Servants of Knowledge
Uttarakhand Gazette · Government of Uttarakhand

Notification

Published 17 December 2022

Notification no.
19069
Issued By
HARI CHANDRA SEMWAL(Secretary)
Identifier
in.gazette.uttarakhand.2022-12-17.19069
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/DDN / 30/ 2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की

[संख्या-51 खण्ड-23] रुड़की, शनिवार, दिनांक 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

विषय-सूची

प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग-अलग दिये गए हैं , जिससे उनके अलग -अलग खण्ड बन सकें

वार्षिक चन्दा विषय

पृष्ठ संख्या

रु०

3075 सम्पूर्ण गजट का मूल्य

927-969

1500 भाग 1 - विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान- नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

869-871

1500 भाग 1 -क-नियम , कार्य- विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

975 भाग 2-आज्ञाएं , विज्ञप्तियां , नियम और नियम विधान, जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण

975 भाग 3 - स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़- पत्र , नगर प्रशासन, नोटीफाइड एरिया , टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया

975 भाग 4- निदेशक , शिक्षा विभाग , उत्तराखण्ड

975 भाग 5- एकाउन्टेन्ट जनरल , उत्तराखण्ड

975 भाग 6-बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

975 भाग 7- इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

685-702

975 भाग 8 -सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

स्टोर्स पर्चेज-स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़- पत्र आदि

1425

927-क 928

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण, अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण अनुभाग-02

अधिसूचना

30 नवम्बर , 2022 ई०

ई- पत्रावली संख्या 19069- राज्यपाल उत्तराखण्ड के कुमांऊ मण्डल में गोला नदी पर प्रस्तावित जमरानी बांध बहुउ‌द्देशीय परियोजना के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन कार्यों हेतु 'जमरानी बांध बहु‌द्देशीय परियोजना हेतु पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति-2022 को अधिसूचित किये जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं ।

929 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना हेतु पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति, 2022

उत्तराखण्ड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम , उत्तराखण्ड सरकार ।

930

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई ० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

विषय सूची

संकेताक्षर सूची.. 931

परिभाषाएं .. 932

1. प्रस्तावना . 933

933-934 2. भूमि अध्याप्ति आवश्यकता एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों का विषय क्षेत्र ..

भूमि अध्याप्ति आवश्यकता का प्रकार एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों का विषय क्षेत्र..

3. नीति के उद्देश्य. 934

4. विधिक ढांचा . 935

4.1 भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 . 935-

4.2 अनुसूचित जनजाति व अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम, 2006.. 935

4.3 वन पंचायत अधिनियम, 1931... 935-936

4.4 विद्युत पारेषण लाइन हेतु विधिक ढांचा .... 936-937

4.5 जमरानी बांध बहुउ‌द्देशीय परियोजना की पुनर्वास नीति के सिद्धान्त.. 937-938

5. परियोजना अधिकार.....

938

5.1 बांध एवं जलाशय घटक हेतु अधिकार ढांचा.. 939-944

5.2 पुनर्वास स्थल पर अवंसरचनात्मक सुविधाएं.. 944-945

5.3 सिंचाई नहर घटक हेतु अधिकार ढांचा . 945-947

5.4 विद्युत पारेषण लाइन घटक हेतु अधिकार ढांचा... 947-948

6. लोक परामर्श एवं सहभागिता. 949-950

7. क्रियान्वयन व्यवस्था.. 950

8. अनुश्रवण और मूल्यांकन. 950 631 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई ० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

संकेताक्षर सूची

उ०स०                 उत्तराखण्ड सरकार
ज० बा०ब० परि०        जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना
कि०मी०              किलो मीटर
के०वी०              किलो वोल्ट
एम०                 मीटर
एम०सी ०एम०          मिलियन घन मीटर
एम०यू०              मिलियन यूनिट
एम०डब्लू०           मेगावाट
पी०आई०ए०             परियोजना क्रियान्वयन ईकाई
पी०सी०सी०            परियोजना समन्वय समिति
पी०आई०यू०            परियोजना क्रियान्वयन ईकाई
पी०आई०यू०जे०         परियोजना क्रियान्वयन ईकाई जमरानी
पी०एम०ए०वाई          प्रधानमंत्री आवास योजना
पी०एम०यू०            परियोजना प्रबन्धन ईकाई
 आर एण्ड आर          पुनर्वास एवं पुनर्व्यवास्थापन
आरएफसीटीएलएआर        भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार
                    अधिनियम 2013
आर०एल०               रिडूस्ड लेवल
आर०ओ ०डब्लू०         रास्ते का अधिकार
 एस०आई०ए०            सामाजिक समाघात मूल्यांकन
 एस ० सी० / एस ० टी० अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति
यू०आई०डी०            उत्तराखण्ड सिंचाई विभाग
यू०जे०वी०एन०एल ०     उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड
यू०के० एस०डी०एम०     उत्तराखण्ड कौशल विकास मिशन
यू०पी०सी० एल०        उत्तराखण्ड पावर कार्पोरोशन लिमिटेड
यू०पी ०डी०सी०सी०     उत्तराखण्ड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम

932

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

परिभाषाएं

विवरण

इस नीति के प्रयोजन हेतु परिभाषा

डूब क्षेत्र में निवासरत भूमि धारक परिवार जो भौतिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं

श्रेणी 1 प्रभावित परिवार

अथवा

परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो गंभीर रुप से प्रभावित हैं ।

श्रेणी 2 प्रभावित

परिवार

भूमि धारक परिवार जो भूमि खो रहे हैं परन्तु डूब क्षेत्र अथवा परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत नही हैं ।

अथवा

परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो आंशिक रुप से प्रभावित हैं ।

श्रेणी 3 प्रभावित परिवार

गैर भूमि धारक परिवार जो डूब क्षेत्र में निवासरत हैं तथा भौतिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं ।

अथवा

श्रेणी 1 के परिवार का व्यस्क व्यक्ति जो किसी भी लिंग का हो एवं आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में पृथक प्रभावित परिवार परिभाषित है ।

श्रेणी 4 प्रभावित परिवार

गैर भूमि धारक परिवार जैसे कृषि एवं व्यवसायिक किरायेदार, बंटाईदार एवं पट्टेधारक जो प्रभावित हैं परन्तु विस्थापित नहीं हैं ।

योग्य

आघात परिवार

गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के प्रभावित परिवार (बी० पी०एल० कार्ड धारक अथवा राजस्व प्राधिकारियों द्वारा प्रमाणित) , भूमिहीन परिवार, वयोवृद्ध मुखिया परिवार (एकमात्र आय अर्जक) , महिला मुखिया परिवार (प्राथमिक आय अर्जक) , अनाथ, अनुसूचित जाति/जन जाति परिवार तथा भूमि के गैर शीर्षक धारक परिवार (पट्टाधारक/किरायेदार / बटाईदार एवं अन्य गैर शीर्षक धारक) ।

कट ऑफ दिनांक प्रतिकर हेतु पात्रता एवं सहायता हेतु भूमि धारक परिवारों हेतु कट ऑफ दिनांक आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की धारा 11 की अधिसूचना की तिथि होगी । गैर शीर्षक धारक परिवारों की पात्रता हेतु कट ऑफ दिनांक परियोजना जनगणना सर्वेक्षण अथवा सम्बन्धित घटकों हेतु विस्तृत मापन सर्वेक्षण की तिथि होगी ।

डूब क्षेत्र

बांध के अपस्ट्रीम में बांध शीर्ष तक की भूमि जो 765.60 मीटर के आरएल तक है डूब क्षेत्र की सीमा होगी ।

गंभीर प्रभाव परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो अपनी 50 प्रतिशत या अधिक भूमि परियोजना हेतु खो रहे हैं ।

आंशिक प्रभाव परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो अपनी 50 प्रतिशत से कम भूमि परियोजना हेतु खो रहे हैं ।

अन्य परिभाषाएं इस पुनर्वास नीति में प्रयुक्त अन्य पद आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम 2013 के अध्याय 1 की धारा 3 के अनुरूप परिभाषित होंगें । ( https://dolr.gov.in) 933 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

1. प्रस्तावना

(1) जमरानी बांध बहुउ‌द्देशीय परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य के जनपद नैनीताल में रामगंगा नदी की सहायक गौला नदी पर बांध का निर्माण प्रस्तावित है । बहुउ‌द्देशीय परियोजना होने के कारण परियोजना के मुख्य घटक निम्नवत हैं ।

जलाशयः इस घटक के तहत गोला नदी में जमरानी नामक स्थान पर काठगोदाम स्थित गोला बैराज से 10 कि०मी० अपस्ट्रीम में 150.60 मीटर उंचाई का कंक्रीट ग्रैविटी बांध का निर्माण सम्मिलित है ।

278.24 सिंचाई नहर निर्माण एवं पुनरोद्धारः इस घटक के अन्तर्गत 168.62 कि० मी० लम्बाई की नहरों का पुनरोद्धार/ पुनर्निमाण , 21.00 कि0 मी0 लम्बाई की नई नहरों के निर्माण के साथ- साथ कि०मी० लम्बाई के वाटर कोर्सेस का निर्माण सम्मिलित है ।

पेयजल आपूर्तिः इस घटक के तहत हल्द्वानी शहर को वर्ष 2051 की आंकलित जनसंख्या हेतु 42. 70 एम०सी०एम० की पेयजल आपूर्ति किये जाने का प्राविधान है ।

जल विद्युत उत्पादन (14 मे० वा०) एवं ट्रांसमिशनः इस घटक के तहत बांध के तली पर डाउनस्ट्रीम में 63.4 एम०यू० जल विद्युत उत्पादन एवं उत्पादित ऊर्जा को 9 कि०मी० लम्बाई की 33 के० वी० ट्रांसमिशन लाईन्स के माध्यम से रानीबाग स्थित सब स्टेशन तक पहुंचाने का कार्य सम्मिलित है । पावर हाउस से रानीबाग सब स्टेशन तक ओवरहेड डबल सर्किट डबल पोल ट्रांसमिशन लाईन्स का निर्माण किया जाएगा । रानीबाग सब स्टेशन से काठगोदाम ग्रिड तक 7 कि० मी ० लम्बाई की भूमिगत 33 के० वी० ट्रांसमिशन केबल बिछाई जायेगी ।

(2) सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड को परियोजना के क्रियान्वन का उत्तरदायित्व सौंपा गया है । उत्तराखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2010 में उत्तराखण्ड परियोजना विकास और निर्माण निगम का गठन सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में निर्माण और परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए किया गया था । यू० पी ०डी० सी० सी० परियोजना हेतु नोडल संस्था होगी एवं परियोजना के विभिन्न घटकों हेतु उत्तरदायी अन्य विभागों से समन्वय स्थापित करेगी ।

(3) यू०पी०डी० सी०सी० के तहत परियोजना के जलाशय एवं सिंचाई प्रणाली घटक के नियोजन एवं क्रियान्वयन हेतु परियोजना क्रियान्वयन इकाई जमरानी की स्थापना की गई हैं । परियोजना के जल विद्युत घटक के क्रियान्वयन हेतु यू०जे ० वी०एन ०एल० के अधीन पृथक पी०आई०ए ० का गठन किया गया है । यू०जे ० वी० एन०एल० की पी०आई०ए० में ट्रांसमिशन लाईन घटक हेतु यू० पी०सी०एल० के अधिकारियों को सम्मिलित किया जायेगा ।

(4) परियोजना डिजाईन के अनुरूप विभिन्न घटकों हेतु निजी भूमि के अर्जन की आवश्यकता होगी । विभिन्न घटकों के भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन के क्रियान्वयन का कार्य सम्बन्धित घटकों की पी०आई०यू० /पी०आई०ए० द्वारा किया जाएगा । उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस विशिष्ट पुनर्वासं एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति का गठन प्रस्तावित जमरानी बांधबहुउ‌द्देशीय परियोजना के भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रबन्धन हेतु किया गया है । प्रभावित व्यक्तियों के लिए नीतिगत प्राविधानों को बेहतर करने के उद्देश्य से बदलाव या संशोधन करने का अधिकार परियोजना के वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णय लेने हेतु गठित उच्च प्राधिकार समिति (एच ० पी० सी ० ) को होगा ।

2. भूमि अध्याप्ति आवश्यकता एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों का विषय क्षेत्र

(1) परियोजना डिजाईन के समय परियोजना हेतु भूमि की आवश्यकता को न्यून रखने हेतु उपयुक्त अभियान्त्रिकी विकल्पों का प्रयोग किया गया है । उपलब्ध राजकीय भूमि का अधिकाधिक प्रयोग किये जाने का प्रयास किया गया है । परन्तु प्राथमिक आंकलन के आधार पर विभिन्न विभागों के स्वामित्व की भूमि के अतिरिक्त निजी भूमि की भी आवश्यकता है । भूमि अध्याप्ति की आवश्यकता एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों के दायरों का सारांश तालिका 1 में दिया गया है ।

934

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

तालिका 1: भूमि अध्याप्ति आवश्यकता एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों का विषय क्षेत्र

क्र०स०

घटक

भूमि अध्याप्ति आवश्यकता का प्रकार एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों का विषय

क्षेत्र

1 बांध एवं जलाशय का निर्माण

वन विभाग के स्वामित्व की आरक्षित वन भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी । वन भूमि के अधिग्रहण के कारण कोई पुनर्व्यवस्थापन प्रभाव नहीं होगा ।

वन विभाग के स्वामित्व की (संरक्षित/ ग्राम बन) वन पंचायत भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी जिसके परिणामस्वरुप ग्रामीणों के वन अधिकारों की हानि होगी ।

राज्य सरकार के स्वामित्व की राजस्व भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी । गैर शीर्षकधारक यदि कोई हों, प्रभावित हो सकते हैं ।

निजी भूमि का स्थाई अधिग्रहण । कृषि भूमि की हानि, आवासीय भूमि की हानि, आजीविका की हानि, आश्रय एवं अन्य परिसम्पतियों की हानि । उक्त के परिणाम स्वरूप परिवारों का विस्थापन एवं आजीविका की हानि ।

सामुदायिक भूमि का स्थाई अधिग्रहण। भूमि एवं अन्य परिसम्पत्तियों सहित सामुदायिक संसाधनों की हानि ।

2 सिंचाई नहर निर्माण एवं पुनरोद्धार

वन विभाग के स्वामित्व की आरक्षित वन भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी। वन भूमि के अधिग्रहण के कारण कोई पुनर्व्यवस्थापन प्रभाव नहीं होगा ।

वन विभाग के स्वामित्व की (संरक्षित/ ग्राम वन) वन पंचायत भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी जिसके परिणामस्वरुप ग्रामीणों के वन अधिकारों की हानि होगी ।

राज्य सरकार के स्वामित्व की राजस्व भूमि सिंचाई विभाग को स्थानान्तरित की जाएगी । गैर शीर्षकधारक यदि कोई हों, प्रभावित हो सकते हैं ।

निजी भूमि का स्थाई अधिग्रहण । कृषि भूमि की हानि, आवासीय भूमि की हानि, आजीविका की हानि, आश्रय एवं अन्य परिसम्पतियों की हानि।

3 जल विद्युत उत्पादन एवं ट्रांसमिशन

पावर हाउस का निर्माण जलाशय घटक की वन भूमि में किया जाएगा एवं अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं है ।

ट्रांसमिशन लाइन हेतु स्थायी अथवा अस्थायी अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है । केवल उपयोगकर्ता अधिकार का प्रयोग किया जायेगा। भूमि तथा फसलों पर अस्थाई प्रभाव पड सकता है ।

(2) इस नीति में उपलब्ध कानूनी ढांचे के अनुरूप भूमि आवश्यकता के प्रकार एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभाव के आधार पर विशिष्ट पात्रता लाभ प्रस्तावित किये गये हैं ।

3. नीति के उद्देश्य

यह नीति परियोजना में प्रस्तावित विभिन्न घटकों की भूमि अध्याप्ति प्रक्रिया के मार्गदर्शन एवं परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन सहित विभिन्न पात्रता लाभों के निर्धारण हेतु तैयार की गयी है । नीति में विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्व्यवस्थापन सम्बन्धी मामलों एवं आजीविका बहाली को प्रभावित परिवारों के साथ परामर्श से हल करने का प्रयास किया गया है । पुनर्व्यवस्थापन की प्रक्रिया में निहित कठिनाईयों को पर्याप्त प्रतिकर व सहायता तथा क्रियान्वयन ईकाई द्वारा सक्रिय क्रिया कलापों के माध्यम से न्यून किये जाने का प्रयास किया गया है । इस नीति में वर्णित प्राविधानों के आधार पर प्रत्येक घटक हेतु पृथक पुनर्व्यवस्थापन योजना तैयार की जायेगी । यह नीति सुनिश्चित करती है कि प्रभावित परिवार अपने पुराने जीवन स्तर, उपार्जन क्षमता, उत्पादन स्तर को बढाने या परियोजना पूर्व के स्तर तक रखने एवं सामाजिक व सांस्कृतिक स्तर को बहाल कर सकें ।

935 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

4. विधिक ढांचा

यह नीति मुख्यतः "भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 " एवं उत्तराखण्ड सरकार द्वारा अपनाये गये सम्बन्धित दिशा निर्देशों के आधार पर तैयार की गयीं है । लागू नीतिगत एंव विधिक ढांचे की मुख्य विशिष्टयां निम्नवत हैं:

4.1 भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013.

(1) भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 दिनांक 01 जनवरी 2014 से प्रभावी है । उत्तराखण्ड सरकार द्वारा इस केन्द्रीय अधिनियम को अपनाते हुए सम्बन्धित नियमों को वर्ष 2015 में अधिसूचित किया है ।

(2) अधिनियम के उद्देश्य हैं: (i ) भारत के संविधान के तहत स्थापित स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं और ग्राम सभाओं के परामर्श से, औद्योगीकरण , अनिवार्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं के विकास और नगरीकरण के लिए भू-स्वामियों तथा अन्य प्रभावित कुटुम्बों को कम से कम बाधा पहुंचाए बिना भूमि अर्जन के लिए एक मानवीय, सहभागी , सूचनाबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना । ( ii) उन प्रभावित कुटुम्बों को जिनकी भूमि का अर्जन किया गया है या अर्जन किए जाने का प्रस्ताव है या जो ऐसे अर्जन से प्रभावित हुए हैं को न्यायसंगत और उचित प्रतिकर दिया जाना । ( iii) ऐसे प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए पर्याप्त प्राविधान करना (iv) यह सुनिश्चित करने के लिए कि अनिवार्य भूमि अर्जन का समुच्चयी निर्णय ऐसा होना चाहिए कि प्रभावित व्यक्ति विकास में भागीदार बने, जिससे अर्जन के बाद उनकी सामाजिक और आर्थिक प्रास्थिति में सुधार हो सके, तथा उससे संबधित या उसके आनुषांगिक विषयों के लिए पर्याप्त उपबंध हों ।

(3) अधिनियम की धारा 107 व 108 राज्य सरकार को ऐसी नीति तैयार करने को अधिकृत करती है जिससे मूल अधिनियम में प्राविधानित पात्रता लाभों में वृद्धि हो अथवा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन हेतु अधिनियम के प्राविधानों को अधिक लाभप्रद किया जा सके । यह नीति आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के उक्त प्राविधान के अतिरिक्त अधिनियम की अनुसूची 1 के अनुरूप बाजार मूल्य के गुणांक के आधार पर प्रस्तावित न्यूनतम प्रतिकर एवं अधिनियम की अनुसूची 2 के अनुरूप पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभों की पुष्टि करती है ।

4.2 अनुसूचित जनजाति व अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम, 2006

(1) यह अधिनियम वन में निवास करने वाली ऐसी अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के, जो ऐसे वनों में पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, किंतु उनके अधिकारों को अभिलिखित नहीं किया जा सका है, के वन अधिकारों और वन भूमि में अधिभोग को मान्यता देने और निहित करने का प्राविधान करता है। इस अधिनियम में वन भूमि में इस प्रकार निहित अधिकारों को अभिलिखित करने के लिए संरचना का और वन भूमि के संबंध में अधिकारों को ऐसी मान्यता देने और निहित करने के लिए अपेक्षित साक्ष्य की प्रकृति का उपबंध करने का प्राविधान है ।

(2) अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 जिसे वन अधिकार अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है, वनवासियों के अधिकारों (मुख्य रुप से अनुसूचित जनजातियों) को विधिक मान्यता प्रदान करके वन और उसके संसाधनों का उपयोग करने के लिए मान्यता देने के साथ इन वन निर्भर समुदायों को वन संसाधनों के सतत उपयोग , संरक्षण और प्रबन्धन में जिम्मेदारी निहित करता है जिससे वे इन महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकें ।

4.3 वन पंचायत अधिनियम, 1931

(1) वन पंचायत जो वर्ष 1921 में प्रारम्भ की गई , उत्तराखण्ड राज्य में सामुदायिक वन प्रबन्धन की एक अनूठी प्रणाली है, जहां लोगों को न केवल छोटे वन उत्पादों का उपयोग करने की अनुमति है, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर " वन पंचायत" नामक संस्था के माध्यम से इसे सतत तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है । वन पंचायत अधिनियम 1931 के माध्यम से इसे औपचारिक रुप से वैध किया गया ।

(2) वन पंचायत का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उपयोग के लिए संरक्षित वनों के हिस्से का कायाकल्प एवं प्रबन्धन करना है । एक बार औपचारिक रुप से सीमांकित हो जाने के उपरान्त यह पड़ोसी ग्रामों को इस क्षेत्र में घुसपैठ करने से भी रोकता है । आग से जंगल की सुरक्षा, अवैध कटाई और चारण के साथ- साथ लोपिंग के कारण पेड़ों को होने वाले नुकसान को रोकना भी वन पंचायतों का उत्तरदायित्व है । कानून में वन पंचायतों के उत्तरदायित्व निर्धारित किए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्राम समुदाय के सर्वोत्तम लाभ के लिए ग्राम वन भूमि को वन उपज के अतिरिक्त किसी अन्य उपयोग में नहीं मोडा जाए ।

936

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

(3) वन पंचायत का गठन नौ सदस्यों की समिति द्वारा किया जाता है जिसमें उसका मुखिया सम्मिलित होता है जिसे "सरपंच" कहा जाता है । इसकी कार्यप्रणाली का संचालन राजस्व विभाग के उपजिलाधिकारी द्वारा किया जाता है । आम तौर पर सामुदायिक वन का प्रबन्धन वन पंचायत द्वारा बारी- बारी से जंगल देखने के माध्यम से किया जाता है या एक गार्ड की नियुक्ति की जाती है जिसके वेतन का भुगतान सामुदायिक अंशदान द्वारा किया जाता है । वन पंचायत घास काटने, चराई और गिरी हुई लकड़ी के संग्रहण की अनुमति भी देती है तथा सरकार की अनुमति से शुल्क भी वसूलती है । सरकार की सिफारिश पर वन पंचायत को राल, गैर इमारती वन उत्पादों और वृक्षों की निकासी के अधिकार भी दिये जाते हैं । वन पंचायत के पास नियमों का उल्लंघन करने पर दंडित करने या जुर्माना लगाने का भी अधिकार है । इसके अतिरिक्त प्रत्येक वन पंचायत आवश्यकताओं के अनुसार बुद्धिमत्ता से अपने नियम और नियमन बनाती है ।

4.4 विद्युत पारेषण लाइन हेतु विधिक ढांचा

33 के ० वी० विद्युत पारेषण लाइन के भूमि अर्जन / प्रतिकर हेतु विशिष्ट विधिक अथवा नीतिगत ढांचा ना होने के कारण परियोजना के ऊर्जा घटक की विद्युत पारेषण लाइन को विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार क्रियान्वित किया जाना प्रस्तावित है । विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 67 व 68 सपठित भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की धारा 10 व 16 प्रतिकर निर्धारित करती हैं । भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की धारा 10 बी0 के अनुरूप यू० पी० सी ०एल ० को किसी भूमि के अर्जन की आवश्यकता नहीं है, परन्तु उक्त अधिनियम की धारा 10 डी0 के अनुरूप सभी क्षतियों हेतु प्रत्येक भू स्वामी को प्रतिकर के भुगतान का प्राविधान है । विद्युत अधिनियम 2003 व भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 के प्रतिकर सम्बन्धी प्राविधान निम्नवत हैं:

A

विद्युत अधिनियम 2003 भाग 8 धारा 67 एवं 68

धारा67(3-5):

(3) अनुज्ञप्तिधारी इस धारा और तद्धीन बनाये गये नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों में से किसी का प्रयोग करते हुए, कम से कम नुकसान, अहित या असुविधा कारित करेगा और उसके द्वारा या उसके द्वारा नियोजित किसी व्यक्ति द्वारा कारित किसी नुकसान, अहित या असुविधा का पूरा प्रतिकर देगा ।

(4) जहां इस धारा के अधीन कोई मतभेद या विवाद (जिसमें उपधारा (3) के अधीन प्रतिकर की रकम भी है) उत्पन्न होता है वहां वह मामला समुचित आयोग द्वारा अवधारित किया जायेगा ।

धारा 68 (5 व 6):

(5) जहां किसी शिरोपरि लाइन के निकट खडे या पड़े कोई वृक्ष या जहां कोई संरचना या अन्य वस्तु जो ऐसी लाइन बिछाने के पश्चातर्ती किसी शिरोपरि लाइन के निकट रखी है या गिर गई है, विद्युत के प्रवहण का पारेषण या किसी संकर्म के पहुंच मार्ग को अवरूद्ध करती है या बाधा डालती है या अवरूद्ध करने या बाधा डालने की सम्भावना है, वहां कार्यपालक मजिस्ट्रेट या समुचित सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, अनुज्ञप्तिधारी के आवेदन पर उस वृक्ष, संरचना या वस्तु को हटवा सकेगा या अन्यथा ऐसी कार्रवाही कर सकेगा जा वह उचित समझे ।

(6) उपधारा (5) के अधीन किसी आवेदन का निपटारा करते समय कार्यपालक मजिस्ट्रेट या उस धारा के अधीन विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, शिरोपरि लाइन के लगाने के पूर्व विद्यमान किसी वृक्ष की दशा में, उस वृक्ष से हितबद्ध व्यक्ति को उतना प्रतिकर प्रदान करेगा जितना वह उचित समझे और ऐसा व्यक्ति उसे अनुज्ञप्तिधारी से वसूल कर सकेगा।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनों के लिये "वृक्ष" पद में कोई झाड़ी, बाड़े, जंगली घास या अन्य पौंधा सम्मिलित हैं ।

भारतीय तार अधिनियम , 1885, भाग-3 , धारा 10

धारा 10 तारयंत्र प्राधिकारी, समय - समय पर, किसी स्थावर सम्पत्ति के नीचे, ऊपर, सहारे या आर पार तारयंत्र लाइन और ऐसी सम्पत्ति में या पर खम्बे लगा सकेगा और अनुरक्षित कर सकेगा ।

परन्तु

(क) तारयंत्र प्राधिकारी इस धारा द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग (केन्द्रीय सरकार) द्वारा स्थापित या अनुरक्षित या इस भांति स्थापित किए या अनुरक्षित रखे जाने वाले तारयंत्र के प्रयोजनों के लिए करने के सिवाय नही करेगा,

(ख) (केन्द्रीय सरकार) उस सम्पत्ति में जिसके नीचे, ऊपर सहारे, आर पार में या पर तारयंत्र प्राधिकारी कोई तारयंत्र लाइन या खम्बे लगाता है, केवल उपयोग के अधिकार से भिन्न कोई अधिकार अर्जित नहीं करेगी, और 937 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

