महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ९, अंक ५(२) ] गुरुवार, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ [पृष्ठे २८, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ९
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १६ मार्च, २०२३ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----
L. A. BILL No. X OF 2023.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA FIRE PREVENTION AND LIFE SAFETY MEASURES ACT, 2006.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक १० सन् २०२३।
महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ में
अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक।
सन् २००७ का महा. ३। क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है, अर्थात् :------
१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय (संशोधन) अधिनियम, २०२३ संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ। कहलाए।
(२) यह ऐसे दिनांक से प्रवृत्त होगा, जिसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें।
भाग सात-९-१.
२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४२. महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा २, के,----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा २ में संशोधन।
(१) खण्ड (१) में के स्पष्टीकरण के स्थान में, निम्न स्पष्टीकरण रखा जायेगा, अर्थात् :------
" स्पष्टीकरण.----इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, " भवन " अभिव्यक्त में अस्थायी तौर पर और समारोह के समय बनाए गए अस्थायी संरचना जैसे कि तंबू, शामियाना और तिरपाल छज्जा शामिल है ;";
(२) खण्ड (४) में, " अग्नि सेवाएँ " शब्दों के स्थान में " अग्नि और आपात काल सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) खण्ड (४) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा :------
" (४क) " अग्नि और आपातकाल सेवाएँ " का तात्पर्य, जहाँ जीवन या सम्पत्ति कोई स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण जोखिम में है ऐसी मानवर्िनमित या नैर्सगिक आपदा या कोई संभाव्य परिणामिक घटना के मामले में या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य ऐसे प्राधिकरण द्वारा दी गई आवश्यक सेवाअों से है।";
(४) खण्ड (५) में " भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, २००५ " शब्दों तथा अंकों के स्थान में, " भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता " शब्द रखे जायेंगे ;
(५) खण्ड (६) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात,-----
"(६) " अनुज्ञप्ति प्राप्त अभिकरण " का तात्पर्य, अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों को हाथ में लेने या निष्पादित करने के लिए या इस अधिनियम के अधीन कार्यान्वित किए जाने के लिए आवश्यक ऐसे अन्य संबंधित क्रियाकलापों के अनुपालन करने के लिए निदेशक द्वारा अनुज्ञप्ति दी गई व्यक्ित या व्यक्ितयों के संघ से है ;";
(६) खण्ड (८) में, " भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता, २००५" शब्दों और अंकोंे के स्थान में, " भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता " शब्द रखे जायेंगे ;
(७) खण्ड (९) में, " और स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण द्वारा नामनिर्देशित किन्ही अधिकारी का समावेश होगा " शब्दों के स्थान में " या स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण " शब्द रखे जायेंगें। (८) खण्ड (१४) के स्थान में, निम्न खण्ड, रखा जायेगा, अर्थात् :------
"(१४) " सुसंगत नगरपालिका विधि " का तात्पर्य,-----
(क) मुंबई नगर निगम अधिनियम ;
(ख) महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम ;
(ग) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ ;"।
सन् १८८८ का ३। सन् १९४९ का ५९। सन् १९६५ का ४०। ३. मूल अधिनियम की धारा ३ की,-----
(१) उप-धारा (१) में,----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा ३ में संशोधन।
(क) " उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना " शब्दों से प्रारंभ होनेवाले और " इस अधिनियम के उपबंधों या नियमों " शब्दों से समाप्त होनेवाले भाग के स्थान में निम्न रखा जायेगा, अर्थात् :-----
" अनुसूची एक में यथा वर्गीकृत किसी भवन या किसी ऐसे भवन के भाग के लिए अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों,महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ३ विनियमों या उप-विधियों या भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता को प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना भवन का स्वामि, या जहाँ स्वामि का पता लगाने योग्य नहीं है, भवन का अधिभोगी संबंधित स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण के मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी से और जहाँ ऐसे क्षेत्र में या स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण की सीमा के बाहर क्षेत्र में मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी नहीं है वहाँ निदेशक, स्वामि या अधिभोगी से आवश्यक अनंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन या अंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन या, यथास्थिति, अग्नि सुरक्षा अनुमोदन का नवीकरण प्राप्त करेगा और भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता के भाग ४ में या उसके किसी संबंधित भाग में और तत्समय प्रवर्तन यथा प्रयुक्ित के अनुसूची मेंे न्यूनतम विहित से कम न हो इस अधिनियम के उपबंधोंे या नियमों के अनुसरण में, सभी समय पर अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों की सभी काल सुस्थिति में और कार्यक्षम स्थिति में बनाए रखेगा :";
(ख) परंतुक के पश्चात् स्पष्टीकरण के स्थान में, निम्न स्पष्टीकरण, रखा जायेगा, अर्थात् :----
" स्पष्टीकरण.---इस उप-धारा के प्रयोजन के लिए,-----
(क) " अनंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन " का तात्पर्य, भवन नक्षा का अनुमोदन और उसके संनिर्माण के पूर्व के समय पर, इस अधिनियम या तद्धीन बनाए नियमों द्वारा या के अधीन यथा उपबंधित अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों के अनुसार, संबंधित स्थानीय प्राधिकारी या योजना प्राधिकारी के मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी के निदेशक द्वारा दी गई सिफारिश, से है ;
(ख) " अंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन " का तात्पर्य, समुचित प्राधिकरण द्वारा भवन का पूर्णता प्रमाणपत्र या अधिभोगी प्रमाणपत्र देने के पूर्व, अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अनंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन के उपबंधों के अनुसरण में है, के अभिनिश्चयन के पश्चात्, संबंधित स्थानीय प्राधिकारी या योजना प्राधिकारी के मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी के निदेशक द्वारा जारी प्रमाणपत्र, से है ;
(ग) " नवीकरण किया गया अंतिम अग्नि सुरक्षा अनुमोदन " का तात्पर्य संबंधित स्थानीय प्राधिकारी या योजना प्राधिकारी के निदेशक या मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी के निदेशक द्वारा जारी नवीकरण प्रमाणपत्र, से है :
परन्तु, नवीकरण प्रमाणपत्र सुसंगत अधिनियमों नियमों, के अनुसार यदि आवश्यक या अनिवार्य है तो उक्त प्राधिकारी द्वारा जारी किया जायेगा ।";
(२) उप-धारा (१क) के पश्चात् निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
" (१ख) इस अधिनियम की उप-धारा (१) या किन्ही अन्य उपबंधों या तत्सम प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किसी अन्य उपबंधों में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी,----
(क) भवन की उँचाई ३० मीटर से उपर है परंतु ४५ मीटर से उँचाई अधिक नहीं है ऐसे भवन अनुसुचि-एक में (ख) के रूप में विर्िनदिष्ट अधिभोगींयो के मामले में, अर्थात् शैक्षिक भवन के मामले में यदि ऐसा भवन संबंधित अग्नि सुरक्षा अनुमोदन में सिफारिश किए और अनुसूचि एक में र्िनदिष्ट न्यूनतम से कम नहीं है अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों की न्यूनतम आवश्यकताअों को पूरा करता है तो वह अनुज्ञा दी जा सकेगी ;
(ख) नगर निगम और विशेष योजना प्राधिकरण की सीमा से बाहर का क्षेत्र में अनुसूचि एक में (ख) के रूप में उँचाई में ३० मीटर से अधिक के भवनों के मामलों में, अर्थात् शैक्षणिक भवनों के मामले में, यदि संबंधित अग्नि सुरक्षा अनुमोदन में यथा सिफारिश किए गए अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों की भाग सात-९-१अ.
