उत्तराखण्ड शासन
पर्यटन अनुभाग
अधिसूचना
विविध
28 अप्रैल, 2025 ई ०
संख्या-1 / 293166/VI (1 ) /2025- तीर्थाटन इस क्षेत्र की एक प्रमुख पर्यटन विधा रही है, जिसमें चारधाम यात्रा, नन्दादेवी राजजात यात्रा एवं आदि कैलाश यात्रा आदि कुछ प्रमुख धार्मिक यात्रायें हैं । वर्तमान समय में बेहतर परिवहन व्यवस्था, सड़क, रेल एवं वायु सेवा की सुलभता के कारण इन यात्राओं / मेलों में तीर्थयात्रियों / श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुये प्रमुख धार्मिक यात्राओं/ मेलों के उचित प्रबन्धन हेतु एक पृथक नियंत्रण एवं प्रबन्धन इकाई की आवश्यकता के दृष्टिगत 'उत्तराखण्ड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद्' के गठन की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है:-
1- प्रस्तावना
उत्तराखण्ड जोकि देवभूमि के नाम से देश - विदेश में सुविख्यात है, में विश्व प्रसिद्ध चारधाम श्री बद्रीनाथ , केदारनाथ , गंगोत्री , यमुनोत्री सहित ही हेमकुण्ड, पूर्णागिरी , नानकमत्ता , नीलकंठ महादेव , नंदा देवी , कैंची धाम जैसे अनेकों धार्मिक मंदिर / स्थल विद्यमान है । पतित पावनी मां गंगां एवं यमुना के उद्गम स्थल इसी क्षेत्र में अवस्थित हैं । अनादि काल से ही तीर्थाटन इस क्षेत्र की एक प्रमुख पर्यटन विधा रही है , जिसमें चारधाम यात्रा , नंदा देवी राजजात, आदि कैलाश यात्रा आदि कुछ प्रमुख धार्मिक यात्राएं हैं । इसके साथ ही कुंभ मेला, माघ मेला, पूर्णागिरी मेला , बैकुण्ठ चतुर्दशी मेला आदि कई मेले प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए हैं ।
वर्तमान समय में बेहतर परिवहन व्यवस्था , सड़क, रेल एवं वायु सेवा की सुलभता के कारण इन यात्राओं / मेलों में तीर्थयात्रियों / श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुये प्रमुख धार्मिक यात्राओं / मेलों के उचित प्रबन्धन हेतु एक पृथक नियंत्रण एवं प्रबन्धन इकाई की आवश्यकता को मध्यनजर रखते हुये प्रस्तर-7 में सूचीबद्ध धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के लिए " उत्तराखण्ड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद् " का गठन किया जा रहा है ।
2- उद्देश्य
परिषद् के मुख्य उद्देश्य निम्नवत् होंगें:-
2 (1 ) धार्मिक यात्राओं एवं मेलों हेतु समुचित प्रबन्धन एवं संचालन ।
2 (2 ) धार्मिक यात्राओं एवं मेलों हेतु बेहतर मुलभूत अवस्थापना सुविधाओं का सृजन, सुदृढीकरण तथा रखरखाव आदि करना ।
2 (3) धार्मिक यात्राओं एवं मेलों को सहज , सुगम, सुरक्षित एवं सुखद बनाया जाना।
(2)
3 -संरचना
प्रस्तर-2 में उल्लेखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु त्रिस्तरीय संगठनात्मक व्यवस्था निम्न प्रकार है:-
क्र०सं०
समिति का नाम
अध्यक्षता
01 नीति निर्धारण एवं मार्ग दर्शन समिति मा ० मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड़
02 नियोजन एवं समन्वय समिति
मुख्य सचिव , उत्तराखण्ड़ शासन
03 क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति
मण्डल आयुक्त गढवाल / कुमाऊँ
4- नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति
नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति , उत्तराखण्ड धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद हेतु राज्य की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था होगी । इस समिति के द्वारा ऐसे समस्त कार्य किये जायेंगें जोकि परिषद् के उद्देश्यों के लिए आवश्यक हों ।
4.1 नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति के सदस्य (क) -सरकारी सदस्य
अध्यक्ष
1 मा० मुख्यमंत्री , उत्तराखण्ड
उपाध्यक्ष
2 मा० धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री , उत्तराखण्ड़
