Servants of Knowledge
Uttarakhand Weekly Gazette · Government of Uttarakhand

Notification

Published 16 March 2024

Department
Forest Department
Type
Weekly
Part
Bhag 1
Notification no.
509/X-2-2023-20(01)2005
Identifier
in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-03-16.3029-300525234201
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

पंजीकरण संख्या- UA/ DO / DDN /30 / 2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की

खण्ड-25 ] रुड़की, शनिवार, दिनांक 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्) [ संख्या-13

विषय-सूची

प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग -अलग दिये गए हैं , जिससे उनके अलग -अलग खण्ड बन सकें

विषय

वार्षिक चन्दा

पृष्ठ संख्या

रु० सम्पूर्ण गजट का मूल्य

3075

369-427

1500 भाग 1 - विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान - नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

115-120

1500 भाग 1 -क-नियम, कार्य - विधियां, आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

भाग 2-आज्ञाएं , विज्ञप्तियां , नियम और नियम विधान, जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण

975

भागं 3-स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़- पत्र, नगर प्रशासन, नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया

975 भाग 4-निदेशक, शिक्षा विभाग , उत्तराखण्ड

975 भाग 5-एकाउन्टेन्ट जनरल, उत्तराखण्ड

975

भाग 6-बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

975

975 भाग 7-इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

भाग 8-सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

975

स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़ - पत्र आदि

1425

369 क 370

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

वन अनुभाग-02

अधिसूचना

16 मार्च, 2024 ई०

संख्या- 509 / X- 2-2023-20 (01 )2005- राज्यपाल , भारतीय वन अधिनियम , 1927 (अधिनियम संख्या 16, 1927) की धारा 76 सहपठित धारा 26 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके उत्तरांचल पंचायती वन नियमावली , 2005 में अग्रेत्तर संशोधन करने के दृष्टिगत निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं :-

उत्तराखण्ड पंचायती वन (संशोधन) नियमावली, 2024

संक्षिप्त नाम तथा प्रारम्भ

1. (1 ) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड पंचायती वन (संशोधन ) नियमावली, 2024 है ।

) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।

(2

नियम 2 का संशोधन 2. उत्तरांचल पंचायती वन नियमावली, 2005 (जिसे आगे मूल नियमावली कहा गया है) के नियम 2 (ग), (च) एवं (प) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित्त नियम

2 (ग)

'आयुक्त' , 'जिलाधिकारी', 'परगना मजिस्ट्रेट, 'पटवारी', "वन संरक्षक', 'प्रभागीय वनाधिकारी', 'उप प्रभागीय

2(ग) 'आयुक्त', 'जिलाधिकारी' , ' परगना मजिस्ट्रेट', 'पटवारी' , 'मुख्य वन संरक्षक' ,' वन संरक्षक', 'प्रभागीय वनाधिकारी' , 'उप प्रभागीय वनाधिकारी /सहायक वन संरक्षक,' 'वन क्षेत्राधिकारी', 'उप वन क्षेत्राधिकारी' , 'वन दरोगा' ('फारेस्टर') , 'वन आरक्षी' ('वन रक्षक') , 'सरपंच' एवं वन पंचायत प्रबन्धन समिति के सदस्य' का तात्पर्य क्रमशः किसी ऐसे पदधारक से है, जिसकी क्षेत्रीय अधिकारिता के अन्तर्गत 'ग्राम वन' / 'पंचायती वन' पड़ता हो ।

'प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत उत्तराखण्ड' , 'मुख्य वन संरक्षक, कार्य योजना' , 'मुख्य वन संरक्षक, उपयोग, एन.टी.एफ.पी. एवं आजीविका' , 'मुख्य वन संरक्षक, ईकोटूरिज्म एवं प्रचार-प्रसार', 'मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन वन्यजीव संरक्षण एवं आसूचना' , 'मुख्य वन संरक्षक, वन पंचायत एवं सामुदायिकी वानिकी, उत्तराखण्ड' से तात्पर्य ऐसे पदधारक से है, जो वन विभाग, उत्तराखण्ड में उवत्त पद धारित करता हो ।

वनाधिकारी/सहायक वन संरक्षक,' 'वन क्षेत्राधिकारी' , 'उप वन क्षेत्राधिकारी' , 'वन दरोगा' (फारेस्टर ), 'वन आरक्षी' ('वन रक्षक'), 'सरपंच' एवं वन पंचायत प्रबन्धन समिति के सदस्य' का तात्पर्य कमशः किसी ऐसे पदधारक से है, जिसकी अधिकारिता अन्तर्गत 'ग्राम वन'/'पंचायती वन' पड़ता हो । क्षेत्रीय 371 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

2(च) 'संहत प्रबन्ध योजना' का तात्पर्य ऐसी योजना से हैं जो प्रभागीय वनाधिकारी की अधिकारिता वाले क्षेत्र में स्थित समस्त ग्राम वनों/ पंचायती वनों के लिए वन वर्धन एवं निरन्तर विकास के सिद्धान्त पर 10 वर्ष के लिए बनायी गयी हो यह योजना एकल अभिलेख के रूप में दो या अधिक खण्डों में होगी और इसमें ग्राम वनों/पंचायती वनों का सामान्य विवरण तथा सूक्ष्म योजना को बनाने तथा किसी ग्राम वन की सुरक्षा तथा प्रबन्धन के लिए भार्गदर्शी 'सिद्धान्त होंगे ।

2(च) 'संहत प्रबन्ध योजना' का तात्पर्य ऐसी योजना से है जो प्रभागीय वनाधिकारी की अधिकारिता वाले क्षेत्र में स्थित समस्त ग्राम वनों/ पंचायती वनों के लिए वन वर्धन एवं निरन्तर विकास के सिद्धान्त पर 5 वर्ष के लिए बनायी गयी हो यह योजना एकल अभिलेख के रूप में दो या अधिक खण्डों में होगी और इसमें ग्राम वनों/पंचायती वनों का सामान्य विवरण तथा सूक्ष्म योजना को बनाने तथा किसी ग्राम वन की सुरक्षा तथा प्रबन्धन के लिए मार्गदर्शी सिद्धान्त होंगे ।

2(प) 'ग्राम सभा' एवं 'ग्राम पंचायत प्रधान' के वही अर्थ होंगे, जो उत्तराखण्ड पंचायती राज अधिनियम, 2016 में उनके लिए दिये गये हैं ।

2(प) 'ग्राम सभा' एवं 'प्रधान' के वही अर्थ होंगे, जो उत्तर प्रदेश पंचायत राज एक्ट, 1947 (जो उत्तराखण्ड में प्रवृत है) में उनके लिए दिये गये हैं ।

नियम-5 का संशोधन 3 . मूल नियमावली के नियम 5 (ख) के पश्चात निम्नलिखित नया नियम -5 (ग) व (घ) जोड़ दिया जायेगा, अर्थात्ः-

नियम 5 (ग) पंचायती वनों/ ग्राम वनों / निजी भूमि/पनघट चारागाह/कब्रस्तान अथवा राजस्व विभाग की भूमि सीमांकन सम्बन्धी प्रकरणों में उत्त्पन्न होने वाले विवादों के निस्तारण हेतु प्रस्तावित नियमावली में वन विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त समिति को गठित किया जायेगा, जिसमें राजस्व विभाग से तहसीलदार एवं वन विभाग के उप- प्रभागीय वनाधिकारी को विवाद की स्थिति को निस्तारित किये जाने के अधिकार होगा । इस निर्णय से प्रभावित पार्टी 30 दिनों के भीतर अपील हेतु रिजर्व फारेस्ट से बनी वन पंचायत हेतु प्रभागीय वनाधिकारी एवं सिविल सोयम भूमि से बनी वन पंचायत हेतु सम्बन्धित जिलाधिकारी को कर सकते हैं ।

5 (घ) सभी पंचायती वनों में सुधार एवं वन पंचायतों के सुदृढीकरण हेतु दावों/ आमत्तियों पर विनिश्चय ग्राम वनों/पंचायती वनों का सीमांकन और विनिश्चय सम्बन्धी आवेदन/प्रार्थना पत्र सम्बन्धित परगना मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत किया जायेगा, जिस पर परगना मजिस्ट्रेट द्वारा नियत समय के अन्दर निस्तारण किया जायेगा ।

372

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

14.

नियम 7 में संशोधन

मूल नियमावली में विद्यमान नियम 7 (1) (क) के अन्त में निम्नलिखित टिप्पणी अन्तः स्थापित कर दी जायेगी, अर्थात्ः- टिप्पणीः प्रबन्धन समिति के 09 सदस्यों में से 02 सदस्य मनोनीत होगें । जिसमें ग्राम पंचायत का एक सदस्य ग्राम प्रधान द्वारा नामित किया जायेगा तथा जैव विविधता प्रबन्धन समिति के एक सदस्य को अध्य क्ष, जैव विविधत्ता प्रबन्धन समिति द्वारा नामित किया जायेगा । जिस ग्राम पंचायत /जैव विविधता प्रवन्धन समिति में एक से अधिक वन पंचायत स्थित हैं उस दशा में ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान द्वारा / अध्यक्ष, जैव विविधता प्रबन्धन समिति द्वारा एक सदस्य को एक से अधिक वन पंचायतों के प्रबन्धन समिति में नामित किया जा सकेगा ।

ऐसी वन पंचायतें जो नगर निकाय/ नगर पालिका में अवस्थित हैं, उनमें 08 सदस्य (पार्षद/ वार्ड मेम्बर) सम्बन्धित नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा नामित किये जायेंगे एवं 01 सदस्य सम्बन्धित नगर निकाय/ नगर पालिका के अन्तर्गत जैव विविधता प्रबन्धन समिति का होगा । ऐसी नगर निकाय वन पंचायत का सरपंच सम्बन्धित नगर निकाय के मेयर/अध्यक्ष द्वारा ही चयनित करं नामित किया जायेगा ।

नियम 11 का संशोधन 5 मूल नियमावली के नियम 11 में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्ण-1

स्तम्भ-2

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम

प्रभागीय वनाधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले समस्त ग्राम वनों/पंचायती वनों के लिये 10 वर्ष की अवधि के लिये शासन द्वारा समय-समय पर जारी किये गये दिशा-निर्देश के अनुसार संहत प्रबन्ध योजना बनायेगा । संहत प्रबन्ध योजना में वन पंचायतों को ग्राम पंचायतों से जोड़ने बावत वन क्षेत्रों में वानिकी एवं पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण कार्यों को भी समाहित किया जायेगा और इसे सम्बन्धित वन संरक्षक, प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत उत्तराखण्ड की अध्य क्षता वाली समिति जिसमें निम्न सदस्य होंगे, के सामने प्रस्तुतीकरण करेगें व अनुमोदन प्राप्त करेंगें:-

1. प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत उत्तराखण्ड- अध्यक्ष

2. मुख्य वन संरक्षक, कार्य योजना सवस्य

3. सम्बन्धित क्षेत्रीय गुख्य वन संरक्षक सदस्य

4. मुख्य वन संरक्षक, (उपयोग,एन.टी.एफ.पी. एवं आजीविका)-सदस्य

5. मुख्य वन संरक्षक, ईकोटूरिज्म एवं प्रचार- प्रसार- सदस्य

प्रभागीय वनाधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले समस्त ग्राम वनों/ पंचायती वनों के लिये पांच वर्ष की अवधि के लिये एक संहत प्रबन्ध योजना बनायेगा । संहत प्रबन्ध योजना में वन पंचायतों को ग्राम पंचायतों से जोडने बावत्त वन क्षेत्रों में वानिकी एवं पर्यावरण संरक्षण तथा जल संरक्षण कार्यों को भी समाहित किया जायेगा और इसे सम्बन्धित वन संरक्षक को अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करेगा एवं वन 373 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

6. मुख्य वन संरक्षक, प्रशासन,वन्यजीव संरक्षण एवं आसूचना-सदस्य

7. प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) उत्तराखण्ड द्वारा सदस्य

नामित विशेषज्ञ सामुदायिक वानिकी क्षेत्र के

संरक्षक बिना संशोधन के अथवा संशोधन सहित 60 दिनों के अन्दर अपना अनुमोदन देगा ।

8. मुख्य वन संरक्षक, वन पंचायत एवं सामुदायिकी- सदस्य

राचिव वानिकी, उत्तराखण्ड-

नियम 12 का संशोधन 6. सूल नियमावली में विद्यमान नियम 12, के अन्त में निम्नलिखित टिप्पणी अन्तः स्थापित कर दी जायेगी, अर्थात्ः-

टिप्पणीः स्वीकृत माइक्रोप्लान में यदि संशोधन की आवश्यकता हो तो सम्बन्धित वन संरक्षक के स्वीकृति उपरान्त माइक्रोप्लान में संशोधन किया जायेगा ।

नियम 18 का संशोधन 7. मूल नियमावली के नियम 18 (ग) में नींचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-1

स्तम्भ-2

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम

18(ग) उपनियम (क) एवं (ख) के अधीन आवश्यकताएं पूर्ण होने के पश्चात प्रबन्धन समिति प्रस्ताव पारित कर अधिकारधारियों के वास्तविक घरेलू उपयोग हेतु या स्थानीय कुटीर उद्योग या ग्रामीण उद्योग या सामुदायिक उपयोग हेतु गैर विनाशकारी श्रेणी के गैर-प्रकाष्ठीय वन उपज का निस्तारण कर सकती है । उत्तराखण्ड इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली 2012 के प्राविधानों के अनुरूप उपरोक्त वन उपज के अभिवहन हेतु वन पंचायत सचिव द्वारा अभिवहन पास जारी किया जायेगा तथा विभिन्न वर्ग के वन उपज के अभिवहन पास के लिए नियमानुसार देय अभिवहन शुल्क (फीस) प्राप्त कर ग्राम वन निधि/पंचायती वन निधि में जमा करेगा ।

18(ग) प्रभागीय वनाधिकारी के पूर्वानुमोदन के पश्चात एवं उपधारा (क) एवं (ख) के अधीन आवश्यकताएं पूर्ण होने के पश्चात प्रबन्धन समिति प्रस्ताव पारित कर अधिकारधारियों के वास्तविक घरेलू उपयोग हेतु या स्थानीय कुटीर उद्योग या ग्रामीण उद्योग या सामुदायिक उपयोग हेतु वन उपज का निस्तारण कर सकती है ।

नियम 19 का संशोधन 8. मूल नियमावली में विद्यमान नियम 19 (त्र) के पश्चात् निम्नलिखित नया नियम 19 (ञ) जोड़ दिया जायेगा; अर्थातः-

19 (ग) यह सुनिश्चित करना कि पंचायती वन क्षेत्रों के अन्दर गंदगी/ कूड़ा /अपशिष्ट जमा न हो तथा वन पंचायत क्षेत्र तथा समीपवर्ती क्षेत्रों में स्थानीय जड़ी- बूटी तथा ईकोटूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देना।

374

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

नियम 20 का संशोधन 9. मूल नियमावली के नियम 20 (क) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियंभ के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित'नियम

 प्रबन्धन समिति   की        प्रबन्धन समिति की प्रास्थिति वन अधिकारी की होगी
 प्रास्थिति वन अधिकारी      और वह सौंपे गये क्षेत्र के लिए निम्नलिखित शक्तियों
 की होगी और वह सौंपे        का प्रयोग करेगी । (क) ग्राम वन/ पंचायती वन के
 गये   क्षेत्र के लिए       भीतर किये गये शमन योग्य वन अपराधों की प्रकृति
 निम्नलिखित    शक्तियों     के अनुसार प्रतिकर के रूप में प्रत्येक अलग-अलग
 का प्रयोग करेगी ।          अपराध हेतु शासन द्वारा समय- समय पर जारी
 (क)    ग्राम   वन/         दिशा-निर्देश के क्रम में शमन करनाः
 पंचायती वन के भीतर               परन्तु यदि अपराधी मामले का शमन करने को
 किये गये वन अपराधों        तैयार हो तो प्रबन्धन समिति इस नियम में विनिर्दिष्ट
का अपराधों की प्रकृति       प्रतिकर के अतिरिक्त अपराध के अर्न्तग्रस्त सम्पत्ति
 के अनुसार प्रतिकर के       का   पूरा  बाजार    मूल्य  जैसा   कि   प्रभागीय
 रूप     में   प्रत्येक     वनाधिकारी/ सम्बंधित वन संरक्षक से अनिम्न श्रेणी के
 अलग-अलग अपराध              किसी अधिकारी द्वारा   विहित अनुसूचित दर पर
 हेतु 500   रू0   की        निर्धारित किया जाये, वसूल करेगी ।
 (सीमा तक) राशि तक                प्रशमन योग्य वन अपराधों, जिसमें अभियुक्त
 शमन करना ।                 प्रशमन हेतु तैयार नहीं है तथा गैर प्रशमन योग्य वन
                            अपराध सम्बन्ध में प्रबन्धन समिति द्वारा लिखित रूप
    परन्तु यदि अपराधी       से राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी को सूचित करेगी
 मामले का शमन करने          जोकि प्रकरण पर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही करेंगे ।
 को   तैयार  हो   तो
 प्रबन्धन समिति  इस
 नियम   में विनिर्दिष्ट
 प्रतिकर के  अतिरिक्त
अपराध   के   अर्न्तग्रस्त
सम्पत्ति  का     पूरा
बाजार मूल्य जैसा कि
प्रभागीय
वनाधिकारी/सम्बंधित
वन संरक्षक से अनिम्न
श्रेणी  के     किसी
अधिकारी द्वारा विहित
अनसूचित     दर   पर
निर्धारित किया  जाय,
वसूल करेगी ।
                    10     मूल नियमावली के नियम 20 (छ) एवं नियम 20 (झ)
                           में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के
                           स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया
                           जायेगा, अर्थात्ः
स्तम्भ-1                   स्तम्भ-2

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापितः नियम

375 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

20 (छ) वन को हानि पहुँचाये बिना चराई और घास कटाई के लिये या गिरी हुई जलोनी लकड़ी को एकत्रित करने के लिये अथवा गैर विनाशकारी श्रेणी के गैर प्रकाष्ठ वन उपजं (जैसे फूल, फल, बीज, पत्तियां, चीड़ पिरूल, शिलाजीत इत्यादि) के समुपयोजन एवं उपयोग हेतु अनुज्ञा पत्र जारी करना और फीस लेना ।

20(छ) वन को हानि पहुँचाये बिना वन उपज की स्थानीय बिक्री करना और चराई और घास कटाई के लिये या गिरी हुई जलाने की लकड़ी को एकत्रित करने के लियें अगर आवश्यक हो तो प्रभागीय वनाधिकारी के पूर्वानुमोदन के साथ अनुज्ञा पत्र जारी करना और फीस लेना जो अधिकारधारियों वास्तविक उपयोग हेतु होगा परन्तु चराई, गास , कटाई या जलोनी लकड़ी एकत्रित करने हेतु के प्रभागीय वनांधिकारी 'की आज्ञा आवश्यक नहीं होगी।

20 (झ) प्रबन्धन समिति स्वयं सहायता समूह या वन उपयोगकर्ता सदस्य से समूह के रूप में अथवा एकल सदस्य (जैसी भी स्थिति हो) तथा अतिरिक्त्त सरकारी एजेन्सी तथा वाह्य एजेन्सी से अपने अधिकार क्षेन्त्र के अन्तर्गत वन ग्राम वनों के समुचित प्रबन्धन, संवर्धन, सुरक्षा, विकास को दृष्टिगत रखते हुए आम सभा से अनुमोदन प्राप्त कर अनुबन्ध कर सकेगी, किन्तु प्रबन्धन समिति वाह्य एजेन्सी से अनुबन्ध करने से पूर्व सम्बन्धित जिलाधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करेगी ।

20(झ) प्रबन्धन समिति स्वयं सहायत्ता समूह या वन उपयोगकर्ता सदस्य से समूह के रूप में अथवा एकल सदस्य (जैसी भी स्थिति हो) , से अपने अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत वन ग्राम वनों के समुचित प्रबन्धन, संवर्धन, सुरक्षा, विकास को दृष्टिगत रखते हुए आम सभा से अनुमोदन प्राप्त कर अनुबन्ध कर सकेगी ।

नियम 25 का संशोधन 11 मूल नियमावली के नियम 25 (क) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रत्तिस्थापित्त नियम

(1) जब तक किसी युक्तियुक्त कारण से असमर्थ न हो, सरपंच का निम्नलिखित कर्तव्य होगाः

(क) प्रबन्धन समिति की सभी बैठकों को बुलाना और

उनकी अध्यक्षता करना ।

(1) जब तक किसी युक्तियुक्त कारण से असमर्थ न हो, सरपंच का निम्नलिखित कर्तव्य होगाः

