क्रम-संख्या-160
रजिस्ट्रेशन नम्बर-एस०एस०पी०/एल० डब्लू०/एन०पी०-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
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(उार प्रदेश विधान मण्डल के विधेयक)
उत्तर प्रदेश
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संख्या 714/वि0स0/संसदीय/76(संं )-2021
लखनऊ, 18 अगस्त, 2021
अधिसूचना
उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2021 जो उत्तर प्रदेश विधान सभा के दिनांक 18 अगस्त, 2021 के उपवेशन में पुरःस्थापित किया गया, उत्तर प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 1958 के नियम 126 के अन्तर्गत एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2021
उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम, 1975 का अग्रतर संशोधन करने के लिए
विधेयक
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता है :-
1-(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) स्ांक्षिप्त नाम और प्रारम्भ
अधिनियम, 2021 कहा जायेगा।
(2) यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा जैसा कि राज्य सरकार इस निमित्त गजट में
अधिसूचना द्वारा नियत करे और भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिये भिन्न-भिन्न दिनांक नियत किये जा सकते हैं। 2 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 2-उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम, 1985, जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है, की धारा 2 में,-
(क) खण्ड 10 के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया जायेगा, अर्थात् :-
उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 43 सन् 1975 की धारा 2 का संशोधन
"(10) नगर विकास विभाग,आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, पंचायतीराज विभाग, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग का तात्पर्य राज्य सरकार के अधीन इन नामों के विभागों से है।'';
(ख) खण्ड (15) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रख दिया जायेगा, अर्थात्ः- "(15) 'निगम' का तात्पर्य धारा 3 के अधीन स्थापित उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) तथा उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से है।'';
(ग) खण्ड (29) के पश्चात् निम्नलिखित खण्ड बढ़ा दिया जायेगा, अर्थात्,ः- ''(29क) नगरीय स्थानीय निकाय का तात्पर्य नगर निगम, नगर पालिका परिषद्, नगर पंचायत अथवा किसी नगरीय क्षेत्र समिति से है और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित ग्रामीण स्थानीय निकाय का तात्पर्य जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत अथवा नगरीय स्थानीय निकाय के रूप में अधिसूचित क्षेत्र से भिन्न किसी अन्य क्षेत्र से है।"
3-मूल अधिनियम की धारा 3 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रख दी जायेगी, धारा 3 का संशोधन
अर्थात्ः-
धारा 4 का संशोधन
''राज्य सरकार गजट में अधिसूचना द्वारा और उसमें विनिर्दिष्ट किये जाने वाले दिनांक से तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम को उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय),जो नगर विकास विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन होगा और उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), जो नमामि गंगे और ग्रामीण जल सम्भरण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन होगा, के नाम से दो निगमों में तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण तथा अभिकल्प सेवाएं उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के साथ जारी रहेंगी।" 4-मूल अधिनियम की धारा 4 में,- (क) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात्ः- "(1) जल निगम (नगरीय) में, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट सदस्यों के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष होगा।
(1क) जल निगम (ग्रामीण) में, उपधारा (2कक) में विनिर्दिष्ट सदस्यों के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष होगा।''
(ख) उपधारा (2) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा रख दी जायेगी, अर्थात् :-
''(2) जल निगम (नगरीय) में अध्यक्ष के अतिरिक्त निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) एक प्रबन्ध निदेशक जो प्रशासनिक अनुभव से युक्त और जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बंधी कार्य के अनुभव से भी युक्त अर्ह अभियंता होगा अथवा सचिव,उत्तर प्रदेश शासन की श्रेणी का कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जायेंगे;
(ख) विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की भारतीय प्रशासनिक सेवा श्रेणी के भाारतीय प्रशासनिक सेवा के दो संयुक्त प्रबन्ध निदेशक अथवा पेय जल और सीवर व्यवस्था सम्बंधी कार्य में अनुभव सहित मुख्य अभियन्ता स्तर के दो अभियंता, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जायेंगे;
(ग) एक वित्त निदेशक, जिसे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा, जिसके पास वित्त एवं लेखा कार्य सम्बन्धी विषयों का अनुभव हो;
(घ) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, वित्त विभाग, पदेन होंगे; (ङ) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, नगर विकास विभाग, प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, आवास एवं शहरी विभाग और प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, पदेन;
(च) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, नियोजन विभाग, पदेन; (छ) निदेशक स्थानीय निकाय, उत्तर प्रदेश पदेन; (ज) निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं उत्तर प्रदेश, पदेन;
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 3 (झ) राज्य में स्थानीय निकायों के पांच निर्वाचित प्रधान, जो राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किये जायेंगे।
(2क) जल निगम (ग्रामीण) में अध्यक्ष के अतिरिक्त निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्ः- (क) एक प्रबन्ध निदेशक, जो प्रशासनिक अनुभव से युक्त और जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बंधी कार्य के भी अनुभव से युक्त अर्ह अभियंता होगा अथवा सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की श्रेणी का भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक अधिकारी, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा;
(ख) विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की श्रेणी का भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो संयुक्त प्रबंध निदेशक अथवा पेय जल तथा सीवर व्यवस्था सम्बंधी कार्य में अनुभव से युक्त मुख्य अभियंता स्तर के दो अभियंता, जो उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किये जायेंगे;
(ग) एक वित्त निदेशक, जिसे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा, जिसके
पास वित्तीय तथा लेखा कार्य सम्बंधी विषयों का अनुभव हो;
