचर्याअों, परीक्षाअों, उपाधियों तथा डिप्लोमाअों के लिए प्रभारित की जानेवाली फीस ;
(छ) विश्वविद्यालय के छात्रावास में विद्यर्ाथियों के आवास की शर्तें ;
(ज) छात्रों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कारवाई करने संबंधी उपबंध ;
(झ) विश्वविद्यालय के शैक्षणिक जीवन में सुधार करने के लिए किसी अन्य निकाय के सृजन, संरचना और कृत्य जो कि आवश्यक माने गए हैं ;
(ञ) उच्च शिक्षा के अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थाअों से सहकारिता और सहयोग की रीति ;
और
(ट) इस अधिनियम या तद्धीन बनाए गए परिनियमों द्वारा जो अन्य सभी मामलें र्ऑडिनेन्सों द्वारा मुहैया करना अपेक्षित है ।
(३) सरकार, उप-धारा (१) के अधीन कुलपति द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रथम ऑडिनेन्सों का विचार करेगी और ऐसे उपांतरण के साथ यदि कोई आवश्यक समझे तो, उसकी प्राप्ति के दिनांक से चार महीनों के भीतर अनुमोदन देगी ।
३३. (१) अकादमिक परिषद द्वारा बनाए गए प्रथम र्ऑडिनेन्स से अन्य सभी र्ऑडिनेन्स प्रबंध मंडल बोर्ड पश्चात्वर्ती ऑर्डीनेन्स । द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद उसके अनुमोदन के लिए शासी निकाय को प्रस्तुत किए जाएँगे ।
(२) अकादमिक परिषद, या तो प्रबंध मंडल बोर्ड और शासी निकाय के सुझावों को सम्मिलित करके र्ऑडिनेन्सेस उपांतरित करेगी या सुझावों को सम्मिलित न करने के लिए कारण देगी, यदि कोई हो, ऐसे कारणों के साथ र्ऑडिनेन्सेस लौटाएगी। प्रबंध मंडल बोर्ड और शासी निकाय, अकादमिक परिषद के सुझावों का विचार करेंगे और विश्वविद्यालय के र्ऑडिनेन्सेस ऐसे उपांतरणों के साथ या के बिना अनुमोदित किए जायेंगे और तत्पश्चात्, शासी निकाय द्वारा अनुमोदित रूप में र्ऑडिनेन्सेस प्रवृत्त होंगे ।
विनियम । ३४. विश्वविद्यालय के प्राधिकरण, प्रबंध मंडल बोर्ड के पूर्वानुमोदन के अध्यधीन, उसके स्वयं के कारोबार और उसके द्वारा नियु समितियों को संचालित करने के लिए इस अधिनियम के उपबंधों, नियमों, तद्धीन बनाए गए र्ऑडिनेन्स और परिनियमों से संगत विनियम बनाएँगे ।
प्रवेश । ३५. (१) विश्वविद्यालय में प्रवेश गुणागुण के आधार पर कडाई से किये जायेंगे ।
(२) विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए गुणागुण के आधार पर या प्रवेश के लिए अर्हता परीक्षा में प्राप्त किए गए श्रेणी के आधार पर और पाठयक्रमेतर तथा पाठयेतर गतिविधियों में प्राप्त उपलब्धि या राज्य स्तर पर संचालित प्रवेश परीक्षा में प्राप्त गुण या श्रेणी के आधार पर या विश्वविद्यालय के सहयोजन द्वारा या राज्य के किसी एजेंसी द्वारा होंगे :
परंतु, वृत्तिक तथा तकनीकी पाठयचर्याअों में प्रवेश केवल प्रवेश परीक्षा के जरिए होंगे।
(३) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, निरधिसूचित जनजाति (विमुक्त जाति), खानाबदोश जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों, विशेष पिछड़े वर्गों तथा विकलांग छात्रों और र्आथिक कमजोर वर्गों (इ डब्ल्यू एस) से संबंध रखनेवाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए सीटें राज्य सरकार की नीति के अनुसार आरक्षित रखी जाएँगी :
परंतु, किसी मामले में कुल आरक्षण पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
(४) महाराष्ट्र का अधिवास रखनेवाले छात्रों के लिए चालीस प्रतिशत सीटें अनुमोदित कुल ग्रहण क्षमता में से आरक्षित रखी जायेगी ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ १९ फीस संरचना पुर्नविलोकन समिती । ३६. (१) विश्वविद्यालय, समय-समय पर विभिन्न पाठयक्रमों और कार्यक्रमों के लिए उनकी फीस संरचना तैयार करेगा और उसे सभी स्व- वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के विभिन्न पाठयक्रमों और कार्यक्रमों के लिए फीस संरचना का पूर्नविलोकन करने के लिए, समय-समय से जारी सरकारी संकल्प द्वारा, राज्य सरकार द्वारा गठित फीस संरचना पुर्नविलोकन समिति के अनुमोदन के लिए उसे अग्रेषित कर सकेगा ।
