RNI No. MAHBIL /2009/36619
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग एक—कोकण विभागीय पुरिणी
िर्ष १०, अंक १६(३)] गुरुिार, फेब्रुिारी २२, २०२४/फेाल्गुन ३, शके १९४५ [पृष्टठे ५, वकंमत : रुपये ११.००
असाधारण क्रमांक २२
प्ावधकृत प्काशन
उपविभागीय अवधकारी , रत्नावगरी यांजकडून
अवधसूचना
महाराष्ट्र औद्यौवगक विकास अवधवनयम, १९६१ याच्या कलम ३२ (२) अन्िये
जाहीर नोटीस
क्रमांाक उविअर/भाूसंपुादन/विनंडी/तळेकराडी/२०२४ .–ज्याअर्थी, मांहाराष्ट्र औद्योविगक विकासं अविविनयामां,१९६१ (१९६२ चा मांहा.तीन) च्या कलमां १, पुोट-कलमां (३) अन्याे काढण्यात आलेली महाराष्ट्र शासन राजपत्र, भाग चार-ब, विदनाक १३ विडीसंबर २०२३, पुृष्ठ क्रमांाक १ ते ८ र प्रविसंद्ध करण्यात आलेली विदनाक १२ विडीसंबर २०२३ चाी शासंकीया अविसंूचाना, उद्योग, ऊर्जा कामांगार विभाग यार्जाकडील क्रमांाक आयाडीसंी, २०२३/ (प्र.क्र.९८२)/ उ-१४, अन्याे उक्त अविविनयामांाच्या प्रकरण संहाचाे उपुब हाे, त्या अविसंूचानेच्या अनुसंूविचात विविनविदष्टिष्टत करण्यात आलेल्या विनंडी तळेकराडी क्षेत्रात संन, २०२३ चाे विडीसंबर मांविहान्याच्या १३ व्या विदसंापुासंून अमांलात याेतील असंा मांहाराष्ट्र शासंनाने विनदेशा विदला आहाे ;
आविण ज्याअर्थी, या संोबतच्या अनुसंूविचात णन केलेली/केलेल्या र्जामांीन/र्जाविमांनी उक्त प्रकरण संहाचाे उपुब ज्या क्षेत्रासं अमांलात आले आहाे, त्या क्षेत्रात आहाे आविण पुरिरणामांी, त्या प्रकरणाचाे उपुब त्या क्षेत्रात लागू हाोतात ;
आविण ज्याअर्थी, उपुरोक्त अविविनयामांाचाे प्रकरण संहा हाे ज्या क्षेत्राना लागू करण्यात आले आहाेत, अशा क्षेत्रात असंणाऱ्या आविण मांहाराष्ट्र औद्योविगक विकासं मांहामांडीळेामांार्फत ( यात यानतर ज्याचा "उक्त मांहामांडीळे" असंा विनदेशा करण्यात आला आहाे.) विकासंाच्या प्रयाोर्जानार्थी विकंा उक्त अविविनयामांाच्या अविष्ठाच्या पुष्ठ्यर्थी असंेल अशा इतर कोणत्याहाी प्रयाोर्जानार्थी ती/त्या आश्याक असंणारी/ असंणाऱ्या र्जामांीन/र्जाविमांनी असंल्यामांुळे, उक्त अविविनयामांाच्या कलमां ३२ अन्याे अशा क्षेत्रातील र्जाविमांनी संपुादन करण्याचाी शाक्ती राज्या शासंनासं प्रदान करण्यात आली आहाे ;
आविण ज्याअर्थी, उक्त अविविनयामांाचाे कलमां २, खंडी (ग) अन्याे काढण्यात १३ विडीसंबर २०२३ पुृष्ठ क्रमांाक १ ते ८ रील शासंकीया अविसंूचाना उद्योग, ऊर्जा कामांगार विभाग यार्जाकडील क्रमांाक आयाडीसंी, २०२३/(प्र.क्र.९८२)/उ-१४ द्वारे राज्याशासंनाने मांहाराष्ट्र औद्योविगक विकासं अविविनयामां, १९६२ याच्या कलमां २८ अन्याे विर्जाल्हाविकाऱ्याकडीे र्जाी कामांे संोपुविण्यात आली आहाेत अशाी, उक्त अविविनयामांाचाे कलमां ३२, कलमां ३३, पुोट-कलमां (३),कलमां ३६ कलमां ३८ खंालील विर्जाल्हाविकाऱ्याचाी कामांे पुार पुाडीण्यासंाठी उपुविभागीया अविकारी ,रत्नाविगरी याचाी विशाेषरिरत्या नेमांणूक केली आहाे ;
आविण ज्याअर्थी, औद्योविगक क्षेत्रा म्हाणून/ औद्योविगक संाहात म्हाणून विकविसंत करण्यासंाठी विकंा दोन्हाीकरिरता म्हाणून संोबतच्या अनुसंूविचात णन केलेली/ केलेल्या र्जामांीन/र्जाविमांनी मांहामांडीळेासं आश्याक आहाे./आहाेत, असंे उपु विभागीया अविकारी, रत्नाविगरी याचाे मांत झाले आहाे.