(घ) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, वित्त विभाग, पदेन; (ड.) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, पंचायतीराज विभाग, नमामि गंगे एवं
ग्रामीण जल सम्भरण विभाग, पदेन;
(च) प्रमुख सचिव/सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, नियोजन विभाग, पदेन; (छ) निदेशक, पंचायतीराज, उत्तर प्रदेश, पदेन; (ज) निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश, पदेन; (झ) राज्य में स्थानीय निकायों के पांच निर्वाचित प्रधान, जो राज्य सरकार द्वारा नाम
निर्दिष्ट किये जायेंगे।''
5-मूल अधिनियम की धारा 14, जिसमें पाश्र्वांकित शीर्षक सम्मिलित है, के स्थान पर धारा 14 का संशोधन निम्नलिखित धारा और पाश्र्वांकित शीर्षक रख दिये जायेंगे, अर्थात् :-
''14-उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की अधिकारिता राज्य का अधिसूचित नगरीय क्षेत्र होगा। उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के —त्य निम्नलिखित होंगे, अर्थात :-
उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) की अधिकारिता का क्षेत्र और उसके —त्य
(एक) राज्य सरकार के निदेशों पर जल सम्भरण, सीवर व्यवस्था और मल निस्तारण के लिए योजनाएं तैयार करना, उनका निष्पादन करना, उनका उन्नयन करना तथा उन्हें वित्त पोषित करना;
(दो) राज्य सरकार, और नगरीय स्थानीय निकायों को निजी संस्था या व्यक्तियों के अनुरोध पर जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था के सम्बन्ध में सभी आवश्यक सेवाओं की व्यवस्थाएं करना;
(तीन) राज्य सरकार के निदेशों पर जल सम्भरण, सीवर व्यवस्था तथा जल निकासी
के लिए राज्य योजनाएं तैयार करना;
(चार) जल संस्थानों और नगरीय स्थानीय निकायाें, जिन्होंने धारा 46 के अधीन निगम के साथ कोई करार किया हो, के क्षेत्रों के भीतर टैरिफ, करों तथा जल सम्भरण प्रभारों के समीक्षा करना और उन पर सलाह देना;
(पाँच) अपेक्षित सामग्री का निर्धारण करना और उन्हें प्राप्त करने तथा उनका
उपयोग किये जाने का प्रबन्ध करना;
(छः) जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सेवाओं के लिए राज्य मानक स्थापित करना; (सात) नगरीय क्षेत्रों में ऐसे सभी कृत्य करना, जो यहाँ पर उल्लिखित न हों और जो इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के पूर्व तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किये जा रहे थे;
(आठ) प्रत्येक जल संस्थान या स्थानीय निकाय, जो धारा 46 के अधीन निगम के साथ कोई करार किया हो। जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था प्रणाली के तकनीकी, आर्थिक तथा अन्य पहलुओं की वार्षिक समीक्षा करना;
(नौ) राज्य में प्रत्येक जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था योजना के तकनीकी, वित्तीय, आर्थिक तथा अन्य संगत पहलुओं की समीक्षा तथा मूल्यांकन करने की सुविधा को स्थापित करना तथा अनुरक्षण करना;
4 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021(दस) जब राज्य सरकार द्वारा निदेश दिया जाय तब किसी जलकल तथा सीवर व्यवस्था प्रणाली को ऐसी निबन्धनों तथा शर्तों पर ऐसी अवधि के लिए, जैसाकि राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय, संचालित करना, चलाना और अनुरक्षण करना; (ग्यारह) राज्य में जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी सेवाओं के सम्बन्ध में अपेक्षित जन-शक्ति तथा प्रशिक्षण निर्धारित करना;
(बारह) निगम अथवा किसी जल संस्थान के कृत्यों को दक्षता पूर्वक निस्तारित करने के लिए व्यावहारिक अनुसंधान करना;
(तेरह) इस अधिनियम द्वारा या तद्धीन निगम को सौपे गये किन्ही कृत्यों को करना;
और
(चौदह) ऐसे अन्य कृत्य करना, जो गजट में अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार द्वारा निगम को सौंपे जाएं।''
6-मूल अधिनियम की धारा 14 के पश्चात् निम्नलिखित धारा बढ़ा दी जायेगी, नयी धारा 14-क का बढ़ाया जाना अर्थात् :-
''14-क उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की अधिकारिता राज्य का ग्रामीण क्षेत्र होगा। उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के निम्नलिखित कृत्य होंगेः-
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की अधिकारिता का क्षेत्र और उसके कृत्य
(एक) जल सम्भरण के लिए तथा सीवर व्यवस्था और मल निस्तारण के लिए योजनाएं तैयार करना, उनका निष्पादन करना, उनका उन्नयन करना तथा उन्हें वित्त पोषित करना;
(दो) राज्य सरकार, और ग्रामीण स्थानीय निकायों को तथा अनुरोध करने पर निजी संस्थाओं या व्यक्तियों को जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था के सम्बन्ध में समस्त आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था करना;
(तीन) राज्य सरकार के निदेशों पर जल सम्भरण और सीवर व्यवस्था तथा जल निकासी के लिए राज्य योजनाएं तैयार करना;
(चार) ग्रामीण स्थानीय निकायों, जिन्होंने धारा 46 के अधीन निगम के साथ कोई करार किया हो, के क्षेत्र के भीतर टैरिफ, कर तथा जल सम्भरण प्रभारों की समीक्षा करना और उन पर सलाह देना;
(पाँच) अपेक्षित सामग्रियों का निर्धारण करना और उन्हें प्राप्त करने तथा उनका उपयोग किये जाने का प्रबन्ध करना;
(छः) जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सेवाओं के लिए राज्य मानक स्थापित करना; (सात) ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे समस्त सम्बन्धित कृत्यों को करना, जो यहाँ उल्लिखित न हाें, और जो इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के पूर्व तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा किये जा रहे थे;
(आठ) प्रत्येक जल संस्थान या स्थानीय निकाय, जिसने धारा 46 के अधीन निगम के साथ करार किया हो, के जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था प्रणाली के तकनीकी, आर्थिक तथा अन्य पहलुओं की वार्षिक समीक्षा करना;
(नौ) राज्य में प्रत्येक जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था योजना के तकनीकी, वित्तीय, आर्थिक तथा अन्य संबद्ध पहलुओं की समीक्षा तथा मूल्यांकन करने की सुविधा स्थापित करना तथा उसका अनुरक्षण करना;
(दस) जब राज्य सरकार द्वारा निदेश दिया जाय तब किसी जलकल तथा सीवर व्यवस्था प्रणाली को ऐसी निबन्धन और शर्तों पर और ऐसी अवधि के लिए, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय, संचालित करना, चलाना और अनुरक्षण करना;
(ग्यारह) राज्य में जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था संबन्धी सेवाओं के सम्बन्ध में अपेक्षित जन-शक्ति तथा प्रशिक्षण निर्धारित करना;
(बारह) निगम अथवा किसी जल संस्थान के कृत्यों को दक्षता पूर्वक व्यावहारिक अनुसंधान करना;
(तेरह) उपरोक्त में किसी बात के होते हुए भी, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), उत्तर प्रदेश राज्य में नमामि गंगे कार्यक्रम के अधीन योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु उत्तरदायी होगा;
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 5(चौदह) इस अधिनियम द्वारा तद्धीन निगम को सौंपे गये किन्ही अन्य कृत्यों को
करना; और
(पन्द्रह) ऐसे अन्य कृत्य करना, जो गजट में, अधिसूचना द्वारा, राज्य सरकार द्वारा
निगम को सौंपे जायें।''