सन् २०१५ महा. २८ ।
(२) महाराष्ट्र असहायताप्राप्त निजी वृत्तिक शैक्षिक संस्थाएँ ( प्रवेश तथा फीस का विनियमन) अधिनियम, २०१५ की धारा १४ और १५ में उपबंधित फीस संरचना के निर्धारण के लिए फीस विनियमिति प्राधिकरण द्वारा अंगीकृत की जानेवाली प्रक्रिया और घटक, विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए फीस संरचना प्रस्ताव का विचार करते समय फीस संरचना पुर्नविलोकन समिति द्वारा यथावश्यक परिवर्तन समेत अपनायी जायेगी ।
(३) समिति, विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की गयी फीस संरचना पर विचार करेगी, उसका पुर्नविलोकन करेगी और चाहे प्रस्तावित फीस,--
(क) (एक) विश्वविद्यालय का आवर्ती व्यय को पूरा करने के लिए स्त्रोत निर्माण करने; और
(दो) विश्वविद्यालय के अधिकतर विकास के लिए आवश्यक व्यावृतियाँ के लिए पर्याप्त है; और (ख) अनुचित ढ़ंग से अत्यधिक नहीं है, का विचार करने के पश्चात्, उसकी सिफारिशें सरकार को प्रस्तुत करेगी
(४) उप-धारा (३) के अधीन सिफारिशों की प्राप्ति के पश्चात्, यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि, प्रस्तावित फीस संरचना पर्याप्त और युक्तीयु है, तो वह फीस संरचना का अनुमोदन कर सकेगी। यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि, प्रस्तावित फीस संरचना पर्याप्त नहीं है और अनुचित है तो वह उसे अस्वीकृत करेगी और उसके पुर्नविचार के लिए उसे समिति को वापस भेज देगी । सरकार द्वारा अनुमोदित फीस संरचना अगले पुर्नविलोकन तक शेष वैध रहेगी।
(५) राज्य सरकार, विश्वविद्यालय में प्रवेशित पिछड़े वर्गों से संबंधित छात्रों के लिए किसी फीस की प्रतिरूति नहीं करेगी या कोई वित्तीय दायित्व नहीं लेगी।
(६) विश्वविद्यालय उप-धारा (४) के अधीन जिसके लिए वह हकदार है से अन्यथा चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए कोई फीस प्रभारित नहीं करेगी ।
प्रतिव्यक्ति फीस का प्रतिषेध। ३७. ( १ ) कोई प्रतिव्य िफीस, विश्वविद्यालय द्वारा या की और से या कोई व्यक्ित जो ऐसी, संस्था के प्रबंधन के लिए प्रभारी है या जिम्मेवार है, के द्वारा, किसी छात्र से या उसके प्रवेश के प्रतिफलेन और ऐसी संस्था में किसी अध्ययन के पाठयक्रम या उच्चतर कक्षा या वर्ग में उसकी पदोन्नति के लिए, संग्रहीत नहीं की जाएगी।
(२) उप-धारा (१) में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, प्रबंधन रोक़ ड़ या उसी प्रकार में विहित रीत्या विन्यास निधि व्ययिों या संगठन या लोकन्यासों या किसी अन्य लोगों के संगठन से छात्रवृत्ति या पुरस्कार या जैसे प्रदान करने के लिए विन्यास निधि सृजन करने के लिए नए शिक्षण संस्थाअों को खोलने के लिए सद्भाव में दान संग्रह या प्राप्त करेगी लेकिन, ऐसे दान संग्रहित या स्वीकारते समय प्रबंधन ऐसे दान के विचार में उसके द्वारा चलित किसी शैक्षणिक संस्था में कोई सीटें आरक्षित नहीं रखेगी । जहाँ ऐसे संदनों की स्वीकृति के विचार में ऐसी संस्था में किसी छात्र के प्रवेश के लिए कोई जगह आरक्षित है तो दान के ऐसे प्रतिग्रहण, प्रतिव्य िफीस, महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्थान (प्रतिव्य िफीस का प्रतिषेध) अधिनियम, १९८७ की धारा २ के खण्ड (क) के अर्थान्तर्गत समझे जाएँगे ।
निर्धारण और मूल्यांकन सारणी। सन् १९८८ का महा. ६।
३८. प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के शुरुआत में और किसी मामले में, प्रत्येक कलैंडर वर्ष के ३१ जुलाई से पहले विश्वविद्यालय उसके द्वारा संचालित हर और प्रत्येक पाठयक्रम के लिए सत्रवार या, यथास्थिति, वर्ाषिक निर्धारण और मूल्यांकन अनुसूची तैयार तथा प्रकाशित करेगी और ऐसे समय-सारणी का कड़ाई से पालन होगा :
