Servants of Knowledge
Uttarakhand Weekly Gazette · Government of Uttarakhand

Notification

Published 19 January 2024

Department
Forest Department
Type
Weekly
Part
Bhag 1
Notification no.
127/X-2-2024-19(10)/2021
Identifier
in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-01-19.gz030224
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30/2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की

( संख्या-05 खण्ड-25] रुड़की, शनिवार, दिनांक 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14 , 1945 शक सम्वत्)

विषय-सूची

प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग - अलग दिये गए हैं , जिरारो उनके अलग - अलग खण्ड बन सकें

विषय

वार्षिक चन्दा

पृष्ठ संख्या

रु०

सम्पूर्ण गजट का मूल्य

3075

39-63

1500 भाग 1 - विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति , स्थानान्तरण, अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

41-52

1500 भाग 1 -क-नियम, कार्य- विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

975 भाग 2-आज्ञाएं, विज्ञप्तियां , नियम और नियम विधान, जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण

975 भाग 3 -स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़-पत्र, नगर प्रशासन , नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया

भाग 4-निदेशक, शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड

975

975 भाग 5- एकाउन्टेन्ट जनरल , उत्तराखण्ड

975 भाग 6-बिल , जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों कीरिपोर्ट

975 भाग 7-इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

85-90

975 भाग 8 - सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़- पत्र आदि

1425

39क 40

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

वन अनुभाग-2

अधिसूचना

19 जनवरी, 2024 ई०

संख्या 127 / X - 2-2024-19 ( 10) / 2021 - राज्यपाल " भारत का संविधान" के अनुच्छेद 166 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके वन्य जीवों द्वारा जान - माल को क्षति पहुँचाने जाने पर क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये जाने के दृष्टिगत अनुग्रह राशि प्रदान किये जाने एवं इसका त्वरित भुगतान सुनिश्चित किये जाने के निमित्त वर्तमान में प्रभावी "मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली, 2012" को, उन बातों के सिवाय अधिक्रमित करते हुये जिन्हें ऐसे अधिक्रमण से पूर्व किया गया था या करने का लोप किया गया है , निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं:-

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली , 2024

(1) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम मानव वन्य जीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली , 2024 है ।

संक्षिप्त नाम 1 . विस्तार और प्रारम्भ

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में होगा ।

(3) यह नियमावली तुरन्त प्रवृत्त होगी ।

परिभाषाएं   2.                  जब तक विषय या सन्दर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो , इस
                               नियमावली में,
                          (क)   "सरकार" से "उत्तराखण्ड राज्य की सरकार " अभिप्रेत है;
                          (ख)   "केन्द्रीय सरकार" से भारत सरकार अभिप्रेत है;
                          (ग)   "राज्यपाल" से उत्तराखण्ड के राज्यपाल अभिप्रेत है;
                          (घ)  " वन क्षेत्र" से 'भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव
                               (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (समय- समय पर यथा संशोधित) के
                               प्रावधानों के अन्तर्गत घोषित वन भूमि एवं समय- समय पर
                               भारत के मा० उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखण्ड राज्य के मा०
                               उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेशों से वन की परिभाषा के
                               अन्तर्गत आने वाली भू-क्षेत्र' अभिप्रेत है;
                          (ड)  "निधि" से मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि अभिप्रेत है;
                         (च)    "वन निगम" से उत्तराखण्ड वन विकास निगम अभिप्रेत है;

भाग 1 ]

41 उत्तराखण्ड गजटः 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14 , 1945 शक सम्वत्)

(छ) । "कैम्पा" से राज्य सरकार द्वारा गठित 'उत्तराखण्ड कैम्पा' अभिप्रेत है;

(ज) "अनुग्रह राशि" से वन क्षेत्र तथा उसके आस-पास के क्षेत्र में वन्य जीवों द्वारा जानमाल की क्षति की दशा में देय आर्थिक सहायता अभिप्रेत है;

(झ) "मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक " से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972की धारा 4(1 ) (क) के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी अभिप्रेत है;

(ञ) "प्रभागीय वनाधिकारी " से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी वन प्रभाग के प्रभारी और उस क्षेत्र पर अधिकारिता का प्रयोग करने वाले अधिकारी अभिप्रेत है;

(ट) "उप निदेशक" से राष्ट्रीय पार्क एवं वन्यजीव अभ्यारण्य का उप निदेशक अभिप्रेत है;

(द) "तहसीलदार " से 'राजस्व विभाग के अन्तर्गत तहसीलदार ' अभिप्रेत है;

(ङ) "राजस्व निरीक्षक/पटवारी " से 'राजस्व विभाग के अन्तर्गत राजस्व निरीक्षक /पटवारी ' अभिप्रेत है;

(ढ़) "वन्य जीवों" से 'इस नियमावली के प्रयोजन हेतु बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड) , जंगली हाथी, तीनों प्रजाति के भालू (एशियाई काला भालू, हिमालयन भूरा भालू, स्लॉथ भालू) , जंगली सुअर, लकड़बग्घा, मगरमच्छ/ घड़ियाल , चीतल, काकड़, सांबर, नील गाय, बन्दर, लंगूर, सांप, मधुमक्खी व ततैया' से एवं राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य से समय - समय पर विशेषतः घोषित वन्यजीव अभिप्रेत है;

(ण) " कृषि फसल" से 'राजस्व विभाग द्वारा पारिभाषित कृषि फसल' अभिप्रेत है;

(त) "आश्रित" से सम्बन्धित व्यक्ति के पति/ पत्नी/बच्चे, माता/ पिता, निकटतम सम्बन्धी अथवा ऐसे व्यक्ति अभिप्रेत हैं; जिनको किसी भी अभिलेख में सम्बन्धित व्यक्ति का आश्रित घोषित किया गया हो;

(थ) "वन अधिकारी" से वन विभाग में कार्यरत वन आरक्षी से अन्यून स्तर का कोई अधिकारी / कर्मचारी अभिप्रेत है;

(द) "वन कार्यालय " से वन विभाग का कोई कार्यालय अभिप्रेत है, जिसमें वन आरक्षी चौकी इत्यादि भी सम्मिलित है;

(ध) "ग्राम प्रधान" से ग्राम सभा के ग्राम प्रधान अभिप्रेत है;

"सरपंच" से वन पंचायत के सरपंच अभिप्रेत है;

(न)

(प) "समिति" से नियम 5 के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है ।

42

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

3.

निधिका

(1)

गठन

मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में जानमाल की क्षतिपूर्ति हेतु अनुग्रह राशि के भुगतान हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना सं० 2228/X - 2-2012-19 (37 )/2003 दिनांक 10 दिसम्बर 2012 के अंतर्गत मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि की स्थापना की गयी है । राज्य सरकार के बजट, केन्द्रीय सरकार की योजनाओं, वन निगम से अनुदान , पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर, विभिन्न संस्थाओं आदि से इस उद्देश्य हेतु प्राप्त धनराशि को निधि में संचित किया जायेगा ।

(2) उत्तराखण्ड शासन के आपदा प्रबंधन अनुभाग-01 की अधिसूचना संख्या 1468 /XVIII-(2 )/ 19-15 (06)/2019 दिनांक 11 नवम्बर 2019 के अनुसार प्रदेश में मानव वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित किया गया है । मानव वन्यजीव संघर्ष के अन्तर्गत वन्यजीवों द्वारा जान- माल को क्षति पंहुचाने पर क्षतिपूर्ति के रूप में अनुग्रह राशि इस नियमावली में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन) , भारत सरकार के पत्र दिनांक 10.10.2022 एवं पत्र दिनांक 11.07.2023 के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2022-23 से राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत निर्धारित नवीन मानक एवं मदों अथवा इस नियमावली के प्रावधानों के अनुसार, जो भी अधिक हो उपलब्ध करायी जायेगी । यदि भविष्य में राज्य आपदा मोचन निधि के मानकों एवं मदों में परिवर्तन होता है तो इस नियमावली के अंतर्गत नवीनतम मानकों के अनुसार राहत सहायता का भुगतान किया जायेगा ।

4.

(1) मानव वन्यजीव संघर्ष की राज्य आपदा से प्रभावितों को प्रथमतः राज्य आपदा मोचन निधि के अनुमन्य मदों के अनुसार अनुग्रह राशि का भुगतान किया जायेगा । किसी मद में इस नियमावली के अंतर्गत देय अनुग्रह राशि यदि राज्य आपदा मोचन निधि से उक्त मद में अनुमन्य धनराशि से अधिक हो तो ऐसी स्थिति में अतिरिक्त्त देय धनराशि का भुगतान वन विभाग द्वारा इस नियमावली द्वारा स्थापित कोष से किया जायेगाः

परन्तु यदि राज्य आपदा मोचन निधि अथवा इस नियमावली के अंतर्गत अनुमन्य अनुग्रह राशि के मानकों में कोई परिवर्तन किया जाता है तो उक्त परिवर्तन की तिथि से परिवर्तित दरों के अनुसार भुगतान किया जायेगा ।

(2) जिन मदों में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से धनराशि देय होगी उन मदों के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा ।

43 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14. 1945 शक सम्वत्)

5.

निधिका प्रशासन

निधि के प्रशासन हेतु निम्नलिखित कार्यकारणी समिति गठित की जायेगी , जो निधि के कार्य कलापों का प्रबन्ध करेगी एवं इस नियमावली के अधीन या उनके द्वारा सौंपे गये कार्यों का निष्पादन करेगीः-

अध्यक्ष

(एक) प्रमुख वन संरक्षक

(दो) प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उपाध्यक्ष

(तीन) प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण द्वारा नामित सदस्य संयुक्त सचिव से अनिम्न स्तर के अधिकारी

(चार) मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल मण्डल सदस्य

(पांच) मुख्य वन संरक्षक, कुमांऊ मण्डल सदस्य

(छः) प्रबन्ध निदेशक, उत्तराखण्ड वन विकास निगम सदस्य

(सात) वित नियंत्रक, वन विभाग सदस्य

सदस्य (आठ) अपर प्रमुख वन संरक्षक, नियोजन एवं वित्तीय प्रबन्धन

सदस्य (नौं) मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव , प्रशासन एवं आसूचना सचिव

6.

(1)

निधि का वितरण व रख- रखाव

नियम 3 के अधीन गठित निधि को ब्याज अर्जित (Interest Bearing) किसी राष्ट्रीयकृत बैंक खाते में रखा जायेगा । इस निधि का खाता उसी बैंक में खोला जायेगा जहां पर NEFT व RTGS की सुविधा उपलब्ध हो । इस बैंक खाते का नियंत्रण प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा किया जायेगा तथा यह उनके अथवा उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर से संचालित होगा । इस मुख्य बैंक खाते के विभिन्न वन प्रभागवार शीर्षक खाते खोले जायेंगे । इस निधि के संचालक द्वारा सम्बन्धित प्रभाग के शीर्षक खाते में वन्य जीवों द्वारा जान- माल को पहुंचायी गयी क्षति के सापेक्ष अनुग्रह धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी ।

(2) इस निधि के गठन हो जाने व संचालित होने के एक माह के भीतर उपरोक्तानुसार गठित समस्त वन प्रभागों के शीर्षक खातों में धनराशि रू0 20.00 लाख (रूपये बीस लाख) उपलब्ध करायी जायेगी । इस हेतु अपेक्षित धनराशि वन विभाग द्वारा सुसंगत मदों के अंतर्गत उपलब्ध करायी जायेगी । सम्बन्धित वन प्रभागों के द्वारा अनुग्रह धनराशि का भुगतान इस धनराशि से किया जायेगा । प्रत्येक घटना में अनुग्रह राशि के भुगतान के पश्चात् सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को स्वीकृति पत्र की एक प्रति उपलब्ध करायी जायेगी, जिसके पश्चात पत्र प्राप्ति के दो दिन के अन्दर उनके द्वारा धनराशि की उपलब्धता 44

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14. 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

अनुसार सम्बन्धित वन प्रभाग के शीर्षक खाते में भुगतान की गयी अनुग्रह राशि के समान धनराशि उपलब्ध करायी जायेगी । किसी भी दशा में उक्त वन प्रभागों के शीर्षक खाते में रू0 20. 0० लाख धनराशि की सीमा को अनुरक्षित किया जायेगा ।

(3) किसी संस्था अथवा व्यक्ति द्वारा निधि में धनराशि दान किये जाने पर सम्बन्धित संस्था/ व्यक्ति को आयकर अधिनियम के अन्तर्गत आयकर से छूट प्रदान किये जाने हेतु केन्द्रीय सरकार को आवेदन करने हेतु स्वतंत्र होगा ।

(4) उपरोक्त गठित कार्यकारणी समिति को यह अधिकार होगा कि किसी भी प्रकरण में अनुग्रह राशि के भुगतान हेतु पृथक से जांच कर सकता है एवं अनियमितायें पाये जाने पर भुगतान प्रक्रिया रोकी जा सकती हैं ।

7.

