RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक ६(२)] शुक्रवार, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५ [पृष्ठे ६, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
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महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा मेंे दिनांक १ मार्च, २०२४ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :----
L. A. BILL No. X OF 2024.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA LABOUR WELFARE FUND ACT.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक १० सन् २०२४।
महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन संबंधी विधेयक।
सन् १९५३ का ४०।
क्योंकि, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है; अंत: भारत गणराज के पचहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :-----
संक्षिप्त नाम। १. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि (संशोधन) अधिनियम, २०२४ कहलाए। (१)
भाग सात---१३--१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५ २. महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम की उप-धारा (२) के स्थान में, निम्न उप-धारा, रखी सन् १९५३ का ४०। जायेगी, अर्थात् :--
""(२) प्रत्येक कर्मचारी और ऐसे प्रत्येक कर्मचारी के नियोक्ता के संबंध में देय प्रत्येक छह महीने की सन् १९५३ का ४० की धारा ६ ख ख में संशोधन।
अंशदान की रक्कम निम्न दरों पर होगी, अर्थात् :--
(क) किसी कर्मचारी के संबंध में जिसका नाम क्रमश: ३० जून और ३१ दिसंबर पर किसी स्थापना रजिस्टर में दिखाई देता है तो पच्चीस रुपयों की दर से भुगतान किया जायेगा :
परंतु, राज्य सरकार बोर्ड से प्रस्ताव की प्राप्ति पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, कर्मचारियों के अंशदान की दर प्रत्येक तीन वर्षों में एक बार बढायेगी; तथापि ऐसी वृद्धि अंशदान दर के ३० प्रतिशत से अधिक नहीं होगी ;
(ख) खंड (क) में, र्िनदिष्ट प्रत्येक कर्मचारी के नियोक्ता के संबंध में किसी कर्मचारी द्वारा देय अंशदान की रकम तीन गुना से अधिक नहीं होगी । "" ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५ ३
उद्देशोें और कारणों का वक्तव्य।
महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम (सन् १९५३ का ४०) यह महाराष्ट्र राज्य में श्रमिक कल्याण निधि को बढ़ावा देने और ऐसी कल्याण गतिविधियों के वित्तीयन के लिए कल्याण निधि के गठन करने हेतु उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया है।
२. उक्त अधिनियम की धारा ६ख ख की, उप-धारा (२), कर्मचारियों, नियोक्ताअों द्वारा और राज्य सरकार द्वारा भी प्रत्येक छह महीने के लिए निधि बनाए जाने के लिए अंशदान करने हेतू उपबंध करती है। उक्त त्रिपक्षीय अंशदान, श्रमिकों और उनके निर्भर व्यक्तियों के लिए कल्याण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण बोर्ड की आय का प्रमुख स्त्रोत है।
३. दशकों से, बोर्ड द्वारा आयोजित कल्याण गतिविधियों में पर्याप्त मात्रा में वृद्धि हुई है और कल्याण गतिविधियों का लाभ लेनेवाले कर्मकार और उनके निर्भरों की संख्या में भी वृद्धि हुई है साथ ही, वेतन और भत्ते से होकर कर्मचारीवृंद की लागत भी काफी हद तक उपर गई है। परंतु, वर्ष २००३ से अंशदान के दर में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण बोर्ड, नई कल्याण उन्मुखी योजनाएं, गतिविधियाँ और कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए कदम उठा रही है। बोर्ड ने, कर्मकारों और उनके निर्भरों के लिए जिला क्रीड़ा प्रशिक्षण केन्द्र शुरू करना तथा क्रीड़ा प्रतियोगिता और शिबिरों को आयोजित करना भी नियोजित किया है। इसलिए, ऐसी कल्याण गतिविधियों को वित्त सहाय करने तथा प्रशासकीय व्यय का अनुपात बनाए रखने के लिए, बोर्ड को समर्थ बनाने की दृष्टि से, उक्त निधि को कर्मचारी, नियोक्ताअों द्वारा और राज्य सरकार द्वारा भी प्रत्येक छह महीने के लिए अदा किए जानेवाले अंशदान के अनुपात में वृद्धि करना इष्टकर है।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई,
सुरेश खाडे,
दिनांकित २९ फरवरी, २०२४।
श्रमिक मंत्री।
भाग सात--१३-२४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५
प्रत्यायुक्त विधान संबधी ज्ञापन।
प्रस्तुत विधेयक में, विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिये निम्न प्रस्ताव अंतर्ग्रस्त है, अर्थात् :---
खण्ड २.--- इस खण्ड के अधीन, राज्य सरकार को, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा ऐसी रकम की कर्मचारियों के अंशदान की दर प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार वृद्धि करने के लिये तथापि, इस प्रकार की ऐसी वृध्दि दर प्रचलित अंशदान दरों से तीस प्रतिशत से अधिक न होने की, शक्ति प्रदान की है। २. विधायी शक्ित के प्रत्यायोजन के लिये उपरोल्लिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरूप के है।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५ ५
वित्तीय ज्ञापन।
प्रस्तुत विधेयक के उपबंध, महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा कल्याण गतिविधियों को बढ़ाने और महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि नियम, के नियम १९क के अधीन यथा उपबंधित उसकी सीमा के भीतर बोर्ड के प्रशासकीय व्यय का अनुपात बनाए रखने के लिए, महाराष्ट्र श्रमिक कल्याण निधि अधिनियम (सन् १९५३ का ४०) के अधीन श्रमिक कल्याण निधि के त्रिपक्षीय अंशदान की दरों की वृद्धि करने के लिये आशयित है। श्रमिक कल्याण निधि को कर्मकारों, नियोक्ताअों और राज्य सरकार द्वारा देय कुल त्रिपक्षीय अंशदान प्रतिवर्ष लगभग १,६८,५४,००,००० रुपये अनुमानित है जिसमें से राज्य की समेकित निधि में से आवर्ती व्यय के रूप में सरकारी अंशदान प्रतिवर्ष लगभग ५६,१८,००,००० रुपये होगा।
२. प्रत्येक तीन पक्षकारों द्वारा समुचित अंशदान हो सकेगा तथापि, अधिनियम द्वारा आवेष्टित कर्मचारियों की संख्या में परिवर्तन के अनुसार प्रति वर्ष से वर्ष की तरह का अंशदान होगा।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोेनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च १, २०२४/फाल्गुन ११, शके १९४५
भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के अधीन राज्यपाल की अनुशंसा
(महाराष्ट्र शासन, विधि व न्याय विभाग, के ओदश कि प्रत)
भारत संविधान के अनुच्छेद २०७ के खंड (३) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हूए, महाराष्ट्र श्रमिक निधि (संशोधन) विधेयक, २०२४ ई. पर विचार करने की अनुशंसा करते है ।
विधान भवन : मुंबई, दिनांकित १ मार्च, २०२४।
जितेंद्र भोळे, सचिव (१) (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा ।
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