क्रम-संख्या-257
रजिस्ट्रेशन नम्बर-एस०एस०पी०/एल० डब्लू०/एन०पी०-91/2014-16
लाइसेन्स टू पोस्ट ऐट कन्सेशनल रेट
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(उार प्रदेश विधान मण्डल के विधेयक)
उत्तर प्रदेश
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संख्या 1161/वि0स0/संसदीय/103(संं )-2021
लखनऊ, 16 दिसम्बर, 2021
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अधिसूचना
उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2021, जो उत्तर प्रदेश विधान सभा के दिनांक 16 दिसम्बर, 2021 के उपवेशन में पुरःस्थापित किया गया, उत्तर प्रदेश विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमावली, 1958 के नियम 126 के अन्तर्गत एतद्द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2021
उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 का अग्रतर संशोधन करने के लिए
विधेयक
भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता हैः-
संक्षिप्त नाम 1-(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अधिनियम, 2021
और प्रारम्भ कहा जायेगा ।
(2) अन्यथा उपबन्धित के सिवाय, यह ऐसे दिनांक को प्रवृत्त होगा जैसा कि राज्य
सरकार गजट में अधिसूचना द्वारा नियत करेः
परन्तु यह कि इस अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबन्धों के लिये भिन्न-भिन्न तारीखें
नियत की जा सकती हैं। 2 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 धारा 7 का संशोधन 2-उत्तर प्रदेश माल और सेवाकर अधिनियम, 2017 (जिसे आगे मूल अधिनियम कहा गया है) में, धारा 7 में, उपधारा (1) में, खंड (क) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड बढ़ा दिया जाएगा और उसे तारीख 01 जुलाई, 2017 से बढ़ाया गया समझा जाएगा, अर्थात् :-
"(कक) किसी व्यक्ति, जो किसी व्यष्टि से भिन्न हो, द्वारा उसके सदस्यों या घटकों या विपर्येन से नकद, आस्थगित संदाय या अन्य मूल्यवान प्रतिफल के लिए क्रियाकलाप या संव्यवहार,"।
स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी न्यायालय, अधिकरण या प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी व्यक्ति और उसके सदस्यों या घटकों को दो पृथक व्यक्ति समझा जाएगा और क्रियाकलापों का प्रदाय या संव्यवहार, परस्पर एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति द्वारा किए गए समझे जाएंगे।
3-मूल अधिनियम की धारा 16 में, उपधारा (2) में, खंड (क) के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 16 का
संशोधन
खंड बढ़ा दिया जाएगा, अर्थात् :-
"(कक) खंड (क) में निर्दिष्ट बीजक या नामे नोट के ब्यौरे, पूर्तिकार द्वारा जावक पूर्ति के विवरण में प्रस्तुत किए गए हैं और ऐसे ब्यौरे, धारा 37 के अधीन विनिर्दिष्ट रीति से ऐसे बीजक या नामे नोट के प्राप्तिकर्ता को संसूचित किए गए हैं।" धारा 35 का
4-मूल अधिनियम की धारा 35 में, उपधारा (5) निकाल दी जायेगी।
संशोधन
5-मूल अधिनियम की धारा 44 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रख दी जायेगी, धारा 44 का
संशोधन
अर्थात् :-
"किसी इनपुट सेवा वितरक से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्री—त व्यक्ति, धारा 51 या धारा 52 के अधीन कर संदाय करने वाला कोई व्यक्ति, नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति, इलेक्ट्रानिक रूप से प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे समय के भीतर और ऐसे प्ररूप और रीति से, जैसा कि विहित किया जाए, संपरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा जिसमें वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित पूर्तियों के मूल्य के साथ सुमेलित करते हुए, एक स्वप्रमाणित सुमेलन विवरण सम्मिलित किया जा सकेगा :
परन्तु यह कि आयुक्त, परिषद् की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, रजिस्ट्री—त व्यक्तियों के किसी वर्ग को इस धारा के अधीन वार्षिक विवरणी दाखिल करने से छूट प्रदान कर सकेगाः
