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Maharashtra Gazette · Government of Maharashtra

Part VII, Extra No. 32, MAHARASHTRA ORDINANCE No. IX 2024. AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA GOODS AND SERVICES TAX ACT, 2017. Friday, 11th October 2024.

Published 11 October 2024

Type
Extra - Ordinary
Part
Part 7 (Hindi)
Division
CENTRAL SECTION
Identifier
in.gazette.maharashtra.2024-10-11.Extra-Ordinary_CENTRAL-SECTION_Part-7-Hindi-
Languages
English, Marathi

RNI No. MAHBIL /2009/31730

महाराष्ट्र शासन राजपत्र

असाधारण भाग सात

वर्ष १०, अंक १८] शुक्रवार, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ [पृष्ठे १५, किंमत : रुपये ४७.००

असाधारण क्रमांक ३२

प्राधिकृत प्रकाशन

अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).

वित्त विभाग

मंत्रालय, मादाम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरु चौक

मुंबई ४०० ०३२, दिनांकित ७ अक्तूबर २०२४।

MAHARASHTRA ORDINANCE No. IX 2024.

AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA GOODS AND SERVICES

TAX ACT 2017.

महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक ९ सन् २०२४।

महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी अध्यादेश।

क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है ;

सन् २०१७ का ४३।

और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, जिनके कारण उन्हें, इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिये महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करने के लिये सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है ;

अब, इसलिये, भारत के संविधान के अनुच्छेद २१३ के खण्ड (१) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करतेे हुए, महाराष्ट्र के राज्यपाल, एतद्द्वारा, निम्न अध्यादेश प्रख्यापित करते हैं, अर्थात् :---

भाग सात-३२-----१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ १. (१) यह अध्यादेश महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, २०२४ कहलाए। संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण।

(२) धारा १ तुरन्त प्रवृत्त होगी ।

(३) यथा अन्यथा उपबंधित के सिवाय शेष धाराएँ ऐसे दिनांक को भविष्यलक्षी या भूतलक्षी प्रभाव से प्रवृत्त होगी जिसे राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें और इस अध्यादेश के विभिन्न उपबंधों के लिए, अलग-अलग दिनांक नियत किए जा सकेगें और इस अध्यादेश के प्रारम्भण के लिए किन्ही ऐसे उपबंध में किसी संदर्भ का उस उपबंध के प्रवृत्त होने के संदर्भ के रूप में अर्थ लगाया जायेगा ।

२. महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (जिसे इसमें आगे "मूल अधिनियम" कहा गया है) की धारा २ के खण्ड (६१) के स्थान में, निम्न खण्ड रखा जायेगा, अर्थात् :------

सन् २०१७ का महा.४३। सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २ में संशोधन।

"(६१) " निविष्टि सेवा वितरक " का तात्पर्य, वस्तु या सेवाअों या दोनों के ऐसे आपर्ूतिकर्ता के कार्यालय से है, जो धारा २५ में र्िनदिष्ट निविष्टि व्यक्ितयों के लिए या उनकी ओर से धारा ९ की, उप-धारा (३) या उप-धारा (४) के अधीन कर के लिए दायी सेवाअों के संबंध में के बीजक समेत निविष्टि सेवाअों की प्राप्ति के लिये कर बीजक प्राप्त करता है और धारा २० में उपबंधित रीत्या, ऐसे बीजक के संबंध में निविष्टि कर ज़मा का वितरण करने के लिए दायी है ; "।

३. मूल अधिनियम की धारा ९ की, उप-धारा (१) में, " मानव उपभोग के लिए अल्कोहल युक्त मादक शराब" शब्दों के पश्चात्, " और मानव उपभोग के लिए अलकहोल युक्त मादक शराब के विनिर्माण के सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ९ में संशोधन। लिए उपयोगी किये जानेवाले असंक्रमित अतिरिक्त निष्प्रभावी अलकोहल या परिशोधित स्िप्रट " शब्द निविष्ट किए जायेगेंे ।

४. मूल अधिनियम की धारा १० की, उप-धारा (५) में, "धारा ७३ या धारा ७४ " शब्दों और अंको के पश्चात् " या धारा ७४क" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १० में संशोधन।

५. मूल अधिनियम की धारा ११ के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :------

सन् २०१७ का महा. ४३ में धारा ११क का निवेशन।

"११क. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, यदि सरकार का यह समाधान हो जाता है कि, ----

(क) वस्तूअों या सेवाअों या दोनों की किसी आपर्ूति पर राज्य कर के उद्ग्रहण (उसके उद्ग्रहण न करने समेत) संबंधित कोई प्रथा सामान्यत: प्रचलित थी या है ; और

(ख) ऐसी आपर्ूति, जहाँ-----

साधारण चलन के प्रतिफल के रुप में उद्ग्रहीत या कम उदग्रहीत न होनेवाले वस्तु एवं सेवा कर वसूल न करने के अधिकार ।

(एक) जहाँ उक्त प्रथा के अनुसार राज्य कर नहीं लगाया गया था या उद्ग्रहीत नहीं किया गया है, के मामले में, राज्य कर के लिये पात्र थे या है ; या

(दो) उक्त प्रथा के अनुसरण में, जो राज्य कर की रक़म उद्ग्रहीत था या उद्ग्रहीत की जा रही रक़म राज्य कर से अधिक है तो सरकार, परिषद की सिफारिश पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकती है कि, ऐसी आपर्ूतियों पर देय संपूर्ण राज्य कर या, यथास्थिति, ऐसी आपर्ूतियों पर देय राज्य कर से अधिक है परंतु, उक्त प्रथा न होती तो उन आपर्ूतियों के संबंध में अदायगी करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिसपर उक्त प्रथा के अनुसार राज्य कर उद्ग्रहीत नहीं किया गया था या उद्ग्रहीत नहीं किया जा रहा है या कम उद्ग्रहीत किया जा रहा है, के लिये दायी है तो अदा करने की आवश्यकता नही हैं। "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ ३ ६. मूल अधिनियम की धारा १३ की, उप-धारा (३), के,---

(१) खण्ड (ख) में " प्रदायकर्ता द्वारा " शब्दों के स्थान में, " जहाँ प्रदायकर्ता द्वारा बीजक जारी

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १३ में संशोधन। करना आवश्यक है, के मामले में प्रदायकर्ता द्वारा ; या " शब्द रखे जायेगे ;

(२) खण्ड (ख) के पश्चात् निम्न खण्ड निविष्ट किया जायेगा अर्थात् :-----

(ग) जहाँ प्राप्तकर्ता द्वारा बीजक जारी करने का दिनांक में प्राप्त कर्ता द्वारा बीजक जारी किया है : "। (३) प्रथम परन्तु में, " या खण्ड (ख) " शब्दों, कोष्ठको या अक्षरों के पश्चात् " या खण्ड (ग) " शब्द, कोष्ठक या अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

७. मूल अधिनियम की, धारा १६ की, उप-धारा (४), के पश्चात्, निम्न उप-धारा जोडी जायेगी और १ जुलाई २०१७ से जोडी समझी जायेगी, अर्थात् :-----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १६ में संशोधन। "(५) उप-धारा (४) में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१९, २०१९-२० और २०२०-२१ से संबंधित वस्तु या सेवा या दोनों की आपर्ूति के लिए बीजक या नामे नोट के संबंध में रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित धारा ३९ के अधीन कोई विवरणी जो नवम्बर २०२१ के तीसवे दिन तक दायर की है, में निविष्टि कर जमा रक़म लेने का हकदार होगा ।

