| राजस्थान राजपत्र वशिेष ांक | RAJASTHAN GAZETTE Extraordinary | |
| स धकि र प्रक शशत | Published by Authority | |
| भाद्र 24, सोमवार, शाके 1947- ससतम बर 15, 2025 Bhadra 24, Monday, Saka 1947- September 15, 2025 |
भाग 6 (क)
नगरपासकिाओं संबंधी ववज्ञप्ततयां आद।ि
स् ियत श सन वभि ग, र ज. जयपुर
अधसिूचना
जयपुर,्सतिम््र्ब1 ,्2125
्््ंिख््या प.10(न.प .)(गठन)( चुन )िडीएलबी/25/14861 :-राजस्थान नगरपालकिा अधनिनयम, 2009 की ािरा 3 एवं 10 तथा राजस्थान नगर पालकिा (ननवााचन) ननयम, 1994 के ननयम 3 के अन्तगात प्रदत्त शक्ततयों का प्रयोग करते हुए क्जाि कतिटर श्रीगंगानगर द्वारा स्थानीय ननकाय नगर पालकिा गजलसंहपुर हेतु र्वाा गठन के प्रारुप आदेश पर प्राप्त आपक्त्तयों के संब िमें प्रस्ताव, अपने अलमित सहहत प्रेषति ककये गये हैं। र्वाा गठन के प्रारुप आदेश पर आपक्त्तयों पर षवचार करने के पश्चात राज्य सरकार उनके अलमित से सहमत है तथा उनके द्वारा प्रस्ताषवत र्वाा गठन के प्रारुप आदेश को अनुमोहदत करती है।
यह सक्षम स्तर से अनुमोहदत हैं ।
र ज्यप ल की आज्ञ से,
जुईकर प्रतीक चन्रशेखर,
ननदेशक एािं वशिशष्ट श सन सधच।ि
| िडष न. | िडों के सीम ांकन क वरििण | जनंिख्या |
| 1 | उतरी-पक्श्चमी कोणे सीमा पत्थर नम्बर 211/233 से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए जदिाय षवािग, छात्रावास को शालम िकरते हुए मर्ण्ी सीमा पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए दक्षक्षणी-पक्श्चमी मर्ण्ी सीमा के पत्थर संख्या 239 तक। यहां से पूवा की ओर चतिे हुए रेविे ािईन तक। यहां से उतर हदशा की तरफ चतिे हुए रेविे फाटक तक। यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए करणपुर-रायलसंहनगर पर अंगतजीत लसंह आरा मशीन तक। यहां से उतर हदशा की तरफ चतिे हुए करणपुर- रायलसंहनगर रोड़ के साथ साथ चतिे र्ॉ. ूिपेन्र शमाा के मिाकान्टा (गौरव पथ कानार) तक। ूिपेन्र शमाा के मिाकान्टा (गौरव पथ कानार) यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए नगरपालकिा पुस्तकायि के षपछे तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए गौरव पथ को क्रास कर A/16 को | 478 |
| छोड़ते हुए K/5 को सक्म्मलति करते हुए इसके उतरी-पूवी कोणे से चतिे हुए गुरूनानक नगर को शालम ि करते हुए उतरी मर्ण्ी सीमा तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए उतरी-पक्श्चमी कोणे मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 211/233 तक। | ||
| 2 | उतरी-पक्श्चमी कोणे रेविे फाटक से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए रेविे प्ेिटफामा, रेविे स्टेशन, रेविे तवाटार को शालम िकरते हुए रेविे ािईन क े साथ-साथ दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए मर्ण्ी की दक्षक्षण सीमा तक। यहां से पूवा की तरफ मुड़ते हुए र्डफे न्स रोड़ को क्रॉस कर सुगना देवी सांसी के मकान को छोड़कर र्डफे न्स रोड़ पर उत्तर की तरफ चतिे हुए पोस्ट ऑकफस को शालम िकरते हुए पोस्ट आकफस के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए अमरजीत लसंह, चरणजीत लसंह षप0 परमजीत लसंह के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पूवी कोणे से गौरव पथ पर उतर की तरफ चतिे हुए पुस्तकायि के दक्षक्षणी-पूवी कोणे तक। पुस्तकायि के दक्षक्षणी-पूवी कोणे स े पुस्तकायि के उतरी-पूवी कोणे तक। यहां से पक्श्चमी हदशा की तरफ चतिे हुए र्डफे न्स रोड़ पर बषिवन्र लसंह के खाीि प्ािट को शालम िकरते हुए र्डफे न्स रोड़ के साथ-साथ दक्षक्षण में चतिे हुए रेविे फाटक तक। | 550 |
| 3 | उतरी-पक्श्चमी कोणे बाबू जगजीवन राम सामुदानयक के न्र को शालम ि करते हुए इसके उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ र्डफे न्स रोड़ पर चतिे हुए सुगना देवी पक्त्न श्री गनीराम सांसी के मकान को शालम िकरते हुए इनके पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से मर्ण्ी सीमा पर पूवा की तरफ चतिे हुए श्रीमनत रेशमा देवी पक्त्न श्री जैताराम के कब्जे को शालम ि करते हुए यहां से उतर की तरफ चतिे हुए षववाह स्थ ि को शालम िकरते हुए गौरव पथ पर उतर की तरफ चतिे हुए सहीराम के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए बाबूजगजीवन राम सामुदानयक के न्र उतरी- पक्श्चमी कोणे तक। | 482 |
