रजिस्ट्रेशन नं0-एस0एस0पी0/एल0 क्रम-सं0-58
डब्लू/एन0पी0-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
लखनऊ, सोमवार, दिनांक 22 मार्च, 2021 01 चैत्र, शक संवत्, 1942
लखनऊ, सोमवार, दिनांक 22 मार्च, 2021 01 चैत्र, शक संवत्, 1943
विधान सभा सचिवालय उत्तर प्रदेश (संसदीय अनुभाग) -------- संख्या : 387/वि0स0/संसदीय/91(सं)/2020 लखनऊ, दिनांक 22 मार्च, 2021 --------
अधिसूचना
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प्रकीर्ण
श्री राजेन्द्र सिंह पुत्र श्री भोला नाथ, निवासी-208, कुमकुम अपार्टमेण्ट, एल्डिको फस्र्ट, बंगला बाजार, दिलकुशा, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के नियम-7 के अन्तर्गत माननीय अध्यक्ष, विधान सभा के विचारार्थ श्री राकेश सिंह, सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा के विरुद्ध दिनांक 27 अगस्त, 2020 को दायर की गयी याचिका पर माननीय अध्यक्ष, विधान सभा द्वारा दिनांक 22 मार्च, 2021 को किया गया विनिश्चय एतद्द्वारा सर्वसाधारण की सूचनार्थ अधिसूचित किया जाता है :- अध्यक्ष, विधान सभा, उत्तर प्रदेश श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के नियम-7 के अन्तर्गत श्री राकेश सिंह, सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा के विरुद्ध प्रस्तुत याचिका पर
निर्णय "भारत का संविधान" की दसवीं अनुसूची, सपठित उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के नियम-7 के अन्तर्गत श्री राकेश सिंह, सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा के विरुद्ध प्रश्नगत याचिका दिनांक 27.08.2020 को प्रस्तुत की गई है। याची के अनुसार श्री राकेश सिंह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में विधान सभा क्षेत्र 179-हरचन्दपुर से वर्ष 2017 में निर्वाचित हुए थे।
याची का यह अभिकथन है कि विपक्षी श्री राकेश सिंह दिनांक 03.04.2019 से लगातार सोशल मीडिया एवं अखबारों में इस प्रकार के कृत्य एवं आचरण प्रसारित कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग दी है। अतः याची के अनुसार श्री राकेश सिंह, संविधान की दसवीं अनुसूची एवं अनुच्छेद-191 (2) के अन्तर्गत निरर्ह घोषित होने योग्य हैं।2 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 याची के अनुसार श्री राकेश सिंह ने अपने फेसबुक अकाउन्ट में लगातार भारतीय जनता पार्टी एवं उनके सदस्यों की प्रशंसा की है एवं वह दिनांक 03.04.2019 से लगातार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं उसके नेताओं के विरुद्ध पोस्ट प्रसारित एवं प्रचारित कर रहे हैं।
विपक्षी श्री राकेश सिंह द्वारा श्री दिनेश प्रताप सिंह, जो कि भारतीय जनता पार्टी के 2019 के आम चुनावों में 36-रायबरेली संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी थे, का प्रचार-प्रसार फेसबुक में किया है। श्री राकेश सिंह, श्री दिनेश सिंह के प्रचार एवं प्रसार में लगातार लिप्त हैं एवं विभिन्न फोरमों पर उन्होंने उनके लिए काम किया है। याची की ओर से विपक्षी द्वारा अपने फेसबुक अकाउन्ट पर जो पोस्ट समय-समय पर प्रसारित की हैं, उनका संदर्भ दिया है। इस संबंध में याची की ओर से दिनांक 07.04.2019, 10.04.2019, 01.06.2019, 05.06.2019, 11.06.2019, 19.07.2019 एवं दिनांक 18.12.2019 की पोस्ट का संदर्भ विशेष रूप से दिया गया है। श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा दिनांक 29.12.2019 की अपनी फेसबुक की पोस्ट में कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना की गई। याची द्वारा, तद्नुसार, यह दर्शाया गया है कि दिनांक 03.04.2019 से लगातार विपक्षी श्री राकेश सिंह अपनी फेसबुक पोस्ट पर अपने मूल राजनीतिक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार तथा प्रसार कर रहे हैं। वर्णित स्थिति में याची के अनुसार श्री राकेश सिंह ने अपने मूल राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग दी है एवं वह निरर्ह घोषित होने योग्य हैं।