(६) जहाँ रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित का रजिस्ट्रीकरण धारा २९ के अधीन रद्द किया गया है और तत्पश्चात्, रजिस्ट्रेशन का रद्दकरण या तो धारा ३० के अधीन किसी आदेश द्वारा या अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय द्वारा दिये गए किसी आदेश के अनुसरण में पिछे लिये गये है, और जहाँ बीजक या नामे नोट के संबंध में निविष्ट कर ज़मा रक़म का लाभ रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण के आदेश के दिनांक पर, उप-धारा (४) के अधीन निर्बधित नहीं किया गया हो तो उक्त व्यक्ित वस्तु या सेवाअों या दोनों की आपर्ूति के लिए ऐसे बीजक या नामे नोट के संबंध में निविष्टि कर जमा रक़म लेने का हकदार होगा, धारा ३९ के अधीन विवरणी में,---

(एक) अनुवर्ती वित्तीय वर्ष के नवम्बर के तीसवें दिन तक दाखिल की है जिसका ऐसा बीजक या नामे नोट सुसंगत वर्ाषिक विवरण से संबंधित है या विरचित है, जो भी पहले हो ; या (दो) रजिस्ट्रीकरण को रद्दकरण के दिनांक से अवधि के लिए या, यथास्थिति, रजिस्टीकरण के रद्दकरण के प्रभावी होने के दिनांक से रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण का पीछे लिये गये आदेश के दिनांक तक जहाँ ऐसी विवरणी रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण का पीछे लिये गये आदेश के दिनांक से तीस दिनों के भीतर दाखिल की है, जो भी बाद का हो, निविष्टि कर ज़मा रक़म लेने का हक़दार होगा । "।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १७ में संशोधन। ८. मूल अधिनियम की धारा १७ की, उप-धारा (५) के खण्ड (एक) में, ""धाराएँ ७४, १२९ और १३०"" शब्दों और अंकों के स्थान में ""वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक के किन्ही अवधि के संबंध में धारा ७४"" शब्द और अंक रखे जायेगें ।

९. मूल अधिनियम की धारा २० के स्थान में, निम्न धारा रखी जायेगी, अर्थात् :------

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २० का प्रतिस्थापन । निविष्टि सेवा वितरक द्वारा ज़मा रक़म वितरित करने की रीति।

"(२०). (१) वस्तुएँ या सेवाएँ या दोनों के आपर्ूतिकर्ता का कोई कार्यालय जो धारा २५ में निर्देशित विशिष्ट व्यक्ितयों के लिए या उनकी ओर से धारा ९ की, उप-धारा (३) या उप-धारा (४) के अधीन कर के लिए दायी सेवाअों के संबंध में बीजक समेत निविष्टि सेवाअों की प्राप्ति के जरिए कर बीजक प्राप्त करता है, धारा २४ के खण्ड (आठ) के अधीन निविष्टि सेवा वितरक के रूप में रजिस्ट्रीकरण करना आवश्यक होगा और ऐसे बीजकों के संबंध में निविष्टि कर जमा रक़म वितरीत करेगा।

(२) निविष्टि सेवा वितरक उसके द्वारा प्राप्त बीजकों पर प्रभारित राज्य कर या एकीकृत कर के जमा रक़म को वितरित करेगा जिसमें धारा ९ की उप-धारा (३) या उप-धारा (४) के अधीन कर के उद्ग्रहण के अध्यधीन सेवाअों के संबंध में राज्य कर या एकीकृत कर की जमा रक़म समेत उसका भूगतान उक्त निविष्टि सेवा वितरक के रूप में उसी राज्य में रजिस्ट्रीकृत विशिष्ट व्यक्ित द्वारा किया गया हो, के भीतर और ऐसे निर्बधनों और शर्तों के अध्यधीन वितरित किया जायेगा ।

भाग सात-३२-----१अ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ (३) राज्य कर का जमा रक़म राज्य कर या एकीकृत कर के रूप में और एकीकृत कर यह एकीकृत कर या राज्य कर के रूप में, निविष्टि कर जमा रक़म की रकम से अंर्तविष्ट दस्तावेज जारी करके ऐसी रित्या वितरित किया जायेगा जैसा कि विहित किया जाए । "।

१०. मूल अधिनियम की धारा २१, में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंको के पश्चात् ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा २१ में संशोधन।

११. मूल अधिनियम की धारा ३० के परंतुक के पश्चात् निम्न परंतुक जोडा जायेगा, अर्थात् :-----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३० में संशोधन।

" परंतु आगे यह कि, रजिस्ट्रीकरण के रद्दकरण करने का ऐसा पिछे लेना जैसा कि विहित किया जाए ऐसे शर्तों और निबर्ंधनों के अध्यधीन होगा ।"।

१२. मूल अधिनियम की धारा ३१ की,----

(क) उप-धारा (३) के खण्ड (च) में, ""धारा ९ के रजिस्टि्रकृत व्यक्ित शब्दों और अंकों के पश्चात्, सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३१ में संशोधन।

" जैसा की विहित किया जाए ऐसी अवधि के भीतर " शब्द निविष्टि किए जायेंगे ;

(ख) खण्ड (छ) के पश्चात् निम्न स्पष्टीकरण निविष्ट किया जायेगा, अर्थात् :---

""स्पष्टीकरण.---खण्ड (च) के प्रयोजनों के लिए " आपर्ूतिकर्ता जो रजिस्ट्रीकृत नहीं है " ""अभिव्यक्ित में, जो धारा ५१ के अधीन कर की कटौती के प्रयोजन के लिए केवल वह से रजिस्ट्रीकृत है ऐसा आपूर्तीकर्ता सम्मिलित होगा।""।

१३. मूल अधिनियम की धारा ३५ की, उप-धारा (६), में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात् ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३५ में संशोधन।

१४. मूल कर अधिनियम की धारा ३९ की, उप-धारा (३) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ३९ में संशोधन।

" (३) धारा ५१ के अधीन स्त्रोत पर कर की कटौती करने के लिए आवश्यक प्रत्येक रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित जैसा कि विहित किया जाए ऐसे प्ररूप और रीत्या तथा ऐसे समय के भीतर उस महीने के दौरान जिस महीने में कटौती की गई के कटौती के प्रत्येक कॅलेंडर महीने के लिए इलेक्ट्रॉनिक रूप में विवरणी प्रस्तुत करेगा :

परंतु, उक्त रजिस्िट्रकृत व्यक्ित, प्रत्येक कॅलेडंर महीने के लिए चाहे उक्त महीने के दौरान कोई कटौती की है या नहीं की है, विवरणी प्रस्तुत करेगा ।"।

१५. मूल अधिनियम की धारा ४९ की, उप-धारा (८), के, खण्ड (ग) में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात् ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर जोडे जायेगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ४९ में संशोधन।

१६. मूल अधिनियम की धारा ५० की, उप-धारा (१), के परंतुक में ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात् ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५० में संशोधन।