(ख) कार्य पर नियंत्रण रखना और उसे संचालित करना तथा व्यवस्था बनाये रखना ।

(क) प्रबन्धन समिति

376
                  उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)               [भाग 1
                की सभी बैठकों को           (ग) प्रबन्धन समिति की वित्त व्यवस्था की देखभाल
                बुलाना और उनकी            करना और उसके प्रशासन का अधीक्षण करना तथा
               अध्यक्षता करना ।           उसमें पाई किसी त्रुटि को उसकी जानकारी में लाना ।
                (ख)       कार्य परं       (घ) प्रबन्धन समिति द्वारा रखे कर्मचारी वर्ग तथा
               नियंत्रण रखना   और         अधिष्ठान का अधीक्षण व नियंत्रण करना ।
               उसे संचालित करना           (ड) प्रबन्धन समिति के संकल्पों को कार्यान्वित करना ।
               और    व्यवस्था बनाये       (च) नियमों के विहित विभिन्न रजिस्टरों को रखने की
               रखना ।                     व्यवस्था करना ।
               (ग)    प्रबन्धन समिति      (छ) प्रबंधन समिति की ओर से दीवानीवाद संस्थित
               की वित्त व्यवस्था की      करना और अभियोग चलाना ।
               देख-भाल करना और            (ज) अपनी अनुपस्थिति में सरपंच के कृत्यों का निर्वहन
              उसके    प्रशासन  का        करने के लिए प्रबन्धन समिति के किसी एक सदस्य
              अधीक्षण करना तथा           को लिखित रूप से नाम निर्दिष्ट करना ।
              उसमें पाई किसी त्रुटि      (झ) सरपंच प्रबन्धन समिति के नाम के साथ ढाली हुई
              को उसकी जानकारी            सरपंच की मोहर प्रबन्धन समिति के दो अन्य सदस्यों
              में लाना ।                की उपस्थिति में ही प्रयोग करेगा जो अपनी उपस्थिति
              (घ)    प्रबन्धन समिति     की पुष्टि में हस्ताक्षर भी करेंगे ।
              द्वारा रखे कर्मचारी वर्ग   (ञ) उप नियम (1) खण्ड (ज) के अधीन सरपंच द्वारा
              तथा    अधिष्ठान का        नाम निर्दिष्ट सदस्य सरपंच की अनुपस्थिति में उन
             अधीक्षण व     नियंत्रण     सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा सभी कर्त्तव्यों का
             करना ।                     निवर्हन करेगा जो उसे नियमावली के अधीन प्रदत्त या
              (ड)   प्रबन्धन समिति      सौंपे गये हैं । यदि सरपंच ऐसा कोई नाम निर्देशन
             के     संकल्पों  को        करने में असफल रहे हों तो ग्राम वन समिति के
             कार्यान्वित करना ।         सदस्य बैठक के समय उपस्थिति सदस्यों में से किसी
             (च)       नियमों के        एक सदस्य को बैठक की कार्यवाही का संचालन करने
             विहित        विभिन्न       के लिये सरपंच के रूप में चुन सकते हैं ।
             रजिस्टरों को रखने की       (ट) इन नियमावली के अधीन सरपंच को सौंपें गये
             व्यवस्था करना   और         कर्त्तव्यों का निवर्हन करने के लिए सरपंच को प्रबन्धन
             प्रबन्धन समिति   की        समिति   की   स्वीकृति  की   प्रत्याशा में ग्राम
             ओर से     सभी   पत्र      वन/ पंचायती वन निधि से शासन द्वारा समय-समय
             व्यवहार करना।             पर जारी दिशा-निर्देश के क्रम की सीमा तक व्यय
             (छ)   प्रबन्धन समिति      करने और इस सीमा तक अग्रिम धनराशि का आहरण
            की ओर से दीवानीवाद         करने की शक्ति होगी ।
            संस्थित करना    और         (2) . सचिव के कर्त्तव्यः-
            अभियोग चलाना ।               वन पंचायत सचिव के 'निम्न कर्त्तव्य होंगे:-
            (ज)           अपनी
            अनुपस्थिति में सरपंच         1. प्रबन्धन समिति की सभी बैठकों की सूचना देना
            के कृत्यों का निर्वहन           तथा उससे सम्बन्धित सूचनाओं को समस्त
            करने के लिए प्रबन्धन           संदस्य को प्रसारित करना ।
            समिति के किसी एक             2. प्रबन्धन समिति की बैठकों का संचालन करना ।
           सदस्य को लिखित
           रूप से नाम निर्दिष्ट          3. नियमों के विहित विभिन्न रजिस्टरों का
           करना ।                          रख- रखाव करना तथा सरपंच, प्रबन्धन समिति
                                           की ओर से सभी पत्र व्यवहार करना ।
           (2)  सरपंच    प्रबन्धन
           समिति के नाम के              4. प्रबन्धन समिति तथा स्थानीय वन विभाग तथा
           साथ ढाली हुई सरपंच              राजस्व के अधिकारियों/ कार्मिकों के साथ
          की     मोहर   प्रबन्धन           समन्वय स्थापित करना ।

भाग 1]

377 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

समिति के दो अन्य सदस्यों की उपस्थिति में ही प्रयोग करेगा जो अपनी उपस्थिति की पुष्टि में हस्ताक्षर भी करेंगे ।

5. बन पंचायत के गठन, सीमांकन, बेदखली, अधिकारधारी, आय- व्यय व वन पंचायत से सम्बन्धित अन्य समस्त अभिलेखों को संधारित कर वन पंचायत के सरपंच की अभिरक्षा में रखवाना । वन पंचायत्त की रोकड बही को संधारित कर रख -रखाव करना एवं बैंक खाते पर सरपंच के साथ संयुक्त्त रूप से हस्ताक्षर करना ।

(3) उप नियम (1 ) खण्ड (ज) के अधीन सरपंच द्वारा नाम निर्दिष्ट सदस्य सरपंच की अनुपस्थिति में उन सभी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा सभी कर्त्तव्यों का निवर्हन करेगा जो उसे नियमावली के अधीन प्रदत्त या सौंपे गये हैं । यदि सरपंच नाम ऐसा कोई निर्देशन करने में असफल रहे हों तो ग्राम वन समिति के सदस्य बैठक के समय उपस्थिति सदस्यों में से किसी एक सदस्य को बैठक कार्यवाहियों की का संचालन करने के लिये सरपंच के रूप में चुन सकते हैं ।

(4) इन नियमावली के अधीन सरपंच को सौंपें गये कर्तव्यों का निवर्हन करने के लिए सरपंच को प्रबन्धन समिति की स्वीकृति की प्रत्याशा में ग्राम वन/पंचायती वन निधि से एक हजार रूपये तक व्यय करने और इस सीमा तक अग्रिम धनराशि का आहरण करने की शक्ति होगी ।

नियम 28 का संशोधन 12 मूल नियमावली के नियम 28 (1 ) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात् 378

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

स्तम्म-1

स्तम्भ-2

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम

प्रत्येक प्रबन्धन समिति के लिये एक ग्राम वन/पंचायती वन निधि की स्थापना की जायेगी और निम्न स्रोतों से प्राप्त आय उसमें जमा की जायेगी:-

1. वन उपज के विक्रय से प्राप्त धनराशि ।

प्रत्येक प्रबन्धन समिति के लिये एक ग्राम वन/ पंचायती वन निधि की स्थापना की जायेगी और निम्न स्रोतों से प्राप्त आय उसमें जमा की जायेगी ।

2. सरकारी अनुदान/ धनराशि (वन विभाग तथा अन्य राजकीय विभाग , केन्द्र तथा वाह्य पोषित योजनाएं) । 3. अन्य किसी स्रोतों (जैसे CSR) से प्राप्त अनुदान अथवा धनराशि ।

1. वन उपज के विक्रय से प्राप्त राशि ।

2. अनुदान । सरकारी

उपरोक्त स्रोतों से प्राप्त धनराशि को प्रबन्धन समिति के नाम पोस्ट ऑफिस , राष्ट्रीयकृत बैंक, अनुसूचित बैंक, सहकारी बैंक में बचत खाता खोलकर धनराशि जमा की जायेगी और इनका संचालन सरपंच और ग्राम वन/ पंचायती वन के सचिव द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा ।

3. अन्य किसी स्रोतों से राजस्व । प्राप्त

पूर्व नियमावलियों के अन्तर्गत प्रबन्धन हेतु गठित समिति/ निकाय के प्रतिभाग की कलेक्टरों के पास उपलब्ध अप्रयुक्त धनराशि बिना किसी विलम्ब के प्रबन्धन समिति के नाम पोस्ट ऑफिस राष्ट्रीयकृत बैंक, अनुसूचित बैंक, सहकारी बैंक में बचत खाता खोलकर जमा की जायेगी और इनका संचालन सरपंच और ग्राम वन/पंचायती वन के सचिव द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा ।

नियम 29 का संशोधन 13 मूल नियमावली के नियम 29 (2) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमानं नियम के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम

विद्यमान नियम भाग 1 ]

379 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

प्रबन्धन समिति द्वारा वन पंचायत के लेखा का रख-रखाव एवं लेखा प्रक्रिया ग्राम पंचायतों में अपनायी जा रही लेखा पद्धति की भाँति किया जायेगा ।

प्रबन्धन समिति को दी जाने वाली धनराशि का भुगतान सरपंच या सचिव द्वारा इस हेतु अधिकृत किसी सदस्य को किया जायेगा और धन प्राप्त करने वाले व्यक्ति द्वारा इसके लिये रसीद फार्म संख्या-2 में प्राप्ति रसीद दी जायेगी ।

नियम 30 का संशोधन 14 मूल नियमावली के नियम 30 (3 ) में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियमं के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित'नियम

शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश के क्रम में धनराशि का भुगतान प्रबन्धन समिति के सरपंच एवं सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों द्वारा जारी किये गये चैकों द्वारा किया जायेगा।

500 रूपये से अधिक धनराशि का भुगतान प्रबन्धन समिति के सरपंच एवं सचिव के संयुक्त हस्ताक्षरों द्वारा जारी किये गये चैकों द्वारा किया जायेगा ।

नियम 54 का संशोधन| 15 मूल नियमावली के नियम 54 में नीचे स्तम्भ-1 में दिये गये विद्यमान नियम के स्थान पर स्तम्भ-2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्

स्तम्भ-2

स्तम्भ-1

विद्यमान नियम

एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम

राज्य स्तर पर ग्राम वनों के प्रबन्धन की समीक्षा, समन्वय , मार्ग- दर्शन तथा नीति निर्धारण हेतु राज्य स्तरीय परामर्शदात्री समिति की संरचना निम्न प्रकार होगी:-

1. माननीय मंत्री, वन, उत्तराखण्ड सरकार- अध्यक्ष

2.प्रमुख सचिव/ सचिव वन एवं पर्यावरण- उपाध्यक्ष

उत्तराखण्ड शासन

3. प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) सदस्य

4. प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत सदस्य

5. सचिव, राजस्व विभाग उत्तराखण्ड शासन- सदस्य

6. सचिव, पंचायती राज, उत्तराखण्ड शासन- सदस्य

7. सचिव, शहरी विकास , उत्तराखण्ड शासन- सदस्य

राज्य स्तर पर ग्राम वनों के प्रबन्धन की समीक्षा एवं नीति निर्धारण हेतु राज्य परामर्शदात्री समिति की संरचना निम्न प्रकार होगी:- 1. वन मंत्री- अध्यक्ष 2.जिला परामर्शदात्री समितियों के समस्त जिला समन्वयक -सदस्य

8. सचिव, वित्त, उत्तराखण्ड शासन सदस्य

3. सचिव, ग्राम्य

9. मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल मण्डल सदस्य

विकास विभाग,

10. मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊँ भण्डल सदस्य

उत्तरांचल शासन 380

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1 -सदस्य

11.मुख्य वन संरक्षक, वन पंचायत एवं सामुदायिक वानिकी उत्तराखण्ड- सदस्यसचिव

4. सचिव वन, उत्तरांचल शासन -सदस्य

5. सचिव, राजस्व, उत्तरांचल शासन-सदस्य

उक्त सदस्यों के अतिरिक्त समिति आवश्यकतानुसार पंचायत्ती वन/ वन पंचायत के प्रतिनिधि तथा पंचायती वन/ वन पंचायत के हित में कार्य करने वाले सरकारी व गैर सरकारी व्यक्ति अथवा संस्थाओं को सहयोजित सदस्य के रूप में मनोनीत करेंगे ।

6. प्रमुख वन संरक्षक (ग्राम वन)- सदस्य सचिव

समिति पंचायती वनों के सुधार एवं वन पंचायतों के सुदृढ़ीकरण हेतु नीतिगत एवं संस्थागत व्यवस्था की समीक्षा करेगी एवं आवश्यक मार्गदर्शन करेगी । विभिन्न विभागों के बीच तथा हितभागी जनता, बाजार एवं सरकार के बीच समन्वय व्यवस्था की समीक्षा करेगी एवं नीति निर्धारण करेगी । समिति की बैठक वर्ष में कम से कम एक बार आहूत की जायेगी ।

इस समिति की बैठक वर्ष में कम से कम एक बार यथासम्भव माह मई अथवा जून में आहूत की जायेगी, जिसमें ग्राम वनों के प्रबन्धन एवं नीति निर्धारण सम्बन्धी समस्त बिन्दुओं पर चर्चा की जायेगी ।

आज्ञा से ,

रमेश कुमार सुधांशु, प्रमुख सचिव ।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अनुभाग -1

अधिसूचना

14 मार्च , 2024 ई ०

संख्या 363 / XXVIII- 1 / 01 ( 38 ) 2014 टी0 सी0-3 - उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम , 2015 (अधिनियम संख्या -18 , वर्ष 2015 ) के प्रस्तर-5 (1 ) तथा 6 (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए , डा० वाई ०एस० थपलियाल , एकता बिहार, सहस्त्रधारा रोड, देहरादून को उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड का अध्यक्ष नामित किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं ।

2- अध्यक्ष पद पर डा० थपलियाल की पदावधि उक्त अधिनियम की धारा 8 (1 ) में निहित प्राविधानानुसार उनकी तैनाती की तिथि से 06 वर्ष अथवा 70 वर्ष की आयु पूर्ण करने तक, जो भी पहले हो , तक होगी ।

आज्ञा से ,

डा० आर० राजेश कुमार, सचिव ।

भाग 1 ]

381 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

नियोजन अनुभाग -1

" उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति-2024" के प्रख्यापन के सम्बन्ध में

15 मार्च , 2024 ई ०

शासनादेश संख्या 138 / एक (05) / 2024 / XXVI / 2024-

उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति -2024 382

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

विषय-सूची

1 प्रस्तावना 383

2 नीति का उद्देश्य 383-384

3 प्रेरक दर्शन 384-387

4 दृष्टि, लक्ष्य एवं उद्देश्य 387-388

5 नीति की वैधता 389

6 फोकस क्षेत्र पात्रता 390-394

7 नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन 394-398

8 नीति का क्रियान्वयन 398-400

9 अनुलग्नक- परिभाषाएँ 400-401 383 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

1. प्रस्तावना

वर्ष 2000 में गठित उत्तराखण्ड भारतीय राज्यों में पूर्ण जीडीपी के संदर्भ में (आधार - वित्तीय वर्ष 21-22) 20 वीं तथा प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में (आधार वित्तीय वर्ष 21-22 ) 12 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है । अपने गठन के प्रथम दशक में राज्य ने प्रभावशाली विकास दर प्राप्त की है, जो मुख्य रूप से पूंजी- सघन विनिर्माण विकास से प्रेरित है । सेवा क्षेत्र , जो राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (वर्तमान मूल्यों) में 40% का योगदान प्रदान करता है, ने विगत 5 वर्षों में 8.5% से 9% सांकेतिक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर ) पर उच्चतम वृद्धि दिखाई है । यह विकास पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं जैसी ज्ञान गहन सेवाओं द्वारा किया गया है ; तथा समान रूप से व्यापार, संचार एवं परिवहन जैसी श्रम- गहन सेवाओं द्वारा समर्थित है ।

" सशक्त उत्तराखण्ड" की परिकल्पना को साकार करने हेतु यह आवश्यक है कि राज्य सेवा क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करे । ऐसे विभिन्न सेवा क्षेत्र हैं जहां उत्तराखण्ड को अपने स्थान , परिदृश्य एवं संस्कृति के संदर्भ में प्राकृतिक लाभ प्राप्त है । उत्तराखण्ड प्रचुर प्राकृतिक सुंदरता, विशाल पर्वत श्रृंखलाओं, आच्छादित वन , सार्वकालिक नदियों, निर्मल हरित वातावरण तथा शीतल जलवायु से समृद्ध है । धार्मिक परंपराओं तथा आयुर्वेदिक प्रथाओं में इसका समृद्ध इतिहास है । इस पृष्ठभूमि में, उत्तराखण्ड में पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)/ (आईटीईएस ) , डेटा सेंटर, पारंपरिक औषधीय पद्धतियों, आवासीय विद्यालयों, फिल्म एवं मीडिया शूटिंग तथा साहसिक खेलों जैसे रणनीतिक सेवा क्षेत्रों में तीव्र आर्थिक विकास प्राप्त करने की वृद्ध संभावनाएं हैं । इसके अतिरिक्त, राज्य के अंतर्गत उच्चतम मानक की स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु द्वितीयक एवं तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के संवर्धन की आवश्यकता है ।

2. नीति का उद्देश्य

जैसे ही अर्थव्यवस्था खाद्य एवं खनिजों के प्राथमिक उत्पादन में प्रचुरता प्राप्त कर लेती है, तथा विनिर्माण गतिविधि निर्यात में वृद्धि के साथ घरेलू मांग को पूर्ण करने में सक्षम हो जाती है, ऐसे परिदृश्य में अर्थव्यवस्था स्वाभाविक रूप से आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु सेवाओं पर निर्भर हो जाती है । जैसे ही अर्थव्यवस्था खाद्य एवं खनिजों के प्राथमिक उत्पादन में प्रचुरता प्राप्त कर लेती है, तथा विनिर्माण गतिविधि निर्यात में वृद्धि के साथ घरेलू मांग को पूर्ण करने में सक्षम हो जाती है , ऐसे परिदृश्य में अर्थव्यवस्था स्वाभाविक रूप से आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान 384

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1 करने हेतु सेवाओं पर निर्भर हो जाती है । भारत की अर्थव्यवस्था में सेवाओं / तृतीयक क्षेत्र का योगदान 1990 में 40% था, जो वर्तमान में 55% हो गया है । इस तीव्र वृद्धि हेतु विभिन्न कारक, जैसे सॉफ्टवेयर सेवाओं में उत्कर्ष , एफडीआई प्रवाह , वित्तीय बाजारों की बहुमुखी वृद्धि, घरेलू पर्यटन में अप्रत्याशित वृद्धि, उन्नत शिक्षा एवं स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर ध्यान , प्रगतिशील डिजिटल अर्थव्यवस्था , रियल एस्टेट सघनीकरण , आदि ने प्रभावित किया है ।

आरम्भिक दशक में विनिर्माण क्षेत्र में तेजी के साथ - साथ सेवा क्षेत्र ने उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की है । राज्य की अवस्थिति एवं परिदृश्य इसे विशिष्ट सेवा क्षेत्रों हेतु लाभप्रद स्थिति में रखता है- सर्वाधिक सुसंगत उदाहरणों में विद्यालय , आयुर्वेदिक रिसॉर्ट, डेटा केंद्र , फिल्म स्टूडियो आदि शामिल हैं । अतः उत्तराखण्ड के विकास का अगला अध्याय सेवा क्षेत्र से आना चाहिए । अतः उत्तराखण्ड के विकास का अगला अध्याय सेवा क्षेत्र से आना चाहिए ।

उत्तराखण्ड ने निवेशकों की सहभागिता को सुगम बनाने हेतु पहले से ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) नीति, स्टार्ट-अप नीति, पर्यटन नीति, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति, फिल्म नीति, मेगा औद्योगिक तथा निवेश नीति जैसी विभिन्न योजनाएं आरम्भ की हैं । ये नीतियां पूंजी निवेश , अन्य राजकोषीय प्रोत्साहन, विपणन एवं संवर्धन, संस्थागत समर्थन आदि के लिए विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करती हैं । अतः सेवा क्षेत्र हेतु विभिन्न उप-क्षेत्रों के अनुरूप एक व्यापक नीति बनाने की आवश्यकता है । इस आलोक में, उत्तराखण्ड शासन द्वारा , नियोजन विभाग ("विभाग " या "प्राधिकरण ") के माध्यम से कार्य करते हुए, उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति ("नीति") प्रस्तावित की गयी है ।

3. प्रेरक दर्शन

नीति का सिद्धांत वृहद्, प्रतिष्ठित प्रतिभागियों द्वारा प्रमुख परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाकर केंद्रित सेवा क्षेत्रों में लक्षित विकास को सक्षम करना है जो व्यापक रोजगार उत्पन्न करने में सहायक होगा ।

3.1 फोकस सेवा क्षेत्र

उत्तराखण्ड सरकार का आशय निम्नलिखित " केंद्रित सेवा क्षेत्रों में उद्यमों के विकास का समर्थन करना है । इन क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, क्योंकि वे राज्य के प्राकृतिक लाभों हेतु सर्वाधिक उत्तरदायी हैं, तथा उत्तराखण्ड ब्रांड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे । 3.1.1 स्वास्थ्य देखभाल सुदृढ़ आर्थिक विकास के कारण उत्तराखण्ड की जनसंख्या (क्षणिक जनसंख्या सहित) में वृद्धि अपेक्षित है । इसके दृष्टिगत , राज्य के अंतर्गत विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं स्थापित करने की आवश्यकता है ।.

