Servants of Knowledge
Uttarakhand Gazette · Government of Uttarakhand

Notification

Published 05 February 2022

Notification no.
24/VII-A-2/2022/11-sidkul-2020
Issued By
AMIT SINGH NEGI(Secretary)
Identifier
in.gazette.uttarakhand.2022-02-05.24_VII-A-2_2022_11-sidkul-2020
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/DDN / 30/ 2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की

खण्ड-23 ] रुड़की , शनिवार, दिनांक 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्) [ संख्या-06

विषय-सूची

प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग- अलग दिये गए हैं , जिससे उनके अलग-अलग खण्ड बन सकें

विषय

वार्षिक चन्दा

पृष्ठ संख्या

रु०

सम्पूर्ण गजट का मूल्य

3075

191-317

1500 भाग 1 - विज्ञप्ति- अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

67-73

1500 भाग 1 -क- नियम, कार्य- विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

975 भाग 2-आज्ञाएं , विज्ञप्तियां, नियम और नियम विधान , जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां , भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण

भाग 3 -स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़ - पत्र , नगर प्रशासन , नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय ) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया

975

भाग 4- निदेशक , शिक्षा विभाग , उत्तराखण्ड

975 भाग 5- एकाउन्टेन्ट जनरल , उत्तराखण्ड

975

भाग 6-बिल , जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

975

975 भाग 7- इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

07-14

975 भाग 8 -सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़ - पत्र आदि

1425

191 क 192

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

औद्योगिक विकास अनुभाग-2

अधिसूचना

07 जनवरी , 2022 ई ०

संख्या 24 / VII - A - 2 / 2022 / 11- सिडकुल - 2020 - चूंकि प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने व प्रोत्साहित करने हेतु अधिसूचना सं0-2381 / सात - औ ० वि०-1 / 2005-137- उद्योग / 2005 , दिनांक 07.07.2005 के द्वारा उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम , 1976 के प्रावधानों के अन्तर्गत राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ( सीडा) का गठन किया गया ।

और चूंकि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ( EODB ) के अर्न्तगत दिये गये सुझावों के अनुसार राज्य में वर्ष 2016 मे Unified Building Byelaws लागू किये गये थे । वर्तमान में सीडा क्षेत्रान्तर्गत औद्योगिक भवन के प्रकरणों के निस्तारण हेतु आवास विभाग द्वारा निर्गत भवन उपविधि के अनुसार ही औद्योगिक प्रकरणों का निस्तारण किया जा रहा है । सीडा क्षेत्रान्तर्गत औद्योगिक भवनों प्रचलित राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक भवन उपविधियों (Building Byelaws ) के संबंध में समय- समय पर उद्योगपतियों तथा विभिन्न औद्योगिक संगठनों द्वारा संशोधन किये जाने की मांग की जाती रही है । इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा भी पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने हेतु विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिसके क्रम में औद्योगिक भवन निर्माण उपविधियों में संशोधन किये जाने की आवश्यकता है ।

अतएव, अब राज्यपाल , सीडा की 16 वीं बोर्ड बैठक में अनुमोदित उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास नियन्त्रण विनियम-2020 (यू० जी० आई० डी० सी ०आर ० ) के सम्बन्ध में सम्यक विचारोपरान्त उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम , 1976 (उत्तराखण्ड राज्य मे यथा प्रवृत्त) की धारा 8 तथा 9 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास नियन्त्रण विनियम-2022 (यू० जी० आई ०डी० सी ०आर0-2022 ) बनाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है ।

भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

193

सामान्य औद्योगिक विकास नियन्त्रण विनियम-2022

(GIDCR-2022)

SIDA

उत्तराखण्ड राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण 194

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

अनुक्रमणिका

कम सं०

विषय पृष्ठ सं०

195-196

अध्याय-1 प्रारम्भिक

1.1 संक्षिप्त नाम प्रारम्भ एवं लागू होना

2.0 परिभाषाऐं

195

195-196

197-209

अध्याय -2 भवन निर्माण अनुज्ञा / अभिन्यास तथा अधिभोग

3.0 भवन / अभिन्यास की अनुज्ञा

197-209

210-226

अध्याय -3 सामान्य आवश्यकताएं

 4.0    समूह आवास                                                                    210
 5.0    एकल आवासीय भवन (समूह आवास को छोड़कर)                                         210
 6.0    अन्य भवन (आवासीय एवं औद्योगिक भवनों को छोड़कर)                               210
 740    औद्योगिक भवन                                                             210-213
 8.0    औद्योगिक भवनों हेतु अन्य प्रावधान                                       213-217
9.0     अधिमानी प्रावधान ( Overriding clauses )                                      217
10.0    सामान्य आवश्यकताएं                                                      217-219
11.0   निर्देश                                                                  219-223
12.0    औद्योगिक ले- आउट / औद्योगिक पार्क / औद्योगिक आस्थान                     223-226

227-238

अध्याय -4 अपराधों के शमन हेतु मार्गदर्शक सिद्धान्त

13.0     अपराधों के शमन हेतु मार्ग दर्शक सिद्धान्त                                    227-230
 14.0    भू- खण्डों का एकीकरण ( Amalgamation )                                        230-231
15.0     भू- खण्डों का उपविभाजन (Subdivison )                                         231-233
16.0     भू- खण्डों के एकीकरण व उपविभाजन के फलस्वरूप अभिन्यास मानचित्र में संशोधन की       233
        व्यवस्था ।
17.0     भवन उपविधि / विनियम में छूट                                                  233-234
18.0     प्राधिकरण के कार्यों के संचालन की व्यवस्था                                        234
19.0     भवनो का जोखिम आधारित वर्गीकरण और निरीक्षण प्रक्रिया                          234-238

भाग 1 ]

195 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

अध्याय-1

प्रारम्भिक

1.1 संक्षिप्त नाम प्रारम्भ एवं लागू होना

1.1.1 इस विनियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास विनियमावली, 2022 (UGIDCR - 2022) है ।

1.1.2 यह अधिसूचना की तिथि से प्रवृत्त होगी ।

1.1.3 जो UGIDCR - 2022 प्रावधान द्वारा आच्छदित नहीं हैं , वह राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता, 2016, आवास विभाग उत्तराखण्ड शासन द्वारा निर्गत भवन निर्माण एवं विकास उपविधि , आवास विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा समय- समय पर निर्गत अद्यतन शासनादेशों तथा शहरी विकास विभाग मंत्रालय , भारत सरकार के माडल भवन उपविधि-2016 के प्रावधान लागू होंगे ।

1.1.4 यह विनियम राज्य सरकार के अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों हेतु लागू होंगे ।

2.0 परिभाषाऐं: इस विनियमावली में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा आपेक्षित न हो-

2.1 " अधिनियम " से उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 (यू० पी ० एक्ट सं० 6 ऑफ 1976 ) जिसको उत्तराखण्ड राज्य द्वारा अनुकूलित एवं उपान्तरित अभिप्रेत है;

2.2 "पर्वतीय क्षेत्र / मैदानी क्षेत्र" जैसा कि आवास विभाग , उत्तराखण्ड शासन के भवन उपविधि में परिभाषित पर्वतीय व मैदानी क्षेत्र के अनुसार होंगे । तथापि, कोटद्वार अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र को मैदानी क्षेत्र अन्तर्गत माना जाएगा । इसके अतिरिक्त, भविष्य में आवश्यकतानुसार सम्बन्धित क्षेत्रों को उनकी भौगोलिक व सामान्य स्थालाकृति अनुसार परिभाषित किया जाएगा;

2.3 घरेलू/ कॉटेज उद्योग सेः ऐसी औद्योगिक इकाई जिनमे अधिकतम 5 श्रमिक कार्यरत हों तथा विद्युत खपत अधिकतम 5 किलोवॉट हो अभिप्रेत है । यह इकाई प्रदूषण रहित इकाई हो तथा जिनमे ज्वलनशील पदार्थों का भण्डारण न हो;

2.4 "सुक्ष्म उद्योग से" ऐसे उद्योग जिनमे अधिकतम रू० 1 करोड़ का प्लान्ट व मशीनों में निवेश किया गया हो तथा जिसका टर्नओवर रू 0 5 करोड़ से अधिक न हो अभिप्रेत है;

*स्रोतः राज्य औद्योगिक नीति, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली ।

2.5 "उद्योग " उद्योग को एक उद्यम ( enterprise ) के रूप में माना जाएगा । विभिन्न उद्योग समूहों, जिनको उत्पाद व अन्य शुल्कों में छूट दिये जाने हेतु उद्योग निदेशालय द्वारा परिभाषित किया गया है, का प्रयोजन आवास विभाग के भवन उपविधि में पृथक- पृथक use group अन्तर्गत 196

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

निर्धारित प्रयोजन के आधार पर परिभाषित किया जाएगा तथा सम्बन्धित प्रयोजन हेतु निर्धारित 2.6 भवन उपविधि मानकों के अनुसार परिक्षण कर मानचित्र स्वीकृति की कार्यवाही की जाएगी; "योजना ( Plan ) से" महायोजना / परिक्षेत्रीय योजना / क्षेत्रीय विकास योजना / औद्योगिक आस्थान की अभिन्यास योजना, जो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित है, अभिप्रेत है ।

2.7 उन शब्दो और पदो के, जो इसमें प्रयुक्त है, और परिभाषित नही है, किन्तु भारत की राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता , 2016 , आवास विभाग उत्तराखण्ड शासन द्वारा निर्गत भवन उपविधि तथा मॉडल भवन, उपविधि (शहरी विकास मंत्रालय , भारत सरकार) में परिभाषित है, वही अर्थ होंगे, जो उनमें है ।

197 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

अध्याय -2

भवन निर्माण अनुज्ञा / अभिन्यास तथा अभियोग

3.0 भवन/ अभिन्यास की अनुज्ञाः_कोई व्यक्ति भवन निर्माण एवं स्थल विकास / भू- उपविभाजन का कार्य मुख्य कार्यकारी अधिकारी , सीडा अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी की बिना पूर्व अनुमति / स्वीकृति के नहीं करेगा ।

3.01 भवन निर्माण अनुज्ञा हेतु आवेदनः-

i) प्रत्येक व्यक्ति, जो सीडा क्षेत्र अन्तर्गत भवन निर्माण करना चाहता है, को Appendix 1 में दिये गये प्रपत्र में आवेदन करना होगा ।

ii) भवन निर्माण की अनुज्ञा हेतु Appendix 1 में वर्णित चेकलिस्ट के अनुसार तत्सम्बन्धी अभिलेख जमा किये जाने होंगे ।

