| राजस् थान राजपत्र विशेषांक | RAJASTHAN GAZETTE Extraordinary | |
| साधिकार प्रकाशित | Published by Authority | |
| माघ 09, गरूवार , शाके 1947- जनवरी 29, 2026 ु Magha 09, Thursday, Saka 1947- January 29, 2026 |
भाग 4 (ग)
उप-ख(cid:214)ड(II)
राज्य सरकार तथा अन्य राज्य प्राधिकारियों (cid:217)वारा जारी किये गये काननीू आदेश तथा
अधिसचनाएं
ू ।
वित्त विभाग
(कर अनभागु )
अधिसचनाू
जयपरु , जनवरी 27, 2026
एस.ओ.159 :- राजस्थान राजभाषा अधिनियम, 1956 (1956 का अधिनियम सं. 47) की धारा 4 के परन्तुक के अनसरणु में इस विभाग की अधिसचनाू संख्यांक प. 2(42)वित/कर/2017-124 दिनांक 02.01.2026 का हिन्दी अनवादु सर्वसाधारण के सचनार्थ
ू एतद(cid:217)वारा प्रकाशित किया जाता है:-
राज्यपाल के आदेश से,
नथमल डिडेल,
विशिष्ट शासन सचिव।
(प्राधिकतृ हिन्दी अनवादु ) ''अधिसचनाू जयपरु , जनवरी 02, 2026
यतः पहचान स्थापित करने के लिए आधार संख्या का उपयोग व्यक्तियों को सविधाजनु क और निर्बाध रीति से सहायिकियां, प्रसविधाएं
ु और सेवाएं प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, पहचान स्थापित करने के लिए विभिन्न दस्तावेजों की आवश्यकता का निवारण करता है, प्रक्रियाओं को सरल बनाता है और पारदर्शिता तथा दक्षता को प्रोत्साहित करता है;
और यत: सशासनु के लिए आधार अधिप्रमाणन (समाज कल्याण, नवाचार, ज्ञान) नियमावली, 2020, जिसे इसमें इसके पश्चात ् उक्त नियमों के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, के नियम 3 के उप-नियम (1) के अधीन विहित प्रयोजनों के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यआईडीएआईू ) से परामर्श के पश्चात ् इलेक्ट्रॉनिकी और सचनाू प्रौ(cid:217)योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार अपने पत्र क्रमांक ईएफ.स.13(9)/2022-ईजी-II दिनांक 27.08.2025 के माध्यम से वित्त विभाग, जिसे इसमें इसके पश्चात ् उक्त विभाग के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, राजस्थान सरकार, जिसे इसमें उसके पश्चात ् उक्त सरकार के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, को 564 राजस्थान राज-पत्र, जनवरी 29, 2026 भाग 4(ग) स्थापित करने के लिए अधिप्रमाणन के दौरान आधार संख्या के उपयोग को अनज्ञातु कर सके गा और आधार (वित्तीय और अन्य सहायिकियों, प्रसविधाओं ु और सेवाओं का लक्ष्यित परिदान) अधिनियम, 2016, जिसे इसमें इसके उक्त अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, की धारा 4 की उप-धारा (4) के ख(cid:214)ड (ख) के उप- ख(cid:214)ड (ii) के साथ पठित उक्त नियमों के नियम 5 के अधीन अधिसचितू कर सके गा;
और यत:, आधार अधिप्रमाणन निवासियों की पहचान स्थापित करने के लिए रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 16) के अधीन अपेक्षित होगा, जिसे इसमें इसके पश्चात ् उक्त नियमों के नियम 3 के उप-नियम (1) के अधीन उक्त प्रयोजन के रूप में निर्दिष्ट किया गया है और उक्त प्रयोजन के लिए आधार अधिप्रमाणन का पालन स्वैच्छिक आधार पर होगा और कि उक्त विभाग दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण के दौरान के वल प्रस्ततकर्ता
ु , निष्पादियों और साक्षियों के लिए आधार अधिप्रमाणन का पालन करेगा;
अब, इसलिए, अधिनियम की धारा 4 की उप-धारा (4) के खंड (ख) के उप-खंड (ii) के साथ पठित उक्त नियमों के नियम 5 के अनसरणु में और इस विभाग की अधिसचनाू संख्यांक प.2(42)वित्त/कर/2017-55 दिनांक 27.07.2023 को अतिष्ठित करते हएु , उक्त विभाग इसके (cid:217)वारा निम्नलिखित अधिसचितू करता है, अर्थात ्:-
1.(i) विभाग, उक्त अधिनियम में यथा उपबंधित, इसमें अधिप्रमाणन के प्रयोजन के लिए आधार संख्या धारक की सहमति अभिप्राप्त करेगा।
(ii) उक्त नियमों के नियम 3 के उप-नियम (2) के अनसारु , आधार अधिप्रमाणन स्वैच्छिक आधार पर होगा, विभाग आधार संख्या के धारक को पहचान के वैकल्पिक और सकरु साधन सचितू करेगा और आधार अधिप्रमाणन से इंकार करने, या असमर्थ रहने पर आधार संख्या धारक को किसी सेवा से इंकार नहीं करेगा, अर्थात ्:-
(क) जन आधार कार्ड
(ख) मतदाता फोटो पहचान-पत्र
(ग) भारतीय पासपोर्ट
(घ) चालन अनज्ञप्ति।ु
2. यह अधिसचनाू राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से प्रवत्तृ होगी।
[सं. एफ. 2(42)वित/कर/2017-124]
राज्यपाल के आदेश से, नथमल डिडेल,
विशिष्ट शासन सचिव''।
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Government Central Press, Jaipur.