भाग 1 ]

385 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

क. संचालकः वृहद् जलग्रहण जनसंख्या; प्रमुख स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं की न्यूनतम उपस्थिति

ख. लक्ष्यः तृतीयक देखभाल अस्पताल (मल्टी स्पेशियलिटी/ सुपर स्पेशियलिटी) की स्थापना

3.1.2 कल्याण (वैलनेस) एवं पारंपरिक चिकित्सा उत्तराखण्ड में आयुर्वेद /योग / पारंपरिक उपचार/ वेलनेस केंद्रों का सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे राज्य में स्थापित करने हेतु प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वेलनेस तथा पारंपरिक उपचारात्मक (हीलिंग) ब्रांडों के सहयोग से और अधिक विस्तारित किया जा सकता है । उत्तराखण्ड को आयुर्वेद , पारंपरिक चिकित्सा तथा वेलनेस के क्षेत्र में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने का सुअवसर है ।

क. संचालकः भारत सरकार का ध्यान आयुष पद्धतियों के संवर्धन पर केंद्रित है; पारंपरिक औषधीय पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद एवं योग के साथ उत्तराखण्ड का मजबूत सम्बन्ध तथा उत्कृष्ट हरित , शांतिपूर्ण एवं मौलिक स्थल शीर्ष मान्यता प्राप्त वेलनेस संचालकों को आकर्षित करने हेतु उपयुक्त हैं ।

ख. लक्ष्यः जीवन शैली (लाइफ स्टाइल) केंद्र, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा एवं पारंपरिक चिकित्सा, आयुष केंद्रों की स्थापना ।

3.1.3 शिक्षा उत्तराखंड प्रमुख विद्यालयों का केंद्र है । इस विरासत को आगे बढ़ाने तथा राज्य के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तर के प्रतिष्ठित किंडरगार्टन से 12 वीं कक्षा (K-12) तक तथा उच्च शिक्षण संस्थानों को आकर्षित करने का अवसर है । ऐसे शिक्षा क्षेत्रों की स्थापना हेतु नए स्थानों का पता लगाया जा सकता है ।

क. संचालकः देहरादून, मसूरी एवं नैनीताल में विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों का सशक्त उन्नतिशील पारिस्थितिकी तंत्र

ख. लक्ष्यः उच्च शिक्षण संस्थान तथा किंडरगार्टन से 12 वीं कक्षा ( K- 12) विद्यालयों की स्थापना

3.1.4 फिल्म, मीडिया एवं मनोरंजन फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए , उत्तराखण्ड ने एक फिल्म नीति की संस्थापना की है । यह नीति मुख्य रूप से राज्य में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहित करने की दिशा में केंद्रित है । प्रोडक्शन स्टूडियो तथा फिल्म सिटी को प्रोत्साहित कर उत्तराखण्ड की श्रेष्ठ्ता को और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है । इससे राज्य में फिल्म एवं मीडिया से आर्थिक योगदान में तेजी से वृद्धि होगी । इसके अतिरिक्त, राज्य स्थानीय निवासियों तथा पर्यटकों पर लक्षित मनोरंजन के साधनों को बढ़ावा देना चाहेगा ।

386

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

क. संचालकः अद्वितीय पृष्ठभूमि एवं स्थल, सुगमता, ग्रीष्म माह में आउटडोर शूटिंग हेतु शीतल जलवायु, प्रगतिशील फिल्म एवं ओटीटी मीडिया

ख. लक्ष्यः फिल्म सिटी, पोस्ट-प्रोडक्शन एवं एनीमेशन स्टूडियों, पारिवारिक मनोरंजन केंद्र ( एफईसी) जैसे मनोरंजन तथा वाटर पार्क , आदि ।

3.1.5 खेल उत्तराखण्ड में पेशेवर साहसिक खेलों के संवर्धन तथा ऐसे खेलों में प्रशिक्षण हेतु एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में उभरने के लिए उपयुक्त वातावरण है । इसमें पर्वतारोहण तथा स्कीइंग में पूर्व से ही प्रशिक्षण संस्थान हैं । इन खेलों में पेशेवर अकादमियाँ स्थापित करने, विश्व स्तरीय प्रशिक्षकों को आकर्षित करने तथा सर्वोत्तम उपकरण एवं सुविधाएँ प्रदान करने की आवश्यकता है ।

क. संचालकः लक्षित खेलों हेतु उत्तराखण्ड में सर्वोत्तम सुगमता है । इन खेलों में पहले से ही शौकीनों/ अर्ध- पेशेवरों की बड़ी संख्या में उपस्थिति है ।

ख. लक्ष्यः पर्वतारोहण , जल आधारित खेल (कयाकिंग , राफ्टिंग , कैनोइंग) , शीतकालीन खेल (स्कीइंग ; स्नोबोर्डिंग , आइस स्केटिंग) , शूटिंग , बैडमिंटन तथा मुक्केबाजी ।

3.1.6 सूचना प्रौद्योगिकी/ सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवाएँ उत्तराखण्ड में पूर्व से हीं एक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति है, जो राज्य में छोटी सूचना प्रौद्योगिकी इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन देने हेतु तैयार है । तथापि, पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में गतिवृद्धि हेतु, राज्य में बड़े आईटी प्रतिभागियों को आकर्षित करने की आवश्यकता है ।

क. संचालकः उत्तराखण्ड को अच्छी संयोजकता, उत्तर भारत में बड़े प्रतिभा निकाय तथा सबसे मंहत्वपूर्ण उत्कृष्ट जलवायु एवं परिदृश्य से लाभ मिलता है ।

ख. लक्ष्यः एंकर आईटी कार्यालय, बड़े प्रारूप के प्रशिक्षण परिसर , जी.सी.सी।

3.1.7 डेटा केंद्र – डिजिटल खपत में वृद्धि , 5 जी विस्तार , क्लाउड सिस्टम , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , स्वचलन , आदि में उभरती प्रौद्योगिकियों के कारण भारत में डेटा केंद्रों की क्षमता में तेजी से वृद्धि अपेक्षित है । उत्तराखण्ड इस क्षेत्र में वृहद निवेश की क्षमता धारित करता है ।

क. संचालकः उत्तराखण्ड शीतल जलवायु (जो डेटा केंद्रों में शीतलन हेतु ऊर्जा की खपत को कम करता है) तथा प्रचुर मात्रा में हरित ऊर्जा क्षमता प्रदान करता है ।

ख. लक्ष्यः बड़े प्रारूप वाले डेटा पार्क , छोटी डेटा इकाइयाँ ।

भाग 1 ]

387 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

3.1.8 कौशल विकास उत्तराखण्ड के विकास हेतु कौशल विकास महत्वपूर्ण हैं । उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) की स्थापना को प्रोत्साहित करने से विशेषीकृत शिक्षा, आयुष, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलेगा । यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था को उन्नत करने तथा एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने में सहायक होगी ।

3.2 प्रतिष्ठित निजी प्रतिभागियों को सम्मिलित करना

उत्तराखण्ड को वृद्ध परियोजनाओं/ प्रमुख प्रतिभागियों को आकर्षित करके केंद्रित सेवा क्षेत्रों में निवेश आरम्भ करने की आवश्यकता है ताकि वे स्थिरक के रूप में कार्य कर सकें तथा समग्र पारिस्थितिकी तंत्र का संचालन कर सकें । यह रणनीति उत्तराखण्ड को होने वाले लाभों को सर्वोत्तम रूप से प्रदर्शित करेगी , उत्तराखण्ड की प्रतिष्ठा का निर्माण करेगी , तथा इस क्षेत्र में और निवेश को आकर्षित करेगी ।

3.3 स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहित करना

सरकार स्वीकार करती है कि इस नीति के माध्यम से प्रोत्साहित की जा रही परियोजनाओं से स्थानीय जनसँख्या हेतु रोजगार के अवसर उत्पन्न होने चाहिए, साथ ही रोजगार क्षमता में सुधार हेतु प्रशिक्षण कौशल प्रदान करने के मार्ग भी प्रशस्त होने चाहिए । इस नीति का लक्ष्य स्थानीय रोजगार को सुविधाजनक बनाने, संतुलित विकास सुनिश्चित करने तथा स्थानीय नागरिकों हेतु जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए तंत्र स्थापित करना है ।

4. दृष्टि, लक्ष्य एवं उद्देश्य

4.1 दृष्टि वक्तव्य

" उत्तराखंड के आर्थिक विकास के आगामी चरण को प्रोत्साहन देने हेतु राज्य के विभिन्न प्राकृतिक आधिक्य का लाभ उठाते हुए सेवा क्षेत्र में विकास का लाभ प्राप्त करना " ।

4.2लक्ष्य (मिशन)

क. केंद्रित सेवा क्षेत्रों में उत्तराखण्ड के सहज लाभों का लाभ उठाना तथा प्रमुख राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों को आकर्षित करके इसे एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करनाः।

ख. निवेशक-अनुकूल अवसंरचना का निर्माण करके, क्षेत्र- विशिष्ट मुद्दों से निपटकर तथा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार अनुरूप प्रोत्साहन प्रदान करके उत्तराखण्ड में निवेश को सुविधाजनक बनाना ।

388

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

ग . पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण को गतिशीलता प्रदान करने हेतु वृहद् परियोजनाओं का पूंजीकरण , स्थानीय जनसँख्या की रोजगार क्षमता बढ़ाना तथा उत्तराखण्ड में सेवा अर्थव्यवस्था के विकास में वृद्धि हेतु प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन प्रदान करना।

4.3 उद्देश्य

उत्तराखण्ड सरकार पर्यावरणीय सुरक्षा एवं स्थिरता संबंधी विचारों के अधीन राज्य में केंद्रित सेवा क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देना चाहती है । इस संदर्भ में, सरकार केंद्रित सेवा क्षेत्रों को समर्पित आर्थिक केंद्रों के विकास को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगी , उन्हें स्थापित करने एवं विकसित करने तथा आवश्यक प्रतिभा पूल विकसित करने हेतु सहायता प्रदान करेगी ।

इस संदर्भ में, नीति के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:

क. राज्य में केंद्रित सेवा क्षेत्र परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के निवेश को सुविधाजनक बनाना ।

ख . नवीन केंद्रित सेवा क्षेत्र केंद्रों के विकास का समर्थन करना जो राज्य में शहरी विकास हेतु बीज के रूप में कार्य करेगा ।

ग. नवीन सेवा क्षेत्र / आर्थिक केन्द्रों हेतु अत्याधुनिक सतत अवसंरचना तैयार करना ।

घ. समावेशी सेवा क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना तथा स्थानीय समुदायों को लाभ का समान वितरण सुनिश्चित करना ।

ङ. विभिन्न सेवा क्षेत्रों में मार्गों का अनुसरण कर, उत्तराखण्ड के आर्थिक विकास में विविधता एवं गतिशीलता लाना ।

च. अविकसित क्षेत्रों में निवेश को सुविधाजनक बनाकर संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना ।

छ. केंद्रित सेवा क्षेत्रों में संस्थागत क्षमता तथा उच्च मूल्य वाले उत्पादक रोजगार अवसरों का निर्माण करना ।

ज. केंद्रित सेवा क्षेत्रों में मंजूरी को सरल बनाना तथा एकल खिड़की प्रणाली द्वारा समर्थित एक सक्षम व्यावसायिक वातावरण बनाना ।

भाग 1 ]

389 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

5. नीति की वैधता

यह नीति 31 दिसंबर , 2030 तक या नई नीति द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने तक प्रभावी रहेगी । उत्तराखण्ड सरकार इस नीति की अवधि को आवश्यकता पड़ने पर बढ़ा या घटा सकती है ।

इस नीति के तहत प्रोत्साहन केवल उसी उत्तराखंड सेवा क्षेत्र नीति की धारा 6 में उल्लिखित परियोजनाओं के लिए लागू होंगे , जो इस नीति की अधिसूचना के बाद और इसकी वैधता अवधि के भीतर एकल खिड़की मंजूरी के माध्यम से सैद्धांतिक मंजूरी के लिए आवेदन करते हैं और प्राप्त करते हैं । जो परियोजनाएं पहले से ही निर्माणाधीन हैं या नीति अधिसूचना के समय सभी वैधानिक मंजूरी और अनुमति प्राप्त करने के बाद ग्राउंडिंग के लिए तैयार हैं, वे इस नीति के तहत लाभ के लिए अनुमन्य नहीं होंगी ।

नोट- उत्तराखण्ड की एमएसएमई नीति (2015 ) , मेगा औद्योगिक एवं निवेश नीति (2021 ) , स्टार्ट अप नीति (2018 ) , आईटी नीति (2018 ), फिल्म नीति (2019 ), पर्यटन नीति (2023 ) अथवा उत्तराखण्ड सरकार की अन्य नीतियों के अंतर्गत फोकस सेवा क्षेत्रों हेतु चिन्हित कोई भी प्रोत्साहन प्रभावी रहेगा । इस नीति के साथ किसी भी अधिव्यापन (ओवरलैप) की स्थिति में, लाभार्थी लागू नीतियों में से किसी एक के अधीन प्रोत्साहन के चयन हेतु स्वतंत्र होगा ।

390

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

6. फोकस क्षेत्र पात्रता

फोकस क्षेत्र

पात्रता

6.1 स्वास्थ्य देखभाल

1) मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 200 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

अथवा

2) एकल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख.. पर्वतीय क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 25 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

6.2 आतिथ्य सत्कार

1 ) पात्र राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी कोड)

क. 55101 होटल /मोटल, पर्यटक रिसॉर्ट, हेरिटेज होटल

ख. 82300 एमआईसीई या सम्मेलन केंद्र

(2) पात्र परियोजनाएँ

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 200 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

आतिथ्य इकाइयाँ, जिन्हें इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन प्राप्त होता है, वे उत्तराखण्ड पर्यटन नीति 2023 के अधीन पूंजीगत सब्सिडी हेतु पात्र नहीं होंगी । तथापि, ऐसी परियोजनाएँ उत्तराखण्ड पर्यटन नीति 2023 के अधीन लागू अन्य सभी सब्सिडी / प्रोत्साहन द्वारा लाभान्वित हो सकती हैं।

भाग 1 ]

391 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत)

1 ) पात्र राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी कोड)

क. एनआईसी कोड 86901 योग , आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा, अथवा

6.3 वैलनेस एवं पारंपरिक चिकित्सा आयुर्वेद /योग / प्राकृतिक चिकित्सा/ समग्र चिकित्सा केंद्र

ख. अन्य आयुष पद्धतियां प्राकृतिक चिकित्सा , यूनानी , रेकी, होम्योपैथी या कोई अन्य पारंपरिक चिकित्सा या उनका संयोजन , अथबा

ग . एनआईसी कोड 87200 स्वास्थ्य देखभाल विषहरण , पुनर्वास , हेतु आवासीय

घ. एनआईसी कोड 86100 सैनिटोरियम

2) पात्र परियोजनाएँ

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र - ईसीए में 5 वर्षों में 25 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

1 ) कक्षा-12 तक के विद्यालय

6.4 कक्षा-12 तक के विद्यालय

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 25 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

6.5

1) महाविद्यालय /विश्वविद्यालय

महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र - ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ध्यान दें कि केवल प्रथम वर्ष में न्यूनतम 500 छात्रों की प्रवेश क्षमता वाली परियोजनाएँ ही इस नीति के अधीन प्रोत्साहन की पात्र होंगी

6.6 फिल्म, मीडिया एवं मनोरंजन

1 ) फिल्म सिटी, पोस्ट-प्रोडक्शन एवं एनीमेशन स्टूडियो, पारिवारिक मनोरंजन केंद्र (एफईसी) जैसे मनोरंजन और वाटर पार्क, आदि ।

क. मैदानी क्षेत्र 5 वर्षों के अंतर्गत ईसीए में 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली फिल्म, मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की 392

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र 5 वर्षों के भीतर ईसीए में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली फिल्म, मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र की परियोजनाएँ

6.7 खेल

1 ) योग्य इकाइयाँ खेल सुविधाएँ एवं प्रशिक्षण अवसंरचना (खेल अकादमियाँ, आदि)

2) निवेश

क. मैदानी क्षेत्र 5 वर्षों के अंतर्गत ईसीए में 25 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ खेल सुविधाएं एवं प्रशिक्षण बुनियादी ढांचा

ख. पर्वतीय क्षेत्र 5 वर्षों के अंतर्गत ईसीए में 15 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ खेल सुविधाएं एवं प्रशिक्षण अवसंरचना

6.8 आईटी/ आईटीईएस

1) पात्र इकाइयां आईटी परिसर एवं जी.सी.सी

2) निवेश

क. मैदानी क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले आईटी परिसर एवं जीसीसी तथा 1,000 कर्मियों का न्यूनतम स्थायी प्रत्यक्ष रोजगार ।

ख. पर्वतीय क्षेत्र आईटी परिसर एवं जीसीसी, ईसीए में 5 वर्षों के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश तथा 500 कर्मियों का न्यूनतम स्थायी प्रत्यक्ष रोजगार ।

6.9 डेटा केंद्र

1) डेटा केंद्र

क. मैदानी क्षेत्र - ईसीए में 5 वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले डेटा केंद्र

ख. पर्वतीय क्षेत्र ईसीए में 5 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले डेटा केंद्र

6.10 कौशल विकास

1) पात्र इकाइयाँ निम्नलिखित क्षेत्रों में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र (सीओई):

क. उन्नत विनिर्माण

ख. आयुष भाग 1 ]

393 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

ग. निर्माण

घ. ड्रोन

ङ . इलेक्ट्रानिक्स

च. खाद्य प्रसंस्करण

छ. हस्तशिल्प

ज. स्वास्थ्य देखभाल

झ . औद्यानिकीः फल, सब्जियाँ , जड़ी- बूटियाँ , फूल

ञ. आतिथ्य सत्कार

2) निवेश

क. मैदानी क्षेत्र 5 वर्षों के अंतर्गत ईसीए में 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

ख. पर्वतीय क्षेत्र 5 वर्षों के अंतर्गत ईसीए में 50 करोड़ रुपये से

अधिक निवेश वाली परियोजनाएं

(क) इस नीति के तहत पूंजीगत सब्सिडी की गणना के लिए विचार किए जाने वाले अधिकतम निवेश को उपरोक्त तालिका में परिभाषित ई० सी० ए ० में न्यूनतम सीमा क्षेत्र- वार निवेश का 3 (तीन) गुना पर कैप किया जाएगा , जो प्रत्येक परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की अधिकतम कैपिंग के अधीन होगा ।

(ख) इस नीति के अधीन कुल पूंजीगत सब्सिडी लाभ नीति की अवधि के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक सीमित किया जाएगा ।

(ग) वार्षिक सैद्धांतिक सब्सिडी वितरण अर्थात नीति के अन्तर्गत किसी विशिष्ट वित्तीय वर्ष में अनुमोदित परियोजनाओं के लिए वितरित की जाने वाली कुल सब्सिडी की धनराशि निम्नलिखित सीमाओं के अधीन होगीः

वित्तीय वार्षिक सैद्धांतिक सब्सिडी

वर्ष

राशि (करोड़ रूपये में)

FY25

250

FY26

500

FY27

500

FY28

500

FY29

250

FY30

250

FY31

250 394

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

(घ) सब्सिडी संवितरण प्रत्येक वर्ष के लिए " पहलें आओ पहले पाओ" के आधार पर किया जाएगा अर्थात वार्षिक सब्सिडी संवितरण की सीमा के अन्तर्गत सब्सिडी के लिए पहले आवेदन करने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी ।

(ड़) यदि कोई परियोजना किसी वर्ष के अन्तर्गत वार्षिक सब्सिडी संवितरण की सीमा से बाहर हो जाती है, तो उसे अगले वर्ष के लिए प्रतीक्षा सूची में रखा जाएगा ।

(च) सब्सिडी का भुगतान पॉलिसी की धारा 7 के अन्तर्गत परिभाषित पूर्व - निर्धारित भुगतान कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा ।

(छ) परियोजनाओं की स्वीकृति और अनुमन्य सीमाओं के अन्तर्गत सब्सिडी संवितरण के लिए सम्बन्धित विभाग उत्तरदायी होगा । अनुमन्य सीमा से किसी भी प्रकार के विचलन की अनुमति ' उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुविधा एवं मंजूरी अधिनियम -2012 ' के अधीन गठित राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एस ० एल ० ई० सी ० ) के अनुमोदन के उपरान्त ही दी जाएगी ।

(ज) नीति की अवधि के लिये निर्धारित अधिकतम पूंजीगत सब्सिडी रू0 2500 करोड़ की सीमा से किसी भी प्रकार के विचलन की स्थिति में यथा प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा निर्णय लिया जायेगा ।

(झ) इस नीति के सापेक्ष प्राप्त होने वाली प्रतिक्रियाओं के आधार पर समग्र सब्सिडी की सीमा और वार्षिक संवितरण सीमा को भविष्य में संशोधित किया जा सकेगा और ऐसे संशोधन करने की शक्तियां राज्य सरकार में निहित होंगी ।

(ञ) यदि परियोजना हेतु भूमि, सरकार द्वारा बिड करके बाजार दर के आलोक में प्रदान की जाती है तो पूंजीगत सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जायेगा, किन्तु यदि परियोजना हेतु अन्य माध्यमों से भूमि आवंटित की जाती है तो पूंजीगत सब्सिडी प्रदान किये जाने पर , भविष्य में बनने वाली भूमि आवंटन नीति के आलोक में राज्य सरकार द्वारा विचार किया जायेगा ।

7. नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन

विभिन्न क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूर्ण करने वाली योग्य परियोजनाएं , निम्नानुसार पूंजीगत सब्सिडी हेतु पात्र होंगीः

7.1 निवेशक 5 वर्षों में योग्य पूंजीगत संपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) के 25% के बराबर पूंजीगत सब्सिडी हेतु पात्र होगा तथा इसके द्वारा लाभान्वित हो सकता है ।

7.2 निवेशक को निम्नलिखित सविस्तृत 2 पूंजीगत सब्सिडी विकल्पों में से चुनने का विकल्प दिया जाएगाः

7.2.1 विकल्प 1: निर्माण चरण के दौरान पूंजीगत सब्सिडी से सम्बद्ध निवेश के पूंजीगत सब्सिडी राशि का भुगतान सरकार द्वारा निम्नलिखित लक्ष्य लक्ष्यों की पूर्ति के अधीन समान किश्तों में किया जाएगा ।

क. किस्त 1 प्रस्तावित निवेश का 20% पूर्ण करना (प्रतिबद्ध )

