RNI No. MAHBIL/2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ९, अंक ३०] बुधवार, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५ [पृष्ठे ७, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ६०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १२ दिसबंर, २०१३ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :--
L. A. BILL No. LII OF 2023.
A BILL
Further to amend the Maharastra Agricultural Lands (Ceiling on Holdings) Act, 1961.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ५२ सन् २०२३ ।
महाराष्ट्र कृषि भूमि (धृति की अधिकतम सीमा) अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक ।
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र कृष िभूमि (धृति की अधिकतम सीमा) अधिनियम, १९६१ में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है; अत: भारत गणराज्य के चौहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :---
सन् १९६१ का महा. २७।
१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र कृष िभूमि (धृति की अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, २०२३ संक्षिप्त नाम। कहलाए।
भाग सात--६०-१
एचबी-१७४२-१.
(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५ (२) महाराष्ट्र कृष िभूमि (धृति की अधिकतम सीमा) अधिनियम, १९६१ (जिसे इसमें आगे " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा २८-१ क क में, ----
सन् १९६१ का महा. २७। सन् १९६१ का महा. २७ की धारा २८-१क का में संशोधन।
(१) विद्यमान उप-धारा (३) के पश्चात् निम्न उप-धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात्:---
" (३-१क) इस धारा और धारा २९ में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी,----
(क) यदि औद्योगिक उपक्रमों के लिए व्यक्ति व्दारा पट्टे पर ली गई भूमि वर्ग-१ अधिभोग भूमि थी तो उप-धारा (३) के अधीन ऐसे व्यक्ति या उसके विधिक वारिस को वर्ग-दो अधिभोग पर अनुदत्त भूमि उसके लिए कोई अधिमूल्य प्रभार करने के सिवाय वर्ग-एक के अधिभोग पर अनुदत्त की गई समझी जायेगी;
(ख) यदि औद्योगिक उपक्रमों के लिए व्यक्ित द्वारा पट्टे पर ली गई भूमि वर्ग-दो अधिभोग भूमियाँ है तो, उक्त अधिनियमों और नियमों के उपबंधों के अनुसार यदि, सुसंगत अधिनियम या तद्धीन विरचित नियमों में ऐसी भूमि के ऐसे संपरिवर्तन के लिए अनुप्रयुक्त है तो उप-धारा (३) के अधीन ऐसी व्यक्ित या उसके विधिक वारिस को वर्ग-दो अधिभोग पर अनुदत्त की गई भूमि वर्ग-एक के अधिभोग में संपरिर्वतित होे सकेगी।"।
(२) उप-धारा (३ क) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी जायेगी, अर्थात्:---
" (३ क) उप-धारा (३) में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार लोक प्रयोजन के लिए महाराष्ट्र राज्य कृष िनिगम लिमिटेड में निहित भूमि का, इस निमित्त जारी विशेष या सामान्य आदेश व्दारा उसके व्दारा जैसा कि विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसे निबंधनों और शर्तो पर राज्य सरकार व्दारा नियत दरों पर सरकार या अर्ध-सरकारी संस्था या स्थानीय प्राधिकरणों को निपटान कर सकेगी।
स्पष्टिकरण, -- इस उप-धारा के प्रयोजनो के लिए, "लोक प्रयोजन के लिए भूमि का निपटान" अभिव्यक्ति का तात्पर्य,----
सन् १९६६ का महा. ३६। सन् २०१३ का ३० ।
(क) शैक्षिक, चिकित्सा, लोक स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण या सांस्कृतिक प्रयोजनों ; या महाराष्ट्र प्रादेशिक तथा नगर योजना अधिनियम, १९६६ की धारा २२ के अधीन विकास योजना में, उल्लिखित अन्य प्रयोजन के लिए या भूमि अर्जन, पुनर्वास तथा पुनव्र्यवस्थापन में उचित क्षतिपर्ूति तथा पारर्दशिता का अधिकार अधिनियम, २०१३ की, धारा २ की उप-धारा (१) में समावेशित किसी अन्य लोक हित के लिए,--
(एक) महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ की सन् १९६५ का महा. ४०।
धारा २ के खण्ड (२४) में यथा परिभाषित परिषद या नगर पंचायत का नगर क्षेत्र;
(दो) महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा ३ की, उप-धारा (२) के अधीन विर्िनदिष्ट बडे सन् १९४९ का महा. ५९।
नगर क्षेत्र ; या
सन् १९६६ का महा. ४१।
(तीन) महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता, १९६६ की धारा २ के खण्ड (१०) में यथा परिभाषित गावठाण या ग्राम स्थल की सीमा, से पाँच किलोमिटर के इलाके के भीतर स्थित के लिए भूमि का निपटान किया जायेगा।