(1) अनुग्रह राशि निम्नलिखित स्थितियों में देय होगी -

अनुग्रह राशि

बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ (स्नो लेपड़) , जंगली हाथी, तीनों प्रजाति के भालू, लकड़बग्घा, जंगली सुअर, मगरमच्छ / घड़ियाल , सांप, मधुमक्खी , ततैया, लंगूर एवं बन्दर के आक्रमण से मृत्यु, घायल या विकलांग होने पर;

(2) बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), जंगली हाथी तीनों प्रजाति के भालू, लकड़बग्घा, जंगली सुअर तथा मगरमच्छ/ घड़ियाल, सांप द्वारा पालतू पशुओं को मारे जाने की हानि;

(3) जंगली हाथी , जंगली सुअर, नील गाय , काकड, सांभर, चीतल, लंगूर तथा बन्दरों द्वारा फसलों की हानि,

(4) जंगली हाथियों एवं तीनों प्रजाति के भालू द्वारा मकान को हानि ।

अनुग्रह राशि 8. के दावा का अवैध होना

जंगली जानवरों द्वारा मानव हानि पर दिये जाने वाले क्षतिपूर्ति के लाभ/ प्रलोभन में पारिवारिक सदस्यों अथवा परिवार से भिन्न व्यक्तियों द्वारा किसी वृद्ध मनुष्य, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अयोग्य (मेडिकल अनफिट) , विकलांग अथवा मानसिक रूप से असंतुलित तथा वयस्क / अवयस्क किसी मानव को अकेले जंगल में छोड़ दिये जाने एवं जंगली जानवरों द्वारा ऐसे मानवों को हानि पहुंचाये जाने पर अनुग्रह राशि का दावा अवैध होगा । किसी भी प्रकार के क्षतिपूर्ति हेतु प्रस्तुत दावों के " अवैध " होने की पुष्टि होने पर ऐसे दावा प्रस्तुत करने वाले के विरूद्ध F.I.R (प्राथमिकी) दर्ज करते हुए विधि सम्मत् दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी ।

भाग 1]

45 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई ० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

(1)

अनुग्रह राशि 9 . की भुगतान की दरें

इस नियमावली के अंतर्गत विभिन्न वन्यजीवों द्वारा हानि पंहुचाने पर देय अनुग्रह राशि तथा उक्त राशि का राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अनुभाग-1 की अधिसूचना संख्या 1468 / XVIII- (2)/19-15-(06)/2019 दिनांक 11.11.2019, गृह मंत्रालय (आपदा प्रबन्धन) , भारत सरकार के पत्र संख्या- 33-03 / 2020 - NDM- I (VOL-11) दिनांक 10.10.2022 एवं पत्र संख्या- 33-03 /2020- NDM - 1 दिनांक 11.07.2023 के क्रम में राज्य आपदा मोचन निधि (State Disaster Response Fund, SDRF ) तथा इस नियमावली द्वारा गठित निधि से अंशवार देयता का विवरण निम्नलिखित हैः-

1. नियम 7 के उपनियम (1 ) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा मानव को हानि पहुंचाने पर देय अनुग्रह राशि की दरें निम्नवत् होगीः-

भुगतान का स्रोत (रू० में)

भानंद थाति का प्रकार

राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के मानक

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली, 2024 के अनुसार अनुग्रह राशि हेतु देय दरें (रू० में)

राज्य आपदा मानव मोचन निधि (SDRF) से देय राशि

वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली 2024से देय राशि

15,000/-

साधारण रूप से घायल

ऐसा गहरा जख्म जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है ।

9,600/- प्रति व्यक्ति

5,400/- प्रति व्यक्ति

(1) रु ० 5,400/- प्रति व्यक्त्ति एक सप्ताह से कम अवधि लक

चिकित्सालय में रहने की स्थिति में ।

(2) रू0

16,000/-

16,000/- प्रति व्यक्ति

16,000 प्रति

व्यक्ति एक

सप्ताह से

अधिक की

अवधि तक

चिकित्सालय में भर्ती होने की स्थिति में ।

1,00,000 /-

गम्भीर रूप से घायल

ऐसा गहरा जख्म जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की 46

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

आवश्यकता है ।

5,400/- प्रति व्यक्ति

94,600/- प्रति व्यक्ति

(1) रू ० 5,400 प्रति व्यक्ति एक सप्ताह से कम अवधि तक चिकित्सालय में भर्ती होने की स्थिति में।

84,000/- प्रति व्यक्त्ति

16,000/- प्रति व्यक्ति

(2) रु० 16,000 प्रति व्यक्ति एक सप्ताह से अधिक की अवधि तक चिकित्सालय में भर्ती होने की स्थिति में।

1,00,000/-

आंशिक रूप सेअपंग

26,000/- प्रति व्यक्ति

74,000 /- प्रति व्यक्त्ति

शरीर के किसी अंग (लिंब) अथवा आंख/ आंखों की हानि होने पर । 50 74,000 प्रति व्यक्ति अपंगता के 40से 60 प्रतिशत के मध्य होने की स्थिति में ।

3,00,000 /-

पूर्ण रूप से अपंग

2,50,000/- प्रति व्यक्तिं

50,000/- प्रति व्यक्ति

रू० 3.00 लाख प्रति व्यक्ति अपंगता के 60 प्रतिशत अधिक होने की स्थिति में ।

अपंगता की सीमा और उसके कारण के संबंध में सरकारी अस्पताल अथवा डिस्पेंसरी के डाक्टर द्वारा किये गये प्रमाणन के अधीन ।

47 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

4,00,000/-

4.00

व 6,00,000/-

प्रति व्यक्ति

लाख प्रति

2,00,000/ -प्रति व्यक्ति

वयस्क अवयस्क की मृत्यु पर

व्यक्ति । इसमें वे भी शामिल हैं, जो राहत अभियानों में शामिल हैं अथवा तैयारियों

संबंधी कार्य कलापों से संबद्ध हैं । यह उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा मृत्यु के कारण संबंधी प्रमाण के अध्यधीन है ।

नोट-"आयुष्मान भारत योजना " के तहत उपचार प्राप्त करने वाले व्यक्त्ति उक्त नियमों के अन्तर्गत राहत के लिए पात्र नहीं होंगे ।

(2)

नियम 7 के उपनियम (2 ) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा पशुओं को हानि पहुँचाने पर देय अनुग्रह राशि की दरें निम्नवत् होगीः-

भुगतान का स्रोत (रू ० में)

राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के मानक

पशु का प्रकार

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली, 2024 के अनुसार अनुग्रह राशि हेतु देय दरें (रू ० में)

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली-202 4 से देय राशि

राज्य आपदा गोधन निधि (SDRF) से देय राशि

37,500/

37,500/-

प्रतिपशु

दुधारू पशु मेस गाय/कंट 37,500/- याक/मिथुन आदि के लिये प्रति पशु।

गाय, (ज्यों) व लवी) जुमो

4,000/

5,000/-

1,000/- प्रति पशु

प्रतिपशु

बकरी/ भेड़/ सुअर

रु० 4,000/- भेड़/ बकरी / सूअर के लिये प्रति पशु ।

32,000/- गैर दुधारू पशु 50 32,000/-ऊंट / घोड़ा / बैल आदि

32,000/ प्रति पशु

ऊंट/ घोड़ा /बैल आदि

20,000/

20,000/-

प्रति पशु

बछड़ा / गधा/

20,000 /-बछड़ा/ गधा/ टट्टू खच्चर / हेफर 48

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

खच्चर

/ हेफर

[नानक-सहायता आर्थिक रूप से उत्पादक पशुओं के वास्तविक नुकसान तक हो सकती है और यह 3 बड़े दुधारू पशुओं और /या 30 छोटे दुधारू पशुओं और/या 6 छोटे गैर-दुधारू पशुओं की अधिकतम सीमा के अध्यधीन होगी तथा इस बात पर ध्यान दिये बिना प्रदान की जायेगी कि किसी परिवार की भारी मात्रा में पशुओं की क्षति हुई है अथवा नहीं ।

(जानवरों के नुकसान के दावे पर तभी विचार किया जायेगा जब छोटे और सीमांत किसानों /भूमिहीन पशुधन मालिकों के स्वामित्व वाले जानवरों की संख्या और प्रकार स्थानीय/नामित अधिकारियों के पास पंजीकृत हों))

37,500/

37,500/-

प्रतिपशु

रू० 37,500 /-भैंस (03वर्ष से अधिक आयु) एवं उक्त मानकानुसार

32,000/

भैंस (03 वर्ष से अधिक आयु) घोड़ा- 40,000/-

8,000/- प्रति पशु

खच्चर

प्रति पशु

रू० 32,000/-घोड़ा/ खच्चर आदि के लिए एवं उक्त मानकानुसार

32,000/

32,000/-

प्रति पशु

रू0 32,000/-बैल (03वर्ष के अधिक आयु) के लिए एवं उक्तमानकानुसार

बैल (03 वर्ष से अधिक आयु)

20,000/

20,000/-

गाय की

बछिया

प्रति पशु

रू० 20,000/-प्रति पशु एवं उक्त मानकानुसार

तथा

भैंस

का

पडुया

/

पड़िया

/जबू (ज्यो) वजुमो के बच्चे

(3) नियम 7 के उपनियम (3 ) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा फसलों को हानि पहुंचाने पर अनुग्रह राशि की दरें निम्नवत् होगीः- 49 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

भुगतान का ओत

फसल का का प्रकार

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निषि नियमावली-2024 से देय राशि (रू०

राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से देय राशि (रू० में)

मानव वन्यजीव संवर्ष राहत वितरण निषि नियमावली, 2024के राशिहेतु चेय अनुसार अनुग्रह दरें (रू० में)

सहायता हेतु राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के क्षति केमानक

इनपुट सब्सिडी (जहां पर फसलों का नुकसान 33 प्रतिशत या उससे अधिक है ।

25,000/-

प्रति एकड़

रु० 21,559/- प्रति एकड़

3,441/ प्रति एकड़

रू० 8,500 प्रति हेक्टेयर, वर्षा सिंचित क्षेत्रों में ।

गन्ना सम्पूर्ण फसल

उपरोक्त सहायता प्रति किसान न्यूनतम रु०

1000/- के अधीन है और बोये गये क्षेत्रों तक सीमित है ।

17000/ प्रति हेक्टेयर सुनिश्चित सिंचित क्षेत्रों में

उपरोक्त

सहायता

प्रति

किसान

न्यनूतम

2000/- के अधीन है और बोये गये क्षेत्रों तक सीमित है।

50

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

उपरोक्तानुसार

धान/गेहूं/ 15,000/-- प्रति एकड़

                                       रू०
तिलहन                                  3,441/-      11,559/- प्रति
सम्पूर्ण                               प्रतिएकड़    एकड़
फर्सल
                           उपरोक्तानुसार            रु० 4,559 /-
                                                    प्रति एकड़

8,000 /-

प्रति एकड़

रू० 3,441/- प्रति एकड़

उपरोक्त फसलों को छोड़कर

अन्य सभी प्रकार के फसलों के क्षतिग्रस्त होने पर सम्पूर्ण

फसल

(4) जंगली हाथी/ तीनों प्रजाति के भालू द्वारा मकान को हानि पहुंचाये जाने की दशा में देय अनुग्रह राशि की दरें निम्नवत् होगी:-

भुगतान का स्रोत

सहायता हेतु

मानव

मकान का प्रकार

मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वित्तरण निषिनियमावली, 2024के अनुसार अनुग्रह राशि हेतु देय दरें (रू ० में)

राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के क्षति के मानक

राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से देय राशि (रू० में)

वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली- 2024 से देय राशि (रू ० नें)

30,000

प्रति घर 1,50,000/-

1,20,000/- प्रति भवन (मैदानी क्षेत्रों

पक्का मकान पूर्ण क्षति

में)

पूर्णतः क्षतिग्रस्त/ नष्ट भवन/ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त

उपरोक्त्तानुसार

1,30,000/-

प्रति घर

कच्चा मकान पूर्ण क्षति

1,30,000/- प्रतिभवन (एकीकृत कार्ययोजना से आच्छादित जनपदों सहित पहाड़ी क्षेत्रों मे)

16,000/- प्रतिघर

4,000/- प्रत्तिघर

20,000/-

प्रतिघर

आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान

कच्चा मकान आंशिक रूप से

(झोपड़ियों के सिवाय) जहां क्षति कम से कम 15 प्रतिशत है । कच्चा घर- रू० 4,000 /- प्रति घर

8,000/-

8,000/- प्रति झोपड़ी

क्षतिग्रस्त/ नष्ट झोपड़ी

झोपड़ी, टट्ट से निर्मित

(झोपडी का तात्पर्य अस्थाई, तौर

आवास क्षतिग्रस्त होने पर 51 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

पर बनायी गयी ईकाई जो कच्चे मकान से कमजोर होती है, यह घास-फूस, मिट्टी, प्लास्टिक आदि से बनी होती है, राज्य/ जिला

प्राधिकरणों द्वारा इसे पांरपरिक तौर पर झोपड़ी के रूप में माना जाता है ।

नोट- क्षतिग्रस्त घर, राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत् प्रमाणित एक अधिकृत निर्माण होना चाहिए ।

3,000/- प्रति शेड

घर से जुड़ा पशुओं का बाड़ा ।

15,000/-

पक्के मकान की चहारदीवारी की क्षति आंशिक क्षति तथा पक्के मकान की

आंशिक क्षतिग्रस्त मकान (झोपड़ियों के शिवाय) जहां क्षति कम से कम 15 प्रतिशत हो ।

6,500/- प्रत्तिभवन

8,500/- प्रति भवन

पक्का घर-रू० 6,500/- प्रति घर ।

(चहारदीवारी हेतु आंशिक एवं पूर्ण क्षति पर तथा पक्के मकान की आंशिक क्षतिपर)

कच्चा चर-रू० 4,000/- प्रति घर ।

4,000/- प्रति भवन

11,000/- प्रति भवन

10.

अनुग्रह राशि कीभुगतान की प्रक्रिया

नियम 7 के उपनियम (1) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा मानव हानि पहुंचाने पर अनुग्रह राशि की भुगतान की प्रक्रिया निम्नलिखित होगी:-

52

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

(1) (एक) वन्य जीवों द्वारा मारे जाने , अपंग करने अथवा घायल कर दिये जाने पर पीड़ित व्यक्ति / सम्बन्धित आश्रित की पुष्टि प्रथमतः घटना क्षेत्र के ग्राम प्रधान अथवा किसी वर्तमान में पदासीन जनप्रतिनिधि एवं सम्बन्धित क्षेत्र के वन रक्षक द्वारा संयुक्त रूप से कर दिये जाने के आधार पर सम्बन्धित प्रभागीय, वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा निधि से घटना विशेष में आंकलित कुल देय धनराशि का 30 प्रतिशत धनराशि अग्रिम के रूप में पीड़ित व्यक्ति/ सम्बन्धित आश्रित को जानमाल की क्षति की घटना की सूचना प्राप्त होने से सार्वजनिक अवकाश दिवसों को छोड़ते हुए अधिकतम 48 घंटे के अन्तर्गत उपलब्ध करायी जायेगी । अवशेष धनराशि अन्तिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर देय होगी ।

स्पष्टीकरणः ऐसी किसी घटना की जानकारी होने पर संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी/ उप निदेशक द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए भी उपरोक्तानुसार कार्यवाही की जायेगी ।

(दो) यदि अन्तिम जांच रिपोर्ट में वन्य जीवों द्वारा सम्बन्धित व्यक्ति के मारे जाने /अपंग करने/ घायल करने की पुष्टि नहीं होती है, तो सम्बन्धित पीड़ित व्यक्त्ति/ आश्रित को प्रदान की गयी अग्रिम धनराशि की वसूली राजस्व वसूली के बकाया रूप में की जायेगी । इस सम्बन्ध में नियमावली के नियम 5 के अनुसार गठित समिति के द्वारा अन्तिम निर्णय लिया जायेगा । अंतिम जांच रिपोर्ट में इस तथ्य की जांच भी अनिवार्य रूप से की जायेगी, कि अनुग्रह राशि का दावा पूर्णतः वैध है । दावा अवैध होने पर नियमावली के नियम 8 के अनुसार कार्यवाही की जायेगी ।

