RNI No. MAHBIL /2009/31730
मांहाराष्ट्रट शोासन राजपत्र
असाधाराण भागू साि
र्ष १२, अका १७ (२)] बंुधारा, मांार्चष २५, २०२६/र्चैत्र ४, शोकाे १९४८ [पृष्ठे ३, विकांमांि : रुपये ४७.००
असाधाराण क्रमांाका २८
प्राविधाकाृि प्रकाशोन
अध्यादेशो, विधाेयकाे अविधाविनयमां यार्चा विहादेी अनुादे (देनागूराी विलापी)
मांहाराष्ट्र विधानमांडळ सविर्चालाय
मेंहाराष्ट्र र्शिवेंधानोंसभा में र्शिदनोंांके २५ मांार्चष, २०२६ ई. केो. पुरा:स्थार्शिपुत र्शिनोंम्नों र्शिवेंधेयोके मेंहाराष्ट्र र्शिवेंधानोंसभा र्शिनोंयोमें ११७ के अधीनों प्रकेार्शित र्शिकेयोा जाता हा ै :–
L. A. BILL No. XXX OF 2026.
A BILL
TO AMEND THE BHARTIYA NYAYA SANHITA, 2023, IN ITS APPLICATION TO THE STATE OF MAHARASHTRA.
विधानसभा का विधाेयका क्रमांाका ३० सन् २०२६।
मांहाराष्ट्र राज्य काो उसकाी प्रयुक्ति मां यथा लागू, भारािीय न्याय सविहािा, २०२३, मां
सशोधान काराने सबंधाी विधाेयका।
सन् २०२३ केा ४५।
यंविका इसमें आगे दर्शित प्रयोजनों के र्शियोे, मेंहाराष्ट्र राज्यो में उसकेी प्रयोुक्तित में योथा ागेू भारातीयो न्योायो संर्शिहाता, २०२३ में संोधनों केरानोंा इष्टकेरा हाै ; अतः भारात गेणराज्यो के सतहात्तरावें वेंर्षि में, एतद् द्वारा, र्शिनोंम्नों अर्शिधर्शिनोंयोमें अर्शिधर्शिनोंयोर्शिमेंत र्शिकेयोा जाता हाै :—
संर्शिप्त नोंामें। १. योहा अर्शिधर्शिनोंयोमें भारातीयो न्योायो संर्शिहाता (मेंहाराष्ट्र संोधनों) अर्शिधर्शिनोंयोमें, २०२६ केहाए।
(१)
भागे सात–२८-१२ मांहाराष्ट्रट शोासन राजपत्र असाधाराण भागू साि, मांार्चष २५, २०२६/र्चैत्र ४, शोकाे १९४८ सन् २०२३ केा ४५ केी धारा ७२ में संोधनों।
२. मेंहाराष्ट्र राज्यो केो उसकेी प्रयोुक्तित में योथा ागेू, भारातीयो न्योायो संर्शिहाता, २०२३ (र्शिजसे इसमें आगे, "उत संर्शिहाता" केहा गेयोा हाै) केी, धारा ७२ केी, उपु-धारा (१) में, " धारा ७१ " ब्द औरा अंकें के पुश्चात् " योा धारा १२४ " ब्द औरा अंके र्शिनोंर्शिवेंष्ट र्शिकेए जायोंगे ;
३. उत संर्शिहाता केी धारा ७५ केी,—
सन् २०२३ केा ४५ केी धारा ७५ में संोधनों।
(१) उपु-धारा (१) के,–
(एके) खंड (चारा) में, "र्शिटप्पुर्शिणयोा " ब्द के पुश्चात्, "योा" ब्द र्शिनोंर्शिवेंष्ट र्शिकेयोा जाएगेा;
(दो) खंड (चारा) के पुश्चात्, र्शिनोंम्नों खंड जोड़े जाएंगे, अथाित् :–
"(पुाचा) टेीफोनों, ईमेंे, सो मेंीर्शिडयोा प्ेटफोॉमेंि योा र्शिकेसी अन्यो इेट्रॉर्शिनोंके योा र्शिडर्शिजट संचारा मेंाध्योमें से इस प्रकेारा केा आपुर्शित्तजनोंके संचारा केरानोंा जो केामेंुके योा अश्ी प्रकेृर्शित केा हाो ; योा
(छहा) र्शिकेसी मेंर्शिहा के राीरा के र्शिकेसी भाी अंगे केा वेंास्तर्शिवेंके योा मेंनोंगेढ़ंत र्शिचात्रण केरानोंे सर्शिहात, र्शिजसमें उस मेंर्शिहा केी र्शिकेसी भाी सहामेंर्शितपुूवेंि योा र्शिनोंा सहामेंर्शितपुूवेंि योौनों र्शियोा में संर्शिप्तता दािनोंे वेंाी केोई भाी तस्वेंीरा, ध्वेंर्शिनों योा वेंीर्शिडयो फोाइ इेट्रॉर्शिनोंके योा र्शिकेसी अन्यो प्रकेारा के मेंीर्शिडयोा के मेंाध्योमें से अपुोड केरानोंे योा प्रसारिरात केरानोंे केी धमेंकेी देनोंा ; योा
(सात) उस मेंर्शिहा केो दनोंामें केरानोंे योा उसकेी प्र्शितष्ठा केो ठाेस पुहाु ंचानोंे के र्शिए र्शिकेसी भाी रूपु में सो इेट्रॉर्शिनोंके मेंीर्शिडयोा योा र्शिकेसी अन्यो मेंीर्शिडयोा केा उपुयोगे केरानोंा ; योा
