RNI No. MAHBIL /2009/36619
महाराष्ट्रट शासन राजपत्र
असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी
र्ष ११, अंक ५७(२)] मंगळारा, ऑक्टोबरा १४, २०२५/आश्विन २२, शाके १९४७ [पृष्ठे ६, विकंमत : रुपये ११.००
असाधाराण क्रमांक ७७
प्राविधाकृत प्राकाशान
विजल्हाविधाकाराी तथा विजल्हादंडाविधाकाराी, पालघरा यांजकडाून
सागराी महामागष पुलाच्या जोडारास्त्याच्या प्राकल्पासाठेी भाूमीसंपादंन, पुनषसन पुनस्थाषपना, कराताना ाजी भारापाई
विमळण्याचा आविण पारादंशाषकतेचा हाक्क अविधाविनयम, २०१३.
अविधासूचाना
क्र. भाुसपुादन/सागरी महामागग कं भाली/अविसूचना ११(१)/कावि-०९/२०२५, विदनाक १४ ऑक्टोबरी २०२५.—भाूमीसपुादन, पुनगसन पुनगसाहात करीताना ाजी भारीपुाई विमळण्याचा आवि पुारीदर्शगकतेचा हाक्क अविविनयाम, २०१३ (२०१३ चा ३०) मीली कलीम ३ च्या खंड (इ) च्या द्वारीे प्रदान करीण्यात आलीेल्या अविकारीाचा ापुरी करून काढण्यात आलीेली र्शासकीया अविसूचना, महासूली न विभाग क्रमाक सविकग ११/२०१४/प्र.क्र.७७/अ-२/विदनाक १९ जानेारी २०१५(यात या पुढे विजचा विनदेर्श उक्त अविसूचना असा करीण्यात आलीा आहाे.) याद्वारीे असे अविसूविचत केलीे आहाे, उक्त अविविनयामाच्या कलीम ३ खंड (झेड अ) मध्याे व्याख्या केलीेल्या सागजविनक प्रयाोजनासाठी एखंाद्या विजल्ह्यातीली ५०० हाेक्टोरी पुेक्षा अविक नसेली इतक्या क्षाेत्राकरिरीता जमीन सपुादन करीण्याच्या सबात अर्शा विजल्ह्याचा अविकारी हा उक्त अविविनयामाच्या प्रयाोजनासाठी समूविचत र्शासन असलीेल्या पुालीघरी विजल्ह्याच्या विजल्हाविकाऱ्यास या सोबत जोडलीेल्या अनुसूची एक मध्याे अविक तपुर्शीलीारी गन केलीेली जमीन (यात यापुढे ज्याचा विनदेर्श उक्त जमीन असा करीण्यात आलीा आहाे.) सागजविनक प्रयाोजनासाठी (यात यापुढे ज्याचा विनदेर्श उक्त सागजविनक प्रयाोजन असा करीण्यात आलीा आहाे.) आश्याक आहाे. अथा वितची आश्याकता भासण्याची र्शक्याता आहाे असे ाटोते. ज्याचे स्रुपुाचे विरी यासोबत जोडलीेल्या अनुसूची दोन मध्याे विदलीेलीे आहाे आवि म्हाूनच उक्त अविविनयामाच्या कलीम ११ च्या पुोटो-कलीम (१) च्या तरीतुदी अन्याे या द्वारीे असे अविसूविचत करीण्यात याेते की, उक्त जविमनीची उक्त सागजविनक प्रयाोजनासाठी आश्याकता भासण्याची र्शक्याता आहाे;
आवि ज्याअथी, प्रस्तावित भाूविमसपुादनाच्या अनुषंगाने बावित व्याक्तंचे विस्थापुन करीण्यास भाग पुडारी कारीे, यासोबत जोडलीेल्या अनुसूची तीन मध्याे विदलीेली आहाेत;
आवि ज्याअथी, कलीम ४३ च्या पुोटो-कलीम (१) अन्याे पुनगसन पुनगसाहात या प्रयाोजनासाठी विनयाुक्त केलीेल्या प्र्शासकाचा तपुर्शीली यासोबत जोडलीेल्या अनुसूची पुाचमध्याे विदलीेलीा आहाे.