परंतु, यदि चाहे जिस किसी भी कारण के लिए, विश्वविद्यालय यह समय-सारणी अनुसरण करने में असमर्थ है तो वह यथासंभव शीघ्र सरकार को प्रकाशित समय-सारणी से प्रस्थान तैयार करने के लिए विस्तृत२० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ कारणों को देने की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी । सरकार, उस पर भविष्य में अनुपालन के लिए जैसा कि उचित समझे, ऐसे निदेश जारी करेगी ।
३९. (१) विश्वविद्यालय, विशिष्ट पाठयक्रम के लिए उसके द्वारा संचालित निर्धारण और मूल्यांकन की परिणामों की घोषणा। अंतिम दिनांक से लेकर तीस दिनों के भीतर उसके द्वारा संचालित परिणाम घोषित करेगा :
परंतु, यदि जो कोई भी कारण हो, विश्वविद्यालय किसी भी निर्धारण और मूल्यांकन के परिणाम पैंतालीस दिन की अवधि के भीतर, अंतिमत: घोषित करने में असमर्थ है, वह सरकार को ऐसे विलंब के विस्तृत कारणों में समाविष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा । सरकार, उस पर, भविष्य में बेहतर अनुपालन के लिए, जैसा कि वह उचित समझे, ऐसे निर्देश जारी करेगा ।
(२) निर्धारण और मूल्यांकन या परीक्षा के परिणाम, विश्वविद्यालय ने धारा ३८ में अनुबद्ध परीक्षा की अनुसूची का अनुसरण नहीं किया है या उप-धारा (१) में विर्िनदिष्ट अवधि के भीतर, विश्वविद्यालय परिणाम घोषित करने में असफल हुआ है सिर्फ इसी कारण के लिए अविधिमान्य नहीं होंगे ।
४०. उपाधियाँ, डिप्लोमा, पुरस्कार प्रदान करने के लिए या किसी अन्य प्रयोजनार्थ विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह । परिनियमों द्वारा विहित रित्या में, प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में किया जाएगा।
विश्वविद्यालय का प्रत्यायन ।
४१. विश्वविद्यालय द्वारा अवधारित किया जाए ऐसे अन्य निकाय या प्राधिकरण से राष्ट्रीय या प्रत्यायन । अन्तराष्ट्रीय प्रत्यायन करेगा और विश्वविद्यालय तत्पश्चात्, ऐसे प्रत्यायन प्रत्येक पाँच वर्ष के अंतराल पर नवीकृत कर सकती है।
४२. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, विश्वविद्यालय विनियमित निकायों के नियमों, विनियमों, मानकों आदि के पालन के लिये और ऐसे निकायों को उनके द्वारा उनके कर्तव्यों का निर्वहन तथा उनके कार्यों को कार्यान्विन करने के लिए आवश्यक है ऐसी सभी सुविधाअों और सहायता मुहैया करने के लिये बाध्यकारी होगी ।
विश्वविद्यालय विनियमित निकायों के नियमों, विनियमों, मानकों आदि का अनुसरण करेगा ।
वर्ाषिक रिपोर्ट । ४३. (१) विश्वविद्यालय का वर्ाषिक रिपोर्ट प्रबंधन मंडल बोर्ड तैयार करेगा जिसमें अन्य मामलों में, विश्वविद्यालय द्वारा उसके उद्देश्यों को पूरा करने हेतु उठाए गए कदमों का समावेश होगा तथा शासी निकाय द्वारा अनुमोदित किया जाएगा तथा उसी की प्रति प्रायोजक निकाय को भेजी जाएगी ।
(२) उप-धारा (१) के अधीन तैयार की गई वर्ाषिक रिपोर्ट की प्रतियाँ सरकार को भी प्रस्तुत की जाएगी। (३) राज्य सरकार, राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष ऐसी रिपोर्ट रखेगी ।
वर्ाषिक लेखा और संपरीक्षा।
४४. (१) प्रबंध मंडल बोर्ड के निर्देशों के अधीन तुलनपत्र समेत विश्वविद्यालय के वर्ाषिक लेखा, वर्ाषिक लेखा और तैयार किए जाएँगे और इस प्रयोजन के लिए विश्वविद्यालय द्वारा नियु लेखापरीक्षकों द्वारा प्रत्येक वर्ष में कम से कम एक बार लेखापरीक्षा की जाएगी।
(२) लेखापरीक्षा रिपोर्ट के साथ वर्ाषिक लेखा की प्रति शासी निकाय को प्रस्तुत की जाएगी।
(३) वर्ाषिक लेखाअों तथा शासी निकाय के संप्रेक्षणों के साथ जोड़ी गई लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रायोजक निकाय को प्रस्तुत की जाएगी।