परन्तु यह और कि इस धारा में अंतर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग या किसी स्थानीय प्राधिकारी को, जिनकी लेखाबहियाँ भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा संपरीक्षा के अध्यधीन है या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन स्थानीय प्राधिकारियों के लेखाओं की संपरीक्षा के लिए नियुक्त किसी संपरीक्षक द्वारा की जाने वाली संपरीक्षा के अध्यधीन हैं, लागू नहीं होगी।"।
धारा 50 का
संशोधन
6-मूल अधिनियम की धारा 50 में, उपधारा (1) में, परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक रख दिया जाएगा और उसे तारीख 1 जुलाई, 2017 से रखा गया समझा जाएगा, अर्थात :
"परन्तु यह कि धारा 39 के उपबंधों के अनुसार, किसी कर अवधि के दौरान की गई पूर्तियों के संबंध में और नियत तारीख के पश्चात् उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत विवरणी में घोषित संदेय कर पर ब्याज सिवाय वहाँ के जहाँ ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा 73 या धारा 74 के अधीन कोई कार्यवाहियाँ आरम्भ होने के पश्चात् प्रस्तुत की जाती हैं, कर के उस भाग के लिए संदेय होगा, जिसे इलेक्ट्रॉनिक नकद लेजर से विकलन करके संदत्त किया जाता है।"। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 3 धारा 74 का
संशोधन 7-मूल अधिनियम, की धारा 74 में, स्पष्टीकरण (1) में, खण्ड (ii) में, शब्द और अंक "धारा 122, 125, 129 और 130 के" स्थान पर, शब्द और अंक "धारा 122 और 125" रख दिये जाएंगे।
धारा 75 का 8-मूल अधिनियम की धारा 75 में, उपधारा (12) में, निम्नलिखित स्पष्टीकरण बढ़ा दिया
संशोधन जाएगा, अर्थात् :-
"स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, पद "स्वनिर्धारित कर" में धारा 37 के अधीन प्रस्तुत की गयी ऐसी जावक पूर्तियों के ब्यौरों के संबंध में संदेय कर, सम्मिलित होगा किन्तु धारा 39 के अधीन प्रस्तुत विवरणी में सम्मिलित नहीं किया जायेगा"।
धारा 83 का 9-मूल अधिनियम की धारा 83 में, उपधारा (1) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रख
संशोधन दी जाएगी, अर्थात् :-
"(1) जहाँ, अध्याय 12, अध्याय 14 या अध्याय 15 के अधीन किसी कार्यवाही के आरंभ होने के पश्चात्, आयुक्त की यह राय हो कि सरकारी राजस्व के हित की संरक्षा करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है, तो वह, लिखित में आदेश द्वारा, ऐसी रीति में, जैसा कि विहित की जाए, धारा 122 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट कराधेय व्यक्ति या किसी व्यक्ति की संपत्ति, जिसके अन्तर्गत बैंक खाता भी है, को अनंतिम रूप से कुर्क कर सकेगा।"।
धारा 107 का 10-मूल अधिनियम की धारा 107 में, उपधारा (6) में, निम्नलिखित परंतुक बढ़ा दिया
संशोधन जाएगा, अर्थात् :
"परंतु यह कि धारा 129 की उपधारा (3) के अधीन, किसी आदेश के विरूद्ध कोई अपील तब तक दाखिल नहीं की जाएगी, जब तक कि शास्ति के पच्चीस प्रतिशत के बराबर धनराशि का अपीलार्थी द्वारा संदाय न कर दिया गया हो।"।
धारा 129 का 11-मूल अधिनियम की धारा 129 में,-(i) उपधारा (1) में, खंड (क) और खंड (ख) के
संशोधन स्थान पर निम्नलिखित खंड रख दिये जायेंगे, अर्थात् :-
"(क) ऐसे माल पर संदेय कर के दो सौ प्रतिशत के बराबर शास्ति के संदाय पर और छूट प्राप्त माल की दशा में, माल के मूल्य के दो प्रतिशत के बराबर की कोई धनराशि या पच्चीस हजार रूपए, जो भी कम हो, के संदाय पर निर्मुक्त किया जाएगा, जहाँ माल का स्वामी ऐसी शास्ति के संदाय के लिए आगे आता है;
(ख) माल के मूल्य के पचास प्रतिशत के बराबर शास्ति या ऐसे माल पर संदेय कर का दो सौ प्रतिशत के संदाय पर, जो भी अधिक हो और छूट प्राप्त माल की दशा में, ऐसे माल के मूल्य के पाँच प्रतिशत के बराबर की कोई धनराशि या पच्चीस हजार रूपए, जो भी कम हो, के संदाय पर निर्मुक्त किया जाएगा, जहाँ माल का स्वामी ऐसी शास्ति के संदाय के लिए आगे नहीं आता है,'',
(ii) उपधारा (2) निकाल दी जायेगी;
(iii) उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रख दी जाएगी, अर्थात :-
