महाराष्ट्र शासन राजपत्र
भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी
षष ११, अंक ५१] गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४,२०२५/अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ [पृष्ठे १७, विकंमते : रुपये १४.००
प्राविधकृते प्राकाशान
विजल्हा न्यायालय, रात्नाविगराी यांजकून
आदेशा
क्रमांाक बी–२/७४६५/सन २०२५.—रत्नाविगरी विल्ह्यात कार्यरत असलेल्र्या खालेीले न्र्याविर्यक अविकारी र्याच्र्या नासमांोर दर्शयविल्र्याप्रमांाणे अवियत रेचा अय, सुट्टी उपुभाोगणेचाे पुरानगीसह विर्शेष बीाबी म्हणेून मांूर करणेत र्येत आहे. तसेचा रकाना क्रमांाक ६ मांीले न्र्याविर्यक अविकारी र्याचाेकडे कार्यभार ठेणेत र्येत आहे.
| अ. क्र. (१) | न्र्याविर्यक अविकाऱ्र्याचाे ना पुदनामां (२) | विर्शल्लेक अवियत रा (३) | अवियत रा मांाविगतलेचा विदनाक (४) | रा / सुट्टी उपुभाोगणेचा मांुख्र्यालेर्य सोडेणेचा कालेाी (कार्याय. ेळेनतर ते कार्याय. ेळेपुूीपुर्यंत) (५) | अवितरिरक्त कार्यभार साभाळेणेारे न्र्याविर्यक अविकारी र्याचाे ना पुदनामां (६) |
| १. | श्रीमां. एस. एस. विपुगळे , मांुख्र्य न्र्यार्यदडेाविकारी, रत्नाविगरी | ४३ विदस अवियत रा | विदनाक ५ विडेसंबीर २०२५ ते विदनाक ६ विडेसंबीर २०२५ पुर्यंतचाी दोन विदस अवियत रा. | विदनाक ७ विडेसंबीर २०२५ रोीचाी सुट्टी विदनाक ५ विडेसंबीर २०२५ रोीचाे कार्याय. ेळेपुासून ते विदनाक ८ विडेसंबीर २०२५ रोीचाे कार्याय. ेळेपुूीपुर्यंत. | श्रीमां. व्ही. व्ही. पुाटीले, सह विदाणेी न्र्यार्याीर्श . स्तर अवित. मांुख्र्य न्र्यार्यदडेाविकारी, रत्नाविगरी. |
सदर आदेर्शाचाी नंद सबीवित न्र्याविर्यक अविकाऱ्र्याचाे सेापुस्तकात घेण्र्यात र्याी.
रत्नाविगरी,
प्रभारी प्रमांुखा विल्हा सत्र न्र्यार्याीर्श, विदनाक ६ विडेसंबीर २०२५.
रत्नाविगरी.
भाग एक (को.वि.पु)—१
(१)२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७
विजल्हा न्यायालय, रात्नाविगराी यांजकून
आदेशा
क्रमांाक आस्था. बी २/७४००/सन २०२५.—रत्नाविगरी विल्ह्यात कार्यरत असलेल्र्या खालेीले न्र्याविर्यक अविकारी र्याच्र्या नासमांोर दर्शयविल्र्याप्रमांाणे अवियत रेचा अय, मांुख्र्यालेर्य सोडेणेच्र्या पुरानगीसह मांूर करण्र्यात र्येत आहे. तसेचा रकाना क्रमांाक ६ मांीले न्र्याविर्यक अविकारी र्याचाेकडे कार्यभार ठेणेत र्येत आहे.
| अ. क्र. (१) | न्र्याविर्यक अविकाऱ्र्याचाे ना पुदनामां (२) | विर्शल्लेक अवियत रा (३) | अवियत रा मांाविगतलेचा विदनाक (४) | रा / सुट्टी उपुभाोगणेचा मांुख्र्यालेर्य सोडेणेचा कालेाी (कार्याय. ेळेनतर ते कार्याय. ेळेपुूीपुर्यंत) (५) | अवितरिरक्त कार्यभार साभाळेणेारे न्र्याविर्यक अविकारी र्याचाे ना पुदनामां (६) |
| १. | श्री. पुी. एस. चादगुडे, विल्हा न्र्यार्याीर्श–१ अवित. सत्र न्र्यार्याीर्श, खाेडे | २९१ विदस अवियत रा | विदनाक ५ विडेसंबीर २०२५ ते विदनाक ८ विडेसंबीर २०२५ चार विदस अवियत रा. | विदनाक ४ विडेसंबीर २०२५ रोीचाे कार्याय. ेळेनतर पुासून ते विदनाक ९ विडेसंबीर २०२५ रोीचाे कार्याय. ेळेपुूीपुर्यंत. | श्रीमां. ए. एस. नेसे, विल्हा न्र्यार्याीर्श १ अवित. सत्र न्र्यार्याीर्श, विचापुळेूणे र्याचाेकडे* |
| * फौदारी कडेीले न्र्याविर्यक कामांाचा पुदभार ठेणेत र्येत आहे. तसेचा विदाणेी कडेीले न्र्याविर्यक कामांाचा तसेचा प्र्शासकीर्य कामांाचा पुदभार (आहरणे सवितरणे अविकारी र्यासह) श्रीमां. व्ही. टी. विनरगुडे, विल्हा न्र्यार्याीर्श-२ अवित. सत्र न्र्यार्याीर्श, खाेडे र्याचाेकडे ठेण्र्यात र्येत आहे. |
सबीत न्र्याविर्यक अविकारी र्यानी त्र्याचाे पुदभारासबी त्र्याचाे न्र्यार्यालेर्यार्शी सलेग्न असलेल्र्या पुोलेीस ठेाण्र्यालेा तुरुंगाविकारी र्याना लेखाी सूचाना द्याव्र्यात. तसेचा त्र्यानी मांुख्र्यालेर्यात हर झालेचाे प्रवितेदन विल्हा न्र्यार्यालेर्याकडे पुाठेविणेचाे आहे.
सदर आदेर्शाचाी नंद सबीवित न्र्याविर्यक अविकाऱ्र्याचाे सेापुस्कात घेण्र्यात र्याी.
रत्नाविगरी,
प्रभारी प्रमांुखा विल्हा सत्र न्र्यार्याीर्श, विदनाक ४ विडेसंबीर २०२५.
रत्नाविगरी.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ ३उप विभागीय अविधकाराी, राजापूरा यांजकून
अविधसूचना
भाूविमसंपादेन, पुनषसन पुनषसाहाते करातेाना उविचते भारापाई विमळण्याचा आविण पारादेशाषकतेचा हाक्क अविधविनयम, २०१३
कलम ४(१).
