Servants of Knowledge
Uttar Pradesh Ordinary Gazette · Government of Uttar Pradesh

Government and Private Ordinary Gazette.

Published 14 May 2022

Department
All Department
Type
Ordinary
Gazette no.
20
Volume Num
76
Identifier
in.gazette.uttarpradesh_ordinary.2022-05-14.c_202303101212476713
Languages
English, Hindi
Published at
Original source ↗

रजिस्टर्ड नं०-१०डी०-4

लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू० पी०-41 (लाइसेन्स्ड टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट)

सरकारी गज़ट , उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित

खण्ड 76] प्रयागराज , शनिवार ,14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24 ,1944 शक संवत्) [ संख्या 20

विषय-सूची

हर भाग के पन्ने अलग -अलग किये गये हैं , जिससे इनके अलग अलग खण्ड बन सके ।

विषय

विषय

वार्षिक

पृष्ठ संख्या वार्षिक चन्दा

पृष्ठ संख्या चन्दा

रु०

सम्पूर्ण गजट का मूल्य

3075 भाग 4-निदेशक, शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश

975

520-537

975

भाग 5- एकाउन्टेन्ट जनरल, उत्तर प्रदेश

भाग 1 -विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण, अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस

भाग 6-(क) बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत्त किये गये या प्रस्तुत किये जाने से पहले प्रकाशित किये गये

975

1500 (ख) सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

299-311

भाग 1 - क-नियम, कार्य-विधियां, आज्ञायें, विज्ञप्तियां इत्यादि, जिनको उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया

भाग 6- क-भारतीय संसद के ऐक्ट

भाग 1 -ख (1 ) औद्योगिक न्यायाधिकरणों के अभिनिर्णय

भाग 7-(क) बिल, जो राज्य की धारा। सभाओं में प्रस्तुत्त किये जाने के पहले प्रकाशित किये गये

भाग 1 -ख (2) श्रम न्यायालयों के अभिनिर्णय

(ख ) सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट

975

भाग 7- क-उत्तर प्रदेशीय धारा सभाओं के ऐक्ट

भाग 7- ख-इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां

975

भाग 2- आज्ञायें, विज्ञप्तियां, नियम और नियम विधान, जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया , हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों का उद्धरण

203-212 975

भाग 8 -सरकारी कागज पत्र दबाई हुई रूई की गाठों का विवरण- पत्र, जन्म- मरण के आँकड़े , रोगग्रस्त होने वालों और मरने वालों के आँकड़े, फसल और ऋतु सम्बन्धी रिपोर्ट, बाजार भाव, सूचना, विज्ञापन इत्यादि

भाग 3- स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़पत्र, खण्ड क- नगरपालिका परिषद, खण्ड ख- नगर पंचायत, खण्ड ग -निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा खण्ड घ-जिला पंचायत

1425

35-73

स्टोर्स पर्चेज विभाग का क्रोड़ पत्र

975

72क भाग 1 ]

521

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

भाग 1

विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण , अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस।

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग

अनुभाग-13

औपबंधिक नियुक्ति

03नवम्बर , 2021 ई ०

सं० 1613/ सत्ताईस-13-2021-49/21-लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा , 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री तान्या राय पुत्री श्री अजय कुमार राय का विवरण निम्नवत् है-

क्र० नाम/ पिता जन्म- तिथि अनुक्रमांक का नाम

सर्वश्री-

128 तान्या राय/ 16-11-1995 21064 स्थाई पता

गृह

पत्र- व्यवहार का पता अभ्युक्ति जनपद

आजमगढ़

अजय कुमार राय

गंगोत्री निवास आर० गंगोत्री निवास आर० टी०ओ० आफिस के टी०ओ० आफिस के

पीछे, न्यू कालोनी पीछे , न्यू कालोनी घोरठ, पो० जफरपुर, घोरठ, पो० जफरपुर,

उ०प्र०-

आजमगढ़

आजमगढ़ उ०प्र०-

276001

276001

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ ० प्र० में सहायक अभियन्ता (सिविल ) के पद पर चेतन बैण्ड रु0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ ०प्र ० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्त्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति- पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण-पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

522

[भाग 1 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा- मत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ-साथ शासन द्वारा समय -समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग -पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4 /2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पत्नी होने का प्रमाण-पत्र ।

[II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[III] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1614/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21-लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य/ विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता ( सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग , उ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्त्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी श्री मुकेश कुमार पुत्र स्व० रामनाथ का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता

अनुक्रमांक

जन्म तिथि

अभ्युक्ति नाम/पिता कानाम

गृह जनपद

पत्र-व्यवहार का पता

सर्वश्री-

आयोग द्वारा सशर्त

प्रकाश,

129 मुकेश कुमार/ 20-05-1993 113915 गाजीपुर विजय प्रकाश तेज स्व० रामनाथ

राजगीरपुर

पो०आ०, मेल ब्रांच संस्तुत अनापत्ति

मऊनाथ भंजन, प्रमाण-पत्र

नखतपुर गाजीपुर,

उ०प्र०-233226 मऊ, उ0प्र0-275101

(NOC) प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये

2-शासनादेश संख्या04/ 2021 /1/ 4/2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग, उ ०प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन 523 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

विभाग. उ०प्र० में सहायक अभियन्ता (सिविल ) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15.600-39,100 (ग्रेड पे रु० 5.400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति- पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण-पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा-भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6 ) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/ कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें। उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण -पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण -पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण- पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ I ] केवल एक जीवित्त पत्नी होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा- पत्र ।

सं० 1615/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21-लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल ) सिंचाई एवं जल 524

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री निधि दूबे पुत्री श्री सुरेश कुमार दूबे का विवरण निम्नवत् है- क्र०

स्थाई पता

अभ्युक्ति नाम/ पिता जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह

पत्र-व्यवहार का पता का नाम

जनपद

सर्वश्री-

130 निधि

49676

धवैया निधि दूबे, संजय दूबे/ 03-09-1996

सुरेश कुमार दूबे

रीवां (मध्य निधि दूबे,

प्रदेश)

रघुराजगढ़, रीवां, नगर, पम्प हाउस के.

म०प्र०-486111

पीछे, रघु स्कूल, रीवां, म०प्र०-486001

2-शासनादेश संख्या04/ 2021 /1/ 4/2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग, उ० प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ० प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति- पत्र तत्त्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बत्ताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3 ) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति / पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा -भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठत्ता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय - समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा 525 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा- पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यमार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1616/ सत्ताईस-13-2021-49/21-लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी श्री मनीष कुमार पुत्र श्री आर०डी० राम का विवरण निम्नवत् है-

क्र ०

स्थाई पता

जन्म तिथि अनुक्रमांक

पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति नाम/पिता का नाम

गृह जनपद

सर्वश्री-

आर०डी० राम, 4789 आर०डी० राम, 4789 131 मनीष कुमार/ 22-03-1992 93354 वाराणसी आर०डी० राम

शास्त्री चौक राम शास्त्री चौक राम

वाराणसी,

नगर, वाराणसी, नगर,

उ०प्र०-221008

उ०प्र०-221008

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021 /1/4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ ०प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता , सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ० प्र ० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण -पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण-पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

526

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा- मत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/ कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C.) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021 /1 /4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पत्नी होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1617/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21-लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य/ विशेष चयन) परीक्षा , 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री श्रेया वर्मा पुत्री श्री मुकेश चन्द्र वर्मा का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता

जनपद

क्र० नाम/पिता का जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति नामः

सर्वश्री-

132 श्रेया वर्मा/ मुकेश 21-10-1996 75802 लखनऊ चन्द्र वर्मा

मुकेश चन्द्र वर्मा, एसएस -1218 , सेक्टर- एच एल०डी० ए ० कालोनी, कानपुर रोड, लखनऊ, उ०प्र०-226012

मुकेश चन्द्र वर्मा, एसएस -1218, सेक्टर- एच, एल०डी० ए० कालोनी, कानपुर रोड, लखनऊ, उ०प्र०-226012

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/ 4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ०प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन 527 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

विभाग. उ०प्र० में सहायक अभियन्ता (सिविल ) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15.600-39,100 ( ग्रेड पे रु० 5.400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण- पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यमार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा-भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठत्ता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ-साथ शासन द्वारा समय -समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/ कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021 /1 / 4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[1 ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV ] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

528

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

सं० 1618/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21 -लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री कीर्ति उपाध्याय पुत्री श्री विपुल कुमार उपाध्याय का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता

क्र० नाम/ पिता का जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह

पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति

जनपद

नाम

सर्वश्री-

133 कीर्ति उपाध्याय/ 01-01-1994 115853 लखनऊ

विपुल कुमार

उपाध्याय

विपुल कुमार उपाध्याय, सेक्टर -11 , हाउस नं० 298 19 , इन्दिरानगर, लखनऊ, 226016 मनीष अग्रवाल, फ्लैट नं0 301 , लक्ष्मी विला अपाटमेंट , कबीर उ०प्र०- नगर, बनी पार्क, जयपुर राजस्थान- 302016

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/4/2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग, उ ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ० प्र० में सहायक अभियन्ता ( सिविल ) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता , सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ० प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्त्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति- पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा- भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ-साथ शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी

73 क 529 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

त्याग-पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण - पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1 /4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण -पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ I ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1619/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21- लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन ) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी मर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग , उ ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री अपर्णा पुत्री श्री लाला राम का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह जनपद

नाम/पिता का नाम

सर्वश्री

134 अर्पणा/ लाला राम 15-03-1997 41349 शाहजहांपुर अर्पणा गंधारपुर, गंधारपुर, शाहजहांपुर, उ०प्र०-242401

अर्पणा गंधारपुर, गंधारपुर, शाहजहांपुर, उ०प्र०-242401

2-शासनादेश संख्या04/ 2021/1/ 4/2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ० प्र० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु 0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता , सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्त्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2 ) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

530

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा। यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा-भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय - समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली- भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04/ 2021 /1/4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण- पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1620/ सत्ताईस-13-2021-49/21-लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित्त सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता ( सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ ० प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री पूर्वी गर्ग पुत्री श्री सुनील कुमार गर्ग का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता

जन्म तिथि अनुक्रमांक

पत्र-व्यवहार का पत्ता अभ्युक्ति क्र० नाम/ पिता का नाम

गृह जनपद

सर्वश्री-

136 पूर्वी गर्ग/सुनील 24-03-1996 45678 मुजफ्फरनगर सुनील कुमार गर्ग सुनील कुमार गर्ग कुमार गर्ग 305ए/1, पटेल 305ए/ 1 , पटेल नगर,

नगर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उ०प्र०-

251001

उ०प्र०-251001

531 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/4/2011-का-4-2021. दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग, उ०प्र०, प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ०प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्त्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बत्ताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण-पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार , इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा- भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय -समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली- भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग -पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुत्ति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र ( N.O.C.) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1 /4 /2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यथर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण -पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV ] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

532

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

सं० 1621/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21 -लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री रश्मि चौधरी पुत्री श्री मांगे राम का विवरण निम्नवत् है-

क्र०

स्थाई पता पत्र- व्यवहार का पता अभ्युक्ति नाम/पिता जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह

जनपद

कानाम

सर्वश्री-

दिल्ली

137 रश्मि चौधरी/ 21-12-1994 79679 मांगे राम

रश्मि चौधरी, म ० नं० रश्मि चौधरी, म० नं० 465, दर्शन बिहार, 465, दर्शन बिहार, बुराडी, गली नं0-4ए बुराडी, गली नं0-4ए उत्तरी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, दिल्ली-110084 दिल्ली-110084

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/4/2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ० प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15.600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ० प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बत्ताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा-भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठत्ता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय-समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते मी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही 533 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1 / 4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन-पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण- पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ I ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं० 1622/ सत्ताईस-13-2021-49 / 21- लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग , उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री गरिमा सचान पुत्री श्री संतोष कुमार सचान का विवरण निम्नवत् है-

क्र०

स्थाई पता पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति नाम/पिता जन्म तिथि अनुक्रमांक गृह

जनपद

कानाम

सर्वश्री-

गरिमा सचान पुत्री गरिमा सचान पुत्री संताष

कानपुर देहात संतोष कुमार सचान, संतोष कुमार सचान, 138 गरिमा सचान/ 05-10-1995 27072 कुमार

सचान

प्राइमरी स्कूल वाली

गली, वार्ड नं0 17. गली, वार्ड नं0 17.

राजेन्द्र

नगर,

नगर, राजेन्द्र

पुखरायां, कानपुर पुखरायां, कानपुर

उ०प्र०-

देहात,

उ०प्र०-

देहात,

प्राइमरी स्कूल वाली 209111

209111

2-शासनादेश संख्या04/ 2021/1/4/2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ ० प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु० 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत 534

[भाग 1 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24. 1944 शक संवत्)

सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा- भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय - समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग -पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र ( N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4/ 2011-का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा- पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण- पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[I ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण -पत्र ।

[II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल -अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

सं0 1623/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21-लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य / विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री ऊर्जा पटेल पुत्री श्री रूप नारायन पटेल का विवरण निम्नवत् है-

स्थाई पता

जन्म-तिथि अनुक्रमांक

पत्र-व्यवहार का पता अभ्युक्ति क्र० नाम/ पिता का नाम

गृह जनपद

सर्वश्री-

विपिन नगर, 23

नगर,

139ऊर्जा पटेल/ 16-09-1994 59404 रूप नारायन पटेल

होसगाबाद विपिन

(मध्य प्रदेश) वार्ड

                23
                29,   वार्ड  नं०    29
होसगांबाद,     मध्य  होसगांबाद.     मध्य
प्रदेश-461111        प्रदेश-461111

535 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021/1/4/2011-का-4-2021. दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग , उ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उ० प्र ० में सहायक अभियन्ता ( सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ०प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1 ) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति- पत्र तत्त्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यभार , इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा -भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठत्ता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय- समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग -पत्र / कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C.) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4/2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा- पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ 1 ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[II] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[ IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

536

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

[भाग 1

सं० 1624/ सत्ताईस-13-2021-49/ 21 -लोक सेवा आयोग , उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा (सामान्य/ विशेष चयन) परीक्षा, 2019 के आधार पर सहायक अभियन्ता (सिविल) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के सीधी भर्ती के रिक्त पद पर चयनित अभ्यर्थियों के सापेक्ष लोक सेवा आयोग, उ० प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत किये गये अभ्यर्थी सुश्री प्रियांशी सिंह पुत्री श्री बृज लाल सिंह का विवरण निम्नवत् है-

क्र०

स्थाई पता

जन्म-तिथि अनुक्रमांक गृह

अभ्युक्ति

पत्र-व्यवहार का पता

नाम/पिता कानाम

जनपद

सर्वश्री-

33978 प्रयागराज

140 प्रियांशी सिंह/ 30-03-1995 बृज लाल सिंह

प्रियांशी सिंह C/o प्रियांशी सिंह C/o 164ए बृज लाल सिंह, बृज लाल सिंह 164ए, 164ए 164ए सोहबतियाबाग , सोहबतियाबाग, प्रयागराज उ० प्र०- प्रयागराज उ०प्र०- 211006 211006

2-शासनादेश संख्या 04/ 2021 /1/4/ 2011-का-4-2021 , दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुरूप लोक सेवा आयोग, उ०प्र ० , प्रयागराज द्वारा नियुक्ति हेतु संस्तुत उपर्युक्त अभ्यर्थी को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ० प्र ० में सहायक अभियन्ता (सिविल) के पद पर वेतन बैण्ड रु0 15,600-39,100 (ग्रेड पे रु0 5,400) में कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग , उ० प्र० में 02 वर्ष की परिवीक्षा पर औपबंधिक रूप से नियुक्त्ति किये जाने की श्री राज्यपाल निम्नलिखित शर्तों के अधीन सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं-

(1) अभ्यर्थी को उक्त औपबंधिक नियुक्ति इस शर्त के साथ प्रदान की जा रही है कि यदि अभ्यर्थी का चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापित नहीं होता है या अभ्यर्थी द्वारा अपने स्वःसत्यापन या घोषणा-पत्र में कोई गलत सूचना दी गयी है तो औपबंधिक नियुक्ति-पत्र तत्काल निरस्त कर दिया जायेगा और परिणाम स्वरूप अन्य आपराधिक/ विधिक कार्यवाही भी की जायेगी ।

(2) यह नियुक्ति नितान्त औपबंधिक एवं अस्थायी है । यदि बाद में अभ्यर्थियों के सम्बन्ध में दिये गये प्रमाण-पत्र एवं अन्य सेवा शर्तों को असत्य पाया जाता है तो उनकी सेवायें बिना कोई कारण बत्ताये तत्काल समाप्त कर दी जायेगी और असत्य प्रमाण- पत्र दिये जाने के सम्बन्ध में नियमानुसार विभागीय आपराधिक (क्रिमिनल) कार्यवाही की जायेगी ।

(3) उक्त अभ्यर्थी को अपना कार्यमार, इस आदेश के निर्गत होने के एक माह के अन्दर अवश्य ग्रहण कर लेना होगा । यदि अभ्यर्थी इस अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो उसका अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जायेगा ।

(4) अभ्यर्थी को अपनी नियुक्ति/ पदस्थापना के स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने हेतु कोई यात्रा-भत्ता इत्यादि देय नहीं होगा ।

(5) उक्त अभ्यर्थी की ज्येष्ठता बाद में नियमानुसार निर्धारित की जायेंगी ।

(6) नवचयनित सहायक अभियन्ता को वेतन के साथ- साथ शासन द्वारा समय -समय पर स्वीकृत महंगाई भत्ता व अन्य देय भत्ते भी नियमानुसार अनुमन्य होंगे ।

(7) अभ्यर्थी के कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कार्यालय प्रमुख अभियन्ता के संबंधित अधिकारी यह भली-भांति सुनिश्चित कर लेंगे कि अभ्यर्थी यदि पूर्व में अन्यत्र कहीं कार्यरत रहा हो तो उनके द्वारा तकनीकी त्याग-पत्र/कार्यमुक्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार किये जायें । उक्त के साथ ही औपबंधिक रूप से चयनित जिन अभ्यर्थियों की आयोग द्वारा सशर्त संस्तुति प्रेषित की गयी है उनके द्वारा

74क 537 भाग 1 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24. 1944 शक संवत्)

अनापत्ति प्रमाण-पत्र (N.O.C. ) उपलब्ध कराये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये । इसी के साथ शासनादेश संख्या 04 / 2021/1/4/2011- का-4-2021, दिनांक 29 अप्रैल, 2021 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थियों से निर्धारित प्रपत्रों में सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र प्राप्त किये जाने के उपरान्त ही योगदान आख्या स्वीकार की जाये ।

(8) कार्यालय प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, उत्तर प्रदेश के अधिकारी अभ्यर्थी को कार्यभार ग्रहण कराने से पूर्व उनके मूल प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की आवश्यक जांच स्वयं कराना सुनिश्चित करेंगे तथा प्रत्येक प्रमाण-पत्र एवं डिग्रियों की अभिप्रमाणित प्रतिलिपियां निम्नलिखित प्रमाण-पत्रों के साथ शासन को कार्यभार प्रमाणक सहित तुरन्त प्रेषित करेंगे-

[ I ] केवल एक जीवित पति होने का प्रमाण-पत्र ।

[ II ] अभ्यर्थी द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से अपनी चल-अचल सम्पत्ति का विवरण ।

[ III ] राजपत्रित अधिकारी द्वारा प्रमाणित अभ्यर्थी के पासपोर्ट साइज की 02 फोटो ।

[IV] अभ्यर्थी द्वारा उपलब्ध कराया गया सत्यापन पत्र एवं स्वःघोषणा-पत्र ।

आज्ञा से, फूल चन्द्र, संयुक्त सचिव ।

पी०एस०यू०पी०-7 हिन्दी गजट-भाग 1-2022 ई ० ।

मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ।

रजिस्टर्ड नं ० - ए०डी०-4

लाइसेन्स सं ०- डब्ल्यू० पी०-41 (लाइसेन्स टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट)

सरकारी गज़ट , उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित

प्रयागराज , शनिवार , 14 मई , 2022 ई० (बैशाख 24 , 1944 शक संवत्)

भाग 1 -क

नियम, कार्य विधियां, आज्ञायें, विज्ञप्तियां इत्यादि , जिनको उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया ।

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

Admin. ' G- II' Section

NOTIFICATION

April 11, 2022

No. 159/2022, Allahabad-In compliance of the directions issuedby Hon'ble Supreme Court vide Judgment date 11-01-2022 passed in Miscellaneous Application No. 1852 of 2019 in Criminal Appeal No. 1101 of 2019. Smruti Tukaram Badade Vs State of Maharashtra & Anr. , the High Court of Judicature at Allahabad is pleased to make the following scheme i.e. " Vulnerable Witnesses Deposition Centres Scheme 2022" for Subordinate Courts of Uttar Pradesh, which shall come in to force with immediate effect.

Vulnerable Witnesses Deposition Centres Scheme 2022

Whereas The Hon'ble Supreme Court of India in State of Maharashtra Vs Bandu @ Daulat : (2018) 11 SCC 163 has issued certain directions for setting up Special Centres for examination of vulnerable witnesses in criminal cases so asto facilitate the conducive environment for recording statement of such witnesses and issued directions to all the High Courts to adopt the guidelines framed in this regard by the Delhi High Court with requisite modifications and also keeping in view the judgment dated 11-01-2022 passed by the Hon'ble Supreme Court of India in Smruti Tukaram Badade I's State of Maharashtra & Another; Misc . Application No. 1852 of 2019 In Re : Criminal Appeal No. 1101 of 2019 whereby certain directions were issued to all the High Courts pertaining to the establishment, functioning and framing of scheme/guidelines for the establishment and functioning of Vulnerable Witnesses Deposition Centres . following scheme is promulgated/adopted in order to regulate the recording of evidence of the vulnerable witnesses in criminal cases.

300

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(भाग 1 -क

Objectives of the Scheme

1. To elicit and secure complete , accurate and reliable evidence from vulnerable witnesses:

2. to minimize harm or secondary victimization of vulnerable witnesses in anticipation and as a result ofparticipation in the criminal justice system;

3.to ensure that the accused's right to a fair trial is also maintained.

Applicability

Unless otherwise provided, this scheme shall govern the examination of vulnerable witnesses during criminal trial , who are victims or witnesses of crime .

1. Short Title , extent and commencement.-

This scheme shall be called Vulnerable Witnesses Deposition Centres Scheme- 2022 ' . It will apply to all criminal courts in Uttar Pradesh subordinate to The High Court of Judicature at Allahabad. The Scheme shall come into operation w.ef. the date notifiedby the High Court of Judicature at Allahabad.

2. Construction of the scheme. -This scheme shall be liberally construed to uphold the interests of vulnerable witnesses and to promote their maximum accommodation without prejudice to the right of the accused to a fair trial.

3.Definitions.-

(a) Vulnerable Witness- Following witnesses shallbe regarded as vulnerable witness:

(i) Awitness who has not attained 18 years of age.

(ii) Victims of offences under Sections 354 and 377 IPC.

(iii) Victims of offences under Sections 376, 376A, 376B , 376C and 376D , IPC.

(iv) Victims of offences defined under the Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012.

(v) Witnesses suffering from "mental illness " as defined under Section 2( s ) of the Mental Healthcare Act, 2017 read with Section 118 ofthe Indian Evidence Act , 1872 .

(vi) Any speech or hearing impaired person suffering from any other disability rendering such persons, in the opinion of the court, as vulnerable witness.

(vii) Any witness deemed to have a threat perception under the Witness Protection Scheme, 2018 ofthe Central Government .

(viii) Any other victim or witness deemed to be vulnerable by the concerned court .

(b) Support Person-Means and includes guardian ad litem , legal aid lawyer, facilitators, interpreters , translators and any other person appointed by court or any other person appointedby the court to provide support , accompany and assist the vulnerable witness to testify or attend judicial proceedings .

(c) In- Camera Proceedings -Means proceedings pertaining to criminal matters or parts thereof wherein the public generally or any particular person may notbe allowed to participate , for good reason as provided u/ s 327 of the Code of Criminal Procedure.

(d) Concealment of Identity of witness -Means and includes any condition prohibiting publication ofthe name, address and other particulars of the vulnerable witness , which may lead to the identification of the witness.

301 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

( e) Comfort Items -Comfort items mean any article which shall have a calming effect on a vulnerable witness at the time of deposition.

(1) Competence of a vulnerable witness -Every vulnerable witness witness shall be competent to testify unless the court considers that they are prevented from understanding the questions put to them , or from giving rational answers to those questions due to tender age , disease, either of body or mind, or any other cause of the same kind.

Explanation : A mentally ill person may also be held competent unless he/ she is preventedby his/her lunacy to understand questions.

(g) Court House Tour -A pre - trial tour of court room to familiarize a vulnerable witnesses with the environment and the basic process of adjudication and roles of each court official.

(h) Descriptive Aids-A human figure model , anatomically correct dolls or a picture or anatomical diagrams or any other aids deemed appropriate to help a vulnerable witness to explain an act or a fact.

(1) Live- Link- Live - link' means and includes a live television link , audio- video electronic means or other arrangement whereby a witness , while absent from the courtroom is nevertheless present in the court room by remote communication using technology to give evidence and be cross - examined.

(7) Special Measures-Means and includes the use of any mode, method and instrument etc, considered necessary for providing assistance in recording deposition of vulnerable witnesses .

(4) Testimonial Aids - Means and includes screen ; live - linds , image and/ or voice altering devices: or any other technical devices .

(7) Secondary Victimization-Means victimization that occurs not as direct result of a criminal act but through the response of institutions and individuals to the victim.

(m) Revictimization -Means a situation in which a person suffers more than one criminal incident over a period oftime.

(n) Waiting Room-A safe place for vulnerable witnesses where they can wait. It may have toys, books, T.V. etc. Which can help in lowering the anxiety of such witnesses.

4. Special Measures .-The court may direct as to which , special measure willbe used to assist a particular eligible witness in providing the best evidence.

5.Applicability of Scheme to all Vulnerable Witnesses-

For the avoidance of doubt , it is made clear that this scheme shall apply to all vulnerable witnesses, regardless ofwhich party is seeking to examine the witness.

6. No adverse inference to the drawn from special measures.-

The fact that witness has had the benefit of a special measure to assist them in depostion, shall not be regarded in any way whatsoever as being adverse to the position of the other side and this shouldbe made clearby the Judge at the time of passing order in terms of this scheme to the parties when the vulnerable witness is examined and when the final judgment is pronounded.

7. Indentification of stress causing factors of adversarial Criminal Justice System.-

Factors which cause stress on vulnerable witness , rendering them further vulnerable and impeding complete disclosure by them shall , amongst others, include:

302

(भाग 1 -क उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(i) Using in appropriate language during examination in chief, cross examination or re- examination .

(ii) Delays and continuances .

(iii) Testifying more than once .

(iv) Prolonged/protracted hours of court proceedings .

(v) Lack of communication between professionals including police, doctors, lawyers, porsecutors , investigators, psychologists etc.

(vi) Fear of public exposure.

(vii) Lack of understanding of complex legal procedures .

(viii) Face-to- face contact with the accused.

(ix) Practices which are insensitive to developmental needs .

(x) Inappropriate and prolonged cross -examination.

(xi) Lack of adequate support and victims services.

(xii) Sequestration of witnesses who may be supportive to the child.

(xiii) Placement that exposes the vulnerable witnesses to intimidation, pressure, or continued abuse.

(xiv) Inadequate preparation for fearless and robust testifying.

(xv) Worry about not being believed especially when there is no evidence other than the testimony ofthe vulnerable witnesses.

(xvi) Formalities of court proceedings and surroundings including formal dress of members of the judiciary and legal personnel .

8. Competency of Vulnerable Witness-

(i) Every vulnerable witness shall be presumed tobe qualified as a witness unless prevented by the following:

(a)Age.

(b) Physical or mental disability leading to recording a finding of doubt regarding the ability of such witness to perceive, remember, communicate, distinguish truth from falsehood or appreciate the duty to tell the truth, and/or to express the same.

Explanation : The court shall conduct a competency assessment before recording the testimony of such witness on an application of either prosecution or defence or suo motu.

9. Persons allowed at competence assessment-

Only the following , in the discretion of the court, maybe allowed to attend the competence assessment:

(i) The Judge and such court personnel deemed necessary and specifiedby order of the Judge concerned:

(ii) the counsel for the parties;

303 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

( iii) the guardian ad litem ;

(iv) one or more support persons for the child ; and

(v) the accused, unless the court determines that competence requires to be and can be fully evaluated in his absence.

(vi) Any other person, who in the opinion of the court can assist in the competence assessment .

10. Conduct of competence assessment-

The assessment of a child as to his/her competence as a witness shallbe conducted only by the Judge.

11. Developmentally appropriate questions-

The questions which may be asked to assess the competency of the vulnerable witness shall be appropriate and commensurate to the age and developmental level of the vulnerable witnesses : shall not be related to the issues at trial and shall focus on the ability of the vulnerable witnesses to remember, communicate, distinguish between truth and falsehood and appreciate the duty to testify truthfully.

12. Continuing duty to assess competence-

The court shall have a duty of continuously assessing the competence of the vulnerable witnesses throughout their testimony and to pass appropriate orders, as and when deemed necessary.

13. Pre-trial visit of Witnesses to the Court-

Vulnerable witness shall be allowed a pre trial tour of the court, along with the support person to enable such witnesses to familiarize himself with the layout and atmosphere of the court and may also include visit to and explanation of the following:

(i) The location of the accused in the dock ;

(ii) court officials (what their roles are and where they sit) ;

(iii) who else might be in the court , for example those in the public gallery ;

(iv) the location of the witness box;

(v) a run -through of basic court procedure :

(vi) the facilities available in the court:

(vii) discussion of any particular fears or concerns with the intermediaries , Prosecutors and the Judge to dispel the fear, trauma and anxiety in connection with the prospective depositionat court : and

(viii) demonstration of any special measures applied for, and granted , for example practising on the live-link and explaining who will be able to see them in the courtroom and showing the use of screens (where it is practical and convenient to do so) .