आवेदन पत्र उसी स्थिति में ही मान्य होंगे जब आवेदक द्वारा विनियम 3.06 में वर्णित शुल्क जमा किया गया हो ।

iv) ऐसी स्थिति में जब लगाई गई आपत्ति, जिससे आवेदन निरस्त हो गया हो , में आवेदक द्वारा जमा किया गया आवेदन शुल्क वापस नहीं किया जाएगा ।

3.02 ऐसे सभी निर्माण कार्य , जो आवास विभाग उत्तराखण्ड शासन के भवन उपविधि में वर्णित हों, में आवदेन की आवश्यकता नहीं होगी । बशर्ते इस निर्माण से सामान्य भवन निर्माण आवश्यकताऐं , संरचनात्मक सुरक्षा , अग्नि शमन/ सुरक्षा, जा राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता, 2016 में वर्णित है, का उल्लंघन न होता हो ।

3.03 भवन निर्माण अनुज्ञा के आवेदन के साथ सूचनाओं का प्रेषणः

1. साईट प्लानः आवास विभाग , उत्तराखण्ड शासन द्वारा निर्गत भवन उपविधि में वर्णित सूचनाऐं ।

II . बिल्डिंग प्लानः आवास विभाग , उत्तराखण्ड शासन द्वारा निर्गत भवन उपविधि में वर्णित सूचनाऐं ।

198

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 3.05.02.07 अभिन्यास मानचित्र / साईट प्लान के मापकः

1 : 500 ( 10 हैक्टेयर तक के क्षेत्र हेतु)

1 : 1000 (10 हैक्टेयर से अधिक के क्षेत्र हेतु)

उक्त प्लान में Appendix 15 में वर्णित विवरण अनुसार ।

3.05.02.08 पर्यावरण प्रभाव का आंकलन ( Environmental Impact Assessment ) | 3.05.02.09 विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सम्मिलित होंगे –

(i )

मौसमी आंकड़े ( Meteorological Data ) |

(ii)

मृदा परिक्षण , भू और भू- गर्भीय जाँच ।

(iii) सम्बन्धित सम्पूर्ण क्षेत्र, जिसमें क्षेत्रीय योजना /महायोजना प्रभावी होगी ।

(iv) प्रस्तावित औद्योगिक आस्थान में विद्यमान औद्योगिक क्षेत्र, बाजार , कच्चे माल के स्त्रोतों एवं मानव संसाधन के स्त्रोतों से सम्बद्वता ( Linkage ) का विवरण हो ।

अवस्थापना- वर्तमान एवं प्रस्तावितः

(v)

(क) सार्वजनिक अवस्थापना सुविधायें यथा- मार्ग, विद्युतापूर्ति, जलापूर्ति, जल निकासी (Drainage ) यातायात (पार्किंग , लोडिंग-अनलोडिंग , फॉरवर्ड एजेन्सी, गोदाम आदि) स्ट्रीट लाईट आदि ।

(ख ) पर्यावरणीय अवस्थापना -ऐफ्लूएन्ट डिस्पोजल सिस्टम, ठोस अपशिष्ट निस्तारण व्यवस्था, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आदि ।

(ग) सामुदायिक सुविधाऐं जैसा Appendix 16 में वर्णित है ।

3.06 भवन निर्माण अनुज्ञा / अभिन्यास मानचित्र शुल्क, पूर्णतः / अधिभोग शुल्क, अस्थाई निर्माण अनुज्ञा शुल्क एवं इनकी गणनाः

3.06.01 आवेदक द्वारा सीडा में समय - समय पर जमा होने वाले शुल्क, जिनका विवरण निम्नतालिकानुसार है, देय होगा । सभी प्रकार के भवनों में पूर्णतः / अधिभोग प्रमाण पत्र निर्गत करने हेतु शुल्क की गणना रू ० 4.00 प्रति वर्ग मीटर, आच्छादित क्षेत्र के आधार पर, आगणित होगी ।

भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी, 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

199

  शुल्क के विभिन्न मद                                     मैदानी क्षेत्र       पर्वतीय क्षेत्र
  मानचित्र आवेदन शुल्क
 आवासीय
 एकल आवासीय इकाई
  100 वर्ग मी० तक का भू- खण्ड क्षेत्र                     रू0 100              रू0 100
  101 वर्ग मी 0 से 200 वर्ग मी ० तक भू- खण्ड क्षेत्र      रू0 200              रू0200
  201 वर्ग मी 0 से 300 वर्ग मी० तक भू- खण्ड क्षेत्र       रू0 300              रू0 300
 300 वर्ग मी 0 से अधिक का भू- खण्ड क्षेत्र                @ रू0 2/ वर्ग मी०    @ रू0 2/ वर्ग मी०
 आवासीय अभिन्यास मानचित्र                                रू0 5000              रू0 5000
 ग्रुप हाउसिंग / पर्यटन / मनोरंजन                        रू0 3000              रू0 3000
 व्यवसायिक / व्यवसायिक अभिन्यास मानचित्र                  रू0 5000             रू0 5000
 कार्यालय / शिक्षा/ संस्थागत / तकनीकी संस्थाएं/          रू0 3000              रू0 3000
 अन्य सामुदायिक सुविधाएं
 औद्योगिक
 एकल औद्योगिक इकाई
 500 वर्ग मी ० तक के भू- खण्ड क्षेत्र                    रू0 500              रू0 500
 500 वर्ग मी 0 से अधिक 2000 वर्ग मी0 तक भू- खण्ड क्षेत्र 50 1000               रू0 1000
 2000 वर्ग मी 0 से अधिक 4000 वर्ग मी ० तक भू- खण्ड क्षेत्र रू 0 2000           रू0 2000
 4000 वर्ग मी ० से अधिक के भू- खण्ड क्षेत्र              रू0 3000             रू0 3000
 औद्योगिक अभिन्यास मानचित्र                              रू0 6000             रू0 3000
 यातायात एवं संचार (आच्छादित क्षेत्र पर)                 रू0 500              रू0 500
 पत्रावली पुनः खोलने का शुल्क
 आवासीय                                                  मानचित्र आवदेन शुल्क का 50 %
 व्यक्सायिक                                              मानचित्र आवदेन शुल्क का 50 %
 औद्योगिक
                                                         मानचित्र आवदेन शुल्क का 50 %
अन्य                                                     मानचित्र आवदेन शुल्क का 30 %
 पर्यवेक्षण शुल्क (आच्छादित क्षेत्र पर)                  @ रू0 5     प्रति वर्ग @ रू 0 5 प्रति वर्ग मी०
                                                         मी०
 अभिन्यास मानचित्र / भवन निर्माण अनुज्ञा शुल्क
आवासीय
 एकल आवासीय (आच्छादित क्षेत्र पर)                          @ रू0 5 प्रति वर्ग मी०    @ रू0 5 प्रति वर्ग मी०
 अभिन्यास मानचित्र ( भू- खण्ड क्षेत्र पर)                  @ रू0 5 प्रति वर्ग मी०    @ रू0 5 प्रति वर्ग मी०
 ग्रुप हाउसिंग / पर्यटन / मनोरंजन (आच्छादित क्षेत्र पर)    @ रू0 10 प्रति वर्ग मी०   @ रू 0 5 प्रति वर्ग मी ०
 व्यवसायिक / व्यवसायिक अभिन्यास मानचित्र (भू- खण्ड क्षेत्र  @ रू0 10 प्रति वर्ग मी०  @ रू 0 10 प्रति वर्ग मी०
पर)
कार्यालय / शिक्षा / संस्थागत/ तकनीकी       संस्थाएं / सूचना @ रू 0 10 प्रति वर्ग मी ० @ रू 0 10 प्रति वर्ग मी०
 प्रौद्योगिकी/ सामुदायिक सुविधाएं (आच्छादित क्षेत्र पर)

200

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० ( माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 औद्योगिक

औद्योगिक इकाई (आच्छादित क्षेत्र पर)

@ रू0 10 प्रति वर्ग मी०

@ रू ० 7 प्रति वर्ग मी०

@ रू0 5 प्रति वर्ग मी०

@ रू० 4 प्रति वर्ग मी०

औद्योगिक अभिन्यास मानचित्र ( भू- खण्ड क्षेत्र पर)

@ रू ० 7 प्रति वर्ग मी०

यातायात एवं संचार (आच्छादित क्षेत्र पर)

@ रू0 10 प्रति वर्ग मी०

3.06.02 यदि भवन के प्रयोजन में संशोधन किया जाता है तथा प्रस्तावित संशोधन की अनुमन्यता होने की स्थिति में भवन के परिवर्तन/ परिवर्धन हेतु शुल्क की गणना परिवर्तित प्रयोजन के आधार पर होगी ।

3.06.03 विद्यमान भवन के ध्वस्तीकरण के पश्चात पुनः निर्माण शुल्क नवीन भवन के बराबर देय होगी ।

3.06.04 संशोधित प्रस्तावों के प्रकरणों, जिनमें प्रस्तावित आच्छादित क्षेत्र पूर्व स्वीकृत मानचित्र के आच्छादित क्षेत्र से कम अथवा बराबर हो , में मानचित्र आवेदन शुल्क कुल देय शुल्क का एक चौथाई होगा । यदि आच्छादित क्षेत्र पूर्व स्वीकृत मानचित्र के आच्छादित क्षेत्र से अधिक होता है तो देय शुल्क, अतिरिक्त आच्छादित क्षेत्र के अनुसार आगणित होगा ।

3.06.05 शुल्क की गणना हेतु भू- गेह एवं सर्विस फ्लोर अन्तर्गत आच्छादित क्षेत्र की गणना आच्छादित क्षेत्र में की जाएगी ।

3.06.06 मुख्य एवं अनुषांगिक अधिभोग की दशा में , जिसमें देय शुल्क भिन्न होने के कारण भवन योजना के कुल शुल्क की गणना व्यक्तिगत अधिभोग की दरों के आधार पर किया जायेगा ।