7-पाश्र्वांकित शीर्षक सहित मूल अधिनियम की धारा 15 के स्थान पर निम्नलिखित धारा 15 का संशोधन
धारा और पाश्र्वांकित शीर्षक रख दिये जायेंगे, अर्थात्ः-
निगम की शक्ति
"15-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अध्यधीन निगम को ऐसा कोई भी कार्य करने की शक्ति होगी, जो इसके लिए इस अधिनियम के अधीन उसके अपने कृत्यों को कार्यान्वित करने के लिए
आवश्यक अथवा समीचीन हो। (2) पूर्ववर्ती उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, अपनी अधिकारिता
क्षेत्र में ऐसी शक्ति के अन्तर्गत उसकी निम्नलिखित शक्तियाँ भी होंगीः-
(एक) समस्त जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सुविधाओं का, चाहे जिसके द्वारा भी
संचालित होती हों, निरीक्षण करना;
(दो) किसी सम्बन्धित स्थानीय निकाय तथा संचालन अधिकरण से ऐसी आवधिक
अथवा विनिर्दिष्ट सूचना प्राप्त करना, जिसे वह आवश्यक समझे;
(तीन) अपने स्वयं के कार्मिकों के साथ-साथ स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के
लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराना;
(चार) जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था योजनाएं तैयार और उन्हें कार्यान्वित करना; (पाँच) राज्य सरकार, स्थानीय निकायों, संस्थाओं या व्यष्टियों को निगम द्वारा प्रदान
की गयी समस्त सेवाओं के लिए फीस की अनुसूची निर्धारित करना;
(छः) किसी व्यक्ति, फर्म या संस्था के साथ ऐसी संविदा या करार करना, जिसे
निगम, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का सम्पादन करने के लिए आवश्यक समझे;
(सात) स्वयं वार्षिक बजट अभिस्वीकृत करना; (आठ) जल संस्थानों के अधिकारिता में समाविष्ट सम्बन्धित स्थानीय क्षेत्रों और ऐसे स्थानीय निकायों पर जिन्होंने धारा 46 के अधीन निगम के साथ करार किया हो, लागू जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी सेवाओं के लिए टैरिफ का अनुमोदन करना;
(नौ) धन उधार लेना, ऋण पत्र जारी करना, वित्तीय सहायता और अनुदान प्राप्त
करना तथा अपनी निधियों का प्रबन्ध करना;
(दस) स्थानीय निकायों को उनकी जल सम्भरण योजना तथा सीवर व्यवस्था
सम्बन्धी योजना के लिए ऋण वितरण करना;
(ग्यारह) इस अधिनियम के अधीन कृत्यों का सम्पादन करने के लिए व्यय करना और ऐसे व्यक्तियों या प्राधिकारियों, जिन्हें निगम आवश्यक समझे, को ऋण और अग्रिम स्वीकृत करना।''
8-मूल अधिनियम की धारा 31 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रख दी जायेगी, धारा 31 का संशोधन
अर्थात्ः-
''31-(1) निगम की स्थापना के दिनाँक, जिसे आगे "नियत दिनाँक'' कहा गया है,
से-
(क) समस्त सम्पत्तियाँ और आस्तियाँ (जिसके अन्तर्गत जल-कल, भवन, प्रयोगशालाएं, भण्डार, यान फर्नीचर और अन्य साज-सामान सम्मिलित हैं) जो तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम में नियत दिनाँक के ठीक पूर्व निहित थीं, सब निगम में निहित हो जायेंगी और अंतरित हुई समझी जायेंगी जैसा कि राज्य सरकार किसी आदेश द्वारा अवधारित करे;
(ख) तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम के समस्त अधिकार देनदारियाँ और दायित्व, चाहे वे उक्त विभाग से सम्बन्धित किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुए हों, वे सब निगम के अधिकार, देनदारियाँ और दायित्व होंगे।
(2) ऐसी सम्पत्तियों, आस्तियों, अधिकारों, देनदारियों और दायित्वों का मूल्यांकन ऐसे
रीति से किया जायेगा, जैसाकि राज्य सरकार निर्धारित करे। 6 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 (3) राज्य सरकार समय-समय पर निगम की सम्पत्तियों, आस्तियों, देनदारियों और दायित्वों का स्टाक ले सकती है और किसी यथा विहित सामान्य अथवा विशिष्ट आदेश द्वारा उन्हें उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) एवं उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के मध्य निहित करने, अन्तरित करने या पुनः आवंटित करने हेतु निर्देशित कर सकती है।
(4) जहाँ नियत दिनाँक के ठीक पूर्व इस अधिनियम को अधीन निगमों के मध्य बंटवारा के अध्याधीन तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम किसी सम्पत्ति अधिकार या देनदारियों के सम्बन्ध में किन्हीं विधिक कार्यवाहियों के लिए पक्षकार हों वहाँ इस अधिनियम के किसी उपबन्ध के आधार पर उस सम्पत्ति या उन अधिकारों या देनदारियों में अंश धारण करने वाला या अर्जित करने वाला निगम तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम पर प्रतिस्थापित किया गया समझा जायेगा अथवा उसे कार्यवाही हेतु पक्षभार के रूप में जोड़ा जायेगा।'' 9-मूल अधिनियम की धारा 37 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रख दी जायेगी, धारा 37 का संशोधन
अर्थात् :-
''37 (1) इस धारा में उपबन्धित के सिवाय प्रत्येक व्यक्ति, जो तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा सीधी भर्ती से नियुक्ति अथवा समायोजित हो, नियत दिनाँक को राज्य सरकार के सामान्य आदेश अथवा विशिष्ट आदेश द्वारा दिये निदेशों के अनुसार उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) एवं उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) का कार्मिक हो जायेगा और उसी अवधि के लिए उसी पारिश्रमिक तथा उन्हीं निबन्धनों एवं शर्तों और पेंशन, उपादान तथा विषयों के सम्बन्ध में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद धारण करेगा या सेवा में रहेगा, जिन पर वह नियत दिनाँक को उसे धारण करता, यदि वह अधिनियम प्रवृत्त न होता और वह इस प्रकार तब तक बना रहेगा, जब तक उसका सेवा योजन निगम से समाप्त न कर दिया जाय अथवा जब तक कि किसी विधि के अधीन उसके अनुसरण में अथवा किसी ऐसे उपबन्ध के अनुसार जिससे उसकी सेवाएं नियंत्रित होती हों, निगम द्वारा उसका पारिश्रमिक या सेवा की अन्य निबन्धन एवं शर्तें पुनरीक्षित या परिवर्तित न कर दी जायें :
परन्तु यह कि उपधारा (1) की कोई बात किसी ऐसे कर्मचारी पर लागू नहीं होगी, जो तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम को ऐसे समय के भीतर जिसे राज्य सरकार समान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करे, लिखित नोटिस द्वारा कर्मचारी न होने के अपने अभिप्राय की सूचना दे :
परन्तु अग्रतर यह कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम/निगम के अधीन पूर्ववर्ती परन्तुक में निर्दिष्ट किसी कर्मचारी की सेवा उसके द्वारा धृत पद के समाप्त होने के कारण समाप्त हो जायेगी और वह तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम से ऐसे प्रतिकर का हकदार होगा, जो-
(क) किसी स्थाई कर्मचारी की दशा में, 03 मास के पारिश्रमिक;
(ख) किसी अस्थाई कर्मचारी की दशा में एक मास के पारिश्रमिक, के बराबर होगा। (2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कर्मचारियों के लिए गठित किसी पेंशन, भविष्य निधि, उपादान अथवा तत्सदृश अन्य निधि में उसके नाम जमा धनराशि तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा नियत दिनाँक तक देय संचयित ब्याज और ऐसी निधि से सम्बन्धित लेखा सहित निगम को अन्तरित कर दी जायेगी और तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम के अपवर्जन हेतु, निगम तत्सदृश धनराशियों का जो उनकी सेवा की शर्तों के अनुसार उचित समय पर उन्हें देय हो, संदाय करने के लिए दायी होगा। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 7 उपरोक्त पैरा में किसी बात के होते हुए भी राज्य सरकार के सामान्य या विशिष्ट
