पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN / 30/ 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की
खण्ड-26 ] रुड़की , शनिवार, दिनांक 22 मार्च, 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्) [ संख्या-12
फार्म नं0 4
(नियम 8 देखिये)
1-प्रकाशन
2- प्रकाशन की अवधि
3- मुद्रक का नाम
(क्या भारतीय नागरिक हैं) (यदि विदेशी हों तो मूल देश ) पता
4-प्रकाशक का नाम
(क्याभारतीय नागरिक हैं) (यदि विदेशी हों तो मूल देश ) 5- सम्पादक का नाम
(क्या भारतीय नागरिक हैं) (यदि विदेशी हों तो मूल देश) पता
6- उन व्यक्तियों के नाम व पते जो समाचार- पत्र के स्वामी हों तथा जो समस्त पूंजी के एक प्रतिशत से अधिक के साझेदार हों ।
: रुड़की ।
: साप्ताहिक ।
:
अपर निदेशक , प्रमोद कुमार सिंह ।
भारतीय ।
अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।
:
अपर निदेशक, प्रमोद कुमार सिंह ।
भारतीय ।
उत्तराखण्ड शासन ।
भारतीय ।
सचिवालय , उत्तराखण्ड, देहरादून ।
:
सचिवालय , उत्तराखण्ड, देहरादून ।
मैं , प्रमोद कुमार सिंह, अपर निदेशक एतद्वारा घोषित करता हूँ कि मेरी अधिकतम जानकारी एवं
विश्वास के अनुसार ऊपर दिये गये विवरण सत्य हैं ।
(प्रकाशक के हस्ताक्षर)
प्रमोद कुमार सिंह, अपर निदेशक ,
राजकीय मुद्रणालय, उत्तराखण्ड, रुड़की ।
225-क 226
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
विषय-सूची
प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग - अलग दिये गए हैं , जिससे उनके अलग -अलग खण्ड बन सकें
विषय
वार्षिक चन्दा
पृष्ठ संख्या
रु०
3075 सम्पूर्ण गजट का मूल्य
1500
225-268
भाग 1 - विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान- नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस
भाग 1 -क- नियम, कार्य - विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया
79-80
1500
975 भाग 2- आज्ञाएं , विज्ञप्तियां , नियम और नियम विधान , जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया, हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां , भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण
975 भाग 3- स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़ - पत्र , नगर प्रशासन , नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया
975 भाग 4 -निदेशक , शिक्षा विभाग , उत्तराखण्ड
975 भाग 5 - एकाउन्टेन्ट जनरल , उत्तराखण्ड
975 भाग 6 -बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट
भाग 7- इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां
975 भाग 8 - सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि
67-88
975
स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़ - पत्र आदि
1425
भाग 1
विज्ञप्ति- अवकाश , नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस
कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग -2
अधिसूचना
प्रकीर्ण
27 फरवरी , 2025 ई ०
संख्या 278836 / XXX ( 2 ) / 2025 - E 38278 - राज्यपाल भारत का संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करके , भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीद सैनिक (उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी ) के आश्रितों की राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन नियमावली , 2018 में अग्रेत्तर संशोधन करने की दृष्टि से निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं: - भाग 1 ]
227 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीद सैनिक (उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी) के आश्रितों की राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन (संशोधन) नियमावली,
2025
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ 1. (1) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीद सैनिक (उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी) के आश्रितों की राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन (संशोधन) नियमावली , 2025 है ।
(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।
नियम 3 का संशोधन
2. i भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीदं सैनिक (उत्तराखण्ड के स्थायी निवासी) के आश्रितों की राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन नियमावली, 2018 (जिसे एतस्मिन पश्चात् मूल नियमावली कहा गया है) में नीचे स्तम्भ -1 में दिए गए विद्यमान नियम 3 के स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्:-
स्तम्भ-1 विद्यमान नियम
स्तम्भ-2 एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम
3. (1) इस नियमावली के प्रावधान परिशिष्ट-1 में उल्लिखितं समूह "ग " एवं "घ" के पदों पर लागू होंगे ;
3. यह नियमावली उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग / उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परिधि के बाहर, नियमावली के परिशिष्ट -1 में उल्लिखित समूह "ग " एवं " घ" के पदों पर ही लागू होगी ।
परन्तु यदि परिशिष्ट-1 में कोई रिक्ति विद्यमान न हो, तो जिलाधिकारी सम्बन्धित जनपद के अन्तर्गत राज्य सरकार के ऐसे अन्य विभाग / कार्यालयों में जिनमें कनिष्ठ सहायक / समूह "घ " के रिक्त पद उपलब्ध हों, को अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन हेतु चिन्हित करते हुए , इसकी सूचना सहित अपनी संस्तुति सचिव , सैनिक कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड शासन को प्रेषित करेंगे । शासन की अनुमति से जिलाधिकारी की संस्तुति पर सम्बन्धित नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा अनुकम्पा के आधार पर तुरन्त ऐसे पद पर नियुक्ति प्रदान की जाएगी , जिसे इस प्रयोजन के लिए सृजित समझा जायेगा और ऐसी नियुक्तियाँ तब तक ही की जा सकेंगी , जब तक परिशिष्ट-1 में उल्लिखित कोई रिक्त पद उपलब्ध न हो जाय;
228
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
परन्तु यह और कि यदि किसी विभाग / कार्यालय में समूह ' घ' की रिक्ति विद्यमान न हो, तो नियुक्ति तुरन्त किसी ऐसे अधिसंख्यक पद के प्रति की जायेगी, जिसे इस प्रयोजन के लिए सृजित किया गया समझा जायेगा ।
(2) उप नियम (1 ) में नियुक्त व्यक्ति सम्बन्धित संवर्ग में नियुक्ति की तिथि से ज्येष्ठता के हकदार होंगे एवं नियमानुसार पदोन्नत किये जा सकेंगे । समूह ' घ' के पद उक्त सीमा तक मृत संवर्ग से मुक्त रहेंगे ।
नियम 5 का 3. संशोधन
मूल नियमावली में नीचे स्तम्भ -1 में दिए गए विद्यमान नियम 5 के स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा , अर्थात्:-
स्तम्भ-1 विद्यमान नियम
स्तम्भ -2 एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम
5. इस नियमावली के प्रवृत्त होने पर , भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीद सैनिक के कुटुम्ब के किसी एक सदस्य को, जो केन्द्र सरकार, अन्य राज्य सरकारों अथवा उत्तराखण्ड सरकार या ऐसी सरकारों के नियंत्रणाधीन किसी
निगम/ परिषद / आयोग/उपकम
5. इस नियमावली के प्रवृत्त होने पर, भारतीय सेना / अर्द्धसैनिक बलों के शहीद सैनिक के कुटुम्ब के किसी एक सदस्य को, जो केन्द्र. सरकार, अन्यं राज्य सरकारों अथवा उत्तराखण्ड सरकार या ऐसी सरकारों के नियंत्रणाधीन किसी निगम/ परिषद/ आयोग / उपक्रम आदि में पहले से सेवायोजित न हो , को यथा संभव उसी जनपद में सेवायोजित किया जायेगा जिस जनपद का शहीद सैनिक स्थायी निवासी हो;
आदि में पहले से सेवायोजित न हो , को यथा संभव उसी जनपद में सेवायोजित किया जायेगा जिस जनपद का शहीद सैनिक स्थायी निवासी हो , बशर्ते वह राज्याधीन सेवाओं में सेवायोजन की शर्ते पूर्ण करता हो ।
परन्तु यदि सम्बन्धित जनपद में रिक्त पद उपलब्ध न हो, तो निकटतम जनपद में रिक्त पद के सापेक्ष सेवायोजित किया जायेगा, बशर्ते वह राज्याधीन सेवाओं में सेवायोजन की शर्ते पूर्ण करता हो ।
नियम 6 का संशोधन 4.
मूल नियमावली में नीचे स्तम्भ -1 में दिए गए विद्यमान नियम 6 के स्थान पर स्तम्भ -2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा, अर्थात्:-
स्तम्भ-1 विद्यमान नियम
स्तम्भ-2 एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम
6. इस नियमावली के अधीन शहीद सैनिक के आश्रित द्वारा सैनिक के शहीद होने के 05 वर्ष के भीतर अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन हेतु आवेदन पत्र सम्बन्धित जनपद के जिला 6. इस नियमावली के अधीन शहीद सैनिक का आश्रित , सेना मुख्यालय अथवा सम्बन्धित अर्द्धसैनिक बल के महानिदेशालय से Battle Casuality भाग 1 ]
229 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
सैनिक कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत किया जायेगा जिसमें सैनिक के शहीद होने की तिथि , सेना / अर्द्ध सैनिक बल की इकाई एवं पद (जिस पर वह अपनी मृत्यु के पूर्व कार्य कर रहा था) का स्पष्ट उल्लेख किया जायेगा । आवेदन पत्र सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी की संस्तुति से सचिव, सैनिक कल्याण विभाग , उत्तराखण्ड शासन को प्रेषित किया जायेगा, जिस पर परिशिष्ट-2 के प्रस्तर -5 के अनुसार अग्रेत्तर कार्यवाही की जायेगी;
अथवा Operational Casuality के रूप में सैनिक के शहीद होने सम्बन्धी आदेश निर्गत होने की तिथि से 02 वर्ष भीतर अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजन हेतु आवेदन पत्र सम्बन्धित जनपद के सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा सम्बन्धित जिलाधिकारी की संस्तुति पर सचिव, सैनिक कल्याण विभाग , उत्तराखण्ड शासन द्वारा परिशिष्ट-2 के प्रस्तर-5 के अनुसार अग्रेत्तर कार्यवाही की जायेगी ।
परन्तु शहीद सैनिक के आश्रित को राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित किये जाने के पश्चात यदि भारतीय सेना / अर्द्ध सैनिक बल में कुटुम्ब के किसी सदस्य को अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित किया जाता है तो उत्तराखण्ड राज्य सरकार में अनुकम्पा के आधार पर प्राप्त नियुक्ति स्वतः समाप्त मान ली जायेगी ।
परन्तु शहीद सैनिक के आश्रित को राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित किये जाने के पश्चात यदि भारतीय सेना/ अर्द्ध सैनिक बल में कुटुम्ब के किसी सदस्य को अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित किया जाता है तो उत्तराखण्ड राज्य सरकार में अनुकम्पा के आधार पर प्राप्त नियुक्ति स्वतः समाप्त मान ली जायेगी ।..
नियम 7 का संशोधन
5. मूल नियमावली में नीचे स्तम्भ-1 में दिए गए विद्यमान नियम 7 के स्थान पर स्तम्भ 2 में दिया गया नियम रख दिया जायेगा , अर्थात् :-
स्तम्भ-1 विद्यमान नियम
स्तम्भ-2 एतद्वारा प्रतिस्थापित नियम
7. राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित भारतीय सेना / अर्द्ध सैनिक बलों के शहीद सैनिक के आश्रित की सम्बन्धित कार्यालय के अन्तर्गत सम्बन्धित संवर्ग में ज्येष्ठता उत्तराखण्ड सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली , 2002 (समय- समय पर यथा संशोधित) में निहित प्राविधानों के अनुसार अवधारित की जायेगी ।
7. राज्याधीन सेवाओं में अनुकम्पा के आधार पर सेवायोजित भारतीय सेना/ अर्द्ध सैनिक बलों के शहीद सैनिक के आश्रित को जिलाधिकारी कार्यालय के अन्तर्गत संबंधित संवर्ग में ज्येष्ठता उत्तराखण्ड सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली 2002 में निहित प्राविधानानुसार अवधारित की जायेगी ।
आज्ञा से , आनन्द बर्द्धन , अपर मुख्य सचिव ।
230
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
In pursuance of the provision of Clause (3) of Article 348 of the 'Constitution of India' , the Governor is pleased to order the publication of the following English Translation of Notification No. 278836/XXX ( 2 ) /2025 - E 38278 Dated- February 27 , 2025 for general information.
NOTIFICATION
Miscellaneous
February 27 , 2025
No.278836/ XXX( 2) / 2025 - E 38278 --In exercise of the powers conferred by the proviso to article 309 of the Constitution of India , the Governor is pleased to make the following rules with a view to amend the Dependent of martyr soldiers of Indian Army/ Paramilitary Forces ( Permanent Resident of Uttarakhand ) on Compassionate basis in State Services employment Rules , 2018: -
The Dependent of martyr soldiers of Indian Army/Paramilitary Forces (Permanent Resident of Uttarakhand) on Compassionate basis in State Services employment (Amendment ) Rules , 2025
and
1. ( 1 )
Short title, Commencement
These rules may be called the Dependent of martyr soldiers of Indian Army/Paramilitary Forces (Permanent Resident of Uttarakhand) on Compassionate basis in State Services employment (Amendment) Rules, 2025 .
(2) It Shall come into force at once .
Amendment of rule 3
2. on In the Dependent of martyred soldiers of the Indian Army /Paramilitary Forces (Permanent Residents of Uttarakhand) Compassionate basis in State Services employment Rules , 2018 (hereinafter referred to as the principal rules) for the existing rule 3, as set out in Column- 1 below, the rule as set out in Column - 2 shall be substituted , namely : - भाग 1 ]
231 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
Column - 2
Column - 1
Existing Rule
Rule here by Substituted
3. (1 ) The provisions of these rules shall be applicable to the posts of Group " C " and " D " mentioned in Appendix - 1 ;
3. These rules will be applicable only to the posts of Group " C " and "D " mentioned in Appendix - 1 of the rules , outside the purview of Uttarakhand Public Service Commission/Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission;
Provided that if vacancy in Appendix - 1 does not exist , then the District Magistrate under concerned district identifying available vacancy of Junior assistant/Group D in such other department/office of State Government for employment on the compassionate basis shall sent recommendation with its information to Secretary, Army Welfare department , Government of. Uttarakhand . With the permission of the Government, on the recommendation of the District Magistrate , the concerned appointing authority shall immediately provide appointment on such a post on compassionate basis , which shall be deemed to be created for this purpose and such appointments may be made only till the time as vacant posts not become available , mentioned in Appendix - 1 ;
Provided further that if in any department/office Group "D " vacancy does not exist , appointment shall be made immediately against such supernumerary post which shall be deemed to have been created for the purpose.
(2) Persons so appointed under sub- rule (1 ) shall be entitled to seniority in the concerned cadre from the date of appointment and may be promoted as per rules . Group . 'D ' posts shall remain free from dead cadre to the said extent .
232
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
Amendment of rule 5
3. In the principal rules , for the existing rule 5 as set out - in column 1 the rule as set out- in in column 2 shall be substituted namely: -
Column-1
Column -2
Existing Rule
Rule here by Substituted
corporation/council/ 5. On commencement of these rules , any member of the family of a martyred soldier of the Indian Army/Paramilitary Forces , who is not employed in the Central Government , other State Governments or the Government of Uttarakhand any or commission/undertaking etc. under the control of such Governments , shall , as far as possible, he shall be employed in the same district in which the martyr soldier is a permanent resident:
5. On coming into force of these rules , any member of the family of a martyred soldier of the Indian Army/Paramilitary Forces , who is working in the Central Government , other State Governments or Uttarakhand Government or any corporation/ council/commission/undertaking etc. under the control of such governments , If not already employed, he will , as far as possible , be employed in the same district in which the martyred soldier is a permanent resident, provided he fulfills the conditions of employment in state services .
vacant Provided that if there is no post available in the concerned district , then he shall be appointed against the vacant post in the nearest district, provided he fulfills the conditions of employment in state services .
Amendment of rule 6
4. In the principal rules , for the existing rule 6 as set out- in column' 1 the rule as set out - in in column 2 shall be substituted namely: -
Column- 1
Column-2
Existing Rule
Rule here by Substituted
6. Under these rules , the dependents of the martyred soldiers can contact the army headquarters or the concerned paramilitary force within 02 years from the date of issue of order from the Directorate General regarding martyrdom of
6. Under these rules , employment on compassionate basis by the dependents of the martyred soldier within 05 years of the martyrdom of the soldier , the application for this shall be submitted to the District Army Welfare Officer of the concerned district in which the date 233 भाग 1 ]
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
of martyrdom of the soldier, the army/ paramilitary force unit and the post (on which he was working before his death) shall be clearly mentioned . The application shall be sent to the Secretary, Army Welfare Department, Uttarakhand Government with the recommendation of the District Magistrate of the concerned district , on which further action shall be taken as per paragraph 5 of Appendix-2:
Provided that after the dependent of a martyr soldier is employed on compassionate basis in the state services , if any member of family is employed compassionate basis in the Indian the on Army/Paramilitary Force, then the appointment on compassionate basis in the Uttarakhand State Government shall be considered automatically dispersed with .
a soldier in the form of Battle Casualty or Operational Casualty, application for employment on compassionate basis should be submitted by the Soldier Welfare Officer of the concerned district on the recommendation of the concerned District Magistrate to the Secretary , Soldier Welfare Department . Further action will be taken by the Uttarakhand government as per paragraph 5 of Appendix- 2 . Provided that after the dependent of martyred soldier is employed on compassionate basis in the state services , if any member of the is a family employed on compassionate basis in the Indian Army/Paramilitary Force, then the appointment received on compassionate basis in the Uttarakhand State willIt automatically Government considered finished; be
Amendment of rule 7
5. In the principal rules , for the existing rule 7 as set out - in column 1 the rule as set out - in in column 2 shall be substituted namely: -
Column- 2
Rule here by Substituted
Column -1 Existing Rule
7. The seniority of the dependants of martyred soldiers of the Indian Army/ Paramilitary Forces employed on compassionate basis in state services in the concerned cadre under the District Magistrate's office will be determined as per the provisions contained in the Uttarakhand Government Servant Seniority Rules 2002 .
7. The seniority of the dependants of martyred soldiers of the Indian Army/Paramilitary Forces employed on compassionate basis in state services in the concerned cadre under the concerned office shall be determined as per the provisions contained in the Uttarakhand Government Servants Seniority Rules 2002 (as amended from time to time) . By Order,
ANAND BARDHAN Additional Chief Secretary .
234
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनुभाग
कार्यालय ज्ञाप
12 फरवरी , 2025 ई ०
संख्या-196 / VII - 3.25/02 (04) एम० एस ० एम ०ई ० / 2022-
RAMP कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य हेतु अनुमोदित SIP (Strategic Investment Plan ) के विभिन्न घटकों हेतु दिशा- निर्देश , 2025
परिचय
भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 के केन्द्रीय बजट में RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance ) कार्यक्रम की घोषणा की गयी है । इसके अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के लिये भारत सरकार द्वारा कुल रू 0 83.05 करोड़ का SIP (Strategic Investment Plan ) स्वीकृत किया गया है । Strategic Investment Plan का विवरण निम्नानुसार है:-
क०सं०
घटक
कार्ययोजना
स्वीकृत धनराशि (करोड़ रू० मे)
राज्यांश
केन्द्रांश
1. निवेश मित्र
8.68 कुल अनुमोदित परियोजना का 20 प्रतिशत
राज्य में गठित निवेश प्रोत्साहन एजेन्सी यूके - स्पाईस में निर्धारित शैक्षिक योग्यता एवं चयन प्रक्रिया के अनुसार की जायेगी ।
2.
5.50
जॉब पोर्टल
भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कार्ययोजना में स्टेक होल्डर कनसल्टेशन, पायलट एवं टेस्टिंग जैसे घटकों पर निक्सी की दरों पर किया जायेगा । तैयार किये जाने वाले पोर्टल को राज्य सरकार के प्रयाग व भारत सरकार के एनएससी पोर्टल के साथ इन्टीग्रेट किया जायेगा ।
18.00
3. फ्लैटेड फैक्ट्री
निर्धारित प्रक्रिया अनुलग्नक-2 पर संलग्न है ।
4.
2.88
निजी औद्योगिक क्षेत्र
निर्धारित प्रक्रिया अनुलग्नक -3 पर संलग्न है ।
5.
13.32
यू-हब
राज्य की स्टार्टअप नीति-2023 एवं यू- हब हेतु प्रचलित गाइडलाइन्स के अनुरूप कार्यवाही की जायेगी ।
0.48
6. उद्योग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण
उत्तराखण्ड शासन, कार्मिक / वित्त विभाग एवं भारत सरकार के प्रतिष्ठानों में निर्धारित प्रकिया के अनुसार किया जायेगा ।
7.
20.00
परिवहन उपादान
निर्धारित प्रकिया अनुलग्नक 4 पर संलग्न है ।
2.00
8. एक्सेस टू फाइनेन्स
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज , भारत के साथ सम्पादित एमओयू के अनुसार कार्यवाही की जायेगी ।
1.12
9. एमएसएमई सहायता केन्द्र
उत्तराखण्ड शासन, कार्मिक/ वित्त विभाग एवं भारत सरकार के प्रतिष्ठानों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा ।
10.
2.65
जिला उद्योग केन्द्र का आधुनिकीकरण
उत्तराखण्ड शासन, कार्मिक/ वित्त विभाग एवं भारत सरकार के प्रतिष्ठानों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा ।
11.
4.48
उत्तराखण्ड शासन , कार्मिक / वित्त विभाग एवं भारत सरकार के प्रतिष्ठानों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा ।
विभाग में संचालित सभी योजनाओं के मॉनिटरिंग हेतु एकीकृत पोर्टल का विकास
12. विज्ञापन एवं प्रचार- 3.95 प्रसार @ 5%
सूचना विभाग , उत्तराखण्ड शासन / भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की जायेगी ।
83.05
16.61
योगः- भाग 1 ]
235 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अनुलग्नक-1
राज्य में रैम्प योजना के क्रियान्वयन हेतु सामान्य दिशा - निर्देश
1. योजना के किसी भी घटक में लाभान्वित होने हेतु एमएसएमई का परिचालन 01 अगस्त, 2023 के उपरान्त होना चाहिये ।
2. योजना में उपलब्ध बजट की सीमा तक ही प्रथम आवत प्रथम पावत (First Come First Serve Basis) के आधार पर लाभ देय होंगे ।
3. योजनान्तर्गत वित्तीय प्रोत्साहनों हेतु निम्नानुसार संवीक्षा समिति होगी , जो अपनी संस्तुतियों सहित राज्य कार्यक्रम कियान्वयन समिति के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करेगी , जिसके आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन का संवितरण किया जायेगाः-
संवीक्षा समितिः
इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों के निस्तारण हेतु निम्नलिखित समिति अधिकृत होगी-
दायित्व
पदनाम
क्र.सं.