(ग) इसके पश्चात इसमें उपबधित के सिवाय, तारयंत्र प्राधिकारी उन शक्तियों का प्रयोग ऐसी किसी सम्पत्ति के बाबत जो किसी स्थानीय प्राधिकारी में निहित है या इसके नियंत्रण में या प्रबन्धाधीन है, उक्त प्राधिकारी की अनुज्ञा के बिना नहीं करेगा, और

(घ) इस धारा द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करने में तारयंत्र प्राधिकारी यथासम्भव अल्पतम नुकसान करेगा, और जब उसने उन शक्तियों का प्रयोग खण्ड (ग) में निर्दिष्ट सम्पत्ति के भिन्न किसी सम्पत्ति के सम्बन्ध में किया हो तब वह सब हितबद्ध व्यक्तियों को उन शक्तियों के प्रयोग के कारण उनको हुए किसी नुकसान के लिए पूर्ण प्रतिकर देगा ।

भारतीय तार अधिनियम, 1885 की धारा 16 के अनुसारः

घारा 16. स्थानीय प्राधिकारी की सम्पत्ति से भिन्न सम्पत्ति की अवस्था में धारा 10 द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग और उक्त अवस्था में प्रतिकर की बाबत विवाद :

(1) यदि धारा 10 के खण्ड (घ) में निर्दिष्ट सम्पत्ति के सम्बन्ध में उक्त धारा में वर्णित शक्तियों के प्रयोग का प्रतिरोध किया जाता है या उसमें बाधा डाली जाती है, तो जिला मजिस्ट्रेट स्वविवेकानुसार आदेश दे सकेगा कि तारयंत्र प्राधिकारी को उनका प्रयोग करने दिया जायेगा ।

(2) यदि उपधारा (1) के अधीन आदेश दिये जाने के पश्चात कोई व्यक्ति उन शक्तियों के प्रयोग का प्रतिरोध करता है, या सम्पत्ति पर नियंत्रण रखते हुए उनका प्रयोग किये जाने के लिए सब सुविधाएं नही देता है, तो यह समझा जाएगा किं उसने भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के अधीन अपराध किया है ।

4.5 जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना की पुनर्वास नीति के सिद्धान्त

जमरानी बांध बहुउ‌द्देशीय परियोजना के अन्तर्गत पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए प्रतिकर एवं सहायता निम्न विशिष्ट नीतिगत सिद्धान्तों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार होंगेः

(i ) विगत , वर्तमान तथा भावी अस्वैच्छिक पुनर्वास प्रभाव और नुकसानों की शीघ्र पहचान करने के लिए परियोजना की जांच । विस्थापित लोगों के सर्वेक्षण तथा / अथवा जनगणना करवाकर पुनर्वास योजना के दायरे को निर्धारित करना जिसमें पुनर्वास समाघात और जोखिमों से जुड़े विश्लेषण शामिल हों।-

(ii) विस्थापित लोगों, मेजबान समुदायों तथा संबंधित गैरसरकारी संगठनों के साथ सार्थक परामर्श करना । सभी विस्थापित लोगों को उनके अधिकारों और पुनर्वास विकल्पों से अवगत कराना । सुनिश्चित करना कि पुनर्वास कार्यक्रमों के नियोजन , कार्यान्वयन, मॉनीटरिंग तथा मूल्यांकन में उनकी भागीदारी हो । कमजोर वर्गों विशेषकर गरीबी रेखा से नीचे. जीवनयापन करने वाले लोगों, भूमिहीनों, महिलाओं और बच्चों तथा देशज़ लोगों और जमीन के कानूनी अधिकार से वंचित लोगों की आवश्यकता की ओर विशेष ध्यान देना और परामर्श में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना । विस्थापित लोगों के सामाजिक तथा सांस्कृतिक संस्थानों और उनकी मेजबानी करने वाले लोगों को सहायता देना । जहां अस्वैच्छिक पुनर्वास के प्रभाव और जोखिम बहुत जटिल और संवेदनशील हों, स्थानीय तैयारी प्रक्रिया से पहले मुआवजा तथा पुनर्वास निर्णय लेना ।

(iii) सभी विस्थापित एवं प्रभावित व्यक्तियों की आजीविका में निम्न माध्यमों से सुधार करना या कम से कम पूर्व स्तर तक रखना (क) जहां प्रभावित होने वाली आजीविका भूमि आधारित हो वहाँ यथा सम्भव भूमि आधारित पुनर्व्यवस्थापन रणनीतियां या जहां भूमि की हानि से आजीविका प्रभावित ना होती हो वहां प्रतिस्थापन लागत पर नकद प्रतिकर (ख ) समान.या अधिक मूल्य की परिसम्पत्तियों तक पहुंच के साथ परिसमपत्तियों का त्वरित प्रतिस्थापन (ग ) बहाल न किये जाने योग्य परिसम्पत्तियों की पूर्ण प्रतिस्थापन लागत पर त्वरित प्रतिकर और ( घ) जहां सम्भव हो योजनाओं के माध्यम से लाभ साझाकरण अतिरिक्त राजस्व एवं सेवाएं ।

(iv) परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यकतानुसार निम्न सहायता उपलब्ध करानाः (क) यदि पुनर्स्थापन हो, तो सुरक्षित कार्यकाल में पुनर्स्थापन, रोजगार एवं उत्पादन के तुलनात्मक अवसरों के साथ पुनर्व्यवस्थापन स्थलों पर बेहतर आवासीय सुविधा, विस्थापित व्यक्तियों का उनके मेजबान समुदाय के साथ सामाजिक एवं आर्थिक एकीकरण , एवं मेजबान समुदायों को परियोजना के लाभों का विस्तार (ख) संक्रमणकालीन और विकास सहायता, जैसे भूमि विकास , ऋण सुविधाएं, प्रशिक्षण , या रोजगार के अवसर और (ग) आवश्यकतानुसार नागरिक आधारभूत संरचनाएं और सामुदायिक सेवाएं ।

[भाग 1 938

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(v) कमजोर समूहों जिसमें गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के प्रभावित परिवार (बी० पी० एल० कार्ड धारक अथवा राजस्व प्राधिकारियों द्वारा प्रमाणित), भूमिहीन परिवार, वयोवृद्ध मुखिया परिवार (एकमात्र आय अर्जक) , महिला मुखिया परिवार (प्राथमिक आय अर्जक) , अनाथ, अनुसूचित जाति/ जन जाति परिवार तथा भूमि के गैर शीर्षक धारक परिवार (पट्टाधारक / किरायेदार / बटाईदार एवं अन्य गैर शीर्षक धारक) भी सम्मिलित हैं पर विशेष ध्यान देते हुए उनके न्यूनतम राष्ट्रीय मानकों तक उन्नयन हेतु अतिरिक्त सहायता प्रदान करना ।

(vi ) यदि भूमि का अधिग्रहण किसी समझौते के माध्यम से हो तो स्पष्ट, सुसंगत तथा उचित ढंग से प्रक्रिया तैयार करना ताकि यह सुनिश्ििचत किया जा सके कि जो लोग ऐसे समझौते करते हैं वे समान या बेहतर आय तथा आजीविका का स्तर बनाए रखें ।

(vii ) यह सुनिश्चित करना कि विस्थापित व्यक्ति जो गैर भूमि धारक हैं या जिनके पास कोई पहचानने योग्य भूमि का विधिक अधिकार ना हो, भी पुनर्वासन सहायता एवं गैर भूमि परिसम्पत्तियों के प्रतिकर के योग्य हैं ।

(viii) विस्थापित व्यक्तियों के अधिकारों , आय और आजीविका बहाली रणनीति, संस्थागत व्यवस्था, निगरानी और रिपोर्टिंग ढांचे, बजट और संम्यबद्ध कियान्वयन कार्यक्रम पर विस्तार से एक पुनर्वास योजना तैयार करना ।

(ix ) प्रारुप एवं अन्तिम पुनर्वास योजना को परामर्श प्रक्रिया के अभिलेखीकरण सहित, एक निश्चित समय अवधि में सुलभ स्थान पर और विस्थापित व्यक्तियों और अन्य हितधारकों के लिए समझने योग्य रूप और भाषा (ओं) में प्रकट करना ।

(x) विकास परियोजना या प्रोग्राम के अंग के रूप में स्वैच्छिक पुनर्वास की योजना तैयार और कार्यान्वित करना । परियोजना की लागत तथा फायदों की प्रस्तुति में पुनर्वास की पूरी लागत सम्मिलित करना। अधिक अस्वैच्छिक पुनर्वास प्रभाव वाली किसी परियोजना के लिए एकाकी कार्य के रूप में परियोजना के अस्वैच्छिक पुनर्वास घटक को किर्यान्वित करने पर विचार करना ।

(xi ) विस्थापन से पूर्व प्रतिकर और अन्य पुनर्वास अधिकार प्रदान करना । सम्पूर्ण परियोजना क्रियान्वयन के दौरान गहन पर्यवेक्षण के तहत पुनर्वास योजना को लागू करना ।

(xii) पुनर्व्यवस्थापन परिणामों का प्रभावित व्यक्तियों के जीवन स्तर पर प्रभावों का अनुश्रवण एवं आंकलन करना तथा अनुश्रवण रिपोर्टों को सार्वजनिक करना ।

(xiii) पारेषण लाईन हेतु स्थाई भूमि अधिग्रहण नहीं किया जाएगा । पारेषण लाईन के समरेखण का किसी प्रकार की संरचना/ भवन पर कोई प्रभाव नहीं होगा । पारेषण लाईन का निर्माण मौजूदा सडकों (जहां विद्यमान हों) के अनुसरण में एवं अन्य स्थानों पर गैर फसली मौसम में किया जाएगा एवं अनिवार्य प्रभावों की स्थिति में हानियों का प्रतिकर दिया जाएगा । फसलों एवं वृक्षों की हानि के प्रतिकर का आंकलन यू० पी० सी० एल० द्वारा राजस्व विभाग तथा उद्यान/ वन विभाग जैसा लागू हो, की सहायता से किया जाएगा । अस्थाई प्रभावों के लिए प्रतिकर का भुगतान पारेषण लाईन के निर्माण से पूर्व किया जाएगा ।

(xiv) प्रतिकर हेतु पात्रता एवं सहायता हेतु भूमि धारक परिवारों हेतु कट ऑफ दिनांक आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की धारा 11 की अधिसूचना की तिथि होगी । गैर भूमि धारक परिवारों की पात्रता हेतु कट ऑफ दिनांक परियोजना जनगणना सर्वेक्षण अथवा सम्बन्धित घटकों हेतु विस्तृत सर्वेक्षण की तिथि होगी ।

(xv) इस पुनर्वास व पुनर्व्यवस्थापन नीति के अंग्रेजी व हिन्दी संस्करणों में किसी प्राविधान में विसंगति कीस्थिति में नीति का अंग्रेजी संस्करण मान्य होगा ।

5. परियोजना अधिकार

उपरोक्त विधिक ढांचे एवं नीति विश्लेषण के अनुरूप इस पुनर्वास नीति में विभिन्न परियोजना घटकों के लिए भूमि अर्जन के प्रकार एवं पुनर्व्यवस्थापन प्रभावों के आधार पर पृथक- पृथक परियोजना अधिकार रेखांकित किये गये हैं । परियोजना अधिकारों हेतु आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में परिभाषित "प्रभावित परिवार" इकाई होगी । प्रत्येक परियोजना घटक के लिए पृथक परियोजना अधिकार ढांचा निम्नवत है ।

939 भाग 1 ]

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5.1 बांध एवं जलाशय घटक हेतु अधिकार ढांचा

बांध एवं जलाशय घटक में सभी प्रभावित व्यक्तियों की भूमि की हानि होगी एवं कुछ प्रभावित व्यक्तियों का भौतिक विस्थापन होगा । भूमि हानि के आंकलन के आधार पर भूमिधारकों की अधिकांश संख्या के पास एक एकड़ से कम की भू- धृति है । इस घटक के अन्तर्गत प्रस्तावित भूमि अर्जन के फलस्वरूप लगभग 25 प्रतिशत भूमिधारक भौतिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं । आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में सिंचाई परियोजनाओं की स्थिति में प्रभावित भूमिहीन/ सीमान्त कृषक को यथासंभव भूमि के बदले भूमि दिया जाना प्राविधानित है । परियोजना के उपरोक्त संदर्भ में सीमित भूमि उपलब्धता एवं भौतिक विस्थापन की मात्रा के दृष्टिगत प्रभावित व्यक्तियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है एवं विशिष्ट अधिकार प्रस्तावित किये गये हैं । इस परियोजना हेतु पुनर्वास नीति को तैयार करते समय सभी हितधारकों एवं प्रभावित समुदायों से परामर्श कर उनके विचारों का समावेश किया गया है । विभिन्न श्रेणियों का विस्तृत विवरण निम्नं तालिका 2 में प्रस्तुत किया गया है ।

तालिका 2: परियोजना प्रभावित व्यक्तियों का वर्गीकरण एवं पात्रता

श्रेणी

श्रेणी का विवरण

श्रेणी 1 डूब क्षेत्र में निवासरत भूमि धारक परिवार जो भौतिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं

अथवा परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो गंभीर रुप से प्रभावित हैं ।

श्रेणी 2 भूमि धारक परिवार जो भूमि खो रहे हैं परन्तु डूब क्षेत्र अथवा परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत नही हैं ।

अथवा परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो आंशिक रुप से प्रभावित हैं ।

श्रेणी 3 गैर भूमि धारक परिवार जो डूब क्षेत्र में निवासरत हैं तथा भौतिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं । अथवा

श्रेणी 1 के परिवार का व्यस्क व्यक्ति जो किसी भी लिंग का हो एवं आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में पृथक प्रभावित परिवार परिभाषित है ।

श्रेणी 4 गैर भूमि धारक परिवार जैसे कृषि एवं व्यवसायिक किरायेदार, बंटाईदार एवं पट्टेधारक जो प्रभावित हैं परन्तु विस्थापित नहीं हैं ।

(2) बांध एवं जलाशय घटक के अन्तर्गत श्रेणी 1 के भूमि धारक परिवारों को एक एकड़ वैकल्पिक विस्थापन विकसित कृषि भूमि व 200 वर्ग मीटर विकसित आवासीय भूखण्ड के अतिरिक्त भूमि एवं अन्य परिसम्पत्तियों का प्रतिकर दिया जाना प्रस्तावित है । श्रेणी 2 के अन्य प्रभावित भूमि धारक परिवारों को पुनर्वास स्थल की भूमि के मूल्य की दर से एक एकड़ भूमि का नकद प्रतिकर उपलब्ध कराया जाएगा । श्रेणी 3 से सम्बन्धित अवशेष परिवारों को पुनर्वास स्थल पर 50 वर्ग मीटर के आवसीय भूखण्ड सहित पी० एम०ए० वाई० विशिष्टियों के अनुरूप निर्मित आवास अथवा आवास निर्माण हेतु समतुल्य धनराशि देय होगी । गैर भूमि धारक प्रभावित परिवार जैसे कृषिक किरायेदार, बंटाईदार/ पट्टाधारक को एक पृथक श्रेणी 4 में वर्गीकृत किया गया है जो पात्रता ढांचा के अनुरुप विभिन्न प्रतिकर एवं सहायता हेतु पात्र होंगे । बांध एवं जलाशय घटक के लिए प्रस्तावित पात्रता ढांचा निम्न तालिका 3 में प्रस्तुत है ।

तालिका 3 : बांध व जलाशय घटक हेतु अधिकार ढांचा

क्र०स० प्रभावित श्रेणीयां

अधिकारों का विवरण

अधिकारों की ईकाई

अ

प्रतिकर

1 श्रेणी 1 के परिवार की भूमि की हानि

(क) डूब क्षेत्र में निवासरत भूमि धारक परिवार तथा भौतिक रूप से विस्थापित (ख) परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो गंभीर रुप से प्रभावित हो।

पूर्ण पुनर्वास स्थल पर विकसित एक एकड़ कृषि भूमि। अर्जित भूमि का प्रतिकर जो आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की अनुसूची । के अनुरूप आंकलित होगा का भुगतान किया जाएगा ।

अवयस्क भू- खातेदारों को भूमि का प्रतिकर फिक्सड डिपोजिट के रूप 940

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

में देय होगा जिसका भुगतान व्यस्क हो जाने के समय हो सकेगा।

पुनर्वास स्थल पर 200 वर्ग मीटर काविकसित आवासीय भूखण्ड

यदि प्रभावित परिवार द्वारा भूमि के बदले भूमि का विकल्प नही लिया जाता है तो रु० 19.50 लाख की एकमुश्त धनराशि एवं अर्जित की जाने चाली भूमि का प्रतिकर जो आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की अनुसूची । के अनुरूप आंकलित होगा का भुगतान किया जाएगा ।

पंजीकरण शुल्क/ स्टॉम्प ड्यूटी परियोजना द्वारा देय होगी ।

प्रभावित कुटुम्बों को आवंटित मकान के लिए भूमि सभी विल्लंगमों से मुक्त होगी ।

आवंटित भूमि या मकान प्रभावित कुटुंब की पत्नी और पति दोनों के संयुक्त नाम में हो सकेगा ।

आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के अनुरुप एस०आई०ए ० की अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से कलेक्टर द्वारा अधिनिर्णय की तिथि तक 12 प्रतिशत ब्याज ।

2 श्रेणी 2 के परिवार की भूमि की हानि

रु० 19.50 लाख की एकमुश्त राशि एवं अर्जित की जाने वाली भूमि का प्रतिकर जो आरएफसीटीएलए‌आरआर

(क) भूमि धारक परिवार जो परियोजना के लिए अपनी भूमि खो रहा हो परन्तु डूब क्षेत्र अथवा परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत ना हो ।

का अधिनियम की अनुसूची । के अनुरूप आंकलित होगा भुगतान किया जाएगा ।

(ख) परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में निवासरत भूमि धारक परिवार जो जो आंशिक रुप से प्रभावित हो।

अवयस्क भू-खातेदारों को भूमि का प्रतिकर फिक्सड डिपोजिट के रूप में देय होगा जिसका भुगतान व्यस्क हो जाने के समय हो सकेगा।

पंजीकरण शुल्क/ स्टॉम्प ड्यूटी परियोजना द्वारा देय होगी ।

आरएफसीटीएलएआरआर

अधिनियम के अनुरुप एस ०आई० ए० की अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से कलेक्टर द्वारा अधिनिर्णय की तिथि तक 12 प्रतिशत ब्याज ।

3 श्रेणी 3 के परिवार हेतु विशेष पुर्नस्थापन प्राविधान

(क) डूब क्षेत्र में निवासरत गैर भूमि धारक परिवार तथा भौतिक रूप से विस्थापित

पी०एम ०ए ० वाई० विशिष्टियों के अनुरूप 50 वर्गमीटर आकार के भूखण्ड पर निर्मित आवास । या

(ख) श्रेणी । से सम्बन्धित किसी भी लिंग का व्यस्क व्यक्ति तथा यदि प्रभावित परिवार द्वारा

' इस राशि की गणना उन ग्रामों मे समान भूमि के वर्तमान अधिकतम सर्किल रेट के आधार पर की गई है, जिनमें पुर्नव्यवस्थापन का प्रस्ताव किया गया है। प्रतिकर के भुगतान के समय उपलब्ध वर्तमान मूल्य सूचकांक/ अद्यतन सर्किल दरें लागू होगें ।

941 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में

पृथक प्रभावित परिवार परिभाषित।

भूखण्ड और/ या आवास का विकल्प नही लिया जाता है तो एकमुश्त रु0 2.95 लाख के नकद प्रतिकर का भुगतान उक्त विकल्प के लिए किया जाएगा ।

पंजीकरण शुल्क/ स्टॉम्प ड्यूटी परियोजना द्वारा देय होगी ।

प्रभावित कुटुम्बों को आवंटित मकान के लिए भूमि सभी विल्लंगमों से मुक्त होगी।

आवंटित भूमि या मकान प्रभावित कुटुंब की पत्नी और पति दोनों के संयुक्त नाम में हो सकेगा ।

4

आरएफसीटीएलएआरआर

निजी परिसम्पत्ति की हानि

आवासीय / व्यवसायिक तथा अन्य परिसम्पत्ति की हानि वाले संबधित श्रेणी के भूमि धारक प्रभावित परिवार

अधिनियम की धारा 29 के अनुसार बिना मूल्य ह्रास के निर्धारित परिसम्पत्ति का बाजार मूल्य ।

परिसम्पत्ति के बाजार मूल्य पर 100 प्रतिशत तोषण राशि । प्रभावित परिवार जिनको दुकान

की हानि हो रही हो को दुकान की हानि के बदले पुनर्वास स्थल पर 15 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्रफल की निर्मित दुकान का अधिकार होगा।

खोई हुई संरचना तथा अन्य परिसम्पत्ति की सामग्री रक्षित करने का अधिकार ।

बिना मूल्य हास के संरचनाओं का बाजार मूल्य

आवासीय / व्यवसायिक तथा अन्य परिसम्पत्ति की हानि वाले श्रेणी 3 के गैर शीर्षक (अतिक्रमणकारी/अवैध प्रभावित परिवार धारक निवासी)

खोई हुई संरचना तथा अन्य परिसम्पत्ति की सामग्री रक्षित करने का अधिकार ।

2

प्रभावित परिवार जिनको दुकान की हानि हो रही हो को दुकान की हानि के बदले पुनर्वास स्थल पर 15 वर्ग मीटर कुर्सी क्षेत्रफल की निर्मित दुकान का अधिकार होगा ।

5 वृक्षों तथा फसलों की हानि

वृक्षों तथा फसलों की हानि वाले राज्य

प्रभावित परिवार

उद्यान/वन/कृषि विभाग द्वार निर्धारित वृक्षों एवं खडी फसलों के बाजार मूल्य का भुगतान किया जाएगा ।

वृक्षों/ फसलों के बाजार मूल्य पर 100 प्रतिशत तोषण राशि ।

ब पुनर्वास तथा पुनर्व्यवस्थापन सहायता

1

पशुबाडा की हानि पशुबाडा खोने वाले प्रभावित परिवार रू 0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकबारगी पुनर्निमाण सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्य तन हो।

2 इस राशि की गणना उन ग्रामों में जिनमें पुर्नव्यवस्थापन का प्रस्ताव किया गया है में 50 वर्ग मीटर भूमि के अधिकतम सर्किल रेट तथा प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत घरों के र्निमाण के लिये दिये गये दिशा र्निदेशों के आधार पर की गई है । प्रतिकर भुगतान के समय उपलब्ध वर्तमान मूल्य सूचकांक / अद्यतन सर्किल दरें लागू होगें ।

942

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

2

[भाग 1

व्यवसायिक संरचना खोने वाले

प्रभावित परिवार

कीहानि व्यवसायिक संरचना

3 कारीगरों, छोटे व्यापारियों और कतिपय अन्य को अनुदान

रू0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकबारगी पुनर्निमाण सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्य तन हो ।

रू0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकमुश्त सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

प्रभावित परिवारों में सम्मिलित कारीगर , छोटे व्यापारी या स्वरोजगार में लगे व्यक्ति या प्रभावित परिवार जिनके स्वामित्व में प्रभावित क्षेत्र में गैर कृषि भूमि अथवा व्यवसायिक, ओद्यौगिक या संस्थागत संरचना हो जिसे भूमि अर्जन के कारण प्रभावित क्षेत्र से अनैच्छिक रूप से विस्थापित कर दिया गया हो ।

वार्षिकी

4

प्रभावित परिवार

5

निर्वाह विस्थापित परिवार जीवन अनुदान

6

विस्थापित परिवार परिवहन अनुदान

7

प्रभावित परिवार पुनर्व्यवस्थापन भत्ता

8

प्रभावित परिवार मछली पकडने का अधिकार

प्रति प्रभावित परिवार रु० पाँच लाख जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो।

या

20 वर्षों के लिए न्यूनतम दो हजार प्रतिमाह की वार्षिकी नीतियां जो कृषिक श्रमिकों के लिए वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

एक वर्ष के लिए रू० तीन हजार प्रतिमाह की राशि अथवा रु० 36000. 00(छत्तीस हजार रू ०) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

कुटम्ब, भवन व घरेलू सामग्री और पशुओं के स्थानान्तरण के लिए रु० 50000.00(पचास हजार रू०) की राशि जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

रु० 50000.00(पचास हजार रू०) की राशि जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

व्यवसायीकरण हेतु शीर्षक धारक प्रभावित परिवारों में से अधिकतम एक इच्छुक अभ्यर्थी को मत्स्य पालन विभाग उत्तराखण्ड द्वारा मत्स्य पालन / शिकार का समूचित प्रशिक्षण दिया जाऐगा उपरोक्त उल्लेखित इच्छुक अभ्यर्थियों का स्वयं सहायता समूह/सहकारी समिति/ महिला मंगल दल का गठन किया जाऐगा । इन समूहों के लिए जलाशय में 2 बीट आरक्षित की जायेगें । इन समूहों/ समिति को उत्तराखण्ड राज्य जल प्रबन्धन एवं संग्रहण नियामावली 2013 में निम्नलिखित छूट दी जायेगीः-

1. नियम संख्या 10-(6) निविदा में भाग लेने के लिए धरोहर राशि में 50 प्रतिशत छूट और स्थिति भाग 1]

943

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

9

प्रभावित परिवार व्यवसायिक विकास का अधिकार

10 वन पंचायत भूमि उपयोग की हानि

(हैसियत) प्रमाण से छूट।

2. नियम संख्या 11- (3) स्टांप शुक्ल में 50 प्रतिशत की छूट ।

3. नियम संख्या 11-(4) सम्पूर्ण 10 प्रतिशत अग्रिम राशि जमा करने में छूट और सफल निविदादाता को अनुबन्ध की तिथि से तीन माह के भीतर निविदा के आरक्षित मूल्य का 25 प्रतिशत जमा करने में छूट होगी ।

4. प्रभावित परिवारों के इच्छुक उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में उत्तराखण्ड राज्य जल प्रबन्धन, मत्स्य पालन एवं संग्रहण नियम 2013 के प्राविधानों के अंनुसार आरक्षित बीट नई निविदाओं के माध्यम से प्रदान की जायेगी ।

यदि परियोजना के अन्तर्गत कोई भी व्यवसायिक/ पर्यटन सम्बन्धित गतिविधियां संचालित होती हैं तो प्रभावित परिवारों को उनमें वरीयता दी जाएगी ।

परियोजना प्रभावित राजस्व ग्रामों में

निवासरत प्रभावित परिवार

11

आघात सहायता योग्य

300 दिनों की न्यूनतम कृषि मजदूरी । प्रभावित परिवार

रु0 40000.00 (चालीस हजार रू० ) की एकमुश्त सहायता ।

गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के प्रभावित परिवार (बी०पी०एल० कार्ड धारक अथवा राजस्व प्राधिकारियों द्वारा प्रमाणित ), भूमि हीन परिवार , वयोवृद्ध मुखिया परिवार ( एकमात्र आय अर्जक), महिला मुखिया परिवार (प्राथमिक आय अर्जक) , अनाथ, अनुसूचित जाति/ जन जाति परिवार तथा भूमि के गैर शीर्षक धारक परिवार (पट्टाधारक/किरायेदार / बटाईदार ए वं अन्य गैर शीर्षक धारक) ।

12 कृषि पट्टा/किरायेदारी कीहानि

जमा किराया या असमाप्त पट्टा राशि (यह पट्टादाता / स्वामी के प्रतिकर से घटायी जाएगी)

प्रभावित क्षेत्र में भूमि अर्जन से तीन वर्ष पूर्व से कार्यरत श्रेणी 4 के पंजीकृत धारक/ किरायेदार । कृषि पट्टा