14.Meeting with the Judge-

The Judge may meet a vulnerable witness , suo motu , on reasons tobe recorded or on an application of either party in the presence of the prosecution and defence counsels or in their absence as the case may be, before they give evidence, for explaining the court process in order to help them in understanding the procedure and giving their best evidence.

304

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(भाग 1 -क

15.Appointment of Guardian ad litem-

The court may appoint any person as guardian ad litem as per law to a witness who is a victim of, or awitness to a crime having regard to his/her best interests after considering the background of the guardian ad litem and his/her familiarity with the judicial process , social service programs, giving preference to the parents of the child, if qualified . The guardian ad litem may also be a member of bar/ practicing advocate, except a person who is a witness or informant in any proceeding involving the vulnerable witness.

16. Duties of Guardian ad litem-

It shall be the duty of the Guardian ad litem so appointed by courtto:

(i) Attend all depositions , hearing , and trial proceedings in which a vulnerable witness participates.

(ii) Make recommendations to the court concerning the welfare of the vulnerable witness keeping in view the needs and impact of the proceedings on such witness.

(iii) Explain in the language understandable to the vulnerable witness, all legal proceedings . including police investigations , in which the witness is involved.

(iv)Assist the vulnerable witness and his/her family in coping with the emotional effects of crime and subsequent criminal or non - criminal proceedings in which the witness is involved.

(v) Remain with the vulnerable witness while the vulnerable witness waits to testify.

17. Legal assistance-

Avulnerable witness maybe provided with legal assistanceby the court either at the request ofthe support person, if one has been designated or pursuant to an order of the court on its own motion, if the court considers the assignment of a lawyer to be in the best interests of the vulnerable witness, throughout the trial.

18. Court to allow presence of support persons-

(a)A court shall allow suo motu or on request, verbal or written, of the vulnerable witness testifying at ajudicial proceeding to have the presence of one person of his own choice to provide him support who shall remain within his /her view and if the need arise may accompany such witness to witness stand, provided that such support person shall not completely obscure the child from the view of the opposing party or the Judge.

(b) The Court may allow the support person to hold the hand of the vulnerable witnesses or take other appropriate steps to provide emotional/moral support to the vulnerable witness in the course of the proceedings.

(c) The court shall instruct the support persons not to prompt , sway, or influence the vulnerable witness during his /her testimony. The support person shall alsobe directed that he/she shall under no circumstancesdiscuss the evidence to be given by the vulnerable witnesses.

19.The testimony of support person to be recorded prior-

Atestimony of the support person, if he / she also happens to be a witness , shall be recorded, ahead of the testimony of the vulnerable witness.

20. Court to appoint facilitator-

(i) To assist the vulnerable witnesses in effectively communicating at various stages of trial and or to coordinate with the other stake holders such as police, medical officer , prosecutors , psychologists, defence counsels and courts , the court may allow use of facilitators.

305 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ii) The court may, suo motu or upon an application presented by either party or a support person of vulnerable witnesses may appoint a facilitator, if it determines that such witness is finding it difficultto understand or respond to questions asked.

Explanation: (i ) The facilitator may be an Interpreter a Translator , Child Psychologist, Psychiatrist. Social Worker, Guidance Counselor, Teacher , Parent , or relative of such witness who shallbe under oathto pose questions according to meaning intended by the Counsel .

(ii) If the court appoints a facilitator, the respective counsels for the parties shall pose questions to the vulnerable witness only through the facilitator, either in the words usedby counsel or, if the vulnerable witness is not likely to understand the same, in words or by such mode as is comprehensible to the vulnerable witness and which convey the meaning intendedby counsel .

21. Right to be informed-

A vulnerable witness , his or her parents or guardian, his or her lawyer, the support person , if designated, or other appropriate person designated to provide assistance shall , from their first contact with the court process and throughout that process ,be promptly informedby the court about the stage of the process and, to the extent feasible and appropriate , about the following:

(a) Procedures of the criminal justice process including the role of vulnerable witnesses , the importance, timing and manner of testimony, and the ways in which proceedings willbe conducted during thetrial;

(b) existing support mechanisms available for a vulnerable witness when participating in proceedings, including making available appropriate person designated to provide assistance :

(c) specific time and places of hearings and other relevant events :

(d) availability of protective measures:

(e) relevant rights of child victims and witnesses pursuant to applicable laws, the Convention on the Rights of the child and other international legal instruments, including the Guidelines and the declaration of Basic Principles of Justice for Victims of Crime and Abuse of Power, adoptedby the United Nations General Assembly in its resolution 40/34 of 29 November, 1985;

() the progress and dispostion of the sepcifice case , including the apprehension, arrest and custodial status of the accused and any pending changes to that status , the prosecutorial decision and relevant post- trial developments and the outcome ofthe case .

22. Language, interpreter and other special assistance measures-

(a) The court shall ensure that proceedings relevant to the testimony of a vulnerable witness or victim are conducted in a language that is simple and comprehensible to such witness.

(b) If a witness needs the assistance of interpretation into a language or mode that he/ she understands , an interpreter may be provided , free of charge.

(c) If, in view of the age, level of maturity or special individual needs , which may include but are not limited to disabilities if any, ethnicity, poverty or risk of revictimization , the child requires special assistance measures in order to testify or participate in the justice process , such measures may be provided freeofcost.

306

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

[भाग 1 -क

23.Waiting area for Vulnerable Witness-

The courts shall ensure that a waiting area for vulnerable witnesses with the support person, lawyer ofthe witness facilitation , if any, is separate from waiting areas used by other persons . The waiting area for vulnerable witnesses should be furnished so as to make a vulnerable witness comfortable.

24.Duty to provide comfortable environment-

It shall be the duty or the court to ensure comfortable environment for the vulnerable witness by issuing suitable direction and also by supervising, the location , movement and department of all persons in the courtroom including the parties, their counsels, witnesses, support persons, guardian ad litem , facilitator, and court personnel . The witness maybe allowed to testify from a place other than the witness chair . The witness chair or other place from which the vulnerable witnesses testifies may be turned to facilitate his/her testimony but the opposing party and his/her counsel must have a frontal or profile view of the witness even by a video - lind, during the recording of testimony of the such witness . The witness chair or other place from which the child testifies may also be rearranged to allow the child to see the opposing party and his/her counsel, if he/ she chooses to look at them , without turning his/ her body or leaving the witness stand . While deciding to make available such environment , the Judge may be dispensed with from wearing his judicial robe.

25.Testimony during appropriate hours-

The court may order that the testimony of the vulnerable witness may be recorded at a particular time of the day within court hours , when the vulnerable witness is well-rested.

26.Recess during testimony-

The vulnerable witness may be allowed reasonable periods of breaks while undergoing depositions as often as necessary depending on his developmental need.

27.Measures to protect the privacy and well-being ofVulnerable Witness and victims-

(1) At the request of the victim or vulnerable witnesses, his or her parents or guardian, his or her lawyer, the support person, other appropriate person designated to provide assistance , or the court on its own motion, taking into account the best interests of the witness, may order one or more of the following measures to protect the privacy and physical and mental well- being of the vulnerable witness and to prevent undue distress and secondary victimization:-

(a) Expunging from the public record any names , addresses , workplaces , professions or any other information that could be used to identity the witness:

(b) forbidding the defence lawyer and persons present in court room from revealing the identity of the witness or disclosing any material or information that would tend to identify the witness :

(c) ordering the non-disclosure of any records that identify the witness , until such time as the court may find appropriate :

(d) assigning a pseudonym or a number to a witness, in which case the full name and date ofbirth of the witness shall be revealed to the accused within a reasonable period for the preparation of his or her defence:

307 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(e) effortsto conceal the features or physical description of the witness giving testimony or to prevent distress or harm to the witness , including testifying:

(i)behind screen :

(ii) using image-or voice- altering devices;

(iii) through examination in another place , transmitted simultaneously to the courtroomby means of video- link : and

(iv) through a qualified and suitable intermediary , such as , but not limited to, an iterpreter for witness with hearing, sight , speech or other disabilities ;

(f) holding closed sessions :

(g) ifsuch witness refuses to give testimony in the presence of the accused or if circumstances show that the witness may be inhibited from speaking the truth in that person's presence, the court shall give orders to temporarily remove the accused from the courtroom to an adjacent room with a video - link or a one-way mirror visibility into the court room . In such cases , the defence lawyer shall remain in the courtroom and may question the witness , and the accused's right of confrontation shall thus be guaranteed: and

(h) taking any other measure that the court may deem necessary, including , where applicable . anonymity, taking into account the best interests of the witness and the rights of the accused .

(2) Any information including name, parentage , age , address , etc. revealed by the victim or vulnerable witness which enables identification of the person of the witness , shallbe kept in a sealed cover on the record and shall not be made available for inspection to any party or person . Certified copies thereof shall also notbe issued . The reference to the child victim or vulnerable witness shallbe only by the pseudonym assigned in the case.

28.Directions for Subordinate Court Judges.-

(a) Vulnerable Witness shall receive high priority and shall be handled as expeditiously as possible, minimizing unnecessary delays and continuances . (Whenever necessary and possible , the court schedule will be altered to ensure that the testimony of the vulnerable witness is recorded on sequential days , without delays).

(b) Judges and court staff should ensure that the developmental needs of vulnerable witnesses are recognized and accommodated in the arrangement of the courtroom.

(c) Separate and safe waiting areas and passage thereto shouldbe provided for vulnerable witnesses .

(d) Judges should ensure that the developmental stages and needs of vulnerable witnesses are identified recognized and addressed throughout the court process by requiring usage of appropriate language, by timing hearings and testimony to meet the attention span and physical needs of such vulnerable witnessesby allowing the use of testimonial aids as well as interpreters , translators , when necessary .

(e) Judges should be flexible in allowing the vulnerable witnesses to have a support person present while testifying and should guard against unnecessary sequestration of support persons.

(f) Hearings involving a vulnerable witness may be scheduled on days/time when the witness is not in inconvenienced or is not disruptive to routine/regular schedule of such witness.

308

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(भाग 1 -क

29. Allowing proceedings to be conducted in camera.-

(a)When a vulnerable witness testifies, the court may order the exclusion from the courtroom of all persons,whodo not have a direct interest in the case including members of the press . Such an order may be made to protect the right to privacy of the vulnerable witness, or if the court determines on the record that requiring the vulnerable witness to testify in open court would cause psychological harm to him, hinder the ascertainment of truth, or result in his inability to effectively communicate due to embarrassment, fear, or timidity.

(b) In making its order, the court shall consider the developmental level of the vulnerable witness, the nature of the crime, the nature of his/her testimony regarding the crime, his/her relationshipto the accused and to persons attending the trial , his/her desires, and the interests of his/her parents or legal guardian.

(c) The court may, motu proprio , exclude the public from the courtroom if the evidence to be produced during trial is of such character as to be distressing , personal , offensive to decency or public morals.

30. Live-link television testimony in criminal cases where the vulnerable witness is involved-

(a) The prosecutor, counsel or the guardian ad litem may apply for an order that the testimony ofthe child be taken in a room outside the courtroom and be televised to the courtroom by live- link television.

(b) In order to take a decision of usage of a live - link the Judge may question the child in chambers , or in some comfortable place other than the courtroom , in the presence of the support person , guardian ad litem, prosecutor, and counsel for the parties . The questions of the Judge shall not be related to the issues at trial but to the feelings of the child about testifying in the courtroom.

(c) The court on its own motion, if deemed appropriate , may pass orders in terms of ( a) or any other suitable directions for recording the evidence of a vulnerable witness.

31.Provision of screens , one - way mirrors , and other devices to facilitate vulnerable witnesses.- The court may, suo motu or on an application madeby the prosecutor or the guardian ad litem, order that the chair of the vulnerable witness or that a screen or other device be placed in the courtroom in such a manner that the child cannot see the accused while testifying . The court shall issue an order stating the reasons and describing the approved courtroom arrangement.

32. Factors to be considered while considering the application under Guidelines 30 & 31.- The court may order that the testimony of the vulnerable witness be taken by live -link television if there is a substantial likelihood that the vulnerable witness would not provide a full and candid account of the evidence if required to testify in the presence of the accused, his/her counsel or the prosecutor as the case maybe.

The order granting or denying the use of live- link television shall state the reasons therefor and shall consider the following:

(a)The age and level of development of the vulnerable witness :

(b) his/her physical and mental health, including any mental or physical disability :

(c) any physical, emotional , or psychological harm related to the case on hand or trauma experiencedby the witness:

(d) the nature of the alleged offence and circumstances of its commission;

(e) anythreats against the vulnerable witness;

309 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(f) his/her relationship with the accused or adverse party:

(g) his/her reaction to any prior encounters with the accused in court or elsewhere;

(h) his/her reaction prior to trial when the topic of testifying was discussed with himby parents or professionals;

(i) specific symptoms of stress exhibited by the vulnerable witness in the days prior to testifying:

(j) testimony of expert or lay witnesses:

(k) the custodial situation of the child and the attitude of the members of his/her family regarding the events about which he/ she will testify; and

(1) other relevant factors, such as court atmosphere and formalities of court procedure.

33.Mode of questioning.-

To facilitate the ascertainment of the truth the court shall exercise control over the examination -in- chief, cross -examination and re- examination of vulnerable witness in following manner-

(a) Ensure that questions are stated in a form appropriate to the developmental level of the vulnerable witness ;

(b) protect vulnerable witness from harassment or undue embarrassment , prolong cross examination; and

(c) avoid waste of time by declining questions which the court considers unacceptable due to their being improper, unfair, misleading , needless, repetitive or expressed in language that is too complicated for the witness to understand.

(d) The court may allow the child witness to testify in a narrative form.

(e) Questions shall be put to the witness only through the court.

34.Rules of and law with regard to the deposition to be explained to the witnesses.-

The court shall explain to a vulnerable witness to listen carefully to the questions and to tell the whole truth,by speaking loudly and not to respond by shaking head in 'yes ' or ' no' and also to specifically state that the witness does not remember where he/ she has forgotten something and to clearly ask when the question is not understood.

Agesture by a child to explain what had happened shall be appropriately translated and recorded in the child'sdepostion.

35. Objections to questions-

Objectionsto questions should be couched in a manner so as not to mislead, confuse , frighten a vulnerable witness.

36. Allow questions in simple language.-

The court shall allow the questions tobe put in simple language avoiding slang, esoteric jargon, proverbs, metaphors and acronyms . The court must not allow the question carrying words capable of two- three meanings , questions having use of both past and present in one sentence , or multiple questions which islikely to confuse a witness , Where the witness seems confused instead of repetition of the same question, the court should direct for its re-phrasing.

310

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(भाग 1 -क

Explanation : ( i ) The reaction of vulnerable witness shall be treated as sufficient clue that question was not clear so it shall be rephrased and put to the witness in a different way.

(ii) Given the witness developmental level , excessively long questions shall be required tobe rephrased and thereafter put to witness .

(iii) Questions framed as compund or complex sentence structure; or two part questions or those containingdouble negatives shallbe rephrased and thereafter putto witness .

37. Testimonial aids.-

The court shall permit a child to use testimonial aids as defined in the definition clause .

38. Protection of privacy and safety.-

(a) Confidentiality of records --Any record regarding a vulnerable witness shallbe confidential and kept under seal except upon written request and order of the court , the record shall only be made available to the following :

(i) Members ofthe court staff for administrative use :

(ii) the Public Prosecutor for inspection;

(iii) defence counsel for inspection:

(iv) the guardian ad litem for inspection : and

(v) other persons as determinedby the court .

(b) Protective order.--The depositions of the vulnerable witness recordedby video - link shallbe video recorded except under reasoned order requiring the special measures by the Judge. However where any videotape or audiotape of a vulnerable witness is made, it shall be under a protective order that provides as follows:

(i) A transcript of the testimony of the vulnerable witness shallbe prepared and maintained on record ofthe case . Copies of such transcript shallbe furnished to the parties of the case.

(ii) Tapes maybe viewed onlyby parties , their counsel , their expert witness , and the guardian adlitem.

(iii) No person shall be granted access to the tape, or any part thereof unless he/ she signs a written affirmation that he has received and read a copy of the protective order, that he submits to the jurisdiction ofthe court with respect to the protective order; and that in case of violation thereof, he/she willbe subject to the contempt power of the court.

(iv) Each of the tapes , if made available to the parties or their counsel , shall bear the following cautionary notice:

"This object or document and the contents thereof are subject to a protective order issued by the court in (case title) , ( case number) . They shall not be examined , inspected , read, viewed, or copied by any person, or disclosed to any person, except as provided in the protective order. No additional copies of the tape or any of its portion shall be made, given , sold, or shown to any person without prior order of the court. Any person violating such protective order is subject to the contempt power ofthe court and other penalties as prescribedby law. "

(v) No tape shall be given, loaned, sold, or shown to any person except as ordered by the court.

(vi) This protective order shall remain in full force and effect until further order of the court.

311 भाग 1 -क

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (वैशाख 24, 1944 शक संवत)

(c) Personal details during evidence likely to cause threat to physical safety of vulnerable witness to be excluded-A vulnerable witness has a right at any court proceeding not to testify regarding personal identifying information, including his/her name, address , telephone number , school , and other information that could endanger his / her physical safety or his/ her family . The court may, however, require the vulnerable witness to testify regarding personal identifying information in the interest ofjustice.

(d) Destruction of videotapes and audiotapes .--Any videotape or audiotape of a child produced under the provisions of these guidelines or otherwise made part of the court record shallbe destroyed as per rules to be framedby the High Court of Judicature at Allahabad later on.

39. Protective measures.-

At any stage in the justice process where the safety of a victim or vulnerable witness is deemed to be at risk, the court shall arrange to have protective measures put in place for the victim or vulnerable witness , as the case may be . Those measures may include the following:-

(a) Avoidingdirect or indirect contactbetween a child victim or witness and the accused an any point in thejustice process:

(b) restraint orders;

(c) a pretrial detention order for the accused or with restraint or " no contact " bail conditions which maybe continued during trial :

(d) protection for a child victim or witnessby the police or other relevant agencies and safeguarding thewhereabouts of the childfrom disclosure ; and

(e) any other protective measures that may be deemed appropriate.

40. Savings.-

In case of any confusion in the interpretation of any clause of the scheme , mentioned hereinabove. the order of the presiding Judge shall be final and conclusive unless such order has been challenged at any higher forum.

By order of the Court, ASHISH GARG .

Registrar General.

पी०एस०यू०पी०-7 हिन्दी गजट- भाग 1- क-2022 ई ० ।

मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ।

रजिस्टर्ड नं०-१०डी०-4

लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू० पी०-41 (लाइसेन्स टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट)

सरकारी गज़ट , उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित

प्रयागराज , शनिवार , 14 मई , 2022 ई० (बैशाख 24 , 1944 शक संवत्)

भाग 3

स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़- पत्र, खण्ड-क- नगरपालिका परिषद, खण्ड- ख- नगर पंचायत, खण्ड-ग-निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा खण्ड- घ- जिला पंचायत ।

खण्ड-घ-जिला पंचायत

23अप्रैल, 2022 ई०

सं० RII- III/XIII -23 (2021-22)-उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 (यथा संशोधित) 1994 की धारा 239 (2 ) के अन्तर्गत जिला पंचायत, गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत बनने वाले सभी प्रकार के भवनों के नक्शों एवं निर्माण को नियन्त्रित एवं विनियमित करने के उ‌द्देश्य से जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा उपविधि बनायी गयी है, जिसे उ ०प्र ० शासकीय गजट में प्रकाशित होना है । उ०प्र ० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम , 1961 की धारा 242 (2) के प्राविधानानुसार करते हुये जिला पंचायत, गोरखपुर की बैठक दिनांक 12 जुलाई. 2021 के प्रस्ताव संख्या 2 ( घ) द्वारा स्वीकृत किया गया है । आयुक्त महोदय के आदेश दिनांक 16 अप्रैल, 2022 द्वारा अधिनियम की धारा 242 (2) के अन्तर्गत प्रश्नगत उपविधि की पुष्टि की गयी है । यह उपविधि शासकीय गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 ( यथा संशोधित) की धारा 239 (1 ) एवं धारा 239 (2) के साथ पठित अधिनियम की धारा 143 में प्रदप्त अधिकारों का प्रयोग कर के जिला पंचायत, गोरखपुर ने जनपद गोरखपुर के ग्राम्य क्षेत्र, जो कि उक्त अधिनियम की धारा 2 (10) में परिभाषित है, में से इस क्षेत्र में स्थापित किसी विकास प्राधिकरण एवं उ० प्र० औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 की धारा 2 (डी) में घोषित औधोगिक विकास क्षेत्र को हटाते हुए शेष ग्राम्य क्षेत्र के अन्तर्गत बनने वाले सभी प्रकार के भवनों के नक्शों एवं निर्माण को नियंत्रित एवं विनियमित करने के उददेश्य से निम्न उपविधियां बनायी गयी है ।

1-अधिनियम का तात्पर्य उ० प्र ० क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 से है ।

2-ग्राम्य क्षेत्र से तात्पर्य जिले में स्थित प्रत्येक नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, छावनी तथा नगर निगम क्षेत्र के अतिरिक्त उस क्षेत्र को हटाते हुए जो कि किसी विकास प्राधिकरण या यू० पी० एस ०आई० डी० सी० के द्वारा अधिग्रहीत किया गया हो एवं जिसके अधिग्रहण की सूचना पूर्ण विवरण सहित यथा ग्राम का नाम, गाटा/ खसरा संख्या, अधिग्रहीत क्षेत्रफल आदि गजट में प्रकाशित की जा चुकी हो ।

7 घ 36

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

3-विनियमन का मतलब भवन के मूल निर्माण एवं बने हुए भवन में अतिरिक्त निर्माण एवं फेरबदल की कार्यवाही को विनियमित करने से है ।

4-मानचित्र से तात्पर्य भवन के ड्राइंग , डिजाईन एवं विशिष्टियों के अनुसार कागज/ इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस पर बने उस नक्शे से है, जोकि पंजीकृत वास्तुविद के द्वारा बनाकर प्रस्तुत किया गया हो एवं डिजाइन योग्य (Elegible ) अभियन्ता द्वारा तैयार किया गया हो ।

5- निर्माण कार्य का तात्पर्य किसी भवन में निर्माण करना, पुनः निर्माण करना या उसमें सारवान विचलन करना या उसको ध्वस्त करने से है ।

6-भवन की ऊंचाई का तात्पर्य संलग्न किसी नाली के टाप से लेकर उस भवन के सबसे ऊंचे बिन्दु तक नापी गयी लम्बवत (Vertical ) ऊंचाई से एवं ढलान वाली छत के लिए दो गहराईयों के बीच से है । भवन की ऊंचाई में मम्टी, मशीनरूम, पानी की टंकी, एन्टीना आदि की ऊंचाई सम्मिलित नहीं होगी ।

7- छज्जा का तात्पर्य ऐसे ढलाननुमा या भूमि के क्षितिज के अनुसार बाहर निकला हुआ भाग जो कि सामान्यतया सूरज या बारिश से बचाव के लिए बनाया जाता है ।

8- ड्रेनेज का तात्पर्य उस व्यवस्था से है, जिसका निर्माण किसी तरल पदार्थ जैसे रसोई, स्नानगृह से विसर्जित पानी आदि को हटाने के लिए किया जाता है. इसके अन्तर्गत नाली व पाइप भी सम्मिलित हैं ।

9-निर्मित भवन का तात्पर्य ऐसे भवन से है. जोकि परिभाषित ग्रामीण क्षेत्र में इन उपविधियों के लागू होने से पहले अस्तित्व में आ चुका है अथवा जिला पंचायत, एटा की स्वीकृति के बिना निर्मित किया गया हो ।

10- तल (Floor Level ) का तात्पर्य किसी मंजिल के उस निचले खंड से है, जहां पर सामान्यतः किसी भवन में चला फिरा जाता हो ।

11 - फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) का तात्पर्य उस भागफल से है , जो सभी तलो के आच्छादित कुल क्षेत्रफल को भू- खण्ड के क्षेत्रफल से भाग देने से प्राप्त होता है ।

12-भू-आच्छादन(Ground Coverage) का तात्पर्य भूतल पर बने सभी निर्माण द्वारा घेरे गये क्षेत्रफल से है ।

13-ग्रुप हाउसिंग का तात्पर्य उस परिसर से है, जिसके अन्दर आवासीय फ्लैट अथवा स्वतंत्र आवासीय (Independent Apartment Unit ) इकाई बनी हों तथा मूल सुविधाओं जैसे पार्किंग , पार्क, बाजार, जनसुविधायें आदि का प्रावधान हो ।

14-लेआउट प्लान का तात्पर्य उस नक्शे से है, जोकि किसी स्थल के समस्त भूखण्ड, भवन खण्ड, मार्ग , खुली जगह, आने-जाने के बिन्दु, पार्किंग व्यवस्था, भूनिर्माण (Landscaping ) अथवा विभिन्न आकार की प्लाटिंग की समस्त जानकारी व अन्य विवरण को इंगित करने वाला प्लान से है ।

15-प्राविधिक (Technical ) व्यक्ति का तात्पर्य निम्नलिखित से है-

(अ) अभियंता अभियंता, जिला पंचायत

(ब) अवर अभियंता इस उपविधि में अवर अभियंता का तात्पर्य उस अवर अभियंता से है जिसको अभियंता, जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा भवन के नक्शों की स्वीकृति की कार्यवाही के लिए निर्देशित (Designated) किया गया हो ।

16-कार्य अधिकारी का तात्पर्य कार्य अधिकारी, जिला पंचायत, गोरखपुर से है ।

17-अधिभोग ( Occupancy ) का तात्पर्य उस प्रयोजन से है, जिसके लिए भवन या उसका भाग प्रयोग में लाया जाना है, जिसके अन्तर्गत सहायक अधिभोग भी सम्मिलित है ।

37 भाग 3]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

18-स्वामी का तात्पर्य व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, कम्पनी, ट्रस्ट, पंजीकृत संस्था राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के विभाग एवं अन्य प्राधिकरण जिसके/ जिनके नाम में भूमि का स्वामित्व सम्बन्धित अभिलेखों में दर्ज है ।

19-रेन वाटर हार्वेस्टिंग का तात्पर्य बरसात के पानी को उपयोग करके विभिन्न तकनीकों से भूगर्भ जल के स्तर को ऊंचा उठाने से है ।

20-सेटबैंक का तात्पर्य किसी भवन के चारो तरफ यथा स्थिति या मानक के अनुसार एवं बाउन्ड्री दीवार

21-अपर मुख्य अधिकारी का तात्पर्य अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, गोरखपुर से है ।

22-जिला पंचायत का तात्पर्य अधिनियम की धारा 17 (1 ) में संघटित जिला पंचायत, गोरखपुर से है ।

23-अध्यक्ष का तात्पर्य अध्यक्ष, जिला पंचायत, गोरखपुर से है ।

24-बहु मंजिली भवन (Multy Storey ) चार मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचाई का भवन बहु मंजिल कहलायेगा।

25- मंजिल का तात्पर्य भवन के उस भाग से है, जो किसी तल की सतह और इसके उपर के अनुवर्ती तल के. बीच हो और यदि इसके उपर कोई तल न हों, तो वह स्थान जो तल और इसके उपर की छत के मध्य हों ।

26- भवन का तात्पर्य ऐसी स्थायी प्रकृति के निर्माण अथवा संरचना से है. जो कि किसी भी प्रकार की सामग्री से निर्माण किया जायें, एवं उसका प्रत्येक भाग चाहें मानव प्रयोग या अन्यथा किसी अन्य प्रयोग में लाया जा रहा हो एवं उसके अन्तर्गत बुनियाद, कुर्सी क्षेत्र, दीवार, फर्श, छत , चिमनी , पानी की व्यवस्था, स्थायी प्लेटफार्म, बरान्डा, बालकनी, कार्नेस या छज्जा या भवन का अन्य भाग जो किसी खुले भू- भाग को ढकने के उददेश्य से बनाया जायेगा । इसके अन्तर्गत टैन्ट, शामियाना, तिरपाल आदि जोकि पूर्णतः अस्थायी रूप से किसी समारोह के लिये लगाये जाते है, वह भवन की परिभाषा में सम्मिलित नहीं होंगे ।

27-आवासीय भवन के अन्तर्गत वे भवन सम्मिलित होंगे जिनमें सामान्यतः आवासीय प्रयोजन के प्राविधान संहित शयन सुविधा के साथ खाना बनाने तथा शौचालय की सुविधा हो । इसमें एक अथवा एक से अधिक आवासीय इकाई भाामिल है ।

28- व्यवसायिक/ वाणिज्यिक भवन के अन्तर्गत वे भवन या भवन का वह भाग जो दुकानों, भण्डारण बाजार व्यवसायिक वस्तुओं के प्रदर्शन, थोक या फुटकर बिक्री, व्यवसाय से सम्बन्धित कार्यकलाप होटल, पैट्रोल पम्प, कन्वीनिएन्स स्टोर्स एवं सुविधाएं जो माल व्यवसायिक माल की बिक्री से अनुशांगिक हों और उसी भवन में स्थित हों सम्मिलित होंगे अथवा ऐसे भवन/ स्थल जिनका प्रयोग धनोपार्जन हेतु किया जाना हो ।

29- संकटमय भवन के अन्तर्गत भवन या भवन के वह भाग सम्मिलित होंगे जिनमें अत्यधिक ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री या उत्पाद का संग्रहण , वितरण, उत्पादन या प्रक्रम ( प्रोसेसिंग) का कार्य होता हो या जो अत्याधिक ज्वलनशील हो या जो ज्वलनशील भाप या विस्फोटक पैदा करता हो या जो अत्यधिक कारोसिव, जहरीली या खतरनाक क्षार, तेजाब हो या अन्य द्रव्य पदार्थ, रासायनिक पदार्थ जिनमें ज्वाला, भाप पैदा होती हो, विस्फोटक जहरीले इरीटेन्ट या कारोसिव गैसें पैदा होती हों या जिनमें धूल के विस्फोटक मिश्रण पैदा करने वाली सामग्री या जिनके परिणाम स्वरूप ठोस पदार्थ छोटे-2 कणों में विभाजित हो जात्ता हो और जिनमें तत्काल ज्वलन प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती हो, के संग्रहण वितरण या प्रक्रम (प्रोसेसिंग) के लिए प्रयुक्त किया जाता हो ।

30-भवन गतिविधि/ भवन निर्माण का तात्पर्य किसी भवन के बनाने या पुनः बनाने या उसमें सारवान विचलन या ध्वस्त करने की कार्यवाही मानी जायेगी ।

