RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्रट शास राजपत्र
असाराण भाग सात
र्ष ११, अक २१] बंुारा, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ [पृष्ठे ६, विकंमत : रुपयाे ४७.००
असाराण क्रमाक ३४
प्राविकृत प्राकाश
अध्यादेश, विेयाके अविवियाम याचा विहादेी अुादे (देागराी विलोपी)
विवि तथा न्याया विभाग
मंत्रालय, मंादामं कामंा मंार्ग, हुतात्मंा राजर्गुरू चौका, मंु ंबई ४०० ०३२,
दिदानांांदिकाता १ दितांबरा २०२५।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. VII OF 2025.
AN ORDINANCE FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PUBLIC TRUST ACT.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमाक ७ सन् २०२५।
महाराष्ट्र लोक न्यास अविवियाम मं अविकतरा सशो कराे सबंी अध्यादेश।
क्यांविक राज्य दिधानांमंडल काे दाोनां दानां का त्रा नांहुं चौल राहुा हुै ;
न् १९५० का २९।
औरा क्यांविक मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु मंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐी पारिरास्थिदिताया दिद्यमंानां हुं दिजनांकाे काराण उन्हुं इमं आर्गे दादिगता प्रयोजनां काे दिलए, मंहुाराष्ट्र लोका न्या अदिधादिनांयमं मं अदिधाकातारा ंोधानां कारानांे काे दिलए, द्य कायगाहुी कारानांा आश्यका हुआ हुै ;
भार्ग ाता-३४—१२ महाराष्ट्रट शास राजपत्र असाराण भाग सात, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ अबं, इसविलोए, भाराता काे ंदिधानां काे अनांुच्छेदा २१३ काे खण्ड (१) द्वारा प्रदात्त स्थितायं का प्रयोर्ग काराताे हुए, मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल, एताद् द्वारा, दिनांम्नां अध्यादाे प्रख्यादिपाता काराताे हुं, अिागत् :—
१. (१) यहु अध्यादाे मंहुाराष्ट्र लोका न्या (ंोधानां) अध्यादाे, २०२५ काहुलाए।
ंदिप्ता नांामं औरा प्राराम्भाण।
(२) (का) धारा ५ छेोड़कारा, यहु ताुरांता प्रृत्त हुोर्गा।
(ख) धारा ५ ऐे दिदानांांका पारा प्रृत्त हुोर्गी दिजे राज्य राकारा, राजपत्र मं प्रकादिता अदिधाूचौनांा द्वारा दिनांयता कारां।
२. मंहुाराष्ट्र लोका न्या अदिधादिनांयमं (दिज इमं आर्गे, "मंूल अदिधादिनांयमं" काहुा र्गया हुै) काी न् १९५० का २९। धारा २ काे,—
न् १९५० का २९ काी धारा २ मं ंोधानां।
(१) खण्ड (९) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां खण्ड दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
"(९क) "दिनांरान्तारा न्याी" का तात्पायग, न्या काे दिलखता काे अनांुारा या इ अदिधादिनांयमं काे उपाबंधां काे अनांुारा आजीनां या िायी न्याी काे रूपा मं दिनांयुता न्याी े हुै ;" ;
(२) खण्ड (१७) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां खण्ड दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
"(१७क) "ादिधा न्याी" का तात्पायग, न्या काे दिलखता काे अनांुारा या इ अदिधादिनांयमं काे उपाबंधां काे अनांुारा एका दिदिनांदिदागष्ट मंयादिधा काे दिलए दिनांयुता दिकाए र्गए न्याी े हुै ;" ;
(३) खण्ड (१८) काे िानां मं, दिनांम्नां खण्ड राखा जायेर्गा, अिागत् :—
