RNI No. MAHBIL/2009/36619
महाराष्ट्र शासन राजपत्र
असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी
र्ष १२, अंक ६९] मंगळारा, ऑगस्ट १८, २०२६/श्राण २७, शाके १९४८ [पृष्ठे ३ , विकंमत : रुपये ११.००
असाधाराण क्रमांक १०४
प्राविधाकृत प्राकाशान
सक्षम प्राविधाकाराी तथा उपविभागीय अविधाकाराी सई यांजकडून
मौजे नागले ता. सई ४० मीटरा रुंद गायमुख ते पायेगा खाडूीपूलेाच्या प्राकल्पासाठेी "भाूविमसंपादन पुनषसन
पुनषसाहात कराताना उवित भारापाई विमळण्याच्या आविण पारादशाषकतेा हाक्क अविधाविनयम २०१३ अंतगषत
कलेम १९ पोट-कलेम (१)
अविधासूना
क्रमांाक व्हीडी/ भाूसंपुादन/ मांौजे नागले/ खाडीपुूले/ कलेमां-१९-१/कावि १२/२०२६.— ज्याअर्थी, संमांुवित शासंन असंलेल्या पुालेघर विजेल्ह्याच्या विजेल्हीाविकाऱ्याने, भाूमांी संपुादन, पुनवसंन पुनर्स्थार्थीावपुना करताना उवित भारपुाई विमांळण्या आवि पुारदशावकतेा हीक्क अविविनयामां, २०१३ (२०१३ ा ३०) (यात यापुूढे ज्या विनदेशा " उक्त अविविनयामां" असंा केलेा आहीे.) याच्या कलेमां ११ े पुोट-कलेमां (१) याद्वारे प्रदान करण्यात आलेल्या अविकारा ापुर करून, अविसंूना जेा.क्र. क्रमांाक/व्हीडी/ भाूसंपुादन/मांौजे नागले/ कावि-०५/२०२६ विदनाक ७ मांे २०२६ अन्याे प्रारविभाक अविसंूना काढेलेी आहीे, आवि त्याव्दारे असंे अविसंूवित केले आहीे की, यासंोबत जेोडीलेल्या अनुसंूी-एक मांध्याे अविक तपुशाीलेार वन केलेल्या जेविमांनी, अनुसंूी-दोन मांध्याे अविक तपुशाीलेार विविनविदवष्ट केलेल्या संावजेविनक प्रयाोजेनासंाठी आश्याकता आहीे विकंा विती आश्याकता भासंण्याी शाक्याता आहीे;
आवि ज्याअर्थी, संई तालेुक्याे, संक्षमां प्राविकारी यानी कलेमां १५ च्या पुोट-कलेमां (२) अन्याे विदलेलेा अहीाले कोताही असंल्यासं, विारात घेतल्यानतर उक्त संावजेनीक प्रयाोजेनासंाठी उक्त जेमांीन संपुाविदत करण्याी आश्याकता आहीे, याबाबत त्याी खात्री पुटलेी आहीे आवि म्हीून उक्त अविविनयामांाच्या कलेमां १९ च्या पुोट-कलेमां (१) च्या तरतुदीन्याे, उक्त संावजेविनक प्रयाोजेनासंाठी उक्त जेविमांनी आश्याकता आहीे, असंे याद्वारे घोवित करण्यात याेत आहीे;
आवि ज्याअर्थी, अनुसंूी-तीन मांध्याे अविक तपुविशालेार वन केलेले क्षेत्री हीे बावित कं ंटुविबयाच्या पुनवसंन पुनवसंाहीतीच्या प्रयाोजेनासंाठी "पुनवसंाहीत क्षेत्री" म्हीून विनावरिरत केले असंल्याे याद्वारे घोवित केले जेात असंून, पुनवसंन पुनर्स्थार्थीावपुना याोजेनेा संाराशा अनुसंूी-ार मांध्याे विविनविदवष्ट केलेा आहीे;
आवि ज्याअर्थी, उक्त अविविनयामांाच्या कलेमां ३ च्या खाडी (छ) अन्याे, संमांुवित शासंन, असंलेलेा विजेल्हीाविकारी, यानी उक्त अविविनयामांाखालेी, विजेल्हीाविकाऱ्याी कायाे पुार पुाडीण्यासंाठी संई तालेुक्याकरिरता उपु विभागीया अविकारी, संई यासं पुदविनदेविशात करीत आहीे.