याची की ओर से यह भी कहा गया है कि 36-रायबरेली संसदीय क्षेत्र के दिनांक 06.05.2019 को होने वाले मतदान के संदर्भ में याची अपने मतदान के अधिकार का प्रयोग करने हेतु पहुंचा था। वहां याची ने यह पाया कि विपक्षी श्री राकेश सिंह अपनी एण्डेवर कार संख्या-यू0पी0 32 जे0वाई0 2877 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार श्री दिनेश सिंह के लिए प्रचार एवं प्रसार कर रहे हैं। इस कार पर विधान सभा सचिवालय द्वारा निर्गत किया गया स्टीकर (पास) सं0-582 लगा हुआ था। याची के अनुसार विपक्षी ने अपने इस कृत्य से यह सिद्ध कर दिया है कि उन्होंने अपने मूल राजनीतिक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता त्याग दी है।
याची ने विपक्षी द्वारा विधान सभा के विशेष सत्र 02 अक्टूबर, 2019 में भाग लेने का उल्लेख भी किया है तथा यह कहा है कि विपक्षी श्री राकेश सिंह ने अपने मूल राजनीतिक दल के निर्देशों के विपरीत इस सत्र में भाग लिया तथा भारतीय जनता पार्टी व उत्तर प्रदेश सरकार की प्रशंसा की। याची ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित किए गए विभिन्न निर्णयों का संदर्भ देते हुए कहा है कि विपक्षी श्री राकेश सिंह ने अपने आचरण एवं कृत्य से परोक्ष रूप से अपने मूल राजनीतिक दल, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता को त्याग दिया है। अन्त में याची ने यह प्रार्थना की है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के सुसंगत नियमों एवं संविधान की दसवीं अनुसूची सपठित अनुच्छेद-191 (2) के अन्तर्गत विपक्षी श्री राकेश सिंह को निरर्ह घोषित किया जाए।
विपक्षी द्वारा उपरोक्त याचिका के संदर्भ में अपनी आख्या प्रस्तुत की गई है। विपक्षी द्वारा यह कहा गया है कि याची ने प्रश्नगत याचिका में तथ्यों को छिपाया है। याची के अनुसार इसी प्रकार की एक याचिका अध्यक्ष, विधान सभा उत्तर प्रदेश द्वारा अपने आदेश संख्या-534/ वि0स0/संसदीय/60(सं)/2019, दिनांक 13.07.2020 द्वारा निर्णीत की जा चुकी है। इस आदेश के विरुद्ध श्री अजय कुमार 'लल्लू' द्वारा माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में याचिका संख्या-13994 (एम/बी) ऑफ 2020 के अन्तर्गत चुनौती दी है, जो कि वर्तमान में न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है।
विपक्षी के अनुसार प्रस्तुत याचिका के तथ्य एवं मसौदा अध्यक्ष की ओर से पूर्व में दिए गए निर्णय के समान है।
विपक्षी ने याची द्वारा उसके विरुद्ध लगाए गए अन्य आरोपों का खण्डन किया है तथा उसने कहा है कि वह भारतीय जनता पार्टी के मंच पर कभी उपस्थित नहीं हुआ और न ही उसने ऐसा कोई कृत्य एवं आचरण किया है जिससे यह सिद्ध हो सके कि उसने अपने मूल राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता त्याग दी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि याची की ओर से कोई विश्वसनीय एवं प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
विपक्षी द्वारा याचिका का प्रस्तरवार खण्डन करते हुए यह कहा गया है कि चूंकि प्रस्तुत याचिका पूर्व में निर्णीत याचिका के सादृश्य है, अतः इस सम्बन्ध में पुनः निर्णय किए जाने का कोई औचित्य नहीं है एवं याचिका निरस्त होने योग्य है।
प्रस्तुत याचिका के विषय में श्रीमती आराधना मिश्रा (मोना), सदस्य, विधान सभा एवं नेता, कांगे्रस विधान मण्डल दल द्वारा भी अपनी आख्या प्रस्तुत की गई है। उन्होंने संक्षिप्त में अपनी आख्या में यह कहा है कि विपक्षी श्री राकेश सिंह को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में विधान सभा क्षेत्र 179-हरचन्दपुर से निर्वाचितउत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 3 घोषित किया गया था। विपक्षी लगातार सोशल मीडिया एवं समाचार-पत्रों में इस प्रकार के कार्य एवं आचरण में लिप्त हैं, जिससे यह प्रकट होता है कि उन्होंने अपने मूल राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता त्याग दी है।
