महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक ७] मंगळवार, मार्च २६, २०२४/चैत्र ६, शके १९४६ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक १४
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
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नगरविकास विभाग
मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित १५ मार्च २०२४।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. III OF 2024.
AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA REGIONAL AND TOWN PLANNING ACT, 1966.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ३ सन् २०२४।
महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ में अधिकतर
संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।
क्योंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;
और क्योंकि, महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;
सन् १९६६ का महा. ३७।
(१)
भाग सात---१४-१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २६, २०२४/चैत्र ६, शके १९४६ अब, इसलिए, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शयिों का प्रयोग करते हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :-----
१. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना (संशोधन) अध्यादेश, २०२४ कहलाए। संक्षिप्त नाम तथा प्रारंभ।
(२) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
सन् १९६६ का महा. ३७। २. महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ (जिसे इसमें आगे, "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा ३० की, उप धारा (१) में, "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और २३ मार्च २०२० से रखे गए है ऐसा समझा जायेगा।
सन् १९६६ का महा. ३७ की धारा ३० में संशोधन।
३. मूल अधिनियम की धारा ३१ की, उप धारा (१) में,-----
(एक) "छह महीने" शब्दों के स्थान में, "बारह महीने" शब्द रखे जायेंगे और २३ मार्च २०२० से सन् १९६६ का महा. ३७ की धारा ३१ में संशोधन। रखे गए है ऐसा समझा जायेगा।
(दो) प्रथम परंतुक के स्थान में, निम्न परंतुक, रखा जायेगा, अर्थात :-----
"परंतु, राज्य सरकार, जिसे वह ठिक समझे, प्रारूप विकास योजना को मंजूर करने या उसकी मंजूरी को अस्वीकृत करने का अवधि चाहे उक्त अवधि अवसित हुआ हो या नहीं हुआ हो, जैसा कि अधिसूचना में विर्िनदिष्ट किया जाए ऐसी अधिकतर अवधि द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर बढ़ा सकेगी ;";
(तीन) तृतीय और चतुर्थ परंतुक अपमर्ाजित किए जायेंगे।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २६, २०२४/चैत्र ६, शके १९४६ ३
वक्तव्य।
महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ (सन् १९६६ का महा. ३७) इस अधिनियम के अधीन स्थापित प्रदेशों में भूमि का विकास करने और उपयोग करने की योजना के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया है। उक्त्त अधिनियम के अध्याय तीन में नगर नियोजन योजना उचित रीत्या बनाई है और उसका निष्पादन प्रभावी हुआ है, यह सुनिश्चित करने की दृष्टि से विकास योजना का उद्देश घोषित करने, उसे तैयारी करने, प्रस्तुत करने और मंजूरी देने के लिए अपनाई जानेवाली प्रक्रिया के लिए उपबंध किये है।
२. उक्त अधिनियम अन्य बातों के साथ, सभी योजना प्रक्रिया के एक समयबद्ध कार्यक्रम के लिए उपबंध करता है और यदि विर्िनदिष्ट अवधि के भीतर योजना बनाने में योजना प्राधिकरण असफल हो जाता है तो, योजना की संपूर्ण प्रक्रिया व्यपगत हो सकेगी। यह अधिनियम, विकास की अनुमति, भूमि का अर्जन और अन्य अनुमतियों से संबंधित समय रेखा के भी उपबंध है, और विर्िनदिष्ट अवधि के पश्चात्, सुसंगत अनुमतियाँ अनुमोदित की गई है ऐसा समझा जायेगा, या, यथास्थिती, सुसंगत कार्यवाहियाँ व्यपगत हो चूकी है ऐसा समझा जायेगा।
३. उ अधिनियम की धारा ३० यह उपबंध करती है कि, प्रत्येक योजना प्राधिकरण, विकास योजना तैयार करने संबंधी धारा २६ के अधीन राजपत्र में सूचना के प्रकाशन के दिनांक से छह महीने की अवधि के भीतर या उसके परंतुक में यथा उल्लिखित ऐसी बढ़ायी गयी अवधि के भीतर प्रारूप विकास योजना मंजूर करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा। उक्त अधिनियम की धारा ३१ यह उपबंध करती है कि, राज्य सरकार, योजना प्राधिकरण द्वारा उसे प्रस्तुत की गई प्रारूप विकास योजना, योजना प्राधिकरण से उसकी प्राप्ति के दिनांक से छह महीने की अवधि भीतर, या उसके प्रथम परंतुक में यथा उल्लिखित ऐसी बढ़ायी गयी अवधि के भीतर मंजूर कर सकेगी।
४. यह ध्यान में आया है कि, वर्ष २०१७ और २०१८ के दौरान, योजना प्राधिकरणों, जैसे कि नगरपरिषदों और नगरपंचायतों की संख्या में वृध्दि हो गई है, इसलिए, ऐसे योजना प्राधिकरणों के लिए विकास योजना तैयार करना आवश्यक बन गया है। सरकार ने, देखिये सरकारी संकल्प नगरविकास विभाग दिनांकित २५ जनवरी २०१९ द्वारा भौगोलिक जानकारी प्रणाली (जीआईएस) के उपयोग द्वारा प्रारूप विकास योजना तैयार करने के लिए योजना प्राधिकरणों को निदेश दिए है। प्रारूप विकास योजना तैयारी करने और उसे मंजूरी देते समय योजना प्राधिकरणों और राज्य सरकार को कई सुझाव और आक्षेप प्राप्त हुए है। इसलिए, इस प्रकार प्राप्त सुझावों और आक्षेपों पर विचार करने तथा अनुबद्ध समय-सीमा के भीतर प्रारूप विकास योजना तैयारी करने और उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी करना कठिन हो गया है। इस कारण यह संभावना है कि, अध्याय तीन के अधीन प्रारूप विकास योजना तैयारी करने और उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया, इस अधिनियम में उपबंधित अल्प अवधि के कारण व्यपगत हो सकेगी और अंतत:
ऐसे योजना प्राधिकरणों की अधिकारिता क्षेत्र के भीतर क्षेत्रों की विकास प्रक्रिया को प्रभावित कर सकेगी।
इसलिए, धारा ३० की उप-धारा (१) और धारा ३१ की उप-धारा (१) के अधीन प्रारूप विकास योजना की मंजूरी की अवधि छह महीने से बारह महीने तक बढ़ाने और योजना प्राधिकरण द्वारा उसे प्रस्तुत प्रारूप विकास योजना को मंजूरी का अवधि राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को, समर्थ बनाना आवश्यक है। इसलिए, महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ की धारा ३० की, उप-धारा (१) और धारा ३१ की उप-धारा (१) में यथोचित संशोधन करना इष्टकर समझा गया है।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २६, २०२४/चैत्र ६, शके १९४६ ५. चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर योजना अधिनियम, १९६६ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।
मुंबई,
रमेश बैस,
दिनांकित १५ मार्च २०२४।
महाराष्ट्र के राज्यपाल।
महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,
असीम गुप्ता,
सरकार के प्रधान सचिव।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोेनीकर,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
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