"(3) माल या वाहन को निरूद्ध करने वाला या उसका अभिग्रहण करने वाला समुचित अधिकारी, ऐसी निरूद्धता या अभिग्रहण के सात दिन के भीतर संदेय शास्ति को विनिर्दिष्ट करते हुए नोटिस जारी करेगा और तत्पश्चात्, उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन शास्ति के संदाय के लिए ऐसी नोटिस तामील किये जाने की तारीख से सात दिन की अवधि के भीतर आदेश पारित करेगा।"।
(iv) उपधारा (4) में, शब्द "ब्याज या शास्ति" के स्थान पर, शब्द "शास्ति" रख दिया
जाएगा;
(v) उपधारा (6) के स्थान पर, निम्नलिखित उपधारा रख दी जाएगी, अर्थातः- 4 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 "(6) जहाँ किसी माल का परिवहन करने वाला व्यक्ति या ऐसे माल का स्वामी उपधारा (3) के अधीन पारित आदेश की प्रति प्राप्त करने की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर, उपधारा (1) के अधीन शास्ति की धनराशि का संदाय करने में विफल रहता है, तो इस प्रकार निरुद्ध या अभिगृहीत माल या वाहन, उपधारा (3) के अधीन संदेय शास्ति की वसूली के लिए ऐसी रीति में और ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित किया जाए विक्रय किए जाने या अन्यथा निपटाए जाने का दायी होगा :
परन्तु यह कि परिवहनकर्ता द्वारा उपधारा (3) के अधीन शास्ति या एक लाख रूपए, जो भी कम हो, का संदाय किए जाने पर वाहन निर्मुक्त कर दिया जाएगा :
परन्तु यह और कि जहां निरुद्ध या अभिग्रहीत किया गया माल नष्ट होने वाला या परिसंकटमय प्र—ति का हो या समय के साथ उसके मूल्य में हृास की संभावना हो, वहां उक्त पन्द्रह दिन की अवधि में समुचित अधिकारी द्वारा, कटौती की जा सकेगी।"।
धारा 130 का
12-मूल अधिनियम की धारा 130 में,-(क) उपधारा (1) में, शब्द "इस अधिनियम में संशोधन
किसी बात के होते हुए भी यदि कोई" के स्थान पर, शब्द "जहां" रख दिया जाएगा ;
(ख) उपधारा (2) में, दूसरे परन्तुक में, शब्द, कोष्ठक और अंक "धारा 129 की उपधारा (1) के अधीन उद्ग्रहणीय शास्ति की रकम'' के स्थान पर, शब्द "ऐसे माल पर संदेय कर के सौ प्रतिशत के बराबर शास्ति" रख दिये जाएंगे;
(ग) उपधारा (3) निकाल दिया जाएगा।
धारा 151 का
13-मूल अधिनियम की धारा 151 के स्थान पर, निम्नलिखित धारा रख दी जाएगी, संशोधन
अर्थात् :-
"आयुक्त या उसके द्वारा प्राधि—त कोई अधिकारी, आदेश द्वारा, किसी व्यक्ति को ऐसे समय के भीतर, ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जैसा कि उसमें विनिर्दिष्ट किया जाए, इस अधिनियम के संबंध में व्यवहृत किसी मामले के संबंध में, कोई सूचना प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगा।"।
धारा 152 का
14-मूल अधिनियम की धारा 152 में,-
संशोधन
(क) उपधारा (1) में,-
(i) शब्द "किसी व्यष्टि विवरणी या उसके भाग की " निकाल दिये जायेंगे;
(ii) शब्द "इस अधिनियम के अधीन किन्हीं प्रक्रियाओं के प्रयोजन के लिए" के पश्चात् शब्द "संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना" बढ़ा दिये जाएंगे;
(ख) उपधारा (2) निकाल दी जायेगी।
अनुसूची 2 का
15-मूल अधिनियम की अनुसूची 2 में, पैरा 7 निकाल दिया जायेगा और उसे तारीख संशोधन
1 जुलाई, 2017 से निकाला गया समझा जायेगा।
16-(1) उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2021,
निरसन और व्यावृत्ति
एतद्द्वारा निरसित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश अध्यादेश सं0 8 सन् 2021 (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी उपधारा (1) में निर्दिष्ट अध्यादेश द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के उपबन्धों के अधीन कृत कोई कार्य या की गई कोई कार्यवाही, इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित मूल अधिनियम के सह प्रत्यर्थी उपबन्धों के अधीन कृत या की गई समझी जायेगी मानों इस अधिनियम के उपबन्ध सभी सारवान समयों में प्रवृत्त थे। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 5
उद्देश्य एवं कारण
उत्तर प्रदेष राज्य द्वारा उत्तर प्रदेष माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (उत्तर प्रदेष अधिनियम संख्या 1 सन् 2017), जिसे आगे उक्त अधिनियम कहा गया है, माल या सेवा या दोनों की अन्तःराज्यीय पूर्ति पर, कर उदग्रहण एवं संग्रहण करने और उससे संबंधित या आनुषंगिक मामलों का उपबन्ध करने के लिए अधिनियमित किया गया है।
