महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष १०, अंक २२(२)] सोमवार, डिसेंबर १६, २०२४/अग्रहायण २५, शके १९४६ [पृष्ठे ४, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ४३
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी).
महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा में दिनांक १६ दिसंबर, २०२४ ई. को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशन किया जाता है :--
L. A. BILL No. XXIII OF 2024.
A BILL FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA MUNICIPAL COUNCILS, NAGAR PANCHAYATS AND INDUSTRIAL TOWNSHIP ACT, 1965.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक २३ सन् २०२४।
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक।
क्योंकि राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था ;
और क्योंकि महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था कि, ऐसी परिस्थितियाँ विद्यमान थीं जिनके कारण उन्हें इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिए, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था ; और, सन् १९६५ का महा. ४०।
भाग सात--४३-१.
(१)
एचबी--२१०७--१.
२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०२४/अग्रहायण २५, शके १९४६इसलिये, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०२४, १६ अगस्त, २०२४ को प्रख्यापित हुआ था ;
सन् २०२४ का महा. अध्या. क्र.५। और क्योंकि, उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना इष्टकर है ; इसलिये, भारत गणराज्य के पचहतरवें वर्ष में, एतदद्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है ;
१. (१) यह अधिनियम महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अधिनियम, संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भण। २०२४ कहलाये।
(२) यह १६ अगस्त २०२४ को प्रवृत्त हुआ समझा जायेगा।
सन् १९६५ का महा. ४०। २. महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (जिसे इसमें आगे "मूल अधिनियम" कहां गया है) की धारा ३४१ख-१ की उप-धारा (९) अपमर्ाजित की जायेगी और १ जनवरी २०२२ से अपमर्ाजित की गयी समझी जायेगी।
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-१ में संशोधन।
३. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-२ की, उप-धारा (६) में, " ढ़ाई वर्षों की अवधि के लिये " शब्दों के स्थान में, " पाँच वर्षों की अवधि के लिये " शब्द रखे जायेंगे और १ जनवरी २०२२ से रखे गये समझे जायेंगे।
सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-२ में संशोधन।
४. मूल अधिनियम की धारा ३४१ख-४ की,----
(१) उप-धारा (१) के स्थान में, निम्न उप-धारा रखी जायेगी और १ जनवरी २०२२ से रखी गयी सन् १९६५ का महा. ४० की धारा ३४१ख-४ में संशोधन। समझी जायेगी, अर्थात् :-----
" (१) अध्यक्ष का पदावधि पाँच वर्षों का होगा और नगर पंचायत की अवधि के साथ समाप्त होगा । ";
(२) उप-धारा (३) अपमर्ाजित की जायेगी और १ जनवरी २०२२ से अपमर्ाजित की गयी समझी जायेगी। कठिनाईयों के निराकरण की शक्ति।
५. (१) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में, यदि कोई कठिनाई उद्भूत होती है तो, राज्य सरकार, जैसा अवसर उद्भूत हो, राजपत्र में प्रकाशित किसी आदेश द्वारा इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियमों के उपबंधों से कोई बात असंगत न हो, जो उसे कठिनाई के निराकरण के प्रयोजनों के लिये आवश्यक या इष्टकर प्रतीत हो :
परंतु, इस अधिनियम के प्रारम्भण के दिनांक से दो वर्षों की अवधि अवसित होने के पश्चात् ऐसा कोई आदेश नहीं बनाया जायेगा ।
(२) उप-धारा (१) के अधीन बनाया गया प्रत्येक आदेश, उसके बनाए जाने के पश्चात्, यथा संभव शीघ्र, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जायेगा।
६. (१) महाराष्ट्र नगर परिषद औऱ नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, २०२४ एतद्द्वारा, निरसित किया जाता है ।
सन् २०२४ का महा. अध्या. क्र.५। सन् २०२४ का महा. अध्या. क्र. ५ का निरसन तथा व्यावृति। (२) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त अध्यादेश द्वारा यथा संशोशित मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत कोई बात या की गई कोई कार्यवाही, (जारी किसी अधिसूचना या आदेश समेत) इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित, मूल अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन कृत, की गई या, यथास्थिति, जारी की गई समझी जायेगी ।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०२४/अग्रहायण २५, शके १९४६ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ (सन् १९६५ का महा. ४०) में अन्र्तविष्ट नगर पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के निर्वाचनों संबंधी उपबंध, उसमें से निर्वाचित पार्षदों द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिये और ऐसे पदाधिकारियों का अवधि ढ़ाई वर्ष करने की दृष्टि से सन् २०२० का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक १२ द्वारा संशोधन किया गया है। सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ४१ के प्रारम्भण के पश्चात् लिये जानेवाले नगर पंचायतों के निर्वाचनों के संबंध में अध्यक्ष के सीधे निर्वाचन और अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का अवधि पाँच वर्षों तक करने की दृष्टि से सन् २०२२ का महाराष्ट्र अधिनियम क्रमांक ४१ द्वारा उक्त अधिनियम में तद्नंतर संशोधन किया गया है।
२. सरकार यह उपबंध करना आवश्यक समझती है कि, अप्रत्यक्ष निर्वाचित नगर पंचायतों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का अवधि भी पाँच वर्षों का होगा। इसलिये, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ की धाराएँ ३४१ख-१, ३४१ख-२ और ३४१ख-४ में यथोचित संशोधन करने का प्रस्तावित किया गया था।
३. चूंकि, राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र नहीं चल रहा था और महाराष्ट्र के राज्यपाल का यह समाधान हो चुका था कि, जिनके कारण उन्हें उपयर्ुक्त प्रयोजनों के लिये, महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, १९६५ में अधिकतर संशोधन करने के लिये, सद्य कार्यवाही करना आवश्यक हुआ था, अत: महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश २०२४, (सन् २०२४ का महा. ५) १६ अगस्त, २०२४ को प्रख्यापित हुआ था।
४. प्रस्तुत विधेयक का आशय उक्त अध्यादेश को राज्य विधानमंडल के अधिनियम में बदलना है। नागपूर,
देवेंद्र फडणवीस,
दिनांकित १५ दिसंबर, २०२४।
मुख्यमंत्री।४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, डिसेंबर १६, २०२४/अग्रहायण २५, शके १९४६
प्रत्यायुक्त विधान संबंधी ज्ञापन ।
प्रस्तुत विधेयक में, विधाय शक्ति के प्रत्यायोजनार्थ निम्न प्रस्ताव अन्तर्ग्रस्त हैं, अर्थात् :----
खंड ५ (१). इस खंड के अधीन राज्य सरकार को, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में उद्भूत किसी कठिनाई का निराकरण करने के लिये आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई है ।
२. विधायी शक्ति के प्रत्यायोजन के लिए उपरोलिखित प्रस्ताव सामान्य स्वरुप का है ।
(यथार्थ अनुवाद),
विजया ल. डोेनीकर,
भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
विधान भवन, नागपूर, दिनांकित : १६ दिसंबर, २०२४।
जितेंद्र भोळे, सचिव (१) (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा।
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