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Rajasthan Extraordinary Gazette · Government of Rajasthan

Rajasthan Extraordinary Gazette, Part Part 4 (C) II, 12 June 2026

Published 12 June 2026

Department
Home department
Type
Extraordinary
Part
Part 4 (C) II
Notification no.
nil
Category
Statutory Notification
Document Type
Statutory Notification /Order
Subdepartment
Jail
Identifier
in.gazette.rajasthan_extraordinary.2026-06-12.5118104
Languages
English, Hindi

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राजस् थान राजपत्र विशेषांक RAJASTHAN GAZETTE Extraordinary
साधिकार प्रकाशित Published by Authority
12, 2026 ज् येष् ठ 22, शक्रवार ु , शाके 1948- जनू Jyaistha 22, Friday, Saka 1948- June 12, 2026

भाग 4 (ग)

उप-ख(cid:214)ड(II)

राज्य सरकार तथा अन्य राज्य प्राधिकारियों (cid:217)वारा जारी किये गये काननी आदेशू तथा

अधिसचनाएं

ू ।

गह विभागृ

(ग्रपु -12)

अधिसचनाू

जयपरु , 12 दिसम्बर, 2022

एस.ओ.16 :-कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं.9) की धारा 59 (cid:217)वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार राजस्थान राज्य में स्थित कारागारों के प्रबंधन और विनियमन के लिए इसके (cid:217)वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात ्:-××××'"

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ.- (1) इन नियमों का नाम राजस्थान कारागार नियम, 2022 है।

(2) ये राजपत्र में इनके प्रकाशन की तारीख को और से प्रवत्तृ होंगे।

2. लाग होनाू .- कारागारों का प्रशासन और प्रबंधन, इसके कर्मचारिवंद और विभिन्नृ विधियों के उपबंधों के अधीन समस्त प्रकार के कै दी और बन्दी इन नियमों से शासित होंगे।

3. परिभाषाएं.- (1) इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) ''अधिनियम'' से कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) अभिप्रेत है;

(ख) ''किशोर बन्दी'' से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है,-

(i) जिसे कारावास से दंडनीय किसी अपराध का सि(cid:217)धदोष ठहराया गया है, या जो, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 117 के अधीन प्रतिभति देने को आदेशित होते हएू

ु , ऐसा करने में असफल रहा है और वह ऐसी दोषसि(िcid:217)ध या प्रतिभति ू देने में असफलता के समय, अठारह वर्ष से कम, परन्तु इक्कीस वर्ष से अधिक आय का नहीं है

ु ; या

84 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ii) जिसे उसके विचारण के लंबित रहने के दौरान कारावास अभिरक्षा में भेजा गया है और वह, भेजे जाने के समय, अठारह वर्ष से कम और इक्कीस वर्ष से अधिक आय का नहीं है

ु ;

(ग) ''पश्चात्वर्ती देखरेख सेवाओं'' से छोड़े गये बन्दियों के सामान्य और अच्छे नागरिकों के रूप में वित्तीय पनर्वास के उ(cid:217)देश्यु से किये गये क्रियाकलाप अभिप्रेत हैं;

(घ) ''सिविल बन्दी'' से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे दा(िcid:214)डक क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए किसी न्यायालय या प्राधिकारी के रिट, वारंट या आदेश के अधीन या कोर्ट मार्शल के आदेश से कारागार में भेजा नहीं गया है और जो नजरबन्द/निरु(cid:217)ध नहीं है;

(ङ) ''सक्षम प्राधिकारी'' से प्रश्नगत किसी विशिष्ट मामले में अधिकारिता रखने वाला और कार्रवाई के लिए सम्यक् विधिक प्राधिकार रखने वाला कोई अधिकारी अभिप्रेत है;

(च) ''परिरोध'' से किसी कारागार में परिरोध अभिप्रेत है और इसमें निवारक निरोध का प्रावधान करने वाली किसी विधि के अधीन निरोध सम्मिलित है;

(छ) ''सि(cid:217)धदोष बन्दी या सि(cid:217)धदोष'' से दांडिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर रहे किसी न्यायालय या कोर्ट मार्शल के दंडादेश के अधीन कोई बन्दी अभिप्रेत है और इसमें दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अध्याय 8 और बन्दी अधिनियम, 1900 (1900 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 3) के उपबंधों के अधीन कारावास में निरु(cid:217)ध व्यक्ति सम्मिलित है;

(ज) ''सधारात्मु क का र्मिक'' से कारागार में सधारात्मु क सेवाओं की व्यवस्था करने के लिए लगाया गया या नियक्तु किया गया कार्मिक अभिप्रेत है;

(झ) ''सधारात्मु क सेवाओं'' से अपराधियों के सधार ु और पनर्वास तथा कारागारों ु

के समचित प्रशासनु , प्रबंध और कामकाज के लिए लक्ष्यित सेवाएं अभिप्रेत हैं;

(ञ) ''न्यायालय'' से तत्समय प्रवत्तृ किसी विधि (cid:217)वारा स्थापित कोई न्यायालय अभिप्रेत है और इसमें तत्समय प्रवत्तृ किसी विधि के अधीन सिविल, निवारक या दा(िcid:214)डक अधिकारिता प्रयोग करने की शक्तियों से निहित कोई अधिकारी या प्राधिकारी सम्मिलित है;

(ट) ''दा(िcid:214)डक बन्दी'' से रिट, वारंट या दा(िcid:214)डक क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर रहे किसी न्यायालय या प्राधिकरण के आदेश या सेना अधिनियम, 1950 (1950 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 46) में यथा परिभाषित कोर्ट मार्शल केभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 85 आदेश (cid:217)वारा सम्यक रूप से अभिरक्षा में भेजा गया कोई बन्दी अभिप्रेत है;

(ठ) ''कारागार उप-महानिरीक्षक'' से कोई ऐसा अधिकारी अभिप्रेत है जिसे राज्य सरकार (cid:217)वारा ऐसी हैसियत से नियक्तु किया गया है;

(ड) ''निरु(cid:217)ध'' से निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन वारंट, रिट या आदेश या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन विचारण के अवसर बिना कारावास में निरु(cid:217)ध कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

(ढ) ''प्ररूप'' से राज्य सरकार (cid:217)वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट प्ररूप अभिप्रेत है;

ु (ण) ''व(cid:217)धृ बन्दी'' से वह बन्दी अभिप्रेत है जो साठ वर्ष या अधिक आय का है और बिना किसी सहायता के अपने सामान्य दैनिक कार्य स्वतंत्र रूप से करने के लिए चिकित्सीय रूप से अयोग्य है;

(त) ''सरकार'' से राजस्थान सरकार अभिप्रेत है;

(थ) ''कारागार निदेशालय प्रमखु '' से महानिदेशक कारागार अभिप्रेत है; (द) ''आभ्यासिक अपराधी'' से ऐसा कोई अपराधी अभिप्रेत है जिसे एक से अधिक अवसर पर किसी विशिष्ट अपराध में सि(cid:217)धदोष ठहराया गया है;

(ध) ''वत्तृ पत्र'' से ऐसी सचनाू एं प्रदर्शित करने वाला पत्र अभिप्रेत है जो इस अधिनियम या तदधीन बनाये गये नियमों (cid:217)वारा प्रत्येक बन्दी के संबंध में आवश्यक हैं;

(न) ''उच्च सरक्षा प्राप्तु बन्दी'' से निकल भागने, जघन्य अपराध जैसे डकै ती, लटू , गैंगस्टर, भाड़े पर रखा गया हत्यारा, ड्रग पेडलर, पलिस पर आक्रमण ु

करने वाला, वामपंथ उग्रवाद में अंतर्वलित और उच्च शारीरिक सरक्षा की ु

अपेक्षा से कारावास अभिरक्षा में भेजा गया कोई बन्दी अभिप्रेत है;

(प) ''कारावास'' से भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) में यथा परिभाषित अभिप्रेत है;

(फ) ''बीमार बन्दी'' से शारीरिक नि:शक्तता वाला कोई बन्दी, जो अपना दैनिक सामान्य कार्य स्वतंत्र रूप से बिना किसी सहायता के करने में असमर्थ है, अभिप्रेत है;

(ब) ''महानिरीक्षक'' से महानिरीक्षक कारागार अभिप्रेत है और इसमें उप- महानिरीक्षक कारागार सम्मिलित है;

(भ) ''विधि अधिकारी'' से कारागार या जेल विभाग में राज्य सरकार (cid:217)वारा नियक्तु राजस्थान विधिक (राज्य एवं अधीनस्थ) सेवा का अधिकारी अभिप्रेत है;

86 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(म) ''मजिस्ट्रेट'' से दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अधीन एक मजिस्ट्रेट की समस्त या किन्हीं शक्तियों का प्रयोग करने वाला कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

(य) कारागारों के संबंध में, ''चिकित्सा अधिकारी'' से राज्य सरकार के सामान्य या विशेष आदेशों (cid:217)वारा घोषित एक अर्हित चिकित्सा व्यवसायी अभिप्रेत है;

(यक) ''सेना बन्दी'' से कोर्ट मार्शल (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष बन्दी अभिप्रेत है;

(यख) ''गैर-आभ्यासिक अपराधी'' से समस्त अन्य ऐसे बन्दी अभिप्रेत हैं जो आभ्यासिक अपराधी नहीं हैं;

(यग) ''अपराध'' से तत्समय प्रवत्तृ किसी विधि (cid:217)वारा दंडनीय बनाया गया कोई कत्यृ या लोप अभिप्रेत है;

(यघ) ''खले शिविरु '' से राजस्थान राज्य (cid:217)वारा यथा अंगीकत कारागार अधिृ नियम, 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 3 के ख(cid:214)ड (1) के अनसरण में बन्दियों के निरोध के लिु ए खले शिविर के रूप में घोषित ु

स्थान अभिप्रेत है;

(यङ) ''कारागार'' से कोई जेल या बन्दियों के निरोध के लिए राज्य सरकार के सामान्य या विशिष्ट आदेशों के अधीन स्थायी या अस्थायी रूप से प्रयक्तु कोई स्थान अभिप्रेत है, इसमें समस्त भमि और भवनू , उसका अपाटर्मेंट सम्मिलित है, कित निम्नं ु लिखित सम्मिलित नहीं हैं,-

(i) बन्दियों के परिरोध के लिए कोई स्थान जो अनन्य रूप से पलिस ु अभिरक्षा में है; और

(ii) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 417 के अधीन राज्य सरकार (cid:217)वारा विशिष्ट रूप से नियत कोई स्थान;

(यच) ''बन्दी'' से सक्षम प्राधिकारी के आदेश के अधीन कारागार में निरु(cid:217)ध कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

(यछ) ''परिवीक्षा अधिकारी'' से अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 20) या तत्समय प्रवत किसी अन्यृ विधि के अधीन परिवीक्षा कार्य का जिम्मा लेने के लिए सरकार (cid:217)वारा ऐसी हैसियत में नियक्तु कोई अधिकारी अभिप्रेत है;

(यज) ''प्रतिषि(cid:217)ध वस्तु'' से वह वस्तु अभिप्रेत है जिसे अधिनियम या नियमों के अनसार कारागार में ु प्रविष्ट नहीं किया जा सकता या हटाया नहीं जा सकता;

(यझ) ''मजरिमु '' से वह अपराधी अभिप्रेत है जिसने पहले अपराध के पश्चात ् दसरा अपराध कारित किया हो ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 87

(य¥) ''रजिस्टर'' से राज्य सरकार (cid:217)वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट रूपविधान में संधारित रजिस्टर अभिप्रेत है;

(यट) ''परिहार'' से कारागार में अच्छे आचरण और व्यवहार के साथ-साथ कारावास के प्रशासन में बन्दी (cid:217)वारा श्रम, विशेष अभिदाय और सहयोग के लिए इनाम के रूप में, स्वीकत दंडादेश ृ की कमी अभिप्रेत है;

(यठ) ''परिहार प्रणाली'' से बन्दी के दंडादेश के परिहार को विनियमित करने के लिए प्रवत्तृ नियम अभिप्रेत हैं;

(यड) ''अधीक्षक'' से सक्षम प्राधिकारी (cid:217)वारा ऐसी हैसियत में नियक्तु अधिकारी अभिप्रेत है और इसमें कारावास उप-अधीक्षक सम्मिलित है;

(यढ) ''उभयलिंगी'' से उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 (2019 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 40) के अधीन यथा परिभाषित उभयलिंगी अभिप्रेत है;

(यण) ''विचाराधीन बन्दी'' से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसे सक्षम प्राधिकारी (cid:217)वारा लंबित अन्वेषण या विचारण के साथ कारागार अभिरक्षा में भेजा गया है;

और

(यत) ''यवा अपराधीु '' से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अ(cid:210)ठारह वर्ष की आय ु पर्ण कर ू ली है किन्तु इक्कीस वर्ष की आय प्राप्तु नहीं की है।

(2) इन नियमों में प्रयक्तु किन्तु परिभाषित नहीं किये गये शब्दों और अभिव्यक्तियों का वही अर्थ होगा जो उनका कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) में है।

अध्याय 2

संस्थागत ढांचा

4. कारागारों की स्थापन के लिए मानदंड.- (1) राज्य सरकार यथासंभव पर्याप्त संख्या में कारागारों की स्थापना करेगी और मानवीय गरिमा के अनरूप निर्वाह मानकों को

ु बनाये रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम आवश्यकताएं उपलब्ध करवायेगी।

(2) कारागार प्रशासन यह सनिश्चित करेगा कि बन्दी के मानवाधिकारों का सम्मा न किया जाये।

(3) कारागार प्रशासन बन्दियों के निम्नलिखित प्रवर्गों का पथक्कृ रण सनिश्चित करेगाु , अर्थात ्:-

(क) सिविल बन्दी;

(ख) विचाराधीन;

(ग) महिला बन्दी;

(घ) सि(cid:217)धदोष बन्दी;

(ङ) यवा अपराधीु ; (च) प्रथम अपराधी;

88 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(छ) आभ्यासिक अपराधी;

(ज) उच्च सरक्षा ु बन्दी; (झ) निवारक बन्दी;

(ञ) जराचिकित्सा और शिथिलांग बन्दी;

(ट) उभयलिंगी बन्दी;

(ठ) मनश्चिकित्सकीय बन्दी; और

(ड) राजनैतिक बन्दी।

(4) उच्च सरक्षा बन्दियों के लिए पथक कारागार होगा।

्

(5) कारागार प्रशासन बन्दियों को कानन का पालन करने वाले , स्वयं की सहायता करने वाले, सधरे हए और सामाजिक रूप से पनर्वासित जीवन का मार्गदर्शन करने हेत तैयार करने की देखभाल करेगा।

5. संस्थागत पैटर्न.- (1) सरकार, अभिरक्षा और सधार के निबंधनों के अनसार ु

बन्दियों की विभेदक अपेक्षाओं को परा करने के लिए संस्था

ू गत संसाधनों के विविधीकरण पर्याप्त रूप में उपबन्ध करवायेगी।

(2) विचार किये जाने वाले घटकों में बन्दी की आयु, लिंग, विधिक प्रास्थिति, अपराध की

ु , स्वास्थ्य की स्थिति और सधारात्मु क प्रकतिृ , दंडादेश की अवधि, सरक्षा अपेक्षाओं

आवश्यकताएं सम्मिलित होंगी।

् गत सविधाओं की ु

(3) ऐसी चर्या में बन्दियों के भिन्न- भिन्न प्रवर्गों के लिए पथक संस्थाृ

स्थापना अंतर्निहित होगी, जैसे कि,-

(क) विचाराधीन बन्दियों के लिए कारागार या उपभवन या यार्ड;

(ख) सरक्षा जोखिम बन्दियों औरु आभ्यासिक या कठोर अपराधियों के लिए अधिकतम सरक्षा कारागार या उपभवन या यार्ड ;

;

(ग) खले शिविर कारागारु (घ) महिला बन्दियों के लिए कारागार या उपभवन या अहाता;

(ङ) यवा बन्दियों के लिए कारागार या उपभवन या यार्ड ;

(च) संक्रामक रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए कारागार या उपभवन या यार्ड;

(छ) मादक व्यसनियों के लिए कारागार या उपभवन या यार्ड; और

(ज) उभयलिंगी के लिए कारागार या उपभवन या यार्ड।

6. बन्दियों का वर्गीकरण.- (1) सरकार ऊपर यथा प्रगणित विभिन्न प्रकार की संस्थाओं में रखे जाने वाले बन्दियों के वर्गीकरण के लिए तंत्र स्थापित करेगी और अनपालन ु की जाने वाली प्रक्रिया अधिकथित करेगी।

(2) प्रत्येक प्रकार की संस्था के लिए प्राधिकत संख्याृ और बन्दियों के लिए क्षेत्र या स्थान के संबंध में मानक, साथ ही रखे जाने वाले बन्दियों की संख्या विनिर्दिष्ट की जायेगी जिसमें शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, कार्य के कार्यक्रम और सांस्कृ तिक क्रियाकलाप, पस्तु कालय और आमोद-प्रमोद, अंतरंग और बहिरंग दोनों के लिए सविधाएं समाविष्टु हो सकें गी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 89

(3) यह प्रत्येक प्रकार की संस्थाओं में नियक्तु किये जाने वाले कर्मचारिवंद के लिए विनिदश ृ

भी दे सके गी।

(4) बन्दियों के विशिष्ट प्रवर्गों के लिए विभिन्न प्रकार के कारागारों के अलावा, सरकार आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए अस्थाई कारागार बना सकती है।

7. कारागार वास्तुकला.- (1) कारागार निर्माण नयी संस्था की अवस्थिति पर आधारित होगा जिसे निम्नलिखित के आधार पर विनिश्चित किया जायेगा,-

(i) ऐसे कत्यृ जो संस्था को करने हैं; (ii) प्रशिक्षण और व्यवहार पर जोर देना; और

(iii) संस्था की कार्यक्रम अंतर्वस्तु।

(2) नयी संस्थाएं बहतायत में बाढ़ग्रस्तु और जलमग्न क्षेत्रों, सीमांत क्षेत्रों और अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं, उप-सीमांत भमि क्षे

ू त्रों, समद्र के अग्रभागोंु , हवाईअ(cid:212)डों और भीड़भाड़ वाले शहरी स्थानों के निकट सन्निर्मित नहीं की जायेंगी।

(3) नयी संस्थाओं के लिए स्थल का चयन करते समय कारकों जैसे यातायात सविधाएं

ु , जल आपर्त

ू , वि(cid:217)यत प्रकाशु , उच्च शक्ति वि(cid:217)यत पारेषण लाइनों के साथ संबं

ु ध, जल और मल निकास, संचार सविधाओं ु (जैसे कि डाक, टेलीग्राफ, दरभाष और इंटरनेटू ) जलवायवी दशाओं, संस्थागत प्रदायों के क्रय के लिए सविधाओं

ु को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

(4) संस्थाएं जैसे न्यायालय, सिविल चिकित्सालय, मानसिक स्वास्थ्य के न्द्र और कारागार कार्मिकों के बच्चों के लिए शैक्षिक सविधाएं

ु , यथासंभव आसान पहंच के भीतर होनी चाहिए।ु (5) संस्थाओं की वास्तुकला दो सि(cid:217)धांतों से शासित होगी, अर्थात ्:-

(क) सरक्षा शर्तों की स्था

ु पन के माध्यम से समाज को पर्याप्त संरक्षण; और (ख) पर्याप्त स्रोत जो विभिन्न सधारात्मु क कार्यक्रमों, संस्थागत अभिकल्पना और वास्तुकला के सफलतापर्ण कार्यान्वू यन के लिए आवश्यक होंगे।

(6) किसी संस्था की योजना अंत:वासी संख्या, आय समहु ू , अभिरक्षा अपेक्षा, विविध कार्य और शैक्षिक कार्यक्रमों के सतर्क विश्लेषण पर आधारित होगी।

(7) बंद कारागार निम्नलिखित रूप में वर्गीकत किये जायेंगे

ृ , अर्थात ्,-

(i) एक हजार पांच सौ बन्दियों की अधिकत संख्याृ के साथ के न्द्रीय जेल; (ii) सात सौ पचास बन्दियों की अधिकत संख्याृ के साथ जिला जेल; और (iii) पांच सौ बन्दियों की अधिकत संख्याृ के साथ उप-जेल/अस्थाई उप-जेल।

(8) समचिु त संवातन और सरज की रोशनी आने के लिए परिधीय दीवार के भीतर पर्याप्त खला स्थाु न होगा और कारागार की चार दीवारी के भीतर परिब(cid:217)ध क्षेत्र, कल क्षमता का प्रति ु

व्यक्ति 83.61 वगर्मीटर से कम नहीं होगा।

(9) जहां भमि अपर्याप्तू हो, प्रति बन्दी न्यूनतम क्षेत्र 62.70 वर्ग मीटर होगा।

(10) कारागार के भीतर कोई भी भवन परिधीय दीवार से पचास फीट निकट तक नहीं होगा।

(11) संस्था का क्षेत्र, संस्थागत कार्यक्रम की आवश्यकताओं के अनसार नियत किया जायेगा।ु90 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (12) वर्गीकरण के विहित सि(cid:217)धांतों के अनसार संस्थाु के भीतर अंतर्वासी समहों के ू पथक्कृ रण की अपेक्षाएं प्रत्येक भवन योजना में उपलब्ध करवायी जायेंगी और भवनों की योजनाएं बनाते समय प्रशासन तथा पर्यवेक्षण की अपेक्षाएं भी ध्यान में रखी जायेंगी।

लिए एक (13) प्रत्येक क्षेत्र या ख(cid:214)ड में, स्थानीय अपेक्षाओं के अनसार महिला बन्दियों के ु

संस्था होगी और प्रत्येक कें द्रीय, जिला और उप-जेल में महिला बन्दियों के लिए एक अहाता होगा।

(14) सामान्य कारागारों में वि(cid:217)यमान अहातों को यह सनिश्चित करने के लिए नवीकत किया जायेगा कि महिला बन्दी इन अहातों से आने-जाने के दौरान परुष बन्दियों की दृु ष्टि में न आयें।

(15) ऐसे अहातों में दोहरी ताला प्रणाली (डबल लॉक सिस्टम) होगी जिसमें एक ताला बाहर और दसरा भीतर होगा और इसके पश्चा

ू त चाबियां सदैव भीतर महिला गार्ड के पास रहेंगी।

(16) महिला बन्दियों के लिए उनकी विशेष आवश्यकताओं जैसे कि पथक्कृ रण, संरक्षण, गर्भावस्था, प्रसव और परिवार की देखभाल, स्वास्थ्य देखभाल, प्रशिक्षण और पनर्वास और ु

ऐसी अन्य आवश्यकताओं के अनसार अपेक्षित समस्तु सविधाएं संस्थाु ओं या अहातों में होंगी।

(17) विचाराधीन और निवारक बन्दियों को सि(cid:217)धदोष बन्दियों से दर रखा जायेगा।ू

(18) बन्दियों के लिए वास सविधाु , हवा का पर्याप्त घनफल, फर्श स्थान, प्रकाश, संवातन और जलवायवी संरक्षण का उपलब्ध करवाया जायेगा और कारागार बनावट में समस्त सन्निर्माण आईएसआई मानकों के अनसार होंगे।ु

(19) विभाग में समस्त सन्निर्माण और मरम्मत कार्यों की योजना, मानिटर और पर्यवेक्षण के लिए कारागार मख्याु लय पर पर्याप्त तकनीकी कर्मचारिवंद सहित विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया जायेगा।

(20) कार्यशेडों, रसोइयों, अस्पतालों, मख्यु गेट, मलाकात कक्षोंु , उच्च सरक्षा अहातों और ु

बैरकों के परिसरों में समचित मानिटरिंग के प्रयोजु न के लिए क्लोज सर्कि ट टेलिविजन कै मरे और अन्य सरक्षा उपकरण लगाये जायेंगे।

ु

8. कारागार भवन के मानक.- (1) इन नियमों के प्रारंभ के पश्चात नये कारागार ्

भवन निम्नलिखित मानकों के साथ सन्निर्मित करवाये जायेंगे और पराने कारागार भवन ु

मानकों की पर्ति होू , यथासंभव ऐसे उपांतरित या नवीनीकत किये जायेंगे जहां तक उक्तृ

अर्थात ्:-

(क) समस्त बंद कारागारों के मख्यु गेट और (िcid:217)वतीय गेट का न्यनतम आकार ू

चौड़ाई में तीन मीटर और ऊं चाई में चार मीटर होगा;

(ख) मख्यु और पिछले गेट का आकार इतना चौड़ा होगा कि आग लगने की स्थिति में अत्यावश्यक दमकल, बोरवेल खोदने के लिए बोरवेल रिग, फै क्ट्री के लिए कच्ची वस्तु या लकड़ी के ल(cid:210)ठों और राशन वस्तुओं के परिवहन के लिए लॉरी इन (cid:217)वारों में से होकर गजर सकें

ु ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 91

(ग) गेट मजबत स्टीू ल फ्रे म का बना होगा जिसमें पच्चीस मिलीमीटर व्यास या मोटाई की ऊध्र्वाधर गोल या वर्गाकार स्टील शलाकायें होंगी;

(घ) प्रत्येक गेट में न्यूनतम 0.6 मीटर चौड़ा और 1.5 मीटर ऊं चा कोई छोटा फाटक होगा;

(ङ) मख्यु गेट और छोटे फाटक में भीतर से ताला लगाने की मजबत व्यू वस्थाएं होंगी और दोनों (cid:217)वारों में शटरों के आसानी से खलने और बंद करने की ु

व्यवस्थाएं होंगी;

(च) गेट बाहर से अढाई मीटर ़ ऊं चाई तक लोहे की चादर से ढके होंगे;

(छ) छोटे फाटकों में आंखों के स्तर पर शीशे से ढके अवलोकन छिद्र होंगे;

(ज) यदि सरकार (cid:217)वारा विहित किया जाता है तो मख्यु गेट विभागीय ध्वज के समरूप रंगों से पेंट किया जायेगा;

(झ) गेट संचालन की सविु धा के लिए दो (cid:217)वारों के मध्य स्थान, लंबाई में बारह मीटर और चौड़ाई में पांच मीटर से कम नहीं होगा और इसमें निम्नलिखित सविधाएं होंगीु , अर्थात ्:- (i) के बिन;

(ii) खोज कक्ष; और

(iii) सरक्षा उपस्कु रों के लिए स्थान;

(ञ) कारागार में प्रवेश के वल मख्यु गेट से होगा और अन्य समस्त प्रवेश गेट, यदि वि(cid:217)यमान हों, स्थाई रूप से बंद कर दिये जायेंगे।

(2) कारागार के प्रत्येक प्रवर्ग के लिए समचित डिजाइन किये हये प्रशासनिक ब्लॉक होंगे और उक्त ब्लॉक मख्यु गेट के पाश्र्वस्थ अवस्थित होंगे और इनमें प्रशासन के दक्ष कार्य संचालन के लिए कार्यालय कक्ष, अभिलेख कक्ष, सम्मेलन हाल, सामान्य कक्ष, पछताछ ू के बिन और नियंत्रण कक्ष, परुष और महिला बन्दियों के लिए मलाकात कक्ष होंगे।

ु

(3) जहां तक अन्य इकाइयों का संबंध है, निम्नलिखित मानकों का अनपालन किया जायेगा , अर्थात ्:-

(क) छोटे-मोटे अपराधों में अंतर्वलित विचारणाधीनों के मामलों का निपटारा करने के लिए जेल के भीतर भी पथक्तृ : कोई न्यायालय कक्ष सन्निर्मित किया जा सके गा;

(ख) स्वागत इकाई में प्रवेश-क्वारंटीन के समचित कार्यान्वु यन और अभिविन्यास वर्गीकरण कार्यक्रम के लिए आवश्यक सविधाएं होंगी और भौतिक सविु

ु धाएं आने वाले अंत:वासियों की संख्या और प्रकार के अनसार और विभिन्नु प्रकार के अंत:वासियों के समचित पथक्कु ृ रण के लिए अनसरण किये जाने ु

वाले कार्यक्रमों के अनसार स्थाु पित की जायेंगी;

(ग) आवास के उ(cid:217)देश्य के लिए, बन्दियों के उपयोग के लिए उपलब्ध करवायी गयी समस्त वास सविधाु , विशिष्ट रूप से शयन के लिए, स्वस्थ जीवन की92 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

आधारभत आवश्यू कताओं को परा करेंगे और जलवाय परिस्थितियों

ु , हवा का घनफल (क्यूबिक कन्टेंट), न्यूनतम फर्श स्थान, प्रकाश और संवातन पर सम्यक ध्या् न दिया जायेगा।

(4) रहने के लिए चार प्रकार के स्थान होंगे, जो नीचे उल्लिखित हैं अर्थात ्:-

(क) अस्सी से अनधिक बंदियों के लिए वास सविधा सहित बैरकें

ु ;

(ख) अध्ययन करने के लिए एकान्तता की आवश्यकता वाले बन्दियों के लिए यथासंभव एकल कक्ष वास सविधाु ;

(ग) सरक्षा और सांसर्गिक रोगों से बचाव के प्रयोजन के लिए बन्दियों के पथक्कृ रण के लिए कोठरी;

;

(घ) उभयलिंगी बन्दियों के लिए पथक वास सविधा के लिए उपबंधृ (ङ) कारागार भवन के मानक, नये भवन या, यथास्थिति, अतिरिक्त वार्डों के सन्निर्माण के लिए लाग होंगे और यदि अपेक्षित हो , वि(cid:217)यमान कारागार भवन बजटीय उपबंध के अध्यधीन रहते हये उपांतरितु किया जायेगा।

(5) प्रति बन्दी शयनकक्षों या बैरकों, कोठरियों और अस्पतालों के लिए न्यूनतम स्थान क्षमता सामान्यतया निम्नलिखित मापमान के अनसार होगीु , अर्थात ्:-

शयन बैरकें कोठरी चिकित्सालय
1 2 3
भ ू क्षेत्र वर्ग मीटर में वाय क्षेत्र ु घन मीटर म ें पाश्र्विक संवातन वर्ग मीटर में भ ू क्षेत्र वर्ग मीटर में वाय क्षेत्र ु घन मीटर म ें पाश्र्विक संवातन वर्ग मीटर में क्षेत्र भू वर्ग मीटर म ें वाय क्षेत्र ु घन मीटर म ें
3.71 15.83 1.12 8.92 33.98 2.23 5.58 23.75

(6) प्रत्येक वार्ड के गेट के ऊपर बंदियों का वर्ग, जिनके लिए यह आशयित है, इसमें अंतर्विष्ट घन और सपरफिशियल फीट की संख्या

ु और बंदियों की संख्या जिनकी वास सविधा ु के लिए यह समर्थ है, को दर्शाते हए या तो भित्ति या एक काष्ठु या धात की प(िcid:210)टका पर ु

पेंट किये हए अक्षरों में होगी।ु

(7) इस संख्या से अधिक में किन्हीं बंदियों के लिए अस्थाई वास सविधा उपलब्धु करवायी जायेगी और यह देखने के लिए सावधानी रखी जायेगी कि हवालात रजिस्टर प्रत्येक वार्ड में उपलब्ध वास सविधा दर्शाता होु , ताकि अधीक्षक को एक नजर में यह निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाया जा सके कि किसी विशिष्ट वार्ड में भीड़भाड़ है या नहीं।

(8) मख्यु या परिसीमा दीवार की ऊं चाई वि(cid:217)यत तार की तारबंदी के साथ अठारह फीट होगी और समस्त कोने गोलाकार होंगे।

(9) महिला वार्डों के चारों ओर विभाजित करने वाली दीवारें, कन्सर्टिना तारबंदी के साथ ग्यारह फीट ऊं ची होगी और अन्य मामलों में यह आठ फीट होगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 93

(10) कोई भी भवन मख्यु दीवार से पचास मीटर से अधिक निकट नहीं होना चाहिए और दो मंजिला भवनों के मामले में, मख्यु दीवार से दरी तीस मीटर होगी।ू

(11) कोई भी भीतरी भवन, शौचालय, शेड आदि बाहरी दीवार के विरु(cid:217)ध सन्निर्मित नहीं किये जायेंगे और ऐसे समस्त भवन दीवार से पचास फीट दर होंगे।ू

(12) बन्दियों के निजी सामान को रखने के लिए प्रत्येक बंदी को पर्याप्त आकार में एक व्यक्तिगत सरक्षित संचयन डिब्बा

ु उपलब्ध करवाया जायेगा।

(13) बैरकें और कोठरी नीचे वर्णित मानकों पर सन्निर्मित किये जायेंगे, अर्थात ् :-

(क) यदि बैरक फ्लैट-रूफ्ड है तो वहां दीवार और अंतश्छद के संगम के निकट

30×12.5 मीटर अंतरालों पर खला अंतश्छु द संवातन होगा और यदि बैरक गैबल-रूफ्ड है तो फर्श से दस फीट से अन्यून छत या अंतश्छद की न्यूनतम ऊं चाई वाला रिज संवातक होगा;

(ख) बैरक का फर्श अभे(cid:217)य वस्तु जैसे कि सीमेंट कं करीट का बना होगा; (ग) ठं डे क्षेत्रों में स्थित कारागारों में या ठं डे मौसम के दौरान बैरकों में रहने योग्य परिस्थितियां सनिश्चित करने के लिए समचित फर्श उपलब्ध करवाया जायेगा;

(घ) सभी बैरकों में, यदि संभव हो, दो मीटर से अन्यून चौड़े बरामदे उपलब्ध करवाये जायेंगे;

(ङ) य(cid:217)यपि शयन बैरकों का संवातन सर्वाधिक महत्व का है, बन्दियों को उनके विवेक के अनसार शटर या पर्दों से खलने वाली खिड़कियों और सवांतन को बंद करना अनज्ञात नहीं किया जायेगा ;

(च) नये बैरकों में, प्रति व्यक्ति संवातन क्षेत्र आधा खिड़की होगा और मानक

कसी हई खिड़की ु 7 फीट×3½ फीट होगी, आधी खिड़की से अभिप्राय 1 वर्ग मीटर होगा;

(छ) तथापि, संवातन, जहां कहीं आवश्यक हो, मौसम के अनसार नियंत्रित किया ु

जायेगा अन्यथा बैरकें शीत और वर्षा के मौसम में अत्यधिक ठं डी और सीलन वाली हो जायेंगी;

(ज) बैरकों की फिटिंग और फिक्सचर और लॉकिग यंत्रों की रचनात्मं क व्यवस्थाएं निकल भागने को रोकने के लिए पर्याप्त सरक्षित होंगी और ु

दरवाजों, खिड़कियों और संवातकों की वि(cid:217)यमान काष्ठ की चौखटें, यदि कोई हों, लोहे या स्टील चौखटों से प्रतिस्थापित की जायेंगी;

(झ) दरवाजों, खिड़कियों और संवातकों में प्रयक्तु लोहे की सलाखें पच्चीस मिलीमीटर व्यास की होंगी और दो सलाखों के मध्य की स्पष्ट दरी साढ़े ू

सात सेंटीमीटर होगी;

94 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ञ) बैरक का 2.2'×1 मीटर का के वल एक और एकल शटर वाला दरवाजा होगा;

(ट) बैरक का दरवाजा स्पष्ट 1 मीटर खलने वाला होगा और लोहे की चौ

ु खट न्यूनतम दस मिलीमीटर मोटाई की लोहे की ऐंगिल से बनी होगी और बैरक के बाहर की तरफ खलनी चाहिएु ;

(ठ) सांयकाल के पश्चात बन्दियों को उनके बैरकों में बिना कठिनाई कार्य करने और पढ़ने में समर्थ बनाने के लिए पर्याप्त कत्रिम प्रकाश उपलब्ध करवाया ृ

जायेगा;

(ड) प्रत्येक बैरक में प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध करवाया जायेगा जो प्राधिकत बन्दी की अभिरक्षा में होगा और प्रत्ये

ृ क बैरक को उपलब्ध करवायी गयी प्राथमिक चिकित्सा किटों में कोई तेज धार वाली वस्तु, लंबी गोज रोल या टेप या ऐसी अन्य वस्तुएं नहीं होंगी;

(ढ) बन्दियों के उपयोग के लिए प्रत्येक बैरक के बाहर एक देखने वाला दर्पण लगाया जा सकता है और प्रत्येक बैरक के भीतर एक दीवार घड़ी लगाई जा सकती है;

(ण) बैरकों या कोठरियों में पर्याप्त अग्नि सरक्षा प्रणालियां स्था पित की जानी चाहिए;

ँएं और अत्यधिक शोर से मक्तु होंगी;

(त) बैरकें तंबाकू , धु (थ) प्रत्येक बैरक या प्रकोष्ठ में जलबहाऊ शौचालय की व्यवस्था की जायेगी;

(द) प्रत्येक कोठरी का परी तरह से संवातन होगा और कोठरी के पीछे , एक रोशनदान हो सकता है;

(ध) कोठरी का फर्श अभे(cid:217)य वस्तु का बना होगा; (न) प्रत्येक कोठरी के साथ एक यार्ड जड़ा होगा जहां बन्दी

ु पर्याप्त हवा और रोशनी का फायदा ले सके गा; और

(प) प्रत्येक कोठरी में एक जलबहाऊ शौचालय की व्यवस्था की जायेगी और जब तक उसमें यह सविधा उपलब्धु न करा दी जाये वि(cid:217)यमान कोठरी उपयोग में नहीं लिये जायेंगे।

अध्याय 3

मख्याु लय संगठन

9. कारागार प्रशासन की प्रभावशीलता.- (1) कारागार प्रशासन की प्रभावशीलता मख्यु रूप से साक्षरता की गणवत्ता और उसमें विभिन्नु संस्थाओं के पर्यवेक्षण और कार्यक्रमों पर निर्भर करती है, जो बारी-बारी से, अधिक्रम के विभिन्न स्तरों पर अभिनियोजित जनशक्ति पर निर्भर करती है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 95

(2) यह आज्ञापक है कि संगठनात्मक संरचना सावधानीपर्वक योजनाब(cid:217)ध की जाये और सेवा परिदान में कमियों की पहचान और समीक्षा करने के लिए निरंतर पनर्विलोकित किया जाये।ु 10. कारागारों का नियंत्रण.- कारागार राज्य सरकार के गह विभाग के नियंत्रणाधीन ृ

होंगे।

11. मख्याु लय पर खंड.- (1) मख्याु लय स्तर पर दो मख्यु खंड होंगे, अर्थात ्:-

(i) कार्यपालक खंड, और

(ii) सधारात्मु क खंड।

(2) कार्यपालक खंड का प्रमख ऐसा अधिकारी होगा जो महानिरीक्षक की रैंक या समतल्य

ु रैंक से नीचे का नहीं होगा और कारागार निदेशालय से विभिन्न रैंक के अधिकारियों (cid:217)वारा ऐसे अधिकारी की सहायता की जायेगी।

(3) महानिरीक्षक सधारात्मु क खंड का प्रमख होगा और परिवीक्षा अधिकारी उसकी सहायता करेगा।

12. मख्याु लय कर्मचारिवंद के घटकृ .- कारागार निदेशालय और सधारात्मु क सेवाओं की संगठनात्मक संरचना ऐसी होगी, जैसी समय समय पर, राज्य सरकार (cid:217)वारा विनिर्दिष्ट की जाये।

13. कारागार मख्याु लय से संलग्नक.- किसी भी अधिकारी को जब भी अपेक्षित हो महानिदेशक कारागार के आदेश (cid:217)वारा कारागार मख्याु लय के कार्यालय से संलग्न किया जा सके गा।

14. कारागार महानिरीक्षक का प्राधिकार और शक्तियां.- (1) सरकार, कारागार महानिरीक्षक को नियक्तु करेगी, जो कारागार महानिदेशक के निदेशों के अधीन, राज्य में स्थित समस्त कारागारों का सामान्य नियंत्रण और अधीक्षण करेगा।

(2) कारागार महानिरीक्षक उसके नियंत्रण के अधीन मख्याु लय पर, कारागारों पर और अन्य संस्थाओं में उसकी सहायता के लिए राज्य सरकार (cid:217)वारा नियक्तु अन्य अधिकारियों के माध्यम से अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन को सनिश्चित करेगा और ऐसा प्रशासनिक प्राधिकारी रखेगा जैसा इन नियमों में अधिकथित है और जैसा सरकार (cid:217)वारा समय-समय पर, अधिकथित किया जाये।

15. कारागार महानिरीक्षक के कत्यृ .- कारागार महानिदेशक के निदेशों और पर्यवेक्षण के अधीन कारागार महानिरीक्षक निम्नलिखित कत्योंृ का पालन करेगा, अर्थात ्:-

(क) सरकार (cid:217)वारा यथा अधिकथित कारागार नीतियों को कार्यान्वित करना;

(ख) विभिन्न कारागार या सधारात्मु क सेवाओं की योजना बनाना, गठित करना, निदेशित करना, समन्वय और नियंत्रण करना;

(ग) कारागार कार्मिकों के कत्योंृ को परिभाषित करना और प्राधिकार की सीमाओं और नियंत्रण प्रणालियों को नियत करना;

96 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(घ) अंत:वासियों की देखभाल, कल्याण, प्रशिक्षण और उपचार, कर्मचारिवंद में ृ अनशासन और कर्मचारिवंद के कल्या

ृ ण इत्यादि के विशेष संदर्भ के साथ कारागारों या संस्थाओं का निरीक्षण;

(ङ) एक वर्ष में कम से कम एक बार समस्त कारागारों या संस्थाओं का निरीक्षण करना या निरीक्षण करने का निदेश देना; और

(च) सत्यापित करना कि क्या छोड़े जाने के पश्चात अंतिम पनर्वास के लिए ्

कारागार में सधार किया जा रहा है। ु

16. बजट की तैयारी.- (1) कारागारों की विभिन्न सेवाओं के लिए बजट, कारागार निदेशालय (cid:217)वारा तैयार किया जायेगा और अनमोदन के लिए सरकार को प्रस्तु

ुत किया जायेगा।

(2) राज्य सरकार के नियमों और आदेशों तथा महालेखाकार, राजस्थान की अपेक्षाओं के अध्यधीन रहते हये

ु , कारागार निदेशालय के व्यय कारागार महानिरीक्षक (cid:217)वारा नियंत्रित किये जायेंगे।

17. बजट का अनमोदनु .- (1) कारागार महानिदेशक और कारागार महानिरीक्षक, बजट में उपबंधित व्यय की किसी मद को मंजर कर सकें गे

ू , कित समस्तं ु विशेष और असाधारण प्रभारों के लिए, जिनके लिए सभिन्न उपबंध नहीं किये गये हैं या जो बजट में नये दर्ज किये गये हैं, राज्य सरकार का अनमोदन अभिप्राप्तु किया जायेगा।

(2) इस नियम के उपबंधों के अध्यधीन रहते हएु , विशेष प्रकति के व्यृ य को परा करने के ू

लिए एक पर्याप्त अनदान महानिु देशक के निस्तारण के लिए रखा जायेगा।

18. कारागार निदेशालय प्रमख की शक्तियां

ु .- कारागार निदेशालय के प्रमख को ु

समस्त वित्तीय, प्रशासनिक और अनशासनात्मु क शक्तियां होंगी।

19. व्ययों के लेखे.- प्रत्येक प्रकार के जेल व्ययों के लिए समस्त मासिक और अन्य बिल निम्नलिखित अपवाद के साथ निदेशालय के प्रमख को प्रस्तु

ुत और उसके (cid:217)वारा संपरीक्षित किये जायेंगे:-

(क) लोक निर्माण के लिए प्रभार, जो लोक निर्माण विभाग (cid:217)वारा विनियमित किये जायेंगे;

(ख) राज्य सरकार के विभाग (cid:217)वारा आपर्त की गयी लेखनू -सामग्री, रजिस्टरों और प्ररूपों के लिए प्रभार।

20. सामान्य कार्यचालन व्ययों के लिए मंजरीू .- कारागार निदेशालय का प्रमखु , बजट

, कित निम्नं

अनदान की सीमाओं के भीतरु

ु लिखित सीमाओं के साथ, समस्त सामान्य व्ययों को या तो विनिर्माणकारी या सामान्य प्रयोजनों के लिए मंजरू करने का प्राधिकार रखता है, जो राज्य सरकार के प्राधिकार के बिना अधिक नहीं होने चाहिए, अर्थात ्:-

(क) बन्दियों के लिए तीन मास के आहार और बारह मास की आवश्यकताओं के स्टाक तक विनिर्माताओं को आपर्त के लिए अनाज ू

का क्रय;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 97

(ख) आवश्यकता के मामले में और बजट उपबंधों के अध्यधीन रहते हए ु अस्थायी नियक्तियों के साथ ही प्रत्ये

ु क मामले में एक वर्ष से अनधिक की कालावधि के लिए समय-समय पर सरकार (cid:217)वारा विहित मास के लिए मजदरी की मंजरीू

ू ;

ु ;

(ग) राजस्थान सामान्य वित्तीय नियम के अनसार पशधन का क्रयु (घ) राजस्थान सामान्य वित्तीय नियमों के अनसार छोटे

ु -छोटे सन्निर्माण और मरम्मतों की मंजरीू ; और

(ङ) राजस्थान लोक निर्माण संहिता में यथा अधिकथित, सन्निर्माण संकर्मों के लिए निधियों की मंजरी और आबंटन।ू

21. अपलिखित करने की शक्ति.- कारागार निदेशालय का प्रमख भ(cid:214)डाु रों के अवसलीय मल्यू ू या कपट (cid:217)वारा या व्यष्टियों की उपेक्षा (cid:217)वारा या अन्य कारणों से हानि हए ु लोक-धन को निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हएु , अंतिम रूप से अपलिखित करने के लिए सशक्त है कि,-

(क) हानि, किसी विनिर्दिष्ट मामले में एक लाख रुपये या समय-समय पर यथासंशोधित राजस्थान सामान्य वित्तीय नियम के अनसार से अु धिक नहीं है;

(ख) हानि, तंत्र की ऐसी त्रटि प्रकट नहीं करती जिसके संशोधन के लिए सरकार के आदेश अपेक्षित हों; और

(ग) किसी व्यष्टि अधिकारी या अधिकारियों की ओर से कोई गंभीर उपेक्षा नहीं रही है जिसके लिए अनशासनात्मक कार्रवाई की जाये। ु

22. जेल कार्मिकों को परस्काु र प्रदान करना.- (1) कारागार निदेशालय का प्रमख ु बजट उपबंधों के अध्यधीन रहते हएु , यदा-कदा होने वाली प्रकति के विशिष्टृ कार्य के लिए

धिक श्रमसाध्य है या ऐसे जब वह कार्य, कारागार निदेशालय प्रमख की राय में या तो अत्यु

विशेष गण का है जो विशेष परस्का

ु र को न्यायोचित ठहराता है, प्रत्येक मामले में जेल के अधिकारी को ऐसी राशि, जो पांच हजार रुपये से अधिक न हो, तक परस्काु र अनदत्त करने ु

के लिए भी सशक्त है।

(2) इसके अतिरिक्त,कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा कारागार अधिकारियों और जेलर की रैंक से नीचे के अधिकारियों की सेवा पस्तिका में अच्छीु सेवा या प्रशंसा अंकित कर परस्कु ृ त किया जायेगा।

23. अधीक्षक की वित्तीय शक्तियां.- (1) अधीक्षक, औषधियों के क्रय को छोड़कर समस्त प्रयोजनों के लिए अपनी वित्तीय शक्तियों को प्रयोग करते समय, समय-समय पर यथासंशोधित, जीएफए(cid:214)डआर में अधिकथित अनदेशों का अनसरण करेगा। ु

ु

(2) औषधियों के क्रय के संबंध में, कें न्द्रीय जेल या जिला जेल या अस्थायी उप-जेलों या उप-जेलों का अधीक्षक, समय-समय पर, जारी सरकारी परिपत्रों या आदेशों के अनसार अपनी ु

वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अनज्ञात है।ु98 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 24. बन्दियों को अंतरित करने की शक्ति.- (1) कारागार निदेशालय के प्रमख के पास ु

बन्दियों को राज्य के भीतर राजस्थान की किसी भी जेल से अन्य जेल में या किसी अन्य राज्य की जेल में अंतरित करने का आदेश देने की शक्ति होगी।

(2) उसके पास महामारी के दौरान बन्दियों को किसी जेल के स्थायी भवनों से अस्थायी क्वार्टर में हटाये जाने की मंजरी की शक्ति होगी। ू

25. जेलों का निरीक्षण.- (1) कारागार निदेशालय का प्रमखु , एक वर्ष में कम से कम एक बार और यदि आवश्यक हो तो अक्सर, प्रत्येक जेल का निरीक्षण करेगा या उसके अधीनस्थ अधिकारियों (cid:217)वारा निरीक्षण करवायेगा।

(2) प्रत्येक निरीक्षण के दौरान, निरीक्षण अधिकारी जेल में प्रत्येक बंदी से मिलेगा और प्रत्येक बंदी को कोई आवेदन या शिकायत, जो वह देने का इच्छु क हो, देने का अवसर देगा और ऐसे मामलों की जांच करेगा और विनिश्चय करेगा जो जेल अनशासन से संबंधित हो ु

और स्वयं का समाधान करेगा कि समस्त लेखे, रजिस्टर और अभिलेख प्रवत्त नियमों के ृ

अनसार संधारित किये गये हैं और समस्तु

अभिलेखों की सरक्षित अभिरक्षा की उचित ु

व्यवस्था की गयी है।

26. निरीक्षण पर टिप्पण तैयार करना.- (1) प्रत्येक जेल के निरीक्षण के पश्चात ्, निरीक्षण अधिकारी उस दशा के बारे में, जिसमें उसने जेल को पाया, वह रीति, जिसमें यह प्रशासित होता है, निरीक्षण टिप्पण तैयार करेगा और अधीक्षक को कोई सझाव या आदेशु , जो वह आवश्यक समझे, दे सके गा।

(2) यदि जेल असंतोषजनक स्थिति में है, अधीक्षक (cid:217)वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण के साथ उप- नियम (1) को निर्दिष्ट टिप्पण की प्रति सरकार को सचना और आदेशों के लिए प्रस्तू

ुत की जायेगी।

(3) अन्य मामलों में, कारागार निदेशालय का प्रमख जेल की सामान्यु दशाओं, अनशासन की ु

स्थिति, स्वास्थ्य इत्यादि की जानकारी देने वाले निरीक्षण के परिणामों का सारांश और कोई विशेष बिंदु, जो वह सरकार के ध्यान में लाना उचित समझे, सरकार को भेजेगा।

27. वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना.- (1) कारागार निदेशालय का प्रमख कै लेंडर वर्ष ु

प्रारंभ होने के पश्चात यथासंभव शीघ्रता से

् और वर्ष की तीस जन के अपश्चाू त कै लेंडर वर्ष ्

के लिए जेल प्रशासन की ब्यौरेवार रिपोर्ट के साथ ही बन्दियों के आंकड़ों के साथ जेल प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट उस पर किन्हीं आवश्यक टीका-टिप्पणियों के साथ-साथ जेल प्रबंधन के प्रत्येक बिन्दु पर उसकी अभ्युक्तियों के साथ प्रतिवर्ष सरकार को प्रस्तुत करेगा।

(2) वार्षिक रिपोर्ट में, कारागार निदेशालय का प्रमख संक्षिप्तु कथन करेगा कि उसने वर्ष में क्या निरीक्षण किये और ऐसे निरीक्षणों के सामान्य परिणाम क्या रहे?

त्येक अधिकारी के मध्य संपर्क (3) कारागार निदेशालय का प्रमख सरकार और विभाग के प्रु

का माध्यम होगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 99

28. रेंज संगठन.- राजस्थान जेल प्रशिक्षण वि(cid:217)यालय को सम्मिलित करते हए ु समस्त जेलों पर सामान्य अधीक्षण के प्रयोजन के लिए, एक संगठन होगा जिसे रेंज संगठन कहा जायेगा।

29. अधीनस्थ कर्मचारिवंदृ .- अधीनस्थ कर्मचारिवंद ऐसे होंगे जो राज्य सरकार (cid:217)वारा विनिर्दिष्ट किये जायें।

30. कारागार उप-महानिरीक्षक के कत्यृ .- (1) कारागार उप-महानिरीक्षक, राजस्थान जेल प्रशिक्षण वि(cid:217)यालय को सम्मिलित करते हएु , अपनी रेंज की समस्त जेलों का सामान्य अधीक्षण करेगा और वह,-

(i) उसकी रेंज के अराजपत्रित कर्मचारिवंद के बकाया दावों को

ृ मंजरू करेगा;

(ii) समय-समय पर यथासंशोधित, जीएफए(cid:214)डएआर के उपबंधों के अनसार ु समाश्रित खर्च मंजरू करेगा;

(iii)विनिर्दिष्ट सीमा के भीतर लेखन-सामग्री के स्थानीय क्रय को प्राधिकत ृ करेगा;

(iv) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जो समय-समय पर उसको कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा प्रत्या

ु योजित की जायें या सरकार (cid:217)वारा इस निमित्त प्राधिकत किया जाये

ृ ;

(v) कम से कम वर्ष में एक बार या कारागार निदेशालय (cid:217)वारा जैसा विनिर्दिष्ट किया जाये, अपनी रेंज के अधीन समस्त कें द्रीय जेलों, जिला जेलों, उप-जेलों का निरीक्षण करेगा;

(vi) अनपालन के लिएु , कारागार निदेशालय और संबंधित जेलों के अधीक्षकों को निरीक्षण टिप्पणों की प्रतियां प्रस्तुत करेगा और ऐसे निरीक्षणों के दौरान, वह देखेगा कि प्रत्येक बन्दी को आवेदन या शिकायत करने का अवसर मिले और वह ऐसी शिकायत या आवेदन पर जांच करेगा या जांच करवायेगा और जेल अनशासन और सरक्षा ु

से संबंधित ऐसे समस्त मामले अवधारित करेगा;

(vii) स्वयं का समाधान करेगा कि समस्त लेखा रजिस्टर और अभिलेख प्रवत्त नियमों के अनसार रखे गये हैं और समस्त अभिलेखों की सरक्षित अभिरक्षा को देखेगा ;

(viii) जेलरों और नीचे की रैंक में के अधिकारियों के निलंबन प्रस्ताव की सिफारिश करेगा;

(ix) कल्याण स्कीमों के समचित कार्यान्वु यन को सनिश्चित करेगाु ; (x) अपनी रेंज के भीतर 10 दिवस के लिए उप-जेलर और अन्य अधीनस्थ जेल अधिकारियों को किसी अन्य जेल में प्रतिनियक्तु करेगा;

100 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(xi) अपनी रेंज के भीतर जेल अधीक्षक के आकस्मिक अवकाश को मंजर ू करने की शक्ति रखेगा और अपनी अधिकारिता के भीतर, सि(cid:217)धदोष बन्द ◌ियों को एक कारागार से किसी दसरे में अंतरण की शक्ति ू

रखेगा; और

(xii) कारागारों की सरक्षा सनिश्चित करते हए मामला दर मामला के आधार पर शैक्षिक संस्थान के विभागाध्यक्ष की सिफारिश पर शैक्षिक और अनसंधान प्रयोजनों के लिए कारागार भ्रमण के लिए अनसंधानविदों और विधि और स्ना

ु तकोत्तर छात्रों को अनज्ञा देने की ु

शक्ति रखेगा।

31. जिला मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा आदेश करने के लिए प्रक्रिया.- जिला मजिस्ट्रेट, अधीक्षक से भिन्न किसी जेल के किसी भी अधिकारी को कोई संसचना या आदेश संबोधित नहीं करेगा और जिला मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा जारी समस्त आदेश लिखित में होंगे।

32. जिला मजिस्ट्रेट के कर्तव्य.- (1) इन नियमों में अन्यत्र विहित कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों के अतिरिक्त, जिला मजिस्ट्रेट के सामान्य कर्तव्य और उत्तरदायित्व निम्नानसार ु होंगे:-

(i) जिला मजिस्ट्रेट, कारागारों की सरक्षा और ु रक्षा, आंतरिक अर्थव्यवस्था, अनशासन और प्रबंध से संबंधित मामलों में कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा जारी समस्तु आदेशों का अनपालन सनिश्चितु

ु करेगा;

(ii) जिला मजिस्ट्रेट, तीन मास में कम से कम एक बार, यथास्थिति, अपनी अधिकारिता के अधीन कारागारों का निरीक्षण करेगा और प्रत्येक निरीक्षण का अभिलेख इस प्रयोजन के लिए अधीक्षक (cid:217)वारा संधारित आगंतक पस्तिका में प्रविष्टु ु किया जायेगा।

, तत्समय स्टेशन का (2) जब जिला मजिस्ट्रेट मख्याु लय से अनपस्थित है या दौरे पर है

प्रभारी अधिकारी, मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा दिये गये किन्हीं निदशों के अध्र्ये धीन, कारागार के संबंध में जिला म जिस्ट्रेट के कर्तव्यों का पालन करेगा और ऐसा अधिकारी आगंतक पस्तिका में ु

''"जिला मजिस्ट्रेट की अनपस्थिति के दौरान स्टेशन का प्रभारी "'' शब्दों से अपने हस्ताक्षर करेगा।

अध्याय 4

जेलों का वर्गीकरण, स्वीकत स्थापन और संस्थागत कार्मिक

(अधीक्षक की शक्तियां और कत्यृ )

33. कारागारों का स्थापन और वर्गीकरण.- अधिनियम की धारा 3 की उप-धारा (1) के अधीन स्थापित कारागार निम्नानसार वर्गीकत किये जायेंगे

ृ :-

(क) के न्द्रीय जेल,

(ख) जिला जेल,

(ग) अस्थाई जेल,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 101 (घ) उच्च सरक्षा जेलु , (ङ) खले शिविरु , (च) उप- जेल, और

(छ) महिला जेल।

34. अभिरक्षा या रक्षक कर्मचारिवंदृ .- (1) अभिरक्षा या रक्षक कर्मचारिवंद की संख्याृ सरक्षा की आवश्यु कताओं, अनुशासन, कार्यक्रम बल, कर्तव्य चौकियों, कार्यभार और कत्योंृ के वितरण को ध्यान में रखते हए अवधारित की जायेगी।ु

(2) प्रत्येक छह बन्दियों के लिए एक रक्षक कार्मिक होना चाहिए।

35. संस्थागत कार्मिकों की सरंचना.- संस्थागत कार्मिकों में निम्नलिखित होंगे,- (क) कार्यपालक;

(ख) सरक्षाु ; (ग) चिकित्सा;

(घ) कल्याण;

(ङ) शैक्षणिक;

(च) तकनीकी;

(छ) कषिकृ ; और (ज) लिपिकवर्गीय;

और ऐसे कार्मिकों की संख्या इतनी होगी जितनी समय-समय पर राज्य सरकार (cid:217)वारा मंजर की जाये।ू

36. संस्थागत कार्मिकों के कर्तव्य और कत्यृ .- संस्थागत कार्मिकों के काननी कर्तव्य ू

और कत्यृ , कारागारों को शासित करने वाली विधियों और नियमों के उपबंधों के अनसार ु होंगे।

37. अधीक्षक के कर्तव्य और उत्तदायित्व.- (1) अधीक्षक का यह सनिश्चित करने का ु

उत्तदायित्व होगा कि मानवाधिकारों, जिनके बन्दी हकदार हैं, के पालन पर कोई टकराव नहीं हो या इनको कै द करने की प्रक्रिया में अन्तर्निहित सीमा निर्बंधित न हो और यह सनिश्चित ु

करना कि कारागार कार्यक्रम, बन्दियों के सधार और पनर्वास के निबंधनानसार में कारागार के समग्र उ(cid:217)देश्यों की ओर अग्रसर हों।

(2) अधीक्षक, सरकार या कारागर निदेशालय के प्रमख के

ु किसी आदेश के अध्यधीन रहते हएु , अन्य बातों के साथ-साथ मितव्ययिता, अनशासनु , श्रम, व्यय, दंड और सामान्य नियंत्रण से संबंधित समस्त मामलों में कारागार के कार्यकारी प्रबंधन का प्रभारी होगा और सहायक और सधारात्मु क स्वरूप में वातावरण विकसित करने और कारागार प्रबंधन के प्रत्येक पहल ु में नेतत्वृ उपलब्ध कराने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

(3) अधीक्षक, समस्त कारागार क्रियाकलापों के कत्र्तव्यों, सझावोंु , योजना, संगठन, निदेशन, मार्गदर्शन, समन्वय, पर्यवेक्षण और नियंत्रण का ध्यान रखेगा।

(4) अधीक्षक, कारागार का प्रमख होगा और समस्तु अधिकारी उसके अधीनस्थ होंगे।

102 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

38. जेल अधीक्षक की नियक्तिु .- के न्द्रीय जेलों, जिला जेलों के अधीक्षक राज्य सरकार (cid:217)वारा नियक्तु किए जायेंगे।

39. जेल अधीक्षक की शक्तियां और कत्यृ .- (1) जेल अधीक्षक सरक्षा और अभिरक्षा ु

व्यवस्थाओं पर सामान्य पर्यवेक्षण के अतिरिक्त, निम्नलिखित मामले भी देखेंगे, अर्थात ्:-

(क) गप्तु और गोपनीय दस्तावेजों की अभिरक्षा; (ख) अंत:वासियों की देखभाल और कल्याण पर पर्यवेक्षण;

(ग) कार्यालय प्रशासन पर पर्यवेक्षण;

(घ) वित्तीय मामलों पर नियंत्रण;

(ङ) सधारात्मक प्रशासन से संबंधितु राज्य नीति का कार्यान्वयन; (च) समस्त संस्थागत कार्यक्रमों और संक्रियाओं की योजना, संगठन, निदेशन, निदशर्ने , समन्वयन, पर्यवेक्षण से संबंधित कार्य का कार्यान्वयन और नियंत्रण;

;

(छ) अन्त:वासी अनशासन और मनोबल का पर्यवेक्षणु (ज) बन्दियों, उनके प्रशिक्षण और उपचार कार्यक्रमों और सधारात्मक ु

क्रियाकलापों का वर्गीकरण;

(झ) कार्य, नियोजन और उत्पाद कार्यक्रमों का निरीक्षण और पर्यवेक्षण;

(ञ) कारागार क्रियाकलापों, कारागार चिकित्सालय, रसोई, कैं टीन इत्यादि का निरीक्षण;

ु , (ट) कार्मिक मामले, कर्मचारिवंद कल्याण और कर्मचारिवंद अनशासनृ

उसके नियंत्रण के अधीन कार्मिकों को कर्तव्यों का आबंटन, कारागार कार्मिक की सरक्षाु , मानव गरिमा, अधिकारों का संरक्षण, शिष्ट कार्य दशाएं उपलब्ध करवाना, संस्थागत कार्मिकों को सधारात्मु क प्रशासन की वतर्मान नीतियों और भमिकाू , जो एक कल्याणकारी राज्य में उनको निभानी है, से परिचित करवाना;

(ठ) संस्थागत स्तर पर कार्मिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन;

(ड) बन्दियों के सधार और संस्थाु गत प्रबंधन के प्रयोजन के लिए कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट देना और अन्यु सरकारी अभिकरणों के साथ संपर्क ;

(ढ) सधारात्मु क भमिका के लिए सहा

ू यक संस्थागत वातावरण का विकास करना और संस्थागत प्रबंधन के प्रत्येक पहल में नेतत्वु

ृ उपलब्ध करवाना;

(ण) दैनिक निरीक्षण दौरे और साप्ताहिक रात्रि निरीक्षण दौरे;

(त) स्टॉक और भंडार का नियंत्रण, अनरक्षणु ; (थ) बन्दियों के प्रवेश और निर्मक्ति का सत्याु पन; औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 103 (द) विनिर्दिष्ट प्ररूप में आदेश पस्तु क का अनरक्षणु , जिसमें जेलर की रिपोर्टों पर आदेशों के अलावा, उसके (cid:217)वारा दिये गये समस्त आदेश या कार्यवत्तृ , बांये हाथ के पष्ठृ पर प्रविष्ट किये जायेंगे और दाहिने हाथ के पष्ठृ पर जेलर या अन्य अधिकारी, जिसको ऐसे आदेश दिये गये हैं, रिपोर्ट करेंगे कि वे कै से पर्ण किये गये हैं।ू

(2) प्रत्येक जेल का अधीक्षक,-

(i) किसी बन्दी (cid:217)वारा कारित प्रत्येक अपराध के संबंध में जांच करेगा और ऐसे अपराधी को दंडित करेगा;

(ii) दंड के लिए समस्त आदेश स्वयं अपने हाथ से अभिलिखित करेगा और देखेगा कि दंड प्रभाव में लाया गया है। परन्तु चिकित्सा अधिकारी पहले यह सत्यापित करेगा कि दंडित किये जाने वाला बन्दी इसे भगतने के ु

योग्य है;

(iii) औपचारिक चेतावनी को सम्मिलित करते हए दिये गये प्रत्ये

ु क दंड के संबंध में, अधिनियम की धारा 51 की उप-धारा (1) (cid:217)वारा अपेक्षित समस्त विशिष्टियां देते हएु , विनिर्दिष्ट रूपविधान में दंड रजिस्टर में प्रविष्टियां की जायेंगी;

(iv) गंभीर अपराध के मामले में, अपराध के साक्ष्य को बताने वाले साक्षियों के नाम अभिलिखित करेगा;

(v) कारागार निदेशालय के प्रमखु , परिदर्शक बोर्ड और जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के उनके जेल के निरीक्षण के दौरान और साथ ही जिला मजिस्ट्रेट (या उसकी ओर से कार्य कर रहे किसी अधिकारी) और किसी आधिकारिक परिदर्शक के साथ भी होगा;

(vi) सर्योदय के थोड़ी ही देर पश्चा

ू त ्, प्रतिदिन जेल का दौरा करेगा, जब उसका प्रथम कर्तव्य उनकी निजी संपत्ति को लौटाने से संबंधित नियमों के सम्यक पालन सहित समय्

-वसित बन्दियों की निर्मक्ति होगी और ु

यदि वह बीमारी या किसी अन्य कारण से सप्ताह के किसी दिवस जेल का दौरा करने में असमर्थ हो, तो वह अपनी अनपस्थिति का तथ्यु और उसका कारण अपनी आदेश पस्तु क में अभिलिखित करेगा;

(vii) सप्ताह में एक बार समस्त बन्दियों की परेड करवायेगा और देखेगा कि प्रत्येक बन्दी प्रकोष्ठों में प्रतिदिन परिरु(cid:217)ध रखा जाता है;

(viii) निम्नलिखित अभिलेख रखेगा या रखवायेगा, अर्थात ्:-

(क) प्रविष्ट बन्दियों का कोई रजिस्टर, जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में हो

सकता है;

ु क प्रत्येक बन्दी को कब (ख) यह प्रदर्शित करते हए कि कोरइ पस्तु

निर्मक्तु किया जाना है;

104 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) कारागार अपराधों के लिए बन्दियों पर अधिरोपित दंडों की

प्रविष्टि के लिए कोई दंड पस्तु क;

(घ) कारागार के प्रशासन से संब(cid:217)ध किसी मामले में आगंतकों ु

(cid:217)वारा की गयी किसी मताभिव्यक्ति की प्रविष्टि के लिए

आगंतक पंजीु ; और

(ङ) बन्दियों से लिए गये धन और अन्य वस्तुओं का कोई अभिलेख

और ऐसे अन्य अभिलेख जो समय-समय पर नियमों (cid:217)वारा

विहित किये जायें;

(ix) जेल परिसर में जेल का कामकाज करेगा और आवश्यकता के मामले के सिवाय जेल अहातों के परे किसी अन्य स्थान पर जेलर या उप-जेलर की उपस्थिति अपेक्षा नहीं करेगा;

(x) उसके अधीनस्थों में प्रत्येक को आबंटित कार्य के विभाजन को अपनी आदेश पस्तु क में लिखित में विहित करेगा, विशेष रूप से उनको जो जेल कार्यालय में नियोजित हैं, ताकि जेल अभिलेखों में भलों या कर्तव्य की ू

अन्य अवहेलना के लिए उत्तरदायित्व, प्रमितता से और बिना विवाद के नियत किया जा सके , लेकिन ऐसा कोई आदेश एक जेलर को जेल कार्यालय में कार्य, चाहे स्वयं के (cid:217)वारा किया गया हो या उसके सहायक (cid:217)वारा, समचित रूप से और निष्ठा

ु पर्वक किया गया है

, को सनिश्चित ु

करने के उत्तरदायित्व से मक्तु नहीं करेगा;

, निकल (xi) कारागार निदेशालय के प्रमख को जेल अनशासन के गंभीर भंगु

भागने, पनु :पकड़े जाने, आत्महत्याओं, दर्घटनात्मक कारणों से बन्दियों ु

ु या गंभीर क्षति, किसी महामारी के प्रादर्भाव या असामान्यु की मत्यृ

बीमारी, जैसे ही वे घटित होती हैं और रोगों के प्रसार को रोकने के लिए किये गये अभ्युपायों की रिपोर्ट देगा;

(xii) जेल प्राप्तियों और व्यय पर निरंतर और ध्यानपर्वक निगरानी रखेगा ू

और प्रत्येक विभाग में समस्त संभव मितव्ययिता को प्रोन्नत करेगा और समस्त मांगों और मांग-पत्रों को मंजर ू करने या मंजरी के लिए प्रस्तू

ुत करने से पर्व सावधानीपर्वक परीक्षण करेगा ;

(xiii) स्वयं का बार-बार यह समाधान करेगा कि रजिस्टरों और पस्तु कों में पर्ण ू विवरण लिखा है, कि नकद अतिशेष वही हैं जो पस्तु कों में प्रविष्ट किये गये हैं, कि दैनिक-पस्तु कों में दैनिक प्रविष्टियां की गयी हैं और परादेय शोध्यों का अप्राप्त रहना अनज्ञात नहीं किया गया है ;

(xiv) अधीक्षक (cid:217)वारा स्वयं या किसी अधीनस्थ (cid:217)वारा जेल से किये गये समस्त क्रय लेखा बहियों में प्रविष्ट करेगा, यह देखना अधीक्षक काभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 105 व्यक्तिगत कर्तव्य होगा कि प्रभार लेखा-बहियों में तरंत प्रविष्टु किये गये हैं और कि ऋण समय पर उन्मोचित किया गया है;

(xv) जेल संस्थापन की ओर से किसी गबन के लिए उत्तरदायी होगा, यदि ऐसा उपदर्शित किया जाता है कि ऐसा गबन उसके मार्गदर्शन के लिए अधिकथित किसी अन्य नियम की उपेक्षा के कारण संभव हआ है

ु ;

(xvi) लेखाओं के और बन्दियों के आने से पर्व और पश्चाू त र्बा -बार निरीक्षण (cid:217)वारा और वितरण के पश्चात भोजन के भार के परिमाप (cid:217)वारा , स्वयं का समाधान करेगा कि बन्दी समचित रूप से पका हआ अपना परा राशन अभिप्राप्त कर रहे हैं;

(xvii) ऐसी समस्त वार्षिक और अन्य विवरणियां, जो सरकार (cid:217)वारा समय- समय पर विनिश्चित की जायें, कारागार निदेशालय के प्रमख को ु

नियमित रूप से प्रस्तुत करेगा;

(xviii) प्रत्येक वर्ष पन्द्रह जन और पन्द्रू ह दिसम्बर के पश्चात यथाशक्य शीर्घ् , प्रत्येक छह मास में जेल से संबंधित समस्त भ(cid:214)डार, मशीनरी, संयंत्र, औजारों, कच्चे माल, विनिर्मित वस्तुओं, उपयोज्य और अनपयोज्यु स्टाक की जांच करेगा और स्वयं का समाधान करेगा कि उसके पास उन तारीखों पर और वर्ष के अंत में परिसर स्टाक और संयंत्र के लेखाओं में उपदर्शित के समतल्यु अतिशेष है और वर्ष की समाप्ति पर यह परीक्षण समस्त स्टाक का माप या तौल सम्मिलित करेगा और एक जलाई और ु

इकत्तीस दिसंबर तक कारागार महानिरीक्षक को इस संबंध में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा;

(xix) किसी भी प्रकार के नये स्टाक का आदेश देने से पर्व

ू , वि(cid:217)यमान स्टाक की संवीक्षा करेगा साथ ही ऑवर स्टाकिग के निवारण के लिएं भविष्य की आवश्यकताओं पर भी विचार करेगा और उसका अ(cid:217)र्ध-वार्षिक परीक्षण तदनसार निश्चित जांच को भी सम्मिलित करेगा कि क्या किसी शीर्ष के अधीन अधिशेष स्टाक है और यदि ऐसा है तो इसे क्षय होने से पर्व उपयोग में लेना संभव नहीं है , इसका असम्यक विलंब के बिना ्

व्ययन किया जायेगा;

(xx) यह देखेगा कि क्या कोई अनपयोगी वस्तु

ुएं हैं और उनका निपटारा करने या अपलिखित करने की व्यवस्था करेगा; और

(xxi) जेल में सरकार के समस्त स्टाक और अन्य संपत्ति का बार-बार निरीक्षण करेगा और उनका अनियमित अंतरालों पर आकस्मिक सत्यापन करेगा जो कमी या आधिक्य के लिए जिम्मेदार हैं और परिणाम की कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट करेगा।ु106 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 40. भारमोचन अधिकारी के कर्तव्य.- अधीक्षकों के स्थानान्तरण पर, भारमोचन अधिकारी, कार्यभार ग्रहण करने से पर्व

ू , स्वयं का समाधान करेगा कि नकद अतिशेष, स्थायी अग्रिम और लेखे सही हैं, साथ ही यथासंभव यह भी कि लेखाओं (cid:217)वारा स्टाक में होने दर्शाये गये समस्त स्टाक (सामान्य और विनिर्माणकारी दोनों), मशीनरी, संयंत्र और औजार उपलब्ध हैं, और यह कि रजिस्टर अ(cid:217)यतन रखे गये हैं, और समस्त नियोजित संस्थापन के लिए मंजरी अभिप्राू प्त कर ली गयी है, और कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट करेगा कि ु

उसने ऐसा कर लिया है और भारमोचन अधिकारी का उत्तरदायित्व तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक कि उपरोक्त कार्य पर्ण नहीं हो जाता है। ू

अध्याय 5

जेलर और अन्य अधीनस्थ कर्मचारिवंदृ

(कर्तव्य और कत्यृ )

41. जेलर को निदशर् े में उप-जेलर निदश को सम्मिलित हैं .- जेलर को निदश संबंधीर् े

इन नियमों का प्रत्येक उपबंध किसी उप-जेलर या जेलर के कर्तव्यों का पालन करने वाले अन्य व्यक्ति पर लाग होगा और कारागार निदेशालय का प्रमख जेलरों को नियक्त

ु करने, पदच्युत करने या निलंबित करने के लिए सशक्त है।

ु अधीक्षक के पद से 42. जेलर के कत्यृ .- (1) कारागार अधीक्षक की अनपस्थिति में

संलग्न समस्त कत्योंृ का पालन जेलर करेगा।

(2) उप-अधीक्षक जेल का मख्यु कार्यकारी अधिकारी होगा और अधीक्षक के आदेशों के अधीन संपर्ण

ू अधीनस्थ जेल संस्थापन का नियंत्रण रखेगा और समस्त अवसरों पर अधीक्षक की सहायता करेगा और देखेगा कि उसके निदशों का प्रभावी कार्यान्र्वे यन हआ है।ु

(3) जेलर जेल के प्रबंधन और बन्दियों से संबंधित समस्त नियमों के पालन के लिए उत्तरदायी होगा।

(4) जेलर के अधीनस्थ समस्त अधिकारी उसके सीधे नियंत्रण के अधीन होंगे और उसके आदेशों का विवक्षित रूप से पालन करेंगे।

(5) जेलर अधीक्षक की मंजरी के बिना किसी अधीनस्थू अधिकारी को जेल से अनपस्थिति के ु

अवकाश को स्वीकत करने के लिए प्राधिकत है

होगा

ृ , कित अवकाश छह घंटों से अधिक नहीं

, उसके कर्तव्यों के सम्यक पालन ्

और जेलर अधीनस्थ अधिकारी की अनपस्थिति के दौरानु

के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होगा।

(6) जेलर कारागार परिसर में निवास करेगा, जब तक कि अधीक्षक उसे अन्यत्र रहने के लिए लिखित में अनज्ञा ना दे।ु

(7) जेलर, जब उसे न्यायालय जाना हो या अधीक्षक से अनज्ञा पर के सिवाय हमेशा जेल में या जेल परिसर में उपस्थित रहेगा।

(8) जेलर किसी प्रयोजन, चाहे जो भी हो, के लिए, जेल प्रसीमा छोड़ने से पर्व

ू , उपस्थित रैंक के अगले वरिष्ठ अधिकारी को जेल का कार्यभार सौंप देगा, और अपनी अभिलेख-पस्तु क मेंभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 107 यह तथ्य अभिलिखित करेगा कि उसने ऐसा कर लिया है और कार्यभार ग्रहण करने वाला अधिकारी, ऐसी प्रविष्टि पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा।

(9) जेलर यदि अपेक्षित हो, मजिस्ट्रेट, चिकित्सा अधिकारी, निरीक्षण अधिकारियों और शासकीय एवं अशासकीय आगंतकों के साथ उनके जेल निु रीक्षण पर साथ होगा और अधीक्षक के जेल निरीक्षण पर हमेशा साथ होगा।

43. रिपोर्ट पस्तु क.- जेलर विनिर्दिष्ट रूपविधान में एक अभिलेख पस्तु क रखेगा, जिसमें वह बांये पष्ठ पर दैनिक रूप से , जेल की स्थि ति और महत्व की समस्त घटनाएं अभिलिखित करेगा और निम्नलिखित सूचनाओं सहित रिपोर्ट और अभ्यावेदन बनायेगा, अर्थात ्:-

(क) समय जिस पर वार्ड खोले गये;

(ख) उपस्थित जेल कर्मचारिवंद के सदस्यृ ; (ग) समय जब बन्दियों ने कार्य शरू कियाु ; (घ) बन्दियों की संख्या जिन्होंने रात्रि शौचालय का प्रयोग किया (छोटी जेलों में, इन बन्दियों की संख्या और नाम);

(ङ) जेलें, जिनमें कोई कोठरी रजिस्टर नहीं रखा हआ है

ु , बन्दियों के नाम जो गत रात्रि कोठरी में सोये थे;

(च) अधिकारियों के नाम जो उनके आगमन और प्रस्थान के समय सहित गत रात्रि जेल के दौरे पर गये थे और संक्षिप्त में उसकी रिपोर्ट;

(छ) समय, जिस पर बन्दियों ने मध्याह्न कार्य रोका और, जिस पर कार्य दबारा प्रारंभ किया गया ;

(ज) समय, जिस पर दिन का कार्य रोका गया और, जिस पर बन्दियों को बंद किया गया;

(झ) सफाई, सामान्य स्वच्छता और बन्दियों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य से संबंधित अनदेशों को पर्ववर्ती ु

ू 24 घंटों के दौरान उसके (cid:217)वारा किस प्रकार कार्यान्वित किया गया;

(ञ) समय, जिस पर बहिर्वर्ती समहों ने निरीक्षण किया और निरीक्षण करने वाले अधिकारी का नाम;

(ट) अधीक्षक के यह ध्यान में लाना कि कर्मचारिवंद और बन्दियों के मध्यृ अनशासन पर उसका सामान्यु मल्यां

ू कन है;

(ठ) सरक्षा व्यु वस्थाओं की किसी अपर्याप्तता को अभिलिखित करना और जहां कहीं अपेक्षित हों, चीजें सही करने के लिए मार्गदर्शक सि(cid:217)धांत सझानाु ;

और

(ड) किसी अन्य महत्व के मामले को अधीक्षक के ध्यान में लाना, कारागार कार्यालय में परिहार शाखा के सामान्य अधीक्षण का अधीक्षण और परिहार108 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) शाखा के समस्त रजिस्टरों और अन्य अभिलेखों की सतत सामयिक जांच करना।

44. घटनाओं के बारे में जेलर की रिपोर्ट.- (1) जेलर उन समस्त मामलों को

ु, अभिलिखित करेगा जिसमें उसे किसी हिंसक विप्लव या गंभीर अपराध, दर्घटनाु , मत्यृ महामारी के प्रसार या सामान्य चर्या से किसी घटना को होने से रोकने के लिए अवरोध करना आवश्यक है।

(2) इन नियमों (cid:217)वारा यथा अपेक्षित ऐसे दैनिक निरीक्षणों या कर्तव्यों के संपादन का व्यतिक्रम होने पर जेलर यह कथन करेगा कि उसने इनका कहां तक लोप किया है और उसका कारण।

(3) जेलर किसी अधीनस्थ अधिकारी (cid:217)वारा की गयी किसी उपेक्षा या किये गये अपराध या कर्तव्य से अनपस्थिति या अधीक्षक के आदेश की अपेक्षा करने वाले किसी अवकाश के लिए आवेदन की रिपोर्ट देगा, असामान्य व्यय की मंजरी या बन्दियों के किसी विशेष रीति से नियोजन के लिए, या किन्हीं मामलों जिन पर उसे आदेश की आवश्यकता हो, के लिए अनरोध की प्रविष्टिु करेगा।

(4) रिपोर्ट पस्तु क अधीक्षक के समक्ष प्रतिदिन (या बार-बार यदि आवश्यक हो) रखी जायेगी, जो प्रत्येक प्रविष्टि पर अपने आदेशों को पृ ष्ठांकित करेगा या यदि कोई आदेश या टिप्पणी अपेक्षित ना हो तो दाहिने हाथ के पष्ठृ पर अपने आ(cid:217)यक्षर करेगा।

(5) सोमवार प्रात:, जेलर अपनी रिपोर्ट पस्तु क में प्रमाणित करेगा कि उसने पर्ववर्ती सोमवार ू

से विभिन्न रजिस्टरों में की गयी प्रविष्टियों का सावधानीपर्वक परीक्षण कर लिया है और यह कि उन्हें सही और अ(cid:217)यतन पाया गया है।

45. जेल का दौरा.- (1) जेलर का मख्यु कर्तव्य बन्दियों की सरक्षित अभिरक्षा को ु

, यह सनिश्चित करनाु , बन्दियों और उनके अधीनस्थों के मध्य अनशासन का पालन कराना सनिश्चित करना कि कठोर कारावास से दंडादिष्ट बन्दी उनको निर्दिष्ट किया गया कार्य करें और उनके मध्य स्वास्थ्य का मानक बनाये रखना जहां तक कि यह इस उ(cid:217)देश्य से बनाये गये नियमों और आदेशों के कठोर अनपालन से सरक्षित किया जा सके ।

ु

(2) ऐसे समस्त मामलों पर अनवरत ध्यान देना, जो बन्दियों का स्वास्थ्य सधार सकते हैं

ु , जेलर के पद के लिए उच्चतम अर्हताओं में से एक समझी जायेगी।

(3) कोठरी और अस्पताल को सम्मिलित करते हए जेलर जेल के प्रत्ये

ु क भाग का दैनिक दौरा करेगा और प्रति चौबीस घंटे में कम से कम एक बार प्रत्येक बन्दी को देखेगा।

46. शक्ति का प्रत्यायोजन.- (1) जेलर का यह कर्तव्य होगा कि जब बन्दी रात्रि में वार्डों में बंद किये जायें और प्रात: बाहर निकाले जायें तो उपस्थित रहें, और यह कर्तव्य जब तक कि जेलर बीमार और कर्तव्य पालन के लिए अयोग्य हो, अधीक्षक की अनज्ञा के सिवाय ु

प्रत्यायोजित नहीं किया जायेगा।

(2) जब इसे इस प्रकार प्रत्यायोजित किया जाता है तो जेलर की रिपोर्ट पुस्तक में एक टिप्पण किया जाना चाहिए।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 109

(3) बड़ी जेलों में, जेल खोलने और बन्द करने का कार्य भाग उप-जेलरों या मख्यु वार्डरों या वार्डरों (cid:217)वारा किया जाएगा, जो कार्य के उनके भाग के समचित पालन के लिए उत्तरदायी ु

होगा, कित जेलर को इन अधिकारीयों से यह अभिनिश्चि त करना चाहिए कि सब कछ सही ु

है और प्रत्येक बन्दी उपस्थित है।

(4) जेलर यह भी देखेगा कि नियमों (cid:217)वारा यथा अपेक्षित समस्त चाबियां प्रत्येक रात्रि को गिनी जाती हैं और समचित रूप से ठिकाने लगायी जाती हैं।

47. बन्दी के प्रवेश पर जेलर का कर्तव्य.- (1) बन्दी के प्रवेश पर जेलर का कर्तव्य होगा कि वह स्वयं का समाधान कर ले कि वारंट सही हैं, बन्दियों से उनके पास मिले धन, आभषण और अन्यू वस्तओं और जेल में अनावश्यु क वस्त्रों को ले और देखे कि ये बन्दी के वारंट पर समचित रूप से इन्द्रा

ु ज किये गये हैं।

(2) जब संपत्ति में धन समाविष्ट है तो रकम रोकड़ बही और निजी रोकड़ रजिस्टर में इन्द्राज की जायेगी और जेलर बन्दी की संपत्ति की सरक्षित अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा।

(3) जेलर बन्दियों को यथाशक्य शीघ्र अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी के समक्ष उपस्थित करेगा।

48. रिलीज डायरी का अनरक्षणु .- (1) जेलर समस्त वारंटों की अभिरक्षा और उनके निबंधनों के कठोर प्रवर्तन के लिए उत्तरदायी होगा और देखेगा कि प्रत्येक बन्दी का नाम उसके आगमन पर, रिलीज डायरी में प्रविष्ट किया जाये और वह तारीख जिस पर बन्दी को छोड़ा जाना है, और बन्दी के जेल में रहते हए दंडादेश के परिहार या किसी अतिरिक्त दंडादेश की प्राप्ति के मामले में, रिलीज डायरी में प्रविष्टि सही तारीख पर अंतरित की जायेगी और कोई बन्दी, किसी भी कारण से, ना तो उसके समय से पर्व रिलीव जायेगा और ू

ना उसके दंडादेश के अवसान या तारीख जिस पर परिहार तंत्र के अधीन वह छोड़े जाने का हकदार है, के परे जेल में रखा जायेगा।

(2) यदि किसी बन्दी को एकांत परिरोध के लिए दंडादिष्ट किया गया है तो वह देखेगा कि इस प्रकार दंडादिष्टबन्दियों के रजिस्टर में ऐसी प्रविष्टि की गयी है, और कि बन्दी को विहित कालावधियों के लिए उचित अंतरालों पर कोठरी में रखा गया है।

(3) सि(cid:217)धदोष बन्दी की समय पर रिहाई का एकमात्र उत्तरदायित्व जेलर और अधीक्षक का है।

49. वत्त पत्र में प्रविष्टिृ

.- (1) अधीक्षक के नियंत्रण के अध्यधीन रहते हए जेलर ु

प्रत्येक बन्दी को उसका कार्य समनदेशित ु करेगा और देखेगा कि काम वत्त पत्र पर उचित रूप ृ

से प्रविष्ट किया गया है और कि श्रम के समस्त परिवर्तन इस पर प्रविष्ट किये गये हैं।

(2) श्रम के आबंटन में, वह सदैव पाक्षिक तौल के परिणामों को ध्यान में रखेगा और देखेगा कि कोई बन्दी जिसका वजन घट रहा है किसी ऐसे श्रम पर नहीं रखा गया है जिससे उसके स्वास्थ्य को क्षति पहंचने की संभावना हो। ु

(3) यह कर्तव्य अधीक्षक की अनज्ञा के बिना किसी अधीनस्थु को प्रत्यायोजित नहीं किया जा सके गा।

110 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

50. जेल नियम का भंग.- जेलर बन्दी की वत्त पत्र में जेल नियमों के प्रत्ये

ृ क भंग को अंकित करेगा, और अपराधी को अधीक्षक के समक्ष लायेगा, कित उसे किसी बन्दी

ु को दंड देने से सर्वथा प्रतिषि(cid:217)ध किया जाता है।

51. प्रतिषि(cid:217)ध वस्तएं रखने का निवारणु

.- जेल में प्रतिषि(cid:217)ध वस्तओं के रखने के ु

निवारण की दृष्टि से, जेलर यदा-कदा, अनिश्चित समय पर, कित सप्तां ु ह में कम से कम एक बार, प्रत्येक बन्दी की और समस्त वस्त्र, बिछौना, वार्डों, कार्यशालाओं और कोठरियों की पर्णतया तलाशी करायेगा।ू

52. बाहरी व्यक्तियों को अनज्ञाु .- बन्दियों के उनके मित्रों या बाहरी व्यक्तियों के साथ मलाकात और संपर्क के संबंध ु में जेलर अध्याय 22 में अंतर्व ◌िष्ट नियमों (cid:217)वारा सर्वथा मार्गदर्शित होगा और अधीक्षक के लिखित आदेश के बिना जेल दौरे के लिए अनधिकत किसी ृ

अजनबी या व्यक्ति को अनज्ञात नहीं करेगा।ु

.- बन्दियों के राशन के समचित तौल और उसे ु

53. पकाये हए भोजन का वितरणु

रसोइयों को जारी करने और देखने, कि वे समचित रूप से पकाये और वितरित किये जाते हैं ताकि प्रत्येक बन्दी को उसकी समचित मात्रा प्राप्तु हो, के लिए जेलर उत्तरदायी होगा कित ं ऐसे उत्तरदायित्व के अध्यधीन रहते हये वह अधीक्षक की अनज्ञा से

ु , इन कर्तव्यों को उप- जेलर या किसी अन्य अधिकारी को प्रत्यायोजित कर सके गा।

54. बन्दियों की चिकित्सा देख-भाल.- जेलर यह व्यवस्था करेगा कि प्रत्येक बन्दी, जो चिकित्सीय अधीनस्थ को दिखाने का इच्छु क है या जो बीमार है या जिसके मन या शरीर की दशा के लिए चिकित्सा देख-भाल की अपेक्षा प्रतीत होती है, को बिना विलंब के चिकित्सा अधिकारी को दिखाया जायेगा और वह ऐसे प्रत्येक बन्दी के वत्त पत्र पर परिस्थितियां ृ

अभिलिखित करेगा।

.- (1) बन्दी के वत्त पत्र पर ऐसे बन्दी

55. वत्त पत्र में निदेशों की प्रविष्टिृ

ृ के उपचार के संबंध में चिकित्सा अधिकारी या भेषजज्ञ (cid:217)वारा प्रविष्ट किये गये समस्त निदेश, जेलर (cid:217)वारा पालन किये जायेंगे, जब तक कि वे इन नियमों में किसी आदेश के प्रतिकल न हों या ू

जब तक कि जेलर के पास उन्हें कार्यान्वित करवाने के साधन या शक्ति न हो।

(2) प्रत्येक मामले में, जेलर बन्दी के वत्त पत्र पर प्रत्ये

ृ क निदेश के बारे में उसने क्या कार्रवाई की या उसने कार्रवाई क्यों नहीं की अभिलिखित करेगा, और किसी मामले में जब वह किसी निदेश का अनपालन करना अनचित समझता है या ऐसा करने में असमर्थ है , वह वत्त पत्र अधीक्षक को दिखायेगा और उस पर उसके आदे श अभिप्राप्त करेगा।

(3) चिकित्सालय में बीमार के संबंध में जेलर चिकित्सा अधिकारी के आकस्मिक लिखित आदेशों का तत्काल कार्यान्वयन करेगा।

ु के बारे में सचनाू .- (1) जब कोई बन्दी मर जाता है तो अधीक्षक 56. बन्दी की मत्यृ

संबंधित पलिस थाना के साथु -साथ कलक्टर और जिला मजिस्ट्रेट और पलिस अधीक्षकु /पलिस ु उपायक्तु और बन्दी के परिवार के सदस्य या निकटतम संबंधी को तरंत सचित करेगा। ु ूभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 111 ु की रिपोर्ट चौबीस घंटों के भीतर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राजस्थान (2) मत्यृ

मानवाधिकार आयोग और कारागार निदेशालय के साथ-साथ स्थानीय नगरपालिका प्राधिकारी को भेजी जायेगी जो संबंधित मजिस्ट्रेट को भी भेजी जायेगी।

57. साप्ताहिक परेड.- प्रत्येक सोमवार, अधीक्षक जेल में परिरु(cid:217)ध समस्त बन्दियों की परेड आयोजित करेगा और चिकित्सा अधिकारी के साथ,-

(क) सावधानीपर्वक प्रत्ये

ू क बन्दी का निरीक्षण करेगा;

(ख) प्रत्येक बन्दी के वस्त्र और बिछौने की जांच करेगा;

(ग) मस्टर-रोल की जांच करेगा और स्वयं का समाधान करेगा कि प्रत्येक बन्दी उपस्थित है या लेखब(cid:217)ध किया गया है, और सामान्यत: वह स्वयं का समाधान करेगा कि सब कछ उचित हालत में है ; और

(घ) अपनी जर्नल में उसके निरीक्षण की रिपोर्ट की प्रविष्टि करेगा, उसमें वस्त्र की अवस्था, स्वच्छता, संख्यात्मक बल और बन्दियों से संबंधित महत्व के अन्य मामलों का टिप्पण करेगा।

58. वार्डर गार्डों की जांच.- (1) जेलर का यह उत्तरदायित्व होगा कि वार्डर गार्ड उचित तौर पर प्रवेधित हों, दिखने में सामान्यत: दक्ष और साफ एवं सथरे हों और यह देखना जेलर ु

का कर्तव्य होगा कि, रिजर्व गार्ड परे समय जेल में पर्ण बल में उपस्थित हों और उचित तौर पर सशस्त्र हों।

(2) जेलर देखेगा कि समस्त वार्डर उनको आबंटित क्वार्टरों में ही सोते हैं और वह यदा-कदा, एक पखवाड़े में कम से कम एक बार, रात्रि में वार्डरों के क्वार्टरों का दौरा करेगा और अभिनिश्चित करेगा कि किसी भी वार्डर ने बिना अनज्ञा के जेल परिसर नहीं छोड़ा है।

59. महत्वपर्ण दस्ताू वेजों और अभिलेखों की अभिरक्षा.- (1) जेलर, इन नियमों (cid:217)वारा विहित समस्त महत्वपर्ण दस्ताू वेजों और रजिस्टरों और अभिलेखों की सरक्षित अभिरक्षा के ु

लिए उत्तरदायी होगा और कार्यालय के कार्य पर सामान्य अधीक्षण का प्रयोग करेगा।

(2) विवरणियों की तैयारी, रजिस्टरों में प्रविष्टियों या जेलर के किसी अन्य कर्तव्य का किसी प्राधिकत अधीनस्थृ को प्रत्यायोजन किसी तरह भी पर्ववर्ती को यह सनिश्चित करने के उत्तरदायित्व कि ये सही ढ़ंग से और समय पर पालन किये जा रहे हैं, के उत्तरदायित्व से किसी भी प्रकार मक्तु नहीं करेगा, कित उसके मख्यं

ु कर्तव्य बन्दियों पर सीधा नियंत्रण और जेलों का प्रबंधन हैं।

(3) जेलर या खजांची से रोकड़ बहियों और ऐसे अन्य रजिस्टरों जो अधीक्षक (cid:217)वारा यथा निर्दिष्ट किये जायें को अपने स्वयं के हाथ से रखना अपेक्षित होगा और जेलर का यह उत्तरदायित्व होगा कि नकद अतिशेष उनके समरूप हो जो रोकड़ बहियों में प्रदर्शित किया गया है, य(cid:217)यपि यह सही हो तो उस पर आ(cid:217)यहस्ताक्षर करेगा और उनको निरीक्षण के लिए प्रतिदिन अधीक्षक को प्रस्तत करेगा।ु112 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 60. जेलर (cid:217)वारा वित्तीय संव्यवहार.- जेलर को जेल प्रयोजनों के लिए निजी निधियों में से अग्रिम संदाय करने से प्रतिषि(cid:217)ध किया जाता है और समस्त वित्तीय संव्यवहारों में वह नियमों और जीएफए(cid:214)डएआर में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया का सख्ती से अनपालन करेगा।ु

61. भंडारों की अभिरक्षा.- (1) जेलर, अपने प्रभार में के समस्त भंडारों, मशीनरी इत्यादि के लिए उत्तरदायी होगा और उसे हटाये जाने या अंतरण पर, समस्त विनिर्मित माल, कच्चे माल, औजारों, संयंत्र, धन इत्यादि का लेखा देगा, जिसके लिए उसे उत्तरदायी ठहराया जा सकता हो।

(2) जेलर देखेगा कि समस्त भंडार कक्ष साफ रखे गये हैं और तरीके से व्यवस्थित हैं और जहां तक संभव हो हिंसक जंतु, पक्षियों, कीटों और नमी से सरक्षित रखे गये हैं। ु

(3) भंडार इत्यादि के लिए जेलर का उत्तरदायित्व, अधीक्षक के लिखित आदेश (cid:217)वारा उप- जेलर को प्रत्यायोजित किया जा सके गा तथापि, जेलर को जेलों में भंडार कक्षों की सरक्षित ु अभिरक्षा और उनके सही होने के लिए उसके सामान्य उत्तरदायित्व से मक्तु नहीं किया जायेगा।

62. संपत्ति और भंडारों की तालिका.- (1) जब एक जेलर को सेवोन्मुक्त या निलंबित किया जाता है या त्यागपत्र दे देता है या छ(cid:210)टीु (आकस्मिक छ(cid:210)टीु के अलावा) लेता है या स्थानान्तरित किया जाता है तो उसके उत्तराधिकारी को कार्यभार सौंपते समय, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह समस्त संपत्ति, भंडार और उसके नियंत्रण में की किन्हीं अन्य वस्तओं ु को विनिर्दिष्ट प्ररूप में उनकी सची दे जिसकी एक प्रति जेल अभिलेख में रखी जायेगी , एक प्रति उसके उत्तराधिकारी को दी जायेगी।

(2) जब कभी उपर्यक्त नियमों ु के अधीन भंडारों के लिए जेलर का उत्तरदायित्व उप-जेलर को प्रत्यायोजित किया जाता है, भारमोचक जेलर भंडारों का निरीक्षण करेगा और कछ मदों की ु

जांच करेगा और प्रभारी अधिकारी से प्रमाणपत्र प्राप्त करेगा कि भंडार सही हैं।

(3) जब तक कि भारमोचक जेलर के पास स्टाक के सही होने के संदेह का कारण ना हो, तब तक भंडारों की ब्यौरेवार जांच आवश्यक नहीं है क्योंकि प्रभारी अधिकारी इसके सही होने के लिए उत्तरदायी है।

(4) तथापि, भारमोचन अधिकारी, ऐसी वस्तओं को जो भारमोचित जेलर के कार्य भार में थीं , व्यक्तिगत रूप से ले लेगा और भारमोचक अधिकारी को समस्त विक्रयों के लिए वाउचर देगा।

ु के मामले में, सची अधीक्षक या कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा या (5) जेलर की मत्यृ

उनके निदेशों के अधीन बनायी जायेगी।

63. अधीक्षक (cid:217)वारा कार्यभार ग्रहण.- (1) जब अधीक्षक जेल का नया कार्यभार ग्रहण करता है, उस जेल से संबंधित समस्त विशेष नियमों और आदेशों का उसके ध्यान में लाना जेलर का उत्तरदायित्व होगा और नियमों या आदेशों को सम्मिलित करते हये अधीक्षक के ु

ध्यान में लाने में किसी गंभीर अनियमितता के मामले में, जेलर अनशासनात्मु क कार्यवाहीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 113 का दायी होगा जब तक कि वह यह उपदर्शित न कर दे कि वह नियमों और आदेशों को अधीक्षक के ध्यान में लाया था।

(2) जेलर यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में समस्त कर्मचारिवंदृ , जो जेल में कार्य कर रहे हैं, का बायोडाटा रजिस्टर अधीक्षक के समक्ष उसकी संसचना के लिए रखेगा।ू

64. जेलर के अतिरिक्त उत्तरदायित्व.- जेलर के निम्नलिखित उत्तरदायित्व भी होंगे, अर्थात ्:-

(क) निकल भागने या अनशासन जोखिम वाले बन्दियों और ज्ञात दश्चु

ु रित्र वाले बन्दियों को अलग करना और अधीक्षक को रिपोर्ट करना;

(ख) देखना कि कारागार की दीवारें, भवन, गेट, शयनागार, कोठरी, चिकित्सालय क्षेत्र और अन्य स्थान पर्णतू : सरक्षित हैं और कारागार में ु

और उसके चारों ओर अच्छे प्रकाश तंत्र को सनिश्चित करेगाु ;

(ग) उन खंडों में संतरी रखना सनिश्चित करना जिनमें कख्या

ु त बन्दी परिरु(cid:217)ध किये गये हैं;

(घ) जहां कहीं सरक्षा व्यु वस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं, उनकी रिपोर्ट पस्तु क के माध्यम से इसे अधीक्षक के ध्यान में लाना;

(ङ) प्रतिदिन कारागार चिकित्सालय का दौरा करना;

(च) कारागार कर्मचारिवंद के (cid:217)वारा किसी गबन को अधीक्षक के संज्ञान में लाना; यदि यह दर्शित हो कि ऐसा गबन होना कर्मचारिवंद की ओर से ृ

उपेक्षा (cid:217)वारा संभव हुआ है;

(छ) अन्य कार्यपालक कर्मचारिवंद के साथ उच्चृ सरक्षा बन्दियों जैसे कि ु

सि(cid:217)धदोष कै दी, नक्सलवादी, आतंकवादी बन्दियों इत्यादि के हवालात का प्रतिदिन पर्यवेक्षण करना;

(ज) रसोई को जारी किये गये राशन की एक सप्ताह में कम से कम दो बार जांच करना और उसका समाधान करना कि सही मात्रा जारी की गयी है;

और

(झ) उसके अधीनस्थ अधिकारियों अर्थात उप् -जेलर के कार्य का पर्यवेक्षण करना और उनसे संलग्न कार्यपालक कार्यों के संबंध में, साथ ही उनके (cid:217)वारा रखे जाने वाले समस्त रजिस्टरों का पर्यवेक्षण करना और उनके (cid:217)वारा जांचे गये प्रमाण स्वरूप आ(cid:217)यक्षर करना।

65. उप-जेलर के कर्तव्य.- (1) उप-जेलर, जेलर का आसन्न सहायक होगा जिसका कर्तव्य जेलर, जब वह अनपस्थित होु , का स्थान लेना होगा और अधीक्षक (cid:217)वारा उसे जेलर के कर्तव्य का जो भी भाग समनदेशित किया गया हो , का जिम्मा लेना होगा।

(2) स्पष्ट तौर पर यह समझा जायेगा कि जेलर पर इन नियमों (cid:217)वारा अधिरोपित कर्तव्यों का उचित अंश, उप-जेलर को समनदेशित किया गया है , जो जेलर के सामान्य पर्यवेक्षण के अधीन उसे आबंटित कर्तव्यों का पालन करेगा।

114 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) उप-जेलर के कर्तव्य अधीक्षक (cid:217)वारा उसकी आदेश पस्तु क में स्पष्ट तौर पर विहित किये जायेंगे और, समय-समय पर, परिवर्तित किये जायेंगे ताकि वह समस्त प्रकार की जेलों में नियक्ति के लिए पर्ण प्रशिक्षण प्राप्त कर

ू ले।

(4) जब कभी उप-जेलर, जेलर की अस्थाई अनपस्थिति के दौरान पश्चा त्कथित के स्थानापन्न के रूप में काम करता है, वह जेलर की समस्त शक्तियां और उत्तरदायित्व धारित करेगा।

(5) इन नियमों में विनिर्दिष्ट कर्तव्यों के अतिरिक्त, अधीक्षक, आदेश पस्तु क में लेखब(cid:217)ध किये गये आदेश (cid:217)वारा, जेलर के कर्तव्यों का कोई भाग उप-जेलर को आबंटित कर सके गा।

(6) उप-जेलर इन नियमों के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए और अनशासन के बनाए ु

रखने के लिए जेलर के उत्तरदायित्व में भाग लेगा।

(7) कर्तव्य समय को छोड़कर उप-जेलर, जेलर की अनज्ञा के बिना अपने क्वा

ु र्टर से अनपस्थिु त नहीं रहेगा।

66. उप-जेलर का उत्तरदायित्व.- (1) उप-जेलर के उत्तरदायित्व निम्नलिखित होंगे, अर्थात ्:-

(क) वे जेलर के अधीनस्थ होंगे और जहां कहीं भी आवश्यक हों उसकी सहायता करेंगे;

(ख) वे इन नियमों के समस्त उपबंधों के अनपालन के लिए सामान्यु त:

उत्तरदायी होंगे;

(ग) उनका बन्दियों की सरक्षाु , अभिरक्षा, अनशासनु , देखभाल और कल्याण के ऊपर पर्यवेक्षण होगा;

(घ) उनका संस्थागत प्रबंध से संबंधित समस्त मामलों में अधीक्षक की सहायता करते हए कार्मिक मामलों , कर्मचारिवंद के अनशासन और कर्मचारिवंद के कल्याण के ऊपर पर्यवेक्षण होगा जिसमें सम्मिलित होंगे,-

(i) रसोई, कैं टीन का निरीक्षण और प्रतिदिन चिकित्सालय का दौरा;

(ii) बन्दियों के प्रवेश और छोड़े जाने का कार्य; और

(iii) बन्दियों का वर्गीकरण और उनका प्रशिक्षण;

(ङ) वे देखेंगे कि बन्दी स्वयं और उनके वस्त्र स्वच्छ हैं और कि उनके पास वस्त्रों और बिछौने की प्राधिकत मात्रा है और अधिक नहीं ;

(च) उनके पास शक्ति होगी कि किसी भी समय, लेकिन एक सप्ताह में कम से कम एक बार, प्रत्येक बन्दी और समस्त वस्त्रों, बिछौनों, कार्यशालाओं, वार्डों और कोठरियों की अच्छी तरह से तलाशी करवायें;

(छ) वे बन्दियों के श्रम से संबंधित समस्त आदेशों के निष्पादन के लिए उत्तरदायी होंगे और प्रत्येक कारागार में इस प्रयोजन के लिए गठित वर्गीकरण समिति की सिफारिश पर प्रत्येक बन्दी को उसका कार्य समनदेशित करेंगे

ु ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 115

(ज) वे उ(cid:217)यान की खेती का पर्यवेक्षण करेंगे और सब्जियों के आपर्त की ू

पर्याप्तता के लिए उत्तरदायी होंगे;

(झ) वे कारागार फार्म और समस्त अन्य बाहरी संक्रियाओं का पर्यवेक्षण करेंगे;

(ञ) वे चिकित्सीय अधीनस्थ के साथ संयक्तु रूप से बन्दियों को भोजन की समचित तैयारी और वितरण के लिए उत्तरदायी होंगे ;

(ट) वे सप्ताह में कम से कम दो बार या अधिक किसी भी समय पहरेदारों के कार्यों का पर्यवेक्षण करेंगे और रात्रि 10:00 बजे के पश्चात कारागार का ्

दौरा करेंगे और स्वयं का समाधान करेंगे कि पहरेदार उपस्थित है, तैनात संतरी सतर्क हैं, और कि गश्त समचित रूप से लगाये जा रहे हैं ;

(ठ) जहां जेलों में पर्याप्त कार्यपालक कार्मिक उपलब्ध हैं, ऐसे अधिकारियों में कोई एक रात्रि के दौरान रात्रि कर्तव्य पालन करेगा और रात्रि (cid:212)यटी ू अधिकारी कहलायेगा;

(ड) वे समस्त वारंटों की अभिरक्षा और उनके निबंधनों के कठोर प्रवर्तन के लिए उत्तरदायी होंगे और कि कोई भी बन्दी सम्यक समय से पर्व किसी भी ्

कारण से छोड़ा नहीं जायेगा या दंडादेश की समाप्ति के पश्चात कारागार में ्

नहीं रखा जायेगा।

(2) उप-जेलर निम्नलिखित अनदेशों का पालन करेगा , अर्थात ्:-

(क) बन्दियों के मनोवैज्ञ◌ानिक और मानसिक संरचना के अध्ययन में जेलर की सहायता करना और उनके सधार के लिए उपाय करना ;

(ख) राशन या विनिर्माणशाला भंडारों का प्रभारी होगा;

(ग) क्रय किये गये राशन और अन्य वस्तुओं के भंडारण और अभिरक्षा तथा भंडारों से उनके जारी करने के लिए प्रत्यक्षत: उत्तरदायी होना;

(घ) बन्दियों के लिए भोजन की समस्त वस्तुओं और आवश्यक वस्तुओं का मांग-पत्र रखना और उन्हें प्राप्त करना

(ङ) स्टाक रजिस्टर और अन्य संबंधित अभिलेखों के रख-रखाव को दिन प्रतिदिन और स्टाक के समचित रखु -रखाव को देखना;

(च) राशन और विविध वस्तुओं को जारी करने के लिए उस पर रखी गयी रसोई पर्चियों, चिकित्सालय मांग-पत्रों और अन्य मांग-पत्रों की श(cid:217)धता को ु

जांचना;

(छ) राशन और अन्य वस्तुओं का वजन करना और उपभोग के लिए जारी करना;

(ज) अनाज, सब्जी और अन्य खाने की वस्तुओं की सफाई और उनकी पिसाई, यदि कोई हो, का पर्यवेक्षण करना;

116 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(झ) यह सनिश्चित करना कि रसोई को लायी गयी समस्त राशन वस्तुऐं वास्तविक रूप से उसी प्रयोजन के लिए, जिनके लिए वे हैं, उपयोग में ली गयी हैं;

(ञ) सि(cid:217)धदोष कै दियों की तलाशी में जेलर की सहायता करना और कोठरियों, जहां सि(cid:217)धदोष कै दी बंद किये गये हैं, का परीक्षण करना;

(ट) तलाशियों में कारागारों के खलने और बंद होने की गणना में जेलर की सहायता करना और संस्थागत प्रबंध से संब(cid:217)ध समस्त मामलों में जेलर की सहायता करना;

(ठ) कोई अन्य कर्तव्य करना जो अधीक्षक (cid:217)वारा उसे समनदिष्ट किये जायें

ु ;

(ड) बन्दियों का प्रवेश और उनके प्रवेश पर तलाशी लेना;

(ढ) बन्दी की संपत्ति को, नकद को छोड़कर, अभिरक्षा में रखना;

(ण) यह देखना कि बन्दियों से, उनके प्रवेश पर, उनके निजी वस्त्रों को समचित ु रूप से हटाया गया है और बन्दी वस्त्र और बिछौना जारी किया गया है और बन्दियों को उनके प्रवेश के तत्काल पश्चात संगरोध ् (क्वारेनटिन) में रखा गया है;

(त) कारागार वस्त्र भंडार में बन्दी के निजी वस्त्रों की समचित अभिरक्षा और ु

बन्दियों को नये वस्त्र जारी किये जाने को ध्यान से देखना;

(थ) यथा विनिर्दिष्ट वस्त्र और बिछौना रजिस्टरों का रख-रखाव करना;

(द) बन्दियों की मलाकात संचालित करना ;

(ध) कारागारों में पशपालन एवं मर्गीपालन इकाइयों के समचित रखु

ु -रखाव पर पर्यवेक्षण करना और स्टाक और स्टाक रजिस्टर का रख-रखाव करना;

(न) संगरोध (क्वारंटाइन) और नागरिक और कष्ठीु उपभवनों का प्रभार जहां ऐसे उपभवन वि(cid:217)यमान हों; और

(प) यह देखना कि बन्दी को संबोधित और बन्दी (cid:217)वारा प्रेषित पत्रों की समचित ु रूप से जांच की गयी है और ऐसे पत्रों का निस्तारण अधीक्षक के आदेश के अधीन किया गया है।

67. रक्षा कार्मिक.- (1) रक्षा कार्मिक मख्यु वार्डरों, महिला वार्डरों को सम्मिलित करते हए वार्डरों से मिलकर गठित होंगे।

(2) प्रत्येक छह बन्दियों के लिए कम से कम एक रक्षा कर्मचारिवंद होगा और समस्तृ तीन पारियों में इस अनपात का पालन किया जायेगा। उ(cid:217)योगों और अन्य कल्याण क्रियाकलापों में लगे हए ु कर्मचारिवंद को उपरोक्तृ अनपात की गणना करते समय अपवर्जित किया जायेगा।

(3) विभिन्न ख(cid:214)डों या बिन्दुओं पर रक्षा कर्मचारिवंद के प्रत्ये

ृ क सदस्य के विनिर्दिष्ट कर्तव्य काडर के भीतर ऐसे कर्मचारिवंद की प्रस्थिति को देखते हए चक्रानक्रम आधार पर अधीक्षक (cid:217)वारा निम्नलिखित क्षेत्रों में समनदेशित किये जायेंगे , अर्थात ् :-

(क) सरक्षाु , अभिरक्षा और अनशासनु ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 117

(ख) बन्दियों की तलाशियां और गणना;

(ग) कारागार को खोलना और बंद करना;

(घ) कारागार भवनों, दीवारों, तालों और प्रकाश व्यवस्थाओं की त्रटियों और कमियों ु

की रिपोर्ट देना, इनको सधारने के लिए तरंत कार्रवाई करना और तालों तथा चाबियों, हथकड़ियों और अन्य सरक्षा उपस्कु र की अभिरक्षा देखना;

(ङ) बन्दियों की देखभाल और कल्याण;

(च) संस्थागत परिसरों, (cid:217)वारों, संगरोधों (क्वारंटीन), बैरकों, शयनागारों, कोठरियों, वर्क शेडों, दंड यार्डों, पथक्कृ रण यार्डों, अस्पताल, रसोई, फार्म और संस्थान के प्रत्येक अन्य खंड में अनशासन बनाए रखना ;

(छ) अपने प्रभार के अधीन क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य;

;

(ज) सरक्षा और संतरी कर्तव्यु (झ) कार्य के लिए बन्दियों को एस्कॉर्ट करना, उनके कार्य का पर्यवेक्षण, औजारों, संपत्ति, उपस्कर, अनपयोगी सामान और पशओं की देखभाल और अभिरक्षा ;

(ञ) भोजन, कैं टीन वस्तुओं और अंत:वासी उपस्कर के वितरण का पर्यवेक्षण; (ट) वर्क शैड में तकनीकी कार्मिकों की सहायता, प्रबंध करना और अनशासन बनाए ु

रना;

रखना, समस्त संबंधित मामलों में कषिक कार्मिकों की सहायता कृ

(ठ) उन क्षेत्रों में अनशासन बनाए रखना जहां शैक्षिकु

, सांस्कृ तिक और आमोद- प्रमोद क्रियाकलाप संचालित किये जाते हैं;

(ड) अनशासन के अतिक्रमण की नियमों के अनसार तत्का

ु ल कार्रवाई के लिए समचित अधिकारियों को रिपोर्ट देना ;

(ढ) अंत:वासियों की आदतों और आचरण क्रम का अवलोकन करना और संबंधित प्राधिकारियों को उसकी रिपोर्ट देना, अंत:वासियों की आदतों और बर्तावों को सधारने में उनकी सहायता करना ;

(ण) समस्त आपात परिस्थितियों के लिए निवारक उपाय करना और नियंत्रण रखना;

ु ;

(त) कर्मचारिवंद के क्वाृ र्टरों में अनशासन सनिश्चित करना (थ) शारीरिक प्रशिक्षण, ड्रिल परेडों और आपात अभ्यास के लिए कदम उठाना;

(द) वीडियो कान्फ्रें सिग के माध्यम से बन्दियों की मलाकात संचालित करना ; और (ध) आपात के दौरान बीमार बन्दी को बाहरी चिकित्सालय ले जाते समय एस्कॉर्ट करना और पलिस एस्कॉु र्ट की तैनाती तक पहरा देना।

68. आदेश पस्तु क का अनरक्षणु .- वार्डर गार्ड, स्थानान्तरण, छ(cid:210)टीु , पदोन्नति और

् के समस्त आदेश, संबंधित उप-महानिरीक्षक अवनति पर प्रभाव डालने वाले वहत महत्वृ

(cid:217)वारा यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में आदेश पस्तिु का में प्रविष्ट किये जायेंगे।

69. स्थानान्तरण पर सेवा पस्तिु का का प्रेषण.- अधीक्षक, छ(cid:210)टी लेखाओं और सेवा ु

अभिलेख को सम्मिलित करते हए वार्डर के सेवा रजिस्टु र में समस्त आवश्यक प्रविष्टियां118 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) करेगा और समस्त पर्ण विशिष्टियों के साथ सेवा पस्तिू

ु का को उसके प्रस्थान के सात दिवस के भीतर उस जेल को, जहां अधिकारी को स्थानान्तरित किया गया है, अग्रेषित करेगा।

70. वार्डरों का आवास.- समस्त मख्यु वार्डरों और वार्डरों को स्वयं उनके लिए और ् र्टर उपलब्ध कराये जायेंगे और एकल और अविवाहित वार्डरों को परिवारों के लिए पथक क्वाृ

जेल परिसर में बैरक में आवास उपलब्ध करवाया जाएगा।

71. जेल सेवा छोड़ने से पर्व नोटिसू .- प्रत्येक अधीनस्थ अधिकारी, जो जेल सेवा छोड़ने की वांछा करता है, छोड़ने से कम से कम तीन मास पर्व लिखित में नोटिस देने के ू

लिए आब(cid:217)ध होगा।

72. नियक्ति के दौरान अभिस्वीकतिु

ृ .- (1) जेल सेवा के लिए नियक्तु ◌ि से पर्व ू अभ्यर्थी, अधिनियम की धारा 54 के उपबंधों को पढेगा और हस्ता क्षर (cid:217)वारा अभिस्वीकति ृ देगा कि उसने उक्त उपबंध पढ़ और समझ लिये हैं।

(2) अभिस्वीकति प्रत्ये

ृ क अधिकारी की सेवा पस्तिु का से संलग्न की जायेगी और उन्हें भी यह समझना आवश्यक है कि उन्हें कहीं भी नियोजित किया जा सके गा जहां उनको नियोजित करना महा-निरीक्षक उचित समझे।

(3) किसी भी अभ्यर्थी को तब तक नियक्तु नहीं किया जाएगा जब तक कि वह विनिर्दिष्ट प्ररूप में दी गई घोषणा हस्ताक्षरित नहीं कर देता है।

73. उत्तराधिकारी को संसचनाू .- प्रत्येक अधीनस्थ अधिकारी अपने कर्तव्यों को विनियमित करने वाले नियमों और आदेशों से परिचित होगा और प्रत्येक अधिकारी भारमक्तु होने पर, अपने पद के कर्तव्यों से संब(cid:217)ध विशेष महत्व के समस्त मामलों को अपने उत्तराधिकारी को बतायेगा और किसी विशिष्ट बन्दी या मामले को प्रभावित करने वाले अधीक्षक, चिकित्सा अधिकारी या अन्य वरिष्ठ अधिकारी के किसी निदेश को स्पष्ट करेगा।

74. अंकित बकु .- प्रत्येक जेलर और उप-जेलर अपने साथ एक अंकित बक रखेंगे ु

जिसमें वे अधीक्षक (cid:217)वारा उनको दिये गये किसी मौखिक आदेश को उन्हें देने के समय प्रविष्ट करेंगे।

75. किसी अन्य नियोजन से प्रतिषेध.- न तो जेलर और न ही उसका अधीनस्थ कोई अधिकारी अपने जेल कर्तव्य से भिन्न किसी नियोजन या व्यवसाय में स्वयं को नहीं लगायेगा।

76. ऋण लेने पर निर्बंधन.- (1) कोई अधिकारी अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से ऋण या धन नहीं लेगा या किसी धनीय बाध्यता के लिए स्वयं को नहीं बांधेगा।

(2) कोई अधिकारी, जो किसी ऐसे पद पर नियक्तु या स्थानान्तरित हआ है जिसमें वह ु

किसी व्यक्ति, जो किसी धनीय बाध्यता के अधीन है, पर पदीय प्रभाव या प्राधिकार प्रयोग करने की स्थिति में होगा, अविलम्ब, अधिकारी को जिसके वह आसन्न अधीनस्थ है, सरकार को परिस्थितियों की सचना देने के लिए बाध्यू होगा जिसमें असफल रहने पर वह उसी दंड का भागी होगा जैसे कि बाध्यतायें उसकी नियक्ति या स्थाु नान्तरण के पश्चात उपगत हई ्

हों।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 119

77. विवादों का निदर्शे .- (1) जेल के अधिकारियों या कर्मचारियों के मध्य समस्त तकरार या विवाद सर्वथा निषि(cid:217)ध हैं और अधीनस्थ अधिकारियों के मध्य उनके कर्तव्यों से संबंधित कोई मामला जेलर को, या यदि आवश्यक हो, अधीक्षक को निदशित किया जायेगार्।े (2) समस्त शिकायतें, घटित होने के चौबीस घंटों के भीतर अधीक्षक या जेलर को किये जायेंगे और तच्छु या मिथ्या शिकायतें करने वाले अधिकारी दंड के लिए उत्तरदायी होंगे।

78. संयोजनों का प्रतिषेध.- अधिकारियों और कर्मचारियों के मध्य कोई संयोजन अनमत नहीं है और ऐसी प्रवत्ति रखने वाली कार्यवाही दंडित की जायेगी।

79. क्वार्टरों के उपबंध.- प्रत्येक अधीनस्थ अधिकारी जिसके लिए सरकार (cid:217)वारा क्वार्टर उपलब्ध करवाये जाते हैं, उन क्वार्टरों में रहेगा और जिनके लिए कोई क्वार्टर उपलब्ध नहीं करवाया जाता है, वे जेल से ऐसी दरी के भीतर रहेंगे जैसी अधीक्षक (cid:217)वारा नियत की जाये।

80. मकान किराये के लिए उपबंध.- (1) प्रत्येक जेल अधिकारी किराया मक्तु क्वार्टर या उसके बदले में मकान किराये का हकदार है, यदि कोई क्वार्टर उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं तो वह अधीक्षक के अनमोदन से जेल के पास में किराये के क्वा र्टर का अधिभोग रखेगा।

(2) जेल परिसर में क्वार्टर सामान्यत: अधीक्षक या जेलर या उप-जेलर या कारागार कल्याण अधिकारी या लिपिक-सह-टंकक या शिक्षक या फार्मासिस्ट या आशलिपिक या समस्तु तकनीकी कर्मचारिवंद या लेखाकार या फै क्ट्री

ृ ओवरसियर या चतर्थ श्रेणी कर्मचारी और रक्षा ु

कर्मचारिवंद के लिए उृ पलब्ध करवाये जायेंगे।

81. निजी आगंतकों पर निर्बंधनु .- (1) किसी भी अधीनस्थ अधिकारी को जेल के भीतरी भाग में किसी भी निजी आगंतक की अगवानी करने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा।

(2) किसी भी महिला का किन्हीं भी परिस्थितियों में, वार्डर की बैरक या गार्डरूम में प्रवेश अनज्ञात नहीं किया जाएगा।ु

(3) ढीले या दश्चु रित्र के समस्त बाहरी व्यक्तियों को जेल प्रसीमाओं से अपवर्जित किया जाएगा।

82. जेल परिसर छोड़ने पर निर्बंधन.- (1) अधीनस्थ अधिकारी ओर कर्मचारी जेल के आसपास आवारगदी नहीं करेंगे।

(2) वे उनके अपने-अपने पदों तक स्वयं को सीमित रखेंगे जब तक कि किसी के (cid:217)वारा उन्हें कहीं जाने के लिए आदेशित न किया जाए या जब वे (cid:212)यटी पर जा रहे हों।ू

83. जेल परिसर छोड़ने से पर्व अनज्ञाू ु .- (1) कोई अधीनस्थ अधिकारी न्यायालय (cid:217)वारा समन किये जाने के सिवाय अधीक्षक या जेलर की अनज्ञा के बिना जेल परिसर से ु

दिन या रात में से किसी में भी, या उसकी उपस्थिति के लिए नियत कर्तव्य के घंटों से स्वयं अनपस्थित नहीं रहेगा।ु120 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (2) रूग्णता (cid:217)वारा कर्तव्य पालन करने से निर्योग्य हआु , या न्यायालय (cid:217)वारा समन किया गया कोई अधीनस्थ अधिकारी, जेलर को तत्काल सचना भेजेगाू , जो ऐसी व्यवस्थायें करेगा जो उसकी अनपस्थिति के दौरान ऐसे अधिकारी के कर्तव्य पालन के लिए आवश्य क हों।

(3) प्रत्येक अधीनस्थ अधिकारी जिसे कोई छ(cid:210)टी मंजर की गयी है

ू , वहां से अपनी वापसी

की रिपोर्ट व्यक्तिगत रूप से करेगा।

पर तरंत जेलर को अपनी वापसी के तथ्यु

84. वदी का उपयोग और स्वच्छता का अनरक्षणु .- (1) समस्त अधीनस्थ अधिकारी व्यक्तियों और पोशाक की स्वच्छता पर कठोर ध्यान देंगे और वे जो प्राय: अपनी मंछ और ू

दाढी नहीं रखे रहते हैं

़ , कर्तव्य पर रहने के दौरान साफ मंडे होंगे और वे

ु जिनके लिए वदी विहित है कर्तव्य पर होने के दौरान सारा समय इसे पहनेंगे, लेकिन इस नियम का शिथिलीकरण अनज्ञात किया जा सकता है जब जेल पदधारी , यदि नियमों के लेखे शोक की कालावधि के दौरान क्षौर या वदी पहनने में असमर्थ है।

(2) जेल परिसर में (cid:212)यटी पर न होने ू या किसी सार्वजनिक स्थान में, वे या तो पर्ण रूप से ू

निजी कपड़ों में रहेंगे या संपर्ण वदी में और दोनों का कोई संयोजन अनज्ञात नहीं किया जायेगा।

85. ध(cid:296)पान और प्रतिषि(cid:217)ध वस्तू

ुओं के उपयोग पर निर्बंधन.- (1) कोई अधीनस्थ अधिकारी या कर्मचारी (cid:212)यटी पर होू ने के दौरान ध(cid:296)पान या मदिरापान या गायन या ऊं चे स्वर से बातचीत नहीं करेगा या किसी भी समय स्वयं अनचित या विच्छं

ृ खलता की रीति से आचरण नहीं करेगा या मदिरा, तंबाक या किसी औषधि या किसी प्रतिषि(cid:217)ध वस्त ु को जेल में प्रविष्ट नहीं करेगा।

(2) (cid:212)यटी पर होने के

ू दौरान वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में सपारी ु (पान) या तंबाक ू चबाना यथा अनचित माना गया है और प्रतिषि(cid:217)ध है।

86. किसी संविदा या करार में हित रखने पर निर्बंधन.- न तो जेल का कोई अधिकारी, न ही उसके (cid:217)वारा न्यस्त या नियोजित कोई व्यक्ति, जेल को किसी वस्तु के आपर्त के लिए किसी संविदा या करार में प्रत्यू क्षत: या अप्रत्यक्षत:, कोई हित रखेगा, ना ही वह जेल की ओर से या किसी बन्दी की वस्तु के विक्रय या क्रय से, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत:, कोई फायदा प्राप्त करेगा, ना ही वह जेल संपत्ति की किसी नीलामी पर बोली लगायेगा, ना ही जेल के साथ किसी संविदा के लिए निविदा करने वाले किसी संविदाकार या व्यक्त ◌ि या किसी बन्दी या बन्दी के मित्र या जेल का दौरा करने वाले किसी व्यक्ति से कोई फीस, उपदान, भेंट या उधार प्राप्त करेगा।

87. बन्दियों के साथ कारबार पर निर्बंधन.- जेल का कोई भी अधिकारी या उसके लिए न्यस्त या नियोजित कोई व्यक्ति, किसी बन्दी को कोई वस्तु न तो विक्रय करेगा या करने देगा या कोई वस्तु विक्रय करके या किराये पर देकर कोई फायदा प्राप्त करेगा या ना किसी बन्दी या बन्दी के मित्र के साथ प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: कोई धन या अन्य कारबार व्यवहार रखेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 121

.- कोई अधीनस्थ अधिकारी किसी भी बन्दी के 88. अनाधिकत संपर्क पर निर्बंधनृ

मित्रों या रिश्तेदारों के साथ पत्र-व्यवहार नहीं करेगा या जेल से संब(cid:217)ध, चाहे कोई भी मामला हो, किसी भी व्यक्ति के साथ कोई अनधिकत संपर्क

ृ नहीं रखेगा ना ही किसी छोड़े गये बन्दी या ऐसे बन्दी के मित्रों या रिश्तेदारों से बातचीत करेगा या ऐसे किसी बन्दी या उसके मित्र या रिश्तेदार को, अधीक्षक की विशेष अनज्ञा के सिवायु , उसके क्वार्टर में आने या रहने को अनज्ञात नहीं करेगा।ु

89. अनावश्यक बातचीत पर निर्बंधन.- कोई अधीनस्थ अधिकारी किसी बन्दी के साथ अनावश्यक बातचीत या मेल-जोल वाला बर्ताव या उसके या उसकी सनवाई के दौरान जेल के ु

अनशासन या विनियमों में संबंधित मामलों की चर्चा नहीं करेगा।

90. बन्दियों से मानवता और दयालता के साथ व्यवहार करना .- समस्त जेल अधिकारी, बन्दियों से न(cid:296)ता, मानवता, दयालता और कठोर निष्पु क्षता के साथ व्यवहार करेंगे और किसी परिवाद या शिकायत को धैर्यपर्वक और बिना चिड़चिड़ाहट के सनेंगे। साथ ही कठोर अनशासन बनाए रखते हए और समस्तु

ु नियमों और विनियमों का अनपालन ु प्रवर्तित करेंगे।

91. शिकायतों को दर करनाू .- किसी बन्दी (cid:217)वारा किए गए प्रत्येक परिवाद या शिकायत उन्हें दर करने के क्रम में ध्या

ू न से सनी जायेगी और असंतोष का कोई कारण नहीं रहने दिया जाएगा।

92. दंड पर निर्बंधन.- (1) कोई भी जेल अधिकारी, अधीक्षक के आदेश के अधीन के सिवाय किसी बन्दी को किन्हीं भी परिस्थितियों में दंडित नहीं करेगा या किसी बन्दी को दंड की धमकी या किसी बन्दी के लिए हिंसात्मक, गाली-गलौच की या अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं करेगा।

(2) किसी बन्दी को के वल चिढाने या क्षुब्ध़ करने के आशय से किये गए समस्त व्यवहार से बचा जाएगा।

93. बल प्रयोग पर निर्बंधन.- (1) कोई भी अधिकारी, किसी भी बहाने से, आत्मरक्षा में या उपद्रव को रोकने के सिवाय, बन्दी पर आघात नहीं करेगा और किसी भी दशा में आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग नहीं करेगा।

(2) जेलर और उसके अधीनस्थ, किसी बलवे, जेल तोड़ने के हिंसक प्रयत्न या बन्दियों के या उनमें से किसी के (cid:217)वारा जेल अधिकारियों पर हमले के मामले में, इन नियमों का कठोरता से पालन करेंगे।

94. अवचार या जानबझकर की गयी अवज्ञा के बारे में रिपोर्ट .- कोई भी अधिकारी, किसी भी बहाने से, पक्ष या दयालताु के प्रस्ताव की भल से

ू , किसी अवचार या जेल नियमों की जानबझकर की गयी अवज्ञा , चाहे बन्दी की ओर से हो या अन्य अधिकारी की, अधीक्षक या अन्य वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल रिपोर्ट देने में विफल नहीं होगा।

95. चाबियों की उचित अभिरक्षा.- (1) कोई भी अधीनस्थ अधिकारी या कर्मचारी जिसे चाबियां न्यस्त की गयी हैं, उन्हें जेल से बाहर नहीं ले जायेगा, उन्हें इधर-उधर नहीं122 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) छोड़ेगा या उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को प्रदत्त नहीं करेगा, तब के सिवाय जब वह जेल छोड़ रहा हो या (cid:212)यटी से जा रहा हो

ू , तब उन्हें ऐसे अधिकारी को परिदत्त करेगा, जिसे उन्हें लेने के लिए प्राधिकत किया जाये

ृ , और वह उन्हें यथा निदेशित सौंप देने के बिना अपना पद या जेल नहीं छोड़ेगा।

(2) वार्डों, कोठरियों, बाहरी (cid:217)वारों या गोदामों की चाबियां, किसी भी बहाने से, चाहे जो भी हो, किसी बन्दी को नहीं सौंपी जायेंगी।

(3) यदि कोई चाबी खो जाती है तो वह ताला या ताले जिसकी ये चाबी हैं उपयोग में नहीं लिये जायेंगे क्योंकि वे अब और सरक्षित नहीं होंगे

ु , और उत्तरदायी अधिकारी उन्हें अपने स्वयं के खच पर बदलने के लिए उत्तरदायी होगा।

96. रात्रि में किसी वार्ड या कोठरी में प्रवेश पर निर्बंधन.- कोई भी अधिकारी किसी भी कारण से रात्रि में किसी वार्ड या बन्दियों की कोठरी में प्रवेश नहीं करेगा, जब तक कि अन्य अधिकारी साथ ना हो और तब भी के वल बीमारी या अन्य आपात का मामला हो।

97. जेल अधिकारियों का सतर्क होना.- (1) समस्त जेल अधिकारी, बन्दियों के निकल भागने को निवारित करने में भरसक प्रयत्न करने के लिए आब(cid:217)ध हैं और इसके लिए जेलर और उसके अधीनस्थ यह देखेंगे कि समस्त सीढियां, रस्सियां, बांस, पात्र और अन्य

ु , किसी ऐसे स्थान पर नहीं छोड़ी गई हैं जिससे वस्तुएं जो निकल भागने को सकर बनाती हैं वे बन्दी (cid:217)वारा निकल भागने के काम ली जा सकती हैं।

(2) समस्त जेल अधिकारी, किसी तंबाकू , अफीम, गांजा या अन्य प्रतिषि(cid:217)व वस्तुओं या नियम (cid:217)वारा अनज्ञात नहीं की गयी किसी वस्तु

ु के जेल में प्रवेश और किसी बन्दी को देने से रोकने का भरसक प्रयत्न करने के लिए आब(cid:217)ध हैं।

(3) नियम (cid:217)वारा यथा अनज्ञात के सिवाय समस्तु जेल अधिकारी बन्दियों और बाहरी व्यक्तियों के मध्य संपर्क के किसी प्रयत्न का निवारण और रिपोर्ट करेंगे और जब कोई संदिग्ध व्यक्ति जेल के आस-पास घमते हए देखा जाए तो इस तथ्यू ु की रिपोर्ट करेंगे।

98. जेल में व्यवस्था और अनशासन बनाए रखना .- (1) समस्त अधीनस्थ अधिकारी, अधिकारियों और बन्दियों, दोनों के मध्य जेल के प्रबंध, व्यवस्था और अनशासन को बनाए ु

रखने और जेल तथा उसमें रखे हए या उससे संबंधित समस्तु व्यक्तियों और संपत्ति के विरु(cid:217)ध किसी व्यक्ति (cid:217)वारा आपराधिक बल के प्रयोग से सरक्षा और प्रतिरक्षा (cid:217)वारा ु सहायता करने के लिए आब(cid:217)ध होंगे।

(2) अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के समस्त विधिपर्ण आदेशों का तत्पू रता से और कठोर अनपालन करने और समस्तु वरिष्ठ अधिकारियों और अतिथियों का सम्मान के साथ व्यवहार करने के लिए आब(cid:217)ध हैं।

(3) अधीनस्थ अधिकारी, तत्ससमय प्रवत्त ृ कर्तव्यों को, जो उन्हें पालन करने हैं, और वह रीति जिसमें उन्हें उनको पालन करना है, विनियमित करने वाली समस्त विधियों, नियमों, विनियमों, निदेशों और आदेशों का अनपालन करने के

ु लिए आब(cid:217)ध हैं।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 123

(4) अधीनस्थ अधिकारी किसी भी समय उन्हें न्यस्त की गयी किसी भी प्रकार की समस्त संपत्ति की समचित देखभाल करेंगे और जब भी अपेक्षा की जाये सम्य क रूप से लेखा देंगे।्

99. अनशासनात्मु क कार्रवाई के लिए दायित्व.- प्रत्येक जेलर या उसके अधीनस्थ कारागार का अधिकारी जो किसी कर्तव्य के अतिक्रमण या किसी नियम या विनियम या सक्षम प्राधिकारी (cid:217)वारा किये गये किसी विधिपर्ण आदेश को जानबझकर भंग करने या उपेक्षा का दोषी है या जो अनज्ञा या दो मास की काला

ु वधि के लिए इस आशय की पर्व लिखित ू

सचना दिये बिना उू सके कार्यालय के कर्तव्यों से हट जाएगा या जो जानबझकर उसे मंजर ू

किसी छ(cid:210)टी से अधिक रुके गा या जो बिना प्राधिकार के अपने कारागार कर्तव्य के अलावा किसी नियोजन में लगेगा, या जो कायरता का दोषी होगा, वह अनशासनात्मु क कार्यवाही का भागी होगा।

100. विभागीय दंड.- प्रत्येक जेलर और अधीनस्थ अधिकारी जो किसी अपराध का दोषी होगा वह दंडित किये जाने का भागी होगा।

101. वार्डर रिपोर्ट बक बनाए रखनाु .- (1) जेलर, जेल रजिस्टर में वार्डर रिपोर्ट बक ु बनाए रखेगा जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में हो सके गी जिसमें वार्डरों या हैड वार्डर के विरु(cid:217)ध (cid:212)यटी ू में अवहेलना या गलती के लिए रिपोर्ट की जायेगी।

(2) यह रिपोर्ट बक संबंधित कर्मचारिवंद के साथ अधीक्षक के समक्ष प्रस्त

ृ त की जायेगी।

102. निलंबित करने की शक्ति.- जब कोई अधीनस्थ अधिकारी कोई अपराध कारित किये जाने का अभियक्तु या संदिग्ध है और अधीक्षक की राय है कि ऐसे अधिकारी के विरु(cid:217)ध प्रथम दृष्(cid:210)या मामला बनता है और मामले में विभाग की ओर से पर्याप्त रूप से कार्रवाई नहीं की जा सकती है तो वह तत्काल ऐसे अधिकारी को निलंबित करेगा और उसे मामले की जांच करने या विचारण करने की अधिकारिता रखने वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तत करेगा।ु

103. अपराध जिनमें अभियोजन संस्थित किया जा सकता है.- निम्नलिखित अपराधों के लिए, यदि किसी जेल अधिकारी (cid:217)वारा कारित किये गये हों, ऐसे जेल अधिकारी के विरु(cid:217)ध अभियोजन संस्थित किया जाएगा, अर्थात ्:-

(क) जानबझकर या उपेक्षापर्व

ू क निकल भागने की अनमति देनाु ;

(ख) निषि(cid:217)ध वस्तुओं का बन्दियों को आपर्त

ू , बन्दियों के साथ अनाधिकत संपर्क ृ

से संबंधित अधिनियम की धारा 42 के अधीन कोई अपराध और ऐसे अपराधों का दष्प्रे

ु रण;

(ग) जेल के लिए आपर्त के लिए किसी संविदा या करार से प्रत्य

ू क्षत: या

करना;

अप्रत्यक्षत: सरोकार रखना या आपर्तकर्ता से कोई भेंट या ऋण प्राप्तू और

(घ) भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 के न्द्रीय अधिनियम संख्यांक 45) या अन्य आपराधिक विधि के अधीन दंडनीय कोई गंभीर अपराध।

124 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

परन्तु साक्ष्य ऐसा हो जिससे दोषसि(िcid:217)ध अधिसंभाव्य हो और यदि इसके लिए साक्ष्य

ु स पर्याप्त नहीं है किन्तु यह अधीक्षक की राय में अधिकारी की दोषिता को यक्तियक्त विश्वाु प्रस्तत करने के लिए पर्याप्तु है तो वह अनशासनात्मु क कार्रवाई कर सके गा।

104. कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट करना .- नियम 105 में यथा उल्लिखित कोई अपराध, विभागीय रूप से छोडा ़, माफ किया या दंडित नहीं किया जाएगा और मामला जिसमें आपराधिक अभियोजन संस्थित नहीं किया गया है कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट किया जाएगा।

105. गंभीर मामलों में पदच्युति.- अधीनस्थ अधिकारियों को, जो निम्नलिखित अपराधों में से कोई एक या अधिक अपराध कारित करते हैं, सामान्यत: पदच्युति से दंडित किया जाएगा, या गंभीर मामलों में जहां दोषसि(िcid:217)ध करने के पर्याप्त साक्ष्य हों, अधिनियम की धारा 54 की उप-धारा (1) के अधीन अभियोजित किया जाएगा, अर्थात ्:-

(क) मदिरा या अन्य मादक द्रव्य से मत्तता की दशा में (cid:212)यटी पर आनाू ; (ख) पहरे पर होने के दौरान सोना;

(ग) आत्मरक्षा या जेल तोड़ने को दबाने के सिवाय बन्दी पर आघात करना या किसी बन्दी को विधिविरु(cid:217)धतया दंडित करना;

क्ति को प्रवेश (घ) महिला अहाता में असम्यक रूप से प्रवेश करना या किसी व्य्

की अनमति देना या महिु ला बन्दी के साथ कोई असम्यक सम्प् र्क बनाए रखना;

(ङ) भोजन के आपर्त या वितरण में अनियमितताएं कारित करना या मौनानमति देना;

(च) निजी प्रयोजनों के लिए किसी बन्दी को नियोजित करना; और

(छ) वरिष्ठ अधिकारियों की अवज्ञा या उनसे धष्टृ ता करना।

106. सेवा पस्तिु का में दंड की प्रविष्टि.- अधीनस्थ अधिकारी के विरु(cid:217)ध लघ प्रकार ु

के आरोपों पर जांच और आदेश पारित करते समय, अधीक्षक के लिए ऐसे अधिकारी की सेवा पस्तिु का में, अपराध की प्रकति और अधिनिर्णीत किये गये दंड को अभिलिखित करना पर्याप्त होगा।

.- जिला या विशेष या अस्थाई उप-जेलों के मामले 107. छ(cid:210)टी मंजर करने की शक्तिु

में कारागारों के अधीक्षक अपनी जेल के मख्यु वार्डर या वार्डर की छ(cid:210)टी मंजर करने के लिए ु

सशक्त है।

108. मख्यु वार्डर और उसके कर्तव्य.- (1) अधीक्षक के सामान्य नियंत्रण के अध्यधीन रहते हएु , मख्यु वार्डर में जेल के भीतरी प्रशासन के समस्त ब्यौरों के पर्यवेक्षण न्यस्त होंगे।

(2) मख्यु वार्डर,-

(i) समस्त अधिकारियों, उनके अधीनस्थ और बन्दियों के (cid:217)वारा इन नियमों के उपबंधों के सम्यक अनपालन के लिए उत्तरदायी होगा और उसका यह कर्तव्यभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 125 है कि वह किन्हीं व्यक्तियों (cid:217)वारा इन नियमों के किसी उपबंध के किसी अतिलंघन को जेलर या अधीक्षक के ध्यान में लाये।

(ii) यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में पस्तिका रु खेगा, जिसमें जेल में प्रविष्ट किए गए और छोड़े गये बन्दियों की ब्यौरेवार सचना अभिलिखित की जाती है।

ू

(iii) वार्डरों और बन्दियों के (cid:217)वारा इन नियमों के समस्त उपबंधों की सम्यक ् पालना सनिश्चित करेगा और कारागार के भीतर किसी व्य क्ति (cid:217)वारा इन नियमों के उपबंधों के किसी ऐसे अतिलंघन को जेलर या अधीक्षक के ध्यान में लायेगा जिसकी किसी वार्डर ने जानबझकर अनशासन के भंग की रिपोर्ट देने में उपेक्षा की है जो उसके संज्ञान में है।

(iv) समस्त शैक्षिक और सधारात्मु क कार्यक्रमों के सफलतापर्वक क्रियान्वू यन और समस्त कारागार सरक्षाु उपायों के सम्यक रूप से प्रवर्तन में जेलर की सहायता करेगा;

(v) प्रात: गिनती परेड से दोपहर गिनती और फिर 3:00 पीएम से बंद करने के समय पर कर्तव्य पर अभिनियोजित रहेगा और गार्ड के प्रत्येक परिवर्तन पर बन्दियों की जांच करेगा;

(vi) बन्दियों के लिए भोजन की तैयारी और वितरण की निगरानी करेगा;

(vii) कारागार में अभिनियोजित वार्डरों के कार्य और वार्डरों का पर्यवेक्षण करेगा और गार्डों की रात्रि जांच संचालित करेगा और सनिश्चित करेगा कि वे सतर्क और चौकन्ने हैं;

(viii)कर्तव्य पर होने के दौरान जेल के कार्य और अनशासन का पर्यवेक्षण करते ु

हुए और वार्डरों और सि(cid:217)धदोष अधिकारी को सतर्क रखते हएु , बन्दियों के मध्य निरंतर आस-पास चलता रहेगा;

ु , प्रत्याशित (ix) उत्पादन के न्द्रों पर लगे हए श्रमिकों (cid:217)वारा समय के दपयोगु

मात्राओं में क्वालिटी उत्पादन को सनिश्चित करेगा और बन्दिु यों को, जो प्रत्येक सबु ह श्रम के दायी हैं, को उनकी अपनी-अपनी कार्य दल वितरित करेगा;

(x) किसी वार्डर के प्रभार में रखे गये प्रत्येक बन्दी का वही नाम समचित टोली ु

पस्तिु का में प्रविष्ट करवायेगा;

(xi) समस्त बांस, खड़े स्तंभ, खंभे, सीढ़ियां, रस्सियां, वैल गियर और अन्य वस्तुएं जो किसी बन्दी के निकल भागने के लिए संभाव्यत: प्रयक्तु होने वाली या सकर बनाने वाली हों , को हटाए जाने और बन्दियों की पहंच से परे रखा ु

जाना कारित करेगा और उन्हें भंडा रण और नियंत्रण के लिए विहित स्थानों में रखवायेगा;

(xii) समस्त जालियों, दरवाजों और वैसी ही अन्य चीजों को सरक्षित करवायेगा ु

और समय-समय पर स्वयं का समाधान करेगा कि वे सरक्षित हैं

ु ;

126 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(xiii)अपने वार्डरों की उपसंजाति और अनशासन के लिए उत्तरदायी होगा और यदि कोई वार्डर, जबकि वह (cid:212)यटी पर होू , अनचित रूप से पोशाक पहने हए पाया जाता है उसके (cid:217)वारा इसकी रिपोर्ट उच्चतर अधिकारियों को की जायेगी;

(xiv) जेलर या कार्यकारी अधिकारियों की समस्त दैनिक कर्तव्यों में सहायता करेगा और जेलर की उपस्थिति में, प्रत्येक सबह शयन वार्डोंु , कोठरी और अन्य कक्ष खोलेगा और बन्दियों को गिनेगा;

(xv) शौचालय और समस्त स्नानघरों के उपयोग और फीडि ंग परेडों का पर्यवेक्षण करेगा और देखेगा कि कोई गंदगी या कड़ा जेल के आसू -पास नहीं रहने दिया गया है और नाले साफ रखे गये हैं;

(xvi) सनिश्चित करेगा कि वार्ड स्वच्छ और दिन के समय के दौरान संवातित हैं और बिछौना उचित रूप से समेटे हए और व्यु वस्थित हैं; और

(xvii) जेलर या उप-जेलर की उपस्थिति में बन्दियों को गिनेगा और तलाश करेगा और बन्दियों को प्रत्येक शाम विहित समय पर उनको अपने-अपने वार्डों, सेलों और अन्य कक्ष में बंद करेगा।

109. गार्ड के भारमोचन की रीति.- (1) भारमोचन गार्ड का मख्यु वार्डर, (cid:212)यटी पर ू

गार्ड के भारमोचन के लिए नियत घंटे से कम से कम दस मिनट पर्व

ू , जेल के मख्यु गेट पर भारमोचन गार्ड के वार्डरों को एकत्रित करेगा और उचित समय पर वह वार्डरों के भारमोचन गार्ड के उनके अपने-अपने पदों को प्रगमन करवायेगा और भारमोचित होने वाले गार्ड को हटायेगा।

(2) गार्ड को भारमोचन करते समय, जेल की दीवारों से बाहर कार्य कर रहे दलों के वार्डर और भारमोचन गार्ड का मख्यु वार्डर, तत्कालीन प्रभारी और हटाये जाने वाले वार्डरों को हटाने से पर्व

ू , बन्दियों की गिनती करेगा और स्वयं का समाधान करेगा कि दल पर्ण है और दल ू

पस्तिु का में अभिलिखित रीति में लिखेगा।

110. वार्डरों का प्रगमन.- (1) वार्डर चाहे (cid:212)यटी पर जा रहे हों या (cid:212)यटी से जा रहे हों

ू , दोहरी कतार में प्रगमित किये जायेंगे और प्रत्येक वार्डर भारमोचन और भारमोचित मख्यु वार्डरों, दोनों की उपस्थिति में पदस्थापित किया जायेगा, भारमोचन वार्डर दस्ते के अग्र से लेते हए और भारमोचित वार्डर को दस्ते के पष्ठृ भाग से ले जाते हए। ु

(2) जब भारमोचन प्रक्रिया पर्ण हो जाती है

ू , भारमोचित प्रमख वार्डर भारमोचित वार्डरों को ु

जेल से बाहर प्रगमन करवायेगा और तब उन्हें विसर्जित करेगा।

111. गेट संतरियों का बदलाव.- कर्तव्यारूढ़ प्रमख वार्डर यह देखेगा कि दिन के गेट संतरी और गेटकीपर अनदेशों के अनसार बदल दिये गये हैं।

ु

112. प्रमख वार्डर के (cid:212)यटी के घंटे

ू .- (1) प्रत्येक प्रमख वार्डर सामान्यु त: आधा दिवस तथा रात्रि को एक पहरे के लिए और प्रात: वार्डों, सेलों और अन्य कक्षों के खोलने पर भी और रात्रि को बन्दियों को बंद करने के समय भी (cid:212)यटी पर रहेगा।ूभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 127 (2) (cid:212)यटी की कालावधि इस प्रकार व्यू वस्थित होगी कि प्रमख वार्डर समस्तु दिन और रात्रि किसी भी प्रकार की (cid:212)यटी से वार्डरों के भारमोचन के समय पर उपस्थित रहेगा।

113. महिला वार्डरों का बदलना.- प्रत्येक बदलाव पर, (cid:212)यटी से भारमोचित और (cid:212)यटी ू

पर भारमोचन महिला वार्डर, महिला वार्ड अहाते में प्रवेश किये बिना, जहां उपलब्ध हो, महिला वार्डर और सि(cid:217)धदोष चौकीदार महिला को आहत करने के (cid:217)वारा अभिनिश्चित करेगी कि क्या समस्त महिला बन्दी सरक्षित अभिरक्षा में हैं

ु ?