13

रु0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकमुश्त सहायता ।

एक वर्ष के लिए रू ० तीन हजार प्रतिमाह का जीवन निर्वहन भत्ता अथवा रु० 36000.00(छत्तीस हजार रू०) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्य तन हो ।

पंजीकृत

आवासीय/ व्यवसायिक

पट्टा धारक/ किरायेदार ।

आवासीय व्यवसायिक पट्टा/किरायेदारी कीहानि

जमा किराया या असमाप्त पट्टा राशि (यह पट्टादाता/ स्वामी के प्रतिकर से घटायी जाएगी)

रु0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकमुश्त सहायता।

944

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

एक वर्ष के लिए रू० तीन हजार प्रतिमाह का जीवन निर्वहन भत्ता अथवा रु० 36000.00 (छत्तीस हजार रू० ) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो।

कुटम्ब, भवन व घरेलू सामग्री और पशुओं के स्थानान्तरण के लिए रु० 50000.00 (पचास हजार रू०) की राशि

जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्य तन हो ।

14 आजीविका की हानि

इच्छुक प्रभावित व्यक्तियों को यू०के ०एस०डी०एम० से कौशल विकास प्रशिक्षण ।

आजिविका खो रहे प्रत्येक प्रभावित परिवार का एक सदस्य (कृषि भूमि धारक / व्यवसाय स्वामी/ कृषि श्रमिक)

स सामुदायिक संपत्ति संसाधन

1 सामुदायिक संपत्ति की हानि

(क) समुदाय के स्वामित्व/ प्रबन्धित

संपत्ति की हानि

(ख)

लोकोपयोगी

सेवाओं

/अवसंरचना की हानि

अर्जित सामुदायिक भूमि का प्रतिकर जो आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की अनुसूची । के अनुसार आंकलित होगा । सामुदायिक संपत्ति संसाधन का पुनर्निमाण अथवा आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के अनुसार प्रतिकर ।

(3) प्रस्तावित जलाशय क्षेत्र के भीतर धार्मिक महत्व की एक बडी संरचना प्रभावित है जिसे हैड़ाखान मंदिर के नाम से जाना जाता है और जिसे पुनर्स्थापित किए जाने की आवश्यकता है । परियोजना द्वारा मंदिर ट्रस्ट से परामर्श के उपरान्त मंदिर के सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विशेष उपबंध के रुप में उपरोक्त अधिकार ढांचे के अनुरुप प्रतिकर के अतिरिक्त मंदिर के समीप 2.5 एकड भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है ।

5.2 पुनर्वास स्थल पर अवसंरचनात्मक सुविधाएं

परियोजना विस्थापित जनसंख्या के पुनव्यर्वस्थापन के लिए आरएफसीटीएलएआरआर की अनुसूची III के प्राविधानों के अनुसार निम्नलिखित अवसंरचनात्मक सुविधाएं एवं न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं जो उपलब्ध नहीं हैं परियोजना द्वारा उपलब्ध करायी जाएंगी जिससे नई पुनर्वास कालोनी में पुनर्व्यवस्थापित जनसंख्या अपने लिए उचित मानकानुसार सामुदायिक जीवन स्तर सुरक्षित कर विस्थापन में होने वाले आघात को न्यूनतम करने का प्रयास कर सकें ।

तालिका 4: पुनर्वास स्थल पर अवसंरचनात्मक सुविधाओं का विवरण

कं०सं०

अवसंरचनात्मक सुविधाओं का विवरण

ईकाई/ विशिष्टि

1

मानकानुसार ।

पुनर्व्यवस्थापित ग्रामों के भीतर सडक और पक्की सडक मार्ग से जुडा बारहमासी सडक ।

2

मानकानुसार ।

वास्तविक पुनर्व्यवस्थापन के पहले उचित निकासी और स्वच्छता योजनाओं का निष्पादन ।

3

मानकानुसार ।

प्रत्येक परिवार के लिए सरकार द्वारा निर्धारित मानकानुसार सुरक्षित पेयजल के स्रोत ।

4

मानकानुसार ।

पशुओं हेतु पेयजल का प्राविधान ।

5 जाति समुदायों और उनकी प्रथाओं के आधार पर कब्रिस्तान या शवदाह गृह ।

पुनर्वासित परिवारों द्वारा मेजबान ग्रामों मैं विद्यमान सुविधा का प्रयोग किया जाएगा । परियोजना द्वारा सुनिश्ििचत किया जाएगा कि मेजबान समुदायों द्वारा उक्त पर आपत्ति नही की जायेगी । आपत्ति होने पर भाग 1 ]

945

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

6 राज्य के मानकों के अनुसार चारागाह ।

7 उचित मूल्य दुकान ।

8 विद्युत संयोजन तथा सार्वजनिक प्रकाश ।

9

परियोजना द्वारा आवश्यक प्राविधान किया जाएगा।

मानकानुसार ।

मानकानुसार ।

मानकानुसार ।

1

शिशु और माता को पूरक पोषणीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाली आंगनबाडी ।

10

1

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के उपबंधों के अनुसार विद्यालय ।

11 दो किलोमीटर क्षेत्र के भीतर उप स्वास्थय केन्द्र ।

12 बच्चों के लिए कीडा क्षेत्र /पार्क ।

13 प्रत्येक सौ कुटुम्बों के लिए एक सामुदायिक केन्द्र ।

14

मानकानुसार ।

1

2

4

प्रभावित क्षेत्र की संख्या और उनके आयाम से संगत प्रत्येक पचास कुटुंबों के लिए पूजा स्थल और सामुदायिक सभा के लिए चौपाल / वृक्ष चौतरा ।

15 मानकों के अनुसार पशुपालन सेवा केन्द्र ।

16 कृषि भूमि हेतु मूलभूत सिंचाई सुविधाएं ।

5.3 सिंचाई नहर घटक हेतु अधिकार ढांचा मानकानुसार ।

मानकानुसार ।

निम्न तालिका 5 में प्रस्तुत किया गया है । सिंचाई नहर घटक के अन्तर्गत होने वाले प्रभाव रेखागत होंगे जिसके लिए प्रतिकर एवं अन्य सहायता आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के अनुसार दिया जाएगा एवं उक्तानुसार निम्न अधिकार ढांचा तैयार कर

तालिका 5: सिंचाई नहर घटक हेतु अधिकार ढांचा

क्र०स० प्रभावित श्रेणीयां

अधिकारों का विवरण

अधिकारों की ईकाई

अ

प्रतिकर

1 भूमि की हानि भूमि धारक परिवार

2 निजी परिसम्पत्ति कीहानि

अर्जित भूमि का प्रतिकर जो आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की अनुसूची 1 के अनुरूप आंकलित होगा का भुगतान किया जाएगा ।

पंजीकरण शुल्क/ स्टॉम्प ड्यूटी परियोजना द्वारा देय होगी ।

आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के अनुरुप एस ०आई०ए० की अधिसूचना प्रकाशित होने की तिथि से कलेक्टर द्वारा अधिनिर्णय की तिथि तक 12 प्रतिशत ब्याज ।

अवयस्क भू- खातेदारों को भूमि का प्रतिकर फिक्सड डिपोजिट के रूप में देय होगा जिसका भुगतान व्यस्क हो जाने के समय हो सकेगा ।

आवासीय / व्यवसायिक तथा अन्य परिसम्पत्ति की हानि वाले भूमि धारक प्रभावित परिवार आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की धारा 29 के अनुसार बिना मूल्य ह्रास के निर्धारित परिसम्पत्ति का बाजार मूल्य ।

परिसम्पत्ति के बाजार मूल्य पर 100 प्रतिशत तोषण राशि ।

खोई हुई संरचना तथा अन्य परिसम्पत्ति की सामग्री रक्षित करने का अधिकार ।

946

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई ० (अग्रहायण 26. 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

आवासीय / व्यवसायिक, तथा अन्य परिसम्पत्ति की हानि वाले तीनों श्रेणीयों के गैर भूमि धारक (अतिक्रमणकारी /अवैध प्रभावित परिवार निवासी)

3

वृक्षों तथा फसलों की हानि

बिना मूल्य ह्रास के संरचनाओं का बाजार मूल्य खोई हुई संरचना तथा अन्य परिसम्पत्ति की सामग्री रक्षित करने का अधिकार ।

वृक्षों तथा फसलों की हानि वाले

प्रभावित परिवार

ब पुनर्वास तथा पुनर्व्यवस्थापन सहायता 1 पशुबाडा की हानि

राज्य उद्यान / वन / कृषि विभाग द्वार निर्धारित वृक्षों एवं खडी फसलों के बाजार मूल्य का भुगतान किया जाएगा ।

वृक्षों / फसलों के बाजार मूल्य पर 100 प्रतिशत तोषण राशि ।

पशुबाडा खोने वाले प्रभावित परिवार

2

व्यवसायिक संरचना कीहानि

रू0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकबारगी पुनर्निमाण सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो।

व्यवसायिक संरचना खोने वाले

प्रभावित परिवार

3

कारीगरों, छोटे व्यापारियों और कतिपय अन्य को अनुदान

रू0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकबारगी पुनर्निमाण सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

रू0 25000.00 (पच्चीस हजार रू० ) की एकमुश्त सहायता जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

प्रभावित परिवारों में सम्मिलित कारीगर, छोटे. व्यापारी या स्वरोजगार में लगे व्यक्ति या प्रभावित परिवार जिनके स्वामित्व में प्रभावित क्षेत्र में गैर कृषि भूमि अथवा व्यवसायिक, ओद्यौगिक या संस्थागत संरचना हो जिसे भूमि अर्जन के कारण प्रभावित क्षेत्र से अनैच्छिक रूप से विस्थापित कर दिया गया हो ।

वार्षिकी

4

प्रभावित परिवार

5

विस्थापित परिवार जीवन निर्वाह अनुदान

6

विस्थापित परिवार परिवहन अनुदान

7

प्रभावित परिवार पुनर्व्यवस्थापन भत्ता

8

आघात योग्य

सहायता

प्रति प्रभावित परिवार रु० पाँच लाख जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो। या

20 वर्षों के लिए न्यूनतम दो हजार प्रतिमाह की वार्षिकी नीतियां जो कृषिक श्रमिकों के लिए वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

एक वर्ष के लिए रू ० तीन हजार प्रतिमाह की राशि अथवा रु0 36000. 00(छत्तीस हजार रू०) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

कुटम्ब, भवन व घरेलू सामग्री और पशुओं के स्थानान्तरण के लिए रु० 50000.00 (पचास हजार रू०) की राशि जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

रु0 50000.00 (पचास हजार रू० ) की राशि जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

रु० 40000.00 (चालीस हजार रू०) की एकमुश्त सहायता ।

गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के प्रभावित परिवार (बी०पी० एल ० कार्ड धारक अथवा राजस्व प्राधिकारियों द्वारा प्रमाणित), भाग 1 ]

947

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भूमिहीन परिवार, वयोवृद्ध मुखिया परिवार (एकमात्र आय अर्जक) , महिला मुखिया परिवार (प्राथमिक आय अर्जक), अनाथ, अनुसूचित जाति/ जन जाति परिवार तथा भूमि के गैर शीर्षक धारक परिवार (पट्टाधारक/किरायेदार/ बटाईदार एवं अन्य गैर शीर्षक धारक) ।

9 कृषि पट्टा/ किरायेदारी कीहानि

प्रभावित क्षेत्र में भूमि अर्जन से तीन वर्ष पूर्व से कार्यरत पंजीकृत कृषि पंट्टा धारक/किरायेदार ।

10

जमा किराया या असमाप्त पट्टा राशि (यह पट्टादाता/ स्वामी के प्रतिकर से घटायी जाएगी) रु0 25000.00 (पच्चीस हजार रू०)

की एकमुश्त सहायता। एक वर्ष के लिए रू० तीन हजार । प्रतिमाह का जीवन निर्वहन भत्ता अथवा रु० 36000.00(छत्तीस हजार रू० ) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो।

जमा किराया या असमाप्त पट्टा राशि

आवासीय /व्यवसायिक

पंजीकृत

पट्टा धारक/किरायेदार ।

आवासीय व्यवसायिक पट्टा/किरायेदारी कीहानि

11 आजीविका हानि

(यह पट्टादाता/ स्वामी के प्रतिकर से घटायी जाएगी) रु० 25000.00 (पच्चीस हजार रू०) की एकमुश्त सहायता । एक वर्ष के लिए रू ० तीन हजार प्रतिमाह का जीवन निर्वहन भत्ता अथवा रु० 36000.00 (छत्तीस हजार रू० ) का एकमुश्त अनुदान जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो।

कुटम्ब, भवन व घरेलू सामग्री और पशुओं के स्थानान्तरण के लिए रु० 50000.00 (पचास हजार रू०) की राशि जो वर्तमान मूल्य सूचकांक से अद्यतन हो ।

इच्छुक प्रभावित व्यक्तियों को यू०के०एस ०डी०एम० से कौशल विकास प्रशिक्षण ।

की आजिविका खो रहे प्रत्येक प्रभावित परिवार का एक सदस्य (कृषि भूमि धारक/ व्यवसाय स्वामी/ कृषि श्रमिक) स सामुदायिक संपत्ति संसाधन 1 सामुदायिक संपत्ति कीहानि

अर्जित सामुदायिक भूमि का प्रतिकर

(क) समुदाय के स्वामित्व / प्रबन्धित संपत्ति की हानि (ख) लोकोपयोगी सेवाओं / अवसंरचना की हानि

5.4

जो आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की अनुसूची । के अनुसार आंकलित होगा । सामुदायिक संपत्ति संसाधन का पुनर्निमाण अथवा आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के अनुसार प्रतिकर ।

विद्युत पारेषण लाइन घटक हेतु अधिकार ढांचा

उपरोक्तानुसार पूर्व चर्चित विधिक ढांचे के अनुसार इस घटक हेतु स्थायी भूमि अर्जन नहीं होगा एवं केवल उपयोगकर्ता अधिकार का प्रयोग किया जायेगा । उपयोगकर्ता अधिकार के लिए फसलों के लिए प्रतिकर एवं उपयोगिताओं की पुर्नस्थापना/ प्रतिकर निम्न तालिका 6 में प्रस्तुत अधिकार ढांचे के अनुरुप होगा ।

948

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

तालिका 6: विद्युत पारेषण लाइन घटक हेतु अधिकार ढांचा क्र०स०

प्रभावित श्रेणियां

[भाग 1

अधिकारों का विवरण

अधिकारों की ईकाई

अ

प्रतिकर

1

प्रभावित परिवार ओवरहेड लाइन हेतु वृक्षों तथा फसलों की हानि

2

प्रभावित परिवार

लाइन हेतु भूमिगत वृक्षों /फसलों तथा अन्य स्थावार परिसम्पत्तियों की हानि

3 लोक उपयोगिताओं की हानि

आर ०ओ ० डब्लू० हेतु कृषि विभाग द्वारा निर्धारित फसलों का प्रतिकर ।

आर०ओ ० डब्लू० के भीतर आ रहे वृक्षों का उद्य ान/ वन विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रतिकर ।

आर०ओ ०डब्लू० हेतु कृषि विभाग द्वारा निर्धारित फसलों का प्रतिकर ।

आर०ओ ० डब्लू० के भीतर आ रहे वृक्षों का उद्य ान/ वन विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रतिकर ।

स्थावार परिसम्पत्तियों का प्रतिकर / पुनर्निमाण ।

लोकउपयोगिताओं का प्रतिकर /पुनर्निमाण ।

लोक उपयोगिता स्वामी

5.5 विस्थापन से प्रभावित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के सम्बन्ध में भूमि अर्जन , पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम , 2013 की धारा 41 एवं 42 के निम्न प्राविधान लागू होंगे-

41. अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष उपबन्धः-

(1) भूमि का कोई भी अर्जन, यथा सम्भव, अनुसूचित क्षेत्रों में नहीं किया जायेगा ।

(2) यदि ऐसा अर्जन होता है तो ऐसा केवल साध्य अन्तिम अवलम्ब के रूप में किया जायेगा।

(3) अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भूमि के अर्जन या अन्यसंक्रामण की दशा में , संविधान की 5वीं अनुसूची के अधीन के अनुसूचित क्षेत्रों में, यथास्थिति, सम्बन्धित ग्रामसभा या पंचायतों या स्वशासी जिला परिषदों की पूर्व सहमति ऐसे क्षेत्रों में भूमि अर्जन के, जिसके अन्तर्गत अत्यावश्यकता की दशा में अर्जन भी है , सभी मामलों में इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम के अधीन कोई अधिसूचना जारी करने से पूर्वसमुचित स्तर पर अभिप्राप्त की जायेगीः

परन्तु पंचायतों और स्वशासी जिला परिषदों की सहमति उन मामलों में अभिप्राप्त की जायेगी, जहां ग्राम सभा अस्तित्व में नहीं है या उसका गठन नहीं किया गया है ।

(4) किसी अक्षेपक निकाय की ओर से भूमि के अर्जन को अंतर्वलित करने वाली ऐसी किसी परियोजना की दशा में, जिसमें अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के कुटुम्बों का अस्वैच्छिक विस्थापन अंतर्वलित है, एक विकास परियोजना ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाय , उनमें भूमि सम्बन्धी उन अधिकारों का, जो शोध्य है किन्तु जिनका परिनिर्धारण नहीं किया गया है, परिनिर्धारण करने तथा भूमि अर्जन सहित एक विशेष अभियान चलाकर अन्यसंक्रामित भूमि पर अनुसूचति जनजातियों और साथ ही अनुसूचित जातियों के हकों को बहाल करने सम्बन्धी प्रक्रिया के ब्यौरे अधिकथित करते हुए तैयार की जायेगी ।

(5) विकास योजना में गैरा वन्य भूमि पर पांच वर्ष की अवधि के भीतर वैकल्पिक ईंधन, चारे और गैरकाष्ट वन्य उपज संसाधनों का विकास करने सम्बन्धी एक ऐसा कार्यक्रम भी होगा जो जनजातीय समुदायों और साथ ही अनुसूचित जातियों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो ।

(6) अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों से भूमि का अर्जन किये जाने की दशा में, शोध्य प्रतिकर की कम से कम एक तिहाई रकम का संदाय प्रभावितों कुटुम्बों को प्रारम्भ में ही पहली किश्त के रूप में किया जायेगा और शेष रकम का संदाय भूमि का कब्जा ग्रहण किये जाने के पश्चात किया जायेगा ।

949 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26,1944 शक सम्वत्)

(7) ऐसे पुनर्वासित क्षेत्रों को, जिनमें प्रधानतया अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोग निवास करते है, उस सीमा तक, जो समुचित सरकार द्वारा विनिश्चित की जाय, सामुदायिक और सामाजिक समूहन के लिए निःशुल्क भूमि मिलेगी ।

(8) जनजातीय लोगों की भूमि या अनुसूचित जातियों के सदस्यों की भूमियों का तत्समय प्रवृत्त विधियों और विनियमों की अवहेलना करके किया गया कोई अन्य संक्रामण अकृत और शून्य माना जायेगा और ऐसी भूमियों के अर्जन की दशा में, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन सम्बन्धी फायदे मूल जनजातीय भू- स्वामियों अथवा अनुसूचित जाति से संबद्ध भू- स्वामियों को उपलब्ध करवाए जाएंगे ।

(9) प्रभावी अनुसूचित जनजातियों, अन्य पारंपरिक वन्य निवासियों और अनुसूचित जातियों को, जिनको प्रभावित क्षेत्र में नदी या तालाब या बांध में मछली पकड़ने के अधिकार प्राप्त हैं, सिंचाई या जल-विद्युत परियोजनाओं के जलाशय क्षेत्र में मछली पकड़ने के अधिकार दिए जाएंगे ।

(10) जहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रभावित कुटुंबों को जिले के बाहर पुनर्वासित किया जाता है, वहां उन्हें पचास हजार रूपये की एक बारगी हकदारी के साथ अतिरिक्त पच्चीस प्रतिशत पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन फायदे संदत्त किये जाएंगे जिन्हें वे धनीय रूप में पाने के हकदार होंगे ।

42. आरक्षण और अन्य फायदे ।

(1) वे सभी फायदे, जिनके अन्तर्गत अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित क्षेत्रों में आरक्षण संबंधी उपलब्ध फायदे भी हैं, पुनर्व्यवस्थापन क्षेत्र में भी मिलते रहेंगे ।

(2) उन सभी अनुसूचित जनजातियों से संबद्ध प्रभावित कुटुंबों को, जो संविधान की पांचवी अनुसूची में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों में या छठी अनुसूची में विनिर्दिष्ट जनजाति क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं, उन क्षेत्रों के बाहर पुनर्वासित किया जाता है , तो उनके द्वारा इस अधिनियम के अधीन उपयोग किये जा रहे सभी कानूनी रक्षोपाय , हकदारियां और फायदे उन क्षेत्रों में भी, जहां उन्हें पुनर्वासित किया जाता है , इस बात पर विचार किये बिना कि पुनर्व्यवस्थापित क्षेत्र उक्त पांचवी अनुसूची में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्र या उक्त छठी अनुसूची में निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्र , है या नहीं, प्रदान किए जाते रहेंगे ।

(3) यहां अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के उपबंधों के अधीन सामुदायिक अधिकारों का परिनिर्धारण किया जा चुका है, वहां उनको धनीय राशि में परिमाणित किया जाएगा और ऐसे संबद्ध व्यष्टिक को, जिसको भूमि के अर्जन के कारण विस्थापित किया गया है, ऐसे सामुदायिक अधिकारों में उसके हिस्से के अनुपात में उसका संदाय किया जायेगा ।

6.लोक परामर्श एवं सहभागिता

(1) सरकार द्वारा परियोजना गठन एवं मूल्यांकन के विभिन्न चरणों के समय परियोजना प्रभावित व्यक्तियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ परमार्श किया जाता रहा है । औपचारिक जन सुनवाई प्रक्रिया के माध्यम से प्रभावित व्यक्तियों के बीच एस०आई ०ए ० रिपोर्ट को प्रसारित किया गया है । अक्टूबर 2020 में आयुक्त कुमाऊँ मण्डल की अध्यक्षता में परियोजना समन्वय समिति (पी० सी० सी०) का गठन किया गया है जिसमें राज्य सरकार , सिंचाई विभाग उत्तराखण्ड एवं जिला प्रशासन का प्रतिनिधित्व है । पी०सी०सी० की बाद की बैठकों में सभी छः प्रभावित ग्रामों से दो- दो प्रतिनिधियों को भी औपचारिक रुप में सम्मिलित किया गया है ।

(2) यू०पी०डी० सी०सी० तथा संबधित पी०आई० यू० विभिन्न हितधारकों के साथ निरन्तर परामर्श करेंगे । प्रत्येक पी०आई ०यू० प्रभावित व्यक्तियों के साथ समन्वय के लिए औपचारिक रुप से एक अधिकारी नामित कर अधिकारी का नाम परियोजना क्षेत्र में प्रकट करेगा । सभी पी०आई० यू० में उपलब्ध परियोजना से संबंधित जानकारी प्रभावित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध होगी । परियोजना से संबंधित सभी अद्यतन सूचनाएं परियोजना की वेबसाइट http://www.jamranidam.com पर अपलोड की जाएगी ।

950

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

(3) उक्तानुसार सुझाई गई परामर्श प्रक्रिया के अतिरिक्त आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम में निर्धारित औपचारिक परमार्श तंत्र प्रक्रिया भूमि अर्जन प्रक्रिया के दौरान कार्यात्मक होगी ।

7. क्रियान्वयन व्यवस्था

(1) यू० पी०डी०सी ० सी ० पी० आई ० यू० जमरानी तथा पी०आई०ए ० यू० जे० वी०एन०एल ० के लिए नोडल एजेन्सी होगी । यू० पी०डी० सी०सी० परियोजना के समग्र समन्वय हेतु परियोजना प्रबन्धन इकाई (पी ०एम० यू०) के रुप में भी कार्य करेगी । यू०पी०डी०सी०सी० में अन्य कियान्वयन इकाईयों यथा यू०पी०जे०एन०एल० व यू० पी०सी० एल० के प्रतिनिधि होंगे । भूमि अर्जन एवं पुनर्वासन तथा पुनर्व्यवस्थापन कार्यों में सभी पी०आई०यू० से समन्वय हेतु यू० पी०डी० सी० सी० स्तर पर एक सामाजिक इकाई जिसमें एक केन्द्रित व्यक्ति हो , पर विचार किया जा सकता है ।

(2) परियोजना निष्पादन के लिए दो पृथक- पृथक पी०आई०यू० / पी०आई ० ए० स्थापित की गई हैं पी०एम०यू० को रिपोर्ट करेंगी । परियोजना के जलाशय एवं सिंचाई घटक के नियोजन तथा कार्यान्वयन के लिए यू०पी०डी०सी०सी० के अधीन पी०आई० यू०जे ० की स्थापना की गई है तथा जल विद्युत घटक हेतु पी०आई० ए० यू०जे ० वी०एन०एल० की स्थापना की गई है । यू०जे०वी०एन०एल० के अधीन पी०आई०ए० में ट्रांसमिशन लाइन घटक के लिए एक अलग इकाई होगी जिसमें यू० पी०सी० एल० के अधिकारी सम्मिलित होंगे । परियोजना के अधीन भूमि अर्जन तथा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन गतिविधियों के क्रियान्वयन में सहायता हेतु पी०आई० यू०जे ० के पास आवश्यक सहायकों सहित एक पूर्णकालिक सामाजिक सुरक्षा विशेषज्ञ होगा । अन्य पी० आई० ए ० भूमि अर्जन तथा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन गतिविधियों के लिए पूर्णकालिक सामाजिक विशेषज्ञों या समन्वय अधिकारियों को नामित करेंगी ।

(3) आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की आवश्यकताओं के अनुसार सरकार द्वारा विभिन्न संस्थानों की स्थापना की जाएगी। अधिनियम की धारा 43 (1 ) के अनुसार अपर जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल को पुनर्वासन एवं पुनव्यर्वस्थापन हेतु प्रशासक नियुक्त किया गया है । आयुक्त कुमाऊँ को अधिनियम की धारा 44(1 ) के अनुसार पुनर्वासन एवं पुनव्यर्वस्थापन आयुक्त नियुक्त किया गया है ।

8. अनुश्रवण और मूल्यांकन

(1) आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की आवश्यकताओं के अनुरुप पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन योजनाओं की समीक्षा व निगरानी हेतु एक राज्य निगरानी समिति पूर्व में ही स्थापित की जा चुकी है ।

(2) परियोजना अपने विभिन्न घटकों के तहत तैयार की जाने वाले पुनर्वासन और पुनव्यर्वस्थापन योजना की निरंतर निगरानी और अनुश्रवण सुनिश्चित करेगी । आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की धारा 45(1 ) के अनुरुप पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन योजना के क्रियान्वयन की निगरानी एवं समीक्षा के लिए कलेक्टर की अध्य क्षता में पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति का गठन किया जाएगा ।

(3) सभी पी०आई० यू० तिमाही पुनर्वास कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण प्रगति रिपोर्ट को समीक्षा और रिकॉर्ड .हेतु यू० पी०डी० सी० सी० को प्रस्तुत करेंगे ।

9. उच्च स्तरीय समिति के निर्णय अधिकार ( DECISION POWERS OF HIGH POWER COMMITTEE) जमरानी बांध-बहुउद्देशीय परियोजना की पुनर्वास नीति लागू होने के उपरान्त नीति की व्यावहारिक कठिनाईयों या प्रभावित परिवारों से सम्बन्धित किसी अन्य बिन्दु के सम्बन्ध में निर्णय , जो कि इस पुनर्वास नीति से आच्छादित नहीं हो रहे हैं, पर निर्णय लेने का अधिकार शासन द्वारा जमरानी बांध- बहुउ‌द्देशीय परियोजना हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति (HIGH POWERED COMMITTEE) को होगा ।

आज्ञा से,

हरिचन्द्र सेमवाल ,

सचिव ।

951 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26,1944 शक सम्वत्)

Resettlement and Rehabilitation Policy For Jamrani Dam Multipurpose Project, 2022

Uttarakhand Project Development & Construction Corporation Ltd. (UPDCCL) Government of Uttarakhand (GoUK) 952

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

TABLE OF CONTENTS

Abbreviations
Definition
1. Project Background
2. Land Acquisition Requirement & Scope of Resettlement Impact ... 955-956 3. Objectives of the Policy
Legal Framework. 956 4.1 TheRight to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013
4.2 TheScheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers ( Recognition of Forest Rights) Act, 2006
4.3 TheVan Panchayat Act , 1931 . 957 4.4 Legal Framework for Transmission Lines

4.5 Policy Principles for JDMP .

-959-960

Project Entitlements.

