Servants of Knowledge
Uttarakhand Daily Gazette · Government of Uttarakhand

Notification

Published 23 May 2025

Department
MSME Department
Type
Daily
Notification no.
552/VII-3-25/02(02)-एम0एस0एम0ई0/2025
Identifier
in.gazette.uttarakhand_daily.2025-05-23.3171-090725223000
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

उत्तराखण्ड शासन

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनुभाग

ई -पत्रावली संख्या-28911

अधिसूचना

23 मई , 2025 ई ०

संख्या-552/VII - 3-25 / 02(02 ) - एम 0एस 0 एम 0ई0 / 2025-प्रदेश में ऐसे उद्यमशील युवाओं, प्रवासियों कुशल -अकुशल दस्तकारों- हस्तशिल्पियों, शिक्षित शहरी - ग्रामीण बेरोजगारों, छोटे उद्यमियों/व्यवसायियों/पथ विक्रेताओं जो बैंक ऋण के माध्यम से स्वयं के उद्यम / व्यवसाय की स्थापना करना चाहते हैं , को पूंजी उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से " मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0" संचालित किये जाने की राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं: -

पृष्ठभूमि

वैश्विक महामारी कोविड-19 की आपात स्थिति के कारण उत्तराखण्ड राज्य के निवासियों की आजीविका पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को कम करने हेतु, उत्तराखण्ड राज्य के उद्यमशील युवाओं, उत्तराखण्ड प्रवासियों, कुशल अकुशल दस्तकारों , हस्तशिल्पियों तथा शिक्षित शहरी- ग्रामीण बेरोजगारों को स्वयं के उद्यम स्थापनार्थ प्रोत्साहित किये जाने हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग , उत्तराखण्ड शासन द्वारा कार्यालय ज्ञाप सं. 580 /VII - 3 / 01 ( 03 ) -एम.एस.एम.ई./ 2020, दिनांक 09 मई, 2020 के द्वारा "मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना" लागू की गयी । इसी क्रम में अति सूक्ष्म उद्यमों / पथ विक्रेताओं हेतु शासनादेश सं. 773/VII - 3-21 / 02 ( 07 ) -एम.एस.एम.ई. / 2020, दिनांक 21 जून, 2021 के द्वारा " मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अति सूक्ष्म (नैनो) उद्यम" लागू की गयी । योजनावधि में लगभग 39,000 से अधिक लाभार्थियों को स्वरोजगार से सम्बद्ध किये जाने के साथ ही लगभग एक लाख से अधिक रोजगार सृजित किये गये हैं ।

पूर्व संचालित उक्त योजनाओं को संविलियन कर अधिक प्रभावी बनाने , महिला उद्यमिता के प्रोत्साहन तथा लाभ की द्विरावृत्ति (Duplicacy ) रोकने के उद्देश्य से बैंक ऋण सहबद्ध (Credit Linked ) " मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 " लागू की जा रही है :-

"मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 "

1. संक्षिप्त इस योजना का संक्षिप्त नाम "एम.एस.वाई. 2.0" है।

नाम

 2.     योजना        यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से प्रारम्भ होकर वित्तीय वर्ष 2029-30 तक
        अवधि        लागू रहेगी , जब तक कि इसमें संशोधन अथवा इसे बंद नहीं किया जाता है ।
3.      योजना का    यह योजना राज्य के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में लागू रहेगी ।
       कार्यक्षेत्र
4.     योजना        योजनावधि में 50 हजार से अधिक लाभार्थियों को स्वरोजगार से सम्बद्ध करते
       का लक्ष्य    हुये अधिकाधिक रोजगार / सहायक रोजगार सृजित किये जाने का लक्ष्य है ।

(2)

योजना के अंतर्गत वार्षिक आधार पर जनपदों हेतु लक्ष्य का निर्धारण महानिदेशक/आयुक्त उद्योग द्वारा सम्बंधित जनपद की जनसंख्या, भौगोलिक पारिस्थितिकी, आर्थिक विकास की स्थिति एवं स्वरोजगार की सम्भावना के आधार पर किया जायेगा ।

5. योजना

हेतु नोडल विभाग / इस योजना हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग नोडल विभाग होगा । इसका संचालन राज्य स्तर पर उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड एवं जनपद स्तर पर जिला उद्योग केन्द्रों द्वारा किया जायेगा । इस योजना के अंतर्गत जनपद हेतु निर्धारित लक्ष्यों का वितरण जिला उद्योग केन्द्रों एवं आवश्यकतानुसार खादी एवं संचालक ग्रामोद्योग बोर्ड के जनपदीय कार्यालयों को किया जायेगा ।

एजेंसी

6. उद्देश्य

(i ) इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिये स्वयं का उद्यम (विनिर्माण, सेवा एवं व्यवसाय) स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना तथा स्वरोजगार से समृद्धि एवं राज्य के सतत् आर्थिक विकास में योगदान दिया जाना है ।