| 4 | उतरी-पक्श्चमी कोणे सोहनाि िपुत्र श्री मंगतराम नायक के मकान को शालम ि करते हुए गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए षववाह स्थ ि को छोड़ते हुए गुरदेव लसंह पुत्र श्री हदबिाग लसंह के कब्जे को शालम ि करते हुए दक्षक्षणी मर्ण्ी सीमा पर पूवा की तरफ चतिे हुए फ ू ािराम ुिहार के मकान को शालम िकरते हुए पूवा की तरफ चतिे हुए गंदे पानी के गढे तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए ंिवराि ि नायक के मकान को शालम ि करते हुए सामुदानयक शौचायि को शालम िकरते हुए इसके पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए गौरव पथ को क्रास कर उदाराम नायक के घर को शालम ि करते हुए | 476 |
| इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए र्मोाराम नायक के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी- उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए सोहनाि िनायक के मकान क े उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | ||
| 5 | उतरी-पक्श्चमी कोणे नानकचंद' पुत्र श्री देवाराम के मकान को शालम ि करते हुए दक्षक्षण की तरफ गौरव पथ पर चतिे हुए सुािचिन्द पुत्र श्री जीतराम की ककरयाने की दुकान को शालम िकरते हुए इनकी दुकान के उतरी-पूवी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए शांनत देवी के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए ोिमाराम नायक के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए गौरव पथ क्रास कर मकिीत लसंह मजहबी के मकान को शालम िकरते ह ुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से दक्षक्षण की तरफ सीाि चतिे ह ुए गन्दे पानी के गढे को शालम िकरते हुए दक्षक्षणी मर्ण्ी सीमा तक। यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए धचत्रकु टी ािम की मेन सड़क पर उतर की तरफ चतिे हुए बीरब ि राम पुत्र श्री ीिखाराम की ककरयाने की दुकान को शालम ि करते हुए इनकी दुकान के पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए नानकचन्द पुत्र श्री देवाराम के मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 523 |
| 6 | उतरी-पक्श्चमी कोणे कु म्ािराम लमस्त्री के मकान के दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए के रिी् चंद् (पुराना् भूरा् संिह् का् मकान)् के ् मकान् को शालम ि करते हुए पक्श्चमी हदशा में चतिे हुए हरजजन्र्द् संिह् पुर्त् श्री् ुिखदेव् संिह के मकान तक। यहां से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए राउप्राषव नं. 05 तक। यहां से पूवी हदशा की तरफ चतिे हुए धचमना राम के घर को शालम िकरते हुए दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए धचत्रकु टी ािम वाीि सड़क के मेन गेट के मध्य तक। यहां से धचत्रकु टी ािम को शालम िकरते हुए धचत्रकु टी ािम व श्मशान घाट को शालम िकरते हुए दक्षक्षणी मर्ण्ी पर पूवा की तरफ चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 239 तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 237 तक। यहां से पक्श्चम की तरफ सीाि चतिे हुए पूवी मर्ण्ी कफरनी के पास दशाना देवी पक्त्न श्री जोगीराम के मकान को छोड़ते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से कफरनी के साथ-साथ दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए प्रेम कु मार शमाा के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए उतरी- पक्श्चमी कोणे कु म्ािराम लमस्त्री के मकान तक । | 539 |
| 7 | उतरी-पक्श्चमी सीमा ररम्पी सोनी के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए राजकु मार | 532 |
| धगररि के मकान को शालम ि कर इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए कम ि लमत ि के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए गोप काड़िा के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए बजिीत लसंह मास्टर के मकान को शालम िकर इसके पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए हंसराज काठपा िके मकान को शालम िकरते हुए आर एम स्कू ि के दक्षक्षणी पक्श्चमी कानार से दक्षक्षण की तरफ चतिे ह ुए मेघराज खत्री के मकान को शालम िकरते हुए पूवी हदशा में मर्ण्ी कफरनी के साथ-साथ चतिे हुए दशाना देवी पक्त्न श्री जोगीराम के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए पदमपुर रोड़ तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चकिर ररम्पी सोनी के मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | ||