3.06.07 पुर्नर्वेधीकरण ( Revalidation ) होने वाले प्रकरणों में देय आवेदन शुल्क मूल आवेदन शुल्क का 10 प्रतिशत देय होगा यदि आवेदन स्वीकृत अवधि अन्तर्गत किया गया हो । अन्यथा कि स्थिति में यह प्रक्रिया नवीन मानी जाएगी जिस हेतु समस्त शुल्क वर्तमान में प्रचलित दर के आधार पर देय होंगे । ऐसे प्रकरणों में, जहाँ निर्माण स्वीकृत मानचित्रानुसार गतिमान है तथा आवेदन स्वीकृति की अवधि की समाप्ति के पश्चात किया गया है, में पुर्नर्वेधीकरण ( Revalidation ) शुल्क वर्तमान में प्रचलित भवन आवेदन शुल्क के अनुसार देय होगा ।

3.06.08 यदि निर्माण कार्य बिना मानचित्र स्वीकृति अथवा देय शुल्क जमा किये बगैर प्रारम्भ किया जाता है तो ऐसी स्थिती में विनियम के बिन्दु 13.0 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार दण्ड देय होगा ।

भाग 1 ]

201 उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

3.06.09 यदि निर्माण कार्य बिना मानचित्र के पुर्नवैधिकरण ( Revalidation ) के प्रारम्भ किया जाता है तो ऐसी स्थिति में रू 0 20 प्रति वर्ग मीटर आच्छादित क्षेत्र के आधार पर शुल्क / दण्ड इस प्रतिबन्ध के साथ देय होगा कि शेष प्रावधान उपविधि के अनुसार किये गये हों ।

3.06.10 आवेदक द्वारा रू 0 10 के नोटराईज किये गये स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र, जिसमें निर्माण के दौरान मलबा सम्बन्धित भू- खण्ड के अन्दर ही रखा जाएगा , का उल्लेख हो ।

3.06.11 यदि समस्त आपत्तियों का निराकरण सीडा द्वारा जारी दो पृथक आपत्ति पत्रों द्वारा सूचित होने वाली आपत्तियों का निराकरण नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में रू0 500 प्रति स्थल निरीक्षण की दर से स्थल निरीक्षण शुल्क देय होगा ।

3.06.12 आवेदक द्वारा मानचित्र आवेदन शुल्क का 25 % शुल्क प्रति निर्माण के अनुसार अस्थाई निर्माणों (श्रमिकों के निर्माणों को छोड़कर) हेतु जमा किया जाएगा । श्रमिकों के निवास हेतु शुल्क रू० 0.25 प्रति वर्ग मीटर की दर से आच्छादित क्षेत्र पर देय होगा ।

3.06.13 जलापूर्ति, सीवर व अन्य सर्विस कनेक्शन चार्ज का भुगतान सीडा बोर्ड द्वारा निर्धारित के अनुसार होगा ।

3.06.14 फीस / चार्ज में संशोधन हेतु सीडा बोर्ड अधिकृत होगा ।

3.07 आवेदन वापस लेनाः

मानचित्र स्वीकृति से पूर्व आवेदक द्वारा अपना भवन निर्माण अनुज्ञा का आवेदन पत्र वापस लिया जा सकता है तथा ऐसा करने से मानचित्र स्वीकृति की सभी प्रक्रिया समाप्त मानी जाएगी । परन्तु इस हेतु दी गई फीस वापस नहीं होगी ।

3.08 भवन निर्माण अनुज्ञा का परिक्षणः

3.08.01 राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) के अधिकृत अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र में दिये गये . सभी तथ्यों एवं तत्सम्बन्धी अभिलेखों का परिक्षण किया जाएगा । भूमि का स्वत्व भी सत्यापित किया जायेगा । सभी अभिलेख , जो मानचित्रों के साथ प्रस्तुत किये गये को आवेदक एवं वास्तुविद् / अधिकृत तकनीकी व्यक्ति द्वारा स्वप्रमाणित किया जायेगा ।

202.

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 3.08.02 अभिन्यास तथा भवनों के मानचित्र व अस्थाई निर्माणों के सम्बन्ध में सम्बन्धित तकनीकी व्यक्ति सभी आवश्यक सूचनाऐं , जिसमें अग्नि सुरक्षा सम्बन्धी आवश्यकताओं, जनोपयोगी सुविधाएं, सुरक्षा प्रावधान व कारखाना अधिनियम के अनुसार अन्य संगत विधि तथा प्रावधानों उपलब्ध करायेगा । तकनीकी व्यक्ति का यह भी दायित्व होगा कि वह भवन उपविधि, नियोजन एवं विकास सम्बन्धी दिशा निर्देश , राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता , 2016 , IS Codes व सीडा द्वारा समय- समय पर यथा आवश्यक अन्य प्रावधानों के अनुसार कार्यान्वयन सुनिश्चित करायेगा ।

3.08.03 आवेदक व तकनीकी व्यक्ति संयुक्त तथा पृथ्क रूप से उत्तरदायी होंगे तथा इस हेतु इनके द्वारा सीडा के पक्ष में भवन उपविधि, नियोजन एवं विकास सम्बन्धी दिशा - निर्देश , राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता, 2016 आदि के प्रावधानों के विरूद्ध सम्भावित उल्लंघन से सम्बन्धित Appendix 5 में दिये गये प्रपत्रानुसार क्षतिपूर्ति बंध पत्र ( Indemnity Bond ) जमा करना होगा ।

3.08.04 सीडा को किसी भी प्लान के परीक्षण ( Test Check ) का अधिकार होगा ।

3.08.05 उल्लंघन की स्थिति में सम्बन्धित वास्तुविद् / अभियंता / नगर नियोजक को सीडा अभिलेखों में 5 वर्ष के लिए काली सूची ( Black list ) में रखा जाएगा तथा जिसकी सूचना वास्तुविद काउन्सिल (Council Architecture ) अभियन्त्रण संस्थान (Institution of Engineers ) अथवा नियोजन संस्थान (Institution of Town Planners , India ) को आवश्यकतानुसार दी जाएगी । साथ ही सीडा में जमा होने वाले अभिलेखों / मानचित्रों में इनके हस्ताक्षर मान्य नहीं होंगे ।

3.08.06 आवेदक के स्तर पर दोष की पुष्टि होने की स्थिति में भू- खण्ड आवंटन को निरस्त किये जाने अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी , सीडा द्वारा परिस्थिति अनुरूप प्रकरणवार समुचित कार्यवाही की जा सकती है ।

भवन निर्माण की अनुज्ञा / निरस्तीकरण :

3.09

3.09.01 (क) आवेदक द्वारा भवन निर्माणं अनुज्ञा Appendix 4 के अनुसार जमा कियी जाएगा जिसको अर्ह तकनीकी व्यक्ति द्वारा सम्यक रुप से प्रमाणित किया जाएगा । अधिकृत अधिकारी द्वारा भवन निर्माण अनुज्ञा का परिक्षण किया जाएगा । प्लान में आपत्तियाँ होने की स्थिति में उनका भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

203

निराकरण आवेदक द्वारा किया जाएगा जिसके पश्चात मानचित्र विधिवत रूप से स्वीकृत किया जाएगा ।

स्वीकृत मानचित्र के सापेक्ष निर्माण के दौरान अथवा निर्माण पूर्ण होने पर यदि उल्लंघन पाया जाता है तो प्राधिकरण की संतुष्टि पर उसका निराकरण आवेदक को उल्लंघन के सूचित होने की दिनांक से 30 दिन के अन्दर किया जाना होगा । यदि उक्त का निराकरण आवेदक द्वारा नहीं किया जाता है तो प्राधिकरण उक्त का निराकरण सुनिश्चित करेगा तथा इसमें होने वाला व्यय आवेदक. से वसूला जाएगा ।

(ख) आपवादिक परिस्थितियों में जहा आवेदक प्लान में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण (To be demolished ) के निर्माण के सम्बन्ध में शपथ- पत्र द्वारा सभी या किन्ही विद्यमान संरचना हटाने के लिए अतिरिक्त समय की मॉग की जाती है तो सक्षम प्राधिकारी , द्वारा सम्बन्धित प्रकरण पर गुण- दोष के आधार पर अनन्तिम स्वीकृति ( Provisional Sanction ) , निर्गत किये जाने पर विचार किया जा सकता है । ऐसी स्थिति में ऐसे निर्माण , जिनका "ध्वस्तीकरण " प्रस्तावित है, को निर्गत अनुज्ञा पत्र की दिनांक से 3 माह की अवधि (जो कुल 6 माह के लिये बढ़ाई जा सकती है) में ध्वस्तीकरण करना होगा तथा जब तक उक्त ध्वस्तीकरण / हटाया नहीं जाता है तो निर्गत स्वीकृति अनुज्ञा पत्र अनन्तिम स्वीकृति ( Provisional Sanction ) मानी जाएगी ।

यदि प्रस्तावित ध्वस्तीकरण , जिसका उल्लेख अनन्तिम स्वीकृत पत्र ( Provisional Sanction) में किया गया हो , को आवेदक द्वारा निर्धारित समयावधि में ध्वस्त/ हटाया नहीं गया है तथा फोटो के साक्ष्य के रूप में ध्वस्तीकरण / हटाने की पुष्टि सम्बन्धी अभिलेख सीडा में नहीं जमा किये जाते हैं तथा सीडा द्वारा इसकी पुष्टी नहीं की जाती है तो अनन्तिम रूप से दी गई स्वीकृति (Provisional Sanction ) निरस्त मानी जाएगी । परन्तु, यदि प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को मौके पर हटा लिया जाता है तथा इसकी पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर सीडा द्वारा की जाती है तो ऐसे प्रकरणों में अन्तिम स्वीकर्ति प्रदान की जाएगी ।

3.09.02 आवेदन की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों की अवधि में यदि आपत्ति/ अस्वीकृति / स्वीकृति प्रदान नहीं की जाती है, तो आवेदक उक्त 30 दिन की अवधि समाप्त होने के पश्चात आगामी 204

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

30 दिन की अवधि में मुख्य कार्यकारी अधिकारी , सीडा को Appendix 10 में दिये गये प्रपत्रानुसार वास्तुविद् द्वारा प्रमाण पत्र सहित एक औपचारिक नोटिस प्रस्तुत करेगा । उक्त नोटिस प्रस्तुत किये जाने की तिथि से स्वीकृति हेतु दिये गये आवेदन को प्राधिकरण द्वारा नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 15 दिवसों के अन्दर निस्तारित किया जाएगा, ऐसे करने में असफल रहने पर प्रस्ताव स्वीकृत माना जाएगा तथा आवेदक मौके पर विकास / निर्माण कार्य प्रारम्भ कर सकता है । परन्तु किसी की दशा में आवेदक को यह अधिकार नहीं होगा कि उक्त निर्माण से औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 , जिसे उत्तराखण्ड राज्य द्वारा अनुकूलित व उपान्तरित किया गया है , की धारा 8 द्वारा निर्गत भवन उपविधि, प्रावधानों व नियोजन दिशा-निर्देश का उल्लंघन होता है ।