(ii) राज्य के युवक- युवतियों, बेरोजगारों तथा रिवर्स माइग्रेसन के माध्यम से राज्य में आए प्रवासियों को रोजगार की तलाश करने वाले (Job Seekers ) के स्थान पर रोजगार सृजक (Job Creators ) के रूप में स्थापित करना ।

(iii) बैंकों से ऋण प्राप्ति को सुलभ बनाकर एवं बैंक ऋण के सापेक्ष मार्जिन मनी / उपादान सहायता प्रदान करते हुये स्वरोजगार को और अधिक आकर्षक एवं लाभप्रद बनाना है ।

(iv) जनपद स्तर पर ' जागरूकता कार्यक्रमों (Awareness Program)' एवं ' उद्यमिता विकास कार्यक्रमों (EDP ) ' के माध्यम से उद्यमिता (Entrepreneurship ) का विकास करना ।

( v) महिलाओं को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करते हुये राज्य में महिला उद्यमिता को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करना है ।

(vi ) स्वरोजगार हेतु स्थापित व्यवसाय / उद्यमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर अधिकाधिक रोजगार / सहायक रोजगार सृजित करते हुये , राज्य में बेरोजगारी दर कम करना, प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि करना एवं राज्य से पलायन रोकना ।

(vii ) राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों एवं छोटे नगर निकायों में स्वरोजगार हेतु अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करते हुये इन क्षेत्रों से राज्य के बड़े शहरों (नगर निगमों) की ओर आंतरिक पलायन को रोककर जनसंख्या दबाव को कम करना ।

(viii) राज्य के स्थानीय उत्पादों के संरक्षण व विकास के उद्देश्य से इनकी उत्पादक इकाइयां स्थापित करने पर अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना ।

(3)

7. परिभाषाएं

(i ) "योजना" से ' मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0' अभिप्रेत है ;

(ii) "राज्य" से ' उत्तराखण्ड' राज्य अभिप्रेत है ;

(iii) "परिवार " से पति- पत्नी एवं उनके 21 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित बच्चे अभिप्रेत हैं ;

(iv ) "महिला उद्यमी " से राज्य की 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं अभिप्रेत हैं, जो स्वरोजगार के माध्यम से अपना व्यवसाय प्रारम्भ करना चाहती हैं ;

(v) " दिव्यांगजन " से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 एवं उत्तराखण्ड दिव्यांगजन अधिकार नियमावली , 2019 में यथा परिभाषित दिव्यांगजन अभिप्रेत है;

(vi ) "एक जनपद दो उत्पाद (ODTP) " से उत्तराखण्ड राज्य की 'एक जनपद दो उत्पाद योजना, 2021 ' के अंतर्गत जनपद विशेष के लिए चिन्हित उत्पाद अभिप्रेत है तथा जिनका विनिर्माण सम्बंधित जनपद की भौगोलिक सीमा में किया जाता है;

(vii ) "एक जनपद एक उत्पाद ( ODOP) " से उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग , वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों हेतु चिन्हित विशिष्ट उत्पाद अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्माण सम्बंधित जनपद की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ;

(viii ) "भौगोलिक संकेतक (GI Tag ) उत्पाद " से महानियंत्रक, पेटेंट, डिजाइन एवं ट्रेडमार्क, उद्योग संवर्द्धन एवं आन्तरिक व्यापार विभाग , वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के उत्पादों हेतु जारी जीआई टैग पंजीकृत उत्पाद अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्माण राज्य/ जनपद / क्षेत्र की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ;

(ix) " बैंक" से राज्य / जनपद के अंतर्गत कार्यरत एवं सक्षम स्तर से मान्यता प्राप्त निम्नलिखित बैंक अभिप्रेत हैं -

(क) सभी सार्वजनिक बैंक

(ख ) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक

(ग) सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

(घ) राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सहकारी बैंक / निजी वाणिज्यिक बैंक;

(x ) " बैंक ऋण " से योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना के सापेक्ष बैंक द्वारा स्वीकृत एवं वितरित , सावधि ऋण (Term Loan) / अधिकतम एक तिमाही के वाणिज्यिक संचालन हेतु आवश्यक कार्यशील पूंजी ऋण अथवा संयुक्त ऋण अभिप्रेत है ;

( xi ) " ग्रामीण क्षेत्र" से उत्तराखण्ड राज्य के ग्रामीण क्षेत्र अभिप्रेत है ;

(xii ) "अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र " से उत्तराखण्ड राज्य के अंतर्गत अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र अभिप्रेत है ;

