पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN / 30 / 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की
खण्ड-26 ] रुड़की, शनिवार, दिनांक 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्) [ संख्या-24
विषय-सूची
प्रत्येक भाग के पृष्ठ अलग- अलग दिये गए हैं, जिससे उनके अलग - अलग खण्ड बन सकें
विषय
पृष्ठ संख्या
वार्षिक चन्दा रु० सम्पूर्ण गंजट का मूल्य
3075
भाग 1 - विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान- नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस
419-470
1500
भाग 1 -क-नियम, कार्य- विधियां, आज्ञाएं, विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया
195-228
1500 भाग 2- आज्ञाएं, विज्ञप्तियां , नियम और नियम विधान , जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों के उद्धरण
975
भाग 3- स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़ - पत्र, नगर प्रशासन, नोटीफाइड एरिया, टाउन एरिया एवं निर्वाचन (स्थानीय निकाय ) तथा पंचायतीराज आदि के निदेश जिन्हें विभिन्न आयुक्तों अथवा जिलाधिकारियों ने जारी किया
975 भाग 4- निदेशक, शिक्षा विभाग , उत्तराखण्ड
975 भाग 5 - एकाउन्टेन्ट जनरल, उत्तराखण्ड
975
भाग 6-बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किए गए या प्रस्तुत किए जाने से पहले प्रकाशित किए गए तथा सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट
975
भाग 7- इलेक्शन कमीशन ऑफ इण्डिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां
975 भाग 8- सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि
177-243
975 स्टोर्स पर्चेज- स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़ - पत्र आदि
1425
419-क 420
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
भाग 1
विज्ञप्ति-अवकाश , नियुक्ति, स्थान- नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम अनुभाग ई- पत्रावली संख्या-28911
अधिसूचना
23 मई, 2025 ई0
संख्या-552/VII- 3-25/ 02 (02) - एम 0एस 0एम0 ई0 / 2025 - प्रदेश में ऐसे उद्यमशील युवाओं, प्रवासियों कुशल-अकुशल दस्तकारों- हस्तशिल्पियों, शिक्षित शहरी- ग्रामीण बेरोजगारों, छोटे उद्यमियों/ व्यवसायियों/ पथ विक्रेताओं जो बैंक ऋण के माध्यम से स्वयं के उद्यम / व्यवसाय की स्थापना करना चाहते हैं, को पूंजी उपलब्ध कराये जाने के उद्देश्य से "मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0" संचालित किये जाने की राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं:-
पृष्ठभूमि
वैश्विक महामारी कोविड-19 की आपात स्थिति के कारण उत्तराखण्ड राज्य के निवासियों की आजीविका पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को कम करने हेतु, उत्तराखण्ड राज्य के उद्यमशील युवाओं, उत्तराखण्ड प्रवासियों, कुशल अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पियों तथा शिक्षित शहरी - ग्रामीण बेरोजगारों को स्वयं के उद्यम स्थापनार्थ प्रोत्साहित किये जाने हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, उत्तराखण्ड शासन द्वारा कार्यालय ज्ञाप सं. 580/VII -3 /01 (03 ) -एम.एस.एम.ई. /2020, दिनांक 09 मई, 2020 के द्वारा " मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना " लागू की गयी । इसी क्रम में अति सूक्ष्म उद्यमों/ पथ विक्रेताओं हेतु शासनादेश सं. 773/VII- 3-21 /02 (07) -एम.एस.एम.ई. / 2020 , दिनांक 21 जून, 2021 के द्वारा " मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अति सूक्ष्म (नैनो) उद्यम " लागू की गयी । योजनावधि में लगभग 39,000 से अधिक लाभार्थियों को स्वरोजगार से सम्बद्ध किये जाने के साथ ही लगभग एक लाख से अधिक रोजगार सृजित किये गये हैं ।
पूर्व संचालित उक्त योजनाओं को संविलियन कर अधिक प्रभावी बनाने, महिला उद्यमिता के प्रोत्साहन तथा लाभ की द्विरावृत्ति (Duplicacy) रोकने के उद्देश्य से बैंक ऋण सहबद्ध (Credit Linked) "मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 " लागू की जा रही है:-
" मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0"
1.
इस योजना का संक्षिप्त नाम "एम.एस.वाई. 2.0" है ।
संक्षिप्त नाम
2. योजना
अवधि
यह योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 से प्रारम्भ होकर वित्तीय वर्ष 2029-30 तक लागू रहेगी, जब तक कि इसमें संशोधन अथवा इसे बंद नहीं किया जाता है ।
3. योजना का यह योजना राज्य के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में लागू रहेगी ।
कार्यक्षेत्र
4. योजना का लक्ष्य
योजनावधि में 50 हजार से अधिक लाभार्थियों को स्वरोजगार से सम्बद्ध करते हुये अधिकाधिक रोजगार / सहायक रोजगार सृजित किये जाने का लक्ष्य है ।
भाग 1 ]
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योजना के अंतर्गत वार्षिक आधार पर जनपदों हेतु लक्ष्य का निर्धारण महानिदेशक /आयुक्त उद्योग द्वारा सम्बंधित जनपद की जनसंख्या, भौगोलिक पारिस्थितिकी , आर्थिक विकास की स्थिति एवं स्वरोजगार की सम्भावना के आधार पर किया जायेगा ।
5. योजना
हेतु
इस योजना हेतु सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग नोडल विभाग होगा। इसका नोडल
संचालन राज्य स्तर पर उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड एवं जनपद स्तर पर
विभाग /
जिला उद्योग केन्द्रों द्वारा किया जायेगा । इस योजना के अंतर्गत जनपद हेतु संचालक
निर्धारित लक्ष्यों का वितरण जिला उद्योग केन्द्रों एवं आवश्यकतानुसार खादी एवं
ग्रामोद्योग बोर्ड के जनपदीय कार्यालयों को किया जायेगा ।
एजेंसी
6. उद्देश्य
(i) इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के लिये स्वयं का उद्यम (विनिर्माण, सेवा एवं व्यवसाय ) स्थापित करने हेतु बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना तथा स्वरोजगार से समृद्धि एवं राज्य के सतत् आर्थिक विकास में योगदान दिया जाना है ।
(ii) राज्य के युवक-युवतियों, बेरोजगारों तथा रिवर्स माइग्रेसन के माध्यम से राज्य में आए प्रवासियों को रोजगार की तलाश करने वाले (Job Seekers ) के स्थान पर रोजगार सृजक (Job Creators ) के रूप में स्थापित करना ।
(iii) बैंकों से ऋण प्राप्ति को सुलभ बनाकर एवं बैंक ऋण के सापेक्ष मार्जिन मनी / उपादान सहायता प्रदान करते हुये स्वरोजगार को और अधिक आकर्षक एवं लाभप्रद बनाना है ।
(iv) जनपद स्तर पर 'जागरूकता कार्यक्रमों (Awareness Program ) ' एवं ' उद्यमिता विकास कार्यक्रमों (EDP ) ' के माध्यम से उद्यमिता (Entrepreneurship ) का विकास करना ।
(v) महिलाओं को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करते हुये राज्य में महिला उद्यमिता को विशेष प्रोत्साहन प्रदान करना है ।
(vi) स्वरोजगार हेतु स्थापित व्यवसाय /उद्यमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर अधिकाधिक रोजगार /सहायक रोजगार सृजित करते हुये , राज्य में बेरोजगारी दर कम करना, प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि करना एवं राज्य से पलायन रोकना।
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों एवं छोटे नगर निकायों में स्वरोजगार हेतु अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करते हुये इन क्षेत्रों से राज्य के बड़े शहरों (नगर निगमों) की ओर आंतरिक पलायन को रोककर जनसंख्या दबाव को कम (vii) करना ।
(viii) राज्य के स्थानीय उत्पादों के संरक्षण व विकास के उद्देश्य से इनकी उत्पादक इकाइयां स्थापित करने पर अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना ।
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[भाग 1 7 . परिभाषाएं
( i ) "योजना " से 'मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0' अभिप्रेत है ;
(ii ) "राज्य" से ' उत्तराखण्ड' राज्य अभिप्रेत है ;
( iii) "परिवार " से पति- पत्नी एवं उनके 21 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित बच्चे अभिप्रेत हैं ;
(iv) " महिला उद्यमी " से राज्य की 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं अभिप्रेत हैं , जो स्वरोजगार के माध्यम से अपना व्यवसाय प्रारम्भ करना चाहती हैं ;
(v ) "दिव्यांगजन " से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम , 2016 एवं उत्तराखण्ड दिव्यांगजन अधिकार नियमावली, 2019 में यथा परिभाषित दिव्यांगजन अभिप्रेत है;
(vi) "एक जनपद दो उत्पाद (ODTP ) " से उत्तराखण्ड राज्य की 'एक जनपद दो उत्पाद योजना , 2021 ' के अंतर्गत जनपद विशेष के लिए चिन्हित उत्पाद अभिप्रेत है तथा जिनका विनिर्माण सम्बंधित जनपद की भौगोलिक सीमा में किया जाता है;
(vii) "एक जनपद एक उत्पाद ( ODOP ) " से उद्योग संवर्द्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग , वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा राज्य के विभिन्न जनपदों हेतु चिन्हित विशिष्ट उत्पाद अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्माण सम्बंधित जनपद की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ;
(viii) "भौगोलिक संकेतक (GI Tag ) उत्पाद " से महानियंत्रक, पेटेंट , डिजाइन एवं ट्रेडमार्क, उद्योग संवर्द्धन एवं आन्तरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य के उत्पादों हेतु जारी जीआई टैग पंजीकृत उत्पाद अभिप्रेत हैं, जिनका विनिर्माण राज्य/ जनपद / क्षेत्र की भौगोलिक सीमा में किया जाता है ;
(ix) "बैंक" से राज्य / जनपद के अंतर्गत कार्यरत एवं सक्षम स्तर से मान्यता प्राप्त निम्नलिखित बैंक अभिप्रेत हैं -
(क) सभी सार्वजनिक बैंक
(ख) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
(ग) सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
(घ) राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सहकारी बैंक / निजी वाणिज्यिक बैंक;
(x ) "बैंक ऋण " से योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना के सापेक्ष बैंक द्वारा स्वीकृत एवं वितरित, सावधि ऋण (Term Loan) /अधिकतम एक तिमाही के वाणिज्यिक संचालन हेतु आवश्यक कार्यशील पूंजी ऋण अथवा संयुक्त ऋण अभिप्रेत है ;
(xi) "ग्रामीण क्षेत्र " से उत्तराखण्ड राज्य के ग्रामीण क्षेत्र अभिप्रेत है ;
(xii) "अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र " से उत्तराखण्ड राज्य के अंतर्गत अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र अभिप्रेत है ;
(xiii) "विनिर्माणक उद्यम" से ऐसा उद्यम अभिप्रेत है, जो उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 की पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट किसी उद्योग से सम्बन्धित माल के विनिर्माण या उत्पादन में लगे हुए या अंतिम उत्पाद, जो एक सुभिन्न नाम या लक्षण या उपयोग रखता हो और जो अन्तिम उत्पाद के मूल्य वर्धन में संयंत्र और मशीनरी का उपयोग करता हो । बिना संयंत्र व मशीनरी के, भाग 1 ]
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हस्तनिर्मित अथवा प्राकृतिक रूप से परिवर्तित/ उत्पादन करने वाले उद्यम इस श्रेणी में सम्मिलित नहीं हैं ;
(xiv ) "सेवा उद्यम" से उपकरण का उपयोग करते हुये विभिन्न प्रकार की सेवायें प्रदान करना अभिप्रेत है ;
(xv ) "परियोजना लागत " में भूमि को छोड़कर उद्यम/व्यवसाय स्थापना हेतु किया गया कुल स्थायी पूंजी निवेश , जिसमें प्लांट व मशीनरी, उपकरण , कार्यशाला भवन, किराये पर भवन की स्थिति में अधिकतम एक वर्ष का किराया तथा अन्य स्थायी प्रकृति की परिसम्पत्तियों में किया गया निवेश एवं अधिकतम एक तिमाही हेतु आवश्यक कार्यशील पूंजी निवेश सम्मिलित है ;
(xvi ) " श्रेणी ए. बी, सी एवं डी के जनपद /क्षेत्र " से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग , उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचना सं. 1145/VII-3-23 /04( 01 )-एम.एस. एम.ई. / 2023, दिनांक 09 अगस्त, 2023 के द्वारा प्रख्यापित उत्तराखण्ड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति, 2023 के प्रस्तर-5 में निम्नवत वर्णित जनपद/क्षेत्र अभिप्रेत हैं -
श्रेणी
सम्मिलित/आच्छादित क्षेत्र
ए जनपद पिथौरागढ़ , उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, रूद्रप्रयाग व बागेश्वर का सम्पूर्ण क्षेत्र ।
बी जनपद अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल का सम्पूर्ण भू-भाग।
जनपद टिहरी गढ़वाल का पर्वतीय बहुल भूभाग ।
जनपद नैनीताल (भीमताल , धारी, बेतालघाट, रामगढ़ , ओखलकाण्डा विकासखण्ड) तथा जनपद देहरादून (चकराता विकासखण्ड) ।
सी जनपद टिहरी का मैदानी भाग (ढालवाला , तपोवन, मुनी की रेती एवं उससे जुड़े फकोट विकासखण्ड के मैदानी क्षेत्र) ।
जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।
जनपद नैनीताल के कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र ।
डी जनपद हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर का सम्पूर्ण भू-भाग ।
जनपद नैनीताल के रामनगर, हल्द्वानी विकासखण्ड, नगर निगम हल्द्वानी, नगरपालिका लालकुआं, नगरपालिका रामनगर तथा कोटाबाग विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र ।
जनपद देहरादून के रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी व डोईवाला विकासखण्ड के समुद्रतल से 800 मीटर या इससे कम ऊंचाई वाले क्षेत्र तथा देहरादून नगर निगम के क्षेत्र ।
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[भाग 1 8. योजना के
घटक
(i) परियोजना निर्माण
इस योजना के अंतर्गत अनुमन्य विभिन्न प्रकार के मॉडल प्रोजेक्ट निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराये जायेंगे । जिला उद्योग केन्द्र एवं अन्य सम्बंधित विभागों द्वारा भी इस योजना के अंतर्गत अनुमन्य परियोजना निर्माण में आवेदकों को सहयोग प्रदान किया जायेगा ।
बैंकों द्वारा रूपये 10 लाख तक की परियोजना आवेदक द्वारा स्व- हस्ताक्षरित तथा रू. 10 लाख से अधिक की परियोजना सी.ए. (चार्टर्ड एकाउन्टेंट ) द्वारा प्रमाणित स्वीकार्य की जायेंगी ।
(ii) कौशल
विकास/
उद्यमिता
प्रशिक्षण
इस योजना के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण ऋण प्राप्ति के लिये पूर्व शर्त नहीं होगी । आवश्यकतानुसार जिला उद्योग केन्द्र द्वारा सम्बंधित जनपद के जिला योजना के अंतर्गत ' उद्यमिता विकास कार्यक्रमों (EDP )' का आयोजन करते हुये, इस योजना के लाभार्थियों हेतु निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सकेगी ।
(iii) परियोजना
लागत
योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना लागत के सापेक्ष लाभार्थी का अंशदान निम्नवत होगा-
में लाभार्थी
लाभार्थी श्रेणी
अंशदान
परियोजना के सापेक्ष लाभार्थी अंशदान
सामान्य श्रेणी
10 प्रतिशत
05प्रतिशत
विशिष्ट श्रेणी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग , अल्पसंख्यक, भूतपूर्व सैनिक, महिला एवं दिव्यांगजन)
(iv) बैंक ऋण योजनान्तर्गत प्रस्तावित परियोजना के सापेक्ष लाभार्थी अंशदान को छोड़कर बैंकों द्वारा शेष धनराशि ऋण के रूप में स्वीकृत की जायेगी , अर्थात् सामान्य श्रेणी के आवेदकों को परियोजना का 90 प्रतिशत तथा विशिष्ट श्रेणी के आवेदकों को परियोजना का 95 प्रतिशत ऋण स्वीकृत किया जायेगा । बैंकों द्वारा स्थायी पूंजी निवेश से सम्बंधित भाग हेतु सावधि ऋण तथा कार्यशील पूंजी हेतु कैश क्रेडिट लिमिट (CC Limit) अथवा संयुक्त ऋण (Composite Loan) के रूप में ऋण स्वीकृत किया जा सकेगा । जिला उद्योग केन्द्र से अग्रसारित परियोजना लागत से अधिक का ऋण (लाभार्थी अंशदान को छोड़कर) बैंक द्वारा स्वीकृत नहीं किया जायेगा ।
भाग 1]
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425 (v) उपादान इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजना लागत के सापेक्ष (मार्जिन मनी) निम्नवत मार्जिन मनी / उपादान देय होगा -
परियोजना लागत के सापेक्ष उपादान की मात्रा
रूपये 02 लाख
तक
परियोजना की भौगोलिक स्थिति
रूपये 02 लाख से अधिक, रूपये 10 लाख तक
रूपये 10 लाख से अधिक, रूपये 25 लाख तक
30प्रतिशत
25 प्रतिशत
20 प्रतिशत
श्रेणी ए एवं बी के जनपद/क्षेत्र
25 प्रतिशत
20प्रतिशत
15 प्रतिशत
श्रेणी सी एवं डी के जनपद/क्षेत्र
अतिरिक्त मार्जिन मनी / उपादान
(क) भौगोलिक बूस्टर - ग्रामीण क्षेत्र एवं अधिसूचित नगर पंचायत क्षेत्र में स्थापित परियोजना पर 05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी/ उपादान देय होगा ।
(ख) सामाजिक बूस्टर - महिला एवं दिव्यांगजन लाभार्थियों को
05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी/ उपादान देय होगा ।
(ग) उत्पाद बूस्टर राज्य के ओ.डी.ओ.पी. /ओ.डी.टी.पी./जी. आई. टैग के तहत जनपद विशेष में चिन्हित उत्पाद के विनिर्माण से सम्बंधित परियोजना को 05 प्रतिशत अतिरिक्त मार्जिन मनी / उपादान देय होगा ।
नोट -किसी लाभार्थी / परियोजना को उक्तानुसार वर्णित भौगोलिक बूस्टर, सामाजिक बूस्टर तथा उत्पाद बूस्टर में से मात्र किसी एक श्रेणी का लाभ ही देय होगा ।
(vi) विपणन
सहायता
(i ) इस योजना के अंतर्गत स्थापित विनिर्माणक उद्यमों को विपणन सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से उद्योग विभाग, उत्तराखण्ड अथवा अन्य राजकीय विभागों द्वारा आयोजित मेले / प्रदर्शनी में न्यूनतम दर पर स्टॉल उपलब्ध कराया जा सकेगा ।
(ii ) योजनान्तर्गत लाभार्थी उद्यमों को उनके उत्पाद / सेवा के ऑनलाइन विपणन हेतु गवर्नमेंट ई- मार्केट प्लेस (GEM) , अमेजॉन , फ्लिपकार्ट आदि मार्केटिंग वेबपोर्टल का उपयोग करने हेतु प्रेरित / प्रशिक्षित किया जायेगा ।
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[भाग 1
(iii) हथकरघा/ हस्तशिल्प उत्पाद तथा ओ.डी.ओ.पी. /ओ.डी.टी.पी. /जी.आई. टैग उत्पादों के विपणन प्रोत्साहन हेतु उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प परिषद् के अंतर्गत कार्यरत 'हिमाद्री इम्पोरियम' में उत्पाद विपणन हेतु नियमानुसार स्थान उपलब्ध कराया जायेगा ।
9. पात्र
गतिविधियां
भारत सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्रतिबन्धित गतिविधियों तथा पारम्परिक विधि से कृषि कार्य को छोड़कर, निम्नलिखित गतिविधियां, योजनान्तर्गत पात्र गतिविधियों में सम्मिलित होंगी-
(i ) रूपये 25 लाख तक लागत के विनिर्माणक उद्यम ।
(ii) रूपये 10 लाख तक लागत के सेवा उद्यम ।
( iii) रूपये 10 लाख तक लागत के व्यापार (ट्रेड) एवं अन्य व्यवसाय ।
उक्तानुसार निर्धारित सीमा से अधिक लागत वाली परियोजना की स्थिति में उद्यमी द्वारा अतिरिक्त लागत का वहन स्वयं किया जायेगा और इसे परियोजना के सापेक्ष उपादान (मार्जिन मनी) के आंगणन हेतु संज्ञान में नहीं लिया जायेगा ।
10. पात्रता शर्तें
एवं अर्हता
(i) योजनान्तर्गत आवेदन के समय आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है ।
(ii) आवेदक राज्य का स्थायी अथवा मूल निवासी हो । इस सम्बंध में आवेदन पत्र के साथ सक्षम स्तर से जारी प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।
(iii) आवेदक किसी भी राष्ट्रीयकृत अथवा मान्यता प्राप्त बैंक / वित्तीय संस्था/ सहकारी बैंक अथवा अन्य किसी राजकीय संस्था का चूककर्ता (Defaulter) नहीं हो ।
(iv) आवेदक अथवा उसके परिवार के किसी सदस्य द्वारा इस योजना के अंतर्गत पूर्व में लाभ प्राप्त नहीं किया गया हो । इस योजना में यथापरिभाषित परिवार से एक सदस्य ही योजना अंतर्गत लाभ हेतु पात्र होगा ।
(v) किसी व्यक्ति द्वारा मात्र एक बार ही इस योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त किया जा सकेगा ।
(vi) आवेदक द्वारा विगत 5 वित्तीय वर्ष के भीतर भारत सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी अन्य स्वरोजगार योजना का पूर्व में लाभ प्राप्त नहीं किया गया हो , किन्तु यदि किसी आवेदक द्वारा विगत 05 वित्तीय वर्ष से पूर्व भारत सरकार या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वरोजगार योजना में लाभ प्राप्त किया गया है और वह चूककर्ता (Defaulter) नहीं है, तो वह अपने उद्यम के विस्तार के लिये योजनान्तर्गत वित्त पोषण प्राप्त कर सकता है ।
भाग 1 ]
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427 (vii)
इस योजनान्तर्गत पात्रता हेतु न्यूनतम शैक्षिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं है ।
(viii) योजनान्तर्गत विशिष्ट श्रेणी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, भूतपूर्व सैनिक, महिला एवं दिव्यांगजन) का लाभ प्राप्त करने हेतु सम्बंधित आवेदकों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत प्रमाण- पत्रों की स्वप्रमाणित प्रतियां आवेदन के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा ।
(ix) आवेदक द्वारा प्रस्तावित परियोजना वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य (Commercially Viable ) होना अनिवार्य है ।
(x) आवेदक द्वारा प्रस्तावित परियोजना योजनान्तर्गत अनुमन्य गतिविधियों में सम्मिलित होना अनिवार्य है ।
(xi)
आवेदक द्वारा पात्रता की सभी शर्तें पूर्ण किये जाने के सम्बंध में आवेदन के साथ शपथ- पत्र प्रस्तुत करना होगा ।
11. आवेदन प्रक्रिया
लाभार्थी द्वारा योजना हेतु निर्धारित पोर्टल पर समस्त अनिवार्य/ सुसंगत अभिलेखों सहित ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत किया जायेगा ।
12. आवश्यक अभिलेख
निम्नलिखित अभिलेखों की स्व- प्रमाणित छायाप्रतियां पोर्टल अपलोड/प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा - पर (i ) लाभार्थी के आधार कार्ड की प्रति ।
(ii) लाभार्थी के स्थायी /मूल निवास प्रमाण- पत्र की प्रति ।
(iii ) प्रस्तावित उद्यम की परियोजना रिपोर्ट । (₹ 10 लाख तक की परियोजना स्व- हस्ताक्षरित तथा इससे अधिक की परियोजना सी.ए. द्वारा प्रमाणित)
(iv ) लाभार्थी का पासपोर्ट साईज फोटो, जो 06 माह से अधिक पुराना न हो । ,
(v) विशिष्ट श्रेणी के लाभ हेतु सक्षम स्तर से निर्गत प्रमाण- पत्र की प्रति । (विशिष्ट श्रेणी में उल्लिखित महिला लाभार्थी को छोड़कर अन्य श्रेणी हेतु सक्षम स्तर से जारी प्रमाण - पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा)
(
vi ) स्टाम्प पेपर पर इस आशय का शपथ-पत्र कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत समस्त तथ्य एवं अभिलेख शुद्ध एवं पूर्ण हैं, आवेदक इस योजना के अंतर्गत निर्धारित पात्रता की शर्तें पूर्ण करता है तथा अपेक्षित किसी तथ्य को उसके द्वारा छिपाया नहीं गया है । किसी प्रतिकूल तथ्य के पाये जाने की स्थिति में उद्योग विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जा सकेगी, जिसके लिये लाभार्थी पूर्ण रूप से उत्तरदायी माना जायेगा ।
(vii) कार्यशाला भवन/ दुकान, पट्टा (Lease) / किराये पर होने की स्थिति में, पट्टा विलेख (Lease Deed) / किरायानामा की प्रति।
(viii
) संयंत्र व मशीनरी / उपकरण /वर्कशेड अथवा दुकान निर्माण अथवा मरम्मत से सम्बंधित वर्तमान दरों के कोटेशन ।
नोट- उक्त क्रम संख्या-(vii ) एवं (viii ) पर अंकित अभिलेख जनपद स्तर पर चयन के उपरान्त लाभार्थी द्वारा प्रस्तुत किये जा सकेंगे ।
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[भाग 1 13. आवेदन पत्रों
की संवीक्षा
एवं लाभार्थी
चयन
(i ) निर्धारित पोर्टल पर प्राप्त आवेदन पत्रों की संवीक्षा (Scrutiny) जिला उद्योग केन्द्र स्तर पर आवेदन प्राप्ति की तिथि से 03 कार्यदिवस के भीतर की जायेगी ।
(ii) आवेदन पत्र की अपूर्णता अथवा त्रुटि की स्थिति में इसे आवेदक को पूर्ण करने एवं त्रुटि की शुद्धि हेतु तत्काल वापस किया जायेगा । पूर्ण एवं शुद्ध आवेदन पत्रों को लाभार्थी चयन हेतु जनपद स्तर पर गठित समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।
(iii) प्राप्त आवेदन पत्रों के आधार पर लाभार्थियों का चयन जनपद में निम्नवत गठित जनपद स्तरीय संवीक्षा समिति द्वारा किया जायेगा:-
महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र
अध्यक्ष
जनपद के लीड बैंक प्रबन्धक
सदस्य
परियोजना से संबंधित विभाग के जनपद स्तरीय अधिकारी
सदस्य
प्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र
सदस्य सचिव
महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा उक्त समिति की बैठक में आवश्यकतानुसार अन्य विभागीय प्रतिनिधियों को आमंत्रितं किया जा सकेगा ।
(iv) जनपद स्तरीय संवीक्षा समिति द्वारा इस योजना के अंतर्गत निर्धारित पात्रता शर्तें, परियोजना की व्यवहार्यता (Viability), पहले आओ पहले पाओ ( First Come First Serve) तथा जनपद के लिये निर्धारित लक्ष्य के दृष्टिगत लाभार्थियों के आवेदन एवं अभिलेखों का परीक्षण करते हुये, लाभार्थियों का चयन किया जायेगा । चयन हेतु साक्षात्कार अनिवार्य नहीं है । जनपद स्तर पर संवीक्षा समिति की बैठक 15 दिन अथवा इससे कम अंतराल पर आयोजित की जायेगी, ताकि चयनित आवेदन पत्रों को यथाशीघ्र बैंकों को प्रेषित किया जा सके ।
(v ) समिति के माध्यम से चयनित आवेदन- पत्रों को जिला उद्योग केन्द्र द्वारा तत्काल सम्बंधित बैंकों को अग्रसारित किया जायेगा । आवेदक के अनुरोध के आधार पर आवेदन - पत्र में अंकित बैंक से भिन्न बैंक को भी महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा आवेदन अग्रसारित किया जा सकेगा । आवेदन पत्र अग्रसारण की कार्यवाही ऑनलाइन की जायेगी, जिसकी सूचना आवेदक को भी प्रेषित की जायेगी । आवेदन प्रक्रिया में तीव्रता एवं पारदर्शिता के दृष्टिगत बैंक अथवा आवेदक के साथ ऑफलाइन पत्राचार नहीं किया जायेगा ।
भाग 1 ]
429 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
14. बैंक स्तर पर
आवेदन
निस्तारण
प्रक्रिया
(i ) बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र सं० RBI/ FIDD/2016-17/37 , Master Direction FIDD.MSME & NFS.3 /06.02.31 / 2016-17 , दिनांक 21 जुलाई, 2016 के प्रस्तर 5.4 के अनुसार बैंक शाखा स्तर पर प्राप्त ऑनलाइन ऋण आवेदन पत्रों पर ऋण स्वीकृति के सम्बंध में निर्णय निम्नवत निर्धारित अधिकतम समय - सीमा के अंतर्गत लिया जायेगा
ऋण धनराशि
निर्धारित अधिकतम समय- सीमा
रू. 05 लाख तक
02सप्ताह
03 सप्ताह
रू. 05 लाख से अधिक एवं रू. 25 लाख तक
अधिकतम समय - सीमा का यह प्रतिबन्ध इस योजना हेतु समस्त बैंकों पर समान रूप से लागू माना जायेगा ।
(ii) स्वीकृत / अस्वीकृत आवेदन पत्रों के सम्बंध में बैंक शाखा द्वारा सम्बंधित पोर्टल के माध्यम से तत्काल जिला उद्योग केन्द्र एवं लाभार्थी को सूचित किया जायेगा।
(iii) ऋण स्वीकृति की दिनांक से अधिकतम 15 दिन के अंदर बैंक शाखा द्वारा ऋण वितरण (Disbursement ) की कार्यवाही की जायेगी । बैंक शाखा द्वारा किश्तों में ऋण वितरण किया जा सकेगा , परन्तु बैंक शाखा द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा की किश्तों में ऋण वितरण से परियोजना की स्थापना एवं समुचित संचालन में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो ।
( iv) बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र सं० RBI /FIDD/ 2016-17/37 , Master Direction FIDD.MSME & NFS.3 /06.02.31 / 2016-17 , दिनांक 21 जुलाई, 2016 के प्रस्तर 4.2 के अनुसार बैंक शाखा द्वारा ऋण वितरण के लिये कोई संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security ) स्वीकार नहीं किया जायेगा । ऐसे बैंक जो भारतीय रिजर्व बैंक के उक्त परिपत्र के परिपालन से मुक्त रखे गये हों, को नियमानुसार संपार्श्विक प्रतिभूति (Collateral Security) प्राप्त किये जाने की छूट होगी ।
(v ) बैंक शाखा द्वारा परियोजना के अनुरूप ऋण अदायगी हेतु आरम्भिक स्थगन (Moratorium) अवधि निर्धारित की जा सकेगी । यदि लाभार्थी ऋण वितरण के उपरान्त प्रारम्भ से ही बैंक ऋण की किश्त अदा करने को तैयार है तो उसे बैंक द्वारा स्वीकार किया जायेगा ।
430
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(vi) बैंक ऋण अदायगी की अवधि बैंक शाखा द्वारा बैंक ऋण के अनुरूप निर्धारित की जायेगी , परन्तु यह अवधि 02 वर्ष से कम नहीं होगी ।
(vii ) ऋण की प्रथम किश्त के वितरण के पश्चात् 07 दिन के अंदर वित्त पोषण करने वाली बैंक शाखा द्वारा स्वीकृत परियोजना के अनुरूप अपेक्षित उपादान / मार्जिन मनी का दावा ऑनलाइन माध्यम से सम्बंधित जनपद के महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जायेगा ।
15. उपादान/ मार्जिन मनी दावे का निस्तारण / समायोजन
(i ) महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र द्वारा उपादान / मार्जिन मनी दावे का परीक्षण करते हुये , इसे संस्तुति सहित उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड को प्रेषित किया जायेगा ।
(ii ) उद्योग निदेशालय, उत्तराखण्ड द्वारा उपादान/ मार्जिन मनी दावे का परीक्षण करते हुये इसके सापेक्ष मार्जिन मनी / उपादान की धनराशि सम्बंधित लाभार्थी / बैंक शाखा के खाते में प्रेषित की जायेगी , जो टी.डी.आर. (मियादी जमा रसीद) के रूप में उपलब्ध रहेगी । बैंक शाखा में मार्जिन मनी प्राप्त होने के उपरान्त परियोजना के इस भाग पर बैंक शाखा द्वारा ब्याज न तो लिया जायेगा और न ही दिया जायेगा ।
(iii ) परियोजना के सफलतापूर्वक संचालित रहने तथा किसी प्रकार की चूक (डिफॉल्ट) नहीं होने की दशा में 02 वित्तीय वर्ष उपरान्त अनुमन्य मार्जिन मनी को उपादान के रूप में सम्बंधित लाभार्थी के बैंक ऋण खाते में समायोजित कर दिया जायेगा । समायोजन से पूर्व जिला उद्योग केन्द्र एवं सम्बंधित बैंक शाखा के अधिकारियों द्वारा लाभार्थी की परियोजना का संयुक्त भौतिक निरीक्षण किया जायेगा । निरीक्षण के समय इकाई के कार्यरत रहने विषयक फोटोग्राफ एवं संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति निर्धारित पोर्टल पर अपलोड की जायेगी ।
(iv ) भौतिक निरीक्षण के समय परियोजना के अकार्यरत पाये जाने अथवा स्वीकृत परियोजना से भिन्न परियोजना में पूंजी निवेश अथवा ऋण का दुरूपयोग पाये जाने की स्थिति में बैंक शाखा द्वारा सम्बंधित मार्जिन मनी को जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से उद्योग निदेशालय , उत्तराखण्ड को वापस कर दिया जायेगा । यदि परियोजना दैवीय आपदा अथवा अन्य असाधारण परिस्थितियों अथवा लाभार्थी की मृत्यु की दशा में बंद पायी जाती है, तो ऐसी स्थिति में महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र से अनुमति प्राप्त करते हुये बैंक शाखा द्वारा मार्जिन मनी को सम्बंधित लाभार्थी के ऋण खाते में समायोजित किया जा सकेगा ।
भाग 1 ]
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431 16. योजना का
योजना के प्रचार- प्रसार का दायित्व सम्बंधित जनपद के महाप्रबन्धक , जिला प्रचार- प्रसार
उद्योग केन्द्र का होगा । महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र योजनान्तर्गत स्वरोजगार अपनाने हेतु अभिप्रेरित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे और इन कार्यशालाओं के माध्यम से उद्यमशील युवाओं/युवतियों को विभागीय योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों , परियोजनाओं के चयन तथा उद्यम स्थापना हेतु अपेक्षित सभी जानकारियां देते हुये हर सम्भव सहायता/ मार्ग-दर्शन भी दिया जायेगा ।
17. योजना की समीक्षा एवं अनुश्रवण
(i ) योजनान्तर्गत बैंकों को प्रेषित आवेदन पत्रों के निस्तारण की समीक्षा विकासखण्ड स्तर पर बी.एल.बी.सी. (Block Level Bankers Committee ) , जनपद स्तर पर डी.एल.आर.सी. (District Level Review Committee ) तथा राज्य स्तर पर एस.एल.बी.सी. (State Level Bankers Committee) के माध्यम से की जायेगी । निम्न स्तरीय समिति से प्राप्त संदर्भ को विचारार्थ/ निर्णयार्थ उच्च स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा ।
( ii ) उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय आदेश सं० 1400/VII-3 / 19(24)-एम.एस.एम. ई./2019 , दिनांक 06 अगस्त , 2019 के द्वारा निम्नवत गठित 'जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति' द्वारा जनपद स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा मासिक आधार पर की जायेगी
जिलाधिकारी
अध्यक्ष
मुख्य विकास अधिकारी
उपाध्यक्ष
मुख्य कृषि अधिकारी
सदस्य
जिला सेवायोजन अधिकारी
सदस्य
अग्रणी बैंक अधिकारी
सदस्य
जिला उद्यान अधिकारी
सदस्य
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी
सदस्य
सहायक निदेशक डेयरी
सदस्य
जिला पर्यटन अधिकारी
सदस्य जिला समाज कल्याण अधिकारी
सदस्य
मुख्य नगर अधिकारी के प्रतिनिधि / अधिशासी
सदस्य अधिकारी, स्थानीय निकाय
महाप्रबन्धक, जिला उद्योग केन्द्र
संयोजक सदस्य 432
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[भाग 1
(iii) योजना की प्रगति की राज्य स्तर पर तिमाही समीक्षा महानिदेशक/आयुक्त उद्योग एवं छमाही समीक्षा प्रमुख सचिव/ सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा की जायेगी ।
18. अन्य नियम /शर्तें /
प्रावधान
(i ) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के बजट में योजना के लिये अलग से प्रावधान किया जायेगा ।
(ii) योजना के कुल बजट की 02 प्रतिशत धनराशि का व्यय आवश्यकतानुसार योजना के प्रचार- प्रसार एवं क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक कार्यों के लिये आकस्मिकता (कंटिनजेंसी) के रूप में किया जा सकेगा ।
(iii) योजनान्तर्गत किया जाने वाला व्यय यथासम्भव बजट प्रावधान के अंतर्गत सीमित रखा जायेगा । किसी वित्तीय वर्ष में बजट में प्रावधानित धनराशि से अतिरिक्त देयतायें सृजित होने की स्थिति में इसे आगामी वित्तीय वर्ष में समायोजित किया जा सकेगा ।
( iv) योजना में स्पष्टीकरण जारी करने हेतु प्रमुख सचिव/ सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग अधिकृत होंगे ।
(v ) योजना के किसी प्रावधान में संशोधन/ परिमार्जन , प्रशासनिक विभाग द्वारा माननीय विभागीय मंत्री जी के अनुमोदन से किया जा सकेगा ।
(vi) गलत/ भ्रामक जानकारी अथवा त्रुटिपूर्ण तरीके से सहायता प्राप्त करने अथवा जिला उद्योग केन्द्र / बैंक प्रतिनिधि द्वारा लाभार्थी को ऋण वितरण के 02 वर्ष के अंतर्गत निरीक्षण के समय इकाई के कार्यरत नहीं पाये जाने की स्थिति में मार्जिन मनी का समायोजन नहीं किया जायेगा और यह धनराशि जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से उद्योग निदेशालय को वापस कर दी जायेगी ।
(vii) योजनान्तर्गत किसी बिन्दु / विषय पर विवाद की स्थिति में आवेदक / लाभार्थी द्वारा 'जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति' के समक्ष अपील की जा सकेगी ।
(
viii) लाभार्थी द्वारा अपने उद्यम पर निर्धारित प्रारूप में अंकित साईनबोर्ड लगाना अनिवार्य होगा ।
आज्ञा से ,
विनय शंकर पाण्डेय ,
सचिव ।
भाग 1 ]
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
433
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास अनुभाग-2
अधिसूचना
28 मई, 2025 ई०
संख्या-258/XVII - 2/25-01 ( 03 ) 2012- राज्यपाल , किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं सरंक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 110 की उपधारा (2) के खण्ड (IV) सपठित धारा 105 की उपधारा (3 ) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड किशोर न्याय निधि से संबंधित विषयों को क्रियान्वित करने के लिए निम्नवत् नियमावली बनाए जाने की सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-
उत्तराखण्ड किशोर न्याय निधि नियमावली , 2025
संक्षिप्त नाम एवं
प्रारम्भ
1. (1 ) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड किशोर न्याय निधि नियमावली, 2025 है ।
परिभाषा
(2) यह नियमावली अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी ।
2. (1) इस नियमावली में जब तक संदर्भ अन्यथा वांछित न हो ,
(क) ' अधिनियम से किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण)
अधिनियम, 2015 (2016 की संख्या-2) अभिप्रेत है;
(ख) "निधि से अधिनियम की धारा 105 के अधीन सृजित उत्तराखण्ड
किशोर न्याय निधि अभिप्रेत है;
(ग) "सरकार" से उत्तराखण्ड राज्य सरकार अभिप्रेत है;
(घ) "निधि प्रबन्धन समिति से उत्तराखण्ड राज्य में निधि के प्रबन्धन के लिए गठित समिति अभिप्रेत है;
(ड) 'लाभार्थी" से कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जिसे किशोर न्याय (बालकों की देखभाल और संरक्षण ) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अधीन या तो वित्तीय सहायता या किसी भी प्रकार की सहायक सामग्री निधि से दी गयी है, अभिप्रेत है;
(च) 'राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी से अधिनियम की धारा 106 के अधीन गठित समिति अभिप्रेत है;
(छ) "निदेशक से निदेशक, महिला कल्याण , उत्तराखण्ड अभिप्रेत है,
(ज) "परिवीक्षा अधिकारी से राज्य सरकार की ओर से अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 (1958 का 20 ) के अधीन परिवीक्षा अधिकारी के रूप मे नियुक्त अधिकारी अथवा राज्य सरकार की ओर से जिला बाल संरक्षण इकाई के अधीन नियुक्त विधि एवं परिवीक्षा अधिकारी अभिप्रेत है ।
(2) वो सभी पद और शब्द, जो अधिनियम एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण ) आदर्श नियम 2016 (जिसे आगे आदर्श नियम कहा गया है) में परिभाषित और प्रयुक्त है, किन्तु इस नियमावली में परिभाषित नहीं है, के वही अर्थ होगें जो अधिनियम व उक्त नियम में अर्थ हैं ।
434
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[भाग 1 नियमावली का
उद्देश्य
3. निधि का उपयोग 18 वर्ष से कम आयु वर्ग (मात्र बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत् बच्चों हेतु 23 वर्ष तक आयु विस्तार की जा सकती है ) के बच्चों जिन्होंने विधि विवादित कार्य किया है अथवा ऐसे बच्चें जो देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता के अंतर्गत हैं, के कल्याण, पुनर्वास एवं सामाजिक पुर्नएकीकरण हेतु समस्त उपर्युक्त प्रयोजनों के लिए अनुसांगिक एवं आवश्यक रुप से किया जायेगा ।
निधि के सृजन
हेतु वित्तीय
4. (1 ) निधि में समय- समय पर सरकार द्वारा अनुमोदित तथा सरकार द्वारा दी जाने वाली अन्य निधियों का समावेश होगा ।
व्यवस्था
(2) निधि में किसी निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR Fund ) के अन्तर्गत या परोपकारी न्यास या अन्य संगठनों के माध्यम से दान, स्वैच्छिक अभिदान , अंशदान या निधियां चाहे वह किसी विशेष प्रयोजन के लिए हो या बिना किसी विशेष प्रयोजन के, भी प्राप्त की जा सकेगी ।
(3) निधियों का सृजन धर्मार्थ प्रदर्शन, मनोरंजन कार्यक्रमों, खेलों, क्लबो , प्रदर्शनियों, प्रतियोगिताओं आदि से किया जा सकता है । इस प्रकार प्राप्त धनराशि सीधे निधि के बैंक खाते में जमा की जायेगी ।
(4) किशोर न्याय बोर्ड द्वारा अधिरोपित आर्थिक शास्ति से प्राप्त धनराशि
इस निधि में जमा की जायेगी ।
(5) निधि में दानदाताओं द्वारा दान की गयी धनराशि पर नियमानुसार आयकर की धारा 80 G के तहत छूट प्राप्त होगी ।
(6) अन्य विधिक साधनों से सृजित धनराशि के संबंध में निधि प्रबंधन समिति निर्णय ले सकेगी ।
निधि का उपयोग निम्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जायेगा:-
(1 ) बाल देखरेख संस्थाओं की स्थापना, अवस्थापना व अनुरक्षण हेतु निधि का उपयोग
5. व्यवस्था , 6 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे जिनका दत्तक ग्राही माता - पिता द्वारा चयन नही किया गया हो तथा जिन्हें विशेष देखरेख की आवश्यकता हो, के लिये बाल देखरेख संस्थाओं में आधारभूत सुविधायें जैसे पर्याप्त भोजन, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सकीय देखभाल आदि सुविधायें उपलब्ध कराना;
(2) बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले समस्त बच्चों को उनकी आयु के अनुसार मनोरंजन, पाठ्योत्तर गतिविधियों जैसे खेल, संगीत, नृत्य, अभिनय , क्लब आदि की सुविधाएँ प्रदान की जायेगी , जो निम्नलिखित को सम्मिलित करेंगी किन्तु इन सुविधाओं तक ही सीमित नहीं होगी:-
(i) बाल देखरेख संस्थाओं में इनडोर एवं आउटडोर खेल , योग , ध्यान , संगीत एवं नृत्य हेतु उपकरण उपलब्ध कराने, मनोरंजन की सुविधा हेतु टेलीविजन , बच्चों के लिए पिकनिक का प्रबंध आदि;
भाग 1 ]
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435
(ii ) बाल देखरेख संस्थाओं में पुस्तकालय की स्थापना, जो बालमित्र होगा , जिसमें समाचार-पत्र , पत्रिकाएं, पहेली पुस्तकें, दृश्य- श्रव्य वीडियोज आदि उपलब्ध होंगे ;
(3) विशेष परिस्थितियों में, परिवार अथवा फॉस्टर केयर में निवासरत् 18 वर्ष तक के बच्चों, जो भारत सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना हेतु अर्ह हैं किन्तु आच्छादित नहीं हैं , को शिक्षा एवं चिकित्सकीय देखभाल हेतु मासिक सहायता स्पॉन्सरशिप के अन्तर्गत प्रदान की जायेगी । यह सहायता मात्र 01 वर्ष के लिए उपलब्ध होगी , जिसे आवश्यकतानुसार मात्र सम्बन्धित जिलाधिकारी की संस्तुति के आधार पर वार्षिक रूप से बढ़ाया जा सकेगा;
परन्तु शर्त यह है कि बच्चा अनाथ हो अथवा अभिभावक जानलेवा रोग से पीड़ित हों या अभिभावक रोग अथवा दुर्घटना के कारण अशक्त हो चुके हों तथा बच्चे की देखरेख करने में आर्थिक व शारीरिक रूप से अक्षम हो या बच्चा गम्भीर रोग से पीड़ित हो या ऐसा बच्चा जिसके अभिभावक कारावास में हैं या माता तलाकशुदा है अथवा परिवार द्वारा परित्यक्त की गयी है;
(4) बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत् ऐसे बच्चे जो 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हों परन्तु 23 वर्ष से कम हो , उनकी देखरेख एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जायेगी । उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने एवं धनराशि प्रदान करने व लघु व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए उन्हें सक्षम बनाने हेतु मूलभूत सहायता , उनकी देखरेख हेतु सुविधायें व उद्यमिता विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी;
(5) ऐसे बच्चे जो , प्रवर्तकता योजना से आच्छादित रहकर 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं उनके लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण / कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था तथा रोजगार सम्बन्धित प्रशिक्षण हेतु आवश्यक खर्चों की व्यवस्था की जायेगी;
(6) बच्चों को 18 वर्ष आयु उपरांत बाल देखरेख संस्था से मुक्त होते समय उन्हें एकमुश्त धनराशि दी जायेगी अथवा व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित किशोरों को टूलकिट दी जायेगी ताकि वे अपना स्वरोजगार प्रारम्भ कर सकें व उन्हें समाज की मुख्य धारा से पुनःएकीकृत किया जा सके;
(7) कैन्सर/ गम्भीर बीमारी से पीड़ित बालकों को प्रशामक (Palliative Care) देखरेख की सुविधा, जिसमें माता- पिता सहित यात्रा / ठहराने की सुविधा भी सम्मिलित होगी, प्रदान की जायेगी;
(8) किशोर न्याय बोर्ड अथवा बाल कल्याण समिति की संस्तुति के आधार पर एवं जिला परिवीक्षा अधिकारी के माध्यम से विशेषज्ञों एवं चिकित्सकीय विशेषज्ञों, मनोचिकित्सों सहित, उनकी विशेषज्ञ सेवाओं हेतु मानदेय प्रदान किया जायेगा;
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[भाग 1
(9) 18 वर्ष से अधिक आयु के संस्थागत देखरेख में रह रहे दिव्यांग व मानसिक रूप से अक्षम बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने व उनके रोजगार मिलने तक आवश्यक खर्च का प्रबन्ध करना;
(10) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नशा करने वाले बच्चों को नशामुक्ति / पुनर्वास केन्द्रों में भेजना व चिकित्सीय एवं अन्य पुनर्वास व्यय को वहन करना;
(11) बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत् बच्चों को उनकी आयु व बौद्धिक सामर्थ्य के अनुसार शिक्षा प्रदान करना जिसमें औपचारिक विद्यालय , मुक्त विद्यालय , अनौपचारिक शिक्षा और विशेष शिक्षा सम्मिलित होंगे;
(12) बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत् बच्चों को उच्च शिक्षा या डिप्लोमा प्रशिक्षण दिलाना जिसका उद्देश्य पाठ्यक्रम के समापन पर उपयुक्त सेवायोजन सुनिश्चित करना;
(13) पुलिस थानों , किशोर न्याय बोडों, बाल न्यायालयों, बाल कल्याण समितियों में बाल अनुकूल स्थलों की साज- सज्जा तथा वहाँ बच्चों के दैनिक उपयोग की आवश्यकताओं हेतु निधि प्रदान करना;
(14) विधिक सहायता प्रदान करना तथा जांच/ विचारण एवं घर वापसी हेतु बच्चों का यात्रा व्यय वहन करना, जिसमें सुरक्षादलों / मार्गरक्षकों की यात्रा, भोजन एवं ठहरने का व्यय सम्मिलित रहेगा;
(15) बालकों की जरूरतों को समझने के लिये माता - पिता और देखरेखकर्ताओं की क्षमता का निर्माण करना;
(16) बच्चों से सम्बन्धित जागरूकता प्रसार कार्यकम;
(17) आपदा प्रभावित बच्चों को आकस्मिक सहायता प्रदान करना;
(18) वन्यजीव एवं मानव संघर्ष से पीड़ित परिवारों के बच्चों को चिकित्सा एवं अन्य उद्दद्देश्यों हेतु सहायता प्रदान करना;
(19) अधिनियम के अंतर्गत संचालित सभी संस्थाओं- बालगृह , विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण , खुला आश्रय गृह, सम्प्रेक्षण गृह, विशेष गृह, सुरक्षा का स्थान साथ ही अन्य सुविधायें जैसे परामर्श केन्द्र, नशा मुक्ति केन्द्र , महिला गृहों आदि, की क्षमताओं का निर्माण करने हेतु विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करना;
(20) गैर सरकारी संगठन अथवा न्यास जो अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हैं एवं बच्चों के कल्याण व पुनर्वास हेतु कार्यरत हैं, को सहायता अनुदान प्रदान करना;
(21 ) गैर संस्थानिक देखभाल यथा फॉस्टर केयर में बच्चों को रखने हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना;
(22) पोक्सो पीड़ित/ लैंगिक अपराध पीड़ित बच्चों की तत्काल देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकताओं के दृष्टिगत आपातकालीन चिकित्सकीय भाग 1 ]
437 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
देखरेख / चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु नियमानुसार/ बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराना, 14 वर्ष से अधिक आयु के पोक्सो / यौन अपराध के पीड़ितों को व्यवसायपरक प्रशिक्षण, कौशल विकास प्रशिक्षण एवं पुनर्वासन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना । इस सहायता हेतु प्रतिबन्ध यह होगा कि ऐसे बच्चे "पोक्सो अधिनियम , 2012 की धारा 4 व 6 के अंतर्गत संचालित देखरेख एवं सहयोग योजना " के तहत समान प्रकार के लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हों;
(23) किशोर न्याय बोर्ड / बाल कल्याण समिति द्वारा अनुमोदित किसी भी गतिविधि एवं उससे सम्बन्धित आकस्मिक व्यय;
(24) अधिनियम एवं आदर्श नियम के अंतर्गत बच्चों के व्यापक हित में कोई अन्य कार्यकम या गतिविधि जो उनके समग्र वृद्धि, विकास एवं कल्याण के लिए सहायक हो ।
सहायता के लिए
मानदण्ड
6. निदेशक, महिला कल्याण द्वारा निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहायता अनुदान की संस्तुति की जाएगीः-
(1) किशोर न्याय बोर्ड अथवा बाल कल्याण समिति के आदेश के आधार पर परिवीक्षा अधिकारी की संस्तुति रिपोर्ट ।
(2) सरकारी कर्मचारी के मामलों में अनुरक्षक के लिए यात्रा व्यय उत्तराखण्ड यात्रा भत्तों के अनुसार दिया जायेगा । अनुरक्षक के सरकारी कर्मचारी न होने की दशा मे सरकार बच्चे व अनुरक्षक को तृतीय श्रेणी कर्मचारी के समान अथवा वास्ताविक , जो भी कम हो , भोजन तथा ठहरने के भत्ते का भुगतान करेगी ।
(3) अनुवादक या दुभाषियों को मानदेय का भुगतान किशोर न्याय बोर्ड या बाल कल्याण समिति की संस्तुति के आधार पर किया जायगा। बिल जिला परिवीक्षा अधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाएगा ।
(4) उपर्युक्त नियम 5 में वर्णित विभिन्न परिस्थितियों से पीड़ित बच्चों को न्यूनतम रू0 5000 / - व अधिकतम रू0 25000/- अथवा वास्तविक व्यय जो भी कम हो, की आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी ।
(5) उपर्युक्त उपनियम (4) में दी गयी व्यवस्था के साथ ही ऐसे किशोर जिन्होंने 18 वर्ष की आयु संस्थागत देखरेख में पूर्ण कर ली है व जिनकी आयु 23 वर्ष से कम है, को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें अपना लघु व्यवसाय प्रारम्भ कराने, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण/कौशल विकास व उच्च शिक्षा अथवा डिप्लोमा प्रशिक्षण प्रदान करने , उनकी चिकित्सकीय देखभाल अथवा अन्य किसी प्रयोजन हेतु यदि वास्तविक व्यय की धनराशि अधिकतम सीमा से ज्यादा है अथवा अतिरिक्त राशि की आवश्यकता है , तो विशिष्ट प्रस्तावों के लिए बढ़ी हुई सीमा तक की राशि का निर्धारण / संस्तुति, निधि प्रबन्धन समिति द्वारा किया जायेगा ।
(6) क्षमता निर्माण व जागरूकता प्रसार हेतु राशि का उपयोग निदेशालय , महिला कल्याण व जिला परिवीक्षा अधिकारियों के माध्यम से किया जायेगा ।
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[भाग 1 निधि
रखरखाव और
संचालन
का 7. ( 1 ) निधि का रखरखाव और संचालन उत्तराखण्ड महिला कल्याण, निदेशालय द्वारा संचालित राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी के माध्यम से किया जायेगा ।
(2) उत्तराखण्ड किशोर न्याय निधि के नाम से किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में निदेशक, महिला कल्याण , उत्तराखण्ड द्वारा एक बचत बैंक खाता खोला जायेगा ।
(3) किसी भी तरह के योगदान द्वारा प्राप्त धनराशि निधि के बचत बैंक खाते में जमा की जायेगी ।
(4) बैंक खाता निदेशक, महिला कल्याण और मुख्य परिवीक्षा अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जायेगा ।
(5) राज्य सरकार के अनुमोदन से राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी , निधि के उपयोग का नियमन करने के लिये वित्तीय नियमों को अंगीकार करेगी ।
(6) लाभार्थी अथवा प्राधिकारी / इकाई को निधि से देय समस्त राशि संबन्धित के बैंक खाते में ऑनलाइन हस्तान्तरित की जायेगी ।
(7) बैंक खाते से किये गये प्रत्येक वित्तीय लेन- देन की सूचना राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी द्वारा निधि प्रबन्धन समिति को ब्यौरावार प्रस्तुत की जायेगी ।
(8) निधि के खातों को राज्य सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार रखा जायेगा ।
(9) निदेशालय, महिला कल्याण निधि से सम्बन्धित अभिलेखों का संरक्षक होगा ।
अपात्रता
8. (1 ) जब तक लाभार्थी द्वारा पूर्व धनराशि का उपयोग उस उद्देश्य हेतु नहीं किया जाता है , जिसके लिए सहायता दी गयी थी, तब तक निधि से कोई भी अतिरिक्त वित्तीय सहायता लाभार्थी को नहीं दी जायेगी ।
(2) यदि कोई लाभार्थी शैक्षिक या व्यावसायिक या अन्य प्रशिक्षण अथवा कोई भी कार्य , जिसके लिए धनराशि प्रदान की गयी है , को बंद कर देता है , तो कोई भी सहायता आगे नहीं बढ़ाई जाएगी, जब तक कि दुध टिना अथवा चिकित्सकीय कारणों से शारीरिक अक्षमता की स्थिति उत्पन्न न हो ।
लेखा परीक्षण
9. निधि के समस्त खातों का प्रत्येक वित्तीय वर्ष में महालेखाकार , उत्तराखण्ड द्वारा लेखा परीक्षण किया जायेगा ।
निधि प्रबन्धन
समिति (Fund
10. निधि के प्रबन्धन हेतु राज्य सरकार द्वारा , निधि प्रबन्धन समिति का गठन किया जायेगा । निधि प्रबन्धन समिति की निम्नलिखित संरचना होंगी:-
Mangement
(1) प्रमुख सचिव/ सचिव , महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास-अध्यक्ष
Committee)
(2) निदेशक/अपर सचिव, महिला कल्याण- सदस्य सचिव
(3) वित्त नियंत्रक महिला कल्याण- सदस्य
(4) मुख्य परिवीक्षा अधिकारी महिला कल्याण- सदस्य भाग 1 ]
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439
(5) लेखाधिकारी /लेखाकार / वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी , निदेशालय , महिला कल्याण - सदस्य
प्रबन्धन निधि
समिति के कार्य
11. (1 ) विभिन्न स्तरों से प्राप्त प्रस्तावों का निस्तारण निधि प्रबन्धन समिति एक माह में करेगी अथवा किसी अधिनियम या नियम में उल्लिखित समय अवधि के अन्तर्गत करेगी ।
(2) निधि आंवटन के कार्यान्वयन का प्रबन्धन और देखरेख करना ।
(3) वित्त पोषण पर विचार तथा सत्यापन करना ।
(4) त्रैमासिक आधार पर प्रगति रिपोर्ट को संकलित , अद्यतन एवं राज्य सरकार को प्रस्तुत करना ।
अन्य
(5) निधि के कुशल संचालन और समुचित उपयोग हेतु प्रासंगिक दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शन जारी करना ।
12. (1 ) समस्त प्रस्तावों पर स्वीकृति एवं कार्योत्तर अनुमोदन निधि प्रबन्धन समिति की बैठक में लिया जायेगा ।
( 2 ) उपर्युक्त नियमों को राज्य सरकार के अनुमोदन के साथ आवश्यकतानुसार संशोधित किया जा सकेगा ।
(3) राजकीय अथवा गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित बाल देखरेख संस्थाओं की स्थापना अथवा सहयोग हेतु धनराशि आंवटन का निर्णय निधि प्रबन्धन समिति द्वारा कुल एकत्रित निधि को देखते हुये किया जायेगा ।
(4) जनपद अथवा निम्न स्तर पर निधि से संबंधित कोई भी विवाद संबंधित जिलाधिकारी को सन्दर्भित किया जायेगा एवं यदि विवाद का हल नहीं होता है तो प्रकरण मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन को संदर्भित किया जायेगा, जिनका निर्णय अन्तिम व समस्त पक्षों पर बाध्यकारी होगा ।
आज्ञा से , चन्द्रेश कुमार , सचिव ।
Inpursuance of the provision of clause (3) of Article 348 of the Constitution of India , the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No.258 /XVII - 2 / 25-01 ( 03) 2012, Dated- May 28, 2025 for general information:
NOTIFICATION
May 28, 2025
No. 258 / XVII - 2/ 25-01 (03 ) 2012 --In exercise of powers conferred by sub- section (3 ) of section 105 read with clause ( IV) of sub- section ( 2) of section 110 of the Juvenile Justice ( Care and Protection of Children ) Act 2015 , to implement the matters related to the Uttarakhand Juvenile Justice Fund, the Gover- nor is pleased to allow to make the following rules: - 440
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
The Uttarakhand Juvenile Justice Fund Rules, 2025
1.