960

5.1 EntitlementMatrix for Dam & Reservoir Component .. 960-964

5.2 Infrastructural facilities at Resettlement Site .. 964-965

5.3 Entitlement Matrix for Irrigation Canal Component . .965-967

967-968 5.4 EntitlementMatrix for Transmission Line Component ....

6. Public Consultation and Participation ..... 969

969 7. Implementation Arrangement ..

969

Monitoring & Evaluation .

भाग 1 ]        उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)     953
     Abbreviations
      GoUK       Government of Uttarakhand
      JDMP      Jamrani Dam Multipurpose Project
      Km         Kilometer
      Kv         Kilo Volt
      m          Meter
     MCM         Million Cubic Meter
      MU         Million Units
      MW        MegaWatt
      PIA       Project Implementing Agency
      PCC       Project Coordination Committee
      PIU       Project Implementation Unit
     PIUJ       Project Implementation Unit Jamrani
      PMAY      Pradhan Mantri Awas Yojna
     PMU        Project Management Unit
      R& R      Rehabilitation and Resettlement
      RFCTLARR   Right to Fair Compensation and Transparency in Land
                Acquisition , Rehabilitation and Resettlement Act
     RL          Reduced Level
     ROW        Right ofWay
      SIA       Social Impact Assessment
      SC/ST      Scheduled Caste / Scheduled Tribe
     UID        Uttarakhand Irrigation Department
      UJVNL     Uttarakhand Jal Vidut Nigam Limited
     UKSDM      Uttarakhand Skill Development Mission
     UPCL       Uttarakhand Power Corporation Limited
     UPDCC      Uttarakhand Project Development and Construction Corporation

954

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26,1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

Definition

Term

Definition for the purpose of this policy

Category

affected

I Title holder family residing in submergence area and physically displaced.

family

Or Title holder family residing in the project affected revenue villages and having severe impact.

Category II

affected

Titleholder family losing land but not residing in submergence area or project affected revenue villages .

Or

family

Title holder family residing in project affected revenue villages and having partial impact.

Category III

affected

Non - title holder family residing in the submergence area and physically displaced .

Or

family

Adult of either gender belonging to Category I and defined as separate affected family as per RFCTLARR Act

Category IV

affected

Non-title holder family, affected but not physically displaced such as agricultural and commercial tenants , leaseholders and sharecroppers .

family

Vulnerable

Family

Affected family belonging to below poverty line ( BPL card holders or certified by revenue authorities ) , landless family, family headed by elderly ( sole income earner ) , family headed by women (primary income earner ) , orphans , physically handicapped , SC/ST family and those without legal title to land (leaseholders/tenants /sharecroppers and other non-title holders) .

Cut-off date The cut- off date for eligibility for compensation and assistance in case of titleholders will be the date of notification under Section 11 of RFCTLARR Act . For non- titleholders the cut -off date for eligibility shall be the date of project census survey or detailed measurement survey for respective components .

Submergence area

Submergence area will be the land in upstream of dam up - to theelevation of top of dam which is at RL 765.60 m .

Severe Impact Family residing in the project affected revenue villages and losing 50 % or more land to the project .

Partial Imapct Family residing in the project affected revenue villages and losing less than 50 % land to the project .

Other definitions

Other terms used in this R & R policy shall be as defined in Chapter- 1 , Section - 3 of RFCTLARR Act . 2013 (https://dolr.gov.in) 955 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

1 . Project Background

(1) Jamrani Dam Multipurpose Project ( JDMP) envisages the construction of a dam across the river Gola, a tributary of river Ramganga in District Nainital , State of Uttarakhand . Being a multipurpose project, the main components are as below.

Reservoir: This component comprises of construction of a 150.60 m high concrete gravity dam to be constructed on Gola river at a location called Jamrani located about 10 Km upstream of Gola Barrage at Kathgodam .

Irrigation Canal Construction & Rehabilitation: This component includes renovation /remodeling of 168.62 Km long irrigation canals and construction of 21.00 Km long new canals along with construction of 278.24 Km long water courses .

Drinking Water Supply: It comprises of providing 42.70 MCM drinking water to Haldwani town for a projected population of year 2051 .

Hydropower Generation (14 MW) and Transmission: The component comprises generation of63.4 MU hydropower at toe of dam and evacuation of the same by 9 Km long 33 kV transmission lines to substation located at Ranibagh . Overhead double circuit double pole transmission lines shall be laid from powerhouse to Ranibagh substation. From Ranibagh substation, 7.0 Km long underground 33 kV transmission cable shall be laid till Kathgodam grid .

(2) Irrigation Department Uttarakhand has been entrusted with the responsibility of execution of the project . In year 2010 Uttarakhand Project Development & Construction Corporation Ltd. was createdby the Govt . of Uttarakhand (GoUK) to provide construction and consultancy services in the field of Civil Engineering . UPDCC will act as Nodal Agency for the project and coordinate with other departments responsible for various components of the project.

(3) Project Implementation Unit Jamrani ( PIUJ ) has been established under UPDCC for planning and implementation of Reservoir and Irrigation component of the project. For implementation of hydropower component under the project separate PIA under UJVNL has been formed. The PIA under UJVNL will have a separate unit for transmission line component involving officials from UPCL.

(4) As per the project design , acquisition of private land will be required for various components, which will be taken up by concerned PIU /PIA including implementation of Resettlement & Rehabilitation for respective components . The GoUK has formulated this specific R& R Policy for land acquisition and resettlement management to be implemented under the proposed JDMP . The High- Powered Committee (HPC ) is constituted for the project for taking administrative and financial decisions shall have the authority for any modifications or amendments aimed at betterment of policy provisions for affected persons .

2. Land Acquisition Requirement & Scope of Resettlement

Impact

(1) During the project design appropriate engineering options have been considered to minimize the land requirement for the project . Attempts are made to maximize the utilization of available government land. However as per preliminary assessment, in addition to government land owned by various departments some private land is also required. The summary of land acquisition requirement and scope of resettlement impact for various components are presented inTable 1.0.

956

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26,1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

Table1: Land Acquisition Requirement Scope of Resettlement Impact

SI No Component

Type of Land Acquisition Requirement and Scope of Resettlement Impact

1 Construction of Dam & Reservoir

Reserve Forest Land owned by forest department will be transferred to Irrigation Department . No resettlement impact due to acquisition of forest land.

Van Panchayat ( Protected/ Village Forest) Land owned by forest department will be transferred to Irrigation Department resulting loss of forest rights of villagers .

Revenue land owned by State Government will be transferred to Irrigation Department may impact non- titleholders if any.

Permanent acquisition of private land. Loss of agricultural land, loss of homestead land, loss of livelihood , loss of shelter and other assets resulting displacement of people and loss of livelihood.

Permanent acquisition of community land. Loss of community resources including land and other assets .

2

Reserve Forest Land owned by forest department will be transferred to Irrigation Department . No resettlement impact due to acquisition of forest land .

Irrigation Canal construction & Rehabilitation

Van Panchayat ( Protected/ Village Forest) Land ownedby forest department will be transferred to Irrigation Department resulting loss of forest rights of villagers .

Revenue land owned by State Government will be transferred to Irrigation Department may impact non- titleholders ifany.

Permanent acquisition of private land . Loss of agricultural land, loss of homestead land, loss of livelihood , loss of shelter and other assets .

3 Hydropower Generation and Transmission

The power house will be constructed within the forest land for reservoir component and no additional land will be required.

For transmission line, no permanent or temporary land acquisition is required . Only user right will be utilized . It may have temporary impact on land and crops.

(2)Based on the type of land requirement and resettlement impact specific entitlements are proposed under this policy as per the available legal framework.

3. Objectives of the Policy

This policy has been formulated to guide the land acquisition process and determination of various entitlements including resettlement and rehabilitation of project affected persons under various components proposed under the project. The policy tries to address the issue of relocation of displaced persons and livelihood restoration during the process of rehabilitation in consultation with the affected persons . Efforts are made to minimize the hardships of resettlement process by providing adequate compensation and assistance through proactive action from the executing agency . Separate resettlement scheme for each component will be prepared based on the policy provisions outlined here. This policy ensures that the affected families improve, or at least regain their previous standard of living, earning capacity, production levels and restore their socio- cultural status.

4. Legal Framework

Thispolicy has been formulated primarily on the basis of "The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition , Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 " and related guidelines adopted by Go UK.. Main features of applicable legal and policy framework are outlined below:

957 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

4.1 The Right to Fair Compensation and Transparency In Land Acquisition , Rehabilitation and Resettlement Act , 2013 .

(i) The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and ResettlementAct, 2013 has been effective from January 1 , 2014. TheGo UK has adopted the Central Act and formulated and notified related rules in 2015.

(ii) The aims and objectives of the Act include : ( i) to ensure , in consultation with institutions of local self-government and Gram Sabha's established under the Constitution of India, a humane , participative, informed and transparent process for land acquisition for industrialization , development of essential infrastructural facilities and urbanization with the least disturbance to the owners of the land and other affected families; ( ii ) provide just and fair compensation to the affected families whose land has been acquired or proposed to be acquired or are affected by such acquisition; ( iii ) make adequate provisions for such affected persons for their rehabilitation and resettlement; (iv) ensure that the cumulative outcome of compulsory acquisition should be that affected persons become partners in development leading to an improvement in their post- acquisition social and economic status and for matters connected therewith or incidental thereto .

(iii) Section 107 & 108 of the Act empowers the state government to enact any policy to enhance or addto the entitlements enumerated under the principal act which confers higher compensation than payable under thisAct or make provisions for rehabilitation and resettlement which is more beneficial than provided under thisAct . This policy confirms the above provision of the RFCTLARR Act in addition to proposed minimum compensationbased on a multiple of market value as per Schedule I and R &R entitlements as per Schedule II oftheAct.

4.2 The Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers ( Recognition of Forest Rights) Act, 2006

(i) This Act recognizes and vests forest rights and occupation on forest land in forest dwellings to scheduled tribes and other traditional forest dwellers who have been residing in such forests for generations but whose rights could not be recorded . The Act provides for a framework for recording the forest rights so vested and the nature of evidence required for such recognition and vesting in respect of forest land.

( II) The Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Act, 2006 also known as the Forest Rights Act recognizes the' rights' of the forest dwellers (mainly scheduled tribes ) to access and use the forest and its resources by providing legal sanctity to that rights and also vests these forest-dependent communities with the responsibility to sustainably use, conserve and manage these forest resources and contribute towards strengthening the conservation of these vital natural resources .

4.3 TheVan Panchayat Act , 1931.

( i) Panchayat in the state of Uttarakhand is a unique system of Community Forest Management started in 1921 , where people are allowed not only to use the minor forest products but manage it in a sustainable way through institution called " Van Panchayat " at Village Panchayat level . It was formally legalized through the Van Panchayat Act,,1931 .

(ii) The major objective of Van Panchayat is to rejuvenate and manage patches of protected forests for local use; it also prevents neighboring villages from intruding into this zone , once formally demarcated as a Van Panchayat Forest . Protection of forest from fire , illicit felling and preventing damage to trees due to lopping along with grazing is also the responsibility of Van Panchayats . Responsibilities of VPs are laid out in the law to ensure that village forest land not to be diverted in any other utilization of forest produce to the best advantage of village community.

(iii) A Van Panchayat is constituted with a committee of 9 members including the head called " Surpanch" . Its functioning is administeredby the Sub District Magistrate of revenue department. The management of community forest is generally carried out by the van panchayat through watching the forest on rotational basis or a guard is appointed and salary is paidby community contribution. Van panchayat also grants permission for cutting grass, grazing and collection of fallen wood and charge fees with government permission. Rights of extraction of resin, NTFPs and trees are also given to Van Panchayats on recommendation of government. It also has right to award punishment or imposition of fine for violating the rules . Besides, each Van Panchayat makes its own rules and regulation as per needs and wisdom.

958

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

4.4 Legal Framework for Transmission Lines

In the absence of specific legal or policy framework with regard to land acquisition/compensation for 33 kV distribution lines , it is proposed to lay distribution lines for power component of the project under the ambit ofElectricity Act, 2003. The provisions stipulated in section 67-68 of the Electricity Act, 2003 read with section 10 & 16 of the Indian Telegraph Act , 1885 governs the compensation. As per the provision of Indian Telegraph Act, 1885 Section 10 b UPCL is not required to acquire any land . However, compensation for all damages are paid to the individual land owner as per the provision of Section - 10 d of Indian Telegraph Act, 1885. The provisions in the Electricity Act, 2003 and Indian Telegraph Act, 1885 regarding compensation for laying of transmission lines are as follows:

TheElectricity Act, 2003 , Part-VIII , Section 67 & 68

Section 67( 3-5) :

(3) A licensee shall, in exercise of any of the powers conferred by or under this section and the rules made thereunder, cause as little damage , detriment and inconvenience as maybe , and shall make full compensation for any damage , detriment or inconvenience caused by him or by anyone employed by him.

(4) Where any difference or dispute [including amount of compensation under sub-section (3)] arises under this section , the matter shall be determined by the Appropriate Commission .

(5) The Appropriate Commission , while determining any difference or dispute arising under this section in addition to any compensation under sub - section (3) , may impose a penalty not exceeding the amount of compensation payable under that sub -section .

Section 68 ( 5 & 6) :

(5) Where any tree standing or lying near an overhead line or where any structure or other objectwhich has been placed or has fallen near an overhead line subsequentto the placing of such line, interrupts or interferes with, or is likely to interrupt or interfere with , the conveyance or transmission of electricity or to interrupt or interfere with, the conveyance or transmission of electricity or the accessibility of any works , an Executive Magistrate or authority specified by the Appropriate Government may, on the application of the licensee , cause the tree , structure or object to be removed or otherwise dealt with as he or it thinks fit .

(6) When disposing of an application under sub- section ( 5) , an Executive Magistrate or authority specified under that sub -section shall, in the case of any tree in existence before the placing of the overhead line, award to the person interested in the tree such compensation as he thinks reasonable, and such person may recover the same from the licensee. Explanation. For purposes of this section , the expression " tree " shall be deemed to include anyshrub, hedge, jungle growth or other plant.

TheIndian Telegraph Act, 1885, Part - III , Section 10

Section10- The telegraph authority may, from time to time , place and maintain a telegraph line under, over, along , or across , and posts in or upon any immovable property, Providedthat

a) the telegraph authority shall not exercise the powers conferred by this section except for the purposes of a telegraph established or maintained by the [Central Government) , or to be so established or maintained;

b) the [Central Government] shall not acquire any right other than that of user only in the property under, over, along, across in or upon which the telegraph authority places any telegraph line or post; and

c) except as hereinafter provided , the telegraph authority shall not exercise those powers in respect of any property vested in or under the control or management of any local authority, without the permission of that authority; and

d) in the exercise of the powers conferred by this section , the telegraph authority shalldo as little damage as possible, and , when it has exercised those powers in respect of any property other than that referred to in clause (c) , shall pay full compensation to all persons interested for any damage sustained by them by reason of the exercise of those powers .

Section16 of the Indian Telegraph Act , 1885 which stipulates as under:

Section16. Exercise of powers conferred by section 10, and disputes as to compensation , in

case of property other than that of a local authority:

(1 ) If the exercise of the powers mentioned in Section 10 in respect of property referred to in clause(d) of that section is resisted or obstructed, the District Magistrate may, in his discretion , order that the telegraph authority shall be permitted to exercise them .

(2) If, after the making of an order under sub section (1) , any person resists the exercise of those powers, or, having control over the property, does not give all facilities for this being exercised, he shall be deemed to have committed an offence under section 188 of the Indian Penal Code (45of1860).

भाग 1 ]

959 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

4.5 PolicyPrinciples for JDMP

The specific policy principles and procedures to be followed under the JDMP with regards to compensation and R&R entitlements will be the following:

(i) Screen the project carly on to identify past, present, and future involuntary resettlement impacts and risks . Determine the scope of resettlement planning through a survey and/or census of displaced persons, specifically related to resettlement impacts and risks .

(ii) Carry out meaningful consultations with affected persons , host communities , and concerned nongovernment organizations . Inform all displaced persons of their entitlements and resettlement options . Ensure their participation in planning , implementation, and monitoring and evaluation of resettlement programs . Pay particular attention to the needs of vulnerable groups , especially those below the poverty line, the landless, the elderly , women and children, and Indigenous Peoples , and those without legal title to land , and ensure their participation in consultations , Support the social and cultural institutions of displaced persons and their host population . Where involuntary resettlement impacts and risks are highly complex and sensitive , compensation and resettlement decisions should be preceded by a social preparation phase.

(iii) Improve, or at least restore , the livelihoods of all displaced and affected persons through ; (a) land-based resettlement strategies when affected livelihoods are land- based where possible or cash compensation at replacement cost for land when the loss of land does not undermine livelihoods , (b ) prompt replacement of assets with access to assets of equal or higher value , (c) prompt compensation at full replacement cost for assets that cannot be restored, and (d) additional revenues and services through benefit- sharing schemes where possible.

(iv) Provideproject affected persons with needed assistance , including the following:

(a) if there is relocation , secured tenure to relocation land, better housing at resettlement sites with comparable access to employment and production opportunities, integration of resettled persons economically and socially into their host communities , and extension of project benefits to host communities; (b) transitional support and development assistance , such as land development, credit facilities , training; and (c) civic infrastructure and community services , as required.

(v) Give special attention to vulnerable groups which include affected family belonging to below poverty line (BPL card holders or certified by revenue authorities ) , landless family, family headed by elderly ( sole income carner) , family headed by women (primary income earner) , orphans , physically handicapped, SC/ST family and those without legal title to land (leaseholders/tenants/ sharecroppers and other non -title holders ) by providing additional assistance for their upliftment to at least national minimum standards .

(vi) Develop procedures in a transparent, consistent, and equitable manner if land acquisition is through negotiated settlement to ensure that those people who enter into negotiated settlements will maintain the same or better income and livelihood status .

Ensure that displaced persons without titles to land or any recognizable legal rights to land are eligible for resettlement assistance and compensation for loss of non - land assets . (vii)

(viii) Prepare R&R scheme elaborating on the entitlements of affected persons , the income and livelihood restoration strategy, institutional arrangements , monitoring and reporting framework, budget, and time- bound implementation schedule.

(ix) Disclose draft and final R&R scheme , including documentation of the consultation process in a timely manner , in an accessible place and a form and language(s) understandable to displaced persons and other stakeholders .

(x) Conceive and execute involuntary resettlement as part of a development project or program. Include the full costs of resettlement in the presentation of project's costs and benefits . For a project with significant involuntary resettlement impacts , consider implementing the involuntary resettlement component ofthe project as a stand-alone operation .

(xi) 7 Pay compensation and provide other resettlement entitlements before displacement. Implement the R&R scheme under close supervision throughout project implementation.

(xii) Monitor and assess resettlement outcomes , their impacts on the standard of living of affected persons anddisclosure of monitoring reports .

960.

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

(xiii ) No permanent land acquisition will be applied for transmission line . Transmission line alignment will completely avoid impact to any kind of structure/buildings . Construction of lines shall follow existing roads ( wherever existing) and other places . Construction shall be planned during the off-crop season and in case of unavoidable impacts the losses will be compensated. Assessment of compensation for loss of crop and trees will be done by the UPCL with the help from revenue department and horticulture/forest department as appropriate . Provide compensationprior to construction of transmission lines for temporary impacts .

(xiv) The cut- off date for eligibility for compensation and assistance in case of titleholders will be the date of notification under Section 11 of RFCTLARR Act . For non-titleholders the cut- off date for eligibility shall be the date of project census survey or detailed measurement survey for respective components .

(xv) In case of discrepancies in any provision in English and Hindi versions of this R& R Policy the English version shall apply.

5. Project Entitlements

On the basis of above legal framework and policy analysis this R& R policy has outlined different project entitlements keeping in view the type of land acquisition and resettlement impacts for different components ofthe project. The unit of entitlement under this policy will be the " affected family" as defined in RFCTLARR Act . Separate entitlement matrix for each component is presented below.

5.1 Entitlement Matrix for Dam & Reservoir Component

(i) The Dam & Reservoir component will cause loss of land for all affected persons including physical displacement of some of them . Based on the assessment of land loss , majority of landholders have a landholding of less than 1 acre . Approximately 25 percent landholders are being physically displaced due to the proposed land acquisition under this component . The RFCTLARR prescribes land for land loss in case of irrigation projects to affected landless/marginal farmer as far as possible . In this project context due to limited land availability and keeping in view the quantum of physical displacement the affected persons are categorized into various categories and offered specific entitlements . During preparation of this project specific R&R policy all stakeholders including affected communities are also consulted and their views are incorporated . The detailed description of various categories are presented in Table 2 below.

Table 2: Categorization of Project affected people and eligibility

Description ofCategory

Category

Category I Titleholder family residing in submergence area and physically displaced.

Or Titleholder family residing in the project affected revenue villages and having severe impact .

Category II Title holder family losing land but not residing in submergence area or project affected revenue villages . Or

Titleholder family residing in project affected revenue villages and having partial impact .

Category III Non-title holder family residing in the submergence area and physically displaced. Or

Adult of either gender belonging to Category I and defined as separate affected family as per RFCTLARR Act

Category IV Non- title holder family , affected but not physically displaced such as agricultural and commercial tenants , leaseholders and sharecroppers .

(ii) Under the dam and reservoir component it is proposed that the entitlement for alternative resettlement land of 1 acre developed agricultural land and 200 sqm of developed residential plot will be provided to titleholder families belonging to Category I in addition to the compensation for land and other assets . Other affected titleholder families belonging to Category II willbe provided with cash compensation for 1 acre of land at the value of resettlement site land. Rest of the affected families belonging to Category III will be entitled to 50 sqm residential plot at resettlement site along with constructed house as per PMAY specifications or equivalent cash for house construction . Non - titleholder affected families such as agricultural tenants , sharecroppers , leaseholders are categorized under a separate Category IV who willbeentitled for various compensation and assistance as provided in the entitlement matrix . Proposed entitlement matrix for dam and reservoir component is presented below in Table 3 .

भाग 1 ]

961 उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

Table 3: Entitlement Matrix for Dam & Reservoir Component

Details of Entitlement

SI No

Unitof Entitlement

Category Impact

A Compensation

1

One acre fully developed agricultural land at resettlement site

by Category I family Loss of land

Compensation for acquired land assessed as perScheduleI of RFCTLARR Act will be paid.

a) Titleholder family residing in submergence area and physically displaced.

For landholders who are minors to be given compensation for land in the form of a fixed deposit payable at the time of becoming an adult.

200 sqm developed residential plot at resettlement site .

b) Titleholder family residing inthe project affected revenue villages and experiencing severe impact

Ifland. for land is not opted by the affected family, one time payment of Rs . 19.5 lacs¹ will be paid in addition to compensation for acquired land assessed as per Schedule I of RFCTLARR Act .

Registration charges/Stamp duty will be payable by the project .

The land for house allotted to the affected family shall be free from all encumbrances .

The land or house allotted may be in the joint names of wife and husband of the affected family.

12% interest from date of publication of notification of SIA till the date of award of the Collector as per RFCTLARR Act .

2

Loss of land by Category II family

Onetime payment of Rs . 19.5 lacs will be paid in addition to compensation for acquired land assessed as per Schedule I of RFCTLARR Act .

For landholders who are minors to be given compensation for land in form of a fixed deposit payable at the time of becoming an adult.

a) Titleholder family losing land but not residing in submergence area project affected revenue villages.

Registration charges /Stamp duty will be payable by the project.

12% interest from date of publication of notification of SIA till the date of the award of theCollector as per RFCTLARR Act.

b) Titleholder family residing in project affected revenue villages partial impact . and experiencing

3

A constructed house in a 50 sqm plot area conforming to PMAY specifications .

provision for Category III Special relocation

or If plot and/or house is not opted by any affected family , one time payment of Rs. 2.95 lacs² cash compensation for such option will a) Non - title holder family residing the in submergence area physically and

This amount has been calculated on the basis of current maximum circle rate of similar land in the villages in which resettlement has been proposed.Available current price index/ updated circle rate will apply during the time of payment of compensation.

2This amount has been calculated on the basis of current circle rate for 50 sq . mtr. of land in the villages in which resettlement has been proposed and as per the guidelines for construction of houses under PMAY-G. Available current price index/updated circle rate will apply during the time of payment of compensation.

962

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

displaced. bepaid.

Registration charges/Stamp duty will be payable by the project . (JDMP)

The land for house allotted to the affected family shall be free from all encumbrances .

The land or house allotted may be in the joint names of wife and husband of the affected family.

of b) Adult either gender belonging to Category and defined as 1 separate affected family as per RFCTLARR Act

4

Loss of private Structure

Market value of structures without depreciation to be determined as per Section 29 of RFCTLARR Act.

100 % solatium on market value of the structures.

Affected family losing shops will be entitled for one constructed shop of 15 sqm plinth area at resettlement site in lieu ofcompensation of lost shop.

Titleholder affected family belonging to relevant categories, losing residential /commercial and other structures.

Right to salvage materials from the lost structure and other assets .

Market value of depreciation. structures without

Right to salvage materials from the lost structure and other assets.

Affected family losing shops will be entitled for one constructed shop of 15 sqm plinth area at resettlement site in lieu ofcompensation of lost shop.

Non-titleholder (encroachers /squatters) affected family belonging to category III , losing residential/ commercial and other structures .

5

Loss of trees and crops

Affected family losing trees crops and

Market value of trees and standing crops as determined by State Horticulture/ Forest/ Agriculture department shallbe paid.

100 % solatium on market value of the trees/crops.

B

R&R Assistance

1

Loss of Cattle Shed

Affected family losing cattle shed

2

One time reconstruction assistance ofRs, 25,000/ -( twenty five thousand RS ) with current price index .

Loss commercial structure of

Onetime reconstruction assistance of Rs, 25,000/- ( twenty five thousand RS ) with current price index.

Affectedfamily losing commercial structure

3

One time assistance of Rs , 25,000/- (twenty fivethousand RS) with current price index.

Grant to artisans , small traders and certain others

Affected family of an artisan, small traders or self- employed person or an affected family which owned non- agricultural land commercial , industrial Institutional or or structure in the affected area which has been भाग 1 ]

963 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

involuntarily

displaced from

the area affected

due to land

acquisition

4 Annuity

Affected family Rs5.00( Five) Lakhs per affected family with current price index

Or Annuity Policies of minimum Rs 2000/(two thousand RS) month for 20 years with current priceindex for agricultural laborer's .