ख. किस्त 2

प्रस्तावित निवेश का 40% पूर्ण करना (प्रतिबद्ध)

गः किस्त 3 प्रस्तावित निवेश का 60 % पूर्ण करना ( प्रतिबद्ध )

घ. किस्त 4 प्रस्तावित निवेश का 80 % पूर्ण करना (प्रतिबद्ध) भाग 1]

395 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

च. अंतिम किस्त (किस्त 5) केवल तभी देय होगी जब निवेशक दोनों 5 वर्षों के अंतर्गत सी.ओ.डी प्राप्त कर लेता है तथा पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) का 100 % पूर्ण कर लेता है । सी.ओ.डी का दावा करने हेतु, निवेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परियोजना के वाणिज्यिक संचालन आरम्भ करने हेतु समस्त अनुमोदन मौजूद हैं ।

i . यदि 5 वर्षों के अंत में, पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में वास्तविक निवेश पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) से कम है , किन्तु फिर भी क्षेत्रीय सीमा से अधिक है (धारा 6 देखें) तथा सीओडी प्राप्त कर लिया गया है, तो निवेशक आनुपातिक रूप से कम पूंजीगत सब्सिडी हेतु पात्र होगा तथा अंतिम किस्त को उपयुक्त रूप से समायोजित किया जाएगा । यदि पहली 4 किस्तों में अतिरेक सब्सिडी प्रदान कर दी गई है, तो निवेशक को प्राप्त अतिरेक पूंजीगत सब्सिडी को निर्गत होने से उस तिथि तक आरबीआई रेपो दर + 4 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ वापस करना होगा । 5 साल की अवधि पूरी होने के बाद 2 महीने के अंतर्गत ऐसा करने में विफल रहने पर प्रदर्शन प्रतिभूति(बैंक गारंटी) को भुना लिया जाएगा ।

ii. यदि 5 वर्षों के अंत में, पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में वास्तविक निवेश पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध ) के बराबर या उससे अधिक है, किन्तु सीओडी प्राप्त नहीं किया गया है, तो विभाग / प्राधिकरण को यह निर्धारित करने का अधिकार होगा कि सीओडी प्राप्त करने के लिए समय विस्तार की अनुमति दी जाय अथवा नहीं । यदि विभाग / प्राधिकरण विस्तार नहीं देता है, तो निवेशक को सब्सिडी किस्त जारी होने की तारीख से आरबीआई रेपो दर + 4 प्रतिशत प्रति वर्ष के ब्याज के साथ अब तक प्राप्त किसी भी पूंजीगत सब्सिडी को वापस करना होगा ।

यदि 5 वर्षों के अंत में, पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में वास्तविक निवेश पात्र पूंजीगत परिसंपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) से कम है तथा क्षेत्रीय सीमा (धारा 6 देखें) से भी कम है, तो निवेशक को अब तक प्राप्त. किसी भी पूंजीगत सब्सिडी को निर्गत होने की तिथि से आरबीआई रेपो दर + 4% प्रति वर्ष ब्याज के साथ वापस करना होगा । 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने के पश्चात 2 माह के अंतर्गत ऐसा करने में विफलता के परिणामस्वरूप निष्पादन प्रतिभूति का नकदीकरण हो जाएगा ।

396

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

iv . 1-4 किस्त निर्गत करने हेतु निवेशक द्वारा निष्पादन प्रतिभूति (बैंक गारंटी) जमा की जाएगी । ऐसी प्रतिभूतियाँ प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध ) के 100% पूर्ण होने के 3 माह बाद तक वैध रहेंगी । निष्पादन प्रतिभूति इस बात की गारंटी होगी कि योग्य पूंजीगत परिसंपत्तियों में प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) 5 वर्षों के अंतर्गत प्राप्त कर लिया जाता है ।

7.2.2 विकल्प 2: निवेश पूर्ण होने तथा सीओडी की प्राप्ति के पश्चात पूंजीगत सब्सिडी का भुगतान - पूंजीगत सब्सिडी राशि का भुगतान सरकार द्वारा निम्नलिखित विवरण के अनुसार समान वार्षिक किश्तों में किया जाएगा । इस विकल्प के अंतर्गत सब्सिडी की गणना सैद्धांतिक अनुमोदन के पश्चात 5 वर्ष की अवधि के दौरान निवेशक द्वारा किए गए वास्तविक निवेश के आधार पर की जाएगी । यदि वास्तविक निवेश नीति की धारा 6 के तहत परिभाषित क्षेत्रवार न्यूनतम/ सीमा निवेश से कम है तो किसी प्रकार की सब्सिडी देय नहीं होगी ।

क. किस्त 1 वित्तीय वर्ष के अंत में कुल पूंजीगत सब्सिडी का 1/3 हिस्सा जिसमें पात्र परियोजना निवेश पूर्ण करती है एवं सीओडी प्राप्त करती है ।

ख किस्त 2 , 3 आगामी दो वित्तीय वर्षों के अंत में कुल पूंजीगत सब्सिडी का 1/3हिस्सा ।

i.. सीओडी का दावा करने हेतु, निवेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परियोजना के वाणिज्यिक संचालन आरम्भ करने के लिए समस्त अनुमोदन प्राप्त हैं ।

ii . यदि निवेशक इस विकल्प के अधीन पूंजीगत सब्सिडी का भुगतान चुनता है तो किसी निष्पादन प्रतिभूति (बैंक गारंटी ) की आवश्यकता नहीं होगी ।

iii. ईसीए में सभी निवेश प्रतिबद्धताएं उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुगमता एवं अनुज्ञापन अधिनियम, 2012 के अधीन सैद्धांतिक अनुमोदन की तिथि से 5 वर्ष के अंतर्गत की जानी हैं ।

iv . इस नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाली इकाईयों को उत्तराखण्ड सेवायोजन शासनादेश का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए ।

v इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन निजी भूमि तथा लोक निजी सहभागिता (पीपीपी)/ अन्य विधि पर निजी निवेशकों को पट्टे पर दी गई सरकारी भूमि पर लागू होगा ।

भाग 1 ]

-397 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

vi . राज्य सरकार तथा नियोजन विभाग , उत्तराखण्ड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) या किसी अन्य कुशल विभाग या प्राधिकरण के माध्यम से कार्य करते हुए , समय - समय पर सरकारी स्वामित्व वाली भूमि पार्सल की निविदा या नीलामी के माध्यम से निजी निवेशकों को आमंत्रित करेंगे । ऐसा इस नीति के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और विशिष्ट सेवा क्षेत्र के विकास की स्थापना को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा ।

vii ध्यान दें, नीति के अंतर्गत सब्सिडी की मात्रा की गणना निम्नानुसार की जाएगीः

अ. विकल्प 1 का लाभ उठाने वाली परियोजनाओं हेतु, धारा 6 में परिभाषित अधिकतम निवेश कैपिंग के अधीन प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) ।

ब . विकल्प 2 का लाभ उठाने वाली परियोजनाओं हेतु , धारा 6 में परिभाषित अधिकतम निवेश कैपिंग के अधीन वास्तविक निवेश ।

viii ई०सी० ए० में सभी निवेश प्रतिबद्धताएँ 'उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुविधा और निकासी अधिनियम -2012 ' के तहत सैद्धान्तिक मंजूरी की तिथि से 05 वर्ष के भीतर की जानी होगी ।

ix . इस नीति के तहत लाभ प्राप्त करने वाली परियोजनाओं को उत्तराखण्ड रोजगार सम्बन्धी शासनादेशों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा ।

x. इस नीति के तहत प्रोत्सहान निजी निवेशको को पट्टे पर दी गई निजी भूमि एवं सरकारी भूमि पर लागू होगा ।

xi . राज्य सरकार और नियोजन विभाग उत्तराखण्ड निवेश एवं संरचना विकास बोर्ड (यू० आई ०आई०डी०बी० ) या कोई अन्य कुशल विभाग या प्राधिकरण के माध्यम से कार्य करते हुये , समय - समय पर सरकारी स्वामित्व वाले भू- खण्ड की निविदा या नीलामी के माध्यम से निजी निवेशको को आमंत्रित करना । ऐसा इस नीति के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढावा देने व विशिष्ट सेवा क्षेत्र के विकास की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान करने के उदेश्य से किया जायेगा ।

XII समस्त औपचारिकताओं एवं अभिलेखों को पूर्ण करने के उपरान्त यदि पूंजीगत सब्सिडी की वार्षिक किश्तों में 40 दिनों से अधिक का विलम्ब होता है , तो सरकार विलंबित अवधि हेतु आरबीआई रेपो रेट के अनुसार 398

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

ब्यांज का भुगतान करेगी तथा ऐसे विलम्ब के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए आवश्यक कार्यवाही करेगी । विस्तृत पूंजीगत सब्सिडी दावा प्रक्रिया को नीति दिशानिर्देशों के भाग के रूप में अधिसूचित किया जाएगा ।

xiii नीति के तहत सब्सिडी का लाभ उठाने वाली परियोजनाओं को सीओडी के बाद कम से कम 25 वर्षों तक चालू रहना होगा । यदि निर्धारित 25 वर्ष की अवधि से पहले संचालन में कटौती की जाती है, तो निवेशक आनुपातिक सब्सिडी की प्रतिपूर्ति करने के लिए बाध्य होगा , जिसकी गणना सब्सिडी जारी होने की तारीख से अनिवार्य संचालन के शेष वर्षों की संख्या को 25 से विभाजित करके, आरबीआई रेपो दर + 4 प्रतिशत प्रति वर्ष की लागू ब्याज दर के साथ की जाएगी । जहां सब्सिडी का लाभार्थी इस धारा में प्रावधान के अनुसार सब्सिडी चुकाने में विफल रहता है, इसे राजस्व वसूली अधिनियम , 1890 के तहत भूमि- राजस्व के बकाया के रूप में वसूली योग्य माना जाएगा और तदनुसार वसूल किया जाएगा ।

8. नीति का क्रियान्वयन

उत्तराखण्ड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड, उत्तराखण्ड सरकार इस नीति हेतु क्रियान्वयन एवं प्रशासनिक एजेंसी होगी । नियोजन विभाग तथा यूआईआईडीबी उत्तराखण्ड सेवा क्षेत्र नीति के अंतर्गत परियोजनाओं एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिशानिर्देश एवं अपेक्षित रूपरेखा तैयार करेंगे ।

8.1 क्रियान्वयन तंत्र

इस नीति के अंतर्गत अनुमोदन एवं संवितरण हेतु नीति उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुविधा तथा मंजूरी अधिनियम 2012 के अंतर्गत पूर्व गठित प्रमुख संस्थानों का उपयोग करेगी ।

8.1.1 कोई भी निवेशक जो इस नीति के अंतर्गत प्रोत्साहन एवं सब्सिडी का लाभ उठाना चाहता है , उसे परियोजना पंजीकृत करानी होगी तथा साथ ही एकल खिड़की निकासी प्रणाली ( https://investuttarhand.uk.gov.in/) पर सैद्धांतिक रूप से अनुमोदन हेतु आवेदन करना होगा ।

8.1.2 इसके अतिरिक्त, नीति गैर- एमएसएमई इकाइयों/ परियोजनाओं के सैद्धांतिक ** मूल्यांकन हेतु एमएसएमई इकाइयों / परियोजनाओं के सैद्धांतिक अनुमोदन के लिए उत्तराखण्ड एकल खिड़की अधिनियम के अधीन गठित वर्तमान जिला स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (डीएलईसी) तथा उत्तराखण्ड एकल खिड़की अधिनियम के अधीन गठित राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एसएलईसी ) का उपयोग करेगी ।

399 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

8.1.3 सब्सिडी का दावा भी एकल खिड़की प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा । दावों के अनुमोदन तथा अनुदान / सब्सिडी के संवितरण हेतु तंत्र को नीति दिशानिर्देशों के भाग के रूप में अधिसूचित किया जाएगा ।

8.2 ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा एकल खिड़की मंजूरी

राज्य सरकार द्वारा व्यावसायिक माहौल में सुधार लाने के उदेश्य से लागू किए गए कार्यनीतिक हस्तक्षेपों से इस नीति से उल्लेखनीय लाभ होगा ।

8.2.1 सूचना एवं पारदर्शिता सक्षमकर्ताओं तक पहुंचः राज्य ने अपने एकल खिड़की पोर्टल पर 55 विभागों में 329 निवेशक संबंधी सेवाओं का एक व्यापक संकलन किया है । इसके अतिरिक्त , सरकार ने निवेशकों से संबंधित प्रश्नों के समाधान हेतु एक हेल्प लाइन भी प्रारम्भ की है ।

8.2.2 पर्यावरण पंजीकरण सक्षमकर्ताः प्रक्रियाओं की एक विस्तृत सूची तथा आवेदन हेतु आवश्यक सभी दस्तावेज उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं । सरकार ने आवेदनों के अनुमोदन / अस्वीकृति हेतु समयसीमा भी तय कर दी है ।

8.2.3 एकल खिड़कीः एकल खिड़की निकासी प्रणाली (एसडब्ल्यूसीएस) का गठन " उत्तराखंड उद्यम एकल खिड़की सुगमता और अनुज्ञापन अधिनियम 2012 " (उत्तराखंड अधिनियम संख्या 05, 2013) के अंतर्गत औद्योगिक एवं अन्य इकाइयां स्थापित / संचालित करने हेतु समस्त आवश्यक अनुमोदन / अनुज्ञप्ति / अनुज्ञा आदि प्रदान करने के लिए किया गया था । एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद निवेशक को सभी आवश्यक मंजूरी समयबद्ध तरीके से प्रदान की जाएंगी ।

8.3 इस नीति के क्रियान्वयन से संबंधित शिकायत निवारण

राज्य सरकार के पास यह अधिकार सुरक्षित हैः

8.3.1 नीति अवधि के दौरान किसी भी समय फोकस सेवा क्षेत्रों की सूची को आवश्यकतानुसार अद्यतन करें ।

8.3.2 नीति के प्रावधान के अंतर्गत, जब भी आवश्यक हो, किसी भी प्रावधान (प्रावधानों) में संशोधन करें, जिसमें किसी भी प्रोत्साहन एवं सब्सिडी में संशोधन या वापसी शामिल है ।

400

उत्तराखण्ड मजट, 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1 8.3.3 इस नीति के तहत पात्र परियोजनाओं को समर्थन की मंजूरी/ वितरण से संबंधित मामलों की समीक्षा करें ।

8.3.4 इस नीति के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा- निर्देश बनायें / संशोधित करें ।

8.3.5 कसी भी टकराव की स्थिति में, एसएलईसी प्रचलित नीति/ दिशानिर्देशों के अनुसार निर्णय ले सकता है तथा इस प्रकार लिया गया निर्णय सभी संबंधितों हेतु अंतिम एवं बाध्यकारी होगा तथा इसका अनुपालन संबंधित विभाग / पक्षकारों हेतु अनिवार्य होगा।

9. परिभाषाएँ

9.1 योग्य पूंजीगत परिसंपत्तियां

"योग्य पूंजीगत परिसंपत्ति" या "ईसीए " का तात्पर्य इसमें सम्मिलित स्थल- स्तरीय अवसंरचना (बाड़ लगाना, आंतरिक सड़कों का निर्माण, एवं अन्य संरचनात्मक सुविधाए) ; संरचनाएं एवं भवन; संयंत्र, मशीनरी एवं उपस्कर , हैंडलिंग उपकरण; यांत्रिक , विद्युतीय एवं नलसाजी स्थापन, फिक्स्चर, फर्नीचर एवं फिटिंग; अपशिष्ट उपचार सुविधाओं, ट्रांसफार्मर, जनरेटर आदि सहित उपयोगिताओं, तथा किसी भी स्थापना शुल्क सहित परिसर में उपयोग हेतु स्थापित अन्य सहायक सुविधाओं से है ।

9.1.1 ईसीए में निम्नलिखित शामिल नहीं होंगेः

क. भूमि

ख. अमूर्त परिसंपत्ति, जिसमें बिना किसी सीमा के, बौद्धिक संपदा अधिकार एवं सद्भावना शामिल है

9.1.2 समस्त पूंजीगत परिसंपत्तियों का भुगतान किया जाना चाहिए तथा उनका स्वामित्व परियोजना/ निवेशक के पास होना चाहिए ।

9.1.3 समस्त पूंजीगत परिसंपत्तियों का उपयोग एवं स्थापना केवल परियोजना स्थल के भीतर ही की जानी चाहिए । ईसीए में योग्य निवेश में निम्नलिखित शामिल नहीं होंगेः क. निर्माण पूर्व व्यय तथा परामर्शदाता की लागत

ख. पूंजीगत ब्याज

ग. कार्यशील पूँजी

9.1.4 विस्तार परियोजनाओं के सम्बन्ध में, उपरोक्त उल्लिखित गणना के अनुसार , ईसीए को केवल विस्तार घटक हेतु गिना जाएगा ।

भाग 1 ]

401 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

9.2 सीओडी का तात्पर्य प्रदान की गई सेवाओं के प्रारम्भ / व्यावसायिक पैमाने पर परिचालन की शुरूआत से है ।

9.3 पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्र की परिभाषा

श्रेणी आच्छादित क्षेत्र/ स्थान

क. पर्वतीय क्षेत्र

जनपद पिथौरागढ, उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, रूद्रप्रयाग, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल के अन्तर्गत सम्पूर्ण क्षेत्र ।

जनपद नैनीताल एवं देहरादून में औसत समुद्र तल से 800 मीटर से ऊपर स्थित क्षेत्र ।

ख. मैदानी क्षेत्र

जनपद देहरादून एवं नैनीताल में औसत समुद्र तल से 800 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र।

जनपद हरिद्वार एवं उधम सिंह नगर के अंतर्गत सम्पूर्ण क्षेत्र ।

9.4 इस दस्तावेज़ में उत्तराखण्ड सेवायोजन शासनादेश का तात्पर्य शासनादेश संख्या 367 / आईडी/ सेवायोजन / 2005-06 दिनांक 25 अक्टूबर 2005 एवं शासनादेश संख्या .429 / आईडी/ सेवायोजन/ 2005-06 दिनांक 19 नवंबर 2005 से होगा ।

9.5 प्रस्तावित निवेश (प्रतिबद्ध) का तात्पर्य सब्सिडी हेतु आवेदन करते समय निवेशक द्वारा घोषित निवेश राशि, जिसे "उत्तराखंड उद्यम एकल खिड़की सुगमता और अनुज्ञापन अधिनियम 2012 के अंतर्गत सैद्धांतिक अनुमोदन की तिथि से 5 वर्ष के भीतर पात्र परियोजना के लिए ईसीए के विकास हेतु किये जाने वाले निवेश से है ।

9.6 वास्तविक निवेश का अर्थ निवेशक द्वारा पात्र परियोजनाओं के विकास हेतु ईसीए के विकास के लिए " उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुविधा और निकासी अधिनियम 2012 " के अन्तर्गत सैद्धान्तिक सहमति की तिथि से 5 वर्ष के भीतर किया गया वास्तविक निवेश है ।

आर० मीनाक्षी सुन्दरम्, सचिव ।

402

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

Enclosure of GO Number- 138 /ΕΚ ( 05 ) /2024/XXVI /2024

Dated 15th March , 2024

Uttarakhand Service Sector Policy- 2024 भाग 1]

403 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

1 PREAMBLE .

404

2 PURPOSE OF THE POLICY 404

3 DRIVING PHILOSOPHY .404-406

4 VISION , MISSION & OBJECTIVES . 406-407

5 VALIDITY OF POLICY

407

6 ELIGIBILITY BY FOCUS SECTOR .

408-410

7 INCENTIVES UNDER THE POLICY 410-411

8 IMPLEMENTATION OF POLICY

411-412

9 DEFINITIONS ...

412-413 404

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

1 PREAMBLE

Uttarakhand , formed in year 2000 , is the 20th largest economy (absolute GDP terms ; FY22) and 12th largest ( per capita terms ; FY22) among Indian states . The State has had an impressive growth rate in the first decade of its formation, largely propelled by capital - intensive manufacturing growth . The service sector, contributing ~40% oftheState'sGSDP ( current prices) has shown the highest growth , at 8.5 % to 9 % nominal CAGR over last 5 years . The growth has been led by knowledge intensive services like tourism , education , health , financial services; and equally anchored by labour- intensive services like trade, communication , and transport .

In order to realize the vision of " Sashakt Uttarakhand" , it is imperative that the State focusses on accelerating service sector growth . There are numerous service sectors where Uttarakhand enjoys natural advantages , in terms of its location , landscape, and culture . Uttarakhand has been blessed with abundant natural beauty, towering mountains , dense forests , perennial rivers, serene green surroundings , and cool climate. It has rich history in religious traditions and ayurvedic practices . In this backdrop , Uttarakhand holds great potential to achieve rapid economic growth in strategic service sectors like tourism, IT/ ITES , Data Centres , traditional medicinal practices , residential schools , film & media shooting , and adventure sports . Further, there is need to augment the secondary & tertiary healthcare system to ensure that the highest standard of healthcare facilities is available within the State .

2 PURPOSE OF THE POLICY

Service sector serves as the cornerstone of progress in any developed economy. As the economy becomes sufficient in primary production of food & minerals , and as the manufacturing activity is able to meet domestic demandwith exports driving growth - the economy naturally latches onto services for providing the necessary boost. Contribution of services / tertiary sector in India's economy has grown from ~ 40 % in 1990% to ~ 55 % presently. Many factors have led to this rapid growth - software services boom , FDI inflows , multi-fold growth offinancial markets , explosion in domestic tourism , focus on better education and healthcare facilities, growing digital economy, real estate densification , etc.