श्रीमती आराधना मिश्रा (मोना) द्वारा याचिका के अन्य तथ्यों का समर्थन किया गया है एवं कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता के रूप में उन्होंने यह अनुरोध किया है कि सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी श्री राकेश सिंह को उत्तर प्रदेश विधान सभा की सदस्यता से निरर्ह घोषित किया जाए।
प्रस्तुत प्रकरण के सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि श्री राकेश सिंह, सदस्य, उत्तर प्रदेश विधान सभा की सदस्यता के विरुद्ध श्री अजय कुमार 'लल्लू', नेता, कांग्रेस विधान मण्डल दल, उत्तर प्रदेश द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 के अन्तर्गत एक याचिका प्रस्तुत की गयी थी, जिस पर संविधान की दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत दिनांक 13 जुलाई, 2020 को गुणावगुण के आधार पर निर्णय प्रदान किया गया है। इस निर्णय के विरुद्ध मा0 इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में याचिका संख्या-13994 सन् 2020 अजय कुमार 'लल्लू' प्रति माननीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश विधान सभा एवं अन्य योजित की गयी, जो कि वर्तमान में लम्बित है। प्रस्तुत याचिका में श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा मूल रूप से उन्हीं बिन्दुओं को उठाया गया है, जो कि पूर्व में निर्णीत किये जा चुके हैं, जैसा कि निम्नलिखित विश्लेषण से स्पष्ट है :-
प्रस्तुत याचिका में याची श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा यह कहा गया है कि 36, रायबरेली संसदीय क्षेत्र के दिनांक 6 मई, 2019 को होने वाले मतदान के सन्दर्भ में जब याची अपनी मतदान के अधिकार का प्रयोग करने मतदेय स्थल पर पहुंचा तो उसने देखा कि श्री राकेश सिंह अपनी एण्डेवर कार संख्या-यू0पी0 32 जे0वाई0 2877 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार श्री दिनेश सिंह के लिये प्रचार एवं प्रसार कर रहे हैं। याची ने यह भी कहा है कि इस कार पर विधान सभा सचिवालय द्वारा निर्गत किया गया स्टीकर (पास) संख्या-582 लगा हुआ था। इस आधार पर याची श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा यह कहा गया है कि विपक्षी श्री राकेश सिंह ने अपने मूल राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से सदस्यता त्याग दी है।
याची द्वारा प्रस्तुत किये गये उपर्युक्त तर्क के विषय में दिनांक 13 जुलाई, 2020 को पारित निर्णय में मेरे स्तर से अध्यक्ष के रूप में यह स्पष्ट रूप से अवधारित किया गया है कि मात्र उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध नहीं होता है कि यह वाहन भारतीय जनता पार्टी के प्रचार हेतु प्रयोग किया गया हो। जैसाकि दिनांक 13 जुलाई, 2020 को प्राख्यापित निर्णय के निम्नलिखित पैरा-61 से स्पष्ट है :-
''61-उपरोक्त वर्णित अभिकथनों एवं साक्ष्यों से यह प्रकट होता है कि कथित वाहन संख्या-यू0पी0 32 जे0वाई0 2877 विपक्षी श्री राकेश सिंह द्वारा प्रयोग की जा रही थी। परन्तु इन परिस्थितियों से एवं तथ्यों से यह सिद्ध नहीं होता कि उपरोक्त वाहन भारतीय जनता पार्टी के प्रचार में विपक्षी द्वारा प्रयोग किया गया अथवा यह कि इस वाहन से विपक्षी द्वारा भारतीय जनता पार्टी के मतदान हेतु प्रचार किया गया। याची द्वारा इस सम्बन्ध में जो तस्वीरें प्रस्तुत की गई हैं उनमें वाहन की तस्वीरें हैं तथा वाहन पर विधान सभा सचिवालय का पास एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, रायबरेली द्वारा निर्गत किया गया परमिट चस्पा है परन्तु मात्र इस तस्वीर से यह सिद्ध नहीं होता है कि यह वाहन भारतीय जनता पार्टी के प्रचार हेतु प्रयोग किया गया हो।''