(xiii ) "विनिर्माणक उद्यम" से ऐसा उद्यम अभिप्रेत है , जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम , 1951 की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी उद्योग से सम्बन्धित माल के विनिर्माण या उत्पादन में लगे हुए या अंतिम उत्पाद , जो एक सुभिन्न नाम या लक्षण या उपयोग रखता हो और जो अन्तिम उत्पाद के मूल्य वर्धन में संयंत्र और मशीनरी का उपयोग करता हो । बिना संयंत्र व मशीनरी के, (4)

हस्तनिर्मित अथवा प्राकृतिक रूप से परिवर्तित / उत्पादन करने वाले उद्यम इस श्रेणी में सम्मिलित नहीं हैं ;

(xiv) "सेवा उद्यम " से उपकरण का उपयोग करते हुये विभिन्न प्रकार की सेवायें प्रदान करना अभिप्रेत है ;

(xv ) "परियोजना लागत " में भूमि को छोड़कर उद्यम / व्यवसाय स्थापना हेतु किया गया कुल स्थायी पूंजी निवेश, जिसमें प्लांट व मशीनरी , उपकरण , कार्यशाला भवन, किराये पर भवन की स्थिति में अधिकतम एक वर्ष का किराया तथा अन्य स्थायी प्रकृति की परिसम्पत्तियों में किया गया निवेश एवं अधिकतम एक तिमाही हेतु आवश्यक कार्यशील पूंजी निवेश सम्मिलित है ;

(xvi ) " श्रेणी ए, बी, सी एवं डी के जनपद/ क्षेत्र" से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग , उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना सं. 1145 / VII - 3-23 / 04 (01 ) -एम.एस. एम.ई. / 2023 , दिनांक 09 अगस्त, 2023 के द्वारा प्रख्यापित उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति, 2023 के प्रस्तर-5 में निम्नवत वर्णित जनपद / क्षेत्र अभिप्रेत हैं -

श्रेणी

सम्मिलित / आच्छादित क्षेत्र

ए जनपद पिथौरागढ़ , उत्तरकाशी, चमोली , चम्पावत, रूद्रप्रयाग व बागेश्वर का सम्पूर्ण क्षेत्र ।

बी | जनपद अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल का सम्पूर्ण भू - भाग ।

जनपद टिहरी गढ़वाल का पर्वतीय बहुल भूभाग ।

जनपद नैनीताल ( भीमताल , धारी , बेतालघाट , रामगढ़ , ओखलकाण्डा विकासखण्ड) तथा जनपद देहरादून (चकराता विकासखण्ड) ।

सी जनपद टिहरी का मैदानी भाग (ढालवाला, तपोवन, मुनी की रेती एवं उससे जुड़े फकोट विकासखण्ड के मैदानी क्षेत्र) ।

जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर, विकासनगर , कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

जनपद नैनीताल के कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

डी जनपद हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर का सम्पूर्ण भू- भाग ।

जनपद नैनीताल के रामनगर , हल्द्वानी विकासखण्ड , नगर निगम हल्द्वानी , नगरपालिका लालकुआं, नगरपालिका रामनगर तथा कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र ।

जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर , विकासनगर , कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र तथा देहरादून नगर निगम के क्षेत्र ।

(5)

8. योजना के

घटक

(i) परियोजना

निर्माण

इस योजना के अंतर्गत अनुमन्य विभिन्न प्रकार के मॉडल प्रोजेक्ट निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराये जायेंगे । जिला उद्योग केन्द्र एवं अन्य सम्बंधित विभागों द्वारा भी इस योजना के अंतर्गत अनुमन्य परियोजना निर्माण में आवेदकों को सहयोग प्रदान किया जायेगा ।

बैंकों द्वारा रूपये 10 लाख तक की परियोजना आवेदक द्वारा स्व - हस्ताक्षरित तथा रु. 10 लाख से अधिक की परियोजना सी.ए. (चार्टर्ड एकाउन्टेंट) द्वारा प्रमाणित स्वीकार्य की जायेंगी ।

(ii) कौशल

विकास/

उद्यमिता

प्रशिक्षण

इस योजना के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण ऋण प्राप्ति के लिये पूर्व शर्त नहीं होगी । आवश्यकतानुसार जिला उद्योग केन्द्र द्वारा सम्बंधित जनपद के जिला योजना के अंतर्गत ' उद्यमिता विकास कार्यक्रमों ( EDP ) ' का आयोजन करते हुये , इस योजना के लाभार्थियों हेतु निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सकेगी ।

(iii)

लागत

परियोजना योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना लागत के सापेक्ष लाभार्थी का अंशदान निम्नवत होगा-

में लाभार्थी

लाभार्थी श्रेणी

परियोजना के सापेक्ष लाभार्थी अंशदान अंशदान

10 प्रतिशत

सामान्य श्रेणी

05प्रतिशत

विशिष्ट श्रेणी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक , भूतपूर्व सैनिक, महिला एवं दिव्यांगजन)