(४) उप-धारा (१) के अधीन तैयार किए गए वर्ाषिक लेखाअों और तुलनपत्र की प्रतियाँ भी सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।
(५) सरकार की सलाह, यदि कोई हो, विश्वविद्यालय के लेखा और लेखापरीक्षा की रिपोर्ट से उद्भूत होती है तो, शासी निकाय के सामने रखी जाएगी और शासी निकाय जैसा उचित समझे ऐसे निदेश जारी करेगी और उसका अनुपालन सरकार को प्रस्तुत करेगी ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ २१ ४५. (१) विश्वविद्यालय से संबंधित अध्यापन, निर्धारण और मूल्याकंन और संशोधन या किसी अन्य मामले की श्रेणियाँ अभिनिश्चित करने के प्रयोजन के लिए, सरकार, कुलपति से परामर्श के बाद, जैसा वह उचित समझे ऐसे व्य िया व्ययिों द्वारा जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रीति में मामला निर्धारण करेगी।
विश्वविद्यालय निरीक्षण करने की सरकार की शक्तियाँ । (२) सरकार, सुधारक कार्यवाही के लिए ऐसे निर्धारण के परिणामस्वरूप, संबंध में उसकी सिफारिशें विश्वविद्यालय को संसूचित करेगी और विश्वविद्यालय सिफारिशों के अनुपालन की सुनिश्चिति के लिए आवश्यकता के रूप में ऐसे सुधारक उपाय करेगी ।
(३) यदि विश्वविद्यालय, उचित समय के भीतर, उप-धारा (२) के अधीन बनी सिफारिशों का अनुपालन करने में असफल रहती है तो सरकार, जैसा वह उचित समझे ऐसे निर्देश देगी जो विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी होंगे ।
४६. (१) प्रायोजक निकाय, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और छात्रों को अग्रिम रूप में कम से कम एक वर्ष की इस प्रभाव की सूचना सरकार को देकर, विश्वविद्यालय विघटित करेगी :
प्रायोजक निकाय द्वारा विश्वविद्यालय का विघटन। परंतु, विश्वविद्यालय का विघटन, केवल उसके नियमित पाठयक्रम पूरे करनेवाले छात्रों की अंतिम बॅच का होगा और उन्हें उपाधि, डिप्लोमा या, यथास्थिति, पुरस्कारों से पुरस्कृत किये जाने पर ही प्रभावी होगा ।
(२) विश्वविद्यालय के विघटन पर विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ और दायित्व, प्रायोजक निकाय में निहित होंगी :
परंतु, विश्वविद्यालय उसकी स्थापना से पंद्रह वर्षों पहले प्रायोजक निकाय द्वारा विघटन किये जाने के मामले में विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ, सभी ऋणभारों से मु होकर सरकार में निहित होंगी ।
कतिपय परिस्थितियों में राज्य सरकार की विशेष शक्तियाँ । ४७. (१) यदि, सरकार को यह प्रतीत होता है कि विश्वविद्यालय इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गये नियमों, परिनियमों या र्ऑडिनेन्स के किन्ही उपबंधों का उल्लंघन करता है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी किन्ही निर्देशों का उल्लंघन हुआ है या इस अधिनियम, की धारा ५ के अधीन दिये गये किन्हीं उपक्रमों के निर्वहन से परिविरत होता है या विश्वविद्यालय में वित्तीय अव्यवस्था या कुप्रशासन की स्थिति उद्भूत होती है तो वह अपेक्षित विश्वविद्यालय को पैंतालिस दिनों के भीतर कारण बताअों नोटीस जारी करेगा क्यों न उसके समापन का आदेश बनाया जाये ।
(२) यदि, सरकार का, उप-धारा (१) के अधीन जारी की गई सूचना पर विश्वविद्यालय के जबाब की प्राप्ति पर, समाधान हो जाता है कि प्रथमदृष्टया इस अधिनियम या तद्धीन बनाये गये नियमों, परिनियमों या र्ऑडिनेन्स के समस्त या किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन हुआ है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन हुआ है या इस अधिनियम, की धारा ५ के अधीन दिये गये किन्ही उपक्रमों के निर्वहन से परिविरत हुआ है या वित्तीय अव्यवस्था या कुप्रशासन हुआ है तो वह आवश्यक समझे ऐसी जाँच के आदेश बना सकेगी।
(३) सरकार, उप-धारा (२) के अधीन किसी जाँच के प्रयोजन के लिए, किन्हीं भी अभिकथनों में जाँच करने के लिए किसी जाँच अधिकारी या अधिकारियों को नियत करेगी और उस पर रिपोर्ट बनायेगी ।