चूंकि उपर्युक्त श्री राकेश सिंह के विषय में संविधान की दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत प्रसारित किये गये उपर्युक्त वर्णित निर्णय में इस बिन्दु पर स्पष्ट अवधारणा मेरे स्तर से अध्यक्ष के रूप में व्यक्त की जा चुकी है, अतः इस सम्बन्ध में पुनः निर्णय लिये जाने का कोई औचित्य नहीं है। दिनांक 13 जुलाई, 2020 को श्री राकेश सिंह के विषय में अध्यक्ष के रूप में मेरे स्तर से पारित किये गये निर्णय को मा0 उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है जो कि लम्बित है। अतः इस बिन्दु पर पुनः निर्णय लिये जाने का कोई औचित्य नहीं है तथा मा0 उच्च न्यायालय द्वारा जो व्यवस्था इस सन्दर्भ में दी जायेगी उसके अनुक्रम में ही अग्रेतर कार्यवाही किया जाना विधिक रूप से अपेक्षित एवं उपयुक्त होगा।
प्रस्तुत याचिका में याची श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा यह भी कहा गया है कि श्री राकेश सिंह दिनांक 03 अप्रैल, 2019 से लगातार सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों में अपने मूल राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं उसके नेताओं की आलोचना कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपने मूल राजनीतिक दल की सदस्यता को स्वेच्छा से त्याग दिया है। इस सम्बन्ध में यह उल्लेखनीय है कि दिनांक 13 जुलाई, 2020 को मेरे स्तर से दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत अध्यक्ष के रूप में पारित किये गये निर्णय में इस बिन्दु पर विश्लेषण करके अवधारणा प्रस्तुत की गयी थी कि याचिका में वर्णित तथ्यों के सन्दर्भ में ही दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत निर्णय लिया जाना विधिक रूप से अपेक्षित है। इस सम्बन्ध में मेरे उक्त निर्णय में मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राम4 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 चन्द्र प्रसाद सिंह प्रति शरद यादव, सिविल अपील संख्या-2004/2020 में दिनांक 19 मार्च, 2020 को पारित निर्णय का सन्दर्भ भी दिया गया था। श्री अजय कुमार 'लल्लू' द्वारा श्री राकेश सिंह के विरुद्ध दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत प्रस्तुत याचिका में याचिका योजित करने के पश्चात् के कृत्यों को पूरक शपथ पत्र के माध्यम से संज्ञान में लाया गया था जिनको पोषणीय नहीं माना गया था।
उक्त बिन्दु पर दिनांक 13 जुलाई, 2020 को पारित निर्णय के विरुद्ध योजित की गयी याचिका में विशेष रूप से बल देते हुये यह कहा गया है कि याचिका प्रस्तुत करने के पश्चात् भी जो तथ्य संज्ञान में लाये गये उन पर भी दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत निर्णय प्रदान किया जाना अपेक्षित है। यह कि जो तथ्य विपक्ष के द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले उत्तर से पूर्व अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर दिये जाते हैं, उन पर निर्णय प्रदत्त किया जाना चाहिये। याचिका संख्या-13994 सन् 2020 के निम्न वर्णित पैरा से यह स्पष्ट है कि इस बिन्दु पर मा0 उच्च न्यायालय का निर्णय अपेक्षित है :-
"It is relevant to mention here that the Additional Affidavit was filed by the petitioner on
25.06.2020 and had documents which were of date prior to filing of reply dated 29-06-2020 by
the Respondent No.3 in Desqualification Petition and also in the Rejoinder Affidavit filed on
03.07.2020 by the Petitioner, all the documents were of date prior to filing of reply by the
Respondent No.3."
