Servants of Knowledge
Uttarakhand Gazette · Government of Uttarakhand

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Published 02 September 2023

Notification no.
29197
Issued By
RADHA RATURI(Addl Chief Secretary)
Identifier
in.gazette.uttarakhand.2023-09-02.29197
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजीकरण संख्या- UA/DO/ DDN/ 30 /2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की

खण्ड-24] रुड़की, शनिवार, दिनांक 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्) [संख्या-35

विषय-सूची

प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग -अलग दिये गए हैं , जिससे उनके अलग -अलग खण्ड बन सकें

विषय

वार्षिक चन्दा

पृष्ठ संख्या

रु० सम्पूर्ण गजट का मूल्य

3075

1500

677-704

भाग 1 -विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान- नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

भाग 1 -क-नियम, कार्य- विधियां, आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

397-398

1500

975 भाग 2-आज्ञाएं , विज्ञप्तियां, नियम और नियम विधान , जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण

975 भाग 3-स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़ - पत्र , नगर प्रशासन , नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया

975 भाग 4- निदेशक , शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड

975 भाग 5- एकाउन्टेन्ट जनरल, उत्तराखण्ड

975 भाग 6-बिल , जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

भाग 7- इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

975 भाग 8- सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

521-538

975

स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़- पत्र आदि

1425

677-क 678

उत्तराखण्ड गजट , 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

गृह अनुभाग -1

विज्ञप्ति/ पदोन्नति

17 अगस्त, 2023 ई ०

ई-पत्रावली संख्याः 29197- भारतीय पुलिस सेवा, उत्तराखण्ड संवर्ग के अधिकारी श्री अजय गणपति कुम्भार, आई.पी.एस.-2018 को तत्काल प्रभाव से वरिष्ठ वेतनमान (वेतन मैट्रिक्स में स्तर-11 ) के पद पर पदोन्नति प्रदान किये जाने की, श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है ।

आज्ञा से, राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव ।

तकनीकी शिक्षा विभाग

विज्ञप्ति

19 जुलाई , 2023 ई ०

संख्या 884 / XLI - A/2023-100/17/E-39194- प्राविधिक शिक्षा विभाग के निम्नलिखित अधिकारी / कार्मिक उनके नाम के सम्मुख अंकित तिथि को 60 वर्ष की अधिवर्षता की आयु पूर्ण करने के पश्चात् वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-2 भाग-2 से 4 के मूल नियम 56 (क) के प्राविधानानुसार सेवानिवृत्त हो जायेंगेः-

क्र.सं. कार्मिक का नाम पद नाम

संस्था का नाम

जन्मतिथि सेवानिवृत्ति की तिथि

01 श्री राजेन्द्र प्रसाद निदेशक

01.06.1964

31.05.2024

प्रावधिक शिक्षा निदेशालय उत्तराखण्ड,

श्रीनगर गढवाल

31.08.2023

15.08.1963

02

प्रधानाचार्य

श्री सुरेन्द्र कुमार ध्यानी

राजकीय पॉलीटेक्निक , नई

टिहरी

31.07.2023

25.07.1963

चन्द्र विभागाध्यक्ष, सिविल

03 श्री उमेश जोशी

राजकीय पॉलीटेक्निक,

द्वाराहाट ,अल्मोड़ा

31.03.2024

07.03.1964

सिंघल 04 श्री सुनील कुमार

विभागाध्यक्ष, सिविल

राजकीय पॉलीटेक्निक,

रानीपोखरी, देहरादून

30.04.2024

12.04.1964

05 श्रीमती मीना अदलखां

विभागाध्यक्ष, एम.ओ. एम.एस.पी.

राजकीय पॉलीटेक्निक ,

द्वाराहाट, अल्मोड़ा

30.06.2024

30.06.1964

06 श्री राम नरेश सिंह सचान

राजकीय पॉलीटेक्निक,

पंतनगर, ऊधम सिंह नगर

प्रवक्ता, इलैक्ट्रानिक्स

रविनाथ रामन,

सचिव ।

भाग 1 ]

679 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत)

खाद्य , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले अनुभाग -1

अधिसूचना

26 जुलाई , 2023 ई०

संख्या 662 / XIX- 1/2023/ 16 खाद्य / 2012 -विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 14 की उप धारा (1 ) में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए कार्मिक विभाग उत्तराखण्ड शासन के स्थानान्तरण / तैनाती आदेश संख्या 114 /XXX- 1-2023 दिनांक 29 जून, 2023 के क्रम में श्रीमती रुचि मोहन रयाल , अपर सचिव, खाद्य , नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, उत्तराखण्ड शासन को एतद्वारा नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान विभाग, उत्तराखण्ड नियुक्त किया जाता है ।

बृजेश कुमार सन्त, सचिव ।

श्रम अनुभाग

अधिसूचना

04 अगस्त, 2023 ई०

संख्या 1/ 144110/VIII- 1/23-70(श्रम) /2001-11- रजिस्ट्रार जनरल , मा० उच्च न्यायालय , उत्तराखण्ड, नैनीताल के पत्र सं0-4011 / UHC/XXX - f- 1 /Admin.A/2010, दिनांक 27.07.2023 में की गयी संस्तुति के क्रम में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवादः अधिनियम-1947 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 28 वर्ष , 1947) (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त) के अधीन श्रमिकों के विवादों के निस्तारण करने हेतु उत्तर प्रदेश, श्रम न्यायालय / औद्योगिक न्यायाधिकरण अधिकारी (नियुक्ति और नियोजन की शर्तें) नियमावली-1996 (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त) एवं उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम-2000 की धारा-89 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड में दावों का निस्तारण करने हेतु निम्नवत तालिका में अंकित न्यायाधीश को उनके नाम के सम्मुख स्तम्भ 2 में वर्णित श्रम न्यायालय में पीठासीन अधिकारी के रूप में प्रचलित सामान्य शर्तों के अधीन नियुक्त किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं:-

क्र.सं. न्यायाधीश का नाम/ वर्तमान तैनाती का स्थल

नवीन तैनाती का स्थल

1 श्री शमशेर अली, अपर सचिव, विधायी एवं पीठासीन अधिकारी , श्रम न्यायालय , उत्तराखण्ड

कार्य,

सरकार, काशीपुर, जिला-ऊधमसिंहनगर ।

संसदीय देहरादून ।

आज्ञा से . शैलेश बगौली, सचिव ।

680

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनुभाग

अधिसूचना

09 अगस्त, 2023 ई ०

संख्या 1145/VII-3-23/04 (01 ) -एम 0 एस 0 एम 0ई0/2023 - एमएसएमई क्षेत्र के समावेशी विकास , अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के दृष्टिगत वर्तमान परिदृश्य और अनुमानित भविष्य के अनुरूप रोजगार सृजन एवं स्वरोजगार हेतु "सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति, 2023 " निम्नवत् प्रख्यापित किये जाने हेतु एतद्वारा श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं:-

1. प्रस्तावना-

राज्य की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का महत्वपूर्ण योगदान है । कृषि क्षेत्र के पश्चात सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र द्वारा सर्वाधिक रोजगार प्रदान किया जाता है । राज्य सरकार, प्रदेश में पूंजी निवेश तथा रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए कृत संकल्पित है । एमएसएमई सहित बृहत उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न नीतिगत व्यवस्थाओं के माध्यम से वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये गये हैं, परन्तु एमएसएमई क्षेत्र, में विशेष रूप से औद्योगिक रूप से पिछड़े पर्वतीय जिलों में बुनियादी ढांचे, क्रेडिट लिंकेज , विपणन की समस्या के कारण आशानुरूप प्रगति नहीं हो पाई है । अतः अन्य पड़ोसी राज्यों से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए, इस क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देकर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाना आवश्यक है । एमएसएमई क्षेत्र के समावेशी विकास को केन्द्रित तरीके से बढ़ावा देने के लिए एवं अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के दृष्टिगत वर्तमान परिदृश्य और अनुमानित भविष्य के अनुरूष, राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति -2023 घोषित की जा रही है ।

2. उद्देश्य-

उत्तराखण्ड को वैश्विक स्तर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों, विशेषकर स्टार्टप्स, स्थानीय कच्चेमाल पर आधारित उत्पाद, नवीकरणीय एवं हरित ऊर्जा तथा प्रदूषण मुक्त उद्योगों के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में प्रतिस्थापित करना, जो सुरक्षित, स्थायी और समावेशी हो और जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पादों के विनिर्माण के साथ- साथ रोजगार के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध हों ।

नए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की स्थापना के लिए पूंजी तक पहुंच बनाना, ताकि राज्य में अधिकतम निवेश आकर्षित कर अन्य प्रदेशों के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की जा सके ।

मौजूदा एमएसएमई के विस्तार, स्केलिंग-अप और विविधीकरण को प्रोत्साहित करना ।

नई तथा विद्यमान इकाइयों में अधिकाधिक रोजगार सृजन ।

उद्यमिता, रोजगार एवं प्रति व्यक्ति आय के मानकों पर क्षेत्रीय असमानताओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य व्याप्त असमानताओं को कम करने का प्रयास ।

राज्य में सूक्ष्म व लघु उद्यमों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों का अधिकतम लाभ ।

पूर्व से स्थापित इकाइयों के उन्नयन एवं उद्यमियों की समस्याओं के निराकरण के लिए उत्कृष्ट आधुनिक तकनीकी युक्त संवेदनशील प्रशासकीय व्यवस्था का निर्माण।

भाग 1 ]

681 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

3. रणनीति-

नीति के उद्देश्यों को साकार करने के लिए प्रदेश सरकार निम्नलिखित रणनीति के अनुरूप कार्य योजना का निर्माण करेगीः-

वर्तमान में विद्यमान उद्यमों के विस्तार एवं तकनीकी उन्नयन के लिये संसाधनों को उपलब्ध कराना, अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ करना एवं निर्मित उत्पादों के विपणन में सहायता प्रदान करना ।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के आसन्न विषयों को विशेष रूप से संबोधित करना और प्रक्रियाओं का सरलीकरण कर पूँजी और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करना ।

नवीन उद्यमों की स्थापना के लिए भूमि/ स्थान की उपलब्धता सुलभ बनाना, नवीन अवस्थापना सुविधाओं का विकास तथा विद्यमान अवसरंचनात्मक सुविधाओं का उन्नयन ।

सुगमता एवं सहजता के साथ व्यापार करने के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण का सृजन ।

पर्यावरण संतुलन के दृष्टिगत स्थाई तथा समावेशी विकास को प्रोत्साहन ।

गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन एवं मानकीकरण के लिये वित्तीय प्रोत्साहन एवं पुरस्कृत करना ।

नयी इकाईयों की स्थापना तथा विद्यमान इकाईयों के पर्याप्त विस्तारीकरण के लिये बैंक के माध्यम से लिये जाने वाले टर्म लोन पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर, राज्य में उद्यमों पर ऋण भार कम करना ।

निवेश के आकर्षण के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों की अनुमन्यता तथा उपादान प्रक्रिया का सरलीकरण ।

क्षेत्रीय असंतुलन की समस्या का समाधान करने की दिशा में सुदूर एवं पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यमों की स्थापना एवं उन्नयन के लिए विशेष प्रोत्साहन देना ।

समाज के विभिन्न वर्गों के मध्य असंतुलन को दृष्टिगत रखते हुए दिव्यांग, महिलाओं, अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन सुविधा प्रदान करना ।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के उत्पादों की गुणवत्ता विकास के लिए तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहन प्रदान करना ।

राज्य में अधिक सम्भावना वाले उत्पादों को अधिक प्रोत्साहन प्रदान करना ।

क्लस्टर के रूप में उद्यम स्थापना को प्रोत्साहन प्रदान करना ।

भारत सरकार के "एक जनपद एक उत्पाद" कार्यक्रम के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा प्रख्यापित "एक जनपद दो उत्पाद " नीति के तहत चिन्हित उत्पादों की पहचान बढ़ाना तथा राज्य में निर्मित उत्पादों को बाजार तक पंहुच बनाने के लिए "एक जनपद दो उत्पाद" के तहत चिन्हित उत्पादों एवं राज्य के "जीआई (Geographical Indication ) टैग " प्राप्त उत्पादों को विशेष प्रोत्साहन देना ।

भारत सरकार की योजनाओं और संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार की योजनाओं और संसाधनों के साथ अभिसरण (Convergence ) |

मुद्रा, स्टार्ट-अप इंडिया , स्टैंड -अप इंडिया, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना एवं भारत सरकार के अन्य मिशन मोड कार्यक्रमों एवं योजनाओं से समन्वय स्थापित करते हुए प्रदेश सरकार की योजनाओं का निर्माण करना ।

वैश्विक मान्यता के लिए उत्पाद ब्राण्डिंग " मेक इन उत्तराखण्ड" को प्रोत्साहित करना ।

682

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

4. परिभाषाएं-

i. राज्य से तात्पर्य , उत्तराखण्ड राज्य से है ।

ii. नीति से तात्पर्य, उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2023 से है ।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से तात्पर्य है, जैसा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम , 2006 तथा इसमें समय- समय पर हुए संशोधनों में परिभाषित किया गया है ।

वर्तमान में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 01.06.2020 से "सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006" में संशोधन करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम की परिभाषा में निम्नलिखित परिवर्तन किये हैं:-

क. सूक्ष्म उद्यम वह है जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में एक करोड़ रुपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार पांच करोड़ रूपये से अधिक नहीं होता है ।

ख. लघु उद्यम वह है जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में दस करोड़ रूपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार पचास करोड़ रूपये से अधिक नहीं होता है ।

ग. मध्यम उद्यम वह है जिसमें संयंत्र और मशीनरी अथवा उपस्कर में पचास करोड़ रूपये से अधिक का निवेश नहीं होता है तथा उसका कारोबार दो सौ पचास करोड़ रूपये से अधिक नहीं होता है ।

iv. विनिर्माणक/ उत्पादक उद्यमः विनिर्माणक / उत्पादक उद्यम से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है, जो उद्योग (विकास और विनियम) अधिनियम , 1951 की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी उद्योग से सम्बन्धित माल के विनिर्माण या उत्पादन में लगे हुए या अंतिम उत्पाद, जो एक सुभिन्न नाम या लक्षण या उपयोग रखता हो और जो अन्तिम उत्पाद के मूल्य वर्धन में संयंत्र और मशीनरी का उपयोग करता हो ।

V. स्टार्टअप का अर्थ उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति-2023 के अन्तर्गत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप से है तथा जिनका विनिर्माण उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ।

vi . जीआई टैग उत्पाद का अर्थ महानियंत्रक, पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क, उद्योग संवर्धन एवं आन्तरिक व्यापार विभाग, भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य क्षेत्र के उत्पादों हेतु जारी जीआई टैग पंजीकृत उत्पादों से है , जिनका विनिर्माण उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ।

vii. एक जनपद दो उत्पाद (ओडीटीपी) का अर्थ उत्तराखण्ड राज्य की एक जनपद दो उत्पाद योजना-2021 के तहत चिन्हित उत्पाद से है, जिनका विनिर्माण उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ।

viii. क्लस्टर से तात्पर्य एक सतत् निर्धारित भौगोलिक सीमा में स्थित, एक मूल्य श्रंखला से सम्बद्ध, एक समान उत्पाद/ पूरक उत्पाद / सेवा का उत्पादन करने वाले न्यूनतम 10 उत्पादक इकाईयों के समूह से है, जिनको समान भौतिक सुविधाओं / संसाधनों की आवश्यकता हो ।

ix. वाणिज्यिक उत्पादन की शुरूआत से तात्पर्य, इकाई में संयंत्र एवं मशीनरी/ उपस्कर का पूर्ण अधिष्ठापन करते हुये , परीक्षण उत्पादन के उपरान्त, स्थापित संयंत्र एवं मशीनरी का संचालन करते हुये वाणिज्यिक पैमाने पर उत्पादन प्रारम्भ करने से है ।

x. नई औद्योगिक इकाई का अर्थ एक ऐसी औद्योगिक इकाई से है , जिसने अपना वाणिज्यिक उत्पादन इस नीति के जारी होने की तिथि के बाद प्रारम्भ किया है ।

xi. विद्यमान उद्यम के पर्याप्त विस्तारीकरण का अर्थ एक ऐसी औद्योगिक इकाई से है, जिसने इस नीति के जारी होने की तिथि से पूर्व ही वाणिज्यिक उत्पादन / प्रचालन प्रारम्भ कर लिया हो तथा विद्यमान इकाई द्वारा इस नीति के जारी होने के पश्चात् अपनी उत्पादन क्षमता में भाग 1]

683 उत्तराखण्ड गजट , 02 सित्तम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

विस्तारीकरण/विविधिकरण के उ‌द्देश्य से विद्यमान स्थायी पूंजी निवेश (भवन, संयंत्र व मशीनरी तथा उपस्कर) में न्यूनतम 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी किया हो तथा इससे इकाई की क्षमता में न्यूनतम 25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होती हो ।

xii. स्थायी पूंजी निवेशः एम०एस ० एम०ई० इकाइयों द्वारा भवन, संयंत्र व मशीनरी एवं उत्पादन कार्ये में संलग्न अन्य उपस्कर और इस तरह की अन्य परिसम्पत्तियों में किया गया निवेश, जों वाणिज्यिक उत्पादन से पूर्व , अंतिम उत्पाद (End Product ) के विनिर्माणः के लिए आवश्यकतानुसार किया गया हो , को निम्नानुसार स्थायी पूंजी निवेश के विनिर्धारण के लिए गणना में लिया जाएगाः-

क. भवनः भवन का तात्पर्य परियोजना के लिए निर्मित एक नया कार्यशाला भवन, जिसमें भण्डारण सुविधाओं और विनिर्माण प्रक्रिया से सम्बन्धित निर्मित अन्य भवन भी शामिल हैं । परियोजना लागत के अन्तर्गत नए कार्यशाला तथा अन्य औद्योगिक प्रयोजन हेतु निर्मित भवनों पर किये गये आवश्यक एवं वास्तविक व्यय की गणना निम्नानुसार की जाएगीः

i. संयंत्र और मशीनरी की स्थापना के लिए बनाया गया भवन,

ii. अनुसंधान एवं विकास (आर एण्ड डी) गतिविधियों के लिए बनाया गया भवन,

इन-हाउस परीक्षण सुविधाओं (टेस्टिंग फैसिलिटीज) के लिए बनाया गया भवन,

iv. भंडारण सुविधाओं और विनिर्माण प्रक्रिया से संबंधित अन्य गतिविधियों के लिए बनाए गए भवन,

अग्नि शमन तथा विद्युत पारेषण व्यवस्था कक्ष, V.

vi. जल संयोजन के लिए निर्मित टंकी ।

ख. प्लांट, मशीनरी एवं उपकरण (संयंत्र एवं मशीनरी): प्लांट और मशीनरी से तात्पर्य नए संयंत्र और मशीनरी , डाइज और मोल्ड्स और ऐसे अन्य उपकरणों से है, जो उत्पाद केविनिर्माण / प्रचालन के लिए सीधे उपयोग में लाये जाते हैं । परियोजना लागत के अन्तर्गत प्लांट और मशीनरी को स्थापित करने, संयंत्र व मशीनरी के संचालन के लिए आन्तरिक विद्युत लाईनों, स्विच बोर्ड, एमसीबी बॉक्स आदि पर किया गया व्यय, संयंत्र व मशीनरी की परिवहन लागत तथा बीमा व्यय भी सम्मिलित होगा । यदि संयंत्र व मशीनरी के संचालन के लिए विद्युत सब- स्टेशन अथवा ट्रांसफार्मर अधिष्ठापित किया जाता है, तो इनकी लागत भी विद्युतीकरण के अन्तर्गत आंगणित की जायेगी। प्लांट और मशीनरी में निम्नलिखित व्यय को भी सम्मिलित किया जा सकता है:-

i. गैर- पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के लिए संयंत्र ।

ii. बिजली उत्पादन के लिए कैप्टिव पॉवर प्लान्ट, गैर पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के संयंत्र, कैप्टिव पावर प्लांट को प्लान्ट एवं मशीनरी के रूप में लाभ हेतु तभी गणना में लिया जायेगा जब इनसे उत्पादित ऊर्जा का उपयोग इकाई द्वारा स्वयं के लिये किया जाये ।

iii . परीक्षण उपकरण (Testing Equipment ) |

iv. विनिर्माण उद्यम हेतु पानी की शुद्धि के लिए संयंत्र।

V. प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के लिए संयंत्र, जिसमें संग्रह, ट्रीटमेंट, अपशिष्ट/ उत्सर्जन या ठोस / गैसीय खतरनाक कचरे के निपटाने की सुविधा सम्मिलित है ।

vi. डीजल जनरेटर सेट्स और बॉयलर ।

vii . विनिर्माण उद्यम हेतु ईटीपी संयंत्र ।

xiii . खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अर्थ कृषि/ बागवानी उत्पादों के प्रसंस्करण (संयंत्र और मशीनरी का उपयोग करके) के बाद तैयार किए गए ऐसे मूल्यवर्धित उत्पादों से है जो उनके मूल भौतिक स्वरूप से भिन्न होते हैं, उनकी वाणिज्यिक उपयोगिता भी होती है और उन्हें खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग किया जा सकता है । जैसेः खाने या पकाने के लिए तैयार खाद्य 684

