RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक १] शुक्रवार, फेब्रुवारी २, २०२४/माघ १३, शके १९४५ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
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सहकारिता, विपणन और वस्त्रोद्योग विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १५ जनवरी २०२४।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. I OF 2024.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CO-OPERATIVE
SOCIETIES ACT, 1960.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १, सन् २०२४।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १९६१ का महा.२४।
और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० मे अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
भाग सात---१--१
(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २, २०२४/माघ १३, शके १९४५ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्ितयों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र सहकारी संस्था (संशोधन) अध्यादेश, २०२४ कहलाए।
संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
२. महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० की, धारा ७३-एक घ की, उप-धारा (२) के परंतुक में, सन् १९६१, का महा.२४। "" छह महीने "" शब्दों के स्थान में, "" दो वर्षों "" शब्द रखे जायेंगे।
सन् १९६१ का महा. २४ की धारा ७३-एक घ में संशोधन।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २, २०२४/माघ १३, शके १९४५ ३
वक्तव्य।
राज्य में सहकारी गतिविधि का सुव्यवस्थित विकास करने के लिए महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० (सन् १९६१ का महा. २४) अधिनियमित किया गया है । उक्त अधिनियम की धारा ७३-एक घ यह उपबंध करती है कि, संस्थाअों के अधिकारियों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए समिति की विशेष बैठक के लिए जिस दिनांक पर उसने अपना पद ग्रहण किया उस दिनांक से छह महीने की अवधि के भीतर प्रस्तुत नहीं की जायेगी ।
२. यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कि, संस्था के अधिकारी को उसके निर्वाचन के पश्चात्, संस्था के प्रबंध मंडल का कार्य करने के लिए पर्याप्त अवधि प्राप्त हो कि जिस अवधि में संस्था के अधिकारी के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए एक विशेष बैठक का मांगपत्र दिया न जाए ऐसा उक्त अवधि, छह महीने से दो वर्षों तक बढ़ाना आवश्यक है । इसलिए, उक्त अधिनियम की धारा ७३-एक घ का यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है ।
३. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ; अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुम्बई,
रमेश बैस,
दिनांकित १२ जनवरी २०२४।
महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
राजेश कुमार,
सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोनीकर,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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