Service sector, along with manufacturing spurt in the initial decade , has propelled the Uttarakhand economy. Thelocation and landscape of the State positions it advantageously for select service sectors - most pertinent examples include schools , ayurvedic resorts , data centres , film studios , etc. Hence, the next chapter of Uttarakhand's growth has to come from the service sector.

Uttarakhand has already instituted multiple schemes to facilitate investor participation , such as MSME Policy, Start- up Policy, Tourism Policy, IT Policy, Film Policy, Mega Industrial and Investment Policy. These policies provide various incentives towards capital investment , other fiscal incentives , marketing and promotion, institutional support , etc. Still there is a need to have a comprehensive policy for the service sector, tailored for various sub -sectors . In this light, Government of Uttarakhand , acting thorough Department of Planning, ("Department" or the "Authority" ) has introduced this Uttarakhand Service Sector Policy (the " Policy" ) .

3 DRIVING PHILOSOPHY

The philosophy of the Policy is to enable targeted growth in Focus Service Sectors by facilitating marquee projects by large, reputed players which will help generate widespread employment.

a . Focus Service Sectors

TheGovernment of Uttarakhand intends to support the development of enterprises in the following " Focus Service Sectors " . These sectors have been shortlisted, as they are most amenable to State's natural advantages, and would be instrumental towards building the Uttarakhand brand.

भाग 1 ]

405 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

i. Healthcare - The population of Uttarakhand ( including transient population ) is expected to grow on theback of strong economic growth . Thus , there is a need to establish world - class healthcare facilities within the State .

roviders Ο Drivers: Large catchment population ; minimal presence of major healthcare providers Ο Target: Tertiary care Hospitals ( Multi Speciality / Super Speciality)

ii. Wellness & Traditional Medicine - Uttarakhand has strong ecosystem of ayurveda / yoga / traditional treatment / wellness centres, which can be further expanded by inviting reputed national and international wellness and traditional healing brands to set up in the State. There is an opportunity to establish Uttarakhand as a leading international hub in ayurveda , traditional medicine and wellness .

Ο Drivers: Government of India's focus on promoting Ayush practices; strong association of Uttarakhand with traditional medicinal practices , especially ayurveda and yoga ; excellent green, peaceful , and pristine locations for attracting top rated wellness operators

Ο Target : Lifestyle Centres, Ayurveda , Naturopathy & Traditional Healing, Ayush Centres

Education - Uttarakhand is a hub for premier schools . There is an opportunity to build upon this legacy and attract K- 12 & Higher education institutes of repute to the State - both national and international .

Newlocations can be explored to set up such education zones .

Drivers: Strong thriving ecosystem of schools and universities in Dehradun , Mussoorie and Nainital

Target: Higher Education institutes & K- 12 schools

iv. Film, Media & Entertainment - In order to promote film shooting, Uttarakhand has instituted a Film Policy. The Film Policy is majorly focussed towards promoting film shooting in the State. There is a need to further capitalize on Uttarakhand's advantage by incentivizing production studios and film cities . This would exponentially increase economic contribution from film and media in the State. Additionally , the Statewould like to promote entertainment avenues in the State targeted at locals and tourists .

Drivers: Uniquebackdrops and location , good accessibility, cool climate for outdoor shooting in summer months , growing film , and OTT media

Target: Film city, Post- production and Animation Studios, Family Entertainment Centres ( FECs) likeAmusement and Water Parks, etc.

V. Sports- Uttarakhand possesses the right ingredients to promote professional adventure sports and emerge as an international hub for training in such sports . It already has training institutes in mountaineering, and skiing . There is need to establish professional academies , attract world-class trainers and provide best equipment & facilities in these sports.

Ο Target: Mountaineering, Water- based sports ( Kayaking , Rafting, Canoeing ) , Winter sports (Skiing; Snowboarding, Ice skating), Shooting, Badminton and Boxing.

Ο Drivers: Uttarakhand has the best accessibility for the target sports . It already has significant footfalls of amateurs / semi - professionals in these sports .

vi . IT/ ITES - Uttarakhand already has an IT Policy, geared towards promoting establishment of smaller IT units in the State. However, for accelerating the ecosystem development, there is a need to attract largeIT players in the State.

Drivers : Uttarakhand benefits from good connectivity, large talent pool in North India, and mostimportantly excellent climate and landscape .

Target Concepts : Anchor IT Offices , Large format Training Campuses, GCCS 406

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

vii . Data Centre India is expected to witness exponential growth in Data Centre capacity , driven by increase in digital consumption , 5G rollout, clouds systems , emerging technologies in Artificial Intelligence, automation , etc. Uttarakhand is aptly positioned to capture a sizeable share of investment activity projected in the sector .

Drivers : Uttarakhand provides cool climate ( which lowers energy consumption towards coolingin data centres) and abundant green power capacity

Target Concepts: Large format Data Parks , smaller Data Units

viii . Skilling - Skill development is crucial for Uttarakhand's growth . Encouraging the establishment of Centres of Excellence ( CoEs) will drive specialized education , fostering expertise in sectors like AYUSH , Food Processing , Tourism , etc. This initiative promises to uplift the State's economy and ensure a sustainable future.

b . Bring- in Reputed Private Players

Uttarakhand is poised to kick - start investments in Focus Service Sectors by attracting large projects / major players to act as anchors and drive the overall ecosystem . This strategy would best showcase the benefits Uttarakhand has to offer, build Uttarakhand's reputation , and attract further investments .

c. Boost Local Employment

Government acknowledges that the projects being incentivized through this Policy, should generate employment opportunities for local population , as well as create avenues to impart training skills to improve employability. This Policy aims to establish mechanisms to facilitate local employment , ensure balanced development and improve quality of life for local citizens.

4 VISION, MISSION & OBJECTIVES

Vision Statement

"To leverage growth in the Services sector to fuel the next phase of Uttarakhand's economic growth, leveraging the State's many natural advantages".

Mission

a . Capitalize on Uttarakhand's innate advantages in Focus Service Sectors and establish it as a premier hub by attracting major national / international private sector players .

b . Facilitate investments in Uttarakhand by creating investor - friendly infrastructure, tackling sector - specific issues, and offering tailored incentives as per sector needs .

c. Capitalize on large projects to kick- start ecosystem creation , provide training and incentives to drive employability of local population and accelerate service economy growth in Uttarakhand .

Objectives

TheGovernment of Uttarakhand wants to promote the development of Focus Service Sectors in the State, subject to environmental safety and sustainability considerations . In this context , the Government would actively encourage the development of economic hubs dedicated to the Focus Service Sectors , provide support for setting up and growing the same, and developing the necessary talent pool .

In this context , the objectives of the Policy are as below:

a . To facilitate private sector investments into Focus Service Sectors in the State.

b. To support development of new Focus Services Sector hubs that would act as seeds for urban development in the State .

भाग 1 ]

407 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

c. To create state - of -art sustainable infrastructure for the new service sector / economic hubs .

d. To promote inclusive service sector growth and ensure equitable distribution of benefits to local communities.

e. To diversify and accelerate Uttarakhand's economic growth , by pursuing avenues in multiple services sectors .

f. To promote balanced regional development by facilitating investments in underdeveloped areas .

g. To build institutional capacity and high - value productive employment opportunities in Focus Service Sectors .

h . To ease clearances in Focus Service Sectors and to create an enabling business environment facilitated by a singlewindow system .

5 VALIDITY OF POLICY

ThisPolicy shall remain in effect till Dec 31st, 2030, or until superseded by a new policy . The Government of Uttarakhand may extend or reduce the period of this Policy as and when required .

Incentives under this Policy shall only be applicable for projects mentioned in the Section 6 of the Policy , which apply for and achieve In Principle Approval through a Single Window Clearance after the notification of this Policy and within its validity period . Projects which are already under construction or ready for grounding after having secured all statutory clearances and permission at the time of Policy notification shall not be applicable for benefits under the Policy.

Note: Any incentives identified for Focus Services Sectors under Uttarakhand's MSME Policy (2015), Mega Industrial and Investment Policy(2021), Start Up Policy (2018), IT Policy (2018), Film Policy(2019), Tourism Policy (2023) or other policies of the Government of Uttarakhand shall continue to be applicable . In case of any overlap with this Policy, the beneficiary shall be free to choose incentives under any one of the applicable policies .

408

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

6 ELIGIBILITY BY FOCUS SECTOR

FocusSector

Eligibility

1) Multi - speciality Hospital

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 200 Cr in 5 years b) Hill Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr in 5 years Healthcare

2) Single super- speciality Hospital

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr in 5 years

Hill Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 25 Cr in 5 years b)

1) Eligible NICCodes

a ) 55101 - Hotels / Motels, Tourist Resorts, Heritage Hotels

b) 82300 - MICE or convention centres

2) Eligible Projects

Hospitality

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 200Cr in 5 years b) Hilly Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 100Cr in 5 years

Hospitality projects, which get incentive under this Policy shall not be eligible for Capital Subsidy under Uttarakhand Tourism Policy 2023. However, such projects may avail all other subsidies/ incentives as applicable under the Uttarakhand Tourism Policy2023.

1) Eligible NICCodes

a) NIC Code 86901 - Yoga , Ayurveda and Naturopathy, OR

b) Other Ayush Practices - Naturopathy, Unani , Reiki , Homeopathy or any other -traditional medicine or a combination thereof, OR

NIC Code 87200 - Residential Healthcare for detoxification , rehabilitation , OR c)

d) NIC Code86100 - Sanatorium

Wellness and Traditional Medicine Ayurveda / Yoga / Naturopathy / Holistic Healing Centres

2) Eligible Projects

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50Cr in 5 years b) HillyAreas - Projects with investments in ECA greater than INR 25 Cr in 5 years

1) K- 12 Schools

K-12school

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr in 5 years b) Hill Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 25 Cr in 5 years

1) College / University

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 100 Cr in 5 years b) Hill Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr in 5 years College/ University

Note: Only institutes with 1st year student intake capacity of minimum 500 students shall be eligible for incentives under this Policy

1) Film city, Post- production and Animation Studios , Family Entertainment Centres( FECs) likeAmusement and Water Parks , etc.

Film, Media& Entertainment

a) Plain Areas - Film , media , and entertainment sector projects with investments in ECA greater than INR 100 Cr within 5 years

b) Hill Areas - Film , media , and entertainment sector projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr within 5 years

1) Sports facilities and training infrastructure (sports academies , etc. )

a) Plain Areas - Sports facilities & training infrastructure with investments in ECA Sports

greater than INR 25 Cr within 5 years

b) HillAreas - Sports facilities & training infrastructure with investments in ECA greater thanINR 15Cr within 5 years

IT/ ITES

1) IT Campuses & GCCs भाग 1]

409 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

FocusSector

Eligibility

a) Plain Areas -IT Campuses & GCCs with investments in ECA greater than INR 100 Cr within 5 years and minimum permanent direct employment of 1,000 personnel b) Hill Areas -IT Campuses & GCCs with investments in ECA greater than INR 50Cr within 5 years and minimum permanent direct employment of 500 personnel

1) Data Centres

Data Centres

a) Plain Areas - Data Centres with investments in ECA greater than INR 100 Cr in 5 years

b) Hill Areas - Data Centres with investments in ECA greater than INR 50 Cr in 5 years

1) Eligible Units - Centres of Excellence ( CoEs) established in the following sectors :

a) Advanced Manufacturing

b) AYUSH

c) Construction

d) Dronės

e) Electronics

f) Food Processing

g) Handicrafts

Skilling

h) Healthcare

i)

Horticulture : Fruits, Vegetables , Herbs , Flowers

j) Hospitality

2) Eligible Projects

a) Plain Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 100 Cr within 5 years

b) Hill Areas - Projects with investments in ECA greater than INR 50 Cr within 5 years

a . The maximum investment to be considered for calculation of Capital Subsidy under this Policy shall be capped at 3 (three) times the minimum / threshold sector -wise investment in ECA defined in the table above; subject to a maximum Capital Subsidy of INR 100Cr per project .

b. Total Capital Subsidy incentive under the Policy shall be capped at INR 2,500 Cr for the duration of the policy.

c. Annual In -Principle Subsidy Approved, i.e. , total subsidy amount to be disbursed for projects approved within a specific year under the Policy, shall be subject to the following limits:

Annual In -Principle Subsidy Amount

Financial Year

(INR Cr)

FY25

250

FY26

500

FY27

500

FY28

500

FY29

250

FY30

250

FY31

250

d. The subsidy approval for each year shall be done on a first come first serve basis i.e. , projects applying first for in- principle approval under the Policy shall be given preference , subject to the annual approval limits .

e. In case a project falls outside the annual subsidy approval limit for a given year , it shall be waitlisted for the next year.

f. Subsidy payments shall be made as per pre - determined payment schedules defined under Section 7 of the Policy

g. It will be responsibility of the Department to sanction the projects and space disbursal of the subsidy within the given limits . Any deviations from the limits will be permitted after approval from the State Level Empowered Committee ( SLEC) , formed under the Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012 .

410

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

h . Any deviations from the limits of INR 2500 cr for the duration of policy , will be permitted after approval of State Government with due procedure .

i . The overall subsidy capping and Annual In - Principle Subsidy Approval limits may be modified in future depending on the response to the Policy and the powers to make such modifications shall be vested in the State Government .

j . The Capital subsidy incentive under the Policy shall be applicable to State Government land only if such land is allotted through competitive bidding process leading to the determination of prevalent market value of theland . In case State Government land is allotted through another process , the provision of Capital Subsidy shall be considered by the State Government with reference to the State's Land Allocation Policy to be formulated in future.

7 INCENTIVES UNDER THE POLICY

Eligible Projects , fulfilling eligibility conditions laid down in various sectors , shall be eligible for Capital Subsidy asbelow:

a. The investor shall be eligible for , and can avail , Capital Subsidy equivalent to 25% of Investment in Eligible Capital Assets in 5 years .

b. The Investor shall be given an option to choose amongst 2 Capital Subsidy options detailed below .

c. Option 1: Investment milestones linked Capital Subsidy during construction phase - The Capital Subsidy amount shall be paid by the Government in equal instalments subject to fulfilment of following milestones .

1. Instalment 1- completion of 20% of Proposed Investment ( Committed )

II . Instalment 2 - completion of 40% of Proposed Investment (Committed)

III . Instalment 3 - completion of 60% of Proposed Investment ( Committed)

IV. Instalment 4 - completion of 80 % of Proposed Investment (Committed )

V. The last instalment ( Instalment 5) shall be due and payable only when the investor attains / achieves COD and has completed 100 % of the Proposed Investment ( Committed ) in Eligible Capital Assets , bothwithin 5 years . For claiming COD , the investor should ensure that all approvals are in place for commencement of commercial operations of the project .

i. If at the end of 5 years , the Actual Investment in Eligible Capital Assets is less than Proposed Investment (Committed) in Eligible Capital Assets , but still higher than the sectoral threshold (seesection 6) and COD has been achieved, the investor would be eligible for proportionately lower capital subsidy and the last instalment would be suitably adjusted . In case excess subsidy hasbeen given in the first 4 instalments, the investor would be required to refund the excess capital subsidy received till date with interest at RBI Repo Rate + 4% per annum from date of release . Failure to do so within 2 months post completion of 5 -year period would result in performance security ( Bank Guarantee ) encashment .

ii. If atthe end of 5 years , the Actual Investment in Eligible Capital Assets is equal to or more than theProposed Investment (Committed) in Eligible Capital Assets , but COD has not been achieved , theDepartment / Authority wouldbe empowered to determine whether extension for achieving COD can be granted or not. In case the Department / Authority does not grant extension , the investor would be required to refund any capital subsidy received till date with interest of RBI Repo Rate + 4% per annum from dates of release of subsidy instalments .

If at the end of 5 years , the actual Investment in Eligible Capital Assets is less than Proposed Investment ( Committed ) in Eligible Capital Assets and is also lower than the sectoral threshold (seesection 6), the investor would be required to refund any capital subsidy received till date with interest at RBI Repo Rate + 4 % per annum from dates of release . Failure to do so within 2months post completion of 5-year period would result in performance security encashment .

iv. Performance security (Bank Guarantee ) would be submitted by the investor for release of Instalments1-4. Such securities would be valid for 3 months beyond the completion of 100% oftheProposed Investment ( Committed) . The performance security shall be a guarantee that Proposed Investment (Committed) in Eligible Capital Assets is achieved within 5 years .

411 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई 0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

d. Option 2: Payment of Capital Subsidy post completion of investment and attainment of COD -The Capital Subsidy amount shall be paid by the Government in equal annual instalments as detailed below. Subsidy under this option shall be calculated basis Actual Investment made by the investor during the 5 - year period postin -principle approval . No subsidy shall be payable in case the Actual Investment is less than the sector wiseminimum / threshold investments defined under section 6 of the Policy.

1. Instalment 1 One-third ( 1/3rd) of total Capital Subsidy at the end of financial year in which the eligible project completes investment and attains COD .

II . Instalment 2 and 3 - One - third ( 1/3rd ) of total Capital Subsidy each at the end of subsequent two financial years

i. For claiming COD , the investor should ensure that all approvals are in place for commencement of commercial operations of the project .

ii . No Performance security ( Bank Guarantee) shall be required if the Investor chooses payment ofCapital Subsidy under this option .

e. Note, under the Policy the quantum of subsidy shall be computed on

1. Proposed Investment (Committed ), subject to maximum investment capping defined in Section 6, for projects availing Option 1.

II . Actual Investment, subject to maximum investment capping defined in Section 6, for projects availing Option 2.

f. All Investment Commitments in ECA are to be made within 5 years from the date of in - principle approval under Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012.

g . Projects availing the benefits under this Policy should ensure implementation of Uttarakhand Employment GO.

h . Incentives under this Policy shall be applicable on private land and Government land leased to private investors .

i . The State Government and Department of Planning, acting through Uttarakhand Investment and Infrastructure Development Board ( UIIDB ) or any other proficient Department or Authority, shall from time to time invite private investors through tendering or auctioning of Government owned land parcels. This shall be done with the aim to promote private sector participation under this Policy and facilitate the establishment of specific service sector developments.

j . If the annual instalments of Capital Subsidy are delayed beyond 40 days from the date of completion of all documents of formalities, the Government would pay an interest of RBI Repo Rate on the delayed amount and also fixed the responsibility and take necessary action for such delay. Detailed Capital Subsidy claims process shall be notified as part of Policy guidelines .

k. Projects availing subsidy under the Policy shall have to remain operational for a minimum of 25 years post COD. If operations are curtailed before the stipulated 25 -year period, the investor will be obligated to reimburse the proportional subsidy, calculated based on the remaining number of years of mandated operations divided by 25, with an applicable interest rate of RBI Repo Rate + 4% per annum from the dates ofsubsidy release. Where the beneficiary of subsidy fails to repay the subsidy as provisioned in this section , it will be treated as recoverable as an arrear of land revenue under the Revenue Recovery Act 1890 and recovered accordingly.

8 IMPLEMENTATION OF POLICY

Uttarakhand Investment and Infrastructure Development Board, Government of Uttarakhand shall be the implementation and administrative agency for this Policy. Department of Planning and UIIDB shall formulate guidelines and institute requisite frameworks for effective implementation of projects & schemes under the Uttarakhand Service Sector Policy.

412

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई 0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

Implementation Mechanism

ThePolicy shall utilize key institutions already formed under the Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012 for approval and disbursements under this Policy.

a . Any investor who wishes to avail incentives and subsidies under this Policy must get the project registered and simultaneously apply for In - Principle Approval on the Single Window Clearance System (https://investuttarakhand.uk.gov.in/)

b . Further, the Policy will use existing District Level Empowered Committee ( DLEC) , formed under the Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012, for in - principle approval of MSME projects AND State Level Empowered Committee ( SLEC) , formed under the Uttarakhand Enterprises SingleWindow Facilitation and Clearance Act 2012 , for in - principle approval of non - MSME projects .

c. The Claim for subsidy shall also be made on the Single Window platform . Mechanism for approval of claims and grant/ disbursement of subsidy shall be notified as part of Policy Guidelines .

Easeof Doing Business and Single Window Clearances

The Policy will benefit from the strategic interventions that State Government has enacted aimed at improving thebusiness environment .

a . Access to Information and Transparency Enablers : The State has done a comprehensive compilation of 329 investor - related services across 55 departments on its single window portal . Further , the Government has also introduced a help line to address the investor related queries .

b. Environment Registration Enablers : A comprehensive list of procedures and all documents required for application are available on UEPPCB's website . The Government has also fixed a timeline for approval / rejection of applications .

c. Single Window: The Single Window Clearance System ( SWCS) was formed under " The Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012 " ( Uttarakhand Act No. 05 of 2013 ) to provide all the requisite clearances / licenses / permits etc. required to establish / operate industrial and other units . All necessary clearances shall be accorded to the investor in a time bound manner after the submission of requisite documents through the Single Window System .

Grievance Redressal related to Implementation of this Policy

The State Government reserves the right to:

a. Update the list of Focus Services Sectors as it sees fit, at any point during the Policy period .

b. Amend any provision ( s) including amendment or withdrawal of any of the incentives and subsidies , as and when necessary, under the provision of the Policy.

c. Review the matters regarding sanction / disbursement of support to eligible projects under this Policy. d.. Make/ amend the necessary guidelines for implementation of this Policy .

e. In case of any conflicts , the SLEC may take a decision in accordance with the prevailing policy / guidelines and the decision thus taken shall be final and binding on all concerned and its compliance shall be mandatory for the concerned department / parties .

9 DEFINITIONS

a. Eligible Capital Assets

"Eligible Capital Assets " or " ECA " shall mean and include site - level infrastructure ( fencing, construction of internal roads , and other basic infrastructure facilities ); structures & buildings ; plants , machinery & equipment, handling equipment ; mechanical , electrical & plumbing installations , fixtures, furniture & fittings ; utilities including waste treatment facilities, transformers , generators , etc. , and other support facilities installed for use in the premises including any installation charges.