अध्यक्ष
1. महानिदेशक/ आयुक्त उद्योग , उत्तराखण्ड
सदस्य
2. उत्तराखण्ड परिवहन आयुक्त के प्रतिनिधि
सदस्य
3. वित्त नियंत्रक , उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड
सदस्य
4. निदेशक / अपर निदेशक उद्योग
सदस्य सचिव
5. नोडल अधिकारी , रैम्प
4. विभिन्न घटकों में वित्तीय प्रोत्साहन हेतु उल्लिखित प्रपत्र सांकेतिक हैं । भारत सरकार / समिति द्वारा अन्य प्रपत्र की अपेक्षा किये जाने पर लाभान्वित इकाई को वांछित प्रपत्र उपलब्ध कराना होगा ।
236
[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च, 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अनुलग्नक-2
RAMP कार्यक्रम के अन्तर्गत फ्लैटेड फैक्ट्री हेतु दिशा-निर्देश
योजना के घटकः
> निजी या सरकारी औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लैटेड फैक्ट्री को पट्टे पर लेने वाली इकाइयों को किराये पर सब्सिडी प्रदान करने में सहायता ।
> 150 वर्ग मीटर से लेकर 1,500 वर्ग मीटर तक के विभाजित निर्मित स्थानों को किराए पर लेने वाली इकाइयों को किराये पर सब्सिडी का प्रावधान ।
> प्रति एमएसएमई इकाई को किराये में 200 वर्ग मीटर तक ही सब्सिडी देय होगी ।
सब्सिडी की मात्रा और प्रकृतिः
इस कार्यक्रम के अन्तर्गत लगभग 300 एमएसएमई के लिए रू 0 3,000 प्रति इकाई प्रतिमाह की दर से 60,000 वर्ग मीटर क्षेत्र रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाएगाः-
> प्रत्येक एमएसएमई 200 वर्ग मीटर पर तीन वर्षों में रू0 6,00,000/- की अधिकतम किराया सब्सिडी का लाभ ले सकती है (प्रति इकाई रू 0 3,000 के रूप में गणना की गयी है) ।
> लाभ लेने वाली इकाइयों को कम से कम पांच वर्षों के लिए पट्टा समझौता करना होगा ।
पात्रताः
इस कार्यक्रम के अन्तर्गत फ्लैटेड फैक्ट्री किराया अनुदान प्राप्त करने की पात्रता निम्नवत होगीः- > इकाई उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर स्थित होनी चाहिए।
> इकाई सूक्ष्म या लघु या मध्यम श्रेणी के तहत विनिर्माण क्षेत्र में होनी चाहिए ।
> इकाई के पास सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम-2006 के तहत उद्यम पंजीकरण होना चाहिए ।
> इकाई के पट्टे की शुरुआत की तारीख 01 अगस्त, 2023 या उसके बाद होनी चाहिए ।
> इकाई सतत् रुप से कार्यशील हो ।
> इकाई उत्तराखंड सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम नीति -2023 के तहत निषिद्ध श्रेणी की नहीं होनी चाहिए ।
> इकाई और / या उसके साझेदार/निदेशक के बैंक खाते आधार से जुड़े होने चाहिए ।
→ रेंट एग्रीमेंट फ्लैटेड फैक्ट्री के संचालन के उद्देश्य से होना चाहिए । यह कानूनी रूप से मान्य होना चाहिए और इसकी अवधि 5 साल से कम नहीं होना चाहिए ।
> किसी भी मामले में सदस्यों या उनके परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली किसी भी संपत्ति के लिए पट्टे की अनुमति नहीं दी जाएगी ।
> इकाई किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक, वित्तीय संस्थान या सहकारी बैंक के लिए डिफॉल्टर नहीं होनी चाहिए ।
इसके अधीन अनुदान/ सब्सिडी तीन वर्ष के लिए उपलब्ध है । यदि भारत सरकार , एमएसएमई मंत्रालय द्वारा इसे विस्तारित किया जाता है , तो तत्शर्तों के अनुरुप लाभ देय होगें ।
भाग 1 ]
237 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
आवेदन प्रक्रियाः
पात्र उद्यमों द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के साथ प्रभावी लीज़ अनुबंध किए जाने के पश्चात, अर्द्धवार्षिक आधार पर (अथवा यदि लीज़ राशि का भुगतान पूरे वर्ष के लिए किया गया है तो वार्षिक आधार पर) अनिवार्य दस्तावेजों के साथ www.investuttarakhand.uk.gov.in पोर्टल पर आवेदन किया जा सकेगा । अर्द्धवार्षिक/ वर्ष की समाप्ति के पश्चात आगामी तीन माह के भीतर निर्धारित पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य होगा।
संबंधित जिला उद्योग केन्द्र/ उद्योग निदेशालय द्वारा समय - समय पर निरीक्षण किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी इकाइयां निरंतर परिचालन कर रही हैं तथा लीज़ शर्तों का अनुपालन कर रही हैं । लाभार्थी एमएसएमई को निम्नलिखित कार्य करने होंगे:-
वार्षिक परिचालन रिपोर्ट प्रस्तुत करना ।
प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा साइट निरीक्षण की अनुमति देना ।
पात्रता को प्रभावित करने वाले किसी भी परिवर्तन की सूचना निदेशालय को तत्काल देना ।
अनिवार्य अभिलेखः
i. उत्तराखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के तहत सीएएफ (www.investuttarakhand.uk.gov.in) पर सैद्धांतिक स्वीकृति की प्रति ।
ii . उद्यम पंजीकरण की प्रति ।
iii . इकाई में वास्तविक पूंजी निवेश के संबंध में सी.ए. द्वारा जारी प्रमाण पत्र की प्रति ।
iv. उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति ।
V. उत्तराखंड अग्निशमन विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति ।
vi . निजी औद्योगिक क्षेत्र के स्वामी / सरकारी औद्योगिक क्षेत्र के स्वामी को लीज राशि के लिए भुगतान किया गया किराया अनुबंध और किराया राशि ।
vii . इस आशय का शपथ पत्र कि इकाई द्वारा प्रस्तुत सभी तथ्य और अभिलेख सही हैं और कोई तथ्य नहीं छिपाया गया है ।
viii . आवश्यकतानुसार अन्य दस्तावेज ।
आवेदन निस्तारण की प्रक्रियाः
i. पोर्टल पर प्राप्त आवेदन पत्र के आधार पर सम्बंधित महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा इकाई का निरीक्षण करते हुए, इकाई के स्थापित एवं कार्यरत होने के सम्बंध में अपनी निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करते हुये , आवेदन की तिथि से 15 दिन के अंदर, आवेदन को, संस्तुति सहित उद्योग निदेशालय को ऑनलाईन अग्रसारित किया जायेगा ।
ii . उद्योग निदेशालय द्वारा प्राप्त आवेदन की संवीक्षा (Scrutiny ) करते हुये , आवेदन की तिथि से 45 दिन के अंदर इसे निस्तारण हेतु संवीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।
iii . संवीक्षा समिति द्वारा इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत आवेदन का निस्तारण किया जायेगा ।
238
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
अनुलग्नक-3
निजी औद्योगिक क्षेत्र के लिए दिशानिर्देश
उपादान की मात्रा और स्वरुपः
इस योजना के कार्यान्वयन अवधि में पात्र एमएसएमई इकाईयों को निम्नलिखित तीन प्रकार की सहायता प्रदान किया जाना है:-
(i) पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित एमएसएमई के लिएः पर्वतीय क्षेत्र में प्रति एमएसएमई न्यूनतम 0.25 एकड़ वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों को 6 % प्रति वर्ष या वास्तविक भुगतान की गई ब्याज दर, जो भी कम हो, की दर से ब्याज की प्रतिपूर्ति के माध्यम से, नई / विस्तार / विविधीकरण / आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए अधिकतम 30,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी । इसके अन्तर्गत योजनावधि में 160 एमएसएमई को लाभान्वित किया जायेगा ।
(ii.) मैदानी क्षेत्रों में स्थापित एमएसएमई के लिएः मैदानी क्षेत्र में प्रति एमएसएमई न्यूनतम 1 एकड़ भूमि वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 6 % प्रति वर्ष की दर से ब्याज की प्रतिपूर्ति या भुगतान की गई वास्तविक ब्याज दर, जो भी कम हो , के माध्यम से सावधि ऋण पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जो नई /विस्तार / विविधीकरण / आधुनिकीकरण परियोजनाओं के लिए अधिकतम रू 0 60,000 तक होगी । इसके अन्तर्गत योजनावधि में 300 एमएसएमई को लाभान्वित किया जायेगा ।
(iii) कार्यशील पूंजी ब्याज सहायताः इसके अतिरिक्त , यह योजना विनिर्माण क्षेत्र में 100 एमएसएमई को कार्यशील पूंजी ब्याज सहायता प्रदान करती है । यह ब्याज सहायता समय- समय पर बकाया राशि पर 3 % प्रति वर्ष की दर से गणना की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा रू0 60,000 प्रति एमएसएमई होगी । यह घटक मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों के लिए समान रुप से लागू होगी । इसके अन्तर्गत योजनावधि में 100 एमएसएमई को लाभान्वित किया जायेगा ।
पात्रताः
इस कार्यक्रम के अंतर्गत निजी औद्योगिक क्षेत्र में स्थापना की दशा में किराया सब्सिडी और ब्याज अनुदान प्राप्त करने की पात्रता निम्नानुसार होगीः
> सूक्ष्म एवं लघु उद्यम जिन्होंने वर्ष 2023-24 से भारत सरकार / उत्तराखण्ड सरकार / आरबीआई के साथ अनुमोदित एवं पंजीकृत किसी भी बैंक/ एनबीएफसी / वित्तीय संस्थान से सावधि ऋण लिया है, वे इस योजना के अंतर्गत पात्र होंगे । आवेदन के समय इकाइयों को निम्नलिखित शर्तों का पालन करना होगा
> इकाई उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक सीमा के भीतर स्थित होनी चाहिए ।
> इकाई सूक्ष्म या लघु या मध्यम श्रेणी के अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र में होनी चाहिए ।
> इकाई वाणिज्यिक उत्पादन में होनी चाहिए, अर्थात योजना के तहत लाभ वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद ही लिया जा सकता है ।
> संवितरण के समय इकाई नियमित उत्पादन में होनी चाहिए और बंद इकाई को सब्सिडी जारी नहीं की जाएगी ।
> वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने से पहले एक वर्ष के लिए भुगतान की गई ब्याज राशि भी इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए प्रतिपूर्ति के लिए पात्र होगी ।
> आवेदक किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक, वित्तीय संस्थान या सहकारी बैंक के साथ डिफॉल्टर या एनपीए नहीं होना चाहिए ।
> इकाई के पास सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम-2006 के तहत उद्यम पंजीकरण होना चाहिए ।
> इकाई उत्तराखंड सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम नीति-2023 के तहत निषिद्ध श्रेणी की नहीं होनी चाहिए ।
भाग 1 ]
239 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
यदि कोई उद्यम प्रोत्साहन का दावा करने वाले वित्तीय वर्ष के समापन के तीन महीने के भीतर या योजना की अधिसूचना की तारीख से, जो भी बाद में हो, सभी मामलों में अपना दावा प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसे सावधि ऋण पर ब्याज सब्सिडी के लिए अपना अधिकार खोना पड़ेगा । :
अनिवार्य अभिलेखः
i. उत्तराखंड सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के तहत सीएएफ (www.investuttarakhand.uk.gov.in) पर सैद्धांतिक मंजूरी की प्रति ।
ii . उद्यम पंजीकरण की प्रति ।
iii . उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति ।
iv . उत्तराखंड अग्निशमन विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति।
v. इस आशय का शपथ पत्र कि इकाई द्वारा प्रस्तुत सभी तथ्य और अभिलेख सही हैं और कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है ।
vi . नवीनतम उद्यम पंजीकरण प्रमाण पत्र (यूआरसी) की प्रति ।
vii . संबंधित डीआईसी / एलएलपी / सहकारी समिति पंजीकरण के साथ निगमन/ साझेदारी पंजीकरण का प्रमाण पत्र ।
viii . निदेशकों / साझेदारों के बहुमत द्वारा उनके नाम, हस्ताक्षर के नमूने और निदेशक पहचान संख्या (जैसा लागू हो) के साथ हस्ताक्षरित बोर्ड संकल्प / पावर ऑफ अटॉर्नी ।
ix . गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर वचनबद्धता / घोषणा।
X. भूमि स्वामित्व दस्तावेज अर्थात, आवेदक इकाई/ मालिक के पक्ष में आवंटन पत्र/ कब्जा प्रमाण पत्र /बिक्री विलेख / हस्तांतरण विलेख / हस्तांतरण विलेख । आवेदक इकाई / मालिक के पक्ष में न्यूनतम 10 वर्ष की अवधि के लिए पंजीकृत पट्टा विलेख / पंजीकृत किराया विलेख , यदि इकाई पट्टे/किराए पर चल रही है ।
xi . बैंक से सावधि ऋण स्वीकृति पत्र ।
xii . संबंधित बैंक / वित्तीय संस्थान के लिए प्रमाण पत्र (अनुलग्नक-II ) ।
xiii . नई इकाई / विस्तार/ विविधीकरण के लिए संयंत्र और मशीनरी में निवेश के संबंध में सीए प्रमाणपत्र (अनुलग्नक-III) ।
xiv. पिछले वित्तीय वर्ष के लिए जीएसटी रिटर्न/ऑडिटेड बैलेंस शीट की प्रति (जैसा लागू हो) ।
xv . इकाई के विस्तार / विविधीकरण के बाद पहले बिक्री बिल की प्रति/ बिक्री बिल की प्रति।
xvi . उद्योग निदेशालय द्वारा समय -समय पर आवश्यक कोई अन्य दस्तावेज ।
आवेदन निस्तारण की प्रक्रियाः
i . पोर्टल पर प्राप्त आवेदन पत्र के आधार पर सम्बंधित महाप्रबन्धक , जिला उद्योग केन्द्र द्वारा इकाई का निरीक्षण करते हुए , इकाई के स्थापित एवं कार्यरत होने के सम्बंध में अपनी निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करते हुये, आवेदन की तिथि से 15 दिन के अंदर, आवेदन को, संस्तुति सहित उद्योग निदेशालय को ऑनलाईन अग्रसारित किया जायेगा ।
ii . उद्योग निदेशालय द्वारा प्राप्त आवेदन की संवीक्षा (Scrutiny ) करते हुये, आवेदन की तिथि से 45 दिन के अंदर इसे निस्तारण हेतु संवीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।
iii . संवीक्षा समिति द्वारा इस दिशानिर्देशों के अंतर्गत आवेदन का निस्तारण किया जायेगा ।
240
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
अनुलग्नक-II
वित्तीय संस्थान/ बैंक से प्रमाण पत्र
को पर स्थित परियोजना के लिए -%
ब्याज पर @
यह प्रमाणित किया जाता है कि मेसर्स है । इकाई को सावधि ऋण वितरित किया गया है । INR का सावधि ऋण स्वीकृत किया गया तक का के सावधि ऋण की पहली किस्त दिनांक को वितरित की गई थी ।
इकाई ने पिछले वित्तीय वर्ष दिनांक 01 /04/20-- से 31 /03 /20-- के लिए निम्नानुसार पुनर्भुगतान किया था ।
सावधि ऋण के विरुद्ध INR--
ब्याज के रूप में
कुल INR
ऊपर उल्लिखित सावधि ऋण की वितरित राशि पर, उपरोक्त अवधि के लिए ब्याज राशि INR पर (6% या वास्तविक दर जो भी लागू हो) आती है ।
यह प्रमाणित किया जाता है किः
(i) इकाई वर्तमान में सावधि ऋण की किस्तों का भुगतान नियमित रूप से कर रही है ।
(ii) कोई दंडात्मक ब्याज नहीं लगाया गया है ।
(iii) उपरोक्त ब्याज इकाई को स्वीकृत मूल सावधि ऋण पर लगाया / गणना किया गया है ।
स्थान
हस्ताक्षर
दिनांक
शाखा प्रबंधक
बैंक का नाम
(बैंक की मुहर) 241 भाग 1 ]
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अनुलग्नक - III
प्लांट और मशीनरी में निवेश और टर्नओवर के संबंध में चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाण पत्र (सीए लेटर हेड पर)
उनके लिए जो इससे संबद्ध हो सकते हैं
मेसर्स
--, जिसका पंजीकृत कार्यालय
है तथा कारखाना
स्थित है, के कंपनी के संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश (मूल मूल्य) के अभिलेखों का सत्यापन किया गया है ।
को
इकाई ने
(बैंक/वित्तीय संस्था) से
तक का सावधि ऋण लिया है ।
रुपये के सावधि ऋण की
को किया गया ।
पहली किस्त का भुगतान दिनांक
इकाई ने पिछले वित्तीय वर्ष दिनांक 01/04/20 से 31/03/20 के लिए निम्नानुसार पुनर्भुगतान कियाथाः
INR ..
सावधि ऋण के विरुद्ध
ब्याज के रूप में
INR .
INR .
कुल
ऊपर उल्लिखित सावधि ऋण की वितरित राशि पर , उपरोक्त अवधि के लिए ब्याज राशि
रुपये (6% या वास्तविक दर जो भी लागू हो) पर आती है ।
उपरोक्त फर्म की खाता बहियों से सत्यापित है कि दिनांक
को संयंत्र एवं मशीनरी में कुल निवेश रुपये है तथा पिछले वित्तीय वर्ष का कारोबार रुपये (रुपये) है ।
चार्टर्ड अकाउंटेंट का नाम और हस्ताक्षर
स्टाम्प और CA सदस्यता संख्या के साथ
दिनांकः
UDIN 242
उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
वचनपत्र/ घोषणा (50 /- (न्यूनतम) रुपए के गैर - न्यायिक स्टाम्प पेपर पर नोटरी पब्लिक (नोटरी स्टाम्प और नोटरी सील और नोटरी पंजीकरण संख्या के साथ विधिवत चिपका हुआ) या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ लेकर प्रस्तुत की जानी चाहिए):
मैं, सत्यनिष्ठा से घोषणा करता हूँ कि मैं मेसर्स का स्वामी / भागीदार /निदेशक/ हूँ, जो के विनिर्माण में लगा हुआ है और मुझे एमएसएमई निदेशालय, उत्तराखंड में ब्याज सब्सिडी का दावा दायर करने के लिए अधिकृत किया गया है ।
यदि किसी प्रकार की चूक के कारण या सत्यापन/ जाँच के समय या अन्यथा किसी भी स्तर पर उत्तराखंड की ऑडिट टीम द्वारा इंगित किए जाने के कारण इकाई पूरी सब्सिडी / सहायता या अतिरिक्त सब्सिडी/ सहायता जारी की जाती है, तो उसे वापस करने के लिए उत्तरदायी होगा ।
इकाई ने न तो किसी बैंक / वित्तीय संस्थान के साथ कोई चूक की है और न ही एनपीए घोषित किया है ।
मैं आगे पुष्टि करता हूँ कि आवेदन में दिए गए विवरण सही हैं । यदि आवेदन / दस्तावेजों में दी गई कोई भी जानकारी गलत या भ्रामक पाई जाती है या किसी भी स्तर पर या राशि के वितरण के बाद पात्रता मानदंड / शर्तों का उल्लंघन करती है, तो मैं इस बात का वचन देता हूँ कि मुझे दी गई ब्याज सब्सिडी योजना की पूरी राशि रुपये(-- रुपये) 12% प्रति वर्ष की दर से ब्याज पर वापस कर दूंगा , साथ ही , यदि इस आवेदन में दिए गए तथ्य सत्यापन/ जांच के समय या किसी भी स्तर पर गलत साबित होते हैं, तो कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए भी तैयार रहूंगा ।
आवेदक के हस्ताक्षर (मुहर सहित)
दिनांकः भाग 1 ]
243 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अनुलग्नक-4
रैम्प (RAMP ) कार्यक्रम के अंतर्गत परिवहन उपादान हेतु दिशानिर्देश
परिवहन उपादान की मात्रा एवं स्वरूपः
इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन अवधि में पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को कच्चे माल तथा विनिर्मित उत्पाद को , भारत की भौगोलिक सीमा में परिवहन करने पर, इस पर होने वाले व्यय का 30 प्रतिशत, अधिकतम रूपये 10 लाख , प्रति इकाई , परिवहन उपादान के रूप में देय होगा । किसी इकाई को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम रूपये 05 लाख का परिवहन उपादान ही देय होगा । इसके अन्तर्गत योजनावधि में 200 एमएसएमई को लाभान्वित किया जायेगा ।
पात्रताः
इस कार्यक्रम के अंतर्गत परिवहन उपादान प्राप्त करने हेतु पात्रता निम्नवत होगी-
i . इकाई उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक सीमा में स्थापित हो ।
ii . इकाई सूक्ष्म अथवा लघु अथवा मध्यम श्रेणी के अंतर्गत विनिर्माणक क्षेत्र की हो ।
iii . इकाई को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम-2006 के अंतर्गत उद्यम पंजीकरण (Udyam Registration ) प्राप्त हो ।
iv . इकाई के वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ की तिथि 01 अगस्त, 2023 या उसके उपरान्त की हो ।
V. इकाई सतत् रूप से कार्यशील हो ।
vi . इकाई उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति-2023 के अंतर्गत प्रतिबन्धित श्रेणी की नहीं हो ।
vii . इकाई द्वारा अपने उत्पाद से सम्बंधित कच्चे माल (पैकेजिंग मैटेरियल भी सम्मिलित है ) एवं विनिर्मित उत्पाद का परिवहन भारत की भौगोलिक सीमा में परिवहन वाणिज्यिक वाहनों (जल / थल/ वायु परिवहन के साधन) से किया गया हो ।
viii . परिवहन व्यय का बीजक पंजीकृत सेवा प्रदाता द्वारा जारी किया गया हो एवं इकाई द्वारा इसका भुगतान कैश के रूप में नहीं किया गया हो ।
ix . प्रत्येक परिवहन हेतु नियमानुसार ई - वे बिल प्राप्त किया गया हो ।
आवेदन प्रक्रियाः
पात्र उद्यमों द्वारा वाणिज्यिक उत्पादन में आने के उपरान्त छमाही आधार पर www.investuttarakhand.uk.gov.in पोर्टल पर अनिवार्य अभिलेखों सहित आवेदन किया जा सकेगा । छमाही की समाप्ति के उपरान्त आगामी तीन माह के अंदर निर्धारित पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य होगा ।
अनिवार्य अभिलेखः
i. उत्तराखण्ड सिंगल विण्डो क्लियरेंस सिस्टम के अंतर्गत कैफ ( Common Application Form ) पर सैद्धान्तिक स्वीकृति की प्रति ।
ii . उद्यम पंजीकरण की प्रति ।
iii. इकाई में स्थायी पूंजी निवेश के सम्बंध में सी.ए. द्वारा जारी प्रमाण - पत्र की प्रति ।
iv . उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण - पत्र की प्रति ।
V. उत्तराखण्ड अग्निशमन विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण- पत्र की प्रति ।
244
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01,1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
vi. परिवहन व्यय से सम्बंधित बीजक एवं भुगतान से सम्बंधित प्रमाण- पत्रं की प्रति ।
वस्तु के परिवहन से सम्बंधित ई -वे बिल की प्रति । vii .
viii . इस आशय का शपथ - पत्र कि इकाई द्वारा प्रस्तुत समस्त तथ्य एवं अभिलेख शुद्ध हैं तथा कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है ।
ix . यथा आवश्यक अन्य अभिलेख ।
आवेदन निस्तारण की प्रक्रियाः
i . पोर्टल पर प्राप्त आवेदन पत्र के आधार पर सम्बंधित महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा इकाई का
निरीक्षण करते हुए , इकाई के स्थापित एवं कार्यरत होने के सम्बंध में अपनी निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करते हुये , आवेदन की तिथि से 15 दिन के अंदर , आवेदन को , संस्तुति सहित उद्योग निदेशालय को ऑनलाईन अग्रसारित किया जायेगा ।
ii. उद्योग निदेशालय द्वारा प्राप्त आवेदन की संवीक्षा (Scrutiny ) करते हुये, आवेदन की तिथि से 45 दिन के अंदर इसे निस्तारण हेतु संवीक्षा समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।
संवीक्षा समिति द्वारा इस दिशानिर्देशों के अंतर्गत आवेदन का निस्तारण किया जायेगा ।
विनय शंकर पाण्डेय , सचिव ।
राजस्व अनुभाग -3
अधिसूचना
20 फरवरी , 2025 ई ०
संख्या 139 / XVIII (3 ) / 2025-03 ( 2 ) / 2025 - राज्यपाल , उत्तर प्रदेश भू- राजस्व अधिनियम , 1901 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 3 वर्ष 1901 ) (उत्तराखण्ड राज्य में यथा प्रवृत्त) की धारा 48 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये यह घोषणा करते हैं कि इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशन की तिथि से नीचे दी गई अनुसूची में उल्लिखित ग्राम सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रियाओं के अधीन होंगे:-
अनुसूची
तहसील
परगना
ग्राम का नाम
जिला
क्रम संख्या
02
05
01
03
04
01
अथरबाड़ी
02
उडालढुंगा
03
एन०टी०डी०
04
कपीना चायबाड़ी
खगमराकोट
05
06
खत्याड़ी
गोलना
07
08
दुगालखोला
09
नगरपालिका खत्याड़ी
10
नारायण तेवाड़ी देवाल
पाण्डेखोला शहर
11
12
पाण्डेखोला ग्रामीण
बारामण्डल
अल्मोड़ा
अल्मोड़ा
13
पोखरबाड़ी
14
पोथ फी स्टेट
बख
15 भाग 1 ]
245 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
16
म्यू० बाहक
17
म्यू० बाहर
18
राजपुर
19
राजपुर म्यू० भीतर
20
रानीधारा
21
रैलापाली
22
हीरा डुंगरी
23
हीरा डुंगरी फी स्टेट
24
म्यू० भीतर
आज्ञा से , डॉ० सुरेन्द्र नारायण पाण्डे , सचिव राजस्व।
In pursuance of the provision of Clause ( 3 ) of the Article 348 of the Constitution of India , the Governor is pleased to order the publication of the following English translation ofNotification No. 139/XVIII ( 3 )/ 2025-03 ( 20 ) /2021 Dated- February 20 , 2025 for general information.
