क्रम-संख्या-168
रजिस्ट्रेशन नम्बर-एस०एस०पी०/एल० डब्लू०/एन०पी०-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
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(उार प्रदेश विधान मण्डल के विधेयक)
उत्तर प्रदेश
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संख्या 810/वि0स0/संसदीय/86(सं)-2020
लखनऊ, 22 अगस्त, 2020
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अधिसूचना
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 जो उत्तर प्रदेश विधान सभा के दिनांक 22 अगस्त, 2020 के उपवेशन में पुरःस्थापित किया गया, उत्तर प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 1958 के नियम 126 के अन्तर्गत एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 का अग्रतर संशोधन करने के लिए
विधेयक
भारत गणराज्य के इकहत्तरवें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है :-
संक्षिप्त नाम 1-यह अधिनियम उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2020
कहा जाएगा।2 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 2-उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006, जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है, की धारा 4 में उपधारा (10) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रख दी जाएगी, अर्थात् :-
उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 8 सन् 2012 की धारा 4 का संशोधन
(10) किसी भू-खातेदार के सम्बन्ध में 'परिवार' का तात्पर्य यथास्थिति स्वयं पुरुष या स्त्री और उसकी पत्नी या उसका पति या थर्ड जेण्डर पत्नी या पति (न्यायिक रूप से पृथक पत्नी या पति या थर्ड जेण्डर पति या पत्नी से भिन्न), विवाहित पुत्रियों और थर्ड जेण्डर अवयस्क संतानो से भिन्न अवयस्क पुत्रों तथा अवयस्क पुत्रियाें से है।
स्पष्टीकरण-थर्ड जेण्डर का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो पुरुष अथवा स्त्री लिंग से भिन्न लिंग का हो।
3-मूल अधिनियम की धारा 59 की उपधारा (4) में ,-
धारा 59 का संशोधन
(1) खण्ड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया जायेगा, अर्थात्ः-
(क) (एक) उपधारा (1) के अधीन जारी किये गये किसी पूर्ववर्ती आदेश में परिवर्द्धन कर सकती है, संशोधन कर सकती है, परिवर्तन कर सकती है या उसे निरस्त कर सकती है;
(दो). किसी ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण को सौंपी गई या
सौंपी हुई समझी गयी या अंतरित की गई किसी ऐसी भूमि, जो धारा 77 की उपधारा (1) के अधीन आच्छादित नहीं है, को धारा 77 की उपधारा (1) के अधीन आच्छादित भूमि में परिवर्तित कर सकती है।
(2) खण्ड (ग) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया जायेगा, अर्थात्ः-
(ग) (एक). किसी ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण को इस प्रकार साैंपी गयी या साैंपी हुयी समझी गई या अन्तरित की गई किसी भूमि या अन्य चीज को ऐसी निबन्धन एवं शर्तों, जैसा कि विहित किया जाय, पर वापस ले सकती है।
(दो) खण्ड (एक) के अधीन जारी किये गये किसी पूर्ववर्ती आदेश में परिवर्द्धन कर सकती है, संशोधन कर सकती है, परिवर्तन कर सकती है या उसे निरस्त कर सकती है;
4-मूल अधिनियम की धारा 60 की उपधारा (2) में, खण्ड (ख) के स्थान पर धारा 60 का संशोधन
निम्नलिखित खण्ड रख दिया जायेगा, अर्थात्ः-
(ख) वनों, वृक्षों और चारागाहों का संरक्षण, अनुरक्षण और विकास।
5-मूल अधिनियम की धारा 77 में उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित धारा 77 का संशोधन
उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात्ः-