114. चाबी के डब्बे का उपयोग.- जेल की चाबियां, जब उपयोग में नहीं आ रही हों या जेल के किसी अन्य अधिकारी की व्यक्तिगत अभिरक्षा में हों, मख्यु गेट पर चाबी के डब्बे में रखी जायेंगी और ऐसे पात्र की चाबी दिन के समय के दौरान प्रमख ु वार्डर (cid:217)वारा और रात्रि के दौरान तत्समय (cid:212)यटी पर गश्तू अधिकारी (cid:217)वारा प्रतिधारित की जायेगी।

115. स्टाउट चैन का उपयोग.- किसी अधिकारी को, जब वह (cid:212)यटी पर होू , कोई चाबियां उसके पास रखनी होती हैं तो वह उन्हें मजबत कड़ी ू (स्टाउट चैन) से अपने पास बांधकर रखेगा।

116. प्रमख वार्डरों का उत्तरदायित्वु

.- निकल भागने की घटना होने की दशा में प्रमख ु वार्डर मख्यतु : उत्तरदायी ठहराया जाएगा जब तक कि समाधानप्रद रूप में यह साबित न किया जाए कि प्रमख वार्डर की ओर से कर्तव्य की शिथिलता के कारण निकल भागना नहीं हआ।ु

117. वार्डर के कर्तव्य.- (1) प्रत्येक वार्डर का अधीक्षक या जेलर (cid:217)वारा समनदिष्ट ु कोई विशिष्ट कर्तव्य होगा जैसे कि विशिष्ट वार्ड अथवा वार्डों के संवर्ग या विशिष्ट कार्यशाला अथवा कार्यशालाओं का संवर्ग अथवा जेल के भीतर या बाहर बन्दियों के विशिष्ट दल का प्रभार।

(2) वार्डरों के पदों और कर्तव्यों की बारंबार अदला-बदली की जाएगी ताकि बन्दियों में से किसी के साथ स्थायी संबंध बनाने से वार्डरों को रोका जा सके ।

(3) कार्यशालाओं के प्रभारी वार्डर कार्यशालाओं में रखे हये समस्तु औजारों और संपत्ति के लिए उत्तरदायी होंगे।

118. वार्डरों के अतिरिक्त कर्तव्य.- इन नियमों में अन्यथा विहित कर्तव्यों के अतिरिक्त, समस्त वार्डरों का यह कर्तव्य होगा, कि वे-

(क) उन्हें सौंपे गये बन्दियों को गिनेंगे और मख्यु वार्डर को संख्या घोषित करेंगे;

करेंगे और किसी भी कारण पर वे (ख) (cid:212)यटी पर होने पर खड़े रहेंगे या गश्तू

अपना बैल्ट नहीं उतार सकें गे या (cid:212)यटी पर होने पर लेटेगा या बैठे गा नहीं;

(ग) उनके प्रभार में बन्दियों की संख्या ज्ञात रखेंगे और उनकी (cid:212)यटी की ू

बारी के दौरान बारंबार बन्दियों की गिनती करेंगे और स्वयं का समाधान करेंगे कि उनकी अभिरक्षा में बन्दियों की सही संख्या है;

128 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(घ) समस्त बन्दियों की उनके दल के साथ उन्हें सौंपे जाने के समय उनकी ऐसी जांच करेंगे जैसी किसी अन्य व्यक्ति को उनका प्रभार दिए जाते समय की जाती और ऐसे अन्य समय पर जब उनकी निगरानी रखने के दौरान ऐसा करना आवश्यक हो और बन्दियों के दल में से किसी के पास प्रतिषि(cid:217)ध वस्तओं का पता चलने पर उसकी रिपोर्ट करेंगे ;

(ङ) तंबाक या किसी औषध या ध(cid:296)पान साधन या धन का या भोजन की

ुओं के उपयोग या कब्जे को निवारित करेंगे;

अस्वीकत वस्तृ

(च) देखेंगे कि बन्दी उनके उपयोग के लिए तैयार और आपर्त किये जाने के ू

अलावा कोई अनाज, सब्जियां, बेरी या फलों को चोरी नहीं करते हैं या नहीं खाते हैं और पानी नहीं पीते हैं;

(छ) श्रम के लिए दंडादिष्ट सि(cid:217)धदोषों के मामले में, ढिलाई और अपर्ण कार्य ू

के समस्त मामलों की रिपोर्ट देंगे;

(ज) समस्त जोर से बातचीत करने, हंसने, गाने, खेलने या झगड़ा करने या अन्य अनचित व्यु वहार को निवारित करेंगे;

(झ) देखेंगे कि बन्दियों को एक स्थान से दसरे स्थाू न पर ले जाते समय वे प्रगमन करेंगे और कि वे अपने समचित स्थाु न नहीं छोड़ते हैं या जेल के आस-पास आवारागदी नहीं करते हैं;

(ञ) देखेंगे कि कोई भी बन्दी बिना प्राधिकार के अपना अहाता न छोड़े और न ही किसी बन्दी के साथ, जिससे उसका कोई समचित सरोकार नहीं है ु या अन्य वर्ग या दल के किसी बन्दी के साथ, संपर्क करता है;

(ट) देखेंगे कि कोई गंदगी या कड़ा जेल के आपू -पास नहीं पड़े रहने दिया गया है और कि नाले साफ रखे गए हैं और उन सफाई कर्मियों, जो अपने कार्य की उपेक्षा करते हैं, के बारे में रिपोर्ट करेंगे;

(ठ) नालों या इस प्रयोजन के लिए उपलब्ध करवाये गये स्थानों के अलावा किसी अन्य स्थान में पेशाब या शौच करने वाले बन्दियों की रिपोर्ट करेंगे और कोई बन्दी जो कार्य समय में शौचालय जाता है, जेलर के ध्यान में लायेंगे;

(ड) देखेंगे कि किसी बन्दी, जिसे अनधिकत समय पर शौचालय के लिए जाना है, को उसके दल से दर रखते हए उत्तरदायी अधिकारी के प्रभार में सौंपा गया है;

(ढ) बन्दियों के उनके दलों में व्यक्तियों, कपड़ों, बिछौनों, ब्रेस्ट टिकटों, घेरों, बेड़ियों, प्लेटों और कपों की सफाई और उनके किटों की समचित ु व्यवस्था देखेंगे;

(ण) देखेंगे कि बन्दी के वल स्नान परेड पर ही स्नान करते हैं और कि बिछौना आदेश के अनसार सखाया गया है

ु ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 129

(त) किसी बन्दी के बीमार होने के संके त या बीमारी की शिकायत करने वाले किसी बन्दी के बारे में जेलर या मख्यु वार्डर के ध्यान में लायेंगे; (थ) निकल भागने या हमला करने या विद्रोह या निषि(cid:217)ध वस्तओं को ु

अभिप्राप्त करने की जेल प्राधिकारियों के विरु(cid:217)ध किसी भमिका की और ू

जेल नियमों के प्रत्येक भंग की रिपोर्ट करेंगे;

(द) वस्त्रों या जेल की संपत्ति को जानबझकर क्षति के

ू किसी मामले की रिपोर्ट करेंगे;

(ध) बन्दियों को गिनती और परेडों के लिए तैयार करेंगे और देखेंगे कि

, सही प्रत्येक बन्दी अपने समचित स्थाु न पर समचित क्रम में आता है व्यवहार करता है और शांत रहता है;

(न) किसी बन्दी के लापता होने के तथ्य की जेलर या अन्य उत्तरदायी अधिकारी को तंरत रिपोर्ट करेंगे

ु ;

(प) देखेंगे कि कोई भोजन बन्दियों (cid:217)वारा छिपाकर नहीं रखा गया है, कि प्रत्येक बन्दी अपने भोजन की समचित मात्रा प्राप्त करता है और कि कोई बन्दी अपना भोजन दसरे को नहीं देता है , किसी रसोइये की, जो बन्दी को कम मात्रा देता है या किसी को बहत अधिक देकर पक्ष लेता ु

है, रिपोर्ट करेंगे; और

(फ) अपने आयधों और सैनिक सामग्री को साफु

-सथरा और व्यु वस्थित और तत्काल उपयोग हेत उपयक्त रखेंगे।ु ु

119. वार्डरों की वदी.- (1) प्रत्येक वार्डर जब वह (cid:212)यटी पर होू , समस्त समय, अपनी साफ और उचित वदी में होगा और अपना बैल्ट पहनेगा और एक छड़ी (पद सचक चिह्नू ) वहन करेगा।

(2) छड़ी लप और सगमता से वियोजित बटन से या स्प्रिं

ु ग क्लिप के साधन (cid:217)वारा बैल्ट पर लटकी होनी चाहिये।

120. महिला वार्डर.- प्रत्येक जेल में, जिसमें महिला बन्दी परिरु(cid:217)ध की गयी हैं, महिला वार्डर होगी।

121. महिला वार्डर की नियक्तिु .- महिला वार्डरों की नियक्ति राजस्थाु न जेल अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 के उपबंधों के अनसार की जायेगी।ु

122. महिला बन्दियों पर नियंत्रण.- अधीक्षक के सामान्य नियंत्रण के अध्यधीन रहते हएु , महिला वार्डर का महिला बन्दियों पर नियंत्रण होगा और वह महिला बन्दियों की देखभाल और अधीक्षण के लिए उत्तरदायी होगी।

123. महिला बन्दियों की प्रवेश के दौरान तलाशी.- (1) महिला वार्डर जेल में प्रवेश पर समस्त महिला बन्दियों की तलाशी लेगी और उनके पास से प्राप्त समस्त प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुओं को हटायेगी और किसी व्यक्ति पर किन्हीं घावों या निशानों के अभिलेख के लिए चिकित्सा अधिकारी के आदेश के अधीन ऐसे बन्दियों का परीक्षण भी करेगी।

130 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) उनके साथ प्रदत्त या उनके साथ प्राप्त धन या अन्य संपत्ति जेलर को सौंपी जायेंगी।

(3) निषि(cid:217)ध वस्तओं के प्रतिु धारण को निवारित करने या जब ऐसा करने को वरिष्ठ अधिकारी (cid:217)वारा आदेशित किया जाये, महिला वार्डर परिरु(cid:217)ध महिला बन्दियों की तलाशी भी प्रतिदिन लेगी और महिला बन्दी की तलाशी या परीक्षण के वल महिलाओं की उपस्थिति में किया जायेगा।

124. ताला खोलने और बंद करने के दौरान उपस्थिति.- महिला वार्डर प्रति दिन प्रात:काल महिला बन्दियों के वार्डों को खोलने और उनकी गिनती करने के समय उपस्थित होगी और इसी भांति रात्रि में ताला बंद करने पर उपस्थित होगी और देखेगी कि प्रत्येक बन्दी उपस्थित है।

125. सफाई के बारे में पर्यवेक्षण.- महिला वार्डर यह देखेगी कि जैसे ही प्रात:काल बन्दियों को बाहर निकाला जाये, वार्ड अच्छी तरह से साफ और स्वच्छ किये जायें, महिला जेल के वर्क -शैड और अन्य समस्त भागों पर झाड लगायी जाये और साफ किये जायें।

126. कार्यों का आबंटन.- अधीक्षक और जेलर के नियंत्रण के अध्ययधीन रहते हये ु महिला वार्डर, श्रम के लिए दंडादिष्ट महिला सि(cid:217)धदोषों को, श्रम के वर्गों के अनसार जिसके ु

लिए चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा प्रत्येक को उत्तीर्ण किया गया है, कार्य का आबंटन करेगी और देखेगी कि कार्यों का सम्यक रूप से पालन हआ है और ऐसे सि(cid:217)धदोष

ु की रिपोर्ट भी करेगी जिसने अपना कार्य नहीं किया है।

127. कपड़ों और बिछौनों की व्यवस्था.- महिला वार्डर देखेगी कि महिला बन्दी अपने आप में और कपड़ों से स्वच्छ हैं, उनके पास कपड़ों की विहित मात्रा है, कि उनके उपयोग में नहीं आ रहे वस्त्र और बिछौने प्रत्येक बन्दी को समनदेशित स्थान पर उचित तौर पर सखाये

ु , समेटे और व्यवस्थित किये गये हैं।

वितरण का सावधानीपर्वक पर्यवेक्षण करेगी

128. भोजन का समचित वितरणु .- महिला वार्डर महिला बन्दियों को भोजन के , और देखेगी कि प्रत्येक को उसका समचित राशन ु प्राप्त होता है और ऐसे किसी मामले की, जिसमें भोजन खराब है या खराब पकाया गया है या मात्रा में अपर्याप्त है, अधीक्षक को रिपोर्ट करेगी।

129. परुष बन्दिु यों के प्रवेश का प्रतिषेध.- (1) महिला वार्डर देखेगी कि जब तक प्राधिकत जेल अधिकारी साथ ना हो , कोई परुष बन्दीु महिला जेल में प्रवेश नहीं करे।

(2) महिला वार्डर ऐसे व्यक्ति की जो, महिला जेल में प्रवेश के लिए बिना प्राधिकार के या उसमें बिना किसी काम के , प्रवेश करता है या ऐसी जेल में प्रवेश का प्रयत्न करता है, अधीक्षक या अन्य जेल अधिकारी को रिपोर्ट करेगी।

130. कोठरी में महिला बन्दी.- (1) जब एक महिला बन्दी महिला अहाता में किसी कोठरी में निरु(cid:217)ध है, महिला वार्डर बन्दियों की मांगों पर ध्यान देने और आत्महत्या को रोकने के लिए कोठरी की चाबियों के साथ अहाते में सदैव उपस्थित रहेगी।

(2) यदि कोई महिला बन्दी रात्रि को कोठरी में परिरु(cid:217)ध की गई है तो महिला वार्डर कोठरी के निकट उपयक्त स्थाु न पर उपस्थित रहेगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 131

131. गेटकीपर.- (1) यदि महिला बन्दी सेल में परिरु(cid:217)ध की गई है तो दो वरिष्ठ और दक्ष प्रमख वार्डर गेटकीपर के कर्तव्यों के पालन के लिए अभिनियोजित किये जायेंगे।

(2) जेलों के अधीक्षक इस उत्तरदायी कर्तव्य के लिए सर्वोत्तम व्यक्ति के चयन में बड़ी सावधानी बरतेंगे।

(3) गेटकीपर के कर्तव्य प्रत्येक तीन मास में बदले जायेंगे।

132. गेटकीपर के कर्तव्यों का बदलना.- (1) प्रथम निगरानी का गेटकीपर जेल खलने ु , जब तक भारमोचित न कर दिया जाये, (cid:217)वारों के पर (cid:212)यटी पर आयेगा और प्रत्येक गेटकीपर

मध्य रहेगा।

(2) गेटकीपर के प्रत्येक बदलाव पर भारमोचित और भारमोचक, दोनों अधिकारियों (cid:217)वारा गेटकीपर रजिस्टर में बदलाव के समय की प्रविष्टि की जाएगी, जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में हो सके गी।

(3) जहां आवश्यक हो, सरक्षा कीु दृष्टि से मख्यु गेटकीपर की सहायता के लिए एक दसरा ू गेटकीपर भी नियोजित किया जा सकता है।

133. गेट रजिस्टर.- (1) गेटकीपर दो गेट रजिस्टर रखेगा, जो यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप में हो सकें गे।

(2) वह समस्त जेल अधिकारियों, बन्दियों और उन अन्य व्यक्तियों, जो जेल से बाहर या अंदर आते और जाते हैं के नाम यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में एक रजिस्टर में अभिलिखित करेगा और दसरे में वह उन समस्तू वस्तुओं, औजार भ(cid:214)डारों का, या जो (cid:217)वारों के माध्यम से या तो जेल के भीतर आते हैं या बाहर जाते हैं, विनिर्दिष्ट प्ररूप में टिप्पण करेगा।

(3) गेटकीपर प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु के प्रवेश और निकास के घंटे और मिनट अभिलिखित करेगा और अपनी सर्वोत्तम क्षमता के अनसारु , जेल से या उसके भीतर किसी भी संपत्ति को अनचित तरीके से हटाने का या जेल परिसर में किन्हीं प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुओं के प्रवेश का निवारण करेगा।

134. गेट और रास्ते पर सफाई.- (1) गेटकीपर, जेलर या नए बन्दियों को प्राप्त करने के लिए प्रतिनियक्तु किये गये अधिकारी की सहायता करेगा।

ु ड़ियों (2) वह मख्यु गेट और उनके मध्य के रास्ते और उसके प्रभार के अधीन रखी हयी बे और अन्य वस्तुओं की सफाई के लिए उत्तरदायी होगा। (3) कोई भी बन्दी मख्यु गेट वाले क्षेत्र में नियोजित नहीं किया जाएगा।

135. गेट के प्रकार.- (1) प्रत्येक जेल के मख्य प्रवेश गेट पर दोहरा गेट होगा , जिसके मध्य में जगह होगी, प्रत्येक गेट में, एक फाटक होगा जिसके एक सरक्षित कसाव होगा जिसे ु

सगमता से बंद किया जा सके ।

(2) भीतरी गेट एक बैटन डोर होगा जिसमें एक आई-हॉल (eye hole) होगा जिससे गेटकीपर किसी व्यक्ति को देख सके जो जेल छोड़कर जा रहा है और यह भी देख सके कि बन्दी गेट को बलपर्वक खोलने की तैयारी से भी

ू तर इक(cid:210)ठे तो नहीं हो रहे हैं।

132 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) बाहरी गेट, लोहे का जालीदार गेट होगा और सामान्य प्रयोजनों के लिए समस्त आना- जाना उप-दरवाजों के माध्यम से ही होगा।

136. गेट खोलने और बंद करने की प्रक्रिया.- (1) गेटकीपर एक समय में एक ही गेट

क्ति खोलेगा और किन्हीं भी परिस्थितियों में, एक साथ दोनों गेट खले नहीं रखेगा भले ही व्यु जिसे गेट से बाहर जाना है वह उच्च पदधारी या बन्दी हो।

(2) दसरा गेट खोलने से पर्व

ू , पहले गेट पर, जिसके माध्यम से उच्च पदधारी या बन्दी गजरता है

ु , सावधानीपर्वक चटकनी लगी होगी और सरक्षित रूप से ता

ु ला लगा होगा।

(3) गेटकीपर, जो इस नियम की उपेक्षा करता है अनशासनात्मक कार्रवाई का दायी होगा।

(4) जेलर यह सनिश्चित करने के लिए भी उत्तरदायी ठहराया जायेगा कि यह नियम कठोरता से पालन किया जाता है।

137. चाबियां रखने की प्रक्रिया.- मख्यु गेट की चाबियां उनके समरूप, य(cid:217)यपि बिल्कल सदृश नहीं

ु , आठ अन्यों के साथ गच्छे में रखी जायेंगी और गेटकीपर की कमर से मजबत चैन से जड़ी होंगी जो बन्दिू

ु यों के लिए चाबियों को अभिप्राप्त करने और उनमें से कौनसी गेट के तालों के लिए उपयक्त होगी को अभिनिश्चित करने को कठिन बनाकर वास्तव में जेल की सरक्षा को बढ़ायेगा।ु 138. चाबियों का सौंपा जाना.- (1) गेटकीपर भीतरी और बाहरी गेट की चाबियां अपनी निजी अभिरक्षा से तब तक नहीं जाने देगा जब तक कि सांय:काल में हवालात परी ू नहीं हो जाती है।

(2) हवालात के पर्ण होने परू , भीतरी गेट के फाटक पर एक दसराू पैडलॉक लगाया जाएगा।

(3) गेटकीपर तब भीतरी और बाहरी गेट के बड़े मड़ने वाले गेट की चाबी जेलर की उपस्थिति में प्रमख वार्डर को सौंप देगा , जो इसे रात्रि में काम नहीं आने वाली चाबियों के साथ गेट की-बॉक्स में रखकर ताला लगायेगा।

(4) गेटकीपर जेलर की उपस्थिति में, भीतरी फाटक की चाबियों में से एक प्रमख वार्डर कोु , जिसे जेल के भीतर गश्त करनी है और भीतरी फाटक गेट की अन्य चाबी रात्रि (cid:212)यटी अधिकारी या रात्रि गश्त अधिकारी को और बाहरी फाटक गेट की चाबी, अन्य चाबियों के साथ, रात्रि गेट संतरी को सौंपेगा।

139. मख्यु गेट के मध्य में मार्ग में रखी जाने वाली वस्तुएं.- मख्यु गेट के मध्य में मार्ग में निम्नलिखित वस्तुएं रखी जा सकें गी, अर्थात ्:-

(क) जेल घड़ी;

(ख) दीवार पर स्थायी रूप से लगाया गया की-बॉक्स, जिसमें ताला लगा हआ होु ;

(ग) मापने वाली छड़;

(घ) उपयोग के लिए तैयार दीवार पर टंगी हई बे

ु ड़ियां और हथकड़ियां; (ङ) गेटकीपर की पस्तु कों और लेखन-सामग्रियों के लिए स्टैंडि ंग डेस्क; (च) आधिकारिक और अनाधिकारिक आगंतकों की सचीु

ू ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 133

(छ) अग्निशमन के लिए, उपकरण, यदि कोई हो;

(ज) रात्रि अलार्मों के मामले में, प्रकाश के लिए वस्तएं ु (टॉर्च इत्यादि); और (झ) बन्दियों की तलाशी के लिए मैटल डिटेक्टर या कोई अन्य इलेक्ट्रानिक गैजेट।

140. बन्दियों की बाहर जाने के लिए प्रक्रिया.- जब बन्दियों को जेल से बाहर या भीतर ले जाना हो तो निम्नलिखित प्रक्रिया का दृढ़ता से पालन किया जाएगा, अर्थात ्:-

(क) गेटकीपर पहले उन्हें भीतरी गेट में से जाने देगा और उसके बाद इसे ताला लगायेगा;

(ख) तब वह जेल छोड़कर जा रहे दल के प्रत्येक सदस्य का परा नाम गेट ू

रजिस्टर में लिखेगा;

(ग) वार्डर, जो प्रभारी है, का नाम और सि(cid:217)धदोष ओवरसियर का नाम जो उसकी सहायता कर रहा है;

(घ) ये प्रविष्टियां सावधानीपर्वक किए जाने पू र, वह बाहरी गेट खोलेगा और यह देखने के लिए कि उसके रजिस्टर में प्रविष्ट कल संख्याु में कोई गलती तो नहीं हो गयी है, बन्दियों को एक के बाद एक गिनेगा;

(ङ) दल में प्रत्येक परिवर्तन के बारे में एक टिप्पण बनाएगा और गेट रजिस्टर में एक बार बनायी गयी दल की सची को मू

ुख्य गेट के माध्यम से उन बन्दियों के गजरने के प्रत्ये

ु क अवसर पर पनु :लिखा जाना आवश्यक नहीं होगा;

(च) दल के बन्दियों के लौटने पर, भीतर वाले गेट पर पहले सावधानीपर्वक ू ताला लगाकर, वह बाहरी गेट खोलेगा और तब उन्हें गेट के मध्य मार्ग में प्रवेश देगा और तब वह बाहरी गेट को ताला लगायेगा और प्रत्येक बन्दी, सि(cid:217)धदोष ओवरसियर और वार्डर का नाम पकारेगाु , प्रत्येक व्यक्ति जैसे ही उसका नाम पकारा जाये

ु , जवाब देगा;

(छ) दल के सही पाये जाने पर, वह भीतरी गेट खोलेगा और यह देखने के लिए कि कल संख्याु में कोई गलती तो नहीं हयी है

ु , जेल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को एक-एक करके गिनेगा; और

(ज) किन्हीं भी परिस्थितियों में, इस प्रक्रिया का विचलन नहीं किया जाएगा और किसी भी बन्दी को जेल छोड़ना अनज्ञात नहीं किया जाएगा जब ु

तक कि वह रक्षा कार्मिक के प्रभार में न हो।

141. बन्दियों के बाहर जाने का प्रतिषेध.- (1) बन्दी, जिन्हें जेल गेट से बाहर जाने के लिए अनज्ञात किया जाता है , अधीक्षक की मंजरी से जेलर (cid:217)वारा विशिष्ट रूप से चयनित किया जाएगा।

(2) यदि गेटकीपर की जानकारी में यह आता है कि बन्दियों में से किसी को नियम के प्रतिकल जेल से बाहर ले

ू जाया जा रहा है तो वह अपनी पस्तक में इस तथ्यु की टिप्पणी134 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) करेगा, इसकी रिपोर्ट तरंत जेलर को करेगा और तत्पश्चा

ु त प्रथम अवसर पर अधीक्षक को देगा।

142. बाहरी लोगों के लिए पास.- गेटकीपर समस्त पदधारियों और आगंतकों की सची ु

तैयार करेगा, जो जेल में प्रवेश करने के लिए हकदार हैं, और गेट पर उनके उपस्थित होने पर वे गेटकीपर (cid:217)वारा अनज्ञात किए जाएंगे

ु , किन्तु गेटकीपर अधीक्षक के पास के बिना बाहरी व्यक्तियों को प्रवेश नहीं देगा।

143. बाहरी व्यक्ति की तलाशी.- (1) उनको छोड़कर जिनके नाम गेटकीपर को दी गयी पदधारियों और नियक्त आगंतकों की सची में सम्मिलित हैं या ऐसे व्य क्ति जो अधीक्षक के विशेष आदेश (cid:217)वारा छट दी गयी है

ू , वह जेल के भीतर आने वाले या बाहर जाने वाले समस्त व्यक्तियों की तलाशी के लिए प्राधिकत होगा।ृ

(2) समस्त पदधारी और नियक्त आगंतकोंु

ु , अधीक्षक के विशेष आदेश से प्रवेश करने वाले आकस्मिक आगंतक और जेल के उच्चु अधिकारियों को तलाशी से सामान्यत: छट दी ू जाएगी।

(3) यदि संदेह का कोई कारण वि(cid:217)यमान हो कि तलाशी से छट प्राप्तू कोई व्यक्ति ऐसी वस्तुएं ला रहे हैं या हटा रहा है, जो जेल के भीतर नहीं लायी जानी या से हटायी नहीं जानी चाहिएं, तो गेटकीपर उस व्यक्ति को गेट के मध्य निरु(cid:217)ध करेगा और जेलर को तत्काल

क्ति की स्वयं तलाशी लेगा, किन्त यह तलाशी किसी बन्दी सचित करेगा जो उस व्यू

ु या अन्य आगंतक की उपस्थिति में नहीं ली जाएगी।

144. विशेष आदेश की प्रतियां टांगना.- इन नियमों के अधीन पारित विशेष आदेशों की प्रति सामान्य सचना के लिए मख्यू

ु दरवाजों के मध्य टंगी हई होंगी।ु

145. बन्दियों की तलाशी.- (1) गेटकीपर उन समस्त बन्दियों की तलाशी लेगा जो दरवाजों के माध्यम से गजरते हैं और जब दरवाजों से गजरने वाले बन्दि

ु यों की संख्या अधिक है तो जेलर, उस समय जब बन्दी बाहरी कार्य के लिये जा रहे हों या वापस आ रहे हों, उसकी सहायता करने के लिए अन्य वार्डरों को विशेष रूप से प्रतिनियक्त कर सके गा। ु (2) यदि किसी अधिकारी या बाहरी व्यक्ति की तलाशी पर ऐसी वस्तु पाई जाती है जो जेल में नहीं लायी या बाहर नहीं ले जाई जानी चाहिए, तो गेटकीपर जेलर को तरंत सचना भेजेगा ु

और यदि बन्दी जेल में कोई वसत लाते हए पाया गया या ले जाते हए पाया गया तो वह इसकी सचना तत्काल देगा।ू 146. चिकित्सा कार्मिक के कर्तव्य.- (1) चिकित्सा कार्मिक, बन्दियों की चिकित्सा और स्वास्थ्य के लिए प्रत्यक्षत: उत्तरदायी होगा और कारागार परिसर में स्वास्थ्यकर परिस्थितियों के न्यूनतम मानकों का अनरक्षण सनिश्चित करेगा। ु

ु

(2) कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा प्रत्येक चिकित्सा कार्मिक के विनिर्दिष्ट कर्तव्य निम्नलिखित क्षेत्रों में समनदिष्ट किये जायेंगे

ु , अर्थात ्:-

(क) निवारक सेवा में, प्रवेश पर समस्त अन्त:वासियों का परीक्षण और कालिक पनु :परीक्षण, जो भी उपचार उपदर्शित हो उसका तत्काल उपबंध, प्रतिरक्षण,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 135 पथक्करण और उनका उपचार जो स्पृ र्शजन्य या संक्रामक दशा में हैं, और अन्त:वासियों और कार्मिकों के लिए भोजन, वस्त्र, उपस्कर, औ(cid:217)योगिक सरक्षाु , पर्यावरणीय और संस्थागत स्वच्छता और आरोग्य, स्वास्थ्य शिक्षा से संबंधित सलाह, सम्मिलित है;

(ख) जेल में आरोग्यकारी सेवाओं के अंतर्गत रोगों का उपचार, दंत चिकित्सा, त्वचा व्याधियों का उपचार, दृष्टि दोषों, श्रवणगोचरता, वाक्शक्ति और अंग-विन्यास का सधारु , कत्रिम अंगृ , कांच के नेत्र, बंधक और अन्य कत्रिमांग यक्तियां उपलब्ध करवाया जाना , विशेष भोजन और व्यायाम तथा भौतिक चिकित्सा होगी; और

(ग) अन्य सामान्य सेवा, जिसमें सम्मिलित है अस्पताल प्रशासन, अस्पताल अनशासनु , बन्दियों का वर्गीकरण, कार्य निर्धारण, अंत:वासियों का नियोजन सामथ्र्य, अपराधियों के कतिपय प्रकारों के लिए, जहां आवश्यक हो, विशेष पर्वोपाय सझानाू

ु दंडादेश के

ु , दंड के अधीन बन्दियों, मत्यृ

अधीन बन्दियों का प्रतिदिन दौरा, रसोई, कैं टीन उपबंधों और प्रदायों, कार्मिकों के चिकित्सीय उपचार का निरीक्षण, संस्थागत प्रबंधन से संबंधित मामलों में अधीक्षक की सहायता करना, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभागों के स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क करना।

147. कल्याण इकाई.- कल्याण कार्मिक, प्राथमिक तौर पर उन बन्दियों के कल्याण से संबं(cid:217)ध होगा जो सधारात्मक कार्यक्रमों के माध्यु म से संस्थागत समायोजन और प्रतिक्रिया की आवश्यकता के लिए व्यक्तिगत वचनबंध रखते हैं।

148. कल्याण कत्यृ कारियों के कर्तव्य.- (1) कल्याण कत्यकारियों के विनिर्दिष्टृ कर्तव्य निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित होंगे, अर्थात ्:-

(क) कल्याण अधिकारी और उसके कत्यृ ; (ख) विधिक अधिकारी और उसके कत्यृ ; और (ग) परामर्शदाता और उसके कत्य।ृ

(2) कल्याण अधिकारी के निम्नलिखित कत्यृ होंगे,-

(क) कल्याण इकाई के कार्य का समन्वयन;

(ख) संस्थागत समायोजन की समस्याओं से निपटने में अंत:वासियों की सहायता करना;

(ग) अंत:वासियों की, उनके परिवारों और आश्रितों के सामने आने वाली समस्याओं से निपटने में, सहायता करना;

(घ) कारागार के भीतर और बाहर उपलब्ध संसाधनों के साथ बन्दियों की सधारात्मक आवश्यु कताओं को जोड़ना;

(ङ) अभिविन्यास, वर्गीकरण और पनु :वर्गीकरण कार्यक्रम में भाग लेना; (च) अंत:वासी और प्रशासन के मध्य समझ को सकर बनानाु ;

136 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(छ) कारागार सरक्षा और अनशासन बनाए रखने में कारागार प्राधिकारियों की सहायता करना;

(ज) पर्वनिर्मक्ति कार्यक्रम में भाग लेना और अंत :वासी की निर्मक्ति के पश्चाु त ् उसके लिए उपयोगी संपर्क स्थापित करने में सहायता करना;

(झ)बन्दियों के पनर्वास के लिए संसाधनों की पहचान करना ;

(ञ) समय से पर्व निर्मक्ति या फर्लो और पैरोल छ(cid:210)टी का ध्या

ु न रखना और अधीक्षक को रिपोर्ट करना;

(ट) कल्याण और परोपकारी क्रियाकलापों का जिम्मा लेने के लिए गैर सरकारी संगठनों से संपर्क करना;

(ठ) बन्दियों के बेहतर उपचार के लिए चिकित्सीय कार्मिकों से संपर्क करना; और (ड) अंत:वासियों को शिक्षित करने के लिए शिक्षकों से संपर्क करना और उसका ध्यान रखना।

(3) विधिक अधिकारी के निम्नलिखित कत्य होंगे

ृ ,-

(क) कारागार की परिसीमा के भीतर बन्दियों के मानवाधिकारों के संरक्षण पर कारागार प्राधिकारियों को सलाह देना;

(ख) बन्दियों के विधिक और प्रक्रियात्मक अधिकारों का निर्वचन करना;

(ग) न्यायालयों में लंबित समस्त कारागार मामलों को निपटाने वाले कारागार प्राधिकारियों की सहायता करना;

(घ) निर्धन बन्दियों के लिए नि:शल्क विधिक सहायता की व्यु वस्था करना; (ङ) योग्य मामलों के लिए याचिका और अपीलें तैयार करना;

(च) विशेष न्यायालय, लोक अदालत और वीडियो कांफ्रें सिग आयोजित करने में कारागार प्राधिकारियों की सहायता करना; और

(छ) समस्त कारागार मामलों पर न्यायिक निर्णयों और निदेशकों के साथ-साथ कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा रखे जाने वाले करारों, संविदाओं, शपथपत्रों और न्यायालय दस्तावेजों को सम्मिलित करते हए विधिक संबंधों वाले ु समस्त मामलों में कारागार प्रशासन को सलाह देना।

(4) परामर्शदाता के कत्यों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे ,-

(क) अंत:वासियों की संवेगात्मक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटना;

(ख) कारागार के भीतर और बाहर उनके परिवारों के संबंध में समायोजन की समस्याओं का सामना कर रहे बन्दियों के लिए परामर्श उपलब्ध करवाना;

:वासियों की, उनकी आत्मछवि, (ग) सधारात्मक उपचार के लिए अंतु

आत्मविश्वास और अभिप्रेरणा विकसित करने में, सहायता करना;

(घ) अंत:वासियों (cid:217)वारा सामना की जा रही समस्याओं को समझने में कर्मचारिवंद की सहायता करना ; और

(ङ) संबंधित मामलों में मनोचिकित्सक की सहायता करना।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 137

149. शैक्षिक कार्मिक के कर्तव्य.- कारागारों में शिक्षा, सधारात्मक उपचार का ु

महत्वपर्ण साधन होने के कारण शैक्षिक कार्मिक बन्दि यों के लिए शिक्षा का व्यापक कार्यक्रम प्रस्तावित करेगा जिसमें विभिन्न कत्यृ कारी निम्नलिखित क्षेत्रों में अपने विनिर्दिष्ट कर्तव्यों का पालन करेंगे, अर्थात ्:-

(क) स्वास्थ्य, शैक्षिक, सामाजिक और नैतिक शिक्षा के लिए विधिक शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करना;

(ख) कारागार शिक्षा को मख्यधारा शिक्षा से जोड़ना ;

(ग) नवागन्तुक अंत:वासियों को उनकी शैक्षिक अभिवत्तिृ , योग्यताओं और अभिरुचियों के अवधारण के लिए छांटना;

(घ) वर्गीकरण समिति के कार्य में भाग लेना;

(ङ) साक्षरता, सामाजिक-सांस्कतिक ृ और आध्यात्मिक विकास कार्यक्रम संचालित करना;

(च) अंत:वासियों की शैक्षिक प्रगति का आवधिक निर्धारण करने के लिए जांच और परीक्षाएं आयोजित करना और, जब आवश्यक हो, तब शैक्षणिक कार्यक्रम परिवर्तित करना;

(छ) पर्याप्त पा(cid:211)य सामग्री के साथ पस्तु कालय का अनरक्षणु ; और (ज) श्रव्य-दृश्य सविधाएं उपलब्ध करवाना।ु

150. तकनीकी कार्मिक के कर्तव्य.- (1) तकनीकी कार्मिक, सधारात्मक प्रक्रिया के ु

महत्वपर्ण घटक के रूप में उत्पा

ू दन कार्य के व्यावसायिक प्रशिक्षण और विभिन्न कार्यक्रमों के विकास के लिए उत्तरदायी होंगे।

(2) जब तकनीकी अर्हताधारी और प्रशिक्षित कर्मचारिवंद को आर्थिक पनर्वास के लिए ज्ञान और कौशल उपलब्ध करवाया जाता है, अन्य तकनीकी कर्मचारिवंद कारागार अवसंरचना का ृ

समचित अनरक्षण सनिश्चित करेगा।

(3) तकनीकी कार्मिक निम्नलिखित क्षेत्रों में अपने कत्योंृ का पालन करेंगे, अर्थात ्:-

(क) अन्त:वासियों की व्यावसायिक अभिवत्ति जांचनाृ , साक्षात्कार लेना और अन्त:वासियों के व्यावसायिक इतिहास, कौशल योग्यताओं और अभिरुचियों के बारे में डाटा संगहीत करनाृ ;

(ख) अन्त:वासियों के लिए कार्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सझानाु ; (ग) व्यावसायिक प्रशिक्षण परियोजनाओं के लिए योजना तैयार करना;

(घ) अंत:वासियों को कार्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण की शिक्षा देना;

(ङ) प्रशिक्षण प्रयोजनों के लिए सेवा के संसाधनों और अनरक्षण इकाई का ु

उपयोग;

(च) कला और हस्तशिल्प परियोजनाओं की व्यवस्था करना;

(छ) अंत:वासियों के लिए व्यावसायिक परीक्षाओं की व्यवस्था करना;

(ज) नवप्रवेशित बन्दियों का प्रशिक्षण;

138 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(झ) बन्दियों के प्रशिक्षण के बारे में प्रगति रिपोर्टों का अनरक्षण करनाु ; (ञ) कार्य रीति में सधारों का सझाव देना

ु ;

(ट) कर्मशाला में उपस्करों और मशीनों को अच्छी कार्य स्थिति, अभिरक्षा में रखना, दकानों और फै क्ट्रिु यों का अनरक्षण रखनाु ;

(ठ) कर्मशालाओं और फै क्ट्री क्षेत्रों में सरक्षा उपायों को सनिश्चित करना

ु ;

(ड) उनके प्रभार के अधीन क्षेत्र में अनशासन बनाए रखना , आपात स्थितियों से निपटना;

(ढ) अंत:वासियों को कार्य का आबंटन;

:वासियों के मस्टररोल बनाए (ण) विभिन्न अनभागों में कार्य कर रहे अंतु

रखना;

;

(त) अंत:वासियों को उत्पादन औजारों और वस्तुओं का आपर्त करनाू ; (थ) उत्पादन की गणवत्ता और परिमाण का पर्यवेक्षणु (द) कार्य-पत्रक का अनरक्षणु ; (ध) लक्ष्य निर्धारित करना और मजदरी का प्रभाजनू ; (न) भंडारी से कच्ची वस्तु की मांग करना, उनके प्रभार में कच्ची वस्तु का भंडारण करना, उनके प्रभार में कच्ची वस्तु और विनिर्मित वस्तओं के लेखे ु

रखना, विनिर्मित वस्तुओं का भंडारी को प्रेषण, उनके प्रभार के अधीन भंडारों की मासिक जांच और संबंधित प्राधिकारियों को उनकी रिपोर्ट करना;

और

(प) उनके नियंत्रण के अधीन वर्क शेड के लिए कार्य-योजना तैयार करना और उन्हें प्रभारी अधिकारी को अग्रेषित करना।

151. अनरक्षण कर्मचारिवन्द के कर्तव्यु

ृ .- अनरक्षण कर्मचारिवन्दु

ृ निम्नलिखित क्षेत्रों में अपने कत्योंृ का पालन करेंगे, अर्थात ्:-

(क) कारागर भवनों का अनरक्षण और मरम्मु त करना; (ख) मशीनों, औजारों और उपस्करों और परिवहन सेवा का अनरक्षण और ु

सर्विस;

ु , जल आपर्त संयंत्र और शक्ति संयंत्र ू

(ग) वि(cid:217)यत लाईनोंु , नलसाजी सविधाओं का अनरक्षण और सर्विसु ; और

(घ) आपात उपस्कर जैसे कि अग्निशमन उपस्कर और दर्घटना निवारण उपायों ु

की कालिक जांच।

152. कषि कार्मिकों के कर्तव्यृ

.- (1) अधिकांश बन्दियों की ग्रामीण पष्ठभमि को ृ ू ध्यान में रखते हएु , कारागारों में कषि का प्रशिक्षण और विकास भी बहत महत्वपर्ण कत्य हैं। (2) कृ षि कार्मिक इस क्षेत्र में उनके कौशलों के उन्नयन के लिए उत्तरदायी होंगे।

(3) कषि कार्मिक के (cid:217)वारा पालन किये जाने वाले विनिर्दिष्ट कर्तव्य निम्नानसार उपदर्शित ु

किये गये हैं, अर्थात ्:-

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 139

(क) कषि और बागवानी से संबंधित समस्त मामलों के साथ संव्यवहार करना ;

, मस्टररोलों का रखा जाना, किये गये (ख) बन्दियों को कषि कार्य का वितरणृ

कार्य का निर्धारण और उनकी मजदरी का प्रभाजन करना ;

(ग) प्रशिक्षण परियोजनाओं की योजना बनाना, अंत:वासियों को कषि और बागवानी ृ

की समन्नु त रीति और कार्य का प्रशिक्षण देना;

(घ) अंत:वासियों के प्रशिक्षण के बारे में प्रगति रिपोर्ट रखा जाना;

(ङ) भंडारी से वस्तु की मांग करना, वस्तु का भंडारण, उपस्कर, वस्तु और उत्पादों का लेखा रखा जाना और मासिक स्टॉक लेना;

(च) कषि और संबंधित कार्य के लिए योजना तैयार करना ;

ु ; और

(छ) औजारों और उपस्करों, पशधन की सरक्षा और अनरक्षणु (ज) उनके प्रभार के अधीन क्षेत्र में अनशासन रखा जाना

ु , प्रतिदिन निरीक्षण दौरे, फार्मों का साप्ताहिक रात्रि निरीक्षण और समस्त आपात स्थितियों से निपटना।

153. लिपिकवर्गीय कार्मिक.- (1) लिपिकवर्गीय कार्मिकों के कर्तव्य निम्नलिखित रीति से व्यवस्थित होंगे, अर्थात ्:-

(क) बन्दियों के साथ उनके कर्तव्यों को बांटने की कोई गंजाइश नहीं होगीु ; और (ख) अधीक्षक (cid:217)वारा लिपिकवर्गीय कार्मिक को, उसके (cid:217)वारा धारित पद और आवश्यकताओं के अनसार कर्तव्य समदेशित किये जायेंगे।

(2) बजट की तैयारी, समस्त शाखाओं और भंडारों के लेखाओं के अनरक्षणु , लेखे और नकद, समस्त भंडारों और लेखा रजिस्टरों, वित्तीय विवरणियों, पत्रिकाओं और सांख्यिकी, समस्त भंडारों का मासिक स्टाक लेने के लिए लेखा कार्मिक या रोकड़िया होगा।

(3) समस्त भंडारों यथा अनाज, रसद, आपर्त

ू , कच्ची वस्तुओं, उपसाधन, विनिर्माण वस्तओं

ु , अंत:वासी उपस्कर और निजी उपस्कर, अनपयोज्य स्टाु क और विविध भंडारों के प्रभारी रहने के प्रयोजन के लिए भंडारपाल होगा।

अध्याय 6

बन्दी का प्रवेश और बन्दी का वत्त पत्रृ

लेकर बंद होने के समय तक, जो कि सर्यास्त पर होता है

154. बन्दियों के प्रवेश का समय.- (1) जेलर सामान्यत: जेल खलने के पश्चाु त से ् , नये बन्दियों को किसी भी समय प्रवेश करायेगा।

140 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) ताला लगाने के पश्चात जे

् लर, विचारण कर रहे मजिस्ट्रेट जिससे ऐसा बन्दी संबंधित है के वारंट के अतिरिक्त विशेष लिखित आदेश के सिवाय, किसी नये बन्दी को प्रवेश नहीं करायेगा।

(3) ताला लगाने के पश्चात सि(cid:217)धदोष वार्डों में किसी भी नये सि(cid:217)धदोष बन्दी को प्रवेश नहीं कराया जाएगा।

(4) ताला लगाने के पश्चात सि(cid:217)धदोष होने पर जेल में लाये गये बन्दी को रात्रि के लिए एक कोठरी या विचाराधीन वार्ड में निरु(cid:217)ध किया जाएगा।

(5) सि(cid:217)धदोष बन्दियों को कारावास भगतने के लिए उपु -जेलों में भी निरु(cid:217)ध या अंतरित किया जा सके गा।

155. प्रवेश के लिए शर्तें.- (1) किसी भी व्यक्ति को एक बन्दी के रूप में जेल में प्रवेश नहीं कराया जाएगा जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की रिट, वारंट या आदेश उसके साथ न हो।

् , वारंट या आदेश होगा, भले ही दो या अधिक बन्दी (2) प्रत्येक बन्दी के लिए पथक रिटृ संयक्तु त: आरोपित किए गए हैं।

(3) किसी भी मामले में बन्दी को प्रोडक्शन वारंट के आधार पर जेल में निरु(cid:217)ध नहीं किया जायेगा।

156. बन्दी की पहचान का सत्यापन.- (1) बन्दी को प्रवेश देने से पर्व

ू , उप-जेलर वारंट का परीक्षण करेगा और बन्दी को उसके नाम और अन्य विशिष्टियों के विषय में प्रश्न पछ कर और बन्दी

ू के पहचान चिह्नों, जो वारंट में उल्लिखित हैं, को सत्यापित करके स्वयं का समाधान करेगा कि यह वही व्यक्ति है जो वारंट में निर्दिष्ट किया गया है।

(2) यदि बन्दी उप-जेलर को जवाब देने से इंकार करता है या वारंट में दर्ज प्रविष्टियों या उसकी सत्यता से इंकार करता है, (cid:212)यटी अधिकारी पलिस के प्रभारी अधिकारी या सैन्य एस्कॉर्ट को सचना के आधार पर बन्दी

ू की पहचान करने के लिए निवेदन करेगा कि बन्दी वही व्यक्ति है जिसका नाम वारंट में है और यदि पलिस अधिकारी ऐसा करने में असफल रहता है तो जेलर या उप-जेलर बन्दी को प्रवेश देने से इंकार कर देगा।

157. वारंट के सत्यापन की प्रक्रिया.- (1) यदि, किसी मामले में, किसी वारंट की वैधता या कारागार में प्रवेश दिये गये किसी बन्दी के साथ उसके (cid:217)वारा अभिप्राप्त सपर्दगी ु के आदेश के बारे में या किसी व्यक्ति की सक्षमता जिसकी प्राधिकारिक मद्रा और हस्ताु क्षर, दंडादेश को पारित करने और ऐसे वारंट को जारी करने के लिए, उस पर लगाये गये हैं, के बारे में संदेह हो, तो वह इसमें इसके पश्चात उपबंधित रीति से कार्यवाही करेगा।

(2) यदि किसी वारंट या आदेश में, कोई गलती या लोप, जो अधीक्षक की राय में, मात्र अन्वेक्षा या भल के कारण हआ है

ु , या यदि पारित दंडादेश या आदेश, य(cid:217)यपि इसे पारित करने वाले न्यायालय जिसने इसे पारित किया है, की सक्षमता के भीतर है, किसी भी रूप में ू था अनियमित है तो वह ऐसे न्यायालय के संदर्भ के अध्यधीन रहते हएु , त्रटिपर्ण है या अन्यु यथास्थिति, आदेशों के लिए, बन्दी को अभिप्राप्त कर सके गा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 141

158. वारंटों की अभिरक्षा और इनकी व्यवस्था.- (1) बन्दियों के वारंट छोड़े जाने की तारीखों के अनसार व्यवस्थु ◌ित किये जायेंगे और मासिक बंडलों में रखे जायेंगे, विशिष्ट मास में छोड़े जाने वाले बन्दियों के वारंट एक बंडल में और प्रत्येक बंडल मास और वर्ष के साथ बाहर डाके ट किये गये रखे जायेंगे और ऐसे बंडल बंद दराज या अलमारी में रखे जायेंगे, जिसकी चाबियां जेलर या उप-जेलर के पास रखी जायेंगी।

(2) निर्णयों, अपील न्यायालयों के आदेशों और सरकार के आदेशों, बन्दियों की निस्तारित

-व्यवहार, वर्गीकरण और अन्य संब(cid:217)ध याचिकाओं, साथ ही जर्माने के संदाय से संबंधित पत्रु

अभिलेखों की प्रतियां पथक कतार में रखी जायेंगी और बन्दी जिससे मामला संबंधित है , के वारंट के साथ रखे जायेंगे।

159. वारंट की परीक्षा.- (1) समस्त वारंट यह अभिनिश्चित करने के लिए परीक्षित किये जायेंगे कि वे दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के उपबंधों की पष्टि करते हैं।ु

टिप्पण 1: बिना यह विनिर्दिष्ट करते हए कि कारावास साधारण है या कठोर , कारावास आदेशित करने वाला वारंट या अदिनांकित, अहस्ताक्षरित या अमद्रांकित वारंट ु

सधार के लिए लौटाया जाएगा।

टिप्पण 2: वारंट में आदेशित एकांत परिरोध की अवधि दंडादेश की कालावधि पर निर्भर होगी और उससे अधिक नहीं होनी चाहिए जो भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 73 के अधीन अनज्ञात है।ु

टिप्पण 3: कारागार अधीक्षक के पास वारंट, जिस पर मद्रा के साथ हस्ता

ु क्षर नहीं हैं, पर कारागार में बन्दी को अभिप्राप्त या निरु(cid:217)ध करने से इंकार करने की शक्ति होगी।

टिप्पण 4: समस्त वारंट न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, जो इसे जारी करता है, (cid:217)वारा पर्ण ू हस्ताक्षरित (आ(cid:217)यक्षर नहीं) होने चाहिए और उस पर न्यायालय की मद्रा लगी ु

होनी चाहिए।

टिप्पण 5: उन व्यक्तियों के मामले में, जिन पर पथक दंडादेश पारित किये गये हैं , उन तारीखों जिनसे सपर्दगी के वारंट में प्रत्येक दंडादेश प्रभावी होगा , का विवरण देने में सावधानी रखी जानी चाहिए।

टिप्पण 6: विचाराधीन बन्दियों के मामले में, मध्यवर्ती अभिरक्षा के लिए सपर्दगी वारंट उक्तु ु अनदेशों के संदर्भ में अधिकतम संभव सावधानी से तैयार किया जाना चाहिए।

टिप्पण 7: जहां उक्त अनदेश कार्यान्वित नहीं किये गये हैं , कारागार अधीक्षक किसी व्यक्ति को प्रवेश देने से इंकार नहीं करेगा, कित उसे संबंधित मजिस्ट्रे

ु ट का उस गलती पर तत्काल ध्यान आकर्षित कराना चाहिए और इसके तत्काल सधार के लिए ु कहना चाहिए।

टिप्पण 8: कारागार में निरु(cid:217)ध बन्दियों को छोड़े जाने या दंडादेशों के परिहार के लिए और बन्दियों को जमानत पर छोड़े जाने के लिए वारंट और जर्मानों के संदाय की ु

कारागार प्राधिकारियों को प्रेषित की जाने वाली सचनाएं सदैव ही आदेश जारी ू142 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) करने वाले अधिकारी (cid:217)वारा हिन्दी में तैयार की जानी चाहियें और ऐसे अधिकारी (cid:217)वारा पर्ण हस्ताू क्षरित होनी चाहिए और उसके न्यायालय की मद्रा से मद्रांकित ु

होनी चाहिए और न्यायालय के संदेशवाहक के माध्यम से या कारागार प्राधिकारियों या डाक अभिकरण के माध्यम से या ऑनलाइन रीति से प्रेषित की जायेंगी और बन्दियों के मित्रों या रिश्तेदारों के माध्यम से नहीं।

टिप्पण 9: प्रत्येक बन्दी के लिए पथक वारंट या नोटिस हो

् ना चाहिए चाहे दो या अधिक बन्दी संयक्त रूप से आरोपित या सि(cid:217)धदोष किये गये हैं।

(2) जब वारंट सधार के लिए लौटाया जाता है तो जब तक मल लौटाया नहीं जाता है , एक प्रति वारंट अलमारी के समचित कक्ष में रखी जाएगी।ु

(3) जब कारागार के प्रभारी अधिकारी को, निष्पादन के लिए उसे प्रेषित वारंट या आदेश की वैधता पर या ऐसा वारंट या आदेश जारी करने के लिए उस व्यक्ति की सक्षमता, जिसकी प्राधिकारिक मद्रा और हस्ताु क्षर उस पर किए गए हैं, पर संदेह है तो वह मामले को संबंधित न्यायालय को निर्दिष्ट करेगा।

(4) प्रवेश रजिस्टर और रिलीज डायरी में आवश्यक प्रविष्टियां करने के पश्चात और पर्ववर्ती ्

नियमों में उल्लिखित प्रक्रिया की पर्णता परू , जो बन्दी के प्रवेश के आगामी दिन के भीतर सामान्यत: की जाएगी, जेलर इन रजिस्टरों और बन्दियों को उनके वारंटों के साथ अधीक्षक के समक्ष लायेगा, जो स्वयं का समाधान करेगा कि प्रविष्टियां (जिन्हें वह आ(cid:217)यक्षर करेगा) सही हैं और कि नियमों के उपबंध क्रियान्वित किये गये हैं।

(5) प्रत्येक बन्दी को उसके वारंट पर उसकी संपत्ति की सचीू , जेलर या अधीक्षक की उपस्थिति में पढ़कर सनायी जाएगी और यदि बन्दी

ु इसे सही होना अभिस्वीकत करता है तो ृ

अधीक्षक प्रविष्टि पर आ(cid:217)यक्षर करेगा।

(6) अधीक्षक उसी समय किसी बन्दी के उपचार से संबंधित कोई विशेष आदेश लिखेगा जो उसके वत्त पत्र में आवश्यक हो सकता है।

160. बन्दी की संपत्ति की जांच.- संबंधित कारागार अधिकारी, बन्दियों की संपत्ति का प्रवेश के समय सावधनीपर्वक परीक्षण करेगा जो बन्दी की अभिस्वीकति के साथ ससंगत रजिस्टर में अभिलिखित की जाएगी और उसी समय प्रवेश रजिस्टर, जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में हो सके गा, में अंकित की जाएगी।

161. बन्दी और उसके वस्त्रों की धलाईु .- (1) कारागार में प्रवेश पर, प्रत्येक बन्दी से उसकी स्वयं की और उसके वस्त्रों की अच्छी तरह से धलाई करना अपेक्षित होगा और महिला बन्दियों और उनके वस्त्रों की धलाई महिला यार्ड में की जाएगी।

(2) यदि वह जहां से आया है, उसके आस-पास में कोई महामारी फै ली हई है तो उसके वस्त्रु भी कीटाणरहित किये जायेंगे और ऐसे मामलों में बन्दी व्यक्ति के शरीर को साफ करने का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 143

162. प्रवेश पर बन्दियों की तलाशी.- (1) प्रवेश के समय जेल पदधारी (cid:217)वारा बन्दियों की गहन तलाशी ली जाएगी। महिला बन्दियों की तलाशी महिला कर्मचारिवन्दृ (cid:217)वारा बंद कमरे में ली जाएगी।

ु एकांतता के साथ सम्यक ध्यान से की (2) बन्दियों की तलाशी शिष्टता और यक्तियक्तु जाएगी।

163. बन्दियों से वस्तएं हटाया जानाु .- (1) तलाशी के दौरान, बन्दियों से प्रत्येक वस्तु, चाहे वस्त्र, बिस्तर, आभषणू , धन, दस्तावेज हो या अन्यथा को ले लिया जाएगा।

(2) विचाराधीन बन्दियों से निजी वस्त्रों को छोड़कर बाकी सभी वस्तएं ले ली जायेंगी । ु

164. स्वागत वार्ड.- (1) कारागार में पहली बार प्रवेश पर बन्दियों को तब तक एक अलग स्वागत वार्ड में रखा जाएगा जब तक कि कारागार में उसके स्थान की प्रारंभिक औपचारिकतायें पर्ण नहीं हो जाती हैं। ू (2) बन्दियों के प्रवेश पर निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जायेंगी, अर्थात ्:-

(क) बाल काटना और दाढ़ी बनाना, साबन और कीटाणनाशक लोशन जारी करना ;

(ख) बन्दियों के व्यक्तिगत वस्त्रों और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का कीटाणशोधन ु और भंडारण;

(ग) जेल के कीटाणरहित वस्त्रु , बिस्तर और बर्तन जारी करना; (घ) आधारभत पथक्करण सि(cid:217)धांतों के अनसार प्राधिकत निजी सामान और निवास जारी करना;

(ङ) चौबीस घंटे के भीतर अच्छी तरह से चिकित्सा परीक्षा करना;

(च) बन्दियों की तात्कालिक और अत्यावश्यक आवश्यकताओं जैसे पत्र, मलाकातु , परिवार कल्याण या अन्य किन्हीं तात्कालिक निजी समस्याओं को देखना;

(छ) जेलर या प्रवेश के प्रभारी उप-जेलर (cid:217)वारा सपर्दगी पत्रोंु ु , पहचान चिह्नों, रजिस्टरों की प्रविष्टियों, बन्दी की नकद संपत्ति, अपील और अन्य विधिक मामलों का सत्यापन करना;

; और

(ज) अंगली छाप और फोटोग्राफु (झ) नशे के आदियों की पहचान करना।

165. बन्दियों की चिकित्सा परीक्षा.- (1) प्रवेश पर बन्दियों का भार चिकित्सा अधिकारी की उपस्थि ति में लिया जाएगा और उसके (cid:217)वारा सत्यापित किया जाएगा।

(2) यदि बन्दियों के कारागार में प्रवेश के समय चिकित्सा अधिकारी उपस्थित नहीं है तो यदि संभव हो तो, प्रवेश के दौरान उनका वजन चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा किया जाएगा और किसी भी मामले में अगली सबह के पश्चाु त नहीं किया जाएगा।्

(3) चिकित्सा अधिकारी प्रवेश पर बन्दी की सावधानीपर्वक परीक्षा करेगा ू और वह स्वयं स्वास्थ्य अनवीक्षण को अभिलिखित करेगा।

(4) चिकित्सा अधिकारी बन्दी के पहचान चिह्नों की प्रविष्टि का भी पर्यवेक्षण करेगा जो चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा अंकित किये जा सकें गे।

144 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(5) बन्दियों की चिकित्सा परीक्षा सम्यक शिष्टता के साथ और यक्तियक्त एकां

ु तता के साथ की जाएगी।

166. बन्दी की आय का अवधारणु .- यदि बन्दी अपनी आय से छोटा दिखाई दे रहा ु

या रही है तो मामला संबंधित न्यायालय को वापस भेजा जायेगा, जो उसकी आय के ु अवधारण पर सम्यक चिकित्सा परीक्षा के पश्चा

कि वे किशोर न्याय ् त आगे निदेश देगा क्यों

(संतानों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (2016 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अधीन कोई किशोर किसी भी मामले में कारागार में नहीं रखा जाएगा और स्थापित किशोर संस्था को भेजे जाते हैं।

167. बीमार या घायल बन्दी.- समस्त बन्दियों को प्रवेश के तत्काल पश्चात ् चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा देखा जायेगा और यदि कोई भी बीमार या क्षतियों, घावों या हिंसा के अन्य चिह्नों से पीड़ित पाया जाता है तो उसकी सामान्य दशा, प्रमख लक्षण और क्षति के ु

मामले में, संख्या, अवस्थिति, आकार, स्वरूप और क्षति, घावों या नील का टिप्पण तत्काल प्रवेश रजिस्टर में किया जाएगा।

168. जेल में महामारी के मामले में पर्वावधानीू .- (1) यदि नये प्रवेशों के लिए कोई सम्प्रेक्षण या पथक्करण वार्ड है तो नए प्रवेशितों को वहां रखा जाएगा जब तक कि चिकित्सा अधिकारी निदेश न दे कि उन्हें अन्य बन्दियों के साथ रखा जाये।

(2) यदि कोई महामारी वि(cid:217)यमान है और जेल के बाहर नव प्रवेशितों के लिए यथा उपबंधित आवास हैं, तो जब तक कि चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा बन्दियों के प्रवेश के लिए आदेश नहीं दिया जाये, उनको जेल के भीतर प्रवेश नहीं दिया जाएगा और ऐसे बन्दियों को तत्काल आवश्यक बिछौना और ठंड से संरक्षण उपलब्ध करवाया जाएगा।

(3) जेल में प्रथम प्रवेश पर बन्दी को चिकित्सा अधिकारी के विवेकाधिकार पर, ऐसी कालावधि के लिए संगरोध में रखा जाएगा, जो उसकी राय में आवश्यक हो।

(4) समस्त नये प्रवेशित बन्दी, उनके प्रवेश के अगली सबह सामान्यु त: चिकित्सा अधिकारी के समक्ष लाये जाऐंगे और तब वह प्रवेश रजिस्टर और बन्दी के वत्त पत्र में प्रविष्टृ बन्दी की प्रवेश पर आयु, स्वास्थ्य के साथ ऐसी विशिष्टियों या पर्ण रुग्णू ता जो उसे ज्ञात हो, प्रवेश पर वजन, व्यक्ति पर किन्हीं घावों के चिह्न और बन्दी के कठोर कारावास के मामले में, श्रम की श्रेणी जिसके लिए बन्दी उपयक्त है

ु , के साथ अन्य विचार जो वह आवश्यक पाता हो, के संबंध में अभिलिखित करेगा या करवायेगा।

169. छोड़े जाने की तारीख का अभिलेख.- (1) सि(cid:217)धदोषों के मामले में, उस तारीख की जिस पर दंडादेश समाप्त होगा, प्रविष्टि सि(cid:217)धदोष रजिस्टर में की जाएगी, जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में हो सके गा।

(2) यदि सि(cid:217)धदोष तीन मास से कम के दंडादेश के अधीन हैं, तो उस संख्या की प्रविष्टि रिलीज डायरी में उस तारीख के अधीन की जायेगी, किन्तु यदि दंडादेश तीन मास या अधिक है तो समाप्ति की तारीख की प्रविष्टि उसके परिहार पत्र में की जायेगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 145

(3) उसी समय पर, बन्दी का रजिस्ट्रीकरण संख्यांक, नाम, दंडादेश, दंडादेश की तारीख और छोड़े जाने की तारीख उसके वारंट पर पष्ठां

ृ कित की जायेगी और वारंट की विषय-वस्त और ु

ृ कन सक्षम सि(cid:217)धदोष रजिस्टर में प्रविष्टियों के परीक्षण और तलना के पश्चाु त पष्ठां अधिकारी (cid:217)वारा हस्ताक्षरित किया जायेगा।

(4) उन मामलों में जहां जर्माने के व्यतिक्रम में दंडादेश पारित किया गया है , छोड़े जाने की दोनों वैकल्पिक तारीखें वारंट पर पष्ठां

ृ कन में, सि(cid:217)धदोष रजिस्टर, रिलीज डायरी और परिहार पत्र में सम्मिलित की जायेंगी।

.- सि(cid:217)धदोषों को कठोर कारावास या 170. श्रम के समचित वर्ग का प्रमाणीकरणु

आजीवन कारावास के दंड के मामले में, चिकित्सा अधिकारी सि(cid:217)धदोष रजिस्टर और वत्त पत्र ृ के समचित स्तंभ में श्रम के वर्ग को प्रविष्ट करेगा जिस पर वह नियोजित किया जाएगा और सि(cid:217)धदोष के वत्त पत्र में भी तत्समान प्रविष्टि की जाएगी।

171. अभिविन्यास.- (1) प्रत्येक नया प्रवेशित बन्दी, एक अभिविन्यास कार्यक्रम के अध्यधीन होगा, जिससे नियमों और विनियमों के बारे में उसे सचित किया जा सके । । ू (2) बन्दी के रूप में उसके अधिकार और कर्तव्य, कारागार के सहजदृश्य भागों पर उपदर्शित किये जायेंगे और उसे उस भाषा में समझाये जायेंगे जो वह समझता है।

(3) कारागार के भीतर समचित स्थान विनिश्चित करने के लिए पदधारियों (cid:217)वारा उसकी पष्ठभमि और आवश्यकताओं का सामा न्य निर्धारण भी किया जाएगा।

172. वत्त पत्रृ .- (1) प्रत्येक बन्दी के उसके जेल में प्रवेश पर तत्काल, विनिर्दिष्ट प्ररूप में वत्त पत्र तैयार किया जायेगा जिसमें , शीर्षक (cid:217)वारा अपेक्षित सचना के अलावाू , ऐसे बन्दी के जेल जीवन में महत्व की प्रत्येक घटना और विशेष रूप से उससे संबंधित प्रत्येक आदेश समय पर और कालानक्रमिक अनक्रम में अभिलिखित किया जाएगा।

(2) वत्त पत्र की प्रत्येक प्रविष्टि उस अधिकारी (cid:217)वारा , जो इसे करता है, दिनांकित और आ(cid:217)यक्षरित की जाएगी और किसी सि(cid:217)धदोष को वत्त पत्र में कोई प्रविष्टि करना ृ अनज्ञात ु नहीं किया जाएगा।

173. वत्त पत्र में प्रविष्टियां .- (1) वत्त पत्र को सही रूप से तैयार करने और अनरक्षित करने का कर्तव्य जेलर (या अधीक्षक (cid:217)वारा विशेष रूप से प्रतिनियक्त अन्यु अधिकारी) पर न्यायगत होगा जो उत्तरदायी होगा कि अधीक्षक और चिकित्सा प्राधिकारियों (cid:217)वारा की जाने वाली प्रविष्टियों के अलावा, समस्त प्रविष्टियां प्रविष्टि करने वाले अधिकारी के आ(cid:217)यक्षर के अधीन सम्यक रूप से और सही रूप से की गई हैं।

(2) जेलर किसी वत्त पत्र पर किसी अनियमितता या किसी प्रविष्टि का लोप संबंधित अधिकारी के ध्यान में लाएगा, यदि आवश्यक हो, और मामले की अधीक्षक को रिपोर्ट करेगा।

174. वत्त पत्र का विषयृ -वस्तु.- प्रत्येक वत्त पत्र में निम्नलिखित विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी, अर्थात ्:-

(क) बन्दी का नाम, संख्यांक और बन्दी की पहचान के लिए आवश्यक अन्य विशिष्टियां;

146 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ख) बन्दी के संबंध में, पारित प्रत्येक आदेश और दिये गये निदेशों और दिये गये दंड की संक्षिप्त प्रविष्टि;

(ग) बन्दी को प्रभावित करने वाली, किसी महत्व की प्रत्येक अन्य घटना, जो उसके परिरोध में रहने के दौरान होती है, का संक्षिप्त अभिलेख; और (घ) प्रत्येक सि(cid:217)धदोष के वत्तृ पत्र में निम्नलिखित भी अंतर्विष्ट होंगे,-

(i) अपराध की प्रकति जिसके लिए वह सि(cid:217)धदोष ठहराया गया है और उस पर लाग विधि के उपबंधू , और

(ii) पारित दंडादेश की तारीख, प्रकति और विस्ताृ र।

175. वत्त पत्रृ में पश्चात्वर्ती प्रविष्टियां.- वत्त पत्र में पश्चाृ त्वर्ती प्रविष्टियां, उस घटना जिससे यह संबंधित है, के होने के समय पर, या पश्चात यथाशक्य शीघ्र की जायेंगी और उस अधिकारी (cid:217)वारा दिनांकित और हस्ताक्षरित की जायेंगी जो इन्हें करता है।

176. वत्त पत्रृ की दसरी प्रतिू .- (1) जब मल वत्त पत्र खो गया हो तब वत्त पत्र की

ृ दसरी प्रति जारी की जायेगी और नये वत्त पत्र पर दसरी प्रति चिह्न

ृ ◌ित की जायेगी और सक्षम प्राधिकारी (cid:217)वारा हस्ताक्षरित की जायेगी।

(2) वत्त पत्र समस्तृ पर्ण प्रविष्टियों को रजिस्टू र करके पनु :संनिर्मित किया जायेगा।

177. वत्त पत्रृ में चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा प्रविष्टियां.- (1) चिकित्सा अधिकारी, प्रत्येक बन्दी के वत्त पत्र के शीर्षक में बन्दी की प्रवेश पर आय ु, ऊँ चाई और भार, उसके स्वास्थ्य की स्थिति, यदि कठोर कारावास से दंडादिष्ट किया गया है, श्रम का वर्ग जिसके लिए बन्दी उपयक्त है और कि उसे टीके से ु संरक्षित किया गया है, स्वयं अभिलिखित करेगा या उसके अनदेशों के अधीन अभिलिखित करवाएगा।

(2) चिकित्सा अधिकारी तत्पश्चात उन मामलों के अलावा जिनके लिए या तो वह स्व यं या उसका चिकित्सा अधीनस्थ अके ले ही उत्तरदायी है, जेल में सम्पादित किये जाने वाले टीकाकरण और परिणाम, प्रत्येक अवसर पर अस्पताल में प्रवेश, और बीमारी जिसके लिये उसे भर्ती किया गया है, छ(cid:210)टी दी गयी है और बन्दी के उपचार के लिए किन्हीं विशेष अनदेशोंु , कार्य या भोजन का परिवर्तन इत्यादि के तथ्य भी वत्त पत्र में प्रविष्ट करेगा या ृ प्रविष्ट करवायेगा।

(3) बन्दी के अस्पताल या रोग उपशमन या विशेष दल से छ(cid:210)टी पर वह सदैव प्रविष्ट करेगा कि क्या बन्दी को उसके मल कार्य और लक्ष्य पर प्रतिवर्तित कर दिया जाए या कि उसे कोई अन्य कार्य और लक्ष्य आबंटित कर दिया जाए।

(4) चिकित्सा अधिकारी यह भी देखेगा कि वत्त पत्र पृ र पाक्षिक तौल आदि सम्यक रूप से ्

अभिलिखित किये गये हैं और वह पथक्करण की आवश्यृ कता या अन्यथा प्रत्येक साधारण कारावास के बन्दी, जो स्वैच्छिक रूप से श्रम करना चाहता है, की श्रम के लिए शारीरिक समर्थता, दंडादिष्टकिसी बन्दी के दंड के लिए शारीरिक समर्थता के लिए अपेक्षित प्रांरभिक चिकित्सा प्रमाणपत्र, न्यायिक एकांत परिरोध के लिए समर्थता, कमि या रोग के लेखे किसी ृ महिला या अन्य बन्दी के बाल काटने के लिए प्रत्येक आदेश अभिलिखित करेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 147

(5) चिकित्सा अधिकारी ऐसे अन्य निदेश या सिफारिशें प्रविष्ट कर सके गा जो वह समय- समय पर बन्दी के स्वास्थ्य के अनरक्षण के लिए आवश्यक समझे।

178. चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा प्रविष्टि.- (1) उपर्यक्त नियम के अधीन की गयी प्रविष्टियों के अतिरिक्त चिकित्सा अधीनस्थ, प्रत्येक निरीक्षण को और शिकायत की प्रकति ृ के साथ किसी बन्दी के संप्रेक्षण के अधीन चिकित्सालय में निरोध और औषध के प्रशासन का तथ्य अभिलिखित करेगा, वह बन्दी के वत्त पत्र में उसके उपचार से संबंधित किसी विशेष सिफारिश को भी प्रविष्ट करेगा जो वह करवाना चाहता हो, किन्त जब तक मामला ु

अत्यावश्यक न हो, वह इसे पष्टि के लिए चिकित्सा अधिकारी

ु को प्रस्तत करेगा।ु

(2) उप-जेलर या चिकित्सा अधीनस्थ के साथ चिकित्सा अधीनस्थ, यदि बन्दियों का तौल करने में उसे सहायता करने के लिए प्रतिनियक्त किया गया है , तो प्रत्येक बन्दी का उसके वत्त पत्र में पाक्षिक वजन प्रविष्ट करेगा।

179. वत्त पत्रृ में प्रविष्ट की जाने वाली विशिष्टियां और उन्हें प्रविष्ट करने वाले अधिकारी.- (1) निम्नलिखित विशिष्टियां वत्त पत्र में प्रविष्ट की जानी अपेक्षित हैं , अर्थात ्:-

(क) कारागार में प्रवेश की तारीख;

र की (ख) प्रवेश पर और उसके पश्चात जारी किये गये वस्त्रों और उपस्क्

प्रत्येक वस्तु की संख्या और नाम;

(ग) विशिष्ट कार्य और लक्ष्य का भार, संख्या या माप, जिसमें बन्दी को रखा गया है;

(घ) चिकित्सा से भिन्न कोई कारण जिनके लिए कार्य या लक्ष्य का प्रत्येक परिवर्तन किया गया;

(ङ) बीमारी की बन्दी (cid:217)वारा की गयी कोई शिकायत या उसकी बीमारी की रिपोर्ट;

(च) चिकित्सा अधिकारी या चिकित्सा अधीनस्थ के किसी निदेश या सिफारिश पर की गयी कोई कार्रवाई;

(छ) यदि बन्दी अपील की वांछा करता है, निर्णय की प्रति के लिए आवेदन;

(ज) निर्णय की प्रति की रसीद;

(झ) अपील का प्रेषण;

(ञ) अपील न्यायालय के आदेश का सार;

(ट) अपील करने के लिए अनज्ञात कालावधि के

ु अवसान से पर्व नहीं की गयी ू

अपील का तथ्य;

(ठ) त्रैमासिक अधिनिर्ण◌ीत परिहार की रकम;

(ड) प्रत्येक तिमाही के अंत तक दिनों में उपार्जित परिहार;

(ढ) किया गया अभिकथित प्रत्येक कारागार अपराध;

ु;

(ण) अनज्ञात प्रत्येक ु मलाकातु और निजी पत्रों की प्राप्ति या प्रेषण; (त) न्यायालय को प्रेषण या अंतरण, उन्मोचन, भाग जाना या मत्यृ148 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) ;

(थ) कार्यशाला पर्यवेक्षण कर्मचारिवंद या जेलर की कोई सिफारिशृ (द) अधीक्षक (cid:217)वारा प्रविष्ट किसी आदेश पर की गयी कार्रवाई;

(ध) तौल का पाक्षिक या साप्ताहिक माप;

(न) कोठरियों के संख्यांक जिनमें वारंट परिरोध के लेखे रखा गया; और (प) प्रत्येक हटाये जाने के अवसर पर वारंट पर भोगा गया कल परिरोध।ु (2) उपर्यक्त उल्लिखित ख(cid:214)डु (क), (ख), (ड.), (छ) से (त), (न) और (प) के बारे में प्रविष्टियां जेलर या उप-जेलर (cid:217)वारा की जा सकें गी।

(3) ख(cid:214)ड (ठ) में उल्लिखित परिहार की त्रैमासिक रकम जेलर या कारागार कल्याण अधिकारी या परिहार अधिनिर्णीत करने के लिए प्राधिकत किसी अन्य अधिकारी (cid:217)वारा और ख(cid:214)ड (च) चिकित्सा अधिकारी या उप-जेलर या चिकित्सालय प्रवेश से संबंधित चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा प्रविष्ट की जा सके गी।

(4) ख(cid:214)ड (ग) में उल्लिखित लक्ष्य लेने वाले (cid:217)वारा प्रविष्ट किया जाएगा, जब इस ग्रेड का अधिकारी नहीं है तो यह उप-जेलर (cid:217)वारा प्रविष्ट किया जाएगा, किन्त बड़ी जेलों में अधीक्षक ु

के आदेशों के अधीन, कर्तव्य का एक भाग जेलर (cid:217)वारा पालन किया जा सके गा।

(5) ख(cid:214)ड (घ), (च) और (द) के बारे में प्रविष्टियां करने का कर्तव्य जेलर के अधीनस्थ किसी अधिकारी को प्रत्यायोजित नहीं किया जाएगा।

(6) ख(cid:214)ड (ध) के बारे में प्रविष्टियां करने का कर्तव्य फार्मासिस्ट (cid:217)वारा किया जाएगा।

180. अधीक्षक (cid:217)वारा की जाने वाली प्रविष्टियां.- प्रत्येक सि(cid:217)धदोष के वत्त पत्र ृ पर, अधीक्षक निम्नलिखित अभिलिखित करेगा,-

(क) किसी बन्दी के संबंध में उसके (cid:217)वारा दिया जाने वाला कोई विशेष आदेश उदाहरणार्थ बेड़ियों का अधिरोपण या हटाया जाना, मलाकात आयोजित ु

करने या पत्र लिखने की अनज्ञाु , रात्रि तक पथक्कृ रण;

(ख) प्रत्येक दंड का अधिनिर्णय;

(ग) बहिर्वर्ती कार्य पर नियोजन के लिए मंजरीू ; (घ) सि(cid:217)धदोष-चौकीदार, सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के ग्रेड की पदोन्नति; और (ङ) विशेष परिहार का अधिनिर्णय।

181. वत्त पत्रृ की अभिरक्षा और प्रबंधन.- (1) प्रत्येक बन्दी का वत्त पत्रृ , जेलर जिसके प्रभार में बन्दी को रखा गया है, (cid:217)वारा समचित दराज में रखा जा

ु एगा, और जब कभी कारागार के किसी अधिकारी या वरिष्ठ कारागार अधिकारी (cid:217)वारा अपेक्षित हो, उसके (cid:217)वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

(2) वत्त पत्र ृ बन्दी के साथ ले जाया जायेगा जब भी वह समह से दसरे या एक प्रकार के ू

कार्य से दसरे कार्य के लिए अंतरित किया जाता है या चि कित्सालय भेजा जाता है।

(3) साप्ताहिक परेडों पर, प्रत्येक बन्दी निरीक्षण के लिए अपना वत्त पत्र ृ अपने हाथ में रखेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 149

(4) जब भी बन्दी किसी अपराध के लिए रिपोर्ट किया जाता है या वह किसी कारण से अधीक्षक या चिकित्सा अधिकारी के समक्ष लाया जाता है या जब परिहार अधिनिर्णीत किया जाता है, वह वत्त पत्र के साथ ृ प्रस्तुत किया जाएगा।

182. छोडे जाने या मत्य के पश्चा

ु त ् वत्त पत्रृ का प्रतिधारण.- प्रत्येक बन्दी का वत्त ृ पत्र सरक्षित अभिरक्षा में रखा जाएगा ,-

(क) उसके निकल भागने की दशा में, तीन वर्ष के लिए;

(ख) उसके छोड़े जाने की दशा में, दो वर्ष के लिए;

ु की दशा में, इसके होने के पश्चात दो वर्ष के लिए् ; और (ग) उसकी मत्यृ (घ) जमानत पर छोड़े जाने की दशा में या अपील के परिणाम के ज्ञात होने के पश्चात एक वर्ष के लिए।्

183. रजिस्टर.- (1) कारागार में प्रवेशित समस्त बन्दियों के लिए एक प्रवेश रजिस्टर होगा, जो विनिर्दिष्ट प्ररूप में इलेक्ट्रानिक रूप में हो सके गा।

(2) प्रवेश रजिस्टर में बन्दियों के नाम, पिता-माता का नाम, घर का पता, विधिक प्रास्थिति, प्रवेश की तारीख और सपर्दगी न्याु ु यालय के रूप में आधारभत विवरण अन्तू र्विष्ट होगा।

(3) रजिस्टर, जेलर/उप-जेलर या समकक्ष (cid:217)वारा विहित प्ररूप में रखा जाएगा और इस रजिस्टर में प्रविष्टियां क्रमानसार संख्यां

ु कित की जायेंगी।

184. रजिस्ट्रीकत संख्यां

ृ क के माध्यम से पहचान.- (1) रजिस्ट्रीकत संख्यां

ृ क बन्दियों की पहचान करने का साधन होगा।

(2) किसी दसरे कारागार में प्रत्ये

ू क अंतरण पर नया संख्यांक दिया जाएगा।

(3) आजीवन कठोर कारावास से दंडादिष्ट प्रत्येक बन्दी के वस्त्र और बिछौने की वस्तुएं उसके संख्यांक से चिह्नित की जाऐंगी और समस्त शासकीय पत्र-व्यवहार में संख्यांक नाम से पहले होगा।

(4) यदि बन्दी को विभिन्न वारन्टों के अधीन दो या अधिक दंडादेशों को भोगना हो, तो एक दंडादेश की समाप्ति पर सि(cid:217)धदोष रजिस्ट र में उसका नाम पनु :प्रविष्ट करना या उसे अन्य संख्यांक देना आवश्यक नहीं होगा।

(5) तथापि, प्रत्येक बन्दी को उसके नाम से पकारा ु जाएगा ना कि रजिस्टर में उसके संख्यांक से।

185. बन्दी का क्रम संख्यांक.- (1) प्रत्येक बन्दी, प्रवेश रजिस्टर में उससे संबंधित प्रविष्टि के तत्समान क्रम संख्यांक प्राप्त करेगा, और वह रजिस्टर संख्यांक जेल में होने के दौरान उसका सभिन्नु चिह्न होगा।

(2) प्रत्येक जेल का क्रम संख्यांक एक से दस हजार तक चलेगा।

(3) बन्दी का संख्यांक और उसके वर्ग को संज्ञापित करने वाला अक्षर, सर्वदा उसके नाम से पहले होगा जब वह किसी शासकीय पत्र-व्यवहार के लिए संदर्भित किया जाता है।

(4) वर्णनात्मक रोल में पिता का नाम सर्वदा जोडा जाएगा।़150 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 186. अभिलिखित किये जाने वाले अन्य ब्यौरे.- (1) प्रत्येक बन्दी की मखाकतिु ृ , रंग और शरीर उसकी आदत और उसके व्यक्तिगत किसी विशेष चिह्न पर टिप्पण का सामान्य ब्यौरा देते हए उसकी पहचान के प्रयोजन के लिए पर्ण वर्णन

ू प्रवेश रजिस्टर में अभिलिखित किया जाएगा।

(2) व्यक्तिगत वर्णन चिकित्सा अधिकारी या चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा प्रविष्ट किया जाएगा।

अध्याय 7

बन्दियों का वर्गीकरण और पथक्कृ रण

187. बन्दियों का वर्गीकरण.- बन्दी निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकत किये जायेंगे और ृ

् , अर्थात ्:-

एक-दसरे से सू म्पूर्ण रूप से पथक रखे जाएंगे

(क) सिविल बन्दी;

(ख) विचाराधीन बन्दी;

(ग) राजनैतिक बन्दी;

(घ) महिला बन्दी;

(ङ) परुष सि(cid:217)धदोष बन्दी ;

(च) 18 से 21 की आय के भीतर यवा परूष अपराधी

ु ;

(छ) प्रथम अपराधी;

(ज) आभ्यासिक अपराधी;

(झ) उच्च सरक्षा बन्दीु ; (ञ) पागल अपराधी;

(ट) निरु(cid:217)ध;

(ठ) जराचिकित्सा और शिथिलांग बन्दी;

(ड) उभयलिंगी बन्दी; और

(ढ) मनोवैज्ञानिक बन्दी।

टिप्पणी : ''राजनैतिक बन्दियों'' से राजनैतिक आंदोलनों से जड़े हए अपराधों के लिए ु

सि(cid:217)धदोष बन्दी अभिप्रेत हैं।

188. उभयलिंगी बन्दियों का पथक्कृ रण.- (1) उभयलिंगी बन्दी अनन्यत: पथक ृ अहाते में रखे जायेंगे।

(2) वस्त्रों, भोजन इत्यादि के आपर्त से संबंधित नियम ऐसे लाग होंगे जैसे विचाराधीन या सि(cid:217)धदोष बन्दियों को लाग होते हैं।ू

189. पहचान जांच परेड.- (1) बन्दियों की पहचान जांच परेड कराने को सक्षम न्यायालय प्राधिकत कर सके गा।ृ

(2) पहचान जांच परेड दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम संख्यांक 2) के उपबंधों के अनसार करवायी जायेगी।ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 151 (3) अधीक्षक संचालन करने वाले अधिकारी (cid:217)वारा ऐसी परेड कराने के लिए यथा अपेक्षित समस्त सविधाओं काु , प्रशासन का अहित किये बिना विस्तार करेगा।

190. पनु :दोषसि(िcid:217)ध की विशिष्टियां.- समस्त पनु :दोषसि(िcid:217)धयों की विशिष्टियां सि(cid:217)धदोष बन्दियों के प्रवेश रजिस्टर में विनिर्दिष्ट प्ररूप में अभिलिखित की जाएंगी।

अध्याय 8

विचाराधीन बन्दी और यवा अपराधीु

191. विचाराधीन बन्दियों का वर्गीकरण.- (1) विचाराधीन बन्दियों का वर्गीकरण के वल सरक्षाु , अनशासन और संस्थागत कार्यक्रम के आधार पर किया जाएगा।

(2) सामाजिक प्रास्थिति के आधार पर किसी वर्गीकरण का प्रयत्न नहीं किया जाएगा।

(3) भोजन, वस्त्र, बिछौना और मलाकातु का हक वही होगा जो बन्दियों के अन्य प्रवर्गों को लाग होगा।ू

(4) विचाराधीन बन्दी नीचे उल्लिखित के रूप में वर्गीकत किये जायेंगे

ृ :-

प्रवर्ग-1 : क(cid:210)टरपंथी, नक्सलवादी, चरमपंथी और आतंकवादी या सरक्षा जोनु -1 में परिरोध की आवश्यकता के वैयक्तिक लक्षणों वाले कोई अन्य।

प्रवर्ग-2 : गैंगस्टर, भाड़े के हत्यारे, डाकू , सीरियल किलर्स या बलात्कारी या हिंसक ले◌ुटेरे, मादक पदार्थ अपराधी, आभ्यासिक गंभीर अपराधी या सांप्रदायिक धर्मान्ध और वे जिनके निकल भागने की अधिक संभावना हो या पर्व के ू भगोड़े या पलिस अथवा कारागार कार्मिक पर के हमलावर और जिनके स्वयं को हानि पहंचाने

ु या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा उत्पन्न करने की

ु -2 में परिरोध की संभावना हो, को सम्मिलित करते हए सरक्षा जोनु आवश्यकता वाले, अन्य खतरनाक अपराधी।

प्रवर्ग-3 : वे जिनको छोड़े जाने पर समाज को कोई खतरा नहीं है, जैसे कि जो व्यक्तिगत हेतक पर हत्याु , अन्य शारीरिक अपराध, चोरी या संपत्ति अपराध, प्रतिषेध अपराध, अन्य विशेष और स्थानीय विधियों से संबंधित अपराध, रेल्वे अपराध और अन्य छोटे अपराधों में अंतवर्लित थे।

्- टिप्पण : (क) मानसिक व्याधि से पीड़ित व्यक्तियों और यवा अपराधियों को पथकु

् पथक रखा जाएगा। ृ

(ख) न्यायालय, कारागार प्राधिकारियों को उन विचाराधीन बन्दियों के बारे में सचना भेजेगा जो सरकारी गवाह बन गये हैं या जिन्होंने संस्वी कति ृ कर ली है।

(ग) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 122 की उप-धारा (2) के अधीन निरु(cid:217)ध व्यक्ति के साथ विचाराधीन बन्दी के रूप में व्यवहार किया जाएगा जब तक कि उसका मामला सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय (cid:217)वारा विनिश्चित नहीं किया जाता है।

152 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

192. निरोध की कालावधि.- न्यायालय आदेश दे सके गा कि अभियक्तु व्यक्ति को जेल की अभिरक्षा में निरु(cid:217)ध या प्रतिप्रेषित किया जाये।

परन्तु सक्षम न्यायालय पर विचारण के लिए सपर्द किये गये व्यु ु क्ति के मामले को छोड़कर, कोई व्यक्ति एक समय पर पन्द्रह दिन से अधिक कालावधि के लिए जेल में निरु(cid:217)ध या प्रतिप्रेषित किये जाने के लिए आदेशित नहीं किया जाएगा :

परन्तु यह और कि उच्च न्यायालय से भिन्न न्यायालय (cid:217)वारा किया गया ऐसा प्रत्येक आदेश लिखित में पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा हस्ताक्षरित होगा।

टिप्पण : जेल में इस प्रकार परिरु(cid:217)ध अभियक्तु व्यक्ति इन नियमों में विचाराधीन बन्दी के रूप में संदर्भित किया जायेगा।

ु .- (1) विचाराधीन बन्दियों परुष ु 193. विचाराधीन बन्दियों के लिए पथक वास सविधाृ

और महिला दोनों, के लिए पथक वास सविधा होगी और जहां

ु 18 से 21 वर्ष की आय समह ु

के विचाराधीन बन्दी परिरु(cid:217)ध किये गये हैं वहां उनके लिए अन्य बन्दियों से पथक रूप से ृ व्यवस्था की जाएगी।

(2) विचाराधीन वार्ड, जेल के शेष जेल से सर्वथा पथक रखे जायेंगे और यदि इसमें पथक कक्ष हैं, तो विचाराधीन बन्दी जो आभ्यासिक बन्दी के रूप में ज्ञात हैं, यथासंभव व्यवस्कों और उन बन्दियों से जो छोटे अपराधों के आरोपों से सेशन सपर्द किये

्

ु गये हैं, से पथक रखे जायेंगे।

(3) राजनैतिक आंदोलनों से संबंधित अपराधों के विचाराधीन अभियक्तु , उनसे अलग रखे जायेंगे जो ऐसे अभियक्तु नहीं है। (4) जेलर विचाराधीन बन्दियों से संबंधित समस्त कार्यों का प्रभारी होगा।

194. विचाराधीन बन्दियों के लिए भोजन.- (1) यदि विचाराधीन बन्दी पर्व में ू कारागार में नहीं रहा है तो पलिस याु , यथास्थिति, सेना एस्कॉर्ट अधिकारी का यह देखने का

, यदि उसके कर्तव्य है कि विचाराधीन बन्दी को कारागार ले जाने से पर्व भोजन दिया जाएू

कारागार भोजन के लिए बहत देरी से पहंचने की संभावु

ु ना हो।

(2) यदि पलिस या सेनाु एस्कॉर्ट रिपोर्ट करता है कि विचाराधीन बन्दी को भोजन का आपर्त ू नहीं किया गया है तो कारागार प्राधिकारियों को उसे भोजन जारी करने के लिए आवश्यक प्रबंध करने चाहिए।

(3) यदि विचाराधीन बन्दी को कारागार भोजन परोसे जाने या ताला बंद करने के पश्चात ्

ु जैसे कि पके हए चावलु , प्रवेश दिया गया है तो उसे विहित मापमान के अनसार भोजन वस्तु पके हए चनाु , मंगफली इत्याू दि जारी किये जायेंगे।

195. प्रवेश घंटे.- (1) विचाराधीन बन्दियों को कारागार के सामान्य कार्य घंटों के दौरान प्रवेश दिया जाएगा।

(2) ताला-बंद करने के पश्चात विचाराधीन बन्द्ि यों को संबंधित न्यायालय (cid:217)वारा जारी किये गये रात्रि वारंट के आधार पर कारागार में प्रवेश दिया जाएगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 153

(3) ताला बंद करने के घंटे के पश्चात प्राप्त् बन्दियों को, ऐसे प्रयोजन के लिए विशेष रूप से ् स्थान में निरु(cid:217)ध किया जाना चाहिए।

निर्धारित पथकृ (4) जब विचाराधीन बन्दियों को एस्कॉर्ट किया जा रहा हो, तो यह देखने में सावधानी रखी

ु जानी चाहिए कि वे गंतव्य पर ताला बंद होने से पर्व पहंच जायें।ू

(5) यदि विचाराधीन बन्दियों के गंतव्य पर ताला बंद करने के घंटे के पश्चात पहंचने की ्

संभावना हो, तो स्थानांतरित करने वाला कारागार या पलिस परु , यथास्थिति, सेना एस्कॉर्ट र्ट किये जाने हैं।

उस कारागार को पर्याप्त अग्रिम सचना भेजेगा जहां विचाराधीन बन्दी एस्कॉ

(6) बन्दियों के प्रवेश, तलाशी, निर्मक्ति और संपत्ति से संबंधितु निम्नलिखित नियम, यथा विनिर्दिष्ट रूप से उपबंधित को छोड़कर, विचाराधीन बन्दियों को भी लाग होंगे।ू

(7) सेशन के लिए सपर्द किए गए बन्दियों के मामलों को छोड़कर , प्रत्येक वारंट जारी करने वाले मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकारी के समक्ष बन्दी को लाये जाने का दिन का कथन होगा।

(8) सेशन मामलों में, जब बन्दी को प्रस्तुत करने के लिए तारीख नियत हो, तो यह जेलर या उप-जेलर (cid:217)वारा वारंट और बन्दी की वत्त पत्र पर पष्ठां

ृ कित की जानी चाहिए और बन्दी को , ताकि वह सेशन आयोजित करने की नियत तारीख सम्यक रूप से सचित की जानी चाहिए्

अपनी प्रतिरक्षा संचालित करने के लिए समस्त आवश्यक प्रबंध कर सके ।

(9) प्रत्येक विचाराधीन बन्दी का संख्यांक और नाम पेशी रजिस्टर में संबंधित तारीख पर, जिसको प्रत्येक को न्यायालय में प्रस्तत करना है प्रविष्टु किया जा सके गा किन्तु जेलों में जहां बड़ी संख्या में निरोध के अधीन रखे जाते हैं वारंट को मास के प्रत्येक दिवस के पिजन होल वाली विशेष अलमारी में रखना अधिक सविधाजनक होगा।ु

196. विचाराधीन बन्दियों के बारे में विशिष्टियां.- (1) समस्त विचाराधीन बन्दियों की विशिष्टियां उनके (cid:217)वारा जेल में लायी गयी संपत्ति की विशिष्टियों के साथ-साथ विनिर्दिष्ट प्ररूप में विचाराधीन बन्दियों के रजिस्टर में प्रविष्ट की जायेंगी।

(2) प्रत्येक विचाराधीन बन्दी, उसके नाम, तारीख जब प्रथम बार विचारण के लिए लाया गया, जेल में प्रवेश की तारीख, अपराध जिसका अभियक्तु है, पर्व ू सि(cid:217)धदोषिता, यदि कोई ज्ञात हो, न्यायालय जिसमें मामला लंबित है, यदि वह संस्वीकति करने वाला बन्दी

ृ है या नहीं, तारीखें जिन पर उसका विचारण प्रतिप्रेषित किया गया, प्रवेश पर भार और पाक्षिक रूप

ुत किया जाएगा।

से एक बार उत्तरवर्ती भार दर्शित करते हए वत्त पत्र सहित प्रस्तु

(3) घाव या नील का कोई चिह्न उनके संबंध में बन्दी के कथन सहित सावधानीपर्वक वत्त ू

पत्र पर अभिलिखित किया जाएगा और ऐसा पत्र सदैव निरीक्षण अधिकारी को दिखाया जाएगा।

197. इकबाली साक्षी (अप्रवरु ).- (1) जब एक विचाराधीन बन्दी अप्रवर या संस्वीु कतिृ करने वाले अभियक्तु के रूप में न्यायालय (cid:217)वारा प्रवेशित किया जाता है तो वह उस मामले

् से संबंधित अन्यों से पथक रखा जाएगा। ृ

(2) जहां कोई विचाराधीन वार्ड में पथक कोठरी या कक्ष हो , तो उनके ये प्रयोजन के लिए प्रयक्त किये जायेंगे।ु154 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) ् नहीं है तो ऐसे बन्दी दिन में पथक कक्षों और रात्रि में पथक वार्डों (3) यदि कोई पथक कक्ष ृ में रखे जा सकें गे, किन्तु यह सावधानी रखी जाएगी कि वे एकांत परिरोध में नहीं रखे जायें।

के लिए आवश्यक होने के सिवाय 198. पथक्कृ रण के लिए विशेष निदेश.- (1) सक्षम न्यायालय (cid:217)वारा विचाराधीन बन्दियों के पथक्कृ रण के किसी विशेष निदेश को क्रियान्वित किया जाना चाहिए। (2) ऐसा पथक्कृ रण, वस्तओं को ठीक रखने के उ(cid:217)देश्यु

, अर्थात ्, उसे प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: उसी किसी भी अप्रिय स्थिति हेत नहीं होना चाहिएु मामले या अन्य मामलों से संबंधित अन्य बन्दियों के साथ संपर्क करने से रोकना।

199. जांच पहचान परेड के दौरान उपस्थिति.- (1) विचाराधीन बन्दी उनके सिर के बाल काटने या चेहरे की शेव करने या किसी भी रूप में उनकी व्यक्तिगत पहचान को परिवर्तित करने के लिए अनज्ञात नहीं किये जायेंगे , जिससे कि उनको पहचानना कठिन हो जाए।

(2) तथापि, उन्हें उनके वस्त्र बदलने से नहीं रोका जाएगा:

परन्तु उनकी पहचान तात्विक रूप से परिवर्तित नहीं हो, जब वे कारागार में पहचान के लिए उपस्थित किये जायें या जब वे विचारण के लिए न्यायालय भेजे जायें।

200. कारागार प्राधिकारी को पलिस (cid:217)वारा सचना

ू .- पलिस अधिकारी उन मामलों की कारागार प्राधिकारियों को सचना देगा जिनमें विचाराधीन बन्दी की पहचान की गयी और बालों, मंछ और दाढ़ी की व(िcid:217)ध का पर्ण विवरण देगा , जो विचाराधीन बन्दियों की गिरफ्तारी के समय पर थी।

201. पलिस पछताछु ू .- (1) के वल ऐसे पलिस अधिकारी जो न्या

(cid:217)वारा प्राधिकत किये जायें

ु याधीश या मजिस्ट्रेट ृ , विचाराधीन बन्दी, जब वह कारागार में हो, से पछताछ के लिए ू

अनज्ञात किये जायेंगे।ु

ु (2) ऐसी पछताछ कारागार अधिकारी की उपस्थिति में और उसके सनते हए की जाएगी।

202. विचाराधीन बन्दियों के लिए सविधाएं

ु .- निम्नलिखित सविधायें समस्तु विचाराधीन बन्दियों को दी जायेंगी, अर्थात ् :-

(क) विधिक सहायता;

(ख) वकीलों या पारिवारिक सदस्यों के साथ मलाकातु (विधिक प्रयोजनों के लिए);

(ग) वकालतनामा और जमानतपत्र हस्ताक्षर करना;

(घ) मख्ताु रनामा का प्रत्यायोजन; (ङ) वसीयत का निष्पादन;

(च) नियमों के अनसार आवश्यु क धार्मिक आवश्यकतायें; (छ) विधि के उपबंधों के अनसार विधिक सहायता के लिए न्या

ु यालयों को आवेदन;

(ज) न्यायालयों को अन्य आवेदन; और

(झ) ऐसी अन्य सविधायें जैसी समयु -समय पर सरकार (cid:217)वारा मंजर की जायें ू

विचाराधीन बन्दियों को दी जायेंगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 155

203. आवश्यकताओं का आपर्त

ू .- विचाराधीन बन्दियों के लिए वार्ड किसी वार्डर के प्रभार के अधीन होगा और नियमित अंतरालों पर, जेल पदधारी की अभिरक्षा में झाड लगाने

ू , जल आपर्त करने और भोजन देने में नियोजित दलों (cid:217)वारा दौरा किया जाएगा , जो विचाराधीन किन्हीं बन्दियों के साथ उनके संपर्क को रोके गा और ऐसी परिस्थितियों में के सिवाय, किसी भी सि(cid:217)धदोष बन्दी को वार्ड में प्रवेश करना अनज्ञात नहीं किया जाएगा।ु

204. भोजन, वस्त्र और बिछौना.- किसी विचाराधीन बन्दी के किसी भोजन, वस्त्र, बिछौना या अन्य आवश्यक सामान का कोई भाग किसी अन्य बन्दी को दिया, किराये पर दिया या बेचा नहीं जाएगा और इस नियम का उल्लंघन कर रहा कोई बन्दी, निजी स्त्रोतों से इसे प्राप्त करने का विशेषाधिकार इतने समय के लिए खो देगा जैसा अधीक्षक समचित ु समझे।

205. भोजन, वस्त्र और बिछौने का क्रय और आपर्त

ू .- (1) प्रत्येक विचाराधीन बन्दी जो स्वयं पर्याप्त वस्त्र और बिछौने का प्रबंध करने में असमर्थ है, अधीक्षक (cid:217)वारा ऐसे वस्त्र (कारागार वस्त्र न हों) और बिछौने, जैसे आवश्यक हों, प्रदत्त किए जायेंगे।

ू , अधीक्षक (2) भोजन, वस्त्र, बिछौना, या अन्य आवश्यक वस्तुओं के समस्त क्रय या आपर्त की मंजरी के अध्यू धीन रहते हएु , जेलर के माध्यम से किये जायेंगे, और विचाराधीन बन्दी को आपर्त से पर्व जेलर (cid:217)वारा परीक्षित किये जायेंगे।

(3) स्वास्थ्य के लिए कछ भी हानिकारक और कोई भी औषधि या मादक प्रदार्थ अन ुज्ञात नहीं किया जायेगा।

(4) निजी स्त्रोतों से प्रदत्त भोजन, जेलर (cid:217)वारा और चिकित्सा अधीनस्थों (cid:217)वारा परीक्षित किया जायेगा, जो यदि इसमें कछ प्रतिषि(cid:217)ध या स्वा

ु स्थ्य के लिए हानिकारक अंतर्विष्ट हो, अधीक्षक को रिपोर्ट करेगा।

(5) यदि कोई प्रतिषि(cid:217)ध वस्तु विचाराधीन बन्दी को प्रदत्त किसी भोजन या अन्य वस्तओं में ु छिपाई हई पायी जाती है तो ऐसा भोजन या वस्त अधि(cid:511)त की जायेगी और उपर्यक्त

ु नियम (cid:217)वारा किए गए विशेषाधिकार प्रत्या(cid:511)त किये जायेंगे।

(6) जो प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुएं हैं और विचाराधीन बन्दियों पर लाग होू ती हैं वे अध्याय 17 में उल्लिखित हैं।

(7) अधीक्षक किसी विचाराधीन बन्दी के लिए किसी चीज के क्रय या परिदान के लिए जिसे वह अनावश्यक या अनपयक्तु ु समझता है, इंकार कर सके गा ।

206. बाहरी भोजन अनज्ञात करने के लिए शर्तें .- (1) बाहर से भोजन निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हए अनज्ञात किया जा सके गा , अर्थात ् :-

(क) विचाराधीन बन्दी और भोजन के प्रदायकर्ता (cid:217)वारा लिखित वचनबंध दिया जायेगा कि वे ऐसे भोजन की स्वास्थ्यप्रदता के लिए पर्णतू : उत्तरदायी हैं और कारागार प्रशासन किसी दर्घटनाु , जो हो सकती है, के लिए उत्तरदायी नहीं होगा;

156 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ख) विचाराधीन बन्दी की के वल एक दिन की आवश्यकता का ही भोजन एक समय पर अनज्ञात किया जायेगा ;

(ग) भोजन की वस्तुएं उस व्यक्ति (cid:217)वारा चखी जायेंगी जो भोजन परिदान करता है;

(घ) भोजन कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा विहित घंटों पर परिदत्त किया जाएगा;

(ङ) भोजन के वल विहित क्षेत्र में और विहित घंटों के दौरान ही खाया जायेगा;

(च) आपात या महामारी के दौरान या विचाराधीन बन्दी के स्वास्थ्य के कारणों से, बाहर का भोजन अननज्ञात किया जा सके गा ; और

(छ) अधीक्षक को किसी भी समय इस छट को अननज्ञात या अनियमित करने का प्राधिकार है।

(2) बाहर का भोजन प्राप्त करने के लिए अनज्ञात बन्दिु यों को कारागार भोजन नहीं दिया जायेगा।

(3) विचाराधीन बन्दियों को कारागार में पथक रूप से अपना भोजन पकाना अनज्ञात नहीं किया जायेगा।

207. निजी वस्त्र अनज्ञात करने के लिए शर्तें .- (1) विचाराधीन बन्दियों को ु आवश्यकताओं को परा करने के लिए सामान्यू निजी वस्त्र अनज्ञात किये जायेंगे।ु

यक्तियक्तु (2) वस्त्रों की ऐसी वस्तुएं जो संस्था की सरक्षा आवश्यु कताओं को प्रभावित करेंगी, अनज्ञात ु नहीं की जायेंगी।

(3) विचाराधीन बन्दी जिसके पास उसके स्वयं के पर्याप्त वस्त्र नहीं हैं, वे विहित मापमान पर सरकारी खच पर उपलब्र्धे करवाये जायेंगे।

(4) ऐसे वस्त्र विचाराधीन बन्दी (cid:217)वारा, उसे छोड़े जाने के पश्चात भी् , प्रतिधारित करना अनज्ञात किया जा सके गा।ु

(5) राजनैतिक संब(cid:217)धताओं के चिह्न या प्रतीकों से संबंधित निजी वस्तुएं विचाराधीन बन्दियों (cid:217)वारा रखा जाना या उपयोग किया जाना अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

208. पत्र प्रेषण के लिए शर्तें.- (1) बन्दी के प्रारम्भिक प्रवेश पर, एक मद्रित कार्ड ु

उसके कटंब को सरकारी खच पर प्रेषित किया जायेगा। कार्ड निम्नलिखित बिंदओं पर सचना अंतर्विष्ट करेगा, अर्थात ् :-

(क) अंत:वासी का संस्थागत संख्यांक;

(ख) अंत:वासी का पता; और

(ग) मलाकातोंु से संबंधित नियमों का संक्षिप्त सारांश।

(2) विचाराधीन बन्दी (cid:217)वारा सरकारी खच पर प्रति कै लेंडर मास दो पत्र लिखा जाना अनज्ञात किया जायेगा।

(3) विधिक प्रयोजनों जैसे कि प्रतिरक्षा, जमानत और प्रतिभति की व्यू वस्था करने के लिए अतिरिक्त पत्र बन्दी के स्वयं के खच पर अनज्ञात किए जा सकें गे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 157

209. कारागार कैं टीन से क्रय.- विचाराधीन बन्दियों को कारागार कैं टीन से स्टेशनरी, लेखन-सामग्रियों और विविध वस्तुओं का युक्तियक्त क्रय करने के लिए अनज्ञात किया जा सके गा जो कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा चिह्न ◌ित और क्रमानसार संख्यां

ु कित की जायेंगी।

210. न्यायालय के समक्ष पेश करना.- (1) मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रति दिन पेश किये जाने वाले समस्त बन्दियों के नाम, जेलर (cid:217)वारा पेशी रजिस्टर में प्रविष्ट किये जाने चाहियें, जिसका कर्तव्य नियत दिन पर न्यायालय में बन्दियों की ठीक समय पर उपस्थिति सनिश्चित करना होगा।ु

(2) अभिरक्षा में निरोध के विस्तार के लिए, बन्दी न्यायालय के समक्ष या तो व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रानिक मीडिया जैसे विडियो कान्फ्रें सिंग के माध्यम से पेश किया जा सके गा।

टिप्पण : विचाराधीन बन्दियों को न्यायालय भेजने से पर्व

ू , प्रात: सामान्य भोजन परोसा जायेगा और जब वे जेल में लौटते हैं उनके भोजन के लिए व्यवस्था की जायेगी, जिससे वे अपना भोजन कर सकें ।

211. एस्कॉर्ट की अध्यपेक्षा.- (1) पेशी रजिस्टर के आधार पर, पलिस ु एस्कॉर्ट के लिए अध्यपेक्षा पर्याप्त रूप से अग्रिम भेजी जायेगी।

(2) विचाराधीन बन्दी महिलाओं, किशोरों, के बारे में और यथासंभव हिंसक, खतरनाक और कख्याु त विचाराधीन बन्दियों के बारे में संसचना ू एस्कॉर्ट अध्यापेक्षा करते समय पलिस ु प्राधिकारियों को भेजी जानी चाहिये।

212. बीमार बन्दी.- यदि विचाराधीन बन्दी बीमार है और चिकित्सा अधिकारी बन्दी की न्यायालय में उपस्थित होने की असमर्थता सत्यापित करता है तो उसे न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया जायेगा और ऐसी दशा में, न्यायालय को चिकित्सा प्रमाणपत्र अग्रेषित किया जायेगा।

ुयें.- (1) न्यायालय 213. न्यायालय जाते समय ले जायी जाने वाली अनज्ञात वस्तु जाने के समय विचाराधीन बन्दी उसे जारी की गई समस्त कारागार वस्तुएं लौटायेगा।

(2) विचाराधीन बन्दी के वैयक्तिक वस्त्रों और उसके मामले से संब(cid:217)ध कागजों को छोड़कर, उसे कोई अन्य वस्तुएं अपने साथ ले जाना अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

(3) यदि विचाराधीन बन्दी विधिक प्रयोजनों के लिए अपनी नकद ले जाना चाहता है तो यह पलिस ु एस्कॉर्ट के माध्यम से अग्रेषित की जायेगी।

(4) यह रकम विचाराधीन बन्दी (cid:217)वारा विधिक प्रतिरक्षा, प्रतियों के खच इत्र्याे दि जैसे प्रयोजन के लिए उपयोग में ली जा सके गी।

(5) इस रकम का व्ययन पलिस और बन्दीु (cid:217)वारा ऐसे प्रयोजन के लिए विहित रजिस्टर के समचित स्तं

ु भ में प्रमाणित किया जायेगा।

(6) किन्हीं भी परिस्थितियों में विचाराधीन बन्दी को नकद या मल्यू वान वस्तु, यदि कोई हो, वैयक्तिक रूप से रखना अनज्ञात नहीं किया जाएगा। ु158 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 214. विचाराधीन बन्दियों की तलाशी.- न्यायालय भेजे जाने से पर्व और न्याू यालय से वापस प्राप्त करने के पश्चात समस्त् विचाराधीन बन्दियों की अच्छी तरह से तलाशी ली जायेगी।

215. विचाराधीन बन्दियों का परिवहन.- (1) न्यायालय को और से तथा अन्य गंतव्यों पर विचाराधीन बन्दियों के परिवहन के लिए आवश्यक इंतजाम पलिस प्राधिकारियों ु (cid:217)वारा किये जायेंगे।

् नहीं (2) यदि विचाराधीन बन्दी महिलाओं और किशोरों के लिए पथक वाहन उपलब्धृ

करवाया जाता है तो सामान्य वाहन में विचाराधीन बन्दी महिलाओं और किशोरों के लिए पथक कक्ष होने चाहियें।ृ

(3) महिला बन्दियों के एक गंतव्य से अन्य को और न्यायालय के समक्ष पेश करने के परिवहन के लिए भी महिला एस्कॉर्ट आवश्यक होगी।

216. हथकड़ी लगाना.- (1) सामान्यत: हथकड़ी लगाने का सहारा के वल तब लिया जायेगा जब दी गयी परिस्थितियों में बन्दी के निकल भागने से रोकने का कोई अन्य यक्तियक्तु ु उपाय नहीं हो।

(2) विचाराधीन बन्दियों के निम्नलिखित प्रवर्ग लेखब(cid:217)ध किये गये कारणों से और संबंधित न्यायालय के पर्व अनमोदन से हथकड़ी लगाये या अवरू(cid:217)ध किये जा सकें गे , अर्थात ्;

(क) गंभीर और हिंसक अपराधों में अंतवर्लित बन्दी;

(ख) कख्याु त या खतरनाक पष्ठृ भमि वाले बन्दीू ; (ग) हिंसक, आक्रामक और उच्चतापसह बन्दी; और

(घ) बन्दी जो पर्व में निकल भाग चके हैं।ू ु

(3) न्यायालय परिसर में, न्यायालय की अनज्ञा से विचाराधीन बन्दिु यों को हथकड़ी लगायी जा सके गी।

217. बलपर्वक हथकड़ी नहीं लगायी जायेगी .- (1) नीचे टिप्पण में वर्णित अधिसचना ू के उपबंधों के अनसार राज्यु में कहीं भी जेल में दाखिल करते समय या एक जेल से दसरी ू या जेल से न्यायालय और वापस परिवहन करते समय मार्ग में किसी सि(cid:217)धदोष या विचाराधीन बन्दी पर कोई हथकड़ी या अन्य बेड़ियां बलपर्वक नहीं लगाई जायेंगी।ू

(2) राज्य में, जेल प्राधिकारियों को, स्वयं जेल के किसी अंत:वासी को या उनके एक जेल से दसरी में या जेल से न्या

ू यालय और वापस परिवहन के दौरान हथकड़ी लगाने के निदेश देने का कोई प्राधिकार नहीं होगा:

परन्तु जहां मामले की अत्यावश्यकता में किसी विशिष्ट बन्दी पर हथकड़ी या बेड़ियां अधिरोपित करना समीचीन हो तो वहां ऐसे अधिरोपण से पर्व संबंधित मजिस्ट्रे

ू ट से विशेष आदेश अभिप्राप्त किये जाएंगे।

218. न्यायालय परिसर में मलाकातु .- (1) न्यायालय के के वल लिखित आदेशों के अधीन, पलिस ु एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारियों (cid:217)वारा विधिक प्रयोजनों के लिए विचाराधीन बन्दियों को न्यायालय परिसर में, मलाकातोंु के लिए अनज्ञा मंजर कीु

ू जा सके गी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 159

(2) ऐसे मलाकातोंु का समचित अभिलेख संबंधित न्या

ु यालयों पर रखा जाएगा और कारागार प्राधिकारियों को सचना भेजी जायेगी।ू

219. नकद या मल्यू वान वस्तुएं प्राप्त करने का प्रतिषेध.- (1) विचाराधीन बन्दी एस्कॉर्ट के अधीन होते हए या न्याु यालय परिसर में होते हए किन्हीं नकद या मल्यवान ु

वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए प्रत्यक्षत: अनज्ञात नहीं किये जायेंगे।ु

(2) उप-नियम (1) में यथा उल्लिखित ऐसी नकद या वस्तुएं विचाराधीन बन्दी को सचना के ू

अधीन कारागार कार्यालय में जमा की जाएंगी और समचित प्राधिकार के अधीनु कारागार संपत्ति रजिस्टर में जमा की जायेंगी।

220. खा(cid:217)य पदार्थ प्राप्त करने का प्रतिषेध.- पलिस ु एस्कॉर्ट न्यायालय और कारागार के मध्य यात्रा के दौरान या न्यायालय परिसर में विचाराधीन बन्दियों को कोई खा(cid:217)य वस्तुएं या प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुऐं अनज्ञात नहीं ु करेगा।

221. न्यायालय कक्ष में ले जाने से पर्व तलाशीू .- विचाराधीन बन्दियों की न्यायालय- कक्ष में ले जाने से पर्व गहन तलाशी ली जाएगी। ू

222. कारागार में वापसी.- जैसे ही न्यायालय का कार्य पर्ण हो जाये

ू , ऐसे विचाराधीन बन्दी जिन्हें न्यायालय अभिरक्षा में प्रतिप्रेषित किया गया है, तत्काल कारागार वापस लाये जायेंगे।

223. कारागार में प्रवेश से पर्व तलाशीू .- (1) विचाराधीन बन्दी के न्यायालय से कारागार गेट तक वापसी पर, यदि (cid:212)यटी पर उपस्थित कारागार अधिकारी (cid:217)वारा उसके पास ु पायी जाती है या कोई विशेष परिस्थिति या अनियमितता देखी जाती है कोई अनधिकत वस्तृ

तो वह कार्रवाई करने के लिए तत्काल मामले की रिपोर्ट अधीक्षक को करेगा और यदि आवश्यक हो, जिला पलिस अधीक्षक या पलिस उपु

ु -आयक्तु को करेगा।

(2) नकदी जो पलिस ु एस्कॉर्ट (cid:217)वारा लायी जाती है रजिस्टर में अभिलिखित की जानी चाहिए और विचाराधीन बन्दी को सचना के अधीन कारागार कार्यालय में जमा की जानी चाहिए।

224. संबंधित जिला पलिस कार्यालय (cid:217)वारा वहन किये जाने वाले व्यय .- (1) न्यायालय को और से या एक जिले से किसी दसरे को ले जाये जाने वाले विचाराधीन बन्दी के प्रवहण के दौरान उपगत व्यय, संबंधित जिला पलिस कार्यालय (cid:217)वारा संदत्त किये जायेंगे।

(2) निर्वाह भत्ता, यदि अनज्ञात होु , सरकार (cid:217)वारा नियत मापमान के अनसार विचाराधीन ु बन्दी को संदत्त किया जाएगा।

225. विचाराधीन बन्दियों का अन्य राज्यों में पेश किया जाना.- (1) जब विचाराधीन बन्दियों को विचारण के लिए अन्य राज्य में भेजा जाना अपेक्षित है तो वह राज्य जहां से विचाराधीन बन्दी भेजा जाना है एस्कॉर्ट के लिए व्यवस्था करेगा।

(2) विचाराधीन बन्दी के एस्कॉर्ट के यात्रा और अन्य आनषंगिक व्यु य अध्यपेक्षा करने वाले राज्य (cid:217)वारा उठाये जाएंगे।

160 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

226. सिविल वाद की कार्यवाही में न्यायालय के समक्ष विचाराधीन बन्दियों का पेश किया जाना.- जब तक सक्षम न्यायालय (cid:217)वारा आदेश न किया गया हो, किसी विचाराधीन बन्दी को सिविल वाद की कार्यवाही में न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया जाएगा।

227. अतिरिक्त मामलों के लंबित रहने के मामले में उठाए जाने वाले कदम.- जब किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध अतिरिक्त मामला या मामले लंबित हों, तो निम्नलिखित कार्रवाई की जाएगी, अर्थात ् :-

(क) विचाराधीन रजिस्टर और न्यायालय डायरी के समचित स्तं

ु भों में प्रतिप्रेषण वारंट पर लाल स्याही में अतिरिक्त मामलों की प्रविष्टियां की जायेंगी;

(ख) संबंधित न्यायालय या न्यायालयों को लंबित मामलों के बारे में यह कथन करते हए सचना भेजी जायेगी कि बन्दी

ू उस मामले या उन मामलों के संबंध में जमानत पर है या नहीं; और

(ग) सौंपे जाने के दौरान अन्य आरोपों के बारे में पलिस ु एस्कॉर्ट को सचना भेजी ू

जायेगी।

् .- (1) जब कोई विचाराधीन बन्दी अन्य मामले या 228. पथक प्रतिप्रेषण वारंटृ मामलों, जिसके /जिनके लिए वह जमानत पर नहीं है, में विचारण के लिए वांछित हो तो संबंधित न्यायालय पथक प्रतिप्रेषण वारंट जारी करेगा।

(2) अन्य मामले या मामलों में जमानत मंजर करने की दशा में , कारागार प्राधिकारियों को न्यायालयों (cid:217)वारा सम्यक सचना प्रेषित की जायेगी। ्

(3) जब कारागार में निरु(cid:217)ध विचाराधीन बन्दी, अन्य मामले या मामलों, जिसके /जिनके लिए वह जमानत पर है, के लिए अपेक्षित है तो कारागार प्राधिकारियों को संबंधित न्यायालय ू सम्यक रूप से सचित करेगा।्

(4) यदि विचाराधीन बन्दी के विरु(cid:217)ध ऐसे दो मामले लंबित हैं, जिनके लिए वह जमानत पर नहीं है तो उसे न्यायालय भेजे जाने के प्रत्येक समय लाल स्याही में उसका पष्ठां

ृ कन किया जाएगा।

229. अनशासनु .- (1) किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी को उस क्षेत्र में नहीं रखा जाएगा जिसमें विचाराधीन बन्दी रखे जाते हैं या विचाराधीन बन्दियों के साथ संपर्क रखना अनज्ञात ु नहीं किया जाएगा।

(2) सफाई इत्यादि, जैसी आवश्यक कारागार सेवाओं में कार्य कर रहे बन्दियों को छोड़कर, किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी को विचाराधीन यार्ड या ब्लॉक में प्रवेश करना अनज्ञात नहीं किया ु जाएगा।

(3) जैसे ही कार्य समाप्त होता है, इन बन्दियों को यार्ड या ब्लॉक से प्रत्या(cid:305)त किया जायेगा।

(4) उन समस्त मामलों में जिनसे विचाराधीन बन्दी संबंधित हैं, किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी को अधीक्षण या समान प्रयोजन के लिए काम में नहीं लिया जाएगा और ऐसे समस्त मामले कर्मचारिवन्दृ सदस्यों (cid:217)वारा संभाले जायेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 161

230. निकल भागने का प्रयत्न.- निकल भागने का प्रयत्न करने वाले विचाराधीन बन्दी को अविलंब भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 224 के अधीन विचारण के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष लाया जायेगा।

231. विचाराधीन बन्दी (cid:217)वारा पालन किये जाने वाले कार्य.- (1) विचाराधीन बन्दी उन यार्डों, बैरकों और कोठरियों की सफाई करेंगे जहां वे रखे जाते हैं और इस कार्य के लिए ब्यौरा दिया जायेगा।

(2) ऐसा कार्य समह आधार पर आबंटित किया जा सके गा , ताकि समस्त विचाराधीन बन्दियों के संचयी कार्य के माध्यम से, यार्ड, बैरकें , कोठरी साफ हो जायें।

(3) समस्त विचाराधीन बन्दियों को उनके स्वयं के वस्त्रों, बिछौने और सामान को समचित ु रूप से धोया हआु , स्वच्छ, और विसंक्रमित रखना भी अत्यावश्यक होगा।

232. कार्यों के लिए संदेय मजदरीू .- यदि कोई विचाराधीन बन्दी स्वेच्छा से कार्य करना चाहता है तो यदि संभव हो, उन्हें उपयक्तु कार्य दिया जाना चाहिए और सरकार (cid:217)वारा नियत कार्य और मजदरी के मानक की अनसू

ू चियों के अनसार मजदरी संदत्त की जा सके गी।

233. बाह्य कार्यों पर प्रतिषेध.- विचाराधीन बन्दियों का बाह्य कार्य पर नियोजन सर्वथा प्रतिषि(cid:217)ध होगा और किसी भी मामले में, विचाराधीन बन्दियों को उनके स्वयं के अहाते या वर्क शैड में और जहां सि(cid:217)धदोष बन्दी कार्य कर रहे हैं उन क्षेत्रों में नियोजित नहीं किया जाएगा। किसी भी असि(cid:217)धदोष आपराधिक बन्दी से बलपर्वक अपमानजनक रूप का ू कोई भी काम नहीं लिया जाएगा।

234. विचाराधीन बन्दियों का अंतरण.- आपात के दौरान या प्रशासनिक आधारों पर, कारागार निदेशालय का प्रमख विचाराधीन बन्दियों को राज्य के भीतर एक कारागार से दसरे कारागार में अंतरित करने के लिए प्राधिकत है।ृ

235. एक राज्य से दसरे राज्यू में अंतरण.- स्थानीय न्यायालय में मामलों के निपटान के पश्चात यदि विचाराधीन बन्दी अन्य् राज्य के न्यायालय के समक्ष पेश करने के लिए अपेक्षित हो, तो संबंधित न्यायालय अधीक्षक (cid:217)वारा उक्त विचाराधीन बन्दी को उसके न्यायालय में पेश करने की व्यवस्था करने का अनरोध कर सके गा। ु

236. विचाराधीन बन्दी की गंभीर रुग्णता.- (1) प्रत्येक मामले में जब विचाराधीन

ु होना संभाव्य हो, तो अधीक्षक संबंधित विचारण बन्दी इतना गंभीर रुग्ण हो कि मत्यृ

न्यायालय को परिस्थितियों की रिपोर्ट करेगा और यदि विधि अनज्ञा देती है और न्या

ु यालय इसे उचित समझता है तो बन्दी जमानत पर छोड़ा जा सके गा।

(2) विचाराधीन बन्दी के इतना रुग्ण होने की दशा में कि वह नियत तारीख पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सकता, तो अधीक्षक इस नियम के उपर्यक्त ख(cid:214)ड (cid:217)वारा यथा अपेक्षित ु

परिस्थितियों की रिपोर्ट करेगा और बन्दी को अभिरक्षा में और निरु(cid:217)ध करने के प्राधिकार की मांग करेगा।

162 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

237. बाह्य चिकित्सालय को अन्तरण.- (1) जब कारागार चिकित्सा अधिकारी सिफारिश करता है कि विचाराधीन बन्दी के स्वास्थ्य के हित में, उसे कारागार के बाहर किसी चिकित्सालय को अंतरित किया जाना चाहिए, तो तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।

(2) यदि विचाराधीन बन्दी को विचारण कर रहे न्यायालय की अधिकारिता के बाहर स्थित किसी रेफरल चिकित्सालय को अन्तरित करने की आवश्यकता है तो ऐसा अन्तरण विचारण न्यायालय को सचना के अधीन तरंत किया जाएगा।

ु की रिपोर्ट उस

ु.- विचाराधीन बन्दी की मत्यृ

238. विचाराधीन बन्दी की मत्यृ न्यायालय को तत्परता से की जायेगी जिसके आदेशों के अधीन वह निरु(cid:217)ध किया गया था।

239. विचाराधीन बन्दी की दोषसि(िcid:217)ध.- (1) जब विचाराधीन बन्दी सि(cid:217)धदोष किया जाता है तो विचाराधीन बन्दियों का प्रभारी अधिकारी नकद और निजी संपत्ति, यदि कोई हो, के साथ-साथ समस्त संबंधित कागजात और अभिलेख, सि(cid:217)धदोष बन्दियों के प्रवेश के प्रभारी अधिकारी को सपर्द करेगा जो इस संबंध में प्रायिकचर्या में भाग लेंगे।

(2) दोषसि(िcid:217)ध पर, विचाराधीन बन्दी को नये प्रवेश दिये गये सि(cid:217)धदोषों के लिए आशयित यार्ड को अंतरित किया जाएगा।

240. न्यायालय से छोड़ा जाना.- (1) जब विचाराधीन बन्दी को न्यायालय से आरोपमक्त किया जाता है या छोड़ा जाता है तो इस आशय का पष्ठां

ृ कन न्यायालय (cid:217)वारा जेल प्राधिकारी को किया जाएगा।।

, विचाराधीन रजिस्टर के अधीन समचित स्तं

ु भों में प्रविष्टियां (2) ऐसी सचना की प्राप्ति परू की जाएगी।

241. निजी संपत्ति का दावा.- यदि विचाराधीन बन्दी न्यायालय से छोड़ा जाता है तो वह कारागार प्राधिकारियों से अपनी निजी संपत्ति, यदि कोई हो, का दावा कर सके गा।

242. कारागार से छोडा जाना़ .- (1) छोडे जाने का आदेश इलेक्ट्रानिक रीति (सम्यक ् रूप से अधिप्रमाणिकतृ ) के माध्यम से या न्यायालय के चपरासी के माध्यम से भेजा जायेगा और यदि कोई निजी व्यक्ति ऐसा दस्तावेज लाता है तो यह कारागार कार्यालय में स्वीकार नहीं किया जायेगा।

(2) छोडे जाने के आदेश की प्राप्ति पर तत्प रता से कार्रवाई की जाएगी और विचाराधीन बन्दी छोडे जाने के आदेश की प्राप्ति से चार घंटे में छोड़ दिया जायेगा।

(3) यदि छोडे जाने का आदेश सर्यास्त

ू के पश्चात प्राप्त् होता है, विचाराधीन बन्दी को अगली सबह यथाशक्य शीघ्र छोडे जाने के लिए कदम उठाये जाने चाहिए।

243. छोड़े जाने के लिए अन्य औपचारिकताएं.- विचाराधीन बन्दी को छोड़ते समय, प्रभारी अधिकारी,-

(क) ससंगत मल कागजों और अभिलेख सहित छोडे जाने के आदेश की संवीक्षा करेगा;

(ख) संवीक्षा करेगा कि क्या विचाराधीन बन्दी के विरु(cid:217)ध कोई अन्य मामला लंबित है;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 163

(ग) विचाराधीन बन्दी की पहचान की संवीक्षा करेगा; और

(घ) विचाराधीन बन्दी की नकदी और संपत्ति उसे सौंपेगा।

244. जमानतपत्र की अंतर्वस्तु के बारे में सचनाू .- विचाराधीन बन्दी को उसे छोडे जाने से पर्व जमानतपत्र की अंतर्वस्तू

ुओं की सचना दी जाएगी।ू

245. महिला विचाराधीन बन्दी.- (1) महिला विचाराधीन बन्दी सामान्यत: महिला पलिस (cid:217)वारा ु एस्कॉर्ट की जायेगी।

(2) जहां तक व्यवहार्य हो, महिला विचाराधीन बन्दियों के परिवहन के लिए पथक वाहन ृ उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

246. महिला विचाराधीन बन्दियों (cid:217)वारा कार्य.- (1) महिला कर्मचारिवन्दृ सदस्य महिला विचाराधीन बन्दियों की प्रभारी होंगी।

(2) महिला विचाराधीन बन्दी के प्रवेश और छोडे जाने के समय महिला उप -जेलर या मैट्रन उपस्थित होगी।

247. महिला विचाराधीन बन्दी का एस्कॉर्ट किया जाना.- (1) जहां तक संभव हो,

ु महिला विचाराधीन बन्दी उनके छोड़े जाने के पश्चात उनके संबंधियों को सपर्द किये जायेंगे।

(2) यदि यह संभव नहीं हो, महिला पलिस या महिला कारागार गार्ड , छोड़े गयी किसी महिला विचाराधीन बन्दी का निकटतम रेल्वे स्टेशन या परिवहन बस स्टै(cid:214)ड तक के लिए एस्कॉर्ट करेगी।

248. रजिस्टर और उनके प्ररूपों को भरने के लिए प्रक्रिया.- किसी जेल में निरु(cid:217)ध विचाराधीन बन्दियों के संबंध में, यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में रजिस्टर रखा जाएगा।

249. यवा अपराधियों का पथक ब्ला

् क में परिरोध.- (1) प्रत्येक कारागार में यवा ु

् क होगा ताकि अपराधियों के लिए, जो 18 और 21 वर्ष की आय के मध्यु हैं, एक पथक ब्लाृ

उन्हें यवा आभ्याु सिक अपराधियों से दर रखा जा सके ।ू

(2) यह ब्लाक दो पथक अनभागों में विभाजित होगा जिसमें से एक विचाराधीनों के लिए और दसरा सि(cid:217)धदोषों के लिए होगा।

(3) सामान्यत: प्रत्येक अनभाग में ु 100 से अनधिक अन्त:वासियों को रखा जाएगा।

250. यवा अपराधियों को शिक्षा .- (1) अधीक्षक यह सनिश्चित करेगा कि कारागारों में यवा अपराधियों को शैक्षिक आवश्यु कताएं पर्याप्त रूप से मिलें और समग्र शैक्षिक विकास के लिए आवश्यक सविधायें उपलब्धु करवायी गयी हैं।

(2) यदि अपेक्षित हो तो गैर सरकारी संगठनों की सहायता से, यवा अपराधियों के ु लिए समचित शैक्षिक कार्यक्रम डिजाइन किये जायेंगे , ताकि विभिन्न आय समहों और ब(िcid:217)धमत्ता ु

स्तरों के यवा अपराधी फायदा प्राप्तु कर सकें ।

लिखित पहलओं पर विशेष बल दिया जाएगा , (3) यवा अपराधियों की शिक्षा में निम्नु अर्थात ्:-

(क) शारी रिक और स्वास्थ्य शिक्षा;

(ख) सामाजिक और नैतिक शिक्षा;

164 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) साहित्यिक शिक्षा;

(घ) व्यावसायिक शिक्षा; और

(ङ) कला और हस्तशिल्प शिक्षा।

(4) अशिक्षित और शैक्षिक रूप से पिछड़े यवा अपराधियों के लिए विशेष शैक्षिक कक्षाएं आयोजित की जायेंगी।

-शिक्षा के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध करवाये (5) कारागारों में यवा अपराधियों की स्वु जायेंगे।

(6) वे जो राज्य शिक्षा विभाग (cid:217)वारा या विश्ववि(cid:217)यालय (cid:217)वारा या अन्य मान्यताप्राप्त संस्थान (cid:217)वारा संचालित परीक्षाओं में उपस्थित होने की अपेक्षित क्षमता और वांछा रखते हैं, उन्हें ऐसा करने की अनज्ञा दी जाएगी। ु

(7) यवाु अपराधियों (सि(cid:217)धदोषों) को ऐसे शिल्प, कौशल और व्यवसाय सिखाये जायेंगे जो छोडे जाने के पश्चा त उनके लिए उपयो

् गी होंगे।

.- (1) यवा अपराधियों को उनके ब्ला

251. यवा अपराधियों का नियोजनु

ु क के भीतर कारागार की आवश्यक सेवाओं जैसे सफाई और स्वच्छता इत्यादि और नलसाजी सेवाओं को चलाने के लिए चक्रानक्रम में नियोजित किया जा सके गा।

(2) नियोजित यवा अपराधी से किसी भी दिवस में 6 घंटे से अधिक के लिए कार्य करना अपेक्षित नहीं होगा।

(3) कार्य पालन करने वाला अपराधी,-

(क) पर्यवेक्षण अधिकारी (cid:217)वारा दिये गये किसी यक्तियक्त निु ु देश का अनपालन ु करेगा; और

(ख) कार्य पालन के प्रयोजन के लिए प्रदत्त किसी सरक्षा वस्त्रु या उपस्कर को पहनेगा।

252. कार्य करने का सरक्षित वातावरण और कार्य की सरक्षित रीति

ु .- पर्यवेक्षण अधिकारी यह सनिश्चित करने के लिए कोई भी उपाय करेगा कि कार्य कर रहा अपराधी ,- (क) उस स्थान पर, जहां कार्यपालन हो रहा है, अरक्षित परिसंकटमय न हो;

(ख) ऐसी रीति से कार्य करेगा कि जिससे अपराधी या अन्य व्यक्ति के लिए परिसंकटमय न हो।

ृ तिक विकास.- (1) यवा अपराधियों के सांस्कु

ृ तिक 253. यवा अपराधियों का सांस्कु विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।

ृ तिक गतिविधियां इस प्रकार तैयार की (2) आमोद-प्रमोदात्मक प्रकति के कार्यक्रम और सांस्कृ जायेंगी ताकि ये यवा अपराधियों के विभिन्नु समहों की आवश्यू कताओं के अनरूप हों।ु

(3) क्रियाकलाप जैसे अंतरंग खेल, बाह्य खेल, व्यायाम, खेलकदू , फिल्में, संगीत, समदायिक ु और लोक नत्यृ , ना(cid:210)य कलाएं, हस्तशिल्प, पठन, लेखन, वाद-विवाद प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम, खेलकद प्रतियोगिताू , आमोद-प्रमोदात्मक और सांस्कृ तिक कार्यक्रमों के लिए आयोजित किये जायेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 165

254. यवा अपराधियों का अनशासनु

ु .- यवा अपराधियों के अनशासन पर विशेष बल दिया जाएगा। जहां तक संभव हो, छोटे अपराधों में रियायत के प्रत्याहरण (cid:217)वारा बरता जायेगा और जब यह उपागम विफल हो जाए, तो दंड के अन्य प्ररूपों का आश्रय लिया जाएगा।

255. छोडे जाने की तारीख की सचना नातेदारों को देना .- (1) सि(cid:217)धदोष के मामले में, यवा अपराधी को छोडे जा ने से कम से कम एक मास पर्व

ू , उसके नातेदारों या मित्रों को उसके छोडे जाने की तारीख की सचना देते हए पत्र प्रेषित किया जाएगा।

(2) यवा अपराधियों के मामले में यथोचित संस्था गत और गैर-संस्थागत उपचार उपलब्ध करवाने के लिए अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 20) का व्यापकता से उपयोग किया जाएगा।

(3) बन्दियों के पश्चातवर्ती देखरेख पनर्वास के उपबंध के अनसार पश्चा

ु तवर्ती देखरेख सविधायें विस्ताु रित की जानी चाहिए।

अध्याय 9

महिला बन्दी और संतान

256. महिला जेल की स्थापना.- (1) महिला बन्दियों की सरक्षा सनिश्चित करने और ु

किसी भी प्रकार के शोषण से उनकी रक्षा करने के लिए राज्य सरकार राज्य में महिला जेलों की स्थापना कर सके गी।

(2) अनन्य कारागारों के के न्द्रीय क्षेत्रों से दर होने के कारण महिला बन्दियों की घर से निकटता प्रतिबाधित हो सके गी, ऐसे अनन्य कारागार कई बार सरक्षा के दृष्टिकोण से ु आवश्यक हो सकते हैं।

(3) किसी भी मामले में, जहां महिलाओं के लिए कोई अनन्य जेल नहीं है, वहां एक जिले या के न्द्रीय कारागार के भीतर महिला अंत:वासियों के निवास के लिए पथक अहाते या कारागार ृ भी स्थापित किये जाने अपेक्षित हैं।

(4) महिलाओं के लिए पथक कारागार स्था

् पित किये जाने तक, परुष और महिला दोनों ु अंत:वासी इस शर्त पर, कि महिला अपराधी कठोरता से कारागार प्रक्षेत्र के भीतर सर्वथा पथक ृ महिला अहातों में रखी जाएगी, उसी कारागार में निरु(cid:217)ध रखे जा सकते हैं।

(5) सामान्य कारागारों में महिलाओं के लिए वि(cid:217)यमान अहाते, यह सनिश्चित करने के लिए ु

कि महिला अंत:वासी इन अहातों तक और से आने-जाने के दौरान परुष अंतु :वासियों के साथ संपर्क में ना आयें, नवीकत किये जा सकें गे। ऐसे अहाते , जहां तक संभव हो, अवसंरचनात्मक ढांचे के निबंधनों के अनसार स्वं

ु तत्र होने चाहियें।

(6) इन अहातों में दोहरी ताला प्रणाली होनी चाहिए एक ताला बाहर और दसरा भीतर।ू 257. महिला बन्दियों के लिए अहाते.- महिला बन्दियों के लिए अहातों में उनकी विशेष आवश्यकताओं के संदर्भ में अपेक्षित समस्त सविधायें होनीु चाहियें जैसे कि अलगाव,

ु -रेख, स्वास्थ्य देख-रेख और पनर्वास इत्याु दि।

सरक्षाु , गर्भावस्था, प्रसव और कटंब देखु166 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 258. कार्य तक समान पहंचु .- महिला अंत:वासियों के लिए कार्य और उपचार कार्यक्रम उनकी विशेष आवश्यकताओं पर सम्यक ध्या् न देते हए प्रकल्पित किये ु जायेंगे और ऐसे अंत:वासियों को परुष बन्दिु यों के समान कार्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण और शिक्षा की ू पहंच मंजर की जाएगी। ु

259. परुषों से महिला बन्दियों की पथकता

सख्ती से पथक रखा जाएगा और विचाराधीन महिला बन्दी

ृ .- (1) महिला बन्दियों को परुष बन्दीु से , यदि संभव हो, सि(cid:217)धदोषों से अलग रखी जाएगी।

(2) महिला वार्ड इस प्रकार स्थित होंगे कि परुष जेल के किसी भी भाग से अनवेक्षा ना हो सके और जहां तक संभव हो, पथक चिकित्सालय अहाता होगा।

(3) महिला बन्दियों को जेल कार्यालय में उपस्थित होना आवश्यक नहीं होगा।

(4) महिला बन्दियों के वारंट की समस्त जांचें और सत्यापन जेलर या महिला उप-जेलर (cid:217)वारा महिला अहाते में संचालित की जायेंगी।

260. वर्गीकरण और पथक्करणृ .- जहां तक संभव हो, महिला बन्दी नीचे वर्णितानसार ु वर्गीकत की जायेंगी और पथक रखी जायेंगी

् :-

(क) विचाराधीन बन्दियों को सि(cid:217)धदोष अपराधियों से पर्ण रूप से पथक रखा ू

जायेगा चाहे उनकी संख्या छोटी है;

(ख) आभ्यासिक बन्दी आकस्मिक अपराधियों से पथक किये जायेंगे

् ;

(ग) आभ्यासिक अपराधियों, वेश्याओं और वेश्यालय चलाने वालों को पथकतृ :

निरु(cid:217)ध किया जायेगा;

(घ) किशोर बालिकाओं को वयस्क महिला बन्दियों के साथ परिरु(cid:217)ध नहीं किया जाएगा; और

(ङ) राजनैतिक और सिविल बन्दी, सि(cid:217)धदोषों और विचाराधीन बन्दियों से पथक ृ रखे जायेंगे।

टिप्पण: (i) किसी बन्दी या विचाराधीन बन्दी को, जो मानसिक रोगी हो, कारागार में नहीं रखा जाएगा;

(ii) यदि ऐसे कोई बन्दी वहां हैं, तो वे तरंत समचित मानसिक स्वा

ु स्थ्य संस्थाओं को अंतरित किये जायेंगे;

(iii) सामाजिक-आर्थिक प्रास्थिति, जाति या वर्ग के आधारों पर बन्दियों का कोई वर्गीकरण अनज्ञात नहीं किया जाएगा।ु

261. रजिस्टर का रखा जाना.- रजिस्टर, जो इलैक्ट्रानिक प्ररूप में हो सके गा, संख्यांकित पष्ठों सहित कारागार के प्रत्ये

ृ क स्थान में रखा जायेगा, जिसमें महिला बन्दियों के निम्नलिखित ब्यौरे प्रविष्ट किये जायेंगे, अर्थात ् :-

(क) उनकी पहचान से संबंधित सचनाू ; (ख) उनके कारावास के कारण और ऐसे आदेश के सम्पूर्ण ब्यौरों सहित ऐसे कारावास का आदेश देने वाला प्राधिकारी;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 167

(ग) उनके प्रवेश और छोड़े जाने का दिन और समय; और

(घ) बन्दी की संतानों, यदि कोई हों, के नाम, आयु, अवस्थिति और अभिरक्षा प्रास्थिति सहित ब्यौरे।

262. महिला बन्दियों पर निर्बंधन.- (1) छोड़े जाने, अन्तरण या न्यायालय में उपस्थिति या अधीक्षक के आदेश के अधीन अन्य वैध प्रयोजनों के सिवाय किसी महिला बन्दी को महिला अहाते से किसी भी बहाने पर, छोड़ा या हटाया नहीं जाएगा।

(2) अपने अहाते को छोड़ने के लिए प्रा धिकत प्रत्ये

ृ क महिला बन्दी के साथ सामान्यत: उसके छोड़े जाने से उसके लौटने के समय तक महिला वार्डर के साथ जेलर या उप-जेलर होगा।

263. महिला बन्दियों के अहातों में प्रवेश पर निर्बंधन.- (1) जेल का कोई भी परुष ु अधिकारी किसी भी बहाने पर या जब तक कि उसका वहां उपस्थित होने का कर्तव्य न हो, महिला अहाते में अके ले प्रवेश नहीं करेगा।

(2) यदि परुष अधिकारी को महिलाओं के अहाते में किसी (cid:212)यटी पर उपस्थित होना हो और वहां महिला वार्डर हो, तो वह उसके साहचर्य में महिलाओं के अहाते में प्रवेश कर सके गा और उसे महिला जेल के जिस किसी भाग में जाना हो, वह साथ होगी।

(3) यदि मैट्रन सि(cid:217)धदोष है तो उसके साथ प्रधान वार्डर होगी और रात्रि में महिलाओं के अहाते में होते हए दोनों पथक नहीं होंगे

् , (cid:212)यटी पर उपस्थित प्रधान वार्डर जेलर को बलाएगा और ये दोनों अधिकारी अहाते में साथ-साथ प्रवेश करेंगे।

(4) जेल अधिकारियों या आगंतकों के ु एस्कॉर्ट के रूप में कार्य कर रहे वार्डरों को अहाते के बाहर रहना आवश्यक है जब इसका निरीक्षण हो रहा हो।

264. मैट्रन या महिला वार्डर चाबी की अभिरक्षक होगी.- जेल के महिला खंड की चाबियां दिन के दौरान मैट्रन या महिला वार्डर (cid:217)वारा रखी जायेंगी और रात्रि में वार्डों और अहाते को ताला लगाये जाने के पश्चात ्, किसी अधिभक्तु महिला कोठरियों के सिवाय, जेलर को सौंपी जायेंगी और अगली सबह महिला वार्डों को खोलने के लिए अपेक्षित होने तक उसकी अभिरक्षा में रहेंगी।

265. प्रयक्तु किए जाने वाले भिन्न-भिन्न ताले.- (1) महिला कोठरियों और वार्डों के ताले उनसे भिन्न होंगे जो जेल के अन्य भागों में प्रयक्तु होते हैं और जेल के परुष और ु महिला दोनों प्रभागों में प्रयक्तु किए जाने वाले ताले एक ही चाबी से नहीं खलेंगे।ु

(2) यदि कोई मैट्रन या महिला वार्डर नहीं है तो महिला वार्ड की चाबियां दिन के समय के

, कित वह अधीक्षक या आगंतक ं

दौरान, (cid:212)यटी परू उपस्थित प्रमख वार्डर (cid:217)वारा रखी जायेंगी

या जेलर या उप-जेलर (जिनमें से एक महिला वार्ड को खोलेगा और ताला लगाएगा) के साथ होने या झाड लगाने वाले प्रभारी वार्डर जिसे सफाई के लिए वार्ड में प्रवेश करना होता है , के सिवाय महिला वार्ड में प्रवेश नहीं करेगा। इस कर्तव्य के लिए न्यस्त वार्डर एक व(cid:217)ध और ृ भरोसेमंद अधिकारी होगा।

266. कर्मचारिवन्दृ का लिंग संवेदनशीलता के लिए प्रशिक्षण.- (1) महिला बन्दियों के साथ कार्य करने को समनदिष्ट समस्तु कर्मचारिवन्द लैंगिक अवचार और विभेद को168 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) सम्मिलित करते हए लिंग विनिर्दिष्टु आवश्यकताओं और महिलाओं के मानवाधिकारों के संबंध में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

(2) ऐसे कर्मचारिवन्द को उन परिस्थितियों और अवस्था

ृ ओं के बारे में भी संवेदनशील किया जाएगा, जहां महिला अंत:वासी विशिष्टत: कष्ट महसस कर सकती है ताकिू उनकी परिस्थिति के लिए संवेदनशील हों और सनिश्चित करें कि महिलाओं को समचित सहायता उपलब्ध करवायी गयी है।

267. शिश स्वाु स्थ्य देख-रेख.- जहां कारागार में संतानों को उनकी माताओं के साथ रहना अनज्ञात होु , वहां आवश्यकता और आपात के समयों में समचित रूप से ु प्रतिक्रिया देने के लिए कारागार कर्मचारिवन्द को शिश विकास से संबंधित जानकारी और संतानों के स्वास्थ्य देख-रेख पर आधारभत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ू

268. फोटोग्राफ और अंगलियों की छापु .- महिला कारागार अधिकारियों या महिला वार्डरों की उपस्थिति में और उनकी सहायता से महिला बन्दियों के फोटोग्राफ, पदचिह्न, अंगलियों की छापु और माप किये जायेंगे।

269. रात्रि निरीक्षण.- महिला अधिकारी (cid:217)वारा रात्रि निरीक्षण और दौरा किया जायेगा जो महिला वार्ड, महिला बन्दियों की संख्या और अन्य सचनाू , यदि कोई हो, महिला वार्ड या (cid:212)यूटी पर महिला सि(cid:217)धदोष चौकीदार से प्राप्त कर सही होना अभिनिश्चित करेगी।

270. मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख की अपेक्षा वाले बन्दी.- (1) मानसिक रोगों के लिए उपचार की आवश्यकताओं वाली महिला बन्दियों को कारागार में प्रवेश नहीं दिया जायेगा।

(2) उप-नियम (1) में यथा वर्णित महिला बन्दियों को महिला चिकित्सा अधिकारी के पर्यवेक्षण के अधीन मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय पर महिला बन्दियों के लिए पथक ृ अहातों या मानसिक स्वास्थ्य सविधाएं रखने वाले अन्यु चिकित्सालयों में रखा जाएगा।

271. महिला अहाते की अभिरक्षा.- महिला अहातों में प्रमख महिला वार्डरों और ु महिला वार्डरों की रात-दिन (cid:212)यटी रहेगी।ू

272. कारागार प्रवेश पर संगरोध और चिकित्सा सहायता.- महिला बन्दियों का कारागार में प्रवेश पर, चिकित्सीय परीक्षण किया जायेगा और यदि परीक्षण करने वाला चिकित्सा अधिकारी यह आवश्यक समझता है, चिकित्सीय आधारों पर ऐसी कालावधि के लिए, जैसी चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा सलाह दी जाए महिला अहातों में पथक रूप से रखी ृ जायेंगी।

273. महिला बन्दियों की देख-रेख करने के लिए महिला चिकित्सक.- (1) जिला सरकारी चिकित्सालय या चिकित्सा महावि(cid:217)यालय चिकित्सालय को अंशकालिक महिला चिकित्सा अधिकारियों को प्रवेश पर महिला बन्दियों के चिकित्सा परीक्षण के लिए लगाया जायेगा।

(2) कारागार में महिला बन्दियों के रहने के दौरान के वल महिला चिकित्सक ही उनके चिकित्सा स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 169

(3) प्रत्येक महिला बन्दी किसी महिला चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा परीक्षित की जायेगी। ऐसे परीक्षण पैरोल इत्यादि के पश्चात पन् ु :प्रवेश पर भी संचालित किये जायेंगे।

274. गर्भावस्था.- (1) जब प्रवेश के समय या उसके पश्चात कोई महिला बन्दी

् गर्भवती होना पायी जाती है या संदेह हो तो महिला चिकित्सा अधिकारी, तथ्य की रिपोर्ट अधीक्षक को करेगी।

(2) महिला के स्वास्थ्य की स्थिति, गर्भावस्था, गर्भावस्था की कालावधि और प्रसव की अधिसंभाव्य तारीख अभिनिश्चित करने के लिए सरकारी चिकित्सालय या चिकित्सा महावि(cid:217)यालय और चिकित्सालय के महिला विंग पर उसका चिकित्सीय परीक्षण करवाने के इंतजाम शीघ्रतम किये जायेंगे।

(3) समस्त आवश्यक विशिष्टियां अभिनिश्चित करने के पश्चात ्, विस्तृत रिपोर्ट कारागार निदेशालय के प्रमख को प्रेषित की जायेंगी। ु (4) उस महिला को, जो गर्भवती है, जेल भेजने से पर्व संबं

ू धित प्राधिकारी सनिश्चित करेंगे ु

कि प्रश्नगत जेल शिश प्रसव के साथु -साथ माता और शिशु, दोनों के लिए प्रसवपर्ण और ू

ूनतम सविधायें रखता है।ु

प्रसवोत्तर देख-रेख की व्यवस्था करने के लिए आधारभत न्यू (5) महिला बन्दी का स्त्रीरोग-विज्ञान संबंधी परीक्षण, जिला सरकारी चिकित्सालय या चिकित्सा महावि(cid:217)यालय चिकित्सालय में किया जाएगा।

(6) उचित प्रसवपर्व और प्रसवोत्तर देखू -रेख अर्हित चिकित्सा अधिकारी की सलाह के अनसार ु बन्दी को उपलब्ध करवायी जायेगी।

(7) गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और शिशओं को परक पोषक तत्वों , स्वस्थ पर्यावरण और नियमित व्यायाम के लिए अवसरों को सम्मिलित करते हए पर्याप्त ु और समयब(cid:217)ध भोजन, उपलब्ध करवाया जाएगा।

275. कारागारों में शिश प्रसवु .- (1) जहां तक संभव हो, प्रत्येक महिला बन्दी के लिए पैरोल के लिए व्यवस्था (या लघ और आकस्मिु क अपराधी के मामले में निलंबित दंडादेश) का उचित विकल्प दिया जायेगा जिससे गर्भवती महिला कारागार के बाहर प्रसव करवाने को समर्थ हो सके ।

(2) के वल उच्च सरक्षा जोखिम गठित करने वाले आपवादिक मामलों या समतल्य

ु गंभीर प्रकार के मामलों में, इन सविधाओं से इंकार किया जा सु के गा।

(3) शिश का प्रसव जहां तक संभव हो चिकित्सालय में किया जायेगा कित कारागार चिकित्सालय में नहीं।

276. जन्म का रजिस्ट्रीकरण.- (1) कारागार में जन्मों को, स्थानीय जन्म

थ्य कि शिश का जन्मु रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में रजिस्ट्रीकत किया जायेगा और यह तृ कारागार में हआ है जन्मु स्थान के रूप में अभिलिखित नहीं किया जायेगा। (2) के वल उस परिक्षेत्र का पता वर्णित किया जायेगा।

(3) जहां तक परिस्थ ◌ितियां अनज्ञेय होंु , कारागार में जन्मे शिश के नामकरण संस्का

ु र को संपादित करने की समस्त सविधाएं माता को दी जायेंगी ।

170 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(4) महिला बन्दी के बीमार होने की दशा में, उसकी देख-रेख के अधीन आने वाले किसी संतान की देख-रेख का वैकल्पिक इंतजाम, जेल कर्मचारिवन्द (cid:217)वारा किया जायेगा।ृ

277. महिला बन्दी को कतिपय आभषण अनज्ञात किया जाना

ु .- (1) महिला बन्दियों को कम मात्रा में, लघमल्यु ू के कतिपय आभषण जैसे कि मंगलू -सत्रू , चड़िू यां और बिछिया रखना अनज्ञात किया जायेगा।ु

(2) तथापि, अधीक्षक अपने विवेकाधिकार पर, अनशासनात्मक या सरक्षा कारणों से किसी विशिष्ट मामले में इन आभषणों को रखा जाना अनज्ञात करने से इंकार कर सके गा।

278. महिला बन्दियों की संतान.- (1) छह वर्ष तक की आय की संतान कोु , यदि उसे नातेदारों के साथ या अन्यथा रखने के लिए, कोई अन्य इंतजाम नहीं किया जा सकता है, उसकी माता के साथ कारागार में प्रवेश दिया जाएगा।

(2) कारागार में जन्मी संतानें, यदि इन्हें अन्यथा किसी उपयक्त स्थान ु पर नहीं रखा जा सके , छह वर्ष की आय तक अपनी माताओं के साथ रह सकती हैं।

(3) चिकित्सा अधिकारी, इस उपबंध के प्रयोजन के लिए कारागार में नहीं जन्मी संतानों की आय अवधारित करेगा।ु

279. छह वर्ष के ऊपर की संतानों के बारे में कलक्टर को सचनाू .- (1) किसी संतान को कारागार में प्रवेश नहीं दिया जाएगा या नहीं रखा जाएगा यदि उसने छह वर्ष की आय ु पर्ण कर ली है।ू (2) अधीक्षक, उन्हें बाल विकास विभाग या सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (cid:217)वारा चलाए जा रहे गह में उस आय की समस्त संतानों को रखे जाने के लिए कलक्टर और जिला मजिस्ट्रेट को सचित करेगा। ू (3) ऐसी संतानें, जब तक कि उनकी माता नहीं छोड़ी जायें, या संतान ऐसी आय पर्ण कर ले ु कि स्वयं की जीविका उपार्जित करने में समर्थ न हो, सरक्षात्मकु अभिरक्षा में रखी जायेंगी ।

(4) संतान का कारागार से हटाया जाना अधिकतम संवेदनशीलता के साथ किया जाएगा और

ु के वल जब उसके रुकने के लिए उपयक्त वैकल्पिक इंतजाम किये जा चके हों।

(5) विदेशी राष्ट्रों के मामले में, संतान का हटाया जाना और वैकल्पिक इंतजाम के वल उनके कौंसलीय प्रतिनिधियों के परामर्श से किये जायेंगे।

280. संरक्षात्मक अभिरक्षा में संतान.- (1) बाल विकास विभाग के गह में संरक्षात्मक ृ अभिरक्षा में रखी गयी संतानों को, एक सप्ताह में कम से कम एक बार उनकी माताओं से मिलना अनज्ञात किया जाएगा। ु

(2) जिला समाज कल्याण अधिकारी सनिश्चित करेगा कि ऐसी संतानें अधीक्षक (cid:217)वारा इस प्रयोजन के लिए नियत तारीखों पर कारागार में लायी जाती हैं।

(3) छह वर्ष से ऊपर आय की संतानें

ु , महिला बन्दी (cid:217)वारा चने गए किसी निकट नातेदार को सौंपी जायेंगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 171

281. मत्य के कारण छोड़े गए शिशृ

ु.- (1) जब एक महिला बन्दी की मत्य हो जाती ृ

है और एक शिश पीछे छोड़ जाती है तो अधीक्षक संबंधिु त जिला मजिस्ट्रेट को सचित करेगा ू

और वह शिश की समचित देखु

ु -रेख के लिए व्यवस्था करेगा।

(2) यदि बन्दी के नातेदार शिश की सहायता करने के अनिच्छक हों

ु , तो जिला मजिस्ट्रेट संतान को या तो सरकार (cid:217)वारा अनमोदित संस्थाु या चलाये जा रहे गह में रखेगा या देखृ - रेख और भरणपोषण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को सौंप देगा।

282. संतानों के लिए सहायक वातावरण.- संतानों के साथ महिला बन्दियों को उप- जेलों में तब तक नहीं रखा जाना चाहिये, जब तक समचित सविधायें सनिश्चित नहीं की जाती जो वहां समचित जैविकु , मनोवैज्ञानिक और सामाजिक व(िcid:217)धृ के लिए, सहायक वातावरण बनाती हों।

283. महिला बन्दियों की संतानों का कल्याण.- (1) महिलाओं के लिए कारागार से

होगा जहां महिला बन्दियों की संतानों की देखभाल शिशकक्ष और नर्सरी वि(cid:217)यालय संलग्नु

की जाएगी और तीन वर्ष से कम आय के शिश शिशकक्ष में अनज्ञातु

ु किये जायेंगे और जो तीन और छह वर्ष के मध्य हैं उनकी देखभाल नर्सरी वि(cid:217)यालय में की जाएगी।

(2) शिशकक्ष और नर्सरी वि(cid:217)यालय कारागार प्रशासन (cid:217)वारा अधिमानत : कारागार के बाहर चलाये जायेंगे।

(3) कारागर में संतानों को समय-समय पर सरकार या कारागार निदेशालय प्रमख ु (cid:217)वारा नियत मापमान के अनसार स्थाु नीय जलवायवीय अपेक्षाओं के अनकल यथोचित वस्त्र ु अपलब्ध करवाये जायेंगे।

(4) बढ़ती हई संतानों के लिए आहार के मापमान संतानों की कै लोरीगत आवश्य कताओं को ध्यान में रखते हए चिकित्सीु य मानकों और जलवायवीय परिस्थितियों के अनसारु विनिश्चित किये जायेंगे।

(5) कारागार में रह रही संतानों के साथ कभी भी बन्दियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाएगा, कारागार कर्मचारिवंदृ , जब संतानों की तलाशी कर रहे हों, संवेदनशीलता, सम्मान और गरिमा प्रदर्शित करेंगे और संतानों के मामले में कभी भी शरीर गहा तलाशीु लाग नहीं होगी।ू

284. संतान के स्वास्थ्य का परीक्षण.- (1) संतानों को उनकी शारीरिक व(िcid:217)ध को ृ

मानिटर करने के लिए चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा नियमित रूप से परीक्षित किया जाएगा जिन्हें समचित समय पर पोलियो और चेचक सहित विभिन्न रोगों के लिए टीके भी लगाये जायेंगे।

(2) चिकित्सा अधिकारी की लिखित सिफारिश पर ऐसी संतानों को अतिरिक्त वस्त्र और आहार भी दिया जा सके गा।

(3) जब कभी संभव हो, बाल रोग विशेषज्ञ संतानों की स्वास्थ्य दशा की जांच करेगा।

285. महिला बन्दियों के साथ रह रही संतानों के लिए शिक्षा.- (1) कारागार में रह

-प्रमोद संबंधी अवसर दिये रही महिला बन्दियों की संतानों को समचित शिक्षा और आमोदु

जाएंगे।

172 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) महिलाओं के लिए कारागार से संलग्न भली-भांति सज्जित शिशकक्ष और नर्सरी ु

वि(cid:217)यालय होगा जहां माताएं जब कारागार में कार्य करती हैं महिला बन्दियों की संतानों की देख-रेख की जाएगी ।

(3) तीन वर्ष से कम आय की संतानों को शिशकक्ष अनज्ञात किये जाएंगे और जो तीन और छह वर्ष के मध्य हैं, उनकी देख-रेख नर्सरी वि(cid:217)यालय में की जाएगी।

(4) ये सविधाएं वार्डरों और अन्यु महिला कारागार कर्मचारिवंद की संतानों को भी दी जा ृ सकें गी।

(5) शिशकक्ष और नर्सरी वि(cid:217)यालय गैर -सरकारी संगठनों या राज्य कल्याण सेवाओं की सहायता से कारागार प्रशासन (cid:217)वारा अधिमानत: कारागार के बाहर चलाये जाऐंगे।

(6) उस दशा में जब कारागार प्रशासन यह समझे कि शिशकक्ष चलाया जाना कठिन है , समचित सरक्षा के अधीन निजी रूप

ु से चलाए जा रहे शिशकक्ष में संतानों को भेजने की ु

व्यवस्थाएं की जाएंगी।

परिवहन प्रभार कारागार प्रशासन (cid:217)वारा वहन (7) शिशकक्ष फीस और प्रक्रिया में अंतग्र्रस्तु