क्रमांाक एलेएक्र्यु/एसआर/१५६.—ज्र्याअथाी, मांहाराष्ट्र र्शासनाने भाूविमांसपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क अविविनर्यमां, २०१३ (२०१३ चा ३०) र्याच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (इ) च्र्या पुरतुकाद्वारे प्रदान करण्र्यात आलेल्र्या अविकाराचा ापुर करून काढण्र्यात आलेलेी र्शासकीर्य अविसूचाना, मांहसूले न विभाग क्रमांाक सकीणेय ११/२०१४/ प्र. क्र. ७७/अ-२, विदनाक १६ मांाचाय २०१५ (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त अविसूचाना " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याद्वारे असे अविसूविचात केले आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (झाेडे अे) मांध्र्ये व्र्याख्र्या केलेल्र्या एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी, एखाद्या विल्ह्यातीले ५०० हेक्टीरपुेक्षा अविक नसेले इतक्र्या क्षाेत्राकरिरता भाूसपुादन करण्र्याच्र्या सबीात, अर्शा विल्ह्याचा विल्हाविकारी हा उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्र्योनासाठेी समांुविचात र्शासन असल्र्याचाे मांानण्र्यात र्येईले ;
आविणे ज्र्याअथाी, एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी लेघेु पुाटीबीारे र्योना ाभालेी, मांौे–ाभालेी, ता. रापुूर, वि. रत्नाविगरी र्येथाीले सी. मांुख्र्य कामांे अतगयत रणे तळे साडेा प्रेर्श पुच्छ कालेा विमांोचाक बीुडेीत क्षाेत्र पुोहोचा रस्ता र्या प्र्योनासाठेी भाूसपुादन होत असून र्यात र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाीमांध्र्ये अविक तपुर्शीलेार णेयन केलेलेी मांीन सपुादन करण्र्याचा, उक्त अविसूचानेनुसार समांुविचात र्शासन असलेल्र्या, रत्नाविगरी विल्ह्याच्र्या विल्हाविकाऱ्र्याचा उद्देर्श आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्रकरणे दोनमांध्र्ये देण्र्यात आलेल्र्या सामांाविक प्रभा आविणे सायविनक प्र्योन र्याचाे विनायरणे करण्र्याकरिरता प्रारविभाक अन्ेषणे करण्र्यासबीतीले तरतुदी विचारात घेता, समांुविचात र्शासनाने सामांाविक प्रभा आविणे सायविनक प्र्योन र्याचाे विनायरणे करण्र्याकरिरता प्रारविभाक अन्ेषणे करणे आश्र्यक आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, सायविनक प्र्योनासाठेी मांीन सपुादन करण्र्याचा समांुविचात र्शासनाचा हेतू असल्र्यास ते बीावित क्षाेत्रामांीले ग्रामां स्तरार विकंा ॉडेडस्तरारीले सबीवित पुचार्यत, नगरपुाविलेका विकंा र्यथास्थिस्थाती, मांहानगरपुाविलेका र्याच्र्यार्शी विचारविविनमांर्य करून अर्शा र्शासनाकडेून अविसूचानेद्वारे विविनविदयष्टी करण्र्यात र्येईले अर्शा रिरतीने आविणे अर्शा विदनाकापुासून सामांाविक पुरिरणेामां विनायरणे अभ्र्यास अमांलेात आणेले अर्शी तरतूद उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ४ च्र्या पुोटी-कलेमां १ मांध्र्ये करण्र्यात आलेी आहे.
त्र्याअथाी, आता उपुरोक्त कार्यद्याचाे कलेमां ३ चाे पुोटी-कलेमां (ई) प्रमांाणे विल्हाविकारी, रत्नाविगरी र्याना समांुविचात र्शासन म्हणेून अविसूविचात करण्र्यात आले आहे आविणे कलेमां ३ चाे पुोटी-कलेमां (ग) नुसार विल्हाविकारी, रत्नाविगरी र्यानी त्र्याचाे तीने पुढीले कार्याही करण्र्यासाठेी उपु विभागीर्य अविकारी, रापुूर र्याना प्राविकृत केले आहे. सबीबी र्याद्वारे उपु विभागीर्य अविकारी, रापुूर असे अविसूविचात करीत आहे की, बीावित क्षाेत्रामांध्र्ये भाकर सेा सस्था, मांु.पुो.कंड्ये, ता.लेा, वि.रत्नाविगरी, र्याच्र्याकडेून भाूमांी सपुादन पुनयसन आविणे पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क (मांहाराष्ट्र) विनर्यमां, २०१४, मांध्र्ये विहीत केलेल्र्या रिरतीने विदनाक २४ विडेसंबीर २०२५ पुासून सामांाविक प्रभा विनायरणे अभ्र्यास करण्र्यात र्येईले.
अनुसूची
भाूसंपादेन संस्थेचे ना – विल्हा लेसारणे अविकारी, मांृद लेसारणे विभाग, कुारबीा रत्नाविगरी.
प्रायोजन :- लेघेुपुाटीबीारे र्योना सी. मांुख्र्य कामांे अतगयत रणे तळे साडेा प्रेर्श पुच्छ कालेा विमांोचाक बीुडेीत क्षाेत्र पुोहोचा रस्ता र्या प्र्योनासाठेी.
गाचे ना :- मांौे-ाभालेी, ता. रापुूर, वि. रत्नाविगरी
एकूण क्षेत्र :- ४२.०५.४४ (हे. आर.)