31-पार्किंग स्थल का तात्पर्य ऐसे चारदीवारी में बंद या खुले स्थान से है, जहां पर वाहन इकट्ठे रूप में खड़े हो सकते है. परन्तु इसके लिए आवश्यक है, कि उक्त स्थान पर आने-जाने के लिए एक सुगम एवं स्वतंत्र जोडने वाला मार्ग बना हो ।

38

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

इन उपविधियों में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है, परन्तु वे उक्त परिभाषाओं में सम्मिलित नहीं है, का तात्पर्य वही होगा, जोकि ऐसे शब्दों का National building Code एवं Bureau of Indian standards यथा संशोधित में माना जाता है । किसी विरोधाभाष की स्थिति में अधिनियम के प्रावधान प्रभावी माने जायेंगे ।

उपविधि

यह उपविधियां जिला पंचायत, गोरखपुर के उक्त परिभाषित ग्रामीण क्षेत्र में जोकि इन उपविधियों के लिए परिभाषित किया गया है. में किसी भी व्यक्ति, ठेकेदार कंपनी, फर्म या संस्था, सहकारी समिति, सोसाईटी, राजकीय विभाग द्वारा निर्माण कराये जाने वाले आबासीय , व्यावसायिक, औद्योगिक मवन, शिक्षण संस्थान, फार्म हाउस, गुप हाऊसिंग, दुकानों, मार्केट, धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन इत्यादि का लेआउट प्लान एवं निर्मित भवनों में परिवर्धन विस्तार को नियन्त्रित एवं विनियमित करने की उपविधियां कहलायेंगी ।

(क) नक्शा स्वीकृत न कराने की परिस्थितियां

ऐसे प्रकरण/ निर्माण कार्य जिनमें उपविधियों के अन्तर्गत नक्शा स्वीकार कराना आवश्यक नहीं होगा ।

1- उक्त परिभाषित ग्राम्य क्षेत्र में निम्नलिखित परिस्थितियों में भवन निर्माण, परिवर्तन, विस्तार की स्वीकृति हेतु प्रार्थना-पत्र की आवश्यकता नहीं होगी ।

(अ) ये उपविधियां कच्चे मकानों एवं गांव के मूल निवासी के शुद्धतया निजी आवास / कृषि कार्य हेतु बनाये जाने वाले 300 वर्गमी० क्षेत्रफल एवं दो मंजिल तक ऊँचे आवासीय भवनों पर लागू नहीं होंगी परन्तु सुरक्षित डिजाईन व निर्माण की जिम्मेदारी मालिक की होगी एवं उक्त निर्माण/ कार्यवाही करने से पूर्व जिला पंचायत, गोरखपुर को एक लिखित सूचना देनी होगी ।

(ब) सफेदी व रंग-रोगन के लिए ।

(स) प्लास्टर व फर्श मरम्मत के लिए ।

(य) पूर्व स्थान पर छत पुनर्निर्माण के लिए ।

(२) प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त भवन के हिस्से का पुनर्निर्माण ।

(व) मिटटी खोदने या मिट्टी से गड्डा भरना ।

(ख) प्रार्थना-पत्र, भू-अभिलेख व नक्शे

उक्त ग्राम्य क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण, पुराने भवन में परिवर्तन या परिवर्द्धन, विस्तार या भू- खण्ड के ले- आउट की स्वीकृति का आशय रखने वाला स्वामी इन उपविधियों के अनुसार, ऐसा करने से एक माह पहले अपर मुख्य अधिकारी , जिला पंचायत, गोरखपुर को एक आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित अभिलेख तथा सूचनायें प्रस्तुत करेगा एवं पावती रसीद प्राप्त करेगा ।

1- स्थल का नक्शा निम्नवत् दिया जायेगा-

ले-आउट प्लान का पैमाना 1:500 होगा ।

की-प्लान का पैमाना 1: 1000 होगा ।

बिल्डिंग प्लान का पैमाना 1: 100 होगा ।

स्थल के चारों तरफ की सीमायें उनके नाम, तथा समीपवर्ती भूमि का संक्षिप्त विवरण तथा भूमि मालिक का नाम। समीपवर्ती मार्ग अथवा मार्गों का विवरण तथा निर्माणाधीन भवन से मार्ग की दूरी । स्थल के नक्शे के साथ भूमि के स्वामित्व का प्रमाण .पत्र जैसे विक्रय आलेख , दाखिल खारिज, खतौनी आलेख ।

2-प्रस्तावित भवन/ परियोजना का नक्शा उपरोक्त वर्णित पैमाने के अनुसार होगा-

(अ) प्रत्येक मंजिल के ढके हुए भाग का नक्शा विवरण सहित ।

39 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ब) नक्शे पर पंजीकृत वास्तुविद् का पंजीकरण नम्बर, नाम व पता सहित हस्ताक्षर ।

(स) नक्शे पर भूस्वामी अथवा स्वामियों के नाम व पता सहित हस्ताक्षर ।

(य) भूस्वामी अथवा स्वामियों द्वारा नक्शा स्वीकृति के लिए प्रार्थना.पत्र ।

(२) भवन/ परियोजना के बनाने व उपयोग का उद्देश्य जैसे आवासीय, व्यावसायिक, शिक्षण, धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन ।

(ल) स्थल का की.प्लान, ले.आउट प्लान, फ्लोर, प्लान , एलिवेशन, भवन की ऊंचाई, सेक्सन , स्ट्रक्चर चिवरण, रैन हार्वेस्टिंग प्रणाली, बेसमेंट, लैंडस्केप प्लान , वातानुकूलित प्लांट, सीवेज. जल निस्तारण व्यवस्था अग्नि निकास जीने की स्थिति व अन्य विवरण ।

(व) नक्शे पर परियोजना का नाम, शीर्षक, भू.खण्ड का खसरा, ग्राम, तहसील सहित पूरा पता ।

(स) नक्शे पर भूखण्ड का क्षेत्रफल, ग्राउंड कवरेज, हर तल का क्षेत्रफल, बेसमेंट का क्षेत्रफल आदि का विवरण ।

3-बहुमंजिली भवन (मल्टी स्टोरी) चार मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचाई के भवन में नक्शे पर निम्नलिखित अतिरिक्त सूचना भी देनी होगी-

अग्निशमन प्रणाली की व्यवस्था आपात सीढ़ी व निकासी, अग्निसुरक्षा लिफ्ट अग्निअलार्म आदि का विवरण व ठिकाने Location निर्माण कार्य एवं निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री की विशिष्टियां आदि ।

(ग) नक्शा स्वीकृति प्रदान न करने की परिस्थितियां

निम्नलिखित परिस्थितियों में भवन निर्माण, परिवर्तन, विस्तार की किसी भू- खण्ड पर स्वीकृति प्रदान नहीं की जायेगी यदि-

(अ) प्रस्तावति भवन-उपयोग अनुमन्य भू- उपयोग से भिन्न है ।

(ब) प्रस्तावित निर्माण धार्मिक प्रकृति का है और उससे किसी समाज की धार्मिक भावनायें आहत होती हो ।

(स) प्रस्तावित निर्माण का उपयोग लोगों की भावनायें भड़कानें का स्रोत अथवा आस-पास रहने वालों के स्वास्थ्यपर दुष्प्रभाव डालता हो ।

(घ) तकनीकी अनुदेश (Technical Instructions)

1-(क) एक आवास गृह में 4.5 व्यक्ति प्रति गृह माना ( Consider) गया है ।

(ख) भवन के भू- तल पर स्टिल्ट पार्किंग (Stilt Parking) अधिकतम 2.4 मी० ऊँचाई तक अनुमन्य होगी ।

(ग) लिंटल (Lintel ) अथवा छत स्तर पर छज्जा अधिकतम क्रमशः 0.45 मी० एवं 0.75 मी० चौड़ा होगा ।

(घ) बेसमेंट का निर्माण भवन की सीमा से बाहर नहीं किया जायेगा । बेसमेंट की फर्श से सीलिंग तक की अधिकतम उंचाई 4.5 मीटर तथा बाहर की नाली से बेसमेंट की अधिकतम उंचाई 1.5 मीटर होगी । स्ट्रक्चर स्थिरता के आधार पर बेसमेंट सन्निकट प्लाट से 2.0 मीटर दूरी तक निर्मित किया जा सकता है ।

(ङ) बहु मंजिली भवन में कम से कम एक सामान (Goods)/मालवाहक लिपट का प्रावधान करना होगा ।

40

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

(च) राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) 2005 के प्रावधान के अनुसार ग्रुप हाउसिंग के दो ब्लॉक में न्यूनतम 6.0 मीटर से 16.0 मीटर की दूरी होगी । भवन की 18.0 मीटर उंचाई तक 6.0 मीटर इसके पश्चात् प्रत्येक 3.0 मी० अतिरिक्त उंचाई के लिए ब्लाक की दूरी 1.0 मीटर बढ़ाई जायेगी । भू-खण्ड के डेड एन्ड पर ब्लॉक की अधिकतम दूरी 9.0 मी० होगी ।

(छ) बहु मंजिली भवन में चार तलों के बाद एक सेवा तल अनुमन्य होगा किसी भवन में अधिकतम 3 सेवा तल का प्रावधान किया जा सकता है सेवा तल की अधिकतम उंचाई 2.4 मी० होगी ।

2-निम्नलिखित निर्माण / सुविधाओं के लिए भू- खण्ड का 10 प्रतिशत क्षेत्रफल, भू-आच्छादन में अतिरिक्त जोड़ा जा सकता है ।

(क) जनरेटर कक्ष, सुरक्षा मचान, सुरक्षा केबिन, गार्ड रूम, टॉयलेट ब्लॉक, ड्राईवर रूम, विद्युत् उपकेन्द्र आदि ।

(ख) मम्टी, मशीन रूम, पम्प हाउस, जल-मल प्लांट ।

(ग) ढके हुए पैदल पथ आदि ।

3-(क) आवासीय भवन में कमरे का आकार 2.4 मीटर एवं 9.5 वर्गमीटर से कम न होना चहिए ।

(ख) छत की सीलिंग की ऊंचाई 2.75 मी0 से कम न होनी चाहिए ।

(ग) ए०सी ० कमरे की ऊंचाई 2.40 मीटर से कम न होनी चाहिए ।

(घ) रसोई घर की ऊंचाई 2.75 मी०, आकार 1.80 मी० एव 5.00 वर्ग मीटर से कम न होना चाहिए ।

(ङ) संयुक्त संडास का आकार 1.20 मी० एवं 2.20 वर्ग मीटर से कम न होना चाहिए ।

(च) खिड़की व रोशनदान का क्षेत्रफल फर्श के क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत से कम न होना चाहिए ।

(छ) तीन मंजिल तक के भवन में सीढ़ी की चौड़ाई 1.00 मीटर एवं इससे अधिक उंचे भवन में 1.50 मीटर से कम न होनी चाहिए ।

4-(क) पार्क, टोट- लोट्स (Tot-Lots ) , लैंड स्केप ( Landscape ) आदि का क्षेत्रफल भू-खण्ड के क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत होगा ।

(ख) 30 मीटर तक के मार्ग पर स्थित समस्त प्रकार के भवनों की अधिकतम ऊंचाई सड़क की विद्यमान चौड़ाई तथा अनुमन्य फ्रन्ट सेट बैंक के योग का डेढ़ गुना होगी ।

होगी । (ग) भू- कम्प रोधी व सुरक्षित डिजाईन की जिम्मेदारी वास्तुविद् एवं उसके अन्तर्गत कार्यरत डिजाईनर की

5-स्वीकृत किये गये भवन में जल आपूर्ति एवं मल -मूत्र एवं बेकार पानी के निस्तारण (Disposal ) की व्यवस्था स्वामी द्वारा स्वयं की जायेगी । जिला पंचायत, गोरखपुर का इसके लिए कोई उत्तरदायित्त्व, व्यय अधिभार नहीं होगा ।

6-बेसमेंट में इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर की स्थापना, ज्वलनशील, विस्फोटक सामग्री आदि का भण्डारण नहीं किया जा सकेगा ।

41 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ङ) रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

भवन एवं पक्की सड़कों के द्वारा भू- खण्ड के प्रत्येक 300 वर्गमीटर के भू-आच्छादन (Ground Coverage) पर एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होगा । प्रत्येक 1000 वर्गमीटर के भू-आच्छादन ( Ground Coverage) पर एक अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना होगा ।

(च) विकसित जनपदों की सूची-1

'लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा , कानपुर नगर, वाराणसी, मथुरा, इलाहाबाद, बरेली, सहारनपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, मुरादाबाद, हापुड़, शामली, मुजफ्फरनगर एवं झांसी ।

(छ) भू-आच्छादन एवं फ्लोर एरिया रेशियो ( FAR)

विभिन्न भवनों हेतु भू-आच्छादन एवं फ्लोर एरिया रेशियो ( FAR) के मानक निम्नवत् होंगे-

क्रमांक

भवन एवं भू- उपयोग

फ्लोर एरिया

रेशियो ( FAR )

मू आच्छादन प्रतिशत

भवन की अधिकतम ऊंचाई सूची (1 ) के अनुसार जनपदों में (मीटर)

भवन की अधिकतम ऊंचाई अन्य जनपदों में (मीटर)

2

1

3

4

5

6

80

15

3.00

15

1 (1) आवासीय भवन भन्खण्ड 500 वर्ग मीटर तक

4.00

15

65

15 (II) आवासीय भवन भू-खण्ड 500- 2000 वर्ग मीटर तक

30

50

3.00

21 2 ग्रुप हाउसिंग योजना, रैन बसेरा

18

औद्योगिक भवन

3

60

1.00

12

4 व्यावसायिक भवन-

21

40

2.50

30

(1 ) सुविधा (Convenient ) शापिंग केन्द्र, शापिंग माल्स, व्यावसायिक केन्द्र, होटल

1.50

24

18

40

(2) बैंक, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स

60

18

15

1,50

(3) वेयर हाउस, गोदाम

10

60

1.50

15

(4) दुकानें व मार्केट

5 संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन-

50

24

15

1.50

(1 ) सभी उच्च शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालय, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, डिग्री कालेज आदि

50

1.50

24

15 (2) हायर सेकेंडरी, प्राईमरी, नर्सरी स्कूल, क्रेच सेंटर आदि

75

2.50

15

24

(3 ) हास्पिटल, डिस्पेंसरी, चिकित्सालय, लैब, नर्सिंग होम आदि 42

[भाग 3

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

2

1

3

6

50 धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन-

30

(i ) सामुदायिक केन्द्र क्लब , बारात घर, जिमखाना, अग्निशमन केन्द्र, डाकघर, पुलिस स्टेशन

40

( ii ) धर्मशाला, लॉज, अतिथिगृह, हॉस्टल

40 ( iii ) धर्मकांटा, पेट्रोल पम्प, गैस गोदाम, शीत गृह

7 कार्यालय भवन-

40 सरकारी, अर्द्धसरकारी, कॉर्पोरेट एवं अन्य कार्यालय भवन

20 8 क्रीड़ा एवं मनोरंजन कॉम्पलेक्स, शूटिंग रेंज, सामाजिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र

9 नर्सरी

10

30 10 बस स्टेशन , बस डिपो , कार्यशाला

11

10 फार्म हाउस

डेरी फार्म

12

10

20

मुर्गा, सूअर, बकरी फार्म

13

14

100

ए०टी० एम०

4

5

6

15

10 1.20

10 1.50

15

15

2.50

10

6 0.50

10

2.00

30

15

0.40

10

15

6

0.50

6

2.00

15

12

0.15

10

6

0.15

10

6

6

0.30

6

6

6 1.00

(ज) सेट बैंक (Set Back)

क्रमांक भू- खण्ड का क्षेत्रफल सामने    साइड         पीछे      लैंड स्केपिंग  खुला स्थान
           (वर्ग मीटर)      मीटर        मीटर       मीटर                     प्रतिशत तक
  1            2              3          4           5            6              7
  1         150 तक           3.0         0.0        1.5       एक वृक्ष प्रति    25
                                                             100 वर्ग मीटर
  2         151-300          3.0         0.0        3.0          तदेव           25
  3        301-500           4,5         3.0        3.0          तदेव           25
  4        501-2000          6.0         3.0        3.0          तदेव           25
  5        2001-6000         7.5        4.5         6:0          तदेव           25
  6       6001-12000         9.0        6.0         6.0          तदेव           25
  7       12001-20000        12.0        7.5        7.5          तदेव           50
  8       20001-40000        15.0        9.0        9.0          तदेव           50
  9      40001 से अधिक       16.0       12.0        12.0         तदेव           50

43 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(झ) पार्किंग स्थान

क्रमांक

पार्किंग स्थान ECU

भवन/भू-खण्ड

3

2

1

ग्रुप हाउसिंग योजना

एक ECU प्रति 80 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

2 संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन

एक ECU प्रति 100 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

3 औद्योगिक भवन

एक ECU प्रति 100 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

4 व्यावसायिक भवन

एक ECU प्रति 30 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR) का

5 सामाजिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र एक ECU प्रति 50 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR) का

एक ECU प्रति 2 अतिथि रूम के लिए

6 लॉज, अतिथिगृह, हॉस्टल

7 हॉस्पिटल, नर्सिंग होम

एक ECU प्रति 65 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR) का

8 सिनेमा, मल्टीप्लेक्स

एक ECU प्रति 15 सीट्स

9 आवासीय भवन

एक ECU प्रति 150 वर्ग मीटर स्वीकृत (FAR ) का

(ञ) अग्नि शमन पद्धत्ति, अग्नि सुरक्षा एवं सर्विसेस

(i) तीन मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों और विशिष्ट भवन यथा संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन, व्यावसायिक भवन, हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स 400 वर्ग मीटर से अधिक भूआच्छादन के भवन में अग्नि निकास हेतु एक जीना बाहर की दीवार पर एवं अग्नि सुरक्षा के अन्य सभी प्रावधान करने होंगे । भवन के चारों तरफ बाउन्ड्री दीवार के साथ साथ 6 मीटर चौड़ा मार्ग का प्रावधान करना होगा, जिसमें दमकलों के चालन हेतु कम से कम 4 मीटर चौड़ाई का परिवहन मार्ग( Carriage Way ) होगा ।

(ii ) अग्नि निकास जीने की न्यूनतम चौड़ाई 1.2 मीटर, ट्रेड की न्यूनतम 28 से ० मी० . राईजर अधिकतम 19 से० मी०, एक फ्लाईट में अधिकतम राईजरों की संख्या 16 तक सीमित होगी ।

(iii) अग्नि निकास जीने तक पहुँच दूरी 15 मीटर से अधिक न होनी चाहिए ।

(iv) घुमावदार अग्नि निकास जीने का प्रावधान 10 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों में नहीं किया जायेगा ।

(v ) उपरोक्त भवनों हेतु अग्नि शमन विभाग के सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने की जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी ।

(vi) उपरोक्त भवनों में उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम (6) 2005 एवं राष्ट्रीय भवन संहिता छजपवदस तनपसकपदह ब्बकमद्ध 2005 भाग 4 के अनुसार प्रावधान किया जायेगा जैसे स्वचालित स्प्रिंक्लर पद्धति, फर्स्ट एंड हॉज रील्स. स्वचालित अग्नि संसूचन और चेतावनी पद्धति, सार्वजनिक संबोधन व्यवस्था, निकास मार्ग के संकेत चिन्ह, फायर मैन, स्विच युक्त फायर लिफ्ट, वेट राइजर डाउन कॉर्नर सिस्टम आदि ।

8 घ 44

[भाग 3

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24, 1944 शक संवत)

(ट) इलेक्ट्रिक लाईन से दूरी

विवरण क्रमांक

2 1

1

उर्ध्वाकार दूरी मीटर क्षैतिज दूरी मीटर

3

4

2.4

1.2

लो एंड मीडियम वोल्टेज लाईन तथा सर्विस लाईन

2 हाई वोल्टेज लाईन 33000 वोल्टेज तक

3 एक्स्ट्राहाई वोल्टेज लाईन

1.8

3.7

1.8 + (0.305एम) 3.7+ (0.305 एम)

प्रत्येक अतिरिक्त प्रत्येक अतिरिक्त 33000 वोल्टेज पर 33000 वोल्टेज पर

(ठ) मोबाइल टावर्स की स्थापना

होगी । (क) मोबाइल टावर की स्थापना हेतु भवन स्वामी एवं आवासीय कल्याण समिति की अनापत्ति प्रस्तुत करनी

(ख) जनरेटर केवल 'साइलेंट' प्रकृति के होंगे तथा भू- तल पर ही लगाये जायेंगे ।

(ग) यदि टावर का निर्माण भवन की छत पर किया जाता है तो टावर का निचला भाग भवन की छत से न्यूनतम 3 मीटर ऊपर होना चाहिये ।

(घ) जहां अपेक्षित हो. वहां टावर के निर्माण से पूर्व एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इण्डिया / वायुसेना का अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा ।

(ङ) सेवा आपरेटर कंपनी और भवन स्वामी के संयुक्त हस्ताक्षर से इस आशय का भापथ-पत्र प्रस्तुत करना होगा कि यदि टावर निर्माण के फलस्वरूप आस-पास के भवन एवं जान- माल को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो उसकी क्षतिपूर्ति का समस्त दायित्व सम्बन्धित कंपनी और भवन स्वामी का होगा ।

(च) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव, रेडियों विकिरण , वायब्रेसन ( कम्पन) आदि के रूप में होने वाले दुश्परिणामों के नियंत्रण हेतु भारत सरकार / राज्य सरकार अथवा अन्य शासकीय अभिकरण द्वारा जारी दिशा- निर्देशों का अनुपालन करना अनिवार्य होगा ।

(छ) अनुज्ञा-पत्र जारी करने के लिए प्रथम बार शुल्क के रूप में एक लाख रुपये जिला पंचायत में जमा कराने होंगे । यह शुल्क एक वर्ष की अवधि के लिए होगा तथा अप्रत्यपर्णीय ( Non-Refundable ) होगा । अनुज्ञा के नवीनीकरण के लिए प्रथम बार की शुल्क का 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष जमा कराने होंगे ।

(ज) शैक्षणिक संस्था, हास्पिटल, अधिक घनत्व वाली आवासीय बस्ती अथवा धार्मिक भवन/ स्थल आदि पर या इनके 100 मीटर के दायरे में मोबाइल टावर की स्थापना नहीं की जायेगी ।

(ड) नक्शे स्वीकृति की दरें

(क) आवासीय भवन व शैक्षणिक भवन जनपद गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी तलों पर ढके भाग पर रुपये 50.00 प्रति वर्ग मीटर होगी ।

45 भाग 3]

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ख) व्यावसायिक एवं व्यापारिक भवन जनपद गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी तलों पर फर्श से ढके भाग पर रुपये 100.00 प्रति वर्ग मीटर होगी ।

(ग) [ i ] भूमि की प्लाटिंग- भूमि को योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न आकार के प्लाटों में बांटना है ।

[ii] भूमि विकास भूमि पर योजनाबद्ध तरीके से पार्क, उद्यान बनाना, फार्म हाउस विकसित करना, नर्सरी लगाना, शादी बैंकट हाल आदि।

[iii ] भूमि का उपभोग - भूमि का विभिन्न प्रकार के सामानों के भण्डारण हेतु प्रयोग करना जैसे निर्माण सामग्री, कन्टेनर , ईंधन आर०सी० सी० पाईप आदि ।

[iv] किसी परियोजना का ले आउट प्लान (तल पट मानचित्र)

उपरोक्त ग ( i ) से (iv) तक जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में रुपये 20.00 प्रति वर्ग मीटर होगी ।

(घ) पुराने भवन को ध्वस्त करने के पश्चात् पुनः निर्माण करने की दशा में अनुज्ञा शुल्क की दरें नये भवन की दरों के समान होंगी ।

(ड) स्वीकृत भवन के नक्शे में संशोधन होने की दशा में अनुज्ञा शुल्क की दरें नये भवन की दरों की एक चौथाई होंगी

(च) बेसमेंट, स्टिल्ट, पोडियम सेवा क्षेत्र व अन्य आच्छादित क्षेत्र की अनुज्ञा शुल्क में गणना की जायेगी ।

(छ) यदि स्वीकृति के नवीनीकरण का आवेदन, अनुज्ञा अवधि समाप्ति से पूर्व किया जाता है तो स्वीकृति के नवीनीकरण की दरें मूल दरों की 10 प्रतिशत होंगी । एक बार में अनुज्ञा की अवधि एक वर्ष व अधिकतम दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है । अनुज्ञा अवधि समाप्ति के पश्चात् नवीनीकरण की दरें मूल दरों की 50 प्रतिशत होंगी ।

(ज) उपविधियों के अनुसार, जिला पंचायत गोरखपुर से नक्शों की स्वीकृति के बिना निर्माण करने, किसी भूमि पर व्यवसाय करने, स्वीकृत नक्शे से इतर निर्माण करने अथवा जिला पंचायत भवन उपविधि की किसी धारा या उपधारा का उल्लंघन करने पर अर्थ- दण्ड के रूप में समझौता शुल्क ( Compounding Fees ) रोपित किया जायेगा । समझौता शुल्क(Compounding Fees ) प्रस्तावित भवन अथवा ले -आउट प्लान (तल पट मानचित्र) पर परिस्थिति अनुसार, कुल शुल्क की गणना का कम से कम 20 प्रतिशत से अधिकतम 50 प्रतिशत अतिरिक्त होगा । समझौता शुल्क (Compounding Fees ) विभाग में जमा होने के उपरान्त पूर्व में निर्मित भवन के नक्शों की स्वीकृति प्रदान की जा सकती है । समझौते की कार्यवाही अधिनियम की धारा 248 में दी गई व्यवस्था से नियन्त्रित होगी ।

(डा) जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्णता प्रमाण-पत्र ( Completion Certificate) जारी करने की दरें 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर होंगी । ये दरें सभी तलों के कुल आच्छादित क्षेत्रफल पर लागू होंगी ।

(ण) जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में बाउन्ड्री वाल स्वीकृति की दर 10.00 रुपये प्रति मीटर होगी । नोट-(शुल्क निर्धारण हेतु भवन के सभी तलों पर फर्श के कुल क्षेत्रफल की गणना करनी होगी ।)

(ण) अनुज्ञा-पत्र जारी करने की प्रक्रिया

1- स्वामी द्वारा आवेदन. पत्र के साथ प्रस्तावित भवन/ परियोजना के नक्शे एवं स्वामित्व के भूअभिलेख अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, गोरखपुर के कार्यालय में जमा किये जायेंगे एवं आवेदक को इस प्रस्तुतिकरण की दिनांकित पावती दी जायेगी ।

2-ऐसे आवेदनपत्र एवं उसके साथ संलग्नकों को अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर तत्काल कार्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर को भूअभिलेखों के परीक्षण हेतु पृष्ठांकित कर देगा ।

3-कार्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर ऐसे प्राप्त आवेदन पर उपरोक्त कार्यवाही पूर्ण करके अधिकतम एक सप्ताह में सम्बन्धित अभिलेख अपर मुख्य अधिकारी , जिला पंचायत, गोरखपुर को प्रस्तुत कर देगा । कार्य अधिकारी जिला पंचायत , गोरखपुर की तैनाती न होने की दशा में उपरोक्त कार्यवाही अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा स्वयं की जायेगी ।

4-कार्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर से प्राप्त आख्या को अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर तत्काल अभियन्ता, जिला पंचायत, गोरखपुर को पृष्ठांकित कर देगा ।

46

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

5 -अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा प्रस्तावित परियोजना के स्थलीय सर्वेक्षण हेतु निर्देशित (Designated) अवर अभियन्ता, जिला पंचायत, गोरखपुर को स्थल के सर्वेक्षण हेतु आदेशित किया जायेगा ।

6-अवर अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा स्थल सर्वेक्षण की आख्या अधिकतम एक सप्ताह में अभियन्ता, जिला पंचायत, गोरखपुर को प्रस्तुत की जायेगी ।

7-अवर अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर से सर्वेक्षण आख्या प्राप्त होने के उपरान्त बहुमंजिली भवन, व्यावसायिक भवन, संकटमय भवन एवं शैक्षणिक भवन अथवा अन्य महत्वपूर्ण परियोजना के नक्शा पारित करने से पहले अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा प्रस्तावित परियोजना के स्थल का सर्वेक्षण अनिवार्य होगा ।

४ -अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा स्थल की सर्वेक्षण आख्या प्रस्तुत करने के उपरान्त सर्वेक्षण आख्या का परीक्षण किया जायेगा । परियोजना के नक्शों की स्वीकृति हेतु अवर अभियन्ता जिला पंचायत , गोरखपुर से एक अंतरिम शुल्क की गणना करके अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, गोरखपुर को सूचित किया जायेगा । आवेदक द्वारा आंगणित अन्तरिम शुल्क की 20 प्रतिशत धनराशि अग्रिम रूप से नोटिस प्राप्त होने के एक सप्ताह के अन्दर कार्यालय जिला पंचायत, गोरखपुर में जमा करनी होगी । इसके उपरान्त ही नक्शें के विषय में अग्रिम कार्यवाही की जायेगी। प्रतिबन्ध यह है कि नक्शा पारित होने के स्तर पर आवेदक मांग. पत्र के अनुसार निर्धारित अवधि में यदि शुल्क जमा करता है तो उक्त धनराशि समायोजित करनेजद्ध हो जायेगी अन्यथा की दशा में जमा धनराशि जब्त हो जायेगी ।

9 -जिला पंचायत के अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा परियोजना की संभाव्यता, व्वेपइपसपजलद्धए सुगमता :ब्बदअमदपमदबमद्ध , साध्यता ( Feasibility) , तकनीकी जांच व जिला पंचायत भवन उपविधि में तकनीकी प्रावधानों एवं नक्शों का परीक्षण किया जायेगा । आवश्कता समझने पर नक्शों में संशोधन हेतु आवेदन कर्ता को निर्देशित किया जायेगा।

10-अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा परियोजना तकनीकी दृष्टि से सुस्थित वनदकद्ध पाये जाने पर अपनी तकनीकी आख्या अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर को अधिकतम 15 दिन में प्रस्तुत करनी होगी । अवर अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर से आंगणित शुल्क की धनराशि का विवरण प्रतिपरीक्षण ( Cross Verification) कराके तकनीकी आख्या के साथ संलग्न करना होगा ।