Short title and Commencement
1
( 1 ) These rules may be called the Uttarakhand Juvenile Justice Fund Rules , 2025.
(2) These rules shall come into force from the date of issue of notification . !
Definitions
2.
( 1 ) In these rules unless the context otherwise requires ,
( a ) " Act " means the Juvenile Justice (Care and Protection of Children ) Act , 2015 ( No. 2 of2016) ;
( b) " Fund" means the Uttarakhand Juvenile Justice Fund created under section 105 of thisAct;
means the State ( c ) " Government " Government of Uttarakhand ;
(d) "Fund Management Committee " means the Committee constituted for the management of the Fund in the State of Uttarakhand;
( e) " Beneficiary " means any person or group of persons who have been given either financial assistance or material assistance of any kind from the Fund under the provisions of the Juvenile Justice (Care and Protection of Children ) Act , 2015;
( f ) " State Child Protection Society" means the Committee constituted under section 106 of the Act ;
(g) " Director " means the Director, Women Welfare, Uttarakhand ;
( h ) " Probation Officer " means the officer appointed as Probation Officer under the Probation of Offenders Act, 1958 ( 20 of 1958) on behalf of the State Government or the Legal Cum Probation Officer appointed by the State Government under the District Child Protection Unit .
(2) All the expressions and words defined and used in the Act and the Juvenile Justice (Care and Protection of Children ) Model Rules , 2016 ( herein after referred to as Model Rules) but not defined in these rules , shall have the same meaning as assigned to them in the Act and the said Model Rules.
भाग 1 ]
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Objective of the3 . Rules
Utilization ofFund for welfare, rehabilitation and reintegration of children under the age of 18 years ( may be extended up to 23 years only for Children living in Child Care Institutions ) who have committed acts in conflict with law or who are in need of care and protection and to do all other things which are incidental and necessary for all the above purposes .
Financial 4. arrangement for creation of fund
(1) The Fund shall include other funds approved by the government and given by the government from time to time .
(2) The Fund may receive donations, voluntary contributions , contributions or funds under Corporate Social Responsibility (CSR Fund) or from philanthropist trusts or other entities , whether for any specific purpose or without any specific purpose .
(3) The Funds may also be created from charitable performances , entertainment programs , sports, clubs , exhibitions , competitions etc. Such funds shall be deposited directly into the bank account of Fund.
(4) The amount of fine or penalty imposed by the Juvenile Justice Board shall be deposited in this Fund .
(5) The amount contributed by donors to the Fund shall be exempted under Section 80 G of Income Tax as per rules .
(6) Amount generated through any other legal means as may be decided by the Fund Management Committee .
Useof Fund
5.
The Fund shall be used for the following purposes: -
(1) To facilitate the establishment, infrastructure and maintenance of Child care Institutions ( CCIs ) , to provide basic facilities in Child Care Institutions like adequate food , clothing , education , medical care , etc. for children above 6 years of age who are not selected by the adoptive parents and who require special care ;
442
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[भाग 1
(2) To provide facilities for age appropriate entertainment, extra - curricular activities, such as sports, music, dance , drama, clubs etc. for all children in Child Care Institutions, which shall include but shall not be limited to the following : -
( i) To provide the equipments for indoor and outdoor games , yoga , meditation , music and dance, television for recreational facilities , organizing picnic for children etc ;
(ii ) To provide library in child care institutions which is child friendly, in which newspapers, magazines, puzzle books, audio -videos etc. are arranged ;
(3) In exceptional circumstances to provide monthly assistance for education and medical care under sponsorship to children up to 18 years living in family or foster care, who are eligible but not covered under Sponsorship scheme of Govt . of India . This assistance shall be available only for one year, if required it may be extended further on annual basis, only on the recommendation of the concerned District Magistrate .
But the condition is that the child is an orphan or the parent is suffering from a life- threatening illness or the parent is disabled dueto disease or accident and is financially and physically incapable of taking care of the child or the child is suffering from a serious illness or the child whose parents areimprisoned or mother is divorced or abandoned by the family .
(4) To provide care and rehabilitation of such juveniles who have crossed the age of 18 years in institutional care , and whose age is less than 23 years . To bring them in themainstream of society and to provide capital and basic support to enable them to start small business , to provide them care facility and entrepreneurship development trainings;
(5) To provide vocational training/skill development training to such children who have crossed the age of 18 years under भाग 1 ]
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443
sponsorship assistance and to provide necessary expenses for their employment related training;
(6) A lumpsum maintenance amount to the childrenleaving the child care institution at the age of 18 years or to provide toolkit to the professionally trained adolescents so that they can start their self- employment to reintegrate with the mainstream of society;
(7) Palliative care for children suffering from cancer /serious illness including travel/accommodation along with parents ;
(8) Grant of honorarium to specialists and medical professionals including psychiatrist for specialized services on recommendation ofJuvenile Justice Board or Child Welfare Committee through District Probation Officers;
(9) To provide vocational training to Divyang and mentally challenged children living in institutional care above 18 years of age and to arrange necessary expenses till they get employed ;
(10) Sending drug addicted children from economically weaker sections to de- addiction/ rehabilitation centers and bearing medical and other rehabilitation expenses;
(11) To provide education to children in Child Care Institutions according to their ageand intellectual ability, including formal schools, open schools, non-formal education and special education ;
(12) To provide higher education or diploma training to the children in Child Care Institutions with a view to ensure suitable placement at the end of the course;
(13) To provide funds for the decoration of child friendly spaces in Police Stations , Juvenile Justice Boards , Children Courts , Child Welfare Committees and provide daily userequirement for children therein;
(14) To provide legal aid and to bear the travel expenses of the children for inquiry/ trial and repatriation , including the expenses of travel , food, stay etc. for the 444
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[भाग 1
security/ escorts ;
(15) Capacity building of parents and caregivers to understand the needs of children;
(16) Awareness generation programs related to children .
(17) Providing emergency assistance to disaster affected children;
( 18) Assistance for medical and other purposes to children of families who are victims of wildlife - human conflict;
(19) Organizing different types of programs to build capacities, in all the institutions operated under the Act- Children Home , Specialized Adoption Agency, Open Shelter, Observation Home, Special Home , Place of Safety as well as other facilities like Counseling Center, Drug De - addiction Center, Women Homes etc ;
(20) Providing grant- in - aid to non- governmental organizations or trusts which are registered under Act and working for the welfare and rehabilitation of children;
( 21) To provide monetary assistance for keeping these children in non - institutional services like foster care;
(22) To meet the need of immediate care and protection of victims of POCSO / sexual crimes, for emergency medical care/medical reimbursement , to provide the amount as per rules/ordered by the Child Welfare Committee , to provide financial assistance for vocational training , skill development training and rehabilitation to victims of POCSO/ sexual crimes above the age of 14 years . The condition for this assistance is that such children are not getting similar benefits under the Scheme for Care & Support to Victims under Section 4 & 6 of the POCSO Act, 2012;
(23) Any activity approved by the Juvenile Justice Board/ Child Welfare Committee and the incidental expenses therein ;
(24) Any other program or activity to support the overall growth , development and welfare of children covered by the Act and Model Rules in the best interest of children;
भाग 1 ]
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Criteria
for6 .
assistance
The grant- in - aid shall be recommended by the Director, Women Welfare subject to the following conditions : -
(1) Recommendation report of the District Probation Officer, based on the orders of the Juvenile Justice Board or the Child WelfareCommittee .
(2) Transport charges for escort in case of government servants shall be given as per Uttarakhand Govt . Traveling Allowance. In case the escort is not a government employee, the government shall pay traveling allowance, food and lodging allowance equal to class three employees or the actual expenditure , whichever is less , to the child and the escort .
(3) Payment of honorarium to translators or interpreters shall be made on the basis of recommendation of Juvenile Justice Board or Child Welfare Committee . The bills shall be approved by the District Probation Officer.
(4) Children suffering from various circumstances as provided in rule 5 above , shall be provided financial assistance of minimum Rs 5,000/- and maximum 25,000/ - or actual expenditure, whichever is less .
(5) In addition to the arrangement mentioned in sub rule (4) above , for such adolescents who have completed 18 years of age under institutional care and whose age is less than 23 years , to bring them in the mainstream of society and to be provide vocational training /skill development and higher education or diploma training to start small businesses , for their medical care or for any other purpose, in case the amount of actual expenditure exceeds the maximum limit or require more funds , then the exceeded amount shall be determined/ recommended by the Fund Management Committee for the particular proposal .
(6) Funds for capacity building and awareness generation shall be utilized through Directorate of Women Welfare and District Probation Officers .
446
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[भाग 1
Maintenance operation of Fund and7 .
(1 ) The maintenance and operation of the Fund shall be done through the State Child Protection Society run by the Uttarakhand Women Welfare Directorate .
(2) Saving Bank account shall be maintained by the Director Women Welfare, Uttarakhand in any nationalized bank with the name of Uttarakhand Juvenile Justice Fund .
(3 ) Amount received through any kind of contribution shall be deposited in the savings bank account of the Fund.
(4) Bank account shall be operated jointly by the Director, Women Welfare and the ChiefProbation Officer .
(5) The State Child Protection Society with the approval of the State Government shall adopt financial rules to regulate the use of theFund.
(6) All the amount payable to beneficiary or authority/ entity from the fund shall be transferred online to the bank account of the concerned .
(7) Information of every financial transaction in this bank account shall be presented by the State Child Protection Society before the Fund Management Committee with details .
(8) The fund accounts shall be maintained as per the prescribed rules of the State Government .
(9 ) The Directorate of Women Welfare shall be the custodian of the records related to the Fund .
Disqualification 8 .
(1) No additional financial assistance from the Fund shall be given to the beneficiary until the beneficiary has utilized the earlier amount for the purpose for which the assistance was provided .
(2) If a beneficiary discontinues educational or vocational or any training or any other activity, for which the amount has been provided, no assistance shall be extended further, unless there is a case of physical disability due to accident or medical reasons .
भाग 1 ]
447 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
Audit
9.
All accounts of the Fund shall be audited every financial year by the Accountant General , Uttarakhand .
Fund Management10 . Committee [ FMC ]
A Fund Management Committee shall be constituted by the State Government for the management of the Fund . This Fund Management Committee shall have the following structure-
1. Principal Secretary/ Secretary, Women Empowerment and Child Development- Chairperson
2. Director/Additional Secretary Women Welfare- Member Secretary
Finance Controller Women Welfare- 3. Member
4. Chief Probation Officer Women Welfare-Member
5. Accounts Officer/Accountant / Senior Administrative Officer, Directorate of WomenWelfare - Member
Functions Fund Management Committee
of11. ( 1) The proposals received from various levels shall be disposed of by the Fund Management Committee within a period of one month or within time limit set forth in any Actor rules.
(2) To manage and oversee the implementation of the fund allocated .
(3) To consider and verify funding .
(4) Compilation , updation and submission of the progress reports on quarterly basis to the State Government .
(5) To issue relevant directions and guidance for efficient operation and proper utilization of the Fund .
448
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[भाग 1 Others 12. ( 1) Acceptance and post- facto approval on all the proposals shall be taken in the meeting of the Fund Management Committee .
(2) The above mentioned rules may be amended as per the requirement with the approval of the State Government .
(3) The decision of allocation of amount for the establishment or support to Government or Non Government Organization run Child Care Institutions shall be taken by the Fund Management Committee considering the amount of total fund collected.
(4) Any dispute regarding Fund at district or lower level shall be referred to the concerned District Magistrate and in case it is not resolved , the matter shall be referred to the Chief Secretary, Govt . of Uttarakhand , whose decision shall be final and binding on all the parties .
By Order,
CHANDRESH KUMAR , Secretary.
सचिवालय प्रशासन (अधि०) अनुभाग -1
प्रोन्नति/ विज्ञाप्ति
02जून, 2025 ई0
संख्या-726 / XXXI ( 1 ) /2025/पदो0-01 / 2024 - उत्तराखण्ड सचिवालय संवर्ग के अन्तर्गत समीक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत सुश्री अलका भारती , को नियमित चयनोपरान्त अनुभाग अधिकारी , वेतनमान-₹ 56,100-177,500 (वेतन लेवल-10) के रिक्त पद पर कार्यभार ग्रहण किये जाने की तिथि से अस्थाई रूप से पदोन्नत किये जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं ।
2- जाता है । उक्त पदोन्नति के फलस्वरूप सुश्री अलका भारती, अनुभाग अधिकारी को 01 वर्ष की विहित परिवीक्षा पर रखा
3- उक्त प्रोन्नति मा ० उच्च न्यायालय , नैनीताल में योजित रिट याचिका संख्या 394 (एस ० बी०) / 2021 ललित मोहन आर्य व अन्य बनाम उत्तराखण्ड राज्य व अन्य में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी ।
4- उक्त पदोन्नति के फलस्वरूप सुश्री अलका भारती , अनुभाग अधिकारी को माध्यमिक शिक्षा अनुभाग -05 में तैनात किया जाता है ।
5- सुश्री अलका भारती , अनुभाग अधिकारी को निर्देशित किया जाता है कि वे तत्काल पदोन्नति के पद तथा तैनाती के अनुभाग में कार्यभार ग्रहण करते हुए सचिवालय प्रशासन (अधि०) अनुभाग -01 को अवगत कराना सुनिश्चित करें ।
आज्ञा से , दीपेन्द्र कुमार चौधरी , सचिव ।
भाग 1 ]
449 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
पंचायतीराज अनुभाग -01
अधिसूचना
09 जून, 2025 ई०
संख्या-815 / XII ( 1 )/ 86 ( 11 ) 2008 / 2025 - राज्यपाल , उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016
(समय- समय पर यथासंशोधित) की धारा 10 - क , धारा 11 , धारा 55 - क, धारा 56 , धारा 92 - क एवं धारा 93 सपठित धारा 126 के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा इस विषय पर विद्यमान समस्त नियमों और आदेशों का अधिक्रमण करते हुए , निम्नलिखित नियमावली बनाते है, अर्थात्: -
उत्तराखण्ड ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 2025
संक्षिप्त नाम और
1 .
प्रारम्भ
(1) इस नियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली , 2025 है ।
(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगी ।
परिभाषाएं
2. (1 ) जब तक कि प्रसंग या सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस नियमावली में:-
(क) " अधिनियम" से उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016अभिप्रेत है ;
(ख) किसी खण्ड के संबंध में " संघटक ग्राम पंचायत " का अर्थ उस ग्राम पंचायत से है जो उस खण्ड के भीतर क्षेत्राधिकार का प्रयोग करती हो;
(ग) "खण्ड" का वही अर्थ है जो उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 में उनके लिये समनुदेशित है;
(घ) "प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र " से-
(एक) किसी ग्राम पंचायत के सन्दर्भ में, अधिनियम की धारा 130 की उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र अभिप्रेत है ,
(दो) किसी क्षेत्र पंचायत के सन्दर्भ में , अधिनियम की धारा 50 की उपधारा (3) के खण्ड (क) तथा 450
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
धारा 130 की उपधारा ( 1 ) में निर्दिष्ट प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र अभिप्रेत है, और
(तीन) किसी जिला पंचायत के सन्दर्भ में , अधिनियम की धारा 86 की उपधारा (2) के खण्ड (ख) तथा धारा 130 की उपधारा (1 ) में निर्दिष्ट प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र अभिप्रेत है;
(2) उन शब्दों और पदों के, जो इस नियमावली में प्रयुक्त हैं, और परिभाषित नहीं हैं, किन्तु उत्तराखण्ड पंचायतीराज अधिनियम , 2016 में परिभाषित है के क्रमशः वही अर्थ होंगे जो अधिनियम में उनके लिए निर्दिष्ट हैं ।
3.
आरक्षित किये जाने वाले स्थानों और पदों की संख्या
अधिनियम की धारा 10 - क या धारा 11 या धारा 55- (क) या धारा 56 या धारा 92-(क) या धारा 93 के उपबन्धों के अनुसार अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों, या पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों या पदों की संख्या की संगणना करने में यदि शेष भाजक के आधे से कम न हो तो भागफल में एक बढ़ा दिया जाएगा और यदि शेष भाजक के आधे से कम हो तो इसे छोड़ दिया जाएगा और इस प्रकार प्राप्त संख्या, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित किए जाने वाले स्थानों या पदों की संख्या होगीः
परन्तु यह कि अनुसूचित जातियों , अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों का कुल आरक्षण कुल स्थानों एवं पदों की संख्या के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
4.
चक्रानुक्रम स्थानों का आवंटन द्वारा
(1 ) अन्य उपनियमों के उपबन्धों के अधीन रहते हुए किसी ग्राम पंचायत या किसी क्षेत्र पंचायत या किसी जिला पंचायत में आरक्षित स्थान , यथास्थिति उस ग्राम पंचायत या क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत में भिन्न- भिन्न प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों को निम्नलिखित क्रम में आवंटित किए जायेंगे-
(क) अनुसूचित जनजातियों की महिलायें ,
(ख) अनुसूचित जनजातियाँ,
(ग) अनुसूचित जातियों की महिलायें,
(घ) अनुसूचित जातियाँ ,
(ङ) पिछड़े वर्गों की महिलायें,
(च) पिछड़े वर्ग , और
(छ) महिलायें ।
भाग 1 ]
451 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(2) यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की या अनुसूचित जातियों की या पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के आधार पर केवल एक स्थान यथास्थिति , अनुसूचित जनजातियों के लिए या अनुसूचित जातियों के लिए या पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित किया जा सकता है , तो ऐसा स्थान , यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों की या अनुसूचित जातियों की या पिछड़े वर्गों की महिला के लिए होगा ।
(3) यदि किसी पंचायत क्षेत्र में जनसंख्या के आधार पर कोई स्थान अनुसूचित जनजातियों के लिए या अनुसूचित जातियों के लिए या पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता है तो उपनियम (1 ) में उल्लिखित क्रम का इस प्रकार अनुसरण किया जाएगा मानो इसमें, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों का या अनुसूचित जातियों का या पिछड़े वर्गों का कोई निर्देश न था ।
(4) नियम 3 में यथा उपबन्धित स्थानों की संख्या भिन्न-भिन्न प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या के अवरोही क्रम के आधार पर आवंटित की जाएगी , अर्थात् किसी ग्राम पंचायत के या किसी क्षेत्र पंचायत के या किसी जिला पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र उनको आवंटित किया जाएगा, और अनुसूचित जातियों की सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र उनको आवंटित किया जाएगा और पिछड़े वर्गों की सर्वाधिक जनसंख्या वाला प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र उनको आवंटित किया जाएगा और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जाएगा किन्तु इस प्रकार कि जहां तक हो सके, वह प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित था, वह अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं किया जाएगा और जो प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जातियों को आवंटित था वह अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं किया जाएगा और जो प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र पिछड़े वर्गों को आवंटित था, वह पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं किया जायेगाः
परन्तु यह कि यदि किसी निर्वाचन में अनुसूचित जनजातियों की या अनुसूचित जातियों की या पिछड़े वर्गों की जनसंख्या, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रवार अभिनिश्चित नहीं की जा सकती है , तो प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में, यथास्थिति अनुसूचित जनजातियों के या अनुसूचित 452
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
जातियों के या पिछड़े वर्गों के परिवारों को संख्या के आधार पर अवरोही क्रम अवधारित किया जा सकता है ।
(5) उपनियम (4) के अधीन अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों को आवंटित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के आधे से अन्यून प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों की महिलाओं को आवंटित किए जायेंगे ।
(6) उपनियम (5) के अधीन आरक्षित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए कुल संख्या के आधे से अन्यून प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र महिलाओं को आवंटित किए जायेंगे , किन्तु इस प्रकार कि जिन प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक जनसंख्या है , जिसमें अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है , वे उनको आवंटित किए जाएंगे और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जाएगा, किन्तु यथाशक्य , पूर्ववर्ती निर्वाचनों में महिलाओं को आवंटित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र महिलाओं को आवंटित नहीं किए जायेंगे ।
5.
चक्रानुक्रम द्वारा पदों का आवंटन
(1 ) अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिए नियम 3 में यथा संगणित प्रधानों के पदों की संख्या, संघटक ग्राम पंचायतों को आवंटित किये जाने के लिए खण्डवार निम्नलिखित रीति से वितरित की जायेगी-
(क) खण्ड में अनुसूचित जनजातियों के लिये प्रधानों के पदों की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में उनकी जनसंख्या के अधिकतम अनुपात के अधीन रहते हुए , खण्ड में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी जो खण्ड में कुल जनसंख्या के अनुपात में खण्ड में उनकी जनसंख्या होः
परन्तु यह कि नियम 3 में यथा संगणित प्रधानों के पदों की अवितरित संख्या की दशा में , खण्ड की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में , केवल उन्हीं खण्डों में उन्हें पुनः वितरित किया जायेगा जहां खण्ड में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
(ख) खण्ड में अनुसूचित जातियों के लिये प्रधानों के पदों भाग 1 ]
453 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में उनकी जनसंख्या के अधिकतम अनुपात के अधीन रहते हुए , खण्ड में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी जो खण्ड में कुल जनसंख्या के अनुपात में खण्ड में उनकी जनसंख्या होः
परन्तु यह कि नियम 3 में यथा संगणित प्रधानों के पदों की अवितरित संख्या की दशा में खण्ड की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में , केवल उन्हीं खण्डों में उन्हें पुनः वितरित किया जायेगा जहां खण्ड की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
(ग) खण्ड में पिछडे वर्गों के लिये प्रधानों के पदों की संख्या, खण्ड में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी जो खण्ड में कुल जनसंख्या के अनुपात में खण्ड में उनकी जनसंख्या होः
परन्तु यह कि किसी खण्ड में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं पिछड़े वर्गों का कुल आरक्षण प्रधानों के पदों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा :
परन्तु यह और कि नियम 3 में यथा संगणित प्रधानों के पदों की अवितरित संख्या की दशा में , खण्ड की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में, केवल उन्हीं खण्डों में पुनः वितरित किया जायेगा जहां खण्ड की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
(2) उपनियम ( 1 ) के अधीन यथा अवधारित अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिए प्रधानों के पदों की संख्या उस खण्ड में भिन्न -भिन्न ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के आधार पर अवरोही क्रम में आवंटित की जायेगी अर्थात् उस खण्ड की ग्राम पंचायतों में से वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित 454
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी और वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी और वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या की अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जायेगा किन्तु इस प्रकार कि जहां तक हो सके पूर्ववर्ती निर्वाचनों में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित ग्राम पंचायत अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेंगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित ग्राम पंचायत अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित ग्राम पंचायत पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगीः
परन्तु यह कि अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों की किसी पंचायत क्षेत्र में जनसंख्या दस से कम हो तो ऐसे पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत के प्रधान का पद यथास्थिति अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों या पिछडे वर्गों को आवंटित नहीं किया जाएगा ।
(3) उपनियम (2 ) के अधीन अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों को आवंटित ग्राम पंचायतों की आधे से अन्यून ग्राम पंचायतें, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों की महिलाओं को आवंटित की जायेगी ।
(4) उपनियम (3) के अधीन महिलाओं के लिये आरक्षित प्रधानों के पदों की संख्या को सम्मिलित करते हुए खण्ड में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के आधे से अन्यून प्रधानों के पदों को महिलाओं को आवंटित किया जायेगा किन्तु इस प्रकार कि उन्हें आवंटित जिन ग्राम पंचायतों के प्रादेशिक क्षेत्रों में सबसे अधिक जनसंख्या है , जिसमें अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है . वे उनको आवंटित किये जायेंगे और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जायेगा, किन्तु इस प्रकार कि पूर्ववर्ती निर्वाचनों में महिलाओं को आवंटित ग्राम पंचायतें महिलाओं को आवंटित नहीं की जायेगी ।
(5) नियम 4 के उपनियम (1 ), (2) और ( 3 ) के उपबन्ध इस भाग 1 ]
455 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
नियम के अधीन प्रधानों के पदों के आवंटन पर यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे ।
6.
प्रमुखों के पदों का आवंटन
(1 ) अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिए नियम 3 में यथा संगणित प्रमुखों के पदों की संख्या संघटक क्षेत्र पंचायतों को आवंटित किए जाने के लिए जिलेवार निम्नलिखित रीति से वितरित की जाएगी-
(क) जिले में अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रमुखों के पदों की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अधीन रहते हुए, जिले में प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी , जो जिला पंचायत में उनकी जनसंख्या का जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में अनुपात होः
परन्तु यह कि नियम 3 में यथा संगणित प्रमुखों के पदों की अवितरित संख्या की दशा में, जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में , केवल उन्हीं जिला पंचायतों में पुनः वितरित किया जाएगा , जहाँ जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
(ख) जिले में अनुसूचित जातियों के लिए प्रमुखों के पदों की संख्या, राज्य की कुल जनसंख्या में राज्य में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अधीन रहते हुए , जिले में प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी, जो जिला पंचायत में उनकी जनसंख्या का जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में अनुपात होः
परन्तु यह कि नियम 3 में यथा संगणित प्रमुखों के पदों की अवितरित संख्या की दशा में , जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में , केवल उन्हीं जिला पंचायतों में पुनः वितरित किया जाएगा , जहाँ जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
456
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(ग) जिले में पिछड़े वर्गों के लिए प्रमुखों के पदों की संख्या, जिले में प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के यथाशक्य उसी अनुपात में होगी, जो जिला पंचायत में उनकी जनसंख्या का जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में अनुपात होः
परन्तु यह कि जिले में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं पिछड़े वर्गों का कुल आरक्षण प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगाः
परन्तु यह और कि नियम 3 में यथा संगणित प्रमुखों के पदों को अवितरित संख्या की दशा में, जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में , केवल उन्हीं जिला पंचायतों में पुनः वितरित किया जाएगा, जहाँ जिला पंचायत की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या का अनुपात राज्य की कुल जनसंख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात से अधिक हो ।
(2) उपनियम (1 ) के अधीन यथा अवधारित अनुसूचित
जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिए प्रमुखों के पदों की संख्या उस जिले में भिन्न-भिन्न क्षेत्र पंचायतों को पंचायत क्षेत्र में उनकी जनसंख्या का पंचायत क्षेत्र की कुल जनसंख्या में अनुपात के आधार पर अवरोही क्रम में आवंटित की जाएगी , अर्थात् उस जिले की क्षेत्र पंचायतों में से वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी और वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जाएगी , और वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो उनको आवंटित की जाएगी , और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जायेगा, किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित क्षेत्र पंचायत अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित क्षेत्र पंचायत अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित क्षेत्र पंचायत पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी ।
(3) उपनियम (2) के अधीन अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित भाग 1 ]
457 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
जातियों या पिछड़े वर्गों को आवंटित पंचायतों की आधे से अन्यून क्षेत्र पंचायतें यथास्थिति अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों की महिलाओं को आवंटित की जायेगी ।
(4) उपनियम (3 ) के अधीन महिलाओं के लिए आरक्षित प्रमुखों
के पदों की संख्या को सम्मिलित करते हुए जिले में प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के आधे से अन्यून प्रमुखों के पदों को महिलाओं को आवंटित किया जायेगा किन्तु इस प्रकार कि उन्हें आवंटित जिन क्षेत्र पंचायतों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक जनसंख्या है , जिसमें अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है , ये उन्हें आवंटित किए जाएंगे और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटित उपर्युक्त रीति से किया जाएगा किन्तु, यथाशक्य, पूर्ववर्ती निर्वाचनों में महिलाओं को आवंटित क्षेत्र पंचायत महिलाओं को आवंटित नहीं किए जायेंगे ।
(5) नियम 3 में यथा उपबन्धित अनुसूचित जनजातियों,
अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिए अध्यक्षों की संख्या राज्य में भिन्न- भिन्न जिला पंचायतों को पंचायत क्षेत्र में उनकी जनसंख्या का पंचायत क्षेत्र की कुल जनसंख्या में अनुपात के आधार पर अवरोही क्रम में आवंटित की जाएगी अर्थात् राज्य में जिला पंचायतों में से वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी और वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जाएगी , और वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो , उनको आवंटित की जायेगी , और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटित उपर्युक्त रीति से किया जायेगा, किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों में अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायत अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायत अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायत पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी ।
(6) उपनियम (5) के अधीन अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला 458
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
पंचायतों की आधे से अन्यून जिला पंचायतें यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों की महिलाओं को आवंटित की जाएगी ।
(7) उपनियम (6) के अधीन महिलाओं के लिए आरक्षित जिला पंचायतों की संख्या को सम्मिलित करते हुए जिला पंचायतों की कुल संख्या के आधे से अन्यून जिला पंचायतों को महिलाओं को आवंटित किया जायेगा , किन्तु इस प्रकार कि उन्हें आवंटित जिन जिला पंचायतों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक जनसंख्या है , जिसमें अनुसूचित जनजातियों , अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है , वे उनको आवंटित किये जायेंगे और पश्चात्वर्ती निर्वाचन में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जाएगा, किन्तु जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों में महिलाओं को आवंटित जिला पंचायतें महिलाओं को आवंटित नहीं किए जायेंगे ।
(8) अध्यक्षों के पद निम्नलिखित क्रम में आवंटित किए जायेंगेः
(क) अनुसूचित जनजातियों की महिलायें;
(ख) अनुसूचित जनजातियाँ,
(ग) अनुसूचित जातियों की महिलायें;
(घ) अनुसूचित जातियाँ ;
(ङ) पिछड़े वर्गों की महिलायें;
(च) पिछड़े वर्ग;
(छ) महिलायें ।
(9) उपनियम (8 ) के उपबन्ध इस नियम के अधीन प्रमुखों के पदों के आवंटन पर यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे ।
(10) नियम 4 के उपनियम (2) के उपबन्ध नियम 6 के अधीन पदों के आवंटन पर यथावश्यक परिवर्तनों सहित लागू होंगे ।
आज्ञा से , चन्द्रेश कुमार , सचिव ।
भाग 1 ]
459 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
In pursuance of the provision of clause ( 3 ) of Article 348 of ' the Constitution of India' , the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No.815 /XII ( 1 )/2025/ 86 ( 11 ) 2008 , Dated June 09 , 2025 for general information :
NOTIFICATION
June09, 2025
No.815 /XII ( 1 ) /2025 / 86 ( 11 ) 2008--In exercise of the powers conferred by Section 10 - A , Section 11 , Section 55 - A , Section 56 , Section 92 - A and Section 93 read with Section 126 of the Uttarakhand Panchayati Raj Act , 2016 ( as amended from time to time) , and in supersession of all existing rules and orders on this subject , the Governor is pleased to make the following rules , namely : -
The Uttarakhand Gram Panchayat , Kshettra Panchayat and Zila Panchayat (Reservation and Allotment of Seats and Offices ) Rules , 2025
1.
Commencement Short title and
(1 ) These rules may be called the Uttarakhand Gram Panchayat , Kshettra Panchayat and Zila Panchayat (Reservation and Allotment of Seats and Offices ) Rules , 2025
(2) It shall come into force at once .
Definitions
2. (1 ) In these rules , unless there is anything repugnant in the subject or context-
(a) "Act " means the Uttarakhand Panchayati Raj Act , 2016;
(b) " Constituent Gram Panchayat " with reference to a Khand means a Gram Panchayat exercising jurisdiction within the Khand;
(c) "Khand " shall have the meanings assigned to them in the Uttarakhand Panchayati Raj Act , 2016 ;
460
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(d) " territorial constituency " in relation to-
(i) a Gram Panchayat means the territorial constituency referred to sub - section ( 1 ) of section 130 of the Act ,
(ii) a Kshettra Panchayat means the territorial constituency referred to in clause ( a) of sub- section (3 ) of section 50 and sub - section ( 1 ) of section 130 of the Act , and
(iii) a Zila Panchayat means the territorial constituency referred to in clause (b) of sub- section (2 ) of section 86 and sub - section ( 1 ) ofSection 130 of the Act .
(2) The words and expression used in these rules and not defined , but defined in the Uttarakhand Panchayati Raj Act , 2016 shall have the same meaning as assigned to them in the said Act .
Number of seats and offices to be reserved
3. In computing the number of seats or offices to be reserved for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes in accordance with the provisions of Section 10 - A, or Section 11 , or Section 55- A, or Section 56 , or Section 92 - A, or Section 93 of the Act , if the remainder is not less than half of the divisor , the quotient shall be increased by one , and if the remainder is less than half of the divisor , it shall be ignored, and the number so arrived at shall be the number of seats or offices to be reserved for the Scheduled Tribes or the Scheduled Castes or the Backward Classes , as the casemay be :
Provided that the total reservation for the Scheduled Castes , the Scheduled Tribes and the Backward Classes shall not exceed 50 percent of the total number of seats and offices .
भाग 1 ] :
461 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
Allotment of
4.
seats
by
rotation-
(1 ) Subject to the provisions of the other sub - rules , the seats reserved in the Gram Panchayat or a Kshettra Panchayat or a Zila Panchayat shall be allotted to different territorial constituencies in that Gram Panchayat or Kshettra Panchayat or Zila Panchayat as the case may be , in the following order :
(a) women belonging to the Scheduled Tribes ;
(b) the Scheduled Tribes ;
(c) women belonging to the Scheduled Castes ;
(d) the Scheduled Castes ;
(e) women belonging to the Backward Classes;
(f) the Backward Classes ; and
(g) women .
(2) If on the basis of population of the Scheduled Tribes or of the Scheduled Castes or of the Backward Classes in a Panchayat area, only one seat can be reserved for the Scheduled Tribes ог for the Scheduled Castes or for the Backward Classes , as the case may be , such seat shall go to a woman belonging to the Scheduled Tribes or to the Scheduled Castes or to the Backward Classes , as the case may be .
(3 ) If on the basis of population in a Panchayat area , a seat cannot be reserved for the Scheduled Tribes or for the Scheduled Castes or for the Backward Classes , the order mentioned in sub - rule ( 1 ) shall be so adhered to as if there was no reference in it to the Scheduled Tribes or to the Scheduled Castes or to the Backward Classes , as the case may be .
(4) The number of seats as provided in rule 3 shall be allotted to different territorial constituencies on the basis of population in the descending order , namely, from amongst the territorial constituencies in a Gram 462
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
Panchayat or in a Kshettra Panchayat or in a Zila Panchayat , the territorial constituency having the largest population of the Scheduled Tribes shall be allotted to them , the territorial constituency having the largest population of the Scheduled Castes shall be allotted to them and the territorial constituency having the largest population of the Backward Classes shall be allotted to them , and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner so however that , as far as may be , the territorial constituency allotted in the previous elections to the Scheduled Tribes shall not be allotted to the Scheduled Tribes , and the territorial constituency allotted to the Scheduled Castes shall not be allotted to the Scheduled Castes and territorial constituency allotted to the Backward Classes shall not be allotted to the Backward Classes :
Provided that if in any election , the population of the Scheduled Tribes or of the Scheduled Castes or of the Backward Classes , cannot be ascertained territorial constituency - wise , the descending order may be determined on the basis of number of families , in the territorial constituencies of the Scheduled Tribes or of the Scheduled Castes or of the Backward Classes , as the case may be .
(5) Not less than half of the territorial constituencies allotted to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes under sub - rule (4) shall be allotted to the women belonging to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes as the case may be .
(6) Not less than half of the total number of territorial constituencies including the number of territorial constituencies reserved for women under sub - rule (5) shall be allotted to women , so however , that , the territorial constituencies having the largest population excluding the population of the Scheduled भाग 1 ]
463 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes , shall be allotted to them and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner so however that , as far as may be , the territorial constituencies allotted to women in the previous elections shall not be allotted to women .
by
Allotment of offices rotation-
5. ( 1 ) The number of offices of Pradhans as computed in rule 3 for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes shall be distributed Khand- wise for being allotted to the constituent Gram Panchayats in the following manner :
(a) The number of offices of Pradhans for the Scheduled Tribes in the Khand shall bear , as nearly as may be , the same proportion to the number of offices of Pradhans in the Khand as their population in the Khand bears to their total population of the Khand , subject to the ratio of their population in the State to the total population of the State :
Provided that in the case of undistributed numbers of offices of Pradhans as computed in rule 3 shall be redistributed amongst only those Khands , where the proportion of their population in the total population of the Khand exceeds the proportion of their population in the total population of the State , in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Khand .