(तीन) वन्यजीवों द्वारा मारे जाने, अपंग करने अथवा घायल कर दिये जाने के सम्बन्ध में राज्य के चिकित्सक द्वारा इस सम्बन्ध में प्रमाण-पत्र दिया जायेगा, जिसके उपरान्त सम्बन्धित सहायक वन संरक्षक/ वन्य जीव प्रतिपालक की अन्तिम जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा देय अनुग्रह राशि को स्वीकृत करने तथा भुगतान करने का पूर्ण अधिकार होगा । इस सम्बन्ध में प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा सम्पूर्ण विवरण के साथ भुगतान आदेश की प्रति अनिवार्य रूप से सूचना प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रेषित की जायेगी ।

(चार) अन्तिम जांच रिपोर्ट घटना घटित होने के अधिकतम 15 दिन के भीतर निश्चित रूप से उपलब्ध करायी जायेगी ।

(पांच) अनुग्रह राशि का अन्तिम भुगतान करने से पूर्व मृतक व्यक्ति के आश्रितों के सम्बन्ध में राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारी से प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जायेगा ।

(8) मानव मृत्यु अथवा घायल किये जाने की दशा में अनुमन्य भुगतान अनिवार्य रूप से अधिकतम 15 दिनों में किया जायेगा ।

53 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1]

(2) नियम 7 के उपनियम (2) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा पशु हानि पहुंचाये जाने पर अनुग्रह राशि की भुगतान की प्रक्रिया निम्नलिखित होगी:-

(एक) वन्यजीवों द्वारा पालतू पशुओं/ मवेशी के मारे जाने पर प्रथमतः इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान अथवा वर्तमान में पदासीन किसी जनप्रतिनिधि द्वारा कर दिये जाने के उपरान्त ही मारे गये मवेशी के मृत शरीर को घटना स्थल से हटाया जायेगा । मृत मवेशी के शव पर किसी प्रकार का विष अथवा कीटनाशक पदार्थ डाले जाने और किसी भी प्रकार से मवेशी के शव से छेड़-छाड़ किये जाने की दशा में अनुग्रह राशि देय नहीं होगी ।

(दो) मवेशी के स्वामी द्वारा मवेशी के मारे जाने की सूचना घटना के दो दिन के अन्दर सम्बन्धित रेंज कार्यालय में लिखित रूप से देनी होगी ।

(तीन) वन्यजीवों द्वारा पालतू पशुओं/ मवेशी को मारे जाने की पुष्टि प्रथमतः घटना क्षेत्र के ग्राम प्रधान अथवा वर्तमान में पदासीन किसी जनप्रतिनिधि एवं सम्बन्धित क्षेत्र के वन रक्षक द्वारा संयुक्त रूप से कर दिये जाने के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी/उप निदेशक द्वारा अपने पास उपलब्ध निधि से घटना विशेष में आंकलित कुल देय धनराशि का 20 प्रतिशत धनराशि अग्रिम धनराशि के रूप में मवेशी के स्वामी को उपलब्ध करायी जायेगी । अवशेष धनराशि अन्तिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर देय होगी । यदि अन्तिम जांच रिपोर्ट में वन्य प्राणी द्वारा मवेशी के मारे जाने की पुष्टि नहीं होती है, तो मवेशी के स्वामी को प्रदान की गयी अग्रिम धनराशि की वसूली राजस्व के रूप में की जायेगी ।

(चार) वन्यजीवों द्वारा मवेशी को मारे जाने का प्रमाण- पत्र सम्बन्धित रेंज अधिकारी द्वारा दिया जायेगा, जिसके उपरान्त सम्बन्धित सहायक वन संरक्षक / वन्यजीव प्रतिपालक की अन्तिम जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक को देय अनुग्रह राशि को स्वीकृत करने तथा भुगतान करने का पूर्ण अधिकार होगा । इस सम्बन्ध में प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा सूचना सम्पूर्ण विवरण के साथ निश्चित रूप से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रेषित की जायेगी ।

(पांच) अन्तिम जांच रिपोर्ट घटना घटित होन के अधिकतम एक माह के भीतर निश्चित रूप से उपलब्ध करायी जायेगी ।

(छः) ऐसे प्रकरणों में अनुमन्य भुगतान अनिवार्य रूप से अधिकतम 15 दिनों में किया जायेगा ।

(3) नियम 7 के उपनियम (3 ) में उल्लिखित वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति पहुंचाये जाने पर अनुग्रह राशि की भुगतान की प्रक्रिया [भाग 1 54

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

निम्नलिखित होगीः-

(एक) घटना की सूचना, 2 दिन के अन्दर स्थानीय वन अधिकारी को लिखित रुप में देनी होगी । इसके उपरान्त सम्बन्धित घटना क्षेत्र के तहसीलदार / पटवारी व स्थानीय वन अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से फसलों की क्षति का सत्त्यापन एवं आंकलन कर जांच रिपोर्ट रेंज अधिकारी के माध्यम से सम्बन्धित सहायक वन संरक्षक / वन्यजीव प्रतिपालक को उपलब्ध करायी जायेगी ।

(दो) सम्बन्धित सहायक वन संरक्षक / वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा अन्तिम जांच रिपोर्ट घटना घटित होने के दो माह के भीतर अनिवार्य रूप से सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक को प्रस्तुत की जायेगी ।

(तीन) अन्तिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी / उपनिदेशक प्रकरण में देय अनुग्रह राशि को स्वीकृत करने व भुगतान करने का पूर्ण अधिकारी होगा। इस सम्बन्ध में प्रभागीय वनाधिकारी / उपनिदेशक द्वारा सम्पूर्ण विवरण के साथ सूचना निश्चित रूप से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रेषित की जायेगी ।

(चार) ऐसे प्रकरणों में अनुमन्य भुगतान अनिवार्य रूप से अधिकतम 15 दिनों में किया जायेगा ।

(4) जंगली हाथियों एवं तीनों प्रजाति के भालू द्वारा मकान क्षति पर अनुग्रह राशि के भुगतान की प्रक्रिया निम्नलिखित होगीः-

(एक) घटना की सूचना दो दिन के अन्दर सम्बन्धित रेंज कार्यालय में लिखित रूप से देनी होगी । जिसकी पुष्टि वन दरोगा अथवा उप वन क्षेत्राधिकारी द्वारा तत्काल कर ली जायेगी ।

(दो) क्षति का आंकलन सम्बन्धित क्षेत्र के नायब तहसीलदार एवं रेंज अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से कर लिये जाने पर जांच रिपोर्ट सहायक वन संरक्षक / वन्यजीव प्रतिपालक को उपलब्ध करायी जायेगी , जिसके द्वारा मामले में अन्तिम जांच करते हुये अन्तिम जांच रिपोर्ट एक माह के अन्दर अनिवार्य रूप से सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक को प्रस्तुत की जायेगी । अन्तिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर सम्बन्धित प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा प्रकरण में देय अनुग्रह राशि को स्वीकृत करने व भुगतान करने का पूर्ण अधिकार होगा । इस सम्बन्ध में प्रभागीय वनाधिकारी/ उप निदेशक द्वारा सम्पूर्ण विवरण के साथ सूचना निश्चित रूप से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रेषित की जायेगी ।

55 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

स्पष्टीकरणः ऐसी किसी घटना की जानकारी होने पर संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी / उप निदेशक द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए भी उपरोक्तानुसार कार्यवाही की जायेगी ।

ऐसे प्रकरणों में अनुमन्य भुगतान अनिवार्य रूप से अधिकतम 15 दिनों में किया जायेगा ।

11.

निधि के अंतर्गत

निधि में जमा धनराशि पर प्राप्त होने वाला ब्याज निधि में ही सम्मिलित किया जायेगा । निधिकी अधिकतम 05 प्रतिशत

धनराशि इस निधि के संचालन हेतु नियमावली के नियम 5 में गठित समिति की देख- रेख में विभिन्न प्रभागीय कार्यालयों में प्रशासनिक व्यय के रूप में व्यय की जायेगी ।

प्रशासनिक व्यय एवं ब्याज का उपयोग

12.

लेखा

सम्परीक्षा

निधि का लेखा सम्परीक्षा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधीन महालेखाकार द्वारा अथवा उनके द्वारा नामित संस्था द्वारा किया जायेगा ।

13.

प्रतिवेदन

निधि के कार्य-कलापों के प्रशासन तथा निधि के लेखों के सम्बन्ध में प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर प्रत्येक वर्ष के दिनांक 15 अप्रैल तक समिति अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी । उक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये निधि की कार्यकारिणी उत्तरदायी होगी ।

राज्य सरकार 14. कीलेखा एवं सूचनायें मांगने की शक्ति

राज्य सरकार को यह अधिकार होगा कि वह ऐसी सूचनायें एवं लेखे कभी भी मांग सकती है, जो उसके विचार से उन्हें युक्तियुक्त रूप से संतुष्ट करने के लिये आवश्यक हो, एवं कार्यकारिणी तथा प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) / मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखण्ड ऐसी अपेक्षा पर तत्काल राज्य सरकार को सूचनायें एवं लेखा प्रस्तुत करेगी ।

15

इस नियमावली के प्रावधानों के प्रवर्तन में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार आदेश द्वारा कठिनाई दूर कर सकती है, जो इस नियमावली से असंगत न होगा ।

नियमों के प्रर्वतन में कठिनाइयों का दूर किया जाना

1. इस नियमावली के प्रवृत्त होने की तिथि के उपरान्त यदि राज्य सरकार अथवा भारत सरकार के गृह मंत्रालय , आपदा प्रबन्धन संभाग द्वारा अनुमन्य राशि की दरों में कोई परिवर्तन (संशोधन) किया जाता है, तो दोनों में से जो भी धनराशि उच्च हो, उसके अनुरूप इस नियमावली को स्वतः उस अंश तक परिवर्तित (संशोधित) माना जायेगा । ऐसे परिवर्तन (संशोधन) लागू होने की तिथि के विषय में राज्य सरकार द्वारा पृथक से आदेश किये जायेंगे ।

56

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

2. भारत सरकार के गृह मंत्रालय , आपदा प्रबंधन संभाग द्वारा व्यस्क अथवा अव्यस्क की मृत्यु पर अनुमन्य अनुग्रह राशि जो भी निर्धारित हो , राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक मामले में उससे रू0 02 लाख अधिक की धनराशि का भुगतान किया जायेगा । रू० 02 लाख की अतिरिक्त धनराशि मानव वन्यजीव संघर्ष वितरण निधि से देय होगी । भारत सरकार द्वारा ऐसे परिवर्तन के अनुरूप इस नियमावली को स्वतः उस अंश तक परिवर्तित माना जायेगा । ऐसे परिवर्तन के लागू होने की तिथि के विषय में राज्य सरकार द्वारा पृथक से आदेश निर्गत किए जायेंगे ।

3. भारत सरकार के गृह मंत्रालय , आपदा प्रबन्धन संभाग द्वारा पूर्ण रूप से अपंग होने पर अनुमन्य अनुग्रह राशि जो भी निर्धारित हो, राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक मामले में उससे रू ० 50 हजार अधिक की राशि का भुगतान किया जायेगा । रू0 50 हजार की अतिरिक्त धनराशि मानव वन्यजीव संघर्ष वितरण निधि से देय होगी । भारत सरकार द्वारा ऐसे परिवर्तन के अनुरूप इस नियमावली को स्वतः उस अंश तक परिवर्तित (संशोधित ) माना जायेगा । ऐसे परिवर्तन के लागू होने के विषय में राज्य सरकार द्वारा पृथक से आदेश किये जायेंगे ।

4. मानव- वन्यजीव संघर्ष के तहत होने वाली विभिन्न क्षतियों की प्रतिपूर्ति हेतु मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि नियमावली, 2023 के तहत नियत की गई धनराशि यदि भारत सरकार द्वारा राज्य आपदा मोचन निधि हेतु निर्धारित दरों से अधिक होती है तो उस दशा में अतिरिक्त धनराशि वन विभाग द्वारा भानव - वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण निधि से वहन की जायेगी ।

आज्ञा से , आर० के सुधांशु, प्रमुख सचिव ।

शहरी विकास अनुभाग-3

अनन्तिम अधिसूचना

19 जनवरी , 2024 ई ०

संख्या 183818/ IV(3)/2024-11 (02 निर्वा०)/2022-उत्तराखण्ड की नगर पंचायत, कीर्तिनगर, जिला-टिहरी गढ़वाल के वार्डों के परिसीमन के सम्बन्ध में अधिसूचना का निम्नलिखित प्रारूप जिसे श्री राज्यपाल उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश , 2007) की धारा -11 क एवं 11 ख में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके जारी करने का प्रस्ताव करते है , उक्त धारा की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार सम्बद्ध व्यक्तियों की सूचना के लिये आपत्तियां आमंत्रित करने के लिये एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है ।

प्रस्तावित अधिसूचना के सम्बन्ध में आपत्तियां, यदि कोई हो, तो वह लिखित रूप में जिलाधिकारी- टिहरी गढ़वाल को प्रेषित की जायेगी । केवल उन्हीं आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा, जो इस अधिसूचना के प्रकाशन के दिनांक से 07 दिनों के भीतर प्राप्त होगी ।

57 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

प्रस्तावित अधिसूचना

उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश , 2007) की धारा-11 क एवं 11 ख की उपधारा (1 ) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके श्री राज्यपाल संलग्न सूची में उल्लिखित नगर पंचायत, कीर्तिनगर, जिला-टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के वार्डों के परिसीमन के सम्बन्ध में निम्नलिखित आदेश जारी करते है-

(1) निर्वाचन के प्रयोजन के लिये उक्त नगर पंचायत क्षेत्र को संलग्न अनुसूची में उल्लिखित वार्डों में विभाजित किया जायेगा ।

(2) प्रत्येक वार्ड का परिसीमन ऐसा होगा, जैसा संलग्न अनुसूची के स्तम्भ 1 से 5 में उल्लिखित किया गया है ।

आज्ञा से. नितिन सिंह भदौरिया, अपर सचिव ।

नगर पंचायत कीर्तिनगर, जिला टिहरी गढवाल-

वार्ड का नाम वार्ड की सीमा वार्ड का विस्तार

सं.