5

Displaced family Rs 3000 ( three thousand RS) per month for Subsistence Grant

one year or one time grant of Rs 36000.00 ( thirty six thousand RS ) with current price index.

6

Displaced family

Transportation Grant

Rs 50000.00 ( fifty thousand RS) with current price Index for transportation of families , building and house materials, animals .

7

Affected family Rs 50000.00 ( fifty thousand RS ) with current priceindex

One time resettlement allowance

8 Fishing rights Affected family Forcommercial fishing , a maximum of one interested candidate from the titleholder affected families will be given proper training for fishing /hunting by the Department of Fisheries Uttarakhand . From the above interested candidates a self- help group/ cooperative society/ Mahaila mangal dal will be formed. Two beats in the reservoir will be reserved for these groups/society.

Following relaxation in Uttarakhand State Water Management Fisheries and Collection Rules 2013 will be given to these groups / society

1- Rule no 10-( 6 ) : 50 % relaxation in Earnest money & Status (Hasiyat) certificate will be given for participating in the tender

2-Rule no11-(3 ) : 50% relaxation in stamp duty

3- Rule no 11-(4) : Cent percent Relaxation in depositing 10% advance money. Further relaxation in depositing 25% reserve price of the tender within three months after the date of agreement by the successfulbidder.

4- In case of unavailability, of interested candidates from affected families reserved beats will be awardedby way of fresh tenders as per provisions of Uttarakhand State Water Managerment Fisheries and Collection Rules2013.

9

Affectedfamily

Commercial Development right

Affected family shall be given priority in any commercial / tourism related activities if carried out under the project .

10

300 days of minimum agricultural wage

Loss of Van Panchayat Land use

Affected family residing in project affected revenue villages.

11 Vulnerability assistance

A lumpsum one time assistance amount of Rs40000.00 . (forty thousand RS)

Affectedfamily belongingto below poverty line(BPL card holders and certified by revenue authorities), landless family. family headed byelderly (sole income earner ) , 964

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

familyheaded bywomen (primary income earner) , orphans, physically handicapped, SC/ST family and those without legal title to land (leaseholders/ tenants/ sharecroppers and other non- titleholders) .

12

Rental deposit or unexpired lease amount (this will be deducted from compensation of lessor/ owner)

Loss agricultural lease /tenancy of

A lumpsum one time assistance amount of Rs 25000.00( twenty five thousand RS) .

Subsistence allowance of Rs 3000 ( three thousand RS ) per month for one year or one time grant of Rs 36000 ( thirty six thousand RS) with current price index.

Registered agricultural lease holder/ tenant belonging to category IV and working in the affected area for three years prior to cut-off date for acquisition. land

13

Rental deposit or unexpired lease amount (thiswill be deducted from compensation of lessor/ owner)

Loss of residential / commercial lease/tenancy

A lumpsum one time assistance amount ofRs 25000.00( twenty five thousand RS ) .

Registered residential / Commercial leaseholder/ tenant.

Subsistence allowance of Rs 3000 ( three thousand RS) per month for one year or one time grant of Rs 36000 (thirty six thousand RS) with current price index.

Rs50000.00 ( fifty thousand RS) with current price index for transportation of families , building and house materials, animals .

14 Loss livelihood of

Skill development training from UKSDM to interested affected persons .

One member of each affected family losing livelihood (agricultural land owners/ business owners /agricultural laborer's)

C Community Property Resources

1

of Compensation of acquired community land assessed as per Schedule I of RFCTLARR Act. Loss community property of a)

Reconstruction of property resources or compensation without depreciation as per RFCTLARR Act .

Loss community owned/ managed property

b) Loss of public utilities/ Infrastructure

(iii) Within the proposed reservoir area one large structure of religious significance known as Haidakhan Temple is affected and needs relocation . In consultation with affected temple trust, as a special measure considering the socio - cultural aspects of the temple the project has proposed to allocate 2.5 acre of land atnearby location in addition to compensation for structure as per the above entitlement matrix.

5.2 Infrastructural facilities at Resettlement Site

Forresettlement of project displaced populations , as per provisions of Schedule III of RFCTLARR Act, following infrastructural facilities and basic minimum amenities which are not available shall be भाग 1]

965 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

providedby the Project to ensure that the resettled population in the new colony can secure for themselves a reasonable standard of community life and can attempt to minimize the trauma involved indisplacement.

Table4: Details Infrastructural facilities at Resettlement Site

Details Infrastructural facilities

Unit/Specification

S. N.

1

Asper norms

Roads within the resettled villages and an all- weather road link to the nearest pucca road

2

As per norms

Proper drainage as well as sanitation plans executed before physical resettlement

3

Asper norms

Sources of safe drinking water for each family as per the norms prescribedby the Government

4 Provision of drinking water for cattle

Asper norms

5 Burial or cremation Ground , depending on the caste-communities at the site and their practices.

The resettled families would use the existing facility in host villages. The project authority would ensure that the host community does not object to it. In case of opposition , the project will make the necessary provision .

6 Grazing land as per State norms

As per norms

7 FairPrice Shop

As per norms

8

As per norms

Electricity connections and street light

9

1

Anganwadi's providing child and mother supplemental nutritional services

1

10 School as per the provisions of the Right ofChildren to Free and Compulsory Education Act, 2009

11

Asper norms

Sub-health center within two kilometers range

12

1

Playground/ Park for children

13

2

Onecommunity center for every hundred familles

14

4

Places ofworship and chowpal /tree platform for every fifty families for community assembly , of numbers and dimensions consonant with the affected area

15

Asper norms

Veterinary service center as per norms

16

Asper norms

Basic irrigation facilities to the agricultural land

5.3 EntitlementMatrix for Irrigation Canal Component

Under the irrigation canal the impact willbe of linear nature for which , compensation and other assistance will be provided as per RFCTLARR Act and accordingly the following entitlement matrix has been formulated and presented below in Table 5.

Table 5: Entitlement Matrix for Irrigation Canal Component

Details of Entitlement

Unitof Entitlement

Impact Category

SI No A

Compensation

1

Loss of land Title holder family

Compensation for acquired land assessed as per Schedule I of RFCTLARR Act .

Registration charges/Stamp duty will be payable by the project .

12% interest from date publication of notification of SIA till the date of award of the Collector as per RFCTLARR Act.

Forlandholders who are minors to be given compensation for land in the form of a fixed deposit payable atthe time of becoming an adult .

966

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

2

Title holder affected

Loss of private Structure

[भाग 1

Market value of structures without depreciation to be determined as perSection 29 of RFCTLARR Act.

family losing residential / commercial and other structures .

100 % solatium on market value of the structures.

Right to salvage materials from the lost structure and other assets.

Market value of structures without depreciation.

Right to salvage materials from the lost structure and other assets .

Non-title (Encroachers holder δι Squatters) affected family losing residential / commercial and other structures.

3

Affected family trees and crops. losing

Loss of trees and crops

B

R&R Assistance

1

Loss of Cattle Shed

Market value of trees and standing crops as determined by State Horticulture/ Forest/ Agriculture department shall be paid.

100 % solatium on market value of thetrees/crops .

cattle shed Affected family losing

2

One time reconstruction assistance of Rs, 25,000/- (twenty five thousand RS) with current price index.

Affected family losing commercial structure

of Loss commercial structure

3

to Grant artisans , small traders and certain others

One time reconstruction assistance ofRs , 25,000/- (twenty five thousand RS) with current price index.

Onetime assistance of Rs , 25,000/- (twenty five thousand RS) current price index . with

Affected family of an artisan , small traders or self-employed person or an affected family which owned non- agricultural land or commercial , or structure industrial institutional in the affected area which has been involuntarilydisplaced from the affected area due to land acquisition

4

Annuity

Affectedfamily

5

Displacedfamily Subsistence Grant

6

Displaced family Transportation Grant

7

Affectedfamily One resettlement allowance time

8

Vulnerability assistance

Rs 5.00 ( Five ) Lakhs per affected familywith current price index

Or

Annuity Policies of minimum Rs 2000/(two thousand RS ) month for 20 years with current

priceindex for agricultural laborer's .

per Rs 3000 (three thousand RS) month with current price index for oneyear.

Rs 50000.00 ( fifty thousand RS) with current price index for transportation of families , building and house materials , animals .

Rs50000.00 ( fifty thousand RS) with current price index

Rs A lumpsum one time assistance amount of 40000.00.(forty thousand RS)

Affected family belonging to below poverty line (BPL card holders and certified by revenue authorities), landless family, family headed by elderly ( sole income earner ) , family headed by women भाग 1 ]

967

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

(primary earner) ,orphans , income to physically handicapped, SC/ST familymily and those without legal title land (leaseholders/ tenants/ sharecroppers and other non-title holders).

9

of Loss agricultural lease/tenancy

Rental deposit or unexpired lease amount(this will be deducted from compensation of lessor / owner)

Registered agricultural lease holder/ tenant working in the affected area for three years prior acquisition. to land

10

A lumpsum one time assistance amount of Rs 25000.00 ( twenty five thousand RS) .

Rs Subsistence allowance of 3000( three thousand RS) per month for one year or one time grant of Rs 36000 ( thirty six thousand RS) with current price index.

Registered residential /

Commercial lease

holder/ tenant

Loss of residential / commercial lease/tenancy

11

Loss Livelihood of

Rental deposit or unexpired lease amount ( this will be deducted from compensation of lessor / owner)

A lumpsum one time assistance amount of Rs 25000.00 ( twenty five thousand RS) .

Subsistence allowance of Rs 3000( three thousand RS) per month for one year or one time grant of Rs 36000 ( thirty six thousand RS ) with current price index.

Rs 50000.00 ( fifty thousand RS) with current price index for transportation of families , building and house materials , animals .

Skill development training from UKSDM to interested affected persons.

One member of each affected familylosing livelihood ( agricultural land owners/ business owners /agricultural laborer's)

C

Community Property Resources

1

Loss of community property

Compensation community land assessed as per ScheduleI of RFCTLARR Act . for acquired

a) Loss of community owned/ property managed

b) Loss of public utilities/ infrastructure Reconstruction of property resources or compensation without depreciation as per RFCTLARR Act .

5.4 EntitlementMatrix for Transmission Line Component

Based on the legal framework discussed above only right of way will be utilized and no permanent land acquisition will be involved. For utilization of right of way compensation for crops and compensation/ restoration ofutilities will be as per the entitlement matrix presented below in Table 6.

Table6: Entitlement Matrix for Transmission Line Component

Unitof Entitlement Impact Category

SI No

A Compensation

1

Affected family Loss of Crop & Trees for overhead lines

Detalls ofEntitlement

Crop comp compensation for ROW estimated by officials of Agriculture department.

Compensation for trees falling within ROW estimated by officials of Horticulture/ Forest department .

968

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 1

2

Affectedfamily

Crop compensation for ROW estimatedby officials of Agriculture department.

Loss of Crop/ Trees & other immovable assets underground cable for

Compensation for trees falling within ROW estimated by officials of Horticulture/ Forest department.

Compensation/ Restoration of immovable assets

3

Owner of utility

Loss of Public Utilities

Compensation/ utilities without depreciation . Restoration of

5.5 The following provisions of Section 41 and 42 of the Right to Fair Compensation and Transparency in land acquisition , Rehabilitation and resettlement Act, 2013 will be applicable in respect of members of Scheduled Castes and Scheduled Tribes affected by displacement-

41.Special provisions for Scheduled Castes and Scheduled Tribes.-

(1)As far as possible, no acquisition of land shall be made in the ScheduledAreas.

(2)Where such acquisition does take place it shall be done only as a demonstrable last resort.

(3)Incase ofacquisition or alienation of any land in the Scheduled Areas , the prior consent of the concemed Gram Sabha orthe Panchayats or the autonomous District Councils , at the appropriate level in Scheduled Areas under the Fifth Schedule to the Constitution, as the case may be, shall be obtained, in all cases of land acquisition in such areas, including acquisition in case of urgency, before issue of a notification under this Act, or any other Central Act or a StateAct for the time being in force:

Provided that the consent of the Panchayats or the Autonomous Districts Councils shall be obtained in cases wheretheGram Sabha does not exist or has not been constituted.

(4) In case of a project involving land acquisition on behalf of a Requiring Body which involves involuntary displacement of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes families , a Development Plan shall be prepared , in such form as may be prescribed, laying down the details of procedure for settling land rights due, but not settled and restoring titles of the Scheduled Tribes as well as the Scheduled Castes on the alienated land by undertaking a special drive together with land acquisition .

(5) The Development Plan shall also contain a programme for development of alternate fuel , fodder and non - timber forest produce resources on non- forest lands within a period of five years , sufficient to meet the requirements of tribal communities as well as the Scheduled Castes .

(6) Incaseof land being acquired from members of the Scheduled Castes or the Scheduled Tribes , at least one-third ofthe compensation amount due shall be paid to the affected families initially as first instalment and the rest shall bepaid aftertaking over of the possession of the land.

(7) The resettlement areas predominantly inhabited by the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes shall get land, to such extent as maybe decided by the appropriate Government free of cost for community and social gatherings.

(8)Any alienation of tribal lands or lands belonging to members of the Scheduled Castes in disregard of the laws and regulations for the time being in force shall be treated as null and void , and in the case of acquisition of such lands, the rehabilitation and resettlement benefits shall be made available to the original tribal land owners or land owners belonging to the Scheduled Castes .

(9) The affected Scheduled Tribes , other traditional forest dwellers and the Scheduled Castes having fishing rights in a river or pond or dam in the affected area shall be given fishing rights in the reservoir area of the irrigation or hydel projects.

(10)Where the affected families belonging to the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes are relocated outside ofthe district, then , they shall be paid an additional twenty- five per cent . rehabilitation and resettlement benefits to whichtheyare entitled in monetary terms along with a onetime entitlement of fifty thousand rupees.

42. Reservation and other benefits.-

(1) Allbenefits, including the reservation benefits available to the Scheduled Tribes and the Scheduled Castes in the affected areas shall continue in the resettlement area.

(2) Whenever the affected families belonging to the Scheduled Tribes who are residing in the Scheduled Areas referred to in the Fifth Schedule or the tribal arcas referred to in the Sixth Schedule to the Constitution are relocated outside those areas , than, all the statutory safeguards , entitlements and benefits being enjoyed by them under this Act shallbe extended to the area to which they are resettled regardless of whether the resettlement area is a ScheduledArea referred to in the said Fifth Schedule , or a tribal area referred to in the said Sixth Schedule, or not.

(3) Where the community rights have been settled under the provisions of the Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights ) Act, 2006 (2 of2007 ) , the same shall be quantified in monetary amount and be paid to the individual concerned who has been displaced due to the acquisition of land in proportionwith his share in such community rights .

969 उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

6. Public Consultation and Participation

(1) The government has already engaged in consultation with various stakeholders including project- affected persons since project preparation and various stages of assessment process . The SIA report has been disseminated among the affected persons through a formal public hearing process . A project coordination committee (PCC) headed by Commissioner Kumaun has been formed having representation from State Government, UID , District administration in October 2020. In subsequent meetings of the PCC two representatives from each of the six affected villages have also been included as a part of formal process .

(ii) UPDCC and respective PIU's will be engaged in continuous consultation with various stakeholders. Each PIU will formally designate one person for coordinating with affected persons and details of such officials shall be disclosed in the project area. Project related information will be available at all PIU's and the same will be accessible to the affected persons . All updated information related to the project willbe uploaded in the project website http://www.jamranidam.com.

(iii) In addition to the consultation process suggested above the formal consultative mechanism prescribed in RFCTLARR Act will be functional during land acquisition process .

7 . Implementation Arrangement

(i) UPDCC will be the nodal agency for PIU Jamrani and PIA UJVNL . UPDCC will also function as Project Management Unit (PMU) for overall coordination of the project . The UPDCC will have representatives from other implementing agencies like UJVNL & UPCL . A social unit may be considered at the UPDCC levelwith a focal person to coordinate with all PIUs for land acquisition & R&R matters .

(ii) For project execution two different PIU /PIA have been established which will report to UPDCC . Project Implementation Unit Jamrani (PIUJ) has been established under UPDCC for planning and implementation ofReservoir and Irrigation component of the project while for the hydropower component PIA UJVNL has been formed. The PIA under UJVNL will have a separate unit for transmission line component involving officials from UPCL . The PIUJ will have one full - time Social Safeguard Expert with the required support staff to assist in implementing land acquisition and R&R activities under the project. Other PIUs will have full-time social experts or designated coordinating staff for land acquisition and R&R activities.

(iii) As per requirements of RFCTLARR Act various institutions will be set up by the State government . The Additional District Magistrate Nainital has been appointed as Administrator for R &R as per Section 43 (1 ) of the Act . Commissioner Kumaun has been appointed as Commissioner for R& R as per Section 44 ( 1 ) of theAct.

8. Monitoring & Evaluation

(1) As per the requirement of RFCTLARR Act a state monitoring committee for rehabilitation and resettlement has been already established for review and monitoring the implementation of rehabilitation and resettlement schemes and plans.

(ii) The project will ensure continuous monitoring and supervision of R&R scheme to be prepared under its various components . As per Section 45( 1) of RFCTLARR Act Rehabilitation & Resettlement Committee under the Chairmanship of Collector will be formed tomonitor and review the implementation of R&Rplan.

(iii) The PIUs will submit quarterly resettlement implementation and monitoring progress reports to UPDCC for review and record.

9. Decision Power of High Power Committee

After the implementation of this Policy, it shall be under the authority of High Powered Conumittee (H.P.C.) constituted by government for Jamrani Dam Multipurpose Project , to redress problems related to functioning of this Policy or decide on matters regarding affected families which are not covered under this Policy.

ByOrder, H.C.SEMWAL, Secretary.

पी०एस०यू० (आर०ई०) 51 हिन्दी गजट/ 725-भाग 1-2022 (कम्प्यूटर / रीजियो) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO /DDN /30/2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 1 - क

नियम, कार्य-विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

HIGH COURT OF UTTARAKHAND NAINITAL

NOTIFICATION

November 22, 2022

No. 352/XIV- a -41/Admin.A/ 2016 --Shri Puneet Kumar, 1st Additional Civil Judge ( Jr. Div. ) , Roorkee, District Haridwar is hereby sanctioned earned leave for 15 days w.e.f. 28.10.2022 to 11.11.2022 with permission to prefix 22.10.2022 to 26.10.2022 as Diwali holidays and 27.10.2022 as local holiday and suffix 12.11.2022 as second Saturday and 13.11.2022 as Sunday holiday respectively.

NOTIFICATION

November 22, 2022

No. 353 /XIV- a-32 /Admin.A/ 2016 --Ms . Aishwarya Bora , Civil Judge ( Jr. Div. ) , Roorkee , District Haridwar is hereby sanctioned earned leave for 15 days w.e.f. 28.10.2022 to 11.11.2022 with permission to prefix 22.10.2022 to 26.10.2022 as Diwali holidays and 27.10.2022 as local holiday and suffix 12.11.2022 as second Saturday and 13.11.2022 as Sunday holiday respectively.

NOTIFICATION

November 23, 2022

No. 355 /XIV- 79/Admin.A/2003--Ms . Neelam Ratra , 2nd Additional District & Sessions Judge, Haldwani, District Nainital is hereby sanctioned earned leave for 13 days w.e.f. 07.11.2022 to 19.11.2022 with permission to prefix 06.11.2022 and suffix 20.11.2022 as Sunday holiday respectively.

869-ख [भाग 1 -क 870

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26,1944 शक सम्वत्)

NOTIFICATION

November 25, 2022

No. 357/XIV- a -41/Admin.A/ 2021 -- Shri Devansh Rathore , Civil Judge ( Jr.Div. ) , Kichha , District Udham Singh Nagar is hereby sanctioned earned leave for 20 days w.e.f. 31.10.2022 to 19.11.2022 with permission to prefix 30.10.2022 and suffix 20.11.2022 as Sunday holiday respectively.

NOTIFICATION

November 29, 2022

No. 358/XIV- 32/Admin.A/ 2019-- Shri Vikram , 2nd Additional District Judge, Roorkee , District Haridwar is hereby sanctioned earned leave for 10 days w.e.f. 07.11.2022 to 16.11.2022 with permission to prefix 06.11.2022 as Sunday holiday.

ByOrder of Hon'ble the Administrative Judge, Sd/-

Registrar (Inspection).

उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग

अधिसूचना

01 दिसम्बर , 2022 ई०

संख्याः 01 / प्रशा० / 6 (4) /उविनिआ/2022-23/1077-विद्युत अधिनियम , 2003 की धारा 87 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए एतद्वारा विद्युत सलाहकार समिति का गठन निम्नानुसार किया जाता हैं:-

पदेन अध्यक्ष 1. अध्यक्ष, उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग

पदेन सदस्य 2. सदस्य (विधि) , उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग

पदेन सदस्य 3. सदस्य (तकनीकी) , उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग

पदेन सदस्य 4. प्रमुख सचिव/सचिव, ऊर्जा, उत्तराखण्ड शासन, देहरादून

पदेन सदस्य 5. प्रमुख सचिव/सचिव, खाद्य एवं रसद, उत्तराखण्ड शासन, देहरादून

6.  अध्यक्ष , इन्डस्ट्रीज एसोसियेशन ऑफ उत्तराखण्ड, देहरादून                    सदस्य
7.   अध्यक्ष , सी ०आई ०आई ०, नेपाल हाऊस , राजपुर रोड, देहरादून                 सदस्य

सदस्य 8. अध्यक्ष, कुमाऊँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कामर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज

चैम्बर हाउस , इण्ड० एरिया, बाजपुर रोड़, काशीपुर

वाणिज्य एवं उ‌द्योग

सदस्य 9. प्रेसीडेन्ट, उत्तराखण्ड होटल एसोसियेशन, देहरादून

सदस्य कृषि 10. संयुक्त निदेशक ( नियोजन), कृषि निदेशालय, नंदा की चौकी, प्रेमनगर, देहरादून।

श्रम

सदस्य 11 . 11. उप श्रमायुक्त, गढ़वाल क्षेत्र , 298, हिमगिरी विहार, अजबपुर खुर्द, देहरादून।

सदस्य परिवहन

12 12. चीफ इलैक्टिकल डिस्ट्रीब्यूशन इंजीनियर, उत्तर रेलवे , बडौदा हाऊस, नईदिल्ली।

871 उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 1 -क]

सदस्य शैक्षणिक

13. विभागाध्यक्ष , विद्युत अभियन्त्रण विभाग, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौ‌द्योगिकी विश्ववि‌द्यालय , पन्तनगर।

सदस्य एवं अनुसंधान 14. प्रोफेसर एवं हेण्ड, डिपार्टमेन्टऑफ इकोनोमिक, दून विश्ववि‌द्यालय , देहरादून ।

{

सदस्य 15. श्री एस० पी०सिंह राघव, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि0 , 303 , नर्मदा ब्लॉक, सिद्धार्थ पेराडाईज, पंडितवाड़ी,

उपभोक्ता प्रतिनिधि देहरादून।

सदस्य 16. श्री राजीव कुमार अग्रवाल, 32, इन्दर रोड़ , डालनवाला, देहरादून।

गैर सरकारी

सदस्य 17. श्री प्रकाश रावत, जय नन्दा वैलफेयर सोसाईटी ( NGO) फ्लेट न0-06, लेन नं0-9 , देवऋषि एनक्लेव , देहराखास , देहरादून।

संगठन

विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 88 के प्राविधानान्तर्गत सलाहकार समिति का दायित्व आयोग को निम्न बिन्दुओ पर सलाह देना हैः-

(i) major questions of policy;

( ii) matters relating to quality , continuity and extent of service provided by the licensees;

(iii) compliance by licensees with the conditions and requirements of their licence;

(iv) protection of consumers interest; and

(v) electricity supply and overall standards of performance of utilities .

विद्युत सलाहकार समिति का कार्यकाल इस विज्ञप्ति के जारी होने की तिथि से एक वर्ष होगा , जब तक कि किसी सदस्य की नियुक्ति विनियम में विहित रीति से इससे पूर्व समाप्त न कर दी जाय।

आयोग की आज्ञा से , नीरज सती , सचिव ।

पी० एस०यू० (आर० ई0) 51 हिन्दी गजट /725- भाग 1- क-2022 (कम्प्यूटर /रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30/2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 17 दिसम्बर, 2022 ई ० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 8

सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

सूचना

मैंने निजी कारणों से अपना नाम शेर सिंह से बदलकर शेर सिंह पोखरिया कर लिया है भविष्य में मुझे शेर सिंह पोखरिया पुत्र उत्तम सिंह के नाम से जाना, पहचाना, पुकारा जाए निवासी पूर्णागिरि कॉलोनी अमाऊ खटीमा, उधमसिंहनगर ।

समस्त विधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

शेर सिंह पोखरिया पुत्र उत्तम सिंह निवासी पूर्णागिरि कॉलोनी अमाऊ खटीमा ,

उधमसिंहनगर ।

685- ट [भाग 8 686 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

सूचना

SOME shares of Reliance industries are on the name of my only son Arpit Jain and wife Saroj Jain . Arpit Jain was his pre schooling name and since schooling his name is Akshat Jain S/o Ajit Kumar Jain , R/ o N - 58 , Shivalik Nagar Haridwar. 249403. Aript Jain and Akshat Jain are same person .

समस्त विधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

AjitKumar Jain S/ o S. K.

Jain R/ o N-58, Shivalik

NagarHaridwar. 249403.