11-अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर उक्त आख्या प्राप्त होने पर कार्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर एवं अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा प्राप्त आख्याओं का परीक्षण करके आवेदक को शुल्क जमा करने का मांग पत्र जारी करेंगे । जिसमें आवेदक को शुल्क जमा करने के लिए एक माह का समय दिया जायेगा ।

12-आवेदक द्वारा नक्शा शुल्क निर्धारित समय में जमा कराना होगा । जिला निधि की रोकड़ बही में शुल्क की प्रविष्टि के उपरान्त अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा नक्शे की स्वीकृति प्रदान की जायेगी ।

13-उपरोक्त समस्त कार्यवाही पूर्ण होने के उपरान्त आवेदक को अनुज्ञा. पत्र अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत. गोरखपुर एवं अभियन्ता, जिला पंचायत, गोरखपुर के संयुक्त हस्ताक्षर से आवश्यक शतों के साथ जारी किया जायेगा । नक्शोंपर अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर एवं अभियन्ता जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से स्वीकृति प्रदान की जायेगी ।

14- यदि जिला पंचायत, गोरखपुर द्वारा आवेदन प्राप्ति के दो माह के भीतर आवेदक को कोई सूचना अथवा शुल्क की मांग पत्र जारी नहीं किया जाता है, तो आवेदक द्वारा निर्धारित दो माह की अवधि के समाप्ति के दिनांक से 20 दिन के भीतर प्रकरण अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर के संज्ञान में लिखित रूप से लाया जायेगा । यदि इस पर भी अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, गोरखपुर 10 दिन में कोई कार्यवाही नहीं करता है तो पूर्व में प्रस्तुत नक्शा एवं निर्माण की स्वीकृति मानित स्वीकृति ( Deemed Sanction ) मानी जायेगी ।

विवाद- उक्त कार्यवाही में किसी विवाद होने की दशा में या स्वीकृत नक्शा किन्हीं कारणों से निरस्त होने की दशा में या ऐसी कार्यवाही उत्पन्न होने के दिनांक से 30 दिन के भीतर प्रकरण अध्यक्ष, जिला पंचायत, गोरखपुर को सन्दर्भित किया जायेगा, जिसमें उनको अपना अनुदेश ऐसे प्रकरण की प्राप्ति के 30 दिन के भीतर देना होगा एवं उनका ये आदेश उभयपक्षों पर बन्धनकारी होगा ।

47 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(त) सामान्य अनुदेश ( General. Instructions)

1 - भारत सरकार अथवा उत्तर प्रदेश सरकार एवं पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक, ईमारत या स्थल के 200 मीटर के दायरे में निर्माण की अनुमति नहीं दी जायेगी। 200 मीटर से 1.5 किलो मीटर के दायरे में निर्माण की मंजिलो एवं ऊंचाई की अनुमति तत्समय आवश्यक और उचित कारण सहित दी जायेगी ।

2-भूखण्ड की सीमा से बाहर कोई निर्माण अनुमन्य नहीं होगा ।

3 -भवन के भूत्तल पर स्टिल्ट पार्किंग (Stilt Parking), वाहन पार्किंग , बेसमेन्ट वाहन पार्किंग , भण्डारण व सुविधाओं के रख रखाव व सेवा तल (Service Floor ) मण्डारण व सुविधाओं के रख-रखाव इत्यादि हेतु उपयोग किया जाये तो इनका क्षेत्रफल एफ० ए ०आर० में शामिल नहीं होगा ।

4-निकटतम हवाई अड्डा चाहे विमानापत्तन प्राधिकरण ( Airport Authority) द्वारा नियन्त्रित हो या रक्षा विभाग अथवा अन्य शासकीय विभाग द्वारा नियन्त्रित हो के 05 किमी0 की परिधि में 30 मी० से ऊंचे भवन के आवेदनकर्ता को उक्त वर्णित प्रतिष्ठानों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा ।

5- उपरोक्त उपविधि में सभी बातों के होते हुए भी जिला पंचायत, गोरखपुर यदि उचित व आवश्यक समझे तो. कारणों का उल्लेख करते हुए किसी भवन में भू-आच्छादन, फ्लोर एरिया रेसियो (FAR) अथवा अधिकतम ऊंचाई में परिवर्तन की स्वीकृति प्रदान कर सकती है ।

6-उपरोक्त सूची में उल्लिखित, भवनों के अतिरिक्त भवनों एवं गतिविधियों के नियमों व विनियमों का निर्धारण, जिला पंचायत द्वारा इस प्रकार के समकक्ष (Similar) भवनों एवं गतिविधियों के लिए निर्धारित उपविधियों के अनुसार किया जायेगा ।

7-मल्टी लेवल पार्किंग में संरचनात्मक एवं सुरक्षा की शर्तों के अधीन अधिकतम दो बेसमेन्ट अनुमन्य होंगे ।

होगी। 8-इन उपविधियों के आधीन जारी अनुज्ञा जारी होने के दिनांक से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध एवं मान्य

9-इन उपविधियों के पालन न करने की दशा में सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता के विरुद्ध सी०आर० पी० सी० की धारा 133 के अन्र्तगत जिला पंचायत द्वारा कार्यवाही की जायेगी ।

(थ) अनुज्ञा की शर्तें

अनुज्ञा -पत्र जारी होने के उपरान्त यदि यह संज्ञान में आये कि नक्शे स्वीकृति हेतु आवेदक द्वारा प्रस्तुत अभिलेख फर्जी है अथवा गलत विवरण दिया गया है तो जिला पंचायत द्वारा दी गई नक्शों की स्वीकृति निरस्त की जा सकती है, किया गया निर्माण ध्वस्त किया जा सकता है अथवा सील ( Seal ) किया जा सकता है ।

(क) अपर मुख्य अधिकारी को अधिकार होगा कि वह, अभियन्ता जिला पंचायत की संस्तुति पर, वास्तुविद् द्वारा प्रस्तुत नयशों में संशोधन अथवा परिवर्तन कर दे अथवा स्वीकार कर दें ।

(ख) पंजीकृत वास्तुविद् द्वारा तैयार एवं हस्ताक्षरित नक्शे ही मान्य होंगे । परियोजना का डिजाईन वास्तुविद के अन्र्तगत कार्य करने वाले योग्य अभियन्ता द्वारा कराया जायेगा ।

(ग ) कोई भी व्यक्ति, कम्पनी, फर्म या संस्था, राजकीय विभाग अथवा ठेकेदार आदि द्वारा प्रस्तावित मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत होने के बावजूद अन्य उन सभी विभागों से जिनसे लाइसेंस/ अनापत्ति प्रमाण- पत्र लिया जाना आवश्यक है, अनुमति प्राप्त करने का उत्तरदायित्व आवेदक का होगा ।

(द) दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम , 1961 की धारा 240 के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, गोरखपुर वह निर्देश देती है कि जो व्यक्ति ठेकेदार कम्पनी, फर्म या संस्था, सहकारी समिति, सोसाईटी, राजकीय विभाग द्वारा इन उपविधियों का उल्लंघन करेगा वह अर्थदण्ड से दण्डनीय होगा, जो अंकन रु0 1,000.00 तक होगा, जो प्रथम दोष सिद्ध होने के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके बारे में यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराध करता रहा है रु0 50.00 प्रतिदिन हो सकेगा, अथवा अर्थदण्ड का भुगतान न किया जाये तो कारावास से दण्डित किया जायेगा, जो कि तीन माह तक हो सकेगा ।

रवि कुमार एन०जी० . आयुक्त, गोरखपुर मण्डल, गोरखपुर ।

48

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25 अप्रैल, 2022 ई ०

सं० 1850/ एल ० बी० ए ० / 2022-23- उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 ( यथा संशोधित) की धारा 239 (1 ) एवं धारा 239 (2) के साथ पठित्त अधिनियम की धारा 143 में प्रदप्त अधिकारों का प्रयोग कर के जिला पंचायत, एटा ने ग्राम्य क्षेत्र, जो कि उक्त अधिनियम की धारा 2 (10) में परिभाषित है, में से इस क्षेत्र में स्थापित किसी विकास प्राधिकरण एवं उ०प्र० औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 की धारा 2 (डी) में घोषित औधोगिक विकास क्षेत्र को हटाते हुए शेष ग्राम्य क्षेत्र के अन्तर्गत बनने वाले सभी प्रकार के भवनों के नक्शों एवं निर्माण को नियंत्रित एवं विनियमित करने के उददेश्य से निम्न उपविधियां बनाये जाने का प्रस्ताव करती है तथा यह भी निर्देशित करती है कि उपविधियों को जनसाधारण की जानकारी हेतु दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित कर जनसाधारण को सूचनार्थ एवं उसके विचार / आपत्तियों आमन्त्रित की जाये जो इस विज्ञापन के 30 दिवस के अन्दर प्राप्त होगें । तत्पश्चात् उन्हे अन्तिम रूप देकर नियत प्राधिकारी आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ के अनुमोदन हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः में, गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242(2 ) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर के इनकी पुष्टि करते हुये एतद् द्वारा प्रकाशित करता हूँ। यह उपविधियाँ प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

भवनों के नक्शों एवं निर्माण को नियंत्रित एवं विनियमित करने सम्बन्धी उपविधियां

1-अधिनियम का तात्पर्य उ० प्र० क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 से है ।

2-ग्राम्य क्षेत्र से तात्पर्य जिले में स्थित प्रत्येक नगर पंचायत, नगर पालिका परिषद, छावनी तथा नगर निगम क्षेत्र के अतिरिक्त उस क्षेत्र को हटाते हुए जो कि किसी विकास प्राधिकरण या यू०पी० एस०आई ० डी० सी० के द्वारा अधिग्रहीत किया गया हो एवं जिसके अधिग्रहण की सूचना पूर्ण विवरण सहित यथा ग्राम का नाम, गाटा/ खसरा संख्या, अधिग्रहीत क्षेत्रफल आदि गजट में प्रकाशित की जा चुकी हो ।

3 -विनियमन का मतलब भवन के मूल निर्माण एवं बने हुए भवन में अतिरिक्त निर्माण एवं फेरबदल की कार्यवाही को विनियमित करने से है ।

4-मानचित्र से तात्पर्य भवन के ड्राइंग, डिजाईन एवं विशिष्टियों के अनुसार कागज/ इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस पर बने उस नक्शे से है, जोकि पंजीकृत वास्तुविद के द्वारा बनाकर प्रस्तुत किया गया हो एवं डिजाइन योग्य (Elegible ) अभियन्ता द्वारा तैयार किया गया हो ।

5-निर्माण कार्य का तात्पर्य किसी भवन में निर्माण करना, पुनः निर्माण करना या उसमें सारवान विचलन करना या उसको ध्वस्त करने से है ।

6 -भवन की ऊंचाई का तात्पर्य संलग्न किसी नाली के टाप से लेकर उस भवन के सबसे ऊंचे बिन्दु तक नापी गयी लम्बवत (Vertical ) ऊंचाई से एवं ढलान वाली छत के लिए दो गहराईयों के बीच से है । भवन की ऊंचाई में मम्टी, मशीनरूम , पानी की टंकी, एन्टीना आदि की ऊंचाई सम्मिलित नहीं होगी ।

7- छज्जा का तात्पर्य ऐसे ढलाननुमा या भूमि के क्षितिज के अनुसार बाहर निकला हुआ भाग जो कि सामान्यतया सूरज या बारिश से बचाव के लिए बनाया जाता है ।

8-ड्रेनेज का तात्पर्य उस व्यवस्था से है, जिसका निर्माण किसी तरल पदार्थ जैसे रसोई, स्नानगृह से विसर्जित पानी आदि को हटाने के लिए किया जाता है. इसके अन्तर्गत नाली व पाइप भी सम्मिलित हैं ।

9-निर्मित भवन का तात्पर्य ऐसे भवन से है, जोकि परिभाषित ग्रामीण क्षेत्र में इन उपविधियों के लागू होने से पहले अस्तित्व में आ चुका है अथवा जिला पंचायत, एटा की स्वीकृति के बिना निर्मित किया गया हो ।

49 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

10- तल (Floor Level ) का तात्पर्य किसी मंजिल के उस निचले खंड से है, जहां पर सामान्यतः किसी भवन में चला फिरा जाता हो ।

11- फ्लोर एरिया रेशियो (FAR ) का तात्पर्य उस भागफल से है , जो सभी तलो के आच्छादित कुल क्षेत्रफल को भू- खण्ड के क्षेत्रफल से भाग देने से प्राप्त होता है ।

12-भू-आच्छादन (Ground Coverage )का त्तात्पर्य भूतल पर बने सभी निर्माण द्वारा घेरे गये क्षेत्रफल से है ।

13- ग्रुप हाउसिंग का तात्पर्य उस परिसर से है, जिसके अन्दर आवासीय फ्लैट अथवा स्वतंत्र आवासीय (Independent Apartment Unit) इकाई बनी हों तथा मूल सुविधाओं जैसे पार्किंग, पार्क, बाजार, जनसुविधायें आदि का प्रावधान हो ।

14-लेआउट प्लान का तात्पर्य उस नक्शे से है, जोकि किसी स्थल के समस्त भूखण्ड, भवन खण्ड, मार्ग, खुली जगह, आने-जाने के बिन्दु, पार्किंग व्यवस्था, भूनिर्माण (Landscaping) अथवा विभिन्न आकार की प्लाटिंग की समस्त जानकारी व अन्य विवरण को इंगित करने वाला प्लान से है ।

15-प्राविधिक (Technical ) व्यक्ति का तात्पर्य निम्नलिखित से है-

(अ) अभियंता अभियंता, जिला पंचायत, एटा

(ब) अवर अभियंता इस उपविधि में अवर अभियंता का तात्पर्य उस अवर अभियंता से है जिसको अभियंता, जिला पंचायत, एटा द्वारा भवन के नक्शों की स्वीकृति की कार्यवाही के लिए निर्देशित (Designated) किया गया हो ।

16-कार्य अधिकारी का तात्पर्य कार्य अधिकारी , जिला पंचायत, एटा से है ।

17-अधिभोग (Occupancy ) का तात्पर्य उस प्रयोजन से है, जिसके लिए भवन या उसका भाग प्रयोग में लाया जाना है, जिसके अन्तर्गत सहायक अधिभोग भी सम्मिलित है ।

18-स्वामी का तात्पर्य व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, कम्पनी, ट्रस्ट, पंजीकृत संस्था राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार के विभाग एवं अन्य प्राधिकरण जिसके/ जिनके नाम में भूमि का स्वामित्व सम्बन्धित अभिलेखों में दर्ज है ।

19-रेन वाटर हार्वेस्टिंग का तात्पर्य बरसात के पानी को उपयोग करके विभिन्न तकनीकों से भूगर्भ जल के स्तर को ऊंचा उठाने से है ।

20-सेटबैक का तात्पर्य किसी भवन के चारो तरफ यथा स्थिति या मानक के अनुसार एवं बाउन्ड्री दीवार के बीच छोड़ी गयी खाली जगह अथवा रास्ते से है ।

21-अपर मुख्य अधिकारी का तात्पर्य अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, एटा से है ।

22-जिला पंचायत का तात्पर्य अधिनियम की धारा 17(1 ) में संघटित जिला पंचायत, एटा से है ।

23-अध्यक्ष का तात्पर्य अध्यक्ष, जिला पंचायत, एटा से है ।

24-बहु मंजिली भवन (Multy Storey) चार मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचाई का भवन बहु मंजिल कहलायेगा ।

25- मंजिल का तात्पर्य भवन के उस भाग से है, जो किसी तल की सतह और इसके उपर के अनुवर्ती तल के बीच हो और यदि इसके उपर कोई तल न हों, तो वह स्थान जो तल और इसके उपर की छत के मध्य हों ।

26- भवन का तात्पर्य ऐसी स्थायी प्रकृति के निर्माण अथवा संरचना से है, जो कि किसी भी प्रकार की सामग्री से निर्माण किया जायें, एवं उसका प्रत्येक भाग चाहें मानव प्रयोग या अन्यथा किसी अन्य प्रयोग में लाया जा रहा हो एवं उसके अन्तर्गत बुनियाद, कुर्सी क्षेत्र, दीवार, फर्श, छत, चिमनी, पानी की व्यवस्था, स्थायी प्लेटफार्म, बरान्डा, 50

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24, 1944 शक संवत)

बालकनी, कार्नेस या छज्जा या भवन का अन्य भाग जो किसी खुले भू- भाग को ढकने के उददेश्य से बनाया जायेगा । इसके अन्तर्गत टेन्ट, शामियाना, तिरपाल आदि जोकि पूर्णतः अस्थायी रूप से किसी समारोह के लिये लगाये जाते है. वह भवन की परिभाषा में सम्मिलित नहीं होंगे ।

27-आवासीय भवन के अन्तर्गत वे भवन सम्मिलित होंगे जिनमें सामान्यतः आवासीय प्रयोजन के प्राविधान सहित शयन सुविधा के साथ खाना बनाने तथा शौचालय की सुविधा हो । इसमें एक अथवा एक से अधिक आवासीय इकाई शामिल है ।

28-व्यवसायिक / वाणिज्यिक भवन के अन्तर्गत वे भवन या भवन का वह भाग जो दुकानों, भण्डारण बाजार व्यवसायिक वस्तुओं के प्रदर्शन, थोक या फुटकर बिक्री, व्यवसाय से सम्बन्धित कार्यकलाप होटल, पैट्रोल पम्प, कन्वीनिएन्स स्टोर्स एवं सुविधाएं जो माल व्यवसायिक माल की बिक्री से अनुशांगिक हों और उसी भवन में स्थित हों सम्मिलित होंगे अथवा ऐसे भवन/ स्थल जिनका प्रयोग धनोपार्जन हेतु किया जाना हो ।

29-संकटमय भवन के अन्तर्गत भवन या भवन के वह भाग सम्मिलित होंगे जिनमें अत्यधिक ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री या उत्पाद का संग्रहण , वितरण , उत्पादन या प्रक्रम ( प्रोसेसिंग) का कार्य होता हो या जो अत्याधिक ज्वलनशील हो या जो ज्वलनशील भाप या विस्फोटक पैदा करता हो या जो अत्यधिक कारोसिव , जहरीली या खतरनाक क्षार, तेजाब हो या अन्य द्रव्य पदार्थ, रासायनिक पदार्थ जिनमें ज्वाला, भाप पैदा होती हो , विस्फोटक जहरीले इरीटेन्ट या कारोसिव गैसें पैदा होती हों या जिनमें धूल के विस्फोटक मिश्रण पैदा करने वाली सामग्री या जिनके परिणामस्वरूप ठोस पदार्थ छोटे-2 कणों में विभाजित हो जाता हो और जिनमें तत्काल ज्वलन प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती हो, के संग्रहण वितरण या प्रक्रम (प्रोसेसिंग ) के लिए प्रयुक्त किया जाता हो ।

30- भवन गतिविधि/ भवन निर्माण का तात्पर्य किसी भवन के बनाने या पुनः बनाने या उसमें सारवान विचलन या ध्वस्त करने की कार्यवाही मानी जायेगी ।

31-पार्किंग स्थल का तात्पर्य ऐसे चारदीवारी में बंद या खुले स्थान से है, जहां पर वाहन इकट्ठे रूप में खड़े हो सकते है, परन्तु इसके लिए आवश्यक है, कि उक्त स्थान पर आने-जाने के लिए एक सुगम एवं स्वतंत्र जोडने वाला मार्ग बना हो ।

इन उपविधियों में जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है, परन्तु वे उक्त परिभाषाओं में सम्मिलित नहीं है, का तात्पर्य वही होगा, जोकि ऐसे शब्दों का National Building Code एवं Bureau of Indian Standards यथा संशोधित में माना जाता है । किसी विरोधाभाष की स्थिति में अधिनियम के प्रावधान प्रभावी माने जायेंगे ।

ये उपविधियां जिला पंचायत, एटा के उक्त परिभाषित ग्रामीण क्षेत्र में जोकि इन उपविधियों के लिए परिभाषित किया गया है, में किसी भी व्यक्ति, ठेकेदार कंपनी , फर्म या संस्था, सहकारी समिति, सोसाईटी, राजकीय विभाग द्वारा निर्माण कराये जाने वाले आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक भवन, शिक्षण संस्थान, फार्म हाउस, ग्रुप हाऊसिंग , दुकानों, मार्केट, धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन इत्यादि का लेआउट प्लान एवं/ या भवन प्लान एवं निर्मित भवनों में परिवर्तन, परिवर्धन, विस्तार को नियन्त्रित एवं विनियमित करने की उपविधियां कहलायेंगी ।

(क) नक्शा स्वीकृत न कराने की परिस्थितियां

ऐसे प्रकरण/ निर्माण कार्य जिनमें उपविधियों के अन्तर्गत नक्शा स्वीकार कराना आवश्यक नहीं होगा ।

1 -उक्त परिभाषित ग्राम्य क्षेत्र में निम्नलिखित परिस्थितियों में भवन निर्माण, परिवर्तन, विस्तार की स्वीकृति हेतु प्रार्थना-पत्र की आवश्यकता नहीं होगी ।

(अ) ये उपविधियां कच्चे मकानों एवं गांव के मूल निवासी के शुद्धतया निजी आवास / कृषि कार्य हेतु बनाये जाने वाले 300 वर्गमी ० क्षेत्रफल एवं दो मंजिल तक ऊँचे आवासीय भवनों पर लागू नहीं होंगी परन्तु सुरक्षित डिजाईन व निर्माण की जिम्मेदारी मालिक की होगी एवं उक्त निर्माण / कार्यवाही करने से पूर्व जिला पंचायत, एटा को एक लिखित सूचना देनी होगी ।

51 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई ० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ब) सफेदी व रंग-रोगन के लिए ।

(स) प्लास्टर व फर्श मरम्मत के लिए ।

(य) पूर्व स्थान पर छत्त पुनर्निर्माण के लिए ।

(२) प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त भवन के हिस्से का पुनर्निर्माण।

(व) मिट्टी खोदने या मिट्टी से गड्डा भरना ।

(ख) प्रार्थना-पत्र, भू-अभिलेख व नक्शे

उक्त ग्राम्य क्षेत्र में कोई भी नया निर्माण, पुराने भवन में परिवर्तन या परिवर्द्धन, विस्तार या भू-खण्ड के ले- आउट की स्वीकृति का आशय रखने वाला स्वामी इन उपविधियों के अनुसार, ऐसा करने से एक माह पहले अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, एटा को एक आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित अभिलेख तथा सूचनायें प्रस्तुत करेगा एवं पावती रसीद प्राप्त करेगा ।

1- स्थल का नक्शा निम्नवत् दिया जायेगा-

ले-आउट प्लान का पैमाना 1: 500 होगा ।

की-प्लान का पैमाना 1: 1000 होगा ।

बिल्डिंग प्लान का पैमाना 1 : 100 होगा ।

स्थल के चारों तरफ की सीमायें उनके नाम, तथा समीपवर्ती भूमि का संक्षिप्त विवरण तथा भूमि मालिक का नाम। समीपवर्ती मार्ग अथवा मार्गों का विवरण तथा निर्माणाधीन भवन से मार्ग की दूरी । स्थल के नक्शे के साथ भूमि के स्वामित्त्व का प्रमाण पत्र जैसे विक्रय आलेख, दाखिल खारिज, खतौनी आलेख ।

2-प्रस्तावित भवन / परियोजना का नक्शा उपरोक्त वर्णित पैमाने के अनुसार होगा-

(अ) प्रत्येक मंजिल के ढके हुए भाग का नक्शा विवरण सहित ।

(ब) नक्शे पर पंजीकृत वास्तुविद् का पंजीकरण नम्बर, नाम व पत्ता सहित हस्ताक्षर ।

(स) नक्शे पर भूस्वामी अथवा स्वामियों के नाम व पता सहित हस्ताक्षर ।

(य) भू-स्वामी अथवा स्वामियों द्वारा नक्शा स्वीकृति के लिए प्रार्थना-पत्र ।

(२) भवन/ परियोजना के बनाने व उपयोग का उ‌द्देश्य जैसे आवासीय , व्यावसायिक , शिक्षण, धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन ।

(ल) स्थल का की-प्लान, ले -आउट प्लान, फ्लोर-प्लान, एलिवेशन, भवन की ऊंचाई , सेक्सन, स्ट्रक्चर विवरण, रैन हार्वेस्टिंग प्रणाली, बेसमेंट, लैंडस्केप प्लान, वातानुकूलित प्लांट, सीवेज जल निस्तारण व्यवस्था अग्नि निकास जीने की स्थिति व अन्य विवरण ।

(व) नक्शे पर परियोजना का नाम, शीर्षक, भू- खण्ड का खसरा, ग्राम, तहसील सहित पूरा पता ।

(स) नक्शे पर भू-खण्ड का क्षेत्रफल, ग्राउंड कवरेज, हर तल का क्षेत्रफल, बेसमेंट का क्षेत्रफल आदि का विवरण ।

3-बहुमंजिली भवन ( मल्टी स्टोरी) चार मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचाई के भवन में नक्शे पर निम्नलिखित अतिरिक्त सूचना भी देनी होगी-

अग्निशमन प्रणाली की व्यवस्था आपात सीढ़ी व निकासी, अग्निसुरक्षा लिफ्ट अग्निअलार्म आदि का विवरण व ठिकाने (Location) निर्माण कार्य एवं निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री की विशिष्टियां आदि ।

9घ 52

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ग) नक्शा स्वीकृति प्रदान न करने की परिस्थितियां

निम्नलिखित परिस्थितियों में भवन निर्माण, परिवर्तन, विस्तार की किसी भू- खण्ड पर स्वीकृति प्रदान नहीं की जायेगी यदि-

(अ) प्रस्तावति भवन-उपयोग अनुमन्य भू- उपयोग से भिन्न है ।

(ब) प्रस्तावित निर्माण धार्मिक प्रकृति का है और उससे किसी समाज की धार्मिक भावनायें आहत होती हो ।

(स) प्रस्तावित निर्माण का उपयोग लोगों की भावनायें भड़कानें का स्रोत ( Source of Annoyance ) अथवा आस-पास रहने वालों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालता हो ।

(घ) तकनीकी अनुदेश (Technical Instructions)

1-(क) एक आवास गृह में 4.5 व्यक्ति प्रति गृह माना (Consider ) गया है ।

(ख) भवन के भू-तल पर स्टिल्ट पार्किंग ( Stilt Parking ) अधिकतम 24 मी० ऊँचाई तक अनुमन्य होगी ।

(ग) लिंटल (Lintel ) अथवा छत स्तर पर छज्जा अधिकतम क्रमशः 0.45 मी० एवं 0.75 मी० चौड़ा होगा ।

(घ) बेसमेंट का निर्माण भवन की सीमा से बाहर नहीं किया जायेगा । बेसमेंट की फर्श से सीलिंग तक की अधिकतम उंचाई 4.5 मीटर तथा बाहर की नाली से बेसमेंट की अधिकतम उंचाई 1.5 मीटर होगी । स्ट्रक्चर स्थिरता के आधार पर बेसमेंट सन्निकट (Adjacent) प्लाट से 2.0 मीटर दूरी तक निर्मित किया जा सकता है ।

(ङ) बहु मंजिली भवन में कम से कम एक सामान (Goods )/मालवाहक लिफ्ट का प्रावधान करना होगा ।

(च) राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code ) 2005 के प्रावधान के अनुसार ग्रुप हाउसिंग के दो ब्लॉक में न्यूनतम 6.0 मीटर से 16.0 मीटर की दूरी होगी । भवन की 18.0 मीटर उंचाई तक 6.0 मीटर इसके पश्चात् प्रत्येक 3.0 मी० अतिरिक्त उंचाई के लिए ब्लाक की दूरी 1.0 मीटर बढ़ाई जायेगी। भू-खण्ड के डेड एन्ड (Dead End ) पर ब्लॉक की अधिकतम दूरी 9.0 मी ० होगी ।

(छ) बहु मंजिली भवन में चार तलों के बाद एक सेवा तल अनुमन्य होगा किसी भवन में अधिकतम 3 सेवा तल का प्रावधान किया जा सकता है सेवा तल की अधिकतम उंचाई 2.4 मी० होगी ।

2-निम्नलिखित निर्माण/ सुविधाओं के लिए भू- खण्ड का 10 प्रतिशत क्षेत्रफल, भू-आच्छादन ( Ground Coverage) में अतिरिक्त जोड़ा जा सकता है।

(क) जनरेटर कक्ष, सुरक्षा मचान, सुरक्षा केबिन, गार्ड रूम, टॉयलेट ब्लॉक, ड्राईवर रूम, विद्युत् उपकेन्द्र आदि ।

(ख) मम्टी, मशीन रूम, पम्प हाउस, जल-मल प्लांट ।

(ग) ढके हुए पैदल पथ आदि ।

3-(क) आवासीय भवन में कमरे का आकार 2.4 मीटर एवं 9.5 वर्गमीटर से कम न होना चहिए ।

(ख) छत की सीलिंग की ऊंचाई 2.75 मी० से कम न होनी चाहिए ।

53 भाग 3]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ग) ए०सी० कमरे की ऊंचाई 2.40 मीटर से कम न होनी चाहिए ।

(घ) रसोई घर की ऊंचाई 2.75 मी०, आकार 1.80 मी० एव 5.00 वर्ग मीटर से कम न होना चाहिए ।

(ङ) संयुक्त संडास (Toilet) का आकार 1.20 मी0 एवं 2.20 वर्ग मीटर से कम न होना चाहिए ।

(च) खिड़की व रोशनदान का क्षेत्रफल फर्श के क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत से कम न होना चाहिए ।

(छ) तीन मंजिल तक के भवन में सीढ़ी की चौड़ाई 1.00 मीटर एवं इससे अधिक उंचे भवन में 1.50 मीटर से कम न होनी चाहिए ।

4-(क) पार्क, टोट-लोट्स (Tot-Lots) , लैंड स्केप (Landscape ) आदि का क्षेत्रफल भू- खण्ड के क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत होगा ।

(ख) 30 मीटर तक के मार्ग पर स्थित समस्त प्रकार के भवनों की अधिकतम ऊंचाई सड़क की विद्यमान चौड़ाई तथा अनुमन्य फ्रन्ट सेट- बैक के योग का डेढ़ गुना होगी ।

होगी । (ग) भूकम्प रोधी व सुरक्षित डिजाईन की जिम्मेदारी वास्तुविद् एवं उसके अन्तर्गत कार्यरत डिजाईनर की

