RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रो
असाणिभागिसाता
षि११,िअकाि२३] शुक्रा,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ [पृष्ठेि८,िविकांमताि:िरुपयाेि४७.००
असाणिक्रमाकाि३६
प्राविकाृतािप्राकाशन
अध्यादेश,िविेयाकाेिअविविनयामियाचािविहदेीिअनुादेि(देनागीिविपी)
महाष्ट्रिविानमडळिसविचाया
मंहुाराष्ट्र दिधानांसभा मं दिदानांांका ३०िजून,ि२०२५ ई.काो. पाुरा:िादिपाता दिनांम्नां दिधाेयका मंहुाराष्ट्र दिधानांसभा दिनांयमं ११७ काे अधाीनां प्रकादिता दिकाया जाता हुै :-
सहकारिता,िविपणनिऔिस्त्रोद्योगिविभाग
मंत्रालय, मंादामं कामंा मंार्ग, हुतात्मंा राजर्गुरू चौका, ंबई ४०० ०३२, दिदानांांदिकाता १३ अक्ताूबरा २०२५। मंु
MAHARASHTRA ORDINANCE No. IX OF 2025.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA AGRICULTURAL PRODUCE MARKETING (DEVELOPMENT AND REGULATION) ACT, 1963.
महाष्ट्रिअध्यादेशिक्रमाकाि९िसन्ि२०२५।
महाष्ट्रिकाृविउपजिविपणनि(विकासिऔिविविनयामन)िअविविनयाम,ि१९६३िमंिअविकाताि
सशोनिकानेिसबंीिअध्यादेशि।
क्यांविकािराज्य दिधानांमंडल काे दाोनां सदानां का सत्रा नांहुं चौल राहुा हुै;
औिक्यांविकािमंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु समंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐसी पारिरास्थिदिताया दिद्यमंानां हुं, दिजनांकाे काराण उन्हुं इसमं आर्गे दादिगता प्रयोजनां काे दिलए, मंहुाराष्ट्र काृदि उपाज दिपाणनां (दिकास औरा दिदिनांयमंनां) अदिधादिनांयमं, १९६३ मं अदिधाकातारा संोधानां कारानांे काे दिलए सद्य कायगाहुी कारानांा आश्यका हुआ हुै;
सन् १९६४ का मंहुा. २०।
भार्ग साता-३६—१२ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि अबं,िइसविए,िभाराता काे संदिधानां काे अनांुच्छेदा २१३ काे खण्ड (१) द्वारा प्रदात्त स्थिक्तायं का प्रयोर्ग काराताे हुए, मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल, एताद् द्वारा, दिनांम्नां अध्यादाे प्रख्यादिपाता काराताे हुं, अिागत् :—
१.ि (१) यहु अध्यादाे मंहुाराष्ट्र काृदि उपाज दिपाणनां (दिकास औरा दिदिनांयमंनां) (संोधानां) संदिक्षेप्ता नांामं औरा प्राराम्भाण। अध्यादाे, २०२५ काहुलाए।
(२) यहु ताुरांता प्रृत्त हुोर्गा।
२. मंहुाराष्ट्र काृदि उपाज दिपाणनां (दिकास औरा दिदिनांयमंनां) अदिधादिनांयमं, १९६३ (दिजसे इसमं आर्गे, "मंूल अदिधादिनांयमं" काहुा र्गया हुै) काी धारा २ काे,—
सन् १९६४ का मंहुा. २०। सन् १९६४ का मंहुा. २० काी धारा २ मं संोधानां।
(१) खण्ड (ञ) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां खण्ड दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
"(ञ-१) "राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा" का तात्पायग, धारा ५-१का काे अधाीनां िादिपाता राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा से हुै ;
(२) खण्ड (ट) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां खण्ड दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