आदेश द्वारा तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम के सेवानिवृत्त कार्मिकों की पेंशन व अन्य
सेवानैवृत्तिक लाभ निगमों के मध्य वितरित किये जाएंगे।
(3) उत्तर प्रदेश औद्योगिक झगड़ों का ऐक्ट, 1947 या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य
विधि में किसी अन्य बात के होते हुए भी उपधारा (1) के अधीन निगम के किसी कर्मचारी के
सेवाओं के अन्तरण से कोई ऐसा कर्मचारी उत्तर प्रदेश औद्योगिक झगड़ों का ऐक्ट, 1947 या
ऐसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर का हकदार नहीं होगा और ऐसा कोई दावा किसी
न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जायेगा।
(4) उपधारा (1) के अधीन तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम का प्रत्येक स्थायी या
अस्थायी कर्मचारी नियत दिनाँक को और स्थायी या अस्थायी पद के प्रति जो नियत दिनाँक
से निगम के अधिष्ठान से सृजित हो जायेगा, निगम का यथास्थिति स्थाई या अस्थाई कर्मचारी
हो जायेगा।
(5) छंटनी या पदों को समाप्त किये जाने के सम्बन्ध में सिविल सर्विस रेगुलेशन्स,
जैसा कि वह राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति के नियंत्रणाधीन सरकारी सेवकों पर
लागू हो, के पैरा 426 या पैरा 436 की कोई बात सिवाय इस धारा में उपबन्धित सीमा तक,
उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी कर्मचारी पर लागू नहीं होगी।
(6) पूर्ववर्ती उपधाराओं में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,-
(क) किसी व्यक्ति की सेवाएं, तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम में नियत दिनाँक
के ठीक पूर्व सेवायोजित या नियत दिनाँक से पहले जिसके विरूद्ध हुए अनुशासनात्मक
कार्यवाही विचाराधीन थी या जिसको उसकी सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का कोई
नोटिस या आदेश जारी किया जा चुका था, निगम को नियत दिनाँक को या से अन्तरित नहीं
होगी, और ऐसे व्यक्ति के विषय में नियत दिनाँक के पश्चात् ऐसी रीति से ऐसे प्राधिकारी
द्वारा कार्यवाही की जायेगी, जैसा कि राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस
सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट करे।
(ख) यदि तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम के किसी कर्मचारी की सेवाएं उपधारा
(1) के अधीन निगम को अन्तरित हो जाती हैं तो निगम ऐसे अन्तरण के पश्चात् राज्य
सरकार की सेवा के दौरान ऐसे कर्मचारी की किसी कार्य या लोप या आचरण या अभिलेख
को ध्यान में रखते हुए ऐसे कर्मचारी के विरूद्ध या उसके सम्बन्ध में ऐसी अनुशासनात्मक या
अन्य कार्यवाही करने में सक्षम होगा, जिसे वह उचित समझे।"
10-(1) राज्य सरकार किसी कठिनाई को दूर करने के प्रयोजनार्थ विशेषतया
कठिनाइयों को दूर किया जाना तत्कालीन जल निगम के विभाजन के सक्रमण के सम्बन्ध में इस अधिनियम या संशोधनों में
निर्दिष्ट अधिनियमिति के उपबन्धों द्वारा आदेश द्वारा निदेश दे सकती है कि वह
अधिनियमितियाँ उस अवधि के दौरान जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जायं, ऐसे अनुकूलनों के
अधीन रहते हुए जो परिष्कार, परिवर्धन अथवा लोप के रूप में हो सकते हैंं तथा जिनसे
मूलार्थ पर प्रभाव न पड़ता हो और जिन्हें यह आवश्यक या समीचीन समझे, प्रभावी होंगे :
परन्तु यह कि ऐसा कोई आदेश, इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के दिनाँक से
02 वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जायेगा।
(2) उपधारा (1) के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, विधान मण्डल के दोनों सदनों
के समक्ष रखा जायेगा। 8 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021
उद्देश्य और कारण
जल संभरण और सीवर व्यवस्था संबंधी सेवाओं का विकास और विनियमन करने हेतु निगम, प्राधिकरणों तथा संगठनों की स्थापना तथा उससे संबंधित मामलों की व्यवस्था करने के लिए उत्तर प्रदेश जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम, 1975 (उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 43 सन् 1975) अधिनियमित किया गया है।
उक्त अधिनियम, 1975 के अधीन उत्तर प्रदेश जल निगम का गठन, एक निगमित निकाय के रूप में शाश्वत उन्नयन के साथ और समस्त प्रयोजनार्थ स्थानीय प्राधिकरण के रूप में किया गया था। उक्त जल निगम के बढ़े हुए कार्यभार के कारण और राज्य में ग्रामीण जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था से संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अनुभव किया गया कि राज्य में नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक-पृथक निगमों की आवश्यकता है। उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुए पूर्वोक्त अधिनियम में संशोधन करके तत्कालीन उत्तर प्रदेश जल निगम को उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) और उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के रूप में विभाजित करने का विनिश्चय किया गया है।
तद्नुसार उत्तर प्रदेश जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2021 पुरःस्थापित किया जाता है।
आशुतोष टण्डन "गोपाल जी" मंत्री, नगर विकास।
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उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था (संशोधन) विधेयक, 2021 द्वारा संशोधित की जाने वाली मूल अधिनियम की संगत धाराओं का उद्धरण।
उत्तर प्रदेश जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम, 1975
धारा 2-(10) स्वायत्त शासन अभियन्त्रण विभाग और सामुदायिक विकास विभाग का तात्पर्य राज्य सरकार के अधीन इन नामों के विभागों से है।
XXX XXX XXX (15) निगम का तात्पर्य धारा 3 के अधीन स्थापित उत्तर प्रदेश जल निगम से है।
धारा 3-(1) राज्य सरकार गजट में अधिसूचना द्वारा और उसमें विनिर्दिष्ट दिनांक से, उत्तर प्रदेश जल निगम के नाम से एक निगम गठित करेगी।
(2) उत्तर प्रदेश जल निगम उक्त नाम से शाश्वत उत्तराधिकार वाला एक निगमित निकाय होगा और उसकी एक सामान्य मुद्रा होगी तथा उक्त नाम से वह वाद प्रस्तुत कर सकेगा और उसके विरूद्ध वाद प्रस्तुत किया जा सकेगा और उसे संपत्ति अर्जित करने, धारण करने अथवा उसका निस्तारण करने की शक्ति होगी।
(3) निगम सभी प्रयोजनों के लिये स्थानीय प्राधिकारी समझा जायेगा।
(4) निगम का प्रधान कार्यालय लखनऊ में होगा, और ऐसे अन्य स्थानो ंपर भी उसके कार्यालय हो सकते हैं जिन्हें वह आवश्यक समझे।
धारा 4-(1) निगम में, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट सदस्यों के अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष होगा।
(2) अध्यक्ष के अतिरिक्त निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :-
(क) एक प्रबन्ध निदेशक (जिसे राज्य सरकार नियुक्त करेगी), जो प्रशासकीय अनुभव रखने वाला तथा जल सम्भरण और सीवर'-व्यवस्था सम्बन्धी कार्यों का भी अनुभव रखने वाला अर्हित अभियन्ता होगा ;