(2) इस संहिता के अन्य उपबन्धों में अन्तर्विष्ट किसी बात के प्रतिकूल होते हुये भी, जहां, इस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई भूमि अथवा उसका कोई भाग, लोक प्रयोजन के लिए क्रय, अर्जित, या पुनगर््रहीत किये गये भू-खण्ड या भू-खण्डों से घिरा है अथवा उसके या उनके मध्य में है, अथवा किनारे है एवं लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक है, वहां राज्य सरकार, ऐसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी को परिवर्तित कर सकेगी, और यदि ऐसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी परिवर्तित की जाती है, तो पूर्वोक्त लोक उपयोगिता की भूमि के बराबर या उससे अधिक कोई अन्य भूमि, उसी प्रयोजन के लिए यथास्थिति उसी अथवा किसी निकटवर्ती ग्राम पंचायत अथवा स्थानीय प्राधिकरण, में आरक्षित कर दी जायेगी या राज्य सरकार इस संहिता की धारा 101 के अधीन, उसके विनिमय की अनुज्ञा, विहित रीति से दे सकेगीः उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 3 परन्तु यह कि किसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी आपवादिक प्रकरणों में ही ऐसी निबंधन एवं शर्तों पर परिवर्तित की जा सकेगी, जैसा कि विहित की जाय। लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी में परिवर्तन किये जाने के कारण को लिखित रूप में अभिलिखित किया जायेगा।
6-मूल अधिनियम की धारा 80 की उपधारा (1) में निम्नलिखित परन्तुक बढ़ा धारा 80 का संशोधन
दिया जायेगा, अर्थात्ः-
परन्तु यह कि यदि घोषणा करने के आवेदन के साथ विहित शुल्क संलग्न हो तथा संयुक्त जोत होने के मामलें में सह भू-धृति धारकों की अनापत्ति सह भू-धृति धारक होने की स्थिति में संलग्न हो और यदि उपजिलाधिकारी द्वारा यथा पूर्वोक्त पैंतालिस दिन के भीतर घोषणा नहीं की जाती है तो घोषणा की गयी समझी जायेगी और तहसीलदार ''उपजिलाधिकारी के आदेश अध्यधीन'' टिप्पणी सहित राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित करेगा।
यदि कोई प्रभावित पक्षकार उक्त घोषणा के सम्बन्ध में कोई आपत्ति दाखिल
करना चाहे, तो वह सक्षम न्यायालय में आपत्ति दाखिल कर सकता है।
7-(एक) मूल अधिनियम की धारा 89 में उपधारा (2) के पश्चात् निम्नलिखित धारा 89 का संशोधन
स्पष्टीकरण बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्ः-
स्पष्टीकरण- इस उपधारा में पद ''किसी व्यक्ति'' का तात्पर्य प्राकृतिक या
विधिक व्यक्ति से है।
(दो) उपधारा (3) में, परन्तुक के स्थान पर निम्नलिखित परन्तुक रख दिया
जायेगा, अर्थात्ः-
परन्तु यह कि जहाँ भूमि, किसी रजिस्ट्रीकृृत फर्म, कम्पनी, पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाईबिलिटी पार्टनरशिप फर्म, न्यास, समिति अथवा किसी अन्य शैक्षिक या किसी पूर्त संस्था द्वारा इस उपधारा या निरसन के पूर्व यथा अधिनियमित उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 की धारा 154 की उपधारा (3) के अधीन पूर्व अनुमोदन प्राप्त किये बिना अर्जित अथवा क्रय की गई हो, वहाँ राज्य सरकार अथवा इस अधिनियम के अधीन इस प्रयोजन हेतु प्राधिकृत कोई अधिकारी, जुर्माना स्वरूप ऐसी धनराशि, जो आवेदन करते समय प्रचलित सर्किल दर के अनुसार आगणित उपधारा (2) के अधीन विहित सीमा से अधिक भूमि की लागत की पचास प्रतिशत होगी, का भुगतान करने के पश्चात् ऐसे अर्जन अथवा क्रय को विनियमित करने के लिए अपना अनुमोदन प्रदान कर सकती/सकता है।
8-मूल अधिनियम की धारा 101 में खण्ड (ख) में निम्नलिखित परन्तुक बढ़ा धारा 101 का संशोधन
दिया जायेगा, अर्थात्ः-
