RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्रट शासन रापंत्र
असाराण भाग सात
षष १२, अंका ३३] बंुारा, ऑगस्ट ५, २०२६/श्राण १४, शकाे १९४८ [पंृष्ठे ५, विकांमत : रुपंयाे ४७.००
असाराण क्रमांका ६६
प्राविकाृत प्राकाशन
अध्यादेश, विेयाकाे अविविनयाम यांचा विहांदेी अनुादे (देनागराी विलापंी).
ग्रामविकास विभाग
बांई ४०० ००१,
बांधकांम भवन २५, मर्जबांन पथ, फोर्ट, मं दिनंदिकात ३ अगस्त २०२६।
MAHARASHTRA ORDINANCE No. X OF 2026.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA VILLAGE PANCHAYATS ACT AND THE MAHARASHTRA ZILLA PARISHADS AND PANCHAYAT SAMITIS ACT, 1961.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्र. १० सन २०२६ ।
महाराष्ट्र ग्रामपंचायात अविविनयाम औरा महाराष्ट्र विला पंरिराषदे तथा पंचायात सविमवित
अविविनयाम, १९६१ मं अविकातरा संशोन काराने संबंी अध्यादेश।
क्यांविका रांज्य दिवधंनमडल काे ोनं सनं कां सत्र नहीं चल राहीं हींै;
सन् १९५९ कां ३। सन् १९६२ कां महीं. ५।
औरा क्यांविका महींरांष्ट्र काे रांज्यपंल कां यहीं समंधंन हींो चंकां हींै दिका, ऐसी परिरास्थिस्थदितयं दिवद्यमंन हीं, दिर्जनकाे कांराण उन्हीं इसमं आगे दिजत प्रयोर्जनं काे दिलए, महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम,१९६१ मं अदिधकातरा सोधन काराने काे दिलए, सद्य कांयजवंहींी कारानं आवश्यका हींै;
२ महाराष्ट्रट शासन रापंत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट ५, २०२६/श्राण १४, शकाे १९४८अबं, इसविलाए, भंरात काे सदिवधंन काे अनंच्छे २१३ काे खण्ड(१) द्वांरां प्रत्त स्थितयं कां प्रयोग काराते हींए, महींरांष्ट्र काे रांज्यपंल, एतद् द्वांरां, दिनम्न अध्यंे प्रख्यंदिपत काराते हीं, अथंजत्:—
अध्याया एका
प्राराम्भिभाका
१. (१) यहीं अध्यंे महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित सदिक्षीप्त नंम औरा प्रंराम्भण।
(सोधन) अध्यंे, २०२६ काहींलंए।
(२) यहीं तंरात प्रवृत्त हींोगं।
अध्याया देो
ग्राम पंचायात अविविनयाम मं संशोन
सन् १९५९ कां ३। सन् १९५९ कां ३ काी धंरां १०-१का मं सोधन।
२. महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम (दिर्जसे इसमं आगे, इस अध्यंय मं, "महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम" काहीं गयं हींै। काी धंरां १०-१का काे दिद्वातीय परातंका काे पश्चंत्, दिनम्न परातंका र्जोड़ां र्जंएगं, अथंजत :—
सन् २०२६ कां महीं. अध्यं. क्र. १०। "परातं यहीं भी दिका, यदि ऐसं व्यस्थित ९ फोरावराी २०२६ काो यं काे पश्चंत् परातं, महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित (सोधन) अध्यंे, २०२६ काे प्रंराम्भण काे दिनंका परा यं काे पूवज हींए दिनवंजचनं मं दिनवंटदिचत हींआ हींै, औरा दिर्जस दिनंका परा उसकां दिनवंजचन घोदिषत हींआ हींै उस दिनंका से बांराहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने मं असफोल हींोतं हींै, तो उसकां दिनवंजचन भूतलक्षी प्रभंव से समंप्त हींआ समझां र्जंएगं औरा वहीं सस्य हींोने काे दिलए अनहींज हींो र्जंएगं।"।
३. महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम काी धंरां ३०-१का काे, दिद्वातीय परातंका काे पश्चंत्, दिनम्न परातंका र्जोड़ां र्जंएगं, अथंजत् :—
सन् १९५९ कां ३ काी धंरां ३०-१का मं सोधन।
सन् २०२६ कां महीं. अध्यं. क्र.१०। "परातं यहीं भी दिका, ऐसं व्यस्थित ९ फोरावराी २०२६ काो यं काे पश्चंत् परातं, महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित (सोधन) अध्यंे, २०२६ काे प्रंराम्भण काे दिनंका परा यं काे पूवज हींए दिनवंजचनं मं दिनवंजदिचत हींआ हींै, औरा दिर्जस दिनंका परा उसकां दिनवंजचन घोदिषत हींआ हींै उस दिनंका से बांराहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने मं असफोल हींोतं हींै, तो उसकां दिनवंजचन भूतलक्षी प्रभंव से समंप्त हींआ समझां र्जंएगं औरा वहीं सरापंचा बांनने काे दिलए अनहींज हींो र्जंएगं।"।
अध्याया तीन
महाराष्ट्र विला पंरिराषदे औरा पंचायात सविमवित अविविनयाम, १९६१ मं संशोन
सन् १९६२ कां महीं. ५। सन् १९६२ कां महीं. ५ काी धंरां १२ का मं सोधन।
४. महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष औरा पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम, १९६१ (दिर्जसे इसमं आगे, इस अध्यंय मं, "महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष औरा पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम काहीं गयं हींै" काी धंरां १२का काे, दिद्वातीय परातंका काे पश्चंत्, दिनम्न परातंका र्जोड़ां र्जंएगं, अथंजत् :—
सन् २०२६ कां महीं. अध्यं. क्र. १०। "परातं यहीं भी दिका, यदि ऐसं व्यस्थित ९ फोरावराी २०२६ काो यं काे पश्चंत, परातं महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित (सोधन) अध्यंे, २०२६ काे प्रंराम्भण काे दिनंका परा यं काे पूवज हींए दिनवंजचनं मं दिनवंजदिचत हींआ हींै औरा वहीं दिर्जस दिनंका परा दिनवंजदिचत घोदिषत हींआ हींै उस दिनंका से बांराहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने मं असफोल हींोतं हींै तो उसकां दिनवंजचन भूतलक्षी प्रभंव से समंप्त हींआ समझां र्जंएगं औरा वहीं परिराष सस्य हींोने काे दिलए अनहींज हींो र्जंएगं।"।महाराष्ट्रट शासन रापंत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट ५, २०२६/श्राण १४, शकाे १९४८ ३ ५. महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष औरा पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम काी धंरां ४२ काी, उप-धंरां(६का) काे, दिद्वातीय परातंका काे पश्चंत्, दिनम्न परातंका र्जोडं र्जंएगं, अथंजत:—
सन् १९६२ कां महीं. ५ काी धंरां ४२ मं सोधन। सन् २०२६ कां महीं. अध्यं. क्र. १०।
"परातं यहीं भी दिका, ऐसं व्यस्थित ९ फोरावराी २०२६ काो यं काे पश्चंत्, परातं महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित (सोधन) अध्यंे, २०२६ काे प्रंराम्भण काे दिनंका परा यं काे पूवज आयोदिर्जत हींए दिनवंजचनं मं दिनवंजदिचत हींआ हींै, औरा वहीं दिर्जस दिनंका परा दिनवंजदिचत घोदिषत हींआ हींै उस दिनंका से बांराहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने मं असफोल हींोतं हींै तो उसकां दिनवंजचन भूतलक्षी प्रभंव से समंप्त हींआ समझां र्जंएगं औरा वहीं अध्यक्षी हींोने काे दिलए अनहींज हींो र्जंएगं।"।
६. महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष औरा पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम काी धंरां ६७ काी, उप-धंरां(७का) काे, दिद्वातीय परातंका काे पश्चंत्, दिनम्न परातंका र्जोड़ां र्जंएगं, अथंजत् :—
सन् १९६२ कां महीं. ५ काी धंरां ६७ मं सोधन। सन् २०२६ कां महीं. अध्यं. क्र.।
"परातं यहीं भी दिका, ऐसं व्यस्थित ९ फोरावराी २०२६ काो यं काे पश्चंत, परातं महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित (सोधन) अध्यंे, २०२६ काे प्रंराम्भण काे दिनंका परा यं काे पूवज हींए दिनवंजचनं मं दिनवंजदिचत हींआ हींै, औरा वहीं दिर्जस दिनंका परा दिनवंजदिचत घोदिषत हींआ हींै उस दिनंका से बांराहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने मं असफोल हींोतं हींै तो उसकां दिनवंजचन भूतलक्षी प्रभंव से समंप्त हींआ समझां र्जंएगं औरा वहीं सभंपदित हींोने काे दिलए अनहींज हींो र्जंएगं।"। ४ महाराष्ट्रट शासन रापंत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट ५, २०२६/श्राण १४, शकाे १९४८
क्तव्या
महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम (सन् १९५९ कां ३) काी धंरां १०-१का औरा ३०-१का औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम,१९६१ (सन् १९६२ कां महीं. ५) काी धंरां १२का, ४२ औरा ६७ यहीं उपबांध काराती हींै दिका, अनंसूदिचत र्जंदित, अनंसूदिचत र्जनर्जंदित यं, यथंस्थिस्थदित, नंगरिराकां काे दिपछेड़ाे वगं से सबांदिधत व्यस्थितयं काे दिलए ग्रांम पचंयत काे सस्यं औरा सरापच, तथं दिर्जलं परिराष काे परिराष सस्य औरा अध्यक्षी, यं पचंयत सदिमदित काे सभंपदित काे दिलए आरादिक्षीत सीर्ट से दिनवंजचन लड़ाने काे इच्छेुका प्रत्येका व्यस्थित नंमदिनेन पत्र काे संथ सक्षीम प्रंदिधकांराी द्वांरां र्जंराी र्जंदित प्रमंणपत्र औरा सवीक्षीं सदिमदित द्वांरां र्जंराी वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराेगं।
२. तथंदिप, उम्मीवंरां काो उपराोत धंरां काे उपबांधं काे अधीन आरादिक्षीत सीर्ट काे दिनवंजचन काे दिलए नंमदिनेन पत्र काे संथ, वैधतं प्रमंणपत्र र्जंराी काराने काे दिलए सवीक्षीं सदिमदित काो उनकाे द्वांरां प्रस्तंत आवेन काी असली प्रदितदिलदिप यं उसकां काोई अन्य सबांूत; औरा वे अपने दिनवंजचन काे दिनंका से छेहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा सवीक्षीं सदिमदित द्वांरां र्जंराी वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत कारांगे, यहीं पथपत्र र्जमं काराने काी अनंमदित हींै। दिवदिनदिजष्र्ट छेहीं महींीने काी अवदिध काे भीतरा ऐसं वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत कारानं मं दिवफोल राहींने से ऐसे व्यस्थितयं काे दिनवंजचन काी समंस्थिप्त भूतलक्षी प्रभंव से हींोगी औरा वहीं सस्य, सरापच, परिराष सस्य, अध्यक्षी यं, यथंस्थिस्थदित, सभंपदित कां प धंराण काराने काे दिलए अनहींज हींो र्जंयंगे े ।
