RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक ५] गुरुवार, फेब्रुवारी २९, २०२४/फाल्गुन १०, शके १९४५ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १०
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
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महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक २९ फरवरी, २०२४ ई. को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा
नियम, ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :-----
L. A. BILL No. VII OF 2024.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA CO-OPERATIVE
SOCIETIES ACT, 1960.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक ७ सन् २०२४।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन संबंधी विधेयक ।
सन् १९६१ का २४।
क्योंकि इसमे आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर कर है ; अत: भारत गणराज्य पचहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :---
संक्षिप्त नाम। १. (१) यह अधिनियम, महाराष्ट्र सहकारी संस्था (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, २०२४ कहलाए।
(१)
भाग सात-१०--१महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २९, २०२४/फाल्गुन १०, शके १९४५ २ २. महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया सन् १९६१ का महा. २४। है) की, धारा ६९ के पश्चात्, निम्न धारा, निविष्ट कि जायगी अर्थात् :-----
सन् १९६१ का महा. २४ की धारा ६९ में संशोधन।
सचिवों के सहकारी जिला संवर्ग का गठन और ऐसे संवर्ग के लिये नियोजन निधि की स्थापना।
" ६९ क. (१) जिला पर्यवेक्षक सहकारी संस्था द्वारा इस प्रयोजन के लिये सेवानिवृत्त व्यक्त्तियों से मिलकर प्राथमिक कृषि सहकारी क्रेडीट संस्था (जिसे इसमें आगे, इस धारा में, " सहकारी जिला संवर्ग " र्िनदिष्ट किया गया है) सचिवों के सहकारी जिला संवर्ग का गठन किया जायेगा। भर्ती किये जानेवाले व्यक्त्तियों की संख्या और उनकी सेवा की शर्ते इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा, समय-समय पर, जारी की जाए ऐसी समान्य या विशेष मार्गदर्शन के अनुसरण में, यदि कोई हो, जिला पर्यवेक्षण सहकारी संस्था द्वारा अवधारित की जायेगी।
(२) जिला पर्यवेक्षण सहकारी संस्था समय-समय पर, जिसे वह आवश्यक समझे उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट किसी संस्था के अधीन कार्य करने के लिये उसके द्वारा नियुक्त्त किसी व्यक्ित्त को प्रतिनियुक्त्त कर सकेगी। जहाँ कोई ऐसा व्यक्त्ति, किसी संस्था के अधीन कार्य करने के लिये नियुक्त्त किया गया है तो उसकी सेवा ऐसे पद पर, ऐसी अवधि के लिये और ऐसे अन्य निबन्धनों और शर्तों पर ली जायेंगी जिसे जिला पर्यवेक्षण सहकारी संस्था अवधारित कर सकें। इस प्रकार नियुक्त्त व्यक्त्ति, उप-धारा (४) के अधीन स्थापित निधि से उसका वेतन और भत्ते प्राप्त करेगी।
(३) उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट प्रत्येक व्यक्त्ति के अधीन सचिव के रुप में कार्य करने के लिये संवर्ग और प्रतिनियुक्ित्त या तैनाती के लिये नियुक्त्त व्यक्ित्त पर तत्काल प्रारंभिक पर्यवेक्षी नियंत्रण संबंधित संस्था में निहित होगा। ऐसी संस्था जिला पर्यवेक्षण सहकारी संस्था की उप-विधि द्वारा उस पर प्रदत्त या अधिरोपित कर सके ऐसी शक्ित्तयों का प्रयोग और ऐसे कार्यों का निर्वहन या ऐसे कर्तव्यों का अनुपालन करेगी।