5-स्वीकृत किये गये भवन में जल आपूर्ति एवं मल -मूत्र एवं बेकार पानी के निस्तारण (Disposal ) की व्यवस्था स्वामी द्वारा स्वयं की जायेगी । जिला पंचायत का इसके लिए कोई उत्तरदायित्व, व्यय अधिभार नहीं होगा ।

6-बेसमेंट में इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर की स्थापना, ज्वलनशील, विस्फोटक सामग्री आदि का भण्डारण नहीं किया जा सकेगा ।

(ङ) रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

भवन एवं पक्की सड़कों के द्वारा भू-खण्ड के प्रत्येक 300 वर्गमीटर के भू-आच्छादन (Ground Coverage ) पर एक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होगा । प्रत्येक 1000 वर्गमीटर के भू-आच्छादन (Ground Coverage ) पर एक अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करना होगा ।

(च) भू-आच्छादन एवं फ्लोर एरिया रेशियो (FAR)

विभिन्न भवनों हेतु भू-आच्छादन एवं फ्लोर एरिया रेशियो ( FAR) के मानक निम्नवत् होंगे-

क्रमांक

भवन एवं भू- उपयोग

फ्लोरएरिया

रेशियो ( FAR )

भू- आच्छादन प्रतिशत

भवन की अधिकतम ऊंचाई अन्य जनपदों में (मीटर)

भवन की अधिकतम ऊंचाई सूची (1 ) के अनुसार जनपदों में (मीटर)

4

1

5

3

6 2

80

15

1

3.00

15 (1) आवासीय भवन भू-खण्ड 500 वर्ग मीटर तक

65

4.00

15

15

(II) आवासीय भवन भू-खण्ड 500- 2000 वर्ग मीटर तक

2

50

30

3.00

21 ग्रुप हाउसिंग योजना , रैन बसेरा

(Night Shelter)

60

12

18

1.00

3 औद्योगिक भवन

4 व्यावसायिक भवन-

30

40

2.50

21 (i) सुविधा ( Convenient ) शापिंग केन्द्र, शापिंग माल्स, व्यावसायिक केन्द्र, होटल 54

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

3

2

1

40 (ii ) बैंक, सिनेमा, मल्टीप्लेक्स

60 ( iii) वेयर हाउस, गोदाम

60

( iv) दुकानें व मार्केट

5 संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन-

50

(i) सभी उच्च शिक्षण संस्थान , विश्वविद्यालय, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, डिग्री कालेज आदि

50 (ii ) हायर सेकेंडरी, प्राईमरी, नर्सरी स्कूल, क्रेच सेंटर आदि

75 (iii) हास्पिटल, डिस्पेंसरी, चिकित्सालय, लैब, नर्सिंग होम आदि

6

50 धर्मार्थ अथवा जनहितार्थ भवन-

30

(i) सामुदायिक केन्द्र क्लब , बारात घर, जिमखाना , अग्निशमन केन्द्र, डाकघर, पुलिस स्टेशन

( ii) धर्मशाला, लॉज, अतिथिगृह, 40 हॉस्टल

40 (iii ) धर्मकांटा, पेट्रोल पम्प, गैस गोदाम, शीत गृह

7 कार्यालय भवन-

40 सरकारी, अर्द्धसरकारी, कॉर्पोरेट एवं अन्य कार्यालय भवन

8

20 क्रीड़ा एवं मनोरंजन कॉम्पलेक्स, शूटिंग रेंज, सामाजिक सांस्कृतिक केन्द्र एवं

9

10 नर्सरी

30 10 बस स्टेशन, बस डिपो , कार्यशाला

10 11 फार्म हाउस

10 12 डेरी फार्म

20

13 मुर्गा, सूअर, बकरी फार्म

100 14 ए०टी०एम०

[भाग 3

4

5

6

24

18 1.50

1.50

18

15

15

10 1.50

24

1.50

15

24

15 1.50

2.50

24

15

1.20

10

15

1.50

15

10

2.50

10

15

10

0.50

6

15 2.00

30

10 0.40

15

0.50

6

6

2.00

15

12

B 0.15

10

10

0.15

6

6 0.30

6

1.00

6

6 भाग 31

55

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(ज) सेट बैंक ( Set Back)

क्रमांक भू-खण्ड का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर)

सामने (Front) मीटर

3

2

1

1

3.0

150 तक

2

151-300

3.0

3

301-500

4.5

4

6.0

501-2000

5

7.5

2001-6000

6001-12000

6

9.0

12001-20000

12.0

8

20001-40000

15.0

9

40001 से अधिक

16.0 पीछे (Reer) मीटर

खुला स्थान प्रतिशत तक

लैंड स्केपिंग (Landscapint)

साईड (Side) मीटर

4

5

6

7

0.0

1.5

25

एक वृक्ष प्रति

100 वर्ग मीटर

3.0

0.0

25

तदेव

3.0

3.0

तदेव

25

3.0

3.0

25

तदेव

4.5

6.0

तदेव

25

25 6.0

6.0

तदेव

7.5

7.5

तदेव

50

9.0

50 9.0

तदेव

12.0

12.0

50

तदेव

(झ) पार्किंग स्थान

क्रमांक

भवन/भू-खण्ड

1

2

1

ग्रुप हाउसिंग योजना

पार्किंग स्थान ECU ( Equivalent Car Unit)

3

एक ECU प्रति 80 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

2 संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन

एक ECU प्रति 100 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

औद्योगिक भवन

3

एक ECU प्रति 100 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

व्यावसायिक भवन

4

एक ECU प्रति 30 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR) का

5 सामाजिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र एक ECU प्रति 50 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR ) का

6

एक ECU प्रति 2 अतिथि रूम के लिए

लॉज, अतिथिगृह, हॉस्टल

7 हॉस्पिटल, नर्सिंग होम

एक ECU प्रति 65 वर्ग मीटर स्वीकृत ( FAR) का

8 सिनेमा, मल्टीप्लेक्स

एक ECU प्रति 15 सीट्स

9 आवासीय भवन

एक ECU प्रति 150 वर्ग मीटर स्वीकृत (FAR) का

(ञ) अग्नि शमन पद्धति, अग्नि सुरक्षा एवं सर्विसेस

(i) तीन मंजिल अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों और विशिष्ट भवन यथा- संस्थागत एवं शैक्षणिक भवन, व्यावसायिक भवन, हॉस्पिटल, नर्सिंग होम , सिनेमा, मल्टीप्लेक्स 400 वर्ग मीटर से अधिक भू-आच्छादन के भवन में अग्नि निकास हेतु एक जीना बाहर की दीवार पर एवं अग्नि सुरक्षा के अन्य सभी प्रावधान करने होंगे । भवन के चारों तरफ 56

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

बाउन्ड्री दीवार के साथ साथ 6 मीटर चौड़ा मार्ग का प्रावधान करना होगा, जिसमें दमकलों के चालन हेतु कम से कम 4 मीटर चौड़ाई का परिवहन मार्ग ( Carriage Way) होगा ।

(ii) अग्नि निकास जीने की न्यूनतम चौड़ाई 1.2 मीटर, ट्रेड की न्यूनतम 28 से० मी० , राईजर अधिकतम 19से०मी० , एक फ्लाईट में अधिकतम राईजरों की संख्या 16 तक सीमित होगी ।

(iii) अग्नि निकास जीने तक पहुँच दूरी 15 मीटर से अधिक न होनी चाहिए ।

( iv) घुमावदार अग्नि निकास जीने का प्रावधान 10 मीटर से अधिक ऊंचे भवनों में नहीं किया जायेगा ।

(v) उपरोक्त भवनों हेतु अग्नि शमन विभाग के सक्षम प्राधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी ।

(vi ) उपरोक्त भवनों में उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम (6) 2005 एवं राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) 2005 भाग 4 के अनुसार प्रावधान किया जायेगा जैसे स्वचालित स्प्रिंक्लर पद्धति, फर्स्ट एंड हॉज रील्स, स्वचालित अग्नि संसूचन और चेतावनी पद्धति, सार्वजनिक संबोधन व्यवस्था, निकास मार्ग के संकेत चिन्ह, फायर मैन, स्विच युक्त फायर लिपट, वेट राइजर डाउन कॉर्नर सिस्टम आदि ।

(ट) इलेक्ट्रिक लाईन से दूरी

क्रमांक

विवरण

उर्ध्वाकार दूरी मीटर क्षैतिज दूरी मीटर

1

3

4

2

1

1.2

2.4

लो एंड मीडियम वोल्टेज लाईन तथा सर्विस लाईन

2

3.7

1.8 हाई वोल्टेज लाईन 33000 वोल्टेज तक

3 एक्स्ट्राहाई वोल्टेज लाईन

3.7+ (0.305 एम) 1.8 + (0.305एम)

प्रत्येक अतिरिक्त

प्रत्येक अतिरिक्त

33000 वोल्टेज पर 33000 वोल्टेज पर

(ठ) मोबाइल टावर्स की स्थापना

(क) मोबाइल टावर की स्थापना हेतु भवन स्वामी एवं आवासीय कल्याण समिति ( RWA) की अनापत्ति प्रस्तुत करनी होगी ।

(ख) जनरेटर केवल 'साइलेंट' प्रकृति के होंगे तथा भू-तल पर ही लगाये जायेंगे ।

(ग) यदि टावर का निर्माण भवन की छत पर किया जाता है तो टावर का निचला भाग भवन की छत से न्यूनत्तम 3 मीटर ऊपर होना चाहिये ।

(घ) जहां अपेक्षित हो, वहां टावर के निर्माण से पूर्व एयरपोर्ट अथर्थोरिटी ऑफ इण्डिया / वायुसेना का अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा ।

(ङ) सेवा आपरेटर कंपनी और भवन स्वामी के संयुक्त हस्ताक्षर से इस आशय का भापथ-पत्र प्रस्तुत करना होगा कि यदि टावर निर्माण के फलस्वरूप आस-पास के भवन एवं जान-माल को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचती है तो उसकी क्षतिपूर्ति का समस्त दायित्व सम्बन्धित कंपनी और भवन स्वामी का होगा ।

57 भाग 3]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई ० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

(च) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव, रेडियों विकिरण , वायब्रेसन (कम्पन) आदि के रूप में होने वाले दुश्परिणामों के नियंत्रण हेतु भारत सरकार / राज्य सरकार अथवा अन्य शासकीय अभिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करना अनिवार्य होगा ।

(छ) अनुज्ञा-पत्र जारी करने के लिए सूची (1 ) के अनुसार जनपदों में प्रथम बार शुल्क के रूप में एक लाख रुपये व अन्य जनपदों में पचास हजार रुपये जिला पंचायत में जमा कराने होंगे । यह शुल्क एक वर्ष की अवधि के लिए होगा तथा अप्रत्त्यपर्णीय (Non- Refundable ) होगा । अनुज्ञा के नवीनीकरण के लिए प्रथम बार की शुल्क का 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष जमा कराने होंगे ।

(ज) शैक्षणिक संस्था, हास्पिटल, अधिक घनत्व वाली आवासीय बस्ती अथवा धार्मिक भवन / स्थल आदि पर या इनके 100 मीटर के दायरे में मोबाइल टावर की स्थापना नहीं की जायेगी ।

(ड) नक्शे स्वीकृति की दरें

होगी। (क) आवासीय भवन एवं शैक्षणिक भवन सभी तलों पर फर्श से ढके भाग पर रुपये 25.00 प्रति वर्ग मीटर

(ख) व्यावसायिक एवं व्यापारिक भवन सभी तलों पर फर्श से ढके भाग पर रुपये 50.00 प्रति वर्ग मीटर होगी ।

(ग) [i ] भूमि की प्लाटिंग भूमि को योजनाबद्ध तरीके से विभिन्न आकार के प्लाटों में बांटना है ।

[ii] भूमि विकास भूमि पर योजनाबद्ध तरीके से पार्क, उद्यान बनाना, फार्म हाउस विकसित करना, नर्सरी लगाना, शादी बैंकट हाल आदि ।

[ iii] भूमि का उपभोग- भूमि का विभिन्न प्रकार के सामानों के भण्डारण हेतु प्रयोग करना जैसे निर्माण सामग्री, कन्टेनर , ईंधन आर० सी०सी० पाईप आदि ।

[ iv] किसी परियोजना का ले आउट प्लान (तल पट मानचित्र)

उपरोक्त ग (i ) से ( iv) तक रुपये 20.00 प्रति वर्ग मीटर होगी।

(घ) पुराने भवन को ध्वस्त करने के पश्चात् पुनः निर्माण करने की दशा में अनुज्ञा शुल्क की दरें नये भवन की दरों के समान होंगी । (ङ) स्वीकृत भवन के नक्शे में संशोधन होने की दशा में अनुज्ञा शुल्क की दरें नये भवन की दरों की एक चौथाई होंगी

(च) बेसमेंट, स्टिल्ट, पोडियम सेवा क्षेत्र व अन्य आच्छादित क्षेत्र की अनुज्ञा शुल्क में गणना की जायेगी ।

(छ) यदि स्वीकृति के नवीनीकरण का आवेदन, अनुज्ञा अवधि समाप्ति से पूर्व किया जाता है तो स्वीकृति के नवीनीकरण की दरें मूल दरों की 10 प्रतिशत होंगी । एक बार में अनुज्ञा की अवधि एक वर्ष व अधिकतम दो वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है । अनुज्ञा अवधि समाप्ति के पश्चात् नवीनीकरण की दरें मूल दरों की 50 प्रतिशत होंगी ।

(ज) उपविधियों के अनुसार, जिला पंचायत, एटा के नक्शों की स्वीकृति के बिना निर्माण करने, किसी भूमि पर व्यवसाय करने, स्वीकृत नक्शे से इतर निर्माण करने अथवा जिला पंचायत भवन उपविधि की किसी धारा या उपधारा का उल्लंघन करने पर अर्थ- दण्ड के रूप में समझौता शुल्क (Compounding Fees ) रोपित किया जायेगा । समझौता शुल्क(Compounding Fees ) प्रस्तावित भवन अथवा ले-आउट प्लान ( तल पट मानचित्र) पर परिस्थिति अनुसार, कुल 58

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

शुल्क की गणना का कम से कम 20 प्रतिशत से अधिकतम 50 प्रतिशत अतिरिक्त होगा । समझौता शुल्क (Compounding Fees ) विभाग में जमा होने के उपरान्त पूर्व में निर्मित भवन के नक्शों की स्वीकृति प्रदान की जा सकती है । समझौते की कार्यवाही अधिनियम की धारा 248 में दी गई व्यवस्था से नियन्त्रित होगी ।

(झ) पूर्णता प्रमाण-पत्र ( Completion Certificate) जारी करने की दरें 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर होंगी । ये दरें सभी तलों के कुल आच्छादित क्षेत्रफल पर लागू होंगी ।

(ण) बाउन्ड्रीवाल स्वीकृति की दर 5.00 रुपये प्रति मीटर होगी ।

नोट-( शुल्क निर्धारण हेतु भवन के सभी तलों पर फर्श के कुल क्षेत्रफल की गणना करनी होगी । )

(ण) अनुज्ञा-पत्र जारी करने की प्रक्रिया

1-स्वामी द्वारा आवेदन पत्र के साथ प्रस्तावित भवन/ परियोजना के नक्शे एवं स्वामित्व के भूअभिलेख अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, एटा के कार्यालय में जमा किये जायेंगे एवं आवेदक को इस प्रस्तुतिकरण की दिनांकित पावती दी जायेगी ।

2-ऐसे आवेदन पत्र एवं उसके साथ संलग्नकों को अपर मुख्य अधिकारी तत्काल कार्य अधिकारी को भू अभिलेखों के परीक्षण हेतु पृष्ठांकित कर देगा ।

3-कार्य अधिकारी ऐसे प्राप्त आवेदन पर उपरोक्त कार्यवाही पूर्ण करके अधिकतम एक सप्ताह में सम्बन्धित अभिलेख अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, एटा को प्रस्तुत कर देगा । कार्य अधिकारी की तैनाती न होने की दशा में उपरोक्त कार्यवाही अपर मुख्य अधिकारी द्वारा स्वयं की जायगी ।

4-कार्य अधिकारी से प्राप्त आख्या को अपर मुख्य अधिकारी तत्काल अभियन्ता, जिला पंचायत, एटा को पृष्ठांकित कर देगा ।

5-अभियन्ता द्वारा प्रस्तावित परियोजना के स्थलीय सर्वेक्षण हेतु निर्देशित यमेपहदंजमकाद्ध अवर अभियन्ता, को स्थल के सर्वेक्षण हेतु आदेशित किया जायेगा ।

6-अवर अभियन्ता द्वारा स्थल सर्वेक्षण की आख्या अधिकतम एक सप्ताह में अभियन्ता, जिला पंचायत, एटा को प्रस्तुत की जायेगी।

7-अवर अभियन्ता से सर्वेक्षण आख्या प्राप्त होने के उपरान्त बहुमंजिली भवन, व्यावसायिक भवन, संकटमय भवन एवं शैक्षणिक भवन अथवा अन्य महत्वपूर्ण परियोजना के नक्शा पारित करने से पहले अभियन्ता जिला पंचायत द्वारा प्रस्तावित परियोजना के स्थल का सर्वेक्षण करना अनिवार्य होगा ।

8-अभियन्ता द्वारा स्थल की सर्वेक्षण आख्या प्रस्तुत करने के उपरान्त सर्वेक्षण आख्या का परीक्षण किया जायेगा । परियोजना के नक्शों की स्वीकृति हेतु अवर अभियन्ता से एक अंतरिम शुल्क की गणना करके अपर मुख्य अधिकारी , जिला पंचायत, एटा को सूचित किया जायेगा । आवेदक द्वारा आंगणित अन्तरिम शुल्क की 20 प्रतिशत धनराशि अग्रिम रूप से नोटिस प्राप्त होने के एक सप्ताह के अन्दर कार्यालय जिला पंचायत, एटा में जमा करनी होगी । इसके उपरान्त ही नक्रों के विषय में अग्रिम कार्यवाही की जायेगी । प्रतिबन्ध यह है कि नक्शा पारित होने के स्तर पर आवेदक मांग पत्र के अनुसार निर्धारित अवधि में यदि शुल्क जमा करता है तो उक्त धनराशि समायोजित करनेजद्ध हो जायेगी अन्यथा की दशा में जमा धनराशि जब्त हो जायेगी ।

59 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

9 -जिला पंचायत, एटा के अभियन्ता द्वारा परियोजना की संभाव्यत्ता, ( Possibility ), सुगमता ( Convenience ), साध्यता ( Feasibility ) , तकनीकी जांच व जिला पंचायत भवन उपविधि में तकनीकी प्रावधानों एवं नक्शों का परीक्षण किया जायेगा । आवश्कता समझने पर नक्शों में संशोधन हेतु आवेदन कर्ता को निर्देशित किया जायेगा।

10-अभियन्ता द्वारा परियोजना तकनीकी दृष्टि से सुस्थित ( Sound ) पाये जाने पर अपनी तकनीकी आख्या अपर मुख्य अधिकारी को अधिकतम 15 दिन में प्रस्तुत करनी होगी । अवर अभियन्ता से आंगणित शुल्क की धनराशि का विवरण प्रतिपरीक्षण (Cross Verification) कराके तकनीकी आख्या के साथ संलग्न करना होगा ।

11-अपर मुख्य अधिकारी उक्त आख्या प्राप्त होने पर कार्य अधिकारी एवं अभियन्ता द्वारा प्राप्त आख्याओं का परीक्षण करके आवेदक को शुल्क जमा करने का मांग. पत्र जारी करेंगे । जिसमें आवेदक को शुल्क जमा करने के लिए एक माह का समय दिया जायेगा ।

12-आवेदक द्वारा नक्शा शुल्क निर्धारित समय में जमा कराना होगा । जिला निधि की रोकड़ बही में शुल्क की प्रविष्टि के उपरान्त अपर मुख्य अधिकारी द्वारा नक्शे की स्वीकृति प्रदान की जायेगी ।

13- उपरोक्त समस्त कार्यवाही पूर्ण होने के उपरान्त आवेदक को अनुज्ञा. पत्र अपर मुख्य अधिकारी एवं अभियन्ता एवं अभियन्ता, के संयुक्त हस्ताक्षर से आवश्यक शर्तों के साथ जारी किया जायेगा । नक्शों पर अपर मुख्य अधिकारी एवं अभियन्ता द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से स्वीकृति प्रदान की जायेगी ।

14- यदि जिला पंचायत, एटा द्वारा आवेदन प्राप्ति के दो माह के भीतर आवेदक को कोई सूचना अथवा शुल्क की मांग.पत्र जारी नहीं किया जाता है. तो आवेदक द्वारा निर्धारित दो माह की अवधि के समाप्ति के दिनांक से 20 दिन के भीतर प्रकरण अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत , एटा के संज्ञान में लिखित रूप से लाया जायेगा । यदि इस पर भी अपर मुख्य अधिकारी 10 दिन में कोई कार्यवाही नहीं करता है तो पूर्व में प्रस्तुत नक्शा एवं निर्माण की स्वीकृति मानित स्वीकृति (Deemed Sanction ) मानी जायेगी ।

विवाद- उक्त कार्यवाही में किसी विवाद होने की दशा में या स्वीकृत नक्शा किन्हीं कारणों से निरस्त होने की दशा में या ऐसी कार्यवाही उत्पन्न होने के दिनांक से 30 दिन के भीतर प्रकरण अध्यक्ष, जिला पंचायत, एटा को सन्दर्भित किया जायेगा , जिसमें उनको अपना अनुदेश ऐसे प्रकरण की प्राप्ति के 30 दिन के भीतर देना होगा एवं उनका ये आदेश उभयपक्षों पर बन्धनकारी होगा ।

(त) सामान्य अनुदेश ( General Instructions)

1-भारत सरकार अथवा उत्तर प्रदेश सरकार एवं पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक, ईमारत या स्थल के 200 मीटर के दायरे में निर्माण की अनुमति नहीं दी जायेगी । 200 मीटर से 1.5 किलो मीटर के दायरे में निर्माण की मंजिलो एवं ऊंचाई की अनुमति तत्समय आवश्यक और उचित कारण सहित दी जायेगी ।

2-भूखण्ड की सीमा से बाहर कोई निर्माण अनुमन्य नहीं होगा ।

3-भवन के भूतल पर स्टिल्ट पार्किंग (Stilt Parking), वाहन पार्किंग, बेसमेन्ट वाहन पार्किंग, भण्डारण व सुविधाओं के रख रखाव व सेवा तल ( Service Floor) भण्डारण व सुविधाओं के रख रखाव इत्यादि हेतु उपयोग किया जाये तो इनका क्षेत्रफल एफ० ए० आर० में शामिल नहीं होगा ।

4-निकटतम हवाई अड्‌डा चाहे विमानापत्तन प्राधिकरण ( Airport Authority ) द्वारा नियन्त्रित हो या रक्षा विभाग अथवा अन्य शासकीय विभाग द्वारा नियन्त्रित हो के 05 किमी० की परिधि में 30 मी० से ऊंचे भवन के आवेदनकर्ता को उक्त वर्णित प्रतिष्ठानों से अनापत्ति प्रमाण- पत्र लेना होगा ।

10 घ 60

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० ( बैशाख 24, 1944 शक संवत)

5-उपरोक्त उपविधि में सभी बातों के होते हुए भी जिला पंचायत, एटा यदि उचित व आवश्यक समझे तो. कारणों का उल्लेख करते हुए किसी भवन में भूआच्छादन, फ्लोर एरिया रेसियो अन्द्ध अथवा अधिकतम ऊंचाई में परिवर्तन की स्वीकृति प्रदान कर सकती है ।

6- उपरोक्त सूची में उल्लिखित, भवनों के अतिरिक्त भवनों एवं गतिविधियों के नियमों व विनियमों का निर्धारण, जिला पंचायत, एटा द्वारा इस प्रकार के समकक्ष पउपसंतद्ध भवनों एवं गतिविधियों के लिए निर्धारित उपविधियों के अनुसार किया जायेगा ।

7-मल्टी लेवल पार्किंग में संरचनात्मक एवं सुरक्षा की शर्तों के अधीन अधिकतम दो बेसमेन्ट अनुमन्य होंगे ।

होगी। 8-इन उपविधियों के आधीन जारी अनुज्ञा जारी होने के दिनांक से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध एवं मान्य

9-इन उपविधियों के पालन न करने की दशा में सम्बन्धित उल्लंघनकर्ता के विरुद्ध सी ० आर ० पी०सी० की धारा 133 के अर्न्तगत जिला पंचायत, एटा द्वारा कार्यवाही की जायेगी ।

(थ) अनुज्ञा की शर्ते

अनुज्ञा- पत्र जारी होने के उपरान्त यदि यह संज्ञान में आये कि नक्शे स्वीकृति हेतु आवेदक द्वारा प्रस्तुत अभिलेख फर्जी है अथवा गलत विवरण दिया गया है तो जिला पंचायत, एटा द्वारा दी गई नक्शों की स्वीकृति निरस्त की जा सकती है, किया गया निर्माण ध्वस्त किया जा सकता है अथवा सील ( Seal ) किया जा सकता है ।

(क) अपर मुख्य अधिकारी को अधिकार होगा कि वह, अभियन्ता जिला पंचायत, एटा की संस्तुति पर, वास्तुविद् द्वारा प्रस्तुत नक्शों में संशोधन अथवा परिवर्तन कर दे अथवा स्वीकार कर दें ।

(ख) पंजीकृत वास्तुविद् द्वारा तैयार एवं हस्ताक्षरित नक्शे ही मान्य होंगे । परियोजना का डिजाईन वास्तुविद के अन्र्तगत कार्य करने वाले योग्य अभियन्ता द्वारा कराया जायेगा ।

(ग) कोई भी व्यक्ति, कम्पनी, फर्म या संस्था, राजकीय विभाग अथवा ठेकेदार आदि द्वारा प्रस्तावित मानचित्र जिला पंचायत, एटा से स्वीकृत होने के बावजूद अन्य उन सभी विभागों से जिनसे लाइसेंस / अनापत्ति प्रमाण-पत्र लिया जाना आवश्यक है, अनुमति प्राप्त करने का उत्तरदायित्त्व आवेदक का होगा ।

(द) दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 240 के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा यह निर्देश देती है कि जो व्यक्ति इन उपविधियों का उल्लंघन करेगा वह अर्थदण्ड से दण्डनीय होगा, जो अंकन रु0 1,000.00 तक होगा, जो प्रथम दोष सिद्ध होने के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिए जिसके बारे में यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराध करता रहा है रु० 50.00 प्रतिदिन हो सकेगा. अथवा अर्थदण्ड का भुगतान न किया जाये तो कारावास से दण्डित किया जायेगा, जो कि तीन माह तक हो सकेगा ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ ।

61 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25 अप्रैल, 2022 ई०

ग्रामीण क्षेत्र में ठेकेदारी के कार्यों को नियन्त्रित एवं विनियमित करने सम्बन्धी उपविधियाँ

सं० 1851/ एल ० बी० ए० / 2022-23 - उत्तर प्रदेश क्षेत्र समिति एवं जिला परिषद अधिनियम , 1961 (अधिनियम सं० 33) उ०प्र० पंचायत निधि संशोधन अधिनियम, 1994 (उ०प्र ० अधिनियम सं ० 9 सन् 1994) के अन्तर्गत धारा 143 के साथ पठित 145 एवं 239 (2) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों को प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा अपने नियन्त्रणाधीन जनपद एटा के ग्रामीण क्षेत्र में ठेकेदारी के कार्यों को नियन्त्रित एवं विनियमित करने के उद्देश्य से उपविधियां बनायी है, जो सर्वसाधारण को सुझाव एवं आपत्ति आमन्त्रण हेतु प्रकाशित की जा रही हैं, प्रकाशन की तिथि से तीस दिवस के अन्दर प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर ही विचार किया जायेगा ।

अतः मैं गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242 (2) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर के इनकी पुष्टि करते हुये एतद्वारा प्रकाशित करता हूँ। यह उपविधियों प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

उपनियम

1-कोई भी व्यक्ति, फर्म संस्था, समिति, कम्पनी आदि जो एटा जनपद के ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत राज्य अथवा केन्द्र सरकार के किसी विभाग / संस्था निगम, कम्पनी , पंचायत, बोर्ड, अन्डरटेकिंग , संस्था आदि से ठेके लेकर भवन, सड़क, पुल. पुलिया, नहरों आदि के निर्माण, मरम्मत, खुदाई एवं भराई सम्बन्धित कार्य, रेलवेलाइन बिछाने, टेलीफोन व बिजली की लाइन बिछाने या अन्य सम्बन्धित कार्य करना चाहे तो उसे अपने को जिला पंचायत से पंजीकृत करवाकर लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा ।

2-जिला पंचायत, एटा में जो व्यक्ति, संस्था आदि ठेकेदारी करना चाहें उनके ऊपर यह उपविधियों यथावत् लागू होगी ।

3-इन उपविधियों के अन्तर्गत अध्यक्ष के अनुमोदन के उपरान्त अपर मुख्य अधिकारी अथवा मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, एटा लाईसेंस जारी करेगा ।

4-ठेकेदारी लाइसेंस लेने के लिए जिस विभाग में ठेकेदारी का कार्य किया जाना है उस विभाग के विभागाध्यक्ष की संस्तुति सहित पंजीकरण के लिए प्रार्थना-पत्र निम्नलिखित प्रमाण -पत्रों के साथ देना होगा-

(अ) अपने निवास स्थान के थाने से चरित्र प्रमाण-पत्र ।

हो । (ब) शासन के माल विभाग से किसी अधिकारी से हैसियत प्रमाण-पत्र जो तहसीलदार स्तर से कम न

पत्र । (स) जिस विभाग में ठेकेदारी का कार्य करना हो उसके विभागाध्यक्ष से ब्लैक लिस्ट न होने का प्रमाण-

(द) प्रार्थना-पत्र में यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि किस विभाग में कितनी धनराशि तक का ठेका किस कार्य के लिए ले रहा है ।

5-जिला पंचायत एटा द्वारा जिस विभाग की ठेकेदारी के लिए लाइसेंस प्रदान किया जायेगा उस लाइसेंस के केवल उसी विभाग में ठेकेदारी अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित मूल्य के कार्यों तक ही कर सकेगा ।