(४) उप-धारा (३) के अधीन नियत किये गये जाँच अधिकारी या अधिकारियों को सिविल प्रक्रिया संहिता, १९०८ के अधीन सिविल न्यायालय में जो शयिाँ निहित होती है वह निम्नलिखित मामलों के संबंध में वाद का विचारण करते समय होगी, अर्थात् :----
(क) किसी व्य िको उपस्थित रहने के लिए, समन जारी करना और प्रवृत्त करना और शपथ पर उसका परीक्षण करना ;
२२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४(ख) साक्ष्य में प्रतिपादित किये गये अपेक्षित किसी ऐसे दस्तावेज या किसी अन्य सामग्री की खोज या निर्माण करना ;
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख की अपेक्षा करना; और
(घ) कोई अन्य मामला जिसे विहित किया जाये ।
(५) जाँच अधिकारी या अधिकारियों की इस अधिनियम के अधीन की गई जाँच, दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ की धारा १९५ और अध्याय २६ के प्रयोजनों के लिये सिविल न्यायालय समझा जायेगा ।
(६) उप-धारा (३) के अधीन नियु किये गये अधिकारी या अधिकारियों से जाँच रिपोर्ट की प्राप्ति पर, यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि विश्वविद्यालय ने इस अधिनियम के सभी या किन्ही उपबंधों या तीन बनाये सन् १९७४ का २। गये नियमों, परिनियमों, या र्आडिनेन्स का उल्लंघन किया है या इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा जारी किन्ही निर्देशों का उल्लंघन किया है या इस अधिनियम की धारा ५ के अधीन उसके द्वारा किये गये उपक्रमों को कार्यान्वित करने के लिये परिविरत है या विश्वविद्यालय के अकादमिक मानकों के संतर्जक से वित्तीय कु-प्रबंध या कु- प्रशासन की स्थिति विश्वविद्यालय में उद्भूत हुई है तो विश्वविद्यालय के परिसमापन या प्रशासक की नियु िके लिए प्रारंभिक आदेश जारी किये जायेंगे ।
(७) उप-धारा ( ६ ) के अधीन नियु किया गया प्रशासक इस अधिनियम के अधीन शासी निकाय और प्रबंध मंडल बोर्ड के सभी शयिाँ होंगी और सभी कर्तव्यों के अध्यधीन होगा और विश्वविद्यालय के कामकाज का प्रबंध तब तक करेगा जब तक नियमित पाठयक्रमों के छात्रों की अंतिम बॅच उनके पाठयक्रम को पूरा नहीं करती हैं और उपाधि, डिप्लोमा या यथास्थिति, पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया है ।
(८) उपाधि, डिप्लोमा या, यथास्थिति पुरस्कार प्रदान करने के पश्चात्, नियमित पाठयक्रमों के छात्रों की अंतिम बॅच के लिये प्रशासक, सरकार को इस प्रभाव की रिपोर्ट करेगा ।
(९) उप-धारा (८) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विश्वविद्यालय के विघटन के अंतिम आदेश जारी करेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन के दिनांक से विश्वविद्यालय विघटित होगा और विश्वविद्यालय की सभी आस्तियाँ और दायित्व ऐसे दिनांक से प्रायोजक निकाय में निहित होगी ।
४८. (१) इस अधिनियम के प्रारंभण के तुरंत पश्चात्, राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर विरचित सचिव स्तरीय समिति ।
स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित मार्गदर्शक सिद्धांतो की आवश्यकताअों के अनुपालन के सत्यापन और सुनिश्चित करने के उद्देश में, सचिव स्तरीय समिति स्थापित की जायेगी और प्रायोजक निकाय को परिवचन प्रस्तुत करेगी । समिति, कौशल्य विभाग, नियोजन और सार्वजनिक उद्यम विभाग, वित्त विभाग और नियोजन विभाग के प्रभारी सचिवों से मिलकर बनेगी ।
(२) उप-धारा (१) के अधीन गठित समिति, उसकी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी ।
(३) उप-धारा (२) के अधीन रिपोर्ट की प्राप्ति पर राज्य सरकार, विश्वविद्यालय के परिचालन को अनुमति देते हुये राजपत्र में, अधिसूचना प्रकाशित करेगी ।