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

पदार्थ, खाद्य योजक ( Food Additive ) , परिरक्षक (Preservative ), रंग एवं सुगंध और दूध से विनिर्मित मूल्यवर्द्धित उत्पाद ।

xiv. सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पाद से तात्पर्य पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना सं० 459, दिनांक 12.08.2021 से यथा परिभाषित प्लास्टिक की मद से है, जिसके निपटान अथवा पुनर्चक्रण से पहले उसे एक ही प्रयोजन के लिये एक बार ही उपयोग किया जाना है ।

XV. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण से तात्पर्य पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना सं0 459, दिनांक 12.08.2021 से यथा परिभाषित ऐसी प्रक्रिया से है जिसके द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट को पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण, सह- प्रसंस्करण अथवा नये उत्पादों में परिवर्तन के प्रयोजन से है, जिसे प्रबंधित किया गया है ।

xvi सिंगल यूज प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्त्पाद से तात्पर्य ऐसे उत्पादों से है, जिसे उत्तराखण्ड शासन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनुभाग की अधिसूचना, सं0 374/V11-3- 23/04(01 )/एमएसएमई/2022 , दिनांक 22 फरवरी, 2023 के अनुलग्नक -1 में उल्लिखित किया गया है ।

xvii भट्ठी (Furnace) का अर्थ, धातु पिघलाने एवं किसी वस्तु को अत्यधिक गर्म करने के लिये उपयोग में आने वाले विशाल परिबद्ध धधकती आग से है ।

xviii अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ महिला/दिव्यांग के स्वामित्व वाली इकाईयों से तात्पर्य ऐसी इकाइयों से है , जो या तो पूर्ण रूप से इस श्रेणी के उद्यमियों के स्वामित्व की इकाई हैं अथवा साझेदारी या निगमित कम्पनी में इस श्रेणी के साझेदारों / निदेशकों की न्यूनतम अंशपूंजी 51 प्रतिशत अथवा इससे अधिक के हों ।

xix. प्राथमिकता श्रेणी उद्यम से तात्पर्य इस नीति के अंतर्गत प्रस्तर-6 (ब) में उल्लिखित विनिर्माणक उद्यम से है ।

xx. अति-प्राथमिकता श्रेणी उद्यम से तात्पर्य इस नीति के अंतर्गत प्रस्तर-6 (स) में उल्लिखित विनिर्माणक उद्यम से है ।

xxi. एंकर (Anchor ) उद्यम से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है , जिसमें संयंत्र एवं मशीनरी में न्यूनतम रू० 10 करोड़ का पूंजी निवेश एवं न्यूनतम 25 व्यक्तियों को स्थायी रोजगार दिया गया है तथा जिसके न्यूनतम 7 सहायक उद्यम, राज्य की सीमा में कार्यरत हैं ।

xxii सहायक (Ancillary) उद्यम से तात्पर्य ऐसे उद्यम से है, जो अपने कुल वार्षिक उत्पादन का न्यूनतम 50 प्रतिशत भाग की आपूर्ति, राज्य में स्थापित अपने एंकर उद्यम को करती है ।

xxiii स्थायी रोजगार का अर्थ पंजीकृत स्थापित उद्योगों में नियोक्ता द्वारा प्रबंधन/ कुशल/अकुशल श्रमिक वर्ग में नियमित रूप से नियोजित प्रदेश के स्थायी / मूल निवासी कर्मकरों / श्रमिकों से है, जिन्हें नियोक्ता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से वेतन/ मंजदूरी का भुगतान किया जाता है । ठेकेदारों के माध्यम से प्रदान किया जाने वाला रोजगार स्थायी रोजगार की श्रेणी में शामिल नहीं होगा ।

5. वित्तीय प्रोत्साहनों की अनुमन्यता के लिए क्षेत्रों का वर्गीकरण-

प्रदेश के जनपदों को भौगोलिक परिस्थितियों तथा इन जनपदों में हुए औद्योगिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए वित्तीय प्रोत्साहनों की अनुमन्यता हेतु निम्नांकित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है । यह वर्गीकरण स्थान, पड़ोसी राज्य की सीमा तथा बाजार से दूरी और क्षेत्र विशेष के आर्थिक विकास व पिछड़ेपन के आधार पर किया गया है:-

685 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर , 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

श्रेणी

सम्मिलित/आच्छादित क्षेत्र

श्रेणी-ए जनपद पिथौरागढ़ , उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, रूद्रप्रयाग व बागेश्वरं का सम्पूर्ण क्षेत्र ।

श्रेणी-बी जनपद अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल का सम्पूर्ण भू- भाग ।

जनपद टिहरी गढ़वाल का पर्वतीय बहुल भूभाग ।

जनपद नैनीताल (भीमताल, धारी, बेतालघाट, रामगढ़ , ओखलकाण्डा विकासखण्ड) तथा जनपद देहरादून (चकराता विकासखण्ड) ।

श्रेणी-सी जनपद टिहरी का मैदानी भाग (ढालवाला, तपोवन, मुनी की रेती एवं उससे जुड़े फकोट विकासखण्ड के मैदानी क्षेत्र) ।

जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

जनपद नैनीताल के कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

श्रेणी-डी जनपद हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर का सम्पूर्ण भू- भाग ।

जनपद नैनीताल के रामनगर, हल्द्वानी विकासखण्ड, नगर निगम हल्द्वानी, नगरपालिका लालकुआं, नगरपालिका रामनगर तथा कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र तथा देहरादून नगर निगम के क्षेत्र ।

6. वित्तीय प्रोत्साहनों की अनुमन्यता के लिए चिन्हित गतिविधियां/ क्रियाकलाप-

अ. विनिर्माणक क्षेत्र के अनुमन्य क्रियाकलाप / गतिविधियांः-

i. निषेध सूची में दिये गये उद्यमों को छोड़कर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के अन्य सभी

विनिर्माणक उद्यम।

. ii. गैर परम्परागत तरीके से ऊर्जा उत्त्पादन ।

निषेध सूचीः संलग्नक -1 (अ)

ब. प्राथमिकता श्रेणी के विनिर्माणक उद्यमः संलग्नक-1 (ब)

स. अति-प्राथमिकता श्रेणी के विनिर्माणक उद्यमः संलग्नक-1 (स)

7. संस्थागत व्यवस्थाएँ-

7.1 व्यापार करने में सुगमता, अनुकूल वातावरण का सृजन एवं संवेदनशील प्रशासन-

सरकार द्वारा बनायी गयी नीतियों व संचालित योजनाओं तथा कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन में तकनीकी रूप से सक्षम तथा संवेदनशील प्रशासनिक मशीनरी का महत्वपूर्ण योगदान है । अतः योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ किया जाएगा । कार्मिकों की तकनीकी क्षमता का विकास एवं उद्योग अनुकूल वातावरण (कन्ड्यूसिव इण्डस्ट्रियल इनवायरमेंट) हेतु अपेक्षित संवेदनशीलता का प्रवाह किया जाएगा । राज्य सरकार, जिला उद्योग केंद्रों में तकनीकी सुविधा प्रदान कर आधुनिकीकृत करेगी , जिससे कि परामर्श देने हेतु सक्षम हेल्पडेस्क, सिंगल विण्डो प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन एवं उद्यमों की परियोजना निर्माण आदि सेवायें सुचारू रूप से उपलब्ध करायी जा सकें । इस हेतु यथासम्भव . विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं प्राप्त की जायेंगी। इसके लिए जिला उद्योग केंद्रों के संरचनात्मक ढांचे में सुधार किया जाएगा, उन्हें उच्च गति इंटरनेट/ ब्रॉडबैण्ड से 686

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर , 2023 ई ० (माद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

जोड़ा जाएगा एवं वीडियो कांन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी । ईआरपी / विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से कार्यालय में प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन/ समस्या/ सुझाव को सूचीबद्ध किया जाएगा एवं उस पर की जा रही कार्यवाही का निरंतर ऑनलाइन पर्यवेक्षण किया जाएगा । विभाग की समस्त सेवायें यथासम्भव ऑनलाइन की जायेंगी ।

7.2 उद्योग निदेशालय एवं जिला उद्योग केन्द्र के स्तर पर एक समर्पित 'निबेश संवर्धन एवं सुविधा केंद्र' (आईपीएफसी) पहले से ही कार्य कर रहा है, जो निवेशकों/व्यवसायियों के लिए एक केंद्रीकृत वन- स्टॉप-शॉप के रूप में कार्य करते हुए समन्वित रूप से व्यवस्थित हैण्डहोल्डिंग सपोर्ट उपलब्ध करा रहा है । इन निवेश प्रोत्साहन एवं सुविधा केन्द्रों को प्रभावी बनाने के लिए अपेक्षित सभी संसाधन और उपकरण उपलब्ध कराये जायेंगे ।

7.3 महिला उद्यमियों तथा दिव्यांगों के लिए पृथक से हैल्पडेस्क सेवा उपलब्ध करायी जायेगी ।.

7.4 उद्यम प्रोत्साहन एवं इन्वेस्टर फैसिलिटेशन, जिला उद्योग केन्द्रों के प्रमुख कार्यों में सम्मिलित है । जहां उद्यम प्रोत्साहन के लिए प्रदेश के युवाओं में उद्यमशीलता का विकास करना नितांत आवश्यक है, वहीं इन्चेस्टर फैसिलिटेशन हेतु जिला उद्योग केन्द्रों को सक्षम बनाने के लिए समुचित मानव संसाधन भी आवश्यक है । इन दोनों उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रदेश सरकार एक योजनां/ कार्यक्रम लाएगी, जहां जिला उद्योग केन्द्रों की मानव संसाधन की आवश्यकता पूर्ति हेतु बैंक/ वित्तीय संस्थान, शासकीय विभागों के सेवानिवृत्त अनुभवी विशेषज्ञ कार्मिकों अथवा व्यावसायिक एवं तकनीकी, प्रबन्धन संस्थानों में अध्ययनरत / उत्तीर्ण छात्रों की यंग प्रोफेशनल/ इन्टर्न के रूप में अनुबन्ध के आधार पर अल्पकालिक सेवा में संविदा पर लिया जायेगा । इन्टर्नशिप के समय छात्र/ यंग प्रोफेशनल्स स्वयं भी उद्यम प्रारम्भ एवं संचालित करने की प्रक्रिया से परिचित होंगे, परिणामस्वरूप , उनके लिए यह इन्टर्नशिप एक व्यावहारिक उद्यमिता विकास कार्यक्रम ( EDP ) की तरह होगा तथा इस प्रकार जिला उद्योग केंद्र भविष्य के उद्यमियों के लिए एक नर्सरी के रूप में उभरेगा ।

7.5 विद्यमान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को विस्तारीकरण एवं विविधीकरण हेतु प्रोत्साहित करने के लिए कतिपय शर्तों के अधीन नई इकाइयों की तरह सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।

7.6 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित क्लस्टर विकास योजना की तर्ज पर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की क्लस्टर के रूप में स्थापना हेतु योजना अवधि में प्रदेश में 50 क्लस्टर विकसित किये जायेंगे । इन क्लस्टरों के माध्यम से सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों के सतत विकास तथा उनसे सम्बन्धित सामान्य विषयों, जैसे प्रौद्योगिकी उन्नयन , कौशल तथा गुणवत्ता विकास, बाजार एवं पूंजी तक पहुंच सुगम बनाने के लिए संस्थागत सुविधायें तथा वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जायेंगे । इसके अतिरिक्त ऐसे क्लस्टर्स में सामान्य सुविधा केन्द्रों की भी स्थापना की जायेगी , ताकि क्लस्टर्स में स्थापित होने वाले उद्योग इनका लाभ उठा सकें । राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक क्लस्टर के लिए अधिकतम रू. 05 करोड़ तक की सहायता भूमि एवं भूमि विकास, अवस्थापना सुविधाओं के सृजन, मशीनरी एवं उपकरण, सामान्य सुविधा केन्द्र की स्थापना तथा अन्य अनिवार्य आवश्यकताओं की उपलब्धता हेतु वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में देय होगी ।

7.7 उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिये वेब आधारित ऑनलाइन पोर्टल एवं कॉल सेन्टर की प्रणाली को और सशक्त किया जायेगा ।

7.8 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सुगमता से भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के 687 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11, 1945 शक सम्वत्)

लिए निजी क्षेत्र में औद्योगिक आस्थान/ क्षेत्र की स्थापना के लिए नीति घोषित की जाएगी, इस नीति में निजी क्षेत्र के प्रवर्तकों को वित्तीय प्रोत्साहन भी दिये जायेंगे ।

8. वित्तीय प्रोत्साहन सहायता-

राज्य में अधिकतम निवेश आकर्षित करने एवं अन्य प्रदेशों के सापेक्ष प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार कुछ नियम एवं शर्तों के अधीन निम्नानुसार वित्तीय प्रोत्साहन / प्रतिपूर्ति सहायता प्रदान करेगी:-

8.1 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) सहायत्ता- राज्य में स्थापित होने वाले चिन्हित श्रेणी के नये सूक्ष्म उद्यमों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) तैयार करने हेतु सहायता दी जायेगी । इसके लिये उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड द्वारा सलाहकारों (Consultants) का मनोनयन (Empanelment) किया जायेगा। राज्य में स्थापित होने वाले सूक्ष्म उद्यमों द्वारा मनोनीत सलाहकारों से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने पर, शुल्क के रूप में होने वाले व्यय की 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति सम्बन्धित उद्यमों को उनके वाणिज्यिक उत्पादन में आने के उपरान्त, दावा प्रस्तुत करने पर किया जायेगा ।

8.2 स्टाम्प शुल्क प्रतिपूर्तिः ए , बी, सी व डी श्रेणी के जनपदों/ क्षेत्रों में चिन्हित श्रेणी के नये सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों की स्थापना के लिए उद्यमी द्वारा भूमि पट्टे पर लेने/क्रय करने / हस्तान्तरण के रूप में प्राप्त करने पर प्रभार्य स्टाम्प शुल्क की निम्नवत् प्रतिपूर्ति, उद्यम स्थापना के उपरान्त वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ करने के पश्चांत, इकाई द्वारा दावा प्रस्तुत करने पर देय होगी-

जनपद/क्षेत्र की श्रेणी स्टाम्प शुल्क प्रतिपूर्ति प्रतिशत

100 प्रतिशत

श्रेणी -ए

100 प्रतिशत

श्रेणी- बी

75प्रतिशत

श्रेणी- सी

50 प्रतिशत

श्रेणी-डी

8.3 पूंजीगत उपादानः प्रदेश में स्थापित होने वाले, चिन्हित श्रेणी के, नये अथवा पर्याप्त विस्तारीकरण वाले विद्यमान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को, उनके द्वारा कार्यशाला भवन तथा संयंत्र व मशीनरी / उपस्कर में किये गए स्थायी पूंजी निवेश के आधार पर, निम्नानुसार पूंजीगत उपादान सहायता देय होगी:-

688              उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)
                                                                                             [भाग 1
                                   रु. 50 लाख)     का@ 25          स्थायी पूंजी   ऊपर के
                                                 प्रतिशत (अधिकतम  निवेश का @     अतिरिक्त
                                                 रु. 1.50 करोड़)   20प्रतिशत      स्थायी
                                                                   (अधिकतम         पूंजी
                                                                    रु. 2.50     निवेश का
                                                                     करोड़)      @ 3.75
                                                                                  प्रतिशत
                                                                                (अधिकतम
                                                                                 रु. 04
                                                                                  करोड़)
                     श्रेणी-बी     स्थायी पूंजी  रू. 40 लाख +     रु. 1.20 करोड़  रू. 02
                                  निवेश का 40    रू. 01 करोड़ से    + रू. 05     करोड़ +
                                    प्रतिशत     ऊपर के अतिरिक्त   करोड़ से ऊपर    रू. 10
                                   (अधिकतम      स्थायी पूंजी निवेश के अतिरिक्त   करोड़ से
                                  रु. 40 लाख)     का@ 20           स्थायी पूंजी ऊपर के
                                                प्रतिशत (अधिकतम   निवेश का      अतिरिक्त
                                                 रू. 1.20 करोड़)  16 प्रतिशत      स्थायी
                                                                  (अधिकतम         पूंजी
                                                                 रू. 02करोड़)   निवेश का
                                                                                @2.50
                                                                                 प्रतिशत
                                                                               (अधिकतम
                                                                                 रु. 03
                                                                                 करोड़)
                   श्रेणी-सी      स्थायी पूंजी  रु. 30 लाख +     रु. 80 लाख     रु. 1.20
                                 निवेश का 30    रू. 01 करोड़ से   ++ रु. 05    करोड़ +
                                    प्रतिशत    ऊपर के अतिरिक्त   करोड़ से ऊपर   रु. 10
                                  (अधिकतम      स्थायी पूंजी निवेश के अतिरिक्त   करोड़ से
                                 रु. 30 लाख)    का @ 12.50        स्थायी पूंजी  ऊपर के
                          इकाई श्रेणी                              लघु                  मध्यम
                                           सूक्ष्म
                                              प्रतिशत (अधिकतम संयंत्र व निवेश का संयंत्र व अतिरिक्त संयत्र व
                      जनपद/क्षेत्र श्रेणी संयंत्र व रू. 80 लाख)   08 प्रतिशत    स्थायी
                                         मशीनरी/         मशीनरी/         मशीनरी/       मशीनरी/
                                                                 (अधिकतम         पूंजी
                                         उपस्कर में   उपस्कर में रू. 01 उपस्कर में रू. उपस्कर में
                             ↓                                    रु. 1.20    निवेशका
                                        रू. 01 करोड़  करोड़ से अधिक,    05 करोड़ से     रु. 10
                                                                   करोड़)       @02
                                        तक के पूंजी   रू. 05 करोड़ तक  अधिक, रू . 10 प्रतिशत करोड़ से
                                         निवेश वाले    के पूंजी निवेश   करोड़ तक के   अधिक, रू.
                                           उद्यम         वाले उद्यम           (अधिकतम  50करोड़
                                                                         पूंजी निवेश
                                                                                रु. 02
                                                                        वाले उद्यम     तक के
                                                                               करोड़)    पूंजी
                  श्रेणी-डी      स्थायी पूंजी  रु. 20 लाख +     रु. 60 लाख     रू. 90
                                                                                        निवेश
                                निवेश का 20    रू. 01 करोड़ से   + रु. 05      लाख +
                                  प्रतिशत                                             वाले उद्यम
                                              ऊपर के अतिरिक्त   करोड़ से ऊपर   रू..10
                           श्रेणी-ए      स्थायी पूंजी  रु. 50 लाख +    रू . 1.50 करोड़ रू. 2.50
                                 (अधिकतम      स्थायी पूंजी निवेश के अतिरिक्त   करोड़ से
                                        निवेश का 50   रू. 01 करोड़ से    + रु. 05      करोड़ +
                                रू. 20लाख)      का @ 10         स्थायी पूंजी  ऊपर के
                                           प्रतिशत    ऊपर के अतिरिक्त  करोड़ से ऊपर     रु. 10
                                             प्रतिशत (अधिकतम    निवेश का @    अतिरिक्त
                                         (अधिकतम      स्थायी पूंजी निवेश के अतिरिक्त   करोड़ से

भाग 1]

689 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11.1945 शक सम्वत्)

रु.60लाख)

06 प्रतिशत (अधिकतम रु . 90 लाख)