NOTIFICATION
February 20 , 2025
No.139 / XVIII ( 3 ) / 2025-03 ( 20 ) / 2021 --In exercise of the powers conferred by Section 48 of the Uttar Pradesh Land Revenue Act , 1901 ( U.P. Act . No. 3 of 1901 ), ( as applicable to the State of Uttarakhand ) , the Governor is pleased to declare that the villages mentioned in the Schedule below shall be under Survey and Record Operations with effect from the date of publication of the notification in the official Gazette : -
Schedule
District
Tehsil
Pargana
Sl . no Name of Village
1
3
2
4
5
1: Atharbari
2 Udaldhunga
3: NTD
4 Kapina Chaibari
Khagmarakot
5
6 Khatyari
7. Golna
8 Dugalkhola
9 Nagarpalika Khatyari
10 Narayan Tewari Deval
11 Pandeykhola Sahar
12: Pandeykhola Gramin
Almora
Almora Baramandal
13: Pokharbari
141 Poth Free State
15! Bakh
16 Mu . Bahak
17 Mu . Bahar
18 Rajpur
19 Rajpur Mu . Bhitar
20 Ranidhara
21 Railapali
22 Heera Dungri
23 Heera Dungri Free State
241 Mu . Bhitar
ByOrder
SURENDRA NARAYAN PANDEY,
Secretary Revenue .
246
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
पर्यटन अनुभाग -1
अधिसूचना
04 मार्च , 2025 ई ०
संख्या 1 / 279742 / 2025 - स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेन्ट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन (नई टिहरी ) संस्थान की शैक्षणिक/ शिक्षणेत्तर अधिकारियों की सेवा शर्तें निर्धारित किये जाने हेतु " स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेन्ट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन (नई टिहरी ) संस्थान की शैक्षणिक / शिक्षणेत्तर सेवा नियमावली , 2024 " (संलग्न - क) प्रख्यापित किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं ।
संलग्नक-क
स्टेट इन्स्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन , (नई टिहरी) संस्थान की शैक्षणिक / शिक्षणेत्तर सेवा नियमावली, 2024
भाग एक-सामान्य
1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ:-
(1) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम स्टेट इस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन ( नई टिहरी ) संस्थान की शैक्षणिक / शिक्षेणेत्तर सेवा नियमावली, 2024 है ।
(2) यह तुरन्त प्रभावी होगी ।
2. सेवा की प्रास्थिति :-
उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद्, उत्तराखण्ड के अधीन तकनीकी शिक्षा सेवा है, जिसमें क, ख, ग, घ समूह के पद सम्मिलित हैं ।
3. परिभाषाएं:-
जब तक कि विषय या संदर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस नियमावली में-
(क) "संस्थान" का तात्पर्य, स्टेट इस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईडन्यूट्रीशन, नई टिहरी जिसका पंजीकरण सोसाइटी रजिस्ट्रेशन आधिनियम 1860 के अन्तर्गत हुआ है, से है ।
(ख) " सोसाइटी" का तात्पर्य, स्टेट इस्टीट्यूट ऑफ होटल मैंनेजमेंट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन (नई टिहरी ) सोसाइटी से है ।
(ग) "परिषद्" का तात्पर्य संस्थान की सोसाइटी (बोर्ड ऑफ गर्वनर्स) के लिये गठित परिषद् से है ।
(घ) "अध्यक्ष" का तात्पर्य , स्टेट इस्टीट्यूट ऑफ होटल मैंनेजमेंट कैटरिंग टैक्नोलॉजी एण्ड एप्लाईड न्यूट्रीशन (नई टिहरी ) सोसाइटी के अध्यक्ष (अपर मुख्य सचिव/ प्रमुख सचिव/ सचिव, पर्यटन, उत्तराखण्ड शासन)से है ।
(ड.) "सदस्य सचिव " का तात्पर्य , राज्यस्तरीय होटल प्रबंधन, खानपान तकनीकी एवं पोषाहार संस्थान, नई टिहरी के प्राचार्य / निदेशक से है ।
(च) "निदेशक /प्राचार्य " का तात्पर्य, संस्थान के प्राचार्य / निदेशक से है ।
(छ) "नियुक्ति प्राधिकारी " का तात्पर्य संस्थान के प्रशासक मण्डल के अध्यक्ष (अपर मुख्य सचिव/ प्रमुख सचिव/ सचिव, पर्यटन, उत्तराखण्ड शासन) से है ।
(ज) "प्रशासनिक अधिकारी " का तात्पर्य , संस्थान के प्राचार्य / निदेशक से है ।
(झ) "कर्मचारी " का तात्पर्य, उत्तराखण्ड सरकार के अन्तर्गत विद्यमान नियमों के अधीनप्रशासक मण्डल द्वारा इस नियमावली के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया से चयनितकार्मिक से है ।
भाग 1 ]
247 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
(ट) "पद " का तात्पर्य, संस्थान के प्रशासक मण्डल द्वारा समय- समय पर पदों की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप विमर्श कर की गई संस्तुति के आधार पर राज्य सरकार द्वारा सृजित/ स्वीकृत किये गये पदों से है ।
(ठ) "सेवा " का तात्पर्य , संस्थान की सेवा से है ।
(ड) " अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद " (अभातशिप ) से मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अधिनियम, 1987 के अधीन गठित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अभिप्रेत है ।
भाग दो-संवर्ग
4. सेवा संवर्ग :-
(1)सेवा में अधिकारियों/ कर्मचारियों तथा उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या उतनी होगी जो समय-समय पर शैक्षणिक स्टॉफ हेतु ए ०आई ०सी० टी० ई० के मानकानुसार / योग्यतानुसार (भारत सरकार के राजपत्र, F. No- 37-3 /Legal /2010, दिनांक 22 जनवरी , 2010 )/(भारत सरकार के राजपत्र , रजिस्ट्री सं ० डी0 एल0-33004 /99/07 , दिनांक 04 जनवरी, 2016) / (भारत सरकार के राजपत्र, रजिस्ट्री सं ० डी० एल०-33004 / 99 / 82 , दिनांक 01 मार्च, 2019 (अग्रेत्तर समय- समय पर यथा संशोधित) एवं शिक्षणेत्तर कार्मिकों के लिए उत्तराखण्ड सरकार के विद्यमान नियमों के अधीन, संस्थान के प्रशासक मण्डल के द्वारा की गई संस्तुति के आधार पर राज्य सरकारद्वारा निर्धारित की जाय ।
(2) सेवा में कर्मचारियों / अधिकारियों तथा उसमें प्रत्येक श्रेणी के पदों की संख्या जब तक उपधारा (1 ) के अधीन पारित आदेशों द्वारा परिवर्तन न किया जाए , उतनी होगी जो परिशिष्ट में दी गयी हैः परन्तु उपबन्ध यह है कि:-
(क)नियुक्ति प्राधिकारी किसी रिक्त पद को खाली छोड़ सकेंगे अथवा किसी पद को इस प्रकार प्रास्थगित कर सकेंगे , कि कोई व्यक्ति प्रतिपूर्ति का हकदार नहीं होगा ।
(ख) राज्यपाल ऐसे स्थायी अथवा अस्थायी पद सृजित कर सकते है , जैसा कि उचित समझें ।
भाग तीन- भर्ती
5. भर्ती का स्रोत :-
(1 )शैक्षणिक सेवा की विभिन्न श्रेणियों के पदों की भर्ती निम्नलिखित स्रोतों से की जायेगीः-
(एक) निदेशक / प्राचार्य सीधी भर्ती द्वारा
(दो ) प्रोफेसर प्रोन्नति/ सीधी भर्ती द्वारा (50 %-50% )
(तीन) एसोसिएट प्रोफेसर प्रोन्नति/सीधी भर्ती द्वारा (50 %-50% )
(चार) असिस्टेंट प्रोफेसर सीधी भर्ती द्वारा
(2)शिक्षणेत्तर स्टाफ की विभिन्न श्रेणियों के पदों की भर्ती निम्नलिखित स्रोतों से की जायेगीः-
01. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रोन्नति द्वारा
02. पुस्तकालयाध्यक्ष सीधी भर्ती
03. प्रशासनिक अधिकारी प्रोन्नति
248
[भाग 1
| उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
04. प्रधान सहायक (स्टोर) 05. लेखाकार
06. व्यैक्तिक सहायक
07. असिस्टैन्ट लाईब्रेरियन /छात्र 08. सहायक लेखाकार / कैशियर 09. वरिष्ठ सहायक
10. कनिष्ठ सहायक / स्वागती कम लिपिक
11. कनिष्ठ सहायक
12. लैब अटेंडेंट
6. आरक्षण :-
प्रोन्नति द्वारा
प्रोन्नति द्वारा
सीधी भर्ती
सीधी भर्ती
सीधी भर्ती
प्रोन्नति द्वारा
सीधी भर्ती
सीधी भर्ती
सीधी भर्ती
उत्तराखण्ड राज्य की अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, अन्य पिछड़े वर्ग , आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण भर्ती के समय प्रवृत्त सरकार के आदेशों के अनुसार किया जायेगा ।
भाग चार-अर्हता
7. राष्ट्रीयता :-
सेवा में किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी-
(क) भारत का नागरिक हो , या
(ख) तिब्बती शरणार्थी, जो भारत में स्थायी रूप से बसने के आशय से 01 जनवरी , 1962 से पहले भारत आया हो, होना चाहिए, या
(ग) भारतीय मूल का व्यक्ति जिने भारत में स्थायी रूप से बसने के आशय से पाकिस्तान, बर्मा , लंका तथा केनिया , युगाण्डा और संयुक्त तांजानिया गणराज्य( पूर्ववर्ती तांजानिया और जंजीबार ) के पूर्वी अफ्रीकी देशों के प्रव्रजन किया हो परन्तु, उक्त श्रेणी (ख ) और (ग) से सम्बन्धित अभ्यर्थी वह व्यक्ति होगा जिसके पक्ष में राज्य सरकार द्वारा पात्रता प्रमाण- पत्र जारी किया गया हो । परन्तु यह और कि श्रेणी (ख) से सम्बन्धित अभ्यर्थी के लिए भी उप पुलिस उप महानिरीक्षक अभिसूचना शाखा, उत्तरांचल द्वारा प्रदत्त पात्रता प्रमाण- पत्र प्राप्त करना आवश्यक होगा ।
परन्तु यह भी कि यदि अभ्यर्थी उक्त श्रेणी से सम्बन्धित है प्रमाण - पत्र एक वर्ष से अधिक के लिए जारी नहीं किया जायेगा और ऐसे अभ्यर्थी को एक वर्ष से अधिक अवधि के बाद उसके द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त करने पर ही सेवा में रखा जा सकेगा ।
टिप्पणी:- जिस अभ्यर्थी के मामले में पात्रता प्रमाण - पत्र आवश्यक हो , किन्तु उसे न तो जारी किया गया हो और न ही नामंजूर कया गया हो , उसे परीक्षा या साक्षात्कार में प्रवेश दिया जा सकता है और उसे अनन्तिम रूप से नियुक्त भी किया जा सकता है । किन्तु शर्त यह है कि उसके द्वारा आवश्यक प्रमाण - पत्र प्राप्त कर लिया जाय या उसके पक्ष में जारी कर दिया जाय ।
8. शैक्षणिक अर्हता :-
सेवा में विभिन्न शैक्षणिक पदों की नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी के पास निम्नलिखित अर्हताएं होनी चाहिए- भाग 1 ]
249 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
(क)शैक्षणिक/ शिक्षण स्टाफ :-
स्थिति
शैक्षणिक अर्हता
पद/वेतनमान
क्र. स.
1. निदेशक / प्राचार्य
सीधी भर्ती सीधी भर्तीके लिए :-
(क) पी.एच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष
वेतन लेवल -14 , प्रवेश वेतन-144200/- ( राज्य सरकार के अनुसार वेतन लेवल-15)
(ख)पर्यवेक्षक/सह-पर्यवेक्षक के रूप में न्यूनतम दो सफल पी.एच.डी. मार्गदर्शन तथा एससीआई जर्नलों / यूजीसी / अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में न्यूनतम 8 शोध प्रकाशन
(ग) शिक्षण / शोध / उद्योग का न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव जिसमें से न्यूनतम 3 वर्ष का अनुभव प्रोफेसर के पद के समकक्ष पद पर हो ।
टिप्पणी : 1. यह पद 5 वर्ष के लिये संविदात्मक प्रकृति का होगा तथा कार्य निष्पादन के आधार पर इसे एक और अवधि के लिये बढाया जा सकता है ।
2. कार्य - निष्पादन मूल्यांकन संबद्ध विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त की गयी समिति के माध्यम से संचालित किया जायेगा ।
3. अंतिम अवधि की समाप्ति के उपरांत पदधारक अपने उस पूर्व पदनाम में अपने मूल संगठन में वापस पदभार ग्रहण कर लेगा जहां से वह प्रोफेसर / वरिष्ठ प्रोफेसर , जैसा भी मामला हो , के रूप में पदनाम के साथ आगे गया था ।
1. सीधी भर्ती के लिए :-
प्रोन्नति/ सीधी भर्ती द्वारा
(क) प्रासंगिक क्षेत्र में पीएच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष
और
2. प्रोफेसर (लेवल-14, प्रवेश वेतन-144200/-) (राज्य सरकार के अनुसार वेतन लेवल -15)
(ख) शिक्षण/ शोध /उद्योग में न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव जिसमें से न्यूनतम 3 वर्ष एसोसिएट प्रोफेसर अथवा समकक्ष पद पर होना चाहिए ।
और (ग)एस.सी.आई जर्नलों/ यूजीसी / अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में एसोसिएट प्रोफेसर के स्तर पर न्यूनतम 6 शोध प्रकाशन तथा प्रोन्नति की पात्रता की तारीख तक पर्यवेक्षक / सह - पर्यवेक्षक के रूप में न्यूनतम 2 सफल पी.एच.डी.मार्गदर्शन
अथवा प्रोन्नति की पात्रता की तारीख तक एसीसीआई जर्नलों / यूजीसी / अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में एसोसिएट प्रोफेसर के स्तर पर न्यूनतम 10 शोध प्रकाशन 250
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
2. पदधारकों की प्रोन्नति के लिए
(क) प्रासंगिक क्षेत्र में पी.एच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष ।
और
(ख) अपेक्षाओं के लिए निम्न वर्णित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो ।
सिट संख्या
एसोसिएट प्रोफेसर के संवर्ग में अर्जित किया जाना है
कुल अनुभव (वषर्षों में)
अनुभव (वर्षों में)
पी.ए .च . डी. मार्ग दर्शन
औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)
एससीआई जर्नलों/ यूजीसी/ अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन
1
15
3
6
8से 10
2
2
15
3
6
5से <8
3
16
3
4
8से 10
टिप्पणियां:- 360 डिग्री प्रतिपुष्टि
1. प्रोन्नति की अपेक्षाओं के लिए, अगली अवस्था की पात्रता की तिथि तक, प्रति वर्ष प्राप्त प्रतिपुष्टि से सभी पूर्ववर्ती वर्षों की प्रतिपुष्टि को जोड़कर उसके औसत को लिए जाएगा ।
2. ऐसे मामले में जहाँ उम्मीदवार निविर्दिष्ट न्यूनतम प्रतिपुष्टि अंक (स्कोर) प्राप्त करने में असफल रहता है तो उसके पूर्ववर्ती वर्षों की प्रतिपुष्टि को विचार के लिए लिया जाएगा जबकि उनमें से किसी उस एक वर्ष को छोड़ दिया जाएगा, जिसमें न्यूनतम प्रतिपुष्टि स्कोर प्राप्त हुआ होगा ।
1. सीधी भर्ती के लिए :-
प्रोन्नति/ सीधी भर्ती द्वारा
3. एसोसिएट प्रोफेसर (लेवल-13ए1 , प्रवेश वेतन-131400/-)
(क) प्रासंगिक क्षेत्र में पीएच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक क्षेत्र में स्नातक अथवा निष्णात स्तर पर प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष
और
(ख) एससीआई जर्नलों/ यूजीसी /अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में न्यूनतम कुल 6 शोध प्रकाशन
और
(ग) शिक्षण /शोध / उद्योग में न्यूनतम 8 वर्ष का अनुभव जिसमें से न्यूनतम 2 वर्ष का पोस्ट पी.एच.डी. अनुभव होगा।
भाग 1 ]
251 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
टिप्पणी: एचएमसीटी के मामले में, विभागाध्यक्ष के पद में अनिम्न प्रबंधकीय स्तर पर 8 वर्ष का उद्योग का अनुभव जिसमें किसी 4 सितारा होटल अथवा ऊपर की श्रेणी में अथवा आतिथ्य सत्कार उद्योग / पर्यटन उद्योग में किसी समान पद पर 20 व्यक्तियों अथवा अधिक के दल का संचालन किया हो ।
2. पदधारकों की प्रोन्नति के लिए
क. प्रासंगिक क्षेत्र में पी.एच.डी. डिग्री तथा प्रासंगिक शाखा में स्नातक अथवा निष्णात स्तर परप्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष
और
ख. अनुबंध- III अनुसारन्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाए पूर्ण की हों ।
और
ग. अपेक्षाओं के लिए निम्न वर्णित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो
सेट संख्या
सहायक प्रोफेसर (चयन ग्रेड) के संवर्ग में अर्जित किये जाने के लिये
अनुभव (वर्षो में)
औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)
एससीआई जर्नलों/ यूजीसी/ अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन
3
2
5से <8
8से10
3
2
1
4. असिस्टेंट प्रोफेसर
सीधी भर्ती सीधी भर्ती के लिए अर्हताएं-
(सहायक प्रोफेसर) (लेवल -10 , प्रवेश वेतन-57700/-)
1. सहायक प्रोफेसर (लेवल-10 , प्रवेश वेतन-57700/-) के लिए न्यूनतम अर्हताएं
होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी (एचएमसीटी) में न्यूनतम 4 वर्षीय स्नातक डिग्री (अथवा अधिसूचना संख्या 82 , दिनांक 01 मार्च 2019 से पूर्व तीन वर्षीय HMCT स्नातक डिग्री) ; और एचएमसीटी अथवा प्रासंगिक विषय क्षेत्र में निष्णात डिग्री जिसमें से दोनों डिग्रियों में किसी एक में प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष
अथवा 252
[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
होटल प्रबंधन और खानपान प्रौद्योगिकी
(एचएमसीटी) में न्यूनतम 4 वर्षीय स्नातक डिग्री प्रथम श्रेणी अथवा समकक्ष में तथा किसी 4-सितारा होटल में सहायक प्रबंधक से अन्यून प्रबंधकीय स्तर अथवा आतिथ्य सत्कार उद्य ोग/ पर्यटन उद्योग में किसी समकक्ष पद पर न्यूनतम 5 वर्ष का प्रासंगिक अनुभव ।
2. सहायक प्रोफेसर के लिए अर्हताएं (वरिष्ठ मान , लेवल-11 , प्रवेश वेतन-68900/-)
पदधारकों की प्रोन्नति के लिए
(क) सहायक प्रोफेसर के पद के लिए विनिर्दिष्ट अर्हताएं और
(ख) अनुबंध -।।। के अनुसार न्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाएं पूर्ण की हों
और
(ग) अपेक्षाओं के नीचे उल्लिखित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो
सेट संख्या
अतिरिक्त अर्हता
सहायक प्रोफेसर के संवर्ग में अर्जित किएजाने के लिए
अनुभव (वर्षों में)
औसत 360 डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)
एससीआई अनुमोदित जर्नलों की सूची में शोध जर्नलों/ यूजीसी / अभातशिप प्रकाशन
1
4
2
8से 10
2
5
1
8 से1 C
3
5
2
5से <8
3. सहायक प्रोफेसर के लिए अर्हताएं (चयन ग्रेड, लेवल -12, प्रवेश वेतन-79800/-)
पदधारकों की प्रोन्नति के लिए
(क) सहायक प्रोफेसर ( वरिष्ठ मान) के पद के लिए विनिर्दिष्ट अर्हताएं
और
(ख) अनुबंध -।।। के अनुसार न्यूनतम प्रशिक्षण अपेक्षाएं पूर्ण की हों
और
(ग) अपेक्षाओं के नीचे उल्लिखित सेट में से किसी एक की पूर्ति की हो
सेट संख्या
सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ मान) के संवर्ग में अर्जित किए जाने के लिये
औसत 360
एससीआई
अतिरिक्त अनुभव
भाग 1 ]
253 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अर्हता (वर्षों)
डिग्री प्रतिपुष्टि अंक (10 में से)
जर्नलों / यूजीसी / अभातशिप अनुमोदित जर्नलों की सूची में शोध प्रकाशन
4
1
8से <10
4
2
2
5से<10
टिप्पणी 1:- पूर्व अर्हताओं के साथ कार्यरत पदधारकों हेतु अखिल भारतीय शिक्षा परिषद नई दिल्ली के द्वारा प्रख्यापित अधिसूचना फाइल सं० 61-1 / आर आई एफ डी / सातवां सीपीसी /2016-17 दिनांक 01.03.2019 के प्रस्तर 7.5 में उल्लेखित प्राविधान भी उन सभी पर लागू होगें ।
टिप्पणी 2:-उपरोक्ततालिका के क्रमांक 4 में अंकित असिस्टेंट प्रोफेसर (लेवल-10) पदधारकों में उच्चतर वेतनक्रम (लेवल-11 एवं लेवल-12) की अनुमन्यता उनके द्वारा तालिका में संगत पदों हेतु विहित की गई वांछित अर्हता पूर्ण करने पर ही अनुमन्य होगी । उच्चतर वेतन क्रम की अनुमन्यता भी इस हेतु परिषद के अध्यक्ष द्वारा गठित की जाने वाली समिति के द्वारा की गई संस्तुति के क्रम में अध्यक्ष के अनुमोदनोपरान्त निर्गत होने वाले आदेश के अनुसार ही होगी । टिप्पणी 3:- सहायक प्रोफेसर के रूप में सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हताएं के नियम 5.1 (3) में पूर्व में उल्लिखित अर्हताओं में संशोधन करते हुए ए.आई.सी.टी.ई. के नोटिस संख्या- F.No.61-3 /RIFD/7th CPC / 2016-17 Date18-03-2020 में उल्लिखित प्राविधान भी लागू होगें, जो पदधारक के अग्रेत्तर सेवा लाभ हेतु भी मान्य होगें ।
(ख) प्रशासनिक स्टाफ/ शिक्षणेत्तर स्टाफः-
सेवा में विभिन्न शिक्षणेत्तरपदों (निम्नवत तालिका में दिये गये) की नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी के पास निम्नलिखित अर्हताएं होनी चाहिए:-
क्र.सं.