(४) विश्वविद्यालय, उप-धारा (३) के अधीन जारी की गई सूचना के पश्चात् ही केवल छात्रों को प्रवेश देगा। ४९. अधिनियम की धारा ४८ की उप-धारा (१) के अधीन स्थापित सचिव स्तर समिति राज्य सरकार द्वारा जब और जहा निदेशित विश्वविद्यालय के निरीक्षण करेगी और स्वयंपिोषित विश्वविद्यालय की स्थापना से सचिव स्तरीय समिति द्वारा निरीक्षण ।
संबंधित, समय-समय से, राज्य सरकार या केन्द्र सरकार द्वारा जारी मार्गदर्शन की आवश्यकता का जाँच और अनुपालन सुनिश्चित करेगी और तत्समय प्रवृत्त सुसंगत विधि के उपबंधों का अनुपालन करेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ २३ शास्तियाँ। ५०. इस अधिनियम के किन्हीं उपबंधों के उल्लंघन में कोई अपराध और धारा ११ के अधीन विर्िनदिष्ट विश्वविद्यालय साथ ही साथ, विश्वविद्यालय के अधिकारी, ऐसे कारावास से जो, तीन महिने से कम न हो परंतु जिसे एक साल तक बढाया जा सकेगा तथा ऐसे जुर्माने से जो पचास हजार रुपयों से कम न हो, जिसे पाँच लाख रुपयों तक बढाया जा सकेगा, से दण्डित किया जायेगा :
परंतु यह कि, इस धारा की कोई बात किसी कार्यवाही के चाहे सिविल या आपराधिक हो विश्वविद्यालय के परिसमापन के प्रकियाअों समेत इस अधिनियम के उपबंधों के अनअनुपालन के लिए प्रारम्भण से सरकार को नहीं रोकेगी ।
कंपनीयों द्वारा अपराध । ५१. (१) जहाँ कंपनी द्वारा इस अधिनियम या तदूधीन बनाए गये नियमों के अधीन अपराध किया कंपनीयों द्वारा जाता है तब अपराध किये जाने के समय, कंपनी के कार्य संचालन साथ ही साथ कंपनी के प्रभारी या के अपराध । लिए जिम्मेदार प्रत्येक व्य िअपराध के लिए दोषी समझा जायेगा तथा उसके विरुद्ध अभियोजन चलाने के लिए, दायी होगा और तद्नुसार दण्डित किया जायेगा :
परंन्तु, इस उप-धारा में अन्र्तविष्ट कोई भी बात ऐसे किया व्य िको किसी दण्ड के लिए दायी नहीं बनायेगी यदि वह यह साबित करता है कि, अपराध उसकी जानकारी के बगैर किया गया था या ऐसा अपराध न हो इसलिए उसने सम्यक् तत्परता बरती थी ।
(२) उप-धारा (१) में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन, कंपनी द्वारा अपराध काय जाता है और यह साबित होता है की अपराध, कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से हुआ है या की और से किसी उपेक्षा के कारण हुआ माना जा सकता है तब ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी या उस अपराध के लिए दोषी होगा तथा उसके विरुद्ध भी अभियोजन के लिए, वह दायी होगा और उसे तद्नुसार दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण.------इस धारा के प्रयोजनार्थ,-----
(क) "कंपनी" का तात्पर्य निगमित निकाय से है तथा इसमे एक न्यास, एक फर्म, समाज, एक संस्था या व्ययिों का अन्य संघ भी शामिल है; और
(ख) फर्म के संबंध में "निदेशक" का तात्पर्य.---
(एक) फर्म का तात्पर्य फर्म के भागीदार से है
(दो) एक समाज, एक न्यास, एक संस्था या व्ययिों का अन्य संघ, या व्ययिों का निकाय का तात्पर्य उस व्य िसे है जो समाज, न्यास, संस्था या अन्य संघ, या यथास्थिति निकाय के कार्य के प्रबंधन के साथ समाज, न्यास, संस्था या अन्य संघ या निकाय के नियमों या उप-विधियों के अधीन हित रखता है ऐसे व्य िसे है ।
५२. (१) सरकार, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना नियम बनाने की शक्ित । सकेगी ।
(२) पूर्वगामी शयिों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्न समस्त या किन्ही मामलों का उपबंध कर सकेंगे, अर्थात् :---
(क) धारा ४७ की, उप-धारा (४) के, खंड (घ) के अधीन विहित किये जानेवाले मामले ;