४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४न्यूनतम आवश्यकताअों पर्ूति करनेवाले ऐसे भवन और जो अनुसूचि एक में र्िनदिष्ट अग्नि रोकथाम प्रतिष्ठापन के लिए न्यूनतम आवश्यकता से अनिम्न नहीं है, को ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने की उनकी माँग पर आग बुझाने वाले यंत्र को मंजूर करने के लिए प्राधिकरण को राज्य सरकार अनुमति देने के लिए सक्षम बना सकेगी ;
(१ग) इस अधिनियम की उप-धारा (१) या किसी अन्य उपबंधों या तत्सम प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, ४५ मीटर तक बहुस्तरीय वाहन पार्किंग (एम. एल. सी. पी.) और तक के यांत्रिक/स्वचालित वाहन पार्किंग को छोड़कर भवन उँचाई मेंे १५ मीटर से उपर है परंतु २४ मीटर से अधिक नहीं है। अनुसूचि एक मेंे (ज) के रूप में विर्िनदिष्ट न्यूनतम भवन के एक तरफ स्वचालित १०० मीटर तक का संलग्न कार पार्किंग या स्टील स्ट्रक्चर या जैसे कि बॅटरी डिजेल जनरेटर (डी.जी.) सेट आदि के उपयोग के लिए उपयोग किए जानेवाले कोई अन्य संयंत्र अधिभोगियों के मामले में, अर्थात् गोदाम भवन के मामले में, यदि ऐसा भवन अनुसूचि-एक में विर्िनदिष्ट आग बुझाने वाले यंत्र को प्रतिष्ठापित करने की न्यूनतम आवश्यकता को पुरा करता है तो वह अनुज्ञा दी जा सकेगी। " ;
(३) उप-धारा (३) के पश्चात् निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात्,----
" (३क) धारा ४५ के अधीन यथा विर्िनदिष्ट भवन के लिए स्वामि या जहाँ स्वामि का पता लगाने योग्य नहीं है वहाँ पर भवन का अधिभोगी यह सुनिश्चित करेगा कि, संबंधित अग्नि सुरक्षा अनुमोदन में यथा सिफारिश की गई आग बुझानेवाली प्रणाली सुस्थिति में और पर्याप्त कार्य करने की स्थिति में है कि सुनिश्चिति करने के लिए जैसा कि विहित किया जाए स्वचालित निरंतर मानिटरींग प्रणाली के साथ उपबंध किया गया है और यह विहित प्ररूप में अनुज्ञप्तिधारी अभिकरण द्वारा प्रमाणित किया जायेगा और जैसा कि विहित किया जाए ऐसी रित्या में उसे संबंधित प्राधिकरण को प्रस्तुत किया जायेगा।"।
४. मूल अधिनियम की धारा ९ में,------
(१) " मुख्य अग्नि सुरक्षा अधिकारी " शब्द जहाँ कहीं वे आए हों, के स्थान में, " निदेशक " शब्द सन् २००७ का महा. ३ की धारा ९ में संशोधन।
रखा जायेगा ;
(२) उप-धारा (२) में " पाँच रुपयों का कोर्ट फी स्टाम्प " शब्दों के स्थान में " जैसा कोर्ट फी स्टाम्प विहित किया जाए " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) उप-धारा (३) में " एक वर्ष " शब्दों के स्थान में " दो वर्ष " शब्द रखे जायेगे ;
(४) उप-धारा (५) अपमर्ाजित की जायेगी।
५. मूल अधिनियम की धारा १० की उप-धारा (१) के परंतुक में, " मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी " शब्दों के स्थान में " निदेशक " शब्द रखे जायेंगे।
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १० में संशोधन।
६. मूल अधिनियम की धारा ११ की,-----
(१) उप-धारा (१) और (२) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेगी, अर्थात् :-----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा ११ में संशोधन।
सन् २०२३ का महा.।
"(१) महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय (संशोधन) अधिनियम, २०२३ के प्रारम्भण के दिनांक से प्रभावी और इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन, स्थानीय प्राधिकरण या योजना प्राधिकरण के क्षेत्र के भीतर (जिसे इसमें आगे यथा अन्यथा उल्लिखित के सिवाय, इस अधिनियम में संपूर्णत: सामुहिक रूप से " प्राधिकरण " के रूप में निर्देशित किया गया है या अन्य क्षेत्र जिसको यह अधिनियम लागू है के भीतर अनुसूचि दो (जिसे इसमें आगे, इस अध्याय में " उक्त अनसूची " कहा गया है) में यथा वर्गीकृत भवनों के सभी स्वामियों या, यथास्थिति, अधिभोगियों पर इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अग्नि सुरक्षा सेवा फीस उद्ग्रहीत की जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ५ (२) किन्ही प्राधिकरण के क्षेत्र के भीतर और जिसे यह अधिनियम लागू है ऐसे क्षेत्र के भीतर स्थित भवन के प्रत्येक प्रकार के संबंध में ऐसी फीस का दर अनुसूची-दो में यथा विर्िनदिष्ट ऐसी होगी।";
(२) उप-धारा (३) में,-----
(क) " प्राधिकरण को " शब्दों के स्थान में, " प्राधिकरण और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है उस प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्र में निदेशक कर सकेगा " शब्द रखे जायेंगे ;
(ख) परंतुक में,-----
(एक) " प्राधिकरण को " शब्दों के स्थान मे, " प्राधिकरण, और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है उस प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्रों में निदेशक कर सकेगा " शब्द रखे जायेगें ;
(दो) " उक्त अनुसूचि में विर्िनदिष्ट न्यूनतम दर " शब्दों के स्थान सें " उक्त अनुसूचि में विर्िनदिष्ट दर " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) उप-धारा (४) में,
(क) " प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात्, " या निदेशक " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(ख )" अग्नि सुरक्षा सेवाएँ " शब्दों के स्थान में, " अग्नि सुरक्षा और आपातकाल सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे।
७. मूल अधिनियम की धारा १२ में,-----
(१) उप-धारा (१) के पश्चात्, निम्न उप-धारा र्िनविष्ट की जायेगी, अर्थात् :-----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १२ में संशोधन। " (१क) निदेशक को किसी आवेदन की प्राप्ति पर या स्वप्रेरणा से दर बढ़ने के पूर्व या बढा हुआ दर घटाने के पूर्व और ऐसी दर पर फीस उद्ग्रहीत करने के पूर्व प्रस्ताव को राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी प्राप्त करने के लिए आगे की कार्यवाही कर सकेगा " ;
(२) उप-धारा (२) में "" प्राधिकरण"" शब्दों के पश्चात् " या निदेशक " शब्द निविष्ट किये जायेंेगे ;
(३) उप-धारा (३) के खण्ड (क) में, " प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात्, " या निदेशक " शब्द निविष्ट किये जायेंगे ;
(४) सीमांत टिप्पणी में " प्राधिकरण " शब्दों के पश्चात् " या निदेशक " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ।
८. मूल अधिनियम की धारा १३ में,-----
(१) उप-धारा (१) में " न्यूनतम फीस विर्िनदिष्ट " शब्दों से प्रारम्भ होनेवाले भाग के तथा " उक्त
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १३ में संशोधन। अनुसची के भागों " शब्दों से समाप्त होनेवाले भाग के स्थान में " उक्त अनुसूची में भवन के प्रत्येक प्रकार के लिए विर्िनदिष्ट फीस" शब्द रखे जायेंगे ;
(२) उप-धारा (२) में, " प्राधिकरण को " शब्दों के स्थान में, " प्राधिकरण, और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है उस प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्रों में, निदेशक को " शब्द रखे जायेंगे।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ९. मूल अधिनियम की धारा १४ की,-----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १४ में संशोधन।
(१) उप-धारा (१) में " प्राधिकरण " शब्दों, दोनों स्थानों पर जहाँ कहीं वे आया हों, " प्राधिकरण और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है के प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्रों में, निदेशक को " शब्द रखे जायेंगे ;