भारत का संविधान के अनुच्छेद 246 क (1) के उपबन्ध के अनुसार संसद और राज्य विधान मण्डल दोनों के पास माल और सेवा कर अधिरोपित करने हेतु विधियाँ बनाने की शक्ति है। माल और सेवा कर परिषद की संस्तुति पर वित्त अधिनियम, 2021 (अधिनियम संख्या 13 सन् 2021), जो संसद द्वारा अधिनियमित किया गया है और जिस पर 28 मार्च, 2021 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई है, के द्वारा केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (अधिनियम संख्या 12 सन् 2017) में कतिपय संंषोधन किये गये थे।
उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्रीय अधिनियम और राज्य अधिनियम में एकरूपता बनाये रखने की दृष्टि से राज्य स्तर पर भी केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में कृत संषोधनों को सम्मिलित करने हेतु उक्त अधिनियम में संषोधन किये जाने का विनिष्चय किया गया था।
चूंकि राज्य विधान मण्डल सत्र में नहीं था और पूर्वोक्त विनिष्चय को क्रियान्वित करने हेतु तुरन्त विधायी कार्यवाही की जानी आवष्यक थी, अतः राज्यपाल द्वारा दिनांक 09 नवम्बर, 2021 को उत्तर प्रदेष माल और सेवा कर (संषोधन) अध्यादेष, 2021 (उत्तर प्रदेष अध्यादेष संख्या 8 सन् 2021) प्रख्यापित किया गया।
यह विधेयक पूर्वोक्त अध्यादेष को प्रतिस्थापित करने हेतु पुरःस्थापित किया जाता है।
योगी आदित्यनाथ,
मुख्य मंत्री।
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उत्तर प्रदेष माल और सेवा कर (संषोधन) विधेयक, 2021 में किये जाने वाले ऐसे उपबन्धों का ज्ञापन-पत्र जिनमें विधायन अधिकारों के प्रतिनिधान अन्तर्ग्रस्त हैं।
| विधेयक का खण्ड | विधायन अधिकारों के प्रतिनिधान का संक्षिप्त विवरण |
| 1 | 2 |
| 1 (2) | इसके द्वारा राज्य सरकार को ऐसा दिनांक नियत करने की शक्ति दी जा रही है, जब से अधिनियम प्रवृत्त होगा और अधिनियम के भिन्न उपबन्ध के लिये भिन्न-भिन्न दिनांक राज्य सरकार द्वारा नियत किये जा सकेंगे। |
| 5 | इसके द्वारा राज्य सरकार को रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों द्वारा दाखिल की जाने वाली वार्षिक विवरणी के संबंध में नियम बनाने की शक्ति दी जा रही है तथा इसके परन्तुक द्वारा आयुक्त को रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों के किसी वर्ग को इस धारा के अधीन वार्षिक विवरणी दाखिल करने से छूट प्रदान करने की शक्ति दी जा रही है। |
| 9 | इसके द्वारा राज्य सरकार को किसी व्यक्ति की सम्पत्ति, जिसके अन्तर्गत बैंक खाता भी है, को अनन्तिम रूप से कुर्क किये जाने की कार्यवाही के संबंध में नियम बनाने की शक्ति दी जा रही है। |
| 11 | इसके द्वारा राज्य सरकार को निरुद्ध या अभिग्रहीत माल या वाहन को संदेय षास्ति की वसूली के लिये विक्रय किये जाने या अन्यथा निपटाये जाने के संंबंध में नियम बनाने की शक्ति दी जा रही है। |
उपर्युक्त प्रतिनिधान सामान्य प्रकार के हैं।
योगी आदित्यनाथ, मुख्य मंत्री।
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उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2021 द्वारा संशोधित की जाने वाली मूल अधिनियम की संगत धाराओं का उद्धरण।
उत्तर प्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017
धारा 35-(5) प्रत्येक रजिस्ट्री—त व्यक्ति जिसका आवर्त किसी वित्तीय वर्ष के दौरान विहित सीमा से अधिक होता है, अपने लेखे किसी चार्टर्ड लेखाकार या लागत लेखाकार द्वारा संपरीक्षित करवाएगा और संपरीक्षित वार्षिक लेखों की एक प्रति, धारा 44 की उपधारा (2) के अधीन समाधान विवरण और ऐसे अन्य दस्तावेज ऐसे प्ररूप और रीति में प्रस्तुत करेगा, जो विहित की जाए।
धारा 44-(1) इनपुट सेवा वितरक, धारा 51 या धारा 52 के अधीन कर संदाय करने वाले व्यक्ति, नैमित्तिक कराधेय व्यक्ति और अनिवासी कराधेय व्यक्ति से भिन्न प्रत्येक रजिस्ट्री—त व्यक्ति, प्रत्येक वित्त वर्ष के लिए इलैक्ट्रानिकी रूप से ऐसे प्ररूप और ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, ऐसे वित्त वर्ष के पश्चात् 31 दिसम्बर को या उससे पूर्व एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा।