(b) The number of offices of Pradhans for the Scheduled Castes in the Khand shall bear , as nearly as may be , the same proportion to the total number of offices of Pradhans in the Khand as their population in the Khand bears to the total population of the Khand , subject to the ratio of their population in the State to the total population of the State :
Provided that in the case of undistributed 464
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
numbers of offices of Pradhans as computed in rule 3 shall be redistributed amongst only those Khands , where the proportion of their population in the total population of the Khand exceeds the proportion of their population in the total population of the State , in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Khand .
(c) The number of offices of Pradhans for the Backward Classes in the Khand shall bear, as nearly as may be , the same proportion to the total number of offices of Pradhans in the Khand as their population in the Khand bears to the total population of the Khand:
Provided that the total reservation for the Scheduled Castes , the Scheduled Tribes and the Backward Classes shall not exceed 50 percent of the total number of offices of Pradhans in the Khand .
Provided further that in the case of undistributed numbers of offices of Pradhans as computed in rule 3 shall be redistributed amongst only those Khands , where the proportion of their population in the total population of the Khand exceeds the proportion of their population in the total population of the State , in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Khand .
(2) The number of offices of Pradhans for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes , as determined in sub - rule ( 1 ) shall be allotted to different Gram Panchayats in the Khand on the basis of the ratio of their population in the Panchayat area to the total population of the Panchayat area in the descending order , namely , from amongst the Gram Panchayats in the Khand , the Gram Panchayat in whose territorial area the ratio of population of the Scheduled Tribes is highest shall be allotted to them , and the Gram Panchayat in whose territorial area the भाग 1 ]
465 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
ratio of population of the Scheduled Castes is highest shall be allotted to them and the Gram Panchayat in whose territorial area the ratio of population of the Backward Classes is highest shall be allotted to them and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner , so , however , that, as far as may be, the Gram Panchayat allotted in the previous elections to the Scheduled Tribes shall not be allotted to the Scheduled Tribes and the Gram Panchayat allotted in the previous elections to the Scheduled Castes shall not be allotted to the Scheduled Castes and the Gram Panchayat allotted in the previous elections to the Backward Classes shall not be allotted to the Backward Classes :
Provided that if the population of the Scheduled Tribes or the Scheduled Castes or the Backward Classes in the Panchayat area is less than ten , the office of Pradhan of the Gram Panchayat for such Panchayat area shall not be allotted to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes , as the case may be .
(3) Not less than half of the Gram Panchayats allotted to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes under sub- rule (2 ) shall be allotted to the women belonging to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes , as the casemay be .
(4) Not less than half of the total number of the offices of Pradhans in the Khand including the number of offices of Pradhans reserved for women under sub- rule (3 ) shall be allotted to women so , however , that the territorial areas of the Gram Panchayats allotted to them have the largest population , excluding the population of the Scheduled Tribes , Scheduled Castes and the Backward Classes shall be allotted to them and in the subsequent election , the allotment shall be made in the aforesaid manner so however that , as far as may be , the Gram Panchayats allotted to women in the previous elections shall not be allotted to women .
466
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(5) The provisions of sub - rules ( 1 ), (2) and (3) of rule 4 shall mutatis matandis apply to allotment of offices of Pradhans under this rule .
6.
Pramukhs of Offices Allotment of
( 1) The number of offices of Pramukhs as computed in rule 3 for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes shall be distributed district- wise for being allotted to the constituent Kshettra Panchayats in the following manner :
(a) The number of offices of Pramukhs for the Scheduled Tribes in the district shall bear , as nearly as may be , the same proportion to the total number of offices of Pramukhs in the district as their population in the Zila Panchayat bears to the total population of the Zila Panchayat , subject to the ratio of their population in the State to the total population of the State:
Provided that in the case of undistributed numbers of offices of Pramukhs as computed in rule 3 shall be redistributed amongst only those Zila Panchayats , where the proportion of their population in the total population of the Zila Panchayats exceeds the proportion of their population in the total population of the State in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Zila Panchayat.
(b) The number of offices of Pramukhs for the Scheduled Castes in the district shall bear , as nearly as may be , the same proportion to the total number of offices of Pramukhs in the district as their population in the Zila Panchayat bears to the total population of the Zila Panchayat , subject to the maximum of the ratio of their population in the State to the total population of the State:
Provided that in the case of undistributed numbers of offices of Pramukhs as computed in भाग 1 ]
467 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
rule 3 shall be redistributed amongst only those Zila Panchayats , where the proportion of their population in the total population of the Zila Panchayats exceeds the proportion of their population in the total population of the State , in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Zila Panchayat .
(c) The number of offices of Pramukhs for the Backward Classes in the district shall bear , as nearly as may be , the same proportion to the total number of offices of Pramukhs in the district as their population in the Zila Panchayat bears to the total population of the Zila Panchayat :
Provided that the total reservation for the Scheduled Castes , the Scheduled Tribes and the Backward Classes shall not exceed 50 percent of the total number of offices of Pramukhs in the district:
Provided further that in the case of undistributed numbers of offices of Pramukhs as computed in rule 3 shall be redistributed amongst only those Zila Panchayats , where the proportion of their population in the total population of the Zila Panchayat exceeds the proportion of their population in the total population of the State , in the descending order of the ratio of their population in the total population of the Zila Panchayat .
(2) The number of offices of Pramukhs for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes , as determined in sub - rule ( 1 ) shall be allotted to different Kshettra Panchayats in the district on the basis of the ratio of their population in the Panchayat area to the total population of the Panchayat area in the descending order , namely , from amongst the Kshettra Panchayats in the district , the Kshettra Panchayat in whose territorial area the ratio of population of the Scheduled Tribes is highest shall be 468
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
allotted to them , and the Kshettra Panchayat in whose territorial area the ratio of population of the Scheduled Castes is highest shall be allotted to them and the Kshettra Panchayat in whose territorial area the ratio ofpopulation of the Backward Classes is highest shall be allotted to them and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner , so , however , that , as far as may be , the Kshettra Panchayat allotted in the previous elections to the Scheduled Tribes shall not be allotted to the Scheduled Tribes and the Kshettra Panchayat allotted to the Scheduled Castes shall not be allotted to the Scheduled Castes and the Kshettra Panchayat allotted to the Backward Classes shall not be allotted to the Backward Classes .
(3) Not less than half of the Kshettra Panchayats allotted to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes under sub - rule (2) shall be allotted to the women belonging to the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes or the Backward Classes , as the casemay be.
(4) Not less than half of the total number of the offices of Pramukhs reserved for women in the district under sub - rule (3 ) shall be allotted to women so , however , that the territorial areas of the Kshettra Panchayats allotted to them have the largest population , excluding the population of the Scheduled Tribes , Scheduled Castes and the Backward Classes shall be allotted to them and in the subsequent election, the allotment shall be made in the aforesaid manner so however that , as far as may be , the Kshettra Panchayats allotted to women in the previous elections shall not be allotted to women .
(5) The number of Chairmen for the Scheduled Tribes , the Scheduled Castes and the Backward Classes as provided in rule 3 shall be allotted to different Zila Panchayats in the State on the basis of the ratio of their population in the Panchayat area to the total population of the Panchayat area in the descending order , namely, from amongst the Zila Panchayats in the State , the Zila Panchayat in whose territorial area भाग 1 ]
469 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
the ratio of population of the Scheduled Tribes is highest shall be allotted to them , the Zila Panchayat in whose territorial area the ratio of population of Scheduled Castes is highest shall be allotted to them , and the Zila Panchayat in whose territorial area the ratio of population of the Backward Classes is highest shall be allotted to them , and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner so , however , that , as far as may be , the Zila Panchayat allotted in the previous elections to the Scheduled Tribes shall not be allotted to the Scheduled Tribes , the Zila Panchayat allotted in the previous elections to the Scheduled Castes shall not be allotted to the Scheduled Castes and the Zila Panchayat allotted to the Backward Classes shall not be allotted to Backward Classes .
(6).Not less than half of the Zila Panchayats allotted to the Scheduled Tribes or the Scheduled Castes or the Backward Classes under sub - rule ( 5) shall be allotted to women belonging to the Scheduled Tribes , or the Scheduled Castes or Backward Classes , as the case may be.
(7) Not less than half of the total number of the Zila Panchayats including the number of Zila Panchayats reserved for women under sub - rule (6) shall be allotted to women , so however , that the territorial area of the Zila Panchayat allotted to them have the largest population , excluding the population of the Scheduled Tribes , Scheduled Castes and the Backward Classes and in the subsequent election the allotment shall be made in the aforesaid manner so however , that , as far as may be , that the Zila Panchayats allotted to women in the previous elections shall not be allotted to women .
(8) The offices of Chairmen shall be allotted in the following order :
(a) women belonging to the Scheduled Tribes ;
(b) the Scheduled Tribes ;
(c) women belonging to the Scheduled Castes ;
470
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1
(d) the Scheduled Castes ;
(e) women belonging to the Backward Classes ;
(f) the Backward Classes ;
(g) women .
(9 ) The provisions of sub - rule (8) shall mutatis mutandis apply to allotment of offices of Pramukhs under this rule .
( 10) The provisions of sub - rule (2) of rule 4 shall mutatis mutandis apply to allotment of offices under rule 6 .
ByOrder, CHANDRESH KUMAR , Secretary.
पी० एस ० यू० (आर ०ई ० ) 24 हिन्दी गजट / 254 - भाग 1-2025 ( कम्प्यूटर / रीजियो) । मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।
पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30/ 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की , शनिवार, दिनांक 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
भाग 1 - क
नियम , कार्य-विधियां , आज्ञाएं, विज्ञप्तियां इत्यादि जिनको उत्तराखण्ड के राज्यपाल महोदय , विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया
HIGH COURT OF UTTARAKHAND , NAINITAL
NOTIFICATION
February 20, 2025
No. 21 /XIV- a /33 /Admin.A/ 2013 --Ms . Nazish Kaleem , 3rd Additional Civil Judge (Sr. Div. ) , Rudrapur District Udham Singh Nagar is hereby sanctioned child care leave for 09 days w.e.f. 02.01.2025 to 10.01.2025 with permission to prefix 25.12.2024 to 01.01.2025 as Christmas & New Year's holidays and suffix 11.01.2025 to 12.01.2025 second Saturday and Sunday holidays respectively.
NOTIFICATION
February 20, 2025
No. 22 / XIV - a - 44 / Admin.A/ 2015 --Ms . Anamika Singh , 5th Additional Civil Judge ( Sr. Div. ) , Dehradun is hereby sanctioned earned leave for 24 days w.e.f. 20.11.2024 to 13.12.2024 with permission suffix 14.12.2024 & 15.12.2024 as second Saturday and Sunday holidays respectively.
By Order of Hon'ble the Administrative Judge,
Sd/-
Registrar ( Inspection) .
195-ख 196
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
NOTIFICATION
March 11 , 2025
No. 48 /XIV / a - 28 / Admin.A/ 2022 -- Shri Ishank ; 3rd Additional Civil Judge ( Jr. Div. ) , Dehradun is hereby sanctioned medical leave for 03 days w.e.f. 06.01.2025 to 08.01.2025 .
By Order of Hon'ble the Vacation Judge ,
Sd/-
Registrar ( Inspection) .
NOTIFICATION
March 11 , 2025
No. 49/XIV- a/53 /Admin.A/ 2012--Shri Neeraj Kumar, Civil Judge (Sr. Div . ) , Bageshwar is hereby sanctioned medical leave for 09 days w.e.f. 30.09.2024 to 08.10.2024 .
NOTIFICATION
March 11 , 2025
No. 50/ XIV- a - 31/Admin.A/2020 --Ms . Suman Bhandari , Civil Judge ( Jr. Div . ) , Bazpur District Udham Singh Nagar is hereby sanctioned earned leave for 26 days w.e.f. 18.11.2024 to 13.12.2024 with permission to prefix 17.11.2024 as Sunday and suffix 14.12.2024 15.12.2024 as second Saturday & Sunday holidays respectively.
NOTIFICATION
March 11 , 2025
No. 51 /XIV /II /UHCAdmin.A/ 2008 --Shri Ritesh Kumar Srivastava , 1st Additional District & Sessions Judge , Kashipur, District U.S. Nagar is hereby sanctioned earned leave for 03 days w.e.f. 07.10.2024 to 09.10.2024 with permission to prefix 06.10.2024 as Sunday & suffix 10.10.2024 to 13.10.2024 as Dussehra holidays for the purpose of L.T.C.
NOTIFICATION
March 11 , 2025
No. 52/XIV- a - 48/ Admin.A/ 2020-- Shri Vishal Goyal , Judicial Magistrate , Haldwani , District Nainital is hareby sanctioned earned leave for 14 days w.e.f. 11.12.2024 to 24.12.2024 with permission to suffix 25.12.2024 to 01.01.2025 as Christmas and New Year's holiday respectively.
By Order of Hon'ble the Administrative Judge ,
Sd/-
Registrar ( Inspection ) .
भाग 1 -क]
197 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
HIGH COURT OF UTTARAKHAND , AT NAINITAL
NOTIFICATION
June05, 2025
No. 103 /UHC /ADMIN.A/VC (Nyaya Shruti) RULES , 2025--
"The High Court of Uttarakhand Electronic Communication and Audio - Video Electronic Means ( Nyay Shruti ) Rules , 2025 "
Statements of Object and Reasons
"Whereas , in order to avoid delay in judicial proceeding due to non- availability of parties , advocates, witnesses and accused physically, it is expedient to formalize and enable use of electronic communication and other audio -video electronic means for the purpose of conducting trial, inquiry and proceeding under the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (No. 46 of 2023).
Whereas, the BNSS under section 54, 63, 64, 70, 71, 94, 154, 183 , 187, 193, 209, 227, 230, 231,251, 254, 262, 265, 266, 308, 310, 316, 336, 355, 356, 392, and 530 recognizes use of audio - video electronic means and other forms of electronic communication for different proceedings .
Whereas, Section 530 of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita , 2023 (BNSS) provides that all trials , inquires and proceedings under this Sanhita, including examination of complainant and witnesses , recording of evidence in inquiries and trials and all appellate proceedings or any other proceeding. may be held in electronic mode, by use of electronic communication or use of audio - video electronic means .
Whereas there is no restriction on civil courts in using video conferencingfacilities in conducting trial .
Whereas, the Judiciary in the State of Uttarakhand has been using video conferencing facilities for conducting inquiries and trials in civil as well as criminal proceedings ."
In exercise of the powers conferred by Article 227 of the Constitution of India, and all other enabling Sections of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita , 2023 (No. 46 of2023 ) , audio - video electronic communication in judicial proceedings in the State ofUttarakhand, the High Court of Uttarakhand makes the following Rules-
CHAPTER I
PRELIMINARY
1. Short title , Application and Commencement -
(1) These Rules shall be called " The High Court of Uttarakhand Electronic Communication and Audio - Video Electronic Means (Nyay Shruti) Rules , 2025".
(2) These Rules shall apply to the High Court and all the Courts under the supervisory jurisdiction of the High Court of Uttarakhand and to all judicial , departmental , Lok Adalat and mediation proceedings .
(3) These Rules shall come into force from the date of their publication in the Official Gazette .
198
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
2. Definitions-
(1) In these Rules , unless the context otherwise requires , -
(a) "Advocate " means and include an advocate entered in any roll maintained under the provisions of the Advocates Act, 1961 and shall for the purpose of these rules, include prosecuting officers and government pleaders;
(b) " Advocate's remote point " means a place from where an advocate or advocates may appear through a live link and shall include advocate's chamber or office or a place notified by the Bar for video conferencing;
(c) " Commissioner " means a person appointed as commissioner under the provisions of the Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 ( 46 of 2023 ) or any other law for the time being in force ;
(d) " Coordinator " means a person nominated as coordinator under Rule 5 ;
(e) " Court" includes a physical court and a virtual court or a tribunal or dispute settlement forum .
(f) "Court point " means the courtroom or the place where the court is physically convened, or the place where a commissioner or an inquiry officer holds proceedings pursuant to the directions of the court ;
(g) " Court room " means the place or room or enclosed space in which court proceedings are held;
(h) "Designated Place " means any one or more places specified where the facilities are made available for use of electronic communication or use of audio -video electronic means with courts points and shall include Vulnerable Witness Deposition Centre from where evidence of such witnesses may be recorded;
(i ) "Designated Video Conferencing Software " means a software approved by the High Court for the use of video conferencing or other audio - video electronic communication :
(j ) "High Court " means the High Court of Uttarakhand at Nainital ;
(k) " Live link " means and includes a live link for audio - video electronic communication or other arrangements whereby a witness , an accused , party , advocate or any other person is required by Court to remain present virtually in the court room by use of electronic communication or use of audio -video electronic means :
(1 ) "Remote Point " means a place where any person is required to be present or appear through a live link and includes designated place from where submissions may be made before the Court but does not include Advocate's remote point;
(m) "Remote User " means a user participating in court proceedings through video conferencing at a designated place or advocates remote point ;
(n) " Required Person " includes :
(i) a person who is to be examined as a witness , complainant or otherwise: or
(ii) person in whose presence certain proceedings are to be recorded or conducted including an accused ; or
(iii) an advocate or a party in person ; or
(iv) any person including victim who is required to make submissions before the Court ; or
(v) any other person who is permittedby the Court to appear through video conferencing or other modes of audio visual electronic communication ;
(0) " Rules " shall mean these rules and any reference to a rule or sub -rule shall be a reference to a rule or sub - rule of these rules ;
199 भाग 1 -क ]
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
(2) The words and phrases used but not defined herein shall bear the same meaning as assigned to them in the General Rules ( Criminal ) 1977 , General Rules (Civil) 1957 , Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita , 2023 ( BNSS ) ; Bharatiya Sakshya Adhiniyam , 2023 (BSA) ; Information Technology Act , 2000 (IT Act) and the General Clauses Act, 1897.
3. Construction of references- Unless the context otherwise requires , any reference to Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita , 2023 in these Rules shall include reference to Code of Criminal Procedure , 1973 under the corresponding provisions .
Chapter II
General Principles - 1
4. Implementation- Video Conferencing under Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita , 2023 (BNSS ) shall be implemented in accordance with following provisions:
4.1 Electronic Hearings- All trials , inquiries , Appeals and other proceedings including those mentioned in Section 530 of BNSS may be conducted electronically, by use of electronic communication or use of audio - video electronic means .
4.2 Appearance via Video Conferencing- Persons required to appear before the court either under Section 154 or 355 of BNSS , as the case may be , may do so via video conferencing , including cases where the accused is absent .
4.3 . Accused in Judicial Custody- Accused persons may be presented before the court as required under Section 187 of BNSS , via video conferencing , except for the first appearance , which requires physical presence .
4.4. Framing of Charges- Charges may be read and explained to the accused in accordance with Section 251 of BNSS through video conferencing , with their plea recorded electronically .
4.5. Evidence of Witnesses- Witness testimonies and depositions may be recorded via audio - video means at the designated place in accordance with Section 254 , 256, 266 , 310 and 356 of BNSS .
4.6. Deposition of evidence of any police officer or public servants- Testimonies of public servants maybe recorded electronically to expedite legal proceedings in accordance with sub- section 2 of Section 254 of BNSS.
4.7. Discharge of Accused - Courts may examine the accused via electronic means before granting discharge as provided under Section 262 of BNSS .
4.8 . Examination of Accused in Custody- Accused persons in custody may be examined electronically provided that his signature shall be taken and verified within seventy- two hours of such examination as mentioned in Section 316 of BNSS .
4.9 . Evidence from Public Servants , Experts and police officers - Public officials , forensic experts , and police officers may provide evidence via video conferencing in accordance with provisions contain under Section 366 of BNSS .
200
[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
4.10. Judgment Pronouncement- If the accused is in custody , judgment maybe pronounced through audio - video electronic means in accordance with Section 392 ofthe BNSS .
4.11. Presence of Accused during Evidence Recording- Accused persons must be present , either physically or via video conferencing , during the recording of evidence as provided under Section 308 of BNSS .
Chapter III
General Principles -2
5. General Principles Governing Video Conferencing and other modes of Audio - video electronic communication- Subject to the provisions hereinafter contained, video conferencing and other modes of audio - visual electronic communication may be used at all stages of judicial proceedings and proceedings conducted by the Court , where a person is required to be present or appear is not physically present in court room :
5.1 All proceedings conducted by a Court via video conferencing and other modes of audio visual electronic communication shall be judicial proceedings and all parties , decoruın and protocols applicable to these proceedings .
5.2 All relevant statutory provisions applicable to judicial proceedings including provisions of BNSS , Contempt of Courts Act, 1971 , Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 ( BSA) ; Information Technology Act , 2000 ( IT Act ) , shall apply to proceedings conducted by video conferencing .
5.3 Subject to maintaining independence , impartiality and credibility of judicial proceedings , and subject to such directions as the High Court may issue , Courts may adopt such technological advances as may become available from time to time ;
5.4 Courts shall use only High Court or government approved and secure video conferencing platforms equipped with end - to - end encryption to protect data and privacy;
5.5 Any unauthorized access , hacking attempts , or security breaches must be reported immediately and addressed in accordance with the law;
5.6 The Rules as applicable to a Court shall mutatis mutandis apply to a Commissioner appointed by the Court to record evidence and to an inquiry officer conducting an inquiry;
5.7 Unless expressly permitted by Court , no person, either at Court Point or at designated place or at Remote Point or Advocate's Remote Point , shall record or publish the proceedings conducted by video conferencing or other modes of audio - visual electronic communication ;
5.8 There shall be no unauthorized recording of the proceedings by any person or entity;
6. Identification of person appearing through video conferencing or other modes of audio - visual electronic communication- The person defined in rule 2(1 ) (n) shall provide an identity proof as recognized by the Government of India 201 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
भाग 1 - क]
or State Government to the court point coordinator by electronic communication . In case , identity proof is not readily available, the Court may , upon satisfaction allows such person to participate in proceedings without production of identity proof.
7. Facilities recommended for Video Conferencing-
7.1 Each courtroom should be equipped with a video conferencing facility to enable seamless connectivity with stakeholders . This integration will eliminate the need to move to a separate dedicated room for virtual hearings , ensuring efficiency, saving time , and enhancing judicial proceedings .
7.2 Adedicated and exclusive video conferencing center should be established promptly at each Court Complex in district and Tehsil level .
7.3 A dedicated space for video conferencing within police stations , prisons , prosecution offices , forensic departments , and other designated places should be established by the State government.
7.4 The equipments recommended for conducting proceedings by video conferencing at the Court Point and the Remote Point are mentioned in SCHEDULE - I
8. The designated video conferencing software tobe procured by High Court or District Courts shall facilitate minimum requirements as prescribed in SCHEDULE - II .
9. Appointment of Coordinators.-
9.1 There shall be a Coordinator both ật thể Court Point and at the designated place from where any required person is to be examined or heard or is directed to remain present . However , coordinator may be required at the remote point onlywhen a witness or a person accused of an offence is to be examined ;
9.2 In all the Courts , one or more persons nominated by the High Court or the Principal District and Sessions Judge concerned within whose jurisdiction the respective Court is present , shall perform the functions of the coordinators at the designated place .
9.3 The Court may appoint any court official as a coordinator at the Court Point.
9.4 The coordinator at the designated place may be any of the person mentioned in SCHEDULE - III
9.5 Notwithstanding the provisions of SCHEDULE - III , regarding designated place as Overseas , where witness examination is to take place in a criminal case of a person located outside the country, the provisions of the BNSS 2023 (Section 110 & Chapter 8 ) and " Comprehensive Guidelines for investigation abroad and issue of Letters Rogatory (LRs) / Mutual Legal Assistance (MLA) Request and Service of Summons / Notices / Judicial documents in respect of Criminal Matters prevailing at that time " willbe followed to the extent they comport with the provisions of the BNSS and BSA.
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[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
10.Preparatory arrangements.-
10.1 The coordinator at the designated place /remote point shall ensure that;
(a) the required persons scheduled to appear in a particular proceeding are ready at the remote point/designated place for video conferencing well before the scheduled time ;
(b) no unauthorized recording device is used ;
(c) no unauthorized person enters the remote point or designated place when the video conference is in progress ;
(d) the person being examined is not prompted , tutored , coaxed, induced or coerced in any manner by any person and that the person being examined does not refer to any document , script or device without the permission of the Court concerned during the course of examination.
10.2 Where the witness to be examined through video conferencing or other audio - visual electronic communication requires or if it is otherwise expedient to do so , the Court shall give sufficient notice in advance , setting out the schedule of video conferencing and in appropriate cases may provide the copies of all or any part of the relevant documents in electronic form to the coordinator of the concerned remote point .
10.3 Before the scheduled video conferencing , the Court shall ensure that the coordinator at the designated place or remote point receives in electronic form , copies of all or any part of the documents which may be required for recording of evidence , or for reference of the witness . However , coordinator shall allow such documents in electronic form to be used by the required person only with the permission of the Court .
10.4 Whenever required , the Court shall order the coordinator at the remote point or at the court point to provide-
a. a translator in case the person to be examined is not conversant with the official language of the court ;
b. an expert in sign languages in case the person to be examined is impaired in speech and /or hearing ;
c. an interpreter or a special educator , as the case may be , in case a person to be examined is differently abled , either temporarily or permanently;
d. a person for reading of documents in case the person to be examined is visually challenged .
CHAPTER IV
PROCEDURE FOR VIDEO CONFERENCING
11. Appearance through video conferencing and other modes of audio - visual electronic communication-
11.1 In criminal cases , any party to the proceedings or witness , save and except where proceedings are initiated at the instance of the Court or on request of public prosecutor , may move a request for presence and proceedings through video conferencing as mentioned in SCHEDULE -V .
11.2 In civil cases , the court may, as its discretion or on request of any of the parties , initiate process for hearing of any case through video conferencing and other modes of audio - visual electronic communication .
भाग 1 -क]
203 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
11.3 While allowing a request for video conferencing the Court may also fix the schedule for convening the video conferencing .
11.4 An advocate may appear from advocate's remote point for making submissions or for examination of witnesses .
11.5 Where video conferencing proceedings are conducted for making oral submissions , the order may require the advocate or party in person to submit written arguments and precedents , if any , in advance .
12. Service of processes- Processes issued to a witness who is to be examined through video conferencing , shall mention the date , time and venue of the concerned designated place and shall direct the witness to attend in person along with proof of identity . If a person is examined with reference to a particular document then the process to witness must be accompanied by a copy of the document:
Provided that nothing in this rule shall preclude a court from conducting trials , inquires and proceedings in electronic mode , by use of electronic communication or use of audio - video electronic means .
13. Examination of persons and witnesses through video conferencing and other modes of audio - visual electronic communication-
13.1 The person being examined through video conferencing and other modes of audio - visual electronic communication shall ordinarily be examined during the working hours of the court concerned or at such time as the court may deem fit.
13.2 Where the person being examined is an accused , the court shall provide adequate opportunity to consult with his advocate before and after the video conferencing.
13.3 The Court shall read over and explain the evidence recorded to the witness and obtain the signature of the person being examined on the transcript immediately after the examination is concluded . The signed transcript shall form part of the record of the judicial proceedings . The signature on the transcript of the person being examined shall be obtained in either of the following ways.-
a. If digital signatures are available at both the concerned Court Point and remote point, the copy of the transcript digitally signed by the presiding officer at the Court Point shall be sent by the designated video conferencing software or official e - mail to the coordinator at remote point where a print out of the same shall be taken and signed by the person being examined . A scanned copy of the transcript digitally signed by the coordinator at the remote point shall be transmitted by the designated video conferencing software or official e - mail of the Court Point;
b . If digital signatures are not available , the printout of the transcript shall be signed by the presiding Judge , at the Coast Point and shall be sent in non- editable scanned format by the designated video conferencing software or official e -mail account of the designated place or e - mail of the coordinator at remote point where a printout of the same shall be taken and signed by the person examined and countersigned by the coordinator at the remote 204
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1-क
point .A non- editable scanned format of the transcript so signed shall be sent by the coordinator at the remote point by the designated video conferencing software or official e -mail to the Court Point where a print out of the same shall be taken and shall be made a part of the judicial record .
c. If the statements of witness are being recorded in CIS- " Witness Statement Recording Module " , the same maybe e - signed or digitally signed by the presiding officer at the Court Point and shall be sent by the designated video conferencing software or officiale -mail to the coordinator at remote point which can be e - signed or digitally signed by the person being examined and e -signed or digitally countersignedby the coordinator at the remote point and sent back to Court Point through the designated video conferencing software or official e - mail .
13.4 The court may, at the request of a person to be examined, or on its own motion , taking into account the best interest of the person to be examined , direct appropriate measures to protect the privacy of the person examined bearing in mind aspects such as age , gender , physical condition and recognized customs and practices .
13.5 The coordinator at the designated place shall ensure that no person is present at the remote point , save and except the person being examined and those whose presence is deemed administratively necessary by the coordinator for the proceedings .
13.6 The court may also impose such other conditions as are necessary in for effective hearing of cases through video conferencing and other modes of audio - video electronic communication .
13.7 If the court thinks fit , the required person may be permitted to connect through video conferencing or other modes of audio - visual electronic communication from the place of his residence or work:
Provided that evidence of a witness shall be recorded only from the designated place , except in situation hereinafter provided-
a. Where a required person is not capable of reaching the Court Point or the designated place due to sickness or physical infirmity, or whose presence cannot be secured without undue delay or expense , the Court may authorize conduct of video conferencing from the place at which such person is located. In such circumstances the court may direct the use of portable video conferencing systems and ensure presence as it may deem fit .
b . Where the court is of opinion, for the reasons recorded in writing that, evidence of the witness cannot be effectively recorded, may decline to examine such witness through video conferencing.
14. Exhibiting or showing documents to witness or accused at a remote point- If in the course of examination of a person at a remote point by video conferencing , it is necessary to show a document to the person , the Court may permit the document to be shown in the following manner :
a. if the document is at Court Point , by transmitting the document through document visualizer ;
205 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
भाग 1 -क ]
b. if the document is at Court Point , but document visualizer is not available , by transmitting a copy or image of the document to the remote point electronically through the designated video conferencing software or official e-mail;
c. if the document is at the remote point , by transmitting a copy or image of the document to the Court Point electronically through the designated video conferencing software or official e - mail . The hard copy of the document counter signed by the witness and the coordinator at the designated place shall also be dispatched to the Court Point .
15.Ensuring seamless video conferencing.-
15.1 The coordinator at Court Point shall provide the live link of the video conferencing hearing with advocates or the required person .
15.2 If the proceedings are carried out from any place other than a remote point , the coordinator , if any , at such remote point shall ensure compliance of all technical requirements .
15.3 The coordinator at the Court Point shall be in contact with the concerned advocate or the required person and guide them in regard to the fulfillment of technical and other requirements for executing a successful hearing through video conferencing . Any problem faced by such advocate or the required person shall be resolved by the coordinator at Court Point .
15.4 The coordinator at the Court Point shall ensure that any document or audio - visual files , emailed by the advocate or the required person , are duly received at the Court Point .
16. Remand- The court may authorize detention in judicial custody, of any person accused of an offence , by video conferencing or other modes of audio - visual electronic communication as per the provisions of section 187 BNSS :
Provided that if the accused is already in judicial custody , whether of same Court or some other Court or is undergoing sentence , the Court may further remand him during inquiry or trial under section 346 (2 ) of the BNSS through video conferencing or other modes of audio - visual electronic communication.
17. Plea bargaining-
The Court may also use the modes of audio - visual electronic communication for the purpose of plea bargaining under Chapter XXIII of the BNSS .
18. Record of proceedings through audio - visual electronic communication.-
Wherever any proceeding is carried out by the Court under these rules by taking recourse to the modes of audio visual electronic communication , the Court shall mention in the order sheet , that the hearing is conducted through video conferencing.
CHAPTER V
GENERAL PROCEDURE
19.General Procedure.-
19.1 The procedure set out hereinafter in this chapter is without prejudice to the procedure indicated elsewhere in these rules where proceedings are 206
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[भाग 1 -क
conducted through video conferencing or other modes of audio visual electronic communication .
19.2 The coordinator at the Court Point shall ensure that video conferencing is conducted only through a designated video conferencing software:
Provided that in the event of a technical fault or for any other sufficient cause , the Court may for reasons to be recorded in writing , permit the use of a software other than the designated video conferencing software for video conferencing in that particular proceeding :
Provided further that nothing contained in these rules shall prevent a Court , after recording its reasons in writing , from using any software other than the designated video conferencing software or other modes of audio visual electronic communication, to facilitate the hearing of cases in electronic mode .
19.3 In criminal cases , where the person to be examined is a prosecution witness , or a court witness , or a defence witness , or a person is to make submission for prosecution , or a person is to make submission for defence , the advocate for the prosecution or defence or the accused , as the case may be , shall confirm to the Court the location of the person , and the time, place and technical facilities available for such video conferencing .
19.4 If the accused is in custody and not present at the Court Point , the Court shall order a multi -point video conference between Court Point , the witness and the accused in custody to facilitate recording of the statement of the witness including medical or other experts .
20. Conduct of Proceedings.-
20.1 All advocates , required persons , the party in person or any other person permitted by the Court to remain physically or virtually present (hereinafter collectively referred to as participants ) , shall have their presence recorded. However , in case participants are desirous that their face or name be masked , information to that effect shall be furnished to the Court Point coordinator prior to the commencement of proceedings for the approval of the court .
20.2 All Advocates , Required Persons , the party in person and/or any other person permitted by the Court to remain physically or virtually present (hereinafter collectively referred to as participants) shall abide by the requirements set out in Schedule IV.
20.3 The Court Point coordinator shall send the live link on mobile number furnished by the participants permitted to be virtually present in the Court . Once the proceedings have commenced, no other person shall be permittedto participate in the virtual hearing , except with the permission of Court .
20.4 Participation in the proceedings through video conferencing shall constitute consent by the participants to the proceedings being recorded.
20.5 Establishment and disconnection of links between the Court Point and the remote point shall be regulated by orders of the Court .
20.6 The court shall satisfy itself that the advocate, required person or any other participant that the court deems necessary at the remote point or the Court Point can be seen and heard clearly and ĉan clearly see and hear the court .
भाग 1 -क]
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20.7 To ensure that video conferencing is conducted seamlessly, the difficulties, if any, experienced in connectivity must be brought to the notice of the Court at the earliest on the mobile number of the Court Point coordinator which has been furnished to the participant before the commencement of the video conferencing . No complaint shall be entertained subsequently.
21.Third parties to the case-
21.1 Third parties maybe allowed to remain present during video conferencing only upon a specific order of the Court . However, they shallbe passive participants and shall not be allowed to make any submission without permission of the Court .
21.2 Where , for any reason , a person uscortrrected with the case is present at the remote point , that person shallbe identified by the coordinator at the remote point at the beginning of the proceedings and the purpose of the presence of that person shall be conveyed to the Court. Such person shall continue to remain present only with the permission of the Court .
22. Costs of Video Conferencing- In the absence of rules prescribed by the concerned Court , the Court may take into consideration the following circumstances when determining and/ or apportioning the costs of video conferencing:
a. In criminal cases , the expenses of the video conferencing facility including expenses involved in preparing soft copies/ certified copies of the Court record and transmitting the same to the Coordinator at the Remote Point , and the fee payable to the translator/ interpreter/ special educator , as the case may be , as also the fee payable to the Coordinator at the Remote Point , shall be borne by such party as directed by the Court .
b . Besides the above , the Court may also make an order as to expenses as it considers appropriate , taking into account the rules /instructions regarding payment of expenses to the complainant and witnesses , as may be prevalent from time to time .
c. It shall be open to the Court to waive the costs as warranted in a given situation.
23.Access to Legal Aid Clinics /Camps / Lok Adalats/ Jail Adalats- In conformity with the provisions of the Legal Services Authorities Act , 1987 and the laws in force , in proceedings related to Legal Aid Clinics , Camps , Lok Adalats or Jail Adalats , any person who at the Remote Point is in Jail or Prison shall be examined by the Chairman / Secretary of the District Legal Service Authority or Members of Lok Adalats /Permanent Lok Adalat before passing any award or orders as per law and -
a. Such award or order shall have the same force as if it was passed by the regular Lok Adalat or Permanent Lok Adalat or Jail Adalat .
b . Copy of the award or order and the record of proceedings shall be sent to the Remote Point .
208
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[भाग 1 -क
24. Allowing persons who are not parties to the case to view the proceedings -To observe the requirement of an open Court proceeding , members of the public will be allowed to view Court hearings conducted through video conferencing , except proceedings ordered for reasons recorded in writing to be conducted in- camera . The Court shall endeavour to make available sufficient links (consistent with available bandwidth) for accessing the proceedings .
Chapter VI
Miscellaneous
25. Power to Relax- The High Court may if satisfied that the operation of any Rule is causing undue hardship , by order dispense with or relax the requirements of that Rule to such extent and subject to such conditions , as may be stipulated to deal with the case in a just and equitable manner .
26. Residual Provisions- Matters concerning which no express provision has been made in these Rules shall be decided by the Court consistent with the principle of furthering the interests ofjustice .
27. Repeal and Savings ( 1 ) The High Court of Uttarakhand Video Conferencing Rules , 2020 are hereby repealed .
(2) Notwithstanding the repeal , provisions of High Court of Uttarakhand Video Conferencing Rules , 2020 shall apply to: -
a. Actions and proceedings commenced before these rules came into force .
b . All notifications/orders published/ issued under the Video Conferencing Rules 2020 , to the extent they are not repugnant to these rules , shall be deemed to have been made or issued under these rules .
SCHEDULE - I
VIDEO CONFERENCING EQUIPMENTS
S. EQUIPMENTS
CONFIGURATION
1. Computer Device a. Desktop and Laptop or tablet/ phone
2. Network and Internet Connectivity
a. High - Speed Internet Connection ( Minimum Speed of 50 Mbps) that ensures seamless video transmission without lag;
b . Backup Internet Connection- A secondary connection to prevent disruptions ;
c. Dedicated LAN/ Wi -Fi Setup that ensures stable and secure connectivity;
3 . Video Equipment a. High -Resolution Cameras (Full HD /4K) - To capture clear video feeds of participants ;
b. Adjustable and Multiple Camera Angles that enables focusing on the judge , lawyers , accused and/ or witnesses ;
4. Audio Equipment
a. Noise- Canceling Microphones that is capable of reducing background noise and ensures clear audio transmission;
b. High- Quality Speakers that provides clear sound output for participants ;
с. Echo Cancellation and Acoustic Treatment for enhanced audio clarity by minimizing reverberation ;
भाग 1 -क]
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5. Display and Projection Equipment
a. Large Display Screens ( preferably LED) - For clear visibility of remote participants at least 55 Inch Display or more as per requirement may be deployed.
b . Wherever required , multiple Screen Set - up may be deployed that allows simultaneous viewing of different participants .
a . End- to -End Encrypted Video Conferencing Software that ensures secure communication ;
6. Software and Encryption Standards
b . Firewall and VPN Protection that prevents unauthorized access ;
c. Multi-Factor Authentication ( MFA ) for Users that ensures identity verification based on login credentials;
d. Secure Login Credentials for each Session in order to limit access to authorized personnel ;
7. Recording and Documentation
a. Court-Approved Recording Mechanism that allows secure documentation of hearings ;
b . Transcription Services maybe Automated or manual transcription of court proceedings ;
c. Cloud or Local Storage Options may be deployed as the High Court may direct for secure storage for recorded sessions .
8. IT Support and Maintenance
a . There shall be a provision of On- Site Technical Team that ensures quick resolution of technical issues ;
b . 24/7 Remote IT Support for Hardware and Software which provides assistance for troubleshooting ;
с. Regular Equipment Maintenance that ensures uninterrupted functionality;
9. Power Backup 1. Uninterruptible Power Supply ( UPS ) System may be deployed either by Solar Backup or Online UPS that prevents Power outages from disrupting proceedings;
2. Backup Generators for each court Complex may be provisioned for prolonged power failures , etc.
SCHEDULE -II
MINIMUM REQUIREMENTS OF DESIGNATED VIDEO CONFERENCING SOFTWARE
1. Online , real -time collaboration software with features like video , voice, screen sharing, document sharing , presentation , recording etc.
2. The solution should have a whiteboard for flashing messages and recording meetings or sessions;
3. The complete access log of the different users with extended reports , including IP / Device details/ Application details , should be provided with each meeting room ;
4. The platform should be hosted on an India -based data centre with a 100 % disaster recovery site;
5. The platform must offer cross -platform functionality, ensuring seamless operation across various operating systems , including Windows , Linux , macOS, IOS etc. , to accommodate diverse technology ecosystems of all participants and guarantee a consistent user experience regardless of the operating system used ;
6. The platform must be scalable to multi point connectivity with minimum 100 user 210
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[भाग 1 -क
logins at a time that may extent up to 500 users ;
7. The platform must provide private and confidential Breakout rooms ; between multiple users;
8. The platform must be capable of synchronizing and scheduling with cause list of cases by advocates with waiting lobby and automatic pulling according to the cause list ;
9. The platform must provide master control facility at Court's end , recording and archiving facility at court point , server or cloud;
10. The platform must provide audit trail facility of the proceedings and also provision of a firewall .
SCHEDULE - III
COORDINATOR AT REMOTE POINT
The Remote Point Coordinator
S. Where the Advocate or Required Person is at the following Point
1. Overseas
An official of an Indian Consulate/the relevant Indian Embassy/ the relevant High Commission of India ;
2. Court of another state or union Any authorized official nominated by Territory of India the concerned District Judge;
3. Mediation Centre or office of District Legal Services Authority Any authorized person/official nominated by the Chairperson or Secretary of the concerned District Legal Services Authority ;
4. Jail or prison
The concerned Jail Superintendent or Officer- in- charge of the prison;
5. Hospitals administered by the Central Government , the State Government or local bodies Medical Superintendent or an official authorized by them or the person in charge of the said hospital ;
The Superintendent or Officer in charge of that Child Care Institution or an official authorized by them;
6. Observation Home , Special Home, Children's Home , Shelter Home, or any institution referred to as a Child Care Institution and where the Required Person is a juvenile or a child or a person who is an inmate of such Child Care institution
The Superintendent or Officer - in charge of the women's facility or an official authorized by them ;
7. Women's Rescue Homes , Protection Homes, Shelter Homes , Nari Niketans or any institution referred to as a women's facility ( collectively referred to as women's facilities) .
भाग 1 -क]
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or Officer- in 8. In custody, care or employment The Superintendent of any other government office , charge of the institutional facility or an organization Or institution official authorized by them ; (collectively referred to as institutional facilities ) .
9. Forensic Science Lab
The Administrative officer - in - charge or their nominee;
10. In case of any other location The concerned Court may nominate- any public servant of public official of the concerned department to render services as a Coordinator to ensure that the proceedings are conducted in a fair , impartial and independent manner and according to the directions issued by the Court in that behalf.
SCHEDULE IV
1. All participants shall wear sober attire consistent with the dignity of the proceedings . Advocates shall be appropriately dressed in professional attire prescribed under the Advocates Act, 1961. Police officials shall appear in the uniform prescribed for police officials under the relevant statute or orders . The attire for judicial officers and court staff will be as specified in the relevant rules prescribed in that behalf by the High Court . The decision of the Presiding Judge or officer as to the dress code will be final .
2. Proceedings shallbe conducted at the appointed date and time. Punctuality shall be scrupulously observed.
3. The case willbe called out and appearances shall be recorded on the direction of the Court.
4. Every participant shall adhere to the courtesies and protocol that are followed in a physical Court. Judges will be addressed as "Madam/Sir " or " Your Honour " or as per prevailing practice of address . Officers will be addressed by their designation such as " Bench Officer/ Court Master /Reader/Peshkar etc " . Advocates willbe addressed as "Learned Counsel / Senior Counsel or as per prevailing practice of address " .
5. Advocates , Required Persons , parties in person and other participants shall keep their microphones muted till they are called upon to make submissions .
6. Remote Users shall ensure that their devices are free from malware .
7. Remote Users and the Coordinator at the Remote Point shall ensure that the Remote Point is situated in a quiet location, is properly secured and has sufficient internet coverage . Any unwarranted disturbance caused during video conferencing may if the Presiding Judge so directs render the proceedings non- est .
8. All participant's cell phones shall remain switched off or in airplane mode during the proceedings except where such phone is being used as a tool for assisting the video- conferencing itself.
9. All participants should endeavor to look into the camera , remain attentive and not engage in any other activity during the proceedings .
10. Background noise , unnecessary movements , and interruptions must be minimized to maintain the decorum ofjudicial proceedings .
11. The use of offensive language , disrespectful behavior , or non - compliance with judicial instructions may lead to immediate removal from the session and potential legal consequences .
12. Only court have the discretion to mute or remove any participant violating these conduct rules .
212
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[भाग 1 -क
SCHEDULE V
Request Form for Video Conference
1. Case Number/CNR Number ( if any)
2. Cause Title
3. Proposed Date of conference ( DD/MM/YYYY) :
4. Location of the Court Point(s) :
5.Location of the Remote Point( s ) :
6. Names & Designation of the Participants at the Remote Point :
7. Reasons for Video Conferencing:
In the matter of
Others
8. Nature of Proceedings ; Final Hearing
MotionHearing
I have read and understood the provisions of "The High Court of Uttarakhand Electronic Communication and Audio - Video Electronic Means ( Nyay Shruti) Rules , 2025. I undertake to remain bound by the same to the extent applicable to me . I agree to payvideo conferencing charges if so , directed by the Court .
Signature of the applicant/ authorized
signatory:.
Date:
A) Bench assigned/ Court Name:
B) Hearing:
Held on (DD/MM/ YYYY) :
Commencement Time :
End time:
Number of approximate hours :
C) Costs:
Overseas transmission charges if any .
Tobe Incurredby Applicant/ Respondent:
To be shared equally:
Waived ; as ordered by the Court
Signature of the authorised officer .
Date:
For use of the Registry / Court Point Coordinator
By Order of Hon'ble the Chief Justice,
Sd- KAHKASHA KHAN , Registrar General , High Courtof Uttarakhand AtNainital .