भाग एक (को.वि.पु)—१अ४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७
| अनुक्रमांक (१) | से नंबुरा/ गट नंबुरा (२) | संपादेन करायाच्या क्षेत्राचा चतेु:विसमा | |||
| संपादेन क्षेत्राच्या पूष विसमेस सर्व्हेहाे नं./विहा.नं. (३) | संपादेन क्षेत्राच्या पश्चिचम विसमेस सर्व्हेहाे नं./विहा.नं. (४) | संपादेन क्षेत्राच्या उत्तरा विसमेस सर्व्हेहाे नं./ विहा.नं. (५) | संपादेन क्षेत्राच्या देविक्षेण विसमेस सर्व्हेहाे नं./विहा.नं. (६) | ||
| १ | ३३/८ पुै | ३३/१७ | ३३/१२ | - | ३३/१२, ३३/१७ |
| २ | ३३/१२ पुै | ३३/१७ | - | ३३/८ | ३३/१५, ३३/१६ |
| ३ | ३३/१५ पुै | ३३/१६ | - | ३३/१२ | ३३/१६ |
| ४ | ३३/१६ | ३३/१७ | ३३/१५ | ३३/१२ | ३८/१ |
| ५ | ३३/१७ पुै | ३८/२ | ३३/८, ३३/१२, ३३/१६ | ३३/८ | ३८/२ |
| ६ | ३५/२ पुै | ३५/५ | - | - | ३५/९ |
| ७ | ३५/४ पुै | ३५/५ | - | - | ३५/५ |
| ८ | ३५/५ पुै | ३८/१, ३८/२, ३८/४ | ३५/२, ३५/९ | ३५/४ | ३६, हाळे |
| ९ | ३५/८ पुै | ३६, हाळे | - | ३५/५ | हाळे |
| १० | ३५/९ पुै | ३५/५ | - | ३५/२ | ३५/५ |
| ११ | ३६/० | ३५/५ | ३५/८, ३५/५ | ३५/५ | हाळे |
| १२ | ३७/२ पुै | ३७/३ | - | हाळे | ३७/५ |
| १३ | ३७/३ पुै | ३८/७, ३८/१० | ३७/२, ३७/५, ३७/७ | हाळे,३८/४ | ३७/७ |
| १४ | ३७/५ पुै | ३७/३ | - | ३७/२,३७/३ | ३७/६, ३७/७ |
| १५ | ३७/६ पुै | ३७/७ | - | ३७/५ | - |
| १६ | ३७/७ पुै | ३७/३ | ३७/६ | ३७/५, ३७/३ | - |
| १७ | ३८/१ | ३८/२ | ३५/५ | ३३/१६ | ३५/५ |
| १८ | ३८/२ पुै | ३८/३ | ३८/१ | ३३/१७ | ३८/४ |
| १९ | ३८/३ पुै | - | ३८/२ | - | ३८/५ |
| २० | ३८/४ | ३८/५, ३८/७ | ३५/५, हाळे | ३८/२ | ३८/७, ३७/३ |
| २१ | ३८/५ | ३८/८ | ३८/४, ३८/७ | ३८/३ | ३८/११, ३८/७ |
| २२ | ३८/६ पुै | ३८/९ | ३८/८ | - | ३८/९, ३८/८ |
| २३ | ३८/७ | ३८/५ | ३७/३ | ३८/४ | ३८/१० |
| २४ | ३८/८ पुै | ३८/६, ३८/९, ३८/११ | ३८/५ | ३८/६ | ३८/५, ३८/११ |
| (१) | (२) | (३) | (४) | (५) | (६) |
| २५ | ३८/९ पुै | - | ३८/६ | - | ३८/११ |
| २६ | ३८/१० पुै | ३८/११, ३८/१३, ३९/४, ३९/३, ३९/२ | ३७/३ | ३८/७, ३८/११, ३८/५ | ३९/१ |
| २७ | ३८/११ पुै | - | ३८/५ | ३८/८, ३८/६, ३८/९ | ३८/१३, ३९/८, ३९/९ |
| २८ | ३८/१३ पुै | ३८/५ | ३८/१० | ३८/११ | ३९/४ |
| २९ | ३९/१ पुै | ३९/२ | - | ३८/१० | ३९/११ |
| ३० | ३९/२ पुै | - | ३९/१, ३९/११, ३९/१४, ३९/१५ | ३८/१० | ३९/२२, ३९/२४ |
| ३१ | ३९/३ पुै | ३९/१२ | ३९/२ | ३९/४ | - |
| ३२ | ३९/४ | ३९/५, ३९/१२ | ३९/३, ३८/१३ | ३८/१३ | ३९/३ |
| ३३ | ३९/५ पुै | ३९/६ | ३९/४ | ३८/१३ | ३९/१२ |
| ३४ | ३९/६ पुै | - | ३९/५, ३९/१२ | ३९/५ | ३९/१८ |
| ३५ | ३९/८ पुै | ३९/९, ३९/१३ | ३८/११ | ३८/११ | - |
| ३६ | ३९/९ पुै | - | ३९/८, ३९/१३ | ३८/११ | - |
| ३७ | ३९/११ पुै | ३९/२ | - | ३९/११ | ३९/१४ |
| ३८ | ३९/१२ पुै | ३९/६, ३९/१८ | ३९/३ | ३९/४, ३९/५, ३९/६ | - |
| ३९ | ३९/१३ पुै | ३९/९ | ३९/८ | ३९/९, ३९/८ | - |
| ४० | ३९/१४ पुै | ३९/२ | - | ३९/११ | ३९/१५ |
| ४१ | ३९/१५ पुै | ३९/२ | - | ३९/१४ | ३९/१६ |
| ४२ | ३९/१६ पुै | - | - | ३९/१५ | - |
| ४३ | ३९/१७ | ३९/२२, ४०/५ | ३९/१५, ३९/१६ | ३९/२ | ४०/४ |
| ४४ | ३९/१८ पुै | - | ३९/१२ | ३९/६ | - |
| ४५ | ३९/२० पुै | ३९/२१ | ३९/१३ | ३९/९ | ३९/१९ |
| ४६ | ३९/२२ | ३९/२ | - | ३९/२ | ४०/५,४०/६ |
| ४७ | ३९/२४ पुै | - | ३९/२ | ३९/२ | ४०/७ |
| ४८ | ४०/२ पुै | ४०/९ | - | - | ४०/१४ |
| ४९ | ४०/३ पुै | ४०/४ | - | ३९/१६ | ४०/९ |
| ५० | ४०/४ | ४०/५, ४०/१० | ४०/३ | ३९/१७ | ४०/९ |
| ५१ | ४०/५ पुै | ४०/६ | ४०/१० | ३९/२२ | - |
| (१) | (२) | (३) | (४) | (५) | (६) |
| ५२ | ४०/६ पुै | ४०/७, ४०/८ | ४०/५ | ३९/२२ | - |
| ५३ | ४०/७ पुै | - | ४०/६ | ३९/२४ | ४०/८ |
| ५४ | ४०/८ पुै | - | ४०/६ | ४०/७ | - |
| ५५ | ४०/९ | ४०/१० | ४०/२ | - | ४०/१४ |
| ५६ | ४०/१० पुै | ४०/५ | ४०/९, ४०/१४ | ४०/५ | ४३/२ |
| ५७ | ४०/१४ पुै | ४०/१० | - | ४०/२, ४०/९ | ४०/१० |
| ५८ | ४३/२ पुै | - | - | ४०/१० | ४३/११, ४३/१२ |
| ५९ | ४३/११ पुै | ४३/२, ४३/१२ | - | ४३/२ | ४३/१९, ४३/२० |
| ६० | ४३/१२ पुै | - | ४३/११ | ४३/२ | ४३/२० |
| ६१ | ४३/१९ पुै | ४३/२०, ४३/२७ | - | ४३/११ | ४३/३१, ४३/३२ |
| ६२ | ४३/२० पुै | ४३/१२ | ४३/११, ४३/१९ | ४३/१२ | ४३/२७ |
| ६३ | ४३/२७ पुै | - | ४३/१९ | ४३/२० | ४३/३२ |
| ६४ | ४३/३१ पुै | ४३/३२ | - | ४३/१९ | - |
| ६५ | ४३/३२ पुै | - | ४३/३१ | ४३/१९, ४३/२७ | - |
| ६६ | ४३/४३ पुै | ४३/३२ | - | ४३/३१ | - |
ॉ. जॅसविमन, रापुूर, सहार्यक विल्हाविकारी (भा.प्र.से.), विदनाक ८ विडेसंबीर २०२५. तथा उपु विभागीर्य अविकारी, रापुूर.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ ७उपविजल्हाविधकाराी, भाूसंपादेन इमाराते देळणळण प्राकल्प, विसंधुदेुगष यांजकून
अविधसूचना
भाूविमसंपादेन, पुनषसन पुनषसाहाते करातेाना उविचते भारापाई विमळण्याचा आविण पारादेशाषकतेचा हाक्क अविधविनयम, २०१३.