(२) उप-धारा (२) में, " प्राधिकरण " शब्द, जहाँ कही वे आए हों, के स्थान में, " प्राधिकरण, और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है के प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्रों में, निदेशक को " शब्द रखे जायेंगे ;
(३) उप-धारा (४) में " प्राधिकरण " शब्द, जहाँ कही वे आया हो, "" प्राधिकरण और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है के प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्र में, निदेशक को "" शब्द रखे जायेंगे ;
(४) उप-धारा (६) में, " प्राधिकरण " शब्द, जहाँ कहीं वे आया हों, के स्थान में " प्राधिकरण और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है के प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्रों में निदेशक को " शब्द रखे जायेंगे ; (५) उप-धारा (७) के खण्ड (ख) में, " प्राधिकरण " शब्द, के स्थान में " प्राधिकरण और जिस क्षेत्र को यह अधिनियम लागू है के प्राधिकरणों की सीमा के बाहरी क्षेत्र में, निदेशक को ", शब्द रखे जायेंगे। १०. मूल अधिनियम की धारा १६ की,--- (१) उप-धारा (१) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी, अर्थात् :----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १६ में संशोधन।
" (१) जहाँ राज्य सरकार को यह प्रतीत होता है कि, किसी प्राधिकारी या निदेशक की अग्नि सुरक्षा निधी की जमा रकम, अग्नि बुझानेवाले यंत्र और सम्पत्ति को खरीदने और उसे बनाए रखने तथा उसको बनाए रखने के लिए या अग्नि सुरक्षा और आपातकाल सेवाअों का उपबंध करने की आवश्यकताअों को पूरा करने या सामान्यत: आग बुझाने के परिचालन को प्रर्दशित करने के लिए अधिकारियों, कर्मचारियों के पद निर्माण करने के लिए उपगत किए जानेवाले आवश्यक किसी व्यय को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है या यह कि ऐसी जमा रकम उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए आवश्यकताअों से अधिक है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, प्राधिकारी या निदेशक को, उक्त अधिसूचना में जैसा कि विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे दर पर, यदि कोई हो फीस का दर बढाने या बढाई गई फीस को कम करने का आदेश दे सकेगी। " ;
(२) सीमांत टीप्पणी में " प्राधिकारी " शब्द के पश्चात् " या निदेशक " शब्द निविष्ट किए जायेंगे। ११. अध्याय पाँच में, " अग्नि रोकथाम सेवा निदेशक " शीर्षक के स्थान में, " अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेेवा निदेशक " शब्द रखे जायेंगे।
१२. मूल अधिनियम की धारा १८ की,
(१) उप-धारा (१) में, " अग्नि रोकथाम सेवा निदेशक " शब्दों के स्थान में, " अग्नि रोकथाम और सन् २००७ का महा. ३ का अध्याय ५ में संशोधन। सन २००७ का महा. ३ की धारा १८ में संशोधन।
आपातकाल सेवा निदेशक " शब्द रखे जायेंगे ;
(२) उप-धारा (२) में, " अग्नि रोकथाम सेवा " शब्दों के स्थान में, " अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवा "" शब्द रखे जायेंगे ।
१३. मूल अधिनियम की धारा १९, में ----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा १९ में संशोधन।
(१) " उप-धारा (३) " शब्द, कोष्ठक और अंक अपमर्ाजित किए जाएंगे। (२) " अग्नि रोकथाम सेवाएँ " शब्द, जहाँ कही वे आए हो, शब्दों के स्थान में, " अग्नि और आपातकाल सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे ।
१४. मूल अधिनियम की धारा २१ की,----- (१) उप-धारा (१) में " अग्नि रोकथाम सेवाएँ " शब्दों के स्थान में, " अग्नि रोकथाम और आपातकाल सन् २००७ का महा. ३ की धारा २१ में संशोधन।
सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(२) सीमांत टिप्पणी में, "" अग्नि रोकथाम सेवा "" शब्दों के स्थान में, "" अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवा " शब्द रखे जायेंगे ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ७ १५. मूल अधिनियम की धारा २२ में,-----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा २२ में संशोधन। (१) " अग्नि रोकथाम सेवा " " अग्नि रोकथाम सेवा " " अग्नि रोकथाम सेवाएँ " या " अग्नि रोकथाम सेवा या सेवाएँ " शब्द जहाँ कही वे आए हो के स्थान में, " अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
(२) सीमांत टिप्पणी में, " महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम सेवा "" शब्दों के स्थान में, " महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवाएँ "" शब्द रखे जायेंगे ।
१६. मूल अधिनियम की धारा २४ में " अग्नि रोकथाम सेवाएँ " शब्दों के स्थान में, "अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवाएँ " शब्द रखे जायेंगे ;
सन् २००७ का महा. ३ की धारा २४ में संशोधन। १७. मूल अधिनियम की धारा २७ की,-----
(१) उप-धारा (१) में,----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा २७ में संशोधन। (क) " अग्नि रोकथाम की"" शब्दों के स्थान में, ""अग्नि रोकथाम की या किसी आपातकाल सेवा की आवश्यकता " शब्द रखे जायेंगे ;
(ख) खण्ड (क) में, ""आग बुझाने या जीवन या सम्पत्ति बचाने के लिये " शब्दों के स्थान में, " आग बुझाने या जीवन या सम्पत्ति बचाने के लिए किसी आपातकाल स्थिति को प्रतिसाद देने के लिए " शब्द रखे जायेंगे;
(ग) खण्ड (ख) में "आग बुझानेवाली "" शब्दों के पश्चात् " या किसी आपातकाल सेवा को प्रतिसाद देने"" शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(घ) खण्ड (ग) में, " अग्नि भडक जाने पर " शब्दों के पश्चात् " या कोई आपातकाल स्थिति पर उद्भूत होती है तो " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(ड़) खण्ड (ड़) " अग्निशमन " शब्दों के पश्चात् " या कोई आपातकाल स्थिति संभालने " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(च) खण्ड (च) में, " आग बुझाने या जीवन या सम्पत्ति का बचाव करने "" शब्दों के स्थान में " आग बुझाने या जीवन या सम्पत्ति का बचाव करने के लिए किसी आपातकाल स्थिति से निपटाने " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;
(२) उप-धारा (२) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी, अर्थात् :------
" (२) अग्नि रोकथाम या कोई आपातकाल स्थिति के अवसर पर अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवा के सदस्यों द्वारा, उनके कर्तव्यों का अपेक्षित निर्वहन करने के समय पर किसी परिसर या सम्पत्ति की कोई हानि होने पर वह अग्नि रोकथाम या कोई आपातकाल स्थिति के किसी बीमा पॉलिसी के अथार्ंतर्गत अग्नि सुरक्षा या कोई आपातकाल स्थिति द्वारा होनेवाली क्षति समझी जायेगी। " ;
(३) उप-धारा (२) के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण निविष्ट किया जायेगा, अर्थात्,------
" स्पष्टीकरण.-----इस धारा के प्रयोजन के लिए " आपातकाल स्थिति " अभिव्यक्त्ति का तात्पर्य, मानवर्िनमित या नैर्सगिक आपदा या कोई आकस्मिक घटना, जहाँ पर जीवन जोखिम में है।";
(४) सीमांत टिप्पणी में, " अग्नि रोकथाम " शब्दों के पश्चात् " या कोई आपातकालीन स्थिति " शब्द जोड़े जायेंेंगे ।
१८. मूल अधिनियम की धारा २९ में,-----
(१) " आग बुझाने के प्रयोजन " शब्दों के पश्चात्, " या किसी आपातकाल स्थिति से निपटाने " शब्द
सन् २००७ का महा. ३ की धारा २९ में संशोधन। निविष्ट किए जायेंेंगे ;
(२) " अग्नि रोकथाम " शब्दों के स्थान में, " अग्नि रोकथाम या कोई आपातकाल स्थिति " शब्द रखे जायेंेंगे ।८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ १९. मूल अधिनियम की धारा ३२ की, उप-धारा (१) में,-----