"(ट-१) "राष्ट्रीय काृदि बाजारा" का तात्पायग तात्त्समंय प्रृत्त दिकासी दिदिधा मं अंतादिगष्ट दिकासी बाता काे हुोताे हुए भाी, जहुा काृदि उपाज का क्रय औरा दिक्रय दिकाया जाता हुै औरा उससे आनांुंदिर्गका र्गदितादिदिधाया या ताो इलेक्ट्रादिनांका रूपा से या अन्यिा कायागस्थिन्ता काी जाताी हुै ऐसा पाूरा समंय औरा िानां काी काब्जाधाीनां दिपाणनां उपायोदिर्गता भाराताीय एकाीकाृता बाजारा से हुै ;";
(३) खण्ड (नां) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां खण्ड दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
"(नां-१) "एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंस" का तात्पायग, राज्यान्तारिराका या अंताराराज्यीय व्यापारा कारानांे काे दिलए धारा ७का काे अधाीनां अनांुदात्त या धारा ७ख काे अधाीनां मंान्यताप्राप्ता एकाीकाृता एकाल व्यापाराी लाइसंस से हुै ;"।
३. मंूल अदिधादिनांयमं का अध्याय झ-का काे पाश्चौात्, दिनांम्नां अध्याय दिनांदिष्ट दिकाया जायेर्गा, अिागत् :—
सन् १९६४ का मंहुा. २० मं अध्याय झ-का काे पाश्चौात् नांए अध्याय का दिनांेनां।
अध्यायािझ-१का
ाष्ट्रीयािमहत्त्िकाे
ेिबंाजािकाीिस्थापना
राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी िापानांा।
"५-१का.ि(१) राज्य सराकारा, ाजपत्रो मं प्रकादिता अदिधासूचौनांा द्वारा, प्रदिक्रया काे अधाीनां मंालं का मंूल्य, उपाराी जलग्रहुण क्षेत्रा, सेा दिदाये र्गये उपाभाोक्ताओं काी अनांुप्राहुी संख्या औरा उसकाे दिलए दिे मंूलभाूता सुदिधा आश्यकाताओं, राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा द्वारा आश्यका दिदिनांयमंनां जैसे काृदि उपाज दिपाणनां से संबंदिधाता ऐसे पाहुलुओं पारा दिचौारा-दिमंग कारानांे काे पाश्चौात् धारा ५ काे अधाीनां िादिपाता दिकासी दिद्यमंानां बाजारा काो "राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा" काे रूपा मं पादादिभादिहुता कारा सकाेर्गा या दिकासी बाजारा काो "राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा" काे रूपा मं िापानांा कारा सकाेर्गा:
पारांताु, असी हुजारा मंेदिट्रका टनां से कामं नां हुो ऐसे काृदि उपाज या सराकारा द्वारा, समंय-समंय से, दिकासी आदाे द्वारा दिदिनांदिदागष्ट दिकाया जाए ऐसे ादिगका टनांभारा या ऐसे ादिगका मंूल्य का काराोबारा हुोनांेाले औरा दिजसमं दाो से कामं नां हुो, अन्य राज्यं से काृदि उपाज आताी हुै, ऐसे बाजारां का राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काे रूपा मं पादादिभादिहुता कारानांे काे दिलए दिचौारा-दिमंग दिकाया जा सकाेर्गा।
(२) इस अदिधादिनांयमं मं अंतादिगष्ट दिकासी बाता काे हुोताे हुए भाी, राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा मं दिपाणनां का दिदिनांयमंनां जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए, ऐसी राीत्या हुोर्गा।ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि ३ ५-१ख. (१) राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता, दिनांम्नां सदायं से दिमंलकारा बनांेर्गी, अिागत्,—
राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता काी संराचौनांा। (एका) दिपाणनां मंत्राी–अध्यक्षे;
(दाो) दिपाणनां राज्य मंत्राी-उपाध्यक्षे;