(४) जिला पर्यवेक्षण सहकारी संस्था " सहकारी जिला संवर्ग नियोजन निधि " नामक एक निधि स्थापित करेगी और सहकारी जिला संवर्ग के नियुक्त्त व्यक्त्तियों और उक्त्त संवर्ग से संबंधित अन्य व्यय अदा करने के लिये वेतन, भत्तों और अन्य पारिश्रमिक पर के व्ययों के लिये उपयोग किया जायेगा। (५) प्रत्येक संस्था, सचिवों के सहकारी जिला संवर्ग के किसी सचिव की सेवा से सीधे किसी लाभ प्राप्त करती है तो राज्य सहकार द्वारा जैसा कि विहित किया जाए ऐसी दर पर और ऐसी रीति में, उक्त्त निधि का अंशदान करेगी। अंशदान दर के अवधारण में, राज्य सरकार उप-धारा (४) में र्िनदिष्ट व्ययों को की जानेवाली संभावित सेवाअों, जिसमेंे संबंधित संस्था द्वारा वितरित और बकाया ऋणों और उपक्रमित अन्य गैर-क्रेडिट क्रिया कलापों समेत संस्थाअों की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखेगी।
(६) राज्य सरकार, उक्त्त निधि में रक़म अदायगी की अभिरक्षा और रखरखाव और रक़म के व्यय और प्रत्याहार से जुडें या सहायक सभी मामलों के विनियमन करने के लिये नियम बना सकेगी। "
३. मूल अधिनियम की धारा ८८ की, उप-धारा (१) में, प्रथम परन्तुक में, " दो वर्षों की अवधि के भीतर " शब्दों के स्थान में " एक वर्ष की अवधि के भीतर " शब्द रखे जायेंगे।
सन् १९६१ का महा. २४ की धारा ८८ में संशोधन।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २९, २०२४/फाल्गुन १०, शके १९४५ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य।
महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० (सन् १९६१ का महा. २४) यह राज्य के भीतर सहकार गतिविधि का सुव्यवस्थित विकास करने का लक्ष रखता है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र का र्आथिक विकास करने के लिए, सहकार क्षेत्र को सक्षम करने की दृष्टि से प्राथमिक कृषि सहकारी क्रेडीट संस्थाअों (पी ए सी एस) का बहुउद्देशीय कारोबार ईकाई में रूपांतरण करने का लक्ष्य रखा है। उक्त्त प्राथमिक कृषि सहकारी क्रेडीट संस्थाअों (पी ए सी एस) के सुचारू कामकाज करने तथा उसपर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए, ऐसी संस्थाअों का सहकारी जिला सचिव संवर्ग तैयार करना तथा ऐसे संवर्ग के लिए नियोजन निधि की स्थापना करना इष्टकर समझा गया है। उक्त्त प्रयोजनों के लिए, सहकारी जिला सचिव संवर्ग का गठन करने और ऐसे संवर्ग के लिए, नियोजन निधि की स्थापना करने के लिए उक्त्त अधिनियम में नई धारा ६९क का निवेशन करना प्रस्तावित है।
२. प्राधिकृत व्यक्ित्त द्वारा धारा, ८८ की उप-धारा (१) के अधीन जाँच और कार्यवाहियां का पूरी करने की अवधि दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने की दृष्टि से, उक्त्त अधिनियम की धारा ८८ में संशोधन करना भी प्रस्तावित किया है।
३. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई,
दिलीप वळसे-पाटील,
दिनांकित २८ फरवरी, २०२४।
सहकारिता मंत्री।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, फेब्रुवारी २९, २०२४/फाल्गुन १०, शके १९४५ ४
प्रत्यायुक्त्त विधान संबंधी ज्ञापन
प्रस्तुत विधेयक में विधायी शक्ित्त के प्रत्यायोजन के लिए, निम्न प्रस्ताव अंतर्ग्रस्त है, अर्थात् :---
खण्ड २.---- इस खण्ड के अधीन जिसका आशय महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, १९६० में नई धारा ६९क निविष्ट करना है,---
(एक) जिसमें उप-धारा (५) में राज्य सरकार को, संस्था द्वारा भुगतान किया जीनेवाला अंशदान, जो सहकारी जिला सचिव संवर्ग से संबंधित सचिव की सेवा से सीधे लाभ प्राप्त होता है, की दर और रीति विहित करने की, शक्ित्त प्रदान की गई है ;
(दो) जिसमें उप-धारा (६) में राज्य सरकार को, सहकारी जिला सचिव संवर्ग नियोजन निधि में के पैसों की अभिरक्षा और भुगतान बनाए रखने तथा पैसों का व्यय करना तथा निकालने के संबंधित या सहायक सभी मामले विनियमित करने के लिए, नियम बनाने की शक्त्ति प्रदान की गई है।
२. विधायी शक्त्ति के प्रत्यायोजन के लिए, उपरोल्लिखित प्रसातव सामान्य स्वरुप के है।
(यथार्थ अनुवाद)
विजया ल. डोेनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
विधान भवन : मुंबई, दिनांकित २९ फरवरी, २०२४।
जितेंद्र भोळे, सचिव (१) (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा।
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