भर्ती / पदोन्नति की प्रक्रिया
पदनाम/ वेतनमान
भर्ती का स्रोत
पदोन्नति/ सीधी भर्ती
प्रोन्नति
1. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (9300-34800 ग्रेड पे 4800)
कार्मिक विभाग के अधिसूचना सं0-170 , दिनांक 01 जून, 2011 "उत्तराखण्ड राज्यधीन सेवाओं के अन्तर्गत लिपिक वर्गीय संवर्ग के पदों पर पदोन्नति हेतु पात्रता अवधि का निर्धारण संशोधन नियमावली, 2011 (समय-समय यथासंशोधित) " के अनुसार । पर
-तदैव-
प्रोन्नति
2. प्रशासनिक अधिकारी (9300-34800 ग्रेड पे 4600)
-तदैव-
प्रोन्नति द्वारा
3. वरिष्ठ सहायक (प्रवर सहायक) (5200-20200 ग्रेड पे 2800)
-तदैव-
सीधी भर्ती
4. कनिष्ठ सहायक (5200-20200 ग्रेड पे 2000)
-तदैव-
सीधी भर्ती
5. कनिष्ठ सहायक / स्वागती कम लिपिक
(5200-20200 ग्रेड पे 2000) 254
[भाग 1
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
6.|
प्रोन्नति
लेखाकार (9300-34800 ग्रेड पे 4200) कार्मिक विभाग के अधिसूचना सं0-124, दिनांक 12 जून, 2019 " उत्तराखण्ड राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखासंवर्ग (अराजपत्रित) सेवानियमावली, 2019 (समय- समय पर यथासंशोधित) " के अनुसार ।
सीधी भर्ती
7. सहायक लेखाकार / कैशियर (5200-20200 ग्रेड पे 2800) -तदैव-
प्रोन्नति द्वारा
8. प्रधान सहायक(स्टोर) / मुख्य सहायक (9300-34800 ग्रेड पे 4200) राज्य सरकार में विद्यमान नियमों अर्हता के अधीनउपरोक्त क्रमांक 1 में वर्णित नियमावली के अनुसार ।
सीधी भर्ती
9. पुस्तकालयाध्यक्ष (9300-34800 ग्रेड पे 4800) माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासनादेश संख्या-40 , दिनांक 28 जनवरी , 2013 के अनुसार अर्हता :- 1. स्नातकोत्तर उपाधि के साथ पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक उपाधि या पुस्तकालय विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ स्नातक उपाधि ; एवं 2.डी०ओ ०ई ० ए० सी० सी० द्वारा प्रदत्त कम्प्यूटर संचालन में ओ लेदल का प्रमाण पत्र ।
सीधी भर्ती
10. असिस्टैन्ट लाईब्रेरियन/ छात्र लिपिक (पुस्तकालय लिपिक) (5200-20200 ग्रेड पे 2800) माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासनादेश संख्या-40 , दिनांक 28 जनवरी , 2013 के अनुसार अर्हता :- इण्टमीडिएट तथा पुस्तकालय विज्ञान में दो वर्षीय डिप्लोमा एवं डी० ओ ० ई० ए ० सी ० सी० द्वारा प्रदत्त कम्प्यूटर संचालन में सी० सी० सी ० लेवल का प्रमाण पत्र ।
सीधी भर्ती
11. व्यैक्तिक सहायक (9300-34800 ग्रेड पे 4200) कार्मिक विभाग के अधिसूचना सं0-121 , दिनांक 21 मई , 2018 "अधीनस्थ कार्यालय व्यैक्तिक सहायक संवर्गीय कर्मचारी सेवा (सीधी भर्ती) नियमावली, 2018 (समय-समय पर यथासंशोधित) " के अनुसार ।
सीधी भर्ती
12. लैब अटेंडेंट (प्रयोगशाला सहायक) (5200-20200 ग्रेड पे 1800) 1.राज्य सरकार में विद्यमान नियमों अधीन यथा संशोधित के में अर्हता समय-समय अनुसार एवं के पर भाग 1 ]
255 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
2.मान्यता प्राप्त संस्था से होटल मैनेजमेंट एण्ड कैटरिंग टैक्नोलॉजी में न्यूनतम एक वर्षीय डिप्लोमा / समकक्ष योग्यता तथा एक वर्ष का होटल में कार्य का अनुभव ।
9. अधिवर्षता की आयु:-
समस्त संकाय सदस्यों तथा संस्थाओं के प्राचार्यो / निदेशकों की अधिवर्षिता की आयु 65 वर्ष होगी । शिक्षणेत्तर कार्मिकों हेतु अधिवर्षता आयु उत्तराखण्ड सरकार के विद्यमान नियमों के अन्तर्गत होगी ।
10. चरित्र :-
सेवा के किसी पद पर सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी का चरित्र ऐसा होना चाहिए , जिसमें व सरकारी सेवा की नौकरी के लिए सर्वथा उपयुक्त हो । नियुक्ति प्राधिकारी इस विषय में स्वयं समाधान करेगा ।संघ सरकार या राज्य सरकार अथवा संघ सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्व में अथवा नियंत्रणाधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे । नैतिक अधमता के अपराध से सम्बद्ध सिद्धदोष व्यक्ति भी नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे ।
टिप्पणी :- संघ सरकारी सा राज्य सरकार अथवा संघ सरकार से स्वामित्व में अथवा नियंत्रणाधीन किसी स्थानीय प्राधिकरण या निगम या निकाय द्वारा पदच्युत व्यक्ति सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे । नैतिक अधमता के अपराध से सम्बद्ध सिद्धदोष व्यक्तिभी नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे ।
11. वैवाहिक प्रास्थिति:-
पुरूष, जिसकी एक से अधिक पत्नी जीवित हो अथवा ऐसी महिला जिसने ऐसे पुरूष से विवाह किया हो जिसकी पहले से ही जीवित पत्नी हो , सेवा में किसी पद पर नियुक्ति के पात्र नहीं होगी । परन्तु, यदि सरकार का समाधान हो जाय कि ऐसा करने के लिए विशेष कारण है , तो वह किसी व्यक्ति को इस नियम के प्रवर्तन से मुक्त कर सकेगी ।
12. शारीरिक योग्यता :-
किसी भी ऐसे अभ्यर्थी को सेवा में किसी पद पर नियुक्त नहीं किया जायेगा, यदि वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है और किसी ऐसे शारीरिक दोष से मुक्त नहीं है, जिसके कारण उसे अपने कर्तव्यों के दक्षतापूर्वक निर्वहन में हस्तक्षेप की सम्भावना हो । किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिये आदेश निर्गत करने से पूर्व उससे यह अपेक्षा की जायेगी कि वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड दो, भाग तीन के अध्याय तीन में दिये गये मूल नियम 10 और उसके अधीन बनाये गये सहायक नियमों के अनुसार जैसा कि वित्तीय हस्त पुस्तिका के खण्ड दो, भाग तीन के अध्याय तीन में दिया गया है, स्वस्थता प्रमाण- पत्र प्रस्तुत करे, परन्तु The Right of Persons With Disabilities Act- 2016 (अधिनियम संख्या-49 वर्ष, 2016 भारत सरकार) की धारा-33 के क्रम में इस हेतु चिन्हित पदों तथा धारा -34 के अन्तर्गत चिहिन्त श्रेणियों में दिव्यांगों को नियमानुसार नियुक्ति देने से मना नहीं किया जायेगा । परन्तु पदोन्नति द्वारा नियुक्त अभ्यर्थी के लिये स्वस्थता प्रमाण- पत्र प्रस्तुत करना अपेक्षित नहीं होगा ।
256
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत)
[भाग 1
भाग पांच- भर्ती प्रक्रिया
13. रिक्तियों की आवधारणा:-
प्रशासक मण्डल तत्समय प्रवृत नियमों के अनुसार शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर पदों की वर्ष के दौरान भरी जाने वाली रिक्तियों और नियम-6 के अधीन उत्तराखण्ड की अनुसूचित जातियाँ , अनुसूचित जनजातियाँ, अन्य पिछड़े वर्ग , आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित की जाने वाली रिक्तियों की संख्या अवधारित करेगा ।
14. सीधी भर्ती की प्रक्रिया :-
(क) शैक्षणिक पदों के लिये सीधी भर्ती के लिए एक चयन समिति का गठन किया जायेगा, जिसमे निम्नलिखित सदस्य होंगेः-
अध्यक्ष
1. सोसायटी के अध्यक्ष/ प्रमुख सचिव / सचिव, पर्यटन, उत्तरााखण्ड शासन
2. कुलपति, उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय के द्वारा नामित प्रतिनिधि
सदस्य
सदस्य
3. शासकीय निकाय के दो सदस्य जिनका नाम निर्देशन, अध्यक्ष द्वारा कियाजायेगा जिसमें से एक अकादमिक प्रशासन में विशेषज्ञ होगा
सदस्य
4. तीन विशेषज्ञ जिसमें संस्थान के प्राचार्य / निदेशक , सम्बन्धित विषय का एक प्रोफेसर एवं एक शिक्षाविद् जिसका नाम निर्देशन शासी निकाय द्वारा नियुक्त किया गया हो
पिछडा सदस्य
5. अनुसूचितजाति / अनुसूचित जनजाति/ अन्य वर्ग / अल्पसंख्यक / महिला/ दिव्यांग जन श्रेणी का प्रतिनिधित्व करने वाला शिक्षाविद्, यदि इन श्रेणियों से सम्बन्धित कोई उम्मीदवार आवेदक हो जिसका नाम निर्देशन, कुलपति अथवा सम्बद्धक विश्वविद्यालय द्वारा किया जायेगा , यदि चयन समिति के उपयुक्त सदस्यों में से कोई भी उस श्रेणी से सम्बन्धित नहीं है
सदस्य-सचिव 6. शासी निकाय के प्राचार्य / निदेशक
नोटः- बैठक के लिये गणपूर्ति का गठन करने के प्रयोजनार्थ, पाँच सदस्य उपस्थित होगें जिनमें से कम से कम दो सदस्य उपरोक्त कुल तीन विषय विशेषज्ञों में से होगें ।
(ख) चयन समिति आवेदन - पत्रों की समीक्षा करेगी और पात्र अभ्यर्थियों से साक्षात्कार में उपस्थित रहने की अपेक्षा करेगी । यदि विज्ञापित पदों की संख्या के सापेक्ष प्राप्त आवेदनों की संख्या आनुपातिक रूप से अत्यधिक हो तो, चयनसमिति इस हेतु लिखित परीक्षा (स्क्रीनिंग) हेतु भी यथाआवश्यकता आयोजित करा सकेगी । लिखित परीक्षा के आयोजक संस्था के संबंध निर्णय परिषद के अध्यक्ष द्वारा परिषद के शासी निकाय की बैठक के माध्यम से लिया जायेगा ।
(ग) चयन समिति प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों द्वारा प्रकट प्रवीणता के क्रम में सूची बनायेगी । चयन समिति पद के लिए उनकी सामान्य उपयुक्तता के आधार पर, गुणानुक्रम के आधार पर क्रमांकित करेगी । सूची में नामों की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक (किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नहीं) होगी ।
भाग 1 ]
257 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
15. शिक्षणेत्तर के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया:-
(क) शिक्षणेत्तर के पदों को राज्य सरकार के विद्यमान संगत नियमों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया एवं व्यवस्था प्रस्तर-8 (ख ) के अनुसार क्रियान्वित किया जायेगा ।
(ख) शिक्षणेत्तर पदों के प्रोन्नति पदों पर भर्ती हेतु चयन समिति का गठन निम्नवतं किया जायेगा, जिसके निम्नलिखित सदस्य होंगे:-
अध्यक्ष 1. प्राचार्य /निदेशक, एस० आई० एच ० एम ० सी ० टी० एण्ड ए ०एन० , नईटिहरी
सदस्य 2. निदेशक, वित्त, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद् , देहरादून
सदस्य 3. अपर निदेशक / संयुक्त निदेशक , यू० टी० डी० बी० / पर्यटन निदेशालय, देहरादून
4. प्रशासक मण्डल के अध्यक्ष द्वारा नामित अधिकारी
सदस्य
सदस्य 5. अनुसूचितजाति / अनुसूचितजनजाति / अन्यपिछ्डा
वर्ग / अल्पसंख्यक / महिला/ दिव्यांग जन श्रेणी का प्रतिनिधित्व करने वाला शिक्षाविद्, यदि इन श्रेणियों से सम्बन्धित कोई उम्मीदवार आवेदक हो जिसका नाम निर्देशन उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किया जायेगा यदि चयन समिति के उपयुक्त सदस्यों में से कोई भी उस श्रेणी से सम्बन्धित नहीं है ।
(ग) चयन समिति शिक्षेणत्तर पदों पर प्रोन्नति हेतु संगत सेवानियमावलियों में विहित पदोन्नति प्रक्रिया / अर्हता के आधार पर परीक्षण / अनुशीलन करते हुए प्रत्येक अभ्यर्थी के प्रोन्नति हेतु उपयुक्तता के आधार पर उपलब्ध रिक्तियों की सीमा में उनके मूल वरिष्ठतानुक्रम में अपनी संस्तुति तैयार करेगी और अपनी संस्तुति परिषद के अध्यक्ष को प्रेषित करेगी ।
(घ) शिक्षेणत्तर पदों पर सीधी भर्तीः- उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSc) उत्तराखण्ड द्वारा ; लिखित परीक्षा के आधार पर व मैरिट लिस्ट तैयार करते हुए पर अभ्यर्थियों का चयन करेगा एवं उक्त चयन सूची परिषद के अध्यक्ष को प्रेषित करेगा । सूची में नामों की संख्या रिक्तियों की संख्या से अधिक (किन्तु 25 प्रतिशत से अधिक नहीं) होगी ।
(ड.) शिक्षणत्तर सीधी भर्ती के पदों हेतु अर्हता :-
क्र.सं.
सीधी भर्ती
पदनाम/वेतनमान भर्ती का स्रोत /
1.
सीधी भर्ती
कनिष्ठ सहायक (5200-20200 ग्रेड पे 2000)
उत्तराखण्डअधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) समूह'ग ' के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया के अनुसार , विहित न्यूनतम शैक्षिक अर्हता के अनुसार (समय - समय पर यथासंशोधित)
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद अथवा उत्तराखण्ड शिक्षा एवं परीक्षा परिषद , की इण्टरमीडिएट परीक्षा प्रमाण-पत्र या सरकार द्वारा उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त किसी अर्हता से कम न हो तथा अभ्यर्थी कम्प्यूटर 258
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
संचालन में 4000 की-डिप्रेशन प्रतिघण्टा की गति होनी आवश्यक है एवं कम्प्यूटर हिन्दी टंकण (देवनागरी लिपि) में दक्ष होना आवश्यक है ।
अधिमानी अर्हता:-
(a) कम्प्यूटर पर अंग्रेजी टंकण का ज्ञान प्राप्त किया हो ।
( b) प्रादेशिक सेना में न्यनतम 2 वर्ष की अवधि तक सेवा की हो, या
(c) राष्ट्रीय कैडेट कोर का ' बी' अथवा 'सी' प्रमाण - पत्र प्राप्त किया हो ।
सीधी भर्ती
-तदैव-
2. कनिष्ठ सहायक/ स्वागती कम लिपिक (5200-20200 ग्रेड पे 2000)
3.
सीधी भर्ती
सहायक लेखाकार / कैशियर (5200-20200 ग्रेड पे 2800)
उत्तराखण्ड राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली , 2019 के अनुसार अर्हता (यथा समय- समय पर संशोधित) ।
सहायक लेखाकार के पद सीधी भर्ती के लिये अभ्यर्थी के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में वाणिज्य में स्नातक उपाधि अथवा बी०बी०ए ० ( Bachelor IN Business Administration) अथवा पोस्ट ग्रेजुएट इन एकाउण्टेंसी तथा हिन्दी टंकण में 4000 की-डिप्रेशन प्रति घण्टा की गति होनी चाहिए अनिवार्य /वांछनीय तथा अर्हताएं, समय- समय पर यथासंशोधित नियमावलियों के अनुसार होंगी ।
सीधी भर्ती
4. पुस्तकालयाध्यक्ष (9300-34800 ग्रेड पे 4800)
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासनादेश संख्या-40 , दिनांक 28 जनवरी , 2013 के अनुसार अर्हता 1. स्नातकोत्तर उपाधि के साथ पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक उपाधि भाग 1 ]
259
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
या पुस्तकालय विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ स्नातक उपाधि ;
एवं
2.डी०ओ ०ई ० ए ० सी० सी० द्वारा प्रदत्त कम्प्यूटर संचालन में ओ लेवल का प्रमाण पत्र ।
सीधी भर्ती
5. असिस्टैन्ट लाईब्रेरियन/छात्र लिपिक (पुस्तकालय लिपिक) (5200-20200 ग्रेड पे 2800)
6.
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासनादेश संख्या-40 , दिनांक 28 जनवरी , 2013 के अनुसार अर्हता :-
इण्टमीडिएट तथा पुस्तकालय विज्ञान में दो वर्षीय डिप्लोमा एवं डी० ओ ०ई ० ए ० सी ० सी० द्वारा प्रदत्त कम्प्यूटर संचालन में सी०सी ०सी० लेवल का प्रमाण पत्र ।
सीधी भर्ती
व्यैक्तिक सहायक (9300-34800 ग्रेड पे 4200) कार्मिक विभाग के अधिसूचना सं0-121 , दिनांक 21 मई, 2018 "अधीनस्थ कार्यालय व्यैक्तिक सहायक संवर्गीय कर्मचारी सेवा (सीधी भर्ती) नियमावली , 2018 (समय- समय पर यथासंशोधित)" के अनुसार तथा संशोधित नियमावली, 2021 के अनुसार सीधी भर्ती के लिये यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् अथवा उत्तराखण्ड विद्य ालयी शिक्षा परिषद की इण्टरमीडिएट परीक्षा या सरकार द्वारा उसके समकक्ष घोषित कोई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण की हो , के साथ- साथ हिन्दी आशुलेखन में न्यूनतम गति 80 शब्द प्रति मिनट तथा कम्प्यूटर पर हिन्दी टंकण में न्यूनतम 4000 की-डिप्रेशन प्रति .. घण्टा की गति प्राप्त करना अनिवार्य होगा ।
अधिमानी अर्हताः-
राष्ट्रीय कैडेट कोर का ' बी' अथवा 'सी' प्रमाण- पत्र प्राप्त किया हो ।
260
[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
7.
सीधी भर्ती
राज्य सरकार में विद्यमान नियमों अर्हता के अधीन । , एवं
लैब अटेंडेंट (प्रयोगशाला सहायक) (5200-20200 ग्रेड पे 1800)
मान्यता प्राप्त संस्था से होटल मैनेजमेंट एण्ड कैटरिंग टैक्नोलॉजी में न्यूनतम एक वर्षीय डिप्लोमा/समकक्ष योग्यता तथा एक वर्ष का होटल में कार्य का अनुभव ।
16. पदोन्नति के लिए भर्ती प्रक्रिया:-
विभिन्न पदों के लिए सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया वार्षिक रूप से क्रियान्वित की जाएगी ताकि अभातशिप मानदण्डों के अनुसार अपेक्षित संकाय संख्या और संवर्ग अनुपात अनुरक्षित किया जाएगा जिसमें विद्यार्थियों को कोई क्षतिकारित न हो । संकाय सदस्यों को प्रोन्नति के लिए साक्षात्कार एक नियमित अवधि पर वार्षिक रूप से संचालित किए जाए ताकि संकाय सदस्यों के कैरियर विकास में किसी गतिरोध से बचा जा सके । जो उम्मीदवार नियमों में प्रस्तावित न्यूनतम अपेक्षा की पूर्ति नहीं करते है , उनका एक वर्ष की अवधि के पश्चात पुनः मूल्यांकन किया जाएगा । प्रोन्नति की तारीख , वह तारीख होगी, जिसको वह समस्त न्यूनतम अपेक्षाओं की पूर्ति करता है तथा उसका सफलतापूर्वक पुनर्मूल्यांकन किया जाता है एवं चयन समिति द्वारा किस आधार पर की गयी संस्तुति के आलोक में नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा तद्विषयक आदेश निर्गत कर दिया जाय ।
इन नियुक्तियों / सहायक प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर में प्रोन्नतियों के लिए यथालागू चयन समिति प्रस्तर-14 में उल्लिखित है ।
जो संकाय प्रोन्नति के लिए विचार किए जाने के लिए इच्छुक है , वे संबधित संस्थान द्वारा तैयार किए गए विनिर्दिष्ट प्रपत्र में लिखित में अपनी उस देय तारीख , जिसको वह सभी अपेक्षित अर्हताओं की पूर्ति कर लेता है, से तीन माह के भीतर संस्थान के प्राचार्य / निदेशक को समस्त प्रत्यय - पत्रों द्वारा सम्यक रूप से समर्थित आवेदन प्रस्तुत करेंगे ।
चयन समिति द्वारा शैक्षणिक पदों के लिए तैयार की गयी योग्यता सूची के अभ्यथिर्यो का पदोन्नति पर ज्येष्ठता सह श्रेष्ठता के आधार पर विचार किया जायेगा एवं शिक्षणेत्तर पदों पर पदोन्नति के लिए यथा लागू संगत नियमों के आधार पर विचार किया जायेगा ।
17. संयुक्त चयन सूची:-
यदि किसी भर्ती के वर्ष नियुक्ति सीधी भर्ती और पदोन्नति दोनों ही प्रकार से की जाती है तो संगत सूचियों से नाम लेकर एक संयुक्त चयन सूची तैयार की जायेगी जिससे विहित प्रतिशत बना रहे । सूची में पहला नाम पदोन्नति द्वारा नियुक्त व्यक्ति का होगा ।
उदाहरण :- उदाहरण के लिए एक ही चयन वर्ष में एसोसिएट प्रोफेसर के 4 पदों पर भर्ती की जाती है जिससे 2 पदोन्नति व 2 सीधी भर्ती से नियुक्त किये जाते हैं तब उनको संयुक्त चयन / ज्येष्ठता सूची निम्न प्रकार होगी :-
1-
प
प
3-
2-
सी
सी
4- 261 भाग 1 ]
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
भाग छः- नियुक्ति, परिवीक्षा, स्थायीकरण एवं ज्येष्ठता
18. नियुक्ति:-
(क) प्रस्तर-14 में उल्लेखित चयन समिति विज्ञापित पदों के सापेक्ष अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (ए० आई० सी० टी ०ई ०) के मानकानुसार, राज्य सरकार के विद्यमान नियमों के अधीन योग्य अभ्यर्थियों का चयन कर सूची तैयार करेगी । तत्पश्चात नियुक्ति प्राधिकारी चयनित अभ्यर्थियों को नियमानुसार नियुक्ति पत्र जारी करेगा ।
(ख) यदि सूचियों का कोई अभ्यर्थी उपलब्ध न हो तो वह इन नियमों के अधीन पात्र अभ्यर्थियों में से ऐसी रिक्तियों पर नियुक्ति कर सकता है ।
(ग) शिक्षणेत्तर पदोंपर राज्य सरकार के विद्यमान नियमों के अन्तर्गत निर्धारित प्रक्रिया एवं व्यवस्था अनुसार नियुक्ति की जायेगी तथा शिक्षणेत्तर पदों पर पदोन्नति के लिए यथा लागू चयन समिति प्रस्तर -15 पर उल्लेखित है ।
19. परिवीक्षा :-
(क) सेवा या किसी स्थायी पद पर या उसके विरूद्ध रिक्ति पर नियुक्त व्यक्ति सहायक प्रोफेसर के पद पर 02 वर्ष तथा अन्य शैक्षणिक पदों पर 01 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रखा जायेगा ।
(ख) नियुक्ति प्राधिकारी को अधिकार होगा की वह नियुक्त व्यक्ति की परिवीक्षा अवधी विशेष परिस्थितियों में आपवादिक परिस्थितियों के सिवाय परिवीक्षा अवधि एक वर्ष तक बढ़ा सकता है ।
(ग) यदि नियुक्ति प्राधिकारी को प्रतीत होता है कि परिवीक्षा अवधि के दौरान किसी समय या परिवीक्षा अवधि की समाप्ति अथवा परिवीक्षा की बढ़ाई गयी अवधि में किसी परिवीक्षाधीन द्वारा अपने अवसरों का प्रर्याप्त उपयोग नहीं किया गया है या अन्यथा समाधान प्रदान करने में असफल रहा है तो उसे उसके मूल पद पर, यदि कोई है, प्रत्यावर्तित किया जा सकेगा या यदि उसका किसी पद पर धारणाधिकार नहीं है , तो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकेंगी ।
(घ ) ऐसे परिवीक्षाधीन व्यक्ति जिसे उपनियम (ग) के अधीन प्रत्यावर्तित कर दिया गया हो या जिसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा ।
20. परिवीक्षाधीन व्यक्ति को उसकी नियुक्ति में उसकी परिवीक्षा अवधि या बढ़ाई गयी परिवीक्षा अवधि की समाप्ति पर स्थायी किया जा सकेगा यदि
(क) उसका कार्य और आचरण संतोषजनक बताया गया होः
(ख) उसकी सत्यनिष्ठा अधिप्रमाणित हैः तथा
(ग) परिषद संतुष्ट हो गयी है कि वह स्थायीकरण हेतु योग्य है ।
21. ज्येष्ठता:-
(1) सेवा में किसी भी श्रेणी के पद पर मौलिक रूप से नियुक्त व्यक्तियों की ज्येष्ठता का निर्धारण उत्तराखण्ड सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली , 2002 के अनुसार किया जायेगा । यदि दो या उससे अधिक व्यक्ति एक साथ नियुक्त किये जाते हैं तो उनकी ज्येष्ठता उस क्रम में निर्धारित की जायेगी । जिसमें उनके नाम, उनकी नियुक्ति आदेश में क्रंमाकित किये जाते हैं ।
262
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
परन्तु यह कि यदि नियुक्ति आदेश में कोई पूर्ववर्ती दिनांक विनिर्दिष्ट किया जाता है, जिससे कोई व्यक्ति मूल रूप में नियुक्त किया जाता है तो वह दिनांक उसकी मौलिक नियुक्ति आदेश का दिनांक माना जायेगा तथा अन्य मामले में इसे आदेश जारी किये जाने का दिनांक माना जायेगा ।
(2) किसी एक चयन के परिणाम स्वरूप सीधी नियुक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो, यथा स्थिति, आयोग या चयन समिति द्वारा अवधारित की जाय ।
(3) पदोन्नति द्वारा नियुक्त व्यक्तियों की परस्पर ज्येष्ठता वही होगी जो उनके संवर्ग में थी जिससे उन्हे पदोन्नत किया गया था ।
(4)जहाँ नियुक्तियां पदोन्नति और सीधी भर्ती दोनों प्रकार से अथवा किसी एक स्रोत द्वारा की जाती है और स्रोतों का पृथक- पृथक कोटा विहित है तो परस्पर ज्येष्ठता नियम 17 के अनुसार तैयार की गयी संयुक्त सूची के नामों को चक्रीय क्रम में इस प्रकार क्रमांकित कर अवधारित की जायेगी कि विहित प्रतिशत बना रहें ।
परन्तु उपबन्ध यह है किः-
1. जहां किसी स्रोत से नियुक्तियां विहित कोटे से अधिक की जाती है वहां कोटे से अधिक नियुक्त व्यक्तियों की ज्येष्ठता अनुवर्ती वर्ष या वर्षों में, जिनमें कोटे के अनुसार रिक्तियां हो, नीचे कर दी जायेंगी ।
2. जहां किसी स्रोत से नियुक्तियां विहित कोटे से कम की जाती है और ऐसे रिक्त पदों के विरूद्ध नियुक्तियां अनुवर्ती वर्ष या वर्षों में की जाती है, वहां इस प्रकार व्यक्तियों किसी पूर्ववर्ती वर्ष से ज्येष्ठता नहीं मिलेगी , बल्कि उन्हें उस वर्ष की ज्येष्ठता मिलेगी जिस वत्र उनकी नियुक्ति की गयी । यद्यपि उस वन की संयुक्त सूची में उनका नाम (इस नियम के अधीन तैयार की जाने वाली सूची) चक्रीय क्रम में अन्य नियुक्त व्यक्तियों के नाम से सबसे ऊपर रखा जायेगा ।
3. जहां नियमों या विहित प्रक्रिया के अनुसार किसी स्रोत से भरे जानी वाली रिक्तियां संगत नियम या प्रक्रिया में उल्लिखित परिस्थितियों में किसी अन्य स्रोत से भरी जा सकती है औरा इस प्रकार कोटे से अधिक नियुक्तियां की जाती हैं , वहां इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति को उसी वर्ष की ज्येष्ठता मिलेगी मानो उसकी नियुक्ति उसके कोटे की रिक्तियां के विरूद्ध की गयी है ।
भाग 7- वेतन आदि
22. वेतनमानः-
(क) सेवा में शैक्षणिक श्रेणीयों के पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को अनुज्ञेय वेतनमान वह होगा जो अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् के मानकों के आलोक में राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर अवधारित किया जायेगा एवं सेवा में शिक्षणेत्तर श्रेणियों के पदों पर नियुक्ति व्यक्तियों को अनुज्ञेय वेतनमान वह होगा जो राज्य सरकार द्वारा समय - समय पर अवधारित किया जायेगा ।
(ख) इस नियमावाली के प्रारम्भ के समय वेतनमान निम्नानुसार होगें:-
(क) शैक्षणिक/शिक्षण स्टाफ :-
क्र०स०
पदनाम
पे गैट्रिक्स /लेवल
01. निदेशक /प्राचार्य
लेवल-14 (AICTEमानकानुसार) ( राज्य सरकार के अनुसार लेवल -15) भाग 1 ]
263 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
02. प्रोफेसर
लेवल-14 ( AICTE मानकानुसार) (राज्य सरकार के अनुसार लेवल-15)
03. एसोसिएट प्रोफेसर
लेवल-13 ए 1 ( AICTEमानकानुसार)
(14. असिस्टेंट प्रोफेसर
लेवल-10 (AICTE मनकानुसार)
(ख) प्रशासनिक स्टाफ/ शिक्षणेत्तर स्टाफ :-
क्र०स ०
पदनाम
वेतनमान
01. वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
9300-34800 ग्रेड पे 4800 वर्तमान में (लवल-8)
02. पुस्तकालयाध्यक्ष
9300-34800 ग्रेड पे 4800 वर्तमान में (लेवल -8 )
03. प्रशासनिक अधिकारी
9330-34600 ग्रेड पे 4600 वर्तमान में (लेवल-7)
04. प्रधान सहायक (स्टोर)
9300-34800 ग्रेड पे 4200 वर्तमान में (लेवल -6)
05. लेखाकार
9300-34800 ग्रेड पे 4200 वर्तमान में (लेवल -6)
06. व्यैक्तिक सहायक
9300-34800 ग्रेड पे 4200 वर्तमान में (लेवल-6 )
07. असिस्टैन्ट लाईब्रेरियन / छात्र लिपिक 5200-20200 ग्रेड पे 2800 वर्तमान में (लेवल-5)
08. कैशियर / सहायक लेखाकार
5200-20200 ग्रेड पे 2800 वर्तमान में (लेवल-5)
09. वरिष्ठ सहायक
5200-20200 ग्रेड पे 2800 वर्तमान में (लेवल-5)
10.