सन् २००७ का महा. ३ की धारा ३२ में संशोधन।
(१) खण्ड (क) के पूर्व, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा अर्थात् :------
" (१-क) धारा ३ की, उप-धारा (१) के अधीन जारी अग्नि सुरक्षा अनुमोदन, या " ;
(२) खण्ड (ख) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
" (ख ख) धारा ९ की उप-धारा (३) या (४) के अधीन आदेश या " ;
(३) खण्ड (ग) के पश्चात्, निम्न खण्ड निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :----
" (घ) धारा ४५क की उप-धारा (५) और (६) के अधीन आदेश द्वारा ;"।
२०. मूल अधिनियम की धारा ३३ के खण्ड (क) के,----
(१) उप-खण्ड (एक) के स्थान में, निम्न उप-खण्ड, रखा जायेगा अर्थात् :------
सन् २००७ का महा. ३ की धारा ३३ में संशोधन।
" (एक) धारा ३२ की, उप-धारा (१) के खण्ड (१-क), (क), (ख), (खख) या (घ) के अधीन अपीलकर्ता को अग्नि सुरक्षा अनुमोदन के जारी करने के दिनांक से या सूचना की तामिल करने के दिनांक से तीस दिनों के भीतर लाया है जिस दिनांक पर अस्वीकृति संसूचित की गई है या आदेश के जारी करने के दिनांक के तीस दिनों के भीतर ;" ;
(२) परंतुक में, " पंद्रह दिनों " शब्दों के स्थान में, " तीस दिन " शब्द रखे जायेंगे ।
सन् २००७ का महा. ३ की धारा ४५ में संशोधन।
२१. मूल अधिनियम की धारा ४५ की, उप-धारा (१) में, " ३० मीटर से अधिक उँचाई वाले भवन और के लिए उपयोगी " शीर्ष खण्ड (क) के रूप में पुन:क्रमांकित किया जायेगा और इस प्रकार पुन: क्रमांकित खण्ड (क) के पश्चात्, निम्न खण्ड जोडा जायेगा, अर्थात् :--
" (ख) " भवन का,-----
(१) ७० मीटर और उससे अधिक निवासी भवन ;
(२) बड़ी तादाद में तेल और नैर्सगिक वायू के प्रतिष्ठापन करना जैसे कि, परिष्करण एलपीजी गॅस बोतल में भरने के सयंत्र और उसी तरह की अन्य सुविधाएँ ;
(३) ३०,००० वर्ग मीटर या उससे अधिक संनिर्माण क्षेत्र होनेवाले निसर्गत: कम जोखिम वाले या १०,००० से अधिक वर्ग मीटर संनिर्माण क्षेत्र होनेवाले निसर्गत: अधिक उच्चतम जोखिमवाले औद्योगिक भवन के रूप में उपयोगी भवन ।"। २२. मूल अधिनियम की धारा ४५ के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----
सन् २००७ का महा. ३ में नई धारा ४५क का निवेशन।
कतिपय भवनों का अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखा परीक्षण।
सन् २०२३ का महा...। ४५क (१) (क) धारा (क) ४५ की उप-धारा (१) में यथा उल्लिखित सभी अधिभोगीयों के लिए, निर्देशक द्वारा अनुज्ञप्ति प्राप्त अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखा-परीक्षक द्वारा स्वामि, या जहाँ स्वामि पता लगाने योग्य नहीं वहाँपर भवन के अधिभोगी द्वारा अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखा परीक्षण किया जायेगा और ऐसे अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखापरीक्षण की बारंबारता, महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों (संशोधन) अधिनियम, २०२३ के प्रारम्भण के दिनांक से एक वर्ष के भीतर और उसके पश्चात् दो वर्ष में एक बार की जायेगी।
(ख) स्वामि या, यथास्थिति, अधिभोगी इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए नियमों द्वारा या के अधीन यथा आवश्यक उनके ऐसे भवन या उसके भाग में अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों के मूल्यांकन से संबंधित अनुज्ञाप्राप्त अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखापरिक्षक द्वारा जारी विहित प्ररूप में का प्रमाणपत्र निदेशक या मुख्य अग्नि रोकथाम अधिकारी या इसनिमित्त नामनिर्देशित अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ९ स्पष्टीकरण :----इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, "अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखा परीक्षण " अभिव्यक्ति का तात्पर्य, प्रवृत्त प्रचलित अधिनियमों या नियमों या भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार आवश्यक अग्नि रोकथाम, संरक्षण और जीवन सुरक्षा उपायों के मूल्यांकन से है।
(२) निदेशक, जिसे वह ठिक समझे जैसा कि विहित किया जाए ऐसी अर्हता और अनुभव धारण करनेवाले किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के संघ को, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अग्नि और जीवन सुरक्षा लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा।
(३) ऐसे लेखापरिक्षक के कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ जैसा कि विहित किया जाए ऐसी होंगी।
(४) ऐसी अनुज्ञप्ति होने या अनुज्ञप्ति नवीकृत करने के लिए चाहनेवाला कोई व्यक्ति, विहीत प्ररूप में और विहित रीत्या में निदेशक को आवेदन करेगा। ऐसा आवेदन, जैसा की विहित किया जाए ऐसे के कोर्ट- फी स्टाम्प और विहित फीस द्वारा धारित होगा।
(५) ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, निदेशक, जिसे वह ठिक समझे ऐसी जाँच करने पश्चात्, या तो दो वर्ष की अवधि के लिए विहित रीत्या में अनुज्ञप्ति अनुदत्त करेगा या उसी अवधि के अनुज्ञप्ति को नवीकृत करेगा या लिखित में अभिलिखित किए जानेवाले कारणों के लिए, आदेश द्वारा अनुज्ञप्ति अनुदत्त करना या अनुज्ञप्ति नवीकृत करना अस्वीकृत करेगा।
(६) जहाँ निदेशक का यह विश्वास रखने का कारण बनता है कि किसी व्यक्ति ने जिसको एक अनुदत्त की है, अधिनियम या तद्धीन बनाए नियमों के उपबंधों का उल्लंघन किया है या अनुज्ञप्ति के शर्तो का अनुपालन करने में असफल हुआ है या सक्षमता, कदाचार के कारणों या किन्ही अन्य गंभीर कारणों द्वारा अनुचित है, तो निर्देशक, उस व्यक्ति को कारण दिखाने का युक्तीयुक्त अवसर देने के पश्चात्, लिखित में अभिलिखित किए जानेवाले कारणों के लिए, आदेश द्वारा अनुज्ञप्ति स्थगित करेगा या रद्द करेगा।"
(७) अनुज्ञप्ति धारी अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखापरीक्षक से अन्यथा कोई व्यक्ति किसी स्थान या भवन या उसके भाग में अग्नि रोकथाम लेखापरिक्षण या उससे संबंधित किया जानेवाला आवश्यक ऐसी अन्य क्रियाकलापो का निर्वहन नहीं करेगा।
(८) कोई अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखा परीक्षक या ऐसे अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखापरीक्षक होने का दावा करनेवाला कोई अन्य व्यक्ति, ऐसे अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों के वास्तविक होने के बनिा अग्नि रोकथाम मूल्यांकन और जीवन सुरक्षा उपाय अच्छे और पर्याप्त स्थिति में होने से संबंधित उप-धारा (१) के अधीन प्रमाणपत्र नहीं दे सकेगा।"।
२३. मूल अधिनियम की धारा ४८ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :--
सन् २००७ का महा. ३ में नई धारा ४८क का निवेशन।
अनुसूची का संशोधन करने की शक्ति। ""४८क (१) जहाँ राज्य सरकार का यह समाधान हो जाता है की जीवन और अग्नि सुरक्षा को बचाए करने से संबंधित भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता के किसी भाग के कार्यान्वयन करने के प्रयोजनों के लिए इस प्रकार करना आवश्यक या इष्टकर है, तो वह सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अनुसूची एक का संशोधन करेगी और उस पर उ अनुसूची तद्नुसार संशोधित की गई है ऐसा समझा जायेगा। (२) उप-धारा (१) के अधीन जारी प्रत्येक अधिसूचना राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जायेगा।"।
२४. मूल अधिनियम से सलग्न अनुसूची-एक और अनुसूची-दो के स्थान में, निम्न अनुसूचियाँ रखी जायेगी, अर्थात् :---
भाग सात-९-२.