क्रमांाक १/२०२० मांौे-विर्शरले.—ज्र्याअथाी, " भाूविमांसपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क अविविनर्यमां, २०१३" (२०१३ चा ३०) र्याच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (इ) च्र्या पुरतुकाद्वारे प्रदान करण्र्यात आलेल्र्या अविकाराचा ापुर करून काढण्र्यात आलेलेी र्शासकीर्य अविसूचाना, मांहसूले नविभाग क्र. सकीणेय ११/२०१४/प्र.क्र.७७/अ-२, विदनाक १९ ानेारी २०१५ (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त अविसूचाना " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याद्वारे असे अविसूविचात केले आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (झाेडे अे) मांध्र्ये व्र्याख्र्या केलेल्र्या एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी, एखाद्या विल्ह्यातीले ५०० हेक्टीरपुेक्षा अविक नसेले इतक्र्या क्षाेत्राकरिरता मांीन सपुादन करण्र्याच्र्या सबीात अर्शा विल्ह्याचा विल्हाविकारी हा उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्र्योनासाठेी समांुविचात र्शासन असल्र्याचाे मांानण्र्यात र्येईले ;
आविणे ज्र्याअथाी, उक्त अविसूचानेनुसार समांुविचात र्शासन असलेल्र्या, विसुदुगय विल्ह्याच्र्या विल्हाविकाऱ्र्यास र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी एक मांध्र्ये अविक तपुविर्शलेार णेयन केलेलेी मांीन (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त मांीन " असा करण्र्यात आलेा आहे) सायविनक प्र्योनासाठेी (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श उक्त " सायविनक प्र्योन " असा करण्र्यात आलेा आहे) आश्र्यक आहे अथा वितचाी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे, असे ाटीते. ज्र्याच्र्या स्रुंपुाचाे विरणे र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी दोनमांध्र्ये विदलेले आहे, आविणे म्हणेून उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) च्र्या तरतुदीन्र्ये र्याद्वारे असे आविणे ज्र्याअथाी, प्रस्तावित भाूमांी सपुादनाच्र्या अनुषगाने बीावित व्र्यक्तीचाे विस्थापुन होत नसल्र्याबीाबीतचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी तीन मांध्र्ये विदलेा आहे.
आविणे, ज्र्याअथाी, पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी चार मांध्र्ये विदलेलेा आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, कलेमां ४३ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) अन्र्ये पुनयसन पुनयसाहत र्या प्र्योनासाठेी प्र्शासकाचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी पुाचा मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
त्र्याअथाी, आता, असे घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां ४ अनुसार कोणेतीही व्र्यक्ती, ही अविसूचाना प्रविसद्ध झाल्र्याच्र्या विदनाकापुासून ते उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्रकरणे चार खालेीले कार्याही पुूणेय होईले त्र्या कालेाीपुर्यंत उक्त विमांनीचा अथा वितच्र्या भागाचा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा उक्त विमांनीर कोणेताही भार विनमांायणे करणेार नाही.
पुरतु, उक्त विमांनीच्र्या अथा वितच्र्या भाराच्र्या मांालेकाने अय केल्र्यार, विल्हाविकाऱ्र्यास विर्शेष पुरिरस्थिस्थातीचाी कारणे लेखाी नमांूद करून अर्शा मांालेकास उपुरोक्त तरतुदीच्र्या प्रतयनातून सूटी देता र्येईले ;
पुरतु आणेखाी असे की, कोणेत्र्याही व्र्यक्तीने र्या तरतुदीचाे बीुद्धीपुरस्सर उल्लेघेन केल्र्यामांुळे झालेल्र्या कोणेत्र्याही हानीचाी विकंा क्षातीचाी विल्हाविकाऱ्र्याकडेून भारपुाई विदलेी ाणेार नाही.
तसेचा, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (५) अनुसार, विल्हाविकारी भाूमांीसपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क (मांहाराष्ट्र) विनर्यमां, २०१४ (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श " उक्त विनर्यमां " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याच्र्या विनर्यमां १० च्र्या उपु-विनर्यमां (३) द्वारे विहीत केल्र्याप्रमांाणे भाूविमां अविभालेखाच्र्या अद्यार्यातीकरणेाचाे कामां हाती घेणेार असल्र्याचाे पुूणेय करणेार असल्र्याचाे देखाीले घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे.
आविणे ज्र्य ाअथाी, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ खाडे (छ) अन्र्ये, समांुविचात र्शासन असलेलेा विल्हाविकारी, उक्त अविविनर्यमांाखालेीले विल्हाविकाऱ्र्याचाी कार्य पुार पुाडेण्र्यासाठेी उपुविल्हाविकारी भाूसपुादन, (इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु) विसुदुगय र्यास पुदविनदेविर्शत करीत आहे.
८ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७अनुसूची—एक
जविमनीचे णषन
गा–विर्शरले, तालेुका – कणेकलेी, विल्हा – विसुदुगय
| अ. क्र. (१) | भाूमांापुन विकंा गटी क्रमांाक (२) | अदावित क्षाेत्र (हेक्टीरमांध्र्ये) (३) |
| १ | १९०८ | ०.०६.८३ |
| २ | १९५९ | ०.०१.४४ |
| ३ | २४४२ | ०.०१.१४ |
| ४ | २४४३ | ०.०३.०० |
| ५ | २४४४ | ०.०२.८९ |
| ६ | २४४५ | ०.००.५० |
| ७ | २४४६ | ०.०६.६६ |
| ८ | २४७२(१) | ०.०७.८३ |
| ९ | २४७२(२) | ०.०८.८२ |
| १० | २४७२(३) | ०.००.५० |
| ११ | २४७२(४) | ०.०९.२७ |
| १२ | २४७२(७) | ०.००.६७ |
| १३ | २४७६ | ०.१०.७० |
| १४ | २४७८ | ०.०३.०० |
| एकूण क्षेत्र | ०.७२.५२ |
अनुसूची– देोन
साषजविनक प्रायोजनाच्या स्रुपाबुाबुते विराण
प्रकल्पुाचाे ना – लेघेु पुाटीबीारे र्योना विर्शरले, ता. कणेकलेी, वि. विसुदुगय, मांौे विर्शरले, तालेुका कणेकलेी, विल्हा विसुदुगय र्या गातीले विमांनी लेघेुपुाटीबीारे र्योना विर्शरले, तालेुका कणेकलेी र्योनेच्र्या पुोहोचा रस्त्र्यासाठेी सपुाविदत करणे.
प्राकल्प कायाषचे षष – २०२५
समांालेा विमांळेणेारे लेाभा – अतगयत ोडेरस्ता
अनुसूची – तेीन
बीावित व्र्यक्तंचाे विस्थापुन होत नसल्र्याने र्याबीाबीतचा तपुर्शीले विनरक आहे.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ ९अनुसूची – चारा
(पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श)
पुनयसन पुनयसाहत र्योना लेागू होत नाही.
अनुसूची – पाच
प्र्शासकाचाी विनर्युक्ती करणेचाी आश्र्यकता नाही.
टीप.—उक्त मांीनीचाे आराखाडे उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु विसुदुगय र्याचाे कार्यायलेर्यामांध्र्ये कार्यायलेर्यीन ेळेत विनरीक्षाणे करता र्येतीले.
आरातेी देसाई, उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, विसुदुगयनगरी, विदनाक २४ नोव्हंबीर २०२५. इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु, विसुदुगय.
भाग एक (को.वि.पु)—२१० महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७
उपविजल्हाविधकाराी, भाूसंपादेन इमाराते देळणळण प्राकल्प, विसंधुदेुगष यांजकून
अविधसूचना
भाूविमसंपादेन, पुनषसन पुनषसाहाते करातेाना उविचते भारापाई विमळण्याचा आविण पारादेशाषकतेचा हाक्क अविधविनयम, २०१३.
क्रमांाक ०४/२०२१ मांौे-विमांठेमांु बीरी.—ज्र्याअथाी, "भाूविमां सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क अविविनर्यमां, २०१३" (२०१३ चा ३०) र्याच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (इ) च्र्या पुरतुकाद्वारे प्रदान करण्र्यात आलेल्र्या अविकाराचा ापुर करून काढण्र्यात आलेलेी र्शासकीर्य अविसूचाना, मांहसूले नविभाग क्र. सकीणेय ११/२०१४/प्र.क्र.७७/ अ-२, विदनाक १९ ानेारी, २०१५ (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त अविसूचाना " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याद्वारे असे अविसूविचात केले आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (झाेडे अे) मांध्र्ये व्र्याख्र्या केलेल्र्या एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी, एखाद्या विल्हर्यातीले ५०० हेक्टीरपुेक्षा अविक नसेले इतक्र्या क्षाेत्राकरिरता मांीन सपुादन करण्र्याच्र्या सबीात अर्शा विल्ह्याचा विल्हाविकारी हा उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्र्योनासाठेी समांुविचात र्शासन असल्र्याचाे मांानण्र्यात र्येईले ;
आविणे ज्र्याअथाी, उक्त अविसूचानेनुसार समांुविचात र्शासन असलेल्र्या, विसुदुगय विल्ह्याच्र्या विल्हाविकाऱ्र्यास र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी एक मांध्र्ये अविक तपुर्शीलेार णेयन केलेलेी मांीन (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त मांीन " असा करण्र्यात आलेा आहे) सायविनक प्र्योनासाठेी (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श उक्त " सायविनक प्र्योन " असा करण्र्यात आलेा आहे) आश्र्यक आहे अथा वितचाी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे. असे ाटीते. ज्र्याच्र्या स्रुंपुाचाे विरणे र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी दोनमांध्र्ये विदलेले आहे. आविणे म्हणेून उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) च्र्या तरतुदंन्र्ये र्याद्वारे असे अविसूविचात करण्र्यात र्येते की, उक्त विमांनीचाी उक्त सायविनक प्र्योनासाठेी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, प्रस्तावित भाूमांी सपुादनाच्र्या अनुषगाने बीावित व्र्यक्तीचाे विस्थापुन होत नसल्र्याबीाबीतचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी तीन मांध्र्ये विदलेा आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी चार मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
आविणे ज्र्याअथाी, कलेमां ४३ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) अन्र्ये पुनयसन पुनयसाहत र्या प्र्योनासाठेी प्र्शासकाचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी पुाचा मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
त्र्याअथाी आता, असे घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां ४ अनुसार कोणेतीही व्र्यक्ती, ही अविसूचाना प्रविसद्ध झाल्र्याच्र्या विदनाकापुासून ते उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्रकरणे चार खालेीले कार्याही पुूणेय होईले त्र्या कालेाीपुर्यंत उक्त विमांनीचा अथा वितच्र्या भागाचा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा उक्त विमांनीर कोणेताही भार विनमांायणे करणेार नाही.
पुरतु, उक्त विमांनीच्र्या अथा वितच्र्या भाराच्र्या मांालेकाने अय केल्र्यार, विल्हाविकाऱ्र्यास विर्शेष पुरिरस्थिस्थातीचाी कारणे लेखाी नमांूद करून अर्शा मांालेकास उपुरोक्त तरतुदीच्र्या प्रतयनातून सूटी देता र्येईले.