किये जायेंगे।

286. कारागार में संतानों के लिए वस्त्र.- (1) कारागार में संतानों को स्थानीय जलवायवीय अपेक्षाओं के अनकल यथोचित वस्त्र उपलब्धु ू करवाये जाएंगे और उक्त प्रयोजन के लिए सरकार समचित मापमान अधिकथित करेगी।

ु , वस्तएं जैसे ु

(2) महिला बन्दियों को, जो अपने नवजात शिशओं की देखु -रेख में लगी हई हैं कि डायपर्स और यथा अपेक्षित ऐसी अन्य चीजें उपलब्ध करवायी जानी चाहिए ।

287. कारागारों के भीतर भोजन पकाना.- (1) कारागारों में महिलाओं के लिए जाति या धार्मिक आधार पर रसोइयों का प्रबंध या भोजन पकाने पर पर्णतू : पाबंदी लगानी चाहिए।

(2) महिला बन्दियों को उनके स्वयं के लिए भोजन पकाना अनज्ञात नहीं किया जाएगा। ु

(3) पका हआ भोजन प्रभारी वार्डर के साथ सि(cid:217)धदोष रसोइए (cid:217)वारा उन तक लाया जायेगा और अहाता के गेट के बाहर रखा जायेगा।

(4) कथित समय पर अहाते के बाहर रखे हए समस्तु अस्वीकत पदार्थ इत्याृ दि सि(cid:217)धदोषों (cid:217)वारा ले जाये जायेंगे।

(5) नर्सिंग महिलाओं और महिला बन्दियों के साथ रह रही संतानों को नियम 757 में यथाविनिर्दिष्टानसार पर्याप्त और पोषक आहार दिया जाएगा।

(6) खा(cid:217)य वस्तएं अच्छी गणवत्ता वाली होंगी।

(7) गर्भवती और नर्सिंग महिला बन्दियों को इन नियमों में यथा विहित विशेष आहार उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

(8) महिला बन्दियों को इन नियमों में यथा विहित त्यौहारों और राष्ट्रीय अवकाशों पर विशेष आहार मिलना चाहिए।

(9) चिकित्सा अधिकारी सनिश्चित करेगा कि भोजन स्वा

ु स्थ्यकर परिस्थितियों के अधीन पकाया गया है और पोषक है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 173

् होगी।

(10) प्रत्येक तीन सौ बन्दियों के लिए एक पथक रसोई ृ

(11) कछ महिला कर्मचारिवन्द को आहार और रसोईयों के प्रबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और ऐसे प्रशिक्षित कर्मचारिवन्द को कारागार में महिलाओं के लिए रसोई और खाना पकाने का पर्यवेक्षण करना चाहिए।

(12) अधीक्षक को सम्मिलित करते हए कारागार अधिकारी

ु कारागार आहार प्रणाली के प्रत्येक पहल जैसे कि राशनों का जारी किया जाना , रसोई का प्रबंध और भोजन का वितरण का पर्यवेक्षण करेगा।

(13) महिला बन्दियों को कारागार बैरकों के भीतर उनकी अपनी छोटी रसोई रखना अनज्ञात ु नहीं किया जाएगा।

(14) बन्दियों को स्वच्छ पेयजल आपर्त किया जाएगा और इसका आवधिक रूप से परीक्षण किया जाएगा।

288. मापमान के अनसार बन्दिु यों का आहार प्राप्त करना.- प्रत्येक बन्दी प्रतिदिन नियत समय पर और अध्याय 35 के अधीन विनिर्दिष्ट मापमान के अनसार भोजन प्राप्त ु करने का हकदार होगा।

289. चिकित्सीय आधारों पर विशेष अतिरिक्त आहार.- (1) जहां चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य के कारणों से, विहित आहार को किसी महिला बन्दी या उसकी संतान के लिए अनपयक्त या अपर्याप्त समझता है तो वह किसी विशिष्ट कालावधि के लिए , विशेष आहार या अतिरिक्त आहार का लि खित आदेश कर सके गा।

(2) इस संबंध में गर्भवती या नर्सिंग बन्दियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

(3) बन्दियों के आहार संबंधी नियमों का, वे जो गर्भवती और नर्सिंग माताओं और नवजात और संतानों के लिए हैं, निष्ठा से संप्रेक्षण किया जाएगा।

290. वस्त्र.- (1) सि(cid:217)धदोष महिलाओं और विचाराधीन बन्दियों को समय-समय पर, राज्य सरकार (cid:217)वारा नियत मापमान के अनसार वस्त्र आपर्त किये जायेंगे।

(2) स्थानीय परिस्थितियों और मौसम के परिवर्तन के अनसारु , पर्याप्त ऊनी वस्त्र भी उपलब्ध करवाये जायेंगे।

(3) महिला बन्दियों के साथ रहने को अनज्ञात की गयी संतानों

ु को ऐसे उपयक्त वस्त्र दिये ु

जायेंगे जैसे स्थानीय समदाय में संतानों (cid:217)वारा सामान्यतु

: प्रयक्त किए जाते हैं।ु

(4) प्रत्येक महिला बन्दी को मरम्मत इकाई बनाये रखनी चाहिए जहां बन्दियों के वस्त्रों की मरम्मत की जा सके ।

(5) महिला बन्दियों को उनकी आवश्यकताओं के अनसार कीटाणरहित सैनिटरी पैड या सैनिटरी नैपकीन जारी किये जायेंगे।

(6) समस्त वस्त्र साफ किये जायेंगे और सही हालत में रखे जायेंगे।

(7) स्वच्छता बनाए रखने के लिए अन्तर्वस्त्र जितनी भी बार आवश्यक हों उतनी बार बदले जायेंगे और धलाई किये जायेंगे। ु174 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (8) प्रत्येक महिला बन्दी को स्थानीय मानकों के अनसार पर्याप्त बिछौना उपलब्ध करवाया जाएगा, ये जारी करते समय स्वच्छ होंगे, सव्यवस्थिु त रखे जायेंगे और उनकी स्वच्छता सनिश्चित करने के लिए पर्याप्त बार बदले जायेंगे।

(9) कारागार की समस्त वस्तुए, बिछौना, वस्त्र और अन्य उपस्कर यह सनिश्चित करने के ु

लिए कि समचित मानक बनाए रखे गये हैं , एक महिला अधिकारी (cid:217)वारा सप्ताह में कम से कम एक बार निरीक्षण किया जायेगा।

291. वास-सविधाु .- (1) यथासंभव महिला बन्दियों के लिए चार प्रकार की वास- सविधा होगीु , अर्थात ्:-

(क) चालीस महिला बन्दियों के लिए वास-सविधा सहित बैरकें

ु ;

(ख) प्रत्येक चार से छह महिला बन्दियों के लिए शयनागार वास-सविधाु ; (ग) अध्ययन करने हेत एकान्तता की आवश्यकता वाली महिला बन्दि यों के लिए एकल कक्ष वास-सविधाु , यदि उपलब्ध हो; और

(घ) सरक्षा और दंड के प्रयोजन के लिए महिला बन्दि यों के पथक्करण के लिए ृ

सैलें।

(2) जब महिला अहाता में कोठरियां अधिभक्तु हों, तो रात्रि में एक महिला अधिकारी की व्यवस्था की जायेगी और दिन के समय में, ऐसा अधिकारी या महिला सि(cid:217)धदोष अधिकारी सदैव अधिभोगियों की पहंच के भीतर होगी।ु

(3) कोठरियों की चाबियां सदैव महिला अधिकारी या वार्डर के हाथ में और उसकी अभिरक्षा में होंगी।

(4) एक व्यक्ति सदैव दिन और रात्रि कोठरियों की चाबियों सहित महिला अहाता में उपस्थित रहेगा।

(5) महिला बन्दियों के कोठरियों में निरंतर परिरोध अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

(6) किसी भी महिला को ऐसे किसी समय पर कोठरी में बंद नहीं किया जायेगा जिसके दौरान महिला वार्डर उपस्थित नहीं हो।

(7) जैसाकि यह ऐसी किसी जेल में एकांत परिरोध के न्यायिक दंडादेश के निष्पादन का प्रतिषेध करता है जिसके पास दो महिला वार्डर नहीं हों, कहीं महिला बन्दी को इस प्रकार न्यायिकत: दंडादिष्ट किया जाता है तो ऐसे किसी जेल के लिए अंतरण के लिए उसकी वर्णन तालिका कारागार महानिरीक्षक को प्रस्तत की जायेगी जिसके लिए आवश्यक संस्था पन मंजर ू किया जा चका है।ु

(8) महिला बन्दियों के लिए उपलब्ध करवाये गये समस्त वास-सविधाऐं और विशिष्टतया ु

समस्त शयन की वास-सविधाऐं

ु , जलवायवीय दशाओं, वाय की घन अंतर्वस्तु

ु, न्यूनतम फर्श स्थान, प्रकाश और संवातन पर सम्यक ध्या् न देते हए स्वाु स्थ्य की आधारभत आवश्यकताओं ू को पर्ण करेंगी।ू

(9) शयन की सविधायें जो माता और शिश को उपलब्धु

ु करवाई गयी है वह पर्याप्त, स्वच्छ और स्वास्थ्यकर होनी चाहिए।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 175

(10) शयनागारों में रखे गए बन्दियों का चयन सावधानीपर्वक किया जाएगा , ताकि वे उन परिस्थितियों में एक दसरे के साथ समायोजन करने में समर्थ हो सकें ।

(11) संस्था की प्रकति को ध्याृ न में रखते हएु , रात्रि तक नियमित पर्यवेक्षण किया जाएगा। (12) प्रसाधनों की पर्याप्त संख्या होगी और वह साफ और शिष्ट स्थिति में रखा जाएगा।

(13) जहां महिला बन्दियों का रहना या कार्य करना अपेक्षित हो, वहां बन्दियों को प्राकतिक ृ प्रकाश में पढ़ने या कार्य करने के लिए समर्थ बनाने के लिए खिड़कियां पर्याप्त बड़ी होंगी और स्वच्छ वाय के प्रवेश के लिए स्था

ु न पर्याप्त रूप से संवातित होगा।

(14) बन्दियों को पढ़ने या कार्य करने के लिए पर्याप्त कत्रिम प्रकाश भी उपलब्धृ करवाया जाएगा।

(15) स्नानागारों और फहारों ु (शॉवर) की पर्याप्त संख्या उपलब्ध करवायी जाएगी ताकि प्रत्येक बन्दी मौसम और जलवाय के अनसार सामान्यु

ु स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए उपयक्त तापमान पर उतनी आवत्ति से

ृ , जितने आवश्यक हों, स्नान कर सके ।

(16) बन्दियों के (cid:217)वारा नियमित रूप से प्रयक्त किये जा रहे

ु , संस्था के समस्त भाग सदैव समचित रूप से सरक्षिु

ु त और सक्ष्म रूप से साफ रखे जायेंगे। ू

292. महिला अहाता की सफाई.- कारागार में महिलाओं के अहाते के समस्त भाग सैदव समचित रूप से सरक्षित और सक्ष्म रूप से साफ रखे जायेंगे।

293. दासवत कर्तव्य प्रतिषि(cid:217)ध्

.- महिलाओं के अहाता से संबंधित न तो दासवत ् कर्तव्य न ही कोई मलसफाई कार्य महिला बन्दियों (cid:217)वारा किया जायेगा और इस प्रयोजन के लिए विशिष्ट कर्मचारिवंद नियोजित किये जायेंगे।ृ

294. वैयक्तिक स्वच्छता.- (1) महिला बन्दियों से स्वयं को साफ रखना अपेक्षित होगा और इस उ(cid:217)देश्य के लिए, उन्हें स्वास्थ्य और सफाई बनाए रखने के लिए आवश्यक पर्याप्त जल और प्रसाधन वस्तयें उपलब्धु करवायी जायेंगी। (2) महिला बन्दी के के श उसकी सहमति के बिना नहीं काटे जायेंगे।

, चिकित्सा अधिकारी स्वास्थ्य और सफाई के (3) यदि, पीड़क जंत या गंदगी के कारणु

आधार पर के श को काटना आवश्यक समझता है तो ये काटे जा सकें गे परन्तु इन्हें अपेक्षित से छोटा नहीं काटा जायेगा।

(4) महिला बन्दियों को उपलब्ध करवाये जाने वाले वस्त्रों और लीनेन में अन्तर्वस्त्र, ऊपरी और अन्य वस्त्र, तौलिये और शीत जलवाय में मोजे और प्रसाधन तथा धलाई के साबन की पर्याप्त मात्रा सम्मिलित होगी।

ु , के श तेल की पर्याप्त मात्रा और (5) महिला बन्दियों को उनकी रूढियों के अनसार कमकमु कं घा उपलब्ध करवाया जाएगा।

(6) पर्याप्त संख्या में दर्पण उनकी बैरकों में फिट किये जायेंगे।

295. मलाकातु .- (1) सि(cid:217)धदोषों और विचाराधीन बन्दियों के लिए मलाकाु तों की संख्या महिला बन्दियों के मामले में उदारीकत होगी।ृ176 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (2) उसी कारागार में निरु(cid:217)ध किये गये महिला के निकट नातेदार के मामले में, दोनों की मलाकात को जेल अधिकारी की उपस्थिति में दो (cid:217)वारों के मध्य सकर बनाया जाएगा।ु

ु और नातेदारों के साथ मलाकात को सकर बनाने ु

(3) महिला बन्दी की उनके कटम्ब सदस्योंु

के लिए पथक मलाकात कक्ष होगा।ृ

(4) प्रत्येक महिला बन्दी को पत्र लिखने के लिए सहायता दी जाएगी और प्रोत्साहित किया जाएगा और उसके नातेदारों या पड़ौसियों के साथ सप्ताह में एक बार मलाकात करने को ु अनज्ञात किया जाएु गा।

(5) मलाकातों की प्रभारी वरिष्ठ महिला अधिकारी नियमों के अनसार मलाकातों की मंजरी के लिए उत्तरदायी होगी।

(6) महिला बन्दियों के आने वाले पत्र की कोई सीमा नहीं होगी।

(7) निरक्षर या अ(cid:217)र्ध-साक्षर बन्दियों की पत्र लिखने में सहायता उपलब्ध करवायी जाएगी।

(8) महिला बन्दियों के लिए प्रत्येक कारागार में आगंतकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष उपलब्ध करवाया जाएगा।

(9) प्रत्येक नये प्रवेशित बन्दी को अपील या पनरीक्षण याचिका तैयार करने या जमानत उपाप्त करने की दृष्टि से, उसके नातेदारों या मित्रों या विधिक सलाहकारों से मिलने या बातचीत करने के लिए सविधायें अनज्ञात की जायेंगी। ु (10) यदि अधीक्षक यह आवश्यक समझे, तो महिला बन्दी को उसकी संपत्ति और अन्य कटंब ु मामलों के प्रबंध की व्यवस्था के लिए उसे समर्थ बनाने के लिए बहधा उसके नातेदारों से ु

मलाकात करने या पत्र लिखने के लिु ए उसे अनज्ञात किया जायेगा। पस्तकालय में धार्मिक पस्तकें जैसे हिन्द बन्दिु

ू यों के मामले में रामायण, महाभारत, गीता, भागवत या अन्य धार्मिक पस्तकें

ु , मस्लिम बन्दिु यों के मामले में करानु , ईसाइयों के लिए बाइबल, सिख बन्दियों के मामले में गरु ग्रन्थ साहिब या

ु गरु बाणी भी रखी जायेंगी। ु

296. पस्तकें

ु .- प्रत्येक संस्था का आमोद-प्रमोद विषयक और शिक्षण संबंधी पस्तकों ु

ु कालय और वाचनालय होगा और इन सविधाओं का पर्ण ु

सहित महिलाओं के लिए पथक पस्तृ उपयोग करने के लिए बन्दियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

297. पस्तु कों का आपर्त

ू .- (1) किसी महिला बन्दी को एक समय पर, अपने साथ पांच पस्तकें तक रखना अनज्ञात किया जाएगा।

(2) पस्तकों की संख्या

ु पर निर्बंधन के वल प्रशासनिक सविधा के लिए अधिरोपित किया जाएगा जैसे प्रति बन्दी के स्थान के कारण और न कि किसी अन्य कारण के लिए।

298. शिक्षा.- (1) प्रत्येक महिला बन्दी को उसके कारागार में रहने के दौरान उपयक्त ु शैक्षिक कार्यक्रम प्रस्तावित किया जाएगा।

(2) कारागारों में शिक्षा कम से कम एक-घंटा प्रतिदिन के लिए अनिवार्य क्रियाकलाप होगी और इसका उ(cid:217)देश्य उनकी कार्यात्मक क्षमता की व(िcid:217)धृ करना होगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 177

(3) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रत्येक कारागार को वयस्क शिक्षा, सामाजिक, नैतिक और स्वास्थ्य शिक्षा, परिवार कल्याण कार्यक्रम और विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण आयोजित करने चाहियें।

(4) हितब(cid:217)ध बन्दियों के लिए, औपचारिक और उन्नत शिक्षा हेतु सविधायें भी उपलब्ध ु करवायी जायेंगी।

299. आमोद-प्रमोद विषयक और सांस्कतिक कार्यक्रमृ .- (1) महिला बन्दियों के लिए आमोद-प्रमोद विषयक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे, जिनमें साधारण बाह्य खेल, भजन, संगीत, लोक नत्यृ , नाटक, टेलीविजन, रेडियो और फिल्म प्रदर्शन सम्मिलित हो सकें गे।

(2) महिला बन्दियों को उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के फायदे के लिए ध्यान और योग के लिए सविधायें उपलब्ध करवायी जायेंगी।

(3) प्रत्येक बन्दी जो बाह्य कार्य में नियोजित नहीं है प्रतिदिन खली हवा में

ु , यदि मौसम अनकल हो तो कम से कम एकु

-घंटा उपयक्त व्याु याम करेगा।

300. व्यावसायिक प्रशिक्षण.- (1) प्रत्येक महिला बन्दी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए यथासंभव उनकी अभिवत्ति और पष्ठभमि के लिए उपयक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा।

(2) महिला बन्दियों को उपयोगी ट्रेड में व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जायेगा।

(3) बन्दी को छोड़े जाने के पश्चात उसकी जीविका उपार्जित करने हेत योग्यता में व(िcid:217)ध करने, उत्पाद की विक्रे यता और लाभप्रदता के अनसार व्याु वसायिक कार्यक्रमों का चयन किया जाएगा।

(4) बन्दियों को सक्रिय रूप से नियोजित रखने के लिए सामान्य कार्य दिवस के लिए पर्याप्त कार्य या व्यावसायिक ट्रेड उपलब्ध करवाया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित हो सकें गे:-

(क) सिलाई;

(ख) कशीदाकारी;

(ग) कढ़ाई-सिलाई;

(घ) मोमबत्ती बनाना;

(ङ) खिलौना बनाना;

(च) लेखन-सामग्रियां बनाना;

(छ) टंकण;

(ज) कम्प्यटर प्रशिक्षणू ; (झ)ब्यटीशियन काू कार्य; (ञ) मशरूम खेती; और

(ट) मि(cid:210)टी के बर्तन बनाना।

178 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

301. संतानों का कारागार के बाहर आमोद-प्रमोद संबंधी दौरा.- जेल कर्मचारिवंद के ृ साथ अधीक्षक नियमित अंतराल पर कारागार के बाहर अन्त:वासी महिलाओं के संतानों के आमोद-प्रमोद संबंधी दौरे के लिए कार्यक्रम की परिकल्पना करेगा।

302. मजदरीू .- बन्दियों को उनके कार्य के लिए साम्यापर्ण मजदरी का संदाय किया ू

ू जायेगा और लिंग भेदों के आधार पर मजदरी में कोई असमानता प्रो(cid:217)भत नहीं होगी।

303. बचत निधियां.- बचत निधियां गठित करने के लिए प्रशासन (cid:217)वारा एक प्रणाली भी उपलब्ध करवायी जायेगी जिसमें आय का एक भाग अलग रखा जायेगा जो बन्दियों को उनके छोड़े जाने पर सौंप दिया जायेगा।

304. अनमोदित वस्तु

ु ओं पर व्यय.- बन्दियों को प्रणाली के अधीन, उनके उपार्जन का कम से कम एक भाग उनके स्वयं के उपयोग के लिए अनमोदित वस्तु

ुओं पर व्यय करने और इसका एक भाग उनके कटंब को प्रेषित करने के लिए अनज्ञात किया जायेगा।

305. चिकित्सा सविधाएं

ु .- मानसिक विकारों, उ(cid:217)वेग, मादक द्रव्य व्यसन और यौन विकति से पीड़िृ त महिला बन्दी को समचित चिकित्सा उपचार और मनोचिकित्सा उपलब्ध करवायी जायेगी।

306. विधिक सहायता.- (1) प्रत्येक संस्था में अभिहित विधि वि(cid:217)यालय, सामाजिक कार्य वि(cid:217)यालय या गैर-सरकारी स्वयंसेवक अभिकरण से स्वयंसेवकों (cid:217)वारा प्रबंधित सामाजिक-विधिक कोठरी का गठन किया जायेगा।

(2) ऐसे कोठरी में कार्य करते समय वि(cid:217)यार्थियों (cid:217)वारा किये गये कार्य को अकादमिक श्रेय दिया जायेगा और यह वि(cid:217)यार्थी के वर्गीकत पा(cid:211)यक्रम का भाग होगा।

307. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की महिला सदस्य की सहायता.- महिला बन्दियों को उनकी प्रक्रियात्मक और विधिक समस्याओं में सहायता के लिए, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की महिला सदस्यों की सहायता उपलब्ध करवायी जायेगी।

308. विदेशी नागरिकों के लिए सविधाएं

ु .- महिला बन्दी, जो अन्य देशों की नागरिक हैं या शरणार्थी हैं, को उनके राजनयिक और कौंसलीय प्रतिनिधियों के साथ संपर्क करने के लिए यु क्तियक्त सविधाएं अनज्ञात की जायेंगी।

309. समयपर्व छोडा जानाू

़ .- (1) महिला बन्दियों को समयपर्व छोड़े जाने पर विशेष ू

ध्यान दिया जायेगा, विशिष्टत: उन मामलों में जहां वह एकमात्र कमाने वाली हो, या जहां महिला बन्दियों के आश्रितों के लिए किसी दसरे से देखभाल संभव नहीं हो। ू

(2) निलंबित दंडादेशों पर या अन्यथा, यथासंभव महिला बन्दियों को कारागार के भीतर उनके शिश के प्रसव से बचने के लिए गर्भवती माताओं को समयपर्व छोड़ा जाना सनिश्चित किया जायेगा।

310. गैर-संस्थागत सधारात्मक उपचारु .- महिला बन्दियों के मामले में उन्हें उपयक्त ु

ए, अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, गैर-संस्थागत सधारात्मक उपचार उपलब्ध कराने के लिु 1958 (1958 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 20) का व्यापकता से उपयोग किया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 179

311. महिला सि(cid:217)धदोषों का महिला कारागारों में अंतरण.- छह या अधिक मास के कारावास से दंडादिष्ट महिला बन्दियों को, जहां संभव हो, उनके पनर्वास को सकर बना

ु ने के लिए महिला कारागार में अंतरित किया जायेगा।

312. महिला बन्दियों का छोड़ा जाना.- (1) किसी महिला बन्दी को छोड़े जाने से पर्व

ू , उसके नातेदारों या मित्रों को कारागार पर उपस्थित होने और उसे अभिप्राप्त करने के लिए पर्याप्त अग्रिम सचना दी जायेगी।ू

(2) यदि उसके छोड़े जाने के दिन कोई नातेदार उपस्थित नहीं होता है तो वह महिला एस्कॉर्ट के प्रभार के अधीन उसके घर भेजी जायेगी।

(3) जेलर महिला बन्दी को उसके घर सरक्षित छोड़े जाने और ु एस्कॉर्ट के लिए की गयी व्यवस्थाओं के बारे में अपनी रिपोर्ट पस्तिका में अभिलेख कु रेगा।

313. पश्चात्वर्ती देखरेख, पनर्वास और अनवर्तनु

ु .- पश्चात्वर्ती देखरेख सेवाओं में सहायता के वे समस्त प्रकार सम्मिलित होंगे जिनके परिणामस्वरूप छोड़ी गयी महिला बन्दियों का समाज में पनु :समायोजन हो।

314. स्वैच्छिक संगठनों की भमिकाू .- (1) प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा अनमोदित कम से कम एक नामनिर्दिष्ट स्वैच्छिक संगठन होगा जिसे छोड़े गये बन्दी को सहायता प्रदान करने का कार्य न्यस्त किया जा सके ।

(2) ऐसे संगठन के अनमोदित प्रतिनिधि संस्था

ु नों और महिला बन्दियों तक आवश्यक पहंच ु रखेंगे और उनके दंडादेशों के प्रारम्भ से विश्वास में लिये जायेंगे।

(3) यह वांछनीय है कि ऐसे संगठन के क्रियाकलाप उनकी सेवाओं के सर्वोत्तम उपयोग को सरक्षित करने के क्रम में के न्द्रीय रूप से मानीटर और समन्वित किये जायें।

315. बाह्य कल्याण अभिकरणों के साथ संपर्क .- (1) कारागार अधीक्षक सामान्यत:

महिलाओं और विशिष्टत: महिला अपराधियों की सेवा कर रहे और उनके म(cid:217)दे को उठा रहे ु

सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं के चयनित समह या गैरू -सरकारी संगठन के साथ प्रकार्यात्मक संपर्क और सहयोगात्मक संबंध स्थापित करेगा, ताकि कारागार प्रशासन और ऐसे संगठन एक साथ अभिरक्षा में महिलाओं से संलग्न सामाजिक कलंक के विरु(cid:217)ध लड़ सकें ।

(2) जैसा कि यह मैदान से अधिक मस्तिष्क में लड़ा जाने वाला य(cid:217)ध है

ु , महिला अपराधियों के छोड़े जाने के पश्चात पनर्वास की आवश्य् ु कता पर विस्तार से बताने और एक अनकल ु लोकराय तैयार करने के लिए, बारंबार विचार गोष्ठियां या संगोष्ठियां संचालित की जायेंगी।

316. महिला बन्दियों की काउं सलिंग.- कारागार में महिला बन्दियों की काउं सलिंग ऐसी रीति में की जायेगी जो,-

(क) उसे सही भावना देगी कि कारागार पाटन स्थल नहीं है जहां उसे फें का गया है, इसके बजाय यह व्यावसायिक चिकित्सा के लिए एक आवासीय के न्द्र है जहां से उसकी मक्त संसार के लिए वापसी यात्रा प्रारंभ होगी ;

(ख) उसके अपराध-समर्थक अभिवत्ति के झकाव को समायोजित या परिशोधित करेगी और विधिपर्ण और शिष्ट जीवन का भाग बनायेगी ; और180 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ग) उसकी स्वयं को विश्वास दिलाने में सहायता करेगी कि मख्यधारा में ु सामान्य जीवन के लिए आवश्यक समस्त घटक उसमें, अभिव्यक्ति की प्रतीक्षा में, अभी ज्यों के त्यों हैं।

317. व्यावसायिक और अन्य प्रशिक्षण.- महिला अपराधियों के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण ऐसी रीति में संचालन किया जाएगा कि यह,-

(क) उसके मानस में आपराधिकता का जि(cid:217)दी जाल खोल डाले;

(ख) उसे वत्तिक सामथ्र्य

ृ प्रदान करे और उसे छोड़े जाने के पश्चात उसकी ्

आजीविका कमाने के लिए समर्थ बनाने के लिए एक या एक से अधिक, व्यवसाय में विशेषज्ञ बनाये;

(ग) गरीबी-अपराध संबंध का उन्मूलन करे; और (घ) अंतिम रूप से उसके मख्यधारा के जीवन के साथ भेंट के लिए उसके मन में वांछा के बीज अंकरित करे

ु , जो अब तक अनदेखे मानव संसाधन के विशाल कोष की खोज में नई संभावनाओं को प्रकट करे।

318. उत्पादों का प्रदर्शन.- (1) महिला बन्दियों (cid:217)वारा निर्मित उत्पादों के लोक प्रदर्शन की व्यवस्थाएं की जायेंगी जिससे यह उनके मनोबल को बढ़ायेगा, उनमें आत्मविश्वास स्थापित और विकसित करेगा और व्यापक तौर पर सामान्य जीवन के लिए आशा की किरण पनु :प्रज्ज्वलित करेगा।

(2) यह सलाखों के पीछे रह रही महिलाओं के लिए अत्यधिक अपेक्षित सामाजिक जागरूकता, सहयोगात्मक और सहानभतिपर्ण मार्ग प्रशस्त करेगा।

319. मानसिक बीमार या विक्षिप्त बन्दी.- (1) महिलाएं जो विक्षिप्त और मानसिक बीमार पायी जायें कारागार में निरु(cid:217)ध नहीं की जायेंगी।

(2) जिन्हें कारागार में प्रवेश दिया गया है उन्हें मानसिक गहों या मानसिक बी

ृ मार बन्दियों की संस्थाओं के लिए हटाये जाने के लिए व्यवस्थाएं की जायेंगी।

320. अनशासनु .- अनशासन और व्यु वस्था दृढ़ता के साथ बनायी रखी जायेगी किन्त ु सरक्षित अभिरक्षा और सव्यवस्थित संस्थागत जीवन के लिए आवश्य

ु कता से अधिक निर्बंधन नहीं होंगे।

321. दंड.- (1) किसी भी महिला बन्दी को कारागार में तब तक दंडित नहीं किया जायेगा जब तक कि उसे उसके विरु(cid:217)ध अभिकथित अपराध की सचना नहीं दी गयी हो और ू

अपना बचाव प्रस्तत करने का समचित अवसर नहीं दिया गया हो।

(2) दंड अधिनिर्णीत करने से पर्व सक्षम प्राधिकारी मामले के सं

ू पर्ण अनसंधान का संचालन ू

करेगा।

322. निवेदन और शिकायतें.- (1) साप्ताहिक परेडों के दौरान, प्रत्येक महिला बन्दी को अधीक्षक को निवेदन या शिकायतें करने का अवसर दिया जायेगा जो बदलें में, ऐसे निवेदनों या शिकायतों पर तत्परता से कार्रवाई करेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 181

(2) महिला अहाते के प्रमख स्थाु न पर एक शिकायत डिब्बा रखा जायेगा जो एक सप्ताह में कम से कम एक बार अधीक्षक की उपस्थिति में खोला जायेगा।

(3) इसमें पायी गयी प्रत्येक शिकायत या निवेदन रजिस्ट्रीकत किया जायेगा और उचित रूप से कार्रवाई की जायेगी और बिना असम्यक विलम्ब के प्रत्यत्त्

ु र दिया जायेगा।

(4) कारागार कल्याण अधिकारी और विधिक सहायता काउं सलिंग कर्मचारिवन्द या साक्षर ृ बन्दियों को निरक्षर बन्दियों को उनकी शिकायतें अभिलिखित करने में सहायता के लिए, काम में लिया जायेगा।

(5) ऐसी समस्त शिकायतें प्राप्त की जायेंगी और ये शिकायतें शिकायतकर्ता के प्रतिकार के जोखिम के बिना उदारता से निपटायी जायेंगी।

323. सेवा की शर्तें और प्रशिक्षण.- (1) महिला वार्डरों और अन्य समस्त महिला कारागार अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र में समसामयिक विकासों के साथ संपर्क बनाये रखने के लिए आधारभत प्रारंभिक प्रू शिक्षण, सेवागत प्रशिक्षण और पनश्चु र्या उपलब्ध करवायी जायेगी।

(2) कारागार कर्मचारिवन्द की प्रत्येक महिला सदस्य को मानवाधिकारों और सधारात्मक कार्य के विभिन्न पहलओं में प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जायेगा।

324. महिला बन्दियों का एस्कॉर्ट किया जाना.- (1) मैट्रन या महिला उप-जेलर या महिला मख्य वार्डर या महिला वार्डर प्रत्येक महिला बन्दी के अहाता छोड़ते समय एस्कॉर्ट करेगी और तब तक बन्दी के साथ रहेगी जब तक बन्दी अहाते में वापस नहीं लौटती है।

(2) महिला पलिस की सेवाएं सरक्षा के विचार का सम्यक ध्या

् न रखते हुए एस्कॉर्ट (cid:212)यटी के ू लिए काम में ली जायेंगी।

325. महिला बन्दियों की तलाशी.- मैट्रन या महिला उप-जेलर या महिला मख्य वार्डर ु

या महिला वार्डर महिला बन्दियों की तलाशी संचालित करेंगी और ऐसी तलाशी किसी परुष ु व्यक्ति की उपस्थिति में संचालित नहीं की जायेगी।

326. मैट्रन या महिला वार्डरों का महिला अहाते में परुष को अनज्ञात नहीं किया ु

जाना.- (1) महिला वार्डर समचित प्राधिकार के बिना किसी परुष कारागार अधिकारी या परुष बन्दी का महिलाओं के अहाते में प्रवेश किया जाना अनज्ञात नहीं करेगी।ु

, किसी (2) यदि कोई परुष कारागार अधिु कारी या वार्डर या बन्दी, समचित प्राधिकार के बिना

समय महिला बन्दियों के अधिभोग के लिए आरक्षित किसी वार्ड या कारागार के भाग में प्रवेश करता है, या प्रवेश का प्रयत्न करता है तो वार्डर तत्काल जेलर या अधीक्षक को रिपोर्ट करेगा।

327. मैट्रन या महिला मुख्य वार्डर का परुष बन्दिु यों के साथ संपर्क नहीं करना.- कोई मैट्रन या महिला मख्यु वार्डर किसी भी समय, और किसी भी बहाने से किसी भी परुष ु बन्दी के साथ किसी भी रूप में, कोई मलाकात नहीं करेगी या बातचीत नहीं करेगी या संपर्क नहीं बनाये रखेगी या उसके कर्तव्य के निर्वहन को छोड़कर, परुष बन्दिु यों को आबंटित, के लिए आरक्षित या अधिभोग किये गये कारागार के किसी भाग का दौरा नहीं करेगी।

182 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

328. महिला अहाते की चाबियां.- मैट्रन या महिला वार्डर के पास उन वार्डों और अहातों की चाबियों की अभिरक्षा होगी जिनमें दिन के दौरान महिला बन्दियों को परिरु(cid:217)ध किया गया है और ताला बंद करने के पश्चात ्, वह चाबियों को मैट्रन या जेलर को परिदत्त करेगी।

अध्याय 10

सिविल बन्दी

329. सिविल वार्ड.- (1) प्रत्येक सिविल बन्दी को सिविल वार्ड या जेल में परिरु(cid:217)ध किया जायेगा और आपराधिक बन्दियों के साथ संपर्क रखने या सहयक्त करने को अनज्ञात ु

नहीं किया जायेगा।

(2) उन जेलों में जिनमें कोई सिविल वार्ड नहीं है, सिविल बन्दियों के लिए इसका कोई भाग पथक किया जा सके गा

् :

परन्तु सिविल बन्दी आपराधिक बन्दियों से सम्पूर्ण रूप से अलग रखे जायेंगे।

330. सिविल बन्दियों के प्रवेश का समय.- (1) किसी भी सिविल बन्दी को रात्रि के लिए सर्यास्त पर बन्दियों को बन्द करने के पश्चा त जेल में प्रवेश नहीं दिया जायेगा।

(2) सिविल बन्दियों के प्रवेश पर तलाशी और उनकी संपत्ति के संबंध में अध्याय 6 में प्रगणित नियम लाग होंगे। ू

331. सिविल बन्दियों के आहार के लिए उपबंध.- सिविल प्रक्रिया संहिता 1908

ू 21, नियम 39 के (1908 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 5) की प्रथम अनसची के आदेश ु अधीन, निर्णीत ऋणियों को डिक्रीदार के व्यय पर आहार दिया जायेगा।

332. मासिक भत्तों की रकम.- (1) जहां निर्णीत ऋणी को डिक्री के निष्पादन में सिविल कारागार को सपर्द किया जाता है , वहां न्यायालय उसके जीवन-निर्वाह के लिए मासिक भत्ता नियत करेगा।

(2) निर्णीत ऋणी को सिविल कारागार को सपर्द किये जाने से पर्व चाल मास के ऐसे भाग के लिए जो अनवसित रहता है, प्रथम संदाय न्यायालय के समचित अधिकारी को किया ु

जायेगा और ऐसा अधिकारी संदत्त रकम को सिविल बन्दी के साथ जेलर को भेजेगा।

(3) किसी ऋणी को तब तक जेल में नहीं लिया जायेगा जब तक कि उसके साथ जीवन- निर्वाह भत्ता की समचित रकम प्राप्त नहीं होती है।

(4) पश्चात्वर्ती संदाय, यदि कोई बकाया है, आगामी मास के लिए प्रत्येक मास के प्रथम दिवस से पर्व संपर्ण बकाया रकम के अग्रिम में मासिक संदायों (cid:217)वारा जेलर को किये जायेंगे।

(5) यदि डिक्रीदार यथा उपरोक्त भत्ते के संदाय का लोप करता है तो अधीक्षक, न्यायालय के निदश के बिर्नाे , निर्णीत ऋणी को छोड़ देगा और छोडा जाना उस सबह किया जायेगा जिस दिन के लिए भत्ते का कोई संदाय नहीं किया गया है।

(6) जेल को संदत्त जीवन-निर्वाह धन के लिए डिक्रीदार को यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में, प्रतिपर्ण पस्तिका से रसीद दी जायेगी , प्राप्त राशि को समाश्रित रोकड़-बही में जमा किया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 183

333. छोड़े जाने वाले रजिस्टर में प्रविष्टि.- (1) सिविल बन्दी के छोड़े जाने की तारीख ''बन्दियों का प्रवेश'' से संबंधित अध्याय में प्रगणित नियम के अनसारु , इस धारणा , प्रकल्पित की जायेगी और उस तारीख के अधीन उसका पर कि वह संपर्ण अवधि रखेगा

नाम छोड़े जाने की डायरी में प्रविष्ट किया जायेगा।

(2) यदि कोई सिविल बन्दी का एक से अधिक वारंट के अधीन सिविल जेल में निरु(cid:217)ध किया जाना आदेशित किया जाता है, प्रत्येक वारंट उसकी तारीख से पर्ण प्रभाव रखेगाू , य(cid:217)यपि इस प्रकार बन्दी छह मास से अधिक निरु(cid:217)ध किया जा सके गा।

334. निर्णीत ऋणी की बीमारी पर व्यय.- सिविल बन्दी के बीमार होने की दशा में, उसके उपचार के व्यय डिक्रीदार या राज्य सरकार (cid:217)वारा वहन किये जायेंगे।

335. निरोध की कालावधि.- (1) सिविल बन्दी, निरु(cid:217)ध करने वाले प्राधिकारी के आदेश के अनसार और ऐसे प्राधिकारी

ु (cid:217)वारा विहित कालावधि के लिए निरु(cid:217)ध किया जायेगा।

(2) सिविल बन्दी निरोध कालावधि पर्ण हो जाने पर छोड़ दिया जायेगा चाहे यह राजपत्रित या कारागार अवकाश हो।

336. आहार-धन का अतिशेष.- (1) सिविल बन्दी को छोड़े जाने के पश्चात ्, यदि जेलर के हाथों में आहार-धन का कोई अतिशेष हो, तो यह न्यायालय को लौटाया जायेगा।

(2) आहार-धन के ऐसे प्रत्येक प्रतिदाय के लिए, रसीद ली जायेगी और रोकड़ बही की जिस प्रविष्टि से यह संबंधित है, उसके सामने प्रविष्ट की जायेगी।

337. वस्त्रों का उपयोग और भोजन का क्रय.- (1) सिविल बन्दियों को उनके स्वयं के वस्त्र, बिछौने और पकाने के बर्तन उपयोग करना और निजी स्त्रोतों से भोजन, वस्त्र और बिछौने या अन्य आवश्यक वस्तएं क्रय या प्राप्त करना अनज्ञात किया जायेगा।

(2) यदि सिविल बन्दी स्वयं पर्याप्त वस्त्र, बिछौना, वस्त्र उपलब्ध करवाने में असमर्थ है और लिखित में इसकी मांग करता है तो अधीक्षक विचाराधीन बन्दियों के लिए विनिर्दिष्ट मापमान के समान, ऐसा आपर्त करेगा।ू

338. जेलर के माध्यम से वस्तओं का आपर्त

ू .- (1) किसी सिविल बन्दी के उपयोग के लिए प्रदत्त प्रत्येक वस्त जेलर के माध्यु म से परिदत्त की जायेगी और उसके (cid:217)वारा जांची जायेगी।

(2) अन्य बन्दियों को परिदत्त की जाने वाली या उनके (cid:217)वारा रखी जाने वाली प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुएं सिविल बन्दियों के लिए भी प्रतिषि(cid:217)ध होंगी।

339. श्रम करना अनिवार्य नहीं.- (1) किसी भी सिविल बन्दी को कोई श्रम करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा।

(2) अधीक्षक की अनज्ञा से सिविल बन्दी , किसी कारागार कर्मशाला में कोई कार्य कर सकें गे या किसी व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में हाजिर हो सकें गे जिसके लिए वे उसकी विहित मजदरी के लिए पात्र हैं।ू184 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 340. साफ वस्त्र और सदाचार.- सिविल बन्दी, जब वे दिन के दौरान उसके कक्षों या वार्डों को छोड़ रहे हों, साफ और उचित तौर से पोशाकित होंगे, जब कोई निरीक्षण अधिकारी या प्राधिकत आगंतक सिविल वार्ड का दौरा करता है वे खड़े होंगे , ऐसे अधिकारियों या आगंतकों (cid:217)वारा उनके कर्तव्य के निर्वहन में उनके (cid:217)वारा किये गये किसी प्रश्न का उत्तर देंगे और उनके साथ सम्मान का व्यवहार करेंगे और वे जेल के विनियमों और अधीक्षक के आदेशों का अनपालन करेंगे। ु

341. रिष्टि के लिए दंड.- किसी अन्य बन्दी या जेल अधिकारी पर हमला करने या अपमानित करने या झगड़ा करने या ऊं ची और तेज बातचीत करने, या अशिष्ट या अनैतिक आचरण या बाहरी व्यक्तियों से अनधिकत रीति में सम्पृ र्क रखने या किसी जेल अधिकारी को रिश्वत देने या रिश्वत देने के प्रयत्न या जआ खेलने या वार्ड , बरामदा या मार्ग में इधर- उधर थकने और गंदा करने , या किसी भी रूप में जेल प्राधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा करने या अनादर दर्शाने के दोषी किसी सिविल बन्दी को दंडित किया जा सके गा।

.- (1) कोई जेल 342. सिविल बन्दी को निकल भागना अनज्ञात करने के लिए दंडु

अधिकारी जो साशय या उपेक्षापर्वक सिविल बन्दी के लिए निकल भागना सकर बनाता है भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 222 या, यथास्थिति, 223 के अधीन दंडनीय होगा।

(2) सिविल बन्दी निकल भागने के (cid:217)वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 225ख के अधीन अपराध कारित करता है और सिविल बन्दी के निकल भागने की घटना पर, निर्णीत ऋणदाता को सचना ू दी जायेगी जो, यदि वह बन्दी का पता अभिनिश्चित करने के लिए समर्थ हो तो उसे पनु :पकड़ने में जेल प्राधिकारियों और पलिस की सहायता करेगा।ु

(3) निकल भागने पर पनु :पकड़े जाने पर या निकल भागने के प्रयत्न की घटना पर, बन्दी को भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 225ख के अधीन दंड न्यायालय के समक्ष अभियोजित किया जायेगा।

343. शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 31) के उपबंधों के बारे में सचनाू .- (1) दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 31) से, दिवाला से संबंधित उपबंध अंतर्विष्ट उ(cid:217)धरण, सिविल ऋणियों और राजस्व व्यतिक्रमियों को समनदेशित प्रत्येक वार्ड या सेल में लगाये जायेंगे और इस अधिनियम के अधीन दिवालिया घोषित किये जाने के इच्छु क सिविल बन्दी के लिए अधीक्षक (cid:217)वारा समस्त आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जा सके गी।

(2) दिवाला की याचिकाएं कारागार पदधारी (cid:217)वारा लिखी जा सकें गी और कागज और यथा आवश्यक लेखन-सामग्रियां प्रदत्त की जा सकें गी।

344. सिविल बन्दियों का रजिस्टर.- किसी जेल में निरु(cid:217)ध सिविल बन्दियों के संबंध में यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में रजिस्टर संधारित किया जायेगा।

अध्याय 11

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 185

मानसिक बीमार बन्दी

345. बन्दी में विक्षिप्तता के संके त.- (1) किसी जेल में परिरु(cid:217)ध किसी बन्दी के विक्षिप्तता के संके त प्रदर्शित करने की दशा में जो, चिकित्सा अधिकारी की राय में ढोंग करना नहीं है, अधीक्षक ऐसे बन्दी को कोठरी में चिकित्सीय देखरेख के अधीन रखेगा।

(2) यदि मानसिक बीमार पाये जाने वाला बन्दी,-

(क) अभियक्त विचाराधीन व्यक्ति है तो जेल अधीक्षक दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अध्याय 25 के अधीन आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित न्यायालय को परिस्थितियों की रिपोर्ट करेगा;

(ख) मत्य के दंडादेश का प्रतीक्षारत बन्दी है तो अधीक्षक इन नियमों में यथा विहित कार्यवाही के लिए अग्रसर होगा;

(ग) व्यक्ति किसी न्यायालय के किसी आदेश या दंडादेश के अधीन निरु(cid:217)ध या कारावासित किया गया है तो अधीक्षक विहित प्ररूप में वर्णन तालिका सहित, संबंधित न्यायालय को सचित करेगा जिसमें ऐसा आदेश या दंडादेश पारित किया गया था।

346. विक्षिप्तता के बारे में रिपोर्ट.- (1) यदि कोई सि(cid:217)धदोष बन्दी जेल में उसके प्रवेश के पश्चात विक्षिप्त हो जाता है तो उसे मानसिक चिकित्सालय के लिए हटाये जाने के लिए राज्य सरकार के आदेश अभिप्राप्त करने की दृष्टि से अधीक्षक (cid:217)वारा उसके मामले के संबंध में रिपोर्ट कारागार निदेशालय प्रमख को तत्काल की जायेगी।

(2) इस रिपोर्ट के साथ,-

(क) मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा प्रदत्त सचना को सम्मिलित करते हए चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा तैयार की गई हिस्ट्रीशीट;

(ख) चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा बन्दी की विक्षिप्तता का हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र;

और

(ग) अन्तरण के लिए बन्दी के स्वास्थ्य का प्रमाणपत्र;

अग्रेषित किया जायेगा।

टिप्पण : जब मानसिक बीमार बन्दी हिंसक, खतरनाक, आत्मघाती इत्यादि होना प्रमाणित किये जाते हैं, तो वास्तविक तथ्यों का कथन प्रमाणपत्र में प्रविष्ट किया जाना चाहिए।

347. मानसिक चिकित्सालय के लिए बन्दी का अग्रेषण.- (1) मानसिक रूप से बीमार बन्दी को मानसिक चिकित्सालय के लिए हटाये जाने के लिए वारंट या आदेश की प्राप्ति पर, अधीक्षक आदेश की प्रति, वर्णन तालिका की प्रति और अन्तरण के लिए चिकित्सा अधिकारी के प्रमाणपत्र की दसरी प्रति के साथ और यदि मानसिक बीमार बन्दी सि(cid:217)धदोष बन्दी है तो186 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) उसके कारावास के मल वारंट और अन्यू दस्तावेजों के साथ उसे विनिर्दिष्ट मानसिक चिकित्सालय को अग्रेषित करेगा।

(2) कोई भी मानसिक बीमार बन्दी मानसिक चिकित्सालय को अंतरित नहीं किया जायेगा जब तक कि प्रेषित करने से ठीक पहले चिकित्सा अधिकारी प्रमाणित नहीं करता है कि वह मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से सरक्षा यात्रा के योग्य है और इस प्रमाणपत्र का मल मानसिक चिकित्सालय के अधीक्षक को डाक (cid:217)वारा भेजा जायेगा।

(3) यह सरक्षित करने के लिए प्रत्ये

ु क पर्वावधानी ली जायेगी कि मानसिक चिकित्सालय के लिए अभिवहन के दौरान मानसिक बीमार बन्दी की उचित तौर से देखरेख की गयी है, उसे पलिस ु एस्कॉर्ट के साथ भेजा जायेगा और इन नियमों में अंतरण संबंधी यथा उल्लिखित, उसकी संपत्ति, वस्त्र, बिछौना और भोजन के विषय में व्यवस्थाएं समचित रूप से की जायेंगी , उसके अलावा वस्त्रों के दो सम्पर्ण सट और एक अतिरिक्त कं बल उपलब्ध करवाया जायेगा।

(4) जब तक पर्ण रूप से आवश्यू क न हो बेड़ियों का उपयोग नहीं किया जायेगा।

348. मानसिक चिकित्सालय के लिए महिला बन्दी का अग्रेषण.- (1) मानसिक बीमार बन्दी महिला को जब जेल से मानसिक चिकित्सालय या मानसिक चिकित्सालय से जेल अंतरित किया जाता है या उसके नातेदारों या मित्रों की अभिरक्षा के लिए छोड़े जाने के लिए अग्रेषित किया जाता है तो सर्वदा महिला वार्डर जो जेल से संलग्न हो या यात्रा के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित प्रतिष्ठित महिला साथ होगी।

महिला जिसे विचारण के लिए भेजा गया है, (2) पनु :निरोग हई किसी मानसिक बीमार बन्दी के साथ सदैव महिला वार्डर या परिचर होगी।

349. मानसिक चिकित्सालय को अग्रेषण का अत्यावश्यक मामला.- अत्यावश्यक और विशेष मामलों में, यदि मानसिक बीमार बन्दी शोरगल करने वालाु , गंदा या खतरनाक हो, तो अधीक्षक ऐसे सि(cid:217)धदोष बन्दियों को कारागार निदेशालय प्रमख की मंजरी की प्रत्या

ू शा में जेलों से मानसिक अस्पतालों को अंतरित करने के लिए प्राधिकत है और ऐसे मामले में , आवश्यक दस्तावेज बन्दी के साथ होंगे।

350. अंतरण के लिए आरोग्य प्रमाणपत्र.- किसी विक्षिप्त व्यक्ति के अंतरण के लिए उपयक्तता सत्याु पित करते समय, चिकित्सा अधिकारी ऐसे व्यक्ति (cid:217)वारा प्रदर्शित किसी नि:शक्तता या हिंसा के चिह्न की वि(cid:217)यमानता को सक्ष्मू ता से अभिलिखित करने में सावधानी रखेगा।

351. पलिस अधिकारी को विक्षिप्त व्यक्ति के ब्यौ रों के बारे में सचनाू .- (1) जब मानसिक बीमार बन्दी को जेलर (cid:217)वारा पलिस ु एस्कॉर्ट को सौंपा जाता है चिकित्सा अधिकारी सर्वदा उपस्थ ◌ित रहेगा, वह ऐसे बन्दी की निश्चित मानसिक और शारीरिक दशा से एस्कॉर्ट का समादेशन करने वाले अधिकारी को परिचित करवायेगा और ऐसी नि:शक्तता या हिंसा के यथा वि(cid:217)यमान चिह्न को उसके ध्यान में लायेगा और उसे स्वयं का समाधान करने के लिए कहेगा कि बन्दी की दशा कथन अनसार है। ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 187 (2) जेलर अपनी रिपोर्ट पस्तिु का में तथ्य का टिप्पण करेगा कि इस नियम के उपबंध की अनपालना की गयी है।ु

352. उठाये जाने वाले कदम यदि दंडादेश बन्दी को मानसिक चिकित्सालय भेजे जाने से पर्व पर्यवसित हो जाता है .- जब एक सि(cid:217)धदोष अपराधिक मानसिक रूप से बीमार बन्दी को उसके दंडादेश के पर्यवसित होने से पर्व मानसिक स्वास्थ्यू देखरेख के न्द्र को अंतरित नहीं किया जा सके तो उसे कारागार में निरु(cid:217)ध किया जायेगा और उसके दंडादेश के पर्यवसित हो जाने पर वह गैर-आपराधिक मानसिक रूप से बीमार बन्दी समझा या समझी जायेगी और ु को सौंप दिया जायेगा या जिला मजिस्ट्रेट को निदशित किया जायेगा।र् े

उसके कटम्बु

353. स्वास्थ्य देखरेख के न्द्र में निरोध की कालावधि भगते हए दंडादेश के रूप में ु

समझी जायेगी.- (1) यदि कोई मानसिक बीमार सि(cid:217)धदोष बन्दी स्वस्थचित्त हो गया है और राज्य सरकार (cid:217)वारा उसके कारागार लौटने का आदेश जारी किया गया है तो समय, जिसके दौरान वह मानसिक स्वास्थ्य देखरेख के न्द्र में निरु(cid:217)ध किया गया या की गयी, भोगे गये दंडादेश के रूप में गिना जायेगा।

(2) यदि एक सि(cid:217)धदोष बन्दी मानसिक गह में उपचार भोगने के दौरान ृ अपना दंडादेश पर्ण ू कर लेता या लेती है तो उसे जेल प्रशासन (cid:217)वारा गह से छोड़ दिया जायेगा। ृ

354. बन्दियों का कारागार लौटना यदि वे उपचारित हो गये हैं.- (1) बन्दी जो

नहीं होता है और वे छोड़े जाने के लिए नहीं हैं या यदि उन्हें विचारण भगतना है

मानसिक रूप से बीमार हैं जैसे ही और जब वे उपचारित हो जाते हैं, यदि उनका दंडादेश पर्ण ू ु , कारागार को लौटेंगे।

(2) मानसिक चिकित्सालय का प्रबंधक, मानसिक चिकित्सालय की के स बक के निष्कु र्ष और वह रीति, जिसमें मानसिक रूप से बीमार बन्दी उसके अंतरण के समय तक मानसिक चिकित्सालय में नियोजित किया गया था, दर्शाते हए एक कथन के साथ मानसिक रूप से बीमार बन्दी के वत्त पत्र की प्रति अधीक्षक को अग्रेषित करेगा।

प्रथम बार में, उस जिले के कारागार टिप्पण : पनु :निरोगी हआ मानसिक रूप से बीमार बन्दी

को अंतरित किया जायेगा जिसमें मानसिक चिकित्सालय स्थित है, कित ं साधारणत: बाद में उसके घर के निकटतम कारागार के लिए हटाया या हटायी जायेगी।

355. मामले जिनमें बन्दी को विक्षिप्तता का पनरावर्तन होु .- जब एक पनु :निरोगी हए ु मानसिक रूप से बीमार बन्दी को विक्षिप्तता का पनरावर्तन होु , तो उसे तरंत उस मानसिक ु

चिकित्सालय को जिससे वह आया या आयी थी लौटाया जायेगा और कारागार निदेशालय प्रमख के माध्यु म से मामला राज्य सरकार को रिपोर्ट किया जायेगा।

356. चिकित्सक बोर्ड की राय.- यदि कोई मानसिक रूप से बीमार बन्दी किसी दांडिक मामले में विचारण भगत रहा है

ु , तो न्यायालय की अनुज्ञा से इस प्रयोजन के लिए गठित चिकित्सक बोर्ड (cid:217)वारा सत्यापित किया जायेगा कि उनकी राय में ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिरक्षा करने में समर्थ है, ऐसे समय पर मजिस्ट्रेट या यथास्थिति, न्यायालय के समक्ष ले188 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) जाया जायेगा जो उसके विरु(cid:217)ध मामले में विचारण भगतने के लिु ए मजिस्ट्रेट या न्यायालय नियत करे।

357. मानसिक बीमारी से उबरने के मामलों के बारे में रिपोर्ट.- प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी और 15 अगस्त को अधीक्षक, उसकी अभिरक्षा में निरोग हए प्रत्ये

ु क मानसिक रूप से बीमार बन्दी के संबंध में रिपोर्ट, पर्व में प्रस्तू

ुत रिपोर्ट से लेकर इस रिपोर्ट के समय और अंतराल के दौरान मानसिक रूप से बीमार बन्दियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति दर्शित करने वाली रिपोर्ट कारागार निदेशालय के प्रमख को अग्रेषित करेगा।ु

अध्याय 12

उच्च सरक्षा बन्दीु और निरु(cid:217)ध

358. उच्च सरक्षाु बन्दियों का वर्गीकरण.- (1) उच्च सरक्षा बन्दिु यों में प्रवर्ग '1' और '2' के विचाराधीन बन्दी सम्मिलित होंगे।

(2) उच्च सरक्षा बन्दीु वि(cid:217)यमान कारागारों के भीतर उच्च सरक्षा अहातों के रूप में सीमांकित किये गये पथक अहातों में रखे जायेंगे।

(3) यदि संभव हो, राज्य में पथक उच्च सरक्षा कारागार स्था

ु पित किये जायेंगे।

(4) किन्हीं भी परिस्थितियों में, उच्च सरक्षा बन्दिु यों को अन्य विचाराधीन बन्दियों या सि(cid:217)धदोषों के साथ नहीं रखा जायेगा।

359. उच्च सरक्षा बन्दिु यों के वर्गीकरण का आधार.- उच्च सरक्षा बन्दीु कारकों जैसे बन्दियों के वर्ग, आपराधिक व्यवहार, निकल भागने का जोखिम, अभिरक्षा में पदक्रम की आवश्यकता और शैक्षिक और व्यावसायिक आवश्यकता के आधार पर वर्गीकत किये जा ृ

सकें गे और वे निम्नानसार वर्गीकत किये जा सकें गे , अर्थात ्:-

प्रवर्ग-1 जो क(cid:210)टरवादी, नक्सली, आतंकवादी और चरमपंथी क्रियाकलापों में अंतर्वलित विचाराधीन, सि(cid:217)धदोष और निरु(cid:217)ध हिसंक और आभ्यासिक अपराधी और वे बन्दी जो पहले निकल भागे हैं को सम्मिलित करेगा।

प्रवर्ग-2 जो हत्या, डकै ती, लटू , बलात्संग में अंतर्वलित विचाराधीन, सि(cid:217)धदोष तथा निरु(cid:217)ध गैंगस्टर और बन्दी जो वत्तिक हत्याृ रे या संगठक, ड्रक पेडलर, पलिस पर आक्रमण ु

करने वाले और अन्य खतरनाक अपराधी जिनकी स्वयं की अपहानि करने की संभावना हो या हिंसक और अनशासनहीन अन्तु :वासियों को सम्मिलित करते हए वे ु जिनसे लोक व्यवस्था को खतरे की संभावना हो और अंत:वासी जिनके निकल भागने की संभावना हो, को सम्मिलित करेगा।

प्रवर्ग-3 जो प्रवर्ग 1 और 2 में संदर्भित अपराधों से भिन्न अपराधों में अंतर्वलित बन्दी और हत्या, डकै ती या लट में प्रथम अपराधियों और वे अपराधी जिनके निकल भागने का जोखिम न हो, सम्मिलित करेगा।

360. उच्च सरक्षा बन्दिु यों के लिए भवन संरचना.- (1) उच्च सरक्षा अहातों या ु कारागारों की कम से कम बीस फीट ऊं ची बाहरी पक्की चिनाई की मोटी दीवार होगी, साथ ही इसके समस्त कोनों पर निगरानी टावर और अहाते के भीतर एक के न्द्रीय टावर होगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 189

(2) अहातों और कारागारों को सरंगरोधी सिल्लिु यां उपलब्ध करवायी जायेंगी और आसपास ु स्थान लोहे की जाली से आच्छादित किया जायेगा। का खला हआ समस्तु (3) ये अहाते सरक्षा क्षेत्र ग्रेड ु 1 और सरक्षा क्षेत्र ग्रेड ु 2 में विभाजित किये जा सकें गे।

361. ग्रेड 1 में सरक्षा जोन में वास सविधा और

ु अन्य सविधाएं

ु .- (1) सरक्षा जोन ु

- ग्रेड 1 न्यूनतम 10'*9' के स्थान सहित कोठरी प्रकार की वास सविधा होगी जिसमें अंतु

निर्मित जल शौचायल (डब्ल्यसीू ) और स्नानघर और मजबत विभाजी दीवार की सविधा होगी।

ु (2) कोठरियों का अग्रभाग लोहे की जालियों का होगा, फर्श प्रबलित सीमेंट कं क्रीट (आरसीसी) का होना चाहिए, खिड़कियों के स्थान पर उच्च संवातनों का प्रबन्ध किया जायेगा।

(3) भवन में एक तरफ आगंतक कक्ष के साथ पथक प्रवेश लाबी चिकित्सी

् य निरीक्षण (एमआई) कक्ष और भोजन वितरण कक्ष होगा।

(4) उच्च सरक्षा बन्दिु यों के प्रवर्ग 1 और 2 सरक्षा जोन ग्रेड ु 1 में रखे जायेंगे।

362. सरक्षा जोन ग्रेड ु 2 में वास सविधाु .- (1) सरक्षा जोन ग्रेड ु 2 में एकल कक्ष वास सविधा ु (कोठरी और सहयोजन बैरक) होगी जो 16'×9' आकार की होगी जहां एक समय पर दो या तीन बन्दी रखे जा सकें गे।

(2) बैरकों की अधिकतम क्षमता 10 से 15 बन्दी अंत:वासियों को रखने की होगी और ऐसे बैरकों के भीतर शौचालय और स्नानघर होंगे।

(3) एक बैरक का आकार 27'×10' होगा।

(4) सरक्षा जोन की सामहिक रसोई हो सके गी और एक पथक प्रवेश लाबी भी होगी , खले ु स्थान लोहे की जालियों से आवरित होंगे।

(5) भवन पैटर्न अंडाकार होगा और सभी दिशाओं से निगरानी टावरों से आवरित होगा और इस जोन में, प्रवर्ग 3 के उच्च सरक्षा बन्दीु जिनके निकल भागने की संभावना कम हो, रखे जा सकें गे।

363. कर्मचारिवन्द पैटर्न

ृ .- (1) उच्च सरक्षा अहातों की निगरानी और वार्ड (cid:212)यटी के लिए सप्रशिक्षित कर्मचारिवन्द को नियोजित किया जायेगा।

(2) अधिकारी जो जेलर, उप-जेलर की रैंक से नीचे का न हो, इन अहातों का प्रभारी होगा और उपबन्ध किये जायेंगे कि (cid:212)यटी पर उपस्थित कोई कर्मचारिवन्द

ृ (cid:212)यटी पर यथा ू

आवश्यकता के बिना बन्दियों के सीधे सम्पर्क में नहीं आयेगा।

364. मख्यु वार्डर और अधीक्षक का दौरा.- (1) बन्दियों को रखने वाले वार्ड का दिन और रात्रि के दौरान प्रत्येक चार घंटे में कम से कम एक बार (cid:212)यटी पर उपस्थित मख्य वार्डर ू

या गश्त अधिकारी (cid:217)वारा दौरा किया जायेगा।

(2) गार्ड को भारमोचन करते समय अधिकारी प्रत्येक वार्ड का दौरा करेंगे और स्वयं का समाधान करेंगे कि समस्त बन्दी उपस्थित हैं और सरक्षित रखे गये हैं।ु

(3) चौबीस घंटे से अधिक के लिए वार्ड में परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी का चिकित्सा अधिकारी के साथ अधीक्षक (cid:217)वारा दौरा किया जायेगा।

190 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

365. मलाकातोंु , पत्रों और संचार की सविधाएं

ु .- (1) उच्च सरक्षा बन्दीु के समस्त प्रवर्ग विचाराधीन बन्दियों या सि(cid:217)धदोषों को स्वीकार्य समस्त सविधाओं का उपभोग करेंगे , कित मलाकातें कारागार अधिकारी की उपस्थिति में की जायेंगी।

(2) यह उचित होगा यदि मलाकात कक्ष में आु वाज की रिकार्डिंग की सविधा सहित क्लो

ु ज सर्कि ट टेलीविजन लगाये जायें।

(3) कक्ष प्रवेश लाबी के पास या उच्च सरक्षा अहाता या प्रक्षेत्र के भीतर होगा।

(4) किसी भी मामले में, उच्च सरक्षा बन्दीु मख्यु मलाकात ब्लाु क में अनज्ञात नहीं किये ु

जायेंगे और मलाकात ु के लिए के वल रक्त नातेदारों और प्राधिकत वकीलों को ही अनज्ञात ृ

किया जायेगा।

(5) बन्दियों को सौंपे जाने से पर्व समस्तू पत्र उचित तौर से जांच किये जाने चाहिए।

366. भोजन, प्रसाधन, वस्त्र और बिछौना.- (1) उच्च सरक्षा बन्दिु यों के लिए बाहर

ु क को उसके स्वयं से पका हआ कोई भोजनु अनज्ञात नहीं किया जायेगा और किसी वैयक्ति

के लिए भोजन पकाना अनज्ञात नहीं किया जायेगा। ु

(2) किसी विचाराधीन, निरु(cid:217)ध या सि(cid:217)धदोष को उच्च सरक्षा अहाते में प्रवेश करना अनज्ञात नहीं किया जायेगा।

(3) प्रसाधन सामग्रियों, वस्त्र और बिछौना के लिए स्वीकार्यता ऐसी होगी जैसी अन्य विचाराधीन और सि(cid:217)धदोषों को दी जाती है।

(4) सरक्षा जोन ग्रेड ु 1 और ग्रेड 2 के बन्दी का आहार सामान्य रसोई में पकाया जायेगा।

367. उच्च सरक्षा बन्दीु के लिए चिकित्सीय देखरेख.- (1) चिकित्सीय देखरेख अन्य अन्त:वासियों के लिए के समान किन्तु अहातों के भीतर होगी।

(2) आपात के मामले में, उपचार के लिए वे स्थानीय चिकित्सालय को अंतरित किये जा सकें गे कित बन्दिं ु यों के अंतरण संबंधी नियमों से संसक्त समचित पलिस एस्कॉ

ु र्ट और गार्ड के अधीन।

368. उच्च सरक्षा बन्दीु के लिए खेलकदू , खेल और आमोद प्रमोद.- (1) कारागार सरक्षा और अनशासन के अध्यु

ु , ु धीन रहते हएु , सरक्षा जोन ग्रेड ु 1 के बन्दियों को पस्तकें समाचारपत्र और जर्नल उपलब्ध करवाये जा सकें गे।

(2) लेखन-सामग्रियां भी जैसी और जब अपेक्षित हों उपलब्ध करवायी जा सकें गी और यदि संभव हो, ऐसे निर्बंधनों सहित जो सरक्षा की दृष्टि से आवश्यु क पाये जायें कोठरियों के बाहर रेडियो सैट भी उपलब्ध करवाये जा सकते हैं।

(3) नियमित शारीरिक व्यायाम और योग स्वयं कोठरी के भीतर अनज्ञात किया जा सके गा।ु (4) ऐसे बन्दी को ताला बंद किये जाने से पर्व सांयकाू ल में ब्लाक के अंदर के स्थान में टहलना अनज्ञात किया जा सके गा।ु

(5) सरक्षा जोन ग्रेड ु 2 के बन्दियों को उनकी बैरकों में रेडियो उपलब्ध करवाया जा सके गा और उन्हें अंतरंग खेल जैसे कै रम और शतरंज दिये जा सकें गे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 191

(6) उन्हें लेखन-सामग्री के साथ-साथ पस्तकें

ु , समाचारपत्र, जर्नल और पत्रिकाएं उपलब्ध करवायी जा सकें गी।

ु या मित्रों 369. धन प्राप्त करने का प्रतिषेध.- उच्च सरक्षा बन्दिु यों को उनके कटम्बु

से कोई धन प्राप्त करना अनज्ञात नहीं किया जायेगा। ु

370. सधार और उपचार कार्यक्रमु

.- (1) सधार और उपचार कार्यक्रमु सरक्षा जोन ग्रेड ु

2 के बन्दियों तक विस्तारित किये जा सकें गे।

(2) हस्तशिल्प कार्य पर मख्यु बल सहित न्यूनतम तकनीकी शिक्षा दी जायेगी।

(3) आधारभत शिक्षाू , कार्यक्रम का आवश्यक भाग रूप होगी।

(4) ये क्रियाकलाप और कार्यक्रम स्वयं अहाते के भीतर संचालित किये जायेंगे और ये बन्दी अन्य अन्त:वासियों के साथ मिलाने के लिए बाहर नहीं ले जाये जायेंगे।

371. भीतरी और बाह्य सरक्षाु .- (1) समस्त सरक्षा अहातों को दोहरा सरक्षा चक्र उपलब्ध करवाया जायेगा।

लित करते हए बाह्य सरक्षाु

(2) अहातों की भीतरी सरक्षा कारागार के उच्चु प्रशिक्षित कर्मचारिवन्द (cid:217)वारा संचालित की ृ जायेगी, जबकि निगरानी टावरों और सरक्षा दीवार को सम्मिु ु , विशेष सशस्त्र गार्ड का कर्तव्य होगा।

372. सरक्षा के लिए अन्य व्यु वस्थाएं.- (1) अहाते रिमोट कं ट्रोल डिवाइस के साथ वॉकी-टॉकियों, अलार्मों और जैमरों से लैस होंगे।

(2) निम्नलिखित व्यवस्थाएं की जानी अपेक्षित हैं, अर्थात ् :-

(क) हाथ से पकड़ने वाली पहचान डिवाइस (आईडी) मशीनें और चौखट, मेटल डिटेक्टर और अन्य समस्त इलक्ट्रोनिक डिवाइसेज उपलब्ध करवाये जायेंगे;

(ख) कारागार का आयधागार समस्तु प्रकार के परिष्कृ त और स्वचालित आयधों से ु लैस होगा;

(ग) प्रत्येक बैरक और कोठरी, विशेष रूप से मलाकात कक्षु , क्लॉज सर्कि ट कै मरों से ससज्जित किये जायें

ु गे;

(घ) निगरानी टावर को गार्ड कर रहे संतरी सदैव सतर्क होंगे;

(ङ) उच्च सरक्षा अहातों के निकट शासनहीन क्षेत्र की पहचान की जायेगी जिस तक उनके सिवाय जिन्हें कर्तव्यों के लिए लगाया गया है, किसी भी कारागार अन्त:वासी और कर्मचारिवन्द की पहंच नहीं होगी

ु ;

(च) बैरकों, कोठरियों और कारागारों की समचित तलाशी प्रतिदिन संचालित की जायेगी;

(छ) प्रवर्ग 1 और 2 के उच्च सरक्षा बन्दियों की एक दिन में दो बार तलाशी ली जायेगी जबकि प्रवर्ग 3 की एक दिन में कम से कम एक बार तलाशी ली जायेगी;

192 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ज) ताला बंद करना और खोलना प्रभारी अधिकारी की उपस्थिति में संचालित किया जायेगा और कोई भी बैरक कोठरी कारागार अधीक्षक की उपस्थिति में के सिवाय रात्रि के घंटों के दौरान खोली नहीं जायेगी;

(झ) तालों, श्लाकाओं, जालियों, भोजनशाला, संवातनों, फर्शों, बैरकों या कोठरियों की दीवारों की जांच करने के अतिरिक्त इसकी सिलिंग की भी जांच की जायेगी;

(ञ) अहातों के यार्डों में पदस्थापित गार्ड उनके कर्तव्य के पालन के लिए जैसा

;

अपेक्षित हो उससे अधिक एक दसरे के साथ बातचीत नहीं करेंगे

(ट) यार्ड के प्रवेश गेट को सदैव ताला लगा हआ रखा जायेगाु ; (ठ) कोठरियों या बैरकों के (cid:217)वारों के तालों की चा बियां, (cid:212)यूटी पर न्यस्त व्यक्ति (cid:217)वारा रखी जायेंगी;

(ड) किन्हीं भी परिस्थितियों में, वे किसी अनधिकत व्यृ क्ति (cid:217)वारा नहीं रखी जायेंगी;

(ढ) कोठरियों और बैरकों के डार्क स्पॉट से बचने के लिए और भीतरी कोना को अच्छी तरह से प्रकाशयक्त किया जायेगा ;

(ण) (cid:212)यटी पर गार्ड की अंदर जाते

ू समय और बाहर आते समय पर्णतया तलाशी ू ली जायेगी और उसे समय-समय पर इन बन्दियों से वस्तएं जैसे खा(cid:217)य ु ुएं, पानी के भी अप्रतिग्रहण के बारे में पर्याप्त रूप वस्तुएं, ध(cid:296)पान के लिए वस्तु ; और

से सचित किया जायेगा

:वासी, ताला बंद करने और खोले जाने के दौरान (त) उच्च सरक्षा अहातों के अंतु

की गयी गणना के अतिरिक्त एक दिन में कम से कम दो बार गिने जायेंगे।

373. न्यायालय सनवाईु .- (1) इन उच्च सरक्षा अहातों में श्रव्यु -दृश्य साधन उपलब्ध करवाये जायेंगे।

(2) किसी भी मामले में किसी विचाराधीन, सि(cid:217)धदोष या सि(cid:217)धदोष अधिकारी या निरु(cid:217)ध का इन अहातों में प्रवेश अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

(3) नियमित कारागार कर्मचारिवन्द या पराचिकित्सा कर्मचारिवंद की इन अहातों तक पहंच नहीं होगी जब तक कि वे ब्लाक के प्रभारी अधिकारी के साथ नहीं हों।

374. कठोर कारावास के लिए सि(cid:217)धदोष.- उच्च सरक्षाु बन्दी जो कठोर कारावास भगत रहे होंु , उन्हें समनदेशित समस्तु प्रकार के कार्य सरक्षा अहातों के भीतर करेंगे।

375. दंड.- (1) समस्त उच्च सरक्षा बन्दीु कारागार के अनशासन और सरक्षा के भंग ु

के मामले में अधीक्षक (cid:217)वारा दंडित किये जा सकें गे।

(2) यदि वह बारंबार भंग करता है तो अधीक्षक, कारागार निदेशालय प्रमख को किसी अन्य ु कारागार को उसके अतंरण की सिफारिश कर सके गा।

, या सदैव के

, निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा सीमित समयु

(3) सविधाएं जैसे मलाकातें और पत्रु लिए वापस ली जा सकें गी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 193

376. निरु(cid:217)ध.- स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अवैध व्यापार निवारण

, 1980 (1980 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 65) अधिनियम, 1988, राष्ट्रीय सरक्षा अधिनियमु और राजस्थान असामाजिक क्रियाकलाप अधिनियम, 2006 (2008 का अधिनियम सं. 1) के अधीन गिरफ्तार किये गये निरु(cid:217)ध के साथ समय-समय पर, सरकार (cid:217)वारा जारी किये गये नियमों के अनसार व्यु वहार किया जायेगा।

अध्याय 13

साधारण कारावास भगत रहे बन्दीु

377. साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दियों से श्रम का प्रतिषेध.- साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दी दिन के समय के दौरान उन्हें समनदिष्ट जेल के भाग में रहेंगे और श्रम यार्डों में प्रवेश नहीं करेंगे या श्रम कर रहे बन्दियों के साथ बातचीत नहीं करेंगे जब तक कि वे कार्य करने का चनाव नहीं करते हैं , जिस मामले में उन्हें उस दल के साथ रहेंगे जो उन्हें आबंटित किया गया है।

378. कं बल, बिछौनों का आपर्त

ू .- साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दियों को कं बल और बिछौने, खा(cid:217)य बर्तन, श्रम कर रहे सि(cid:217)धदोषों के समान ही प्रदत्त कियें जायेंगे और जब उपयोग में नहीं हों, अध्याय 35 में यथा वर्णित नियम के अनसार यथा अपेक्षितु

, पर्ववर्ती ू उचित रूप से समेटे हए रखे जायेंगे और पश्चात्कथित एक व्यवस्थि त रीति में साफ और व्यवस्थित रखे जायेंगे।

379. किसी कार्य को करने की अनिवार्यता नहीं.- (1) साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दी अपने वस्त्र साफ और सव्यवस्थित रखेंगे और उनके वार्ड और यार्डों को साफ रखेंगे :

परन्तु वे सोसाइटी के एक वर्ग से संबंधित हैं, जिसके सदस्य अपने घरों में ऐसे कर्तव्यों का पालन करेंगे।

(2) उन्हें किसी अन्य कार्य को करने के लिए, या दसरों के लिए चतर्थवर्ग ू

ु कर्तव्यों का पालन करने के लिए, या अपमानजनक प्रकति का कोई अन्य कार्य करने के लिए , जैसे कि सफाई कर्मचारी का कार्य बाध्य नहीं किया जायेगा।

(3) परेडों, व्यायाम के समय और रात्रि को छोड़कर, उन्हें स्वयं के अपने वार्ड या स्थान में सर्वथा और व्यवस्थित रीति में इक(cid:210)ठे बातचीत करना अनज्ञात किया जायेगा।ु

(4) साधारण कारावास से दंडादिष्ट कोई बन्दी जो स्वेच्छा कार्य करना चाहता है, को ऐसे

है और उसे ऐसे कार्य पर रखा कार्य को चुनना अनज्ञात किया जायेगा जैसा जेल में उपलब्धु

जाएगा।

(5) यदि ऐसा बन्दी कार्य करना छोड़ने और उसकी मल स्थिति में लौटने की इच्छा करता है तो उसे ऐसा करने के लिए अनज्ञात किया जायेगा।ु

(6) यदि अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी इसे उचित समझते हैं, गैर-श्रमिक बन्दियों को प्रात:काल और सांय एक घंटा के लिए टहलना या अन्य शारीरिक व्यायाम करने के लिए बाध्य किया जायेगा।

194 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

380. अन्य उपबंधों का लाग होनाू .- इस अध्याय में और मलाकातों और आहार से ु

संबंधित अध्याय में अन्यथा उपबन्धित को छोड़कर, सि(cid:217)धदोष आपराधिक बन्दियों को लाग ू इनके अन्य समस्त उपबंध साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दियों को यथावश्यक परिवर्तन सहित लाग होंगे।ू

परन्तु निम्नलिखित दंड ऐसे बन्दियों को नहीं दिया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) श्रम का परिवर्तन – लघ दंडु ; और (ख) परिहार का समपहरण – मख्य दंड।ु

अध्याय 14

बन्दी की संपत्ति

381. जेलर धन और संपत्तियों का अभिरक्षक होगा.- (1) समस्त धन और अन्य वस्तएं जिनके संबंध में सक्षम न्यायालय का कोई आदेश नहीं है और जिसे किसी बन्दी (cid:217)वारा कारागार में समचित प्राधिकार से लाया गया है या उसके उपयोग के लिए कारागार को भेजा गया है, जेलर की अभिरक्षा में रखा जायेगा।

(2) नियम के अधीन बन्दी से ली गयी या उसे प्रदत्त की गयी या तत्पश्चात उसके लेखे ्

प्राप्त की गयी, समस्त संपत्ति की सचीू , सिविल या सि(cid:217)धदोष बन्दी के मामले में, उसके वारंट पर पष्ठांकित की जायेगी और अधीक्षृ क तथा जेलर (cid:217)वारा हस्ताक्षरित की जायेगी, विचाराधीन बन्दी के मामले में संपत्ति, विचाराधीन बन्दियों के बन्दी संपत्ति रजिस्टर में प्रविष्ट की जायेगी।

(3) जेल में बन्दी को संबोधित, रजिस्ट्रीकत और बीमित वस्तएं

ु , डाक विभाग के प्राधिकारियों (cid:217)वारा जेलर को रसीदों या अभिस्वीकतियों को हस्ताृ क्षरित करने पर परिदत्त की जायेंगी।

(4) बन्दियों के लिए मनीआर्डर उन्हें जेलर की उपस्थिति में उसके मनीआर्डर प्ररूप पर उनके हस्ताक्षर या चिह्न अनप्रमाणन पर संदत्त किये जायेंगे।

(5) इस प्रकार जेलर उसकी अभिरक्षा में, कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 25 (cid:217)वारा यथा अपेक्षित, बन्दियों के लिए डाक (cid:217)वारा प्राप्त धन या अन्य वस्तओं को रखने की स्थिति में होगा।

(6) किसी बन्दी से संबधित कोई संपत्ति या धन, बन्दी (cid:217)वारा हस्ताक्षरित प्राधिकार के अधीन अधीक्षक के अनमोदन से

ु , उसके कारावास दौरान किसी भी समय उसके मित्रों को परिदत्त किया जा सके गा, कित किसी भी बन्दी को अपना कोई वस्त्र सौंप देना अनज्ञात नहीं किया जायेगा यदि वह स्वयं उसके उन्मोचन पर अपर्याप्त वस्त्रों के साथ चला जाता है और किसी भी बन्दी को, या तो उसके कारावास या छोड़े जाने के दौरान, अपनी किसी संपत्ति को किसी अन्य बन्दी को सौंप देना अनज्ञात नहीं किया जायेगा। ु

382. बन्दी की संपत्ति से संव्यवहार करने की प्रक्रिया.- इन नियमों के अध्यधीन रहते हएु , बन्दी की संपत्ति से जेलर (cid:217)वारा निम्नलि खित रीति में संव्यवहार किया जायेगा, अर्थात ्:-

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 195

(क) ऐसी प्रतिषि(cid:217)ध वस्तएं जैसे कि तंबाकु

ू , अफीम, गांजा, चिलमें, मादक मदिरा, स्वापक औषध इत्यादि नष्ट की जायेंगी;

(ख) यदि अधीक्षक (cid:217)वारा अनज्ञात किया जाये

ु , कछ सखे भोजन को छोड़कर ु

किसी मल्यू की विनश्वर वस्तएं जैसे कि अनाज ु या भोजन, बन्दियों के साथ एस्कॉर्ट दल से प्राप्त नहीं किये जायेंगे;

(ग) यदि चिकित्सा अधिकारी समझता है कि किसी बन्दी के धारण के किये जाने वाले वस्त्र स्वच्छ नहीं हैं या प्रवेश के समय बन्दी किसी संक्रामक या सांसर्गिक रोग से पीड़ित है तो चिकित्सा अधिकारी के लिखित आदेश पर, वस्त्र नष्ट किये जायेंगे;

(घ) यदि बन्दी का वस्त्र फटा हआ और पर्णरूप से बेकार है तो यह नष्ट किया जायेगा और इसे नष्ट करने के लिए उसके आदेश को वारंट के पीछे मद के सामने प्रविष्ट करेगा;

(ङ) कठोर कारावास या साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दी के वस्त्र, स्वच्छ इत्यादि किये जाने से पश्चात ्, एक बंडल में बांधे जायेंगे और भंडारित किये जायेंगे।

(च) भंडार किये जाने योग्य गैर-विनश्वर वस्तएं वस्त्रों में सम्मिलित होंगी ;

(छ) ऐसे प्रत्येक बंडल पर बन्दी की संख्या और नाम और छोड़े जाने की तारीख का लेबल लगाया जायेगा;

(ज) बंडल पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए छोड़े जाने के वर्ष के अनसार भंडार गोदाम ु

में व्यवस्थित किये जायेंगे;

(झ) प्रत्येक बन्दी, विचाराधीन बन्दी या सि(cid:217)धदोष के मल्यवान आभषण पथक ू

महरबंद पेपर पैके ट में रखे जायेंगे (उक्त मोहरबंद पैकट पर संबंधित बन्दी के हस्ताक्षर सहित) जिस पर बन्दी का संख्यांक, नाम और छोड़े जाने की तारीख अन्तर्लिखित होगी और जेलर के कार्यालय में ताला-चाबी के अधीन सरक्षित बक्स में रखे जायेंगे ;

(ञ) बन्दी की निजी नकद आयरन चेस्ट में रखी जायेगी और प्रत्येक बन्दी की पांच हजार रुपये से अधिक नकद बैंक या डाकघर में बचत बैंक पास बक ु के रूप में जमा की जायेगी; और

(ट) जेलर इस प्रकार जमा की गयी रकम का अभिलेख रखेगा और प्रत्येक बन्दी से संबंधित धन का ब्यौरेवार लेखा बन्दियों के निजी नकद रजिस्टर में संधारित करेगा और जब भी बन्दी के छोड़े जाने पर संदाय के लिए अपेक्षित हो, पासबुक बन्दी को सौंप दी जायेगी।

383. अंतरित की जाने वाली बन्दी की संपत्ति.- बन्दी के एक जेल से दसरी जेल को ू

अंतरण पर उसकी समस्त संपत्ति उसके साथ भेजी जायेगी और यदि ऐसे अंतरण के पश्चात ्196 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) बन्दी के लिए कोई संपत्ति प्राप्त की जाती है तो इसे उसी जेल को अग्रेषित किया जायेगा जिसे वह भेजा गया है।

384. अदावाकत संपत्तिृ .- (1) बन्दी को छोड़े जाने पर उसकी संपत्ति उसे परिदत्त की जायेगी।

(2) छोड़े गये बन्दी की कोई अदावाकत संपत्तिृ , उसे छोड़े जाने की तारीख से एक वर्ष के लिए जेल में प्रतिधारित की जायेगी और यदि उस कालावधि के दौरान कोई दावा प्रस्तत नहीं ु

किया जाता है तो संपत्ति विक्रय की जायेगी और उसके आगम चालान के (cid:217)वारा राजकोष में जमा किये जायेंगे।

(3) यदि कोई दावा विक्रय के आगम राजकोष में संदाय के एक वर्ष के भीतर प्रस्तत किया ु

जाता है और दावेदार उसके लिए अपना अधिकार स्थापित करता है तो कारागार निदेशालय का प्रमख ऐसे दावेदार को रकम का प्रतिदाय मंजर कर सके गा और प्रतिदाय किया जायेगा।

(4) उपर्यक्त नियत कालावधि के अवसान के पश्चात ्, धन सरकार को व्यपगत हो जायेगा।

385. बन्दियों की मत्य के मामले

ु हो जाती है,

ु .- (1) जब एक बन्दी की जेल में मत्य ृ

उसकी संपत्ति, निपटान के लिए, उस पलिस थाने

ु , जिसमें उसका गह अवस्थित है

ृ , के प्रभारी अधिकारी को भेजी जायेगी।

(2) मत्यकालिक बन्दी (cid:217)वारा अभिव्यक्त की गयी इच्छाएं सम्पर्ण विशिष्टियों के साथ -साथ उस अधिकारी को संसचित की जायेंगी जो नातेदारों का पता लगाने के लिए उसे समर्थ बनाये।

386. निकल भागे बन्दियों की संपत्ति.- (1) निकल भागे बन्दी की संपत्ति, उसके निकल भागने की तारीख से एक वर्ष के लिए प्रतिधारित की जायेगी और यदि वह उस कालावधि के भीतर पनु :पकड़ा नहीं जाता है तो उसकी संपत्ति विक्रय की जायेगी और बन्दी से संबंधित किसी नकद के साथ आगम अदावाकत संपत्ति के रूप में राजकोष में संदत्त की जायेगी।

(2) जेलर यह देखने के लिए उत्तरदायी होगा कि छोड़े जाने पर बन्दी को सपर्द की गयीु ु , अंतरण पर उसके साथ भेजी गयी, बन्दी की मत्य पर निपटान के लिए पलिस को सौंप दी गयी या निकल भागे बन्दी के मामले में विक्रय की गयी संपत्ति, उस अभिलेख के समरूप है जो प्रभार के अधीन लिया गया था।

अध्याय 15

सि(cid:217)धदोष अधिकारी

(सि(cid:217)धदोष चौकीदार और सि(cid:217)धदोष ओवरसियर)

387. सि(cid:217)धदोष अधिकारियों की श्रेणियां.- (1) सि(cid:217)धदोष अधिकारियों की दो श्रेणियां होगी, अर्थात ्:-

(क) सि(cid:217)धदोष रात्रि चौकीदार; और

(ख) सि(cid:217)धदोष ओवरसियर।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 197

(2) सि(cid:217)धदोष अधिकारियों के रूप में नियक्त बन्दी भारतीय दंड संहिता , 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) के अर्थ में लोकसेवक होंगे।

388. सि(cid:217)धदोष अधिकारियों की संख्या.- एक जेल में सि(cid:217)धदोष अधिकारियों की संख्या किसी भी दशा में कारागार की दैनिक औसत संख्या के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

389. सि(cid:217)धदोष अधिकारियों के कर्तव्य.- कोई भी सि(cid:217)धदोष अधिकारी रात्रि में कोठरियों या बैरकों में बन्दियों की रक्षा की (cid:212)यटी में नियोजित नहीं किया जायेगा और

ू कोई भी सि(cid:217)धदोष अधिकारी रात्रि में उसकी बैरक से बाहर नहीं होगा।

390. कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं.- (1) किसी सि(cid:217)धदोष अधिकारी का किसी फाईल, दल या बन्दियों अन्य निकाय का स्वतंत्र प्रभार नहीं होगा, न ही उसकी बन्दियों को आदेशों को जारी करने की स्वतंत्र शक्ति होगी, कित वरिष्ठ प्रभार में सदैव एक नियमित वार्डर होगा जिसके नियंत्रण और आदेशों के अधीन सि(cid:217)धदोष अधिकारी कार्य करेगा:

परन्त जेल की मख्यु

ु दीवार के भीतर विश्वसनीय सि(cid:217)धदोष अधिकारी को फटीग (cid:212)यटी पर नियोजित दल का , या स्वास्थ्य लाभकारी दल या जल वाहकों या अहाता सफाईकर्मियों का प्रभार न्यस्त किया जा सकता है।

(2) वार्डर के वल आभ्यासिक बन्दी दलों और कार्यशालाओं के प्रभारी होंगे।

391. सि(cid:217)धदोष अधिकारी होने वाले बन्दियों का प्रवर्ग.- साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दियों के लिए आरक्षित यार्डों या बैरकों में नियोजन के लिए अपेक्षित सि(cid:217)धदोष अधिकारी, यथा संभव साधारण कारावास भोग रहे बन्दियों में से लगाये जायेंगे।

392. (cid:212)यटी पर निर्बंधनू .- (1) कोई गैर-आभ्यासिक बन्दी आभ्यासिक बन्दियों के सि(cid:217)धदोष प्रभारी अधिकारी के रूप में नियोजित नहीं किया जायेगा, जब तक कि वह साधनों और स्थिति का व्यक्ति न हो, जो किसी आवेश में प्रतिब(cid:217)ध व्यक्ति के विरु(cid:217)ध गंभीर

, अपराध के लिए कारावास को दंडादिष्ट किया गया है और जो, किन्त इस गलती के लिएु समाज का एक प्रतिष्ठित सदस्य है, और जिसके आभ्यासिकों पर उत्तरदायित्व की उसकी स्थिति के माध्यम से, संदूषित हो जाने की संभावना नहीं हो। (2) कोई सि(cid:217)धदोष अधिकारी, किसी भी बहाने से, आत्मरक्षा में या जेल अधिकारी की रक्षा में या उपद्रव के दमन में को छोड़कर जिसमें आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग नहीं किया जायेगा बन्दी को आघात नहीं करेगा, या जब सर्वथा आवश्यक होने के सिवाय कोई हिंसा नहीं करेगा।

(3) कोई सि(cid:217)धदोष अधिकारी जो इस नियम का अतिलंघन करते हए पाया जाता है स्था

ु यी रूप से साधारण सि(cid:217)धदोष की स्थिति में पदच्यत किया जायेगा।ु

(4) किसी सि(cid:217)धदोष अधिकारी (cid:217)वारा प्रतिषि(cid:217)ध वस्तओं को प्रविष्ट कराना या प्रविष्ट कराने में मौन स्वीकति का पता चलने पर उसे बन्दी अधिनियम , 1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 42 के अधीन न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अभियोजित किया जायेगा और जब भी जानबझकर या उपेक्षापर्वक बन्दी को निकल भागना अनज्ञात करने का198 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) दोषी हो, वह सदैव भारतीय दंड संहिता 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 222 और 223 के अधीन अभियोजित किया जायेगा और सि(cid:217)धदोष अधिकारी निकल भागना निवारित करने के लिए उनकी शक्ति में हर संभव करने के लिए आब(cid:217)ध होंगे।

(5) सि(cid:217)धदोष ओवरसियर को, दंड के रूप में के सिवाय, कठोर श्रम से छू ट दी जायेगी। 393. स्थायी अक्षमता के मामले में हटाया जाना.- यदि कोई सि(cid:217)धदोष अधिकारी, उससे अपेक्षित समस्त कर्तव्यों को या किसी के पालन के लिए स्थायी रूप से अक्षम हो जाता है तो अधीक्षक उसे कार्यालय से पदावनत कर सके गा या हटा सके गा।

394. सभिन्न वस्त्रु .- सि(cid:217)धदोष अधिकारी सभिन्न वस्त्र पहनेंगे और पत्रों और मलाकातों के संबंध में विशेष छट अनज्ञात की जायेगी।

395. नियक्ति आदेश का वत्त पत्र में प्रविष्ट किया जाना .- सि(cid:217)धदोष अधिकारी के रूप में किसी बन्दी को नियक्त करने का प्रत्येक आदेश अधीक्षक (cid:217)वारा बन्दी के वत्त पत्र पर ृ

लिखा जायेगा और अधीक्षक की आदेश पस्तिका में भी प्रविष्ट किया जायेगा।

396. सि(cid:217)धदोष रात्रि चौकीदार.- सि(cid:217)धदोष रात्रि चौकीदार के रूप में नियक्तु ◌ि के लिए,-

(क) यदि वह के न्द्रीय जेल में है तो उसे छह मास से कम के कारावास से और यदि जिला जेल में है तो उसे चार मास से कम के कारावास से दंडादिष्ट नहीं होना चाहिए;

(ख) परिहार की कालावधि को अपवर्जित करते हए उसने दंडादेश का एक चौथाई पर्ण कर लिया होू ;

(ग) वह ठगी, डकै ती और राज-द्रोह, संज्ञाहीनकारी द्रव्य का प्रयोग, आतंकवाद और स्वापक और विस्फोटक वस्तओं जैसे अपराु धों के लिए सि(cid:217)धदोष नहीं हआ ु हो;

(घ) वह कार्यालय के कर्तव्यों की पालना करने लिए शारीरिक रूप से योग्य और सदाचार वाला हो; और

(ङ) यदि परिहार प्रणाली पर हो, तो उसे संभावित (साधारण) परिहार का तीन चौथाई अर्जित किया हआ या संधारित किया हआ होना चाहिए।

397. सि(cid:217)धदोष रात्रि-चौकीदार होने के लिए पात्रता.- आभ्यासिक बन्दी, आभ्यासिक बन्दियों के लिए आरक्षित बैरकों में सि(cid:217)धदोष रात्रि चौकीदारों के रूप में नियोजित किये जा सकें गे, कित कारागार निदेशालय के प्रमख की मंजरी के बिना किसी उच्चतर ग्रेड पर पदोन्नत नहीं किये जायेंगे:

परन्तु दो से अधिक दोषसि(िcid:217)धयों वाला कोई भी बन्दी, आभ्यासिक अपराधियों के लिए बैरकों में रात्रि चौकीदार के रूप में नियक्त नहीं किया जायेगा।ु 398. सि(cid:217)धदोष चौकीदार के कर्तव्य.- इन नियमों में अन्यत्र विहित कर्तव्यों के अतिरिक्त, प्रत्येक सि(cid:217)धदोष चौकीदार का कर्तव्य होगा,-भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 199 (क) वार्डों और कोठरी से आत्महत्या और निकल भागना रोकने के लिए बन्दियों पर निगरानी रखना;

(ख) जेल अस्पताल में रोगियों का उपचार और देखरेख करना;

(ग) वार्डों के भीतर गश्त करना और रात्रि में अनशासन और व्यवस्था

ु बनाये रखना या बनाये रखने में सहायता करना;

(घ) अनज्ञाु सहित और आवश्यक प्रयोजन के सिवाय अपनी बर्थ छोड़ने वाले बन्दियों को रोकना;

(ङ) उसके भारसाधन में बन्दियों की बार-बार गणना करना, स्वयं का समाधान करना कि समस्त उपस्थित हैं, और जब बाहरी गश्ती (cid:217)वारा आह्वान किया जाये प्रत्यत्तर देनाु ;

(च) जहां तक उसकी शक्ति में है किसी बन्दी (cid:217)वारा जेल नियमों के किसी भंग को रोकना और उसकी रिपोर्ट करना;

(छ) किसी उपद्रव को शांत करने में सहायता करना और आवश्यकता के मामले में, किसी पदधारी की रक्षा करना;

(ज) बीमारी और शौचालय का उस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट समयों पर से अन्यथा उपयोग के मामलों की रिपोर्ट करना;

(झ)ऐसे कत्यों का पालन करना जो उसे दिन के दौरान आबंटित किये जायें और उसके दल के प्रभारी वार्डर या सि(cid:217)धदोष ओवरसियर को समस्त समचित ु सहायता देना;

(ञ) जब ऐसा अपेक्षित हो, जेल दीवारों के भीतर संदेशवाहक के रूप में कार्य करना और जेल के एक भाग से दसरे भाग को बू न्दियों का एस्कॉर्ट करना; (ट) जेल दीवारों की निगरानी रखना और बन्दियों के उनके निकट अतिचार से रोकना; और

(ठ) यदि आवश्यक हो, जेल के भीतर दल या दल के भाग का प्रभार लेना।

399. काम के घंटों के लिए इंतजाम.- (1) बन्दियों को रात्रि के लिए बंद किये जाने से पर्व जेलरू , मुख्य वार्डर की सहायता से, रात्रि के दौरान समस्त गश्ती अधिकारियों की सचना के लिए हवालात रिपोर्ट पस्तक में प्रत्येक सि(cid:217)धदोष अधिकारी के लिए घंटे अंकित करते हए निगरानी के घंटों के लिए इंतजाम करेगा ; या प्रत्येक वार्ड के लिए निगरानी का क्रम साधारणत: प्रत्येक सप्ताह नियत किया जा सके गा।

(2) सि(cid:217)धदोष चौकीदारों की रात्रि (cid:212)यटी अध्याय ू 19 में उपवर्णित रूप में होगी।

400. सि(cid:217)धदोष चौकीदार की पोशाक.- सि(cid:217)धदोष चौकीदार पीली टोपियां और लंबी बाज वाले सफे द सती कत पहनेंगे और श्रम तथा अनशासन के संबंध में वे साधारण सि(cid:217)धदोष के समान होंगे।

401. सि(cid:217)धदोष ओवरसियर.- सि(cid:217)धदोष चौकीदार को अधीक्षक (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के रूप में पदोन्नत किया जा सके गा:

200 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

परन्तु,-

(क) वह तीन मास के लिए सि(cid:217)धदोष चौकीदार के रूप में सेवा कर चका या चकी ु

हो; और

(ख) परिहार को अपवर्जित करते हए वह अपने

ु दंडादेश का आधा भगत चका या ु

चकी हो।ु

402. निदेशालय के प्रमख का अनमोदनु

अनमोदन के बिना उक्त नियमों के उल्लंघन में

ु .- कोई भी बन्दी निदेशालय के प्रमख के ु , स्थायी या अस्थायी रूप से सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के रूप में नियक्त नहीं किया जायेगा। ु

403. सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के कर्तव्य.- इन नियमों में अन्यत्र विहित कर्तव्यों के अतिरिक्त, सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे,-

(क) वार्डों और कोठरियों से आत्महत्या और निकल भागना रोकने के लिए बन्दियों पर निगरानी रखना;

(ख) जेल चिकित्सालय में रोगियों की परिचर्या और देखरेख करना;

(ग) अधीक्षक, जेलर या अन्य जेल पदधारी, या सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी, जिसके अधीन उन्हें रखा गया है, का आज्ञापालन करना जब तक कि उन्हें जेल नियमों के प्रतिकल कछ करने को ू आदेशित नहीं किया जाये, ऐसे मामले में वे अधीक्षक या जेलर को शीघ्रातिशीघ्र अवसर पर रिपोर्ट करेंगे;

(घ) काम पर बन्दियों के दलों के अधीक्षण, उनकी परेड संचालित करने, अनशासन और शांति बनाए रखने और उन्हें सरक्षित अभिरक्षा में रखने में वार्डरों की सहायता करना;

(ङ) जेल के भीतर बन्दियों के दल या दल के भाग का, यदि आवश्यक हो, प्रभार लेना;

(च) रात्रि को भीतरी गश्त (cid:217)वारा वार्डों की रक्षा करने के चौकीदार के कर्तव्यों में भाग लेना और निगरानी की दक्षता, बन्दियों की सरक्षित ु अभिरक्षा और रात्रि में वार्डों में अनशासन बनाये रखने के लिए ु

उत्तरदायी होना;

(छ) जेल के भीतर व्यष्टि बन्दियों का एस्कॉर्ट किया जाना;

(ज) उनके दल के बन्दियों के वत्त पत्र रखनाृ ; (झ)उन्हें सौंपे गये बन्दियों की बार-बार गणना करना, देखना कि संख्या सही है और उनकी तलाशी लेना और उन्हें प्रतिषि(cid:217)ध वस्तएं प्राप्त ु करने और प्रतिधारण करने से निवारित करना;

(ञ) किसी बन्दी के पास प्रतिषि(cid:217)ध वस्तएं पाये जाने की दशा में

ु तथ्य की रिपोर्ट करना, अन्यथा उस दल, जिससे ऐसा बन्दी संबंधित है, काभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 201 प्रभारी सि(cid:217)धदोष ओवरसियर दंडित किया जायेगा, यदि वह इस तथ्य की रिपोर्ट नहीं करता है;

(ट) जेल नियमों में से किसी के भंग, गप्त योजनाओं या षडयंत्रो की सचना देना, जो उसकी जानकारी में आयें, चाहे उसके स्वयं के दल के बन्दियों में से हों या अन्य दलों के ;

, (ठ) यह देखना कि बन्दी उनके कतिकों का परिश्रमपर्वक पालन करते हैं उनके समचित स्थाु न नहीं छोड़ते हैं या एक दसरे के साथ ू अनियमित रीति से संपर्क नहीं करते हैं, और जब एक स्थान से दसरे स्थाू न को हटाये जाते हैं, तो पांच में रहते हैं;

(ड) प्रत्येक बन्दी की, जो नियमित समय के अलावा शौचालय का (मत्र ू त्यागने के प्रयोजन के अलावा) प्रयोग करता है, रिपोर्ट करना और अतिसार और अन्य बीमारी के समस्त मामलों की रिपोर्ट करना, विशेषत: महामारियों के प्रसार के दौरान;

(ढ) यह देखना कि प्रत्येक बन्दी प्रात: वार्डों को खोलने के पर्व अपना ू बिछौना समचित रूप से समेटता है और व्यवस्थिु त करता है; (ण) यह देखना कि बन्दी स्वयं को साफ रखते हैं और उनके वस्त्रों को धोते हैं;

(त) किसी विद्रोह के दमन में सहायता करना और हमले के मामले में किसी जेल पदधारी की रक्षा करना; और

(थ) कारागार चिकित्सालय में वार्डों का पर्यवेक्षण करना और चिकित्सा अधिकारी की सहायता करना।

कोट, एक ऊनी कोट, एक कर्ता

404. सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों की पोशाक.- (1) सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों को एक सती ू ु , एक जोड़ा पतलनू , एक जांघिया, एक टोपी, एक गमछा, एक जोड़ी जूता और पीतल के बैज सहित के नवास बैल्ट से मिलकर बनने वाली विशेष पोशाक प्रदत्त की जायेगी।

, यदि आवश्यक हों, सती वस्त्र ू

(2) अतिरिक्त कोट, गमछा, टोपी और पतलन कोट जोड़े सहितू एक वर्ष चलेंगे और ऊनी कोट तीन वर्ष चलना चाहिए।

(3) बैज पर ''सि(cid:217)धदोष ओवरसियर'' शब्द उत्कीर्ण होंगे और एक से ऊपर की ओर क्रमानसार संख्यांकित होंगे , और ओवरसियरों (cid:217)वारा उनकी योग्यता के क्रम में पहने जायेंगे, सर्वाधिक पात्र व्यक्ति को संख्यांक एक का बैज दिया जायेगा।

(4) वे कोई बेंत या आयध नहीं रखेंगे।ु

(5) जब उनसे धप या वर्षा

, तो उन्हें छाता ू , किसी स्थिति में (cid:212)यटी करना अपेक्षित हो

उपलब्ध करवाया जायेगा।

202 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

405. सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों के विरु(cid:217)ध दंड.- (1) सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों (cid:217)वारा किये गये लघ अपराध या उपेक्षा , परिहार की हानि, बैज के संख्यांक के परिवर्तन से प्रतिष्ठा में कमी, अस्थायी पद घटाने और कोठरियों में परिरोध (cid:217)वारा दंडित की जा सके गी।

(2) गंभीर अपराधों के लिए, ओवरसियर को सि(cid:217)धदोष चौकीदार या सामान्य बन्दी की रैंक तक पदावनत किया जा सके गा।

(3) गंभीर अवचार की दशा में, उन्हें औपचारिक रूप से ओवरसियर के रूप में उनकी प्रास्थिति और उनकी पोशाक से वंचित किया जायेगा।

406. महिला सि(cid:217)धदोष अधिकारियों को उपबंधों का लाग होगाू .- इस अध्याय के उपबंध यथावश्यक परिवर्तन सहित महिला सि(cid:217)धदोष अधिकारियों पर लाग होंगे। ू

407. सि(cid:217)धदोष रात्रि महिला चौकीदार की पोशाक.- सि(cid:217)धदोष रात्रि महिला चौकीदार नीले ब्लाउज के साथ सूती नीली साड़ी पहनेगी।

408. सि(cid:217)धदोष अधिकारियों को प्रोत्साहन राशि.- सि(cid:217)धदोष अधिकारी को प्रोत्साहन राशि मास के अंत में दी जायेगी और उसके वैयक्तिक खाते में जमा की जायेगी।

अध्याय 16

दंडादेश का निष्पादन

(छोड़े जाने की तारीख की गणना और रिलीज डायरी)

409. दंडादेश गणना की रीति.- (1) दंडादेश की अवधि की गणना कै लेन्डर वर्ष, मास, पखवाड़ा, सप्ताह या दिनों में की जायेगी।

(2) गणना के प्रयोजन के लिए,-

(क) ''वर्ष'' से कै लेन्डर वर्ष अभिप्रेत है;

(ख) ''मास'' से तीस दिन अभिप्रेत है;

(ग) ''पखवाड़ा'' से चौहद दिन अभिप्रेत है; और

(घ) ''सप्ताह'' से सात दिन अभिप्रेत है।

(3) जब बन्दी के दंडादेश में मास का भाग सम्मिलित होता है तो छोड़े जाने की तारीख दिनों में ऐसे भाग को घटाते हये संगणित की जायेगी।ु 410. दंडादेश का भगतनाु .- (1) दंडादेश किसी भी क्रम में दिये गये हों, बन्दी समस्त दंडादेशों की कालावधि के योग को भगतने के लिए दायी होगा :

परन्तु किन्हीं भी परिस्थितियों में, बन्दी को सपर्दगी के वारंट के निबंधनों में उपदर्शित कालावधि से अधिक कारागार में निरु(cid:217)ध नहीं किया जायेगा।

(2) संदेह के मामले में, उस क्रम में जिसमें दंडादेश प्रभावी होंगे, संबंधित न्यायालय से निदेश लिये जायेंगे।

411. कारावास का प्रारम्भ, और उसमें व्यवधान, कै से गिने जायेंगे.- (1) आपराधिक मामले में कारावास के दंडादेश की समाप्ति की तारीख गणना करने में, वह दिन जिस परभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 203 दंडादेश पारित किया गया था और छोड़े जाने का दिन दोनों कारावास के दिनों के रूप में सम्मिलित किये जायेंगे।

(2) बन्दी जिसे न्यायालय के उठने तक दंडित किया गया है, स्वयं न्यायालय से छोड़ दिया जाएगा और कारागार में प्रविष्ट नहीं किया जायेगा।

(3) ऐसे बन्दी के मामले में जिसे न्यायालय के उठने तक दंडित किया गया है और उसी दिन अन्य दंडादेश अधिनिर्णीत किया गया है, पश्चात्वर्ती दंडादेश उस तारीख से प्रारंभ होगा जिस पर दंडादेश अधिनिर्णीत किया गया है।

(4) यदि बन्दी को चौबीस घंटों के कारावास से दंडादिष्ट किया गया है, तो वह घंटों की निश्चित संख्या के लिए कारागार में रखा जाएगा और ऐसे मामलों में, दंडादेश वारंट में उपदर्शित घंटे से प्रारंभ समझा जायेगा।

(5) एक दिन के कारावास से दंडादिष्ट बन्दी, कारागार में प्रविष्ट किये जायेंगे और उसी दिन छोड़े जायेंगे।

स्पष्टीकरण-1 : 1 जनवरी को एक मास के कारावास से दंडादिष्ट कोई बन्दी 31 जनवरी को छोड़ा जायेगा और न कि एक फरवरी को।

स्पष्टीकरण-2 : 28 फरवरी को एक मास के कारावास से दंडादिष्ट कोई बन्दी 27 मार्च को छोड़ा जायेगा।

स्पष्टीकरण-3 : 1 जनवरी को एक दिन के कारावास से दंडादिष्ट कोई बन्दी उसी दिन छोड़ा जायेगा। कित यदि वं ु ह 24 घंटों के लिए दंडादिष्ट किया गया है तो वह उस कालावधि के लिए परिरोध में रखा जाएगा और 2 जनवरी को घंटे पर्ण होने ू

से पर्व नहीं छोड़ा जाएगा।ू

412. मामले जहां न्यायालय के निदेश का पालन किया जायेगा.- भोगे जाने वाले कारावास की कालावधि, उन मामलों को छोड़कर जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 31, 426, और 427 के अधीन आते है, जहां न्यायालय के निदेशों का पालन किया जाएगा, उस तारीख से संगणित की जायेगी जिस पर दंडादेश पारित किया गया था।

स्पष्टीकरण : जर्माने के व्यतिक्रम में कारावास के लिए दंडादिष्ट बन्दी के मामले में, कारावास की कालावधि उस दिन से गिनी जायेगी जिस पर उसे अधिरोपित जर्माने के संदाय से असफल रहने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

413. एक ही विचारण में विभिन्न दंड.- जब कोई व्यक्ति एक ही विचारण में दो या अधिक अपराधों के लिए विभिन्न दंडों के लिए दंडादिष्ट किया जाता है, जब ऐसे दंड, कारावास के रूप में हों, जब तक न्यायालय ने यह निदेश न दिया हो कि ऐसे दंड साथ-साथ भोगे जाएंगे, तब तक वे ऐसे क्रम से एक के बाद एक प्रारंभ होंगे जिसका न्यायालय निदेश दे।

414. दो कारावास का साथ-साथ भोगा जाना.- (1) जहां उस व्यक्ति को, जिसे प्रतिभति देने में व्यू तिक्रम करने पर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 123 के अधीन दंडादेश दिया गया है ऐसा दंडादेश भोगने के दौरान ऐसे204 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) , आदेश के दिये जाने से पर्व किये गये अपराध के लिए कारावास का दंडादेश दिया जाता है वहां पश्चात्कथित दंडादेश तरंत प्रारंभ हो जाएगा और दोनों कालावधियों का कारावास साथ - साथ भोगा जायेगा।

(2) यदि मख्य दंडादेश दंड प्रक्रिया संहिता , 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 123 के अधीन आदेश के पारित किये जाने के पश्चात कारित अपराध के

् लिए था, तो दंडादेश साथ-साथ भोगे जायेंगे।

स्पष्टीकरण : प्रतिभति देने में व्यू तिक्रम होने पर कारावास, इस नियम के अर्थ में दंडादेश नहीं है।

415. कारावास का क्रमवर्ती होना.- (1) यदि कोई व्यक्ति जो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 123 के अधीन प्रतिभति देने में ू व्यतिक्रम के कारण दंडादिष्ट किया गया है या दंड भोग रहा है, ऐसे कारावास की कालावधि, जिसके लिए ऐसी प्रतिभति अपेक्षित है मख्य दंडादेश की समाप्ति पर प्रारंभ होगी।

(2) सदाचार के लिए प्रतिभति देने में व्यतिक्रम पर कारा

पर्वावधानी है न कि अपराध के लिए दंड

ू वास, जनता की सरक्षा के लिए ु , मामले जहां ऐसे कारावास को भोगने के क्रम में मख्य दंडादेश के अवसान के पश्चात बन्दी निरु(cid:217)ध किया गया है , अधीक्षक (cid:217)वारा इसलिए मजिस्ट्रेट या न्यायालय के ध्यान में लाया जाएगा, कि यदि वह उचित समझता है, बन्दी के उन्मोचन के लिए, वह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 124 के अधीन कार्रवाई कर सके गा।

416. छोड़े जाने की तारीख जब दो या अधिक दंडादेश क्रमवर्ती रूप से चल रहे हैं.- जब एक बन्दी क्रमवर्ती भोगे जाने वाले कारावास की दो या अधिक कालावधियों के लिए दंडादिष्ट किया गया है, छोड़े जाने की तारीख, दोनों कालावधियों को एक मानते हए संगणित ु की जाएगी।

स्पष्टीकरण-1 : प्रत्येक एक वर्ष के कारावास की दो मख्यु अवधियों के लिए 21 नवंबर, 2000 को दंडादिष्ट बन्दी 20 नवंबर, 2002 को छोड़ा जाएगा न कि 19 नवंबर, 2002 को।

स्पष्टीकरण-2 : किसी बन्दी को 1 जनवरी को दो मास के कारावास और 200 रु. के जर्माने ु या, व्यतिक्रम में, एक मास के कारावास के लिए दंडादिष्ट किया जाता है तो यदि जर्माना संदत्त नहीं किया जाता है , उसे 31 मार्च को छोड़ा जाएगा, कित ं यदि जर्माना संदत्त कर दिया जाता है , तब फरवरी के अंतिम दिन छोड़ा जाएगा।

417. आजीवन कारावास के लिए दंडादिष्ट बन्दियों के मामले में छोड़े जाने की तारीख.- आजीवन कारावास का तकनीकी रूप से अर्थ है संपर्ण जीवन के लिए कारावास और आजीवन कारावास के लिए या कु ल मिलाकर बीस वर्ष से अधिक के लिए दंडादिष्ट समस्त बन्दियों के दंडादेश, छोड़े जाने की सामान्य तारीख की गणना के प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए, बीस वर्ष के लिए कारावास के दंडादेश माने जायेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 205

किसी 418. दंडादेश का लघकरणु .- यदि मत्य के दंडादेश का आजीवन कारावास या अवधि के लिए कारावास में से एक के लिए लघकरण किया जाता है , आजीवन कारावास या किसी अवधि के लिए कारावास का दंडादेश उस तारीख से प्रारंभ समझा जाएगा जिस पर दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के नियम 428 से अनषक्त ु ु पारित किया गया था।

मत्य का दंडादेशृ

419. निकल भागे सि(cid:217)धदोष का अनवसित दंडादेश.- निकल भागने वाले बन्दी के मामले में, जो किसी अन्य अपराध के संबंध में तत्पश्चात गिरफ्तार किया जाता है , उस लेखे

ू पलिस अभिरक्षाु , या विचाराधीन बन्दी के रूप में व्ययनित कोई कालावधि, मल दंडादेश के अधीन कारावास के रूप में संगणित नहीं की जाएगी।

420. निकल भागने के लिए दंडादिष्ट बन्दियों को छोड़े जाने की तारीख.- यदि बन्दी कारागार से निकल भागने के लिए दंडादेश प्राप्त करता है तो दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 426 के अनसार छोड़े जाने की तारीख ु

पनु :संगणित की जाएगी और छोड़े जाने वाले बन्दियों के रजिस्टर में छोड़े जाने की मल ू तारीख के स्थान पर प्रविष्ट की जाएगी।

421. मामले जहां प्रथम दंडादेश अपील पर बातिल किया जाता है.- जब किसी बन्दी को एक से अधिक दंडादेश अधिनिर्णीत किये जाते हैं, और प्रथम दंडादेश अपील पर बातिल किया जाता है, तो (िcid:217)वतीय दंडादेश प्रथम दंडादेश के परिणामस्वरूप बन्दी को जेल को सपर्द ु किए जाने की तारीख से प्रभावी होगा और निरोध की कालावधि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 428 के उपबंधों के अनसार संगणित की ु जाएगी।

422. रिलीज डायरी में छोड़े जाने की तारीख की प्रविष्टि.- (1) तारीख जिस पर एक बन्दी छोड़े जाने का हकदार है, अधीक्षक और जेलर (cid:217)वारा संगणित की जाएगी, और बन्दी का नाम और क्रम संख्यांक देते हएु , उस तारीख के अधीन रिलीज डायरी में प्रविष्टि की जाएगी।

(2) यह सपर्दगीकार अधिकारी का यह कर्तव्य नहीं है कि वह वारंट पर छोड़े जाने की तारीख अंकित करे और यदि वारंट पर छोड़े जाने की तारीख गलत कथित की गयी है या लोप की गयी है, वारंट उस लेखे सधार के लिए लौटाया नहीं जाएगा।

(3) रिलीज डायरी में प्रविष्टि या तो स्वयं जेलर (cid:217)वारा या उसके सीधे पर्यवेक्षण के अधीन उप-जेलर (cid:217)वारा की जाएगी, कारावास की अवधि परिवर्तित हो जाने के मामले में, या तो अतिरिक्त कारावास के न्यायिक अधिरोपण या दंडादेश के किसी भाग के परिहार या जमानत पर या निकल भागने के पश्चात जेल से अनपस्थिति का तथ्य्

ु ऐसी प्रविष्टि के सामने अंकित किया जाएगा और नए आदेश के अधीन, जिस तारीख के अधीन नयी प्रविष्टि की जाएगी, छोड़े जाने की तारीख के लिए निदश किया जाएगार्।े

(4) अधीक्षक रिलीज डायरियों और प्रवेश रजिस्टर में प्रत्येक प्रविष्टि की स्वयं जांच करेगा और ऐसी प्रविष्टियों की सत्यता के लिए और बन्दी के किसी अवैध निरोध या इस नियम206 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) की अनानषक्ति के कारण दंडादेश को निष्पादित करने के लिए असफलता के लिए स्व यं उत्तरदायी होगा।

423. सशर्त छोड़े जाने का प्रतिसंहरण.- ऐसी दशा में जहां बन्दी को मंजूर सशर्त छोड़ा जाना प्रतिसं(cid:305)त किया जाता है और बन्दी जेल को मल दंडादेश भोगने के लिए वापस आदेशित किया गया है, वह मल वारंटू , सरकार के प्रतिसंहरण के आदेशों की प्रति और वारंट में न्यायालय (cid:217)वारा पष्ठांकन के साथ जेल भेजा जायेगा।

424. जर्माने का संदाय करने

ु पर छोड़े जाने की तारीख पनु :नियत किया जाना.- (1) यदि कोई बन्दी कारावास से दंडादिष्ट किया जाता है जिसका संपर्ण या कोई भाग किसी ू

जर्माने के संदाय के व्यतिक्रम में है , और यदि जर्माना तत्काु ल संदत्त नहीं किया जाता है, छोड़े जाने की तारीख नियत की जायेगी और,-

(क) यदि जर्माना तत्पश्चात संदत्त कर दिया जाता है

; और

(ख) यदि जर्माना संदत्त नहीं किया जाता है।

रिलीज डायरियों में ऐसी तारीखों पर प्रविष्ट की जायेगी जो छोड़े जाने की तारीख के तत्समान होगी।

(2) जब जर्माने का कोई भाग संदत्त कर दिया जाता है , छोड़े जाने की तारीख तदनसार ु परिवर्तित की जायेगी।

दृष्टांत : यदि कोई बन्दी 1 जनवरी को छह मास के कारावास और तीन सौ रुपये के जर्माने ु से दंडादिष्ट किया जाता है और यदि आदेश किया जाता है कि यदि जर्माना संदत्त ु

नहीं किया जाये तो वह छह मास की अतिरिक्त कालावधि के लिए कारावासित

(अर्थात छह मास ्

होगा, तब यह मानते हए कि बन्दीु , दोषसि(िcid:217)ध पर तत्काल, सौ रुपये का संदाय करता है, छोड़े जाने की तारीख 31 अक्टबर नियत की जायेगी ू

और असंदत्त जर्माने के समतल्य चार मासु

ु ) और रिलीज डायरी में प्रविष्टियां 30 , यदि वह तत्पश्चात सौ रुपये का संदाय और ्

जन और ू 31 अक्टबर को की जायेंगी

कर देता है, पश्चातकथित तारीख 31 अगस्त के रूप में परिवर्तित हो जायेगी और

, 30 जन को प्रविष्टि के सामने यह तथ्य अंकित उसका संपर्ण संदाय करने परू

किया जायेगा।

425. संदाय के लिए परिहार की गणना.- (1) यदि कोई बन्दी, जो जर्माने से दं

ु डादिष्ट है और उसके व्यतिक्रम में मास की निश्चित संख्या के लिए कारावास से दंडादिष्ट है, उसके जर्माने के किसी भाग का संदाय कर देता है , संदाय के लिए परिहार की गणना कै लेन्डर मासों में की जायेगी न कि दिनों में।

(2) ऐसी गणना (cid:217)वारा अभिप्राप्त मास का कोई भाग दिनों में से घटाया जाएगा और दिन का भाग गिना नहीं जायेगा।

दृष्टांत : यदि कोई बन्दी 15 जलाई को छह मास के कारावास से और तीन सौ रुपये के जर्माने के संदाय से या संदाय के व्यतिक्रम में छह मास के अतिरिक्त कारावासभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 207 को भोगने के लिए दंडादिष्ट है, और वह 63 रु. संदत्त कर देता है, जो गणना निम्नानसार की जायेगीु :-

63 रु.÷300×6 मास = 126÷100 = मास छोड़े जाने की तारीख, एक मास कटौती करते हये

ु , 14 जन आयेगी। जैसा कि जन ू के पर्ववर्ती मास में ू 31 दिन होते हैं, मास का 26/100 इकत्तीस दिनों पर संगणित किया जायेगा। 26/100×31 = 806/100 = 8 दिन। यहां 63 रु. के संदाय के लिए परिहार एक मास और आठ दिन है।

, मास के यदि बन्दी 15 जलाई के बजाय ु 15 जन को दंडादिष्ट किया गया है

86/100 की गणना 30 दिन के मास पर की जाएगी क्योंकि अप्रैल में कोई तारीख से मई में की ऐसी तारीख होगी जो 30 दिन के समान है, जैसे 26/100×30 = 78/10 = 7 दिन ताकि उस एक मामले में परिहार के वल एक होगा।

426. संदाय के बारे में वारंट पर पष्ठांकनृ .- (1) यदि ऐसा जर्माना या इसका कोई ु भाग दोषसि(िcid:217)ध पर तत्काल संदत्त कर दिया जाता है, वारंट जारी करने वाला मजिस्ट्रेट वारंट पर ऐसे संदाय का तथ्य पष्ठांकित करेगा।ृ

(2) यदि संदाय तत्पश्चात किया जाता है

, जब तक कि

् , जर्माना प्राप्त करने वाला न्यायालयु

बंदी के वारंट पर यह पहले से ही दर्शित करते हए कि वह छोड़ा जा चका है पष्ठांकन न हो

ृ , विहित प्ररूप में और अंग्रेजी भाषा में जर्माना वसली कथन लेखब(cid:217)ध करेगा और उन्हें दसरी प्रति में प्रत्यक्षत: (और किसी अन्य न्यायालय के माध्यम से नहीं) उन जेलों को भेजेगा जिनमें बन्दी को दोषसि(िcid:217)ध के पश्चात प्रथम बार परिरु(cid:217)ध किया गया था।

(3) न्यायालय का उत्तरदायित्व तब तक समाप्त नहीं होगा जब तक कि इसे यह दर्शित करते हए कि रिलीज डायरी में आवश्यु क संशोधन किये जा चके हैं उस जेलु , जिसमें बन्दी परिरु(cid:217)ध किया गया है, से अभिस्वीकति सहित कथन की दसरी प्रति वापस प्राप्त नहीं होती है।

(4) मल जर्माना वसली कथनू

ू , वारंट के साथ फाईल किया जाएगा और दंडादेश कार्यान्वित हो जाने के पश्चात इसके साथ लौटाया जाएगा।

(5) यदि बन्दी का जर्माना वसली कथन जेल को उसके जमानत पर उन्मोचित हो जाने के पश्चात प्राप्त होता है

् तो जेलर, जारी करने वाले न्यायालय को कथन लौटाने से पर्व

ू , तथ्य का ु , बन्दी के नाम के सामने प्रवेश अभिलेख करते हुए कि जर्माने का संदाय किया जा चका है रजिस्टर में प्रविष्टी करेगा।

427. कालावधियां जो दंडादेश में गिनी नहीं जायेंगी.- निम्नलिखित मामलों में, स्वच्छन्द कालावधि के रूप में जानी जाने वाली, कारागार के बाहर बन्दियों (cid:217)वारा बिताई हई ु कालावधि, दंडादेश में नहीं गिनी जायेगी, अर्थात ्:-

(क) निकल भागना;

(ख) जमानत;

208 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) आपात छ(cid:210)टी या आपात पैरोल को सम्मिलित करते हए दंडादेश की निलंबित कालावधि;

(घ) अस्थायी छोड़े जाने का अनधिकत विस्तारणृ ; (ङ) दंडादेश की निलंबित कालावधि, यदि न्यायालय (cid:217)वारा निदेशित की गई है;

(च) सशर्त छोड़े जाने की शर्त का अतिक्रमण; और

(छ) प्रत्यर्पण।

428. बन्दी के अंतरण के मामले में दंडादेश का भोगा जाना.- बन्दी अंतरण अधिनियम, 1950 (1950 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 29) के उपबंधों के अधीन एक राज्य के कारागार से दसरे राज्यू के कारागार में हटाये गये सि(cid:217)धदोष बन्दियों के संबंध में यह समझा जायेगा कि वे उस कारागार में, जहां वे अंतरित किये गये हैं, उनके मल दंडादेश को ू भोग रहे हैं।

429. छोडे गये बन्दी का पनु :प्रवेश.- (1) जब सशर्त रूप से छोड़ा गया बन्दी उस निबंधन के अतिलंघन के कारण, जिस पर वह छोड़ा गया था, कारागार में पनु :प्रविष्ट किया जाता है, उसके दंडादेश का अपर्यवसित भाग सरकारी आदेशों की प्राप्ति के लिए प्रतीक्षा के बिना कार्यान्वित किया जायेगा, जो ऐसे बन्दी के प्रवेश पर कारागार निदेशालय के प्रमख के ु माध्यम से तत्काल लाग किया जाएगा।ू

(2) ऐसे मामलों में, दंडादेश का अपर्यवसित भाग बन्दी के कारागार में पनु :प्रवेश की तारीख से प्रारंभ होना समझा जायेगा।

430. एक से अधिक ''स्वच्छन्द'' कालावधि रखने वाले मामले.- (1) उन मामलों में जहां एक से अधिक ''स्वच्छन्द'' कालावधियां हैं, समस्त ऐसी कालावधियों का संकलित योग दिनों के निबंधनों के अनसार लिखा जाएगा और मख्यु

ु दंडादेश में जोड़ा जाएगा।

(2) दोषसि(िcid:217)ध की तारीख से गिनते हएु , तारीख जिस पर इन कालावधियों का कल व्यु पगत होता है, दंडादेश की समाप्ति की तारीख होगी।

स्पष्टीकरण : स्वच्छन्द कालावधि से बन्दी (cid:217)वारा जेल के बाहर बितायी हई कालावधि ु

अभिप्रेत है।

431. छोड़े जाने की तारीख पर न्यायालय में उपस्थित होना.- (1) सि(cid:217)धदोष के मामले में जिसे उसके छोड़े जाने के दिन, उस मामले के लिए जिसके लिए वह जमानत पर नहीं है, न्यायालय में उपस्थित होना हो, उसे प्रात: छोड़े गये बन्दी के रूप में माना जायेगा और एक विचाराधीन बन्दी के रूप में न्यायालय भेजा जाएगा।

(2) यदि बन्दी अतिरिक्त कारावास के लिए दंडित किया जाता है, तो उस तारीख पर, दंडादेश की गणना ठीक अगले दिन से की जाएगी।

432. जब कोई विदेशी कारावास की किसी अवधि के लिए दंडादिष्ट किया जाता है.- यदि किसी विदेशी को, जिसे विदेशी अधिनियम, 1946 (1946 का के न्द्रीय अधिनियम सं.

31) की धारा 4 के अधीन गिरफ्तार और निरु(cid:217)ध किया गया है, कारावास की अवधि भोगनीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 209 हो, तो उक्त अधिनियम के अधीन निरोध की कालावधि, उस कारावास के किसी दंड की कालावधि के अनन्य और अतिरिक्त होगी जो उस पर अधिरोपित किया जा सके गा।

433. बन्दी की पनु :गिरफ्तारी और पनु :पकड़े जाने पर छोड़े जाने की तारीख की गणना.- बन्दी जो, दोषसि(िcid:217)ध के पश्चात जमानत पर छोड़ा गया है कित तत्प

ु श्चात उसे ् दंडादेश भोगने के लिए कारागार को पनु :सपर्द किया जाता है या जो निकल भागा है और तत्पश्चात पन् ु :पकड़ा जाता है, के छोड़े जाने की तारीख की गणना करने में निम्नलिखित रीति अपनाई जाएगी, अर्थात ्:-

(क) दिनों की संख्या जिसके लिए बन्दी जमानत पर था, या स्वच्छन्द था, छोड़े जाने और पनु :गिरफ्तारी, या निकल भागने और पनु :पकड़े जाने के दिन को छोड़कर दंडादेश की अवधि में जोड़ी जाएगी, और

(ख) दोषसि(िcid:217)ध की तारीख से गणना करते हएु , जिस पर इन कालावधियों का योग व्यपगत होता है, दंडादेश की समाप्ति की तारीख होगी।

स्पष्टीकरण : 1 जनवरी को एक मास के कारावास से दंडादिष्ट बन्दी 15 जनवरी को निकल भागता है और 16 को पनु :पकड़ा जाता है तो 31 जनवरी पर मल वारंट पर ू छोड़े जाने का हकदार होगा।

434. जमानत के दौरान कारित अपराध.- यदि एक सि(cid:217)धदोष बन्दी, जिसे जमानत पर छोड़ा गया है, उसकी जमानत कालावधि के दौरान कोई अपराध कारित करता है और उसे कारागार में पनु :प्रविष्ट किया जाता है, स्वच्छन्द कालावधि की गणना उसके पनु :प्रवेश की तारीख तक गिनी जाएगी।

435. जर्माने के संदाय में व्यु

तिक्रम पर कारावास के दंडादेश की गणना.- जर्माने के ु

संदाय में व्यतिक्रम पर अधिनिर्णीत किये जाने वाले दंडादेशों की गणना निम्नानसार की ु

जाएगी:-

(क) जर्मानों के संदाय में व्यतिक्रम पर अधिरोपित दंडादेश साथ -साथ नहीं चल सकें गे;

तिक्रम पर कारावास से दंडादिष्ट कोई बन्दी, (ख) यदि जर्माने के संदाय में व्यु

ऐसा कारावास भोगने के दौरान दसरा दंडादेश प्राप्त करता है , (िcid:217)वतीय दंडादेश उस तारीख से प्रारंभ होगा जिस पर प्रथम दंडादेश समाप्त होता है या यदि जर्माना संदत्त कर दिया जाता है तो संदाय की तारीख से प्रारंभ होगा।

स्पष्टीकरण : एक बन्दी 31 जनवरी को 300 रु. का जर्माना संदत्त करने के लिए या उसके व्यतिक्रम में दो मास के कठोर कारावास के लिए दंडादिष्ट किया जाता है और उसी वर्ष 12 फरवरी को वह दसरे मामले में चार मास के अतिरिक्त कारावास के लिए दंडादिष्ट किया जाता है। 28 फरवरी को पर्ण जर्माना संदत्त कर दिया ू

जाता है। चार मास के कारावास का दंडादेश 28 फरवरी से प्रारंभ होगा न कि 31 जनवरी से।

210 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) यदि जर्माने के संदाय में व्यतिक्रम पर कारावास की अवधि से दंडादिष्ट बन्दी , या तो उसी समय पर या तत्पश्चात ्, कारावास की दसरी अवधि या अवधियों ू के लिए दंडादिष्ट किया जाता है तो प्रारंभिक दंडादेश, कारावास के समस्त पर्ण ू दंडादेशों की समाप्ति तक प्रास्थगन में रखा जाएगा और यह उस कालावधि से पर्व या जब तक कि कारावास जारी रहता है , जर्माने के संपर्ण या भागतु

ू :

संदाय पर पर्णतू : या भागत: बातिल किया जायेगा।

स्पष्टीकरण : यह नियम उस बन्दी का मामला अंतर्वलित करता है जिसके कारावास का प्रथम दंडादेश के वल जर्माने के ु संदाय में व्यतिक्रम का है। तत्पश्चात ् अधिरोपित कारावास का मख्यु दंडादेश, प्रथम दंडादेश की तारीख से गिना

तिक्रम पर कारावास अंत में प्रभावी होगा, जायेगा और जब तक कि कारावास उस मख्यु दंडादेश से भिन्न अभिधान का ना हो, जर्माने के संदाय में व्यु

य(cid:217)यपि जब मख्य दंडादेश अधिनिर्णीत किया गया तब इसका भाग पहले से ही भोगा जा चका है। ऐसे मामले में जर्माने के संदाय में व्य तिक्रम पर कारावास मख्यु दंडादेश के प्रभावी होने से पर्व पर्ण किया जाएगा।ू

तिक्रम पर अधिरोपित किया जाता है, (घ) कारावास, जो जर्माने के संदाय में व्यु

जब भी वह जर्माना या तो संदत्त कर दिया जाता है या विधि की प्रक्रिया (cid:217)वारा उदगहीत कर लिया जाता है , समाप्त हो जाएगा।

(ङ) यदि कोई बन्दी कारावास के लिए दंडादिष्ट किया जाता है, जिसका संपर्ण या ू

तिक्रम पर है, और यदि जर्मा कोई भाग किसी जर्माने के संदाय में व्यु ु ना या इसका भाग तत्काल संदत्त नहीं किया जाता है, तो छोड़े जाने की तारीखें संगणित की जायेंगी और बन्दी के वारंट और वत्त पत्र और रजिस्टृ रों में ऐसे प्रविष्ट की जायेंगी कि जर्माने के संदाय और असंदाय के सा

ु थ, दोनों सचित ू हों।

436. जर्माने के संदाय की सचना

ू .- (1) जब बन्दियों पर अधिरोपित जर्माने न्याु यालय (cid:217)वारा वसल कर लिये जाते हैं , तो इसकी सचना अधीक्षक (cid:217)वारा न्या

ू यालय से प्राप्त की जाएगी।

(2) यदि सि(cid:217)धदोष अन्यत्र अंतरित किया गया है, तो अधीक्षक विशेष संदेशवाहक या स्पीड पोस्ट (cid:217)वारा ऐसी सचना उस जेल को

ू अग्रेषित करेगा जिसमें सि(cid:217)धदोष अंतरित किया गया है।

(3) जर्माने से संबंधिु त समस्त सचनायें अभिस्वीू कत की जायेंगी।ृ

(4) जर्माने से संबंधित किसी ऐसी सचना पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जिस पर न्यायालय की मद्रा नहीं हो और ऐसी सचना समचित अधिप्रमाणीकरण के

ु लिए और न्यायालय की मद्रा लगाये जाने के लिए न्या

ु यालय को लौटाई जायेगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 211

437. बन्दियों को सचित किया जाना

,

ू .- (1) जब जर्माना संदत्त कर दिया जाता है संबंधित बन्दी को सचित किया जाएगा और संदाय को रजिस्टर में , वारंट पर और बन्दी के वत्त पत्र पर सम्यृ क रू् प से अंकित किया जाएगा।

(2) रजिस्टर और वारंटों और वत्त पत्रों में प्रविष्टियां अधीक्षक या जेलर (cid:217)वारा हस्ता क्षरित की जायेंगी।

438. प्रक्रिया जब दंडादेश निलंबित किया जाता है.- (1) जब अपील न्यायालय निदेश देता है कि दंडादेश या आदेश, जिसके विरु(cid:217)ध अपील की गयी है, का निष्पादन निलंबित किया जाये, अपीलार्थी, यदि ऐसे न्यायालयों के उत्तरभावी आदेशों के लंबित रहते हए कारागार ु में निरु(cid:217)ध है, के साथ सभी बातों में विचाराधीन बन्दी के रूप में व्यवहार किया जायेगा।

(2) यदि अपीलार्थी अंततोगत्वा कारावास या आजीवन कारावास के लिए दंडादिष्ट किया जाता है, तो वह कालावधि, जिसके दौरान मल दंडादेश निलंबित था ,-

(क) यदि उस समय पारित किया गया, जब बन्दी कारागार में था, सम्मिलित की जायेगी, और

(ख) यदि तब पारित किया गया जब बन्दी स्वच्छन्द था, अवधि की गणना करने में जिसके लिए वह अपील न्यायालय (cid:217)वारा दंडादिष्ट किया गया था, अपवर्जित किया जायेगा।

पश्चात दंडादेश पारित करता है

439. जब पनु :विचारण का आदेश किया जाता है.- जब न्यायालय पनु :विचारण के , या अपील पर मल दंडादेश उलट दिया जाता है और पनु :विचारण (नये विचारण) का आदेश किया जाता है, तब पर्व दंडादे

ू श या उसका भाग, जो कि नये विचारण से पर्व बन्दीू भोग चका ु है, जब तक कि विनिर्दिष्ट रूप से अन्यथा निदिष्ट , उस कालावधि को न किया जाये, नये विचारण के पश्चात अधिरोपित दंडादेश के लेखे

छोड़कर जिसके दौरान बन्दी स्वच्छन्द था, भी संगणित किया जायेगा।

.- उन समस्त मामलों में जिनमें दंडादेश या 440. पृथक वारंट का जारी किया जाना

आदेश उपांतरित किया या उलट दिया जाता है, चाहे अपील हो या पनरीक्षणु , प्रत्येक बन्दी के बारे में, जिसका दंडादेश उपांतरित या उलट दिया गया है, पथक वारंट जारी किया जायेगा।

441. प्रक्रिया जब कोई दंडादेश पष्ट किया जाता है .- (1) जब उच्च न्यायालय से

, भिन्न अपील न्यायालय (cid:217)वारा अपील नामंजर की जाती है

ू , या दंडादेश पष्ट किया जाता है तो उस आशय की सचना ऐसे अपील न्या

ू यालय (cid:217)वारा कारागार के प्रभारी अधिकारी को भेजी जायेगी और ऐसा आदेश अभिलेख के लिए निचले न्यायालय को भी संसचित किया जाएगा।ू

(2) जब किसी बन्दी (cid:217)वारा अपील या पनरीक्षण आवेदन की उच्च न्या

की सचना उस न्यायालय को दी जाती है जिसके (cid:217)वारा ऐसा बन्दी

ु यालय (cid:217)वारा नामंजरी ू सि(cid:217)धदोष किया गया था, ऐसा न्यायालय ऐसे निर्णय की सचना तत्काल बन्दी

ू को दिलवायेगा।

(3) सेशन न्यायालय (cid:217)वारा मत्य के दंडादेश की पष्टि के लिए उच्च न्या

ु यालय को निर्दिष्ट मामलों में, उच्च न्यायालय अपने आदेश की प्रति सेशन न्यायालय को भेजेगा जो तब कारागार के प्रभारी अधिकारी को वारंट जारी करेगा।

212 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

442. बन्दी को उसकी अपील या आवेदन के परिणाम के बारे में सचनाू .- किसी वारंट या आदेश या सचना की प्राप्ति के समस्त मामलों में अधीक्षक पत्र (cid:217)वारा अभिस्वीकति देगा और बन्दी को उसकी अपील या आवेदन के परिणाम बाबत सचित करेगा।ू

443. अपील पर उपांतरित दंडादेश की गणना.- जब अपील न्यायालय धारा को परिवर्तित किये बिना निचले न्यायालय (cid:217)वारा पारित दंडादेश को मात्र उपांतरित करता है, या जब अपील न्यायालय दोषसि(िcid:217)ध धारा या दंड धारा या अन्यथा परिवर्तन करने के (cid:217)वारा नया दंडादेश पारित करता है, तो अंततोगत्वा पारित दंडादेश मल दंडादेश के अधीन कारावास ू के प्रथम दिन, जब तक विशेष रूप से अन्यथा निर्दिष्ट न किया जाये, से गिना जायेगा।

444. दो दंडादेशों में से प्रथम को बातिल किये जाने का प्रभाव.- जब कोई बन्दी एक विचारण पर दो पथक वारंटों के अधीन कारागार को सपर्द किया जाता है , और एक वारंट में का दंडादेश दसरे वाू रंट में के दंडादेश के अवसान पर प्रभावी होना है, (cid:217)व ◌ितीय दंडादेश की तारीख अपील में प्रथम दंडादेश के अपास्त होने की दशा में, उस तारीख से प्रभावी होना उपधारित की जाएगी जिस पर वह प्रथम या मल दंडादेश के अधीन कारागार को सपर्द किया गया था।

445. दो पथक दंडादे

् शों का क्रमवार चलना.- जब पथक विचारण में पथक दंडादेश पारित किये गये हैं और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 427 के अधीन दंडादेश क्रमवर्ती रूप से चल रहे हैं, (िcid:217)वतीय दंडादेश का प्रवर्तन, प्रथम दंडादेश के अपील पर अपास्त होने की दशा में (िcid:217)वतीय मामले में दोषसि(िcid:217)ध की तारीख से प्रारंभ होगा।

दृष्टांत:

(i) कोई बन्दी 1 जलाई को दो अपराधों के लिए छह मास के कारावास की दो कालावधियों के लिए दंडादिष्ट किया जाता है। अपील पर प्रथम दंडादेश 31 अगस्त को अभिखंडित किया जाता है तो बन्दी 31 दिसम्बर को छोड़े जाने का हकदार होगा।

(ii) कोई बन्दी 1 जलाई को छह मास के कारावास से और 1 अगस्त को छह मास के कारावास की दसरी कालावधि के लिए दंडादिष्ट किया जाता है। अपील पर प्रथम दंडादेश 31 अगस्त को अभिखंडित किया जाता है। बन्दी 31 जनवरी को छोड़े जाने का हकदार होगा।

446. दंडादेश को बातिल करने और पनु :विचारण के अपील न्यायालय के आदेश का परिणाम.- (1) जब अपील न्यायालय कोई दंडादेश बातिल करता है और निदेश देता है कि बन्दी का पनु :विचारण किया जाये, और बन्दी को जमानत पर छोड़े जाने के लिए वारंट प्राप्त नहीं होता है, बन्दी को विचाराधीन यार्ड प्रतिप्रेषित किया जायेगा (जब तक कि वह कोई दसरा ू दंडादेश नहीं भोग रहा हो) और अधीक्षक विचारण लंबित रहते हए उसे अभिरक्षा के लिए ु

सपर्द करने वाले न्या

ु यालय को वारंट के लिए आवेदन करेगा यदि ऐसा वारंट उसी समय नहीं दिया जाता है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 213

(2) ऐसे वारंट में वह न्यायालय जिसके (cid:217)वारा बन्दी का विचारण किया जाना है और वह तारीख जिस पर उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तत किया जाना है , उपवर्णित होगी।

अध्याय 17

कारागार अनशासन और दैनिकचर्या

447. कारागार अनशासनु .- कारागार अनशासन कोु ,-

(क) मार्गदर्शन और परामर्श सहित, अंत:वासियों की कठिन परिस्थितियों की

ू , जो उनके लिए संवेगात्मक अवलंब सहानभतिपर्ण और धैर्यपर्ण समझु आधार के रूप में कार्य करेगी;

(ख) परामर्श उनके मानस में नैराश्य के विरु(cid:217)ध निवारक उपाय के रूप में भी कार्य करेगा;

(ग) प्रोत्साहनों और परस्कारों की प्रणाली परु

ु :स्थापित करना जो सधार के पथ पर ु

तीव्र प्रगति कर रहे योग्य अंत:वासियों (cid:217)वारा स्वीकार की जायेगी; और (घ) अधीक्षक और अन्य कारागार कार्मिकों की ओर से अनकरणीय आचरण करके बन्दियों को स्वच्छन्द समाज में लौटने और इसे भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर स्थान बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कार्य किया जायेगा।

(cid:217)वारा समर्थन किया जायेगा और मानवीय चेहरा दिया जायेगा।

448. कारागार अनशासन का विस्ता

ु र.- कारागार अनशासन संस्थाु गत जीवन के

,-

समस्त पहलओं को सम्मिलित करेगा जैसे किु

(क) अच्छे स्वास्थ्य का अनशासनु ; (ख) कार्य का अनुशासन; (ग) समचित व्यु वहार का अनशासनु ; (घ) शिक्षा और अधिगम का अनशासनु ; और (ङ) जीवन के बेहतर पहलओं में अभिरुचि का अनशासन। ु

449. दैनिक चर्या.- (1) बैरकों के बाहर बन्दियों की गतिविधियों को सस्पु ष्टत: देखने के लिए बैरकें और कोठरी परे वर्ष

ू सवेरे यथाशक्य शीघ्र खोली जायेंगी।

(2) बैरकों को खोलने से बीस मिनट पर्व

ू , जगाने की घंटी या घड़ियाल बजाया जायेगा और सि(cid:217)धदोष ओवरसियर और चौकीदार तब बन्दियों को जगायेंगे और उनसे उनके बिछौनों को झड़वायेंगे और तरीके से तह करवायेंगे।

(3) बन्दी (प्रत्येक अपना बिछौना अपनी सोने की बर्थ पर व्यवस्थित करके ) तब गेट पर अग्र जोड़े सहित बैरक के के न्द्र में नीचे दोहरी कतार में बैठें गे।

(4) सि(cid:217)धदोष अधिकारी अभिनिश्चित करेंगे कि क्या कोई बन्दी बीमार है या चिकित्सा अधीनस्थ से मिलने का इच्छक है।ु

(5) ये सब कतार के पष्ठ भाग पर रखे जायेंगे और जे

ृ लर, उप-जेलर, मख्यु वार्डर और वार्डरों के आगमन पर, वार्ड खोला जाएगा और बन्दियों को जोड़ियों में बाहर निकाला जायेगा,214 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) तलाशी ली जायेगी, गिना जायेगा और हवालात रिपोर्ट पस्तक में प्रविष्टियों के साथ उनके संख्यांकों को जांचा जाएगा।

450. बीमार बन्दियों का उपचार.- (1) बैरके खोले जाने और बन्दियों की गणना के पश्चात ्, उन्हें प्रसाधनों के लिए ले जाया जायेगा और वहां से कम दरी पर लाइन में बैठाया ू जायेगा, इस दौरान जो ऐसा करने के इच्छु क हों उन्हें बारी-बारी से शौचालय जाना अनज्ञात ु किया जाएगा।

(2) इस परेड के दौरान वे बन्दी, जो बीमार हैं, शेष से लगभग 1 मीटर की दरी पर बैठाये ू जायेंगे और चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा निरीक्षित किये जायेंगे, जो देखेगा कि वे ऐसा उपचार प्राप्त करें जैसा आवश्यक है; कित यदि कोई बन्दी

ु गंभीर रूप से बीमार प्रतीत होता है तो उसे तत्काल अस्पताल भेजा जायेगा।

451. प्रसाधन परेड.- (1) समस्त प्रसाधन परेडों पर प्रत्येक बन्दी को प्रसाधन में कम से कम पांच मिनट और अधिक, यदि आत्यंतिक रूप से आवश्यक हो, अनज्ञात किया जाएगा। ु

(2) प्रत्येक प्रसाधन परेड आधा घंटा से अधिक नहीं होगी और इसके लिए प्रत्येक शौचालय का उपयोग करने के लिए बन्दियों की संख्या के 1:6 के अनपात में कक्ष अंतर्विष्ट किये ु

जायेंगे और प्रत्येक शौचालय से संलग्न धलाई स्थाु न का प्रत्येक चार शौचालय सीटों के लिए एक कक्ष होगा।

(3) प्रसाधन परेड प्रभारी वार्डर (cid:217)वारा सावधानीपर्वक विनियमित की जा

ू येगी जो एक बार में उतने ही बन्दियों को भीतर जाना अनज्ञात करेगा जितने रिक्तु कक्ष हैं।

452. बन्दियों के लिए अन्य दैनिक कार्य.- (1) दैनिक निवत्ति कार्य में भाग लेने के ृ

पश्चात समस्त् बन्दी प्रार्थना सभा में भाग लेंगे।

(2) प्रार्थना सभा पर्ण होने परू , बन्दियों को उनके दांत साफ करने के प्रयोजन के लिए स्नान मंच को प्रगमित होंगे और तब वे अपना मंह और हाथ धोयेंगे।ु

(3) धलाई परेड के पश्चा

ु त ्, प्रात:काल का नाश्ता वितरित किया जायेगा और नाश्ते के पर्ण ू होने पर बन्दियों को अपने हाथ और भोजन करने के पात्र धोना अनज्ञात किया जायेगा।ु (4) तब वे गैंग बक्सु के अनसार उनके कार्य दलों में व्यु वस्थित किये जायेंगे और उसी समय जेलर उप-जेलरों के साथ, यदि आवश्यक हो, दलों के किसी परिवर्तन की व्यवस्था करेगा जो आवश्यक हो, वह बन्दियों के वत्त पत्रों में कार्य के किसी

ृ परिवर्तन का आदेश नहीं कर सके गा, या उसके आ(cid:217)यक्षर के अधीन ऐसी प्रविष्टियां कर सके गा और गैंग बक्सु में ऐसे परिवर्तनों के प्रविष्ट होने पर और यह किये जाने के पश्चात रोल मांगे जायेंगे

् , और दलों को उनके कार्य स्थानों को प्रगमित किया जायेगा।

453. समादेश या सिगनल का उपयोग.- (1) जब भी बन्दियों को जेल के एक भाग से दसरे को प्रगमित किया जाता है या दलों में बैठे या खड़े हों , सिवाय जब वास्तविक रूप से भोजन ले रहे हों या काम पर हों या जब निरीक्षण के लिए परेड में हो, वे जोड़◌ो◌ं की कतारों में व्यवस्थित किये जायेंगे और समादेश या सिगनल की आज्ञा पर खड़े होंगे, आगेभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 215 बढ़ेंगे, रुकें गे या नीचे बैठें गे। इसमें इसके पश्चात उपबंधित नियमों में यथा वर्णित परेडों को कार्यान्वित करने में इस री ति का अनसरण किया जायेगा। ु

(2) इन परेडों पर सिगनल प्राय: घंटी या घंटे की आवाज होंगे।

454. समादेश और सिगनल की रीति.- (1) जब कभी जेलर या उससे वरिष्ठ रैंक का कोई अधिकारी बन्दियों के दल का दौरा या निरीक्षण करता है, बन्दी कार्य करना छोड़ देंगे और खड़े हो जायेंगे और यदि प्रगमन कर रहे हों, तो समादेश की आज्ञा पर स्थिर खड़े हो जायेंगे, जिसका समादेश (cid:217)वारा संक्षिप्त अंतराल के पश्चात पालन किया जायेगा। ्

(2) समादेश, दल के प्रभारी अधिकारी (cid:217)वारा दिया जायेगा।

(3) बन्दी, जब किसी जेल अधिकारी या आगंतक (cid:217)वारा संबोधित किये जा रहे हों या संबोधित किये गये हों, हाथों को बगल से नीचे लटकाये हए सावधान खड़े हों

ु गे।

(4) यदि बन्दी का वत्त पत्र परीक्षित किया जाना अपेक्षित हो , तो यह बन्दी के बांये हाथ में खला रखा जायेगा।ु

455. वर्क शेड और इसका (cid:217)वार.- (1) जहां वर्क शेड परिब(cid:217)ध है और (cid:217)वार के साथ उपलब्ध करवायी गयी है, वहां बन्दियों के प्रवेश किये जाने के पश्चात ् (cid:217)वार बंद रखा जायेगा और (cid:217)वार की चाबी वर्क शेड या यार्ड, जिसमें वर्क शेड स्थित है, के प्रभारी अधिकारी (cid:217)वारा रखी जायेगी।

(2) प्रभारी अधिकारी उत्तरदायी ठहराया जायेगा कि कोई भी बन्दी बिना अनज्ञा या समचित ु

कारण के वर्क शेड में या से बाहर नहीं जाता है।

456. वर्क शेड में प्रसाधन का उपयोग.- (1) प्रत्येक वर्क शेड या अन्य स्थान जहां बन्दी कार्य करते हैं वहां प्रसाधन रखा जायेगा और नियत समय के अतिरिक्त प्रसाधन का बन्दियों (cid:217)वारा उपयोग बाबत चिकित्सा् अधीनस्थ को रिपोर्ट किया जायेगा।

(2) नियत समय के अतिरिक्त बारंबारता से प्रसाधन को जा रहा बन्दी, ऐसे भोजन के अध्यधीन रहते हए जैसा चिकित्सा

ु अधिकारी ऐसे मामलों के लिए निदेश करे, या तो चिकित्सा अवलोकन के अधीन पथक्कृ रण वार्ड या कोठरी में रखा जायेगा या यदि यह विश्वास करने का पर्याप्त कारण है कि बन्दी प्रसाधन अनावश्यक रूप से गया है, तो यह अनियमितता जेल अपराध के रूप में समझी जायेगी।

(3) नये सि(cid:217)धदोष बन्दियों के मामले में, इस नियम के प्रवर्तन में कछ छट अनज्ञात की ु

जायेगी।

457. मध्याह्न परेडों के लिए घंटी बजाना और भोजन लेने के लिए प्रक्रिया.- (1) समस्त दल (अंतर्वर्ती और बहिर्वर्ती दोनों) कार्य रोकें गे और प्रत्येक बन्दी अपने वस्त्र, कप और प्लेट को उठायेगा और अपने दल में आयेगा।

(2) बन्दी तब स्नान मंच के निकट प्रगमित किये जायेंगे, जहां प्रत्येक बन्दी स्वयं को अपने वस्त्रों से निर्वस्त्र करेगा, अपने स्नान वस्त्र पहनेगा, अपना कप उठायेगा और वह कतार का बांये हाथ या दांए हाथ का व्यक्ति होने के अनसारु अपने वस्त्रों को अपने दाएं या बांये रखते हए प्रत्ये

ु क बन्दी, स्वयं को इस प्रकार स्नान के लिए तैयार करेगा;

216 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) तब बन्दी स्वयं को सखायेंगे

ु , अपने वस्त्र पहनेंगे और भोजन मंच के लिए प्रगमित

् , प्रत्येक कतार को एक मंच पर करवाये जायेंगे जहां वे पनु :दो कतारों में पथक हो जायेंगे

बैठाया जायेगा और मंच पर उनकी प्लेटें जमा की जायेंगी।

(4) तब रसोइये प्रत्येक प्लेट में भोजन की समचित मात्रा वितरित करेंगे और बन्दि

ु यों को उनके भोजन से मक्खियों को दर रखने के लिए अनदिष्ट किया जायेगा।

ु

(5) यदि कोई बन्दी भोजन की मात्रा या गणवत्ता की शिकायत करता है , उसे खड़े होने, अपना भोजन उठाने और स्वयं को दसरों से पथक करने को आदेशित किया जायेगा , तब उसे अपना भोजन खाने के लिए आदेशित किया जाएगा।

(6) कत्र्तव्यारूढ़ अधिकारी शिकायत के कारण की तरंत जांच करेगाु ; यदि यह कम आबंटन के लिए है, तो वह राशन को तलवायेगा और कमी , यदि कोई आपर्त की गयी है

ू , और व्यतिक्रमी रसोइये की रिपोर्ट जेलर को करेगा, किन्तु यदि शिकायत खराब गणवत्ता या खराब पका

ु ने की है, तो वह मामले की तत्काल रिपोर्ट जेलर को करेगा जो भोजन की जांच करेगा और शिकायत के संबंध में ऐसी आगे जांच करेगा जैसी आवश्यक हो और बंदी के वत्त पत्र परृ , प्रथम अवसर पर परिस्थितियों की रिपोर्ट अधीक्षक को करेगा।