(ताीनां) काृदि आयुक्ता या संयुक्ता दिनांदाेका से अदिनांम्नां श्रेणी का नां हुाे, उसका प्रदितादिनांदिधा ;
(चौारा) दिपाणनां दिनांदाेका या उसका प्रदितादिनांदिधा, जो सहुकारिराता दिभार्ग काे संयुक्ता रादिजट्रारा से अदिनांम्नां श्रेणी का नांहुं हुोर्गा ;
(पाचौ) मंहुाराष्ट्र राज्य काृदि दिपाणनां बोडड, पाूणे काे कायगपालका दिनांदाेका या उसकाे प्रदितादिनांदिधा, जो सहुकारिराता दिभार्ग काे संयुक्ता रादिजट्रारा से अदिनांम्नां श्रेणी का नांहुं हुोर्गा;
(छेहु) दिजस राज दिभार्ग दिजस मं राष्ट्रीय मंहुत्त् का बाजारा स्थिता हुै, उसमं चौारा काृकां मं से दाो काृका बाजारा सदिमंदिता काे क्षेत्रा मं से हुंर्गे [दिजसमं एका, मंदिहुला हुोर्गी औरा एका, अनांुसूदिचौता जादिता, या अनांुसूदिचौता जनांजादिता या अन्य दिपाछेड़े र्गं या दिनांरादिधासूदिचौता जनांजादिता (विमुक्तािजाविता) या खानांाबदाो जनांजादिता से संबंदिधाता व्यस्थिक्ता हुोर्गा] ;
(साता) यदिदा आश्यका हुो, जहुा राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा याडड मं अदिधाकातामं काृदि उपाज प्राप्ता हुोताी हुै हुा अन्य राज्य सराकारां द्वारा दिसफारिरा दिकाए र्गए, मंहुाराष्ट्र राज्य सराकारा द्वारा नांामंदिनांदाेदिता दिकाये जानांेाले दाो काृका (दाो अन्य राज्यं मं से प्रत्येकाी, एका);
(आठ) राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारां से संबंदिधाता व्यापाराी काे लाइसंसधाराका नां कारानांेाले ताीनां सदाय, दिजसमं से, एका काृदि प्रसंकाराण उद्योर्ग से, जो संबंदिधाता प्रसंकाराण उद्योर्ग मं दिनांदाेका या भार्गीदारा काे रूपा मं न्यूनांतामं ताीनां ं का अनांुभा राखनांेाला हुोर्गा, [दिजसमं से एका, मंदिहुला हुोर्गी औरा एका, अनांुसूदिचौता जादिता या अनांुसूदिचौता जनांजादिता या अन्य दिपाछेड़े र्गो या दिनांरादिधासूदिचौता जनांजादिता (विमुक्ताि जाविता)िया खानांाबदाो जनांजादिता से हुोर्गा] ;
(नांौ) सराकारा द्वारा नांामंदिनांदाेदिता एका व्यस्थिक्ता जो दित्त, दिपाणनां, सहुकारिराता, प्रबन्धानां या आयाता-दिनांयागता काे क्षेत्रा काे दिकासी क्षेत्रा मं दिेज्ञ हुोर्गा।
(२)(का) बाजारा सदिमंदिता दिकासी मंामंले या मंामंलं पारा उसे सहुायता कारानांे या सलाहु दाेनांे काे प्रयोजनां काे दिलए, दिनांम्नां व्यस्थिक्तायं काो दिे दिनांमंदित्राताी काे रूपा मं आमंदित्राता कारा सकाेर्गी, अिागत् :—
(एका) भाराता सराकारा काे संबंदिधाता प्रादिधाकाराण काी पाूागनांुमंदिता प्राप्ता कारानांे काे पाश्चौात्, काृदि औरा प्रसंकाराण खाद्य उत्पादा दिनांयागता दिकास प्रादिधाकाराण (अपेडा) का एका प्रदितादिनांदिधा;
(दाो) मंहुाराष्ट्र राज्य मंाल भाण्डाराण दिनांर्गमं काे प्रबंधानां दिनांदाेका या उसका प्रदितादिनांदिधा (जो सहुकारिराता दिभार्ग काे संयुक्ता रादिजट्रारा से अदिनांम्नां श्रेणी का नां हुो;
(ताीनां) जहुा राष्ट्रीय मंहुत्त् का बाजारा स्थिता हुै उस क्षेत्रा मं काी िानांीय सराकाराी दिनांकाय काे प्रासकाीय प्रमंुख या उसकाे द्वारा नांामंदिनांदाेदिता दिकाये र्गए समंूहु-अ काे अदिधाकाराी से अदिनांम्नां श्रेणी का अदिधाकाराी नां हुो।