सूचना

मैंने निजी कारणों से अपना नाम अवनीत कुमार चौहान से बदलकर अवनीत चौहान कर लिया है । भविष्य में मुझे अवनीत चौहान पुत्र अनिल कुमार चौहान के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाएं ।

समस्तविधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

अवनीत चौहान पुत्र अनिल कुमार चौहान निवासी 722 चाकलान ज्वालापुर , हरिद्वार

उत्तराखण्ड ।

भाग 8 ]

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्) 687

कार्यालय नगर निगम, देहरादून

19 सितम्बर, 2022 ई०

पत्रांक 142(V.A)-

" उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम , 1959 " के प्राविधानों के आलोक में , नगर निगम, देहरादून * अन्तर्गत मांस की दुकानों ( Meat Shops ) को अनापत्ति दिये जाने के क्रम में उपविधि का सृजन:

वैधानिक सन्दर्भः

नगर निगम क्षेत्रांतर्गत मांस विक्रेता प्रतिष्ठान संचालन हेतु दुकान स्वामी द्वारा अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन नगर निगम को प्रस्तुत किये जाते हैं। वर्तमान में नगर निगम द्वारा प्राप्त आवेदनों पर अनापत्ति प्रमाण- पत्र निर्गत किये जाने पर कोई शुल्क लागू नहीं है जबकि उक्त कार्य हेतु कार्मिकों द्वारा निरीक्षण एवं तदुपरांत कार्यालय अभिलेखीकरण का कार्य सम्मिलित होता है। मांस विक्रेता प्रतिष्ठान के संचालन हेतु अनापत्ति प्रमाण- पत्र निर्गत किये जाने हेतु नगर निगम अधिनियम के अर्न्तगत उपविधि का प्राख्यापन व प्रवर्तन प्रस्तावित है ।

वैधानिक प्राविधानः

उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 के अन्तर्गत प्राविधान:-

1. अधिनियम की धारा-541 (XVI - Regulation of Markets , Slaughter- houses , certain trades and acts etc. ) के अन्तर्गत निगम द्वारा मांस विक्रेता प्रतिष्ठानों के संचालन हेतु अनापत्ति प्रमाण- पत्र के क्रम में उपविधि का प्राख्यापन प्रस्तावित है:-

541. किन प्रयोजनों के लिये उपविधियों बनायी जायेंगी (निगम ) समय - समय पर निम्नलिखित विषयों के सम्बन्ध में ऐसी उपविधियाँ बना सकती है, जो इस अधिनियम और नियमों से असंगत न हों,

2. धारा-421 एवं 422(च ) एवं ( छ) , 426, 427 के अर्न्तगत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर निगम द्वारा अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्रदत्त मांस विक्रेता प्रतिष्ठानों का संचालन किया जाना अपेक्षित हैः-

3. धारा -451(3) एवं 423 के अनुरुप मांस विक्रेता स्वामी द्वारा कानूनी प्राविधानों ( अधिनियम/ नियम / उपनियम ) के अनुरुप निर्धारित प्रतिबन्धों/शर्तों का उल्लंघन हेतु सिद्धदोष पाये जाने पर, मांस विक्रेता प्रतिष्ठानों के संचालन हेतु निर्गत अनापात्ति प्रमाण- पत्र को निरस्त किये जाने का प्राविधान है: -

4. ۱۰ धारा -467 के अनुरुप किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्राविधानों (अधिनियम/नियम/ उपनियम/उपविधि/ ' प्रतिबन्ध/ शर्त/नोटिस ) के उल्लंघन हेतु सिद्धदोष पाये जाने पर दण्डित किये जाने का प्राविधान है: - 688

उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

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नगर निगम , देहरादून क्षेत्रान्तर्गत मांस विक्रेता प्रतिष्ठानों के संचालन हेतु अनापत्ति प्रमाण- पत्र दिये जाने के क्रम में प्रस्तावित अंतिम उपविधि

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा मांस विक्रेता 'प्रतिष्ठानों के संचालन हेतु अनापत्ति प्रमाण- पत्र के क्रम में उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा -541 के अन्तर्गत निम्नानुसार उपविधि का प्राख्यापन प्रस्तावित है: -

उपविधि

1. नाम- यह उपविधि" नगर निगम, देहरादून मीट शॉप रेगुलेशन उपविधि, 2022 " कहलाएगी।

2. यह उपविधि सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी।

3. परिभाषायें: -

(क) " नगर निगम " से तात्पर्य नगर निगम, देहरादून व उसकी सीमा से है ।

(ख) "नगर आयुक्त" से तात्पर्य नगर निगम, देहरादून के नगर आयुक्त से है।

( ग) " अधिनियम" का तात्पर्य उ ० प्र ० नगर निगम अधिनियम 1959 से है ।

( घ) "वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी " से तात्पर्य नगर निगम में शासन द्वारा प्रतिनियुक्त पशुचिकित्सा अधिकारी जो कि, केन्द्रीय अधिनियम Indian Veterinary Council Act, 1984 के प्राविधानों के अनुरुप, राज्य पशुचिकित्सा परिषद अन्तर्गत पंजीकृत हो, से है।

(च) " सक्षम अधिकारी " का तात्पर्य , नगर आयुक्त से है ।

(छ) "निरीक्षण अधिकारी " का तात्पर्य नगर आयुक्त द्वारा मांस विक्रेता प्रतिष्ठानों के निरीक्षण हेतु अधिकृत, समय- समय पर उत्तराखण्ड शासन द्वारा पदस्थापित वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी से है ।

(ज) "मीट शॉप" से तात्पर्य उस परिसर से है जहां भोज्य मांस का विक्रय किया जाता हो, से है ।

4. कोई भी व्यक्ति नगर निगम की सीमा के भीतर किसी भी परिसर या परिसर के उपयोग किये जाने वाले भाग जो उसके स्वामित्व में हो, को मांस विक्रय के लिये तब तक उपयोग नहीं करेगा व ना ही किसी अन्य को करने की अनुमति देगा जब तक कि वह नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण- पत्र व FSSAI से अनुज्ञा प्राप्त न कर लें।

अनापत्ति प्रमाण- पत्र हेतु प्रतिबन्ध

(क) नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत मांस विक्रेता प्रतिष्ठान संचालित किये जाने हेतु अथवा भोज्य मांस विक्रय करने हेतु नगर निगम द्वारा अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा। अनापत्ति प्रमाण - पत्र प्राप्त करने से तात्पर्य यह कदापि नहीं होगा कि वह FSSAI से अनुज्ञा/ लाईसेंस प्राप्त किये बिना ही मांस प्रतिष्ठान का संचालन कर सकेगा । ( केन्द्रीय अधिनियम खाद्य संरक्षा एवं मानकीकरण अधिनियम , 2006 ( Food Safety & Standardization Act , 2006) के प्राविधानों के अनुरुप नगर निगम द्वारा जारी अनापत्ति के उपरान्त खाद्य संरक्षा विभाग द्वारा अनुज्ञा दिया जाना प्रावधानित है। )

(ख ) नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत मांस विक्रेता प्रतिष्ठान के संचालन हेतु अथवा भोज्य मांस विक्रय हेतु अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्राप्त किये जाने हेतु आवेदक को नगर निगम के पक्ष में नगर निगम बोर्ड द्वारा निर्धारित आवेदन शुल्क के साथ , प्रारुप-1 के अनुरुप निर्धारित आवेदन पत्र के माध्यम से वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदक द्वारा जमा किया गया आवेदन शुल्क अप्रतिदाय ( non refundable ) होगा।

(ग ) वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी द्वारा , अधिकृत अधिकारी/ अधिकारियों/ दल द्वारा मांस विक्रेता प्रतिष्ठान का स्थलीय निरीक्षण किया जायेगा, जिसके द्वारा प्रारुप -2 पर स्थलीय निरीक्षण उपरांत आख्या प्रस्तुत की जायेगी।

(घ) सक्षम अधिकारी प्रारुप -2 पर प्रस्तुत स्थलीय निरीक्षण आख्या के आलोक में सम्बन्धित मांस विक्रेता प्रतिष्ठान को अनापत्ति प्रमाण - पत्र प्रदत्त किये जाने के क्रम में निर्णय लेगें । अनापत्ति प्रमाण- पत्र दिये जाने हेतु उपयुक्तता की स्थिति में खाद्य संरक्षा एवं मानकीकरण अधिनियम, 2006 के नियमों का पालन न किये जाने पर अनापत्ति प्रमाण- पत्र हेतु प्राप्त आवेदन को निरस्त किया जा सकता है।

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(ङ) मांस विक्रेता स्वामी मांस विक्रेता प्रतिष्ठान हेतु जारी अनापत्ति प्रमाण- पत्र के प्रतिबन्धों/ शर्तों के अनुपालन हेतु बाध्य होगा।

(च) मांस विक्रेता स्वामी को अपनी मांस विक्रेता प्रतिष्ठान के मुख्य दीवार पर अनापत्ति प्रमाण- पत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। निरीक्षण के समय प्रदर्शित न पाये जाने पर रू0 500/- का अर्थदण्ड आरोपित किया जाएगा।

( छ) नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत समय -समय पर मांस विक्रेता प्रतिष्ठान का स्थलीय निरीक्षण किया जा सकेगा। मांस विक्रेता स्वामी द्वारा मांस विक्रेता प्रतिष्ठान हेतु जारी अनापत्ति प्रमाण- पत्र के प्रतिबन्धों/ शर्तों का उल्लंघन किये जाने पर अनापत्ति प्रमाण- पत्र का तात्कालिक निलम्बन अथवा पूर्णतः निरस्तीकरण किया जा सकेगा तथा अधिनियम की धारा-467 एवं धारा -451(3) के अनुरुप अर्थदण्ड का आरोपण किया जायेगा जिसकी राशि 10,000/- प्रति अपराध प्रति बार तक हो सकेगी।

(ज) नगर निगम द्वारा निर्गत अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी किये जाने की तिथि से कुल 01 वर्ष हेतु मान्य होगा ।

(झ) अनापत्ति प्रमाण- पत्र दिये जाने हेतु अनुपयुक्तता की स्थिति में आवेदन के एक माह के भीतर सम्बन्धित प्रकरण के अस्वीकृति की सूचना निर्गत कर दी जायेगी।

(अ) नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत नगर निगम द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण - पत्र एवं खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी अनुज्ञा के बिना मांस विक्रेता प्रतिष्ठान संचालित किये जाने की दशा में नगर निगम अधिनियम की धारा-467 एवं धारा- 451(3) के अनुरुप दण्ड का आरोपण किया जायेगा , जो रू0 25,000/- तक हो सकेगा।

(ट) मांस विक्रेता प्रतिष्ठान के लिए समय -समय पर सक्षम न्यायालयों के पारित आदेशों/ बोर्ड / प्राधिकरण/आयोग/ विभाग द्वारा जरूरी सभी अनुमतियां प्राप्त करने की जिम्मेदारी मांस विक्रेता स्वामी की होगी तथा इस आशय का शपथ- पत्र भी आवेदन के साथ संलग्न करना अनिवार्य होगा । यदि अनापत्ति प्रमाण- पत्र जारी करने के बाद भी किसी भी सक्षम न्यायालय/ बोर्ड/प्राधिकरण/ आयोग/विभाग से मांस विक्रेता स्वामी की मीट शॉप मानकों के अनुरूप नहीं पायी जाती व कोई कार्यवाही की जाती है तो निगम द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र स्वतः निरस्त मानी जायेगी। 6- अनापत्ति प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण- अनापत्ति प्रमाण- पत्र के नवीनीकरण के लिये अनापत्ति धारक की जिम्मेदारी होगी कि वह अपना आवेदन पिछली अनापत्ति प्रमाण - पत्र के समाप्त होने के 15 दिन पहले करना अनिवार्य होगा। अनापत्ति प्रमाण- पत्र की वैद्यता समाप्ति के उपरान्त संचालक पर नियम 4(ञ ) के तहत कार्यवाही की जाएगी।

7. अनापत्ति प्रमाण- पत्र जारी किये जाने हेतु शुल्क इस उपविधि के तहत् भांस विक्रेता प्रतिष्ठान के निरीक्षण एवं तत्संबंधी अभिलेखीकरण आदि कार्यवाही के उपरांत अनापत्ति प्रमाण- पत्र निर्गत किये जाने हेतु 01 वर्ष हेतु शुल्क निम्नवत निर्धारित है ।

1. मुर्गा, मछली एवं अण्डा हेतु

रु० 1,000 /-

2. सुअर हेतु

रु० 2,000/-

रु० 5,000/-

3. बकरा , भेड़ एवं भैंस हेतु

8. इस उपविधि के प्रकाशन से पूर्व भी निगम द्वारा यदि अनापत्ति प्रमाण- पत्र जारी किया गया हो तो उसकी वैद्यता भी जारी करने की तिथि से एक वर्ष के लिये ही होगी।

9. उक्त, उपविधि के तहत् जारी की गयी प्रत्येक अनापत्ति प्रमाण- पत्र निम्नलिखित शर्तों के अधीन होगी अर्थात्-

(क) प्रस्तावित मांस विक्रेय प्रतिष्ठान किसी भी धार्मिक जगह से पचास मीटर के दायरे में नहीं होनी चाहिए व 100 मीटर से कम दूरी पर ठीक सामने की ओर धार्मिक स्थल का प्रवेश द्वार नहीं होना चाहिए।

( ख) दुकान पर एग्जास्ट फेन/ सीलिंग फेन लगा होना चाहिए।

(ग) महिशवंषीय एवं सूकरवंशीय पशुओं का मांस विक्रय किये जाने हेतु सम्बन्धित क्षेत्र के पुलिस थाने की अनापत्ति ली जानी अनिवार्य होगी।

(घ) प्रस्तावित मीट शॉप पर गीजर वॉश बेसिंग/ नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए।

(ङ) दुकानदार जानवरों या पक्षियों को दुकान के अंदर न काट सकते है व ना ही दुकान के अन्दर व बाहर जिन्दा रखे जायेंगे। ऐसा करने पर रू0 10,000/- काअर्थदण्ड आरोपित किया जाएगा।

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(च) केवल पंजीकृत वधशाला/ट्रेडर से खरीदकर ही मांस बेचा जायेगा । जिसकी खरीद- फरोक्त की रसीद का हिसाब- किताब भी रखना अनिवार्य होगा। दुकान पर मांस विक्रय हेतु खुले में नहीं रखा जाएगा।

(छ ) प्रस्तावित मांस की दुकान पर उत्सर्जित जैव अपशिष्टों का निस्तारण विधि संगत रीति से किया जायेगा। दुकान के अन्दर या बाहर किसी भी प्रकार की गन्दगी जैसे अनुपयोगी आंतरिक अंग वं बाहरी अंग (offal) सार्वजनिक स्थान पर फैकने रखने पर रू0 10,000/- के अर्थदण्ड की कार्यवाही की जाएगी।

(ज) अनापत्ति निर्गत करने हेतु निकटस्थ पड़ोसियों द्वारा आपत्ति/ अनापत्ति पत्र प्राप्त कराना होगा।

(झ) प्रस्तावित मीट शॉप पर मक्खियों एवं कीटों से मुक्त रखने हेतु फ्लाई टेपिंग सिस्टम की व्यवस्था के साथ दरवाजे जालीदार / शीशे ( काले ) का दरवाजे लगा होना चाहिए ताकि जनता को मांस नजर न आए। पैस्ट कंट्रोल सर्टिफिकेट आवेदन के साथ संलग्न करना होगा।

(ञ) प्रस्तावित मीट शॉप की ऊंचाई 03 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।

(ट) प्रस्तावित दुकान आवासीय परिसर में नहीं होनी चाहिए।

(ठ) प्रस्तावित मांस विक्रय प्रतिष्ठान स्वामी की पूर्ण जिम्मेदारी होगी की वह दुकान के अन्दर व बाहर स्वच्छता को बनाये रखेगा।

( ड ) प्रस्तावित मांस विक्रेय प्रतिष्ठान द्वारा यह शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया जायेगा कि वह देहरादून नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत विधिसंगत रीति से ही मांस का विक्रय करेगा।

1. प्रस्तावित मांस विक्रेय प्रतिष्ठान पर कार्यरत सभी कार्मिकों के स्वास्थ्य परीक्षण सम्बन्धी अभिलेख ( हेल्थ सर्टिफिकेट ) दुकान पर उपलब्ध होने चाहिए जो कि छः माह से पुराना न हो।

2. प्रस्तावित मांस की दुकान पर प्रयोग होने चाकू, छूरी या किसी भी प्रकार के औजार स्टील के बने होने चाहिए तथा चॉपिंग ब्लॉक खाद्य ग्रेड सिंथेटिक सामग्री का होना चाहिए यदि ब्लॉक लकड़ी का है तो यह पर्याप्त ठोस लकड़ी के तने का होना चाहिए।

10. कोई भी मांस विक्रेता प्रतिष्ठान स्वामी नगर निगम के निरीक्षण अधिकारी को किसी भी समय पर , प्रतिष्ठान का निरीक्षण करने के लिये आपत्ति नहीं कर सकेगा।

11. उपरोक्त उपविधियों के उल्लंघन पर रदद् की गयी अनापत्ति प्रमाण- पत्र के निरस्तीकरण को पुनर्जीवित करने हेतु नगर आयुक्त, नगर निगम, देहरादून के समक्ष अनुरोध प्रस्तुत किया जा सकता है जिस पर निर्णय नगर आयुक्त , नगर निगम, देहरादून अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी का निर्णय अन्तिम होगा । दो बार निरस्त की गयी किसी अनापत्ति को किसी भी दशा में पुर्नजीवित नहीं कराया जा सकेगा। उक्त प्रकार के अनुरोध किये जाने हेतु अधिकतम समय सीमा प्रथम निरस्तीकरण के एक' माह तक होगी।

मनुजगोयल , आई०ए०एस०, नगर आयुक्त्, नगर निगम, देहरादून ।

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कार्यालय नगर पालिका परिषद , धारचूला (पिथौरागढ़)

प्रस्तावित उपविधि

30 जुलाई, 2019 ई०

पत्रांक 102 / ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन / उपविधि / 2019-20 - नगर पालिका अधिनियम की धारा 541 (1 ) (42) के एवं पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 (1986 का 29) की धारा 3 , 6 , एवं 25 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में केन्द्र सरकार द्वारा बनायी गयी ठोस कचरा प्रबन्धन नियमावली 2016 के नियम 15 (ङ), 15(च ) एवं 15 (यच) के अन्तर्गत शक्तियों के प्रयोग में नगर पालिका धारचूला द्वारा बनाए गए निम्नलिखित ठोस कचरा प्रबन्धन के लिए उपविधियों को अपने क्षेत्राधिकार में नगर पालिका के अधिवेशन दिनांक 19/06/2019 में प्रस्ताव सं 0 06 के माध्यम से रखा गया एवं आपत्ती एवं सुझाव हेतु विशेष संकल्प से पारित हुआ ।

अध्याय-1

सामान्य

1. संक्षिप्त नाम और लागू होने की तारीख:

(1) ये उप-नियम नगर पालिका धारचूला ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन उप- नियम, 2019 कहलाएंगे ।

(2) ये उप - नियम नगर पालिका धारचूला के सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे ।

(3) नगरीय ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन उपविधि 2009, गजट नोटिफिकेशन 16 जुलाई 2010 द्वारा प्राख्यापित उपविधि नगर पालिका धारचूला ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन उप- नियम, 2019 लागू होने की तिथि से स्वतः समाप्त हो जायेगी ।

2. ये उप- नियम नगर पालिका धारचूला की सीमाओं के भीतर लागू होंगे । परिभाषाए

3 (1 ) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस उप नियमों में निम्नाकित परिभाषाएं लागू हैं:-

(क) 'बल्क उधान और बागवान कचरा" का अर्थ हैं, उघानो, बागो आदि से उत्सर्जित बल्क कचरा, जिसमें घास कतरन, खरपतवार, कार्बनयुक्त काष्ठ ब्राउन सामग्री जैसे पेडों की छटाई से उत्पन्न कचरा , पेडो की कटिंग, टहनियां, लकडी की कतरन, भूसा, सूखी पत्तियां, पेडों की छटाई आदि से उत्पन ठोस कचरा , जो दैनिक जैव अपघटीय कचरे के संकलन में समायोजित नही किया जा सकता है ।

(ख) 'बल्क कचरा उत्सर्जन का अर्थ हैं कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 (जिसे बाद में यहा एस.डब्ल्यू.एम नियम कहा जाएगां) के नियम 3(1) (8) के अंतर्गत परिभाषित बल्क कचरा उत्सर्जक और सम्बद्ध वार्ड कार्यालय के सहायक आयुक्त या उससे वरिष्ठ अधिकारीयों द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा उत्सर्जक;

"संग्रह" का अर्थ है, कचरा उत्सर्जन के स्रोत से ठोस कचरे को उठाना और संग्रहण बिंदुओं या किसी अन्य स्थान तक पहुंचाना;

"सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ हैं नगर पालिका काअध्यक्ष / अधिशासीअधिकारी अथवा उसके द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति ।

"निर्माण एवं विध्वंस कचरा का वही अर्थ होगा, जो निर्माण एवं विध्वंरा कचरा नियम, 2016 नियग 3 (1 ) (ग ) में परिभाषित किया गया है ।

"स्वच्छ क्षेत्र" का अर्थ है, किसी परिसर के सामने और चारो ओर या निकटवर्ती फुटपाथ तक विस्तारित स्वच्छ सार्वजनिक स्थल , जिसमें नाली. फुटपाथ और पटरी के किनारे शामिल हैं, जिनका रख- रखाव इन उपनियमों के अन्र्तगत किया जाना हैं ।

(छ) "सामुदायिक कूडा घर (ढलाव) का अर्थ है, नगर पालिका द्वारा स्थापित और संचालित अथवा एक या अधिक परिसरों के मालिकों और/या अधिभोगियों द्वारा मिल कर सडक किनारे/ ऐसे मालिकों/ अधिभोगियों के किसी एक परिसर में अथवा समक्ष अधिकारी द्वारा अधिकृत उनके साझा परिसर में पृथक्कृत ठोस कचरे के संग्रहण के लिए स्थापित और संचालित कोई संग्रह केंद्र;

(ज) "कंटेनराइज्ड हैड कार्ट" का अर्थ है, ठोस कचरे के बिन्दु दर बिन्दु संग्रह हेतु नगर पालिका या उसके द्वारा नियुक्त ऐजेंसी / एजेंट द्वारा प्रदत्त ठेला;

(झ) "सुपुर्दगी" का अर्थ है किसी भी श्रेणी के ठोस कचरे को नगर पालिका के वर्कर या ऐसे कचरे की सुपुर्दगी के लिए नगर पालिका द्वारा नियुक्त, प्राधिकृत या लाइसेंस प्रदत्त व्यक्ति को सौपना अथवा उसे नगर पालिका या नगर पालिका द्वारा अधिकृत लाइसेंस प्रदत्त एजेंसी द्वारा प्रदान किए गये वाहन में डालना;

(ञ) "ई-कचरा" का अर्थ वही होगा , जो ई- कचरा (प्रबंधन) नियम, 2016 के नियम 3 (1 ) (आर) में निर्दिष्ट किया गया हैं:

(ट) 'फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (एफसीटीएस) का अर्थ है, एक ऊर्जा चालित मशीन , जिसका डिजाइन बिखरे हुए ठोस कचरे को कम्पैट करने के लिए किया गया है और प्रचालन के समय स्थिर रहती हैं । प्रचालन के समय कम्पैक्टर मोबाईल भी हो सकती हैं, जिसे मोबाईल ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) कहा जा सकता है;

(ठ) "कूडा-कचरा' का अर्थ है , सभी प्रकार का कूडा और उसमें कोई भी ऐसा कचरा पदार्थ शामिल जिसे फेकना अथवा संग्रह करना इन उप-नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित है और ऐसा करने से किसी व्यक्ति, जीव जंतु को परेशानी होने या पर्यावरण अथवा सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के प्रति खतरा पहुंचाने की आशंका हो ।

(ड) "गंदगी फैलाने का अर्थ है, किसी ऐसी बस्ती में गंदगी उत्सर्जित करना, डालना, दबाना अथवा तत्संबंधी अनुमति देना, जहां वह गिरती, ढलती, बहती, धुल कर, रिस कर अथवा किसी अन्य तरीके से पहुचती हो अथवा गंदगी के उत्सर्जित होने , बह कर आने, धुल कर आने या अन्य किसी तरह से खुले या सार्वजनिक स्थल पर आने की आशंका हो ।

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(ढ) 'स्वामी' का अर्थ है, जो किसी भवन , या भूमि या किसी भाग के मालिक के रुप में अधिकारों का इस्तेमाल करता हैं;

(ण) ' अधिभोगी / पट्टेदार" का अर्थ है , ऐसा व्यक्ति जो किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का अधिभोगी / पट्टेदार हो, इसमें ऐसे व्यक्ति भी शामिल है , जो तत्समय किसी प्रयोजन के लिए किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का इस्तेमाल कर रहा हैं ।

(प) "पैलेटाइजेशन' का अर्थ है, एक प्रक्रिया, जिसमें पैलेट तैयार की जाती हैं, जो ठोस कचरे से बने छोटे क्यूब अथवा सिलिंडरीकल टुकडे होते हैं; और उनके ईधन पैलेट्स भी शामिल होते हैं, जिन्हे रिफ्यूज डेराइब्ड ईंधन कहा जाता हैं ।

(फ) 'निर्धारित" का अर्थ है, एसडब्यूएम नियमो और / या इन उप नियमों द्वारा निर्धारित;

(ब) 'सार्वजनिक स्थल" का अर्थ है, कोई ऐसा स्थान, जो आम लोगों के इस्तेमाल और मनोरंजन के लिए सहज सुलभ हैं , भले ही वह वास्तव में लोगों द्वारा इस्तेमाल या उपभोग किया जा रहा हो या नही;

(भ) संग्रहण" का अर्थ है, ठोस कचरे को अस्थायी तौर पर इस तरह से संग्रह करना जिससे गंदगी न फैले और मच्छर आदि कीटों,आवारा पशुओं और अत्यधिक बदबू का प्रकोप रोका जा सके;

(म) 'सैनेटरी वर्कर' का अर्थ है, नगर पालिका के इलाकों में ठोस कचरा एकत्र करने या हटाने अथवा नालियो को साफ करने के लिये नगर पालिका/ एजेंसी द्वारा नियोजित व्यक्ति;

(य) "शेड्यूल" का अर्थ है. इन उप नियमों से सम्बद्ध शेड्यूल;

(र) 'इस्तेमालकर्ता शुल्क/प्रभारी" का अर्थ है , नगर पालिका द्वारा समय - समय पर सक्षम प्राधिकारी के सामान्य या विशेष आदेश के जरिए कचरा उत्सर्जक पर लगाया गया शुल्क या प्रभार, ताकि ठोस कचरा संग्रह, ढुलाई, प्रोसेसिंग और निपटान सेवाओं की आंशिक अथवा पूर्ण लागत कवर की जा सकें;

(ल) 'खाली प्लाट का अर्थ है , प्राइवेट पार्टी/ व्यक्ति/ सरकारी एजेंसी से सम्बद्ध कोई ऐसी भूमि या खुला स्थाल , जिस पर किसी का कब्जान हो;

यहां प्रयुक्त लेकिन परिभाषित न किए शब्दों और अभिव्यक्तियों, का अर्थ वही होगा, जो ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 और निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 में अभिप्रेत होगा ।

अध्याय -2

ठोस कचरे का स्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण

4. ठोस कचरे का स्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण

(i) सभी कचरा उत्सर्जको के लिए अनिवार्य होगा कि वे उनके स्वयं के स्थलो से उत्सर्जित होने वाले ठोस कचरे को नियमित रुप से पृथक करें और उसे संगृहीत करें । यह पृथक्करण मुख्य रुप से निम्नांकित 3 वर्गों में किया जायेगाः-

(क) गैर-जैव अपघटीय या सूखा कचरा

(ख) जैव अपघटीय या गीला कचरा

(ग) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा और तीनो श्रेणियों के कचरे को कवर्ड कचरा डिब्बो में रखा जाएगा तथा समय समय पर जारी नगर पालिका के निर्देशों के अनुसार पथ्थकृत कचरे को निर्दिष्ट कचरा संग्रहकर्ताओं को सोपेगा ।

(ii ) प्रत्येक बल्क कचरा उत्सर्जक के लिए अनिवार्य होगा कि वह स्वयं के स्थलों पर उज्सर्जित ठोस कचरे को पृथक करे और उसे संगृहीत करे निम्नाकित 3 वर्गों में:-

(क) गैर-जैव अपघटीय या खुश्क कचरा

(ख) जैव अपघटीय या गीला कचरा

(ग) उपयुक्त कूड़ेदानों में जोखिमपूर्ण कचरा, जैविक (गीला) कचरे को अपने परिसर में प्रोसेस कर कम्पोस्ट या बायोगैस आदि तैयार करना एवं पृथक्क्त कचरे को अधिकृत कचरा संग्रहण एंजेसी जरिए अधिकृत कचरा प्रसंस्करण अथवा निपटान केंद्रो या संग्रहण केंद्रो को सौपेगा और उसके लिए को नगर पालिका द्वारा समय समय पर निर्धारित दुलाई शुल्कों का भुगतान अधिकृत कचरा संग्रह एजेंसी को करेगा ।

(iii) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए कूड़ेदानों का रंग इस प्रकार होगाः-

हराः- जैव अपघटीय कचरे के लिए;

नीलाः- गैर-जैव अपघटीय या खुश्क कचरे के लिए ;

कालाः घरेलु जोखिम पूर्ण कचरे के लिए

(iv) सभी निवासी कल्याण और बाजार संगठन, नगर पालिका के भागीदारी से, यह सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा स्रोत पर कचरे का पृथक्करण किया जाए, पृथक किए गए ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बों में संगृहीत किया जाए और फिर से इस्तेमाल करने वालों को सौपी जाएं । जैव अपघटीय कचरें की प्रोसेंसिग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे कचरे को नगर पालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी कोदिया जाएगा ।