सदस्य
3 मा० पर्यटन मंत्री , उत्तराखण्ड़
सदस्य
4 मा० चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री , उत्तराखण्ड़
सदस्य
5 मा० लोक निर्माण विभाग मंत्री , उत्तराखण्ड़
सदस्य
6 मा० शहरी विकास मंत्री , उत्तराखण्ड़
सदस्य
7 मा० अध्यक्ष द्वारा नामित विधायकगण , उत्तराखण्ड़ (नामित मा० विधायकगणों की अधिकतम संख्या पांच तथा कार्यकाल एक वर्ष होगा )
सदस्य
अध्यक्ष, बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति
8
सदस्य
मुख्य सचिव , उत्तराखण्ड़ शासन
9 (3)
10 सचिव , पर्यटन / धर्मस्व एवं तीर्थाटन , उत्तराखण्ड सदस्य सचिव शासन
11
सदस्य
मण्डलायुक्त, गढ़वाल एवं कुमाऊँ
12 12- विशेष आमंत्रित सदस्य (अध्यक्ष महोदय की अनुमति से)
(ख) - गैर सरकारी सदस्यः-
राज्य सरकार द्वारा अधिकतम पांच गैर सरकारी सदस्य जोकि धर्मस्व/ तीर्थाटन / संस्कृति, होटल व रैस्टोरेंट , ट्रैवल एण्ड टूर , अन्य व्यापार तथा पर्यटन व्यवसाय के हितधारकों से सम्बन्धित हो , को इस समिति में नामित किया जा सकेगा । गैर सरकारी सदस्यों का कार्यकाल 01 वर्ष होगा , किन्तु कोई भी सदस्य लगातार दो वर्षों के लिए इस समिति का सदस्य नही रह सकेगा ।
4.2 नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति के मुख्य कार्य / दायित्व / अधिकार
1- धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के लिए नीतियां निर्धारित करना ।
2- धार्मिक यात्राओं एवं मेलों को सुगम सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित रूप से आयोजित किये जाने हेतु आवश्यक सुझाव तथा मार्गदर्शन करना ।
3- समय - समय पर अन्य धार्मिक यात्राओं एवं मेलों को सम्मिलित किये जाने पर अनुमोदन प्रदान करना ।
4- क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति के प्रस्ताव पर नियोजन एवं समन्वय समिति की संस्तुति के क्रम में किसी यात्रा / मेले को निरस्त किये जाने हेतु अनुमोदन प्रदान करना ।
5- प्रस्तर -2 में उल्लिखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु समय - समय पर आवश्यक निर्देश निर्गत करना ।
6- होंगी । इस समिति की वर्ष में न्यूनतम दो बैठक आयोजित की जानी
5- नियोजन एवं समन्वय समिति
धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के उचित प्रबन्धन हेतु राज्य स्तरीयनियोजन एवं समन्वय समिति होगी , जोकि नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति से प्राप्त नीतियों / निर्देशों एवं मार्गदर्शन के आधार पर क्रियान्वयन एवं नियंत्रण समिति के द्वारा कार्यवाही करवाना सुनिश्चित कराने के साथ ही दोनो समिति के मध्य सेतु का कार्य करेगी ।
(4)
5.1 नियोजन एवं समन्वय समिति की संरचना
अध्यक्ष
1 मुख्य सचिव , उत्तराखण्ड शासन
सदस्य
2 पुलिस महानिदेशक
पर्यटन
सचिव/ सचिव
सदस्य
प्रमुख
3
प्रमुख
सचिव / सचिव ,
4
सदस्य
संस्कृति
वित्त
सदस्य
सचिव / सचिव
5 प्रमुख
परिवहन
सचिव / सचिव
6 प्रमुख
सदस्य
सदस्य
7 प्रमुख सचिव / सचिव गृह
सचिव / सचिव लोक निर्माण विभाग सदस्य
8 प्रमुख
शहरी
विकास
सचिव / सचिव
सदस्य
9 प्रमुख
आपदा
प्रबन्धन
सचिव / सचिव
सदस्य
10 प्रमुख
सदस्य
प्रमुख
सचिव / सचिव
11
पशुपालन
वन
सचिव / सचिव
सदस्य
प्रमुख
12
नागरिक
सचिव / सचिव
सदस्य
प्रमुख
13
उड्डयन
मण्डलायुक्त, गढ़वाल एवं कुमाऊँ
14
सदस्य
15 विशेष आमंत्रित सदस्य (अध्यक्ष महोदय की अनुमति से ) (5)
5. 2 नियोजन एवं समन्वय समिति के मुख्य
कार्य / दायित्व / अधिकार
1- नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति द्वारा तैयार की गई नीतियों / निर्गत निर्देशो के क्रियान्वयन आदि से सम्बंधित परियोजनाओं के नियोजन एवं सृजन, सुदृढीकरण व रखरखाव आदि के पर्यवेक्षण सम्बंधी कार्य ।
2- धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के विकास / प्रबन्धन आदि हेतु क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति द्वारा तैयार की गयी मानक संचालन विधि/ दिशा निर्देश/ कार्ययोजना करना । पर अनुमोदन प्रदान
3- सहज , सुगम , सुरक्षित एवं सुखद यात्रा हेतु आवश्यकतानुसार निर्धारित नीतियों का क्रियान्वयन करवाना ।
4 क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति के कार्यों का पर्यवेक्षण एवं उनका मार्गदर्शन करना ।
5- अंतर- विभागीय समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों का सुनियोजित रूप से सम्पादित करवाना ।
6- क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति के द्वारा तैयार विस्तृत वार्षिक कार्ययोजना को नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति के समक्ष अनुमोदन हेतु संस्तुत करना ।
7- नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति द्वारा समय - समय पर सौपें गये अन्य कार्य ।
8- इस समिति की वर्ष में न्यूनतम चार बैठक आयोजित की जानी होगीं ।
6- क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति
धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के उचित प्रबन्धन हेतु मण्डल स्तरीय क्रियान्वयन , प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति होगी , जो कि प्रस्तर -2 में उल्लिखित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निर्धारित नीतियों / निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु उत्तरदायी होगी ।
6.1 क्रियान्वयन, प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति की संरचना मण्डल स्तर पर निम्नवत् समिति होगी :-
1 मण्डलायुक्त
अध्यक्ष
2 मुख्य कार्यकारी अधिकारी ,
सम्बन्धित यात्रा प्रबन्धन एवं नियत्रण संगठन
सदस्य सचिव
3 पुलिस उप महानिरीक्षक
सदस्य (6)
4 सम्बंधित जिलाधिकारी
सदस्य
5
सदस्य प्रबन्ध निदेशक, जी ० एम ० वी ० एन ० / के ० एम० वी ० एन० अथवा उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि जोकि महाप्रबन्धक से अन्यून न हो
6 सम्बंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
सदस्य
सदस्य
7 सम्बंधित पुलिस अधीक्षक, यात्रा / ट्रैफिक
सदस्य
8 प्रत्येक धाम / मेंले / यात्रा से जुड़े मंदिर / मेला / यात्रा समिति से सचिव पर्यटन/ धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद्
द्वारा नामित दो प्रतिनिधि (नामित सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष होगा)
9 मुख्य अभियन्ता, यू० पी ० सी ० एल ०
सदस्य
10 मुख्य अभियन्ता, लो ०नि ०वि०-
सदस्य
11 मुख्य अभियन्ता, सीमा सड़क संगठन
सदस्य
12 अपर निदेशक, स्वास्थ्य
सदस्य
13 उपायुक्त, खाद्य एव नागरिक आपूर्ति
सदस्य
14 सम्बन्धित महाप्रबन्धक, जल संस्थान
सदस्य
15 सम्बन्धित संभागीय परिवहन अधिकारी
सदस्य
16
सदस्य
वित्त नियंत्रक, सम्बन्धित यात्रा प्रबन्धन एवं नियत्रण
संगठन
17
विशेष आमंत्रित सदस्य (अध्यक्ष महोदय की अनुमति से ) (7)
6. 2 क्रियान्वयन, प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति के मुख्य कार्य / दायित्व एवं अधिकार
1- सूचीबद्ध यात्राओं एवं मेलों का आयोजन, प्रबन्धन एवं नियंत्रण सम्बंधी कार्य ।
2- राज्य में यात्राओं एवं मेलों के विकास हेतु मानक प्रचालन विधियां / दिशा निर्देश/ कार्ययोजना तैयार कर समन्वय एवं नियोजन समिति को संदर्भित करना ।
3- श्रद्धालुओं / यात्रियों हेतु मूलभूत सुविधाओं का सृजन, सुदृढीकरण तथा रखरखाव आदि कार्य करना ।
4- धार्मिक यात्राओं एवं मेलों को सहज, सुगम, सुरक्षित एवं सुखद बनाये जाने हेतु समुचित कदम उठाना ।
5- किसी आपदा /अपरिहार्य परिस्थिति होने पर यात्रा को अधिकतम सात दिनों तक तात्कालिकता के दृष्टिगत स्थगित / निरस्त करने का अधिकार होगा ।