"That it is respectfully submitted that as per the judgment of Hon'ble Supreme Court in
Ram Chandra Prasad Vs. Sharad Yadav in Civil Appeal No.2004 of 2020 decided on
19.03.2020, if the Hon'ble High Court can look into the subsequent events when the matter is
before the Hon'ble High Court in Writ Jurisdiction regarding the challenge to the order passed
by Hon'ble Tribunal in a disqualification petition, the Respondent No.1 also had to look into the
subsequent acts, conduct and events upto the date of deciding the Disqualification Petition and
especially till date of filing comments/reply by Respondent No.3 on 29.06.2020 so that
Constitutional mandate does not get defeated."
"It is relevant to mention here that the Additional Affidavit was filed by the Petitioner on
25-06-2020 and had documents which were of date prior to filing of reply dated 29.06.2020 by
the Respondent No.3 in Disqualification Petition and also in the Rejoinder Affidavit filed on
03.07.2020 by the Petitioner, all the documents were of date prior to filing of reply by the
Respondent No.3."
"It is important to note here that all the subsequent acts, events and facts against the
Respondent No.3 brought on record in the Additional Affidavit filed on 25.06.2020 and
Rejoinder Affidavit filed on 06.07.2020 were not taken into consideration in the impugned order,
whereas an affidavit of Mahendra Singh filed by the Respondent No.3 on the date of hearing i.e.
10.07.2020 was taken into consideration."
"That since objections /reply was finally filed on 29.06.2020 by the Respondent No.1
alongwith supporting affidavit after the gap of one year therefore all the Act, Conduct and
Events regarding the Act, Conduct and Events of the Respondent No.3 upto date of deciding
Disqualification Petition as mentioned in Rejoinder Affidavit filed in Disqualification, Petition
ought to have been taken into consideration and atleast the Act, Conduct and Events from
31.05.2019 (date of filing of the Petition to till filing of objections/reply on 29.06.2020 by the
Opposite Party) before the Respondent No.1 had to be considered, at the time of deciding the
petition for Disqualification of the Respondent No.3 herein."
"Therefore, subsequent act, conduct and events till disposal of disqualification petition
had to be taken into consideration and especially Act, Conduct and Events which are prior to
the date of filing of objections/reply by the Respondent No.3 dated 29.06.2020 and had to be
looked into to decide disqualification petition, at time of deciding the present petition by the
Respondent No.1."
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 5"It is respectfully submitted that in the Impugned order it has been mentioned that if
acts, events and facts subsequent to the filing of disqualification petition are taken into
consideration it would lead to a situation where it would be tough to finally decide the issue. It
is relevant to mention here that there was no delay on the part of Petitioner, however, the
Respondent No.1 was not deciding the disqualification petition for a period of one year and was
constantly giving time to the Respondent No.3 to file reply without the Respondent No.3 even
asking for time. In such a situation, it cannot be held against the Petitioner to place subsequent
acts, events and facts to the filing of disqualification petition on record as both parties have to
treated equally by the Ld. Tribunal."