213 भाग 1 -क]
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
कार्यालय महानिरीक्षक, निबन्धन, उत्तराखण्ड
अधिसूचना
10 जून, 2025 ई 0०
पत्रांक-88 / म०नि०नि०/ 2025-26- महानिरीक्षक , निबंधन , उत्तराखण्ड, साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (अधिनियम संख्या 10 सन् 1897 ) की धारा 21 (उत्तराखण्ड राज्य में यथाप्रवृत्त एवं यथासंशोधित) और रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908 ) की धारा 69 की उपधारा (1 ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए , दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण के सम्बन्ध में निम्नलिखित नियमावली बनाते है ; अर्थात-
उत्तराखण्ड ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली , 2025
1 (1)
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
इस नियमावली का संक्षिप्त नाम उत्तराखण्ड ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली , 2025 है ।
(2) यह नियमावली जैसा उत्तराखण्ड सरकार द्वारा समय - समय पर अधिसूचित की जाय , ऐसे उप निबंधक कार्यालयों अथवा अन्य निबंधन कार्यालयों पर लागू होगी ।
(3) यह नियमावली राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रवृत्त होगी ।
परिभाषायें
2 1 (क) ' अधिनियम ' से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908) अभिप्रेत है ;
(ख) 'अधिप्रमाणन' से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति की जनसांख्यिकीय सूचना या बायोमेट्रिक सूचना सहित आधार संख्या, केंद्रीय पहचान आंकड़े निक्षेपागार को, उसके सत्यापन हेतु भेजी जाती है और ऐसा निक्षेपागार ( सी ०आई ०डी०आर०) उसके पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी सत्यता का या कमी का सत्यापन करता है;
(ग) ' प्राधिकृत अधिकारी' से ई- रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनार्थ निष्पादक के रूप में दस्तावेज के निष्पादन हेतु विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा प्राधिकृत अधिकारी अभिप्रेत है ;
(घ) 'डिजीलॉकर' से दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के भण्डारण , साझाकरण और सत्यापन हेतु, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एम० ई०आई० टी० वाई०) द्वारा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अधीन स्थापित एक संरक्षित क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म अभिप्रेत है;
(ङ) 'दस्तावेज प्रबंधन शुल्क' से कार्यालय एवं कम्प्यूटरीकरण को सुदृढ़ करने एवं अभिलेख कक्ष में संरक्षित दस्तावेजों के स्कैनिंग एवं डिजिटलीकरण हेतु संदेय शुल्क अभिप्रेत है :
(च) ' ई- बहीं' से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम , 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908) की धारा 51 के अधीन तथा यथा परिभाषित रजिस्टर बहियों के सॉफ्टवेयर द्वारा जनित बही अभिप्रेत है जिसमे ई- रजिस्ट्रीकरण व ई-फाइलिंग प्रक्रिया से जनित दस्तावेजों की अतिरिक्त बही सम्मिलित
(छ)
है; 'ई- निष्पादन' अथवा ' इलेक्ट्रॉनिक निष्पादन' से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम , 2000 (अधिनियम संख्या -21 सन् 2000) की धारा 2 (1 ) (न क) के अधीन यथा परिभाषित दस्तावेजों पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर अथवा आधार के ई- हस्ताक्षर अथवा इलेक्ट्रानिक हस्ताक्षर अभिप्रेत है;
(ज) 'ई-फाइलिंग ' से ई- फाइलिंग मॉड्यूल के माध्यम से अधिनियम की धारा- 18 तथा धारा-89 में निर्दिष्ट सम्पत्ति दस्तावेजों की ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अभिप्रेत है ;
214
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
(झ) 'ई - के० वाई० सी०' से आधार संख्या धारकों की निजता, सुरक्षा और समावेशन को बनाए रखते हुए कागज रहित और इलेक्ट्रॉनिक रूप में विभिन्न अनुप्रयोगों में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए स्वेच्छा से इसका उपयोग किया जाना अभिप्रेत है;
(ञ) ' ई- रजिस्ट्रीकरण' से दस्तावेजों के ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रीकरण अभिप्रेत है;
(ट) ' हार्डवेयर' में ऐसी इलेक्ट्रानिक युक्ति यथा कम्प्यूटर, रकैनर्स, प्रिन्टर्स, कम्पैक्ट डिस्क, हार्डडिस्क आदि सम्मिलित है जिनका प्रयोग डेटा को डिजिटल प्रारूप में अभिगृहीत, संचित या उपान्तरित करने के लिए किया जाता है ;
(ठ) 'रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक' से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908) की धारा 3 के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक अभिप्रेत है;
(ड) 'ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण साफ्टवेयर से रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा इस नियमावली के अधीन संपत्ति के रजिस्ट्रीकरण करने के लिए विकसित एक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल अभिप्रेत है और इसमें 'ई - रजिस्ट्रीकरण मॉड्यूल' एवं ' ई- फाइलिंग मॉड्यूल' सम्मिलित हैं ;
(ढ) 'अभिलेखण' से इलेक्ट्रानिक भण्डारण मीडिया यथा कम्पैक्ट डिस्क, टेप , हार्ड डिस्क तथा तत्समान अन्य मीडिया पर डेटा को, जिनमें प्रतिबिम्व भी सम्मिलित है , को दीर्घकाल तक परिरक्षित रखने और जय अपेक्षित हो तो पुनः प्राप्त करने के आशय से उन्हें अभिलिखित किया जाना अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत पुनः अभिलेखण भी सम्मिलित है;
(ण) 'रजिस्ट्रीकरण अधिकारी' से रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन 1908) की धारा 6, 11 एवं 12 के अधीन नियुक्त रजिस्ट्रार एवं उप रजिस्ट्रार है एवं इसमें ई-रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी सम्मिलित है;
(त) 'स्कैनर से ऐसी इलेक्ट्रानिक युक्ति अभिप्रेत है, जिसका प्रयोग किसी कम्प्यूटर और किसी उचित साफ्टवेयर के संयोजन में कागजी दस्तावेजों को इलेक्ट्रानिक मीडिया पर संचयन किए जाने हेतु डिजिटल मीडिया इमेज में परिवर्तित करने और जब अपेक्षित हो तो उन्हें पुनः प्रस्तुत किए जाने के लिए किया जाता है और तद्नुसार शब्द स्कैनिंग या स्कैन्स का अर्थ लगाया जायेगा;
(थ) ' विनिर्दिष्ट इकाई' से किसी सरकारी / अर्धसरकारी विभाग अथवा ऐसे किसी संगठन इकाई अभिप्रेत है जिसे ई- रजिस्ट्रीकरण हेतु रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा प्राधिकृत किया जाये;
(द) '
विशिष्ट आवेदन क्रमांक' से इस नियमावली के अधीन दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण हेतु किये गए ऑनलाइन आवेदन के पूर्ण होने के उपरान्त वेबसाइट पर स्वतः जनित आवेदन क्रमांक अभिप्रेत है ;
(घ) 'वेबसाइट' से उत्तराखण्ड स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग द्वारा उत्तराखण्ड राज्य की अधिकारिता के भीतर दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण हेतु अभिहित ऑनलाइन प्लेटफार्म अभिप्रेत है, जिसे आवश्यकतानुसार अद्यतन एवं संशोधित किया जा सके;
(न) 'सेवा प्रदाता' से महानिरीक्षक निबंधन द्वारा निर्धारित तरीके से सीआरएस के माध्यम से उत्तराखण्ड ई- स्टाम्प नियम, 2011 के अन्तर्गत ई- स्टाम्प जारी करना एवं अन्य दस्तावेज तैयार करने तथा अन्य सम्बन्धित सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राधिकृत अनुज्ञप्तिधारी अभिप्रेत है ;
(प) 'आधार अधिप्रमाणन' से वह प्रक्रिया जिसके द्वारा आधार संख्या धारक की जनसांख्यिकीय जानकारी या बायोमेट्रिक जानकारी के साथ आधार संख्या उसके सत्यापन के लिए यूआईडीएआई के केंद्रीय पहचान डेटा संग्रह (रिपॉजिटरी) में प्रस्तुत का जाती है अभिप्रेत है , और ऐसा संग्रह (रिपॉजिटरी) उसके पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर सत्यता या उसकी कमी की पुष्टि करता है तथा " हां या नहीं " प्रतिक्रिया देता है;
215 भाग 1 -क]
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(2) | इसमें प्रयुक्त किंतु अपरिभाषित शब्दों और पदों के वही अर्थ होंगे जो उनके लिए क्रमशः रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908 ) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम , 2000 (अधिनियम संख्या -21 सन् 2000) में समनुदेशित है;
सेवा प्रदाताओं के निम्नलिखित वर्ग होंगे , अर्थात् -
(1 )
(क) वैयिक्तक,
(ख) बैंक एवं वित्तीय संस्थाएं,
दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण 3 हेतु सेवा प्रदाता के वर्ग एवं शुल्क
(ग) डाकघर,
(घ) निगम/ मंडल, जिनमें केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा कम - से- कम
51 प्रतिशत अंश धारित हों,
(ङ) कंपनी अधिनियम , 2013 (2013 का 18) के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई
कंपनी,
(च ) ' एडवोकेट ' जो कि उत्तराखण्ड बार कौंसिल का सदस्य हो,
(2) सेवा प्रदाता हेतु आवेदन के शुल्क की धनराशि महानिरीक्षक निबंधन द्वारा नियत की जाएगी । विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन एवं आधुनिकीकरण के सेवा प्रदाता शुल्क के प्रबंधन हेतु राज्य एवं जिला प्रयोक्ता प्रभार समिति का गठन किया जायेगा । इसकी अन्य शर्ते शासन के अनुमोदन से अवधारित की जाएँगी ।
रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में 4 पक्षकार की उपस्थिति की दशा में दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण की तैयारी
(1 ) रजिस्ट्रीकरण के लिए आशयित प्रत्येक दस्तावेज का प्रस्तुतकर्ता, रजिस्ट्रीकरण हेतु रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में दस्तावेज के ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण के पूर्व स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की सरकारी वेबसाइट पर दस्तावेज से सम्बंधित विवरणों को प्रविष्ट करते हुए विहित प्रारूप पर आवेदन करेगा ।
(2) उपरोक्त रीति से आवेदन पूर्ण करने के पश्चात् दरतावेज के प्रस्तुतकर्ता को वेबसाइट पर एक विशिष्ट आवेदन क्रमांक प्राप्त होगा जोकि सम्बंधित दस्तावेज का विशिष्ट आवेदन क्रमांक कहलायेगा ।
(3) डेटा प्रविष्टि के पूर्ण होने पर, आवेदन का विवरण स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा । पक्षकार, आवेदन प्रेषित करने के पूर्व किसी भी त्रुटि को उपान्तरित कर सकता हैं । आवेदन को प्रेषित करने के पश्चात कोई उपान्तरण संभव नहीं होगा ।
(4) उपरोक्त रीति से आवेदन पूर्ण करने के पश्चात् दस्तावेज का प्रस्तुतकर्ता आवेदन के विवरणों का प्रिंट प्राप्त करेगा तथा रजिस्ट्रीकरण के समय रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगा ।
(5) प्रथम बार डेटा प्रविष्टि के अगले दिन से 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रीकरण कार्यालय में दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सकता है । यदि दस्तावेज 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो नई डाटा प्रविष्टि करनी होगी ।
(6) ऑनलाइन आवेदन 24× 7 घंटे किया जा सकता है किंतु रजिस्ट्रीकरण का समय कार्यालय समयावधि रहेगा ।
(7) ऑनलाइन रजिस्ट्रीकरण में प्रयुक्त होने वाले स्टाम्प तथा फीस सरकार द्वारा विहित संदाय पद्धति के माध्यम से संदत्त किया जायेगा ।
(1 )
दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण 5 हेतु कार्यालय में उपस्थित होने पर प्रक्रिया
रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी दस्तावेज के रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ करने के क्रम में, पक्षकार द्वारा किये गए ऑनलाइन आवेदन का "पूर्व रजिस्ट्रीकरण विवरण " के प्रिंट आउट पर पक्षकारों के हस्ताक्षर प्राप्त करके स्वयं हस्ताक्षर करेगा तथा विहित रीति से दस्तावेज के साथ संरक्षित करेगा ।
(2) रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी, इस बात का समाधान कर लेने के पश्चात् कि रजिस्ट्रीकरण हेतु प्रस्तुत दस्तावेज अधिनियम के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकरण हेतु उपयुक्त है, वेबसाइट पर विहित प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही पूर्ण करेगा ।
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[भाग 1 -क
(3) | रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के अन्तरालेखन, प्रस्तुतिकरण हेतु समयावधि, प्रभार्य स्टाम्प शुल्क, क्षेत्राधिकार, निष्पादन आदि के सम्बन्ध में भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 , (अधिनियम संख्या 2 सन् 1899) रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 , (अधिनियम संख्या 16 सन् 1908 ) तथा रजिस्ट्रीकरण नियमावली के उपबंधों के अनुसार अपना समाधान करेगा ।
(4) सॉफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या बायोमेट्रिक अंगूठे का निशान दर्ज करना अथवा निष्पादक के पहचान हेतु सहमति के द्वारा आधार प्रमाणीकरण और डिजिटल फोटो खींचना, जब भी और जहां भी आवश्यक हो, सभी निष्पादकों के लिए अनिवार्य होगा । जहां भी विधि द्वारा अपेक्षित हो , सॉफ्टवेयर गॉड्यूल के माध्यम से अनुप्रमाणक साक्षियों के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और डिजिटल फोटो और बायोमेट्रिक अंगुष्ठ चिन्ह को संलग्न करना अनिवार्य होगा ।
(5) रजिस्ट्रीकरण हेतु गृहीत प्रत्येक दस्तावेज के संबंध में उपरोक्त कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत वेबसाइट पर विहित बही में दस्तावेज का एक पृथक रजिस्ट्रीकरण क्रगांक स्वतः जनित होगा तथा अधिनियम की धारा 52, 58 तथा 60 में विहित पृष्ठांकन भी स्वतः जनित होंगे ।
(6) रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी दस्तावेज के पृष्ठांकनों का प्रिंट दस्तावेज के पृष्ठ भाग पर प्राप्त करेगा तथा पृष्ठांकनों के अपेक्षित स्थानों पर दस्तावेज के प्रस्तुतकर्ता/ पक्षकारों/ निष्पादको तथा साक्षियों के अंगूठे का निशान प्राप्त करेगा तथा स्वयं भी हरताक्षर करेगा ।
(7) अधिनियम की धारा 60 में विहित पृष्ठांकन पर हस्ताक्षर के उपरांत रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेज के प्रत्येक पृष्ठ का दोनों तरफ स्कैन कराएगा तथा वेबसाइट पर विहित रीति से अपलोड करते हुए संरक्षित करेगा ।
(8) | इस नियमावली में विहित रीति से रजिस्ट्रीकृत दस्तावेजों की, अधिनियम तथा उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रीकरण मैनुअल (उत्तराखण्ड में यथाप्रवृत्त) के उपबंधों के अधीन विहित प्ररूप में, वेबसाइट पर अनुक्रमणिका खतः जनित होगी ।
(1)
ई- रजिस्ट्रीकरण की 6 प्रक्रिया
रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा विनिर्दिष्ट संस्थायें निष्पादित दस्तावेजों का प्रस्तुतीकरण वेबसाइट पर उपबंधित रीति से करने हेतु प्राधिकृत होगा । इस प्रक्रिया में ई- रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजनों के लिए पक्षकारों की उपस्थिति विनिर्दिष्ट संस्था के कार्यालय में आवश्यक होगी ।
(2) विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा ई - रजिस्ट्रीकरण हेतु प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी । सरकारी / अर्धसरकारी संगठनों द्वारा राजपत्रित अधिकारी से अनिम्न श्रेणी के अधिकारी को प्राधिकृत अधिकारी नाम निर्दिष्ट किया जायेगा । प्राधिकृत कार्यालय द्वारा, जहां पर राजपत्रित अधिकारी नियुक्त ना हो , उस कार्यालय में तैनात ज्येष्ठतम अधिकारी / कार्मिक को नामित किया जा सकता है । प्राधिकृत अधिकारियों की संख्या प्राधिकृत कार्यालय की आवश्यकता के आधार पर एक से अधिक भी हो सकती है, परंतु ऐसी दशा में प्राधिकृत अधिकारी राजपत्रित श्रेणी का ही होना चाहिए । निजी संस्थाओं के बोर्ड आफ डायरेक्टर द्वारा नियोजित नियमित अधिकारी को प्राधिकृत अधिकारी नाम निर्दिष्ट किया जायेगा । प्राधिकृत अधिकारी सम्बंधित संस्था की ओर से विक्रेता के रूप में लिखत पर इलेक्ट्रानिक हरताक्षर करेगा तथा लिखत की अंतर्वस्तु एवं निष्पादकों एवं साक्षियों की पहचान के लिए उत्तरदायी होगा ।
(3) ई- रजिस्ट्रीकरण के प्रयोजन हेतु ऐसी प्रत्येक संस्था का स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर लॉगिन सृजित किया जायेगा ।
भाग 1 - क]
217 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(4) | विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा ई- रजिस्ट्रीकरण हेतु चयनित योजना की सूचना, विस्तृत विवरण के साथ रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक को ऑनलाइन उपलब्ध करायी जाएगी । चयनित योजनाओं में से ई- रजिस्ट्रीकरण हेतु दस्तावेज का प्रकार एवं प्रकृति का विनिश्चय रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा किया जायेगा । सम्बंधित विनिर्दिष्ट संस्था के सॉफ्टवेयर का स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के सॉफ्टवेयर से वेब एकीकरण किया जा सकेगा ।
(5) चयनित योजना के दस्तावेजों का प्रारूप सम्बंधित जिला के सहायक महानिरीक्षक के लॉगिन पर अनुमोदन हेतु ऑनलाइन प्रेषित किया जायेगा ।
(6) जिले के सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा चयनित योजना के प्रारूप (Draft)/ (Template) के ऑनलाइन अनुमोदन पश्चात सम्बंधित विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा ई- रजिस्ट्रीकरण की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी ।
(7) प्रत्येक विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा अपने लॉगिन के माध्यम से पक्षकारों के अंगूठे का निशान दर्ज करने हेतु बायोमेट्रिक डिवाइस को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के साफ्टवेयर पर रजिस्ट्रीकृत किया जायेगा ।
(8) स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण शुल्क का भुगतान रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा विहित रीति से किया जायेगा । सम्बंधित दस्तावेज पर समुचित स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण शुल्क का भुगतान सुनिश्चित करने का दायित्व सम्बंधित विनिर्दिष्ट संस्था का होगा ।
(9) सहमति के पश्चात् पक्षकार एवं साक्षी की पहचान आधार आधारित ई- के ० वाई ० सी० (c-KYC) द्वारा सत्यापित की जाएगी। पैन कार्ड / पासपोर्ट / ड्राइविंग लाइसेंस/ शस्त्र लाइसेंस , भी पहचान पत्र के रूप में स्वीकृत होंगे, जिसे प्रत्येक निष्पादक एवं साक्षी द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा ।
(10) दस्तावेज के पक्षकार पत्राचार के लिए अपनी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर प्रस्तुत कर सकते हैं ।
(11) दस्तावेज के ई- निष्पादन हेतु सॉफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या बायोमेट्रिक अंगूठे का निशान लगाना अथवा सहमति के द्वारा आधार का ई- हरताक्षर और डिजिटल फोटो खींचना, जब भी और जहां भी अपेक्षित हो, सभी निष्पादकों के लिए अनिवार्य होगा । सॉफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से अनुप्रमाणक साक्षियों के इलेक्ट्रॉनिक हरताक्षर और डिजिटल फोटो और बायोमेट्रिक थम्ब प्रिंट को ग्रहण किया जायेगा ।
(12) दस्तावेज के निष्पादन एवं पक्षकारों के पहचान से सम्बंधित कार्यवाही पूर्ण करने के पश्चात विनिर्दिष्ट संस्था के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप मे सम्बंधित रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को ऑनलाइन प्रेषित किया जायेगा ।
(13) रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी , इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्राप्त दस्तावेज को सत्यापित करेगा, दस्तावेज पर संदत्त स्टाम्प शुल्क एवं रजिस्ट्रीकरण शुल्क को सत्यापन पश्चात् लॉक करेगा, पक्षकारों के पहचान को आधार के माध्यम से प्रतिसत्यापन एवं सही तरीके से दर्ज फोटो एवं अंगूठे के निशान का समाधान करेगा । किसी प्रकार की विसंगति की दशा में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अपनी आपत्ति सहित प्रश्नगत विलेख को विनिर्दिष्ट संस्था को ऑनलाइन वापस करेगा । सम्बंधित संस्था प्राप्त आपत्ति के निस्तारण पश्चात विलेख को पुनः ऑनलाइन प्रेषित करेगा ।
(14) उपरोक्त प्रकार से समाधान होने के पश्चात् रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी द्वारा दस्तावेज के रजिस्ट्रीकरण की कार्यवाही वेबसाइट पर विहित प्रक्रिया से पूर्ण की जाएगी । इस नियमावली के प्रयोजन के लिए, अधिनियम की धारा 52, 58 व 60 के पृष्ठांकन स्वतः सृजित होंगे जिस पर रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर अथवा आधार के ई-हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित किया जायेगा ।
218
[भाग 1 -क उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(15) | इलेक्ट्रॉनिक रूप से रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पोर्टल पर अपलोड होने के उपरांत उसकी प्रति का थंबनेल प्रिंट विहित रीति से रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा संरक्षित किया जा सकता है ।
(16) अधिनियम की धारा 32 के प्रयोजनों के लिए दस्तावेजों के प्रस्तुतीकरण में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रस्तुत दस्तावेज भी सम्मिलित होंगे ।
(17) प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष दस्तावेज के पक्षकारों की उपस्थिति को अधिनियम की धारा 34 और 35 के अधीन उपस्थिति मानी जाएगी।
(1 )
ई-फाइलिंग की प्रक्रिया 7 अधिनियम की धारा 18 एवं 89 के अधीन विहित दस्तावेजों में से रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा चिन्हित दस्तावेजों के ई- रजिस्ट्रीकरण की प्रक्रिया वेबसाइट पर ई- फाइलिंग के माध्यम से की जा सकेगी ।
इस नियमावली के अधीन ई - फाइलिंग के प्रयोजनों के लिए-
(2)
(1 ) सॉफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या आधार के ई- हस्ताक्षर या बायोमेट्रिक अंगूठे का निशान लगाना और सहमति से डिजिटल फोटो खींचना, जब भी और जहां भी अपेक्षित हो, सगस्त
निष्पादको के लिए आनवाय होगा । साफ्टवेयर मॉड्यूल के माध्यम से साक्ष्यांकित साक्षियों के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर और डिजिटल फोटो और बायोमेट्रिक अंगूठा निशान को ग्रहण किया जायेगा ।
(2) पैन कार्ड नंबर या आधार संख्या (विशिष्ट पहचान संख्या)/ पासपोर्ट/ ड्राइविंग लाइसेंस शस्त्र लाइसेंस भी वैकल्पिक पहचान पत्र के रूप में विधिमान्य होंगे , जो प्रत्येक निष्पादक एवं साक्षी द्वारा प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा ।
(3) पक्षकार पत्राचार के लिए अपनी ई - मेल आईडी और मोबाइल नंबर प्रस्तुत कर सकते हैं,
(4) वह व्यक्ति जिसने अधिनियम की धारा 18 एवं धारा 89 के अधीन चिन्हित दस्तावेजों की ऑनलाइन ई- फाइलिंग की है, वह दस्तावेज के विषयवस्तु की सत्यता सिद्ध करने के लिए पूर्णतः उत्तरदायी होगा।
(5) सम्यक् स्टाम्प शुल्क या फाइलिंग शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन ही किया जा सकेगा ।
रजिस्ट्रीकृत लेखपत्रों का 8 संरक्षण
(1) इस नियमावली में विहित रीति से रजिस्ट्रीकृत दस्तावेजों से सम्बंधित समस्त डाटा अधिनियम द्वारा अपेक्षित प्रारूप में , रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक उत्तरखण्ड द्वारा समय - समय पर आवश्यकतानुसार विहित रीति से सर्वर पर संरक्षित किए जाएंगे ।
(2) ऐसे दस्तावेज जिनका रजिस्ट्रीकरण नियम 4 के अधीन उप रजिस्ट्रार/ उपनिबंधक कार्यालय में पक्षकारों की उपस्थिति के माध्यम से किया जाय , उनमे विलेखों की तैयारी, विलेख का आकार, विलेख की फोटो प्रति का स्वरूप , विलेख की फोटो प्रति का पक्षकार द्वारा सत्यापन, विलेख का मूल प्रति के साथ मिलान एवं पुष्टि, विलेख के पक्षकार यथा निष्पादक / प्रतिनिधि/ मुख्तार अथवा साक्षी के फोटो एवं अंगूठा का निशान लिए जाने के विषय में उत्तराखण्ड (कंप्यूटर द्वारा स्कैनिंग के माध्यम से दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण) नियमावली 2007 में विहित प्रावधान लागू होंगे ।
(3) इस नियमावली के अधीन ई- रजिस्ट्रीकृत / ई- फाईल दस्तावेज, पृथक अतिरिक्त ई- बही / ई - फाइल में अभिलिखित किये जायेंगे तथा दस्तावेज समस्त डाटा स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के सर्वर पर संरक्षित किये जायेंगे । लिखत का थंबनेल प्रिंट महानिरीक्षक निबंधन द्वारा विहित रीति से रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी द्वारा संरक्षित किया जायेगा ।
(4) उपर्युक्त रीति से रजिस्ट्रीकृत / ई- रजिस्ट्रीकृत / ई - फाइल किये गये दस्तावेज सम्बंधित विनिर्दिष्ट संस्था द्वारा आवेदक को डाउनलोड करने की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध करायी जा सकेगी । इसे पक्षकारों द्वारा प्रदान किए गए डिजीलॉकर अथवा ई- मेल पते पर भी भेजा जा सकता है ।
भाग 1 -क]
219 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
9 (1)
ई-खोज (ई- सर्च) / सम्पत्ति खोजें
रजिस्ट्रीकृत संपत्तियों एवं दस्तावेजों का विवरण ऑनलाइन स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक द्वारा विहित रीति से उपलब्ध कराया जायेगा।
(2) प्रमाणित प्रतियां- ई- खोज ( सम्पत्ति खोजे) के लिए अनुरोध किये जाने पर ऑनलाइन रजिस्ट्रीकरण या ई- रजिस्ट्रीकरण या ई- फाइलिंग द्वारा रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज की प्रतियां स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी । आवश्यक शुल्क का भुगतान ऑनलाइन या इस संबंध में सरकार द्वारा विहित भुगतान के किसी अन्य माध्यम से किया जाएगा । दस्तावेज की प्रगाणित प्रतियां केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी ।
(3) प्रमाणित प्रतियाँ, अधिनियम की धारा 78 के अधीन रजिस्ट्रीकरण शुल्क की सारणी द्वारा यथा उपबंधित शुल्क के भुगतान के पश्चात वेबसाइट पर विहित प्रक्रिया के अनुसार जारी की जा सकेंगी ।
(4) भार युक्त/ भार मुक्त प्रमाण पत्र, अधिनियम की धारा 78 के अधीन रजिस्ट्रीकरण शुल्क की सारणी द्वारा यथा उपबन्धित शुल्क के भुगतान के पश्चात कम्प्यूटर द्वारा जनित किये जा सकते है ।
(1 )
पक्षकार की पहचान के 10 प्रति सत्यापन
प्रत्येक पक्षकार अन्य पक्षकार की पहचान के प्रति सत्त्यापन एवं दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर की विधिमान्यता के लिए उत्तरदायी होगा ।
(2) इस नियमावली के प्रयोजनों के लिए, दरतावेज पर हस्ताक्षर/ ई-हस्ताक्षर का तात्पर्य दस्तावेज को निष्पादित करना एवं स्वीकार करना होगा।
11
संगृहीत शुल्क प्रबंधन
दस्तावेज के पक्षकारों से दस्तावेज प्रबंधन शुल्क प्राप्त किया जाएगा । शुल्क की धनराशि राज्य सरकार द्वारा नियत की जाएगी । विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन एवं आधुनिकीकरण के लिए संगृहीत दस्तावेज प्रबंधन शुल्क के प्रबंधन हेतु राज्य एवं जिला प्रयोक्ता प्रभार समिति का गठन किया जायेगा । इसकी अन्य शर्ते शासन के अनुमोदन से अवधारित की जाएँगी ।
12
महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जारी मार्गदर्शी सिद्धान्त
इस नियमावली के अधीन विनिर्दिष्ट संस्थाओं का चयन, दस्तावेजों के रजिस्ट्रीकरण, ई- रजिस्ट्रीकरण, ई- फाइलिंग , रजिस्ट्रीकृत दसतावेजों के प्रबंधन, अनुरक्षण, पुनर्प्राप्ति (Retrieval ) आदि के सम्बन्ध में दिन प्रतिदिन होने वाली विभिन्न गतिविधियों के संचालन हेतु रजिस्ट्रीकरण महानिरीक्षक आवश्यक मार्गदर्शी सिद्धान्त जारी कर सकेंगे । इस प्रकार जारी आदेशों / अनुदेशों का वही प्रभाव होगा गानो वे इस नियमावली के अधीन जारी किये गए हों । A
सोनिका, महानिरीक्षक निबंधन ,
उत्तराखण्ड , देहरादून ।
220
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
In pursuance of the provisions of clause ( 3) of Article 348 of the Constitution of India , the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No.88/म० नि ०नि०/2025-26 , Dated- June 10, 2025 for general information:
OFFICE OF THE INSPECTOR GENERAL OF REGISTRATION
UTTARAKHAND
NOTIFICATION
June10, 2025
No. 88/म०नि ०नि०/2025-26-- In exercise of the powers conferred by section 21 of the general Clauses Act . 1897 (Act 10 of 1897) read with sub- section ( 1 ) of section 69 of the Registration Act , 1908 (XVI of 1908 ) as amended and adapted in the State of Uttarakhand , the Inspector General of Registration , Uttarakhand is pleased to make the following rules namely: -
The Uttarakhand Online Registration of Document Rules , 2025
1 (1)
Short title , extent and commencement
These rules may be called the Uttarakhand Online Registration of Documents Rules , 2025 .
(2) These rules shallbe applicable to such sub - regisrtrar offices or other registration offices as may be notified by the Uttarakhand government from time to time.
(3) These rules shall come into force from the date of their publication in the official Gazette .
2
Definitions
1. ( a) "Act " means the Registration Act . 1908 ( Act no . 16 of 1908) ;
(b) "Authentication " means the process by which the Aadhaar number along with demographic information or biometric information of an individual is submittedto the Central Identities Data Repository (CIDR) for its verification and such Repository verifies the correctness , or the lack thereof on the basis of information available with it;
(c) "Authorized Officer " means the officer authorized by the specified entity to execute the document as executant for the purpose of e- registration ;
(d) "DigiLocker " means a secure cloud based platform for storage , sharing and verification of documents and certificates , established by the Ministry of Electronics and Information Technology ( Meity ) of the Government of India under the Digital India program me ;
(e) " Document Handling Fee " means the fee payable for strengthening the office and computerization and for scanning and digitizing documents preserved in the record room;
221 भाग 1 -क]
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(1) " c-Book " means the software- generated book of the register as defined under section 51 of the Registration Act , 1908 ( Act no . 16 of 1908) , which includes additional books of documents generated through the c - registration and e- filing process :
(g) " e- execution " or " electronic execution " means electronic signature on documents or e - signature of Aadhaar or electronic signature as defined under section 2( 1 ) ( ta) of the Information Technology Act , 2000 ( Act no . 21 of 2000) ;
(h) "e- filing " means online or electronic filing of documents of property referredto in sections 18( c) and 89 of the Act filed through the e - filing module ;
(i) " e-KYC " means voluntary use of Aadhaar number holders to establish their identity across various applications in a paperless and electronic form while maintaining their privacy, security, and inclusion;
(i ) " e -Registration " means online or electronic registration of documents ;
(k) " Hardware " includes electronic devices such as computers , scanners , printers , compact discs , hard drives , etc. , which are used to capture , store or modify data in digital form;
( 1 ) " Inspector- General of Registration " means the Inspector General of Registration appointed under section 3 of the Registration Act , 1908 ( Act no . 16 of 1908);
(m) "Online Document Registration Software " means a software module developedby the Inspector General of Registration for the registration of properties under these rules . It includes an " e- Registration Module " and an " e -Filing Module ;
( n) " Recording " means recording data on electronic storage media such as compact dises , tapes , hard dises and similar media, including images , to preserve them for a long period and retrieve them as and when required and includes re- recording:
(o) " Registration Officer " means Registrar and Sub- Registrar appointed under sections 6. 11 , and 12 of the Registration Act , 1908 ( Act no . 16 of 1908 ) and includes e -Registration Officer ;
(p) " Scanner " means an electronic device used in conjunction with a computer and appropriate software to convert paper documents into electronic digital images for storage on electronic media and for reproduction as and when required, and the word scanning or scans shall be construed accordingly;
(q) " Specified Entity " means any Government/ Semi- Government Department or any such organization /unit which the Inspector General of Registration authorizes for e -registration:
222
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[भाग 1 -क
(r) " Unique Application Number " means the automatically generated application number on the website after the online application is completed for registration ofdocuments under these rules ;
(s) " Website " means the official online platform designated by the Uttarakhand Stamp and Registration Department for the purposes of registeringdocuments within the jurisdiction of the State of Uttarakhand, which may be updated and amended as deemed necessary ;
(t) "Service Provider " means the license authorized to issue e - stamp and prepare other documents and provide other related services under the Uttarakhand E- Stamp Rules , 2011 through CRS in the manner prescribed by the Inspector General of Registration ;
(u ) 'Aadhaar Authentication ' means the process by which the Aadhaar number along with the demographic information or biometric information of the Aadhaar number holder is submitted to the Central Repository of UIDAI for its verification and such repository verifies the veracity or lack thereof based on the information available to it and gives a 'yes ' or 'no ' response ;
(2) "Words and expressions used but not defined herein shall have the same meaning as respectively assigned to them in the Registration Act, 1908 ( Act no . 16 of 1908 ) and the Information Technology Act , 2000 (Act no . 21 of 2000 ) ;
(1) There will be the following categories of service providers , namely
(a) individual ,
Categories and charges 3 of service provider for registration documents of
(b) Banks and financial institutions ,
(c) Post Office ,
(d) Corporations/Boards in which at least 51 percent shares are held by the Central or State Government ,
(m) a company registered under the Companies Act , 2013 ( 18 of 2013 ) ,
(f) Advocate ' who is a member of the Uttarakhand BarCouncil:
(2) The amount of application fee for the service provider will be fixed by the Inspector General of Registration . State and District User Charge Committee willbe formed for the management of service provider fees for smooth operation and modernization of departmental work . Its other conditions willbe determined with the approval of the government .
(1)
Preparation for 4 registration of document in case of presence of the party in the registration office
Before the online submission of the document in the Registration Office for registration , the presenter of cach document intended for registration shall apply on the prescribed formatby entering the details related to the document on the official website of the Stamp and Registration Department .
भाग 1 -क]
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(2) After completing the application in the above manner , the presenter of the document shall get a unique application number on the website , which shall be called the unique application number of the concerned document .
(3) On completion of the data entry, details of the application shallbe displayed on the screen. The party may modify any error before sending the application . No modification shall be possible after sending the application.
(4) After completing the application in the above manner, the presenter of the document shall get the print of the details of the application and shall present it before the registering officer at the time of registration.
(5) Documents can be submitted to the registration office within 30 days from the day following the data entry for the first time . If the document is not submitted within 30 days , fresh data entry has to be done .
(6) Online applications can be made 24x7 hours but registration time shall be during office hours .
(7) Stamps and fees to be used in online registration shall be paid through the payment method prescribedby the Government.
5 (1)
Procedure on appearance in the registration office for registration documents of
To initiate the process of registration of the document , the Registering Officer shall personally sign the printout of the " Pre-Registration Details of the online application made by the party after obtaining the signatures of the parties and preserve it along with the document in the prescribed manner.
(2) The Registering Officer, having been satisfied that the document submitted for registration is suitable for registration under the provisions of the Act, shall complete the proceedings as per the procedure prescribed on the website .
(3) The Registering Officer shall satisfy himself about interlineations , time period for presentation, chargeability of stamp duty, jurisdiction, execution, etc. , with the provisions of the Indian Stamp Act, 1899 (Act no . 2 of 1899 ) , the Registration Act, 1908 (Act no . 16 of 1908 ) and the Registration Rules .
(4) Capturing of an electronic signature orbiometric thumb impression by consent through software module or Aadhaar authentication for identification of executants and capture of digital photograph , as and when required, shall be mandatory for all executants . Wherever requiredby law, it shall be mandatory to attach electronic signatures and digital photographs and biometric thumbprints of attesting witnesses through the software module .
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[भाग 1-क
(5)
After the completion of the above proceedings in respect of each document accepted for registration , a separate registration number of the document shallbe automatically generated in the prescribed book on the website and the endorsements prescribed in sections 52, 58. and 60 of the Act shall also be generated automatically.
(6)
(7)
Registering officer shall get the print of the endorsements of the document on the reverse side of the document and shall obtain the signatures /thumb impressions of the presenter/parties /executants and witnesses of thedocument at necessary places on the endorsements and shall also put his signature .
(8)
Registering Officer after signing the endorsement prescribed under section 60 of the Act, shall get cach page of the document scanned on both sides accordingto the procedure and shall preserve it by uploading on the website in the prescribed manner .
E-Registration Process 6 (1)
For the documents registered under these rules , an index shall be automatically generated on the website as per the format prescribed under the provisions of the Act and the Uttarakhand Registration Manual .
The authorized office by the Inspector General of Registration shall be authorized to present the executed document in the manner provided on the website . In this process . the presence of the parties for e- registration shall be necessary at the office of the authorized office .
(2)
by Officer shall be appointed for e - registrationby the authorized office . An officer not below the rank of a Gazetted officer shall be designated as an authorized officer government/semi- government organizations . Where a Gazetted officer is not appointed , the senior most officer/personnel posted in that office may be nominated by the specified institution. The number of authorized officers may be more than one depending on the need of specified entity, but in such case the authorized officer should be of Gazetted category only. The regular officer employed by the Board of Directors of private institutions shall be designated as the authorized officer . The authorized officer shall electronically sign the instrument on behalf of the concerned entity as the seller and shall be responsible for the contents ofthe instrument and the identity of the executors and witnesses .
(3)
For e- registration , a login shallbe created on the website of the Stamp and Registration Department for each specified entity .
भाग 1 -क]
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225
(4) The information of the scheme selected for e- registration by the specified entity , along with a detailed description shall be made available online to the Inspector General of Registration . The type and nature of the document for e -registration in the selected schemes shallbe decidedby the Inspector General of Registration . Web integration of the software of the concerned specified entity shall be done with the software of the Stamp and Registration Department.
(5) The draft of the documents of the selected scheme shall be sent online for approval on the login of the Assistant Inspector General of the concerned district .
(6) After the online approval of the draft/template of the selected scheme by the Assistant Inspector General of the district, the process ofe- registration may be started by the concerned specified entity.
(7) The biometric device shallbe registered on the software of the Stamp and Registration Department for capturing thumb impressions of parties ,by each specified entity through its login .
(8) Stamp duty and registration fee shallbe paid in the manner prescribed by the Inspector General of Registration . It shall be the responsibility of the concerned specified entity to ensure payment of proper stamp duty and registration fee for the related document.
(9) The identity of the party as well as witnesses shall be verified by c- KYC of Aadhaar after consent . PAN Card/Passport/Driving Licence/Arms Licence , shall also be accepted as ID proof, which shallbe produced by each executant and witness .
(10) Partiesto the document may submit their email ID and mobile number for correspondence ;
(11) Capture of an electronic signature or biometric thumb impression through a software module for c- execution of a document or Aadhaar e - signature and digital photograph by consent, as and when required. shall be mandatory for all executants . Electronic signatures and digital photographs and biometric thumb print of the attesting witnesses shall be captured through the software module.
(12) After completing the proceedings relatedto the execution of the document and the identification of the parties , the document shallbe sent online by the authorized officer of the specified entity to the concerned registration officer in electronic form .
(13) The Registering Officer shall verify the document received in electronic form , lock the stamp duty and registration fee paid on the document after verification , cross - verify the identity of the parties !
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उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
through Aadhaar, and satisfy himself about the correctness of captured photographs and thumb impressions . In case of any discrepancy, the registration officer shall return the deed online to the specified entity along with his objections . The concerned entity shall resend the deed online after the disposal of the objection received .
(14) After being satisfied as above , the process of registration of the documents shallbe completed by the Registration Officer as per the procedure prescribed on the website . For the purposes of these rules , the endorsements under section 52 , 58 , and 60 of the Act shallbe generated automatically , which shall be signed by the Registration Officer by electronic signature or e - signature of Aadhaar .
(15) After the electronically registered document is uploaded on the portal of the Stamp and Registration Department , the thumbnail print of its copy shallbe preserved by the Registration Officer in the manner prescribed .
(16) The presentation of documents for the purposes of section 32 of the Act shall also include presentation ofdocumentsby electronic means .
(17) The presence of parties to the document before the authorized officer shallbe considered as presence under section 34 and 35 of the Act .
7
E-filing process
(1) Out of the documents prescribed under sections 18 and 89 , of the Act , thedocuments identified by the Inspector General of Registration for e - registration may be registered through e - filing on the website .
(2) For the purposes of e - filing under this rule : -
( 1 ) Capture of an electronic signature or biometric thumb impression through software module for e- execution of a document or Aadhaar e - signature and digital photograph by consent , as and when required , shall be mandatory for all executants . Electronic signatures and digital photographs and biometric thumb print of the attesting witnesses shallbe captured through the software module .
(2) PAN Card Number or Aadhaar Number ( Unique Identification Number ) / Passport / Driving Licence / Arms Licence shall alsobe valid ID proof, which shall be mandatory to be submitted by each executant and witness .
(3) The parties may furnish their email ID and mobile number for correspondence .
(4) The person who has done the online e - filing of the document identified under section s 18 and 89 of the Act, shallbe solely responsible for proving the correctness of the contents of the document .
( 5) The due stamp duty or filing fee shallbe paid online only.
भाग 1 -क]
227 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(1 )
of 8 Preservation Registered Documents
All the data related to the documents registered in the manner prescribed in these rules, in the format required by the Act , shallbe preserved on the server in the manner prescribed by the Inspector - General of Registration , Uttarakhand from time to time.
(2) Suchdocument which are to be registered through the presence of the parties in the registration office , the provisions prescribed in the Uttarakhand (Registration of Documents through Scanning by Computer ) Rules 2007 shallbe applicable with respect to preparation of deed , size of the deed , format of photocopy of deed, verification of photocopy of deedby the party, Comparison and verification of copy with original deed , capture of photographs and thumb impressions of the parties to the deed such as executant / representative/ attorney or witnesses .
(3) E -registered/e- filed documents under these rules shall be recorded in separate additional e -book / c- file books and all the data of the document shall be preserved on the server of the Stamp and Registration Department . The thumbnail print of the instrument shall be preserved by the registering officer in the manner prescribed by the Inspector-General of Registration .
(4) The facilitytodownload the documents registered/ c- registered/e- filed in the above manner shall be made available online to the concerned specified entity / Applicant . It may also be sent to Digi Locker or the e-mail address provided by the parties .
9 (1 )
E-Search/Property Search
The Details of registered properties and documents shall be made available online on the website of the Stamp and Registration Department in the manner prescribed by the Inspector - General of Registration .
(2) Certified Copies On request for e - search /property search , copies of documents registered through online registration or e - registration , or e - filing shall be made available online through the website of the Stamp and Registration Department . The requisite fee shall be paid online or through any other mode of payment prescribed by the Government in this regard . Certified copies of the document shallbe made available online only .
(3) Certified copies maybe issued as per the prescribed procedure on the website after payment of fees as provided by the table of registration fees under section 78 of the Act .
(4) Encumbrance / Non -Encumbrance Certificates can be generated by a computer after payment of fees as provided by the Table of Registration Fees under Section 78 of the Act .
228
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 1 -क
Verification as to the 10 ( 1 ) identity of the party
Each party shallbe responsible for verifying the identity of the other party and the validity of its signature on the document .
(2) For the purposes of these rules , signature/e- signature on a document shall mean execution and acceptance of the document .
Registration Department . The requisite fee shall be paid online or through any other mode of payment prescribed by the Government in this regard . Certified copies of the document shallbe made available online only.
(3) Certified copies may be issued as per the prescribed procedure on the website after payment of fees as provided by the table of registration fees under section 78 of the Act .
(4) Encumbrance / Non - Encumbrance Certificates can be generated by a computer after payment of fees as provided by the Table of Registration Fees under Section 78 of the Act .
Verification as to the 10. ( 1) identity of the party
Each party shallbe responsible for verifying the identity of the other party and the validity of its signature on the document .
(2) For the purposes of these rules , signature/e - signature on a document shall mean execution and acceptance ofthe document .
Fec 11 .
Collected Management
Document handling fee shall be realised from the parties of the document . Amount of the fee shall be fixed by the State Government. For the smooth operation and modernization of departmental works , State and District User Charge Committee shall be constituted for the management of the collected document Handling fee . Its other conditions shall be determined with the approval of the Government .
Guidelines issued by 12. the Inpsector- General ofRegistration
The Inspector General of Registration may issue necessary guidelines for conducting various day-to- day activities in relation to the selection of specified entities, registration of documents , e - registration , e- filing, management , maintenance , retrieval of registered documents , etc. The orders / instructions so issued shall have the same effect as if they had been issued under these rules .
SONIKA, Inspector General of Registration ,
Uttarakhand ,
पी ० एस ० यू० (आर० ई ० ) 24 हिन्दी गजट / 254- भाग 1 - क-2025 (कम्प्यूटर / रीजियो ) ।
मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक , राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड, रुड़की ।
पंजीकरण संख्या- UA/ DO/ DDN /30 / 2024-2026
सरकारी गजट, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रकाशित
रुड़की, शनिवार, दिनांक 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
भाग 8
सूचना एवं अन्य वैयक्तिक विज्ञापन आदि
सूचना
मैंने सन्यास धारण करने के पश्चात अपना नाम संवित स्वरूप से बदलकर स्वामी संवित् तीर्थ शिष्य स्वामी विष्णु तीर्थ रख लिया है । भविष्य में मुझे स्वामी संवित् तीर्थ शिष्य विष्णु तीर्थ के नाम से जाना व पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
संवित् तीर्थ शिष्य विष्णु तीर्थ निवासी-259 , हरिहर कुटीर , भागीरथी विहार आशा राम बापू आश्रम के पास हरिपुर कलां देहरादून उत्तराखण्ड ।
सूचना
I , Lt. Col. Surinder Surjit Singh , hereby declare that due to an error in my army records , my wife's name is incorrectly recorded as Charanjit Kaur. However, my wife's actual name is Althea Joy Singh. In all future references , my wife should be recognized and addressed as Althea Joy Singh , wife of Surinder Surjit Singh .