स्थायी पूंजी निवेश का @1.50 प्रतिशत (अधिकत्तम रु. 1.50 करोड़)

8.3.1 इस नीति के अंतर्गत "प्राथमिकता श्रेणी" के रूप में चिन्हित नये विनिर्माणक उद्यमों की राज्य में स्थापना पर 5 प्रतिशत (अधिकतम सूक्ष्म उद्यम- रू ० 5 लाख, लघु उद्यम रू0 10 लाख तथा मध्यम उद्यम रू0 15 लाख) अतिरिक्त पूंजीगत उपादान देय होगा ।

8.3.2 इस नीति के अंतर्गत " अति-प्राथमिकता श्रेणी" के रूप में चिन्हित नये विनिर्माणक उद्यमों की श्रेणी-ए अथवा बी के जनपद/क्षेत्र में स्थापना पर 10 प्रतिशत (अधिकतम सूक्ष्म उद्यम रू0 10 लाख, लघु उद्यम रू 0 15 लाख तथा मध्यम उद्यम रू ० 20 लाख ) तथा श्रेणी- सी व डी के जनपद/ क्षेत्र में स्थापना पर 5 प्रतिशत (अधिकतम सूक्ष्म उद्यम रू० 5 लाख, लघु उद्यम रू0 10 लाख तथा मध्यम उद्यम रू 0 15 लाख) अतिरिक्त पूंजीगत उपादान देय होगा ।

8.3.3 इस नीति के अंतर्गत चिन्हित श्रेणी की नयी एंकर (Anchor) इकाई एवं न्यूनतम 7 सहायक (Ancillary) इकाईयों की राज्य में स्थापना पर एंकर इकाई तथा सभी नयी सहायक इकाईयों (यदि वे चिन्हित उद्यम श्रेणी में सम्मिलित हैं) को 5 प्रतिशत (अधिकतम सूक्ष्म उद्यम- रू० 5 लाख, लघु उद्यम- रू0 10 लाख तथा मध्यम उद्यम रू0 15 लाख ) अतिरिक्त पूंजीगत उपादान देय होगा ।

8.3.4 इस नीति के अंतर्गत राज्य में स्थापित होने वाले, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ महिला/ दिव्यांग के स्वामित्व वाली इकाईयों को 5 प्रतिशत (अधिकतम सूक्ष्म उद्यम रू० 5 लाख, लघु उद्यम- रू0 10 लाख तथा मध्यम उद्यम रू0 15 लाख) अतिरिक्त पूंजीगत उपादान देय होगा ।

8.3.5 किसी भी उद्यम द्वारा , इस नीति के अंतर्गत वर्णित विशिष्ट श्रेणी में से, एक श्रेणी का ही लाभ लिया जा सकेगा ।

8.3.6 पूंजीगत उपादान सहायता की गणना हेतु स्थायी पूंजी निवेश के लिए कार्यशाला भवन तथा संयंत्र एवं मशीनरी में कुल पूंजी निवेश को आंगणन में लिया जायेगा, परन्तु इकाई की पात्रता श्रेणी (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम) का निर्धारण मात्र संयंत्र एवं मशीनरी में कुल स्थायी पूंजी निवेश के आधार पर किया जायेगा । स्थायी पूंजी निवेश के रूप में " भूमि एवं भूमि विकास" में किये गये निवेश को पूंजी उपादान के लिये आंगणन में नहीं लिया जायेगा ।

8.3.7 विनिर्माणक क्षेत्र के ऐसे सूक्ष्म उद्यम, जिन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), पीएमएफएमई (Pradhan Mantri Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) अथवा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (एमएसवाई) के अंतर्गत लाभान्वित किया जा सकता है, को सर्वप्रथम इन योजनाओं का लाभ दिया जायेगा । यदि ये इकाईयां एमएसएमई नीति-2023 की अनुमन्य गतिविधियों में भी सम्मिलित हैं, तो बैंकों द्वारा 690

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[भाग 1

अनुमोदित परियोजना के कार्यशाला भवन, संयंत्र व भशीनरी/ उपरकर मद के लिए स्वीकृत/ संवितरित बैंक ऋण पर अनुमन्य मार्जिन मनी (अनुदान) को, एमएसएमई नीति-2023 में अनुमन्य कुल पूंजीगत उपादान में से घटाकर अवशेष धनराशि टॉप-अप सहायता के रूप में दी जायेगी ।

8.3.8 यदि भारत सरकार द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले उद्यमों के लिये कोई नयी नीति जारी की जाती है तो , उक्त नीति में अनुमन्य वित्तीय प्रोत्साहन/ उपादान को एमएसएमई नीति-2023 में देय वित्तीय प्रोत्साहन से. समायोजित किया जायेगा ।

8.3.9 पूंजीगत उपादान सहायता का संवितरण -

सूक्ष्म उद्यम - वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ करने की तिथि के उपरान्त्, आगामी 2 वर्षों में, 2 समान किश्तों में । लघु एवं मध्यम उद्यम वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ करने की तिथि के उपरान्तू, आगामी 5 वर्षों में, 5 समान किश्तों में ।

8.4 ब्याज सहायता प्रतिपूर्ति प्रदेश में स्थापित होने वाले चिन्हित श्रेणी के नये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को उनके द्वारा कार्यशाला भवन तथा संयंत्र व मशीनरी/ उपस्कर में स्थायी पूंजी निवेश के वित्त पोषण हेतु अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक, वित्तीय संस्था, राज्य सरकार के सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अथवा भारत सरकार/ राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्था से लिये गये सावधि ऋण ( Term Loan ) पर निम्नवत् ब्याज दर सहायता प्रतिपूर्ति, अधिकतम ३ वर्ष तक देय होगी-

ब्याज दर सहायता प्रतिपूर्ति मात्रा/सीमा

जनपद/ क्षेत्र श्रेणी

मध्यम उद्यम

सूक्ष्म उद्यम

लघु उद्यम

ए 4 प्रतिशत (अधिकतम रू ० 5 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

2 प्रतिशत (अधिकतम रू ० 7 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

3 प्रतिशत (अधिकतम रु ० 6 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

बी 4 प्रतिशत (अधिकतम रू० 4 लाख प्रतिवर्ष , प्रति इकाई)

3 प्रतिशत (अधिकतम रू० 5 लाख प्रतिवर्ष , प्रति इकाई)

2 प्रतिशत (अधिकतम रू० 6 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

सी 4 प्रतिशत (अधिकतम रू ० 3 लाख प्रतिवर्ष , प्रति इकाई)

3 प्रतिशत (अधिकतम रू० 4 लाख प्रतिवर्ष , प्रति इकाई)

2 प्रतिशत (अधिकतम रू ० 5 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

डी 4 प्रतिशत (अधिकतम रू० 2 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

3 प्रतिशत (अधिकतम रू ० ३ लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

2 प्रतिशत (अधिकतम रू० 4 लाख प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

8.5 विद्युत ड्यूटी पर छूट राज्य में स्थापित होने वाले चिन्हित श्रेणी के नये उद्यम , जिनमें स्वीकृत विद्युत भार 500 कि०वा ० तक हो, को 5 वर्षों तक विद्युत ड्यूटी में छूट दी जायेगी।

8.6 गुणवत्ता प्रमाणीकरण प्रोत्साहन सहायता प्रतिपूर्ति- राज्य में स्थापित होने वाले चिन्हित श्रेणी के नये सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को राष्ट्रीय /अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण पत्र (आई.एस.ओ. /आई.एस.आई. /बी.आई.एस./पेटेंट / क्वालिटी मार्किंग /ट्रेडमार्क /कॉपीराईट/ एफ.एस.एस.ए.आई./प्रदूषण नियंत्रण/जेड- Zero Effect Zero Defect आदि) प्राप्त करने पर, इकाई द्वारा किये गये वास्तविक व्यय का 75 प्रतिशत , अधिकतम रू. 1 लाख , प्रति इकाई की प्रतिपूर्ति देय होगी ।

8.7 मण्डी शुल्क प्रतिपूर्ति श्रेणी-ए व बी के जनपदों / क्षेत्रों में स्थापित होने वाले कृषि भाग 1 ]

691 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद11, 1945 शक सम्वत्)

एवं उद्यान आधारित नये खाद्य प्रसंस्करण तथा फल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्यगों को राज्य की भौगोलिक सीमा में स्थित मण्डी से कच्चा माल क्रय करने पर, इस पर लगने वाले शुल्क की प्रतिपूर्ति, अधिकतम 5 वर्ष तक निम्नवत् देय होगी-

मण्डी शुल्क प्रतिपूर्ति मात्रा

जनपद/क्षेत्र की श्रेणी

श्रेणी-ए 50 प्रतिशत (अधिकतम रू० 5 लाख, प्रतिवर्ष, प्रति इकाई) श्रेणी-बी 50 प्रतिशत (अधिकतम रू. 3 लाख, प्रतिवर्ष, प्रति इकाई)

9. गुणवत्ता तथा मानक प्रोत्साहन-

9.1 तकनीकी के क्षेत्र में निरंतर हो रहे द्रुतं विकास एवं पर्यावरण तथा तकनीकी मानकों के प्रति वैश्विक स्तर पर अपनाये जा रहे उच्चीकृत मानकों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी उन्नयन एवं परीक्षण सम्बन्धी आधारभूत अवस्थापना पर किया जाने वाला निवेश सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता की वृद्धि हेतु महत्वपूर्ण है । अतः उद्योगों को अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों, प्रदूषण नियंत्रण सुविधाओं एवं मानकों को अपनाने, गुणवत्ता विकास तथा इण्डस्ट्री 4.0 तकनीकी को अपनाते हुये उत्पादन दक्षता प्राप्त करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा ।

9.2 उन्नत तकनीकी का लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों तक पहुंचाने के लिए सेमिनार के माध्यम से प्रचार- प्रसार किया जायेगा, ताकि उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ, विभिन्न क्षेत्रों यथा- उत्पाद गुणवत्ता सुधार, पर्यावरण सुधार, ऊर्जा दक्षता, गुणात्मक-पैकेजिंग, परीक्षण-सुविधाएं एवं कम्प्यूटरीकृत गुणवत्ता नियंत्रण आदि में मिल सके ।

9.3 जेड प्रमाणित सूक्ष्म , लघु व मध्यम उद्यमों को पुरस्कारः जेड योजनान्तर्गत गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीन श्रेणियों में प्रमाणन की व्यवस्था है । गोल्ड, सिल्वर तथा ब्रॉन्ज श्रेणी में प्रमाणन प्राप्त करने वाली सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को पुरस्कार स्वरूप स्मृति चिन्ह, उत्कृष्टता प्रमाण पत्र तथा निम्नवत् धनराशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जायेगी-

जेड प्रमाण पत्र श्रेणी पुरस्कार धनराशि

गोल्ड श्रेणी

रु0 75000 प्रति इकाई

सिल्वर श्रेणी

रू० 50000 प्रति इकाई

ब्रांज श्रेणी

रू0 25000 प्रति इकाई

योजना अवधि में एक इकाई द्वारा एक श्रेणी के अन्तर्गत ही पुरस्कार का लाभ लिया जा सकेगा ।

10. उद्यमिता तथा कौशल विकास प्रोत्साहन-

10.1 राज्य के सभी जनपदों में उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित कर, उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जायेगा ताकि नवयुवकों को उद्यम स्थापना हेतु उन्हें प्रोत्साहित कर, रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजक के रूप में स्थापित किया जा सके ।

10.2 विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन में आधुनिक तकनीक पर कारीगरों एवं . युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए इन क्षेत्रों में काम कर रहे ख्याति प्राप्त सरकारी/ गैर सरकारी संगठनों/ संस्थाओं तथा बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों का सहयोग लिया जाएगा ।

11. विपणन प्रोत्साहन-

11.1 प्रदेश में निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग के अनुरूप विपणन सामर्थ्य को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है । राज्य सरकार इस क्षेत्र की कमी को पूरा करने के लिए उपयुक्त कदम उठाएगी । उत्तराखण्ड हथकरघा एवं 692

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[भाग 1

हस्तशिल्प विकास परिषद ( UHHDC) द्वारा वाणिज्यिक ई-कामर्स पोर्टल का सहयोग लेते हुये विपणन को प्रोत्साहन दिया जायेगा, जिससे परम्परागत शिल्पकारों को प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा सके ।

11.2 उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद को इस प्रकार सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे वह राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर प्रदर्शनी एवं क्रेता- विक्रेता सम्मेलन का आयोजन करते हुए हस्तशिल्पियों एवं उद्यमियों की सहभागिता को प्रोत्साहित कर सके ।

11.3 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को GeM पोर्टल पर ऑनबोर्ड होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ।

11.4 प्रदेश के सूक्ष्म व लघु उद्यमों को निविदा के समय सामग्री / सेवाओं के शासकीय. उपापन में वरीयता दी जायेगी ।

12. वित्तीय प्रोत्साहनों की स्वीकृति हेतु प्रक्रिया-

12.1 इस नीति से सम्बंधित सभी वित्तीय प्रोत्साहन सहायता एवं पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा , जिसकी स्थिति आवेदक को ऑनलाइन प्रदर्शित होगी । इस हेतु उद्योग निदेशालय द्वारा सम्बन्धित वेबसाइट में यथा--आवश्यक परिवर्तन कराया जायेगा ।

12.2 नीति के अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने हेतु इकाइयों को निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन करना होगा। सम्बंधित जिले के महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा प्राप्त आवेदन का परीक्षण कर अपनी संस्तुति सहित इसे उद्योग निदेशालय को अग्रसारित किया जायेगा ।

12.3 नीति अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों पर वित्तीय प्रोत्साहन सहायता की स्वीकृति एवं पुरस्कार के लिये चयन हेतु निम्नवत गठित राज्य स्तरीय प्राधिकृत समिति उत्तरदायी होगी-

1. महानिदेशक एवं आयुक्त उद्योग , उत्तराखण्ड अध्यक्ष

2. विभागाध्यक्ष , राज्य कर विभाग / ऊर्जा/

सदस्य

उरेडा/ श्रम/ वन एवं पर्यावरण/ सूचना प्रौद्योगिकी/ आयुष/ कृषि/उद्यान/ लोक निर्माण विभाग अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी जो अपर विभागाध्यक्ष के स्तर का हो ।

3. वित्त नियंत्रक, उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड सदस्य

4. राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक सदस्य - सदस्य

5. निदेशक उद्योग, उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड - सदस्य सचिव

आयुक्त एवं महानिदेशक उद्योग द्वारा आवश्यकतानुसार अन्य विशेषज्ञ विभागों को भी समिति की बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा ।

12.4 जिला स्तर पर सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला प्राधिकृत समिति का गठन निम्नवत् किया जायेगा-

1. जिलाधिकारी

अध्यक्ष

सदस्य

2. मुख्य विकास अधिकारी

3. मुख्य/वरिष्ठ कोषाधिकारी सदस्य

4. लीड बैंक प्रबन्धक सदस्य

5. महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र संयोजक सदस्य

जिलाधिकारी द्वारा अन्य विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यकतानुसार समिति की बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा । यह समिति भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर , 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शंक सम्वत्)

693

प्रत्यायोजित शक्ति ( Delegated Power), यदि इस प्रकार का प्रत्यायोजन किया जाता है , तो नीति में प्रदत्त वित्तीय प्रोत्साहनों के लिए प्राप्त आवेदनों पर विचार कर निर्णय ले सकेगी । यह समिति योजना की प्रगति के लिये जनपद स्तर पर आवश्यक विभागीय समन्वय एवं समीक्षा के लिये भी उत्तरदायी होगी ।

प्रमुख सचिव/ सचिव, एमएसएमई, उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का निम्नवत् गठन किया जाएगा- 12.5

अध्यक्ष

1. प्रमुख सचिव/ सचिव, एम.एस.एम.ई.

2. सचिव/अपर सचिव, वित्त /ऊर्जा/उरेडा/ श्रम/वन एवं पर्यावरण/सूचना प्रौद्योगिकी/ आयुष/कृषि/उद्यान/ लोक निर्माण विभाग सदस्य

3. महानिदेशक/आयुक्त उद्योग -संयोजक सदस्य प्रमुख सचिव/ सचिव एम.एस.एम.ई. द्वारा आवश्यकतानुसार अन्य विशेषज्ञ विभागों को भी समिति की बैठक में आमंत्रित किया जा सकेगा । इस समिति का दायित्व नीति की प्रगति समीक्षा एवं अंतर- विभागीय समन्वय का होगा । आयुक्त एवं महानिदेशक उद्योग द्वारा सन्दर्भित प्रकरणों को इस समिति के सम्मुख प्रस्तुत कर, इनका निस्तारण सुनिश्चित कराया जायेगा ।

13. सामान्य प्रावधान/ मार्गदर्शक सिद्धांतः

13.1 यह सामान्य प्रावधान/मार्गदर्शक सिद्धांत इस नीति के अन्तर्गत पात्र सभी सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यमों पर लागू होंगे ।

13.2 यह नीति दिनांक 01 अगस्त, 2023 से लागू होकर पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी ।

13.3 इस नीति के अन्तर्गत प्रदत्त सभी लाभ , दिनांक 01 अगस्त, 2023 से नीति के लागू रहने की अवधि तक उत्पादन में आने वाले सभी पात्र उद्यमों को अनुमन्यतानुसार निर्धारित सीमा में निर्धारित अवधि तक देय होगा ।

13.4 इस नीति में कोई भी परिवर्तन करने का अधिकार उत्तराखण्ड शासन में निहित होगा । नीति में किसी भी परिवर्तन की स्थिति में नीति अन्तर्गत पूर्व से लाभ प्राप्त कर रही इकाईयां, उक्त लाभ प्राप्त करती रहेंगी । नीति के बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण जारी करने का अधिकार महानिदेशक/ आयुक्त उद्योग को होगा ।

13.5 इस नीति में अनुमन्य गतिविधि, निषेध सूची , प्राथमिकता श्रेणी के उद्यम तथा अति- प्राथमिकता श्रेणी के उद्यम की सूची को संशोधित करने का अधिकार उत्तराखण्ड शासन में निहित होगा ।

13.6 सम्भावित उद्यमियों /निवेशकों को उद्यम स्थापित करने और उद्यम में किये गये पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक / सेबी द्वारा अनुमोदित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों/ वित्तीय संस्थानों से सावधि ऋण सुविधा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा ।

13.7 वित्तीय प्रोत्साहनों के लिए आवेदन करने वाली इकाई अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों या आरबीआई / सेबी द्वारा अनुमोदित ऐसे वित्तीय संस्थानों/ बैंकों, जिनके द्वारा सावधि ऋण दिया गया है, की अनुमोदित बैंक एप्रेजल रिपोर्ट के साथ एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत करेगी । बैंक / वित्तीय संस्थान द्वारा तैयार मूल्यांकन रिपोर्ट प्रोत्साहनों की गणना के लिए परियोजना लागत के मूल्यांकन के लिए आधार बनेगी ।

13.8 इस नीति के तहत प्रोत्साहन की गणना के प्रयोजन के लिए, अनुमोदित परियोजना लागत का अर्थ वित्त पोषक बैंक/ वित्तीय संस्था/विभाग द्वारा इम्पैनल्ड संस्था/ प्राधिकारी या व्यक्ति द्वारा अंतिम रूप से अनुमोदित परियोजना लागत से होगा और यह परियोजना लागत प्रोत्साहनों के निर्धारण का आधार होगी ।

694

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[भाग 1

13.9 इस नीति के तहत उल्लिखित सभी वित्तीय प्रोत्साहन पोस्ट-प्रोडक्शन अर्थात् वाणिज्यिक उत्पादन / संचालन प्रारम्भ करने की तिथि के पश्चात इकाई द्वारा दावा प्रस्तुत करने पर प्रदान किए जाएंगे ।

13.10 इस नीति के अन्तर्गत उत्पादन प्रारम्भ करने के दिनांक से एक वर्ष के भीतर पूंजी निवेश उपादान दावा निर्धारित पोर्टल पर पूर्ण रूप से प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा । अपूर्ण, अशुद्ध एवं अस्पष्ट दावा स्वीकार्य नहीं होगा ।