पुरतु आणेखाी असे की, कोणेत्र्याही व्र्यक्तीने र्या तरतुदीचाे बीुद्धीपुरस्सर उल्लेघेन केल्र्यामांुळे झालेल्र्या कोणेत्र्याही हानीचाी विकंा क्षातीचाी विल्हाविकाऱ्र्याकडेून भारपुाई विदलेी ाणेार नाही.
तसेचा, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (५) अनुसार, विल्हाविकारी भाूमांी सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क (मांहाराष्ट्र) विनर्यमां, २०१४ (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श " उक्त विनर्यमां " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याच्र्या विनर्यमां १० च्र्या उपु विनर्यमां (३) द्वारे विहीत केल्र्याप्रमांाणे भाूविमां अविभालेखाच्र्या अद्यार्यातीकरणेाचाे कामां हाती घेणेार असल्र्याचाे पुूणेय करणेार असल्र्याचाे देखाीले घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ ११आविणे ज्र्य ाअथाी, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ खाडे (छ) अन्र्ये, समांुविचात र्शासन असलेलेा विल्हाविकारी, उक्त अविविनर्यमांाखालेीले विल्हाविकाऱ्र्याचाी कार्ये पुार पुाडेण्र्यासाठेी उपुविल्हाविकारी भाूसपुादन, (इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु) विसुदुगय र्यास पुदविनदेविर्शत करीत आहे.
अनुसूची—एक
जविमनीचे णषन
गा–विमांठेमांु बीरी, तालेुका – देगडे, विल्हा – विसुदुगय
| अ. क्र. (१) | सव्हे नबीर विकंा गटी नबीर (२) | अदावित क्षाेत्र (हेक्टीरमांध्र्ये) (३) |
| १ | ४९/२/१ | ०.३०.०० |
| २ | ५३अ/९ | ०.५०.०० |
| ३ | ५५/१/२बी | ०.२५.०० |
| ४ | ८/१/१ | ०.५०.०० |
| ५ | ५०/१ | ०.३०.०० |
| ६ | ५०/२ | ०.२०.०० |
| ७ | ५०/३ | ०.२०.०० |
| ८ | ५०/४ | ०.३०.०० |
| ९ | ४७/१ | ०.३०.०० |
| १० | ४७/२ | ०.१०.०० |
| ११ | ४७/३ | ०.१०.०० |
| १२ | ४७/५ | ०.१०.०० |
| १३ | ४७/६ | ०.१०.०० |
| एकूण क्षेत्र | ३.२५.०० |
अनुसूची– देोन
साषजविनक प्रायोजनाच्या स्रुपाबुाबुते विराण
प्रकल्पुाचाे ना – मांौे विमांठेमांु बीरी, ता. देगडे, तालेुक्र्यातीले सागरी मांहामांागय (प्ररामांा४) करिरता तारामांु बीरी ळेणे रस्ता करणे र्या रस्त्र्यासाठेी सपुाविदत करणे.
प्राकल्प कायाषचे षष – २०२५
समांालेा विमांळेणेारे लेाभा – अतगयत ोडेरस्ता
भाग एक (को.वि.पु)—३१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७
अनुसूची – तेीन
बीावित व्र्यक्तंचाे विस्थापुन होत नसल्र्याने र्याबीाबीतचा तपुर्शीले विनरक आहे.
अनुसूची – चारा
( पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श )
पुनयसन पुनयसाहत र्योना लेागू होत नाही.
अनुसूची – पाच
प्र्शासकाचाी विनर्युक्ती करणेचाी आश्र्यकता नाही.
टीप.—उक्त मांीनीचाे आराखाडे उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु विसुदुगय र्याचाे कार्यायलेर्यामांध्र्ये कार्यायलेर्यीन ेळेत विनरीक्षाणे करता र्येतीले.
आरातेी देसाई, उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, विसुदुगयनगरी, विदनाक २१ नोव्हंबीर २०२५. इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु, विसुदुगय.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ १३उपविजल्हाविधकाराी, भाूसंपादेन इमाराते देळणळण प्राकल्प, विसंधुदेुगष यांजकून
अविधसूचना
भाूविमसंपादेन, पुनषसन पुनषसाहाते करातेाना उविचते भारापाई विमळण्याचा आविण पारादेशाषकतेचा हाक्क अविधविनयम, २०१३.
भाूसपुादन प्रस्ता क्रमांाक ४/२०२३ मांौे-साडेा.—ज्र्याअथाी, " भाूविमां सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क अविविनर्यमां, २०१३" (२०१३ चा ३०) र्याच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (डे) च्र्या पुरतुकाद्वारे प्रदान करण्र्यात आलेल्र्या अविकाराचा ापुर करून काढण्र्यात आलेलेी र्शासकीर्य अविसूचाना, मांहसूले नविभाग क्र. सकीणेय ११/२०१४/ प्र.क्र.७७/अ-२, विदनाक १९ ानेारी, २०१५ (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त अविसूचाना " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याद्वारे असे अविसूविचात केले आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (झाेडे अे) मांध्र्ये व्र्याख्र्या केलेल्र्या एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी, एखाद्या विल्ह्यातीले ५०० हेक्टीरपुेक्षा अविक नसेले इतक्र्या क्षाेत्राकरिरता मांीन सपुादन करण्र्याच्र्या सबीात अर्शा विल्ह्याचा विल्हाविकारी हा उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्र्योनासाठेी समांुविचात र्शासन असल्र्याचाे मांानण्र्यात र्येईले ;
आविणे ज्र्याअथाी, उक्त अविसूचानेनुसार समांुविचात र्शासन असलेल्र्या, विसुदुगय विल्ह्याच्र्या विल्हाविकाऱ्र्यास र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी एक मांध्र्ये अविक तपुर्शीलेार णेयन केलेलेी मांीन (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त मांीन " असा करण्र्यात आलेा आहे) सायविनक प्र्योनासाठेी (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श उक्त " सायविनक प्र्योन " असा करण्र्यात आलेा आहे) आश्र्यक आहे अथा वितचाी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे, असे ाटीते. ज्र्याच्र्या स्रुंपुाचाे विरणे र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी दोनमांध्र्ये विदलेले आहे, आविणे म्हणेून उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) च्र्या तरतुदीन्र्ये र्याद्वारे असे अविसूविचात करण्र्यात र्येते की, उक्त विमांनीचाी उक्त सायविनक प्र्योनासाठेी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, प्रस्तावित भाूमांी सपुादनाच्र्या अनुषगाने बीावित व्र्यक्तीचाे विस्थापुन होत नसल्र्याबीाबीतचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी तीन मांध्र्ये विदलेा आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी चार मांध्र्ये विदलेलेा आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, कलेमां ४३ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) अन्र्ये पुनयसन पुनयसाहत र्या प्र्योनासाठेी प्र्शासकाचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी पुाचा मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
त्र्याअथाी आता, असे घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां ४ अनुसार कोणेतीही व्र्यक्ती, ही अविसूचाना प्रविसद्ध झाल्र्याच्र्या विदनाकापुासून ते उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्रकरणे चार खालेीले कार्याही पुूणेय होईले त्र्या कालेाीपुर्यंत उक्त विमांनीचा अथा वितच्र्या भागाचा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा उक्त विमांनीर कोणेताही भार विनमांायणे करणेार नाही.