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
सुरिंदर सुरजीत सिंह निवासी म०नं ० 93 , बिघौली तहसील विकासनगर जिला- देहरादून उत्तराखण्ड ।
177- ट 178
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
सूचना
मेरी पुत्री के आधार कार्ड नं. 336852744737 में उसका नाम आनिया सैनी (AANIYA SAINI ) D / O DHIRAJ KUMAR दर्ज है । लेकिन अब निजी कारणों से मैंने अपनी पुत्री का नाम आनिया सैनी (AANIYA SAINI) से बदलकर आन्या सैनी (ANYA SAINI) लिया है । जो उसके जनम प्रमाण -पत्र सं . 224 में भी दर्ज है । भविष्य में मेरी पुत्री को आन्या सैनी (ANYA SAINI ) D / O DHIRAJ KUMAR के नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताएँ मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
DHIRAJ KUMAR
निवासी म.नं. 692 , भगवानपुर, हरिद्वार उत्तराखण्ड ।
सूचना
मेरे , एल ० आई ० सी ० पॉलिसी सं 0 113862966 में त्रुटिवश मेरी नाम- PARAS BARTWAL गलत दर्ज हो गया है । जोकि गलत है । जबकि मेरा वास्तविक नाम - SHASHANK BARTWAL है । जो मेरे हाईस्कूल अनुक्रमांक 5309022 व आधारकार्ड नं 0 . 510552434408 में भी दर्ज है । भविष्य में मुझे SHASHANK BARTWAL S / O RAKESH BARTWAL नाम से जाना पहचाना व पुकारा जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
SHASHANK BARTWAL
S / O RAKESH BARTWAL निवासी- मनं 0 . 5 बद्री केदार एन्क्लेव , लेन नं0.4 इन्दरपुर , बदीपुर रोड देहरादून, उत्तराखण्ड |
सूचना
मैंने अपने पुत्र का नाम - मधुकर पाराशर से बदलकर इवान शर्मा (IVAAN SHARMA ) कर लिया है । भविष्य में मेरे पुत्र को इवान शर्मा (IVAAN SHARMA ) के नाम से जाना पहचाना जाए ।
समस्त विधिक औपचारिकताऐं मेरे द्वारा पूर्ण कर ली गई हैं ।
श्रीमती अंचल पाराशर पत्नी श्री पुष्कर पाराशर निवासी- सी-4 , पी ० डब्ल्यू०डी० क्र्वाटर्स , यमुना कालोनी, देहरादून ।
भाग 8]
179 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
कार्यालय नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला देहरादून
उपविधि
17 मार्च , 2025 ई ०
पत्रांकः 1025 / गजट प्रकाशन/ 2024-
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला-देहरादून सीमान्तर्गत उत्तराखण्ड (नगर पालिका अधिनियम -1916) (अनुकूलन और उपान्तरण आदेश -2002) (संशोधन ) अधिनियम-2021 की धारा -298 (1 ) की खण्ड (ज ) की सूची (च ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -128 के तहत विज्ञापन पटों को नियन्त्रित करने एवं विज्ञापन शुल्क वसूली के उदेश्य से नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर देहरादून के लिए " विज्ञापन नियन्त्रण एवं शुल्क वसूली उपविधि-2024 बनाई गयी है जो नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा -301 ( 1 ) के अन्तर्गत आपत्ति एवं सुझाव हेतु समाचार पत्र दैनिक राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र अंक दिनांक 10-10-2024 में प्रकाशन किया गया है परन्तु नियत अवधि के अन्दर कोई आपत्ति एवं सुझाव नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर के कार्यालय में प्राप्त नही हुआ है ।
अतः अब प्रशासक नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर की बोर्ड बैठक दिनांक 1-3-2025 में पारित प्रस्ताव सं0-6 द्वारा नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -301 (2) के अन्तर्गत "विज्ञापन नियन्त्रण एवं शुल्क वसूली उपविधि-2024 " उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित करने की स्वीकृति दी गयी है , यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होगी ।
विज्ञापन नियन्त्रण एवं शुल्क वसूली उपविधि -2024
1. संक्षिप्त नगर प्रसार और प्रारम्भ-
क- यह उपविधि नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला-देहरादून "विज्ञापन नियन्त्रण एवं शुल्क वसूली उपविधि-2024 " कहलायेगी ।
ख- यह उपविधि नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला- देहरादून की सीमा में प्रवृत होगी ।
ग- यह उपविधि नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला - देहरादून की अधिसूचित सीमाओं में उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होगी ।
2. परिभाशाएँ-
किसी विषय या प्रसंग से कोई वाद प्रतिकुल न होने पर इस उपविधि में-
(क) " नगर पालिका" का तात्पर्य नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला- देहरादून से है ।
(ख ) "सीमा " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला - देहरादून की अधिसूचित सीमाओं से है।
( ग ) "अधिशासी अधिकारी " का तात्पर्य अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला- देहरादून से है ।
(घ ) "अध्यक्ष " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला देहरादून के निर्वाचित अध्यक्ष/ प्रशासक से है ।
(ड ) " बोर्ड " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर के निर्वाचित अध्यक्ष/ सदस्य अथवा प्रशासक से है ।
(च ) " अधिनियम" का तात्पर्य उत्तराखण्ड ( 30 प्र 0 नगरपालिका अधिनियम -1916)(अनुकूलन एवं उपान्तण एवं आदेश-2002) (संशोधन) अधिनियम -2021 से है ।
(
छ ) "विज्ञापन " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला- देहरादून की सीमान्तर्गत प्रकाशित किये जाने वाले विज्ञापन पट, होर्डिंग, यूनिपोल, बोर्ड एवं अन्य प्रचार सामग्री से है ।
180
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
3. विज्ञापन पट्ट ( होर्डिंग , यूनिपोल ) स्थल के अनुसार सड़कों के समानान्तर लगाये जायेंगे , छोटे यूनिपोल पेन्टेड सर्फेस से 2.5 मीटर की दूरी पर 5 × 3 फिट एवं सड़क से 8 फुट ऊंचाई पर होंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं प्रान्तीय मार्ग यूनिपोल के बीच कम से कम 50 मीटर की दूरी होगी।
4. यूनिपोल / होर्डिंग सड़क से समानान्तर लगाये जायेंगे , जिससे यातायात सुगमता से संचालित हो सके एवं होर्डिंग के कारण सड़क दुर्घटना न होने के उद्देश्य से जहां आवश्यकता होगी , वहां से इन यूनिपोल /होर्डिंग को 25 डिग्री के कोण से कम भी किया जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर सड़क के समानान्तर लगाने के निर्देश भी दिये जा सकते हैं ।
5. यूनिपोल/ होर्डिंग का अधिकतम साईज 20 × 10 फिट होगा।
6. होर्डिंग दो लोहे / पाईप के स्तम्भ एवं यूनिपोल लोहे / पाईप के स्तम्भ की संरचना मजबूत व फ्रेम के आकार की होनी चाहिये जिससे आंधी, तूफान आदि से न गिर पायेगी । अतः इनकी संरचना के सम्बन्ध में स्ट्रक्चर इन्जीनियर की रिपोर्ट आवेदन पत्र के साथ प्रस्तुत करनी होगी ।
7. मुख्य चैराहों व मोड़ों पर 25-25 मीटर दूरी तक होर्डिंग/ यूनिपोल नहीं लगाये जायेंगे ।
8. प्रत्येक होर्डिंग के सम्बन्ध में सड़कवार एक यूनीक कोड नम्बर दिया जायेगा, जिसके विवरण में उस होर्डिंग का आकार प्रकार होर्डिंग विज्ञापन एजेन्सी का नाम लगाने का स्थान , स्वीकृति तिथि, रसीद नम्बर व उस होर्डिंग का सड़क से एंगल भी वर्णित किया जायेगा।
9. नगर पालिका सीमा में विज्ञापन पट्ट लगाये जाने हेतु विज्ञापन एजेन्सियों द्वारा प्रत्येक वर्ष विज्ञापन पट्ट लगाने से पूर्व नगर पालिका कार्यालय में पंजीकरण कराया जायेगा। इस प्रकार केवल पंजीकृत एजेन्सियों को ही विज्ञापन पट्ट लगाये जाने की अनुमति दी जायेगी । पंजीकरण प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 1 जनवरी से 31 मार्च तक किया जायेगा ।
10. नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला -देहरादून में विज्ञापन एजेन्सियों को पंजीकृत किये जाने हेतु प्रथम बार पंजीकरण राशि रू0 20,000.00 पालिका कोष में जमा करानी होगी, तत्पश्चात पंजीकृत एजेन्सी अगले प्रत्येक वित्तीय वर्ष हेतु रू0 5,000.00 की धनराशि नवीनीकरण के रूप में नगर पालिका कोष में जमा करनी होगी ।
11. नगर पालिका परिषद् सीमा में लगाये जाने वाले विज्ञापन पट्टों एवं अन्य प्रचार सामग्री आदि का न्यूनतम निर्धारित शुल्क में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी । विज्ञापन शुल्क हेतु निर्धारित दरें निम्नवत होगी अथवा निर्धारित दरों के आधार पर विज्ञापन का ठेका सार्वजनिक नीलामी द्वारा भी दिया जा सकता है ।
विज्ञापन शुल्क की दरें
विवराण
क्र० सं०
यूनिट
दर (रू० में)
1
75.00
एन0 एच/ प्रान्तीय मार्ग के किनारे स्थित विज्ञापन पट्ट होर्डिंग / यूनीपोल (दोनों साईड कुल वर्गफिट ) ।
2
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
50.00
नगर पालिका के मुख्य मार्ग एवं आन्तरिक मोहल्लों के सार्वजनिक स्थलों पर लगने वाले विज्ञापन पट्ट होर्डिंग/ यूनीपोल (दोनों साईड कुल वर्गफिट ) ।
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष भाग 8]
181 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
3
1000.00
इन्डीकेटर बोर्ड (आई 0एच0पी0) (3 ×2 फिट ) पोल क्योक्स 2 (3 × 2 फिट)
4
प्रति पोल/ प्रतिवर्ष
75.00
निजी भवनों पर लगे ग्लोसाइन बोर्ड/ विभिन्न कम्पनीयों के उत्पादनों को प्रदर्शित करने वाले बोर्डो पर ।
निजी भवनों पर लगे विज्ञापन/होर्डिंग ।
5
फ्लाईओवर कालम ( 10 × 20 फिट ) 6
पुल/पुल के कालम पर ( 10× 20 फिट ) 7
प्रोटेक्शन स्क्रीन/नाला कल्वर्ट (8 × 15 फिट ) 8
9
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
30.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
20.00
निजी बस/ पब्लिक बस एडवरटाईजिंग 4× 15 फिट (दोनों साईड ) बैक साइड 3 × 3 फिट
10 डिलवरी वाहन/ सर्विस वाहन/ टैक्सी
11 डिमोस्टेशन वाहन
12 बिल्डिंग रैंप 80 × 20 फिट
13 पार्किंग (दो डिसप्ले बोर्ड ) 3 × 5 फिट
14 ट्री- गार्ड 1.5 × 1.5 फिट
15 ट्रैफिक बैरीकैटिंग
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
20.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
200.00
प्रतिदिन
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
2500.00 प्रतिवर्ष
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
200.00
प्रति बैरीकैटिंग
/
प्रतिवर्ष 182
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
16
[भाग 8
160.00
ट्रैफिक पोस्ट/पुलिस बूथ के ऊपर कियोस्क 2 × 3 फिट
17
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
100.00
सार्वजनिक शौचालय दो साईड वाल 8 × 10 फिट
18
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
100.00
रोड डिवाईडर / सड़क के किनारे यूनिपोल 20 × 10 लगाये जाने पर (दोनों साईड कुल वर्गफिट )
19
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
150.00
गैन्ट्री ( स्वागत द्वार ) रोड सर्फेश के सम्पूर्ण भाग को छोड़ने के पश्चात लगाये जाने पर एन०एच०/प्रान्तीय मार्ग पर
20
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
50.00
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
गैन्ट्री ( स्वागत द्वार ) रोड सर्फेश के सम्पूर्ण भाग को छोड़ने के पश्चात लगाये जाने पर एन० एच०/प्रान्तीय मार्ग पर नगर पालिका के आन्तरिक मार्ग एवं अन्य मुख्य मार्ग
21
200.00
लाऊडस्पीकर द्वारा प्रचार अतिरिक्त दिन के लिए
22
प्रतिदिन
5,000.00 /
1000.00
इवेन्ट एण्ड एक्जीबिशन/ मेला एक दिन का अतिरिक्त दिन के लिए
23 बस शैल्टर 26 × 5 फिट
24
प्रति आयोजन प्रतिदिन
100.00 प्रति वर्गफिट / प्रतिवर्ष
200.00
बिजली/टेलीफोन के खम्बों पर कियोक्स 3 × 2 फिट
25 बैलून ( गुब्बारा ) पर विज्ञापन
26
प्रति वर्गफिट/ प्रतिवर्ष
100.00 प्रति बैलून/ प्रतिवर्ष
500.00
केवल/जीओ फाईबर द्वारा टेलिविजन हेतु दिये गये कनेक्शन के अनुसार विज्ञापन शुल्क
प्रतिवर्ष/प्र ति कनेक्शन केवल आपरेटर अथवा कम्पनी को देना होगा भाग 8]
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
183
12. नगर पालिका द्वारा विज्ञापन शुल्क का ठेका 3 वर्ष के लिए दिया जायेगा तथा प्रतिवर्ष ठेके की धनराशि में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी अथवा गैन्ट्री या बस शैल्टर का ठेका BOT के आधार पर दिये जाने की अवधि कम से कम 5 वर्ष या अधिक से अधिक 10 वर्ष होगी, जिसमें प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि विज्ञापन शुल्क में की जायेगी, ठेके की अवधि पूर्ण होने के पश्चात विज्ञापन स्ट्रक्चर नगर पालिका परिषद् को हस्तगत कराना होगा।
13. निम्नलिखित क्षेत्रों में विज्ञापन पट्ट प्रतिबन्धित रहेगा-
1. धार्मिक स्थल ।
2. नगर पालिका कार्यालय के आसपास।
14. नगर पालिका सीमान्तर्गत सम्प्रदर्शित किये जाने वाले ग्लोसाईन / साईन बोर्ड जो दुकानों के नाम के साथ या स्वतन्त्र रूप से किसी वस्तु के विषय , गुण आदि के बारे में उल्लेख हो, जनसाधारण को विज्ञापन की भांति आकर्शित करता हो, के विज्ञापनकर्ता से विज्ञापन शुल्क की वसूली की जायेगी का कार्य निविदा के माध्यम से ठेके पर किया जायेगा ।
15. विज्ञापन शुल्क का भुगतान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 15 अप्रैल तक पूर्णतः अग्रिम ( 100 प्रतिशत ) जमा किया जायेगा, एक माह तक विज्ञापन शुल्क जमा न होने पर सम्बन्धित विज्ञापन एजेन्सी का पंजीकरण निरस्त करते हुए ब्लैक लिस्ट कर दिया जायेगा तथा बकाया विज्ञापन शुल्क की वसूली भू- राजस्व की भांति वसूली की जायेगी ।
16. इन्डिकेटर बोर्ड या अन्य बोर्ड जहां दोनों ओर विज्ञापन लिखें होगें वहाँ निर्धारित शुल्क दुगुने हो जायेगें, इन्डिकेटर बोर्ड का साईज 5× 3 फिट का होगा।
17. विज्ञापन शुल्क बैंक ड्राफ्ट या बैंकर्स चैक या नकद के रूप में ही जमा किया जायेगा।
18. प्रत्येक तिराहों एवं चैराहे में जहां कि समय- समय पर विज्ञापन पट्ट एकदम रास्ते के किनारे से एक दूसरे के अगल- बगल से आने वाले वाहनों का एक दूसरे को देखने में कठिनाई होती है तथा यातायात में बाधा उत्पन्न होती है, इन चैराहों एवं तिराहों में केन्द्र से चारों ओर पथों पर 25 मीटर तक विज्ञापन पट्ट लगाने में प्रतिबन्ध रहेगा।
19. पोल कियोस्क का साईज 2 × 3 फिट होगा।
20. सरकार द्वारा समय - समय पर प्रतिबन्धित उत्पादों जैसे शराब , तम्बाकू , धूम्रपाल एवं अश्लील , जातिसूचक, धार्मिक भवनाओं को उत्तेजित करने वाले, पशु क्रूरता, हिंसात्मक, विध्वंसक उत्पाद , हथियारों से सम्बन्धित उत्पाद सम्बन्धी विज्ञापनों का प्रदर्शन पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा ।
21. किसी भी विज्ञापन एजेन्सी द्वारा यदि स्वीकृत पट्ट के इतर कोई विज्ञापन प्रदर्शित किया हुआ पाया गया, तो बिना किसी नोटिस के विज्ञापन एजेन्सी का पंजीकरण निरस्त कर दिया जायेगा।
22. जनहित अथवा यातायात की दृष्टि से एवं राज्य सरकार के निर्देशानुसार यदि किसी स्वीकृत विज्ञापन पट्ट हो हटाने की आवश्यकता होती है तो बिना किसी नोटिस के विज्ञापन पट्ट हटा दिया जायेगा, जिस पर कोई प्रतिकर देय नहीं होगा ।
23. यूनियन रोड कांग्रेस द्वारा रोड शाइन (आई 0आर 0 सी0) 67-2001 में निर्धारित कलरों/ मानकों का प्रयोग ही विज्ञापन पट्टों के लिए अनुमन्य होगा। विज्ञापन पट्टों में प्रयोग किय जाने वाले रंग एवं फोन्ट साईज आफिशियल ट्रैफिक साइन के समान एवं वाहन चालक को भ्रमित करने वाले 184
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[भाग 8
नही होंगे ।
24. विज्ञापन पट्ट/ यूनीपोल का आवंटन विज्ञापन शुल्क के निर्धारित न्यूनतम धनराशि पर सीलबन्ध निविदायें आमन्त्रित कर सर्वोच्च बोलीदाता को किया जायेगा ।
25. रोड पटरी , निजी भवनों एवं भूमियों पर किसी भी प्रकार के विज्ञापन अवैध रूप से लगाने पर विज्ञापन एजेन्सी, ठेकेदार एवं भवन स्वामी से रू 0 25,000/ - जुर्माना वसूल किया जायेगा एवं अवैध विज्ञापन पट्ट को तत्काल हटाते हुए विज्ञापन एजेन्सी का पंजीकरण एवं ठेका निरस्त कर दिया जायेगा । इस पर होने वाले व्यय की वसूली विज्ञापन एजेन्सी एवं ठेकेदार से की जायेगी ।
26. जनहित में नगर पालिका में पंजीकृत विज्ञापन एजेन्सियों को जो भी विज्ञापन पट्ट स्वीकृत किये जायेंगे , उन पर सुन्दर, हरबर्टपुर का स्लोगन प्रदर्शित किये जायेंगें तथा यातायात की दृष्टि से पुलिस विभाग द्वारा लगाये जाने वाले विज्ञापन के लिए होर्डिंग / यूनीपोल में उनकी आवश्यकता अनुसार निःशुल्क स्थान दिया जायेगा ।
27. उपरोक्त शर्तों में से किसी भी शर्त का उल्लंघन पाये जाने पर बिना किसी नोटिस के एजेन्सी का पंजीकरण निरस्त करते हुए एजन्सी को ब्लैक लिस्ट करने का अधिकार बोर्ड में निहित होगा ।
शास्ति
अतः उपरोक्त उपविधि का उल्लंघन नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा- 299 (1 ) के अन्तर्गत दण्डनीय होगा , जो रू 0 1000.00 तक हो सकेगा और जब ऐसा भंग निरन्तर किया जाय , तो अग्रेत्तर जुर्माना किया जायेगा, जो प्रथम दोष सिद्धि के दिनांक के पश्चात ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसमें अपराधी का अपराध करते रहना सिद्ध हो , रू0 250.00 तक हो सकेगा । यह अधिकार अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला देहरादून में अन्तिम रूप में निहित होगा।
बी०एल ० आर्य
अधिशासी अधिकारी ,
नीरू देवी अध्यक्ष ,
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
भाग 8]
185 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
कार्यालय नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर देहरादून
उपविधि
17 मार्च , 2025 ई ०
पत्रांकः 1025 / गजट प्रकाशन/ 2024-
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर देहरादून की सीमान्तर्गत उत्तराखण्ड ( 30 प्र 0 नगर पालिका अधिनियम -1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश -2002 ) (संशोधन ) विधेयक 2021 की धारा- 298 ( 1 ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -128 ( 1 ) के अन्तर्गत भवनों या भूमि या दोनों के वार्षिक मूल्य पर सम्पत्तिकर आरोपित करने के उदेश्य से नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -140, 141 (क ), 141 (ख ) एवं धारा -144 के तहत सम्पत्ति कर निर्धारण एवं वसूली हेतु नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला देहरादून के लिए " सम्पत्ति कर उपविधि-2024 " बनाई गयी है , जो नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -301 ( 1 ) के अन्तर्गत आपत्ति एवं सुझाव हेतु समाचार पत्र दैनिक शाह टाईम्स समाचार अंक दिनांक 09-10-2024 में प्रकाशन किया गया है परन्तु नियत अवधि के अन्दर कोई आपत्ति एवं सुझाव नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर के कार्यालय में प्राप्त नही हुआ है ।
अतः नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर की बोर्ड बैठक दिनांक 1-3-2025 में पारित प्रस्ताव सं0-6 द्वारा नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -301 (2) के अन्तर्गत " सम्पत्ति कर उपविधि -2024 " उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित करने की स्वीकृति दी गयी है, यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगें ।
सम्पत्ति कर उपविधि-2024
1- संक्षिप्त नाम प्रसार और प्रारम्भः-
(क ) यह उपविधि नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला- देहरादून " सम्पत्ति कर उपविधि -2024 " कहलायेगी ।
(ख ) उ0प्र0 सरकारी गजट में दिनांक 27-04-1991 ई 0 (बैसाख 7 , 1913 शक सम्बन) में प्रकाशित टाऊन एरिया कमेटी , हरबर्टपुर की गृहकर निर्धारण एवं वसूली उपविधि-1991 के स्थान पर नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा-298 ( 1 ) के अन्तर्गत गठित सम्पत्तिकर उपविधि -2024 उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन होने की तिथि से निषप्रभावी हो जायेगी ।
(ख ) यह सम्पत्तिकर उपविधि-2024 उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन होने की तिथि से नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला- देहरादून की सीमा में प्रवृत्त होगी।
2- परिभाषाऐ
किसी विषय या प्रसंग से कोई बात प्रतिकूल न होने पर इस उपविधि में-
(क) " नगर पालिका " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला - देहरादून से है ।
(ख) " सीमा " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला - देहरादून की अधिसूचित सीमाओं सेहै ।
( ग) " अधिशासी अधिकारी " का तात्पर्य अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर , जिला -देहरादून से है ।
( घ) " अध्यक्ष " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला - देहरादून के निर्वाचित अध्यक्ष अथवा प्रशासक से है ।
186
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
(5) " बोर्ड " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला-देहरादून के निर्वाचित अध्यक्ष/ सदस्य अथवा प्रशासक से है ।
(च) " अधिनियम " का तात्पर्य उत्तराखण्ड (उ 0 प्र0 नगर पालिका अधिनियम-1916) (अनुकुलन एवं उपान्तरण आदेश -2002 ) ( संशोधन) अधिनियम -2021 से है ।
(छ) " वार्षिक मूल्य" का तात्पर्य नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -140 के अन्तर्गत वार्षिक मूल्य से है ।
(ज) "सर्किल रेट" का तात्पर्य कलैक्टर द्वारा समय - समय पर निर्धारित सर्किल रेट से है ।
(झ) " सम्पत्तिकर " का तात्पर्य नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा-128 के अन्तर्गत आवासीय भवन , व्यवसायिक भवन एवं भूमि (भू- खण्ड) के वार्षिक मूल्य पर निर्धारित सम्पत्तिकर निर्धारण एवं वसूली से है ।
(झ) " भवन एवं भूमि " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला- देहरादून सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि से है ।
(फ) " स्वामी " का तात्पर्य भवन एवं भूमि के स्वामी से है ।
(ब) " अध्यासी " का तात्पर्य नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला - देहरादून सीमान्तर्गत निर्मित भवन एवं भूमि पर किराये एवं लीज पर रहने वाले व्यक्तियों से है ।
3- वार्षिक मूल्य- नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -141 के अन्तर्गत नगर पालिकापरिषद् हरबर्टपुर जिला - देहरादून या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर क्षेत्र या उसके भाग में नियामावली विहित रीति के अनुसार समय- समय पर कर निर्धारण सूची तैयार करवायेगा । नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा- 140 की अपेक्षानुसार नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला - देहरादून की सीमाओं में स्थित भवन या भूमि या दोनों , जैसी भी स्थिति हो , का पूँजीगत मूल्य जैसी स्थिति हो , को भारतीय स्टाम्प अधिनियम -1899 के प्रयोजनार्थ कलैक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल रेट/निर्माण की दर जो प्रचलन में हो , से गुणा कर प्राप्त मूल्यः
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि सम्पत्तिकर के अन्तर्गत सामान्य कर की दर वार्षिक मूल्य के 0.01 प्रतिशत से 1 प्रतिशत के मध्य होगी तथा पूँजीगत मूल्य आधारित सम्पत्तिकर प्रारम्भ होने के आगामी 05 वर्षों में किसी भी दशा में ठीक पूर्व के वर्ष में निर्धारित कम से कम अथवा 5 प्रतिशत से अधिक नही होगा , तत्पश्चात अनुवर्ती वर्षों में सम्पत्तिकर में प्रतिवर्ष वृद्धि अधिकतम दर नियामावली में विहित रीति से तय की जायेगी ।
परन्तु यह भी कि पूँजीगत मूल्य आधारित सम्पत्तिकर का निर्धारण प्रत्येक वर्ष में एक बार किया जायेगा तथा 1 अप्रैल को प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर ही पूर्ण वर्ष का सम्पत्तिकर निर्धारित किया जायेगा ।
4- भवन एवं भूमि के वार्षिक मूल्य पर सम्पत्तिकर- नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा- 140 के अन्तर्गत नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर की सीमाओं में स्थित आवासीय , व्यवसायिक भवन एवं भूमि/ भू- खण्ड पर उपविधि के नियम -3 में दिये गये प्राविधानों के अनुसार वार्षिक मूल्य प्रचलित / निर्धारित सर्किल रेट के आधार पर सम्पत्तिकर का निर्धारण निम्नलिखित प्रतिशत के आधार पर किया जायेगा ।
भाग 8]
187 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
भवन/भूमि का प्रकार सड़क की चैड़ाई (मीटर में)
वार्षिक मूल्य का प्रतिशत
0-4 5-6 7-10
आवासीय भवन
0.1 0.2 0.3 0.4
10 से अधिक
7-10
व्यवसासिक भवन 0-4 5-6
0.3 0.4 0.5 0.6
10से अधिक
0-4 5-6 7-10
0.25
0.1 0.15 0.2
भूमि/भू-खण्ड
10 से अधिक
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर सीमान्तर्गत स्थित सड़कों की चैड़ाई के आधार पर उस क्षेत्र के लिए निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार वार्षिक मूल्य का प्रतिशत लागू होगा ।
5- कर निर्धारण सूचियाँ तैयार करना- नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -141 के अन्तर्गत नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला -देहरादून या इस नियमित उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी अर्थात अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर क्षेत्र या उसके भाग में नियामावली में विहित रीति के अनुसार समय - समय पर कर निर्धारण सूचियाँ तैयार करवायेगा तथा नगर पालिका अधिनियम की धारा -141 (ख) की उपधारा -1 के अन्तर्गत वार्षिक मूल्य के प्रयोजनों के लिए प्रत्येक भवन या भूमि का स्वामी या अध्यासी ऐसी दिनांक तक जैसा विहित किया जाय एक सम्पत्ति विवरण निर्धारित आवेदन पत्र पर प्रस्तुत करेगा ।
6- कर निर्धारित सूचियों को अधिप्रमाणित करना- नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा- 144 के अन्तर्गत विहित रीति से तैयार की गयी कर निर्धारण सूचियों पर अधिशासी अधिकारी या इस निमित उसके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी , यथास्थिति, नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर क्षेत्र या उसके किसी भाग के कर निर्धारण सूची को अपने हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित करेगा , तद्मपरान्त नगर पालिका अधिनियम -1916 धारा -142 के अन्तर्गत नगर पालिका या उनके द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी नियामावली में विहित रीति के अनुसार धारा -141 के अधीन तैयार की गयी सम्पत्तिकर निर्धारण सूची को प्रकाशित करेगा तथा सम्पत्तिकर निर्धारण सूची में अंकित प्रत्येक भवन/ भूमि के स्वामी या अध्यासी को एक डिमाण्ड नोटिस प्रस्तुत करेगा , जिसमें यह उल्लेख करना होगा कि यदि किसी को सम्पत्तिकर निर्धारण में कोई आपत्ति हो तो 15 दिनों के भीतर साक्ष्यों सहित प्रस्तुत कर सकते हैं।
7- आपत्तियों का निस्तारण- भूमि एवं भवन के वार्षिक मूल्य अथवा सम्पत्तिकर निर्धारण पर प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई एवं निस्तारण हेतु नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -143 के अन्तर्गत नगर पालिका परिषद् या इस निमित उसके द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी नियामावली में विहित रीति के अनुसार आपत्तियों का निस्तारण करेगा, आपत्तियों के निस्तारण निम्न प्रकार से किया जायेगा ।
i- प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई हेतु तिथि एवं समय नियत करते हुए आपत्तिकर्ता को लिखित सूचना प्रेषित करनी होगी ,
ii- आपत्तियों के निस्तारण की स्थिति एवं निर्णय सम्बन्धित पत्रावली अथवा आपत्ति निस्तारण पंजिका में जस्टीफिकेशन के साथ दर्ज करनी होगी,
8- कर निर्धारण सूचियों का अन्तिम प्रमाणीकरण और अभिरक्षा-
(क) अधिशासी अधिकारी या इस निमित उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी , यथास्थिति, नगर पालिका क्षेत्र अन्तर्गत प्रत्येक वार्ड हेतु निर्धारित प्रारूप में कर निर्धारण पंजिका पर आपत्तियों के निस्तारण के उपरान्त अन्तिम सम्पत्तिकर निर्धारण सूचियों को अंकित करेगा ।
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[भाग 8 (ख) कर निर्धारण पंजिका में सम्पत्तिकर निर्धारण की अन्तिम सूची दर्ज होने के उपरान्त सम्पत्तिकर माँग एवं वसूली पंजिका में दर्ज करने के पश्चात नगर पालिका अधिनियम- 1916 की धारा -166 के अन्तर्गत दावों की वसूली हेतु बिल प्रत्येक वर्ष के माह अप्रैल एवं मई में भवन एवं भूमि के स्वामी एवं अध्यासियों को प्रेषित किये जायेंगे ।
9- सम्पत्तिकर दावा व वसूली, नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -166 के अन्तर्गत सम्पत्तिकर दावों की वसूली वार्षिक माँग के सापेक्ष प्रत्येक वर्ष के 31 मार्च तक सम्पत्तिकर की धनराशि भवन स्वामी/अध्यासी को पालिका कार्यालय अथवा निकाय द्वारा वसूली हेतु अधिकृत कार्मिक को जमा कर रसीद प्राप्त करनी होगी , यदि सम्पत्तिकर की धनराशि 31 मार्च तक जमा नही होती है तो बकाया धनराशि पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत अधिभार देना होगा , अन्यथा बकाया धनराशि अधिभार सहित भू- राजस्व के रूप मे वसूली हेतु वसूली प्रमाणपत्र (आर 0सी0 ) कलैक्टर को प्रेषित कर दी जायेगी ।
10- सम्पत्तिकर की वार्षिक मांग के सापेक्ष प्रत्येक वर्ष मे 31 अक्टूबर तक सम्पत्तिकर की धनराशि एकमुस्त जमा करने पर 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की जायेगी , जो बकाया सम्पत्तिकर के बकायेदारों पर लागू नही होगी ।
11- सम्पत्तिकर निर्धारण सूचियों में संशोधन और परिवर्तन- ( 1 ) नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा -147 के अन्तर्गत अधिशासी अधिकारी नगर पालिका या उनके द्वारा प्राधिकृत अधिकारी किसी भी समय सम्पत्तिकर निर्धारण सूची में निम्नलिखित परिवर्तन या संशोधन कर सकती है ।
(क) उसमें किसी ऐसे व्यक्ति व ऐसी सम्पत्ति का नाम, जिसकी प्रविष्टि होनी आवश्यक थी या किसी ऐसी सम्पत्ति को, जो कर निर्धारण सूची में अधिप्रमाणीकृत होने के पश्चात कराधान के लिए दाईं हो गयी हो , प्रविष्टि करके; या
(ख) उसमें किसी सम्पत्ति के स्वामी या अध्यासी के नाम के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम जिसने अन्तरण द्वारा या उस प्रकार से सम्पत्ति या अन्य प्रकार से सम्पत्ति का स्वामित्व या अध्यासन का उत्तराधिकार प्राप्त किया गया हो, प्रतिस्थापित करके; या
(ग) किसी सम्पत्ति के जिसका (मूल्याकंन या कर निर्धारण गलत हो गया है या जिसका मूल्यांकन या निर्धारण कपट, मिथ्या व्यपदेशन या त्रुटि के कारण गलत किया गया है) मूल्यांकन या कर निर्धारण में वृद्धि करके; या
(घ) किसी सम्पत्ति का जिसका मूल्य भवन में किये गये परिवर्द्धन या परिवर्तन के कारण बढ़ गया हो , पुनः मूल्यांकन या पुनः कर निर्धारण करके; या
(इ) जहाँ वार्षिक मूल्य का , जिस पर कोई कर उद्ग्रहीत किया जाना हो , प्रतिशत ( नगर पालिका या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी ) द्वारा धारा -136 के उपबन्धों के अधीन परिवर्तन कर दिया गया हो , वहाँ प्रत्येक मामले में देय कर की धनराशि में तद्नुसार परिवर्तन करके ; या
(च) स्वामी के आवेदन पत्र देने पर या ऐसे सन्तोषप्रद साक्ष्य पर कि स्वामी का पता नहीं चल रहा है , और कमी करने की आवश्यकता सिद्ध कर दी गई है, स्वप्रेरणा से किसी ऐसे भवन के जो पूर्णतः या अंशतः तोड़ दिया गया है या नष्ट कर दिया गया है, मूल्यांकन में कमी करके; या भाग 8]
189 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
किसी लिपिकीय गणना सम्बन्धी या अन्य प्रत्यक्ष भूल को ठीक करके । प्रतिबन्ध- यह है कि (नगर पालिका या उसक द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी) किसी हितबन्धी व्यक्ति को ऐसे परिवर्तन की जिसे नगर पालिका परिषद् या उसके द्वारा प्राधिकृत अधिशासी अधिकारी उपधारा-1 के खण्ड (क) , ( ख) , (ग) या (घ) के अधीन , करने का प्रस्ताव करें और उस दिनांक के सम्बन्ध में जब उक्त परिवर्तन किया जायेगा , कम से कम 1 माह की नोटिस देनी होगी ।
1- नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा -143 की उपधारा (2) और (3) के उपबन्ध, जो तदन्तर्गत वर्णित आपत्तियों पर लागू होते है, यथा संभव, उपधारा -2 के अधीन की गयी नोटिस के अनुश्रवण की गयीं किसी आपत्ति पर धारा -147 की उपधारा -1 के खण्ड (च) लागू होंगे।
अधिनियम की धारा-147 की उपधारा-1 के अधीन किया गया प्रत्येक परिवर्तन धारा-144 के द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति या व्यक्तियों के हस्ताक्षरों से अधिप्रमाणित किया जायेगा, और धारा -160 केअधीन की गयी अपील के परिणाम अधीन रहते हुये उस दिनांक से प्रभावी होगा , जब अगली किस्त देय होगी । 2-
3- सम्पत्तिकर निर्धारण सूचियों में परिवर्तन हेतु विरासतन, उत्तराधिकारी, मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं बंटवारा आदि के आधार पर आवासीय भवन एवं भू- खण्ड में संशोधन/परिवर्तन के लिए रू० 2500.00 एवं व्यावसायिक भवन में संशोधन/परिवर्तन के लिए रू0 5000.00 शुल्क आवेदनकर्ता को जमा करना होगा ।
4- सम्पत्तिकर निर्धारण सूचियों में रजिस्टर्ड बैनामा पर अंकित प्रचलित सर्किल रेट की लागत पर 2 प्रतिशत शुल्क अदा करना होगा , जो आवासीय भवन एवं भू- खण्ड के लिए रू 0 2500.00 एवं व्यावसायिक भवन एवं भू- खण्ड के लिए रू0 500.00 से कम नहीं होगा ।
5- नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा -151 ( 1 ) से ( 5 ) की अपेक्षानुसार अध्यासन के कारण सम्पत्तिकर मे तद्नुसार बोर्ड द्वारा विशेष संकल्प से पारित प्रस्ताव के आधार पर विहित प्राधिकारी की स्वीकृति उपरान्त छूट प्रदान की जायेगी ।
शास्ति
उत्तराखण्ड (30 प्र 0 नगर पालिका अधिनियम 1916)(उत्तराखण्ड में यथाप्रवृत्त) की धारा 298 ( 1 ) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला -देहरादून एतद्वारा निर्देश देती है कि उपरोक्त उपविधि का उल्लघंन करने के लिए अर्थदण्ड रू0 1000.00 (एक हजार ) तक हो सकता है और यदि उल्लंघन निरन्तर जारी रहा हो तो प्रथम दोष सिद्धी के दिनांक से प्रत्येक दिन के लिए जिनके बारे में यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराध करता रहा है, अतिरिक्त जुर्माना किया जा सकता है , जो रू0 100.00 (एक सौ) प्रतिदिन तक हो सकता है ।
बी०एल ० आर्य
नीरू देवी
अधिशासी अधिकारी ,
अध्यक्ष,
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
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उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
कार्यालय नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर देहरादून
विज्ञप्ति
17 मार्च , 2025 ई 0
पत्रांकः 1025/ गजट प्रकाशन / 2024-
उत्तराखण्ड ( उ 0 प्र 0 नगरपालिका अधिनियम -1916) (अनुकूलन एवं उपान्तरण आदेश- 2002) (संशोधन ) की धारा-298 झ ( घ ) एवं पर्यावरण ( संरक्षण ) अधिनियम-1986 की धारा -3 , 6 व 25 पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गठित " ठोस अपशिष्ट प्रबन्ध नियम- 1916 " के नियम -15 (ण ) , 15(च ) एवं 15 (य, च ) तथा उत्तराखण्ड कूडा फेकना एवं थूकना अधिनियम- 2016 द्वारा प्रदत्त शक्तियो के प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद हरबर्टपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के लिए अपने सीमान्तर्गत " ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2024 " बनायी गयी है, जो नगरपालिका अधिनियम -1916 की धारा -301 ( 1 ) के अन्तर्गत आपत्ति एवं सुझाव हेतु समाचार पत्र दैनिक नवोदय टाइम्स समाचार पत्र के अंक दिनांक 08-10-2024 में प्रकाशन किया गया है परन्तु नियत अवधि के अन्दर कोई आपत्ति एवं सुझाव नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर के कार्यालय में प्राप्त नही हुआ है।
अतः अब प्रशासक नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर की बोर्ड बैठक दिनांक 1-3-2025 में पारित प्रस्ताव सं0-6 द्वारा नगर पालिका अधिनियम -1916 की धारा-301 (2 ) के अन्तर्गत " ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2024 " उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित करने की स्वीकृति दी गयी है , यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगें।
ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2024
अध्याय -1
सामान्य
1. संक्षिप्त नाम प्रसार और प्रारम्भः-
( 1 ) यह उपविधि नगरपालिका परिषद हरबर्टपुर "ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपविधि -2024 कहलाएगी ।
(2) यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाषित होने की तिथि से प्रभावी होगी ।
(3 ) नगरीय ठोस अपशिष्ट (प्रबन्धन एवं हथालन ) उपविधि -2024 ( संशोधित ) ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन एवं यूजर चार्ज उपविधि -2016 , सरकारी गजट उत्तराखण्ड दिनाँक 18-10-2014 एवं 11-07-2016 द्वारा प्रख्यापित उपविधि " ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन उपविधि-2024 " लागू होने की तिथि से स्वतः ही समाप्त हो जायेगी ।
(4 ) यह उपविधि नगरपालिका परिषद , हरबर्टपुर जनपद - देहरादून की अधिसूचित सीमाओ के भीतर लागू होगी ।
2. परिभाषाएं: -
( 1 ) किसी विषय या प्रसग से अन्यथा अपेक्षित न हो , इस उपविधि में निम्नलिखित परिभाषाएँ लागू रहेगी: -
(क ) " बल्क उघान और बागवान कचरा " का अर्थ हैं, उघानो , बागो आदि से उत्सर्जित बल्क कचरा , जिसमें घास कतरन , खरपतवार , कार्बनयुक्त कष्ट ब्राउन सामग्री जैसे पेडों की छटाई से उत्पन्न कचरा , पेडो की कटिंग, टहनियां , लकडी की कतरन, भूसा , सूखी पत्तियां , पेडों की छटाई आदि से उत्पन ठोस कचरा , जो दैनिक जैव अपघटीय कचरे के संकलन में समायोजित नही किया जा सकता हैं ।
भाग 8]
191 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून , 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(ख ) " बल्क कचरा उत्सर्जन का अर्थ हैं कि ठोस अपशिष्ट कचरा प्रबंधन नियम -2016 (जिसे बाद में यहा एस 0 डब्ल्यू0 एम 0 नियम कहा जाएगा ) के नियम 3 ( 1 ) ( 8 ) के अंतर्गत परिभाषित बल्क कचरा उत्सर्जक और सम्बद्ध वार्ड कार्यालय के अधिशासी अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा उत्सर्जक;
(ग ) " संग्रह" का अर्थ है, ठोस अपशिष्ट उत्सर्जन के स्त्रोत से ठोस अपशिष्ट को उठाना और संग्रहण बिंदुओं या किसी अन्य स्थान तक पहुचाना ,
(घ ) " सक्षम प्राधिकारी " का अर्थ हैं नगरपालिका परिषद, हरबर्टपुर के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी, अथवा उसके द्वारा अधिकृत कोई अधिकारी / कर्मचारी।
(ड ) " निर्माण एवं विध्वंस कचरा " का वही अर्थ होगा , जो निर्माण एवं विध्वंस ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियम, 2016 के नियम 3 ( 1 ) ( ग ) में परिभाषित किया गया हैं ।
(च ) "स्वच्छ क्षेत्र " का अर्थ है, किसी परिसर के सामने और चारो ओर या निकटवर्ती फुटपाथ तक विस्तारित स्वच्छ सार्वजनिक स्थल , जिसमें नाली, फुटपाथ और पटरी के किनारे शामिल हैं , जिनक रख - रखाव इन उपविधियो के अन्तर्गत किया जाना हैं।
(छ ) "सामुदायिक कूडा घर ( ढलाव ) " का अर्थ है , नगरपालिका द्वारा स्थापित और संचालित अथवा एक या अधिक परिसरों के मालिकों और/ या अधिभोगियों द्वारा मिल कर सडक किनारे ऐसे मालिकों/ अधिभोगियों के किसी एक परिसर में अथवा समक्ष अधिकारी द्वारा अधिकृत उनके साझा परिसर में पृथक्कृत ठोस अपशिष्ट के संग्रहण के लिए स्थापित और संचालित कोई संग्रह केंद्र;
( ज ) " कंटेनराइज्ड हैड कार्ट " का अर्थ है , ठोस अपशिष्ट के बिन्दु दर बिन्दु संग्रह हेतु नगर पालिका या उसके द्वारा नियुक्त ऐजेंसी / एजेंट द्वारा प्रदत्त ठेला;
(झ ) " सुपुर्दगी " का अर्थ है किसी भी श्रेणी के ठोस अपशिष्ट को नगरपालिका के वर्कर या ऐसे ठोस अपशिष्ट की सुपुर्दगी के लिए नगरपालिका परिषद , हरबर्टपुर द्वारा नियुक्त, प्राधिकृत या लाइसेंस प्रदत्त व्यक्ति को सौपना अथवा उसे नगरपालिका या नगर पालिका द्वारा अधिकृत लाइसेंस प्रदत्त एजेंसी द्वारा प्रदान किए गये वाहन में डालना ;
( ञ ) "ई - कचरा " का अर्थ वही होगा , जो ई - कचरा ( प्रबन्धन ) नियम, 2016 के नियम 3 ( 1 ) ( आर ) में निर्दिष्ट किया गया हैं;
(ट ) "फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन ( एफसीटीएस ) " का अर्थ है , एक ऊर्जा चालित मशीन , जिसका डिजाइन बिखरे हुए ठोस अपशिष्ट को कम्पैक्ट करने के लिए किया गया है और प्रचालन के समय स्थिर रहती हैं । प्रचालन के समय कम्पैक्टर मोबाईल भी हो सकती हैं, जिसे मोबाईल ट्रांसफर स्टेशन ( एमटीएस ) कहा जा सकता है ;
(ठ ) "ठोस अपशिष्ट " का अर्थ है, सभी प्रकार का कूड़ा और उसमें कोई भी ऐसा कचरा पदार्थ शामिल जिसे फेंकना अथवा संग्रह करना इन उपविधियो के अंतर्गत प्रतिबंधित है और ऐसा करने से किसी व्यक्ति , जीव जंतु को परेशानी होने या पर्यावरण अथवा सार्वजनिक स्वास्थ्य , सुरक्षा और कल्याण के प्रति खतरा पहुचाने की आशंका हो ।
( ड ) "गंदगी फैलाने " का अर्थ है , किसी ऐसी बस्ती में गंदगी उत्सर्जित करना , डालना , दबाना अथवा तत्संबंधी अनुमति देना, जहां वह गिरती , ढलती , बहती , धुल कर , रिस कर अथवा किसी अन्य तरीके से पहुचती हो अथवा गंदगी के उत्सर्जित होने , बहकर आने , धुल कर 192
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
आने या अन्य किसी तरह से खुले या सार्वजनिक स्थल पर आने की आशंका हो ।
(ढ) "स्वामी " का अर्थ है, जो किसी भवन या भूमि या किसी भाग के मालिक के रुप में अधिकारों का इस्तेमाल करता हैं;
(ण ) "अधिभोगी / पट्टेदार " का अर्थ है , ऐसा व्यक्ति जो किसी भूमि , भवन या उसके हिस्से का अधिभोगी/ पट्टेदार हो, इसमें ऐसे व्यक्ति भी शामिल है, जो तत्समय किसी प्रयोजन के लिए किसी भूमि, भवन या उसके हिस्से का इस्तेमाल कर रहा हैं।
(प ) " पैलेटाइजेशन" का अर्थ है, एक प्रक्रिया, जिसमें पैलेट तैयार की जाती हैं, जो ठोस अपशिष्ट से बने छोटे क्यूब अथवा सिलिंडरीकल टुकडे होते हैं; और उनके ईधन पैलेट्स भी शामिल होते हैं, जिन्हे रिफ्यूज डेराइब्ड ईधन कहा जाता हैं।
(फ ) "निर्धारित " का अर्थ है, एसडब्यूएम नियमो या इन उपविधियो द्वारा निर्धारित;
(ब ) "सार्वजनिक स्थल " का अर्थ है, कोई ऐसा स्थान, जो आम लोगों के इस्तेमाल और मनोरंजन के लिए सहज सुलभ हैं , भले ही वह वास्तव में लोगों द्वारा इस्तेमालया उपभोग किया जा रहा हो या नही ;
(भ ) "संग्रहण " का अर्थ है , ठोस अपशिष्ट को अस्थायी तौर पर इस तरह से संग्रह करना जिससे गंदगी न फैले और मच्छर आदि कीटों, आवारा पशुओं और अत्यधिक बदबू का प्रकोप रोका जा सके;
(म ) "सैनेटरी वर्कर " का अर्थ है, नगरपालिका के इलाकों में ठोस अपशिष्ट एकत्र करने या हटाने अथवा नालियो को साफ करने के लिए नगरपालिका/ एजेंसी द्वारा नियोजित व्यक्ति;
(य ) "शेड्यूल " का अर्थ है, इन उपविधि से सम्बद्व शेड्यूल से है,
(र ) "इस्तेमालकर्ता शुल्क/ प्रभारी " का अर्थ है, नगरपालिका द्वारा समय - समय पर सक्षम प्राधिकारी के सामान्य या विशेष आदेश के जरिए ठोस अपशिष्ट उत्सर्जक पर लगाया गया शुल्क या प्रभार, ताकि ठोस अपशिष्ट संग्रह , ढुलाई , प्रोसेसिंग और निपटान सेवाओं की आंशिक अथवा पूर्ण लागत कवर की जा सकें;
(ल ) "खाली प्लाट " का अर्थ है, प्राइवेट पार्टी/ व्यक्ति/ सरकारी एजेंसी से सम्बद्ध कोई ऐसी भूमि या खुला स्थान , जिस पर किसी का कब्जा न हो;
(3) यहां प्रयुक्त लेकिन परिभाषित न किए शब्दों और अभिव्यक्तियों का अर्थ वही होगा , जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम -2016 और निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 में अभिप्रेत होगा ।
अध्याय -2
ठोस अपशिष्ट का स्त्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण
4. ठोस अपशिष्ट का स्त्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण
(प) सभी ठोस अपशिष्ट उत्सर्जको के लिए अनिवार्य होगा कि वे उनके स्वयं के स्थलो से उत्सर्जित होने वाले ठोस अपशिष्ट को नियमित रुप से पृथक करें और उसे संगृहीत करें । यह पृथक्करण मुख्य रुप से निम्नांकित 3 वर्गों में किया जायेगाः-
(क ) गैर-जैव अपघटीय या सूखा कचरा
(ख ) जैव अपघटीय या गीला कचरा भाग 8 ]
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( ग ) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा और तीनो श्रेणियों के कचरे को कवर्ड कचरा डिब्बो में रखा जाएगा तथा समय समय पर जारी नगरपालिका के निर्देशों के अनुसार पृथकृत ठोस अपशिष्ट को निर्दिष्ट कचरा संग्रहकर्ताओं को सौंपेगा ।
(पप ) प्रत्येक बल्क ठोस अपशिष्ट उत्सर्जक के लिए अनिवार्य होगा कि वह स्वयं के स्थलों पर उज्सर्जित ठोस अपशिष्ट को पृथक करे और उसे संगृहीत करे निम्नाकित 3 वर्गों में- (क ) गैर -जैव अपघटीय या खुष्क कचरा
(ख ) जैव अपघटीय या गीला कचरा
(ग ) उपयुक्त कूड़ेदानों में जोखिमपूर्ण ठोस अपशिष्ट , जैविक ( गीला ) कचरे को अपने परिसर में प्रोसेस कर कम्पोस्ट या बायोगैस आदि तैयार करना एवं पृथक्क्त कचरे को अधिकृत कचरा संग्रहण एंजेसी जरिए अधिकृत कचरा प्रसंस्करण अथवा निपटान केंद्रो या संग्रहण केंद्रो को सौपेगा और उसके लिए को नगरपालिका द्वारा समय समय पर निर्धारित दुलाई शुल्कों का भुगतान अधिकृत कचरा संग्रह एजेंसी को करेगा ।