परन्तु यह कि विनिमय की अनुज्ञा प्रदान की जा सकती है, भले ही विनिमय हेतु प्रस्तावित निजी भूमि का मूल्यांकन सार्वजनिक मूल्य से दस प्रतिशत से अधिक हो।
खण्ड (ग) में निम्नलिखित परन्तुक बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात् :- परन्तु यह कि विनिमय की अनुज्ञा प्रदान की जा सकती है, भले ही विनिमय हेतु प्रस्तावित निजी भूमि का क्षेत्र, सार्वजनिक भूमि के क्षेत्र से पच्चीस प्रतिशत से अधिक हो।
9-(1) मूल अधिनियम की धारा 108 में, उपधारा (1) में शब्द ''किसी'' के धारा 108 का संशोधन
पश्चात् शब्द ''थर्ड जेण्डर'' बढ़ा दिये जायेंगे। 4 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 (2) उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात्ः-
उपधारा (1) के उपबन्धों के अध्यधीन पुरुष थर्ड जेण्डर भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार के निम्नलिखित नातेदार उत्तराधिकारी हैं, अर्थात्् :-
(क) विधवा, थर्ड जेण्डर पति या पत्नी, अविवाहित पुत्री, थर्ड जेण्डर संतान और पुत्र-पौत्रादिक क्रम में पुंजातीय वंशज, प्रति शाखा के अनुसारः
परन्तु यह कि विधवा, अविवाहित पुत्री, थर्ड जेण्डर संतान, और पुत्र, चाहे वे जितनी भी नीची पीढ़ी में हों, को विरासत में वह अंश मिलेगा जो पूर्वमृत पुत्र को, यदि वह जीवित होता, न्यागत होता;
(ख) माता और पिता ;
(ग) विवाहित पुत्री ;
(घ) भाई, अविवाहित बहिन, थर्ड जेण्डर सहोदर भाई या बहिन जो क्रमशः उसी मृत पिता के पुत्र और पुत्री थर्ड जेण्डर संतान हों और पूर्व मृत भाई का पुत्र, अविवाहित पुत्री, थर्ड जेण्डर संतान जब पूर्व मृत भाई उसी मृत पिता का पुत्र हो;
(ङ) पुत्र की पुत्री और थर्ड जेण्डर संतान;
(च) पिता की माता और पिता के पिता;
(छ) पुत्री का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ज) विवाहित बहिन;
(झ) सौतेली बहिन जो उसी मृत पिता की ही पुत्री हो;
(ञ) बहिन का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ट) सौतेली बहिन का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री, जहाँ बहिन उसी मृत पिता की ही पुत्री हो;
(ठ) भाई के पुत्र का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ड) पिता के पिता का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ढ़) पिता के पिता के पुत्र का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ण) माता की माता का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री। 10-मूल अधिनियम की धारा 109 में शब्द 'पुरुष' जहाँ कहीं आया हो के धारा 109 का संशोधन
पश्चात् शब्द ''थर्ड जेण्डर'' बढ़ा दिया जायेगा।
11-मूल अधिनियम की धारा 110 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रख दी धारा 110 का संशोधन
जायेगी, अर्थातः-
110-जहाँ इस संहिता के प्रारम्भ होेने के पश्चात् किसी स्त्री भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार की मृत्यु हो जाय, वहां किसी जोत या उसके आंशिक भाग में उसका हित, धारा 107 से 109 के उपबन्धों के अध्यधीन, नीचे दिए गए उत्तराधिकार क्रम के अनुसार न्यागत हो जाएगा ,-
(क) पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान, अविवाहित पुत्री, पुत्र का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान, और अविवाहित पुत्री, पुत्र के पुत्र का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान, और अविवाहित पुत्री, पूर्व मृत पुत्र की विधवा और पूर्व मृत पुत्र के पूर्व मृत पुत्र की विधवा, प्रति शाखा के अनुसार समान अंशों में :
परन्तु यह कि प्रथमतः उसी शाखा का निकटतर, दूरतर को अपवर्जित कर देगा :