(ख) ऐसे दिे आमंदित्राताी, सदिमंदिता काी बैठका मं भार्ग ले सकांर्गे, पारांताु, उन्हुे मंता दाेनांे का अदिधाकारा नांहुं हुोर्गा।
(३) काृदि, दिपाणनां, सहुकारिराता राज दिभार्ग से अदिधाकाराी या काोई अन्य दिभार्ग से सराकाराी अदिधाकाराी जो सहुकारिराता दिभार्ग काे संयुक्ता रादिजट्रारा काे समंकाक्षे पादा धाराण काराता हुै, ऐसा राज्य सराकारा द्वारा नांामंदिनांदाेदिता दिकाया जानांेाला बाजारा सदिमंदिता का सदिचौ हुोर्गा। भार्ग साता-३६—१अ४ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि (४) राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता काे सदाय काी रूपा मं राज्य सराकारा द्वारा नांामंदिनांदाेदिता दिकाया र्गया व्यस्थिक्ता उसकाे नांामंदिनांदाेनां काे दिदानांांका से पाचौ ं काी अदिधा ताका या राज्य सराकारा काी इच्छेा ताका अपानांा पादा धाराण कारांर्गे।
(५) इस अदिधादिनांयमं मं अंतादिगष्ट दिकासी बाता काे हुोताे हुए भाी, धारा ५-१का काे अधाीनां राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काे िापानांा काी अदिधासूचौनांा, यिासंभा ीघ्र , राज्य सराकारा द्वारा जाराी काी हुै ताो दिद्यमंानां बाजारा सदिमंदिता अपानांा कायग कारानांे से पारिरादिराता हुोर्गी औरा सभाी दिद्यमंानां सदिमंदिता काे सदाय उनांका पादा धाराण कारानांे से पारिरादिराता हुंर्गे।
५-१गि(१) राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता काे दाैदिनांका कातागव्यं का कायागन्यनां कारानांे काे दिलए जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए, ऐसे व्यस्थिक्तायं से दिमंलकारा एका कायगकाराी सदिमंदिता र्गदिठता हुोर्गी।
राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता काी कायगकाराी सदिमंदिता। (२) बाजारा सदिमंदिता अपानांे अदिधाकारा औरा कातागव्यं मं काोई भाी अदिधाकारा औरा कातागव्यं काो दिलदिखता मं आदाे द्वारा कायगकाराी सदिमंदिता काो प्रत्यायोदिजता कारा सकाेर्गी।
राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काो कादितापाय धाराओं काो लार्गू हुोनांा।
५-१घि इस अदिधादिनांयमं काे उपाबंधा, जो धारा ५काे अधाीनां िादिपाता बाजारां काो लार्गू हुोताे हुै, धारा १२(१) का पारांताुका औरा धारा १२(३), १३,१४,१४का,१५,१५का,१६,१७,१८,१९,२०,२१,२१का, २२,२३,२३का,२४,२५,२६,२७,२७का,२८,४१का औरा ४५ काो छेोडकारा राष्ट्रीय मंहुत्त् काे बाजारा काो लार्गू हुंर्गे।"।
४. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ५घ काी, उपा-धारा (६) काे खण्ड (का) मं, "काे उपाबंधा" ब्दां काे पाश्चौात् "धारा ७का, धारा १०का," ब्दा, अंका औरा अक्षेरा दिनांदिष्ट दिकाए जायंर्गे।
सन् १९४६ का मंहुा. २० काी धारा ५घ मं संोधानां।
सन् १९४६ का मंहुा. २० काी धारा ६ मं संोधानां।
५. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ६ काी, उपा-धारा (२का) मं, "धारा ५ घ मं यिा उपाबंदिधाता काो छेोडकारा, दिकासी लाइसंस या अनांुमंादिता काी आश्यकाता नांहुं हुोर्गी, औरा ऐसी बाजारा सदिमंदिता द्वारा दिदिनांयमंनां नांहुं दिकाया जायेर्गा।" ब्दां काे िानां मं, "धारा ५घ मं यिा उपाबंदिधाता लाइसंस या बाजारा सदिमंदिता से काोई लाइसंस या अनांुमंदिता आश्यका हुोर्गी, तािादिपा, बाजारा सदिमंदिता द्वारा ऐसे लाइसंसधाराी से काोई बाजारा फाीस प्रभारिराता नांहुं काी जायेर्गी।" ब्दा राखे जायंर्गे।
६. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ७ काी, उपा-धारा (३) अपामंादिजगता काी जायेर्गी।
सन् १९४६ का मंहुा. २० काी धारा ७ मं संोधानां।
७. मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ७ काे पाश्चौात्, दिनांम्नां धाराए दिनांदिष्ट काी जायेर्गी, अिागत् :—
सन् १९६४ मंहुा. २० मं नांई धाराए ७का औरा ७ख का दिनांेनां।
एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंस दाेनांा।
"७काि(१) राज्य मं दिकासी मंुख्य बाजारा कांद्र, उपा-बाजारा कांद्र, दिनांजी बाजारा कांद्र औरा ई-ट्रेदिडंर्ग प्लटफामंग पारा या इस प्रयोजनां काे दिलए काोई अन्य िानां मं व्यापाराी काे रूपा मं कायग कारानांे काे दिलए, जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए, ऐसी राीत्या औरा ऐसे प्ररूपा मं, दिनांदाेका द्वारा या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता दिकासी अदिधाकाराी द्वारा अनांुदात्त या नांीकाृता दिकाए जानांेाले व्यापारिरायं काे दिलए पाूराे राज्य मं व्यापारा कारानांे काे दिलए एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंस हुोर्गी।
(२) एका व्यापाराी काे रूपा मं, उपा-धारा (१) काे अधाीनां एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंस प्राप्ता कारानांे या नांीकाृता कारानांे काे दिलए इच्छेुका काोई व्यस्थिक्ता, जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए, ऐसी फाीस काे साि ऐसे प्ररूपा मं दिनांदाेका या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता दिकासी अदिधाकाराी काो आेदानां काराेर्गा।
(३) दिनांदाेका या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता दिकाया र्गया काोई अदिधाकाराी, उपा-धारा (२) काे अधाीनां आेदानां काी प्रास्थिप्ता पारा, इस अदिधादिनांयमं काे उपाबंधां औरा इस दिनांदिमंत्त बनांाए र्गए दिनांयमं काे अध्यधाीनां दिजसे हु उदिचौताि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि ५ समंझे ऐसी जाचौ कारानांे काे पाश्चौात्, जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए ऐसी अदिधा काे दिलए, लाइसंस दाे सकाेर्गा या नांीकाृता कारा सकाेर्गा:
पारांताु, इस अदिधादिनांयमं मं औरा दिनांयमं मं अन्तादिगष्ट दिकासी बाता काे हुोताे हुए भाी ऐसा लाइसंस दाेनांे या उसे नांीकाृता कारानांे काे दिलए, अदिधास, खराीदा या संग्रहुण कांद्र काी अदिनांायग आश्यकाता या न्यूनांतामं मंात्रा काो दिचौारािग नांहुं दिलया जायेर्गा:
पारांताु आर्गे यहु दिका, ऐसी दाी र्गयी या नांीकाृता काी र्गयी ऐसी लाइसंस लाइसंसधाराका काो दिबनांा दिकासी भाेदाभा काे दिकासी प्ररूपा मं अिागत् प्रािदिमंका या दिद्वाताीयका या जो भाी हुो, व्यापारा कारानांे का अदिधाकारा प्रदानां काराेर्गा।
(४) इस धारा काे अधाीनां दिनांदाेका या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता अदिधाकाराी द्वारा जाराी एकाीकाृता एकाल व्यापाराी लाइसंस जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए, ऐसा संकाेतांका अंदिकाता हुोर्गा।