वार्ड में सम्मिलित मौहल्लों के नाम

1

2

3

4

5

1वार्ड नं0.01 पूरब-वार्ड नं0.02

1 कोर्ट कॉलोनी

कोर्ट

एवंसीमा ।

की रामपुर ग्राम सभा के मोहन नगर का

2- मोहन नगर

3-थाना कॉलोनी

कॉलेज कॉलोनी

रामपुर

पूर्ण क्षेत्र ।

पश्चिम- ग्राम की सीमा ।

4-पैन्यूला मौहल्ला

मौहल्ला

5- दुण्डप्रयाग

बाजार लाइन ।

उत्तर-ग्राम सेमा/ पैन्यूला ग्राम की सीमा ।

दक्षिण-ग्राम रामपुर की सीमा ।

ऊपरी 1 -ब्लॉक कालोनी

0.02 पूरब- ग्राम घिल्डियाल एवंगांव की सीमा ।

जाखणी भाग का पूर्ण क्षेत्र । 2-अस्पताल कॉलोनी

2 वार्ड नं ब्लॉक सिंचाई विभाग कॉलोनी

पश्चिम- ग्राम पैन्यूला की सीमा ।

3-सिंचाई विभाग कॉलोनी 4-जाखणी

ऊपरी

भाग/मेवाड़ मौहल्ला

5-बाजार लाइन

उत्तर-ग्राम सेमा/ पैन्यूला ग्राम की सीमा ।

दक्षिण-अलकनन्दा नदी एवं वार्ड नं० . 01 व वार्ड नं0. 03 की सीमा।

[भाग 1 58

उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

5

4

1

2

3

3 वार्ड नं0.03 नयी बस्ती कॉलोनी

पूरब- ग्राम घिल्डियाल गांव की सीमा / पैदल रास्ता ।

घिल्डियाल

ग्राम सभा

माण्डाकुटी

का क्षेत्र ।

पश्चिम-वार्ड नं0.04 की सीमा/रौली ।

गांव1 - नयी बस्ती के 2-जाखणी गांव सैण 3-बंगारी मौहल्ला 4-बाडा भीतर मौहल्ला 5- माण्डाकुटी सैण नयी बस्ती

उत्तर- बडियारगढ़ मोटर मार्ग । दक्षिण-अलकनन्दा नदी ।

का1-लो ०नि०वि० कॉलोनी

4

का2 पिछली बाजार लाइन कॉलोनी

की ग्राम जाखणी

आंशिक भाग

क्षेत्र ।

सीमा/ रौली । पश्चिम- ढुण्डप्रयाग पूरब- वार्ड नं0.03

वार्ड पिछली बाजार लाइन कॉलोनी नं0.04

3- दुण्डप्रयाग मन्दिर मौहल्ला

4-ग्राम जाखणी नीचे का भाग

गदेरा । उत्तर- बडियारगढ़ मोटर मार्ग/राष्ट्रीय राजमार्ग ।

5-वाल्मिीकी मौहल्ला मन्दिर दक्षिण-अलकनन्दा नदी।

आज्ञा से, नितिन सिंह भदौरिया, अपर सचिव ।

शहरी विकास अनुभाग-3

अनन्तिम अधिसूचना

19 जनवरी, 2024 ई0

संख्या 183821 / IV(3)/2024-11 (02 निर्वा०) /2022- उत्तराखण्ड की नगर पालिका परिषद, नरेन्द्रनगर, जिला-टिहरी गढ़वाल के वार्डों के परिसीमन के सम्बन्ध में अधिसूचना का निम्नलिखित प्रारूप जिसे श्री राज्यपाल उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश , 2007) की धारा -11 क एवं 11 ख में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके जारी करने का प्रस्ताव करते है, उक्त धारा की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार सम्बद्ध व्यक्तियों की सूचना के लिये आपत्तियां आमंत्रित करने के लिये एतद्वारा प्रकाशित किया जाता है ।

i 59 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

प्रस्तावित अधिसूचना के सम्बन्ध में आपत्तियां , यदि कोई हो, तो वह लिखित रूप में जिलाधिकारी, टिहरी गढ़वाल को प्रेषित की जायेगी । केवल उन्हीं आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा, जो इस अधिसूचना के प्रकाशन के दिनांक से 07 दिनों के भीतर प्राप्त होगी ।

प्रस्तावित अधिसूचना

उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश , 2007) की धारा -11 क एवं 11 ख की उपधारा (1 ) के अधीन शक्ति का प्रयोग करके श्री राज्यपाल संलग्न सूची में उल्लिखित नगर पालिका परिषद् ,नरेन्द्रनगर, जिला - टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के वार्डों के परिसीमन के सम्बन्ध में निम्नलिखित आदेश जारी करते है:-

(1) निर्वाचन के प्रयोजन के लिये उक्त नगर पालिका क्षेत्र को संलग्न अनुसूची में उल्लिखित वार्डों में विभाजित किया जायेगा ।

(2) प्रत्येक वार्ड का परिसीमन ऐसा होगा, जैसा संलग्न अनुसूची के स्तम्भ 1 से 6 में उल्लिखित किया गया है ।

आज्ञा से ,

नितिन सिंह भदौरिया, अपर सचिव ।

नगर पालिका परिषद, नरेन्द्र नगर जिला टिहरी गढ़वाल

कक्ष की सीमाएं

का

क्र०सं० कक्ष

कक्ष की जनसंख्या

कक्ष में सम्मिलित मौहल्लों का नाम

कक्ष संख्यानाम

6

3

5

4

1

2

1,030

1

01 किनवानी

पश्चिम में- ऋषिकेश

उत्तर में-डागर

दक्षिण में- ग्राम

बडकोट

पूर्व में ग्राम बडेडा सम्पूर्ण किनवानी बस्ती, कुम्हारखेडा बस्ती, राजकीय महाविद्यालय नरेन्द्रनगर, होटल महानन्दा, होटल वैस्टिन, पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय , कांडा गाँव का सम्पूर्ण क्षेत्र माँ कुंजापुरी माता का मन्दिर एवं मन्दिर परिसर के नीचे स्थित पार्किग एंव उसकी आसपास की दुकाने, बडेडा गाँव, हिण्डोला खाल मे सौराल्या देवता का मन्दिर एवं इसके आसपास की दुकाने, बगर धार में मण्डी 60

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

4

2

3

6

5

समिति, प्रस्तावित बस अड्डा, माउण्ट कॉर्मल किश्चन एकेडमी स्कूल, सिटी ऑफ रोमान्स होटल तक का भू-भाग ।

2 02 वन्दे मातरम 1,024 पूर्व में राजमहल

पश्चिम में बस

स्टैण्ड

उत्तर

कुम्हारखेड़ा

डी० जी०बी० आर० कैम्प एवं नरेन्द्र नगर मोटर मार्ग की डी०जी०बी०आर० कैंप से ओर आने वाले पैदल मार्ग में-के बायीं तरफ की सम्पूर्ण आवासीय बस्ती एंव हैंड पंप तक का क्षेत्र, पुराना मोटर

दक्षिण में- रीझ

हाउस

गैराज, कुँवर कोठी स्यारू खाला, राजमहल, होटल आनन्दा, डाक बंगला, धमांदा भवन, जल संस्थान का टैंक, मधुबन कॉलोनी, रेड क्रास, वन्दे मातरम, हीरा आटा चक्की, सिविल जज निवास, कोर्ट परिसर, नन्दा गेस्ट हाऊस , शिव मूर्ति, डंग निवास एन0एच0-94 से पाथौ नामक तोक में पर्वतीय बिल्ड टैक प्रा० लि० रिसोर्ट, अमाया होटल तक का भू-भाग ।

3 03

960

पूर्व

बाजार लाईन

में-रेग्मी भवन

रेग्मी भवन से सनव्यू होटल के समीप समस्त बस्ती, पोस्ट ऑफिस एंव उसके

पश्चिम में बाजार

लाईन

आस-पास की बस्ती , नन्दी बैल के निकट भण्डारी

उत्तर

में-भण्डारी

भवन

भवन, बाजार लाईन, पुराना कलक्ट्रेट भवन, एफ-01 ब्लाक, कोषागार, राजकीय

दक्षिण में-

बस

स्टैण्ड

बालिका इण्टर कॉलेज, कवि भवन, रीझ हाऊस, बी०एस ० एन ०एल ० एक्सचेंज तक का भू-भाग ।

61 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1]

6

3

2

4

1

5

950

04

4

सिविल लाईन

पूर्व

में-डी०जी०बी०आर०

कैम्प

पश्चिम चिकित्सालय उत्तर में- सुमन में-बेसिक स्कूल भवन दक्षिण में - बहुधन्दी भवन

सौंकारू खाला में राणा भवन, कैन्तुरा भवन, माणिक लाल का मकान, बारात घर, लो०नि०वि० के भवन, पंवार भवन, तहसील परिसर, आबकारी भवन, निरंकारी भवन, राधा- कृष्ण मन्दिर, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, क्षेत्राधिकारी पुलिस कार्यालय , नेगी भवन, सम्पूर्ण राजस्व कॉलोनी एंव उसके आस- पास का क्षेत्र, डंगवाल भवन, झण्डा मैदान का समस्त क्षेत्र ।

05

850

5

सुमन चिकित्सालय परिसर

पूर्व में बाजार लाईन पश्चिम में- सुमन चिकित्सालय उत्तर में वाल्मीकि बस्ती

दक्षिण में बस स्टैण्ड

उनियाल भवन, वाल्मीकि बस्ती, सुमन चिकित्सालय परिसर, ओल्ड पुलिस उपभोक्ता भण्डार, एवं उसके आस पास का क्षेत्र, पूर्व प्रतिसार निरीक्षक आवास , जिला क्षय रोग निवारण केन्द्र, ओल्ड जिलाधिकारी आवास , पावर हाउस, आटा चक्की (पुरानी), पैसेन्जर शैड, बस स्टैण्ड तक का भू- भाग ।

6

856

06 बखरियाणा

पूर्व में बाजार लाईन

पश्चिम

में- ग्राम

तलाई

उत्तर में वाल्मीकि

बस्ती

दक्षिण में- उनियाल

भवन

ओल्ड पुलिस मनोरंजन गृह, आशा किरण वृद्ध आश्रम, राजकीय इण्टर कॉलेज परिसर, जिला क्रिडा अधिकारी कार्यालय , पुराना राजस्व भवन, ओल्ड पुलिस लाईन (सैनिक क्षेत्र को छोड़कर), सम्पूर्ण बखरियाणा बस्ती , मंगल सिंह का मकान एवं उसके आस-पास के मकान तक का क्षेत्र ।

62

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14. 1945 शक सम्वत्)

[भाग 1

6

5

4

3

2

943

में-ओल्ड

पूर्व

07

7

क्र्लक क्वाटर

कलक्ट्रेट भवन

पश्चिम में-

बखरियाणा बस्ती

उत्तर में-सिविल

लाईन

दक्षिण में-

विद्युत सब- स्टेशन

बिजल्वाण भवन, उनियाल भवन, ओल्ड सुपरिटेण्डेंट क्वाटर, पंत निवास , धीमान भवन, क्लर्कस क्वाटर, चौहान भवन, जोशी भवन, बिलल्वाण भवन, कुँजापुरी होटल, पुलिस थाना परिसर, रेंज कार्यालय , नौटियाल भवन, प्लास्डा चौकी, पॉलिटेक्निक संस्थान, विद्युत सब- स्टेशन, पुरानी झील तक का क्षेत्र ।

आज्ञा से , नितिन सिंह भदौरिया, अपर सचिव ।

वन अनुभाग-2

अधिसूचना

18 जनवरी, 2024 ई०

संख्या120/X-2-2023-19 (04) /2014-T.C (E-28750) वन्य जीव (संरक्षण ) अधिनियम, 1972 (यथा- संशोधित 2002) (केन्द्रीय अधिनियम संख्या 53, सन् 1972) की धारा 6 के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड राज्य हेतु शासन की अधिसूचना संख्या-432 /X- 2-2015-19 (04)2014 टी0 सी0 , दिनांक 31.01.2015 द्वारा गठित राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड (State Wildlife Advisory Board ) में उक्त निर्गत अधिसूचना के क्रमांक -16 में दी गयी व्यवस्थानुसार निम्नलिखित सदस्यों को 02 वर्ष, के लिए राज्य सरकार द्वारा नामित किए जाने की श्री राज्यपाल, सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते है :-

अवधि

पद

क्र. सं.

राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड में सम्मिलित महानुभाव/अधिकारी

धारा 6(1 )(ग) में प्रदत्त शक्तियों के अधीन राज्य सरकार द्वारा नामित विधान सभा के तीन सदस्य

02 वर्ष

सदस्य

1 श्री दीवान सिंह बिष्ट मा० सदस्य , विधान सभा, विधान सभा क्षेत्र-रामनगर ।

02वर्ष

सदस्य

2 श्री सुरेश सिंह चौहान, मा० सदस्य, विधान सभा, विधान सभा क्षेत्र- गंगोत्री।

02वर्ष

सदस्य

3 श्री बंशीधर भगत, मा० सदस्य, विधान सभा, विधान सभा क्षेत्र-कालाढूंगी ।

63 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग १]

2- उपरोक्तानुसार गठित राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (यथा- संशोधित 2002 ) (अधिनियम संख्या 53 , सन् 1972) की धारा 7 में उल्लिखित प्राविधानानुसार होगी ।

3- प्रश्नगत राज्य वन्य जीव बोर्ड के कर्तव्य वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (यथा- संशोधित 2002 ) (अधिनियम संख्या 53, सन् 1972 ) की धारा 8 के अनुसार होंगे ।

आज्ञा से, सत्यप्रकाश सिंह, उप सचिव ।

पी० एस०यू० (आर० ई० ) 05 हिन्दी गजट / 63 -भाग 1-2024 (कम्प्यूटर /रीजियो) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30 / 2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 - क

नियम, कार्य-विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

UTTARAKHAND STATE LEGAL SERVICES AUTHORITY

HIGH COURT CAMPUS , NAINITAL

NOTIFICATION

September 06, 2023

No. 1210/ III -A - 6 / 09/SLSA-- Sri Abhay Singh , Secretary, District Legal Services Authority, Haridwar is hereby sanctioned paternity leave for a period of 15 days w.e.f. 17.07.2023 to 31.07.2023 with permission to prefix of 16.07.2023 as Sunday holiday in light of G.O. No. 819 /XXVII ( 7 ) 34 / 2010-11 , dated31.12.2013 issued by the Government of Uttarakhand.

ByOrder ofHon'ble Executive Chairman ,

Sd/-

SAYED GUFRAN , Officer on Special Duty.

NOTIFICATION

September 13 , 2023

No. 1229 / III -A - 07/ 2023 /SLSA--Ms . Beenu Gulyani , Secretary, District Legal Services Authority, Nainital is hereby sanctioned:

1.