3.09.03 अस्वीकृत किये जाने पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी विधिव्त कारण बताओ नोटिस, जो उन नियमों के प्रांसगिक प्रावधानों को उद्धृत करेंगे तथा प्रारम्भ में ही जहाँ तक सम्भव हो , उल्लंघन करते हो, के विषय में अवगत कराएगें ।

3.09.04 योजना का परिक्षणोपरान्त आपत्तियाँ , यदि कोई हों, का उल्लेखोपरान्त, आवेदक द्वारा तदानुसार योजना में संशोधन करते हुए पुनः संशोधित योजना प्रस्तुत की जाएगी । यदि आपत्तियों का निराकरण 30 दिवसों के अन्दर नहीं किया जाता है तो अनुज्ञा की स्वीकृती नहीं दी जाएगी तथा मानचित्र निरस्त समझा जाएगा व जमा किया गया शुल्क जब्त कर लिया जाएगा ।

3.09.05 यदि आवेदक बिना निर्माण पूर्ण किये अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवदेन प्रस्तुत करता है तो ऐसी स्थिति में सीडा कार्यालय में आवेदन पत्र जमा होने की तिथि से 30 दिवसों के अन्दर स्थल निरीक्षण किया जाएगा । यदि अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु स्थल निरीक्षण के समय निर्माण पूर्ण नहीं पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में अधिभोग हेतु दिया गया आवेदन अस्वीकृत किया जाएगा ।

भाग 1 ]

205 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

3.10 ले-आउट / भवन निर्माण अनुज्ञा की वैधता की अवधिः

3.10.01 इस विनियमावली के अधीन स्वीकृत ले- आउट प्लान / भवन निर्माण अनुज्ञा की वैधता अवधि अधिकतम 3 वर्ष अथवा जैसा कि पट्टा विलेख में वर्णित हो, में से जो भी कम हो, होगी । पूर्णता प्रमाण - पत्र की स्वीकृत अवधि में जमा करना होगा । तथापि, वैधता अवधि प्रति वर्ष के लिये तथा अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक इस प्रतिबन्ध के साथ बढ़ाई जा सकती है कि वैधता अवधि की समय सीमा हेतु किया गया आवेदन वैधता अवधि समाप्त होने से पूर्व किया गया हो तथा इससे पट्टा विलेख की शर्तों का उल्लंघन न होता हो । यदि भवन निर्माण / विकास कार्य उक्त बढ़ी हुई अवधि अन्तर्गत पूर्ण नहीं हो पाते हैं तो ऐसी स्थिति में आवेदक द्वारा नवीन रूप से आवेदन करना होगा । ऐसे विस्तार की स्वीकृति को एक वर्ष, जिसकी अधिकतम सीमा 3 वर्ष होगी, तक प्रति वर्ष बढ़ाया जा सकता है । विशेष परिस्थितियों में इन प्रकरणों , जिनमें कतिपय औपचारिकताएं पूर्ण की जानी अपेक्षित हों, में मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा सन्तुष्ट होने पर अधिभोग प्रमाण पत्र जमा रहने हेतु उक्त समय सीमा बढ़ाये जाने पर विचार किया जा सकता है । ऐसी औपचारिकताएँ , जो पूर्ण की जानी अपेक्षित हों, के सम्बन्ध में स्पष्ट उल्लेख के साथ मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी द्वारा सामान्य आदेश अथवा दिशा-निर्देश निर्गत किये जा सकते हैं । जिन प्रकरणों में आंशिक / पूर्णतः अधिभोग ( Part Completion / Occupancy ) लिया जा चुका है में ले - आउट / भवन निर्माण / अनुज्ञा हेतु वैधता अवधि में कोई परिवर्तन नहीं होगा ।

3.10.02 अस्थाई निर्माणों हेतु भवन निर्माण की अनुज्ञा अथवा पट्टा विलेख में वर्णित समयावधि की वैधता होगी । भवन निर्माण पूर्ण होने पर तथा अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवेदन करने से पूर्व अस्थाई निर्माण को तुरन्त हटाया जाना होगा ।

3.10.03 वैधता अवधि समाप्त होने पर आवेदक सभी प्रकार के अस्थाई निर्माण को हटाएगा तथा ऐसे निर्माणों को हटाने के पश्चात ही प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा ।

3.10.04 विकास कार्य प्रारम्भ करने की सूचना स्वीकृति प्राधिकारी को दी जानी होगी ।

206

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 3.11 निर्माण के दौरान परिवर्तन/परिवर्धनः

यदि स्वीकृत मानचित्र में कोई परिवर्तन / परिवर्धन प्रस्तावित हो तो प्रस्तावित परिवर्धन / परिवर्तन करने से पूर्व इसकी अनुमति मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी से लिखित में लेनी होगी । आवेदक, जिसका भवन मानचित्र स्वीकृत है, की जिम्मेदारी होगी कि वह परिवर्तन/ परिवर्धन सम्बन्धी संशोधित मानचित्र जमा करेगा । इस हेतु मानचित्र स्वीकृति सम्बन्धी बिन्दु 3.9.01 तथा 3.9.02 के प्रावधान प्रभावी होंगे ।

3.12 भवन निर्माण अनुज्ञा का निरस्तीकरण :

यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी के संज्ञान में यह तथ्य आता है कि पूर्व में निर्गत की गई स्वीकृति में गलत तथ्यों अथवा गलत अभिलेख प्रस्तुत किया गया अथवा तथ्यों को छिपाया गया है , तो भवन निर्माण अनुज्ञा का निरस्तीकरण भवन निर्माण की अनुज्ञा निर्गत होने के पश्चात किसी भी समय मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी आवेदक को समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए दी गई स्वीकृति से निरस्त कर सकता है । ऐसी स्थिति में स्वीकृति अनुसार किये गये निर्माण को "बिना स्वीकृत " किये गये निर्माण की श्रेणी में माना जाएगा ।

उक्त कार्य हेतु सम्बन्धित तकनीकी व्यक्ति को, समुचित सुनवाई उपरान्त, काली सूची ( Black listing) में रखते हुए सीडा के क्षेत्राधिकार में कार्य करने हेतु 3 वर्ष तक की अवधि तक प्रतिबन्धित किया जा सकता है ।

3.13 परिक्षेत्रीय विनियमन, ले-आउट / भवन निर्माण उपविधि व दिशा- निर्देशों के अनुरूप कार्य सम्पादित कराया जानाः

निर्माण की अनुज्ञा, मानचित्रों की स्वीकृती तथा निर्माण के दौरान सीडा द्वारा किये गये निरीक्षण में आवेदक का यह दायित्व होगा कि निर्माण कार्य क्षेत्रीय विकास योजना के विनियन, भवन उपविधि/विनियम तथा / अथवा नियोजन सम्बन्धी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हो । निर्माणोपरान्त अथवा निर्माण के दौरान उल्लघंन पाये जाने की दशा में तथा आवेदक द्वारा उक्त उल्लघंन की सूचना निर्गत भाग 1 ]

207 उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

होने की तिथि से 15 दिवसों के अन्दर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी की संतुष्टि होने पर, तदानुसार संशोधन किया जाना आवश्यक होगा ।

3.14 स्थल पर अभिलेखों की उपलब्धताः

स्थल में निर्माण के दौरान अथवा ऐसी अवधि तक , जब तक सीडा को आवश्यकता हो , निम्न अभिलेखों को रखा जाना आवश्यक होगा ।

(i) बिल्डिंग परमिट की प्रति ।

(ii) भवन निर्माण अनुज्ञा की प्रति ।

(iii) स्वीकृत ले-आउट की प्रति, यदि सम्बन्धित भू- खण्ड ले -आउट का भाग है ।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी किसी व्यक्ति को किसी सहायक अथवा श्रमिकों के साथ भवन / भू- खण्ड में निम्न कार्यों हेतु प्रवेश हेतु अधिकृत कर सकता हैः

(क) सूचना प्राप्त करना, निरीक्षण करना, पैमाइस करना अथवा भूमि / भवन का लेवल नापना ।

(ख) निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना ।

(ग) यह सुनिश्ििचत करना कि विकसित की जा रही है अथवा विकसित की गई है भूमि में

महायोजना / परिक्षेत्रीय योजना अथवा स्वीकृत मानचित्र अथवा भवन उपविधि में कोई उल्लंघन है अथवा नहीं ।

(घ) अन्य कोई ऐसी गतिविधि, जो सुचारू प्रशासनं व विनियम के अनुपालन हेतु आवश्यक हो ।

3.15 अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु नोटिसः

सभी आवेदकों को सीडा में Appendix 7 में वर्णित अभिलेख के साथ भवन निर्माण पूर्ण किये जाने हेतु आवेदन जमा करना होगा ।

3.16 अधिभोग / गांरटी धनराशि मुक्त करने हेतु अधिभोग / पूर्णतः प्रमाण पत्र की आवश्यकताः

कोई भी निर्मित / पुननिर्मित भवन पूर्ण अथवा आंशिक रूप से अधिभोग हेतु तब तक प्रयुक्त नहीं होगा जब तक Appendix 12 में दिये गये प्रपत्रानुसार सीडा द्वारा उसका अधिभोग प्रमाण पत्र निर्गत न किया 208

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी, 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

गया हो । यदि अधिभोग हेतु दिये गये आवेदन पत्र की दिनांक से 60 दिनों के अन्दर सीडा अधिभोग प्रमाण पत्र निर्गत नहीं कर पाता है अथवा ऐसा प्रमाण पत्र निर्गत न किये जाने की सूचना नहीं देता है तो आवेदक सीडा को भवन के अधिभोग करने की सूचना दे सकता है । उक्त 60 दिन की अवधि पूर्ण होने पर आवेदक इस आशय का नोटिस सीडा को दे सकता है । सीडा ऐसे आवेदन को आवेदन प्रस्तुत किये जाने की दिनांक के 15 दिनों के अन्दर निस्तारित करेगा अन्यथा प्लान स्वीकृत माना जाएगा। परन्तु यह कृत्य आवेदक को उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण 1976 अधिनियम, जिसे राज्य सरकार द्वारा अनुकूलित एवं उपान्तरित किया गया है, की धारा 8 व 9 अन्तर्गत निर्गत विनियम व नियोजन दिशा निर्देशों के उल्लंघन हेतु अधिकृत नहीं करेगा ।