उपर्युक्त वर्णित प्रस्तरों से यह स्पष्ट है कि जो याचिका दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत अध्यक्ष के रूप में मेरे स्तर से दिनांक 13 जुलाई, 2020 को पारित निर्णय के विरुद्ध मा0 उच्च न्यायालय में योजित की गयी है एवं लम्बित है, उसमें इस बिन्दु पर मा0 उच्च न्यायालय का निर्णय एवं अवधारणायें प्रतीक्षित हैं कि याचिका में वर्णित तथ्यों के पश्चात् जो कृत्य दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत अध्यक्ष के रूप में मेरे समक्ष लाये गये थे, उनको तत्समय मेरे द्वारा निर्णय देते समय संज्ञान में लेना चाहिये था अथवा नहीं। यदि मा0 उच्च न्यायालय द्वारा उपर्युक्त याचिका में यह निर्णय लिया जाता है कि अध्यक्ष के रूप में मेरे द्वारा तत्समय उन तथ्यों को भी संज्ञान में लिया जाना चाहिये था जो याचिका प्रस्तुत करने के पश्चात् प्रस्तुत किये गये थे तो उस सम्बन्ध में तद्नुसार कार्यवाही किया जाना अपेक्षित होगा। इसके साथ ही मा0 उच्च न्यायालय स्वयं उन तथ्यों का संज्ञान लेकर याचिका संख्या-13994 सन् 2020 में निर्णय प्रदान करने की अधिकारिता रिट क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत धारित करता है। ऐसी स्थिति में मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष प्रकरण के लम्बित रहते हुये पुनः मेरे स्तर पर उसी सन्दर्भ में निर्णय पारित किये जाने का कोई विधिक औचित्य नहीं है। कदाचित् यह मा0 उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में अनावश्यक एवं अनुचित हस्तक्षेप भी माना जा सकता है। चूॅंकि मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष दिनांक 13 जुलाई, 2020 को मेरे द्वारा पारित किये गये निर्णय की वैधानिकता का प्रश्न लम्बित है अतः मा0 उच्च न्यायालय प्रस्तुत याचिका में श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा वर्णित किये तथ्यों के विषय में भी अवधारणायें व्यक्त कर सकता है। मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष लम्बित याचिका के उपर्युक्त वर्णित प्रस्तरों से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि इस बिन्दु पर मा0 उच्च न्यायालय का निर्णय आना अवश्यम्भावी है। तद्नुसार इस सम्बन्ध में मेरे स्तर से सम्प्रति निर्णय किये जाने का कोई औचित्य नहीं है।
यदि श्री राकेश सिंह की विधान सभा की सदस्यता के विषय में मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष लम्बित याचिका संख्या-13994 सन् 2020 में उन तथ्यों के विषय में, जो दिनांक 03 अप्रैल, 2020 के बाद के हैं, मा0 उच्च न्यायालय द्वारा कोई निर्णय लिया जाता है तो उसकी शुचिता बनाये रखने के दृष्टिकोण से भी मेरे स्तर पर सम्प्रति दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत निर्णय पारित किये जाने का कोई औचित्य नहीं है एवं कदाचित् यह मा0 उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप भी माना जा सकता है। उदाहरण के लिये श्री राकेश सिंह के दिनांक 03 अप्रैल, 2020 के बाद के जिन कृत्यों के आधार पर प्रस्तुत याचिका में श्री राजेन्द्र सिंह ने यह कहा है कि सोशल मीडिया एवं समाचार-पत्रों में प्रसारित की गयी अपने पोस्टों एवं संदेशों के आधार पर श्री राकेश सिंह ने अपने मूल राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग दी है। यदि मा0 उच्च न्यायालय द्वारा उन तथ्यों को याचिका संख्या-13994 सन् 2020 में संज्ञान में लेते हुये गुणावगुण के आधार पर कोई निर्णय पारित किया जाता है एवं मेरे द्वारा इस स्तर पर पारित किये जाने वाले निर्णय एवं मा0 उच्च न्यायालय के निर्णय में कोई विरोधाभास उत्पन्न होता है तो वह विधिक रूप से असहज स्थिति होगी। वर्णित स्थिति में ऐसे तथ्य जो श्री अजय कुमार 'लल्लू' द्वारा याचिका प्रस्तुत करने के पश्चात् मेरे संज्ञान में तत्समय लाये गये थे तथा जिनके विषय में दिनांक 13 जुलाई, 2020 को मेरे द्वारा निर्णय पारित किया गया था, चूंकि वह तथ्य वर्तमान में मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष परीक्षण हेतु लम्बित हैं अतः इस स्तर पर उनके विषय में दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत अध्यक्ष के रूप में मेरे द्वारा निर्णय पारित किये जाने का कोई विधिक औचित्य नहीं है।
याची श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत याचिका में यह प्रश्न भी उठाया गया है कि विधान सभा के विशेष सत्र 02 अक्टूबर, 2019 में श्री राकेश सिंह द्वारा अपने मूल राजनीतिक दल के निर्देशों के विपरीत भाग लिया गया तथा भारतीय जनता पार्टी व उत्तर प्रदेश सरकार की उन्होंने प्रशंसा की। याची के अनुसार इस आचरण के आधार पर यह माना जाना चाहिये कि श्री राकेश सिंह द्वारा अपने मूल राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की6 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 सदस्यता को स्वेच्छा से त्याग दिया गया है। इस विषय में मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किहोटो होलोहॉन (AIR 1993 SCC 111) के प्रकरण में पारित निर्णय के निम्नलिखित अंश सुसंगत हैंः-