5200-20200 ग्रेड पे 2000 वर्तमान में (लेवल-3)
कनिष्ठ सहायक / स्वागती कम लिपिक
11. कनिष्ठ सहायक
5200-20200 ग्रेड पे 2000 वर्तमान में (लेवल-3 )
12. लैब अटेंडेंट
5200-20200 ग्रेड पे 1800 वर्तमान में (लेवल -1)
23. परिवीक्षा के दौरान वेतन :-
(1 )मूल नियम में किसी प्रतिकूल उपबन्ध के होते हुये भी , प्ररिवीक्षाधीन व्यक्ति को, यदि वह पहले से स्थायीसरकारी सेवा में न हो , समयमान में उसकी प्रथम वेतनवृद्धि तभी दी जायेगी जब उसने एक वर्ष की सन्तोषजनक सेवा पूरी कर ली हो , प्रशिक्षण जहां विहित हो, पूरा कर लिया हो और द्वितीय वेतनवृद्धि दो वर्ष की सेवा के पश्चात तभी दी जायेगी जब उसने परिवीक्षा अवधि पूरी कर ली हो ।
परन्तु यदि सन्तोष प्रदान न कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढ़ाई जाय तो इस प्रकार बढ़ाई गई अवधि की गणना वेतनवृद्धि के लिये नहीं की जायेगी जब तक कि नियुक्ति प्राधिकारी अन्यथा निदेश न दे ।
(2) ऐसे व्यक्ति का जो पहले से सरकार के अधीन कोई पद धारण कर रहा हो , परिवीक्षा अवधि में वेतन सुसंगत मूल नियम द्वारा विनियमित होगा:-
परन्तु यदि सन्तोष प्रदान कर सकने के कारण परिवीक्षा अवधि बढाई जाये जो इस प्रकार बढाई गई अवधि की गणना वेतनवृद्धि के लिये नहीं की जायेगी तब तक कि नियुक्ति प्रधिकारी अन्यथा निदेश न दें ।
264
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(3) परिवीक्षा के दौरान ऐसे व्यक्ति का जो पहले से स्थायी सरकारी सेवा में हो परिवीक्षा अवधि में वेतन राज्य के कार्याकलाप के सम्बन्ध में सेवारत सरकारी सेवकों पर सामान्यतया लागू सुसंगत नियमों द्वारा विनियमित होगा ।
भाग 8- अन्य प्राविधान
24. अधियाचन:
किसी पद या सेवा पर लागू नियमों के अधीन अपेक्षित सिफारिशों से भिन्न किन्ही सिफारिशों पर चाहे लिखित हो या मौखिक विचार नहीं किया जायेगा । किसी अभ्यर्थी की ओर से अपनी अभ्यर्थिता के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में समर्थन प्राप्त करने का कोई प्रयास उसे नियुक्ति के लिये अनर्ह कर देगा ।
25. अन्य विषयों का विनियमन:-
'ऐसे विषयों के सम्बन्ध में, जो इन नियमों या विशेष आदेशों के अन्तर्गत नहीं आते सेवा में नियुक्त ऐसे व्यक्ति राज्य के कार्यों से सम्बन्धित सेवारत सरकारी सेवकों पर साधारणतः लागू निवियमों और आदेशों द्वारा विनियमित होंगे ।
26. सेवा शर्तों का शिथिलीकरण :-
यदि निदेशक/ प्राचार्यके संज्ञान में यह आता है कि इन नियमों में से किसी के संचालन से संस्थान के कार्यकलापों में कठिनाई पैदा करने की संभावना है, तो वे किसी भी नियम या शर्तों में छूट के लिए प्रशासक मण्डल के अध्यक्ष (अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव, पर्यटन विभाग , उत्तराखण्ड शासन )के सामने ऐसा मामला रख सकते हैं । ऐसे मामले या मामलों की गम्भीरता के दृष्टीगत परिषद् किसी भी नियम या शर्तों को राज्य सरकार के पूर्वानुमोदन से उचित और न्यायसंगत तरीके से शिथिल कर सकती है ।
27. व्यावृत्ति :-
इस नियमावली की किसी बात का कोई प्रभाव ऐसे आरक्षण और अन्य रियायतों पर नहीं पड़ेगा इनका इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा समय- सनय पर जारी किये गये आदेशों के अनुसार अनुसूचित जातियाँ, अनुसूचित जनजातियाँ, अन्य पिछड़े वर्ग , आंर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा अन्य विशेष श्रेणियों के अभ्यर्थीयों के उपबन्धित किया जाना अपेक्षित हो ।
भाग 1 ]
265
उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च, 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
परिशिष्ट-01
पदनाम
वेतनमान
पदों की
स्थिति/ संख्या
प्राचार्य/निदेशक स्थायी 01
(लेवल-14 ) (राज्य सरकार के अनुसार
लेवल-15)
प्रोफेसर स्थायी 01
(लेवल-14) ( राज्य सरकार के अनुसार
लेवल-15)
एसोसिएट प्रोफेसर स्थायी 03 (लेवल-13 ए1 )
असिस्टेंट प्रोफेसर स्थायी 11
(लेवल-10)
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्थायी 01 9300-34800 ग्रेड पे 4800 वर्तमान में
(लवल-8)
पुस्तकालयाध्यक्ष स्थायी 01 9300-34800 ग्रेड पे 4800 वर्तमान में
(लेवल-8)
प्रशासनिक अधिकारी स्थायी 01 9300-34800 ग्रेड पे 4600 वर्तमान में
(लेवल-7)
प्रधान सहायक (स्टोर) स्थायी 01 9300-34800ग्रेड पे 4200 वर्तमान में
(लेवल-6)
लेखाकार स्थायी 01 9300--34800 ग्रेड पे
4200 वर्तमान में(लेवल-6 )
व्यैक्तिक सहायक स्थायी 01 9300-34800 ग्रेड पे 4200 वर्तमान में
(लेवल-6)
असिस्टैन्ट लाईब्रेरियन/छात्र स्थायी 01 5200-20200 ग्रेड पे 2500 वर्तमान में
लिपिक
(लेवल-5)
कैशियर/ सहायक लेखाकार स्थायी 01 5200-20200 ग्रेड पे 2800 वर्तमान में
(लेवल-5)
वरिष्ठ सहायक स्थायी 02 5200-20200 ग्रेड पे 2800 वर्तमान में
(लेवल-5)
कनिष्ठ सहायक / स्वागती कम स्थायी 02 5200-20200 ग्रेड पे 2000 वर्तमान में
लिपिक (लेवल-3)
कनिष्ठ सहायक स्थायी 01 5200-20200ग्रेड पे 2000वर्तमान में
(लेवल-3)
लैब अटेंडेंट स्थायी 08
5200-20200 ग्रेड पे 1800 वर्तमान में
(लेवल-1)
कुल योग :- 37
आज्ञा से ,
सचिन कुर्वे ,
सचिव ।
266
उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
सिंचाई अनुभाग -1
11 फरवरी , 2025 ई ०
संख्या-1 /274314/2025-13 ( 02) 2003 ( E-44886) -
विषयः- जल शक्ति मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड , के सम्बन्ध में निर्गत संकल्प पत्र,
भारत सरकार
जल शक्ति मत्रांलय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग
संकल्प
नई दिल्ली , दिनांकः 10 दिसम्बर , 2024 ई ०
संख्या- ए-50013 / 354 / 2024-ई-III- इस मंत्रालय के समय - समय पर यथा संशोधित दिनांक 18 अप्रैल, 1972 के संकल्प सं. एफंसी-47/2 /72 के उप-पैरा-2 जिसके द्वारा गंगा बाढ़ नियंत्रण बोर्ड गठित किया गया था, जिसका पिछला संशोधन दिनांक 28.06.2001 के संकल्प सं. 22 / 3 / 99 - ईआर / 2586 द्वारा जारी किया गया में निम्नलिखित उप- पैरा में निम्न प्रतिस्थापित किया जाए:-
1 . केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
अध्यक्ष
2. केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री
सदस्य (केंद्रीय जल शक्ति
मंत्री की अनुपस्थिति में
अध्यक्ष)
3. केंद्रीय वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
4. केंद्रीय रेल मंत्री या उनके प्रतिनिधि
सदस्य
5. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
6 . केंद्रीय कृषि मंत्री या उनके प्रतिनिधि
सदस्य
7 . बिहार के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि
सदस्य
8. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
9. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
10. हरियाणा के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
11. राजस्थान के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
12. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
13. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
14. झारखंड के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
15. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
16. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री या उनके प्रतिनिधि सदस्य
17. मुख्यमंत्री , राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली या उनके प्रतिनिधि सदस्य
18. सदस्य ( जल संसाधन ) , नीति आयोग सदस्य
19. सचिव , जल संसाधन , नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग , सदस्य
जल शक्ति मंत्रालय , भारत सरकार
20. अध्यक्ष , गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग सदस्य-सचिव
आदेश
आदेश दिया जाता है कि उपर्युक्त संकल्प की एक प्रति बिहार , उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड ,
हरियाणा , मध्य प्रदेश , दिल्ली , झारखंड , छत्तीसगढ़ , पश्चिम बंगाल , राजस्थान , हिमाचल प्रदेश .
की राज्य सरकारों और केंद्रीय वित्त रेलवे , कृषि , सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालयों , नीति
आयोग , प्रधानमंत्री कार्यालय , भारत के राष्ट्रपति के सचिव और भारत के नियंत्रक और महालेखा
परीक्षक को सूचनार्थ भेजी जाए ।
भाग 1 ]
267 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
यह भी आदेश दिया जाता है कि उपर्युक्त संकल्प भारत के राजपत्र में प्रकाशित कियां जाए और बिहार , उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड , हरियाणा , मध्य प्रदेश , दिल्ली , झारखंड , छत्तीसगढ़ , पश्चिम बंगाल , राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों से अनुरोध किया जाए कि वे इसे सामान्य जानकारी के लिए राज्य के राजपत्र में प्रकाशित करें ।
सुबोध यादव , अपर सचिव , भारत सरकार:
दूरभाष 011-23710343
अजीत सिंह , उप सचिव ।
MINISTRY OF JAL SHAKTI
(Jal Shakti Mantralay )
Department of Water Resources , River Development & Ganga Rejuvenation
RESOLUTION
New Delhi , the 10th December, 2024
No.A - 50013/354/ 2024- E - III -- Sub- Para- 2 of this Ministry's resolution No.FC - 47/ 2 / 72 dated 18th April , 1972 constituting the Ganga Flood Control Board as amended from time to time , the last amendment issued , vide Resolution No.22/ 3/ 99 - ER/ 2586 , dated 28.06.2001 - may be substituted with the following sub - paras: -
1 . Union Minister of Jal Shakti Chairman
2. Union Minister of State for Jal Shakti Member
(Chairman in
absence of Union
Minister of Jal
Shakti)
3. Union Minister of Finance or his representative Member
4. Union Minister of Railways or his representative Member
5. Union Minister of Road Transport and Highways or Member
his representative
6. Union Minister of Agriculture or his representative Member
7. Chief Minister of Bihar or his representative Member
8 . Chief Minister of West Bengal or his representative Member
19. Chief Minister of Uttar Pradesh or his representative Member
10. Chief Minister of Haryana or his representative Member
11. Chief Minister of Rajasthan or his representative Member
12. Chief Minister of Madhya Pradesh or his Member
representative
13. Chief Minister of Himachal Pradesh or his Member
representative
14. Chief Minister of Jharkhand or his representative Member
15. Chief Minister of Uttarakhand or his representative Member
16. Chief Minister of Chhattisgarh or his representative Member
17. Chief Minister , NCT of Delhi or his representative Member
18. Member( Water Resources ) , NITI Ayog Member
268
[भाग 1 उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
Member
19. Secretary, DoWR, RD & GR , Jal Shakti , Gol
20. Chairman , Ganga Flood Control Commission Member- Secretary
ORDER
ORDERED that a copy of the Resolution be communicated to the State Governments of Bihar , Uttar Pradesh , Uttarakhand , Haryana, Madhya Pradesh , Delhi , Jharkhand, Chhattisgarh , West Bengal , Rajasthan , Himachal Pradesh and to the Union Ministries of Finance, Railways , Agriculture , Road Transport and Highways , Niti Aayog , PrimeMinister's Office, Secretary to the President of India and Comptroller and Auditor General of India for information .
ORDERED also that the Resolution be published in the Gazette of India and State Governments of Bihar , Uttar Pradesh , Uttarakhand , Haryana , Madhya Pradesh , Delhi , Jharkhand , Chhattisgarh , West Bengal , Rajasthan and Himachal Pradesh be requested to publish it in the State Gazette for general information .
SUBODH YADAV Additional Secretary to the Government of India
Tel- 011-23710343.
AJEET SINGH , Deputy Secretary.