(iv) बैंक ऋण योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना के सापेक्ष लाभार्थी अंशदान को छोड़कर बैंकों द्वारा शेष धनराशि ऋण के रूप में स्वीकृत की जायेगी , अर्थात् सामान्य श्रेणी के आवेदकों को परियोजना का 90 प्रतिशत तथा विशिष्ट श्रेणी के आवेदकों को परियोजना का 95 प्रतिशत ऋण स्वीकृत किया जायेगा । बैंकों द्वारा स्थायी पूंजी निवेश से सम्बंधित भाग हेतु सावधि ऋण तथा कार्यशील पूंजी हेतु कैश क्रेडिट लिमिट (CC Limit) अथवा संयुक्त ऋण (Composite Loan ) के रूप में ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा । जिला उद्योग केन्द्र से अग्रसारित परियोजना लागत से अधिक का ऋण (लाभार्थी अंशदान को छोड़कर) बैंक द्वारा स्वीकृत नहीं किया जायेगा।

(7)

(iii) हथकरघा / हस्तशिल्प उत्पाद तथा ओ.डी.ओ.पी./ओ.डी.टी.पी. /जी.आई. टैग उत्पादों के विपणन प्रोत्साहन हेतु उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प परिषद् के अंतर्गत कार्यरत ' हिमाद्री इम्पोरियम' में उत्पाद विपणन हेतु नियमानुसार स्थान उपलब्ध कराया जायेगा ।

9. पात्र

गतिविधियां

भारत सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्रतिबन्धित गतिविधियों तथा पारम्परिक विधि से कृषि कार्य को छोड़कर, निम्नलिखित गतिविधियां, योजनान्तर्गत पात्र गतिविधियों में सम्मिलित होंगी

(i) रूपये 25 लाख तक लागत के विनिर्माणक उद्यम ।

(ii) रूपये 10 लाख तक लागत के सेवा उद्यम ।

(iii) रूपये 10 लाख तक लागत के व्यापार (ट्रेड) एवं अन्य व्यवसाय ।

उक्तानुसार निर्धारित सीमा से अधिक लागत वाली परियोजना की स्थिति में उद्यमी द्वारा अतिरिक्त लागत का वहन स्वयं किया जायेगा और इसे परियोजना के सापेक्ष उपादान ( मार्जिन मनी) के आंगणन हेतु संज्ञान में नहीं लिया जायेगा ।

10. पात्रता शर्तें एवं अर्हता

(i) योजनान्तर्गत आवेदन के समय आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है ।

(ii) आवेदक राज्य का स्थायी अथवा मूल निवासी हो । इस सम्बंध में आवेदन पत्र के साथ सक्षम स्तर से जारी प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।

(iii ) आवेदक किसी भी राष्ट्रीयकृत अथवा मान्यता प्राप्त बैंक / वित्तीय संस्था / सहकारी बैंक अथवा अन्य किसी राजकीय संस्था का चूककर्ता (Defaulter) नहीं हो ।

( iv) आवेदक अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा इस योजना के अंतर्गत पूर्व में लाभ प्राप्त नहीं किया गया हो । इस योजना में यथापरिभाषित परिवार से एक सदस्य ही योजना अंतर्गत लाभ हेतु पात्र होगा ।

( v) किसी व्यक्ति द्वारा मात्र एक बार ही इस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त किया जा सकेगा ।

(vi) आवेदक द्वारा विगत 5 वित्तीय वर्ष के भीतर भारत सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी अन्य स्वरोजगार योजना का पूर्व में लाभ प्राप्त नहीं किया गया हो , किन्तु यदि किसी आवेदक द्वारा विगत 05 वित्तीय वर्ष से पूर्व भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना में लाभ प्राप्त किया गया है और वह चूककर्ता (Defaulter ) नहीं है, तो वह अपने उद्यम के विस्तार के लिये योजनान्तर्गत वित्त पोषण प्राप्त कर सकता है ।

(6)

(v)

उपादान इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजना लागत के सापेक्ष (मार्जिन मनी) निम्नवत मार्जिन मनी / उपादान देय होगा

परियोजना लागत के सापेक्ष उपादान की मात्रा

रूपये 02 लाख

तक

परियोजना की भौगोलिक स्थिति

रूपये 02 लाख से अधिक, रूपये 10 लाख तक

रूपये 10 लाख से अधिक, रूपये 25 लाख तक

30प्रतिशत 25 प्रतिशत

20 प्रतिशत

श्रेणी ए एवं बी के जनपद/क्षेत्र

20 प्रतिशत

15 प्रतिशत

25प्रतिशत

श्रेणी सी एवं डी के जनपद/ क्षेत्र

अतिरिक्त मार्जिन मनी/ उपादान

(क) भौगोलिक बूस्टर – ग्रामीण क्षेत्र एवं अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र में स्थापित परियोजना पर 05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी / उपादान देय होगा ।