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 5परन्तु द्वितीयतः यह कि कोई विधवा, जिसने पुनर्विवाह कर लिया है, अपवर्जित
हो जायेगी।
(ख) पति या विवाहित थर्ड जेण्डर पति या पत्नी ;
(ग) विवाहित पुत्री;
(घ) पुत्री का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री;
(ङ) पिता;
(च) विधवा माता;
(छ) भाई, जो उसी मृत पिता का पुत्र हो या थर्ड जेण्डर संतान सहोदर भाई या बहिन हो, जो उसी मृत पिता की संतान होे, और भाई का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री प्रतिशाखा अनुसार;
(ज) अविवाहित बहिन;
(झ) विवाहित बहिन;
(ञ) बहिन का पुत्र, थर्ड जेण्डर संतान और अविवाहित पुत्री।
12-मूल अधिनियम की धारा 126 के अंत में निम्नलिखित परन्तुक बढ़ा दिया धारा 126 का संशोधन
जायेगा, अर्थात्ः-
परन्तु यह कि विधवा और दिव्यांग व्यक्तियों को अधिमान प्रदान किया
जायेगा ।
13-मूल अधिनियम की धारा 128 की उपधारा (1-क) के स्थान पर धारा 128 का संशोधन
निम्नलिखित उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात्ः-
उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन इस संहिता के प्रारम्भ होने के पूर्व या पश्चात् किये गये भूमि के आवंटन या कृत पट्टा के मामले में ऐसे पट्टा आवंटन के दिनांक से पाँच वर्ष के भीतर आवेदन किया जा सकता है।
-------- उद्देश्य और कारण उत्तर प्रदेश राज्य में भू-धृतियों और भू-राजस्व से संबंधित विधि को समेकित करने तथा उसमें संशोधन करने के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 अधिनियमित किया गया है। राज्य के औद्योगीकरण और सरकारी योजनाओं के उत्तम क्रियान्वयन के प्रयोजनार्थ भूमि की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने, निजी उद्योगों के लिए भूमि आदि की विनिमय की प्रक्रिया को सरल बनाने, लोक उपयोगिता हेतु भूमि सुरक्षित किये जाने, विहित सीमा से अधिक भूमि विनियमितीकरण प्रक्रिया को स्पष्ट किये जाने, भू-उपयोग में कृषि भू-उपयोग से गैर कृषि भू-उपयोग के रूप में परिवर्तन किये जानेे, भू-स्वामित्व के उत्तराधिकार सम्बन्धी अधिकारों हेतु पात्र थर्ड जेण्डर को सम्मिलित किये जाने तथा राजस्व मामलों से संबंधित विभिन्न प्रक्रियागत समस्याओं का समाधान किये जाने के लिए उक्त अधिनियम में कतिपय संशोधन किये जाने आवश्यक थे। उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुए पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन किये जाने का विनिश्चय किया गया है। तद्नुसार उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 पुरःस्थापित किया जाता है।
योगी आदित्यनाथ,
मुख्य मंत्री। 6 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2020 द्वारा संशोधित की जाने वाली मूल अधिनियम की संगत धाराओं का उद्धरण।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006
धारा 4(10) किसी भू-खातेदार के सम्बन्ध में ''परिवार'' का तात्पर्य यथास्थिति स्वयं पुरुष या स्त्री और उसकी पत्नी या उसका पति (न्यायिक रूप से पृथक पत्नी या पति से भिन्न) अवयस्क पुत्रों, और विवाहित पुत्रियाें से भिन्न अवयस्क पुत्रियाें से है :
परन्तु जहां प्रश्न किसी भूमि के अन्तरण से सम्बन्धित हो और अन्तरिती अवयस्क हो वहां पद ''परिवार'' के अन्तर्गत ऐसे अवयस्क के माता-पिता होंगे;
धारा 59(4)(क) (1) के अधीन जारी किये गये किसी पूर्ववर्ती आदेश में परिवर्द्धन कर सकती है, संशोधन कर सकती है, परिवर्तन कर सकती है या उसे निरस्त कर सकती है;
[धारा 59 की उपधारा 4(क) में नयी व्यवस्था 4(क)(2) के रूप में जोड़ी जा रही है।] 59(4)(ग) किसी ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण को साैंपी गई या साैंपी हुई समझी गई या अन्तरित की गई किसी भूमि या अन्य चीज को ऐसी निबन्धन एवं शर्तों पर जैसी कि विहित की जाएं वापस ले सकती है;