(7) अधीक्षक विनिश्चय करेगा कि शिकायत न्यायसम्मत है या नहीं और ऐसी कार्रवाई करेगा जैसी आवश्यक हो।

(8) मिथ्या और वि(cid:217)वेषपर्ण शिकायत करने वाला कोई बन्दी दंडित किया जायेगा और भोजन के संबंध में प्रत्येक शिकायत अधीक्षक को रिपोर्ट की जायेगी।

(9) जब बन्दी अपना भोजन लेते हैं तो वार्डर-गार्ड भोजन मंचों के चारों ओर खड़े होंगे और देखेंगे कि कोई भी बन्दी अपना भोजन अन्य को नहीं सौंपता है या अपने स्वयं के आस-पास स्त्रावित नहीं करता है।

; बन्दियों को उनका भोजन अच्छी तरह से (10) भोजन परेड में आतरता नहीं करनी चाहिएु

चबाने के लिए समय अनज्ञात किया जाु ना चाहिए और जब भोजन समाप्त हो जाता है तो बन्दी दोहरी कतारों में एक साथ खड़े हो जायेंगे और स्नान मंच के लिए प्रगमित होंगे, जिसके अंत में दो टब रखे जायेंगे जिनमें परी वाले भोजन से चावल या चपातियों को पथक ृ करते हए प्रत्ये

ु क बन्दी, अपनी प्लेट में छोड़े गये किसी भोजन के कचरे को फें के गा।

(11) मंच पर वे अपनी प्लेटें और मंह धोयेंगे।ु

458. (िcid:217)वतीय प्रसाधन परेड और तत्पश्चात कार्य

् .- (1) इसके पश्चात ्, एक ओर प्रसाधन परेड रखी जायेगी, जैसी प्रात: रखी जाती है, कित गर्म मौसम और वर्षा के दौरान इस परेड के दौरान बन्दी धप के बजाय वार्डों में या शेड में बैठ सकें गे और एक ओवरसियर के प्रभार में प्रत्येक बैच को पर्ववर्ती की वापसी पर भेजते हएू

ु , बैचों में प्रसाधन के लिए ले जाये जायेंगे।

(2) इस परेड की पर्णता परू , वार्डर-गार्ड परिवर्तित किये जायेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 217

459. रसोइयों के स्नान और भोजन करने के लिए व्यवस्था.- (1) उन रसोइयों के

् यें की जायेंगी जो बन्दियों को भोजन परोसने स्नान और भोजन करने के लिए पथक व्यवस्थाृ

के लिए नियोजित होते हएु सामान्य परेडों में सम्मिलित नहीं हो सकते।

(2) अपराह्न में कार्य पनु :प्रारंभ करने के लिए जब घंटी या घड़ियाल बजाया जाता है तो दल पनु :जांचे जायेंगे और उनके कार्य-स्थलों को प्रगमित करवाये जायेंगे, कार्य करना तब तक जारी रखेंगे जब तक कार्य बंद करने के लिए सांय:काल घंटी नहीं बजती है।

460. सांय:काल के और आगे के कार्य.- (1) जब सांय:काल घंटी बजायी जाती है, जेल के भीतर और बाहर दोनों के समस्त कार्य, तरंत रोक दिये जायेंगे और वस्तु

ुएं, औजार और उपकरण संगहीत किये जायेंगे और ताले में बंद किये जायेंगे।

(2) बन्दी मध्याह्न परेडों से पर्व इसमें यथा उपबंधित समरूप विनियमों के अधीन खाने , धोने और प्रसाधन परेडों का पालन करेंगे सिवाय, जब तक कि विशिष्ट रूप से ऐसा करने के लिए आदेशित न हो, बन्दी पर्णतू : स्नान करने के बजाय के वल अपना चेहरा और हाथ धोयेंगे।

(3) आपवादिक मामलों में, जहां बन्दी आपवादिक रूप से मलिन कार्य पर रखे गये हैं, जैसे कि गर्म मौसम में मि(cid:210)टी ले जाना, इत्यादि तो उन्हें अधीक्षक से लिखित आदेश के (cid:217)वारा सांय:काल परेड पर पर्णतू : स्नान करना अनज्ञात किया जा सके गा। ु

(4) उप-नियम (3) में उल्लिखित परेडों के समाप्त होने के पश्चात दल् , यदि आवश्यक हो, तोड़ दिये जायेंगे और बन्दी शयन बैरकों में उनकी अवस्थ ◌िति के अनसार व्यु वस्थित किये जायेंगे; कित यथासंभवं ु वे बन्दी जो साथ-साथ कार्य करते हैं, साथ-साथ ही सोयेंगे।

(5) तब वे उनकी बैरकों के समक्ष एकत्र किये जायेंगे, सावधानीपर्वक तलाशी ली जायेगी , गिने जायेंगे और बंद किये जायेंगे।

(6) जेलर या उप-जेलर या हवालात का व्यक्तिश: अधीक्षण करेगा और पर्ववर्ती स्वू यं का समाधान करने के पश्चात कि रात्रि गार्ड के प्रभारी अधिकारी के पास बन्दि यों की सही संख्या उपस्थित है, हवालात रिपोर्ट पस्तक को हस्ताु क्षरित करेगा।

(7) हवालात रात्रि होने तक पर्ण होनी चाहिये। ू

(8) बंद करने से पर्ण बन्दिू यों के मध्य छोटे पैके टों में रात्रि भोजन वितरित किया जायेगा।

461. बाहर स्नान करने का प्रतिषेध.- जेल से बाहर दल में कार्य कर रहे समस्त बन्दी भीतर लाये जायेंगे और उनसे विभिन्न परेडों में भाग दिलवाया जायेगा और बन्दियों का जेल से बाहर स्नान और भोजन करना प्रतिषि(cid:217)ध है।

462. रात्रि पर प्रसाधन का उपयोग.- (1) प्रत्येक वार्ड के लिए प्रसाधन उपलब्ध करवाये जायेंगे और बन्दी शौच के लिए प्रसाधनों का उपयोग के वल तब करेंगे जब वास्तव में आवश्यक हो और एक नियम के रूप में, इसका उपयोग के वल आपात मामलों में किया जायेगा।

(2) रात्रि में बन्दियों (cid:217)वारा प्रसाधनों का उपयोग करने की रात्रि चौकीदार (cid:217)वारा जेलर को रिपोर्ट की जायेगी।

218 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) यदि ऐसा बन्दी बीमार पाया जाता है तो वह अन्य बन्दियों से अलग चिकित्सा संप्रेक्षण के अधीन रखा जायेगा।

463. साप्ताहिक बैठक में शिकायत.- (1) अधीक्षक सप्ताह में एक बार समस्त बन्दियों की परेड आयोजित करेगा, जब प्रत्येक बन्दी को उससे कोई निवेदन या शिकायत करने का अवसर होगा।

(2) बड़ी जेलों में जहां बन्दियों की बड़ी संख्या के कारण एक समय पर समस्त बन्दियों की परेड आयोजित कराना संभव नहीं हो, आधे बन्दी पहली सबह परेड कराये जा सकें गे और दसरे आधे अगली सबह।ू

ु

(3) शीत मास में, यह परेड धप में खले में करवाई जा सके गी , कित गर्म मौसम और वर्षा ं

के मौसम में बन्दी आश्रय के अधीन परेड करवाये जायेंगे।

(4) इस परेड में बन्दी, इसके स्वयं के खंड में प्रत्येक वर्ग, दलों (cid:217)वारा एकल रेखा में व्यवस्थ ◌ित किये जायेंगे।

(5) प्रत्येक बन्दी से पहले उचित क्रम में उसके बिछावन की चादर, दरी, कं बल और वस्त्र, कप, प्लेट और वत्त पत्र प्रसारित किये जायेंगे। ृ

(6) वजन घटने वाले समस्त बन्दी पथक्तृ : परेड कराये जायेंगे।

(7) अधीक्षक के आगमन पर, प्रत्येक बन्दी, समादेश की आवाज पर खड़ा होगा, वत्त पत्र ृ अपने बांये हाथ में उठा लेगा।

(8) अधीक्षक को शिकायत या निवेदन करने के इच्छु क बन्दी ऐसा करेंगे।

(9) तब अधीक्षक लाइन से निकलेगा, प्रत्येक वर्णन की शिकायतों और निवेदनों को सनेगा ु और उन पर आदेश पारित करेगा। वह स्वयं का समाधान करेगा,-

(क) कि समस्त बन्दियों को वत्त पत्र प्रदत्त किये गये हैं और लि◌ेखे गये हैं ;

(ख) कि वर्गीकरण नियम कार्यान्वित किये गये हैं;

(ग) कि बन्दियों को परिहार सम्यक रूप से अधिनिर्णीत और सं

् सचित किया गया ू

है और कि बन्दी जानने में समर्थ होंगे कि उन्होंने क्या परिहार अर्जित किया है;

(घ) कि बन्दियों के वजन सम्यक रूप से किये गये हैं और वत्त पत्रों पर लेखब(cid:217)ध किये गये हैं;

(ङ) कि श्रम के वितरण में उसके अधीनस्थों (cid:217)वारा वजन सावधानीपर्वक किये गये ू

हैं;

(च) कि बन्दियों को प्रदत्त वस्त्र और बिछौना विहित मापमान के अनसार हैं

ु , कि उन पर बन्दियों के संख्यांक चिह्नित हैं और साफ और व्यवस्थित हैं;

(छ) कि उनके कप और प्लेटें साफ और चमकदार हैं;

(ज) कि बन्दी व्यक्तिगत रूप से स्वच्छ हैं, और कि उनके बाल नियमों के अनसार ु रखे हए हैं

ु ; औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 219 (झ) किसी बीमार दिखने वाले बन्दी को बाहर निकालेगा जिसे वह समझता है कि संप्रेक्षण के अधीन रखा जाना चाहिये।

464. विवाद के निपटारे के लिए प्रक्रिया.- (1) अधीक्षक या जेलर को कोई अभ्यावेदन देने के लिए कोई भी बन्दी अपना कार्य या अपनी पंक्ति नहीं छोड़ेगा।

(2) जेलर, दिन में कम से कम एक बार, समस्त बन्दियों का दौरा करेगा और उन्हें किसी आपात मामले पर, जैसे कि अपील, हमला या बरा बर्ताव पर अभ्या

ु वेदन और शिकायत देने का अवसर देगा।

(3) अपील या ऐसी कोई शिकायत करने का इच्छक कोई बन्दीु , जेलर (cid:217)वारा अधीक्षक के समक्ष लाया जायेगा, कित लघ शिकायतें और याचिकायें , यथासंभव शीघ्रता से नियमानसार ु जेलर (cid:217)वारा निपटायी जायेंगी।

465. जेल अधिकारियों के आदेश का पालन.- बन्दी समस्त जेल अधिकारियों के आदेशों का पालन करेंगे। वे सि(cid:217)धदोष अधिकारियों के आदेशों का भी पालन करेंगे, जब तक कि आदेश जेल विनियमों के स्पष्टत: प्रतिकल न होंू , ऐसे मामले में बन्दी यथाशक्यशीघ्र मामले की रिपोर्ट जेलर को करेगा।

466. जेल में सामान्य व्यवहार.- (1) जब कार्य के संबंध में कोई जांच या अनदेश ु आवश्यक है या जब प्राधिकत संपर्क या आदेश ृ पहंचाये जा रहे होंु , को छोड़कर समस्त समय पर्ण शांति बनाये रखी जायेगी और जेल में समस्त जोर से बातचीत, गाना, या झगड़ा करना प्रतिषि(cid:217)ध होगा।

(2) किसी भी बन्दी को रात्रि चौकीदार और (cid:212)यटी पर उपस्थित वार्डर की पर्ण अनज्ञा अभिप्राप्त किये बिना, किसी भी प्रयोजन के लिए रात्रि में उसका बिस्तर छोड़ना अनज्ञात ु नहीं किया जायेगा न ही उसे किसी दसरे बन्दीू के बिस्तर पर बैठना या लेटना अनज्ञात ु किया जायेगा।

467. बन्दियों के कर्तव्य.- बन्दियों (cid:217)वारा निम्नलिखित कर्तव्यों का पालन किया जाना अपेक्षित है, अर्थात ्:-

(क) सर्वथा अपने दलों के साथ और जेल के उस भाग के भीतर रहना जिसमें वे परिरु(cid:217)ध किये गये हैं जब तक कि समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा इसे छोड़ने के लिए आदेशित न किया गया हो;

(ख) जब कार्य पर नहीं हो तो कतार में रहना और नियमित परेडों को सर्वथा क्रियान्वित करना;

(ग) उनको आबंटित कार्यों का स्वैच्छिक रूप से और सावधानीपर्वक पालन करना

ू , और प्रयोजन के लिए उनको न्यस्त सरकार की किसी संपत्त ◌ि की समचित ु देखभाल करना;

(घ) निकल भागने के किसी प्रयत्न या निकल भागने के लिए तैयारी या किसी बन्दी या जेल अधिकारी पर आक्रमण की किसी गप्त योजना या षु (cid:212)यंत्र की रिपोर्ट करना;

220 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ङ) जेल अधिकारियों पर किसी आक्रमण के मामले में उनकी सहायता करना;

(च) जेल के भीतर न तो जआ खेलनाु , न ही वस्तु विनिमय करना और न ही कोई खेल खेलना, न ही पशु, पक्षी या अन्य पालत रखनाू ;

(छ) ध(cid:296)पान नहीं करना और न ही कोई प्रतिषि(cid:217)ध वस्त ु प्राप्त करना, धारित करना या अंतरित करना; और

(ज) ऐसा कोई अन्य कत्यृ कारित नहीं करना जो दंड के लिए नियमों में यथाविनिर्दिष्ट कारागार अपराध का गठन करता है।

468. गार्ड का गोली चलाने का प्राधिकार.- (1) किसी बलवे या हिंसक विप्लव की दशा में, गार्ड बन्दियों पर गोली चलाने के लिए प्राधिकत हैं। ृ

(2) किसी जेल नियम या किसी विधिपर्ण आदेश की अवज्ञा के लिए अपराधी , अपराध और दंड से संबंधित अध्याय 18 में उपबंधित नियमों के अनसार दंड के अध्यु धीन होगा।

469. बीमार बन्दियों के लिए धोबी का नियोजन.- (1) समस्त बन्दी अधीक्षक की साप्ताहिक परेड के पर्ववर्ती दिन स्नाू न परेड पर अपने स्वयं के वस्त्र धोयेंगे।

(2) उन बीमार बन्दियों, जो अस्पताल में हैं, के वस्त्र और बिछौना धोने के लिए बन्दी धोबी भी नियोजित किया जा सके गा।

470. बाल काटने से संबंधित उपबंध.- (1) प्रत्येक सि(cid:217)धदोष परुु ष बन्दी के बाल के वल ऐसी सीमा तक और ऐसे समय पर काटे जायेंगे जैसा स्वास्थ्य और स्वच्छता को सनिश्चित करने के लिए आवश्यु क हो:

परंतु,-

(क) अधीक्षक, अपने विवेकाधिकार पर, इससे उन समस्त बन्दियों को छट देगा ू

जिन्हें यह उपबंध घणोत्पाृ दक या अपमानजनक होना न्यायोचित ठहराता है;

(ख) सिख अपने बाल न तो कटवायेंगे और न ही हटायेंगे और उनको कं घों का उपयोग अनज्ञात किया जायेगा ;

;

(ग) हिन्दू चटिया या शिखा रखेंगे (घ) मसलमानों की दाढियां छोड़ दी जायेंगी यदि वे चाहते हैं ;

(ङ) सि(cid:217)धदोष के बाल, उसकी सहमति के बिना, उस तारीख से 30 दिनों के भीतर जिसको वह छोड़े जाने का हकदार है, किसी भी समय नहीं काटे जायेंगे;

(च) यदि पीड़क जंतु, गंदगी या बीमारी के कारण चिकित्सा अधिकारी किसी बन्दी के के श कतरना या सिर शेव करना आवश्यक समझता है, तो यह उसके लिखित आदेश पर बन्दी के वत्त पत्र पर प्रविष्टृ किये जाने पर किया जाएगा; और

(छ) कोई बन्दी जो अपनी दाढी या मंछ कटवाने की वांछा करता है , तो उसे एक सप्ताह में दो बार, ऐसा करना अनज्ञात किया जाएगा। ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 221 (2) जेल में शेव करने के उपकरण उपलब्ध करवाने और समचित पर्यवेक्षण के अधीन कार्य ु

को सि(cid:217)धदोष क्षौरकारों (cid:217)वारा करवाये जाने की व्यवस्था की जायेगी।

(3) विचाराधीन बन्दियों को उनके बाल काटना या किसी भी रूप में उनकी व्यक्तिगत पहचान को परिवर्तित करने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा , जिससे कि उनको पहचानना कठिन हो जाए और इसे निवारित करने के लिए, कैं ची या ऐसे उपकरण वार्ड में अनज्ञात नहीं किये जायेंगे। ु

(4) बन्दी जिन्हें जेल में एक मास से अधिक हो गया है उस लंबाई तक अपने बाल कटवायेंगे जितनी तब थी जब वे कारागार में प्रविष्ट किये गये थे और उनकी मल पहचान ू

बनाये रखने के क्रम में यथाशक्य संभव इसी लंबाई तक रखे जायेंगे।

(5) जब चिकित्सा अधिकारी समझता है कि गंदगी, पीड़क जंत या बीमारी के आधार पर यह ु

आवश्यक है, विचाराधीन बन्दी के बाल काटे जायेंगे, कित उससे अधिक नहीं काटे जाएंगे जितने स्वास्थ्य और सफाई के प्रयोजन के लिए आवश्यक हों।

471. अवकाशों पर दैनिक कार्य का प्रेक्षण.- (1) जेल में, सफाई और जेल परिसर साफ करने को सम्मिलित करते हएु , चतर्थवर्ग कार्यालयों और अन्यु आवश्यक कार्य से अन्यथा, उन दिनों में जिनमें किसी भी बन्दी का कार्य करना अपेक्षित नहीं होगा, के सिवाय खित दैनिक कार्य रविवार और अन्य अवकाशों पर भी संप्रेक्षित किया पर्ववर्ती नियमों में उल्लिू

जायेगा।

(2) बन्दियों को रविवार को दलों में यार्डों में प्रात: दस बजे तक व्यायाम करना और सांयकालीन परेडों से पर्व एक घंटा के लिए पनू

ु :व्यायाम करना अनज्ञात किया जायेगा। ु (3) मध्यवर्ती समय में वे या तो उनके वार्डों में या यदि मौसम पर्याप्त ठं डा हो, तो यार्डों में कतारों में बैठें गे।

472. मासिक जनगणना.- प्रत्येक मास के अंतिम दिन, जेल में भगते गये समय के ु

अनसार उस दिन उपस्थित सि(cid:217)धदोषों की संख्या अभिनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक जेल की सि(cid:217)धदोष जनसंख्या की जनगणना की जायेगी।

473. किन्हीं वस्तुओं को लाने और हटाने के लिए निर्बंधन.- (1) इन नियमों में उपबंधित के सिवाय,-

(क) कोई भी व्यक्ति किसी कारागार में या से जेल की सीमाओं के बाहर से कोई प्रतिषि(cid:217)ध वस्तु प्रविष्ट या हटायेगा नहीं या चाहे किसी भी साधन (cid:217)वारा इसका प्रयत्न नहीं करेगा, या आपर्त या आपर्त का प्रयत्नू

ू नहीं करेगा;

(ख) कारागार का कोई भी अधिकारी ऐसी किसी वस्तु को किसी कारागार के भीतर प्रविष्ट करना या से हटाया जाना या किसी बन्दी (cid:217)वारा प्रतिधारित करना या कारागार की सीमाओं से बाहर के किसी बन्दी को प्रदत्त किया जाना अनज्ञात नहीं करेगाु ; और222 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ग) कोई भी व्यक्ति किसी बन्दी के साथ संपर्क या संपर्क का प्रयत्न नहीं करेगा।

(2) जो कोई इन अपराधों में से कोई कारित करता है या कारित करने का दष्प्रे

ु रण करता है, वह न्यायिक कार्रवाई का दायी होगा।

474. नाम और पता देने से इंकार करने पर व्यक्ति की गिरफ्तारी.- जब कोई व्यक्ति, कारागार के किसी अधिकारी की उपस्थि ति में, पर्ववर्ती नियमों में विनिर्दिष्टू कोई अपराध करता है और ऐसे अधिकारी की मांग पर अपना नाम और निवास बताने से इंकार करता है, या ऐसा नाम या निवास बताता है जिसे ऐसा अधिकारी मिथ्या होना जानता है, या विश्वास करने का कारण है कि वह मिथ्या है, ऐसा अधिकारी उसे गिरफ्तार कर सके गा और अनावश्यक विलंब के बिना निकटतम पलिस थाना के पलिस अधिकारी को सौंपा देगा।

ु 475. प्रतिषि(cid:217)ध कत्योंृ के लिए नोटिस.- अधीक्षक अधिनियम की धारा 42 के अधीन प्रतिषि(cid:217)ध कत्योंृ और उन्हें करने पर उपगत शास्तियां उपवर्णित करते हएु , कारागार के बाहर सहजदृश्य स्थान में हिन्दी और अंग्रेजी में एक नोटिस चिपकवायेगा।

476. प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुओं पर निर्बंधन.- अधिनियम की धारा 59 की उप-धारा (13) के अनसारु , नियम 477 में विनिर्दिष्ट वस्तुएं, अधिनियम की धारा 42 और धारा 45 की उप- धारा (12) के अर्थ में प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुऐं समझी जायेंगी, जब तक कि ऐसी वस्तु,-

(क) किसी जेल में प्रविष्ट की या से हटाई न जाये;

(ख) किसी बन्दी (cid:217)वारा प्राप्त, प्रतिधारित या अंतरित न की जाये; और

(ग) अधीक्षक या इस निमित्त उसके (cid:217)वारा सशक्त अन्य अधिकारी की अनज्ञा ु के साथ न हो।

477. प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुओं की सचीू .- निम्नलिखित वस्तुएं प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुएं हैं, अर्थात ्:-

ुएं जैसेकि तंबाकू , पाइप, चिलम इत्यादि;

(क) ऐल्कोहल या किसी भी किस्म का स्पिरिटयक्तु लिकर; (ख) ध(cid:296)पानू , चबाने या संघने की वस्तू (ग) गांजा, अफीम, ब्राउन शगरु , या कोई अन्य ड्रग या विषैली वस्तु; (घ) विषैली सामग्रियां, आग जलाने की सामग्रियां, या ऐसी वस्तुएं जो विद्रपीकरण कारित करें ;

(ङ) सोना-चांदी, धातु, धन, नकद राशि, मल्यू वान प्रतिभतियां

ू , आभषण या ू

किसी भी प्रकार के अलंकार और प्रत्येक विवरण के मल्यू की वस्तुएं;

ु कें , मद्रित सामग्रीु , पत्र या (च) अधीक्षक (cid:217)वारा प्राधिकत नहीं की गयी पस्तृ

किसी भी प्रकार की लेखन-सामग्रियां;

(छ) मोबाइल फोन, सिमकार्ड, चार्जर, अन्य इलैक्ट्रानिक उपस्कर (टेलीविजन के सिवाय), पेन ड्राइव या ऐसे अन्य उपस्कर;

(ज) वे वस्तुएं, जो कार्य के पालन में उपयोग के लिए जारी की गयी हैं, के सिवाय और वे के वल कार्य घंटों के दौरान और ऐसे स्थानों के सिवाय जैसेभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 223 जेल कार्य के लिए अपेक्षित हों, चाकू , आयधु , रस्सियां, डोरियां, बांस, सीढ़ ◌ियां, छड़ियां, निकल भागने को सकर बनाने वाली कोई वस्तु

ु या किसी किस्म के उपकरण; और

(झ) अन्य वस्तु जो जेल भंडारों और प्रदायों से बन्दियों के उपयोग के लिए जारी नहीं की गयी है।

478. अन्य प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुऐं.- किसी भी विवरण की प्रत्येक वस्तु निम्नलिखित मामलों में अधिनियम की धारा 42 और धारा 45 की उप-धारा (12) के अर्थ में प्रतिषि(cid:217)ध वस्तु समझी जाएगी:-

(क) कोई बन्दी यदि ऐसी वस्तु किसी जेल में प्रविष्ट करता है या हटाता है, ऐसे बन्दी (cid:217)वारा, प्राप्त प्रतिधारित या अंतरित की जाती है और ऐसी वस्तु,-

(i) जेल भंडारों या प्रदायों से उसके स्वयं के उपयोग के लिए समचित ु प्राधिकार के अधीन जारी नहीं की गयी है;

(ii) इस प्रकार जारी की गयी है, कितं ु जैसे प्राधिकत है

ृ , से भिन्न समय या स्थान पर प्रतिधारित या उपयोग की जाती; या

(iii) समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा , प्रविष्ट करने, हटाने या, यथास्थिति, उपयोग करने के लिए उसके कब्जे में नहीं रखी गई है।

(ख) जेल अधिकारी, यदि ऐसी वस्तु को किसी जेल में प्रविष्ट करता है या से हटाता है या किसी बन्दी को आपर्त करता है और ऐसी वस्तू

ु,-

(i) समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा उसके स्वु यं के उपयोग के लिए जारी या मंजर नहीं की गयी है ;

(ii) उसके स्वयं के पहनने के लिए आवश्यक वस्त्र सामग्री नहीं है; या (iii) जेल में प्रविष्ट करने या से हटाये जाने के लिए या किन्हीं बन्दियों को आपर्त किये जाने के प्रयोजन के लिए समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा उसके कब्जे में नहीं रखी गई है।

(ग) कोई आगंतक यदि ऐसी वस्तु

ु को किसी जेल में प्रविष्ट करता है या से हटाता है या किसी बन्दी को आपर्त करता है और ऐसी वस्तू

ु,-

(i) जेल के भीतर होते हए उसके स्वु यं के उपयोग के लिए अपेक्षित नहीं है और जेल में प्रवेश करने से पर्व उसके (cid:217)वारा घोषित नहीं ू

की गयी है, और जेल में प्रविष्ट करना या जेल से हटाया जाना या जिसका प्रतिधारण समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा अनज्ञात नहीं है

ु ;

(ii) प्राधिकार के साथ या के बिना प्रविष्ट की जाती है और जब तक कि वह जेल परिसर नहीं छोड़ देता है, उसके कब्जे में प्रतिधारित नहीं की जाती है; और224 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (iii) जेल के भीतर होने के समय कब्जे में आती है, और तत्पश्चात ् उसके (cid:217)वारा जेल से हटायी जाती है।

(घ) कोई अन्य व्यक्ति किसी बन्दी को चाहे जेल के भीतर या बाहर किसी जेल में प्रविष्ट कराने या से हटाने के लिए देता है।

अध्याय 18

अपराध और दंड

479. कारागार अपराध.- (1) बन्दियों के निम्न कत्यृ कारागार अपराधों का गठन करेंगे, अर्थात ्:-

(क) जानबझकर या उपेक्षापर्वकू

ू , किसी भी रूप में कारागार की सरक्षा को ु

संकटापन्न करना और इसमें किसी भी रूप में कारागार दीवारों, भवन, श्लाकाओं, तालों और चाबियों, लैम्पों या रोशनी या किसी अन्य सरक्षा ु और अभिरक्षा उपायों के साथ छे ड़छाड़ करना सम्मिलित होगा;

(ख) अन्य बन्दियों के मन में अनावश्यक शंका पैदा करने के लिए प्रकल्पित कोई कत्यृ करना;

(ग) स्वयं को कोई रुग्णता, क्षति या नि:शक्तता करने के आशय से कोई कत्यृ करना या करने का लोप करना;

(घ) किसी कारागार अपराध की रिपोर्ट करने का लोप करना;

(ङ) विधि और व्यवस्था और कारागार अनशासन भंग करना

ु ;

(च) किसी कारागार अपराध के किये जाने की, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत:, योजना बनाना, उकसाना और दष्प्रे

ु रण करना;

(छ) व्यवहार के मानकों, नियमों और विनियमों तथा विधिपर्ण अनदेशों और ू

आदेशों का पालन करने से इंकार करना, लोप करना;

(ज) कारागार अनशासन बनाये रखने में सहायता करने में विफल रहना ;

(झ) कारागार अधिकारी को सहायता देने में, जब ऐसा करने के लिए कहा जाये, विफल रहना;

(ञ) कारागार पदाधिकारियों के विरु(cid:217)ध, मिथ्या, वि(cid:217)वेषपर्ण और आधारहीन ू

लिखित या मौखिक शिकायतें करना;

(ट) किसी भी प्रकार का न्यूसेंस या रिष्टि कारित करना; (ठ) अन्य बन्दियों के साथ झगड़ा करना;

(ड) ध(cid:296)पान करनाू ; (ढ) दसरों पर आक्रमणू , हमला और क्षति करना; (ण) बलवा या विद्रोह में भाग लेना, अन्य बन्दियों को भी ऐसा करने को दष्प्रे

ु रित करना;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 225

(त) कारागार या विधिक अभिरक्षा से निकल भागना या निकल भागने का प्रयत्न करना या निकल भागने के किये गये प्रयत्नों के बारे में कारागार पदधारियों को रिपोर्ट करने में विफल रहना;

(थ) विनिषि(cid:217)ध वस्तुऐं कब्जे में रखना, छिपाना, तस्करी करना, तस्करी करने का प्रयत्न करना, अभिप्राप्त करना, देना या प्राप्त करना और वस्तु- विनिमय करना;

(द) विनिषि(cid:217)ध वस्तुओं के बारे में कारागार पदधारियों को रिपोर्ट करने में विफल रहना;

(ध) किसी सरकारी संपत्ति या किसी अन्य बन्दी की अन्य वस्तुएं और संपत्ति चोरी करना, नकसान करनाु या नष्ट करना या विद्रपणू , दर्विनियोग करनाु ; (न) कारागार संपत्ति या उपकरणों की किसी हानि, टटू -फट या क्षतिू , जिसे बन्दी ने संयोगवश किया हो, की तत्काल रिपोर्ट करने में विफल रहना;

(प) पहचान पत्रों, अभिलेखों या दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करना या विरूपित करना;

(फ) छ(cid:210)टी और आपात में छोड़े जाने की शर्तों का भंग करना ;

(ब) भोजन खाने से इंकार करना या भखू -हड़ताल पर जाना; (भ) उसे समनदेशित नहीं किये गये किसी भोजन को खाना या प्रभाजित करना या अन्य बन्दियों को समनदेशित किये गये भागों से लेना या जोड़ना ;

(म) साशय या उपेक्षापर्वक भोजन नष्ट करना या खराब करना या आदेशों के बिना इसे फें कना;

(य) भोजन या पेय में कछ प्रविष्ट करना जिससे इसके मानव उपभोग के लिए अरुचिकर, अस्वास्थ्यकर, या खतरनाक होने की संभावना हो;

(यक) अनधिकत रूप से पकाना

ृ ;

(यख) कैं टीन को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए विरचित नियमों और विनियमों का अतिक्रमण करना;

(यग) कैं टीन वस्तुओं का वस्तु विनिमय करना;

(यघ) कार्य में निष्क्रिय, लापरवाह या उपेक्षावान होना, कार्य करने से इंकार करना, कर्तव्यों से बचने के लिए रोगी बनना, कार्य कर रहे या बैरकों में अन्य बन्दियों को विघ्न डालना;

(यड.) कारागार अधिकारी की जानकारी या अनज्ञा के बिना किु सी वस्तु का विनिर्माण करना;

(यच) किसी अन्य बन्दी को आबंटित कार्य के किसी भाग को करना या स्वयं के कार्य के पालन में अन्य बन्दी की अनधिकत सहायता अभिप्राप्तृ करना;

226 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(यछ) किसी बन्दी (cid:217)वारा पालन किये जाने वाले कार्य का कोई भाग अन्य को प्रभाजित करना;

(यज) कार्य के लिए जारी की गयी वस्तुओं में विजातीय पदार्थ मिश्रित करना या जोड़ना;

(यझ) स्वयं को श्रम से जानबझकर बचानाू ;

(यञ) किसी बन्दी को भिन्न धार्मिक विश्वास में संपरिवर्तित करना या संपरिवर्तित करने का प्रयत्न करना;

(यट) जानबझकर दसरों की धार्मिकू

ू भावनाओं, विश्वासों और निष्ठाओं को आहत करना;

(यठ) जाति या धार्मिक पर्वाग्रह के आधार पर आंदोलन करना या कार्य करना ;

(यड) अनज्ञा के बिनाु , किसी बाहरी व्यक्ति, विचाराधीन बन्दी, निरु(cid:217)धों, सिविल बन्दियों और सरकारी गवाहों के साथ लिखित में या शब्द (cid:217)वारा या संके त (cid:217)वारा कोई संपर्क करना;

(यढ) लिखित या मौखिक रूप से कोई संदेश छिपाकर भेजना;

(यण) अनधिकत क्रियाकलापोंृ , जैसे कि जआ खेलना और दांव लगाना में भाग लेना, या आयोजित करना;

(यत) अनादरपर्ण होते हएू

ु अशिष्ट, गाली-गलौच, असभ्य, धमकी भरी या अनचित भाषा उपयो

ु ग करना, अशिष्ट या असभ्य कत्यृ या अंगविक्षेप करना;

;

(यथ) किसी स्थान या वस्तु को दषित करना या मैला करना

(यद) अनज्ञा के बिना नियत क्षेत्र या कार्य -समह को छोड़कर आवारागदी करना या सस्तु हो जाना;

(यध) हिंसा, हमला, बलवा, विद्रोह, आक्रमण, घोर व्यैक्तिक हिंसा का दमन करने या किन्हीं अन्य आपात परिस्थितियों में कारागार पदधारियों की सहायता करने में विफल रहना, या किसी अन्य व्यक्ति को निवारित करना;

(यन) जब कतार में हो, या ताला खोलने पर या शौचालय पर स्नान या अन्य परेड पर या किसी समय बात करना जब अधिकारी या कारागार (cid:217)वारा प्रविरत रहने के लिए आदेशित किया गया हो और किसी समय गाना गाना, जोर से हंसना और जोर से बात करना;

(यप) किसी जेल अधिकारी या आगंतक के लिए अनादर दर्शित करना ; या

का (यफ) कारागार के किसी अधिकारी या आगंतक (cid:217)वारा किये गये किसी प्रश्नु

असत्यतापर्वक उत्तर देना। ू

(2) ऐसे अन्य कत्यृ , जैसे सरकार समय-समय पर, राजपत्र में अधिसचना (cid:217)वाराू , कारागार अपराध का गठन करने के लिए विनिर्दिष्ट करे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 227

480. दंड.- (1) अधीक्षक उप-नियम (2) में यथा वर्णित दंड अधिनिर्णीत कर सके गा:

परंत वेदनापर्ण योज्यु

ू क के रूप में कोई एकांत परिरोध, कोई आहार परिवर्तन, कोई अन्य दंड या विशेषाधिकारों और सखु -सविधाओं का प्रत्या

ु ख्यान, किसी बन्दी पर अधिरोपित नहीं किया जाएगा।

(2) जब अधीक्षक की राय में निम्नलिखित में से कोई अपराध किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध सि(cid:217)ध होता है, तो वह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अनसार ु जांच के लिए क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर रहे मजिस्ट्रेट को मामला निर्दिष्ट करेगा, अर्थात ्:-

(क) भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 को के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 147, 148 और 152 के अधीन दंडनीय अपराध, अर्थात ्:-

(i) घातक आयध से सज्जिु त होकर बल्वा करना; या (ii) लोकसेवक जब बल्वा को दबा रहा हो, तब उस पर हमला करना या उसे बाधित करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना, या ऐसा करने की धमकी देना या ऐसा करने का प्रयत्न करना।

(ख) भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 222, 223 और 224 के अधीन दंडनीय अपराध, अर्थात ्:-

(i) पकड़ने के लिए आब(cid:217)ध लोक-सेवक (cid:217)वारा पकड़ने का साशय लोप या विधिपर्वक अभिरक्षा को सपर्द किये गये किसी व्य क्ति को निकल भागने में साशय सहायता करना या सहन करना; या (ii) किसी लोक-सेवक की उपेक्षा से निकल भागना; या

(iii) विधि के अनसार पकड़े जाने में प्रतिरोध करना या बाधा डालना या विधिपर्ण अभिरक्षा से निकल भागना या निकल भागने का प्रयत्न करना;

(ग) भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 304-क, 309, 325 और 326 के अधीन दंडनीय अपराध, अर्थात ्:-

ृ कारित करना; या (i) उतावलेपन या उपेक्षापर्ण कार्य (cid:217)वारा मत्यू (ii) आत्महत्या करने का प्रयत्न; या

(iii) खतरनाक आयधों या साधनों (cid:217)वारा स्वे

ु च्छया घोर उपहति कारित करना।

(घ) अनन्यत: सेशन न्यायालय (cid:217)वारा विचारणीय कोई अपराध।

(3) किसी अन्य कत्यृ जो कारागार अपराध और भारतीय दंड सं हिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) के अधीन अपराध, दोनों का गठन करता है, के संबंध में अधीक्षक को यह अवधारित करने का विवेकाधिकार होगा कि वह दंड की स्वयं की शक्तियों का उपयोग करेगा या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) के अनसार जांच करने के लिए क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर रहे मजिस्ट्रे ट को भेजेगा कित कोई ं

भी बन्दी एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जाएगा।

228 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

टिप्पण : किसी अपराध के लिए न्यायिक दोषसि(िcid:217)ध के परिणामस्वरूप कारागार कार्यालय से हटाये गये आवश्यकता के बन्दी को दो बार दंडित किया हआ नहीं माना जायेगा।ु 481. अपराधों का बारंबार कारित करना.- अधिनियम की धारा 52 के उपबंधों के अध◌ीन, यदि कोई बन्दी जेल अनशासन के विरु(cid:217)ध किसी अपराध का दोषी है , जो उसके ऐसा अपराध बारंबारता से कारित किये जाने के कारण हआ है

ु , या अन्यथा अधीक्षक की राय में कोई दंड, जिसे अधिनिर्णीत करने की उसे शक्ति है, पर्याप्त रूप से दंडनीय नहीं है, तो अधीक्षक परिस्थितियों के कथन के साथ, ऐसे बन्दी को मख्यु न्यायिक मजिस्ट्रेट या क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय को अग्रेषित कर सके गा और ऐसा मजिस्ट्रेट या कोई प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट जिसे मख्यु न्यायिक मजिस्ट्रेट मामला अंतरित करता है, उसमें जांच करेगा और बन्दी के विरु(cid:217)ध लाये गये आरोप पर विचार करेगा और बन्दी की दोषसि(िcid:217)ध के लिए आदेश पारित करेगा:

परन्तु कोई भी बन्दी एक ही अपराध के लिए दो बार दंडित नहीं किया जायेगा।

482. दंड का वर्गीकरण.- (1) दंड, लघ और वहत दंड में वर्गीकत किये जा सकें गे।

ृ (2) निम्नलिखित दंड, लघ दंड के रूप में माना जा सके गा , अर्थात ्:-

(क) औपचारिक चेतावनी;

(ख) कथित कालावधि के लिए कछ अधिक भारी या कठोर रूप में श्रम का परिवर्तन करना;

(ग) चार दिवस से अनधिक परिहार का समपहरण;

(घ) तीन मास से अनधिक की कालावधि के लिए वर्ग, श्रेणी या कारागार विशेषाधिकार का समपहरण (कारागार विशेषाधिकार में मलाकात का ु

र(cid:217)दकरण और टेलिफोन सविु धायें सम्मिलित हैं);

(ङ) उच्चतर वर्ग से निम्नतर वर्ग या श्रेणी में अस्थायी गिरावट;

(च) सात दिवस से अनधिक के लिए कोठरी-बंद परिरोध;

् ; और

(छ) चौदह दिवस से अनधिक के लिए पथक परिरोधृ (ज) एक मास में एक बार में तीन दिवस के उपार्जन तक मजदरी का समपहरण। ू (3) निम्नलिखित दंड वहत दंड समझे जाएंगे

् , अर्थात ्:-

(क) चार से अधिक कित बारह दिवसों से अनधिकं

, अर्जित परिहार का समपहरण;

(ख) बाहर दिवसों के आधिक्य में, अर्जित परिहार का समपहरण;

(ग) तीन मास से अधिक की कालावधि के लिए वर्ग, श्रेणी या कारागार विशेषाधिकारों का समपहरण;

(घ) तीन मास से अधिक की कालावधि के लिए परिहार प्रणाली से अपवर्जन;

(ङ) तीन मास से अनधिक की कालावधि के लिए परिहार प्रणाली से अपवर्जन;

(च) एक मास में चार से सात दिवस के उपार्जन तक मजदरी का समपहरणू ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 229

(छ) गरुतर सरक्षा कारागारों को अंतरण और परिणामस्व रूप विशेषाधिकारों की हानि;

(ज) अवकाश की शर्तों के भंग के मामले में दंडादेश के प्रति अवकाश की कालावधि गणना नहीं करना;

(झ) उच्चतर से निम्नतर वर्ग या श्रेणी में स्थायी अवनति;

(ञ) अन्त:वासी की अवकाश पर छोड़े जाने के लिए आगामी पात्रता की तारीख से प्रारंभ होने वाले एक वर्ष से अनधिक की कालावधि के लिए अवकाश के विशेषाधिकारों को मल्तु वी करना;

(ट) सात दिवस से अधिक की कालावधि के लिए कोठरी-बंद परिरोध; और

्

(ठ) चौदह दिवस से अधिक की कालावधि के लिए पथक परिरोध। ृ

483. दंड अधिनिर्णीत करने के लिए प्रक्रिया.- (1) समस्त प्रकार के दंड अधिनिर्णीत करने के लिए बन्दी को व्यक्तिगत सनु वाई का अवसर दिया जायेगा।

(2) अधिनिर्णीत दंड संबंधित बन्दी के वत्त पत्र और दंड रजिस्टृ र में भी प्रविष्ट किया जाएगा।

(3) इन नियमों के उपबंधों में से किसी का अतिलंघन, अधीक्षक के ध्यान में लाया जायेगा, जो विनिश्चय करेगा कि अपराध का गठन करने के लिए, ऐसी परिस्थितियों में यथा कारित रिपोर्ट किया गया अतिलंघन जानबझकर या माफी के बिना किया गया है।

(4) यदि अधीक्षक की राय है कि नियम का अतिलंघन अनभिज्ञता या माफी योग्य असावधानी के माध्यम से कारित किया गया था, तो वह बन्दी की भत्र्सना करेगा और आरोप को दंड रजिस्टर में अभिलिखित किये बिना खारिज करेगा, कित यदि वह इसे अपराध ं

होना पाता है, तो वह कछ दंड अधिनिर्णीत करेगा और नियम (cid:217)वारा अपेक्षित समस्त ब्यौरे देते हए यथा विनिर्दिष्टु प्ररूप में और इसी भांति बन्दी के वत्त पत्र पर अभिलिखित ृ

करवायेगा।

(5) ''श्रम का परिवर्तन'' जो एक लघ दंड है और के वल कारावास भगत रहे बन्दि

ु यों को अधिनिर्णीत किया जा सके गा और लगातार कम कार्य या निष्क्रियता के लिए उपयक्तु दंड है, कित अन्यं ु अपराधों के लिए भी दिया जा सके गा और यह के वल किसी निश्चित समय के लिए दिया जा सके गा।

(6) परिहार प्रणाली के अधीन आने वाले बन्दियों के मामले में लघ अपराधु , जैसे कि लघ ु कार्य, जब तक कि बार-बार दोहराये नहीं जायें, परिहार की हानि पर्याप्त दंड हो सके गा और

सभी पर अधिमान देकर उपयोग किया जायेगा जब तक लघ अपराधों के लिए यह दंड अन्यु

कि बन्दी के पास जमा कराने के लिए कोई परिहार है।

(7) ''औपचारिक चेतावनी'' दंड समझी जायेगी और अधीक्षक (cid:217)वारा अपराधी को स्वयं संबोधित की जायेगी और प्रत्येक आपवादिक मामले में प्रथम अपराध के लिए दंड ''औपचारिक चेतावनी'' होगा।

(8) औपचारिक चेतावनी किसी भी अन्य दंड के साथ संयोजित नहीं की जायेगी।

230 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(9) परिहार प्रणाली के अधीन कारागार विशेषाधिकारों के समपहरण में इन नियमों (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों और सि(cid:217)धदोष चौकीदार को अनज्ञात कोई विशेष विशेषाधिकार सम्मिलित है और इन विशेषाधिकारों में से एक या अधिक निलंबित किये जा सकें गे।

(10) उप-नियम (9) में कथित दंडों को अधिनिर्णीत करते समय या श्रेणी में गिरावट जो नियम 482 के उप-नियम (2) के खंड (ग) और (घ) में लघ अपराधों के रूप में उपदर्शित की गयी है और नियम 482 के उप-नियम (3) के खंड (ड.) में यथा उल्लिखित मख्यु दंड को अधिनिर्णीत करते समय, अधीक्षक अभिलिखित करेगा कि यह स्थायी होगा या किस कालावधि के लिए होगा।

(11) जब कभी बारह दिवस से अधिक परिहार के समपहरण की मंजरी के लिए या तीन ू

मास से अधिक कालावधि के लिए परिहार प्रणाली से बन्दी के अपवर्जन के लिए कारागार निदेशालय के प्रमख को आवेदन किया जाता है , तो अपराध और बन्दी (cid:217)वारा अर्जित परिहार की पर्ण विशिष्टिू यां और उसके पर्व इतिहास का संक्षिप्तू कथन, उसकी वर्णनात्मक सची के ू साथ प्रस्तुत किया जायेगा।

484. कोठरी-बंद परिरोध.- (1) कोठरी-बंद परिरोध श्रम सहित या श्रम के बिना, कोठरी में परिरोध है, जिसमें बन्दी अन्य बन्दियों से संपर्क से पर्णतू : अलग कर दिया जाता है कित उनकी दृष्टि से पथक नहीं किया जाता।

्

(2) बन्दी को उसका भोजन देने और सफाई के लिए उपस्थित होने के लिए सि(cid:217)धदोष कोठरी परिचर उसकी कोठरी तक पहंच रखेंगे ु अपना भोजन अके ले ही करेगा और उसके

ु , कित बन्दीं

कोठरी यार्ड में स्नान करेगा।

(3) कोठरी-बंद परिरोध चौदह दिवस से अनधिक के लिए अधिनिर्णीत किया जा सके गा और कोठरी-बंद परिरोध की प्रत्येक कालावधि के पश्चात बन्दी् के पनु : दसरे कोठरीू -बंद परिरोध को दंडादिष्ट किये जाने से पर्व ऐसी कालावधि से अन्यू

ून अंतराल व्यपगत होगा।

् , किसी कोठरी में श्रम सहित या श्रम के 485. पथक परिरोधृ ् .- (1) पथक परिरोधृ

बिना परिरोध है, जिससे कि बन्दी को उसकी कोठरी में होने के दौरान, अन्य बन्दियों से संपर्क से पथक किया जा सके कित दृष्टि से नहीं।

ु

(2) मानक योजना पर निर्मित कोठरियों में कोठरी यार्ड का बाहरी बैटन दरवाजा खला छोड़ा ु

जायेगा और इस दंड को भोग रहा बन्दी कोठरी के सामने सामान्य रास्ते या वार्डर की दृष्टि में अन्य पर्याप्त स्थान में प्रतिदिन कम से कम एक घंटे व्यायाम करेगा और एक या अधिक अन्य बन्दियों के साथ मिलकर अपना भोजन करेगा।

(3) अधीक्षक तीस दिवस तक का पथक परिरोध अधिनिर्णीत कर सके गा और इसके अतिरिक्त आवश्यक समझी गयी, किसी कालावधि के लिए, जो तीन मास तक आवश्यक समझी जाए, कारागार निदेशालय के प्रमख का आदेश अभिप्राप्तु किया जायेगा।

(4) ऐसे आदेश के लिए आवेदन प्रस्तुत करते समय, अधीक्षक, सिफारिश की गयी कालावधि के लिए पथक परिरोध भोगने के लिए या किसी अन्य कालावधि के लिए जिसे भोगने केभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 231 लिए चिकित्सा अधिकारी बन्दी को समर्थ समझे, चिकित्सा अधिकारी का आरोग्य प्रमाणपत्र अग्रेषित करेगा।

486. दंड रजिस्टर.- (1) दंड रजिस्टर विनिर्दिष्ट प्ररूप में रखा जायेगा।

(2) यदि दंडित बन्दी सि(cid:217)धदोष अधिकारी है, तो उसकी ग्रेड उसके नाम के अधीन कथित की जायेगी।

(3) वहत या लघ दंड के रूप में प्रत्ये

ु क दंड का वर्गीकरण, इस प्रयोजन के लिए पथक रखे ृ

गये स्तंभ में सावधानीपर्वक अभिलिखिू त किया जायेगा।

(4) प्रत्येक मास के अंत में अपराधों और दंडों का सार प्राधिकत आगंतकों की सविधा के ृ

लिए इस रजिस्टर में प्रविष्ट किया जायेगा।

(5) प्रत्येक मास के अंत में इस रजिस्टर में निम्नलिखित रीति से एक अभिलेख किया जायेगा, अर्थात ् :-

(क) दिये गये दंडों की कल संख्याु ; (ख) सि(cid:217)धदोषों की दैनिक औसत संख्या;

(ग) दंडित किये गये बन्दियों का प्रतिशत;

् ; और

लित की जायेगी।

(घ) बन्दियों को दिये गये वहत दंडों का प्रतिशतृ (ङ) यह सचना वार्षिक रिपोर्ट में भी सम्मिू

487. जेल दंड के समापन की डायरी.- (1) यह अधिक महत्वपर्ण है

ू कि बन्दी उस कालावधि से अधिक दंड न भोगें जो अधीक्षक (cid:217)वारा आदेशित किया गया है।

(2) जिस दिन किसी दंड के लिए आदेश, जो किसी विनिर्दिष्ट अवधि के लिए जारी रहेगा, प्रभावी होता है, ऐसे दंड की अवधि की समाप्ति की तारीख संगणित की जायेगी और बन्दी का नाम और विशिष्टियां, यदि दंड उस तारीख के अधीन जिस पर यह समाप्त हो जायेगा, इस डायरी में प्रविष्ट की जायेंगी।

(3) जेलर (cid:217)वारा डायरी प्रतिदिन परीक्षित की जायेगी और प्रत्येक दंड जो प्रतिदिन समाप्त होता है, के जारी नहीं रहने के लिए यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में बन्दी के वत्त पत्रों पर आदेश ृ

दिये जायेंगे।

488. बन्दियों के कर्तव्य.- प्रवेश के समय बन्दियों को नियमों का पालन करने के लिए कहा जायेगा और उन्हें नीचे उल्लिखित कर्तव्य समझाये जायेंगे:-

(क) कारागार के समस्त अधिकारियों (लिपिकों, चिकित्सीय और तकनीकी कर्मचारिवं ृद को सम्मिलित करते हएु ) और सि(cid:217)धदोष अधिकारियों के आदेशों का पालन करना;

(ख) जब तक समचित प्राधिकारी (cid:217)वारा इसे छोड़ने के लिए आदेशित न किया जाये, सर्वथा अपने समहों के साथ और कारागार के उस भाग के भीतर रहना जिसमें वे परिरु(cid:217)ध किये गये हैं;

(ग) जब ताला खोलते समय या प्रसाधन में हो या स्नान करते समय या अन्य परेडों में कतार में हों या जब कारागार के किसी अधिकारी (cid:217)वारा232 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) किसी समय ऐसा करने से मना करने के लिए आदेश किया जाये, आपस में बातचीत से प्रविरत रहना; किसी भी समय गाली-गलौच करने, गाना गाने, झगड़ा करने, जोर से हंसने, जोर से बात करने और अशिष्ट व्यवहार दर्शित करने से भी प्रविरत रहेगा;

(घ) बाहरी व्यक्तियों, महिलाओं, सिविल या विचाराधीन बन्दियों या उनके स्वयं से भिन्न वर्ग के बन्दियों या गार्डों के साथ, उससे परे जो आत्यंतिक आवश्यक है; कोई संपर्क नहीं रखना;

(ङ) गांजा या अन्य स्वापक औषधियां, धन या आभषण या नियमों (cid:217)वारा ू

प्रतिषि(cid:217)ध भोजन की कोई वस्तु या वस्त्र, पस्तु कें , कागज, किसी भी प्रकार की लेखन-सामग्री, रस्सी, चाकू , या अन्य उपकरण (कार्य घंटों के दौरान और जब उपकरण कार्य के लिए अपेक्षित हो, के सिवाय); प्राप्त या कब्जे में नहीं लेना;

(च) जब वे कारागार में खंड (ड.) में उल्लिखित वस्तुओं में से किसी को पाते हैं या ऐसी किसी वस्तु का किसी अन्य बन्दी के कब्जे में होना जानते है; तो वे मामले की रिपोर्ट जेलर या वार्डर को करेंगे;

(छ) किसी गप्तु योजना या ष(cid:212)यंत्र, और निकल भागने के किसी प्रयत्न, या किसी बन्दी या कारागार के अधिकारी या किसी बाहरी व्यक्ति पर योजनाब(cid:217)ध हमले की रिपोर्ट करना;

(ज) कारागार के अधिकारियों पर हमले की दशा में उनकी सहायता करना;

(झ) उनके वस्त्रों, कं बलों, बिछौनों, और बर्तनों को स्वच्छ और उचित क्रम में रखना;

(ञ) स्वयं को स्वच्छ रखना;

(ट) उनको समनदिष्टु कार्यों को रजामंदी से और सावधानीपर्वक करना और ू

किसी भी प्रयोजन के लिए उन्हें न्यस्त सरकार की किसी संपत्ति की समचित देखु -रेख करना;

(ठ) अपने व्यवहार में व्यवस्थित होना; जब कारागार में चल रहे हों तो प्रगमन करना, जब कारागार का कोई अधिकारी या आगंतक संबोधित ु

करे या उसके (cid:217)वारा संबोधित किया जा रहा हो तो अपने हाथ नीचे किये हए सावधान की मद्रा में खड़े होना

ु ; और जब आदेशित किया जाये सैल्यट करनाू ;

(ड) प्राधिकार के बिना रसोई या भोजन परोसने के मंच से रसद नहीं हटाना, या वार्डों अथवा कोठरियों में भोजन की कोई वस्तु नहीं छिपाना; (ढ) जहां भोजन किया जाता है उस स्थान से किसी उपभोग नहीं किये गये भोजन को नहीं हटाना;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 233

(ण) भोजन करने या कार्य पर होने के समय उन्हें समनदेशित चारपाईु , वार्ड, यार्ड और सीट से जड़े रहनाु ;

(त) (cid:217)वारों को खोले जाने के पश्चात यार्डों के आस् -पास या वार्डों में आवारागदी नहीं करना या विनिर्दिष्ट घंटों के बाहर स्नान नहीं करना या प्रसाधनों का उपयोग नहीं करना;

(थ) कोरइ न्य् ूसेंस कारित नहीं करना या कारागार के किसी भाग में, जो उस प्रयोजन के लिए समनदिष्टु नहीं किया गया है मत्रू नहीं करना या कारागार का कोई भाग या कारागार में कोई वस्तु किसी भी रूप में खराब नहीं करना;

(द) समस्त अधिकारियों के लिए सम्मान दर्शित करना;

(ध) हड़ताल, किसी अधिकारी या बन्दी पर हमला नहीं करना या धमकी नहीं देना;

(न) कारागार के भीतर न तो जआ खेलना या वस्तु

ु विनियम करना, न ही पशु, पक्षी या अन्य पालत रखनाू ;

(प) उन्हें दिये गये वस्त्र पहनना और उनकी कारागार किट के वस्त्र या उसके भाग का, किसी अन्य बन्दी के साथ विनिमय नहीं करना; और

(फ) किसी आंदोलन, संगठित अभ्यापत्ति या भख हड़ताल का जिम्मा

ू नहीं लेना।

अध्याय 19

बन्दियों की रक्षा और सरक्षित अभिरक्षाु

(दिन और रात्रि की चर्या)

489. रक्षा में उत्तरदायित्व.- (1) जेल रक्षा में संप्रेक्षित किया जाने वाला मलभत ू सि(cid:217)धांत यह है कि प्रत्येक बन्दी, दिन और रात्रि दोनों में पर्ण समयू , ऐसे किसी उत्तरदायी अधिकारी के प्रभार में होगा जिसका उत्तरदायित्व उपेक्षा के परिणाम से निकल भागने के लिए दंड न्यायालय में साबित किया जा सके गा।

(2) उप-नियम (1) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, जेल में समस्त बन्दी दलों में विभाजित किये जायेंगे, और प्रत्येक बन्दी, उसके कारागार का संपर्ण काू लावधि के दौरान, इन दलों में से एक या अन्य का सदस्य होगा।

(3) दल में रखे गये बन्दियों के नामों का अभिलेख, विनिर्दिष्ट प्ररूप में रखी गयी दल- पस्तिु का में रखा जायेगा और बन्दी का एक दल से दसरे दल को प्रत्ये

ू क पश्चात्वर्ती परिवर्तन उसमें मख्यु वार्डर की रैंक से अन्यून अधिकारी के आ(cid:217)यक्षर के अधीन अभिलिखित किया जायेगा।

(4) दलों को दो मख्यु वर्गों में विभाजित किया जायेगा:-

(क) बहिर्वर्ती या वे जो जेल की चारदीवारी के बाहर नियोजित हैं; और

(ख) अंतर्वर्ती या वे जो जेल की चारदीवारी के भीतर नियोजित हैं।

234 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(5) सि(cid:217)धदोष अधिकारियों को सम्मिलित करते हये दल की संख्या

ु निम्नलिखित से अधिक नहीं होगी,-

(क) बहिर्वर्ती या वे जो जेल की चारदीवारी के बाहर नियोजित हैं, के मामले में,-

(i) जेल अहातों के परे .....11 बन्दी;

(ii) जेल अहातों के भीतर .....15 बन्दी;

(ख) अंतर्वर्ती या वे जो जेल दीवारों के भीतर नियोजित हैं के मामले में .....25 बन्दियों से अधिक नहीं होंगी।

(6) इन नियमों (cid:217)वारा यथा अन्यथा अनज्ञात के सिवायु , प्रत्येक दल के प्रत्यक्ष प्रभार में सदैव एक नियमित वार्डर होगा।

(7) बहिर्वर्ती दल सदैव वार्डर के प्रभार में होंगे, जिसकी सहायता के लिए सि(cid:217)धदोष ओवरसियर होगा और यदि दल में बन्दियों की संख्या दस से अधिक हो, तो एक चौकीदार भी होगा।

(8) दल का प्रभारी अधिकारी, परे दिन उसके दल के लिए अके ले ही उत्तरदायी होगा और जब अपेक्षित हो उसके प्रभार में रखे गये व्यक्तियों की संख्या का लेखा देने के लिए तैयार रहेगा।

(9) वह दल-पस्तिका सदैव अपने कब्जे

ु में रखेगा।

(10) दल के प्रभार के लिए उत्तरदायित्व कभी भी दो या अधिक अधिकारियों के मध्य विभाजित नहीं किया जायेगा।

(11) किसी दल के स्वतंत्र प्रभार में का कोई वार्डर या सि(cid:217)धदोष ओवरसियर किसी भी कारण से मख्यु वार्डर के पर्यवेक्षण के अधीन, दसरे वार्डर या सि(cid:217)धदोष अधिकारी (cid:217)वारा भारमोचित हये बिना अपना दल नहीं छोड़ेगा।

(12) भारमोचन अधिकारी उसे सौंपे गये बन्दियों की संख्या सत्यापित करेगा और मल रूप ू

से प्रभारी अधिकारी की अनपस्थिु ति के दौरान उनके लिए उत्तरदायी ठहराया जायेगा।

(13) यदि किसी कारण से जैसे शौचालय प्रयोजनों के लिए या अस्पताल जाने के लिए, इत्यादि अंतर्वर्ती दल से एक या अधिक बन्दियों को वियोजित करना आवश्यक हो, तो वरिष्ठ स ◌ि(cid:217)धदोष चौकीदार (जो संदेशवाहक भी होगा), मख्यु वार्डर की अनज्ञा से वियोजित किया ु

जायेगा और उनके साथ रहेगा जब तक कि वे उसी या किसी अन्य दल के प्रभारी अधिकारी को पनु : नहीं सौंपे जाते हैं।

(14) प्रभारी वार्डर और बहिर्वर्ती दलों से संब(cid:217)ध सि(cid:217)धदोष ओवरसियर अपने बन्दियों को यथासंभव साथ-साथ रखने के लिए विशेष रूप से ध्यान रखेंगे और चेतावनी दी जानी चाहिये कि◌े वे किसी भी लेखे चाहे किसी भी कारण से बन्दियों को इधर-उधर विचरण करने या उनकी दृष्टि के बाहर नहीं जाने देंगे।

(15) अस्थायी रूप से विशेष प्रयोजन के लिए वियोजित किया गया कोई बन्दी, दल के सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के प्रभार के अधीन होगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 235

(16) जब जेल से बन्दियों को किसी भी दरी पर परे दिवस कार्यरत रखा जाता है तो एक अस्थायी शौचालय उपलब्ध करवाया जायेगा, जिसका प्रवेश (cid:217)वार वार्डर को सस्पु ष्टतया दृश्यमान होगा और सि(cid:217)धदोष ओवरसियर उन बन्दियों का प्रभार लेगा जिन्हें वहां जाना है।

(17) इसके अतिरिक्त, कार्यपालक अधिकारियों में से एक अपने क्रम में बहिर्वर्ती दल के कार्य का बारंबारता से पर्यवेक्षण करेगा और इसके लिए अधीक्षक, प्रत्येक मास या सप्ताह में जेल अधिकारी का नाम उल्लिखित करते हए आदेश जारी करेगा। ु

(18) इस प्रकार वियोजित किये गये बन्दियों के नाम एक नोट बक में अभिलिखित किये ु

जायेंगे और यह जारी करने वाले अधिकारी को लौटायी जायेगी।

(19) दल सविधानसार निम्ना

:-

ु नसार विभाजित किये जा सकें गे

(क)बहिर्वर्ती दल निम्नानसार विभाजित किये जा सकें गे :-

(i) उ(cid:217)यान;

(ii) सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीन नियोजित।

(ख) अंतर्वर्ती दल निम्नानसार विभाजित किये जा सकें गे :-

(i) सिविल बन्दी;

(ii) विचाराधीन बन्दी;

(iii) साधारण कारावास;

(iv) अस्पताल;

(v) वाल गार्ड;

(vi) (cid:217)वारपाल और अन्य अलग-थलग बन्दी;

(vii) जेल सेवक;

(viii) विनिर्माणशाला;

(ix) सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीन नियोजित; और

(x) रसोई।

490. बाहरी दीवारों की देखरेख.- यह समीचीन है कि दिन के समय, जब बन्दी जेल के आसपास चल रहे हों, तो जेल की बाहरी दीवारों की देखरेख भीतर गश्त कर रहे सि(cid:217)धदोष अधिकारियों (cid:217)वारा की जाये।

491. (cid:212)यटी रजिस्टू र.- (1) प्रत्येक वार्डर और मख्यु वार्डर की (cid:212)यूटी या शिफ्ट की

प्ररूप में या उसके आदेश के अधीन पारियां प्रदर्शित करते हए जेलर (cid:217)वारा यथा विनिर्दिष्टु

प्रत्येक सप्ताह (cid:212)यटी रजिस्टू र तैयार किया जायेगा और अधीक्षक (cid:217)वारा अनमोदित किया ु

जायेगा।

(2) यदि सप्ताह के अनक्रम में किसी वार्डर की (cid:212)यटी की पा

ू री परिवर्तित करना आवश्यक हो, तो परिवर्तन बाबत रोस्टर पर अंकित करना आवश्यक है और प्रत्येक वार्डर की निश्चित (cid:212)यटी या बीट प्रत्ये

ू क रात्रि परिवर्तित की जायेगी और किसी भी वार्डर को बीट या (cid:212)यटी ू सौंपने से पर्व यह सचित नहीं किया जायेगा कि उसे कौनसी बी ट या (cid:212)यटी पर रखा जायेगा। ू236 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (3) प्रत्येक बीट में रखे गये वार्डरों के प्रयोजन के लिए प्रत्येक निगरानी में विशेष रूप से रखी गयी नोट बक में अभिलेख रखा जायेगा। ु

(4) ऐसे वार्डर भी जो (cid:212)यटी पर नहीं हैं

ू , किसी आपात (cid:212)यटी के लिए कारागार परिसर में सदैव उपस्थित होंगे और अपनी (cid:212)यटी की पारी के दौरान अनपस्थिू

ु त कोई वार्डर अनशासनात्मक कार्रवाई के लिए दायी होगा।

492. दिवस और रात्रि की चर्या.- (1) दिन के कार्य के लिए रिजर्व गार्ड और गेट वार्डरों को अपवर्जित करते हये

ु वार्डरों और स्थापन पर वार्डरों को सामान्यत:

ु , संपर्ण मख्यू

तीन दस्तों में विभाजित किया जायेगा।

(2) वार्ड प्रात: खोले जायेंगे और वार्डों के खोलने के तत्काल पर्व

ू जेलर, उप-जेलर, और मख्यु वार्डर उन वार्डरों के साथ जो प्रात: (cid:212)यटी पर होंगे

ू , साथ-साथ जेल में प्रवेश करेंगे।

(3) जेलर तब सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों और सि(cid:217)धदोष चौकीदारों के दल को, जिन्हें (cid:212)यटी की ू प्रथम पारी के दौरान जेल दीवारों की निगरानी करनी है, उनके वार्डों से बाहर आने देगा, ये चौकीदार एक वार्ड में बंद किये जायेंगे न कि अलग-अलग वार्डों में।

(4) मख्यु वार्डरों में से एक इन सि(cid:217)धदोष चौकीदारों को शौचालय ले जायेगा और तब उन्हें जेल दीवारों के चारों ओर पदस्थापित करेगा।

(5) जब मख्यु वार्डर रिपोर्ट करता है कि दीवार रक्षक पदस्थापित किये गये हैं तो वार्ड खोले जायेंगे और बन्दी, वार्डरों और अंतिम निगरानी के सि(cid:217)धदोष चौकीदारों और भारमोचक दिवस वार्डरों और दिवस सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों की उपस्थिति में जोड़ों में गिने जायेंगे।

(6) पर्व संध्याू में बंद किये गये बन्दियों की संख्या सही पाये जाने के पश्चात ्, बन्दी दिवस- दल के वार्डरों और सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों को सौंपे जायेंगे जिसमें वे परे दिवस के दौरान ू

रहेंगे।

(7) जब यह हो जाये, तो तीसरी पारी या अंतिम निगरानी के भारमक्तु वार्डर जेल के बाहर प्रगमित करवाये जायेंगे।

(8) दलों के सामान्य प्रात:कालीन शौचालय, स्नान और भोजन परेडें, उसी वार्डर या सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के प्रभार में रहते हए क्रियान्विु त की जायेंगी जिसने उन्हें जेल के खोलने पर शयन वार्ड छोड़ते हए प्राप्तु किया था।

-जेलर के पर्यवेक्षण के अधीन, (9) जब प्रात:कालीन परेड पर्ण हो जाती है तो जेलर या उपू

बन्दी जिन्हें प्रत्येक दल में मख्यु वार्डर या वार्डर यह सनिश्चित करने के लिए कि समस्तु

उपस्थित होना चाहिये, वास्तविक रूप से उपस्थित हैं, उपस्थिति पंजिका से बन्दियों के नामों को पकारने के पश्चाु त जोड़् ◌ियों में विभिन्न दलों को उनके संबंधित कार्य स्थानों को भेजेंगे और जेल के खोलने पर दलों के प्रभार में रखे गये या संलग्न सि(cid:217)धदोष ओवरसियर संपर्ण ू दिन के लिए उत्तरदायी बने रहेंगे।

(10) प्रत्येक दल को इसका प्रभार प्राप्त कर रहे वार्डर या सि(cid:217)धदोष अधिकारी की उपस्थिति में संगणित किया जायेगा, जिनके नाम तब दल-पस्तिु का में अभिलिखित किये जायेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 237

(11) दिन के दौरान गार्ड के प्रत्येक पश्चात्वर्ती परिवर्तन पर, इसी प्रक्रिया का पालन किया जायेगा, चाहे परिवर्तन मामली अनक्रम में या बीमारी या अन्यू

ु कारण के लेखे किया जाता है।

(12) सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों के स्वतंत्र प्रभार में सौंपे गये दलों की पंजिकाओं के नाम दोपहर में पकारा जाना आवश्यु क नहीं होगा, यदि ये अधिकारी दिन के दौरान परिवर्तित नहीं किये जाते हैं, कित ये दल वार्डर गार्ड परिवर्तन किये जाने के समय पर गिने जायेंगे और सत्यापित किये जायेंगे।

(13) ठं डे मौसम में जेलों में, जब कार्य और परेडों को दोपहर में रोके जाने के लिए के वल एक घंटा अनज्ञात किया जाता है , तो गार्ड और दलों के दोपहर परिवर्तन पर पंजिका के नाम पकारने के लिए पर्याप्तु समय नहीं होता है, अत: तब के वल गिने जायेंगे।

(14) वार्डरों का प्रथम दस्ता (िcid:217)वतीय दस्ते (cid:217)वारा दोपहर को भारमोचित किया जायेगा, जो दिन की (cid:212)यटी की (cid:217)वू ◌ितीय पारी के लिए मख्यु वार्डर (cid:217)वारा भीतर लाया जायेगा, और तब तक प्रभार में रहेगा जब तब वार्डों में समस्त बन्दी गिने जाते हैं और रात्रि के लिए बन्द किये जाते हैं और रात्रि गश्तीदल (cid:212)यटी पर आ चका हो। ू

ु

(15) सि(cid:217)धदोष चौकीदार जो दीवारों की निगरानी करते हैं दोपहर की व्यवस्था में परिवर्तित नहीं किये जायेंगे, उन्हें समचित अंतरालों पर अपना भोजन लेने और स्ना न करने, इत्यादि के लिए अनज्ञात करने के लिए बारी -बारी से अस्थायी रूप से छट दी जाने के लिएू

, तदनसार ु व्यवस्थायें की जायेंगी और यह जेल के भीतर गश्त करने के लिए भारमोचित किये जाने वाले चौकीदारों के स्थान पर सि(cid:217)धदोष अधिकारियों को रखते हए सविधाजनक रूप से किया ु

जा सके गा।

(16) सांय:काल, जब कार्य रोकने के लिए घंटी बजायी जाती है तो वार्डर या सि(cid:217)धदोष ओवरसियर के प्रभार में प्रत्येक दल जांच किये जाने के पश्चात ् उस स्थान को अग्रसर होगा जहां सामान्यत: स्नान, भोजन और शौचालय परेडें की जाती हैं और प्रभारी अधिकारी तब तक प्रभारी रहेगा जब तक समस्त बन्दी अपने-अपने संबंधित वार्डों में बंद किये जाते हैं।

(17) परेडों के पर्ण होने पर दल उनके संबंधित वार्डरों या सि(cid:217)धदोष अधिकारियों के सा थ अपने शयन वार्डों की ओर प्रगमित और कतारब(cid:217)ध होंगे।

(18) बन्दी तब बन्द किये जायेंगे (दल-पस्तिु का से उनके नाम पकारे और अभिलिखित किये ु

जायेंगे) और वार्ड के भीतर निगरानी के प्रथम रात्रि चौकीदार के प्रभार में रखे जायेंगे और तत्पश्चात रात्रि चौकीदार के

् प्रत्येक परिवर्तन पर गिनती करते हए वार्ड में संख्या

ु सावधानीपर्वक सत्याू पित करते हएु , प्रत्येक उत्तरवर्ती रात्रि चौकीदार को सौंपे जायेंगे।

(19) दोपहर परेड पर्ण हो जाने के पश्चा

ू त ् प्रथम रात्रि गश्ती दल मख्यु वार्डर, और जेलर, सहायक जेलर (cid:217)वारा भीतर लाया जायेगा और वार्डर या सि(cid:217)धदोष अधिकारी, जिसे प्रथम निगरानी के लिए प्रत्येक वार्ड का प्रभार लेना है, की उपस्थिति में अपने-अपने वार्डों में बन्दियों की गणना की जायेगी।

238 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(20) जब दीवारों के सि(cid:217)धदोष चौकीदार के सिवाय समस्त बन्दी बंद कर दि◌ेये जाते हैं तो बन्दियों की कल संख्याु सत्यापित की जायेगी और यदि यह सही पायी जाती है, तो मख्यु वार्डर, तब दीवार से सि(cid:217)धदोष चौकीदारों को एकत्र करेगा और यह देखते हए कि संख्याु सही है उन्हें गिनेगा और बंद करेगा।

(21) बंद किये जाने के पश्चात ्, समस्त वार्डों की चाबियां मख्यु वार्डर के पास रहेंगी और कोठरियों की चाबियां (cid:212)यटी पर उपस्थित वार्डर के पास रखी जायेंगी और महिला वार्ड की चाबियां जेलर के पास रखी जायेंगी।

(22) बन्दियों की और चाबियों की संख्या यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में हवालात रिपोर्ट में अंकित की जायेगी, ताकि प्रत्येक निगरानी या पारी का प्रभारी अधिकारी स्वयं का समाधान कर सके कि उसने चाबियों की सही संख्या प्राप्त की है।

(23) वार्डों को बंद किये जाने के पश्चात प्रत्ये

् न में परिरु(cid:217)ध बन्दियों की कल ु

् क पथक स्थाृ

संख्या यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में लाक अप रजिस्टर में अभिलिखित की जायेगी।

(24) यह रजिस्टर यह दर्शाने के लिए आशयित है कि क्या वार्डों में भीड़भाड़ है या नहीं।

(25) मख्यु वार्डर या अन्य अधिकारी हवालात समय पर प्रत्येक वार्ड में संख्या का टिप्पण लेगा और तत्पश्चात उप् -जेलर पस्तु क में संख्या प्रविष्ट करेगा।

(26) रक्षा के प्रयोजन के लिए (cid:212)यटीू , कारागार महानिदेशक (cid:217)वारा यथा विनिश्चित रूप में विभाजित की जायेगी।

(27) (cid:212)यटी पोस्टू और शिफ्ट (cid:212)यटी कर्मचारिवन्दू

ृ स्थिति पर निर्भर करते हए वास्तविक ु

अपेक्षाओं के अनसार अधीक्षक (cid:217)वारा परिवर्ति

ु त की जा सके गी।

(28) प्रत्येक पारी के परिवर्तन के दौरान, समस्त रक्षा कर्मचारिवन्दृ की एक अधिकारी के पर्यवेक्षण के अधीन (cid:212)यटी पर उपस्थिू त मख्यु वार्डर (cid:217)वारा तलाशी लिया जाना अपेक्षित है।

(29) अधीक्षक या जेलर उसकी रैंक से नीचे के समस्त कार्यपालक अधिकारियों, लिपिकवर्गीय कर्मचारिवन्दृ की भी अकस्मात रूप से तलाशी लेगा। ्

493. निगरानी की विशेष प्रणाली.- (1) निगरानी के परिवर्तन वार्डर निगरानी के

, प्रत्येक वार्ड में सि(cid:217)धदोष चौकीदारों (cid:217)वारा निगरानी की परिवर्तन के अनरूप करने के लिएु

विशेष प्रणाली होगी।

(2) उन मामलों में जहां वार्डों के लिए आपवादिक पर्वावधानी अपेक्षित है , या वे असामान्य लंबाई के हैं, वहां एक समय में (cid:212)यटी पर दो या अधिक चौकीदार होंगे।

(3) ये सि(cid:217)धदोष अधिकारी निगरानी पर होने के समय, वार्डों के भीतर चलते रहेंगे और किसी बन्दी को उसका स्थान छोड़ने या कारागार अनशासन के किसी भंग को कारित करने से निवारित करेंगे और गणना (cid:217)वारा स्वयं का समाधान करेंगे कि उनके प्रभार में के समस्त बन्दी सरक्षित हैं। ु

(4) निगरानी के परिवर्तन पर भारमोचक और भारमोचित सि(cid:217)धदोष अधिकारी दोनों, सौंपे गये बन्दियों की संख्या और किसी बन्दी का नाम जिसने रात्रि शौचालय का उपयोग किया हैभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 239 या जिसे अस्पताल के लिए हटाया गया है, गश्ती दल या अन्य सम्यक रूप से प्राधिकत ्

पदधारी को रिपोर्ट करेंगे।

त सि(cid:217)धदोष अधिकारी, गश्ती (5) किसी महत्वपर्ण घटना के मामले में निगरानी पर उपस्थिू

दल को तत्काल सचना देगाू , जो मख्यु वार्डर या रात्रि (cid:212)यटी अधिकारी को समन करेगा ताकि वह मामले में जांच कर सके गा और ऐसी कार्रवाई कर सके जैसी वह आवश्यक समझे।

(6) शौचालय का उपयोग करने के इच्छु क बन्दी, सि(cid:217)धदोष चौकीदार को सचित करेगाू , जो अगली सबह किु सी ऐसे बन्दी की रिपोर्ट करेगा जिसने शौचालय का शौच के लिए उपयोग किया है और गंभीर बीमारी के मामले में, मामला तत्काल (cid:212)यटी पर उपस्थिू त गश्ती दल के वार्डर को रिपोर्ट किया जायेगा।

(7) यदि रात्रि को वार्ड खोलना आवश्यक होगा, तो गेट या गेट खोलने से पर्व

ू , एक चैन दरवाजों से या दरवाजे से और डोर-पोस्ट से संलग्न होनी चाहिए, ताकि एक समय पर एक से अधिक व्यक्ति का प्रवेश या निकास रोका जा सके , यह प्रक्रिया दरवाजे के माध्यम से भागने के किसी संयोजित प्रयत्न को निष्फल बना देगी जब दरवाजा खला हो। ु

(8) रात्रि के दौरान, निगरानी गार्ड बैरक या बैरकों के बाहर चारों ओर उचित गति पर, गश्त करेंगे जिसका वे यथास्थिति प्रभार रखते हैं और किसी भी लेखे, बैठें गे नहीं या अपनी बीट नहीं छोड़ेगे।

(9) वे सदैव सतर्क होंगे और बारिश के मौसम में प्रत्येक अपना बड़ा कोट और छाता रखेंगे, और कोई भी वार्डर दिन या रात्रि किसी भी मौसम में अन्य से आश्रय की मांग नहीं करेगा।

(10) वे प्रत्येक छड़ी (बैटन) के साथ सशस्त्र होंगे और प्रकाशयक्तु टॉर्च रखेंगे और बारंबार जालियों और दरवाजों का परीक्षण करेंगे और देखेंगे कि उनके साथ कोई छे ड़छाड़ नहीं की गयी है।

(11) वे वार्डों के भीतर, यदि संभव हो, यह देखेंगे कि बन्दी उनके समचित स्थाु नों में हैं और कि सि(cid:217)धदोष चौकीदार सतर्क हैं, बैठे नहीं हैं, और बारंबार उन्हें सचेत करेंगे और उनको बन्दियों की संख्या की रिपोर्ट करेंगे।

494. टावर पर निगरानी करना.- (1) जेलों में जहां के न्द्रीय टावर या नियंत्रण कक्ष है, वहां रात्रि कर्तव्य अधिकारी कार्यालय में रहने के स्थान पर, रात्रि में उसी के न्द्रीय टावर या नियंत्रण कक्ष में कर्तव्य का पालन करेगा।

(2) रात्रि कर्तव्य अधिकारी भिन्न-भिन्न घंटों में जेल का दौरा करेगा और देखेगा कि सि(cid:217)धदोष चौकीदार और वार्डर सचेत हैं कि गश्त समचित रूप से की जा रही है और बन्दी शांत हैं।

(3) रात्रि कर्तव्य अधिकारी, रात्रि दौरा रजिस्टर में किये गये रात्रि दौरे के ब्यौरे अभिलिखित करेगा।

(4) असविधाजनक समय पर जेल के भीतर जांच करने के लि ए दिन के दौरे का रजिस्टर भी होगा।

240 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(5) रात्रि कर्तव्य अधिकारी किन्हीं प्रतिकल घटनाओं या बन्दी

ू की गंभीर रुग्णता के संबंध में वॉकी-टॉकी या तीव्रतम संपर्क के किसी साधन के माध्यम से जेलर और अधीक्षक को सचित ू करेगा।

495. बन्दी की रुग्णता के बारे में रिपोर्ट.- (1) रात्रि में गश्त (cid:212)यटी पर उपस्थिू त मख्यु वार्डर या वरिष्ठ वार्डर, उसकी निगरानी के संपर्ण समय के दौरान जेल के भीतर गश्तू

ू

कर रहे वार्डरों और सि(cid:217)धदोष चौकीदारों का दौरा करते हए घमेगा।ु

(2) वह अपने साथ हवालात रिपोर्ट पस्तु क रखेगा, और प्रभार लेने तथा प्रभार देने, दोनों में यह देखेगा कि वार्ड और कोठरियां सरक्षित हैं

ु , और कि प्रत्येक वार्ड में अभिरक्षा में होने वाले बन्दियों की सही संख्या अभिलिखित की गयी है।

(3) अत:, निष्कर्ष यह है कि जब रात्रि को गार्ड परिवर्तित होने के समय भारमोचन मख्यु वार्डर या वरिष्ठ वार्डर और वह जो भारमोचित किया जाना है संख्याओं को सत्यापित करेंगे, वार्डों की सरक्षा को देखेंगे ओर कं पनी में गार्डों को परिवर्ति त करेंगे।

(4) वह वार्डों और चैन (cid:217)वारा स्वयं से संब(cid:217)ध आंतरिक मख्यु गेट फाटक के तालों में से एक की चाबी रखेगा।

(5) गंभीर बीमारी के मामले में वह वॉकी-टॉकी के माध्यम से रात्रि कर्तव्य अधिकारी और जेल चिकित्सा अधिकारी को तत्काल सचना देगा औरू , यदि जेल चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा ऐसा करने का सझाव दिया जाता है , तो बीमार बन्दी को अस्पताल ले जायेगा।

(6) यदि या तो वार्डरों या बन्दियों की ओर से कोई अनियमितता होती है, तो वह अगली सबह अधीक्षक या जेलर को रिपोर्ट करने के लिए हवालात रिपोर्ट पस्त

ु क में परिस्थितियों की तत्काल प्रविष्टि करेगा।

(7) उच्चतर प्राधिकारी के (cid:217)वारा तत्परता से कार्रवाई की अपेक्षा वाली किसी घटना जैसे कि निकल भागने का प्रयत्न, बलवा, अग्नि या गंभीर बीमारी की सचना तत्काू ल रात्रि कर्तव्य अधिकारी या जेलर को दी जायेगी, ।

(8) उसकी निगरानी की कालावधि की समाप्ति से 15 मिनट पर्व वह गार्ड कक्ष जायेगा और ू

मख्यु वार्डर को जगायेगा जिसे उसे भारमोच ◌ित करना है और ऐसा करने के पश्चात ्, तत्काल अपने कर्तव्य पर लौटेगा।

(9) निगरानी के परिवर्तन के समय पर मख्यु वार्डर जिसे अगली निगरानी लेनी है भारमोचन वार्डरों को समय पर भीतर लायेगा।

(10) जेलों में, अधीक्षक व्यवस्था कर सकें गे कि गार्ड के परिवर्तन का पालन करने में, वरिष्ठ वार्डरों (cid:217)वारा मख्यु वार्डर की सहायता की जाये, जेल का आधा भाग मख्यु वार्डर और दसरा ू आधा भाग वरिष्ठ वार्डर लेंगे, कित ऐसे प्रत्ये

ु क मामले में दो वार्डर, भारमोचन और वह जो भारमोचित किया जाने वाला है, एक साथ निरीक्षण करेंगे और बन्दियों की संख्या सत्यापित करेंगे और वार्डों की सरक्षा को देखेंगे। ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 241 496. रसोईये बाहर निकालना.- (1) जब सबह का भोजन तैयार करने के लिए सर्योदय से पर्व रसोईयों में से कछ को बाहर निकालना आवश्य

ु क हो, तो मख्यु वार्डर उतनी संख्या में उन्हें बाहर निकालेगा और उन्हें एक वार्डर के प्रभार में रखेगा।

(2) इस कार्य के लिए के वल अल्प अपर्यवसित दंडादेशों वाले बन्दियों का ही चयन किया जाना चाहिये।

497. बन्दियों की सरक्षित अभिरक्षाु .- के वल अनमोदित पैटर्न के वियोज्यु ताले उपयोग किये जायेंगे, ऐसे ताले कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा मांगु -पत्र पर प्रदत्त किये जायेंगे और मख्यु गेट के लिए तीन इंच और वार्डों और कोठरियों के लिए 2½ इंच के वियोज्य ताले सर्वोत्तम हैं।

498. बेड़ ◌ियों का उपयोग.- बन्दी जो जेल से निकल भागे या एक जेल से दसरी को ू

अभिवहन में होने के समय या निकल भागने का प्रयत्न या ष(cid:212)यंत्र कर चके हैं

ु , सक्षम न्यायालय या सि(cid:217)धदोष करने वाले न्यायालय की मंजरी से बेड़ू ◌ियों में रखे जा सकें गे।

.- (1) जेल की 499. बाहरी दीवार के शीर्ष पर टटे हये कांच के उपयोग का प्रतिषेधू

बाहरी दीवार के शीर्ष पर टटे हए कांच नहीं लगाये

ु जायेंगे क्योंकि यह दीवार पर फें के गये कं बल के लिए या वस्त्र के लिए पकड़ प्रदान करता है, और इस प्रकार निकल भागने को सकर बनाता है

ु , और कोई भी कं गरा या निकला हआ भाग नहीं होगा जिसे किनारे पर गोलाकार या ढलानयक्तु किया जाना चाहिये।

(2) किसी जेल की बाहरी दीवार के साथ विभाजित करने वाली दीवार के प्रत्येक संगम पर, बन्दी को जब वह विभाजित करने वाली दीवार पर खड़ा हो, इसकी पपड़ी उतारने से निवारित करने के लिए पर्याप्त आकार का बाहरी दीवार का अ(cid:217)र्धवतीय परिवर्धन होगा। ृ

500. तालों की जांच करना.- (1) जेल या जेल के खंड के लिए उत्तरदायी प्रत्येक मख्यु वार्डर अपराह्न निगरानी के दौरान उसके प्रभार के भीतर वार्डों, कोठरियों या मख्यु (cid:217)वारों को सरक्षित करने के लिए उपयोग किये गये समस्त तालों की यह सनिश्चिु त करने के लिए कि वे अच्छी चाल हालत में हैं

ू , प्रतिदिन जांच करेगा।

(2) कोई भी खराब ताला तरंत जेलर के पास लाया जाएगा।

(3) लीवर वाले तालों में वनस्पति तेल नहीं देना चाहिए, इससे लीवर एक साथ चिपक जाता हैं और इस प्रकार ताला खलना आसान हो जाता है। ु

(4) वार्डों, कोठरियों, गोदामों या किसी अन्य स्थान, जिनकी सरक्षा सनिश्चिु ु त की जानी आवश्यक है, की चाबियां, सि(cid:217)धदोष अधिकारी या किन्हीं बन्दियों के हाथों में नहीं दी जायेंगी।

(5) यदि सि(cid:217)धदोष अधिकारी दिन के समय के दौरान उनके प्रभार में अस्थायी रूप से औजार या सामग्री बंद करने के लिए सामान्य वियोज्य तालों और चाबियों को रखना अनज्ञात किये जाते हैं , तो बंद करने से पर्व उनसे चाबियां ली जायेंगी। ू242 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (6) प्रत्येक सप्ताह में, सहायक जेलर, उनके वार्डों या कोठरियों के प्रभारी और मख्यु वार्डर समस्त जालियों, जेल के तालों की जांच करवायेंगे और एक निरीक्षण रिपोर्ट जेलर को प्रस्तुत की जायेगी जो इसे अपनी आदेश पस्तु क में अभिलिखित करेगा।

501. ठे के दारों और कर्मकारों को पहचानपत्रों का जारी किया जाना.- (1) ठे के दार और कर्मकार, जिनका सिविल कार्य के कार्यपालन के लिए प्रवेश करना आवश्यक हो, को कार्य की कालावधि के लिए फोटो पहचानपत्र जारी किये जायेंगे और तलाशी ली जायेगी और कारागार में प्रवेश करने और छोड़ने के समय ऐसे पहचानपत्रों की जांच की जायेगी।

(2) कारागार भवन की मरम्मत के लिए उत्तरदायी लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी संगठन और भवन सन्निर्माण संगठन के अभियन्ताओं को, उनके कार्य निष्पादन के लिए यथा अपेक्षित दिन के समय के दौरान कारागार का दौरा करना अनज्ञात किया जायेगा। ु

502. अतिरिक्त सरक्षा अध्यु

ुपाय.- कारागार कार्मिक (cid:217)वारा प्रत्येक कारागार की सरक्षा ु सनिश्चिु त करने के लिए निम्नलिखित अतिरिक्त सरक्षा अध्यु

ुपाय क्रियान्वित किये जायेंगे, अर्थात ्:-

(क)समस्त वार्डों या कोठरियों की साप्ताहिक तलाशियां;

;

(ख) कारागार परिसर और भवनों की दैनिक सरक्षा जांच और निरीक्षणु (ग) कारागार भवन के भीतर और कारागार परिसरों में अच्छी सरक्षा प्रकाश ु

व्यवस्था;

(घ) भीतर आने वाले और बाहर जाने वाले बन्दियों, वस्तुओं और वाहनों की संपर्ण ू तलाशी की जाएगी और अभिलेख रखा जाएगा। वस्तुओं और व्यक्तियों का गेट रजिस्टर प्रत्येक कारागार में रखा जायेगा;

(ङ) रात्रि को नियमित आधार पर समस्त वार्डों और कोठरियों की आकस्मिक तलाशी;

(च) बन्दी कर्मचारिवन्दृ को सचेत करने के लिए बेतार संचार, इंटरकॉम, डोर फ्रे म मेटल डिटेक्टर, हाथ से पकड़ने वाले मेटल डिटेक्टर, गहन तलाशी मेटल डिटेक्टर, नॉन-लीनियर जंक्शन डिटेक्टर (मोबाइल फोन, वि(cid:217)यत उपस्कु र का पता लगाने के लिए) साइरनों का उपयोग;

(छ)बन्दियों की डाक की जांच करने और मलाकातों पर निगरानी रखने के लिए प्रभावी प्रणाली;

(ज)कारागार के भीतर सचना संगहीत करने के लिए आसचना प्रणाली बनाए रखना;

(झ) कारागार के भीतर और बाहर निगरानी करने के लिए परिधि पर सर्चलाइटों, दरबीनोंू , नाईट विजन उपस्कर के साथ निगरानी टावर लगाया जाना;

(ञ) निगरानी टावरों और के न्द्रीय टावरों का आकस्मिक निरीक्षण; और

(ट) कारागार आयधागार पर सरक्षा व्यु

ु वस्था का नियमित निर्धारण।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 243

अध्याय 20

कोठरियों में बन्दियों का उपचार

503. कोठरियों का उपयोग.- (1) कोठरियां,-

(क) भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 37 और 74 के अधीन एकांत परिरोध कार्यान्वित करने;

(ख) कारागार अधिनियम, 1894 (1894 की के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) की

् -बंद धारा 46 खंड (8) और (10) के अधीन बन्दियों के पथक और कोठरीृ

परिरोध;

(ग) नियम के अनसार आभ्याु सिक अपराधियों के पथक्कृ रण; (घ) संस्वीकति करने वाले विचाराधीन बन्दिृ यों के पथक्कृ रण; (ङ) अवरोध के प्रयोजनों;

(च) पागलों के चिकित्सीय संप्रेक्षण;

(छ) आंत्र शिकायतों या अन्य बीमारी से पीड़ ◌ित होना अनमितु , या हानिकारक पदार्थों के उपयोग (cid:217)वारा रुग्णता या व्रणों का कारण बन रहे, या जो स्पर्शजन्य बीमारियों से पीड़ ◌ित हैं, उन बन्दियों के चिकित्सीय संप्रेक्षण और पथक्कृ रण;

ु के लिए सि(cid:217)धदोष कै दियों के परिरोध;

(ज) मत्यृ (झ) संगरोध; और

(ञ) बन्दियों के पथक्कृ रण

के लिए उपयोग की जा सकें गी।

(2) प्रत्येक कोठरी को पेय जल सविधायें उपलब्धु करवायी जायेंगी।

(3) कोठरियों की चाबियां दिन और रात्रि दोनों पर प्रभारी वार्डर (cid:217)वारा पहनी गयी चैन या कड़ी से जड़ी होंगीु , ताकि वे रुग्णता या आत्महत्या का प्रयत्न किये जाने के मामले में हमेशा तरंत उपलब्धु हों।

(4) कोठरियों की चाबियां कभी भी सि(cid:217)धदोषों को न्यस्त नहीं की जायेंगी और उत्तरदायी मख्यु वार्डर (cid:217)वारा प्रत्येक कोठरी के तालों का प्रतिदिन परीक्षण किया जायेगा।

(5) कोठरी में परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी, सदैव, एक वार्डर के तत्काल प्रभार के अधीन होगा, यदि आवश्यक हो, तो दिन के दौरान, विशेष रूप से चयनित सि(cid:217)धदोष अधिकारी (cid:217)वारा उसकी सहायता की जायेगी।

(6) दिन और रात दोनों में गार्ड इस प्रकार पदस्थापित और व्यवस्थित किये जायेंगे कि कोठरियों में समस्त बन्दी समस्त समय जेल अधिकारी के साथ संपर्क रखेंगे।

(7) इस प्रकार परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी का, दिन और रात के दौरान प्रत्येक दो घंटों में एक बार मख्यु वार्डर (cid:217)वारा दौरा किया जाएगा।

244 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(8) भारमोचक और भारमोचित मख्यु वार्डर और वार्डर यह देखने के लिए कि कोठरियों में सही संख्या परिरु(cid:217)ध है और कि सब ठीक है गार्ड के प्रत्येक परिवर्तन पर उनका दौरा साथ- साथ करेंगे।

504. कोठरियों में बन्दियों का उपचार.- (1) बन्दियों को आत्महत्या कारित करने या स्वयं को क्षति पहंचाने से निवारित करने के लिए कोठरियों में परिरु(cid:217)ध समस्त बन्दियों पर कड़ी निगरानी रखी जायेगी।

(2) प्रत्येक मानसिक बीमार या संदिग्ध मानसिक बीमार बन्दी, जिन पर संदेह है कि उनकी प्रवत्ति आत्मृ हत्या करने के प्रयत्न करने की है, कोठरियों में चिकित्सीय संप्रेक्षण के अधीन दिन और रात दोनों में सावधानीपर्वक निगरानी की जायेगी। ू

(3) दिन के दौरान, विशेष रूप से चयनित सि(cid:217)धदोष अधिकारी इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक तीन पाश्र्वस्थ कोठरियों के लिए अधिकतम एक सि(cid:217)धदोष अधिकारी के अनपात में भेजे जा ु

सकें गे।

(4) ऐसे सि(cid:217)धदोष अधिकारी प्रभारी वार्डर के तत्काल आदेशों के अधीन रखे जायेंगे और उन्हें उनके प्रभारों के शील और संभावित प्रवृ त्तियों के विषय में अनदेश दिये जायेंगे और उनके ु

संप्रेक्षण के अधीन बन्दियों (cid:217)वारा प्रदर्शित संदिग्ध प्रकति के किसी लक्षण की प्रभारी वार्डर को तत्काल सचना देने के लिए चेतावनी दी जायेगी और वे कोठरियों के बाहर रखे जायेंगे।

(5) चिकित्सीय संप्रेक्षण के लिए कोठरी को भेजे गये बन्दी का (cid:212)यटी पर उपस्थित वार्डर ू

(cid:217)वारा बारंबार दौरा किया जाएगा, जो चिकित्सा अधिकारी को किसी परिवर्तन, जो बन्दी की दशा में हो सकता है, की सचना भेजेगा और उस समय के दौरान जब बन्दी संप्रेक्षण के अधीन है, वह ऐसा भोजन प्राप्त करेगा जैसा चिकित्सा अधिकारी आवश्यक समझे।

(6) रुग्णता के मामले में, गार्ड (cid:217)वारा संतरी से संतरी के माध्यम से गजरते हये (cid:212)यटी पर ु

उपस्थित मख्यु वार्डर को तत्काल सचना दी जायेगी। ू

(7) मख्यु वार्डर तत्काल मामले की रिपोर्ट चिकित्सा अधिकारी को करेगा, जो कोठरी का दौरा करेगा, और यदि आवश्यक हो, बन्दी को अस्पताल के लिए हटायेगा, और तत्काल अधीक्षक और जेलर को सचित करेगा। ू

ु के लिए सि(cid:217)धदोष महिला 505. एक कोठरी में दो बन्दियों का प्रतिषेध.- (1) मत्यृ

बन्दी के मामले में के सिवाय, किन्हीं भी परिस्थितियों में एक कोठरी में दो बन्दी परिरु(cid:217)ध नहीं किये जायेंगे।

(2) यदि सि(cid:217)धदोष कै दी परुष बन्दिु यों या गंभीर मानसिक बीमार बन्दी की सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा निगरानी रखी जानी हो, तो वे कोठरी के कसे हये दरवाजे के बाहर रखे जायेंगे।

(3) जब आवश्यक हो सफाईकर्मी, रसोईये, और पानी वाले वार्डर के साथ कोठरियों में प्रवेश कर सकें गे।

(4) भोजन कारागार रसोईयों (cid:217)वारा जेल अधिकारी के अधीक्षण के अधीन पकाया और ले जाया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 245

506. अधीक्षक (cid:217)वारा दौरा.- (1) कोठरी में चौबीस घंटे से अधिक के लिए परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी का अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी या भेषजज्ञ (cid:217)वारा भी प्रतिदिन दौरा किया जाएगा।

(2) जेलर प्रतिदिन कोठरियों का दौरा करेगा और उनमें परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी को देखेगा।

्, कोठरी या न्यायिक एकांत परिरोध के लिए किसी भी (3) कोठरियों का प्रभारी वार्डर पथकृ

बन्दी को अधीक्षक के लिखित आदेश के बिना प्राप्त नहीं करेगा, जो सामान्यत: बन्दी के वत्त ृ पत्र पर दिया जाएगा और जब किसी निरीक्षण करने वाले अधिकारी या आगंतक (cid:217)वारा मांगा ु

जाये तो प्रस्तुत किया जायेगा।

(4) वह अधीक्षक या जेलर से आदेश के बिना, नियम के अधीन दिन या रात (cid:217)वारा पथक्करण के लिए किसी भी बन्दी को प्राप्त नहीं करेगा।

(5) कोई भी व्यक्ति तब तक न्यायिक पथक परिरोध में

् नहीं रखा जायेगा जब तक कि उसे चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा ऐसे परिरोध के लिए योग्य प्रमाणित नहीं कर दिया गया है।

507. टिकट का निलंबन.- आदेशित परिरोध की कालावधि और वह तारीख जिससे ऐसा परिरोध प्रारंभ होता है दर्शित करने वाली टिकट कोठरी में परिरोध भोग रहे प्रत्येक बन्दी की या कोठरी यार्ड दरवाजे की टिकट निलंबित कर दी जाएगी।

508. कोठरी के लिए रजिस्टर का रखा जाना.- (1) वह तारीख जिस पर प्रत्येक बन्दी प्रविष्ट किया गया और उन्मोचित किया जाता है, आदेशित परिरोध की प्रकति और प्रतिदिन ृ

किये गये कार्य की मात्रा दर्शाते हएु , कोठरी के प्रभारी वार्डर (cid:217)वारा जन-भाषा में एक रजिस्टर रखा जाएगा।

(2) जेलर यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में और अपनी रिपोर्ट पस्तिु का में यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में समस्त बन्दियों के नाम भी अभिलिखित करेगा जो रात्रि में कोठरियों में सोये थे।

509. रजिस्टर के रखे जाने की रीति.- जेलों की कोठरियों में परिरु(cid:217)ध बन्दियों के संबंध में निम्नलिखित रजिस्टर रखा जाएगा, अर्थात ् :-

(क) उन समस्त बन्दियों के नाम जो एकांत या पथक कोठरियों में या तो ृ

दिन या रात्रि को बंद किये गये थे, प्ररूप (cid:217)वारा अपेक्षित अन्य ब्यौरों सहित इस रजिस्टर में जन-भाषा में यथा विनिर्दिष्ट प्ररूप में प्रविष्ट किये जायेंगे और रजिस्टर जेलर (cid:217)वारा आ(cid:217)यक्षरित किया जायेगा और अधीक्षक को दिखाया जायेगा जब वह कोठरियों का दौरा करता है।

् , जिसका (ख) प्रत्येक कोठरी के लिए रजिस्टर का पष्ठृ पथक रखा जायेगा

संख्यांक शीर्ष पर प्रविष्ट किया जाएगा।

(ग) कोठरी में रखे गये प्रत्येक बन्दी का नाम उसके कोठरी को अधिभोग के प्रारंभ करने के समय उस पष्ठृ में प्रविष्ट किया जाएगा।

(घ) यदि दिन और रात्रि में कोठरी का अधिभोग भिन्न बन्दी करते हैं, तो पष्ठृ का आधा भाग उन बन्दियों के लिए उपयोग किया जा सके गा जो दिन में अंदर हैं और आधा भाग रात्रि अधिभोग करने वालों के लिए।

246 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ङ) प्रत्येक बन्दी का नाम उस कालावधि के दौरान जिसमें वह कोठरी का अधिभोग करता है, के वल एक बार प्रविष्ट किया जाना आवश्यक है, कित प्रत्ये

ु क परिवर्तन पर नयी प्रविष्टी की जायेगी।

510. कोठरी में परिरोध से पर्व बन्दिू यों की तलाशी.- कोठरी में रखने से पर्व

ू , प्रत्येक बन्दी की बहत सावधानीपर्वक तलाशी ली जाएगी और निकल भागने , स्वयं को क्षति या आत्महत्या को सकर बनाने वाले समस्तु उपकरण और साधित्र ले लिए जायेंगे और उसमें के प्रत्येक बन्दी की हवालात समय में प्रतिदिन, और यदि आवश्यक हो प्राय:, सावधानीपर्वक ू तलाशी ली जायेगी।

511. बिछौने की सफाई.- (1) कोठरियों में बन्दियों का बिछौना, उन बन्दियों के सिवाय जो रुग्णता या विक्षिप्तता के लिए संप्रेक्षण के अधीन हैं, दिन के दौरान कोठरी से हटा लिया जायेगा, और जब मौसम अनज्ञा देता है धप और हवा में खला रखा जायेगा।

ु (2) कोठरी के अंत:वासी को समस्त समय, इसे निष्ठा से स्वच्छ रखने को विवश किया जाएगा।

512. कार्य न्यस्त किया जाना.- कोठरियों में परिरु(cid:217)ध श्रम करने वाले बन्दियों को उनके सामथ्र्य के अनसार उपयक्तु

ु कार्य न्यस्त किया जाएगा।

513. परिरोध में मौन.- कोठरियों में परिरोध में समस्त बन्दियों के मध्य पर्ण मौन ू

बनाए रखा जाना चाहिए।

अध्याय 21

न्यायिक एकांत परिरोध

514. एकांत परिरोध की कालावधि और उसका निष्पादन.- (1) एकांत परिरोध के लिए कालावधि ऐसी होगी जैसी भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 73 में विनिर्दिष्ट है, और निष्पादन ऐसी रीति में किया जाएगा जैसा भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 74 में विनिर्दिष्ट है।

(2) यदि किसी वारंट में एकांत परिरोध संबंधी आदेश अंतर्विष्ट है, जो भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 73 या 74 में उपबंधों के प्रतिकल ू है, तो मामला कारागार निदेशालय के प्रमख को निर्दिष्टु किया जायेगा।

515. रजिस्टर में की जाने वाली प्रविष्टि.- (1) उन बन्दियों के नाम जो एकांत परिरोध के लिए दंडादिष्ट किये गये हैं जेलर (cid:217)वारा रजिस्टर में सम्यक रूप से प्रविष्ट् किये जायेंगे और प्रविष्टियां अधीक्षक (cid:217)वारा सत्यापित की जायेंगी और यह निश्चित करने के लिए क ◌ि प्रत्येक बन्दी, जब तक कि किसी पर्याप्त कारण के लिए वह कोठरी में नहीं रखा जा सकता है, सम्यक अनक्रम में अपना परिरोध भोग रहा है , यह रजिस्टर आवधिक रूप से प्रत्येक मास के पहले दिन परीक्षित किया जायेगा।

(2) किसी भी बन्दी को एकांत परिरोध में नहीं रखा जायेगा जब तक कि चिकि त्सा अधिकारी प्रमाणित नहीं करता है कि वह इसे भोगने के योग्य है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 247

(3) एकांत परिरोध के लिए दंडादिष्ट बन्दी सामान्यत: चार दलों में विभाजित किये जायेंगे, प्रत्येक दल एक समय में एक सप्ताह के लिए कोठरियों में रखा जाना चाहिए, जिससे कि कोठरियों का पर्णतम मात्रा में उपयोग किया जा सके और उसी समय भारतीय दंड संहिता , 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 73 और 74 की अपेक्षाओं का अनपालन किया जायेगा। ु

(4) प्रत्येक मास के पहले, आठवें, पन्द्रहवें और बाईसवें दिन को उन दिनों के रूप में नियत करना सविधाजनक होगा जिस पर कोई समह एकांत परिरोध के लिये सपर्द किये जायेंगे।

ु (5) वह बन्दी, जो सामान्यत: परिरू(cid:217)ध किये जाने के समय अयोग्य है, यदि भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 74 (cid:217)वारा अधिरोपित शर्तें, इसकी अनज्ञा देती हैं

ु , पश्चात्वर्ती तारीख पर कोठरी में रखा जायेगा ।

(6) एकांत परिरोध के दंडादेश का निष्पादन, अपील के लंबित होने के लेखे स्थगित किया जाना आवश्यक नहीं है।

(7) एकांत परिरोध भोग रहे प्रत्येक बन्दी का चिकित्सा अधिकारी या चिकित्सा अधीनस्थ और जेलर (cid:217)वारा प्रतिदिन दौरा किया जायेगा।

(8) यदि न्यायिक एकांत परिरोध की किसी कालावधि से पर्व

ू , ऐसे परिरोध को भोगने के लिए बन्दी चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा अयोग्य घोषित किया जाता है या यदि न्यायिक एकांत परिरोध की किसी कालावधि के दौरान, चिकित्सा अधिकारी के आदेशों के अधीन, मस्तिष्क या शरीर को क्षति के आधार पर बन्दी को हटाना आवश्यक हो जाता है, तो तथ्य की रिपोर्ट कारागार निदेशालय के प्रमख और उस न्या

ु यालय को की जायेगी जिसके (cid:217)वारा दंडादेश पारित किया गया गया था और रजिस्टर में अभिलिखित की जायेगी।

(9) यदि न्यायिक एकांत परिरोध के लिए दंडादिष्ट कोई बन्दी ऐसे परिरोध को भोगने के लिए चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया जाता है, तो मामला उस न्यायालय को रिपोर्ट किया जाएगा जिसने दंडादेश पारित किया था और एकांत परिरोध के दंडादेश को कार्यान्वित नहीं किया जायेगा।

516. दो दंडादेशों को भोगने की रीति.- यदि कोई बन्दी दो या अधिक पथक वारंटों के ृ

अधीन दंडादिष्ट है, तो अधिनिर्णीत एकांत परिरोध की कोई कालावधि के वल उस दंडादेश के दौरान प्रभावी की जा सके गा जिसका यह निष्पादन किया जाने वाले का भाग है।

517. एकांत परिरोध के निष्पादन का प्रमाणपत्र.- न्यायिक एकांत परिरोध अधिनिर्णीत प्रत्येक बन्दी के दंडादेश की समाप्ति पर, अधीक्षक (cid:217)वारा वारंट पर पष्ठां

ृ कन, दंडादेश के निष्पादन को सत्यापित करते हये

ु , बन्दी (cid:217)वारा भोगे गये न्यायिक एकांत परिरोध की कल ु कालावधि सप्ताहों में कथित करेगा और यदि ऐसे दंडादेश का कोई भाग सम्यक रूप से ्

निष्पादित नहीं किया गया है, तो कारण स्पष्ट किया जाएगा।

518. पथक या कोठरी परिरोध का दंड अधिनिर्णीत करने के लिए प्रतिषेध .- कोई भी बन्दी जो न्यायिक एकांत परिरोध की कालावधि भोग चका है

ु , ऐसे परिरोध की समाप्ति के248 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) पश्चात उसके (cid:217)वारा भोगे गये न्या यिक एकांत परिरोध के बराबर कालावधि के भीतर जेल अपराध के लिए पथक या कोठरी परिरोध से दंडित नहीं किया जाएगा।

519. कोठरियों और एकांत परिरोध में बन्दियों के लिए समान नियम.- कोठरियों में बन्दियों के व्यवहार से संबंधित समस्त नियम न्यायिक एकांत परिरोध भोग रहे बन्द ◌ियों को भी लाग होंगे। ू

520. महिला बन्दियों के लिए विशेष व्यवस्था.- (1) जब महिला अहाते में सैलें दखलकत होंृ , तो व्यवस्थायें की जायेंगी कि रात्रि को महिला वार्डर और दिन के समय में ऐसा ही अधिकारी या महिला सि(cid:217)धदोष अधिकारी, सदैव कोठरी के अधिभोगियों की सनवाई ु के लिए होंगे।

(2) कोठरियों की चाबियों सदैव महिला वार्डर के हाथ में और अभिरक्षा में होंगी।

(3) यदि दो महिला वार्डर नहीं हैं ताकि एक समस्त दिन और रात्रि कोठरियों की चाबियों के साथ सदैव महिला अहाते में उपस्थ ◌ित रहे, महिला बन्दियों की कोठरियों में निरंतर परिरोध अनज्ञात नहीं किया जा सके गा , कोई भी महिला किसी ऐसे समय पर कोठरी में बंद नहीं की जायेगी जिसके दौरान महिला वार्डर उपस्थित नहीं है।

(4) जैसा कि किसी जेल में, जिसके पास दो महिला वार्डर नहीं है, एकांत परिरोध के न्यायिक दंडादेश के निष्पादन का प्रतिषेध है जब कभी महिला बन्दी इस प्रकार न्यायिक रूप से दंडादिष्ट की जाती है, तो उसकी वर्णन तालिका किसी ऐसी जेल को अंतरण के लिए जिसके लिए आवश्यक स्थापन मंजर कियाू गया है, कारागार निदेशालय के प्रमख को प्रस्तु

ुत की जायेगी।

अध्याय 22

बाहरी दनिया के साथ संपर्क ु (मलाकात और पत्र व्यु वहार)

521. पत्र-व्यवहार के लिए यक्तिु यक्तु सविधायें

ु .- (1) प्रत्येक नए सि(cid:217)धदोष बन्दी को अपील की तैयारी या जमानत लेने की दृष्टि से विचार करने के लिए उसके नातेदारों या मित्रों के साथ मिलने या पत्र-व्यवहार के लिए यक्तियक्तु ु सविधायें अनज्ञात की जायेंगी और उसे उसकी संपत्ति या अन्य कटंब मामलों के प्रबंध के लिए व्यवस्था करने के लिए समर्थ बनाने के लिए, यदि अधीक्षक इसे आवश्यक समझता है, तो पाक्षिक एक बार या दो बार या अक्सर, उसके मित्रों से मलाकात करना या पत्र लिखना भी अनज्ञात किया जायेगा।

ु

तिक्रम या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अध्याय 8 के अधीन (2) जर्माने के संदाय में व्यु

प्रतिभति प्राप्तू करने लिए सपर्द किये गये प्रत्ये

ु क बन्दी को जर्माने के संदाय के लिए या ु

प्रतिभति प्रस्तू

ुत करने के लिए व्यवस्था करने के प्रयोजन के लिए उसके नातेदारों या मित्रों के साथ यक्तिु यक्तु समय पर पत्र (cid:217)वारा संपर्क करना और मलाकातें करना अनज्ञात कि◌ेया ु

जायेगा।

ु के दंडादेश के अधीन प्रत्येक बन्दी को उसके नातेदारों, मित्रों और विधिक (3) मत्यृ

सलाहकारों के साथ ऐसी मलाकातों और अन्यु संपर्कों को अनज्ञात किया जायेगा जैसा ु

अधीक्षक यक्तिु यक्तु समझता है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 249

टिप्पण- 1: बन्दी अधिनियम, 1894 की धारा 40, अपेक्षा करती है कि व्यक्तियों, जिनके साथ सिविल या विचाराधीन बन्दी संपर्क करने की ईच्छा करते हैं, के जेल में प्रवेश के लिए सम्यक उपबंध बनाये जायेंगे , ध्यान रखा जायेगा कि जहां तक न्याय के हितों से संगत हो, विचाराधीन बन्दी, किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थ ◌िति के बिना अपने विधिक सलाहकार से मिल सकें गे।

टिप्पण- 2: धारा 41 के अधीन, जेलर बन्दी के किसी आगंतक के नाम और पते की मांग ु

कर सके गा, और किसी आगंतक की तलाशी ले सके गा , यदि उस पर संदेह का कोई आधार है। अपनी कार्रवाई के आधारों को ऐसे अभिलेख में प्रविष्ट करते

गंतक को प्रवेश से इंकार कर ु

हये जैसा सरकार निदेश दे जेलर किसी ऐसे आु

सके गा जो स्वयं को तलाशी लिये जाने से इंकार करता है,।

टिप्पण- 3: राजनैतिक बन्दियों के साथ मलाकातें इस अध्या

ु य में अंतर्विष्ट नियमों (cid:217)वारा विनियमित नहीं होती हैं कित उनके व्यं ु वहार के लिए सरकार (cid:217)वारा जारी किये ् पनीय अनदेशों से होती है। ु

गये पथक गोृ

522. मलाकात करने वाले व्यु

क्तियों की सची का प्रस्तू

ुत किया जाना.- (1) प्रत्येक बन्दी को प्रवेश पर, उन व्यक्तियों की सची प्रस्तू

ुत करेगा जो उससे मलाकात करने वाले हैं ु

और मलाकात ऐसे कटंब सदस्यों

ु , नातेदारों और मित्रों तक निर्बंधित होगी।

(2) मलाकातों पर बातचीत निजी और घरेल मामलों तक सीमित होगी और कारागार प्रशासन और अनशासन और अन्यु बन्दियों या राजनीति का कोई संदर्भ नहीं होगा।

(3) उन व्यक्तियों की संख्या जो एक समय पर बन्दी से मलाकात कर सकें गे सामान्यु त:

तीन तक सीमित होगी।

523. आगंतकों की तलाशीु .- (1) जेलर बन्दी के किसी आगंतक की पहचानु , नाम और पता मांग कर सके गा, और यदि उसके पास संदेह करने के लिए पर्याप्त आधार है कि कोई आगंतक बन्दीु के लिए प्रतिषि(cid:217)ध वस्तुएं ले जा रहा है तो वह जेल में प्रवेश करना या बन्दी से मिलना अनज्ञात किये जाने से पर्व आगंतक की तलाशी लेगा या तलाशी करवायेगा लेकिन तलाशी किसी बन्दी या किसी अन्य आगंतक की उपस्थु ◌िति में नहीं ली जायेगी।

(2) यदि आगंतक महिला है

ु , तो तलाशी के वल महिला कर्मचारिवन्द (cid:217)वारा ली जायेगी। ृ (3) ऐसे आगंतक के मामले में

ु जो तलाशी दिये जाने से इंकार करता है जेलर बन्दी के साथ किसी मलाकात को अनज्ञात करने से इंकार कर सके गा।

(4) किसी ऐसे मामले में जब आगंतक की तलाशी ली जाती है या विचाराधीन बन्दी के साथ मलाकात से इंकार किया जाता है , जेलर अपनी रिपोर्ट पस्तिु का में अपनी कार्रवाई के लिए परिस्थितियां और आधार तत्काल अंकित करेगा, और तत्काल अपनी रिपोर्ट अधीक्षक को प्रस्तुत करेगा।

524. सदाचरण पर समाश्रित विशेषाधिकार.- (1) समस्त पत्रों की अंतर्वस्तुएं निजी मामलों तक सीमित होंगी।

250 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) बन्दियों (cid:217)वारा विदेशों में उनके नातेदारों को संबोधित पत्रों के लिए उनकी खच पर डाकर् े

महसल स्टां

ू प क्रय करना अनज्ञात किया जा सके गा। ु

(3) यदि बन्दियों के पास कोई जमा नकद नहीं है, तो योग्य मामलों में और यक्तिु यक्तु अंतरालों पर, यह अधीक्षक के विवेकाधिकार पर, सरकारी खच पर प्रदत्त किये जायें

ेर् गे।

(4) बन्दी ऐसे विशेषा◌ाधिकारों का दरुपयोग करना अनज्ञात नहीं किये जायेंगे।

ु

(5) मास में अनज्ञात पत्रों की संख्या

ु के अतिरिक्त, यदि वे ऐसी वांछा करते हैं, तो उनके मित्रों या नातेदारों को एक कारागार से दसरे को अंतरण की जानकारी देने के लिए बन्दि यें को विशेष पत्र अनज्ञात किया जाएगा। ु

(6) यह उन्हें अनज्ञात पत्रों के अतिरिक्तु होगा।

(7) भतपर्व बन्दी और आभ्या सिक बन्दी, जो कारागार में दाखिल किये गये उनके मित्रों से मिलने के लिए आवेदन करते हैं, को अधीक्षक (cid:217)वारा ऐसी मलाकात अनज्ञात नहीं की ु

विक कारण वि(cid:217)यमान न हो।

जायेगी, जब तक कि ऐसी मलाकात के लिए वास्तु

525. लघत्तर अंतरालों पर विशेषाधिकार मंजर करने का अधीक्षक का विवेकाधिकार .- (1) यदि अधीक्षक समझता है कि ऐसी छट के लिए विशेष या आपात आधार वि(cid:217)यमान हैं वह अपने विवेकाधिकार पर, बन्दी के अवचारी होते हए भी उपबंधित से लघत्तर अंतरालों पर मलाकातें या पत्रों का प्रेषण और प्राप्ति अनज्ञात कर सके गा।

ु

ु, या जब बन्दी का मित्र या (2) बन्दी के गंभीर बीमार होने, या निकट नातेदार की मत्यृ

नातेदार उससे मिलने के लिए दर से आये हों और इससे उनको असम्यू क कठिनाई ् होगी यदि उन्हें मलाकात से इंकार किया जाता है या यदि बन्दी छोड़े जाने के निकट हो और रोजगार सु निश्चित करने की वांछा करता है, या किसी अन्य पर्याप्त कारण की दशा में यह किया जा सके गा।

(3) महत्वपर्ण मामले

ु अधीक्षक को किसी भी समय संसचित की ू

ू , जैसे कि नातेदार की मत्यृ

जा सके गी जो, यदि वह समझता है, तो बन्दी को इसके बारे में शीघ्र सचित करेगा। ू

526. बन्दियों का मख्ताु रनामा हस्ताक्षर किया जाना अनज्ञात करनाु .- प्रत्येक सि(cid:217)धदोष बन्दी, अधीक्षक के विवेकाधिकार पर, उसकी संपत्तियों से संबंधित मख्ताु रनामा, या अन्य कथनों या हस्तांतरण-पत्र हस्ताक्षरित करना और अनप्रमाणित करना अनज्ञात किया जाएगा और ऐसा प्रत्येक संव्यवहार मलाकात के रूप में समझा जाएगा।

527. उसी कारागार में या कारागार के बाहर अस्पतालों में बन्दियों के साथ मलाकातु .- उपर्यक्त नियमों के उपबं

ु धों के अध्यधीन रहते हएु , अधीक्षक परुष और महिला ु

बन्दियों, जो विवाह या रक्त (cid:217)वारा एक दसरे से संबंधित हैं

ू , जब वे उसी कारागार में निरु(cid:217)ध किये गये हों, के मध्य भी मलाकातें अनज्ञात करेगा। ु

ु

528. अस्पताल में अन्य बन्दी से मिलने की सविधाु .- अधीक्षक सि(cid:217)धदोष कै दी से भिन्न, बन्दी को निम्नलिखित शर्तों के अध्यधीन रहते हये

ु कारागार से बाहर अस्पताल में मिलना अनज्ञात करेगाु , अर्थात ्:-

(क) बन्दी नातेदार अस्पताल में है और गंभीर रूप से बीमार है;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 251

(ख) अस्पताल उसी नगर या शहर में स्थित है;

(ग) बन्दी यथोचित एस्कॉर्ट, जैसा अधीक्षक विनिश्चित करे, के अधीन भेजा गया है; और

(घ) बन्दी अस्पताल में बन्दी से मिलने के तत्काल पश्चात कारागार को लौटेगा :

परन्तु इस नियम में अंतर्विष्ट कछ भी निवारक निरोध विधियों के अधीन निरु(cid:217)ध व्यक्तियों या उन बन्दियों पर जो भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 224, 376, 392 से 402, 467, 471, 472, 474, 489, 489क, 489ख और 489घ के अधीन और विशेष अधिनियमों के अधीन आभ्यासिक रूप से दंडनीय अपराध कारित करते हैं जो और भारतीय दंड संहिता, 1860 की ऊपर उल्लिखित धाराओं के अधीन दोषसि(cid:217)ध हैं या किसी विशेष अधिनियम, जो सरकार समय-समय पर विनिश्चित कर सके गी के अधीन निरु(cid:217)ध या दोषसि(cid:217)ध व्यक्तियों पर लाग नहीं होगा। ू

529. मलाकातों के लिए अधीक्षक की अनज्ञा अपेक्षित होना

ु - किसी भी बन्दी को अधीक्षक की अनज्ञा के बिना मलाकात अनज्ञात ु

ु नहीं की जायेगी और ऐसी अनज्ञा लिखित में ु

अभिलिखित की जायेगी।

530. मलाकात के लिए आवेदन की रीतु

◌ि.- (1) बन्दियों के साथ मलाकात के लिए ु

आवेदन या तो इलैक्ट्रानिक या मौखिक या लिखित में हो सकें गे।

(2) यदि बन्दी मलाकात का हकदार नहीं है , तो आवेदेक को तत्काल सूचित किया जाएगा।

531. प्रतीक्षा कक्ष.- आगंतकों को मलाकात के लिए प्रतीक्षा करने के लिए प्रत्ये

ु क कारागार में उपयक्तु प्रतीक्षा कक्ष उपलब्ध करवाये जा सकें गे और उन्हें उनकी बारी की प्रतीक्षा करने के लिए टोकन दिया जा सके गा।

532. कारागार अवकाशों पर मलाकाु त.- (1) रविवार और अन्य राजपत्रित अवकाशों पर सामान्यत: मलाकातें मंजर नहीं की जायेंगी। अधीक्षक तथापि , बहत आपवादिक ु

परिस्थितियों के अधीन, इन दिनों पर भी मलाकातें मंजर कर सके गा। ु

ू

, अधीक्षक (cid:217)वारा (2) रविवार या अवकाशों पर ऐसी मलाकातें मंजर करने के लिए कारणु

मलाकात रजिस्टु र में अभिलिखित किये जायेंगे।

.- (1) अधीक्षक कार्य दिवसों पर बन्दियों के साथ 533. मलाकात के लिए समयु

मलाकात के घंटे सामान्यु त: प्रात: 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और अपराह्न 3:00 बजे से 5:00 बजे तक नियत करेगा।

(2) अधीक्षक की विशेष अनज्ञा के सिवायु , किसी अन्य समय पर मलाकातें अनज्ञात नहीं की ु

जायेंगी।

(3) मलाकात घंटे उपदर्शित करते हए कारागार के बाहर नोटिस चिपकाया जाएगा।

534. मलाकात का स्था

ु न.- (1) प्रत्येक मलाकात इस प्रयोजन के लिए नियक्तु

ु कारागार के विशेष भाग में होगी और यद ◌ि संभव हो तो बन्दियों की सावधानी और सरक्षा ु को सनिश्चित करने के लिए ऐसा स्था

ु न मख्यु दरवाजे पर या के निकट होना चाहिए।

252 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) इस मलाकात कक्ष में इंटरकॉम सविधाओं के साथ फाइबर कांच विभाजक होगा , जिससे कि बन्दी शांतिपर्ण मलाकात कर सकें । ू ु

(3) मलाकात कक्ष घु नाकति में विभाजित किया जाएगा और इसकी दीवारें और सीलिंग ध्वनिरोधी वस्तुएं आच्दित करने वाली होंगी।

535. उस बन्दी के साथ मलाकात जो गंभीर रूप से बीमार है .- (1) यदि कोई बन्दी गंभीर रूप से बीमार है, तो अधीक्षक कारागार अस्पताल में मलाकात की अनज्ञा देगा

ु ।

(2) तथापि, अधीक्षक लिखित में अभिलिखित किये जाने वाले विशेष कारणों से, कारागार के किसी अन्य भाग में मलाकात करने की अनज्ञा दे सके गा।

ु

536. मलाकात के दौरान प्रतिषि(cid:217)ध वस्तु

ुओं को ले जाने का निवारण.- यद ◌ि

क्तियों के मध्य किन्हीं प्रतिषि(cid:217)ध आवश्यक हो, बन्दियों और उनसे मलाकात करने वाले व्यु

वस्तुओं को देने या विनिमय को रोकने के लिए पद या तार की जाली लगाई जाएगी।

ति में होना.- (1) सि(cid:217)धदोष बन्दी 537. मलाकात का कारागार अधिकारी की उपस्थिु

के साथ प्रत्येक मलाकात कारागार अधिकारी की उपस्थिति में होगी , जो ऐसे स्थान पर होगा, जहां से वह देख और सन सके कि बन्दी

ु और उससे मलाकात करने वाले के मध्यु क्या बात हो रही है और वह दोनों पक्षकारों के मध्य एक-दसरे की दी जाने वाली किसी वस्तू

ु को रोके गा।

-जेलर या महिला वार्डर (2) जब महिला बन्दियों से मलाकात हो रही हो तो महिला उपु

उपस्थित होगी।

538. मलाकात का पलिस अधिकारी की उपस्थिति में होना .- (1) आतंकवादी या उग्रवादी, चाहे दंडादेश भोग रहा हो या विचाराधीन बन्दी के रूप में रखा गया हो, या निवारक निरोध विधियों के अधीन बन्दी हो, के साथ प्रत्येक मलाकातु , आसचना अू धिकारी या बन्दी के विरु(cid:217)ध मामले से सपरिचित स्थाु नीय पलिस अधिकारी की उपस्थिति में होगी।

(2) ऐसी मलाकात के दौरान अनभवी कारागार अधिकारी भी उपस्थि त होगा।

(3) ऐसे बन्दी के नातेदार और मित्र, जो उनसे मलाकात करने की वांछा करते हैं , बन्दियों के साथ निवास और नातेदारी के सबत के रूप में संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान या राज्य विधानमंडल के सदस्य से प्रमाणपत्र, या अधिप्रमाणीकत पहचान दस्ता

ृ वेज जैसे कि कटंब ु राशनकार्ड, मतदाता पहचानपत्र, चालन अनज्ञाु , पासपोर्ट या आधार कार्ड प्रस्तुत करेंगे।

539. विदेशी नागरिकों के साथ संपर्क या दौरा.- (1) यदि कोई विदेशी नागरिक कारागार को या विचारण लंबित रहते हए अभिरक्षा को सपर्द किया जाता है या किसी अन्य रीति में निरु(cid:217)ध किया जाता है, तो अधीक्षक तत्काल कारागार निदेशालय के प्रमख को ु

सचित करेगा।ू

(2) बन्दी या निरु(cid:217)ध (cid:217)वारा, दतावास को संबोधित कोई संसचना

ू , असम्यक विलंब के बिना ्

उचित प्रणाली के माध्यम से विदेश मंत्रालय को अग्रेषित की जायेगी।

(3) ऐसी संसचना नियमों के अनसार छानबीन या जांच के अध्य

ु धीन होगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 253

(4) विदेशी नागरिक के आने और जाने वाले पत्रों की विशिष्टियां, यदि आक्षेपणीय पायी जाती हैं, तो जांच की जायेगी और सरकार को भी दी जायेगी।

540. दतावास पदधारियों (cid:217)वारा दौरा करना .- (1) जब कभी दतावास पदधारी बन्दिू यों लिए विधिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए, बन्दी का दौरा करने या मलाकात के लिए अनज्ञा मांगते हैं

ु , तो अधीक्षक दतावास से ऐसे अनरोध ू

को जिला मजिस्ट्रेट को सचित करेगा। ू

(2) के वल सरकार से आदेशों की प्राप्ति पर ही अधीक्षक, दतावास पदधारियों को बन्दी

ू का दौरा करने की अनज्ञा देगा। ु

टिप्पण : कारागार में विदेशी नागरिक से मलाकात के अधिकार से निजी मलाकात अभिप्रेत नहीं है और इसमें बन्दी या निरु(cid:217)ध के रहने के वार्ड या बैरक के निरीक्षण का अधिकार सम्मिलित नहीं है। यह कारागार में मलाकातों से संबंधित सामान्यु विनियमों के भी अध्ययधीन होगा।

541. मलाकात का समापनु

.- (1) मलाकातु का किसी भी समय समापन किया जा सके गा यदि उपस्थित कारागार अधिकारी समझता है कि इसके समापन के लिए पर्याप्त कारण है।

, कारागार में उपस्थित वरिष्ठ (2) ऐसे प्रत्येक मामले में, मलाकात समाप्त करने के कारणु

कारागार अधिकारी को तत्काल रिपोर्ट किये जायेंगे।

542. मुलाकात की कालावधि.- सामान्यत:, मलाकात के लिए अनज्ञात समय बीस मिनट से अधिक नहीं होगा जो अधीक्षक (cid:217)वारा उसके विवेकाधिकार पर विस्तारित किया जा सके गा।

543. मलाकात से पर्व और पश्चा

् क

ू त तलाशी् .- मलाकात से पर्व और पश्चा

ू त प्रत्ये बन्दी की सावधानीपर्वकू तलाशी ली जायेगी।

544. मलाकात से इंकार करने की शक्तियां .- (1) अधीक्षक किसी मलाकातु , जिसका इन नियमों के अधीन बन्दी सामान्यत: हकदार होगा, को अनज्ञात करने से इंकार कर ु

सके गा, यदि उसकी राय में विशिष्ट व्यक्ति की बन्दी से मलाकात अनज्ञात करना लोकहित

पर्याप्त कारण है।

में नहीं है, या यदि, मलाकात से इंकार करने का कोई अन्यु

(2) ऐसे प्रत्येक मामले में, अधीक्षक मलाकात रजिस्टु र में ऐसे इंकार के उसके कारण अभिलिखित करेगा।

(3) प्रैस/पत्रकारों/संचार माध्यमों को बन्दियों के साथ मलाकात करना अनज्ञात नहीं किु

ु या जाना चाहिए।

545. विशेषाधिकार का प्रत्याहरण.- मलाकात पर विचारु -विमर्श किये गये किसी मामले का प्रकाशन चाहे किसी भी रूप में हों विशेषाधिकार के प्रत्याहरण के लिए पर्याप्त आधार समझा जाएगा, यदि अधीक्षक के पास विश्वास करने का कारण है कि ऐसा प्रकाशन बन्दी के (cid:217)वारा येन-के न-प्रकारेण किसी कत्यृ या लोप के कारण हआ है।ु254 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 546. उत्तरभावी मलाकात के लिए प्रतिषेधु

.- कारागार निदेशालय का प्रमख किसी ु

व्यक्ति को किसी बन्दी के साथ किन्हीं उत्तरभावी मलाकातों को करने से प्रतिषेध करने के लिए प्राधिकत है

ृ , यदि उसके पास विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति ने मलाकात ु

या जेल के दौरे के परिणामस्वरूप कोई प्रकाशन जारी किया है और समस्त आगंतकों को ु

मलाकात से पर्व इस आदेश की चेतावनी दी जाएगी।

547. पत्रों और उनके निपटान को रोकना.- बन्दियों के पत्रों को रोकने के लिए मानदंड निम्नानसार हैं

ु :-

ु , नातेदारों और निकट मित्रों को ही (क) बन्दियों को के वल उनके कटंब सदस्योंु

पत्र लिखना अनज्ञात किया जाएगा और यदि यह पाया जाता है कि बन्दी अवांछनीय व्यक्तियों के साथ पत्र-व्यवहार कर रहा है या उनसे पत्र प्राप्त कर रहा है, या कोई पत्र-व्यवहार बन्दी के पनर्वास के लिए अहितकार पाया ु

जाता है, तो ऐसे पत्र, आने और जाने वाले दोनों, रोक लिये जायेंगे।

(ख) बन्दियों को प्राप्त किये गये पत्रों की विषय वस्तुओं को प्रकट किये बिना ऐसी कार्रवाई की सचना दी जायेगी ओर यदि आवश्यू क हो, तो उन्हें इस संबंध में चेतावनी भी दी जाएगी।

(ग) बन्दी को आने वाले पत्रों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी।

(घ) बन्दियों को अन्य कारागारों के अंत:वासियों के साथ पत्र-व्यवहार करना अनज्ञात नहीं किया जाएगा कित यदि किसी बन्दी

ं का या की नातेदार दसरे कारागार में है तो उनके कल्या

ू ण के बारे में सचना देते हये उन्हें

ु पत्र भेजना अनज्ञात किया जा सके गा। ु

(ङ) अधीक्षक, यदि वह इसे आवश्यक समझता है को सरक्षा और अनशासन के ु

कारणों के लिए या आपातकालों की कालावधियों के दौरान पत्रों को अनानज्ञात करने का अधिकार होगा। ु

(च) इन नियमों के प्रयोजन के लिए बन्दियों (cid:217)वारा भेजे गये आवेदन, पत्रों के रूप में नहीं समझे जायेंगे।

548. बन्दी को सौंपने से पर्व पत्रों की परीक्षा

ू .- (1) कोई भी पत्र सि(cid:217)धदोष बन्दी को प्रदत्त, या उसके (cid:217)वारा भेजा नहीं जायेगा, जब तक कि इसकी अधीक्षक (cid:217)वारा या जेलर या अधीक्षक के आदेशों के अधीन अन्य अधिकारी (cid:217)वारा परीक्षा नहीं की गई है, कित परिदान ं

या प्रेषण में कोई भी अनावश्यक विलंब होना अनज्ञात नहीं किया जाएगा। ु

(2) यदि पत्र ऐसी भाषा में लिखा जाता है जो अधीक्षक नहीं जानता है तो वह पत्र को अग्रेषित करने से पर्व अनवादक उपाप्तू ु करने की कार्रवाई करेगा।

(3) बीजलेख में लिखा हआ कोई भी पत्र अनज्ञात नहीं किया जाएगा।

ु

(4) अधीक्षक किसी ऐसे पत्र को रोक सकता है जो उसे किसी रूप में अनचित या आक्षेपणीय ु

होना प्रतीत होता है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 255

(5) यदि बन्दी को संबोधित कोई पत्र अनचित या आक्षेपणीय है तो यु ह बन्दी को सचना के ू

अधीन रोका जा सके गा और अधीक्षक की अभिरक्षा में रखा जा सके गा या इसे उस बन्दी को सचना के अधीन प्रेषक को लौटाया जा सके गा।

(6) अधीक्षक, यदि वह आवश्यक समझता है, ऐसे पत्र की विषय वस्तुऐं बन्दी को संसचित ू कर सके गा।

549. बन्दी पत्रों को रख सकें गे.- बन्दी किसी ऐसे पत्र को रख सके गा जो उसे सम्यक ् प्राधिकार के अधीन प्रदत्त किया गया है।

550. लेखन सामग्रियों और अन्य सविधाओं का आपर्त

ू .- (1) सेवा पोस्टकार्डों को सम्मिलित करते हए लेखन सामग्री

ु , को ु , किसी सि(cid:217)धदोष, जिसे पत्र लिखने की अनज्ञा है यक्तिु यक्तु मात्रा में प्रदत्त की जायेगी।

(2) बन्दियों (cid:217)वारा समस्त पत्र ऐसे समय और स्थान पर लिखे जायेंगे जैसा अधीक्षक नियत करे।

551. बन्दियों (cid:217)वारा लेखन सामग्रियों का क्रय करना.- (1) बन्दियों को उनके स्वयं के व्यय पर लेखन सामग्री क्रय करना अनज्ञात किया जाएगा। ु

(2) उन्हे उपलब्ध करवाई गई समस्त अंकित बक्सु , उनके दरुपयोग पर जांच करने के लिए और गप्तु पत्र-व्यवहार को निवारित करने के लिए उनके पष्ठोंृ को संख्याकित की हई होनी ु

चाहियें।

552. विशेषाधिकारों से अपवर्जन.- यदि कोई बन्दी मलाकाु त करने या पत्र लिखने या कारागार से बाहर व्यक्तियों के साथ संपर्क करने संबंधी विशेषाधिकार का दरुपयोग करता है

ु , तो वह ऐसे विशेषाधिकार से अपवर्जित किये जाने का दायी होगा और अन्य निर्बंधनों, जैसे अधीक्षक आवश्यक समझता है, के अध्यधीन हो सके गा।

553. विचाराधीन और सिविल बन्दियों को मलाकातों के लिए और पत्रों को लिखने और प्राप्त करने के लिए मंजर की जाने वाली सविधाएं

ु .- विचाराधीन बन्दियों और सिविल बन्दियों को नीचे वर्णित सविधाएं मंजर की जा सके गी

ू , अर्थात ्:-

ु , नातेदारों, मित्रों और (क) विचाराधीन और सिविल बन्दियों को उनके कटंब सदस्योंु

विधिक सलाहकारों के साथ एक सप्ताह में एक बार और आपात मामलों में भी मलाकात करने के लिए यक्तिु

ु यक्तु सविधायें मंजर की जायेंगी। ु

ू

ु , नातेदारों, मित्रों, और विधिक सलाहकारों को पत्र (ख) उन्हें उनके कटंब सदस्योंु

लिखना अनज्ञात किया जाु एगा और ऐसे समस्त लिखित पत्र-व्यवहार की जांच की जायेगी।

(ग) विचाराधीन बन्दी और उसके विधिक सलाहकार के मध्य प्रत्येक मलाकातु , कारागार पदधारी की दृष्टि के भीतर, कित सने जाने के बाहर होगी। ं ु (घ) विचाराधीन के किसी निकट नातेदार के साथ मलाकात के मामले में अधीक्षक ु

(cid:217)वारा समान छट अनज्ञात की जाएगी। ू ु256 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ङ) तथापि कठोर अपराधियों जैसे कि वत्तिक और भाड़े का हत्या

ृ रा, डकै ती, लटू , फिरौती के लिए अपहरण के अभियक्तु , आतंकवादी और अपराधी जो राज्य के विरु(cid:217)ध य(cid:217)ध करने में अंतवर्लित हैं , इत्यादि के लिए मलाकात कारागार ु

पदधारियों की सने जाने के भीतर होगी। ु

(च) जब कोई व्यक्ति बन्दी के विधिक सलाहकार की हैसियत में विचाराधीन बन्दी के साथ मलाकात की वांछा करता है , तो वह अपना नाम और पता देते हए ु और मलाकात का प्रयोजन विनिर्दिष्टु करते हएु , लिखित में आवेदन करेगा। (छ) वह अधीक्षक का समाधान करेगा कि वह उस बन्दी का यथार्थ विधिक सलाहकार है जिसके साथ वह मलाकात चाहता है और कि उसे उससे विधिसम्मत कार्य है और यदि मलाकात अनज्ञात की जाती है

ु , तो विधिक सलाहकार का नाम बन्दी के वत्त पत्र में प्रविष्टृ किया जाएगा और समस्त मलाकातों काु , जो होती हैं, अभिलेख टिकट पर रखा जाएगा।

(ज) विचाराधीन बन्दी (cid:217)वारा उसके विधिक सलाहकार जैसे कि अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (1961 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 25) की परिभाषा के भीतर विधि व्यवसायी, को निदेशों के रूप में तैयार की गई यथार्थ लिखित संसचनाू , ऐसे सलाहकार, या उसके प्राधिकृ त नामनिदशिती र्कोे , अधीक्षक (cid:217)वारा, व्यक्तिगत रूप से परिदान करवाई जा सके गी।

(झ) यदि ऐसी संसचना गोपनीय है तो यह पर्व परीक्षा किये बिना ही प्रदत्त की जाएगी।

ु , मित्रों, नातेदारों और विधिक सलाहकारों से (ञ) सिविल बन्दी अपने कटंब सदस्योंु

ऐसे समय और ऐसे निर्बंधनों के अधीन मिल सकें गे, जैसे अधीक्षक विनिश्चत करे।

(ट) तथापि, ऐसे किसी भी आगंतक कोु , कारागार के भीतर अधीक्षक की अनज्ञा के ु बिना खा(cid:217)य वस्तुएं ले जाना अनज्ञात नहीं किया जाएगा। ु

.- (1) अधीक्षक इन नियमों के लाग ू 554. बन्दियों के कछ वर्गों संबंधी विशेष नियमु

होने को रोकने और उन मामलों में, जो आपवादिक संव्यवहार की मांग करते हैं, मलाकात ु

संचालित करने के विषय में स्वयं जेलर को लिखित अनदेश देने का प्राधिकार रखता है और किसी बन्दी या बन्दियों के वर्ग जो उन अपराधों के अभियक्तु हैं जो, जिला मजिस्ट्रेट की राय में, वांछनीय बनाते हैं कि विशेष पर्वावधानियां ली जानी चाहियें , के मामले में उसके प्राधिकार को प्रयोग करना उसका कर्तव्य होगा।

(2) विशिष्टतया, यदि ऐसा जिला मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा अनरोध किया जाता है , वह किसी ऐसे बन्दी की मलाकातों पर उपु -निरीक्षक की रैंक से अन्यून के पलिस अधिकारी की उपस्थिति ु

की अपेक्षा करेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 257

(3) इस प्राधिकार के अधीन नियमों के समस्त उपांतरण तत्काल कारागार निदेशालय के प्रमख को रिपोर्ट किये जायेंगे

ु जो उन्हें, यदि आवश्यक हो, तो सरकार के अनमोदन के लिएु प्रस्तुत करेगा।

555. बन्दियों (cid:217)वारा लिखित पत्रों की जांच करना.- (1) किसी बन्दी, को संबोधित, या (cid:217)वारा लिखे गये समस्त पत्र, जांच के प्रयोजन के लिए, जिसका नाम महानिदेशक पलिसु , अपराध अन्वेषण विभाग (cid:217)वारा कारागार निदेशालय के प्रमख को संसचित किया जाता है , जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा पश्चात्वर्ती नाम वाले को भेजे जायेंगे।

(2) जब ऐसा बन्दी अन्य राज्य से अंतरित किया जाता है, तो उसके पत्र-व्यवहार की जांच करने के लिए प्रत्येक मामले में सरकार (cid:217)वारा विशेष आदेश जारी किये जायेंगे।

(3) ऐसे समस्त बन्दियों जिनसे यह अपेक्षित हो सके गा और समस्त सैन्य बन्दियों के संबंध में बन्दी को संबोधित या (cid:217)वारा लिखे गये प्रत्येक पत्र की प्रति, परिदान या यथास्थिति, प्रेषण, से पर्व संवीक्षा के लिए जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा जिला मजिस्ट्रे ट को भेजी जायेगी।

(4) यदि जिला मजिस्ट्रेट आवश्यक समझता है तो वह पलिस महानिु रीक्षक, अपराध अन्वेषण विभाग के परिशीलन या सलाह के लिए पत्र की प्रति प्रेषित करेगा।

(5) किसी भी मामले में अधीक्षक किसी पत्र को परिदान या प्रेषित नहीं करेगा जब तक कि वह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश प्राप्त नहीं करता है।

556. उस बन्दी से पत्र-व्यवहार जो राज्य विधान-मंडल या संसद का सदस्य है.- (1) जब कोई बन्दी राज्य विधान-मंडल या संसद का सदस्य हो, तो उसके (cid:217)वारा ऐसे सदन की विशेषाधिकार समिति, या राज्य विधान-मंडल या, यथास्थि ति, संसद के दोनों सदनों की संयक्तु समिति के अध्यक्ष या सभापति को संबोधित समस्त पत्र-व्यवहार, इस अध्याय के पर्ववर्ती नियमों में अंतर्विष्टू किसी के प्रतिकल होने पर भीू , सदन जिससे वह संबंधित है के सदस्य के रूप में बन्दी के अधिकारों और विशेषाधिकारों से उनके (cid:217)वारा विधि के अनसार ु कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधीक्षक (cid:217)वारा सरकार को तत्काल अग्रेषित किये जायेंगे।

(2) समस्त प्रश्न चाहे तारांकित हों या अतारांकित हों या अन्य कोई संसचना भी तत्काू ल पारेषित की जाएगी।

(3) जब कोई बन्दी, य(cid:217)यपि सम्यक् रूप से निर्वाचित है, भारत के संविधान के अनच्छे

ु द 99 या 188 के अधीन यथा अपेक्षित राज्य विधान-मंडल या संसद का सदस्य औपचारिक रूप से नहीं बना हो, भारत के संविधान के अनच्छे

ु द 104 और 193 में अंतर्विष्ट किसी बात के होने पर भी, अध्यक्ष, या यथास्थिति, सभापति के मध्य, पत्र-व्यवहार का कोई रोका जाना नहीं होगा।

परन्तु ऐसे संपर्क को अग्रेषित करने में, संबंधित प्राधिकारी अध्यक्ष या यथास्थिति, सभापति का इस तथ्य पर ध्यान आकर्षित करेंगे कि भारत के संविधान के अनच्छे

ु द 104 या 193 की अपेक्षा की अनपालन नहीं की गयी है। ु258 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 557. टेलीफोन ◌िक और इलैक्ट्रानिक संचार.- (1) अधीक्षक बन्दी को समय-समय पर, उसके कटंब और वकीलों से संपर्क करने के लिए , संचार के टेलीफोन या इलैक्ट्रानिक प्रकार, जहां कहीं भी ऐसी सविधा उपलब्धु हो, का संदाय पर उपयोग करना अनज्ञात कर सके गा। ु (2) बन्दी इस सविधा का उपयोग अधीक्षक (cid:217)वारा नामनिर्दिष्ट कारागार अधिकारी के पर्यवेक्षण के अधीन कर सकता है।

(3) बन्दी को ऐसी सविधाओं का उपयोग अनज्ञात करते समयु

ु , अधीक्षक सनिश्चित करेगा ु

कि ऐसी अनज्ञा ऐसे बन्दिु यों को नहीं दी जाये जो उच्छं

ृ खल और दराचरण का व्यु वहार रखते हैं।

(4) बन्दियों के लिए विनिर्दिष्ट प्ररूप में टेलीफोन रजिस्टर रखा जाएगा।

558. बन्दियों से संबंधित अधिकार और अन्य सखु -सविधाएं

ु .- (1) समस्त बन्दियों को प्रवेश के समय उनके मित्रों और नातेदारों से इस शर्त के अध्यधीन रहते हए कि प्राप्तु की गई मात्रा एक सप्ताह के लिए उनकी वैयक्तिक अपेक्षाओं तक सीमित है और कि बन्दियों को गजरने वालीु , वस्तुओं की संपर्ण परीक्षाू , कारागार के वरिष्ठ अधिकारी (cid:217)वारा की गई है, साबनु , तेल और दंत पाउडर या पेस्ट, तौलिया, अंत:वस्त्र प्राप्त करना अनज्ञात किया ु

जाएगा।

(2) विचाराधीन बन्दियों को अधीक्षक के विवेकाधिकार पर मलाकात के समय उनके नाते

ु दारों से निजी वस्त्र प्राप्त करना अनज्ञात किया जायेगा। ु

(3) बन्दियों के निम्नलिखित अधिकार होंगे, अर्थात ्:-

(क) मानव गरिमा का अधिकार;

ूनतम आवश्यकताओं का अधिकार;

(ख) आधारभत न्यू (ग) संपर्क का अधिकार;

धिकार।

(घ) विधि तक पहंच का अधिकारु ; और (ङ) सम्यक तारीख पर छोड़े जाने का अ्

अध्याय 23

अपील और याचिकायें

559. अपील कतार करने की रीति.- (1) अपील के लिए वांछा करने वाले और ऐसा करने के लिए हकदार प्रत्येक सि(cid:217)धदोष बन्दी को, इस प्रयोजन के लिए समस्त यक्तिु यक्तु सविधा मंजर की जायेगी

ू और उसके अनरोध पर तत्पु रता से कार्यवाही की जाएगी, चाहे अपील विनिर्दिष्ट कालावधि की भीतर अपील न्यायालय पहंचे या नहीं।ु

(2) उन मामलों में जहां अपील के लिए याचिका इतने विलंब से की गई है जिससे इसका आबंटित समय के भीतर अपील न्यायालय पहंचना असंभाव्यु या असंभव है, तो प्रभारी अधिकारी इसे पर्व में प्रू स्तुत नहीं करने के लिए सि(cid:217)धदोष के कारण के साथ, इस प्रकार दिए गए कारणों पर उसके स्वयं के विचार (यदि कोई हो) अपील पर पष्ठां

ृ कित करेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 259

(3) प्रत्येक सि(cid:217)धदोष को उसकी अपील तैयार करने के प्रयोजन के लिए उसके नातेदारों, मित्रों और अधिवक्ता से व्यक्तिगत रूप से मलाकात करने के यक्तिु

ु यक्तु अवसर अनज्ञात ु किये जायेंगे:

परंत ऐसी प्रत्ये

, कित सने जाने के ं

ु क मलाकात उस जेल अधिकारी की दृष्टि के भीतर

बाहर होगी जिसके प्रभार में ऐसी मलाकात के प्रयोजन के लिए बन्दी रखा गया है।

(4) सि(cid:217)धदोष को उसके लिए कार्य करने के लिए किसी को प्राधिकत करते हए मख्ता

ु रनामा हस्ताक्षर करना अनज्ञात किया जाएगा , मख्ताु रनामा पर राजस्थान स्टांप अधिनियम, 1998 के अधीन समचित स्टां

ु प होनी आवश्यक है और बन्दी के हस्ताक्षर जेलर या उप-जेलर (cid:217)वारा अनप्रमाणित होने चाहिए। ु

560. अपील के लिए सविधाएं स्पु ष्ट की जाएंगी.- बन्दियों को उनके प्रवेश के समय जेलर या उप-जेलर या अधीक्षक (cid:217)वारा अपील के बारे में समस्त ससंगत नियमु और अपीलों को तैयार करने और भेजने के लिए कारागार में उपलब्ध सविधाएं

ु , स्पष्ट की जाएंगी।

561. जेलर या उप-जेलर या अधीक्षक अपील प्रस्तुत करने की बन्दी की वांछा अभिलिखित करेगा.- जेलर या उप-जेलर या जेल अधीक्षक यह अभिनिश्चित करेगा कि बन्दी अपील फाइल करना चाहता है या नहीं और इसे बन्दी के सि(cid:217)धदोष रजिस्टर में और वत्त पत्र ृ पर अभिलिखित करेगा और बन्दी से वत्त पत्र पर हस्ता

ृ क्षर करना या उस पर अपने बायें अंगठे का निशान लगाया जाना अपेक्षित होगा और उप -जेलर, जेलर या कारागार अधीक्षक के (cid:217)वारा इसका सत्यापन और पष्टि की जाएगी।ु

562. अपील के लिए परिसीमा की कालावधि.- विभिन्न न्यायालयों में अपील फाइल करने के लिए अनज्ञात की गयी ु कालावधि, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) और परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 36) में यथाविहित अनसारु होगी।

563. अधीक्षक का अपील की याचिकाएं अग्रेषित करना.- (1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 383 के अधीन, एक अपीलार्थी, जो कारागार में है, अपनी याचिका या अपील, और इसके साथ के दस्तावेजों को अधीक्षक को प्रस्तुत कर सके गा, जो, इस पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा और इसे सरकारी व्यय पर उचित अपील न्यायालय को अग्रेषित करेगा।

(2) ऐसी समस्त अपीलें सदैव रजिस्ट्रीकतृ /स्पीड पोस्ट (cid:217)वारा भेजी जायेंगी।

(3) जेल का कोई भी बन्दी या अधिकारी, अधीक्षक की पर्व लिखित अनज्ञा के बिना

ु , किसी भी बन्दी की ओर से कोई अपील या याचिका तैयार नहीं करेगा, नहीं लिखेगा या प्रस्तुत नहीं करेगा।

564. निर्णय की प्रति के लिए आवेदन.- (1) यदि कोई बन्दी अपील करना चाहता है और घोषणा करता है कि उसका ऐसा कोई भी नातेदार, मित्र या अभिकर्ता नहीं है, जो उसके लिए अपील करने का इच्छु क है, तो अधीक्षक ऐसे बन्दी से सम्बन्धित निर्णय या आदेश की260 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) एक प्रति के लिए, जिसके लिए वह अपील करना चाहता है, सम्बन्धित न्यायालय को यथाविनिर्दिष्ट प्ररूप में तरंत आवेदन करेगा।ु

(2) निर्णय या आदेश की प्रति प्राप्त होने पर बन्दी, यदि वह लिखने में समर्थ है, तो उसे उसकी स्वयं की अपील लिखने के लिए अनज्ञात किया जायेगा और यदिु बन्दी लिखने में समर्थ नहीं है, तो अधीक्षक उसके लिए उसकी अपील किसी अन्य बन्दी (cid:217)वारा या किसी जेल अधिकारी (cid:217)वारा लिखवाएगा।

(3) यदि निर्णय की प्रति सात दिवस के भीतर प्राप्त नहीं होती तो अधीक्षक विनिर्दिष्ट प्ररूप में इसके लिए एक स्मरण पत्र भेजेगा और यदि अत्यधिक विलंब होता है तो मामले की रिपोर्ट कारागार निदेशालय प्रमख को करेगा।ु

(4) अधीक्षक संबंधित न्यायालय की वेबसाईट से निर्णय की प्रति डाउनलोड कर सकता है।

(5) अपील लिखने के लिए प्रतिनियक्तु किया गया कोई बन्दी या अधिकारी वही लिखेगा जो अपीलकर्ता बोलकर लिखवाता है और वह न तो बन्दी को कोई सझाव देगा कि क्या

ु वर्णित किया जाये, न ही उसमें कछ जोडेगा जोु बन्दी स्वयं अपील में कथित करने का इच्छु क है।

(6) अधीक्षक अपील न्यायालय को अपील किये गये निर्णय या आदेश की प्रति के साथ बिना विलंब के अपील अग्रेषित करेगा।

(7) यदि, निर्णय या आदेश की प्रति की प्राप्ति के पश्चात ्, बन्दी का कोई नातेदार, मित्र या अभिकर्ता उसकी ओर से अपील करने का जिम्मा लेता है और बन्दी उस अनक्रम में सहमति ु

देता है, तो ऐसे नातेदार, मित्र या, यथास्थिति, अभिकर्ता को निर्णय की प्रति प्रदत्त की जायेगी।

(8) यदि एक ही मामले में दंडादिष्ट कई बन्दी, एक ही न्यायालय में एक ही समय में एक साथ याचिका फाइल करने के इच्छु क हैं, तो निर्णय की एक प्रति सभी के लिए पर्याप्त होगी।

(9) किन्तु यह उल्लेखनीय है कि एक बन्दी की अपील पर जारी किये गये आदेश, अन्य बन्दियों पर, जो उसी मामले में दंडादिष्ट थे और जिन्होंने ऐसे बन्दी के साथ अपील की थी, आवश्यक रूप से लाग नहीं होंू गे।

565. बन्दी को निर्णय की प्रति दिये जाने की रीति.- (1) अपील, पनरीक्षण या अन्यु न्यायालय (cid:217)वारा किसी बन्दी को परिदान करने के लिए निर्णय की प्रति कारागार प्राधिकारियों को भेजे जाने की दशा में, संबंधित पदधारी इसे बन्दी को परिदत्त करवायेगा और बन्दी से इसकी लिखित अभिस्वीकति अभिप्राप्तृ करेगा।

