RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्रट शोासन राजपत्र
असाधाराण भाग सात
षष १२, अंका ५] शोविनारा, फेब्रुाराी २८, २०२६/फाल्गुन ९, शोकाे १९४७ [पृष्ठे ३, विकांमत : रुपये ४७.००
असाधाराण क्रमांका ८
प्राविधाकाृत प्राकाशोन
अध्यादेशो, विधाेयकाे अविधाविनयम यांा विहांदी अनुाद (देनागराी विलपी)
महाराष्ट्र विधानमंडळ सविालय
महाराष्ट्र विधानपरिराषद मं विदनाक २८ फराराी, २०२६ ई.को. पुरा:स्थाविपत विनम्न विधाेयक महाराष्ट्र विधानपरिराषद विनयम ११३ के अधाीन प्रकाविन विकया जाता हाै :-
L. C. BILL No. I OF 2026.
A BILL
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA PUBLIC
UNIVERSITIES ACT, 2016.
विधानपरिराषद का विधाेयका क्रमांका १ सन् २०२६।
महाराष्ट्र लोका विश्विद्यालय अविधाविनयम, २०१६ मं अविधाकातरा संशोधान काराने संबंधाी विधाेयका।
क्यंविका राज्य विधानमडल दोनं सदनं का सत्र नहां चल राहा था ;
औरा क्यंविका महाराष्ट्र के राज्यपाल का यहा समाधान हाो चुका था विक, ऐसी परिरास्थिस्थावितया विद्यमान थां विजानके काराण उन्हां इसमं आगे दवित प्रयोजानं के विलए, महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय अविधाविनयम, सन् २०१७ का महा. ६
२०१६ मं अविधाकतरा सोधान कराने के सद्य कायिाहाी कराना आश्यक हाुआ था; औरा, इसविलए, महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय (सोधान) अध्यादे, २०२६, १८ फराराी २०२६ को प्रख्याविपत विकया गेया था;
सन् २०२६ का महा. १
(१)
भागे सात-८–१२ महाराष्ट्रट शोासन राजपत्र असाधाराण भाग सात, फेब्रुाराी २८, २०२६/फाल्गुन ९, शोकाे १९४७ औरा क्यंविक उक्त अध्यादे को राज्य विधानमडल के अविधाविनयम मं बदलना इष्टकरा हाै; अत: भारात गेणराज्य के सतहात्तरां षि मं, एत् दद्वारा, विनम्न अविधाविनयम, अविधाविनयविमत विकया जाता हाै :—
१. (१) यहा अविधाविनयम महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय (सोधान) अविधाविनयम, २०२६ कहालाए । सविप्त नाम औरा प्राराम्भण।
(२) यहा १८ फ़राराी, २०२६ को प्रृत्त हाुआ समझा जाएगेा ।
२. महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय अविधाविनयम, २०१६ (विजासे इसमं मागे " मूल अविधाविनयम " कहा गेया हाै) की, धारा १०९ की उप-धारा (३) के,—
सन् २०१७ का महा. ६ | सन् २०१७ का महा. ६ की धारा १०९ मं साेधान।
(१) खण्ड (घ) मं विद्यमान परातुक के पश्चात् , विनम्न परातुक जाोड़ा जाएगेा अथाित् :—
"परातु यहा औरा भी विक, अकादविमक षि २०२६-२७ के विलए राज्य सराकारा १५ माचि, २०२६ परा या के पूि आय पत्र अनुदत्त करा सकेगेी।" ;
(२) खण्ड (छ) का विद्वातीय परातुक औरा साराणी अपमाविजाित की जाएगेी ।
३. (१) महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय (सोधान) अध्यादे, २०२६, एतदद्वारा, विनराविसत विकया जाता हाै।
सन् २०२६ का महा. अध्या. क्र.१ | सन २०२६ का महा. अध्या. क्र.१ का विनरासन औरा व्याृवित्त।
(२) ऐसे विनरासन के हाोते हाुए भी, उक्त अध्याधाे द्वारा यथा सोविधात मूल अविधाविनयम के तत्स्थानी उपबधां के अधाीन कृत कोई बात या की गेई कोई कायिाहाी (जाराी विकसी अविधासूचना या आदे समेत) इस अविधाविनयम द्वारा यथा सोविधात मूल अविधाविनयम के तत्स्थानी उपबधां के अधाीन कृत, की गेई या, यथास्थिस्थावित, जाराी की गेई समझाी जाएगेी।महाराष्ट्रट शोासन राजपत्र असाधाराण भाग सात, फेब्रुाराी २८, २०२६/फाल्गुन ९, शोकाे १९४७ ३
उद्देश्यं औरा काराणं का क्तव्य
महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय अविधाविनयम, २०१६ (सन् २०१७ का महा. ६) की धारा १०९, नए महाविद्यालय या नए पाठ् यक्रम, विषय, सकाय विभागे या उपग्रहा कंद्र ुरू कराने की अनुमवित मागेने की प्रविक्रया के विलए उपबधा कराती हाै। उक्त धारा १०९ की उप-धारा (३) का खण्ड (घ) यहा उपबधा कराता हाै विक, विश्विद्यालय द्वारा विसफारिरा विकए गेए आेदनं मं से राज्य सराकारा, उक्त धारा १०९ के खण्ड (गे) के अधाीन विश्विद्यालय की विसफारिरां के पश्चात् तत्काल अनुती षि के ३१ जानराी को या के पूि आय पत्र अनुदत्त करा सकेगेी ।
२. स्थानीय प्राविधाकराणं के विनािचन के विलए आचारा सविहाता के काराण सराकारा, विविहात अविधा के भीतरा आय पत्र देने के विलए समथाि नहां थाी। इसविलए, सराकारा धारा १०९ की उप-धारा (३) का खण्ड (घ) मं यथाोविचत सोधान कराना इष्टकरा समझाती हाै, ताविक अकादविमक षि २०२६-२०२७ के विलए नया महाविद्यालय या उच्चतरा विा की सस्था ुरू कराने के विलए राज्य सराकारा द्वारा आय पत्र अनुदत्त कराने का विदनाक विस्तारिरात करा सकेगेी।
३. चू विक, राज्य विधानमडल के दोनं सदनं का सत्र नहां चल राहा था औरा महाराष्ट्र के राज्यपाल िक्त प्रयोजानं का यहा समाधान हाो चुका था विक, ऐसी परिरास्थिस्थावितया विद्यमान थाी विजानके काराण उन्हां इसमं उपयु के विलए, महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय अविधाविनयम, २०१६ (सन् २०१७ का महा. ६) मं अविधाकतरा सोधान कराने के विलए, सद्य कायिाहाी कराना आश्यक हाुआ हाै, अत: महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र लोक विश्विद्यालय (सोधान) अध्यादे, २०२६ (सन् २०२६ का महा. अध्या. क्र. १) १८ फ़राराी, २०२६ को प्रख्याविपत विकया गेया था ।
४. प्रस्तुत विधाेयक का आय उक्त अध्यादे को राज्य विधान मडल के अविधाविनयम मं बदलना हाै। बई,
ंद्रकांत (दादा) पाटील,
मु विदनाविकत २७ फ़राराी, २०२६। उच्चतरा तथा तकनीकी विा मत्री।
(यथाथाि अनुाद),
बई,
प्रभाराी भाषा सचालक,
विधान भान : श्री. अरुण कामळाबंाइ ाळू विगते, मु विदनाविकत २८ फ़राराी, २०२६। महाराष्ट्र राज्य।
डॉ. विलास आठेले, सविच-३, महाराष्ट्र विधानपरिराषद।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, RUPENDRA DINESH MORE.