| 8 | उतरी-पक्श्चमी सीमा ीिमसेन लमत िके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे स े दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए गुरदया िहुण्द िके मकान को छोड़ते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए कृ ष ि उपज मर्ण्ी सलमनत कायाायि को छोड़ते हुए रामीि ि ग्राउर्ण् को आंलशक शालम िकरते हुए राजकीय कन्या उच्च माध्यलमक षवाियि की तरफ चतिे हुए कु दिीप नाई की दुकान को शालम िकरते हुए यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए के राजकीय कन्या उच्च माध्यलमक षवाियि क े उतरी-पूवी कोणे तक। यहां से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए राजकीय कन्या उच्च माध्यलमक षवाियि को छोड़ते्हुए्करते्हुए दक्षक्षणी पूवी कोणे तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए श्री कु न्दनाि ि लमगािनी के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी- पक्श्चमी कोणे से पदमपुर-् गजसंिहर्पु रोड् क्रॉ्ि र्क दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए एएसआई नरेन्र के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए मदनाि िपुत्र श्री कमाचन्द के मकान को शालम ि कर इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए पदमपुर रोड़ क्रास कर ाि ि स्कू ि को शालम िकरते हुए इसके दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पदमपुर रोड़ पर पूवा की तरफ चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 235 तक। यहां से पक्श्चम की तरफ सीाि चतिे हुए ीिखाराम ुिहार के मकान को शालम िकरते ह ुए व ािनक मिाशााि को र्छोकर इसके पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए मांगीाि ि के मकान 37 एफ ब्ािक को शालम िकरते हुए इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पक्श्चम की | 508 |
| तरफ चतिे हुए सुशी िकु मार लसपाही के मकान को शालम िकरते हुए वीर लसंह यादव के मकान को शालम ि करते हुए वीर लसंह यादव के मकान से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए षवनय अरोड़ा (सोनू ज्यूस बार) क े मकान को शालम ि करते पक्श्चमी की तरफ चतिे हुए ीिमसेन लमत िके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | ||
| 9 | उतरी-पक्श्चमी कोणे लशव मक्न्दर ािनक समाज को शालम ि करते हुए दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए अश्वनी कु मार के मकान को शालम ि कर इसके पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए मिापा िइन्दौरा क े मकान से दक्षक्षणी की तरफ चतिे हुए अंजना पत्नी श्री मदनाि िके मकान के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोने से पूवा की तरफ चतिे हुए जगदीश यादव के मकान को शालम िकरते हुए उतर हदशा में चतिे हुए जगदीश यादव के षपछे मांगीाि िके खाीि प्ािट (आहाता संख्या 32 एफ) को शालम िकरते हुए पूवा की तरफ चतिे हुए ािनक मिाशााि को शालम ि कर पूवा की तरफ सीाि चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा के पत्थर संख्या 235 तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए पत्थर संख्या 235 व 234 क े मध्य तक। यहां से पक्श्चम की तरफ सीाि चतिे हुए पूवी मर्ण्ी कफरनी को क्रास कर गोपा ि तोाि, सीस राम मेम्बर के मकान को शालम िकरते हुए संजय कु मार पुत्र श्री मदनाि िबैंक कमी के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए र्रूी देवी दाई के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए लशव मक्न्दर ािनक समाज के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 545 |
| 10 | उतरी-पक्श्चमी कोणे मर्ण्ी सीमा के पत्थर संख्या 208 व 207 के गिगि मध्य से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए हरीककशन पुत्र श्री पदमाराम के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी- पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ सीाि चतिे हुए रमेश कु मार ककशनाराम, मुरीिराम बैंक कमी के मकान को शालम ि करते हुए दक्षक्षण की तरफ सीाि चतिे हुए धचंरजी ककराड़ के मकान को शालम ि कर इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए प्रकाश चन्द पुत्र श्री ररछपा ि के मकान को शालम िकर इनके मकान क े दक्षक्षणी-पूवी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए राजकु मार पुत्र श्री रतीराम के मकान को शालम ि कर इनके मकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ सीाि चतिे हुए पूवी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 234 व 235 के मध्य तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए मर्ण्ी सीमा के उतरी-पूवी कोणे पर मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 203/233 तक। यहां से पक्श्चम की तरफ मर्ण्ी सीमा के साथ-साथ चतिे हुए उतरी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 207 व 208 के मध्य तक। | 531 |