(2) यदि, निर्णय की प्रति प्राप्त होने से पर्व

ू , बन्दी को अन्य कारागार में, या किसी अन्य अधिकारी की अभिरक्षा में अन्तरित कर दिया गया हो, तो निर्णय की अनलिपिु , प्राप्त होने पर, ऐसे कारागार के अधीक्षक या, यथास्थिति, ऐसे अधिकारी को बिना विलंब के अग्रेषित की जायेगी।

(3) जब तक निर्णय की प्रति बन्दी को प्राप्त न हो जाये, तब तक कारागार अधीक्षक, यह सनिश्चित करेगा कि संबं धित न्यायालय को निर्णय की प्रति भेजने के लिए, प्रत्येक सप्ताह एक स्मरण पत्र भेजा जाये।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 261

(4) यदि न्यायालय को आवेदन अग्रेषित करने के एक मास के भीतर निर्णय की प्रति प्राप्त नहीं होती है, तो अधीक्षक किसी कारागार अधिकारी को, व्यक्तिगत रूप से न्यायालय जाने के लिए और निर्णय की प्रति लेने के लिए तथा इसे बन्दी को प्रदत्त करने के लिए, प्रतिनियक्तु करेगा।

566. अपील.- (1) प्रत्येक अपील लिखित में की जाएगी और यह ध्यान रखा जायेगा कि अपीलार्थी (cid:217)वारा अपील पर सम्यक रूप से हस्ता् क्षर किए गए हैं और हस्ताक्षर को जेलर या उप-जेलर (cid:217)वारा साक्षित और अनप्रमाणित किया जायेगा।ु

(2) अपील की समस्त याचिकाएं अधीक्षक (cid:217)वारा पष्ठां

ृ कित और अग्रेषित की जायेंगी।

(3) जेल में एक ही मामले में दोषसि(cid:217)ध बन्दी, या तो एक याचिका में संयक्तु रूप से या पथक्तृ : अपील या पनरीक्षण के लिए आवेदन कर सकें गे।

567. उच्च न्यायालय में अपील के बारे में सेशन न्यायाधीश को सचनाू .- जब भी कोई बन्दी जेल से उच्च न्यायालय को अपील करता है, तो अधीक्षक ऐसी अपील के बारे में सेशन न्यायाधीश को सचित करेगा।ू

568. अपील की कालावधि के दौरान बन्दी का अंतरण.- निम्नलिखित मामलों के अलावा, कोई सि(cid:217)धदोष बन्दी सामान्यत: उस जेल से, जिसे वह सपर्द किया गया है

ु , तब तक अन्तरित नहीं किया जायेगा, जब तक कि वह बिना अपील किये अपील करने की

:-

अवधि पूर्ण नहीं कर लेता या जब तक कि उसकी अपील नामंजर न कर दी गयी हो

(क) प्रभावशाली, हिंसक या खतरनाक बन्दी,

(ख) साक्ष्य देने के लिये अपेक्षित या अन्य आरोप में विचाराधीन बन्दी।

569. बन्दी के अंतरण के बारे में न्यायालय को सचनाू .- (1) जब ऐसे बन्दियों को, जिन्होंने जेल प्राधिकारियों की जानकारी में अपील प्रस्तुत नहीं की है, अपील फाइल करने के लिए अनज्ञात कालावधि के अवसान से पर्व अन्यु

ू जेलों में अन्तरित कर दिया गया है, तो ऐसे अंतरण की सचना सदैव अं

ू तिम सि(cid:217)धदोष ठहराने वाले न्यायालय को भेजी जायेगी।

(2) जब अपील न्यायालय से किसी बन्दी, जो अन्तरित किया गया है, को छोड़े जाने का आदेश, या कोई पनरीक्षित वारंट या उसकी अपील से संबंधित कोई सचना अधीक्षक

ू को प्राप्त होती है, वह तत्काल इसे डाक (cid:217)वारा, उस जेल के अधीक्षक को, जिसको बन्दी अन्तरित किया गया है, अग्रेषित करेगा।

570. जब दंडादेश उलट दिया जाये तो बन्दी को छोड़े जाने की रीति.- (1) प्रत्येक मामले में, जिसमें दंडादेश उलट दिया गया है, अपील न्यायालय छोड़े जाने के वारंट को विहित प्ररूप में भरेगा और उसे सीधे ही उस जेल के प्रभारी अधिकारी को भेजेगा, जिसमें अपीलार्थी परिरु(cid:217)ध है।

(2) वह उसी समय मल सपर्दगी वारंट को वापस मंगायेगा और उसे रदद् करेगा , और यह वारंट और बन्दी को छोड़े जाने का निदेश देने वाले अपील न्यायालय का वारंट जब वह निष्पादन के पष्ठां

ृ कन के साथ लौटाया जाएगा, तब वह मल न्यायालय के अभिलेख के साथ संलग्न कर दिया जाएगा और उनके साथ उसे लौटा दिया जाएगा।

262 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

571. दंडादेश के उपांतरण के मामले में नया वारंट.- (1) प्रत्येक मामले में, जिसमें अपील पर कोई दंडादेश उपांतरित हआ है

ु , वहां अपील न्यायालय पारित आदेश के निबंधनों के अनसार विहित प्ररूप में एक नया वारंट तैयार करेगा , और उसे सीधे उस जेल के अधीक्षक को भेजेगा जहां अपीलार्थी परिरु(cid:217)ध है, और उस मल सपर्दगी वारंट को वापस लेगा

किया जाएगा और उसके और र(cid:217)द करेगा, जो मल न्यायालय के अभिलेख के साथ संलग्नू

साथ उसे लौटा दिया जायेगा।

(2) जब नया वारंट निष्पादन के पष्ठां

ृ कन के साथ लौटा दिया जाता है, तब अपील न्यायालय उसे मल अभिलेख में संलग्नू करने के लिए उस न्यायालय को अग्रेषित करेगा, जिसके निर्णय के विरु(cid:217)ध अपील प्रस्तुत की गयी थी:

परन्तु यदि किसी अपीलार्थी को उसकी अपील की सनवाई लंबित रहने के दौरान ु

जमानत पर छोड़ दिया गया है, तो कारागार अधीक्षक को नया वारंट तब तक नहीं भेजा जायेगा जब तक कि बन्दी अभ्यर्पण न कर दे और अपील न्यायालय का यह कर्तव्य होगा कि या तो सीधे या उस न्यायालय के माध्यम से, जिसके (cid:217)वारा उसे जमानत पर छोड़े जाने का वास्तविक आदेश जारी किया गया था, उसका अभ्यर्पण सनिश्चित करने के लिए उपाय ु

करे।

572. मामले जहां अपील पर दंडादेश पष्टु किया गया हो.- (1) प्रत्येक मामले में, जिसमें अपील पर दंडादेश की पष्टि की गई होु , जेल प्राधिकारी सक्षम न्यायालय से इस प्रभाव की सचना प्राप्तू करेंगे।

(2) अपील न्यायालय, अपीलार्थी की जानकारी के लिए उसकी अपील का परिणाम उस जेल के अधीक्षक को सचित करेगा जिसमें ऐसा अपीलार्थी परिरु(cid:217)ध है।

(3) यह सचना के वल अपीलार्थी को अपील के परिणाम की संसचना देने के लिए है और यह किसी भी प्रकार से न्यायिक अधिकारियों को पुनरीक्षित वारंट, जब ऐसा आवश्यक हो, जारी करने के कर्तव्य से मक्तु नहीं करती है।

(4) किसी बन्दी की अपील के संदर्भ में जारी किये गये समस्त वारंटों और आदेशों में बन्दी के नाम के साथ-साथ उसके पिता का नाम भी उल्लिखित किया जायेगा।

573. सरकार (cid:217)वारा दंडादेश का लघूकरण.- (1) यह नियम उन मामलों पर लाग नहीं ू होगा जिनमें किसी न्यायिक न्यायालय (cid:217)वारा पारित दंडादेश को राज्य सरकार के आदेश (cid:217)वारा लघूकत किया गया हो

ृ ृ , और न ही दंडादेश के उन मामलों पर लाग होगा जिनमें मत्यू

के दंडादेशों को राज्यपाल के आदेश (cid:217)वारा लघूकत किया गया हो।ृ

(2) ऐसे मामले में, राज्य सरकार या राज्यपाल का आदेश या उसकी प्रमाणित प्रति, बन्दी के वारंट के साथ संलग्न की जायेगी, जिस पर दंडादेश के परिवर्तन और सरकारी आदेश का संख्यांक और तारीख का एक टिप्पण उपवर्णित किया जायेगा और अधीक्षक (cid:217)वारा अनप्रमाणित किया जायेगा।ु

574. मामले जहां बन्दी के पनु :विचारण के लिए आदेश पारित किये जाते हैं.- (1) जब अपील न्यायालय किसी दंडादेश को बातिल करता है और निदेश देता है कि बन्दी कोभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 263 पनःविचारु ण किया जायेगा, और बन्दी को जमानत पर छोड़े जाने के लिए कोई वारंट प्राप्त नहीं होता है, तो बन्दी को तब तक विचाराधीन वार्ड में अभिरक्षा में रखा जायेगा, जब तक वह कोई अन्य दंड नहीं भगत रहा होु , और ऐसा वारंट उसी समय नहीं दिया गया है, तो अधीक्षक विचारण लंबित रहने तक, उसकी अभिरक्षा के लिए वारंट हेत सपु ुर्दगी न्यायालय में आवेदन करेगा।

(2) ऐसे वारंट में न्यायालय, जिसके (cid:217)वारा बन्दी का विचारण किया जाना है और तारीख, जिस पर उसको न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना है, उपवर्णित की जायेगी।

575. भारत के संविधान के अनच्छे

ु द 161 के अधीन माननीय राज्यपाल को याचिका.- (1) कोई बन्दी जिसकी अपील उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय (cid:217)वारा अस्वीकत हो गयी होृ , यदि वह चाहे, तो सरकार के माध्यम से माननीय राज्यपाल को क्षमा या दंडादेश को कम करने के लिए याचिका प्रस्तत कर सके गाु , कित जब एक बार ऐसी ं

याचिका को अस्वीकत कर दिया गृ या हो तो दसरी याचिका सरकार को तब तक अग्रेषित नहीं की जायेगी, जब तक कोई शासकीय आगंतक नु ये तथ्यों या परिस्थितियों पर, जो विषय पर पनर्विचार के लिए आधार प्रदान करते हों , उसे उपयक्तु न समझे।

ु म या बन्दी के स्वास्थ्य या अच्छे आचरण के आधार पर याचिका (2) कटंब करस्थु

सामान्यत: विधारित की जायेगी।

(3) किसी शासकीय आगंतक को इस मामले में कोई राय बनाने में समर्थ बनाने के लिए , याचिकाओं और उन पर सरकार के आदेश की प्रतियां जेल कार्यालय में रखी जायेंगी, और जब अपेक्षित हों, आगंतक को दिखायी जायेंगी।ु

(4) किसी बन्दी की अस्वस्थता या अच्छे आचरण के आधार पर जेल प्राधिकारियों (cid:217)वारा परिहार के लिए सिफारिश की जा सके गी, किन्तु यह सिफारिश बन्दी (cid:217)वारा सरकार को दी गयी याचिका से आरंभ नहीं होगी।

ुदंड प्राप्त सभी बन्दी इन नियमों में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन दया की अपील करने (5) मत्यृ

के लिए अनज्ञात होंगे।ु

576. दया याचिका फाइल करने की रीति.- (1) बन्दियों की याचिकाएं हाफ मार्जिन फलस्के

ु प में लिखी जायेंगी, और यदि उन्हें देशी भाषा में लिखा गया हो, तो उनके साथ

धिकारी (cid:217)वारा अनवाद भी होगा औरु बन्दी के हस्ताक्षर या अंगठे का निशान जेल के किसी अू

अनप्रमाणित किया जायेगा।ु

(2) याचिकाएं अधीक्षक (cid:217)वारा प्रतिहस्ताक्षरित की जायेंगी और उसके (cid:217)वारा सीधे गह विभागृ , राजस्थान सरकार के प्रभारी सचिव को अग्रेषित की जायेंगी।

(3) यदि याचिका उस बन्दी, जो अपील करता है, की अभिकथित अस्वस्थता से संबंधित है, तो उसके साथ उस बिन्दु पर चिकित्सा अधिकारी की अभिव्यक्त राय भी संलग्न की जायेगी।

(4) यदि किसी बन्दी की ओर से तैयार की गयी याचिका बन्दी के हस्ताक्षर और उस पर अंगठे का निशान अभिप्राप्तू करने की दृष्टि से अधीक्षक को प्रस्तुत की जाती है, तो264 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) अनुपालना के पश्चात ्, इसे उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों को वापस नहीं सौंपा जायेगा जिन्होनें याचिका प्रस्तुत की है कित अधीक्षक (cid:217)वारा कारागार निदेशालय के प्रमख के माध्यम से राज्य सरकार को सम्यक रूप से अग्रेषित की जायेगी।

्

ु , 577. अन्य विविध याचिकाएं फाइल करना.- (1) किसी बन्दी के कटंब मामलोंु

सिविल दावों, संपत्ति या इसी तरह के मामलों से सम्बन्धित अत्यावश्यक मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, या उसके वरिष्ठ अधिकारी या नियोजकों को याचिका प्रस्तुत करने का इच्छु क होने की दशा में, अधीक्षक, सम्यक विचार के प् श्चात ्, स्वविवेकानसार ऐसी याचिका की ु

अनज्ञा दे सके गा और तब इसे प्रतिहस्ता

ु क्षरित करेगा और इसे सीधे इसके गंतव्य स्थान को अग्रेषित करेगा:

परन्तु किसी भी दशा में इस प्रकति की कोई याचिका सीधे उच्च न्यायालय या राज्य सरकार को अग्रेषित नहीं की जायेगी।

(2) विदेशी राष्ट्रीयता वाले बन्दियों को, अत्यावश्यक मामलों में अधीक्षक के स्वविवेक पर, राज्य सरकार को याचिका फाइल करने के लिए अनज्ञा दी जा सके गी।ु

578. विधिक सहायता.- (1) अधीक्षक, विधिक सहायता और सहायता प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सतत ् आधार पर संपर्क रखने के अतिरिक्त, राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय के सदस्य सचिव को निम्नलिखित प्रवर्गों के बन्दियों की एक सचीू , संसचित करेगाू ,-

(क) विचाराधीन बन्दी जो व(cid:217)ध और अशक्तृ हैं, इनमें ऐसी महिलायें जो गर्भवती हैं या जिन्हें बच्चों का पालन-पोषण करना है, सम्मिलित हैं;

(ख) विचाराधीन बन्दी जिन्होंने तीन महीने से अधिक समय कारागारों में बिताया है और जिनके पास वकील नियक्तु करने के साधन नहीं हैं;

(ग) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 41 के अधीन संदेह के आधार पर गिरफ्तार किये गये व्यक्ति, जो पन्द्रह दिवस की कालावधि से अधिक कारागार में रह चके हैं

ु ;

(घ) कोई सि(cid:217)धदोष बन्दी, जिसने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 2) में यथा उपबंधित के अनसार कारागार प्राधिकारियों के ु

माध्यम से पहले ही अपील फाइल कर दी है और जिसने नि:शल्कु विधिक सहायता लेने की लिखित में वांछा दी है;

ु , जिन्हें किसी सिविल या आपराधिक मामले (ङ) बन्दी, या उनके कटंब के सदस्यु

में विधिक सहायता की आवश्यकता है।

(2) अधीक्षक, राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य-सचिव को भी, ऐसी अपील के संबंध में अपील के ज्ञापन की एक प्रति, यदि उपलब्ध हो, के साथ सचना प्रदान करेगा।ू (3) यदि संबंधित बन्दी नें नि:शल्कु विधिक सहायता प्राप्त करने की वांछा लिखित में दी है, तो अधीक्षक (cid:217)वारा, विधिक सहायता चाहने की सचनाू , राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य–सचिव को दी जा सके गी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 265

(4) विधिक सेवा प्राधिकरण (cid:217)वारा नियक्त काउं सलु , यदि ऐसी वांछा करता है, तो वह इन मामलों के संबंध में बन्दी से साक्षात्कार कर सकता है।

579. निर्णय की प्रति अभिप्राप्त करने में लगे समय का अपवर्जन.- वह तारीख, जिस पर कोई बन्दी अपील करने का आशय अभिव्यक्त करता है, उसे उसके वत्त पत्र में उचित ृ

स्थान पर प्रविष्ट किया जायेगा और उस तारीख और जिस तारीख को निर्णय की प्रति बन्दी को प्रदत्त की जाती है, के मध्य के समय को परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का कें द्रीय अधिनियम सं. 36) की धारा 12 के अर्थ के भीतर, उस आदेश या दंडादेश की प्रति को जिसके विरु(cid:217)ध अपील की गई है, अभिप्राप्त करने के लिए आवश्यक समय माना जायेगा।

580. अपील याचिका का पष्ठां

ृ कन.- अपील न्यायालय को, परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का कें द्रीय अधिनियम सं. 36) के अधीन आपराधिक अपीलों के लिए विहित परिसीमा की कालावधि की गणना करने में सक्षम बनाने के लिए, प्रत्येक अपील याचिका को निम्नलिखित के साथ पष्ठां

ृ कित किया जायेगा और अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षरित किया जायेगा, अर्थात ्:-

"परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का कें द्रीय अधिनियम सं. 36) की धारा 12 के अधीन परिसीमा की कालावधि से अपवर्जित किये जाने के विरु(cid:217)ध अपील किये गये आदेश की एक प्रति अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित कालावधि...... दिन थी।" 581. याचिका तैयार करने में विलंब टिप्पण किया जाना.- यदि निर्णय की प्रति प्राप्त होने के पश्चात अपील या पनरीक्षण याचिका तैयार करने में कोई विलंब हआ है

ु , तो अपील या पनरीक्षण याचिका पर ऐसे विलंब का एक टिप्प

ु ण भी बनाया जायेगा।

582. जेलर या उप-जेलर (cid:217)वारा अपील रजिस्टर का संधारण.- (1) जेलर या उप-जेलर एक अपील रजिस्टर संधारित करेगा जिसे उसके (cid:217)वारा अधीक्षक के समक्ष जितनी बार आवश्यकता हो, रखा जायेगा।

(2) जिस तारीख को बन्दी अपील फाइल करने की वांछा अभिव्यक्त करता या करती है, उस तारीख से प्रारंभ होकर, अपील का निपटारा करने वाले अपील न्यायालय के आदेश की प्राप्ति की तारीख तक, ऐसी सभी तारीखें जिन पर सम्पूर्ण प्रक्रिया के दौरान कार्रवाई की जाती है, अपील रजिस्टर में प्रविष्ट और अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षरित की जायेंगी।

(3) इसमें, वे तारीखें जिन पर निर्णय प्रति के लिए अध्यपेक्षा भेजी जाती है, निर्णय प्रति की प्राप्ति की तारीख, बन्दी या अन्य नामनिर्दिष्ट पक्षकार को निर्णय प्रति परिदान करने की तारीख और बन्दी से अपील प्राप्त होने की तारीख सम्मिलित होंगी।

583. सनवाई की तारीख की सचना बन्दियों को संसचित की जायेगी

ू .- जब किसी अपील या याचिका की सनवाई की तारीख की सचना प्राप्त होती है , तो इसे बन्दी को संसचित किया जायेगा , जो ऐसे नोटिस की प्राप्ति के प्रतीक के रूप में अपने हस्ताक्षर या बाएं अंगठे का निशान लगाएगा या लगाएगी और फिर नोटिस को अधीक्षक या जेलर (cid:217)वारा सत्यापित किया जाएगा और संबंधित न्यायालय को लौटाया जायेगा।

266 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

584. अपील न्यायालय में बन्दी की व्यक्तिगत उपस्थिति.- (1) जब अपील न्यायालय से कारण बताने के लिए नोटिस प्राप्त होता है कि किसी बन्दी के दंडादेश में

, तो बन्दी से पछा जाएगा कि क्या वह संबंधित न्या

ू यालय व(िcid:217)ध क्यों नहीं की जानी चाहिएृ

के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनमति ु के लिए आवेदन करना चाहता है या चाहती है और यदि वह ऐसा कहता या कहती है, अधीक्षक उनके आवेदन को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश के लिए अधिमानतः श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से न्यायालय को अग्रेषित करेगा।

(2) यदि इसकी अनज्ञा दी जाती ु है, तो न्यायालय में उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति के इंतजाम किये जायेंगे।

585. सेना न्यायालय (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष किये गये व्यक्तियों के संबंध में अपील प्रक्रिया.- (1) सेना अधिनियम, 1950 (1950 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 46) के अधीन सेना न्यायालय (cid:217)वारा पारित दंड की कोई अपील नहीं होगी।

(2) बन्दी को निर्णय या दंडादेश के विरु(cid:217)ध, के वल एक याचिका प्रस्तुत करने का अधिकार है जिनका निपटारा उच्चतम प्राधिकारी (cid:217)वारा, जिसे वह आवेदन करने के लिए प्राधिकत है

ृ , किया जाएगा।

(3) प्रत्येक अभियक्तु को दंडादेश सनाु ये जाने के समय याचिका प्रस्तुत करने के उसके विधिक अधिकार और वह प्राधिकारी जिसे याचिका संबोधित की जायेगी, समझाये जायेंगे।

(4) ऐसी याचिका उस प्राधिकारी को अग्रेषित की जायेगी, जिसे वह संबोधित की गयी है।

(5) भारत सरकार, या किसी सिविल प्राधिकारी को संबोधित अपील या याचिकाएं, निपटान के लिए, संबंधित सशस्त्र बल के कें द्रीय मख्यालय को अग्रेषित की जायेंगी।

586. अपीलीय आदेश का अभिलेख.- अपील न्यायालय के आदेश और निर्णय, मल ू निर्णय की प्रति और अन्य संसक्त अभिलेख, बन्दी के वारंट के साथ फाइल किये जायेंगे और रखे जायेंगे।

अध्याय 24

बन्दियों का अंतरण

587. अंतरण के लिए कारण और परिस्थितियां.- बन्दी एक कारागार से दसरे ू कारागार में निम्नलिखित कारणों से अन्तरित किये जा सकें गे, अर्थात ्:-

(क) वर्गीकरण प्रक्रिया के अनसार उपयक्तु

ु संस्था में अभिरक्षा और उपचार के लिए;

(ख) विचारण चलाने या साक्ष्य देने के प्रयोजन से न्यायालय में उपस्थिति के लिए;

(ग) चिकित्सीय आधार पर;

(घ) मानवीय आधार पर, उनके पनर्वास के हित में

ु ;

;

(ङ) छोड़े जाने के पश्चात पलिस (cid:217)वारा सतर्क ता के लिए्

(च) आवश्यक सेवाओं का उपबंध करने के लिए;

(छ) सरक्षाु , प्रशासनिक, अतिभीड़ और समीचीनता के आधारों पर;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 267

(ज) अपने गृह जिले के नजदीक होना; या (झ) अन्य विशेष कारणों से, यदि कोई हों।

588. गह राज्यृ .- (1) किसी बन्दी के मामले में, जिसका लंबे समय से अपने जन्म के राज्य से कोई संबंध नहीं है, और जो उस राज्य का निवासी है जहां वह कारावासित है और जहां उसके निकट नातेदार रहते हैं, अंतरण के प्रयोजन के लिए बाद वाले राज्य को उसका गह राज्य माना जायेगा।ृ

(2) ऐसे बन्दी को अन्तरित करने का निर्णय लेने से पर्व

ू , इस तथ्य को उसके पर्ववर्ती से या ू

उसके नातेदारों के संबंध में पछताछ करके सनिश्चित किया जायेगा।

ु

589. कारागार निदेशालय के प्रमखों कीु शक्तियां.- (1) कारागार निदेशालय प्रमख की ु निम्नलिखित शक्तियां होंगी, अर्थात ्:-

(क) बन्दी अधिनियम, 1900 (1900 का कें द्रीय अधिनियम सं. 3) की धारा 29 में यथाविनिर्दिष्ट किसी भी बन्दी को राज्य के भीतर एक कारागार से दसरे में ू अन्तरित करने की मंजरी देना।ू

ु दंडादेश के अधीन किसी भी बन्दी को एक कारागार से दसरे में अन्तू रित (ख) मत्यृ

करने का अधिकार कारागार निदेशालय प्रमख के पास होगा। ु

(2) तथापि, निम्नलिखित मामलों में बन्दियों के अंतरण के लिए कारागार निदेशालय प्रमख ु की मंजरी आवश्यक नहीं होगी , और अधीक्षक ऐसे अंतरण के लिए आदेश पारित कर सके गा, अर्थात ्:-

(i) बन्दियों का किसी दसरे राज्य में किसी अपराध के लिए साक्ष्य देने या विचारण चलाने के लिए आवश्यक अंतरण;

(ii) बन्दियों का मार्ग में अंतरण;

(iii) इस प्रयोजन के लिए जारी एक स्थायी आदेश के अनसार वर्गीकत संस्था में

ृ बन्दी का अंतरण।

स्पष्टीकरण: तथापि, उपर्यक्त तीन परिस्थितियों में बन्दी के अंतरण के संदर्भ में सचना की ू

प्रति, तरंत कारागार निदेशालय प्रमख को प्रस्तत की जानी चाहिए।

ु

.- (1) कोई भी बन्दी एक जेल 590. अंतरण से पर्व चिकित्सा अधिकारी का प्रमाणपत्रू

से दसरीू जेल में अन्तरित नहीं किया जायेगा जब तक चिकित्सा अधिकारी प्रमाणित नहीं करता कि बन्दी किसी भी बीमारी से मक्तु है जो उसे अंतरण के लिए अयोग्य बनाती हो।

(2) जिस दिन किसी बन्दी को अन्तरित किया जाना है, उसे चिकित्सा अधिकारी के सामने लाया जायेगा, जो विनिर्दिष्ट प्ररूप में प्रमाणपत्र प्रदान करेगा कि अंतरण के लिए चना गया ु

प्रत्येक बन्दी यात्रा के लिए उपयक्तु दशा में है।

(3) व(cid:217)ध और कमजोरृ , व्यक्तियों को जो चलने में असमर्थ या अयोग्य हैं, अत्यंत आवश्यक होने पर हटाने की दशा में, उन्हें ले जाने के लिए उपयक्तु साधन उपलब्ध करवाये जायेंगे।

(4) यह देखना अधीक्षक का कर्तव्य होगा कि किसी भी बन्दी को, जो उ(cid:296), बीमारी या दर्बलता के कारण शारीरिक श्रम करने में असमर्थ है या जिसे दंडादेश (cid:217)वारा श्रम से छट ू268 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) प्रदान की गयी है, कारागार निदेशालय प्रमख के विशेष आदेश के बिना अंतरण के लिए अनशं

ु सित या किसी अन्य जेल में अन्तरित नहीं किया जायेगा।

591. बीमार बन्दियों का अंतरण.- बीमार बन्दियों को निम्नलिखित आधारों पर एक

रित किया जा सकता है, अर्थात ्:-

कारागार से दसरे कारागार में अन्तू

(क) किसी भी बन्दी को, जो बीमार है, उसके स्वास्थ्य लाभ के सिवाय, अन्तरित नहीं किया जायेगा;

(ख) जब चिकित्सा अधिकारी की राय हो कि किसी बीमार बन्दी को दसरे कारागार ू

में अन्तरित करने से उसके ठीक होने की संभावना है, या इससे उसके जीवन को बढ़ाने में मदद मिलेगी, तो वह मामले का एक संक्षिप्त विवरण, उस कारागार का उल्लेख करते हए जिसमें

ु अंतरण वांछनीय है, अधीक्षक को अग्रेषित करेगा और तत्पश्चात अधीक्षक मामले को कारागार निदेशालय प्रमख को उसके आदेशों के लिए प्रस्तत करेगाु ;

(ग) अधीक्षक, चिकित्सा अधिकारी की लिखित अध्यपेक्षा पर, ऐसी यात्राओं के लिए बन्दियों को अतिरिक्त खा(cid:217)य, वस्त्र और बिछौना का प्रदाय करेगा;

(घ) ऐसे बन्दी को ले जाने वाले अधिकारी को दवाईयां, यदि आवश्यक हों, तो उनके उपयोग के अनदेश के साथु प्रदान की जायेंगी; और

(ङ) चिकित्सा अधिकारी यह सनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होगा कि किसी बन्दी की मेडिकल के स शीट उसके अंतरण के समय अ(cid:217)यतन है।

592. समान मामले में सि(cid:217)धदोष बन्दी.- एक ही मामले में सि(cid:217)धदोष ठहराये गये बन्दियों को, यदि अधीक्षक की राय में, कारागार में अनशासन और व्यवस्था बनाए रखने के हित में ऐसा करना आत्यंतिक रूप से आवश्यक है, तो अलग-अलग कारागारों में अन्तरित किया जा सके गा।

593. आभ्यासिक बन्दियों का अंतरण.- (1) अधीक्षक किसी आभ्यासिक बन्दी को कारागार से अन्तरित करने के लिए कारागार निदेशालय प्रमख को इस आधार पर आवेदन कर सके गा कि बन्दी वहां पिछले कारावास या अन्यथा के कारण परिक्षेत्र और वातावरण से परिचित है।

(2) कारागार निदेशालय प्रमख ऐसे प्रत्ये

ु क आवेदन का गणागण के आधार पर विचार करते हए और स्वु यं का समाधान हो जाने के पश्चात क्ि बन्दी को अन्तरित करने के पर्याप्त कारण वि(cid:217)यमान है, के वल विशेष मामलों में ही ऐसे बन्दियों के अंतरण का आदेश देगा।

594. सिविल न्यायालयों (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष बन्दियों का अंतरण.- (1) प्रत्येक बन्दी को अपने मल राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में सक्षम अधिकारिता वाले सिविल न्यायालय (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष ठहराए जाने पर, उसके मल राज्य में अन्तू रित किया जा सके गा, यदि उसके अंतरण के समय उसके दंडादेश का अनवसित भाग कम से कम तीन मास का हो।

(2) उसे या तो उस जिले के कारागार में भेजा जायेगा जहां का वह है या उसके जन्म स्थान के निकटतम कारागार भेजा जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 269

(3) ऐसे किसी भी बन्दी को उसके जन्म के राज्य में अन्तरित किये जाने की दशा में, राज्य के उस जिले के पलिस अधीक्षक और परिवी

ु क्षा अधिकारी इस तथ्य की पष्टि करेंगे किु बन्दी राज्य के उस जिले का मल निवासी है।ू

595. बन्दी का बाहरी राज्य में अंतरण.- (1) किसी भी सि(cid:217)धदोष बन्दी को दसरे ू राज्य में अन्तरित किये जाने की दशा में, कारागार अधीक्षक, जहां बन्दी परिरु(cid:217)ध है, बन्दी से एक लिखित उ(cid:217)घोषणा प्राप्त करेगा जिसमें उसके पते के साथ-साथ उसके मल राज्यू में उसके नातेदारों के पते का विवरण भी दिया जायेगा और विवरण कारागार निदेशालय प्रमख ु को भेजेगा।

(2) कारागार निदेशालय प्रमख उस राज्य के कारागार निदेशालय प्रमख से उस कारागार का नाम भी सनिश्चित करेगाु , जिस मल राज्य में

ू बन्दी को अन्तरित किया जाना है और फिर राज्य सरकार से आदेश प्राप्त करने के पश्चात ् बन्दी के अंतरण के आदेश जारी करेगा।

स्पष्टीकरण: (i) अपने गह राज्य में अंतरण के संबंध में बन्दी की वांछा पर सम्यक विचार ्

किया जायेगा, जब तक कि इसके विरु(cid:217)ध पर्याप्त कारण न हों - उदाहरण के लिए, उसका मानसिक रूप से पागल होना या उपद्रवी या अंतिम दिनों के दौरान बजर्ग माताु ु -पिता को उसके बच्चों से मिलने की वांछा होना।

स्पष्टीकरण: (ii) अन्तरित करने वाला राज्य बन्दी के अंतरण की लागत वहन करेगा। बन्दी के भरण-पोषण का व्यय उसके आने की तारीख से उसके मल राज्य (cid:217)वारा ू

वहन किया जायेगा।

स्पष्टीकरण: (iii) बन्दी की संपत्ति और कारागार में उसके अंतरण की तिथि तक अर्जित मजदरीू , बन्दी के साथ, उस कारागार में भेजी जायेगी जहां उसका अंतरण किया गया है।

596. सेना न्यायालय (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष बन्दी का व्यतिकारी आधार पर विदेश या भारत में अंतरण.- (1) विदेश में या भारत में सेना न्यायालय (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष ठहराये गये

किसी भी कारागार में परिरु(cid:217)ध प्रत्येक पर्व और अपने मल राज्य की कारागार के अतिरिक्तू

ू -

रित किया जा सके गा।

सैन्य बन्दी को उसके मल राज्य के कारागार में अन्तू

(2) कारागार अधीक्षक, जहां बन्दी परिरु(cid:217)ध है, उसके प्रवेश के तरंत पश्चाु त ्, कारागार निदेशालय प्रमख को दो प्रतियों में पर्व

ू -सैन्य बन्दी की एक लिखित उ(cid:217)घोषणा भेजेगा, जो कारागार बन्दी के मल राज्य ू के कारागार निदेशालय प्रमख से परामर्श ु करके निर्णय लें कि बन्दी को अन्तरित किया जायेगा और इस आशय के आदेश जारी करेगा।

(3) कारागार निदेशालय प्रमख अन्य राज्यों की कारागारों में परिरु(cid:217)ध अपने राज्य के बन्दियों के अनरोधों पर भी विचार करेगा और जिस जिले का बन्दी है, उसके पलिस ु अधीक्षक (cid:217)वारा उचित सत्यापन के पश्चात संबंधित महानिरीक्षक को उन कारागारों के बारे में सचित करेंगे

ू , जहां ऐसे बन्दी को अन्तरित करना चाहिये।

स्पष्टीकरण: (i) पर्व

ू -सैन्य बन्दियों को उनकी दंडादेश की अनवसित अवधि का विचार किये बिना तरंतु उनके मल राज्य में अन्तू रित किया जाना चाहिये।

270 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

स्पष्टीकरण: (ii) पर्व

ू -सैन्य बन्दियों के भरण-पोषण की लागत उनके कारागारों में आगमन की तारीख से उनके मल राज्यों (cid:217)वारा वहन की जायेगी।

597. छोड़े जाने से पर्व बन्दियों का ू अंतरण.- प्रत्येक आभ्यासिक बन्दी, पुलिस (cid:217)वारा

बन्दी, छोड़े जाने के पश्चात ् रजिस्ट्रीकतृ बन्दी, जर्माना संदत्त करने का आदेश दिया गया

–बन्दी शांति या सदाचार को बनाये रखने के निवास स्थान को सचना देने के लिए अपेक्षितू

लिए प्रतिभति देने में व्यू तिक्रम करने पर कारावास भगतने का आदेश दिया गु या व्यक्ति, मानसिक रूप से बीमार प्रमाणित बन्दी, और कोई महिला बन्दी, यदि किसी दर के कारागार ू

में परिरु(cid:217)ध हैं, तो उसकी मल दंडादेश के अवसान की तारीख से स्पष्ट एक सप्ताह पर्व

ू ,

रित किया जायेगा।

उसके गह के निकटतम कारागार में अन्तृ

598. पलिस ु (cid:217)वारा रजिस्ट्रीकतृ बीमार बन्दियों का अंतरण.- (1) यदि कोई पलिस ु (cid:217)वारा रजिस्ट्रीकत बन्दीृ , जैसा कि उल्लेख किया गया है, बीमारी के कारण उस जिले की जेलों में अंतरण के लिए अयोग्य है जिसमें उसका घर स्थित है, तो उसको छोड़े जाने से दो मास पर्व इस तथ्य कोू , उस जिले के पलिु स अधीक्षक को, जिस जिले से बन्दी संबंधित है और स्थानीय पलिस अधीक्षक को भी संसचित किया जायेगा।

ू

(2) यदि बन्दी उसको छोड़े जाने से पर्व

ू , उसके जिले के कारागार में उसके पहंचने के ु

अनज्ञात किये जाने के समय पर अंतरण के लिए बाद में योग्य हो जाता है, तो उसे अन्तरित कर दिया जाएगा।

(3) यदि, जब उसके दंडादेश का के वल एक पखवाड़ा शेष रह गया हो, तब भी वह अंतरण के लिए अयोग्य है, तो उसकी पलिस रजिस्ट्रीु कतृ स्लिप (पी.आर.स्लिप) स्थानीय पलिस को इस ु

तथ्य के एक टिप्पण के साथ भेजी जाएगी और उस दिन, उसे बिना कोई अतिरिक्त कार्रवाई किये कारागार गेट पर उन्मुक्त कर दिया जायेगा।

599. अन्य राज्यों से संबंधित बन्दियों का अंतरण.- अन्य राज्यों के बन्दियों को निम्नलिखित आधारों पर अन्तरित किया जा सके गा, अर्थात ्:-

(क) एक सामान्य नियम के रूप में, पलिस (cid:217)वारा रजिस्ट्री

ु कत अपराधियों को

ृ , जो उस राज्य के मल निवासी नहीं हैं , जहां वे दंडादेश भगत रहे हैं

ु , यदि उन्हें तीन मास या उससे कम के कारावास का दंडादेश सनायाु जाता है तो मामले में उनकी वांछाओं की परवाह किए बिना किसी भी समय हटा दिया जाएगा, और उनको छोड़े जाने से दो मास पर्व

ू यदि उन्हें तीन मास से अधिक के कारावास का दंडादेश सनाया जाता है

ु , या तो उस जिले के कारागार में जहां वे रहते हैं या उनके मल स्थान के निकटतम कारागार में भेज दिया जायेगा।

परन्तु ऐसे कारागार को संबंधित राज्य सरकार (cid:217)वारा राज्य से हटाये गये बन्दियों के लिए रिसेप्शन डिपो के रूप में घोषित किया गया हो।

(ख) तीन महीने से अधिक कारावास का दंडादेश पाने वाले बन्दी को दो महीने से पर्व उसके गह जिले के कारागार में अन्त रित कर दिया जायेगा यदि वह इच्छक है या यदि ऐसे अंतरण की आवश्यकता के पर्याप्त कारण हैं।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 271

(ग) ऐसे सभी मामले, जैसा कि ऊपर वर्णित किये गये हैं, सामान्यत: पलिस (cid:217)वारा ु

कारागार अधीक्षक को पलिस रजिस्ट्रीु कत पर्ची के रूप में सचित किये

ू जायेंगे।

, तो कारागार में भरे जाने वाले (घ) जब एक पलिस रजिस्ट्रीु कत पर्ची प्राप्त होती है

विवरण पर्ण किये जायेंगे और पर्ची को

ू बन्दी के वारंट के साथ संलग्न किया जायेगा और उसके साथ कारागार में जहां उसे अन्तरित किया जायेगा, भेजा जायेगा, उसी समय अंतरण के लिए पलिस (cid:217)वारा रजिस्ट्री

ु कत बन्दियों ृ के अंतरण को सचित करने वाले ू "पी.आर.टी." अक्षरों की एक प्रविष्टि सि(cid:217)धदोष रजिस्टर और छोड़े जाने वाले बन्दियों के रजिस्टर में लाल स्याही से की जायेगी।

(ङ) अधीक्षक ऐसे बन्दी के लिए कारागार निदेशालय प्रमख को उसके अंतरण के ु

लिए एक आवेदन उस तारीख से एक मास पर्व अग्रेषित करेगा जिस पर ू

नियमों के अनसार अंतरण प्रभावी होना है।

ु

(च) कारागार निदेशालय प्रमख ऐसे

ु बन्दी को हटाने के लिए आदेश देने के लिए प्राधिकत है

ृ , जैसा कि ऊपर अपेक्षित है, और उस सरकार की सहमति से, जहां से बन्दी को हटाया जाना है, राज्य के कारागार निदेशालय प्रमख के परामर्श ु

से अंतरण को मंजरी देने वाला एक औपचारिक आदेश पारित करेगा।

(छ) किसी पलिस रजिस्टर्ड

ु निकल भागने की स्थिति में, उसके ु बन्दी की मत्य या ृ

ु निकल वारंट के साथ संलग्न पलिस रजिस्ट्रीु कतृ फ़ॉर्म को उसके मत्य या ृ

ृ कन के साथ उसके जिले के पलिस अधीक्षक ु

भागने की तिथि दर्शाते हुए पष्ठां

को वापस भेजा जायेगा।

(ज) इसी प्रकार कोई भी बन्दी, जिसका उस राज्य की कारागार में निरोध, जिसमें वह दंडादेश भगत रहा है

ु , असमीचीन समझा जायेगा, उसे राज्य के कारागार निदेशालय प्रमख और वह राज्यु सरकार जिस को उसे हटाया जाना प्रस्तावित है, की पर्व सहमति से हटाया जा सके

ू गा।

600. महामारी के दौरान अंतरण का प्रतिषेध.- (1) बन्दियों को, अन्तरित करने वाली या प्राप्त करने वाली कारागार में हैजा या कोई अन्य महामारी रोग वि(cid:217)यमान होने पर अन्तरित नहीं किया जायेगा।

(2) किसी ऐसे मार्ग से अंतरण से, जहां हैजा या कोई अन्य महामारी फै ली हई होु , जहां तक संभव हो बचा जायेगा।

601. पनु :अंतरण के आधारों का वर्णन किया जाना.- (1) जब किसी बन्दी को कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा किसी विशेष कारण से अन्त रित किया गया है, तो अधीक्षक, ऐसे बन्दी का पनु :अंतरण प्रस्तावित करते समय उस विशेष कारण को ध्यान में लाएगा जिसके लिए मल अंतरण किया गया था।ू

(2) किन्हीं तथ्यों को दबाया नहीं जायेगा।

272 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

602. पलिस (cid:217)वारा बन्दियों का एस्कॉर्ट .- बन्दियों के लिए पलिस एस्कॉर्ट ु

निम्नलिखित रीति से प्रदान किया जाता है, अर्थात ्:-

(क) बन्दियों को एस्कॉर्ट करने की जिम्मेदारी पलिस की होती है

ु ;

(ख) कारागार अधीक्षक, बन्दियों को बैचों में अन्तरित करके , जहां तक संभव हो, पलिस पर पड़ु ने वाले दवाब को घटाने का प्रयास करेगा;

(ग) अन्तरित करने वाले कारागार के प्राधिकारी, जहां तक संभव हो, विभिन्न प्रवर्गों के बन्दियों को एक ही बैच में भेजने से बचेंगे; और

(घ) के वल वहां जहां परिस्थितियां इसे अपरिहार्य बनाती हैं, वे एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी को ऐसे बन्दियों के बीच संसचना को प्रतिबंधित करने के लिए स्पष्ट अनदेशु देंगे।

603. एस्कॉर्ट के लिए आवेदन.- (1) अधीक्षक एक जेल से दसरे जेल में अंतरण पर ू

या न्यायालय को भेजे जाने वाले बन्दियों (विचाराधीन बन्दियों सहित) की सरक्षा के लिए ु

् पेक्षा भेजेगा।

अपेक्षित प्रत्येक एस्कॉर्ट के लिए पलिस अधीक्षक को एक पथक लिखित अध्यु

(2) ऐसी अध्यपेक्षा में एस्कॉर्ट किये जाने वाले बन्दियों की संख्या और नाम, उनका अपराध जिसके लिए सि(cid:217)धदोष या अभियक्तु ठहराया गया, दंडादेश, यदि कोई हो, पर्व दोषसि(िcid:217)धू , जेल रिकॉर्ड इत्यादि, का वर्णन होगा, जैसा कि अंतरण के लिए अपेक्षित है और एस्कॉर्ट की आवश्यकता होने से, कम से कम बहत्तर घंटे पर्व रविवार और अवकाश को छोड़कर प्रदत्त किया जायेगा।

(3) अत्यावश्यक मामलों में अधीक्षक अल्प सचना पर एस्कॉर्ट के लिए अध्यू पेक्षा भेज सकते हैं।

604. पर्वोपायू .- (1) अंतरण करने वाली कारागार के अधीक्षक (cid:217)वारा पलिस को सौंपे ु

जाने से पर्व निम्नलिखित प्रकार के बन्दियों का पर्ण विवरण सदैव एस्कॉर्ट दल को प्रदान किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) बन्दी जिनका कारागार में आचरण खराब है या जो खतरनाक पाये गये हैं;

(ख) जघन्य अपराधों में अंतर्वलित बन्दी;

(ग) भारतीय दंड संहिता (1860 का कें द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 224 के अधीन दंडादेशित बन्दी, और वे जो निकल भागने या निकल भागने का प्रयास करने के लिए ज्ञात हैं; और

(घ) कोई अन्य महत्वपर्ण सचना।ू ू

(2) जब ऐसे बन्दियों को अन्तरित किया जा रहा हो जिनसे लोगों का ध्यान आकर्षित होने और उपद्रव उत्पन्न होने की संभावना हो, तो जिला कलेक्टर, पलिस अधीक्षक और कारागार ु

अधीक्षक को अग्रिम सचना दी जायेगी।ू

605. महिला वार्डरों का उपबंध.- जब कोई महिला बन्दी अन्तरित की जाती है, तो उसके साथ एक महिला वार्डन या महिला पलिस कांस्टेबल होगी , लेकिन उनकी उपस्थिति अभिवहन में बन्दी को सरक्षित अभिरक्षा के उत्तरदायित्वु से पलिस को मक्तु

ु नहीं करती है।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 273

606. अन्तरित बन्दियों की सचना देनाू .- (1) अधीक्षक एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी को एक ज्ञापन देगा जिसमें भेजे जाने वाले बन्दियों की संख्या, उनके स्वास्थ्य की स्थिति, उन्हें जिस मार्ग से जाना है और भेजे जाने की तारीख दर्शायी जायेगी।

(2) वह इन सभी ब्यौरों को, उनके आगमन की संभावित तारीख के साथ, प्राप्त करने वाले कारागार के अधीक्षक को अग्रिम रूप से और यदि आवश्यक हो, तो ई-मेल या फै क्स (cid:217)वारा भी भेजेगा।

607. अंतरण से पर्व प्रक्रियाू .- अधीक्षक, किसी बन्दी को अन्तरित करने से पर्व

ू , उसके संबंध में सभी प्रविष्टियों को सत्यापित करेगा और वारंट के पीछे अंतरण का निदशर् े देने वाले आदेश की संख्या और तारीख और अंतरण की तारीख को प्रमाणित करेगा।

608. बन्दी की सम्पत्ति का प्रेषण.- (1) किसी बन्दी के अंतरण पर, प्रेषित करने वाली कारागार का जेलर या अधीक्षक, बन्दी की संपत्ति की एक सचीू , तीन प्रतियों में तैयार करवाएगा जैसा कि सि(cid:217)धदोष रजिस्टर में अभिलिखित किया गया है, और संपत्ति के लिए एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी के हस्ताक्षर प्रतिपर्ण पर रसीद के रूप में प्राप्त करेगा।

(2) दसरी प्रति और ती

ू सरी प्रति प्ररूप, जिनमें से दसरी प्रति को प्रेषण कारागार के जेलर (cid:217)वारा हस्ताक्षरित, किया जाए संपत्ति के साथ, प्राप्तकर्ता कारागार को सौंपने के लिए एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी को दिया जाएगा, जहां दसरी प्रति सची प्रतिधारित और फाइल की जायेगी।

(3) तीसरी प्रति प्राप्तकर्ता कारागार के जेलर (cid:217)वारा हस्ताक्षरित की जाएगी और एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी को सौंप दी जाएगी।

(4) यदि नकदी, आभषण या संपत्ति में को

ू ई अंतर पाया जाता है, तो इसकी तत्काल सचना ू प्रेषण कारागार के अधीक्षक को दी जायेगी जो मामले की जांच शरू करेगाु

609. बन्दियों के साथ भेजे जाने वाले दस्तावेज.- प्रत्येक अन्तरित बन्दी से संबंधित निम्नलिखित दस्तावेज प्राप्त करने वाले कारागार के अधीक्षक को प्रदत्त करने के लिए एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी को दिये जायेंगे, अर्थात ्:-

ृ कित वारंट;

(क) उसका/उसके मल वारंट या सम्यू क रूप से पष्ठां (ख) सपर्दगीकार न्याु ु यालय के निर्णय की एक प्रति, यदि उपलब्ध हो, बन्दी (cid:217)वारा की गयी किसी भी याचिका पर किसी अपील न्यायालय और सरकार का आदेश;

(ग) उसका वत्त पत्रृ ; (घ) उसकी परिहार शीट, यदि कोई हो;

(ङ) उसकी मेडिकल के स शीट;

(च) बन्दी से संबंधित सभी निजी संपत्ति की दोहरी और तिहरी सचियां

ू ; और (छ) बन्दी के साथ भेजे गए वस्त्र, बिछौना और अन्य सरकारी संपत्ति की सची।ू274 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 610. उपार्जित परिहार.- (1) पर्ववर्ती ू मास के अंत तक प्रत्येक अन्तरित बन्दी (cid:217)वारा उपार्जित परिहार की कल ु मात्रा उसके वत्त पत्रृ , परिहार शीट और वारंट पर पष्ठांकित की ृ

जायेगी, और प्रविष्टियां अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षरित की जायेंगी।

(2) अन्तरित करने वाले कारागार का जेलर उत्तरदायी होगा कि उपरोक्त जानकारी सम्यक ् रूप से और सही ढंग से प्रदत्त की गयी है और बन्दियों के साथ आने वाले सभी दस्तावेज सही ढंग से भेजे गये हैं।

.- प्रेषण से पर्व प्रत्ये

611. प्रेषण से पर्व बन्दियों की तलाशी

ू क बन्दी की उप-जेलर और एस्कॉर्ट दल की उपस्थिति में तलाशी ली जायेगी।

612. यात्रा में भोजन और वस्त्रों की आपर्ति

ू .- (1) विचाराधीन बन्दी के मामले में अभिवहन के दौरान अपने निजी वस्त्र पहनने की अनमति दी जाएगी। जब भी किसी बन्दी के निजी वस्त्र नष्ट कर दिये गये हैं, तो उसे अंतरण पर, सरकारी व्यय पर सिविलियन वस्त्र उपलब्ध कराये जायेंगे।

(2) समस्त विचाराधीन बन्दियों को निर्वाह भत्ता सरकार (cid:217)वारा निर्धारित दर पर दिया जायेगा, जिसका वहन जेल विभाग (cid:217)वारा किया जायेगा।

613. एस्कॉर्ट अधिकारी का कर्तव्य.- (1) एस्कॉर्ट का प्रभारी अधिकारी यह देखेगा कि बन्दी बाहरी व्यक्तियों के साथ संवाद न करें और अभिवहन के दौरान उन्हें अपने मित्रों या नातेदारों से नकदी सहित प्रतिषि(cid:217)ध वस्तएं प्राप्त करने का कोई अवसर न मिले। अभिवहन अवधि के दौरान, बन्दी को अपने निजी वस्त्रों के अतिरिक्त कोई नकदी, आभषण या अन्य ू

निजी संपत्ति को संभालने की अनमतिु नहीं दी जायेगी।

(2) यदि एस्कॉर्ट के प्रभारी अधिकारी की ओर से कर्तव्य का कोई भंग या उपेक्षा देखी जाती है, तो प्राप्त करने वाले कारागार का अधीक्षक कारागार महानिरीक्षक को एक रिपोर्ट भेजेगा।

614. महिला और किशोर बन्दियों की अभिरक्षा.- अभिवहन के दौरान, महिला और किशोर बन्दियों को वयस्क परुष बन्दियों से अलग रखा जायेगा।

615. अभिवहन के दौरान तलाशी.- बन्दियों की अभिवहन के दौरान अभिवहन के भारसाधक अधिकारी (cid:217)वारा प्रतिदिन तलाशी ली जायेगी।

616. रेल (cid:217)वारा अंतरण.- (1) बन्दियों को, जहां रेल (cid:217)वारा यात्रा की सविधाएं ु उपलब्ध हैं, सामान्यत: रेल (cid:217)वारा अन्तरित किया जायेगा, और बन्दियों और वार्डर, यदि कोई प्रभारी हो, का किराया रेलवे वारंट में सम्मिलित किया जायेगा। आवास उपलब्ध कराये जाने की सविधा निम्नतम श्रेणी की होगी।

(2) बन्दियों और कर्मचारिवंद के लिए रेलवे वारंट जारी

ृ करना जेल अधीक्षक के विवेक पर निर्भर होगा।

(3) जब बन्दियों को रेल (cid:217)वारा अन्तरित किया जाना हो, तो अभिवहन में उनकी सरक्षित ु अभिरक्षा और आवश्यक आवास के प्रावधान के लिए रेलवे प्राधिकारियों के साथ उचित व्यवस्था करने की दृष्टि से पलिस को प्रेषण की आशयित तारी

ु ख और घंटे की समय पर सचना दी जायेगी।ूभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 275 617. सड़क (cid:217)वारा अंतरण.- (1) पलिस एस्कॉर्ट दलु , जो सड़क मार्ग से बन्दियों को

करायेगी।

ले जा रही है, कम दरी के लिए भी आवश्यक वाहन उपलब्धू

(2) बन्दियों की सरक्षा और संरक्षा को ध्यान में रखते हए

ु , पलिस मार्गों और रुकु ने के स्थानों की पहले से ही रूपरेखा बनायेगी और अभिवहन के दौरान किसी भी दर्घटना की ु

सचना उस कारागार के अधीक्षक को तरंत दी जानी चाहिये जहां से

ु बन्दी को ले जाया गया है।

618. बन्दी के बीमार होने पर प्रक्रिया.- (1) यदि, सड़क मार्ग से ऐसे अंतरण के दौरान, कोई बन्दी इतना बीमार हो जाता है कि अपनी यात्रा जारी रखने में असमर्थ हो तो उसे चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा उपचार के लिए निकटतम अस्पताल, या किसी ऐसे स्थान पर ले जाया जाएगा जहां कोई सार्वजनिक अस्पताल हो।

(2) परिस्थितियों की रिपोर्ट तरंत प्रेषण कारागार के अधीक्षु क को और उस कारागार के अधीक्षक को दी जायेगी जहां बन्दी को ले जाया जा रहा था।

ु की दशा में प्रक्रिया.- (1) जब किसी बन्दी की 619. अभिवहन में बन्दी की मत्यृ

अभिवहन में मत्य हो जाती है

ु , तो एस्कॉर्ट का प्रभारी अधिकारी तरंत निकटतम पलिस ु

स्टेशन को परिस्थितियों की रिपोर्ट देगा, जो तत्पश्चात कार्य

् पालक मजिस्ट्रेट को सचित ू करेगा।

(2) कार्यपालक मजिस्ट्रेट मामले की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट सीधे महानिरीक्षक को सौंपेगा और शव के निपटान की व्यवस्था करेगा।

ु की सचना तरंत उस कारागार के ू

(3) एस्कॉर्ट का प्रभारी अधिकारी किसी बन्दी की मत्यृ

अधीक्षक को जहां बन्दी को अन्तरित किया जा रहा था, और अन्तरित करने वाले कारागार के अधीक्षक को भी देगा।

(4) अन्तरित करने वाले कारागार का अधीक्षक, मतक बन्दीृ के नातेदारों, सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राजस्थान मानवाधिकार आयोग को बन्दी की मत्य की ृ

सचना देगा।ू

620. बन्दी के निकल भागने पर प्रक्रिया.- (1) यदि, अभिवहन के दौरान, कोई बन्दी निकल भागता है, तो अभिवहन के प्रभारी अधिकारी (cid:217)वारा निकटतम पलिस स्टेशन को तरंत ु

सचना दी जायेगी ताकि वे

ू बन्दी को पनु : पकड़ने के लिए कदम उठा सकें ।

(2) जिस कारागार में बन्दी को ले जाया जा रहा था, उसके अधीक्षक को और अन्तरित करने वाले कारागार के अधीक्षक को भी निकल भागने की सचना दी जायेगीू , और अन्तरित करने वाले कारागार का अधीक्षक बन्दी की पर्व आशंका के लिए विहित उपाय करेगा।

(3) ऐसे बन्दी को पनः पकड़े जाने पर उस कारागार में भेज दिया जाएगा जहां से उसे मल रूप से अन्तरित किया जा गया था और यदि उसे तरंत पनु ु : नहीं पकड़ा जाता है, तो बन्दी और बन्दी की संपत्ति से संबंधित वारंट और अन्य दस्तावेज उस जेल को लौटा दिये जायेंगे जहां से उसे अन्तरित किया गया था।

276 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

621. अन्तरित बन्दियों का प्रवेश.- (1) प्राप्त करने वाले कारागार में आगमन पर, बन्दियों के प्रवेश के लिए सामान्य प्रक्रिया का पालन किया जायेगा।

(2) अधीक्षक स्वयं का समाधान करेगा कि बन्दियों की सही संख्या प्राप्त हई है और ु

अभिवहन के दौरान उन्हें समुचित भोजन और देखभाल प्रदान की गयी है।

622. बन्दियों के साथ आने वाली सचियों का सत्याू पन.- जब प्राप्तकर्ता कारागार के प्राधिकत कारागार अधिकारी ने स्वृ यं का समाधान कर लिया है कि बन्दी के दस्तावेज और संपत्ति सही ढंग से प्राप्त कर ली गयी हैं, तो वह ज्ञापन और संपत्ति की सची की तीन प्रतियों ू

पर प्रतिहस्ताक्षर करेगा और उन्हें सरकारी लागत पर जारी किये गये किसी भी वस्त्र और वस्त के साथ अन्तु रित करने वाले कारागार को लौटा देगा।

623. पत्र-लेखन के मामले में सविधाएं

ु .- कारागार अधीक्षक के विवेक पर बन्दियों को अंतरण से पर्व और पश्चाू त परिवार को पत्र लिखने की विशेष सविधाएं को दी जा सकें गी।

ु

अध्याय 25

जेलों का निरीक्षण

624. जेलों का निरीक्षण.- निरीक्षण, कारागार के बन्दियों की स्थिति और कारागार कर्मचारिवंद की कार्य स्थितियों में सधार करने में महत्वपर्ण

ू भमिका निभाते हैं और यह ू

सनिश्चित करने के लिए एक महत्वपर्ण उपकरण है कि कारागार कर्मचारिवंद लाग नियमों और विनियमों के अनसार सख्ती से कार्य कर रहे हैं और कारागार

ु अंत:वासियों से संबंधित मामलों से संबंधित सभी अभिलेखों का ससंगत नियमों के अनसार ु

ु अनरक्षितु और अ(cid:217)यतन किये जाते हैं।

625. निरीक्षण के प्रकार.- निरीक्षण दो प्रकार के होते हैं, अर्थात ्:-

(क) अनौपचारिक निरीक्षण; और

(ख) औपचारिक निरीक्षण।

626. अनौपचारिक निरीक्षण का संचालन.- (1) जेल विभाग के जेल अधीक्षक और उससे ऊपर की रैंक के प्रत्येक अधिकारी (cid:217)वारा, जैसे और जब भी वे अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हए जेल का दौरा करते हैं , अनौपचारिक निरीक्षण किये जायेंगे।

(2) आगंतकु अधिकारी एक अनौपचारिक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसमें निम्नलिखित सम्मिलित होंगे, अर्थात ्:-

(क) सरक्षा एवं प्रकाश व्यवस्था ;

(ख) भोजनालय और कैं टीन सविधाएं

ु ;

(ग) कर्मचारिवंदृ के रिक्त पदों की स्थिति; (घ) चिकित्सा सविधाएं

ु ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 277

(ङ) बन्दियों की संख्या;

(च) समस्त जेल भवन;

(छ) बन्दियों से मलाकातु ; (ज) कारागार कर्मचारिवंद की शिकायतें

ृ ; (झ) कारागार मख्यालय में लंबित मामले ;

(ञ) महिला बन्दी और शिशु; (ट) बन्दी प्रबंधन सॉ(cid:257)टवेयर या वीडियो कांफ्रें सिंग सविधाु ; और (ठ) कोई अन्य प्रशासनिक म(cid:217)दे।ु

627. औपचारिक निरीक्षणों का संचालन.- (1) निरीक्षण अधिकारी, जो सरकार (cid:217)वारा नामनिर्दिष्ट किया जाये, (cid:217)वारा विस्तृत औपचारिक निरीक्षण किया जायेगा।

(2) निरीक्षण अधिकारी, निरीक्षण कार्यान्वित करने के दौरान कारागार में न्यूनतम दो रात्रि और दो दिन व्यतीत करेगा।

(3) निरीक्षण अधिकारी निम्नलिखित को सम्मिलित करते हए एक विस्तत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करेगा, अर्थात ्:-

(क) पर्व निरीक्षण टिप्पू ण पर निदेशालय प्रमख (cid:217)वाराु किये गये संप्रेक्षणों या जारी किये गये निदेशों के अनपालन पर टिप्पणियां ;

ू सविधा ु और वास्तविक कारागार जनसंख्या;

;

(ख) अनसचित वास ु (ग) कर्मचारिवंद की रिक्ति की स्थितिृ (घ) दिन और रात्रि के दौरान सरक्षा और प्रकाश व्यवस्था या जेनरेटर सेट ;

(ङ) जेल अलार्म प्रणाली;

(च) भोजनालय और कैं टीन सविधाएं

ु ;

(छ) बन्दियों के लिए साक्षात्कार सविु धाएं; (ज) भ(cid:214)डारगहृ ; (झ) कारागार अंत:वासियों के लिए जेल अभिलेख बनाये रखना;

;

(ञ) पैरोल, परिहार और समय से पर्व छोड़े जाने आदि से संबंधित अभिलेखू (ट) महिला बन्दी और शिशु; (ठ) चिकित्सा सविधाएं

ु ;

(ड) जेल में कार्य के अवसर;

(ढ) परिहार प्रणाली;

(ण) बन्दियों की मजदरीू ; (त) पस्तकालयु ; (थ) पानी और मलवहन सविधाओं सहित बैरक में स्वा

ु स्थ्यकर परिस्थितियां;

(द) आमोद-प्रमोद संबंधी सविधाएं या खेलु -कदू या धार्मिक गतिविधियां या आध्यात्मिक गतिविधियां;

(ध) जेल फार्म;

278 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(न) जेल उ(cid:217)योग या कार्यशाला;

(प) कारागार पंचायत;

(फ) उच्च सरक्षा वार्ड

ु ;

(ब) उच्च जोखिम बन्दी;

(भ) कम्प्यटरीकरण या वीडियो ू कॉन्फ्रें सिंग सविधा या सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रानिक निगरानी प्रणाली;

;

(म) कारागार कर्मचारिवंद कॉलोनी या वार्डर लाइन आदिृ (य) कारागार कर्मचारिवंद ृ से मलाकातु ;

(यक) कारागारों, बन्दियों और कर्मचारिवंद से संबंधित अन्य प्रशासनिक मामले ; और (यख) कर्मचारिवंद का कल्याृ ण।

(4) औपचारिक निरीक्षण में निम्नलिखित पर की गयी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सम्मिलित होगी,- (क) शिकायत प्रतितोष बैठक, यदि कोई हो; और

(ख) कैं टीन प्रबंधन।

628. अर्धवार्षिक निरीक्षण.- (1) प्रत्येक कें द्रीय जेल या जिला जेल या उपलब्ध-जेल या ओपन एयर (खलाु ) कैं प या महिला जेल का वर्ष में दो बार निरीक्षण किया जायेगा, जिनमें से कम से कम एक ऐसा निरीक्षण कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा प्राधिकत किसी ु

अधिकारी (cid:217)वारा कार्यान्वित किया जायेगा।

(2) कारागार निदेशालय प्रमख प्रत्येक वर्ष ु 15 जनवरी तक विभिन्न जेलों के लिए निरीक्षण अधिकारियों की अग्रिम नियक्ति करेंगे।ु

629. अनपालना रिपोर्ट

ु .- (1) निरीक्षण रिपोर्ट में की गई टिप्पणियों की अनपालना के ु

लिए निदेशालय के प्रमख संबंधित जेल अधीक्षक को निदेश जारी करेंगे।

(2) निरीक्षण टिप्पण पर जारी निदेशों की अनपालना रिपोर्ट संबंधिु त जेल अधीक्षक (cid:217)वारा अगले निरीक्षण से पर्व प्रस्तत की जायेगी। ू ु

(3) निरीक्षण अधिकारी अपनी रिपोर्ट में पिछली निरीक्षण रिपोर्ट में उठाये गये बिंदओं या ु

टिप्पणियों पर जेल अधीक्षक (cid:217)वारा अनपालना या प्रतिक्रिया के बारे में एक पैराग्राफ लिखेगा।

630. वार्षिक निरीक्षण.- (1) निदेशालय प्रमख या उसके (cid:217)वारा प्राधिकत कोई अन्य अधिकारी राज्य की सभी जेलों का वर्ष में कम से कम एक बार निरीक्षण करेगा।

(2) यह आबंटन भी निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा प्रत्येक वर्ष ु 15 जनवरी तक अग्रिम रूप से किया जायेगा।

अध्याय 26

अभिरक्षणीय प्रबंध

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 279

631. निर्बंधन, सधार और पनर्वासु

ु .- (1) अंत:वासियों की सरक्षित अभिरक्षा कारागार ु

का प्राथमिक उत्तरदायित्व होगा और अभिरक्षा की संरचना के भीतर सधार और पनर्वास के ु

समग्र उ(cid:217)देश्य को आगे बढ़ाया जायेगा।

(2) इसके अतिरिक्त, कारागार अभिरक्षा में बंदियों के बन्दीकरण की प्रक्रिया के अधीन मानव के रूप में बन्दियों के मलभत अधिकारों पर कछ निर्बंधन सम्मिलित हैं , जिनसे बन्दियों को गजरु ना अपेक्षित है।

632. सरक्षा और अभिरक्षा .- कारागारों में सरक्षा और अभिरक्षा के संबंध में मानक निम्नानसार दिये गये हैं

ु :-

(i) प्रत्येक कारागार की विनिर्दिष्ट आवश्यकताओं के अनसार सरक्षा अध्यु

ुपाय अपनाये जायेंगे,

(ii) प्रत्येक कारागार परिसर के चारों ओर विसंक्रमित जोन के रूप में एक वर्जित क्षेत्र ('आउट-ऑफ बाउ(cid:214)ड' क्षेत्र) का सीमांकन 70 मीटर होगा,

(iii) सरक्षित दीवारें

ु , भवन (cid:217)वार, बैरक, कोठरी, अस्पताल क्षेत्र और अन्य स्थान, इनका दैनिक निरीक्षण और कारागार भवनों और परिसरों का उचित रखरखाव करना,

(iv) कारागार के भीतर और आसपास अच्छी रोशनी की व्यवस्था,

(v) सभी आने और जाने वाले बन्दियों, वस्तओं और वाहनों की गहन तलाशी की व्यवस्था। सभी कारागार अनभागों और उपु स्करों की दैनिक तलाशी और कालिक औचक तलाशी,

(vi) बन्दियों के संचालन पर नियंत्रण के लिए एक सेन्ट्रल-पाइन्ट (के न्द्र बिन्दु) मॉनिटरिंग,

(vii) प्रतिषि(cid:217)ध वस्तओं के नियंत्रण की गहन प्रणाली ,

(viii) बन्दियों की गणना की गहन प्रणाली,

(ix) ताले, चाबियां, हथकड़ी और अन्य सरक्षा उपस्कु रों की अभिरक्षा और नियंत्रण

, और निरीक्षण, सभी सरक्षा उपस्कु रों के अनरक्षण और सेवा की एक प्रणाली (x) औज़ारों और उपस्करों की अभिरक्षा, नियंत्रण, निरीक्षण और गणना की एक प्रणाली,

निकल भागने, बलवा, हमले और आग जैसी आपात (xi) दर्घटना की रोकथाम और ु

स्थितियों के दौरान आवश्यकताओं को पर्ण करने की एक प्रणाली ,

(xii) अग्न्यायध नियंत्रणु , क्वार्टर गार्ड, मैगजीन और आयध अभ्यास की एक ु

प्रणाली,

(xiii) कर्मचारिवंद और उपस्कृ रों के लिए उचित मानक अपनाकर पर्याप्त संरक्षण और सरक्षा अध्यु

ुपाय और कार्यकारी कार्मिकों (cid:217)वारा उनका कालिक परीक्षण और निरीक्षण,280 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (xiv) बन्दियों की मेल को सेंसर करने और साक्षात्कारों की जांच करने की प्रभावी प्रणाली,

(xv) जहां भी आवश्यक हो, स्थानीय आसचना शाखाओं का उपयोग करना और कारागार के भीतर जानकारी एकत्र करने के लिए एक आसचना प्रणाली बनाये ू

रखना,

(xvi) कारागार के भीतर सरक्षा के किसी भी उल्लं

ु घन के लिए प्रभावी रूप से मॉनीटर करने और कड़ी निगरानी बनाये रखने के लिए क्लोज सर्कि ट टेलीविजन प्रणाली और अन्य इलेक्ट्रानिक उपस्करों का स्थापन,

(xvii) कारागार के भीतर और बाहर दृष्टि रखने के लिए, जहां भी आवश्यक हो, निगरानी टावरों का निर्माण किया जाना और सर्चलाइट और दरबीन उपलब्ध ू

करवाना,

(xviii) बन्दियों के बीच विस्फोटकों और स्वापक पदार्थों का पता लगाने के लिए गहन तलाशी की प्रणाली,

(xix) कारागार के भीतर और एक कारागार से दसरे कारागार तक प्रभावी संपर्क प्रणाली और इंटरकॉम स्थापित करना,

(xx) कारागार भवन को आम जनता के लिए यथासंभव दर्ग

ु म क्षेत्र बनाते हएु और साथ ही अतिचार को भी रोकने के लिए, प्रत्येक कारागार में एक दसरी सरक्षा ू

दीवार सन्निर्मित करना,

, (xxi) बेहतर गश्त के लिए मख्य दीवारों के भीतर और बाहर एक अच्छी सड़कु (xxii) सरक्षा की अनदेखी किु ये बिना, सहज बातचीत और मानवीय गरिमा सनिश्चित करने के लिु ए ध्वनि अवशोषण वाला एक आधनिक साक्षात्काु र कक्ष,

(xxiii) सरक्षा आवश्यकताओं के आधार पर बन्दियों का प्रभावी रूप से पथक्करण

ृ , (xxiv) किसी भी अप्रिय घटना के बारे में कारागार कर्मचारिवंदृ , जनता और आसपास के पलिस स्टेशनों को सतर्क करने के लिए हाई पिच सायरन का स्था पन, (xxv) किसी भी परिस्थिति में अप्रशिक्षित कार्मिकों को कारागार के भीतर सरक्षा ु प्रयोजनों के लिए नियक्तु नहीं किया जाना, और

(xxvi) सरक्षा (cid:212)यटी में व(िcid:217)ध करने के लिए इलेक्ट्रानिक

ृ गैजे(cid:210)स का उपयोग किया जायेगा।

633. गार्ड स्थापन.- (1) प्रत्येक कारागार में एक सरक्षा संस्थाु पन होगा, जो बन्दियों, कारागार परिसर, गेट की सरक्षा और उन्हें सौंपे गु ये किसी भी अन्य कर्तव्य को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होगा।

(2) गार्ड स्थापन में चक्रानक्रम से अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले वार्डर सम्मिलित होंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 281

634. रिजर्व गार्ड.- (1) रिजर्व गार्ड को कारागार में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आनकल्पिक दिनों पर उपयोग होने वाले दो समहों में विभाजित किया जायेगा, उन्हें तेज गति की सविधाओं के साथ ु सचेत रखा जायेगा और रिजर्व गार्ड का उपयोग के वल उसके विनिर्दिष्ट कर्तव्यों के लिए किया जायेगा।

(2) यथासंभव, रिजर्व गार्ड का चयन यवा वार्डरों में से किया जायेगा और वे त्वरित प्रतिक्रिया टीम के रूप में कार्य करेंगे।

635. रिजर्व गार्ड की कमान.- दिन और रात्रि के दौरान रिजर्व गार्ड सदैव किसी अधिकारी के कमान में होगी।

636. रिजर्व गार्ड के आयध और गोु ला-बारूद.- रिजर्व गार्ड कार्मिक आवश्यक आधनिक ु शस्त्र जैसे पिस्तौल, कार्बाइन, सेल्फ लोडि ंग राइफल (एस.एल.आर.), पंप एक्शन गन और

-बारूद अपने साथ रखेंगे

ु , प्लास्टिक बलेट और जीवित गोला

प्राधिकत गणवत्ता की रबर बलेटृ

जिससे कि आपात स्थिति में इनका उपयोग किया जा सके ।

637. रिजर्व गार्ड का प्रशिक्षण और सतर्क ता.- अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से स्वयं का समाधान करना होगा कि रिजर्व गार्ड हर समय उचित रूप से प्रशिक्षित, ससज्जित और ु

सतर्क है। जब रिज़र्व गार्ड तैनात किया जाता है, तो उसके अधीन प्रत्येक व्यक्ति प्राधिकत ृ गोला-बारूद साथ रखेगा।

638. रिजर्व गार्ड (cid:217)वारा आयध और गोलाु -बारूद का प्रबन्ध.- जब गार्ड के एक समह ू को भारमक्तु किया जाता है, तो सभी आयध और गोलाु -बारूद भारमोचन करने वाले गार्ड को सौंप दिये जायेंगे। कमान में रिजर्व मख्यु वार्डर (रिजर्व गार्ड) आयधों और गोलाु -बारूद को सही तरीके से सौंपने के लिए उत्तरदायी होगा।

639. रिजर्व गार्ड की संख्या और अवधि.- (1) समस्त जेलों में, निम्नलिखित मान के अनसार रिजर्व वार्डर गार्ड होंगे :-

मख्यु वार्डर वार्डर

के न्द्रीय जेलें 02 20

जिला जेलें और विशेष जेलें 01 10

उपलब्ध-जेलें 01 05

(2) रिज़र्व गार्ड के वार्डर परुष या महिला होंगे , जिन्हें विशेष रूप से ड्रिल और आग्नेयास्त्रों के उपयोग में उनकी दक्षता के लिए चना जायेगा।ु

(3) रिजर्व गार्ड में वार्डर का कार्यकाल छह मास की कालावधि के लिए होगा।

(4) रिजर्व गार्ड आपातकालीन या अति आवश्यक स्थिति में अस्पताल के बाहर भी सरक्षा ु (cid:212)यटी करेगा।ू

640. रिजर्व गार्ड की तत्परता.- रिजर्व गार्ड किसी भी गतिविधि की सचना पर परी ू

तरह से सशस्त्र और ससज्जित होकर आने के लिए हर समय तैयार रहेंगे , यदि किसी भी282 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) विद्रोह को दबाने या निकल भागने के किसी भी संयक्त प्रयास को रोकने के लिए उनकी सेवाओं की आवश्यकता हो और परुषों को ु .303 राइफल या अन्य उन्नत संस्करण राइफलों से लैस होना चाहिए।

641. रिजर्व गार्ड को जेल परिसर छोड़ने की अनज्ञाु .- (1) जेलर के साथ-साथ रिजर्व मख्यु वार्डर की यह देखने की जिम्मेदारी होगी कि तत्काल कार्रवाई के लिए उपलब्ध रिजर्व में वार्डर की संख्या पर्वगामी नियम में नियत संख्या से कभी भी कम नहीं हो ।

(2) किसी रिजर्व गार्ड को, जेल परिसर छोड़ने की अनज्ञा दिये जाने या अनपस्थिति की छ(cid:210)टी दिये जाने की दशा में , जेलर वार्डरों के सामान्य निकाय से प्रतिस्थानी उपलब्ध करने की व्यवस्था करेगा, और जब ये प्रतिस्थानी रिजर्व गार्ड पर कार्य करेंगे, तब तक वे रिजर्व के लिए नियमों का हर मामले में सख्ती से पालन करेंगे।

642. रिजर्व गार्ड का प्रभारी अधिकारी.- रिजर्व गार्ड एक मख्यु वार्डर के अधीन होंगे, जो अधीक्षक (cid:217)वारा चने गए अनसार ड्रिल में परी तरह से दक्ष होगा।

ू

643. रिजर्व गार्ड के अतिरिक्त कर्तव्य.- इन नियमों में अन्यत्र विहित कर्तव्यों के अतिरिक्त, रिजर्व मख्यु वार्डर का यह कर्तव्य होगा कि,-

(i) जेल की सरक्षा और बन्दियों की सरक्षित अभिरक्षा के लि

ु ए जेलर और अधीक्षक के प्राधिकार के अध्यधीन समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं करना;

(ii) विभिन्न चौकियों, पिके (cid:210)स और वार्डरों के लिए आदमियों को व्यवस्थित और तैनात करना;

(iii) आयधागार और उसकी सामग्री का प्रभार रखना , और इस बात के लिए उत्तरदायी होना कि उससे संबंधित विनियमों के प्रति और सभी आयधोंु की देखभाल, अभिरक्षा, साफ-सफाई और तत्काल उपयोग के लिए तत्परता आदि का सख्ती से अनपालना कु रना;

(iv) प्राप्त और व्यय किए गए गोला-बारूद के स्टॉक का लेखा रखना;

(v) वार्डर गार्ड की दक्षता बनाये रखना;

(vi) प्रत्येक वार्डर को कम से कम आधे घंटे की ड्रिल देते हये

ु , सभी वार्डरों को प्रत्येक सप्ताह में एक दिन ड्रिल कराया जाएगा;

(vii) ड्रिल से अनपस्थित रहने वाले प्रत्येक वार्डर की रिपोर्ट करना ;

(viii) अधीक्षक (cid:217)वारा आदेशित किसी भी दंडादेश ड्रिल को प्रभावी बनाना;

(ix) यह देखना कि कोई भी वार्डर सम्यक प्राधिकार के बिना जेल परिसर से

अनपस्थिति की अवधि बताते हए ु

अनपस्थित न रहे और इसु संबंध में उल्लंघन करने वाले प्रत्येक वार्डर को ु रिपोर्ट करना;

(x) यह देखना कि सभी वार्डर (cid:212)यटी के दौरान सदैव उचित रूप से

ू वदी में हैं, और हर उस व्यक्ति जो उचित वदी में न हो उसके बारे में रिपोर्ट करना और यह भी देखना कि नियमों का कठोरता से अनपालना ु किया जाता है;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 283

(xi) यह देखना कि गार्ड-रूम साफ-सथरा रखा जाता है

ु , और बिस्तरों को उचित रूप से व्यवस्थित किया जाता है, और इसके लिए आपर्ति की गई लाइटें जलती ू

रहें और किसी भी खराबी के बारे में तरंत जेलर को सचित किया जा

ू ता है;

और

(xii) स्वयं का समाधान करना कि प्रत्येक वार्डर अपने पद के आदेशों को जानता और समझता है।

644. आयधागारु , आयध और गोलाु -बारूद.- (1) मख्य (cid:217)वार के पास आयध और गोला-बारूद के भंडारण के लिए एक विशेष कक्ष बनाया जायेगा और कमरे को आग्नेयास्त्र और गोला-बारूद रखने के लिए उपयक्तु स्टील या लकड़ी के रैक और सैनिक सामग्री लटकाने के लिए खंटियों से ससज्जित किया जायेगा।

ु

(2) कक्ष एक मजबत प्रबलित स्टील के दरवाजे के साथ प्रशासनिक ब्लॉक के भीतर खलने वाला होगा।

645. आयधाु गारों के ताले और चाबियां.- (1) आयधाु गार पर दो ताले होंगे और आयधाु गार तक अनचित पहंच की संभावना को कम करने के लिए , प्रत्येक दसरी ू (प्रतिरूप) चाबी को मजबत वस्त्रू के कवर में बंद किया जायेगा, इस प्रकार सील किया जायेगा कि सील को तोड़े बिना चाबी का उपयोग नहीं किया जा सके ।

(2) समस्त जेलों में उपयोग में आने वाली दोनों चाबियां दिन में रिजर्व मख्यु वार्डर के पास रहेंगी और रात्रि में एक उसके पास और दसरीू (प्रतिरूप) जेलर के पास रहेगी। दोनों दसरी ू (प्रतिरूप) दिन और रात्रि में गेट संतरी के पास रहेंगी।

(3) सभी उपलब्ध-जेलों में उपयोग में आने वाली दोनों चाबियां दिन में मख्यु वार्डर (cid:217)वारा और रात्रि में जेलर (cid:217)वारा रखी जायेंगी।

(4) दसरी ू (प्रतिरूप) को दिन में गेट संतरी (cid:217)वारा रखा जायेगा और रात्रि को जेल तिजोरी में बंद कर दिया जायेगा।

646. सशस्त्र गार्डों (cid:217)वारा सलामी.- गार्ड और संतरी नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (1) में उल्लिखित व्यक्तियों को उसके स्तंभ (2) में उल्लिखित तरीके से आवश्यक रूप से सलामी देंगे:

व् यक्ति सलामी की रीति
(1) (2)
महानिदेशक महानिरीक्षक कारागार, कारागार, उपलब्ध-महानिरीक्षक कारागार, अधीक्षक आयधों Ùवारा सलामी ु
अन् य समस् त राजपत्रित अधिकारी, , जेलर शासकीय आगंतकु आयधों को तिरछा करके और दाहिने हाथ ु को होशियारी से बट पर रखकर, उं गलियां
फ ै लाकर।
उपलब्ध-जेलर व् यवस्थित आयधों के साथ सावधान होकर। ु
284 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

स्पष्टीकरण: इस नियम का पालन करने में संतरी की ओर से किसी भी चक को रिजर्व ू

मख्यु वार्डर सदैव जेलर के ध्यान में लायेगा।

647. रिजर्व गार्ड की प्रात: और सांय की उपस्थिति.- (1) प्रात: कारागार खलने से पर्व ु

रिजर्व गार्ड और वार्डर जिनकी उस दिन के लिए (cid:212)यटी नियत नहीं की गयी है , उन्हें मख्य ु (cid:217)वार के बाहर आयधों के साथ तैनात किया जायेगा , और रिजर्व मख्यु वार्डर तरंत दिन के ु

संतरी को नियक्तु करेगा।

(2) गार्ड को ड्रिल किया जायेगा और तत्पश्चात उसे सम्प्

ूर्ण दल बाहर निकल जाने और गार्डरूम में भेज दिये जाने तक आयधों सहित रखा जायेगा

ु ।

(3) रिज़र्व गार्ड कार्य बंद करने के लिए नियत समय से लेकर बन्दियों को रात्रि के लिए बंद किये जाने तक पनु : आयधों सहित ु रहेंगे।

648. सर्यास्त के पश्चाू त सआयध उपस्थित्ि ु .- नियम के रूप में, गार्ड को सलामी प्रयोजनों के लिए सर्यास्तू के पश्चात आयध सहित बाहर नहीं आना चाहिए।

649. सामान्य गार्ड (cid:212)यटीू .- (1) सामान्य सरक्षा वार्डर स्थाु पन (cid:217)वारा अपने अधीन ली जायेगी।

(2) वे कारागार की आंतरिक और बाहरी गार्ड, श्रम घंटों के दौरान बन्दियों की निगरानी के साथ-साथ वार्डों, ब्लॉकों, कार्यशालाओं, उपस्करों और संयंत्रों और अन्य सरकारी संपत्तियों, चौकियों और टावरों की सरक्षा और रखरखाव का कार्य करेंगे ।

650. गार्डिंग अपेक्षाएं.- सरक्षा कर्मचारियों के कत्यों

ृ का चार्टर निम्नलिखित होगा:

(i) संतरी या गार्ड किसी भी दशा में कायर्मक्त हए बिना अपना पद नहीं छोड़ेगा और यदि वह अचानक बीमारी या किसी अन्य कारण से अपने कर्तव्यों का पालन करने में स्वयं को असमर्थ पाता है, तो वह प्रभारी अधिकारी को एक सचना प्रेषित करेगा

ू , जो आवश्यक व्यवस्था करेगा।

(ii) कोई भी संतरी या गार्ड (cid:212)यटी के दौरान अपनी वदी नहीं उतारेगा , परंत भोजन ु

करते समय या विश्राम करते समय यह लाग नहीं होगा।ू

(iii) गार्डों और संतरियों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को समझाया जायेगा और उनका किसी भी बन्दी के साथ कोई संपर्क नहीं होगा, जब तक कि यह उनके पदीय कर्तव्य के रूप में आवश्यक न हो।

(iv) अधिकारियों और गार्ड को कारागार के बाहर से किसी भी बन्दी के लिए कछ ु भी लाने और किसी बन्दी से कारागार के बाहर ले जाने के लिए कछ भीु प्राप्त करने पर कठोर प्रतिबंध होगा।

(v) यदि कोई बन्दी निकल भागने का प्रयास करता है, तो गार्ड तरंत अलार्म ु

बजायेगा और सरकारी संपत्ति को नकसान होने से भी बचायेगा।

ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 285 (vi) सभी सरक्षाकर्मियों कोु , जो आवश्यक सेवाओं का भाग हैं, चौबीस घंटे (cid:212)यटी ू पर समझा जायेगा और उन्हें सक्षम प्राधिकारी की अनमति के बिना परिसर ु

छोड़ने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

, (vii) रिजर्व मख्यु वार्डर और मख्यु वार्डर एक दैनिक रिपोर्ट पस्तिका संधारित करेंगे जिसमें वे उचित कार्रवाई के लिए दर्शाये जाने वाले निपटान या निगमन की सभी महत्वपर्ण घटनाओं औरू रिपोर्टों को अभिलिखित करेंगे।

651. आगंतकों के दौरे पर रिजर्व गार्ड (cid:212)यटी

ू .- रिजर्व गार्ड का जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा प्रतिदिन निरीक्षण किया जायेगा, और उसके जेल में आगमन पर वे परी वदी में

ू , उचित रूप से ससज्जित होकर और आयधों की सलामी देंगे।

ु

652. रिजर्व गार्ड पर मख्यु वार्डर (cid:217)वारा रिपोर्ट.- प्रतिदिन जेल गेट पर अधीक्षक के आगमन पर, रिजर्व मख्यु वार्डर स्वयं उपस्थित होगा और निम्नलिखित बिंदओं पर रिपोर्ट ु

देगा, अर्थात ्:-

(i) क्या पर्ववर्ती ू 24 घंटों के दौरान रिजर्व गार्ड किसी भी समय अपनी पर्ण संख्याू से कम थी और यदि ऐसा था, तो इसका कारण;

(ii) क्या जेल के किसी आगंतक अधिकारी ने रात्रि में जेल का दौरा किया था , और रात्रि के दौरान उसे कोई अन्य महत्वपर्ण मामले के बारे में सचित किया गया था;

(iii) क्या पाउच में आयध और गोलाु -बारूद तत्काल उपयोग के लिए तैयार हैं; और (iv) वार्डरों और बिना छ(cid:210)टी के अनपस्थित वार्डरों (cid:217)वारा कारित कोई अनियमितताएं या अवचार।

653. आगंतकों के लिए ु रिजर्व गार्ड एस्कॉर्ट.- रिजर्व गार्ड इन नियमों में यथा विहित आगंतकों के लिए एस्कॉ

ु र्ट उपलब्ध करायेगा और इस अवधि के दौरान जेल में किसी पद पर एक अन्य वार्डर होगा, अधिमानतः जेल के शीर्ष पर, जहां से वह जेल के भीतरी भाग का

दृश्य देख सकता है और उसके पास एक घंटी या संके तक तक पंहच होगी ु जिसके माध्यम से वह अलार्म बजा सके , और बाकी रिजर्व गार्ड को बला सके ।ु

654. गेट संतरी.- प्रत्येक जेल में रिजर्व गार्ड में से, एक गार्ड दिन और रात्रि दोनों समय मख्य (cid:217)वार पर संतरी की (cid:212)यटी करेगा

ू , (cid:212)यटी का समय उपलब्ध परुषों की संख्या के अनसार दो या तीन घंटे का हो सकता है और दिन का संतरी , मख्य (cid:217)वार पर लोहे की ु

सलाखों वाले गेट के ठीक बाहर तैनात किया जाएगा और वह 0.303 राइफल या संगीन

लगी हुई किसी भी उन्नत संस्करण की राइफल को साथ रखेगा।

655. रात्रि संतरी.- (1) मख्य (cid:217)वार पर रात्रि संतरी को भीतर या बाहर से किसी आकस्मिकता से बचने के लिए पर्वावधान के तौर पर (cid:217)वारों के मध्यू

नियक्तु किया जायेगा, और वह भीतरी (cid:217)वार के फाटक के साथ-साथ बाहरी (cid:217)वार के दसरे ताले की चाबी भी अपने ू

कब्जे में रखेगा।

286 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) वह किसी भी व्यक्ति को जेल में प्रवेश करने या छोड़ने की अनमति तब तक नहीं देगा ु

जब तक कि वह अपनी टॉर्च की रोशनी या आपातकालीन रोशनी से जांच करके स्वयं का समाधान न कर ले कि वह व्यक्ति रात्रि में जेल में आने या छोड़ने के लिए सम्यक रूप से ्

प्राधिकत अधिकारी है

ु वार्डर के साथ के सिवाय किसी भी वार्डर ृ , और वह (cid:212)यटी पर मख्यू

को जेल में प्रवेश करने या छोड़ने के लिए अनज्ञात नहीं करेगा।ु

, मजिस्ट्रेट और (3) रात्रि में जेल का दौरा करने के लिए प्राधिकत अधिकारियों में अधीक्षकृ

आधिकारिक आगंतकु , जेलर, उप-जेलर, (cid:212)यटी पर मख्यू

ु वार्डर और मख्यु वार्डर के प्रभारी गश्ती वार्डर, चिकित्सा अधिकारी और उनके अधीनस्थ भी सम्मिलित हैं।

(4) वह मख्य (cid:217)वार पर स्वु यं को प्रस्तुत करने वाले किसी भी व्यक्ति को ऊं चे स्वर में चनौती नहीं

ु देगा, या किसी भी आगंतक अधिकारी के आने की सचना मख्यु

ु वार्डर या अंदर के वार्डरों को नहीं देगा, वह सलाखों वाले (cid:217)वार के पीछे तैनात होने के कारण सरक्षा में यह ु

सनिश्चित कर सकता है कि उस व्यक्ति का जेल में कोई कार्य है या नहीं , रात्रि में किसी भी निरीक्षण अधिकारी के उपयोग के लिए आंतरिक गेट फाटक की एक दसरी ू (प्रतिरूप) चाबी रिजर्व गार्ड के प्रभारी मख्यु वार्डर (cid:217)वारा रखी जाएगी।

656. मख्यु वार्डर को रात्रि संतरी की रिपोर्ट.- जब भी जेल का कोई अधिकारी रात्रि में जेल का दौरा करता है, या उसकी संतरी (cid:212)यटी के दौू रान किसी महत्वपर्ण असामान्य घटना ू

की सचना देता है

ू , तो रात्रि संतरी (cid:212)यटी पर उपस्थित मख्यू

ु वार्डर को सचित करेगा और ू

मख्यु वार्डर अगली प्रात: अपनी (cid:212)यटी रिपोर्ट देते समय अधीक्षक की जानकारी के लिए इस तथ्य की सचना रिजर्व मख्यू

ु वार्डर को देगा।

657. गेट संतरी के आयध और गोलाु -बारूद.- (1) गेट संतरी को .303 राइफल या किसी उन्नत संस्करण वाली राइफल और बीस राउं ड गोला-बारूद उपलब्ध कराया जायेगा।

(2) किसी विद्रोह या चेतावनी की स्थिति में वह अलार्म बजायेगा और (cid:217)वारों की रक्षा करेगा और उसे आयधागार की एक दसरी प्रु

ू ति चाबी प्रदान की जायेगी।

658. गेट संतरी के कर्तव्य.- एक संतरी के सामान्य कर्तव्य निम्नलिखित होंगे;- (i) प्रत्येक दो घ(cid:214)टे में पन्द्रह मिनट से अधिक समय के लिए अपनी चौकी पर, अपनी बन्दूक के साथ "तिरछा" रखते हए स्थिर संगीन सहित उसे न तो "आराम की अवस्था में" और न ही "आयध चलाने की अवस्था

ु में" तेजी से आगे बढ़ते हए पहरा देनाु ;

(ii) किसी वरिष्ठ अधिकारी (cid:217)वारा पछताछ किू ये जाने के सिवाय किसी के साथ बातचीत में सम्मिलित नहीं होना;

(iii) किसी भी बन्दी या जेल अधिकारी के साथ अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप न करना;

(iv) नियमित राहत के बिना किसी भी बहाने से अपना पद नहीं छोड़ना;

(v) अंधेरा होने के पश्चात किसी भी व्यक्ति को चनौती दिए बिना अपनी चौकी के नजदीक न आने देना;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 287

, चनौती देने वाले व्यक्ति को चनौती (vi) अंधेरे के पश्चात चेतावनी देने के लिए्

देना, यदि उत्तर असंतोषजनक है तो, प्रभारी मख्यु वार्डर के आने तक खड़े रहना, उसी समय अपनी राइफल को "तानना";

(vii) अंधेरी रात्रि में चनौती देने में

ु , कदमों की पहंच की आवाज सनाई देने पर

ु , यदि उसे कोई उत्तर नहीं मिलता है, या असंतोषजनक उत्तर मिले, तो प्रभारी मख्यु वार्डर को बलानाु , या आवश्यक होने पर अलार्म बजाना;

(viii) अपने आसपास व्यक्तियों को भीड़ लगाने के लिए अनज्ञात न करनाु ; (ix) यदि वह किसी बन्दी को निकल भागने का प्रयास करते हए देखता है

ु , तो उसे खड़े रहने के लिए कहना, और यदि वह ऐसा करने से इनकार करता है और वहां कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजद नहीं है जोू बन्दी पर गोली चला सके गा, बशर्ते वह अन्यथा भागने को नहीं रोक सकता;

(x) यदि वह बलाए जाने से परे है और उसे गार्ड को सचेत करना है , तो अलार्म के संके त के रूप में हवा में गोली चलाना;

(xi) यदि वह जेल में या उसके आस-पास कोई ऐसी वस्त देखता है जिससे निकल ु

भागने में सहायता मिलने की संभावना हो या यदि कोई असामान्य घटना उसकी निगरानी में आती है, तो तरंत प्रभारी मख्यु

ु वार्डर को मामले की रिपोर्ट करना; और

(xii) अपने आदेशों को दृढ़तापर्वक और व्यक्तियों के बीच भेदभाव किू ये बिना लाग ू करना।

659. (cid:212)यटी रोस्टू र का अनरक्षणु .- (1) प्रत्येक कारागार में एक (cid:212)यटी ू रोस्टर अनरक्षित ु किया जायेगा और उक्त रजिस्टर के उचित अनरक्षण के लिए रिजर्व मख्यु

ु वार्डर उत्तरदायी होगा।

(2) रजिस्टर में (cid:212)यटी पर नियक्तू

ु समस्त गार्डों के नाम, उनकी (cid:212)यटी के घंटे और (cid:212)यटी के ू

घंटों को समझे जाने के लिए उनके हस्ताक्षर सम्मिलित होंगे।

(3) रजिस्टर प्रतिदिन जेलर के माध्यम से अधीक्षक को जांच एवं हस्ताक्षर के लिए भेजा जायेगा।

660. आकस्मिक दौरा.- (1) यह सनिश्चित करना रिजर्व मख्यु

ु वार्डर और जेलर की जिम्मेदारी होगी कि वार्डर (cid:212)यटी रोस्टर के अनसार अपने पद पर बने रहें और इस संबंध में किसी भी उल्लंघन को तरंत अधीक्षक के ध्यान में लाया जायेगा।

(2) अधीक्षक दिन और रात्रि के दौरान अलग-अलग हिस्सों में अपने आकस्मिक दौरे के दौरान भी इसका सत्यापन करेगा और इस बात का ध्यान रखेगा कि रात्रि की (cid:212)यटी ू चक्रानक्रम में आवंटित की जाये।ु

661. आयधों और गोु ला-बारूद का उत्तरदायित्व.- (1) प्रत्येक कारागार में कारागार की सरक्षा और रक्षा सनिश्चित करने के लिए आवश्यक पर्याप्त संख्या और प्रकार के आयध और288 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) गोला-बारूद होंगे और अधीक्षक, जेलर और उप-जेलर, जहां आवश्यक हो, स्वयं की सरक्षा के ु

लिए व्यक्तिगत आयध के रूप में

ु 9 मिमी पिस्तौल या रिवॉल्वर का उपयोग कर सकते हैं।

(2) प्रत्येक कारागार को आपात स्थिति के मामले में सरक्षा प्रयोजनों के लिए कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा यथा विनिश्चित किये गये गोला -बारूद के साथ ऐसी सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर) भी उपलब्ध करवायी जायेंगी।

(3) प्रत्येक कारागार के लिए आयधों और गोलाु -बारूद का उत्तरदायित्व कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा विनिश्चित किया जायेगा। अभ्यास गोला -बारूद उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि कारागार के समस्त कर्मचारिवंद को वार्षिक फायरिंग अभ्यास कराया जा सके ।

(4) रिजर्व गार्ड के वार्डरों या अधिकारियों को संगीन म्यान और फ्रॉग और दो गोला-बारूद पाउच के साथ एक बेल्ट जिसमें कम से कम पांच खाली राउं ड गोला-बारूद उपलब्ध कराया जायेगा। (5) प्रत्येक कारागार में पर्याप्त संख्या में लाठी, डंडे, हेलमेट, बॉडी प्रोटेक्टर, बलेटु - प्रफ जैके टू , आंसू गैस के गोले और रबर या प्लास्टिक की गोलियां चलाने के लिए उपान्तरित सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर) होनी चाहिए, जो कारागार परिसर के भीतर कारागार बलवा के मामले में व्यवस्था लाग करने के लिए आवश्यक समझी जायें।

(6) आयधों और गोलाु -बारूद में प्रौ(cid:217)योगिकी के उन्नयन और अन्य कारणों से महानिरीक्षक, राज्य सरकार की मंजरी से

ू , ऊपर उल्लिखित आयधों और गोलाु -बारूद के उपबंधों में यथोचित बदलाव कर सकें गे।

662. महानिरीक्षक को हर वर्ष भेजी जाने वाली आयधों की स्टॉक सची

ू .- (1) प्रत्येक तिमाही में, कारागार उप-महानिरीक्षक (cid:217)वारा स्टॉक में रखे आयधों गोलाु -बारूद और सैनिक सामग्री की एक सचीू , उनकी स्थिति के बारे में टिप्पणियों के साथ, महानिरीक्षक की जानकारी के लिए प्रस्तत की जायेगी और स्टॉक रजिस्टर को विनिर्दिष्ट प्ररूप में रखा जायेगा।

(2) आयधों और गोलाु -बारूद पर पाक्षिक रिटर्न विनिर्दिष्ट प्ररूप में कारागार महानिरीक्षक को भेजा जायेगा।

663. गोला-बारूद की आपर्ति

ू .- (1) कारागार निदेशालय प्रमख राज्य सरकार के ु

परामर्श से कारागार की सरक्षा के लिए आवश्यक आयधों और गोला

ु -बारूद की खरीद और उनके रखरखाव और मरम्मत के उपापन लिए उचित व्यवस्था करेगा।

(2) लघ आयधों की सभी मरम्मत या परिवर्तन आयधों के निरीक्षण के दौरान कारागार के उप-महानिरीक्षक के आयधिक (cid:217)वारा कार्यान्वित किया जायेगा।

664. आयधागार को स्वच्छु , सरक्षित एवं व्यवस्थित रखा जाना .- (1) आयधागार को ु

हर समय निष्ठा से स्वच्छ रखा जायेगा, जब भी स्टोर को प्राप्ति, वितरण या निरीक्षण के लिए खोला जायेगा, तो प्रत्येक बार उसे साफ करने के लिए आयधागार में एक ब्रश या झाड़ ु

रखी जायेगी।

(2) समस्त आयधों और गोलाु -बारूद के लिए आयध रैक में एक विशेष स्थान नियत किया जायेगा और उसकी एक ही संख्या होगी। गोला-बारूद बक्सों में सरक्षित रूप से ु तालाबंदभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 289 किया जायेगा और चाबी आयधागार के प्रभारी रिजर्व मख्यु

ु वार्डर के पास रहेगी और बक्सों की चाबियों का दसरा सेट जेलर के पास रहेगा।

ू

(3) संगीनों और गोला-बारूद के पाउचों को बेल्टों पर लटकाया जायेगा और आग्नेयास्त्रों के साथ, जिनसे वे संबंधित हैं, जब उपयोग में न हों तो, तत्काल उपयोग के लिए तैयार आयधागार में प्रत्येक को उसके विशेष स्थान पर उचित रूप से रखा जायेगा।

(4) रिजर्व गार्ड के आग्नेयास्त्रों को दिन के दौरान बेल्ट पर संगीन और गोला-बारूद के पाउचों के साथ रिजर्व गार्ड-रूम में एक रैक में तत्काल उपयोग के लिए तैयार रखा जायेगा।

(5) खाली बक्से या खली पैकिग सामग्री को आयधागार में नहीं रखा जायेगा , गोला-बारूद या आयध वाले बक्से नीचे नहीं फें के जायेंगे या फर्श पर नहीं घसीटे जायेंगे, खाली कागज कारतस की पेटी को अधीक्षक की उपस्थितिू

में जला दिया जाएगा जबकि खाली कारतस की ू पेटी आयधागार को वापस लौटा दी जायेंगी , आयधागार में भेजने से पहले , अधीक्षक को अनिवार्य रूप से प्रत्येक पैके ज की सावधानीपर्वक जांच करानी होगी और आयधागार में आयधोंु , गोला-बारूद, खाली पेटियों को वापस लौटाते समय, निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) वस्तओं को एक मजबत बक्से में सरक्षित रूप से पैक किया जायेगा ;

(ख) प्रत्येक बॉक्स को स्पष्ट रूप से सील किया जायेगा, परिवहन के दौरान टटने ू से बचाने के लिए सील को प्रतिगर्तित कर दिया जायेगा;

(ग) प्रत्येक डिब्बे पर सकल वजन अंकित किया जायेगा;

(घ) प्रत्येक बक्से पर आयधागार का पता स्पष्ट रूप से अंकित किया जायेगा ;

(ङ) प्रत्येक बक्से पर प्रेषण कारागार का नाम अंकित किया जायेगा;

(च) प्रत्येक बक्से पर वाउचर संख्यांक अंकित किया जायेगा;

(छ) प्रत्येक बक्से में एक पैकिग टिप्पं ण संलग्न किया जायेगा;

(ज) वाउचर संख्या रेलवे रसीद या बिल ऑफ टेकिग पर अभिलिखित की जायेगी ;

(झ) आयधागार की मल महर के साथ बक्से भेजे जाने के अलावा उपयोग की ग यी महरों की एक प्रतिकति आयधागार को दी जायेगी ;

(ञ) दो प्रतिदाय और दो रसीद वाउचर प्रस्तत किये जायेंगे

ु ; और

(ट) रेलवे रसीद (तैयार की गयी माल ढलाईु ), महरों की प्रतिकति और चार वाउचर संलग्न करते हए एक सलाह पत्र अग्रेषित किये जायेंगे।

(6) आयधागार के भीतर आग या ध(cid:296)पान की अनमति नहीं दी जायेगी और आयधागार में किसी भी विस्फोटक का भंडारण नहीं किया जायेगा।

665. आग्नेयास्त्रों को क्रमांकित किया जाना और किसी अधिकारी के भारसाधन में रखा जाना.- (1) प्रत्येक आग्नेयास्त्र को क्रमांकित किया जायेगा और आयधागार का प्रभारी ु

मख्यु वार्डर आयधों और गोलाु -बारूद की प्राप्ति और जारी करने का रिकॉर्ड संधारित करेगा।

290 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) प्राप्तियों और निगर्मों को उनके घटित होने की तारीख के क्रम में अभिलिखित किया जायेगा और प्रत्येक माह उनका वजन किया जायेगा। समस्त प्राप्तियों और निगर्मों पर आयधागार के प्रभारी और अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे।

(3) जिन अधिकारियों को आयध और साजु -सामान जारी किये गये हैं, उन्हें ऐसे आयधोंु और साज-सामान को साफ और अच्छी सेवा योग्य स्थिति में रखने के लिए उत्तरदायी ठहराया जायेगा।

666. आयधोंु , साज-सामान और गोला-बारूद का निरीक्षण.- (1) समस्त आयध साजु - सामान और नियमित उपयोग के लिए निकाले गये ऐसे गोला-बारूद का निरीक्षण, आयधागार ु के प्रभारी रिजर्व मख्यु वार्डर (cid:217)वारा प्रतिदिन और अधीक्षक और जेलर (cid:217)वारा साप्ताहिक रूप

, अच्छी स्थिति में, से किया जायेगा ताकि यह सनिश्चित किया जा सके कि उन्हें साफु

उचित रूप से व्यवस्थित और सेवा योग्य स्थिति में रखा गया है।

(2) यदि सेवा गोला-बारूद के क्षय होने के लक्षण दिखते हैं, तो इसका उपयोग अभ्यास गोला-बारूद के रूप में किया जायेगा।

(3) अधीक्षक प्रत्येक धात कारतस के नकसान का विस्तत स्पु

ृ ष्टीकरण कारागार महानिरीक्षक को प्रस्तत करेगा।ु

.- (1) प्रत्येक जेलर, उप- 667. कारागार अधिकारी को आयध उपयोग का प्रशिक्षणु

जेलर, मख्यु वार्डर और वार्डर को स्क्वाड ड्रिल और उनके लिए प्रदान किये गये आयधों के ु उपयोग के गहन प्रशिक्षण से गजरना होगा और उन्हें वर्ष में एक बार आयध प्रशिक्षण और फायरिंग अभ्यास का पा(cid:211)यक्रम भी करवाया जाएगा।

(2) कारागार में रिजर्व मख्यु वार्डर (cid:217)वारा वार्डरों को प्रत्येक सप्ताह दिन में एक बार प्रात: या सांयकाल को आधे घंटे के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा और समस्त अधिकारियों को, यदि आवश्यक हो, तो पलिस रेंज में लक्ष्य अभ्यास का एक पा(cid:211)यक्रम कराया जायेगा , जिससे कि वे सक्ष्मू ता और आत्मविश्वास के साथ आयधों का उपयोग करु ने में समर्थ हो सकें ।

(3) रेंज पर बॉल प्रैक्टिस का पा(cid:211)यक्रम, यथासंभव, वही होना चाहिए जो पलिस (cid:217)वारा ु

अधिकारियों को परी तरह से समझ लेना चाहिए अनसरण किया जाता है और यह समस्तु

कि किसी भी अधीनस्थ अधिकारी को चिकित्सा प्रमाण-पत्र पर छ(cid:210)टी के सिवायु , कोई भी छु (cid:210)टी तब तक मंजरू नहीं की जायेगी, जब तक कि वह ड्रिल में योग्यता प्राप्त नहीं कर लेता या लेती।

668. साप्ताहिक आयधु परेड.- (1) अधीक्षक एक साप्ताहिक परेड आयोजित करेगा जिसमें रिजर्व गार्ड और परे वार्डर स्टाफू , जो (cid:212)यटी पर नहीं हैं

ू , का उनके मख्यु वार्डर और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अधीक्षक (cid:217)वारा निरीक्षण किया जायेगा और उनके समक्ष ड्रिल अभ्यास कराया जायेगा।

(2) इन निरीक्षणों में साधारणतया महीने में कम से कम एक बार खाली कारतस के साथ ू

अभ्यास किया जायेगा और अधीक्षक, इस अवसर का उपयोग परीक्षा या पनु :परीक्षा (cid:217)वाराभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 291 अधिकारियों की व्यक्तिगत दक्षता का परीक्षण करने के लिए करेगा और इस परीक्षा के परिणामों को अधिकारी के सेवा अभिलेख पर अभिलिखित करेगा।

(3) इन परेडों में, अधीक्षक आयधों और साजु -सामान की बारीकी से जांच करेगा और स्वयं का समाधान करेगा कि जारी किये गये आयध साफ औु र अच्छे क्रम में रखे गये हैं और अधिकारी अपने व्यक्तित्व और वस्त्रों में साफ-सथरे हैं।ु

669. आग्नेयास्त्र कारागार के भीतर नहीं ले जाये जायेंगे.- (1) आग्नेयास्त्रों को के वल अलार्म परेड के समय में या आपातकाल के समय अधीक्षक या जेलर के आदेश के अधीन कारागार के भीतर ले जाया जायेगा।

(2) यदि सरक्षा स्थिति की मांग हो तो , (cid:212)यटी पर तैनात वार्डरों और मख्यू

ु वार्डरों को लाठी या बेंत जारी किये जा सकते हैं।

(3) किसी अधिकारी या वार्डर (cid:217)वारा इस नियम का उल्लंघन, उसे दंड के लिए दायी बनायेगा।

670. आयधोंु की अभिरक्षा.- (1) संबंधित रिजर्व मख्यु वार्डर यह सनिश्चित करने के ु

लिए उत्तरदायी होगा कि आयध कभी भी बन्दियों की पहंच के भीतर नहीं छोड़े जायें।

ु

(2) समस्त आवश्यक आयध जब उपयोग में न हों , गार्डरूम में रखे जायेंगे।

(3) गार्ड रूम पहंचने का मार्ग मख्य (cid:217)वार के बाहर से होगा ।

671. निकल भागने में सहायक वस्तओं की अभिरक्षा

ु .- (1) अधिकारी और सरक्षा ु कर्मचारिवंद यह सनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होंगे कि कोई भी सीढ़ि यां, तख्ते, बांस और रस्सियां, जो निकल भागने में सहायक हो सकती हैं, इधर-उधर न छोड़ी जायें और यदि ऐसी सामग्री उपयोग के लिए अंदर ले जायी जाती है तो उन्हें उचित रूप से अनरक्षित किया ु

जायेगा और उपयोग के पश्चात कारागार से बाहर भेज दिया जायेगा।

(2) कार्यशाला का प्रभारी प्रत्येक वार्डर यह देखने के लिए उत्तरदायी होगा कि ऐसी समस्त वस्तओं को ठीक से सरक्षित रखा जाये और कार्य

ु बंद होने पर उन्हें हटा दिया जाये और इस आशय का प्रमाण पत्र प्रतिदिन लॉकअप रजिस्टर में दिया जाये।

672. बन्दियों के विरु(cid:217)ध आयधों का उपयोगु .- निम्नलिखित नियम किसी भी बन्दी या बन्दियों के समह के विरु(cid:217)ध किसी विद्रोह या भागने के प्रयास की स्थिति में आयधों

ु के उपयोग को विनियमित करते हैं, अर्थात ्:-

(क) कारागार का कोई भी अधिकारी निकल भागने या निकल भागने का प्रयास करने वाले किसी भी बन्दी के विरु(cid:217)ध संगीन, आग्नेयास्त्र या किसी अन्य आयध का उपयोग कर सके

ु गा; परंत ऐसे आयध का उपयोग तब तक नहीं किया जायेगा जब तक कि ऐसे अधिकारी के पास यह विश्वास करने का यक्तियक्तु ु आधार न हो कि वह अन्यथा निकल भागने को नहीं रोक सकता।

(ख) कारागार का कोई भी अधिकारी किसी भी बन्दी पर संगीन, आग्नेयास्त्र या किसी अन्य आयध का उपयोग कर सु के गा, जो किसी भी संयक्त विद्रोह या ु

कारागार के बाहरी गेट को बलपर्वक खोलने या ू अहाते की दीवार को तोड़ने का292 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) प्रयास करता है, और ऐसे आयध का उपयोग तब तक जारी रख सके

ु गा जब तक ऐसा संयक्त विद्रोह या प्रयास वास्तव में चलाया जा रहा हो।

(ग) कारागार का कोई भी अधिकारी, कारागार के किसी भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के प्रति हिंसा करने वाले किसी भी बन्दी के विरु(cid:217)ध संगीन, आग्नेयास्त्र या किसी अन्य आयध का उपयोग कर सु के गा, यदि ऐसे अधिकारी के पास यह मानने का यक्तियक्तु ु आधार है कि कारागार अधिकारी या अन्य व्यक्ति के जीवन या अंग को खतरा है, या उसे अन्य घोर उपहति कारित होने की संभावना है।

(घ) खंड (ख) में दिए गये प्राधिकार के अधीन किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध आग्नेयास्त्रों का उपयोग करने से पर्व

ू , कारागार अधिकारी बन्दी को चेतावनी देगा कि वह उस पर गोली चलाने वाला है।

(ङ) कारागार का कोई भी अधिकारी, अपने वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में, किसी विद्रोह या निकल भागने के प्रयास की दशा में, ऐसे वरिष्ठ अधिकारी के आदेशों के सिवाय, किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध किसी भी प्रकार के आयध उपयोग ु

नहीं करेगा।

673. आयधों और गोलाु -बारूद का परिवहन.- (1) परिवहन के किसी भी माध्यम से भेजे गये आयध और गोलाु -बारूद के समस्त मालों (परेषणों) को सीलबंद बक्सों में रखा जायेगा और एक उपयक्तु सशस्त्र गार्ड (cid:217)वारा एस्कॉर्ट किया जायेगा।

(2) किसी भी आकस्मिकता के विरु(cid:217)ध आयध और गोलाु -बारूद की सरक्षा करना एस्कॉ

ु र्ट का कर्तव्य होगा।

(3) जब कारागार विभाग के आयध मरम्मत के लिए राज्य के बाहर के स्टेशनों पर भे जे जाने हों, तो उन्हें पलिस विभाग को सौंप दिया जायेगा।

(4) एक पलिस दल इन आयधों को

ु , पलिस विभाग के आयधों

ु , यदि कोई हों, के साथ एस्कॉर्ट करेगी, और जब एस्कॉर्ट के लिए पलिस विभाग के कोई आयध न हों और कारागार विभाग के आयधों का एस्कॉु र्ट करने के लिए अनन्य रूप से एक पलिस दल उपलब्धु करवाया जाना हो, एस्कॉर्ट यात्रा के संबंध में उपगत व्यय कारागार निदेशालय (cid:217)वारा वहन किया जायेगा।

674. तालों और सलाखों की सरक्षाु .- (1) प्रभारी वार्डर (cid:217)वारा समस्त तालों, सलाखों और अन्य बंधनों की नियमित रूप से जांच की जानी चाहिए और इस आशय की एक रिपोर्ट जेलर को दी जानी चाहिए।

(2) तालों की समस्त चाबियों की दसरी प्रति संबंधित जेलर की अभिरक्षा में एक सीलबंद बक्से में रखी जानी चाहिएं और कोई भी चाबियां बेहिसाब नहीं छोड़ी जायेंगी और किसी भी बन्दी की पहंच कारागार की चाबियों तक नहीं होनी चाहिए।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 293

(3) ब्लॉक की समस्त चाबियां, जब उपयोग में न हों तो, गेट पर या टावर पर एक अलमारी या चाबी बक्से में, गेट कीपर या, यथास्थिति मख्यु वार्डर (टॉवर) की अभिरक्षा में रखी जायेंगी।

(4) प्रत्येक कारागार में एक स्वचालित स्विच सहित जनित्र (जैनरेटर) लगा होगा, जिससे कि यदि वि(cid:217)यत चली जाये

ु , तो जनित्र स्वत: चाल हो जाये और समस्तू सरक्षा उपकरण बिना ु

किसी अवरोध के कार्य करते रहें।

675. गतिशील सरक्षाु .- (1) कारागारों का संचालन गतिशील सरक्षा के आधार पर ु

किया जायेगा।

(2) गतिशील सरक्षा वैकल्पिक प(cid:217)धतियों के उपयो

ु ग पर निर्भर करती है, जिसके लिए बन्दियों से विचार-विमर्श पर्व

ू -अपेक्षित है, जिससे उन्हें यह ज्ञात रहे कि क्या हो रहा है और सनिश्चित किया जा सके कि उन्हें सरक्षित और मानवीय वातावरण में रखा जा रहा है।

(3) यह के वल बन्दियों को निकल भागने से रोकने का ही नहीं, कित उनके साथ रचनात्मं ु क संबंध बनाए रखने का भी साधन है।

(4) कर्मचारिवंद को यह भी समझाया जायेगा कि सरक्षा का तात्पर्य के वल दीवार और बाड़ की सरक्षा और इलेक्ट्रानिक निगरानी नहीं है , कित यह सरक्षा और आपसी विश्वास की भावना उत्पन्न करने वाली कार्रवाई भी है।

676. वदी.- कारागार अधिकारियों की विभिन्न ग्रेड के लिए वदी की निम्नलिखित श्रेणियां विहित की गयी हैं, अर्थात ्:-

(1) कारागार महानिरीक्षक या अधीक्षक या उप-अधीक्षक या जेलर या उप-जेलर की वदी, बैज के अपवाद के साथ, नीचे दिए गये अनसार ु एक समान होगी, अर्थात ्:-

ु );

(क) पतलनू : खाकी टेरीकॉट (पलिस पैटर्न (ख) शर्ट: छोटी आस्तीन वाली खाकी टेरीकॉट (पलिस पैटर्न

ु );

(ग) सिर का पहनावा: भरे चमड़े की प(cid:210)टी के साथ खाकी ऊनी पीक कै प , कारागार संप्रतीक के साथ फोरेज कै प;

(घ) सहायक सामग्री: भरे ऑक्सफोर्ड प्रकार के चमड़े के जते

ू , चमड़े की भरे रंग की ू

बेल्ट, कारागार उप-अधीक्षक से कारागार महानिरीक्षक तक की रैंक के लिए बायीं छाती की जेब में रखे जाने के लिए नीली रेशमी कं धे की लाइन यार्ड से

-जेलर के पद के लिए खाकी सीटी की बंधी हई सीटी और वार्डर से लेकर उपु

रस्सी; और

(ङ) उप-अधीक्षक से कारागार महानिरीक्षक को स्कं धप(cid:210)ट, राजस्थान जेल सेवा और नेमप्लेट तथा वार्डर से लेकर जेलर की रैंक तक को आर.पीआर. और नेमप्लेट।

टिप्पण: कारागार सेवा में महानिरीक्षक, उप-महानिरीक्षक या अधीक्षक, उप-अधीक्षक या जेलर या उप-जेलर के लिए, रैंक के बैज (प्रतीक और सितारे सहित), पलिसु में लाग बैज ू के समान होंगे।

294 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) मख्यु वार्डर या वार्डर की वदी, बैज के अपवाद के साथ, नीचे दिये गये अनसार एक ु

समान होगी।

ु ),

(क) पतलनू : खाकी टेरीकॉट (पलिस पैटर्न (ख) शर्ट: खाकी टेरीकॉट (पलिस पैटर्न

ु ),

(ग) सिर का पहनावा: कारागार संप्रतीक के साथ खाकी ऊनी बेरेट कै प,

(घ) स्कं धप(cid:210)ट: कं धे पर आर.पीआर., नेमप्लेट,

(ङ) सहायक सामग्री: भरे ऑक्सफोर्ड प्रकार के चमड़े के जते

ू , कारागार संप्रतीक के साथ चमड़े की भरे रंग की बेल्टू , बायीं छाती की जेब में रखे जाने के लिए खाकी रेशम की लाइन यार्ड के साथ बंधी हुई सीटी।

टिप्पण: मख्यु वार्डर, वार्डर और कारागार सेवा में वार्डर के लिए, रैंक के बैज (संप्रतीक सहित), पलिस सेवा के समान होंगे।ु

(3) समस्त कारागार अधिकारियों के लिए, शीतकालीन वदी के लिए टेरीकॉट ड्रेस सामग्री के स्थान पर पतलन के लिए टेरी वल ड्रेस सामग्री और शर्ट के लिए अंगोला प्रतिस्थापि त किया जायेगा तथा खाकी ऊनी या ऐक्रे लिक स्वेटर और जैके ट अतिरिक्त रूप से जारी किये जायेंगे।

(4) सरकार विहित वदी, बैज, संप्रतीक और सितारों को आवश्यकतानसार परिवर्तित कर ु

सके गी।

(5) वार्डर से लेकर महानिरीक्षक तक प्रत्येक कारागार अधिकारी को, ऐसा भत्ता उपलब्ध कराया जायेगा जो समय-समय पर सरकार (cid:217)वारा, विहित किया जाये।

अध्याय 27

व्यावसायिक प्रशिक्षण और कार्य योजना

677. कार्य योजना और व्यावसायिक प्रशिक्षण के उ(cid:217)देश्य.- (1) व्यावसायिक प्रशिक्षण और कार्य योजना को सधारात्मक कार्य

ु योजना की आवश्यक विशेषताओं के रूप में माना जायेगा।

(2) ऐसी कार्य योजनाओं का उ(cid:217)देश्य,-

(क) अंत:वासियों के मध्य अनशासन और कार्य संस्कति को बढावा देना ;

(ख) कार्य और श्रम की गरिमा के प्रति सही दृष्टिकोण विकसित करना;

(ग) (i) अंत:वासियों के शारीरिक और मानसिक कल्याण;

(ii) ब(िcid:217)धमान शारीरिक श्रम के माध्यु म से मस्तिष्क के समचित विकासु ; (iii)अध्येतावति और जीवन जीने के सहयोगात्मक तरीके ; और

;

(iv)समह समायोजन की भावना

की अभिव(िcid:217)ध करनाृ ;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 295

(घ) सतत कड़ी मेहनत करने की क्षमता विकसित करना;

(ङ) कार्य में एकाग्रता, स्थिरता, नियमितता और सटीकता की आदतें बनाना;

(च) कार्य-कौशल प्रदान करना और उसमें सधार करनाु ; (छ) अंत:वासियों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को जागत करनाृ ; (ज) स्थायी सामाजिक पनर्स

:वासियों

ु मायोजन और पनर्वास प्राप्त करने के लिए अंतु

को प्रशिक्षण देना और तैयार करना;

(झ) व्यावसायिक प्रस्थिति प्रदान करना और इस प्रकार अंत:वासियों के बीच आर्थिक सरक्षा की भावना का सजन करना

ृ ;

(ञ) अंत:वासियों को सार्थक और उत्पादक कार्यों में उपयोगी ढंग से नियोजित रखना;

(ट) उनके मध्य आलस्य, अनशासनहीनता और अव्यवस्था को रोकना ; और

(ठ) उनके बीच मनोबल का एक अच्छा स्तर बनाए रखना और इस प्रकार उनमें स्वयं की भावना के साथ-साथ संस्थागत अनशासन को बढ़ावा देना ,

होना चाहिए।

678. नीति.- (1) कारागार में रोजगार और उत्पादन नीति को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से आने वाले बन्दियों की आवश्यकताओं को पर्ण करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए और उन कौशलों और नौकरियों पर जोर दिया जाना चाहिए, जो बन्दी के कारागार से छोड़े जाने पर रोजगार या स्व-रोजगार सनिश्चित करेंगे।ु

(2) कारागार महानिरीक्षक की अध्यक्षता के अधीन कारागार मख्यालय में एक ु "कार्य योजना और व्यावसायिक प्रशिक्षण बोर्ड" स्थापित किया जायेगा और उसे प्रशासनिक और पर्ण वित्तीय ू

शक्तियां प्रदान की जायेंगी और बोर्ड के निम्नलिखित कत्यृ होंगे:-

(क) कार्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण के कार्यक्रमों की योजना बनाना और उन्हें क्रियान्वित करना;

(ख) ऐसे कार्यक्रमों को चलाने के लिए आवश्यक निधियों की व्यवस्था करना;

(ग) उत्पादन की नीति तय करना;

(घ) कार्यक्रमों के आर्थिक पहलओं की जांच करना ;

(ङ) कारागार के कार्य, कार्यक्रमों को सदृढ़ व्यावसायिक स्तर पर लाना ;

(च) समस्त स्तरों पर समन्वय सनिश्चित करनाु ; (छ) प्रत्येक संस्थान के कार्य योजना के प्रदर्शन का मल्यांकन करनाू ; (ज) उत्पादन के आधनिक प्रबंधन की प(cid:217)धतियों और प्रक्रियाओं को पर

ु :स्थापित करना;

(झ) संस्थागत कार्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण से संबंधित समस्त मामलों का मार्गदर्शन, पर्यवेक्षण, निदेशन और नियंत्रण करना;

(ञ) उन्मोचित बन्दियों के लिए पश्चातवर्ती देखरेख गहों में कार्यशालाएं आयोजित ृ

करना;

296 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ट) कारागार उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देना;

(ठ) उत्पाद की गणवत्ता का परीक्षण किया जाना , जिससे कि उत्पादों को वर्षों तक एक साथ भ(cid:214)डारित न रखा जाये; और

(ड) राजस्थान उ(cid:217)योग विभाग के परामर्श से अंत:वासियों के लिए उपयक्तु कतिपय व्यवसायों की पहचान कर सके गा, जिनमें उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, जिससे रिहा होने के पश्चात ् एकबार उन्हें लाभकारी रोजगार मिल सके ।

(3) सरकारी विभाग, अर्ध-सरकारी संगठन, सहकारी समितियां और सार्वजनिक उपक्रम अपनी आवश्यकताओं के अनसार कारागार उ(cid:217)योगों में उत्पादित वस्तओं को कारागार और सधार सेवाऐं निदेशालय से खरीदेंगे।

, खपने वाली वस्तओं (4) दरुपयोग ु या बर्बादी की संभावना को दर करने के लिए कच्चे मालू

ु , औजार और उपस्करों की खरीद के लिए जीएफ एंड एआर के उपबंधों का पालन किया जायेगा।

(5) चयनित बन्दियों को कारागार से रिहा होने पर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, राज्य की सहकारी फर्मों और सहकारी क्षेत्र में स्थापित कषि आधारित उ(cid:217)योगों में रोजगार के लिए एक नीति अधिकथित की जायेगी।

679. व्यावसायिक प्रशिक्षण.- (1) प्रत्येक कारागार में रोज़गार योग्य दोषसि(cid:217)धों के लिए स्व-रोज़गार व्यापारों और उप-जीविकाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

(2) ऐसे कार्यक्रम उन विचाराधीन बन्दियों के लिए चलाये जायेंगे जो स्वेच्छा से ऐसा प्रशिक्षण लेना चाहते हैं।

(3) बन्दियों को प्रशिक्षण देने में स्थानीय औ(cid:217)योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की भी मदद प्राप्त की जायेगी।

(4) कारागार में विभिन्न प्रशिक्षण परियोजनाओं के कशल ु आयोजन के लिए पर्याप्त कर्मचारिवंद होंगे और ृ अपने अंत:वासियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के अनरूप विविध ु

परियोजनाओं के संचालन के लिए प्रशिक्षण सहायता और कक्षाओं से उचित रूप से ससज्जित ु

होगा।

(5) कारागार में सजातीय समहों के गठन और परियोजनाओं

ू की दैनिक चर्या और समय- अनसचीु ू निर्धारित करने के संदर्भ में प्रशिक्षण परियोजनाओं के लिए उचित रूप से परिभाषित संगठन होगा।

(6) प्रशिक्षण परियोजनाओं में उपगत होने वाली लागत, कर्मचारिवंदृ , उपस्कर और सामग्री पर व्यय को अपराधियों के प्रशिक्षण और पनर्वास के प्रयोु जन के लिए आवश्यक निवेश के रूप में माना जायेगा।

(7) किशोर अपराधियों, यवा वयस्क अपराधियों और अन्य के व्यावसायिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया जायेगा जो प्रशिक्षण परियोजनाओं से लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 297

(8) प्रत्येक उत्पादन इकाई में और व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रत्येक कार्यक्रम के लिए योग्य तकनीकी कर्मियों को पर्याप्त संख्या में नियक्त किया जायेगा और ऐसे कर्मियों को यथासंभव, औ(cid:217)योगिक प्रशिक्षण संस्थान या अन्य सरकारी संस्थान से अंतरण या प्रतिनियक्ति के आधार पर कारागार में नियक्तु

ु किया जायेगा।

(9) अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक कारावास के दंडादेश प्राप्त बन्दियों की आवश्यकताओं के अनरूप व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्य

ु योजनाएं तैयार की जायेंगी।

(10) व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यावहारिक एवं व्यवहारमलक आधार पर विकसित ू

करने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग, उ(cid:217)योग निदेशालय (कटीर उ(cid:217)योग सहितु ), औ(cid:217)योगिक प्रशिक्षण संस्थान, पॉलिटेक्निक, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान और निदेशक, रोजगार मिशन और राजस्थान राज्य आजीविका और विकास निगम आदि के साथ संपर्क स्थापित किया जायेगा।

(11) व्यावसायिक प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रमों के पर्ण होने परू , राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग (cid:217)वारा अंत:वासियों का परीक्षण किया जायेगा और परीक्षा उत्तीर्ण करने पर उन्हें उस विभाग (cid:217)वारा एक नियमित प्रमाणपत्र या डिप्लोमा प्रदान किया जाना चाहिए।

(12) कार्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण में अच्छी प्रगति दिखाने वाले बन्दियों को "प्रोत्साहन" के अध्युपाय के रूप में, अंत:वासियों को महत्वपर्ण उपक्रमों और अन्य सरकारी स्वामित्व वाले उ(cid:217)योगों का दौरा करने की अनमति दी जायेगी।ु

(13) राज्य सरकार (cid:217)वारा विभिन्न औ(cid:217)योगिक या उत्पादन इकाइयों को चलाने की मंजरीू देने के मामले में कारागार उ(cid:217)योग को अधिमानी व्यवहार दिया जायेगा और कार्यकारी और पर्यवेक्षी कार्मिकों को प्रबंधन की आधनिक प(cid:217)धतियों में प्रशिक्षित किया जायेगा।

680. बन्दियों का नियोजन.- (1) सि(cid:217)धदोषों के अलावा, स्वेच्छा से कार्य करने वाले विचाराधीन बन्दियों को भी कार्यक्रमों में नियोजित किया जायेगा और उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जायेगा।

(2) कारागार उ(cid:217)योग, या कषि में नियोजित विचाराधीन बन्दियों को सि(cid:217)धदोषों के लिए यथा विहित समान पैमाने पर उचित और साम्यापर्ण ू मजदरीू दी जायेगी।

(3) चिकित्सा अधिकारी, समय-समय पर, नियोजित रहने के दौरान बन्दियों की जांच करेगा, और प्रत्येक पखवाड़े में कम से कम एक बार, उनके वत्त पत्रों में उनका वजन अभिलिखित करवायेगा।

(4) मध्यम और दीर्घकालिक कारावास के दंडादेश प्राप्त बन्दियों को कई कौशलों में प्रशिक्षित किया जायेगा, जिससे कि वे कारागार के बाहर श्रम बाजार की स्थितियों से प्रतिस्पर्धा करने में समर्थ हो सकें ।

(5) अंत:वासियों के योजनाब(cid:217)ध नियोजन के लिए, कार्य कार्यक्रम आयोजित करते समय निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखा जायेगा:-

(क) मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य;

;

(ख) सरक्षाु , अभिरक्षा और अनशासन की आवश्यकताएं298 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ग) आयु; (घ) दंडादेश की अवधि;

(ङ) अंत:वासियों के कौशल और योग्यताएं और कौशल प्राप्त करने की संभाव्यता भी; और

ू

(च) अंत:वासी की शहरी और ग्रामीण पष्ठभमि।ृ

681. कारागार उ(cid:217)योग और कार्य योजनाओं.- (1) कार्य योजनाओं में आवश्यक संस्थागत रखरखाव सेवायें जैसे पाककला, स्वच्छता और स्वास्थ्यकर सेवाएं, कारागार अस्पताल, अन्य कारागार सेवाएं, मरम्मत और रखरखाव सेवाएं भी सम्मिलित होंगी।

(2) कारागार कार्य योजनाओं में समदाय (cid:217)वारा आवश्यक सेवा

ु एं जैसे निर्माण कार्य, चिनाई, बढ़ईगिरी, प्लम्बरी, वि(cid:217)यत फिटिंगु , सिलाई, रेडीमेड वस्त्रों का बनाना, चमड़े का कार्य, कारागार सेवा, कषिृ , बागवानी, डेरी, मर्गीपालनु , फलों की खेतीू , बेंत का कार्य, टोकरी बनाना, मि(cid:210)टी के बर्तन बनाना, किताबों की बाइंडिंग, टाइपिंग, कं प्यटर संचालनू , हस्तशिल्प, आशलिपिु , वस्त्र छपाई, कढ़ाई, होजरी, बेकरी, नमकीन बनाना, कागज बनाना, छपाई, सिलाई, बनाईु , साबन बनानाु , मोमबत्ती बनाना, खिलौना बनाना, मोबाइल मरम्मत, कं प्यटर ू मरम्मत, भोजन प्रसंस्करण और ब्यटीपार्लर सम्मिलित होंगी।ू

(3) समस्त कारागारों में आवश्यकतानसार एक ु क्षौरकार की दकान या सैलन स्थापित किया ु

जा सके गा।

(4) रविवारों को, समस्त बन्दी जेल की सामान्य साफ-सफाई में भाग लेंगे और अपने वस्त्र धोयेंगे और मरम्मत करेंगे और सोमवार को साप्ताहिक परेड के लिए सभी चीजें व्यवस्थित रखेंगे।

(5) जेल श्रम का उपयोग निम्नलिखित रूप में किया जायेगा,-

(क) जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्री की तैयारी के लिए;

(ख) लोक निर्माण विभाग के अधीन बड़े संकर्मो के सन्निर्माण हेत जेल परिसर के ु

भीतर ऐसे कार्य;

(ग) अन्यथा दर्लभ अवसरों को छोड़कर जेल परिसर से बाहर बन्दियों का रोजगार निषि(cid:217)ध है लोक निर्माण विभाग के अधीन बड़े कार्यों में दोषसि(cid:217)धों को जेलों से इतनी दरी पर नियोजितू करना समीचीन समझा जायेगा कि मौके पर ही आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिये और किसी भी बन्दी को स्टेशन सड़कों और नगरपालिका कार्यों पर अतिरिक्त रूप से नियोजित नहीं किया जायेगा, न ही किसी बन्दी को जेल परिसर के बाहर रोजगार के लिए निजी व्यक्तियों के कार्य पर रखा जायेगा।

(6) नियमित रूप से नियोजित चतर्थवर्ग कर्मचारियों अर्थात रसोइया

् , अस्पताल परिचारक, क्षौरकार, जल-वाहक और सफाई कर्मचारी की कल संख्याु जेल में बन्दियों की कल संख्या के ु

दस प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिये।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 299

(7) प्रत्येक सि(cid:217)धदोष को किसी भी प्रकार का कार्य करने के लिए पहली बार नियक्त किये ु

जाने पर एक यक्तियक्तु ु समय दिया जायेगा जिसमें वह निर्धारित कार्य के निष्पादन के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त कर सके और यदि इस दौरान वह सम्यक तत्प् रता दिखाता है और संतोषजनक प्रगति करता है तो उसे उ(cid:217)योग के लिए परिहार अनज्ञाु त किया जायेगा।

(8) किसी पर्ण कार्य

ू को पूरा करने के लिए आवश्यक समय, कार्य की प्रकति पर निर्भर ृ

करेगा और तेल निकालने, पिसाई, सत लपेटने या मोड़ने जैसे कार्यों के लिए कछ दिनों का अनभव पर्याप्त होगा और तब ु पर्ण कार्य

ू प्रवर्तित कराया जायेगा।

(9) ऐसे उ(cid:217)योगों में, जिनमें अधिक कौशल की आवश्यकता होती है, जैसे बनाईु , कालीन या दरी बनाना, किसी बन्दी को अपनी ब(िcid:217)ध के अनसार ु

ु पर्ण कार्य

ू देने में तीन मास या उससे

, अधिक का समय लग सकता है, और किसी सि(cid:217)धदोष की प्रगति का अनमान लगाते समयु

मानसिक और शारीरिक क्षमता के अंतर को ध्यान में रखते हए उचित छट देने का ध्यान ु

रखा जायेगा।

(10) प्रत्येक मामले में, जब किसी बन्दी को नया कार्य आबंटित किया जाता है (चाहे प्रवेश पर या तत्पश्चात ्) अधीक्षक, या उसके नियंत्रण के अध्यधीन जेलर, बन्दी के वत्त पत्र पर उस ृ

सटीक कार्य, जो उसे प्रारम्भ करना है, और पश्चातवर्ती पर्ण कार्य तक आवश्यू क प्रत्येक अभिव(िcid:217)धृ , अंकित करेगा।

(11) बन्दियों से करवाये गये सभी श्रम किसी निश्चित कार्य के निष्पादन के लिए आवश्यक शारीरिक परिश्रम की मात्रा के अनसारु , "कठिन", "मध्यम" या "हल्का" के रूप में वर्गीकतृ किये जायेंगे और किसी भी बन्दी से लिए जाने वाले अधिकतम कार्य निर्धारित किये जायेंगे और कार्य या कार्य अनपात या विशेष श्रम का जिसे करने के लिए प्रत्येक बन्दी शारीरिक रूप से उपयक्तु है, चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा निर्धारित किया जायेगा और किसी भी बन्दी से चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा निर्धारित और समय-समय पर उसके वत्त पत्र पर अभिलिखित ृ

किये गये श्रम से अधिक कठिन श्रम नहीं कराया जायेगा।

(12) चिकित्सीय आधारों के सिवाय, कार्य में बारंबार परिवर्तन से बचा जायेगा, कित तै

ु ल निकालने जैसे कठिन प्रकार के श्रम को बिना किसी परिवर्तन के अनिश्चित काल तक जारी नहीं रखा जायेगा, और गतिहीन कार्य को कभी-कभी अधिक सामान्य गतिविधि वाले कार्य से परिवर्तित किया जायेगा।

(13) यह अपेक्षा की जाती है कि प्रत्येक अधीक्षक अपने बन्दियों से करवाये जाने वाले कार्यों से परिचित होगा।

(14) किसी भी जेल में महानिरीक्षक की मंजरी के बिना नियमों में निर्धारित कार्यों में कोई सामान्य कमी नहीं की जायेगी।

(15) किसी बन्दी को श्रम आबंटित करने और उसका कार्य निर्धारित करने में जेलर को उसके टिकट में पाक्षिक वजन के रिकॉर्ड से निदशित किया जाना चाहियेर्।े300 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (16) बन्दियों को प्रात: की परेड और बन्दियों का दलों में वितरण का कार्य पर्ण होते ही ू

कार्य शरू कर देना चाहिए सामान्यु त: यह कार्य वार्डों को खोलने के एक घंटे के भीतर होना चाहिये।

(17) श्रम की अवधि पर्वाह्न ू 8.00 बजे से पर्वाह्न ू 11.30 बजे तक होगी और 11.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक एक घंटे के विश्राम के साथ अपराह्न 12.30 बजे से अपराह्न 4.00 बजे तक होगी।

(18) छह महीने और उससे कम के दंडादेश वाले समस्त बन्दी बाह्य कार्य के लिए पात्र होंगे, कित उन्हें तब तक नियोजित नहीं किया जायेगा जब तक कि वे सि(cid:217)धदोष के रूप में कम से कम एक मास जेल में न रह चके हों।ु

(19) इस प्रवर्ग के ऐसे बन्दियों के मामले में जो अपनी दोषसि(िcid:217)ध से पर्व कम से कम एक ू

मास तक विचाराधीन बन्दी के रूप में जेल में रहे हों, उन्हें दस दिवस की निगरानी अवधि के पश्चात बा(cid:511)य रूप से नियोजित किया जा सके

् गा।

(20) आजीवन कारावास का दंडादेश पाने वाले दोषसि(cid:217)धों के मामले में, विचाराधीन अवधि सहित चार साल का दंडादेश पर्ण होने के पश्चा

ू त ्, वे बाहरी दल में कार्य करने के लिए पात्र होंगे।

(21) प्रत्येक मामले में, वत्त पत्र में प्रविष्टि पर हस्ताक्षर करने से पर्व

ू , अधीक्षक जेल में बन्दी के आचरण और उस अपराध की प्रकति जिसके लिए उसे कारावासित किया गया है , के संदर्भ से स्वयं का समाधान करेगा कि वह इस प्रकार के रोजगार के लिए उपयक्तु व्यक्ति है।

(22) ऐसे बन्दी जो निकल भागने की प्रबल प्रवत्ति दर्शित करते हैं , या भागने की संभावना है, या घमते

ू -फिरते या आपराधिक जनजाति के सदस्य हैं, भले ही पात्र हों, उन्हें बाहरी कार्य पर नियोजित नहीं किया जायेगा।

(23) किसी बन्दी को बाह्य दल के लिए उपयोग करने से पर्व बन्दियों के व्यवहार और ू

आचरण के बारे में मख्यु वार्डर या वार्डर की रिपोर्ट पर भी विचार किया जायेगा।

, जिसके लिए (24) प्रत्येक अभ्यस्त वर्ग के सि(cid:217)धदोष को, कारावास की परी अवधि के दौरानू

उसे दंडादिष्ट किया गया है, उसके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हएु , कठोरतम प्रकार का कठोर श्रम करने की अपेक्षा की जाएगी, जिसे वह करने में सक्षम है।

(25) किसी भी लाभ या सविधा के विचार को वर्ग या श्रम को प्रभावित करने की अनमति नहीं दी जायेगी, जिसे कठोर कारावास का दंडादेश पाने वाले किसी भी सि(cid:217)धदोष को किसी भी समय निष्पादित करना आवश्यक है। यह के वल सि(cid:217)धदोष के स्वास्थ्य और बन्दियों के रोजगार के संबंध में कारागार के विनियमों के संदर्भ में नियत किया जायेगा।

(26) उपस्करों, उपकरणों, उपसाधनों और स्पेयर पा(cid:210)र्स की एक मानक सचीू , जो प्रत्येक उत्पादन इकाई के पास सदैव होनी चाहिए, तैयार की जानी चाहिए और उसका रखरखाव किया जाना चाहिये।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 301

(27) प्रत्येक संस्था में मशीनरी और उपकरणों की समय पर मरम्मत करने और खराबी को रोकने के लिए एक पथक और उचित रूप से संगठित रखरखाव कार्यशाला होगी।

(28) कारागार उ(cid:217)योगों (cid:217)वारा विनिर्मित उत्पाद बाजार के रुझानों और मांगों के आधार पर बदले या परिवर्तित किये जायेंगे।

(29) खातों और इन्वेंट्री के संघटन को व्यावसायिक तर्ज पर आधनिक बनाया जायेगा।ु 682. उत्पादों का मानकीकरण.- (1) कारागार उ(cid:217)योगों के विभिन्न उत्पादों का मानकीकरण किया जायेगा।

(2) कार्मिकों के मार्गदर्शन के लिए विभिन्न उत्पादन इकाइयों के मानकीकरण और विनिर्माण प्रक्रिया के ब्यौरों वाली एक पुस्तिका (हैन्डबकु ) तैयार की जायेगी और समस्त जेलों के लिए कारागार निदेशालय (cid:217)वारा विभिन्न उत्पादों का मानकीकरण तैयार किया जायेगा।

(3) विभिन्न उत्पादन इकाइयों के लिए बाजार से आदेश प्राप्त करने के लिए कारागार उ(cid:217)योगों के मानकीकत उत्पादों की सची तैयार की जा

ू येगी।

(4) तकनीकी पर्यवेक्षण में सधार किया जायेगा और उत्पादन के प्रत्येक चरण में गणवत्ता ु नियंत्रण की एक प्रणाली शरू की जायेगीु , जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनायी रखी जा सके ।

(5) कारागार उत्पादों की लागत कारागार प्रबंधन की विभिन्न सीमाओं और बाधाओं को ध्यान में रखते हए तर्क संगत आधार पर की जायेगी और कारागार उ(cid:217)योगों (cid:217)वारा उत्पादन के पीछे हेतक लाभ का प्रतिशत नहीं होगा।

(6) कारागार गेट के बाहर और अन्य स्थानों पर, कारागार उ(cid:217)योग के उत्पादों के विक्रय की प्रोन्नति के लिए शोरूम खोले जायेंगे और एक ब्रोशर भी रखा जायेगा, जिसमें इंटरनेट पर जनता को विक्रय किये जाने वाले उत्पादों के बारे में जानकारी दी जायेगी और उनकी दरें भी प्रदर्शित की जायेंगी।

(7) राज्य की राजधानी में एक बड़ा शोरूम या सेल्स काउं टर होगा।

683. कारागार उ(cid:217)योगों के लिए उत्पादन के लक्ष्य.- (1) आगामी वर्ष के लिए प्रत्येक इकाई के लिए उत्पादन के लक्ष्य रोजगार योग्य अंत:वासी जनसंख्या और इकाई की उत्पादन संभाव्यता के अनसार नियत किये जायेंगे।ु

(2) इन लक्ष्यों को संबंधित संस्थानों को अग्रिम रूप से संसचित किया जायेगा और लक्ष्य के अनसार इकाई के उत्पादन का ु मासिक रूप से पनर्विलोकन किया जाना चाहिए।

ु

(3) निर्धारित उत्पादन लक्ष्य को पर्ण करना कारागार अधीक्षक का उत्तरदायित्व होगा।

(4) प्रत्येक बन्दी की कार्य सची को उत्पादन इकाइयों के प्रभारी तकनीकी कार्मिकों (cid:217)वारा सही ढंग से अनरक्षित किया जायेगा।ु

684. मजदूरी.- (1) योग्य अंत:वासियों को प्रदर्शन आधारित मजदरी का भगतान ू

किया जायेगा मज़दरी उचित और साम्या

ू पर्ण होगीू , न कि के वल नाममात्र की और मामली।ू (2) इन दरों को समय-समय पर सरकार (cid:217)वारा यथा अधिसचित न्यनतम मजदरी को ध्यान में रखते हए मानकीकत किया जायेगा।

ृ302 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (3) कारागारों में मजदरी प्रणाली को स्वतंत्र समदाय के अनरूप बना

ु ये रखने की दृष्टि से, वेतन का प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार पुनर्विलोकन किया जायेगा और जब भी आवश्यक हो, संशोधित किया जायेगा।

(4) सि(cid:217)धदोष को देय मजदरी का एक भाग पीड़ित या उसके परिवार के लिए रा ज्य सरकार या न्यायालय के आदेशों (cid:217)वारा इस प्रयोजन के लिए बनाये जाने वाले नियमों के अनसार ु काटा जायेगा।

(5) मजदरी हर माह बन्दी

ू के बचत बैंक खाते में जमा की जायेगी और पासबक संबंधित ु

जेलर के पास रखी जायेगी।

685. कार्य में लगे बन्दियों के लिए सरक्षा उपायु .- (1) कार्यस्थलों और अन्य स्थानों पर जहां बन्दी कार्य करते हैं, निम्नलिखित सविधाएं प्रदान की जायेंगी ,-

ु , धपू , गैसों और रसायनों से सरक्षाु ;

;

(क) गर्मी, सदी, बरसात, धलू , धएं (ख) रिसाव और नमी से सरक्षाु ; (ग) सरक्षित पेयजलु ; (घ) थकदानू , मत्रालय और शौचालयू (ङ) धलाई और स्नान की

ु सविधाु एं;

(च) प्राथमिक चिकित्सा सविधाएं

ु ; (छ) अग्निशामक दमकल यंत्र और अन्य अग्निशमन उपस्कर;

(ज) पर्याप्त संवातन और प्रकाश व्यवस्था; और

(झ) सरक्षा उपु स्कर और दर्घटना निवारण उपाय।ु

टिप्पण: इस संबंध में बाहरी कारखानों में अपनाये गये मानकों को कारागार कारखानों में भी अपनाया जाना चाहिए। इन्हें कारखानों के प्रबंधक के परामर्श से निर्धारित किया जाना चाहिए;

(2) उप-जीविकाजन्य रोगों के जोखिमों वाली उत्पादन इकाइयों में कार्य करने वाले बन्दियों की आवधिक चिकित्सा जांच की जायेगी।

(3) बन्दियों को प्रतिकर दिया जायेगा, जिन्हें गंभीर क्षति या मत्य ृ ु हयी हो।ु

(4) बन्दियों के प्रत्येक समह के लिए कार्य के घंटे प्रत्येक संस्थान की कार्यक्रम सामग्री के अनसार विहित किये जायेंगे , कित एक दिन में कार्य के कल घंटे आठ घंटे से अधिक नहीं होने चाहिये।

(5) तकनीकी कार्मिक या उत्पादन इकाई का प्रभारी कार्यकर्ता, यदि कोई हो, बन्दी (cid:217)वारा किये गए कार्य को मापेगा, साथ ही इसे संबंधित बन्दियों के टास्क टिकट फॉर्म में ध्यानपर्वक ू अंकित किया जायेगा और इस टिकट को जेल प्रबंधन प्रणाली में कम्प्यटरीकत ू

प्ररूप में भी संधारित किया जायेगा।

(6) कठोर कारावास दंडादेशित बन्दी या अन्य बन्दी जो कार्य करने के इच्छक हैं

ु , आपातकाल के सिवाय और अधीक्षक के लिखित आदेश को उसकी आदेश पस्तिु का और बन्दी के वत्त पत्र ृ में प्रविष्ट करके , प्रतिदिन आठ घंटे से अधिक कार्य नहीं करेंगे।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 303

(7) कार्य पारी का समय जलवाय के आधार पर अधीक्षु क (cid:217)वारा विनिश्चित किया जायेगा और तत्काल आवश्यकता के सिवाय, सि(cid:217)धदोष को रविवार या घोषित अवकाशों पर श्रम में नहीं रखा जायेगा।

(8) प्रत्येक बन्दी को कार्य योजनाओं से सप्ताह में एक दिन का विश्राम मिलेगा।

(9) यदि चिकित्सा अधिकारी को पता चलता है कि कोई बन्दी सांसर्गिक और संक्रामक रोग से पीड़ित है, तो वह तरंत उसे क्वारंटाइन करने की व्यवस्था करेगा और बन्दी को तब तक कोई कार्य करने के लिए नहीं कहा जायेगा जब तक वह परी तरह से ठीक न हो जाए।

ू (10) जिन कारागारों के परिसर में कैं टीन है, वे बन्दियों को समय-समय पर कारागार महानिरीक्षक (cid:217)वारा विनिश्चित की गयी राशि के नकद के बदले कपन प्रदान करेंगे।ू

(11) कारागार अधिकारियों को अधीक्षक के विवेक पर वास्तविक लागत मल्य पर जेल ू

कार्यशालाओं में लघु सामग्री सामान बनवाने या लघ कार्य करु वाने के लिए अनज्ञात ु किया जायेगा, परंत यह तब जु बकि ऐसे सामान या कार्य ऐसे अधिकारी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए वास्तव में हों और अधीक्षक की पर्व मंजरी लिखित रूप में प्राप्त कर ली गयी है।

(12) कारागार कार्यालयों में लिपिक के रूप में बन्दियों का नियोजन सर्वथा निषि(cid:217)ध होगा, कित अधीक्षकं ु , जब इसके लिए विशेष आवश्यकता हो, किसी ऐसे शिक्षित बन्दी को लिपिकीय कार्य में नियोजित करने की मंजरी दे सके

ू गा, जिसका कारागार कार्यालय से कोई संबंध नहीं है।

(13) कारागार उत्पादन कें द्र के भीतर या बाहर कोई भी प्राधिकत कार्य नहीं किया जाएगा ृ

और निर्माण या मरम्मत का कोई भी कार्य तब तक नहीं किया जायेगा, जब तक कि इसके निष्पादन का आदेश जेलर की रिपोर्ट-पस्तिु का या अधीक्षक की आदेश पस्तिु का में सम्यक ् रूप से अभिलिखित नहीं किया जाता है या ऐसे प्रयोजन के लिए रखी गई किसी विशेष पस्तक में

ु , जेलर या उत्पादन कें द्र के प्रभारी के रूप में तैनात अन्य अधिकारी के (cid:217)वारा आ(cid:217)यक्षरों के अधीन या बन्दी के वस्त्रों की मरम्मत के मामले में, जब तक कि जेलर का आदेश ऐसे बन्दी के वत्त पत्र में अभिलिखित नहीं किया जाता है।

686. महिला और किशोर दोषसि(cid:217)धों पर अधिरोपित किये जाने वाले कार्य.- महिलाओं या किशोर दोषसि(cid:217)धों पर क्रमशः अधिरोपित किये जाने वाले कार्य किसी भी दशा में वयस्क परुष दोषसि(cid:217)धों के संबंध में विहित कठिन और मध्यम श्रम के अधिकतम कार्य के दो तिहाई से अधिक नहीं होंगे।

687. वितरण रजिस्टर.- (1) एक वितरण रजिस्टर होगा जिसे अगले दिन शीघ्र लिखा जायेगा।

(2) किसी भी दिन भर्ती किये गये या छोड़े गये और कार्य नहीं करने वाले बन्दियों को श्रम से छट के रूप में अभिलिखित किया जायेगा और रविवार और अवकाशों पर, सफाई कर्मचारियों, रसोइयों या हर दिन कार्य करने वाले ओवरसियर के सिवाय समस्त बन्दियों को श्रम से छट दीू जायेगी।

304 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) इस रजिस्टर से औसत बनाते समय, रविवार और छ(िcid:210)टयों को सदैव बाहर रखा जायेगा और इसलिए, खाली छोड़ा जायेगा।

688. किसी भी बन्दी को निजी कार्य पर नहीं लगाया जाना.- किसी भी बन्दी को, किसी भी समय, कारागार के किसी भी अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति (cid:217)वारा, किसी भी निजी कार्य या किसी भी प्रकार की सेवा के लिए नियोजित नहीं किया जायेगा।

689. बाहरी अभिकरणों के लिए कार्य का निष्पादन.- निजी पक्षकारों या औ(cid:217)योगिक इकाइयों को कारागारों के भीतर कारागार श्रमिकों (cid:217)वारा अपना विनिर्माण कार्य कराने के लिए कारागार से संपर्क करने के लिए अनज्ञात किया जा सकता है , यदि ऐसे निर्माण की क्षमता और जानकारी उपलब्ध हो, और यह सनिश्चित किया जाना चाहिये कि ऐसी निजी पक्षकारों और औ(cid:217)योगिक इकाइयों (cid:217)वारा उचित वेतन और अन्य खर्चों का भगतान किया जाये।ु 690. खातों की वार्षिक संपरीक्षा.- उत्पादन या कार्य इकाई के खातों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए सरकारी संपरीक्षकों (cid:217)वारा व्यवस्थित रूप से संपरीक्षण किया जायेगा।

ु , बन्दियों को निम्नलिखित आधारिक 691. कषिृ .- कषि के निबंधनों के अनसारृ

संरचनात्मक सविधाएं उपलब्ध करवा

ु यी जायेंगी, अर्थात ्:-

(क) सधाु रात्मक संस्थानों में कार्य योजनाओं और व्यावसायिक प्रशिक्षण के नियोजित विकास में कषिृ , कषिृ -आधारित उ(cid:217)योगों और अन्य संब(cid:217)ध गतिविधियों को उच्च प्राथमिकता दी जायेगी;

(ख) किसी संस्थान के पास उपलब्ध भमि का मदा विश्लेषणू

ृ , उपलब्धता, उर्वरता, लवणता और जल निकासी की आवश्यकता के संदर्भ में गहन सवक्षण कियार् े

जायेगा, ताकि इसका अधिकतम उपयोग किया जा सके ;

(ग) इस संबंध में खंड विकास अधिकारियों, राज्य कषि विभाग या बागवानी ृ

विभाग के अधिकारियों और अन्य संब(cid:217)ध एजेंसियों की मदद ली जायेगी;

(घ) ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक नये कारागार भवन में जहां भी इस प्रयोजन के लिए भमि उपलब्ध होू , एक उचित बाड़यक्तु खेत होना चाहिए;

;

(ङ) यह सनिश्चित किया जायेगा कि ु फार्म में उचित सिंचाई सविधाएं उपलब्ध हों (च) प्रत्येक फार्म भमि ू पर आवश्यक भवन संरचना का सन्निर्माण किया जायेगा और आंतरिक सड़कें बिछाई जायेंगी;

(छ) प्रत्येक फार्म पर समस्त आवश्यक कषि उपस्कृ र और स्पेयर पा(cid:210)र्स उपलब्ध कराये जायेंगे और बड़े फार्मों में एक रखरखाव की दकान भी स्थापित की ु

जायेगी;

(ज) कषि फार्मों में श्रम के लिए नियक्त बन्दियों को समह बनाकर फार्म में विभिन्न स्थानों पर वितरित किया जायेगा, प्रत्येक समह के लिए एक नेता ू

को नामनिर्दिष्ट किया जायेगा;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 305

(झ) अंत:वासी जिन्हें खले कषि फाम्र्स

ृ में अभिनियोजित किया जायेगा, के पात्रता मानदंड का कथन करते हएु , कारागार मख्याु लय (cid:217)वारा मार्गदशन जारी किये जायेंगे;

(ञ) किसानों को उर्वरक, उपस्कर खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी और कारागार फार्मों को वि(cid:217)यत भी उपलब्ध कराई जायेगी ;

(ट) कषि और संब(cid:217)ध गतिविधियों के विकास के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध करायी जायेगी और इसका लेखा अलग से रखा जायेगा;

(ठ) प्रत्येक कषि इकाई पर अपेक्षित सरक्षा कार्मिक उपलब्ध करा

ु ये जायेंगे और उनके कर्तव्य और उत्तरदायित्व स्पष्ट तौर पर अधिकथित किये जायेंगे;

(ड) कषि उत्पादों काृ पहले कारागार में उपभोग किया जायेगा और शेष को सरकारी विभागों और खले बाजार में विक्रीत किया जायेगा ;

(ढ) प्रत्येक इकाई की दक्षता का वार्षिक मल्यांकन नियत और प्राप्त लक्ष्यों के निबंधनों के अनसाु र किया जायेगा;

(ण) बन्द कारागारों में कषि गतिविधियों में नियोजित बन्दियों की संख्या कल कारागार आबादी के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए;

(त) कारागार कार्मिकों को कषि और संब(cid:217)ध गतिविधियों के विभिन्न पहलओं में प्रशिक्षण दिया जायेगा;

(थ) कारागार फार्म मे बायो-गैस संयंत्र, पवनचक्की या सौर-खाना पकाने की रेंज प्रविष्ट की जायेगी;

(द) कषिृ क और अन्य उपज की लागत का निर्धारण सर्वथा वाणिज्यिक आधार पर किया जायेगा;

(ध) खलीु कषिृ क संस्थाएं और संलग्न कषिृ क फार्म वाली संस्थाएं, मिश्रित खेती, सिंचित फसल या सखी खेती जैसी फसल योजनाओं के अनसार ु कार्य योजनाओं में विविधता लायेंगी; और

(न) कछ खले कारागारों में कार्य का कषिु

ृ क गतिविधियों, औ(cid:217)योगिक इकाइयों और कषि आधारित उत्पादन इकाइयों में विविधीकरण किया जा सकता है।

692. डेरी और कक्कु ु ट पालन के न्द्र.- (1) उचित तकनीकी मार्गदर्शन के अधीन व्यावसायिक तर्ज पर खले कारागार फार्मों पर डेरी

ु यां विकसित की जायेंगी।

(2) कक्कट पालन के न्द्रु ु को भी खले फार्मों में व्यवस्थित किया जाना चाहिए। इन्हें उचित तकनीकी पर्यवेक्षण के अधीन वाणिज्यिक प(cid:217)धति पर चलाया जायेगा।

अध्याय 28

बन्दियों का कल्याण

693. कल्याण कार्यक्रमों के मल तत्वू .- (1) कारागारों में कल्याण कार्यक्रमों के

उ(cid:217)देश्य,-306 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (क) संस्था में एक आरामदायक, सकारात्मक और संरचनात्मक वातावरण विकसित करना;

(ख) आपसी भरोसा और विश्वास पर आधारित अच्छे कार्मिक-अंत:वासी संबंध सनिश्चित करनाु ;

(ग) अंत:वासियों की देखभाल और कल्याण सुनिश्चित करना; (घ) दृढ़ एवं सकारात्मक अनशासन सनिश्चित करना

ु ;

(ङ) अंत:वासियों की तत्काल और अर्जेंट आवश्यकताओं और समस्याओं पर ध्यान देना;

(च) अंत:वासियों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं पर ध्यान देना;

(छ) अंत:वासियों को बाहरी दनिया में उनके परिवारों और समदायों के साथ

नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद करना;

(ज) आत्म-अनशासन के लिए प्रोत्साहनों की एक अच्छी प्रणाली सनिश्चित करना जैसे कि परिहार, खली हवा शिविर में छ(cid:210)टी अंतरणु

ु और समय पर्व छोड़ा ू

जाना;

(झ) व्यक्तिगत मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करना;

(ञ) समह गतिविधियोंू , समह मार्गदर्शनू , समह काू र्य को प्रोत्साहित करना; (ट) उचित आदतें, रुख और पहंच लाग करना और उन्हें सामान्य सामाजिक जीवन के लिए तैयार करना; और

(ठ) मनोचिकित्सा सहित सहायक चिकित्सा प्रदान करना।

होने चाहियें।

(2) समस्त कल्याण कार्यक्रमों का प्रारंभिक बिंद बन्दीु का प्रारंभिक वर्गीकरण और व्यक्तिगत अंत:वासियों का अध्ययन होगा। कल्याण कार्यक्रम में बन्दियों की प्रगति और पनर्वर्गीकरण ु

की समय-समय पर समीक्षा, दंडादेश की समीक्षा और समय से पर्व छोड़ा जानाू , छोड़े जाने की योजना, छोड़े जाने से पर्व की तैयारी और उसके पश्चा

ू त की देखभाल सम्मिलित होनी ्

चाहिए।

(3) संस्थागत कार्मिकों का सकारात्मक प्रभाव, इस प्रक्रिया में महत्वपर्ण भमिका निभायेगा ू

और सामदायिक भागीदारीु , कल्याण कार्यक्रमों का एक महत्वपर्ण लक्षण होगा।ू

694. परामर्श.- बन्दियों को परामर्श सविधाएं निम्नानसार विस्ता

ु रित की जायेंगी:-

(क) कारागार में प्रवेश के समय बन्दी के वर्गीकरण से पर्व उसकी मानसिक ू

स्वास्थ्य स्थिति का अध्ययन किया जायेगा और मानसिक रूप से बीमार प्रमाणित बन्दियों को कारागार में परिरु(cid:217)ध नहीं किया जायेगा और इसके बजाय उन्हें विशेष संस्थाओं में अन्तरित करने के लिए समचित उपाय किये ु

जायेंगे;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 307

(ख) जरूरतमंद बन्दियों, विशिष्ट रूप से मादक पदार्थों से संबंधित व्यसनी विकारों से पीड़ित और दव्र्यवहार के शिकार को परामर्श प्रदान करने के लिए कारागार विभाग (cid:217)वारा पेशेवर रूप से अर्हित परामर्शदाताओं को नियक्त किया जायेगा

ु ;

(ग) कारागार विभाग (cid:217)वारा अपेक्षित मनोवैज्ञानिक सामाजिक सहायता सेवाओं को सक्षम करने के लिए बन्दी के मानसिक स्वास्थ्य का उचित और नियमित मल्यांकन किया जायेगा ;

(घ) गंभीर मानसिक विकारों के लिए उचित मनश्चिकित्सीय उपचार अपेक्षित होगा और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का कें द्रीय अधिनियम सं.