पुरतु, उक्त विमांनीच्र्या अा वितच्र्या भाराच्र्या मांालेकाने अय केल्र्यार, विल्हाविकाऱ्र्यास विर्शेष पुरिरस्थिस्थातीचाी कारणे लेखाी नमांूद करून अर्शा मांालेकास उपुरोक्त तरतुदीच्र्या प्रतयनातून सूटी देता र्येईले.
पुरतु आणेखाी असे की, कोणेत्र्याही व्र्यक्तीने र्या तरतुदीचाे बीुद्धीपुरस्सर उल्लेघेन केल्र्यामांुळे झालेल्र्या कोणेत्र्याही हानीचाी विकंा क्षातीचाी विल्हाविकाऱ्र्याकडेून भारपुाई विदलेी ाणेार नाही.
तसेचा, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (५) अनुसार, विल्हाविकारी भाूमांी सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क (मांहाराष्ट्र) विनर्यमां, २०१४ (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श "उक्त विनर्यमां" असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याच्र्या विनर्यमां १० च्र्या उपु विनर्यमां (३) द्वारे विहीत केल्र्याप्रमांाणे भाूविमां अविभालेखाच्र्या अद्यार्यातीकरणेाचाे कामां हाती घेणेार असल्र्याचाे पुूणेय करणेार असल्र्याचाे देखाीले घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे.
आविणे ज्र्य ाअथाी, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ खाडे (छ) अन्र्ये, समांुविचात र्शासन असलेलेा विल्हाविकारी, उक्त अविविनर्यमांाखालेीले विल्हाविकाऱ्र्याचाी कार्ये पुार पुाडेण्र्यासाठेी उपुविल्हाविकारी भाूसपुादन, (इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु) विसुदुगय र्यास पुदविनदेविर्शत करीत आहे.
भाग एक (को.वि.पु)—३अ१४ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७
अनुसूची—एक
जविमनीचे णषन
गा–विपुगुळेी, तालेुका – कुडेाळे, विल्हा – विसुदुगय
| अ. क्र. (१) | भाूमांापुन विकंा गटी क्रमांाक (२) | अदावित क्षाेत्र (हेक्टीरमांध्र्ये) (३) |
| १ | १७३१/१ | ०.२०.१० |
| एकूण क्षेत्र | ०.२०.१० |
अनुसूची– देोन
साषजविनक प्रायोजनाच्या स्रुपाबुाबुते विराण
प्रकल्पुाचाे ना – लेघेू पुाटीबीारे र्योना साडेा, तालेुका कणेकलेी, विल्हा विसुदुगय र्या र्योनेचा रणे बीैठेक, साडेा प्रेर्श, पुच्छ कालेा तसेचा रस्ता र्यासाठेी ाढी क्षाेत्रासाठेी आश्र्यक असलेल्र्या खागी विमांनीचाे भाूसपुादन करणेकरिरता
प्राकल्प कायाषचे षष – २०२५
समांालेा विमांळेणेारे लेाभा – अतगयत ोडेरस्ता
अनुसूची – तेीन
बीावित व्र्यक्तंचाे विस्थापुन होत नसल्र्याने र्याबीाबीतचा तपुर्शीले विनरक आहे.
अनुसूची – चारा
( पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श )
पुनयसन पुनयसाहत र्योना लेागू होत नाही.
अनुसूची – पाच
प्र्शासकाचाी विनर्युक्ती करणेचाी आश्र्यकता नाही.
टीप.—उक्त मांीनीचाे आराखाडे उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु विसुदुगय र्याचाे कार्यायलेर्यामांध्र्ये कार्यायलेर्यीन ेळेत विनरीक्षाणे करता र्येतीले.
आरातेी देसाई, उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, विसुदुगयनगरी, विदनाक २५ नोव्हंबीर २०२५. इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु, विसुदुगय.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ १५उपविजल्हाविधकाराी, भाूसंपादेन इमाराते देळणळण प्राकल्प, विसंधुदेुगष यांजकून
अविधसूचना
भाूविमसंपादेन, पुनषसन पुनषसाहाते करातेाना उविचते भारापाई विमळण्याचा आविण पारादेशाषकतेचा हाक्क अविधविनयम, २०१३.
क्रमांाक २७/२०१६ मांौे-विपुगुळेी.—ज्र्याअथाी, " भाूविमां सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क अविविनर्यमां, २०१३" (२०१३ चा ३०) र्याच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (३) च्र्या पुरतुकाद्वारे प्रदान करण्र्यात आलेल्र्या अविकाराचा ापुर करून काढण्र्यात आलेलेी र्शासकीर्य अविसूचाना, मांहसूले नविभाग क्र. सकीणेय ११/२०१४/प्र.क्र.७७/अ-२, विदनाक १९ ानेारी, २०१५ (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त अविसूचाना " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याद्वारे असे अविसूविचात केले आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ च्र्या खाडे (झाेडे अे) मांध्र्ये व्र्याख्र्या केलेल्र्या एखाद्या सायविनक प्र्योनासाठेी, एखाद्या विल्हर्यातीले ५०० हेक्टीरपुेक्षा अविक नसेले इतक्र्या क्षाेत्राकरिरता मांीन सपुादन करण्र्याच्र्या सबीात अर्शा विल्ह्याचा विल्हाविकारी हा उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्र्योनासाठेी समांुविचात र्शासन असल्र्याचाे मांानण्र्यात र्येईले ;
आविणे ज्र्याअथाी, उक्त अविसूचानेनुसार समांुविचात र्शासन असलेल्र्या, विसुदुगय विल्ह्याच्र्या विल्हाविकाऱ्र्यास र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी एक मांध्र्ये अविक तपुर्शीलेार णेयन केलेलेी मांीन (र्यात र्यापुढे विचा विनदेर्श " उक्त मांीन " असा करण्र्यात आलेा आहे) सायविनक प्र्योनासाठेी (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श उक्त " सायविनक प्र्योन " असा करण्र्यात आलेा आहे) आश्र्यक आहे अथा वितचाी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्र्यता आहे, असे ाटीते. ज्र्याच्र्या स्रुंपुाचाे विरणे र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी दोनमांध्र्ये विदलेले आहे, आविणे म्हणेून उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) च्र्या तरतुदीन्र्ये र्याद्वारे असे अविसूविचात करण्र्यात र्येते की, उक्त विमांनीचाी उक्त सायविनक प्र्योनासाठेी आश्र्यकता भासण्र्याचाी र्शक्तता आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, प्रस्तावित भाूमांी सपुादनाच्र्या अनुषगाने बीावित व्र्यक्तीचाे विस्थापुन होत नसल्र्याबीाबीतचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी तीन मांध्र्ये विदलेा आहे ;
आविणे ज्र्याअथाी, पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी चार मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
आविणे ज्र्याअथाी, कलेमां ४३ च्र्या पुोटी-कलेमां (१) अन्र्ये पुनयसन पुनयसाहत र्या प्र्योनासाठेी प्र्शासकाचा तपुर्शीले, र्यासोबीत ोडेलेल्र्या अनुसूचाी पुाचा मांध्र्ये विदलेलेा आहे.