(ख) सामाजिक बूस्टर महिला एवं दिव्यांगजन लाभार्थियों को 05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी / उपादान देय होगा ।

(ग) उत्पाद बूस्टर राज्य के ओ.डी.ओ.पी. / ओ.डी.टी.पी. /जी. आई. टैग के तहत जनपद विशेष में चिन्हित उत्पाद के विनिर्माण से सम्बंधित परियोजना को 05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी / उपादान देय होगा ।

नोट-किसी लाभार्थी / परियोजना को उक्तानुसार वर्णित भौगोलिक बूस्टर, सामाजिक बूस्टर तथा उत्पाद बूस्टर में से मात्र किसी एक श्रेणी का लाभ ही देय होगा ।

(vi) विपणन

सहायता

(i) इस योजना के अंतर्गत स्थापित विनिर्माणक उद्यमों को विपणन सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से उद्योग विभाग , उत्तराखण्ड अथवा अन्य राजकीय विभागों द्वारा आयोजित मेले / प्रदर्शनी में न्यूनतम दर पर स्टॉल उपलब्ध कराया जा सकेगा ।

(ii ) योजनान्तर्गत लाभार्थी उद्यमों को उनके उत्पाद / सेवा के ऑनलाइन विपणन हेतु गवर्नमेंट ई - मार्केट प्लेस (GEM) , अमेजॉन , फ्लिपकार्ट आदि मार्केटिंग वेबपोर्टल का उपयोग करने हेतु प्रेरित / प्रशिक्षित किया जायेगा ।

(8)

(vii) इस योजनान्तर्गत पात्रता हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है ।

(viii) योजनान्तर्गत विशिष्ट श्रेणी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक, भूतपूर्व सैनिक, महिला एवं दिव्यांगजन) का लाभ प्राप्त करने हेतु सम्बंधित आवेदकों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत प्रमाण- पत्रों की स्वप्रमाणित प्रतियां आवेदन के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

(ix) आवेदक द्वारा प्रस्तावित परियोजना वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable ) होना अनिवार्य है ।

(x) आवेदक द्वारा प्रस्तावित परियोजना योजनान्तर्गत अनुमन्य गतिविधियों में सम्मिलित होना अनिवार्य है ।

( xi) आवेदक द्वारा पात्रता की सभी शर्तें पूर्ण किये जाने के सम्बंध में आवेदन के साथ शपथ- पत्र प्रस्तुत करना होगा ।

11. आवेदन प्रक्रिया

लाभार्थी द्वारा योजना हेतु निर्धारित पोर्टल पर समस्त अनिवार्य / सुसंगत अभिलेखों सहित ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया जायेगा ।

12. आवश्यक अभिलेख

निम्नलिखित अभिलेखों की स्व- प्रमाणित छायाप्रतियां पोर्टल पर अपलोड / प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा -

(i ) लाभार्थी के आधार कार्ड की प्रति ।

(ii) लाभार्थी के स्थायी / मूल निवास प्रमाण- पत्र की प्रति ।

( iii ) प्रस्तावित उद्यम की परियोजना रिपोर्ट । (₹ 10 लाख तक की परियोजना स्व - हस्ताक्षरित तथा इससे अधिक की परियोजना सी.ए. द्वारा प्रमाणित)

( iv ) लाभार्थी का पासपोर्ट साईज फोटो, जो 06 माह से अधिक पुराना न हो ।

(v ) विशिष्ट श्रेणी के लाभ हेतु सक्षम स्तर से निर्गत प्रमाण - पत्र की प्रति। (विशिष्ट श्रेणी में उल्लिखित महिला लाभार्थी को छोड़कर अन्य श्रेणी हेतु सक्षम स्तर से जारी प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा)

( vi ) स्टाम्प पेपर पर इस आशय का शपथ - पत्र कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत समस्त तथ्य एवं अभिलेख शुद्ध एवं पूर्ण हैं, आवेदक इस योजना के अंतर्गत निर्धारित पात्रता की शर्तें पूर्ण करता है तथा अपेक्षित किसी तथ्य को उसके द्वारा छिपाया नहीं गया है । किसी प्रतिकूल तथ्य के पाये जाने की स्थिति में उद्योग विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जा सकेगी , जिसके लिये लाभार्थी पूर्ण रूप से उत्तरदायी माना जायेगा ।

(vii ) कार्यशाला भवन / दुकान , पट्टा (Lease ) / किराये पर होने की स्थिति में , पट्टा विलेख (Lease Deed ) / किरायानामा की प्रति।

(viii) संयंत्र व मशीनरी/ उपकरण / वर्कशेड अथवा दुकान निर्माण अथवा मरम्मत से सम्बंधित वर्तमान दरों के कोटेशन ।