सन् २००७ का महा. ३ की अनुसूची एक और अनुसूची दो की प्रतिस्थापना।१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ े
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ा त् र भाग सात-९-४.
२२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४टिप्पणियाँ आवश्यकताएँ :
१. व्यक्तिगत रूप से संचालित इलेक्ट्रॉनिक फायर अलार्म (मोईफा) प्रणाली (मोईफा) जहाँ यह प्रणाली २४ मीटर और उसके उपर की उँचाई के भवनों के लिए उपबंधित की जायेगी, वहाँ क-३ और क-४ अधिभोगियों को छोड़कर, १५ मीटर और उससे उपर के उँचाई वाले सभी भवनों में टॉकबॅक प्रणाली और लोक संबोधन प्रणाली का भी समावेश होगा। वहॉ के क्षेत्र का विचार किए बिना ३०० वर्ग मीटर से अधिक कार पार्किंग क्षेत्र और बहु स्तरीय कार पार्किंग का भी उपबंध किया जायेगा।
२. स्वचालित खोज और चेतावनी घंटा प्रणाली कार पार्किंग क्षेत्र में उपबंधित नहीं की गई है। तथापि ऐसी खोज प्रणाली कार पार्किंग के अन्य क्षेत्र में, जैसे कि बिजली घर, केबिन और अन्य भण्डार क्षेत्रों में आवश्यक होगी। ३ (क) उँचाई में १५ मीटर से उपरवाले भवनों को, अधिभोग समूह ञ के लिए अनुमति नहीं दी जायेगी। ३ (ख) उँचाई में ३० मीटर से उपरवाले भवनों को, समूह ग-२ और ग-३, समूह घ और समूह च के अधिभोग के लिए अनुमति नहीं दी जायेगी।
३ (ग) उँचाई में २४ मीटर से उपरवाले भवनों की, समूह छ (खरीद प्रक्रिया के लिए जब तक आवश्यक नहीं हो) समूह ज के लिए अनुमति नहीं दी जायेगी।
३ (घ) उँचाई में ४५ मीटर के उपर होनेवाले भवनों को, अधिभोग समूह क-१ और क-२, समूह बी और समूह ज-४ (एमएलसीपी) के लिए अनुमति नहीं दी जायेगी।
३ (ङ) उँचाई में ४५ मीटर के उपरवाले भवनों को अधिभोग समूह ग-१ के लिये अनुमति दी जायेगी, परंतु ऐसे अधिभोग के संबंध में राष्ट्रीय अग्िन संरक्षण संघिय संस्था (यु.एस.ए.) समय-समय से निर्धारित किये गये मानदण्ड की पर्ूति और उसका अनुपालन करेगी।
३ (च) केवल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा और उसी तरह के शैक्षिक प्रयोजनों वाले भवनों के लिए स्थानीय अग्निसुरक्षा सुविधाअों की उपलब्धता के अध्यधीन ३० मीटर से उपरवाले भवनों को अनुमति दी जायेगी। ३ (छ) १५ मीटर के उपर और २४ मीटर से अधिक न होनेवाले भण्डार भवनों को स्थानीय अग्निसुरक्षा सुविधाअों की उपलब्धता के अध्यधीन अनुमति दी जा सकेगी।
३ (ज) १०० मीटर के उपर के स्वचालित यांत्रिक पार्किंग की स्थानीय अग्निसुरक्षा सुविधाअों के अध्यधीन अनुमति नहीं दी जायेगी यदि यह संरचना भवन से संलग्नित है जो भी भवन उप-विधि के अधिन विर्िनदिष्ट से कम है तब उक्त दिवार, २ घंटे के अग्नि प्रतिरोध से निष्प्रभ हो जायेगी।
४. यदि उसका क्षेत्र २०० वर्ग मीटर से अधिक है तो तहखाने में यंत्रणा लगाया जाना आवश्यक है। ५. यदि तहखाने का क्षेत्र २०० वर्ग मीटर से अधिक है तो उपबंध किया जाना आवश्यक है।
६. यदि तहखाने का क्षेत्र २०० वर्ग मीटर से अधिक है तो कोष्ठक में दिया गया अतिरिक्त मूल्य जोड़ दिया जायेगा।
७. दो मंजिलों (तल मंजिल + एक मंजिल) से अधिक मंजिलों वाले भवनों के लिए उपबंध किया जायेगा।
८. विभिन्न वर्गीकरण होनेवाले अधिभोगियों के भवनों से संबंधित संकुल के मामले में, अग्नि सुरक्षा प्रणाली, व्यक्ितगत अधिभोग के लिए प्रयुक्त उन संहिता के उपबंधों को अत्यधिक प्रतिबंधात्मक उपबंधों द्वारा संचालित की जायेगी।
९. तालिका में क्रमश: मदों के अधीन यथा सूचित विर्िनदिष्ट क्षमता की उपरी टंकी (यदि लागू हो तो छत के पम्प के साथ) प्रत्येक भवन/टॉवर को उपबंधित की जायेगी। चाहे भवन (भवनों) टॉवर (टॉवर्स) संलग्न स्थित है या अलग स्थित है। आगे यह कि टंकी, तालिका में यथा प्रयुक्त या तो सीधे या छत के पम्प के ज़रिए फुहारा प्रणाली, नीचे आनेवाले पम्प और प्रथमोपचार पाईप चरखी से जोड़ी जाएगी।
१०. प्रत्येकी १०० बम्बा (हाईड्रेन्ट) या उसके भाग के लिए अधिकतम दो संच के साथ एक पम्प सेट दिये जायेंगे। इस मामले में, एक सेट विद्युत पम्प, एक डिजेल पम्प से चलनेवाला सामान्य सहायता (२२८० एलपीएम क्षमता होनेवाला) और एक विद्युत जॅकी पम्प (१८० एलपीएम क्षमता का) से मिलकर दिये जायेंगे।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ २३ ११. प्रत्येक १०० बम्बा (हाईड्रेन्ट) या उसके भाग के लिए अधिकतम २ संच समेत एक पम्प संच दिया जायेगा। इस मामले में, २२८० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाले दो विद्युत पम्प बम्बा (हाईड्रेन्ट) और फुहारा प्रणाली के लिए प्रत्येकी एक एक डिझेल से चलनेवाला सामान्य सहायता पम्प (२२८० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाला) और दो विद्युत से चलनेवाले जॅकी पम्प (१८० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाले, बम्बा (हाईड्रेन्ट) और फुहारा प्रणाली के लिए प्रत्येकी एक से मिलकर एक पम्प संच दिया जायेगा।