"49...While construing Paragraph 2(1)(b) it cannot be ignored that under the Constitution members of Parliament as well as of the State legislature enjoy freedom of speech in the House though this freedom is subject to the provisions of the constitution and the rules and standing orders regulating the Procedure of the House {Art. 105(1) and Article 194(1)}. The disqualification imposed by Paragraph 2(1)(b) must be so construed as not to unduly impinge on the said freedom of speech of a member. This would be possible if Paragraph 2(1)(b) must be so construed as not to unduly impinge on the said freedom of speech of a member. This would be possible if Paragraph 2(1)(b) is confined in its scope by keeping in view the object suderlying the amendments contained in the Tenth Schedule, namely to curb the evil or mischief of political defections motivated by the lure of office of other similar considerations. The said object would be achieved if the disqualification incurred on the ground of voting or abstaining from voting by a member is confined to cases where a change of Government is likely to be brought about or is prevented as the case may be, as a result of such voting or abstinence or when such voting or abstinence is on a matter which was a major policy and programme on which the political party to which the member belongs went to the polls. For this purpose the direction given by the political party to a member belonging to it, the violation of which may entail disqualification under paragraph 2(1)(b), would have to be limited to a vote on motion of confidence or no confidence in the Government or where the motion under consideration relates to a matter which was an integral policy and programme of the political party on the basis of which it approached the elaborate. The voting or abstinence from voting by a member against the direction by the political party on such a motion would amount to disapproval of the programme of the basis of which he went before the electorate and got himself elected and such voting or abstinence would amount to a breach of the trust reposed in him by he electrorate..."
मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित की गयी उपर्युक्त अवधारणा से यह स्पष्ट है कि निम्न दो प्रकार के व्हिप/निर्देशाें का उल्लंघन ही दसवीं अनुसूची के प्रकरणों में सुसंगत होगा :-
''(क) सरकार के विश्वासमत के सम्बन्ध में।
(ख) ऐसे प्रस्ताव अथवा संकल्पों के विषय में जो उस राजनीतिक दल की नीति एवं योजनाओं के सन्दर्भ में हैं जिसके आधार पर सदस्य ने निर्वाचन में भाग लिया हो।
उपर्युक्त निदेशों के अतिरिक्त अन्य निदेशों के उल्लंघन से दसवीं अनुसूची के पैरा-2 के प्रावधान आकर्षित नहीं होंगे। प्रस्तुत प्रकरण में कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता द्वारा दिनांक 02 अक्टूबर, 2019 को निर्गत किये गये कथित 'व्हिप' में विशेष सत्र के बहिष्कार करने एवं उसमें उपस्थित न होने का निदेश दिया गया था जो कि किहोटो होलोहॉन के प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अन्तर्गत सुसंगत नहीं है। अतः इस निदेश के उल्लंघन के आधार पर विपक्षी को दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता से ग्रसित नहीं माना जा सकता।
किहोटो होलोहॉन के प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह भी अवधारित किया गया है कि यदि किसी निदेश अथवा 'व्हिप' के उल्लंघन पर दसवीं अनुसूची के प्रावधानों को आकर्षित करना है तो उसमें इस तथ्य का विशिष्ट उल्लेख होना चाहिये। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किहोटो होलोहॉन के प्रकरण में व्यक्त की गयी निम्न अवधारणायें उल्लेखनीय हैं :-
"Keeping in view the consequences of the disqualification i.e. termination of the
membership of a House; it would be appropriate that the direction or whip which result in such
disqualification under paragraph 2(1)(b) is so worded as to clearly indicate that voting or
abstaining from voting contrary to the said direction would result in incurring the
disqualification under Paragraph 2(1)(b) of the Tenth Schedule so that the member concerned
has fare-knowledge of the consequences flowing from his conduct in voting or abstaining from
voting contrary to such a direction."