62

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

6-विभिन्न विभागों के अन्तर्गत ठेकेदारी करने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा ।

7-यदि ठेकेदार अपनी दर्शायी हुई श्रेणी से अधिक की धनराशि का ठेका लेना चाहता है तो जिला पंचायत एटा में पुनः प्रार्थना-पत्र विभाग के विभागाध्यक्ष के संस्तुति सहित देगा तथा बढ़ाई हुई धनराशि की सीमा व श्रेणी के अनुसार लाइसेंस शुल्क अदा कर देने पर नया लाइसेंस दिया जायेगा । ऐसी स्थिति में पूर्व में दिया गया लाइसेंस निम्न श्रेणी स्वत निरस्त हो जावेगा ।

8 -लाइसेंस की अवधि प्रतिवर्ष 01 अप्रैल से 31 मार्च तक होगी ।

9-शासन के किसी विभाग, संस्था, निगम, कम्पनी, पंचायत, बोर्ड, अन्डरटेकिंग आदि संस्थाओं के लिए आवश्यकः होगा कि वह अपने कार्यों के ठेके जिला पंचायत से पंजीकृत और लाईसेंस शुदा ठेकेदार का ही दें ।

10-जिला पंचायत एटा द्वारा ठेकेदारों का निम्नवत् श्रेणी में श्रेणीबद्ध व पंजीकृत किया जायेगा और उसी के अनुसार निर्धारित शुल्क जमा करना होगा ।

(अ) रुपये 5,00,000.00 तक के ठेके लेने वाले ठेकेदार तृतीय श्रेणी के ठेकेदार होगें उनका लाईसेंस शुल्क 1,000.00 रुपया प्रतिवर्ष होगा ।

(ब) रुपये 5,00,000.00 से 10,00,000.00 तक की धनराशि का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वितीय श्रेणी के ठेकेदार होगें और उनके लिए लाईसेंस शुल्क 2,500.00 रुपया प्रतिवर्ष होगा ।

(स) रुपये 10,00,000.00 से अधिक धनराशि का ठेका लेने वाले ठेकेदार प्रथम श्रेणी के ठेकेदार होगें और उनके लिए लाईसेंस शुल्क 5,000.00 रुपया प्रतिवर्ष होगा ।

11-यदि किसी विभाग , अर्द्धसरकारी संस्था, निगम, कम्पनी, पंचायत, बोर्ड, अन्डरटेकिंग द्वारा ठेकेदारों को विनियमित करने का प्राविधान है अथवा आगे किया जावे तो भी इस उपविधि के प्राविधान लागू होगें और सम्बन्धित नियम, उपनियम अथवा आदेशों के अन्तर्गत प्रदत्त अनुज्ञा इस लाईसेंस से अलग रहेगी ।

12-तकनीकी कार्यों के लिए सम्बन्धित विभागों की अनुज्ञा प्रस्तुत करने पर ही जिला पंचायत एटा द्वारा लाईसेंस प्रदान किया जायेगा ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित 1994 की धारा 240 द्वारा प्रदत्तः अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लंघन करने पर उल्लंघनकर्ता न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन 5,000.00 रुपया तक का अर्थदण्ड दिया जा सकला है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिसमें उल्लंघन जारी रहा है तो 250.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल,अलीगढ़ ।

63 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25 अप्रैल, 2022 ई०

विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल , प्रचार तथा अन्य प्रचार कार्य को विनियमित्त एवं नियन्त्रित करने सम्बन्धी उपविधियों

सं० 1852/ एल ०बी० ए ० / 2022-23 -उ० प्र० समिति एवं जिला परिषद अधिनियम , 1961 ( अधिनियम सं० 33) उ०प्र० पंचायत निधि संशोधन अधिनियम, 1994 (उ०प्र० अधिनियम संख्या 9 सन् 1994 ) के अन्तर्गत धारा 143 के साथ पठित 145 एवं 239 (2 ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों को प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा अपने नियन्त्रणाधीन जनपद एटा के ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञापन पट्ट, क्यास , दीवाल, प्रचार तथा अन्य प्रचार कार्य को विनियमित एवं नियन्त्रित करने के उद्देश्य से उपविधियों बनायी है, जो सर्वसाधारण को सुझाव एवं आपत्ति आमन्त्रण हेतु प्रकाशित की जा रही है, प्रकाशन की तिथि से तीस दिवस के अन्दर प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर ही विचार किया जायेगा ।

अतः मै. गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242 (2) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करके इनकी पुष्टि करते हुये एतद्वारा प्रकाशित करता हूँ । यह उपविधियों प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

उपविधियाँ

1-यह उपविधि क्षेत्र में विज्ञापन पट्ट, क्यास तथा दीवाल प्रचार कार्य को नियन्त्रण एवं विनियमन की उपविधियों कहलायेगी ।

2-यह उपविधियों आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ द्वारा पुष्टि होने एवं तत्पश्चात् गजट में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होगी ।

3-परिभाषायें (अ) ग्रामीण क्षेत्र का तात्पर्य उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 यथा संशोधित 1994 की धारा 2 (10) से तथा परिभाषित ग्रामीण क्षेत्र से हैं ।

(ब) विज्ञापन पट्ट का तात्पर्य ऐसी होर्डिंग से है जो किसी लोहे या लकड़ी के स्तम्म के सहारे खड़ी की गयी हो या लगायी गयी हो ।

(स) क्यास का तात्पर्य ऐसे साइन बोर्ड से है जो किसी बिजली के खम्भे, टेलीफोन के खम्भे अथवा दीवाल या वृक्ष के सहारे लगाया गया है ।

(द) दीवाल प्रचार का तात्पर्य ऐसी विज्ञापन सामग्री से है जो किसी दीवाल पर पेंट, चूना, खड़िया, गेरू आदि से लिखित चित्रित एवं चिन्हित किया गया हो ।

(य) अन्य प्रचार सामग्री का तात्पर्य ऐसे विज्ञापन से है जो किसी टीन या कपड़े से या फ्लैक्स बोर्ड पर लिखित चित्रित एवं चिन्हित करके लगाया गया हो ।

4-कोई भी व्यक्ति एटा जनपद के ग्रामीण क्षेत्र में उपविधि की धारा -13 के अन्तर्गत निर्धारित लाईसेंस शुल्क जमा करके तथा विधिवत् अनुमति प्राप्त करके ही विज्ञापन पट्ट, क्यास लगायेगा तथा दीवाल प्रचार व अन्य प्रचार कार्य करेगा, अन्यथा किसी भी दशा में नहीं ।

5-इस उपविधियों के अन्तर्गत मुख्य अधिकारी/अपर मुख्य अधिकारी लाईसेसिंग अधिकारी होगें या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी / कर्मचारी भी लाईसेंस निर्गत कर सकते हैं ।

6-लाईसेंस अधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील आदेश की सूचना मिलने पर 15 दिवस के अन्दर जिला पंचायत, एटा के समक्ष हो सकेगी और अध्यक्ष जिला पंचायत का आदेश मानना दोनों पक्षों को बाध्यकारी होगा ।

7-केवल उन्हीं विज्ञापन पट्टों, क्यासों व दीवाल प्रचार व अन्य प्रचार सामग्री को प्रदर्षित , स्थापित एवं चित्रित करने की अनुमति दी जायेगी जो अश्लील न हो और किसी भी तरह समाज विरोधी न हो ।

64

[भाग 3

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

8 -लाईसेंस के इच्छुक व्यक्ति/ संस्था, फर्म अथवा कम्पनी को विज्ञापन सामग्री की साइज व किस्म विवरण विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार व अन्य प्रचार सामग्री की साइज व किस्म किस स्थान पर विज्ञापन प्रकाशित करना है को भी इंगित करते हुए एक प्रार्थना-पत्र कार्यालय जिला पंचायत, एटा में प्रस्तुत करना होगा । लाईसेंस अधिकारी स्वयं या अधिकृत अधिकारी या कर्मचारी के माध्यम से स्थल का निरीक्षण करा सकता है । निरीक्षण में इस बात का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि उक्त विज्ञापन पट्ट , क्यास , दीवाल प्रचार तथा अन्य प्रचार सामग्री किसी ऐसे स्थान पर न हो , जिससे यातायात में बाधा उपस्थित हो और वाहन चालकों की असुविधा के कारण दुर्घटना सम्भव हो, तदुपरान्त निर्धारित शुल्क जमा करने के पश्चात् लाईसेंस जारी करेगा ।

9-लाईसेंस अधिकारी किसी भी ऐसे विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार या अन्य प्रचार सामग्री को हटवा सकता है, जो कि इन उपविधियों के अन्तर्गत उपयुक्त न पाये गये हों । लाईसेंस अधिकारी को यह भी अधिकार होगा कि ऐसे विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार तथा अन्य प्रचार सामग्री हटाने में जो व्यय आदि हुआ हो, वह सम्बन्धित व्यक्ति/ संस्था अथवा कम्पनी से राजस्व के बकाये की भांति वसूल कर सकता है ।

10-विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार तथा अन्य सामग्री की दरें निम्न प्रकार होगीं-

मार्ग कानाम क्र० सं०

1

2

1

एटा से अलीगढ़ रोड (प्रतिवर्ष)

2

एटा से कानपुर रोड (प्रतिवर्ष)

3

एटा से आगरा रोड (प्रतिवर्ष)

4 एटा से शिकोहाबाद रोड (प्रतिवर्ष)

5 एटा से कासगंज रोड (प्रतिवर्ष)

6 एटा से अलीगंज रोड (प्रतिवर्ष)

7 अलीगंज से कायमगंज रोड (प्रतिवर्ष)

8 एटा-जलेसर वाया निधौली रोड (प्रतिवर्ष)

9 अलीगढ़-जलेसर रोड (प्रतिवर्ष)

10 जलेसर-आगरा रोड (प्रतिवर्ष)

11 एटा-सहावर रोड (प्रतिवर्ष)

12

एटा-गंजडुण्डवारा रोड (प्रतिवर्ष)

13 एटा-मारहरा रोड (प्रतिवर्ष)

14 एटा-सकीट रोड वाया जी०आई०सी० (प्रतिवर्ष)

15 एटा-सकीट रोड वाया चपरई (प्रतिवर्ष)

16 करतला-औंछा रोड (प्रतिवर्ष)

क्यास की शुल्क दर

विज्ञापन पट्ट की शुल्क दर प्रति फुट

दीवार प्रचार तथा अन्य प्रचार सामग्री की शुल्क दरें

4

3

5

रु०

रु०

रु०

50.00

50,00

150,00

50.00

150.00 50.00

50.00

50.00

150.00

50.00

50.00

150.00

50.00

50.00

150.00

50.00

50.00

150.00

50.00

50.00

150.00

25.00

25.00

75.00

25.00

25.00

75.00

75.00 25.00

25.00

15.00

25.00

50.00

50.00 15.00

25:00

50.00 15.00

25:00

15.00

50.00

25:00

50.00 15:00

25.00

15.00

25:00

50.00 भाग 31

65

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

1

2

17 मलावन-गोला कुँआ रोड (प्रतिवर्ष)

18 अलीगंज- सराय अगहत रोड (प्रतिवर्ष)

19 अलीगंज-मैनपुरी रोड (प्रतिवर्ष)

20 अलीगंज- कुरावली रोड (प्रतिवर्ष)

21 जैथरा कुरावली रोड ( प्रतिवर्ष)

4

3

5

रु०

रु०

50.00 15:00

25:00

15.00

25.00

50.00

25.00

50.00 15.00

15,00

25.00

50.00

15.00

25.00.

50.00

11-अस्थायी लाईसेंस दरें, टूरिंग टाविक तथा सर्कस प्रदर्शन के लिए पट, क्यास, दीवाल प्रचार तथा अन्य प्रचार सामग्री की उपविधि की धारा 01 में वर्णित दरों की एक चौथाई होगी, भले ही प्रदर्शन की अवधि तीन माह से कम हो ।

12-धारा 10 के अन्तर्गत निर्धारित दरों में परिवर्तन/ परिवर्धन जिला पंचायत में विशेष प्रस्ताव से किया जा सकता है ।

13-जिला पंचायत हित में लाईसेंस शुल्क वसूली का कार्य जनपदवार /तहसीलदार, खुली निविदा आमन्त्रित कर ठेके पर भी कराया जा सकता है । ठेके पद्धति के लिए ठेकेदारों के सम्बन्ध में जिला पंचायत अपने हित में शर्तों का निर्धारण कर सकती है ।

14- केन्द्र तथा प्रदेश सरकार का नीतियों / कार्यक्रमों के प्रचार, प्रसार हेतु सरकारी विभागों द्वारा लगाये गये विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार व अन्य प्रचार सामग्री इन उपविधियों के अन्तर्गत उक्त लाईसेंस मुक्त होगी ।

15-भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार के किन्ही अधिनियमों, नियमावलियों अथवा शासनादेश व विज्ञापन पट्ट, क्यास, दीवाल प्रचार तथा अन्य प्रचार सामग्रियों के सम्बन्ध में जारी निर्देश यथावत लागू माने जायेंगे ।

16-भारत निर्वाचन आयोग अथवा राज्य निर्वाचन आयोग के अधीन नियन्त्रण एवं निर्देश में सम्पन्न होने वाले चुनाव में सम्बन्धित्त प्रचार सामग्रियों एवं उपविधियों के अन्तर्गत लाईसेंस व्यवस्था से मुक्त समझे जायेगें । शर्त यह है कि उपरोक्त निर्वाचन आयोग द्वारा अन्यथा दिशा-निर्देश न जारी किये गये हों ।

17-इन उपविधियों के अन्तर्गत लाईसेंस की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च होगी । आगामी 30 अप्रैल तक जैसे भी हो, उपविधि की धारा 10 में निर्धारित शुल्क जमा करके नवीनीकरण किया जा सकेगा, यदि लाईसेंसधारी द्वारा 30 अप्रैल तक अपना लाईसेंस नवीनीकृत नहीं कराया तो प्रति तिमाही लाईसेंस शुल्क की 25 प्रतिशत अतिरिक्त बिलम्ब शुल्क देने पर ही नवीनीकरण किया जा सकेगा ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित, 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लंघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु० 1,000.00 तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिस में उल्लंघन जारी रहा है तो रु० 50.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल,अलीगढ़ ।

66

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25 अप्रैल, 2022 ई०

चिगनी मट्टे की पूर्व स्वीकृति उपविधियाँ

सं० 1853/ एल ०बी० ए०/ 2022-23-जिला पंचायत, एटा ने चिमनी भट्टे की पूर्व स्वीकृति उपविधियों में उपविधि की धारा 06, 08 एवं 13 में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया है । जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम 1961 यथा संशोधित 1994 की धारा 242 (2) के अधीन जनसाधरण को सूचनार्थ एवं उन पर आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जाती है । उन आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर कार्यालय में प्राप्त होगें । प्राप्त आपत्तियों पर विचार कर उन्हे अन्तिम रूप देते हुए आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ को अनुमोदनार्थ हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः मैं गौरव दयाल, आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242 (2 ) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर इनकी पुष्टि करते हुये एतद्द्वारा प्रकाशित करता हूँ । यह उपविधियां प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगी ।

संशोधित उपविधियाँ

प्रस्तावित उपविधि

वर्तमान प्रचलित उपविधि

उपविधि सं० 6-अनुज्ञा प्राप्त करने के लिये आवेदन-पत्र निर्धारित प्रारूप पर किया जायेगा । जो निर्धारित शुल्क जमा कर जिला पंचायत, एटा के कार्यालय से प्राप्त किया जायेगा । इसका मूल्य नये चिमनी मट्ट के लिये मु० 500 तथा नवीनीकरण के लिये मु० 200 प्रति आवेदन-पत्र होगा ।

उपविधि सं० 6-अनुज्ञा प्राप्त करने के लिये आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप पर किया जायेगा । जो निर्धारित शुल्क जमा कर जिला पंचायत. एटा के कार्यालय से प्राप्त किया जायेगा । इसका मूल्य नये चिमनी भट्ट के लिये मु० 100 तथा नवीनीकरण के लिये मु0 50 प्रति आवेदन - पत्र होगा ।

उपविधि सं० 08 -शुल्क निम्न लिखित होगा ।

उपविधि सं० 08- शुल्क निम्न लिखित होगा ।

अ चिमनी भट्टा

अ चिमनी भट्टा

4,000.00

200.00

बिना चिमनी के ईट भट्टा 1,000.00 ब बिना चिमनी के ईट भट्टा

1,000.00 स टाइल्स अनुज्ञा-पत्र 3,000.00 स टाइल्स अनुज्ञा-पत्र

द चूना या सुर्खी इंजन की शक्ति द्वारा 2,000.00

बनाने या फूकने का अनुज्ञा-पत्र

द चूना या सुखी इंजन की 1,000.00 शक्ति द्वारा बताने या फूकने का अनुज्ञा-पत्र

य चूना या सुर्वी बैल , चक्की द्वारा 1,000.00 बनाने या फूकने का अनुज्ञा-पत्र शुल्क

य चूना या सुर्खी बैल, चक्की द्वारा बनाने या फूकने का अनुज्ञा-पत्र शुल्क 500.00

उपविधि सं० 13 - प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर तक नवीनीकरण न कराने पर चिमनी भ‌ट्टा के लिए विलम्ब शुल्क मु० रु0 500.00 तथा अन्य के लिये विलम्ब शुल्क मु० रु0 100.00 देना होगा । तत्पश्चात् लाइसेन्स निरस्तीकरण की नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी ।

उपविधि सं ० 13- प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर तक नवीनीकरण न कराने पर चिमनी भट्टा के लिए विलम्ब शुल्क मु० रु0 1,000.00 तथा अन्य के लिये विलम्ब शुल्क मु० रु0 200.00 देना होगा । तत्पश्चात लाइसेन्स निरस्तीकरण की नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी । 30 सितम्बर तक शुल्क जमा नहीं होता है तो भू राजस्व की भाँति वसूली कार्यवाही की जायेगी । जिला पंचायत, एटा को यह भी अधिकार होगा कि उपविधि की धारा 08 में निर्धारित शुल्क में प्रत्येक तीन वर्ष बाद 25 प्रतिशत धनराशि की बढ़ोत्तरी कर सकेंगी।

अतः उपरोक्त प्रस्तावित उपविधि में दर्शाये गये संशोधित दरों की पुष्टि कर उ ०प्र० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 242(2) के अधीन प्रस्तावित उपविधि में की गयी संशोधित दरों को अनमोदित कर उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित कराये जाने का कष्ट करें ।

67 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु० 1,000.00 तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिस में उल्लंघन जारी रहा है तो रु0 50. 00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्डदिया जा सकता है ।

गौरव दयाल आयुक्त अलीगढ़ मण्डल,अलीगढ़ ।

25 अप्रैल, 2022 ई०

खोआ भट्टी की पूर्व स्वीकृति उपविधियाँ

सं० 1854/ एल ० बी० ए० / 2022-23-जिला पंचायत, एटा ने खोआ मट्टी की पूर्व स्वीकृति उपविधियों में उपविधि संख्या 11 व 12 में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया है । जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम 1961 यथा संशोधित 1994 की धारा 242 (2 ) के अधीन जनसाधरण को सूचनार्थ एवं उन पर आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जाती है । उन आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर कार्यालय में प्राप्त होगें । प्राप्त आपत्तियों पर विचार कर उन्हें अन्तिम रूप देते हुए आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ को अनुमोदनार्थ हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः मै. गौरव दयाल, आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242 (2 ) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर इनकी पुष्टि करते हुये एतद्वारा प्रकाशित करता हूँ । यह उपविधिया प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी।

संशोधित उपविधियाँ

प्रस्तावित उपविधि

वर्तमान प्रचलित उपविधि

उपविधि सं ० 11- खोआ बनाने अथवा उसका व्यवसाय करने वाले व्यक्ति की लाइसेन्स शुल्क के रूप में रु0 500.00 प्रतिवर्ष अदा कराना होगा तथा यही शुल्क नवीनीकरण की दशा में भी भुगतान करना होगा ।

उपविधि सं० 11 -खोआ बनाने अथवा उसका व्यवसाय करने वाले व्यक्ति की लाइसेन्स शुल्क के रूप में रु0 1,000.00 प्रतिवर्ष अदा कराना होगा तथा यही शुल्क नवीनीकरण की दशा में भी भुगतान करना होगा । जिला पंचायत. एटा को प्रत्येक तीन वर्ष के बाद शुल्क में 25 प्रतिशत की वृद्धि करने का अधिकार होगा ।

उपविधि सं० 12-निर्धारित शुल्क का भुगतान वित्तीय वर्ष प्रारम्भ होने के एक माह के अन्दर अर्थात्त 30 अप्रैल तक जमा करना अनिवार्य है । निर्धारित समय में भुगतान न करने पर विलम्ब शुल्क रु 0 50.00 का भुगतान करने पर ही नवीनीकरण स्वीकार किया जा सकेगा ।

उपविधि सं० 12- निर्धारित शुल्क का भुगतान वित्तीय वर्ष प्रारम्भ होने के एक माह के अन्दर अर्थात्त 30 अप्रैल तक जमा करना अनिवार्य है । निर्धारित समय में मुगतान न करने पर विलम्ब शुल्क रु0 200.00 का भुगतान करने पर ही नवीनीकरण स्वीकार किया जा सकेगा ।

अतः उपरोक्त प्रस्तावित उपविधि में दर्शाये गये संशोधित दरो की पुष्टि कर उ ० प्र० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 242(2) के अधीन प्रस्तावित्त उपविधि में की गयी संशोधित दरो को भुनमोदित कर उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित कराये जाने का कष्ट करें ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित, 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लंघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु0 1,000.00 तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिस में उल्लंघन जारी रहा है तो रु० 50.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल , आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ ।

11 घ 68

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

उद्योग, संग्रह केन्द्र तथा उत्पादन एवं बिक्री केन्द्र विनियमित करने सम्बन्धी उपविधियाँ

25 अप्रैल, 2022 ई०

सं० 1855/ एल ० बी०ए०/2022-23- जिला पंचायत, एटा ने उद्योग, संग्रह केन्द्र तथा उत्पादन एवं बिक्री केन्द्र की पूर्व स्वीकृति उपविधियों में उपविधि संख्या 18 में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया है । जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम , 1961 यथा संशोधित, 1994 की धारा 242 (2 ) के अधीन जनसाधरण को सूचनार्थ एवं उन पर आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जाती है । उन आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर कार्यालय में प्राप्त होगें । प्राप्त आपत्तियों पर विचार कर उन्हे अन्तिम रूप देते हुए आयुक्त अलीगढ़ मण्डलअलीगढ़ को अनुमोदनार्थ हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः मै, गौरव दयाल, आयुक्त अलीगढ़ मण्डल , अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242(2) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर इनकी पुष्टि करते हुये एतद्द्वारा प्रकाशित करता हूँ। यह उपविधिया प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

संशोधित उपविधियों

संशोधित

वर्तमान शुल्क

प्रस्तावित शुल्क

लाइसेंस शुल्क प्रतिवर्ष निम्न प्रकार होगी तथा नवीनीकरण के लिये भी वही शुल्क जमा कर नवीनीकरण कराया जा सकता है ।

लाइसेंस शुल्क प्रतिवर्ष निम्न प्रकार होगा तथा नवीनीकरण के लिये भी वही शुल्क जमा नवीनीकरण कर कराया जा सकता है । जिला पंचायत , एटा को प्रत्येक तीन वर्ष के बाद निम्न शुल्क में 25 प्रतिशत की वृद्धि करने का अधिकार होगा ।

नाम मद

नाम मद

क्र०सं ०

वर्तमान शुल्क

क्र० सं०

प्रस्तावित शुल्क 1

2

4

5

3

6 रु०

잉

1 चीनी मिल

5,000.00 1

चीनी मिल

2 सल्फर प्लान्ट

500.00 2

सल्फर प्लान्ट

2,000.00

3 गन्ना पेरने का क्रेशर

500.00 3

गन्ना पेरने का क्रेशर

2,000.00

4

200.00 4

गन्ना पेरने का शक्ति चालक

गन्ना पेरने का शक्ति चालक

1,000.00

खाउकोल्हू

खाउ कोल्हू

5

200.00 5

खॉड मशीन पावर

खाँड मशीन पावर

1,000.00

150.00 6

6 आटा चक्की

आटा चक्की

300.00

100.00 7

7

300.00 तेल कोल्हू

तेल कोल्हू

8

250.00

150.00 8

धान कूटने की मशीन

धान कूटने की मशीन

9

150.00 9

150.00

रूई धुनने की मशीन

रूई धुनने की मशीन

10 खॉड मशीन दस्ती

100.00 10 खॉड मशीन दस्ती

200.00

11 आरा मशीन व खराद

200.00 11

आरा मशीन व खराद

500.00

12 धान से चावल निकालने का

धान से चावल निकालने का

5,000.00

1,000.00 12

कारखाना

कारखाना भाग 31

69

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

2

1

3 रु०

13

5

6 4

रु०

5,000.00 13

दूध से पाउडर या दूध से अन्य सामान बनाने का मिल

14 सरिया बनाने का मिल

दूध से पाउडर या दूध से अन्य सामान बनाने का मिल

500.00 14

15

सरिया बनाने का मिल

5000.00

2,000.00 15

       फल तथा सब्जीयों को सुरक्षित                         फल तथा सब्जीयों को सुरक्षित
       रखने के लिये भण्डार (कोल्ड                          रखने के लिये भण्डार (कोल्ड
       स्टोरेज)                                           स्टोरेज)
16     पत्थर व इंट की रोडी तोड़ने व        500.00 16       पत्थर व इंट की रोडी तोड़ने व
       पीसने का कार्य का कारखाना                           पीसने का कार्य का कारखाना
17     वर्षा या वर्षा से वस्तुये बनाने का  250.00 17       वर्फ या वर्फ से वस्तुये बनाने का  500.00
       कारखाना                                             कारखाना
18    साबुन फैक्ट्री                       200.00 18      साबुन फैक्ट्री                    3,000.00
19     कोच का सामान बनाना                  200.00 19       कोच का सामान बनाना                500.00
20     पैट्रोल,डीजल तथा अन्य ज्वलन         500.00 20       पैट्रोल, डीजल तथा अन्य ज्वलन     5,000.00
       शील पदार्थ का संग्रह                                शील पदार्थ का संग्रह
21     मिनी सीमेन्ट प्लान्ट               2000.00  21      मिनी सीमेन्ट प्लान्ट             3,000.00
22     कपास से विनोला निकालने की           200.00 22       कपास से विनोला निकालने की         500.00
       मशीन                                                मशीन
23     प्लास्टिक, नाइलोन की वस्तुयें      1000.00 23       प्लास्टिक, नाइलोन की वस्तुयें    2,000.00
       बनाने का कारखाना                                    बनाने का कारखाना
24     अन्य मिल व फैक्ट्री               1,000.00 24       अन्य मिल व फैक्ट्री              2,000.00
25     गैस गोदाम                                           गैस गोदाम

1,000.00 25

26

5,000.00

       केरोसिन ऑयल डिपो                    0.00 26       केरोसिन ऑयल डिपो                5,000.00
27     स्टील अलमारी वर्क्सशॉप              0.00 27       स्टील अलमारी वर्क्सशॉप         3,000.00
28     शटरिंग व्यवसाय                      0.00 28       शटरिंग व्यवसाय                  1,000.00
29    धर्मकाटा                             0.00 29      धर्मकाटा                         1,500.00
30    कोल डिपो                             0.00 30      कोल डिपो                          500.00
31     मेथा प्लान्ट/शिवाला प्लान्ट         0.00 31       मेथा प्लान्ट/शिवाला प्लान्ट     1,000.00
32     दूध डेयरी                           0.00 32       दूध डेयरी                       1,000.00
33    नर्सरी                               0.00 33       नर्सरी                           500.00
34     बेकरी फैक्ट्री                      0.00 34       बेकरी फैक्ट्री                 4,000.00

70

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

1

2

35

इण्टर लॉकिंग ब्रिक / टाइल्स

निर्माता

मिनरल वाटर

36

37 पोल्ट्रीफार्म

38 नमकीन कारखाना

39 नर्सिंगहोम

40 ट्रैक्टर ऐजेन्सी

41 आटो मोबाइल ऐजेन्सी ( चार पहिया)

42 दो पहिया वाहन ऐजेन्सी

43 ट्रैक्टर चलित आटा चक्की

44

मिनी राईस मिल ( पालेसर)

45 ट्रैक्टर की ट्राली निर्माता

46 चाय फैक्ट्री/कॉफी फैक्ट्री

47 चकोरी प्लान्ट

[भाग 3

4

5

6 3 रु०

0.00 35

500.00 इण्टर लॉकिंग ब्रिक /टाइल्स निर्माता

0.00 36 मिनरल वाटर

500.00

0.00 37

1,000.00.

पोल्ट्री फार्म

0,00 38 नमकीन कारखाना

0.00 39

1,000.00 नर्सिंग होम

0.00 40 ट्रैक्टर ऐजेन्सी

5,000.00

0.00 41 आटो मोबाइल ऐजेन्सी (चार पहिया)

0.00 42 दो पहिया वाहन ऐजेन्सी

0.00 43

500.00 ट्रैक्टर चलित आटा चक्की

0.00 44

1,000.00 मिनी राईस मिल (पालेसर).

