क्रम-संख्या-55(क)
रजिस्ट्रेशन नम्बर-एस०एस०पी०/एल० डब्लू०/एन०पी०-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
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(उार प्रदेश विधान मण्डल के विधेयक)
उत्तर प्रदेश
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संख्या 279/वि0स0/संसदीय/31(संं )-2021
लखनऊ, 3 मार्च, 2021
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अधिसूचना
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021, जो उत्तर प्रदेश विधान सभा के दिनांक 3 मार्च, 2021 के उपवेशन में पुरःस्थापित किया गया, उत्तर प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 1958 के नियम 126 के अन्तर्गत एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964 का अग्रतर संशोधन करने के लिए
विधेयक
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है :-
1-(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम, 2021
संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ कहा जायेगा।
(2) इस अधिनियम की धारा 3 का उपबन्ध, गजट में प्रकाशित किये जाने के दिनांक से प्रवृत्त होगा और शेष उपबन्ध, दिनांक 01 नवम्बर, 2020 से प्रवृत्त हुए समझे जायेंगे। 2 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 16 मार्च, 2021 उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 24 सन् 1964 की धारा 8 का संशोधन
2-उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964, जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है, की धारा 8 में, उपधारा (4) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात् :-
किसी चीनी कारखाना का अध्यासी, अपने द्वारा अंतरित किये गये, विक्रय किये गये या आपूर्ति किये गये शीरे पर ऐसी दर, जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर अवधारित करे, पर प्रशासनिक प्रभार का विहित रीति से राज्य सरकार को भुगतान करने के लिये दायी होगा।
धारा 16 का संशोधन 3-मूल अधिनियम की धारा 16 में, शब्द "नियंत्रक" के स्थान पर शब्द "नियंत्रक या अन्य कोई अधिकारी, जो विनिर्दिष्ट अपराधों के लिए राज्य सरकार द्वारा प्राधि—त हो," रख दिये जायेंगे।
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उद्देश्य और कारण
उत्तर प्रदेश में चीनी कारखानों द्वारा उत्पादित शीरा के नियंत्रण, भण्डारण, श्रेणीकरण तथा कीमत, और उसकी आपूर्ति एवं वितरण के विनियमन का उपबंध करने के लिये उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 24 सन् 1964) (जिसे आगे उक्त अधिनियम कहा गया है) अधिनियम किया गया है।
उक्त अधिनियम की धारा 8 की उपधारा (4) में यह उपबंधित है कि किसी चीनी कारखाना का अध्यासी, अपने द्वारा अंतरित किये गये, विक्रय किये गये या आपूर्ति किये गये शीरे पर, अनधिक पन्द्रह रुपये प्रति कुन्तल की ऐसी दर, जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर अधिसूचित करे, पर प्रशासनिक प्रभारों का विहित रीति से राज्य सरकार को भुगतान करने के लिये दायी होगा। उक्त अधिनियम की धारा 16 के अधीन अपराध प्रशमित करने की शक्ति नियंत्रक में निहित होती है।
राज्य के आबकारी राजस्व के हित में तथा प्रक्रियागत सुगमता के प्रयोजन से चीनी कारखाने के अध्यासी द्वारा अंतरित किये गये, विक्रय किये गये या आपूर्ति किये गये शीरे पर ऐसी दर, जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर अवधारित करे, पर प्रशासनिक प्रभार अवधारित करने की शक्ति राज्य सरकार को प्रदत्त करने, और नियंत्रक तथा साथ ही साथ राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अपराधों हेतु यथा प्राधि—त किसी अन्य अधिकारी को अपराध प्रशमित करने की शक्ति प्रतिनिधानित करने का उपबंध करने के लिए उक्त अधिनियम की पूर्वोक्त धाराओं में संशोधन किये जाने का विनिश्चय किया गया है।
तद्नुसार उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021 पुरःस्थापित किया जाता है।
रामनरेश अग्निहोत्री,
मंत्री,
आबकारी। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 16 मार्च, 2021 3 उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2021 द्वारा संशोधित की जाने वाली मूल अधिनियम की संगत धाराओं का उद्धरण।
उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964
धारा 8 (4) शक्कर के कारखाने का अध्यासी, अपने द्वारा "अन्तरित या बेचे गये या सम्भरित" शीरे का राज्य सरकार को नियत रीति से पन्द्रह रुपये प्रति क्विंटल से अनधिक ऐसी दर पर जैसा राज्य सरकार समय-समय पर अधिसूचित करे, प्रशासनिक प्रभार का देनदार होगा।