त्याअथी, असे घोविषंत करीण्यात याेत आहाे की, उक्त अविविनयामाच्या कलीम ११ चा पुोटो-कलीम (४) नुसारी कोतीहाी व्याक्ती हाी अविसूचना प्रविसद्ध झेाल्याच्या विदनाकापुासून ते उक्त अविविनयामाच्या प्रकरी चारी खंालीली कायागाहाी पुूग हाोईली त्या कालीाी पुयागत उक्त जविमनीचा अथा वितच्या भागाचा कोताहाी व्याहारी करीारी नाहाी विका उक्त जविमनीरी कोताहाी भारी विनमाग करीारी नाहाी:
पुरीतु, उक्त जविमनीच्या अथा वितच्या भागाच्या मालीकाने अजग केल्यारी, विजल्हाविकाऱ्यास विर्शेषं पुरिरीस्थिस्थतीची कारीे लीेखंी नमूद करून अर्शा मालीकास उपुरीोक्त तरीतुदीच्या प्रतगनातून सूटो देता याेईली:
भाग एक (को.वि.पु)-७७–१
(१)२ महाराष्ट्रट शासन राजपत्र असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी, ऑक्टोबरा १४, २०२५/आश्विन २२, शाके १९४७ पुरीतु आखंी असे की, जरी कोत्याहाी व्याक्तीने या तरीतुदीचे बुद्धीपुरीस्सरी उल्लीघन केल्यामुळे वितलीा झेालीेल्या कोत्याहाी हानीची विका क्षातीची विजल्हाविकाऱ्याकडून भारीपुाई विदली जारी नाहाी.
तसेच, उक्त अविविनयामाच्या कलीम ११ च्या पुोटो-कलीम (५) नुसारी भाूमीसपुादन पुनगसन पुनगसाहात करीताना उविचत भारीपुाई विमळण्याचा आवि पुारीदर्शगकतेचा हाक्क ( महारीाष्ट्र ) विनयाम १४ (या पुढे ज्याचा विनदेर्श उक्त विनयाम असा करीण्यात आलीा आहाे.) याच्या विनयाम १० च्या उपु विनयाम (३) द्वारीे विविहात केल्याप्रमाे भाूविम अविभालीेखंाचा अद्यातीकरीाचे काम हाती घेारी असल्याचे पुूग करीारी असल्याचे देखंीली घोविषंत करीण्यात याेत आहाे.
आवि त्याअथी, उक्त अविविनयामाच्या कलीम ३ चा खंड (छ) समुविचत र्शासन असलीेल्या विजल्हाविकारी, पुालीघरी यानी उक्त अविविनयामाखंालीली विजल्हाविकाऱ्याची कायाग पुारी पुाडण्यासाठी अपुरी विनासी उपु विजल्हाविकारी, पुालीघरी यास पुदविनदेविर्शत केलीे आहाे.
अनुसूचाी–एक
जविमनीचाे णषन
गाचे ना - कं भाली तालीुका - पुालीघरी विजल्हा - पुालीघरी
| अ.क्र. | भाूमापुन/गटो/सव्हाे न. | सपुाविदत क्षाेत्रा (हाे.आरी.) मध्याे |
| १ | ९२ | ००.००.२० |
| २ | ९३ | ००.३१.२५ |
| ३ | ९७ | ००.४६.१० |
| ४ | ९९ | ००.००.८० |
| ५ | १०३ | ००.०७.५० |
| ६ | १०४ | ००.१२.८० |
| ७ | १०५/अ | ००.०७.५० |
| ८ | १०५/ब | ००.२५.१० |
| ९ | १०८ | ००.०४.०० |
| १० | १०९ | ००.०१.३० |
| ११ | ११२ | ००.००.५० |
| १२ | ११४ | ००.०३.०० |
| १३ | ११६ | ००.१२.०० |
| १४ | १३३ | ००.२५.०० |
| १५ | १४१ | ००.००.६० |
| १६ | १५५ | ००.००.२० |
| १७ | १५६ | ००.१३.१० |
| १८ | १५७ | ००.०४.७० |
| १९ | १५८ | ००.०३.६० |
| २० | १५९ | ००.०१.५० |
| २१ | १६० | ००.००.३५ |
| २२ | १६१ | ००.००.२० |
| २३ | १६७ | ००.३२.९० |
| २४ | १६९ | ००.२३.५० |
| २५ | १७० | ००.०१.४० |
| २६ | १७२ | ००.०१.३० |