त्याअर्थी, आता, उक्त अविविनयामांाचाे कलमां ३२, पुोट-कलमांे(२) अन्याे उक्त अविसंूचानेप्रमांाणे प्रदान करण्यात आलेल्या राज्या शासंनाच्या शाक्तंचा ापुर करून, मांी, उपु विभागीया अविकारी, रत्नाविगरी याद्वारे यासंोबतच्या अनुसंूविचात णन केलेली/केलेल्या र्जामांीन/ २ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग एक–कोकण विभागीय पुरिणी, फेब्रुिारी २२, २०२४/फेाल्गुन ३, शके १९४५ र्जाविमांनंमांध्याे भाूारकाविशाया इतर कोणत्याहाी व्याक्तंचा विहातसंब आविण कोणताहाी अविकार असंणाऱ्या सं व्याक्तंना खंाली उल्लेखं केलेल्या र्जाविमांनीमांध्याे उक्त प्रयाोर्जानार्थी संपुादन करण्याबाबत आक्षेपु असंल्यासं, संदर विहातसंबी व्याक्तंनी आपुले आक्षेपु लेखंी स्रूपुात नोटीसं प्रविसंद्ध झाल्याच्या तारखंेपुासंून १५ विदसंाच्या आत खंाली संहाी करणार याचाे कायालयात, रत्नाविगरी याेर्थीे कायालयाीन ेळेत कायालयाीन कामांकार्जाचाे विदशाी संादर कराेत ;
या नोविटशाीच्या तारखंेनतर, विर्जाल्हाविकाऱ्याच्या मांर्जाुरीविशाया विक्री करून, पुट्ट्याने देऊन, गहाण ठेून, अविभाहास्ताकन करून, अदलाबदल करून विकंा अन्या रिरतीने, करायाच्या उक्त र्जाविमांनीच्या/र्जाविमांनंच्या विल्हाेाटीसंबी केलेला कोणताहाी करार विकंा तीर/ त्यार केलेला कोणताहाी खंचा विकंा तीमांध्याे/त्यामांध्याे केलेल्या संुारणा या उक्त र्जाविमांनंच्या अवितमांत: संपुादन करण्यात याेतील अशा भागासंबी भारपुाई विनारिरत करणाऱ्या अविकाऱ्याकडीून उक्त अविविनयामांाचाे कलमां ३३, पुोट–कलमां (५) भाूसंपुादनातील याोग्या नुकसंानभारपुाईचा अविकार स्र्थीानातरण, पुन:स्र्थीापुना आविण पुनसंन अविविनयामां,२०१३ मांील तरतुदी [कलमां ११(३) ११(४)] अन्याे विचारात घेतल्या र्जाणार नाहाीत ;
ज्याचाी व्याक्तीगत संुनाणी करण्याचाी इच्छा असंेल, अशा कोणत्याहाी व्याक्ती या नोविटशाीच्या तारखंेपुासंून १५ विदसंाच्या आत भाेटीचाी ेळे ठरून, कोणत्याहाी कामांाच्या विदशाी संकाळेी ११-०० ते दुपुारी १-०० ार्जापुयांत खंाली संहाी करणाऱ्याच्या संमांोर र्जातीने विकंा आपुल्या कायादेशाीर मांुखंत्यारमांार्फत हार्जार राहाता याेईल.