त्र्याअथाी आता, असे घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे की, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां ४ अनुसार कोणेतीही व्र्यक्ती, ही अविसूचाना प्रविसद्ध झाल्र्याच्र्या विदनाकापुासून ते उक्त अविविनर्यमांाच्र्या प्रकरणे चार खालेीले कार्याही पुूणेय होईले त्र्या कालेाीपुर्यंत उक्त विमांनीचा अथा वितच्र्या भागाचा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा कोणेताही व्र्यहार करणेार नाही विकंा उक्त विमांनीर कोणेताही भार विनमांायणे करणेार नाही.
पुरतु, उक्त विमांनीच्र्या अथा वितच्र्या भाराच्र्या मांालेकाने अय केल्र्यार, विल्हाविकाऱ्र्यास विर्शेष पुरिरस्थिस्थातीचाी कारणे लेखाी नमांूद करून अर्शा मांालेकास उपुरोक्त तरतुदीच्र्या प्रतयनातून सूटी देता र्येईले.
पुरतु आणेखाी असे की, कोणेत्र्याही व्र्यक्तीने र्या तरतुदीचाे बीुद्धीपुरस्सर उल्लेघेन केल्र्यामांुळे झालेल्र्या कोणेत्र्याही हानीचाी विकंा क्षातीचाी विल्हाविकाऱ्र्याकडेून भारपुाई विदलेी ाणेार नाही.
तसेचा, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ११ च्र्या पुोटी-कलेमां (५) अनुसार, विल्हाविकारी भाूमांी सपुादन, पुनयसन पुनयसाहत करताना उविचात भारपुाई विमांळेण्र्याचा आविणे पुारदर्शयकतेचा हक्क (मांहाराष्ट्र) विनर्यमां, २०१४ (र्यात र्यापुढे ज्र्याचा विनदेर्श " उक्त विनर्यमां " असा करण्र्यात आलेा आहे) र्याच्र्या विनर्यमां १० च्र्या उपु विनर्यमां (३) द्वारे विहीत केल्र्याप्रमांाणे भाूविमां अविभालेखाच्र्या अद्यार्याती करणेाचाे कामां हाती घेणेार असल्र्याचाे पुूणेय करणेार असल्र्याचाे देखाीले घेोविषत करण्र्यात र्येत आहे.
१६ महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७आविणे ज्र्य ाअथाी, उक्त अविविनर्यमांाच्र्या कलेमां ३ खाडे (छ) अन्र्ये, समांुविचात र्शासन असलेलेा विल्हाविकारी, उक्त अविविनर्यमांाखालेीले विल्हाविकाऱ्र्याचाी कार्य पुार पुाडेण्र्यासाठेी उपुविल्हाविकारी भाूसपुादन, (इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु) विसुदुगय र्यास पुदविनदेविर्शत करीत आहे.
अनुसूची—एक
जविमनीचे णषन
गा–विपुगुळेी, तालेुका – कुडेाळे, विल्हा – विसुदुगय
| अ. क्र. (१) | भाूमांापुन विकंा गटी क्रमांाक (२) | अदावित क्षाेत्र (हेक्टीरमांध्र्ये) (३) |
| १ | ४५/१ | ०.००.८ |
| २ | ४५/१० | ०.००.३ |
| ३ | ४५/१२/१ | ०.००.९ |
| ४ | ४५/१९ | ०.०१.१ |
| ५ | ९/५ | ०.०४.५ |
| ६ | ९/८ | ०.००.५ |
| एकूण क्षेत्र | ०.०८.१ |
अनुसूची– देोन
साषजविनक प्रायोजनाच्या स्रुपाबुाबुते विराण
प्रकल्पुाचाे ना – गा मांौे विपुगुळेी र्येथाीले ग्रामांपुचार्यत क्षाेत्रातीले बीॉस्को उदर्योगर्शाळेा ते मांोरकराडेी र्या रस्त्र्यासाठेी सपुाविदत करणे.
प्राकल्प कायाषचे षष – २०२५
समांालेा विमांळेणेारे लेाभा – अतगयत ोडेरस्ता
अनुसूची – तेीन
बीावित व्र्यक्तंचाे विस्थापुन होत नसल्र्याने र्याबीाबीतचा तपुर्शीले विनरक आहे.
अनुसूची – चारा
( पुनयसन पुनयसाहत र्योनेचा सारार्श )
पुनयसन पुनयसाहत र्योना लेागू होत नाही.
महाराष्ट्र शासन राजपत्र भाग एक—कोकण विभागीय पुराणी, गुरुारा ते बुधारा, विसंबुरा १८-२४, अग्रहायण २७-पौष ३, शाके १९४७ १७अनुसूची – पाच
प्र्शासकाचाी विनर्युक्ती करणेचाी आश्र्यकता नाही.
टीप.—उक्त मांीनीचाे आराखाडे उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु विसुदुगय र्याचाे कार्यायलेर्यामांध्र्ये कार्यायलेर्यीन ेळेत विनरीक्षाणे करता र्येतीले.
आरातेी देसाई, उपु विल्हाविकारी भाूसपुादन, विसुदुगयनगरी, विदनाक २४ नोव्हंबीर २०२५. इमांारत दळेणेळेणे प्रकल्पु, विसुदुगय.
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