13.11 प्रदेश में विभिन्न नीतियां जैसे मेगा इण्डस्ट्रियल एवं इन्वेस्टमेंट नीति, स्टार्टअप नीति, एक जनपद दो उत्पाद नीति, पर्यटन नीति, सूचना प्रौद्योगिकी नीति, अरोमा पार्क नीति, जैव प्रौद्योगिकी नीति आदि प्रभावी हैं । उक्त नीतियों के अंतर्गत एक ही मद/ घटक में वित्तीय प्रोत्साहनों का लाभ केवल एक ही स्रोत से अनुमन्य होगा, जिससे कि एक ही प्रकार के लाभ की द्विरावृत्ति न हो सके ।

13.12 किसी इकाई के स्वामित्व या प्रबन्धन में परिवर्तन की स्थिति में, इकाई द्वारा विभाग से इसकी पूर्वानुमति प्राप्त करनी आवश्यक होगी, ताकि इकाई के स्वामित्व या प्रबन्धन में परिवर्तन होने की दशा में विद्यमान इकाई को मिल रहे प्रोत्साहनों का लाभ शेष अनुमन्य अवधि तक मिलता रहे । पात्रता अवधि तथा वित्तीय प्रोत्साहन की मात्रा/ सीमा किसी भी परिस्थिति में नहीं बढ़ायी जायेगी ।

13.13 नीति अन्तर्गत लाभ प्राप्त करने वाली इकाई को न्यूनतम 5 वर्ष तक कार्यरत रहना आवश्यक होगा । प्राकृतिक आपदा के कारणों से अधिकतम 6 माह तक इकाई बन्द रहने पर, इसे बन्द होने की श्रेणी में नहीं माना जायेगा । लाभ प्राप्त करने वाली इकाई यदि उत्पादन तिथि से 5 वर्ष के मध्य, 6 माह से अधिक समय तक बन्द पायी जाती है तो, नीति अन्तर्गत प्रदत्त सभी वित्तीय प्रोत्साहन की वसूली , इकाई से 18 प्रतिशत ब्याज के साथ, भू- राजस्व सादृश्य की जा सकेगी । आपदा अथवा अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों को संज्ञान में लेते हुये इस नीति के अन्तर्गत गठित राज्य प्राधिकृत समिति द्वारा वसूली का निर्णय लिया जा सकेगा । इस निर्णय से असन्तुष्ट पक्ष द्वारा प्रमुख सचिव / सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, उत्तराखण्ड शासन की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष अपील की जा सकेगी , जिसका निर्णय अन्तिम होगा ।

13.14 अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/महिलाओं / दिव्यांग के स्वामित्व वाले उद्यमों को व्यवसायिक उत्पादन प्रारम्भ करने के बाद से 5 वर्षों के भीतर , इकाई के अंशधारिता/ स्वामित्व के बदलाव की स्थिति में, नया अंशधारक / स्वामी उसी श्रेणी का होना चाहिए । यदि नया अंशधारक / स्वामी उसी श्रेणी से नहीं हैं, तो ऐसी इकाइयों को दी जाने वाली प्रोत्साहन की समस्त राशि, प्रोत्साहन प्राप्त करने की तिथि से 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर के साथ वसूल की जाएगी ।

13.15 पहले से मौजूद किसी उद्यम के विभाजन अथवा पुनर्गठन या पहले किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग में आने वाले संयंत्र एवं मशीनरी के किसी नई इकाई में हस्तान्तरण अथवा अन्यत्र से विस्थापित इकाई नीति के अन्तर्गत वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्र नहीं होगी ।

13.16 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग इस नीति के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए नोडल विभाग होगा।

13.17 निषेध/ प्रतिबन्धित सूची के उद्योग इस नीति के तहत किसी भी प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होंगे ।

13.18 इस नीति के अन्तर्गत वित्तीय प्रोत्साहनों की अनुमन्यता के लिए पात्र उद्यम को अपने उद्यम में प्रदेश के स्थायी निवासियों को न्यूनतम 70 प्रतिशत स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना आवश्यक होगा ।

695 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

संलग्नक: 1 (अ)- निषेध सूची:

i. केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क अधिनियम, 1985 ( 1986 का 5) की प्रथम अनुसूची के अध्याय 24 के अन्तर्गत आने वाले सभी सामान जो तम्बाकू तथा निर्मित तम्बाकू उत्पादों से सम्बन्धित हैं ।

ii . केन्द्रीय उत्पाद प्रशुल्क अधिनियम , 1985 (1986 का 5) की प्रथम अनुसूची के अध्याय 21 के अन्तर्गत आने वाले पान मसाला ।

उत्तराखण्ड शासन, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग की अधिसूचना संख्या 84/XXXVIII - 1-20-13( 11 )/2001 दिनांक 16.02.2021 तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय , भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक12 अगस्त, 2021 के द्वारा दिनांक 01 जुलाई, 2022 द्वारा प्रतिबन्धित सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पाद, 120 माइक्रोन से कम मोटाई की पॉलिथीन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण ।

iv. ब्रिक मेकिंग (ईंट भट्टा) यूनिट्स ।

आरा मिल।

vi . पटाखों का विनिर्माण ।

vii . खनन तथा स्टोन क्रशर की इकाईयां (सोप स्टोन, सिलिका प्रसंस्करण एवं इसके उप- उत्पाद को छोड़कर) ।

viii . थर्मल पॉवर प्लाण्ट ।

ix. स्टील एवं स्टील इंगट विनिर्माण ।

X. भट्ठी ( Furnace ) का उपयोग करने वाली समस्त इकाईयां ।

xi . केन्द्र / राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर प्रतिनिषिद्ध श्रेणी की सूची में सम्मिलित समस्त उत्पाद ।

xii . पर्यावरण संबंधी मानकों का अनुपालन नहीं करने वाली अथवा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय , भारत सरकार अथवा राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA ) अथवा संबंधित केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना तथा प्रचालन हेतु अपेक्षित सहमति नहीं लेने वाली इकाईयां ।

xiii . भण्डारण तथा थोक व खुदरा व्यापार के दौरान संरक्षण, साफ-सफाई, प्रचालन, पैकिंग , रि-पैकिंग अथवा रि-लैबलिंग , छटनी, खुदरा बिक्री मूल्य में परिवर्तन आदि जैसे कम मूल्य संवर्द्धन के कार्यकलाप ।

xiv. पर्यटन सहित सेवा क्षेत्र की समस्त गतिविधियां ।

4

संलग्नक: 1 (ब)- प्राथमिकता श्रेणी के विनिर्माणक उद्यम :

1. नेचुरल फाइबर तथा लघु वनोपज पर आधारित उद्यम ।

2. 'एक जनपद दो उत्पाद ' योजनान्तर्गत चिन्हित उत्पाद विनिर्माण उद्यम ।

3. राज्य के 'जी आई टैग' प्राप्त उत्पादों के विनिर्माणक उद्यम ।

4. विनिर्माणक क्षेत्र के स्टार्टप्स ।

5. जैव-प्रौद्योगिकी और नैनो प्रौद्योगिकी के अंतर्गत आने वाले उत्पाद ।

6. सिंगल यूज प्लास्टिक के वैकल्पिक उत्पाद विनिर्माणक उद्यम ।

संलग्नक: 1 (स)- अति-प्राथमिकता श्रेणी के विनिर्माणक उद्यम:

1. खाद्य प्रसंस्करण उद्यम ।

2. फल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्यम ।

3. फ्रूट आधारित वायनरी।

4. पिरूल से ब्रिकेट्स/पेलेट्स विनिर्माणक उद्यम ।

5. औषधीय हर्ब्स एवं सगन्ध पौध पर आधारित विनिर्माणक उद्यम ।

आज्ञा से, विनय शंकर पाण्डेय , सचिव ।

696

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

राजस्व अनुभाग-3

अधिसूचना

11 अगस्त, 2023 ई ०

संख्या 540 / XVIII (3 )/ 2023-03 ( 02)/2018- राज्यपाल , उत्तर प्रदेश भू- राजस्व अधिनियम, 1901 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 3. वर्ष 1901 ) (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त) की धारा 48 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये यह घोषणा करते हैं कि इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशन की तिथि से नीचे दी गई अनुसूची में उल्लिखित ग्राम सर्वेक्षण एवं अभिलेख क्रियाओं के अधीन होंगे:-

अनुसूची

जनपद

तहसील

ग्राम का नाम

नैनीताल

रामनगर

पाटकोट

आज्ञा से, सचिन कुर्वे, सचिव, राजस्व ।

Inpursuance of the provision of Clause (3 ) of the Article 348 of the Constitution of India , the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No.540/ XVIII (3)/2023-03 ( 02 )/2018 Dated- August 11 , 2023 for general information .

NOTIFICATION

August11, 2023

No.540/XVIII (3 )/2023-03 (02)/2018--In exercise of the powers conferred by Section 48 of the UttarPradesh Land Revenue Act , 1901 ( U.P. Act. No. 3 of 1901 ) , (as applicable to the State of Uttarakhand) , theGovernor is pleased to declare that the village mentioned in the Schedule below shall be under Survey and Record Operations with effect from the date of publication of the notification in the official Gazette: -

Schedule

District

Tehsil

NameofVillage

1

2

3

Nainital

Ramnagar

Patkote

ByOrder,

SACHIN KURVE ,

Secretary, Revenue.

भाग 1 ]

697 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई ० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग

अधिसूचना

प्रकीर्ण

22अगस्त, 2023 ई ०

संख्या 1388 /XL - 1/2023-04/2021- राज्यपाल , "भारत का संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके और इस विषय पर विद्यमान समस्त नियमों और आदेशों को अंधिक्रमित करते हुए उत्तराखण्ड होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा विभाग में नियुक्त लिपिक वर्गीय कार्मिकों की सेवा का एकीकरण किए जाने हेतु निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं , अर्थातः-

उत्तराखण्ड होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा विभाग (निदेशालय एवं अधीनस्थ कार्यालय ) लिपिक वर्गीय सेवा के कार्मिकों की एकीकरण नियमावली, 2023

संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ

1. (1) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम "उत्तराखण्ड होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा विभाग (निदेशालय एवं अधीनस्थ कार्यालय ) लिपिक वर्गीय सेवा के कार्मिकों की एकीकरण नियमावली, 2023 " है ।

(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।

अध्यारोही प्रभाव

2. इस नियमावली के प्रभावी होने से पूर्व किसी अन्य सेवा नियमावली या आदेश या संविलियन नियमावली में दी गयी किसी बात के प्रतिकूल

परिभाषाएं

होते हुए भी इस नियमावली के उपबन्ध प्रभावी होंगे । 3. जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो , इस

नियमावली में:-

(क) "नियुक्ति प्राधिकारी से निदेशक, होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा उत्तराखण्ड अभिप्रेत है;

(ख) "उपलब्ध रिक्ति से ऐसी रिक्ति अभिप्रेत है, जो एकीकरण की तिथि

को स्वीकृत पदों के सापेक्ष रिक्त हो;

(ग) "राज्यपाल" से उत्तराखण्ड के राज्यपाल अभिप्रेत है;

(घ) "निदेशालय" से उत्तराखण्ड के होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा विभाग का निदेशालय अभिप्रेत है;

(ड) "अधीनस्थ कार्यालयों" से निदेशालय , होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा उत्तराखण्ड के नियंत्रणाधीन मण्डलीय/ जनपदीय/ ब्लॉक स्तरीय कार्यालय अभिप्रेत है;

(च) "मौलिक नियुक्ति" से सेवा के संवर्ग में किसी पद पर ऐसी नियुक्ति अभिप्रेत है, जो तदर्थ नियुक्ति न हो और जो नियमों के अनुसार चयन के पश्चात की गयी हो और यदि कोई नियम न हो तो सरकार द्वारा जारी किये गये कार्यपालक अनुदेशों द्वारा तत्समय विहित प्रक्रिया के अनुसार की गयी हो ।

698

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

एकीकरण

4. (1) निदेशालय तथा अधीनस्थ कार्यालय के कार्मिकों का इस नियमावली के माध्यम से एकीकरण किया जायेगा ।

(2) एकीकरण की तिथि से निदेशालय तथा अधीनस्थ कार्यालय के लिपिक वर्गीय सेवा के समस्त कार्मिक "होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा लिपिक वर्गीय सेवा के कार्मिक कहलायेंगे ।

एकीकरण के पश्चात लिपिक संवर्गीय ढांचा एकीकरण की

5. "होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा लिपिक वर्गीय सेवा का संगठनात्मक ढांचा इस नियमावली के परिशिष्ट- क के अनुसार होगा ।

प्रक्रिया एवं दिशा-निर्देश

6. एकीकरण के पश्चात लिपिक वर्गीय कार्मिकों के पदस्थापना हेतु निम्नलिखित प्रक्रिया अपनायी जायेगीः-

(1) एकीकरण के पश्चात लिपिक वर्गीय कार्मिकों की तैनाती / स्थानान्तरण निदेशालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों में कहीं भी की जा सकेगी ।

(2) एकीकरण के पश्चात लिपिक वर्गीय कार्मिकों के सम्बन्ध में उत्तराखण्ड होम्यापैथिक चिकित्सा सेवा विभाग लिपिक वर्गीय सेवा नियमावली प्रख्यापित की जायेगी ।

(3) एकीकरण के पश्चात समस्त लिपिक वर्गीय कार्मिकों के अर्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश , भविष्य निर्वाह निधि, एन०पी० एस० , सेवानिवृत्तिक लाभ इत्यादि की गणना उनके द्वारा निदेशालय तथा अधिनस्थ कार्यालयों में की गयी राजकीय सेवा को सम्मिलित करते हुए की जायेगी ।

एकीकरण के पश्चात कार्मिकों कीज्येष्ठता

7. होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा विभाग में लिपिक संवर्ग के एकीकरण (निदेशालय लिपिक संवर्ग एवं अधीनस्थ कार्यालय लिपिक संवर्ग का एकीकरण) के फलस्वरूप राज्य स्तरीय संवर्ग में मौलिक रूप से नियुक्त कार्मिकों की पारस्परिक ज्येष्ठता का निर्धारण " उत्तराखण्ड सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली, 2002" (समय-समय पर यथा संशोधित) के अनुसार किया जायेगा ।

निरसन एवं व्यावृत्ति

(1) इस नियमावली के प्रवृत्त होने के फलस्वरूप उ० प्र ० होम्योपैथिक लिपिक वर्गीय सेवा नियमावली, 1991 (उत्तराखण्ड राज्य में यथाप्रवृत्त) एतद्वारा निरसित की जाती हैः

(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, उक्त नियमावली के अधीन की गई कोई बात या कार्यवाही इस नियमावली के तत्त्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई समझी जायेगी ।

699 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट , 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

16

0

02

09

0

07

34

एकल संवर्गके उपरान्त नदीन ढांचा

सचिव।

आज्ञासे,

13

05

01

26

00

07

00

पदोंकी संख्या

डॉ०पंकजकुमारपाण्डेय,.

वेतनमान (रू०में)

संवर्गकावर्तमानढांचा

21700-69100 वेतनलेवल-3

वेतनमैट्रिक्स

वेतनमैट्रिक्स 29200-92300 वेतनलेवल-5

वेतनमैट्रिक्स 47600-151100 वेतनलेवल-8

वेतनमैट्रिक्स

44900-142400

वेतनलेवल-7

वेतनमैट्रिक्स 35400-112400 वेतनलेवल-6

वेतनमैट्रिक्स 56100-177500 वेतनलेवल-10

पदनाम

अधीनस्थकार्यालय

प्रशासनिकअधिकारी

कनिष्ठसहायक

वरिष्ठसहायक

वरिष्ठप्रशासनिक अधिकारी

प्रधानसहायक

मुख्यप्रशासनिक अधिकारी

परिशिष्ट"क"(नियम5देखें)

02

08

02

03

01

00

00

पदोंकी संख्या

वेतनमान (रू०में)

(निदेशालयतथाअधीनस्थकार्यालयोंकेपूर्वढांचोंकेएकीकरणकेउपरान्त होम्योपैथिकचिकित्सासेवायेंविभागकेलिपिकवर्गीयपदोंकाढांचा)

21700-69100 वेतनलेवल-3

वेतनमैट्रिक्स 47600-151100 वेतनलेवल-8

वेतनलेवल-10 वेतनमैट्रिक्स 56100-177500

वेतनमैट्रिक्स 35400-112400 वेतनलेवल-6

वेतनमैट्रिक्स 29200-92300 वेतनलेवल-5 वेतनमैट्रिक्स

वेतनमैट्रिक्स

44900-142400

वेतनलेवल-7

निदेशालयसंवर्गकावर्तमानढांचा

पदनाम

मुख्यप्रशासनिक अधिकारी

1

6कनिष्ठसहायक

5वरिष्ठसहायक

4प्रधानसहायक

2वरिष्ठप्रशासनिक अधिकारी

3प्रशासनिकअधिकारी

कुलपद

쇠 क्र.

700

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई ० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

In pursuance of the provision of Clause (3) of Articles 348 of "The Constitution of India" , the Governor pleased to order the publication of the following English translation of Notification No.1388/XL- 1/2023-04/2021 , Dehradun Dated- August 22 , 2023 for general information .

NOTIFICATION

Miscellaneous

August22, 2023

No.1388/XL-1 /2023-04/2021 -- In exercise of the power conferred by the proviso to Article 309 of "TheConstitution of India " and in supersession of all existing rules and orders on the subject , the Governor is pleased to allow to make the following rules for integration of services of the appointed Ministerial cadre employees in the Department of the Uttarakhand Homoeopathic Medical Services, namely:-

TheUttarakhand Homoeopathic Medical Service Department (Directorate and Subordinate offices) integration of employees of Ministerial cadre service Rules , 2023

and 1.

Short title Commencement

(1) These Rules may be called the Uttarakhand Homoeopathic Medical Service Department (Directorate and Subordinate Offices) integration of employees ofMinisterial cadre service Rules , 2023

(2) It shall come into force at once.

2.

Overriding effects

The provisions of these Rules shall have effect not withstanding anything in consistent there with in any service rules or order or absorption rules enforce immediately before the commencement of these rules .

3.

Definitions

In these rules, unless there is anything repugnant in the subject or context:-

(g) 'Appointing Authority' means the Director of Homoeopathic Medical Services , Uttarakhand;

(h) 'Available vacancy ' means such vacancy who is vacant to against the sanctioned post on the date of integration;

(i) 'Governor' means the Governor of Uttarakhand;

(j ) ' Directorate ' means Directorate of Homoeopathic medical services , Uttarakhand.

(k) 'Subordinate offices' means district/and other offices under control of Directorate of Homoeopathic medical services , Uttarakhand;

(1) 'Substantive appointment' means an appointment, not being an ad hoc appointment, on a post in the cadre of the service and made after selection in accordance with the rule and, ifthere were no rules , in accordance with the procedure prescribed for the time being by executive instruction issued by the Government .

Integration

4. (1) The integration shall be made through these rules of the employee of the Directorate and subordinate offices ;

(2) The all employees of the Ministerial cadre service of Directorate and subordinate offices shall be called the employees of Homoeopathic medical services Ministerial cadre service from the date of integration.

भाग 1]

7,01 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11, 1945 शक सम्वत्)

The organizational structure of Homoeopathic medical Services Ministerial cadre service shall be according the appendix-A ofthese rules. The following procedure shall be followed for posting of Ministerial cadre employees after the integration-

Ministerial Cadre 5. Structure after the integration , procedure of 6. integration guidelines and

(4) After the integration the posting/transfer ofthe Ministerial cadre employees may be made anywhere in the Directorate and Subordinate offices.

(5) Aservice rule shall be promulgating known as the Uttarakhand Homoeopathic medical services Ministerial cadre service rules.

(6) The calculation of earn leave, medical leave, GPF , NPS , retrial benefits etc. shall be made with including to the Government service be done in the Directorate and subordinate offices by him .

Seniority employees integration of the 7. after

The inter se seniority of the employees appointed as substantively in the state level cadre due to integration of Ministerial cadre in the Homoeopathic medical services department ( integration of Directorate ministerial cadre and subordinate offices Ministerial cadre) shall be determined according the Uttarakhand Government servent seniority rules, 2002 (as amended from time to time) .

Repeal and savings (1) The U.P. Homeopathic Ministrial Service Rules, 1991 (as applicable to the State of Uttarakhand) is hereby repealed.

(2) Notwithstanding such repeal anything done or any action taken under the said rules shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of this rules.