(पपप ) पृथक किए गए ठोस अपशिष्ट के संग्रहण के लिए कूड़ेदानों का रंग इस प्रकार होगाः- हराः- जैव अपघटीय कचरे के लिए ;
नीलाः- गैर-जैव अपघटीय या खुष्क कचरे के लिए;
कालाः- घरेलु जोखिम पूर्ण कचरे के लिए
(पअ ) सभी निवासी कल्याण और बाजार संगठन , नगरपालिका के भागीदारी से, यह सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा स्त्रोत पर कचरे का पृथक्करण किया जाए , पृथक किए गए ठोस अपशिष्ट को अलग अलग डिब्बों में संगृहीत किया जाए और फिर से इस्तेमाल करने वालों को सौपी जाएं । जैव अपघटीय कचरें की प्रोसेंसिग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे कचरे को नगरपालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा।
(अ ) 5000 वर्गमीटर क्षेत्र से अधिक क्षेत्र कब्जा रखने वाले सभी द्वारा बंद समुदाय तथा संस्थान नगरपालिका की भागीदारी के साथ , सुनिश्चित करेंगे कि उत्सर्जकों द्वारा कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण हो , पृथक किए गए कचरे को अलग अलग डिब्बों में रखेंगे और पुनः उपयोग आने वाली सामग्री को अधिकृत कूडा संग्रहकर्ताओं या अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वाले को सौपेगें । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो -मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा। इससे बचे हुए ठोस अपशिष्ट को नगरपालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(अप ) सभी होटल और रेस्त्रां , नगरपालिका के भागीदारी सें , कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे , पृथक किए गए गये ठोस अपशिष्ट को अलग अलग डिब्बे में संग्रहीत करेगें और फिर से इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री अधिकृत कचरा संग्रहकर्ताओं अथवा अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वालो को सौपेगे । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग, उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो - मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगरपालिका द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
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[भाग 8 (अपप ) कोई व्यक्ति गैर-लाइसेंसी स्थान पर कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित नही करेगा , जिसमें 100 से अधिक व्यक्ति एकत्र हों , ऐसा करने के लिए यह जरुरी होगा कि अनुसूची में निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क का भुगतान करते हुए नगरपालिका को कम से कम 3 कार्य दिवस अग्रिम लिखित जानकारी देनी होगी और ऐसा व्यक्ति या आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि ठोस कचरे को स्त्रोत पर अलग अलग किया जाए , ताकि नगर पालिका द्वारा निधारित संग्रहकर्ता या एजेंसी को सौपा जा सकें ।
(अपपप ) सेनिटरी उत्पादों से उत्सर्जित कचरे को तत्सम्बन्धी विनिर्माताओं या ब्राण्ड मालिकों द्वारा प्रदान किए गए पाउचों अथवा अखबारों या उपयुक्त जैव अपघटीय संलेपन सामग्री में सुरक्षित तरीके से संलेपित किया जाए और उसे गैर - जैव अपघटीय या खुष्क कचरे के लिए बनाए गए कूड़ेदान में रखा जाना चाहिए ।
(पग ) प्रत्येक गली विक्रेता अपने क्रियाकलाप के दौरान उत्सर्जित होने वाली खाघ सामग्री, निपटान योग्य प्लेटें , कप, डिब्बे, रैपर्स , नारियल के खोल , बचा खुचा भोजन, सब्जियां , फल आदि को अलग अलग करके उपयुक्त कूड़ेदानो में संग्रहित करेगा और उसे नगर पालिका द्वारा अधिसूचित डिपो या कंटेनर या वाहन को सौपेगा ।
(ग) उद्यान और बागवानी के कचरा उत्सर्जक अपने परिसर में उत्सर्जित कचरे को अलग से एकत्र करेंगे और समय समय पर नगरपालिका के निर्देषो के अनुसार उसका निपटान करेंगे।
(गप ) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्रत्येक कचरा उत्सर्जक द्वारा स्टोर किया जाएगा और उसे नगरपालिका या उसके द्वारा अथवा उत्तराखण्ड सरकार या प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा ऐसे कचरे का संग्रह के लिए साप्ताहिक/ समय-समय पर उपलब्ध कराए गए वाहन तक पहुचाया जाएगा अथवा ऐसे कचरे को उत्तराखण्ड सरकार या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित तरीके से निपटान के लिए निदिष्ट कचरा संग्रह केंद्र तक पहुंचाया जाएगा ।
( गपप ) निर्माण कार्यों और भवनों को ढहाए जाने से उत्सर्जित कचरा , निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम -2016 के अनुसार अलग से एकत्र और निपटान किया जायेगा।
( गपपप ) बायो मेडिकल कचरा , ई - कचरा , जोखिमपूर्ण रासायनिक एवं औद्योगिक कचरा बिना उपचारित किए ठोस कचरे में मिश्रित नहीं किया जाएगा। ऐसे कचरे का निपटान पर्यावरण ( संरक्षण ) अधिनियम , 1986 के अंतर्गत बनाए गए तत्संबंधी नियमों के अनुसार किया जाएगा ।
( गपअ ) निर्दिष्ट बूचडखानों और बाजारों को छोड कर अन्य परिसरों के प्रत्येक ऐसे मालिक / कब्जाधारी , जो किसी वाणिज्यिक गतिविधि के परिणाम स्वरुप पोल्ट्री, मछली और पशुवध संबधी कचरा उत्सर्जित करते हो, उन्हे ऐसे कचरे को अलग से बंद कंटेनर में स्वास्थ्यकर स्थिति में एकत्र करना होगा और रोजमर्रा के आधार पर निर्दिष्ट समयानुसार नगरपालिका द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्रदान किए गए कचरा वाहन / स्थल तक पहुचाना होगा । ऐसे कचरे को सामुदायिक कूडा घरो में डालना निशेध होगा ।
(गअ ) पृथक किए गए जैव अपघटीय ठोस कचरे को यदि उत्सर्जकों द्वारा कम्पोस्ट न किया गया हो , तो उसे उन्हे अपने परिसर में अलग से एकत्र करना होगा और उसकी डिलिवरी पालिका श्रमिक /वाहन/ कचरा एकत्रकर्ता / कचरा संग्रहकर्ता अथवा बल्क में जैव अपघटीय कचरा उत्सर्जित करने वाले निर्दिष्ट वाणिज्यिक उत्सर्जकों के लिए प्रदान कराए गए कचरा संग्रह भाग 8]
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वाहन तक पहुँचाया जाएगा । यह सुपुर्दगी समय समय पर अधिसूचित समयानुसार करनी होगी ।
अध्याय-3
ठोस अपशिष्ट संग्रह
5. ठोस अपशिष्ट का संग्रह निम्नांकित अनुसार किया जाएगाः-
(प) नगरपालिका के सभी क्षेत्रों या वार्डो में पृथक किए गए ठोस अपशिष्ट को घर- घर जाकर संग्रह करने के बारे में एसडब्लूएम नियमों का अनुपालन किया जाएगा , जिनके अनुसार मलिन और अनौपचारिक बस्तियों सहित दैनिक आधार पर प्रत्येक घर से कचरा एकत्र किया जाएगा। इसके लिए घर - घर जाकर कचरा एकत्र करने की अनौपचारिक प्रणाली को नगरपालिका संग्रह प्रणाली के साथ एकीकृत किया जाएगा।
(पप ) प्रत्येक घर से ठोस अपशिष्ट एकत्र करने के लिए क्षेत्रवार विशेष समय निर्धारित किया जाएगा और उसे सम्बद्ध क्षेत्र में खास- खास स्थानों पर प्रचारित किया जाएगा और नगर पालिका की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा । घर - घर जाकर ठोस अपशिष्ट एकत्र करने का समय सामान्यतया प्रातः 6 बजे से 11 बजे तक निर्धारित किया जाएगा। व्यापारिक प्रतिष्ठान , वाणिज्यिक क्षेत्रों में दुकानों या किसी अन्य संस्थागत कचरा उत्सर्जकों से ठोस अपशिष्ट एकत्र करने का समय प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा अथवा नगर पालिका द्वारा समय समय पर निर्धारित समय पर होगा।
(पपप) ठोस अपशिष्ट को स्व-स्थाने प्रोसेस करने वाले बल्क कचरा उल्सर्जकों से अपशिष्ट ठोस अपशिष्ट को एकत्र करने के प्रबंध किए जाएगे ।
(पअ ) सब्जी फल, फूल, मांस , पोल्ट्री और मछली बाजार से अपशिष्ट ठोस कचरे को रोजमर्रा के आधार पर एकत्र किया जाएगा ।
(अ ) बागवानी और उद्यान संबंधी ठोस अपशिष्ट अलग से एकत्र किया जाएगा और उसका निपटान किया जाएगा। इस प्रायोजन के लिए सप्ताह में एक या दो दिन निर्दिष्ट किए जाएंगें ।
(अप ) फलों और सब्जी बाजारों , मांस और मछली बाजारों, बल्क बागवानी और उद्यानों से उत्सर्जित जैव अपघटीय कचरे का अनुकूलतम इस्तेमाल करने और संग्रहण एवं ढुलाई की लागत में कमी लाने के लिए ऐसे ठोस अपशिष्ट को उस क्षेत्र के भीतर प्रोसेस या उपचारित किया जाएगा, जिसमें वह उत्सर्जित होता हैं ।
(अपप ) कंटेनरों में कचरे का हाथ से परिचालन निषेध हैं । यदि दबावों के कारण अपरिहार्य हो तो ठोस अपशिष्ट का हाथ से निपटान श्रमिकों की उचित देखभाल और सुरक्षा के साथ समुचित संरक्षण के तहत किया जाएगा।
(अपपप ) ठोस अपशिष्ट उत्सर्जक अपने पृथक किए गए कचरे को नगरपालिका द्वारा अथवा अधिसूचित। अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा तैनात होपर/ ऑटो-टिप्पर्स / रिक्षा आदि वाहनो में डालने के लिए जिम्मेदार होगें । बहुमंजिला इमारतों , अपार्टमेंटो , आवास परिसरों ( इन उपनियमों के खण्ड- 4 व उप - खण्ड (पअ ) और (अ ) के अंतर्गत आने वालों को छोड कर ) से उत्सर्जित पृथक किए गए कचरे को ऐसे परिसरों के मुख्य द्वार से अथवा किसी अन्य निर्दिष्ट स्थान से एकत्र किया जाएगा।
(पग ) ठोस अपशिष्ट संग्रह उपकरणों और वाहनों के चयन के लिए बदलती जरुरतों और 196
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[भाग 8 प्रौद्योगिकी में नई खोजो को ध्यान में रखा जाएगा । कचरा एकत्र करने के लिए विशेष क्षमता वाले ऐसे ऑटो टिप्पर या वाहन इंस्तेमाल किए जाएगें , जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होगे और उनमें जैव अपघटीय और गेर - जैव अपघटीय कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो पर हूटर भी लगा होगा ।
(ग ) स्वचालित ध्वनि रिकार्डिड उपकरण , घंटी या शोर के स्वीकार्य स्तर तक सीमित हॉर्न भी कचरा संग्रह वाहन में कचरा संग्रहकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा।
( गप ) प्रत्येक प्राथमिक संग्रहण तथा ढुलाई वाहन के लिए मार्ग योजनाए और नगरपालिका द्वारा या अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा । ये योजनाएं तालिकाबद्ध और जीआईएस मानचित्र में होगी , जो नगरपालिका द्वारा विधिवत रुप से अनुमोदित होगी और उनमें प्रारंभिक बिन्दु, प्रारंभ करने का समय , प्रतीक्षा स्थलों , मार्ग में रुकने का समय , अंतिम बिंदु और निर्दिष्ट मार्ग के अंतिम समय का उल्लेख होगा । नगरपालिका अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा प्रत्येक गली में एक बोर्ड लगाया जाएगा , जिस पर प्राथमिक कचरा संग्रह और ढुलाई वाहनों की समय सारणी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि क्षेत्र के निवासी निर्धारित समय पर इस सुविधा का लाभ उठा सकें। ऐसी जानकारी नगरपालिका की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।
(गपप ) तंग गलियों में , जहां ऑटो टिप्पर या वाहन की सेवाएं संभव न हों , वहां एक थ्रीव्हीलर अथवा छोटे मोटरयुक्त वाहन / साईकिल रिक्सा काम पर लगाया जाएगा , जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होंगा और उसमें गीले और सूखे कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो में टूटर लगा होगा और वह मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन के अनुकूल होगा ।
(गपपप ) अत्यंत भीड भाड वाले और अधिक तंग गलियों वाले क्षेत्रों में जहां श्रीव्हीलर या छोटे वाहन भी न जा सकें वहां साइकिल रिक्षा अथवा अन्य प्रकार के उपयुक्त उपकरण तैनात किए जाएंगे ।
(गपअ ) ऐसी छोटी , तंग और भीडी गलियों/ लेनों में जहा श्रीव्लीहर / रिक्षा आदि का संचालन संभव न हो , ऐसे स्थानों पर बस्ति/ गली के छोर पर खास जगह तय की जाएगी , जहां कचरा संग्रह वाहन खड़ा किया जा सके और वाहन के हेल्पर के पास एक सीटी होगी और वे सीटी बजाते हुए गली में ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहन के आगमन की घोशणा करेंगे । इस तरह की संग्रह प्रणाली की समय सारिणी नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी और नगरपालिका की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।
(गअ) ऑटो टिप्पर , श्रीव्हीलर्स , रिक्षा और सेवा में संलग्न किसी अन्य तरह के वाहन केवल घरों से कचरा एकत्र करेंगे , और अन्य क्षेत्र जैसे ढलाव, खुले स्थलों, मैदान , कूड़ेदानों और नालियों आदि से कचरा एकत्र नहीं करेंगे ।
(गअप) नगरपालिका या उसके अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहर्ता प्राथमिक कचरा संग्रहण के लिए क्षेत्र की सभी गलियों / लेनों को कवर करने के लिए जिम्मेदार होगें ।
भाग 8]
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अध्याय-4
ठोस अपशिष्ट का द्वितीयक संग्रहण
6. द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ में ठोस कचरे का संग्रहण निम्नाकित अनुसार किया जाएगा (प ) घरो में एकत्र किया गया पृथक ठोस कचरा , कचरा स्टोरेज डिपो , सामुदायिक कूडा घरों या अचल या चल अंतरण स्थलों या कचरे के द्वितीयक संग्रहण के लिए नगरपालिका द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर ले जाया जाएगा ।
(पप ) ऐसे द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ को कंटेनरों ( निर्दिष्ट रंग के ) से कवर किया जाएगा, जिनसे निम्नांकित के लिए अलग अलग स्टोरेज होगें-
(क ) गैर-जैव अपघटीय अथवा सूखा कचरा
(ख ) जैव अपघटीय अथवा गीला कचरा
(ग ) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा ।
(पपप ) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए नगरपालिका द्वारा चिन्हित अलग अलग कंटेनरो का इस्तेमाल निम्नांकित अनुसार किया जायेगाः हराः जैव अपघटीय कचरे के लिए नीलाः गैर - जैव अपघटीय कचरे के लिए कालाः घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए नगरपालिका समय- समय पर विभिन्न प्रकार के ठोस अपशिष्ट के संग्रहण और वितरण के लिए निर्धारित गोदामों की रंग संहिता और अन्य मानदंड अधिसूचित करेगी ताकि कचरे का सुगम और सुरक्षित संग्रहण हो सके और किसी प्रकार का मिश्रण या रिसाव न हो, जिनका अनुपालन विभिन्न प्रकार के ठोस कचरा उत्सर्जकों को करना होगा ।
(पपपप ) नगरपालिका स्वयं अथवा बाहरी एजेंसियों के जरिए ठोस कचरा संग्रहण केंद्रो का संचालन इस ढंग से करेगी कि उनके आस पास अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ स्थितियां पैदा न हों ।
(अ ) द्वितीयक संग्रहण डिपुओं में विभिन्न आकार के कंटेनर नगरपालिका या किन्ही अन्य निदिष्ट एजेंसियों द्वारा प्रदान किये जाएंगे , जो इस उप- नियमों में वर्णित अनुसार अलग अलग रंगो के होगे ।
(अप ) संग्रहण केन्द्रो का निर्माण और स्थापना इस बात को ध्यान में रख कर की जाएगी कि किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में कचरे के उत्सर्जन की मात्रा कितनी है और जनसंख्या का घनत्व कितना है ।
(अपप ) संग्रहण केन्द्र इस्तेमालकर्ता अनुकूल होंगे और उनका डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनसे कचरा ढका रहे और संग्रहण किए गये कचरे का खुले वातावरण में कोई दुष्प्रभाव न पडे ।
(अपपप) सभी आवास सहकारी समितीयों, एसोसिएशनों , रिहायशी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और द्वारा बंद समुदायों का यह दायित्व होगा कि वे इन उप - नियमों द्वारा निर्धारित रंगीन कूड़ेदान रखें और स्वयं के परिसरों में समुचित स्थानो पर पर्याप्त संख्या में ऐसे कंटेनर रखें ताकि वहां हर रोज उत्सर्जित कचरा ठीक ढग से संगृहीत किया जा सकें।
(पग ) नगरपालिका या उसकी कोई निदिष्ट एजेंसी का यह दायित्व होगा कि वे सप्ताहिक आधार पर सभी कूडाघरों की धुलाई और संक्रमणमुक्त बनाने की व्यवस्था करें ।
(ग ) सूखे कचरे ( गैर-जैव उपघटीय कचरा ) के लिए रीसाइकलिंग सेंटर
(क ) नगरपालिका अपने वर्तमान ढलावों अथवा पहचान किए गए खास स्थानों को आवश्यकतानुसार 198
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[भाग 8
रिसाइकलिंग केंद्रों के रुप में परिवर्तित करेगा, जिनका इस्तेमाल गलियों / घर घर जाकर कचरा एकत्र करने संबंधी सेवा के जरिए एकत्र किए गए सूखे कचरे को पृथक करने के लिए किया जाएगा। प्राप्त सूखे कचरे की मात्रा के अनुसार रिसाइकलिंग केंद्रों की संख्या बढाई जा सकती है ।
(ख ) गली/ घर घर जाकर कचरा संग्रहण प्रणाली के जरिए और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त केवल सूखा कचरा ( गैर-जैव अपघटीय ) इन्न निर्दिष्ट रिसाईकल केंद्रो को स्थानातरित किया जाएगा । ये निर्दिष्ट केंद्र केवल सूखा कचरा प्राप्त करेंगे।
(ग ) परिवारों के लिए प्रावधान भी होगा कि वे अपना रिसाईकिल योग्य सूखा कचरा इन रिसाईकिल केंद्रों पर सीधे जमा करा सकते है अथवा अधिकृत एजेंटो और / या नगरपालिका से अधिकृत कचरा व्यापारियों को पूर्व अधिसूचित दरो के अनूसार बैच सकते है । इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक रिसाईकिल यूनिट पर एक धर्मकांटा और काउंटर उपलब्ध कराया जाएगा । अधिकृत एजेंट और / या अधिकृत कचरा व्यापारी को इस बात की अनुमति होगी कि वे रिसाइकिल योग्य कचरे को एस 0डब्ल्यू0 एम नियमों के प्रावधानों के अनुसार द्वितीयक बाजार अथवा रिसाईकिल यूनिटों को बेच सकते है । अधिकृत एजेंट और/ या अधिकृत व्यापारी बिक्री से प्राप्त धनराशि रखने का हकदार होंगे ।
(गप ) निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए संग्रहण केंद्र
(क) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के संग्रह के लिए एक संग्रहण केंद्र उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाएगा , जहा निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्राप्त किया जाएगा, ऐसा सरकार द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार यथासमम्भव प्रत्येक वार्ड में स्थापित किया जाएगा और उसे कचरा प्राप्त करने का समय अधिसूचित करना होगा।
(ख ) नगरपालिका अपनी एजेंसी को या छूटग्राही को यह दायित्व सौप सकती है कि वह सभी कचरा उत्सर्जकों से घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा पृथककृत तरीके से एकत्र करें ।
(ग ) इस तरह प्राप्त किया गया कचरा सरकार द्वारा स्थापित जोखिमपूर्ण कचरा निपटान केंद्रो पर अलग से लाया जाएगा।
अध्याय-5
ठोस अपशिष्ट की दुलाई
7. ठोस अपशिष्ट की ढुलाई निम्नांकित बातों को ध्यान में रख कर की जाएगीः-
(प ) ठोस अपशिष्ट की ढुलाई के लिए प्रयुक्त वाहन भलीभाति कवर्ड होंगे ताकि एकत्र कचरे का दुष्प्रभाव मुक्त वातावरण पर न पडे । इन वाहनो में कम्पैक्टर और मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन शामिल हो सकते है , जो नगरपालिका द्वारा चुनी गई प्रौद्योगिकी पर निर्भर करेंगे ।
(पप ) नगरपालिका द्वारा स्थापित संग्रहण केंद्र कचरे के निपटान के लिए हर रोज काम करेंगे । कूड़ेदान या कंटेनरों के आस पास के क्षेत्र को साफ रखा जाएगा ।
(पपप ) आवासीय और अन्य क्षेत्रों से एकत्र किया गया पृथककृत जैव अपघटीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांटो जैसे कम्पोस्ट प्लांट, बायो- मिथिनेशन प्लांट या अन्य केंद्र तक कवर्ड तरीके से पहुचाया जाएगा ।
(पअ) जहा कही प्रयोज्य हो, जैव अपघटीय कचरे के लिए , ऐसे कचरे की स्व-स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।
भाग 8 ]
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(अ) एकत्र किया गया गैर - जैव अपघटीय कचरा सम्बद्व प्रोसेसिंग केंद्रो अथवा द्वितीयक संग्रहण में पहुचाया जाएगा ।
(अप ) निर्माण और विध्वंस जन्य कचरे की ढुलाई निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानो के अनुसार की जाएगी ।
(अपप ) नगरपालिका कचरे की समुचित ढंग से ढुलाई के प्रबंध करेगा । गलियों को बुहारने से उत्पन्न कचरा और नालियों से निकाली गई गाद काम समाप्त होने के तत्काल बाद हटाई जाएगी।
(अपप ) दुलाई वाहनों का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि अंतिम निपटारे से पहले कचरे के बार बार परिचालन से बचा जा सकें ।
(पग ) कचरा संग्रहण के लिए काम में लगाए गए वाहन कचरे को केवल एमटीएस अथवा एफसीटीएस, जहां कही प्रदान किए गए हों , में जमा / स्थानांतरित करेंगे ।
(ग ) यदि किसी कारणवश एम ०टी०एस ०/ एफ० सी० टी ० एस ० निर्दिष्ट स्थल पर खड़े नही पाए जाएगें , तो लदा वाहन एमटीएस अथवा एफसीटीएस के अगले निर्दिष्ट स्थल अथवा कचरे को उतारने के लिए नगरपालिका द्वारा निर्दिष्ट स्थल तक जाएगा ।
( गप ) फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रासफर स्टेशन को हूक लोडर के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाएगा ।
(गपप ) कचरे की ढुलाई के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से उत्सर्जित कचरे का परस्पर मिश्रण नही होना चाहिए ।
(अपप ) कचरे के गली स्तरीय संग्रहण और ढुलाई सेवाएं अवकाश के दिनों सहित हर दिन उपलब्ध कराई जाएंगी ।
(गअ) इस सेवा में संलग्न एमटीएस केवल गली स्तरीय प्रचालनों से कचरा संग्रह करनें वाले निर्दिष्ट ऑटो-टिप्परों , तिपहिया या अन्य वाहनों / कूडादानों से कचरा प्राप्त करेंगा ।
(गअप ) परिवारों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से गली स्तरीय और घर घर जाकर ठोस कचरा संग्रह करने में लगे ऑटो- टिप्परों , तिपहिया वाहनो , रिक्षा आदि से कचरा प्राप्त करने के लिए एक अनुमोदित रुट प्लान के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रतिबद्व एमटीएस तैनात किए जाएगें।
(गअपप ) एमटीएस और एफसीटीएस का डिजाइन ऐसा होगा , जो कचरे को प्राथमिक संग्रहण वाहनों से उतारने में कम से कम समय लें और कूड़ा करकट इधर उधर न फैले ।
(गअपपप ) ठोस कचरे को स्थानांतरित करते समय एमटीएस और एफसीटीएस के इर्द गिर्द रिसे हुए कचरे को साफ किया जाना चाहिए, ताकि कोई रिसाव न बचे । ऐसे स्थान पर सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद संक्रमण विरोधी पदार्थ इस्तेमाल किए जाने चहिए ।
(गअग ) नगरपालिका अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसी सभी द्वितीयक संग्रहण केंद्रो पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगी ।
अध्याय-6
ठोस अपषिश्ट की प्रोसेसिंग
8. ठोस अपषिश्ट की प्रोसेसिंगः: -
(प ) नगरपालिका ठोस कचरा प्रोसेसिंग केंद्रो और सम्बद्ध ढांचे के निर्माण , प्रचालन और रख - रखाव की स्वयं व्यवस्था करेगा अथवा किसी एजेंसी के द्वारा इस कार्य को अजाम देगा , ताकि ठोस कचरे के विभिन्न घटकों का अनुकूलतम उपयोग किया जा सके । इसके लिए निम्नांकित 200
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[भाग 8
प्रौद्योगिकियों सहित उपयुक्त प्रौद्योगिकी अपनाई जाएगी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा समय समय पर जारी दिशा- निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानको का अनुपालन किया जायेगाः-
(क ) ढुलाई की लागत और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को निम्नवत रखने के लिए विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी , जैसे बायो- मिथेनेशन, माइक्रोवियल कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग , एनायरोबिक डाइजेशन अथवा जैव अपघटीय कचरे की जैव -स्थिरता के लिए कोई अन्य उपयुक्त प्रोसेसिंग पद्वति;
(ख ) केंद्रीकृत स्थलों पर स्थित मध्यम / बडे कम्पोस्टिंग/ बायो- मिथेनेशन प्लांटो के जरिए ;
(ग) कचरे से ऊर्जा प्रक्रियाओं के जरिए , ठोस कचरा अधारित बिजली संयंत्रो को कचरे के ज्वलनशील अंश के लिए रिफ्यूज डेराइव्य ईधन के रुप में अथवा फीड स्टॉक आपूर्ति के रुप में ईधन प्रदान करते हुए;
(घ ) निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन प्लांटों के जरिए ।
(पप ) नगरपालिका रिफ्यूज ड्राइव फ्यूल ( आरडीएफ ) की खपत के लिए बाजार सृजित करने का प्रयास करेगा ।
(पपप ) कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट में सीधे भस्मीकरण के लिए कचरे का पूर्ण पृथक्करण अनिवार्य होगा और ऐसा करना सम्बद्ध अनुबंधो की कार्यशर्तो का हिस्सा होगा ।
(पअ) नगरपालिका सुनिश्चित करेगा कि कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच, कपडा आदि रीसाइकिल योग्य पदार्थ रीसाइकिल करने वाली अधिकृत एजेंसियो को भेजा जाए ।
9. ठोस अपशिष्ट की प्रोसेसिंग के लिए अन्य दिषा- निर्देषः-
(प ) नगरपालिका सभी निवासी कल्याण संगठनों , समूह आवास समितियों, बाजारों, द्वार बंद समुदायों और 5000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र रखने वाले संस्थानों, सभी होटलो एवं रेस्त्राओं , बैक्वेट हालों और इस तरह के अन्य स्थलों पर यथासंभव कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनशन के जरिए जैव अपघटीय कचरे वाले अन्य कचरा उत्सर्जकों को भी जैव अपघटीय कचरे की स्व-स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी।
(पप ) नगरपालिका यह नियम प्रवृत्त करेगा कि सब्जी, फल , मांस , पोल्ट्री और मछली व्यापार मंडियां अपने जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग करते समय स्वच्छ स्थितियां बनाए रखना सुनिश्चित करें ।
( पपप ) नगरपालिका यह नियम प्रवृत्त करेगा कि बागवानी, उद्यानों और पार्कों से उत्सर्जित कचरे का निपटान अलग से यथासंभव पार्को और उद्यानों में ही किया जाए ।
(पअ) नगरपालिका कचरा प्रबंधन में समुदाय को शामिल करने और घर पर ही कम्पोस्टिंग , बायो गैस उत्पादन , सामुदायिक स्तर पर कचरे की विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करेगा। परंतु ऐसा करते समय बदबू को नियंत्रित रखना और तत्संबंधी यूनिट के आसपास स्वच्छता स्थितियां बनाए रखना अनिवार्य होगा ।
भाग 8]
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अध्याय -7
ठोस अपशिष्ट का निपटान
10. ठोस अपशिष्ट का निपटान नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और गलियों में झाडू लगाने से उत्सर्जित कचरे तथा नालियों से निकलने वाली गाद का निपटान एसडब्ल्यूएम नियमों के अंतर्गत निर्धारित ढंग और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून द्वारा लागू किए गए किसी अन्य दायित्व के अनुरुप करने के लिए स्वयं अथवा किसी अन्य एजेंसी के जरिए सेनिटरी लैंडफिल और सम्बद्ध ढाचे का निर्माण , प्रचालन और रख- रखाव करेगा ।
अध्याय-8
इस्तेमालकर्ता शुल्क और स्थल पर ही जुर्माना/दंड लगाना
11. ठोस अपशिष्ट का संग्रहण , ढुलाई, निपटान के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्कः-
(क ) कचरा उत्र्सजकों से कचरा संग्रहण , ढुलाई और निपटान हेतु सेवाएं प्रदान करने के लिए नगरपालिका द्वारा इस्तेमालकर्ता शुल्क निर्धारित किया जाएगा । इस्तेमालकर्ता शुल्क की दरें अनुसूची -1 में निर्दिष्ट है ।
(ख ) कचरा उत्सर्जकों से निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली नगरपालिका अथवा अध्यक्ष/ नगरपालिका द्वारा अधिकृत एजेंसी या अधिकृत व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(ग ) नगरपालिका इन उपनियमों की अधिसूचना की तारीख से 3 माह के भीतर , इस्तेमालकर्ता शुल्क लगाने के प्रयोजन के लिए कचरा उत्सर्जन का डाटाबेस तैयार करेगा और इस्तेमालकर्ता शुल्क की बिंलिग / संग्रह / वसूली के लिए समुचित व्यवस्था विकसित करेगा । डाटाबेस को नियमित रुप से अद्यतन बनाया जाएगा ।
(घ) नगरपालिका ऑनलाइन भुगतान के सहित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली के लिए विभिन्न पद्वतियां अपनाएगा ।
(ड ) इस्तेमालंकर्ता वसूली के लिए महीने में विशेष दिन निर्धारित किए जाएंगे , जिसमें प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह को वरीयता दी जाएगी ।
(च ) वार्षिक और छमाही भुगतान की प्रणाली अपनाई जाएगी । यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क समूचे वर्ष के लिए अग्रिम अदा किया जाता है, तो ऐसे में 12 महीने के बाजए 10 महीने का शुल्क लिया जाएगा । इसी प्रकार यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली का भुगतान 6 महीने के लिए किया जाता है तो शुल्क की मांग की राशि छह महीने के बजाये साढे पांच महीने के लिए वसूल की जाएगी ।
(छ) अनुसूची 1 में वर्णित इस्तेमालकर्ता शुल्क प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 10 प्रतिशत बढ जाएगा ।
(ज ) इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक सामान्य या विशेष आदेश के जरिए अधिकृत संस्थान/व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(झ ) इस्तेमालकर्ता शुल्क के भुगतान में चूक होने के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा चूककर्ता से उसकी वसूली भू- राजस्व के बकाये की भांति वसूल की जायेगी ।
202
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[भाग 8
12. एसडब्ल्यूएम नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना/दंड: -
(क ) एसडब्ल्यूएम नियमों अथवा इन उप- नियमों के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन अथवा अनुपालन करने में विफलता के लिए इन उप - नियमों के परिशिष्ट में दी गई अनुसूची 2 में वर्णित अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा ।
(ख ) उपरोक्त खंड ( क ) में वर्णित अनुसार उल्लंघन या गैर-अनुपालन की स्थिति बार बार आने पर ऐसी प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना प्रतिदिन या महीना, जो भी लागू हो , के अनुसार लगाया जाएगा ।
(ग ) जुर्माना या दंड लगाने हेतु निर्दिष्ट/ प्राधिकृत अधिकारी अधिशासी अधिकारी , कर निरीक्षक , सफाई निरीक्षक , सब इन्स्पेक्टर , चैकी, थाना प्रभारी होगें तथा जिला मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष के सामान्य या विशेष आदेश के अधीन अन्य अधिकारियों को भी नामित कर सकते हैं । जुर्माना / दंड राशि अनुसूची-2 में दी गयी है।
( घ ) अनुसूची-2 में वर्णित जुर्माना अथवा दंड राशि प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 5 प्रतिशत बढ जाएगी ।
(ड ) निर्दिष्ट / प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जुर्माना मौके पर लगाया और वसूल किया जाएगा । जुर्माने का भुगतान मौके पर जमा न करने में उक्त धनराशि भू- राजस्व के बकाये की भांति वसूल की जायेगी एवं मामले में पर्यावरण ( संरक्षण ) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित अभियोजन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी । अध्याय-9
प्रतिभागियों के दायित्व
13. ठोस अपशिष्ट उत्सर्जकों के दायित्वः-
(प ) कूड़ा फैंकने पर पाबंदी
(क ) उत्तराखण्ड कूडा फैंकना एवं थूकना अधिनियम -2016 में दिये गये प्राविधानो के अन्तर्गत किसी सार्वजनिक स्थल पर कूडा फैलानाः अधिकृत सार्वजनिक या निजी कूडादानो के सिवाय कोई व्यक्ति किसी सर्वाजनिक स्थल पर कूडा नही फैलाएगा । कोई व्यक्ति विशेष प्रयोजन के लिए प्रावधान किए गए सार्वजनिक केन्द्रों या सुविधाओं को छोडकर किसी सार्वजनिक स्थल पर वाहनों की मरम्मत , बर्तन या कोई अन्य उपकरण धोने/ साफ करने का काम नही करेगा या किसी प्रकार का संग्रहण नही करेगा ।
(ख ) किसी संपत्ति पर कूडा फैलानाः अधिकृत निजी अथवा सार्वजनिक कूडेदानों के सिवाय कोई व्यक्ति किसी मुक्त या रिक्त संपत्ति पर कूडा नही डालेगा ।
(ग ) वाहनों से कूडा फेकनाः किसी वाहन के ड्राइवर या यात्री के रुप में कोई व्यक्ति किसी गली, सडक , फुटपाथ , खेल के मैदान , उद्यान, ट्रैफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थान पर कूडा नही फैकेगा ।
(घ ) मालवाहक वाहन से गंदगी डालनाः कोई भी व्यक्ति तब तक किसी ट्रक या अन्य मालवाहक वाहन को नही चलाएगा , जब तक कि ऐसे वाहन का निर्माण और लदान इस प्रयोजन के लिए अधिकृत न किया गया हो ताकि सडक, फुटपाथ , खेल का मैदान, उद्यान , ट्रेफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलो पर कोई लोड, पदार्थ अथवा गंदगी डालने से रोका जा सकें ।
(ड ) स्वयं / पालतू पशुओं से गंदगीः कुत्ता , बिल्ली आदि पालतू जानवरों के मालिकों का यह भी भाग 8]
203 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
दायित्व होगा कि गली अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर ऐसे जानवरो द्वारा उत्सर्जित किसी प्रकार की गंदगी को तत्काल उठाएगा साफ करेगा और इस तरह के उत्सर्जित कचरे के समुचित निपटान के लिए समुचित उपाय करेगा , जिनमें स्वयं की सीवेज प्रणाली से निपटान को वरीयता दी जाएगी ।
(च ) नालियों आदि में कचरे का निपटानः कोई व्यक्ति किसी नाली/नदी/ खुले तालाब /जल निकायों में गंदगी नही डालेगा ।
(पप ) कचरे को जलानाः सार्वजनिक स्थानों पर या निजी स्थान पर या निषेध सार्वजनिक संपत्ति पर ठोस कचरे के किसी भी प्रकार के जलाने द्वारा निपटान निशिद्ध होगा ।
(पपप ) " स्वच्छ क्षेत्र " प्रत्येक व्यक्ति यह प्रयास करेगा कि उसके स्वामित्व या कब्जे वाले परिसर के सामने कोई भी सार्वजनिक स्थान अथवा आस पास का क्षेत्र स्वच्छ रहें । इन स्थानो में फुटपाथ और खुली नालियां / गटर , सडक किनारा सामिल है , जो किसी भी तरह ठोस या तरल कचरे से मुक्त होने चाहिए ।
( पअ ) सार्वजनिक सभाओं और किसी कारण ( जुलूस , प्रर्दशनियां, सर्कस , मेले , राजनैतिक रैलियां, वाणिज्यक , धार्मिक , सामाजिक, सास्कृतिक कार्यक्रमों , विरोध प्रदर्शनो और प्रदर्शनो आदि सहित ) से सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियों, जिनमें पुलिस विभाग और/ या नगरपालिका से अनुमति अपेक्षित हो , के मामले में ऐसी गतिविधियों के आयोजनकर्ता का यह दायित्व होगा कि वह उस क्षेत्र और आस पास के क्षेत्रों की स्वस्च्छता सुनिश्चित करें ।
(अ ) ऐसे आयोजनो के मामले में आयोजक से नगरपालिका द्वारा अधिसूचित रिफंड योग्य स्वच्छता धरोहर राशि सम्बद्ध सफाई निरीक्षक या नगरपालिका द्वारा अधिकृत कर्मचारी प्राप्त करेगा , जो कार्यक्रम की अवधी में उसके पास जमा रहेगी । यह जमा राशि कार्यक्रम पूरा होने के बाद रिफंड की जाएगी लेकिन उससे पहले यह जांच की जाएगी कि उक्त सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता बहाल कर दी गई हैं । यह धरोहर राशि सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता के लिए होगी और इसमें संपत्ति को पहुचाई गई किसी भी प्रकार की क्षति का हर्जाना नही होगा। यदि आयोजनकर्ता , कार्यक्रम के आयोजन के परिणाम स्वरुप उत्सर्जित कचरे की सफाई , संग्रहण और दुलाई में नगरपालिका की सेवाए प्राप्त करना चाहते हो , तो उन्हे नगरपालिका के सम्बद्ध सफाई निरीक्षक को आवेदन करना होगा तथा इस प्रायोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किया गया अपेक्षित शुल्क जमा करना होगा।
(अप ) खाली प्लांट पर ठोस कचरा डम्प करने और गैर निर्दिष्ट स्थानों पर निर्माण और विध्वंस कचरा डाले जाने की स्थितियों से नगरपालिका निम्नांकित ढंग से निपटेगा: -
(क) नगरपालिका किसी परिषर के मालिक / अधिभोगी को नोटिस भेज सकता है , जिसमें ऐसे मालिक/ अधिभोगी से उक्त परिसर पर डाले गए किसी भी प्रकार के कचरे को नोटिस में वर्णित तरीके और समय सीमा के भीतर हटाने को कहा जाएगा।
(ख ) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाएं पूरी करने में विफल रहता है, तो ऐसे व्यक्ति को समय समय पर निर्धारित दंड का भुगतान करना होगा ।
यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाओ का अनुपालन करने में विफल (ग ) 204
[भाग 8 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
रहता है तो नगरपालिका निम्नांकित कार्यवाई कर सकता है: -
(प ) ऐसे परिसर में प्रवेश कर कचरे को साफ करना, और
(पप ) अधिभोगी से कचरा साफ करने पर किए गए व्यय को वसूल करेंगा ।
(अपप ) डिस्पोजेबल उत्पादों और सेनिटरी नेपकिन तथा डायपर्स के विनिर्माताओं या मालिकों का दायित्वः
(क ) डिस्पोजेबल उत्पादो जैसे टिन , कॉच , प्लास्टिक पैकेजिंग आदि के सभी विनिर्माताओं अथवा नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बाजारो में ऐसे उत्पाद प्रारंभ करने वाले ब्रैड मालिकों को कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए नगरपालिका को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी। नगरपालिका इस प्रावधान के लिए केन्द्र सरकार / राज्य सरकार के सम्बद्ध विभागों के साथ समन्वय कर सकती है ।
(ख ) ऐसे सभी ब्रैड मालिको को, जो गैर- जैव अपघटीय पैकेजिंग सामग्री में अपने उत्पाद बेचते या विपणन करते हैं , उन्हे ऐसी प्रणाली कायम करनी होगी , जिसमें उनके उत्पादन के कारण उत्सर्जित पैकेजिंग कचरे को वापस लिया जा सके।
( ग ) सेनिटरी नेपकिन और डायपर्स विनिर्माता या ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां इस बात की संभावनाओं का पता लगाएंगी कि उनके उत्पादो में सभी रीसाईकिल योग्य पदार्थों का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है अथवा वे अपने सेनिटरी उत्पादों के पैकेट के साथ एक ऐसा पाउच या रैपर उपलब्ध कराएंगी , जिनसें नेपकिन या डायपर का निपटान किया जा सके ।
( घ ) ऐसे सभी विनिर्माता , ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां अपने उत्पादों की रैंपिग और डिस्पोजल के लिए लोगो को शिक्षित करेगी ।
14. नगरपालिका के दायित्वः
(प ) नगरपालिका अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले भूभाग में सभी साझा गलियों / मार्ग , सार्वजनिक स्थलों , अस्थाई बस्तियों, मलिन क्षेत्रों, बाजारों , स्वयं के उद्यानों , बागों , नालियों आदि की सफाई की नियमित प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी। वह इसके लिए मानव संसाधन और मशीने लगाएगा तथा घोषित संग्रहण कंटेनर से कचरा एकत्र करने और उसे हर रोज बंद वाहनों में अंतिम निपटान स्थल तक पहुचाने के लिए बाध्य होगा , जिसके लिए नगरपालिका अपने सफाई स्टाफ और वाहनों के अलावा , अनुबंध के आधार पर प्राइवेट पार्टियों को काम पर लगा सकता है , अथवा सरकारी- निजी भागीदार व्यवस्था का सहारा ले सकता है । इसके अतिरिक्त नगरपालिका सभी वाणिज्यक क्षेत्रों ऐसे वाणिज्यक क्षेत्रो की पहचान करेगा , जिनमें दिन में दो बार झाडू लगाने की आवश्यता हों ।
(पप ) नगरपालिका अथवा उसके द्वारा संलग्न अधिकृत एजेंसी सार्वजनिक मार्गो, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, धार्मिक स्थलों और वाणिज्यिक क्षेत्रो आदि के आसपास पर्याप्त संख्या में और पर्याप्त आकार के कूड़ेदानों का रख रखाव करेगा ।
(पपप ) नगरपालिका विकेंद्रीकृत और नियमित ढंग से ठोस कचरा प्रबंधन गतिविधियों के प्रयोजन के लिए प्रत्येक वार्ड में एक वार्ड अधिकारी निर्दिष्ट करेगा , ताकि वह कंटेनरों, सार्वजनिक शौचालयों , सामुदायिक शौचालयों अथवा सर्वाजनिक स्थलो पर बने पेशाबघरों , सर्वाजनिक कचरे के लिए बनाए ट्रांसफर स्टेशन , लैंडफिल प्रोसेसिंग यूनिटों आदि स्थानो की निगरानी भाग 8]
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रख सके ।
(पअ ) सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरे के प्रथक्करण , संग्रह , ढुलाई, प्रसंस्करण और निपटान कार्यों की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा , अध्यक्ष/अधिशासी अधिकारी द्वारा नियुक्त अधिकारी / कर्मचारी को वरीयता दी जाएगी ।
(अ ) प्रत्येक वार्ड निर्धारित मानदंड के आधार पर स्वीपिंग बीट्स में विभाजित किया जाएगा और उसमें तदनुरुप कार्मिक तैनात किए जाएंगे या वर्तमान तैनाती सुसंगत बनाया जाएगा तथा अद्यतन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए उनके काम पर निगरानी रखी जाएगी । नगरपालिका जहां कही अपने स्टाफ से स्वीपिंग कराने में असर्मथ होगा, तो वह अनुबंध के जरिए बाहरी एजेंसियों से यह काम करा सकती हैं । प्रत्येक बीट का निरीक्षण दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित दैनिक आधार पर सुपरवाइजिंग अधिकारियों द्वारा किया जाएगा ।
(अप ) नगरपालिका अद्यतन सडक/ गली क्लिनिंग मशीनों , मैकेनिकल स्वीपरो अथवा उपकरणों का इस्तेमाल करेगा , जिनसे झाडू लगाने और नालियों की सफाई की सक्षमता में सुधार होगा ।
(अपप ) नगरपालिका सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी ) अभियान के माध्यम से जागरुकता और संवेदनशीलता पैदा करेगा तथा कचरा उत्सर्जको और अन्य हितभागियो को एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप- नियमों के विभिन्न प्रावधानों के बारे में प्रशिक्षित करेंगा , जिसमें इस्तेमालकर्ता शुल्क और जुर्माना/दंड संबंधी प्रावधानो की जानकारी पर विशेष बल दिया जाएगा ।
(अपपप ) नगरपालिका कचरा उत्सर्जकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे गीले कचरे का श्रोत पर ही उपचार करे । नगरपालिका विकेंद्रीकृत प्रौद्योगिकियों, जैसे बायो- मिथेनेशन, कम्पोस्टिंगआदि अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर सकता है । इन प्रोत्साहनों में परिवारों , निवासी कल्याण संगठनो और संस्थानों आदि को पुरस्कृत और सम्मान प्रदान करना, उनके नाम सम्बद्ध वेबसाइटों में प्रकाशित करना अथवा संपत्ति कर आदि में छूट प्रदान करना शामिल हो सकते है ।
(पग ) नगरपालिका स्वयं द्वारा रख रखाव किए जा रहें सभी पार्को , उद्यानों और जहां कही संभव हो , अपने अधिकार क्षेत्र वाले अन्य स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग समाप्त करेगा और उनमें कम्पोस्ट का इस्तेमाल करेगा । अनौपचारिक कचरा रिसाईकिल क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले रिसाईकिल उपायों के लिए प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा सकते है ।
( ग ) नगरपालिका ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों को सुचारु और औपचारिक बनाने के उपाय करेगा और यह प्रयास करेगा कि कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों ( कचरा बीनने वालों ) को वरीयता दी जाए , ताकि उनके कार्य स्थितियों को उन्नत बनाया जा सके और उन्हे ठोस कचरा प्रबंधन की औपचारिक प्रणाली में समाहित एवं एकीकृत किया जा सकें ।
( गप ) नगरपालिका यह सुनिश्चित करेगा कि स्वच्छता सेवा के सुविधा प्रदाता द्वारा अपने उन श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सहित वर्दी, फ्लोरेसेंट जैकेट, दस्ताले,रेनकोट,समुचित फुटवेयर और मास्क प्रदान किए जाएं , जो ठोस कचरा परिचालन कार्य करते है और यह 206
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[भाग 8
भी कि ऐसे श्रमिकों द्वारा इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए ।
(गपप ) नगरपालिका कचरे के संग्रहण , परिवहन और परिचालन में शामिल स्वयं और बाहरी एजेंसी के स्टाफ की व्यवसायिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत संरक्षा के उपयुक्त और समुचित उपकरण प्रदान करेगा ।
(गपपप ) किसी ठोस कचरा प्रोसेसिंग या उपचार या निपटान केंद्र अथवा लैंडफिल साइट पर कोई दुर्घटना होने की स्थिति में , उस केंद्र का प्रभारी अधिकारी तत्काल नगरपालिका को रिर्पोट करेगा , जो स्थिति की समीक्षा करने के बाद उस केंद्र के प्रभारी अधिकारी को आवश्यक जारी करेगा ।
(गपअ ) नियमित जांचः अध्यक्ष , उपाध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी वार्ड के विभिन्न भागों और ठोस कचरे के संग्रहण , ढुलाई , प्रोसेसिंग और निपटान से संबंधित अन्य स्थानों की नियमित जांच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप- नियमों के विभिन्न प्रावधानों का पालन हो रहा हैं ।
(गअ ) नगरपालिका अपने मुख्यालय में कॉल सेंटर की स्थापना के जरिए सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली ( पीजीआरएस ) विकसित करेगा । इस पीजीआरएस में एसएमएस आधारित सेवा, मोबाइल अप्लीकेशन अथवा वैब आधारित सेवाएं शामिल हो सकती हैं ।
(गअप ) नगरपालिका एसडब्ल्यूएम नियमों और उप- नियमों के कार्यान्वयन से सम्बद्ध कर्मचारियों की उपस्थितिदर्ज करने के लिए कार्ड प्रोद्योगिकियों/ आईसीटी प्रणाली कायम करेगा तथा ऐसी प्रणाली को वेतन/ दिहाडी/ परिश्रमिक के साथ एकीकृत करने के प्रयास करेगा ।
( गअपप ) पारदर्शिता और सर्वाजनिक पहुँचः अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नगरपालिका अपनी वेबसाइट से सारी आवश्यक सूचनाऐ प्रदान करेगा ।
(गअपपप ) नगरपालिका एस 0डब्ल्यू0 एम नियमों में वर्णित सभी अन्य दायित्व पूरे करेगा, जो इन उपनियमों में विशेष रुप से उल्लिखित नहीं किए गये हैं ।
अध्याय -10
विविध
15. इन उपनियमों की व्याख्या या कार्यान्वयन में कोई संदेह या कठिनाई आने की स्थिति में उसे अध्यक्ष, नगरपालिका के समक्ष रखा जाएगा , जिसका निर्णय ऐसे मामले में अंतिम होगा।
16. सरकारी निकायों के साथ समन्वयः नगरपालिका अन्य सरकारी एजेंसियों और प्राधिकरणों के साथ समन्वय करेगा , ताकि इन उपनियमों का अनुपालन ऐसे निकायों के अधिकार क्षेत्रया नियंत्रण में आने वाले इलाकों सुनिश्चित किया जा सके। कोई कठिनाई होने की स्थिति में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा।
17. सक्षम प्राधिकारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 और इन उपविधियो के समुचित कार्यान्वयन के लिए समय -समय पर सामान्य या विशेष आदेश जारी कर सकते हैं भाग 8 ]
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अनुसूची -1
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्क
1
2
3
अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी/ अपशिष्ट का प्रकार
क्र० सं०
1.