(v) 5000 वर्गमीटर क्षेत्र से अधिक क्षेत्र कब्जा रखने वाले सभी द्वारबंद समुदाय तथा संस्थान नगर पालिका की भागीदारी के साथ, सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण हो, पृथक किए गए कचरे को अलग अलग डिब्बों में रखेंगे और पुनः उपयोग आने वाली सामग्री को अधिकृत कूडा संग्रहकर्ताओं या अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वाले को सौपेगें । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।

भाग 8 ]

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(vi)' सभी होटल और रेस्त्रां, नगर पालिका के भागीदारी सें, कचरे का स्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे, पृथक किए गए गये ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बे में संग्रहीत करेगें और फिर से इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री अधिकृत कचरा संग्रहकर्ताओं अथवा अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वालो को सौपेगे । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग, उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।

(vii),कोई व्यक्ति गैर -लाइसेंसी स्थान पर कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित नही करेगा , जिसमें 100 से अधिक व्यक्ति, एकत्र हों, ऐसा करने के लिए यह जरुरी होगा कि अनुसूची में निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क का भुगतान करते हुए नगर पालिका को कम से कम 3 कार्य दिवस अग्रिम लिखित जानकारी देनी होगी और ऐसा व्यक्ति या आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि ठोस कचरे को स्रोत पर अलग अलग किया जाए, ताकि नगर पालिका द्वारा निधारित संग्रहकर्ता या एजेंसी को सौपा जा सकें ।

(viii) सेनिटरी उत्पादों से उत्सर्जित कचरे को तत्संबेधी विनिर्माताओं या ब्रॉड मालिकों द्वारा प्रदान किए गए पाउचों अथवा अखबारों या उपयुक्त जैव अपघटीय संलेपन सामग्री में सुरक्षित तरीके से संलेपित किया जाए और उसे गैर - जैव अपघटीय या खुश्क कचरे के लिए बनाए गए कूड़ेदान में रखा जाना चाहिए ।

(ix) प्रत्येक गली विक्रेता अपने क्रियाकलाप के दौरान उत्सर्जित होने वाली खाघ सामग्री, निपटान योग्य प्लेटें, कप, डिब्बे, रैपर्स, नारियल के खोल, बचा खुचा भोजन, सब्जियां, फल आदि को अलग अलग करके उपयुक्त कूड़ेदानो में संग्रहित करेगा और उसे नगर पालिका द्वारा अधिसूचित डिपो या कंटेनर या वाहन को सौपेगा ।

(x) उद्यान और बागवानी के कचरा उत्सर्जक अपने परिसर में उत्सर्जित कचरे को अलग से एकत्र करेंगे और समय समय पर नगर पालिका के निर्देशों के अनुसार उसका निपटान करेंगे ।

(xi ) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्रत्येक कचरा उत्सर्जक द्वारा स्टोर किया जाएगा और उसे नगर पालिका या उसके द्वारा अथवा उत्तराखण्ड सरकार या प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा ऐसे कचरे का संग्रह के लिए साप्ताहिक / समय समय पर उपलब्ध कराए गए वाहन तक पहुंचाया जाएगा अथवा ऐसे कचरे को उत्तराखण्ड सरकार या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित तरीके से निपटान के लिए निर्दिष्ट कचरा संग्रह केंद्र तक पहुंचाया जाएगा ।

(xii) निर्माण कार्यों और भवनों को ढहाए जाने से उत्सर्जित कचरा, निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के अनुसार अलग से एकत्र और निपटान किया जायेगा ।

(xiii) बायो मेडिकल कचरा, ई- कचरा, जोखिमपूर्ण रासायनिक एवं औद्योगिक कचरा बिना उपचारित किए ठोस कचरे में मिश्रित नही किया जाएगा। ऐसे कचरे का निपटान पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत बनाए गए तत्संबंधी नियमों के अनुसार किया जाएगा ।

(xiv) निर्दिष्ट बूचडखानों और बाजारों को छोड कर अन्य परिसरों के प्रत्येक ऐसे मालिक/ कब्जाधारी, जो किसी वाणिज्यिक गतिविधि के परिणाम स्वरुप पोल्ट्री, मछली और पशुवध संबधी कचरा उत्सर्जित करते हो , उन्हे ऐसे कचरे को अलग से बंद कंटेनर में स्वास्थ्यकर स्थिति में एकत्र करना होगा और रोजमर्रा के आधार पर निर्दिष्ट समयानुसार नगर पालिका द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्रदान किए गए कचरा वाहन/ स्थल तक पहुंचाना होगा । ऐसे कचरे को सामुदायिक कूडा घरो में डालना निषेध होगा ।

(xv) पृथक किए गए जैव अपघटीय ठोस कचरे को यदि उत्सर्जकों द्वारा कम्पोस्ट न किया गया हो, तो उसे उन्हे अपने परिसर में अलग से एकत्र करना होगा और उसकी डिलिवरी पंचायत श्रमिक/ वाहन/ कचरा एकत्रकर्ता/ कचरा संग्रहकर्ता अथवा बल्क में जैव अपघटीय कचरा उत्सर्जित करने वाले निर्दिष्ट वाणिज्यिक उत्सर्जकों के लिए प्रदान कराए गए कचरा संग्रह वाहन तक पहुंचाया जाएगा। यह सुपुर्दगी समय समय पर अधिसूचित समयानुसार करनी होगी ।

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उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 8

अध्याय-3

ठोस कचरा संग्रह

5. ठोस कचरे का संग्रह निम्नांकित अनुसार किया जाएगाः-

(i ) नगर पालिका के सभी क्षेत्रों या वार्डो में पृथक किए गए ठोस कचरे को घर घर जाकर संग्रह करने के बारे में एसडब्लूएम नियमों का अनुपालन किया जाएगा, जिनके अनुसार मलिन' और अनौपचारिक बस्तियों सहित दैनिक आधार पर प्रत्येक घर से कचरा एकत्र किया जाएगा । इसके लिए घर घर जाकर कचरा एकत्र करने की अनौपचारिक प्रणाली को नगर पालिका संग्रह प्रणाली के साथ एकीकृत किया जाएगा । (ii ) प्रत्येक घर से कचरा एकत्र करने के लिए क्षेत्रवार विशेष समय निर्धारित किया जाएगा और उसे सम्बद्ध क्षेत्र में खास खास स्थानों पर प्रचारित किया जाएगा और नगर पालिका वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा । घर घर जाकर कचरा एकत्र करने का समय सामान्यतया प्रातः 6 बजे से 11 बजे तक निर्धारित किया जाएगा । व्यापारिक प्रतिष्ठानों, वाणिज्यिक क्षेत्रों में दुकानों या किसी अन्य संस्थागत कचरा उत्सर्जकों से कचरा एकत्र करने का समय प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा अथवा नगर पालिका द्वारा समय समय पर निर्धारित समय पर होगा ।

(iii) कचरे को स्व-स्थाने प्रोसेस करने वाले बल्क कचरा उल्सर्जकों से अवशिष्ट ठोस कचरे को एकत्र करने का प्रबंध किए जाएगे।

(iv) सब्जी फल, फूल, मांस, पोल्ट्री और मछली बाजार से अवशिष्ट ठोस कचरे को रोजमर्रा के आधार पर एकत्र किया जाएगा ।

(v) बागवानी और उद्यान संबंधी कचरा अलग से एकत्र किया जाएगा और उसका निपटान किया जाएगा । इस प्रायोजन के लिए सप्ताह में एक या दो दिन निर्दिष्ट किए जाएंगें ।

! (vi ) फलों और सब्जी बाजारों, मांस और मछली बाजारों, बल्क बागवानी और उद्यानों से उत्सर्जित जैव अपघटीय कचरे का अनुकूलतम इस्तेमाल करने और संग्रहण एवं दुलाई की लागत में कमी लाने के लिए ऐसे कचरे को उस क्षेत्र के भीतर प्रोसेस या उपचारित किया जाएगा, जिसमें वह उत्सर्जित होता हैं ।

(vii) कंटेनरों में कचरे का हाथ से परिचालन निषेध हैं । यदि दबावों के कारण अपरिहार्य हो तो कचरे का हाथ से निपटान श्रमिकों की उचित देखभाल और सुरक्षा के साथ समुचित संरक्षण के तहत किया जाएगा ।

(viii) कचरा उत्सर्जक अपने पृथक किए गए कचरे को नगर पालिका द्वारा अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा तैनात होपर/ऑटो-टिप्पर्स/ रिक्शा आदि वाहनो में डालने के लिए जिम्मेदार होगें । बहुमंजिला इमारतों, अपार्टमेंटो, आवास परिसरों (इन उपनियमों के खंड 4 व उप- खंड (पअ) और (अ) के अंतर्गत आने वालों को छोड कर ) से उत्सर्जित पृथक किए गए कचरे को ऐसे परिसरों के मुख्य द्वार से अथवा किसी अन्य निर्दिष्ट स्थान से एकत्र किया जाएगा ।

(ix) कचरा संग्रह उपकरणों और वाहनों के चयन के लिए बदलती जरुरतों और प्रौद्योगिकी में नई खोजो को ध्यान में रखा जाएगा । कचरा एकत्र करने के लिए विशेष क्षमता वाले ऐसे ऑटो टिप्पर या वाहन इस्तेमाल किए जाएगें, जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होगे और उनमें जैव अपघटीय और गेर- जैव अपघटीय कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो पर हूटर भी लगा होगा ।

(x) स्वचालित ध्वनि रिकार्डिड उपकरण , घंटी या शोर के स्वीकार्य स्तर तक सीमित हॉर्न भी कचरा संग्रह वाहन में कचरा संग्रहकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा ।

(xi ) प्रत्येक प्राथमिक संग्रहण तथा ढुलाई वाहन के लिए मार्ग योजनाए और नगर पालिका द्वारा या अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा । ये योजनाएं तालिकाबद्ध और जीआईएस मानचित्र में होगी, जो नगर पालिका द्वारा विधिवत रुप से अनुमोदित होगी और उनमें प्रारंभिक बिन्दु, प्रारंभ करने का समय, प्रतीक्षा स्थलों , मार्ग में रुकने का समय, अंतिम बिंदु और निर्दिष्ट मार्ग के अंतिम समय का उल्लेख होगा। नगर पालिका अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा प्रत्येक गली में एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर प्राथमिक कचरा संग्रह और दुलाई वाहनों की समय सारणी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि क्षेत्र के निवासी निर्धारित समय पर इस सुविधा का लाभ उठा सकें। ऐसी जानकारी नगर पालिका की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।

(xii ) तंग गलियों में, जहां ऑटो टिप्पर या वाहन की सेवाएं संभव न हों, वहां एक थ्रीव्हीलर अथवा छोटे मोटरयुक्त वाहन/ साईकिल रिक्सा काम पर लगाया जाएगा, जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होंगा और उसमें गीले और सूखे कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो में हूटर लगा होगा और वह मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन के अनुकूल होगा ।

(xiii) अत्यंत भीड भाड वाले और अधिक तंग गलियों वाले क्षेत्रों में जहां श्रीव्हीलर या छोटे वाहन भी न जा सकें वहां साइकिल रिक्शाअथवा अन्य प्रकार के उपयुक्त उपकरण तैनात किए जाएंगे ।

(xiv) ऐसी छोटी, तंग और भीडी गलियों / लेनों में जहा श्रीव्लीहर/ रिक्शा आदि का संचालन संभव न हो,ऐसे स्थानों पर बस्ति/ गली के छोर पर खास जगह तय की जाएगी, जहां कचरा संग्रह वाहन खडा किया जा सके और वाहन के हेल्पर के पास एक सीटी होगी और वे सीटी बजाते हुए गली में ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहन के आगमन की घोषणा करेंगे । इस तरह की संग्रह प्रणाली की समय सारिणी नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी और नगर पालिका की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।

(xv) ऑटो टिप्पर, थीव्हीलर्स , रिक्शा और सेवा में संलग्न किसी अन्य तरह के वाहन केवल घरों से कचरा एकत्र करेंगे, और अन्य स्रोतो जैसे ढलाव, खुले स्थलों, मैदान, कूडेदानों और नालियों आदि से कचरा एकत्र नहीं करेंगे ।

(xvi ) नगर पालिका या उसके अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहर्ता प्राथमिक कचरा संग्रहण के लिए क्षेत्र की सभी गलियों/ लेनों को कवर करने के लिए जिम्मेदार होगें ।

भाग 8 ]

695 उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26 , 1944 शक सम्वत्)

अध्याय-4

ठोस कचरे का द्वितीयक संग्रहण

6. द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ में ठोस कचरे का संग्रहण निम्नाकित अनुसार किया जाएगा

(i ) घरो में एकत्र किया गया पृथक ठोस कचरा, कचरा स्टोरेज डिपो, सामुदायिक कूडा घरों या अचल या चल अंतरण स्थलों या कचरे के द्वितीयक संग्रहण के लिए नगर पालिका द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर ले जाया जाएगा ।

(ii) ऐसे द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ को कंटेनरों (निर्दिष्ट रंग के) से कवर किया जाएगा, जिनसे निम्नांकित के लिए अलग अलग स्टोरेज होगें:-

(क) गैर-जैव अपघटीय अथवा सूखा कचरा

(ख) जैव अपघटीय अथवा गीला कचरा

(ग) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा ।

(iii) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए नगर पालिका द्वारा चिन्हित अलग अलग कंटेनरो का इस्तेमाल निम्नांकित अनुसार किया जायेगाः-

हराः जैव अपघटीय कचरे के लिए

नीलाः गैर-जैव अपघटीय कचरे के लिए

कालाः घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए

नगर पालिका समय समय पर विभिन्न प्रकार के ठोस कचरे के संग्रहण और वितरण के लिए निर्धारित

गोदामों की रंग संहिता और अन्य मानदंड अधिसूचित करेगी ताकि कचरे का सुगम और सुरक्षित संग्रहण हो सके और किसी प्रकार का मिश्रण या रिसाव न हो, जिनका अनुपालन विभिन्न प्रकार के ठोस कचरा उत्सर्जकों को करना होगा ।

(iv) नगर पालिका स्वयं अथवा बाहरी एजेंसियों के जरिए ठोस कचरा संग्रहण केंद्रो का संचालन इस ढंग से करेगी कि उनके आस पास अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ स्थितियां पैदा न हों ।

(v) द्वितीयक संग्रहण डिपुओं में विभिन्न आकार के कंटेनर नगर पालिका या किन्ही अन्य निर्दिष्ट एजेंसियों द्वारा प्रदान किये जाएंगे, जो इस उप-नियमों में वर्णित अनुसार अलग अलग रंगो के होगे ।

(vi) संग्रहण केन्द्रो का निर्माण और स्थापना इस बात को ध्यान में रख कर की जाएगी कि किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में कचरे के उत्सर्जन की मात्रा कितनी है और जनसंख्या का घनत्व कितना है ।

(vii) संग्रहण केन्द्र इस्तेमालकर्ता अनुकूल होंगे और उनका डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनसे कचरा ढका रहे और संग्रहण किए गये कचरे का खुले वातावरण में कोई दुष्प्रभाव न पडे ।

(viii) सभी आवास सहकारी समितीयों, एसोसिएशनों, रिहायशी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और द्वारबंद समुदायों का यह दायित्व होगा

कि वे इन उप-नियमों द्वारा निर्धारित रंगीन कूड़ेदान रखें और स्वयं के परिसरों में समुचित स्थानो पर पर्याप्त संख्या में ऐसे कंटेनर रखें ताकि वहां हर रोज उत्सर्जित कचरा ठीक ढंग से संगृहीत किया जा सकें ।

(ix) नगर पालिका या उसकी कोई निर्दिष्ट एजेंसी का यह दायित्व होगा किवे सप्ताहिक आधार पर सभी कूडाघरों की धुलाई और :

संक्रमणमुक्त बनाने की व्यवस्था करें ।

(x) सूखे कचरे (गैर - जैव उपघटीय कचरा ) के लिए रीसाइकलिंग सेंटर (क) नगर पालिका अपने वर्तमान ढलावों अथवा पहचान किए गए खास स्थानों को आवश्यकतानुसार रीसाइकलिंग केंद्रों के रुप में परिवर्तित करेगा, जिनका इस्तेमाल गलियों/ घर घर जाकर कचरा एकत्र करने संबंधी सेवा के जरिए एकत्र किए गए सूखे कचरे को पृथक करने के लिए किया जाएगा। प्राप्त सूखे कचरे की मात्रा के अनुसार रीसाइकलिंग केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है । (ख) गली/ घर घर जाकर कचरा संग्रहण प्रणाली के जरिए और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त केवल सूखा कचरा (गैर-जैव अपघटीय) इन निर्दिष्ट रीसाइकलिंग केंद्रो को स्थानातरित किया जाएगा। ये निर्दिष्ट केंद्र केवल सूखा कचरा प्राप्त करेंगे ।

(ग) परिवारों के लिए प्रावधान भी होगा कि वे अपना रीसाइकिल योग्य सूखा कचरा इन रीसाइकलिंग केंद्रों पर सीधे जमा करा सकते है अथवा अधिकृत एजेंटो और / या नगर पालिका से अधिकृत कचरा व्यापारियों को पूर्व अधिसूचित दरो के अनुसार बैच सकते है । इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक रीसाइकलिंग यूनिट पर एक धर्मकांटा और काउंटर उपलब्ध कराया जाएगा । अधिकृत एजेंट और/या अधिकृत कचरा व्यापारी को इस बात की अनुमति होगी कि वे रीसाइकिल योग्य कचरे को एसडब्ल्यूएम नियमों के प्रावधानों के अनुसार द्वितीयक बाजार अथवा रीसाइकलिंग यूनिटों को बेच सकते है । अधिकृत एजेंट और/ या अधिकृत व्यापारी बिक्री से प्राप्त धनराशी रखने का हकदार होंगे ।

(xi ) निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए संग्रहण केंद्र

(क) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के संग्रह के लिए एक संग्रहण केंद्र उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाएगा,एगा, जहा निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्राप्त किया जाएगा, ऐसा सरकार द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार यथासमग्भव प्रत्येक वार्ड में स्थापित किया जाएगा और उसे कचरा प्राप्त करने का समय अधिसूचित करना होगा ।

(ख) नगर पालिका अपनी एजेंसी को या छूटग्राही को यह दायित्व सौप सकती है कि वह सभी कचरा उत्सर्जकों से घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा पृथककृत तरीके से एकत्र करें ।

(ग) इस तरह प्राप्त किया गया कचरा सरकार द्वारा स्थापित जोखिमपूर्ण कचरा निपटान केंद्रो पर अलग से लाया जाएगा ।

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[भाग 8 उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

अध्याय-5

ठोस कचरे की ढुलाई

7. ठोस कचरे की ढुलाई निम्नांकित बातों को ध्यान में रख कर की जाएगी:-

(i) कचरे की ढुलाई के लिए प्रयुक्त वाहन भलीभाति कवर्ड होंगे ताकि एकत्र कचरे का दुष्प्रभाव मुक्त वातावरण पर न पडे । इन वाहनो में कम्पैक्टर और मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन शामिल हो सकते है, जो नगर पालिका द्वारा चुनी गई प्रौद्योगिकी पर निर्भर करेंगे ।

(ii) नगर पालिका द्वारा स्थापित संग्रहण केंद्र कचरे के निपटान के लिए हर रोज काम करेंगे । कूड़ेदान या कंटेनरों के आस पास के क्षेत्र को साफ रखा जाएगा ।

(iii ) आवासीय और अन्य क्षेत्रों से एकत्र किया गया पृथककृत जैव अपघटीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांटो जैसे कम्पोस्ट प्लांट, बायो-मिथिनेशन प्लांट या अन्य केंद्र तक कवर्ड तरीके से पहुचाया जाएगा ।

(iv) जहा कही प्रयोज्य हो , जैव अपघटीय कचरे के लिए, ऐसे कचरे की स्व-स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।

(v) एकत्र किया गया गैर- जैव अपघटीय कचरा सम्बद्ध प्रोसेसिंग केंद्रो अथवा द्वितीयक संग्रहण में पहुंचाया जाएगा ।

(vi) निर्माण और विध्वंस जन्य कचरे की ढुलाई निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम,2016 के प्रावधानो के अनुसार की जाएगी ।

(vii ) नगर पालिका कचरे की समुचित ढंग से ढुलाई के प्रबंध करेगा । गलियों को बुहारने से उत्पन्न कचरा और नालियों से निकाली गई गाद काम समाप्त होने के तत्काल बाद हटाई जाएगी ।

(viii ) ढुलाई वाहनों का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि अंतिम निपटारे से पहले कचरे के बार बारं परिचालन से बचा जा सकें ।

(ix) कचरा संग्रहण के लिए काम में लगाए गए वाहन कचरे को केवल एमटीएस अथवा एफसीटीएस , जहां कही प्रदान किए गए हों. में जमा/ स्थानांतरित करेंगे ।

(x) यदि किसी कारणवश एमटीएस / एफसीटीएस निर्दिष्ट स्थल पर खडे नही पाए जाएगें, तो लदा वाहन एमटीएस अथवा एफसीटीएस के अगले निर्दिष्ट स्थल अथवा कचरे को उतारने के लिए नगर पालिका द्वारा निर्दिष्ट स्थल तक जाएगा ।

(xi) फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रासफर स्टेशन को हूक लोडर के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाएगा ।

(xii ) कचरे की ढुलाई के दौरान विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित कचरे का परस्पर मिश्रण नही होना चाहिए ।

(xiv) कचरे के गली स्तरीय संग्रहण और दुलाई सेवाएं अवकाश के दिनों सहित हर दिन उपलब्ध कराई जाएंगी ।

(xv) इस सेवा में संलग्न एमटीएस केवल गली स्तरीय प्रचालनों से कचरा संग्रह करनें वाले निर्दिष्ट ऑटो- टिप्परों, तिपहिया या अन्य वाहनों/ कूडादानों से कचरा प्राप्त करेंगा ।

(xvi ) परिवारों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से गली स्तरीय और घर घर जाकर ठोस कचरा संग्रह करने में लगे ऑटो-टिप्परों , तिपहिया वाहनो , रिक्शा आदि से कचरा प्राप्त करने के लिए एक अनुमोदित रुट प्लान के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रतिबद्ध एमटीएस तैनात किए जाएगें ।

(xvii ) एमटीएस और एफसीटीएस का डिजाइन ऐसा होगा, जो कचरे को प्राथमिक संग्रहण वाहनों से उतारने में कम से कम समय लें और कूड़ा करकट इधर उधर न फैले ।

(xviii) ठोस कचरे को स्थानांतरित करते समय एमटीएस और एफसीटीएस के इर्द गिर्द रिसे हुए कचरे को साफ किया जाना चाहिए ,

xvx) नगर पालिका अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसी सभी द्वितीयक संग्रहण केंद्रो पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगी ।

ताकि कोई रिसाव न बचे । ऐसे स्थान पर सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद संक्रमण विरोधी पदार्थ इस्तेमाल किए जाने चहिए । (

अध्याय-6

ठोस कचरे की प्रोसेसिंग

8. ठोस कचरे की प्रोसेसिंग:-

(i ) नगर पालिका ठोस कचरा प्रोसेसिंग केंद्रो और सम्बद्ध ढांचे के निर्माण, प्रचालन और रख - रखाव की स्वयं व्यवस्था करेगा अथवा किसी एजेंसी के द्वारा इस कार्य को अजाम देगा, ताकि ठोस कचरे के विभिन्न घटकों का अनुकूलतम उपयोग किया जा सके। इसके लिए निम्नांकित प्रौद्योििकयों सहित उपयुक्त प्रौद्योगिकी अपनाई जाएगी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा समय समय पर जारी दिशा-निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानको का अनुपालन किया जायेगाः-

(क) ढुलाई की लागत और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को निम्नवत रखने के लिए विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी , जैसे : बायो-मिथेनेशन, माइक्रोवियल कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग , एनायरोबिक डाइजेशन अथवा जैव अपघटीय कचरे की जैव-स्थिरता के लिए कोई अन्य उपयुक्त प्रोसेसिंग पद्धति;

(ख) केंद्रीकृत स्थलों पर स्थित मध्यम / बडे कम्पोस्टिंग/ बायो-मिथेनेशन प्लांटो के जरिए ;

(ग) कचरे से ऊर्जा प्रक्रियाओं के जरिए , ठोस कचरा अधारित बिजली संयंत्रो को कचरे के ज्वलनशील अंश के लिए रिफ्यूज डेराइव्य ईधन के रुप में अथवा फीड स्टॉक आपूर्ति के रुप में ईधन प्रदान करते हुए :

(घ) निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन प्लांटों के जरिए ।

(ii ) नगर पालिका रिफ्यूज डेराइव्य फ्यूल (आरडीएफ) की खपत के लिए बाजार सृजित करने का प्रयास करेगा ।

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भाग 8 ]

(iii) कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट में सीधे भस्मीकरण के लिए कचरे का पूर्ण पृथक्करण अनिवार्य होगा और ऐसा करना सम्बद्ध अनुबंधो की कार्यशर्तों का हिस्सा होगा ।

(iv) नगर पालिका सुनिश्चित करेगा कि कागज , प्लास्टिक, धातु, कांच, कपडा आदि रीसाइकिल योग्य पदार्थ रीसाइकिल करने

वाली अधिकृत एजेंसियों को भेजा जाए । * 9. ठोस कचरे की प्रोसेसिंग के लिए अन्य दिशा-निर्देशः-

(i ) नगर पालिका सभी निवासी कल्याण संगठनों, समूह आवास समितियों, बाजारों, द्वारबंद समुदायों और 5000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र रखने वाले संस्थानों, सभी होटलो एवं रेस्त्राओं, बैक्वेट हालों और इस तरह के अन्य स्थलों पर यथासंभव कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मिथेनेशन के जरिए जैव अपघटीय कचरे वाले अन्य कचरा उत्सर्जकों को भी जैव अपघटीय कचरे की स्व-स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।

(ii) नगर पालिका यह नियम प्रवृत्त करेगा कि सब्जी, फल, मांस, पोल्ट्री और मछली व्यापार मंडियां अपने जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग करते समय स्वच्छ स्थितियां बनाए रखना सुनिश्चित करें ।

(iii) नगर पालिका यह नियम प्रवृत्त करेगा कि बागवानी , उद्यानों और पार्को से उत्सर्जित कचरे का निपटान अलग से यथासंभव पार्को और उद्यानों में ही किया जाए ।

(iv) नगर पालिका कचरा प्रबंधन में समुदाय को शामिल करने और घर पर ही कम्पोस्टिंग , बायो गैस उत्पादन, सामुदायिक स्तर पर कचरे की विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करेगा । परंतु ऐसा करते समय बदबू को नियंत्रित रखना और तत्संबंधी यूनिट के आसपास स्वच्छता स्थितियां बनाए रखना अनिवार्य हागा ।

अध्याय-7 ठोस कचरे का निपटान

10. ठोस कचरे का निपटान

नगर पालिका अवशिष्ठ कचरे और गलियों में झाडू लगाने से उत्सर्जित कचरे तथा नालियों से निकलने वाली गाद का निपटान एसडब्ल्यूएम नियमों के अंतर्गत निर्धारित ढंग और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून द्वारा लागू किए गए किसी अन्य दायित्व के अनुरुप करने के लिए स्वयं अथवा किसी अन्य एजेंसी के जरिए सेनिटरी लैंडफिल और सम्बद्ध ढाचे का निर्माण, प्रचालन और रख-रखाव करेगा ।