(१)
भाग एक (को.वि.पु.)-१०४–१२ महाराष्ट्र शासन राजपत्र असाधाराण भाग एक–कोकण विभागीय पुराणी, ऑगस्ट १८, २०२६/श्राण २७, शाके १९४८
अनुसूी एक
जविमनीे णषन
मौजे नागले, ता. सई, विज. पालेघरा येथाीले संपाविदत करायाच्या जविमनीा तपशाीले
| अ.क्र. | स.नं/विहा.नं. | ७/१२ सदराी क्षेत्र | संपाविदत क्षेत्र (हाे.आरा) |
| १ | १२/अ/प्लेॉट न.१ | ०.८१.०० | ०.७३.७१ |
| १२/अ/प्लेॉट न.२ | ०.५३.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.४ | १.६२.०० | ||
| १२/अ/४/३ | ०.१४.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.५ | १.६२.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.६ | ०.०४.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.७ | १.६२.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.८ | ०.०६.०० | ||
| १२/अ/प्लेॉट न.१४ | ०.०६.०० | ||
| १२/ब/१ | १०.७९.३० | ||
| २ | १२/ब | ०.३६.४० | ०.१५.१३ |
| ३ | ३८/१/१ | ०.२७.४० | ०.०६.५६ |
| ३८/१/२ | ०.६८.०० | ||
| ३८/२/१ | ०.७५.५० | ||
| ३८/२/२ | ०.०४.५० | ||
| ३८/३ | ०.७६.०० | ||
| ३८/४/१ | ०.४५.०० | ||
| ३८/४/२ | ०.१३.०० | ||
| ३८/५ | १.१०.०० | ||
| ३८/६/१ | ०.१९.४० | ||
| ३८/६/२ | ०.०२.५० | ||
| ४ | ८६/१ | ०.५२.७० | ०.१५.९२ |
| ८६/२ | २.८०.८० | ||
| ८६/३ | ०.५९.५० | ||
| ५ | ८८/१ | ३.४१.८० | ०.३९.५० |
| ८८/२ | ०.३३.०० | ||
| ६ | ८९/१ | ०.५३.०० | ०.०६.६९ |
| ८९/२ | ०.२६.८० | ||
| ८९/३ | ०.०६.६० | ||
| ८९/४ | ०.२१.२० | ||
| ८९/५ | ०.१३.४० | ||
| ८९/६ | १.७३.२० | ||
| ७ | ९०/१ | ०.०५.०० | ०.२६.७५ |
| ९०/१/५/१ | २.१८.५० | ||
| ९०/२ | ०.२३.०० | ||
| ९०/३ | ०.४२.५० | ||
| ९०/४ | ०.३०.०० | ||
| ९०/५ | ३.०६.०० | ||
| ९०/६ | ०.४०.०० | ||
| एकू | १.८४.२६ |
अनुसूी दोन
| साषजनीक प्रायोजन स्रुपात विराण | |
| प्राकल्पांे ना | मांौजे नागले ता. संई ४० मांीटर रुंद गायामांुखा ते पुायाेगा खाडीपुूले |
| प्राकल्पाे णषन | संदरहीू रर्स्थाता खाडीपुूले हीा ठीाे मांहीानगरपुाविलेका क्षेत्रीातीले भाईंदरपुाडीा याेर्थीे असंलेल्या घोडीबदर रर्स्थात्यासं जेोडीण्यात याेार आहीे. |
| समजालेा विमळणाराे लेाभा | मांौजे नागले या पुरिरसंरातीले गाे उक्त प्रकल्पुामांुळे ठीाे मांहीानगरपुाविलेका क्षेत्रीाशाी जेोडीले जेाऊन मांहीापुाविलेका क्षेत्रीामांीले संोईसंुविा लेाभा नागरीकासं उपुलेब् हीोईले. तसंे प्रादेविशाक ाहीतुकीे बळकटी कर या प्रकल्पुामांुळे हीोार असंल्यामांळे संामांाविजेक उन्नती या क्षेत्रीात मांोठ्या प्रमांार हीोण्यासं मांदत हीोईले. |
अनुसूी तीन
बाविधात व्यक्तीे विस्थापन कराण्यास भाग पाडूणाराी काराणे- विस्थाविपत हाोत नाहाीत काराणे विनरांक.
अनुसूी ारा
सामाविजक परिराणाम विनधाषराणांा सारांशा - विनरांक.
(संामांाविजेक पुरिरामां विनावर अभ्यासं संर्स्थार्थीेद्वारे विदलेल्या मांाविहीतीनुसंार)
अनुसूी पा
| अ | प्राशासक म्हाणून विनयुक्त कराण्यात आलेल्या अविधाकाऱ्यांे पदनाम | संक्षमां प्राविकारी तर्थीा उपुविभागीया अविकारी संई |
| बा | प्राशासकाच्या कायाषलेया पत्ता | श्रीप्र्स्थार्थीा, नालेासंोपुरा-विरार विलेक रोडी, ए पुी पुेट्रोले पुपुाच्यापुूढे, विनळेमांोरे, नालेासंोपुारा(पु.), ता. संई, विजे. पुालेघर विपुन -४०१२०३ |
| क | ज्या अविधासुनेद्वाराे प्राशासकाी विनयुक्ती कराण्यात आलेी आहाे त्या अविधासूनेा तपशाीले | मांा. विजेल्हीाविकारी पुालेघर याेकडीले पुत्री क्र. भाुसंपुादन/कक्ष-१/टे- १कावि-१३५७/२०२५ विदनाक ०४/०८/२०२५ |
शाेखरा घाडूगे, डूॉ. इंदुराणी जाखड़, संक्षमां प्राविकारी तर्थीा विजेल्हीाविकारी, पुालेघर. उपुविभागीया अविकारी, संई.
विठीका संई, विदनाक १८ ऑगर्स्थाट २०२६.
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