"(१८) "न्याी" का तात्पायग, दिजमं या ताो, अकाेले या अन्य व्यस्थितायं े हुयोजनां मं, न्या म्पादित्त दिनांदिहुता काी हुै ऐा व्यस्थिता औरा उमं, न्याी मंयादिधा औरा दिनांरान्तारा न्याी ादिमंल हुै ;"।
३. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा १८ काी, उपा-धारा ६ मं, "अस्थितात् मं हुै" ब्दां काे पाश्चौात् "औरा न्या काी िारा म्पादित्तपारा ादिमंत् या दिहुता दागनांेाले दाताेजं काी एका प्रदितादिलदिपा" ब्दा जोडे जायंर्गे। न् १९५० का २९ काी धारा १८ मं ंोधानां।
४. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ३० काे पाश्चौात्, दिनांम्नां धारा दिनांदिष्ट काी जायेर्गी, अिागत् :—
न् १९५० का २९ मं नांई धारा ३०का का दिनांेनां।
ादिधा न्याी या दिनांरांतारा न्याी काी दिनांयुस्थिता।
"३०क. (१) जहुा एका ादिधा न्याी काी दिनांयुस्थिता का दिदिनांदिदागष्ट अदिधा अदिता हुोता हुै ताब या ताो, न्या काे दिलखता मं या न्यादियं द्वारा दिलए र्गए दिकाी दिदिनांणगय मं अंतादिगष्ट दिकाी बाता काे हुोताे हुए भाी, ऐा ादिधा न्याी जब ताका हु पाुनांदिनांगयुता नांहुं हुोता हुै ताब ताका, न्याी कां रूपा मं कायं का अनांुपालनां कारानांे का कातागव्यं का दिनांगहुनां कारानांे े पारिरादिराता हुोर्गा :
पारांताु, यदिदा, न्याी काी दिनांयुस्थिता या पाुनांदिनांगयुस्थिता कारानांे काे दिलए दिकाी दिदिनांदिदागष्ट अदिधा काे दिलए काुछे भाी उस्थिलदिखता नांहुं दिकाया हुै या पाष्ट रूपा े उपाबंधा नांहुं दिकाया हुै ताब न्या काी दिलखता मं अंतादिगष्ट दिकाी प्रदिताकाूल बाता काे हुोताे हुए भाी, काोई दिदिनांणगय जो न्यादियं द्वारा दिलए जानांे काे बाजूदा जाराी राहुनांेाले या उत्तराजी न्यादियं काे दिलए गम्मंदिता े एका न्याी काो एका मंय मं पाचौ र्षों ताका काी अदिधा काे दिलए दिनांयुता कारानांा दिदिधापाूणग हुोर्गा।
(२) यदिदा, न्या काी दिलखता दिनांरांतारा न्याी काे रूपा मं न्यादियं काी दिनांयुस्थिता कारानांे काे दिलए काोई दिदिनांदिदागष्ट उपाबंधा अंतादिगष्ट नांहुं हुं ताब, न्या काे उपायोर्ग मं या काोई दिनांणगय जो न्यादियं द्वारामहाराष्ट्रट शास राजपत्र असाराण भाग सात, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ ३ दिलए जानांे काे बाजूदा प्रदिताकाूल दिकाी बाता काे हुोताे हुए भाी, न्या मं दिकाी मंय पारा दिनांरांतारा न्यादियं काी ंख्या काुल न्यादियं काी ंख्या े एका चौिाई े अदिधाका नांहुं हुोर्गी :
पारांताु, दिद्यमंानां या उत्तराजी न्यादियं, दिजका दिनांरांतारा न्याी का अदिधा अदिता हुआ हुै उ ादिधा न्याी काी दिकान्हुी दिनांम्नां काराणं मं े उद्भाूता दिनांरांतारा न्याी काी रिरास्थिता काेल दिनांरांतारा न्याी काे रूपा मं गम्मंदिता े दिनांयुस्थिता काी जा काेर्गी :—
(का) मंृत्यु ;
(ख) दिदादिलयापानां ;
(र्ग) अत्यादिधाका ृद्धािा, दिबमंाराी चौाहुे ाराीरिराका या मंानांदिका काराणं द्वारा अपानांे पादा काे कायं औरा काृत्यं का दिनांगहुनां कारानांे मं अमंिग या अयोग्य हुोनांे ;
(घ) दिदाे मं िायी दिनांा कारानांे काे उद् दाेश्य े भाराता छेोडनांे ;
(ङ) नांैदिताका अधामंता े अंतार्ग्रगता दिकाी अपाराधा काे दिलए दाोर्षोंदिदिद्धा।