14) के उपबंधों के अधीन अवधारित किया जायेगा।

695. मनोचिकित्सा.- कारागारों में मनोचिकित्सा का उपयोग किया जायेगा क्योंकि इसे कछ हद तक मानसिक विकार और दोषों से पीड़ित बन्दियों के उपचार के लिए एक प्रभावी उपाय के रूप में मान्यता दी गई है।

696. मार्गदर्शन.- (1) किसी बन्दी के अधिकारों, कर्तव्यों, हकदारी, अनशासन और ु

दैनिक दिनचर्या से संबंधित पैम्फलेट मद्रित और वितरित किये जायेंगे ताकि बन्दी 'क्या करें' और 'क्या न करें' का पालन कर सके और अपने परिरोध के दौरान अनशासन बनाए रख ु

सके ।

(2) उपरोक्त साहित्य को कारागार पस्तु कालय में भी रखा जायेगा और उन बन्दियों को जारी किया जायेगा, जो पढ़ सकते हैं।

(3) निरक्षर बन्दियों को जेल कर्मचारियों (cid:217)वारा स्वयं या शैक्षिक कार्यक्रमों में लगे अन्य साक्षर बन्दियों की सहायता से साहित्य की सामग्री समझायी जायेगी।

, फ़िल्में, पस्तकालयु .- (1) 697. आमोद-प्रमोद, खेल-कदू , सांस्कतिक गतिविधियां

बन्दियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए समस्त संस्थाओं में सांस्कतिक और आमोदृ -प्रमोदात्मक गतिविधियां आयोजित की जायेंगी और चकि ये ू

गतिविधियां बन्दियों के पनर्वास कार्यक्रमों के मल तत्वु

ू हैं, इसलिए वे एक संस्थागत शासन का अभिन्न अंग बनेंगी।

(2) आमोद-प्रमोदात्मक और सांस्कतिक गतिविधियां विभिन्न स्थितियों जैसे स्थान की उपलब्धता, जलवाय और मौसमु , अंत:वासियों की संरचना और सरक्षा की व्यवस्था के आधार ु

पर आयोजित की जायेंगी।

(3) ऐसी गतिविधियों में,-

(क) बहिरंग (आउटडोर) खेल जैसे क्रिके ट, कब(cid:212)डी, कश्तीु , वॉलीबॉल, बैडमिंटन, फ़टबॉल और बास्के टु -बॉल;

(ख) जिम्नास्टिक;

(ग) शतरंज, लडोू , कै रम, रिंग-बॉल और स्किपिंग जैसे अंतरंग (इनडोर) खेल; (घ) ऐतिहासिक, देशभक्ति, जीवनी संबंधी, वैज्ञानिक और शैक्षणिक फिल्में, यात्रावतृ , वत्तृ चित्र, न्यज़रील और सामाजिक विषयों से संबंधित फिल्में दिखाने308 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) वाले फिल्म शो दिखाए जाने चाहिए और अपराध, सेक्स, हिंसा, रहस्य और ऐसे अन्य विषयों को दर्शाने वाली फिल्में, जो अंत:वासियों के मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव डाल सकती हैं और उन्हें नहीं दिखाई जानी चाहिए।

(ङ) प्रत्येक कें द्रीय और जिला कारागार में बन्दियों या अंत:वासियों को फिल्में दिखाने की सविधा होनी चाहिए और महानिरीक्षक के मख्यालय में अच्छी फिल्मों की एक लाइब्रेरी विकसित की जानी चाहिए और उन फिल्मों को विभिन्न संस्थाओं में परिचालित किया जायेगा;

, फिल्म और (च) महानिरीक्षक और फिल्म प्रभाग, सचना और प्रसारण विभागू

टेलीविजन संस्थाओं, फिल्म सोसायटियों और अन्य संगठनों के मध्य घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया जाना चाहिए जो अंत:वासियों के लिए अच्छी फिल्मों की आपर्ति

ू कर सकते हैं;

(छ) कारागार के परिरु(cid:217)ध वातावरण में संगीत का विशेष महत्व होता है, यह एकाकी, व्यथित और दखी ु अंत:वासियों को राहत पहंचा सकता है

ु , यह बोरियत से अवमक्तु कर सकता है और संस्थागत कार्यक्रमों में रुचि में अभिव(िcid:217)ध कर सकता है और संगीत कार्यक्रमों में रेडियो संगीत , रिकॉडडर् े संगीत, समह गायनू , लोक संगीत, वा(cid:217)य संगीत और ऑकस्ट्रा सम्मिलितर् े

होंगे;

(ज) सामदायिक और लोक नत्यु

ृ : समह और लोक नत्य त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर संपादित किये जायेंगे;

(झ) उपयोगी सामाजिक मल्यों और व्यवहार के मॉडलों

ू वाले नाटक को नाटकीय प्रदर्शनों के माध्यम से अंत:वासियों के समक्ष प्रस्तत किया जा ु सकता है और सामाजिक समस्याओं से निपटने वाले नाटक, तमाशे, संगीत नाटक, झांकी, एकांत भाषण, संवाद, रेडियो नाटक और हास्य नाटक अंत:वासियों के लाभ के लिए प्रस्तत किये जायेंगे और ु अंत:वासियों को स्वयं भाग लेने और इन गतिविधियों को आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है;

(ञ) कला और शिल्प बन्दियों को उपयोगी मल्य प्रदान करने में महत्वपर्ण भमिका निभा सकते हैं; बन्दी इन गतिविधियों के माध्यम से अपनी वैयक्तिकता बनाए रख सकते हैं और ऐसी गतिविधियां कारागार के नीरस जीवन में सहायक चिकित्सीय उपायों के रूप में भी कार्य कर सकती हैं;

(ट) बन्दियों को मि(cid:210)टी के बर्तन, टोकरी बनाना, लकड़ी पर नक्काशी, बढ़ईगीरी, लकड़ी की छत और लिबास, लकड़ी मोड़ना, घिसाई का कार्य, चमड़े का कार्य, गहृ -सज्जा, लैंप-शेड बनाना, धात शिल्पु , प्लास्टिक, खिलौना बनाना, कत्रिम ृ फल बनानाू , सींग-शिल्प, मि(cid:210)टी (क्ले) मॉडलिंग, लाख का कार्य, ड्राइंग, पेंटिंग, स्टेंसिलिंग, कागज-शिल्प, कागज से कलाकतियां बनानाृ , गलीचा बनाना,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 309 फे ल्ट-वर्क , बनाईु , कढ़ाई, सईका कार्य या कसीदाकारी के लिए आवश्यक सविधाएं प्रदान की जायेंगी ;

(ठ) अंत:वासियों को किताबें, समाचार पत्र और पत्रिकाएं पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा और समह में पढ़ने और निदशित पठन को भी प्रोत्साहित किया जायेगा; और

(ड) टेलीविजन बन्दियों के लिए सबसे बड़ा मनोरंजक है और दिखाये जाने वाले चैनलों और उनके समय का चयन कारागार अधीक्षक (cid:217)वारा सावधानीपर्वक ू किया जाना चाहिए;

सम्मिलित होंगे।

(4) प्रत्येक कारागार और संब(cid:217)ध संस्था में वार्षिक खेल-कदू या सांस्कतिक प्रतियोगिताएं ृ

होगी। अंत:वासियों की अंतर-संस्थागत और अंतरराज्यीय खेल-कद ू प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जानी चाहिए और बाहर से खेल समहों को बन्दियों के साथ विभिन्न खेल खेलने के लिए जेल में आमंत्रित किया जा सकता है।

(5) योग और ध्यान का अभ्यास प्रतिदिन किया जाएगा जिसके लिए समय नियत किया जाना चाहिए और कारागार के अंदर ध्यान के स्थायी कें द्र खोले जा सकते हैं और इस संबंध में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की सेवाएं ली जा सकती हैं और यह सनिश्चिु त किया जायेगा कि ध्यान सत्र के दौरान प्रवचन प्रकति में धर्मनिरपेक्ष हों।ृ

(6) बन्दियों को प्रेरित करने और उनके लिए प्रेरणास्रोत बनने के लिए कला, खेल, साहित्य, संस्कति और संगीत के क्षेत्र में प्रसि(cid:217)ध हस्तियों को विभिन्न अवसरों पर अतिथि के रूप में कारागार में आमंत्रित किया जायेगा।

(7) प्रत्येक कारागार में बहिरंग खेंलों के लिए एक खेल मैदान और सांस्कतिक कार्यक्रमों के ृ

लिए एक सामदायिक हॉल होगा।ु

(8) जेल परिसर में, जहां भी संभव हो, विभिन्न प्रकार की दकानें सन्निर्मित की जायेंगी और जिन सि(cid:217)धदोष बन्दियों को दकाु नें बनाने के लिए अनज्ञात किया गया है , उन्हें खले कारागार ु

में अन्तरित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

698. गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) की भमिकाू .- (1) गैर-सरकारी संगठन खेल-

होंगे। उन्हें ऐसे कदू और सांस्कतिक बैठकों के आयोजन में बड़े पैमाने पर अंतग्र्रस्त

आयोजनों के सचारू संचालन के लिए विभिन्न वस्तओं और उपस्क

ु रों को उधार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

(2) कल्याण कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए कल्याण एजेंसियों या गैर-सरकारी संगठनों के चयन में सावधानी बरती जायेगी और के वल वे गैर-सरकारी संगठन या कल्याण एजेंसियां जिनका सि(cid:217)ध ट्रैक रिकॉर्ड है, और जो अपने समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए जाने जाते हैं, उन्हें कारागार कार्यक्रमों से संब(cid:217)धता के लिए चयनित किया जायेगा।

310 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) किसी कल्याण एजेंसी या गैर-सरकारी संगठन का कोई भी सदस्य, यदि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड है, कारागार से संब(cid:217)ध नहीं होगा और इस प्रयोजन के लिए एजेंसी या गैर-सरकारी संगठनों से अ(cid:214)डरटेकिग अभिप्राप्त की जायेगी।ं

(4) कारागारों में कल्याणकारी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों (cid:217)वारा किये गये अच्छे कार्यों की सार्वजनिक रूप से सराहना की जायेगी।

699. शिकायत निवारण प्रणाली.- (1) आक्रोश या शिकायत व्यक्त करना एक प्राथमिक मानवीय प्रवत्ति है। यदि इसे दबाया जाता है , तो यह विकत मनोदशा को जन्म दे ृ

सकता है, जो शरीर और दिमाग की प्राकतिक और स्वस्थ ृ व(िcid:217)धृ के लिए हानिकारक होगा।

(2) शिकायत निवारण तंत्र निम्नानसार होगाु , अर्थात ्:-

(क) प्रत्येक कारागार में एक सक्रिय शिकायत निवारण प्रणाली (जी.आर.एस.) होगी जो प्रत्येक अंत:वासी को अपनी शिकायतें सनाने का वैध अवसर प्रदान करेगी ;

(ख) यह प्रणाली दबायी हई शिकायतों के अचानक आवेग की किसी भी संभावना के विरु(cid:217)ध एक सरक्षा वाल्वु के रूप में भी कार्य करेगी;

(ग) प्रत्येक कारागार में अंत:वासियों की आसान पहंच के भीतर कें द्रीय रूप से ु

स्थित और सविधाजनक स्थानों पर एक या एक से अधिक शिकायत पेटियां स्थापित की जायेंगी और ऐसी शिकायत पेटी महिला वार्ड में आसानी से पहंच ु योग्य स्थान पर भी स्थापित की जायेगी;

(घ) अंत:वासी अपनी शिकायतें लिखित याचिका के रूप में अधीक्षक या उच्च अधिकारियों को संबोधित करते हए ऐसी पेटियों में डाल सकते हैं ;

(ङ) पेटी ताले और चाबी के अधीन रहेगा और चाबी जेलर की अभिरक्षा में रहेगी, जो अधीक्षक (cid:217)वारा नियत और अनमोदित दिनों पर सप्ताह ु में कम से कम दो बार शिकायत पेटी को खोलेगा;

(च) शिकायत पेटी सायंकाल कारागार बंद होने से पर्व नियत समय पर खोली ू

जायेगी;

(छ) अधीक्षक, स्वयं, जेलर (एक से अधिक जेलर तैनात होने की दशा में वरिष्ठतम जेलर), चिकित्सा अधिकारी और कल्याण अधिकारी को समाविष्ट करते हए शिकायत निु वारण प्रणाली (जी.आर.एस.) की एक स्थायी समिति का गठन करेगा;

(ज) यदि कारागार में महिला अहाता है, तो समिति में एक महिला अधिकारी, जो जेलर के पद से अनिम्न हो, सम्मिलित की जायेगी;

(झ) समिति, जब भी आवश्यक हो, कित अंतं ु :वासियों की समस्त शिकायतों को देखने के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार बैठक करेगी;

(ञ) अधीक्षक समिति की अध्यक्षता करेगा, जो शीघ्रतम समस्त शिकायतों की जांच करेगा;

(ट) समिति के विनिश्चय को तत्क्षण निष्पादित किया जायेगा;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 311

(ठ) उच्चतर प्राधिकारियों को संबोधित परिवाद अविलंब अधीक्षक की टिप्पणियों सहित प्रेषिती को अग्रेषित किये जायेंगे;

(ड) बन्दियों (cid:217)वारा सरकार, न्यायपालिका, महानिरीक्षक या अन्य उच्च कत्यृ कारियों को संबोधित पत्र बिना सेंसर किये तरंत उन्हें अग्रेषित किया ु

जायेगा और इसकी एक दिनांकित रसीद बन्दी को दी जायेगी और प्राप्तकर्ता प्राधिकारी पत्रों को तरंत स्वीकार करेगा औु र उनकी तत्परता से जांच पड़ताल करेगा; और

(ढ) जिला न्यायाधीश महीने में एक बार अपने क्षेत्राधिकार में प्रत्येक कारागार का दौरा करेगा और कारागार अधिकारियों की अनपस्थिति में समस्तु बन्दियों को अपनी शिकायतें या अनरोध प्रस्तत करने का अवसर देगा , यदि वे ऐसा चाहें, और यह जिला न्यायाधीश का काननी कत्यू ृ होगा।

(3) बैठक से तीन दिवस पर्व कारागार अधिकारी को , विचाराधीन बन्दियों सहित, बन्दियों की शिकायत, यदि कोई हो, को अंकित करना चाहिए और चर्चा के लिए संबंधित अनभागों से ु

प्राप्त कार्यालय नो(cid:210)स या टिप्पणियों सहित शिकायत रजिस्टर को बैठक में रखना चाहिए, संबंधित बन्दियों को व्यक्तिगत सनवाई के लिए बलाया जायेगा और बन्दियों की ऐसी समस्त शिकायतों की सनवाईु , विश्लेषण और यथासाध्य समाधान किया जायेगा।

(4) कें द्रीय जेल या जिला जेल या उप-जेल में जेलर (cid:217)वारा बन्दी शिकायत रजिस्टर का रखरखाव किया जायेगा।

700. कारागारों में धार्मिक और नैतिक शिक्षा तथा धार्मिक अनष्ठानु .- (1) समस्त वर्गों के बन्दियों को रविवार के अतिरिक्त निम्नलिखित अवकाश अनज्ञात किये जायेंगे , अर्थात ्:-

क्र.सं. अवकाश का नाम दिवसों की संख्या
1 होली (के वल धलंडी के लिए ु एक दिन) 1
2 रामनवमी 1
3 गड फ्राइडे (के वल ईसाइयों के ु लिए) 1
4 ईदल फ़ितर ु 1
5 ईदल ज़हा ु ु 1
6 गरु नानक जयंती ु 1
7 मोहरर्म 1
8 जन् माष् टमी 1
9 दशहरा 1
10 दिवाली 2
11 क्रिसमस 1
12 गणतंत्र दिवस 1
13 स्वतंत्रता दिवस 1
14 गांधी जयंती 1
15 महावीर जयंती (के वल जैनियों क े लिए) 1
16 महाशिवरात्रि 1
17 नवरात्रि स्थापना (आसोज) 1
312 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) त्योहारों पर, फल और दध सहित कच्चा भोजन बन्दियों को या तो उनके स्वयं के व्य य पर या उनके दोस्तों के व्यय पर, या यदि बाहरी लोगों (cid:217)वारा दिया जाता है, तो अधीक्षक के विवेक पर अनुज्ञात किया जा सकता है।

(3) हिंद बन्दीू , जो ऐसा करना चाहते हैं, उन्हें नवरात्रि, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि, राम नवमी और एकादशी या पणिर्मा के दिन उपवास रखने के लिए अनज्ञात किया जायेगा बन्दियों को या तो दधू , फल, दही, मिठाई जैसे विशेष आहार प्रदान किये जायेंगे या उपवास के समापन पर अतिरिक्त भोजन अनज्ञात किया जायेगा और आहार की कल लागत अन्य बन्दियों को दिये गए भोजन से अधिक नहीं होगी।

टिप्पण: ऊपर जारी विशेष आहार या अतिरिक्त भोजन सामान्य आहार के बदले में है।

(4) मस्लिम बन्दीु , जो ऐसा करना चाहते हैं, उन्हें रमज़ान के दौरान रोज़ा रखने के लिए अनज्ञात किया जायेगा , ऐसे बन्दियों का आहार,-

(क) आहार की कल लागत अन्य बन्दियों को दिये जाने वाले भोजन से अधिक नहीं होगी;

(ख) जिन वार्डों या कोठरियों में मस्लिम बन्दियों को रखा जाता है , वहां जल की पर्याप्त आपर्ति की भी व्यवस्था ू की जायेगी।

टिप्पण: पर्ववर्ती नियमों में अनज्ञात विशेष आहार जारी करने के विशेषाधिकार का दरुपयोग करते हए पाु ये जाने वाले किसी भी बन्दी को उपयक्तु रूप से द(िcid:214)डत किया जायेगा।

(5) किसी भी बन्दी के मामले में चिकित्सा अधिकारी, यदि उसकी राय है कि ऐसे बन्दी (cid:217)वारा उपवास जारी रखना स्वास्थ्य के लिए हानिकर या खतरनाक होना संभावित है, तो उसे बंद करने का निदश दे सके

ेर् गा।

, इनमें प्रत्येक बन्दी को भाग लेने के (6) समस्त धर्मों के मख्य त्यौहार मनाये जाने चाहिएु

लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और किसी विशेष जाति या धर्म से संबंधित बन्दियों के समह के साथ कोई भी विशेष व्यवहार सख्ती से प्रतिषि(cid:217)ध होगा।

701. कैं टीन की सविधाु .- (1) प्रत्येक कारागार में बन्दियों के लिए कैं टीन की सविधा ु होगी जिसमें साबन ु (धोने और नहाने दोनों), टथ पेस्टू , टथ पाउडरू , टथ ब्रशू , शेविंग साबनु ,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 313 कं घी, चाय, ब्रेड, स्नैक्स, बिस्कटु , मिठाई, समाचार पत्र, पत्रिका और अन्य स्टेशनरी आदि जैसी चीजें होंगी, और ऐसी कैं टीन के संचालन के नियम और विनियम कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा विनिश्चित किये जायेंगे।

(2) जेल अधीक्षक को थोक दर पर उत्पाद प्राप्त करने के लिए पेय पदार्थ निर्माताओं के उपापन का भी विवेकाधिकार होगा। पेय पदार्थ टेट्रा पैक में ही विक्रय किये जाने चाहिए। इस नियम में उल्लिखित वस्तओं के अतिरिक्तु किसी भी बोतल या टिन और किसी अन्य वस्त ु को अनज्ञात नहीं किया जाना चाहिएु

, और विशेष रूप से तेल में तली हई ु वस्तओं को कैं टीन ु

में तैयार करना और बेचना सख्त प्रतिषि(cid:217)ध है।

702. कैं टीन के प्रबंधन के संबंध में नियम.- जेलों में कैं टीन संचालन के प्रबंधन के लिए निम्नलिखित का पालन किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) कैं टीन के प्रभारी अधिकारी को हर एक वर्ष में बदला जायेगा;

(ख) कैं टीन का कार्य समय तालाबन्दी के पश्चात और ताला लगने से पहले का होगा और सत्यापन के पश्चात स्टॉक की जांच के लिए कैं टीन हर महीने के आखिरी शनिवार को बंद रहेगी;

(ग) कैं टीन में विक्रय के लिए वस्तएं ु (जैसे टथ ब्रशू , टथ पेस्टू , साबनु , डिटर्जेंट और चप्पल) आवश्यक खरीद नियमों का पालन करने के पश्चात कारागार की ्

अन्य वस्तओं की तरह अधीक्षक के आदेश के अधीन खरीदी जायेंगी ;

(घ) वस्तओं के थोक मल्य पर दस प्रतिशत से अधिक का लाभ खदरा विक्रय में नहीं लिया जा सके गा, बशत कि यह ऐसी वस्तओं के स्थानीय खदरा बाजार मल्य से अधिक न हो। फलों

ू और सखे खा(cid:217)य पदार्थों जैसे खराब होने वाली वस्तओं के मामले में संभावित बर्बादी को ध्यान में रखते हए

ु 10 से 15 प्रतिशत जोड़ा जा सकता है;

(ङ) कैं टीन में के विक्रयों से उत्पन्न लाभ को कारागार निदेशालय को सचनाू के अधीन कैं टीन के लिए पर्याप्त कार्यशील पंजी रखने ू के पश्चात बन्दी् कल्याण कोष में जमा किया जायेगा;

(च) कैं टीन के संबंध में एक बैलेंस शीट कै लेंडर वर्ष के अंत में तैयार की जायेगी और अधीक्षक के समक्ष रखी जायेगी। बैलेंस शीट की एक प्रति उप- महानिरीक्षक, कारागार (रेंज) या कारागार निदेशालय प्रमख को भेजी जायेगी ;

(छ) कैं टीन लेखों की प्रत्येक मास में एक बार लेखाकार (cid:217)वारा जांच और संपरीक्षा की जायेगी और उसे अधीक्षक के समक्ष रखा जायेगा।

703. बन्दी कल्याण निधि.- सरकार ने राजस्थान बन्दी कल्याण निधि नियम, 1964 के लिए नियम विरचित कियें हैं, जिनके उपबंधों का पालन और संपादन निधियों का व्यौहार करने में, किया जायेगा।

704. कल्याणकारी क्रियाकलापों का कार्यान्वयन.- (1) कारागार में कल्याणकारी क्रियाकलापों के सचारुु और व्यवस्थित कार्यान्वयन के लिए अधीक्षक उत्तरदायी होगा।

314 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) इस प्रयोजन के लिए प्रतिनियक्तु कारागार अधिकारी कारागार में संचालित कल्याणकारी क्रियाकलापों की त्रैमासिक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसे कारागार उप-महानिरीक्षक (रेंज) को सचित करते हए कारागार महानिरीक्षक को आगे पारेषण करने के लिए अधीक्षक को भेजेगा।

अध्याय 29

परिहार

705. परिहार.- (1) बन्दियों को दिये जाने वाले परिहार के प्रकार निम्नानसार होंगे

ु , अर्थात ्:-

(क) कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का कें द्रीय अधिनियम सं. 9) और तदधीन बनाये गये नियमों के उपबंधों के अधीन परिहार। यह समस्त पात्र बन्दियों (cid:217)वारा अर्जित किया जा सके गा यदि वे इसमें इसके पश्चात उपबंधित की गयी ्

आवश्यक शर्तों को पर्ण करते हैं और इस परिहार को सामान्य परिहार कहा जाता है;

(ख) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का कें द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 432 के अधीन सरकार (cid:217)वारा दंड में अनदत्त किया गया परिहार। सरकार दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का कें द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 432 के अधीन अधिकथित प्रक्रिया का अनसरण करते हए मामले दर मामले के आधार पर किसी बन्दी के दंडादेश का परिहार कर सके गी और यह बन्दी के अनरोध ु पर उसके दंडादेश का परिहार करते समय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का कें द्रीय अधिनियम सं. 2) की धारा 432 के अधीन विहित प्रक्रिया से विचलित नहीं हो सकता है तथा इस परिहार को राज्य सरकार का परिहार कहा जाता है; और

(ग) राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास किसी भी बन्दी को उसके अनरोध पर परिहार ु

देने के साथ-साथ, यथास्थिति, भारतीय संविधान के अनच्छे द ु 72 या 161 के

की अधीन शक्तियों का प्रयोग करते हए विशेष अवसरों पर मंत्रिपरिषद्ु

सिफारिश पर विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के बन्दियों को सामान्य परिहार अनदत्त किये ु

जाने की समस्त शक्तियां हैं।

(2) इसलिए इस अध्याय के उपबंध के वल उप-नियम (1) के खंड (क) के अधीन कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा अनदत्त किु ये गये परिहार पर ही लाग होते हैं।ू

(3) परिहार प्रणाली का लक्ष्य एक बन्दी का सधार करना है और यह स्की

ु म बन्दियों की ओर से कारागार अनशासन और अच्छे आचरण को सनिश्चित करने तथा प्रोत्साहन के रूप में कारागार से उनकी समय पर्व छोड़े जाने की संभावना के साथ उन्हें सीखने और बेहतर कार्य संस्कति के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आशयित होगी ।

(4) परिहार एक रियायत है, जो राज्य सरकार (cid:217)वारा या कारागार निदेशालय प्रमख और ु

कारागार अधीक्षक (cid:217)वारा बन्दियों को अनदत्त की जा सकती है , यह रियायत पाश्चिक प्रत्याहरण या समपहरण या प्रतिसंहरण के अध्यधीन होगी और राज्य सरकार किसी भीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 315 बन्दी, या बन्दियों के प्रवर्ग को परिहार की रियायत से वंचित करने या वापस लेने का अधिकार आरक्षित रखेगी।

706. परिहार अर्जित करने का आधार.- जेल में रहने के दौरान अंत:वासी के सम्पूर्ण अच्छे व्यवहार, अभिरक्षा में रहते समय कार्य करने की तत्परता, कारागार प्रशासन को कारागार प्रबंधन में सहयोग और सहायता तथा विभिन्न प्रकार के संस्थागत क्रियाकलापों के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया के आधार पर परिहार अनदत्त किया जायेगा।ु

स्पष्टीकरण: इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,-

(i) 'बन्दी' में सदाचार या शांति बनाये रखने के लिए प्रतिभति देने में व्यू तिक्रम करने पर कारागार को सपर्द कोई व्यक्ति सम्मिलित है और इसमें सैन्य न्यायालय (cid:217)वारा सि(cid:217)धदोष व्यक्ति भी सम्मिलित हैं,

(ii) 'द(cid:214)डादेश' से अपील या पनरीक्षण या अन्यथा पर अंतिम रूप से नियत किया गया दंडादेश अभिप्रेत है और इसमें एक से अधिक दंडादेशों का कल योग ु

और सदाचार या शांति बनाये रखने के लिए प्रतिभति देने में व्यू तिक्रम करने पर कारागार को सपर्दगी आदेश सम्मिलित है।

ु

707. सामान्य परिहार अनदत्त करने के लिए प्राधिकारी .- (1) अधीक्षक सामान्य परिहार अनदत्त करने के लिए प्राधिकत है।

ृ

(2) निम्नलिखित प्रकार के सि(cid:217)धदोष बन्दी सामान्य परिहार के लिए पात्र होंगे, अर्थात ्:-

(क) छह मास और अधिक के मख्यु दंडादेश वाले बन्दी; (ख) छह मास या अधिक के साधारण कारावास से दंडादिष्ट बन्दी, जो स्वेच्छया कार्य करना चाहते हों;

(ग) इनके दंडादेश की अवधि का विचार किये बिना कारागार रखरखाव सेवाओं पर नियोजित बन्दी, जिनका रविवार और अवकाशों पर कार्य करना आवश्यक होता है, उदाहरणार्थ झाड़ लगानाू , खाना बनाना आदि; और

(घ) जानबझकर कारित न की गयी किसी व्या धि या चोट के पश्चात उपचार या ्

स्वास्थ्य लाभ के लिए एक मास से कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती बन्दी (वो जो ऐसे प्रयोजन के लिए एक मास से अधिक के लिए भर्ती किये गये हों के वल अच्छे आचरण के लिए परिहार के हकदार होने चाहिए)।

टिप्पण: समस्त पात्र बन्दियों को कार्य उपलब्ध कराना कारागार प्रशासन का उत्तरदायित्व होगा। यदि किसी भी कारण से कारागार प्रशासन ऐसा करने में असफल रहता है, तो वो बन्दी, जो अन्यथा कार्य से परिहार के लिए पात्र हैं, उन्हें कारागार महानिरीक्षक के आदेश के अधीन उनकी सामान्य पात्रता के अनसार परिहार अनदत्त किया जाना चाहि

ु ए।

(3) निम्नलिखित प्रकार के बन्दी सामान्य परिहार के पात्र नहीं होंगे, अर्थात ्:-

(क) छह मास से कम के मख्यु दंडादेश वाले बन्दी, (ख) के वल जर्माना देने में व्यु तिक्रम पर दंडदिष्ट बन्दी,316 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ग) ऐसे बन्दी जिनका दंडादेश घटा कर छह मास से कम किया जाता है (ऐसे मामलों में पहले से अर्जित परिहार, यदि कोई हो, समप(cid:511)त रखा जाना चाहिए),

(घ) ऐसे बन्दियों की दशा में, जो कारागार में प्रवेश के पश्चात ् भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का कें द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 147, 148, 152, 224, 302, 304, 304 क, 306, 307, 308, 323, 324, 325, 326, 332, 333, 352, 353 या 377 के अधीन कारित किसी अपराध के लिए हैं या कारागार में प्रवेश के पश्चात किसी वार्डर या अन्य अधिकारी पर हमला कारित करने के लिए या किसी अन्य विधि के अधीन पैरोल की रियायत या

, उस विधि के अधीन अनदत्त की गु यी फर्लो का दरुपयोग करने के लिएु

सि(cid:217)धदोष किया गया हो तो, उक्त दोषसि(िcid:217)ध की तारीख तक इन नियमों के अधीन उसके (cid:217)वारा अर्जित किया गया किसी भी प्रकार का परिहार, निदेशालय प्रमख की मंजरी से र(cid:217)द किया जा सके गा ,

(ङ) दंडादेश के रूप में परिहार से विवर्जित बन्दी,

(च) किसी विधि या नियम के अधीन परिहार से विनिर्दिष्ट रूप से विवर्जित बन्दी, (छ) बन्दी, जो विशेष छ(cid:210)टी पर या ऐसी छ(cid:210)टी की कालावधि के लिए आकस्मिक पैरोल पर बाहर हैं, और

(ज) स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का कें द्रीय अधिनियम सं. 61) के अधीन सि(cid:217)धदोष बन्दी।

(4) सामान्य परिहार उन बन्दियों को अनदत्त कियाु जा सके गा, जो नीचे दिखाये गये उत्तरदायित्व पर इसके लिए पात्र हैं, अर्थात ्:-

(क) सदाचार, अनशासन और संस्थागत क्रियाकलापों में भागीदारी के लिए प्रति कै लेंडर मास में दो दिवस,

(ख) विहित मानकों के अनसार कार्य सम्पादन के लिए प्रति कै ले(cid:214)डर मास में दो दिवस,

(ग) कारागार रखरखाव सेवाओं पर नियोजित बन्दी, जिसमें उन्हें रविवार और अवकाशों पर भी कार्य करने की आवश्यकता होती है उदाहरणार्थ झाड़ लगानाू , खाना बनाना आदि के लिए प्रति कै लेंडर मास में एक दिवस,

(घ) इस नियम के अधीन अनज्ञात परिहार के बदले रात्रि प्रहरी के रूप में कार्य करने वालों के लिए प्रति कै लेंडर मास में पांच दिवस,

(ङ) इस नियम के अधीन अनज्ञात परिहार के बदले सि(cid:217)धदोष ओवरसियर को प्रति कै लेंडर मास में छ: दिवस,

(च) ओपन एयर कैं प में सौंपे गये सि(cid:217)धदोष बन्दी के लिए,-

(i) सदाचार, अनशासन और संस्थागत क्रियाकलापों में भागीदारी के लिए प्रति कै लेंडर मास में तीन दिवस, औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 317 (ii) विहित मानकों के अनसार कार्य सम्पादन के लिए प्रति कै ले(cid:214)डर मास में तीन दिवस,

का परिहार होगा।

(छ) सि(cid:217)धदोष बन्दी को स्थाई पैरोल पर प्रति मास दो दिवस का समय दिया जायेगा।

स्पष्टीकरण:(i) इस नियम के प्रयोजन के लिए के वल चेतावनी के साथ दंडादिष्ट कारागार अपराधों को गिनती में नहीं लिया जायेगा।

(ii) एक बन्दी, जो न्यायालय में, एक जेल से दसरे जेल के अभिवहन में , अस्पताल में या किसी अशक्त समह में होने के कारण अपने नियंत्रण से परे कारणों से श्रम करने में असमर्थ है, तो उसे पिछले महीने के दौरान उसके (cid:217)वारा इस नियम के उत्तरदायित्व पर इस नियम के सदाचार के लिए अर्जित परिहार अनदत्त किया जायेगा , यदि प्रश्नगत कालावधि से पर्व और उसके ू

दौरान उसका आचरण इस प्रकार के अनदान के योग्यु रहा है। पर्व मास के ू

दौरान उसके (cid:217)वारा अर्जित उत्तरदायित्व पर, वह ख(cid:214)ड (ख) के अधीन परिहार के अनदान का भी हकदार होगा। यदि वह उस अवधि के दौरान कारागार में रहा हो; यदि नहीं तो प्रति मास दो दिवस की दर से:

परंत यह कि यदि वह जेल में अपने स्वयं के कदाचार के कारण कार्य से अनपस्थित है

ु , तो इस उप-नियम के ख(cid:214)ड (ख) के अधीन अनपस्थिु ति की कालावधि के लिए कोई परिहार नहीं दिया जायेगा:

परंत यह और किु , यदि वह अस्पताल में है या अशक्त समह में है

ू , तो इस उप-नियम के खंड (ख) के अधीन कोई परिहार नहीं दिया जायेगा, जब तक कि चिकित्सा अधिकारी यह प्रमाणित न कर दे कि बन्दी की श्रम से अनपस्थिति उसके

ु नियंत्रण से परे कारणों से है और यह किसी भी तरह से बन्दी के स्वयं के (cid:217)वारा किये गये किसी भी कार्य, जो कार्य से बचने या अस्पताल में भर्ती होने या रहने की दृष्टि से किये गये हों, के कारण नहीं है।

708. विशेष परिहार अनदत्त करने के लिए प्राधिकारी .- (1) संबंधित कारागार अधीक्षक और महानिरीक्षक कारागार या कारागार निदेशालय प्रमख विशेष परिहार अनदत्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे।

: बन्दियों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना (2) विशेष परिहार अनदत्त करने के मानदंडु

उत्पन्न करने के लिए वार्षिक सदाचार परिहार के अतिरिक्त अंत:वासियों (cid:217)वारा किये गये प्रतिभाशाली कार्यों को विशेष परिहार देकर परस्कत किया जाना चाहिए। ु ृ

(3) साधारण परिहार के पात्र बन्दियों को ऐसा विशेष परिहार निम्नलिखित पर विचार करके अनदत्त किया जा सके गा , अर्थात ्:-

:वासी का जीवन (क) किसी सरकारी कर्मचारी, कारागार आगंतक या किसी अंतु

बचाना;

318 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ख) किसी सरकारी कर्मचारी या कारागार आगंतक या अंतु :वासी को शारीरिक हिंसा या खतरों से बचाना;

(ग) बन्दियों के निकल भागने को रोकना या रोकने में सहायता करना, निकल भागने का प्रयास करने वाले बन्दियों को पकड़ना या किसी बन्दी या बन्दियों के समह (cid:217)वारा निकल भागने की किसी योजना या प्रयास के बारे में महत्वपर्ण जानकारी देना

ू ;

(घ) आगजनी, बलवे और हड़ताल जैसी आपात स्थितियों से निपटने में कारागार अधिकारियों की सहायता करना;

(ङ) कारागार विनियमों के गंभीर उल्लंघन की रिपोर्ट देना या उसकी रोकथाम में सहायता करना;

(च) सांस्कतिक गतिविधियों या शिक्षा में उत्कष्ट योगदान

ृ ; और

, या व्यावसायिक प्रशिक्षण में विशेष (छ) उ(cid:217)योग, कषि या किसी अन्य वर्क प्रोग्रामृ

रूप से अच्छा कार्य।

(4) उपर्यक्त शर्तों में से किसी एक या अधिक की पर्ति के अध्य

ू धीन, कारागार अधीक्षक (cid:217)वारा उन बन्दियों को, जो साधारण परिहार के पात्र हैं, एक वर्ष में तीस दिवस से अनधिक का विशेष परिहार अनदत्त किया जा सके गा।ु

(5) कारागार निदेशालय प्रमख एक वर्ष में साठ दिवस तक विशेष परिहार अनदत्त कर सके गा और वह अपनी शक्तियों के भीतर विशेष परिस्थितियों में, ऐसे बन्दी को भी विशेष परिहार अनदत्त कर सके गाु , जो साधारण परिहार के लिए पात्र नहीं है।

टिप्पण: इस नियम के प्रयोजन के लिए, वर्षों की गणना दंडादेश की तारीख से की जायेगी और वर्ष का कोई भी भाग एक पर्ण वर्ष होगा।ू

709. राज्य सरकार (cid:217)वारा परिहार.- (1) राज्य सरकार (cid:217)वारा अनदत्त परिहार को ु

राज्य सरकार का परिहार कहा जायेगा।

(2) राज्य सरकार का परिहार, ऐसे बन्दियों या बन्दियों के प्रवर्ग को प्रदान किया जा सके गा, जैसा कि राज्य सरकार विनिश्चय करे।

(3) ऐसे बन्दियों की दशा में, जिन्हें राज्य सरकार के साधारण परिहार अनदत्त करते समु य, अस्थायी या आपातकालीन छोड़ा जाता है, ऐसे बन्दियों को ऐसा परिहार प्रदान किये जाने के बारे में राज्य सरकार के विनिर्दिष्ट आदेश आवश्यक हैं।

(4) परिहार ऐसे पैमाने या इतनी मात्रा में अनदत्त किया जायेगा , जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर नियत करे।

710. परिहार समिति.- प्रत्येक संस्था की परिहार समिति निम्नलिखित से मिलकर

(क) संस्था का प्रभारी अधीक्षक अध्यक्ष
(ख) जेलर या संस्था में उप-वरिष्ठतम कारागार अधिकारी सदस्य
(ग) परिहार अनभाग का प्रभारी उप -जेलर ु सदस्य सचिव
(घ) उÙयोग या व्यावसायिक प्रशिक्षण का प्रभारी अधिकारी सदस्य।
भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 319

711. परिहार समिति के कत्यृ .- इस समिति के कृ त्य निम्न प्रकार होंगे:-

(क) परिहार से संबंधित समस्त मामलों पर ध्यान देना;

(ख) इन नियमों के उपबंधों के अनसार विशेष परिहार अनदत्त करने के लिए बन्दियों के मामलों की सिफारिश महानिरीक्षक या कारागार विभाग प्रमख को ु करना; और

(ग) इन नियमों के उपबंधों के अनसार विशेष परिहार अनदत्त करना।

ु

712. परिहार समिति (cid:217)वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया.- (1) समिति के सदस्य, परिहार प्रदान करने से संबंधित समस्त मामलों में अधीक्षक की सहायता करेंगे, परिहार समिति प्रत्येक मास के अंतिम सप्ताह में नियत दिनों पर या जब भी अपेक्षित हो बैठक करेगी और अधीक्षक का निर्णय अंतिम माना जायेगा।

(2) परिहार कार्य के महत्व को दृष्टि में रखते हएु , यह आवश्यक है कि समिति नियत शे(cid:212)यल के अनसार बैठक करे जिससे समय पर परिहार अनदत्त किया जा सके और विशेष परिहार बन्दी को छोड़े जाने से पर्व कम से कम सात दिवस का अंतर छोड़कर अनदत्त किया जायेगा।

(3) परिहार से संबंधित प्रविष्टियां परिहार रजिस्टर, परिहार कार्ड और संबंधित बन्दी के वत्त ृ पत्र में, अधीक्षक के उचित अनप्रमाणन के अधीनु

, परिहार अनदत्त किु ये जाने के तरंत ु पश्चात ्, की जायेंगी।

(4) छह मास से पांच वर्ष तक के मख्यु दंडादेश वाले बन्दियों को प्रत्येक मास परिहार स्वीकत किया जाना चाहिएृ जबकि पांच वर्ष से अधिक के लिए दंडादिष्ट (आजीवन सि(cid:217)धदोषों सहित) को तिमाही में एक बार परिहार अनदत्त किया जाना चाहिए।ु

(5) साधारण परिहार की गणना परे कै लेंडर मासों के लिए की जानी चाहिए। इसे एक कै लेंडर मास के एक भाग के लिए अनदत्त नहीं किया जाना चाहिए।

ु

(6) तदनसारु , वर्ष के किसी भी भाग के लिए विशेष परिहार अनदत्त किया जा सके गा।ु (7) इन नियमों के अधीन, किसी बन्दी को प्रदान किया गया कल परिहार साधारणतया उसके ु

दंडादेश के एक तिहाई भाग से अधिक नहीं होगा।

(8) सेना न्यायालय (cid:217)वारा दंडादिष्ट बन्दियों को परिहार का अनदान उन्हीं सि(cid:217)धांतों पर ु

होगा, जो अन्य बन्दियों पर लाग होते हैं।ू

713. आजीवन सि(cid:217)धदोष.- (1) परिहार की गणना के प्रयोजन के लिए आजीवन कारावास बीस वर्ष के कारावास के रूप में समझा जायेगा और एक से अधिक आजीवन कारावास काट रहे बन्दी के मामले में, परिहार की गणना के लिए बीस वर्ष उसके समस्त दंडादेशों का योग माना जायेगा।

320 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) आजीवन सि(cid:217)धदोष को परिहार अनदत्त करने का अर्थ उसके दंडादेश

ु में वास्तविक परिहार नहीं होगा और जब सलाहकार बोर्ड (cid:217)वारा उसके मामले की परीक्षा की जायेगी, तो उसके क्रे डिट में परिहार उन कारकों में से एक होगा, जिनके आधार पर उसके दंडादेश के पनर्विलोकन को विचार में लिया जायेगा।

714. प्रकीर्ण.- (1) सेना न्यायालय (cid:217)वारा दंडादिष्ट बन्दियों को कारागार में प्रवेश से पर्व

ू , अभिवहन में या सैन्य अभिरक्षा में बितायी गयी कालावधि के लिए, इन नियमों में अधिकथित उन्हीं उत्तरदायित्व पर साधारण परिहार अनदत्त किया जायेगा।ु

(2) कारावास भगतने के दौरान एक कारागार से दसरे कारागार में अन्त रित किये जाने वाले बन्दी की दशा में, परिहार के लिए, उसके (cid:217)वारा प्रथम कारागार में व्यतीत कालावधि में से, विचाराधीन बन्दी के तौर पर व्यतीत कालावधि को अपवर्जित करते हएु , उसके (cid:217)वारा दसरे ू कारागार में व्यतीत कालावधि के साथ गणना की जायेगी।

(3) साधारण परिहार की गणना, बन्दी के दंडादेश की तारीख के पश्चात कै लेंडर मास के ्

प्रथम दिवस से की जायेगी, साधारण परिहार एक कै लेंडर मास की खंडित कालावधि के लिए

बन्दी को उस महिने के लिए परिहार नहीं मिलेगा, अनदत्त नहीं किया जायेगा और एकु

जिसमें उसे दंडादिष्ट किया गया है, जब तक कि उसे माह के प्रथम दिवस को दंडादिष्ट नहीं किया जाता है।

(4) किसी भी बन्दी को उसके छोड़े जाने के कै लेंडर मास के लिए साधारण परिहार नहीं मिलेगा।

(5) कारागार के बाहर व्यतीत की गयी कालावधि, जैसे कि छ(cid:210)टी पर छोड़ा जाना , जो दंडादेश के एक भाग के रूप में सम्मिलित है, को खंडित कालावधि के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए, ऐसी कालावधियों के दौरान, बन्दी साधारण परिहार अर्जित करने के लिए पात्र होगा, कारागार के बाहर व्यतीत की गयी कालावधि के लिए, जो दंडादेश के भाग के रूप में सम्मिलित नहीं हैं (जैसे जमानत, आपातकालीन छोड़ा जाना, निकल भागना और प्रत्यर्पण) बन्दी परिहार अर्जित करने के पात्र नहीं होंगे और ऐसी दशा में, बन्दियों को उनके पनः प्रवेश ु

की तारीख के पश्चात के कै लेंडर मास के प्रथम दिवस से परिहार अर्जित करने के लिए पात्र माना जायेगा।

(6) ऐसे सभी मामलों में, वार्षिक सदाचार परिहार की पात्रता के लिए तारीख सम्यक रूप से ्

मल्तु वी की जायेगी, बन्दी जो जमानत पर छोड़े गये हैं, या जिनका दंडादेश अस्थायी रूप से निलम्बित किया गया है, उनके कारागार में पनु :प्रवेश पर, उनके जमानत पर छोड़े जाने से पर्व या दंडादेश के निलम्बू न पर, उन्होंने जो भी परिहार अर्जित किया होगा, उसके साथ क्रे डिट कर दिया जायेगा और उन्हें उनके पनु :प्रवेश के पश्चात कै ले(cid:214)ड् र मास के प्रथम दिवस पर पनु :परिहार प्रणाली के अधीन लाया जायेगा।

715. बन्दी का परिहार से हटाया जाना और प्रतिसंहरण करना.- (1) राज्य सरकार, कारागार निदेशालय प्रमखु , कारागार महानिरीक्षक और अधीक्षक किसी भी बन्दी को कारागार अपराध कारित करने के लिए विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए, परिहार से विवर्जित कर सकतेभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 321 हैं। अधीक्षक किसी बन्दी को परिहार से तीन मास से अनधिक की कालावधि के लिए विवर्जित कर सकता है। तथापि, तीन मास से अधिक की कालावधि के लिए परिहार से विवर्जित करने के लिए महानिरीक्षक की मंजरी आवश्यक होगी।ू

(2) महानिरीक्षक की पर्व मंजरी से

ू , अधीक्षक, किसी भी बन्दी का परिहार पनु :ग्रहण कर सकता है, जो वहां से विवर्जित कर दिया गया है और जिस बन्दी का परिहार पनु :ग्रहण किया गया है, वह अपने पनु :प्रवेश के पश्चात माह के प्रारम्भ् से इन नियमों के अधीन परिहार अर्जित करेगा।

716. परिहार समपहरण के लिए शर्तें.- (1) यदि बन्दी कारागार में प्रवेश के पश्चात ् भारतीय दंड संहिता, 1860 (1860 का अधिनियम सं. 45) की धारा 147, 148, 152, 224, 232, 302, 304, 304-क, 306, 307, 308, 324, 325, 326, 327, 332, 333, 352, 352 या 377 के अधीन किसी अपराध के लिए सि(cid:217)धदोष किया जाता है या किसी कारागार अधिकारी, कारागार आगंतकु , बन्दी या अन्य सरकारी कर्मचारी पर हमला कारित करने के लिए सि(cid:217)धदोष किया जाता है, तो बन्दी (cid:217)वारा अर्जित परिहार राज्य सरकार या कारागार निदेशालय प्रमख या कारागार महानिरीक्षक या कारागार अधीक्षक (cid:217)वारा समप(cid:511)त किया जा सके गा।

(2) उक्त दोषसि(िcid:217)ध की तारीख तक, इन नियमों के अधीन उसके (cid:217)वारा अर्जित, किसी भी प्रकार के समस्त साधारण या विशेष परिहार, भागत: या सम्पूर्णत:, कारागार महानिरीक्षक या कारागार निदेशालय प्रमख की मंजरी से समप(cid:511)त किये जा सकें गे।

टिप्पण: (i) परिहार समपहरण के बारे में समस्त प्रविष्टियां परिहार शीट और परिहार रजिस्टर में तत्परता से की जायेंगी।

(ii) दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के अधीन राष्ट्रीय महत्व या सार्वजनिक प्रसन्नता के अवसरों पर राज्य सरकारों का परिहार अनदत्त किया गया। इस ु

धारा के अधीन ऐसे दंडादेश के बिना शर्त परिहार के आदेश को, इसके अनदत्त ु करने में कपट या भल के मामलों के सिवाय विख(िcid:214)डत नहीं किया जा सकता है।

717. अभिलेखों का रखना.- (1) कारागार प्राधिकारी (cid:217)वारा निम्नलिखित अभिलेख रखे जायेंगे, अर्थात ्:-

(i) उप-जेलर, या अनभागों का कोई अन्यु प्रभारी अधिकारी, परिहार अर्जित करने के पात्र बन्दियों के लिए टास्क टिकट रखेगा। नियत दिनों पर, यह टास्क टिकट परिहार कार्य से संबंधित अधिकारी और जेलर, या निरीक्षण के लिए बन्दियों के प्रवेश और छोड़े जाने के किसी अन्य प्रभारी अधिकारी को अग्रेषित की जायेगी। ये टास्क टिकट बन्दियों के परिहार कार्ड के साथ संलग्न किये जायेंगे; और322 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ii) परिहार रजिस्टर, परिहार कार्ड, विनिर्दिष्ट प्ररूप में रखे जायेंगे, जिसमें परिहार

, यदि कोई हो, की समस्त प्रविष्टियां तत्परता से के अनदान और समपहरणु

की जायेंगी और संबंधित अधिकारियों (cid:217)वारा सम्यक रूप से सत्या् पित की जायेंगी।

(2) परिहार रजिस्टर में प्रविष्टियां प्रत्येक तिमाही के अंत में की जायेंगी और यदि किसी बन्दी को तिमाही परी होने से पर्व छोड़ा जाना है

ू , तो ये प्रविष्टियां प्रासंगिक माह के दौरान की जायेंगी, और तदनसारु , उसको छोड़े जाने से संबंधित कार्रवाई की जा सके गी। प्रत्येक माह या तिमाही के अंत में, बन्दियों को उस महीने या तिमाही के दौरान उनके अर्जित किये गये परिहार और उनके कल परिहार के बारे में भी सचित किया जायेगा।

ू

(3) समस्त प्रकार के परिहार का अनदान या समपहरणु

, यदि कोई हो, परिहार शीट और वत्त ृ पत्र में अभिलिखित किया जायेगा।

(4) जेलर या प्रवेश और छोड़े जाने का प्रभारी अधिकारी, नियत अंतरालों पर परिहार रजिस्टर या परिहार कार्ड का निरीक्षण करेगा। उप-नियम (2) में उल्लिखित संसचना के सिवाय ू

परिहार अभिलेख गोपनीय माना जायेगा और इसे बन्दियों (cid:217)वारा संभाला जाना अनज्ञात नहीं ु

किया जायेगा।

(5) परिहार अनदान अनज्ञात किये जाने के पश्चा

ु त ्, बन्दियों को ऐसी तारीखों पर छोड़ा जायेगा, जैसा कि सझाया जाये।ु

(6) छोड़े गये बन्दी का परिहार कार्ड, बन्दी को छोड़े जाने के पश्चात ्, तीन वर्ष तक सरक्षित ु रखा जायेगा।

(7) जब कोई बन्दी किसी अन्य कारागार में अन्तरित किया जाता है, तो अंतरण की तारीख तक अर्जित परिहार की कल संख्या दर्शाने वाला उसका परिहार कार्ड बन्दी के साथ भेजा जायेगा।

(8) ऐसे मास के प्रथम सप्ताह में, परिहार कार्ड का प्रभारी अधिकारी विनिर्दिष्ट प्ररूप में, उन समस्त बन्दियों का परिहार रोल तैयार करेगा, जो कि चाल मास के दौरान अपना पर्ण ू

साधारण परिहार अर्जित करने के अनमान पर होंु , आगामी मास के दौरान छोड़े जाने के हकदार होंगे, वह उसी समय ऐसे बन्दियों के परिहार कार्ड और वत्त पत्रों की तलना करेगा ृ

और प्रविष्टियों के सही होने का सत्यापन करने के पश्चात परिहार रोल और वत्त पत्र में प्रत्येक बन्दी को छोड़े जाने की अधिसंभाव्य तारीख प्रविष्ट करेगा।

(9) परिहार कार्ड के प्रभारी अधिकारी (cid:217)वारा हस्ताक्षरित, परिहार रोल अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा और कार्यालय में फाइल किया जायेगा।

अध्याय 30

पैरोल

718. पैरोल.- (1) अंत: वासियों को पैरोल, सधाराु त्मक सेवाओं के प्रगतिशील अध्युपाय हैं।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 323

(2) पैरोल पर बन्दी को छोड़ा जाना न के वल उसे कै द की बराइयों से बचाती है बल्कि उसे ु

अपने परिवार और समदाय के साथ सामाजिक संबंध बनाये रखने में भी समर्थ बनाती है , यह उसे आत्मविश्वास की भावना विकसित करने और बनाये रखने तथा परिवार और समदाय के साथ निरंतर संपर्क , उसमें जीवन के लिए आशा बनाये रखने में भी मदद करता है।

(3) बन्दी को अपने परिवार के साथ सामंजस्यपर्ण संबंध बनाू ये रखने में मदद करने के लिए, पैरोल अनदत्त करने के उपबंधों का उदारीकरण किया जाना चाहिए।

(4) पैरोल का विशेषाधिकार निस्संदेह रूप से पात्रता और औचित्यता के स्पष्ट परिभाषित सन्नियमों के आधार पर, चयनित बन्दियों को अनज्ञात किया जाना चाहिए। ु

(5) किसी बन्दी को पैरोल पर छोड़ा जाना, समय-समय पर यथासंशोधित, राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स, 2021 (cid:217)वारा शासित होगा।

अध्याय 31

छोड़ा जाना और समय पर्व छोड़ा जानाू

719. बन्दियों को छोड़ा जाना.- (1) समस्त दोषसि(cid:217)धों, जिनको किसी भी महीने में छोड़ा जाना है, के वारंट की सत्यता सनिश्चित करने के लिए पर्ववर्ती माह के

ू 25वें दिन परीक्षण किया जायेगा।

(2) जब किसी बन्दी के दंडादेश का अवसान हो जाता है, तो जेलर उसे वारंट के साथ अधीक्षक के समक्ष लायेगा और वह अधीक्षक की उपस्थिति में छोड़ दिया जायेगा।

(3) बंदियो के अंतिम उन्मोचन के समस्त आदेश जेल अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षरित किये जायेंगे। अपील पर, जर्माने के संदायु , प्रतिभूति दिये जाने पर, जमानत देने पर छोड़े जाने की दशा में, जिनमें विधिक निरोध की शक्ति, न्यायालय के आदेश के , जो कि अंग्रेजी में होना चाहिए, यथाशीघ्र जेल को प्रदत्त होते ही समाप्त हो जाती है, जेलर बन्दी को अपने उत्तरदायित्व पर छोड़ेगा:

ेर् है।

परंत यह कि जेल से ु दरी या अन्य कारणों से , अधीक्षक को तरंत निदश असाध्यु

(4) जेलर (cid:217)वारा छोड़े गये बन्दी के वारंट पर अधीक्षक (cid:217)वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे जैसे कि बन्दी को उसके समक्ष छोड़ा गया था। किसी अन्य जेल में अन्तरित किये गये बन्दी को छोड़े जाने के लिए वारंट प्राप्त होने पर, इसे तरंत रजिस्ट्रीु कत कवर के अधीन उस जेल को अग्रेषित किया जायेगा, जिसमें बन्दी परिरु(cid:217)ध है।

(5) प्रत्येक बन्दी को छोड़े जाने से पर्व

ू , प्रवेश रजिस्टर में उसके व्यक्तिगत विवरण के साथ सावधानीपर्वक मिलान किया जायेगा , और अधीक्षक या जेलर, यथास्थिति, स्वयं की संतष्टि ु करेगा कि उचित बन्दी को आगे लाया गया है और उसका दंडादेश, परिहार नियमों के अधीन अर्जित परिहार से संबंधित के सिवाय सम्यक रूप से निष्पादित किया गया है।

(6) चिकित्सा अधिकारी, छोड़े जाने पर प्रत्येक बन्दी का स्वास्थ्य और वजन प्रवेश रजिस्टर, छोड़े जाने की डायरी और वत्त पत्र में अभिलिखित करेगा या अभिलिखित करायेगा।

324 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(7) बन्दियों को साधारणतया उसी जेल से छोड़ दिया जायेगा, जिसमें वे छोड़े जाने के समय परिरु(cid:217)ध हैं, कित सरकार यह निदशित करते हए विशेष आदेश दे सके गी कि किसी भी जेल में परिरु(cid:217)ध बन्दियों को उस जिले की जेल में अन्तरित किया जायेगा, जहां उनके घर स्थित हैं और वहीं छोड़ा जायेगा।

(8) कोई भी बन्दी किसी भी कारण से लॉक-अप के पश्चात नहीं छोड़ा जायेगा , किसी न्यायालय (cid:217)वारा, छोड़े जाने के लिए वारंट सर्यास्त के पश्चाू त प्रेष्ि त नहीं किया जाना चाहिए, या यदि प्रेषित कर दिया जाता है, तो अगली प्रात: यथासंभव शीघ्र छोड़े जाने के निदश के साथ पष्ठांकित किया जाना चाहिए और साधारणतया बन्दियों को उनके प्रात : के भोजन के पश्चात ् और यथाशीघ्र सर्योदय होते ही छोड़ दिया जायेगा।

(9) किट की समस्त वस्तएं साफ और उपयोग के लिए उपयक्तु

ु होंगी, जो भी बन्दी गंदी अवस्था में अपनी किट छोड़ता है, उसे छोड़े जाने से पहले इसे धोना और साफ करना होगा, छोड़े जाने वाले सि(cid:217)धदोष को अधीक्षक के समक्ष स्वयं को अपने निजी वस्त्रों में पेश करना होगा और अपने हाथ में निरीक्षण के लिए उस किट को ले जायेगा, जो उसे जेल में प्रवेश पर या अंतिम बार वस्त्र देने पर दी गयी और छोड़े गये बन्दियों के वस्त्र तथा बिछौना तत्काल धोये जायेंगे, जिसके पश्चात उन्हें पनः जारी किये जाने के लिए वस्त्र गोदाम में संग्रहित रखा जायेगा, छोड़े गये बन्दियों (cid:217)वारा नये प्रवेश करने वाले बन्दियों को किट देना प्रतिषि(cid:217)ध है।

(10) यदि छोड़े जाने की तारीख रविवार या नियम में विहित कारागार अवकाश पर आ रही है, तो बन्दी को पर्ववर्ती दिवस को छोड़ दिया जायेगा , किन्त कोई निर्णय देने ु

वाला/निर्णयकर्ता उस व्यक्ति (cid:217)वारा, जिसके आवेदन पर उसे निरु(cid:217)ध किया गया है, जीवन- निर्वाह भत्ता देने में लोप के कारण उसके उन्मोचन का हकदार है, यदि उस मास का प्रथम दिवस उस दिन आता है, तो उसे रविवार को छोड़ा जाना चाहिए।

(11) किसी बन्दी को छोड़े जाने पर, यथास्थिति, अधीक्षक या जेलर उसे ऐसी किसी भी संपत्ति को सौंप सके गा, जिस पर उसका कब्जा रहा हो और जो उसके वारंट पर प्रविष्ट की जाती है और संपत्ति प्राप्ति की अभिस्वीकति रसीदृ बन्दी से ली जायेगी।

(12) यदि किसी बन्दी की संपत्ति का कोई भाग नहीं पाया जाता है और उसे नहीं दिया जाता है, तो इसे प्रवेश रजिस्टर में टिप्पण किया जायेगा और अधीक्षक विनिश्चय करेगा कि बन्दी को कितना प्रतिकर दिया जाये और किस अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जाये।

720. छोड़े जाने पर बन्दियों को यात्रा संबंधी सहायता.- (1) प्रत्येक सि(cid:217)धदोष बन्दी, जिसका घर उस कारागार से, जहां से उसे छोड़ा जाना है, से दस किलोमीटर से अधिक की दरी पर स्थित है और जिसके पास यात्रा के लिए पर्याप्त धन नहीं है , उसे उसके छोड़े जाने के समय उसके घर तक जाने के लिए, परिवहन के सबसे सस्ते साधन जैसे बस, रेल या परिवहन के किसी अन्य साधन का उपयोग करते हएु , सामान्य मार्ग का किराया उपलब्ध कराया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 325

(2) छोड़े गये बन्दी, जिन्हें चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा बीमारी या शारीरिक शैथिल्यता के कारण पैदल यात्रा करने के लिए अयोग्य प्रमाणित किया गया है, उन्हें सड़क मार्ग से यात्रा के लिए परिवहन का उपयक्तु साधन दिया जायेगा।

(3) कोई महिला बन्दी, जो उस जिले से भिन्न जिले की निवासी है, जिसमें वह परिरु(cid:217)ध है, उसको छोड़े जाने के कम से कम एक माह पर्व

ू , उसे छोड़े जाने के लिए उसके अपने जिले की कारागार में अन्तरित किया जायेगा और जब छोड़ी जाने वाली महिला बन्दी का घर जेल से कछ दरी पर है और कोई भी रिश्तेदार उसे लेने के लिए नहीं आता है , तो उसे एक महिला वार्डर के साथ उसके घर भेजा जायेगा।

ु या उसके दंडादेश के अवसान पर उसको छोड़े जाने पर, (4) किसी बन्दी की मत्य होने परृ

या जमानत पर, उसका वारंट, उस न्यायालय को, जिसने उसे जारी किया था, मत्य की ृ

तारीख, छोड़े जाने की तारीख और कारण तथा वारंट लौटाने की तारीख दर्शित करने वाले पष्ठां

ृ कन के साथ लौटा दिया जायेगा।

(5) यदि किसी बन्दी का अलग-अलग वारंट के अधीन दो या अधिक दंडादेश भगतना ु अपेक्षित है, तो ऐसे वारंट तब लौटा दिये जायेंगे, जब संयोजित दंडादेश निष्पादित हो गये हों।

721. बन्दियों का समयपर्व छोड़ा जानाू .- (1) समय से पहले छोड़े जाने का प्राथमिक उ(cid:217)देश्य अपराधियों का सधार और उनका पनर्वास तथा समाज में मिलाना है , साथ ही आपराधिक गतिविधियों से समाज की सरक्षा सनिश्चित करना है और ये

ु दोनों पहल आपस ू

में निकटतम रूप से परस्पर जड़े हए हैं तथा वहीं कारागार में रहते हए बन्दियों का आचरण , व्यवहार और प्रदर्शन आनषंगिक हैं।ु

(2) इनका उनकी पनर्वास क्षमता और उनके (cid:217)वारा अर्जित परिहार या उन्हें समय पर्व छोड़ा जाना अनदत्त करने वाले आदेश के आधा र पर उनको छोड़े जाने की संभावना से संबंधित है।

-समय पर, यथासंशोधित, राजस्थान बन्दी (3) बन्दियों को समय पर्व छोड़ा जाना समयू

(सजाएं छोटी करना) नियम, 2006 (cid:217)वारा शासित होगी।

722. मामलों को मानीटर करना.- (1) कारागारों में दंडादेश भगत रहे समस्तु बन्दियों का कं प्यटरीकत रिकॉर्ड

ु क कारागार के साथ- ृ , उनके मामलों की अनवर्ती कार्रवाई के लिए प्रत्ये

साथ कारागार मख्यालयों और राज्य सरकार के गह विभाग में रखा जाना अत्यं

ृ त वांछनीय है।

(2) मानिटरिंग प्रणाली निम्नलिखित मार्गदर्शक सि(cid:217)धांतों पर आधारित होगी:-

(क) प्रत्येक बन्दी के मामले के लिए एक एकल फाइल प्रणाली होगी और ऐसी फाइलें कारागार संस्था में रखी जायेंगी;

(ख) इस फाईल में पर्व अवसरों परू , किसी भी आधार पर, बन्दी को समयपर्व छोड़ा ू

जाना और मामले को पनु :विचार में लिये जाने की तारीख से संबंधित सचना ू का संपर्ण रिकॉर्ड होगाू ;

326 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

, एक समय में के वल एक ही (ग) किसी बन्दी की समयपर्व छोड़े जाने के लिएू

आधार पर विचार किया जायेगा;

(घ) प्रत्येक बन्दी की, समयपर्व छोड़े जाने के स्तू र के संबंध में सचना का पर्ण ू

रिकॉर्ड, इस प्रयोजन के लिए विहित रजिस्टर के साथ-साथ कं प्यटर में भी ू

रखा जायेगा;

(ङ) समस्त मामलों की मानिटरिंग, कारागार स्तर पर प्रत्येक मास और कारागार मख्यालय स्तर पर प्रत्ये

ु क तीन मास में की जायेगी।

अध्याय 32

ओपन एयर कैं प

723. ओपन एयर कैं प की आवश्यकता.- (1) सभी ओपन एयर कैं प, सि(cid:217)धदोष

व्यवहार में लाने के बन्दियों के सधारु , शोधन और पनर्वास की समकालीन विचारधारा को

लिए आशयित हैं, जिससे वे छोड़े जाने के पश्चात स्व् -अनशासित और संवर्धित जीवन जी सकें ।

(2) ये संस्थाएं बन्दियों को नियोजन और खले में जीवन जीने के अवसर प्रदान करती हैं।

(3) यह व्यक्ति की गरिमा को वापिस लौटाता है और उसमें आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व, जो समाज में उसके पनर्वास के लिए आवश्यक हैं , विकसित करता है।

(4) ओपन एयर कैं प में प्रवेश समय-समय पर, यथासंशोधित, राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैं प रूल्स, 1972 (cid:217)वारा शासित होगा।

अध्याय 33

आगंतक बोर्ड

ु

724. आगंतक बोर्ड

ु .- जिला मजिस्ट्रेट, आदेश (cid:217)वारा, जिला और उप-ख(cid:214)ड स्तर पर सरकारी और गैर सरकारी सदस्यों को समाविष्ट करते हएु , एक बोर्ड का गठन करेगा।

,-

725. आगंतक बोर्ड के ु कार्य.- आगंतक बोर्ड के कार्य में

(क) डिग्री और प्रशिक्षण की गणवत्ताु तथा कारागारों में अवसंरचना या सुविधाओं की प्रभाविता पर विशेष ध्यान देते हएु , कारागारों में सधारात्मक कार्य की ु

मानिटरिंग करना,

ृ ये मार्ग सझानाु , और

(ख) सधारात्मक कार्य में अभिव(िcid:217)ध के लिए नु (ग) बन्दियों की व्यक्तिगत या सामहिक शिकायतों पर ध्यान देना और कारागार प्राधिकारियों के परामर्श से निवारण के लिए उपबंध करना,

सम्मिलित होंगे।

726. पदेन आगंतकु .- (1) निम्नलिखित अधिकारी और ऐसे अन्य व्यक्ति, जिन्हें राज्य सरकार, समय-समय पर, इस निमित्त नियक्त करे

ु , राज्य की सभी जेलों के पदेन आगंतक होंगे

ु , अर्थात:-

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 327

(क) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग/राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्य;

(ख) राष्ट्रीय महिला आयोग/राजस्थान राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्य;

(ग) पलिस महानिदेशकु ; (घ) ऐसे कारागार, जो ऐसे मख्याु लय पर अवस्थित हैं जहां वह निवास कर रहा है, राजस्थान विधानसभा का प्रत्येक सदस्य;

(ङ) निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग;

(च) निदेशक, उ(cid:217)योग;

(छ) निदेशक, कषिृ ; (ज) निदेशक, मत्स्य पालन;

(झ) निदेशक, प्रौढ़ शिक्षा;

(ञ) मख्य अभियंताु , सार्वजनिक निर्माण विभाग; और (ट) मख्य अभियंताु , जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग।

(2) अपनी-अपनी अधिकारिता के भीतर समस्त जेलों के सरकारी आगंतकु ,-

(क) जिला एवं सत्र न्यायाधीश;

ु /पलिस महानिरीक्षकु ;

(ख) संभागीय आयक्तु ; (ग) पलिस आयक्तु (घ) जिला मजिस्ट्रेट;

ु ;

;

(ङ) जिला पलिस अधीक्षक या पलिस उपायक्तु (च) मख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटु (छ) अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट;

(ज) उप-ख(cid:214)ड मजिस्ट्रेट;

(झ) मख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ;

(ञ) कार्यकारी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग;

(ट) कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग;

;

(ठ) कार्यकारी अभियंता, वि(cid:217)यत वितरण निगम लिमिटेडु (ड) जिला शिक्षा अधिकारी;

(ढ) जिला कषि अधिकारीृ ; (ण) जिला उ(cid:217)योग अधिकारी;

(त) जिला मत्स्य अधिकारी;

(थ) नगर पालिका या अधिसचित क्षेत्र परिषद्ू के मेयर/अध्यक्ष/चेयरमैन; और (द) जिला परिवीक्षा अधिकारी।

(3) माननीय राज्यपाल या जेल विभाग के प्रभारी मंत्री किसी भी समय और किन्हीं भी परिस्थितियों के अधीन, जेल प्राधिकारियों को सचना देकर या बिना सचना दिये

ू , किसी भी328 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) जेल या उप-जेल का दौरा कर सकते हैं, राज्यपाल या मंत्री का अधीक्षक (cid:217)वारा जेल के गेट पर स्वागत किया जायेगा और उसका सम्यक सम्मान के साथ स्वागत किया जायेगा और राज्यपाल या मंत्री, जैसा भी मामला हो, यदि माननीय राज्यपाल या जेल विभाग के प्रभारी मंत्री ऐसे इच्छु क हों, को जेल के भीतर अधीक्षक (cid:217)वारा घमाया जायेगा।ु

(4) आगंतक बोर्ड में निम्नु लिखित गैर सरकारी सदस्य भी समाविष्ट होंगे:-

(क) के न्द्रीय जेल की दशा में कम से कम तीन गैर सरकारी आगंतक और जिला ु

तथा अन्य जेल की दशा में दो;

, (ख) महिला कारागारों के लिए दो महिला गैर सरकारी आगंतक होंगी और कें द्रीयु

जिला और अन्य जेलों के लिए एक;

(ग) के न्द्रीय जेल, जिला और अन्य जेलों के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता।

(5) जेलों के गैर-सरकारी विजिटरों का नामनिदशन राज्य सरकार (cid:217)वारा किया जायेगा।

(6) जिला मजिस्ट्रेट, के न्द्रीय जेलों या जिला जेलों या विशेष जेलों में आगंतक बोर्ड का ु

अध्यक्ष होगा और उपखंड मजिस्ट्रेट, अस्थायी उप-जेलों तथा उप-जेलों में अध्यक्ष होगा।

(7) आगंतक बोर्ड प्रत्येक तिमाही में कम से कम एक बार कारागारों के अधीक्षक के कार्यालय में बैठक करेंगे।

(8) आगंतक बोर्ड की प्रत्येक बैठक का कार्यवत्त आगंतक ऑर्डर बक में अभिलिखित किया जायेगा और उसे अधीक्षक की टिप्पणियों के साथ कारागार महानिरीक्षक को अग्रेषित किया जायेगा, कार्यवत्त की एक प्रति आगंतक बोर्ड के प्रत्येक सदस्य को भी प्रेषित की जायेगी और कारागार महानिरीक्षक समस्त कारागारों के आगंतक बोर्ड की अंतिम बैठक या बैठकों के कार्यवत्त की एक प्रति राज्य सलाहकार

ृ बोर्ड के समक्ष रखेंगे।

(9) जब आगंतक बोर्ड का कोई गैर सरकारी सदस्य कारागार का दौरा करता है , तो उसके साथ कारागार अधिकारी भी होंगे और आगंतक बोर्ड का अध्यक्ष अधीक्षक के परामर्श से , बोर्ड के सदस्यों (cid:217)वारा कारागार में किये जाने वाले दौरों का मासिक रोस्टर बनायेगा।

(10) रोस्टर इस रीति से बनाया जायेगा कि प्रत्येक मास में एक सदस्य (cid:217)वारा कम से कम एक यात्रा परिकल्पित की जायेगी।

(11) प्रत्येक गैर सरकारी आगंतक से अपेक्षा की जाती है कि वह बन्दियों की देखभाल में स्वयं की रुचि रखे और जिस कारागार का वह आगंतक है

ु , माह में एक बार और यदि संभव हो, तो प्राय: उस कारागार का दौरा करे।

(12) दौरों के दौरान एक आगंतक ु (आगंतक बोर्ड के सदस्यु ) को किसी भी बन्दी के साथ, जो आगंतक से बात करने का इच्छक है

ु , गप्त रूप से और पथक्तु

ृ : बातचीत करने का अधिकार

, किसी होगा, तथापि आगंतक औरु बन्दी के मध्य ऐसी पथक बातचीत कारागार के भीतर

ऐसे स्थान पर की जायेगी जो कारागार अधिकारी की दृष्टि में हो, आगंतकु बन्दी के साथ ऐसी बातचीत के तरंत पश्चाु त ्, बोर्ड के अध्यक्ष को लिखित में सचित करेगा किू बन्दी के साथ बातचीत में क्या पता चला और अध्यक्ष, यदि वह आवश्यक समझे, तो वह इस मामले को कारागार अधीक्षक के समक्ष उठायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 329

(13) बोर्ड के किसी भी सदस्य (cid:217)वारा, आगंतक ु आदेश पस्तिु का में की गयी कोई भी संपेक्षण या टिप्पणियां, अधीक्षक (cid:217)वारा तरंत अपनी टिप्पणियों के साथ कारागार महानिरीक्षक के ध्यान में लायी जायेगी और उसकी प्रति संबंधित आगंतक और आगंतक बोर्ड के अध्यक्ष को भी भेजी जायेगी।

(14) आगंतक बोर्ड के सदस्य विशेष रूप से कारागार के आहार की गणवत्ता और मात्रा

ु , रसोई और अस्पताल की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता, अस्पताल प्रबंधन, बन्दियों के चिकित्सा उपचार, स्वच्छता व्यवस्थायें, व्यावसायिक प्रशिक्षण के पहलओं

ु , साक्षरता कार्यक्रम और बन्दियों के लिए पस्तकालय की सविधा पर ध्यान देंगे।

ु

(15) अधीक्षक, विजिटिंग सदस्य या आगंतक बोर्ड के सदस्यों के समक्ष सधारात्मक कार्य

ु , बन्दियों के आमोद-प्रमोद और प्रशिक्षण, कारागार आहार या दवाओं, बन्दियों की शिकायतों से संबंधित कोई भी कागज या दस्तावेज प्रस्तत करेगा और शिकायतों को दर करेगा

ू , यदि बोर्ड के विजिटिंग सदस्य (cid:217)वारा यह चाहा गया हो।

(16) अधीक्षक, कारागार महानिरीक्षक की लिखित अनमोदन के बिनाु , आगंतक बोर्ड के किसी ु

सदस्य के समक्ष वित्तीय लेखों से संबंधित कोई भी रजिस्टर या दस्तावेज या कागज प्रस्तत ु करने के लिए बाध्य नहीं होगा।

(17) अधीक्षक यह सनिश्चित करेगा कि आगंतक सदस्य या आगंतक बोर्ड के सदस्यों को शिकायत अभिलिखित कराने वाले बन्दी, तत्पश्चात अभियक्त्

ु या कारागार कर्मचारिवंद ृ जिसके विरु(cid:217)ध शिकायत की गयी है, के प्रतिशोध का शिकार न बनें।

(18) आगंतक बोर्ड के सदस्य या सदस्यों की ऐसे किसी भी दौरे के पश्चा त ्, अधीक्षक यात्रा के ब्यौरे के संबंध में कारागार महानिरीक्षक को सचित करेगा।ू

(19) आगंतक बोर्ड की बैठक के प्रयोजन के लिए एक सरकारी आगंतक और दो गैर सरकारी ु

आगंतक गणपर्ति करेंगे।ु

ू

(20) आगंतक बोर्ड का एक गैर सरकारी सदस्यु

, बोर्ड में अपनी नियक्ति की तारीख से दो ु

वर्ष की कालावधि के लिए पद धारित करेगा, और पनर्नियक्ति पर विचार किया जा सके गा।

(21) राज्य सरकार, किसी भी समय, किसी भी गैर सरकारी आगंतक की नियक्ति र(cid:217)द ु

करने का अधिकार रखती है।

(22) आगंतक बोर्ड के गैर सरकारी सदस्य को , आगंतक बोर्ड की बैठकों में भाग लेने के लिए भत्ते प्राप्त होंगे, जो समय-समय पर सरकार (cid:217)वारा मंजर किये जा सकें गे।ू

(23) कषि विभाग और पश चिकित्सा विभाग

ु के अधिकारियों को जेल उ(cid:217)यान के निरीक्षण के लिए अनज्ञात किया जायेगा।ु

(24) किसी भी पलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति को , विचारण मजिस्ट्रेट की विशेष अनज्ञा ु के बिना, किसी बन्दी से पछताछ करने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा और अनज्ञा अधीक्षक को संबोधित एक लिखित आदेश के प्ररूप में दी जायेगी।

330 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(25) अधीक्षक यह व्यवस्था करेगा कि जेल में आने वाले प्रत्येक आगंतक के साथ जेल का ु

कोई उत्तरदायी अधिकारी रहेगा, साथ ही डंडों से लैस दो से चार वार्डर एस्कॉर्ट करेंगे।

(26) आगंतक बोर्ड की त्रैमासिक बैठक में , जेल में उनके निरीक्षण के दौरान अधीक्षक स्वयं उनके साथ रहेगा और किसी भी सरकारी या गैर सरकारी आगंतक को बिना किसी एस्कॉ

ु र्ट के जेल में जाने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा।ु

727. विजिटरों के कर्तव्य.- समस्त सरकारी और गैर सरकारी आगंतकु , प्रत्येक दौरे पर,-

(क) पके हए भोजन का परीक्षण करे

ु गा;

(ख) साधारणत: कारागार के बैरकों, वार्डों, वर्क -शेडों और अन्य भवनों का निरीक्षण करेगा;

(ग) यह अभिनिश्चित करेगा कि क्या स्वास्थ्य, सफाई और सरक्षा का ध्यान रखा ु

गया है, क्या प्रत्येक मामले में उचित प्रबंधन और अनशासन बनाु ये रखा गया है और क्या किसी बन्दी को अवैध रूप से निरु(cid:217)ध किया गया है, या विचारण की प्रतीक्षा के दौरान असम्यक कालावधि के लिए निरु(cid:217)ध किया गया है ;

(घ) गप्त अभिलेखों और लेखों से संबंधित अभिलेखों को छोड़कर , कारागार रजिस्टरों और अभिलेखों की परीक्षा करेगा;

(ङ) बन्दियों (cid:217)वारा या उनकी ओर से किये गये समस्त अभ्यावेदन और याचिकाओं को सनना और उन पर ध्यान देना ;

(च) यदि उचित समझे, तो निदेश देगा कि ऐसा कोई भी अभ्यावेदन या याचिका सरकार को अग्रेषित की जाये; और

(छ) सधारात्मक कार्य में उन्नु

ति के लिए नये रास्ते सझायेगा।ु

टिप्पण: विजिटरों के कर्तव्यों की सची की एक अतिरिक्त प्रू

ति मख्य (cid:217)वार पर रखी जायेगी ु

और उसके कारागार दौरे के अवसर पर आगंतक को सौंपी जायेगी। प्रत्येक गैर सरकारी आगंतक को उसकी नियक्ति पर एक प्रति दी जायेगी।

ु

728. आगंतक बोर्ड (cid:217)वारा टिप्पणियां अभिलिखित करना .- आगंतक बोर्ड को प्रत्येक ु

दौरे के पश्चात आगंतक पस्त्ि

ु का में अपनी टिप्पणियां अभिलिखित करनी चाहिए और टीका- टिप्पणियों के साथ इन टिप्पणियों की एक प्रति महानिरीक्षक को अग्रेषित की जायेंगी, जिसे ऐसे आदेश पारित करने चाहिए, जो वह आवश्यक समझे, जिन्हें संबंधित आगंतक को भेजा ु

जायेगा।

729. विजिटरों को देय सविधाएं

ु .- (1) आगंतक बोर्ड को कारागार की स्थिति और उसके प्रबंधन का निरीक्षण करने के लिए हर सविधा प्रदान की जायेगी , और उचित विनियमों के अधीन, कारागार के समस्त भागों और उसमें परिरु(cid:217)ध प्रत्येक बन्दी तक पहंच के लिए ु

अनज्ञात किया जायेगा। वे साधारणतया उच्च सरक्षा

ु वाले क्षेत्रों का दौरा नहीं करेंगे, जब तक कि कारागार महानिरीक्षक (cid:217)वारा इस निमित्त अनदेश न दिये जायें।ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 331 (2) प्रत्येक आगंतक को कारागार में किसी भी पस्तकु

ु , या अन्य अभिलेख मंगाने और उसकी निरीक्षण करने की शक्ति होगी, जब तक कि अधीक्षक, लिखित में अभिलिखित किये गये कारणों से, इस आधार पर मना न कर दे कि इसका प्रस्तुत किया जाना अवांछनीय है।

(3) गैर सरकारी आगंतक उन बन्दियों से नहीं मिलेंगे , जिन्हें चिकित्सा आधारों पर मलाकात ु

के लिए अनज्ञात नहीं किया गया है।ु

(4) साधारणतया बन्दियों को रात्रि के लिए बंद करने के पश्चात और कारागार अवकाशों पर ्

दौरा नहीं किया जायेगा।

730. जिला एवं सत्र न्यायाधीश (cid:217)वारा कारागारों का दौरा और निरीक्षण.- जिला एवं सत्र न्यायाधीश का यह कर्तव्य होगा कि वह उच्च सरक्षा और अन्य कारागारों का दौरा तथा निरीक्षण करे और वह स्वयं को संतष्ट करें कि ऐु सी कारागारों के लिए बनाये गये या जारी किये गये समस्त नियमों, विनियमों, निदेशों और आदेशों का सम्यक रूप से अनपालना और ्

प्रवर्तन किया जाता है।

731. किसी आगंतक (cid:217)वारा की गई टिप्पणियों का निपटानु

.- (1) पर्ववर्ती धारा के ू

अधीन आगंतक (cid:217)वारा की गयी कोई भी टिप्पु णी, वास्तविक तथ्यों के कथन और निष्पक्ष आलोचना, जो उसके ज्ञान में आते हैं और ऐसे सझावों तक सीमित होगी , जिन पर वह इच्छु क हो कि अधीक्षक या महानिरीक्षक विचार करे, आलोचना कारागार के सामान्य प्रशासन और प्रबंधन के ऐसे पहलओं तक ही सीमित होगी , जिनमें आगंतक कीु राय में, सधार किया ु

जा सकता है, किसी भी तरह से आगंतक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से , चाहे अनकलतु ू : या प्रतिकलतू : किसी भी कारागार कर्मचारिवंद के चरित्र या आचरण पर अनचिंतन नहीं करेगा और यदि आगंतक किसी कारागार अधिकारी के अच्छे या बरे कार्य को ध्यान में

ु लाना चाहता है, तो वह कारागार महानिरीक्षक को पत्र (cid:217)वारा ऐसा संबोधित करेगा।

(2) कारागार महानिरीक्षक किसी आगंतक (cid:217)वारा की गु यी किसी भी टिप्पणी पर आदेश पारित कर सके गा और, यदि किसी महत्वपर्ण म(cid:217)दे पर सरकार के आदेश अपेक्षित हैं , तो ऐसा अभिलेख राज्य सरकार को, अग्रेषित कर दिया जायेगा।

(3) किसी आगंतक (cid:217)वारा बनाये गये किसी अभिलेख पर , महानिरीक्षक या राज्य सरकार (cid:217)वारा पारित किसी भी आदेश की एक प्रति, कारागार अधीक्षक के माध्यम से संबंधित आगंतक को ु संसचितू की जायेगी।

अध्याय 34

ु से दंडादिष्ट बन्दी

मत्यृ

(सि(cid:217)धदोष बन्दी)

732. परिभाषाएं.- (1) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए,-

ु बन्दी अभिप्रेत है; और

(क) "बन्दी" से मत्य से दंडादिष्टृ (ख) "नातेदार" से किसी बन्दी के संबंध में पति या पत्नी, बच्चे, पौत्र पौत्री, माता- पिता, पितामही-मातामही, माता-पिता के भाई या बहन, सास-ससरु , सास-ससर ु332 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) के माता-पिता, पति या पत्नी के भाई बहन, भाई बहन के बच्चे और पति या पत्नी के भाइयों या बहनों के बच्चे अभिप्रेत हैं।

ु प्रत्येक बन्दी को उसकी दंडादेश की तारीख से, तथा उच्च न्यायालय (2) मत्य से दंडादिष्टृ

(cid:217)वारा दंडादेश की पष्टि किए जाने की प्रतीक्षा

ु किये बिना, जेल के भीतर किसी सरक्षित ु स्थान, यदि संभव हो, तो किसी कोठरी में, अन्य समस्त बन्दियों से अलग परिरु(cid:217)ध रखा जायेगा और वह कोठरी या कक्ष जिसमें मत्य से सि(cid:217)धदोष को परिरु(cid:217)ध किया जाता है , सदैव ही उसे उसमें रखे जाने से पर्व

ू , जेलर (cid:217)वारा उसका परीक्षण किया जायेगा, जो उसकी उपयक्तु ता और सरक्षा के बारे में स्वयं को संतष्ट करेगा

ु , और परीक्षण का परिणाम अपनी रिपोर्ट पस्तिका में अभिलिखित करेगा।

ु

ु होता है, तो दंडादेश तब टिप्पण: 1 जब कोई व्यक्ति सत्र न्यायालय (cid:217)वारा मत्य से दंडादिष्टृ

तक निष्पादित नहीं किया जायेगा, जब तक कि उच्च न्यायालय (cid:217)वारा इसकी पष्टि नहीं कर दी जाती है और जब उच्च न्यायालय (cid:217)वारा दंडादेश की पष्टि कर दी जाती है, तो सत्र न्यायालय उस जेल के अधीक्षक को, दंडादेश क्रियान्वित करने के लिए वारंट जारी करेगा, जिसमें बन्दी परिरु(cid:217)ध है। यदि मृत्य से ु दंडादिष्ट महिला गर्भवती पायी जाती है, तो उच्च न्यायालय दंडादेश के निष्पादन को स्थगित करने का आदेश देगा और यदि वह ठीक समझे, तो दंडादेश को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर सकता है।

टिप्पण: 2 कारागार अधिनियम, 1894 की धारा 30 के अनसारु , मत्य द(cid:214)डादे

ु श के अधीन किसी बन्दी की, द(cid:214)डादेश के पश्चात ् कारागार में पहंचते हीु , जेलर (cid:217)वारा या उसके आदेश पर, तरन्त तलाशी ली जायेगी और उससे वे सभी वस्तएं ले ली जायेंगी, जिन्हें जेलर उसके कब्जे में छोड़ना समीचीन या खतरनाक समझे। ऐसे प्रत्येक बन्दी को अन्य सभी बन्दियों से अलग एक कोठरी में परिरु(cid:217)ध रखा जायेगा तथा दिन और रात्रि उसे सरक्षा गार्ड के अधीन रखा जायेगा।

ु किसी सि(cid:217)धदोष के कारागार में प्रवेश होने पर, अधीक्षक, ऐसे प्रवेश की (3) मत्य दंडादिष्टृ

रिपोर्ट राज्य सरकार को देगा। अधीक्षक, राज्य सरकार को उच्च न्यायालय (cid:217)वारा मत्य ृ दंडादेश की पष्टि किु ये जाने पर, सत्र न्यायालय (cid:217)वारा उसके निष्पादन के लिए नियत तारीख की भी रिपोर्ट देगा और उसके निष्पादन पर रोक लगाने के संबंध में राज्य सरकार के आदेशों के लिए याचना करेगा।

733. प्रवेश पर वस्तुएं जारी करना.- (1) कारागार में उसके आगमन पर तरंतु , यदि बन्दी परुष है

ु , तो जेलर अपनी उपस्थिति में उसके वस्त्र उतरवायेगा और उसकी तलाशी लेगा, उसके निजी वस्त्र या अन्य संपत्ति की प्रत्येक वस्तु उससे ले लेगा और उसे जेल वस्त्र का एक सट देगाू , एक दरी और दो कं बल तथा कप और प्लेट का एक सेट और यदि बन्दी महिला है, तो उसकी तलाशी मैट्रन या महिला वार्डर (cid:217)वारा अके ले में ली जायेगी, जो परुषु बन्दी की दशा में, जेलर के समान ही कार्रवाई करेगी।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 333

ु बन्दी को तब तक बेड़ियां या हथकड़ी नहीं लगायी जायेगी, जब तक (2) मत्य से द(cid:214)डादिष्टृ

कि वह इतना हिंसक न हो कि वह गार्ड या स्वयं उसके लिए खतरनाक हो और यदि बेड़ियां या हथकड़ी लगाना आवश्यक समझा जाये, तो सि(cid:217)धदोष ठहराने वाले न्यायालय के आदेश अभिप्राप्त किये जायेंगे।

ु दंडादेश 734. कोठरी का परीक्षण किया जाना.- (1) प्रत्येक कोठरी का, जिसमें मत्यृ

के अधीन सि(cid:217)धदोष को परिरु(cid:217)ध किया जाना है, ऐसे सि(cid:217)धदोष को इसमें रखने से पर्व

ू , जेलर (cid:217)वारा या इस निमित्त नियक्त अधिकारी (cid:217)वारा परीक्षण किया जायेगा , जो स्वयं को संतष्ट करेगा कि यह सरक्षित है और इसमें किसी भी प्रकार की ऐसी कोई वस्त ु नहीं है जिसे बन्दी, अपराध के आयध (cid:217)वाु रा, या आत्महत्या करने के लिए उपकरण के रूप में उपयोग किये जाने की कोई भी संभावना हो, या उस अधिकारी की राय में, इसकी अनमति देना ऐसे ु

कोठरी में समीचीन न हो।

ु दंडादेश के अधीन महिला बन्दियों को महिला यार्ड में रखा जायेगा और उनकी (2) मत्यृ

सरक्षा महिला वार्डरु या महिला परिचर (cid:217)वारा की जायेगी।

ु से दंडादिष्ट प्रत्येक बन्दी को चौबीस घंटे एक वार्डर की निगरानी के अधीन रखा (3) मत्यृ

जायेगा। सि(cid:217)धदोषों को इस कार्य पर नियक्त नहीं किया जायेगा और सि(cid:217)धदोष बन्दियों की सरक्षा का उत्तरदायी ु कर्तव्य सदैव सर्वाधिक भरोसेमंद स्थायी वार्डरों को दिया जायेगा।

(4) वार्डर एक रेग्यलेशन बैटन से सज्जित होगा , और जहां तक संभव हो, उसे कोठरी के जालीदार दरवाजे के बाहर रखा जायेगा, यदि बन्दी परुष है

ु , तो कोठरी के ताले की चाबी वार्डर के पास रखी जायेगी, ताकि वह आत्महत्या के किसी भी प्रयास को रोक सके , किन्त ु यदि वह महिला है, तो उसे जेल में (cid:212)यटी के दौरान महिला वार्डर (cid:217)वारा , अन्यथा (cid:212)यटी पर ू मौजद वरिष्ठ मख्यू

ु वार्डर (cid:217)वारा रखा जायेगा, ताला ऐसा होगा जिसे किसी भी परिस्थिति में जेल में उपयोग में आने वाली किसी अन्य चाबी से नहीं खोला जा सके गा, किसी भी परिस्थिति में, यह आवश्यक है कि वार्डर को बन्दी और उस कोठरी के सभी भागों का पर्ण ू दृश्य दिखाई दे, जिसमें वह परिरु(cid:217)ध है, इसलिए रात्रि के समय बन्दी पर अच्छी रोशनी की व्यवस्था की जायेगी और परुषु बन्दी की दशा में, जब तक कि बन्दी आत्महत्या का प्रयास न कर रहा हो, उसकी कोठरी का (cid:217)वार के वल तभी खोला जायेगा, जब हिंसा का प्रयास करने पर उसे रोकने के लिए तीन व्यक्ति उपस्थित हों।

(5) जब किसी कारागार में एक ही समय में दो या अधिक सि(cid:217)धदोष बन्दी एक दसरे से ू कछ दरी पर स्थित कोठरियों में परिरु(cid:217)ध हैं , तो प्रत्येक कोठरी के लिए एक पथक गार्ड ृ

तैनात किया जायेगा, कितं ु, यदि कोठरियां संलग्न हों, तो एक वार्डर अधिकतम तीन बन्दियों की सरक्षा के लिए तैनात किया जायेगा और तीन से अधिक कोठरियों के लिए , एक अतिरिक्त गार्ड तैनात किया जायेगा, चाहे कोठरियां संलग्न हों।

(6) (cid:212)यूटी पर तैनात मख्यु वार्डर दिन और रात्रि दोनों समय के दौरान अनिश्चित घंटों में उन वार्डरों से जिन्हें ऐसे बन्दियों को सौंपा गया है, बार-बार मलाकात करेगा औरु बन्दी के334 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) किसी भी संदिग्ध आचरण या वार्डरों या गार्ड (cid:217)वारा कोई भल करने के बारे में अधीक्षक को संसचित करने के लिए तरंत जेलर को रिपोर्ट करेगा।

ु

ु से सि(cid:217)धदोष प्रत्येक परुषु बन्दी (7) प्रतिदिन प्रात: और सांयकाल, जेलर अपने हाथों से मत्यृ

की सावधानीपर्वक तलाशी लेगा और उसकी कोठरी का परीक्षण करेगा और स्वयं को आश्वस्त करेगा कि बन्दी के पास निकल भागने या आत्महत्या कारित करने के लिए कोई आयध या ु अन्य साधन नहीं है और यह कार्य किसी भी परिस्थिति में वार्डरों को प्रत्यायोजित नहीं किया जायेगा। इसी प्रकार महिला बन्दियों की तलाशी महिला वार्डर या महिला जेल अधिकारी (cid:217)वारा निजी तौर पर ली जायेगी और उनकी कोठरियों की परीक्षा भी महिला जेल अधिकारी (cid:217)वारा की जायेगी।

ु दंडादेश के अधीन बन्दी को एक श्रमिक बन्दी का सामान्य 735. आहार.- मत्यृ

आहार अनज्ञात किया जायेगा , अंतिम अपील के अस्वीकार होने के पश्चात ्, उसे अधीक्षक के विवेकानसारु , मिठाइयों या अतिरिक्त आहार के रूप में सभी यक्तियक्त भोग दिये जायेंगे ु

और उसके भोजन का उसे देने से पहले जेलर या चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा सदैव परीक्षण किया जायेगा और उसे इन अधिकारियों में से किसी एक अधिकारी की उपस्थिति में दिया जायेगा।

उनके नातेदारों, 736. मलाकातु .- (1) अधीक्षक, मत्य दंडादेश के अधीन बन्दियों को

मित्रों या विधिक सलाहकारों से सप्ताह में एक बार मलाकात के लिए अनज्ञात कर सके गा

ु , या अधिक बार भी अनज्ञात किया जा सकता है , जब अधीक्षक की राय में ऐसी मलाकात की ु

अनमति अच्छे कारण से अनदत्त की जा सकती है।

ु

(2) जेलर मलाकात अनदत्त करने से पु

ूर्व यह सनिश्चित करेगा कि सभी पर्वोपाय और सरक्षा उपाय पहले से ही कर लिये गये हैं।

ु बन्दी की मलाकात जेलर या उपु -जेलर (cid:217)वारा संचालित की जायेगी, (3) मत्य से सि(cid:217)धदोषृ

जो मलाकात के दौरान उपस्थित रहेगा और यह देखेगा कि उक्त बन्दी को कछ भी न दिया ु

जाये।

(4) यदि बन्दी ऐसा चाहे तो उस धर्म या आस्था के धार्मिक पजारीु , जिससे बन्दी संबंधित है, को राज्य सरकार के व्यय पर सप्ताह में एक बार बलाया जायेगा और अधीक्षक किसी धार्मिक पजारी को सि(cid:217)धदोष के वत्त पत्र में अभिलिखित कि

ृ ये जाने वाले पर्याप्त कारणों के लिए अधिक बार बलाने की अनमति दे सकता है।

ु

737. सविधाएं

ु से दंडादिष्ट बन्दी को कारागार अधीक्षक के अनमोदन से ु

ु .- (1) मत्यृ

निम्नलिखित सविधाएं दी जा सकें गी , अर्थात ्:-

(क) धार्मिक पस्तकें

ु ;

(ख) धार्मिक चित्र;

(ग) सरक्षा अपेक्षाओं के अध्यु धीन माला और आवश्यक धार्मिक प्रतीक; और (घ) समाचार पत्र और पस्तु कें ।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 335

(2) अधीक्षक किसी योग्य मामले में बन्दी को यक्तियक्तु ु सांत्वना देने के उ(cid:217)देश्य से सरकार (cid:217)वारा नियत रकम तक का व्यय उपगत करने के लिए प्राधिकत है

ृ , उदाहरण के लिए उसके दंड के निष्पादन से पर्व उसके निकट नातेदारों की उपस्थिति सू

ुनिश्चित करना।

ु से (3) कारागार निदेशालय प्रमख अत्यावश्यकु , अनकम्पाु और योग्य मामलों में मत्यृ

दंडादिष्ट बन्दी पर अतिरिक्त व्यय अनज्ञात कर सकता है।ु

ु दंडादेश के अधीन बन्दी के 738. संप्रेक्षण.- कारागार अधिकारी को प्रति दिन मत्यृ

बारे में अपना संप्रेक्षण अभिलिखित करना चाहिए। ऐसा रिकॉर्ड मनोवैज्ञानिक अध्ययन और अनसंधान प्रयोजनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

739. उन्मत्तता.- (1) यदि मत्य दंडादेश की प्रतीक्षा कर रहे किसी बन्दी में उन्मत्तता के संके त दिखाई दें, जो चिकित्सा अधिकारी की राय में, ढोंग नहीं हैं, या जिसे निर्धारित करने के लिए निगरानी की आवश्यकता है कि वे ढोंग हैं या नहीं, सरकार को तरंत ु परिस्थिति की रिपोर्ट, निम्नलिखित दस्तावेजों सहित आदेशों के लिए कारागार महानिरीक्षक के माध्यम से की जायेगी, अर्थात ्:-

(क) बन्दी की वर्णन तालिका;

(ख) वारंट की एक प्रति जिसके अधीन उसे परिरु(cid:217)ध किया गया है (दो प्रतियों में);

(ग) विहित प्ररूप में चिकित्सा अधिकारी का प्रमाणपत्र; और

(घ) मेडिकल हिस्ट्री शीट (दो प्रतियों में)।

टिप्पण: निर्णय की प्रति भी यथासंभव शीघ्र भेजी जायेगी।

ु दंडादिष्ट किसी सि(cid:217)धदोष की मानसिक स्थिति का परीक्षण करने के (2) यदि सरकार मत्यृ

प्रयोजन से, एक विशेष चिकित्सा बोर्ड की नियक्ति का आदेश देती है , तो सि(cid:217)धदोष को मेडिकल बोर्ड (cid:217)वारा परीक्षण से पर्व

ू , यदि आवश्यक समझा जाये, निकटतम मख्यालय ु

अस्पताल या चिकित्सा महावि(cid:217)यालय और अस्पताल के प्रभारी मनोचिकित्सक (cid:217)वारा कारागार में दस दिन या उससे अधिक कालावधि के लिए निगरानी के अधीन रखा जायेगा।

(3) जिस कारागार में सि(cid:217)धदोष को परिरु(cid:217)ध किया गया है, उस कारागार के अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी सि(cid:217)धदोष के चिकित्सीय परीक्षण के लिए मनोचिकित्सक को सभी सविधाएं प्रदान कु रेंगे।

निगरानी के अधीन रखे (4) यथासंभव शीघ्र, मेडिकल बोर्ड नियक्त होने और सि(cid:217)धदोष को ु

जाने के पश्चात ्, कारागार अधीक्षक पलिस या अन्य स्रोतों के माध्यम से सि(cid:217)धदोष के बारे

, या चिकित्सा अधिकारी के निपटान पर में सचना एकत्र करेगा और इसे मनोचिकित्सकू

उनके समक्ष रखेगा।

(5) सि(cid:217)धदोष का इतिहास उन संस्थाओं या व्यक्तियों से अभिप्राप्त किया जायेगा, जिनके साथ उसका संपर्क रहा है, मनोचिकित्सक जेल अधीक्षक को सचना एकत्रित करने के लिए ू

एक प्रश्नावली उपलब्ध करायेगा, सि(cid:217)धदोष की मानसिक स्थिति से संबंधित तथ्यात्मक सामग्री या तो अभिलेखों से या उसे गिरफ्तार करने वाले अधिकारी सहित प्रत्यक्षदर्शियों से अभिप्राप्त की जायेगी और अपराध के ठीक पर्व

ू , अपराध के समय और अपराध कारित करने336 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) , सि(cid:217)धदोष के तरंत पश्चाु त सि(cid:217)धदोष की मनःस्थिति का आकलन करने के प्रयोजन के लिए

के नातेदारों सहित प्रत्यक्षदर्शियों से रिपोर्ट अभिप्राप्त की जायेगी।

टिप्पण: विचारण के समय और विशेष रूप से न्यायालय में परीक्षण के दौरान बन्दी के व्यवहार के बारे में साक्ष्य, न्यायालय की कार्यवाहियों से उपलब्ध होंगे, जिसमें साक्ष्य, सारांश और निर्णय सम्मिलित हैं। सि(cid:217)धदोष पर रिपोर्ट उन व्यक्तियों से अभिप्राप्त की जायेगी, जो रिमांड कालावधि और उसके पश्चात कारागार में निरोध ्

के दौरान उसके संपर्क में रहे हैं। यह जानकारी एकत्रित करते समय, इस बात का अधिकतम ध्यान रखा जायेगा कि जिस उ(cid:217)देश्य से यह जानकारी एकत्रित की जा रही है, उसे प्रकट न किया जाये। यह भी याद रखना चाहिए कि सि(cid:217)धदोष के नातेदारों की इसमें विशेष रुचि होने की संभावना है और उनके (cid:217)वारा प्रदत्त जानकारी का उपयोग अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। ऐसी रिपोर्ट कारागार अधिकारी (cid:217)वारा एकत्रित की जानी चाहिए।

(6) यथासंभव शीघ्र मनोचिकित्सक या चिकित्सा अधिकारी अपनी रिपोर्ट तैयार कर लेते हैं, वह अधीक्षक या निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से विशेष चिकित्सा बोर्ड के लिए तारीख नियत करने का अनरोध करेंगे।ु

(7) मनोचिकित्सक या चिकित्सा अधिकारी समस्त रिकॉर्ड मेडिकल बोर्ड के समक्ष रखेंगे। बोर्ड का अध्यक्ष मेडिकल बोर्ड की कार्यवाही, कारागार महानिरीक्षक के माध्यम से, जेल के अधीक्षक की सचना के साथू , सचिव, गह विभाग को अग्रेषित करेंगे।

ृ

ु दंडादिष्ट महिला बन्दी का गर्भवती होना चिकित्सा 740. गर्भावस्था.- (1) जब मत्यृ

अधिकारी (cid:217)वारा प्रमाणित किया जाता है, तो यह तथ्य सदैव वारंट पर टिप्पण किया जायेगा, जिसे जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का के न्द्रीय अधिनियम सं.

2) की धारा 416 के अधीन उच्च न्यायालय के आदेश प्राप्त होने तक निष्पादन के निलंबन के लिए आदेश का उस पर पष्ठांकन ृ किये जाने के लिए सत्र न्यायाधीश को लौटाया जायेगा।

ु महिला बन्दी स्वयं को गर्भवती घोषित करती है, और चिकित्सा (2) जब मत्य दंडादिष्टृ

अधिकारी कथन की सत्यता या अन्यथा यह प्रमाणित करने में असमर्थ होता है, तो वह लिखित रूप में तथ्य का कथन करेगा, तथा इस बिन्दु पर स्वयं का समाधान करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समय अन्तराल का भी कथन करेगा, और कथन को वारंट के साथ संलग्न करेगा तथा उसके साथ सत्र न्यायाधीश को, पर्ववर्ती नियम में विनिर्दिष्ट प्रक्रिया के लिए अग्रेषित करेगा।

ु निष्पादन ऊपर उल्लिखित किन्हीं भी (3) जब किसी महिला बन्दी पर मत्यदंड काृ

परिस्थितियों के अधीन निलंबित कर दिया गया है, तो बाद में दंड को सरकार के स्पष्ट आदेश के बिना निष्पादित नहीं किया जायेगा, जिसके लिए अधीक्षक, कारागार महानिरीक्षक के माध्यम से आवेदन करेगा।

741. अपील सविधाएं

ु दंडादेश की उच्च न्यायालय (cid:217)वारा पष्टि के ु

ु .- (1) मत्यृ

परिणामस्वरूप न्यायालय से निष्पादन का वारंट प्राप्त होने पर, अधीक्षक सि(cid:217)धदोष कोभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 337 सचित करेगा कि यदि वह भारत के संविधान के किसी भी ससंगत प्रावधान के अधीन उच्चतम न्यायालय में अपील करना चाहता है, जिसे इसमें इसके पश्चात क्रमशः ् "अपील और आवेदन" के रूप में निर्दिष्ट किया गया है, तो उच्चतम न्यायालय के नियमों (cid:217)वारा विहित कालावधि के भीतर ऐसा कर सकता है।

ु दंडादिष्ट बन्दी ऐसा करने का इच्छु क है, तो जेलर या विधि अधिकारी, (2) यदि मत्यृ

यथास्थिति, तरंत उसके लिए यथासंभव उु सके स्वयं के शब्दों में उसकी अपील तैयार करेगा और इसे या तो रजिस्ट्रीकत कवर के अधीन या किसी जेल अधिकारी (cid:217)वारा दस्ती रूप से राज्य सरकार और कारागार महानिरीक्षक को सचना देते हए समचित न्या

ु यालय के रजिस्ट्रार को अग्रेषित कर दिया जायेगा।

(3) जब कभी किसी न्यायालय (cid:217)वारा मत्य द(cid:214)डादेश पारित किया जाता है , तो वह द(cid:214)डादेश अपील या आवेदन के खारिज होने तक या, ऐसी अपील प्रस्तुत न किये जाने या ऐसा कोई आवेदन न किये जाने की दशा में, अपील या ऐसा आवेदन करने के लिए अनज्ञात कालावधि ु

की समाप्ति तक निष्पादित नहीं किया जायेगा:

परंत यह किु , यदि किसी सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा या उसकी ओर से दया याचिका प्रस्तुत की गयी है, तो उस पर राष्ट्रपति के आदेशों तक दंडादेश का निष्पादन आगे स्थगित कर दिया जायेगा:

ु दंडादेश परंत यह और किु , यदि उसी मामले में एक से अधिक व्यक्तियों को मत्यृ

पारित किया है और यदि अपील या आवेदन के वल एक या अधिक (cid:217)वारा या उनकी ओर से किया जाता है, कित सभी की ओर से नहीं , तो दंडादेश का निष्पादन ऐसे समस्त व्यक्तियों (दोषसि(cid:217)धों) के मामले में स्थगित किया जायेगा, न कि के वल उस व्यक्ति या व्यक्तियों के मामले में जिसके (cid:217)वारा या जिनकी ओर से अपील या आवेदन किया जायेगा।

ु से सि(cid:217)धदोष 742. दया याचिकाओं में कारागार प्राधिकारियों की भमिकाू .- (1) मत्यृ

प्रत्येक बन्दी को दया याचिका प्रस्तुत करने का विशेषाधिकार है।

ु दंडादेश के अधीन दोषसि(cid:217)धों की ओर से दया की याचिकाओं के संबंध में या (2) मत्यृ

सि(cid:217)धदोष के (cid:217)वारा या उनकी ओर से भारत के उच्चतम न्यायालय में अपील के संबंध में जेल के अधीक्षकों (cid:217)वारा निम्नलिखित अनदेशों का अनपालना किया जायेगा :-

ु दंडादेश की पष्टि पर या भारत के उच्चु तम (क) उच्च न्यायालय (cid:217)वारा मत्यृ

न्यायालय (cid:217)वारा अपील की विशेष अनमति के लिए आवेदन को खारिज करने की सचना या किसी भी मध्यू वर्ती प्रक्रम में अपील की विशेष अनमति के लिए ु

उसके आवेदन को रोक देने के परिणामत:, निष्पादन के लिए वारंट प्राप्त होने पर तरंत यदि सि(cid:217)धदोष नें दया के लिए कोई याचिका पर्व में नहीं लगायी है , तो जेल अधीक्षक संबंधित सि(cid:217)धदोष को सचित करेगा कि यदि वह दया के लिए याचिका प्रस्तुत करना चाहता है, तो उसे ऐसी सचना की तारीख से सात ू

दिनों के भीतर इसे लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए;

338 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

ु के दंडादेश के निष्पादन की तारीख, उच्च न्यायालय से पष्टिकरण आदेश ु

टिप्पण: मत्यृ

प्राप्त होने पर, सेशन न्यायाधीश (cid:217)वारा नियत की जाती है। निष्पादन का वारंट, निष्पादन के लिए, वारंट जारी होने की तारीख से 21 दिवस से अनधिक और 28 दिवस से अधिक के अंतराल पर नियत नहीं करेगा।

(ख) यदि सि(cid:217)धदोष, उपरोक्त अनदेश (cid:217)वारा विहित सात दिवस की कालावधि के भीतर याचिका प्रस्तत करता है

ु , तो इसे राज्य सरकार और भारत के राष्ट्रपति दोनों को अलग-अलग निष्पादन के लिए नियत तारीख की रिपोर्ट देते हए एक ु

व्याख्यापत्र के साथ संबोधित किया जाना चाहिए और यह प्रमाणित करना होगा कि याचिका पर सरकार के आदेशों की प्राप्ति लम्बित होने के कारण निष्पादन पर रोक लगा दी गयी है और यदि याचिका प्रेषित किये जाने की तारीख से पन्द्रह दिवस के भीतर कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो अधीक्षक तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हए राज्यु सरकार को फै क्स या ई-मेल

सरकार का के माध्यम से सचित ू करेगा। कित वह किसी भी स्थिति में राज्यं

उत्तर प्राप्त होने से पर्व निष्पाू दन नहीं करेगा;

(ग) यदि सि(cid:217)धदोष, उपरोक्त अनदेश ु (क) (cid:217)वारा विहित कालावधि के पश्चात ् याचिका प्रस्तुत करता है, तो जेल का अधीक्षक इसे, तरंत राज्यु सरकार को अग्रेषित करेगा और साथ ही निष्पादन के लिए नियत तिथि विनिर्दिष्ट करते हए इसका सार सचित करेगा

ू , और आदेशों के लिए अनरोध करेगा कि क्या

ु निष्पादन मल्तु वी कर दिया जाना चाहिए और यह कथन करेगा कि उत्तर लम्बित होने तक, दंडादेश कार्यान्वित नहीं किया जायेगा तथा यदि ऐसी याचिका, तथापि, निष्पादन के लिए नियत दिन से पहले दिन दोपहर के बाद अधीक्षक को प्राप्त होती है, तो वह इसे तरन्तु राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा और साथ ही निष्पादन की तारीख देते हएु , इसका सार फै क्स या ईमेल करेगा और कथन करेगा कि दंडादेश कार्यान्वित किया जायेगा जब तक कि इसके प्रतिकल आदेश प्राप्तू न हो जायें;

(घ) यदि सि(cid:217)धदोष भारत के राष्ट्रपति को संबोधित दया याचिका प्रस्तत करता है

ु , तो अधीक्षक तरंत इसे राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा और उसी समय ई - मेल या फै क्स के माध्यम से इसकी प्रति और निष्पादन की तारीख राज्य सरकार को भेजेगा और वह निष्पादन को तब तक आगे मल्तु वी नहीं करेंगे जब तक कि राज्य सरकार (cid:217)वारा विशेष रूप से आदेश न दिया जाये;

(ङ) यदि किसी सि(cid:217)धदोष से या उसकी ओर से जेल के अधीक्षक को सचना प्राप्त ू

होती है कि अपील करने के लिए विशेष अनमति के लिए उच्चतम न्यायालय में आवेदन किया जाना आशयित है, तो जेल का अधीक्षक तत्काल राज्य सरकार को निष्पादन के लिए नियत की गयी तारीख देते हए व्याु ख्या पत्र के साथ और यदि संभव हो, तो बन्दी के लिए कार्य करने वाले वकील का नामभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 339 और पते की सचना भेजेगा और प्रमाणित करेगा कि सचना पर राज्य

ू सरकार के आदेशों की प्राप्ति लम्बित रहने तक निष्पादन रोक दिया गया है और यदि सूचना भेजने की तारीख से पन्द्रह दिनों के भीतर कोई उत्तर प्राप्त नहीं होता, तो अधीक्षक इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हएु , राज्य सरकार को फै क्स या ई-मेल भेजेगा, कित किसी भी स्थितिं ु में राज्य सरकार को फै क्स या ई-मेल भेजेगा, कित किसी भी स्थिति में राज्यं ु सरकार का उत्तर प्राप्त होने से पर्व निष्पाू दन नहीं करेगा;

ु दंडादेश पारित किया गया टिप्पण: यदि उसी मामले में एक से अधिक व्यक्तियों को मत्यृ

है, और यदि के वल एक या एक से अधिक से या उनकी ओर से सचना प्राप्त होती ू

है, कित उनमें से समस्तं ु , उच्चतम न्यायालय में अपील करने की अनमति के लिए ु

आवेदन करने का आशय नहीं रखते हैं, तो दंडादेश का निष्पादन न के वल उस व्यक्ति या व्यक्तियों के मामले में मल्तु वी किया जायेगा जिनसे, या जिनकी ओर से, ऐसी सचना प्राप्त हई है

ु , बल्कि उस अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के मामले में भी, जिनसे या जिनकी ओर से, ऐसी कोई सचना प्राप्तू नहीं हुई है। (च) जैसे ही अपील की विशेष अनमति के लिए किसी आवेदन को उच्चतम न्यायालय (cid:217)वारा अस्वीकार किये जाने या प्रस्तुत की गयी अपील को खारिज किये जाने की सचना सरकार को मिलती है , तो जिला मजिस्ट्रेट और जेल के अधीक्षक को सचित किया जायेगा और जेल के अधीक्षक को निष्पा दन की तारीख नियत करने के लिए प्राधिकत किया जायेगा और उसी समय फै क्स या ई-मेल के माध्यम से उसके (cid:217)वारा उच्चतम न्यायालय के आदेशों की पोस्ट कॉपी की प्राप्ति लम्बित रहने तक निष्पादन पर रोक लगाने के लिए अनदिष्टु किया जायेगा;

टिप्पण: यदि बन्दी की ओर से दया याचिका प्राप्त होती है, तो उसका निस्तारण उपरोक्त नियमों के अनसार किया जायेगा।ु

(छ) दंडादेश के निष्पादन से पहले किसी भी समय अधीक्षक को यह पता चलने की स्थिति में, कि परी तरह से असाधारण परिस्थितियां उत्पन्न हो ग यी हैं, जो स्पष्ट रूप से दंडादेश पर पनर्विचार की मांग करती हैं , तो वह पर्वगामी ू

नियमों के होते हए भीु , वह राज्य सरकार को ई-मेल या फै क्स (cid:217)वारा परिस्थितियों की रिपोर्ट करने और आदेशों के लिए कहने और उनके प्राप्त होने तक निष्पादन को आस्थगित रखने के लिए स्वतंत्र है।

टिप्पण: जहां सि(cid:217)धदोष बन्दी या जेल में किसी अन्य व्यक्ति का कोई भी कथन अपराध पर प्रकाश डालने और संभवतः दंडादेश पर पनर्विचार को न्या

ु योचित ठहराने के लिए महत्वपर्ण प्रू तीत होता है, तो अधीक्षक तरंत जिला मजिस्ट्रेट को सचित करेगा और उनसे या तो स्वयं जेल आने का या एक वरिष्ठ मजिस्ट्रेट को प्रतिनियक्त करने का ु

अनरोध करेगा जिससे कथन या कथनों को पर्ण रूप से अभिलिखित किया जा सके340 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) और राज्य सरकार को ऐसी किसी भी राय के साथ प्रस्तत किया जा सके जो ु

मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच के परिणामस्वरूप बनायी हो।

(ज) जब राज्य सरकार या भारत सरकार हस्तक्षेप करने से इनकार करती है, तो उनके आदेश सामान्यत: के वल स्पीड पोस्ट (cid:217)वारा जेल के अधीक्षक को संसचित ू किये जायेंगे, कित जब मत्यं

, तो आदेश

ृ के दंडादेश का लघकरण किया जाता है

जेल के अधीक्षक को फै क्स या ई-मेल, उसके पश्चात एक पष्टिकरण पत्र (cid:217)वारा ्

संसचित किये जायेंगे और अधीक्षक तरंत राज्य सरकार को फै क्स या ई -मेल (cid:217)वारा दया की याचिकाओं के संबंध में उसको प्राप्त आदेशों को संसचित करते ू

हएु , उपरोक्त समस्त दस्तावेजों को उनकी प्राप्ति की पावती के माध्यम से संसचित करेगा। इसी प्रकार डाक (cid:217)वारा राज्य सरकार के आदेशों को डाकघर में स्पीड पोस्ट से उसके (cid:217)वारा तरंत स्वीकार किया जायेगा। प्रत्येक फै क्स या ई - मेल और पावती पत्र में अधीक्षक अभिस्वीकत आदेश ृ का सार बतायेगा;

(झ) समस्त कवर जिनमें न के वल दया के लिए याचिकाएं हैं, बल्कि मत्यदंड के ृ

मामलों में समस्त पत्र और अभिस्वीकतियां भी हैं

ृ , उन पर "दया के लिए अपील" और "तत्काल" लिखा जायेगा और डाकघर में रजिस्ट्रीकत किया ृ

जायेगा;

(ञ) किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी के निष्पादन को मल्तु वी करने या रोकने के राज्य सरकार के समस्त आदेश टेलीफोन या फै क्स या ई-मेल जैसे संपर्क के किसी अन्य माध्यम के अतिरिक्त होंगे, जिसकी सचना तरंत लाल रंग के एक लिफाफे

ु का मामला" शब्द अंकित होंगे, उस जेल के में शीर्ष पर स्पष्ट रूप से "मत्यृ

अधीक्षक को दी जायेगी, जिसमें सि(cid:217)धदोष बन्दी परिरु(cid:217)ध है। लिफाफा संबंधित जेल के अधीक्षक को पदनाम से संबोधित किया जायेगा, कारागार अधीक्षक यह सनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं करेंगे कि इन विशिष्ट लिफाफों में प्राप्त संसचनाएं दिन या रात्रिू के किसी भी समय जेल में प्राप्त हों तो, ऐसे लिफाफे प्राप्त होने पर, चाहे दिन हो या रात्रि, जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा, यदि वह उपस्थित है या अन्यथा प्रभारी जेलर (cid:217)वारा तरंत खोले जायेंगे

ु और उसमें

ु रकार को अन्तर्विष्ट आदेशों को निर्दिष्ट करते हए एक पावती तरंत राज्य सु

भेज दी जायेगी; और

ु दंडादेश का निष्पादन रोक दिया जाता है, (ट) जब उपरोक्त नियम के अधीन मत्यृ

तो जेल अधीक्षक, दंडादेश को निष्पादित करने के लिए सरकार से आदेश प्राप्त होने पर, यदि सेशन न्यायालय के वारंट में नियत की गयी तारीख पर दंडादेश को निष्पादित करना संभव नहीं है, तो तरंत निष्पाु दन के लिए एक नयी तारीख नियत करेगा, जो सरकार के आदेशों की प्राप्ति के पश्चात चौदह दिन ्

से अधिक नहीं होगी, और किसी भी मामले में सेशन न्यायालय के वारंट में

ु यत विनिर्दिष्ट तारीख से पहले नहीं होगी और मत्यदंड के निष्पादन के लिए निृभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 341 तारीख को मल्तु वी किये जाने की रिपोर्ट, बिना किसी विलम्ब के सेशन न्यायाधीश और जिला मजिस्ट्रेट को दी जायेगी।

ु दंडादेश का निष्पादन दोषसि(cid:217)धों को (3) सि(cid:217)धदोष बन्दियों को भी सम्मान और मत्यृ

समस्त विधिक उपचारों को नि:शेष किये बिना मनमाने ढंग से, जल्दबाजी और गप्त रीति से ु

नहीं किये जाने का अधिकार है।

ु से दंडादिष्ट सि(cid:217)धदोष बचाव के लिए काननी व्यवसायी की पेशकश करने की (4) जहां मत्यृ

स्थिति में नहीं है, उसे उच्च न्यायालय, भारत के उच्चतम न्यायालय और दया याचिका में अपील करने में काननी सहायता सहायता प्रदान ू की जानी चाहिए और ये आवश्यक प्रक्रियात्मक सरक्षा उपाय हैं जो अवश्य होने चाहिए यदि जीवन के अधिकार को इसके अर्थ और सामग्री से वंचित नहीं किया जाना है तो ध्यान दिया जाना चाहिए।

(5) मत्यदंड के दोषियों को राष्ट्रपति और राज्यपाल (cid:217)वारा दया याचिका की अस्वीकति

ृ की प्रति प्राप्त करने का अधिकार है।

743. दया के लिए याचिका और सरकार (cid:217)वारा कार्रवाई.- (1) यदि सि(cid:217)धदोष उपरोक्त कालावधि के भीतर याचिका प्रस्तत करता है

ु , तो इसे राज्य के राज्यपाल और भारत के राष्ट्रपति को संबोधित किया जायेगा और समस्त मामलों में दंडादेश का निष्पादन उनके आदेशों की प्राप्ति के लम्बित रहने तक स्थगित कर दिया जायेगा।

(2) याचिका को प्रथम बार राज्यपाल के विचार और आदेशों के लिए राज्य सरकार को भेजा जायेगा और यदि विचार के पश्चात इसे खारिज कर दिया जाता है तो इसे भारत सरकार के सचिव, गह मंत्रालय को अग्रे

ृ षित कर दिया जायेगा।

ु के दंडादेश को कम करने का विनिश्चय किया जाता है, तो भारत के राष्ट्रपति (3) यदि मत्यृ

को संबोधित याचिका विधारित रखी जायेगी और याचिकाकर्ता को इस तथ्य की सचना भेज ू

दी जायेगी।

ु का दंडादेश किसी विधि के विरु(cid:217)ध टिप्पण: उस मामले में की गयी याचिका, जहां मत्यृ

अपराध के लिए है, जो अनन्यत: उस मामले से संबंधित है, जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, पर राज्य सरकार (cid:217)वारा विचार नहीं किया जायेगा, कित तरंत भारत सरकार के सचिवं

, गह मंत्रालय को अग्रेषित कर दिया जायेगा।

(4) यदि सि(cid:217)धदोष ऊपर विहित अवधि के पश्चात याचिका प्रस्तत करता है

ु , तो यह राज्य सरकार के विवेक पर होगा कि वह याचिका पर विचार करे और ऐसे विचार के लम्बित रहने तक निष्पादन को स्थगित करे और राष्ट्रपति को संबोधित याचिका को विधारित करे या विधारित न करे।

(5) तथापि, निम्नलिखित परिस्थितियों में, याचिका भारत सरकार के गह मंत्रालय के सचिव ृ

को अग्रेषित कर दी जायेगी, अर्थात ्:-

ु का दंडादेश किसी अपील न्यायालय (cid:217)वारा दोषमक्तु किये जाने के (क) यदि मत्यृ

विरु(cid:217)ध अपील पर या अपील न्यायालय (cid:217)वारा दंडादेश में व(िcid:217)ध के ृ342 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) परिणामस्वरूप, चाहे स्वप्रेरणा से या दंडादेश में व(िcid:217)ध के लिए आवेदन पर ृ

पारित किया गया था; या

(ख) जब किसी मामले के बारे में ऐसी परिस्थितियां हों, जो राज्य सरकार की राय में, यह वांछनीय बनाती हैं कि राष्ट्रपति को उस पर विचार करने का अवसर मिलना चाहिए, जैसे राजनीतिक चरित्र के मामले और उन मामलों में जिनमें किसी विशेष कारण से बड़े पैमाने पर लोकहित उ(cid:217)भत हो गया हो।ू

(ग) जब याचिका भारत सरकार के गह मंत्रालय के सचिव को अग्रेषित की जाती है, तो उस पर राष्ट्रपति के आदेशों की प्राप्ति लम्बित रहने तक निष्पादन भी साथ-साथ स्थगित कर दिया जायेगा।

ु दंडादेश से दंडित किसी सि(cid:217)धदोष की दया याचिका (6) ऐसे समस्त मामलों में जिनमें मत्यृ

भारत सरकार के सचिव, गह मंत्रालय या राज्य सरकार को अग्रेषित की जानी है , तो याचिका को मामले के और उसके अभिलेखों या याचिका में आग्रह किये गये किन्हीं आधारों के संबंध में इसकी टिप्पणियों के साथ यथासंभव शीघ्रता से अग्रेषित किया जायेगा। अन्य राज्यों के मामले में, संबंधित राज्य सरकार, यदि उसने पर्व में उसे या राज्यपाल को संबोधित किसी याचिका को अस्वीकत कर दिया थाृ , तो पर्व याचिका या याचिकाओं की अस्वीकति के कारणों का एक संक्षिप्त विवरण भी अग्रेषित करेगी।

(7) राष्ट्रपति के आदेशों की प्राप्ति पर, इसके पश्चात उपबंधित रीति से तरंत्

ु , भारत सरकार के गह मंत्रालय के सचिव को एक पावती भेजी जा येगी। इस दशा में, यदि याचिका अस्वीकत ृ कर दी जाती है, तो आदेश एक्सप्रेस पत्र (cid:217)वारा संसचित किये जाू येंगे और उनकी प्राप्ति एक्सप्रेस पत्र (cid:217)वारा अभिस्वीकत की जायेगी। मत्य दंडादेश को कम करने के आदेश एक्स प्रेस पत्र (cid:217)वारा संसचित किये जायेंगे

ू , उनकी प्राप्ति एक्सप्रेस पत्र (cid:217)वारा अभिस्वीकत की जायेगी।ृ (8) किसी सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा प्रस्तत याचिका को राज्यु सरकार (cid:217)वारा विधारित रखा जायेगा, यदि इसी तरह की प्रार्थना वाली याचिका पर्व में ही राष्ट्रपति को प्रस्तत की जा चकी है। जब कोई याचिका इस प्रकार विधारित रखी जाती है, तो याचिकाकर्ताओं को तथ्य और इसे विधारित रखे जाने के कारण के बारे में सचित किया जायेगा।ू

ु दंडादेश के अधीन किसी सि(cid:217)धदोष की ओर से प्रस्तत दया याचिकाओं को ु

(9) मत्यृ

सि(cid:217)धदोष की स्वयं की याचिका से निपटने के लिए यहां उपबंधित रीति से, यथोचित परिवर्तनों के साथ निपटाया जायेगा और संबंधित सि(cid:217)धदोष की ओर से याचिकाकर्ताओं को मामले में पारित आदेशों के बारे में सचित किया जायेगा। यदि याचिका पर एक से अधिक व्यक्तियों (cid:217)वारा हस्ताक्षर किये गये हैं, तो प्रथम हस्ताक्षरकर्ता को सचित करना पर्याप्त ू

होगा, स्वयं सि(cid:217)धदोष को भी उसकी ओर से किसी याचिका को प्रस्तत करने और उस पर ु

पारित आदेशों के बारे में सचित किया जाू येगा।

ु दंडादेश पारित किया गया हो, तो दंडादेश तब (10) जब भी किसी न्यायालय (cid:217)वारा मत्यृ

तक निष्पादित नहीं किया जायेगा, जब तक कि उच्चतम न्यायालय में अपील खारिज न कर दी गयी हो या उच्चतम न्यायालय में अपील करने की विशेष इजाजत के लिए आवेदन नभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 343 कर दिया गया हो, या ऐसे मामलों में जहां उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए या उच्चतम न्यायालय में अपील करने की विशेष इजाजत के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए अनज्ञात की गयी कालावधि के अवसान के पश्चा त ् कोई अपील प्रस्तुत नहीं की गयी हो या ऐसा आवेदन दाखिल न किया गया हो:

परंत यु ह कि यदि सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा या उसकी ओर से दया की याचिका प्रस्तुत की गयी है, तो दंडादेश का निष्पादन उस पर राष्ट्रपति के आदेशों के लम्बित रहने तक स्थगित कर दिया जायेगा।

ु दंडादेश पारित किया टिप्पण: यदि एक ही मामले में एक से अधिक व्यक्तियों के लिए मत्यृ

गया हो और यदि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में अपील करने के लिए विशेष इजाजत के लिए आवेदन के वल एक या अधिक (cid:217)वारा या उनकी ओर से दाखिल किया जाता है, परंत समस्तु (cid:217)वारा नहीं, तो द(cid:214)डादेश का निष्पादन ऐसे समस्त व्यक्तियों के मामले में स्थगित कर दिया जायेगा, न कि के वल उस व्यक्ति या व्यक्तियों के मामले में, जिनके (cid:217)वारा या जिनकी ओर से अपील या आवेदन दाखिल किया गया है।

(11) उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने या उस न्यायालय में अपील करने के लिए विशेष अनमति के लिए आवेदन या ऐसा करने के इरादे की सचना प्राप्त होने पर , संबंधित राज्य सरकार तरंत फै क्स या ईु -मेल (cid:217)वारा सरकारी अधिवक्ता और सचिव, गह मंत्रालयृ भारत सरकार, को भी सचित करेगीू ,-

ु दंडादेश के अधीन सि(cid:217)धदोष का नाम, और

(क) मत्यृ (ख) अपील या आवेदन से संबंधित विशिष्टियां।

(12) यदि अपील या आवेदन का विरोध करना वांछित हो, तो पेपर बक और उच्च न्यायालय ु

के निर्णय की तीन प्रतियां (प्रत्येक की एक प्रति प्रमाणित प्रति होगी) सर्वोच्च न्यायालय (cid:217)वारा विहित प्ररूप में पावर ऑफ अटॉर्नी और अपील या आवेदन का विरोध करने के प्रयोजन से अनदेशु , यदि कोई हो, तरंत सरकारी अधिवक्ता

ु को भेजे जायेंगे, आशयित अपील या आवेदन की सचनाू , यदि और जब सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा या उसकी ओर से तामील की जाती है, तो अविलम्ब उसे पारेषित किया जायेगा; यदि आशयित अपील या आवेदन उच्चतम न्यायालय के नियमों (cid:217)वारा विहित कालावधि के भीतर-भीतर दाखिल नहीं किया जाता है, तो सरकारी अधिवक्ता राज्य सरकार को एक्सप्रेस पत्र (cid:217)वारा इस तथ्य की सचना देगा और ू

तत्पश्चात दंडादेश का निष्पादन स्थगित नहीं किया जायेगा , जब तक कि सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा या उसकी ओर से दया याचिका प्रस्तत नहीं की जाती है।ु

(13) यदि सि(cid:217)धदोष की ओर से उच्चतम न्यायालय में अपील या अपील करने की विशेष इजाजत के लिए आवेदन दाखिल किया गया है, सरकारी अधिवक्ता इस तथ्य की सचना ू राज्य सरकार को और सचिव, गह मंत्रालयृ , भारत सरकार को भी देगा, सरकारी वकील, उन मामलों में, जिनमें अप्रायिक विशेषताएं हों, उपर्यक्त प्राधिकारियों को , उच्चतम न्यायालय में

, समस्त मामलों में, वह अपील होने वाली समस्त गतिविधियों की सचना देते रहेंगे। तथापिू344 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) या अपील करने की विशेष इजाजत के लिए आवेदन के परिणाम को, अपनी संसचना की एक ू

प्रति सचिव, गह मंत्रालयृ , भारत सरकार को पष्ठां

ृ कित करते हएु , संबंधित राज्य सरकार को एक्सप्रेस पत्र (cid:217)वारा संसचित करेगा और राज्य सरकार , प्रत्येक मामले में न्यायालय से प्राप्त संसचनाू , जो सरकारी अधिवक्ता (cid:217)वारा राज्य सरकार को सम्यक अनक्रम में उपलब्ध करायी ्

जायेगी, की तरन्त प्राप्ति की अभिस्वी

ु कति देगीृ , जो उसकी प्राप्ति की अभिस्वीकति होगी। ृ

ु दंडादेश तब तक निष्पादित नहीं किया जायेगा, जब तक कि अपील या अपील मत्य काृ

करने की विशेष अनमतिु के आवेदन को खारिज करने वाले उच्चतम न्यायालय के निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त नहीं हो जाती है और जब तक कि सि(cid:217)धदोष (cid:217)वारा या उसकी ओर से प्रस्तत दया याचिकाु , यदि कोई हो, को भारत के राष्ट्रपति (cid:217)वारा अस्वीकार करने के बारे में गह मंत्रालय से सचना प्राप्त नहीं हो जाती है।

ू

744. मत्य दंडादेश के निष्पादन की न्यनतम कालावधि

ू .- दया याचिका की नामंजरी ू की संसचना प्राप्त होने और निष्पा

ू दन की नियत तारीख के मध्य उच्चतम न्यायालय (cid:217)वारा न्यनतम चौदह दिवस की कालावधि नियत की ग यी थी और यह सि(cid:217)धदोष को स्वयं को तैयार करने और अपने मामलों को निपटाने और अपने परिवार के सदस्यों से अंतिम बार मिलने या न्यायिक उपचार का उपलब्ध भोग करने के लिए समर्थ बनाने के लिए होगी।

.- (1) यदि किसी सि(cid:217)धदोष की ु दंडादेश के अंतिम पष्टिकरण पर कार्रवाईु

745. मत्यृ

दया याचिका खारिज हो जाती है, तो राज्य सरकार उसकी निष्पादन की तारीख नियत करेगी।

(2) किसी सि(cid:217)धदोष की अंतिम पष्टि और निष्पाु दन की तारीख राज्य सरकार से प्राप्त होने पर,-

(क) सि(cid:217)धदोष और उसके नातेदारों को, अधीक्षक (cid:217)वारा निष्पादन की तारीख के बारे में सचित किया जायेगा ;

(ख) सि(cid:217)धदोष, यदि वह इच्छु क है, तो उसे अपनी वांछा से वसीयत तैयार करने के लिए अनज्ञात किया जायेगा , इस आशय का उसका बयान वरिष्ठ जेलर (cid:217)वारा अभिलिखित किया जायेगा; और

(ग) कारागार प्राधिकारियों के लिए निष्पादन से पर्व

ू बन्दी और उसके परिवार और मित्रों के मध्य अंतिम मलाकात को सकर बनाना और अनज्ञात करना आज्ञापक होगा।

746. चिकित्सा आधार पर मल्तु वी.- (1) यदि कोई सि(cid:217)धदोष दंड के लिए शारीरिक रूप से अनपयक्तु ु है, तो उसे नियत तारीख पर निष्पादित नहीं किया जायेगा, कित निष्पां ु दन की मल्तवी को न्याु योचित ठहराने के लिए शारीरिक नि:शक्तता की पर्याप्त मात्रा अवधारित करने में, मल्तवी से पर्व विचार किया जायेगा कि बीमारी गंभीर और तीव्र दोनों (चिरकालिक नहीं) है।

विस्तत रिपोर्ट

(2) अधीक्षक तरंत महानिरीक्षक को ऐसे मामलों की एकु

ृ , बन्दी की शारीरिक नि:शक्तता की मात्रा और अधिसंभाव्य तारीख, यदि कोई हो, के बारे में चिकित्सा राय केभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 345 साथ प्रस्तत करेगाु , जिस दिन बन्दी के निष्पादन के लिए शारीरिक रूप से फिट होने की संभावना है।

ु .- (1) यदि नियम के अधीन याचिका या अपील प्रस्तत ु 747. मत्य दंड में विलंबृ

करने से भिन्न किसी कारण से मत्यदंड के निष्पादन में कोई असाधारण या अपरिहार्य विलम्ब होता है, तो जेल अधीक्षक परिस्थितियों की रिपोर्ट तरंत कारागार निदेशालय के ु

प्रमख को देगा और वह स्वयं ही निष्पा दन की नयी तारीख नियत करेगा, जो अंतिम बार नियत तारीख से चौदह दिवस से अधिक नहीं होगी।

(2) जब मत्य दंड के अधीन अपराधी का साक्ष्य अपेक्षित हो , तो न्यायालय इस प्रयोजन के लिए जेल में कार्यवाही करेगा और सि(cid:217)धदोष की उपस्थिति अपेक्षित नहीं होगी।

(3) जब तक वारंट में विशेष रूप से निदिष्ट न किया गया हो, या जब तक कि सि(cid:217)धदोष बन्दी को कारागार निदेशालय प्रमख के आदेश के अधीन किसी अन्य जेल में अन्त रित न कर दिया गया हो, तब तक निष्पादन उस जिले के मख्यालय में किया जायेगा , जिसमें बन्दी मत्य दंड पारित करते समय निरु(cid:217)ध था , यदि निष्पादन की तारीख बन्दियों के लिए मान्यता प्राप्त अवकाश के दिन पड़ती है, तो निष्पादन अगले कार्य दिवस पर किया जायेगा, मत्य दंड ृ

का वारंट प्राप्त होने पर जेल अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट को तत्काल इस तथ्य की संसचना ू

ु ष्पादन उचित रूप से देगा और अधीक्षक अके ले ही उत्तरदायी होगा कि मत्य दंड का निृ

कार्यान्वित किया जाये और जल्लादों (अन्य जेल से भाड़े पर लिये गये या इच्छक सि(cid:217)धदोष ु

या इच्छक अधिकारी या मख्यु

ु वार्डर या वार्डर) की सेवाओं की यथासमय व्यवस्था करेगा, फांसी का तख्ता व्यवस्थित करने के लिए, और रस्सी, टोपी, और पिनियनिंग प(िcid:210)टयां तैयार हैं, एक इंच व्यास वाली यरोप निर्मित मनीला रस्सी का उपयोग निष्पा दन के लिए किया जायेगा और ऐसी दो रस्सियां उपलब्ध होनी चाहिए, रस्सी नयी होनी आवश्यक नहीं है, कित ं वह उस भार को सहने में सक्षम होनी चाहिए, जो बन्दी के भार से डेढ़ गना भारी रेत या ु

मि(cid:210)टी की बोरी को, उस ऊँ चाई से गिराने पर उत्पन्न होता है, जिस ऊँ चाई से गिराया जाना प्रस्तावित है, यह परीक्षण निष्पादन के लिए नियत तारीख से कम से कम एक सप्ताह पर्व ू किया जाना चाहिए, ताकि, यदि आवश्यक हो, तो अन्य रस्सियां सही समय पर प्राप्त की जा सकें , और उसी परीक्षण के अध्यधीन, परीक्षण के बाद रस्सियों को सरक्षित स्थान पर बंद ु

कर देना चाहिए, निष्पादन से पर्व सांयकाल कोू , यदि फांसी का तख्ता अस्थायी हो तो अधीक्षक उसे अपनी उपस्थिति में खड़ा करवायेगा और रस्सियों का परीक्षण करके स्वयं को संतष्टु करेगा कि परीक्षण के पश्चात रस्सियों को कोई नकसान नहीं पहंचा है और जब किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी को एक जेल से दसरी जेल में अन्तू रित किया जाता है, तो प्राप्त करने और भेजने वाली जेलों के अधीक्षक अपने-अपने संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को इस तथ्य की रिपोर्ट करेंगे।

टिप्पण: दो दीर्घकालिक सि(cid:217)धदोष, जो स्वेच्छा से कार्य करने के लिए तैयार हों, को जल्लाद के रूप में प्रशिक्षित किया जायेगा और सदैव सेवा के लिए तैयार रहेंगे। जल्लाद को जेल महानिरीक्षक (cid:217)वारा नियत पारिश्रमिक का भगतान किया जायेगा।ु346 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 748. निष्पादन के लिए व्यवस्था.- (1) कार्यकारी अभियंता प्रत्येक तिमाही में और निष्पादन की तारीख से पर्व

ू , जब भी अधीक्षक (cid:217)वारा सचित किया जाू ये, फांसी के तख्ते के निरीक्षण की व्यवस्था करेगा।

(2) जिस तारीख को बन्दी को फांसी दी जानी है, उससे कम से कम चार दिवस पर्व ू चिकित्सा अधिकारी बन्दी को दी जाने वाली ड्रॉप के बारे में मेडिकल रिपोर्ट में सचना देगा।ू (3) कारागार चिकित्सा अधिकारी नीचे दर्शित सि(cid:217)धांतों के आधार पर एक बन्दी को दी जाने वाली ड्रॉप की लंबाई का विवरण तैयार करेगा:-

(क) यदि बन्दी का वजन 100 पाउं ड से कम है या 45 किलोग्राम, उसे 8 फीट या 2.5 मीटर की ऊं चाई से गिराया जाना चाहिए;

(ख) यदि बन्दी का वजन 100 से 133 पाउं ड के बीच है या 45 से 60 किलोग्राम है, तो उसे 7 फीट 8 इंच या 2.3 मीटर की ऊं चाई से गिराया जाना चाहिए;

(ग) यदि बन्दी का वजन 133 पाउं ड से अधिक है या 60 किलोग्राम, कित ं ु 166 पाउं ड से अधिक नहीं या 75 किलोग्राम, उसे 7 फीट या 2.2 मीटर की ऊं चाई से गिराया जाना चाहिए;

(घ) यदि बन्दी का वजन 166 पाउं ड से अधिक है या 75 किलोग्राम कित ं ु 200 पाउं ड से अधिक नहीं या 91 किलोग्राम, उसे 6 फीट 6 इंच या 2 मीटर की ऊं चाई से गिराया जाना चाहिए; और

(ङ) यदि बन्दी का वजन 200 पाउं ड से अधिक है या 91 किलोग्राम है, तो उसे 6 फीट 1.83 मीटर की ऊं चाई से गिराया जाना चाहिए।

टिप्पण: आवश्यक रस्सी की वास्तविक लंबाई अलग-अलग मामलों में अलग-अलग होती है, गांठों की स्थिति का ड्रॉप से कोई सटीक संबंध नहीं होता है। आवश्यक रस्सी की लंबाई ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सत्र का उपयोग किया जा सकता है:-

मान लीजिए 'क' को नॉट क्लैंप के शीर्ष से प्लेटफ़ॉर्म तक की दरी के बराबर ू

किया गया है।

मान लीजिए कि 'ख' सि(cid:217)धदोष व्यक्ति की ऊं चाई जबड़े के कोण के बराबर है (यह कल ऊं चाई से लगभग साढ़े छह इंच कम है )।

मान लीजिए 'ग' निर्धारित गिरावट के बराबर है।

मान लीजिए कि 'घ', 'क' और 'ख' के बीच के अंतर को बराबर करता है।

तब 'घ' + 'ग' = आवश्यक रस्सी की लंबाई यानी गांठ क्लैंप के शीर्ष से गर्दन की स्थिति के आकार तक खींचे गये लप की अंगठी तक।ू

ू

(4) जब तक एक ओर 6 फीट या 1.83 मीटर और दसरी ओर ू 8 फीट या 2.5 मीटर की चरम सीमा का पालन किया जाता है, यदि बन्दी की शारीरिक विशिष्टता के कारण, चिकित्सा अधिकारी की राय है कि गिराया जाना चाहिए व(िcid:217)ध या कमीृ , प्रभाव चिकित्सा अधिकारी की राय पर दिया जाना चाहिए।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 347

टिप्पण: उपरोक्त गणना इस धारणा पर आधारित है कि निष्पादन रस्सी 1 इंच से 1-% इंच या 2.59 से 3.81 सेमी व्यास के सती धागे या मनीला से बनी होगी।

(5) आवश्यक गिरावट की अनमति देने के लिए रस्सी की लंबाई तय करने के संबंध में निम्नलिखित उपाय अपनाये जायेंगे, बन्दी की ऊं चाई को बायें कान के ठीक नीचे जबड़े के कोण तक सटीक रूप से मापा जायेगा, जैसा कि ऊं चाई से भी होना चाहिए ड्रॉप शटर, जब स्थिति में तय किया जाता है, तो बीम में रिंग के निचले भाग तक, जिस पर रस्सी चिपकी होगी, ये दो माप दरी निर्धारित करेंगे जबू बन्दी ड्रॉप पर स्थिति में खड़ा है, पश्चात के बिंद ्

से बीम में जबड़े से रिंग तक, बन्दी की गर्दन की माप भी सावधानी से ली जायेगी, गर्दन की माप और जबड़े के कोण की ऊं चाई की माप बन्दी के प्रवेश होने के तरंत पश्चाु त की ् जायेगी और किसी भी दिये गये रस्सी की लंबाई के बारे में बताया जायेगा। ड्रॉप की लंबाई और बन्दी के जबड़े के कोण से बीम में रिंग तक की दरी होगी।ू

(6) फांसी से एक सांयकाल पहले अधीक्षक की उपस्थिति में फांसी के तख्ते का निरीक्षण किया जायेगा और रस्सी का परीक्षण किया जायेगा; वह व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी है कि ये व्यवस्थाएं ठीक से की गयी हैं, हर निष्पादन के लिए एक नयी रस्सी का उपयोग करना आवश्यक नहीं है, कित अधीक्षक यह देखेगा कि रस्सी का सावधानीपर्वक परीक्षण किया जाता है, एक नियम के रूप में, एक डमी या रेत का एक बैग जिसका वजन डेढ़ गना होता ु

है बन्दी को 6 से 8 फीट या 1.83 और 2.50 मीटर के बीच लटकाया और गिराया गया।

बन्दी के लिए दो अतिरिक्त रस्सियां रस्सी का सरक्षित परीक्षण किया जायेगा और प्रत्येकु

किसी भी आकस्मिकता से निपटने के लिए मचान पर सदैव रिजर्व में तैयार रखी जायेंगी।

(7) रस्सी के फं दे पर मोम या मक्खन लगाया जायेगा। परीक्षण के बाद, रस्सियों और अन्य उपस्करों को स्टील के बक्से में सरक्षित रूप से बंद कर दिया जायेगा और जेलर के प्रभार में रखा जायेगा।

749. स्थान और अधिकारियों एवं अन्य की उपस्थिति.- (1) जब तक स्पष्ट रूप से अन्यथा आदेश न दिया गया हो, समस्त निष्पादन उसी जेल में होंगी जिसके लिए वारंट निदेशित किया गया है। साधारणतया निष्पादन कारागार की दीवारों के भीतर या उससे संलग्न एक विशेष घेरे में किया जायेगा।

(2) अधीक्षक, जेलर, उप-जेलर, जेल कल्याण अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी समस्त निष्पादन के समय उपस्थित रहेंगे, जिला मजिस्ट्रेट या उनके (cid:217)वारा प्रतिनियक्तु एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट निष्पादन में सम्मिलित होंगे और वारंट पर प्रतिहस्ताक्षर करेंगे और और यदि बन्दी चाहे तो उसकी आस्था के किसी पजारी कोु , अधीक्षक के विवेक पर, सरक्षा और ु

, निष्पादन के स्थान पर उपस्थित रहने की जेल अनशासन की आवश्यकताओं के अधीनु

अनमतिु दी जा सकती है।

(3) बन्दी के नातेदारों और अन्य बन्दियों को निष्पादन देखने की अनमति नहीं दी जाु येगी, हालाँकि, अधीक्षक सामाजिक वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों या मनोचिकित्सकों को उपस्थित होने की अनमति दे सकता है

ु , जो अनसंधान कर रहे हैं

ु , अनमति अनदत्त करने सं

ु बंधित मामलों348 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) में अधीक्षक का विवेक प्रबल होगा निष्पादन को देखने की अनमति और सामान्य नीति के ु

रूप में, अन्य व्यक्तियों को उपस्थित होने की अनमति नहीं दी जाु येगी।

(4) बचाव के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए .303 राइफल या किसी भी अग्रिम संस्करण की राइफल से लैस और उनके पाउच में कारतस के साथ कम से कम दस लोगों की एक गार्ड को फांसी के तख्ते के सामने इक(cid:210)ठा किया जायेगा और आम तौर पर, ये रिजर्व वार्डर गार्ड (cid:217)वारा ससज्जित किये जायेंगे , कित गंभीर और खतरे की प्रकति के असाधारण मामलों में कारागार अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट के परामर्श से पलिस अधीक्षक से ु

आवश्यक गार्ड और अधिकारी उपलब्ध कराने के लिए कह सकता है।

(5) समस्त श्रेणियों के बन्दियों को फांसी का दंडादेश पर्ण होने तक बंद रखा जायेगा और प्रात: उजाला होने से पहले ही फांसी निष्पादित कर दी जायेगी।

750. निष्पादन.- (1) अधीक्षक, कार्यकारी मजिस्ट्रेट, चिकित्सा अधिकारी और जेलर निष्पादन के लिए नियत समय से पर्व