नोट- उक्त क्रम संख्या-( vii ) एवं ( viii) पर अंकित अभिलेख जनपद स्तर पर चयन के उपरान्त लाभार्थी द्वारा प्रस्तुत किये जा सकेंगे ।

(9)

13. आवेदन पत्रों

की संवीक्षा

एवं लाभार्थी

चयन

(i ) निर्धारित पोर्टल पर प्राप्त आवेदन पत्रों की संवीक्षा (Scrutiny) जिला उद्योग केन्द्र स्तर पर आवेदन प्राप्ति की तिथि से 03 कार्यदिवस के भीतर की जायेगी ।

(ii) आवेदन पत्र की अपूर्णता अथवा त्रुटि की स्थिति में इसे आवेदक को पूर्ण करने एवं त्रुटि की शुद्धि हेतु तत्काल वापस किया जायेगा । पूर्ण एवं शुद्ध आवेदन पत्रों को लाभार्थी चयन हेतु जनपद स्तर पर गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।

( iii ) प्राप्त आवेदन पत्रों के आधार पर लाभार्थियों का चयन जनपद में निम्नवत गठित जनपद स्तरीय संवीक्षा समिति द्वारा किया जायेगा:-

अध्यक्ष

महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र

सदस्य

जनपद के लीड बैंक प्रबन्धक

सदस्य

परियोजना से संबंधित विभाग के जनपद स्तरीय अधिकारी

प्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र

सदस्य सचिव

महाप्रबन्धक , जिला उद्योग केन्द्र द्वारा उक्त समिति की बैठक में आवश्यकतानुसार अन्य विभागीय प्रतिनिधियों को आमंत्रितं किया जा सकेगा ।

( iv) जनपद स्तरीय संवीक्षा समिति द्वारा इस योजना के अंतर्गत निर्धारित पात्रता शर्तें, परियोजना की व्यवहार्यता (Viability ) , पहले आओ पहले पाओ ( First Come First Serve) तथा जनपद के लिये निर्धारित लक्ष्य के दृष्टिगत लाभार्थियों के आवेदन एवं अभिलेखों का परीक्षण करते हुये, लाभार्थियों का चयन किया जायेगा । चयन हेतु साक्षात्कार अनिवार्य नहीं है । जनपद स्तर पर संवीक्षा समिति की बैठक 15 दिन अथवा इससे कम अंतराल पर आयोजित की जायेगी, ताकि चयनित आवेदन पत्रों को यथाशीघ्र बैंकों को प्रेषित किया जा सके ।

( v) समिति के माध्यम से चयनित आवेदन- पत्रों को जिला उद्योग केन्द्र द्वारा तत्काल सम्बंधित बैंकों को अग्रसारित किया जायेगा । आवेदक के अनुरोध के आधार पर आवेदन- पत्र में अंकित बैंक से भिन्न बैंक को भी महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा आवेदन अग्रसारित किया जा सकेगा । आवेदन पत्र अग्रसारण की कार्यवाही ऑनलाइन की जायेगी , जिसकी सूचना आवेदक को भी प्रेषित की जायेगी । आवेदन प्रक्रिया में तीव्रता एवं पारदर्शिता के दृष्टिगत बैंक अथवा आवेदक के साथ ऑफलाइन पत्राचार नहीं किया जायेगा ।

(10)

14. बैंक स्तर पर

आवेदन

निस्तारण

प्रक्रिया

(i ) बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र सं० RBI/ FIDD / 2016-17 /37 , Master Direction FIDD.MSME & NFS.3/06.02.31 / 2016-17, दिनांक 21 जुलाई, 2016 के प्रस्तर 5.4 के अनुसार बैंक शाखा स्तर पर प्राप्त ऑनलाइन ऋण आवेदन पत्रों पर ऋण स्वीकृति के सम्बंध में निर्णय निम्नवत निर्धारित अधिकतम समय - सीमा के अंतर्गत लिया जायेगा

ऋण धनराशि

निर्धारित अधिकतम समय - सीमा

रू. 05 लाख तक

02सप्ताह

03 सप्ताह

रू. 05 लाख से अधिक एवं रू. 25 लाख तक

अधिकतम समय - सीमा का यह प्रतिबन्ध इस योजना हेतु समस्त बैंकों पर समान रूप से लागू माना जायेगा ।

(ii ) स्वीकृत / अस्वीकृत आवेदन पत्रों के सम्बंध में बैंक शाखा द्वारा सम्बंधित पोर्टल के माध्यम से तत्काल जिला उद्योग केन्द्र एवं लाभार्थी को सूचित किया जायेगा ।

(iii) ऋण स्वीकृति की दिनांक से अधिकतम 15 दिन के अंदर बैंक शाखा द्वारा ऋण वितरण (Disbursement ) की कार्यवाही की जायेगी । बैंक शाखा द्वारा किश्तों में ऋण वितरण किया जा सकेगा, परन्तु बैंक शाखा द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा की किश्तों में ऋण वितरण से परियोजना की स्थापना एवं समुचित संचालन में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो ।