धारा 16 नियंत्रक किसी व्यक्ति से जिसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध किये जाने का युक्तियुक्त संदेह हो, ऐसे किये गये अपराध के लिए समझौते के रूप में पांच हजार रुपये से अनधिक धनराशि स्वीकार कर सकता है और ऐसी प्रत्येक दशा में, जब इस अधिनियम के अधीन जब्त की जाने योग्य कोई सम्पत्ति अभिगृहीत की गयी हो, नियंत्रक द्वारा अनुमानित उसके मूल्य का भुगतान किये जाने पर उस सम्पत्ति को छोड़ सकता है। नियंत्रक को, यथास्थिति, ऐसी धनराशि या मूल्य अथवा दोनों का भुगतान किये जाने पर अभियुक्त को यदि वह हिरासत में हो, उन्मुक्त कर दिया जायेगा और अभिगृहीत सम्पत्ति छोड़ दी जायेगी और उस व्यक्ति या सम्पत्ति के विरुद्ध आगे कोई कार्यवाही न की जायेगी।
आज्ञा से, प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव।
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UTTAR PRADESH SARKAR
SANSADIYA KARYA ANUBHAG-1
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No. 224/XC-S-1–21-24S-2021
Dated Lucknow, March 16, 2021
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NOTIFICATION
IN pursuance of the provisions of clause (3) of Article 348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of the "Uttar Pradesh Sheera Niyantran (Sanshodhan) Vidheyak, 2021" introduced in the Uttar Pradesh Legislative Assembly on March 3, 2021.
THE UTTAR PRADESH SHEERA NIYANTRAN (SANSHODHAN)
VIDHEYAK, 2021
A
BILL
further to amend the Uttar Pradesh Sheera Niyantran Adhiniyam, 1964.
IT IS HEREBY enacted in the Seventy second Year of the Republic of India as
follows :–
1.(1) This Act may be called the Uttar Pradesh Sheera Niyantran Short title and commencement (Sanshodhan) Adhiniyam, 2021.
(2) The provision of section 3 of this Act shall come into force with effect from the date of its publication in the Gazette and the remaining provisions shall be deemed to have come into force with effect from Novermber 01, 2020.
796 RPH Nirsan) (Sansadiya) 2021 Data 4e4 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 16 मार्च, 2021 Amendment of 2. In section 8 of the Uttar Pradesh Sheera Niyantran Adhiniyam, 1964 Section 8 of hereinafter referred to as principal Act, for sub-section (4) the following sub-section shall U.P. Act
be substituted, namely :-
no. 24 of 1964
"The occupier of a sugar factory shall be liable to pay to State Government, in the manner prescribed, administrative charges at such rate, as the State Government may from time to time determine, on the molasses transferred, sold or supplied by him".
3. In section 16 of the principal Act, for the word "Controller", the words Amendment of section 16
"Controller or any other officer authorized for specific offences by the State Government" shall be substituted.
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The Uttar Pradesh Sheera Niyantran Adhiniyam, 1964 (Uttar Pradesh Act no. 24 of 1964) (hereinafter referred to as the said Act) has been enacted to provide for the control, storage, gradation and price of molasses produced by sugar factories in Uttar Pradesh and the regulation of supply and distribution thereof.
Sub-section (4) of section 8 of the said act, provides that the occupier of a sugar factory shall be liable to pay to the State Government, in the manner prescribed, administrative charges at such rate, not exceeding fifteen rupees per quintal as the State Government may from time to time notify, on the molasses transferred, sold or supplied by him. Under section 16 of the said Act, power to compound offences lies with the Controller.
In the interest of the State excise revenue and for the purpose of procedural ease, it has been decided to amend the aforesaid sections of the said Act to confer the State Government with the power of determining the administrative charges at such rate as it may from time to time determine on the molasses transferred, sold or supplied by the occupier of the sugar factory; and to provide for delegation of the power of compounding offences to the Controller as well as any other the officer as authorized for specific offences by the State Government.
The Uttar Pradesh Sheera Niyantran (Sanshodhan) Vidheyak, 2021 is introduced accordingly.
RAMNARESH AGNIHOTRI, Mantri, Aabkari.
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By order,
J. P. SINGH-II, Pramukh Sachiv.
पी0एस0यू0पी0-ए0पी0 799 राजपत्र-2021-(1698)-59930=629 प्रतियां (कम्प्यूटर/टी0/ऑफसेट)।