(ख) कोई अन्य मामला जिसे नियमों द्वारा विहित करना आवश्यक है या किया जा सके ।२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ (३) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, उसके बनाए जाने के पश्चात् यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा जो कि चाहे वह एक सत्र में हो या दो या अधिक अनुक्रमिक सत्रों में हो, और यदि, उस सत्र में जिसमें उसे रखा गया है, उसके ठीक बाद के सत्र या सत्रों के अवसान के पूर्व दोनों सदन नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत होते हों या दोनों सदन इस बात के लिए सहमत होते हों कि नियम न बनाया जाए तो नियम, अधिसूचना के प्रकाश के दिनांक से, केवल ऐसे परिर्वतित रूप में हों प्रभावी होगा, या, यथास्थिति, निष्प्रभावी हो जायेगा; तथापि, ऐसा कोई परिवर्तन या बातिलिकरण, उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात या विलुप्ति की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी ।
कठिनाईयों के निराकरण की शक्ित ।
५३. (१) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों से अनसंगत कोई बात कर सकेगी, जो उसे कठिनाई के निराकरण के लिए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हों :
परंतु, ऐसा कोई भी आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभण के दिनांक से दो वर्षो की अवधि के अवसान के बाद, नही बनाया जायेगा ।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश उसके बनाए जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ २५
उद्देश्यों तथा कारणों का वक्तव्य ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, २०२० की तर्ज पर राज्य सरकार, महाराष्ट्र राज्य में, कौशल विकास, रोजगार और उद्योगता को बढ़ावा देने की दृष्टि के साथ कौशल शिक्षा रोजगारभिमुख प्रशिक्षण और परिपाक दिखाने को प्रोत्साहन देने हेतु स्ववित्तपोषित कौशल विश्वविद्यालय स्थापित तथा निगमित करना इष्टकर समझती है ।
२. सरकार, इसके अलावा एक आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई नामक स्ववित्तपोषित कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिये एक नवीन विधि बनाना इष्टकर समझती है जो निम्न के लिये समर्थ वातावरण निर्माण करेगी---
(१) देश की कुशल रोजगार जरुरतों को पूरा करने के लिये कौशल, अध्ययन और उद्यमिता की भावना के साथ सक्षम, कुशल और सक्षम युवाअों का विकास करना ;
(२) उद्योग के साथ एक एकीकृत रीति में रोजगार और उद्यमिता समेत कौशल शिक्षा को प्रोत्साहन देना ताकि प्रगति और सुगमता के राह की सुनिश्चिति हो सकें ।
(३) परिदान, छात्र सेवायें सुकर बनाने और शिक्षा, परामर्श, सूचना और कौशल प्रशिक्षण आदि के लिये राज्य में विभिन्न स्थानों पर परिसरों, प्रादेशिक केंद्रों, कौशल केंद्रों, सामुदायिक महाविद्यालयों, अध्ययन केंद्रों, सूचना केंद्रों, परीक्षण या परीक्षा केंद्रों, उत्कर्षता केंद्रों आदि की स्थापना करना ;
(४) आधुनिक तकनीकी का उपयोग करनेवाले असदृश्य पाश्र्वभूमि, आयु समुहों और सामाजिक- र्आथिक हैसियत का प्रतिनिधित्व करनेवाले अध्ययणकर्ताअों को व्यापक पैमाने पर कौशलता और रोजगार के अवसरों का उपबंध करना ;
(५) सुसंगत पाठयक्रम आरेखन, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार केंद्र उद्यमिता, परामर्शी, संयुक्त परियोजनायें आदि को सुनिश्चिति के लिये नियोजनकर्ता, उद्योग और उद्योग संघों के साथ सहभागिता करना ;
(६) रोजगार, उद्योमिता और स्व-रोजगार अवसरों को प्रदान करके निबंधकों में र्आथिक रूप से पिछडे समुदायों को समर्थन देना ;
(७) युवाअों को उनकी आय बढाने के लिये सुकर रोजगार और स्व-रोजगार सलाह द्वारा सम्मिलित करके बढ़ावा देना, अतः संप्रवर्तन में वृध्दि होगी ।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय आयटीएम कौशल विश्वविद्यालय, नवी मुंबई नामक एक स्व-वित्तयोजिक कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना करना है ।
मंगल प्रभात लोढा
नागपुर, दिनांकित २७ दिसंबर, २०२२ । कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता तथा नवपरिवर्तन मंत्री । भाग सात-४२-४. एचबी--१४७४-४.