१७. मूल अधिनियम की धारा ५१ की, उप-धारा (७) में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात्, ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५१ में संशोधन।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ ५ १८. मूल अधिनियम की धारा ५४ की,-----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ५४ में संशोधन। (१) उप-धारा (३) के द्वितीय परंतुक अपमर्ाजित किया जायेगा ; (२) उप-धारा (१४) के पश्चात् और स्पष्टीकरण के पूर्व निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---

" (१५) इस धारा में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, शून्य दर आपर्ूति के कारण उपयोग न किए गए निविष्टि कर जमा रक़म या वस्तुअों के शून्य दरवाली वस्तुअों की आपर्ूति के कारण अदा किये गये एकीकृत कर की कोई वापसी की अनुमति नहीं दी जायेगी जहाँ ऐसी शून्य दरवाली वस्तुअों की आपर्ूति निर्यात शुल्क के अध्याधीन है ।"।

१९. मूल अधिनियम की धारा ६१ की, उप-धारा (३) में, " धारा ७३ या धारा ७४" शब्दों और अंकों सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ६१में संशोधन। के पश्चात्, " या धारा ७४क" शब्द, अंक और अक्षर जोडे जायेंगे ।

२०. मूल अधिनियम की धारा ६२ की, उप-धारा (१) में, " धारा ७३ या धारा ७४ " शब्दों और अंकों के सन् २०१७ का ४३ की धारा ६२ में संशोधन। पश्चात् , " या धारा ७४क " शब्द, अंक या अक्षर निविष्ट किए जायेंगे।

२१. मूल अधिनियम की धारा ६३ में, " धारा ७३ या धारा ७४ " शब्दों और अंकों के पश्चात्, या " धारा ७४ क " शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

२२. मूल अधिनियम की धारा ६४ की, उप-धारा (२) में, " धारा ७३ या धारा ७४ ", शब्दों और अंकोंे के पश्चात्, " या धारा ७४ क " शब्द, अंक और अक्षर जोडे जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ६३ में संशोधन। सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ६४ में संशोधन । २३. मूल अधिनियम की धारा ६५ की, उप-धारा (७) में, " धारा ७३ या धारा ७४ " शब्दों और अंकोंे के पश्चात्, " या धारा ७४ क " शब्द, अंक और अक्षर जोडे जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ६५ में संशोधन । २४. मूल अधिनियम की धारा ६६ की, उप-धारा (६) में, " धारा ७३ या धारा ७४ " शब्दों और अंकोंे के पश्चात्, " या धारा ७४ क " शब्द, अंक और अक्षर जोड़े जायेंगे।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ६६ में संशोधन । २५. मूल अधिनियम की धारा ७० की, उप-धारा (१) के पश्चात्, निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७० में संशोधन । " (१क) उप-धारा (१) के अधीन समन किये गये सभी व्यक्ति या तो व्यक्तिगत रूप से या किसी प्राधिकृत प्रतिनिधि द्वारा जैसा कि अधिकारी निर्देश दे उपस्थित होने के लिये बाध्यकारी होंगे और इसप्रकार उपस्थित रहनेवाला व्यक्ति की साक्षय की जाँच के दौरान सत्य कथन करेगा या कथन करेगा या ऐसे दस्तावेज और अन्य वस्तुएँ प्रस्तुत करेगा जिनकी आवश्यकता हो। "।

२६. मूल अधिनियम की धारा ७३ के,---

(१) पाश्र्व टिप्पणी में, " कर का निर्धारण " शब्दों के पश्चात् , " वित्तिय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७३ में संशोधन । संबंधित " शब्द औेर अंक निविष्ट किए जायेंगे ;

(२) उप-धारा (११) के पश्चात्, निम्न उप-धारा जोड़ी जायेगी, अर्थात् :---

" (१२) इस धारा के उपबंध वित्तिय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर का अवधारण करने के लिए लागू होंगे। "।६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ २७. मूल अधिनियम की धारा ७४ के ,---

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७४ में संशोधन। (१) पाश्र्व टिप्पणी मेें, " कर का अवधारण " शब्दों के पश्चात्, " वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित " शब्द निविष्ट किए जायेंगे ;

(२) उप-धारा (११) के पश्चात्, और स्पष्टीकरण १ के पूर्व, निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---

" (१२) इस धारा के उपबंध, वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर का निर्धारण करने के लिए लागू होंगे। "। ;

(३) स्पष्टीकरण २ अपमर्ाजित किया जायेगा ।

२८. मूल अधिनियम की धारा ७४ के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ में धारा ७४क का निवेशन।

" ७४ क. (१) जहाँ समुचित अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि, कोई कर अदा नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या गलत तरीके से प्रतिदाय किया है या जहाँ निविष्टि कर ज़मा रक़म का गलत तरीके से लाभ लिया गया है या उसका उपयोग किया गया है, तो उस व्यक्ति को नोटिस देगा जो कर का भुगतान नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या जिसे गलत तरीके से प्रतिदाय किया गया है या जिसने निविष्टि कर ज़मा रक़म गलत तरीके से ली गयी है या उसका उपयोग किया है तो, धारा ५० के अधीन उसपर देय ब्याज के साथ नोटीस में विर्िनदिष्ट रकम और इस अधिनियम के उपबंधों और तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन उद्ग्रहणीय शास्ति की रकम वह क्यों न अदा करे के बारे में कारण दर्शाने की अपेक्षा करते हुए नोटीस तामिल करेगा :

वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से संबंधित किसी कारण के लिए अदा न किया गया कर या कम अदा प्रतिदाय या त्रुटीवंश कर प्रतिदाय या निविष्टि कर जमा रकम गलती से लिया है या उपयोग किया है, के कर का विनिश्चयन ।

परंतु, यदि वह कर जिसका वित्तीय वर्ष में भुगतान नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या गलत तरीके से प्रतिदाय किया गया है या जहाँ निविष्टि कर ज़मा रक़म को गलत तरीके से लिया गया है या उसका उपयोग किया गया है वह रकम एक हजार रूपयों से कम है, तो यह नोटीस जारी नहीं की जायेगी ।

(२) समुचित अधिकारी, उस वित्तीय वर्ष, जिस वर्ष का कर अदा नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या निविष्टि कर ज़मा रक़म गलत तरीके से लिया गया है या उपयोग किया गया है, उस वित्तीय वर्ष से संबंधित वर्ाषिक विवरणी प्रस्तुत करने के देय दिनांक से बयालिस महीने के भीतर प्रतिदाय दिये गये उप-धारा (१) के अधीन नोटीस जारी करेगा।

(३) उप-धारा (१) के अधीन किसी अवधि के लिए नोटीस जारी किया गया है उस बारे में समुचित अधिकारी कर के लिये उत्तरदायी व्यक्ति पर, उप-धारा (१) के अधीन आनेवाली कर अवधि से अन्य ऐसी अवधि के लिये कर अदा न किये गये या कम अदा किये गये या गलती से प्रतिदाय किये गये या गलती से लिये गये या उपयोग किये गये निविष्टि कर ज़मा रक़म कर ब्यौरेवार अन्र्तविष्ट विवरण तामिल करेगा ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ ७ (४) ऐसे विवरण की तामिल करने पर उप-धारा (१) के अधीन ऐसे व्यक्ति पर नोटीस तामिल की गई समझी जायेगी, जो इस शर्त के अध्यधीन कि, उप-धारा (१) के अधीन आनेवाली ऐसी कर अवधियों से अन्य ऐसी कर अवधियों के लिए जिन आधारों पर विश्वास किया गया है वे वहीं हैं जो पूर्वतर नोटीस में उल्लिखित है ।