[धारा 59 की उपधारा 4(ग) में नयी व्यवस्था 4(ग)(2) के रूप में जोड़ी जा रही है।] धारा 60 (2) पूर्ववर्ती उपबन्धों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना भूमि प्रबन्धक समिति के कृत्यों और कर्तव्यों में निम्नलिखित बिन्दु सम्मिलित होंगे -
XXX XXX XXX (ख) वनों और वृक्षों का संरक्षण, अनुरक्षण और विकास; धारा 77 (2) ''इस संहिता के अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां, इस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई भूमि अथवा उसका कोई भाग लोक प्रयोजन के लिए क्रय, अर्जित या पुनर्गृहीत किये गये भू-खण्ड या भू-खण्डों से घिरी हैं अथवा उनके बीच में है, वहां राज्य सरकार ऐसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी को परिवर्तित कर सकेगी, और यदि ऐसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी परिवर्तित की जाती है, तो उपरोक्त लोक उपयोगिता की भूमि के बराबर या उससे अधिक भूमि उसी प्रयोजन के लिए उसी अथवा किसी निकटवर्ती ग्राम पंचायत अथवा अन्य स्थानीय प्राधिकरण, जैसी भी स्थिति हो, में सुरक्षित कर दी जायेगी या राज्य सरकार इस संहिता की धारा 101 के अन्तर्गत, उसके विनिमय की अनुज्ञा, विहित रीति से दे सकेगी :
परन्तु यह कि किसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी अपवादात्मक प्रकरणों में ही ऐसे निबंधन एवं शर्तों पर परिवर्तित की जा सकेगी, जो विहित की जाये। लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी परिवर्तित करने का कारण अभिलिखित किया जायेगा।
धारा 89 (3) परन्तु यह कि जहां भूमि, किसी रजिस्ट्रीकृृत फर्म, कम्पनी, पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाईबिलिटी पार्टनरशिप फर्म, न्यास, समिति अथवा किसी शैक्षिक या किसी पूर्त संस्था द्वारा इस उपधारा के अधीन पूर्व अनुमोदन प्राप्त किये बिना अर्जित अथवा क्रय की गई हो वहां राज्य सरकार अथवा इस अधिनियम के अधीन इस प्रयोजन हेतु प्राधिकृत कोई अधिकारी, जुर्माना स्वरूप ऐसी धनराशि, जो आवेदन करते समय प्रचलित सर्किल दर के अनुसार आगणित उपधारा (2) के अधीन विहित सीमा से अधिक भूमि की लागत का पांच प्रतिशत होगी, का भुगतान करने के पश्चात् ऐसे अर्जन अथवा क्रय को विनियमित करने के लिए अपना अनुमोदन प्रदान कर सकती अथवा सकता है;
धारा 108 (2) उपधारा (1) के उपबन्धों के अध्यधीन पुरुष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार के निम्नलिखित नातेदार उत्तराधिकारी हैं, अर्थात् :-
(क) विधवा, अविवाहित पुत्री, और पुत्र-पौत्रादिक क्रम में पुंजातीय वंशज, प्रति शाखा के अनुसारः
परन्तु यह कि किसी पूर्वमृत पुत्र के पुत्र, और अविवाहित पुत्री, और विधवा, चाहे वे जितनी भी नीची पीढ़ी में हो, को विरासत में वह अंश मिलेगा जो पूर्वमृत पुत्र को यदि वह जीवित होता, न्यागत होता;
(ख) माता और पिता ; (ग) विवाहित पुत्री ; (घ) भाई और अविवाहित बहिन जो क्रमशः उसी मृत पिता के पुत्र और पुत्री हों, और पूर्व मृत भाई का पुत्र, और अविवाहित पुत्री, जब पूर्व मृत भाई उसी मृत पिता का पुत्र हो;
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 7(ञ) बहिन का पुत्र, और अविवाहित पुत्री; (ट) सौतेली बहिन का पुत्र, और अविवाहित पुत्री, जहँ बहिन उसी मृत पिता की ही पुत्री हो;
(ठ) भाई के पुत्र का पुत्र, और अविवाहित पुत्री; (ड) पिता के पिता का पुत्र, और अविवाहित पुत्री; (ढ़) पिता के पिता के पुत्र का पुत्र, और अविवाहित पुत्री; (ण) माता की माता का पुत्र, और अविवाहित पुत्री।