Earned Leave for 27 days w.e.f. 31.07.2023 to 26.08.2023 with permission of prefix of29.07.2023 and 30.07.2023 as Moharram and Sunday holidays respectively.

2.

Further Earned Leave for 07 day w.e.f. 27.08.2023 to 02.09.2023 with permission ofsuffix 03.09.2023 as Sunday Holiday.

41-ख 42

[भाग 1-क उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

NOTIFICATION

October10th,2023

No. 1361 /1-2-/2023 / SLSA -- Shri Sahdev Singh , Member Secretary, Uttarakhand State Legal Services Authority, Nainital is hereby sanctioned:

1. Medical Leave for 110 days w.e.f. 07th June , 2023 to 24th September, 2023 .

2. Earned Leave for 15 days w.e.f. 25th September, 2023 to 09th October, 2023 .

NOTIFICATION

December 06, 2023

No. 1582/ III - A- 02 /2023 /SLSA -- Shri Jayendra Singh , Secretary, District Legal ServicesAuthority, Bageshwar is hereby sanctioned earned leave for a period of 13 days w.e.f. 20.11.2023 to 02.12.2023 with prefix of 19.11.2023 as Sunday holiday and suffix of 03.12.2023 as Sunday holiday.

NOTIFICATION

December 12, 2023

No. 1613 / III (4) -B -2009-10/2023/ SLSA-- Shri Brijendra Singh , Chairman , Permanent Lok Adalat, Udham Singh Nagar is hereby sanctioned earned leave for a period of 22 days w.e.f. 14.11.2023 to 05.12.2023 with prefix of 11th, 12th and 13th of November, 2023 as second Saturday, Sunday and Goverdhan Pujaholidays respectively,

NOTIFICATION

January 18, 2024

No. 84 / III - A- 06/ 2024 / SLSA--Shri Abhay Singh , Secretary, District Legal Services Authority, Haridwar is hereby sanctioned earned leave for a period of 10 days w.e.f. 11.12.2023 to 20.12.2023 with permission to prefix of 10.12.2023 as Sunday holiday.

ByOrder of the Hon'ble Executive Chairman ,

Sd/-

SAYED GUFRAN , Officer on Special Duty.

43 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1-क

उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग

अधिसूचना

01 जनवरी , 2024 ई0

उविनिआ, (उपभोक्ताओं की शिकायत निवारण हेतु सदस्यों की नियुक्ति तथा मंच द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया सम्बन्धी मार्ग- दर्शिका) (तृतीय संशोधन) विनियम 2024

सं० UERC/F-9 (30) (iii )/RG/UERC/2023-24/1025: विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 181 की उपधारा 2 (आर) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उक्त अधिनियम की धारा 42 की उपधारा (5) के साथ पठित, तथा इस निमित्त सभी शक्तियों से सक्षम होकर, तथा पूर्व प्रकाशन के उपरान्त उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग एतद्वारा ' उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग (सदस्यों की नियुक्ति तथा उपभोक्त्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिए फोरम द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के लिए दिशा-निर्देश ) विनियम, 2019' (मूल विनियम) एवं संशोधनों में एतद्वारा निम्नलिखित संशोधन करता है, यथाः-

1 संक्षिप्त नाम, उपयुक्तता, प्रारम्भ व निर्वचन

(1) इन विनियमों का नाम उत्तराखण्ड विद्युत नियामक आयोग (उपभोक्ताओं की शिकायत निवारण हेतु सदस्यों की नियुक्ति तथा मंच द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया संबंधी दिशा- निर्देश ) (तृतीय संशोधन) विनियम, 2024 होगा ।

(2) ये विनियम पूरे उत्तराखण्ड राज्य पर लागू होंगे ।

(3) ये विनियम उत्तराखण्ड के क्षेत्र में वितरण अनुज्ञप्तिधारी (यो) पर उनके सम्बन्धित अनुज्ञप्ति क्षेत्र में लागू होंगे ।

(4) ये विनियम सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे ।

(5) ऐसे शब्दों व वाक्यांश का, जो इन विनियमों में प्रयुक्त तो हुए हैं, पर उनको यहाँ परिभाषित नहीं किया गया है, परन्तु विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) में उनकी व्याख्या की गई है, तो यहाँ भी उन शब्दों व वाक्यांशों का वही अर्थ माना जाएगा ।

(यह विनियम सरकारी गजट में प्रकाशित अंग्रेजी विनियम का हिन्दी रूपान्तरण है, किसी भी तरह के निर्वचन अथवा विवाद (व्याख्या) के लिए अंग्रेजी विनियम अन्तिम एवं मान्य होगा ।) 44

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत)

[भाग 1 -क

2 मुख्य विनियम 2.2 के उप नियम (2) एवं इसके पश्चात् के संशोधनों को निम्नानुसार पढ़ा जायेगाः

"तकनीकी सदस्य किसी वितरण अनुज्ञप्तिधारी कम्पनी का सेवा निवृत्त अधिकारी होगा, जो अधीक्षण अभियन्ता से नीचे के पद का न हो व इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स/ कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का डिग्रीधारी हो तथा जिसके पास डिस्ट्रीब्यूसन यूटीलीटी में काम करने का कम से कम 15 वर्ष का समग्र अनुभव हो, अथवा इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल/ इलेक्ट्रॉनिक्स/कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का डिग्रीधारी हो और ऊर्जा क्षेत्र में कार्य का कम से कम 20 वर्ष का समग्र अनुभव हो,

परन्तुक वितरण अनुज्ञप्तिधारी के अधीन कार्यरत ऐसा अधिकारी जो अधीक्षण अभियन्ता के पद से नीचे का न हो तथा उस क्षेत्र में कार्यरत हो, जो उस फोरम के अन्तर्गत आता है, जिसके लिए सदस्य की आवश्यकता है, कोपूर्णकालिक तकनीकी सदस्य की नियुक्ति तक कार्य प्रभार दिया जा सकता है ।"

3 मुख्य विनियम 2.4 के उप नियम (4) एवं इसके पश्चात् के संशोधनों को निम्नानुसार पढ़ा जायेगाः

"न्यायिक व उपभोक्ता सदस्य पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाएँगे, तथा न्यायिक सदस्य फोरम के प्रशासनिक प्रमुख होंगे, बशर्ते, वह एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश/अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हो, अन्यथा वितरण अनुज्ञापी द्वारा आयोग के अनुमोदन के पश्चात् तीनों सदस्यों मेंसेकिसी एक सदस्य को वरियता और उपयुक्ता के आधार पर अध्यक्ष के रूप में नामित किया जायेगा ।"

4 मुख्य विनियम 2.5 के उप नियम (3) एवं इसके पश्चात् के संशोधनों को निम्नानुसार पढ़ा जायेगाः

"कोई भी सदस्य वितरण अनुज्ञापी को कम से कम 03 माह का नोटिस दे कर अपना पद त्याग सकता है जिसकी सूचना अनुज्ञप्तिधारी द्वारा आयोग को दी जायेगी। यदि आयोग किसी फोरम के किसी सदस्य/सभी सदस्योंके कार्य से संतुष्ट नहीं है, और उसकी धारणा है कि यह निष्कासन उपभोक्ताओं के हित के लिए तथा उनकी शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए आवश्यक है, तो आयोग ऐसे सदस्य/सदस्यों को एक माह का लिखित नोटिस अथवा नोटिस अवधि हेतु 01 माह का वेतन दे कर वितरण अनुज्ञप्तिधारी को फोरम के उस सदस्य/उन सदस्यों को हटाने के लिए निर्देश दे सकता है।

आयोग के आदेश से , नीरज सती, सचिव ।

45 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 -क]

निदेशालय पंचायतीराज , उत्तराखण्ड

24 जनवरी, 2024 ई०

संख्या 919/933 / जि०पं०अ०को०/2022-23-

जिला पंचायत चमोली द्वारा उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (अधिनियम सं0-11 , वर्ष 2016) के भाग-4 की धारा 106 के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत , चमोली के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक उपविधि-2023 को प्रस्ताव संख्या-02 दिनांक 30.05.2023 द्वारा जनपद चमोली के ग्रामीण क्षेत्रान्तर्गत प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक उपविधि-2022 निर्मित की गई है ।

कार्यालय जिला पंचायत, चमोली

प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक (Single Use Plastic) उपविधि 2023

04 अगस्त, 2023 ई ०

पत्रांक संख्या 1173/नौ- एक /उपविधि एकल-सिंग०- प्ला०-

जिला पंचायत चमोली ठोस प्रबन्धन नीति 2017एवं तद्क्रम में उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश सं0-182दिनांक 24/10/2017 एवं मा० उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड द्वारा जनहित याचिका संख्या 93/2022 श्री जितेन्द्र यादव बनाम भारत संघ व अन्य में पारित आदेशों के पालन में जनपद चमोली के. ग्रामीण क्षेत्रान्तर्गत एकल उपयोग प्लास्टिक (Single Use Plastic) के प्रयोग को प्रतिबंधित करने हेतु आम जनसाधारण के अवलोकनार्थ एवं तद्‌नुसार उक्त विज्ञप्ति प्रकाशित होने के 01 माह की अवधि अन्तर्गत किसी भी प्रकार की आपत्ति अथवा सुझावों हेतु निम्नवत् उपविधि प्रकाशित की जा रही है, निर्धारित अवधि अन्तर्गत प्राप्त शिकायतों/ सुझावों पर विचार करते हुए उक्त उपविधि निर्धारित प्रक्रिया अन्तर्गत राजकीय गजट में लागू करने हेतु प्रेषित कर दी जायेगी ।

उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 106 में जिला पंचायतों के प्रयोजन के लिये ऐसे विषय के सम्बन्ध में जिनका उपविधियों द्वारा शासित होना इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित है जो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा सुविधान्मुखी अनुरक्षण के प्रयोजन हेतु एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित करने हेतु जनपद चमोली के ग्रामीण क्षेत्रों हेतु उपविधियों का निर्माण किया जाता है, उक्त उपविधि में शासनादेश संख्या- 182/XXI (1) -2017-70 (08) 2017 रिट दिनांक 24/10/2017 द्वारा उत्तराखण्ड की पंचायतों हेतु ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन नीति 2017 प्रख्यापित की गयी है । इसके प्राविधानों एवं रिट याचिका संख्या 93/2022 (पी०आई०एल ०) जितेन्द्र यादव बनाम भारत संघ एवं अन्य में मा० न्यायालय द्वारा पारित आदेशों व दिनांक 08/09/2022 को मा० मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड नैनीताल द्वारा निर्गत आदेशों के अनुपालनार्थ यह उपविधि निर्मित की जाती है । यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित होने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवृर्त होगी । जो कि एकल उपयोग प्लास्टिक उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित होने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवृर्त होगी । जो कि एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबन्धित उपविधि-2023 कहलायेगी, जिसके मुख्य मुख्य प्रतिबन्ध/शर्ते/ प्राविधान निम्नवत्लागू होंगे-

1. कोई भी स्वयं या किसी और के माध्यम से जानबूझकर या अनजाने में निम्नलिखित प्लास्टिक/थमॉकोल/स्टायरोफोम सामान के क्रय विक्रय, उत्पादन, आयात, भण्डारण ले जाना उपयोग व आपूर्ति जनपद चमोली के ग्रामीण सीमान्तर्गत नहीं करेगा ।

(क).किसी भी आकार, मोटाई माप व रंग के प्लास्टिक कैरी बैग (हैंडल के साथ अथवा बिना हँडल के) और नॉन वोवन पॉली प्रोपाईलिन बैग परन्तु बायो कम्पोस्टेबल प्लास्टिक बैंग एवं 75 (उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जाने वाले परिवर्तन के अनुसारं परिवर्तनीय) माईक्रो से अधिक मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग जो जैव चिकित्सा अपशिष्ट व ठोस अपशिष्ट और खतरनाक अपशिष्ट परिवहन में उपयोग किये जाते हैं , पर उपरोक्त प्रतिबन्ध लागू नहीं होगा ।

46

[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

(ख). थर्मोकोल (पॉलीस्टायरीन) पॉलीयुरेथेन, स्टायोफोम और इसी तरह के बने एकल उपयोग के लिये डिस्पोजेबल कटलरी या प्लास्टिक जैसे प्लेटे, कटोरें, कप, गिलास , कांठे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, स्ट्रिर (1 जुलाई 2022 से मिठाई के डिब्बों के इर्द- गिर्द लपेटने या पैक करने वाली फिल्में, निमन्त्रण कार्ड और सिगरेट पैकिट 100 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पी ०वी० सी० बैनर, प्लास्टिक स्टिक युक्त ईयर बड्स, गुब्बारें के लिये प्लास्टिक की झंडिया, प्लास्टिक के झण्डे, कॅण्डी स्टिक आइसक्रीम की डंडिया, पॉलीस्टायरीन (थर्मोकोल ) की सजावटी सामग्री आदि चाहे वह किसी भी आकार व प्रकार की हों ।

(ग). एकल उपयोग खाद्य पदार्थ के पैकेजिंग कन्टेनर चाहे किसी भी आकार, माप प्रकार व रंग के हो जो पुनः चक्रित प्लास्टिक से बने हो व जो खाद्य/ तरल पदार्थ को ढक कर ले जाने व भण्डारित करने में उपयोग होता है ।

2- उक्त उपनियम कम्पोस्ट योग्य प्लास्टिक से बनी वस्तुयें में लागू नहीं होगे ।

नोट- कम्पोस्ट प्लास्टिक भारतीय मानक जो तत्समय लागू हो की पुष्टि करेगा, बायो कम्पोस्टेबल प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माता या विक्रेता विपणन या विक्रय से पहले केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड/ राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (जो भी लागू हो) से प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत करना आवश्यक होगा ।

(क) कोई भी व्यक्ति जानते हुये या अन्यथा की दशा में सार्वजनिक स्थल में किसी भी प्रकार के

प्लास्टिक को जो इन उपनियमों में प्रतिबंधित प्लास्टिक हो- को नही फेंकेगा तथा उसका प्रयोग भी नहीं करेगा । 3-हाट बाजार संचालन समस्त व्यवासायियों, धार्मिक स्थलों व संस्थानों, सिनेमा घरों, मॉल , रेस्तरां, कैफे, मोबाइल, फूड काउन्टर कैटर्स और अन्य स्थानों जैसे बारात घर, पार्टी हॉल कार्यालय, संस्थान, फैक्ट्री स्वामी और प्राधिकरण उक्त उपनियमों का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु उत्तरदायी होंगे , इसके साथ उनके द्वारा प्लास्टिक जनित अपशिष्ट के एकत्रीकरण हेतु उनके परिसर में स्थान उपलब्ध कराया जायेगा व प्लास्टिक का एकत्रीकरण के पश्चात उसको जिला पंचायत अथवा अधिकृत ठेकेदार अपने परिवहन द्वारा या नियत निस्तारण स्थल पर पृथक्कीकरण कम्प्रेश करने के उपरान्त पुनर्चक्रण हेतु भेजेगा ।