6- किसी भी यात्रा को सात दिनों से अधिक स्थगित करने अथवा यात्रा को किसी वर्ष विशेष हेतु स्थगित / निरस्त किये जाने के लिए नियोजन एवं समन्वय समिति के माध्यम से नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति को प्रस्तावित करना ।
7- श्रद्धालुओं / तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु सभी आवश्यक प्रासंगिक एवं अनुकूल कार्य करना ।
9- धार्मिक यात्राओं एवं मेलों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यकतानुसार जिला प्रशासन , पुलिस प्रशासन , जिला पंचायत, स्थानीय निकाय जैसे विभिन्न जनपद स्तरीय पदाधिकारियों को उचित निर्देश देना ।
10- समय - समय पर अन्य धार्मिक यात्राओं एवं मेलों को सम्मिलित किये जाने हेतु नियोजन एवं समन्वय समिति के माध्यम से नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन समिति को प्रस्ताव संदर्भित करना ।
11- समिति को सौपें गये कार्यों / उत्तरदायित्वों की पूर्ति हेतु मण्डल आयुक्त को उपलब्ध बजट के अन्तर्गत रू 0 01.00 करोड़ तक के कार्यों को सम्पादित किये जाने हेतु प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार होगें ।
12- इस समिति की प्रत्येक माह में न्यूनतम एक बैठक आयोजित की जानी होगीं ।
6. 3 यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन
6.3 (1 ) क्रियान्वयन, प्रबन्धन एवं नियंत्रण समिति के प्रस्तर -6.2 में उल्लिखित कार्यों एवं दायित्वों के सम्पादन/ निष्पादन हेतु यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन (गढवाल व कुमांऊँ ) प्रशासकीय इकाई के रूप में कार्य करेगा ।
(8)
6.3 (2) यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन के पृथक- पृथक प्रशासनिक कार्यालय गढवाल मण्डल में ऋषिकेश तथा कुमाऊँ मण्डल में हल्द्वानी में अवस्थित होगें , जोकि सम्बन्धित मण्डलायुक्त के अधीन रहेगें ।
6.3 (3) इस संगठन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी , जो कि शासन के " अपर सचिव " स्तर से अन्यून स्तर का नही होगा अथवा सेवानिवृत्त आई ० ए ० एस ० / वरिष्ठ पी ० सी० एस० अधिकारी होगा संगठनाध्यक्ष के रूप के कार्य करेंगें । इस संगठन आवश्यकतानुसार अन्य अधीनस्थ अधिकारी / कर्मचारी होगें । यह संगठन स्थाई रूप से वर्षभर कार्यरत रहेगा । में 6.3 (4) शासनादेश सख्या-30902 , दिनांक 25 मई, 2023 के द्वारा गठित चारधाम यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन ऋषिकेश ही यांत्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन , गढ़वाल मण्डल ऋषिकेश के रूप में कार्य करेगा , एवं इस संगठन हेतु आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पदों का सृजन किया जा सकेगा ।
6.3 (5) यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन, कुमाऊँ मण्डल , हल्द्वानी के लिए पृथक से आवश्यकतानुसार पदों का सृजन कर संगठन का ढांचा तैयार किया जाएगा ।
7- सूचीबद्ध धार्मिक यात्रा / मेले
(1) चारधाम यात्रा
(2) आदि कैलाश यात्रा
(3) पूर्णागिरी यात्रा
(4) नंदा देवी राजजात यात्रा
8 -आय- व्यक व्यवस्था
यात्रा प्रबन्धन एवं नियंत्रण संगठन (गढवाल व कुमाऊँ) द्वारा प्रशासनिक कार्यों , अवस्थापना सुविधा विकास , आदि हेतु वार्षिक आय - व्ययक विवरण एवं अनुपूरक मांगों को नियमानुसार तैयार कर निर्धारित समयसीमा में नोडल विभाग के माध्यम से वित्त विभाग , उत्तराखण्ड शासन को प्रस्तुत किया जायेगा ।
आज्ञा से , अभिषेक रूहेला , अपर सचिव ।
टिप्पणी-राजपत्र , दिनांक 10-05-2025 , भाग 1 में प्रकाशित ।
[प्रतिलिपि सूचनार्थ प्रेषित--]
पी०एस ०यू० ( आर ०ई ० ) 04 पर्यटन / 260-10-06-2025-200 प्रतियां (कम्प्यूटर/ रीजियो) ।