ू बन्दी से उसके कक्ष में मिलेंगे, फिर अधीक्षक और कार्यकारी मजिस्ट्रेट बन्दी की पहचान वारंट में नामित व्यक्ति के रूप में करेंगे और उसे पढ़ेंगे। वारंट का उसकी मातृभाषा में अनवादु , बन्दी (cid:217)वारा सत्यापन की आवश्यकता वाले किसी भी अन्य दस्तावेज जैसे कि उसकी वसीयत पर अधीक्षक और कार्यकारी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में हस्ताक्षर और सत्यापन किया जायेगा और सि(cid:217)धदोष के हाथ उसकी पीठ के पीछे रखे जायेंगे।

(2) फांसीघर में प्रवेश करने से ठीक पहले बन्दी के चेहरे पर फ्लैप वाली एक सती टोपी ू

लगायी जायेगी और बन्दी को फांसीघर देखने की अनमति नहीं दी जाु येगी।

(3) बन्दी के मचान पर पहंचने पर उसे जल्लादों के दल को सौंप दिया जायेगा।

टिप्पण: 1 जल्लादों की आवश्यक संख्या सदैव उस जेल में तैनात की जानी चाहिए जहां निष्पादन किया जाना है। जल्लादों को बन्दियों की फांसी से संबंधित समस्त मामलों में प्रशिक्षित किया जायेगा। निश्चित अंतराल पर जल्लादों को डमी पर अभ्यास करना होगा।

टिप्पण: 2 प्राधिकत पैटर्न की रस्सियां मंगवा

ृ यी जा सकती हैं और यह बताया जाना चाहिए कि वे नये पैटर्न के फांसी के तख्ते के लिए हैं या नहीं।

751. जल्लादों के कर्तव्य.- (1) जल्लाद या जल्लादों के कर्तव्य होंगे,-

(क) बन्दी को बीम के ठीक उस भाग के नीचे स्थिर करना, जिससे रस्सी संलग्न है;

(ख) बन्दी के हाथ को कसकर बांधना; और

(ग) गदर्न में फं दा कसकर डालने के लिए, गांठ या धात की आंख जबड़े के कोण ु

के ठीक सामने और नीचे होनी चाहिए, ताकि जब बन्दी गिरे और झटका खाये, तो वह कान के पीछे तक चली जाए, रस्सी को इस तरह से समायोजित करने का ध्यान रखना कि जिस भाग से धात की आंख संबंधित है , वह गले के सामने से गजरे

ु । फं दा कसा हआ रखा जायेगाु , रस्सी पर लगे चमड़े के कड़ेभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 349 वॉशर के माध्यम से इसे समायोजित किया जायेगा तथा टोपी का फ्लैप रस्सी से स्वतंत्र होकर सामने की ओर लटका रहेगा।

(2) अधीक्षक यह देखेगा कि बन्दी के गले के चारों तरफ रस्सी ठीक से समायोजित है और गांठ उचित स्थिति में है।

(3) उपरोक्त उल्लिखित संक्रियाओं को एक साथ और यथाशक्य शीघ्रता से किया चाहिए और इन समस्त संक्रियाओं के पर्ण होने परू , अधीक्षक एक संके त देगा, जिसे देखकर प्रभारी जल्लाद ट्रैप-डोर को छोड़ने के लिए लीवर को धक्का देगा।

(4) शरीर आधा घंटे तक लटका रहेगा और तब चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा यह प्रमाणित करने के पश्चात ही कि शरीर निष्प्रा

् ण हो गया है, उसे नीचे उतारा जायेगा।

टिप्पण- प्रत्येक फांसी के लिए, जल्लाद को अपेक्षित फांसी शल्क का भगतान किया ु

जायेगा।

752. शरीर का निपटारा.- (1) फांसी दिये गये बन्दी के शरीर को पोस्टमॉटर्म के लिए भेजा जायेगा और तब, फांसी पर लटकाया गया सि(cid:217)धदोष जिस धर्म से संबंधित था, की धार्मिक आवश्यकताओं के अनसारु , उसका निपटान किया जायेगा।

(2) यदि फांसी दिये गये बन्दी के नातेदार अंतिम संस्कार करने के लिए लिखित आवेदन करते हैं, तो अधीक्षक स्वविवेकानसार ऐसा अनरोध अनज्ञात करेगा

ु , यदि रिश्तेदार लिखित वचनबंध दें कि वे शवदाह या दफनाने पर सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करेंगे।

(3) ऐसे मामलों में जहां अधीक्षक को लगता है कि सार्वजनिक प्रदर्शन की संभाव्यता है, उसके पास ऐसी अनज्ञा देने से इंकार करने ु का प्राधिकार है और फांसी दिये गये बन्दी के शरीर के निपटान के मामलों में, जिसके मामले में सार्वजनिक प्रदर्शन की संभाव्यता है, अधीक्षक जिला मजिस्ट्रेट से परामर्श करेगा और स्थिति की आवश्यकताओं के अनसार शरीर ु

के निपटान की व्यवस्था की जायेगी, ऐसी दशा में अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट के निदशों के र् े अनसार कार्य करेगा। ु

(4) फांसी दिये गये बन्दी के शव को पर्ण अनष्ठाू ु न के साथ कारागार से बाहर ले जाया जायेगा, शव को शमशान घाट या कब्रिस्तान तक परिवहन के लिए एक एम्बलेंस का उपयोग ु

किया जायेगा और अधीक्षक को मत शरीर के पृ रिवहन और निपटान के लिए अपेक्षित समस्त यक्तियक्तु ु व्यय उपगत करने के लिए प्राधिकत होगा।ृ

753. पश्चात्वर्ती कार्रवाई.- (1) अधीक्षक वारंट को उस न्यायालय को लौटा देगा, जिसने इसे चिकित्सा अधिकारी और कार्यकारी मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा प्रतिहस्ताक्षरित पष्ठांकन के

ृ साथ जारी किया था।

(2) अधीक्षक फांसी की रिपोर्ट कारागार महानिरीक्षक को सौंपेंगा।

अध्याय 35

बन्दियों का अनरक्षणु

(भोजन, वस्त्र और बिछौना, स्वच्छता विनियमन, सफाई, जल प्रदाय)

350 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

754. भोजन.- (1) कारागार विभाग बन्दियों के लिए आहार योजना इस प्रकार विहित करेगा कि नीचे दी गयी ऊर्जा आवश्यकताएं परी हो सकें

ू :-

प्रवर्ग शरीर का वजन किलो म ें शÙध ऊर्जा (किलो ु क ै लोरी/दिन)
परुु ष गतिहीन कार्य 60 किलोग्राम 2320
मध्यम कार्य 2730
महिला गतिहीन कार्य 55 किलोग्राम 1900
मध्यम कार्य 2230
गर्भवती महिलाएं +350
स् तनपान 0-6 महिने 6-12 महिने +600 +520

(2) भोजन का सेवन कार्य/गतिविधि के स्तर से नहीं, बल्कि गरिमामय मानव जीवन के लिए के वल कै लोरी की आवश्यकता से जड़ा होना चाहिए।ु

755. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की आवश्यकताएं.- (1) गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान, एक महिला को अन्य की तलना में अधिक प्रोटीन और खनिजों की आवश्यकता होती है। दध और दध उत्पादों आदि पर अधिक ध्यान कें द्रित करके आहार के अनाज वाले भाग के एक भाग को प्रतिस्थापित करके अतिरिक्त प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है। इससे खनिजों की आवश्यक अतिरिक्त आपर्ति भी सनिश्चित होगी।ू

ु

(2) जब भी विश्व स्वास्थ्य संगठन या भारतीय संदर्भ में किसी नये मान्यता प्राप्त निकाय से पोषण के लिए कोई सिफारिश प्राप्त होती है, तो सरकार (cid:217)वारा आहार चार्ट की समीक्षा के लिए उस पर विचार किया जायेगा।

756. आवश्यक पोषक तत्व.- किसी व्यक्ति के दैनिक आहार में आवश्यक पोषक तत्व, उनकी मात्रा और पोषक तत्वों के सामान्य स्रोत नीचे दी गयी सारणी में दर्शाये गये हैं:

क्र. सं. पोषक तत् व आवश् यकताएं स्रोत
1 प्रोटीन 1 ग्राम प्रति किग्रा. शरीर क े वजन का ँ, दालें, चावल, गेहू दध आदि ू
2 फ ै ट 50 ग्राम तेल, मक्खन, घी, दध आदि ू
3 कार्बोहाइड्रेट 300 ग्राम , अनाज, चीनी, गड़ु , जड़ वाली दधू सब्जियां जैसे आलू, आदि
4 मिनरलस: क ै ल्शियम 0.65 ग्राम. वयस्क क े लिए, 1 ग्राम. बच्चे के लिए , दध से बने दधू ू उत्पाद, हरी सब्जियां, बिना छिलके वाला अनाज और साबत चना ु आदि
आयरन 12.15 मि.ग्रा. सब्जियां और फल आदि
5 विटामिन विटामिन ए 3,000 स े 4,000 आई.यू. पत्तेदार सब्जियां, , लीवर तेल, दधू पीली सब्जियां, गाजर, पीली मिठाई आल आदि ू
विटामिन सी 50 मिलीग्राम इमली, आंवला, अमरूद, समस् त खÒटे फल, नीबू, संतरा आदि
विटामिन डी 400 आई.यू. लिवर तेल, दध ू आदि
विटामिन समहू थायमिन 1 स े 2 मिलीग्राम कम पिसे हए ु अनाज और दालें, उबले हए चावल , ु साबत गेहं ु ू
राइबोफ्लेविन 1.8 से 3.0 मिलीग्राम पत्तेदार सब्जियां, , दध से बने दधू ू उत्पाद आदि।
निकोटिनिक एसिड 10 स े 15 मि.ग्रा कम पिसा हआ ु अनाज, दालें, उबले चावल आदि
भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 351 352 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

757. आहार के पैमाने.- (1) बन्दियों के लिए आहार के पैमाने ऐसे होंगे जो राज्य सरकार (cid:217)वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किये जायें। पैमाने स्थानीय रीति-रिवाजों और आहार संबंधी आदतों के अनसार भिन्न हो सकते हैं , जहां तक संभव हो, विहित मानकों के अनपालना में हों। बन्दियों के लिए आहार का उत्तरदायित्व विहित करते समय ऊपर उल्लिखित सि(cid:217)धांतों, बन्दियों की वर्गीकत आवश्यकताओं

ृ , आदतों और रहने के तरीकों और

रकार, यदि राजस्थान की जलवाय परिस्थितियों पर सम्यु क ध्यान दिया जाना चाहिए। स्

उचित समझे, तो किसी भी समय पैमानों को उपांतरित भी कर सकती है।

(2) विनिर्दिष्ट आहार और पैमाने में कोई कमी या परिवर्तन विशेष परिस्थितियों के अतिरिक्त और कारागार निदेशालय प्रमख के पर्व अनमोदन के बिना नहीं किया जायेगा।

यदि, चिकित्सा अधिकारी की सिफ़ारिश पर, अधीक्षक किसी बन्दी के स्वास्थ्य या उसके रहने के विशिष्ट तरीके के कारण विहित आहार को अनपयक्त या अपर्याप्त मानता है , तो वह महानिरीक्षक के औपचारिक अनमोदन के अधीनु , लिखित में विशेष आहार का आदेश दे सकता है, या ऐसे बन्दी के आहार में अतिरिक्त कै लोरी जोड़ सकता है।

758. भोजन का राशन.- (1) प्रत्येक बन्दी विहित पैमाने के अनसार एक दिन में ु

तीन बार भोजन करेगा। ये होंगे,-

(क) प्रात: कार्य के घंटे से पर्व हल्का नाश्ताू ; (ख) दोपहर का भोजन; और

(ग) बन्दियों को रात्रि के लिए बंद करने से पहले रात्रि का भोजन।

(2) प्रत्येक भोजन के लिए जारी किये जाने वाले राशन की मात्रा कारागार निदेशालय प्रमख ु (cid:217)वारा विहित की जायेगी। मध्याह्न और रात्रि भोजन के लिए उपलब्ध करवायी जाने वाली आहार सामग्री को दोनों भोजन के मध्य उपयक्तु रूप से विभाजित किया जायेगा।

(3) आहार स्थानीय रीति के अनसारु नियत किया जायेगा, कित यह विहित पोषण संबंधी ं

आवश्यकताओं के भीतर होना चाहिए। सप्ताह के भिन्न-भिन्न दिवसों या भिन्न-भिन्न भोजन के लिए विभिन्न प्रकार की दालें, सब्जियां और रक्तशोधक जारी कर आहार में विविधता लायी जा सकती है। अधीक्षक सप्ताह के अलग-अलग दिवसों के लिए मेन अधिकथित करेगा।ू (4) त्यौहारों के अवसर पर, सरकार (cid:217)वारा यथाविनिर्दिष्ट किया जाये, प्रत्येक बन्दी को अतिरिक्त आहार सामग्री दी जा सकती है।

(5) जो बन्दी धार्मिक उपवास रखते हैं, उन्हें स्थानीय प्रथाओं के अनसारु , ऐसे उपवासों के लिए उपयक्तु भोजन की अतिरिक्त वस्तएं ु (जैसे आलू, फल, आदि) उपलब्ध करवायी जा सकती हैं, या वे अपने भोजन का पर्ण या आंशिक भाग दिवस के किसी स्थान और समय पर आनकल्पिक ले सकते हैं , जैसा कि उनके (cid:217)वारा उपवासों के उचित पालन के लिए सरकार के आदेशों (cid:217)वारा अनज्ञात किया जाये।ु

759. अस्पताल आहार.- वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी की सलाह पर स्थानीय खान-पान की आदतों के अनसार कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा उपयक्त

ु अस्पताल आहार विहित किया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 353

760. खा(cid:217)य पदार्थों की सफाई, भंडारण और उनका जारी किया जाना.- (1) इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि समस्त अनाज को मिल-घर में पीसने के लिए जारी करने से पर्व अच्छीू तरह से साफ कर लिया जाये और आटे को सावधानीपर्वक छान लिया जा

ू ये और ढंके हए डिब्बे में रखा जा

ु ये।

(2) चावल को पकाने के लिए जारी करने से पर्व छिलके

ू , धल या अन्य कणों से पथक् ू

ृ कर लेना चाहिए। चावल की गणवत्ता और मसाला ऐसा होना चाहिए कि पके हए चावल का भार कच्चे चावल के वजन से लगभग तीन गना हो। इसे बारु -बार तौलकर जांचा जाना चाहिए।

(3) आहार की समस्त वस्तओं

ु , साथ ही पकाने के लिए (cid:579)धन, को रसोइयों को जारी करते समय, जेलर से अनिम्न, विशेष रूप से अधीक्षक (cid:217)वारा इस प्रयोजन के लिए नियक्तु , एक उत्तरदायी अधिकारी (cid:217)वारा भार किया जायेगा। इन्हें पर्णतः तैयार अवस्था में जारी किया जायेगा या, यदि यह संभव न हो तो तैयारी के दौरान होने वाली किसी भी हानि के पर्ण ू भत्ते के साथ जारी किया जायेगा। कितं ु, अधीक्षक यह देखने के लिए उत्तरदायी होगा कि राशन का ठीक भार और गणवत्ता जारी की गु यी है। इन वस्तओं की गणवत्ता की जांच ु

चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा नियमित रूप से की जानी चाहिये।

(4) जहां बन्दियों को चपाती/रोटी दी जाती है, उसे अलग-अलग प्रवर्ग के बन्दियों के लिए विहित भार में तैयार किया जाना चाहिए, और रसोइयों को विहित भार के बारे में पहले से सचित किया जाना चाहिये।ू

(5) दाल को पकाने से पहले छिलके और बिना छिलके वाले दानों को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए।

(6) जारी की गयी सब्जियां डंठल और पत्तियों से मक्त होंगी और पकाने के लिए भार किये जाने और रसोइयों तक पहंचाने से पर्व काट दी जायेंगी। सब्जियों की कल मात्रा में आल या अन्य जड़ वाली सब्जियों की मात्रा कम से कम एक तिहाई होनी चाहिए। समस्त सब्जियों की जांच प्रतिदिन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी या उसके अधीनस्थ चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा की जानी चाहिये।

(7) समस्त बन्दियों को प्रतिदिन मध्याह्न और सांयकाल के भोजन के साथ अपेक्षित मात्रा में रक्तशोधक दवाएं दी जायेंगी। साधारणतया उपलब्ध विभिन्न प्रकार के रक्तशोधकों की तैयारी और जारी करने के लिए स्थायी निदश होने चाहिएर्।े

(8) दध को उचित रूप से

ू साफ और संवातन वाले स्थान पर संग्रहित किया जाना चाहिए।

बन्दियों को विशेष/चिकित्सीय आहार पर दध उबालने के पश्चा

ू त ही जारी किया जायेगा। ्

उबालने का कार्य किसी उत्तरदायी अधिकारी की देखरेख में अस्पताल के परिसर में किया जाना चाहिए, जो इसके अभिप्राप्त होने से लेकर अंतिम वितरण तक इसके उचित उपयोग के लिए उत्तरदायी होगा।

(9) दही तैयार करते समय दध को उबालने से पर्व उसमें जल नहीं मिलाना चाहिए।

354 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

761. खाना पकाना.- (1) खाना स्टेनलेस स्टील या अन्य उपयक्तु बर्तनों में पकाया जायेगा। खाना पकाने के समस्त बर्तनों को साफ और चमकीला रखना चाहिए तथा रसोई और खाने का स्थान भी साफ व्यवस्थित होना चाहिए।

(2) यह सनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जायेगा कि समस्त बर्तन, जिनमें दध ू रखा जाता है, पर्ण रूप से साफ हों। उपयोग के तरंत पश्चा

ु त समस्त् बर्तनों को उबलते जल से जलाकर साफ करना चाहिए। इन्हें गंदा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

(3) समस्त पके हए भोजन को वितरित किये जाने तक ढककर रखा जाना चाहिये , और खराब होने वाली वस्तओं के भंडारण के लिए फ्रीजर , रेफ्रिजरेटर आदि के रूप में समचित ु व्यवस्था की जायेगी।

(4) अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी भोजन प्रदाय के पयवक्षण मानिटरिंग में अधिकर्ते म सतर्क ता बरतेंगे, और जब भोजन पक जायेगा और बन्दियों को वितरित करने के लिए तैयार हो जायेगा, तो वे नियमित निरीक्षण के अलावा, सप्ताह में कम से कम एक बार औचक निरीक्षण करेंगे। इन निरीक्षणों में वितरित भोजन का भार और स्वाद भी जांचा जायेगा।

(5) मिलों को राशन जारी करने के लिए उपयोग किये जाने वाले माप उपस्करों और रसोई में उपयोग किये जाने वाले उपस्करों की जांच, अधीक्षक (cid:217)वारा यदि अधिक बार नहीं, तो मास में कम से कम एक बार, की जायेगी। माप उपस्करों की औचक जांच (cid:212)यटी अधिकारियों ू

(cid:217)वारा मास में कम से कम चार से पांच बार की जानी चाहिए।

(6) भोजन या मापन के साथ हस्तक्षेप करते पाये जाने वाले रसोइयों को गंभीर दंडादेश दिया जायेगा।

762. रसोइये.- (1) दैनिक आपर्ति

ू जारी होने के पश्चात ्, रसोइये समस्त आवश्यक तैयारी और प्रक्रियाएं संपादित करेंगे और उचित देखभाल और ध्यान से भोजन तैयार करेंगे।

(2) खाना बनाते/संभालते समय रसोइयों को साफ एप्रन पहनना चाहिए।

763. भोजन का वितरण एवं परोसा जाना.- (1) कारागार निदेशालय प्रमख कारागारों ु

में प्रात:, दोपहर और रात्रि भोजन परोसने का समय विहित करेंगे। विभिन्न ऋतओं में ु

तापमान के आधार पर ऐसा समय विहित किया जायेगा।

(2) ताज़ा और गर्म भोजन परोसा जाना चाहिए। शरद ऋत के दौरानु , भोजन को गर्म और उपभोग के लिए उपयक्तु बनाये रखने के लिए समचित तापन प(cid:217)धति का उपयोग किया जायेगा। भोजन ले जाने के लिए उपयोग किये जाने वाले पात्र अच्छी तरह से फिटिंग वाले ढक्कन सहित उपलब्ध कराये जायेंगे। समस्त भोजन को मक्खियों और अन्य कीड़ों से सावधानीपर्वक संरक्षित किया जायेगा।

ू

(3) प्रत्येक भोजन के वितरण से पन्द्रह मिनट पर्व एक घोषणा की जानी चाहिए। इसके पश्चात बन्दियों को कार्य बंद कर देना चाहिए, अपने हाथ-मंह धोना चाहिए और भोजन ु

वितरण के लिए कतार में लगना चाहिए, जिसके पश्चात पका हआ भोजन जेलर के पद से अनिम्न किसी उत्तरदायी कारागार अधिकारी की उपस्थिति में, रसोइयों (cid:217)वारा वितरित कियाभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 355 जायेगा। वे यह देखेंगे कि किसी बन्दी को दिया गया खाना, कोई दसरा न ले जाये या ू

अन्यथा बर्बाद न किया जाये।

(4) भोजन परोसने के पश्चात ् बन्दी को भोजन खाने के लिए कम से कम बीस मिनट का समय अनज्ञात किया जायेगा।ु

(5) पर्यवेक्षण अधिकारी की अनज्ञा के सिवायु , किसी भी बन्दी को भोजन क्षेत्र से कोई भोजन कहीं और खाने के लिए नहीं ले जाया जायेगा।

(6) जब भोजन समाप्त हो जायेगा, तो बन्दी वाशिग प्ले

ं टफॉर्म पर जायेंगे, जहां दो टब रखे जायेंगे। बन्दी अपनी थाली में बचा हआ शेष भोजनु , जिससे चावल या चपाती को कढ़ी ् , इन टबों में डाल देगा। तब वे अपने हाथ-मं ुह और अपने बर्तन धोयेंगे।

भोजन से पथक करृ

(7) बन्दियों के भोजन समाप्त करने के तरंत पश्चाु त फर्श और प्लेटफार्मों को साफ किया जायेगा।

764. खाने-पीने के बर्तन.- प्रत्येक बन्दी को खाने-पीने के बर्तन का एक सेट उपलब्ध कराया जायेगा। बर्तन, गैर-धात सामग्री खा(cid:217)य श्रेणी के बने होंगे और एक समान सामग्री और पैटर्न के होंगे।

765. खाने के बारे में शिकायत.- भोजन के संबंध में किसी भी शिकायत की जांच मौके पर ही जेलर से अनिम्न नामनिर्दिष्ट पर्यवेक्षक अधिकारी (cid:217)वारा की जायेगी। वह निर्णय करेगा कि शिकायत सही है या नहीं और फिर आवश्यक कार्रवाई करेगा। भोजन से संबंधित प्रत्येक शिकायत की सचना अधीक्षक को दी जायेगी। यदि शिकायत वैध और किसी कारागार अधिकारी की गलती के कारण है, तो अधीक्षक ऐसी कार्रवाई करेगा, जो वह उचित समझे और अपने आदेश अभिलिखित करेगा। झठी या दर्भावनापर्ण शिकायत करने वाले

ू बन्दी को दंडित किया जायेगा।

766. भोजन का दैनिक निरीक्षण.- अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी खा(cid:217)य प्रदाय के पर्यवेक्षण में अधिकतम सतर्क ता बरतेंगे और उपभोग के लिए जारी की गयी समस्त वस्तओं ु का प्रतिदिन चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा या उनकी अनपस्थिति में उनके चिकित्सा अधीनस्थों (cid:217)वारा निरीक्षण किया जायेगा। निरीक्षण अधिकारी विशेष रूप से यह देखेंगे कि जारी की गयी सब्जियां अच्छी गणवत्ताु की हैं। वह ऐसे निरीक्षणों के दौरान गणवत्ताु में पायी गयी किसी भी खराबी को कारागार अधीक्षक के ध्यान में लायेगा।

.- यह अत्यंत आवश्यक है कि खाना ठीक से 767. पके हए भोजन का निरीक्षणु

पकाया जाये और उसकी पर्ण मात्रा बन्दियों तक पहंचे। सप्ताह में एक बार , जब भोजन पकाया जाता है और परोसने के लिए तैयार होता है, तो बिना किसी पर्व सचना के इसका ू

निरीक्षण किया जायेगा, और इसकी गणवत्ताु और भार की जांच कारागार अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा की जायेगी, वे अपने निरीक्षण के परिणाम को रोजनामचे में अभिलिखित करेंगे।

768. खा(cid:217)य पदार्थों की वस्तओं का भार करना .- उपभोग के लिए जारी किये गये भोजन की समस्त वस्तओं का प्रतिदिन आहार के ु प्रभारी अधिकारी के रूप में नामनिर्दिष्ट,356 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) जेलर के पद से अनिम्न का ना हो, (cid:217)वारा भार किया जायेगा। वह यह सनिश्चित करेगा कि ु

प्रत्येक बन्दी के लिए उचित मात्रा में भोजन जारी किया जाये। समय-समय पर अधीक्षक स्वयं राशन वितरण की जांच करेगा। राशन और भोजन का भार करने या मापने के लिए मीट्रिक बाट और माप का उपयोग किया जायेगा और प्रत्येक कारागार में तराजू, बाट और माप का एक उचित सेट संधारित किया जायेगा। इनकी श(cid:217)धता के लिए अधीक्षक (cid:217)वारा बार-बार परीक्षण किया जायेगा।

769. बन्दी की शिकायत का निपटान.- वार्ड के प्रभारी अधिकारी को बन्दियों को परोसे जाने वाले भोजन की मात्रा, गणवत्ताु या तैयारी से संबंधित फीडबैक, जो इलेक्ट्रानिक प्ररूप में होगा, अभिलिखित करने के लिए एक रजिस्टर का रखरखाव सनिश्चित करना ु

चाहिए। यदि किसी बन्दी (cid:217)वारा भोजन के संबंध में कोई शिकायत की जाती है, तो तरंत ु जेलर (cid:217)वारा इसकी जांच की जायेगी। यदि शिकायत, प्राप्त भोजन की मात्रा से संबंधित है, तो ऐसी शिकायत करने वाले बन्दी के समक्ष, तरंत राशन का भार किया जायेगा।

770. आहार में परिवर्तन को मंजरी देने की शक्तिू .- (1) कारागार निदेशालय प्रमखु , व्यक्तिगत बन्दी के मामले में, सि(cid:217)धदोष करने वाले न्यायालय (cid:217)वारा विहित आहार में,

विहित आहार में परिवर्तन, के वल परिवर्तन का निदश दे सकता है। इसके अतिरिक्र्ते

अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किया जायेगा, जब विहित खा(cid:217)य सामग्री उपलब्ध न हो। ऐसी दशा में, विहित आहार में समस्त परिवर्तनों की सचना कारागार निदेशालय प्रमू

ुख को दी जायेगी।

(2) जब कोई बन्दी अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसके आहार को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की सिफारिश पर अधीक्षक (cid:217)वारा परिवर्तित या संशोधित किया जा सकता है। यदि आहार में यह परिवर्तन एक महीने से अधिक समय तक जारी रहना है, तो अधीक्षक, कारागार निदेशालय प्रमख की सहमति अभिप्राप्तु करेगा।

771. अस्पताल आहार पर नियंत्रण.- अस्पताल में बन्दी के आहार पर नियंत्रण चिकित्सा अधिकारी का उत्तरदायित्व होगा और वह ऐसी अतिरिक्त चीजों का आदेश दे सकता है, जैसा कि वह आवश्यक समझता है, ऐसा करते समय वह इसमें अंतग्र्रस्त खर्चों का भी ध्यान रखेगा, जो अत्यधिक नहीं होनी चाहिए।

772. बाल काटना.- बाल काटने के नियम इस प्रकार होंगे:-

(क) बन्दियों के बाल के वल उसी सीमा तक और ऐसे समय पर परिकर्तित किये जायेंगे, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता सनिश्चित करने के प्रयोजनों के लिए आवश्यक हो।

(ख) जो बन्दी कारागार में प्रवेश से पर्व चेहरा क्षौर के अभ्यू स्त थे, उन्हें कारागार में क्षौर की सविधा के लिए अनज्ञात किया जायेगा।

ु

(ग) बन्दी को अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति, दाढ़ी, बाल आदि को बनाये रखने के लिए अनज्ञात किया जा सकता है।ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 357 (घ) दाढी, लंबे बाल आदि प्रतिधारित करने के लिए अनज्ञातु बन्दी, अधीक्षक की

लिखित अनज्ञा से अपने अनरोध पर कटवा सकते हैं।

ु

(ङ) समस्त बन्दियों को स्वच्छता प्रयोजन के लिए साबन और तेल और अन्य ु

प्रसाधन सामग्री, अधीक्षक (cid:217)वारा सरकारी व्यय पर अनज्ञात की जायेगी। ु

कारागार निदेशालय प्रमख उपलब्ध करा

ु यी जाने वाली प्रसाधन सामग्री की मात्रा और आवत्ति अवधारित करने के लिए विस्तत दिशानिदश जारी करेगा।

ेर् 773. वस्त्र और बिछौना.- प्रत्येक सि(cid:217)धदोष से इन नियमों में विहित कारागार के वस्त्र पहनने की अपेक्षा होगी और अन्य बन्दियों, जैसे विचाराधीन बन्दियों और निरु(cid:217)ध बन्दियों को, यदि वे इस प्रयोजन के लिए कारागार अधीक्षक को आवेदन करते हैं, तो वस्त्र प्रदाय किये जायेंगे। ऐसे वस्त्र सि(cid:217)धदोषों को दिये जाने वाले वस्त्रों से भिन्न रंग के होंगे, ताकि सि(cid:217)धदोषों और अन्य बन्दियों के मध्य विभेद दृश्यमान हो। समस्त बन्दियों को, चाहे वह सि(cid:217)धदोष हो या विचाराधीन, कारागार बिछौना प्रदाय किया जायेगा।

774. वस्त्रों और बिछौनों का पैमाना.- (1) कारागार निदेशालय प्रमखु , सरकार की पर्व ू मंजरी से

ू , प्रत्येक श्रेणी के बन्दियों के संबंध में प्रदाय किये जाने वाले वस्त्र, बिछौना और अन्य आवश्यक उपस्करों का पैमाना नियत करेगा और ऐसी मंजरी से समयू -समय पर,- (क) साधारणतया वस्त्रों और बिस्तरों के पैमाने में या किसी भी वर्ग के बन्दी के संबंध में विहित पैमाने में परिवर्तन;

(ख) समय की कालावधि या कालावधियों या वर्ष की किसी भी ऋत के संबंध में ु

एक विशेष पैमाना विनिर्दिष्ट; और

(ग) वस्त्रों या बिछौना के किसी भी पैमाने में किसी भी वस्त के आकारु , साइज,

;

सामग्री या गणवत्ता में परिवर्तनु

कर सके गा।

(2) चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा आधार पर और किसी भी बन्दी या बन्दियों के वर्ग के स्वास्थ्य के लाभ के लिए, वर्ष की किसी भी ऋत के दौरानु , किसी भी विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए ऐसे किसी भी बन्दी या बन्दियों के वर्ग को अतिरिक्त वस्त्र विनिर्दिष्ट कर सकता है।

(3) बन्दियों के लिए वस्त्र, बिछौना और उपस्करों की अन्य आवश्यकताओं का पैमाना ऐसा होगा, जैसा कि राज्य सरकार (cid:217)वारा समय-समय पर विनिर्दिष्ट किया जाये।

(4) वस्त्र, बिछौना और उपस्करों की समस्त वस्तुएं कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा ु

अनमोदित मानक पैटर्न की होंगी। कारागार निदेशालय प्रमख के आदेश से सि(cid:217)धदोषों को उपलब्ध वस्त्रों की सविधा गरीबों और जरूरतमंद विचाराधीन बन्दियों को भी दी जा सकती है।

ुएं कारागार प्रशासन (5) वस्त्रों और बिस्तरों की वस्तओं परु , यह उपदर्शित करते हए कि वस्तु

की हैं, एक सस्पु ष्ट चिह्न होना चाहिए।

358 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(6) प्रत्येक पैमाने में, बन्दी के लिए विहित सती वस्त्रू की भत्ता राशि, सती चादर के मामले ू

के सिवाय, जो दो वर्ष तक चलनी चाहिए, सामान्यतः एक वर्ष तक चलनी चाहिए।

दरी/बिछौना, जैके ट, स्वेटर और कं बल तीन वर्ष तक चल सकते हैं।

775. सि(cid:217)धदोषों के वस्त्र.- बन्दियों को उनके शारीरिक माप के अनरूप पोशाकें ु

उपलब्ध करायी जायेंगी।

776. इन नियमों के अंतर्गत न आने वाले किसी भी प्रवर्ग के बन्दियों के वस्त्र.- इन नियमों के अधीन न आने वाले किसी अन्य प्रवर्ग के बन्दियों के वस्त्रों का निर्णय, कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा किया जायेगा , बशत कि इसमें अंतर्वलित व्यय उस लागत से अधिक न हो, जो अन्यथा उपगत की जायेगी, जब नियमों के अंतर्गत स्वीकार्य वस्तएं उस ु प्रवर्ग को प्रदाय की जायेंगी, जिससे बन्दी संबंधित है।

777. न्यायालय में उपस्थित होने वाले सि(cid:217)धदोषों के वस्त्र.- (1) अभिरक्षा में लिये गये सि(cid:217)धदोषों को जब गवाह या अभियक्तु के रूप में न्यायालय में भेजा जायेगा, तो वे साधारण निजी वस्त्र पहनेंगे। इस प्रयोजन के लिए, सि(cid:217)धदोषों के कारागार में जमा किये गये निजी या दोस्तों या नातेदारों (cid:217)वारा प्रदान किये गये वस्त्र, उन्हें न्यायालय में ले जाने से पहले जारी किये जायेंगे, ऐसे वस्त्र न्यायालय में उपस्थिति से लौटने पर वापस ले लिये जायेंगे।

(2) अन्य मामलों में, अधीक्षक यथोचित वस्त्र उपलब्ध करायेगा।

778. वस्त्र स्टोर का प्रभारी.- (1) जेलर वस्त्र स्टोर का प्रभारी होगा और समस्त वस्त्रों और बिस्तरों की अभिरक्षा और रख-रखाव के लिए उत्तरदायी होगा। उसे वस्त्रों को नियमित रूप से धप और हवा में रखने और साफ करने के लिए पर्याप्त संख्या में बन्दियों की मदद लेने के लिए अनज्ञात किया जायेगा। स्टोर में वापस लाने से पहले वस्त्रों को अच्छी तरह से धोने पर उचित ध्यान दिया जायेगा।

स्पष्टीकरण: उपयोग किये गये वस्त्रों को, बन्दियों को जारी किये जाने से पर्व

ू कीड़े, पिस्स ू आदि को नष्ट करने के लिए अच्छी तरह से धप दिया जायेगा और गर्म जल में धोया जायेगा।

779. वस्त्रों और बिस्तरों की मरम्मत, रखरखाव और निरीक्षण.- वस्त्रों के साप्ताहिक रख-रखाव और निरीक्षण के लिए एक दिन नियत किया जायेगा। बन्दियों की साप्ताहिक परेड में अधीक्षक या उपलब्ध अधीक्षक उनके वस्त्रों और बिछौना पर विशेष ध्यान देंगे और खद ु को संतष्ट करेंगे कि प्रत्येक व्यक्ति की किट पर्ण है और उचित दशा में है। बन्दियों के वस्त्रों और बिस्तरों की प्रत्येक वस्त की धलाई और सफाई के लिए उपु

ु यक्तु व्यवस्था की जायेगी।

780. बन्दियों (cid:217)वारा अपने वस्त्र धोया जाना.- प्रत्येक बन्दी (cid:217)वारा अपने वस्त्र प्राय:

दैनिक आधार पर धोया जाना अपेक्षित होगा, और किसी अन्य समय, जैसाकि अधीक्षक तथ्यों के अधीन कि बन्दियों को, यदि सविधा उपलब्धु है, तो वस्त्र लांड्री के माध्यम से धलवाने का विकल्पु दिया जायेगा, कित यदि किसीं ु बन्दी को लांड्री के माध्यम से वस्त्रभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 359 धलवाने में आपत्ति है , तो बन्दी अपने वस्त्र हाथ से धो सके गा। अधीक्षक, राज्य सरकार (cid:217)वारा समय-समय पर, यथानिर्णित, आवश्यक धलाई सामग्री जारी करना प्रा धिकत कर ृ

सकता है।

781. अपरणीय वस्त्रोंू का निपटान.- (1) अपरणीय वस्त्रोंू को महीने में एक बार अधीक्षक के हस्ताक्षर के अधीन रजिस्टर से काट दिया जायेगा और रसोईघर की सफाई तथा कार्यशाला में मशीनों की सफाई के लिए चिथड़ों की आवश्यकता होगी। यदि ऐसे वस्त्रों का संचयन अधिक हो, तो उसे लघु-लघ टकड़ों में काटकर खादी की कागज बनाने वाली इकाइयों या अन्य ऐसी एजेंसियों को बेच दिया जायेगा या सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से विक्रय किया जायेगा।

(2) अनपयोगी वस्त्रोंु को अलग से स्टॉक किया जायेगा और इस प्रयोजन के लिए एक उचित स्टॉक रजिस्टर बनाया जायेगा।

782. उन्मोचित बन्दियों के वस्त्रों का निपटान.- उन्मोचित बन्दियों को कारागार के

बन्दी अपने वस्त्र नहीं दिये जायेंगे। यह सनिश्चित करने के लिए ध्यान रखा जायेगा किु

छोड़े जाने के समय अपनी सम्पूर्ण किट अभ्यर्पित कर दें। यदि आगे उपयोग के लिए उपयक्तु हों, तो ऐसे वस्त्रों को अच्छी तरह से धोया और मरम्मत किया जायेगा, और स्टॉक में लिया जायेगा। अनपयोगी वस्त्रोंु की मदों को ऐसे वस्त्रों के स्टॉक रजिस्टर में सम्यक रूप ् से अभिलिखित किया जायेगा और अपरणीय वस्त्रोंू का निपटान के लिए विनिर्दिष्ट रीति से, उनका निपटान किया जायेगा।

783. वस्त्रों और बिस्तरों के मांगपत्र प्रस्तुत करना.- (1) अगले छ:, नौ या बारह महीनों के दौरान अपेक्षित वस्त्रों और बिस्तरों के लिए मांगपत्र दो प्रतियों में तैयार किया जायेगा और मंजरी के लिए कारागार निदेशालयू प्रमख को प्रस्तत किया जायेगा।

ु

(2) किसी भी कारागार के विनिर्माण विभाग से कोई भी वस्त्र या बिछौना तब तक जारी नहीं किया जायेगा, जब तक कि मांगपत्र कारागार निदेशालय प्रमख (cid:217)वारा अनमोदित नहीं किया जाता है और स्थानीय बाजार से कोई भी वस्त्र या बिछौना बहत विु शेष परिस्थितियों को छोड़कर और कारागार निदेशालय प्रमख की मंजरी के बिना नहीं खरीदा जायेगा।

आवास और संवातन

784. (cid:217)वार के पास वार्ड की क्षमता अंतर्लिखित करना.- (1) प्रत्येक वार्ड के (cid:217)वार के पास कक्ष का आकार और यह कितने बन्दियों की संख्या समायोजित करने में सक्षम है, यह वार्ड की बाहरी दीवार पर अंतर्निहित फलक पर अभिलिखित किया जायेगा। किसी भी वार्ड में विहित क्षमता से अधिक बन्दी समायोजित नहीं किये जाने चाहिए।

(2) ख(cid:214)डों और अन्य महत्वपर्ण भवनों और बाड़ों के नाम और संख्याएं , उन पर सहजदृश्य और उपयक्तु स्थान पर प्रदर्शित की जायेंगी। सफ़े दी करने की तारीख भी सस्पु ष्ट अंकों में दर्शित की जायेगी।

785. वार्डों और कार्यशालाओं का संवातन.- (1) अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी वार्डों के संवातन पर विशेष ध्यान देंगे। समस्त मामलों में, इस बात का ध्यान रखा जायेगा360 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) कि पाश्र्व और साथ ही छत पर भी पर्याप्त संवातन है। चंकि बन्दियों (cid:217)वारा सांस लिू ये जाने वाले वातावरण की स्थिति का निर्णय बन्दियों को बंद करने के कछ घंटों पश्चाु त वार्डों में ्

जाकर ही लिया जा सकता है, अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी, स्वयं को संतष्ट करने के ु

लिए कि पर्याप्त संवातन है और बन्दियों ने संवातन को किसी भी प्रकार से अवरु(cid:217)ध नहीं किया है, समस्त ऋतओं में और अनियमित अंतराल पर रात्रि में कारागार का दौरा करेंगे।

इन दौरों के परिणाम उनके (cid:217)वारा अपनी संबंधित पत्रिकाओं में अभिलिखित किये जायेंगे।

इस प्रयोजन के लिए अन्य अधिकारियों को भी प्रतिनियक्त किया जायेगा।ु

(2) दिन के दौरान कई घंटों तक वार्डों के पर्ण संवातन के लिए हर संभव व्यवस्था की जायेगी। दीवारों से कार्बनिक पदार्थ, जो धीरे-धीरे ऑक्सीकत होता है

ृ , हटाया जाना आवश्यक है।

786. दीवारों का रंग-रोगन या सफे दी करवाया जाना.- कारागार भवनों की दीवारों पर समय-समय पर सफे दी की जायेगी। बैरकों, वार्डों और कक्षों जिनमें बन्दी परिरु(cid:217)ध हैं, उनके आंतरिक भाग पर वर्ष में कम से कम एक बार सफे दी की जायेगी।

787. वक्षारोपणृ .- (1) जहां भी संभव हो, जेल के भीतर और उसके आस-पास घास

-सथरे ढंग से परिकर्तित रखे जायेंगे।

उगायी जायेगी और वक्ष लगाये जायेंगे और साफृ

बन्दियों के दिमाग पर हितकारी प्रभाव डालने के लिए, प्रत्येक कारागार में उ(cid:217)यान भी अनरक्षित किये जायेंगे। चंकिु

ू , वक्षों को दीवारों और भवनों के बहत निकट नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इनका उपयोग कारागार से निकल भागने के लिए किया जा सकता है।

(2) बरसात के मौसम के पश्चात ्, परिधि की दीवार के भीतरी और बाहरी भाग, कारागार और वार्डों की दीवार को रगड़कर साफ़ किया जायेगा। कारागार परिसर के भीतर के रास्ते साफ किये जायेंगे। जहां भी रास्ते डामर से बने हों, वहां की असमतल सतह को ठीक से समतल किया जायेगा।

788. समस्त अधिकारियों का सफाई का उत्तरदायित्व.- समस्त कारागार अधिकारियों का यह भी कर्तव्य है कि वे सफाई पर विशेष ध्यान दें, तथा सरकारी और गैर सरकारी विजिटरों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे स्वयं का समाधान कर लें कि यह उचित रूप से कार्यान्वित की जा रही है।

789. स्वास्थ्य अधिकारी का उत्तरदायित्व.- नगरपालिका स्वास्थ्य अधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी या नगर पालिका का स्वास्थ्य अधिकारी, जैसा भी मामला हो, महीने में एक बार अपनी अधिकारिता के अधीन समस्त कारागारों का दौरा करेगा और स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए सझाव देंगे।ु

790. कारागार क्षेत्र को साफ-सथरा रखनाु .- कारागार क्षेत्र को प्रतिदिन साफ किया

, विनिर्माण जायेगा और समस्त अवांछित पौधों और खरपतवारों, टटी (cid:579)टों के संचयनू

अपशिष्ट आदि से मक्त रखा जाये

ु गा। रसोई के कचरे को जमीन पर फें कने के लिए अनज्ञात ु नहीं किया जायेगा, न ही कारागार में या उसके निकट किसी भी प्रकार के कचरे का संचयन नहीं होने दिया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 361

.- कारागार के भीतर या उसके निकट मल 791. संडास एवं खली नालियों का प्रतिषेधु

के संचयन और निपटान के लिए संडास और खली नालियां प्रतिषि(cid:217)ध हैं।ु

792. मलेरिया के विरु(cid:217)ध पर्वावधानीू .- कारागार के पास स्थिर जल वाले समस्त ग(cid:212)ढों और तालाबों को ढक दिया जायेगा या भर दिया जायेगा। कारागार के चारों ओर खली ु नालियां, यदि कोई हों, का सावधानीपर्वक रखरखाव किया जायेगा और जल के संचयन को रोकने के लिए, जहां भी आवश्यक हो, जल निकासी भागों को साफ किया जायेगा।

793. चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा जलनिकासी अनमोदित करनाु .- चिकित्सा अधिकारी कारागार के भीतर या आसपास जलनिकासी में किसी भी दोष को, कारागार अधीक्षक के ध्यान में लायेगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो यह उपधारित किया जायेगा कि वह इससे

, जो सीधे सार्वजनिक संतष्ट है। कारागार में समस्तु जलनिकासी भमिगत होनी चाहिएू

जलनिकासी प्रणाली से संब(cid:217)ध होना चाहिए।

794. कारागार के आसपास हानिकर दशाएं.- (1) यदि कारागार के आसपास, कछ भी ु

होता है, या होने की संभावना है, जो बन्दी के स्वास्थ्य पर क्षतिकारक प्रभाव डाल सकता है, तो इसकी सचना तरंत कारागार निदेशालय प्रमख को दी जायेगी। कारागार के पास सार्वजनिक शौचालयों और मल नालियों का सन्निर्माण आक्षेपणीय है और ऐसे सन्निर्माण को रोकने के लिए उपाय किये जायेंगे।

(2) मिलों और कारखानों या अन्य सार्वजनिक स्रोतों से निकलने वाले किसी भी मल या बहि:स्राव नालियों को, जो बन्दियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, किसी भी कारागार के पास अनज्ञात नहीं किया जाना चाहिए।

ु

795. शौचालयों की सफाई.- शौचालयों को कीटाणनाशक से दिन में दो

ु बार या यदि आवश्यक हो, तो अधिक बार अच्छी तरह साफ किया जायेगा।

796. रसोईघर.- खाना पकाने में लगे बन्दियों का, यह सनिश्चित करने के लिु ये कि उनमें कोई संक्रमण तो नहीं है, नियमित रूप से परीक्षण किया जाना चाहिए। खाना बनाना प्रारंभ करने से पर्व रसोइयों के लिए सा

ू बन और जल से हाथ धोने की यथोचित व्यवस्था होनी चाहिए। खाना पकाने या परोसने के लिए अनज्ञात करने से पर्व रसोइयों को साफ वदी पहननी चाहिए। भोजन को हाथ से संभालना अवांछनीय है और इससे बचना चाहिए।

797. भंडार.- भंडारों या गोदामों को साफ, अच्छी तरह से व्यवस्थित और अच्छी तरह संवातित रखा जाना चाहिए। उनकी सामग्री को यथासंभव बार-बार हवा दी जानी चाहिए। घन ु की व(िcid:217)ध को रोकने के लिए गोदामों या अनाज भंडारों को उपयक्त

ु कीटनाशकों से उपचारित किया जाना चाहिए।

798. स्नान.- समस्त बन्दियों को आवश्यकतानसार बारु -बार स्नान करना चाहिए।

समशीतोष्ण जलवाय में उन्हें दैनिक स्नान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए , जब तक कि चिकित्सकीय रूप से ऐसा करने से छट न दी गू यी हो। ग्रीष्म ऋत में बन्दियों को ु

अपराह्न में भी स्नान की सविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिये।

जल-प्रदाय

362 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

799. जल-प्रदाय के स्रोत का चयन.- (1) जहां भी नगर पालिका, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) राजस्थान आदि की जल प्रदाय व्यवस्था मौजद है

ू , वहां कारागार को पाइप लाइन से जोड़ने की व्यवस्था की जायेगी।

(2) यदि किसी कारागार में कएं या (cid:210)यबु

ू -वेल का उपयोग किया जाता है, तो ऐसे कओं को ु

सतही जल के रिसाव से प्रदषित होने से अच्छी तरह से संरक्षित किया जाना चाहिए।

(3) प्रत्येक पेयजल कएं का मंह पर्ण रूप से बंद कर दिया जायेगा और पंप (cid:217)वारा जल चढ़ाया जायेगा। कएं के मंह पर चारों ओर की सतह को एक ढलान वाले सीमेंट प्लेटफॉर्म से ढका जायेगा, जिसके चारों ओर गिरा हआ जल ले जाने के लिए एक नाली होगी , और (cid:210)यब ू को अभे(cid:217)य बनाने के लिए कएं को पर्याप्त गहराई तक पंक्तिब(cid:217)ध किया जायेगा।

(4) प्रत्येक जल भंडारण टैंक को नियमित रूप से साफ किया जाना चाहिए और जिस तारीख को यह किया जाता है उसे अभिलिखित किया जाना चाहिए। इसका रख-रखाव लोक निर्माण विभाग (cid:217)वारा समय-समय पर जारी अनरक्षण नियमावली में दिये गये निदशों के उपबंधानसार किया जायेगा।ु

(5) सप्ताह में एक बार, प्रत्येक पेयजल कएं में जल की गहराई का परीक्षण किया जायेगा और परिणामों का अभिलेख रखा जायेगा।

800. जल का निष्यंदन.- (1) चिकित्सा प्राधिकारियों/जल प्रदाय एजेंसियों की सलाह पर, कारागार निदेशालय प्रमख के निदशों के अनसार पीने के जल निष्यं दित किया जायेगा।

(2) किसी भी मंडल कप या (cid:210)यबवेल के ू

ू 15 मीटर के अर्धव्यास में कोई कड़ा डंप या ू

स्वच्छता अपशिष्ट नहीं होगा।

801. जल खींचना.- स्वच्छ जल का वितरण सर्वोपरि महत्व का है। पीने के लिए जल संदत्त करने और रसोई में उपयोग के लिए उपयोग की जाने वाली बाल्टियों का उपयोग किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं किया जायेगा। जल के बर्तनों, बैरलों, टैंकों और जलाशयों को बार-बार साफ किया जायेगा। प्रत्येक जल भंडारण पात्र को ढका जायेगा और संदत्त करने के पश्चात ढक्कन जकड़ दिया जायेगा। इनमें पानी निकालने के लिए नल भी लगा ये जायेंगे।

802. पीने योग्य जल का प्रदाय.- (1) वार्ड और कोठरी के प्रत्येक बन्दी को दिन और रात्रि के दौरान नलों के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में ताजा पीने का जल उपलब्ध कराने के

होगा लिए उपयक्तु व्यवस्था की जायेगी। यह देखना (cid:212)यटी पर तैनात वार्डर का उत्तरदायित्वू

कि बन्दियों को बंद करने से पूर्व पर्याप्त पीने का जल उपलब्ध है।

(2) कार्यस्थल पर बन्दियों को पर्याप्त मात्रा में पीने का जल उपलब्ध कराया जायेगा। यदि

, जिसे प्रततिदिन जल का भंडारण करना है, तो इसे ढके हए बर्तनों में किया जाना चाहिएु

अच्छी तरह से साफ किया जाना चाहिए।

803. जल का विश्लेषण.- (1) प्रत्येक कारागार में घरेल प्रयोजनों के लिए उपयोग ू

किये जाने वाले जल के नमने साधारणतया रासायनिक और जीवाणतत्व

ु -संबंधी परीक्षण के लिए स्थानीय जल विश्लेषण प्राधिकरण/पीएचईडी को वर्ष में दो बार प्रस्तत किये जायेंगे।ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 363 (2) किसी भी कारागार में महामारी के प्रादर्भाव की स्थिति में , जो जल प्रदाय के संदषण के ू

कारण हो सकती है, और जिसमें पीने के जल की तत्काल जांच की आवश्यकता हो, तो चिकित्सा अधिकारी को तरंत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक या किसी अन्य यथोचित एजेंसी को लिखित अनरोध करना चाहिएु , जो विश्लेषण के लिए आवश्यक नमने प्राप्त करने ू

की व्यवस्था करेगी। इसके अतिरिक्त ऐसे कारागारों में वैकल्पिक स्रोत से जल प्रदाय सनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाये जायेंगे।

(3) स्थानीय जल विश्लेषण प्राधिकरण, सम्यक् अनक्रम में

ु , अपनी विश्लेषण रिपोर्ट की एक प्रति, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक के माध्यम से, कारागार अधीक्षक को और दसरी कारागार निदेशालय प्रमख को भेजेगा।

ु

.- जब भी यह विश्वास करने का कारण हो कि कोई भी 804. कओं का विसंक्रामणु

ू , तो इसे, स्थानीय कआु , जिससे पीने का जल अभिप्राप्त किया जाता है, संदषण का स्रोत है

स्वास्थ्य अधिकारी के परामर्श से तीन दिवस के अंतराल पर पोटेशियम परमैंगनेट/क्लोरीन टैबलेट और अन्य कीटाणनाशकोंु , जो आवश्यक समझा जाये, से उपचारित किया जायेगा।

805. कर्मचारिवंद के क्वाृ र्टरों के लिए जल का उपबंध.- (1) कारागार कर्मचारिवंद के ृ आवासीय क्वार्टरों में पर्याप्त जल प्रदाय भी सनिश्चित किया जायेगा। उक्तु वर्णित जल स्वच्छता की शर्तें यहां भी लाग होंगी। कर्मचारिवंद क्वार्टरों का अधिभो

ृ गी प्रत्येक अधिकारी, अपने परिसर की सफाई के लिए उत्तरदायी ठहराया जायेगा। अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी सामान्य स्वच्छता की जांच के लिए आवधिक रूप से कर्मचारिवंद क्वार्टरों का ृ

निरीक्षण करेंगे।

(2) कारागार प्रशासन और सरकार कारागारों में जल, वि(cid:217)यत या वैकल्पिक (cid:579)धन बचाने या उत्पन्न करने के लिए वर्षा जल संचयन, बायोगैस, बायो मास या सौर संयंत्र या किसी अन्य रीति को शरू करने का प्रयास करेगी।ु

वि(cid:217)यतु

806. वि(cid:217)यत उपबंधु .- समस्त संबंधित सरकारी विभागों (cid:217)वारा, कारागारों और उसके कर्मचारिवंद के क्वाृ र्टर्स में निरंतर वि(cid:217)यत उपलब्धु करवाने का प्रयास किया जायेगा।

अध्याय 36

चिकित्सीय देखरेख

807. चिकित्सा प्रशासन.- (1) चिकित्सा प्रशासन कारागार प्रबंधन की सबसे महत्वपर्ण ू चिंताओं में से एक है, और इसलिए कारागार के चिकित्सा अधिकारी को के वल बीमार बन्दियों के उपचार के लिए ही नहीं, बल्कि बन्दियों के स्वास्थ्य से जड़े प्रत्ये

ु क मामले और कारागार की स्वच्छता पर भी सावधानी से ध्यान देना चाहिए।

(2) कारागारों के चिकित्सा अधिकारियों के लिए इससे अधिक श्रेय की बात और कोई नहीं होगी कि उन्होंने अपने प्रभार के अधीन कारागारों में सर्वोत्तम स्वास्थ्य मानक बनाये रखने में सफलता प्राप्त की है।

364 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

808. कारागार अस्पताल.- (1) सभी कारागारों में, अस्पताल वास सविधाु , बन्दियों के दैनिक औसत के 5% के पैमाने पर उपलब्ध करायी जानी चाहिए, कारागार अस्पताल 'क' और 'ख' प्रकार के हो सकते हैं। तीस या उससे अधिक बिस्तरों वाले बड़े अस्पतालों को 'क' प्रकार का अस्पताल कहा जायेगा। तीस से कम बिस्तरों वाले, अन्य अस्पतालों को 'ख' प्रकार के अस्पताल कहा जायेगा।

अधिकारी 'क' प्रकार 'ख' प्रकार
1. चिकित्सा अधिकारी (विशेषज्ञों सहित) 03 02
2. स् टाफ नर्स 03 02
3. फार्मासिस् ट 02 01
4. नर्सिंग परुु ष/महिला सहायक 03 02
5. प्रयोगशाला तकनीशियन (ई.सी.जी., एक्स-रे और पोटबल ए क्सरे ेर् मशीनों सहित उपकरण समस् त को संभालने में प्रशिक्षित) 02 01
6. मनोचिकित्सक 01 01
7. डाटा एंट्री ऑपरेटर 01 01

(3) जहां आवश्यक हो, प्रत्येक कारागार अस्पताल में एक एम्बलेंस उपलब्धु करायी जायेगी।

(4) कारागार अस्पताल में नियक्तु चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारी किराया-मक्त कर्मचारी ु

आवास हकदार होंगे।

809. संसचना की प्रणालीू .- (1) यदि वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी नियक्त किया जाता ु

है, तो वह समस्त चिकित्सा अधिकारियों का तकनीकी प्रमख होगा और संपर्ण चिकित्सा प्रशासन का प्रभारी होगा। वह बन्दियों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए उत्तरदायी होगा।

(2) कारागार अधीक्षक प्रशासनिक प्रमख होंगे और कारागार महानिदेशक या निदेशक , चिकित्सा और स्वास्थ्य को समस्त पत्राचार उनके माध्यम से भेजा जायेगा।

810. सामान्य कर्तव्य.- चिकित्सा अधिकारी या प्रभारी के सामान्य कर्तव्यों में बन्दियों के स्वास्थ्य, बीमार होने पर उनके उपचार और कारागार की स्वच्छता और साफ- सफाई से संबंधित प्रत्येक मामला सम्मिलित होगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 365

811. कारागार का दैनिक दौरा.- (1) चिकित्सा अधिकारी प्रतिदिन कारागार का दौरा करेगा और बीमार बन्दियों को देखेंगे, जब आवश्यक हो, रविवार और अवकाश के दिन भी कारागार का दौरा करेंगे।

(2) वह कारागार के प्रत्येक भाग का निरीक्षण करेगा और सप्ताह में कम से कम एक बार समस्त बन्दियों की जांच करेगा और समय-समय पर कारागार अधीक्षक और कारागार निदेशालय प्रमख को आवधिक रूप से प्रेषित की जाने वाली अपनी रिपोर्ट में अपने विचार लिखेगा।

(3) वह माह में एक बार समस्त बन्दियों का पर्ण चिकित्सा निरीक्षण भी करेगा और यदि कोई महामारी या असामान्य बीमारी फै लती है, या बीमारी का कोई गंभीर मामला होता है, तो वह जितनी बार आवश्यक हो, कारागार का दौरा करेगा।

812. व(cid:217)ध बन्दियों की ृ विशेष आवश्यकताएं.- चिकित्सा अधिकारी सनिश्चित करेगा ु

कि व(cid:217)ध बन्दियों की चिकित्सा आवश्यकताएं आँखों की देखभाल , दांतों की देखभाल, फिजियोथेरेपी और मधमेह के लिए नैदानिक परीक्षण के रूप में नियमित रूप से परी की जायें।

813. मादक पदार्थों के व्यसनियों का उपचार.- चिकित्सा अधिकारी ऐसे बन्दियों के लिए, जो मादक पदार्थों के व्यसनियों के रूप में जाने जाते हैं, नशामक्ति कार्यक्रमों का ु

आयोजन करेगा और वह उनके लिए गंभीर ध्यान और योग का प्रशिक्षण भी आयोजित करेगा।

814. साप्ताहिक निरीक्षण पर उपस्थिति.- अधीक्षक के साप्ताहिक निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहेगा और कारागार में वि(cid:217)यमान सामान्य स्वास्थ्य और स्वच्छता परिस्थितियों को देखेगा, वह किसी भी तरह स्कारब्युटिक या रक्ताल्पता की प्रवति ृ के लक्षणों, स्वास्थ्य की दशा में गिरावट और चर्म रोगों पर विशेष ध्यान देगा, वह बन्दियों के वस्त्रों और बिछौनों का भी निरीक्षण यह देखने के लिए करेगा कि वे पर्याप्त और साफ हैं और वह कारागार के जलनिकास, संवातन, पेयजल और सफाई व्यवस्थाओं का भी परीक्षण करेगा।

815. कारागार अधिकारियों की देखभाल.- (1) चिकित्सा अधिकारी कारागार के स्टाफ क्वार्टर और बैरकों में निवास करने वाले कारागार अधिकारियों और उनके कटम्बोंु ु की चिकित्सीय आवश्यकताओं का ध्यान रखेगा और वह अधीनस्थ अधिकारियों के मामली ू मामलों के लिए भेषजज्ञ प्रतिनियक्तु कर सके गा।

(2) जेल अधिकारियों और उनके कु टम्बोंु के उपचार के लिए अपेक्षित औषधियां जेल भंडार से आपर्त की जायेंगी। कित ऐसी औषधियां जो साधारणत : बन्दियों के उपचार हेत उपयोग में ु

नहीं ली जाती हैं और जो स्टॉक में उपलब्ध नहीं है, यदि आवश्यक हों, तो अधिकारी के स्वयं के व्यय पर अभिप्राप्त की जायेंगी और वह रोग के कारणों से संबंधित किन्हीं तथ्यों, जो जेल सेवा में उसके निरंतर नियोजन के लिए किसी अधीनस्थ की उपयक्तु ता या अन्यथा अवधारित करने में महत्वपर्ण होंू , को अधीक्षक के ध्यान में लायेगा।

366 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) चिकित्सा अधिकारी, नियोजन के लिए समस्त अभ्यर्थियों और समस्त जेल अधिकारियों का, जिन्हें अधीक्षक (cid:217)वारा उस प्रयोजन के लिए भेजा जाये, परीक्षण करेगा, और उनकी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य की स्थिति के संबंध में लिखित रूप में प्रमाणित करेगा।

(4) चिकित्सा अधिकारी, अधिकारियों और अधीनस्थ कारागार स्टाफ के रोगों के कारण के किन्हीं तथ्यों के बारे में अधीक्षक को सचित करेगाू , जो महत्व के हों और कारागार में

ु ता अवधारित करने हेत समर्थ बनायें।ु

निरंतर नियोजन हेत जो उनकी उपयक्तु 816. चिकित्सा अधिकारी के उत्तरदायित्व.- (1) चिकित्सा अधिकारी कारागार के भेषजज्ञ (cid:217)वारा बनाये गये अभिलेखों की श(cid:217)धता सत्याु पित करेगा।

(2) वह भंडार में रखी औषधियों का प्रत्येक मास में एक बार निरीक्षण करेगा और स्वयं का समाधान करेगा कि उनके वजन और मात्रा स्टॉक रजिस्टर में सही रूप से प्रविष्ट की गयी है, वह यह भी सनिश्चित करेगा कि ु औषधियों का उपभोग उनकी अवसान की तिथि से पर्व ू कर लिया गया हो और वह यह देखने के लिए उपकरणों और उपस्करों का निरीक्षण भी करेगा कि उनका संधारण उचित रूप से किया जा रहा है और पर्याप्त स्टॉक रिजर्व में रखा गया है।

(3) चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा समस्त मांगपत्रों की संवीक्षा की जायेगी और अधीक्षक (cid:217)वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जायेगा।

(4) वह चिकित्सीय आधार पर छोड़े जाने के लिए आए समस्त मामलों का परीक्षण करेगा।

ु दर 0.5% प्रति वर्ष से अधिक हो, तो वह (5) जब कभी किसी मास में कारागार की मत्यृ

ु दर की ऐसी अधिकता के कारण का स्पष्टीकरण अभिलिखित मासिक विवरणी में मत्यृ

ु दर की दशा में, वह कारागार निदेशालय के प्रमख के माध्यु म से करेगा और असामान्य मत्यृ सरकार को प्रेषण के लिए इस विषय पर एक विशिष्ट रिपोर्ट तैयार करेगा।

(6) चिकित्सा अधिकारी कारागार महानिरीक्षक के प्रत्यक्ष अनदेश के अधीन कारागार में ु

र्थियों का चिकित्सीय परीक्षण करवाने के विभिन्न पदों पर नियक्ति के लिए चयनित अभ्यु

लिए भी उत्तरदायी होगा।

(7) यदि कोई बन्दी भोजन से प्रविरत रहता है और चिकित्सा अधिकारी की राय में इस कारण उसका स्वास्थ्य या उसका जीवन संकटापन्न होता है, तो चिकित्सा अधिकारी उसे

.- (1) चिकित्सा अधिकारी, विनिर्दिष्ट प्ररूप में ऐसी किसी भी रीति से भोजन दे सके गा जो परिस्थितियों के अनसार आवश्यु क हो। 817. आदेश पस्तिका का रखरखावु

एक आदेश पस्तिका रखेगाु , जिसमें वह किये गये प्रत्येक दौरे, कारागार में प्रवेश करने और छोड़ने का समय दौरा किये गये कारागार के भाग या बन्दियों के वर्ग, कारागार में रोगियों की संख्या और कोई अन्य बिन्दु जिसे वह अधीक्षक के ज्ञान में लाया जाना उचित समझे, अभिलिखित करेगा।

(2) ऐसा करते समय वह निम्नलिखित का विशिष्ट टिप्पण करेगा, अर्थात ्-:

(क) बन्दियों के भोजन, वस्त्र या बिस्तर में या कारागार की स्वच्छता, जल- निकासी, संवातन, जल आपर्त या अन्यू व्यवस्थाओं में कोई खराबी जिसेभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 367 चिकित्सा अधिकारी बन्दियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक समझे, और साथ ही साथ ऐसी खराबी को दर करने के ू लिए सझावु ;

(ख) अस्पताल प्रशासन से संबंधित कोई महत्वपर्ण घटनाू ; और (ग) आंतरिक या बाह्य रोगियों की संख्या में कोई उल्लेखनीय व(िcid:217)ध और इसके ृ

प्रत्यक्ष कारण।

(3) प्रत्येक दौरे के पश्चात यह आदेश पस्तिका तत्का

ु ल अधीक्षक को उसके परिशीलन के लिए भेजी जायेगी। तदपरिु अधीक्षक कोई भी आदेश, जो वह उचित समझे, जारी कर सके गा।

818. विवरणियों का प्रस्तुत किया जाना.- (1) चिकित्सा अधिकारी विनिर्दिष्ट विवरणियां समय पर प्रस्तुत करेगा और कारागार के चिकित्सा प्रशासन से संबंधित ऐसी कोई अन्य सचना भी देगा जो कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा मांगी जाये। कारागार में वि(cid:217)यमान स्वच्छता संबंधी स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट भी वार्षिक विवरणी के साथ-साथ महानिरीक्षक को प्रस्तुत की जायेगी।

(2) चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा निम्नलिखित विवरणियां और रिपोर्टें प्रस्तुत की जाऐंगी, अर्थात ्:-

(क) बीमार बन्दियों की विनिर्दिष्ट प्ररूप में मासिक विवरणी, मख्यु बीमारियों के कारण समस्त वर्गों के बन्दियों में से भर्ती और मरने वालों की संख्या दर्शायेगी;

(ख) चिकित्सा अधिकारी के आदेशों (cid:217)वारा या के अधीन विनिर्दिष्ट प्ररूप में वार्षिक विवरणी तैयार की जायेगी और उसकी प्रतियां जेल अधीक्षक के माध्यम से कारागार निदेशालय के प्रमख को प्रस्तु

ुत की जायेंगी और वह ऐसे समस्त अभिलेख भी, जो विहित किये जाये, रखेगा या रखवायेगा।

(ग) बन्दियों की बीमारी और मत्यृ ु दर को दर्शाती हई विनिर्दिष्टु प्ररूप में वार्षिक विवरणी; और

(घ) गंभीर संक्रामक रोग की घटना की विनिर्दिष्ट प्ररूप में रिपोर्ट।

819. रजिस्टरों का रखरखाव.- (1) आदेश पस्तिका से भिन्नु चिकित्सा रजिस्टर और प्ररूप चिकित्सा अधिकारी के आदेशों के अधीन रखें जायेंगे जो, उनकी सत्यता के लिए उत्तरदायी होगा और कारागार निदेशालय के प्रमख के निरीक्षण पर चिकित्सा अधिकारी, कारागार के चिकित्सा विभाग से संबंधित प्रत्येक रजिस्टर और अभिलेख उसके समक्ष प्रस्तुत करेगा।

(2) चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा निम्नलिखित रजिस्टरों का रखरखाव किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) चिकित्सा अधिकारी की आदेश पस्तिकाु ; (ख) बीमार की स्थिति बताने वाला सबह का रजिस्टु र;

368 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) अस्पताल रजिस्टर और बीमारों के भोजन का अस्पताल रोल, बाजार औषधियां और अन्य अस्पताल अभिलेख चिकित्सा अधिकारी के निदेशन के अधीन रखे जायेंगे जो उनकी सत्यता के लिए उत्तरदायी हैं;

(घ) स्वास्थ्यलाभ और विशेष दलों का रजिस्टर जो चार भागों में विभाजित किया जायेगा:

(i) स्वास्थ्यलाभ दल ................................... क वर्ग;

(ii) स्वास्थ्यलाभ दल ................................... ख वर्ग;

(iii)विशेष दल ........................................... क वर्ग; और

(iv) विशेष दल ........................................... ख वर्ग।

(ङ) वजन कम होने वाले बन्दियों के साप्ताहिक वजन का रजिस्टर; और

(च) ऐसा अन्य रजिस्टर जो राज्य सरकार (cid:217)वारा, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट किया जाए।

(3) इनमें से किसी भी दल में रखे जाने हेत चिकित्साु अधिकारी (cid:217)वारा आदेशित प्रत्येक बन्दी का नाम दल के अनसार और वर्ग के अनसार प्रविष्टु

ु किया जायेगा, साथ ही किसी बन्दी को दल से छोड़े जाने पर व्यक्तिगत मामलों में आदेशित कोई विशेष आहार और कोई विशेष उपचार भी दर्ज किया जायेगा, दल में उसका नाम प्रविष्ट किया जायेगा और प्रत्येक तीन महीने के प्रारंभ में प्रत्येक दल से एक नयी सची तैयार की जायेगी।ू 820. कारागार अस्पतालों के लिए क्लिनिक और प्रयोगशालाएं.- निम्नलिखित उपस्कर कारागार अस्पतालों को उपलब्ध करवाये जायेंगे, अर्थात ्:-

(क) समस्त उपस्करों सहित दंत क्लिनिक;

(ख) समस्त उपस्करों सहित नेत्र विज्ञान क्लिनिक;

;

(ग) समस्त शल्यक्रियात्मक उपस्करों सहित लघ ऑपरेशन थियेटरु (घ) अपेक्षित उपस्करों सहित नैदानिक प्रयोगशाला;

(ङ) डार्क रूम और उपस्करों सहित एक्स-रे प्रयोगशाला;

(च) उपस्कर सहित भौतिक चिकित्सा ईकाई;

(छ) निराविषीकरण ईकाई;

(ज) उपस्कर सहित मनोविकृ ति संबंधी ईकाई; और (झ)सोनोग्राफी उपस्कर।

821. मेडिकल स्टाफ की वदी.- (1) जेल चिकित्सा अधिकारी को वदी के रूप में प्रतिवर्ष चार कोट दिए जायेंगे, ये कोट कारागार में बनी ड्रिल से बनाये जायेंगे और कारागार के सिलाई अनभाग में सिले जायें

ु गे और कोट गह विभाग की संपत्ति होंगे और कारागार में रखे जायेंगे।

(2) कारागार अस्पतालों में पदस्थापित चिकित्सा स्टाफ, राज्य स्वास्थ्य सेवाओं या चिकित्सा विभाग (cid:217)वारा विहित वदी पहनेंगे।

822. (cid:212)यटी के घंटे

ू .- उन कारागारों में जहां एक से अधिक चिकित्सा अधिकारी हों,-भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 369 (क) दिन के दौरान (cid:212)यटी के घंटे

ू , चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा उनके मध्य समान रूप से यह सनिश्चित करते हए बांटे जायेंगे

ु , कि उनमें से एक सदैव कारागार में उपस्थित रहेगा, और

(ख) दिन के समय के दौरान चिकित्सा अधिकारी के (cid:212)यटी के घंटे निम्ना

ू नसार ु नियत किये गये हैं.-

प्रात: 08:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे,

सांय 03:00 से सांय 06:00 बजे।

823. जेल के चिकित्सा अधिकारी के कर्तव्य.- चिकित्सा अधिकारी के कर्तव्य निम्नानसार होंगे

ु ,-

(i) किसी ऐसे बन्दी की, जो बीमारी की शिकायत करता है या जो बीमार प्रतीत होता है, परिचर्या के लिए उपलब्ध होना और उसे अस्पताल या चिकित्सीय परीक्षण के लिए किसी स्थान पर ले जाना;

(ii) अस्पताल में आने वाले बीमार बन्दियों और बाह्य रोगियों की परिचर्या करना और औषधियों, भोजन और अतिरिक्त आहार की तैयारी और जारी किये जाने का पर्यवेक्षण करना,

(iii) कारागार कोठरियों का दैनिक दौरा करना और अधीक्षक को कारागार की उन परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट करना, जिनका अन्त:वासियों के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ता हो और उसको ऐसी प्रत्येक शिकायत करना।

(iv) यह सनिश्चिु त करना कि अस्पताल के लिए आशयित समस्त औषधियां उचित रूप से व्यवस्थित, लेबल की गयी और सरक्षित स्थाु न पर भंडारित हैं,

(v) अपने प्रभार में उपकरणों, साधनों और उपस्करों की उचित देखभाल करना,

(vi) यह देखना कि बीमार बन्दी साफ-सथरे होंु , (vii) यह देखना कि अस्पताल के वस्त्र और बिस्तर सभिन्नु रीति से चिन्हित हों,

(viii) यह देखना कि अस्पताल में उपयोग में आने वाली समस्त वस्तुऐं सरक्षित रूप से भंडारित हों और साफ रखी हई हों

ु ,

(ix) अपने प्रभार में की किसी भी संपत्ति को कारागार परिसर से बाहर जाने की अनमति न देनाु ,

(x) किसी भी सि(cid:217)धदोष परिचारक को उपकरणों को संभालने या दवाओं, जिनका दरुपयोग हानिकारक हो सकता है , को वितरित करने की अनमति ु न देना,370 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (xi) यह सनिश्चित करना कि भेषजज्ञ अस्पु ताल से संबंधित लिपिकीय कार्य संभाले जैसे कि रजिस्टरों का अनरक्षणु , विवरणियों को तैयार करना और मांगपत्र समय पर जमा करना,

(xii) स्वयं का यह समाधान करना कि बीमार व्यक्ति के लिए भोजन उचित रूप से तैयार और वितरित किया गया हो,

(xiii) यह सनिश्चित करना कि अस्पु ताल में और उसके आस पास व्यवस्था, स्वच्छता और अनशासन बनाये रखा जाये ,

(xiv) यह सनिश्चिु त करना कि अस्पताल में नियोजित स्टाफ नर्स और अन्य अपने कर्तव्यों का उचित रूप से पालन कर रहे हों,

(xv) यह सनिश्चित करना कि परिचारकों की किसी भी अधिकता या कमी अधीक्षक के ध्यान में लायी जाये,

, (xvi) प्रतिदिन कारागार की रसोई का दौरा करना, आपर्त किये गये भोजनू

कच्चा और पका हआु , दोनों (थोक में और वितरण के पश्चात, दोनों) का निरीक्षण करना और देखना कि नमक, तेल और मसाले डाले गए हों और अच्छी तरह से मिश्रित किये गये हों, स्वयं का समाधान करना कि भोजन अच्छी गणवत्ताु का है और प्रत्येक वस्तु की मात्रा स्वीकत ृ मापमान के अनसार है और वह यह भी देखेगा कि रसोई और उसके आसपास स्वच्छता की स्थ ◌िति रहे, नालियां साफ हों और कचरा मक्तु हों, खाना पकाने और बर्तन धोने के लिए टंकियों में भंडारित पानी बार- बार बदला जाता हो, और उपयोग में आने वाले बर्तन साफ और अच्छी स्थिति में हों,

(xvii) अस्पताल को दध के आपर्त का पर्यवेक्षण करना , विहित रीति में दध का ू परीक्षण करना, यह देखना कि वितरित किये जाने से पर्व यह उचित रूप ू

से उबाला गया है,

(xviii) सिविल और असि(cid:217)धदोष अपराधिक बन्दियों को उनके मित्रों (cid:217)वारा दिये जाने वाले भोजन का निरीक्षण करना,

(xix) रोग का बहाना करने वाले संदिग्ध बन्दियों पर नजर रखना और अपने संप्रेक्षणों के परिणाम की रिपोर्ट करना,

(xx) विभिन्न परेडों में उपस्थित रहना और परीक्षण तथा उपचार के लिए किसी बन्दी को जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता प्रतीत हो या जिस पर अपने भोजन के किसी हिस्से को बिना खाए छोड़ देने का संदेह हो, ् ,

पथक करनाृ

(xxi) किसी ऐसी महिला को अधीक्षक के ध्यान में लाना, जिसके गर्भवती होने का संदेह हो,

(xxii) चर्म संक्रमण से पीड़ित बन्दियों के स्नान का ध्यान रखना,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 371 (xxiii) समस्त नये भर्ती हये बन्दियों का परीक्षण करना और उनके स्वा स्थ्य से संबंधित विशिष्टियों, और उनकी स्वास्थ्य दशाओं को दृष्टि में रखते हये ु श्रम का प्रकार जो वे कर सकते हैं, को प्रवेश रजिस्टर और चिकित्सीय शीट में अभिलिखित करना,

(xxiv) स्वयं का समाधान करेगा कि नये भर्ती किये गये बन्दी स्वयं और उनके निजी वस्त्र उचित रूप से स्वच्छ हों, और वस्त्रों को स्टोर रूम में रखने से पर्व

ू , यदि आवश्यक हो, कीटाणरहित किु या जायेगा,

(xxv) नये भर्ती बन्दियों और (यदि ऐसा निदिष्ट किया जाये) कारागार में अपनी माताओं के साथ भर्ती या जन्में शिशओं का टीकाकरण करना , (xxvi) कारागार के कर्मचारिवन्दृ या अंत:वासियों में हैजा या अन्य सांसर्गिक या संक्रामक रोग होने के संदेह के किसी मामले को तत्परता से अधीक्षक के ध्यान में लाना,

ू स्त्रोतों की जांच करना, आपर्त किये गये ू

(xxvii) कओं और जल आपर्त के अन्यु

जल की मात्रा या गणवत्ताु के संबंध में किन्हीं दोषों को ध्यान में लाना, प्रतिदिन समस्त टैंकों और पात्रों, जिनमें जल भंडारित किया या पहंचाया ु जाता है, का परीक्षण करना, और जब कभी भी अपेक्षित हो, विश्लेषण के लिए जल के नमने तैयार करनाू ,

(xxviii)सप्ताह में कम से कम एक बार कारागार के आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करना और वह उस रीति पर विशेष ध्यान देगा जिससे गंदगी ग(cid:212)ढे में डाली जाती हो या अन्य था निस्तारित की जाती हो, और

(xxix) मौसम को सम्यक ध्यान में रखते हएु , अस्पताल, शयनवार्डों और कार्यशालाओं के संवातन का ध्यान रखना और स्वयं का यह समाधान करना कि बन्दी अनावश्यक रूप से गर्मी या बारिश में न निकलें।

824. बन्दियों का वजन करना.- बन्दियों के पाक्षिक वजन लिये जाने के दौरान भेषजज्ञ उपस्थित रहेगा और वह अपने वजन चार्ट में प्रत्येक बन्दी का वजन अभिलिखित करेगा और इसके पश्चात यथासम्भ् व उन समस्त बन्दियों, जिनका वजन उल्लेखनीय सीमा तक कम हो रहा हो, की परेड चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा निरीक्षण के लिए करवायेगा:

परंत ऐसे मामलोंु में जहां बन्दिये◌ा◌ं की संख्या के लिए अधीनस्थ चिकित्सा स्टाफ कम हो, या ऐसे मामलों में जहां चिकित्सीय कार्य अधिक हो वहां, कारागार के अधीक्षक (cid:217)वारा कारागार के कार्यपालक स्टाफ के किसी अधिकारी को, बन्दियों के वजन के

ु किया जा अभिलिखित करने का कार्य करने के लिए भेषजज्ञ की सहायता हेत प्रतिनियक्तु सके गा।

825. पाक्षिक रूप से लिया जाने वाला वजन.- (1) इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि कारागार अधिनियम,1894 (1894 का के न्द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 35 की उप- धारा (2) के अधीन, यथासंभव, दिनभर में प्राकृ तिक रूप से होने वाले फे रफारों से बचने के372 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) लिए पाक्षिक वजन दिन में लगभग एक ही समय पर लिया जायेगा।

(2) चंकि रविवार को कोई श्रम नहीं किया जाता है , वजन लेने के लिए रविवार सबसे उपयक्तु रहेगा और जब श्रमिक बन्दियों की संख्या अधिक हो, तब उन्हें दो समहों में ू विभाजित किया जा सके गा, प्रत्येक समह का वजन आनकल्पिक रविवार को लिया जा सके गा। इस प्रयोजन के लिए भेषजज्ञ और अधीक्षक (cid:217)वारा इंगित कार्यपालक स्टाफ के एक सदस्य की सहायता ली जा सके गी।

स्पष्टीकरण: सामान्य परिस्थितयों के अधीन शरीर का वजन समय-समय पर एक कतिपय सीमा तक परिवर्तित होता है। इसलिये, एक किलोग्राम तक के वजन का छोटे अंतर आवश्यक रूप से यह नहीं दर्शायेंगे कि वजन लापरवाही से लिया गया था।

826. वजनों का अभिलेख.- (1) कारागार में प्रवेश के समय का प्रारम्भिक वजन और

र में अभिलिखित किया जायेगा और इसके छोड़े जाने से पर्व अंतिम वजन प्रवेश रजिस्टू

साथ-साथ ये मध्यवर्ती पाक्षिक वजन बन्दी के वत्तृ -पत्र और वजन चार्ट में भी अभिलिखित किया जायेगा।

(2) बन्दी का वजन अभिलिखित करने से पर्व

ू , यह अभिनिश्चित किया जायेगा कि वजन करने वाली मशीनें सटीक हों।

827. बन्दियों के घटते वजन का उपचार.- (1) समस्त बन्दी जिनका वजन पिछले पाक्षिक वजन लिये जाने के समय से 1.5 किलोग्राम से अधिक या कारागार में प्रवेश के समय से 3.0 किलोग्राम से अधिक कम हआ है

ु , उन्हें उस दिन जिसको वजन लिया गया हो, के ठीक अगले दिन अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी के निरीक्षण के लिये उनके वजन चार्ट के साथ परेड करायी जायेगी।

(2) प्रवेश के समय दर्बल शरीर वाले बन्दियों के मामले में ज्या दा ध्यान दिया जायेगा, जिनके लिये वजन का थोड़ा सा भी कम होना एक गंभीर चिंता का विषय है।

828. चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा जांच.- चिकित्सा अधिकारी, पाक्षिक वजन किये जाने के पश्चात ्, यथाशक्यशीघ्र, उनकी सत्यता के बारे में स्वयं का समाधान करने हेत आकस्मिक ु

रूप से चने गये एक दर्जन या अधिक बन्दियों के वजन की जांच करेगा और अपनी आदेश पस्तिका में ऐसी अभ्यु

ुक्तियां, जो वह आवश्यक समझे, अभिलिखित करेगा ।

829. बीमारी की शिकायत करने वाले बन्दियों का परीक्षण.- बीमारी की शिकायत करने वाले या बीमार प्रतीत होने वाले प्रत्येक बन्दी को चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा या उसकी अनपस्थिति में चिकित्सी

ु य अधीनस्थ (cid:217)वारा तत्काल परीक्षण और आगे के उपचार के लिए कारागार अस्पताल भेजा जायेगा।

830. बाहरी अस्पताल में बन्दियों के उपचार के संबंध में नियम.- (1) जेल चिकित्सा अधिकारी की सलाह पर अधीक्षक किसी भी बीमार बन्दी को बाहरी सरकारी अस्पताल या रेफरल अस्पताल में स्थानांतरित कर सके गा और यदि जेल चिकित्सा अधिकारी की यह राय हो कि कारागार निदेशालय के प्रमख के

ु पर्व ू अनमोदन ु में इतना समय लगेगा कि किसीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 373 बीमार बन्दी के जीवन को खतरा हो सकता है तो ऐसा स्थानांतरण, कारागार निदेशालय के प्रमख की मंजरी की प्रत्याशा में किया जा सु

ू के गा।

(2) गंभीर चिकित्सीय आवश्यकताओं के आधार को छोड़कर, किसी भी बन्दी को किसी बाहरी अस्पताल में रहने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा

ु और विचाराधीन बन्दी के मामले में विचारण न्यायालय को सचित ू रखा जायेगा।

(3) यदि कोई मामला, जो जेल या उप-जेल के अधीक्षक (cid:217)वारा रिपोर्ट किया गया है, इतना गंभीर है कि बन्दी को इलाज के लिए सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया जाए, तो कारागार निदेशालय के प्रमख याु , यथास्थिति, मजिस्ट्रेट को जेल अधीक्षक के वि निश्चय की सत्यता पर सामान्यत: सवाल नहीं उठाना चाहिए और रोगी को शीघ्र अस्पताल में भर्ती कराने के लिए समस्त कदम उठाने चाहिए।

(4) जब खतरनाक या प्रभावशाली बन्दियों को जेल से बाहर निकाला जाता है और उपचार हेतु दरू -दराज के अस्पतालों या चिकित्सीय महावि(cid:217)यालयों और अस्पताल में दीर्घ कालावधि के लिए रखा जाता है तो वार्डर एस्कॉर्ट या पलिस एस्कॉर्ट ु के होते हए भी उन्हें

ु इच्छानसार ु

ुजाइश और स्वतंत्रता मिल जाती है और जेल अधीक्षक नियमित कछ भी ु करने की पर्ण गं

अंतराल पर बाहरी अस्पताल में सरक्षा ु (cid:212)यटी के पर्यवेक्षणू के लिए जेल अधिकारी और विश्वसनीय हेड वार्डर को भेजेगा और कारागार के उप महानिरीक्षक (रेंज) और कारागार

ति रिपोर्ट में इसका उल्लेख करेगा।

निदेशालय के प्रमख को भेजी जाने वाली दैनिक स्थिु (5) यदि किसी बन्दी को विशेष उपचार के लिए राज्य से बाहर ले जाया जाता है तो कारागार निदेशालय का प्रमखु , रेफरल अस्पताल के लिए परिवहन के दौरान बन्दी की सरक्षा के लिए ु पर्याप्त राज्य पलिस बल के साथ एक ु कारागार पदधारी प्रतिनियक्तु करेगा। (6) जब कोई बन्दी विशेष उपचार के लिए अन्य राज्य में रेफर किया जाता है तो, बन्दियों का स्थानांतरण अधिनियम, 1950 (1950 का कें द्रीय अधिनियम सं. 29) की धारा 3 के अधीन राज्य सरकार से परामर्श किया जायेगा ताकि बन्दी को उस राज्य के कारागारों में अस्थायी रूप से निरु(cid:217)ध किया जा सके , संबंधित राज्य में पहंचने पर ु रेफर किये गये

की सरक्षा सनिश्चित की जायेगी

अस्पताल में ऐसे कार्य के लिए संबंधित राज्य सरकार (cid:217)वारा प्रतिनियक्त बल (cid:217)वारा ु बन्दी , यह व्यवस्था पहले से ही की जायेगी और मख्यु त: रेफरल अखिल भारतीय आयर्विज्ञान संस्थान या सरकार और राजस्थान के अन्य रेफरल अस्पतालों में किये जायेंगे और इस मामले में ऐसे प्रत्येक रेफरल की प्रक्रिया की पनरावत्ति से बचने के ु , संबंधित चिकित्सा प्राधिकारियों और अस्पतालों से लिए गह विभाग (cid:217)वारा स्थायी आधार पर

संबंधित व्यवस्थाएं की जायेंगी।

831. अस्पताल आहार.- अस्पताल में बन्दियों का आहार पर्णतू : चिकित्सा अधिकारी के नियंत्रणाधीन होगा जो बन्दी को या तो साधारण कारागार आहार पर या नियमित अस्पताल आहारों में से किसी एक पर रख सके गा या कारागार या अस्पताल के आहार में किसी भी उपांतरणों का आदेश दे सके गा या नियमों के अधीन विहित आहार के मानकों, यदि

, जो वह आवश्यक समझे, विहित कर सके गा।

कोई हों, के अनसार अतिरिक्त आहारु374 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) 832. अस्पताल आहारों की तैयारी.- विशिष्ट तैयारी की आवश्यकता वाले अस्पताल के आहारों को अस्पताल की रसोई में पकाया जायेगा और चिकित्सा अधिकारी बार-बार आहार का परीक्षण करेगा और उसका वजन करके स्वयं का समाधान करेगा कि विहित सामग्री की पर्ण मात्राू उपस्थित है, और अच्छी तरह से पकायी गयी है। 833. दध ू से संबंधित सावधानियां.- कछ ु वस्तओं ु , जैसे दधू पर विशेष ध्यान दिया जायेगा जो आसानी से अपमिश्रित या चोरी किया जा सकता है, ताजा दध का उपयोग किया ू जायेगा, लैक्टोमीटर (cid:217)वारा दध ू का बार-बार परीक्षण किया जायेगा ताकि यह सनिश्चित ु किया

ू दध ू का विशिष्ट गरुत्वु 1.025 ग्राम/मिलीलीटर से जा सके कि यह श(cid:217)ध है और यदि ु आपर्त कम हो तो दध ू को स्वीकत ृ नहीं किया जाना चाहिए। 834. अस्पताल में नहीं रहने वाले बन्दियों के लिए विशेष आहार.- (1) चिकित्सा अधिकारी, अपने रजिस्टर में सिफारिश के कारणों को अभिलिखित करने के पश्चात ् किसी भी बन्दी के लिए विशेष आहार की सिफारिश कर सके गा।

(2) कित ं ु ऐसी सिफ़ारिशें नैत्यिक मामले के रूप में नहीं की जायेंगी और चिकित्सा अधीनस्थ चिकित्सा अधिकारी की अनपस्थिति में

ु किसी बन्दी को विशेष आहार जारी करने की सिफ़ारिश कर सके गा कित ं ु वह उसे इसकी रिपोर्ट करेगा और उसका अनमोदन प्राप्तु करेगा।

(3) विशेष आहार का जारी किया जाना सदैव उस नियमित आहार के अतिरिक्त होगा जिसके लिए बन्दी पात्र हो और यदि इसे एक पखवाड़े से अधिक समय के लिये जारी रखा गया हो, तो इसकी सचना अधीक्षक को दी जायेगी।

(4) चिकित्सा अधिकारी इस लेखे होने वाले व्यय का उत्तरदायी होगा और बन्दियों को विशेष आहार की सिफारिश करने में अत्यधिक सावधानी बरतेगा।

835. अस्पताल आहारों के लिए मांगपत्र.- अस्पताल आहारों और अपेक्षित अतिरिक्त आहारों की संख्या दर्शित करने वाला एक मांगपत्र, प्रतिदिन प्रात: 8 बजे के अपश्चात ् राशन के प्रभारी अधिकारी को भेजा जायेगा और इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि आहार और अतिरिक्त आहार तत्परता से बन्दियों तक पहंच जाएु , आकस्मिक मांगपत्र, अत्यावश्यकता के मामलों में, दिन के किसी भी समय भेजा जा सके गा और अत्यधिक आवश्यकता के मामलों को छोड़कर इसे सामान्यत: परिवर्जित किया जायेगा।

836. संप्रेक्षण के लिए किसी बन्दी का निरु(cid:217)ध किया जाना.- (1) किसी बन्दी को 24 घंटे के लिए अस्पताल में संप्रेक्षण के लिए निरु(cid:217)ध किया जा सके गा और उसका नाम समुचित रजिस्टर में प्रविष्ट किया जायेगा।

(2) संप्रेक्षण के अधीन निरु(cid:217)ध किये गये बन्दियों की संख्या अस्पताल रोल में और उनके लिए विहित किया गया उपचार प्रिस्क्रिप्शन बक में ु अभिलिखित किया जायेगा।

(3) यदि चिकित्सा अधिकारी किसी बन्दी को बीमारी का बहाना करते हुए पाता है तो वह दंड के लिए अधीक्षक को इस तथ्य की रिपोर्ट तुरंत करेगा।

837. बीमार बन्दियों के लिए चिकित्सीय उपचार.- (1) किसी सक्रिय बीमारी से पीड़ित प्रत्येक बन्दी, चाहे बहिरंग रोगी, या अंतरंग रोगी के रूप में, चिकित्सीय उपचार केभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 375 अधीन लाया जायेगा, और तदनसार ु उसका नाम बहिरंग रोगियों और अंतरंग रोगियों के रजिस्टर में अभिलिखित किया जायेगा।

में होगा और यदि उसकी अनपस्थिति में

(2) कारागार अस्पताल में बीमार बन्दियों का उपचार पर्णतू : चिकित्सा अधिकारी की देखरेख ु , प्रभारी चिकित्सा अधिकारी किसी बन्दी के उपचार के लिए कोई कार्रवाई करता है, तो वह की गई कार्रवाई को अभिलिखित करेगा और चिकित्सा अधिकारी को, उसके लौटने पर तत्काल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

838. के स शीट का रखरखाव.- (1) अस्पताल में बीमारों की संख्या विनिर्दिष्ट प्ररूप में प्रतिदिन बीमारों के अस्पताल रोल में अभिलिखित की जायेगी।

(2) उनके उपचार और आहार को विनिर्दिष्ट प्ररूप में के स शीट में अभिलिखित किया जायेगा।

जिसमें रोगी के पर्व

(3) अस्पताल में प्रत्येक अधिकतृ बिस्तर पर विनिर्दिष्ट प्ररूप में एक टिकट लगाया जायेगा, ू इतिहास, मामले की प्रगति और उसके उपचार की पर्ण ू विशिष्टियां अभिलिखित की जायेंगी और पेचिश के मामले में यह टिप्पण किया जायेगा कि क्या बन्दी उसके स्वयं घर से इस बीमारी से पीड़ित था या पर्ववर्ती रूू प से उसे यह जेल में हई थी।ु (4) बखार के प्रत्येक मामले में , विनिर्दिष्ट प्ररूप में एक तापमान चार्ट, रोगी के तापमान को रिकॉर्ड करते हए ु "बेड-हेड टिकट" के साथ संलग्न किया जायेगा और इन टिकटों को रखने के लिए उपयक्त क्लाु स्प फ्रे म उपलब्ध करवाया जायेगा।

839. धलाईु का उचित स्थान.- गंदे कपड़ों और च(cid:217)दरों को धोने और उबालने के लिए एक उचित स्थान उपलब्ध कराया जायेगा और कं बल और कार्य के कपड़ों को भी बार-बार उबलते पानी में धोया जायेगा।

840. अस्पताल की साफ-सफाई.- प्रत्येक अस्पताल को स्वच्छ और उचित रूप में संवातित रखा जायेगा और अस्पताल की दीवारों को छह महीने में एक बार या, यदि आवश्यक हो, तो अधिक बार साफ किया जायेगा और सफे दी की जायेगी।

841. वार्डों का विसंक्रमण.- कोई वार्ड या कोठर जिसमें संक्रामक रोग का कोई मामला सामने आता है या उसका इलाज किया गया है, उसे तत्काल यथाविहित विसंक्रामकों का उपयोग करते हएु , पर्ण ू रूप से साफ किया जायेगा। स्पष्टीकरण: विसंक्रमण, चिकित्सा अधिकारी के व्यक्तिगत निदेशन में किया जायेगा।

842. जब कारागार के बाहर के अस्पतालों में उपचार किया जाये तो औषधियों की आपर्ति

ू .- जहां कारागार के बाहर किसी अस्पताल में किसी बन्दी का विशेष उपचार चल रहा हो और ऐसे बाहरी अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा विहित कोई औषधि, जो अत्यन्त आवश्यक हो, और उक्त अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो, तब उसे अधीक्षक (cid:217)वारा स्थानीय स्तर पर क्रय किया जायेगा।

843. चिकित्सकीय राय पर श्रम का आबंटन.- जब चिकित्सा अधिकारी की यह राय हो कि किसी भी प्रकार या वर्ग के श्रम के नियोजन से किसी बन्दी का स्वास्थ्य प्रभावित हो376 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) रहा है, तो वह ऐसी राय बन्दी के वत्तृ -पत्र में अभिलिखित करेगा और बन्दी को उस श्रम पर नियोजित नहीं किया जायेगा।

844. अधीक्षक की सहायता करना.- वह स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले समस्त मामलों की अधीक्षक को रिपोर्ट करके उसे सहायता प्रदान करेगा, जैसे-

(क) अतिभीड़ होना,

ु , कटे-फटे या गंदे वस्त्र,

(ख) अनपयक्तु (ग) व्यक्तिगत स्वच्छता की उपेक्षा,

(घ) मौसम के असम्यक संपर्क में आना,

(ङ) भोजन की अनशासनहीनताु , (च) कपड़ों और बिस्तरों को हवा में सखाने या साफ करने ु में उपेक्षा, और (छ) अनपयक्त कार्य।ु ु

845. स्टाफ नर्स और भेषजज्ञ के कर्तव्य.- (1) स्टाफ नर्स, भेषजज्ञ और अन्य तकनीकी स्टाफ, कारागार के चिकित्सीय कार्य से संबंधित समस्त मामलों में, चिकित्सा अधिकारी और सहायक सर्जन के और अन्य मामलों में, अधीक्षक या जेलर के विध ◌िपर्ण

ू आदेशों का पालन करेंगे।

(2) उनका कर्तव्य औषधियां वितरित करने, टीकाकरण करने और बन्दियों का वजन लेने, लिपिकीय कार्य करने, अस्पताल में व्यवस्था और अनशासन बनाए रखु ने और चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा उन्हें आबंटित ऐसे अन्य कर्तव्य पर्ण

ू कर के कर्मचारियों और बन्दियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में चिकित्सा अधिकारी की सहायता करना होगा।

846. चिकित्सा अधिकारी बहिरंग रोगियों के उपचार का पर्यवेक्षण करेगा.- के वल लघ ु व्याधियों से पीड़ित बन्दियों को बहिरंग रोगी के रूप में माना जायेगा, जेल चिकित्सा अधिकारी उत्तरदायी होगा कि समस्त अन्य रोगियों को कारागार अस्पताल में भर्ती कराया जाये और किसी भी परिस्थिति में पेचिश से पीड़ित बन्दियों को बहिरंग रोगी के रूप में नहीं माना जायेगा।

847. चिकित्सा अधिकारी का दैनिक दौरा.- चिकित्सा अधिकारी अस्पताल में संप्रेक्षणाधीन रखे गये समस्त बन्दियों का प्रतिदिन दौरा करेगा और यह विनिश्चय करेगा कि किसी बन्दी को अस्पताल से छ(cid:210)टी देने की आवश्यकता है या नहीं।

848. अस्पताल के कपड़ों और बिस्तरों की आपर्ति

ू .- (1) अस्पताल में प्रत्येक मरीज को उचित ग(cid:217)दा, एक तकिया और सफे द च(cid:217)दरें प्रदान की जायेंगी।

(2) यदि किसी मिर्गी रोगी को कोठरी में रखा जाता है, तो उसे मोटी चटाई उपलब्ध करायी जायेगी और वह फर्श पर सोएगा। उसे ऊं ची चिनाई वाली बर्थ पर नहीं सोने दिया जायेगा।

(3) प्रत्येक जेल अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह किसी भी परिस्थिति को, जिससे किसी बन्दी की बीमारी का अनमान लगाया जा सके , जेल चिकित्सा अधिकारी या चिकित्सक अधीनस्थ के ध्यान में तत्काल लाये और यदि कोई बन्दी सामान्य से अधिक बार शौचालय जाता है, तो वह संप्रेक्षण के लिए पथक्रण वार्ड में ले जाया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 377

् अस्पताल उपलब्ध कराए (4) प्रत्येक जेल में, परुष और महिला ु बन्दियों के लिए पथक ृ जायेंगे, बीमारी की शिकायत करने वाले समस्त बन्दियों को चिकित्सा अधिकारी के सामने लाया जायेगा और उसके (cid:217)वारा परीक्षण किया जायेगा और वह यह विनिश्चय करेगा कि क्या उन्हें चिकित्सा निगरानी में रखा जाये या बहिरंग रोगी के रूप में इलाज किया जाये या अस्पताल में भर्ती किया जाये; या यदि वह आवश्यक समझे, तो वह कोई अन्य कार्रवाई करेगा जिसके लिए वह इन नियमों (cid:217)वारा सशक्त है। जब परामर्श आवश्यक हो, एक सरकारी चिकित्सा अधिकारी को, यदि संभव हो तो, बलाया जाु येगा।

(5) निजी चिकित्सा व्यवसायियों को बन्दियों का इलाज करने के लिए जेल में प्रवेश करने के लिए अनज्ञातु नहीं किया जायेगा और उन्हें जेल चिकित्सा अधिकारी की सिफारिश पर और

, जेल महानिरीक्षक के प्राधिकार के साथ के वल परामर्श के लिए बलाया जायेगा और इसलिएु

यदि जेल चिकित्सा अधिकारी किसी निजी चिकित्सा व्यवसायी से परामर्श करना नितांत आवश्यक समझता है तो वह तत्काल आदेशों के लिए जेल अधीक्षक के माध्यम से कारागार

ु निदेशालय के प्रमख को अपनी अनशंसा प्रस्तत करेगा।

(6) निजी स्रोतों से किसी भी औषधि, चिकित्सीय या सर्जिकल उपकरण इत्यादि को चिकित्सा अधिकारी के अनमोदनु के बिना जेल में प्रवेश करने की अनज्ञाु नहीं दी जायेगी। टिप्पण: जहां किसी महिला बन्दी की विस्तत जांच वांछनीय ृ समझी जाये, तो एक सरकारी महिला चिकित्सक, यदि उपलब्ध हो, को बलाया जा ु सके गा।

849. संक्रामक मामलों का पथृ क्करण.- संक्रामक रोगों के प्रत्येक मामले या संदिग्ध

् जायेगा और सर्वथा अलग रखा जायेगा जब तक कि मामले को तत्काल पथक किया ृ

या बिस्तर को नष्ट करने के बारे में चिकित्सा अधिकारी यह न समझे कि सावधनियों को बंद करना सरक्षिु त है और चिकित्सा अधिकारी सफाई, कीटाणशोधन या किसी संक्रमित वस्त्रु लिखित अनदेश करेगाु , और स्वयं का यह समाधान करेगा कि वही किया जा रहा है।

850. कारागार अस्पताल में बन्दियों का पथृ क्करण.- (1) पेचिश और दस्त के मामलों

् वार्ड में किया जायेगा। ऐसे रोगियों के पतले मल को का इलाज, यदि संभव हो, तो एक पथक ृ

कीटाणरहित ु किया जायेगा और आग में नष्ट कर दिया जायेगा और उनके (cid:217)वारा उपयोग में लिए गये समस्त वार्ड, बेड, बिस्तर, वस्त्र और शौचालय के बर्तनों को पर्ण रूपू से कीटाणरहित किया जायेगा।ु

् रखा जायेगा।

(2) रतिजन्य रोगों से पीड़ित बन्दियों को पथक ृ

् किया जायेगा और (3) फे फड़ों संबंधी क्षय रोग के समस्त मामलों को विशेष वार्डों में पथक ृ अन्य बन्दियों में संक्रमण फै लने से बचाव हेतु समस्त आवश्यक सावधानियां बरती जायेंगी।

(4) मलेरिया बखार से पीड़ित समस्तु बन्दियों को पथक किया जायेगा और उन्हें मच्छरदानी उपलब्ध करवायी जायेगी।

(5) जेलों में प्लेग की रोकथाम के लिये उपाय किये जायेंगे।

378 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(6) असामान्य रूप से बढ़े हए प्लीहा वाले समस्तु मामलों में त्वचा पर सीमाएं चिह्नित की जायेंगी और उन्हें कछ विशिष्ट वस्त्रु उपलब्ध करवाये जायेंगे और इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि प्लीहा को चोट न पहंचे।ु (7) लघ ु संक्रामक बीमारियां जैसे कि खजलीु , क(cid:214)ठमाला, खसरा, या अन्य संक्रामक बीमारियों को किसी भी दशा में उपेक्षित नहीं किया जायेगा, पर्ण

ू कालावधि के लिए पथृ क्करण लाग ू किया जायेगा, खजली के मामलों ु का अस्पताल में भर्ती किया जाना एक नियम के रूप में आवश्यक नहीं है, कितं

्

ु अन्य बन्दियों से पथक किया जायेगा।ृ

(8) पागलपन के लक्षण दिखने वाले बन्दी को, यदि वे खतरनाक, शोरगल वाले या गंदे हैं तो,

् खे जायेंगे।

अस्पताल में नहीं रखे जायेंगे, बल्कि एक पथक कोठरी में रृ

851. अस्पताल से छ(cid:210)टी ु किये गये बन्दियों का उपचार.- अस्पताल से छ(cid:210)टी मिलने ु पर प्रत्येक बन्दी को या तो श्रम में लगाया जायेगा या 'अशक्त समहू ' में रखा जायेगा, जो भी चिकित्सा अधिकारी निदेशित करे।

852. अशक्त समह की संरचनाू .- अशक्त समह में ू निम्नलिखित सम्मिलित होंगे,- (क) वे जो आयु या शारीरिक दर्ब

ु लता के कारण कठिन या मध्यम श्रम करने में

;

स्थायी रूप से अक्षम हैं। वे समह के स्थायी सदस्य होंगे

(ख) वे जिन्हें स्वास्थ्य लाभ के रूप में अस्पताल से छ(cid:210)टी दी गु यी है, लेकिन अस्थायी रूप से कठिन या मध्यम श्रम करने के लिए अयोग्य हैं; और

(ग) परुष जोु भले ही उपरोक्त दो श्रेणियों में नहीं आते हों किन्तु आम तौर पर अस्वस्थ रह्ते हैं और इस श्रेणी में, के वल हल्के श्रम के लिए उपयक्त माने ु गए बन्दी, स्कब्र्यटिक या मलेरिया स्कब्र्यटिक मसड़े प्रदर्शित करने वाले बन्दी, वजन में लगातार गिरावट पाए जाने वाले बन्दी, और जो बन्दी रक्तहीनता से पीड़ित हैं, सम्मिलित होंगे।

853. अशक्त समह का उपचारू .- (1) अशक्त समह के ू बन्दियों को उनके सामथ्र्य के ु कार्य दिये जायेंगे और जहां तक संभव हो, उन्हें दिन और रात्रि दोनों अनकल कछ हल्के ु समय आहार और संप्रेक्षण के प्रयोजन हेत ु एक साथ रखा जायेगा।

(2) विनिर्दिष्ट प्ररूप में ऐसे बन्दियों का एक रजिस्टर रखा जायेगा और चिकित्सा अधिकारी की अनज्ञाु के बिना किसी भी बन्दी को इस समह में रखा या ू हटाया नहीं जायेगा और चिकित्सा अधीनस्थ (cid:217)वारा प्रतिदिन और चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा सप्ताह में कम से कम एक बार उनका परीक्षण भी किया जायेगा।

854. भेषजज्ञ के कर्तव्य और कत्यृ .- (1) वार्डों के खलने परु , वह बीमारी की शिकायत करने वाले किसी बन्दी को तत्काल देखेगा या देखेगी और यदि आवश्यक हो तो वह उन्हें तत्काल अस्पताल भेजेगा/भेजेगी, कितं ु यदि उसे यह अनावश्यक लगे तो वह चिकित्सा अधिकारी के आगमन पर उसके ध्यान में इस बात को लाएगा और वह यह भी देखेगा/देखेगी कि बाहर जाने वाले दलों के उन बन्दियों को औषधियां वितरित की जा रही हों जिनकी आवश्यकता उन्हें है और फिर वह अस्पताल का चक्कर लगायेगा/लगायेगी औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 379 प्रत्येक मरीज़ से मलाकात करेगाु /करेगी और उसके लिए जो भी आवश्यक हो वह करेगा/करेगी और साथ ही उसके मामले की स्थिति या प्रगति को चिकित्सा अधिकारी की जानकारी के लिए बेड-हेड टिकट पर विवरण अंकित करेगा/करेगी।

(2) वह प्रत्येक सबह ु "स्वास्थ्य लाभ" और "विशेष" दलों और संप्रेक्षण के अधीन रखे गये बन्दियों का दौरा करेगा/करेगी और देखेगा/देखेगी कि उन लोगों को औषधियां वितरित की जा रही हैं जिन्हें उनकी आवश्यकता है और यह कि उनके लिए मंगवाये गये विशेष भोजन, वस्त्र, बिस्तर इत्यादि उन्हें प्राप्त हों और यदि किसी बन्दी को चिकित्सा प्राधिकारी के प्राधिकार के बिना 'स्वास्थ्य लाभ' या 'विशेष' दल से हटा दिया जाता है, तो वह मामले की रिपोर्ट उसे करेगा/करेगी।

(3) वह कोठरियों में निरु(cid:217)ध समस्त बन्दियों का प्रतिदिन दौरा करेगा या करेगी, और उसे की गयी किसी भी शिकायत के बारे में चिकित्सा अधिकारी को सचित करेगाू /करेगी।

(4) वह इस बात के लिए उत्तरदायी होगा/होगी कि समस्त औषधियों के मांगपत्र सही ढंग से तैयार किये गये हैं, कि औषध की अलमारी को बंद किया गया है और समस्त विषैले पदार्थ को पथक रखा गया है

् , वह किसी भी सि(cid:217)धदोष परिचारक को किसी भी उपकरण को संभालने या किसी भी मादक द्रव्य को वितरित करने की अनमति नहीं देगाु , जिसका दरुपयोग ु होने का खतरा हो सकता है, वह अस्पताल की आहार पस्तिका लिखेगाु या लिखेगी, बीमारों के लिए आहार की वस्तओं और स्थानीय ु क्रय की औषधियों आदि के लिए उचित जेल अधिकारियों को आवश्यक मांगपत्र देगा/देगी और वह देखेगा या देखेगी कि भोजन उचित रूप से तैयार किया गया है और बीमार बन्दियों को समय पर वितरित किया जाता है।

(5) वह अस्पताल के समस्त रजिस्टरों और अन्य विवरणियों को अ(cid:217)यतन रखेगा या रखेगी, समय पर तैयार करेगा/करेगी और मासिक रूप से चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तत ु करेगा/करेगी और अस्पताल अभिलेख के लिए सामान्यत: उत्तरदायी होगा/होगी।

(6) वह इस बात के लिए उत्तरदायी होगा या होगी कि सर्जिकल उपकरणों को अच्छी स्थिति में रखा जाये और अस्पताल में उपयोग के लिए जारी किये गये वस्त्र, बिस्तर और कं बल

-सफाई की जाए और स्टॉक में किसी भी कमी के इत्यादि को सरक्षित रखा जाए और साफु

बारे में उसके (cid:217)वारा चिकित्सा अधिकारी को सचित किया जायेगा।ू

(7) वह अस्पताल में सफाई व्यवस्था और अनशासन बनाु ये रखने के लिए उत्तरदायी होगा या होगी और यह देखेगा/देखेगी कि इसमें जेल के समस्त नियमों का कठोरता से पालन किया जाये, अस्पताल परिचारक अपनी (cid:212)यटीू करें और यह भी कि अस्पताल परिचारकों की किसी भी कमी या अधिकता को ध्यान में लाया जाये। जब कोई बन्दी गंभीर रूप से इतना बीमार हो कि उसे विशेष परिचारक की सेवाओं की आवश्यकता हो, तो चिकित्सा अधीनस्थ चिकित्सा अधिकारी का आदेश लेगा, जो इस कार्य के लिए किसी सि(cid:217)धदोष बन्दी की सेवा के लिए अधीक्षक को आवेदन करेगा।

380 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(8) किसी भी सि(cid:217)धदोष परिचारक को अधीक्षक के लिखित आदेश के बिना नहीं बदला जायेगा और परिचारकों के लिए चयनित ऐसे सि(cid:217)धदोष बन्दियों के नाम अभिलिखित किये जायेंगे और ऐसी (cid:212)यटी के तथ्य प्रत्ये

ू क के वत्तृ -पत्र में प्रविष्ट किये जायेंगे। (9) समस्त बन्दी, जिनके विमंदित होने का संदेह है, उसके (cid:217)वारा प्रतिदिन परिक्षित किये जायेंगे और उनकी मानसिक दशा की एक रिपोर्ट चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तुत की जायेगी। (10) वह सामान्यत: विभिन्न परेडों में उपस्थित रहेगा या रहेगी और किसी भी बन्दी को ् /करेगी जिसका आचरण या ढंग यह दर्शित करे कि वह अपने इलाज के लिए पथक करेगाृ सामान्य स्वास्थ्य में नहीं है और वह बन्दियों के मसड़ों और दांतों परू भी विशेष ध्यान देगा।

(11) वह यह व्यवस्था करेगा या करेगी कि आंत संबंधी शिकायत के समस्त मामलों का उपचार एक पथक वार्ड में किया जा

् ये और ऐसे रोगियों का निष्क्रमण चिकित्सा अधिकारी के निरीक्षण के लिए इस तरह से रखा जाये, ताकि इससे गजरने वाले अलगु -अलग रोगियों की पहचान के बारे में कोई संदेह न रहे, चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा परीक्षण के पश्चात ् वह देखेगा कि ऐसे निष्क्रमण उचित रूप से कीटाणरहित और ु निस्तारित किये गये हैं और जब चिकित्सा अधिकारी जेल का दौरा करता है, तो चिकित्सा अधीनस्थ उसके साथ उसके दौरे पर जायेगा और उसके (cid:217)वारा दिये गये बीमारों के उपचार या जेल की सफ़ाई के बारे में किसी भी आदेश का ध्यान रखेगा।

(12) वह जेल में समस्त नये बन्दियों के आगमन पर तत्काल सावधानीपर्वक ू उनका परीक्षण करेगा और नियमों (cid:217)वारा यथा अपेक्षित उनके स्वास्थ्य की स्थिति और घावों के निशान आदि सहित व्यक्तिगत निशान अभिलिखित करेगा और यह देखेगा कि आवश्यक प्रविष्टियां वत्तृ -पत्रों पर की गयी हैं।

(13) वह स्वयं का समाधान करेगा कि नव प्रवेशित बन्दियों के निजी वस्त्रों को गोदाम में ले जाने से पर्व

ू साफ और कीटाणरहित ु किया गया हो।

855. किसी बन्दी की मत्य पर प्रक्रियाृ ु .- (1) किसी बन्दी की मत्य की ृ ु दशा में, चिकित्सा अधिकारी मत ृ बन्दी के शरीर को देखेगा और, यदि आवश्यक हो तो, उसका

ु के तथ्य और कारण को प्रमाणित करने की स्थिति में हो परीक्षण करेगा जिससे वह मत्य ृ

और समय-समय पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राजस्थान मानवाधिकार आयोग के मार्गदर्शक सि(cid:217)धांतों के अनसार अन्य अधिकारियों

, तत्काल इस

ु को सचित करने के लिएू

तथ्य को, जेल अधीक्षक को सचित करेगा।ू (2) चिकित्सा अधिकारी, कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का कें द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 15 (cid:217)वारा यथा अपेक्षित उचित रजिस्टर में ब्यौरे अभिलिखित करेगा।

856. कारागार में जन्म या मत्य का ृ ु रजिस्ट्रीकरण.- कारागार अधीक्षक, जन्म और , 1969 (1969 का कें द्रीय अधिनियम सं. 18) के अधीन इस मत्य पंजीकरण अधिनियमृ

प्रयोजन के लिए नियक्त ु स्थानीय रजिस्ट्रार को कारागार में जन्म या मत्य की सचना ृ लिखित में भेजेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 381

857. अभिरक्षा में मत्यृ ु.- (1) जब किसी सैन्य बन्दी की कारागार में मत्य हो जाती ृ है, तो उसकी तत्काल रिपोर्ट उस कमांडि ंग ऑफिसर को दी जायेगी जिसने उसे कारागार में भेजा था।

(2) जब किसी विदेशी बन्दी की कारागार में मत्य हो जाती है

ु , तो सरकार को आगे संसचना ू हेतु जिले के जिला मजिस्ट्रेट और कारागार निदेशालय के प्रमख को तत्काल रिपोर्ट भेजी ु

ू जायेगी और सरकार, दतावास या ू समुचित प्राधिकारी को मत्य के बारे में सचित करेगी।

संतान (3) जहां एक महिला बन्दी की कारागार में मत्य हो जाती है और वह अपने पीछे एकृ छोड़ जाती है, तो तत्काल जिले के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस भेजा जायेगा जो उस संतान की आगे की देखभाल के लिए ऐसी व्यवस्था करेगा जो उचित समझी जाये।

(4) जहां एक सि(cid:217)धदोष बन्दी कारागार में मर जाता है, तो उसका वारंट, उसकी मत्य के ृ कारण और तारीख को प्रमाणित करने वाले पष्ठांकन के साथ उस न्यायालय को वापस कर दिया जायेगा जहां से वह जारी किया गया था और जहां कोई रिमांड किया गया या विचाराधीन बन्दी कारागार में मर जाता है, तो न्यायालय या न्यायालयों में जिसमें या जिनमें यदि मतक के ृ विरु(cid:217)ध मामला या मामले लंबित हैं, तुरंत लिखित में मत्य के तथ्य ृ

कस्टडी वारंट भी मत्य के कारण के पष्ठांकन के ृ

की सचना दी जायेगी और इंटरमीडिएटू साथ न्यायालय को लौटा दिया जायेगा।

858. मत्य काृ ु अभिलिखित किया जाना.- किसी बन्दी की मत्य से संबंधित ृ प्रविष्टियां संबंधित रजिस्टर में, ब्यौरेवार वत्तृ -पत्र में और अस्पताल के अभिलेख में की

ु समस्त अभिलेख कम से कम दस वर्ष तक संरक्षित जायेंगी और बन्दी की मत्य से संबंधित ृ रखे जायेंगे।

859. बन्दियों के शवों का निस्तारण.- (1) किसी भी बन्दी के शव, जिसमें महिला बन्दी के साथ रहने वाली संतान भी सम्मिलित है, जो कारागार में या अस्पताल या मनोचिकित्सालय में मर जाती है, का निस्तारण निम्नलिखित रीति से किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) अस्पताल में शव-परीक्षण के पश्चात ही, शव परिजनों को, यदि उपलब्ध हों, सौंपा जा सके गा; और

(ख) इस प्रयोजन के लिए शव 24 घंटे के लिए अस्पताल के मर्दाघर में रखा जा ु

सके गा।

(2) यदि 24 घंटे के भीतर नातेदारों या मित्रों के पहंचने की कोई संभावना नहीं ु हो, तो कारागार अधिकारी नियमों के अनसार शव का ु निस्तारण करेंगे और इस व्यय का वहन गह ृ विभाग (cid:217)वारा किया जायेगा।

(3) किसी शव को नातेदारों या मित्रों को इस शर्त के अध्यधीन सौंपा जायेगा कि इसे हटाने के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया जायेगा।

(4) बन्दियों के नातेदार, यदि गरीब हों, तो बन्दी के शव को उसके मल स्थान तक ले जाने ू या अंतिम संस्कार करने के लिए अधिकतम पांच हजार रुपये का भगतान किया जा ु सके गा।

382 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

860. जांच मजिस्ट्रेट और पलिस अधिकारी को सचना

ू .- (1) कारागार में होने वाली ु की, जिसमें महिला बन्दी के साथ रहने वाले बालक सम्मिलित हैं, चाहे किसी भी किसी मत्यृ कारण से हो, सचनाू , -

ु-समीक्षा करने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का कें द्रीय (क) मत्यृ

अधिनियम सं. 2) की धारा 174 की उप-धारा (4) के अधीन सशक्त किसी निकटतम मजिस्ट्रेट;

(ख) अधिकरिता रखने वाले पलिस ु थाने का प्रभारी अधिकारी, जिससे प्रारंभिक अन्वेषण करना अपेक्षित हो; और

ु 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य (ग) मत्य के ृ

मानवाधिकार आयोग,

को भेजी जायेगी।

ु-समीक्षा करने वाले अधिकारी (2) मत ृ बन्दी या महिला बन्दी की मत ृ संतान के शव को मत्यृ के निरीक्षण और आदेशों के लिए रखा जायेगा।

861. शव परीक्षण परीक्षा.- (1) कारागार परिसर के भीतर, कारागार अस्पतालों में, एक कारागार से दसरे में

ू या एक कारागार से किसी बाहरी अस्पताल के अभिवहन में या किसी

ु मामलों में, बाहरी अस्पताल में, बन्दियों या उनके बच्चों की होने वाली मत्य के समस्तृ

बाहरी चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा वि(cid:217)यमान नियमों के अनसारु , राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राजस्थान मानवाधिकार आयोग के मार्गदर्शक सि(cid:217)धांतों के अनसारु शव परीक्षण किया जायेगा।

ु की परिस्थितियों पर एक पूर्ण रिपोर्ट, सरकार को प्रस्तत करने ु हेतु, बिना किसी (2) मत्य ृ

विलंब के अधीक्षक (cid:217)वारा कारागार निदेशालय के प्रमख को भेजी जायेगी ु और पलिस ु तथा मजिस्ट्रेट (cid:217)वारा बनायी गयी रिपोर्ट, वर्णनात्मक रोल, कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का कें द्रीय अधिनियम संख्या 9) की धारा 15 (cid:217)वारा अपेक्षित रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के साथ गवाहों के बयान भी प्रस्तत किु ये जायेंगे।

862. कपड़ों और बिस्तरों के लिए मांगपत्र.- अस्पताल उपयोग के लिए आवश्यक कपड़ों और बिस्तरों की मात्रा, चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा निश्चित समय में अधीक्षक को रिपोर्ट की जायेगी, जो उन्हें कारागार महानिरीक्षक (cid:217)वारा अनमोदनु के लिए प्रस्तत ु कारागार कपड़ों के सामान्य मांगपत्र में यथास्थिति सम्मिलित करेगा।

.- आहार, वस्त्र और बिस्तर से भिन्न अन्य 863. अन्य वस्तओं के लिए मांगपत्रु

ु वस्तओं के लिएु , चिकित्सा अधिकारी पत्र (cid:217)वारा या अपनी ऑर्डर बक में प्रविष्टि (cid:217)वारा मांगपत्र देगा।

864. औषधियों का स्थानीय क्रय.- (1) गंभीर बीमारी के मामलों में और असाधारण

, कारागार के चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिशों पर कारागार मांगों को पर्ण करने के लिएू अधीक्षक, नीचे वर्णितानसारु स्थानीय स्तर पर औषधियां क्रय करने के लिए अधिकत है

ृ :-

(क) कें द्रीय या जिला जेल अधीक्षक प्रतिदिन दो हजार पांच सौभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 383 (ख) उप या अस्थायी जेल का प्रभारी प्रतिदिन एक हजार

(2) कारागार निदेशालय का प्रमख ु औषधियों की स्थानीय क्रय के लिए पर्ण शक्ति का ू

उपयोग करने के लिए सशक्त होगा और ऐसी खरीद के परिणामस्वरूप, किसी भी स्थिति में औषधियों का अनावश्यक भंडारण नहीं होगा और यह अधीक्षक का उत्तरदायित्व होगा कि वह अपने विवेक का उचित रूप से उपयोग करे और व्यय को व्यवस्थित रखे।

(3) अधीक्षक औषधियों पर होने वाले व्यय को कम करने के लिए जेनेरिक दवाओं की खरीद पर भी जोर देगें और उन्हें जेल की औषधियों की आवश्यकता को पर्ण करने के लिए ू सरकार प्रदत्त औषधियों को अभिप्राप्त करने के लिए जिले के मख्य चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने के लिये भी अनदेशितु किया जायेगा।

865. औषधियों की आपर्ति

अधिकारी औषधियों की आपर्ति

ू के लिए मांगपत्र रखना.- (1) कारागार में चिकित्सा ू के लिए आवश्यक मांगपत्र, कारागार अधीक्षक के माध्यम से -समय पर विनिर्दिष्ट अन्य स्रोतों को भेजेगा, जिस पर कारागार अनमोदित फर्मों और समयु

निदेशालय के प्रमख ु को इसकी सचनाू सहित अधीक्षक (cid:217)वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जायेगा और ऐसा मांगपत्र एक वर्ष के लिए आवश्यकताओं का उचित निर्धारण होगा और आपर्ति

ू प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय देते हये ु अनमोदित फर्म तक ु अग्रिम ही पहंच जायेगा।ु (2) मांगपत्र इस प्रकार तैयार किये जायेंगे कि स्थानीय बाजार से औषधियों की खरीद को न्यनतम सीमा तक सीमित किया जा सके और औषधियों के अनावश्यक भंडारण से बचा जा सके और जहां भी आवश्यक हो, परक मांगपत्र अग्रेषित किए जायेंगे।

(3) समस्त मामलों में, मांगी गई औषधियों की प्राप्ति तक मामले में प्रयास किया जायेगा और विलंब के मामले में, उचित कार्रवाई के लिए मामला कारागार निदेशालय के प्रमख को ु रिपोर्ट किया जायेगा।

866. कारागार अधीक्षकों (cid:217)वारा स्टॉक सत्यापन.- (1) कारागार अधीक्षक वार्षिक रूप से जनवरी के प्रथम सप्ताह में कारागार अस्पतालों में औषधियों, उपकरणों और उपस्करों के स्टॉक का सत्यापन करेंगे।

(2) वे कारागार अस्पतालों में औषधियों और चिकित्सा उपकरणों की स्टॉक की औचक जांच भी करेंगे और स्टॉक बक में दु र्शित वास्तविक वजन और मात्रा के मध्य समस्त भिन्नताओं की रिपोर्ट कारागार महानिरीक्षक को की जायेगी।

(3) कारागार उप महानिरीक्षक (रेंज) (cid:217)वारा इन भंडारों का वार्षिक स्टॉक सत्यापन भी किया जायेगा।

867. परिचारकों की नियक्ति और नर्सिंग अर्दलिु यों का प्रशिक्षण.- (1) बीमार बन्दी की देखभाल के प्रयोजन के लिए अच्छे आचरण वाले और लंबी सजा काट रहे कछ शिक्षित ु

सि(cid:217)धदोष चिकित्सा अधिकारी के परामर्श से अधीक्षकों (cid:217)वारा चयनित किये जायेंगे और नर्सिंग अर्दलियों के रूप में प्रशिक्षित किये जायेंगे।

(2) उनके प्रशिक्षण के लिए एक संक्षिप्त पा(cid:211)यविवरण, ऐसा प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा तैयार किया जायेगा।

384 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) नर्सिंग अर्दली के रूप में नियोजित सि(cid:217)धदोषों की संख्या सामान्यत: प्रत्येक दस रोगियों पर एक के अनपात में होगी और महामारी और अन्य आपात के समय में यह अनपात बढ़ाया जा सके गा और बहत गंभीर मामलों या बिस्तर पर रहने वाले रोगियों के लिए विशेष अर्दली अनज्ञात किये

ु जा सकें गे।

(4) सि(cid:217)धदोष नर्सिंग अर्दली, जो अपने कर्तव्यों को संतोषजनक पालन करते हैं, को सि(cid:217)धदोष रात्रि चौकीदार के लिए विहित दर और मापमान के समान अतिरिक्त छट और दैनिक वेतन ू अनज्ञात कियाु जायेगा।

868. अस्पताल में सेवकों की नियक्तिु .- अधीक्षक अस्पताल में सेवा करने के कर्तव्यों का पालन करने के लिए पर्याप्त संख्या में सि(cid:217)धदोषों का विवरण देगा। ऐसे सि(cid:217)धदोष चिकित्सा अधिकारी के आदेश के अधीन काम करेंगे। के वल लंबी सजा काट रहे और अच्छे आचरण वाले बन्दियों को ही ऐसे कर्तव्यों के लिए भेजा जायेगा।

869. प्रवेश पर बन्दियों का टीकाकरण.- (1) कारागार में प्रवेश किये गये प्रत्येक बन्दी को प्रवेश पर या उसके पश्चात यथाशक्यशीर्घ् , टीका लगाया जायेगा, जब तक कि, -

(क) वह चेचक के विरु(cid:217)ध सरक्षित होने का स्पष्ट प्रमाण दिखाता

ु या दिखाती है, उसे या तो पर्व में ू चेचक हआ हो ु या पर्व टीकाकरण कराया हो।ू

(ख) वह ऐसा दंड भोग रहा या रही है, जिसमें उसे एक महीने से अनधिक किसी अवधि के लिए कारागार में निरु(cid:217)ध किया गया है।

(2) चिकित्सा अधिकारी अपने विवेकाधिकार से उन मामलों में टीकाकरण या पनः टीकाकरण ु से छट दे सू के गा जिन्हें वह अवांछनीय या अनावश्यक समझे। (3) कारागार में प्रविष्ट होने वाले प्रत्येक बन्दी, को प्रवेश पर या उसके तत्पश्चात ् कोरोना और टाइफाइड का टीका लगाया जायेगा। अन्य निवारक टीके जैसे कोरोना और हैजा जब भी चिकित्सा अधिकारी कारागार के बन्दियों की संख्या के स्वास्थ्य के हित में आवश्यक समझे, के विरु(cid:217)ध दिये जायेंगे।

870. टीकाकरण रजिस्टर.- एक टीकाकरण रजिस्टर रखा जायेगा और जिनका टीकाकरण किया गया है, उनकी विशिष्टियां इसमें प्रविष्ट की जायेंगी। जब पिछले टीकाकरण या चेचक की पिछली घटना से उत्पन्न प्रतिरक्षा विफलता के लिए जिम्मेदार नहीं है, तो प्रचालन दोहराया जायेगा और प्रचालन को विफल करने के समस्त प्रयास अधीक्षक के संज्ञान में लाये जायेंगे।

871. स्टाफ के सदस्यों का चिकित्सीय परीक्षण.- स्टाफ के सदस्यों का चिकित्सीय परीक्षण कारागार अधीक्षक के परामर्श से वर्ष में कम से कम एक बार किया जा सके गा और ऐसे चिकि त्सीय परीक्षण की रिपोर्ट अधीक्षक के कार्यालय में रखी जायेगी।

872. चिरकालिक संक्रामक रोग से पीड़ित बन्दी.- (1) जब कोई सि(cid:217)धदोष बन्दी या विचाराधीन बन्दी या सिविल बन्दी किसी चिरकालिक संक्रामक रोग से पीड़ित पाया जाता है, तो जेल चिकित्सा अधिकारी इस तथ्य को उनके वत्तृ -पत्र पर अभिलिखित करेगा, और इसीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 385 ् ना आवश्यक है जो प्रकार अपनी राय भी कि क्या उस बन्दी को उन लोगों से पथक रखृ स्वस्थ है, अभिलिखित करेगा।

(2) जब संक्रामक रोग से पीड़ित बन्दियों को जेल चिकित्सा अधिकारी के लिखित आदेश के अनसार एक ु कोठरी में निरु(cid:217)ध करने का आदेश दिया गया हो, तो इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि ऐसा कारावास एकांत कारावास न हो; बन्दी अन्य बन्दियों को देख सके और उनसे बात कर सके कितं ु उन्हें पथक ृ ् रखा जायेगा; किसी संक्रामक बन्दी (cid:217)वारा अधिकत ृ किसी भी कोठरी या अन्य भवन को किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करने से पर्व पर्ण ू

रूप से कीटाणरहित किया जायेगा , दीवार को खरच कर साफ किया जायेगा

ु और सफे दी की जायेगी; और उपरोक्त बन्दियों (cid:217)वारा उपयोग किये गये वस्त्र और बिस्तर को कभी भी दोबारा जारी नहीं किया जायेगा बल्कि जलाया जायेगा।

अध्याय 37

आपात स्थितियां

873. किसी आपात आधार पर संभाली जाने वाली स्थितियां.- निम्नलिखित स्थितियों को आपात के रूप में संभाला जायेगा, अर्थात ्:-

(क) कारागार से निकल भागना;

(ख) विद्रोह;

(ग) दंगे या दल य(cid:217)धु ; (घ) हड़तालें;

(ङ) भख हड़तालें

ू (व्यक्तिगत या सामहिकू );

(च) हमला;

(छ) आत्महत्या;

(ज) दर्घटनाएं

ु ;

(झ)आग;

(ञ) महामारी;

(ट) खा(cid:217)य विषाक्तता;

(ठ) अतिभीड़;

(ड) जल आपर्त

, और अन्य आवश्यक कारागार सेवाएं जैसे ू , वि(cid:217)यत प्रकाश व्यवस्था स्वच्छता और पाइपलाइन की विफलता;

(ढ) भोजन या कच्चे माल की आपर्ति

ू न होने से कारागार की दिनचर्या में व्यवधान;

(ण) बाढ़;

(त) भकं पू ; (थ) आतंकवादी हमला;

(द) बम विस्फोट;

386 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ध) शत्र राष्ट्र (cid:217)वारा य(cid:217)ध या बमबा

ु री; (न) रासायनिक, परमाणु, या, यथास्थिति, जैविक आपदाएं; और (प) कोई अन्य मानव निर्मित या प्राकतिक आपदाएं

ृ ।

874. आपात स्थितियों को रोकने और नियंत्रित करने के उपाय.- अधीक्षक का यह उत्तरदायित्व है कि वह आपात स्थितियों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त अध्युपाय करे। अध्युपायों में निम्नलिखित सम्मिलित हो सकें गे, अर्थात ्:-

(क) कारागार की परिधीय दीवार के परिक्षेत्र की सीमा से बाहर के क्षेत्र का सीमांकन;

(ख) पर्याप्त रक्षा और सरक्षा ु अध्युपाय और कालिक निरीक्षण; (ग) गहन खोज की प्रणाली;

(घ) कारागार भवन और परिसर का उचित रखरखाव;

(ङ) औज़ारों और उपस्कर की उचित अभिरक्षा;

(च) बन्दियों के आने जाने पर उचित नियंत्रण;

(छ) उन बन्दियों का समय पर पथक्कृ रण जो उकसाने वाले हैं, या बरे चरित्र वाले ु

;

हैं और कारागार अनशासन के लिए संभावित जोखिम हैं

(ज) समस्त अनशासन समस्याओं का त्वरित और सशक्त कितं ु विचारशील प्रबंधन;

(झ)बन्दियों की देखभाल और कल्याणकारी आवश्यकताओं को देखना;

(ञ) अच्छे अनशासन की ु प्रणाली; (ट) संयंत्र और उपस्कर का सावधानीपर्वक ू प्रबंधन; (ठ) संयंत्र और उपकरण आपात संचालन का कालिक निरीक्षण;

;

(ड) दर्घटना निवारक उपायु (ढ) अग्नि निवारक उपाय;

(ण) समस्त संवेदनशील बिंदओं पर अग्निशमु न उपकरण; (त) अच्छा पर्यावरण और संस्थागत स्वच्छता और साफ-सफाई;

(थ) नये प्रविष्ट बन्दियों के लिए क्वारंटीन की उचित प्रक्रिया;

(द) संक्रामक रोगों से पीड़ित बन्दियों का पथृ क्करण; (ध) खा(cid:217)य वस्तओं ु का उचित भंडारण और निरीक्षण;

(न) रसोई और कैं टीन संचालन, भोजन और खा(cid:217)य पदार्थों की सेवा में अपेक्षित

;

न्यनतम मानकों का पालनू

(प) पेड़ों पर चढ़कर बन्दियों के निकलने भागने को रोकने के लिए पेड़ों पर कांटेदार तार लगाना;

(फ) जल भंडारण, बिजली संयंत्र और आपात प्रकाश के लिए अतिरिक्त व्यवस्था;

(ब) भवनों में समस्त जल निकासी और पानी के पाइपों को छिपाना; औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 387 (भ) आपात स्थितियों में बल प्रयोग करने के लिए अपने अधीनस्थ कारागार अधिकारियों को ऐसी शक्तियां प्रत्यायोजित करना, जैसी कि पलिस को दीु गयी हैं।

875. आपात स्थिति के लिए उपस्कर.- (1) प्रत्येक कारागार विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों से निपटने के लिए निम्नलिखित से उचित रूप से सज्जित होगा, अर्थात ्:-

(क) अग्निशमन उपस्कर;

(ख) वि(cid:217)यत टॉर्च

ु , गैस लाइट, के रोसिन लैंप और आयल टॉर्च जैसी आपात प्रकाश व्यवस्थाएं;

(ग) सर्च लाइट;

(घ) स्टील हेलमेट;

(ङ) बेंत;

(च) आंस गैस उपू स्कर; (छ) पानी की नली;

(ज) टेलीफोन, अंतर-संचार, वॉकी-टॉकी प्रणाली, मेगा फोन;

(झ)हथियार और गोला-बारूद;

(ञ) सीढ़ियां, कल्हाु ड़ ◌ियां, चाकू , रस्सियां, जंजीरें, हथकड़ियां, अलार्म और सायरन; (ट) प्राथमिक चिकित्सा किट; और

(ठ) वीडियो कै मरा या डिजिटल कै मरा या फोटोग्राफी के लिए कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपस्कर या उपर्यक्तु किसी भी आपात पर ◌िस्थिति से निपटने के लिए उपयक्त आधनिक उपु

ु स्कर।

(2) राज्य सरकार समय-समय पर उपस्करों की सची ू के पनरीक्षु ण के लिए राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) या राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) या निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से परामर्श कर सके गी।

(3) अधीक्षक उपर्यक्तु सचीब(cid:217)ध वस्तओं ू

ु के क्रय के लिए कारागार निदेशालय के प्रमख की ु आवश्यक मंजरी ू अभिप्राप्त करेगा।

(4) यह सनिश्चित करना ु कारागार अधीक्षक का उत्तरदायित्व होगा कि ये समस्त उपस्कर आपात परिस्थितियों में उपयोग के लिए हमेशा अच्छी स्थिति में रखे जायें।

876. आपात स्थितियों के लिए तैयारियां.- (1) संस्थाएं, जहां खतरनाक बन्दी रखे जाते हैं, या जहां किसी भी प्रकार की गंभीर गड़बड़ी की संभावना हो, समस्त प्रकार से सज्जित की जानी चाहिए। ऐसी संस्थाओं में सरक्षा व्यवस्थाु एं भी बहत चाक चौबंदु होंगी।

(2) प्रत्येक जेल एक रिजर्व गार्ड की व्यवस्था करेगा, इस दस्ते में चालीस वर्ष से कम आयु के कार्मिक सम्मिलित होंगे; इस दस्ते के कार्मिकों को विभिन्न आपात परिस्थितियों या अप्रत्याशित स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा और दस्ते को उचित रूप से सज्जित और कार्रवाई के लिए तैयार रखा जायेगा।

388 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) आपात स्थितियों से निपटने के लिए नियत अंतराल पर अभ्यास आयोजित किये जायेंगे और विनिर्दिष्ट प्ररूप में एक रिपोर्ट कारागार महानिरीक्षक को प्रस्तत की ु जायेगी।

877. आपात स्थिति से निपटने के लिए सामान्य अनदेशु .- आपात स्थितियों से निपटने के लिए सामान्य अनुदेशों का पालन किया जायेगा, अर्थात ्:- (क) घायलों को तत्काल प्राथमिक सहायता देना;

(ख) प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश को प्रतिषि(cid:217)ध करना;

(ग) अन्य क्षेत्रों में समस्या फै लने पर उसका मकाबला करने के लिएु तत्काल कार्रवाई;

(घ) समस्त संबंधित प्राधिकारियों को त्वरित सचनाू ; (ङ) संबंधित प्राधिकारियों को सहायता के लिए, यदि आवश्यक हो, रिपोर्ट करना;

(च) यदि समस्या उत्पन्न होने के समय अधीक्षक कारागार में उपस्थित नहीं है, तो ऐसी आपात स्थिति की सचनाू मिलते ही वह यथाशीघ्र वहां पहंचेगा और ु

उसे नियंत्रित करने के लिए उचित उपाय करेगा;

(छ) नियंत्रण उपायों, जैसे हथकड़ी लगाना, बन्दियों को बंद करना, उपद्रवियों को ् ना और भीड़ को तितर-बितर करने का उपयोग करना;

पथक करृ

;

(ज) स्थिति की आवश्यकताओं के अनसार समस्तु सरक्षा उपायों को कड़ा करना (झ) आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हर संभव सहायता जटानाु ;

और

(ञ) जिला कलक्टर, पलिस और ु अग्निशमन से समस्त आवश्यक सहायता अभिप्राप्त करना।

878. कारागार तोड़ने और निकल भागने पर अलार्म.- (1) कारागार तोड़ने या निकल भागने के प्रयास के मामले में किसी बन्दी या बन्दियों के समह के ू विरु(cid:217)ध हथियारों के उपयोग को विनियमित करने के लिए निम्नलिखित नियम होंगे, अर्थात ्:-

(क) कारागार का कोई भी अधिकारी, किसी बन्दी के निकल भागने या निकल भागने के प्रयास के विरु(cid:217)ध आग्नेयास्त्र या किसी अन्य हथियार का उपयोग कर सके गा, परंतु ऐसे अधिकारी के पास विश्वास करने का उचित आधार होगा कि वह ऐसे निकल भागने को अन्यथा नहीं रोक सके गा या सके गी;

(ख) कारागार का कोई भी अधिकारी किसी भी बन्दी पर, जो किसी संयक्तु विद्रोह या कारागार के बाहरी दरवाजे या बंद दीवार को बलपर्वक या तोड़कर ू

खोलने के प्रयास में लगा हआ होु , किसी आग्नेयास्त्र या किसी अन्य हथियार का उपयोग कर सके गा और ऐसे हथियार का उपयोग निरंतर तब तक कर सके गा जब तक ऐसा संयक्तु विद्रोह या प्रयास विफल न हो जाये; (ग) कारागार का कोई भी अधिकारी, कारागार के किसी भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति पर हमला करने वाले या हिंसा का प्रयोग करने वाले किसी भी बन्दी के विरु(cid:217)ध आग्नेयास्त्र या किसी अन्य हथियार का उपयोग कर सके गा,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 389 परंतु ऐसे अधिकारी के पास यह विश्वास करने के लिए उचित आधार हो कि कारागार के अधिकारी या अन्य व्यक्ति के जीवन या शरीर को खतरा है या उसे अन्य गंभीर क्षति होने की संभावना है;

(घ) किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध आग्नेयास्त्रों का उपयोग करने से पर्व

ू कारागार अधिकारी बन्दी को चेतावनी देगा या देगी कि वह उस पर गोली चलाने वाला या वाली है;

(ङ) कारागार का कोई भी अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति में, कारागार तोडने या निकल भागने के प्रयास के मामले में किसी बन्दी के विरु(cid:217)ध किसी भी प्रकार के हथियार का उपयोग, ऐसे वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के अधीन को छोड़कर, नहीं करेगा;

(च) प्रत्येक कारागार में एक पर्व

ू -व्यवस्थित सिग्नल होगा जिसे 'अलार्म' नाम से जाना जायेगा, जिसके माध्यम से कारागार के समस्त अधिकारियों और

, निकल भागने या अन्य अप्रिय घटना की पलिस को किसी भी विद्रोहु

जानकारी दी जा सके गी; और

(छ) कारागार तोड़ने, निकल भागने या कारागार में अन्य अप्रिय घटना होने के समय (cid:212)यटी पर ू उपस्थित कारागार अधिकारी, कारागार के समस्त अधिकारियों और पलिस बल को चेतावनी देने के लिए बार -बार सीटी बजायेगा।

(2) यह अलार्म एक नियम के रूप में उस अधिकारी (cid:217)वारा प्रारम्भ किया जायेगा जिसका ध्यान सबसे पहले घटित किसी घटना की ओर जाता है, फिर आसपास के समस्त अन्य अधिकारियों (cid:217)वारा इसे आगे बढ़ाया जायेगा और तत्पश्चात ् मख्य गेट पर इस ु प्रयोजन के लिए उपलब्ध करवाया गया सायरन तेजी से और लगातार बजता रहेगा। उपर्यक्तु में कोई भी विचलन, कर्तव्य में लापरवाही और कदाचार माना जायेगा।

879. अधीक्षक सहित कारागार अधिकारियों को सचित किया ू जाना.- (1) जिस स्थान से अलार्म बजना चाल हआू ु उस स्थान पर (cid:212)यटी पर ू उपस्थ ◌ित हेड वार्डर या वार्डर, किसी अन्य वार्डर या किसी भरोसेमंद सि(cid:217)धदोष अधिकारी को मख्य गेट पर शीघ्रता से भेजेगा या ऐसी जानकारी, जो वह घटना के स्वरूप, उसके घटित होने या घटित करने वाले के बारे में जानता हो, देने के लिए वॉकी-टॉकी या इसी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग जेलर या अन्य प्रभारी अधिकारी को तदनसार कार्रवाई काु निदेश देने में सक्षम बनाने के लिए करेगा।

टिप्पण: उदाहरण के लिए, किसी भी निकल भागने की स्थिति में, बन्दी का नाम, वह स्थान जहां उसे आखिरी बार देखा गया था।

(2) कारागार या परिसर का वह भाग जहां से वह गायब हो गया या गयी है और वह दिशा जिस ओर वह संभाव्यत: गया/गयी हो, कमान अधिकारी को इसके दमन के लिए सबसे390 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) प्रभावी तरीके से अपना बल भेजने में सक्षम करेगा। क्लोज सर्कि ट कै मरे के फटेज को महत्व ु

दिया जायेगा और उसके तदनसार कार्य किया जायेगा।ु

(3) अलार्म के समय पर अधीक्षक, यदि कारागार में उपस्थित नहीं हो तो उसे, संसचनाू के यथोचित माध्यम का उपयोग करके , घटना के बारे में सचित किया जायेगा।ू

880. उपद्रव की सचना पलिस को ू ु दिया जाना.- उपद्रव की सचना टेलीफोन या किसी ू

अन्य उपयक्त माध्यम से

ु तत्काल पलिस को ु दी जायेगी जिससे कि उपलब्ध पलिस बल ु

उपद्रव पर नियंत्रण में सहायता के लिए कारागार तक पहंच सके

ु और अधीक्षक, पलिस ु अधीक्षक/आयक्त के साथ मिलकरु किसी विद्रोह की स्थिति में ठोस कार्य योजना के लिए ऐसी व्यवस्थाएं करेंगे जो उचित प्रतीत हों।

881. कारागार के भीतर बन्दियों को वार्डर (cid:217)वारा बंद किया जाना.- अलार्म बजने पर, बाह्य दलों के प्रभारी वार्डर अपने बन्दियों को एकत्रित करेंगे, उन्हें पर्व

ू -व्यवस्थित स्थान पर ले जायेंगे न कि मख्य गेट के ु बिल्कु ल आसपास के क्षेत्र में, और उन्हें वहां पंक्ति में बैठायेंगे। ऐसे बन्दियों को उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के बिना जेल में तब तक नहीं भेजा जायेगा जब तक उपद्रव कम न हो जाये, जेल के भीतर के समस्त बन्दियों को, सिवाय सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों को छोड़कर निकटतम और सबसे सविधाजनक वार्ड

ु , कार्यशाला या अन्य भवन में बंद किया जायेगा, सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों को दीवारों की सरक्षा करने

ु , बैरक के बाहर गश्त करने या ऐसे अन्य कार्यों के लिए नियोजित किया जा सके गा जैसा उन्हें निदेशित किया जाये और अन्य सि(cid:217)धदोष अधिकारी जो बन्दियों के साथ बंद हैं, उनसे उस भवन में व्यवस्था बनाये रखने की अपेक्षा की जायेगी जिसमें वे परिरु(cid:217)ध हैं।

882. कारागार अधिकारियों का सशस्त्र और मख्य गेट ु पर तैनात रहना.- अलार्म सनने परु प्रत्येक कारागार अधिकारी, चाहे वह वदी में हो या नहीं, तत्काल शस्त्रागार की ओर अग्रसर होगा, सशस्त्र होगा/होगी, मख्य गेटु की ओर बढ़ेगा और उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों के अधीन कार्रवाई करेगा और परुषों के दो दस्तों ु (रिजर्व गार्ड से नहीं) को दीवारों पर चढ़◌़ कर किन्ही भी बन्दियों के प्रयास को रोकने की दृष्टि से दीवारों के बाहर जेल के बाड़े के विपरीत कोणों पर भेजा जायेगा।

883. रिजर्व गार्ड का पर्ण रूप ू से सशस्त्र होना.- (1) कारागार का रिजर्व गार्ड स्वयं को सशस्त्र करेगा और यदि आवश्यक हो, तो बाहरी गेट और मख्य परिु धीय दीवार की सरक्षा ु में गेट संतरी की सहायता करेगा।

(2) बन्दियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए मख्य गेट की छत पर एक वार्डर भी नियक्तु किया जायेगा और जब तक बन्दी वास्तव में मख्य गेटु की ओर प्रहार की चेतावनी न दें, तब तक उपलब्ध शेष बल डंडों से लैस होकर जेल में प्रवेश करेगा और उपद्रव स्थल की ओर बढ़ेगा। कितं ु यदि बन्दी मख्य गेटु की ओर प्रहार की चेतावनी दे रहे हैं, तो उसका बचाव तब तक किया जाये जब तक कि गार्ड बन्दियों को वापस कारागार के अन्दर खदेड़ने के लिए पर्याप्त रूप से मजबत ू न हों, उस समय, वॉच टावर में तैनात गार्ड तैयार रहेगा और स्थिति को संभालने की स्थिति में तैयार रहेगा और निकल भागना, यदि कोई हो,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 391 तो उसे रोके गा और वॉच टावर का गार्ड वॉकी-टॉकी के माध्यम से समस्त संबंधितों को सचित करेगा।ू

884. उपद्रव के दमन के दौरान पालन की जाने वाली प्रक्रिया.- (1) यदि यह जेल के भीतर बलवे या उपद्रव का मामला है, तो उसे दबाने के लिए, रिजर्व गार्ड अपने लोगों का

ू , वह मख्य गेट ु की छत पर संतरी से जांच नेतत्वृ करेगा, तथापि ऐसा कदम उठाने से पर्व

करके स्वयं का यह समाधान करेगा कि भीतरी गेट बन्दियों से मक्त है और फिर वह अपने ु

आदमियों को (cid:217)वारों के मध्य से दोहरी पंक्ति में ले जायेगा, फिर बाहरी गेट बंद कर दिया जायेगा और भीतरी गेट खोल दिया जायेगा, और गार्ड परिस्थितियों की आवश्यकता के अनसार कार्य करने के लिए जेल में चला जायेगा।

सीटियां बजना (2) जब गार्ड कारगार में प्रवेश करेगा तो मल सीटी को छोड़कर बाकी समस्तू

बंद हो जायेंगी, जो उपद्रव के स्थान को इंगित करेगी और जो गार्ड के मौके पर पहंचने पर ु

बंद हो जायेगी, उपद्रव वाले स्थान पर पहंचने परु जैसा कमान अधिकारी विनिश्चय करे, गार्ड डंडों या आंस गैसू , यदि उपलब्ध हो, का प्रयोग करके उसे शांत करने के लिए आगे बढ़ेगा, जैसा कि प्रारंभिक कार्रवाई, निकल भागने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए, दंगाइयों

् करने के लिए और किसी भी कारागार अधिकारी को, जो खतरे में को अन्य बन्दियों से पथक ृ

हो, बचाने के लिए निदेशित की जायेगी; यदि उपद्रव के साथ किसी कारागार अधिकारी पर हमला या निकल भागने का संयक्त प्रयास होता है , तो कमान अधिकारी बन्दियों को चेतावनी देगा कि यदि वे समर्पण नहीं करेंगे तो उन पर गोली चला दी जायेगी; यदि परिस्थितियां अनमति दें

ु , तो यह चेतावनी तीन बार दोहराई जायेगी; यदि बन्दी समर्पण नहीं करते हैं या उपद्रव या अशांति को शांत नहीं किया जा सके , तो कमान अधिकारी रिजर्व गार्ड को बला ु सके गा और इन बन्दियों पर गोलियां चला सके गा; और जैसे ही बन्दी प्रतिरोध करना बंद कर दें या समर्पण कर दें तो वह गोलीबारी बंद कर देगा और समस्त परिस्थितियों में के वल आवश्यक न्यनतम बल का ू प्रयोग किया जायेगा।

टिप्पण: प्रभारी अधिकारी को इस बात पर सावधान रहना चाहिए कि वह अपने लोगों को पंक्ति में एक साथ रखे और उन्हें बन्दियों से 50 फीट से अनधिक तक पास जाने

, जहां से वह दंगाइयों से निपटने के लिए सबसे हेत अनज्ञेय नहीं करना चाहिएु

अच्छी स्थिति में होते हैं। समस्त मामलों में कछ वार्डरों को डंडों से लैस किया जाना चाहिए और ददर्म्य ु बन्दियों की सरक्षा के लिए हथकड़ी प्रदान की जानी चाहिए।

(3) यदि वार्डों के भीतर उपद्रव होता है, तो उपलब्ध गार्ड डंडों से लैस होकर जेल में प्रवेश करेगा और वार्ड गेट की ओर बढ़ेगा और वार्ड में प्रवेश करने और उपद्रव को शांत करने के लिए एक दल को अलग कर दिया जायेगा, जबकि शेष बल वार्ड गेट पर इंतजार करेगा।

(4) उपद्रव को शांत करने के दौरान अपनायी जाने वाली प्रक्रिया आवश्यक रूप से घटना की

, पर्ण शांति बनाए रखी जायेगी और कार्यवा हियां, व्यवस्थित प्रकति पर निर्भर होनी चाहिएृ392 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) और सनियोजित रूपु से की जायेंगी और प्रत्येक अधिकारी को उसके कर्तव्यों के बारे में पहले से निदेशित किया जायेगा ताकि वह ठीक से जान सके कि क्या करना है और कहां जाना है।

885. कार्य स्थल से बन्दी का निकल भागना.- (1) कारागार के बाहर किसी कार्य स्थल से निकल भागने के कारण अलार्म बजने पर, मख्य गेट का प्रभारी अधिकारी सहायता के लिए जितने वार्डर भेज सकता/सकती है भेज देगा/देगी और शेष वार्डर उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी के आदेश की प्रतीक्षा करेंगे।

(2) वह बाहरी समहू , जिससे कोई बन्दी निकल भागा है, का प्रभारी वार्डर अलार्म बजाने के पश्चात ्, बन्दी को पकड़ने के लिए अपने एक एस्कॉर्ट को भेजेगा और शेष बन्दियों को एकत्रित करने के पश्चात उन्हें वापस ् कारागार के मख्य गेट तक ले जायेगा जहां वह (cid:212)यटी पर के वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेगा/करेगी।

(3) जैसे ही किसी के निकल भागने की रिपोर्ट प्राप्त होती है, (cid:212)यटी पर ू उपस्थित जेलर,- (क) उस क्षेत्र, जहां से निकल भागना हआ है

ु , की खोज करने के लिए पर्याप्त बल की एक पाटी भेजेगा; और

(ख) अधीक्षक को निकल भागने के बारे में सचित करे

ू गा।

886. पलिसु , जिला मजिस्ट्रेट आदि को निकल भागने की सचनाू .- अधीक्षक किसी बन्दी के निकल भागने की सचना तू त्काल निकटतम पलिस ु थाना, क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट या तहसीलदार, जिला मजिस्ट्रेट और पलिस अधीक्षक या , यथास्थिति, पलिस आयक्त को ु

देगा, ऐसी सचनाू के साथ निकल भागने वाले बन्दी का विवरण, आवासीय पता और फोटो देते हए एक वर्णनात्मक रोल संलग्न किया जायेगा , वह बन्दी के घर के पास के पलिस थाने ु

में भी तत्काल सचना भेजेगा या भेजेगी और यदि बन्दी उस जिले से भिन्न किसी अन्य जिले का है जहां वह कारागार में था या थी, तो सचना उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट के साथ-साथ पलिस अधीक्षक या

ु , यथास्थिति, पलिस आयक्तु

ु को भेजी जायेगी।

887. बन्दी को पनःपकड़नाु .- जहां निकल भागने की घटना हई है और ु निकल भागने वाले बन्दी को पनु :पकड़ लिया गया है, तो निकटतम पलिसु थाना और क्षेत्र के पलिस ु अधीक्षक, पलिस आयक्तु

