RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधारण भाग सात
वर्ष ११, अंक ६] गुरुवार, मार्च २०, २०२५/फाल्गुन २९, शके १९४६ [पृष्ठे ३, किंमत : रुपये ४७.००
असाधारण क्रमांक ८
प्राधिकृत प्रकाशन
अध्यादेश, विधेयके व अधिनियम यांचा हिंदी अनुवाद (देवनागरी लिपी)
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महाराष्ट्र विधानमंडळ सचिवालय
महाराष्ट्र विधानसभा मेंे दिनांक २० मार्र्च, २०२५ ई.को. पुर:स्थापित निम्न विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा नियम ११७ के अधीन प्रकाशित किया जाता है :----
L. A. BILL No. XXV OF 2025.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PUBLIC TRUSTS ACT.
विधानसभा का विधेयक क्रमांक २५ सन् २०२५।
महाराष्ट्र लोक न्यास अधिनियम में अधिकतर संशोधन करने संबंधी विधेयक ।
सन् १९५० का महा. २९।
क्योंकि इसमें आगे र्दशित प्रयोजनों के लिए, महाराष्ट्र लोेक न्यास अधिनियम में अधिकतर संशोधन करना इष्टकर है; अत: भारत गणराज्य के छिहत्तरवें वर्ष में, एतद्द्वारा, निम्न अधिनियम अधिनियमित किया जाता है :–
१. (१) यह अधिनियम, महाराष्ट्र लोक न्यास (संशोधन) अधिनियम, २०२५ कहलाए। संक्षिप्त नाम।
(१)
भाग सात-८---१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २०, २०२५/फाल्गुन २९, शके १९४६ २. महाराष्ट्र लोक न्यास अधिनियम (जिसे इसमें आगे, " मूल अधिनियम " कहा गया है) की धारा ४१ कक की, उप धारा (४) के खण्ड (क) के, उप-खण्ड (चार) के पश्चात्, निम्न उप-खण्ड निविष्ट किए जायेंगे,
सन् १९५० का महा. २९ । सन् १९५० का महा. २९ की धारा ४१ कक में संशोधन। अर्थात् :–
" (पाँच) धारा ५८ के अधीन राज्य सरकार द्वारा लोक न्यास प्रबंधन निधि को वर्ाषिक अंशदान की अदायगी करने से छूट दी गई है;
(छह) राज्य सरकार, केंद्र सरकार या उनके अधीनस्थ या कोई स्थानीय प्राधिकरण द्वारा बिजली प्रभार, जल प्रभार, नगर निगम या स्थानीय निकाय करों की अदायगी में कोई रियायत, या छूट या शिथिलीकरण या कोई अन्य वित्तीय रियायत या छूट या शिथिलीकरण दिया गया है; "।
३. मूल अधिनियम की धारा ५८, की उप-धारा (२) में, " केवल दर्ुभिक्षता, सूखा, बाढ़, आग या अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण विपत्ति से राहत देने के प्रयोजन के लिए " शब्दों के पश्चात्, निम्न निविष्ट किया सन् १९५० का महा. २९ की धारा ५८ में संशोधन।
जायेगा, अर्थात् :–
" या लोक न्यासो, जो अस्पताल (कोई परिचारिका गृह या प्रसूति गृह समेत) चिकित्सालय या धारा ४१ कक में " चिकित्सा केंद्र " के रूप में निर्देशित चिकित्सा राहत के लिए कोई अन्य केंद्र बनाए रखता है, जिसका वर्ाषिक व्यय पाँच लाख रुपयों से अधिक है या कोई अन्य सीमा जिसे राज्य सरकार राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा समय-समय से विर्िनदिष्ट करे। "।महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधारण भाग सात, मार्च २०, २०२५/फाल्गुन २९, शके १९४६ ३
उद्देश्यों और कारणों का वक्तव्य
महाराष्ट्र लोक न्यास अधिनियम (सन् १९५० का महा. २९) यह महाराष्ट्र राज्य में सार्वजनिक, धर्ामिक और पूर्त न्यासों को विनियमित करने और उनके प्रशासन के लिए उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया है।