(2) प्रत्येक रजिस्ट्री—त व्यक्ति, जिससे धारा 35 की उपधारा (5) के उपबंधों के अनुसार उसके लेखाओं की संपरीक्षा करवाने की अपेक्षा है, वार्षिक लेखाओं की संपरीक्षित प्रति और एक समाधान विवरण के साथ वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तुत वार्षिक विवरणी में घोषित पूर्तियों के मूल्य को संपरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण के साथ मिलाते हुए और ऐसी अन्य विशिष्टियों, जो विहित की जाए, के साथ इलैक्ट्रानिकी रूप में उपधारा (1) के अधीन एक वार्षिक विवरणी प्रस्तुत करेगा।
धारा 50-(1) "परंतु किसी कर अवधि के दौरान की गई पूर्तियों के संबंध में संदेय कर पर ब्याज, जिसे धारा 39 के उपबंधों के अनुसार नियत तारीख के पश्चात उक्त अवधि के लिए प्रस्तुत की गई विवरणी में घोषित किया गया है, सिवाय वहां के, जहां ऐसी विवरणी को उक्त अवधि के संबंध में धारा 73 या धारा 74 के अधीन किन्ही कार्यवाहियों के प्रारंभ के पश्चात् प्रस्तुत किया जाता है, कर के उस भाग पर उद्गृहीत किया जाएगा, जिसका संदाय इलेक्ट्रानिक नकद खाते से निकालकर किया गया है।"
धारा 74-1(ii) जहां उन्हीं कार्यवाहियों के अधीन कर का संदाय करने के लिए दायी मुख्य व्यक्ति और कुछ अन्य व्यक्तियों को सूचना जारी की जाती है और ऐसी कार्यवाहियों को धारा 73 या धारा 74 के अधीन मुख्य व्यक्ति के विरूद्ध पूरा कर लिया गया है तो धारा 122, धारा 125, धारा 129 और 130 के अधीन शास्ति का संदाय करने के लिए दायी सभी व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाहियों को पूरा हुआ समझा जाएगा।
धारा 83-(1) जहां धारा 62 या धारा 63 या धारा 64 या धारा 67 या धारा 73 या धारा 74 के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के लंबन के दौरान आयुक्त का यह मत है कि सरकारी राजस्व के हित का संरक्षण करने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह लिखित आदेश द्वारा अनंतिम रूप से ऐसे कराधेय व्यक्ति की संपत्ति, जिसके अंतर्गत बैंक खाता है, की ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, कुर्की कर सकेगा।
धारा 129-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी जहां कोई व्यक्ति किसी माल का परिवहन या माल का भंडारण करता है जब वे अभिवहन में इस अधिनियम या तद्धीन निर्मित नियमों के उपबंधों के उल्लंघन में हैं, तब सभी माल और अभिवहन में उक्त माल को ले जाने के लिए उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 7 परिवहन के साधनों के रूप में प्रयुक्त प्रवहण और ऐसे माल से संबंधित दस्तावेज और प्रवहण से सम्बन्धित दस्तावेज अभिरक्षा में लेने या अभिग्रहण के लिए दायी होंगे तथा अभिरक्षा या अभिग्रहण निर्मुक्त हो सकेगा-
(क) ऐसे माल पर लागू कर के और संदेय कर के 100 प्रतिशत के बराबर शास्ति के संदाय पर और छूट प्राप्त माल की दशा में माल के मूल्य के दो प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपये जो कम हो, के संदाय पर जहां माल का स्वामी ऐसे कर और शास्ति के संदाय के लिए आगे आता है;
(ख) लागू कर के और उस पर संदत्त कर रकम द्वारा कम करके माल के मूल्य का 50 प्रतिशत के बराबर शास्ति और छूट प्राप्त माल की दशा में माल के मूल्य के पांच प्रतिशत के बराबर रकम या पच्चीस हजार रुपये जो कम हो, के संदाय पर जहां माल का स्वामी ऐसे कर और शास्ति के संदाय के लिए आगे नहीं आता है;
(2) धारा 67 की उपधारा (6) के उपबंध माल की अभिरक्षा और अभिग्रहण और प्रवहण के लिए यथा आवश्यक परिवर्तन सहित लागू होंगे।
(3) माल की अभिरक्षा या अभिग्रहण या प्रवहण करने वाला समुचित अधिकारी कर और संदेय शास्ति को विनिर्दिष्ट करते हुए नोटिस जारी करेगा और उसके पश्चात् खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) के अधीन संदेय कर और शास्ति के लिए एक आदेश पारित करेगा। (4) बिना संबद्ध व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए ब्याज या शास्ति उपधारा (3) के अधीन अवधारित नहीं की जाएगी।
xxx x x x x x x