ु , तहसीलदार या उपखंड मजिस्ट्रेट और जिला मजिस्ट्रेट को तत्काल

, मल वारंट ू

सचना भेजी जायेगी और ू ऐसे भागे हएु बन्दी को जिसे पनः पकड़ लिया गया है

पर वापस जेल में भेजा जा सके गा।

888. निकल भागने और पनःपकड़े जाने की रिपोर्ट .- (1) निकल भागने और पनःपकड़े जाने की रिपोर्ट कारागार के उप महानिरीक्षक (रेंज) और कारागार निदेशालय के प्रमख को ु विनिर्दिष्ट प्ररूप में दी जायेगी, ऐसे निकल भागने के मामले में जो के वल लापरवाही से नहीं, बल्कि भवन में या कारागार नियमों में किसी दोष के कारण हआ है

ु , ऐसे दोष को हर मामले में इंगित किया जायेगा और जब कभी कोई बन्दी किसी जेल से निकल भागता है तो निकल भागने की रिपोर्ट की एक प्रति कें द्रीय जेल के अधीक्षक को भेजी जायेगी और ऐसी रिपोर्ट से दर्शित होगा कि निकल भागने के संबंध में किसी जेल अधिकारीभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 393 की किस सीमा तक गलती रही है और अपराधी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है और क्या सजा, यदि कोई हो, दी गयी है।

(2) निकल भागने और पनःपकड़े जाने की रिपोर्ट , सि(cid:217)धदोष करने वाला न्यायालय या विचारण न्यायालय को भी भेजी जायेगी।

889. निकल भागने से रोकने वाले बन्दियों को इनाम.- समस्त मामलों में, जिनमें बन्दी चाहे किसी भी साजिश या तैयारी के बारे में अधिकारियों को चेतावनी देकर, या निकल भागने की कोशिश कर रहे किसी बन्दी को पकड़कर, या किसी अन्य रीति से निकल भागने को रोकते हैं, उन्हें उचित परस्कार देने की दृष्टि से कारागार के उप महानिरी क्षक (रेंज) और महानिदेशक, कारागार के संज्ञान में लाया जायेगा और यदि बन्दी परिहार नियमों के अधीन आता है, तो उसे अतिरिक्त परिहार दिया जा सके गा या इसकी सिफारिश की जा सके गी।

कारागार निदेशालय का प्रमख ऐसे मामलों में परस्कारों की मंजरी के संबंध में

ू विनिश्चय कर सके गा।

890. अधीक्षक का जांच करना.- कारागार अधिकारियों पर हमले, बन्दियों के निकल भागने और विद्रोह जैसी घटनाओं की जांच अधीक्षक या ऐसे अन्य अधिकारी (cid:217)वारा की जायेगी जैसा कारागार निदेशालय के प्रमख निु देशित करे। अधीक्षक, कारागार निदेशालय के प्रमखु , उप महानिरीक्षक, कारागार (रेंज) और जिला और उप-जेलों के मामले में कें द्रीय जेल के अधीक्षक को पर्ण रिपोर्ट ू प्रस्तुत करेगा।

891. बन्दी के निकल भागने में सहायता करने के लिए दंड.- कारागार के प्रत्येक अधिकारी, जिसकी सहायता, मौनानकलता ु ू के कारण निकल भागना होता है, भारतीय दंड संहिता,1860 (1860 का कें द्रीय अधिनियम सं. 45) की धारा 222, 223 या 225क के अधीन अभियोजित किया जायेगा, जब तक कि प्रत्येक परिशमनकारी परिस्थितियां उपस्थित न हों या अधीक्षक दोषसि(िcid:217)ध उपाप्त करने के लिए साक्ष्यों को अपर्याप्त माने।

892. निकल भागने वाले बन्दी की विशिष्टियां इस्के प रजिस्टर और वत्तृ -पत्र में प्रविष्ट किया जाना.- (1) प्रत्येक बंदी, जो निकल भागा है और पनु :पकड़ा नहीं गया है, का नाम, रजिस्टर संख्यांक और भागने की तारीख को इस्के प रजिस्टर और बन्दी के वत्तृ -पत्र में प्रविष्ट किया जायेगा और जब किसी बन्दी को पनु :पकड़ा जाता है, तो पनु :पकड़े जाने की तारीख अंकित की जायेगी और बन्दी, जो निकल भागा है और दस वर्षों तक पकड़ा नहीं जाता है, की सपर्दगी का वारंट उपर्यक्तु

ु प्रभाव के पष्ठां

ृ कन के साथ और निकल भागने की तारीख दर्शित करते हए उस कालावधि के

ु पश्चात न्या् यालय को लौटा दिया जायेगा।

(2) प्रत्येक बन्दी जो निकल भागता है या निकल भागने का प्रयास करता है, अभियोजित किया जायेगा और किसी भी बहाने से इन अपराधों को कारागार नियमों का उल्लंघन नहीं माना जायेगा और जेल प्राधिकारियों से लिखित रिपोर्ट की प्राप्ति पर, पलिस ु थाने का प्रभारी अधिकारी नियमानसार कार्रवाई ु करेगा।

893. अभ्यास या परीक्षण अलार्म.- (1) समस्त जेल पदधारियों को उनके संबंधित कर्तव्यों के लिए प्रशिक्षित करने के लिए, जो उन्हें किसी विद्रोह के मामले में पालन करने394 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) होंगे, अधीक्षक (cid:217)वारा यथा नियत किसी भी दिन या रात्रि के समय के किसी भी घ(cid:214)टे में त्रैमासिक अलार्म परेड आयोजित की जायेगी।

(2) इस परेड के संपादन में उपर्यक्तु ब्यौरेवार प्रक्रिया का कठोरता से पालन किया जायेगा, सिवाय इसके कि वार्डर जीवित कारतसों के बजाय खाली फायर करू ता है।

(3) इन परेडों में, जेलर उस समय को अंकित करेगा जब अलार्म बजने के पश्चात प्रत्येक ्

जेल अधिकारी (cid:212)यटी के लिए तैयार ू रहता है; प्रत्येक परेड के आयोजित होने की तारीख और समय जेलर (cid:217)वारा अपनी रिपोर्ट बकु में अभिलिखित किया जायेगा; इसी प्रकार रिजर्व गार्ड को मख्य गेट पर आने

ु में लगा समय भी अभिलिखित किया जायेगा, उसके अधीनस्थों और अन्य वार्डरों को इक(cid:210)ठा होने और अपनी पोस्ट तक जाने में लगा समय, विलंब से आने वाले या अनपस्थित रहने वाले किसी भी व्यक्ति के नाम और परेड को पर्ण करने में

ू लगा समय या यदि परेड सही ढंग से नहीं की गयी थी, तो वह यह बतायेगा कि दोष क्या था और गलती किसकी थी; अभ्यास अलार्म परेड आयोजित करने के लिए स्थानीय पलिस ु थाने को ऐसी परेड से पर्व

ू सचित किया जायेगा।ू

(4) चाहे अलार्म सही है या गलत, प्रारंभिक सिग्नल से लेकर लापता बन्दी के लिए तलाश की समाप्ति तक या, यथास्थिति, उपद्रव के दमन तक, समस्त ब्यौरे दिये जायेंगे, पर्ण मौनू रखा जायेगा और कार्यवाही क्रमब(cid:217)ध और व्यवस्थित तरीके से की जायेगी, उप-जेलर और हेड वार्डर जिन्हें परुषों की अलगु -अलग पार्टियों का प्रभार लेना है, उन्हें पहले से ही अपने कर्तव्यों के बारे में निदेश दिया जायेगा, ताकि उन्हें प्रभारी अधिकारी के निदेशों का इंतजार किये बिना पता हो कि वास्तव में करना क्या है और जाना कहां है।

894. अलार्म का समापन.- अलार्म का समापन एक लंबे धमाके के साथ सीटी या

अधिकारियों सायरन बजाकर किया जायेगा, जिसके पश्चात परेड में भाग लेने वाले समस्त्

के लिए मख्य गेट पर लौटने , पंक्ति में आने और जेलर (cid:217)वारा समाप्त किये जाने के संके त के रूप में घंटियों पर कछ त्वरित प्रहार किु ये जायेंगे।

895. रात्रि के दौरान निकल भागना.- रात्रि में या समस्त दलों के जेल के भीतर होने के पश्चात ् निकल भागना या उपद्रव की स्थिति में अलार्म प्रारंभ करने की वही विधि अपनायी जायेगी अर्थात ् हवालात बन्द होने के पश्चात ् सीटी बजाना और गश्ती अधिकारी (cid:217)वारा मख्य गेट तक आवश्यक जानकारी पहंचाना

ु या उस समय से पर्व ू किसी कनिष्ठ अधिकारी (cid:217)वारा, मख्य गेट पर एक संतरी तैनात किया जायेगा और निकल भागने के प्रयासों को विफल करने के लिए जेल को बाहर से घेरने के लिए आवश्यक रक्षक दल भेजे जायेंगे, जैसा कि दिन के दौरान किया जाता है; तथापि, रिजर्व गार्ड को छोड़कर समस्त अधिकारी और वार्डर राइफलों के बजाय लाठियों से लैस होंगे और उन्हें प्रकाश वाली टार्च प्रदान की जायेंगी; यदि यह रिपोर्ट की जाती है कि कोई बन्दी निकल भागा है और ऐसा प्रतीत होता है कि वह अभी भी जेल के भीतर छु पा हआ है

ु , तो प्रकाश वाली टार्च वाले वार्डरों को बाड़े की दीवारों के भीतर अंतराल पर तैनात किया जायेगा (या यदि आवश्यक हो तो भरोसेमंद सि(cid:217)धदोष ओवरसियरों को बाहर निकाला जा सके गा और उसे इस कर्तव्य परभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 395 विस्तत ृ जानकारी दी जायेगी); शेष वार्डरों को दो दलों में विभाजित किया जायेगा, एक जेल के भीतर और दसरा जेल के बाहर तलाशी के लिए।

टिप्पण: उपयोग के लिए तैयार टार्चों को मख्य गेट पर एकु डिब्बे में रखा जाना चाहिए।

896. कारागार महानिरीक्षक को रिपोर्ट.- (1) यदि कोई बन्दी निकल भागा है, तो अधीक्षक या उसकी अनपस्थिति में

ु जेलर या डिप्टी जेलर तत्काल कारागार निदेशालय के प्रमखु , कारागार महानिरीक्षक या उप महानिरीक्षक, उसकी अनपस्थिति में मख्यालय ु

ु में उपलब्ध अगले अधिकारी को फोन पर सचित करे

ू गा साथ में निकल भागने के समय से 24 घंटे के भीतर-भीतर एक विस्तत रिपोर्ट दी जायेगी , इसमें वह समय और उन परिस्थितियों की जानकारी भी होगी जिसमें निकल भागने की घटना घटित हईु , किस पक्ष या पक्षों की उपेक्षा से यह हआु , क्या बन्दी को पनु :पकड़ लिया गया और यदि नहीं तो उसे पनःु पकड़ने के क्या उपाय किये गये; जब बन्दी को पनु :पकड़ लिया जाता है, तो एक और रिपोर्ट कारागार निदेशालय के प्रमखु , कारागार महानिरीक्षक या उप महानिरीक्षक (रेंज) को भेजी जायेगी।

(2) प्रत्येक बन्दी, जो निकल भागा है और पनु :पकड़ा नहीं गया है, का नाम, रजिस्टर नंबर और निकल भागने की तारीख, प्रत्येक वर्ष की वतर्मान रिहाई डायरी के कवर के भीतर प्रविष्ट की जायेगी; जब किसी बन्दी को पनु :पकड़ा जाता है, तो उसका नाम काट दिया जायेगा और पनु :पकड़े जाने की तारीख अंकित की जायेगी और इस माध्यम से प्रत्येक नया अधीक्षक और जेलर यह सनिश्चित कर ु सके गा कि निकल भागे हए ु बन्दियों में से कौन कितने समय से भागा हआ है।ु

897. विद्रोह पर अलार्म का बजाया जाना.- (1) जब कभी जेल में कोई विद्रोह होता है या/और जेल के भीतर आंदोलन होता है, तो संबंधित कारागार अधीक्षक या उप-अधीक्षक जिला पलिस को सचित करेंगे जो ु

ू कारागार के भीतर स्थिति को नियंत्रित करने और व्यवस्था

, कारागार की बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे, तथापि, जिला पलिस के आने तकु

सरक्षा करने वाले

ु कारागार प्रहरी और सरक्षाकाु र्मिक स्थिति को नियंत्रित करने और आगे होने वाली किन्हीं अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएंगे।

(2) किसी विद्रोह या उपद्रव की स्थिति में, घटना स्थल पर मौजद ू कारागार अधिकारी अपनी सीटी बजाकर अलार्म बजायेगा जिसे सनकर वार्डर ु स्टॉफ अपनी सीटी बजायेंगे; इसके पश्चात ् मख्य गेट पु र घंटा या सायरन बजाया जायेगा, कारागार के बाहर प्रत्येक कारागार अधिकारी तत्काल गार्ड रूम में जायेगा और स्वयं को एक डंडे से लैस करेगा; उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी (cid:217)वारा अधीक्षक और उप-अधीक्षक, जो प्रत्येक उपलब्ध व्यक्ति को बलाु येगा, के पास एक संदेशवाहक भेजा जायेगा।

898. अलार्म पर प्रतिक्रिया.- अलार्म की आवाज़ पर, रिज़र्व गार्ड स्वयं को सेवा हथियारों से सशस्त्र करेंगे और कारागार के बाहर सजग खड़े रहेंगे, मख्य ु गेट संतरी अन्य वार्डरों के साथ (cid:217)वारों के मध्य तैनात किया जायेगा और जब तक बन्दी वास्तव में मख्य गेट ु

की ओर नहीं बढ़ रहे हों, उपलब्ध बल का शेष भाग डंडों से लैस होकर कारागार में प्रवेश करेगा और उपद्रव स्थल की ओर बढ़ेगा; लेकिन यदि बन्दी मख्य गेटु की ओर बढ़ रहे हैं, तो396 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) इसका बचाव तब तक किया जायेगा जब तक कि गार्ड भीतर प्रवेश करने और बन्दियों को वापस खदेड़ने के लिए पर्याप्त सशक्त न हो जायें और सशस्त्र रिजर्व गार्ड कारागार में प्रवेश नहीं करेगा या उपद्रव के स्थान पर तब तक नहीं पहंचेगा जब तक कि कमान अधिकारी (cid:217)वारा उसे विशेष रूप से नहीं भेजा जाये।

899. अलार्म सनने पर सि(cid:217)धदोषों

ु का कर्तव्य.- जब अलार्म दिया जाये तो प्रत्येक सि(cid:217)धदोष का यह कर्तव्य होगा कि वह तत्काल पहले से नियत सरक्षाु स्थानों पर जायें, सामान्यत: निकटतम शयन बैरक में, जहां उन्हें कारागार के भीतर वार्डर (cid:217)वारा बंद कर दिया जायेगा और बन्दियों को पहले से चेतावनी दी जायेगी कि इस नियम की उपेक्षा करने पर उन्हें विद्रोह में सहभागी के रूप में माना जायेगा।

900. विद्रोह दमन की रीति.- (1) विद्रोह के स्थान पर पहंचने परु , गार्ड डंडे या आंस ू गैस, यदि उपलब्ध हो, का प्रयोग करके , जैसा कमान अधिकारी (cid:217)वारा विनिश्चित करे इसका दमन करने के लिए आगे बढ़ेगा; सर्वप्रथम कार्रवाई निकल भागने के किसी भी प्रयास को

् करने और किसी भी कारागार अधिकारी, जो रोकने, दंगाइयों को अन्य सि(cid:217)धदोषों से पथकृ

खतरे में हो, को बचाने के लिए निदेशित की जायेगी; यदि विद्रोह किसी कारागार अधिकारी पर हमले के साथ होता है, या निकल भागने का संयक्त प्रयास होता है , तो कमान अधिकारी बन्दियों को चेतावनी देगा कि यदि वे समर्पण नहीं करेंगे तो उन पर गोली चलायी जायेगी;

यदि परिस्थितियां अनमति दें

ु , तो यह चेतावनी तीन बार दोहराई जायेगी; यदि बन्दी समर्पण नहीं करें, या उपद्रव या विद्रोह को शांत नहीं किया जा सके , तो कमान अधिकारी रिजर्व गार्ड को बला सके

ु गा और इन बन्दियों पर गोलियां चला सके गा; जैसे ही बन्दी प्रतिरोध करना बंद कर दें या समर्पण कर दें, वह गोलीबारी बंद कर देगा; और समस्त परिस्थितियों में के वल आवश्यक न्यनतम बल का ही प्रयोग किया जायेगा।

(2) अधीक्षक के आगमन पर, उसके आदेश लिये जायेंगे और जेलर तथा उससे निम्न रैंक के समस्त अधिकारी उसके आदेशानसार कार्य करेंगे।ु

(3) कारागार पदधारी, कारागार के बाहर भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास तब तक नहीं करेंगे जब तक कि कारागार स्टाफ को न धमकाया जाये।

(4) घटनाओं जैसे कारागार पदधारियों पर हमले की जांच अधीक्षक, या ऐसे अन्य अधिकारी (cid:217)वारा की जायेगी जिसे महानिरीक्षक निदेशित करे।

तैनात 901. मख्य गेट की ु प्रतिरक्षा.- मख्य गेट संतरी और (cid:217)वारों के मध्यु

अतिरिक्त वार्डर मख्य गेट की ु प्रतिरक्षा करेंगे। यदि बन्दियों को किन्हीं अन्य साधनों से पीछे नहीं धके ला जा सके , तो उचित चेतावनी के पश्चात गोलीबारी का सहारा लिया जायेगा और बन्दियों को वापस खदेड़ते ही इसे रोक दिया जायेगा।

902. अप्राकतिक मत्य होने पर प्रक्रिया

ु .- (1) जब कभी किसी कारागार में अकस्मात ् ु होती है, तो अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी को तत्काल या हिंसात्मक मत्य या आत्महत्या ृ

सचना भेजी जायेगी और इन अधिकारियों (cid:217)वारा निरीक्षण के लिए शव को उसी स्थिति में अछता ू रखा जायेगा जिस स्थिति में वह पाया गया था।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 397

(2) यदि इस बात की संभावना हो कि व्यक्ति अभी भी जीवित है, तो बन्दी की प्राथमिक चिकित्सा, उपचार और चेतना प्राप्ति के लिए तत्काल उपाय किये जायेंगे।

(3) यदि यह अनिश्चित है कि मत्य हो गई है

ु , तो चेतना प्राप्ति के लिए तत्काल उपाय किये जायेंगे और इस प्रयोजन के लिए शरीर को, उसके पाये जाने पर अतिशीघ्र, उस स्थिति से हटाया जा सके गा, जिस स्थिति में वह पाया गया था।

(4) यदि किसी बन्दी को आत्महत्या करने के प्रयास में रस्सी से लटका हआ पाया ु जाये, और यह विश्वास करने का कारण हो कि वह अभी भी जीवित हो सकता है, तो दबाव कम करने के लिए शरीर को तत्काल उठाकर उतारा जायेगा और धीरे से जमीन पर रखा जायेगा और सहायता की प्रतीक्षा किये बिना, चेतना प्राप्ति के लिए समस्त उपाय किये जायेंगे, तथापि जो बिना किसी विलंब के किये जायेंगे और किसी मत्य के

ु समस्त मामलों में, मत्य ृ संबंधी अध्याय में अधिकथित प्रक्रियाओं का अनुपालन किया जाना चाहिए।

(5) अकस्मात ् या हिंसात्मक मृत्यु या किसी दर्घटना के कारण मत्य या किसी

ृ बन्दी की

ु-समीक्षा की कथित आत्महत्या के समस्त मामलों में, उचित अधिकारी (cid:217)वारा शव की मत्यृ

जायेगी, अन्वेषण करने वाला उचित अधिकारी उस जिले का मजिस्ट्रेट या उसके (cid:217)वारा प्रतिनियक्त मजिस्ट्रेटु होगा। घटना की त्वरित रिपोर्ट अधीक्षक (cid:217)वारा उचित अधिकारी को की जायेगी और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों की सावधानीपर्वक जांच की जायेगी और ू

अन्वेषण अधिकारी (cid:217)वारा बिना किसी विलंब के कारागार निदेशालय के प्रमख को पर्ण रिपोर्ट ु

सौंपी जायेगी।

(6) उपरोक्त रिपोर्ट में, परीक्षित साक्षियों (cid:217)वारा दिये गये साक्ष्यों के अतिरिक्त एक विशिष्ट और औपचारिक निष्कर्ष अंतर्विष्ट होगा और इसी प्रकार अकस्मात ् या हिंसात्मक मत्य के ृ प्रत्येक मामले की परिस्थितियों की एक पर्ण ू रिपोर्ट अधीक्षक (cid:217)वारा कारागार निदेशालय के प्रमख को प्रस्तत की जा

ु येगी।

(7) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के मार्गदर्शक सि(cid:217)धान्तों का जेलों में बन्दी की मत्य पर विस्तत रिपोर्ट प्रस्तत करने में

ु सर्वथा पालन किया जाना चाहिए।

903. आत्महत्या के लिए प्रयक्तु वस्तओं की अभिरक्षा

ु .- वर्क -शेड में प्रयक्तु चाक ू और औजार और नाई या दर्जी के उपस्कर वार्डर (cid:217)वारा प्रतिदिन गिने जायेंगे और ताले में रखे जायेंगे, कओं कीु रस्सियों को उचित रूप से सरक्षितु रखा जायेगा या ताले में रखा जायेगा, और कओं में

ु व्यक्तियों को गिरने या खद कोु उसमें गिराने से रोकने के लिये उन्हें सुरक्षित रखा जायेगा और इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि कारागार में ऐसी कोई भी चीज़ न रह जाये जिसका उपयोग आत्मघाती प्रयोजनों के लिए किया जा सके ।

904. प्रत्यक्षत: आत्महत्या की प्रवत्ति ृ रखने वाले बन्दियों के प्रति सावधानियां.- प्रत्यक्षत: आत्महत्या की प्रवत्ति ृ रखने वाले बन्दियों की सावधानीपर्वक ू निगरानी की जायेगी और उन्हें कोठरी में अके ला नहीं छोड़ा जायेगा।

398 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

905. विषैले पदार्थों की अभिरक्षा.- विषैली औषधियां और उनींदापन उत्प्रेरित करने वाली औषधियां, सर्जिकल उपकरण और अन्य समान वस्तुएं बन्दियों की पहंच के भीतर नहीं ु

छोड़ी जायेंगी; किसी भी विषैली दवा वाले प्रत्येक पात्र पर बड़े मद्रित अक्षरों में ु "विष" का लेबल लगाया जायेगा। इन समस्त को ताले और चाबी के अन्दर रखा जायेगा; और किसी भी परिस्थिति में ऐसी चाबी किसी बन्दी को नहीं सौंपी जायेगी।

906. डू बने से सावधानी.- (1) प्रत्येक कारागार के सरक्षा कक्ष में एक मजबत रस्सी और बेड़ियां रखी जायेंगी, ताकि कओं में होने वाली दर्घटनाओं की स्थिति में वे उपलब्ध रहें।

(2) समस्त वार्डर और सि(cid:217)धदोष ओवरसियर बन्दियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी देंगे कि मि(cid:210)टी खोदते और हटाते समय नियम से अधिक न काटें; कं कर खोदने, (cid:579)ट बनाने आदि के दौरान बनने वाले ग(cid:212)ढों के किनारों की ढलान ऐसे कोण पर होनी चाहिए कि मि(cid:210)टी कर्मकारों पर न गिरे। अधीक्षक और जेलर, ऐसे स्थानों का लगातार निरीक्षण करेंगे और इस नियम को सर्वथा से प्रवत्त ृ करेंगे। किसी भी बन्दी को भमिगत कएं खोदने या खतरनाक प्रकति के किसी भी कार्य में तब तक नियोजित नहीं किया जायेगा, जब तक कि वह स्वेच्छा से और कारागार निदेशालय के प्रमख की मंजरी के साथु

ू ऐसा न करे और जमीन से तीन फीट से अधिक ऊं चाई वाली समस्त सीढ़ियां और बरामदे पर्याप्त ऊं चाई की दीवारों या छज्जों से सरु क्षित किये जायेंगे।

907. आग से बचाव.- (1) किसी भी कार्यालय या स्टोर रूम में के रोसिन और गैस लाइट का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरती जायेगी और यहां तक कि इलेक्ट्र ◌िक लाइट के रखरखाव में भी, किसी भी रिसाव को तत्काल जेलर के ध्यान में लाया जायेगा और बिना किसी विलंब के ठीक किया जायेगा।

(2) कार्यालयों और भंडारों के समस्त प्रभारी स्टाफ रात्रि को कार्य समाप्त किये जाने से पर्व

ू कार्यालयों और भंडारगहोंृ का एक दौरा करेंगे और स्वयं का समाधान करेंगे कि सब कछ ु सरक्षित है।ु

(3) कार्यशालाओं में आग का उपयोग उचित रूप से निर्मित फायरप्लेस में किया जायेगा और वरिष्ठ अधिकारी, जो कारागार को ताला लगाता है, जाने से पर्व

ू स्वयं का समाधान करेगा कि आग ठीक से बझ गई है और इस संबंध में अनभाग के संबंधित वरिष्ठ तकनीकी कर्मचारी भी उत्तरदायी होंगे।

(4) रसोई में उपयोग में लिया गया कोई भी जलता हआ कोयलाु , लकड़ी या अन्य (cid:579)धन बाहर ले जाना अनज्ञात नहीं किया जायेगा

ु । रसोई का प्रभारी किसी भी उल्लंघन के लिए उत्तरदायी होगा और यदि रसोई में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस का उपयोग किया जाता है तो यह सनिश्चित किु या जायेगा कि गैस सिलेंडर को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस सिलेंडर के भंडारण के लिए सरक्षा नियमों के अनसार एक सरक्षित कमरे में

ु भंडारित किया जाये और किसी भी बन्दी की पहंच ु ऐसी जगह तक न हो। यदि कोई आग लग जाती है, तो आग पर्ण ू रूप से बझने तक किसी भी व्यक्ति ु को गैस कक्ष के पास जाने के लिए अनज्ञात नहीं किया ु

जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 399

(5) कारागार के समस्त हिस्सों में और विशेष रूप से, अग्निशमन अधिकारी के परामर्श से तय किये गये समस्त संवेदनशील स्थानों पर अग्नि हाइड्रेंट और अग्निशमन उपस्कर, रेत और पानी की बाल्टियां होंगी।

(6) कारागार में वि(cid:217)यत ु संस्थापनों का नियमित अंतरालों में निरीक्षण किया जायेगा।

(7) बाह्य शिविरों और खलीु संस्थाओं में सावधानियां जैसे पानी और अग्निशमन उपस्करों ू रखा जायेगा।

का वहद् आपर्त उपलब्धृ

(8) अधीक्षक, अग्नि सरक्षा और अपु ने कारागार में अपनायी जाने वाली ड्रिल पर अनदेशु तैयार करेगा, जिसमें आग लगने के अलार्म पर कारागार संस्थापन के समस्त सदस्यों के संबंधित कर्तव्यों को दर्शाया जायेगा और वह स्टाफ को छह मास में कम से कम एक बार फायर ड्रिल का अभ्यास करायेगा और इसमें अग्निशमन सरक्षा उपाय और निकासी तकनीकें सम्मिलित होंगी।

(9) आग लगने की दशा में, फायर ब्रिगेड को तत्काल सचना ू भेजी जायेगी, जब तक फायर ब्रिगेड से मदद प्राप्त हो, तब तक आग बझाने का हरु संभव प्रयास किया जायेगा और कारागार में दिन या रात्रि में आग लगने की दशा में, अलार्म बज जायेगा।

(10) यह सनिश्चित करने

ु के लिए कदम उठाये जायेंगे कि आग कारागार के अन्य हिस्सों तक न पहंचे

ु और बन्दियों और स्टाफ के सदस्यों का जीवन खतरे में न आ जाये।

(11) आग के कारण किसी बन्दी या (cid:212)यटी पर तैनात स्टाफ के किसी सदस्य

ू को चोट लगने की दशा में,-

(क) चोटिलों को चिकित्सीय परिचर्या दी जायेगी; और

(ख) तत्काल जांच की जायेगी और चोटिल बन्दी या स्टाफ के सदस्य और अन्य साक्ष्यों के बयान अभिलिखित किये जायेंगे।

908. महामारियां और उनके विरु(cid:217)ध बचाव.- (1) महामारियां, जो सम्भवत: कारागारों में होती हैं वे हैजा, आंत्र ज्वर, गैस्ट्रो-एंटेराइटिस, चेचक, खसरा, क(cid:214)ठमाला, इन्फ्लएंजाू , सेरेब्रोस्पाइनल मेनिनजाइटिस, निमोनिया, प्लेग, बेरीबेरी, स्कर्वी और महामारी ड्रॉप्सी हैं।

(2) जब किसी कारागार के आसपास कोई महामारी फै ली हो, तो स्टाफ और संक्रमित स्थानों के मध्य संव्यवहार को, जहां तक संभव हो, रोका जायेगा और यह विशेष ध्यान रखा जायेगा कि उसके फै लने से निपटने के लिए समस्त व्यवस्थाएं पर्ण हैं

ू ।

909. पथृ क्करण शेड में ले जाने के लिए हटाना.- हैजा या किसी अन्य संक्रामक बीमारी का कोई मामला या ऐसा मामला संदिग्ध होने पर, प्रत्येक कारागार में, कारागार के भीतर एक स्थायी पथृ क्करण शेड उपलब्ध करवाया जायेगा, रोगी को अस्पताल नहीं ले जाया जायेगा किन्तु तत्काल इन शेडों में से किसी एक में ले जाया जायेगा जबकि मामले को देखने वाले समस्त अर्दली और सफाईकर्मी सर्वथा दसरे शेड में ू एकल रखे जायेंगे, जब तक कि संक्रमण का खतरा पर्ण

ू खत्म न हो जाये, उन्हें अन्य बन्दियों के साथ संव्यवहार के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा

ु और यदि संभव हो तो बन्दियों को कारागार के बाहर एक संक्रामक रोग अस्पताल में ले जाया जायेगा।

400 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

910. संक्रमण के संपर्क में आने के पश्चात ् बन्दियों का उपचार.- वार्ड, जिसमें किसी संदिग्ध संक्रामक रोग का मामला उत्पन्न हआ होु , की सफाई में नियोजित समस्त बन्दियों को या जो रोगी के संपर्क में रहे हों, की अन्य बन्दियों के साथ घलने

ु -मिलने से रोकने के लिए एक अलग भवन में चिकित्सीय निगरानी के अधीन रखा जायेगा और इस बात का

् न और भोजन करें ।

ध्यान रखा जायेगा कि वे पथक रूप से स्नाृ

911. कारागार अधिकारियों के वस्त्र, यदि संक्रमित हों.- यदि यह मानने का कोई कारण है कि किसी वार्डर या अन्य कारागार अधिकारी के वस्त्र किसी हैजा स्राव से प्रदषित ू हो गये हैं, तो इसे उपयोग किये जाने से तत्काल हटा दिया जायेगा और कीटाणरहित किया ु

जायेगा।

912. संक्रमित बैरक का उपचार.- बैरक, जिसमें कोई मामला उत्पन्न हआ है

ु , तत्काल खाली कराया जायेगा और अंत:वासियों को एक साथ रखा जायेगा और अन्य बन्दियों के पास जाने के लिए अनज्ञात नहीं किया जायेगा ु और खाली किये गये बैरक को पर्ण ू रूप से कीटाणरहित किया जायेगा।ु

913. टीकाकरण या इनोक्यलेशनू .- जब कभी किसी महामारी का मामला उत्पन्न होता है, तो चिकित्सा अधिकारी तत्काल समस्त बन्दियों, कारागार कार्मिकों और उनके कटंब ु के सदस्यों के लिए टीकाकरण या, यथास्थिति, इनोक्यूलेशन की व्यवस्था करेगा।

914. रोगी की वास-सविधाु .- (1) अस्पताल के साथ-साथ प्रत्येक कोठरी और वार्ड, दोनों में अतिभीड़ से सर्वथा से बचा जायेगा और यदि महामारी गंभीर है तो महामारी के मामलों के उपचार के लिए पर्ण

ू अस्पताल का उपयोग करना वांछनीय हो सके गा, अन्य समस्त मामलों को एक अस्थायी अस्पताल, यदि कोई अन्य बेहतर स्थान उपलब्ध नहीं है तो किसी वार्ड या वर्क -शेड में स्थापित किया जा सके गा, के लिए हटाया जायेगा।

् किया जायेगा (2) उदरशल या साधारण दस्त के ू लघु मामलों का भी उपचार पथक रूप से

और अस्पताल में भर्ती नहीं किया जायेगा जब तक कि हैजा और दस्त के लक्षण समाप्त न हो जायें।

915. पेयजल का कीटाणशोधनु .- चिकित्सा अधिकारी की सिफ़ारिश पर पीने के पानी को अच्छी तरह से उबाला जायेगा, इस प्रयोजन के लिए कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वाराु विनिश्चित की गयी न्यनतम सीमा तकू , गैस या (cid:579)धन की लकड़ी उपलब्ध करवायी जायेगी और यह भी सनिश्चित ु किया जायेगा कि पानी उबालने के लिए पर्याप्त उपस्कर भी उपलब्ध करवाये गये हैं।

916. बन्दियों की निगरानी.- प्रारंभिक मामलों की पहचान करने के लिए बन्दियों की सामान्य स्थिति पर ध्यान रखा जायेगा, प्रारंभिक लक्षणों से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को तत्काल उपचार के लिए हटाया जायेगा, सि(cid:217)धदोष अधिकारियों से बीमारी के किसी भी लक्षण की तत्काल सचनाू देना अपेक्षित होगा और सामान्य से ज्यादा बार शौचालय जाने वाले बन्दी को निगरानी के अधीन रखा जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 401

917. अस्पताल के फर्श का उपचार.- पथृ क्करण अस्पताल के फर्श को 2% सैपोनिफाइड क्रे सोल या इज़ाल लोशन की पर्याप्त मात्रा से धोया जायेगा या उस पर छिड़का जायेगा।

918. मलत्याग का निस्तारण.- मलत्याग को एक बंद फिटिंग के ढक्कन वाले बर्तन में दो घंटे के लिए 4% क्रे सोल या इज़ाल लोशन के बराबर भाग के साथ रखा जायेगा और फिर मि(cid:210)टी में दबा दिया जायेगा और मलत्याग को चराू , धान की भसी या मि(cid:210)टी के तेल ू

के साथ भी जलाया जा सके गा।

919. बन्दियों की साफ-सफाई.- बन्दियों और उनके कपड़ों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जायेगा और धोने के लिए उपयोग किये जाने वाले पानी को कारागार की दीवारों के भीतर छोड़ना अनज्ञातु नहीं किया जायेगा।

920. कपड़ों और बिस्तरों का उपचार.- संक्रमित वार्ड के अंत:वासियों के वस्त्र और बिस्तर या तो उबलते पानी में 30 मिनट के लिए भिगोकर रखे जायेंगे या 20% कार्बोलिक या क्रे सोल लोशन में रखे जायेंगे और फिर सखा दिये ु जायेंगे और उनके स्नान के पश्चात ् वे उन्हें लौटा दिये जायेंगे और संक्रमित मरीजों (cid:217)वारा उपयोग लिये गये अस्पताल के वस्त्र और बिस्तर जला दिये जायेंगे।

921. संक्रमित शव का निस्तारण.- किसी व्यक्ति, जो संक्रामक बीमारी से मर गया है, के शरीर को पर्ण रूप से ू 2% कार्बोलिक या क्रे सोल लोशन से संतप्त ृ किसी चादर में लपेटा जायेगा और बिना किसी विलंब के दफनाया या अंतिम संस्कार कर दिया जायेगा।

922. महानिरीक्षक को रिपोर्ट.- (1) हैजा या अन्य किसी संक्रामक रोग के मामले की पहली घटना सामने आने पर तत्काल कारागार निदेशालय के प्रमख को ु दरभाू ष या ई-मेल (cid:217)वारा सचित ू किया जायेगा। इसके पश्चात ् मामले की परिस्थितियों और बीमारियों को बढ़ने से रोकने के लिए किये गये उपायों का कथन करने वाली एक लिखित रिपोर्ट उसी दिन दी जायेगी।

(2) इसी प्रकार अगले मामले भी कारागार महानिरीक्षक को दरभाू ष या ई-मेल पर रिपोर्ट किये जायेंगे। दसरे मामले के ू सामने आने पर अधीक्षक, एक रिपोर्ट प्रस्तत करेगा जिसमें ु वह यह कथन करेगा कि क्या वह कारागार परिसर के भीतर बन्दियों का बड़े पैमाने पर पथक्कृ रण करना प्रस्तावित करता है और यदि वह ऐसा करता है तो, वह इसके लिए जो उपाय कर रहा है उसे विस्तृत रूप में कथित करेगा और यदि वह पथक्कृ रण की योजना नहीं बना रहा तो, वह इसके लिए भी कारण बतायेगा।

923. महामारी के रूप में समझी जाने वाली बीमारी.- यदि हैजा का पहला मामला सामने आने के एक सप्ताह के भीतर तीन या अधिक मामले सामने आते हैं, और जेल चिकित्सा अधिकारी की राय लेने के पश्चात ् यह निर्णायात्मक निष्कर्ष होगा कि बीमारी ने महामारी का रूप धारण कर लिया है।

402 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

924. महामारियों पर सामान्यत: लाग ू होने वाले नियम.- (1) उपरोक्त नियम पथक्कृ रण से संबंधित हैं और अन्य बीमारियों, जैसे चेचक और प्लेग और किसी दीर्घकालिक अन्य परानी संक्रामक बीमारी , पर भी लाग ू होंगे।

(2) इन मामलों में, पथक्कृ रण की आवश्यकता बराबर महत्वपर्ण है और टाइफाइड ू ज्वर के मामले में जल आपर्त का परिवर्तन ू प्राथमिक महत्व होगा।

925. महामारी के दौरान दैनिक रिपोर्ट.- (1) जब कभी किसी कारागार में कोई महामारी फै लती है तो कारागार निदेशालय के प्रमख को एक दैनिक रिपोर्ट प्रस्तत की जायेगी और इस रिपोर्ट में चिकित्सा अधिकारी ऐसी महामारी बढ़ने, इसकी रोकथाम हेत उसके (cid:217)वारा ु

किये जा रहे अध्युपायों और ऐसी कोई भी जानकारी जो वह महत्वपर्ण

ू समझे को संक्षिप्त रूप से अंकित करेगा।

(2) इस रिपोर्ट की एक प्रति मख्य चिकित्सा अधिकारी ु और निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी जायेगी।

926. विशेष महामारी-विज्ञान जांच.- (1) निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के परामर्श से, कारागार निदेशालय का प्रमखु , जब भी सलाह हेत ऐसा करना वहु उचित समझे, मख्य ु चिकित्सा अधिकारी या चिकित्सा अधिकारी से महामारी-विज्ञान संबंधी की गयी जांच या रिपोर्ट मांग सके गा।

(2) ऐसी जांच रिपोर्ट की एक प्रति निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, राजस्थान सरकार को प्रस्तुत की जायेगी।

927. भख हड़ताल के मामलों में अपना

ू यी जाने वाली प्रक्रिया.- (1) भख हड़ताल पर ू

जाने वाले बन्दियों को चेतावनी दी जायेगी कि जब तक हड़ताल जारी रहेगी, किसी भी कथित शिकायत का निवारण नहीं किया जायेगा और वे कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का कें द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 52 के अधीन किसी कारागार दंड या अभियोजन के लिए दायी होंगे।

(2) अभियोजन के अतिरिक्त, निम्नलिखित कदम भी उठाये जा सकें गे, अर्थात ्:-

(क) भख हड़ताल जारी रहने तक किसी भी परिस्थिति में शिकायतों का कोई निवारण नहीं किया जायेगा; और

(ख) जेल प्राधिकारी को जेल दंड अधिरोपित करने का पर्ण विवेकाधिकार होगा :

परंतु यह कि चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा दी गयी यह राय कि उपचार बन्दी के स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में है, सम्यक सतर्क ता एवं ध्यान से ईमानदारी के साथ दी गयी हो।

(3) पर्याप्त चेतावनी के पश्चात ् और भोजन लेने से इनकार करने के कारण उन पर होने ू , और यदि कोई अन्य दंड उन्हें रोकने हेत प्रतीत न होु , तो उन वाले प्रतिकल प्रभाव से ू पर्व

पर कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का कें द्रीय अधिनियम सं. 9) की धारा 52 के अधीन अभियोजन चलाया जा सके गा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 403

(4) ऐसे बन्दी की मलाकातु और पत्रों के मामले में दी जाने वाली सामान्य रियायत, के वल विधिक वत्तिृ के सदस्यों तक सीमित की जायेगी।

(5) यदि सामहिक भख हड़ताल विद्रोह ू ू बन जाये तो बन्दियों को, जहां तक संभव हो, एक-

् जायेगा।

दसरे से और अन्य ू बन्दियों से पथक रखा ृ

(6) भख हड़ताल के दौरान ू बन्दियों की शिकायतों या परिवादों की उच्चतर प्राधिकारियों (cid:217)वारा परीक्षा की जानी चाहिए और उनका यथासम्भव तरंतु समाधान किया जाना चाहिए।

.- (1) कारागार 928. भख हड़ताल पर बैठे ू बन्दियों को बलपर्वक भोजन कराना

ु प्राधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे अपने प्रभार में के बन्दियों को स्वस्थ रखने और मत्यृ से उन्हें बचाने के लिए वह सब करें जो यक्तिु यक्तु हो।

ु कारित करने हेतु निरंतर भोजन लेने से इनकार (2) यदि कोई बन्दी स्वयं की संभावित मत्यृ

करता है, तो चिकित्सा अधिकारी निदेश कर सके गा कि बन्दी को जीवित रखने के लिए उसे बलपूर्वक भोजन कराया जाये और ऐसा बलपर्वक भोजन कराने

ू का प्रयास अनावश्यक हिंसा के साथ नहीं किया जायेगा।

(3) कितं ु ऐसी स्थिति के आने तक, चिकित्सा अधिकारी (cid:217)वारा अनमोदित भोजन भख ु

हड़ताल पर बैठे बन्दी के पास उसके उपभोग के लिए नियमित रूप से रखा जायेगा।

929. सरकार को दैनिक रिपोर्ट.- चिकित्सा अधिकारी, उस बन्दी जो भख हड़ताल पर ू

बैठा है, के स्वास्थ्य के बारे में अधीक्षक को दैनिक रिपोर्ट प्रस्तत करेगा। वह इसे ु कारागार निदेशालय के प्रमख को ु अग्रेषित करेगा। अधीक्षक इस संबंध में कलक्टर एवं संबंधित पलिस ु अधीक्षक को भी रिपोर्ट भेजेगा।

930. कारागार निदेशालय के प्रमख को अतिभीड़ ु की रिपोर्ट की जायेगी.- (1) यदि कारागार अतिभीड़ वाला हो जाये, तो अधीक्षक, कारागार निदेशालय के प्रमख को ु ऐसी परिस्थितियों के बारे में, जिससे अतिभीड़ हई है

् रिपोर्ट करके समस्त

ु , की सम्यक रूप से

बन्दियों को उचित रूप से समायोजित करने के लिए उपयक्तु कार्रवाई करेगा।

(2) अतिभीड़ से संबंधित कोई भी अन्य मामला सदैव कारागार निदेशालय के प्रमख को ु

आदेशों के लिए निदेशित किया जायेगा।

931. अतिभीड़ को दर करने

ू के उपाय.- (1) जैसे ही किसी कारागार या अस्पताल में उपलब्ध वास-सविधाु से अधिक बन्दी आ जायें तो, अधीक्षक, निदेशालय के प्रमख को एक ु

रिपोर्ट प्रस्तत करेगा जिसमें उन ु अध्युपायों का विवरण होगा जिसे वह अतिभीड़ को दर करने ू

के अध्युपाय अपनाने का प्रस्ताव करेगा, और ऐसी अस्थायी व्यवस्थाएं, जो वह सबसे उपयक्तु समझे, इस प्रयोजन के लिए तत्काल अपनायी जायेंगी।

(2) अधीक्षक, सि(cid:217)धदोषों को निकटतम जेलों में जहां कहीं भी संभव हो, किसी अस्थायी अवधि के लिए स्थानांतरित करने हेतु निदेशालय के प्रमख ु के पास जायेगा।

932. बन्दियों को शेड या तंब में रखनाू .- (1) वास-सविधाु से अधिक बन्दियों को, अस्थायी अध्युपाय को छोड़कर, कार्यशेड या बरामदे में नहीं रखा जायेगा, कितं ु कारागार के भीतर शेड या तंब ू में रखा जायेगा।

404 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(2) अधीक्षक, इस संबंध में उपगत व्यय के लिए, सर्वदा पर्व मंजरीू ू , जब कभी आवश्यक हो, अभिप्राप्त करेगा और प्रत्येक पहल में मितव्ययिताू सनिश्चित करे

ु गा।

933. भकं पू .- भकं प कीू दशा में निम्नलिखित कार्रवाई की जायेगी, अर्थात ्:-

(क) बन्दी को छिपने के लिए कहा जायेगा (घटने टेकें

ु और सिर को भजाओं

ु से ढकें );

(ख) पश्चात्वर्ती झटकों के कारण, बन्दियों को कछ मिनटों के लिए उसी स्थिति में बने रहने लिए कहा जायेगा;

(ग) बन्दियों को खिड़कियों, शीशों, चिमनियों, किताबों की ऊं ची अलमारियों, फर्नीचर, परानी और ऊं ची इमारतों , खंभों, पेड़ों और बिजली के तारों से कम से कम 14 फीट की दरी पर रखा जायेगा ;

(घ) बन्दियों को शांत और संयमित तरीके से एक खले स्थाु न की ओर चलने के लिए कहा जायेगा;

(ङ) निष्क्रमण टीम के अनदेशों ु पर निष्क्रमण और बचाव अध्युपाय किये जाने चाहिए और प्रभावित क्षेत्र में अनावश्यक अतिभीड़ से बचाना चाहिए।

934. भीड़ के हमलों से निपटने की प्रक्रिया.- (1) कारागार को तोड़ने, कारागार के सरक्षा घेरे को तोड़ने या उसकी दीवार

ु या गेट को तोड़ने के लिए कारागार के बाहर से, भीड़ या व्यक्तियों के किसी समह (cid:217)वारा किये गये हमले के मामले में , अधीक्षक, उसकी कमान के सशस्त्र गार्डों और अन्य कार्मिकों का उपयोग करके तत्काल कार्रवाई करेगा।

(2) निकटतम पलिस ु थाना, जिला मजिस्ट्रेट, उप महानिरीक्षक, कारागार (रेंज) और कारागार निदेशालय के प्रमख को तत्काल सचना दी जायेगी।

ू

(3) अधीक्षक, ऐसे हमलों से निपटने और निष्क्रिय करने के लिए यथोचित बल का उपयोग करने के लिए प्राधिकत है।ृ

935. बाढ़ से बचने की तैयारी और आपात प्रबंध.- (1) कारागार निदेशालय का प्रमख ु यह सनिश्चित करने के लिए ु उत्तरदायी होगा कि बाढ़ प्रवहण क्षेत्र में आने वाले कारागारों के लिए एक बाढ़ आपात योजना तैयार की जाये जिसमें सम्मिलित होने वाले समस्त पक्षों की भमिकाओं और ू उत्तरदायित्व, की जाने वाली कार्रवाइयों, किसी बाढ़ की घटना से पर्व

ू , उसके दौरान और उसके पश्चात ् की समन्वय व्यवस्था और संचार चैनलों की रूपरेखा होगी।

(2) इसके अतिरिक्त, जिला मजिस्ट्रेट स्थानीय बाढ़ चेतावनी प्रणाली विकसित करने के लिए उत्तरदायी होगा और बाढ़ प्रवहण क्षेत्र के अधीन आने वाला कारागार अधीक्षक अपने कारागारों में बाढ़ चेतावनी और अलर्ट प्रणाली विकसित करने के लिए उत्तरदायी होंगे।

936. अन्य आपात.- (1) अन्य आपात के मामलों में भी अपेक्षानसार ु उपयक्तु कार्रवाई की जायेगी।

(2) अधीक्षक, कारागार निदेशालय के प्रमख को परिस्थितियों की रिपोर्ट ु करेगा।

अध्याय 38

बन्दियों की शिक्षाभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 405 937. बन्दियों के लिए शिक्षा.- (1) बन्दियों के समग्र विकास के लिए शिक्षा महत्वपर्ण है और शिक्षा के माध्यम से उनके दृष्टिकोण , आदतों और जीवन के संपर्ण ू परिप्रेक्ष्य को बदला जा सकता है। बन्दियों की शिक्षा से समाज को लाभ होता है साथ ही यह उन्हें पनर्वास और आत्मनिर्भरता ु की ओर ले जाती है तथा अपराध की प्रवत्ति ृ को कम करती है, इसका मतलब होगा कम अपराध, कम पीड़ित, कम बन्दी, अधिक सामाजिक रूप से उत्पादक लोग और आपराधिक न्याय और कानन प्रवर्तन पर कम ू व्यय।

(2) शिक्षा सामंजस्यपर्ण होगी और मानसिकू के साथ शारीरिक सर्वांगीण विकास को सनिश्चित करेगीु , यह एक ऐसा औजार है जिसके (cid:217)वारा अंत:वासी के ज्ञान, चरित्र और व्यवहार को परिवर्तित किया जा सकता है और यह समाज में एक बन्दी को सामाजिक वातावरण और उसके अंतिम पनर्वास ु में समायोजन हेत सहायताु करता है।

(3) कारागार में जीवन अत्यंत नीरस, नियमित और अनशासिु त होता है; शैक्षिक क्रियाकलाप किसी बन्दी को अपने दिमाग से निराशाजनक विचारों को दर करने का अवसर प्रदान करती हैं जिससे आराम और आनन्द मिलता है; हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा कि शिक्षा और अन्य गतिविधियों के माध्यम से उनको परिवर्तित किये जाने का प्रयास किये बिना दीवारों के पीछे परिरु(cid:217)ध रखना एक महंगी मर्खता ू होगी।

938. उ(cid:217)देश्य.- (1) कारागारों में शैक्षिक कार्यक्रमों के पीछे का उ(cid:217)देश्य बन्दियों की ऊर्जा को रचनात्मक और सजृ नात्मक कार्यों में लगाना, उनमें आत्मविश्वास की भावना पैदा करना, उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व और चेतना विकसित करना, उनमें समदाय में ु

समायोजन के लिए आवश्यक आदतों और दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, उनमें आपराधिक जीवन जीने की निरर्थकता के बारे में जागरूकता का सजन करना औरृ उन्हें नैतिक, मानसिक और सामाजिक रूप से ऊपर उठाना होना चाहिए।

(2) कारागार में एक व्यापक शैक्षिक कार्यक्रम का लक्ष्य होगा,-

(क) निरक्षर अंत:वासियों को कम से कम एक निश्चित न्यनतम स्तर की शिक्षा ू

प्राप्त करने के अवसर प्रदान करना,

(ख) साक्षर अंत:वासियों को उनके शैक्षिक मानकों को आगे बढ़ाने के लिए सविधाु ओं का विस्तार करना,

(ग) एक नागरिक के कर्तव्यों और दायित्वों की बेहतर समझ विकसित करना, (घ) समाज के प्रति अंत:वासियों के दृष्टिकोण में सधार ु लाना और अच्छे नागरिकों के रूप में जीने की इच्छा को बढ़ावा देना,

(ङ) अच्छी सामाजिक और नैतिक आदतों और दृष्टिकोणों के विकास में सहायता करना जिससे अंत:वासी, समदाय में अपने जीवन को उचित रूप से समायोजित कर सकें ,

(च) सामाजिक जीवन में व्यक्तिगत और समह मार्गदर्शन के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और सामाजिक समायोजन की क्षमता में सधार करने में उनकी ु

सहायता करना,406 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (छ) एक ऐसा दृष्टिकोण विकसित करना जो अंत:वासियों के सामने आपराधिक जीवन शैली की निरर्थकता को स्पष्ट कर दे, उन्हें कानन का ू पालन करने वाले जीवन के फायदों के बारे में जागरूक करे,

(ज) आत्म सधार की दिशा में निरंतर रुचि और प्रयास को प्रोत्साहित करना , और (झ) सामाजिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी और दायित्वों की भावना विकसित करना।

939. बन्दियों के लिए शैक्षिक योजना.- बन्दियों की शिक्षा की योजना निम्नानसारु होगी:-

(क) प्रत्येक बन्दी को शिक्षा का एक कार्यक्रम दिया जायेगा जो उसके समाजीकरण और पनर्वास की प्रक्रिया में ु सहायता करेगा और इन उ(cid:217)देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक कारागार में पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित शैक्षिक स्टाफ और न्यनतम सविधाएं ू

ु जैसे कक्षा कक्ष और पस्तकालय ु उपलब्ध करवाये जायेंगे;

(ख) निरक्षर किशोरों और वयस्क बन्दियों की शिक्षा अनिवार्य होगी और सधारात्मक सेवाएं शैक्षिु क कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देंगी;

(ग) अंत:वासियों के बौ(िcid:217)धक स्तर और व्यक्तिगत रुचियों में व्यापक भिन्नता के कारण यह आवश्यक है कि बड़े समहों की आवश्यकताओं के अनरूप विविध शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किये जायें;

(घ) शैक्षिक कार्यक्रम ऐसे विषय अंतर्विष्ट करेंगे जो अंत:वासियों को सामाजिक समहों के

ू भावात्मक सदस्यों के रूप में विकसित करने में सहायता प्रदान करें और कार्यक्रमों को अंत:वासियों की ओर से अंतर्दृष्टि विकसित करने में भी सहायता करनी चाहिए;

(ङ) किसी संस्था में शैक्षिक कार्यक्रमों की प्रकति ृ अंत:वासियों की आबादी के आकार और प्रकार से संबंधित होगी और इन कार्यक्रमों और शैक्षिक क्रियाकलापों के लिए निश्चित समय संस्था के समग्र कार्यक्रम के साथ-साथ मिलकर विकसित किया जायेगा;

(च) यथासाध्य, बन्दियों की शिक्षा को राज्य की शैक्षिक प्रणाली के साथ एकीकत ृ किया जायेगा ताकि उनकी रिहाई के पश्चात वे बिना किसी कठिनाई के ्

अपनी शिक्षा जारी रख सकें और ये कार्यक्रम पश्चात्वर्ती देखरेख कार्यक्रमों से भी संबंधित होने चाहिएं;

(छ) शिक्षा नीति ऐसी रीति से तैयार की जायेगी जो सामाजिक परिवेश के अनकल ु हो, जिससे समाज में किसी बन्दी का पनर्वास हो सके ु और शिक्षा को तीन स्तरों पर व्यवस्थित किया जायेगा;

(i) प्रारंभिक और निरक्षर अंत:वासियों के लिए;

(ii) मध्यवर्तियों के लिए;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 407

(iii)अभिवर्धित शिक्षा के लिए; और

(iv) व्यावसायिक शिक्षा के लिए।

(ज) शैक्षिक कार्मिकों को विशेष प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रमों के माध्यम से सधारात्मक ु

नीतियों, कार्यक्रमों और प(cid:217)धतियों के लिए यथासंभव उन्मख किया जायेगाु ;

और

(झ) गैर-सरकारी संगठन शैक्षिक कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर सम्मिलित होंगे।

940. शैक्षिक कार्यक्रम की प्रकतिृ .- शैक्षिक कार्यक्रम में निम्नलिखित समाविष्ट होंगे,- (क) शारीरिक और स्वास्थ्य शिक्षा;

(ख) शैक्षणिक शिक्षा;

(ग) सामाजिक शिक्षा;

(घ) व्यावसायिक शिक्षा;

(ङ) नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा; और

(च) सांस्कतिक शिक्षा।ृ

941. अंत:वासियों के लिए शैक्षिक नीति.- (1) कारागार में प्रवेश करने पर बन्दियों

ू , आगे अध्यापन करने की उनकी अभिक्षमता, का प्रारंभिक वर्गीकरण उनकी शैक्षिक पष्ठभमिृ

उनकी सामाजिक पष्ठभमि और व्यावसायिक शिक्षा के आधार पर किया जायेगा।

(2) शैक्षणिक शिक्षा की नीति का लक्ष्य होगा,-

(क) प्रत्येक निरक्षर बन्दी को साक्षर बनाना; और

(ख) बन्दियों की शैक्षिक अर्हताएं विकसित करना।

(3) यदि कोई बन्दी, जो कारावास से पहले पढ़ाई कर रहा था या रही थी, अपनी पढ़ाई जारी रखने और किसी बोर्ड या विश्ववि(cid:217)यालय या संस्थान की परीक्षा में उपस्थित होने का आशय व्यक्त करता है या करती है, तो उसे इसके लिए सम्यक सविधाएं दी जायेंगी और उसे बाहर से अपने मित्रों और नातेदारों से पस्तु कें और लेखन सामग्री प्राप्त करने और जेल अभिरक्षा में रखी अपनी निजी नकदी से या सरकारी व्यय पर पस्तु कें और ऐसी सामग्री खरीदने की अनमति दी जायेगी।ु

(4) ऐसी सविधाएं उस ु बन्दी को भी दी जायेंगी जिसने कारावास से पर्व

ू अपनी पढ़ाई छोड़ दी है, किन्तु किसी विश्ववि(cid:217)यालय या अन्य काननी ू निकाय या किसी मान्यताप्राप्त संस्था (cid:217)वारा आयोजित परीक्षा में उपस्थित होने की दृष्टि से इसे आगे बढ़ाने का आशय व्यक्त करता है या करती है।

942. बन्दियों का वर्गीकरण.- (1) कारागार में प्रवेश के समय बन्दियों को उनकी शैक्षणिक या शैक्षिक अर्हता और आगे सीखने की अभिवत्ति ृ के आधार पर वर्गीकत किया ृ

जायेगा और प्रत्येक बन्दी के लिए, उनकी अर्हता के अनसार व्यवस्थित शैक्षिक कक्षाओं में दिन में कम से कम दो घंटे, अधिमानतः सबह के समयु , बैठना अनिवार्य होगा।

(2) वर्गीकरण समिति और शैक्षिक कार्मिक मिलकर प्रत्येक अंत:वासी के लिए शैक्षणिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और कार्य के लिए दिये जाने वाले समय की मात्रा विनिश्चित408 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) करेंगे और चंकि शैक्षिक स्तरू , ब(िcid:217)धु मत्ता और रुचियों में भिन्नताएं होती हैं इसलिए बन्दियों

ये जायेंगे।

के विभिन्न समहों के लिए विविध शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किू

(3) शैक्षिक कार्यक्रमों को चलाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (cid:217)वारा दी जाने वाली समान सविधाओं के अलावा , नियमित रूप से नियोजित शिक्षकों की सेवा के अतिरिक्त, शिक्षित बन्दियों की सहायता का उदारतापर्वक उपयोग किया जायेगा। उन

ू बन्दियों को विशेष छट दी ू जा सके गी जो शिक्षण कार्यक्रमों में संलिप्त हैं।

943. भाषा कक्षाएं.– (1) भाषा कक्षाओं को प्रोत्साहित किया जायेगा। ये कक्षाएं शिक्षित बन्दियों, नियमित शिक्षकों और गैर-सरकारी संगठनों (cid:217)वारा चलायी जा सकें गी और

ु बन्दियों के मध्य संबंधों में इससे कारागार प्रशासन को विभिन्न संस्कतियों और समदायों के ृ

सामंजस्य बनाने में सहायता मिलेगी और कारगार के अनशासन में सधारु

ु आयेगा।

(2) बन्दियों को पर्याप्त रूप से जागरूक रखने के लिए कारागार में चलाये जा रहे विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों को सचीब(cid:217)ध करते हए एक पस्तिका तैयार की जानी चाहिए।

944. किशोर अपराधियों के लिए वि(cid:217)यालय.- (1) प्रत्येक कारागार में एक नियमित वि(cid:217)यालय होगा जहां किशोर अपराधी नियमित कक्षाओं में पारियों में उपस्थित हो सकें गे।

(2) यह वि(cid:217)यालय राज्य के शिक्षा विभाग (cid:217)वारा चलाये जा रहे किसी भी सरकारी वि(cid:217)यालय की एक शाखा होगी, जिसमें शिक्षा विभाग किशोर अपराधियों को पढ़ाने के लिए अध्यापक, उपस्कर और सामग्री उपलब्ध करवायेगा।

(3) वि(cid:217)यालय प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा उपलब्ध करवायेगा, प्रत्येक किशोर के लिए कक्षाओं में उपस्थित होना अनिवार्य होगा और कारागार में पदस्थापित स्टाफ को वि(cid:217)यालय जाने में बन्दियों की रुचि बनाये रखने के लिए विशेष प्रोत्साहन संदत्त किया जायेगा।

(4) विभिन्न परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने वाले बन्दियों को नियमित वि(cid:217)यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के समान प्रमाणपत्र दिये जायेंगे और यह सनिश्चित करने का ध्यान ु रखा जायेगा कि ऐसे प्रमाणपत्रों पर किशोर के कारावास का कोई उल्लेख न हो।

945. अल्पावधि बन्दियों के लिए शिक्षा.- (1) विचाराधीन बन्दियों और अल्पावधि कारावास से दंडित बन्दियों के लिए, शैक्षिक कक्षाएं उन यार्डों या अहातों में आयोजित की जा सकें गी जहां ऐसे बन्दियों को रखा जाता हो।

(2) इससे उन बन्दियों के लिए, जिनके लिए लघु, मध्यम या दीर्घकालिक आधार पर शैक्षिक कार्यक्रम लेना अपेक्षित है, नियमित कक्षाओं के बेहतर संचालन सविधा ु प्राप्त होगी।

946. कार्मिक और उपस्कर.- बन्दियों के शैक्षिक कार्यक्रम के लिए निम्नलिखित कार्मिक और उपस्कर उपलब्ध करवाये जायेंगे, अर्थात ्:-

(i) कारागारों में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम चलाने और मार्गदर्शन के लिए शिक्षक उपलब्ध कराये जाने चाहिए। अंत:वासी जो शिक्षित हैं और जिनका आचरण अच्छा रहा है, उन्हें दसरों को शिक्षा ू देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिएभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 409 और ये प्रशिक्षित अंत:वासी विविध शैक्षिक कार्यक्रमों के आयोजन में नियमित अध्यापकों की सहायता करेंगे;

(ii) शैक्षिक कार्यक्रमों को चलाने में सेवानिवत्त ृ अध्यापकों या गैर-सरकारी संगठनों की सेवाओं का भी उपयोग किया जायेगा;

(iii) शिक्षा के लिए आवश्यक वस्तुएं जैसे किताबें, स्टेशनरी, लेखन सामग्री, फर्नीचर और अन्य स्टेशनरी मदें, सरकारी खर्चे पर उपलब्ध करवायी जायेंगी;

(iv) प्रत्येक कारागार में राष्ट्रीय खलाु वि(cid:217)यालय या इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खलाु विश्ववि(cid:217)यालय के अध्ययन या परीक्षा कें द्र स्थापित किये जायेंगे और शैक्षिक कार्मिकों की संख्या अंत:वासियों की आबादी और आयोजित किये जाने वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के अनसार ु नियत की जायेगी;

(v) शिक्षित बन्दियों, जो शैक्षिक कार्यक्रमों के संचालन में कारागार प्रशासन की सहायता करते हैं, को कारागार प्राधिकारियों (cid:217)वारा मजदरीू , विशेष छट या ू मानदेय दिया जायेगा;

(vi) श्रव्य-दृश्य उपस्करों का शैक्षिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जायेगा; और (vii) बन्दियों के रहने की व्यवस्था भी उनकी शैक्षिक अपेक्षाओं के अनसार की जा ु

सके गी जिससे बैरक या कोठरी में उपयक्त वातावरण ु सजित कियाृ जा सके ताकि वे अपने अध्यापकों (cid:217)वारा दिये गये कार्यों को पर्ण करने में समू र्थ हो सकें ।

947. पा(cid:211)यविवरण.- पा(cid:211)यविवरण प्रत्येक बन्दी समह की आवश्यकताओं के अनसार तैयार किया जायेगा। यह राज्य में अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित शैक्षिक कार्यक्रमों के अनरूप होगा और इसे इस ु प्रकार से योजनाब(cid:217)ध किया जायेगा कि बन्दियों के दंड की अवधि के साथ समकालिक हो; और कारागार के कल कार्यक्रम ु के अनसारु शैक्षिक कार्यक्रम और समय सारणी तैयार की जायेगी।

948. परीक्षण और परीक्षाएं.- बन्दियों को उनकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित रियायतें दी जायेंगी:-

(i) प्रत्येक शैक्षिक परियोजना के अंत में, बन्दियों को परीक्षण और परीक्षाएं देनी होंगी और ये परीक्षण या परीक्षाएं कारागार के भीतर शिक्षा विभाग या राष्ट्रीय खलाु वि(cid:217)यालय या इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खला ु विश्ववि(cid:217)यालय (cid:217)वारा आयोजित की जायेंगी; और

(ii) विभिन्न परीक्षाओं में उपस्थित होने वाले छात्रों से परीक्षा शल्क सहित कोईु भी शल्क नहीं लिया जायेगा। मेधावी छात्रों के मामले , छात्रवत्ति प्रदान करने के ृ

लिए शिक्षा विभाग और अन्य एजेंसियों को, सिफारिश किये जायेंगे।

949. संपर्क .- संस्था को शैक्षिक सामग्री और अन्य सहायता अभिप्राप्त करने के लिए शिक्षा विभाग या राष्ट्रीय खलाु वि(cid:217)यालय या इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खलाु विश्ववि(cid:217)यालय और अन्य अनमोदित शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्क स्थापित करना चाहिए।

410 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

950. पस्तकालयु .- कारागार पस्तकालय में निम्नलिखित सविधाएं

ु उपलब्ध करवायी जायेंगी, अर्थात ्:-

(क) पस्तकालय में पस्तकों को

ु , अंत:वासियों के विभिन्न शैक्षिक मानकों, बौ(िcid:217)धक आवश्यकताओं के समाधान, और ज्ञान के विकास की आवश्यकताओं को पूर्ण करना चाहिए;

(ख) कारागार पस्तकालय पस्तकों

ु , पत्रिकाओं और समाचारपत्रों से उचित रूप से ससज्जित होगा। ु ये बन्दियों को जारी किये जायेंगे और बन्दियों को पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा;

(ग) एक शिक्षित सि(cid:217)धदोष बन्दी पस्तकालय चलाने के लिए पस्तकों और अन्य पठन सामग्री के प्रबंध के लिए नियक्त किया जा सके

ु गा, जेल अध्यापक बन्दियों की जरूरतों का समाधान करने के लिए विभिन्न विषयों पर पस्तकों ु की व्यवस्था करेगा और उपलब्ध करायेगा और जेल अध्यापक, बन्दियों (cid:217)वारा उपयोग के लिए और कारागार अधीक्षक की जानकारी के लिए, विषय या शीर्षक के अनसार पस्तकालय में उपलब्ध पस्तकों

ु और सामयिकियों के ब्यौरे रखेगा;

(घ) गैर-सरकारी संगठनों (cid:217)वारा पस्तकों के ु संदान को प्रोत्साहित और स्वागत किया जाना चाहिए और सार्वजनिक तथा सरकारी वि(cid:217)यालय को बन्दियों के लिए कारागार के भीतर चलाये जा रहे शैक्षिक कार्यक्रमों को अंगीकत करने

ृ के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए; और

(ङ) कारागार कल्याण अधिकारी, कारागार पस्तकालय के लिए पस्तकों के संग्रह

ु ण के लिए पहल करेगा।

951. सामाजिक, नैतिक, सांस्कतिक और आध्यात्मिक शिक्षा .– बन्दियों के मध्य अतीत के बरे अनभवों की स्मति को मिटाने के लिए ध्यान चिकित्सा का उपयोग किया जायेगा।

952. कारागार प्रकाशन.- बन्दियों और स्टाफ के क्रियाकलापों के लिए पत्रिका का वार्षिक प्रकाशन होगा और प्रकाशन को उपलब्ध सविधाओं के अनसार ु

ु मद्रितु किया जा सके गा।

953. जवाबदेही.- यह कारागार अधीक्षक और कल्याण अधिकारी के प्राथमिक उत्तरदायित्वों में से एक होगा कि शिक्षा के कार्यक्रम को उसकी समुचित भावना से कार्यान्वित किया जाये और कार्यक्रम की सफलता या विफलता और प्रत्येक संस्था में शैक्षिक क्रियाकलापों का विस्तार प्रमख कारकोंु में से एक होगा, जिस पर इन अधिकारियों के प्रदर्शन का मल्यांकन किया जा

ू येगा।

अध्याय 39

कृ षि और बागवानी, डेरी

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 411

954. उ(cid:217)यान.- (1) यदि संभव हो, तो अपेक्षित सब्जियों और मसालों की आपर्ति

ू के लिए प्रत्येक जेल में पर्याप्त आकार का सीमा दीवार से घिरा हआु एक उ(cid:217)यान बनाया जा सके गा।

(2) जेलर इस बात के लिए उत्तरदायी होगा कि उ(cid:217)यान में हर मौसम में जेल के उपयोग के लिए अच्छी रसीली सब्जियां, मसाले और प्रतिस्कर्वी पर्याप्त मात्रा में अंतर्विष्ट हों, और खेती के लिए उपलब्ध जेल की दीवारों के बाहर की संपर्ण

ू भमि पर सर्वोत्तम लाभ के लिए खेती की जाये।

(3) किसी भी वार्डर या अन्य अधीनस्थ अधिकारी को उ(cid:217)यान में जाने की अनमतिु , वहां पर (cid:212)यटी के समय ू के अलावा, नहीं दी जायेगी।

(4) अधीक्षक और जेलर, जेल उ(cid:217)यान का दौरा और पर्यवेक्षण करेंगे और देखेंगे कि वर्षपर्यन्त सम्यक् मौसम में ताजी सब्जियों, मसालों और प्रतिस्कर्वी फलों के प्रचर ु आपर्त ू के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गयी है और चिकित्सा अधिकारी दर्बलु या स्वास्थ्य लाभ कर रहे बन्दियों को उ(cid:217)यान में काम करने के लिए सिफारिश कर सके गा।

(5) प्रदर्शन कार्य के प्रभारी कषिृ क ओवरसीयर, सलाह के दृष्टिकोण से नियमित रूप से जेल उ(cid:217)यान का निरीक्षण करेंगे, जेल विभाग को किये जाने वाले सधारों पर सलाह देंगे ; यदि आवश्यक हो, तो जेल मैदानों में प्रदर्शन कार्य प्रारंभ कर सकते हैं और कषि विभाग काृ एक वरिष्ठ अधिकारी, अपने दौरों के दौरान अवसर मिलने पर समस्त जिलों में जेल उ(cid:217)यानों का निरीक्षण करेगा।

(6) नींब के फलो(cid:217)यान के

ू अतिरिक्त, सड़कों के किनारे के साथ-साथ जेल भमि की सीमाओं ू

और अन्य उपलब्ध स्थानों पर, इमली (टैमारिंडस इंडिका), बेल (एगल मामलोर्से ), अमराली (स्पोंडियास मैंगीफे रा) और आम (मैंगीफे रा इंडिका) के पेड़ लगाकर प्रतिस्कर्वी फलों का अच्छा आपर्त

ू उपलब्ध करवाया जायेगा, ताकि खेती में यथासंभव हस्तक्षेप से विरत रहा जा सके और ऐसे पेड़ यदि जेल की दीवारों के भीतर उपलब्ध स्थानों में उगाये जाते हैं तो सखद ु छाया दें, परंतु उनसे वार्डों या कार्यशालाओं के संवातन में हस्तक्षेप होने पर अनमति नहीं ु दी जानी चाहिए। रोसेले (हिबिस्कस सबदरिफा) की भी खेती की जायेगी और जेलर इन पेड़ों की पर्याप्त संख्या के लिए और यह देखने के लिए उत्तरद◌ायी होगा कि उन्हें स्वस्थ स्थिति में रखा गया है।

(7) जेल के उ(cid:217)यान को साफ-सथराु , खरपतवार और झाड़-झंझाड़ से मक्त रखा जाु येगा और डेरी के गोबर का उपयोग उ(cid:217)यानों में खाद के रूप में किया जायेगा और बरसात के मौसम में रसीले खरपतवारों को मि(cid:210)टी में गाड़ दिया जायेगा, लेकिन रेशेदार और लकड़ी वाली सब्जियों के अवशिष्ट को, जहां तक संभव हो, जेल में खाद के ग(cid:212)ढों में डाल दिया जायेगा और सड़ने के लिए तब तक छोड़ दिया जायेगा, जब तक कि वे भमि में खाद के लिए उपयक्त स्थिति में न आ जायें।

412 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(8) इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि उ(cid:217)यानों में जल-आपर्त

ू के समस्त उपलब्ध स्रोतों का यथासंभव उपयोग किया जाये और सिंचाई चैनल पक्की चिनाई वाले या गारे में पकी हुई मि(cid:210)टी के होंगे और रिसाव की तरंत मरम्मत की जानी चाहिु ए।

(9) जेल की सब्जियों, मसालों और प्रतिस्कर्वी के उत्पादन के लिए उ(cid:217)यान में नियोजित बन्दियों की संख्या, सामान्यतः जेल में परिरु(cid:217)ध बन्दियों की संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, उ(cid:217)यान में नियोजित बन्दियों का चयन अध्याय "सरक्षा और ु

सरक्षित अभिरक्षाु " में उल्लिखित नियमों के अनसार किया जाु येगा, और उनकी सरक्षा में ु

विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

(10) उ(cid:217)यान का प्रभारी वार्डर, यदि संभव हो, एक ऐसा व्यक्ति होगा जो बागवानी को अच्छी तरह से समझता है, उसे रात्रि की (cid:212)यटी से छट दी जा

ू येगी और जब ऐसा होता है तो उसके पास परे दिन के लिए उ(cid:217)यान के दल का प्र

ू भार होगा, और उसे रात्रि में उसके लिए उ(cid:217)यान में उपलब्ध झोपड़ी में सोना होगा।

(11) इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि जेल के उ(cid:217)यान में उत्पादित सब्जियां जेल की दैनिक आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त हों और यदि आपर्त

ू में कोई कमी हो तो सब्जियों को आपर्तकर्ता याू स्थानीय बाजार से क्रय किया जाना अपेक्षित होगा।

(12) जेल उ(cid:217)यान का उ(cid:217)देश्य मख्य रूप से ु बन्दियों के लिए सब्जियां उगाना होगा और के वल ऐसे बीज अभिप्राप्त किये जायेंगे जो जेल के प्रयोजनों के लिए सर्वाधिक उपयोगी हों।

(13) जेलर इस बात के लिए उत्तरदायी होंगे कि, जेल भमि पर उगाू यी गयी फसलें उचित समय पर काटी जायें और उन्हें काटने तथा भंडार में लाने के मध्य कोई अनावश्यक देरी न हो। कीटों (cid:217)वारा हानि के प्रति समुचित सावधानियां बरती गयी हैं, उप-उत्पादों को के वल राजकीय प्रयोजनों के लिए उचित रूप से निपटाया गया है, जेल खातों में प्रत्येक चीज का मल्य ू सम्यक रूप से प्रविष्ट् किया गया है, और जेल भमिू के प्रत्येक उत्पाद का उपयोग करके अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के हर अवसर का लाभ उठाया गया है, और चारे के लिए उपयक्त समस्तु उत्पादों को डेरी में उपभोग के लिए विनियोजित किया जाना चाहिए।

(14) अधिशेष सब्जियां, यदि कोई हों, जेल की आवश्यकता को पूर्ण करने के पश्चात ्, उन्हें, प्रचलित बाजार दर पर जेल स्टाफ को और स्थानीय बाजार में विक्रय कर निस्तारित की जा सकें गी।

(15) जेल भमि पर ू वि(cid:217)यमान समस्त स्थायी पेड़ सरकार की संपत्ति हैं और कारागार निदेशालय के प्रमख के नियंत्रण में हैं और इस ु प्रयोजन के लिए संधारित रजिस्टर में प्रविष्ट किये जायेंगे।

(16) जेल के उ(cid:217)यान से प्रतिदिन अभिप्राप्त होने वाली सब्जी की मात्रा, बन्दियों के आहार के लिए जारी की गयी मात्रा और विक्रय की गयी मात्रा को उसके मल्य के साथ ू प्रदर्शित करते हएु , एक सब्जी रजिस्टर संधारित किया जायेगा, यह रजिस्टर प्रतिदिन निरीक्षण के लिए अधीक्षक के समक्ष रखा जायेगा और एक रजिस्टर में अनाज और दालों की खेती के अधीन भमि के क्षेत्र और काटे गए अनाज की मात्रा का भी अभिलेख रखा जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 413

टिप्पण: बन्दियों को जारी की गयी और विक्रीत सब्जियों और अन्य उ(cid:217)यान उपज के मल्य ू के साथ-साथ वर्ष के दौरान बाजार से क्रय की गयी सब्जियों और मसालों के मल्य ू का वार्षिक प्रशासन रिपोर्ट के मख्य भाग में उल्लिु खित किया जायेगा।

955. डेरी.- (1) जेल में जहां कहीं भी संभव हो, डेरी हो सके गी। अच्छी छत वाले और संवातित शेड उपलब्ध कराये जायेंगे। फर्श अच्छी तरह से पकी हुई (cid:579)टों से बना होना चाहिए या फिसलने से रोकने के लिए सीमेंट से पताई कीु हई अन्य अच्छी सामग्री का होना चाहिए, फर्श का ढलान हल्का होना चाहिए, जो के वल मत्र ू और धलाई को चिनाई नाली में ले ु

जाने के लिए पर्याप्त हो; गौशाला के फर्श को प्रतिदिन रगड़कर धोया जायेगा और तत्पश्चात ् अच्छी तरह से सखाया जाु येगा और गायों को फिसलने से रोकने के लिए फर्श पर रेत और भसा डाला जाू येगा, और गौशाला में मक्खियों की उपस्थिति को यथासंभव रोका जायेगा।

(2) गायों की सर्वोत्तम नस्ल का चयन करने का ध्यान रखा जायेगा जिन्हें या तो स्थानीय रूप से अभिप्राप्त किया जा सके गा या अन्य क्षेत्र से क्रय किया जा सके गा और नस्ल के सधार को ु सदैव ध्यान में रखा जायेगा।

(3) यह सनिश्चित करने के लिए ध्यान रखा जा

ु येगा कि बन्दियों के लिए पर्याप्त दध ू उपलब्ध हो और इसके लिए गायों का गर्भाधान करवाया जायेगा, जिससे वे कालिक अंतरालों पर बछड़े दे सकें ।

(4) प्रत्येक गाय को रजिस्ट्रीकरण संख्या दी जायेगी, ये संख्यांक प्रत्येक गाय के गले से लटकाये गये लकड़ी या धात के टिकट परु उत्कीर्ण की जायेगी, बछड़ों के मामले में टिकट पर उनकी संख्या के अतिरिक्त माताओं की रजिस्ट्रीकत संख्याृ भी धारित होगी और समस्त गायों का बीमा होना चाहिए।

् किया जायेगा, (5) बन्दियों (cid:217)वारा नहीं खाया गया भोजन सावधानी से दो बाल्टियों में पथकृ

, के वल बन्दियों (cid:217)वारा जैसे एक चावल के लिए और दसरा करीदार अस्वीकत भोजन के लिएू

नहीं खाया गया भोजन मवेशियों को दिया जायेगा और उच्छिष्ट भोजन का उपयोग मछली को खिलाने के लिए किया जायेगा या खाद के रूप में गाड़ा जायेगा, समस्त चावल का पानी, चावल की धावन, दाल की भसीू , और अनाज की तैयारी से प्राप्त कोई भी अन्य अपशिष्ट जो मवेशियों के लिए पौष्टिक हो सकता है, सरसों या अलसी के तेल के निर्माण से प्राप्त खली और जेल भमि से प्राप्त घास का उपयोग मवेशियों के भोजन के रूप में किया जाना चाहिए और यथावश्यक अन्य खा(cid:217)य पदार्थों के क्रय के साथ पूरक किया जायेगा।

(6) गर्म मौसम में, मवेशियों को प्रतिदिन धप में अच्छी तरह से

ू धोया जायेगा, उन्हें अच्छी तरह से सखाने का ध्यानु रखा जायेगा और ठं डे मौसम में, उनकी मालिश की जायेगी और ब्रश किया जायेगा।

(7) जेल डेरी (cid:217)वारा उत्पादित दध ू (या उसके उत्पाद) पहले अस्पताल में बीमार बन्दियों (विशेष रूप से आंत्र रोगों से पीड़ित) और स्वास्थ्य लाभ कर रहे और विशेष दल के बन्दियों की आवश्यकताओं के लिए प्रदत्त किया जायेगा और अंत:वासियों की आवश्यकता पर्ण

ू करने414 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) के पश्चात ् ही अधिशेष, यदि कोई हो, पर्व

ू वर्ती की मांग को प्राथमिकता देते हएु , प्रचलित बाजार दर पर स्थानीय अस्पताल या बाहरी व्यक्तियों को विक्रय किया जायेगा।

(8) मक्खन या घी का उत्पादन प्रतिषि(cid:217)ध होगा और बन्दियों को दधू , यदि उबला हआ है

ु , तो उबला हआ या दही के रूप में दिया जाना चाहिए , और किसी अन्य रूप में नहीं, यह अस्पताल के अहाते में भेषजज्ञ के पर्यवेक्षण के अधीन किया जाना चाहिए, जो गाय से दध ू अभिप्राप्त होने से लेकर उसके अंतिम वितरण तक दध के उचित निपटा

ू रे के लिए उत्तरदायी होगा और दही बनाते समय दध को उबालने से पहले उसमें पानी नहीं मिला या जाना चाहिए।

(9) इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि जिन बर्तनों में दध डाला जाता है वे पू

ूर्ण रूप से साफ रखे जायें; बिना उबले दध के लिए बर्तन एल्यमीनियम या स्टील का बना होगा ;

एल्यमीनियम या स्टील की कड़ाही का दध उबालने के लिए उपयोग किया जा सू के गा, कित ं दही जमाने के लिए मि(cid:210)टी के बर्तन का उपयोग किया जायेगा, यदि चमकीले बर्तन उपलब्ध हों तो उनका उपयोग किया जाना चाहिए; उपयोग के तरंत ु पश्चात ् समस्त बर्तनों को गर्म उबलते पानी से धोया जायेगा; उन्हें गंदी स्थिति में नहीं रहने दिया जायेगा; एक समुचित रूप से सरक्षित और अच्छी तरह ु संवातित स्थान उपलब्ध करवाया जायेगा, जिसमें दधू को निकालने के पश्चात ् यथासंभवशीघ्र और जब तक वह जारी नहीं किया जाता है, भंडारित किया जायेगा; यह सही होगा यदि यह किसी दृश्य स्थिति में हो जहां दध के साथू -साथ भंडारण या तैयारी के लिए उपयोग किये जाने वाले समस्त बर्तन निरीक्षण अधिकारियों की जानकारी में हों।

(10) डेरी से प्राप्त खाद का उपयोग जेल के उ(cid:217)यान और भमि ू के सधारु के लिए किया जायेगा।

् स्थानीय (11) बंध्या गायों और नर बछड़ों को एक वर्ष की आय प्राप्त करने के पश्चातु

पशचिकित्सक के परामर्श से नीलामी (cid:217)वारा निस्तारित किया जायेगा और नीलामी प्रक्रिया, दैनिक समाचार पत्र में एक माह पर्व ू प्रकाशन के पश्चात ् की जायेगी।

(12) संक्रामक बीमारी जैसे रिंडर-पेस्ट, खरपका मंहपका रोगु

ु , एंथ्रेक्स से पीड़ित पशओं

ु को

या और संक्रामक बीमारी के पश्चात ् तरंत जेल के उ(cid:217)यान में एक पेड़ के नीचे अलग कर दि जायेगा और यह भी सलाह दी जाती है कि बखार से पीड़ित किसी भी ु पशु को तब तक अलग रखा जाये जब तक कि रोग की प्रकति स्पष्ट ृ न हो।

(13) जेल डेरियां कषि और पश चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण के लिए ख ुली रहेंगी और बीमार जेल मवेशियों की देखभाल के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी की सेवाएं ली जानी चाहिएं।

(14) जेलर या उप-जेलर या चिकित्सा अधिकारी प्रतिदिन डेरी का दौरा करेंगे और अधीक्षक सप्ताह में तीन बार समस्त मवेशियों का निरीक्षण करेंगे।

(15) डेरी स्टॉक और संव्यवहार का ध्यानपर्वक अभिलेखू , डेरी और मवेशी लेखों के लिए, विनिर्दिष्ट रूपविधान में रजिस्टर में रखा जायेगा।

अध्याय 40

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 415

जेलों में सार्वजनिक कार्य

956. जेल परिसर के भीतर संनिर्माण कार्य.- (1) सरकारी भमि परू , धार्मिक अवशेषों या प्रतीकों को रखना और पवित्र स्थानों या पजा स्थलों का निर्माण निषि(cid:217)ध होगा , जेलर, जेल परिसर के भीतर किसी भी नये अतिक्रमण या अतिक्रमण के विस्तार पर तरंत अधीक्षक ु

को रिपोर्ट करेगा।

(2) कोई भी काम तब तक प्रारंभ नहीं किया जायेगा जब तक समुचित रूप से ब्यौरेवार डिजाइन और प्राक्कलन स्वीकत ृ नहीं हो जाता है, निधियों का आबंटन और इसे प्रारंभ करने के आदेश सक्षम प्राधिकारी (cid:217)वारा जारी किये जायेंगे और अचानक उत्पन्न होने वाले खतरे या असविधा के आकस्मिक मामलों में , एक स्पष्ट लिखित अनरोध कार्यपालक इंजीनियर ु को किया जायेगा जो अपने स्वयं के उत्तरदायित्व पर कार्य करेंगे।

(3) ठेके दारों को वास्तविक आवश्यकता से पर्व ू या पश्चात ् सात दिनों से अधिक समय तक सामग्री को जेल में संगृहीत करना अनुज्ञात नहीं किया जायेगा।

(4) कार्यपालक इंजीनियर देखेगा कि किसी भी कार्य के निष्पादन में कोई असम्यक् विलंब न हो।

(5) कार्यपालक इंजीनियर, अपने खंडों और जिलों में भवनों और संकर्मों को संरक्षित करने और सरकारी भमि पर अतिक्रमण ू के निवारण के लिए उत्तरदायी होंगे।

957. अधीक्षक और कार्यपालक इंजीनियर (cid:217)वारा संयक्त निरीक्षणु .- (1) कार्यपालक इंजीनियर उत्तरदायी होगा कि लोक निर्माण विभाग की पस्तकों में ु कथित समस्त जेल भवनों ू रखरखाव है और वह वर्ष में एक बार अधीक्षक के साथ मिलकर ऐसे का कशलतापर्वकु

समस्त भवनों की, विशेष रूप से उनकी सरक्षा ु के प्रश्न के संबंध में, सावधानीपर्वक जांच ू

करेंगे और इन निरीक्षणों की रिपोर्ट जेल अधीक्षक (cid:217)वारा कारागार निदेशालय के प्रमख को ु और कार्यपालक इंजीनियर (cid:217)वारा अधीक्षण इंजीनियर या मख्य इंजीनियर को भे

ु जी जायेगी।

(2) प्रत्येक जेल कार्य के निष्पादन में सि(cid:217)धदोष श्रमिकों का यथासंभव पर्ण उपयोग किया ू

जायेगा और बन्दियों की मजदरी का भगतान सरकारी नियम के अनसार लोक निर्माण विभाग (cid:217)वारा किया जायेगा।

958. कार्य किये जाने की रीति.- (1) यदि किसी कार्य के लिए धन का आबंटन लोक निर्माण विभाग के बजट में किया जाता है, तो वह कार्य, नियमानसारु लोक निर्माण विभाग (cid:217)वारा या उस विभाग के आदेशों के अधीन किया जायेगा।

(2) कार्य निम्नलिखित प्रक्रिया के अधीन किया जायेगा, अर्थात ्:-

(क) इस प्रकार नियोजित सि(cid:217)धदोषों के अनशासन से जड़े सु

ु मस्त मामले और उनकी सरक्षित ु अभिरक्षा, भोजन, वस्त्र और उपचार से जड़े समस्तु मामले पर्ण

ू रूप से जेल अधीक्षक के पास रहेंगे;

(ख) कार्यपालक इंजीनियर, सि(cid:217)धदोष श्रमिकों की संभावित मांग के बारे में समय-समय पर अधीक्षक को सचिू त करेगा, और अधीक्षक, कारागार416 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) निदेशालय के प्रमख ु के अनमोदनु से, सि(cid:217)धदोषों की आवश्यक संख्या उपलब्ध कराने के लिए यथासंभव व्यवस्था करेगा;

(ग) सि(cid:217)धदोष श्रमिकों के लिए इस सामान्य मांग के अतिरिक्त, प्रभारी कार्यपालक इंजीनियर (cid:217)वारा इस प्रयोजन के लिए नियक्त अधीनस्थु अधिकारी, प्रत्येक दिन अधीक्षक को दलों की संख्या, प्रत्येक दल में सि(cid:217)धदोषों की संख्या और कार्य का वह प्रभाग जिस पर प्रत्येक दल को नियोजित किया जायेगा, को विनिर्दिष्ट करते हएु , अगले दिन के लिए आवश्यक सि(cid:217)धदोषों की संख्या के बारे में लिखित रूप में सचित करे

ू गा;

(घ) प्रत्येक दल को इंगित कार्य के प्रभाग के पास प्रात: परेड करायी जायेगी और जेल अधिकारी (cid:217)वारा एक प्रमाणपत्र तैयार किया जायेगा और इंजीनियर के प्रभारी अधीनस्थ को उसके प्रतिहस्ताक्षर के लिए प्रस्तत ु किया जायेगा, जिसमें उस दिन के काम के निपटान के लिए उसके पास रखे गये प्रत्येक विवरण या वर्ग के सि(cid:217)धदोषों की संख्या दर्शायी जायेगी;

(ङ) कार्यपालक इंजीनियर, जेल अधिकारियों के साथ संवाद से और नियम में अधिकथित कार्यों पर विचार करने के पश्चात ्, या तो प्रत्येक सि(cid:217)धदोष या निश्चित संख्या में सि(cid:217)धदोषों (cid:217)वारा किये जाने वाले कार्य के प्रत्येक विवरण की एक अनसची तैयार करेगा

ू ;

(च) इंजीनियर के अधीनस्थ प्रभारी का यह कर्तव्य होगा कि वह अधीक्षक या उसके अधीनस्थों को सि(cid:217)धदोषों के प्रत्येक दल (cid:217)वारा प्रतिदिन किये जाने वाले कार्य के बारे में बताये और उस दिन का कार्य बंद होने से पूर्व यह देख ले कि ऐसा कार्य पर्ण ू हो गया है और इस तथ्य को या किसी कमी या दोष को दैनिक रिपोर्ट में अंकित करे, जिसकी एक प्रति जेल अधीक्षक को सौंपी जायेगी;

(छ) अधीक्षक, बन्दियों की, जब वे काम पर हों और जब अपने क्वार्टर में हों, दोनों में, सरक्षा और उनके पर्यवेक्षण के लिु ए समस्त व्यवस्थाएं करेगा, और यह निर्धारित करने का उत्तरदायित्व उस पर होगा कि कार्यपालक इंजीनियर या उसके अधीनस्थों (cid:217)वारा खराब या अल्प काम, उपकरण या सामग्रियां खराब करने, आदेशों की उपेक्षा या सामग्री की बर्बादी के संबंध में की गयी रिपोर्ट में कौनसे सि(cid:217)धदोषों की गलती है, और उनसे जेल नियमों के अनसार निपटनाु ; रात्रि में जेल में से निकल भागना सकर ु बनाने वाला कोई बांस, मचान, तख्त, औज़ार, उपकरण आदि नहीं छोड़े जायेंगे; और यदि व्यापक मचान का उपयोग किया जाता है जिसे हर शाम काम बंद होने के पश्चात ह् टाया नहीं जा सकता है, तो अधीक्षक (cid:217)वारा रात्रि में ऐसे मचान पर विशेष निगरानी रखवायी जायेगी;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 417

(ज) समस्त भवन संक्रियाएं, जेल के प्रभारी अधिकारी के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप के बिना, कार्यपालक इंजीनियर या उनके अधीनस्थ प्रभारी के अधीन होंगी और अल्प काम, खराब काम, उपकरण और सामग्री के खराब होने या सामग्री की बर्बादी के संबंध में इंजीनियर की रिपोर्ट को पर्ववर्ती ू पैरा के संदर्भ में जेल अधीक्षक (cid:217)वारा अंतिम रूप में स्वीकार किया जायेगा; और

(झ) बाहरी मजदरों कोू , जब नियोजित किया जाता है, तो उन्हें सि(cid:217)धदोष

् रखा जायेगा, कितं ु जहां कशल बाहरी ु श्रमिकों श्रमिकों से यथासंभव पथकृ

(कारीगरों) को सि(cid:217)धदोष श्रमिकों को सिखाने या उनके काम की निगरानी के लिए नियोजित किया जाता है, ऐसी व्यवस्था की जायेगी जिससे सि(cid:217)धदोष श्रमिकों के अनशासनु में यथासंभव कम हस्तक्षेप हो।

(3) लोक निर्माण विभाग की पस्तकों में

ु के किसी भी भवन को लोक निर्माण विभाग में सरकार के प्राधिकार के बिना ध्वस्त नहीं किया जायेगा।

(4) यदि आमलू -चल या व्यापक परिवर्तन वांछित हो तो सरकार का आदेश अवश्य लिया जाना चाहिए।

:शल्क प्राु प्त हो (5) गह ृ (जेल) विभाग के पास ध्वस्त भवनों से परानी सामग्रियों को निु

सकती हैं, परंत ु जेल से संबंधित किसी विशिष्ट कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को उनकी आवश्यकता न हो, और उनका मल्य जेल ू के काम के लिए प्राक्कलन में जमा नहीं किया गया हो जिसमें उन भवनों, जहां से उन्हें अभिप्राप्त किया गया है, को नष्ट करना सम्मिलित है, यदि फिर भी, उन्हें गह ृ (जेल) विभाग (cid:217)वारा विक्रीत किया जाता है, तो विक्रय के रूप में प्राप्त रकम को उचित खाते के शीर्ष में जमा किया जायेगा।

अध्याय 41

विधिक सहायता

959. विधिक सेवा प्राधिकरणों का गठन.- (1) भारत के संविधान का अनच्छे द ु 39क समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को नि:शुल्क विधिक सहायता का उपबंध करता है और सभी के लिए न्याय सनिश्चित करता है

ु , संविधान के अनच्छे द ु 14 और 22 राज्य के लिए, विधि के समक्ष समानता को सनिश्चित करने ु और एक विधिक प्रणाली, जो सभी के लिए समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देती है, को सनिश्चित करना ु बाध्यकारी बनाते हैं और इन्हें अग्रसर करने में, समान अवसर के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क और सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी समान नेटवर्क स्थापित करने के लिए संसद (cid:217)वारा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 अधिनियमित किया गया था।

(2) कार्यान्वयन की निगरानी और मल्यांकन के लिएू , विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अधीन, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) का गठन किया गया है।

418 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(3) एनएएलएसए की नीतियों और निदेशों को प्रभावी बनाने के लिए और लोगों को नि:शुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए और राज्य में लोक अदालतों का संचालन करने के लिए प्रत्येक राज्य में, एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) और प्रत्येक उच्च न्यायालय में, एक उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है, जिलों और तालकों में जिलाु विधिक सेवा प्राधिकरणों और तालक ु विधिक सेवा समितियों का गठन किया गया है।

(4) विधिक सेवा कार्यक्रम, जहां तक यह भारत के सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है, को प्रशासित और कार्यान्वित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है।

(5) भारत के मख्य न्यायाधीश एनएएलएसएु के संरक्षक-प्रमख हैं और सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश कार्यकारी अध्यक्ष हैं। भारत के मख्य न्यायाधीश के परामर्श से कें द्र सरकार ने उच्च न्यायिक सेवा के एक अधिकारी को एनएएलएसए के सदस्य सचिव के रूप में भी नियक्त कियाु है।

(6) इसी प्रकार, राज्य स्तर पर उच्च न्यायालय के मख्य न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक-प्रमख हैं

ु और उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश कार्यकारी अध्यक्ष हैं और प्रत्येक एसएलएसए के लिए एक सदस्य-सचिव होगा।

(7) जिला स्तर पर, जिला न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का अध्यक्ष होता है और मख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या समकक्ष न्यायिक अधिकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का सचिव होता है।

960. विधिक सेवा संस्थाओं की कार्यप्रणाली.- (1) एनएएलएसए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए नीतियां, सि(cid:217)धांत, मार्गदर्शक सि(cid:217)धांत अधिकथित करता है और परे देश ू में कार्यांवित करने के लिए प्रभावी और सस्ती स्कीमें तैयार करता है।

(2) राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और तालक विधिक सेवा ु

समितियों को निम्नलिखित प्राथमिक कत्यृ न्यस्त किये गये हैं:-

(क) पात्र व्यक्तियों को निःशल्क और सक्षम विधिक सेवाएं

ु उपलब्ध करवाना;

(ख) विवादों के सौहार्दपर्ण समाधान के लिए लोक अदालतों का आयोजन करना ;

(ग) विधिक जागरूकता शिविर आयोजित करना; और

(घ) अनकलु ू और निवारक विधिक सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से एनएएलएसए की स्कीमों और नीतियों को कार्यांवित करना।

(3) निःशल्क विधिक सेवाओं में ु सम्मिलित होंगे,-

(क) समुचित मामलों में न्यायालय शल्क का भगतानु

ु , किन्हीं भी विधिक कार्यवाहियों के संबंध में प्रक्रिया शल्क औरु संदेय या उपगत किये गये अन्य समस्त प्रभार;

(ख) विधिक कार्यवाहियों में वकीलों की सेवा उपलब्ध करवाना;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 419

(ग) विधिक कार्यवाहियों में आदेशों और अन्य दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां अभिप्राप्त करना और उनका आपर्त

ू ; और

(घ) विधिक कार्यवाहियों में दस्तावेजों के मद्रणु और अनवाद ु को सम्मिलित करते

हएु अपील, पेपर बक तैयार करना।ु

(4) विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (1987 का कें द्रीय अधिनियम सं. 39) के अधीन निःशल्क विधिक सेवाएं प्राप्त करने के लिए पात्र व्यक्तियों में अभिरक्षा में व्यक्ति सम्मिलित हैं।

961. प्रत्येक कारागार में विधिक सहायता क्लिनिक.- समस्त कार्य दिवसों पर अंत:वासियों को निःशल्क विधिक सेवाएं

ु उपलब्ध करवाने के लिए ऐसे क्लिनिकों में पर्याप्त संख्या में पैनल वकील और पैरा लीगल स्वयंसेवकों के साथ प्रत्येक कारागार में विधिक सेवा क्लिनिक स्थापित किये जायेंगे। कारागारों में स्थापित विधिक सहायता क्लीनिकों में सहायता के लिए कतिपय अंत:वासियों को पैरा लीगल स्वयंसेवकों (पीएलवीएस) के रूप में प्रशिक्षित किया जा सकें गे।

962. कारागारों में विधिक साक्षरता कक्षाएं.- बन्दियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के साथ-साथ निःशल्क विधिक सहायता सेवाओं की उपलब्धता के बारे में शिक्षित करने के क्रम में कारागारों में विधिक साक्षरता कक्षाएं आयोजित की जा सकें गी। अंत:वासियों की विधिक सहायता आवश्यकताओं को अभिनिश्चित करने के लिए विधि छात्रों, पैरा लीगल स्वयंसेवकों और विधिक सहायता वकीलों की सेवाएं ली जा सकें गी।

963. विचाराधीन बन्दी समीक्षा समिति का गठन.- (1) अध्यक्ष के रूप में जिला

, जिला न्यायाधीश, सदस्यों के रूप में जिला मजिस्ट्रेट, जिला पलिस अधीक्षक और सचिवु

विधिक सेवा प्राधिकरण और कें द्रीय जेल के अधीक्षक, अधीक्षक, जिला जेल, अस्थायी उप- जेल और उप-जेल के जेलर को सम्मिलित करते हएु , उन विचाराधीन बन्दियों की पहचान करने के लिए एक समिति का गठन किया जायेगा, जिन्होंने कथित अपराध के लिए विधि के अधीन उपबंधित पर्ण की ू गयी कारावास की अधिकतम कालावधि का आधा हिस्सा या अधिकतम कालावधि पूर्ण कर ली है।

(2) राज्य विधिक सेवा प्राधिकारी पैनल वकीलों को ऐसे बन्दियों से तत्काल मिलने, उनके साथ उनके मामलों पर चर्चा करने और उनको छोड़े जाने के लिए समचितु न्यायालय के समक्ष समचितु आवेदन प्रस्ततु करने का निदेश देंगे, जब तक कि उन्हें किसी अन्य प्रयोजन के लिए अभिरक्षा में रखना अपेक्षित न हो।

अध्याय 42

कर्मचारिवं

ृद विकास

(प्रशिक्षण और परस्कारु )

964. कार्य के घंटे.- (1) कार्मिकों के प्रत्येक प्रवर्ग के लिए कार्य घंटों की एक सनियोजित और ु समुचित रूप से विनियमित समय सारणी होगी और सामान्यतया सरक्षा ु420 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) कार्मिकों को सम्मिलित करते हएु किसी भी स्टाफ सदस्य को दिन में आठ घंटे से अधिक कार्य करने की आवश्यकता नहीं होगी और संस्थागत (cid:212)यटीू , दिन की (cid:212)यटीू , रात्रि की (cid:212)यटीू , अनभागीय (cid:212)यटीु

ू , परिसर (cid:212)यटी या ऑफ (cid:212)यटी की एकू

ू अनसचीु ू होगी और परिसर (cid:212)यटी से ू संबंधित उत्तरदायित्वों या अवकाशों पर (cid:212)यटी को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा

ू येगा।

(2) रात्रि गश्त (cid:212)यटी एक समय में तीन घंटे ू से अधिक की नहीं होगी और ऐसी प्रत्येक (cid:212)यटी के ू पश्चात ् गार्ड को कम से कम दो घंटे का आराम दिया जायेगा। एक रात्रि में गार्ड को तीन से अधिक गश्त (cid:212)यटी नहीं दी जाू येगी।

(3) कारागार अधीक्षक कार्य के घंटों में समस्त यक्तियक्त ु ु समायोजन करने के लिए अधिकत ृ होगा। आपात परिस्थिति में जैसे निकल भागने, बलवे, हमले या आग लगने, परिसर के समस्त कार्मिकों को, चाहे ऑफ-(cid:212)यटी हो या अन्यथा

ू , तरंत (cid:212)यटी पर रिपोर्ट करना ु

होगा।

965. आपात पर ◌िस्थितियों के दौरान अतिरिक्त स्टाफ.- अंत:वासियों के अचानक अंतर्वाह या महामारी की स्थिति में, या किसी पर्याप्त कारण से, किसी भी जेल का अधीक्षक क्षमता की मंजरी से अधिक किसी भी ू स्थापन को ग्रहण करना आवश्यक समझता है, तो वह कारागार निदेशालय के प्रमख को प्रस्ताव प्रस्तत करेगा

ु या करेगी और किसी भी स्थिति में, इस प्रकार लिया गया अतिरिक्त स्थापन, नयी मंजरी के बिना जारी नहीं रहेगा

ू और उस कालावधि, जिसके लिए मंजरी दी ू गयी थी, के अवसान के पश्चात ् वह समाप्त हो जायेगा।

966. (cid:212)यटी के दौरान सविधाएं

ु .- (cid:212)यटी पर तैनात का

ू र्मिकों को निम्नलिखित सविधाएं ु दी जायेंगी:-

(क) स्टाफ सदस्यों, जिन्हें अपनी (cid:212)यटी ू की कालावधियों के मध्य, संस्थान में प्रतीक्षा करने की आवश्यकता होती है, के उपयोग के लिए बिस्तरों के साथ विश्राम कक्ष;

(ख) स्टाफ कैं टीन;

(ग) स्नानघर, शौचालय और पानी की कोठरियां;

(घ) लॉकर;

(ङ) सर्पदंश के लिए आवश्यक उपकरणों सहित प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स और यह दरस्थ (cid:212)यटीू

ू स्थलों या कारागार फार्मों या चौकियों पर भी उपलब्ध होंगे;

(च) रात्रि (cid:212)यटी कार्मिकों के लिए टॉर्च और जते

ू ; और

(छ) रेनकोट, छाते, ओवरकोट, गमबट।ू

967. आवासन.- (1) कारागार परिसर में वदीधारी कारागार कार्मिकों के लिए किराया मक्त आवासीय वासु -सविधाु उपलब्ध करायी जायेगी और यदि यह सविधा ु उपलब्ध नहीं करायी जाती है, तो कारागार कार्मिकों को, राज्य सरकार (cid:217)वारा समय-समय पर नियत, मकान किराया दिया जायेगा।

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 421

(2) कारागार स्टाफ के लिए आवासन को पर्याप्त सामदायिक सेवाओं और सविधाओं के साथ आधनिक तर्ज पर विकसित किया जा

ु येगा।

(3) प्रत्येक संस्था में, संस्थाओं का दौरा करने वाले पदधारियों, अतिथियों और अन्य आगंतकों के ठहरने की व्यवस्था होगी।

(4) निम्नलिखित सविधाएं ु स्टाफ क्वार्टरों और परिसरों तक भी विस्तारित की जायेंगी:-

(क) समय-समय पर कीटाणशोधनु , (ख) स्टाफ क्वार्टरों में सफ़ाई और स्वच्छता सेवाएं, और

(ग) परिसर में पार्कों और अन्य उपयोगिताओं का रखरखाव।

968. शैक्षिक सविधाएं

ु .- कारागार कार्मिकों की संतानों के फायदे के लिए निम्नलिखित शैक्षिक सविधाओं का विस्तार किया जा

ु येगा,-

(क) वि(cid:217)यालय संस्थागत परिसरों के निकटतर होंगे;

ू हैं तो स्टाफ की संतानों के लिए (ख) यदि संस्थाएं शहर से कछ दरी पर स्थित ु

स्कल बसू ;

(ग) स्टाफ की संतानों की शैक्षिक आवश्यकताओं के लिए सरकारी लागत पर परिवहन या स्टाफ के स्कल या कॉलेज जाने वाली

ू संतानों के लिए वैकल्पिक उपयक्त परिवहन भत्ता

ु ; और

(घ) संस्थागत परिसरों में स्थानांतरित और अन्य स्टाफ सदस्यों की संतानों के लिए छात्रावास।

969. विविध सविधाएं

ु .- (1) यदि कोई संस्था शहर या कस्बे से दरी पर स्थित है

ू , तो प्रशासन, स्टाफ सदस्यों के आवासन के लिए, जहां तक संभव हो, कारागार परिसर के भीतर आवश्यक व्यवस्था करेगा।

(2) चिकित्सीय आपात परिस्थिति और बीमारी के मामलों में चिकित्सीय सविधाएं ु उपलब्ध करायी जायेंगी।

(3) स्टाफ सदस्यों के लिए मैस।

(4) खेल सविधाएं

ु , वार्षिक खेल प्रतियोगिताएं, और उपरोक्त के लिए आनुषंगिक यात्रा भत्ता।

970. परस्कारु .- (1) वीरता और सराहनीय और विशिष्ट सेवाओं के कत्योंृ को मान्यता देने हेतु भारत सरकार कारागार कार्मिकों को परस्कत करने के लिए पदक ु ृ संस्थित करेगी और कारागार कार्मिकों (cid:217)वारा किये गये समस्त अच्छे कार्यों का समुचित प्रचार किया जायेगा और उन्हें मीडिया के माध्यम से प्रदर्शित किया जायेगा।

(2) कारागार निदेशालय के प्रमखु , कारागार महानिरीक्षक या उप-महानिरीक्षक (रेंज) के पास उत्कष्ट कार्य और विशेष सेवाओं जैसे निकल भागे बन्दियों को पकड़ने, साहस, निष्ठा और विश्वसनीयता के उच्च स्तर के प्रदर्शन, कर्तव्य के प्रति समर्पण और आपातकाल के दौरान की गयी पहल और संसाधनशीलता और अन्य सराहनीय सेवाओं की प्रशंसा में योग्य स्टाफ सदस्यों को उपयक्त नकद परस्कार ु

ु मंजरू करने की शक्तियां होंगी और इस प्रयोजन के लिए विभाग के वार्षिक बजट में पर्याप्त निधि रखी जायेगी।

422 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

971. वित्तीय सहायता और प्रतिकर.- (1) कारागार कार्मिकों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर क्षति या दर्घटनाु से पीड़ित होने की स्थिति में, कारागार निदेशालय के प्रमख और ु कारागार महानिरीक्षक को, ऐसी सीमा तक, तत्काल वित्तीय सहायता स्वीकत ृ करने की शक्ति होगी जैसी राज्य सरकार (cid:217)वारा अधिकत और ृ योग्य मामलों में, जहां इस सीमा से अधिक सहायता की आवश्यकता है, कारागार निदेशालय का प्रमख मामले को राज्य ु

सरकार को निर्दिष्ट करेगा।

(2) कारागार कार्मिक की (cid:212)यटी के दौरान मत्य के

ु उत्तरजीवियों को

ृ मामले में, उसके कटंब के

राज्य सरकार (cid:217)वारा यथाविनिर्दिष्ट रकम संदत्त की जायेगी।

972. नकसानी से ु संरक्षण.- शासकीय कर्तव्यों के स(cid:217)भावपर्वकू निर्वहन से उ(cid:217)भत होने ू

वाले आपराधिक अभियोजन या सिविल कार्यवाहियों की स्थिति में स्वयं के प्रतिरक्षण के लिए स्टाफ सदस्यों को सरकारी व्यय पर आवश्यक सविधाएं प्रदान की जा

ु येंगी।

973. स्टाफ बैठकें .- (1) अधीक्षक संस्थागत स्टाफ सदस्यों की एक मासिक बैठक बलाु येगा और इस बैठक के उ(cid:217)देश्य होंगे,-

(क) संस्थागत क्रियाकलापों का समन्वय करना;

(ख) कार्य की रीतियों में सधारु करना; (ग) स्टाफ सदस्यों को सरकारी नीतियों का निर्वचन करना;

(घ) अंत:वासी अनशासनु , बन्दियों के उपचार और संस्थागत प्रबंध के संबंध में नयी प्रक्रियाओं, नियमों और विनियमों और नीतियों को स्पष्ट करना;

(ङ) स्टाफ लाइनों में कार्मिक प्रबंध, स्टाफ अनशासन और मनोबल से संबंधित नीतियों को स्पष्ट करना;

(च) स्टाफ कल्याण समिति (cid:217)वारा बनाये गये कल्याण कार्यक्रमों को स्पष्ट करना;

(छ) स्टाफ को उनकी सामान्य समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर देना;

(ज) जब और जैसे भी आवश्यक हो, अच्छे कार्य की सराहना संसचित करनाू ;

और

(झ) जब और जैसे भी आवश्यक हो, स्टाफ को परस्कत करु ृ ना।

(2) बैठक की कार्यवाही का कार्यवत्त ृ अभिलिखित किया जाना चाहिए और इसकी एक प्रति, अधीक्षक की टिप्पणियों के साथ, महानिरीक्षक या उप महानिरीक्षक कारागार (रेंज) को अग्रेषित की जायेगी।

974. सम्मेलन.- (1) विभागीय कार्मिकों का सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किया जायेगा और ऐसे सम्मेलन का उ(cid:217)देश्य होगा,-

(क) उपलब्धियों की जानकारी लेना;

(ख) संगठन की वतर्मान प्रक्रियाओं, प्रथाओं और रीतियों का मल्यां

ू कन करना;

(ग) विभाग के भावी विकास की योजना बनाना;

(घ) स्टाफ की समस्याओं और आकांक्षाओं को समझना; और

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 423

(ङ) अभिरक्षण सम्बन्धी प्रबंध में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना।

(2) सम्मेलन के कार्यवत्त को ृ अभिलिखित किया जायेगा और महानिरीक्षक इसे अपने सझावों ु और समुचित प्रस्तावों और इन कार्यवत्तों पर की गई कार्रवाई के साथ सरकार को अग्रेषित करेगा और कारागार मख्यालय (cid:217)वारा एक प्रस्ताव संस्थागत कार्मिकों को संसचित किया ू

जायेगा।

975. स्टाफ प्रशिक्षण.- (1) सधारात्मक प्रशासनु निरंतर रूप से कार्मिकों के मन में जागति औरृ स्मरण रखने का प्रयास करेगा।

(2) सधारात्मक कार्य अत्यंत महत्वपर्ण सामाजिक सेवा है , और इसके लिए समस्त समुचित साधनों का उपयोग किया जायेगा।

(3) सधाराु त्मक कार्मिकों का मख्य कर्तव्य अपराधियों की सामाजिक पनःशिक्षा

ु ; संस्थागत अनशासन की प्रभावु कारिता होगी और उपचार का प्रभाव मख्य रूप से सधारात्मक ु

ु स्टाफ की गणवत्ता पर निर्भर करता है ; अप्रशिक्षित और अननदेशित कार्मिकु न के वल निष्प्रभावी होते हैं, बल्कि अक्सर सधारात्मक नीतियों के उचित कार्यान्वयन के लिए हानिकारक भी बन जाते हैं; इसलिए सधारात्मक प्रशासन की किसी भी व्यवस्था में, सधारात्मकु कार्मिकों का विशेषीकत क्षेत्र में ृ प्रशिक्षण सर्वोपरि महत्व का होगा।

(4) प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लक्ष्य होगा,-

(क) सधारात्मक प्रशासन की

ु वैज्ञानिक और प्रगतिशील रीतियों से सधारात्मक ु

कार्मिकों को परिचित कराना;

(ख) उन्हें उनके उत्तरदायित्वों के प्रति और एक कल्याणकारी राज्य में उनके (cid:217)वारा निभायी जाने वाली भमिका के प्रति सचेत करना ;

(ग) उनके सांस्कतिक और व्यावसायिक हितों को व्यापक बनाना , उनके अनभव ु का विस्तार करना, उनकी क्षमताओं और कौशल को परिष्कृ त करना, प्रशासनिक कर्तव्यों के उनके प्रदर्शन में सधारु करना और उन्हें उच्च उत्तरदायित्व वाले पदों पर विभाग की भविष्य की जरूरतों को परा करने के ू

लिए अनभव प्रदान करनाु ; और

(घ) सधारात्मक कार्मिकों के मध्यु दल भावना का भाव पैदा करना।

(5) सधाराु त्मक कार्मिकों को सधार कार्य के सि(cid:217)धांत और व्यवहार में उचित रूप से प्रशिक्षित किया जायेगा और सेवा में प्रवेश करने के पश्चात ् और अपने करियर के दौरान, कार्मिकों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर और अपने स्वयं के व्यक्तिगत प्रयासों के माध्यम से अपने ज्ञान और वत्तिकृ क्षमता को बनाये रखना और सधारना होगा।ु (6) ससंगतु नियमों और विनियमों के अनसार ु प्राधिकारियों (cid:217)वारा विहित साधनों (cid:217)वारा आक्रामक बन्दियों को नियंत्रित करने के लिये समर्थ बनाने हेत ु जेल कार्मिकों को विशेष प्रशिक्षण (पी.टी., ड्रिल, निहत्थे य(cid:217)धु , बेंत ड्रिल और भीड़ तितर-बितर करने वाली ड्रिल) दिया जायेगा और कार्मिकों, जिन्हे हथियार उपलब्ध करवाये गये हैं, को उनके उपयोग में प्रशिक्षित424 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) किया जायेगा और उनके उपयोग को शासित करने वाले विनियमों के बारे में निदेश दिया जायेगा।

(7) प्रशिक्षण स्कल में दिया गया प्रारंभिक ू आधारभतू प्रशिक्षण, सधार संस्थाु ओं में जारी रखा जायेगा और उपयक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किु ये जाएंगे ताकि संस्थागत कार्मिक सधार के क्षेत्र में ु सामयिक विकास के साथ निरंतर संपर्क में रहें।

(8) प्रशिक्षण प्रक्रिया व्यक्तिगत क्षमताओं को प्रकट करेगी, ऐसे ज्ञान के माध्यम से, सही व्यक्ति को सही कार्य दिया जा सकता है और इससे अंततः मानव संसाधनों का समुचित उपयोग हो सके गा।

(9) सधार कार्मिकों का प्रशिक्षण न के वल विभाग में एक उचित सांस्कतिक

ृ वातावरण बनाने में सहायक होगा, बल्कि संस्थागत प्रबंधन और सधारात्मक प्रक्रियाओं की अच्छी परंपराओं और प(cid:217)धतियों को स्थापित करने में भी लंबा चलेगा। समुचित रूप से प्रशिक्षित स्टाफ कारागार सधारों के ु समुचित कार्यान्वयन के लिए एक आस्ति होगा। प्रशिक्षण के प्रभाव से,

ये गये कार्मिकों के दृष्टिकोण और क्षमताओं में सधार होगा। कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर किु

व्यय से अंततः न के वल विभागीय लाभ होगा, बल्कि बेहतर संस्थागत प्रभाव और अपराधियों के अंततोगत्वा पनर्वास के रूप में सामाजिक लाभ भी होगा।

(10) कारागार विभाग में भर्ती किये गये समस्त कार्मिकों को, चाहे उन्हें सरक्षाु , अभिरक्षण, कार्यकारी, उपचार या पर्यवेक्षी स्टाफ के रूप में प्रवेशित किया गया हो, उन्हें उनके कार्य की अपेक्षाओं के अनरूप पर्याप्त कालावधि का बनियादी प्रशिक्षण दिया जा

ु येगा। अन्य विभागों से प्रतिनियक्ति पर लिु ये गये समस्त अधिकारियों और स्टाफ को कारागार विभाग की कार्यप्रणाली के संबंध में दो सप्ताह का संक्षिप्त अभिविन्यास पा(cid:211)यक्रम कराया जायेगा।

(11) कारागार सेवा के प्रत्येक संवर्ग में पर्याप्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जायेगा जिससे कि उनके लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सके ।

976. प्रशिक्षण संस्थान.- स्टाफ का प्रशिक्षण राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय तीन स्तरों पर निम्नलिखित रीति से किया जायेगा, अर्थात ्:-

(i) सरक्षा और मंत्रालयिक ु स्टाफ के प्रशिक्षण के लिए, राज्य सरकार (cid:217)वारा एक प्रशिक्षण स्कल स्थापित किया जा

ू येगा और पड़ोसी छोटे राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के स्टाफ प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण सविधाओं का लाभ उठा ु

सकें गे;

(ii) कार्यकारी स्टाफ के प्रशिक्षण के लिए, सधाराु त्मक प्रशासन के क्षेत्रीय संस्थानों की स्थापना की जा सके गी।

ु :-

977. कृ त्य.- (1) एक प्रशिक्षण संस्थान के कत्यृ निम्नानसार होंगे

(क) प्रशिक्षण,

(ख) अनसंधानु , (ग) संगठन और रीतियों पर अध्ययन, औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 425 (घ) पैम्फलेट पेपर, हैंडबकु , सधारात्मक सेवा ु जर्नल्स (पत्र-पत्रिकाओं) का प्रकाशन।

(2) इन संस्थाओं में के वल प्रशिक्षण और शिक्षण की ओर अभिवतिृ वाले अर्हित व्यक्तियों को ही प(cid:217)स्थापित किया जाएगा।

(3) प्रशिक्षण संस्थानों में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित विशेषज्ञों को प्रशिक्षण की सामग्री के बारे में मार्गदर्शक सि(cid:217)धांतों का एक सेट उपलब्ध करवाया जायेगा और प्रशिक्षण संस्थान का स्थायी शैक्षणिक स्टाफ सधारात्मक कार्य के विभिन्न पु क्षों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं के प्रति भी उन्मखु होगा, अन्य राज्यों के प्रशिक्षण स्कलों ू की शिक्षण सविधाु ओं और संकायों को, विश्ववि(cid:217)यालयों और सामाजिक विज्ञान के स्कलों को प्रशिक्षण ू प्रयोजनों के लिए उपयोग में लिया जायेगा और अतिथि व्याख्याताओं को उचित मानदेय और यात्रा भत्ते संदत्त किये जायेंगे।

(4) पा(cid:211)यक्रम, पा(cid:211)यवस्तु सामग्री, परीक्षा की प(cid:217)धतियों के विवरण का और प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रमाणपत्र देने का ढंग, कारागार निदेशालय के प्रमख (cid:217)वारा ु प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार पनर्विलोकन किया जायेगा

ु ।

(5) कारागार निदेशालय और सधाराु त्मक सेवा के कार्मिकों की विभिन्न श्रेणियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को परा करने

ू के लिए समुचित साहित्य तैयार किया जायेगा।

978. प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम.- प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम, इस क्षेत्र में विशेषज्ञों (cid:217)वारा संचालित प्रशिक्षण आवश्यकताओं के विश्लेषण के आधार पर, आयोजित किये जायेंगे और निम्नलिखित प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित किये जायेंगे:-

(क) भर्ती पर, समस्त अधिकारियों, कार्यकारी और सरक्षा कर्मचारियों को

ु प्रशिक्षण संस्थान के प्रारंभिक आधारभतू प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम से गजरना ु होगा;

(ख) सेवारत अधीक्षकों, उप-अधीक्षकों, जेलरों, उप जेलरों और समस्त ग्रेड के अन्य सधाराु त्मक अधिकारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में कम से कम एक बार एक मास के पनश्चर्या ु (रिफ्रे शर) पा(cid:211)यक्रम से गजरना होगाु ;

(ग) कारागार अधिकारियों के लिए ऊध्र्व अंत:क्रिया पा(cid:211)यक्रम (विषयगत);

(घ) सधारात्मक प्रशासन और अपराधियों के उपचार के विभिन्न पहलओं पर अल्पकालिक पा(cid:211)यक्रम;

(ङ) कारागार महानिरीक्षक देश और विदेश में सम्मेलन और विशेष प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रमों में भाग लेने के लिए विशेष योग्यता और क्षमता रखने वाले अधिकारियों का एक पैनल तैयार करेगा;

(च) वरिष्ठ अधिकारियों की अध्ययन टीमों को देश के अन्य राज्यों का दौरा करने के लिए प्रतिनियक्त किया जाु येगा और ऐसी टीमें उन देशों का भी दौरा कर सकें गी जहां नवाचारपर्ण

ू सधारात्मक कार्यक्रम और ु प्रक्रियाएं सफलतापर्वक ू परु :स्थापित की गयीं हैं; और426 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (छ) विभाग में उत्कष्ट ृ कार्य करने वाले अधिकारियों को ऐसे दौरों के लिए प्राथमिकता दी जायेगी।

979. अनशासनु .- (1) प्रशिक्षण संस्था का प्रमख अनशासन के संबंध में आवश्यक नियम बनायेगा और अनशासन के उल्लंघन के

ु मामले में अनशासनात्मक कार्रवाई करने के ु

लिए प्राधिकत होगाृ ।

(2) प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण कालावधि के दौरान विहित पोशाक पहनेंगे।

980. परीक्षण और परीक्षाएं.- (1) प्रशिक्षण संस्था का प्रमख परीक्षाओं और परीक्षणों ु

के बारे में ब्यौरे नियत करेगा जिसमें समस्त संवर्गों के प्रशिक्षणार्थियों को निर्धारित परीक्षाओं और परीक्षणों को उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा और यदि कोई प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम

के दौरान आवश्यक मानकों तक पहंचु ने में विफल रहता है, तो प्रशिक्षण संस्था का प्रमख ु उपयक्तु कार्रवाई के लिए महानिरीक्षक को एक रिपोर्ट अग्रेषित करेगा और परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफलता और प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रमों को संतोषजनक ढंग से परा करने में प्रशिक्षू णार्थी को ऐसी अनशासनात्मक कार्रवाई के

ु लिए उत्तरदायी बनायेगा जो महानिरीक्षक उचित समझे;

और नये भर्ती किये गये कार्मिकों के मामले में, ऐसी विफलता का परिणाम सेवा से सेवोन्मुक्त करना हो सके गा।

(2) किसी प्रशिक्षणार्थी का मल्यांकन समस्तू परीक्षणों और परीक्षाओं में उसके समग्र प्रदर्शन के आधार पर किया जायेगा और प्रशिक्षणार्थियों का मल्यांकन अन्य बिंदओं के ू

ु साथ-साथ निम्नलिखित के आधार पर किया जायेगा:-

(क) काम पर आना और अनशासनु ; (ख) कड़ी मेहनत और शारीरिक सामथ्र्य;

(ग) प्रत्येक परीक्षण और परीक्षा में प्रदर्शन;

(घ) प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रम के दौरान दर्शित विशेष क्षमताएं;

(ङ) नेतत्वृ ; और (च) आचरण, सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता।

981. पस्तकालयु , पत्र-पत्रिकाएं और अन्य आमोद-प्रमोद सविधाएं

ु .- (1) प्रशिक्षण वि(cid:217)यालयों में एक अच्छे पस्तकालय और वाचनालय की सविधा हो

ु गी और पस्तकों ु तथा नियतकालिक पत्रिकाओं के क्रय के लिए संस्था के वार्षिक बजट में उपबंध किया जायेगा।

(2) प्रत्येक वर्ष प्रशिक्षण वि(cid:217)यालय (cid:217)वारा एक सधारात्मक सेवा ु पत्रिका प्रकाशित की जायेगी।

(3) आमोद-प्रमोद सविधाएं

ु आयोजित की जायेंगी।

(4) कारागार प्रशासन के ऐतिहासिक विकास और संस्थागत प्रबंधन के अन्य पहलओं को ु

दर्शित करने वाला एक संग्रहालय प्रशिक्षण वि(cid:217)यालयों में स्थापित किया जायेगा।

982. कार्यस्थल पर प्रशिक्षण जारी रखना.- (1) संस्थाओं में निम्नलिखित प्रशिक्षण सविधाएं आयोजित की जा

ु येंगी:-

(क) दौरों के दौरान मख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों (cid:217)वारा नीति का निर्वचन, (ख) स्टाफ सदस्यों के लिए पस्तु कालय और वाचनालय की सविधाएं

ु ,भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 427 (ग) सधारात्मक कार्य से संबंधित विषयों पर विश्ववि(cid:217)यालयों और वि(cid:217)यालयों के आचार्यों (cid:217)वारा सामाजिक कार्य के व्याख्यान,

(घ) अधीक्षक या किसी अन्य अधिकारी (cid:217)वारा सधारात्मक ु प(cid:217)धतियों पर पाक्षिक वार्ता,

(ङ) संस्थागत स्टाफ सदस्यों (cid:217)वारा पेपर, के स हिस्ट्री, इत्यादि पढ़ना, और (च) प्रशासनिक प्रक्रियाओं, प(cid:217)धतियों और संगठन इत्यादि में सधार पर मासिक ु

चर्चा।

(2) अधिकारियों और जवानों को अच्छी स्थिति में रखने के लिए, प्रशिक्षण वि(cid:217)यालय में ड्रिल, परेड, राइफल, निहत्थे य(cid:217)धु , कै न-ड्रिल और भीड़ को तितर-बितर करने वाली ड्रिल में दिया जाने वाला प्रशिक्षण, संस्थान में भी जारी रखा जायेगा और खेलों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा; नयी वस्तओं और प्रशिक्षण के तरीकों को

ु प्रस्तुत करके कार्मिकों में रुचि और उत्साह उत्पन्न करने के प्रयास किये जायेंगे और कार्मिकों के मध्य पहल, ब(िcid:217)धमत्ताु , स्वतंत्र निर्णय और संसाधनशीलता को प्रोत्साहित करने के अवसर आपर्त किू ये जायेंगे। (3) सामान्य या विशिष्ट आदेशों के अध्यधीन रहते हएु , जो कारागार महानिरीक्षक (cid:217)वारा इस निमित्त जारी किये जा सकते हैं, प्रशिक्षण कार्यक्रम में शारीरिक अभ्यास, स्क्वाड ड्रिल, हथियार प्रशिक्षण, संगीन लड़ाई, औपचारिक परेड, निहत्थे य(cid:217)धु , बैटन और कै न ड्रिल, भीड़ तितर-बितर करना, आब्स्टेकल कोर्स, गार्ड और संतरी (cid:212)यटीू का निरीक्षण, सलामी, किट निरीक्षण और आपातकालीन ड्रिल सम्मिलित होंगे।

(4) अधिकारियों और सरक्षा कार्मि

ु कों के लिए वर्ष में एक बार राइफल अभ्यास आयोजित किया जायेगा और ऐसे अवसरों पर समस्त सरक्षा उपाय ु अंगीकतृ किये जायेंगे।

(5) इन समस्त मामलों में एक अनभवी ु अधिकारी को ऐसे प्रशिक्षण का प्रभारी बनाया जायेगा और जहां भी आवश्यक हो, स्थानीय पलिस अधिकारियों से आवु श्यक सहायता अभिप्राप्त की जा सके गी।

(6) सरक्षा काु र्मिकों के लिए निम्नलिखित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किये जायेंगे:-

(क) छ(िcid:210)टयों ु को छोड़कर, प्रतिदिन 45 मिनट तक शारीरिक प्रशिक्षण और ड्रिल,

(ख) जेलर अनदेशकु या हवलदार अनदेशकु (cid:217)वारा सप्ताह में एक बार नियमों, विनियमों और प्रक्रियाओं में अनदेशु दिया जायेगा।

(ग) प्रशिक्षण कालावधि के दौरान आपात परिस्थितियों को निवारित और नियंत्रित करने का अभ्यास, और

ु , फटबॉलु , वॉली-बॉल, बास्के ट-बॉल जैसे (घ) उपलब्ध सविधाओं के अनसार क्रिके टु खेलों का आयोजन किया जा सके गा।

(7) प्राचार्य निम्नलिखित रिपोर्ट कारागार के महानिरीक्षक को भेजेगा:-

(क) पी.टी. ड्रिल में प्रशिक्षण, व्याख्यानों, चर्चाओं, आपात अभ्यास के बारे में मासिक रिपोर्ट; और428 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) (ख) राइफल अभ्यास पर छह मासिक रिपोर्ट।

983. कल्याण समिति.- (1) प्रत्येक संस्था में एक कल्याण समिति होगी जिसमें कार्यकारी, तकनीकी, मंत्रालयिक और सुरक्षा या अभिरक्षण कार्मिकों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे और समिति का पदेन अध्यक्ष, अधीक्षक होगा।

(2) कल्याण समिति मास में कम से कम एक बार बैठक करेगी और इसकी बैठकों का कार्यवत्तृ अभिलिखित किया जायेगा।

ु को सविधाएं ु 984. कल्याण निधि.- प्रत्येक संस्था में, स्टाफ सदस्यों और उनके कटंबोंु

उपलब्ध करवाने के लिए एक कल्याण निधि सजित कीृ जायेगी और यह निधि निम्नलिखित स्रोतों से विकसित की जायेगी, अर्थात ्:-

(क) स्टाफ सदस्यों से मासिक अभिदाय;

(ख) सरकार (cid:217)वारा विरचित नियमों के अध्यधीन रहते हए ु स्वैच्छिक दान; (ग) विनिधानों से प्रो(cid:217)भूत होने वाली ब्याज; (घ) कलाकारों, ना(cid:210)य दलों और सिनेमा (cid:217)वारा लाभकारी प्रदर्शन;

(ङ) सहकारी क्रे डिट सोसायटी से दान;

(च) सहकारी दकान से लाभु ; और (छ) सरकार से सहायिकी।

् स्टाफ इकाई होगी जो कल्याण 985. कल्याण इकाई.- बड़े संस्थानों में, एक पथकृ

कार्यों के समस्त पहलओं जैसे स्टाु फ कैं टीन और सहकारी समिति में भाग लेगी।

986. कल्याण प्रसविधाएं

ु .- (1) कल्याण निधि से कार्मिकों को निम्नलिखित प्रसविधाएं

ु उपलब्ध करवायी जायेंगी:-

(क) अचानक बीमारी के मामले में राहत;

(ख) चिकित्सा सहायता, जहां सामान्य चिकित्सा सहायता से अधिक की आवश्यकता है और जो स्टाफ सदस्य की आर्थिक क्षमता से परे है;

(ग) स्टाफ की संतानों की शिक्षा के लिए सहायता;

(घ) स्टाफ पस्तकालयु ; और (ङ) स्टाफ खेल, संस्थागत और अंतर-संस्थागत फिक्स्चर्स, इत्यादि।

(2) कारागार कार्मिकों को संपर्ण सेवा या कै डर की सामान्य शिकायतों पर चर्चा करने और उनके निवारण के लिए सार्थक चर्चा करने के लिए संस्थागत और राज्य स्तर पर एक उचित मंच उपलब्ध करवाया जायेगा।

अध्याय 43

कारागार का कम्प्यटरीकरणू

987. बन्दियों के क्रियाकलापों का कम्प्यूटरीकरण.- (1) संपर्ण ू कारागार प्रशासन को कम्प्यटरीकत ू ृ किये जाने की आवश्यकता है जिससे कि डेटाबेस तक आसानी से पहंचा जा ु

सके और अधिक कशलता से प्रबंधित किया जा सके । यह एकीकत आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) का आज्ञापक का भाग भी है जो कारागारों, अदालतों और पलिस स्टेशनों को ुभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 429 एक त्रिकोण के रूप में जोड़ने का प्रयास करता है, इससे पलिस और अदालतों के साथ ु

एकीकत डेटा साझा ृ किया जा सके गा जिससे अपराधियों की दक्षतापर्वकू और व्यापक ट्रैकिग ं और तेज़ विधिक प्रवर्तन प्रतिक्रियाएं हो सके गी।

(2) कारागार प्रशासन को उनके अपने आज्ञापक क्रियाकलापों को प्रभावी रूप से और दक्षतापर्वकू निष्पादित करने में आने वाली प्रमख चनौतियां

ु निम्नांकित हैं,-

ू ;

ं ;

(क) कें द्रीय स्तर पर उचित समय पर सचनाू की अनपलब्धताु ; (ख) बन्दियों का गैर-कें द्रीकत सचना भंडारृ (ग) बन्दी क्रियाकलापों की अनचित ट्रैकिगु (घ) विभिन्न हितधारक अभिकरणों के साथ अपर्याप्त अंत:क्रिया;

(ङ) अनचित डाु टा विश्लेषण; (च) कारागारों की बहसंख्याु में उपलब्ध अनेक स्टैंडअलोन आईटी सिस्टम; (छ) पैरोल या फर्लो पर बाहर गये बन्दी की अपर्याप्त ट्रैकिगं ;

(ज) पैरोल, ओपन एयर कैं प और स्थायी पैरोल पर बन्दी की पात्रता के संबंध में;

(झ) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 436 या 436क के अधीन विचाराधीन बन्दियों के निरोध के मामले में कशलु अलार्म प्रणाली का अभाव; और (ञ) एक बार सजा पूर्ण होने के पश्चात बन्दी् को छोड़े जाने से संबंधित अपर्याप्त सचनाू ।

(3) कम्प्यटरीकरण का उ(cid:217)देश्य ू कारागारों को निम्नलिखित मलू सविधाएं और एक एकीकतु

ृ डाटा साझेदारी मंच प्रदान करना है,-

(क) न्यायालयों और पलिस ु थानों के साथ परस्पर संबंधों वाला एक व्यापक वेब आधारित कारागार सॉफ्टवेयर;

(ख) न्यायालयों और पलिस के साथ एकीकत डा

ृ टा साझाकरण;

(ग) व्यापक वीडियो कॉन्फ्रें स सविधाएं

ु ;

(घ) अंत:वासियों के आने और जाने के लिए बायोमेट्रिक पहंचु ; (ङ) प्रेरण और पनश्चर्या प्रशिक्षण पा(cid:211)यक्रमों के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं;

(च) अंत:वासियों को उनके मामले के ब्यौरों तक पहंचने के लिए ु कारागारों में टच स्क्रीन कियोस्क;

(छ) बन्दी की उचित पहचान के लिए डाटा डिजिटलीकरण के माध्यम से सि(cid:217)धदोष और विचाराधीन बन्दियों दोनों का फोटोग्राफ संरक्षित किया जा सकता है, जो आवश्यकता के समय अपेक्षित होगी।

(4) कारागार कम्प्यटरीकरण के सफल कार्यान्वयन के पश्चा त न्ि म्नलिखित परिणाम अपेक्षित होंगे:-

430 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(क) समस्त कारागारों और पलिस विभाु ग, गह मंत्रालय ृ (एमएचए) में सचना ू का निर्बाध और एकीकत प्रवाहृ , जिसके (cid:217)वारा जानकारी की उपलब्धता वास्तविक समय में संभव हो जाती है जिसे खोजना आसान हो जाता है और बन्दियों के एक कें द्रीकत डाृ टाबेस से बन्दी की जानकारी की त्वरित पनप्र्राप्ति होती है

ु ;

(ख) रिहाई की संभावित तारीख (पीडीआर), कारागार अधिभोग, पैरोल या फर्लो इत्यादि का लाभ उठा रहे बन्दी जैसी जानकारी के साथ वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के लिए डैशबोर्डों या सांख्यिकीय रिपोर्ट या एमआईएस रिपोर्ट की उपलब्धता;

(ग) बन्दियों के क्रियाकलापों जैसे जमानत, निकल भागने, जर्मा

ु ना संदाय, घटना की सजा, बन्दी की आय, अदालत की अपीलें, अदालत में पेशी, छटू , प्रतिप्रेषण, मजदरीू , कार्य आबंटन, रिहाई और स्थानांतरण का पर्ण

ू रिकॉर्ड;

(घ) पैरोल या फर्लो जैसी अनमोदन प्रक्रियाओं के लिए ु कार्य प्रगति आधारित समाधान और प्रणाली में इसका वास्तविक समय परावर्तन;

(ङ) रिहाई की संभावित तारीख (पीडीआर) स्वचालित संगणना जिससे सनिश्चित हो कि मानवीय विधिमान्यु करण की आवश्यकता के बिना बन्दियों की रिहाई में विलंब ना हो;

(च) बेहतर आगंतक प्रबंध प्रक्रिया जो ु पदधारियों को इस प्रकार आगंतकों के ु प्रबंध, किसी विशिष्ट बन्दी के लिए आगंतकों की संख्या और मलाकात की आवत्तिृ , इत्यादि पर नज़र रखने में मदद करती है;

(छ) एक कें द्रीकत ृ बन्दी रजिस्ट्री का सजनृ , जिससे अभिलेखों के डाटा डिजिटलीकरण के माध्यम से व्यक्तियों के सत्यापन और विधिमान्यकरण प्रयोजनों के लिए पलिस विभागों और अन्य ु मख्यु विधि प्रवर्तन एजेंसियों (cid:217)वारा पहं ुचा जा सकता है।

(आईसीजेएस) का कार्यान्वयन एक प्रमख घटक है ु

(5) एकीकत आपराधिक न्याय प्रणाली ृ

जिससे अपराध सधार ु और आपराधिक ट्रैकिग नेटवर्क सिस्टम ं (सीसीटीएनएस) परियोजना को प्राप्त किया जा सके और इसमें निम्नलिखित घटक सम्मिलित होंगे,-

(क) समस्त राज्यों या संघ राज्यक्षेत्रों में कारागार रोल आउट करना;

(ख) कारागारों के लिए निर्धारण आधारित हार्डवेयर और नेटवर्क के उपबंध करना;

(ग) अभियोजन कार्यालयों और विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए हार्डवेयर का उपबंध करना;

(घ) विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं और अभियोजन कार्यालयों के लिए मॉ(cid:212)यल्सू का विकास; औरभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 431 (ङ) इन समस्त अनप्रयोगों के साथ सीसीटीएनएस का एकीकरण।

(6) कें द्रीकत ृ कारागार प्रबंध प्रणाली के सफल कार्यान्वयन के लिए, प्रत्येक कारागार में ऑफिस हार्डवेयर और पर्याप्त नेटवर्क कनेक्टिविटी का उपबंध किया जाना आवश्यक है।

(7) सॉ(cid:257)टवेयर एप्लिके शन का रोल आउट और इसकी स्थिरता प्रत्येक राज्य कारागार में अपेक्षित ऑफिस हार्डवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी की उपलब्धता पर निर्भर है।

अध्याय 44

विविध

(विकास योजनाओं में कारागारों का सम्मिलित होना)

988. विकास योजना में कारागारों का स्थान.- (1) चंकि ू कारागार प्रशासन का उन

जाते हैं, जीवन की गणवत्ता में सधार ु

ु का लोगों के , जो स्वीकत सामाजिक मानदंडों से भटकृ

प्रत्यक्ष संबंध है, इसलिए कारागारों के विकास को राष्ट्रीय विकास योजनाओं के एक अभिन्न अंग के रूप में आगे बढ़ाया जायेगा।

(2) कारागारों पर विनिधान से अपराधियों का न के वल विधि का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में सधार और पनर्वास होगा

ु , बल्कि उन लोगों के जीवन की सरक्षा भी होगीु जो अपराध से प्रतिकल रूप से प्रभावितू होते हैं।

(3) राज्य सरकार, कें द्रीय और राज्य योजनाओं में कारागारों के समग्र विकास के लिए स्कीमें बनाने के लिए कदम उठायेगी और ऐसी स्कीमें न के वल कारागार कार्यक्रमों की सधारात्मक ु

विषय-वस्तु से संबंधित होंगी बल्कि कारागार स्टाफ, जो सधारात्मक प्रशासन का मख्य ु

ु घटक हैं, की गणवत्ता में सधार से भी संबंधित होंगी।

ु

989. राज्य सलाहकार बोर्ड.- कारागारों में सधारात्मक कार्य

ु , अंत:वासियों के पनर्वास ु और बन्दियों या उनके नातेदारों की शिकायतों के निवारण से संबंधित मामलों पर राज्य सरकार और जेल प्रशासन को सलाह देने के लिए एक राज्य सलाहकार बोर्ड होगा।

टिप्पण: I राज्य सलाहकार बोर्ड, प्रभावी अंतर-विभागीय सहयोग और समन्वय लाने के क्रम में राज्य सरकार के कारागार, विधि और न्याय, पलिसु , शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग के विभागीय प्रमखों ु के समन्वय स्थल के रूप में कार्य करेगा।

टिप्पण: II राज्य सलाहकार बोर्ड जीवन के समस्त क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता सजितृ करने और अपराधियों के पनर्वास की आवश्यकता पर ु ज़ोर देने वाले मखिु याओं की भमिका भी निभाू येगा।

990. बोर्ड की संरचना.- राज्य सलाहकार बोर्ड में राज्य के निम्नलिखित पदधारी सम्मिलित होंगे, अर्थात ्:-

(क) प्रभारी सचिव, गह विभागृ -अध्यक्ष के रूप में; (ख) प्रमख सचिवु , विधि विभाग या उसका नामनिदशिर्तीे जो सचिव की रैंक से नीचे का न हो;

432 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग)

(ग) प्रभारी सचिव, वित्त विभाग या उसका नामनिदशिर्तीे जो सचिव की रैंक से नीचे का न हो;

(घ) प्रभारी सचिव, प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग या उसका नामनिदशिर्तीे जो संयक्तु सचिव की रैंक से नीचे का न हो;

(ङ) पलिस महानिदेशकु ; (च) कारागार महानिदेशक, सदस्य सचिव के रूप में;

(छ) निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग;

(ज) निदेशक, तकनीकी शिक्षा;

(झ) निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग; और

(ञ) मख्य ु अभियंता, लोक निर्माण विभाग।

991. बोर्ड के अन्य सदस्य.- राज्य सरकार (cid:217)वारा राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में निम्नलिखित गैर-पदधारियों को भी नियक्त किया जाु येगा, अर्थात ्:-

(क) राज्य विधानसभा के तीन सदस्य, जिनमें से एक महिला होगी और एक राज्य विधान म(cid:214)डल में प्रमख विपक्षी दल से होगा ;

(ख) राज्य से निर्वाचित दो संसद सदस्य;

(ग) सामाजिक सधार के क्षेत्र में काम करने वाले जनता के तीन प्रख्यात सदस्य जिनमें से एक महिला होगी; और

(घ) राज्य की कारागार सेवा का एक सेवानिवत्त अधिकारीृ , जो उप महानिरीक्षक की रैंक से नीचे का नहीं हो।

992. बोर्ड की बैठक.- (1) राज्य सलाहकार बोर्ड एक कै लेंडर वर्ष में कम से कम तीन बैठकें आयोजित करेगा और किसी भी असाधारण स्थिति को देखते हएु , सदस्य सचिव राज्य सलाहकार बोर्ड की एक विशेष बैठक बलाने के लिए अधिकत है ताकि सदस्यों को ऐसी बैठकों की आवश्यकता वाली स्थिति के ब्यौरों से अवगत कराया जा सके ।

(2) राज्य सलाहकार बोर्ड की ऐसी बैठक की कार्यवाही आदेश पस्तिका में ु अभिलिखित की जायेगी और उसकी एक प्रति गह विभाग के प्रमख सचिव या सचिव को

ु अग्रेषित की जायेगी।

993. बोर्ड के सदस्यों का दौरा.- (1) राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों को, व्यक्तिगत रूप से या समह में राज्य के

ू किसी भी कारागार का दौरा, कारागार अधीक्षक को पर्व सचनाू ू के साथ या उसके बिना, करने का अधिकार होगा।

(2) तथापि, राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य शाम की तालाबन्दी और सबह तालाु खलने के ु

मध्य की कालावधि के दौरान किसी भी जेल का दौरा करने से विरत रहेंगे।

(3) अधीक्षक राज्य सलाहकार बोर्ड के दौरे पर आये सदस्य या सदस्यों के समक्ष उपस्थित होगा। यदि बन्दियों के सधाराु त्मक कार्य, आमोद-प्रमोद, बन्दियों के प्रशिक्षण, कारागार आहार, बन्दियों की स्वास्थ्य देखभाल, बन्दियों की शिकायतों और प्रतितोष के संबंध में कोईभाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 433 कागज या दस्तावेज, यदि दौरे पर आये राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य या सदस्यों (cid:217)वारा मांगा गया हो, तो वह अधीक्षक (cid:217)वारा उपलब्ध करवाया जायेगा।

(4) अधीक्षक यह सनिश्चित करेगा किु दौरे पर आने वाले राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य या सदस्यों के पास शिकायत दर्ज कराने वाले बन्दी, उन व्यक्तियों के प्रतिशोध का शिकार न बनें जिनके विरु(cid:217)ध शिकायत की गयी है।

(5) राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य या सदस्यों के ऐसे किसी भी दौरे के बाद, अधीक्षक कारागार निदेशालय के प्रमख को सचित करेगा।ु

ू

994. बैठक के लिए गणपूर्ति.- राज्य सलाहकार बोर्ड की बैठकों के प्रयोजन के लिए कम से कम दो शासकीय और दो गैर-शासकीय सदस्यों सहित छह सदस्यों से गणपूर्ति होगी।

995. सदस्यता का र(cid:217)द होना.- (1) यदि राज्य सलाहकार बोर्ड का कोई गैर-शासकीय सदस्य पर्व सचना और नोटिस के बावजद लगातार तीन अवसरों पर बोर्ड की बैठकों में उपस्थित होने में विफल रहता है, तो सलाहकार बोर्ड की उसकी सदस्यता स्वत: र(cid:217)द हो जायेगी और बोर्ड का सदस्य-सचिव उसके स्थान पर एक नये गैर-शासकीय सदस्य की नियक्ति के लिए राज्य सरकार ु को कहेगा।

(2) राज्य सलाहकार बोर्ड का कोई गैर-शासकीय सदस्य, बोर्ड में अपनी नियक्ति की ताु रीख से तीन वर्ष की कालावधि के लिए पद धारण करेगा और पनर्नियक्ति ु ु के लिए उस पर विचार किया जा सके गा।

(3) राज्य सरकार किसी भी समय राज्य सलाहकार बोर्ड के किसी भी गैर-शासकीय सदस्य की नियक्ति को ु प्रतिसं(cid:511)त करने का अधिकार सरक्षित रखती है।ु

(4) बोर्ड का गैर-शासकीय सदस्य बोर्ड की बैठकों में भाग लेने के लिए समय-समय पर राज्य सरकार (cid:217)वारा यथा विहित भत्ते प्राप्त करेगा।

(5) कारागार के दौरों के दौरान, राज्य सलाहकार बोर्ड का कोई सदस्य कोई हथियार या आग्नेयास्त्र नहीं रखेगा, न ही उसके साथ उसका सशस्त्र या निहत्था, आधिकारिक या निजी सरक्षा गार्ड

ु होगा और अधीक्षक दौरा करने वाले राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य या सदस्यों को उचित सरक्षा ु उपलब्ध करवायेगा।

.- (1) राज्य सरकार मानिटरिंग, अध्ययन, 996. योजना, अनसंधान और विकास तंत्रु

विश्लेषण और अनसंधान के माध्यम से अपने उ(cid:217)देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने में कारागारों और सधारात्मक सेवाओं की प्रभावकारिता पर आवश्यक फीडबैक प्रदान करने और क्षेत्र में नये रुझानों और विकास की प्रणाली से अवगत रखने के लिए एक तंत्र विकसित करेगी।

(2) ऐसा तंत्र न के वल संगठन के लिए, बल्कि व्यक्तिगत संस्थाओं के लिए भी, कारागार भवनों के कार्यात्मक नवीकरण और पननिर्र्माणु , सधार संस्थाु ओं के विविधीकरण, बन्दियों के वर्गीकरण, कारागार उ(cid:217)योगों का पनर्वासु और पनर्रचनाु , कारागार कार्यक्रमों की सधारात्मक ु

विषयवस्तु, कारागार कार्मिकों की भर्ती और प्रशिक्षण और आपराधिक न्याय प्रणाली की अन्य शाखाओं के साथ समन्वय के साधनों के संदर्भ में विशिष्ट उ(cid:217)देश्यों और लक्ष्यों को स्पष्ट434 राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 भाग 4(ग) रूप से बतायेगा। यह सधाराु त्मक प्रणाली के लिए मात्रात्मक लक्ष्य निर्धारित करेगा जैसे, अपराध में कमी, पनर्वासित अपराधियों की संख्या , पर्व अपराधियों की सं

ू ख्या, शिक्षित बन्दियों की संख्या, कारागारों की उत्पादकता में व(िcid:217)धृ , कारागार विनिर्माण विक्रय आगम, नवीकरणीय बैंकिग ं स्कीमों और अन्य स्रोतों के अधीन बन्दियों या पर्व ू बन्दियों को दिये गये ऋण की राशि और विभाग (cid:217)वारा वर्ष में कम से कम एक बार संगठनात्मक और संस्थागत लक्ष्यों की समीक्षा के लिए एक स्थापित प्रक्रिया होगी।

997. कारागार विकास बोर्ड.- (1) कारागारों में ढांचागत सविधाओं में सधार और ु

आधनिकीकरण के लिएु

, त्वरित निर्णय लेने और आधनिक तकनीक और प्रबंधकीयु प्रथाओं का पूर्ण लाभ उठाने के लिए अनकल संस्थागत व्यु ू वस्था रखने के लिए राज्य में एक उच्च शक्ति वाले कारागार विकास बोर्ड की स्थापना की जा सके गी।

1. मख्यमंत्री ु अध्यक्ष
2. जेल विभाग का प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष
3. प्रभारी सचिव, गह विभाग ृ सदस्य
4. प्रभारी सचिव, वित्त विभाग सदस्य
5. प्रभारी सचिव, राजस्व विभाग सदस्य
6. प्रभारी सचिव, विधि एवं विधिक कार्य विभाग सदस्य
7. रजिस्ट्रार (प्रशासन) राजस्थान उच्च न्यायालय जयपर ु सदस्य
8. कारागार महानिदेशक सदस्य सचिव
9. निदेशक, अभियोजन सदस्य
10. कारागार प्रशासन या कारागार सधारों का ज्ञान रखने वाले राज्य ु सरकार Ùवारा नामनिर्दिष् ट दो व्यक्ति, जिनमें से एक महिला होगी। सदस्य।

(3) बोर्ड के कत्य ृ होंगे,-

(क) समस्त कारागारों में बन्दियों की मलभतू ू आवश्यकताओं और मानव जीवन की गरिमा के अनरूप सविधाओं के

ु उपबंधों के विशेष संदर्भ में उनके जीवन की परिस्थितियों का परीक्षण करना;

(ख) यदि वि(cid:217)यमान कारागार भवन संतोषजनक स्थिति में नहीं हैं, या मरम्मत के योग्य नहीं हैं, तो नये भवनों के निर्माण की सिफारिश करना;

भाग 4(ग) राजस्थान राज-पत्र, जन ू 12, 2026 435

(ग) कारागारों को सधार कें द्र के रूप में विकसित करने की दृष्टि से शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उत्पादक कार्यों सहित 'बन्दियों के उपचार' के लिए कार्यक्रमों के विकास के उपायों की समीक्षा करना और सझाव देनाु ;

(घ) आधनिक प्रौ(cid:217)योगिकी

ु , प(cid:217)धतियों और साधित्र को प्रतिष्ठापित करके कारागारों का कशलतापर्वक प्रबंधन करना

ू ; और (ङ) ऐसे अन्य कार्य जो समय-समय पर राज्य सरकार (cid:217)वारा विनिर्दिष्ट किये जायें।

998. वार्षिक रिपोर्ट का प्रकाशन.- राज्य सरकार राज्य के विभिन्न कारागारों के कत्योंृ और प्राप्त प्रगति पर एक वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करेगी।

999. विशेषज्ञता का विनिमय.- राज्य सरकार अन्य राज्यों के साथ तकनीकी जानकारी और वत्तिकृ विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में कारागारों के प्रशासन और सधारात्मक सेवाओं में सर्वोत्तम ु कार्यप्रणालियों को अपनाने में या तो स्वयं की पहल पर या कें द्र सरकार की सहायता से सक्षम हो।

1000. कठिनाइयों का निराकरण.- यदि इन नियमों के उपबन्धों को प्रभावी बनाने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसचना (cid:217)वाराू , ऐसे उपबंध कर सके गी, जो इन नियमों से असंगत न हों, और जो कठिनाई के निराकरण के लिए आवश्यक, या समीचीन हों:

परंत ु इस नियम के अधीन कोई भी आदेश इन नियमों के प्रारंभ होने की तारीख से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात ् नहीं किया जायेगा।

1001. निरसन और व्यावत्तियां

ृ .- (1) राजस्थान कारागार नियम, 1951 को इसके (cid:217)वारा निरसित किया जाता है।

(2) उप-नियम (1) के अधीन किया गया निरसन इस प्रकार निरसित किये गये नियमों के पूर्व प्रवर्तन को प्रभावित नहीं करेगा और इस प्रकार निरसित किये गये नियमों के अधीन किये गये या की गयी कार्रवाई या की गयी कोई नियक्ति याु बनाया गया कोई प्रतिनिधिमंडल, अधिसचनाू , आदेश, निदेश इन नियमों के अधीन किये गये समझे जायेंगे, जहां तक यह इन नियमों के उपबन्धों के साथ असंगत नहीं हैं, लाग रहेंगे और तब तक ू

लाग रहेंगे जब तक कि इन्हें ू अतिष्ठित नहीं किया जाता।

[F.7(61)Home-12/Kara/1996 part]

राज्यपाल के आदेश से,

गोविन्द प्रसाद,

शासन उप सचिव।

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Government Central Press, Jaipur.

Cite this issue. Rajasthan Extraordinary Gazette, Government of Rajasthan, 12 June 2026. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.rajasthan_extraordinary.2026-06-12.5118104/. Archive identifier in.gazette.rajasthan_extraordinary.2026-06-12.5118104.