२. उक्त अधिनियम की धारा ४१ कक पूर्त आयुक्त और राज्य सरकार को राज्य-सहायता प्राप्त लोक न्यासों को, जिनका वर्ाषिक व्यय पाँच लाख रुपयों से अधिक है, को निदेशन जारी करने, शल्यक्रम बेड की कुल संख्या के दस प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए लागत मुफ़्त में अलग रखने और आरक्षित रखने और समाज के कमजोर वर्गों के मरिजों को रियायती दर पर शल्यक्रम बेड की कुल संख्या के दस प्रतिशत बेड़ अलग रखने और आरक्षित रखने के लिए सशक्त करते है। धारा ४१ कक के प्रयोजन के लिए, माननीय उच्च न्यायालय, मुंबई ने भी रिट याचिका (पी आय एल) क्रमांक ३१३२/२००४ में, " समाज के गरीब मरीजों और कमज़ोर वर्ग मरीज़ों को मुफ़्त और रियायती चिकित्सा इलाज के लिए योजना " अनुमोदित की है।
३. कई लोक न्यासों की, राज्य सरकार या केंद्र सरकार या कोई स्थानीय या सक्षम प्राधिकरण से, नाममात्र या रियायती दर पर, या तो स्वामित्व आधार पर या पट्टे पर या अनुमति और अनुज्ञप्ति पर नाममात्र या रियायती दर पर भूमि या भवन को मंजूरी दी है या नगरीय भूमि (धृति की अधिकतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, १९७६ के अधीन किसी रिक्त भूमि को निरंतर धारण करने में रियायत या अनुमति मिलि है; या विकास नियंत्रण नियमों से छूट, रियायत या शिथिलीकरण है; या ॠ ण या प्रतिभूति या सहायता अनुदान प्राप्त है, चाहे आवर्ती या अनावर्ती या अन्य वित्तीय सहायता, जिसके आधार पर वे " राज्य सहायता प्राप्त लोक न्यास" है ।
४. अधिनियम की धारा ५८ प्रत्येक लोक न्यास को, लोक न्यास प्रबंधन निधि को, सरकार द्वारा राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा समय-समय से जिसे अधिसूचित किया जा सके, कुल वर्ाषिक आय के पाँच प्रतिशत से अनधिक दर या दरों पर ऐसा वर्ाषिक अंशदान अदा करते हैं। परंतु, राज्य सरकार ने, धारा ५८ की, उप-धारा (२) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, बहुसंख्य लोक न्यासों, जिसके चिकित्सा राहत के प्रयोजनों के लिए पहले ऐसे वर्ाषिक अंशदान से छुट दी है। तथापि, धारा ४१ कक की, उप-धारा (४) के खण्ड (क) में यह सहायता छूट के रूप में सम्मिलित नहीं है।
५. इसलिए, राज्य सरकार लोक न्यास प्रबंधन को वर्ाषिक अंशदान की अदायगी करने से उनको राज्य सहायता के रूप में छूट की मान्यता या प्राप्ति समझना आवश्यक समझती है।
६. इसलिए, राज्य सरकार, धारा ४१ क क की उप-धारा (४) के, खण्ड (क) में संशोधन करना इष्टकर समझती है ताकि, अधिनियम की धारा ५८ द्वारा यथा आदेशित वर्ाषिक अंशदान की अदायगी से लोक न्यासों को कोई छूट उनमें सम्मिलित की जा सके।
महाराष्ट्र लोक न्यास आधिनियम, १९५० की धारा ५८ की उप-धारा (२) में यथोचित संशोधन करने के लिए भी प्रस्तावित किया है।
७. प्रस्तुत विधेयक का आशय उपयर्ुक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
मुंबई, दिनांकित १९ मार्च, २०२५।
देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री।
(यथार्थ अनुवाद), श्रीमती विजया ल. डोनीकर, भाषा संचालक, महाराष्ट्र राज्य।
विधान भवन : मुंबई, दिनांकित : २० मार्च, २०२५
जितेंद्र भोळे, सचिव (१) (कार्यभार), महाराष्ट्र विधानसभा।
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