(५) जहाँ कोई कर, जो अदा नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या गलत तरीके से प्रतिदाय किया गया है, या जहाँ निविष्टि कर ज़मा रक़म का गलत तरीके से गयी है या उपयोग किया है, के मामले में शास्ति,----

(एक) कर से बचने के लिए धोखाधडी या जानबूझकर किया गया गलत बयान या तथ्यों को छिपाने के अलावा किसी अन्य कारण से ऐसे व्यक्ति से देय कर के दस प्रतिशत या दस हजार रुपये जो भी अधिक हो, के समान होगा ;

(दो) कर से बचने के लिए धोखाधडी या कोई जानबूझकर किया गया गलत बयान या तथ्यों को छिपाने के कारण ऐसे व्यक्ति से देय कर के समान होगा ;

(६) समुचित अधिकारी अभ्यावेदन का विचार-विर्मश करने के पश्चात् कर प्रभार्य व्यक्ति यदि कोई हो, ऐसे व्यक्ति से देय कर की रक़म, ब्याज और शास्ति की रक़म विनिश्चित करेगा और वैसा आदेश जारी करेगा । (७) समुचित अधिकारी उप-धारा (२) में विर्िनदिष्ट नोटीस के जारी करने दिनांक से बारह महीने के भीतर उप-धारा (६) के अधीन आदेश जारी करेगा :

परंतु, जहाँ समुचित अधिकारी विर्िनदिष्ट अवधि के भीतर आदेश जारी करने के लिए समर्थ नहीं हैं वहाँ आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी की श्रेणी के वरिष्ठ परंतु राज्य संयुक्त कर आयुक्त की श्रेणी से अनिम्न श्रेणी से न हो, उप-धारा (६) के अधीन आदेश के जारी होने में विलंब के लिए कारणों ध्यान में रखते हुए, जिसे विर्िनदिष्ट अवधि के अवसित होने के पूर्व लिखित में अभिलिखित करते हुए उक्त अवधि को अधिकतम छह महीने के लिये आगे बढ़ा सकेगा ।

(८) कर से प्रभार्य व्यक्ति जहाँ कोई कर अदा नहीं किया गया है या कम कर अदा किया गया है या गलत तरीके से प्रतिदाय किया गया है या जहाँ निविष्टि कर ज़मा रक़म गलत तरीके से ली गयी है या कर से बचने के लिए धोखाधडी या जानबूझकर गलत बयान या तथ्यों को छिपाने के किसी कारण के अलावा किसी अन्य कारण से उपयोग किया गया है, वह---

(एक) उप-धारा (१) के अधीन नोटीस तामिल करने के पूर्व, ऐसे कर के अपने स्वअभिनिश्चयन के आधार पर या समुचित प्राधिकारी द्वारा यथा अभिनिश्चयीत कर की रक़म धारा ५० के अधीन देय ब्याज के साथ की रक़म अदा कर सकेगा, और ऐसे अदायगी का लिखित रूप में समुचित अधिकारी को जानकारी देगा, और समुचित अधिकारी, ऐसी जानकारी की प्राप्ति पर इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन इस प्रकार अदा कर या या देय कोई शास्ति के संबंध में, उप-धारा (१) के अधीन कोई नोटीस या, यथास्थिति, उप-धारा (३) के अधीन कोई विवरणी तामिल नहीं करेगा ;

(दो) धारा ५० के अधीन देय ब्याज के साथ उक्त कर कारण दर्शाओ नोटीस के जारी होने के दिनांक से साठ दिनों के भीतर अदा कर सकेगा, और इसप्रकार कर अदा करने पर कोई शास्ति देय नहीं होगी तथा उक्त नोटीस के संबंध में सभी कार्यवाहियाँ समाप्त हो चुकी ऐसा समझा जायेगा । (९) कर से प्रभार्य व्यक्ति, जहाँ कोई कर अदा नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या गलती से कर का प्रतिदाय किया गया है या निविष्टि कर ज़मा रक़म गलत तरीके से ली गयी है या कर से बचने के लिए धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत बयान किया गया है या तथ्यों को छिपाया गया है तो करप्रभार्य व्यक्ति,----

(एक) उप-धारा (१) के अधीन नोटीस तामिल करने के पूर्व, धारा ५० के अधीन देय ब्याज के साथ कर की रक़म और ऐसे कर के उसके स्वअभिनिश्चयन या समुचित अधिकारी द्वारा यथा अभिनिश्चयन के आधार पर कर पर ऐसे कर के पचास प्रतिशत की समान शास्ति अदा कर सकेगा८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ और ऐसी अदायगी का लिखित में समुचित अधिकारी को जानकारी देगा, तथा ऐसी जानकारी की प्राप्ति पर समुचित अधिकारी इस अधिनियम के उपबंधों या तद्धीन बनाए गए नियमों के अधीन इस प्रकार अदा कर या देय शास्ति के संबंध में उप-धारा (१) के अधीन कोई नोटीस तामिल नहीं करेगा ;

(दो) धारा ५० के अधीन देय ब्याज के साथ उक्त कर अदा करेगा और सूचना जारी करने के साठ दिनों के भीतर ऐसे कर के पच्चीस प्रतिशत की समान शास्ति की अदायगी करेगा, और इस प्रकार अदायगी करने पर, उक्त नोटीस के संबंध में सभी कार्यवाहियाँ की गई है ऐसा समझा जायेगा । (तीन) धारा ५० के अधीन समतुल्य उसपर देय ब्याज के साथ कर अदा करेगा तथा ऐसे कर के पचास प्रतिशत की समतुल्य शास्ति अदा करने के आदेश की संसूचना के साठ दिनां के भीतर अदा करेगा और इसप्रकार अदा करने पर उक्त नोटीस के संबंध में सभी कार्यवाहियाँ समाप्त हो गयी है ऐसा समझा जायेगा ।

(१०) जहाँ समुचित अधिकारी की राय यह है कि, उप-धारा (८) के खण्ड (एक) या उप-धारा (९) के खण्ड (एक) के अधीन अदा की गई रक़म वास्तविक में देय रक़म से कम है, वहाँ ऐसी रक़म के संबंध में उप-धारा (१) में यथा उपबंधित नोटीस जारी करने की कार्यवाही करेगा जो वास्तव में देय रक़म से कम है ।

(११) उप-धारा (८) के खण्ड (एक) या खण्ड (दो) में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (५) के खण्ड (एक) के अधीन शास्ति देय होगी वहाँ स्व-निर्धारित कर की कोई रक़म या कर के रूप में संग्रहीत कोई रक़म ऐसे कर के देय दिनांक से तीस दिनों की अवधि के भीतर अदा नहीं की गई है ।

(१२) इस धारा के उपबंध वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से संबंधित कर का विनिश्चियण करने के लिए लागू होंगे । स्पष्टीकरण १.----इस धारा के प्रयोजनों के लिए,----