4- बोतल बन्द पानी की शीतल पेय हेतु पॉली इथायलीन टरेथलेट (पी०ई०टी० /पी०ई ०टी० ई०) बोतलों के उत्पादनकर्ता विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व के तहत परस्पर सहमत नियमों और शर्तों के अन्तर्गत एक ही खुदरा बिकी नेटवर्क के माध्यम से क्रमशः पॉलीथीन टरेप्थलेट की बोतलों और प्लास्टिक अपशिष्टों को वापस लेंगे अथवा उनके उत्पाद द्वारा जनित प्लास्टिक अपशिष्ट के एकत्रण परिवहन व सुरक्षित निस्तारण हेतु जिला पंचायत चमोली द्वारा किये गए खर्चों का भुगतान उनके द्वारा अनिवार्य रुप से किया जायेगा ।

5- ऐसी सभी उत्पादन इकाइयां जो बिन्दु संख्या 1 (ख) में निर्दिष्ट उत्पाद बना रही है, उन्हें इन उपनियमों के लागू होने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्रों मे उत्पादन बन्द करना होगा ।

6- गैर बुना हुआ प्लास्टिक बैग 60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर (जी०एस०एम०) से कम नहीं होगा ।

7- 75 माइकोन (उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जाने वाले परिवर्तन के अनुसार परिवर्तनीय ) माइको से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग व अन्य प्लास्टिक पर उपरोक्त प्रतिबन्ध लागू होगा । ग्रामीण क्षेत्र के समस्त व्यवसायी, फैक्टी स्वामी, प्रतिष्ठान, सस्थागत इकाईयों, घरों से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक अपशिष्टों को पृथक-पृथक रुप से एकत्रित करने की जिम्मेदारी स्वयं समस्त व्यवसायियों, फैक्ट्री स्वामियों, प्रतिष्ठानों, संस्थागत इकाईयों व घरों के उत्पादनकर्ताओं की होगी, ताकि प्लास्टिक अपशिष्टों को निस्तारण हेतु सुगमता से परिवहन किया जा सके । 8-उपरोक्त उपविधियों का उल्लंघन करने की दशा में निम्नानुसार जुर्माना आरोपित किया जायेगाः-

उल्लंघनकर्ता

जुर्माने की धनराशि (रूपये में)

उत्पादनकर्ता

रू0 5,00,000/- (पांच लाख)

रू0 2,00,000/- (दो लाख)

परिवहनकर्ता

रू0 1,00,000/- (एक लाख)

खुदरा विक्रेता

रू0 100/- (एक सौ रूपये)

व्यक्तिगत उपयोग कर्ता

रू0 5000/- अथवा रू0 500 /- प्रति पॉलीथीन व्यवसायियों द्वारा उपयोग लाये जाने पर

यदि पुनः उल्लंघन करना पाया जाता है तो सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता पर उपरोक्त दरों के अनुसार दोगुना जुर्माना आरोपित किया जायेगा ।

47 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 -क]

9- जिला पंचायत चमोली की ओर से अपर मुख्य अधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित / अधिकृत किये जाने वाले जिला पंचायत के अधिकारी/ कार्मिक यथा कार्य अधिकारी, अभियन्ता, कर अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, कनिष्ठ अभियन्ता, समस्त प्रधान सहायक, समस्त वरिष्ठ/ कनिष्ठ सहायक, समस्त कर निरीक्षक/ कर समाहर्ता उपरोक्त उपविधि/ उपनियमों/ निर्देशों के कार्यान्वयन/ जुर्माना आरोपित करने हेतु अधिकृत होंगे ।

10- उपरोक्तानुसार अधिकृत अधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा एकत्र किये जाने वाले जुर्माने की धनराशि जिला पंचायत में एक अलग खाते में जमा करायी जायेगी ।

11- जिला पंचायत के अधिकृत अधिकारियों / कर्मचारियों के पास यदि उल्लंघन कर्ता द्वारा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं की जाती है तो उस जुमाने की धनराशि वसूलने हेतु उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 180 के अन्तर्गत मांग- बिल प्रस्तुत किये जायेंगे, उक्त के उपरान्त भी यदि 15 दिवस की अवधि अन्तर्गत उल्लंघनकर्ता द्वारा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं की जाती है तो उसके विरूद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित कर दी जायेगी ।

12- जिला पंचायत चमोली द्वारा निर्मित उक्त उपविधियों के उल्लंघन किये जाने पर सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता के विरूद्ध जिला पंचायत अधिनियम की धारा 182 के अन्तर्गत न्यायिक क्षेत्र चमोली में वाद दायर करते हुए जुर्माने की धनराशि मालगुजारी के बकाये के रूप में वसूल की जायेगी । जिसके समस्त खर्चे हर्जाने को उत्तरदायित्व उल्लंघनकर्ता का होगा ।

!! शास्ति/ दण्ड !!

उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 106 एवं 149 में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत चमोली यह आदेश देती है कि उपरोक्त उपविधि में किसी भी एक उपनियम/ उपविधि का उल्लंघन करने पर ऐसे उल्लंघनकर्ता के विरूद्ध मा० न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर जुर्माने के अतिरिक्त रू0 1000/- तक का अर्थदण्ड आरोपित किया जा सकता है एवं यदि ऐसे उल्लंघन जारी रहता है तो प्रथम दोष सिद्ध होने के पश्चात ऐसे प्रत्येक दिन के लिये जिसमें उल्लंघन जारी हो रु0-100/- प्रतिदिन की दर से जुर्माना किया जा सकता है, और जुर्माना अदा न करने पर 03 माह का साधारण कारावास अथवा जैसा मा० न्यायालय द्वारा विहित किया जाय दण्डनीय होगा । उक्त क्रम में न्यायिक क्षेत्र जनपद चमोली होगा ।

रजनी भण्डारी , राजेन्द्र सिंह कठैत ,

अध्यक्ष, अपर मुख्य अधिकारी,

जिला पंचायत चमोली ।

जिला पंचायत चमोली ।

निधि यादव , निदेशक ।

निदेशालय पंचायतीराज, उत्तराखण्ड

24 जनवरी, 2024 ई०

संख्या 920/933 / जि० पं०अ०को०/2022-23-

जिला पंचायत रूद्रप्रयाग द्वारा उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 (अधिनियम सं0-11 , वर्ष 2016) के भाग-4 की धारा 106 के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक उपविधि-2023 को प्रस्ताव संख्या-34 दिनांक 13.02.2023 द्वारा जनपद रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रान्तर्गत प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक उपविधि-2023 निर्मित की गई है ।

48

[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

कार्यालय जिला पंचायत, रूद्रप्रयाग

प्रतिबन्धित एकल उपयोग प्लास्टिक (Single Use Plastic) उपविधि 2023

पत्रांक /बारह-कर/सिं०यू० प्ला० उपविधि /2022-23-

जिला पंचायत रूद्रप्रयाग ठोस प्रबन्धन नीति 2017 एवं तद्क्रम में उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश सं0-182 दि0-24/10 / 2017 एवं मा० उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड द्वारा जनहित याचिका संख्या 93/2022 श्री जितेन्द्र यादव बनाम भारत संघ व अन्य में पारित आदेशों के पालन में जनपद रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रान्तर्गत एकल उपयोग प्लास्टिक ( single use plastic) के प्रयोग को प्रतिबंधित करने हेतु आम-जनसाधारण के अवलोकनार्थ एवं तद्नुसार उक्त विज्ञप्ति प्रकशित होने के 01 माह की अवधि अन्तर्गत किसी भी प्रकार की आपत्ति अथवा सुझावों हेतु निम्नवत् उपविधि प्रकाशित की जा रही है , निर्धारित अवधि अन्तर्गत प्राप्त शिकायतों / सुझावों पर विचार करते हुए उक्त उपविधि निर्धारित प्रक्रिया अन्तर्गत राजकीय गजट में लागू करने हेतु प्रेषित कर दी जायेगी ।

उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 106 में जिला पंचायतों के प्रयोजन के लिये ऐसे विषय के सम्बन्ध में जिनका उपविधियों द्वारा शासित होना इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित है जो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा सुविधान्मुखी अनुरक्षण के प्रयोजन हेतु एकल उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित करने हेतु जनपद रूद्रप्रयाग के ग्रामीण क्षेत्रों हेतु उपविधियों का निर्माण किया जाता है, उक्त उपविधि में शासनादेश संख्या-182 / XXI ( 1 ) -2017-70 ( 08) 2017 रिट दिनांक 24/10/2017 द्वारा उत्तराखण्ड की पंचायतों हेतु ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नीति 2017 प्रख्यापित की गयी है । इसके प्राविधानों एवं रिट याचिका संख्या-93 / 2022 (पी०आई०एल) जितेन्द्र यादव बनाम भारत संघ एवं अन्य में मा० न्यायालय द्वारा पारित आदेशों व दिनांक-08 /09/ 2022 को मा० मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड नैनीताल द्वारा निर्गत आदेशों के अनुपालनार्थ यह उपविधि निर्मित की जाती है । यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित होने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवृर्त होगी । जो कि एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबन्धित उपविधि-2023 कहलायेगी, जिसके मुख्य मुख्य प्रतिबन्ध / शर्तें / प्राविधान निम्नवत् लागू होंगे:-

1. कोई भी स्वयं या किसी और के माध्यम से जानबूझकर या अनजाने में निम्नलिखित प्लास्टिक /थर्मोकोल/ स्टायरोफोम सामान के क्रय, विक्रय , उत्पादन , आयात, भण्डारण ले जाना उपयोग व आपूर्ति जनपद रूद्रप्रयाग के ग्रामीण सीमान्तर्गत नहीं करेगा ।

क- किसी भी आकार, मोटाई माप व रंग के प्लास्टिक कैरी बैग (हैंडल के साथ अथवा बिना हैंडल के) और नॉन वोवन पॉली प्रोपाईलिन बैग परन्तु बायो कम्पोस्टेबल प्लास्टिक बैग एवं 75 (उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जाने वाले परिवर्तन के अनुसार परिवर्तनीय) माईक्रो से अधिक मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग जो जैव चिकित्सा अपशिष्ट व ठोस अपशिष्ट और खतरनाक अपशिष्ट परिवहन में उपयोग किये जाते हैं, पर उपरोक्त प्रतिबन्ध लागू नहीं होगा ।

ख- थर्मोकोल(पॉलीस्टायरीन) पॉलीयुरेथेन, स्टायोफोम और इसी तरह के बने एकल उपयोग के लिये डिस्पोजेबल कटलरी या प्लास्टिक जैसे प्लेटें, कटोरे, कप, गिलास, कांटे, चम्मच , चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे, स्ट्रिर(1 जुलाई 2022 से मिठाई के डिब्बों के इर्द- गिर्द लपेटने या पैक करने वाली फिल्में, निमन्त्रण कार्ड और सिगरेट पैकिट 100 माइक्रॉन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पी०वी० सी० बैनर, प्लास्टिक स्टिक युक्त ईयर बेड्स , गुब्बारे के लिये प्लास्टिक की झंडिया, प्लास्टिक के झण्डे, कैण्डी स्टिक आइसक्रीम की डंडियां, पॉलीस्टायरीन (थर्मोकोल ) की सजावटी सामाग्री आदि चाहे वह किसी भी आकार व प्रकार की हों ।

ग- एकल उपयोग खाद्य पदार्थ के पैकेजिंग कन्टेनर चाहे किसी भी आकार, माप प्रकार व रंग के हो जो पुनः चक्रित प्लास्टिक से बने हो व जो खाद्य / तरल पदार्थ को ढक कर ले जाने व भण्डारित करने में उपयोग होता हो ।

2. उक्त उपनियम कम्पोस्ट योग्य प्लास्टिक से बनी वस्तुयें में लागू नहीं होंगे ।

नोट- कम्पोस्ट प्लास्टिक भारतीय मानक जो तत्समय लागू हो की पुष्टि करेगा, बायो कम्पोस्टेबल प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माता या विक्रेता विपणन या विक्रय से पहले केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड/ राज्य प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड (जो भी लागू हो) से प्रमाण पत्र प्राप्त कर प्रस्तुत करना आवश्यक होगा ।

49 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1-क]

कु-कोई भी व्यक्ति जानते हुये या अन्यथा की दशा में सार्वजनिक स्थल में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक को २. जो इन उपनियमों में प्रतिबंधित प्लास्टिक हो- को नही फेंकेगा तथा उसका प्रयोग भी नहीं करेगा ।

3. हाट बाजार संचालक समस्त व्यवासायियों, धार्मिक स्थलों व संस्थानों, सिनेमा घरों, मॉल, रेस्तरां, कैफे, मोबाइल, फूड काउन्टर कैटर्स और अन्य स्थानों जैसे बारात घर, पार्टी हॉल कार्यालय , संस्थान, फैक्ट्री स्वामी और प्राधिकरण उक्त उपनियमों का कडाई से अनुपालन करने हेतु उत्तरदायी होंगे, इसके साथ ही साथ उनके द्वारा प्लास्टिक जनित अपशिष्ट के एकत्रीकरण हेतु उनके परिसर में स्थान उपलब्ध कराया जायेगा व प्लास्टिक का एकत्रीकरण किया जायेगा व प्लास्टिक के एकत्रीकरण के पश्चात उसको जिला पंचायत अथवा अधिकृत ठेकेदार अपने परिवहन द्वारा या नियत निस्तारण स्थल पर पृथक्कीकरण कम्प्रेश करने के उपरान्त पुनर्चक्रण हेतु भेजेगा ।

4. बोतल बन्द पानी की शीतल पेय हेतु पॉली इथायलीन टरेथलेट(पी०ई ०टी०/ पी ०ई०टी०ई०) बोतलों के उत्पादनकर्ता विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व के तहत परस्पर सहमत नियमों और शर्तों के अन्तर्गत एक ही खुदरा बिक्री नेटवर्क के माध्यम से क्रमशः पॉलीथीन टरेप्थलेट की बोतलों और प्लास्टिक अपशिष्टों को वापस लेंगे. अथवा उनके उत्पाद द्वारा जनित प्लास्टिक अपशिष्ट के एकत्रण परिवहन व सुरक्षित निस्तारण हेतु जिला पंचायत रुद्रप्रयाग द्वारा किये गये खर्चों का भुगतान उनके द्वारा अनिवार्य रूप से किया जायेगा।

5. ऐसी सभी उत्पादन इकाईयां जो बिन्दु संख्या 1 (ख) में निर्दिष्ट उत्पाद बना रही हैं, उन्हें इन उपनियमों के लागू होने के उपरान्त ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन बन्द करना होगा ।

6. गैर बुना हुआ प्लास्टिक बैग 60 ग्राम प्रति वर्ग मीटर (जी० एस ०एम०) से कम नहीं होगा ।.