पी० एस ०यू ० ( आर 0 ई 0 ) 12 हिन्दी गजट / 78 -भाग 1-2025 ( कम्प्यूटर / रीजियो ) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।
पंजीकरण संख्या- UA/DO / DDN / 30/ 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की, शनिवार, दिनांक 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
भाग 1 -क
नियम , कार्य -विधियां , आज्ञाएं , विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया
कार्यालय सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी
टनकपुर (चम्पावत )
आदेश
31 अगस्त, 2024 ई ०
पत्रांकः-995 / पंजीयन निरस्त / 2024-25 - वाहन संख्या UA033702 ( MOTOR CAR ) मॉडल 2005 चैचिस 6001421HUZP99751 इंजन न0 4751D105HUZP172029 वाहन श्री विशाल गुप्ता पुत्र श्री राम मोहन गुप्ता निवासी-भजनपुर, बनबसा जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 27/08/2024 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है) आवेदन किया गया हैं । वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन (उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यों के आधार पर वाहन के पंजीयन/ चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।
अतः मैं सुरेन्द्र कुमार सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत ) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 31.08.2024 को वाहन संख्या UA033702 ( MOTOR CAR) मॉडल 2005 चैचिस 6001421HUZP99751 इंजन न 0 4751D105HUZP172029 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।
79-ख 80
[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
आदेश
31 अगस्त, 2024 ई ०
पत्रांकः-997 / पंजीयन निरस्त / 2024-25- वाहन संख्या UA035059 (MAXI CAB ) मॉडल 2007 चैचिस 73A40514 इंजन न० GF74A55680 वाहन स्वामी श्री लक्ष्मण राम पुत्र श्री गंगा राम निवासी- काकड़ बाराकोट जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । दिनांक 26/06/2024 को वाहन स्वामी द्वारा वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं) आवेदन किया गया हैं । वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन (उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यों के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।
अतः मैं सुरेन्द्र कुमार सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 31.08.2024 को वाहन संख्या UA035059 ( MAXI CAB ) मॉडल 2007 चैचिस 73A40514 इंजन न0 GF74A55680 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।
आदेश
11 सितम्बर , 2024 ई०
पत्रांकः-1096 / पंजीयन निरस्त/ 2024-25 - वाहन संख्या UK03C1836 ( MOTOR CAR ) मॉडल 2021 चैचिस MA3EUA61S00H48514 इंजन न 0 F8DN6496884 वाहन श्री हरीश सिंह पुत्र श्री अमर सिंह निवासी ग्राम- मड़ , पोस्ट- सीलिंग तहसील लोहाघाट जिला चम्पावत के नाम पंजीकृत है । वाहन के कब्जे वाले उत्तराधिकारी श्रीमती रेनू देवी पत्नी स्व० श्री हरीश सिंह निवासी ग्राम- मड़ , पोस्ट- सीलिंग तहसील लोहाघाट जिला चम्पावत द्वारा दिनांक 24/05/2024 को वाहन के पंजीयन निरस्त हेतु (क्योंकि वाहन चलने योग्य नहीं है ) आवेदन किया गया हैं । वाहन फाइनेन्स से मुक्त है । प्रवर्तन अनुभाग की आख्या के अनुसार वाहन पर कोई चैक चालान लम्बित नहीं है । सीनियर फोरमैन (उत्तराखण्ड परिवहन निगम टनकपुर) की आख्यानुसार वाहन का मूल चेचिस प्लेट नष्ट कर जमा कर लिया गया है । उक्त तथ्यों के आधार पर वाहन के पंजीयन / चिन्ह के बने रहने का कोई औचित्य नहीं रहता है ।
अतः मैं सुरेन्द्र कुमार सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी टनकपुर (चम्पावत) केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 55 (1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये दिनांक 11.09.2024 को वाहन संख्या UK03C1836 (MOTOR CAR) मॉडल 2021 चैचिस MA3EUA61S00H48514 इंजन न0 F8DN6496884 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करता हूँ ।
सुरेन्द्र कुमार ,
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी ,
टनकपुर चम्पावत ।
पी० एस ० यू० ( आर ० ई ० ) 12 हिन्दी गजट / 78 - भाग 1 - क-2025 (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।
मुद्रक एवम् प्रकाशक -अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।
पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN / 30/ 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की , शनिवार, दिनांक 22 मार्च, 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
भाग 8
सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि
सूचना
मैंने अपनी पुत्री का नाम SHAMBHAVI SAINI से बदलकर THARINI SSAINI कर लिया था भविष्य में पुत्री को THARINI SSAINI के नाम से जाना व पहचाना, पढा लिखा समझा जाये ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
संदीप सैनी पुत्र श्री एस ० सी ० सैनी निवासी- मकान नम्बर 60 लेन नम्बर -1 राजेश्वर नगर फेज -1 सहस्त्रधारा रोड देहरादून
सूचना
मैंने सन्यास धारण करने के पश्चात अपना नाम नीतू सिंह से बदलकर साध्वी अनंत आनंद कर लिया है । भविष्य में मुझे इसी नाम से जाना, पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
अनंत आनंद C/o श्री जगतार बाबाजी निवासी मकान नंबर -11 , श्री मात्रे कुटीर गंगोत्रीपुरी , तहसील- भटवाडी (उत्तरकाशी) उत्तराखण्ड ।
67 -ट 68
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
सूचना
मेरे पुत्र के आधार कार्ड नं 0 559918494061 में त्रुटिवश उसका घरेलू नाम श्रस्ट पाल (Shrast Pal ) गलत दर्ज हो गया है । जबकि मेरे पुत्र का वास्तविक नाम अजितेश पाल है । भविष्य में मेरे पुत्र को अजितेश पाल पुत्र श्री मुनेश पाल के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
मुनेश पाल
निवासी - डबल फाटक मोहनपुरा मौहम्मदपुर मिलापनगर , जिला- हरिद्वार , उत्तराखण्ड ।
सूचना
मेरे आधार कार्ड नं 0 562453811174 में त्रुटिवश मेरा नाम MOHIT CHAUDHARY गलत दर्ज हो गया है । जबकि मेरा वास्तविक नाम MOHIT CHUDERE है । जो कि मेरे हाईस्कूल अनुक्रमांक 2388988 तथा इण्टरमीडिएट अनुक्रमांक 2520677 व जन्म प्रमाण - पत्र में भी दर्ज है । भविष्य में मुझे MOHIT CHUDERE S/ o NARAYAN SINGH के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
MOHIT CHUDERE S/ O NARAYAN SINGH
निवासी- उदलहेडी जिला- हरिद्वार उत्तराखण्ड ।
सूचना
मेरे शैक्षिक प्रमाण पत्रों में त्रुटिवश मेरे पिता का नाम शाहब जलील खान (Shahab Jalil Khan ) हो गया हैं । जबकि मेरे पिता का वास्तविक नाम साहब जलील खान (Sahab Jalil Khan) है । भविष्य में मुझे उरूज खान ( Uruj Khan ) पुत्री साहब जलील खान (Sahab Jalil Khan) के नाम से जाना जाये ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
उरूज खान ( Uruj Khan)
निवासी -37 , दिलाराम बाजार, देहरादून , उत्तराखण्ड ।
69 भाग 8 ]
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
कार्यालय नगर पंचायत केलाखेड़ा (ऊधम सिंह नगर)
सार्वजनिक सूचना
29 अगस्त, 2024 ई ०
पत्रांकः -374 / न 0 पं 0 / ठो ० अप ० प्र ० उपविधि / 2024-25 - सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि नगर पंचायत केलाखेड़ा ने उत्तराखण्ड (उ० प्र० नगर पालिका अधिनियम-1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश -2002 ) अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश- 2007 की धारा-298 झ (घ) एवं पर्यावरण (संरक्षण ) अधिनियम-1986 की धारा 3 , 6 व 25 पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गठित " ठोस अपशिष्ट प्रबन्ध नियम-2016 " के नियम-15 (ङ) , 15 (च ) एवं 15 (यच ) तथा उत्तराखण्ड ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियम- 2016 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में नगर पंचायत, केलाखेड़ा जनपद- ऊधम सिंह नगर द्वारा ठोस अपशिष्ट के लिये अपने सीमान्तर्गत " ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2023 " बनायी गयी है, जिसे उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा 301 की उपधारा -1 एवं धारा 298 (2) के अन्तर्गत अपनी सीमान्तर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था को नियंत्रित तथा विनियमित करने हेतु निम्नलिखित उपनियम बनाने का प्रस्ताव किया है , जिसे उक्त अधिनियम की धारा 301 के अन्तर्गत उन व्यक्तियों जिन पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है , से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित करने के उद्देश्य से उपविधि का प्रकाशन कराने हेतु नगर पंचायत केलाखेड़ा (ऊ ०सिं ० नगर) की बोर्ड बैठक दिनांक 30-10-2023 के प्रस्ताव सं0-05 द्वारा सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव के अनुसार उपनियम " नगर पंचायत केलाखेड़ा ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2023 " बनाई गई है । स्थानीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र दैनिक जागरण एवं अमर उजाला में आपत्ति हेतु उपविधि का प्रकाशन कराया गया था , किन्तु निर्धारित अवधि में नगर पंचायत कार्यालय में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है ।
अतः नियमावली को प्रभावी बनाये जाने हेतु सरकारी राजकीय गजट उत्तराखंड में अंतिम प्रकाशन किया जाता है ।
ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2023
अध्याय-1
सामान्य
1 - संक्षिप्त नाम और लागू होने की तारीखः -
(1 ) ये उप- नियम नगर पंचायत केलाखेड़ा ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन उप -नियम 2023 कहलाएंगे ।
(2) ये उप -नियम नगर पंचायत केलाखेड़ा के सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे ।
2- ये उप -नियम नगर पंचायत केलाखेड़ा की सीमाओं के भीतर लागू होंगे ।
3- परिभाषाएं
( 1 ) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो , इस उपनियमों में निम्नांकित परिभाषाएं लागू रहेंगी ।
(क) "बल्क उघान और बागवान कचरा " का अर्थ हैं, उघानो , बागो आदि से उत्सर्जित बल्क कचरा , जिसमें घास कतरन , खरपतवार, कार्बन युक्त काष्ठ ब्राउन सामग्री जैसे पेडों की छटाई से उत्पन्न कचरा , पेडो की कटिंग, टहनियां, लकडी की कतरन, भूसा , सूखी पत्तियां , पेडों की छटाई आदि से उत्पन्न ठोस कचरा , जो. दैनिक जैव अपघटकीय कचरे के संकलन में समायोजितन ही किया जा सकता हैं ।
70
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
(ख) "बल्क कचरा उत्सर्जन का अर्थ हैं कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 ( जिसे बाद में यहा एस. डब्लू.एम. नियम कहा जाएगा) के नियम 3 ( 1 ) ( 8 ) के अंतर्गत परिभाषित बल्क कचरा उत्सर्जक और पंचायत कार्यालय के सफाई निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा उत्सर्जक।
(ग) "संग्रह " का अर्थ है , कचरा उत्सर्जन के स्त्रोत से ठोस कचरे को उठाना और संग्रहण बिंदुओं या किसी अन्य स्थान तक पहुचाना।
(घ) "सक्षम प्राधिकारी " का अर्थ हैं नगर पंचायत का अध्यक्ष/ प्रशासक अथवा उसके द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति।
(ङ) "निर्माण एवं विध्वंस कचरा " का वही अर्थ होगा , जो निर्माण एवं विध्वंस कचरा नियम, 2016 नियम 3 (1 ) (ग) में परिभाषित किया गया हैं ।
(च) "स्वच्छ क्षेत्र " का अर्थ है, किसी परिसर के सामने और चारो ओर या निकटवर्ती फुटपाथ तक विस्तारित स्वच्छ सार्वजनिक स्थल, जिसमें नाली , फुटपाथ और पटरी के किनारे शामिल हैं, जिनका रख- रखाव इन उपनियमों के अर्न्तगत किया जाना हैं ।
(छ) "सामुदायिक कूड़ा घर (ढलाव) " का अर्थ है , नगर पंचायत द्वारा स्थापित और संचालित अथवा एक या अधिक परिसरों के मालिकों और/ या अधिभोगियों द्वारा मिलकर सड़क किनारे/ ऐसे मालिकों/ अधिभोगियों के किसी एक परिसर में अथवा समक्ष अधिकारी द्वारा अधिकृत उनके साझा परिसर में पृथक्कृत ठोस कचरे के संग्रहण के लिए स्थापित और संचालित कोई संग्रह केंद्र|
(ज) "कंटेनराइज्ड हैड कार्ट' का अर्थ है , ठोस कचरे के बिन्दु दर बिन्दु संग्रह हेतु नगर पंचायत या उसके द्वारा नियुक्त ऐजेंसी/ एजेंट द्वारा प्रदत्त ठेला ।
(झ) " सुपुर्दगी" का अर्थ है किसी भी श्रेणी के ठोस कचरे को नगर पंचायत के वर्कर या ऐसे कचरे की सुपुर्दगी के लिए नगर पंचायत द्वारा नियुक्त, प्राधिकृत या लाइसेंस प्रदत्त व्यक्ति को सौपना अथवा उसे नगर पंचायत या नगर पंचायत द्वारा अधिकृत लाइसेंस प्रदत्त एजेंसी द्वारा प्रदान किए गये वाहन मेंडा लना।
(ञ) "ई-कचरा " का अर्थ वही होगा , जो ई-कचरा ( प्रबंधन) नियम, 2016 के नियम 3 ( 1 ) ( आर ) में निर्दिष्ट किया गया हैं ।
(ट) "फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन ( एफसीटीएस) का अर्थहै , एक ऊर्जा चालित मशीन , जिसका डिजाइन बिखरे हुए ठोस कचरे को कम्पैट करने के लिए किया गया है और प्रचालन के समय स्थिर रहती हैं। प्रचालन के समय कम्पैक्टर मोबाईल भी हो सकती हैं, जिसे मोबाईल ट्रांसफर स्टेशन ( एमटीएस ) कहा जा सकता हैं
(ठ) "ठोस अपशिष्ट" (कूडा- कचरा ) का अर्थ है , सभी प्रकार का कूडा और उसमें कोई भी ऐसा कचरा पदार्थ शामिल जिसे फेकना अथवा संग्रह करना इन उप-नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित है और ऐसा करने से किसी व्यक्ति, जीव जंतु को परेशानी होने या पर्यावरण अथवा सार्वजनिक स्वास्थ्य , सुरक्षा और कल्याण के प्रति खतरा पहुँचाने की आशंका हो ।
(इ) " गंदगी फैलाने" का अर्थ है, किसी ऐसी बस्ती में गंदगी उत्सर्जित करना, डालना , दबाना अथवा तत्संबंधी अनुमतिदेना , जहां वह गिरती, ढलती, बहती , धुलकर, रिसकर अथवा किसी अन्य तरीके से पहुचती हो अथवा गंदगी के उत्सर्जित होने, बहकर आने, धुलकर आने या अन्य किसी तरह से खुले या सार्वजनिक स्थल पर आने की आशंका हो ।
(ढ ) ' स्वामी' का अर्थ है, जो किसी भवन, या भूमि या किसी भाग के मालिक के रूप में अधिकारों का इस्तेमाल करता हैं ।
( ण) अधिभोगी/ पट्टेदार का अर्थ है, ऐसा व्यक्ति जो किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का अधिभोगी/ पट्टेदार हो , इसमें ऐसे व्यक्ति भी शामिल है , जो तत्समय किसी प्रयोजन के लिए किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का इस्तेमाल कर रहा हैं ।
(त) " पैलेटाइजेशन" का अर्थ है , एक प्रक्रिया , जिसमें पैलेट तैयार की जाती हैं, जो ठोस कचरे से बने छोटे क्यूब अथवा सिलिंडरीकल टुकडे होते हैं, और उन के ईधन पैलेट्स भी शामिल होते हैं , जिन्हे रिफ्यूज डेराइब्ड ईधन कहा जाता हैं ।
भाग 8]
71 उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
(थ ) " निर्धारित " का अर्थ है , एस. डब्लू. एम. नियमो या इन उपनियमों द्वारा निर्धारित ।
(द) "सार्वजनिक स्थल " का अर्थ है , कोई ऐसा स्थान , जो आम लोगों के इस्तेमाल और मनोरंजन के लिए सहज सुलभ हैं , भले ही वह वास्तव में लोगों द्वारा इस्तेमाल या उपभोग किया जा रहा हो या नही ।
(ध) "संग्रहण" का अर्थ है , ठोस कचरे को अस्थायी तौर पर इस तरह से संग्रह करना जिससे गंदगी न फैले और मच्छर आदि कीटों, आवारा पशुओं और अत्यधिक बदबू का प्रकोप रोका जा सके।
(न) "सैनेटरी वर्कर " का अर्थ है, नगर पंचायत के इलाकों में ठोस कचरा एकत्र करने या हटाने अथवा नालियो को साफ करने के लिये नगर पंचायत अथवा एजेंसी द्वारा नियोजित व्यक्ति।
(प) "शेड्यूल " का अर्थ है , इन उपनियमों से सम्बद्व शेड्यूल से हैं ।
(फ) "इस्तेमालकर्ता शुल्क/प्रभारी " का अर्थ है, नगर पंचायत द्वारा समय- समय पर सक्षम प्राधिकारी के सामान्य या विशेष आदेश के जरिए कचरा उत्सर्जक पर लगाया गया शुल्क या प्रभार, ताकि ठोस कचरा संग्रह, दुलाई , प्रोसेसिंग और निपटान सेवाओं की आंशिक अथवा पूर्ण लागत कवर की जा सकें।
(ब) " खाली प्लाट' का अर्थ है, प्राइवेट पार्टी व्यक्ति/ सरकारी एजेंसी से सम्बद्ध कोई ऐसी भूमिया खुला स्थल , जिस पर किसी का कब्जा न हो ।
(2) यहां प्रयुक्त लेकिन परिभाषित न किए शब्दों और अभिव्यक्तियों , का अर्थ वही होगा, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 और निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 में अभिप्रेत होगा।
अध्याय-2
4. ठोस कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण
(1 ) सभी कचरा उत्सर्जको के लिए अनिवार्य होगा कि वे उनके स्वयं के स्थलो से उत्सर्जित होने वाले ठोस कचरे को नियमित रुप से पृथक करें और उसे संगृहीत करें। यह पृथक्करण मुख्य रुप से निम्नांकित 3 वर्गों में किया जायेगाः
(क) गैर-जैव अपघटकीय या सूखा कचरा।
(ख) जैव अपघटकीय या गीला कचरा ।
(ग) घरेलू जोखिम पूर्ण कचरा और तीनो श्रेणियों के कचरे को कवर्ड कचरा डिब्बो में रखा जाएगा तथा समय समय पर जारी नगर पंचायत के निर्देशों के अनुसार पृथककृत कचरे को निर्दिष्ट कचरा संग्रहकर्ताओं को सोंपेगा।
(2) प्रत्येक बल्क कचरा उत्सर्जक के लिए अनिवार्य होगा कि वह स्वयं के स्थलों पर उज्सर्जित ठोस कचरे को पृथक करे और उसे संगृहीत करे निम्नाकित 3 वर्गों में:
(क) गैर- जैव अपघटकीय या खुश्क कचरा।
(ख) जैव अपघटकीय या गीला कचरा ।
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(ग) उपयुक्त कूड़े दानों में जोखिम पूर्ण कचरा , जैविक ( गीला ) कचरे को अपने परिसर में प्रोसेस कर कम्पोस्ट या बायोगैस आदि तैयार करना एवं पृथक्क्त कचरे को अधिकृत कचरा संग्रहण एंजेसी जरिए अधिकृत कचरा प्रसंस्करण अथवा निपटान केंद्रो या संग्रहण केंद्रो को सोंपेगा और उसके लिए नगर पंचायत द्वारा समय समय पर निर्धारित ढुलाई शुल्कों का भुगतान अधिकृत कचरा संग्रह एजेंसी को करेगा ।
(3 ) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए कूड़ेदानों का रंग इस प्रकार होगाः -
हराः- जैव कचरे के लिए।
नीलाः- गैर- जैव अपघटकीय या खुष्क कचरे के लिए।
काला: - घरेलु जोखिम पूर्ण कचरे के लिए ।
(4) सभी निवासी कल्याण और बाजार संगठन, नगर पंचायत के भागीदारी से, यह सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा स्रोत पर कचरे का पृथक्करण किया जाए , पृथक किए गए ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बों में संगृहीत किया जाए और फिर से इस्तेमाल करने वालों को सौपी जाएं। जैव अपघटकीय कचरें की प्रोसेंसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(5) 5000 वर्ग मीटर क्षेत्र से अधिक क्षेत्र कब्जा रखने वाले सभी द्वार बंद समुदाय तथा संस्थान नगर पंचायत की भागीदारी के साथ , सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण हो , पृथक किए गए कचरे को अलग- अलग डिब्बों में रखेंगे और पुनःउपयोग आने वाली सामग्री को अधिकृत कूड़ा संग्रहकर्ताओं या अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वाले को सौपेगें । जैव अपघटकीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा।
(6) सभी होटल और रेस्त्रां, नगर पंचायत के भागीदारी सें, कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे , पृथक किए गए गये ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बे में संग्रहीत करेगें और फिर से इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री अधिकृत कचरा संग्रहकर्ताओं अथवा अधिकृत पुनःइस्तेमाल करने वालो को सौपेंगे । जैव अपघटकीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(7) कोई व्यक्ति गैर- लाइसेंसी स्थान पर कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित नही करेगा , जिसमें 100 से अधिक व्यक्ति एकत्र हों , ऐसा करने के लिए यह जरुरी होगा कि अनुसूची में निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क का भुगतान करते हुए नगर पंचायत को कम से कम 3 कार्य दिवस अग्रिमलिखित जानकारी देनी होगी और ऐसा व्यक्तिया आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि ठोस कचरे को स्त्रोत पर अलग अलग किया जाए, ताकि नगर पंचायत द्वारा निधारित संग्रहकर्ता या एजेंसी को सौपा जा सकें।
(8) सेनिटरी उत्पादों से उत्सर्जित कचरे को तत्संबेधी विनिर्माताओं या ब्रॉड मालिकों द्वारा प्रदान किए गए पाउचों अथवा अखबारों या उपयुक्त जैव अपघटकीय संलेपन सामग्री में सुरक्षित तरीके से संलेपित किया जाए और उसे गैर- जैव अपघटकीय या खुष्क कचरे के लिए बनाए गए कूड़ेदान में रखा जाना चाहिए।
(9) प्रत्येक गली विक्रेता अपने क्रियाकलाप के दौरान उत्सर्जित होने वाली खाद्य सामग्री , निपटान योग्य प्लेटें , कप , डिब्बे, रैपर्स, नारियल के खोल , बचा खुचा भोजन , सब्जियां , फल आदि को अलग अलग करके उपयुक्त कूड़ेदानो में संग्रहित करेगा और उसे नगर पंचायत द्वारा अधिसूचित डिपो या कंटेनर या वाहन को सौपेगा।
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(10) उद्यान और बागवानी के कचरा उत्सर्जक अपने परिसर में उत्सर्जित कचरे को अलग से एकत्र करेंगे और समय समय पर नगर पंचायत के निर्देशों के अनुसार उसका निपटान करेंगे ।
( 11 ) घरेलू जोखिम पूर्ण कचरे को प्रत्येक कचरा उत्सर्जक द्वारा स्टोर किया जाएगा और उसे नगर पंचायत या उसके द्वारा अथवा उत्तराखण्ड सरकार या प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा ऐसे कचरे का संग्रह के लिए साप्ताहिक/ समय समय पर उपलब्ध कराए गए वाहन तक पहुंचाया जाएगा अथवा ऐसे कचरे को उत्तराखण्ड सरकार या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित तरीके से निपटान के लिए निर्दिष्ट कचरा संग्रह केंद्र तक पहुंचाया जाएगा।
(12) निर्माण कार्यों और भवनों को ढहाए जाने से उत्सर्जित कचरा , निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016के अनुसार अलग से एकत्र और निपटान किया जायेगा।
(13) बायो-मेडिकल कचरा , ई- कचरा , जोखिम पूर्ण रासायनिक एवं औद्योगिक कचरा बिना उपचारित किए ठोस कचरे में मिश्रित नही किया जाएगा। ऐसे कचरे का निपटान पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम , 1986 के अंतर्गत बनाएग एतत्संबंधी नियमों के अनुसार किया जाएगा ।
( 14) निर्दिष्ट बूचड खानों और बाजारों को छोडकर अन्य परिसरों के प्रत्येक ऐसे मालिक/ कब्जाधारी , जो किसी वाणिज्यिक गतिविधि के परिणाम स्वरुप पोल्ट्री, मछली और पशु वध संबंधी कचरा उत्सर्जित करते हो , उन्हें ऐसे कचरे को अलग से बंद कंटेनर में स्वास्थ्यकर स्थिति में एकत्र करना होगा और रोजमर्रा के आधार पर निर्दिष्ट समयानुसार नगर पंचायत द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्रदान किए गए कचरा वाहन/ स्थल तक पहुचाना होगा। ऐसे कचरे को सामुदायिक कूडा घरो में डालना निषेध होगा ।
( 15 ) पृथक किए गए जैव अपघटकीय ठोस कचरे को यदि उत्सर्जकों द्वारा कम्पोस्ट नया गया हो , तो उसे उन्हें अपने परिसर में अलग से एकत्र करना होगा और उसकी डिलिवरी पंचायत श्रमिक/ वाहन/ कचरा एकत्रकर्ता/ कचरा संग्रहकर्ता अथवा बल्क में जैव अपघटकीय कचरा उत्सर्जित करने वाले निर्दिष्ट वाणिज्यिक उत्सर्जकों के लिए प्रदान कराए गए कचरा संग्रह वाहन तक पहुंचाया जाएगा। यह सुपुर्दगी समय समय पर अधिसूचित समयानुसार करनी होगी ।