(ख) एक वित्त निदेशक (जिसे राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा) जो ऐसा व्यक्ति होगा जिसे वित्तीय तथा लेखा सबन्धी विषयों का अनुभव हो;
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 9(ग) सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार वित्त विभाग पदेन; (घ) सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, स्वायत्त शासन विभाग पदेन;
(ङ) स्थानीय निकाय निदेशक, उत्तर प्रदेश पदेन;
(च) स्वास्थ्य सेवा निदेशक, उत्तर प्रदेश पदेन; (छ) राज्य में स्थानीय निकायों के तीन निर्वाचित प्रधान, जो राज्य सरकार द्वारा नाम-निर्दिष्ट किये जायेंगे।
धारा 14-निगम के निम्नलिखित —त्य होंगे :- (1) जल सम्भरण के लिए तथा सीवर व्यवस्था और सीवेज के निस्तारण के लिए योजनाएं तैयार करना, उनका निष्पादन करना, उनकी प्रोन्नति करना तथा उन्हें वित्त पोषित करना। (2) राज्य सरकार, और स्थानीय निकाय को तथा अनुरोध करने पर निजी संस्थाओं या व्यक्तियों को जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था के सम्बन्ध में सभी आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था करना।
(3) राज्य सरकार के निर्देश पर जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था तथा जलोत्सारण के लिए राज्य योजनाएं तैयार करना।
(4) जल संस्थानों और स्थानीय निकायों के जिन्होंने धारा 46 के अधीन निगम के साथ कोई करार किया हो, क्षेत्र के भीतर टैरिफ, कर तथा जल सम्भरण के परिव्यय का पुनर्विलोकन करना और उन पर सलाह देना।
(5) अपेक्षित सामग्री का निर्धारण करना और उसे प्राप्त करने तथा उसका उपयोग किये जाने का प्रबन्ध करना।
(6) जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सेवाओं के लिए राज्य मानक स्थापित करना। (7) ऐसे सभी —त्य करना जो यहां पर वर्णित नहीं हुए हैं और जो इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के पूर्व स्वायत्त शासन अभियंत्रण विभाग द्वारा किये जा रहे थे।
(8) प्रत्येक जल संस्थान या स्थानीय निकाय के जिसमें धारा 46 के अधीन निगम के साथ कोई करार किया है, जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था प्रणाली के तकनीकी, वित्तीय आर्थिक तथा अन्य पहलुओं का वार्षिक पुनर्विलोकन करना।
(9) राज्य में प्रत्येक जल संभरण तथा सीवर व्यवथा योजना के तकनीकी, वित्तीय, आर्थिक तथा अन्य संगत पहलुओं के पुनर्विलोकन तथा मूल्यांकन करने की सुविधा को स्थापित करना तथा उनका अनुरक्षण करना।
(10) जब राज्य सरकार द्वारा निर्देश दिया जाय तो किसी जल-कल सीवर व्यवस्था प्रणाली को ऐसी शर्तों तथा निबन्धनों पर और ऐसी अवधि के लिए जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय, संचालित करना, चलाना और अनुरक्षण करना।
(11) राज्य में जल सम्भरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी सेवाओं के सम्बन्ध में अपेक्षित जन-शक्ति तथा प्रशिक्षण निर्धारित करना।
(12) निगम अथवा किसी जल संस्थान के —त्यों को दक्षतापूर्वक चलाने के लिये व्यावहारिक गवेषणा करना।
(13) इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन निगम को सौंपे गये किन्हीं —त्याें को करना, और (14) ऐसे अन्य —त्य करना जो गजट में अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार द्वारा निगम को सौंपे जायें।
धारा 15-(1) इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन रहते हुए निगम को ऐसा कोई भी कार्य करने की शक्ति होगी जो उसे इस अधिनियम के अधीन अपने —त्यों को करने के लिए आवश्यक अथवा समीचीन हो।
(2) पूर्ववर्ती उपबन्ध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी शक्ति के अन्तर्गत निम्नलिखित शक्तियाँ भी होंगी :-
(1) राज्य में समस्त जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था सुविधाओं का, चाहे जिसके द्वारा भी संचालित होती हो, निरीक्षण करना।
(2) किसी स्थानीय निकाय तथा संचालन अभिकरण से ऐसी आवधिक अथवा विनिर्दिष्ट सूचना प्राप्त करना जिसे वह आवश्यक समझे। 10 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 (3) अपने कार्मिकों के लिए तथा स्थानीय निकायों के कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
(4) जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था योजनाओंं को तैयार और कार्यान्वित करना।
(5) राज्य सरकार और स्थानीय निकायों, संस्थाओं या व्यष्टियों को निगम द्वारा प्रदान की गई सभी सेवाओं के लिए फीस की अनुसूची निर्धारित करना।
(6) किसी व्यक्ति, फर्म या संस्था के साथ ऐसी, संविदा या करार करना, जिसे निगम इस अधिनियम के अधीन अपने —त्यों का संपादन करने के लिए आवश्यक समझे।
(7) प्रति वर्ष अपना बजट अभिस्वी—त करना।
(8) जल संस्थानों की अधिकारिता में समाविष्ट अलग-अलग स्थानीय क्षेत्रों और ऐसे स्थानीय निकायों पर जिन्होंने धारा 46 के अधीन निगम के साथ करार किया हो, प्रयोज्य जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी सेवाओं के लिये टैरिफ का अनुमोदन करना।
(9) धन उधाार लेना, ़ऋण पत्र जारी करना, वित्तीय सहायता और अनुदान प्राप्त करना अपनी निधियों का प्रबन्ध करना।
(10) स्थानीय निकायों को उनकी जल संभरण योजना तथा सीवर व्यवस्था सम्बन्धी योजना के लिए ऋण वितरण करना।
(11) इस अधिनियम के अधीन —त्यों का संपादन करने के लिये व्यय करना और ऐसे व्यक्तियों या प्राधिकारियों को जिन्हें निगम आवश्यक समझे, ऋण और अग्रिम स्वी—त करना। धारा 31-(1) निगम की स्थापना के दिनांक, अर्थात् 18 जून, 1975 से, जिसे इस अध्याय में आगे नियत दिनांक के रूप में निर्दिष्ट किया गया है,-
(क) जो सम्पत्ति और आस्तियों (जिसके अन्तर्गत जल-कल, भवन, प्रयोगशाला, भण्डार, गाड़ी फर्नीचर और अन्य साज-सामान सम्मिलित है) स्वायत्त शासन अभियंत्रण विभाग के प्रयोजनार्थ राज्य सरकार में नियत दिनांक के ठीक पूर्व निहित थी वह सब निगम में निहित और उसको अन्तरित हो जायेगी;
(ख) जो अधिकार, दायित्व और आभार राज्य सरकार के उक्त विभाग से सम्बन्धित थे चाहे वे किसी संविदा से या अन्यथा उद्भूत हुए हों, वे सब निगम के अधिकार, दायित्व और आभार होंगे। (2) ऐसी सम्पत्तियों, आस्तियों, अधिकारों, दायित्वों और आभारों का मूल्यांकन ऐसी रीति से किया जायेगा जैसी राज्य सरकार निर्धारित करे।
(3) जो वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियां राज्य सरकार के द्वारा या विरूद्ध संस्थित या प्रतिवादित की गयी है या उपधारा (1) के अधीन निहित और अन्तरित न होने पर की गयी होती, वे निगम के द्वारा या विरूद्ध जारी, संस्थित या प्रतिवादित की जा सकती है।
धारा 37-(1) इस धारा में की गई अन्यथा व्यवस्था के सिवाय, प्रत्येक व्यक्ति जो राज्य सरकार के स्वायत्त शासन अभियन्त्रण विभाग में सेवायोजित हो, नियत दिनांक को तथा से निगम का कर्मचारी हो जाएगा और उसमें उसी अवधि के लिए, उसी पारिश्रमिक तथा उन्हीं अन्य निबन्धनों एवं शर्तों पर और पेंशन, उपादान तथा अन्य विषयों के सम्बन्ध में उन्हीं अधिकारों और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद धारण करेगा, या सेवा में रहेगा जिन पर वह नियत दिनांक को उसे धारण करता यदि यह अधिनियम प्रवृत्त न हुआ होता, और वह इस प्रकार तब तक बना रहेगा जब तक कि उसका सेवायोजन निगम से समाप्त न कर दिया जाए अथवा जब तक कि किसी विधि के अधीन या उसके अनुसरण में अथवा किसी ऐसे उपबन्ध में अनुसार, जिससे तत्समय उसकी सेवायें नियंत्रित होती हों, निगम द्वारा उसका पारिश्रमिक या सेवा के अन्य निबन्धन एवं शर्तें पुनरीक्षित या परिवर्तित न कर दी जाय :