अनुसूची
मांौर्जाे विनंडी, तालुका रत्नाविगरी, विर्जाल्हा रत्नाविगरी
| अ. क्र. (१) | सर्व्हेहे नंबर (२) | वहस्सा नंबर (३) | क्षेत्र (हे.आर) (४) |
| १ | २ | ३ | ४ |
| १ | ३५ | १अ | ३.४९ |
| २ | ३५ | १ब | ०.१२ |
| ३ | ३५ | २ | ०.९७ |
| ४ | ३५ | ३/१ | ०.८० |
| ५ | ३५ | ३/२ | १.७७ |
| ६ | ३५ | ४अ | २.०१ |
| ७ | ३५ | ४ब | १.०० |
| ८ | ३६ | १/१ | २.११ |
| ९ | ३६ | १/२ | ०.०९ |
| १० | ३६ | १/३ | ०.३० |
| ११ | ३६ | १/४ | ०.१३ |
| १२ | ३६ | १/५ | ०.२४ |
| १३ | ३६ | १/६ | ०.०४ |
| १४ | ३६ | २अ | ०.३० |
| १५ | ३६ | २ब | ०.१० |
| १६ | ३६ | २क | ०.०४ |
| १७ | ३६ | ३/१ | ०.६४ |
| १८ | ३६ | ३/२ | ०.३२ |
| १९ | ३६ | ३/३ | ०.१२ |
| २० | ३६ | ३/४ | ०.४२ |
| २१ | ३६ | ३/५ | ०.३४ |
| २२ | ३६ | ३/६ | ०.७२ |
| २३ | ३६ | ४अ | ०.०९ |
| २४ | ३६ | ४ब | ०.०५ |
| २५ | ३६ | ४क | ०.३१ |
| २६ | ३६ | ४डी | ०.१० |
| २७ | ३६ | ४ई | ०.३३ |
| २८ | ३६ | ५ | ३.१३ |
| २९ | ३७ | १ | ०.०८ |
| ३० | ३७ | २ | १.०५ |
| ३१ | ३७ | ३/१ | ०.६१ |
| ३२ | ३७ | ३/२ | ०.१७ |
| ३३ | ३७ | ३/३ | १.०० |
| ३४ | ३७ | ३/४ | ०.२० |
| ३५ | ३७ | ३/५ | ०.५२ |
| ३६ | ३७ | ३/६ | ०.१८ |
| ३७ | ३७ | ३/७ | ०.१५ |
| ३८ | ३७ | ३/८ | ०.११ |
| ३९ | ३७ | ४ | १.७५ |
| ४० | ३७ | ५ | १.६२ |
| ४१ | ३७ | ६ | ०.८३ |
| ४२ | ३७ | ७ | ०.८३ |
| ४३ | ३७ | ८ | ०.३६ |
| ४४ | ३७ | ९ | ०.२० |
| ४५ | ३७ | १० | ०.१० |
| ४६ | ३७ | ११ | ०.८३ |
| ४७ | ३९ | १ | २.९८ |
| ४८ | ३९ | २ | २.८३ |
| ४९ | ३९ | ३ | ३.४१ |
| ५० | ४० | १ | ०.६७ |
| ५१ | ४० | २ | २.३२ |
| ५२ | ४० | ३/१ | ०.४१ |
| ५३ | ४० | ३/२ | ०.२९ |
| ५४ | ४० | ३/३ | ०.१८ |
| ५५ | ४० | ३/४ | ०.३२ |
| ५६ | ४० | ३/५ | ०.०८ |
| ५७ | ४० | ३/६ | ०.२० |
| ५८ | ४० | ३/७ | ०.०३ |
| ५९ | ४० | ३/८ | ०.०३ |
| ६० | ४० | ४/१ | ०.२० |
| ६१ | ४० | ४/२ | ०.६१ |
| ६२ | ४० | ४/३ | ०.०८ |
| ६३ | ४० | ४/४ | ०.२१ |
| ६४ | ४० | ४/५ | ०.१२ |
| ६५ | ४० | ४/६ | ०.०३ |