१२. प्रत्येकी १०० बम्बा (हाईड्रेन्ट) के लिए या उसके भाग के लिए, अधिकतम दो संच समेत, एक पम्प का संच दिया जायेगा। इस मामले में, संच दो विद्युत पम्प बम्बा (हाईड्रेन्ट) और फुहारा प्रणाली के लिए प्रत्येकी एक), २८५० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाले होगा। एक डिझेल पर चलनेवाला सामान्य सहायता पम्प (२८५० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाला) और दो विद्युत पर चलनेवाला जॅकी पम्प १८० लिटर प्रति मिनट की क्षमता होनेवाला, बम्बा (हाईड्रेन्ट) और फुहारा प्रणाली के लिए प्रत्येकी एक से मिलकर एक संच दिया जायेगा। १३. उँचाई में ६० मीटर या उसके उपर की गगनचुंबी इमारत में निम्न स्तर पर उच्च दाब का अनुभव हाने की संभावना है और इसलिए, बहु मंजिला, बहु-निकास पम्प (दाब प्रक्षेत्र का निर्माण करके) या एक या अधिक स्तर पर पम्प लगाना या परिवर्तनशील बारम्बारता पम्प चलाना या कोई अन्य समतुल्य पम्पो की व्यवस्था करना आवश्यक समझा है।
१४. प्रत्येकी १०० बम्बा (हाईड्रेन्ट) या उसके भाग के लिए, अधिकतम दो संच के साथ पम्प का एक संच दिया जायेगा। इस मामले में, एक बिजली से चलनेवाला पम्प, एक डिझेल से चलनेवाला सामान्य सहायता पम्प (१६२० एलपीएम की क्षमता होनेवाला) और एक बिजली से चलनेवाला जॅकी पम्प (१८० एलपीएम की क्षमता होनेवाला) से मिलकर एक संच होगा। १०० से परे बम्बों (हाईड्रेन्ट) की संख्या का विचार किए बिना, तालिका में उल्लिखित क्षमताअों की जल टंकी के साथ दो पम्प संच पर्याप्त होंगे।
१५(क). जब तालिका में दोनों को विहित किया है तब फुहारा प्रणाली में भूमिगत स्थिर जल भण्डार और छ़त टंकी दोनों से जल भरा जायेगा।
१५(ख). संपूर्ण भवन (पूरे भवन) अर्थात् सार्वजनिक क्षेत्र साथ ही साथ उसके भीतर का रहने लायक क्षेत्र भारतीय मानदण्डो के अनुसार संरक्षित किया जायेगा।
१६(क). वे उद्योग, जिन्हे भारत सरकार द्वारा " शिल्पकार कार्यशालाएँ, ग्राम और कुटिर उद्योग, लघु क्षेत्र उद्योग " के रूप में परिभाषित किया था या अनुज्ञाप्राप्त किया था केवल उन्होंने अग्निशामक और अग्नि बकेट का उपबंध करना आवश्यक है, उनकी गुणवत्ता और वितरण संबंधित भारतीय मानदण्डो के अनुपालन में होंगे।
१६(ख). विविध अधिभोगी औद्योगिक परिसम्पति (सभी एक भवन में) " युक्ितयुक्त " जोखिम उद्योगों के लिए आवश्यकता के अनुसार संरक्षित किए जायेंगे। ऐसे भवन में जोखिमवाले अधिभोगीयों को इजाजत नहीं होगी। १६(ग). उच्च जोखिमवाले उद्योग जैसे कि, शैलरसायन उद्योग, परिष्करण शालाएँ और उसी तरह के उद्योग के मामले में उपर की तालिका की आवश्यकताअों के अनुपालन के साथ तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय और उसी तरह के सांविधिक आवश्यकताअों का पालन करना आवश्यक है।
१७. संपूर्ण अधिभोग को, एक बिजलीपर चलनेवाले कम से कम ९०० लिटर प्रति मिनट निर्वहन क्षमतावाले मुख्य पम्प, उसी प्रकार की क्षमतावाले (भरोसेमंद सहायता से आपर्ूति के साथ) सहायता पम्प और कम से कम १८० लिटर प्रति मिनट की क्षमता का जॉकी पम्प से सुरक्षित किया जायेगा।
१८. संपूर्ण अधिभोग को, सभी बातों का ध्यान रखकर अर्थात् आरेखन, पम्प बिठाने, पाईपलाईन आदि, समेत में संबंधित सुसंगत भारतीय मानक संहिता के अनुसरण में यथा लागू बम्बा (हाईड्रेन्ट) फुहारा, जल बौछार, जल कोहरा, गॅस अधारित प्रणाली, झाग निकालने अग्नि चेतावनी प्रणाली आदि द्वारा सुरक्षित किया जायेगा। निम्न टिप्पणी १९ और २१ देखिये ।
१९. कतिपय अधिभोगियों को लागू की गई समुचित (दाब) के साथ स्वचालित जल बौछार प्रणाली द्वारा भी संरक्षित किया जा सकेगा। यदि ऐसी प्रणाली, ऐसे अधिभोगियों के लिए मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय आंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों द्वारा मुल्यांकित/प्रमाणित की गई है। आयएस-१५५१९ के विभिन्न उपबंधों के अनुपालन के अलावा, भाग सात-९-४अ.