भाग 1 ]

413 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

ECA shall not include:

Land

Intangible assets including, without limitation , Intellectual Property rights and goodwill .

All capital assets should have been paid for and should be owned by the project / investor .

All capital assets should be used and installed only within the Project Site . Eligible investment in ECA shall not include:

Pre-construction expenses and cost of consultant

Capitalized interest

Working capital

In case of Expansion projects , the ECA shall be counted only for the expansion component , as per the calculation outlined above .

b . COD means the commencement of services rendered / commencement of operation on a commercial scale.

c. Hill and Plain Regions Definition

Area / regions cove

Entire area under districts Pithoragarh , Uttarkashi , Chamoli , Champawat, Rudraprayag, Bageshwar, Almora , Pauri Garhwal, Tehri Garhwal .

Hilly areas

Areas lying above 800 m from mean sea level in districts Nainital and Dehradun

Areaslying under 800 m from mean sea level in districts Dehradun and Nainital

Plain areas

Entire area under districts Haridwar and Udham Singh Nagar

d. Uttarakhand Employment GO in this document shall mean GO no . 367 / ID / Employment / 2005-06 dated 25 October 2005 and GO no. 429 / ID / Employment / 2005-06 dated 19 November 2005.

e. Proposed Investment ( Committed) means the investment amount declared by the investor at the time of applying for subsidy, to be undertaken for development of ECA for the Eligible Project within 5 years from thedate of in - principle approval under Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012 .

f. Actual Investment means the actual investment made by the investor for development of ECA for the Eligible Project within 5 years from the date of in - principle approval under Uttarakhand Enterprises Single Window Facilitation and Clearance Act 2012 .

R. MEENAKSHI SUNDARAM , Secretary.

414

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

पर्यटन अनुभाग

अधिसूचना

विविध

15 मार्च , 2024 ई ०

संख्या- 199609 / 2024-भारत का संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा शक्ति का प्रयोग तथा इस विषय में विद्यमान समस्त नियमों और आदेशों का अधिक्रमण करके राज्यपाल , उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत इकाई राजकीय होटल मैंनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एण्ड एप्लाइड न्यूट्रीशन संस्थानों के विभिन्न पदों और उनमें नियुक्त व्यक्तियों की भर्ती तथा सेवा शर्तें विनियमित करने के लिए निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं :-

राजकीय होटल मैनेजमैन्ट एवं कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन संस्थान, देहरादून / अल्मोड़ा शैक्षणिक संवर्ग (राजपत्रित) सेवा नियमावली , 2024

भाग एक-सामान्य

1. संक्षिप्त नाम एंव प्रारम्भ

(1 ) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम राजकीय होटल मैनेजमैंट एण्ड कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन संस्थान , देहरादून/ अल्मोड़ा शैक्षणिक संवर्ग (राजपत्रित) संवर्ग सेवा नियमावली , 2024 है ।

2. सेवा की प्रास्थिति

सेवा से अभिप्रेत उत्तराखण्ड राजकीय होटल मैनेजमैन्ट एवं कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन संस्थान , देहरादून/ अल्मोड़ा की राजकीय सेवा है, जिसमें समूह ' क' व ' ख ' के पद सम्मिलित हैं ।

3. परिभाषायें

जब तक विषय या सन्दर्भ में कोई प्रतिकूल बात न हो इस नियमावली में:- (क) "नियुक्ति प्राधिकारी " से राज्यपाल अभिप्रेत है;

(ख) "भारत का नागरिक " से ऐसे व्यक्ति से है, जो संविधान के भाग - दो के अधीन 415 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भारत का नागरिक हो या भारत का नागरिक समझा जाता है;

:

(ग) "आयोग " से उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग अभिप्रेत है;

(घ) "संविधान " से भारत का संविधान अभिप्रेत है;

(ड.) "सरकार " से उत्तराखण्ड राज्य की सरकार अभिप्रेत है;

(च) "राज्यपाल " से उत्तराखण्ड का राज्यपाल अभिप्रेत है ;

(छ) "सेवा का सदस्य " से इस नियमावली के प्रारम्भ होने से पूर्व प्रवृत्त नियमों या आदेशों के अधीन मौलिक रूप से नियुक्त व्यक्ति अभिप्रेत है;

(ज) "भर्ती का वर्ष " से कलैण्डर वर्ष के जुलाई माह के प्रथम दिवस से आरम्भ होने वाली बारह मास की अवधि अभिप्रेत है।

(झ) " मौलिक नियुक्ति" से सेवा के संवर्ग में किसी पद पर ऐसी नियुक्ति अभिप्रेत है , जो तदर्थ नियुक्ति न हो और नियमानुसार चयन के पश्चात् की गई हो और यदि कोई नियम न हो , तो सरकार द्वारा जारी किये गये कार्यपालक अनुदेशों द्वारा तत्समय विहित प्रक्रिया के अनुसार चयन के पश्चात की गयी हो, तथा

(ञ) "प्रथम श्रेणी " से 60 प्रतिशत प्राप्तांक अभिप्रेत है;

(त) "संस्थान" से अभिप्रेत राज्य में स्थित राजकीय होटल मैनेजमैंट कैटरिंग 416

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन संस्थान देहरादून/ अल्मोड़ा से है ।

(थ) विभागाध्यक्ष से तात्पर्य राजकीय होटल मैनेजमैन्ट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन संस्थान , देहरादून / अल्मोड़ा के निदेशक /प्राचार्य से अभिप्रेत है ।

(द) "अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्" से मानव संसाधन विकास मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् अधिनियम, 1987 के अधीन गठित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के नोटिफिकेशन सं0-82 , दिनांक 01 मार्च, 2019 के मानकों (समय- समय पर यथासंशोधित) से अभिप्रेत है ।

भाग दो-संवर्ग

4. सेवा का संवर्ग:

(1 ) सेवा में अधिकारियों तथा उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या उतनी होगी जो समय- समय पर सरकार द्वारा निर्धारित की जाये ।

(2) सेवा में अधिकारियों तथा प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या जब तक उपधारा (1 ) के अधीन पारित आदेशों द्वारा परिवर्तन न किया जाय , उतनी होगी जो परिशिष्ट "क " में दी गयी है ।

परन्तु उपबन्ध यह है कि:

(क) नियुक्ति प्राधिकारी किसी पद को खाली छोड सकेंगे अथवा राज्यपाल किसी पद को इस प्रकार प्रास्थगित कर सकेंगे कि कोई व्यक्ति प्रतिपूर्ति का हकदार नहीं होगा । (ख ) राज्यपाल ऐसे स्थायी अथवा अस्थायी पद सृजित कर सकते हैं जैसा कि उचित समझें ।

417 भाग 1]

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भाग तीन - भर्ती एवं न्यूनतम अर्हताएं

5. भर्ती का स्रोत -उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के आधार पर सीधी भर्ती / प्रोन्नति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जायेगीः-

सीधी भर्ती द्वारा

(1) निदेशक / प्राचार्य

एसोसिएट प्रोफेसर

प्रोन्नति / सीधी भर्ती द्वारा ( 50 % -- 50 %)

(2)

सीधी भर्ती द्वारा

(3) असिस्टेंट प्रोफेसर

6. शैक्षणिक अर्हता-

सेवा में विभिन्न शैक्षणिक पदों की भर्ती के लिये अभ्यर्थी के पास निम्नलिखित अर्हतायें होनी

चाहिए:-

(क) शैक्षणिक/ शिक्षण स्टाफ :-

स्थिति

शैक्षणिक अर्हता

पद/वेतनमान

क्र. स.

1.

सीधी भर्ती के लिए :-

सीधी भर्ती

लेवल-14, प्रवेश

निदेशक /प्राचार्य वेतन-144200/-) (राज्य सरकार के अनुसार लेवल-15)

(क) पी ०एच ०डी० डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष (ख) पर्यवेक्षक / सह - पर्यवेक्षक के रूप में न्यूनतम दो सफल पी ० एच ०डी० मार्गदर्शन तथा एससीआई जर्नलों/ यूजीसी / अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में न्यूनतम ४ शोध प्रकाशन

(ग) शिक्षण/ शोध /उद्योग का न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव जिसमें से न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव प्रोफेसर के पद के समकक्ष पद पर हो । टिप्पणी:

1. यह पद 5 वर्ष के लिये संविदात्मक प्रकृति का होगा तथा कार्य निष्पादन के आधार पर इसे एक और अवधि के लिये बढाया जा सकता है ।

2. कार्य-निष्पादन मूल्यांकन संबद्ध विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त की गयी समिति के माध्यम से संचालित किया जायेगा ।

3. अंतिम अवधि की समाप्ति के उपरांत पदधारक अपने उस पूर्व पदनाम में अपने मूल संगठन में वापस पदभार ग्रहण कर लेगा जहां से वह प्रोफेसर / वरिष्ठ प्रोफेसर , जैसा भी मामला हो, के रूप में पदनाम के साथ आगे गया था ।

418

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

1. सीधी भर्ती के लिए :-

प्रोन्नति/ सीधी भर्ती द्वारा

2. एसोसिएट प्रोफेसर (लेवल-13ए 1 , प्रवेश वेतन--131400/-)

(क) प्रासंगिक क्षेत्र में पी०एच ०डी० डिग्री तथा प्रासंगिक क्षेत्र में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष

और

(खा) एससीआई जर्नलों/ यूजीसी / अ० भा०त ० शि० प० अनुमोदित जर्नलों की सूची में न्यूनतम कुल 6 शोध प्रकाशन

और

(ग) शिक्षण / शोध/ उद्योग में न्यूनतम 8 वर्ष का अनुभव जिसमें से न्यूनतम 2 वर्ष का पोस्ट पी.एच.डी. अनुभव होगा।

टिप्पणी : एचएमसीटी के मामले में , विभागाध्यक्ष के पद में अनिम्न प्रबंधकीय स्तर पर 8 वर्ष का उद्योग का अनुभव जिसमें किंसी 4 सितारा होटल अथवा ऊपर की श्रेणी में अथवा आतिथ्य सत्कार उद्योग /पर्यटन उद्योग में किसी समान पद पर 20 व्यक्तियों अथवा अधिक के दल का संचालन किया हो ।

2. पदधारकों की प्रोन्नति 'के लिए

क. प्रासंगिक क्षेत्र में पी.एच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष और

ख. अनुबंध- III (परिशिष्ट ' ख') अनुसार न्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाए पूर्ण की हों ।

और

ग. अपेक्षाओं के लिए निम्न वर्णित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो

सेट सहायक प्रोफेसर (चयन ग्रेड) के संवर्ग में अर्जित किये जाने के संख्या लिये

एससीआई

अनुभव (वर्षो में)

औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)

अभातशिप अनुमोदित जर्नलों/ यूजीसी/ जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन

1

3

2

5से < 8

2

33

1

8 से 10

सीधी भर्ती सीधी भर्ती के लिए अर्हताएं-

1. सहायक प्रोफेसर (लेवल -10 , प्रवेश वेतन-57700 / -) के लिए न्यूनतम अर्हताएं

3. असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक प्रोफेसर) (लेवल-10 , प्रवेश वेतन-57700/-) भाग 1 ]

419 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी (एच ०एम०सी०टी०) में न्यूनतम 4 वर्षीय स्नातक डिग्री और एच०एम०सी ०टी० अथवा प्रासंगिक विषय क्षेत्र में निष्णात डिग्री जिसमें से दोनों डिग्रियों में किसी एक में प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष

अथवा

होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी (एचएमसीटी) में न्यूनतम 4 वर्षीयं स्नातक डिग्री प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष में तथा किसी 4-सितारा होटल में सहायक प्रबंधक से अन्यून प्रबंधकीय स्तर अथवा आतिथ्य सत्कार उद्योग/ पर्यटन उद्योग में किसी समकक्ष पद पर न्यूनतम 5 वर्ष का प्रासंगिक अनुभव ।

2. सहायक प्रोफेसर के लिए अर्हताएं (वरिष्ठ मान, लेवल-11 , प्रवेश वेतन-68900/-)

पदधारकों की प्रोन्नति के लिए

(क ) सहायक प्रोफेसर के पद के लिए विनिर्दिष्ट अर्हताएं

और

(ख) अनुबंध -111 के अनुसार न्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाएं पूर्ण की हों

और

(ग) अपेक्षाओं के नीचे उल्लिखित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो

सहायक प्रोफेसर के संवर्ग में अर्जित किए जाने के

सेट संख्या

अतिरिक्त अर्हता

लिए

अनुभव (वर्षों में)

औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)

एससीआई जर्नलों/ यूजीसी / अ०भा०त० शि०प० अनुमोदित जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन

1

4

2

8से 10

2

5

1

8से 10

3

5

2

5से < 8

3. सहायक प्रोफेसर के लिए अर्हताएं (चयन गेड, लेवल-12, प्रवेश वेतन-79800/-)

पधारकों की प्रोन्नति के लिए

(क) सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ मान ) के पद के लिए विनिर्दिष्ट अर्हताएं

और

(ख) अनुबंध-111 के अनुसार न्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाएं पूर्ण की हों

और 420

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

(ग) अपेक्षाओं के नीचे उल्लिखित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो

सेट संख्या

सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ मान) के संवर्ग में अर्जित किए जाने के लिये

अनुभव (वर्षों)

अतिरिक्त अर्हता

औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)

जर्नलों/ यूजीसी/ अभातशिप अनुमोदित एससीआई जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन

1

4

1

8से <10

2

4

2

5से < 10

टिप्पणी 1:- पूर्व अर्हताओं के साथ कार्यरत पदधारकों हेतु अखिल भारतीय शिक्षा परिषद नई दिल्ली के द्वारा प्रख्यापित अधिसूचना फाइल सं 0 61-1 / आर आई एफ डी / सातवां सीपीसी / 2016-17 दिनांक 01.03.2019 के प्रस्तर 7.5 में उल्लिखित प्राविधान भी उन सभी पर लागू होगें ।

टिप्पणी 2:-उपरोक्त तालिका के क्रमांक 3 में अंकित असिस्टेंट प्रोफेसर (लेवल-10) पदधारकों में उच्चतर वेतनक्रम (लेवल-11 एवं लेवल-12) की अनुमन्यता उनके द्वारा तालिका में संगत पदों हेतु विहित की गई वांछित अर्हता पूर्ण करने पर ही अनुमन्य होगी । उच्चतर वेतन क्रम की अनुमन्यता उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा गठित की जाने वाली समिति के द्वारा की गई संस्तुति के क्रम में शासन स्तर से निर्गत होने वाले आदेश के अनुसार ही होगी ।

7. आरक्षण:

उत्तराखण्ड राज्य की अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियों अन्य पिछडे वर्ग आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण भर्ती के समय प्रवृत्त सरकार के आदेशों के अनुसार किया जायेगा ।

भाग चार- अर्हता

8. राष्ट्रीयताः

सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिये अभ्यर्थी:-

(क) भारत का नागरिक हो , या

(ख) तिब्बती शरणार्थी जो, भारत में स्थाई रूप से बसने के आशय से 01 जनवरी , 1962 से पहले भारत आया हो, होना चाहिये, या

(ग) भारतीय मूल का व्यक्ति जिसने भारत में स्थाई निवास के आशय से पाकिस्तान, वर्मा , श्रीलंका, केनिया और संयुक्त तांजानिया (पूर्ववर्ती तांगानिका और जंजीवार) के पूर्वी अफ्रीकी देश प्रवजन किया हो परन्तु उपयुक्त श्रेणी (ख) या (ग) से सम्बन्धित अभ्यर्थी को ऐसा व्यक्तित्व चाहिये जिसके पक्ष में सरकार द्वारा पात्रता का प्रमाण- पत्र जारी किया गया हो परन्तु यह और कि श्रेणी (ख) से संबंधित अभ्यर्थी के लिए भी पुलिस उप महानिरीक्षक, अभिसूचना शाखा, उत्तराखण्ड से पात्रता का प्रमाण - पत्र प्राप्त करना आवश्यक होगा ।

भाग 1 ]

421 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

परन्तु यह भी कि यदि कोई अभ्यर्थी उपयुक्त श्रेणी (ग ) से संबंधित है, तो पात्रता का प्रमाण- पत्र एक वर्ष से अधिक अवधि के लिये जारी नही किया जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी को एक वर्ष की अवधि के आगे सेवा में इस शर्त पर रहने दिया जायेगा कि वह भारत की नागरिकता प्राप्त कर लें ।

टिप्पणी- जिस अभ्यर्थी के मामले में पात्रता प्रमाण-पत्र आवश्यक हो किन्तु उसे न तो जारी किया गया हो और न ही नांमजूर किया गया है , उसे परीक्षा या साक्षात्कार में प्रवेश दिया जा सकता है और उसे अनन्तिम रूप से नियुक्त भी किया जा सकता है, किन्तु शर्त यह है कि उसके द्वारा आवश्यक प्रमाण - पत्र प्राप्त कर लिया जाये या उसके पक्ष मे जारी कर दिया जाय ।

9. आयु सीमाः

समस्त संकाय सदस्यों तथा संस्थाओं के प्राचार्यो /निदेशकों की अधिवर्षिता की आयु 65 वर्ष होगी । उन संकाय सदस्यों को 5 वर्ष (70वर्ष की आयु प्राप्त करने तक) का विस्तार दिया जा सकेगा जो शारीरिक रूप में स्वस्थ है , जिन्होंने तकनीकी पुस्तकें लिखी है, पत्र प्रकाशित किए है तथा 10 में से 8 से अधिक का औसत 360 डिग्री फीडबैक प्राप्त किया है जो उन्हें सेवा के अंतिम 3 पूर्ववर्ती वर्षों के दौरान सक्रिय दर्शाता है ।

10. चरित्रः

सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा होना चाहिए जिससे वह सरकारी सेवा की नौकरी के लिए में सर्वथा उपयुक्त हो । नियुक्ति प्राधिकारी इस विषय में स्वयं समाधान करेगा ।

टिप्पणी-

संघ सरकार या राज्य सरकार अथवा संघ सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व में अथवा नियंत्रणाधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। नैतिक अधमता के अपराध से सम्बद्ध सिद्धदोष भी नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे ।

11. वैवाहिक प्रास्थितिः

पुरुष जिसकी एक से अधिक पत्नी जीवित हो अथवा ऐसी महिला अभ्यर्थी जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो , जिसकी पहले से जीवित पत्नी हो, सेवा में किसी पद पर नियुक्ति का पात्र नहीं होंगे । परन्तु, यदि सरकार का यह समाधान हो जाय कि ऐसा करने के लिए विशेष कारण है,

तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से मुक्त कर सकेगी ।

422

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

12. शारीरिक योग्यताः

किसी भी ऐसे अभ्यर्थी को सेवा में किसी पद पर नियुक्त नहीं किया जायेगा, यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है और किसी ऐसे शारीरिक' दोष से मुक्त नहीं है, जिसके कारण उसे अपने कर्तव्यों का दक्षतापूर्वक निर्वहन में हस्तक्षेप की सम्भावना हो । किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए अनुमोदित करने से पूर्व उससे सेवा के अन्य मामले में वित्तीय हस्त पुस्तिकां खण्ड-2, भाग -3 के अध्याय -3 में समाविष्ट मूल नियम 10 के अधीन बनाये गये नियमों के अनुसार स्वस्थता प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अपेक्षित है । परन्तु यह कि The Right of persons with disabilities Act 2016 (अधिनियम संख्या 49 वर्ष 2016 भारत सरकार) की धारा- 33 के कम में इस हेतु चिन्हित पदों तथा धारा-34 के अन्तर्गत चिन्हित श्रेणियों में दिव्यागों को नियमानुसार नियुक्ति देने से मना नहीं किया जायेगा । परन्तु पदोन्नति द्वारा नियुक्त अभ्यर्थी के लिये स्वस्थता प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अपेक्षित नहीं होगा ।

13. रिक्तियों की अवधारणा :

नियुक्ति प्राधिकारी तत्समय प्रवृत्त नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्तियों और नियम -7 के अधीन उत्तराखण्ड की अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिये आरक्षित की जाने वाली रिक्तियों की संख्या अवधारित करेगा और आयोग को सूचित करेगा ।

14. सीधी भर्ती की प्रक्रिया :

( 1 ) उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के आधार पर सीधी भर्ती द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शैक्षणिक पदों पर भर्ती की जायेगी । इस हेतु शैक्षणिक पदों पर भर्ती हेतु आयोग द्वारा विहित प्रपत्र में आवेदन मगाये जायेंगे । आवेदन प्रपत्र यथा निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आयोग के सचिव से प्राप्त किये जा सकेंगे ।

(2) नियम 7 के अधीन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिये आरक्षण का प्रतिशत सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुये आयोग द्वारा अपेक्षित अर्हतायें पूरी करने वाले उतने अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिये बुलाया जायेगा जितने वह उचित समझे ।

423 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

(3) आयोग प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा साक्षात्कार में प्राप्त अंकों द्वारा प्रकटित प्रवीणता के क्रम में सूची बनायेगा । यदि दो या उससे अधिक अभ्यर्थी बराबर अंक प्राप्त करते हैं तो आयोग द्वारा उनके नाम सेवा के लिये उनकी सामान्य उपयुक्तता के आधार पर उनके गुणानुक्रम के आधार पर क्रमांकित किये जायेंगे । प्रवीणता सूची में नामों की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक नहीं होगी । आयोग प्रवीणता सूची नियुक्ति प्राधिकारी को प्रेषित करेगा ।