(एक) ""उक्त नोटीस के संबंध में सभी कार्यवाहियाँ"" अभिव्यक्ति में धारा १३२ के अधीन की कार्यवाहियाँ सम्मिलित नहीं होगी ;

(दो) जहाँ समान कार्यवाहियों के अधीन नोटिस कर अदा करने के लिये दायी मुख्य व्यक्ित और कुछ अन्य व्यक्ितयों को जारी की गयी है और मुख्य व्यक्ित के विरुद्ध ऐसी कार्यवाहियाँ इस धारा के अधीन समाप्त की गयी है, के बारे में धारा १२२ और १२५ के अधीन शास्ति अदा करने के लिये दायी सभी व्यक्ित के विरुद्ध कार्यवाहियाँ समाप्त हुई है ऐसा समझा जायेगा।

स्पष्टीकरण (२).----इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ""दमन"" अभिव्यक्ति का तात्पर्य, कोई करादेय व्यक्ति इस अधिनियम या तद्धीन बनाए नियमों के अधीन प्रस्तुत विवरण, कथन, रिपोर्ट या कोई अन्य दस्तावेज में उन तथ्यों या जानकारी की घोषणा घोषित करने की आवश्यकता होती है, वह तथ्यों या जानकारी की घोषणा न करने, या समुचित अधिकारी द्वारा, उसे लिखित में किसी जानकारी के लिए पूछने पर उसे प्रस्तुत करने में असफल होता है, से है ।""।

२९. मूल अधिनियम की धारा ७५ की,----

(१) उप-धारा (१) में, ""धारा ७४"" शब्द और अंकों के पश्चात्, ""या धारा ७४-क की, उप- सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ७५ में संशोधन । धारा (२) और (७)"" में शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ;

(२) उप-धारा (२) पश्चात् निम्न उप-धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात्, :---

""(२क) जहाँ कोई अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय यह निष्कर्ष निकालता है कि, धारा ७४क की उप-धारा (५) के, खण्ड (दो) के अधीन की शास्ति इस कारण लगाने योग्य नहीं है कि, कर से बचने के लिए धोखाधड़ी या जानबूझकर मिथ्या कथन या तत्थ्यों को छिपाने का आरोप उस व्यक्ति के विरूद्ध सिद्ध नहीं हुआ है जिसे यह नोटीस जारी किया गया था । वहाँ ऐसे व्यक्ति द्वारा धारा ७४क की, उप-धारा (५) के खण्ड (एक) के अधीन ऐसी शास्ति देय होगी ।"";

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ ९

(३) उप-धारा (१०) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी, अर्थात्, :---

""(१०) न्यायनिर्णयन की कार्यवाहियाँ समाप्त हो गई ऐसा समझा जायेगा, यदि आदेश धारा ७३ की, उप-धारा (१०) या धारा ७४ की, उप-धारा (१०) या धारा ७४क की, उप-धारा (७) में विर्िनदिष्ट अवधि के भीतर जारी नहीं हुआ है । "" ;

(४) उप-धारा (११) में, ""धारा ७४"" शब्द और अंकों के पश्चात् ""या धारा ७४क की, उप-धारा (७)"" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर निविष्ट किये जायेंगे ;

(५) उप-धारा (१२) में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात्, ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ;

(छह) उप-धारा (१३) में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात्, ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

३०. मूल अधिनियम की धारा १०४ की, उप-धारा (१) के स्पष्टीकरण में, ""धारा ७४"" शब्द और अंकों के पश्चात्, ""या ७४क की, उप-धारा (२) और (७)"" शब्द, कोष्ठक, अंक और अक्षर जोड़े जायेगें ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०४ में संशोधन । ३१. मूल अधिनियम की धारा १०७ की,----

(एक) उप-धारा (६) के खण्ड (ख) में, ""पच्चीस करोड़"" शब्दों के स्थान में ""बीस करोड़""

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०७ में संशोधन । शब्द रखे जायेंगे ;

(दो) उप-धारा (११) के द्वितीय परंतुक में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंकों के पश्चात्, ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर जोड़े जायेंगे ।

३२. मूल अधिनियम की धारा १०९ में, ""पुनरीक्षण प्राधिकारी"" शब्दों के पश्चात् ""या धारा १७१ की, उप-धारा (२) में र्िनदिष्ट मामलों की जाँच या न्यायानिर्णयन करने के लिये, यदि उक्त धारा के अधीन ऐसा अधिसूचित किया गया हो"" शब्द निविष्ट किये जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १०९ में संशोधन । ३३. मूल अधिनियम की धारा ११२ में,----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा ११२ में संशोधन । (१) उप-धारा (१) में, ""अपील किये जानेवाले व्यक्ित को जिस आदेश के विरुद्ध अपील की जानेवाली है, ऐसा आदेश उसे संसूचित किये जाने के दिनांक से"" शब्दों के पश्चात्, ""या वह दिनांक जिसे इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के समक्ष अपील दायर करने के लिए, परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए, जो भी बाद का हो,"" शब्द निविष्ट किए जायेंगे, और १ अगस्त २०२४ से निविष्ट किये गये समझे जायेंगे ;

(२) उप-धारा (३) में, ""उस दिनांक से जिस पर उक्त आदेश पारित किया गया है"" शब्दों के पश्चात्, ""या ; वह दिनांक जिसे इस अधिनियम के अधीन अपील अधिकरण के समक्ष आवेदन दाखिल करने के प्रयोजन के लिए परिषद की सिफारिश पर सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाए,"" शब्द निविष्ट किए जायेंगे और १ अगस्त २०२४ से निविष्ट किये गये समझे जायेंगे ;

(३) उप-धारा (६) में, ""उप-धारा (१) में र्िनदिष्ट अवधि अवसित होने के पश्चात्"" शब्दों, कोष्ठकों और अंकों के पश्चात्, ""या उप-धारा (३) में र्िनदिष्ट अवधि अवसित होने पश्चात् तीन महीने के भीतर आवेदन दाखिल करने की अनुमति"" शब्द, कोष्ठक और अंक निविष्ट किए जायेंगे ;

भाग सात-३२-----२१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ (४) उप-धारा (८) के खण्ड (ख) में,----

(क) ""बीस प्रतिशत"" शब्दों के स्थान में, ""दस प्रतिशत"" शब्द रखे जायेंगे ;

(ख) ""पचास करोड़ रुपयों"" शब्दों के स्थान में, ""बीस करोड़ रुपयों"" शब्द रखे जायेंगे । ३४. मूल अधिनियम की धारा १२२ की, उप-धारा (१ख) में, ""कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक जो"" शब्दों के स्थान में, ""कोई इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य प्रचालक, जो धारा ५२ के अधीन स्रोत पर कर संग्रहण करने के लिए दायी है"" शब्द और अंक रखे जायेंगे और १ अक्तूबर २०२३ से रखी गयी समझी जायेगी । सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १२२ में संशोधन ।

३५. (१) मूल अधिनियम की धारा १२२ के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :---