अध्याय-8

इस्तेमालकर्ता शुल्क और स्थल पर ही जुर्माना / दंड लगाना

11. ठोस कचरे का संग्रहण, दुलाई, निपटान के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्कः-

(क) कचरा उर्त्सजकों से कचरा संग्रहण, दुलाई और निपटान हेतु सेवाएं प्रदान करने के लिए नगर पालिका द्वारा इस्तेमालकर्ता शुल्क निर्धारित किया जाएगा । इस्तेमालकर्ता शुल्क की दरें अनुसूची-1 में निर्दिष्ट है ।

(ख) कचरा उत्सर्जकों से निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली नगर पालिका अथवा मेयर/ नगर पालिका द्वारा अधिकृत एजेंसी या अधिकृत व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।

(ग) नगर पालिका इन उपनियमों की अधिसूचना की तारीख से 3 माह के भीतर, इस्तेमालकर्ता शुल्क लगाने के प्रयोजन के लिए कचरा उत्सर्जन का डाटाबेस तैयार करेगा और इस्तेमालकर्ता शुल्क की बिंलिग/ संग्रह/ वसूली के लिए समुचित व्यवस्था विकसित करेगा । डाटाबेस को नियमित रुप से अद्यतन बनाया जाएगा ।

(घ) नगर पालिका ऑनलाइन भुगतान के सहित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली के लिए विभिन्न पद्धतियां अपनाएगा । (ड) इस्तेमालकर्ता वसूली के लिए महीने में विशेष दिन निर्धारित किए जाएंगे , जिसमें प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह को वरीयता दी जाएगी।

( च) वार्षिक और छमाही भुगतान की प्रणाली अपनाई जाएगी। यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क समूचे वर्ष के लिए अग्रिम अदा किया जाता

है, तो ऐसे में 12 महीने के बाजए 10 महीने का शुल्क लिया जाएगा । इसी प्रकार यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली का भुगतान 6 महीने के लिए किया जाता है तो शुल्क की मांग की राशि छह महीने के बजाये साढे पांच महीने के लिए वसूल की जाएगी । (

छ) अनुसूची 1 में वर्णित इस्तेमालकर्ता शुल्क प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 10 प्रतिशत बढ जाएगा ।

(ज) इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक सामान्य या विशेष आदेश के जरिए अधिकृत संस्थान / व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।

(झ) इस्तेमालकर्ता शुल्क के भुगतान में चूक होने के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा चूककर्ता से उसकी वसूली भू- राजस्व के बकाये की भाँती वसूल की जायेगी ।

12. एसडब्ल्यूएम नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना/ दंड:-

(क) एसडब्ल्यूएम नियमों अथवा इन उप-नियमों के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन अथवा अनुपालन करने में विफलता के लिए इन उप-नियमों के परिशिष्ट में दी गई अनुसूची 2 में वर्णित अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा ।

(ख) उपरोक्त खंड (क) में वर्णित अनुसार उल्लंघन या गैर-अनुपालन की स्थिति बार बार आने पर ऐसी प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना प्रतिदिन या महीना, जो भी लागू हो. के अनुसार लगाया जाएगा ।

698

[भाग 8- उत्तराखण्ड गजट , 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

(ग) जुर्माना या दंड लगाने हेतु निर्दिष्ट/ प्राधिकृत अधिकारी नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी ,वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी, अधिशासी अभियंता, स्वास्थ्य निरिक्षक, कर निरिक्षक, सब इन्स्पेक्टर, चौकी, थाना प्रभारी होगें तथा जिला मजिस्ट्रेट एवं महापौर सामान्य या विशेष आदेश के अधीन अन्य अधिकारियों को भी नामित कर सकते हैं । जुर्माना / दंड राशि अनुसूचि 2 में दी गई है ।

(घ) अनुसूची 2 में वर्णित जुर्माना अथवा दंड राशि प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 5 प्रतिशत बढ जाएगी ।

(ड) निर्दिष्ट/ प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जुर्माना मौके पर लगाया और वसूल किया जाएगा । जुर्माने का भुगतान मौके पर जमा न करने में उक्त धनराशी भू- राजस्व के बकाये की भांति वसूल की जायेगी एवं मामले में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित अभियोजन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी ।

अध्याय-9

प्रतिभागियों के दायित्व

13. कचरा उत्सर्जकों के दायित्वः-

(i ) कूडा फेकने पर पाबंदी

(क) किसी सार्वजनिक स्थल पर कूडा फैलाना अधिकृत सार्वजनिक या निजी कूडादानो के सिवाय कोई व्यक्ति किसी सर्वाजनिक स्थल पर कूडा नही फैलाएगा । कोई व्यक्ति विशेष प्रयोजन के लिए प्रावधान किए गए सार्वजनिक केंद्रों या सुविधाओं को छोडकर किसी सार्वजनिक स्थल पर वाहनों की मरम्मत , बर्तन या कोई अन्य उपकरण धोने / साफ करने का काम नही करेगा या किसी प्रकार का संग्रहण नहीं करेगा ।

(ख) किसी संपत्ति पर कूडा फैलाना अधिकृत निजी अथवा सार्वजनिक कूड़ेदानों के सिवाय कोई व्यक्ति किसी मुक्त या रिक्त संपत्ति पर कूड़ा नही डालेगा ।

(ग) वाहनों से कूडा फेकना किसी वाहन के ड्राइवर या यात्री के रुप में कोई व्यक्ति किसी गली, सडक, फुटपाथ, खेल के मैदान, उद्यान , ट्रैफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थान पर कूडा नही फैकेगा ।

(घ) मालवाहक वाहन से गंदगी डालना कोई भी व्यक्त्ति तब तक किसी ट्रक या अन्य मालवाहक वाहन को नही चलाएगा, जब तक कि ऐसे वाहन का निर्माण और लदान इस प्रयोजन के लिए अधिकृत न किया गया हो ताकि सडक, फुटपाथ, खेल का मैदान, उद्यान , ट्रेफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलो पर कोई लोड, पदार्थ अथवा गंदगी डालने से रोका जा सकें ।

(ड) स्वयं/ पालतू पशुओं से गंदगी कुत्ता, बिल्ली आदि पालतू जानवरों के मालिकों का यह भी दायित्व होगा कि गली अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर ऐसे जानवरो द्वारा उत्सर्जित किसी प्रकार की गंदगी को तत्काल उठाएगा / साफ करेगा और इस तरह के उत्सर्जित कचरे के समुचित निपटान के लिए समुचित उपाय करेगा , जिनमें स्वयं की सीवेज प्रणाली से निपटान को वरीयता दी जाएगी ।

(च) नालियों आदि में कचरे का निपटान कोई व्यक्ति किसी नाली / नदी/ खुले तालाब/ जल निकायों में गंदगी नही डालेगा ।

(ii) कचरे को जलाना: सार्वजनिक स्थानों पर या निजी स्थान पर या निषेध सार्वजनिक संपत्ति पर ठोस कचरे के किसी भी प्रकार के जलाने द्वारा निपटान निषिद्ध होगा ।

(iii ) "स्वच्छ क्षेत्र": प्रत्येक व्यक्ति यह प्रयास करेगा कि उसके स्वामित्व या कब्जे वाले परिसर के सामने कोई भी सार्वजनिक स्थान अथवा आस पास का क्षेत्र स्वच्छ रहें । इन स्थानो में फुटपाथ और खुली नालियां/ गटर, सडक किनारा सामिल है, जो किसी भी तरह ठोस या तरल कचरे से मुक्त होने चाहिए ।

(iv) सार्वजनिक सभाओं और किसी कारण ( जुलूस, प्रर्दशनियां, सर्कस, मेले, राजनैतिक रैलियां , वाणिज्यक, धार्मिक, सामाजिक, सास्कृतिक कार्यक्रमों, विरोध प्रर्दशनो और प्रर्दशनो आदि सहित) से सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की जाने वाली गतिविधयों, जिनमें पुलिस विभाग और / या नगर पालिका से अनुमति अपेक्षित हो, के मामले में ऐसी गतिविधियों के आयोजनकर्ता का यह दायित्व होगा कि वह उस क्षेत्र और आस पास के क्षेत्रों की स्वस्च्छता सुनिश्चित करें ।

(v) ऐसे आयोजनो के मामले में आयोजक से नगर पालिका द्वारा अधिसूचित रिफंड योग्य स्वच्छता धरोहर राशि सम्बद्ध जोनल अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाएगी, जो कार्यक्रम की अवधी में उसके पास जमा रहेगी । यह जमा राशि कार्यक्रम पूरा होने के बाद रिफंड की जाएगी लेकिन उससे पहले यह जांच की जाएगी कि उक्त सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता बहाल कर दी गई हैं । यह धरोहर राशि सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता के लिए होगी और इसमें संपत्ति को पहुंचाई गई किसी भी प्रकार की क्षति का हर्जाना नही होगा । यदि आयोजनकर्ता, कार्यक्रम के आयोजन के परिणाम स्वरुप उत्सर्जित कचरे की सफाई, संग्रहण और ढुलाई में नगर पालिका की सेवाए प्राप्त करना चाहते हो, तो उन्हे नगर पालिका के सम्बद्ध जोनल अधिकारी को आवेदन करना होगा तथा इस प्रायोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किया गया अपेक्षित शुल्क जमा करना होगा ।

(vi ) खाली प्लांट पर ठोस कचरा डम्प करने और गैर- निर्दिष्ट स्थानों पर निर्माण और विध्वंस कचरा डाले जाने की स्थितियों से नगर पालिका निम्नांकित ढंग से निपटेगा:-

(क) नगर पालिका किसी परिषर के मालिक/ अधिभोगी को नोटिस भेज सकता है, जिसमें ऐसे मालिक/ अधिभोगी से उक्त परिसर पर डाले गए किसी भी प्रकार के कचरे को नोटिस में वर्णित तरीके और समय सीमा के भीतर हटाने को कहा जाएगा ।

699 उत्तराखण्ड गजटं , 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

भाग 8 ]

(ख) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाएं पूरी करने में विफल रहता है, तो ऐसे व्यक्ति को समय समय पर निर्धारित दंड का भुगतान करना होगा ।

(ग) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाओ का अनुपालन करने में विफल रहता है तो नगर पालिका निम्नांकित कार्यवाई कर सकता है:-

(i ) ऐसे परिसर में प्रवेश कर कचरे को साफ करना, और (पप) अधिभोगी से कचरा साफ करने पर किए गए व्यय को वसूल करेंगा ।

(vii ) डिस्पोजेबल उत्पादों और सेनिटरी नेपकिन तथा डायपर्स के विनिर्माताओं या मालिकों का दायित्व:

(क) डिस्पोजेबल उत्पादो जैसे टिन, काच, प्लास्टिक पैकेजिंग आदि के सभी विनिर्माताओं अथवा नगर पालिका के अधिकारी क्षेत्र में आने वाले बाजारो में ऐसे उत्पाद प्रारंभ करने वाले ब्रैड मालिकों को कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए नगर पालिका को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी । नगर पालिका इस प्रावधान के लिए केन्द्र सरकार / राज्स सरकार के सम्बद्ध विभागों के साथ समन्वय कर सकती है ।

(ख) ऐसे सभी ब्रैड मालिको को, जो गैर- जैव अपघटीय पैकेजिंग सामग्री में अपने उत्पाद बेचते या विपणन करते हैं, उन्हे ऐसी प्रणाली कायम करनी होगी , जिसमें उनके उत्पादन के कारण उत्सर्जित पैकेजिंग कचरे को वापस लिया जा सके ।

(ग) सेनिटरी नेपकिन और डायपर्स विनिर्माता या ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां इस बात की संभावनाओं का पता लगाएंगी कि उनके उत्पादो में सभी रीसाइकिल योग्य पदार्थों का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है अथवा वे अपने सेनिटरी उत्पादों के पैकेट के साथ एक ऐसा पाउच या रैपर उपलब्ध कराएंगी , जिनसें नेपकिन या डायपर का निपटान किया जा सके ।

(घ) ऐसे सभी विनिर्माता , ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां अपने उत्पादों की रैंपिग और डिस्पोजल के लिए लोगो को शिक्षित करेगी ।

14. नगर पालिका के दायित्व:

(1) नगर पालिका अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले भूभाग में सभी साझा गलियों/ मार्ग, सार्वजनिक स्थलों, अस्थाई बस्तियों, मलिन क्षेत्रों, बाजारों, स्वयं के उद्यानों, बागों, नालियों आदि की सफाई की नियमित प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी । वह इसके लिए मानव संसाधन और मशीने लगाएगा तथा घोषित संग्रहण कंटेनर से कचरा एकत्र करने और उसे हर रोज बंद वाहनों में अंतिम निपटान स्थल तक पहुंचाने के लिए बाध्य होगा, जिसके लिए नगर पालिका अपने सफाई स्टाफ और वाहनों के अलावा, अनुबंध के आधार पर प्राइवेट पार्टियों को काम पर लगा सकता है, अथवा सरकारी- निजी भागीदार व्यवस्था का सहारा ले सकता है । इसके अतिरिक्त नगर पालिका सभी वाणिज्यक क्षेत्रों ऐसे वाणिज्यक क्षेत्रो की पहचान करेगा , जिनमें दिन में दो बार झाडू लगाने की आवश्यता हों ।

(ii ) नगर पालिका अथवा उसके द्वारा संलग्न अधिकृत एजेंसी सार्वजनिक मार्गों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, धार्मिक स्थलों और वाणिज्यिक क्षेत्रो आदि के आसपास पर्याप्त संख्या में और पर्याप्त आकार के कूड़ेदानों का रख रखाव करेगा ।

(iii) नगर पालिका विकेंद्रीकृत और नियमित ढंग से ठोस कचरा प्रबंधन गतिविधियों के प्रयोजन के लिए प्रत्येक वार्ड में एक वार्ड अधिकारी निर्दिष्ट करेगा, ताकि वह कंटेनरों, सार्वजनिक शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों अथवा सर्वाजनिक स्थलो पर बने पेशाबघरों, सर्वाजनिक कचरे के लिए बनाए ट्रांसफर स्टेशन , लैडफिल प्रोसेसिंग यूनिटों आदि स्थानो की निगरानी रख सके ।

(iv) सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरे के प्रथक्करण, संग्रह, दुलाई, प्रसंस्करण और निपटान कार्यों की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जिसमें कम से कम अपर नगर आयुक्त या समकक्ष रैंक के अधिकारियों को वरीयता दी जाएगी ।

S (v) प्रत्येक वार्ड निर्धारित मानदंड के आधार पर स्वीपिंग बीट्स में विभाजित किया जाएगा और उसमें तदनुरुप कार्मिक तैनात किए जाएंगे या वर्तमान तैनाती सुक्तिसंगत बनाया जाएगा तथा अद्यतन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए उनके काम पर निगरानी रखी जाएगी । नगर पालिका जहां कही अपने स्टाफ से स्वीपिंग कराने में असर्मथ होगा, तो वह अनुबंध के जरिए बाहरी एजेंसियों से यह काम करा सकती हैं । प्रत्येक बीट का निरीक्षण दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित दैनिक आधार पर सुपरवाइजिंग अधिकारियों द्वारा किया जाएगा ।

(vi ) नगर पालिका अद्यतन सडक / गली क्लिनिंग मशीनों, मैकेनिकल स्वीपरो अथवा उपकरणों का इस्तेमाल करेगा, जिनसे झाडू लगाने और नालियों की सफाई की सक्षमता में सुधार होगा ।

(vii) नगर पालिका सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान के माध्यम से जागरुकता और संवेदनशीलता पैदा करेगा तथा कचरा उत्सर्जको और अन्य हितभागियो को एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप- नियमों के विभिन्न प्रावधानों के बारे में प्रशिक्षित करेंगा , जिसमें इस्तेमालकर्ता शुल्क और जुर्माना/ दंड संबंधी प्रावधानो की जानकारी पर विशेष बल दिया जाएगा ।

(viii) नगर पालिका कचरा उत्सर्जकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे गीले कचरे का स्त्रोत पर ही उपचार करे । नगर पालिका विकेंद्रीकृत प्रौद्योगिकियों, जैसे बायो- मिथेनेशन, कम्पोस्टिंग आदि अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर सकता है । इन प्रोत्साहनों में परिवारों, निवासी कल्याण संगठनो और संस्थानों आदि को पुरस्कृत और सम्मान प्रदान करना , उनके नाम सम्बद्ध वेबसाइटों में प्रकाशित करना अथवा संपत्ति कर आदि में छूट प्रदान करना शामिल हो सकते है ।

(ix) नगर पालिका स्वयं द्वारा रख रखाव किए जा रहें सभी पार्को, उद्यानों और जहां कही संभव हो, अपने अधिकार क्षेत्र वाले अन्य स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग समाप्त करेगा और उनमें कम्पोस्ट का इस्तेमाल करेगा । अनौपचारिक कचरा रीसाइकलिंग क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले रीसाइकलिंग उपायों के लिए प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा सकते है ।

(x) नगर पालिका ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों को सुचारु और औपचारिक बनाने के उपाय करेगा और यह प्रयास करेगा कि कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों (कचरा बीनने वालों) को वरीयता दी जाए, ताकि उनके कार्य स्थितियों को उन्नत बनाया जा सके और उन्हे ठोस कचरा प्रबंधन की औपचारिक प्रणाली में समाहित एवं एकीकृत किया जा सकें ।

700

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई ० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

[भाग 8

(xi) नगर पालिका यह सुनिश्चित करेगा कि स्वच्छता सेवा के सुविधा प्रदाता द्वारा अपने उन श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सहित वर्दी, फ्लोरेसेंट जैकेट, दस्ताले, रेनकोट, समुचित फुटवेयर और मास्क प्रदान किए जाएं, जो ठोस कचरा परिचालन कार्य करते है और यह भी कि ऐसे श्रमिकों द्वारा इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए ।

*(xii) नगर पालिका कचरे के संग्रहण , परिवहन और परिचालन में शामिल स्वयं और बाहरी एजेंसी के स्टाफ की व्यवसायिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत संरक्षा के उपयुक्त और समुचित उपकरण प्रदान करेगा ।

(xiii) किसी ठोस कचरा प्रोसेसिंग या उपचार या निपटान केंद्र अथवा लैंडफिल साइट पर कोई दुर्घटना होने की स्थिति में, उस केंद्र का प्रभारी अधिकारी तत्काल नगर पालिका को रिर्पोट करेगा, जो स्थिति की समीक्षा करने के बाद उस केंद्र के प्रभारी अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी करेगा ।

(xiv) नियमित जांच: महापौर, उपमहापौर द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी वार्ड के विभिन्न भागों और ठोस कचरे के संग्रहण , दुलाई, प्रोसेसिंग और निपटान से संबंधित अन्य स्थानों की नियमित जांच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप- नियमों के विभिन्न प्रावधानों का पालन हो रहा हैं ।

(xv) नगर पालिका अपने मुख्यालय में कॉल सेंटर की स्थापना के जरिए सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरएस) विकसित करेगा । इस पीजीआरएस में एसएमएसमएस आधारित सेवा, मोबाइल अप्लीकेशन अथवा वैब आधारित सेवाएं शामिल हो सकती हैं।

(xvi) नगर पालिका एसडब्ल्यूएम नियमों और उप- नियमों के कार्यान्वयन से सम्बद्ध कर्मचारियों की उपस्थिकत दर्ज करने के लिए कार्ड प्रोद्योगिकियों/ आईसीटी प्रणाली कायम करेगा तथा ऐसी प्रणाली को वेतन/ दिहाडी/ परिश्रमिक के साथ एकीकृत करने के प्रयास करेगा ।

(xvii ) पारदर्शिता और सर्वाजनिक पहुच अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नगर पालिका अपनी वेबसाइट से सारी आवश्यक सूचनाऐ प्रदान करेगा।

(xviii) नगर पालिका एसडब्ल्यूएम नियमों में वर्णित सभी अन्य दायित्व पूरे करेगा, जो इन उपनियमों में विशेष रुप से उल्लिखित नहीं किए गये हैं ।

अध्याय -10

विविध

15. इन उपनियमों की व्याख्या या कार्यान्वयन में कोई संदेह या कठिनाई आने की स्थिति में उसे महापौर, नगर पालिका के समक्ष रखा जाएगा, जिसका निर्णय ऐसे मामले में अंतिम होगा । '

16. सरकारी निकायों के साथ समन्वय नगर पालिका अन्य सरकारी एजेंसियों और प्राधिकरणों के साथ समन्वय करेगा, ताकि इन उपनियमों का अनुपालन ऐसे निकायों के अधिकार क्षेत्र या नियंत्रण में आने वाले इलाकों सुनिश्चित किया जा सके । कोई कठिनाई होने की स्थिति में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा ।

17. सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 और इन उप-नियमों के समुचित कार्यान्वयन के लिए समय समय पर सामान्य याविशेष आदेश जारी कर सकते हैं

इस्तेमालकर्ता शुल्क/ प्रभार का भुगतान मांग जारी होने से 30 दिन के भीतर न किए जाने की स्थिति में इस्तेमालकर्ता शुल्क/ प्रभार पर 10 प्रतिशत की दर से विलंम भुगतान / प्रभार (एलपीएससी) लगाया जाएगा ।

अनुसूची-2

जुर्माना/दंड

क्र

अपराध

निम्नांकित पर लागू

नियम/उप नियम संख्या

सं

प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना (रुपये में) 1.

आवासीय

बल्कजन्रेटर

200 500

10,000

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(1)(क)

कचरे को पृथक करने और संग्रह करने तथा पृथक्कृत कचरे को इन नियमों के अनुसार सौपने में विफल रहना

5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले विवाह/ पार्टी हाल, फेस्टिवल हाल, पार्टी लान, प्रदर्शनी और मेले स्थल

5000

5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले क्लबों, सिनेमाघरों , पब्स, सामुदायिक हॉल , मल्टीप्लेक्सेज और अन्य ऐसे स्थान

500

5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले अन्य गैर- आवासीय स्थान

500

फिस, मीट विक्रेता द्वारा कूडे को पृथ्थकरण तरीके से न रखना 701 भाग 8 ]

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर , 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

उल्घनकर्ता

1.कूडा

सडक/ गली में फैकना, थूकना

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2)

200से 500 एवं कार्यवाही उत्तराखण्ड कूडा फेकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम 2016 के अन्तर्गत होगी ।

500

2.नहाना,पैशाब करना, जानवरो को चारा खिलाना, कपडे धोना, वाहन धोना, गोबर नाली में बहाना

2.

आवासीय

एसडब्ल्यूएम       नियमानुसार सेनिटरी कचरे का                                        200
नियमों का नियम    निपटान करने में विफल रहना ।
4(1)(ख) और (घ)    नियम के अनुसार बागवानी और
                  उद्यान कचरे के निपटान में      गैर-आवासीय / बल्क जन्रेटर          500
                 विफल रहना ।

3.

आवासीय

एसडब्ल्यूएम       नियम के अनुसार निर्माण और                                         1000
नियमों का नियम    विध्वंस कचरे के निपटान में
4(1)(ग)           विफल रहना ।                    गैर-आवासीय/ बल्क जन्रेटर           5000

4.

उल्लंघनकर्ता

        एसडब्ल्यूएम       ठोस कचरे को खुले में जलाना                                        5000
        नियमों का नियम
       4(2) , 15(2) ,
5.      एसडब्ल्यूएम       निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित        10,000
        नियमों का नियम    किए बिना किसी गैर              करने वाले व्यक्ति अथवा ऐसा व्यक्ति
        4(4)              लाइसेंसीकृत स्थल पर 100        जिसकी ओर से ऐसा कार्यक्रम या
                          व्यक्तियों से अधिक की भागीदारी सभा आयोजित की गई हो और इवेंट
                          के साथ कार्यक्रम या सभा का     मैनेजर यदि कोई हो, जिसने कार्यक्रम
                         आयोजन करना                      या सभा आयोजित की हो
6.

उल्लंघनकर्ता

200

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(5)

नियम के अनुसार कचरे का निपटान करने में विफल रहने वाले गली विक्रेता/ वेन्डर कूडादान न रखने एवं कूडे को पृथ्थकरण न करने, अपशिष्ट भण्डारन डिपो या पात्र या वाहन में डालने में विफल रहने पर

7.

अपराधी

500

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2), 15(छ)

सार्वजनिक स्थलो, सडका, गलियों आदि में गंदगी फैलाना/ कुत्ते / अन्य जानवरो द्वारा मल त्याग / उत्सर्जित कचरे के निपटान में विफलता

निम्नांकित उल्लंघनों के लिए महीने में केवल एक बार जुर्माना लगाया जाएगा

नियमों के

8.

10,000

अनुसार कचरे का निपटान में विफलता

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(6)

निवासी कल्याण एसोसिएशन, आर . डब्ल्यूए

20,000

बजार एसोसिएशन,संघ

9.

10,000

द्वारबंद समुदाय

नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता

संस्थान

20,000

एसडब्ल्यूएम नियमों कानियम 4(7) 702

उत्तराखण्ड गजट, 17 दिसम्बर, 2022 ई० (अग्रहायण 26, 1944 शक सम्वत्)

10.

एसडब्ल्यूएम नियमों कानियम 4(8)

[भाग 8

50,000

नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता

11. एसडब्ल्यूएम नियमों कानियम 17(2)

होटल रेस्टोरेंट

20,000

विनिर्माता और/ या ब्रॉड

ऑनर / स्वामी

उत्पादन के कारण सृजित पैकेजिंग कचरे को वापस लेने की प्रणाली कायम किये बिना डिस्पोजल उत्पादों की बिक्री अथवा विपणन

12.

50,000

नियमों के अनुसार उपाय करने में विफलता

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 17(3)

13

एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 15 य (ङ)

विनिर्माता और ब्रॉड स्वामी और विपणन कुपनियां

50,000

उल्लंघनकर्ता, ग्रुप हाउसिंग सोसाईटि या मॉर्केट काम्पलेक्स आदि

नियमों के उपाय करने, भवन योजना में अपशिष्ट संग्रहण केन्द्र स्थापित करने में विफलता

14

एसडब्ल्यूएम नियमों कानियम 20(ग)

1000

उल्लंघनकर्ता /पर्यटक वाहन/चालक

गलियों , पहाडियों, सार्वजनिक स्थलो में अपशिष्ट यथा कागज, पानी की बोतल, शराब की बोतल, सोफ्ट ड्रिक, कैन, टैट्रा पैक अन्य कोई प्लास्टिक या कागज अपशिष्ट को फैकने पर 15

एसडब्ल्यूएम नियमों कानियम 20(घ)

1000

उल्लंघनकर्ता/ होटल / अतिथिग्रह स्वामी

नगर पालिका की उप विधि को होटल/ अतिथिग्रह में बोर्ड लगाकर व्यवस्था करने में विफलता

16

आयोजनकर्ता

5000

सार्वजनिक सभाओं (जलूस

प्रर्दशिनियों,

सर्कस,मेले,राजनैतिक

रैलिया, वाणिजिक, धार्मिक, सास्कृतिक कार्यक्रमों, विरोध प्रर्दशन आदि सहित से सार्वजनिक स्थलो पर आयोजित गतिधियों के क्षेत्र एवं आस-पास के क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करने में विफलता

पी०एस० बोरा , अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, धारचूला (पिथौरागढ)

राजेश्वरी देवी, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, धारचूला (पिथौरागढ)

पी०एस०यू० (आर० ई० ) 51 हिन्दी गजट / 725-भाग 8-2022 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।

Cite this issue. Uttarakhand Gazette, Government of Uttarakhand, 17 December 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand.2022-12-17.19069/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand.2022-12-17.19069.