| 11 | उतरी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 209 व 208 के मध्य से दक्षक्षण की तरफ सीाि चतिे हुए गुरूनानक नगर को छोड़ते हुए ए/16 को सक्म्मलति करते हुए इसकी उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चकिर गौरव पथ को क्रास कर नगरपालकिा पुस्तकायि के उतरी हदवार के मध्य तक। यहां से गौरव पथ पर पूवा की तरफ चतिे हुए अबान स्कू िको शालम िकर इसके पूवी-दक्षक्षण कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए वाक््मीकी मक्न्दर व ंिवराि िपुत्र श्री सहीराम के मकान को शालम ि करते हुए मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 208 व 207 के मध्य तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए उतरी मर्ण्ी सीमा पत्थर संख्या 208 व 209 के मध्य तक। | 460 |
| 12 | उतरी-पक्श्चमी कोणे पृथ्वीराज शास्त्री के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए ककशन जग्गा के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान क े दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए शांनत धगररि के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पूवी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए रषव शमाा पुत्र बाबूाि ि शमाा के मकान को शालम िकरते हुए इसके पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए सोमेश पाठक के मकान को शालम िकरते हुए इसके मकान के उतरी- पक्श्चमी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए श्री गोपा िलसंह के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे से गौरव पथ पर पक्श्चम की तरफ चतिे हुए श्री पृथ्वीराज शास्त्री के मकान के उतरी- पक्श्चमी कोणे तक। | 458 |
| 13 | उतरी-पक्श्चमी कोणे पुराने आर.एम स्कू ि के उतरी-पक्श्चमी कोणे से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए राज कु मार सुखीजा के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पक्श्चम की तरफ मुड़ते हुए वेदप्रकाश बजाज के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे से गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे ह ुए भीमेिन्समत्तल्(न्द्यू्नीलकं ठ्फै शन) की दुकान को शालम िकरते ह ुए इनकी दुकान के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए षवजय लमत्त ि(काला)्के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पूवी कोणे से उतर की तरफ गौरव पथ पर चतिे हुए फकीरचन्द के मकान को शालम िकर इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे स े पक्श्चम की तरफ चतिे हुए पुराने आर.एम स्कू ि की बबक्र््ंग के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 478 |
| 14 | उतरी पक्श्चमी सीमा श्री कमजिीत लसंह हुण्द िके मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए मर्ण्ी सलमनत को शालम िकरते हुए राजकीय कन्या उच्च माध्यलमक षवाियि के दक्षक्षणी | 545 |
| पक्श्चमी कोणे तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए राजन गुप्ता क े मकान को शालम िकरते हुए प्रमोद बबश्नोई की दुकान (पाीि कोचर) की दुकान को शालम ि करते हुए दक्षक्षणी हदशा में चतिे हुए गुरषवन्र लमस्त्री की दुकान तक। यहां से पूवा हदशा में चतिे हुए हरबंस नागपा ि क े मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए पदमपुर रोड़ को क्रास कर मिेन्र लसंह, गुरूनानक मेर्डक ि के मकान को शालम ि करते हुए यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए राबाउमाषव के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए राबाउमाषव की उतरी-पूवी कोणे तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए कु विन्त लसंह एसी ररपेयर की दुकान को शालम िकरते हुए यहां से उतर की तरफ चतिे हुए रामीिाि ग्राउं र् को शालम िकर उतर की तरफ चतिे हुए सतीश लमत्त िके मकान तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए उतरी-पक्श्चमी सीमा श्री कमजिीत लसंह हुण्द िके मकान तक। | ||
| 15 | उतरी-पक्श्चमी सीमा इकबा ि लसंह (गोगा) की खाीि दुकान के उतरी- पक्श्चमी कोणे से गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए रामनारायण चौरिी के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी- पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए चन्रशेखर पुत्र चन्रािन के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए षवनोद पासी के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए उतरी पक्श्चमी सीमा इकबा िलसंह (गोगा) की खाीि दुकान तक। | 514 |