(आठा) उस मेंर्शिहा के नोंामें, र्शिवेंवेंराण, फोटो योा पुहाचानों के र्शिकेसी अन्यो साधनों केा प्रत्यो चानोंे योा उसकेी र्शिनोंजता केा उल्ंघनों केरानोंे के र्शिए योा अप्रत्यो रूपु से उसकेी गेरिरामेंा केो ठाेस पुहाु उपुयोगे केरानोंा ;"।
(२) उपु-धारा (२) में, "खंड (तीनों)" ब्द, केोष्ठाके औरा अंके के पुश्चात्, "खंड (पुांचा) योा खंड (छहा) योा खंड (सात) योा खंड (आठा)" ब्द, अंके औरा केोष्टके र्शिनोंर्शिवेंष्ट र्शिकेए जाएंगे।मांहाराष्ट्रट शोासन राजपत्र असाधाराण भागू साि, मांार्चष २५, २०२६/र्चैत्र ४, शोकाे १९४८ ३
उद्देश्यं औरा काराणं का िव्य
भारातीयो न्योायो संर्शिहाता, २०२३ (सन् २०२३ केा ४६) के अध्योायो पुांचा केी धारा ६३ से ९९ तके मेंर्शिहाओं औरा च्चां के र्शिवेंरुद्ध अपुराधं औरा उनोंके र्शिए दंड केा उपुंध हां। मेंहाराष्ट्र सराकेारा राज्यो में मेंर्शिहाओं केो अर्शितरिरात सुरा औरा संराण केरानोंे के र्शिए मेंहाराष्ट्र राज्यो केो उसकेी प्रयोुक्तित में योथा ागेू, उत संर्शिहाता केी केर्शितपुयो धाराओं में संोधनों केरानोंा इष्टकेरा समेंझती हां। केरानोंे
२. उत संर्शिहाता में प्रस्तार्शिवेंत संोधनों योथा र्शिनोंम्नों हां:-
(एके) उत संर्शिहाता केी धारा ७२ में केर्शितपुयो योौनों अपुराधं के पुीर्शिड़ेतं केी पुहाचानों उजागेरा केरानोंे के अपुराध औरा उसके र्शिए दंड केा उपुंध हां। उत संर्शिहाता केी धारा १२४ में तेजा के उपुयोगे दादा स्वेंच्छापुूवेंिके गेंभाीरा चाोट पुहाु ंचानोंे के अपुराचा के र्शिए दंड केा उपुंध हां, जो धारा ७२ में ार्शिमें नोंहां हाै। इसर्शिए, सराकेारा उत धारा ७२ में योथाोर्शिचात संोधनों द्वारा तेजा हामेंे के पुीर्शिड़ेत केी पुहाचानों उजागेरा केरानोंे के र्शिए दंड केा उपुंध केरानोंा इष्टकेरा समेंझती हां।
(दो) उत संर्शिहाता केी धारा ७५ में र्शिवेंर्शिभान्नों केृत्यों केा वेंणिनों हां जो योौनों उत्पुीड़ेनों के अपुराध समेंजे जाते हां। ईमेंे, सो मेंीर्शिडयोा प्ेटफोॉमेंि योा र्शिकेसी अन्यो इेट्रॉर्शिनोंके योा र्शिडर्शिजट मेंाध्योमें से र्शिकेए गेए योौनों उत्पुीड़ेनों के केृत्यो, जैसे आपुर्शित्तजनोंके संचारा, र्शिकेसी फोटो, ऑर्शिडयो योा वेंीर्शिडयो फोाइ केो अपुोड केरानोंे योा प्रसारिरात केरानोंे केी धमेंकेी आर्शिद, उत धारा ७५ के अंतगेित नोंहां आते हां। मेंहाराष्ट्र सराकेारा उत संर्शिहाता केी धारा ७५ में योथाोर्शिचात संोधनों द्वारा ऐसे योौनों उत्पुीड़ेनों के केृत्यों केो ार्शिमें केरानोंा औरा उनोंके र्शिए दंड केा उपुंध केरानोंा इष्टकेरा समेंझती हां।
ंर्शिके, उपुयोु
३. योहा संोधनों, क्तित आपुरार्शिधके र्शिवेंर्शिध (मेंहाराष्ट्र संोधनों) र्शिवेंधेयोके, २०२० (सन् २०२० केा र्शिवेंधानोंसभा र्शिवेंधेयोके मेंांके ५१) द्वारा भारातीयो दंड संर्शिहाता, १८६० (सन् १८६० केा ४५) में प्रस्तार्शिवेंत र्शिकेए गेए थाे, र्शिजसे उत संर्शिहाता द्वारा र्शिनोंरास्त केरा र्शिदयोा गेयोा हाै। चाू ित र्शिनोंर्शिदिष्ट उपुंध उत संर्शिहाता में अंतरार्शिवेंष्ट नोंहां हां, इसर्शिए, योहा संोधनों प्रस्तार्शिवेंत र्शिकेए गेए हां।
४. प्रस्तुत र्शिवेंधेयोके केा आयो उपुयोु ित उद्देश्यों केो प्राप्त केरानोंा हां।
ंई,
मेंु र्शिदनोंांर्शिकेत २४ मेंाचाि, २०२६।
देंद्र फडणीस, मेंुख्योमेंत्री।
(योथाथाि अनोंुवेंाद),
श्री. अरुण कामांळाबंाई ाळू विगूिे,
प्रभाराी भार्षा संचाके, मेंहाराष्ट्र राज्यो,
ंई,
विधान भान : मेंु र्शिदनोंांर्शिकेत २५ मेंाचाि, २०२६।
विजिंद्र भाोळे, सर्शिचावें-१, मेंहाराष्ट्र र्शिवेंधानोंसभा।
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