आवासीय / औद्योगिक ले आउट / टाउनशिप के प्रकरणों में गारंटी धनराशि अधिभोग प्रमाण पत्र निर्गत होने के उपरान्त ही अवमुक्त की जाएगी ।

यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा अधिभोग / पूर्णतः प्रमाण पत्र निर्गत करने में आपत्ति की जाती है, तो ऐसी स्थिति में आवेदक द्वारा आपत्ति के निराकरण हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाएगी । यदि सूचना की दिनांक से 1 माह के अन्दर आपत्ति का निराकरण नहीं होता है तो अधिभोग / पूर्णतः प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने हेतु किया गया आवेदन स्वतः निरस्त माना जाएगा तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी अनाधिकृत निर्माण को हटाने हेतु उपयुक्त कार्यवाही करेगा । तत्पश्चात आवेदक को अधिभोग/ पूर्णतः प्रमाण पत्र हेतु पुनः आवेदन करना होगा तथा ऐसे प्रकरणों में समय सीमा में विस्तार अनुमन्य नहीं होगा ।

3.17 असुरक्षित भवनः

असुरक्षित भवन को जन सुरक्षा , सफाई व सेनिटेशन की दृष्टि से जोखिम वाला माना जायेगा, की मरम्मत रेट्रोफिटिंग अथवा पुर्नस्थापित अथवा ध्वस्त करना अथवा जैसा मुख्य कार्यकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा निर्देशित किया जायेगा ।

भाग 1 ]

209 उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

3.18 अनाधिकृत विकासः

अनाधिकृत विकास के प्रकरणों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी निम्न कार्यवाही सम्पादित करेंगेः

( i ) अनाधिकृत निर्माणों के विरूद्ध अधिनियम के उपबन्धो के अनुसार उचित कार्रवाई ।

( ii ) सम्बन्धित तकनीकी व्यक्ति के विरूद्ध उचित कार्रवाई ।

3.19 अस्थाई अधिभोगः

तकनीकी व्यक्ति के प्रमाण पत्र पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी यदि सन्तुष्ट है कि भवन अथवा उसके भाग के अस्थाई अधिभोग से जनहित प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होता है, ऐसी स्थिति में अस्थाई अधिभोग की Appendix 12A में दिये गये प्रपत्रानुसार भवन अथवा उनके भाग पर , जैसी स्थिति हो तथा जितनी अवधि के लिए उचित समझे अस्थाई अधिभोग की अनुमति दे सकता है ।

210

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी, 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

अध्याय 3

सामान्य आवश्यकताएं

4. समूह आवास (Group Housing):

भवन निर्माण मानक आवास विभाग , उत्तराखण्ड शासन की भवन उपविधि के अनुसार होंगे ।

भवन मानकः

5. एकल आवासीय भवन (समूह आवास को छोड़कर): भवन निर्माण मानक, मल्टिपल हाउसिंगः

एकल आवासीय भवन व मल्टिपल यूनिट हेतु भवन निर्माण मानक आवास विभाग , उत्तराखण्ड शासन की भवन उपविधि के अनुसार होंगे ।

6. अन्य भवन (आवासीय एवं औद्योगिक भवनों को छोड़कर):

आवास एवं औद्योगिक भवनों को छोड़कर अन्य भवनों हेतु भवन निर्माण मानक आवास विभाग, उत्तराखण्ड शासन की भवन उपविधि के अनुसार होंगे ।

औद्योगिक भवनः 7.

7.1 औद्योगिक भवन (घरेलू/ कॉटेज, माईक्रो उद्योग को छोड़कर)

क) न्यूनतम पहुँच मार्ग (मीटर में):

(1 ) न्यूनतम पहुँच मार्ग हेतु मानक निम्नानुसार होंगेः

मैदानी क्षेत्र

पर्वतीय क्षेत्र

(i)

15.0 मी० *

औद्योगिक इकाई

7.5 मी०

औद्योगिक आस्थान

(ii)

18.0 मी0**

9.0 मी०

* ऐसे प्रकरणों, जहां 15.0 मी चौड़े मार्ग से भू- खण्ड की दूरी 500 मीटर अथवा इससे कम होगी , में न्यूनतम पहुँच मार्ग चौड़ाई 12.0 मीटर हो सकती है ।

** ऐसे प्रकरणों, जहां 18.0 मी चौड़े मार्ग से भू- खण्ड की दूरी 500 मीटर अथवा इससे कम होगी , में न्यूनतम पहुँच मार्ग चौड़ाई 15.0 मीटर हो सकती है ।

ख)      न्यूनतम भू- खण्ड क्षेत्रफलः
                                                             मैदानी क्षेत्र       पर्वतीय क्षेत्र
        (i)     औद्योगिक इकाई                             300 वर्ग मी ०            200 वर्ग मी०
       (ii)     फलेटिड फैक्ट्री                           1000 वर्ग मी०           500 वर्ग मी०
        (iii )  औद्योगिक आस्थान /पार्क                       30एकड                 2एकड
        (iv)    सूचना प्रौद्योगिकी पार्क / बायोटैक्नोलॉजी पार्क 5 एकड़             2 एकड़

इस गजट में पेज संख्या अधिक होने के कारण भाग -1 में पेज न0 .- 211 से पेज न0 . - 314 तक अपलोड नही है ।

भाग 1 ]

315 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

Appendix 16

Cominunity facilities: -

Facilities required

Area of Layout Hectare

Sl . No.

Minimum Area required per facility Hectare

I.

.3

1 . Restaurant

2 .

Upto 10

Local Shopping Centre

3 Water & Electric Complaint Office

Above 10 upto 50

II.

0.5

1 . Shops . Bank . Restaurant

0.2

2. Labour welfare Centre

0.2

Bus- stand

3 .

0.4

Health Centre

4.

0.2

5. Post & Telegraph Office

0.4

6 . Electricity & Water Distribution

Sub -Station

0.8

1 . Local Shopping Centre . Restaurant & Bank

0.2

Above 50

Labour Welfare Centre

2.

0.4

Bus -Stand

3.

0.4

4. Post-Telegraph Office & Telephone Exchange

1.0

Health Centre with Staff Quarters

5.

0.2

6 . Petrol Pump - cum - Service Station

0.4

7. Fire Station

0.2

Police Station

8.

0.4

Electricity & Water Distribution Sub station

9 .

316

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16 , 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1

Appendix-17

Specific Timelines for Services provided to investors by SIDA Authority

CEO

Architect GM Avisor

Services/ Designation

Assistant Architect/ Scrutiny verification

Accounts (Payment verification ) , Asst . Architect (Document verification process, Land use, Ownership and documents, Junior Engineer(Site Inspection)

2

CTE

3

3 CTO

3

3

3

3

Addition- Alteration Revalidation

3

2

Layout Plan

3

3

Approval Revision of layout plan Approval

3

3

Compounding

3

3

Part Occupancy

2 Plinth Inspection

Total Days

Internal Query

2

15 2

2

4

15

2

2

2

3

2

15

2

3

2

15

2

3

2

2

15 2

2

2

4

15

2

2

2

3

15

2

2

3

2

2

15 2

2

3

5

1

3

All the figures are in number of working days .

भाग 1]

317 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

REFERENCES

1. National Building Code ( NBC) - www.sidauk.in

2. Model Building bye - laws - www.mddaonline.in

3. Building bye - laws- www.sidauk.in

4. Ease of Doing Business Govt . Order- www.sidauk.in

5. Energy Conservation Building code- www.ureda.uk.org.in

6. General Industrial Development Control and Regulation ( GIDCR - 05 )

ByOrder,

AMIT SINGH NEGI , Secretary.

पी० एस ० यू० (आर०ई ० ) 06 हिन्दी गजट / 134-भाग 1-2022 (कम्प्यूटर / रीजियो) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN/ 30/ 2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की , शनिवार, दिनांक 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

भाग 1 - क

नियम , कार्य-विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

HIGH COURT OF UTTARAKHAND , NAINITAL

NOTIFICATION

December 24 , 2021

No. 386/XIV- a -52/ Admin.A/ 2020--Shri Shiv Singh , Civil Judge ( Jr. Div . ) , Tharali , District Chamoli is hereby sanctioned earned leave for 15 days w.e.f. 26.11.2021 to 10.12.2021 .

NOTIFICATION

December 24, 2021

No. 387 /XIV/39/Admin.A-- Sri G.K. Sharma , District & Sessions Judge, Pithoragarh is hereby sanctioned medical leave for 04 days w.e.f. 07.12.2021 to 10.12.2021 .

NOTIFICATION

28thDecember, 2021

No. 388 /XIV- 32/Admin.A/ 2019--Shri Vikram , 2nd Additional District Judge , Haridwar is hereby sanctioned earned leave for 10 days w.e.f. 09.12.2021 to 18.12.2021 with permission to suffix 19.12.2021 as Sunday holiday.

67-ख 68

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी, 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 -क

NOTIFICATION

28thDecember, 2021

No. 389 /XIV- 82 /Admin.A/ 2003 --Ms . Pritu Sharma , 1st Additional District Judge , Nainital is hereby sanctioned child care leave for 20 days w.e.f. 01.12.2021 to 20.12.2021 .

NOTIFICATION

28thDecember, 2021

No. 390/XIV- a - 35/Admin.A/ 2017--Shri Vivek Singh Rana , 1st Additional Civil Judge ( Jr. Div. ) , Haridwar is hereby sanctioned paternity leave for 15 days w.e.f. 06.12.2021 to 20.12.2021 .

By Order ofHon'ble the Administrative Judge ,

Sd/-

Registrar ( Inspection) .

HIGH COURT OF UTTARAKHAND AT NAINITAL

NOTIFICATION

December 28, 2021

No. 391 / UHC / Admin.A/ 2021 --In exercise of the powers conferred by Article 235 of the Constitution of India , High Court of Uttarakhand , with the approval of the Government of Uttarakhand hereby makes the following amendments in the Uttarakhand High Court Vigilance Rules , 2019: --

Amended Rule

Rule

ExistingRule

title Short

In exercise of the powers conferred under Article 235 of the Constitution, High Court of Uttarakhand makes following Rules to promote transparency and accountability in working of the Judicial Officers and the Staff: -

In order to provide more effective machinery for the prevention of corruption , to strengthen the Vigilance in Judiciary and to take appropriate action against the corrupt officers and officials in the establishment of High Court of Uttarakhand and in the State Judiciary, High court of Uttarakhand , in exercise of the powers conferred under Article 235 of the Constitution of India , frame the following Rules : - भाग 1 -क]

69

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

4. (a) There shall be a Vigilance Cell in the High Court of Uttarakhand, which shall act as a separate Department of the High Court . Vigilance Cell shall work under the direct control and supervision of Hon'ble the Chief Justice .