(ख) इस प्रयोजन के लिए, सरकार व्दारा अधिसूचित लोक परियोजना के परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के पूनर्वास के लिए, भूमि का निपटान किया जायेगा।"।
(३) मूल अधिनियम की धारा २९ की, उप-धारा (३) में,---
(एक) प्रथम परंतुक में, "ऐसी रकम, विर्िनदिष्ट कर सके जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में सन् १९६१ का महा. २७की धारा २९ में संशोधन ।
प्रकाशित आदेश व्दारा", शब्दों के स्थान में, निम्न भाग, रखा जायेगा, अर्थात्:---
महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५ ३" महाराष्ट्र स्टाम्प (सम्पत्ति के सही बाजार मूल्य का अवधारण) नियम, १९९५ के उपबंधों के अधीन प्रकाशित दरों के विद्यमान वर्ाषिक विवरण के अनुसार, अभिनिश्चित ऐसी भूमि के बाजार मूल्य के पचहत्तर प्रतिशत की रकम।" ;
(दो) व्दितीय परंतुक, अपमर्ाजित किया जायेगा ।
४. मूल अधिनियम की धारा २९ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :--
सन् १९६१ का महा. २७ में नई धारा २९क का
निवेशन। " २९ क. धारा २९ में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, कलक्टर, धारा २७ के अधीन अनुदत्त वर्ग-दो अधिभोग भूमि को,---
धारा २७ के अधीन अनुदत्त अधिभोग भूमि का संपरिवर्तन । (एक) ऐसी भूमि अनुदत्त करने के दिनांक से १० वर्ष बीत जाने के बाद ; और
(दो) यदि ऐसी भूमि अनुदत्त करने के लिए होनेवाली शर्तों में से किन्ही शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है; या यदि ऐसी किन्हीं शर्तों का उल्लंघन हुआ है, तो ऐसे उल्लंघन का नियमितकरण करने के पश्चात्,
ऐसे परिवर्तन अधिमूल्य की अदायगी पर और ऐसी प्रक्रिया अपनाने के पश्चात् तथा जैसा कि विहित किया जाए ऐसे अन्य निबंधनों और शर्तों के अध्यधीन वर्ग--एक में अधिभोग भूमि परिर्वतित कर सकेगा ।
५. मूल अधिनियम की धारा ४० क अपमर्ाजित की जायेगी ।
६. मूल अधिनियम की धारा ४६, की उप-धारा (२) के खण्ड (ड.) के पश्चात्, निम्न खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---
सन् १९६१ का महा. २७ की धारा ४० क का अपमार्जन। सन् १९६१ का महा २७ की धारा ४६ में संशोधन । "(ङ-१) धारा २९ क के अधीन वर्ग-दो अधिभोग भूमि का वर्ग-१ अधिभोग भूमि में परिवर्तन करने के लिए परिवर्तन अधिमूल्य और उसके लिए प्रक्रिया तथा अन्य निबंधन तथा शर्तें; "।
कठिनाई के निराकरण की शि । ७. (१) मूल अधिनियम के उपबंधों को प्रभावित करने में यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है, तो सरकार, जैसा अवसर आया हो, राजपत्र में प्रकाशित आदेश व्दारा, इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हो ऐसी बात कर सकेगी जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजन के लिए आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो :
परंतु ऐसा कोई भी आदेश, इस अधिनियम के प्रारंभण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के अवसान के बाद नहीं बनाया जायेगा।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाये जाने के पश्चात्, यथासंभव शीघ्र, राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य ।
महाराष्ट्र कृषि भूमि (धृति की अधिकतम सीमा) अधिनियम, १९६१ (सन् १९६१ का महा. २७) महाराष्ट्र राज्य में कृष िभूमि के धृति पर अधिकतम सीमा अधिरोपित करने और ऐसी अधिकतम सीमा के अधिकता में धारित भूमि का अर्जन और वितरण के उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया है ।
२. उक्त अधिनियम की धारा २१ के अधीन अधिशेष के रूप में घोषित भूमि, उसकी धारा २७ के अधीन अधिभोग वर्ग-दो भूमिहिन, पर भूतपूर्व सैनिक और अन्यों को आबंटित की जाती है । ऐसे अधिशेष भूमि का अंतरण या विभाजन कलक्टर की पूर्व मंजूरी से तथा उक्त अधिनियम की धारा २९ के अधीन विहित अधिमूल्य की अदायगी पर आबंटित की जाती है । सरकार ने, सन् २०१९ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १९ के अधिनियमिति द्वारा ऐसी भूमि के बाजार मूल्य के पचास प्रतिशत की अदायगी करणे के पश्चात्, कलक्टर की पूर्व मंजूरी के बिना तथा उसके लिए अधिमूल्य की अदायगी पर ऐसी भूमि के अंतरण या विभाजन के विनियमितिकरण के लिए भी उपबंध किया है ।