अध्याय-3
ठोस कचरा संग्रह
5. ठोस कचरे का संग्रह निम्नांकित अनुसार किया जाएगाः
( 1 ) नगर पंचायत के सभी क्षेत्रों या वार्डों में पृथक किए गए ठोस कचरे को घर घर जा कर संग्रह करने के बारे में एस. डब्लू. एम. नियमों का अनुपालन किया जाएगा, जिनके अनुसार मलिन और अनौपचारिक बस्तियोंसहित दैनिक आधार पर प्रत्येक घर से कचरा एकत्र किया जाएगा । इसके लिए घर घर जाकर कचरा एकत्र करने की अनौपचारिक प्रणाली को नगर पंचायत संग्रह प्रणाली के साथ एकीकृत किया जाएगा।
(2) प्रत्येक घर से कचरा एकत्र करने के लिए क्षेत्र वार विशेष समय निर्धारित किया जाएगा और उसे सम्बद्ध क्षेत्र में खास -खास स्थानों पर प्रचारित किया जाएगा और नगर पंचायत वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा । घर - घर जाकर कचरा एकत्र करने का समय सामान्यतया प्रातः 06 बजे से 11 बजे तक निर्धारित किया जाएगा । व्यापारिक प्रतिष्ठानों , वाणिज्यिक क्षेत्रों में दुकानों या किसी अन्य संस्थागत कचरा उत्सर्जकों से कचरा एकत्र करने का समय प्रातः 07 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा अथवा नगर पंचायत द्वारा समय - समय पर निर्धारित समय पर होगा।
(3) कचरे को स्वः प्रोसेस करने वाले बल्क कचरा उत्सर्जकों से अवशिष्ट ठोस कचरे को एकत्र करने का प्रबंध किया जाएगा ।
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(4) सब्जी फल, फूल, मांस , पोल्ट्री और मछली बाजार से अवशिष्ट ठोस कचरे को रोजमर्रा के आधार पर एकत्र किया जाएगा ।
(5) बागवानी और उद्यान संबंधी कचरा अलग से एकत्र किया जाएगा और उसका निपटान किया जाएगा । इस प्रायोजन के लिए सप्ताह में एक या दो दिन निर्दिष्ट किए जाएंगें ।
(6) फलों और सब्जी बाजारों , मांस और मछली बाजारों , बल्क बागवानी और उद्यानों से उत्सर्जित जैव अपघटकीय कचरे का अनुकूलतम इस्तेमाल करने और संग्रहण एवं ढुलाई की लागत में कमी लाने के लिए ऐसे कचरे को उस क्षेत्र के भीतर प्रोसेस या उपचारित किया जाएगा , जिसमें वह उत्सर्जित होता हैं ।
(7) कंटेनरों में कचरे का हाथ से परिचालन निषेध हैं। यदि दबावों के कारण अपरिहार्य हो तो कचरे का हाथ से निपटान श्रमिकों की उचित देखभाल और सुरक्षा के साथ समुचित संरक्षण के तहत किया जाएगा ।
(8 ) कचरा उत्सर्जक अपने पृथक किए गए कचरे को नगर पंचायत द्वारा अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा तैनात हो पर ऑटो-टिप्पर्स/ रिक्शा आदि वाहनो में डालने के लिए जिम्मेदार होगें। बहु मंजिलाइमारतों , अपार्टमेंटो, आवास परिसरों (इन उपनियमों के खंड 4 व उप- खंड (क-4) और (क- 5) के अंतर्गत आने वालों को छोड़कर ) से उत्सर्जित पृथक किए गए कचरे को ऐसे परिसरों के मुख्य द्वार से अथवा किसी अन्य निर्दिष्ट स्थान से एकत्र किया जाएगा ।
(9) कचरा संग्रह उपकरणों और वाहनों के चयन के लिए बदलती जरुरतों और प्रौद्योगिकी में नई खोजो को ध्यान में रखा जाएगा । कचरा एकत्र करने के लिए विशेष क्षमता वाले ऐसे ऑटो टिप्पर या वाहन इस्तेमाल किए जाएगें , जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होगे और उनमें जैव अपघटकीय और गेर-जैव अपघटकीय कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो पर हूटर भी लगा होगा ।
( 10) स्वचालित ध्वनि रिकार्डिड उपकरण , घंटी या शोर के स्वीकार्य स्तर तक सीमित हॉर्न भी कचरा संग्रह वाहन में कचरा संग्रहकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा ।
(11 ) प्रत्येक प्राथमिक संग्रहण तथा ढुलाई वाहन के लिए मार्ग योजनाए और नगर पंचायत द्वारा या अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। ये योजनाएं तालिका बद्व और जीआईएस मानचित्र में होगी , जो नगर पंचायत द्वारा विधिवत रुप से अनुमोदित होगी और उन में प्रारंभिक बिन्दु, प्रारंभ करने का समय , प्रतीक्षा स्थलों , मार्ग में रुकने का समय , अंतिम बिंदु और निर्दिष्ट मार्ग के अंतिम समय का उल्लेख होगा। नगर पंचायत अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा प्रत्येक गली में एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर प्राथमिक कचरा संग्रह और ढुलाई वाहनों की समय-सारणी प्रदर्शित की जाएगी , ताकि क्षेत्र के निवासी निर्धारित समय पर इस सुविधा का लाभ उठा सकें। ऐसी जानकारी नगर पंचायत की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।
(12) तंग गलियों में , जहां ऑटो टिप्पर या वाहन की सेवाएं संभव न हों, वहां एक थ्री व्हीलर अथवा छोटे मोटर युक्तवाहन/ साईकिल रिक्शा काम पर लगाया जाएगा , जो ऊपर से हाई ड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होंगा और उस में गीले और सूखे कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो में हूटर लगा होगा और वह मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन के अनुकूल होगा।
(13) अत्यंत भीड़ भाड़ वाले और अधिक तंग गलियों वाले क्षेत्रों में जहां श्री व्हीलर या छोटे वाहन भी न जा सकें वहां साइकिल रिक्शा अथवा अन्य प्रकार के उपयुक्त उपकरण तैनात किए जाएंगे।
(14) ऐसी छोटी, तंग और भीडी गलियों/ लेनों में जहा श्री व्लीहर/ रिक्शा आदि का संचालन संभवन हो , ऐसे स्थानों पर बस्ति/ गली के छोर पर खास जगह तय की जाएगी , जहां कचरा संग्रह वाहन खडा किया जा सके और वाहन के हेल्पर के पास एक सीटी होगी और वे सीटी बजाते हुए गली में ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहन के आगमन की घोषणा करेंगे । इस तरह की संग्रह प्रणाली की समय सारिणी नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी और नगर पंचायत की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।
75 भाग 8 ]
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(15 ) ऑटो टिप्पर , थ्री व्हीलर्स , रिक्शा और सेवा में संलग्न किसी अन्य तरह के वाहन केवल घरों से कचरा एकत्रकरेंगे , और अन्य स्त्रोतो जैसे ढलाव, खुले स्थलों , मैदान, कूड़े दानों और नालियों आदि से कचरा एकत्र नहीं करेंगे ।
(16) नगर पंचायत या उसके अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहर्ता प्राथमिक कचरा संग्रहण के लिए क्षेत्र की सभी गलियों/ लाईनों को कवर करने के लिए जिम्मेदार होगें ।
अध्याय-4
ठोस कचरे का द्वितीयक संग्रहण
6. द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ में ठोस कचरे का संग्रहण निम्नाकित अनुसार किया जाएगा
क-( 1 ) घरो में एकत्र किया गया पृथक ठोस कचरा , कंचरा स्टोरेज डिपो, सामुदायिक कूड़ा घरों या अचल या चल अंतरण स्थलों या कचरे के द्वितीयक संग्रहण के लिए नगर पंचायत द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर ले जाया जाएगा ।
(2 ) ऐसे द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ को कंटेनरों ( निर्दिष्ट रंग के) से कवर किया जाएगा, जिनसे निम्नांकित : -
के लिए अलग-अलग स्टोरेज होगें: -
(क) गैर- जैव अपघटकीय अथवा सूखाकचरा ।
(ख) जैव अपघटकीय अथवा गीला कचरा।
(ग) घरेलू जोखिम पूर्ण कचरा।
(3) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए नगर पंचायत द्वारा चिन्हित अलग -अलग कंटेनरो का इस्तेमाल निम्नांकित अनुसार किया जायेगाः-
> हराः जैव अपघटकीय कचरे के लिए ।
> नीलाः गैर- जैव अपघटकीय कचरे के लिए।
> कालाःघरेलू जोखिम पूर्ण कचरे के लिए।
नगर पंचायत समय- समय पर विभिन्न प्रकार के ठोस कचरे के संग्रहण और वितरण के लिए निर्धारित गोदामों की रंगसंहिता और अन्यमान दंड अधिसूचित करेगी ताकि कचरे का सुगम और सुरक्षित संग्रहण हो सके और किसी प्रकार का मिश्रण या रिसाव न हो , जिनका अनुपालन विभिन्न प्रकार के ठोस कचरा उत्सर्जकों को करना होगा।
(4) नगर पंचायत स्वयं अथवा बाहरी एजेंसियों के जरिए ठोस कचरा संग्रहण केंद्रो का संचालन इस ढंग से करेगी कि उनके आस- पास अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ स्थितियां पैदा न हों ।
(5) द्वितीयक संग्रहण डीपूओं में विभिन्न आकार के कंटेनर नगर पंचायत या किन्ही अन्य निर्दिष्ट एजेंसियों द्वारा प्रदान किये जाएंगे, जो इस उप- नियमों में वर्णित अनुसार अलग-अलग रंगो के होगे।
(6) संग्रहण केन्द्रो का निर्माण और स्थापना इस बात को ध्यान में रखकर की जाएगी कि किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में कचरे के उत्सर्जन की मात्रा कितनी है और जनसंख्या का घनत्व कितना है ।
(7) संग्रहण केन्द्र इस्तेमालकर्ता अनुकूल होंगे और उनका डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनसे कचरा ढका रहे और संग्रहण किए गये कचरे का खुले वातावरण में कोई दुष्प्रभाव न पडे।
(8) सभी आवास सहकारी समितीयों, एसोसिएशनों , रिहायशी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और द्वारबंद समुदायों का यह दायित्व होगा कि वे इन उप -नियमों द्वारा निर्धारित रंगीन कूड़ेदान रखें और स्वयं के परिसरों में समुचित स्थानो पर पर्याप्त संख्या में ऐसे कंटेनर रखें ताकि वहां हर रोज उत्सर्जित कचरा ठीक ढंग से संगृहीत किया जा सकें।
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(9) नगर पंचायत या उसकी कोई निर्दिष्ट एजेंसी का यह दायित्व होगा कि वे सप्ताहिक आधार पर सभी कूडा घरों की धुलाई और संक्रमण मुक्त बनाने की व्यवस्था करें।
ख- सूखे कचरे ( गैर- जैव अपघटकीय कचरा) के लिए रिसाईक्लिंग सेंटर
( 1 ) नगर पंचायत अपने वर्तमान ढलावों अथवा पहचान किए गए खास स्थानों को आवश्यकतानुसार रिसाईक्लिंग केंद्रों के रुप में परिवर्तित करेगा , जिनका इस्तेमाल गलियों/ घर- घर जाकर कचरा एकत्र करने संबंधी सेवा के जरिए एकत्र किए गए सूखे कचरे को पृथक करने के लिए किया जाएगा। प्राप्त सूखे कचरे की मात्रा के अनुसार रिसाईक्लिंग केंद्रों की संख्या बढाई जा सकती है।
(2) गली/ घर - घर जाकर कचरा संग्रहण प्रणाली के जरिए और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त केवल सूखा कचरा (गैर- जैव अपघटकीय) इन निर्दिष्ट रिसाईक्लिंग केंद्रो को स्थानातरित किया जाएगा । ये निर्दिष्ट केंद्र केवल सूखा कचरा प्राप्त करेंगे।
(3) परिवारों के लिए प्रावधान भी होगा कि वे अपना रिसाईक्लिंग योग्य सूखा कचरा इन रिसाईक्लिंग केंद्रों पर सीधे जमा करा सकते है अथवा अधिकृत एजेंटो और/ या नगर पंचायत से अधिकृत कचरा व्यापारियों को पूर्व अधिसूचित दरो के अनूसार बैच सकते है । इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक रिसाईक्लिंग यूनिट पर एक धर्मकांटा और काउंटर उपलब्ध कराया जाएगा । अधिकृत एजेंट और/ या अधिकृत कचरा व्यापारी को इस बात की अनुमति होगी कि वे रिसाईक्लिंग योग्य कचरे को एसडब्ल्यूएम नियमों के प्रावधानों के अनुसार द्वितीयक बाजार अथवा रिसाईक्लिंग यूनिटों को बेच सकते है । अधिकृत एजेंट और/ या अधिकृत व्यापारी बिक्री से प्राप्त धनराशी रखने का हकदार होंगे।
ग - निर्दिष्ट घरेलू जोखिम पूर्ण कचरे के लिए संग्रहण केंद्र
( 1 ) घरेलू जोखिम पूर्ण कचरे के संग्रह के लिए एक संग्रहण केंद्र उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाएगा, जहा निर्दिष्ट घरेलू जोखिम पूर्ण कचरे को प्राप्त किया जाएगा, ऐसा सरकार द्वारा निर्धारित दिशा- निर्देशों के अनुसार यथा समम्भव प्रत्येक वार्ड में स्थापित किया जाएगा और उसे कचरा प्राप्त करने का समय अधिसूचित करना होगा ।
(2) नगर पंचायत अपनी एजेंसी को या छूट ग्राही को यह दायित्व सौप सकती है कि वह सभी कचराउ त्सर्जकों से घरेलू जोखिम पूर्ण कचरा पृथक्कृत तरीके से एकत्र करें।
(3 ) इस तरह प्राप्त किया गया कचरा सरकार द्वारा स्थापित जोखिम पूर्ण कचरा निपटान केंद्रो पर अलग से लाया जाएगा ।
अध्याय-5
ठोस कचरे की ढुलाई
(7) ठोस कचरे की ढुलाई निम्नांकित बातों को ध्यान में रखकर की जाएगी:
(1) कचरे की ढुलाई के लिए प्रयुक्त वाहन भली - भाति कवर्ड होंगे ताकि एकत्र कचरे का दुष्प्रभाव मुक्त वातावरण पर न पड़े । इन वाहनो में कॉम्पैक्टर और मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन शामिल हो सकते है , जो नगर पंचायत द्वारा चुनी गई प्रौद्योगिकी पर निर्भर करेंगे।
(2) नगर पंचायत द्वारा स्थापित संग्रहण केंद्र कचरे के निपटान के लिए हर रोज काम करेंगे । कूड़ेदान या कंटेनरों के आस- पास के क्षेत्र को साफ रखा जाएगा।
भाग 8]
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(3) आवासीय और अन्य क्षेत्रों से एकत्र किया गया पृथककृत जैव अपघटकीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांटो जैसे कम्पोस्ट प्लांट , बायो- मिथिनेशन प्लांट या अन्य केंद्र तक कवर्ड तरीके से पहुचाया जाएगा।
(4) जहा कही प्रयोज्य हो, जैव अपघटकीय कचरे के लिए , ऐसे कचरे की स्व-स्थान प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।
(5) एकत्र किया गया गैर- जैव अपघटकीय कचरा सम्बद्ध प्रोसेसिंग केंद्रो अथवा द्वितीयक संग्रहण में पहुचाया जाएगा ।
( 6) निर्माण और विध्वंस जन्य कचरे की ढुलाई निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानो के अनुसार की जाएगी।
(7) नगर पंचायत कचरे की समुचित ढंग से ढुलाई के प्रबंध करेगा। गलियों को बुहारने से उत्पन्न कचरा और नालियों से निकाली गई गाद काम समाप्त होने के तत्काल बाद हटाई जाएगी ।
(8) दुलाई वाहनों का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि अंतिम निपटारे से पहले कचरे के बार- बार परिचालन से बचा जा सकें।
(9) कचरा संग्रहण के लिए काम में लगाए गए वाहन कचरे को केवल एमटीएस अथवा एफसीटीएस, जहां कही प्रदान किए गए हों, में जमा/ स्थानांतरित करेंगे ।
( 10) यदि किसी कारण वश एमटीएस/ एफसीटीएस निर्दिष्ट स्थल पर खड़े नही पाए जाएगें , तो लदा वाहन एमटीएस अथवा एफसीटीएस के अगले निर्दिष्ट स्थल अथवा कचरे को उतारने के लिए नगर पंचायत द्वारा निर्दिष्ट स्थल तक जाएगा।
( 11 ) फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन को हूक लोडर के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाएगा ।
12) कचरे की ढुलाई के दौरान विभिन्न स्त्रोतों से उत्सर्जित कचरे का परस्पर मिश्रण नही होना चाहिए ।
(
(13 ) कचरे के गली स्तरीय संग्रहण और ढुलाई सेवाएं अवकाश के दिनों सहित हर दिन उपलब्ध कराई जाएंगी।
(14) इस सेवा में संलग्न एमटीएस केवल गली स्तरीय प्रचालनों से कचरा संग्रह करनें वाले निर्दिष्ट ऑटो- टिप्परों , तिपहिया या अन्य वाहनों/ कूडा दानों से कचरा प्राप्त करेंगा।
(15) परिवारों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से गलीस्तरीय और घर -घर जाकर ठोस कचरा संग्रह करने में लगे ऑटो- टिप्परों , तिपहिया वाहनो , रिक्शा आदि से कचरा प्राप्त करने के लिए एक अनुमोदित रुट प्लान के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रतिबद्ध एमटीएस तैनात किए जाएगें।
(16) एमटीएस और एफसीटीएस का डिजाइन ऐसा होगा, जो कचरे को प्राथमिक संग्रहण वाहनों से उतारने में कम से कम समय लें और कूड़ा करकट इधर-उधर न फैले ।
(17) ठोस कचरे को स्थानांतरित करते समय एमटीएस और एफसीटीएस के इर्द- गिर्द रिसे हुए कचरे को साफ किया जाना चाहिए , ताकि कोई रिसाव न बचे । ऐसे स्थान पर सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद संक्रमण विरोधी पदार्थ इस्तेमाल किए जाने चाहिए ।
(18) नगर पंचायत अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसीस भी द्वितीयक संग्रहण केंद्रो पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगी ।
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अध्याय-6
8. ठोस कचरे की प्रोसेसिंग
(1) नगर पंचायत ठोस कचरा प्रोसेसिंग केंद्रो और सम्बद्ध ढांचे के निर्माण, प्रचालन और रख - रखाव की स्वयं व्यवस्था करेगा अथवा किसी एजेंसी के द्वारा इस कार्य को अंजाम देगा, ताकि ठोस कचरे के विभिन्न घटकों का अनुकूलतम उपयोग किया जा सके। इसके लिए निम्नांकित प्रौद्योगिकियों सहित उपयुक्त प्रौद्योगिकी अपनाई जाएगी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा समय - समय पर जारी दिशा- निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानको का अनुपालन किया जायेगाः- (क) ढुलाई की लागत और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को निम्नवत रखने के लिए विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी , जैसे बायो- मिथेनेशन , माइक्रोवियल कम्पोस्टिंग , वर्मी कम्पोस्टिंग , एनायरोबिक डाइजेशन अथवा जैव अपघटकीय कचरे की जैव स्थिरता के लिए कोई अन्य उपयुक्त प्रोसेसिंग पद्वति;
(ख) केंद्रीकृत स्थलों पर स्थित मध्यम/ बडे कम्पोस्टिंग/ बायो- मिथेनेशन प्लांटो के जरिए;
(ग) कचरे से ऊर्जा प्रक्रियाओं के जरिए ठोस कचरा अधारित बिजली संयंत्रो को कचरे के ज्वलनशील अंश के लिए रिफ्यूज डेराइब्ड ईधन के रूप में अथवा फीड स्टॉक आपूर्ति के रुप में ईधन प्रदान करते हुए;
(घ) निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन प्लांटों के जरिए ।
(2) नगर पंचायत रिफ्यूज डेराइब्ड फ्यूल (आरडीएफ) की खपत के लिए बाजार सृजित करने का प्रयास करेगा ।
(3) कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट में सीधे भस्मीकरण के लिए कचरे का पूर्ण पृथक्करण अनिवार्य होगा और ऐसा करना सम्बद्ध अनुबंधो की कार्य- शर्तों का हिस्सा होगा। नगर पंचायत सुनिश्चित करेगा कि कागज , प्लास्टिक, धातु, कांच , कपडा आदि रिसाईक्लिंग योग्य पदार्थ रिसाईक्लिंग करने वाली अधिकृत एजेंसियो को भेजा जाए ।
9- ठोस कचरे की प्रोसेसिंग के लिए अन्य दिशा-निर्देशः -
(1) नगर पंचायत सभी निवासी कल्याण संगठनों , समूह आवास समितियों , बाजारों , द्वारबंद समुदायों और 5000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र रखने वाले संस्थानों , सभी होटलो एवं रेस्त्राओं, बैंक्वेट हालों और इस तरह के अन्य स्थलों पर यथा संभव कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन के जरिए जैव अपघटकीय कचरे वाले अन्य कचरा उत्सर्जकों को भी जैव अपघटकीय कचरे की स्व प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।
(2) नगर पंचायत यह नियम प्रवृत्त करेगा कि सब्जी, फल, मांस , पोल्ट्री और मछली व्यापार मंडियां अपने जैव अपघटकीय कचरे की प्रोसेसिंग करते समय स्वच्छ स्थितियां बनाए रखना सुनिश्चित करें।
(3) नगर पंचायत यह नियम प्रवृत्त करेगा कि बागवानी , उद्यानों और पार्कों से उत्सर्जित कचरे का निपटान अलग से यथा संभव पार्को और उद्यानों में ही किया जाए।
(4) नगर पंचायत कचरा प्रबंधन में समुदाय को शामिल करने और घर पर ही कम्पोस्टिंग , बायो गैस उत्पादन , सामुदायिक स्तर पर कचरे की विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करेगा। परंतु ऐसा करते समय बदबू को नियंत्रित रखना और तत्संबंधी यूनिट के आस-पास स्वच्छता स्थितियां बनाए रखना अनिवार्य होगा ।
भाग 8]
79 उत्तराखण्ड गजट, 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अध्याय- 7
10. ठोस कचरे का निपटान
नगर पंचायत अपशिष्ठ कचरे और गलियों में झाडू लगाने से उत्सर्जित कचरे तथा नालियों से निकलने वाली गाद का निपटान एस.डब्लू.एम. नियमों के अंतर्गत निर्धारित ढंग और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून द्वारा लागू किए गए किसी अन्य दायित्व के अनुरुप करने के लिए स्वयं अथवा किसी अन्य एजेंसी के जरिए सेनिटरी लैंडफिल और सम्बद्ध ढाँचे का निर्माण , प्रचालन और रख - रखाव करेगा ।
अध्याय-8
इस्तेमालकर्ता शुल्क और स्थल पर ही जुर्माना/ दंड लगाना
11- ठोस कचरे का संग्रहण , दुलाई , निपटान के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्कः
(क) कचरा उर्सजकों से कचरा संग्रहण , ढुलाई और निपटान हेतु सेवाएं प्रदान करने के लिए नगर पंचायत द्वारा इस्तेमालकर्ता शुल्क निर्धारित किया जाएगा । इस्तेमालकर्ता शुल्क की दरें अनुसूची-1 में निर्दिष्ट है। (ख) कचरा उत्सर्जकों से निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली नगर पंचायत अथवा नगर पंचायत द्वारा अधिकृत एजेंसी या अधिकृत व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(ग) नगर पंचायत इन उपनियमों की अधिसूचना की तारीख से 3 माह के भीतर इस्तेमालकर्ता शुल्क लगाने के प्रयोजन के लिए कचरा उत्सर्जन का डाटाबेस तैयार करेगा और इस्तेमालकर्ता शुल्क की बिलिंग/ संग्रह/ वसूली के लिए समुचित व्यवस्था विकसित करेगा । डाटाबेस को नियमित रुप से अद्यतन बनाया जाएगा ।
(घ) नगर पंचायत ऑन लाइन भुगतान के सहित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली के लिए विभिन्न पद्धतियां अपनाएगा ।
(ङ) इस्तेमालकर्ता वसूली के लिए महीने में विशेष दिन निर्धारित किए जाएंगे, जिसमें प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह को वरीयता दी जाएगी ।
(च) वार्षिक और छः माही भुगतान की प्रणाली अपनाई जाएगी । यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क समूचे वर्ष के लिए अग्रिम अदा किया जाता है , तो ऐसे में 12 महीने के बजाए 10 महीने का शुल्क लिया जाएगा। इसी प्रकार यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली का भुगतान 6 महीने के लिए किया जाता है तो शुल्क की मांग की राशि छः महीने के बजाए साढ़े पांच महीने के लिए वसूल की जाएगी।
(छ) अनुसूची-1 में वर्णित इस्तेमालकर्ता शुल्क प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 10 प्रतिशत बढ जाएगा ।
(ज) इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक सामान्य या विशेष आदेश के जरिए अधिकृत संस्थान/ व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(झ ) इस्तेमालकर्ता शुल्क के भुगतान में चूक होने के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा चूककर्ता से उसकी वसूली भू- राजस्व के बकाये की भाँती वसूल की जायेगी ।
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[भाग 8
12- एस.डब्लू. एम . नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना/ दंड: -
(क) एस.डब्लू. एम. नियमों अथवा इन उप - नियमों के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन अथवा अनुपालन करने में विफलता के लिए इन उप -नियमों के परिशिष्ट में दी गई अनुसूची-2 में वर्णित अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा
(ख) उपरोक्तखंड (क) में वर्णित अनुसार उल्लंघन या गैर-अनुपालन की स्थिति बार - बार आने पर ऐसी प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना प्रतिदिन या महीना, जो भी लागू हो , के अनुसार लगाया जाएगा।
(ग) जुर्माना या दंड लगाने हेतु निर्दिष्ट/ प्राधिकृत अधिकारी अधिशासी अधिकारी , सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक, सम्बन्धित थाना/ चौकी प्रभारी होगें तथा जिला मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष सामान्य या विशेष आदेश के अधीन अन्य अधिकारियों को भी नामित कर सकते हैं। जुर्माना/दण्ड राशि अनुसूचि-2 में दी गई है।
(घ ) अनुसूची -2 में वर्णित जुर्माना अथवा दंड राशि प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 5 प्रतिशत बढ जाएगी ।