15. पदोन्नति द्वारा भर्ती की प्रक्रिया: सहायक प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर (कुल पदों में से प्रोन्नति के 50 प्रतिशत पदों पर) पदोन्नति, द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् के मानकों एवं राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा- निर्देशों के अनुरूप लोक सेवा आयोग के स्तर पर गठित चयन समिति के माध्यम से पद्वार उल्लेखित मानकों (नियम-6(क) (2) ) के अनुसार की जायेगी ।

16. संयुक्त चयन सूची:

यदि किसी भर्ती के वर्ष नियुक्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों ही प्रकार से की जाती है तो संगत सूचियों से नाम लेकर एक संयुक्त चयन सूची तैयार की जायेगी जिससे विहित प्रतिशत बना रहे । सूची में पहला नाम पदोन्नति द्वारा नियुक्त व्यक्ति का होगा ।

उदाहरण :- उदाहरण के लिए एक ही चयन वर्ष में एसोसिएट प्रोफेसर के 4 पदों पर भर्ती की जाती है जिससे 2 पदोन्नति व 2 सीधी भर्ती से नियुक्त किये जाते हैं तब उनको संयुक्त चयन / ज्येष्ठता सूची निम्न प्रकार होगी:-

1- 2- प सी 3- 4- प सी

भाग पांचः-नियुक्ति, परिवीक्षा, स्थायीकरण और ज्येष्ठता

17. नियुक्ति:

(1) उपनियम (2) के अध्यधीन रहते हुये नियुक्ति प्राधिकारी अभ्यर्थियों के नाम उस क्रम में लेकर जिसमें वे नियम 14,15 या नियम 16 यथास्थिति के अधीन तैयार की गई सूचियों में हो, नियुक्त करेगा।

424

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई0 (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1

(2) यदि किसी वर्ष भर्ती नियुक्तियां सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों प्रकार से की जानी हैं, तो नियमित नियुक्तियां तब तक नहीं की जायेंगी जब तक कि दोनों स्त्रोतों से चयन न किया गया हो और नियम 16 के अनुसार संयुक्त सूचियां तैयार न की गयी हों ।

(3) यदि किसी चयन के सम्बन्ध में एक से अधिक नियुक्ति का आदेश जारी किया जाता है तो एक संयुक्त आदेश भी जारी किया जायेगा, जिसमें चयनित व्यक्तियों के नाम का उल्लेख चयन में अवधारित ज्येष्ठता के आधार या उस क्रम में , यथास्थिति, जिस क्रम में उनका नाम उस संवर्ग में है, जिससे उन्हें पदोन्नत किया गया है, किया जायेगा। यदि नियुक्तियां सीधी भर्ती ओर पदोन्नति दोनों प्रकार से की जाती हैं तो नियम 16 में निर्दिष्ट चक्रीय क्रम में क्रमांकित किये जायेंगे ।

18. परिवीक्षा

(1) सेवा में असिस्टेन्ट प्रोफेसर / एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर 02 वर्ष एवं प्राचार्य के पद पर 01 वर्ष की अवधि के लिए परिवीक्षा में रखा जायेगा ।

(2) नियुक्ति प्राधिकारी ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किये जायेंगे , अलग-अलग मामलों में परिवीक्षा अवधि को बढा सकता है । जिसमें ऐसा दिनांक विनिर्दिष्ट किया जायेगा जब तक के लिए अवधि बढाई जाये :

परन्तु आपवादिक परिस्थितियों के सिवाय परिवीक्षा अवधि एक वर्ष से अधिक और किसी भी परिस्थिति में दो वर्ष से अधिक नहीं बढाई जायेगी ।

(3) यदि परिवीक्षा अवधि या बढाई गई परिवीक्षा अवधि के दौरान किसी भी समय या उसके अन्त में नियुक्ति प्राधिकारी को यह प्रतीत होता है कि परिवीक्षाधीन व्यक्ति ने अपने अवसरों का पर्याप्त उपयोग नहीं किया है, या सन्तोष प्रदान करने में अन्यथा विफल रहा है, जो उसे उसके मौलिक पद पर, यदि कोई हो, प्रत्यावर्तित किया जा सकता है और यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार न हो तो, उसकी सेवा समाप्तकी जा सकती है।

(4) ऐसा परिवीक्षाधीन व्यक्ति, जिसे उप नियम (3 ) के अधीन प्रत्यावर्तित किया जाये या जिसकी सेवायें समाप्त की जायें, किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।

(5) नियुक्ति प्राधिकारी संवर्ग में सम्मिलित किसी पद पर या किसी अन्य समकक्ष या उच्च पद पर स्थानापन्न या अस्थायी रूप में की गई निरन्तर सेवा को परिवीक्षा अवधि की संगणना करने के प्रयोजनार्थ गिने जाने की अनुमति दे सकता है ।

425 भाग 1 ]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

19. स्थायीकरण :

सहायक प्रोफेसर / एसोसिएट प्रोफेसर/ प्राचार्य / निदेशक का पद पर स्थायीकरण उत्तराखण्ड राज्य के सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली, 2002 के अनुसार किया जायेगा ।

20. ज्येष्ठता:

सेवा में किसी श्रेणी के पद पर किसी कार्मिक की ज्येष्ठता का निर्धारण उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (ज्येष्ठता निर्धारित) नियमावली, 2002 (समय- समय पर यथा संशोधित) के अनुसार किया जायेगा ।

भाग छ-वेतनमान आदि

21. वेतनमान

आधार (1) सेवा में विभिन्न श्रेणियों के पदों पर चाहें मौलिक या स्थानापन्न रूप में या अस्थायी पर नियुक्त व्यक्तियों का अनुमन्य वेतनमान ऐसा होगा जो राज्य सरकार / अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् द्वारा समय- समय पर अवधारित किया जाय ।

(2) इस नियमावली के प्रारम्भ के समय के वेतनमान परिशिष्ट "क" में दिये गये हैं ।

22. परिवीक्षा के दौरान वेतन:

(1 ) मूल नियम में किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुए भी , परिवीक्षाधीन व्यक्ति को, यदि 'वह पहले से स्थायी सरकारी सेवा में न हो , समयमान मे उसकी प्रथम वेतनवृद्धि तभी दी जायेगी , जब उसने एक वर्ष की सन्तोषजनक सेवा पूरी कर ली हो , प्रशिक्षण जहां विहित हो, पूरा कर लिया हो और द्वितीय वेतनवृद्धि दो वर्ष की सेवा के पश्चात् तभी दी जायेगी , जब उसने परिवीक्षा अवधि पूरी कर ली हो:

परन्तु यदि सन्तोष प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढाई जाये तो इस प्रकार बढाई गई अवधि की गणना वेतनवृद्धि के लिये नहीं की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निर्देश न दे ।

(2) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से सरकार के अधीन कोई पदधारण कर रहा हो, परिवीक्षा अवधि में वेतन सुसंगत मूल नियम द्वारा विनियमित होगाः

परन्तु यदि सन्तोष प्रदान कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढाई जाये तो इस प्रकार बढाई गई अवधि की गणना वेतनवृद्धि के लिये नही की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निदेश न दें ।

(3) परिवीक्षा के दौरान ऐसे व्यक्ति का जो पहले से स्थायी सरकारी सेवा में हो, परिवीक्षा अवधि में वेतन राज्य के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवारत सरकारी सेवकों पर सामान्यतया लागू सुसंगत नियमों द्वारा विनियमित होगा ।

426

[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई 0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भाग सात अन्य उपबन्ध

23. अधियाचन (पक्षः समर्थन):

किसी पद पर या सेवा में लागू नियमों के अधीन अपेक्षित सिफारिशों से भिन्न किन्हीं सिफारिशों पर, चाहें लिखित हो या मौखिक , विचार नहीं किया जायेगा । किसी अभ्यर्थी की ओर से अपनी अभ्यर्थिता के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में समर्थन प्राप्त करने का कोई प्रयास उसे नियुक्ति के लिए अनर्ह कर देगा ।

24. अन्य विषयों का विनियमन:

ऐसे विषयों के सम्बन्ध में जो विनिर्दिष्ट रूप से इस नियमावली या विशेष आदेशों के अर्न्तगत न आते हों, सेवा में नियुक्त व्यक्ति राज्य के कार्यों से सम्बन्धित सेवारत सरकारी सेवकों पर साधारणतः लागू विनियमों और आदेशों द्वारा विनियमित होंगे ।

25. रोवा की शर्तों गे शिथिलता

जहां राज्य सरकार/ अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् का यह समाधान हो जाये कि सेवा मे नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्ते विनियमित करने वाले किसी नियम के प्रवर्तन से किसी विशेष मामले में अनुचित कठिनाई हो सकती है तो वे इस मामले में लागू नियमावली में, किसी बात के होते हुए भी, आदेश द्वारा , इस सीमा तक तथा ऐसी शर्तों के अधीन इस नियम की अपेक्षाओं से अभिमुक्त कर देगी या शिथिल कर देगी जो वह मामले के सम्बन्ध में न्यायोचित तथा साम्यपूर्वक कार्यवाही करने के लिये उचित समझे । संस्थान में कार्यरत् ऐसे कार्मिको जिनके पास नियुक्ति के समय निर्धारित की गयी अर्हता थी किन्तु इस नियमावली के अनुरूप ये अर्हता धारण नहीं करते है, उन्हें केवल एक बार पदोन्नति प्रदान करने के सम्वन्ध मे भी उपरोक्तानुसार कार्यवाही की जा सकेगीः

परन्तु यह कि जहां कोई नियम आयोग के परामर्श से बनाया गया है , वहां नियम की अपेक्षाओं से अभिमुक्त करने या शिथिल करने से पूर्व आयोग से परामर्श करना होगा ।

26. व्यावृति:

इस नियमावली में किसी बात या कोई प्रभाव ऐसे आरक्षण और अन्य नियमों पर नहीं पडेगा, जिसका इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा समय- समय पर जारी किये गये आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियां, अनुसचित जन जातियां, अन्य पिछडे वर्ग , आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य विशेष श्रेणियों के अभ्यार्थियों के लिये उपबन्धित किया जाना अपेक्षित हो ।

आज्ञा से, डॉ० पूजा गर्ज्याल, अपर सचिव ।

427 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भाग 1 ]

परिशिष्ट "क "

राजकीय होटल मैनेजमैन्ट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन , देहरादून / अल्मोडा में पदों की संख्या एवं वेतनमान

क्र०सं०

पदनाम

वेतन लेवल/ प्रवेश वेतन नियुक्ति की पद्धति

पदों की संख्या

1

2

3

4

5

02

1. प्राचार्य/निदेशक

सीधी भर्ती

वेतन लेवल-14, प्रवेश वेतन-144200/-

2. एसोसिएट प्रोफेसर

04

प्रोन्नति / सीधी भर्ती

लेवल-13ए1 , प्रवेश वेतन-131400/-

3. सहायक प्रोफेसर

14

सीधी भर्ती

लेवल-10, प्रवेश वेतन 57700 /-

20

पों का योग

परिशिष्ट "ख "

अनुबन्ध- ।।।

सभी विषय क्षेत्रों से शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए प्रशिक्षण अपेक्षाएं

एसोसिएट प्रोफेसर के लिएः सहायक प्रोफेसर के लेवल में निम्नलिखित प्रशिक्षण अपेक्षाओं की पूर्तिः प्रासंगित क्षेत्र अभातशिप / यूजीसी / टीईक्यूआईपी /एनआईटीटीटीआर/पीएमएमएमएनएमटीटी/ आईआईएस / आईआईटी / विश्वविद्यालय / सरकार/डीटीई/तकनीकीशिक्षाबोर्ड/ सीओए / आईआईए / एसपी ए/ आईटीपीआई / एनआरसी / एआरपीआईटी शोध संगठन/ राष्ट्रीय महत्व के अन्य संस्थान /डिजाईन स्टूडियों द्वारा मान्यता प्रदान दो सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) जिसमें से कम- से- कम एक एफडीपी उन्नत शिक्षा शास्त्र में हो ।

अथवा

उपर्युक्तानुसार एक साग्तह का संकाय विकास कार्यक्रम तथा एनपीटीईएल- अभातशिप द्वारा ई-प्रमाणन के साथ ऐसे आठ सप्ताह की अवधि का एक एमओओसीएस (मूक्स) पाठ्यक्रम

अथवा

एनपीटीईएल अभातशिप द्वारा ई- प्रमाणन के साथ ऐसे आठ सप्ताह के दो एमओओसीएस (मूक्स) पाठ्यक्रम पूर्ण किए हों

और

कम- से- कम दो सप्ताह का औद्योगिक प्रशिक्षण /व्यवसायिक प्रशिक्षण पूर्ण किया हो ।

आज्ञा से ,

डॉ० पूजा गर्ज्याल,

अपर सचिव ।

पी० एस ० यू० ( आर ०ई० ) 13 हिन्दी गजट / 119-भाग 1-2024 ( कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN / 30/ 2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार, दिनांक 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

भाग 1 -क

नियम, कार्य-विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

HIGH COURT OF UTTARAKHAND , NAINITAL

NOTIFICATION

February 04, 2024

No. 46 / UHC / Admin.A/ 2024-- Hon'ble Ms. Justice Ritu Bahri has assumed charge of Office of the Chief Justice of High Court of Uttarakhand , Nainital on February 04 , 2024 at 12:00 Noon pursuantto the Notification No. K. 13032 /02/2023 - US.II dated 02 : 02.2024 issued by Government of India , Ministry ofLaw and Justice , Department of Justice (Appointments Division ) , Jaisalmer House , 26 , Man Singh Road , New Delhi .

Sd/- Registrar General.

NOTIFICATION

February 09, 2024

No. 47 / UHC /Admin.A- 2 / 2024--Ms . Sujata Singh , District & Sessions Judge , Nainital has handed over the charge of office of the District & Sessions Judge , Nainital in the afternoon of 30.01.2024 for being appointed as Officer on Special Duty ( in the grade of Registrar ) , in Supreme Court of India , on deputation basis .

In this regard , Hon'ble Supreme Court of India has issued Office Order No. 25/2024 dated 01.02.2024 and said Office- Order states as under .

115-ख 116

[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

"Hon'ble the Chief Justice of India has been pleased to appoint Ms. Sujata Singh, District & Sessions Judge, Nainital, as Officer on Special Duty ( in the grade of Registrar), In Supreme Court of India, on deputation basis, initially for a period of oneyear, with effect from the forenoon of 1st February, 2024.

[Atul M. Kurhekar] Secretary General"

Sd/-

KAUSHAL KISHORE SHUKLA ,

I/C Registrar General.

NOTIFICATION

February 21 , 2024

No. 49 / UHC / Admin.A- 2/ 2024-- Shri Subir Kumar , Judge , Family Court , Nainital is repatriated and posted as District & Sessions Judge , Nainital , in the vacant Court .

This order will come into force with immediate effect .

NOTIFICATION

February 21 , 2024

No. 50/ UHC /Admin.A- 2/ 2024-- Pursuant to Government Notification No. 39 /XXX( 4 ) /2024-04 ( 1 ) / 2018 dated 09.02.2024 , Ms. Sangeeta Rani , Chief Judicial Magistrate , Haridwar, on her promotion in Uttarakhand Higher Judicial Service Cadre in the pay scale of ₹ 144840-194660 ( J - 5 ) , is posted as Additional District & Sessions Judge , Fast Track Special Court ( FTSC ) POCSO Act , Haridwar, in the vacant Court .

This order will come into force with immediate effect .

Note:

Recommendations of the names of following officers are being sent to the concerned authorities (State Government/ Uttarakhand State Legal Services Authority , Nainital) for issuing notifications of their postings as :

S.No.

Presentposting

1.

Name of the Officer Shri Sahdev Singh

Recommended for posting as Presiding Officer,

Member-Secretary,

Uttarakhand State Legal

Services Authority, Nainital

2.

Food Safety Appellate Tribunal , Dehradun, in the vacant post. Member -Secretary, Uttarakhand

Shri Pradeep Kumar Mani

Judge , Family Court, Tehri

Garhwal

State Legal Services Authority, Nainital, vice Shri Sahdev Singh .

3.

Shri Abdul Qayyum , Registrar , State Consumer Dispute Redressal Commission , Dehradun

Judge , Family Court , Tehri Garhwal , vice Shri Pradeep Kumar Mani

4.

Ms.Anjali Noliyal

7th Additional District &

Sessions Judge, Dehradun

Chairman , Permanent Lok Adalat , Dehradun , in the vacant post .

5.

Shri Ramesh Singh Chief Judicial Magistrate, Nainital

Judge , Family Court , Nainital , vice Shri Subir Kumar

[Now promoted to HJS

Cadre]

[Pursuant to his promotion in Uttarakhand Higher Judicial Service Cadre in the pay scale of 144840-194660 (J-5), vide Government Notification No. 39 /XXX(4)/ 2024-04(1)/2018 dated 09.02.2024] 117 भाग 1 -क]

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

NOTIFICATION

February 21 , 2024

No. 51 / UHC / Admin.A- 2/ 2024-- Shri Rahul Kumar Srivastava , Civil Judge ( Sr. Div. ) , Haridwar is posted as Chief Judicial Magistrate , Haridwar, vice Ms. Sangeeta Rani .

This will come into force with immediate effect .

NOTIFICATION

February 21 , 2024

No. 52 / UHC / Admin.A- 2 / 2024-- Shri Ravi Prakash , Civil Judge ( Sr. Div. ) , Ramnagar , District Nainital is transferred and posted as Chief Judicial Magistrate , Nainital , vice Shri Ramesh Singh .

This order will come into force after handing over charge or office of the Chief Judicial Magistrate , Nainital by Shri Ramesh Singh .

NOTIFICATION

February 21 , 2024

No. 53 / UHC / Admin.A- 2/ 2024-- Shri Shahzad Ahmad Wahid , 1st Additional Civil Judge ( Sr. Div . ) , Haridwar is posted as Civil Judge ( Sr. Div. ) , Haridwar , vice Shri Rahul Kumar Srivastava.

This order will come into force with immediate effect .

By Order of Hon'ble the Chief Justice ,

Sd/-

ASHISH NAITHANI , Registrar General.

कार्यालय जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण , उत्तराखण्ड

कार्य भार ग्रहण करने का प्रमाण-पत्र

20 मार्च , 2024 ई ०

पत्रांक सं0-11 / जि ० पु ० शि ० प्रा ० / 24 - उत्तराखण्ड शासन के गृह अनुभाग -1 की अधिसूचना संख्या-48 / XX-1-2024-13 (2) 2007 टीसी दिनांक 12 मार्च , 2024 के अनुपालन में अद्योहस्ताक्षरी ने आज दिनांक 20 मार्च , 2024 , के अपराहृन में सदस्य, जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण , देहरादून के पद का कार्य भार ग्रहण कर लिया है ।

प्रतिहस्ताक्षरित ,

अवमोचक, कुसुम रानी नैथानी, सदस्य, जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण, उत्तराखण्ड, देहरादून ।

के०डी० भटट,

अध्यक्ष, जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण , उत्तराखण्ड, देहरादून ।

118

उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई ० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1 -क

कार्यालय मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण

अधिसूचना

13 मार्च , 2024 ई ०

संख्या 4679 / नि0 अनु०- भू० उप० परि० (आर) / बी-001 / 2024 - आवास विभाग के शासनादेश संख्या 1311 /V-2/21-10 (आ0) / 2020 दिनांक 26.7.2021 के क्रम में देहरादून महायोजना-2025 में नीचे दी गयी अनुसूची में यथावर्णित संशोधन करने के सम्बन्ध में आपत्तियाँ एवं सुझाव प्राप्त किये जाने के दृष्टि से 02 दैनिक समाचार पत्रों अमर उजाला में 07.2.2024 एवं दैनिक जागरण में दिनांक 08.2.2024 को विज्ञप्ति प्रकाशित करायी गयी थी । आपत्ति एवं सुझाव प्रस्तुत करने हेतु निर्धारित 30 दिन की अवधि के भीतर प्रस्तावित भू- उपयोग परिवर्तन के सम्बन्ध में कोई आपत्ति एवं सुझाव प्राप्त नहीं हुआ है ।

अतएव, अब उत्तराखण्ड (उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 (संशोधन) अधिनियम 2013 की धारा 13 (2) के अधीन शासनादेश संख्या 1311 /V-2/ 21-10 (आ० )/ 2020 दिनांक 26.7.2021 द्वारा प्राप्त शक्ति का प्रयोग करते हुए देहरादून महायोजना -2025 में नीचे दी गयी अनुसूची में यथावर्णित निम्नलिखित संशोधन करते हैं :-

स्थल/ ग्राम का नाम

क्रम सं ०

भू- उपयोग हेतु

प्रस्तावित खसरा नम्बर

1.