प्रतिबन्ध यह है कि इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे कर्मचारी पर लागू न होगी जो राज्य सरकार को ऐसे समय के भीतर जिसे राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा निर्दिष्ट करें, लिखित नोटिस द्वारा निगम का कर्मचारी न होने के अपने अभिप्राय की सूचना दें : अग्रेतर प्रतिबन्ध यह है कि राज्य सरका के अधीन पूर्ववर्ती प्रतिबन्धात्मक खण्ड में निर्दिष्ट किसी कर्मचारी की सेवा उसके द्वारा धृत के पद के समाप्त होने के कारण समाप्त हो जाएगी और वह राज्य सरकार से ऐसे प्रतिकर का हकदार होगा जो,-
(1) किसी स्थाई कर्मचारी की दशा में, तीन मास के पारिश्रमिक। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 11 (2) किसी अस्थाई कर्मचारी की दशा में, एक मास के पारिश्रमिक के बराबर होगा।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कर्मचारियों के लिए गठित किसी पेंशन, भविष्य निधि उपादान अथवा तत्सदृश अन्य निधि में उनके नाम जमा धनराशि, राज्य सरकार द्वारा नियत दिनांक तक देय संचयित ब्याज और ऐसी निधि से सम्बन्धित लेख सहित निगम को अन्तरित कर दी जायेगी और राज्य सरकार को छोड़कर, निगम ऐसे कर्मचारियों को पेंशन, भविष्य निधि, उपादान या अन्य तत्सदृश धनराशियों का, जो उनकी सेवा की शर्तों के अनुसार समुपयुक्त, समय पर उन्हें देय हो, भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
(3) संयुक्त प्रांतीय औद्योगिक झगड़ों का ऐक्ट, 1947 ई0 या तत्समय प्रवृृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन निगम के किसी कर्मचारी की सेवाओं के अन्तर से कोई ऐसा कर्मचारी उक्त ऐक्ट या ऐसी अन्य विधि के अधीन कोई प्रतिकर का हकदार न होगा, और ऐसा कोई दावा किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकारी द्वारा ग्रहण नहीं किया जाएगा। (4) उपधारा (1) के अधीन राज्य सरकार के स्वायत्त शासन अभ्यिन्त्रण विभाग का प्रत्येक स्थायी या अस्थायी कर्मचारी नियत दिनांक को और से स्थायी या अस्थायी पद के प्रति जो नियम दिनांक से निगम के अधिष्ठान से सृजित हो जायगा, निगम का, यथास्थिति स्थायी या अस्थायी कर्मचारी हो जाएगा।
(5) उपधारा (1) के प्रथम प्रतिबन्धात्मक खण्ड में निर्दिष्ट कोई कर्मचारी नियत दिनांक और उक्त उपधारा के द्वितीय प्रतिबन्धात्मक खण्ड के अधीन पदों की समाप्ति के दिनांक के बीच के राज्य सरकार की सेवा में बना रहा समझा जायेगा, किन्तु राज्य सरकार उक्त अवधि के लिए ऐसे कर्मचारी को अपने द्वारा दिये गये पारिश्रमिक और उपधारा के द्वितीय प्रतिबन्धात्मक खण्ड में निर्दिष्ट प्रतिकर की निगम से प्रतिपूर्ति की भी हकदार होगी।
(6) छंटनी या पदों को समाप्त किये जाने के सम्बन्ध में सिविल सर्विस रेग्यूलेशन्स, जैसे कि वह राज्य सरकार की नियम बनाने की शक्ति के नियन्त्रणाधीन सरकारी सेवकों पर लागू है, के पैरा 426 या पैरा 436 की कोई बात सिवाय इस धारा में व्यवस्थित सीमा तक, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी कर्मचारी पर लागू न होंगे।
(7) पूर्ववर्ती उपधाराओं में किसी बात के होते हुए भी :-
(क) किसी व्यक्ति की सेवाएं, जो राज्य सरकार स्वायत्त शासन अभियन्त्रण विभाग में नियत दिनांक के ठीक पूर्व सेवायोजित या नियत दिनांक के पहले जिसके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही विचाराधीन थी या, जिसको उसकी सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवा-निवृत्ति का कोई नोटिस या आदेश जारी किया जा युका था, निगम को नियत दिनांक को या से अन्तरित नहीं होगी, और ऐसे व्यक्ति के विषय में नियत दिनांक के पश्चात् ऐसी रीति से और ऐसे प्राधिकारी द्वारा कार्यवाही की जायेगी जैसा राज्य सरकार सामान्य या विशेष आदेश द्वारा इस सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट करे।
(ख) यदि राज्य सरकार के किसी कर्मचारी की सेवाएं उपधारा (1) के अधीन निगम को अन्तरित हो जाती हैं तो निगम ऐसे अन्तरण के पश्चात् ऐसे कर्मचारी के विरुद्ध या सम्बन्ध में ऐसी अनुशासनात्मक या अन्य कार्यवाही करने को जिसे वह उचित समझे, ऐसे कर्मचारी के, जब वह राज्य सरकार की सेवा में था, किसी कार्य या लोप या आचरण या अभिलेख का ध्यान रखते हुए, सक्षम होगा।
आज्ञा से, प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव। 12 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 UTTAR PRADESH SARKAR SANSADIYA KARYA ANUBHAG-1 ——— No. 672/XC-S-1–21-41S-2021 Dated Lucknow, August 27, 2021 ———
IN pursuance of the provisions of clause (3) of Article 348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of the "Uttar Pradesh Jal Sambharan Tatha Sewer Vyavastha (Sanshodhan) Vidheyak, 2021" introduced in the Uttar Pradesh Legislative Assembly on August 18, 2021.
THE UTTAR PRADESH WATER SUPPLY AND SEWERAGE (AMENDMENT)
BILL, 2021
A
BILL
further to amend the Uttar Pradesh Water Supply and Sewerage Act, 1975.
IT IS HEREBY enacted in the Seventy second Year of the Republic of India as follows :–
Short title
1. (1) This Act may be called the Uttar Pradesh Water Supply and Sewerage (Amendment) Act, 2021.
and commencement
(2) It shall come into force on such date as the State Government may, by notification in the Gazette, appoint in that behalf and different dates may be appointed in respect of different provisions.
Amendment of
2. In section 2 of the Uttar Pradesh Water Supply and Sewerage Act,1975, section 2 of U.P. hereinafter referred to as the principal Act,-
Act no. 43
(a) for clause (10) the following clause shall be substituted, namely:-
of 1975
―(10) Urban Development Department, Housing and Urban Planning Department, Panchayati Raj Department, Rural Development Department, Namami Gange and Gramin Jalapurti Department, Infrastructure and Industrial Development Department mean the Departments with these names under the State Government."
(b) for clause (15) the following clause shall be substituted, namely:-
"(15) 'Nigam' means the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) and Uttar
Pradesh Jal Nigam (Rural) established under section 3."
(c) after clause (29), the following clause shall be inserted, namely:-
"(29A) Urban local body means Municipal Corporation, Nagar Palika Parishad, Nagar Panchayat or any town area committee notified by the State Government from time to time and rural local body means Zila Panchayat, Kshettra Panchayat and Gram Panchayat or any other area other than an area defined as urban local body."
