RNI No. MAHBIL /2009/31730
महाराष्ट्रट शासन राजपत्र
असाराण भाग सात
वर्ष १२, अक ३४] बंुवारा, ऑगस्ट १२, २०२६/श्रावण २१, शके १९४८ [पृष्ठे ३, विकंमत : रुपयाे ४७.००
असाराण क्रमाक ६७
प्राविकृत प्राकाशन
अध्यादेश, विवेयाके व अविविनयाम याचा विहादेी अनुवादे (देवनागराी विपी).
राजस्व तथा वन विवभाग
मंत्रालय, मंादामं कामंा मंार्ग, हुतात्मंा राजर्गुरू चौका, ंबई ४०० ०३२, दिदानांांदिकाता ७ अर्गस्ता २०२६।
मंु
MAHARASHTRA ORDINANCE No. XI OF 2026.
AN ORDINANCE
FURTHER TO AMEND THE MAHARASHTRA LAND REVENUE CODE, 1966.
महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमाक ११ सन् २०२६।
महाराष्ट्र भाू-राजस्व सविहाता, १९६६ मं अविकतरा सशोन कराने सबंवि अध्यादेश।
क्यांविक राज्य दिधानांमंडल काे दाोनां सदानां का सत्रा नांहुं चौल राहुा हुै ;
औरा क्यांविक मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु समंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐसी पारिरास्थिस्िदिताया दिद्यमंानां हुं दिजनांकाे काराण उन्हुं इसमं आर्गे दादिगता प्रयोजनां काे दिलए, मंहुाराष्ट्र भू-राजस् संदिहुता, १९६६ मं अदिधाकातारा संोधानां कारानांे काे दिलए सद्य कायगाहुी कारानांा आश्यका हुआ हुै ;
सन् १९६६ का मंहुा. ४१.
अबं, इसविए, भूाराता काे संदिधानां काे अनांुच्छेदा २१३ काे खण्ड (१) द्वारा प्रदात्त स्थितायं का प्रयोर्ग काराताे हुए, मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल, एताद् द्वारा, दिनांम्नां अध्यादाे प्रख्यादिपाता काराताे हुं, अिागत् :—
(१)
भूार्ग साता-६७–१२ महाराष्ट्रट शासन राजपत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट १२, २०२६/श्रावण २१, शके १९४८ १. (१) यहु अध्यादाे मंहुाराष्ट्र भू-राजस् संदिहुता (संोधानां) अध्यादाे, २०२६ काहुलाए। संदिप्ता नांामं औरा प्राराम्भूण।
(२) यहु ताुरांता प्रृत्त हुोर्गा।
सन् १९६६ का मंहुा. ४१। सन् १९६६ का मंहुा.४१ काी धारा ४८ मं संोधानां।
२. मंहुाराष्ट्र भू-राजस् संदिहुता, १९६६ काी धारा ४८ काी, उपा-धारा (७) मं, "खदिनांजं काे बाजारा मंुल्य काे पाचौ र्गुणा ताका" ब्दां काे स्िानां मं, "खदिनांजं काे दिलए दाेय रायल्टी काे दास र्गुणा काे समंानां" ब्दा राखे जायंर्गे।महाराष्ट्रट शासन राजपत्र असाराण भाग सात, ऑगस्ट १२, २०२६/श्रावण २१, शके १९४८ ३
वक्तव्या
मंहुाराष्ट्र भू-राजस् संदिहुता, १९६६ (सन् १९६६ का मंहुा. ४१) काी धारा ४८ यहु खानां औरा खदिनांजं पारा सराकाराी स्ादिमंत् का उपाबंधा काराताी हुै। उता धारा ४८ काी उपा-धारा (७) मं यहु उपाबंधा हुै दिका, यदिदा दिदिधापाूणग प्रादिधाकारा काे दिबनांा दिकासी खदिनांजं का उत्खनांनां काराता हुै, उसे दिनांकालता हुै, संग्रहुण काराता हुै, एका जर्गहु से अन्य जर्गहु पारा ले जाता हुै, उसे उठाता या दिनांपाटीानां काराता हुै, ताो उस पारा ऐसे खदिनांजं काे बाजारा मंूल्य काे पाचौ र्गुणा ताका काी ास्थिस्ता अदिधाराोदिपाता काी जा सकाेर्गी।
२. यहु ध्यानां मं आया हुै दिका, जैसा दिका कालटीरा द्वारा दिनांधागरिराता बाजारा मंूल्य दिदिभून्नां दिजलं मं अलर्ग-अलर्ग हुै, खदिनांजो काे अैधा उत्खनांनां या उसे दिनांकालनांे आदिदा, काे दिलए दिदिभून्नां ेत्रां मं ास्थिस्ता काी अलर्ग-अलर्ग राक़मं अदिधाराोदिपाता काी जाताी हुै। यहु भूी दाेखा र्गया हुै दिका, काुच्छे पारिरायोजनांाओं मं पारिरायोजनांा लार्गता से अदिधाका ास्थिस्ता अदिधाराोदिपाता काी जाताी हुै, दिजसकाे पारिराणामं स्रूपा ऐसी पारिरायोजनांाए रुका र्गई हुै। ास्थिस्ता काी राक़मं खदिनांजं काे बाजारा मंूल्य पारा दिनांभूगरा हुोनांे काे काराण अत्यदिधाका हुोनांे से ास्थिस्ता काे दिरुद्ध समं प्रादिधाकाराण काे समं बड़ी संख्या मं अपाील दिलंदिबता हुै। इससे ास्थिस्ता काी सूली मं दिलंब हुो राहुा हुै। इसदिलए, ऐसे खदिनांजं काे दिलए दाेय रायल्टी काे दास र्गुणा समंानां ास्थिस्ता काे उद् ग्रहुण का उपाबंधा कारानांे काी दाृस्थिष्टी से, उता संदिहुता काी धारा ४८ मं संोधानां कारानांा इष्टीकारा समंझा र्गया हुै।
३. चौू दिका, राज्य दिधानांमंडल काे दाोनां सदानां का सत्रा नांहुं चौल राहुा हुै औरा मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल का यहु समंाधानां हुो चौुका हुै दिका, ऐसी पारिरास्थिस्िदिताया दिद्यमंानां हुं दिजनांकाे काराण उन्हुं उपायु गता प्रयोजनां काे दिलए, मंहुाराष्ट्र भू-राजस् संदिहुता, १९६६ मं अदिधाकातारा संोधानां कारानांे काे दिलए सद्य कायगाहुी कारानांा आश्यका हुआ हुै; अता: यहु अध्यादाे प्रख्यादिपाता दिकाया जाता हुै।
मंु ंबई,
विजष्णु देव वमाष,
दिदानांांका ६ अर्गस्ता २०२६।
मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल।
मंहुाराष्ट्र काे राज्यपाल काे
आदाे तािा नांामं से,
विवकास खारागे,
सराकारा काे अप्पारा मंुख्य सदिचौ।
(यिािग अनांुादा),
श्राी. अरुण कमळाबंाई वाळाू विगते,
भूाषा संचौालका,
मंहुाराष्ट्र राज्य ।
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