(३) न्या काी दिलखता मं या काोई दिदिनांणगय दिजे न्यादियं द्वारा दिलए र्गए ऐे दिकाी दिदिनांणगय मं अंतादिगष्ट दिकाी बाता काे हुोताे हुए भाी, ादिधा न्यादियं या दिनांरान्तारा न्यादियं काी हुमंेा पाष्ट रुपा े न्यादियं काी अदिधाकातामं ंख्या काी ीमंा काे भाीतारा या न्या काे दिलखता मं अदिधाकादिता आश्यका दिनांदिहुतािग द्वारा दिनांयुता दिकाए जायंर्गे। ताद्नांुारा, दिनांरांतारा या उत्तराजी न्याी या ताो, ादिधा न्याी का अदिधा अदिता हुोनांे पारा या उपा-धारा (२) काे खण्ड (का) े (ङ) मं दिदिनांदिदागष्ट काोई घटनांा हुोनांे पारा न्या काी दिलखता मं इप्रकारा अदिधाकादिता न्यादियं काी अदिधाकातामं ंख्या काे अदितारिराता दिकाी न्याी या न्यादियं काी दिनांयुस्थिता नांहुं कारांर्गे।"।
५. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ५०का काे पाश्चौात्, दिनांम्नां धारा दिनांदिष्ट काी जायेर्गी, अिागत् :— न् १९५० का २९ मं नांई धारा ५०ख का दिनांेनां। "५०ख. (का) दिकाी लोका न्या काे दिलये योजनांा बनांानांा या उपांताराण कारानांा, या ;
(ख) दिकाी लोका न्या काे अध्य या भापादिता या न्याी या पादादिधाकाराी काे रूपा मं कायग कारानांे या उनांकाे कायं का दिनांगहुनां कारानांे, या ;
दिदिल न्यायालय आदिदा काे िानां मं धामंािग आयुता का ंदाभाग लेनांा। (र्ग) दिकाी लोका न्या काे दिकाी न्याी या न्यादियं काी दिनांयुस्थिता कारानांे काी,—
अदिधाकारिराता, अदिधाकारा या प्रादिधाकारा हुोनांेाले दिकाी लोका न्या काो, चौाहुे इ अदिधादिनांयमं काी प्रयुस्थिता काे दिदानांांका काे पाूग या पाश्चौात्, न्या काी दिलखता योजनांा, दिदाए र्गए या पारिराता दिकाए र्गए आदाे या दिडक्री मं दिदिल न्यायालय या दिदिल न्यायाधाी, दिजला न्यायाधाी का काोई ंदाभाग धामंािग आयुता काे ंदाभाग काे रुपा मं अिग लर्गाया जायेर्गा औरा धामंािग आयुता ताद्नांुारा अदिधाकारिराता, अदिधाकारां औरा प्रादिधाकारा का प्रयोर्ग काराेर्गा।"।
न् १९५० का २९ काी धारा ६६का मं ंोधानां। ६. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ६६का मं, "ामंान्य कारा े, दिजे छेहु मंहुीनां ताका बढ़ाया जा काे या जुमंागनांे े, दिजे पाच्चौी हुजारा रुपायं ताका बढ़ाया जा काे या दाोनां े, दास्थिण्डता दिकाया जायेर्गा" ब्दां काे िानां मं, "या ताो दिरादिणता कारा े, दिजे एका र्षोंग ताका बढ़ाया जा काे या जुमंागनांे े, दिजे पाचौा हुजारा रुपायं ताका बढ़ाया जा काे या दाोनां े दास्थिण्डता दिकाया जायेर्गा" ब्दा राखे जायंर्गे।
न् १९५० का २९ काी धारा ६६ख मं ंोधानां। ७. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ६६ख मं, "ताीनां मंहुीनां े या जुमंागनांे े, दिजे पाच्चौी हुजाहु रुपायं ताका बढ़ाया जा काे या दाोनां े दास्थिण्डता दिकाया जायेर्गा" ब्दां काे िानां मं, " एका र्षोंग काे कारा े या जुमंागनांे े दिजे पाचौा हुजारा रुपायं ताका काे बढ़ाया जा काे या दाोनां े दास्थिण्डता दिकाया जायेर्गा" ब्दा राखे जायंर्गे।
भार्ग ाता–३४-२४ महाराष्ट्रट शास राजपत्र असाराण भाग सात, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ ८. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ७०ख काी, उपा-धारा (१) मं,—