यहाँपर धारा २७ के अधिन आबंटित भूमि में हित रखनेवाले व्यक्ित से, साथ ही साथ धारा २८-१ क क (३) के अधीन फिर से अनुदत्त की गई भूमि के भूतपूर्व पट्टादाता या उनके विधिक वारिस जो औद्योगिक उपक्रमों को उनकी भूमि पट्टे पर लेते है, से महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता १९६६, (सन् १९६६ का महा. ४१) की धारा २९क के अधीन सरकारी भूमि का वर्ग-दो से वर्ग-एक में अधिभोग परिवर्तन करने की तर्ज पर ऐसी भूमि के अधिभोग वर्ग-दो से वर्ग-एक में परिवर्तन करने के लिए माँग बढ रही है । इसलिए, सरकार ने, उ अधिनियम में संशोधन करने का विनिश्चय किया है ।
३. उक्त अधिनियम के संशोंधनों की प्रमुख विशेषताएँ यथा निम्न है ।
(क) अधिमूल्य की अदायगी पर और कतिपय निबंधनों तथा शर्तों के अध्यधीन धारा २७ के अधीन अनुदत्त अधिशेष भूमि का वर्ग-दो से वर्ग-एक में अधिभोग परिर्वतित करना ;
(ख) धारा २८-१कक (३) के अधीन भूतपूर्व पट्टादाता को, उसके विधिक वारिस के लिए पुनरानुदत्त भूमि के अधिभोग वर्ग-दो से वर्ग-एक में परिर्वतित करना,--
(एक) जहाँ औद्योगिक उपक्रमों को भूतपूर्व पट्टादाता द्वारा पट्टेपर ली गई भूमि वर्ग-एक अधिभोग भूमि है तो ऐसे परिवर्तन के लिए कोई अधिमूल्य प्रभारित किए बिना या कोई शर्ते अधिरोपित किए बिना ;
(दो) जहाँ औद्योगिक उपक्रमों की भूतपूर्व पट्टादाता द्वारा पट्टेपर दी गई भूमि वर्ग-दो अधिभोग भूमि है तो यदि ऐसी भूमि को अनुप्रयुक्त, सुसंगत अधिनियम या सुसंगत अधिनियम के उपबंधों के अनुसार ऐसे परिवर्तन के लिए उपबंधित तद्ध्दीन विरचित नियम अनुप्रयुक्त है ;
(ग) भूमि, जिसका धारा २९ के उल्लंघन में अंतरण या विभाजन किया था, के नियमितिकरण के लिए भूमि के बाजार मूल्य के पचास प्रतिशत के अधिमूल्य रकम को पचहत्तर प्रतिशत तक बढाना । (घ) लोक प्रयोजनों के लिए, गावठाण या ग्रामीण स्थल की सीमा से पाँच किलोमिटर के इलाके के भीतर स्थित निगम में निहित भूमि का निपटान करने के लिए सरकार को सशक्त करना ;
(ङ) धारा ४०क, जो, अल्प उल्लंघन के लिए राज्य अधिनियमों के उपबंधों के गैर अपराधीकरण की प्रक्रिया के भाग के रूप में धारा १२ द्वारा यथा आवश्यक विवरणी प्रस्तुत करने में असफल हुआ है, के लिए शास्ति का उपबंध करती है, का अपमार्जन करना ।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
राजस्व मंत्री।
नागपुर, दिनांकित २०२३ ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५ ५
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन ।
विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिए निम्न प्रस्ताव अन्र्तग्रस्त है, अर्थात् :----
खण्ड ४.----इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को धारा २९ क के अधीन वर्ग-दो अधिभोग भूमि को वर्ग-एक अधिभोग में परिर्वतित करने के लिये परिवर्तन अधिमूल्य, निर्बन्धनों निर्वहन में प्रक्रिया और उसके लिए अन्य निर्बन्धनों और शर्तों को नियमों द्वारा विहित करने की, शक्ित प्रदान की गई है ।
खण्ड ७.---- इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार कोे इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत किसी कठिनाई को दूर करने के लिये प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि के भीतर आदेश जारी करने की, शक्ित प्रदान की गई है।
२. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिये उपयर्ुक्त उल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के है।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५
वित्तीय ज्ञापन
प्रस्तुत विधेयक में महाराष्ट्र कृष िभूमि (धृति की अधिकतम सीमा) अधिनियम, १९६१ (सन १९६१ का महा.
२७) का संशोधन करना प्रस्तावित है।
इस विधेयक में राज्य विधानमंडल के अधिनियम के रूप में उसकी अधिनियमीत पर राज्य की समेकित निधि में से आवर्ती या अनावर्ती व्यय का उपबंध अंर्तविष्ट नही किया गया है।
(यर्थाथ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १३, २०२३/अग्रहायण २२, शके १९४५ ७ भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल की अनुशंसा (महाराष्ट्र शासन, विधी व न्याय विभाग, आदेश कि प्रत)
भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के खंड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र राज्यपाल महोदय, महाराष्ट्र कृष िभूमि (धृति की अधिकतम सीमा) (संशोधन) विधेयक, २०२३ ई. पर पुर:स्थापना करने की अनुशंसा करते है।
विधान भवन, नागपूर, दिनांकित १२ दिसंबर, २०२३
जितेंद्र भोळे, सचिव (१) (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT PRESS AND BOOK DEPOT, CIVIL LINES, NAGPUR-440 001 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI-400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.