| 16 | उतरी-पक्श्चमी कोणे गुरूद्वारा लसंह साि से दक्षक्षण की तरफ र्डफे न्स रोड़ पर चतिे हुए बाबू जगजीवन राम सामुदानयक के न्र को छोड़कर इसके उतरी-पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए र्गुी देवी नायक क े मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के दक्षक्षणी पूवी कोणे से उतर की तरफ गौरव पथ पर चतिे हुए गुरूद्वारा लसंह साि के पूवी- उतरी कोणे तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए गुरूद्वारा लसंह साि के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 454 |
| 17 | उतरी-पक्श्चमी कोणे ककशनाि ि ािट के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान से गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए पूणाराम लमस्त्री के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पक्श्चमी- दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए रामीदेवी पक्त्न श्री गंगाराम के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए ािीिदेवी नायक के मकान को शालम िकरते ह ुए इनके मकान के दक्षक्षणी-पक्श्चमी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए गौरव पथ पर चेतराम ािट के प्ािट को शालम िकरते हुए इनके प्ािट | 497 |
| क े पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ गौरव पथ पर चतिे हुए सुरेन्र कौर पक्त्न श्री नानकचन्द के अहाता को शालम ि करते हुए इनके अहाता के उतरी-पूवी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए ककशनाि ि ािट के मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक । | ||
| 18 | उतरी-पक्श्चमी कोणे षवद्यादेवी पक्त्न श्री मोहनाि ि कु म्हार के मकान स े गौरव पथ पर दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए नानक कु म्हार के अहाते को शालम िकरते हुए इनके अहाते के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे हुए गौरव पथ को क्रास कर नानकचन्द की ककरयाने की दुकान को शालम िकरते हुए चेतराम पुत्र श्री मनीराम ढोीि के मकान को शालम ि करते हुए इनके मकान के पूवी-दक्षक्षणी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए बविीर पूननया के मकान को शालम िकरते हुए इनके मकान के पूवी-उतरी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए षवद्यादेवी पक्त्न श्री मोहनाि िकु म्हार के मकान के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 479 |
| 19 | उतरी-पक्श्चमी कोणे नरेश लमगािनी के मकान से दक्षक्षण की तरफ चतिे हुए बाबाराम देव मक्न्दर को शालम ि करते हुए मक्न्दर के पक्श्चमी-दक्षक्षणी कोणे से पूवा की तरफ चतिे मक्न्दर के दक्षक्षणी-पूवी कोणे तक। यहां से उतर की तरफ चतिे हुए हनुमान पुत्र सीताराम के मकान तक। यहां से पूवा की तरफ चतिे हुए जोगेन्रपा ि मास्टर के खाीि प्ािट को शालम िकरते हुए दक्षक्षणी-पूवी कोणे से उतर की तरफ चतिे हुए दाता राम के खाीि प्ािट को शालम िकरते हुए इनके उतरी- नराम के ा पूवी कोणे से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए मैनादेवी पत्नी अजु मकान को शालम िकरते हुए उतरी हदशा की तरफ चतिे हुए बन्त लसंह ट ेरि के मकान तक। यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे हुए लशवचंद काठपा िके लमठाई गोदाम को शालम िकरते हुए यहां से पूणाचन्द रेवड़ी क े खाीि गोदाम को शालम िकरते हुए यहां से पक्श्चम की तरफ चतिे ह ुए नरेश लमगािनी के उतरी-पक्श्चमी कोणे तक। | 470 |
| 20 | उतरी-पक्श्चमी कोणे के व ि ठिे जा (मुकसररया) के मकान को शालम ि करते हुए दक्षक्षणी हदशा में चतिे हुए षवक्रम सहग ि के मकान को शालम ि करते हुए पक्श्चमी हदशा की तरफ चतिे हुए कु लभुषण् पुर्त् पूणणचन्द्द्रेवड़ी के मकान को शालम िकरते हुए दक्षक्षणी हदशा में चतिे ह ुए नरेश काठपा ि उफा बब्ाि के मकान को शालम ि करते हुए पूवा हदशा में लशवचन्द काठपा ि के मकान को शालम ि करते हुए दक्षक्षणी हदशा की तरफ चतिे हुए बाूिराम पटवारी के मकान को शालम िकरते ह ुए क्जन्द ि तािसेज को शालम ि करते हुए पूवा हदशा की तरफ मुड़ते ह ुए जगसीर लसंह न.पा. कमाचारी के मकान को शालम ि करते हुए रामकाि यादव से उतर की तरफ चतिे हुए धचराग बतरा के मकान को शालम िकरते हुए पक्श्चमी हदशा की तरफ मुड़ते हुए गुरचरण मास्टर के | 476 |
| मकान के साथ खाीि प्ािट (कानार) को शालम िकरते हुए उतर हदशा म े चतिे हुए संदीप पारीक पुत्र श्री सत्यनारायण पटवारी के मकान तक। यहां से पक्श्चम हदशा मे चतिे हुए उतरी-पक्श्चमी कोणे के व ि ठिे जा (मुकसररया) तक। |