| २७ | १७३ | ००.००.२० |
| २८ | १७५ | ००.०७.६० |
| २९ | १७९ | ००.००.७० |
| ३० | १८२ | ००.०२.४० |
| ३१ | १८३ | ००.३३.८० |
| ३२ | १९० | ००.०१.५० |
| ३३ | १९१ | ००.२२.५५ |
| ३४ | ३३८ | ००.०२.२५ |
| ३५ | ३४० | ००.२८.५० |
| ३६ | ३४१ | ००.२४.८५ |
| ३७ | ३७७ | ००.२८.३० |
| ३८ | ३७८ | ०.२५.६० |
| ३९ | ३७९ | ०.२२.७५ |
| ४० | ३८२ | ०.१०.७५ |
| ४१ | ३८३ | ०.००.१५ |
| ४२ | ३८४ | ०.०२.५० |
| ४३ | ३८५ | ००.०३.३० |
| ४४ | ३८७ | ००.०७.४० |
| ४५ | ५६९ | ०.१९.४५ |
| ४६ | ५९२ | ०.०७.७० |
| ४७ | ७२७ | ०.००.१० |
| ४८ | ७२८ | ०.१४.१५ |
| ४९ | ७२९ | ०.१५.०० |
| ५० | ७३२ | ०.०१.६५ |
| ५१ | ७३३ | ०.००.६५ |
| ५२ | ७३४ | ०.००.१० |
| ५३ | ७६५ | ०.०३.७० |
| ५४ | ७६६ | ०.०७.६० |
| ५५ | ७६७ | ०.५३.४० |
| ५६ | ७६८ | ०.०४.४० |
| ५७ | ७७४ | ०.०३.८० |
भाग एक (को.वि.पु)-७७–२४ महाराष्ट्रट शासन राजपत्र असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी, ऑक्टोबरा १४, २०२५/आश्विन २२, शाके १९४७
| अ.क्र. | भाूमापुन/गटो/सव्हाे न. | सपुाविदत क्षाेत्रा (हाे.आरी.) मध्याे |
| ५८ | ७९५ | ०.१३.१० |
| ५९ | ७९६ | ०.०१.०० |
| ६० | ७९७ | |
| ६१ | ७९८ | ०.०१.९० |
| ६२ | ७९९ | ०.०५.०० |
| ६३ | ८०२ | ००.०४.६० |
| ६४ | ८०३ | ०.१२.४५ |
| ६५ | ८०४ | ०.०१.१० |
| ६६ | ८०७ | ०.०२.१० |
| ६७ | ८०८ | ०.००.१० |
| ६८ | ८०९ | ०.०१.४५ |
| ६९ | ८१० | ०.०२.८० |
| ७० | ८२६ | ०.१२.६० |
| ७१ | ८३० | ०.०१.०० |
| ७२ | ८३१ | ०.००.६० |
| ७३ | ८३२ | ०.०१.०० |
| ७४ | ८३३ | ०.०१.०० |
| ७५ | ८४० | ०.०४.३० |
| ७६ | ८४२ | ०.११.४० |
| ७७ | ८४३ | ०.०१.०० |
| ७८ | ८४४ | ०.०७.१० |
| ७९ | ८४५ | ०.०३.४० |
| ८० | ८४८/क | ०.०१.७० |
| ८१ | ११०९ | ०.१९.५० |
| ८२ | १२२२ | ०.०१.७० |
| ८३ | १४१७ | ०.०२.८० |
| ८४ | १०२ | ०.२१.५० |
| ८५ | १३२ | ०.०८.०० |
| ८६ | १७७५ पुैकी | ०.८८.०० |
| ८७ | १७७५ पुैकी | ०२.७७.०० |
| एकूण ११.२७.०० |
अनुसूचाी-दंोन
| प्रकल्पुाचे ना : | सागरी महामागग आग खंाडीरीली पुलीाचा जोडरीस्ता प्रकल्पु ता. पुालीघरी विज. पुालीघरी. |
| प्रकल्पुाचे गन : | सागरी महामागग आग खंाडीरीली पुलीाचा जोडरीस्ता प्रकल्पु हा महारीाष्ट्रात आहाे. |
| समाजालीा विमळारीे लीाभा : | सागरी महामागग आग खंाडीरीली पुलीाच्या जोडरीस्ता हा सागरी महामागग झेाई बोडी रीेस रीेड्डी सातडे पुयांत असलीेलीा प्रमुखं विजल्हा मागग असून सदरी रीस्ता झेाई ते रीेस सातडे पुयांत जोडारीा आहाे. पुालीघरी विजल्ह्यातीली तीन तालीुक्याना जोडलीा जारी आहाे. या रीस्त्याचा उपुयाोग औद्याोविगक, बागायातदारी तसेच स्थाविनक नागरिरीकाना दळ ळासाठी हाोारी आहाे. |
अनुसूचाी-तीन
बाविधात व्यक्तंचाे विस्थापन कराण्यास भाग पाडाणाराी काराणे.