702

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

0

0

2

7

9

1.6

34

NumberofPosts afterintegration structure

Secretary.

00

00

01

05

13

07

26

Numberof Posts

ByOrder,

47600-151100

DR.PANKAJKUMARPANDEY,

44900-142400

35400-112400

29200-92300

21700-69100

Payscale (inRs.)

56100-177500 PayMatrix level-10

PayMatrix level-8

PayMatrix level-7

PayMatrix

level-6

PayMatrix level-5

PayMatrix level-3

PresentStructureofSubordinateofficeścadre

NameofPosts

AdministrativeOfficer

Appendix-'A'

ChiefAdministrative Officer

SeniorAdministrative Officer

Subordinateoffices)

SeniorAssistant

JuniorAssistant

HeadAssistant

[PleaseseeRule5]

00

00

01

02

02 03 08

Numberof Posts

47600-151100 35400-112400

29200-92300

21700-69100

Payscale

(inRs.) 56100-177500

level-10

level-7

level-5

PayMatrix

PayMatrix level-8

level-3

44900-142400 PayMatrix

PayMatrix

PayMatrix

level-6

PayMatrix

PresentStructureofDirectoratecadre

NameofPosts

AdministrativeOfficer

SeniorAdministrative Officer

ChiefAdministrative Officer

SeniorAssistant

JuniorAssistant

HeadAssistant

TotalPost

2

3

4

5

6

Sr.No.

(StructureofMinisterialcadrepostsofDepartmentofHomoeopathicmedicalservicesafterintegrationoftheformerstructureofDirectorateand भाग 1]

703 उत्तराखण्ड गजट. 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग

अधिसूचना (संशोधन)

12 जुलाई, 2023 ई ०

संख्या 1126 / XL - 1 /2023-18 / 2004- शासन की अधिसूचना संख्या-915 / XL- 1 /2023-18/2004 दिनांक 16.06.2023 के द्वारा डॉ ० के०के ० पाण्डेय, चिकित्साधिकारी , राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय , नयेली, नैनीताल को जनहित एवं कार्यहित में आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवायें, निदेशालय , देहरादून में स्थानान्तरित करते हुए सहायक औषधि नियंत्रक एवं मिशन निदेशक , राष्ट्रीय आयुष मिशन के पद पर तैनात किया गया था ।

उक्त अधिसूचना दिनांक 16.06.2023 में आंशिक संशोधन करते हुए डॉ० के०के० पाण्डेय को मिशन निदेशक, राष्ट्रीय आयुष मिशन के स्थान पर समन्वयक, राष्ट्रीय आयुष मिशन के रूप में तैनात किया जाता है । डॉ० पाण्डेय को समन्वयक, राष्ट्रीय आयुष मिशन के अतिरिक्त दायित्व हेतु कोई वेतन एवं अन्य भत्ते आदि देय नहीं होगें ।

अधिसूचना संख्या-915/XL- 1 / 2023-18 /2004 दिनांक 16.06.2023 को इस सीमा तक संशोधित समझा व पढ़ा जाय । अधिसूचना दिनांक 16.06.2023 में उल्लिखित शेष शर्तें, यथावत् रहेंगी ।

डॉ० विजय कुमार जोगदण्डे, अपर सचिव ।

कृषि एवं कृषि कल्याण अनुभाग -1

पदोन्नति

19 जुलाई, 2023 ई०

संख्या 139020 / ई-47598 /XIII - 1/2023-03 ( 15 ) 2005- कृषि विभागान्तर्गत कृषि सेवा श्रेणी-2 (अभियंत्रण शाखा) में प्रोन्नति के रिक्त पदों पर नियमित पदोन्नति हेतु उत्तर प्रदेश, कृषि सेवा समूह 'ख' सेवा नियमावली 1995 (उत्तराखण्ड में यथा अनुकूलित/ उपान्तरित आदेश 2002) के सुसंगत नियमो एवं उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग सपरामर्श चयनोन्नति (प्रक्रिया) नियमावली, 2003 के प्रासंगिक प्राविधानों के अनुसार लोक सेवा आयोग, उत्तराखण्ड हरिद्वार की संस्तुति के आधार पर अधीनस्थ कृषि सेवा वर्ग-1 , (अभियंत्रण शाखा) के अधोलिखित अधिकारियों को तात्कालिक प्रभाव से कृषि सेवा श्रेणी -2 (अभियंत्रण शाखा) में चयन वर्ष 2021-22 एवं चयन वर्ष 2022-23 की रिक्ति के सापेक्ष वेतनमान रू 0 15600-39100 ग्रेड वेतन रू 0 5400 / पुनरीक्षित वेतनमान-56100-177500 (लेबल-10) में नियमित पदोन्नति प्रदान किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं:-

(1)

चयन वर्ष 2021-22

श्री पवन कुमार काला

(2) श्री शैलेन्द्र सिंह चौहान चयन वर्ष 2022-23

(3) श्री रमेश चन्द्र जोशी चयन वर्ष 2022-23

(4) श्री प्रेम प्रकाश टम्टा

चयन वर्ष 2022-23

(5) श्री मनोज सिंह अधिकारी चयन वर्ष 2022-23

2- उक्त अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वे पदोन्नति के फलस्वरूप तत्काल उक्त पद पर कार्यभार ग्रहण कर कार्यभार प्रमाणक निदेशक , कृषि एवं शासन को शीघ्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ।

3- उक्त अधिकारियों के तैनाती आदेश पृथक से निर्गत किये जायेंगे ।

आज्ञा से,

रणवीर सिंह चौहान,

अपर सचिव ।

704

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

कृषि एवं कृषक कल्याण अनुभाग -1

पदोन्नति-आदेश

25 जुलाई , 2023 ई०

संख्या 140745 /ई ० पत्रा -57601 /XIII- 1/2023- उत्तराखण्ड रेशम विकास (अधिकारी वर्ग , ' क' एवं 'ख') सेवा नियमावली, 2011 में विहित व्यवस्थाओं के आलोक में विभागीय चयन समिति के माध्यम से नियमित चयनोपरान्त उत्तराखण्ड रेशम विकास विभाग में कार्यरत अधिकारी श्री प्रदीप कुमार, उप निदेशक, वेतन बैण्ड रू 0 15600-39100 ग्रेड पे ० रू0 6600 (यथासंशोधित वेतन लेवल -11 रू 0 67700-208700) को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से संयुक्त निदेशक, रेशम विकास विभाग के पद पर वेतन बैण्ड रू 0 15600-39100 ग्रेड पे ० रू0 7600 (यथासंशोधित वेतन लेवल-12 रू0 78800-209200) में पदोन्नति प्रदान करते हुये दो वर्ष की विहित परिवीक्षा अवधि में रखे जाने की श्री राज्यपाल महोदय सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है ।

2. उक्त पदोन्नत अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि वे अपना कार्यभार रेशम विकास विभाग , उत्तराखण्ड में ग्रहण करते हुए अपनी योगदान आख्या तत्काल शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें ।

आज्ञा से, रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव ।

पी ०एस ०यू० (आर० ई ०) 35 हिन्दी गजट / 373 -भाग 1-2023 ( कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/DO /DDN/30 /2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 -क

नियम, कार्य-विधियां, आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

HIGH COURT OF UTTARAKHAND , NAINITAL

NOTIFICATION

July11, 2023

No. 285 /XIV- 2/Admin.A/ 2008 -- Shri Pradeep Kumar Mani , Judge , Family Court , Tehri Garhwal is hereby sanctioned earned leave for 10 days w.e.f. 19.06.2023 to 28.06.2023 with permission to suffix 29.06.2023 as Idul - Zuha holiday.

NOTIFICATION

July13, 2023

No. 286/XIV / 86/ Admin.A/ 2013 -- Shri Mahesh Chandra Kaushiwa , Additional District & Sessions Judge, Karnprayag , District Chamoli is hereby sanctioned earned leave for 10 days w.e.f. 26.06.2023to 05.07.2023 with permission to prefix 25.06.2023 as Sunday holiday.

NOTIFICATION

July13,2023

No. 287 / XIV- a / 58 /Admin.A/ 2012 --Ms . Neha Qayyum , Civil Judge (Sr. Div . ) , Pauri Garhwal is hereby sanctioned child care leave for 20 days w.e.f. 15.06.2023 to 04.07.2023 .

397-ख 398

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1-क

NOTIFICATION

July20, 2023

No. 288 /XIV/a - 17 / Admin.A/ 2009 --Shri Hemant Singh , Civil Judge ( Sr. Div. ) , Champawat is hereby sanctioned earned leave for 14 days w.e.f. 24.06.2023 to 07.07.2023 with permission to suffix 08.07.2023 & 09.07.2023 as second Saturday and Sunday holidays respectively.

NOTIFICATION

July20, 2023

No. 289/XIV- a - 45/Admin.A/2020--Ms . Ruchika Narula , the then Civil Judge ( Jr. Div. ) , Dwarahat , District Almora , presently posted as Civil Judge ( Jr. Div .) , Sitarganj District U.S. Nagar is hereby sanctioned:

1. Earned leave for 02 days w.e.f. 22.03.2023 to 23.03.2023

2. Medical leave for 13 days w.e.f. 24.03.2023 to 05.04.2023

NOTIFICATION

July20, 2023

No. 290/XIV- a-47/Admin.A/ 2020 --Ms . Akmal , Judicial Magistrate - II , Rudrapur , District Udham Singh Nagar is hereby sanctioned child care leave for 60 days w.e.f. 15.05.2023 to 13.07.2023 with permission to prefix 13.05.2023 & 14.05.2023 as second Saturday and Sunday holidays respectively.

NOTIFICATION

July20,2023

No. 291 /XIV/10/Admin.A/ 2008--Ms . Parul Gairola , Judge , Family Court , Almora is hereby sanctioned earned leave for 18 days w.e.f. 16.06.2023 to 03.07.2023 .

ByOrder of Hon'ble the Administrative Judge ,

Sd/-

Registrar General .

पी० एस ०यू० (आर०ई० ) 35 हिन्दी गजट / 373 - भाग 1 -क 2023 (कम्प्यूटर / रीजियो ) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30 / 2021-2023

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

भाग 8

सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

सूचना

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मैंने अपना नाम संजय (पुराना नाम) से बदलकर संजय कुमार (नया नाम) कर लिया है । भविष्य में मुझे संजय कुमार (नया नाम) पुत्र श्री राम सिंह के नाम से जाना पहचाना जाए ।

समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

संजय कुमार (नया नाम्) पुत्र श्री राम सिंह निवासी मकान नं0-70 राजीव जुयाल मार्ग रोचीपुरा निरंजनपुर माजरा देहरादून, उत्तराखण्ड -248171

सूचना

Ihave changed my name from DEEPALI GUPTA TO DEEPALI GUPTA DORAN aftermarriage .henceforth I shall be known and called as DEEPALI GUPTA DORAN wife of Jeremy James Doran .

समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

DEEPALI GUPTA DORAN

W/ o Jeremy James Doran . Resident 745 A-396/9 , Gali No. 06 , Ganesh Vihar Ganga Nagar, Rishikesh District-Dehradun .

521-ट 522

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 8

सूचना

यह कि शपथकर्ता मैंने निजी कारणों से अपना नाम LAXMI PRASAD से बदलकर LAXMI PRASAD DWIVEDI कर लिया हैं । भविष्य मे मुझे LAXMI PRASAD DWIVEDI S /O SADANAND के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाए ।

समस्त विधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

LAXMI PRASAD DWIVEDI S/O SADANAND

निवासी लेन सी-9 त्रिमूर्ति विहार टर्नर रोड भारू वाला ग्रांट क्लेमेंट टाउन देहरादून ।

सूचना

महाराष्ट्र विद्यालयी बोर्ड अभिलेखों में मेरा नाम रौतेला महेन्द्र सिंह श्याम सिंह गलत दर्ज है मेरा सही नाम महेन्द्र सिंह रौतेला हैं ।

समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

महेन्द्र सिंह रौतेला पुत्र स्व० श्याम सिंह रौतेला निवासी ग्राम विजयपुर तहसी द्ववाराहाट जिला अल्मोड़ा ( उत्तराखण्ड) ।

सूचना

मेरे हाईस्कूल के प्रमाणपत्र में मेरे पिता का नाम बलवान सिंह रावत गलत दर्ज हैं जबकि मेरे पिता का सही नाम बलवन्त सिंह रावत हैं । अतः सही नाम दर्ज किया जाए ।

समस्तविधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

नीरज रावत पुत्र बलवन्त सिंह रावत निवासी ग्राम आग्रर प्रो ० ओ ० आगराखाल नरेन्द्रनगर , जिला टिहरी , गढ़वाल उत्तराखण्ड ।

भाग 8]

523 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर , 2023 ई० (भाद्रपदं 11. 1945 शक सम्वत्)

कार्यालय- नगर पंचायत, ढण्डेरा ( हरिद्वार)

"सम्पत्ति/ भवनकर उपविधि - 2021-22"

28 जनवरी , 2023 ई०

पत्रांक-361 /सम्पत्तिकर- गजट / 2022-23-

संक्षिप्त नाम प्रसार और प्रारम्भ 1.

यह उपविधि नगर पंचायत ढण्डेरा 'सम्पत्ति / भवनकर उपविधि- 2021-22 " कहलायेगी । क

ख यह उपविधि नगर पंचायत ढण्डेरा की सीमा में प्रवृत्त होगी ।

ग- यह उपविधि नगर पंचायत ढण्डेरा द्वारा प्रख्यापित तथा शासकीय गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगी ।

2 परिभाषाएँ-

किसी विषय या प्रसंग से कोई वादा प्रतिकूल न होने पर इस उपविधि में-

(क) 'नगर पंचायत" का तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा से है ।

(ख) "सीमा" का तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा की सीमाओं से है ।

(ग) "अधिशासी अधिकारी " का तात्पर्य अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत ढण्डेरा से है ।

(घ) "अध्यक्ष " का तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा के अध्यक्ष / प्रशासक से है ।

(ड) "बोर्ड" का तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा के निर्वाचित अध्यक्ष / प्रशासक से है ।

(च) " अधिनियम" का तात्पर्य उत्तर प्रदेश, नगर पालिका अधिनियम 1916 (उत्तराखण्ड में यथावृत्त प्रभावी)

संशोधन से है ।

(छ) वार्षिक" मूल्याकंन का तात्पर्य नगर पालिका अधिनियम 1916 कि धारा 140 व धारा 141 के अन्तर्गत वार्षिक मूल्य से है ।

(ज)" सम्पत्ति /भवनकर' का तात्पर्य नगर पालिका अधिनियम 1916 कि धारा -128 के अन्तर्गत भवनो या भूमि दोनो के वार्षिक मूल्य पर कर से है ।

(झ) "समिति" का तात्पर्य जंगर पालिका अधिनियम 1916 कि धारा 104 के अन्तर्गत गठित समिति से है ।

(प ) "स्वामी" का तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि से है ।

(फ) 'स्वामी' का तात्पर्य भवन एवं भूमि के स्वामी से है ।

(ब ) 'अध्यासी" का. तात्पर्य नगर पंचायत ढण्डेरा सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि पर किराये में रहने वाले व्यक्त्तियों से है।

3. वार्षिक मूल्यांकन- नगर पंचायत ढण्डेरा सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि पर सम्पत्ति/ भवनकर निर्धारण हेतु नगर पालिका अधिनियम 1916 कि धारा 142 (2 ) के अन्तर्गत कर निर्धारण के प्रयोजन के लिए नगर पालिका द्वारा समय पर पारिश्रमिक सहित या सहित किसी व्यक्ति या व्यक्तियों चाहें वे सदस्य हो, या ना हो अथवा संस्था / एजेंन्सी नियुक्त किया गया या किये गये व्यक्ति / संस्था /एजेन्सी ऐसे प्रयोजन के लिए किसी सम्बद्ध सम्पत्ति का निरीक्षण कर सकते है । सम्पत्ति / संस्था/ एजेन्सी ऐसे प्रयोजन के लिए किसी सम्बद्ध सम्पत्ति का निरिक्षण कर सकते है ।

सम्पत्ति / भवनकर निधारण हेतु नियमानुसार वार्षिक मूल्याकन किया जायेगा ।

(क) रेलवे स्टेशनो, कॉलेजो, होंटलो, कारखानो, वाणिज्यिक भवनों और अन्य अनावासियो भवनों की दशा में भवन निर्माण की वर्तमान अनुमानित लागत लो०नि०वि० के प्रचलित सैडयूल रेट और उससे अनुलगन भूमि की अनुमानित मुल्य तत्यमय प्रचलित सर्किल रेट को जोडकर निकाली गयी धनराशि का 5 प्रतिशत से अनाधिक पर वार्षिक मुल्यांकन का आकंलन किया जायेगा । (ख) खण्ड (क) के उपबन्धों के अन्तर्गत न आने वाली किसी भवन या भूमि की दशा में, यथा स्थिति भवन की दशा में प्रतिवर्ग फुट कारपेट क्षेत्रफल पर लागून्यूनतम मासिक किराया दर या भूमि की दशा में प्रतिवर्ग फुट क्षेत्रफल पर लागू न्यूनतम मासिक किराया भवन के कारपेट क्षेत्रफल या भूमि के क्षेत्रफल से गुणा किये जाने पर आये 12 गुणा मूल्य से है और इस प्रयोजन के लिए प्रतिवर्ग फुट मासिक किराया दर पर इस प्रकार होगी जैसे कि नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रत्येक दो वर्ष में एक बार भवन या भूमि की अवस्थित, भवन निर्माण की प्रकृति, भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 के प्रयोजन के लिए कलैक्टर द्वारा नियम सर्किल दर के आधार पर नियत सर्किल दर के आधार पर नियत किया जाये और ऐसे भवन या भूमि के लिए क्षेत्रफल में चालू न्यूनतम दर और अन्य कारक इस प्रकार होगें, जैसे निहित किए जायें ।

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(ग) खण्ड (क) (ख) के अन्तर्गत न आने वाले किसी भवन या भूमि की दशा में यथास्थित, ऐसे आवासीय एवं आनावसीय (दुकानात) जो किराये पर उठाये गये हों. उनाका वार्षिक मूल्याकंन शहर की प्रचलित बाजार दर अथवा उस क्षेत्र के लिए कलैक्टर द्वारा तत्समय किराये हेतु प्रचलित सर्किल रेट से जो भी अधिकतम हो, के अनुसार किराये के भवन के प्रतिवर्ग फीट या मीटर भासिक किराया दर पर निधार्रण करना होगा और मासिक किराये के 12 गुणा पर मूल्यांकन निधार्रण किया जायेगा ।

प्रतिबन्ध यह है कि जहाँ नगर पंचायत कि राय में असाधारण परिस्थितियों के कारण किसी भवन का वार्षिक मूल्य, यदि उपयुक्त निधि से गणना की गयी हो, अत्यधिक हो, यहाँ नगर पंचायत किसी भी कम धनराशि पर जो उसे समय पूर्ण प्रतीत हो, मूल्य नियम कर सकती है ।

1- वार्षिक मूल्य की गणना के प्रयोजन के लिए कारपेट क्षेत्र की गणना निम्नलिखित रूप से की जायेगी-

(1) कक्ष- आन्तरिक आयाम की पूर्ण माप,

( आच्छादित बरामदा आन्तरिक आयाम की पूर्ण माप,

(ii) बालकोनी , गलियारा, रसोई, घर और भण्डार गृह- आन्तरिक आयाम की 50 प्रतिशत माप,

(M) गैराज आंन्तरिक आयाम की एक चौथाई गाप,

(M) स्नानागार, शौचालय , द्वारमण्डप और जीना से आच्छादित क्षेत्रफल , कारपेट क्षेत्रफल का अगं नहीं होगां

2- उ ० प्र ० शहरी भवन (किराये पर देने, किराये तथा बेदखली का विनिमयन) अधिनियम 1972 के प्रयोजनं के लिए किसी भवन मानक किराया, या युक्तियुक्त वार्षिक किराये को भवन के वार्षिक गणना करते समय हिसाब में नही लिया जायेगा ।

3- सम्पत्ति / भवन कर निर्धारण हेतु थार्षिक मूल्याकंन हेतु सर्वेक्षण निर्धारित प्रपत्र मे प्रत्येक भवन एवं भूमि का मौके पर निरिक्षण करने के उपरान्त यथास्थिति के अनुसार किया जायेगा ।