सन् २०१७ का महा. ४३ में धारा १२२ का निवेशन ।

""१२२क. इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ कोई व्यक्ति, जो वस्तुअों के विनिर्माण में जुड़े है जिसके संबंध में मशीनों का रजिस्ट्रेशन करने से संबंधित कोई विशेष प्रक्रिया धारा १४८ के अधीन अधिसूचित की गई है, उक्त विशेष प्रक्रिया के उल्लंघन में कार्य करता है, तो वह अध्याय पंद्रह या इस अध्याय के किन्ही अन्य उपबंधों के अधीन कोई शास्ति जो उसके द्वारा अदा की है या देय है, के अतिरिक्त, इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत न किए गए प्रत्येक मशीन के लिए एक लाख रुपयों की रक़म के समान शास्ति अदा करने के लिए दायी होगा ।

विशेष प्रक्रिया के अनुसार वस्तुअों के विनिर्माण में उपयोगी कतिपय मशीनों का रजिस्ट्रीकरण करने में असफल होने पर शास्ति ।

(२) उप-धारा (१) के अधीन शास्ति के अतिरिक्त, इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत न किया गया प्रत्येक मशीन अभिग्रहण करने और ज़ब्त करने के लिए दायी होगा :

परंतु, ऐसा मशीन जब्त नहीं की जायेगी,----

(क) इस प्रकार अधिरोपित शास्ति अदा की है ; और

(ख) ऐसे मशीन का रजिस्ट्रीकरण, शास्ति के आदेश की संसूचना की प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर विशेष प्रक्रिया के अनुसरण में की है ।""।

३६. मूल अधिनियम की धारा १२७ में, ""धारा ७३ या धारा ७४"" शब्दों और अंको के पश्चात्, ""या धारा ७४क"" शब्द, अंक और अक्षर निविष्ट किए जायेंगे ।

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १२७ में संशोधन ।

३७. मूल अधिनियम की धारा १२८ के पश्चात्, निम्न धारा निविष्ट की जायेगी, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ में नई धारा १२८क का निवेशन ।

""१२८क. (१) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट उल्लंघन में किसी बात के होते हुए भी, जहाँ कर की कोई रक़म प्रभार्य व्यक्ति द्वारा देय है के अनुसरण में,----

(क) धारा ७३ की, उप-धारा (१) के अधीन जारी की गयी नोटीस या धारा ७३ की, उप-धारा (३) के अधीन जारी की गयी विवरणी और जहाँ धारा ७३ की, उप-धारा (९) के अधीन कोई आदेश जारी नहीं किया हैं ; या

कतिपय कर अवधियों के किये धारा ७३ के अधीन उठाई गयी मांगों से संबंधित ब्याज या शास्ति या दोनों से छूट ।

(ख) धारा ७३ की, उप-धारा (९) के अधीन पारित कोई आदेश और जहाँ धारा १०७ की, उप-धारा (११) या धारा १०८ की, उप-धारा (१) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया है ; या

(ग) धारा १०७ की, उप-धारा (११) या धारा १०८ की, उप-धारा (१) के अधीन पारित कोई आदेश और जहाँ धारा ११३ की, उप-धारा (१) के अधीन कोई आदेश पारित नहीं किया है,महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ ११ १ जुलाई २०१७ से ३१ मार्च २०२० की अवधि से या उसके भाग संबंधित है, और के अनुसरण में संदाय किया जायेगा और उक्त व्यक्ति, परिषद की सिफारिशों पर सरकार द्वारा जिसे अधिसूचित किया जाए ऐसे दिनांक पर या के पूर्व खण्ड (क), खण्ड (ख) या, यथास्थिति, खण्ड (ग) में र्िनदिष्ट नोटीस या विवरणी या आदेश के अनुसार देय कर की संपूर्ण रक़म अदा करेगा, धारा ५० के अधीन कोई ब्याज और इस अधिनियम के अधीन कोई शास्ति देय नहीं होगी और उक्त नोटीस, विवरणी या, यथास्थिति, आदेश के संबंध में सभी कार्यवाहीयाँ जैसा कि विहित किया जाए, ऐसी शर्तों के अध्यधीन समाप्त हुई ऐसा समझा जायेगा :

परंतु, जहाँ धारा ७४ की, उप-धारा (१) के अधीन नोटीस जारी की गयी है और आदेश धारा ७५ की, उप-धारा (२) के उपबंधों के अनुसरण में अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निर्देशन के अनुसरण में समुचित अधिकारी द्वारा पारित है या पारित किए जाने की आवश्यकता है, उक्त नोटीस या आदेश इस उप-धारा के खण्ड (क) या खण्ड (ख) में र्िनदिष्ट नोटीस या, यथास्थिति, आदेश के रूप में समझा जायेगा :

परंतु आगे यह कि, जहाँ कोई कार्यवाहियाँ, खण्ड (ख) या खण्ड (ग) में र्िनदिष्ट आदेश के विरुद्ध या प्रथम परंतुक में र्िनदिष्ट अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय के निदेशन के विरुद्ध धारा १०७ की, उप-धारा (३) या धारा ११२ की, उप-धारा (३) के अधीन आवेदन दायर किया है या धारा ११७ की, उप-धारा (१) या धारा ११८ की, उप-धारा (१) के अधीन राज्य कर अधिकारी द्वारा अपील दायर किया गया है या धारा १०८ की, उप-धारा (१) के अधीन शुरू की है के मामले में, इस शर्त के अध्यधीन कि, उक्त व्यक्ति, अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या न्यायालय या, यथास्थिति, पुनरीक्षण प्राधिकारी के आदेश के अनुसरण में, उक्त आदेश के दिनांक से तीन महीनेे के भीतर देय कर की अतिरिक्त रक़म, यदि कोई है, तो अदा करेगा, इस उप-धारा के अधीन की कार्यवाहियाँ समाप्त होगी :

परंतु, यह भी कि, जहाँ ऐसा ब्याज और शास्ति पहले से ही अदा की गई है तो उसका प्रतिदाय उपलब्ध नहीं होगा ।

(२) उप-धारा (१) में अंर्तविष्ट कोई बात, गलत प्रतिदाय के कारण व्यक्ति द्वारा देय कोई रक़म के संबंध में लागू नहीं होगी ।

(३) उप-धारा (१) में अंर्तविष्ट कोई बात, जहाँ उक्त व्यक्ति द्वारा दायर अपील या रिट याचिका अपील प्राधिकारी या अपील अधिकरण या, यथास्थिति, न्यायालय के समक्ष लंबित है, और उप-धारा (१) के अधीन अधिसूचित दिनांक पर या के पूर्व उक्त व्यक्ति द्वारा वापस नहीं की गई है के मामले के संबंध में लागू नहीं होगी ।

(४) इस अधिनियम में अंर्तविष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ उप-धारा (१) के अधीन विर्िनदिष्ट कोई रक़म संदत्त की गई है और उक्त उप-धारा के अधीन कार्यवाहियाँ समाप्त की गई ऐसा समझा गया है तो उप-धारा (१) के खण्ड (ख) या, यथास्थिति, खण्ड (ग) में र्िनदिष्ट आदेश के विरुद्ध धारा १०७ की उप-धारा (१) या धारा ११२ की, उप-धारा (१) के अधीन कोई अपील दायर नहीं की जायेगी ।""।