१. प्रकल्पुाचे बाकाम
२. प्रकल्पुाचे पुरिरीचालीक
३. प्रकल्पुाच्या देखंभालीसाठी
या कारीाकरीता जविमनीची आश्याकता आहाे.
अनुसूचाी-चारा
(सामाविजक प्राभा विनधाषराण अभ्यास कराणाऱ्या अविधाकाऱ्याने विदंलेला सामाविजक प्राभा विनधाषराण सारांशा)
र्शासन महासूली नविभाग मत्रालीया मु बई-३२ यानी त्याचे अविसूचना क्र. सविकग -०१/२०१५ प्र.क्र.३/अ-२ विद. १३.०३.२०१५ द्वारीे भाूमीसपुादन, पुनगसन पुनगसाहात करीताना उविचत भारीपुाई विमळण्याचा आवि पुारीदर्शगकतेचा हाक्क अविविनयाम २०१३ (२०१३ चा ३०) यामध्याे कलीम १० क समाविष्टो केलीे असून त्यामध्याे अर्शी तरीतूद केली आहाे की, समुविचत र्शासनालीा जनविहाताच्या दृष्टोीने अविसूचनेद्वारीे, उक्त अविविनयामाच्या प्रकरी दोन प्रकरी तीन याच्या तरीतुदी लीागू करीण्यापुासून सूटो देता याेते. त्यानुसारी महाराष्ट्र शासन राजपत्र, असारी क्रमाक ४४७, विदनाक ०७ ऑक्टोबरी २०२५ नुसारी उक्त प्रकल्पुालीा जनविहाताच्या दृष्टोीने लीोकविहातकारी प्रकल्पु असल्या कारीे, प्रकरी दोन आवि प्रकरी तीन च्या तरीतुदी लीागू करीण्यापुासून उक्त प्रकल्पुालीा सूटो देण्यात आली आहाे.
६ महाराष्ट्रट शासन राजपत्र असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी, ऑक्टोबरा १४, २०२५/आश्विन २२, शाके १९४७अनुसूचाी-पाचा
विनयुक्त केलेल्या प्राशासनाचा तपशाील
| अ. | प्र्शासन म्हाून विनयाुक्त करीण्यात आलीेल्या अविकाऱ्याचे पुदनाम | उपु विजल्हाविकारी (पुनगसन), पुालीघरी |
| ब. | प्र्शासनाच्या कायागलीयाचा पुत्ता | उपु विजल्हाविकारी (पुनगसन), पुालीघरी विजल्हा मुख्यालीया, पुालीघरी, कोळगा, पुालीघरी बोईसरी रीोड, ता. विज. पुालीघरी, ४०१ ४०४. |
| क. | ज्या अविसूचनेद्वारीे प्र्शासकाची विनयाुक्ती करीण्यात आली आहाे. त्या अविसूचनेचा तपुर्शीली. | महाराष्ट्र शासन राजपत्र, असारी भाग चारी-ब षंग ५, अक ९२(२) गुरुारी, जुलीै ११,२०१९/आषंाढ २०,र्शके १९४१, महासूली न विभाग,अविसूचना विदनाक ०९ जुलीै २०१९ अन्याे उपु विजल्हाविकारी (पुनगसन), विजल्हाविकारी कायागलीया पुालीघरी याची प्र्शासक, पुनगसन पुनस्थागपुना म्हाून विनयाुक्ती करीेत आली आहाे. |
सदरी अविसूचनेव्दारीे ज्या जविमनीची सागजविनक प्रयाोजनासाठी आश्याक आहाे विका आश्याकता भासण्याचा सभा असल्याचे कायाद्याचे कलीम ११ चे उपु-कलीम (१) खंाली अविसूचीत करीण्यात आलीे आहाे. प्रारीविभाक अविसूचनेच्या तारीखंेपुासून ६० विदसाच्या आत सक्षाम प्राविकारी तथा अपुरी विनासी उपु विजल्हाविकारी पुालीघरी याचे कायागलीयात आक्षाेपु नंदविता याेईली.
रांद्र राजपूत, सक्षाम प्राविकारी तथा
विठीका : पुालीघरी, विदनाक : १४ ऑक्टोबरी २०२५. अपुरी विनासी उपु विजल्हाविकारी,पुालीघरी.
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