500.00 0.00 45 ट्रैक्टर की ट्राली निर्माता

0.00 46 चाय फैक्ट्री/कॉफी फैक्ट्री

0.00 47 चकोरी प्लान्ट

5,000.00

अतः उपरोक्त प्रस्तावित उपविधि में दर्शाये गये संशोधित दरों की पुष्टि कर उ० प्र० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 242(2) के अधीन प्रस्तावित उपविधि में की गयी संशोधित दरों को अनमोदित कर उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित कराये जाने का कष्ट करें ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित, 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लंघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु0 1000.00 तक काअर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिसमें उल्लंघन जारी रहा है तो रु० 50.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ ।

71 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25अप्रैल, 2022 ई ०

विभिन्न प्रकार के कारोबार व दुकानों आदि की पूर्व स्वीकृति उपविधियाँ

सं०1856/ एल०बी०ए ०/ 2022-23-जिला पंचायत, एटा ने विभिन्न प्रकार के करोबार व दुकानों आदि की पूर्व स्वीकृति उपविधियों में उपविधि संख्या 03 (अ) में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया है । जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम 1961 यथा संशोधित 1994 की धारा 242 (2 ) के अधीन जनसाधरण को सूचनार्थ एवं उन पर आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जाती है । उन आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर कार्यालय में प्राप्त होगें । प्राप्त आपत्तियों पर विचार कर उन्हे अन्तिम रूप देते हुए आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ को अनुमोदनार्थ एवं गजट में प्रकाशनार्थ हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः मै, गौरव दयाल, आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा-242 (2 ) के अधीन प्रदत्त अधिकारो का प्रयोग कर इनकी पुष्टि करते हुये एतद्वारा प्रकाशित करता हूँ । यह उपविधिया प्रकाशन की तिथि से प्रभावीहोगी ।

संशोधित उपविधियों

नाम मद

नाम मद

क्र० सं०

वर्तमान दरें

प्रस्तावित दरें

क्र० सं०

2

4

1

3

5

6

1

1

100.00

250.00

कपड़े की दुकान

कपड़े की दुकान

100.00 2

300.00

खाद्य सामिग्री की दुकानें जिसमें होटल 2 खाद्य सामिग्री की दुकानें जिसमें होटल और हलवावी, बूरा, वत्तासा, गुण,चीनी आदि सम्मिलित है ।

और हलवायी, बूरा , वतासा, गुण, चीनी आदि सम्मिलित है ।

300.00

100.00

3 संयुक्त समाज की दुकान नलकूप हैण्ड पम्प, कपड़े बनाने की दुकान सम्मिलित है।

3 संयुक्त समाज की दुकान नलकूप हैण्ड पम्प, कपड़े बनाने की दुकान सम्मिलित है ।

50.00 4

4

100.00 पान. तम्बाकू तथा बीड़ी, सिगरेट

पान, तम्बाकू तथा बीड़ी, सिगरेट

300.00

परचूनी

5 परचूनी

100.00 5

500.00

100.00 6

6   सुनारी की दुकान / सर्राफ                       सुनारी की दुकान/ सर्राफ
7   जूट /विसातखाना                      50.00  7   जूट/विसातखाना                     150.00
8   वर्तन की दुकान                     100.00  8   वर्तन की दुकान                    300.00
9 जूता. चप्पल, कपड़ा सिलाई आदि का       50.00  9   जूता. चप्पल, कपड़ा सिलाई आदि का   200.00
    दुकान                                          दुकान
10 मेडीकल स्टोर                                    मेडीकल स्टोर                      500.00

200.00 10

11

50.00 11

250.00 गल्ले की छोटी दुकान फड़ पर लगी दुकान

गल्ले की छोटी दुकान फड़ पर लगी दुकान

500.00 12 गल्ले की आदत / थोक व्यापारी

250.00 12

गल्ले की आदत/ थोक व्यापारी

100.00

250.00 13 चिकित्सक/ मेडिकल प्रेक्टिशनर

13 चिकित्सक/ मेडिकल प्रेक्टिशनर

14 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान

100.00 14

100.00

300.00

15 सीमेण्टकी दुकान

15 सीमेण्ट की दुकान

300.00

16 खाद की दुकान

100.00 16

खाद की दुकान

500.00 17 टेण्ट सामियाना की दुकान

100.00 17

टेण्ट सामियाना की दुकान 72

[भाग 3 उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

1

3

5

6 2

4

500.00

200.00

18 पेन्ट सरिया, भवन निर्माण सामग्री आदि

18 पेन्ट - सरिया, भवन निर्माण सामग्री आदि

19

500.00 19

1,000.00 मधपान के व्यवसाय/ दुकान (अंग्रेजी शराब)

मघपान के व्यवसाय / दुकान (अंग्रेजी शराब)

1,500.00

20 देशी शराब की दुकान

1,000.00

20 देशी शराब की दुकान

500.00

100.00 21

21   साईकिल की दुकान                                साईकिल की दुकान
22   मोटर साईकिल स्कूटर मरम्मत दुकान   100.00.  22  मोटर साईकिल स्कूटर मरम्मत दुकान   250.00
23   साईकिल मरम्मत की दुकान              50.00 23   साईकिल मरम्मत की दुकान             100.00
24   दूध बेचने का व्यवसाय              100.00  24   दूध बेचने का व्यवसाय               100.00
25   दुध से क्रीम निकालने की मशीन                                                     500.00

200.00 25

दुध से क्रीम निकालने की मशीन

300,00

0.00 26 लकड़ी के फर्नीचर की दुकान

26 लकड़ी के फर्नीचर की दुकान

500.00 27 लोहे के फर्नीचर (ग्रिल निर्माता)

0.00 27 लोहे के फर्नीचर ( ग्रिल निर्माता)

250.00 28 साउण्ड सर्विस

0.00 28 साउण्ड सर्विस

250.00

0.00 29 मोबाइल विक्रेता/ मरम्मत

29 मोबाइल विक्रेता/ मरम्मत

250,00

30

0.00 स्टेशनरी की दुकान

30. स्टेशनरी की दुकान

0.00 31 सब्जी की आढ़त

500.00 31 सब्जी की आढ़त

250.00

32 इलैक्ट्रोनिक उपकरण की दुकान

32

0.00 इलैक्ट्रोनिक उपकरण की दुकान

500.00 33

0.00 33 बीज कीटनाशक विक्रेता

बीज कीटनाशक विक्रेता

34 फोटो स्टेट

34 फोटो स्टेट

0.00

200.00

35 प्रिटिंग प्रेस

35 प्रिटिंग प्रेस

0.00

300.00

36

300,00 प्लास्टिक फर्नीचर की दुकान

0.00 36 प्लास्टिक फर्नीचर की दुकान

250.00 37

0.00 37 फोटो स्टूडियों

फोटो स्टूडियों

250.00

0.00 38 स्क्रैप विक्रेता (कवाड़ी)

38 स्क्रैप विक्रेता (कवाड़ी)

300.00

बैट्री निर्माता

39 बैट्री निर्माता

0.00 39

250.00

0.00 40 टेलरिंग शॉप ( तीन मशीन से अधिक)

40 टेलरिंग शॉप (तीन मशीन से अधिक)

जिला पंचायत, एटा को प्रत्येक तीन वर्ष के बाद उपरोक्त शुल्क में 25 प्रतिशत की वृद्धि करने का अधिकार होगा ।

अतः उपरोक्त प्रस्तावित उपविधि में दर्शाये गये संशोधित दरों की पुष्टि कर उ ०प्र० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 242 (2) के अधीन प्रस्तावित उपविधि में की गयी संशोधित दरों को अनमोदित कर उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित कराये जाने का कष्ट करें ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम , 1961 तथा संशोधित, 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत , एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु0 1,000.00 तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिस में उल्लंघन जारी रहा है तो रु0 50.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल , अलीगढ़ ।

73 भाग 31

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

25 अप्रैल, 2022 ई०

पशुमेलों, पशुपैठों, बाजारों, प्रदर्शनी, औद्योगिक प्रदर्शनी की पूर्व स्वीकृति उपविधियों सं० 1857/ एल० बी० ए० / 2022-23-जिला पंचायत, एटा ने पशुमेलों, पशु पैठों, बाजारो , प्रदर्शनी, औद्योगिक प्रदर्शनी की पूर्व स्वीकृति उपविधियों में उपविधि संख्या 12 में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव किया है । जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम, 1961 यथा संशोधित 1994 की धारा 242(2) के अधीन जनसाधरण को सूचनार्थ एवं उन पर आपत्ति तथा सुझाव आमंत्रित करने हेतु प्रकाशित की जाती है । उन आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जायेगा जो प्रकाशन के 30 दिन के अन्दर कार्यालय में प्राप्त होगें । प्राप्त आपत्तियों पर विचार कर उन्हें अन्तिम रूप देते हुए आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ को अनुमोदनार्थ हेतु प्रेषित की जायेगी ।

अतः मै गौरव दयाल, आयुक्त अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ उक्त अधिनियम की धारा 242(2 ) के अधीन प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग कर इनकी पुष्टि करते हुये एतद्वारा प्रकाशित करता हूँ । यह उपविधिया प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगी ।

संशोधित उपविधियाँ

प्रस्तावित उपविधि

वर्तमान प्रचलित उपविधि

उपविधि सं० 12 प्रत्येक व्यक्ति जो पशुमेला, पशुपैठ, सब्जीपैठ एवं औद्योगिक प्रदर्शनी लगाना अथवा चलाना चाहता है. निम्न शुल्क जमा करना होगा और यही शुल्क लाइसेन्स नवीनीकरण पर लागू होगाः

उपविधि सं० 12 प्रत्येक व्यक्ति जो पशुमेला, पशु मेला प्रदर्शनी एवं औद्योगिक प्रदर्शनी लगाना अथवा चलाना चाहता है । प्रतिवर्ष निम्न शुल्क देना होगा और यही शुल्क लाइसेन्स के नवीनीकरण पर देय होगा:

रु० प्रतिवर्ष

रु० प्रतिवर्ष

5,000.00

1. पशुमेला

1. पशुमेला

4,000.00

1000.00

2. पशुपैठ

2 पशुपैठ

3. सब्जी पैठ

4,000.00 3. सब्जी पैठ

1000.00

4,000.00

4. मेला

1000.00

4. मेला

4,000.00

2000.00

5. प्रदर्शनी एवं औद्योगिक प्रदर्शनी

5. प्रदर्शनी एवं औद्योगिक प्रदर्शनी

जिला पंचायत एटा को प्रत्येक तीन वर्ष के बाद उपरोक्त शुल्क में 25 प्रतिशत की वृद्धि करने का अधिकार होगा ।

अतः उपरोक्त प्रस्तावित उपविधि में दर्शाये गये संशोधित दरों की पुष्टि कर उ ०प्र० क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 242 (2) के अधीन प्रस्तावित उपविधि में की गयी संशोधित दरों को भुनमोदित्त कर उत्तर प्रदेश गजट में प्रकाशित कराये जाने का कष्ट करें ।

दण्ड

उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 तथा संशोधित, 1984 की धारा 240 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत, एटा घोषणा करती है कि उपरोक्त में से किसी भी उपविधि का उल्लंघन करने पर उल्लंघनकर्ता को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने पर अंकन रु ० 1,000: 00 तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है तथा प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर प्रत्येक ऐसे दिवस के लिए जिस में उल्लंघन जारी रहा है तो रु0 50.00 प्रतिदिन के हिसाब से अर्थदण्ड किया जा सकता है और अर्थदण्ड जमा न होने पर तीन माह का कारावास भी दण्ड दिया जा सकता है ।

गौरव दयाल, आयुक्त, अलीगढ़ मण्डल, अलीगढ़ ।

पी०एस ० यू०पी०-7 हिन्दी गजट - भाग 3-2022 ई० ।

मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री , उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ।

रजिस्टर्ड नं ० - ए०डी०-4

लाइसेन्स सं ०- डब्ल्यू०पी०-41 (लाइसेन्स टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट)

सरकारी गज़ट , उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रकाशित

प्रयागराज , शनिवार , 14 मई , 2022 ई० (बैशाख 24 , 1944 शक संवत्)

भाग 8

सरकारी कागज- पत्र , दबाई हुई रूई की गांठों का विवरण- पत्र , जन्म- मरण के आंकड़े, रोगग्रस्त होने वालों और मरने वालों के आंकड़े, फसल और ऋतु सम्बन्धी रिपोर्ट, बाजार- भाव, सूचना, विज्ञापन इत्यादि ।

कार्यालय, नगरपालिका परिषद्, टाण्डा, जनपद अम्बेडकरनगर

09 मई, 2022 ई०

सं० 187/ न० पा ० प ० टा ० / 2022- नगरपालिका अधिनियम , 1916 की धारा 298 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद्, टाण्डा अम्बेडकरनगर अपनी सीमान्तर्गत नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 128 (2) उपधारा (1 ) का ( सात) के अन्तर्गत विज्ञापनों पर कर (जो समाचार पत्रों में प्रकाशित न हो) आरोपित करने हेतु अधिनियम की धारा 131 की कार्यवाही के लिए तथा धारा 132 से 135 तक की अग्रिम कार्यवाही हेतु पाण्डुलेख तैयार कर मा० बोर्ड के समक्ष विशेष प्रस्ताव संख्या 3 दिनांक 12 अप्रैल, 2021 सर्वसम्मति से पारित किया गया है । तत्पश्चात् दिनांक 15 जुलाई, 2021 को आपत्ति आमंत्रण हेतु दैनिक समाचार- पत्र 'जन मोर्चा' में प्रकाशित कराया गया। निर्धारित समय के 15 दिन के अतिरिक्त 21 फरवरी, 2022 तक कोई आपत्ति प्राप्त न होने के कारण आगामी बोर्ड बैठक के विशेष प्रस्ताव संख्या 3 के द्वारा सर्वसम्मति से दिनांक 25 अप्रैल, 2022 नियमावली प्रकाशन हेतु स्वीकृति देते हुये पुष्टि की गयी । जो नगरपालिका परिषद टाण्डा के सीमान्तर्गत भवनों एंव अन्य स्थानों पर अश्लील व अभद्र पोस्टरों आदि के प्रदर्शनों के नियंत्रण हेतु तैयार कर सरकारी गजट में प्रकाशन हेतु प्रस्तुत है जो प्रकाशित होने के दिनांक से प्रभावी मानी जायेगी ।

नगर पालिका परिषद टाण्डा जनपद अम्बेडकरनगर ( आकाश चिन्ह, विज्ञापनों का विनियमन, नियंत्रण एवं अनुज्ञप्ति शुल्क वसूली) उपविधि, 2021

संक्षिप्त नाम व विस्तार और प्रारम्भ-

1-यह उपविधि नगर पालिका परिषद टाण्डा जनपद अम्बेडकरनगर "आकाश चिन्ह, विज्ञापनों का विनियमन, नियंत्रण एंव अनुज्ञप्ति शुल्क वसूली उपविधि 2021 " कही जायेगी।

2- इसका विस्तार नगर पालिका परिषद टाण्डा जनपद अम्बेडकरनगर का सम्पूर्ण क्षेत्र होगा ।

3-यह उपविधि सरकारी गजट में प्रकाशित होने के दिनांक से लागू होगी।

परिभाषायें-

जब तक विषय या संदर्भ में कोई बात प्रतिकूल इस उपविधि में न हो-

(एक) अधिनियम का तात्पर्य उ० प्र ० नगरपालिका अधिनियम, 1916 से है ।

(दो) नगरपालिका का तात्पर्य नगरपालिका परिषद् टाण्डा जनपद अम्बेडकरनगर से है ।

204

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

[भाग 8

(तीन) विज्ञापन का तात्पर्य विज्ञापन प्रतीक या आकाश चिन्ह के माध्यम से प्रदर्शित करने से है ।

(चार) विज्ञापनकर्ता का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसे इस उपविधि के अधीन कोई विज्ञापन या विज्ञापन पट्ट पर निर्मित करने, प्रदर्शित करने, संप्रदर्शित करने लगाने, चिपकाने, लिखने, चित्रित करने या लटकाने के लिए लिखित अनुमति प्रदान की गयी हो और ऐसे व्यक्ति में उसका अभिकर्ता, प्रतिनिधि या संवक सम्मिलित है और भूमि एवं भवन का स्वामी भी सम्मिलित है ।

(पाँच) आकाश चिन्ह से तात्पर्य है शब्द, वर्ण नमूना चिन्ह युक्त, या अन्य प्रतिरूप जो विज्ञापन घोषणा या निर्देश के रूप में हो जो किसी भवन या ढाँचे पर उसके पूर्णतः या अंशतः किसी खम्मे, बल्ली, ध्वजदंड, चौखट या अन्य किसी अवलम्ब के सहारे रखा हुआ हो या उससे संलग्न हो जो किसी सड़क या सार्वजनिक स्थान के किसी भी स्थान से पूर्णतः या अंशतः आकाश पर दिखाई देता हो ।

(छः) विद्युतीय प्रतीकों का तात्पर्य ऐसे विज्ञापन प्रतीक से है जिसमे विद्युतीय साज- सज्जे जो प्रतीकों के महत्वपूर्ण अंग है प्रयुक्त किये जाते है ।

(सात) यूनीपोल का तात्पर्य एल० आकार में लोहे का बना पोल से है तथा गेन्ट्री विज्ञापन का तात्पर्य सड़क के दोनों तरफ लोहे का मजबूत पिलर गाड़कर उसके उपर न्यूनतम निर्दिष्ट ऊचाई परः आयताकार विज्ञापन से है ।

(आठ) भूमिविज्ञापन से तात्पर्य जो भूमि पर या किसी खम्भे या स्क्रीन , बाड़ा या विज्ञापन परिनिर्मित या चित्रित हो और जनता के लिए दृश्य हो ।

अनुज्ञा शुल्क व स्थल चिन्हीकरण

1-अनुज्ञा शुल्क का तात्पर्य नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 128 (2) उपधारा ( 1 ) का (सात्त) के अन्तर्गत मा० बोर्ड द्वारा स्वीकृत अनुज्ञा शुल्क से है ।

2- स्थल चयन हेतु अधिशासी अधिकारी की अध्यक्षता में विज्ञापन पट्ट के लिए उचित और उपर्युक्त स्थलों की पहचान हेतु, स्थलों का चयन नगरपालिका के सिविल अभियन्ता और सफाई एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा किया जायेगा।

3- स्थलों के पहचान की संस्तुति के पश्चात् ही विज्ञापन एंव विज्ञापन पट्टों की अनुज्ञा दी जायेगी ।

प्रतिषेध

1-नगरपालिका परिषद्, टाण्डा जनपद अम्बेडकरनगर की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का विज्ञापन या चल चित्रों का प्रदर्शन कोई व्यक्ति नहीं कर सकेगा ।

2-विज्ञापनों को वृक्षों, बल्लियों, बास या लकड़ी पर नहीं बाधा जायेगा व इस बात पर विशेष ध्यान दिया जायेगा व इस बात पर विशेष ध्यान दिया जायेगा कि विज्ञापन से आस -पास कलात्मक सौन्दर्य व लोक सम्पत्ति पर किसी भी प्रकार की क्षति व भव्यता में कोई प्रभाव न पड़े ।

3-कोई भी विज्ञापन या विज्ञापन पट्ट किसी भी दशा में जनहित व निकायहित के प्रतिकूल नहीं होनी चाहिए उसमें सम्प्रदर्शित विज्ञापन किसी भी प्रकार से आशिष्ट, अश्लील अपत्तिजनक व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नही होना चाहिए ।

1 -विज्ञापन और विज्ञापन पट्ट पर अनुज्ञा शुल्क की दरें-

इलेक्ट्रानिक, एल०ई०डी० लाइट या सोडियम लाइट, बल्ब अथवा अन्य डिजिटल माध्यम से विज्ञापन हेतु रु0 40 प्रति वर्ग फीट प्रतिमाह विज्ञापन शुल्क होगा, परन्तु निजी भूमि भवनों पर प्रदर्शन हेतु रु० 30 प्रति वर्ग फीट प्रति माह विज्ञापन शुल्क देय होगा तथा यूनीपोल , गैन्ट्री का शुल्क रु0 25 प्रति वर्ग फीट प्रति माह शुल्क देय होगा । 2-वाहन प्रकार व विज्ञापन शुल्क की दरें-

होगा । A- रिक्शा, साइकिल, ठेला, ठेलिया जो मानव शक्ति चालित हो , पर विज्ञापन शुल्क रु० 50 प्रतिदिन देय

B-दो पहियां मोटर साइकिल व भाक्ति चलित जुगाड़ गाड़ी विज्ञापन करने पर रु0 75.00 प्रतिदिन विज्ञापन शुल्क देय होगा ।

C-तीन पहियां मोटर वाहन रु0 400.00 रुपये प्रतिदिन

D-चार पहियां हल्के मोटर वाहन 600.00 रुपये प्रतिदिन ।

E-चार पहियां भारी मोटर वाहन मिनी ट्रक, बस, मिनी बस, ट्रक आदि 800.00 रुपये प्रतिदिन ।

F-छः पहिया या इससे अधिक पहिया वाले भारी मोटर वाहन 1,000.00 रुपये प्रतिदिन।

विज्ञापन के अन्य साधन

3-विद्युत तथा अन्य खम्भों/ वोर्ड / फ्लावर पार्ट / जनसुविधा संसाधनों पर विज्ञापन कर की दरे -10 रुपया प्रति वर्गफीट प्रतिदिन ।

4-पोस्टर, पताका ( बैनर) पूर्णतया प्रतिबन्धित है परन्तु पाये जाने पर 20 रुपया प्रति वर्गफीट प्रतिदिन, शुल्क के साथ- साथ रुपया 10,000.00 (दस हजार रुपये मात्र) जुर्माना देय होगा ।

205 भाग 8 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

5-पर्चा (हैण्ड विल) 10.00 रुपया प्रति वर्गफीट प्रतिदिन ।

6-रस्सी या सुतली वाले गुब्बारे से विज्ञापन 250.00 रूपये प्रति गुब्बारा प्रतिदिन ।

7-छतरी (कनोपी)-200.00 रुपये प्रति छतरी प्रतिदिन ।

8 -दिवारों पर वालराइटिंग पूर्णतया प्रतिबन्धित है, परन्तु पाये जाने पर 25.00 रुपया प्रतिवर्ग फीट प्रतिदिन की दर से शुल्क के साथ- साथ रुपया 10,000.00 (दस हजार रुपये) जुर्माना देय होगा ।

9 -रेलवे या केन्द्र सरकार के जमीनों पर लगने वाली हॉर्डिंग या अन्य प्रकार के विज्ञापन संसाधन जो सड़क की ओर सम्मुख होने की दशा में अनुज्ञा शुल्क की निर्धारित दरों का 75 प्रतिशत अनुज्ञा शुल्क देय होगा ।

प्रतिदिन । 10- सर्कस, प्रदर्शनी या उत्सव मेला (शुल्क सम्बन्धी सरकारी स्वीकृति को छोड़कर ) 2,000.00 (दो हजार) रुपये

11- ध्वनि विस्तारक यंत्रः 300.00 (तीन सी) रुपये (शुल्क सम्बन्धी सरकारी स्वीकृति को छोड़कर) प्रति बाक्स या प्रति स्पीकर प्रतिदिन ।

12-विज्ञापन के जिन मदों का ऊपर उल्लेख नहीं हुआ है उनका विज्ञापन/ अनुज्ञा शुल्क उसी श्रेणी के उपरोक्त विज्ञापन शुल्कों के अनुसार करना होगा ।

13-निजी भवन या भूमि पर विज्ञापन स्ट्रक्चर लगाने से पूर्व भवन स्वामी द्वारा स्ट्रक्चर इंजीनियर से भवन के मजबूती, गुणवत्ता एंव सुदृढीकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा ।

14-यह उपविधि जिस वित्तीय वर्ष में प्रकाशित हुई हो उसके हर पांच वर्ष के बाद प्रत्येक अनुज्ञा शुल्क की दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होती रहेगी ।

अनिर्वाय होगा ।

15-अनुज्ञा शुल्क अग्रिम रूप से जमा करना

स्पष्टीकरण

यदि कोई विज्ञापनकर्ता किसी विज्ञापन को प्रदर्शित करना चाहता है तो उसे नगरपालिका परिषद टाण्डा, अम्बेडकरनगर में प्रार्थना- पत्र प्रस्तुत करते समय विज्ञापन हेतु स्थान का उल्लेख तथा उनका क्षेत्रफल वर्गफीट में और विज्ञापन समय (किस दिनांक से किस दिनांक तक) लिखना अनिवार्य होगा ।

शास्ति

1-जांच के दौरान प्रार्थना पत्र में उल्लेखित वर्ग फीट ऐरिया से ज्यादा पाये जाने पर अथवा निर्धारित दिनांक के बाद विज्ञापन लगा हुआ पाये जाने पर निर्धारित शुल्क के साथ-साथ 500.00 रुपये प्रतिदिन के आधार पर जुर्माना देय होगा ।

2-अनुज्ञाधारी/विज्ञापनकर्ता की जिम्मेदारी होगी कि वह अनुज्ञा तिथि की समाप्ति के दिन रात्रि 12:00 बजे तक अपना विज्ञापन पट, लेख या जो भी विज्ञापन का साधन प्रयोग किया है उसे स्वयं हटा ले अन्यथा नगर पालिका परिषद टाण्डा अम्बेडकरनगर द्वारा हटाये जाने पर निर्धारित शुल्क व जुर्माना सहित समस्त हर्जा खर्चा विज्ञापनकर्ता से नगर पालिका को वसूली करने का अधिकार होगा ।

ह० (अस्पष्ट) अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद्, टाण्डा, अम्बेडकरनगर ।

कार्यालय, नगरपालिका परिषद्, टाण्डा, जनपद अम्बेडकरनगर

09मई, 2022 ई०

प्राईवेट वाहन स्टैण्ड शुल्क नियमावली , 2021

सं० 187(1 ) /न ०पा० प०टा०/ 2022- नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 298 के अधीन प्राइवेट वाहन शुल्क नियमावली बनाने हेतु अधिनियम की धारा 128 (2) उपधारा (1 ) ( एक) व (आठ) के अन्तर्गत नगरपालिका सीमा के अन्दर सवारी ढोने वाले समस्त प्राइवेट वाहनों तथा वस्तुओं को उत्तारने - चढाने ( लोडिंग -अनलोडिग ) करने वाले सभी प्राइवेट वाहनों से कर वसूली हेतु उपविधि / नियमावली नगरपालिका अधिनिय 1916 की धारा 131 के अन्तर्गत प्रारम्भिक प्रस्ताव बोर्ड बैठक दिनांक 12 अप्रैल, 2021 के विशेष प्रस्ताव संख्या 2 के द्वारा सर्वसम्मति से पारित करते हुए समस्त अग्रिम कार्यवाही हेतु अध्यक्ष अधिशासी अधिकारी को अधिकृत कर दिये जाने के पश्चात् नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 131 व 132 कार्यवाही हेतु राजकीय समाचार- पत्र "स्वतंत्र भारत में दिनांक 16 जुलाई, 2021 को प्रकाशित कराकर आपत्ति एवं सुझाव मांगे गये थे । निर्धारित अवधि में दो आपत्तियां प्राप्त हुई जिनका निस्तारण करने के पश्चात् बोर्ड बैठक दिनांक 25 अप्रैल, 2022 को प्रस्तावित उपविधि/ नियमावली को सर्वसम्मति से पुष्टि करते 206

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

[भाग 8

हुये अग्रिम कार्यवाही (सरकारी गजट में प्रकाशन) हेतु अधिशासी अधिकारी / प्रशासक को अधिकृत किया गया । यह उपविधि सरकारी गजट में प्रकाशन के दिनांक से प्रभावी मानी जायेगी ।

नियमावली

1-यह नियमावली वाहन स्टैण्ड शुल्क नियमावली, 2021 कही जायेगी ।

2-यह नियमावली नगरपालिका परिषद्, टाण्डा सीमा के अन्दर सम्पूर्ण क्षेत्र में लागू होगी ।

3-अधिशासी अधिकारी व अध्यक्ष तथा प्रशासक से तात्पर्य नगरपालिका परिषद्, टाण्डा (अम्बेडकरनगर) के अधिशासी अधिकारी, अध्यक्ष / प्रशासक से है ।

नियम व शर्तें

1-यह शुल्क नगरपालिका परिषद, टाण्डा अम्बेडकरनगर सीमा में प्रवेश करने वाले व चलने वाले ऐसे समस्त वाहनों से उद्‌ग्रहीत होगा , जो प्राइवेट होंगे , और नगर क्षेत्र में सामान ( वस्तुएँ) उतारने चढ़ाने व सवारी ढोने का कार्य कर रहे हैं ।

2- नगर क्षेत्र में व्यवसाय व आजीविका हेतु चलने वाले समस्त (वस्तुओं व यात्रियों के उतारने चढ़ाने से सम्बन्धित) प्राइवेट वाहनों को उक्त शुल्क देय होगा, चाहे वे वाहन स्टैण्ड पर जायें या ना जाये, पार्किंग स्थल पर रूके अथवा न रूके ।

3-निर्धारित दरों में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि होती रहेगी ।

4-वसूली हेतु कर्मचारी अथवा ठेकेदार नगर पालिका सीमा के अन्दर (भीड़- भाड़ वाले स्थान को छोड़कर) शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थान निर्धारित करके वसूली स्थान निर्धारण की सूचना अधिशासी अधिकारी को देने व स्वीकृति के पश्चात् ही वसूली कर सकेगा ।

5- रसीद कटने पर उसकी वैधता, रसीद में उल्लेखित दिनांक तक ही रहेगी ।

शास्ति

1-यदि कोई वाहन जिस पर उक्त कर लागू है वह नही देता है या भागता है तो . पकड़े जाने या दोष सिद्ध होने पर उक्त दिवस के कर / शुल्क के अलावा एक हजार रुपये जुर्माना भी देय होगा ।

2- यदि ठेकेदार द्वारा वसूली की जा रही है तो जुर्माने की धनराशि ठेकेदार द्वारा वसूल कर पालिका कोष में जमा किया जायेगा, जो ठेके की धनराशि से अलग होगा ।

वाहन स्टैण्ड शुल्क

मद

प्रस्तावित दरें प्रतिदिन क्र० सं०

2

3 1

200.00 1 प्राइवेट, बस मिनी बस

2

125.00 जीप, कार मेटाडोर, टैक्सी, टैम्पों, सूमो आदि

3

80.00 ऑटो रिक्शा, विक्रम आदि व इसी श्रेणी के अन्य वाहन

4

25.00 ई-रिक्शा (बैट्रीचालित अनुदानित सहित)

5

250.00

(चार

मालवाहक लोड-अनलोड वाहन ट्रक अथवा ऐसे बड़े वाहन, टायर से अधिक)

6

125:00

वाहन

मालवाहक वाहन, मैजिक, पिकप गाड़ी आदि छोटे (चार टायर तक)

वाहन स्टैण्ड निर्दिष्ट स्थल

नगर पालिका टाण्डा सीमा के अन्दर निर्धारित किये गये पार्किंग स्थल / स्टैण्ड के लिए अकबरपुर रोड की ओर आने -जाने वाले समस्त प्राइवेट वाहनों का पार्किंग स्थल कश्मीरिया पुलिस चौकी तिराहा , तथा हसंवर जलालपुर, बसखारी आदि की ओर आने- जाने वाले समस्त प्राइवेट वाहनो का पार्किंग स्थल चिन्तौरा चौराहा तथा फैजाबाद रोड की तरफ आने-जाने वाले प्राइवेट वाहनों का पार्किंग स्थल अलीगंज धुरयहिया रामलीला मैदान होगा । अधिशासी अधिकारी द्वारा आवश्यकतानुसार किसी भी समय वाहन पार्किंग स्थलों में स्थान परिवर्तन किया जा सकता है ।