Amendment of
3. For section 3 of the principal Act, the following section shall be substituted, section 3
namely:-
"The State Government shall, by notification in the Gazette and with effect from a date to be specified therein, bifurcate the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam into two corporations by the name of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) which shall be under administrative control of Urban Development Department and the Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural), which shall be under the administrative control of Namami Gange and Rural Water Supply Department:
Provided that the construction and design services of erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam will continue to be with Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) ." उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 13 4. In section 4 of the principal Act,- Amendment of section 4 (a) for sub-section (1) the following sub-section shall be substituted,
namely :–
"(1) The Jal Nigam (Urban) shall consist of a Chairman appointed by the State Government besides the members specified in sub-section (2).
(1A) The Jal Nigam (Rural) shall consist of a Chairman appointed by the State Government besides the members specified in sub-section (2AA)." (b) for sub-section (2), the following sub-section shall be substituted,
namely :–
"(2) The members of Jal Nigam (Urban) other than the Chairman shall
be as follows, namely :–
(a) a Managing Director who shall be qualified engineer having administrative experience and also the experience of water supply and sewerage work, or an officer of Indian Administrative Service in the rank of Secretary to the U.P. Government, to be appointed by the State Government ;
(b) two Joint Managing Directors of Indian Administrative Service in the rank of Special Secretary in the U.P. Government or two engineers of Chief Engineer level with experience in drinking water and sewerage work to be appointed by the State Government;
(c) a Finance Director to be appointed by the State Government, who shall have experience of matters relating to finance and accounts; (d) the Principal Secretary/Secretary to the U.P. Government in
the Finance Department, ex-officio;
(e) the Principal Secretary/Secretary to the U.P. Government in the Urban Development Department, the Principal Secretary/ Secretary to the U.P. Government in the Housing and Urban Planning Department and Principal Secretary/ Secretary to the U.P. Government in the Infrastructure and Industrial Development Department, ex-officio;
(f) the Principal Secretary/Secretary to the U.P. Government in
the Planning Department, ex-officio;
(g) the Director of local bodies, Uttar Pradesh, ex-officio; (h) the Director of Medical and Health services, Uttar Pradesh,
ex-officio;
(i) five elected heads of local bodies in the State, to be
nominated by the State Government.
(2A) The members of Jal Nigam (Rural) other than the Chairman
shall be as follows, namely :–
(a) a Managing Director who shall be qualified engineer having administrative experience and also the experience of water supply and sewerage work, or an officer of Indian Administrative Service in the rank of Secretary to the U.P. Government, to be appointed by the State Government ;
(b) two Joint Managing Director of Indian Administrative Service in the rank of Special Secretary in the U.P. Government or two engineer of Chief Engineer level with experience in drinking water and sewerage work to be appointed by the State Government in Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural);
(c) a Finance Director to be appointed by the State Government, who shall have experience of matters relating to finance and accounts; (d) the Principal Secretary/ Secretary to the U.P. Government in
the Finance Department, ex-officio;
(e) the Principal Secretary/Secretary to the U.P. Government in Panchayati Raj Department and Namami Gange and Rural Water Supply Department;
(f) the Principal Secretary/Secretary to the U.P. Government in
the Planning Department, ex-officio;
(g) the Director, Panchayati Raj, Uttar Pradesh, ex-officio; (h) the Director of Medical and Health services, Uttar Pradesh,
ex-officio;
(i) five elected heads of local bodies in the State, to be
nominated by the State Government." 14 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 Amendment 5. For section 14 of the principal Act including the marginal heading, the of section 14 following section and the marginal heading shall be substituted, namely:-
"14. The jurisdiction of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) shall be the Area of jurisdiction and
functions of the Uttar
the notified urban area notified urban area of the State. The function of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) shall be the following, namely :–
Pradesh Jal Nigam (Urban)
(i) the preparation, execution, promotion and financing the schemes for the supply of water and for sewerage and sewage disposal;
(ii) to render all necessary service in regard to water supply and sewerage to the State Government and urban local bodies, on request to private institution or individuals;
(iii) to prepare State plans for water supply, sewerage and drainage on the directions of the State Government;
(iv) to review and advise on the tariff, taxes and charges of water supply in the areas of Jal Sansthans and urban local bodies which have entered into an agreement with the Nigam under section 46;
(v) to assess the requirement for materials and arrange for their procurement and utilisation;
(vi) to establish state standards for water supply and sewerage services; (vii) to perform all functions in urban areas, not stated herein which were being performed by the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam before the commencement of this Act;
(viii) to review annually the technical, economic and other aspects of water supply and sewerage system of every Jal Sansthans or local bodies which has entered into an agreement with the Nigam under section 46;
(ix) to establish and maintain a facility to review and appraise the technical, financial, economic and other pertinent aspect of every water supply and sewerage scheme in the State;
(x) to operate, run and maintain any water works and sewerage system, if and when directed by the State Government, on such terms and conditions and for such period as may be specified by the State Government;
(xi) to assess the requirements for manpower and training in relation to water supply and sewerage services in the State;
(xii) to carry out applied research for efficient discharge of the function of the Nigam or a Jal Sansthans;
(xiii) any other functions entrusted to the Nigam by or under this Act; and
(xiv) such other functions as may be entrusted to the Nigam by the State Government, by notification, in the Gazette. "
Insertion of
6. After section 14 of the principal Act, the following section shall be inserted, new section namely:-
14-A
Area of jurisdiction and
functions of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural)
"14-A The jurisdiction of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural) shall be the rural area of the State. The function of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural) shall be the following, namely:-
(i) the preparation, execution, promotion and financing the schemes for the supply of water and for sewerage and sewage disposal;
(ii) to render all necessary service in regard to water supply and sewerage to the State Government and rural local bodies, on request to private institution or individuals;
(iii) to prepare State plans for water supply, sewerage and drainage on the directions of the State Government;
(iv) to review and advise on the tariff, taxes and charges of water supply in the areas of rural local bodies which have entered into an agreement with the Nigam under section 46;
(v) to assess the requirement for materials and arrange for their procurement and utilization;
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 15(vi) to establish state standards for water supply and sewerage
services;
(vii) to perform all related functions in rural areas, not stated herein
which were being performed by the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam
before the commencement of this Act;
(viii) to review annually the technical, economic and other aspects
of water supply and sewerage system of every Jal Sansthans or local
bodies which has entered into an agreement with the Nigam under
section 46;
(ix) to establish and maintain a facility to review and appraise the
technical, financial, economic and other pertinent aspect of every water
supply and sewerage scheme in the State;
(x) to operate, run and maintain any water works and sewerage
system, if and when directed by the State Government, on such terms
and conditions and for such period as may be specified by the State
Government;
(xi) to assess the requirements for manpower and training in
relation to water supply and sewerage services in the State;
(xii) to carry out applied research for efficient discharge of the
function of the Nigam or a Jal Sansthans;
(xiii) notwithstanding anything above, Uttar Pradesh Jal Nigam
(Rural) shall also be responsible for implementation of schemes under
Namami Gange program in the State of Uttar Pradesh;
(xiv) any other functions entrusted to the Nigam by or under this
Act; and
(xv) such other functions as may be entrusted to the Nigam by the
State Government, by notification, in the Gazette."
Amendment of 7. For section 15 of the principal Act, including the marginal heading the
section 15 following section and the marginal heading shall be substituted, namely:-
"15. (1) The Nigam shall, subject to the provision of this Act have power
to do anything which may be necessary or expedient
Power of Nigam
for carrying out its functions under this Act.