धारा 109-स्त्री वारिस के नाते विरासत में हित प्राप्त करने वाली स्त्री का उत्तराधिकार- जहां इस संहिता के प्रारम्भ होने के पूर्व या पश्चात् कोई स्त्री किसी जोत में पुरुष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार का हित विरासत में प्राप्त करे और ऐसी स्त्री की ऐसे प्रारम्भ होने के पश्चात् मृत्यु हो जाय, वह विवाह कर ले या पुनर्विवाह कर ले वहां जोत में उसका हित धारा 107 और 112 के उपबन्धों के अध्यधीन यथास्थिति अन्तिम पुरुष भूमिधर, असामी या सरकारी पट्टेदार के निकटतम जीवित वारिस को न्यागत होगा।
स्पष्टीकरण-इस धारा में पद ''निकटतम जीवित वारिस'' का तात्पर्य धारा 108 के अनुसार अभिनिश्चित वारिस से है :
परन्तु यह कि यदि पुत्री के रूप में विरासत प्राप्त करने वाली किसी स्त्री, जिसके पास इस संहिता की धारा 110 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट वारिस जीवित हैं, की मृत्यु हो जाती है तो जोत में उसका हित धारा 110 के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट वारिसों पर न्यागत होगा।
धारा 128 (13) कलेक्टर, किसी आवंटन के सम्बन्ध में, विहित रीति से, स्वप्रेरणा से जांच कर सकता है और किसी व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर जांच करेगा और यदि उसका समाधान हो जाए कि आवंटन इस संहिता या इस संहिता द्वारा निरसित किन्हीं अधिनियमितियों या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के उल्लंघन में है, तो वह, आवंटन और पट्टा, यदि कोई हो, को निरस्त कर सकता है।
(1-क) उपधारा (1) के अन्तर्गत कोई प्रार्थना-पत्र इस संहिता के प्रारम्भ के पूर्व किये गये आवंटन की स्थिति में, ऐसे प्रारम्भ के दिनांक से पांच वर्ष के भीतर और ऐसे प्रारम्भ के दिनांक को या उसके पश्चात् किये गये आवंटन की स्थिति में, ऐसे आवंटन या पट्टा के दिनांक से पांच वर्ष के भीतर दिया जा सकता है।
आज्ञा से, प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव।
----- UTTAR PRADESH SARKAR SANSADIYA KARYA ANUBHAG-1 ——— No. 536/XC-S-1–20-54S-2020 Dated Lucknow, September 18, 2020 ——— NOTIFICATION
MISCELLANEOUS
IN pursuance of the provisions of clause (3) of Article 348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of the "Uttar Pradesh Rajasva Sanhita (Sanshodhan) Vidheyak, 2020" introduced in the Uttar Pradesh Legislative Assembly on August 22, 2020.
THE UTTAR PRADESH REVENUE CODE (AMENDMENT) BILL, 2020
A BILL
further to amend the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006. IT IS HEREBY enacted in the Seventy-first Year of the Republic of India as
follows:-
Short title 1. This Act may be called the Uttar Pradesh Revenue Code (Amendment)
Act, 2020.
8 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 Amendment of2. In section 4 of the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 hereinafter referred section 4 of the to as the principal Act, for sub-section (10) the following sub-section shall be U.P. Act no. 8 of
substituted, namely:-
2012
(10) Family, in relation to a tenure-holder, means himself or herself and his wife or her husband or third gender spouse, as the case may be, (other than a judicially separated wife or husband or third gender spouse), minor sons and minor daughters other than married daughters and third gender minor issue.