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट दिनांक 22 मार्च, 2021 ई0 7याची श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा यह नहीं दर्शाया गया है कि कांग्रेस विधान मण्डल दल की ओर से दिनांक 02 अक्टूबर, 2019 को आहूत किये गये विशेष सत्र में भाग न लेने के विषय में उपर्युक्त वर्णित विशिष्ट व्हिप/निदेश प्रचारित किये गये हों अथवा उनका कोई उल्लंघन कारित हुआ हो। अतः याची द्वारा उठाया गया यह तर्क मान्य नहीं है। इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि विधान सभा के अन्दर सभी मा0 सदस्यों को अपना मत व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। जब तक मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित किये गये उपर्युक्त सिद्धान्तों के क्रम में किसी राजनीतिक दल के व्हिप/निदेशों का उल्लंघन कारित नहीं होता है तब तक उस आधार पर दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत कोई निरर्हता आकर्षित नहीं होगी।
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं विधि व्यवस्थाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि प्रस्तुत याचिका में उठाये गये बिन्दु मा0 उच्च न्यायालय में लम्बित याचिका संख्या-13994 सन् 2020 के अन्तर्गत विचाराधीन हैं। चूंकि दिनांक 13 जुलाई, 2020 को मेरे स्तर से अध्यक्ष के रूप में दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत श्री राकेश सिंह के सन्दर्भ में पारित किये गये निर्णय में प्रस्तुत याचिका के विषय में उठाये गये बिन्दुओं के सन्दर्भ में गुणावगुण के आधार पर निर्णय दिया जा चुका है अतः पुनः उन बिन्दुओं के विषय में मेरे स्तर से दसवीं अनुसूची के अन्तर्गत निर्णय पारित किये जाने का, सम्प्रति, कोई औचित्य नहीं है।
आदेश
प्रस्तुत प्रकरण के तथ्यों, विधिक व्यवस्थाओं एवं सुसंगत अभिलेखों के विवेचन से उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में मेरा यह समाधान है कि प्रस्तुत याचिका में उठाये गये बिन्दुओं के विषय में मेरे स्तर से पूर्व में श्री राकेश सिंह की उत्तर प्रदेश विधान सभा की सदस्यता के विषय में दिनांक 13 जुलाई, 2020 को पारित किये गये निर्णय में गुणावगुण के आधार पर स्पष्ट अवधारणा व्यक्त की जा चुकी है एवं निर्णय प्रदान किया जा चुका है और चूंकि इस निर्णय की वैधानिकता मा0 इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के समक्ष याचिका संख्या-13994 सन् 2020 के अन्तर्गत विचाराधीन है अतः मेरे स्तर से पुनः उन्हीं बिन्दुओं के विषय में निर्णय दिये जाने का कोई विधिक औचित्य नहीं है। अतः श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत की गयी यह याचिका, सम्प्रति, निरस्त की जाती है।
दिनांक : 22 मार्च, 2021
हृदय नारायण दीक्षित, अध्यक्ष, विधान सभा, उत्तर प्रदेश।
आज्ञा से,
प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव, विधान सभा, उत्तर प्रदेश। पी0एस0यू0पी0-एल0 33 राजपत्र (415)-22-03-2021-58525 प्रतियां (कम्प्यूटर)।