ह० (अस्पष्ट), अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद्, टाण्डा, अम्बेडकरनगर ।

207 भाग 8]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

कार्यालय, नगरपालिका परिषद्, खैर, (अलीगढ़)

20जनवरी , 2020 ई ०

सं0 635/न० पा०प० खैर/ 2019-20 दिनांक 20 जनवरी, 2020 के माध्यम से संयुक्त प्रान्त नगर पालिका अधिनियम, 1916 यू० पी० एक्ट संख्या-2, 1916 की धारा 128 का प्रयोग करते हुये अपनी सीमा में जलकर निर्धारण एवं वसूली हेतु नियमावली , 2018 तैयार की गयी है । जिसका प्रकाशन इस आशय से किया जा रहा है कि नगरवासियों व प्रभावित व्यक्ति/समूह अपने अमूल्य सुझाव व आपत्तियों से नगर पालिका परिषद खैर को अवगत करा सकें ।

समस्त नगर वासियों व प्राभावित व्यक्तियों /समूह से अपेक्षा है कि प्रकाशन दिनांक से 30 दिवस के अन्दर अपने सुझाब व आपत्तियां नगर पालिका परिषद खैर कार्यालय को प्राप्त करायें । जिससे उन पर विचारोपरान्त समुचित निर्णय किया जा सके । समयावधि पश्चात् कोई भी आपत्ति स्वीकार नहीं की जायेगी के सम्बन्धित प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र दैनिक स्वदेश/दैनिक प्रावदा में दिनांक11 जुलाई, 2018 को प्रकाशित कर आपत्तियों एवं सुझाव आमंत्रित किये गये थे, परन्तु निर्धारित अवधि के अन्दर कोई आपत्ति एवं सुझाव इस कार्यालय को प्रप्त नहीं हुये । मा० बोर्ड के प्रस्ताव संख्या 22 अक्टूबर, 2020 को सर्वसम्मति से अग्रेतर कार्यवाही हेतु अधिशासी अधिकारी को अधिकृत करते हुये स्वीकृति प्रदान की गयी है।

अतएव नियमावली नगरपालिका अधिनियम ,1916की धारा 131(1) के अपेक्षानुसार सरकारी गजट में सर्वसाधारण को सूचनार्थ प्रकाशित की जा रही है, जो प्रकाशन की तिधि से प्रभावी मानी जायेगी ।

नियमावली

1-यह नियमावली नगर पालिका परिषद खैर की सीमा के अन्तर्गत जलकर निर्धारण सम्बन्धी एवम् वसूली सम्बंधी नियमावली के नाम से जानी जावेगी ।

2-प्रशासक/प्रभारी अधिकारी /अध्यक्ष /अधिशासी अधिकारी का तात्पर्य नगर पालिका परिषद खैर के प्रशासक/प्रभारी अधिकारी/अध्यक्ष/अधिशासी अधिकारी से है ।

3 - नगर पालिका परिषद् खैर की सीमा का तात्पर्य उ० प्र० शासन द्वारा निर्धारित नगर पालिका परिषद् खैर की सीमा से है ।

4-यह उपविधियां आयुक्त अलीगढ़ मण्डल अलीगढ़ द्वारा अन्तिम स्वीकृति प्रदान किये जाने के उपरान्त तथा सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे ।

(क) कोई भी व्यक्ति किसी भी समय अपना नाम किसी भवन अथवा भूमि के स्वामी के रूप में जलकर निर्धारण सूची में अंकित कराने के लिये आवेदन - पत्र दे सकता है और जब तक ऐसे आवेदन-पन्नों को अस्वीकृति करने के लिये पर्याप्त कारण न हो जिनकी अस्वीकृति लिखित होगी उनका नाम जलकर निर्धारण सूची में अंकित कर दिया जायगा ।

(ख) जब यह संदेह हो कि किसी भी भवन या भूमि के स्वामित्व का अधिकारी कौन है तो नगर पालिका परिषद यह निश्चय करेगी कि स्वामित्व का अधिकारी कौन है जिसका नाम अंकित किया जावे और उसका निर्णय उस समय तक लागू रहेगा जब तक कि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा नगर पालिका परिषद् द्वारा किया गया निर्णय रद न कर दिया जावे ।

5-यदि किसी भवन या भूमि के जिस पर कर निर्धारण हो अथवा कर का भुगतान करना आवश्यक हो के स्वामित्व अधिकार किसी को हस्तान्तरित अधिकार प्राप्त करने वाला व्यक्ति दोनों ही हस्तान्तरण की कार्यवाही या उसकी रजिस्ट्री हुई हो तो रजिस्ट्रेशन के पश्चात् या यदि हस्तान्तरण -पत्र नहीं लिखा गया हो तो हस्तान्तरण की कार्यवाही के पश्चात् 3 मास के अन्दर ऐसे हस्तान्तरण की लिखित सूचना नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को देगा ।

208

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत)

[भाग 8

(क) यदि किसी भवन या भूमि का स्वामी जिस पर कर आरोपित हो या कर देना आवश्यक हो, मर जाता है तो उस सम्पत्ति का उत्तराधिकार प्राप्त होने की सूचना तीन माह के अन्दर देगा किन्तु नाम के परिवर्तन से सम्बन्धित कार्यवाही के कारण कर देना स्थगित नहीं होगा ।

6-उपर्युक्त नियम के अन्तर्गत दी जाने वाली सूचना कथित नियम के स्पष्ट और तदोपूर्ण विवरण अंकित किये जायेंगे ।

यदि किसी ऐसे हस्तान्तरित सम्पत्ति पाने वाले व्यक्ति को अधिशासी अधिकारी द्वारा बुलाया जावे तो वह हस्तान्तरण सम्बंधित आलेखों को ( यदि कोई हो) या सन् 1966 के भारतीय अधिनियम के अन्तर्गत प्राप्त प्रतिलिपि की प्रति प्रस्तुत करेगा।

7-अधिनियम की धारा 151 ( 2) के अन्तर्गत कर की छूट अथवा वापिसी के सम्बन्ध में ऐसे भवन का स्वामी जिसमें अलग -अलग कई भाग सम्मिलित हों भवन की कर निर्धारण सूची बनते समय अपने पूर्ण भवन के बार्षिक मूल्य के विस्तृित अभिलेख के साथ अंकित कराने के लिये नगर पालिका परिषद् से प्रार्थना कर सकता है । जब भवन को कोई भाग जिसका वार्षिक मूल्य पृथक अंकित है वर्ष में 90 दिन या उसके अधिक अनुगामी दिनों तक रिक्त रहा हो या उससे किराया प्राप्त न हुआ हो, तो पूरे भवन पर लगे हुये कर में से ऐसे भाग का कर छोड़ कर वापिस कर दिया जावेगा जैसा कि अधिनियम की बारा 151 ( 1 ) के अन्तर्गत छूट या वापिस हो सकता है, यदि इस भाग का कर पृथक ढंग से निर्धारित हुआ हो ।

8-अधिनियम की धारा 129 (अ) के संदर्भ में कर लगाने की दूरी 200 मीटर होगी ।

टिप्पणी-अर्थ व्यास निर्धारण करने के लिये दूरी एक सीधी रेखा होगी जो कि सबसे निकट के जल स्तम्भ या बोर्ड द्वारा लगाये गये हैण्डपम्प या जलकल जहां से जनता को नगर पालिका द्वारा भवन या भूमि जिस पर कर लगाने का प्रस्ताव हो जल का प्रबन्ध हो ।

9-भवन और भूमि के वार्षिक मूल्य पर 10 प्रतिशत वार्षिक जलकर देय होगा जिसके भुगतान का उत्तरदायित्व भवन अथवा भूमि के स्वामी अथवा प्रबन्धक को होगा लेकिन वह उसे किरायेदार से वसूल कर सकता है । प्रतिबन्ध यह है कि 5 प्रतिशत की छूट अग्रिम अथवा बिल प्राप्त होने से एक माह के अन्दर समय पर भुगतान करने पर दिया जायेगा ।

10-निम्नलिखित भूमि अथवा भवन जलकर से मुक्त होंगे, परन्तु उन पर जलमूल्य निर्धारित दर से वास्तविक जल प्रयोग करने पर लगेगा । यदि भवनों में जल का कनैक्शन लगा हो ।

11-समस्त भवन और भूमि जिनका वार्षिक मूल्य 360 रुपये तक है ।

(क) भवन या भवन का कोई भूमि भाग जो केवल सार्वजनिक उपासना के लिये प्रयोग हो, कब्रस्थान, मजार , अनाथालय , गौशाला , पड़ाव अथवा रजिस्टर्ड सार्वजनिक पुस्तकालय , जेल , हवालात, हास्पीटल (वार्ड) , डिस्पैन्सरी, न्यायालय ( कक्ष) , राजकीय कोषालय , स्कूल व कालिज ( कक्षायें) स्मारक आदि ।

(ख) नगर पालिका के निजी समस्त भवन अथवा भूमि ।

दण्ड

अधिनियम की धारा 299 ( 1) द्वारा प्रदत्त अधिकारों को कार्यान्वित करने के लिये नगर पालिका परिषद् खैर यह आदेश देती है कि उपरोक्त नियमों को किसी भी शर्त का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति दण्डनीय होगा जिस पर रुपये 1000 अर्थ दण्ड हो सकता है ।

ह० (अस्पष्ट), अधिशासी अधिकारी , नगर पालिका परिषद्, खैर, अलीगढ़ ।

209 भाग 8]

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

सूचना

पार्टनरशीप डीड में नये पार्टनर श्री अंकित विश्नोई पुत्र स्व० नीरज कुमार विश्नोई निवासी 14061 सेक्टर 150 एटीएस प्रिस्टाईन, गौतमबुद्ध नगर, नोएडा, उ० प्र ० को सम्मिलित किया गया है तथा फर्म का पता लासा हाऊस सिविल लाइन्स मुरादाबाद से परिवर्तित करके 48 / ए हस्थला इण्डस्ट्रीयल इस्टेट, कांठ रोड, मुरादाबाद किया गया है ।

श्री मुकेश बालस्वरूप त्यागी, पार्टनर मेसर्स टैम्पटेशन फूडस, 48/ ए. हरथला इण्डस्ट्रीयल इस्टेट, कांठ रोड, मुरादाबाद ।

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स श्री सॉई कैरिज, 101/4 मेन रोड, द्वारिका पुरी. तहसील सदर, मुज्जफर नगर-251001 का जिला सहारनपुर में पंजीकरण सहायक रजिस्ट्रार फर्म एण्ड सोसायटीज एवं चिट्स सहारनपुर मण्डल, जिला सहारनपुर से दिनांक 16 जुलाई, 2016 को हुआ था । फर्म में आदित्य कुमार पुत्र स्व० सोम प्रकाश, श्रीमती पूनम पत्नी श्री आदित्य एवं अलक्षेन्द्र प्रताप पुत्र श्री आदित्य कुमार पार्टनर थे । दिनांक 12 मार्च, 2022 को श्री आदित्य कुमार पुत्र स्व० सोम प्रकाश का हृदयगति रूकने के कारण स्वर्गवास हो गया था तथा वर्तमान में श्रीमती पूनम पत्नी श्री आदित्य एवं अलक्षेन्द्र प्रताप पुत्र श्री आदित्य कुमार पार्टनर हैं।

साझीदार, श्रीमती पूनम, पत्नी श्री आदित्य, (पार्टनर)

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स अमृत सिनेमा, अम्बाला रोड, सहारनपुर (उ ० प्र० ) का पंजीकरण सहायक रजिस्ट्रार फर्म एण्ड सोसायटीज एवं चिट्स सहारनपुर, (उ०प्र०) के कार्यालय में दिनांक 08 नवम्बर, 2007 को हुआ था । दिनांक 27 मई, 2013 के फार्म-7 के अनुसार श्री विश्वम्भर नाथ पुण्डीर व श्री विश्वजीत सिंह पुण्डीर पार्टनर थे । दिनांक 02 मार्च, 2022 को श्री विश्वम्भर सिंह पुण्डीर ने स्वेच्छा से पार्टनरशिप छोड़ी तथा श्री अर्जुन पुण्डीर व श्री यश पुण्डीर फर्म में भागीदार के रूप में सम्मिलित हुए । वर्तमान में श्री विश्वजीत सिंह पुण्डीर, श्री अर्जुन पुण्डीर व श्री यश पुण्डीर फर्म के पार्टनर हैं ।

साझीदार, विश्वजीत सिंह पुण्डीर, मेसर्स अमृत सिनेमा, अम्बाला रोड, सहारनपुर ।

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स सौरभ सागर बिल्डर्स, सी-15 /16 हरथला इण्डस्ट्रीयल एरिया कांठ रोड़, मुरादाबाद में दिनांक 04 अगस्त, 2021 को श्री नीरज विश्नोई पुत्र स्व० हंस राज विश्नोई निवासी 20 मधुवनी, कांठ रोड, मुरादाबाद की मृत्यु के पश्चात दिनांक 07 अगस्त, 2021 को निष्पादित पार्टनरशीप डीड में नयी पार्टनर श्रीमती सीमा विश्नोई पत्नी स्व० नीरज कुमार विश्नोई निवासिनी 14061 सेक्टर 150, एटीएस प्रिस्टाईन, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), उ०प्र० को सम्मिलित किया गया है ।

सूचना

श्री अंकित विश्नोई, पार्टनर मेसर्स सौरभ सागर बिल्डर्स, कांठ रोड मुरादाबाद । सी-15/ 16 हरथला इण्डस्ट्रीयल एरिया,

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के पत्नी के घर का नाम ममता सिंह (MAMTA SINGH) है। जबकि प्रार्थी के पत्नी के शैक्षिक अभिलेखों में ब्राहमी सिंह (BRAHMI SINGH ) अंकित है । त्रुटिवश प्रार्थी ने अपनी सेवा पुस्तिका में अपनी पत्नी के घर का नाम अंकित करा दिया है । उपरोक्त दोनों नाम मेरी पत्नी का ही है । भविष्य में मेरी पत्नी को ब्राहमी सिंह पत्नी जितेन्द्र सिंह के नाम से जाना व पहचाना जाय ।

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स टैम्पटेशन फूडस, 48 /ए हरथला इण्डस्ट्रीयल इस्टेट, कांठ रोड मुरादाबाद में दिनांक 04 अगस्त, 2021 को श्री नीरज कुमार विश्नोई पुत्र स्व ० हंस राज विश्नोई, निवासी 20 मधुवनी, कांठ रोड, मुरादाबाद की मृत्यु के पश्चात् दिनांक 07 अगस्त, 2021 को निष्पादित

जितेन्द्रसिंह. टाइप-III/124, एन० टी०पी०, सी० कालोनी, टांडा विद्युतनगर, अम्बेडकर नगर, ( उ ०प्र०) ।

210

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई ० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

[भाग 8

सूचना

सूचना

मैं, निलेश त्रिपाठी, यह सूचित करता हूँ कि मेरे पिता का नाम अंग्रेजी में Shyama Charan Tripathi है । किन्तु त्रुटिवश मेरे शैक्षणिक अभिलेखों में S. C. Tripathi हो गया है । जबकि दोनों व्यक्ति एक ही हैं । अतः भविष्य मेरे पिता को Shyama Charan Tripathi के नाम से जाना जायेगा ।

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स गायत्री इण्टरनेशनल , सी-15 /16 हरथला इण्डस्ट्रीयल एरिया कांठ रोड, मुरादाबाद में दिनांक 04 अगस्त, 2021 को श्री नीरज कुमार विश्नोई पुत्र स्व० हंस राज विश्नोई निवासी 20 मधुवनी, कांठ रोड, मुरादाबाद की मृत्यु के पश्चात दिनांक 07 अगस्त, 2021 को निष्पादित्त पार्टनरशीप डीड में नयी पार्टनर श्रीमती सीमा विश्नोई पत्नी स्व० नीरज कुमार विश्नोई निवासी 14061 सेक्टर 150 , एटीएस प्रिस्टाईन गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) उ०प्र० को सम्मिलित किया गया है ।

निलेश त्रिपाठी, 99C/45A/ 1 काला डांडा, बेनीगंज, जी०टी० बी० नगर, प्रयागराज ।

सूचना

पार्टनर,

श्री अंकित विश्नोई, मेसर्स गायत्री इण्टरनेशनल, सी-15/ 16 हरथला इण्डस्ट्रीयल एरिया, कांठ रोड, मुरादाबाद ।

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि प्रार्थी के घर का नाम दिनेश सिंह पटेल है जब कि प्रार्थी के शैक्षिक अभिलेखों में प्रार्थी का नाम अंकित सिंह है । प्रार्थी के एल ० आई०सी० की पालिसी सं ० 310870195 में घर का नाम दिनेश सिंह पटेल अंकित हो गया है । उपरोक्त दोनों नाम शपथकर्ता का ही है । भविष्य में प्रार्थी को अंकित सिंह पुत्र बेनी प्रसाद के नाम से जाना व पहचाना जाय ।

अंकितसिंह, मोहीउददीनपुर भरेता, बम्हरौली, प्रयागराज ।

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स किन फार्मसूटिकल्स गांव पोस्ट शेरनगर, तहसील मुजफ्फरनगर, जिला मुजफ्फरनगर में पंजीकरण सहायक रजिस्ट्रार फर्म सोसायटी एवं चिट्स सहारनपुर मण्डल से दिनांक 01 फरवरी, 2022 को हुआ था । पंजीकरण के समय फर्म में मोहम्मद अकदस सिद्दीकी और मोहम्मद राशिद पार्टनर थे । 11 फरवरी, 2022 को नायाब अरशद और इमराना परवीन भी फर्म में भागीदार बन गये । इस प्रकार वर्तमान में फर्म में मोहम्मद अकदस सिद्दीकी , मोहम्मद राशिद, इमराना प्रवीन, नायाब अरशद पार्टनर हैं ।

साझेदार,

मोहम्मद अकदस सिद्दीकी, किन फार्मसूटिकल्स वर्तमान, निवासी 853/19 , खालापार, मुजफ्फरनगर ।

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स- डी० ए ०एस० बिल्ड होम , आफिस नं0-4 फर्स्ट फ्लोर , रोलैण्ड टावर, मालरोड, कानपुर-208001 का साझीदार हूँ। फर्म की भागीदारी डीड दिनांक 04 सिद्धावार, 2015 के अनुसार फर्म में श्री आदेश कुमार गुप्ता, श्री देवेन्द्र सिंह राठौर, मोहम्मद शाहनवाज साझीदार थे। संशोधित भागीदारी डीड दिनांक 01 दिसम्बर, 2021 के अनुसार साझीदार श्री आदेश कुमार गुप्ता भागीदारी से दिनांक 01 दिसम्बर, 2021 से स्वेच्छा से पृथक हो गये हैं और अब फर्म में श्री देवेन्द्र सिंह राठौर व मोहम्मद शाहनवाज भागीदार हैं । फर्म की पंजीकरण सं० K- 11432 पर दिनांक 14अक्टूबर, 2015 को पंजीकृत है ।

पार्टनर, देवेन्द्र सिंह राठौर ।

मेरा नाम कुछ अभिलेखों में चंदन सिंह पुत्र गुलाब सिंह अंकित है तथा कुछ अभिलेखों में संदीप कुमार सिंह पुत्र गुलाब सिंह अंकित हो गया है । जबकि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं । आगे मेरा नाम चंदन सिंह पुत्र गुलाब सिंह ही माना जाय ।

सूचना

चंदन सिंह पुत्र गुलाब सिंह, ग्राम -तालापार

शंकरगढ़, बारा, प्रयागराज।

सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स पंछी इन्टरप्राईजेज, 429 , सिकलापुर, बरेली उ० प्र० , पिनकोड 211 भाग 8 ]

उत्तर प्रदेश गजट, 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

छठे एवं सातवें साझेदार फर्म से हट गये हैं । जिनके स्थान पर प्रज्जवल प्रताप सिंह एवं प्रीति सिंह को द्वितीय एवं तृतीय साझेदार के रूप में दिनांक 14 अप्रैल, 2022 से शामिल कर लिया गया है । उक्त तिथि से पूर्व के प्रथम, द्वित्तीय, चतुर्थ, पांचवे, छठे एवं सात्तवें साझेदार का भविष्य में कोई लेना- देना नहीं होगा । वर्तमान में उक्त फर्म में आनन्द सिंह प्रथम, प्रज्जवल प्रत्ताप सिंह द्वितीय एवं प्रीति सिंह तृतीय साझेदार के रूप में सम्मिलित हैं ।

243001 ( पंजीकरण संख्या BAR/ 0011168) फर्म में 2 साझेदार अमित सक्सेना व महेश पाल सिंह हैं साझेदारों की रजामन्दी से दिनांक 27 अप्रैल, 2022 को फर्म के कार्यालय का पता हाउस नं० 15/3 , गोल्डन ग्रीन पार्क, लेन 2. बरेली, उ ०प्र ० को पता परिवर्तित करके नया पता 429., सिकलापुर, बरेली , उ० प्र०, पिनकोड 243001 कर लिया है। फर्म में एवं साझेदारों में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है । एतद्वारा सूचित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकतायें मेरे द्वारा पूरी कर ली गयी है ।

अमित सक्सेना,

एतद् द्वारा प्रमाणित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक रूप से औपचारिकताओं का पालन स्वयं मेरे द्वारा किया गया है ।

आनन्दसिंह, साझेदार, मेसर्स-भारत ऑर्गेनिक्स ।

साझेदार, मेसर्स पंछी इन्टरप्राईजेज. बरेली, उ०प्र० ।

सूचना

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स- सिंह कान्स्ट्रक्शन", ग्राम-गौरन खेड़ा, पो०-ओसाह शिवगढ़ , जिला रायबरेली 226103 रजि० नं० -आर ए ई/0000122 का पंजीकरण दिनांक 16 मई, 2018 एवं संशोधन 21 जनवरी, 2022 को कराया गया था जिसमें रंजना सिंह प्रथम, सुरेन्द्र बहादुर सिंह द्वितीय एवं धर्मेन्द्र सिंह तृतीय साझेदार थे । उक्त फर्म में दिनांक 26 अप्रैल , 2022 से द्वितीय साझेदार सुरेन्द्र बहादुर सिंह फर्म से हट गये हैं, उक्त तिथि से द्वितीय साझेदार का भविष्य में कोई लेना-देना नहीं होगा । वर्तमान में उक्त फर्म में धर्मेन्द्र सिंह प्रथम एवं रंजना सिंह द्वित्तीय साझीदार के रूप में सम्मिलित हैं ।

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स-रत्नागिरी इन्फ्रा प्रोजेक्ट 11 ए/ 212, वृन्दावन योजना, रायबरेली रोड, लखनऊ उ 0प्र0 226029 रजि० नं०- LUC/ 0004762 का पंजीकरण दिनांक 04 अक्टूबर, 2019 को कराया गया था जिसमें धीरेन्द्र पाण्डेय प्रथम, अलोक कुमार द्वितीय, मानवेन्द्र कुमार यादव तृतीय, तेजवंत सिंह चतुर्थ, दिलराज सिंह पांचवे एवं जायद कुमार बाजपेयी को छठे साझेदार के रूप में फर्म में शामिल किया गया था जिसमें द्वितीय एवं तृतीय साझेदार अलोक कुमार व मानवेद्र कुमार यादव फर्म से दिनांक 08 जून, 2021 से हट गये हैं । उक्त तिथि से पूर्व के द्वितीय एवं तृतीय साझेदार का भविष्य में कोई लेना-देना नहीं होगा। वर्तमान में उक्त फर्म में धीरेन्द्र पाण्डय प्रथम, तेजवंत सिंह द्वितीय, दिलराज सिंह तृतीय एवं जायद कुमार बाजपेयी चतुर्थ साझेदार के रूप में सम्मिलित हैं ।

एतदद्वारा प्रमाणित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक रूप से औपचारिकताओं का पालन स्वयं मेरे द्वारा किया गया है ।

धर्मेन्द्र सिंह, साझेदार ।

एतद् द्वारा प्रमाणित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक रूप से औपचारिकताओं का पालन स्वयं मेरे द्वारा किया गया है ।

सूचना

धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय, साझेदार, मेसर्स -रत्नागिरी इन्फ्रा प्रोजेक्ट ।

सूचना

सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स-भारत ऑर्गेनिक्स 207 प्राइम पैलेस 7बी-1 , फैजाबाद रोड, इन्दिरा नगर, लखनऊ उ० प्र० रजि० नं0-184711 का पंजीकरण दिनांक 27 नवम्बर, 1999 को कराया गया था जिसमें डा० ए० एल० सिंह प्रथम, चम्पा सिंह द्वितीय, आनन्द सिंह तृतीय, अखिलेन्द्र प्रताप सिंह चतुर्थ, ओम प्रकाश सिंह पांचवे, नीलम सिंह छठे, शिवानन्द सिंह सातवें साझेदार थे, जिसमें प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पांचवे,

फर्म मे ० इकरी इण्डस्ट्रीज इकरी विला रेलवे अलीगढ़ पत्रावली संख्या एएलआई / 0011930 में दिनांक 01 अप्रैल, 2022 को मधुर मित्तल पुत्र श्री राकेश मित्तल निवासी-37 इकरी विला रेलवे रोड अलीगढ़ एवं रमिल 212

उत्तर प्रदेश गजट , 14 मई, 2022 ई० (बैशाख 24, 1944 शक संवत्)

[भाग 8

मित्तल पुत्र श्री राकेश मित्तल निवासी -37 इकरी विला रेलवे रोड अलीगढ़ फर्म की साझेदारी में सम्मिलित हो गये । त‌द्दिनांक को जितेन्द्र कुमार मित्तल पुत्र स्व० जवाहर लाल मित्तल निवासी-7/ 118 सुभाष रोड अलीगढ़ फर्म की भागीदारी से पृथक हुये । वर्तमान फर्म में भागीदार राकेश मित्तल, मधुर मित्तल, रमिल मित्तल हैं ।

की साझेदारी में सम्मिलित हुये दिनांक 27 अप्रैल, 2022 को फर्म की प्रथम पक्ष श्रीमती अपाला शुक्ला पत्नी स्व० अनुराग शुक्ला निवासी 32 से 5 आवास विकास कॉलोनी आगरा एवं द्वितीय पक्ष श्री अनिरूद्ध शुक्ला पुत्र स्व० अनुराग शुक्ला निवासी 32 से 5 आवास विकास कॉलोनी आगरा की आपसी सहमति से फर्म को विघटित कर दिया गया है ।

राकेश मित्तल, साझेदार, मे० इकरी इण्डस्ट्रीज, इकरी विला रेलवे, अलीगढ़ ।

अनिरूद्ध शुक्ला, साझेदार, मे० सीता गैस सर्विस, 47 न्यूमार्केट जीवनी मण्डी, आगरा ।

सूचना

सूचना

फर्म मे० जेन सेल्स इण्डिया 7/169 सुभाष रोड अलीगढ़ पत्रावली संख्या एएलआई / 0011867 में दिनांक 01 अप्रैल, 2022 को ऋतु बंसल पत्नी श्री रमिल मित्तल निवासी-म० न 011 /56 शंकरपुरी बड़ा बाजार जलेसर एटा फर्म की साझेदारी में सम्मिलित हो गये तद्दिनांक को शशी मित्तल पत्नी श्री जितेन्द्र कुमार मित्तल निवासी- इकरी विला रेलवे रोड अलीगढ़ एवं रीतिमा मित्तल पत्नी श्री जिनेन्द्र कुमार मित्तल निवासी इकरी विला रेलवे रोड अलीगढ़ फर्म की भागेदारी से पृथक हुये वर्तमान फर्म में भागीदार श्रीमती लता मित्तल, ऋतु बंसल है ।

सूचित किया जाता है कि फर्म मेसर्स न्यू गौड़ इंजीनियर एलाइट 208 एफ प्रेम नगर , बरेली उत्तर प्रदेश पिन कोड-243005 (पंजीकरण संख्या कोड बी-1222) फर्म में पांच साझेदार जसवंत सिंह मौर्य, अनिल कुमार गंगवार, अमरीश कुमार सक्सेना, रामकिशोर मौर्य व अवनीश कुशवाहा थे । साझेदारों की रजामंदी से दिनांक 31 मार्च, 2022 को एक नये साझेदार श्वेता मौर्य को शामिल किया गया है । चार साझेदार जसवंत सिंह मौर्य, अनिल कुमार गंगवार, अमरीश कुमार सक्सेना व रामकिशोर मौर्य अपनी स्वेच्छा से दिनांक 31 मार्च, 2022 को फर्म से अलग हो गये हैं । फर्म से अलग हुए साझेदारों का सारा हिसाब-किताब चुकता हो गया है कोई लेन-देन बकाया नहीं है । अब फर्म में दो साझेदर अवनीश कुशवाहा व श्रीमती श्वेता मौर्य हैं ।

श्रीमती लता मित्तल, साझेदार, मे० जेन सेल्स इण्डिया, 7/169 सुभाष रोड, अलीगढ़ ।

एतद्वारा सूचित किया जाता है कि उक्त्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकतायें मेरे द्वारा पूरी कर ली गयी है ।

सूचना

अवनीश कुशवाहा, साझेदार, मेसर्स न्यू गौड़ इंजीनियर एलाइड, बरेली (उ ० प्र०) ।

फर्म मे ० सीता गैस सर्विस 47 न्यू मार्केट जीवनी मण्डी आगरा पत्रावली संख्या एजी/ 4985 में दिनांक 25 अप्रैल, 2021 को श्री अनुराग शुक्ला की मृत्यु होने के उपरान्त उनके लीगल हायर अनिरूद्ध शुक्ला उक्त फर्म

पी ०एस०यू० पी०-7 हिन्दी गजट- भाग 8-2022 ई० ।

मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन सामग्री, उ ०प्र ०, प्रयागराज ।

Cite this issue. Uttar Pradesh Ordinary Gazette, Government of Uttar Pradesh, 14 May 2022. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gazette.uttarpradesh_ordinary.2022-05-14.c_202303101212476713/. Archive identifier in.gazette.uttarpradesh_ordinary.2022-05-14.c_202303101212476713.