4- भवन एवं भूमि के वार्षिक मूल्याकन पर 10 प्रतिशत सम्पत्ति/ भवन कर लिया जायेगा, परन्तु निम्नलिखित भवन एवं भूमि अथवा उसके भाग निम्नानुसार कर से मुक्त रहेंगे ।

(क) मन्दिर, गुरूद्वारे, मस्जिद अथवा दूसरी धार्मिक संस्थाए जो सार्वजनिक तथा रजिस्टर्ड ट्रस्ट या संस्था के अधीन हो , परन्तु जो स्थान अथवा स्थानो के भाग से किराये या अन्य प्रकार से आय अर्जित की जाती है उन पर छूट के नियम लागू नही होगें ।

(ख) अनाथालय, स्कूल, छात्रावास चिकित्सालय , धर्मशालाएँ तथा इस प्रकार से अन्य भवन तथा भूमि जो इस प्रकार की दान की संस्थाो की सम्पत्तियों और उन्ही संस्था द्वारा ऐसे कार्य करती है ।

(ग) नगर पंचायत ढण्डेरा की समस्त सम्पत्तियाँ ।

5- सम्पत्ति / भवनकर पर प्रत्येक वर्ष 01 अप्रैल से 31 जुलाई तक 20 तथा 1 अगस्त से 31 दिसम्बर 10 छूट प्रदान की जायेगी तथा 1 जनवरी से 31 मार्च तक जमा होने वाले गृहकर पर कोई छूट देय नही तथा 31 मार्च के पश्चात जमा होने वाले विगत वर्ष के गृहकर पर 05 अधिभार देय होगा ।

6- कर निर्धारण सूचियो का प्रकाशन- भूमि एवं भवन के वार्षिक मूल्यांकन पर सम्पत्ति / भवन कर निर्धारण हेतु नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा-141 के अधीन तैयार की गयी सूचियो का प्रकाशन जनसामान्य के अवलोकनार्थ एवं निरिक्षण के लिए नगर पालिका कार्यालय में अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रदर्शित की जायेगी तथा समाचार पत्र मे इस आशय की सूचना प्रकाशित करते हुए अपील करनी होगी कि पंचवर्षीय गृहकर का निर्धारण किया जा चुका है, जिस किसी व्यक्ति अथवा भवन स्वामी या अध्यासी को कर निर्धारण सूची का अवलोकन एवं निरिक्षण करना हो वे नगर पालिका कार्यालय में आकर का निर्धारण की सूचना सम्बन्धित प्रत्येक भवन स्वामी को 15 दिन के अन्दर आपत्ति प्रस्तुत करने हेतु दी जानी होगी और कर निर्धारण सूचियो मे प्राप्त आपत्तियों को मौहल्ले/ गार्ड द्वारा कम संख्या देते हुए आपत्ति एवं निस्तारण पजिका मे अकित किया जायेगा ।

7- आपत्तियो का निस्तारण भूमि एवं भवन के वार्षिक मूल्यांकन अथवा कर निर्धारण पर प्राप्त आपत्तियो की सुनवाई एंव निस्तारण हेतु नगर पालिका अधिनियम 1918की धारा 104 के अन्तर्गत गठित समिति अथवा समिति गठित न होने के फलस्वरूप अधिशासी अधिकारी द्वारा निन्न प्रकार किया जायेगा

) प्राप्त आपत्तियो की सुनवाई हेतु तिथि एवं समय नियत करते हुए आपतिकर्ता को लिखित सूचना पेषित करनी होगी ।

(i (ii ) आपत्तियों के निस्तारण की स्थिति एवं नियम सम्बन्धित पत्रावली अथवा निस्तारण पंजिका में जस्टीफिकेशन के साथ दर्ज करनी होगी।

(ii ) शासनादेश स० 2054/ नौ-9-97-79 दिनांक 28.06.1997 द्वारा वार्षिक मूल्यांकन एवं कर निर्धारण पर प्राप्त आपत्त्यिो की सुनवाई और निस्तारण दिए गए निर्देशानुसार दी जायेगी ।

8- कर निर्धारण सूचियों का अभीप्रमाणीकरण और अभिरक्षा-

(क) अधिशासी अधिकारी या इस निर्मित प्राधिकृत अधिकारी , यथास्थिति, नगर पंचायत क्षेत्र या उसके किसी भाग के क्षेत्रवार किराया दरे और निर्धारण सूची को अपने हस्ताक्षर से अभिप्रमाणित करेगा।

(ख) इस प्रकार से अभिप्रमाणित सूची को नगर पंचायत कार्यालय मे जमा किया जायेगा ।

(ग) जैसे ही सम्पूर्ण नगर क्षेत्र की सूची इस प्रकार से जमा कर दी जाये वैसे ही निरीक्षण हेतु खुले होने के लिए सार्वजनिक सूचना द्वारा घोषणा की जायेगी, 525 भाग 8]

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(घ) कर निर्धारण सूचियो मे उपरोक्तानुसार सम्पूर्ण कारवाई होने के उपरान्त सम्पत्ति/ भवन कर मांग एवं वसूली पजिका मे अन्तिम रूप से सूची दर्ज करते हुए नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-166 के अन्तर्गत दावो की वसूली हेतु अग्रेतर कार्यवाही शासन द्वारा समय - समय पर दिए गये निर्देशानुसार करनी होगी ।

9- कोई भी व्यक्त्ति किसी समया भवनों की कर निर्धारण सूची पर अपना नाम स्वामी के रूप मे दर्ज करा सकता है और जिस समय तक आवेदन पत्र को अस्वीकार करने का काफी कारण ना हो उसका नाम दर्ज कर लिया जायेगा, अस्वीकृति का कारण लिस दिया जायेगा ।

| 10- जब इस बात में शक हो के भवन या भूमि पर की जिसका नाम स्वामी के रूप मे दर्ज किया जाये तो बोर्ड या समिति या वह अधिकारी जिसकी | बोर्ड ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका एक्ट-1916 की धारा 143-(3) के अधीन हो, यह तय करेगा कि किसका नाम स्वामी के तौर पर दर्ज होना चाहिए । । इसका निश्चित उस समय तक लागू रहेगा । जब तक सशक्त न्यायालय उसको रदद ना करे दे ।

11- (1 ) अगर किसी ऐसे भवन या भूमि के स्वामी होने का अधिकार पर कर लागू हो, हस्तान्तरित किया जाये तो अधिकार हस्तान्तरित करने वाला था जिसको हस्तान्तरित किया जाये , वह यदि कोई दस्तावेज न लिखी गई हो, तो अधिकार लेने की तिथि से और लिखी गई हो तो दस्तावेज लिखे जाने या रजिस्ट्री होने या हस्तान्तरित होने की तिथि से तीन माह के अन्दर हस्तान्तरित होने की सूचना अध्यक्ष को अथवा अधिशासी अधिकारी को देगा ।

(2) किसी ऐसे भवन या भूमि का स्वामी जिस पर कर लागू है, की मृत्यु के पश्चात उसका उत्तराधिकारी या जो जायदाद का स्वामी हो , इसी प्रकार स्वामी होने से तीन माह के अन्दर सूचना देगा ।

1

12-(1) सूचना में जिसका विवरण पहले दिया गया है, उक्त नियम में उल्लिखित सभी विवरण सफाई से और ठीक तौर से दिये जायेगें ।

(2) हर ऐसा व्यक्ति जिसको जायदाद हस्तान्तरित की गयी हो , अधिशासी अधिकारी के मांगने पर दस्वावेज (अगर लिखी गयी है) या उसकी एक प्रतिलिपि जो इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1877 ई० के अनुसार ली गयी हो पेश करेगा ।

13- उत्तर प्रदेश नगर पालिका एक्ट 1916 की धारा 151 (2) के अधीन कर की थोडी माफी या ऐसी माफी के लिए भवन का स्वामी जिसमें कई किरायेदार रहते हो , भवन पर कर लागू करने के समय बोर्ड से प्रार्थना कर करता है कि तमाम भवन का कर लागू करने के अलावा हर इस भग का वार्षिक मूल्य अलग -अलग एक नोट मे दर्ज किया जाये और जब कोई भाग, जिसका वार्षिक मूल्य अलग दर्ज हो गया है या किराये के नब्बे दिन या इससे अधिक समय के लिए किसी साल में खाली रहा हो तो कुल भवन के कर का वह हिस्सा माफ किया जाये जो कि उक्त एक्ट की धारा 151 (1 ) के अधीन वापस या माफ किया जाता यदि भवन के भाग पर अलग कर लागू किया होगा ।

शास्ति

उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916की धारा -299 (1 ) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके नगर पंचायत ढण्डेरा एतदृद्वारा निर्देश देती है कि उपरोक्त उपविधि उल्लंघन करने के लिए अर्थदण्ड के 1000.00 (एक हजार) तक हो सकता है और यदि उल्लंघन निरन्तर जारी रहा हो जो प्रथम दोषसिद्धी के दिनांक से ऐसे प्रत्येक दिन लिए जिनके बारे मे यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराध करता रहा है , अतिरिक्त जुर्माना किया जा सकता है , जो रू 100.00 (एक सौ) प्रतिदिन तक हो सकता है ।

संजय रावत, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत , ढण्डेरा जिला- हरिद्वार ।

विजय नाथ शुक्ल, प्रशासक, नगर पंचायत, ढण्डेरा जिला- हरिद्वार ।

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[भाग 8

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कार्यालय नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़

सार्वजनिक सूचना

19जून, 2023 ई०

पत्रांक-304/एन०पी०/05- राज०अनु० / गजट श्वान लाई ०एवं विज्ञापन-

नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ की सीमा के अन्तर्गत श्वान (कुत्तो) के लाइसेंस शुल्क से संबंधित उपविधियाँ

पत्रांक / उपविधि 2022-2023/ दिनाक नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ सीमान्तर्गत उ ० प्र ० नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 298 (उत्तराखण्ड में यथाप्रवृत्त) की उपधारा-2 , खण्ड(ज) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए, आरोपित/ संशोधित करने हेतु उपविधियां बनाकर उन व्यक्तियों जिन पर प्रस्तावित शुल्क के प्रभाव पड़ने की संभावना की जाती है, को दो राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाशन कराकर आपत्ति एवं सुझाव प्राप्त हेतु प्रकाशित की जा रही है ।

अतः समाचार पत्र में उपविधि की प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के अंदर लिखित सुझाव एवं आपत्ति, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़ को प्रेषित की जा सकेंगी । वादमियादी प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा । यह उपनियम शासकीय गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे ।

श्वान लाईसेन्स उपविधि 2022-23

1. यह उपविधि नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ लाइसेंस उपविधि 2022 कहलायेगी ।

2. यह उपविधि सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

3. परिभाषाए:

(क) " नगर पालिका परिषद" से तात्पर्य नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ व उसकी सीमा से है;

(ख) "अधिशासी अधिकारी" से तात्पर्य नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ के अधिशासी अधिकारी सेहै;

(ग) " अधिनियम "का तात्पर्य उत्तर प्रदेश, नगर पालिका अधिनियम 1916 (उत्राखण्ड राज्य में यथावृत्त) से है ।

4. प्रत्येक 3 माह अथवा इससे अधिक की आयु का श्वान (कुत्ता) , नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ की सीमा के अन्दर रखने / पालने पर इसका पंजीकरण नगर पालिका परिषद, कार्यालय में कराना आवश्यक होगा, जो प्रत्येक वर्ष की अन्तिम तिथि 31 मार्च तक वैद्य रहेगा ।

5. प्रत्येक ऐसे श्वान ( कुत्ता) , जिसका पंजीकरण कराना हो, के (1 ) लिंग, (2) रंग , (3) नस्ल (यदि ज्ञात हो) की सूचना सहित अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ को उसके स्वामी द्वारा आवेदन प्रेषित करना होगा । इसके लिए आवेदन-पत्र के साथ रु01000 का पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा । आवेदन- पत्र के साथ श्वान (कुत्ता) , को एंटि रेबीज वैक्सीन का टीका लगा होने का प्रमाण- पत्र भी प्रस्तुत करना होगा ।

6. श्वान (कुत्ता) , के स्वामी को प्रत्येक वर्ष अप्रैल अथवा इससे पूर्व ही पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन निर्धारित शुल्क सहित प्रेषित करना होगा । विलम्ब से प्रेषित नवीनीकरण प्रार्थना- पत्र पर प्रतिमाह रु० 10 विलम्ब शुल्क देय होगा ।

7. प्रत्येक श्वान (कुत्ता), के पंजीकरण के पश्चात् उसके पंजीयन संख्या का टोकन जारी किया जायेगा, जो श्वान (कुत्ता) , के गले में सदैव उपलब्ध रहेगा ।

भाग 8 ]

527 उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर , 2023 ई० (भाद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

8. किसी भी पंजीकरण के टोकन के खो जाने की दशा में उसके स्वामी की लिखित सूचना पर दूसरा टोकन रु0 50 के दण्ड शुल्क लेकर जारी किया जा सकेगा, श्वान (कुत्ता), के गले में टोकन ना पाये जाने की स्थिति में श्वान (कुत्ता) , पंजीकरण रहित माना जायेगा ।

9. प्रत्येक ऐसा श्वान (कुत्ता ), जो सार्वजनिक स्थल पर बिना गले में टोकन के पाया जायेगा, पकड़कर जब्त करने योग्य होगा ।

10. सार्वजनिक स्थल पर श्वान को कोई भी शौच नही करायेगा ।

11. खतरनाक श्वानपशु पालना वर्जित होगा । इस प्रकार के श्वानपशु द्वारा कोई जनहानि की जाती है तो उसका सम्पूर्ण दायित्व श्वानपशुपालक का होगा ।

12. किसी श्वान पालक द्वारा किया सार्वजनिक स्थल पर अपने श्वान को नही घुमायेगा ना ही शौच करायेगा । सार्वजनिक स्थल / मार्ग पर शौच कराने/ गंदगी करने पर कूड़ा फेंकना एवं थूकना प्रतिषेध नियमावली के अनुसार श्वान पालक के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी ।

13. श्वान पालक श्वान को विचरण कराते समय सदैव चैन/ पट्टे आदि में बांध कर रखेगा ताकि श्वान द्वारा किसी अन्य व्यक्ति/ पशु को हानि ना पहुंचा सके ।

14. यदि बिन्दु संख्या 13 के अनुसार कोई घटना घटित होती है और जिसके साथ घटना घटित हुई उस व्यक्ति/ संस्था द्वारा दूसरे पशुपालक द्वारा कोई वैधानिक कार्यवाही की जाती है तो उसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व उस श्वान पालक का होगा जो घटना घटित करने वाले श्वान का पालक/स्वामी होगा ।

15. यदि किसी व्यक्ति/ संस्था द्वारा श्वान पालन व्यवसाय की मंशा से की जाती है या श्वान का विक्रय पालन व्यवसाय की दृष्टि से किया जाता है तो उस व्यक्ति/ संस्था को नियतानुसार पशुपालन विभाग या अन्य संबंधित वभाग से अनुमति / स्वीकृति, ऐसा व्यवसाय करने से पूर्व लेना होगा ।

16. श्वान पशुपालक का यह दायित्व होगा कि यदि उसका पालतू श्वान बिमार/ खतरनाक हा जाता है ते उसकी सूचना पशुपालन विभाग को देगा और यथोचित कार्यवाही करेगा ।

17. यदि पालतू श्वान की मृत्यु होती है तो श्वान पालक उसे खुले में नहीं फेंकेगा, बल्कि उसका निसतारण प्रचलित व्यवस्था के अनुसार करेगा ।

दण्ड

इस नियमावली के नियम 4 से 8 की अवहेलना होने पर श्वान स्वामी दण्ड का भागी होगा, जो रु0 500 तक हो सकेगा एवं अवज्ञा जारी रहने की दशा में प्रतिदिन रु0 50 तक का अतिरिक्त दण्ड देय होगा ।

राजदेव जायसी,

अधिशासी अधिकारी ,

नगर पालिका परिषद- पिथौरागढ़ ।

राजेन्द्र सिंह रावत, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद् पिथौरागढ़ ।

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उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 8

कार्यालय नगर पालिका परिषद पिथौरागढ़

19 जून, 2023 ई०

पत्रांक-304/एन०पी०/ 05- राज० अनु० / गजट श्वान लाई ०एवं विज्ञापन-

पत्रांक 2946/विज्ञापन शुल्क उपविधि 2022-23 , नगर पालिका परिषद , पिंथौरागढ़, अधिनियम की धारा 298 (2) आई० एच० एफ० के अन्तर्गत जो अधिसूचित क्षेत्र समिति पर भी लागू है, द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका परिषद , पिथौरागढ़ ने अपनी सीमा के अन्दर अश्लील व अभद्र फिल्म पोस्टरों, विज्ञापनों, भवनों पर इश्तहारों, साइन बोर्डों आदि चिपकाने व प्रस्थापित करने सम्बन्धी विनियमित एवं नियंत्रित करने हेतु उपविधियां बनाई है । उक्त अधिनियम की धारा 301 (2 ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए उपविधियों की पुष्टि करते हैं । जो जन सामान्य एवं जिन पर इस उपविधि का प्रभाव पड़ने वाला हो, आपत्ति एवं सुझाव प्राप्ति हेतु प्रकाशित की जा रही है ।

अतः समाचार- पत्र में उपविधि के प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के अन्दर लिखित सुझाव एवं आपत्ति अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ को प्रेषित की जा सकेगी, बादमियादी प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ।

उपविधियां शासकीय गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगी ।

विज्ञापन शुल्क हेतु उपविधि 2022-23

1. इन उपनियमों में-

(क) प्रचार या विज्ञापन शब्द का अर्थ है- किसी भी प्रकार का होर्डिंग यूनिपोल, वॉल पेन्टिंग, पोल कियोस्क फलैक्स, बैनर, बैलून, बल्ली, एल ०ई०डी० लाईट, छतरी / कैनोपी, ध्वनि प्रसारक , लिफलेट/ पमप्लैट बिल, सूचना पोस्टर, चिपकाने वाले या साइनबोर्ड या अन्य किसी ऐसी वस्तु से है जिसके माध्यम से किसी वस्तु/ संस्था/ उत्पाद / प्रतिष्ठान / नाम(ब्राण्ड) आदि का विज्ञापन प्रचार के लिए प्रयुक्त किया गया हो या स्टेन्सिल के छपे हुए , हाथ से लिखे हुए रंगीन तथा रेखा चित्र अंकित किये गये हों, में सम्मिलित है ।

(ख) विज्ञापन के प्रचार हेतु प्रयुक्त स्थान से तात्पर्य किसी भवन, जिसमें किसी भी प्रकार का निर्माण किया हुआ भाग या भवन की बाहरी दीवार, फड़, अहाता एवं दूसरे प्रकार के भवनों के भाग , नगर के सड़कों के किनारे, दीवारों या पेड़ों, पार्किंग स्थलों, नदियों/ नालों के किनारे वाले स्थानों, घाटों का भाग भी सम्मिलित है तथा प्रयोगार्थ मान्य समझे जायेंगे ।

(ग) नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ की सीमा से तात्पर्य नगर पालिका की वर्तमान भौगोलिक सीमा/ क्षेत्र से है तथा भविष्य में संशोधित सीमाएँ भी इसमें उन उपविधियों के नियंत्रण एवं विनियमन हेतु सम्मिलित मानी जायेंगी ।

(घ) बोर्ड से तात्पर्य नगर पालिका में निर्वाचित माननीय अध्यक्ष एवं माननीय सभासदों सें है।

(ड) "अध्यक्ष" का तात्पर्य- नगर पालिका परिषद्, पिथौरागढ़ के अध्यक्ष से है ।

'529 भाग 8]

उत्तराखण्ड गजट , 02 सितम्बर, 2023 ई० (मांद्रपद 11. 1945 शक सम्वत्)

(च) अधिशासी अधिकारी का तात्पर्य अधिकारी से है । नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ के अधिशासी (छ) अश्लील एवं अभद्र का अर्थ ऐसे विज्ञापन/ प्रचार- प्रसार, वस्तु से है जिससे सामाजिक वैमन्स्यता उत्पन्न हो या जन भावनाओं के विपरीत हो ।