न् १९५० का २९ काी धारा ७०का मं ंोधानां।
(१) दिद्यमंानां पारांताुका काे पाूग, दिनांम्नां पारांताुका दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
" पारांताु, इ उपा-धारा काे अधाीनां काे आेदानां, दिनांष्कार्षों काो अदिभादिलदिखता कारानांे, या यिास्थिदिता, आदाें काो पारिराता कारानांे काे दिदानांांका े एका ौ बी दिदानां काे भाीतारा धामंािग आयुता काो प्रताुता दिकाया जायेर्गा :";
(२) दिद्यमंानां पारांताुका मं, " पारांताु" ब्दा काे िानां मं " पारांताु यहु औरा दिका," ब्दा राखे जायंर्गे। ९. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ७५ मं,—
न् १९५० का २९ काी धारा ७५ मं ंोधानां।
(१) " अपाील कारानांे काी अदिधा" ब्दां काे पाश्चौात्, " औरा धारा ७०का काे अधाीनां आेदानां" ब्दा दिनांदिष्ट दिकाए जायंर्गे ;
(२) " ऐे अपाील" ब्दां काे पाश्चौात्, "औरा आेदानां" ब्दा जोड़े जायंर्गे।
१०. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ८२ मं "मंहुानांर्गरा मंदिजट्रेट या" ब्दा अपामंादिजगता दिकाए जायंर्गे। न् १९५० का २९ काी धारा ८२ मं ंोधानां।महाराष्ट्रट शास राजपत्र असाराण भाग सात, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ ५
क्तव्या
मंहुाराष्ट्र लोका न्या अदिधादिनांयमं (न् १९५० का २९) यहु मंहुाराष्ट्र राज्य मं लोका धादिमंगका औरा पाूताग न्यां काे प्रानां दिदिनांयदिमंता कारानांे तािा उपाबंधा कारानांे काे दिलए अदिधादिनांयदिमंता दिकाया र्गया हुै।
२. यहु ध्यानां मं आया हुै दिका, न्या काे दिदिभान्नां दिलखतां मं दिनांरान्तारा या िायी न्यादियं तािा ादिधा न्याी दिका दिनांयुस्थिता औरा उनांकाे मंयादिधा काे बाराे मं पाष्टता नांहुं हुै जो, धामंागधाग आयुता औरा न्यायालय काे मं बहुंख्य मंुकादामं का काराण बनांा हुै दिजे न्यां काे कायं, लाभािीयं औरा लोका कायाण काो प्रभादिता काराताे हुं। जब ादिधा न्याीयं औरा दिनांरांतारा न्यादियं दिका, दिनांयुस्थिता काे बाराे मं न्या दिलखता मं उकाे दिलए काोई दिेर्षों उपाबंधा अंतादिगष्ट नांहुं काराताी हुै, ताब दिनांयुताी काे दिलए नांई धारा ३०का काे दिनांेनां द्वारा अदिधादिनांयमं मं उपाबंधा कारानांा इष्टकारा मंझा र्गया हुै। उता अदिधादिनांयमं काी धारा २(१८) मं अंतादिगष्ट "न्याी" काी दिद्यमंानां पारिराभार्षोंा, दिनांयुस्थिता काी उनांकाी अदिधा पारा आधारिराता अिागत् उनांमं ादिधा न्यादियं औरा दिनांरान्तारा न्यादियं काे प्रकारा दिदिनांदिदागष्ट कारानांे काे प्रयोजनां े ंोदिधाता कारानांा प्रतादिता हुै।
३. उता अदिधादिनांयमं काी धारा १८ यहु "लोका न्यां काे रादिजट्रीकाराण" पारा कांदिता हुै। धारा १८ काी, उपा-धारा (६) का प्रतादिता ंोधानां पारा ऐा प्राधानां काराता हुै दिका, न्या काे रादिजट्रीकाराण कारानांे काे दिलए दिकाए जानांेाले आेदानां काे ाि न्या काी िारा म्पादित्त पारा ादिमंत् या दिहुता दागनांेाले दाताेजं काी प्रदितादिलदिपा काे ाि हुी जोडी जानांा जादिहुए। इे, न्या का रादिजट्रीकाराण काराताे मंय दिकाीभाी म्पादित्त पारा न्या काी म्पादित्त काे रूपा मं दिकाए जानांेाले झाूठे दाे काो राोका जा काेर्गा।