6

( a) There shall be a Vigilance Cell in the High Court of Uttarakhand, which shall act as a separate Branch of the High Court . Vigilance Cell shall work under the direct control and supervision ofHon'ble the Chief Justice .

(a) The Vigilance Cell shall comprise of two Sections as mentioned below .

The Vigilance.Cell shall comprise of two Sections as mentioned below .

Administrative Section: It shall comprise of the following: -

(1) One Assistant Registrar

(2) One Section Officer (3) One Assistant Review Officer

(4) Stenographer (English)

(5) Stenographer (Hindi )

(6) One Peon

Administrative Section: It shall comprise of the following:-

(1) One Assistant Registrar

(2) One Section Officer

(3) One Assistant Review Officer

(4) Stenographer ( English )

(5) Stenographer (Hindi )

(6) One Peon

Investigation Section: - It comprise of the following:- shall Investigation Section: - It shall comprise of such Officers and Staff of the establishment of the High Court, which , Hon'ble the Chief Justice deems fit and appropriate .

( 1 ) One Vigilance Officer ( of SSP/SP level , on deputation from police department, having minimum 8 years of service, preferably with experience in vigilance/anti - corruption work/CID .

(2) One Vigilance Officer (of Dy . SP level, on deputation from police department, having minimum 8 years of service, preferably with experience in Vigilance/Anti - corruption work /CID.

(3) Three Inspectors of Police having minimum 15 years of service, preferably with experience in Vigilance/anti- corruption work/CID .

70

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 -क

(4) Three Head Constables having minimum 10 years of service .

(5) Six Constables with minimum 5 years of service .

(b) Deputation of Police Officers to the Vigilance Cell shall be decided by the Hon'ble Chief Justice from a panel of five names forwarded by the state government .

(c) The Police Officers on deputation to the Vigilance Cell will have a tenure of 02 years , extendable by 01 more year . Any extension of their deputation will be at the discretion of the Hon'ble Chief Justice . However , if the conduct /performance of any Police Officer is found unsatisfactory , the High Court may revert him to his parent department , atany time .

9

( ii) After registration, the complaint received against the Judicial Officers or Staff of the Subordinate Court shall be first placed before the concerned Administrative Judge. The Administrative Judge , if necessary , shall refer the complaint to a Committee of Hon'ble Judges , to be constituted by Hon'ble the Chief Justice .

(ii) After registration , the complaints received against the judicial officers and the staff of the High Court shall be placed before Hon'ble the Chief Justice and complaints received against staff of subordinate courts shall first be placed before the Administrative Judge of the district concerned , and thereafter before Hon'ble the Chief justice along with opinion/recommendation, their orders. for

(iii) Further action on the complaint shall be taken on the directions of Hon'ble the Chief Justice .

(iii) If the Committee , after considering the complaint, opines that allegations are made, which need to be enquired into, or for which a departmental inquiry needs 71 भाग 1 -क]

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

to be initiated against the delinquent officer/staff, it shall submit its recommendations before Hon'ble the Chief Justice . The action to be taken on the compliant shall be the sole discretion of Hon'ble the Chief Justice .

(iv) If it appears that a trap be laid in a matter of corruption, Registrar (Vigilance) shall, with the previous approval of the Chief Justice, direct the Superintendent of the police and , thereafter, Superintendent of Police shall do the needful as per prescribed procedure .'

(iv) In every case , where a complaint has been placed before the Administrative Judge under sub - rule ( ii) or before the Committee under sub - rule (iii ) above, the outcome shall be placed before Hon'ble the Chief Justice ,

(v) The complaint against officers and staff of the High Court shall be placed before Hon'ble the Chief Justice by the Registrar (Vigilance) .

(v) Copy of every complaint routed through the District Judge , or comments sought from the district, shall be kept in the concerned district and an endorsement of this fact shall be mentioned in the correspondence made with the High Court that the said complaint/comments has been entered at s.no/register no . along with a copy of the same.

(vi) Complaint, if accompanied by a duly sworn affidavit ог verifiable material, shall only be registered. However, nothing in this sub -rule will prevent registration of a complaint on a discreet enquiry conducted on the order of Hon'ble the Chief Justice.

(vii) Complaints making allegations purely in connection with a judicial order passed by a court, may be filed/lodged.

(vi) Complaints making allegations against members of the subordinate judiciary, if not accompanied by a duly sworn affidavit and/or verifiable material , shall be lodged. Nothing mentioned hereinbefore shall preclude action being taken on any complaint even if it is an anonymous/ pseudonymous one , if on a discreet inquiry or verification of contents , undertaken with the approval of Hon'ble the Chief Justice , it is considered necessary that action be taken.

(viii) Complaints received against advocates shall be forwarded to the concerned Bar Council for further action.

(vii) Complaints making allegations purely in connection with a judicial order passed by a court, shall be 72

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 1 -क

filed/lodged without taking any steps thereon.

( ix) Other complaints , which are outside the purview of the Vigilance Cell will either be returned to the sender or to the other Authorities concerned . If it is not possible to return them for want of sufficient details , they shall be closed .

(viii) All outcomes pertaining to enquiries , on the complaints received or investigations (including laying of traps) shall be forwarded by Superintendent of Police to the Registrar (Vigilance) . the

(x) Complaints containing allegations, other than of corruption , will be forwarded to the Registry for further action.

(ix) No trap shall be laid except under the specific directions from Hon'ble the ChiefJustice .

(xi) All matters of the Vigilance Cell shall be placed before Hon'ble the Chief Justice through the Registrar (Vigilance) , except when the matter pertains to the Registrar (Vigilance) himself.

(x) The Superintendent of Police will be responsible for assigning duties to the officers under him , with respect to the functions pertaining to the Vigilance Cell .

(xi) The Registrar ( Vigilance ) will scrutinize the performance Appraisal Reports of the Police Officers in the Vigilance Cell and sign them .

(xii) Complaints received against Advocates shall be forwarded to the concerned State Bar Council for further action.

(xiii) Other complaints , which are outside the purview of the Vigilance Cell will either be returned to the sender or to the other Authorities concerned . If it is not possible to return them for want ofsufficient details , they shall be closed.

(xiv) Complaints containing allegations , other than of corruption, will be forwarded to the Registry for further action.

73 भाग 1 -क]

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

(xv) All matters of the Vigilance Cell shall be placed before Hon'ble the Chief Justice through the Registrar (Vigilance) , except when the matter pertains to the Registrar (Vigilance ) himself.

These amendments will come into force with immediate effect .

ByOrder of the Court, Sd/- DHANANJAY CHATURVEDI , Registrar General .

HIGH COURT OF UTTARAKHAND , NAINITAL

NOTIFICATION

December 29, 2021

No. 392/XIV- a - 41/Admin.A/ 2008 --Ms . Kahkasha Khan , District & Sessions Judge , Champawat is hereby sanctioned:

1. Earned leave for 04 days w.e.f. 08.11.2021 to 11.11.2021

2. Medical leave for 14 days w.e.f. 12.11.2021 to 25.11.2021

NOTIFICATION

December 29 , 2021

No. 393 /XIV / 52 /Admin.A-- Shri Rajendra Joshi , District & Sessions Judge , Nainital is hereby sanctioned medical leave for 10 days w.e.f. 13.12.2021 to 22.12.2021 .

By Order of Hon'ble the Administrative Judge ,

Sd/- Registrar ( Inspection) .

पी० एस ० यू० ( आर ० ई ० ) 06 हिन्दी गजट / 134- भाग 1 - क-2022 (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ QQ / DDN / 30 / 2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 05 फरवरी, 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

भाग 8

सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

कार्यालय नगर पालिका परिषद्, मसूरी नगर पालिका परिषद् मसूरी के सेप्टेज मैनेजमेंन्ट प्रोटोकॉल-2017

01 सितम्बर , 2021 ई०

पत्रांक 916 / अ०अ०/ 2021-22- नगर पालिका परिषद् मसूरी सीमांतगर्त उत्तराखण्ड में यथा प्रवृत्त नगर पालिका अधिनियम 1959 की धारा की धारा 250 खंड (क) (ख) , धारा 251 एवं धारा 258 खंड (क) (ख) (ग ) (घ) (ड) (उत्तराखण्ड) , एवं

a) Uttrakhand State Protocal for Septage Management , 2017

b) National Policy on Faecal Sludge and Septag Management , 2017

c ) The CPHEEO Manual on Sewerage and Sewage Management , 2013

d) Model Building By Laws , 2016 and Other Applicable Building By- Laws

e) Prohibition of Employment as Manual Rehabilitation Act , 2013 Scavengers and their f) Is Code 2470 Part I & II , 1985 ( Reaffirmed 1996 ) -Code of Practice for Installation of Septic Tanks

07-ट 08

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 8

Regulation g) Central Laws , Rules (Environment ( Protection ) Act , 1974 and

h) The Water ( Prevention and Control of Pollution ) Act 1974

i ) State Laws of Uttarakhand pertaining to Water and Sanitation such as U.P

Water Supply and Sewarage Act , 1975 , Uttarakhand Jal Sansthan Water Supply and Sewarage By- Laws , 2008 ; and any other pertinent state low

के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका परिषद , मसूरी द्वारा नगरपालिका अधिनियम 1959 की उपविधि का प्रभाव पड़ने वाला हो , उनसे आपत्ति एवं सुझाव हेतु प्रकाशित की जा रही है । अतः समाचार पत्र में उपविधि को प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के अंदर लिखित सुझाव एवं आपत्तियों सहित अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद , मसूरी को प्रेषित की जा सकेगी । वाद मियाद प्राप्त आपत्तियों एवं सुझाव पर कोई निर्णय नहीं किया जाएगा ।

अध्याय - 1

सामान्य

1. संक्षिप्त नाम और लागू होने की तारीख:

1) ये उप नियम नगर पालिका परिषद , मसूरी फीकल स्लज एवं सेप्टेज प्रबंध उपनियम -2020 कहलाएगा ।

2) ये उप - नियम नगर पालिका परिषद मसूरी के सरकारी गजट उत्तराखंड में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे।