25, 1, 24, 1/21 , 24, 26 मौजा सेन्ट्रल होप टाउन , तहसील विकास नगर जिला देहरादून

क्षेत्रफल (एकड़ में)

महायोजना में वर्तमान भू- उपयोग

प्रस्तावित भू- उपयोग 7.715

औद्योगिक

आवासीय

बंशीधर तिवारी,

उपाध्यक्ष ।

कार्यालय सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी ,

टनकपुर (चम्पावत)

आदेश

30 सितम्बर , 2023 ई०

पत्रांकः-1448 / पंजीयन निरस्त/ 2023- वाहन संख्या UA07R8329 ( MAXI CAB ) मॉडल 2006 चैचिस 2GAK63B35586 इंजन संख्या GA64A20083 इस कार्यालय अभिलेखानुसार वाहन श्री नदीम अहमद पुत्र श्री जमीर अहमद निवासी - रेवल कॉलोनी वार्ड नम्बर 04 टनकपुर जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 20/09/2023 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है) आवेदन किया गया हैं,। वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । उक्त तथ्यो के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।

अतः सुरेन्द्र कुमार, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 30.09.2023 को वाहन संख्या UA07R8329 ( MAXI CAB ) मॉडल 2006 चैचिस 2GAK63B35586 इंजन संख्या GA64A20083 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।

भाग 1 -क]

119 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

आदेश

05 अक्टूबर , 2023 ई ०

पत्रांकः-1458 / पंजीयन निरस्त/ 2023 - वाहन संख्या UK03B0861 ( MOTOR CAR) मॉडल 2017 चैचिस MA3EWB62SHA289033 इंजन संख्या 2987771 इस कार्यालय अभिलेखानुसार वाहन सुशीला देवी पत्नी श्री राधेश्याम निवासी-शिव कॉलोनी नौगवाठग्गू खटीमा उधमसिंह नगर के नाम पंजीकृत है । दिनांक 11/09/2023 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है ) आवेदन किया गया हैं,। वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । उक्त तथ्यो के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।

अतः सुरेन्द्र कुमार , सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 05.10.2023 को वाहन संख्या UK03B0861 (MOTOR CAR) मॉडल 2017 चैचिस MA3EWB62SHA289033 इंजन संख्या 2987771 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।

आदेश

27 अक्टूबर , 2023 ई ०

पत्रांकः-1565 / पंजीयन निरस्त / 2023-24- वाहन संख्या UK04TA1880 ( Motor cab ) मॉडल 2010 चैचिस MA3EAA61501628684 इंजन न० F8DN4385215 श्री राकेश मौर्या पुत्र श्री किशन लाल मौर्या निवासी मकान संख्या 129 रेलवे वार्ड टनकपुर जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 19/10/2023 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है ) आवेदन किया गया हैं,। वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन (उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर ) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यो के आधार पर वाहन के पंजीयन/ चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।

अतः मैं सुरेन्द्र कुमार, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 27.10.2023 को वाहन संख्या UK04TA1880 ( Motor cab ) मॉडल 2010 चैचिस MA3EAA61S01628684 इंजन न0 F8DN4385215 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।

आदेश

27 अक्टूबर , 2023 ई ०

पत्रांकः-1566 / पंजीयन निरस्त/ 2023-24- वाहनं संख्या UK03TA0868 ( Motor cab ) मॉडल 2012 चैचिस MA3EAA61S02053169 इंजन न० F8DN4829089 श्रीमती सुशीला थापा पत्नी श्री श्याम सिंह निवासी-खड़ी बाजार लोहाघाट, जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 26/10/2023 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है) आवेदन किया गया हैं,। वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन ( उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यो के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।

अतः मैं सुरेन्द्र कुमार , सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 27.10.2023 को वाहन संख्या UK03TA0868 (Motor cab ) मॉडल 2012 चैचिस MA3EAA61S02053169 इंजन न० F8DN4829089 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।

120

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[भाग 1 -क

आदेश

27 अक्टूबर , 2023 ई ०

पत्रांकः-1567 / पंजीयन निरस्त / 2023-24 - वाहन संख्या UK04CA7141 (LGV) मॉडल 2013 चैचिस MB1AA22E9DRT54826 इंजन न० TDH030308P श्री हरीश सिंह पुत्र श्री किशन सिंह निवासी मकान संख्या 81 ख चूनाभट्टा बनबसा पोस्ट- चन्दनी , तहसील टनकपुर जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 26/10/2023 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है ) आवेदन किया गया हैं ,। वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन ( उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर ) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यो के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।

अतः मैं सुरेन्द्र कुमार, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 27.10.2023 को वाहन संख्या UK04CA7141 (LGV) मॉडल 2013 चैचिस MB1AA22E9DRT54826 इंजन न० TDH030308P को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।

सुरेन्द्र कुमार ,

सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी , टनकपुर (चम्पावत) ।

पी ० एस ० यू० ( आर० ई० ) 13 हिन्दी गजट / 119- भाग 1 -क-2024 (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

पंजीकरण संख्या- UA/ DO / DDN / 30/ 2024-2026

सरकारी गजट, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित

रुड़की, शनिवार , दिनांक 30 मार्च , 2024 ई० (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

भाग 8

सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि

सूचना

बृस्त सिंह पुत्र श्री देव सिंह निवासी ग्राम गैच्वाणगांव तह ० मोरी पो ० ऑ ० नैटवाड़ जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड । मेरा नाम आधार कार्ड संख्या 588944711049 में बृहस्पति सिंह हैं जो कि गलत है जबकि मेरा सही नाम बृस्त सिंह है भविष्य में मुझे बृस्त सिंह के नाम से जाना पहचाना जाऐं ।

समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।

बृस्त सिंह पुत्र श्री देव सिंह निवासी ग्राम गैच्वाणगांव तह० मोरी पो ०ऑ ० नैटवाड़ जिला उत्तरकाशी , उत्तराखण्ड ।

111 - ट 112

उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च , 2024 ई 0 (चैत्र 10, 1946 शक सम्वत्)

[ भाग 8

कार्यालय नगर पंचायत गजा, जनपद- टिहरी गढ़वाल

12 जनवरी , 2024 ई ०

पत्रांक 433 / (उपविधियां भवनकर ) / 2023-24 - नगर पंचायत , गजा , जनपद टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड) की सीमान्तर्गत उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 (उत्तराखण्ड में यथा प्रवृत्त ) की धारा -298(1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -128 के अन्तर्गत भवनों या भूमि या दोनों के वार्षिक मूल्य पर भवन / सम्पत्ति कर आरोपित करने के उद्देश्य से नगर पंचायत गजा द्वारा " सम्पत्ति / भवनकर उपविधि-2023-24" बनायी गई है, जो नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -301 (1 ) के अन्तर्गत जनसामान्य एवं जिन पर इस उपविधि का प्रभाव पड़ने वाला है उनसे आपत्ति एवं सुझाव हेतु प्रकाशित की जा रही है ।

अतः समाचार पत्र में उपविधि के प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के अन्दर लिखित सुझाव एवं आपत्तियाँ अधिशासी अधिकारी , नगर पंचायत, गजा, जनपद टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड) को प्रेषित की जा सकेगीं । वादमियाद प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा ।

सम्पत्ति/ भवनकर उपविधि-2023-24

1- संक्षिप्त नाम प्रसार और प्रारम्भः-

(क) यह उपविधि नगर पंचायत, गजा, जनपद- टिहरी गढ़वाल(उत्तराखण्ड) "सम्पत्ति/ भवनकर उपविधि-2023-24" कहलायेगी।

ख) यह उपविधि नगर पंचायत, गजा, जनपद- टिहरी गढ़वाल (उत्तराखण्ड) की सीमा में प्रवृत्त होगी।

( (ग) यह उपविधि नगर पंचायत, गजा, जनपद- टिहरी गढ़वाल(उत्तराखण्ड) द्वारा प्रख्यापित अथवा शासकीय गजट मे प्रकाशन की तिथि से प्रवृत्त होगी ।

2- परिभाषाएँ:-

किसी विषय या प्रसंग से कोई बात प्रतिकूल न होने पर इस उपविधि मे -

(क) "नगर पंचायत" का तात्पर्य नगर पंचायत , गजा से है ।

(ख) "सीमा" का तात्पर्य नगर पंचायत, गजा की सीमा से है ।

(ग) "अधिशासी अधिकारी " का तात्पर्य अधिशासी अधिकारी , नगर पंचायत , गजा से है ।

(घ) "अध्यक्ष" का तात्पर्य नगर पंचायत , गजा के निर्वाचित अध्यक्ष से है ।

(3) "बोर्ड" का तात्पर्य नगर पंचायत , गजा के निर्वाचित अध्यक्ष/सदस्य अथवा प्रशासक से है ।

(च) "अधिनियम " का तात्पर्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम -1916 (उत्तराखण्ड मे यथा प्रवृत्त) से है ।

(छ) "वार्षिक मूल्याकंन" का तात्पर्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -140 व धारा-141 के अन्तर्गत वार्षिक मूल्य से है ।

(ज) "सम्पत्ति/ भवनकर " का तात्पर्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-128 के अन्तर्गत भवनों या भूमि यो दोनो के वार्षिक मूल्य पर कर से है ।

(झ) " समिति" का तात्पर्य उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -104 के अन्तर्गत गठित समिति से है ।

(प) " भवन एवं भूमि" का तात्पर्य नगर पंचायत की सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि से है।

(फ) "स्वामी " का तात्पर्य भवन एवं भूमि के स्वामी से है ।

(ब) "अध्यासी" का तात्पर्य नगर पंचायत सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि से है ।

3- वार्षिक मूल्यांकन: - " भवन या भूमि या दोनो, जैसी भी स्थिति हो, का पूंजीगत मूल्य, जो कि भवन के आच्दादित क्षेत्रफल या भूमि के क्षेत्रफल या दोनों , जैसी भी स्थिति, को भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 के प्रायोजनार्थ कलेक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल रेट / निर्माण की दर जो प्रचलन मे हो, से गुणा करने पर प्राप्त मूल्य;

किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि सम्पत्ति कर के अन्तर्गत सामान्य कर की दर वार्षिक मूल्य के 0.01 प्रतिशत से 1 प्रतिशत के मध्य होगी तथा पूंजीगत मूल्य आधारित सम्पत्ति कर प्रारम्भ होने के अगामी भाग 8 ]

113 उत्तराखण्ड गजट , 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

5 वर्षों में किसी भी दशा में ठीक पूर्व के वर्ष मे निर्धारित कर से कम अथवा 5 प्रतिशत से अधिक नही होगा , तत्त्पश्चात् अनुवर्ती वर्षों में सम्पत्ति कर में प्रतिवर्ष वृद्धि की अधिकतम दर नियमावली मे विहित रीति से तय की जायेगी;

परन्तु यह भी कि पूंजीगत मूल्य आधारित कर का निर्धारण प्रत्येक वर्ष में एक बार किया जायेगा तथा एक अप्रैल को प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर ही पूर्ण वर्ष का सम्पत्ति कर निर्धारित किया जायेगा। "

अनावासीय भवनो के लिए गणना निम्न भांति की जाएगी: -

0.025 प्रतिशत i . होमस्टे/होटल 01 कमरे से 10 कमरे का निर्धारण वार्षिक मूल्यांकन के

0.050 प्रतिशत ii . होटल 10 कमरे से 35 कमरे का निर्धारण वार्षिक मूल्यांकन के

0.075 प्रतिशत होटल 35 कमरे से 50 कमरे का निर्धारण वार्षिक मूल्यांकन के

0.10 प्रतिशत iv. होटल 35 कमरे से 50 कमरे का निर्धारण वार्षिक मूल्यांकन के

0.10 प्रतिशत v . जिस अवासीय मकान । भूमि पर मोबाइल पर टावर का निर्धारण वार्षिक मूल्यांकन के

1- वार्षिक मूल्य की गणना के प्रयोजन के लिए कारपेट क्षेत्र की गणना निम्नलिखित रूप से की जायेगी (प) कक्ष-आन्तरिक आयाम की पूर्ण माप,

(पप) आच्छादित बरामदा-आन्तरिक आयाम की पूर्ण माप,

(पपप) बालकोनी, गलियारा, रसोई घर और भण्डार गृह आन्तरिक आयाम की 50 प्रतिशत माप,

(पअ) गैराज-आन्तरिक आयाम की एक चैथाई माप,

(अप) गैराज-आन्तरिक आयाम की एक चैथाई माप ,

(अ) स्नानागार , शौचालय , द्वारमण्डप और जीना से आच्छादित क्षेत्रफल, कारपेट क्षेत्रफल का अंग नहीं होगा।

2- उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराये तथा बेदखली का विनियमन ) अधिनियम 1972 के प्रयोजन के लिए किसी भवन का मानक किराया, या युक्तियुक्त वार्षिक किराये को भवन के वार्षिक गणना करते समय हिसाब मे नही लिया जायेगा ।

3- सम्पत्ति/ भवन कर निर्धारण हेतु वार्षिक मूल्यांकन एवं सर्वेक्षण निर्धारित प्रपत्र मे प्रत्येक भवन एवं भूमि का मौके पर निरीक्षण करने के उपरान्त यथा स्थिति के अनुसार किया जायेगा।

4- भूमि/ भवन के वार्षिक मूल्यांकन पर कर- भवन एवं भूमि के वार्षिक मूल्यांकन पर 10 प्रतिशत सम्पत्ति/ भवन कर लिया जायेगा, परन्तु निम्नलिखित भवन एवं भूमि अथवा उसके भाग निम्नानुसार कर से मुक्त रहेगें।

(क) मन्दिर, गुरु‌द्वारा , मस्जिदअथवा दूसरे धार्मिक संस्थाएं जो सार्वजनिक तथा रजिस्टर्ड ट्रस्ट या संस्था के अधीन हों , परन्तु जो स्थान अथवा स्थानो के भाग रहने अथवा किराये पर या अन्य प्रकार से आय अर्जित की जाती है तो उन पर कर की छूट का नियम लागू नही होगें।

(ख) अनाथालय , स्कूल, छात्रावास , चिकित्सालय, धर्मशालाएँ तथा इस प्रकार से अन्य भवन तथा भूमि जो इस प्रकार की दान की संस्थाओं की सम्पत्तियों और उन्ही संस्था द्वारा ऐसे कार्य करती हो ।

(ग) नगर पंचायत , गजां की समस्त परिसम्पत्तियाँ।

5- कर निर्धारण सूचियों का प्रकाशन भूमि एवं भवन के वार्षिक मूल्यांकन पर सम्पत्ति/ भवन कर निर्धारण हेतु नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-141 के अधीन तैयार की गयी सूचियों का प्रकाशन जनसामान्य के अवलोकनार्थ एवं निरीक्षण के लिए नगर पंचायत कार्यालय के अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रदर्शित की जायेगी तथा समाचार पत्र मे इस आशय की सूचना प्रकाशित करते हुए अपील करनी होगी कि पंचवर्षीय गृहकर का निर्धारण किया जा चुका है, जिस किसी व्यक्ति अथवा भवन स्वामी या अध्यासी को कर निर्धारण सूची का अवलोकन एवं निरीक्षण करना हो वे नगर पंचायत कार्यालय में आकर निर्धारण सूचियों 114

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[ भाग 8

का अवलोकन एवं निरीक्षण कर सकते हैं, तथा प्रस्तावित कर निर्धारण की सूचना सम्बन्धित प्रत्येक भवन स्वामी को 15 दिन के अन्दर आपत्ति प्रस्तुत करने हेतु दी जानी आवश्यक होगी और कर निर्धारण सूचियाँ मे प्राप्त आपत्तियों को मोहल्ले/वार्ड वार क्रम संख्या देते हुए आपत्ति एवं निस्तारण पंजिका में अंकित किया जायेगा ।

6- आपत्तियों का निस्तारण भूमि एवं भवन के वार्षिक मूल्यांकन अथवा कर निर्धारण पर प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई एवं निस्तारण हेतु नगर पालिका अधिनियम-1916 की धार-104 के अन्तर्गत गठित समिति अथवा समिति गठित न होने के फलस्वरूप अधिशासी अधिकारी द्वारा निम्न प्रकार से किया जायेगा - (क) प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई हेतु तिथि एवं समय नियत करते हुए आपत्तिकर्ता को लिखितं सूचना प्रेषित करनी होगी ।

(ख) आपत्तियों के निस्तारण की स्थिति एवं निर्णय सम्बन्धित पत्रावली अथवा आपत्ति निस्तारण पंजिका मे जस्टीफिकेशन के साथ दर्ज करनी होगी ।

(ग) शासनादेश संख्या 2064/नौ -9-97-79ज/97 dated 28.06.1997 द्वारा वार्षिक मूल्यांकन एवं कर निर्धारण पर प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई और निस्तारण दिये गये निर्देशानुसार दी जायेगी ।

7- कर निर्धारण सूचियों का अभीप्रमाणीकरण और अभिरक्षा-

(क) अधिशासी अधिकारी या इस निमित प्राधिकृत अधिकारी, यथास्थिति, नगर पंचायत क्षेत्र या उसके किसी भाग के क्षेत्रवार किराया दरों और निर्धारण सूची को अपने हस्ताक्षर से अभिप्रमाणित करेगा।

(ख) इस प्रकार से अभिप्रमाणित सूची को नगर पंचायत कार्यालय में जमा किया जायेगा।

(ग) जैसे सम्पूर्ण नगर क्षेत्र की सूची इस प्रकार से जमा कर दी जाये वैसे ही निरीक्षण हेतु खुले होने के लिए सार्वजनिक सूचना द्वारा घोषणा की जायेगी ।

(घ) कर निर्धारण सूचीयों में उपरोक्तानुसार सम्पूर्ण कार्यवाही होने के उपरान्त सम्पत्ति/ भवन कर मांग एवं वसूली पंजिका मे अन्तिम रूप से सूची दर्ज करते हुए नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -166 के अन्तर्गत दावों की वसूली हेतु अग्रेत्तर कार्यवाही शासन द्वारा समय -समय पर दिये गये निर्देशानुसार करनी होगी। 8- कोई भी व्यक्ति किसी समय भवनों की एसेसमेन्ट सूची पर अपना नाम बतौर स्वामी दर्ज करा सकता है और जिस समय तक आवेदन-पत्र को अस्वीकार करने का काफी कारण न हो उसका नाम दर्ज कर लिया जायेगा, अस्वीकृति का कारण लिख दिया जायेगा।

9- जब इस बात मे शक हो कि भवन या भूमि पर कि जिसका नाम स्वामी के रूप मे दर्ज किया जाये तो बोर्ड या समिति या वह अधिकारी दिया हो, यह तय करेगा कि किसका नाम स्वामी के तौर पर दर्ज होना चाहिए । इसका निश्चय उस समय तक लागू रहेगा जब तक सशक्त न्यायालय उसको रद्द न कर दे ।

10- (1 ) अगर किसी ऐसे भवन या भूमि के स्वामी होने का अधिकार जिस पर यह लागू हो, हस्तान्तरित किया जाये तो अधिकार हस्तान्तरित किया जाये तो अधिकार हस्तान्तरित करने वाला या जिसको हस्तान्तरित किया जाये, वह यदि कोई दस्तावेज न लिखी गयी हो तो अधिकार लेने की तिथि से और लिखि गयी हो तो दस्तावेज लिखे जाने या रजिस्ट्री होने या हस्तान्तरित होने की तिथि से तीन माह के अन्दर हस्तान्तरित होने की सूचना अध्यक्ष को अथवा अधिशासी अधिकारी को देगा।

(2) किसी ऐसे भवन या भूमि का स्वामी जिस पर कर लागू है , की मृत्यु के पश्चात उसका उत्तराधिकारी या जो जायदात का स्वामी हो , इसी प्रकार स्वामी होने के तीन के अन्दर सूचना देगा।

11- (1 ) सूचना में जिसका विवरण पहले दिया गया है, उक्त नियम मे उल्लिखित सभी विवरण सफाई से और ठीक तौर पर दिये जायेगें ।

( 2 ) हर ऐसा व्यक्ति जिसको जायदाद हस्तान्तरित्त की गयी हो , अधिशासी अधिकारी के मांगने पर दस्तावेज (अगर लिखी गयी है ) या उसकी एक प्रतिलिपि जो इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट 1877 ई 0 के अनुसार ली गयी हो , पेश करेंगा ।

भाग 8 ]

115 उत्तराखण्ड गजट, 30 मार्च, 2024 ई० (चैत्र 10 , 1946 शक सम्वत्)

12- उत्तर प्रदेश नगर पालिका एक्ट 1916 की धारा 151 ( 2) ( यथा प्रवृत्त उत्तराखण्ड) के अधीन कर की थोडी माफी या ऐसी माफी के लिए भवन का स्वामी जिसमें कई किरायेदार रहते हो, भवन पर कर लागू करने के समयं बोर्ड से प्रार्थना कर सकता है कि तमाम भवन का कर लागू करने के अलावा हर एक भाग का वार्षिक मूल्य अलग अलग एक नोट मे दर्ज किया जाये और जब कोई भाग, जिसका वार्षिक मूल्य अलग दर्ज हो गया है, या किराये के नब्बे दिन या इससे अधिक समय के लिए किसी साल में खाली रहा हो तो कुकूल भवन के कर का वह हिस्सा माफ किया जाये जो कि एक्ट की धारा 151 ( 1 ) के अधीन वापस या माफ किया जाता यदि भवन के भाग पर अलग कर लागू किया होता।

शास्ति

उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा -299 ( 1 ) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके नगर पंचायत एत‌द्वारा निर्देश देती है कि उपरोक्त उपविधि उल्लघंन करने के लिए अर्थदण्ड रु ० 25000.00 ( रुपये पच्चीस हजार मात्र ) तक हो सकता है और यदि उल्लंघन निरन्तर जारी रहा हो तो प्रथम दोषसिद्धी के दिनांक से ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिनके बारे मे यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराध करता रहा है, अतिरिक्त जुर्माना किया जा सकता है जो रू0 500.00 ( रुपये पाँच सौ) प्रदिदिन तक हो सकता है ।

हरेन्द्र सिंह,

देवेन्द्र सिंह नेगी,

अधिशासी अधिकारी,

नगर पंचायत गजा ।

प्रशासक, नगर पंचायत गजा/ उपजिलाधिकारी नरेन्द्रनगर ।

पी ०एस ०यू० (आर ० ई० ) 13 हिन्दी गजट / 119 - भाग 8-2024 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।

मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।

Cite this issue. Uttarakhand Weekly Gazette, Government of Uttarakhand, 16 March 2024. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-03-16.3029-300525234201/. Archive identifier in.gazette.uttarakhand_weekly.2024-03-16.3029-300525234201.