| ६६ | ४० | ५/१ | १.५९ |
| ६७ | ४० | ५/२ | १.९९ |
| ६८ | ४० | ५/३ | १.७९ |
| ६९ | ४१ | १ | ०.७१ |
| ७० | ४१ | २ | ०.१६ |
| ७१ | ४१ | ३अ | २.०१५ |
| ७२ | ४१ | ३ब | २.००५ |
| ७३ | ४१ | ४अ | ०.४० |
| ७४ | ४१ | ४ब | ०.३० |
| ७५ | ४१ | ४क | ०.१८ |
| ७६ | ४१ | ५/१ | ०.९२ |
| ७७ | ४१ | ५/२ | ०.९२ |
| ७८ | ४१ | ५/३ | ०.८९ |
| ७९ | ४२ | १ | ६.२८ |
| ८० | ४२ | २अ | ३.०३५० |
| ८१ | ४२ | २ब | ३.०३५० |
| ८२ | ४२ | ३ | १.२५ |
| ८३ | ४३ | १ | २.०६ |
| ८४ | ४३ | २/१ | १.२३ |
| ८५ | ४३ | २/२ | ०.५७ |
| ८६ | ४३ | २/३ | १.२४ |
| ८७ | ४३ | ३ | ५.७७ |
| ८८ | ४४ | १ | १.६२ |
| ८९ | ४४ | २ | ३.४० |
| ९० | ४४ | ३ | ०.१६ |
| ९१ | ४४ | ४ | १.७८ |
| ९२ | ४४ | ५ | ०.२६ |
| एकूण क्षेत्र | ९१.२३ |
चतु:सीमा
उत्तरेस : मांौर्जाे तळेकराडीचाी विशा
दवक्षेणेस : मांौर्जाे विनंडीचाे संव्हाे न. ४५ २९ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग एक–कोकण विभागीय पुरिणी, फेब्रुिारी २२, २०२४/फेाल्गुन ३, शके १९४५ ५
अनुसूची
मांौर्जाे तळेकराडी, तालुका रत्नाविगरी, विर्जाल्हा रत्नाविगरी
| अ. क्र. (१) | सर्व्हेहे नंबर (२) | वहस्सा नंबर (३) | क्षेत्र (हे.आर) (४) |
| १ | २२ | १ | ०.८९ |
| २ | २२ | २ | ०.३६ |
| ३ | २२ | ३अ | ०.७९ |
| ४ | २२ | ३ब | ०.७९ |
| ५ | २२ | ३क | ०.७९ |
| ६ | २२ | ३डी | ०.७९ |
| ७ | २२ | ३ई | ३.१५ |
| एकूण | ७.५६ |
चतु:सीमा
उत्तरेस : मांौर्जाे तळेकराडीचाे संव्हाे न. २३
दवक्षेणेस : मांौर्जाे विनंडीचाी विशा
पूिेस : मांौर्जाे तळेकराडीचाे संव्हाे न. २१
पश्चिचमेस : मांौर्जाे तळेकराडीचाे संव्हाे न. २८
ज्या प्रयाोर्जानासंाठी र्जाविमांनी आश्याक आहाेत विकंा आश्याक असंल्याचा संभा आहाे ते प्रयाोर्जान मांहाराष्ट्र औद्योविगक विकासं मांहामांडीळेाच्या विनंडी औद्योविगक क्षेत्रासंाठी तालुका विर्जाल्हा रत्नाविगरी.
रत्नाविगरी, विदनाक २१ र्फेब्रुारी २०२४.
जीिन देसाई, उपु विभागीया अविकारी, रत्नाविगरी.
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