3 ) उप- नियम नगरपालिका परिषद , मसूरी , की सीमाओं के भीतर लागू होंगे। स्कोप - यह उपविधि उन समस्त वित्तधारकों ऑनसाइट स्वच्छता प्रणाली के प्रयोगकर्ता एवं उनके स्वामी डिसलजकर्ता एवं सेप्टेज के परिवहन एवं परिचालक से जुड़े संचालक , सेप्टेज के प्रसंस्करण एवं निस्तारण से जुड़ी संस्थाएं , शहरी स्थानीय निकाय एवं सेप्टेज प्रबंध समिति ( SMC) पर लागू होगी जो नगर पालिका परिषद , मसूरी के प्रशासनिक सीमांतर्गत फिकल स्लज सेप्टेज मैनेजमेंट विधी ( FSSM ) के लिए जिम्मेदार है । यह उपविधि नगर पालिका परिषद , मसूरी की सीमाओं के भीतर समस्त सार्वजनिक या निजी आवसीय , वाणिज्यिक संस्थागत औद्योगिक प्रस्तावित नियोजित या मौजूदा सभी बिल्डिंग पर लागू होगा।

सेप्टेज मैनेजमेट सेल

उत्तराखंड राज्य प्रोटोकोल फॉर फीकल स्लज सेप्टेज मैनेजमेंट , 2017 के अनुसार नगर पालिका परिषद , मसूरी द्वारा सेप्टेज मैनेजमेंट समिति ( SMC ) का गठन निम्नवत किया गया है: -

उपजिलाधिकार , मसूरी- अध्यक्ष

अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद , मसूरी- सदस्य सचिव

प्रतिनिधि उत्तराखंड जल संस्थान ( not below EE ) - सदस्य भाग 8 ]

09 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

प्रतिनिधि पेयजल निगम ( not below EE ) - सदस्य प्रतिनिधि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य प्रतिनिधि स्वास्थ्य विभाग सदस्य तकनीकी सलाह हेतु एक तकनीकी विशेषज्ञ

2.1. प्रसंग:

यह महत्वपूर्ण है कि , एक उचित वैज्ञानिक सिकल लॉज एवं सेप्टिक प्रबंधन का अनुपालन किया जाए ताकि सेप्टेज / फीकल स्लज सेप्टेज टैंक गड्ढे, शौचालय , से पर्यावरण नदी एवं अन्य पानी के स्रोत प्रदूषित ना हो सके।

1.1 राष्ट्रीय फीकल स्लज एंव सेप्टेज प्रबंधकीय नीति :

ग्रामीण विकास मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा " राष्ट्रीय फीकल स्लज एंव सेप्टेज प्रबंध नीतिवर्ष 2017 घोषित की गई है , जिसमें शहर पूर्ण रूप से स्वच्छ , तंदुरुस्त और जीवित बना रहें और अच्छे सफाई भी बनी रहे । शहरी नीति का मुख्य उद्देश्य शहर की प्रसन्नता , प्राथमिकता और दिशा निर्धारित करना है , ताकि राष्ट्रव्यापी सेवाओं का अनुपालन करते हुए समस्त क्षेत्र की सुरक्षित और स्थाई सफाई व्यवस्था हो सके।

1.2 उत्तराखंड में सेप्टेज प्रबंधक प्रोटोकॉल

नगर पालिका परिषद , मसूरी " उचित प्रबंधन योजना या प्रोटोकॉल सीवरेज की निकासी जो कि सामान्य सेप्टिक टैंक में या बायोडाइजेस्टर में एकत्रित की जाती है , नियमित रूप से खाली की जाये और उसका उचित प्रबंध किया जाये और उसके परिणामस्वरूप खाद जो इस प्रकार से एकत्रित हुई है वह निशुल्क किसानों में वितरित की जायें । जल आपूर्ति एवं सीवरेज अधिनियम 1975 / नगरपालिका परिषद , अधिनियम 1959 एवं शहरी विकास निदेशालय के पत्रांक संख्या 597/4

(2 ) यू०डी०-2017-50/16 दिनांक 22-05-2017 के क्रम में उत्तराखंड जल संस्थान के समन्वय से होगा । इस नियमावली द्वारा सेफ्टेज प्रबंध प्रोटोकॉल देहरादून का दिग्दर्शन कराना है , ताकि वैज्ञानिक विधि द्वारा सेप्टेज प्रबंध बना रहे , जो कि एकत्रीकरण , परिवहन , इलाज , सेप्टेज फीकल स्लज का निस्तारण और पुनः प्रयोग हो सके । इस प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए और आंतरिक विभागीय समन्वय हेतु एक सेप्टेज मैनेजमेंट सेल का गठन किया गया है , जिसके अंतर्गत यू० एल ० बी० , जल निगम एवं जल संस्थान होंगे।

2. नगरिक उपकानून/ फीकल स्लज एवं सेप्टेज प्रबंध का नियमितीकरण:

सेप्टज प्रबंधन प्रोटोकोल के अनुसार जो कि शहरी विकास विभाग उत्तराखंड सरकार के शासनादेशों एवं समस्त लागू होने योग्य नियम , कानून या नियमावली नगर पालिका परिषद , मसूरी के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत सूचित किया जाता है ।

3. उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र:

नियावली का उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र निम्नवत है:

1. निर्माण , सेप्टिक टैंक के दैनिक रखरखाव और शौचालय के गड्ढेडे , परिवहन , इलाज और सुरक्षित रखरखाव , जो कि स्लज और सेप्टेज से संबंधित है ।

2. क्षेत्र के मालिक द्वारा जो कार्य किया जाना है , उसको निर्देशित करना जो कि सेप्टिक टैंक और शौचालय के गड्ढे से और फीकल स्लज एवं सेप्टेज परिवहन से संबंधित है , ताकि वे इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कर सकें ।

10

उत्तराखण्ड गजट, 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[भाग 8

3. उचित निरीक्षण प्रदान करना और मशीनरी का अनुपालन।

4. लागत , वसूली सुनिश्चित करना जो कि स्लज और सेप्टेज उचित प्रबंधन हेतु है ।

5. निजी और गैर सरकारी क्षेत्रों को फीकल स्लज एवं सेप्टेज प्रबंध में सहभागी की सुविधा देना।

4. एकत्रीकरण परिवहन इलाज और सेप्टेज के खुर्द- बुर्द हेतु एक प्रक्रअपनाना:

4.1 सेप्टिक टैंक और सेप्टेज / फीकल स्लज एकत्रीकरण को रिक्त करनाः सेप्टिक टैंक की तली में जो जमा हो गया है , उसको कटाना और एक बार उसको ठीक करना , जो की गहराई में पहुंच गया है या बारंबार के आखिर में जो डिजाइन है , जो कोई भी पहले आए । जबकि स्लज को सुखाना और सब सेप्टिक टैंक में जो द्रव्य है , उसको भी सुखाना। मेकेनिकल वैक्यूम टैंकर का भी उपयोग नगरिया अधिकारियों द्वारा सेप्टिक टैंक को खाली करने हेतु उपयोग किया जाना चाहिए । सुरक्षा प्रक्रिया जैसे प्रोटोकॉल में वर्णित है को सेप्टिक टैंक के खाली करते समय और सेप्टेज के परिवहन के समय इस नियम का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए ।

4.2 सेप्टेज/ का परिवहन

1 . फीकल स्लज और सेप्टेज ट्रंसपोर्टर वाहन के सुरक्षित परिवहन हेतु उत्तरदायी होंगे । जैसा कि समय - समय पर एस.एम.सी. द्वारा स्वीकृत किए जाएंगे ।

2. फीकल स्लज और सेप्टेज परिवहन निर्माता यह आश्वासन देंगे किः

( क ) . पंजीकृत संग्रह वाहन जिसके अंतर्गत समस्त उपकरण जो कि परिवहन हेतु इस्तेमाल किए जाएंगे फीकल स्लज और हेतु। जो कि छिद्र निरोधी होगा और फीकल स्लज और

सेप्टेज हेतु ताला बंद रहेगा और लागू किए जाने योग्य मानदंड का अनुपालन करेंगे ।

(ख) . कोई भी टैंक और उपकरण जो कि फीकल स्लज और सेप्टेज और सेप्टेज हेतु उपयोग में लाया जाएगा वह किसी अन्य वस्तु या द्रव्य को परिवहन हेतु इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

4.3 सेप्टेज का निष्पादन और इलाज:

राज्य सेप्टेज मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के अनुसार नगर निगम की अपनी एक इकाई होगी। परंतु इस निकाय में स्वयं की इकाई न होने के कारण सेप्टेज को निकाय के अंतर्गत स्थित उत्तराखंड जल संस्थान के एस.टी.पी. के परिवहन किया जाएगा । भविष्य हेतु आवश्यकताअनुसार अन्य सेप्टेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण हेतु भी उत्तराखंड जल संस्थान के साथ समन्वय कर कार्य योजना तैयार करने के प्रयास किए जाएंगे ।

भाग 8 ]

11 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

5. सुरक्षा उपाय:

1. उचित तकनीकी संयंत्र , सुरक्षा , उपकरण का प्रयोग करते हुए मल निस्तारण किया जाएगा। फीकल स्लज और सेप्टेज ट्रांसपोर्टर यह आशान्वित करेंगे कि समस्त मल निस्तारण कर्मचारी उचित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जिसके अंतर्गत कंधे की लंबाई तक पूरा नियोप्रिन गलबस , रबड़ बूट चेहरे का मास्क और आंखों की सुरक्षा आदि । समस्त एकत्रीकरण क्षेत्र से पहले अपना लिया जाएगा। इसके लिए जागरूकता भी की जाएगी । इसके अलावा प्रथम सहायता के किट गैस का पता करने वाला लैंप और अग्निशामक यंत्र , मल निस्तारण गाड़ी में रखे जाएंगे । प्रथम सहायता किट गैस का पता करने वाला लैंप और आग बुझाने वाला संयंत्र मल निस्तारण गाड़ी में रखे जाते हैं । इसे पहले कि यह एकत्रीकरण क्षेत्र में जाता है ।