७ख.ि इस अदिधादिनांयमं मं अंतादिगष्ट दिकासी बाता काे हुोताे हुए भाी, राज्य, दिकासी अन्य राज्य या संघराज्य क्षेत्रा द्वारा दिदाया र्गया, संकाेतांका अंदिकाता दिकाए र्गए एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंसधाराका काो या भाौदिताका सदिहुता काोई अन्य प्रारूपा, दिजसमं उसकाे भाौर्गोदिलका अदिधाकारा क्षेत्रा मं जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए ऐसी राीत्या, पारिराचौालनां मं हुै ऐसे ई-प्लटफामंग पारा व्यापाराी काे रूपा मं व्यापारा संव्यहुारा कारानांे काी अनांुमंदिता दाे सकाेर्गा।
(२) ऐसा लाइसंसधाराका दिजस राज्य मं व्यापारा संव्यहुारा दिकाया जा राहुा हुै उस राज्य काे लार्गू दारा पारा जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए ऐसी राीत्या, बाजारा फाीस औरा अन्य दिपाणनां प्रभारा अदा कारानांे काे दिलए दायी हुोर्गा।"।
आंताराराज्य व्यापारा काे दिलए अन्य राज्यं या संघराज्य क्षेत्रां द्वारा दिदाए र्गए या नांीकाृता दिकाए र्गए एकाीकाृता एकाल व्यापाराी लाइसंस काी मंान्यता। ८.ि मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ८ काी, उपा-धारा (३) काे पाश्चौात्, दिनांम्नां उपा-धारा (४) जोड़ेी जायेर्गी, अिागत् :—
सन् १९६४ का मंहुा. २० काी धारा ८ मं संोधानां। "(४) यदिदा इस धारा काे अधाीनां लाइसंस दिनांलंदिबता या राद् दा काी हुै ताब, ऐसा लाइसंसधाराका उसे तात्काल बाजारा सदिमंदिता या दिनांदाेका या, यिास्थिदिता, उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता अदिधाकाराी काे कायागलय मं प्रताुता काराेर्गा, औरा हु, ऐसे दिनांलंबनां या राद् दाकारा.ण काे काराण, लाइसंस फाीस या काोई अन्य राकामं काी संपाूणग या दिकासी भार्गता: काी क्षेदितापाूदिताग या प्रदितादाय का दा कारानांे का हुकादारा नांहुं हुोर्गा।"ि
९.ि मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा १० काी, उपा-धारा (६) काे पाश्चौात् दिनांम्नां उपा-धारा जोडी जायेर्गी, अिागत् :—
सन् १९६४ का मंहुा. २० काी धारा १० मं संोधानां। "(७) दिजसे मंहुाराष्ट्र काे भाौर्गोदिलका अदिधाकारिराता क्षेत्रा काे भाीतारा ई-प्लटफामंग पारा या पारिराचौालनां मं हुो, ऐसे भाौदिताका समंेता काोई अन्य प्रारूपा मं व्यापाराी काे रूपा मं व्यापारा संव्यहुारा कारानांे काे दिलए अनांुमंदिता दाी र्गयी हुै, ऐसा एकाीकाृता एकाल व्यापारा लाइसंसधाराका, दिक्रेता, दिकासानां, बाजारा सदिमंदिता औरा अन्य राज्य या संघ राज्य क्षेत्रा काे एकाीकाृता एकाल लाइसंसधाराकां काे बीचौ या उनांसे उद् भाूता काोई दिादा दिकासी काृदि उपाज काी र्गुणत्ता या ताौल या अदायर्गी या दिकासी काृदि उपाज काे दिपाणनां काे दिदिनांयमंनां से संबंदिधाता दिकासी मंामंले से संबंदिधाता काोई ादा हुो ताो दिनांदाेका या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता दिकासी अदिधाकाराी द्वारा, पाक्षेकारां काो सुनांाई का युस्थिक्तायुक्ता असरा दाेनांे काे पाश्चौात् ताीस दिदानां काे भाीतारा संदिक्षेप्ता राीत्या, सुलझा जा सकाेर्गा।