( iv ) बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र सं ० RBI/FIDD/ 2016-17/ 37 , Master Direction FIDD.MSME & NFS.3/06.02.31 /2016-17 , दिनांक 21 जुलाई , 2016 के प्रस्तर 4.2 के अनुसार बैंक शाखा द्वारा ऋण वितरण के लिये कोई संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security ) स्वीकार नहीं किया जायेगा । ऐसे बैंक जो भारतीय रिजर्व बैंक के उक्त परिपत्र के परिपालन से मुक्त रखे गये हों, को नियमानुसार संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security ) प्राप्त किये जाने की छूट होगी ।

( v) बैंक शाखा द्वारा परियोजना के अनुरूप ऋण अदायगी हेतु आरम्भिक स्थगन (Moratorium) अवधि निर्धारित की जा सकेगी । यदि लाभार्थी ऋण वितरण के उपरान्त प्रारम्भ से ही बैंक ऋण की किश्त अदा करने को तैयार है तो उसे बैंक द्वारा स्वीकार किया जायेगा ।

(11)

(vi ) बैंक ऋण अदायगी की अवधि बैंक शाखा द्वारा बैंक ऋण के अनुरूप निर्धारित की जायेगी, परन्तु यह अवधि 02 वर्ष से कम नहीं होगी ।

(vii) ऋण की प्रथम किश्त के वितरण के पश्चात् 07 दिन के अंदर वित्त पोषण करने वाली बैंक शाखा द्वारा स्वीकृत परियोजना के अनुरूप अपेक्षित उपादान / मार्जिन मनी का दावा ऑनलाइन माध्यम से सम्बंधित जनपद के महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जायेगा ।

15. उपादान/ मार्जिन मनी दावे का निस्तारण/ समायोजन

(i ) महाप्रबन्धक , जिला उद्योग केन्द्र द्वारा उपादान / मार्जिन मनी दावे का परीक्षण करते हुये , इसे संस्तुति सहित उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड को प्रेषित किया जायेगा ।

(ii) उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड द्वारा उपादान / मार्जिन मनी दावे का परीक्षण करते हुये इसके सापेक्ष मार्जिन मनी / उपादान की धनराशि सम्बंधित लाभार्थी / बैंक शाखा के खाते में प्रेषित की जायेगी , जो टी.डी.आर. ( मियादी जमा रसीद) के रूप में उपलब्ध रहेगी । बैंक शाखा में मार्जिन मनी प्राप्त होने के उपरान्त परियोजना के इस भाग पर बैंक शाखा द्वारा ब्याज न तो लिया जायेगा और न ही दिया जायेगा ।

(iii ) परियोजना के सफलतापूर्वक संचालित रहने तथा किसी प्रकार की चूक (डिफॉल्ट) नहीं होने की दशा में 02 वित्तीय वर्ष उपरान्त अनुमन्य मार्जिन मनी को उपादान के रूप में सम्बंधित लाभार्थी के बैंक ऋण खाते में समायोजित कर दिया जायेगा । समायोजन से पूर्व जिला उद्योग केन्द्र एवं सम्बंधित बैंक शाखा के अधिकारियों द्वारा लाभार्थी की परियोजना का संयुक्त भौतिक निरीक्षण किया जायेगा । निरीक्षण के समय इकाई के कार्यरत रहने विषयक फोटोग्राफ एवं संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति निर्धारित पोर्टल पर अपलोड की जायेगी ।

( iv) भौतिक निरीक्षण के समय परियोजना के अकार्यरत पाये जाने अथवा स्वीकृत परियोजना से भिन्न परियोजना में पूंजी निवेश अथवा ऋण का दुरूपयोग पाये जाने की स्थिति में बैंक शाखा द्वारा सम्बंधित मार्जिन मनी को जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड को वापस कर दिया जायेगा । यदि परियोजना दैवीय आपदा अथवा अन्य असाधारण परिस्थितियों अथवा लाभार्थी की मृत्यु की दशा में बंद पायी जाती है , तो ऐसी स्थिति में महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र से अनुमति प्राप्त करते हुये बैंक शाखा द्वारा मार्जिन मनी को सम्बंधित लाभार्थी के ऋण खाते में समायोजित किया जा सकेगा।

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16. योजना का योजना के प्रचार- प्रसार का दायित्व सम्बंधित जनपद के महाप्रबन्धक, जिला प्रचार- प्रसार उद्योग केन्द्र का होगा। महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र योजनान्तर्गत स्वरोजगार अपनाने हेतु अभिप्रेरित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे और इन कार्यशालाओं के माध्यम से उद्यमशील युवाओं/ युवतियों को विभागीय योजनाओं , स्वरोजगार के अवसरों, परियोजनाओं के चयन तथा उद्यम स्थापना हेतु अपेक्षित सभी जानकारियां देते हुये हर सम्भव सहायता / मार्ग-दर्शन भी दिया जायेगा ।

