RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ९, अंक ५(३) ] शुक्रवार, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियमों (सातवाँ संस्करण) के नियम ११६ (१) के प्रथम परंतुक के
अधीन प्रकाशित किया जाता है :---
L. A. BILL No. XI OF 2023.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CO-OPERATIVE
SOCIETIES ACT, 1960.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ११ सन् २०२३।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक।
रूष् १९६१ ॅ द्ध. २४
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है ; अत: भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :---
१. यह अधिनियम महाराष्ट्र सहकारी संस्था (संशोधन) अधिनियम, २०२३ कहलाए। संक्षिप्त नाम।
(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ २ रूष् १९६१ ॅ द्ध. २४ २. महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा ७३ ककक, की, उप-धारा (३) के प्रथम परंतुक में " कोविड़-१९ महामारी को देखते हुए राज्य में तालाबंदी का अधिरोपण " शब्द अपमर्ाजित किए जायेंगे ।
रूष् १९६१ ॅ द्ध. २४ ॅ्र न् ७३ ॅॅॅ द्ध रूह
३. मूल अधिनियम की धारा ७८क, की, उप-धारा (१) का चतुर्थ परंतुक, अपमर्ाजित किया जायेगा । रूष् १९६१ ॅ द्ध. २४ ॅ्र न् ७८ॅ द्ध रूहमहाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १६, २०२३/फाल्गुन २५, शके १९४४ ३ ३
उद्देश्यों तथा कारणों का वक्तव्य।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० (सन् १९६१ का महा. २४) की धारा ७३ ककक की, उप-धारा (३) का परंतुक, अन्य बातों के साथ-साथ यह उपबंध करता है कि, यदि, समिति के निर्वाचित सदस्यों तथा उसके पदाधिकारियों का पदावधि अवसित हो चुका है और यदि संस्था के समिति का निर्वाचन, कोविड़-१९ महामारी को देखते हुए राज्य में तालाबंदी का अधिरोपण करने के कारण नहीं लिया जा सका है तो समिति के ऐसे सदस्य और पदाधिकारी नई समिति सम्य्क गठित होने तक, समिति सदस्य और पदाधिकारी के रूप में निरंतर रहे हैं ऐसा समझा जायेगा ।
जैसे कि कोविड़-१९ बीमारी, महामारी के रूप में नहीं रही हैं, सरकार उक्त अधिनियम की धारा ७३ ककक की उप-धारा (३) के परंतुक में से कोविड़-१९ महामारी से संबंधित संदर्भ अपमर्ाजित करना आवश्यक समझती है ।
२. सहकारी संस्था के रजिस्ट्रार को, संस्थाअों की कार्यकारी समितियों की वित्तीय अनियमितता, कपट आदि से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई है । उक्त अधिनियम की धारा ७८क, रजिस्ट्रार को, वित्तीय अनियमितता और कपट के मामले में, समिति को अतिष्ठित करने तथा इस प्रकार अतिष्ठित किए गए समिति के सदस्यों से अन्यथा के संस्था के तीन या अधिक सदस्यों से मिलकर गठित समिति की नियुक्ित करने या संस्था के कार्य का प्रबंध करने के लिए छह से अनधिक महीने की अवधि के लिए प्रशासक या प्रशासकों को नियुक्त करने के लिए सशक्त करती है । तथापि, रजिस्ट्रार को केवल उपयर्ुक्त र्िनदिष्ट संस्थाअों के संबंध में ऐसी शक्ितयाँ है । इसलिए, उक्त धारा ७८क की सीमा के भीतर शेष संस्थाअों को लाने के उद्देश में, सरकार उक्त धारा ७८ क में यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझती है ।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है ।
मुंबई, दिनांकित १० मार्च, २०२३।
अतुल सावे, सहकारिता मंत्री।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
विधान भवन : मुंबई, दिनांकित १६ मार्च, २०२३।
राजेन्द्र भागवत, प्रधान सचिव, महाराष्ट्र विधानसभा।
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