४. न्या काी दिकाी दिलखता मं या दिकाी योजनांा, बनांाए र्गए या पारिराता दिकाए र्गए आदाे या दिडक्री मं दिदिल न्यायालय या दिदिल न्यायाधाी या दिजला न्यायालय, या दिजला न्यायाधाी का ंदाभाग दिदाया हुो ऐे मंामंलं मं न्यायालय या धामंागिग आयुता काी अदिधाकारिराता का प्रश्नां ुलझानांे काे दिलए ऐे मंामंलं मं धामंागिग आयुता काो अदिधाकारिराता, अदिधाकारा औरा प्रादिधाकारा का उपायोर्ग कारानांे काे दिलए मं बनांानांे काे दिलए ऐे ंदाभाग का धामंागिग आयुता का ंदाभाग काे रूपा मं अिग लर्गाया जायेर्गा, यहु उपाबंधा कारानांे काी दाृस्थिष्ट े उता अदिधादिनांयमं मं नांीनां धारा ५०ख दिनांेदिता कारानांे का प्रतादिता हुै।
५. उता अदिधादिनांयमं काी धारा ६६का धामंागिग आयुता काी पाूग मंजूराी काे दिबनांा लोका न्या काी िारा म्पादित्त दाुरां काे नांामं कारानांे पारा दाण्ड का प्राधानां काराताी हुै औरा दिनांधागनां औरा दाुबगल र्ग काे मंराीजं काे दिलए धामंागिग अपातालं मं बेड आरादिता राखनांे काे ंबंधा मं धारा ४१काका काे अधाीनां दिनांदाेनां का अनांुपालनां कारानांे मं अफल हुोनांे पारा दाण्ड का प्राधानां धारा ६६ख मं दिकाया हुै। उपायु गता ंदादिभागता उलंघनां काे काई उदाहुराण राकारा काे ध्यानां मं आय हुै। इदिलए, इकाे भायोपाराधाी प्रभा काे उद्दे े उता धाराओं काे यिोदिचौता ंोधानां द्वारा दिद्यमंानां ास्थिता मं बढोत्तराी कारानांा प्रतादिता दिकाया र्गया हुै।
६. उपा या हुायका धामंागिग आयुता काे मं काी प्रदिक्रीयाओं काे ंबंधा मं धामंागिग आयुता काे पाूनांराीदिता अदिधाकारां काे दिलए उपाबंधा धारा ७०का मं काराताी हुै। तािादिपा, उता धारा ७०का काे अधाीनां आेदानां दादिखल कारानांे काे दिलए मंयीमंा दिदिनांदिदागष्ट नांहुं काी हुै। इदिलए, उता धारा काे अधाीनां का आेदानां दिदाघागदिधा अंताराल काे पाश्चौात् भाी दादिखल दिकाये जाताे हुं। अता:, ऐा आेदानां दादिखल कारानांे काी मंयीमंा एका ौ बी दिदानां ताय कारानांे काे उपाबंधा कारानांे काे दिलए उता धारा ७०का मं ंोधानां कारानांा प्रतादिता दिकाया र्गया हुै।६ महाराष्ट्रट शास राजपत्र असाराण भाग सात, सप्टेंबंरा १७, २०२५/भाद्रपदे २६, शके १९४७ ७. चौू काी, राज्य दिधानांमंडल काे दाोनां दानां का त्रा नांहुं चौल राहुा हुै औरा मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु मंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐी पारिरास्थिदिताया दिद्यमंानां हुं दिजनांकाे काराण उन्हुं इमं उपायु गता प्रयोजनां काे दिलए, मंहुाराष्ट्र लोका न्या अदिधादिनांयमं मं अदिधाकातारा ंोधानां कारानांे काे दिलए, द्य कायगाहुी कारानांा आश्यका हुआ हुै, अता: यहु अध्यादाे प्रख्यादिपाता दिकाया जाता हुै।
मंु ंबई,
सी. पी. राकृष्ण,
दिदानांांदिकाता ३० अर्गता २०२५। मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल।
मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल काे आदाे तािा नांामं े,
सुणाष केलोे,
राकारा काे प्रधानां दिचौ औरा दिदिधा पारामंग ।
(यिािग अनांुादा),
विजया लो. डोीकरा, भार्षोंा ंचौालका, मंहुाराष्ट्र राज्य।
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