RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ९, अंक १] सोमवार, फेब्रुवारी २७, २०२३/फाल्गुन ८, शके १९४४ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक २७ फरवरी, २०२३ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----
L. A. BILL NO. I OF 2023.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL CORPORATION
ACT AND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL CORPORATIONS ACT.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक १ सन् २०२३।
मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी विधेयक ।
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :----
रूष् १८८८ ॅ ३ रूष् १९४९ ॅ ५९
(१)
भाग सात-१-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २७, २०२३/फाल्गुन ८, शके १९४४ अध्याय एक प्रारम्भिक
१. यह अधिनियम मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र नगर निगम (संशोधन) अधिनियम, २०२३ कहलाए। संक्षिप्त नाम।
अध्याय दो मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन ।
२. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५ की, उप-धारा (१) के खण्ड (ख) में, " पाँच नामनिर्देशित रूष् १८८८ ॅ ३ पार्षदों " शब्दों के स्थान में, " दस नामनिर्देशित पार्षदों " शब्द रखे जायेंगे।
रूष् १८८८ ॅ ३ ॅ्र न् ५ द्ध रूह
अध्याय तीन महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में संशोधन ।
रूष् १९४९ ॅ ५९ रूष् १९४९ ॅ ५९ ॅ्र न् ५ द्ध रूह
३. महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा ५ की, उप-धारा (२) के खण्ड (ख) में, " पाँच से अनधिक " शब्दों के स्थान में, " निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या के दस प्रतिशत से अनधिक या दस, जो भी न्यूनतम है " शब्द रखे जायेंगे।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २७, २०२३/फाल्गुन ८, शके १९४४ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।
मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की धारा ५ की, उप-धारा (१) का खण्ड (ख), यह उपबंध करता है कि, नगर निगम प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव होनेवाले पाँच नामनिर्देशित पार्षदों से मिलकर बनेगा और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम (सन् १९४९ का ५९) की धारा ५ की, उप-धारा (२) का, खण्ड (ख), यह उपबंध करता है कि, प्रत्येक नगर निगम प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव होनेवाले पाँच से अनधिक नामनिर्देशित पार्षदों की ऐसी संख्या से मिलकर बनेगा ।
२. राज्य में नगर निगम के अधिक प्रभावी प्रशासन के लिए, नगर निगम प्रशासन में ज्ञान और अनुभव होनेवाला व्यक्ति पार्षद के रूप में नामनिर्देशित किया जाता है । इस प्रकार नामनिर्देशित सदस्यों के ज्ञान और अनुभव के उपयोग द्वारा नगर निगम के कार्य में गुणात्मक सुधार करने की दृष्टि से, सरकार, राज्य में, बृहन्मुंबई के नगर निगम में दस तक नामनिर्देशित सदस्यों की संख्या में वृद्धि करना तथा अन्य नगर निगमों में निर्वाचित पार्षदोें की कुल संख्या के दस प्रतिशत से अनधिक या दस, जो भी न्यूनतम है में वृद्धि करना इष्टकर समझती है । इसलिए, मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा ५(१)(ख) और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा ५(२)(ख) में यथोचित संशोधन करना प्रस्तावित है । ३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई, दिनांकित २२ फ़रवरी, २०२३।
एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य। विधान भवन : मुंबई, दिनांकित २७ फ़रवरी, २०२३।
राजेन्द्र भागवत, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा। ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.