(6) जहां किसी माल का परिवहन करने वाला व्यक्ति या माल का स्वामी उपधारा (1) में यथा उपबंधित कर और शास्ति की रकम का संदाय करने में ऐसी अभिरक्षा या अभिग्रहण के सात दिन में असफल रहता है तो अन्य कार्यवाहियां धारा 130 की शर्तों के अनुसार आरंभ की जाएगी :
परंतु यह कि जहां अभिरक्षा या अभिग्रहण का माल शीघ्र नष्ट होने योग्य या खतरनाक या समय के साथ मूल्य में हृास की प्र—ति का है तो उक्त सात दिन की अवधि समुचित अधिकारी द्वारा कम की जा सकेगी।
धारा 130-(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति-
(2) जब कभी किसी माल या प्रवहण की जब्ती इस अधिनियम द्वारा प्राधि—त है तो उसको न्यायनिर्णयन करने वाला अधिकारी माल के स्वामी को जब्त माल के स्थान पर ऐसा जुर्माना जो उक्त अधिकारी ठीक समझे, संदाय करने का विकल्प दे सकेगा :
परंतु यह कि ऐसा उद्ग्रहणीय जुर्माना जब्त माल के बाजार मूल्य से उस पर प्रभारित कर घटाने पर प्राप्त मूल्य से अधिक नहीं होगा :
परंतु यह और कि ऐसा जुर्माना और उद्ग्रहणीय शास्ति धारा 129 की उपधारा (1) के अधीन उद्ग्रहणीय शास्ति की रकम से कम नहीं होगा :
परंतु यह भी कि जहां माल को ढोने या भाड़े पर यात्रियाें को ढोने में प्रयुक्त कोई ऐसा प्रवहण है वहां प्रवहण स्वामी को जब्त प्रवहण के स्थान पर उसमें परिवहन किए माल पर संदेय कर के बराबर जुर्माना संदेय करने का विकल्प दिया जा सकेगा।
(3) जहां उपधारा (2) के अधीन अधिरोपित माल या प्रवहण की जब्ती के स्थान पर जुर्माना किया गया है वहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसे माल का स्वामी या प्रवहण स्वामी या व्यक्ति इसके अतिरिक्त किसी ऐसे माल या प्रवहण की बाबत किसी कर शास्ति और शोध्य प्रभारों के लिए दायी होगा।
धारा 151-(1) आयुक्त, यदि यह विचार करता है कि इसे दिया जाना आवश्यक है, तो वह अधिसूचना द्वारा, उससे संबंधित या इस अधिनियम के संबंध में किसी मामले से संबंधित सांख्यिकी का संग्रहण करने को निदेश दे सकेगा।
(2) ऐसी सूचना जारी करने पर आयुक्त या उसकी ओर से या उसके द्वारा प्राधि—त कोई 8 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 व्यक्ति, यथा विहित, ऐसे प्ररूप और रीति में उन सांख्यिकियों के संग्रहण से संबंधित किसी मामले के संबंध में, ऐसी सूचना या विवरणी देने के लिए संबंधित व्यक्ति को बुला सकेगा।
धारा 152-(1) धारा 150 या धारा 151 के प्रयोजनों के लिए दी गई किसी बात के संबंध में किसी व्यष्टि विवरणी या उसके भाग की सूचना, बिना सहमति के अनुरूप या उसके प्राधि—त प्रतिनिधि की लिखित सहमति के बिना ऐसी रीति से प्रकाशित की जाएगी ताकि विशिष्ट व्यक्ति के यथाविनिर्दिष्ट पहचान किए गए ऐसी विवरणी को सक्षम बना सके और ऐसी सूचना इस अधिनियम के अधीन किसी प्रक्रियाओं के प्रयोजन के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी।
(2) इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियम के अधीन अभियोजन के प्रयोजन को छोड़कर, कोई व्यक्ति जो कि इस अधिनियम के अधीन सांख्यिकी संग्रहण में या इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए संकलन या उसके कंप्यूटरीकरण में नहीं लगा हुआ है, को, धारा 151 में निर्दिष्ट कोई सूचना या कोई व्यष्टि विवरणी को देखने या उसकी पहुंच तक को अनुज्ञात नहीं किया जायेगा।
अनुसूची-2
7-माल की पूर्ति-
निम्नलिखित को माल की पूर्ति के रूप में माना जाएगा, अर्थात्ः-
किसी सदस्य को किसी अनिगमित संगम या व्यक्तियों के निकाय द्वारा नकद, विरत संदाय या अन्य मूल्यवान प्रतिफल के लिए माल की पूर्ति।
आज्ञा से, प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव।
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UTTAR PRADESH SARKAR SANSADIYA KARYA ANUBHAG-1 ——— No. 849/XC-S-1–21-49S-2021 Dated Lucknow, December 20, 2021 ———
IN pursuance of the provisions of clause (3) of Article 348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of the "Uttar Pradesh Maal Aur Seva Kar (Sanshodhan) Vidheyak, 2021" introduced in the Uttar Pradesh Legislative Assembly on December 16, 2021.