7. 75 माइक्रोन (उत्त्तराखण्ड सरकार द्वारा किये जाने वाले परिवर्तन के अनुसार परिवर्तनीय) माइक्रो से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग व अन्य प्लास्टिक पर उपरोक्त प्रतिबन्ध लागू होगा । ग्रामीण क्षेत्र के समस्त व्यवसायी, फैक्ट्री स्वामी, प्रतिष्ठान , संस्थागत इकाईयां, घरों से उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक अपशिष्टों को पृथक् पृथक् रूप से एकत्रित करने की जिम्मेदारी स्वयं समस्त व्यवसायियों, फैक्ट्री स्वामियों, प्रतिष्ठानों , संस्थागत इकाईयों व घरों के उत्पादनकर्ताओं की होगी, ताकि प्लास्टिक अपशिष्टों को निस्तारण हेतु सुगमता से परिवहन किया जा सके ।

8. उपरोक्त उपविधियों का उल्लंघन करने की दशा में निम्नानुसार जुर्माना आरोपित किया जायेगाः- उल्लंघनकर्ता

जुर्माने की धनराशि(रूपये में)

उत्पादनकर्ता

रु0 5,00,000 /-(पांच लाख)

परिवहनकर्ता

रू0 2,00,000 /-(दो लाख)

रु० 1,00,000/-(एक लाख)

खुदरा विक्रेता /विक्रेता

व्यक्तिगत उपयोग कर्ता

रू0 100/-(एक सौ रूपये)

व्यवसायियों द्वारा उपयोग लाये जाने पर

रु ० 5000 /- अथवा रू0 500/ - प्रति पॉलीथीन

यदि पुनः उल्लंघन करना पाया जाता है तो सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता पर उपरोक्त दरों के अनुसार दोगुना जुर्माना आरोपित किया जायेगा ।

9. जिला पंचायत रूद्रप्रयाग की ओर से अपर मुख्य अधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित/ अधिकृत किये जाने वाले जिला पंचायत के अधिकारी / कार्मिक यथा कार्य अधिकारी , अभियन्ता, कर अधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी , कनिष्ठ अभियन्ता, समस्त प्रधान सहायक, समस्त वरिष्ठ/कनिष्ठ सहायक, समस्त कर निरीक्षक / कर समाहर्ता उपरोक्त उपविधि/ उपनियमों/निर्देशों के कार्यात्त्वयन/जुर्माना आरोपित करने हेतु अधिकृत होंगे ।

10. उपरोक्तानुसार अधिकृत अधिकारियों/ कर्मचारियों द्वारा एकत्र किये जाने वाले जुर्माने की धनराशि जिला पंचायत में एक अलग खाते में जमा करायी जायेगी ।

11. जिला पंचायत के अधिकृत अधिकारियों / कर्मचारियों के पास यदि उल्लंघन कर्ता द्वारा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं की जाती है तो उस जुर्माने की धनराशि वसूलने हेतु उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 180 के अन्तर्गत मांग बिल प्रस्तुत किये जायेंगे , उक्त के उपरान्त भी यदि 15 दिवस की अवधि अन्तर्गत उल्लंघनकर्ता द्वारा जुर्माने की धनराशि जमा नहीं की जाती है तो उसके विरूद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित कर दी जायेगी ।

50

[भाग 1-क उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी, 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

12. जिला पंचायत रुद्रप्रयाग द्वारा निर्मित उक्त उपविधियों के उल्लंघन किये जाने पर सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता केविरूद्ध जिला पंचाग्न अधिनियम की धारा 182 के अन्तर्गत न्यायिक क्षेत्र रूद्रप्रयाग में वाद दायर करते हुए जुर्माने की धनराशि मालगुजारी के बकाये के रूप में बसूल की जायेगी । जिसके समस्त खर्चे हर्जाने का उत्तरदायित्व उल्लंघनकर्ता का होगा ।

।। शास्ति/ दण्ड।।

उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 106 एवं 149 में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत रूद्रप्रयाग यह आदेश देती है कि उपरोक्त उपविधि में किसी भी एक उपनियम/ उपविधि का उल्लंघन करने पर ऐसे उल्लंघनकर्ता के विरूद्ध मा० न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर जुर्माने के अतिरिक्त रू0-1000 /- तक का अर्थदण्ड आरोपित किया जा सकता है एवं यदि ऐसे उल्लंघन जारी रहता है तो प्रथम दोष सिद्ध होने के पश्चात ऐसे प्रत्येक दिन के लिये जिसमें उल्लंघन जारी हो रू0-100 /- प्रतिदिन की दर से जुर्माना किया जा सकता है, और जुर्माना अदा न करने पर 03 माह का साधारण कारावास अथवा जैसा मा० न्यायालय द्वारा विहित किया जाय दण्डनीय होगा । उक्त क्रम में न्यायिक क्षेत्र जनपद रूद्रप्रयाग होगा ।

अमरदेई शाह,

आनन्द स्वरुप ,

सोहन सिंह कठैत,

अध्यक्ष,

निदेशक,

प्र ० अपर मुख्य अधिकारी,

जिला पंचायत रूद्रप्रयाग ।

जिला पंचायत रुद्रप्रयाग ।

पंचायतीराज उत्तराखण्ड देहरादून ।

निधि यादव, निदेशक ।

कार्यालय सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी , बागेश्वर

अधिसूचना

02 फरवरी , 2024 ई०

पत्र संख्या 58933 / प्रवर्तन/ गतिसीमा/ 2023-24-

केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-112 की उपधारा (2) में प्राविधानित है कि यदि राज्य सरकार का या ऐसे किसी प्राधिकारी का जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत हो, समाधान हो जाता है कि सार्वजनिक सुरक्षा या सुविधा की दृष्टि से या किसी सड़क या पुल के स्वरूप के कारण यह आवश्यक है कि मोटरयानों की गति परिसीमित की जाए तो वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और धारा-116 के अधीन उचित स्थानों पर समुचित यातायात चिन्ह रखवाकर या लगवाकर मोटरयानों की या किसी विनिर्दिष्ट वर्ग का वर्णन के मोटरयानों की या ऐसे मोटरयानों की जिनके साथ ट्रेलर संलग्न है या तो साधारणतया या किसी विशिष्ट क्षेत्र में या विशिष्ट सड़क या सड़को के बारे में ऐसी अधिकतम गति सीमाएं या न्यूनतम गति सीमाएं नियत कर सकेंगी जो ठीक समझे ।

51

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 1 -क]

उत्तराखण्ड मोटरयान नियमावली, 2011 (यथा संशोधित) के नियम 180 में वर्णित है कि "A Superintendent of Police within a municipal corporation ,municipality or Nagar panchayat and a Registering Authority in other area within their respective jurisdication may make such orders as they think fit restricting the speed of or restricting or prohibiting the use of motor vehicles , generally or any particuler class or classes of motor vehicles, in any area or on any road . Such orders shall be published by notification in the official Gazette and also by means of notice boards at or near the place or road to which the apply .

Provided that in regard to the hill roads , the Superintendent of Police or the Registering Authority shall exercise the power conferred by this rule subject to the general control of the Regional Transport Authority."

अतः मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा -112 की उपधारा (2) के साथ पठित उत्तराखण्ड मोटरयान नियमावली 2011 (यथा संशोधित) के नियम-180 में प्रदत्त शत्तियों का प्रयोग करते हुए बागेश्वर जनपद होकर निकलने / चलने वाले बागेश्वर जनपद के अन्तर्गत नगर पालिका / नगर पंचायत / ग्रामीण क्षेत्र की सीमा के अन्तर्गत आने वाले पहाड़ी मार्गो (Hill Roads) या मार्गो के अंश पर संचालन हेतु श्रेणीवार वाहनों की गतिसीमा निम्नलिखित तालिका के अनुसार निर्धारित की जाती है:-

जनपद बागंश्वर पर्वतीय मार्गो तथा नगर पालिका क्षेत्र के अन्तर्गत भारी तथा हल्के वाहनों हेतु अधिकतम गतिसीमा निर्धारण

अधिकतम गतिसीमा

भार्ग संख्या

कहा से कहा तक

हल्के वाहन

क्रम० सं०

मार्ग का प्रकार

भारी वाहन

मोटर साईकिल /दो पहिया

40

35

1

बागेश्वर

NH ताकुला

एन०एच०-309 A 25

40

40

35

2

काण्डा

बागेश्वर

NH

एन०एच०-309 A

40

35

25

काण्डा

3

कोटमन्या

NH

एन०एच०-309 A

25

40

35

कौसानी गरुड

4

एस०एच०-11

SH

40

35

40

5

गरूड

एस०एच०-11

बैजनाथ

SH

30

40

40

6

ग्वालदम

एस० एच०-11

बैजनाथ

SH

30

25

40

डंगोली

7

एस०एच0-60

प्रन्द्रहपाली बालीघाट

SH

40

45

40

बागेश्वर

8

एस०एच०-11

बैजनाथ

SH

40

45

40

कपकोट

9

बागेश्वर

एस०एच०-40

SH

40

25

35

कपकोट शामा

एस०एच०-40

10 SH

40

30

30

11

शामा

एस०एच०-40

SH

राम गंगा पुल

40

40

25

बालीघाट धरमघर कोटमन्या एस०एच०-60

12 SH

40

30

40

13

बागेश्वर गिरेछीना

एस०एच0-58

SH

30

25

35

14

बी०जी०-6

बागेश्वर दफौट

MDR 52

उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14. 1945 शक सम्वत्)

15

काण्डा

MDR

सानिउडियार

16

स्याली हरीनगरी ग्वालतम MDR

17 MDR पौडीबैण्ड पालडीछीना- काफलीगैर

18 MDR भराडी

[भाग 1 -क

25

35

बी०जी०-6

30

25

30

बी0जी0-7

30

बी० जी०-8

25

30

30

25

30

30 बी0-2

सौंग- मुनार (पिण्डारी ग्लेशियर)

19

कर्मी

कपकोट

MDR

20

चेटाबगड MDR खडलेख

21 MDR

विनायक

हरसिंगया बगड

बी0-4

25

30

30

25

बी०जी०-11

30

30

बी०जी०-10

25

30

30

नोट- जनपद की अन्य समस्त अन्य मार्ग तथा ग्रामीण पर भारी एवं हल्के वाहनों हेतु अधिकतम गतिसीमा क्रमशः 25 कि० प्रति घण्टा एवं 35 कि० मी० प्रति घण्टा करने की संस्तुति की जाती है ।

नोट जनपद के बागेश्वर नगर पालिका क्षेत्र तथा कपकोट नगर पंचायत क्षेत्र की सीमा के अन्तर्गत भारी तथा हल्के वाहनों हेतु अधिकतम गतिसीमा क्रमशः 25 कि0 प्रति घण्टा एवं 35 कि 0 मी0 प्रति घण्टा करने की संस्तुति की जाती है ।

नोट- विद्यालय , सरकारी / निजी अस्पताल के 100 मी0 आगे पीछे 20कि0 मी0 प्रति घण्टा एवं सभी अन्धे मोड एवं हेयर पिन मोड पर 10 कि०मी० प्रति घण्टा एवं सभी सी ( C ) बैण्ड और इन्वर्टेड बैण्ड पर 20 कि०मी० प्रति घण्टा की गति निर्धारण हेतु संस्तुति की जाती है ।

गति सम्बन्धी उपरोक्त प्रतिबन्ध निम्नलिखित शर्तों के अधीन प्रभावी होगाः-

(1) मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-116 में विनिर्दिष्ट साइन बोर्ड प्रतिबन्धित स्थान के दोनों छोर- प्रारम्भिक एवं अंतिम बिन्दु पर तथा मध्य में भी जगह- जगह पर आई० आर० सी० कोड के मानक के अनुसार सम्बन्धित सड़क सुरक्षा के स्वामित्व वाले विभाग द्वारा इस प्रकार लगाया जायेगा कि वाहन चालकों को इसकी जानकारी व ज्ञान हो सके ताकि वे रात्रि में भी चमके इसके लिए रिट्रो -रिफ्लेक्टिव टेप का प्रयोग किया जायेगा ।

(2) उक्त प्रतिबन्ध केन्द्रीय मोटरयान नियमावली , 1989 के विनिर्दिष्ट निम्न प्रकार के वाहनों पर लागू नही होगा ।

(अ) अग्निशमन वाहन ।

(ब) एम्बुलेंस ।

(स) पुलिस वाहन ।

(द) कानून एवं व्यवस्था बनाये रखने में लगे सैन्य बल तथा अर्ध सैन्य बल के लिए प्रयुक्त

होने वाले वाहन ।

(य) प्राकृतिक आपदा के प्रबन्धन के लिए प्रयुक्त वाहन ।

(3) उपरोक्त तालिका के कालम 2 एवं 3 पर उल्लिखित मार्गों /स्थानों को छोडकर जनपद के सभी मार्गों के अन्य नगरीय क्षेत्रों के मार्गो में केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-112 की उपधारा (1 ) के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या-1377 दिनांक 06.04.2018 , समय - समय पर यथा संशोधित, द्वारा निर्धारित अधिकतम गतिसीमा यथावत लागू रहेगी ।

रत्नाकर सिंह,

सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी ,

बागेश्वर,

पी० एस०यू० (आर० ई०) 05 हिन्दी गजट/ 63 - भाग 1 - क-2024 (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30/2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

भाग 8

सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

सूचना

मेरे पति की एल आई सी जिसकी पॉलिसी सं 0 270656744 नॉमिनी में मेरा घरेलू नाम सोमवती दर्ज हो गया है । जबकि मेरा वास्तविक नाम कविता है , ये दोनों ही नाम मेरे है , भविष्य में मुझे कविता पत्नी स्व० शीशपाल के नाम से जाना पहचाना जाये ।

समस्तविधिक औपचारिकताये मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

प्रार्थीया

श्रीमती कविता पत्नी स्व० शीशपाल निवासी म० नं० 170 इन्द्रा विहार सुनहरा रूडकी तहसील रूडकी जिला हरिद्वार ।