Explanation- Third Gender means such a person who is of a gender different from the male or female gender.
Amendment of
3. In sub-section (4) of section 59 of the principal Act,–
section 59
(1) for clause (a) the following clause shall be substituted, namely:-
(a) (i) add to, amend, vary or rescind any earlier order issued under sub-section (1);
(ii) convert any land entrusted or deemed to be entrusted or transferred to any Gram Panchayat or local authority, which is not covered under sub-section (1) of section 77 to a land covered under sub-section (1) of section 77.
(2) for clause (c) the following clause shall be substituted, namely:-
(c) (i) resume any land or other thing so entrusted or deemed to be entrusted or transferred to any Gram Panchayat or local authority on such terms and conditions as prescribed.
(ii) add to, amend, vary or rescind any earlier order issued under clause (i).
Amendment of
4. In sub-section (2) of section 60 of the principal Act, for clause (b) the section 60
following clause shall be substituted, namely:-
(b) the preservation, maintenance and development of forests, trees and pastures.
Amendment of
5. In section 77 of the principal Act, for sub-section (2) the following section 77
sub-section shall be substituted, namely:-
(2) Notwithstanding anything to the contrary contained in other provisions of this Code, where any land or part thereof specified in sub-section (1) of this section is, surrounded by or, in between, or on the edges and necessary for public purpose, the plot or plots of land purchased, acquired or resumed for public purpose, the State Government may change the class of such public utility land, and if class of such public utility land is changed, any other land equivalent to or more than that of the aforesaid public utility land, shall be reserved for the same purpose in the same or any nearby Gram Panchayat or local authority, as the case may be or the State Government may permit the exchange thereof under section 101 of this Code in the manner prescribed :
Provided that the class of any public utility land may be changed only in exceptional cases on such terms and conditions, as may be prescribed. The reason for changing the class of public utility land shall be recorded in writing.
Amendment of
6. In sub-section (1) of section 80 of the principal Act, the following proviso section 80
shall be inserted, namely:-
Provided that if the application for declaration is accompanied with the prescribed fee and in case of joint holding, no objection of co-tenure holders is attached in case of co-tenure holder and if the declaration is not made by the Sub- Divisional Officer with forty-five days as aforesaid, then the declaration shall be deemed to have been made. Tehsildar will make a record of it in the revenue records, with the comment "subject to the order of the Sub Divisional Officer".
If any affected party wants to file an objection in relation to the said declaration, it may file an objection in the competent court.
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 9Amendment of section 89
7. In section 89 of the principal Act,– (i) after sub-section (2) the following explanation shall be inserted,
namely:-
Explanation – The expression 'person' in this sub-section means
natural or legal person.
(ii) In sub-section (3) for the proviso the following proviso shall be
substituted, namely:-
Provided that where the land has been acquired or purchased by a registered firm, company, partnership firm, limited liability partnership firm, trust, society or any educational or a charitable institution, without obtaining prior approval under this sub-section or sub-section (3) of section 154 of the Uttar Pradesh Zamindari Abolition and Land Reforms Act, 1950 as enacted before the repeal, the State Government or an officer authorized for this purpose under this Act, may give its approval for regularizing such acquisition or purchase, after payment of an amount as fine, which shall be fifty per cent of the cost of the land in excess of the limit prescribed under sub-section (2) calculated as per the circle rate prevailing at the time of making the application.
8. In section 101 of the principal Act, in clause (b) the following Amendment of section 101
proviso shall be inserted, namely:-
Provided that permission for exchange may be granted even if the valuation of private land offered for exchange is more than ten per cent of the value of the public land.
In clause (c) the following proviso shall be inserted, namely:- Provided that permission for exchange may be granted even if the area of private land offered for exchange is more than twenty five per cent of the area of the public land.
9. (1) In section 108 of the principal Act, in sub-section (1) after the Amendment of section 108
words "being a male" the words "Third Gender" shall be inserted.