३८. मूल अधिनियम की धारा १७१ की,----

(१) उप-धारा (२) में निम्न परंतुक और स्पष्टीकरण जोड़ा जायेगा, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ की धारा १७१ में संशोधन । ""परन्तु, सरकार परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचना द्वारा वह दिनांक विर्िनदिष्ट कर सकेगी जिसे उक्त प्राधिकारी रजिस्टि्रकृत व्यक्ति द्वारा चाहे वह निविष्टि कर ज़मा रक़म का लाभ उठाने के परीक्षण के लिये किसी अनुरोध को स्वीकार नहीं करेगा या वास्तव में उसके द्वारा आपर्ूति की गयी वस्तुअों या सेवाअों या दोनों की मूल्य मे समानुपातिक कटौती कर दर में कटौती का नतिजा है ।

भाग सात-३२-----२अ१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ स्पष्टीकरण.----इस उप-धारा के प्रयोजनों के लिये ""परिक्षण करने के लिये अनुरोध"" का तात्पर्य किसी रजिस्टि्रकृत व्यक्ति द्वारा चाहे वह निविष्टि कर ज़मा रक़म या कर दर में कटौती के परिणाम स्वरूप परीक्षण करने के लिए किसी आवेदक के अनुरोध पर दायर लिखित आवेदन उसके द्वारा की गयी आपर्ूति वस्तुअों या सेवाअों या दोनों के मूल्य में समानुपातिक कटौती का नतीजा है, से है ।"";

(२) विद्यमान स्पष्टीकरण उसके स्पष्टीकरण १ के रूप मे पुन:क्रमांकित किया जायेगा और इस प्रकार पुन:क्रमांकित स्पष्टीकरण १ के पश्चात्, निम्न स्पष्टीकरण जोडा जायेगा, अर्थात् :----

""स्पष्टीकरण २.---इस धारा के प्रयोजन के लिए, ""प्राधिकरण"" अभिव्यक्ति में अपील अधिकरण सम्मिलित है ।""।

३९. मूल अधिनियम से संलग्न अनुसूचि तीन में परिच्छेद ८ के पश्चात् और स्पष्टीकरण १ के पूर्व निम्न परिच्छेद जोड़ा जायेगा, अर्थात् :----

सन् २०१७ का महा. ४३ की अनुसूचि तीन में संशोधन ।

""९. सह-बीमा करारों में सह-बीमा अधिमूल्य में बीमाकृत को मुख्य बीमाकर्ता और सह-बीमाकर्ता द्वारा संयुक्त रूप से आपर्ूति की गई बीमा सेवाअों के लिए मुख्य बीमाकर्ता द्वारा सह- बीमाकर्ता को सह-बीमा अधिमूल्य के बंटवारे की गतिविधि, इस शर्त के अध्यधीन कि, मुख्य बीमाकर्ता बीमाकृत व्यक्ति द्वारा अदा किए गए अधिमूल्य की संपूर्ण रक़म पर केंद्रीय कर, राज्य कर, संघराज्य क्षेत्र कर और एकीकृत कर अदा कर सकेगा ।

१०. बीमाकर्ता द्वारा पुनर्बीमाकर्ता को दी गई सेवाएँ, जिनके लिए बीमाकर्ता द्वारा पुनर्बीमाकर्ता को अदा किए गए पुनर्बीमा अधिमूल्य से अधित्याग कमीशन या पुनर्बीमा कमीशन काटा जाता है, इस शर्त के अध्यधीन कि, केंद्रिय कर, राज्य कर, संघराज्य क्षेत्र कर और एकीकृत कर बीमाकर्ता द्वारा पुनर्बीमाकर्ता को देय कुल पुनर्बीमा अधिमूल्य पर अदा किया जाता है, जिसमें उक्त अधित्याग कमीशन या पुनर्बीमा कमीशन शामिल है ।""।

४०. सभी अदा किये गये कर या, पुनरीक्षित निविष्टि कर ज़मा रक़म का प्रतिदाय नहीं होगा जो इस प्रकार अदा नहीं किया गया है या पुनरीक्षित नहीं किया गया है, इस अध्यादेश की धारा ७ सभी तात्विक समयों पर प्रवर्तन में बनी रही थी ।

अदा कर या पुनरीक्षित निविष्टि कर ज़मा रक़म का प्रतिदाय नहीं होगा ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ १३

व्यक्तव्य

वस्तु और सेवा कर परिषद द्वारा अपने बैठक में वस्तु और सेवा कर विधियों में संशोधन करने की आवश्यकता से संबंधित विभिन्न निर्णय लिये गये हैं। तद्नुसार, वित्त अधिनियम, २०२४ (सन् २०२४ का ८) और वित्त (क्रमांक २) अधिनियम, २०२४ (सन् २०२४ का १५) द्वारा केंद्रिय वस्तु और सेवा कर, २०१७ (सन् २०१७ का १२) में संसद द्वारा से संशोधित किया गया है। उपयर्ुक्त बैठकों में वस्तु और सेवा कर परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का कार्यान्वयन करने और केंद्रिय वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ और महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ (सन् २०१७ का महा. ४३) के उपबंधों को लागू करने में एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से, महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में संशोधन करना इष्टकर है। २. महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ के प्रस्तावित संशोधन अन्य बातों के साथ निम्न के लिए उपबंध करते हैं, अर्थात् :—

(एक) धारा २ की, उप-धारा (६१) की प्रतिस्थापित करना है, ताकि मुख्य कार्यालय द्वारा, तीसरे पक्ष से प्राप्त की गयी निविष्टि सेवा प्रक्रिया के संबंध में निविष्टि कर ज़मा रक़म के वितरण के लिये निविष्टि सेवा वितरक प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जा सके परंतु, मुख्य कार्यालय और शाखा कार्यालय या दोनों या अनन्य रूप से एक या अधिक शाखा कार्यालयों के लिये जिम्मेवार माना जा सकेगा ;

(दो) धारा ९ में संशोधन करना हैं, ताकि मानव उपभोग के लिए अल्कोहल युक्त शराब के निर्माण करने के लिए उपयोग किये जानेवाले असंक्रमित अतिरिक्त अल्कोहल या परिशोधित स्पिरिट पर राज्य कर उद्ग्रहीत नहीं किया जा सके ;

(तीन) धारा ११क को निविष्ट करना है, ताकि सरकार को राज्य कर के गैर-उद्ग्रहण या कम उद्ग्रहण को नियमित करने की शक्ित मिल सके, जहाँ वह समाधानी है कि, ऐसा गैर-उद्ग्रहण या कम उद्रग्रहण सामान्य व्यवहार का परिनाम था ;

(चार) धारा १३ की, उप-धारा (३) में संशोधन करना है, ताकि सेवाअों में आपर्ूति का समय विर्िनदिष्ट किया जा सके, जिस मामले में संरक्षित प्रभार आपर्ूति के मामलों में सेवाअों के प्राप्तकर्ता द्वारा बीज़क जारी किया जाना आवश्यक है ;

(पाँच) धारा १६ की, उप-धारा (५) निविष्ट करना है, ताकि विद्यमान उप-धारा (४) के लिये अपवाद बनाया जा सके और यह उपबंध किया जा सके कि, उक्त उप-धारा के अधीन बीजक या नामे नोट के संबंध में, वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१९, २०१९-२० और २०२०-२१ के लिए रजिस्ट्रीकृत व्यक्ित धारा ३९ के अधिन कोई विवरणी में निविष्ट कर ज़मा रक़म लेने के लिए हकदार होगा, जिसे तीस नवम्बर २०२१ तक दायर किया जायेगा ;