(2) Without prejudice to the generality of the foregoing provision, such
power shall include the power in their respective areas of jurisdiction ,–
(i) to inspect all water supply and sewerage facilities by
whomsoever they are operated;
(ii) to obtain such periodic or specific information from any
respective local body and operating agency as it may deem necessary;
(iii) to provide training for its own personnel as well as employees
of the local bodies;
(iv) to prepare and carry out schemes for water supply and
sewerage;
(v) to lay down the schedule of fees for all services rendered by the
Nigam to the State Government, local bodies, institutions or individuals;
16 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021(vi) to enter into contract or agreement with any person, firm or
institution, as the Nigam may deem necessary, for performing its
function under this Act;
(vii) to adopt its own budget annually;
(viii) to approve tariffs for water supply and sewerage services
applicable to respective local areas comprised within the jurisdiction of
Jal Sansthans and such local bodies as have entered into an agreement
with the Nigam under section 46;
(ix) to borrow money, issue debentures, to obtain subventions and
grants and manage its own funds;
(x) to disburse loans to local bodies to their water supply and
sewerage schemes;
(xi) to incur expenditure and to grant loans and advances to such
persons or authorities as the Nigam may deem necessary for performing
the functions under this Act."
Amendment of
8. For section 31 of the principal Act, the following section shall be section 31
substituted, namely;-
"31. (1) As from the date of establishment of the Nigam hereinafter referred to as 'the appointed date, -
(a) all properties and assets (including waterworks, buildings, laboratories, stores, vehicles, furniture's and other furnishing) which immediately before the appointed date were vested in the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam shall vest in and stand transferred to the Nigam, as the State Government may by an order determine;
(b) all the rights, liabilities and obligations of the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam whether arising out of any contract or otherwise pertaining to the said department shall be the rights, liabilities and obligations of the Nigam.
(2) Such properties, assets, rights, liabilities and obligations shall be valued in such manner as the State Government may determine.
(3) The State Government may take stock of property, assets, liabilities and obligations of Nigam from time to time and can direct for vesting, transfer or reallocate the same between the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) and Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural) by any general or specific order as prescribed.
(4) Where, immediately before the appointed day, the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam is a party to any legal proceedings with respect to any property, rights or liabilities subject to apportionment between the Nigam under this Act, the Nigam that succeeds to, or acquires a share in, that property or those rights or liabilities by virtue of any provision of this Act shall be deemed to be substituted for the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam or added as a party to those proceedings, and the proceedings may continue accordingly." उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021 17 Amendment of 9. For section 37 of the principal Act, the following section shall be
section 37 substituted, namely;-
"37. (1) Save as otherwise provided in this section, every person, who was
directly appointed or absorbed by the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam shall on and
from the appointed date become employee of the Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) or
Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural) as determined by the State Government by a general or
special order and shall hold his office or service therein by the same tenure and with the
same remuneration and upon same other terms and conditions, and with the same rights
and privileges as to pension, gratuity and other matters as he would have held the same
on the appointed date if this Act had not come into force, and shall continue to do so
until his employment in the Nigam is terminated or until his remuneration or other
terms and conditions of services are revised or altered by the Nigam under or in
pursuance of any law or in accordance with any provision which for the time being
governs his service:
Provided that nothing contained in this sub-section shall apply to any such
employee who by notice in writing given to the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam
within such time as the State Government may, by general or special order, specify,
intimates his intention of not becoming an employee of the Nigam:
Provided further that the services of any employee referred to in the preceding
proviso under the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam/Nigam shall stand terminated on
account of abolition of the post held by him and he shall be entitled from the erstwhile
Uttar Pradesh Jal Nigam to compensation equivalent -
(a) in the case of a permanent employee, to three month's remuneration;
(b) in the case of a temporary employee, to one month's remuneration.
(2) The sums standing to the credit of the employees referred to in sub-section
in any pension, provident fund, gratuity or other like funds constituted for them shall be
transferred by the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam along with any accumulated
interest due till the appointed date and with the accounts relating to such funds and the
Nigam shall, to the exclusion of the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam, be liable for
payment of pension, provident fund, gratuity or other like sums as may be payable to
such employee at the appropriate time in accordance with the conditions of their
service.
Notwithstanding anything contained in the above paragraph, pension and other
retirement benefits of retired employees of the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam shall
be distributed between the Nigam by any general or specific order of the State
Government.
(3) Notwithstanding anything contained in the Uttar Pradesh Industrial
Disputes Act, 1947, or in any other law for the time being in force, the transfer of
services of any employee to the Nigam under sub-section (1) shall not entitle any such
employee to any compensation under that Act or such other law and no such claim shall
be entertained by any court, tribunal or authority.
(4) Every permanent or temporary employee of the erstwhile Uttar Pradesh Jal
Nigam under sub-section (1) shall on and from the appointed date, be a permanent or
temporary employee of the Nigam, as the case may be, against a permanent or
temporary post which shall stand created in the establishment of the Nigam with effect
from the appointed date.
(5) Nothing in paragraph 426 or paragraph 436 of the Civil Service
Regulations as applicable to Government servants under the rule making control of the
State Government in relation to retrenchment or abolition of posts shall be extent to the
except provided in this section, apply to any employee referred to in sub-section (1).
18 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 27 अगस्त, 2021(6) Notwithstanding anything contained in the foregoing sub-sections,-
(a) the services of no person who was employed in the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam immediately before the appointed date against whom any disciplinary proceeding was pending or to whom any notice or order of termination of his services or compulsory retirement had been issued before the appointed date shall stand transferred to the Nigam on or from the appointed date in such persons may be dealt with after appointed date in such manner and by such authority as the State Government may by general or special order specify in this behalf;
(b) if the service of any employee of the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam stand transferred under sub-section (1) to the Nigam, the Nigam shall be competent after such transfer to take such disciplinary or other action as it thinks fit against or in respect of such employee having regard to any act or omission or conduct or record of such employee while he was in service of the State Government."
10. (1) The State Government may for the purpose of removing any Removal of difficulties
difficulty, particularly in relation to the transition of the bifurcation of erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam from the provisions of the enactment referred to in this Act or amendments, by order direct that the said enactments shall, during such period as may be specified in the order, have effect subject to such adaptation, whether by way of modification, addition or omission not effecting the substance as it may deemed to be necessary or expedient:
Provided that no such order shall be made after the expiry of a period of two years, from the commencement of this Act.
(2) Every order made under sub-section (1) shall be laid before both Houses of the State Legislature.
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STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS
The Uttar Pradesh Water Supply and Sewerage Act, 1975 (U.P. Act no. 43 of 1975) has been enacted to provide for the establishment of a Corporation, authorities and organizations for the development and regulation of water supply and sewerage services and for matters connected therewith.
The Uttar Pradesh Jal Nigam was formed under the aforesaid Act, 1975 as a body corporate with perpetual succession and as a local authority for all purposes. Due to the increased workload of the said Jal Nigam and in order to ensure effective implementation of the schemes related to rural water supply and sewerage in the State, it has been felt that there is a requirement of separate corporations for urban and rural areas in the State. In view of the above, it has been decided to divide the erstwhile Uttar Pradesh Jal Nigam into Uttar Pradesh Jal Nigam (Urban) and Uttar Pradesh Jal Nigam (Rural) by amending the aforesaid Act.
The Uttar Pradesh Water Supply and Sewerage (Amendment) Bill, 2021 is introduced accordingly.
ASHUTOSH TANDON "GOPAL JI"
Mantri,
Nagar Vikaas.
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By order,
J. P. SINGH-II, Pramukh Sachiv.
पी0एस0यू0पी0-ए0पी0 274 राजपत्र-2021-(610)-59930=629 प्रतियां (कम्प्यूटर/टी0/ऑफसेट)।