टैंक पिट लैट्रिन में हूं काम चल रहा हो कोमा धूम्रपान वर्जित है।

2 . माल निस्तारण कार्यकर्तासेप्टिक टैंक में और शौचालय गड्ढे में प्रवेश नहीं करेंगे और अच्छादित टैंक को हवा के लिए आना जाना रखेंगे , जो कि इस कार्य को शुरू करने से पहले किया जाना आवश्यक ह होगा । बच्चों को टाइम के ढक्कन से दूर रखा जाएगा , एवं टेंथ के स्क्रू और ताले से सुरक्षित रख जाएगा । कर्मचारी सावधान रहेंगे कि मल निस्तारण प्रक्रिया के समय कोमा ढक्कन पर अत्याधिक भार न हो ताकि मेनहोल का ढक्कन टूटने से बचा रहे ।

6. सेप्टेज खाली करना और वाहन के पंजीकरण का परिवहनः

6.1 निजी व्यवसायियों के लिए जिनके पास मशीनीकरण खाली करना और परिवहन गाड़ी उपलब्ध हो यू.एल. बी में पंजीकरण दर्ज करेगा और संबंधित यू. एल . बी लाइसेंस निर्गत करेगा । इस प्रकार का लाइसेंस निर्गत करने से पहले यह व्यवसायी आशनिवत करेगा कि यह ट्रक उचित उपकरण और उचित सुरक्षा माफ से सुसज्जित है । सेप्टेज ट्रांसपोर्टर और उसका पंजीकरण हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करेगा , जो की गाड़ियों के परिवहन हेतु होगा। ये निजी व्यक्ति को भी अपने इस कार्य से उत्साहित करेगा। परिवहन प्रपत्र और परमिट परिशिष्ट- A.2 मे संलग्न है ।

6.2 कोई भी व्यक्ति या वाहन पंजीकृत सेप्टेज ट्रांसपोर्टर द्वारा प्रयोग किया जाएगा , जो कि एकत्रीकरण परिवहन और सेप्टेज के प्रयोजन हेतु है। इसका पंजीकरण सेप्टेज ट्रांसपोट्रेशन वहीकल एस.एम.सी. के साथ इन प्रोटोकोलो में पंजीकृत नहीं है ।

6.3 परिशिष्ट -1

सारणी 1 पंजीकरण व्यय

अ . प्रारंभिक पंजीकरण

:रु . 1,000.00 प्रति गाड़ी

ब . नवीनीकरण

: रु .500.00 प्रति गाड़ी 12

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

[ भाग 8

7. उपभोक्ता लागत और इसका संचय:

7.1 इस क्षेत्र के समस्त मालिक जो सेप्टिक टैंक और शौचालय के गड्ढे जिसका भुगतान उपभोक्ता करेगा जैसा कि यू.एल. बी . में फीकल स्लज और सेप्टेज उपनियम में समय - समय पर दर्शाया गया है जो कि सेप्टिक टैंक के भरने , शौचालय के गड्ढे परिवहन और फीकल स्लज एवं सेप्टेज के उपयोग हेतु है ।

7.2 इस क्षेत्र के समस्त मालिक जिनके अपने क्षेत्र में निरर्थक पानी के निष्कासन की प्रणाली उपलब्ध है , जो कि यू.एल.बी. में कार्य एवं शिकायत हेतु प्रमाणित है और वे भी जो कि सीवर नेटवर्क से संबंधित है उनको उपभोक्ता के भुगतान से विमुक्त किया जाता है।

7.3. यू.एल.बी. अपनी लागत संशोधित करेगा जो कि समय - समय पर इसके संबंधित है । ऐसे उपी उपभोक्ता लाकर जिसके अंतर्गत मल निस्तारण लागत परिवहन एवं फैकल स्लज और सफेद से निष्कासन हेतु।

7.4 उपभोक्ता लागत क्षेत्र विशेष के स्वामी से एकत्र किये जाये जो निम्नवत् है।

अ . उपभोक्ता लागत प्रत्यक्ष रूप सम्बन्धित भवन/ सेप्टिक टैंक मालिक से यू. एल . बी . द्वारा वसूल किया जायेगा ।

ब . यू. एल . बी . किसी व्यक्ति को अधिकृत कर सकता है , जिसके अंतर्गत फीकल स्लज और सेफ्टेज परिवहन जो कि उपभोक्ता लागत से एकत्र की जाएगी । जो कि उस क्षेत्र विशेष का स्वामी है और सेप्टिक टैंक शौजालय के गड्ढे से सम्बधित है ।

परिशिष्ट A- 2

सारणी 2 उपभोक्ता लागतः-

नगर पालिका क्षेत्र में सेप्टिक टैंक एंव हर मकान के शौचालय गढ्ढेवेढे या किसी भी शिकायत के इस आशय की शिकायत प्राप्त होने पर कि सेप्टिक टैंक ओवरफ्लो तो नही हो रहा है तुरन्त पालिका से सुपरवाइजर को भेज कर जाँच करवायेंगे । इसके अलावा पालिका में सेप्टिक टैंक को खाली कराने के ओवद के आने पर पालिका द्वारा जांच करायी जायेगी कि सेप्टिक टैंक कितना क्षेत्रफल का है और उसके खाली कराने में कितने सीवर टेंकर के चक्कर लगेंगे । तसदीक होने पर निम्न प्रकार शुल्क जायेगा।

1. नगर पालिका परिषद मसूरी के सीवर टैंकर की क्षमता 5000लीटर

2. नगर पालिका परिषद मसूरी सीमा के भीतर रू . 2500 / -प्रति फेरा , तथा रू

500 / -STP शुल्क , कुल रू .

भाग 8 ]

13 उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई ० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

3000 / - भवन स्वामी नगर पालिका में शुल्क जमा करेगा । सेप्टिक टैंक में ज्यादा फिकल होने के कर्मी के द्वारा समक्ष अधिकारी के अनुमोदन पश्चात दूसरे फेरे की स्थिति होने के कर्मी के द्वारा सक्षम अधिकारी के अनुमोदन पश्चात दूसरे फेरे में 500 / - रू . की छूट प्रदान की जायेगी।

3. नगर पालिका सीमा के बाहर रू . 5000 / प्रति फेरा , तथा रू . 1000 / STP शुल्क एवम रु . 500/- प्रति किमी , भवन स्वामी नगर पालिका में शुल्क जमा करेगा । सेप्टिक टैंक ज्यादा फीकल होने पर दूसरे फेरे की स्थिति होने के कारण सम्बन्धित कर्मी के द्वारा सक्षमअधिकारी के अनुमोदित पश्चात दूसरे फेरे में 1000 / - रू . की छूट प्रदान की जायेगी ।

4. नगर पालिका परिषद मसूरी द्वारा यह भी देखा जायेगा कि यदि कोई सेप्टिक टैंक ज्यादा ही छोटा है तो निरीक्षण पश्चात तथा यह समाधान हो जाने पर कि सम्बन्धित सेप्टिक टैंक में 5000 ली . का सीवर टैंक पूर्ण नहीं भर पायेगा , उपरोक्त निर्धारित दरों में आवश्यक छूट देकर शुल्क प्राप्त कर सकते है ।

8. मैकेनिजम का निरीक्षण , क्रयान्यवन और मजबूती देनाः-

8.1 कोई भी व्यक्ति जोकि एस . एम . सी . / नगरीय स्थानीय संस्था द्वारा अधिकृत है , उसको पूर्ण अधिकार होगा कि वह सेप्टिक टैंक एंव हर एक मकान के शौचालय गड्ढे या सामुदायिक / संस्थागत आदि का निरीक्षण करें । प्रत्येक भवन स्वामियों द्वारा 03 वर्ष में सेप्टिक टैंक एवम् डबल पिट टैंक खाली करवाया जाना भी अनिवार्य है ।

8.2 मल निस्तारण का अनुपालन न करना जैसा कि उपरोक्त प्रोटोकॉल में वर्णित है , जुर्माना अलग से लागया जायेगा और इससे प्राप्त धनराशि नगर निगम देहरादून में जमा होगी।

8.3 यू. एल . बी . और परिचालक सेप्टिक टैंक के खाली होने का अभिलेख रखेंगे।

8.4 अवचेतन कार्यक्रम समय समय पर चलाया जायेगा , जो कि प्रत्येक व्यक्ति सरकार या निजी व्यवसाय के सेप्टिक टैंक , बायोंडाइजेस्टर मल निस्तारण सेप्टिक टैंक का एकत्रीकरण , मशीनरी , परिवहन , निष्पादन और सेफ सेफ्टिक सेक्टेज का इलाज हेतु प्रशिक्षण पर अधारित कार्यक्रम होगा ।

9. दंडः

दंड का ढांचा उपकरण से रहित / अकार्यशील जी . पी . एस . प्रणाली निर्धन वर्ग शिकायतें फीकल स्लज का एकत्र न करना और सेफ्टेज का इलाज हेतु प्रशिक्षण पर आधारित कार्यक्रम होगा।

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[भाग 8

उत्तराखण्ड गजट , 05 फरवरी , 2022 ई० (माघ 16, 1943 शक सम्वत्)

सारणी 3 दंड

शिकायत का प्रकार क्र . सं.

दंड या कार्यवाही वर्ष में तीसरे समय पकड़ी विशेष रूप से मल निस्तारण वाहन

दंड या कार्यवाही प्रथम दृष्टया पकड़ी गयी वर्ष में एक बार मल निस्तारण वाहन

1.

1000

लोंगो की सेवा की शिकायत

2.

5000

सेप्टेज फीकल स्लज जैसा की विशेष कार्यक्षेत्र में खाली न करने पर

3 .

500

पंजीकरण करना पंजीकरण का नवीनीकरण न करना ।

4.

2000

विशेष सुरक्षा उपायों का पालन न करना एवम जी . पी . एस . का न जाना

आशुतोष सती,

अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद्, मसूरी ।

दंड या कार्यवाही वर्ष में दोबारा पकड़ी गई मल निस्तारण वाहन से सम्बन्धित

5000

तीन महीने के लिए परमिट सेवा की शिकायत परमिट का निरस्तीकरण

6 माह के लिए परमिट को स्थगित करना

2000

आर . टी. ओ. को संस्तुति वाहन के पंजीकरण को निरस्त करने हेतु 3 महीने के

5000

लिए परमिट को स्थगित करना परमिट का निरस्तीकरण के लिए स्थगित करना।

अनुज गुप्ता,

अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद्, मसूरी ।

पी०एस० यू० (आर० ई० ) 06 हिन्दी गजट / 134- भाग 8-2022 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।

Cite this issue. Uttarakhand Gazette, Government of Uttarakhand, 05 February 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand.2022-02-05.24_VII-A-2_2022_11-sidkul-2020/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand.2022-02-05.24_VII-A-2_2022_11-sidkul-2020.