(2) For sub-section (2), the following sub-section shall be substituted,
namely:-
The following relatives of the male third gender Bhumidhar, asami or Government lessee are heirs subject to the provisions of sub-section (1), namely :–
(a) Widow, or third gender spouse, unmarried daughters, third gender issue and the male lineal descendants in the male line of descent per stirpes:
Provided that widow, unmarried daughters, third gender issue and sons howsoever low shall inherit per stripes the share which would have devalved upon the predeceased son had he been alive.
(b) Mother and father; (c) Married daughter; (d) Brother, unmarried sister, third gender sibling being respectively the son and daughter, third gender issue of the same father as the deceased, and son, unmarried daughter, third gender issue of predeceased brother, the predeceased brother, having been the son of the same father as the deceased.
(e) Son's daughter and third gender issue. (f) Father's mother and father's father. (g) Daughter's son, third gender issue and unmarried daughter; (h) Married sister; (i) Half sister, being the daughter of the same father as the 10 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 (j) Sister's son, third gender issue and unmarried daughter; (k) Half sister's son, third gender issue and unmarried daughter the sister having been the daughter of the same father as the deceased; (l) Brother's son's son, third gender issue and unmarried daughter; (m) Father's father's son, third gender issue and unmarried daughter;
(n) Father's father's son's son, third gender issue and unmarried daughter;
(o) Mother's mother's son, third gender issue and unmarried daughter. 10. In section 109 of the principal Act, after the word "male", Amendment of section 109
wherever occuring, the words "third gender" shall be inserted.
11. For section 110 of the principal Act, the following section shall be Amendment of section 110
substituted, namely:-
110. Where any female bhumidhar asami or a Government lessee dies, after the commencement of this code, then her interest in any holding or its part shall subject to the provisions of section 107 to 109, devolve, in accordance with the order of succession given below-
(a) Son, third gender issue, unmarried daughter, son's son, third gender issue, and unmarried daughter, son's son's son, third gender issue and unmarried daughter, predeceased son's widow, and predeceased son's predeceased son's widow, in equal shares as per stripes:
Provided firstly that the nearer shall exclude the remoter in the same branch:
Provided secondly that a widow who has remarried, shall be excluded.
(b) Husband or married third gender spouse; (c) Married daughters; (d) Daughter's son, third gender issue and unmarried daughter; (e) Father; (f) Widow mother; (g) Brother being the son of the same father as the deceased, third gender sibling being the issue of the same father as the deceased and brother's son, third gender issue and unmarried daughter as per stirpes;
(h) Unmarried sister; (i) Married sister; (j) Sister's son, third gender issue and unmarried daughter.
12. In section 126 of the principal Act, the following proviso shall be Amendment of section 126
inserted at the end, namely:-
Provided that preference shall be given to widow and physically disabled persons.
13. For sub-section (1-A) of section 128 of the principal Act, the Amendment of section 128
following sub-section shall be substituted, namely:-
Under the provisions of sub-section (1), an application may be moved in the case of an allotment or lease of land made before or after the commencement of this code, within five years from the date of such allotment of lease.
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 सितम्बर, 2020 11STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 has been enacted to consolidate and amend the law relating to land tenures and land revenue in the State of Uttar Pradesh. To ensure smooth availability of land for purposes of industrialization and for the better implementation of Government schemes of the State, to simplify the process of exchange of land etc. for private industries, to secure land for public utility, to clarify the process of regularization of land over the prescribed limit, to make land use changes from agricultural use to non-agricultural land use, to include third gender as eligible for the succession rights of land ownership and to solve various procedural problems related to revenue matters certain amendments were required in the said Act. In view of the above, it has been decided to amend the aforesaid Act.
The Uttar Pradesh Revenue Code (Amendment) Bill, 2020 is introduced accordingly.
YOGI ADITYANATH,
Mukhya Mantri.
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By order,
J. P. SINGH-II,
Pramukh Sachiv.
पी0एस0यू0पी0-ए0पी0 250 राजपत्र-2020-(651)-599़+255=629 प्रतियां-(क0/टी0/ऑफसेट)।