(ङ) निर्दिष्ट/ प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जुर्माना मौके पर लगाया और वसूल किया जाएगा । जुर्माने का भुगतान मौके पर जमा न करने में उक्त धनराशि भू- राजस्व के बकाये की भांति वसूल की जायेगी एवं मामले में पर्यावरण(संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित अभियोजन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी ।
अध्याय-9
प्रतिभागियों के दायित्व
13. कचरा उत्सर्जकों के दायित्वः
( 1 ) कूड़ा फेंकने पर पाबंदीः
(क) किसी सार्वजनिक स्थल पर कूड़ा फैलानाः अधिकृत सार्वजनिक या निजी कूड़ादानो के सिवाय कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थल पर कूडा नही फैलाएगा । कोई व्यक्ति विशेष प्रयोजन के लिए प्रावधान किए गए सार्वजनिक केंद्रों या सुविधाओं को छोडकर किसी सार्वजनिक स्थल पर वाहनों की मरम्मत, बर्तन या कोई अन्य उपकरण धोने/ साफ करने का काम नही करेगा या किसी प्रकार का संग्रहण नही करेगा।
(ख) किसी संपत्ति पर कूड़ा फैलानाः अधिकृत निजी अथवा सार्वजनिक कूड़ेदानों के सिवाय कोई व्यक्ति किसी मुक्त या रिक्त संपत्ति पर कूड़ान ही डालेगा ।
(ग) वाहनों से कूड़ा फेंकनाः किसी वाहन के ड्राइवर या यात्री के रुप में कोई व्यक्ति किसी गली , सडक, फुटपाथ , खेल के मैदान , उद्यान, ट्रैफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थान पर कूडा नही फैकेगा।
(घ) मालवाहक वाहन से गंदगी डालनाः कोई भी व्यक्ति तब तक किसी ट्रक या अन्य माल वाहक वाहन को नही चलाएगा , जब तक कि ऐसे वाहन का निर्माण और लदान इस प्रयोजन के लिए अधिकृतन किया गया हो ताकि सड़क, फुटपाथ, खेल का मैदान , उद्यान , ट्रेफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलो पर कोई लोड, पदार्थ अथवा गंदगी डालने से रोका जा सकें।
(ड) स्वयं/ पालतू पशुओं से गंदगीः कुत्ता , बिल्ली आदि पालतू जानवरों के मालिकों का यह भी दायित्व होगा कि गली अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर ऐसे जानवरो द्वारा उत्सर्जित किसी प्रकार की गंदगी को तत्काल उठाएगा/ साफ करेगा और इस तरह के उत्सर्जित कचरे के समुचित निपटान के लिए समुचित उपाय करेगा , जिनमें स्वयं की सीवेज प्रणाली से निपटान को वरीयता दी जाएगी।
भाग 8 ]
81 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
(च) नालियों आदि में कचरे का निपटानः कोई व्यक्ति किसी नाली/ नदी/ खुले तालाब/ जल निकायों में गंदगी नही डालेगा ।
(2) कचरे को जलानाः- सार्वजनिक स्थानों पर या निजी स्थान पर या निषेध सार्वजनिक संपत्ति पर ठोस कचरे के किसी भी प्रकार के जलाने द्वारा निपटान निषिद्ध होगा ।
(3) "स्वच्छ क्षेत्र": - प्रत्येक व्यक्ति यह प्रयास करेगा कि उसके स्वामित्व या कब्जे वाले परिसर के सामने कोई भी सार्वजनिक स्थान अथवा आस-पास का क्षेत्र स्वच्छ रहें । इन स्थानो में फुटपाथ और खुली नालियां/ गटर , सडक किनारा सामिल है , जो किसी भी तरह ठोस या तरल कचरे से मुक्त होने चाहिए।
(4) सार्वजनिक सभाओं और किसी कारण ( जुलूस, प्रदर्शनियां, सर्कस , मेले , राजनैतिक रैलियां , वाणिज्यक, धार्मिक , सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों विरोध प्रर्दशनो और प्रर्दशनो आदि सहित) से सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की जानेवाली गतिविधियों, जिनमें पुलिस विभाग और/ या नगर पंचायत से अनुमति अपेक्षित हो, के मामले में ऐसी गतिविधियों के आयोजन कर्ता का यह दायित्व होगा कि वह उस क्षेत्र और आस- पास के क्षेत्रों की स्वःस्वच्छता सुनिश्चित करें ।
(i ) ऐसे आयोजनो के मामले में आयोजक से नगर पंचायत द्वारा अधिसूचित रिफंड योग्य स्वच्छता धरोहरराशि सम्बद्ध जोनल अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाएगी, जो कार्यक्रम की अवधी में उसके पास जमा रहेगी । यह जमा राशि कार्यक्रम पूरा होने के बाद रिफंड की जाएगी लेकिन उससे पहले यह जांच की जाएगी कि उक्त सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता बहाल कर दी गई हैं । यह धरोहर राशि सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता के लिए होगी और इसमें संपत्ति को पहुचाई गई किसी भी प्रकार की क्षति का हर्जाना नही होगा । यदि आयोजन कर्ता , कार्यक्रम के आयोजन के परिणाम स्वरुप उत्सर्जित कचरे की सफाई, संग्रहण और ढुलाई में नगर पंचायत की सेवाए प्राप्त करना चाहते हो , तो उन्हे नगर पंचायत के सम्बद्ध जोनल अधिकारी को आवेदन करना होगा तथा इस प्रायोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किया गया अपेक्षित शुल्क जमा करना होगा ।
(ii) खाली प्लाट पर ठोस कचरा डम्प करने और गैर- निर्दिष्ट स्थानों पर निर्माण और विध्वंस कचरा डाले जाने की स्थितियों से नगर पंचायत निम्नांकित ढंग से निपटेगी:
(क) नगर पंचायत किसी परिसर के मालिक/अधिभोगी को नोटिस भेज सकता है , जिसमें ऐसे मालिक/ अधिभोगी से उक्त परिसर पर डाले गए किसी भी प्रकार के कचरे को नोटिस में वर्णित तरीके और समय सीमा के भीतर हटाने को कहा जाएगा ।
(ख) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाएं पूरी करने में विफल रहता है, तो ऐसे व्यक्ति को समय - समय पर निर्धारित दंड का भुगतान करना होगा ।
( ग) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाओ का अनुपालन करने में विफल रहता है तो नगर पंचायत निम्नांकित कार्यवाई कर सकती है: -
(iii) ऐसे परिसर में प्रवेश कर कचरे को साफ करना, और (2) अधिभोगी से कचरा साफ करने पर किए गए व्यय को वसूल करेगा ।
(iv) डिस्पोजेबल उत्पादों और सेनिटरी नेपकिन तथा डायपर्स के विनिर्माताओं या मालिकों का दायित्वः (क) डिस्पोजेबल उत्पादो जैसे टिन, कॉच , प्लास्टिक पैकेजिंग आदि के सभी विनिर्माताओं अथवा नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बाजारो में ऐसे उत्पाद प्रारंभ करने वाले ब्रांड मालिकों को कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए नगर पंचायत को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी । नगर पंचायत इस प्रावधान के लिए केन्द्र सरकार/ राज्स सरकार के सम्बद्ध विभागों के साथ समन्वय कर सकती है ।
(ख) ऐसे सभी ब्रांड मालिकों को, जो गैर- जैव अपघटकीय पैकेजिंग सामग्री में अपने उत्पाद बेचते या विपणन करते हैं , उन्हें ऐसी प्रणाली कायम करनी होगी , जिसमें उनके उत्पादन के कारण उत्सर्जित पैकेजिंग कचरे को वापस लिया जा सके।
82
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[भाग 8
| (ग) सेनिटरी नेपकिन और डायपर्स विनिर्माता या ब्रांड मालिक या विपणन कंपनियां इस बात की संभावनाओं का पता लगाएंगी कि उनके उत्पादो में सभी रिसाइकिल योग्य पदार्थों का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है अथवा वे अपने से निटरी उत्पादों के पैकेट के साथ एक ऐसा पाउच या रैपर उपलब्ध कराएंगी , जिनसें नेपकिन या डायपर का निपटान किया जा सके।
(घ) ऐसे सभी विनिर्माता, ब्रांड मालिक या विपणन कंपनियां अपने उत्पादों की रैंपिग और डिस्पोजल के लिए लोगो को शिक्षित करेगी ।
14- नगर पंचायत के दायित्वः-
(1 ) नगर पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले भू- भाग में सभी साझा गलियों/ मार्ग , सार्वजनिक स्थलों, अस्थाई बस्तियों, मलिन क्षेत्रों , बाजारों , स्वयं के उद्यानों , बागों, नालियों आदि की सफाई की नियमित प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी । वह इसके लिए मानव संसाधन और मशीने लगाएगा तथा घोषित संग्रहण कंटेनर से कचरा एकत्र करने और उसे हर रोज बंद वाहनों में अंतिम निपटान स्थल तक पहुंचाने के लिए बाध्य होगा , जिसके लिए नगर पंचायत अपने सफाई स्टाफ और वाहनों के अलावा, अनुबंध के आधार पर प्राइवेट पार्टियों को काम पर लगा सकता है , अथवा सरकारी-निजी भागीदार व्यवस्था का सहारा ले सकता है । इसके अतिरिक्त नगर पंचायत सभी वाणिज्यक क्षेत्रों ऐसे वाणिज्यक क्षेत्रो की पहचान करेगा , जिन में दिन में दो बार झाडू लगाने की आवश्यता हों ।
(2) नगर पंचायत अथवा उसके द्वारा संलग्न अधिकृत एजेंसी सार्वजनिक मार्गों , रेलवे स्टेशनों , बस अड्डों , धार्मिक स्थलों और वाणिज्यिक क्षेत्रो आदि के आस-पास पर्याप्त संख्या में और पर्याप्त आकार के कूड़े दानों का रखरखाव करेगा ।
(3) नगर पंचायत विकेंद्रीकृत और नियमित ढंग से ठोस कचरा प्रबंधन गतिविधियों के प्रयोजन के लिए प्रत्येक वार्ड में एक वार्ड अधिकारी निर्दिष्ट करेगा, ताकि वह कंटेनरों , सार्वजनिक शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों अथवा सर्वाजनिक स्थलो पर बने पेशाब घरों , सर्वाजनिक कचरे के लिए बनाए ट्रांसफर स्टेशन, लैंडफिल प्रोसेसिंग यूनिटों आदि स्थानो की निगरानी रख सके।
(4) सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरे के प्रथक्करण , संग्रह , ढुलाई , प्रसंस्करण और निपटान कार्यों की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जिसमें कम से कम अधिशासी अधिकारी या समकक्ष रैंक के अधिकारियों को वरीयता दी जाएगी।
(5) प्रत्येक वार्ड निर्धारित मानदंड के आधार पर स्वीपिंग बीट्स में विभाजित किया जाएगा और उसमें तदनुरुप कार्मिक तैनात किए जाएंगे या वर्तमान तैनाती युक्ति संगत बनाया जाएगा तथा अद्यतन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए उनके काम पर निगरानी रखी जाएगी। नगर पंचायत जहां कही अपने स्टाफ से स्वीपिंग कराने में असर्मथ होगा , तो वह अनुबंध के जरिए बाहरी एजेंसियों से यह काम करा सकती हैं । प्रत्येक बीट का निरीक्षण दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित दैनिक आधार पर सुपर वाइजिंग अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।
(6) नगर पंचायत अद्यतन सडक/ गली क्लिनिंग मशीनों, मैकेनिकल स्वीपरो अथवा उपकरणों का इस्तेमाल करेगा, जिनसे झाडू लगाने और नालियों की सफाई की सक्षमता में सुधार होगा।
(7) नगर पंचायत सूचना, शिक्षा और संचार ( आईईसी ) अभियान के माध्यम से जागरुकता और संवेदनशीलता पैदा करेगा तथा कचरा उत्सर्जको और अन्य हितभागियो को एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप -नियमों के विभिन्न प्रावधानों के बारे में प्रशिक्षित करेंगा , जिसमें इस्तेमालकर्ता शुल्क और जुर्माना/ दंड संबंधी प्रावधानो की जानकारी पर विशेष बल दिया जाएगा।
भाग 8 ]
83 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
(8) नगर पंचायत कचरा उत्सर्जकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे गीले कचरे का स्रोत पर ही उपचार करे । नगर पंचायत विकेंद्रीकृत प्रौद्योगिकियों, जैसे बायो-मिथेनेशन, कम्पोस्टिंग आदि अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर सकता है । इन प्रोत्साहनों में परिवारों , निवासी कल्याण संगठनो और संस्थानों आदि को पुरस्कृत और सम्मान प्रदान करना, उनके नाम सम्बद्ध वेबसाइटों में प्रकाशित करना अथवा संपत्ति कर आदि में छूट प्रदान करना शामिल हो सकते है।
(9) नगर पंचायत स्वयं द्वारा रख - रखाव किए जा रहें सभी पार्को, उद्यानों और जहां कही संभव हो , अपने अधिकार क्षेत्र वाले अन्य स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग समाप्त करेगा और उन में कम्पोस्ट का इस्तेमाल करेगा। अनौपचारिक कचरा रिसाईक्लिंग क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले रिसाईक्लिंग उपायों के लिए प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा सकते है।
( 10) नगर पंचायत ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों को सुचारु और औपचारिक बनाने के उपाय करेगा और यह प्रयास करेगा कि कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों (कचरा बीनने वालों) को वरीयता दी जाए, ताकि उनके कार्य स्थितियों को उन्नत बनाया जा सके और उन्हें ठोस कचरा प्रबंधन की औपचारिक प्रणाली में समाहित एवं एकीकृत किया जा सकें।
(11 ) नगर पंचायत यह सुनिश्चित करेगा कि स्वच्छता सेवा के सुविधा प्रदाता द्वारा अपने उन श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सहित वर्दी, फ्लोरेसेंट जैकेट, दस्ताने, रेनकोट, समुचित फुटवेयर और मास्क प्रदान किए जाएं , जो ठोस कचरा परिचालन कार्य करते है और यह भी कि ऐसे श्रमिकों द्वारा इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए।
( 12) नगर पंचायत कचरे के संग्रहण , परिवहन और परिचालन में शामिल स्वयं और बाहरी एजेंसी के स्टाफ की व्यवसायिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत संरक्षा के उपयुक्त और समुचित उपकरण प्रदान करेगा।
(13) किसी ठोस कचरा प्रोसेसिंग या उपचार या निपटान केंद्र अथवा लैंडफिल साइट पर कोई दुर्घटना होने की स्थिति में , उस केंद्र का प्रभारी अधिकारी तत्काल नगर पंचायत को रिर्पोट करेगा , जो स्थिति की समीक्षा करने के बाद उस केंद्र के प्रभारी अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी करेगा ।
(14) नियमित जांचः- अध्यक्ष/प्रशासक द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी वार्ड के विभिन्न भागों और ठोस कचरे के संग्रहण , ढुलाई , प्रोसेसिंग और निपटान से संबंधित अन्य स्थानों की नियमित जांच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके , जिससें कि एस. डबलएम. नियमों और इन उप - नियमों के विभिन्न प्रावधानों का पालन हो रहा हैं ।
(15) नगर पंचायत अपने मुख्यालय में कॉल सेंटर की स्थापना के जरिए सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली
(पीजीआरएस) विकसित करेगा । इस पीजीआरएस में एसएमएस आधारित सेवा , मोबाइल अप्लीकेशन अथवा वैन आधारित सेवाएं शामिल हो सकती हैं ।
(16) नगर पंचायत एस.डब्लूएम. नियमों और उप- नियमों के कार्यान्वयन से सम्बद्ध कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए कार्ड प्रोद्योगिकियों/ आईसीटी प्रणाली कायम करेगा तथा ऐसी प्रणाली को वेतन/दिहाड़ी / पारिश्रमिक के साथ एकीकृत करने के प्रयास करेगा ।
( 17) पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुँच अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नगर पंचायत अपनी वेबसाइट से सारी आवश्यक सूचनाएं प्रदान करेगा ।
( 18) नगर पंचायत एस.डब्लू.एम. नियमों में वर्णित सभी अन्य दायित्व पूरे करेगा , जो इन उपनियमों में विशेष रुप से उल्लिखित न ही किए गये हैं ।
84
[भाग 8
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
अध्याय -10
विविध
15. इन उपनियमों की व्याख्या या कार्यान्वयन में कोई संदेह या कठिनाई आने की स्थिति में उसे अध्यक्ष/प्रशासक , नगर पंचायत के समक्ष रखा जाएगा, जिसका निर्णय ऐसे मामले में अंतिम होगा ।
16. सरकारी निकायों के साथ समन्वयः नगर पंचायत अन्य सरकारी एजेंसियों और प्राधिकरणों के साथ समन्वय करेगा , ताकि इन उपनियमों का अनुपालन ऐसे निकायों के अधिकार क्षेत्र या नियंत्रण में आने वाले इलाकों को सुनिश्चित किया जा सके। कोई कठिनाई होने की स्थिति में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा ।
17. सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरा प्रबंधन नियम- 2016 और इन उप- नियमों के समुचित कार्यान्वयन के लिए समय -समय पर सामान्य या विशेष आदेश जारी कर सकते हैं ।
अनुसूची-1
ठोस कचरा प्रबंधन के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्क
क्र०सं०
अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी/ अपशिष्टका प्रकार प्रतिमाह सेवा शुल्क( User Charges ) की राशि ₹ में
thpelaghsep BEH15Hallel
thteaiseHealt 12thPlk/2B IND2Delho
thplashsou
OSHleof-lPOTE
154bollet-bblle
1
2
1
गरीबी रेखा से नीचे के घर
2
मध्यम आय वाले घर
3
उच्च आय वर्ग वाले घर
4
सब्जी एवं फल विक्रेता
5 रेस्टोरेन्ट
6
होटल/ लॉजिग/ गेस्टहाऊस
धर्मशाला
7
8
बरातघर
9 बेकरी
10 कार्यालय
11
स्कूल/ शिक्षण संस्थाएं(आवासीय)
12
स्कूल/ शिक्षण संस्थाएं (अनावासीय)
13
हॉस्पिटल/ नर्सिंगहोम(बायो-मेडिकल वेस्टको छोडकर)
14
क्लीनिक(मेडिकल)
thtelekit-lekoIE 19thPl6/23 154ballet-bblle
3
4
5
6
05
10
15
20
10
15
20
25
15
20
25
30
100
200
100
125
250
500
200
250
300
200
300
350
20
30
40
50
1000
1500
1000
1500
150
200
150
200
50
100
50
75
100
200
200
200
20
25
25
25
200
400
200
250
200
100
150
200 भाग 8]
85 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च, 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
15 दुकान
100
200
150
175
16
200
400
300
450 फैक्ट्री( उधोग)
17 वर्कशॉप/कबाड़ी
1000
1500
500
700
18
50
100
125
150 गन्ने का रस/जूस विक्रेता
19
200
500
500
400 सार्वजनिक/ निजी स्थलों पर सर्कस/ प्रदर्शनी/ विवाह आदि आयोजन जिन में अपशिष्ट उत्पन्न हो
20 ढहान तथा निर्माण सम्बन्धी अपशिष्ट
200
300
400
400
उपरोक्त विवरण के आलावा धार्मिक कार्य जैसे- भण्डारा, जागरण, शोभा यात्रा/जुलुस आदि पर दरें लागू नहीं होंगी।
इस्तेमालकर्ता शुल्क/ प्रभार का भुगतान मांग जारी होने से 30 दिन के भीतर न किए जाने की स्थिति में इस्तेमालकर्ता शुल्क/ प्रभार पर 10 प्रतिशत की दर से विलम्ब भुगतान/ प्रभार (एल ०पी ०एस ०सी०) लगाया जाएगा ।
अनुसूची-2
जुर्माना/ दंड
अपराध
निम्नांकित पर लागू
क्र० सं०
नियम/ उप नियम संख्या
प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना (रुपयेमें)
1.
आवासीय
200.00
बल्कजनरेटर
500.00 एस.डब्लू.एम. नियमों का नियम 4(1 ) (क)
कचरे को पृथक करने और संग्रह करने तथा पृथक्कृत कचरे को इन नियमों के अनुसार सौपने में विफल रहना
8,000.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले विवाह/ पार्टीहाल, फेस्टिवल हाल, पार्टी लान, प्रदर्शनी और मेले स्थल
4000.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले क्लबों , सिनेमा घरों , पब्स, सामुदायिक हॉल मल्टीप्लेक्सेज और अन्य ऐसे स्थान
500.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले अन्य गैर- आवासीय स्थान
500.00
फिस, मीट विक्रेता द्वारा कूडे को पृथक्करण तरीके से न रखना 86
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई ० (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
सडक/ गलीमें
1. कूडा फेकना या थूकना
एस.डब्लू.एम . नियमों का नियम 4(2)
[भाग 8
उल्लंघनकर्ता
2. नहाना, पैशाब करना, जानवरो को चारा खिलाना, कपडे धोना, वाहन धोना, गोबर नाली में बहाना
आवासीय एस.डब्लू.एम. 2. नियमों नियम का
4(1) (ख) और (घ)
200.00 से 500.00 एवं कार्यवाही उत्तराखण्ड कूडा फेकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम 2016 के अन्तर्गत होगी ।
500.00
200.00
500.00
जनरेटर
गैर-आवासीय/ बल्क
नियमानुसार सेनिटरी कचरे का निपटान करने में विफल रहना। नियम के अनुसार बागवानी और उद्यान कचरे के निपटान में विफल रहना।
आवासीय
नियम के अनुसार निर्माण और विध्वंस कचरे के निपटान में विफल रहना ।
500.00
गैर-आवासीय/ बल्क जनरेटर
नियमों नियम 3. एस.डब्लू.एम. का 4(1)(T)
1000.00
5000.00
उल्लंघनकर्ता
जलाना ठोस कचरे को खुले में
4. एस.डब्लू.एम. नियमों नियम4 (2) , 15 ( ट) , का
नियम 4(4) 5. एस.डब्लू.एम. नियमों का
निर्धारित प्रक्रिया का अनुपाल न किए बिना किसी गैर लाइसेंसी कृत स्थल पर 100 व्यक्तियों से अधिक की भागीदारी के साथ कार्यक्रम या सभा का आयोजन करना
10000.00
ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित करने वाले व्यक्ति अथवा ऐसा व्यक्ति जिसकी ओर से ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित की गई हो और इवेंट मैनेजर यदि कोई हो , जिसने कार्यक्रम या सभा आयोजित की हो भाग 8]
87 उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई 0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
6. एस.डब्लू.एम. नियमों का नियम 4(5)
200.00
उल्लंघनकर्ता
नियमके अनुसार कचरे का निपटान करने में विफल रहने वाले गली विक्रेता/ वेन्डर कूड़ादान न रखने एवं कूडे को पृथ्थकरण न करने , अपशिष्ट भण्डारन डिपो या पात्र या वाहन में डालने में विफल रहने पर
500.00
अपराधी
7. एस.डब्लू.एम. नियमों का नियम 4(2) , 15 (छ)
सार्वजनिक स्थलो , सडको , गलियों आदि में गंदगी फैलाना/ कुत्ते/ अन्य जानवरो द्वारा मल त्याग/ उत्सर्जित कचरे के निपटान में विफलता
निम्नांकित उल्लंघनों के लिए महीने में केवल एक बार जुर्माना लगाया जाएगा
8.
नियमो के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता
10000.00
निवासी कल्याण एसोसिएशन, आर. डब्ल्यू.ए
एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम4(6)
20000.00
बजार एसोसिएशन, संघ
9.
10000.00
द्वार बंद समुदाय
नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता
एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम4(7)
20000.00
संस्थान
होटल
10000.00 नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता
10. एस.डब्लू.एम . नियमों कानियम4 (8)
5000.00
रेस्टोरेंट
50000.00 11. एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम17 (2)
विनिर्माता/ब्रॉडऑनर/ स्वामी
उत्पादन के कारण सृजित पैकेजिंग कचरे को वापस लेने की प्रणाली कायम किये बिना डिस्पोजल उत्पादों की बिक्री अथवा विपणन 88
उत्तराखण्ड गजट , 22 मार्च , 2025 ई0 (चैत्र 01 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
12.
नियमों के अनुसार उपाय
करने में विफलता
50000.00 एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम17(3)
विनिर्माता और ब्रॉड स्वामी और विपणन कम्पनियाँ
13.
50000.00 एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम 15य( ङ)
नियमों के उपाय करने, भवन योजना में अपशिष्ट करने में विफलता संग्रहण केन्द्र स्थापित
उल्लंघनकर्ता, ग्रुप हाउसिंग सोसाईटी या मॉर्केट काम्पलेक्स आदि
14. एस.डब्लू.एम. 20 (ग) नियमोंकानियम
1000.00
उल्लंघनकर्ता/पर्यटक/ वाहन / चालक
गलियों , पहाड़ियों, अपशिष्ट यथा कागज , सार्वजनिक स्थलो में पानी की बोतल , शराब की बोतल, सोफ्टड्रिक , कैन , टैट्रापैक अन्य कोई प्लास्टिक या कागज अपशिष्ट को फैकने पर
1000.00
उल्लंघनकर्ता/ होटल/ अतिथि ग्रह स्वामी
नगर निगम की उपविधि को होटल/ अतिथि ग्रह में बोर्ड लगाकर व्यवस्था करने में विफलता
15. एस.डब्लू.एम. नियमों कानियम 20 (घ)
16.
आयोजनकर्ता
5000.00 सार्वजनिक सभाओं(जलूस प्रर्दशिनियों , सर्कस , मेले , राजनैतिक रैलिया, वाणिजिक , धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विरोध प्रर्दशन आदि सहित से सार्वजनिक स्थलो पर आयोजित गतिविधियों के क्षेत्र एवं आस-पास के क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करने में विफलता)
आदेश कुमार ,
राकेश चन्द्र तिवारी ,
अधिशासी अधिकारी ,
प्रशासक ,
नगर पंचायत केलाखेड़ा ,
नगर पंचायत के लाखेड़ा
उधम सिंह नगर ।
उधम सिंह नगर ।
पी० एस ० यू० ( आर० ई० ) 12 हिन्दी गजट / 78 - भाग 8-2025 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।
मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।