२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ऐसी प्रणाली का लगाया जाना और आरेखण परीक्षण शर्तों के अनुपालन में विनिर्माण विनिर्देश के अनुसार होगा और उसे संबंधित प्राधिकारी की स्वीकृति होनी चाहिए। परीक्षण परिणाम का बहिर्वेशन विख्यात परीक्षण अभिकरणों द्वारा विशेष रूप से अनुमति दिए बिना बड़े क्षेत्र का संरक्षण करने का उपबंध करने की अनुमति नहीं दी जायेगी। २०. बम्बा (हाईड्रेन्ट) प्रणाली के लिए पम्प की क्षमता भवनों के आवृत्त क्षेत्र पर आधारित अर्थात् ५०० वर्ग मीटर क्षेत्र के लिए के लिए २.० लिटर प्रति मिनिट/वर्ग मीटर पम्िंपग क्षमता होगी, ५०० वर्ग मीटर से बड़े परंतु १००० वर्ग मीटर तक के क्षेत्र के लिए @ २.५ लिटर प्रति मिनट/वर्ग मीटर की पम्िंपग क्षमता होगी। वहाँ का अग्निपृथ्थकरण दो घंटे के समान समय के सममूल्य पर नहीं हो जाता तब तक १००० मीटर वर्ग से अधिक क्षेत्र स्वीकार्य नही माना जायेगा। संपूर्ण बम्बा (हाईड्रेन्ट) और छिड़काव प्रणाली की सुसंगत आय एस मानकों के अनुसार परिकल्िपत होगी देखिए टिप्पणी १८, १९ और २१(क) और २१ (ख)।
२१(क). क से ञ के अधीन वर्गीकृत सभी अधिभोगियों के लिए पम्िंपग क्षमता और जल आवश्यकताएँ उपयर्ुक्त तालिका में क्रमश: स्तंभ और टिप्पणी में जहाँ भी उपर्दशित किए है, उपबंध किया जाना आवश्यक है। तथापि, जहाँ पम्िंपग क्षमता और चाहे आवश्यकताएँ संबंधित स्तंभो में उपर्दशित नहीं की है तो व्यौरे के लिए, बम्बा (हाईड्रेन्ट)/छिड़काव/जल बौछार आदि; के लिए संबंधित आय एस व्यवहार की संहिता का संदर्भ लिया जायेगा। बम्बा (हाईड्रेन्ट) छिड़काव, बौछार प्रणाली आदि जैसे परिकल्पना और यंत्रणा के लगाए जाने के दोनों दशाअों मे से हर एक में ; आयएस-१३०३९, आयएस-१५३२५ आदि, जैसे क्रमश: आय एस व्यवहार की संहिता में के उपबंधों के अनुसार कड़ाई से कार्यान्वयन किया जायेगा।
२१(ख). जहाँ अग्नि बुझाने के रूप में जल का उपयोग विद्यमान जल प्रतिघातक सामुग्री या विद्यमानत: विधिमान्य स्वीकार्य कारणों के कारण समुचित नहीं है तो एक समुचित प्राधिकारियों से परामर्श में, यथोचित वैकल्पिक अग्नि बुझाने की प्रणाली और पद्धति उपबंधित की जायेगी। संरक्षण पद्धति सभी पहलूअों में सुसंगत भारतीय मानकों के अनुपालन में सुझावित की जायेगी। अग्नि अलार्म, वायू आधारित प्रणाली आदि के लिए प्रणालीयों के अन्य प्रकार सभी पहलूअों में सुसंगत भारतीय मानकों के अनुसार आरेखित तथा संस्थापित भी किये जायेंगे।
२२. स्थानीय प्राधिकारी के आवश्यकता के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में, औद्यौगिक क्षेत्रों में या यथा आवश्यक क्षेत्रों में शुष्क उन्मार्ग का उपयोग किया जा सकेगा।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ २५
अनुसूची-दो
(देखिए धारा ११)
अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवा फीस संरचना
१. अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवा फीस महाराष्ट्र स्टाम्प अधिनियम (सन् १९५८ का ५९) के अधीन बनाए गए महाराष्ट्र स्टाम्प (सम्पत्ति के सही बाजार मूल्य का अवधारण) नियम, १९९५ के उपबंधो के अधीन यथा प्रकाशित वर्ाषिक दरों के विवरण के प्रतिशत के अनुसार भवन के विभिन्न प्रवर्गों के लिए अन्र्तनिहित क्षेत्र के स्क्वेअर मीटर के अनुसार निचे सूचित की गई तालिका के अनुसार उद्ग्रहीत होगी।
तालिका
| अनु- क्रमांक | मीटर में भवन की उँचाई | वर्ाषिक दरों के विवरण (एएसआर) के प्रतिशत | |||
| निवासी | संस्थागत | औद्योगिक | वाणिज्यिक | ||
| १ | ४५ मीटर तक का भवन | ०.२५% | ०.५०% | ०.७५% | ०.७५% |
| २ | ४५ मीटर के उपर का भवन तथा | ०.५०% | ०.७५% | १.००% | १.०१% |
२. उपयर्ुक्त परिच्छेद १ में के अधिभोगियों का प्रवर्गीकरण भारत की राष्ट्रीय भवन संहिता में यथा वर्गीकृत ऐसा होगा जो तथा निम्न है :----
(क) " निवासी भवन " का तात्पर्य, उक्त संहिता के (ए)-५ और (ए)-६ को छोड़कर उसका भाग ४ का समूह क, में यथा उल्लिखित निवासी अधिभोगियों अर्थात् आवासगृह, भोजनगृह, शयनगृह, अपार्टमेंट और बहुस्तरीय वाहन पार्किंग और यांत्रिक वाहन पार्किंग, से है।
(ख) " संस्थागत भवन " का तात्पर्य, उक्त संहिता के भाग ४ के समूह ख और उक्त संहिता के भाग ४ के समूह ग में संस्थागत अधिभोगियों में यथा उल्लिखित शैक्षणिक अधिभोगियों अर्थात् विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अस्पताल परिचारिका गृह, से है।
(ग) " वाणिज्य भवन " का तात्पर्य उक्त संहिता के भाग ४ के उप-समूह (ए)-५, (ए)-६ और उक्त संहिता के भाग ४ के समूह घ में के सदन अधिभोगियों और उक्त संहिता के भाग ४ के समूह ड़ में कारोबार अधिभोगियों और उक्त संहिता के भाग ४ के समूह च में के वाणिज्यीय अधिभोगी में यथा उल्लिखित अधिभोगी अर्थात् हॉटेल, भोजनालय, मॉल, मल्टिप्लेक्स (बहुपटीय सिनेमा गृह), नाटयगृह, दुकान, से है।
(घ) " औद्योगिक भवन " का तात्पर्य, उक्त संहिता के भाग ४ के समूह छ, उक्त संहिता के भाग ४ के समूह ज में भन्डार अधिभोगियों (बहुस्तरीय वाहन पार्किंग को छोड़कर) और उक्त संहिता के भाग ४ के समूह ञ में व्यावसायिक जोखिम अधिभोगी में यथा उल्लिखित औद्योगिक अधिभोगियों, से है। "।
टिप्पणी.----भवन के उपर के वर्गीकरण के लिए फीस यथा निम्न परिकलित की जायेगी :---
१. एएसआर के आवश्यक प्रतिशत परिगणना के पश्चात् फीस, आवश्यक अनुमोदन के लिए प्रतिफल के अधीन भवन के अन्र्तनिहित क्षेत्र द्वारा द्विगुणित की जायेगी।
२. फीस के निर्धारण के प्रयोजनों के लिए, अन्र्तनिहित क्षेत्र सकल अन्र्तनिहित क्षेत्र होगा जिसमें भवन के संनिर्माण के लिए अनुमति माँगने के आवेदन के साथ वास्तूकार द्वारा प्रमाणित भवन योजना जो प्राधिकरण को प्रस्तुत किया है में यथा दर्शाए तहखाना, सुविधाधिकार, बाँस, मंच, सीढियाँ, उद्वाहन, प्रतिक्षा कक्ष, बरामदा, छज्जा, बाहुधरन भाग सेवा स्थल, आश्रय क्षेत्रों आदि का क्षेत्र सम्मिलित है। इस प्रयोजन के लिए परिकलित किया जानेवाला अन्र्तनिहित क्षेत्र फर्श क्षेत्र सूचकांक या किसी अन्य रीत्या में परिकलित अंर्तनिहित क्षेत्र से संबंधित नही होगा।
३. परिकलित की जानेवाली फीस निम्नतम स्तर से रहनेलायक मंजिल तक ली जायेगी और जब तालिका में यथा सूचित भवन के निर्धारण के खण्ड के अनुसार नही होगी।२६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ४. फीस के निर्धारण के प्रयोजन के लिए, मुंबई स्टाम्प (सम्पत्ति के सही बाजार मूल्य का अवधारण) नियम, १९९५ के उपबंधों के अधीन प्रकाशित वर्ाषिक दरों का विवरण, महाराष्ट्र सरकार के रजिस्ट्रीकरण और स्टाम्प के विभाग द्वारा जारी भवन संनिर्माण दरों से है।
५. भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता भाग ४ के अनुसार १५ मीटर के निचे अधिभोगीयों जैसे समूह क-२ और क-४ में शिनाख्त किए गए भवन अधिभोगीयों और अधिनियम की धारा १५ में शिनाख्त किए गए वे सभी भवन को कोई फीस उद्ग्रहीत नहीं की जायेगी।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ २७
उद्देश्यो और कारणों का वक्तव्य
महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ (सन् २००७ का ३) महाराष्ट्र राज्य में के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के भवनों में अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय के लिए, अग्नि रोकथाम सेवा फीस के आरोपण तथा अग्नि सुरक्षा निधि के गठन के लिए अधिक प्रभावी उपबंध बनाने की दृष्टी से अधिनियमित किया गया है।
२. उपभोक्ता कार्य मंत्रालय भारत सरकार, खाद्यान्न और लोक वितरण, भारतीय मानक ब्युरो ने वर्ष २०१६ में, भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता प्राप्त की है। उक्त संहिता का भाग ४ अग्नि रोकथाम, बचाव और जीवन सुरक्षा के लिए मार्गदर्शन का उपबंध करता है। तत्पश्चात्, भारत सरकार ने, सभी राज्यों को प्रारुप अग्नि सुरक्षा विधेयक भेज दिया है और उक्त विधेयक के यथोचित उपबंधों को अपनाने की प्रत्येक राज्य को अनुरोध किया है। इस दृष्टि से, विभिन्न प्रकार के भवनों को अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपायों का उपबंध करने के लिए, सरकार महाराष्ट्र अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ में यथोचित उपबंध बनाना इष्टकर समझती है।
३. उक्त अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की प्रमुख विशेषताएँ यथा निम्न है----
(एक) धारा ३ का संशोधन----यह धारा कतिपय उँचाई तक शैक्षिक भवनों और भण्डार भवनों, बहुस्तर कार पार्किंग (एमएलसीपी) संरचना, स्वचलित यांत्रिक कार पार्किंग संरचना के कतिपय प्रकारों में तथा उपयोगिता प्रयोजनों के लिए जैसे कि डिझेल जनरेटर (डीजी) सेट के लिए उपयोगी संरचना में अग्नि सुरक्षा आवश्यकताएँ विनियमित करने, विभिन्न प्रकार के अधिभोगीयों को अग्नि सुरक्षा अनुमोदन का उपबंध करने के लिए संशोधित की गई है।
(दो) धारा ३२ और धारा ३३ में संशोधन----यह धाराएँ, अपील का अवधि पंद्रह दिनों से तीस दिनों तक बढाने के लिए संशोधित की है।
(तीन) धारा ४५ का संशोधन----यह धारा, ७० मीटर से अधिक उँचाईवाले निवासी भवनों, बडे तेल और नैर्सगिक वायू प्रतिष्ठापना जैसे कि, रिफाईनरी, एलपीजी बॉटलिंग प्लांट आदि आदि तथा उपांतरित जोखिम क्रियाकलाप और उच्च जोखिम क्रियाकलाप के औद्योगिक भवनों में भी अग्नि रोकथाम अधिकारी और अग्नि रोकथाम अधीक्षक की नियुक्ित के लिए उपबंध करने के लिए संशोधित किया है।
(चार) धारा ४५क में निवेशन----यह धारा भवनों का अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखा परिक्षण करने का उपबंध करने तथा भवनों का लेखापरीक्षण के कार्यान्वयन के लिए अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा लेखापरिक्षक की नियुक्ित के लिए उपबंध करती है।
(पाँच) अनुसूची एक और दो की प्रतिस्थापना----यह अनुसूची पूनरीक्षित भारतीय भवन संहिता के अनुसार न्यूनतम आग बुझाने वाली आवश्यकताअों का उपबंध करने की दृष्टी से प्रतिस्थापित की गई है। (छह) सभी मानव र्िनमित और नैर्सगिक आपदा को सम्मिलित करने विद्यमान अग्नि रोकथाम सेवाअों की जिम्मेदारीयों का दायरा बढ़ाने के लिए सुसंगत धाराअों में यथोचित संशोधन द्वारा गृह कार्य मंत्रालय की निदेशनों दृष्टि में, " अग्नि रोकथाम सेवाअों " को " अग्नि रोकथाम और आपातकाल सेवाएँ " के रूप में नया नाम दिया है।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई, दिनांकित ६ मार्च, २०२३।
एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री।२८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन
प्रस्तुत विधेयक में विधायी श िके प्रत्यायोजन के लिये निम्न प्रस्ताव अंतग्रस्त हैं, अर्थात् :----
खण्ड १(२).----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, जिसे वह नियत कर सके ऐसे दिनांक पर अधिनियम प्रवर्तन में लाने की शक्ित प्रदान की गई है।
खण्ड २(३).----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय, धारा २ में खण्ड (४क) निविष्ट करना है जिसमें, राज्य सरकार को, अग्नि और आपातकाल सेवामें देनेवाले प्राधिकरण को अधिसूचित करने की शक्ित प्रदान की गई है।
खण्ड ३(३).----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय, अग्नि रोकथाम और जीवन सुरक्षा उपाय अधिनियम, २००६ (सन् २००७ का महा. ३) की धारा ३ में उप-धारा ३(क) निविष्ट करनी है, जिसमें राज्य सरकार को स्वचलित निरंतर मानिटरींग प्रणाली और अनुज्ञप्ति अभिकरण द्वारा प्रमाणित किये जानेवाले प्रमाणपत्र का प्ररुप और रिति और संबंधित प्राधिकरण को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की रीति नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है।
खण्ड ४(२).----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय उक्त अधिनियम की धारा ९ की उप-धारा (२) में संशोधन करना है जिसमें राज्य सरकार को, आवेदन के साथ वहन किये जानेवाले कोर्ट फीस स्टाम्प को नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है।
खण्ड २२.----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय उक्त अधिनियम में धारा ४५क निविष्ट करना है जिसमें,---
(क) उप-धारा (२) में, राज्य सरकार को अग्नि और जीवन सुरक्षा संपरीक्षक की अहर्तायें और अनुभव को नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है ;
(ख) उप-धारा (३) में, राज्य सरकार को अग्नि और जीवन सुरक्षा संपरीक्षक के कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है ;
(ग) उप-धारा (४) में, राज्य सरकार को अग्नि और जीवन सुरक्षा संपरीक्षक के रूप में कार्य करने के लिये अनुज्ञप्ति के लिये, प्रपत्र और आवेदन की रिति और आवेदन के साथ संलग्न फीस और आवेदन के साथ वहन किये जानेवाली कोर्ट फीस स्टाम्प को नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है ;
(घ) उप-धारा (५) राज्य सरकार को अनुज्ञप्ति प्रपत्र नियमों द्वारा विहित करने की शक्ित प्रदान की गई है ;
खण्ड २३.----इस खण्ड के अधीन, जिसका आशय, उक्त अधिनियम में धारा ४८क निविष्ट करनी है, जिसमें राज्य सरकार को, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अनुसूची एक संशोधन करने की शक्ित प्रदान की गई है।
२. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिये उपरोल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरुप के है।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य। विधान भवन : मुंबई, दिनांकित १६ मार्च, २०२३।
राजेन्द्र भागवत, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा।
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