(ज) विज्ञापनों के प्रचार करने वालों में वे सभी व्यक्ति सम्मिलित हैं, जो विज्ञापन कार्यों के प्रकार हेतु नियुक्त प्रदर्शनकर्ता हो अथवा फर्म या कम्पनी का मालिक, स्वामी, प्रतिनिधि, साझेदार या प्रबंधक आदि प्रत्यक्ष विधि से. विज्ञापन प्रदर्शित किया गया हो या किये जाने की स्थिति में हो ।

(झ) अधिशासी अधिकारी स्वयं या अपने अधीनस्थ किसी भी कर्मचारी को विज्ञापन प्रसार व अनुमति दिये जाने से सम्बन्धित अभिलेखों के रख- रखाव हेतु व्यवस्था करेंगे तथा लेखों पर नियंत्रण रखेंगे या नामित करेंगे ।

2. कोई भी व्यक्त्ति नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ की सीमा के अन्दर किसी स्थान, भवन या जिसका ब्यौरा उपविधियों के प्रस्तर (ब) में उल्लिखित है । प्रदर्शित करने या सर्वसाधारण का ध्यान आकर्षित करने के लिए , बिना अधिशासी अधिकारी के पूर्व स्वीकृति न तो लगायेगा और न लगाने का अधिकारी होगा ।

3. विज्ञापित किये जाने हेतु प्रस्तावित विज्ञापन की दो प्रतियों के साथ प्रार्थना-पत्र अधिशासी अधिकारी को देना होगा । जो उसके विषय तथा भाषा आदि का परीक्षण करके अपनी सन्तुष्टि करेगा कि उसमें नैतिक व मानवीय दृष्टिकोण से कोई अभद्र, अप्रिय, अश्लील, अप्रिय कटु अथवा आपत्तिजनक तत्व व सामग्री तो नहीं है और तत्पश्चात् लिखित अनुमति या स्वीकृति देगा । इस प्रकार का कोई प्रार्थना-पत्र स्वीकृत/ अस्वीकृत करने का अधिकार बिना कारण बतायें अधिशासी अधिकारी का होगा ।

4. किसी स्थान विशेष की उपयोग की आज्ञा प्राप्त करने के लिए आवेदन- पत्र निश्चित स्थान के लिए स्पष्ट मानचित्र, प्रदर्शित की जाने वाली सामग्री या बनवाये जाने वाली तस्वीर की दो प्रतियाँ, विज्ञापन का आकार तथा जितने समय के लिए आज्ञा माँगी गई हो, उसके उल्लेख के साथ अधिशासी अधिकारी को प्रस्तुत करेगा व अधिशासी अधिकारी उपविधियों के प्रस्तर-3 के अन्तर्गत कार्यवाही करेगा ।

5. अधिशासी अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह अपने द्वारा किसी स्वीकृत आज्ञा को आपत्ति स्थिति में या जनहित में अस्वीकृत कर दें, काट दें या रोक दें तो ऐसी स्थिति में शुल्क का यथोचित भाग उनके द्वारा वापिस किया जायेगा । लेकिन इस प्रकार शुल्क का भाग वापस चाहने बाबत प्रार्थना-पत्र प्रभावित व्यक्ति या जिनके सम्बन्ध में उपनियमों के 1 खण्ड (च) में उल्लेख है, द्वारा प्रस्तुत किये जाने पर ही शुल्क वापिस कर दिया जायेगा ।

6. नगर पालिका परिषद , पिथौरागढ़ के सीमान्तर्गत अनाधिकृत विज्ञापन लगा होने पर अधिशासी अधिकारी को अधिकार होगा कि वह विज्ञापन (साइनबोर्ड सहित) को सम्बन्धित व्यक्ति के मूल्य, जोखिम और व्यय पर हटा दे । इस प्रकार किया गया व्यय सम्बन्धित व्यक्ति या फर्म 530

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से वसूल किया जायेगा । जिसके पक्ष में या ओर से उक्त विज्ञापन लगाया गया होगा । इस प्रकार के विज्ञापन को हटाने के पश्चात् वहां से हटाये गये साइनबोर्ड/ विज्ञापन सामग्री के स्वामी को अधिशासी अधिकारी द्वारा बिना नोटिस के या नोटिस देने पश्चात् या कोई स्वामी ज्ञात न होने पर हटाने के पश्चात् अध्यक्ष / अधिशासी अधिकारी उसको नीलाम करने की आज्ञा दे सकेगा ।

7. अधिशासी अधिकारी की किसी भी आज्ञा के विरूद्ध अपील, समिति के अध्यक्ष के पास की जा सकेगी, किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि इस प्रकार की आज्ञा प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर प्रस्तुत की जायेगीं । समिति के अध्यक्ष, अध्यक्ष नगर पालिका होंगे तथा सदस्य अधिशासी अधिकारी , कर अधीक्षक, अवर अभियन्ता एवं कर निरीक्षक या अध्यक्ष को अधिकार होगा कि वह किसी अन्य सदस्य को भी नामित कर सकेगा ।

8. इन उपनियमों एवं उपविधियों के अन्तर्गत प्रत्येक आज्ञा को स्वीकार किये जाने पर प्रतिवर्ग फीट के अनुसार निर्धारित विज्ञापन शुल्क अग्रिम जमा करना होगा।

9. इन्डिकेटर / साईन बोर्ड या अन्य बोर्ड जहाँ दोनों ओर विज्ञापन लिखे होंगे, वहां निर्धारित शुल्क दोगुने हो जायेंगे । इन्डिकेटर/ साईन बोर्ड का साइज 5x3 फीट का होगा ।

10. विज्ञापन शुल्क बैंक ड्राफट / बैंक चेक/ नकद रूप में जमा किया जायेगा ।

11. विज्ञापन शुल्क का भुगतान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 अप्रैल तक पूर्णतः अग्रिम (100 प्रतिशत) जमा किया जायेगा । 30 अप्रैल के एक माह तक शुल्क जमा न होने पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क प्रतिमाह तथा उसके पश्चात् भी जमा न होने की दशा में विज्ञापन का पंजीकरण / स्वीकृति निरस्त कर दिया जायेगा ।

12. तिराहे, चौराहों तथा मोड़ों या ऐसे स्थल जहां पर विज्ञापन पट लगाने से यातायात में कठिनाई हो/यातायात बाधित हो । ऐसे में तिराहे व चौराहे में केंद्र से प्रत्येक पथ पर 10 मीटर तक विज्ञापन पट लगाने पर प्रतिबन्ध रहेगा या परिस्थिति अनुसार समिति दूरी पर निर्णय लेते हुए दूरी में कमी या वृद्धि कर सकेगी ।

13. यूनिपोल पर विज्ञापन शुल्क सामान्य विज्ञापन शुल्क से दोगुना होगा ।

14. होर्डिंग/यूनिपोल का अधिकतम साइज 20x10 फीट का होगा ।

15. होर्डिंग/यूनिपोल की संरचना मजबूत व फ्रेम के आकार की होनी चाहिए । जिससे आँधी आदि के समय न गिरे ।

16. कपड़े के बैनर की चौड़ाई ढाई फुट से अधिक नहीं होगी तथा वह सड़क धरातल 12 फुट ऊँचाई से कम पर प्रदर्शित नहीं होगा ।

17. प्रत्येक 04 वर्ष पश्चात् निर्धारित विज्ञापन शुल्क में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी ।

भाग 8 ]

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18. नगर पालिका की सीमान्तर्गत प्रदर्शित किए जाने वाले विज्ञापन हेतु विज्ञापनकर्ता से विज्ञापन शुल्क की वसूली की जायेगी । वसूली का कार्य नगरपालिका की सुविधानुसार स्वयं निकासे द्वारा या निविदा के माध्यम से ठेके पर किया जायेगा ।

19. वर्णित उपविधियों के अन्तर्गत साइनबोर्ड आदि हेतु प्रदत्त आज्ञा प्राप्त होने अथवा शुल्क जमा होने की स्थिति में यदि किसी व्यक्ति या फर्म आदि का साईनबोर्ड गिर जाता है, खो जाता है, चोरी में चला जाता है या क्षतिग्रस्त होता है तो उसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व विज्ञापन स्वामी का होगा । किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति के लिये नगर पालिका उत्तरदायी नही होगी ।

20. उपरोक्त उपनियमों के अन्तर्गत निम्नलिखित विज्ञापन निःशुल्क दिया जा सकेगा ।

(क) शासन के कार्यों के लिए शासन द्वारा लगाये गये विज्ञापन ।

(ख) केन्द्र /राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार- प्रसार ।

(ग) सरकारी स्कूल, राजकीय कॉलेज, शासकीय औषधालय , आपात स्थिति से सम्बन्धित स्वीकृत नारे (बैनर) ऐसे सामाजिक शासकीय विज्ञापन आदि जो जनहित से संबंधित हो ।

21. यदि कोई व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान नगर पालिका द्वारा किसी प्रकार का अर्थ दण्ड आरोपित किये जाने उपरान्त निर्धारित शुल्क जमा नहीं करता है अथवा आरोपित अर्थदण्ड का ससमय भुगतान नहीं करता है तो उक्त विज्ञापन शुल्क/ आरोपित अर्थदण्ड की वसूली भू- राजस्व की भांति करने का अधिकार नगर पालिका परिषद्, पिथौरागढ़ में निहित होगा ।

22. किसी भी संस्था/ प्रतिष्ठान / दुकान के सम्मुख लगे विज्ञापन जो उस संस्था / प्रतिष्ठान/ दुकान के पहचान जैसे संस्था/ प्रतिष्ठान/ दुकान का नाम आदि प्रदर्शित करता हो, पर कोई शुल्क देय नही होगा परन्तु यदि उसी संस्था/ प्रतिष्ठान/ दुकान का नाम किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शित करता है या संस्था / प्रतिष्ठान/ दुकान के सम्मुख लगे फसाहट पर किसी वस्तु प्रमाणित ब्राण्ड, उत्पाद का उल्लेख करता है तो प्रतिवर्ग फीट निधारित दर से शुल्क देय होगा ।

इकाई

दर (प्रति वर्ग फुट/ प्रति वर्ष)

माप (वर्ग फुट

में)

10*20

होर्डिंग्स/यूनिपोल

100.00

पोल क्योस्क

2*1.5

100.00

फ्लैक्स/बैनर

100.00

बड़े एयर

100.00 प्रति दिन

बैलून/बल्ली/दिवार

एल०ई०डी० डिस्प्लै

300.00 प्रति वर्ग फुट / प्रति वर्ष

छतरी /कैनोपी

50प्रति दिन

ध्वनी प्रचारक

200.00 प्रति दिन/ प्रति ध्वनी

पम्प्लैट

50.00 (प्रति एक सौ)

लिफ्लेट

100.00 (प्रति एक सौ) 532

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

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शास्ति

यू० पी० म्युनिसिपैलिटीज एक्ट, 1916 (उत्तराखण्ड में प्रवृत) की धारा 299(1 ) द्वारा प्रवृत अधिकारों का प्रयोग करके नगरपालिका परिषद्, पिथौरागढ़ आदेश देती है कि उपरोक्त उपविधियों में से किसी उपविधि का उल्लंघन करने पर अर्थदण्ड आरोपित किया जा सकता है । जो रु० 1,000.00 तक हो सकता है और यदि अपराध निरंतर जारी रहा तो प्रथम अपराध के निर्णय के दिनांक के पश्चात् जिनमें कि अपराधी का अपराध सिद्ध हुआ है रु0 500.00 प्रतिदिन हो सकता है ।

राजदेव जायसी,

अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ ।

राजेन्द्र सिंह रावत, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, पिथौरागढ़ ।

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भाग 8]

कार्यालय नगर पंचायत, बेरीनाग पिथौरागढ

"सार्वजनिक सूचना"

30जून, 2022 ई०

संख्या-173 /न० प०बे ० / सा० सू० / 2022-23- नगर पंचायत बेरीनाग क्षेत्रान्तर्गत नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 128 (प) 130 (क), (2), 140, 141 , 141- क, 141 ख , (1 ) (2) के साथ पठित नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 298 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करके नगर क्षेत्रान्तर्गत आवासीय , व्यवसायिक , गैर आवासीय , किराये के भवनों व्यवसायिक भवनों पर भवन कर निर्धारण करने हेतु " सम्पत्ति एवं भवन कर निर्धारण " उपविधि-2022 तैयार की गई है जो नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 301 के अन्तर्गत जनसामान्य एवं जिन पर इस उपविधि का प्रभाव पड़ने वाला हो, उनसे आपत्ति एवं सुझाव प्राप्त करने हेतु प्रकाशित की जा रही है ।

अतः समाचार पत्र में उपविधि के प्रकाशन की तिथि से अन्दर 30 दिवस के लिखित सुझाव एवं आपत्तियां अधिशासी अधिकारी , नगर पंचायत बेरीनाग के कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस में कार्यावधि के दौरान उपलब्ध करानी होंगी । बाद मियाद प्राप्त होने वाली किसी भी आपत्तियों एवं सुझावों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा ।

" सम्पत्ति एवं भवन कर निर्धारण' उपविधि 2022

1- संक्षिप्त शीर्षनाम और लागू होने की तारीख

( 1) यह उपविधि नगर पंचायत बेरीनाग जिला पिथोरागढ़ के सम्पूर्ण सीमान्तर्गत स्थित भवनों पर आरोपित किये जाने हेतु तैयार की गई है जो सम्पत्ति एवं भवन कर निर्धारण' उपविधि- 2022 कहलाएगी

( 2 ) यह उपविधि उत्तराखण्ड शासकीय गजट में प्रकाशित होने की तिथि से प्रवृत्त होगी ।

2. परिभाषायें किसी विषय या प्रसंग में कोई प्रतिकूल न होने पर इस नियमावली में -

(क) हैं । अधिनियम का तात्पर्य नगरपालिका अधिनियम 1916 ( यू० पी० म्युनिस्पैलटीज एक्ट संख्या 2,1916 ) से (ख ) नगर का तात्पर्य नगर पंचायत बेरीनाग से है ।

(ग ) अध्यक्ष'' का तात्पर्य नगर पंचायत बेरीनाग के निर्वाचित अध्यक्ष से है ।

(घ) बोर्ड का तात्पर्य नगर पंचायत बेरीनाग के निर्वाचित अध्यक्ष व सदस्यों के बोर्ड से हैं ।

(ड. ) अधिशासी अधिकारी का तात्पर्य अधिशासी अधिकारी , नगर पंचायत बेरीनाग से है ।

(च ) प्रशासक का तात्पर्य जिलाधिकारी अथवा जिलाधिकारी द्वारा नामित प्रशासनिक अधिकारी से है ।

(छ) अवर अभियन्ता' का तात्पर्य नगर पंचायत बेरीनाग में कार्यरत अथवा नगर पंचायत हेतु नामित अवर अभियन्ता से है ।

(ज ) '' कर निरीक्षक का तात्पर्य कर निरीक्षक नगर पंचायत बेरीनाग अथवा अधिशासी अधिकारी द्वारा नामित सम्बन्धित कर्मचारी से है ।

(झ ) '' कर संग्रहकर्ता का तात्पर्य नगर पंचायत में कार्यरत कर संग्रहकर्ता या ऐसे पालिका कर्मचारी से है जिसे अधिशासी अधिकारी द्वारा कर वसूली हेतु समय- समय पर अधिकृत किया गया हो ।

( ' ) '' भवनों का समूह का तात्पर्य नियम 4 के अधीन उल्लिखित भवनों के समूह से है ।

(ट ) ' कबर्ड एरिया का तात्पर्य भूमि के उस भाग से है जिस भाग पर भवन निर्मित हैं ।

(ठ) आवासीय भवन' का तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसका उपयोग भवन स्वामी/अध्यासी/पट्टाधारक आदि द्वारा निवास हेतु किया जा रहा है ।

(ड ) अनावासीय भवन ' का तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसका उपयोग व्यवसायिक रूप से किया जा रहा हो या जिससे आय सृजन हो रही हो।

(च ) '' खाली भवन का तात्पर्य ऐसे भवन से जिसका उपयोग किसी भी रूप में यथा आवासीय/व्यवसायिक/भण्डारण आदि के रूप में लगातार 90 दिन तक ना किया गया हो ।

(छ ) व्यवसायिक अनुलग्न भूमि का तात्पर्य ऐसी भूमि से है जिसका उपयोग व्यवसायिक रूप से किया जा रहा हो (कृषि कार्य को छोड़कर ) 534

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[भाग 8

(ज) '' दूरी का तात्पर्य मोटर मार्ग व भवन के मध्य हवाई दूरी या भूगत दूरी से जो कम हो लागू होगी ।

किसी भवन या भूखण्ड के कबर्ड एरियों और अन्य क्षेत्र, का विवरण -

3- ( 1 ) नगर पंचायत द्वारा सूचना प्रकाशित कर के सम्पत्ति कर के भुगतान के लिए मुख्यतः दायी स्वामी या अध्यासी उपभोगकर्ता से इस नियमावली में संलग्न प्रपत्र ' क' में यथा स्थिति आवासीय भवन या भूखण्ड के कबर्ड एरिया और अन्य क्षेत्रफल का विवरण भर कर प्रत्येक पांच वर्ष में कर निर्धारण के प्रयोजनार्थ उक्त सूचना में नियत दिनांक तक प्रस्तुत करने की अपेक्षा करेगा ।

(2 ) अधिशासी अधिकारी सम्पत्ति के स्वामी या अध्यासी की सुविधा के लिए प्रपत्र " क " में विवरण प्रस्तुत करने के लिए नगर के विभिन्न वार्डों के लिए विभिन्न स्थलों को नियत कर सकता है ।

( 3 ) जब कभी स्वामी द्वारा स्व-अध्यासिक या खाली भवन को किराये पर दिया जाय या इसके विपरीत हो तो ऐसा होने के साठ दिन भीतर स्वामी के लिए प्रपत्र ' क' में एक नया विवरण प्रस्तुत करना आज्ञांपक होगा ।

(4 ) जब किसी भवन में निर्माण या पुर्ननिर्माण के फलस्वरूप आच्छादित क्षेत्रफल में 25 प्रतिशत या अधिक वृद्धि हो जाती है तो निर्माण के समापन या अध्यासक के दिनांक से साठ दिन के भीतर यथास्थिति स्वामी या अध्यासी के लिए प्रपत्र '' क'' में एक नया विवरण प्रस्तुत करना होगा ।

( 5 ) व्यवसायिक भवन के साथ अनुलग्न भूमि की माप व अनुलग्न भूमि पर कर निर्धारण यदि उसका उपयोग व्यवसायिक रुप में किया जा रहा हो तो उसी प्रकार आरोपित होगा जैसे वह भूमि कोई एक मंजिला भवन हैं।

( 6 ) नगर में ऐसे समस्त स्थापित टावर , होर्डिंग वाले भवन , दूर संचार टावर या अन्य टावर जो भवन की सतह पर या शिखर पर , खुले स्थान पर प्रतिस्थापित किये गये हों की भाप पर भवन कर उपविधि के उपनियम 4 ख के अनुसार लागू होगी ।

( 7 ) नगर स्थित विद्युत विभाग के सार्वजनिक/निजि भूमि पर स्थापित किये जाने वाले विद्युत ट्रांसफार्मर वाली भूमि चाहरदीवारी सहित , विद्युत पोल जिसमें पोल स्थापित किये जाने वाली भूमि के अतिरिक्त एक वर्गफुट की एरिया सम्मिलित होगी में माप के अनुसार भवन कर उपविधि के उपनियम 4 ख के अनुसार लागू होगी ।

4- सम्पत्तियों का वर्गीकरण

( 1) अध्यक्ष/प्रशासक/ बोर्ड/अधिशासी अधिकारी/ नगर पंचायत बेरीनाग द्वारा पंचायत सीमान्तर्गत आने वाली सम्पत्ति /भवन की अवस्थिति का वार्डवार वर्गीकरण करेगा और तत्पश्चात प्रत्येक वार्ड के भीतर तीन विभिन्न प्रकार के मार्गों पर सम्पत्ति की अवस्थिति के आधार पर इंसे वर्गीकृत किया जाएगा अर्थात -

(क ) मोटरेबल रोड से 0 से 50 मीटर तक की दूरी परः-

( ख ) मोटरेबल रोड से 50 मीटर से 100 मीटर तक की दूरी पर

( ग ) मोटरेबल रोड से 100 मीटर से अधिक तक की दूरी पर

( 2) अधिशासी अधिकारी उपबन्ध के अन्तर्गत आने वाले भवनों के निर्माण की प्रकृति का वर्गीकरण निम्नलिखित आधार पर करेगा-