17. योजना की समीक्षा एवं अनुश्रवण

(i ) योजनान्तर्गत बैंकों को प्रेषित आवेदन पत्रों के निस्तारण की समीक्षा विकासखण्ड स्तर पर बी.एल.बी.सी. (Block Level Bankers Committee ) , जनपद स्तर पर डी.एल.आर.सी. (District Level Review Committee ) तथा राज्य स्तर पर एस.एल.बी.सी. ( State Level Bankers Committee) के माध्यम से की जायेगी । निम्न स्तरीय समिति से प्राप्त संदर्भ को विचारार्थ/ निर्णयार्थ उच्च स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।

(ii ) उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय आदेश सं० 1400 /VII - 3 / 19 (24) -एम.एस.एम. ई./2019 , दिनांक 06 अगस्त , 2019 के द्वारा निम्नवत गठित ' जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति' द्वारा जनपद स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा मासिक आधार पर की जायेगी

जिलाधिकारी

मुख्य विकास अधिकारी मुख्य कृषि अधिकारी जिला सेवायोजन अधिकारी अग्रणी बैंक अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी जिला ग्रामोद्योग अधिकारी सहायक निदेशक डेयरी जिला पर्यटन अधिकारी जिला समाज कल्याण अधिकारी अध्यक्ष उपाध्यक्ष सदस्य सदस्य सदस्य सदस्य सदस्य सदस्य सदस्य सदस्य

सदस्य

मुख्य नगर अधिकारी के प्रतिनिधि / अधिशासी

अधिकारी, स्थानीय निकाय महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र संयोजक सदस्य (13)

(iii) योजना की प्रगति की राज्य स्तर पर तिमाही समीक्षा महानिदेशक/ आयुक्त उद्योग एवं छमाही समीक्षा प्रमुख सचिव/ सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा की जायेगी ।

18. अन्य नियम /शर्तें /

प्रावधान

(i ) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के बजट में योजना के लिये अलग से प्रावधान किया जायेगा ।

(ii ) योजना के कुल बजट की 02 प्रतिशत धनराशि का व्यय आवश्यकतानुसार योजना के प्रचार - प्रसार एवं क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक कार्यों के लिये आकस्मिकता ( कंटिनजेंसी) के रूप में किया जा सकेगा ।

(iii) योजनान्तर्गत किया जाने वाला व्यय यथासम्भव बजट प्रावधान के अंतर्गत सीमित रखा जायेगा । किसी वित्तीय वर्ष में बजट में प्रावधानित धनराशि से अतिरिक्त देयतायें सृजित होने की स्थिति में इसे आगामी वित्तीय वर्ष में समायोजित किया जा सकेगा ।

( iv ) योजना में स्पष्टीकरण जारी करने हेतु प्रमुख सचिव / सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग अधिकृत होंगे ।

(v) योजना के किसी प्रावधान में संशोधन/ परिमार्जन , प्रशासनिक विभाग द्वारा माननीय विभागीय मंत्री जी के अनुमोदन से किया जा सकेगा ।

(vi) गलत/ भ्रामक जानकारी अथवा त्रुटिपूर्ण तरीके से सहायता प्राप्त करने अथवा जिला उद्योग केन्द्र / बैंक प्रतिनिधि द्वारा लाभार्थी को ऋण वितरण के 02 वर्ष के अंतर्गत निरीक्षण के समय इकाई के कार्यरत नहीं पाये जाने की स्थिति में मार्जिन मनी का समायोजन नहीं किया जायेगा और यह धनराशि जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से उद्योग निदेशालय को वापस कर दी जायेगी ।

(vii) योजनान्तर्गत किसी बिन्दु / विषय पर विवाद की स्थिति में आवेदक / लाभार्थी द्वारा 'जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति' के समक्ष अपील की जा सकेगी ।

(viii) लाभार्थी द्वारा अपने उद्यम पर निर्धारित प्रारूप में अंकित साईनबोर्ड लगाना अनिवार्य होगा ।

आज्ञा से, विनय शंकर पाण्डेय , सचिव ।

टिप्पणी- राजपत्र , दिनांक 14-06-2025 , भाग 1 में प्रकाशित ।

[ प्रतिलिपि सूचनार्थ प्रेषित--]

पी० एस ०यू० (आर०ई ० ) 04 सूक्ष्म एवं लघु / 295-23-06-2025-50 प्रतियां (कम्प्यूटर / रीजियो)

Cite this issue. Uttarakhand Daily Gazette, Government of Uttarakhand, 23 May 2025. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand_daily.2025-05-23.3171-090725223000/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand_daily.2025-05-23.3171-090725223000.