३. चू दिका, दिसम्बांरा २०२५ से फोरावराी २०२६ काे महींीनं मं बांडी सख्यं मं नगरा पंदिलकां, दिर्जलं परिराष, पचंयत सदिमदित औरा ग्रांम पचंयत काे दिनवंजचन दिलए र्जंने से, सवीक्षीं सदिमदितयं परा र्जंदित प्रमंणपत्रं काे सत्यंपन औरा वैधतं प्रमंणपत्र र्जंराी काराने काे कांयज कां अत्यदिधका बांोझा पड़ां हींै। इस कांराण से, ऐसे दिनवंजचन मं दिनवंजदिचत उम्मीवंरां काो दिवदिनदिजष्र्ट समय सीमं मं वैधतं प्रमंणपत्र प्रंप्त काराने मं कादिनंईयं कां संमनं कारानं पड़ा राहीं हींै। इसदिलए, यहीं संदिनस्थिश्चत कारानं आवश्यका हींै दिका, दिनवंजदिचत सस्य, सरापच, परिराष सस्य, औरा अध्यक्षी दिर्जन्हींे सदिवक्षीं सदिमदित काे समक्षी उनकाे आवेनं काे लदिबांत राहींने काे कांराण वैधतं प्रमंणपत्र प्रंप्त नहीं हींआ हींै वे दिव दिन दिटष्र्ट समय-सीमं काे भीतरा वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत न काराने से अनहींट घोंेदिषत नहींी हींगे। इसदिलए, महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम,१९६१ काी दिनदिजष्र्ट उपराोत धंरांओं मं यथोदिचत सोधन द्वांरां ऐसे दिनवंजचनं मं सस्य, सरापच, परिराष सस्य, अध्यक्षी औरा सभंपदित द्वांरां वैधतं प्रमंणपत्र प्रस्तंत काराने काे दिलए छेहीं महींीनं काी अदिधकातरा अवदिध ेनं इष्र्टकारा समझां गयं हीं।महाराष्ट्रट शासन रापंत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट ५, २०२६/श्राण १४, शकाे १९४८ ५ ४. चू दिका, रांज्य दिवधंनमडल काे ोनं सनं कां सत्र नहीं चल राहीं हींै औरा महींरांष्ट्र काे रांज्यपंल कां यहीं समंधंन हींो चंकां हींै दिका, ऐसी परिरास्थिस्थतीयं दिवद्यमंन हीं दिर्जनकाे कांराण उन्हीं इसमं उपयं जत प्रयोर्जनं काे दिलए, महींरांष्ट्र ग्रांम पचंयत अदिधदिनयम औरा महींरांष्ट्र दिर्जलं परिराष तथं पचंयत सदिमदित अदिधदिनयम,१९६१मं अदिधकातरा सोधन काराने काे दिलए सद्य कांयजवंहींी कारानं आवश्यका हींआ हींै; अत: यहीं अध्यंे प्रख्यंदिपत दिकायं र्जंतं हींै।
विष्णु दे माष,
बांई,
महाराष्ट्र काे राज्यापंाला।
मं दिनंदिकात ३१ र्जंलंई २०२६।
महींरांष्ट्र काे रांज्यपंल काे आे तथं नंम से,
डाॅा. चांद्रकांत पंुलाकां
ंडाॅारा,
सराकांरा काे सदिचव।
(यथंथज अनंवं),
श्राी. अरुण कामळाबंाई ाळाू विगते, भंषं सचंलका,
महींरांष्ट्र रांज्य, मं बांई।
ON BEHALF OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATION, PRINTED AND PUBLISHED BY DIRECTOR, SMT. MANISHA KUMBHAR, PRINTED AT GOVERNMENT CENTRAL PRESS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004 AND PUBLISHED AT DIRECTORATE OF GOVERNMENT PRINTING, STATIONERY AND PUBLICATIONS, 21-A, NETAJI SUBHASH ROAD, CHARNI ROAD, MUMBAI 400 004. EDITOR : DIRECTOR, SMT. MANISHA KUMBHAR.