THE UTTAR PRADESH GOODS AND SERVICES TAX (AMENDMENT)
BILL, 2021
A
BILL
further to amend the Uttar Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017.
IT IS HEREBY enacted in the Seventy-second Year of the Republic of India as follows :– 1. (1) This Act may be called the Uttar Pradesh Goods and Services Tax Short title and commencement
(Amendment) Act, 2021.
(2) Save as otherwise provided, it shall come into force on such date as the State Government may, by notification in the Gazette, appoint:
Provided that different dates may be appointed for different provisions of this Act.
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 9Amendment of section 7 2. In the Uttar Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (hereinafter referred to as the principal Act), in section 7, in sub-section (1), after clause (a), the following clause shall be inserted and shall be deemed to have been inserted with effect from the 1st day of July 2017, namely:-
"(aa) the activities or transactions by a person other than an individual, to its members or constituents or vice-versa, for cash, deferred payment or other valuable consideration.
Explanation- For the purposes of this clause, it is hereby clarified that, notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force or any judgment, decree or order of any Court, Tribunal or Authority, the person and its members or constituents shall be deemed to be two separate persons and the supply of activities or transactions inter se shall be deemed to take place from one such person to another;"
3. In section 16 of the principal Act, in sub-section (2), after clause (a), the Amendment of section 16 following clause shall be inserted, namely:-
"(aa) the details of the invoice or debit note referred to in clause (a) has been furnished by the supplier in the statement of outward supplies and such details have been communicated to the recipient of such invoice or debit note in the manner specified under section 37;".
4. In section 35 of the principal Act, sub-section (5) shall be omitted. Amendment of
section 35 5. For section 44 of the principal Act, the following section shall be Amendment of section 44 substituted, namely:-
"44. Every registered person, other than an Input Service Distributor, a person paying tax under section 51 or section 52, a casual taxable person and a non- resident taxable person shall furnish an annual return which may include a self- certified reconciliation statement, reconciling the value of supplies declared in the return furnished for the financial year, with the audited annual financial statement for every financial year electronically, within such time and in such form and in such manner as may be prescribed:
Provided that the Commissioner may, on the recommendations of the
Council, by notification, exempt any class of registered persons from filing annual
return under this section:
Provided further that nothing contained in this section shall apply to any
department of the Central Government or a State Government or a local authority,
whose books of account are subject to audit by the Comptroller and Auditor-General
of India or an auditor appointed for auditing the accounts of local authorities under any
law for the time being in force.".
Amendment of 6. In section 50 of the principal Act, in sub-section (l), for the proviso, the
section 50 following proviso shall be substituted and shall be deemed to have been substituted with effect from the 1st day of July 2017, namely :–
"Provided that the interest on tax payable in respect of supplies made
during a tax period and declared in the return for the said period furnished
after the due date in accordance with the provisions of section 39, except
where such return is furnished after commencement of any proceedings under
section 73 or section 74 in respect of the said period, shall be payable on that
portion of the tax which is paid by debiting the electronic cash ledger.".
Amendment of 7. In section 74 of the principal Act, in Explanation 1, in clause (ii), for the
section 74 words and figures "sections 122, 125, 129 and 130", the words and figures "sections
122 and 125" shall be substituted.
Amendment of 8. In section 75 of the principal Act, in sub-section (12), the following
section 75 Explanation shall be inserted, namely :– 10 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 "Explanation–For the purposes of this sub-section, the expression "self- assessed tax" shall include the tax payable in respect of details of outward supplies furnished under section 37, but not included in the return furnished under section 39.''.
Amendment of
9. In section 83 of the principal Act, for sub-section (l), the following sub- section 83
section shall be substituted, namely :–
"(l) Where, after the initiation of any proceeding under Chapter XII, Chapter XIV or Chapter XV, the Commissioner is of the opinion that for the purpose of protecting the interest of the Government revenue it is necessary so do to, he may, by order in writing, attach provisionally, any property, including bank account, belonging to the taxable person or any person specified in sub-section (1A) of section 122, in such manner as may be prescribed.".
Amendment of
10. In section 107 of the principal Act, in sub-section (6), the following section 107
proviso shall be inserted, namely :–
"Provided that no appeal shall be filed against an order under sub-section (3) of section 129, unless a sum equal to twenty-five percent of the penalty has been paid by the appellant.".