85-ट 86

[भाग 8 उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

सूचना

मेरे समस्त सेवा अभिलेखों में मेरा नाम कु ० अनीता पुत्री गोवर्द्धन सिंह, निवासी ग्राम कांडई . पो. बल्ली, कोटद्वार , गढ़वाल दर्ज हैं । विवाह के उपरांत मेरा नाम अनीता नेगी पत्नी सोवन सिंह नेगी, निवासी ग्राम/पो. कुंभीचौड़ , कोटद्वार, गढ़वाल हो गया है । भविष्य में मुझे अनीता नेगी पत्नी सोवन सिंह नेगी के नाम से जाना - पहचाना जाए ।

समस्तविधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

अनीता नेगी पत्नी सोवन सिंह नेगी निवासी ग्राम/ पो . कुंभीचौड़ , कोटद्वार , गढ़वाल

सूचना

मेरी पुत्री अम्बर सुल्ताना के शैक्षिक प्रमाण पत्रों में मेरा नाम FARMEEDA BEGUM दर्ज है व अन्य समस्त परिचय संबंधी दस्तावेजों में मेरा नाम FARIDA BEGUM है । FARMEEDA BEGUM एवं FARIDA BEGUM दोनो एक ही महिला के नाम है । भविष्य में मुझे उपरोक्त दोनो नामों से ही जाना जाए । FARMEEDA BEGUM व FARIDA BEGUM W / O JAAN ALAM निवासी सिरचंदी तहसील भगवानपुर जिला हरिद्वार ।

समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

दिनांक-13.05.2023:

श्रीमती फरीदा बेगम पत्नी श्री जान आलम FARIDA BEGUM W/O JAAN ALAM निवासी ग्राम व पोस्ट सिरचन्दी परगना व तहसील भगवानपुर जिला हरिद्वार , उत्तराखण्ड ।

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उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

कार्यालय-नगर पंचायत लालकुऑ-नैनीताल

सार्वजनिक सूचना

नगर पंचायत लालकुआँ साप्ताहिक बाजार की उपविधि 2022

20 अगस्त, 2022 ई०

पत्रांक 266 / न०प० / सा० बा० / गजट / 2022-23- सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि नगर पंचायत लालकुओं, जिला-नैनीताल द्वारा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 (यथा प्रवृत्त उत्तराखण्ड राज्य में) की धारा 241 में दिये गये प्राविधानों के अनुसार तथा धारा 298 के खण्ड च (क) में दी गई उपनियम बनाये जाने की शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा धारा 301 के अन्तर्गत दी गई शक्ति के अनुसार साप्ताहिक बाजार की उपविधि 2022 के प्रकाशन करने हेतु नगर पंचायत लालकुओं की बोर्ड बैठक दिनांक 30.06.2022 के प्रस्ताव सं०- 02 द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुसार बाजार की उपविधि 2022 बनाये जाने की स्वीकृति के उपरान्त यह विज्ञप्ति आपत्ति एवं सुझाव चाहने हेतु प्रकाशित की जा रही है, जिससे नागरिकों पर प्रभाव पड़ने जा रहा हैं ।

अतः लोकहित में सुविधा, सुरक्षा एवं नियन्त्रण व विनियमन करने हेतु साप्ताहिक बाजार की उपविधि 2022 में यदि किसी संस्था, व्यक्ति विशेष , फर्म, उद्योग, विभाग आदि की कोई आपत्ति एवं सुझाव हो तो इस विज्ञप्ति के प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर अपनी लिखित आपत्ति कार्यालय नगर पंचायत लालकुओं में प्रस्तुत कर सकते हैं । निर्धारित समय पश्चात प्राप्त होने वाली आपत्ति एवं सुझाव पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।

निकाय द्वारा सीमा के अन्तर्गत और इस सम्बन्ध विषय से सम्बन्धित पूर्ववर्ती सभी नियमों को अवकमित करते हुए नगर पंचायत लालकुआँ सीमान्तर्गत लगने वाले सभी साप्ताहिक बाजारों को नियंत्रित एवं विनियमित करने के लिए निम्न प्रकार शुल्क दरें निर्धारित करते हुए उपनियम बनाये गये हैं । जो सूचनार्थ प्रकाशित हैं:-

उपविधियाँ

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ- यह उपविधियों नगर पंचायत लालकुओं की सम्पूर्ण सीमा के अन्तर्गत लगने वाले साप्ताहिक बाजारों, साप्ताहिक बाजार स्थलों या उसके किसी भाग व उसमें व्यवसाय करने वाले व्यवसाईयों को एवं व्यवसाय करने की रीति को विनियमित, नियंत्रित करने हेतु साप्ताहिक बाजार शुल्क एवं विनियम उपविधि 2022 कहलायेगी तथा यह गजट में प्रकाशित की तिथि से लागू समझी जायेगी ।

2. परिभाषाएं-

(क) अधिनियम- अधिनियम का तात्पर्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 (यथा प्रवृत उत्तराखण्ड) से है ।

(ख) नगर पंचायत लालकुओं सीमा नगर पंचायत लालकुओं की सीमा शासन द्वारा निर्धारित है ।

(घ) अध्यक्ष अध्यक्ष का तात्पर्य नगर पंचायत लालकुओं के निर्वाचित अध्यक्ष से है ।

(ग)अधिशासी अधिकारी-अधिशासी अधिकारी का तात्पर्य नगर पंचायत लालकुओं के अधिशासी अधिकारी से है ।

(ङ) बोर्ड- बोर्ड का तत्पर्य नगर पंचायत लालकुओं के बोर्ड से है ।

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3. नगर पंचायत लालकुओं की सीमा के अन्तर्गत लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में कोई भी व्यक्ति व्यवसाय करेगा तो उसे निगम बोर्ड द्वारा व्यवसाय हेतु निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।

4. साप्ताहिक बाजार को व्यवस्थित करने, निर्धारित शुल्क के निरीक्षण करने का अधिकार अधिशासी अधिकारी या उनके द्वारा इस निमित्त नियुक्त प्राधिकारी, साप्ताहिक बाजारों में स्टाल, ठेला, फड़ की जाँच करने व जमा रसीद मांगे जाने का अधिकारी होगा । व्यवसायी को जमा रसीद दिखाना अनिवार्य होगा । नियुक्त प्राधिकारी जमा रसीद निरस्त करने व स्टाल हटाने का भी अधिकारी होगा ।

5. कोई ऐसा व्यक्ति जो संक्रामक रोग से पिडित हो स्वयं खदद्य सामाग्री संबंधी व्यवसाय नहीं करेगा और ना ही किसी भी संक्रामक रोग से पिडित व्यक्ति को सेवायोजित करेगा जिससे जनसामान्य प्रभावित हो ।

6. अधिशासी अधिकारी इन उपविधियों के अधीन साप्ताहिक बाजार में खान- पान से सम्बन्धित व्यवसाय यथा दुकानों , हलवाईयों , सब्जी विक्रेताओं आदि के विरूद्ध गुणवत्तायुक्त पदार्थ न रखने व विक्रय करने के विरूद्ध कार्यवाही करने अथवा सडी गली फर्ल सब्जियों को रखने व विक्रय करने के विरूद्ध कार्यवाही करने अथवा मानव अनुपयोगी पदार्थ को नष्ट करने का अधिकार होगा ।

7. अधिशासी अधिकारी की अनुमति के बिना साप्ताहिक बाजार में कोई भी व्यक्ति / व्यापारी किसी भी प्रकार के ध्वनि यन्त्रों लाउडस्वीकर, स्पीकर का उपयोग नहीं करेगा ।

8. साप्ताहिक बाजार में प्रतिबन्धित प्लास्टिक, पॉलीथीन/ थरमाकौल से बनी सामग्री का उपयोग पूर्णतः वर्जित होगा।

9. इन उपविधियों के अधीन साप्ताहिक बाजर में खान- पान से सम्बन्धित व्यवसायों, दुकानदारों, व्यक्तियों की दुकान से संलग्न व सामने प्रवेश कक्ष के समक्ष दुकान का कूडा व अन्य अनुपयुक्त गन्दी वस्तुयें रखने व प्रदर्शित करने का अधिकार नहीं होगा, जो किसी व्यक्ति के स्वास्थ एवं पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक हो ।

10. इस उपविधि के किसी प्राविधान के बारे में राज्य सरकार यदि सन्तुष्ट है, कि उपविधि के किसी प्राविधन का दुरुप्रयोग किया जा रहा है , अथवा कोई प्राविधान जनहित में नहीं है, तो उक्त प्राविधानों को परिष्कृत करने, छूट देने का अधिकार राज्य सरकार को होगा ।

11. कोई भी व्यक्ति / व्यवसायी फुटपाथों एवं सार्वजनिक मार्ग को बाधित कर व्यवसाय करने का पात्र नहीं होगा।

12. केन्द्र या राज्य सरार या अन्य विधिस्थापित संस्था के द्वारा विधि/ उपविधियों में उल्लिखित व्यवसायों के नियन्त्रण हेतु लाईसेंस इन उपविधियों से भिन्न होगा ।

13. जो व्यवसाय उपनियमों द्वारा निर्धारित सूची में नहीं है । उसके दरों का निर्धारण करने का अधिकार नगर पंचायत लालकुआँ बोर्ड को होगा ।

14. अधिशासी अधिकारी किसी ऐसे स्थान में प्रवेश कर सकता है जहाँ नगर पंचायत लालकुआँ अधिनियम के उपबन्धों के प्रतिकूल पशु वध या मांस बिकी किये जाने का संदेह हो । अधिशासी अधिकारी मानव भोजनार्थ बिकी के लिए प्रदर्शित की गई वस्तुओं के निरीक्षण एवं अस्वास्थ कर वस्तुओं आदि का अभिग्रहण करेंगे ।

15. साप्तहिक बाजार के उपरोक्त प्रावधानों में किसी प्रतिकूल परिस्थिति की व्यवस्था ना होने की दशा में उसके निस्तारण का अधिकार अध्यक्ष नगर पंचायत लालकुओं में निहित होगा ।

16. साप्ताहिक बाजार हेतु जो दरें निर्धारित होगी , उसका मा० बोर्ड द्वारा आवश्यकतानुसार कभी भी पुर्ननिर्धारण किया जा सकता हैं ।

17. नगर पंचायत लालकुओं की सीमा के अन्दर नगर पंचायत या उसके द्वारा अधिकृत एजेन्सी / ठेकेदार द्वारा ही साप्ताहिक बाजारों का संचालन किया जायेगा । इसके अतिरिक्त नगर पचांयत लालकुओं की सीमा में साप्ताहिक बाजार पूर्णतया प्रतिबन्धित होगे ।

भाग ४ ]

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उत्तराखण्ड गजट, 03 फरवरी , 2024 ई० (गाघ 14, 1945 शक सम्वत्)

क्र.सं.                          मद                            नगर पंचायत द्वारा प्रस्तावित दरें
 01    मिर्च, गल्ला, धनिया, हल्दी, आटा, चावल, अड्डी कपास व रूई,           150
        नमक आदि के थोक पर
 02     मिर्च, गल्ला, धनिया, हल्दी, आटा, चावल, अड्डी कपास व रूई,          150
        नमक आदि के फुटकर पर
 03     घी थोक में
 04.   घी फुटकर में
 05     गुड भेली
 06     जूते का फड
 07    जूता गडने वाला
 08     बिस्कुट, मोमबत्ती खमची में
 09     फल, तरबूज, खरबूज, आम तथा अन्य फल
 10     सब्जी फुटकर
 11     पाटवा, पूजा सामाग्री
 12     कुम्हार
 13    टोकरी बांसी आदि
 14    नाई फड
 15     आचार मुरब्बा आदि
 16     भुर्जी, नमकीन आदि
 17     दर्जी
 18     छीपी लिहाफ बेचने वाला
 19     कपडे की दुकान बजाज
 20    बिसाती
 21    तेली
 22     हलवाई
 23    लोहार
 24     मछली व अण्डे
 25    पंसारी
 26     गन्ना फरोस
 27     बकरा फरोस
 28     कसेरा अल्मोनियम पीतल कलई के बर्तन
 29    कम्बल फरोस
 30    सोफे मेज आदि
 31     चारपाई के पाये , हरस, हल आदि
 32    चटाई
 33     चाय, सोडा लेमन, मलाई, बर्फी, आइसक्रीम आदि
 34     तम्बाकू सूती, पान का तम्बाकू आदि
 35     मुर्गी, बत्तख
 36    चाट खोमचा
37     घास
38     लकडी का ग‌ठ्ठा
39     खोमचा पान बीडी, सिगरेट आदि
40      इमारती लकडी चौखट आदि
41      बतासे, खिलौना खाड आदि
42     रेवडी गजक आदि

नोट- फड का आशय 6X6 वर्ग फिट के स्थान/ स्टॉल / हाथ ठेला से होगा ।

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200
100
150
 40
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200
200
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200
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200
200
200
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150
150
200
150
 50
300
200
200
200
200

90

[भाग 8 उत्तराखण्ड गजट , 03 फरवरी , 2024 ई० (माघ 14, 1945 शक सम्वत्)

प्रत्येक ऐसे व्यवसायी जो बिन्दु संख्या 17 से भिन्न उपरोक्त उपविधियों को किसी भी भाग / अंश का किसी प्रकार का उल्लंघन ऐसे जुर्माने से जो रूपया 1000/- (रु० एक हजार मात्र) तक अर्थदण्ड हो सकता है और उल्लंघन करते रहने की दशा में प्रथम उल्लंघन की दोषसिद्धि के पश्चात प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिस दौरान ऐसा उल्लंघन जारी रहा, ऐसे जुर्काने से जो रू0 50 /- प्रतिदिन हो सकता है, दण्डनीय होगा। बिन्दु सं० 17 के उल्लंघन पर प्रतिदिन के लिये रू 0 10000/- तक अर्थदण्ड हो सकता है और उल्लंघन करते रहने की दशा में प्रथम उल्लंघन की दोष सिद्ध के पश्चात प्रत्येक ऐसे दिन के लिये जिस दौरान उल्लंघन जारी रहा उक्त जुर्माने की राशि के गुणांक हो सकता है । दण्डनीय होगा ।

लालचन्द्र सिंह,

पूजा,

अधिशासी अधिकारी,

नगर पंचायत लालकुआँ,

अध्यक्ष, नगर पंचायत लालकुओं,

जिला-नैनीताल ।

जिला-नैनीताल ।

पी० एस ०यू० ( आर०ई०) 05 हिन्दी गजट/ 63 -भाग 8-2024 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

Cite this issue. Uttarakhand Weekly Gazette, Government of Uttarakhand, 19 January 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-01-19.gz030224/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-01-19.gz030224.