(८) उपा-धारा (७) काे अधाीनां दिनांदाेका या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता अदिधाकाराी काे आदाे से व्यदिता काोई व्यस्थिक्ता, ऐसे आदाे काी प्रास्थिप्ता काे दिदानांांका से ताीस दिदानां काे भाीतारा, जैसा दिका दिदिहुता दिकाया जाए ऐसे प्ररूपा औरा राीत्या, राज्य सराकारा या उसकाे द्वारा प्रादिधाकाृता अदिधाकाराी काो अपाील प्रताुता कारा सकाेर्गा। अपाील प्रादिधाकाराी अपाील काी प्रास्थिप्ता काे दिदानांांका से ताीस दिदानां काी अदिधा काे भाीतारा, पाक्षेकारां काो सुनांाई का युस्थिक्तायुक्ता असरा दाेनांे पाश्चौात् दिनांपाटानां काराेर्गा।६ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि १०.ि मंूल अदिधादिनांयमं काी धारा ३४का काी, उपा-धारा (१) मं, "राज्य सराकारा" ब्दां काे िानां मं, "दिनांदाेका" ब्दा राखा जायेर्गा।
सन् १९६४ का मंहुा. २० काी धारा ३४का मं संोधानां।
कादिठनांाईयं काे दिनांराकाराण काी स्थिक्ता।
११.ि (१) इस अध्यादाे द्वारा यिा संोदिधाता मंूल अदिधादिनांयमं काे उपाबंधां काो प्रभाी कारानांे मं यदिदा, काोई कादिठनांाई उद् भाूता हुोताी हुै ताो राज्य सराकारा, ाजपत्रो मं प्रकादिता आदाे द्वारा ऐसे उपाबन्धा कारा सकाेर्गी जो इस अध्यादाे द्वारा यिा संोदिधाता मंूल अदिधादिनांयमं काे उपाबधां से असंर्गता नां हुो, जो उसे कादिठनांाई काे दिनांराकाराण प्रयोजनां काे दिलए आश्यका या इष्टकारा प्रताीता हुं ।
(२) उपा-धारा (१) काे अधाीनां बनांाया र्गया प्रत्येका आदाे उसकाे बनांाए जानांे काे पाश्चौात् यिा संभा ीघ्र, राज्य दिधानांमंडल काे प्रत्येका सदानां काे समंक्षे राखा जायेर्गा।ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि ७
क्ताव्या
मंहुाराष्ट्र काृदि उपाज दिपाणनां (दिकास औरा दिदिनांयमंनां) अदिधादिनांयमं, १९६३(सन् १९६४ का मंहुा. २०) राज्य मं िादिपाता बाजारा क्षेत्रां औरा दिनांजी बाजोरां तािा दिकासानां उपाभाोक्ता बाजारां समंेता बाजारा क्षेत्राो मं काृदि औरा कादितापाय अन्य उपाजं काे दिकास औरा दिदिनांयमंनां कारानांे, बाजारा सदिमंदितायं पारा अदिधाकारा प्रदात्त कारानांे तािा उपायु गक्ता मंामंलं से संबंदिधाता प्रयोजनां काे दिलए उपाबंधा कारानांे काे दिलए अदिधादिनांयदिमंता दिकाया र्गया हुै। २. राज्य सराकारा, दिकासानां काे काृदि उपाज काे दिलए बेहुतारा मंूल्य प्राप्ता कारानांे काे दिलए दिनांरांतारा प्रयासराता हुै। प्रचौदिलता नांीलामंी प्रणाली मं एकारुपाता औरा पारादादिगता लानांे काे दिलए तािा काृदि उपाजं काे दिलए उदिचौता मंूल्य प्राप्ता कारानांे काे दिलए कांद्र सराकारानांे काृदि उपाज का दिक्रय औरा क्रय कारानांे काे दिलए राष्ट्रीय तारा पारा एका बाजारा काी संकाल्पानांा काे आधारा पारा ई-राष्ट्रीय काृदि बाजारा योजनांा (इ-नांामं) ुरू काी हुै।
