महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक ३] मंगळवार, फेब्रुवारी २०, २०२४/फाल्गुन १, शके १९४५ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
नगरविकास विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १५ फरवरी २०२४।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. II OF 2024.
AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MUMBAI MUNICIPAL
CORPORATION ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक २ सन् २०२४।
मुंबई नगर निगम अधिनियम में अधिकतर संशोधन संबंधी अध्यादेश।
और क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
सन् १८८८ का ३।
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का समाधान हो चुका है कि ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, मुंबई नगर निगम अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है;
अब, इसलिये, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रद्त शक्तियों का प्रयोग करतेे हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---
१. (१) यह अध्यादेश मुंबई नगर निगम अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश, २०२४ कहलाए।
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भण। (२) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा ।
(१)
भाग सात--३----१ २. मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा १५४ की, उप-धारा (१घ) के, खण्ड (क) के पश्चात्, निम्न सन् १८८८ का ३।खण्ड, निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :------ २ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २०, २०२४/फाल्गुन १, शके १९४५ सन् १८८८ का ३ की धारा १५४ में संशोधन। "(क-१) उप-धारा (१ ग) में अन्र्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी,------ (एक) उप-धारा (१ क) के अधीन, नियत किसी भवन या भूमि का पुंजीगत मूल्य वर्ष २०२३-२४ में पुनरीक्षित नहीं होगा ;
(दो) वर्ष २०२३-२४ के लिये सम्पत्ति कर बिल किसी भवन या भूमि के लिये वर्ष २०२२- २३ के लिये समान था ;
(तीन) उप-धारा (१ क) के अधीन, नियत किसी भवन या भूमि का पूंजीगत मूल्य वर्ष २०२४-२०२५ में पुनरीक्षित किया जायेगा, मानोंे की खण्ड (एक) वर्ष २०२३-२४ के लिये लागू नहीं है।"।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २०, २०२४/फाल्गुन १, शके १९४५ ३
वक्तव्य ।
मुंबई नगर निगम अधिनियम (सन् १८८८ का ३) की धारा १३९ का खण्ड (१) सम्पत्ति करों को अधिरोपित करने के लिए उपबंध करता है। उक्त अधिनियम की धारा १५४, सम्पत्ति कर को निर्धारणीय किसी भवन या भूमि के करयोग्य मूल्य या पूंजीगत मूल्य का अवधारण करने के लिए उपबंध करती है। उक्त धारा १५४ की, उप-धारा (१क), सम्पत्ति कर के तध्दीन उल्लिखित घटकों के संबंध में आयुक्त द्वारा सम्पत्ति कर को निर्धारणीय किसी भूमि या भवन के पूंजीगत मूल्य के नियतन के लिए उपबंध करता है। उसकी उप-धारा (१ख), उप-धारा (१क) के अधीन, पूंजीगत मूल्य का नियतन करने के प्रयोजन के लिए तध्दीन विर्िनदिष्ट मामलों के संबंध में स्थायी समिति के अनुमोदन से नियम विरचित करने के लिए आयुक्त को सशक्त बनाती है। उसकी उप-धारा (१ग) यह उपबंध करती है कि, उक्त धारा १५४ की उप-धारा (१क) के अधीन नियत किसी भवन या भूमि का पूंजीगत मूल्य प्रत्येक पाँच वर्षों में पुनरीक्षित किया जायेगा ।
२. बृहन्मुंबई के निगर निगम के आयुक्त ने, उप-धारा (१क) के अधीन, पूंजीगत मूल्य के नियतन के प्रयोजन के लिए उप-धारा (१ख) के अधीन, भवनों या भूमियों के उपयोगकर्ता के घटक और प्रवर्गों (बहुलीकरण द्वारा भार का निर्धारण) पूंजीगत मूल्य का नियतन नियम २०१० के तथा भवनों और भूमियों के उपयोगकर्ता के घटक और प्रवर्गो (बहुलीकरण द्वारा भार का निर्धारण) पूंजीगत मूल्य का नियतन नियम २०१५ विरचित किया है।
सन् २०१९ के एस एल पी (ग) क्रमांक १७००९ में उच्चतम न्यायालय ने दिनांकित ७ नवम्बर २०२२ के उनके न्यायनिर्णय में उक्त अधिनियम की धारा १५४ की उप-धारा (१क) और (१ख) के उपबंधों को आधिकारितित होनेवाले उक्त पूंजीगत मूल्य नियम २०१० और २०१५ को नियम २० प्रभावित करता है।
३. इसे देखते हुए, उक्त धारा १५४ की उप-धारा (१क) के अधीन पूंजीगत मूल्य का नियतन करना और वर्ष २०२३-२४ में पूंजीगत मूल्य का पुनरीक्षण करना संभव नही है। इसलिए किसी भवन या भूमि का पूंजीगत मूल्य वर्ष २०२३-२४ में पुनरीक्षित नही किया जायेगा और किसी भवन या भूमि के लिए सम्पत्ति कर वही रहेगा जैसे वर्ष २०२२-२३ के लिए था तथा वर्ष २०२४-२५ में पुनरीक्षित किया जायेगा, यह उपबंध करने के लिए उक्त अधिनियम की धारा १५४ की उप-धारा (१घ) का यथोचित संशोधन करना इष्टकर है समझा गया है।
४. चूँकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चूका है कि ऐसी परिस्थितियाँ है जिसके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए मुंबई नगर निगम अधिनियम मे अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई, दिनांकित १५ फेब्रुवारी २०२४।
रमेश बैस, महाराष्ट्र के राज्यपाल,
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
डॉ. के. एच. गोविंदा राज, सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद), विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य ।
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