२६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन ।
प्रस्तुत विधेयक में विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिए निम्न प्रस्ताव अंतर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :---
खण्ड १ (२).---इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, जिस दिनांक को यह अधिनियम प्रवृत्त होगा वह दिनांक नियुक्त करने की, शक्ित प्रदान की गई हैं।
खण्ड ५ (२४).---इस खण्ड के अधीन, विभिन्न पाठयक्रमों की फीस संरचना विहित करने की, शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड ८ ( ३ ).---इस खण्ड के अधीन, विश्वविद्यालय या प्रायोजित निकाय, तद्धीन बनाए गए इस अधिनियम या नियमों, परिनियमों, र्ऑडिनेन्सों या विनियमों के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन करते हैं तो उस मामले में, विन्यास निधि के एक भाग या संपूर्ण जुर्माने के लिए रीति विहित करने की शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई हैं।
खण्ड १५ (२).---इस खण्ड के अधीन, संकायाध्यक्षों की शक्ितयाँ तथा कृत्य, विनियमों द्वारा विहित करने की शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड १६ (५).---इस खण्ड के अधीन, रजिस्ट्रार की शक्ितयाँ तथा कर्तव्य, विहित करने की शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड १७.---इस खण्ड के अधीन,---
(क) उप-खण्ड (३) के अधीन, परीक्षा नियंत्रक के चयन के प्रयोजनों लिए अर्हताएँ और अनुभव, परिनियमों द्वारा विहित करने ;
(ख) उप-खण्ड (४) (च) के अधीन, परीक्षा नियंत्रक की शक्ितयाँ तथा कर्तव्य, परिनियमों या र्ऑडिनेंसों या विनियमों द्वारा विहित करने की शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई है ।
खण्ड १८.---इस खण्ड के अधीन,---
(क) उप-खण्ड (२) के अधीन, मुख्य वित्त और लेखा अधिकारी की नियुक्ित की रीति और सेवा के निबंधन और शर्ते परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट करने ;
(ख) उप-खण्ड (३) के अधीन, मुख्य वित्त और लेखा अधिकारी की, अन्य शक्ितयाँ और कर्तव्य, परिनियमों द्वारा विहित करने की शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई है ।
खण्ड १९ (२).---इस खण्ड के अधीन विश्वविद्यालय के कृत्यों के लिये आवश्यक समझा जाए ऐसे अधिकारियों की नियुक्ित की रीति, सेवा निबंधन और शर्तें और उनकी शक्ितयाँ और कृत्य परिनियमों द्वारा विर्िनदिष्ट करने की, शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड २१ (३) (च).---इस खण्ड के अधीन, शासी निकाय की अन्य शक्ितयाँ, परिनियमों द्वारा विहित करने की शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड २३ (४).---इस खण्ड के अधीन, अकादमिक परिषद की बैठक के लिए गणपर्ूति परिनियमों द्वारा विहित करने की शक्ित विश्वविद्यालय को प्रदान की गई हैं ।
खण्ड २४(३).---इस खण्ड के अधीन, विश्वविद्यालय को परिमिमों द्वारा शासी निकाम की अन्य शक्ितयाँ विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है ।
खण्ड ३० (४).---इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को उनके द्वारा तथा अनिमोदित प्रथम परिनियम राजपत्र में प्रकाशित करने की, शक्ित प्रदान की गई हैं ।
खण्ड ४५ (१).---इस खण्ड के अधीन, अध्यापन, परीक्षा और अनुसंधान के मानकों का अभिनिश्चयन करने या विश्वविद्यालय से संबंधित किसी अन्य मामलों के प्रयोजन के लिए निर्धारण के कारण की रीति विहित करने की शक्ित सरकार को प्रदान की गई है।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर २९, २०२२/पौष ८, शके १९४४ २७ खण्ड ४७ (९).---इस खण्ड के अधीन, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा जिस विश्वविद्यालय का विघटन करने का अंतिम आदेश जारी करने की, शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई है ।
खण्ड ४८ (३).---इस खण्ड के अधीन, विश्वविद्यालय के परिचालन के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना जारी करने की, शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई है ।
खण्ड ५२.---इस खण्ड के अधीन, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियमों को बनाने की, शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई है।
खण्ड ५३.---इस खण्ड के अधीन जो प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के भीतर इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, उसके निराकरण के लिए राजपत्र में प्रकाशित कोई आदेश जारी करने की, शक्ित राज्य सरकार को प्रदान की गई है ।
२. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिए उपरोल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरुप के है ।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर,
भाषा संचालक,
नागपूर,
दिनांकित २०२२ ।
महाराष्ट्र राज्य ।
विधान भवन,
राजेन्द्र भागवत,
नागपूर,
प्रधान सचिव,
दिनांकित २८ दिसंबर, २०२२ ।
महाराष्ट्र विधानसभा ।
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