पंजीकरण संख्या- UA/ DO / DDN/ 30/ 2024-2026 क्रम संख्या-24 (त)
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
असाधारण
विधायी परिशिष्ट
भाग -4 , खण्ड (ख )
(परिनियत आदेश)
देहरादून , सोमवार , 13 अप्रैल , 2026 ई 0
चैत्र 23 , 1948 शक सम्वत्
उत्तराखण्ड शासन
न्याय अनुभाग -1
संख्या- 137 / XXXVI - A- 1 / 2026-105/ 2012
देहरादून , 13 अप्रैल , 2026
प० आ0-16
उत्तराखण्ड वादकारिता नीति , 2011 एवं उच्चतम न्यायालय तथा उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में राज्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति तथा पदावधि के लिए सामान्य अनुदेश , 2016 के प्रस्तर -4 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मा० उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने हेतु निम्न वर्णित पूर्व से आबद्ध विधि अधिकारियों को उच्चीकृत करते हुए उनके नाम के सम्मुख अंकित पद पर तत्काल प्रभाव से अग्रेत्तर आदेश तक आबद्ध किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैः--
विधि अधिकारी का नाम/ पदनाम
उच्चीकृत पदनाम
क० सं०
1
अपर महाधिवक्ता
श्री सुनील खेड़ा ( उप महाधिवक्ता) ( सि० )
2
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता श्री प्रदीप हेडिया (स्थायी अधिवक्ता) (सि ०)
3
स्थायी अधिवक्ता
सुश्री पूजा बंगा (ब्रीफ होल्डर) ( सि ० )
4
स्थायी अधिवक्ता
श्री सचिन मोहन मेहता (ब्रीफ होल्डर) ( सि ०)
5
सहायक शासकीय अधिवक्ता श्री प्रदीप लोहनी (ब्रीफ होल्डर) (कि०)
सहायक शासकीय अधिवक्ता 6 सुश्री मीनाक्षी शर्मा (ब्रीफ होल्डर) (कि ०)
2- उपरोक्त के अतिरिक्त निम्नलिखित अधिवक्ताओं को उनके नाम के सम्मुख पदनाम पर तत्काल प्रभाव से अग्रेत्तर आदेश तक आबद्ध किये जाने की भी श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है:-
2
उत्तराखण्ड असाधारण गजट , 13 अप्रैल , 2026 ई ० (चैत्र 23 , 1948 शक सम्वत्)
विधि अधिकारी का नाम / पदनाम
उच्चीकृत पदनाम
क० सं०
1 श्री राकेश सिंह कुंवर
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता
2 श्री विश्व दीपक विसैन
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता
3 श्री देवेन्द्र सिंह
सहायक शासकीय अधिवक्ता
4 श्री देवेन्द्र सिंह बोहरा
सहायक शासकीय अधिवक्ता
5
स्थायी अधिवक्ता
श्री गिरिश चन्द्र खोलिया
6 श्री जय प्रकाश
ब्रीफ होल्डर ( क्रि ०)
3- उक्त आबद्धता इस शर्त के साथ प्रदान की जाती है कि यह एक व्यवसायिक आबन्धन है. किसी सिविल पद पर नियुक्ति नहीं है । इस आबन्धन को राज्य सरकार द्वारा किसी भी समय बिना किसी पूर्व सूचना के और बिना कोई कारण बताये समाप्त किया जा सकता है तथा आबद्ध अधिवक्ता भी इसे कभी भी लिखित सूचना देकर समाप्त कर सकते हैं । आबद्ध अधिवक्ता द्वारा अपनी आबद्धता के दौरान उत्तराखण्ड राज्य के विरूद्ध किसी भी न्यायालय में किसी भी प्रकार के मामले में किसी अन्य व्यक्ति/ संस्था की आबद्धता स्वीकार नहीं करेंगे और न ही राज्य के विरूद्ध कोई विधिक परामर्श देगें तथा वे विधि परामर्शी निदेशिका के उपबन्धों का कड़ाई से पालन करेंगे ।
3- आबद्ध अधिवक्ता राज्य सरकार का पक्ष पूर्ण तैयारी के साथ एवं मजबूती से रखना सुनिश्चित करेंगे । आबद्ध अधिवक्ता प्रत्येक माह की कारगुजारी का विवरण निर्धारित प्रारूप में महाधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता अथवा मुख्य स्थायी अधिवक्ता , जो भी हो, के माध्यम से अगले माह की 07 तारीख तक प्रमुख सचिव, न्याय एवं विधि परामर्शी, उत्तराखण्ड शासन को प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे ।
4- महाधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता अथवा मुख्य स्थायी अधिवक्ता आबद्ध अधिवक्तागण द्वारा उनको प्रस्तुत कारगुजारी पर अपना स्पष्ट मंतव्य प्रस्तुत करेंगे तथा उसे पृथक रूप से प्रमुख सचिव , न्याय को अगले माह की 10 तारीख को प्रस्तुत करेंगे ।
5- शासकीय अधिवक्ता अथवा मुख्य स्थायी अधिवक्ता, वादों / याचिकाओं / अपीलों आदि का आवंटन समान रूप से एवं इस प्रकार से सुनिश्चित करेंगे कि सम्बन्धित अधिवक्ता की जिस क्षेत्र में विशेषज्ञता हो यथासम्भव उसे उस क्षेत्र से सम्बन्धित वाद /अपील / याचिका आदि आवंटित की जाए तथा प्रारम्भ से लेकर वाद / याचिका / अपील आदि के निस्तारण तक, यथासम्भव समान अधिवक्ता द्वारा ही प्रभावी पैरवी की जा सके ।
6- उक्त आबद्ध अधिवक्ताओं को संलग्न शासनादेश सं०-111 / XXXVI - A - 1 / 2020-43 एक (1 ) / 2003 , दिनांक 18.03.2020 के अनुसार फीस देय होगी ।
7- आबद्ध अधिवक्ता इस आशय का प्रमाण पत्र भी महाधिवक्ता, उत्तराखण्ड के माध्यम से शासन को प्रस्तुत करेंगे कि उक्त शर्तों पर कोई आपत्ति नहीं है ।
आज्ञा से,
अमित कुमार सिरोही, प्रमुख सचिव ।
पी० एस ०यू० ( आर ० ई ० ) 17 / न्याय / 173-2026-100 + 20 प्रतियां (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।