काृदि उपाज काे व्यापारा मं अराोधा काो कामं कारानांे औरा राज्य काी बाजारा सदिमंदिता मं दिकासानां, उनांकाे काृदि उपाज काे दिलए बेहुतारा मंुल्य प्राप्ता कारानांे काे दिलए, ई-राष्ट्रीय काृदि बाजारा योजनांा(ई-नांामं) कायागस्थिन्ता काी हुै। तािादिपा, उक्ता अदिधादिनांयमं मं एकाल एकाीकाृता व्यापारा लाइसे ंस काे उपाबंधा नां हुोनांे काे काराण संपाूणग, राज्य काे दिलए ई-नाम योजनांा काे अधाीनां आंतारा बाजारा औरा आंताराराज्य व्यापारा मं ई-राष्ट्रीय काृदि बाजारा योजनांा कायागस्थिन्ता नांहुं हुो सकाी। राज्य मं ई-नाम योजनांा काे प्रभाी कायागन्यनां कारानांे काी दाृस्थिष्ट से सराकारा, संपाूणग राज्य मं काृदि उपाज मं व्यापारा काे दिलए औरा अन्य राज्य द्वारा यदिदा ऐसी मंान्यता हुो ताो, आंताराराज्य व्यापारा मं भाी काृदि उपाज काे व्यापारा काे दिलए एकाल एकाीकाृता लाइसंस दाेनांे काे दिलए उपाबंधा कारानांे हुेताु उक्ता अदिधादिनांयमं मं संोधानां कारानांा इष्टकारा समंझताी हुै।
३. जो काोई भाी दिद्यमंानां बाजारा का काराोबारा असी हुजारा मंेदिट्रका टनां काृदि उपाज से कामं नां हुो उतानांी दाे अन्य राज्यं से काृदि उपाज आताी हुै ऐसे दिकासी भाी दिद्यमंानां बाजारां मं मंूलभाूता सुदिधाओं काी दिे आश्यक्ता औरा काृदि उपाज काे दिक्रय काी बेहुतारा सुदिधा काी जरूरातां काो ध्यानां मं राखताे हुए उसकाे राष्ट्रीय मंहुत् काे बाजारा काे रूपा मं दिकासी ऐसे बाजारा िादिपाता कारानांा या दिकासी ऐसे बाजारा काो, राष्ट्रीय मंहुत् काे बाजारा काे रूपा मं िादिपाता कारानांा आश्यका समंझा र्गया हुै।
राष्ट्रीय मंहुत् काे बाजारा काी बाजारा सदिमंदिता औरा ऐसी बाजारा सदिमंदिता काे दाैनांदिदानां कातागव्यं का कायागन्यनां कारानांे काे दिलए, कायगकाराी सदिमंदिता काी िापानांा कारानांे काे दिलए भाी उपाबंधा दिकाये र्गए हुं।
४. एकाीकाृता एकाल व्यापाराी लाइसंसधाराका, दिकासानां, ब्यौहुाराी औरा बाजारा सदिमंदिता काे बीचौ मं औरा उनांमं दिकासी काृदि उपाज काी र्गुणत्ता या ताौल या अदायर्गी से संबंदिधाता दिादां काो सुलझानांे काे दिलए उपाबंधा कारानांे काे प्राधानां हुै।
५. यहु संोधानां यहु सुदिनांस्थिश्चौता काराेर्गा दिका, राज्य काे दिकासानां काो, काृदि उपाज काे प्रदितापाधागत्मंका मंूल्य से अदिधाकातामं लाभा प्राप्ता हुो।
६. चौू दिका, राज्य दिधानांमंडल काे दाोनां सदानां का सत्रा नांहुं चौल राहुा हुै औरा मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु समंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐसी पारिरास्थिदिताया दिद्यमंानां हुं, दिजनांकाे काराण उन्हुं इसमं उपायु गक्ता प्रयोजनां८ि महाष्ट्रटिशासनिाजपत्रोिअसाणिभागिसाता,िऑक्िटाेाेबंि३१,ि२०२५/कावितािकाि९,िशकाेि१९४७ि काे दिलए, मंहुाराष्ट्र काृदि उपाज दिपाणनां (दिकास औरा दिदिनांयमंनां) अदिधादिनांयमं, १९६३ मं संोधानां कारानांे काे दिलए, सद्य कायगाहुी कारानांा आश्यका समंझा र्गया हुै, अताः यहु अध्यादाे प्रख्यादिपाता दिकाया जाता हुै। मंु ंबई, आचायाषिदेव्रता,
दिदानांांदिकाता ८ अक्ताूबरा २०२५। मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल।
मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल काे आदाे तािा नांामं से,-
प्राीणिदेाडे,
सराकारा काे प्रधानां सदिचौ।
(यिािग अनांुादा),
श्रीिअरूणिकामळाबंाइषिाळूिविगताे,
प्रभाराी भा संचौालका,
मंहुाराष्ट्र राज्य।
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