प्रतिमाह सेवा शुल्क (यूजर चार्जेज रुपये में )
रु 30.00 प्रतिमाह
गरीबी रेखा से नीचे के घर ( बी.पी.एल कार्ड धारक एवं ऐसे घर जिनकी छत आर ० सी ०सी० की नहीं है )
2.
रु 100.00 प्रतिमाह
गरीबी रेखा से उपर एवं मध्यम आय वर्ग के मकान / परिवार ( जिसके मकान में कम से कम 2-4 कमरे आदि निर्मित हो , ) 3.
रु 150.00 प्रतिमाह
उच्च वर्ग के परिवार/ मकान ( जिनके मकान में 4 कमरों से अधिक कमरे , फ्लैट ओर कोठी नूमा हो )
4. सब्जी एवं फल विक्रेता
5. मांस एवं मछली विक्रेता
6. रेस्ट्रोरेन्ट
7 . होटल /लॉजिक/ गेस्ट हाऊस
8. धर्मशाला
9. बरातघर ( चेरिटेबिल ) बरातघर ( नॉन- चेरिटेबिल )
10. बेकरी
11. कार्यालय/ बैक
रु 10.00 प्रतिदिन ठेली पर फेरी
रु 300.00 प्रतिमाह दुकान एंव फड
रु 1000.00 प्रतिमाह
रू 500.00 प्रतिमाह छोटे रेस्टोरेन्ट
रु 1000.00 प्रतिमाह मध्यरेस्टोरेन्ट
रु 1500.00 प्रतिमाह बडेरेस्टोरेन्ट
रु 200.00 प्रतिमाह 20 बेड तक
रु 500.00 प्रतितमाह 21 से 40 बेड तक
रु 1000.00 प्रतिमाह 41 से 100 बेड तथा इससे अधिक पर प्रति बेड रू ० 10 अतिरिक्त
रु 1000.00 प्रति उत्सव/ समारोह एवं प्रति
रु 1000.00 प्रति उत्सव / समारोह
रु 2000.00 प्रति उत्सव /समरोह
रु 200.00 प्रतिमाह
रु 200.00 प्रतिमाह 50 कर्मचारी रु 500.00 प्रतिमाह 51 से 100 कर्मचारी तक 208
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
12. स्कूल/ शिक्षण संस्थाएं (आवासीय )
13. स्कूल/ शिक्षण संस्थाएं (अनावासीय )
14
[भाग 8
रु 800.00 प्रतिमाह 101 से अधिक कर्मचारी तक
रु 2000.00 प्रतिमाह 50 बेड तक ओर उससे अधिक पर
रु 10.00 प्रति बेड
रु 1000.00 प्रतिमाह 500 विद्यार्थियो तक
रु 3000.00 प्रतिमाह 501 से अधिक विद्यार्थियो तक
रु 500.00 प्रतिमाह 20 बेड तक हॉस्पिटल/नर्सिंग होम ( बायोमेडिकल वेस्ट को छोडकर )
15. क्लीनिक/पैथोलोजी ( बायोमेडिकल वेस्ट को छोडकर )
16.
दुकान/चाय की दुकान
फैक्ट्री
17.
वर्कशॉप
18.
कबाडी
19.
20. जूस/ गन्ने का रस विक्रेता
21.
रु 1000.00 प्रतिमाह 21 से 40 बेड तक
रु 2000.00 प्रतिमाह 41 से 100बेड तक
रु 5000.00 प्रतिमाह 101 से अधिक बेड तक
रु 100.00 प्रतिमाह क्लीनिक
रु 300.00 प्रतिमाह पैथोलोजी
रु 150.00 प्रतिमाह छोटी दुकान
रु 200.00 प्रतिमाह बडी दुकान
रु 1000.00 प्रतिमाह छोटी
रु 2000.00 प्रतिमाह बड़ी
रु 200.00 प्रतिमाह छोटा वर्कशॉप
रु 500.00 प्रतिमाह बडा वर्कशॉप
रू 200.00 प्रतिमाह छोटा कबाडी रु 500.00 प्रतिमाह बडा कबाडी
रु 10.00 प्रतिदिन ठेली/फड या रु 300 प्रतिमाह
रु 500.00 प्रतिमाह दुकान
रु 1000.00 प्रतिदिन आयोजन
रु 2000.00 प्रतिदिन / प्रति विवाह
सार्वजनिक/ निजी स्थलों पर सर्कस / प्रदर्शनी / विवाह आदि आयोजन जिनमें अपशिष्ट उत्पन्न हो वैडिग प्वांन्ट भाग 8]
209
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
22.
रु 2000.00 प्रतिदिन सार्वजनिक/ निजी स्थल पर सर्कस/ प्रदर्शनी विवाह आदि आयोजन
ढहान तथा निर्माण सम्बन्धी अपशिष्ट
23. सिनेमा हॉल
24.
रु 300.00 प्रतिदिन 0.50 घनमीटर तक रु 500.00 प्रतिदिन 1.00 घनमीटर तक रु 1000.00 प्रतिदिन 6.00 घनमीटर तक तथा उससे अधिक पर रू 200.00 घनमीटर अतिरिक्त
रु 500.00 प्रतिमाह
रू 500.00 बडी दुकान अथवा टुपलैक्स दुकान
उपरोक्त के अतिरिक्त अन्य ( प्रतिष्ठान की स्थिति के अनुसार ) शोरूम/काम्पलैक्स/टावर/मॉल रु 1000.00 प्रतिमाह
इस्तेमालकर्ता शुल्क / प्रभार का भुगतान मांग जारी होने से 30 दिन के भीतर न किए जाने की स्थिति में इस्तेमालकर्ता शुल्क/प्रभार पर 10 प्रतिशत की दर से विलंम भुगतान/ प्रभार ( एलपीएससी ) लगाया जाएगा ।
अनुसूची-2
जुर्माना/दंड
अपराध क्र सं
नियम/उप नियम संख्या
1.
निम्नांकित पर लागू प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना (रुपये में )
200.00 500.00
आवासीय
बल्क जब्रेटर
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(1)(क)
5000.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले विवाह / पार्टी हाल , पार्टी लान , प्रदर्शनी और फेस्टिवल हाल , मेले स्थल
कचरे को पृथक करने और संग्रह करने तथा पृथक्कृत कचरे को इन नियमों के अनुसार सौपने में विफल रहना
2000.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले क्लबों , सिनेमाघरों , पब्स, सामुदायिक हॉल, मल्टीप्लेक्सेज और अन्य ऐसे स्थान 210
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
200.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले अन्य स्थान गैर-आवासीय
200.00
फिश, मीट विक्रेता द्वारा कूडे को पृथ्थकरण तरीके से न रखना
उल्लंघनकर्ता
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2)
सडक/ गली में 1. कूडा फैकना , थूकना
200 से 500 एवं कार्यवाही उत्तराखण्ड कूडा फेकना एवं थूकना प्रतिशेध अधिनियम 2016 के अन्तर्गत होगी । 500.00 2. नहाना , पैशाब करना , जानवरो को चारा खिलाना, कपडे धोना, वाहन धोना, गोबर नाली में बहाना
500.00 2.
कचरे आवासीय
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(1) (ख ) और (घ )
नियमानुसार सेनिटरी निपटान करने में विफल रहना ।
गैर- आवासीय / बल्क जनरेटर
2000.00 नियम के अनुसार बागवानी और उद्यान कचरे के निपटान में विफल रहना ।
500.00
आवासीय
3.
2000.00
गैर-आवासीय/ बल्क जन्नेटर
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(1) (ग )
नियम के अनुसार निर्माण और विध्वंस कचरे के निपटान में विफल रहना ।
4.
2000.00
उल्लंघनकर्ता
ठोस कचरे को खुले में का जलाना
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2) , 5 (ट ) , 211 भाग 8]
उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
5.
5000.00 एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(4)
निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन किए बिना किसी गैर लाइसेंसीकृत स्थल पर 100 व्यक्तियों से अधिक की भागीदारी के साथ
ऐसा कार्यक्रम या सभा अनुपालन करने वाले व्यक्ति अथवा ऐसा व्यक्ति जिसकी ओर से ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित की गई हो और इवेंट मैनेजर यदि कोई हो , जिसने कार्यक्रम या सभा आयोजित की हो
200.00
उल्लंघनकर्ता
6.
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(5),
नियम के अनुसार कचरे का निपटान करने में विफल रहने वाले गली विक्रेता/ वेन्डर कूडादान न रखने एवं कूडे को पृथ्थकरण न करने , अपशिष्ट भण्डारन डिपो या पात्र या वाहन में डालने में विफल रहने पर
500.00
अपराधी
7.
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2), 15 (छ )
सार्वजनिक स्थलो, सडको, गलियों अपराधी आदि में गंदगी फैलाना/ कुत्ते/ अन्य जानवरो द्वारा मल त्याग / उत्सर्जित कचरे के निपटान में विफलता
निम्नांकित उल्लंघनों के लिए महीने में केवल एक बार जुर्माना लगाया जाएगा
8.
5000.00 एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(5)
नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता
निवासी कल्याण एसोसिएशन, आर.डब्ल्यू.ए
बजार एसोसिएशन ,संघ
5000.00
द्वार बंद समुदाय
9.
212
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
संस्थान
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(7)
नियमों के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता नियमों
10.
होटल
5000.00
रेस्टोरेंट
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(8)
नियमो के अनुसार कचरे का निपटान में विफलता
11.
विनिर्माता और / या ब्राण्ड ऑनर/स्वामी
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 17(2)
उत्पादन के करण सृजित पैकेजिंग कचरे को वापस लेने की प्रणाली कायम किये बिना डिस्पोजल उत्पादों की बिक्री अथवा विपणन
25,000.00
12.
विनिर्माता और ब्राण्ड स्वामी और विपणन कुपनियां
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 17(3)
नियमों के अनुसार उपाय करने में विफलता
13
25,000.00
उल्लंघनकर्ता , ग्रुप हाउसिंग काम्पलेक्स आदि
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 15य ( ड)
नियमों के उपाय करने , भवन योजना में अपशिष्ट संग्रहण केन्द्र स्थापित करने में विफलता
500.00
14
उल्लंघनकर्ता/पर्यटक/ वाहन/ चालक
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 20(ग)
गलियों, पहाडियों , सार्वजनिक स्थलो में अपशिष्ट यथा कागज, पानी की बोतल ,शराब की बोतल , सोफ्ट ड्रिक , कैन, टैट्रा पैक अन्य कोई प्लास्टिकया कागज अपशिष्ट को फैकने पर
15
500.00
उल्लंघनकर्ता/ पर्यटक / वाहन /चालक
गलियों , पहाडियों , सार्वजनिक स्थलो में अपशिष्ट यथा
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 20(ग) भाग 8 ]
213 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
कागज,पानी की बोतल,शराब की बोतल, सोफ्ट ड्रिक, कैन, टैट्रा पैक अन्य कोई प्लास्टिक या कागज अपशिष्ट को फैकने पर
15
500.00 !
उल्लंघनकर्ता/ होटल / अतिथिग्रह स्वामी
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 20(घ)
नगरपालिका की उपविधि को होटल/ अतिथिग्रह में बोर्ड लगाकर व्यवस्था करने में विफलता
आयोजनकर्ता
16
2000.00 सार्वजनिक सभाओं (जुलूस प्रर्दशिनियों, सर्कस , मेले, राजनैतिक रैलिया, वाणिजिक, धार्मिक , सास्कृतिक कार्यक्रमों , विरोध प्रर्दशन आदि सहित से सार्वजनिक स्थलो आयोजित पर गतिधियों के क्षेत्र एवं आस-पास के क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करने में विफलता)
बी०एल ० आर्य अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
नीरू देवी अध्यक्ष , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
214
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
कार्यालय नगर पालिका परिषद हरबर्टपुर जिला देहरादून
उपविधि
17 मार्च , 2025 ई ०
पत्रांकः 1025 / गजट प्रकाशन / 2024-
नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर जिला- देहरादून सीमाओं में उत्तराखण्ड (उ0 प्र 0 नगर पालिका अधिनियम 1916) (अनुकूलन और उपान्तरण आदेश -2002) (संशोधन ) अधिनियम -2021 की धारा -298 ( 1 ) खण्ड ( ज ) सूची- ( ञ ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर देहरादून द्वारा निर्माण कार्यों के सम्पादन हेतु ठेकेदारों के पंजीकरण एवं नियन्त्रण के लिए उत्तराखण्ड सरकारी गजट के दिनांक 16-07-2016 ( आषढ 25 , 1938 शक सम्वत ) को प्रकाशित "ठेकेदारी | पंजीकरण एवं नियन्त्रण उपविधि-2024" के नियम -6, 7 एवं 9 में निम्नानुसार संशोधन किया जाता है, जो नगर पालिका अधिनियम -1916 की की धारा-301 ( 1 ) के अन्तर्गत आपत्ति एवं सुझाव हेतु समाचार पत्र दैनिक शाह टाईम्स समाचार पत्र अंक दिनांक 10-10-2024 में प्रकाशन किया गया है, परन्तु नियत अवधि के अन्दर कोई आपत्ति एवं सुझाव नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर के कार्यालय में प्राप्त नही हुआ है ।
अतः अब प्रशासक नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर की बोर्ड बैठक दिनांक 1-3-2025 में पारित प्रस्ताव सं0-6 द्वारा नगर पालिका अधिनियम-1916 की धारा -301 (2) के अन्तर्गत "ठेकेदारी पंजीकरण एवं नियन्त्रण उपविधि-2024 " उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशित करने की स्वीकृति दी गयी है , यह उपविधि उत्तराखण्ड सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगें ।
ठेकेदारी पंजीकरण एवं नियन्त्रण (संशोधन ) उपविधि -2024
स्तम्भ-2
स्तम्भ-1 विध्मान नियम
एतद्वारा प्रख्यापित नियम नियम-6 नवीनीकरण कि प्रक्रिया-
नियम-6 नवीनीकरण कि प्रक्रिया-
ठेकेदारों को प्रत्येक 2 वर्ष के बाद में निम्न श्रेणी के अनुसार अपने पंजीकरण ठेकेदारों को प्रत्येक 2 वर्ष के बाद में निम्न श्रेणी के अनुसार अपने पंजीकरण का नवीनीकरण कराना होगा-
का नवीनीकरण कराना होगा-
1- नवीनीकरण प्रत्येक 3 वर्ष के बाद में 01 अप्रैल से 31 जुलाई तक होगा। 1- नवीनीकरण प्रत्येक 2 वर्ष के बाद में 01 अप्रैल से 30 जुलाई तक ही होगा, पश्चात नवीनीकरण कराने पर प्रतिमाह रु 1000.00 का विलम्ब शुल्क का भुगतान कर नवीनीकरण किया जायेगा ।
2- नवीनीकरण से पूर्व प्रत्येक ठेकेदार को निर्धारित नवीनीकरण आवेदन पत्र रू ० 500.00 की धनराशि निकाय कोष में जमा कराकर प्राप्त करना होगा , नवीनीकरण आवेदन पत्र के साथ विगत 2 वर्ष में किये गये निर्माण कार्यों के विवरण देना होगा ।
2- नवीनीकरण से पूर्व प्रत्येक ठेकेदार को निर्धारित नवीनीकरण आवेदन पत्र के लागत रू0 100.00 होगा नगर पंचायत कार्यालय से क्रय कर विगत 02 वर्ष में किये गये कार्यों का विवरण देना होगा ।
3- नवीनीकरण 03 वर्ष के पश्चात 01 अप्रैल से 30 जून तक करना होगा , एवं नवीनीकरण शुल्क निम्न श्रेणी के अनुसार नगर पालिका परिषद् में जमा करने तथा विगत 02 वर्षों में किये गये 3- नवीनीकरण प्रत्येक वर्ष में करना होगा एवं नवीनीकरण शुल्क निम्न श्रेणी के भाग 8]
215 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून , 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
अनुसार नगर पंचायत में जमा करने तथा विगत 02 वर्षों में किये गये कार्यों का विवरण पर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी / अध्यक्ष द्वारा स्वीकृति प्रदान की जायेगी-
कार्यों का विवरण नगर पालिका को प्रस्तुत किये जाने के पश्चात तकनीकि अभियन्ता की संस्तुति के आधार पर ठेकेदारी पंजीकरण का नवीनीकरण अधिशासी अधिकारी द्वारा स्वीकृति प्रदान कीजायेगी-
(क) प्रथम श्रेणी के लिए 3,000.00
(ख ) द्वितीय श्रेणी के लिए 2,000.00
(क ) प्रथम श्रेणी के लिए 5000
(ख ) द्वितीय श्रेणी के लिए 3000 (ग ) तृतीय श्रेणी के लिए 1,000.00
(ग ) तृतीय श्रेणी के लिए 2000 4- अधिशासी अधिकारी / अध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी ठेकेदार के पंजीकरण के नवीनीकरण को उसके त्रुटिपूर्ण कार्य के लिए रोक सकता है ।
4- अधिशासी अधिकारी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी ठेकेदार के पंजीकरण के नवीनीकरण को तकनीकि अभियन्ता एवं कार्यालय रिपोर्ट के आधार पर उसकै त्रुटिपूर्ण कार्य एवं विलम्ब से कार्य करने के लिए रोक सकता है ।
5- नवीनीकरण के आवेदन पत्र के साथ प्रत्येक वर्ष में चरित्र- पत्र ( जो छः माह की अवधि के अंदर का हो ) 02 वर्ष बाद हैसियत प्रमाण-पत्र/ नवीनीकरण के समय यदि हैसियत यथावत हो तो उसके लिये शपथ-पत्र देना होगा ।
5- नवीनीकरण के आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित प्रमाण पत्र नवीनीकरण शुल्क की रसीद सहित देना होगा।
1- चरित्र प्रमाण पत्र उपजिलाधिकारी / जिलाधिकारी द्वारा निर्गत ( जो छः माह की अवधि के अंदर का हो )
2- हैसियत प्रमाण-पत्र उपजिलाधिकारी/ जिलाधिकारी ( जो छः माह की अवधि के अंदर का हो ) या यदि हैसियत यथावत हो तो विगत 03 वर्ष में निर्गत हैसियत प्रमाण पत्र सहित रु 100.00 के स्टाम्प पेपर पर नोटरी का शपथ पत्र
3- जिला पंचायत का लाईसेंस ( जो 06 माह की अवधि के अन्दर का हो)
नियम -7 निर्माण के सम्पादन के सीमा- प्रत्येक श्रेणी के ठेकेदारों को निम्नानुसार कार्य के टेण्डर लेने का अधिकार होगा-
नियम -7 निर्माण के सम्पादन के सीमा- प्रत्येक श्रेणी के ठेकेदारों को निम्नानुसार कार्य के टेण्डर लेने का अधिकार होगा-
1- प्रथम श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार सभी 216
[भाग 8 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
प्रकार ( असीमित धनराशि के ) निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होगे ।
1- प्रथम श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार सभी प्रकार (असीमित धनराशि के ) निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होगे । 2- द्वितीय श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रू ० 50.00 लाख तक के निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होंगे ।
2- द्वितीय श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रू0 10.00 लाख तक के निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होंगे ।
3- तृतीय श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रू ० 25.00 लाख तक के निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होंगे। 3- तृतीय श्रेणी में पंजीकृत ठेकेदार रु० 05.00 लाख तक के निर्माण कार्यों के टेण्डर लेने के अधिकार होंगे ।
नियम -9 निविदा स्वीकार करने का अधिकार नियम 9 निविदा स्वीकार /अस्वीकार करने का अधिकार-
ठेकेदार द्वारा डाली गयी निविदाओं ठेकेदार द्वारा डाली गयी निविदाओं में न्यूनतम निविदाओं को स्वीकृत करने का अधिकार अधिशासी अधिकारी/ अध्यक्ष का होगा , किंतु यदि न्यूनतम निविदा आंकलन से ठेकेदार के 10 प्रतिशत लाभ घटाने के बाद भी कम हैं, तो इस पर तकनिकी राय लेकर निर्णय निया जायेगा । निविदा डालने के 6 माह तक उन्हीं दरों पर कार्य करने के लिए ठेकेदार बाध्य नही होगा ।
में न्यूनतम निविदाओं को उत्तराखण्ड अधिप्राप्ति नियामावली 2017 के अन्तर्गत गठित निविदा समिति की संस्तुति पर स्वीकृत करने का अधिकार अध्यक्ष के अनुमोदन के पश्चात बोर्ड एवं प्रशासक का होगा , किंतु यदि न्यूनतम निविदा की दर /लागत स्टीमेट लागत से 10 प्रतिशत कम अथवा ठेकेदार के 10 प्रतिशत लाभांश को घटाने के बाद भी कम है तो इस पर तकनीकि अभियन्ता की राय लेकर निर्णय लिया जायेगा । निविदा डालने के 06 माह तक उन्हीं दरों पर कार्य करने के लिए ठेकेदार बाध्य होगा, यदि ठेकेदार को निविदा डालने की तिथि से 06 माह के अन्दर कार्यादेश नही दिया जाता है तो ठेकेदार उन दरों पर कार्य करने के लिए बाध्य नही होगा , ठेकेदार की सहमति पर निविदा की स्वीकृत दरों पर कार्य कराया जा सकता है ।
बी० एल ० आर्य अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
नीरू देवी अध्यक्ष , नगर पालिका परिषद् हरबर्टपुर ।
भाग 8]
217 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
कार्यालय नगर पंचायत भीमताल, (नैनीताल)
प्रस्तावित उपविधि
26 नवम्बर , 2023 ई ०
पत्रांकः 511 / उपविधि/ 2023-24 - उत्तराखण्ड नगर पालिका अधिनियम 1916 (अनुकूल एवं उपान्तरण आदेश 2002 एवं 2007) की धारा 298 झ एवं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 (1986 का 29) की धारा 3 , 6 व 25 का प्रयोग करके भारत सरकार द्वारा बनायी गयी ठोस अपशिष्ठ प्रबन्धन नियमावली 2016 के नियम 15 (ण) , तथा उत्तराखण्ड कूड़ा फेंकना तथा थूकना अधिनियम 2016 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके नगर पंचायत भीमताल , नैनीताल द्वारा अपने सीमान्तर्गत ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन हेतु निम्नलिखित उपविधि बनाकर नगर पंचायत के बोर्ड की बैठक दिनांक 03.09.2019 में प्रस्ताव संख्या 6 रखा गया एवं आपत्ति एवं सुझाव हेतु विशेष संकल्प से पारित हुआ ।
अतः समाचार पत्र में उपविधि के प्रकाशन की तिथि से 30 दिन के अन्दर लिखित सुझाव एवं आपत्तियां जिस व्यक्ति / दुकान/ प्रतिष्ठान / कार्यालय आदि को इस उपविधि का प्रभाव पड़ता हो वह अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत भीमताल , नैनीताल को प्रेषित की जा सकती है । वादमियाद प्राप्त आपत्तियों एवं सुक्षावों पर कोई विचार नही किया जायेगा ।
अध्याय-1
सामान्य
1. सक्षिप्त नाम और लागू होने की तारीखः
(1 ) ये उप - नियम नगर पंचायत भीमताल ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन उप - नियम, 2019 कहलाएंगे ।
(2) ये उप - नियम नगर पंचायत भीमताल के सरकारी गजट उत्तराखण्ड में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगे ।
(3 ) नगरीय ठोस अपशिष्ठ प्रबंन्धन उपविधि 2009 , गजट नोटिफिकेशन 16 जुलाई 2010 द्वारा प्राख्यापित उपविधि नगर पंचायत भीमताल ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन उप - नियम 2019 लागू होने की तिथि से स्वतः समाप्त हो जायेगी ।
2. 'ये उप - नियम नगर पंचायत भीमताल की सीमाओं के भीतर लागू होंगे ।
218
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
3. परिभाषाएं
(1 ) जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो , इस उप नियमों में निम्नांकित परिभाषाएं
लागू हैं:-
(क) 'बल्क उघान और बागवान कचरा " का अर्थ हैं, उघानो , बागो आदि से उत्सर्जित बल्क कचरा , जिसमें घास कतरन , खरपतवार, कार्बनयुक्त काष्ठ ब्राउन सामग्री जैसे पेडों की छटाई से उत्पन्न कचरा , पेडो की कटिंग , टहनियां, लकडी की कतरन , भूसा, सूखी पत्तियां, पेडों की छटाई आदि से उत्पन ठोस कचरा , जो दैनिक जैव अपघटीय कचरे के संकलन में समायोजित नही किया जा सकता हैं ।
(ख) 'बल्क कचरा उत्सर्जन का अर्थ हैं कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 (जिसे बाद में यहा एस.डब्ल्यू.एम नियम कहा जाएगा) के नियम 3 (1 ) (8) के अंतर्गत परिभाषित बल्क कचरा उत्सर्जक और अधिशासी अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधिसूचित ठोस कचरा उत्सर्जक ।
(ग) "संग्रह" का अर्थ है, कचरा उत्सर्जन के स्त्रोत से ठोस कचरे को उठाना और संग्रहण बिंदुओं या किसी अन्य स्थान तक पहुचाना;
(घ) सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ हैं नगर पंचायत का अध्यक्ष, अथवा उसके द्वारा अधिकृत कोई व्यक्ति।
(ड) "निर्माण एवं विध्वंस कचरा " का वही अर्थ होगा, जो निर्माण एवं विध्वंस कचरा नियम, 2016 नियम 3 (1 )(ग) में परिभाषित किया गया हैं ।
(च) "स्वच्छ क्षेत्र" का अर्थ है, किसी परिसर के सामने और चारो ओर या निकटवर्ती फुटपाथ तक विस्तारित स्वच्छ सार्वजनिक स्थल , जिसमें नाली, फुटपाथ और पटरी के किनारे शामिल हैं, जिनका रख- रखाव इन उपनियमों के अर्न्तगत किया जाना हैं ।
(छ) "सामुदायिक कूडा घर (ढलाव) " का अर्थ है , नगर पंचायत द्वारा स्थापित और संचालित अथवा एक या अधिक परिसरों के मालिकों और / या अधिभोगियों द्वारा मिल कर सडक किनारे / ऐसे मालिकों / अधिभोगियों के किसी एक परिसर में अथवा समक्ष अधिकारी द्वारा अधिकृत उनके साझा परिसर में पृथक्कृत ठोस कचरे के संग्रहण के लिए स्थापित और संचालित कोई संग्रह केंद्र ।
(ज) "कंटेनराइज्ड हैड कार्ट" का अर्थ है, ठोस कचरे के बिन्दु दर बिन्दु संग्रह हेतु नगर पंचायत या उसके द्वारा नियुक्त ऐजेंसी / एजेंट द्वारा प्रदत्त ठेला;
(झ) "सुपुर्दगी" का अर्थ है किसी भी श्रेणी के ठोस कचरे को नगर पंचायत के वर्कर या ऐसे कचरे की सुपुर्दगी के लिए नगर पंचायत द्वारा नियुक्त, प्राधिकृत या लाइसेंस प्रदत्त व्यक्ति को सौपना अथवा उसे नगर पंचायत या नगर पंचायतं द्वारा अधिकृत लाइसेंस प्रदत्त एजेंसी द्वारा प्रदान किए गये वाहन में डालना ।
भाग 8 ]
219 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
(ञ) "ई-कचरा " का अर्थ वही होगा, जो ई- कचरा (प्रबंधन) नियम , 2016 के नियम 3 (1 ) (आर) में . निर्दिष्ट किया गया है ।
(ट) "फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (एफसीटीएस) का अर्थ है, एक ऊर्जा चालित मशीन, जिसका डिजाइन बिखरे हुए ठोस कचरे को कम्पैट करने के लिए किया गया है और प्रचालन के समय स्थिर रहती हैं । प्रचालन के समय कम्पैक्टर मोबाईल भी हो सकती हैं, जिसे मोबाईल ट्रांसफर स्टेशन ( एमटीएस) कहा जा सकता है ।
(ठ) " कूडा- कचरा" का अर्थ है, सभी प्रकार का कूड़ा और उसमें कोई भी ऐसा कचरा पदार्थ शामिल जिसे फेंकना अथवा संग्रह करना इन उप- नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित है और ऐसा करने से किसी व्यक्ति, जीव- जंतु को परेशानी होने या पर्यावरण अथवा सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के प्रति खतरा पहुंचाने की आशंका हो ।
(ड) " गंदगी फैलाने" का अर्थ है , किसी ऐसी बस्ती में गंदगी उत्सर्जित करना, डालना, दबाना अथवा तत्संबंधी अनुमति देना, जहां वह गिरती, ढलती, बहती, घुल कर, रिस कर अथवा किसी अन्य तरीके से पहुंचती हो अथवा गंदगी के उत्सर्जित होने, बह कर आने, घुल कर आने या अन्य किसी तरह से खुले या सार्वजनिक स्थल पर आने की आशंका हो ।
(ढ) "स्वामी" का अर्थ है , जो किसी भवन , या भूमि या किसी भाग के मालिक के रुप में अधिकारों का इस्तेमाल करता है ।
(ण) " अधिभोगी/ पट्टेदार " का अर्थ है , ऐसा व्यक्ति जो किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का अधिभोगी / पट्टेदार हो, इसमें ऐसे व्यक्ति भी शामिल हैं, जो तत्समय किसी प्रयोजन के लिए किसी भूमि या भवन या उसके हिस्से का इस्तेमाल कर रहा हैं ।
(प) "पैलेटाइजेशन" का अर्थ है, एक प्रक्रिया, जिसमें पैलेट तैयार की जाती हैं, जो ठोस कचरे से बने छोटे क्यूब अथवा सिलिंडरीकल टुकडे होते हैं; और उनके ईधन पैलेट्स भी शामिल होते हैं, जिन्हे रिफ्यूज डेराइब्ड ईधन कहा जाता हैं ।
(फ) "निर्धारित" का अर्थ है, एसडब्यूएम नियमों और/ या इन उप नियमों द्वारा निर्धारित ।
(ब) "सार्वजनिक स्थल का अर्थ है, कोई ऐसा स्थान,जो आम लोगों के इस्तेमाल और मनोरंजन के लिए सहज सुलभ हैं , भले ही वह वास्तव में लोगों द्वारा इस्तेमाल या उपभोग किया जा रहा हो या नही ।
(भ) "संग्रहण" का अर्थ है, ठोस कचरे को अस्थायी तौर पर इस तरह से संग्रह करना जिससे गंदगी न फैले और मच्छर आदि कीटों, आवारा पशुओं और अत्यधिक बदबू का प्रकोप रोका जा सके ।
(म) " सैनेटरी 'वर्कर" का अर्थ है , नगर पंचायत के इलाकों में ठोस कचरा एकत्र करने या हटाने अथवा नालियों को साफ करने के लिये नगर पंचायत / एजेंसी द्वारा नियोजित व्यक्ति ।
(य) शेड्यूल" का अर्थ है, इन उप नियमों से सम्बद्व शेड्यूल ।
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(र) " इस्तेमालकर्ता शुल्क / प्रभारी" का अर्थ है , नगर पंचायत द्वारा समय - समय पर सक्षम प्राधिकारी के सामान्य या विशेष आदेश के जरिए कचरा उत्सर्जक पर लगाया गया शुल्क या प्रभार, ताकि ठोस कचरा संग्रह, दुलाई, प्रोसेसिंग और निपटान सेवाओं की आंशिक अथवा पूर्ण लागत कवर की जा सके ।
(ल) 'खाली प्लाट" का अर्थ है , प्राइवेट पार्टी/ व्यक्ति/ सरकारी एजेंसी से सम्बद्ध कोई ऐसी भूमि या खुला स्थल , जिस पर किसी का कब्जा न हो ।
(2) यहां प्रयुक्त लेकिन परिभाषितं न किए शब्दों और अभिव्यक्तियों, का अर्थ वही होगा, जो ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 और निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 में अभिप्रेत होगा ।
अध्याय -2
ठोस कचरे का स्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण
4. ठोस कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण और संग्रहण
(i ) सभी कचरा उत्सर्जकों के लिए अनिवार्य होगा कि वे उनके स्वयं के स्थलों से उत्सर्जित होने वाले ठोस कचरे को नियमित रुप से पृथक करें और उसे संगृहीत करें । यह पृथक्करण मुख्य रुप से निम्नांकित 3 वर्गों में किया जायेगा:
(क) गैर-जैव अपघटीय या सूखा कचरा
(ख) जैव अपघटीय या गीला कचरा
(ग ) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा और तीनो श्रेणियों के कचरे को कवर्ड कचरा डिब्बों में रखा जाएगा तथा समय- समय पर जारी नगर पंचायत के निर्देशों के अनुसार पृथक्कृत कचरे को निर्दिष्ट कचरा संग्रहकर्ताओं को सौंपेगा ।
(ii) प्रत्येक ठोस अपशिष्ठ / बल्क कचरा उत्सर्जक के लिए अनिवार्य होगा कि वह स्वयं के स्थलों पर उत्सर्जित ठोस कचरे को पृथक करे और उसे संगृहित करे निम्नांकित 3 वर्गो में:-
(क) गैर-जैव अपघटीय या खुश्क कचरा
(ख) जैव अपघटीय या गीला कचरा
(ग) उपयुक्त कूड़ेदानों में जोखिमपूर्ण कचरा , जैविक (गीला) कचरे को अपने परिसर में प्रोसेस कर कम्पोस्ट या बायोगैस आदि तैयार करना एवं पृथक्कृत कचरे को अधिकृत कचरा संग्रहण एजेंसी जरिए अधिकृत कचरा प्रसंस्करण अथवा निपटान केंद्रो या संग्रहण केंद्रो को सौंपेगा और उसके लिए को नगर पंचायत द्वारा समय समय पर निर्धारित दुलाई शुल्कों का भुगतान अधिकृत कचरा संग्रह एजेंसी को करेगा ।
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(iii) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए कूड़ेदानों का रंग इस प्रकार होगाः--
हरा : जैव अपघटीय कचरे के लिए;
नीला: गैर-जैव अपघटीय या खुश्क कचरे के लिए;
काला : घरेलू जोखिम पूर्ण कचरे के लिए
(iv) सभी निवासी कल्याण और बाजार संगठन, नगर पंचायत के भागीदारी से यह सुनिश्चित करेंगे कि , उत्सर्जकों द्वारा स्त्रोत पर कचरे का पृथक्करण किया जाए, पृथक किए गए ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बों में संगृहीत किया जाए और फिर से इस्तेमाल करने वालों को सौंपी जाएं । जैव अपघटीय कचरें की प्रोसेंसिग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(v) 5000 वर्गमीटर क्षेत्र से अधिक क्षेत्र कब्जा रखने वाले सभी द्वारबंद समुदाय तथा संस्थान नगर पंचायत की भागीदारी के साथ सुनिश्चितं करेंगे कि, उत्सर्जकों द्वारा कचरे का स्रोत पर पृथक्करण हो , पृथक किए गए कचरे को अलग अलग डिब्बों में रखेंगे और पुनः उपयोग आने वाली सामग्री को अधिकृत कूडा संग्रहकर्ताओं या अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वाले को सौपेगें । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(vi) सभी होटल और रेस्त्रां, नगर पंचायत के भागीदारी से , कचरे का स्त्रोत पर पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे , पृथक किए गए ठोस कचरे को अलग अलग डिब्बे में संग्रहीत करेंगे और फिर से इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री अधिकृत कचरा संग्रहकर्ताओं अथवा अधिकृत पुनः इस्तेमाल करने वालों को सौंपेगें । जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग , उपचार और निपटान कम्पोस्टिंग अथवा बायो-मिथेनेशन तकनीक के जरिए यथासंभव परिसर के भीतर ही किया जाएगा । इससे बचे हुए कचरे को नगर पंचायत द्वारा निर्देशित कचरा संग्रहकर्ताओं या एजेंसी को दिया जाएगा ।
(vii) कोई व्यक्ति गैर- लाइसेंसी स्थान पर कोई ऐसा कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगा, जिसमें 100 से अधिक व्यक्ति एकत्र हों, ऐसा करने के लिए यह जरुरी होगा कि अनुसूची में निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क का भुगतान करते हुए नगर पंचायत को कम से कम 3 कार्य दिवस अग्रिम लिखित जानकारी देनी होगी और ऐसा व्यक्ति या आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि ठोस कचरे को स्त्रोत पर अलग अलग किया जाए , ताकि नगर पंचायत द्वारा निधारित संग्रहकर्ता या एजेंसी को सौंपा जा सके ।
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(viii ) सेनिटरी उत्पादों से उत्सर्जित कचरे को तत्संबेधी विनिर्माताओं या ब्रॉड मालिकों द्वारा प्रदान किए गए पाउचों अथवा अखबारों या उपयुक्त जैव अपघटीय संलेपन सामग्री में सुरक्षित तरीके से संलेपित किया जाए और उसे गैर- जैव अपघटीय या खुश्क कचरे के लिए बनाए गए कूड़ेदान में रखा जाना चाहिए ।
(ix) प्रत्येक गली विक्रेता अपने क्रियाकलाप के दौरान उत्सर्जित होने वाली खाद्य सामग्री , निपटान योग्य प्लेटें, कप, डिब्बे , रैपर्स , नारियल के खोल, बचा खुचा भोजन, सब्जियां, फल आदि को अलग अलग करके उपयुक्त कूड़ेदानो में संग्रहित करेगा और उसे नगर पंचायत द्वारा अधिसूचित डिपो या कंटेनर या वाहन को सौंपेगा ।
(x) उद्यान और बागवानी के कचरा उत्सर्जक अपने परिसर में उत्सर्जित कचरे को अलग से एकत्र करेंगे और समय- समय पर नगर पंचायत के निर्देशों के अनुसार उसका निपटान करेंगे ।
(xi) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्रत्येक कचरा उत्सर्जक द्वारा स्टोर किया जाएगा और उसे नगर पंचायत या उसके द्वारा अथवा उत्तराखण्ड सरकार या प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा ऐसे कचरे का संग्रह के लिए साप्ताहिक / समय- समय पर उपलब्ध कराए गए वाहन तक पहुचाया जाएगा अथवा ऐसे कचरे को उत्तराखण्ड सरकार या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिसूचित तरीके से निपटान के लिए निर्दिष्ट कचरा संग्रह केंद्र तक पहुंचाया जाएगा ।
(xii ) निर्माण कार्यों और भवनों को ढहाए जाने से उत्सर्जित कचरा, निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के अनुसार अलग से एकत्र और निपटान किया जायेगा ।
(xiii ) बायो मेडिकल कचरा, ई- कचरा, जोखिमपूर्ण रासायनिक एवं औद्योगिक कचरा बिना उपचारित किए ठोस कचरे में मिश्रित नहीं किया जाएगा । ऐसे कचरे का निपटान पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम , 1986 के अंतर्गत बनाए गए तत्संबंधी नियमों के अनुसार किया जाएगा ।
(xiv) निर्दिष्ट बूचडखानों और बाजारों को छोड कर अन्य परिसरों के प्रत्येक ऐसे मालिक / कब्जाधारी , जो किसी वाणिज्यिक गतिविधि के परिणाम स्वरुप पोल्ट्री, मछली और पशुवध संबंधी कचरा उत्सर्जित करते हों, उन्हें ऐसे कचरे को अलग से बंद कंटेनर में स्वास्थ्यकर स्थिति में एकत्र करना होगा और रोजमर्रा के आधार पर निर्दिष्ट समयानुसार नगर पंचायत द्वारा इस प्रयोजन के लिए प्रदान किए गए कचरा वाहन/ स्थल तक पहुंचाना होगा । ऐसे कचरे को सामुदायिक कूडा घरो में डालना निषेध होगा ।
(xv) पृथक किए गए जैव अपघटीय ठोस कचरे को यदि उत्सर्जकों द्वारा कम्पोस्ट न किया गया हो, तो उसे उन्हे अपने परिसर में अलग से एकत्र करना होगा और उसकी डिलिवरी पंचायत श्रमिक /वाहन / कचरा एकत्रकर्ता/ कचरा संग्रहकर्ता अथवा बल्क में जैव अपघटीय कचरा उत्सर्जित करने वाले निर्दिष्ट वाणिज्यिक उत्सर्जकों के लिए प्रदान कराए गए कचरा संग्रह वाहन तक पहुंचाया जाएगा । यह सुपुर्दगी संमय-समय पर अधिसूचित समयानुसार करनी होगी ।
भाग 8]
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अध्याय-3
ठोस कचरा संग्रह
5. ठोस कचरे का संग्रह निम्नांकित अनुसार किया जाएगाः-
(i) नगर पंचायत के सभी क्षेत्रों या वार्डों में पृथक किए गए ठोस कचरे को घर घर जाकर संग्रह करने के बारे में एसडब्लूएम नियमों का अनुपालन किया जाएगा, जिनके अनुसार मलिन और अनौपचारिक बस्तियों सहित दैनिक आधार पर प्रत्येक घर से कचरा एकत्र किया जाएगा । इसके लिए घर घर जाकर कचरा एकत्र करने की अनौपचारिक प्रणाली को नगर पंचायत संग्रह प्रणाली के साथ एकीकृत किया जाएगा ।
(ii) प्रत्येक घर से कचरा एकत्र करने के लिए क्षेत्रवार विशेष समय निर्धारित किया जाएगा और उसे सम्बद्ध क्षेत्र में खास खास स्थानों पर प्रचारित किया जाएगा और नगर पंचायत वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा । घर घर जाकर कचरा एकत्र करने का समय सामान्यतया प्रातः 6 बजे से 11 बजे तक निर्धारित किया जाएगा । व्यापारिक प्रतिष्ठानों, वाणिज्यिक क्षेत्रों में दुकानों या किसी अन्य संस्थागत कचरा उत्सर्जकों से कचरा एकत्र करने का समय प्रातः 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा अथवा नगर पंचायत द्वारा समय समय पर निर्धारित समय पर होगा ।
(iii ) कचरे को स्व- स्थान प्रोसेस करने वाले बल्क कचरा उत्सर्जकों से अवशिष्ट ठोस कचरे को एकत्र करने के प्रबंध किए जाएगे ।
(iv) सब्जी फल , फूल , मांस , पोल्ट्री और मछली बाजार से अवशिष्ट ठोस कचरे को रोजमर्रा के आधार पर एकत्र किया जाएगा ।
(v) बागवानी और उद्यान संबंधी कचरा अलग से एकत्र किया जाएगा और उसका निपटान किया जाएगा । इस प्रायोजन के लिए सप्ताह में एक या दो दिन निर्दिष्ट किए जाएंगें ।
(vi ) फलों और सब्जी बाजारों, मांस और मछली बाजारों, बल्क बागवानी और उद्यानों से उत्सर्जित जैव अपघटीय कचरे का अनुकूलतम इस्तेमाल करने और संग्रहण एवं ढुलाई की लागत में कमी लाने के लिए ऐसे कचरे को उस क्षेत्र के भीतर प्रोसेस या उपचारित किया जाएगा, जिसमें वह उत्सर्जित होता है ।
(vii ) कंटेनरों में कंचरे का हाथ से परिचालन निषेध है । यदि दबावों के कारण अपरिहार्य हो तो कचरे का हाथ से निपटान श्रमिकों की उचित देखभाल और सुरक्षा के साथ समुचित संरक्षण के तहत किया जाएगा ।
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(viii ) कचरा उत्सर्जक अपने पृथक किए गए कचरे को नगर पंचायत द्वारा अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा तैनात होपर/ ऑटो-टिप्पर्स / रिक्शा आदि वाहनो में डालने के लिए जिम्मेदार होगें । बहुमंजिला इमारतों, अपार्टमेंटो, आवास परिसरों (इन उपनियमों के खंड 4 व उप- खंड (प) और (अ) के अंतर्गत आने वालों को छोड कर) से उत्सर्जित पृथक किए गए कचरे को ऐसे परिसरों के मुख्य द्वार से अथवा किसी अन्य निर्दिष्ट स्थान से एकत्र किया जाएगा ।
( ix) कचरा संग्रह उपकरणों और वाहनों के चयन के लिए बदलती जरुरतों और प्रौद्योगिकी में नई खोजों को ध्यान में रखा जाएगा । कचरा एकत्र करने के लिए विशेष क्षमता वाले ऐसे ऑटो टिप्पर या वाहन इस्तेमाल किए जाएगें, जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होगे और उनमें जैव अपघटीय और गैर- जैव अपघटीय कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो पर हूटर भी लगा होगा ।
(x) स्वचालित ध्वनि रिकार्डिड उपकरण , घंटी या शोर के स्वीकार्य स्तर तक सीमित हॉर्न भी कचरा संग्रह वाहन में कचरा संग्रहकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा ।
(xi ) प्रत्येक प्राथमिक संग्रहण तथा ढुलाई वाहन के लिए मार्ग योजनाए और नगर पंचायत द्वारा या अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा । ये योजनाएं तालिकाबद्द और जीआईएस मानचित्र में होगी , जो नगर पंचायत द्वारा विधिवत रुप से अनुमोदित होगी और उनमें प्रारंभिक बिन्दु, प्रारंभ करने का समय, प्रतीक्षा स्थलों, मार्ग में रुकने का समय , अंतिम बिंदु और निर्दिष्ट मार्ग के अंतिम समय का उल्लेख होगा । नगर पंचायत अथवा अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहकर्ता द्वारा प्रत्येक गली में एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर प्राथमिक कचरा संग्रह और ढुलाई वाहनों की समय सारणी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि क्षेत्र के निवासी निर्धारित समय पर इस सुविधा का लाभ उठा सकें । ऐसी जानकारी नगर पंचायत की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।
(xii ) तंग गलियों में, जहां ऑटो टिप्पर या वाहन की सेवाएं संभव न हों, वहां एक थ्रीव्हीलर अथवा छोटे मोटरयुक्त वाहन/ साईकिल रिक्सा काम पर लगाया जाएगा, जो ऊपर से हाईड्रोलिक तरीके से संचालित हूपर कवरिंग व्यवस्था से युक्त होंगा और उसमें गीले और सूखे कचरे के लिए अलग अलग दो कम्पार्टमेंट होंगे । ऐसे वाहनो में हूटर लगा होगा और वह मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन के अनुकूल होगा ।
(xiii) अत्यंत भीड़- भाड़ वाले और अधिक तंग गलियों वाले क्षेत्रों में जहां श्रीव्हीलर या छोटे वाहन भी न जा सकें वहां साइकिल रिक्शा अथवा अन्य प्रकार के उपयुक्त उपकरण तैनात किए जाएंगे ।
225 भाग 8]
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(xiv) ऐसी छोटी, तंग और भीड़ी गलियों/ लेनों में जहा श्रीव्लीहर / रिक्शा आदि का संचालन संभव न हो,ऐसे स्थानों पर बस्ति/ गली के छोर पर खास जगह तय की जाएगी, जहां कचरा संग्रह वाहन खड़ा किया जा सके और वाहन के हेल्पर के पास एक सीटी होगी और वे सीटी बजाते हुए गली में ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहन के आगमन की घोषणा करेंगे । इस तरह की संग्रह प्रणाली की समय सारणी नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएगी और नगर पंचायत की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ।
(xv) ऑटो टिप्पर, थ्रीव्हीलर्स , रिक्शा और सेवा में संलग्न किसी अन्य तरह के वाहन केवल घरों से कचरा एकत्र करेंगे , और अन्य स्त्रोतो जैसे ढलाव, खुले स्थलों, मैदान, कूड़ेदानों और नालियों आदि से कचरा एकत्र नहीं करेंगे ।
(xvi) नगर पंचायत या उसके अधिसूचित अधिकृत कचरा संग्रहर्ता प्राथमिक कचरा संग्रहण के लिए क्षेत्र की सभी गलियों / लेनों को कवर करने के लिए जिम्मेदार होगें ।
अध्याय-4
ठोस कचरे का द्वितीयक संग्रहण
6. द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ में ठोस कचरे का संग्रहण निम्नांकित अनुसार किया जाएगा
(i ) घरो में एकत्र किया गया पृथक ठोस कचरा , कचरा स्टोरेज डिपो, सामुदायिक कूड़ा घरों या अचल या चल अंतरण स्थलों या कचरे के द्वितीयक संग्रहण के लिए नगर पंचायत द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर ले जाया जाएगा ।
(ii ) ऐसे द्वितीयक संग्रहण बिंदुओ को कंटेनरों (निर्दिष्ट रंग के) से कवर किया जाएगा, जिनसे निम्नांकित के लिए अलग अलग स्टोरेज होगेंः-
(क) गैर-जैव अपघटीय अथवा सूखा कचरा
(ख) जैव अपघटीय अथवा गीला कचरा
(ग) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा ।
(iii) पृथक किए गए कचरे के संग्रहण के लिए नगर पंचायत द्वारा चिन्हित अलग अलग कंटेनरो का इस्तेमाल निम्नांकित अनुसार किया जायेगाः-
हराः जैव अपघटीय कचरे के लिए
नीलाः गैर-जैव अपघटीय कचरे के लिए
कालाः घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए 226
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[भाग 8
नगर पंचायत समय समय पर विभिन्न प्रकार के ठोस कचरे के संग्रहण और वितरण के लिए निर्धारित
गोदामों की रंग संहिता और अन्य मानदंड अधिसूचित करेगी ताकि कचरे का सुगम और सुरक्षित संग्रहण हो सके और किसी प्रकार का मिश्रण या रिसाव न हो, जिनका अनुपालन विभिन्न प्रकार के ठोस कचरा उत्सर्जकों को करना होगा ।
(iv) नगर पंचायत स्वयं अथवा बाहरी एजेंसियों के ज़रिए ठोस कचरा संग्रहण केंद्रो का संचालन इस ढंग से करेगी कि उनके आस - पास अस्वास्थ्यकर और अस्वच्छ स्थितियां पैदा न हों ।
(v) द्वितीयक संग्रहण डिपुओं में विभिन्न आकार के कंटेनर नगर पंचायत या किन्ही अन्य निर्दिष्ट एजेंसियों द्वारा प्रदान किये जाएंगे , जो इस उप - नियमों में वर्णित अनुसार अलग अलग रंगो के होंगे ।
(vi) संग्रहण केन्द्रों का निर्माण और स्थापना इस बात को ध्यान में रख कर की जाएगी कि किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में कचरे के उत्सर्जन की मात्रा कितनी है और जनसंख्या का घनत्व कितना है ।
(vii) संग्रहण केन्द्र इस्तेमालकर्ता अनुकूल होंगे और उनका डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनसे कचरा ढका रहे और संग्रहण किए गये कचरे का खुले वातावरण में कोई दुष्प्रभाव न पड़े ।
(viii ) सभी आवास सहकारी समीतियों , एसोसिएशनों, रिहायशी और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और द्वारबंद समुदायों का यह दायित्व होगा कि वे इन उप - नियमों द्वारा निर्धारित रंगीन कूड़ेदान रखें और स्वयं के परिसरों में समुचित स्थानों पर पर्याप्त संख्या में ऐसे कंटेनर रखें ताकि वहां हर रोज उत्सर्जित कचरा ठीक ढंग से संगृहीत किया जा सके ।
(ix) नगर पंचायत या उसकी कोई निर्दिष्ट एजेंसी का यह दायित्व होगा कि वे साप्ताहिक आधार पर सभी कूड़ाघरों की धुलाई और संक्रमणमुक्त बनाने की व्यवस्था करें ।
(x) सूखे कचरे (गैर- जैव उपघटीय कचरा) के लिए रीसाइकलिंग सेंटर ।
(क) नगर पंचायत अपने वर्तमान ढलावों अथवा पहचान किए गए खास स्थानों को आवश्यकतानुसार रीसाइकलिंग केंद्रों के रुप में परिवर्तित करेगा , जिनका इस्तेमाल गलियों / घर घर जाकर कंचरा एकत्र करने संबंधी सेवा के जरिए एकत्र किए गए सूखे कचरे को पृथक करने के लिए किया जाएगा । प्राप्त सूखे कचरे की मात्रा के अनुसार रीसाइकलिंग केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है ।
भाग 8]
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(ख) गली / घर- घर जाकर कचरा संग्रहण प्रणाली के जरिए और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से प्राप्त केवल सूखा कचरा ( गैर- जैव अपघटीय) इन निर्दिष्ट रीसाइकलिंग केंद्रो को स्थानातरित किया जाएगा । ये निर्दिष्ट केंद्र केवल सूखा कचरा प्राप्त करेंगे ।
(ग) परिवारों के लिए प्रावधान भी होगा कि वे अपना रीसाइकिल योग्य सूखा कचरा इन रीसाइकलिंग केंद्रों पर सीधे जमा करा सकते हैं अथवा अधिकृत एजेंटो और/ या नगर पंचायत से अधिकृत कचरा व्यापारियों को पूर्व अधिसूचित दरों के अनुसार बेच सकते हैं । इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक रीसाइकलिंग यूनिट पर एक धर्मकांटा और काउंटर उपलब्ध कराया जाएगा । अधिकृत एजेंट और / या अधिकृत कचरा व्यापारी को इस बात की अनुमति होगी कि वे रीसाइकिल योग्य कचरे को एसडब्ल्यूएम नियमों के प्रावधानों के अनुसार द्वितीयक बाजार अथवा रीसाइकलिंग यूनिटों को बेच सकते हैं । अधिकृत एजेंट और / या अधिकृत व्यापारी बिक्री से प्राप्त धनराशि रखने के हकदार होंगे ।
(xi ) निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के लिए संग्रहण केंद्र
(क) घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे के संग्रह के लिए एक संग्रहण केंद्र उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाएगा , जहां निर्दिष्ट घरेलू जोखिमपूर्ण कचरे को प्राप्त किया जाएगा , ऐसा सरकार द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार यथासम्भव प्रत्येक वार्ड में स्थापित किया जाएगा और उसे कचरा प्राप्त करने का समय अधिसूचित करना होगा ।
(ख) नगर पंचायत अपनी एजेंसी को या छूटग्राही को यह दायित्व सौंप सकती है कि वह सभी कचरा उत्सर्जकों से घरेलू जोखिमपूर्ण कचरा पृथक्कृत तरीके से एकत्र करें ।
(ग) इस तरह प्राप्त किया गया कचरा सरकार द्वारा स्थापित जोखिमपूर्ण कचरा निपटान केंद्रो पर अलग से लाया जाएगा ।
अध्याय-5
ठोस कचरे की ढुलाई
7. ठोस कचरे की ढुलाई निम्नांकित बातों को ध्यान में रख कर की जाएगी:-
(i) कचरे की ढुलाई के लिए प्रयुक्त वाहन भली- भांति कवर्ड होंगे ताकि एकत्र कचरे का दुष्प्रभाव मुक्त वातावरण पर न पड़े । इन वाहनो में कम्पैक्टर और मोबाइल ट्रांसफर स्टेशन शामिल हो सकते है , जो नगर पंचायत द्वारा चुनी गई प्रौद्योगिकी पर निर्भर करेंगे ।
(ii) नगर पंचायत द्वारा स्थापित संग्रहण केंद्र कचरे के निपटान के लिए हर रोज काम करेंगे । कूड़ेदान या कंटेनरों के आस पास के क्षेत्र को साफ रखा जाएगा ।
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[भाग 8
!