(छह) धारा १७ की, उप-धारा (५) में संशोधन करना है, ताकि केवल वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की माँगों के लिए, उक्त अधिनियम की धारा ७४ के अधीन अदा किये गये कर के संबंध में निविष्ट कर ज़मा रक़म की अनुपलब्धता को निबर्ंधित किया जा सके ;

(सात) धारा ३० की, उप-धारा (२) में नवीन परन्तुक निविष्ट करना है, ताकि रजिस्ट्रीकरण का रद्दकरण प्रतिसंहरन करने के लिए शर्तें और निबर्ंधन विहित करने के लिए राज्य सरकार को, सशक्त किया जा सके ;

(आठ) धारा ३९ की, उप-धारा (३) में संशोधन करना है, ताकि चाहे कोई कटौती उक्त महीने में की गयी है या नहीं की गयी है के बावजूद स्रोत में कर कटौती करने के लिये आवश्यक रजिस्टि्रकृत व्यक्ित द्वारा प्रत्येक महीने के लिये विवरणी इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रस्तुत करना अनिवार्य किया जा सके ;

(नौ) धारा ७० की, उप-धारा (१क) निविष्ट करना है, ताकि उक्त अधिकारी द्वारा जारी समन के अनुपालन में समुचित अधिकारी के समक्ष, समन प्राप्त हुए व्यक्ित की ओर से उपस्थित होने के लिए प्राधिकृत प्रतिनिधि को समर्थ किया जा सके ;

१४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६

(दस) धारा ७३ की, उप-धारा (१२) निविष्ट करना है, ताकि वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर का विनिश्चयन करने के लिए उक्त धारा की लागू करना निबर्ंधित किया जा सके।

(ग्यारह) धारा ७४ की उप-धारा (१२) निविष्ट करना है, ताकि वित्तीय वर्ष २०२३-२४ तक की अवधि से संबंधित कर का विनिश्चयन करने के लिए, उक्त धारा को लागू करना निबर्ंधित किया जा सके ;

(बारह) धारा ७४क को निविष्ट करना है, ताकि वित्तीय वर्ष २०२४-२५ से संबंधित कर अदा नहीं किया गया है या कम अदा किया गया है या गलत तरीके से प्रतिदाय किया गया है या किसी कारण के लिए निविष्टि कर ज़मा रक़म का गलत तरीके से ला गयी है या उपयोग किया गया है, का विनिश्चयन करने के लिए उपबंध किया जा सके ;

(तेरह) धारा १०७ की, उप-धारा (६) में संशोधन करना है, ताकि अपील प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर करने के लिए राज्य कर में पूर्व-निक्षेप की अधिकतम रकम पच्चीस करोड़ रुपयों से बीस करोड़ रुपयों तक घटाई जा सके ;

(चौदह) धारा १०९ में संशोधन करना है, ताकि सरकार को अपील अधिकरण द्वारा सुनवाई किये जानेवाले उस मामलों के प्रकार अधिसूचित करने के लिए सशक्त किया जा सके ;

(पंद्रह) धारा ११२ की उप-धारा (१) और (३) में संशोधन करना है, ताकि सरकार को अपील अधिकरण के समक्ष अपील दायर करने के लिए दिनांक अधिसूचित करने और अपील अधिकरण के समक्ष अपील या आवेदन दायर करने के लिए, पुनरीक्षित समय-सीमा के उपबंध करने के लिए सशक्त किया जा सके ;

(सोलह) धारा ११२ की, उप-धारा (८) में संशोधन करना है, ताकि अपील अधिकरण के समक्ष अपील दायर करने के लिए पूर्व-निक्षेप की अधिकतम रकम विवाद में विद्यमान कर के बीस प्रतिशत से दस प्रतिशत तक घटाने और राज्य कर में पूर्व-निक्षेप के रूप में देय अधिकतम रकम भी पचास करोड़ रुपयों से बीस करोड़ रुपयों तक घटाई जा सके ;

(सत्रह) धारा १२२ की, उप-धारा (१ख) में संशोधन करना है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य परिचालकों, जो उक्त अधिनियम की धारा ५२ के अधीन स्रोत में कर संग्रहण करना आवश्यक है, को उक्त उप-धारा लागू करना निबर्ंधित किया जा सके।

(अठारह) धारा १२२क को निविष्ट करना है, ताकि धारा १४८ के अधीन अधिसूचित विशेष प्रक्रिया के उल्लंघन में कृत्य करने के इस प्रकार रजिस्ट्रीकृत न किए गए किसी मशीन के लिए एक लाख रुपयों की, शास्ति का प्रावधान उपबंधित किया जा सके ;

(उन्नीस) धारा १२८क को निविष्ट करना है, ताकि गलती से प्रतिदाय होने के संबंध में माँग नोटीस को छोडकर वित्तीय वर्ष २०१७-१८, २०१८-१९ और २०१९-२० के लिए उक्त अधिनियम की धारा ७३ के अधीन जारी माँग नोटीस के संबंध में ब्याज और शास्ति का सशर्तत्यजन करने के उपबंध किया जा सके ;

(बीस) धारा १७१ की, उप-धारा (२) में संशोधन करना है, ताकि सरकार को, वह दिनांक अधिसूचित करने के लिए सशक्त किया जा सके जिससे उक्त धारा के अधीन प्राधिकरण मुनाफाखोरी रोधी मामलों के लिए कोई आवेदन स्वीकार नही करेंगा ;

(ईक्कीस) अनुसूचि तीन में परिच्छेद ९ और १० को निविष्ट करना ;

महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, ऑक्टोबर ११, २०२४/आश्िवन १९, शके १९४६ १५

(बाईस) धारा १० की, उप-धारा (५), धारा २१, धारा ३५ की, उप-धारा (६), धारा ४९ की उप-धारा (८), धारा ५० की, उप-धारा (१), धारा ५१ की, उप-धारा (७), धारा ६१ की, उप-धारा (३), धारा ६२ की, उप-धारा (१), धारा ६३, धारा ६४ की, उप-धारा (२), धारा ६५ की, उप-धारा (७), धारा ६६ की, उप-धारा (६), धारा ७५, धारा १०४ की, उप-धारा (१), धारा १०७ की, उप-धारा (११) और १२७ में संशोधन करना है, ताकि प्रस्तावित नई धारा ७४क के संदर्भ निगमित कर सके।

(३) चूँकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा है और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका है कि, ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण उन्हें इसमें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र वस्तु और सेवा कर अधिनियम, २०१७ में अधिकतर संशोधन करने के लिए सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ है, अत: यह अध्यादेश प्रख्यापित किया जाता है।

मुंबई,

सी. पी. राधाकृष्णन,

दिनांकित ६ अक्तूबर २०२४।

महाराष्ट्र के राज्यपाल।

महाराष्ट्र के राज्यपाल के आदेश तथा नाम से,

ओम प्रकाश गुप्ता,

सरकार के अपर मुख्य सचिव।

(यथार्थ अनुवाद)

विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।

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