Amendment of
11. In section 129 of the principal Act,–
section 129
(i) in sub-section (1), for clauses (a) and (b), the following clauses shall be substituted, namely :–
"(a) on payment of penalty equal to two hundred percent of the tax payable on such goods and, in case of exempted goods, on payment of an amount equal to two percent of the value of goods or twenty-five thousand rupees, whichever is less, where the owner of the goods comes forward for payment of such penalty;
(b) on payment of penalty equal to fifty percent of the value of the goods or two hundred percent of the tax payable on such goods, whichever is higher, and in case of exempted goods, on payment of an amount equal to five percent of the value of goods or twenty-five thousand rupees, whichever is less, where the owner of the goods does not come forward for payment of such penalty;";
(ii) sub-section (2) shall be omitted;
(iii) for sub-section (3), the following sub-section shall be substituted, namely :–
"(3) The proper officer detaining or seizing goods or conveyance shall issue a notice within seven days of such detention or seizure, specifying the penalty payable, and thereafter, pass an order within a period of seven days from the date of service of such notice, for payment of penalty under clause (a) or clause (b) of sub-section (1).";
(iv) in sub-section (4), for the words "No tax, interest or penalty", the words "No penalty" shall be substituted;
(v) for sub-section (6), the following sub-section shall be substituted, namely :–
"(6) Where the person transporting any goods or the owner of such goods fails to pay the amount of penalty under sub-section (1) within fifteen days from the date of receipt of the copy of the order passed under sub- section (3), the goods or conveyance so detained or seized shall be liable to be sold or disposed of otherwise, in such manner and within such time as may be prescribed, to recover the penalty payable under sub-section (3) :
उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021 11Provided that the conveyance shall be released on payment by the
transporter of penalty under sub-section (3) or one lakh rupees, whichever is
less :
Provided further that where the detained or seized goods are perishable
or hazardous in nature or are likely to depreciate in value with passage of
time, the said period of fifteen days may be reduced by the proper officer.".
Amendment of 12. In section 130 of the principal Act,–
section 130 (a) in sub-section (1), for the words "Notwithstanding anything
contained in this Act, if", the words "Where" shall be substituted;
(b) in sub-section (2), in the second proviso, for the words, brackets and
figures "amount of penalty leviable under sub-section (1) of section 129", the
words "penalty equal to hundred percent of the tax payable on such goods"
shall be substituted;
(c) sub-section (3) shall be omitted.
Amendment of 13. For section 151 of the principal Act, the following section shall be
section 151 substituted, namely :–
"151. The Commissioner or an officer authorised by him may, by an
order, direct any person to furnish information relating to any matter dealt
with in connection with this Act, within such time, in such form, and in such
manner, as may be specified therein.".
14. In section 152 of the principal Act,–
Amendment of section 152 (a) in sub-section (1),–
(i) the words "of any individual return or part thereof" shall be
omitted;
(ii) after the words "any proceedings under this Act", the words "without giving an opportunity of being heard to the person concerned" shall be inserted.
(b) sub-section (2) shall be omitted.
15. In Schedule II of the principal Act, paragraph 7 shall be omitted and Amendment of Schedule II shall be deemed to have been omitted with effect from the 1st day of July, 2017.
Repeal and Saving 16. (1) The Uttar Pradesh Goods and Services Tax
(Amendment) Ordinance, 2021 is hereby repealed.
U.P. Ordinance no. 8 of 2021
(2) Notwithstanding such repeal, anything done or any action taken under the provisions of the principal Act as amended by the Ordinance referred to in sub-section (1) shall be deemed to have been done or taken under the corresponding provisions of the principal Act as amended by this Act as if the provisions of this Act were in force at all material times.
12 उत्तर प्रदेश असाधारण गजट, 21 दिसम्बर, 2021STATEMENT OF OBJECTS AND REASONS The Uttar Pradesh Goods and Services Tax Act, 2017 (U.P. Act no. 1 of 2017), hereinafter referred to as the ― said Act‖, has been enacted to make provision for levy and collection of tax on intra- State supply of goods or services or both, by the State of Uttar Pradesh and the matters connected therewith or incidental thereto. According to the provisions of Article 246 A(1) of the Constitution of India, both the Parliament and the State Legislature have the power to make laws for the imposition of Goods and Services Tax. On the recommendation of GST Council, certain amendments were made in the Central Goods and Services Tax Act, 2017 (Act no. 12 of 2017) vide the Finance Act, 2021 (Act no. 13 of 2021), which was enacted by the Parliament and received the assent of the President on 28th March, 2021. In view of the above, it was decided to amend the said Act to incorporate the amendments made in the Central Goods and Services Tax Act, 2017 at the State level as well, with the view to maintain uniformity in the Central Act and the State Act. Since the State Legislature was not in session and immediate legislative action was necessary to implement the aforesaid decision, the Uttar Pradesh Goods and Services Tax (Amendment) Ordinance, 2021 (U.P. Ordinance no. 8 of 2021) was promulgated by the Governor on 9th November, 2021. This Bill is introduced to replace the aforesaid Ordinance.
YOGI ADITYANATH,
Mukhya Mantri.
–––––––
By order,
J. P. SINGH-II, Pramukh Sachiv.
पी0एस0यू0पी0-ए0पी0 479 राजपत्र-2021-(1091)-599255= 629 प्रतियां (कम्प्यूटर/टी0/ऑफसेट)।