. (iii) आवासीय और अन्य क्षेत्रों से एकत्र किया गया पृथककृत जैव अपघटीय कचरा प्रोसेसिंग प्लांटो जैसे कम्पोस्ट प्लांट , बायो - मिथिनेशन प्लांट या अन्य केंद्र तक कवर्ड तरीके से पहुंचाया जाएगा ।
(iv) जहा कही प्रयोज्य हो , जैव अपघटीय कचरे के लिए, ऐसे कचरे की स्व - स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।
(v) एकत्र किया गया गैर-जैव अपघटीय कचरा सम्बद्ध प्रोसेसिंग केंद्रो अथवा द्वितीयक संग्रहण में पहुचाया जाएगा ।
(vi) निर्माण और विध्वंस जन्य कचरे की ढुलाई निर्माण एवं विध्वंस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधानो के अनुसार की जाएगी ।
(vii) नगर पंचायत कचरे की समुचित ढंग से ढुलाई के प्रबंध करेगा । गलियों को बुहारने से उत्पन्न कचरा और नालियों से निकाली गई गाद काम समाप्त होने के तत्काल बाद हटाई जाएगी ।
(viii) ढुलाई वाहनों का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाएगा कि अंतिम निपटारे से पहले कचरे के बार- बार परिचालन से बचा जा सके ।
(ix) कचरा संग्रहण के लिए काम में लगाए गए वाहन कचरे को केवल एमटीएस अथवा एफसीटीएस , जहां कही प्रदान किए गए हों, में जमा / स्थानांतरित करेंगे ।
(x) यदि किसी कारणवश एमटीएस / एफसीटीएस निर्दिष्ट स्थल पर खड़े नही पाए जाएंगे, तो लदा वाहन एमटीएस अथवा एफसीटीएस के अगले निर्दिष्ट स्थल अथवा कचरे को उतारने के लिए नगर पंचायत द्वारा निर्दिष्ट स्थल तक जाएगा ।
(xi) फिक्स्ड कम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन को हुक लोडर के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाएगा ।
(xii) कत्रे की ढुलाई के दौरान विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित कचरे का परस्पर मिश्रण नहीं होना चाहिए ।
(xiv) कचरे के गली स्तरीय संग्रहण और ढुलाई सेवाएं अवकाश के दिनों सहित हर दिन उपलब्ध कराई जाएंगी ।
(xv) इस सेवा में संलग्न एमटीएस केवल गली स्तरीय प्रचालनों से कचरा संग्रह करने वाले निर्दिष्ट ऑटो- टिप्परों , तिपहिया या अन्य वाहनों / कूड़ेदानों से कचरा प्राप्त करेंगा ।
भाग 8 ]
229 उत्तराखण्ड गजट, 14 जून , 2025 ई 0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
(xvi) परिवारों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से गली स्तरीय और घर- घर जाकर ठोस कचरा संग्रह करने में लगे ऑटो- टिप्परों, तिपहिया वाहनो , रिक्शा आदि से कचरा प्राप्त करने के लिए एक अनुमोदित रूट प्लान के अनुसार निर्दिष्ट स्थानों पर प्रतिबद्व एमटीएस तैनात किए जाएगें ।
(xvii ) एमटीएस और एफसीटीएस का डिजाइन ऐसा होगा, जो कचरे को प्राथमिक संग्रहण वाहनों से उतारने में कम से कम समय लें और कूडा- करकट इधर- उधर न फैले ।
(xviii) ठोस कचरे को स्थानांतरित करते समय एमटीएस और एफसीटीएस के इर्द गिर्द रिसे हुए कचरे को साफ किया जाना चाहिए, ताकि कोई रिसाव न बचे । ऐसे स्थान पर सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद संक्रमण विरोधी पदार्थ इस्तेमाल किए जाने चाहिए ।
(xvx) नगर पंचायत अथवा उसकी निर्दिष्ट एजेंसी सभी द्वितीयक संग्रहण केंद्रो पर सीसीटीवी कैमरेलगाएगी ।
अध्याय-6
ठोस कचरे की प्रोसेसिंग
8. ठोस कचरे की प्रोसेसिंग :-
(i ) नगर पंचायत ठोस कचरा प्रोसेसिंग केंद्रो और सम्बद्ध ढांचे के निर्माण , प्रचालन और रख- रखाव की स्वयं व्यवस्था करेगा अथवा किसी एजेंसी के द्वारा इस कार्य को अंजाम देगा, ताकि ठोस कचरे के विभिन्न घटकों का अनुकूलतम उपयोग किया जा सके । इसके लिए निम्नांकित प्रौद्योििकयों सहित उपयुक्त प्रौद्योगिकी अपनाई जाएगी और शहरी विकास मंत्रालय द्वारा समय समय पर जारी दिशा-निर्देशों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों का अनुपालन किया जायेगा-
(क) दुलाई क़ी लागत और पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को निम्नवत रखने के लिए विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी , जैसे बायो- मिथेनेशन , माइक्रोवियल कम्पोस्टिंग, वर्मी कम्पोस्टिंग , एनायरोबिक डाइजेशन अथवा जैव अपघटीय कचरे की जैव - स्थिरता के लिए कोई अन्य उपयुक्त प्रोसेसिंग पद्वति;
(ख) केंद्रीकृत स्थलों पर स्थित मध्यम / बडे कम्पोस्टिंग / बायो- मिथेनेशन प्लांटो के जरिए ;
(ग) कचरे से ऊर्जा प्रक्रियाओं के जरिए , ठोस कचरा अधारित बिजली संयंत्रो को कचरे के ज्वलनशील अंश के लिए रिफ्यूज डेराइव्य ईधन के रुप में अथवा फीड स्टॉक आपूर्ति के रुप में ईधन प्रदान करते हुए ;
(घ) निर्माण और विध्वंस कचरा प्रबंधन प्लांटों के जरिए ।
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[भाग 8
'(ii) नगर पंचायत रिफ्यूज डेराइव्य फ्यूल (आरडीएफ) की खपत के लिए बाजार सृजित करने का प्रयास करेगा ।
(iii) कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट में सीधे भस्मीकरण के लिए कचरे का पूर्ण पृथक्करण अनिवार्य होगा और ऐसा करना सम्बद्ध अनुबंधो की कार्यशर्तो का हिस्सा होगा ।
(iv) नगर पंचायत सुनिश्चित करेगा कि कागज , प्लास्टिक, धातु, कांच , कपडा आदि रीसाइकिल योग्य पदार्थ रीसाइकिल करने वाली अधिकृत एजेंसियो को भेजा जाए ।
9. ठोस कचरे की प्रोसेसिंग के लिए अन्य दिशा-निर्देशः-
(i) नगर पंचायत सभी निवासी कल्याण संगठनों, समूह आवास समितियों, बाजारों, द्वारबंद समुदायों और 5000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र रखने वाले संस्थानों, सभी होटलो एवं रेस्त्राओं , बैक्वेट हालों और इस तरह के अन्य स्थलों पर यथासंभव कम्पोस्टिंग अथवा बायो- मिथेनेशन के जरिए जैव अपघटीय कचरे वाले अन्य कचरा उत्सर्जकों को भी जैव अपघटीय कचरे की स्व-स्थाने प्रोसेसिंग को वरीयता दी जाएगी ।
(ii ) नगर पंचायत यह नियम प्रवृत्त करेगा कि सब्जी, फल , मांस , पोल्ट्री और मछली व्यापार मंडियां अपने जैव अपघटीय कचरे की प्रोसेसिंग करते समय स्वच्छ स्थितियां बनाए रखना सुनिश्चित करें ।
(iii) नगर पंचायत यह नियम प्रवृत्त करेगा कि बागवानी, उद्यानों और पार्कों से उत्सर्जित कचरे का निपटान अलग से यथासंभव पार्को और उद्यानों में ही किया जाए ।
(iv) नगर पंचायत कचरा प्रबंधन में समुदाय को शामिल करने और घर पर ही कम्पोस्टिंग , बायो गैस उत्पादन, सामुदायिक स्तर पर कचरे की विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग को प्रोत्साहित करेगा । परंतु ऐसा करते समय बदबू को नियंत्रित रखना और तत्संबंधी यूनिट के आसपास स्वच्छता स्थितियां बनाए रखना अनिवार्य हागा ।
अध्याय-7
ठोस कचरे का निपटान
10. ठोस कचरे का निपटान
नगर पंचायत अवशिष्ठ कचरे और गलियों में झाडू लगाने से उत्सर्जित कचरे तथा नालियों से निकलने वाली गाद का निपटान एसडब्ल्यूएम नियमों के अंतर्गत निर्धारित ढंग और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य कानून द्वारा लागू किए गए किसी अन्य दायित्व के अनुरुप करने के लिए स्वयं अथवा किसी अन्य एजेंसी के ज़रिए सेनिटरी लैंडफिल और सम्बद्ध ढाचे का निर्माण , प्रचालन और रख - रखाव करेगा ।
भाग 8 ]
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अध्याय-४
इस्तेमालकर्ता शुल्क और स्थल पर ही जुर्माना/ दंड लगाना
11. ठोस कचरे का संग्रहण, ढुलाई, निपटान के लिए इस्तेमालकर्ता शुल्कः-
(क ) कचरा उर्त्सजकों से कचरा संग्रहण , ढुलाई और निपटान हेतु सेवाएं प्रदान करने के लिए नगर पंचायत द्वारा इस्तेमालकर्ता शुल्क निर्धारित किया जाएगा । इस्तेमालकर्ता शुल्क की दरें अनुसूची -1 में निर्दिष्ट हैं ।
(ख) कचरा उत्सर्जकों से निर्धारित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली नगर पंचायत अथवा मेयर / नगर पंचायत द्वारा अधिकृत एजेंसी या अधिकृत व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(ग) नगर पंचायत इन उपनियमों की अधिसूचना की तारीख से 3 माह के भीतर, इस्तेमालकर्ता शुल्क लगाने के प्रयोजन के लिए कचरा उत्सर्जन का डाटाबेस तैयार करेगा और इस्तेमालकर्ता शुल्क की बिंलिग / संग्रह / वसूली के लिए समुचित व्यवस्था विकसित करेगा । डाटाबेस को नियमित रुप से अद्यतन बनाया जाएगा ।
(घ) नगर पंचायत ऑनलाइन भुगतान के सहित इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली के लिए विभिन्न पद्वतियां अपनाएगा ।
(ड) इस्तेमालकर्ता वसूली के लिए महीने में विशेष दिन निर्धारित किए जाएंगे , जिसमें प्रत्येक महीने के पहले सप्ताह को वरीयता दी जाएगी ।
(च) वार्षिक और छमाही भुगतान की प्रणाली अपनाई जाएगी । यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क समूचे वर्ष के लिए अग्रिम अदा किया जाता है, तो ऐसे में 12 महीने के बाजए 10 महीने का शुल्क लिया जाएगा । इसी प्रकार यदि इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली का भुगतान 6 महीने के लिए किया जाता है तो शुल्क की मांग की राशि छह महीने के बजाये साढे पांच महीने के लिए वसूल की जाएगी ।
(छ) अनुसूची 1 में वर्णित इस्तेमालकर्ता शुल्क प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः 10 प्रतिशत बढ जाएगा ।
(ज) इस्तेमालकर्ता शुल्क की वसूली केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा एक सामान्य या विशेष आदेश के जरिए अधिकृत संस्थान / व्यक्ति द्वारा की जाएगी ।
(झ) इस्तेमालकर्ता शुल्क के भुगतान में चूक होने के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा चूककर्ता से उसकी वसूली भू- राजस्व के बकाये की भॉती वसूल की जायेगी ।
12. एसडब्ल्यूएम नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माला / दंड :-
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(कं) एसडब्ल्यूएम नियमों अथवा इन उप - नियमों के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन अथवा अनुपालन करने में विफलता के लिए इन उप- नियमों के परिशिष्ट में दी गई अनुसूची 2 में वर्णित अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा ।
(ख) उपरोक्त खंड (क) में वर्णित अनुसार उल्लंघन या गैर-अनुपालन की स्थिति बार बार आने पर ऐसी प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना प्रतिदिन या महीना, जो भी लागू हो , के अनुसार लगाया जाएगा ।
: :
(ग) जुर्माना या दंड लगाने हेतु निर्दिष्ट / प्राधिकृत अधिकारी , अधिशासी अधिकारी या उनके द्वारा नामित कर्मचारी चौकी , थाना प्रभारी होगें तथा जिला मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष सामान्य या विशेष आदेश के अधीन अन्य अधिकारियों को भी नामित कर सकते हैं । जुर्माना / दंड राशि अनुसूची 2 में दी गई है ।
(घ) अनुसूची 2 में वर्णित जुर्माना अथवा दंड राशि प्रत्येक परवर्ती वर्ष की पहली जनवरी से स्वतः . 5 प्रतिशत बढ जाएगी ।
(ड) निर्दिष्ट / प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जुर्माना मौके पर लगाया और वसूल किया जाएगा । जुर्माने का भुगतान मौके पर जमा न करने में उक्त धनराशी भू- राजस्व के बकाये की भांति वसूल की जायेगीएवं मामले में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम , 1986 के प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित अभियोजन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी ।
अध्याय-9
प्रतिभागियों के दायित्व
13. कचरा उत्सर्जकों के दायित्वः-
(i) कूडा फेकने पर पाबंदी
(क) किसी सार्वजनिक स्थल पर कूडा फैलाना अधिकृत सार्वजनिक या निजी कूडादानो के सिवाय कोई व्यक्ति किसी सर्वाजनिक स्थल पर कूडा नही फैलाएगा । कोई व्यक्ति विशेष प्रयोजन के लिए प्रावधान किए गए सार्वजनिक केद्रों या सुविधाओं को छोडकर किसी सार्वजनिक स्थल पर वाहनों की मरम्मत , बर्तन या कोई अन्य उपकरण धोने / साफ करने का काम नही करेगा या किसी प्रकार का संग्रहण नही करेगा ।
(ख ) किसी संपत्ति पर कूडा फैलाना अधिकृत निजी अथवा सार्वजनिक कूडेदानों के सिवाय कोई व्यक्ति किसी मुक्त या रिक्त संपत्ति पर कूडा नही डालेगा ।
भाग 8 ]
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(ग) वाहनों से कूडा फेकना किसी वाहन के ड्राइवर या यात्री के रूप में कोई व्यक्ति किसी गली, सडक, फुटपाथ , खेल के मैदान, उद्यान, ट्रैफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिक स्थान पर कूडा नही फैकेगा ।
(घ) मालवाहक वाहन से गंदगी डालना कोई भी व्यक्ति तब तक किसी ट्रक या अन्य मालवाहक वाहन को नही चलाएगा, जब तक कि ऐसे वाहन का निर्माण और लदान इस प्रयोजन के लिए अधिकृत न किया गया हो ताकि सडक , फुटपाथ , खेल का मैदान, उद्यान , ट्रेफिक आइलैंड या अन्य सार्वजनिकं स्थलो पर कोई लोड, पदार्थ अथवा गंदगी डालने से रोका जा सकें ।
(ड) स्वयं / पालतू पशुओं से गंदगी कुत्ता, बिल्ली आदि पालतू जानवरों के मालिकों का यह भी दायित्व होगा कि गली अथवा किसी सार्वजनिक स्थल पर ऐसे जानवरो द्वारा उत्सर्जित किसी प्रकार की गंदगी को तत्काल उठाएगा / साफ करेगा और इस तरह के उत्सर्जित कचरे के समुचित निपटान के लिए समुचित उपाय करेगा, जिनमें स्वयं की सीवेज प्रणाली से निपटान को वरीयता दी जाएगी ।
(च) नालियों आदि में कचरे का निपटान कोई व्यक्ति किसी नाली / नदी / खुले तालाब /जल निकायों में गंदगी नहीं डालेगा ।
(ii) कचरे को जलाना सार्वजनिक स्थानों पर या निजी स्थान पर या निषेध सार्वजनिक संपत्ति पर ठोस कचरे के किसी भी प्रकार के जलाने द्वारा निपटान निषिद्ध होगा ।
(iii ) "स्वच्छ क्षेत्र" : प्रत्येक व्यक्ति यह प्रयास करेगा कि उसके स्वामित्व या कब्जे वाले परिसर के सामने कोई भी सार्वजनिक स्थान अथवा आस पास का क्षेत्र स्वच्छ रहें । इन स्थानो में फुटपाथ और खुली नालियां / गटर, सडक किनारा सामिल है, जो किसी भी तरह ठोस या तरल कचरे से मुक्त होने चाहिए ।
( iv) सार्वजनिक सभाओं और किसी कारण (जुलूस , प्रर्दशनियां, सर्कस , मेले , राजनैतिक रैलियां, वाणिज्यक , धार्मिक , सामाजिक , सास्कृतिक कार्यक्रमों, विरोध प्रर्दशनो और प्रर्दशनो आदि सहित) से सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की जाने वाली गतिविधयों, जिनमें पुलिस विभाग और / या नगर पंचायत से अनुमति अपेक्षित हो , के मामले में ऐसी गतिविधियों के आयोजनकर्ता का यह दायित्व होगा कि वह उस क्षेत्र और आस पास के क्षेत्रों की स्वस्च्छता सुनिश्चित करें ।
(v) ऐसे आयोजनो के मामले में आयोजक से नगर पंचायत द्वारा अधिसूचित रिफंड योग्य स्वच्छता धरोहर राशि सम्बद्ध जोनल अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाएगी, जो कार्यक्रम की अवधी में उसके पास जमा रहेगी । यह जमा राशि कार्यक्रम पूरा होने के बाद रिफंड की जाएगी लेकिन उससे पहले यह जांच की जाएगी कि उक्त सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता बहाल कर दी गई हैं । यह धरोहर राशि सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता के लिए होगी और इसमें संपत्ति को पहुचाई गई किसी भी प्रकार की क्षति का हर्जाना नही होगा । यदि आयोजनकर्ता, कार्यक्रम के 234
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[भाग 8
आयोजन के परिणाम स्वरुप उत्सर्जित कचरे की सफाई , संग्रहण और ढुलाई में नगर पंचायत की सेवाए प्राप्त करना चाहते हो, तो उन्हे नगर पंचायत के सम्बद्ध जोनल अधिकारी को आवेदन करना होगा तथा इस प्रायोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किया गया अपेक्षित शुल्क जमा करना होगा ।
(vi) खाली प्लांट पर ठोस कचरा डम्प करने और गैर--निर्दिष्ट स्थानों पर निर्माण और विध्वंस कचरा डाले जाने की स्थितियों से नगर पंचायत निम्नांकित ढंग से निपटेगा:-
:
:
(क) नगर पंचायत किसी परिषर के मालिक / अधिभोगी को नोटिस भेज सकता है , जिसमें ऐसे मालिक / अधिभोगी से उक्त परिसर पर डाले गए किसी भी प्रकार के कचरे को नोटिस में वर्णित तरीके और समय सीमा के भीतर हटाने को कहा जाएगा ।
(ख) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाएं पूरी करने में विफल रहता है, तो ऐसे व्यक्ति को समय समय पर निर्धारित दंड का भुगतान करना होगा ।
(ग) यदि नोटिस पाने वाला व्यक्ति नोटिस में वर्णित अपेक्षाओ का अनुपालन करने में विफल रहता है तो नगर पंचायत निम्नांकित कार्यवाई कर सकता है: -
(i) ऐसे परिसर में प्रवेश कर कचरे को साफ करना, और (ii ) अधिभोगी से कचरा साफ करने पर किए गए व्यय को वसूल करेंगा ।
(vii) डिस्पोजेबल उत्पादों और सेनिटरी नैपकिन तथा डायपर्स के विनिर्माताओं या मालिकों का दायित्व:
(क) डिस्पोजेबल उत्पादो जैसे टिन, काच , प्लास्टिक पैकेजिंग आदि के सभी विनिर्माताओं अथवा नगर पंचायत के अधिकारी क्षेत्र में आने वाले बाजारो में ऐसे उत्पाद प्रारंभ करने वाले ब्रैड मालिकों को कचरा प्रबंधन प्रणाली के लिए नगर पंचायत को आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करनी होगी । नगर पंचायत इस प्रावधान के लिए केन्द्र सरकार / राज्स सरकार के सम्बद्ध विभागों के साथ समन्वय कर सकती है ।
(ख) ऐसे सभी ब्रैड मालिको को, जो गैर-जैव अपघटीय पैकेजिंग सामग्री में अपने उत्पाद बेचते या विपणन करते हैं, उन्हे ऐसी प्रणाली कायम करनी होगी , जिसमें उनके उत्पादन के कारण उत्सर्जित पैकेजिंग कचरे को वापस लिया जा सके ।
(ग) सेनिटरी नेपकिन और डायपर्स विनिर्माता या ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां इस बात की संभावनाओं का पता लगाएंगी कि उनके उत्पादो में सभी रीसाइकिल योग्य पदार्थों का इस्तेमाल किस हद तक किया जा सकता है अथवा वे अपने सेनिटरी उत्पादों के पैकेट के साथ एक ऐसा पाउच या रैपर उपलब्ध कराएंगी , जिनसें नेपकिन या डायपर का निपटान किया जा सके ।
भाग 8]
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(घ) ऐसे सभी विनिर्माता, ब्रैड मालिक या विपणन कंपनियां अपने उत्पादों की रैंपिग और डिस्पोजल के लिए लोगो को शिक्षित करेगी ।
14. नगर पंचायत के दायित्व :
(i) नगर पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले भूभाग में सभी साझा गलियों/मार्ग; सार्वजनिक स्थलों, अस्थाई बस्तियों, मलिन क्षेत्रों , बाजारों, स्वयं के उद्यानों, बागों, नालियों आदि की सफाई की नियमित प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगी । वह इसके लिए मानव संसाधन और मशीने लगाएगा तथा घोषित संग्रहण कंटेनर से कचरा एकत्र करने और उसे हर रोज बंद वाहनों में अंतिम निपटान स्थल तक पहुचाने के लिए बाध्य होगा, जिसके लिए नगर पंचायत अपने सफाई स्टाफ और वाहनों के अलावा, अनुबंध के आधार पर प्राइवेट पार्टियों को काम पर लगा सकता है , अथवा सरकारी - निजी भागीदार व्यवस्था का सहारा ले सकता है । 'इसके अंतिरिक्त नगर पंचायत सभी वाणिज्यक क्षेत्रों ऐसे वाणिज्यक क्षेत्रो की पहचान करेगा, जिनमें दिन में दो बार झाडू लगाने की आवश्यता हों ।
(ii ) नगर पंचायत अथवा उसके द्वारा संलग्न अधिकृत एजेंसी सार्वजनिक मार्गो, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, धार्मिक स्थलों और वाणिज्यिक क्षेत्रो आदि के आसपास पर्याप्त संख्या में और पर्याप्त आकार के कूड़ेदानों का रख रखाव करेगा ।
(iii) नगर पंचायत विकेंद्रीकृत और नियमित ढंग से ठोस कचरा प्रबंधन गतिविधियों के प्रयोजन के लिए प्रत्येक वार्ड में एक वार्ड अधिकारी निर्दिष्ट करेगा , ताकि वह कंटेनरों , सार्वजनिक शौचालयों, सामुदायिक शौचालयों अथवा सर्वाजनिक स्थलो पर बने पेशाबघरों, सर्वाजनिक कचरे के लिए बनाए ट्रांसफर स्टेशन , लैडफिल प्रोसेसिंग यूनिटों आदि स्थानो की निगरानी रख सके ।
(iv). सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरे के प्रथक्करण, संग्रह, ढुलाई, प्रसंस्करण और निपटान कार्यो की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारी नियुक्त करेगा ।
(v) प्रत्येक वार्ड निर्धारित मानदंड के आधार पर स्वीपिंग बीट्स में विभाजित किया जाएगा और उसमें तदनुरुप कार्मिक तैनात किए जाएंगे या वर्तमान तैनाती युक्तिसंगत बनाया जाएगा तथा अद्यतन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए उनके काम पर निगरानी रखी जाएगी । नगर पंचायत जहां कहीं अपने स्टाफ से स्वीपिंग कराने में असर्मथ होगा, तो वह अनुबंध के जरिए बाहरी एजेंसियों से यह काम करा सकती हैं । प्रत्येक बीट का निरीक्षण दिशा निर्देशों के अनुसार निर्धारित दैनिक आधार पर सुपरवाइजिंग अधिकारियों द्वारा किया जाएगा ।
(vi) नगर पंचायत अद्यतन सड़क / गली क्लीनिंग मशीनों, मैकेनिकल स्वीपरो अथवा उपकरणों का इस्तेमाल करेगा , जिनसे झाडू लगाने और नालियों की सफाई की सक्षमता में सुधार होगा ।
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(vii ) नगर पंचायत सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान के माध्यम से जागरुकता और संवेदनशीलता पैदा करेगा तथा कचरा उत्सर्जको और अन्य हितभागियो को एसडब्ल्यूएम नियमों और इन उप- नियमों के विभिन्न प्रावधानों के बारे में प्रशिक्षित करेंगा, जिसमें इस्तेमालकर्ता शुल्क और जुर्माना/ दंड संबंधी प्रावधानो की जानकारी पर विशेष बल दिया जाएगा ।
(viii) नगर पंचायत कचरा उत्सर्जकों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगा कि वे गीले कचरे का स्रोत पर ही उपचार करे । नगर पंचायत विकेंद्रीकृत प्रौद्योगिकियों, जैसे बायो - मिथेनेशन , कम्पोस्टिंग आदि अपनाने के लिए प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर सकता है । इन प्रोत्साहनों में परिवारों , निवासी कल्याण संगठनो और संस्थानों आदि को पुरस्कृत और सम्मान प्रदान करना , उनके नाम सम्बद्ध वेबसाइटों में प्रकाशित करना अथवा संपत्ति कर आदि में छूट प्रदान करना शामिल हो सकते है ।
(ix) नगर पंचायत स्वयं द्वारा रख रखाव किए जा रहें सभी पार्को, उद्यानों और जहां कही संभव हो, अपने अधिकार क्षेत्र वाले अन्य स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग समाप्त करेगा और उनमें कम्पोस्ट का इस्तेमाल करेगा । अनौपचारिक कचरा रीसाइकलिंग क्षेत्र द्वारा किए जाने वाले रीसाइकलिंग उपायों के लिए प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा सकते है ।
(x) नगर पंचायत ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों को सुचारु और औपचारिक बनाने के उपाय करेगा और यह प्रयास करेगा कि कचरा प्रबंधन में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों (कचरा बीनने वालों) को वरीयता दी जाए , ताकि उनके कार्य स्थितियों को उन्नत बनाया जा सके और उन्हे ठोस कचरा प्रबंधन की औपचारिक प्रणाली में समाहित एवं एकीकृत किया जा सकें ।
(xi) नगर पंचायत यह सुनिश्चित करेगा कि स्वच्छता सेवा के सुविधा प्रदाता द्वारा अपने उन श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण सहित वर्दी, फ्लोरेसेंट जैकेट, दस्ताले , रेनकोट, समुचित फुटवेयर और मास्क प्रदान किए जाएं, जो ठोस कचरा परिचालन कार्य करते है और यह भी कि ऐसे श्रमिकों द्वारा इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाए ।
(xii ) नगर पंचायत कचरे के संग्रहण , परिवहन और परिचालन में शामिल स्वयं और बाहरी एजेंसी के स्टाफ की व्यवसायिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत संरक्षा के उपयुक्त और समुचित उपकरण प्रदान करेगा ।
(xiii ) किसी ठोस कचरा प्रोसेसिंग या उपचार या निपटान केंद्र अथवा लैडफिल साइट पर कोई दुर्घटना होने की स्थिति में, उस केंद्र का प्रभारी अधिकारी तत्काल नगर पंचायत को रिर्पोट करेगा, जो स्थिति की समीक्षा करने के बाद उस केंद्र के प्रभारी अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी करेगा ।
भाग 8]
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(xiv) नियमित जांच : अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी वार्ड के विभिन्न भागों और ठोस कचरे के संग्रहण , ढुलाई, प्रोसेसिंग और निपटान से संबंधित अन्य स्थानों की नियमित जांच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एसंडब्ल्यूएम नियमों और इन उप -नियमों के विभिन्न प्रावधानों का पालन हो रहा हैं ।
(xv) नगर पंचायतं अपने मुख्यालय में कॉल सेंटर की स्थापना के जरिए सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरएस) विकसित करेगा । इस पीजीआरएस में एसएमएस आधारित सेवा, मोबाइल अप्लीकेशन अथवा वैब आधारित सेवाएं शामिल हो सकती हैं ।
(xvi ) नगर पंचायत एसडब्ल्यूएम नियमों और उप- नियमों के कार्यान्वयन से सम्बद्ध कर्मचारियों की उपस्थिकत दर्ज करने के लिए कार्ड प्रोद्योगिकियों / आईसीटी प्रणाली कायम करेगा तथा ऐसी प्रणाली को वेतन / दिहाडी/ परिश्रमिक के साथ एकीकृत करने के प्रयास करेगा ।
(xvii) पारदर्शिता और सर्वाजनिक पहुच अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नगर पंचायत अपनी वेबसाइट से सारी आवश्यक सूचनाऐं प्रदान करेगा ।
(xviii) नगर पंचायत एसडब्ल्यूएम नियमों में वर्णित सभी अन्य दायित्व पूरे करेगा, जो इन उपनियमों में विशेष रुप से उल्लिखित नही किए गये हैं ।
अध्याय-10
विविध
15. इन उपनियमों की व्याख्या या कार्यान्वयन में कोई संदेह या कठिनाई आने की स्थिति में उसे अध्यक्ष , नगर पंचायत के समक्ष रखा जाएगा, जिसका निर्णय ऐसे मामले में अंतिम होगा ।
16. सरकारी निकायों के साथ समन्वय नगर पंचायत अन्य सरकारी एजेंसियों और प्राधिकरणों के साथ समन्वय करेगा, ताकि इन उपनियमों का अनुपालन ऐसे निकायों के अधिकार क्षेत्र या नियंत्रण में आने वाले इलाकों सुनिश्चित किया जा सके । कोई कठिनाई होने की स्थिति में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा ।
17. सक्षम प्राधिकारी ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 और इन उप - नियमों के समुचित कार्यान्वयन के लिए समय समय पर सामान्य या विशेष आदेश जारी कर सकते हैं 238
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
अनुसूची-1
नगर पंचायत भीमताल के बोर्ड की बैठक में पारित प्रस्ताव में निर्धारित (ठोस कचरा प्रबंधन के लिए उपयोगकर्ता शुल्क)
क्र० सं० अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी / अपशिष्ट का प्रतिमाह सेवा शुल्क (यूजर चार्जेज रुपये में)
प्रकार
1 2 3
: :
1 कम आय वाले परिवार (बी ० पी०एल ० कार्ड रू 0 10.00 प्रति परिवार
धारक तथा रू0 5000.00 प्रतिमाह तक की
आय वाले परिवार)
2 अन्य समस्त आवासीय भवन रू० 30.00 प्रति परिवार
3 उपरोक्त के अतिरिक्त भवन रू0 50.00 प्रति परिवार
(अर्द्ध-आवासीय भवन)
4 होटल / गैस्ट हाउस (1-20 कमरे) रू0 200.00 प्रति कमरा
5 होटल / गैस्ट हाउस (21-30 कमरे) रू0 300.00 प्रति कमरा
6 होटल / गैस्ट हाउस (31 से ज्यादा कमरे) रू0 400.00 प्रति कमरा
7 रैस्टोरेन्ट (बड़े) रू 0 500.00
8 रैस्टोरेन्ट (छोटे) रू0 300.00
9 बारात घर रू0 1000.00 प्रति आयोजन
10 टैन्ट हाउस ( सार्वजनिक स्थान पर) रू0 2000.00 प्रति आयोजन
11 प्रदर्शनी / हाट बाजार रू0 5000.00 प्रति आयोजन
12 बैकरी
रू0 200.00
13 कार्यालय रू0 100.00
14 फैक्ट्री 10 वर्कर तक रू 0 500.00
25 वर्कर तक रू0 1000.00
25 से अधिक वर्कर रू0 2000.00
15 विद्यालय / शिक्षण संस्थाएं (आवासीय) रू0 10.00 प्रति बेड
16 हॉस्पिटल / नर्सिंग होम (बायो मेडिकल 20 बेड तक रू0 500.00
वेस्ट को छोड़कर) 21 बेड से अधिक रू 0 1000.00
भाग 8 ]
239
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
17 दुकान/प्रतिष्ठान मोहल्ले की छोटी दुकान रू0 50.00
बाजार की दुकान रू 0 75.00
शो - रूम रू0 2000.00
मॉल रू0 1000.00
18 सब्जी एवं फल विक्रेता रू0 200.00
19 मांस एवं मछली विक्रेता रू 0 200.00
20 कार-पेन्टर रू 0 200.00
21 वर्क-शॉप दो पहिया रू 0 300.00
चार पहिया रू0 500.00
22 भवन का ढहान / निर्माण संबंधी अपशिष्ट
रू0 500.00 प्रति घन मी०
23 क्लीनिक
रू0 100.00
24 पैथोलॉजी
रू0 500.00
25 कबाड़ी रू0 100.00 से 1000.00
26 जूस / गन्ने का रस विक्रेता रू0 10.00 प्रतिदिन
27 सिनेमा हॉल / थियेटर रू0 500.00
28 उपरोक्त के अतिरिक्त अन्य (प्रतिष्ठान की
पंचायत बोर्ड - स्तर से आवश्यकतानुसार
स्थिति के अनुसार) निर्धारित किया जायेगा ।
उपयोगकर्ता शुल्क/ प्रभार का भुगतान मांग जारी होने से 30 दिन के भीतर न किए जाने की स्थिति में उपयोगकर्ता शुल्क / प्रभार पर 10 प्रतिशत की दर से विलम्ब भुगतान /प्रभार (एलपीएससी) लगाया जाएगा ।
240
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
अनुसूची-2
जुर्माना / दंड
अपराध
निम्नांकित पर लागू
नियम/उप नियम संख्या
क्र सं
प्रत्येक चूक के लिए जुर्माना (रुपये में)
1.
आवासीय
200.00
बल्क जन्रेटर
500.00
4(1) (क) एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम
कचरे को पृथक करने और संग्रह करने तथा पृथक्कृत कचरे को इन नियमों के अनुसार सौपने में विफल रहना
5000 मीटर से कम . क्षेत्र वाले विवाह /पार्टी हाल, फेस्टिवल हाल , पार्टी लान, प्रदर्शनी और मेले स्थल
5000.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले क्लबों, सिनेमाघरों, पब्स, सामुदायिक हॉल , मल्टीप्लेक्सेज और अन्य ऐसे स्थान
500.00
5000 मीटर से कम क्षेत्र वाले अन्य गैर-आवासीय स्थान
500.00
फिस ,मीट विक्रेता द्वारा कूडे को पृथ्थकरण तरीके से न रखना
1. उल्घनकर्ता
200.00
सडक / गली में कूडा फैकना, थूकना
से 500.00
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2)
एवं कार्यवाही उत्तराखण्ड कूडा फेकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम 2016 के अन्तर्गत होगी भाग 8]
241 उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई० (ज्येष्ठ 24, 1947 शक सम्वत्)
500.00
2. नहाना, पैशाब करना, जानवरो को चारा खिलाना, कपडे धोना, वाहन धोना,गोबर नाली में बहाना
2.
आवासीय
200.00
नियमानुसार सेनिटरी कचरे का निपटान करने में विफल रहना ।:
500.00
गैर-आवासीय / बल्क जन्रेटर
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(1 ) (ख) और (घ)
नियम के अनुसार बागवानी और उद्यान कचरे के निपटान में विफल रहना ।
3.
1000.00
आवासीय
5000.00
नियम के अनुसार निर्माण और विध्वंस कचरे के निपटान में विफल रहना ।
गैर-आवासीय / बल्क जन्रेटर
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4 (1) (ग)
4.
उल्लंघनकर्ता
ठोस कचरे को खुले में जलाना
5000.00
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(2) , 15 (ट) ,
5. एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(4)
निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन किए बिना किसी गैर लाइसेंसीकृत स्थल पर 100 व्यक्तियों से अधिक की भागीदारी के साथ कार्यक्रम या सभा का आयोजन करना
ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित करने वाले व्यक्ति अथवा ऐसा व्यक्ति जिसकी ओर से ऐसा कार्यक्रम या सभा आयोजित की गई हो और इवेंट मैनेजर यदि कोई हो, जिसने कार्यक्रम या सभा आयोजित की हो
6.
200.00
उल्लंघनकर्ता
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(5)
नियम के अनुसार कचरे का निपटान करने में विफल रहने वाले गली विक्रेता/ वेन्डर कूडादान न रखने एवं कूडे को पृथ्थकरण न
करने, अपशिष्ट भण्डारन डिपो या पात्र या वाहन 242
उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई ० (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
[भाग 8
में डालने में विफल रहने
पर
7.
500.00
अपराधी
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4 (2 ) , 15 (छ)
सार्वजनिक स्थलो, सडको, गलियों आदि में गंदगी फैलाना / कुत्ते / अन्य जानवरो द्वारा मल त्याग / उत्सर्जित कचरे के निपटान में विफलता
:
:
निम्नांकित उल्लंघनों के लिए महीने में केवल एक बार जुर्माना लगाया जाएगा
8.
नियमों के अनुसार
कचरे का निपटान में
विफलता
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(6)
निवासी कल्याण एसोसिएशन, आर. डब्ल्यू.ए
बजार एसोसिएशन,संघ 20,000.00
9.
द्वारबंद समुदाय
संस्थांन
नियमों के अनुसार
कचरे का निपटान में
विफलता
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4(7)
10.
होटल
रेस्टोरेंट
नियमों के अनुसार
कचरे का निपटान में
विफलता
एसडब्ल्यूएम नियमों का नियम 4 (8)
:
11. एसडब्ल्यूएम नियमोंका नियम 17(2)
विनिर्माता और/ या ब्रॉड ऑनर/स्वामी
उत्पादन के कारण सृजित पैकेजिंग कचरे को वापस लेने की प्रणाली कायम किये बिना डिस्पोजल उत्पादों कीबिक्री अथवा विपणन
12.
नियमों के अनुसार
उपाय करने में विफलता
एसडब्ल्यूएम विनिर्माता और ब्रॉड
नियमों का स्वामी और विपणन
नियम 17(3) कुपनियां
13 नियमों के उपाय करने ,
एसडब्ल्यूएम उल्लंघनकर्ता, ग्रुप
नियमों का भवन योजना में हाउसिंग सोसाईटि या
नियम 15 य (ङ) अपशिष्ट संग्रहण केन्द्र मॉर्केट काम्पलेक्स
स्थापित करने में आदि
विफलता
भाग 8 ]
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उत्तराखण्ड गजट , 14 जून, 2025 ई0 (ज्येष्ठ 24 , 1947 शक सम्वत्)
14 एसडब्लूएम नियमों का निमय 20 (ग)
1000.00
उल्लघंनकर्ता / पर्यटक/ वाहन चालक
गलियों, पहाड़ियों , सार्वजनिक स्थलों में अपशिष्ठ यथा कागज पानी की बोतल, शराब की बोतल, सोफ्ट ड्रिक कैन, टैट्रा पैक अन्य कोई प्लास्टिक या कागज अपशिष्ठ को फैकने पर
15 एसडब्लूएम नियमों का निमय 20 (घ)
उल्लंघनकर्ता / होटल / अतिथिग्रह स्वामी
1000.00
नगर पंचायत की उपविधि को होटल/ अतिथिग्रह में बोर्ड लगाकर व्यवस्था करने में विफलता
16
आयोजनकर्ता
5000.00
सार्वजनिक सभाओं (जलूस प्रर्दशिनियों, सर्कस, मेले , राजनैतिक रैलिया , वाणिजिक, धार्मिक सास्कृतिक कार्यक्रमों, विरोध प्रर्दशन आदि सहित सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित गतिविधियों के क्षेत्र एवं आस-पास के क्षेत्रों की स्वच्छता सुनिश्चित करने में विफलता)
विजय बिष्ट,
अधिशासी अधिकारी ,
नगर पंचायत भीमताल
नैनीताल ।
देवेन्द्र सिंह चनौतिया,
अध्यक्ष,
नगर पंचायत भीमताल नैनीताल ।
पी० एस० यू० (आर० ई0) 24 हिन्दी गजट / 254 - भाग 8-2025 (कम्प्यूटर / रीजियो) ।
मुद्रक एवम् प्रकाशक-अपर निदेशक, राजकीय मुद्रणालय , उत्तराखण्ड , रुड़की ।