(क) पक्काभवन आर ०आर ० सी० छत या आर ० बी ० छत सहित या

( ख) अन्य पक्का भवन , या

(ग ) कच्चा भवन अर्थात समस्त अन्य भवन जो खण्ड (क ) और (ख ) से आच्छादित नहीं है ।

( 3 ) अध्यक्ष/प्रशासक/बोर्ड/अधिशासी अधिकारी/नगर पंचायत बेरीनाग तद्रुसार वार्ड में नीचे दर्शाये गये अनुसार सभी भवनों को 9 विभिन्न समूहों की अधिकतम् संख्या में व्यवस्थित करेगा -

( एक) मोटरेबल रोड से 0 से 50 मीटर तक की दूरी पर स्थित आर० सी० सी० छत या आर ० बी० छत सहित पक्का मकान ।

(दो ) मोटरेबल रोड से 50 से 100 मीटर तक की दूरी पर स्थित आर ० सी० सी० छत या आर० बी० सहित पक्का भवन । (तीन) मोटरेबल रोड से 100 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित आर ० सी ० सी ० छत या आर ० बी० छत सहित पक्का भवन ।

(चार ) मोटरेबल रोड से 0 से 50 मीटर तक की दूरी पर स्थित अन्य पक्का भवन ।

( पांच ) मोटरेबल रोड से 50 से 100 मीटर तक की दूरी पर स्थित अन्य पक्का भवन ।

भाग 8]

f

535

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

(छः) मोटरेबल रोड से 100 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित अन्य पक्का भवन ।

(सातें) मोटरेबल रोड से 0 से 50 मीटर तक की दूरी पर स्थित कच्चा भवन 'जो उपरोक्त (1,2,3,4,5 में सम्मिलित नहीं है ।

(आठ) मोटरेबल रोड से 50 से 100 मीटर तक की दूरी पर स्थित कच्चा भवन जो उपरोक्त ( 1,2,3,4,5,6 ) में सम्मिलित नहीं है

(नौ) मोटरेबल रोड से 100 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित कच्चा भवन जो उपरोक्त ( 1,2,3,4,5,6) में सम्मिलित नहीं है ।

(नोट - सम्बन्धित भवनों की दूरी भवन के समीप स्थित मोटर मार्ग /जीपेबल मार्ग से हवाई दूरी के आधार पर आंकी जाएगी )

4 (क) न्यूनतम् मासिक किराये की दर का निर्धारण अध्यक्ष/प्रशासक/बोर्ड/अधिशासी अधिकारी/नगर पंचायत बेरीनाग वार्ड के भीतर प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार यथास्थिति भवनों के प्रत्येक समूह के लिए कबर्ड एरिया की प्रति इकाई (वर्गफुट ) न्यूनतम् मासिक किराये की दर तैयार करेगा और निम्न को ध्यान में रखते हुए नियत करेगा -

(एक) भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 के प्रयोजन के लिए कलैक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल दर और

(दो ) भवन के लिए क्षेत्र में वर्तमान किराये की न्यूनतम् दर ।

प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे मासिक किराये की दर नियत करने के पूर्व अध्यक्ष/ प्रशासक/ बोर्ड /अधिशासी अधिकारी /नगर पंचायत बेरीनाग ऐसी प्रस्तावित दरों को ऐसे नगर में परिचालन करने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में अधिसूचित करेगा और तत्पश्चात हितबद्ध व्यक्तियों को आपत्तियां दाखिल करने के लिए न्यूनतम् 30 दिन का समय देगा । प्राप्त आपत्तियों की पच्चीस भिन्न- भिन्न बण्डलों की अधिकतम् संख्या में समूह बनाने के पश्चात ऐसी सभी आपत्तियों पर वार्डवार सुनवाई की जायेगी । प्रत्येक बण्डल में यथास्थिति भवनों के एक समूह के लिए आपत्तियां रहेंगी । सभी आपत्तियों का निस्तारण अध्यक्ष/प्रशासक/बोर्ड/अधिशासी अधिकारी/ नगर पंचायत द्वारा स्वयं अथवा उनके द्वारा प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा आपत्तिकर्ताओं की कुल संख्या के कम से कम दस प्रतिशत व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात किया जाएगा । यह आवश्यक नहीं होगा कि सभी आपत्तिकर्ताओं को या हितबद्ध व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप् से सुना जाय। आपत्तियों का बण्डलवार विनिश्चित किया जाएगा ।

(तीन)- आवासीय भवन का प्रस्तावित समस्त वार्डों के लिए कबर्ड एरिया की मासिक किराया दर प्रति वर्ग फिट /माह

वार्ड का नाम/ नम्बर

पक्काभवन आर० सी ०सी० / आर०वी ० छत

मुख्य सड़क से 50 से 100 मीटर तक की दूरी पर स्थित भवनकी मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 50 मीटर तक की दूरी पर स्थित भवन की मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 100 से अधिक तक की दूरी पर स्थित भवन की मासिक किराया दर अन्य कच्चा भवन

कच्चा भवन

मुख्य सड़क से 50 मीटर तक की दूरी पर स्थित भवनकी मासिक किराया दर

1

0.75

वार्ड-01 (बना)

0.50

0,25 मुख्य सड़क से 100 से अधिक तक की दूरी पर स्थित भवन की मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 50 से 100 मीटर तक की दूरी पर स्थित भवनकी मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 100 से अधिक तक की दूरी पर स्थित भवन की मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 50 मीटर तककी दूरी पर स्थित भवन की मासिक किराया दर

मुख्य सड़क से 50 से 100 मीटर तक की दूरी परस्थित भवन की मासिक किराया दर

0.25

0.50

0.75

0.50

0.25 2 वार्ड-02 (खितोली)

0.20

0.25

0.15

0.10

0,50

0.75

0.50

3 वार्ड-03 ( भटटीगांव)

0.25 0.25

0.20

0.15

0.25

0.10

0.50

0.75

0.25

0.50

4 वार्ड-04 (नागदेवमंदिर)

0,25

0.20

0.25

0.15

0.10

0.50

0.75

0.50

5 वार्ड-05 (शहीद चौक)

0.25

0.20

0.25

0.15

0.10

0.50

0.25

0.75

0.50

0.25 0.25

0.25

0.20

0.15

0.10

0.50

6 वार्ड-06 (ढनौली पंत)

0.75

0.50

0.25 7 वार्ड -07 (सरस्वतीविहार)

0.25

0.20

0.25

0.15

0.10

0.25

0.50

0.20

0.25

0.15

0.10 536

उत्तराखण्ड गुजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 8

4. (ख ) अनावासिक भवनों के आच्छादित क्षेत्रफल और भूमि का प्रति इकाई क्षेत्रफल मासिक किराये की दर उपनियम (4क) के अधीन नियत किराये की मासिक दर का गुणांक होगा , जैसा कि नीचे अनुसूची में उल्लिखित है -

अनुसूची

श्रेणी

सम्पत्तिका विवरण

अनावासिक भवन की मासिक किराये की दर

1 आवासीय भवन का व भाग जो किराये पर दिया हो

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का तीन गुना 2

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का पांच गुना प्रत्येक प्रकार के वाणिज्यिक काम्पलैक्स, दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान, बैंक कार्यालय, होटल तीन स्टार तक, निजी होटल, कोचिंग और प्रशिक्षण संस्थान (राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त को छोड़कर)

3 प्रत्येक प्रकार के निजि क्लीनिक, पालीक्लीनिक, डायग्नोस्टिक केन्द्र, प्रयोगशालाएं, नर्सिंग होम, चिकित्सालय मेडिकल स्टोर और स्वास्थ्य परिचर्या केन्द्र या कोचिंग

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का तीन गुना 4 कीड़ा केन्द्र यथा जिम, शारीरिक स्वास्थ्य केन्द्र आदि और थियेटर तथा सिनेमागृह

उपनियम (4क) के अधीन

नियत दर का तीन गुना 5 छात्रावास और शैक्षणिक संस्थान/विद्यालय (केन्द्र सरकार / राज्य सरकार द्वारा पूर्णतः संचालित को छोड़कर)

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर के चार गुना 6 पैट्रोल पम्प, गैस एजेन्सी, डिपो और गोदाम आदि

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का तीन गुना 7 मॉल्स,चार सितारा और उससे ऊपर के होटल, पब्स, बार, वासगृह जहां भोजन के साथ मदिरा भी परोसी जाती है

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का छः गुना

8 सामाजिक भवन, कल्याण मण्डप , विवाह क्लब, बारात घर और इसी प्रकार के भवन

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का पाँच गुना

9 औद्योगिक इकाइयां, सरकारी , अर्द्धसरकारी और सार्वजनिक उपक्रम कार्यालय (समस्त राजकीय चिकित्सालयों को छोड़कर)

उपनियम (4क) के अधीन नियत दरं का तीन गुना

10 टावर और होर्डिंग वाले भवन, टी०वी० टावर दूरसंचार टावर या कोई अन्य टावर जो भवन की सतह पर या शिखर या खुले स्थान पर प्रतिस्थापित किये जाते हैं

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का चार गुना

उपनियम (4 क) के अधीन नियत दर का चार गुना 11 विद्युत विभाग के सार्वजनिक/ निजि भूमि पर सीपित किये जाने वाले विद्युत ट्रांसफार्मर वाली भूमि चाहरदीवारी सहित, विद्युत पोल जिसमें पोल सीीपित किये जाने वाली भूमि के अतिरिक्त एक वर्गफुट की एरिया सम्मिलित होगी

उपनियम (4क) के अधीन नियत दर का दो गुना 12 मन्दिर, मस्जिद , गुरुद्वारा , चर्च एवं अन्य धार्मिक स्थल के ऐसे भवन जिनका उपयोग धर्मशाला, पड़ाव, मुसाफिरखाना,सराय के लिए होता है, को छोड़ कर अन्य भाग ,भवन जिनका उपयोग व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है या जिस भाग से कोई शुल्क या आर्थिक लाभ प्राप्त किया जाता हो ।

13 अन्य प्रकार के अनावासिक भवन जो उपर्युक्त श्रेणियों में उल्लिखित नहीं हैं

उपनियम (4 क) के अधीन नियत दर का तीन गुना

14 समस्त व्यवसायिक भवन से अनुलग्न भूमि जिसका उपयोग व्यवसायिक भवन के साथ व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है।

भवन के निर्धारित प्रति वर्गफुट के कर के बराबर

4- ( ग ) वार्षिक कर निर्धारण वार्षिककर का निर्धारण निम्नांकित आधार पर किया जायेगा

(एक) आवासीय भवन के वार्षिक मूल्याकंन की गणना सम्पूर्ण भवन का कबर्ड एरिया x 80 प्रतिशत x निर्धारित

प्रति वर्ग फुट क्षेत्रफल मासिक किराया की दर x 12 =

दो) अनावासिक भवनों की वार्षिक मूल्य की गणना-

( भवन का कवर्ड क्षेत्रफल x अनावासिक भवनों की दर के सम्बन्ध में गुणक के आधार पर नियत प्रति इकाई

क्षेत्रफल की दर x 12 = भाग 8]

537 उत्तराखण्ड गजट , 02 सितम्बर , 2023 ई० ( भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

(तीन) संदेय कर ग (एक ) , ग ( दो ) के अनुसार निर्धारित वार्षिक मूल्यांकन का 10 प्रतिशत वार्षिक सम्पत्ति कर देय होगा।

(चार ) संदेय कर का उत्तरदायित्व भवन स्वामी या अध्यासी या उपभोगकर्ता या प‌ट्टादाता का यह उत्तरदायित्वं होगा कि वह स्थानीय निकास द्वारा भवन/भूमि का विवरण/ वार्षिक मूल्यांकन निर्धारित करने हेतु निर्धारित प्रपत्र 'क' नगर निकाय से प्राप्त कर अपने भवन/ प्रतिष्ठान का पूर्ण विवरण व वार्षिक मूल्यांकन स्वयं निर्धारित कर उपनियमं 04 ( ग ) के अनुसार नगर पालिका को उपलब्ध करायेगा ।

(पांच) ग (एक) , ग ( दो) के अनुसार निर्धारित वार्षिक मूल्यांकन पर ग (तीन) के अनुसार नियम संदेय कर को जमा करने की अंतिम तिथि प्रत्येक वर्ष के माह 31 अक्टूबर होगी ।

अथवा

1. कोई कर दाता नियमावली के उपनियम 5 के द्वारा निर्धारित छुट का लाभ तभी प्राप्त कर सकेगा कि वह प्रत्येक वर्ष के माह 31 अक्टूबर या उससे पूर्व देय कर को नगर पालिका कोष में जमा कर उक्त तिथि तक रसीद या सूचना प्राप्त कर लेवें ।

( 5 ) छूट आवासिक भवनों के देय कर में छूट अनुमन्य होगी और जो निम्नानुसार होगी ।

1. भवन कर वित्तीय वर्ष के माह अक्टूबर तक जमा करने की स्थिति में भवन स्वामी को देय भवन कर पर 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट आकलित वार्षिक कर पर प्रदान की जायेगी ।

2. भवन 20 से 30 वर्ष पुराना होने पर देय कर में 5 प्रतिशत की छूट । ( वार्षिककर के आगणन के समय) 3. भवन 31 से 40 वर्ष पुराना होने पर देय कर में 10 प्रतिशत की छूट। (वार्षिककर के आगणन के समय ) 4. भवन 41 वर्ष से अधिक पुराना होने पर देय कर में 15 प्रतिशत की छूट । ( वार्षिककर के आगणन के समय ) प्रतिबन्ध यह है कि

1. उपरोक्त बिन्दु सं 0 2,3,4 पर भवन कर से छूट प्राप्त करने हेतु भवन स्वामी भवन की आयुगणना व स्वामित्व प्रमाण हेतु निम्न अभिलेख मान्य होगा-

(क ) खतौनी , विक्रय पत्र , दान पत्र , प‌ट्टाभिलेख , वारिसान प्रमाण पत्र आदि की छाया प्रति

(ख ) विहित प्राधिकारी , नगरपालिका या अधिकृत संस्था द्वारा स्वीकृत मानचित्र की छायाप्रति

( ग) भवन का सबसे पुराना विद्युत बिल गृहकर रसीद/पानी का बिल या अन्य प्रमाण आदि जिसमें भवन की आयु की गणना आदि इंगित हो ।

1. नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 157 के तहत छूट अनुमन्य होगी।

2. भवन स्वामी , अध्यासी उपभोगकर्ता द्वारा भवन कर जमा न करने की स्थिति में भवन कर की वसूली नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 173 ( क ) के तहत भू- राजस्व की भांति वसूली की जायेगी।

( 6 ) स्वनिर्धारण आवासिक भवन के विषय में भवन कर के भुगतान के लिए मुख्यतयः दायी व्यक्ति या अन्य दायी व्यक्ति नियम 4 और 4 - ग के अनुसार कर निर्धारित करते हुवे नियम 3 में अपेक्षित विवरणी के साथ इस नियमावली के प्रपत्र " क " में सम्पत्ति कर का विवरण अंकित करते हुए नियम 3 के उपनियम ( 1 ) के अधीन निर्धारित दिनांक यथा स्थिति प्रपत्र '' क'' के साथ नगर पंचायत बेरीनाग में धनराशी जमा कर सकेगा ।

(7) कर निर्धारण सूची का तैयार किया जाना

( 1 ) सभी भवनों की कर निर्धारण सूची गणना के पश्चात निम्नलिखित आधार पर तैयार की जाएगी -

(क) भवन के स्वामी या अध्यासी द्वारा प्रपत्र ' क' पर प्रस्तुत किये गये विवरण के आधार पर

या

(ख ) नियत समय के भीतर प्रपत्र यथा स्थिति ' क' में सूचनायें न देने की स्थिति में अध्यक्ष/ प्रशासक/अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत या उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी द्वारा एकत्र की गई सूचनाओं के आधार पर , ( ग ) कर निर्धारण सूची में निम्नलिखित समाविष्ट होंगे-

(एक) सड़क या मोहल्ले, जिसमें सम्पत्ति स्थिति हो , का नाम ,

(दो) नाम या संख्या या किसी अन्य विनिर्दिष्ट द्वारा जो पहचान के लिए पर्याप्त हों , सम्पत्ति का अभिधान , 538

उत्तराखण्ड गजट, 02 सितम्बर, 2023 ई० (भाद्रपद 11 , 1945 शक सम्वत्)

[भाग 8

(तीन ) स्वामी का नाम , यह उल्लेख करते हुए कि यह स्वामी द्वारा अध्यासित है या किराये पर है , यदि किराये पर है तो किरायेदार का नाम ,

(चार) भवन या भवन से अनुलग्न समूह के लिए कबर्ड एरिया आधारित तथा आच्छादित क्षेत्रफल आधारित प्रति वर्ग फुट किराये की न्यूनतम मासिक दर।

(पांच) भवन का कबर्ड एरिया अथवा आच्छादित क्षेत्रफल या भूमि का क्षेत्रफल या दोनों ,

(छः ) भवन निर्माण का वर्ष ,

(सात) भवन निर्माण की प्रकृति ,

(2) भवन कर निर्धारण के सम्बन्ध में सूची ऐसे आवासिक भवनों को, जिनके विषयों में प्रपत्र ' क' पर और अनावासिक भवनों , जिनके विषय में प्रपत्र पर विहित अवधि के भीतर स्वनिर्धारित कर जमा कर दिया हो , उपनियम (1 ) के अन्तर्गत तैयार की गई सूची में प्रविष्ट तो किया जायेगा परन्तु भवन नियम 5 - क के उपलब्ध ऐसे भवनों पर लागू नहीं होगे । प्रतिबन्ध यह है कि किसी शिकायत या जांच के आधार पर यदि कोई विवरण सहीं नहीं पाया जाता है तो सूची में प्रविष्ट विवरण एवं उसमें निर्धारित कर को पुनरीक्षित किया जायेगा तथा कारण बताओ के पश्चात शास्ति अधिरोपित की जायेगी ।

( 8 ) - सम्पत्तिकर निर्धारण किसी भवन या भूमि या दोनों के सम्बन्ध में कर के भुगतान के लिए मुख्यतः स्वामी या अध्यासी अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार सम्पत्ति कर को स्वतः अवधारित कर सकता है और उसके द्वारा इस प्रकार निर्धारित सम्पत्ति कर को स्वकर निर्धारण विवरण के साथ पालिका में नगद , पालिका द्वारा अधिसूचित बैंक खाते में ड्राफ्ट/चैक अथवा नगर सेवा पोर्टल या शासन द्वारा समय समय निर्देशित माध्यम से जमा कर सकता है ।

( 9 ) शास्ति ( 1 ) यदि किसी भवन स्वामी , अध्यासी , उपभोगकर्ता द्वारा उपविधि के उपबन्धों के अनुसार स्वकर निर्धाकरण सम्बन्धी सूचना/कोई तथ्य छिपता है त्रुटि करता है/ भवन कर आंगणन में कमी करता है और ऐसा पाये जाने पर त्रुटि/छिपाये गये कर का दो से चार गुना जैसा कि कर निर्धारण समिति निर्धाकरण करें भवन स्वामी/अध्यासी/उपभोगकर्ता से वसूल किया जा सकेगा।

(2) संदेय कर प्रत्येक वित्तीय वर्ष तक पालिका कोष में जमा न करने पर आगामी वित्तीय वर्ष में संदेय कर पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार देना होगा जो प्रत्येक बकाया वर्ष पर लगातार लागू रहेगा।

(10 ) स्वामित्व उपरोक्त उपविधि का प्रकाशन मात्र पालिका करों की वसूली के प्रयोजनार्थ किया गया है संदेय कर से सम्पत्ति के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा । किसी भी वाद की स्थिति में सम्पूर्ण उत्तरदायित्व भवन स्वामी/अध्यासी का होगा।

ह० (अस्पष्ट)

अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत बेरीनाग ।

ह० (अस्पष्ट) अध्यक्ष, नगर पंचायत बेरीनाग ।

पी० एस० यू० (आर० ई० ) 35 हिन्दी गजट / 373 - भाग 8-2023 (कम्प्यूटर/ रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।

Cite this issue. Uttarakhand Gazette, Government of Uttarakhand, 02 September 2023. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand.2023-09-02.29197/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand.2023-09-02.29197.