रजिस्टर्ड नं०-ए०डी०-4 लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू०पी०-41 (लाइसेन्स्ड टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट) खण्ड 79] प्रयागराज, शनिवार, 11 जनवरी, 2025 ई० (पौष 21, 1946 शक संवत्) [संख्या 02
विषय-सूची
हर भाग के पन्ने अलग-अलग किये गये हैं, जिससे इनके अलग-अलग खण्ड बन सके।
विषय पृष्ठ संख्या
विषय
वार्षिक चन्दा
पृष्ठ संख्या
21-28 3075 भाग 5-एकाउन्टेन्ट जनरल, उार प्रदेश .. 975
वार्षिक चन्दा सम्पूर्ण गजट का मूल्य रु0 रु0 भाग 1- विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण, अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस
भाग 6-(क) बिल, जो भारतीय संसद में प्रस्तुत किये गये या प्रस्तुत किये जाने से पहले प्रकाशित किये गये
.. 975
75-112 1500
(ख) सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट क-भारतीय संसद के ऐक्ट
भाग 1-क- नियम, कार्य-विधियां, आज्ञायें, विज्ञप्तियां इत्यादि, जिनको उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया
भाग 1-ख (1) औद्योगिक न्यायाधिकरणों
के अभिनिर्णय
भाग 1-ख (2)-श्रम न्यायालयों के
भाग 7-(क) बिल, जो राज्य की धारा सभाओं में प्रस्तुत किये जाने के पहले प्रकाशित किये गये
अभिनिर्णय
... 975
... 975
(ख) सिलेक्ट कमेटियों की रिपोर्ट भाग 7-क-उत्तर प्रदेशीय धारा सभाओं के ऐक्ट भाग 7-ख-इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की अनुविहित तथा अन्य निर्वाचन सम्बन्धी विज्ञप्तियां
भाग 2-आज्ञायें, विज्ञप्तियां, नियम और नियम विधान, जिनको केन्द्रीय सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों ने जारी किया, हाई कोर्ट की विज्ञप्तियां, भारत सरकार के गजट और दूसरे राज्यों के गजटों का उद्धरण
... 975
भाग 3-स्वायत्त शासन विभाग का क्रोड़पत्र, खण्ड ग-निर्वाचन (स्थानीय निकाय) तथा खण्ड घ-जिला पंचायत
53-81 975
1-426 975
भाग 8-नगरपालिका परिषद्, नगर पंचायत, सरकारी कागज-पत्र, दबाई हुई रूई की गाठों का विवरण-पत्र, जन्म-मरण के आँकड़े, रोगग्रस्त होने वालों और मरने वालों के आँकड़े, फसल और ऋतु सम्बन्धी रिपोर्ट, बाजार भाव, सूचना, विज्ञापन इत्यादि
भाग 4- निदेशक, शिक्षा विभाग, उार प्रदेश
स्टोर्स-पर्चेज विभाग का क्रोड़ पत्र .. 1425
4 क22 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1
आवश्यक सूचना
1-गजट के न मिलने की सूचना गजट में प्रकाशित होने से 15 दिन के अन्दर
निदेशक, मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, उार प्रदेश, प्रयागराज को प्राप्त होनी चाहिये।
उसके बाद के परिवादों की कोई सुनवाई न होगी। केवल गजट की वही प्रतियां पुनः
बगैर कीमत भेजी जा सकेंगी जो डिलीवरी न होने के कारण वापस आई हों।
2-सम्पूर्ण गजट के ग्राहकों को असाधारण गजट की सम्पूर्ति की जाती है।
असाधारण गजट नवीन राजकीय मुद्रणालय, ऐशबाग, लखनऊ से वितरित होता है।
अतः असाधारण गजट के सम्बन्ध में यदि कोई पत्र-व्यवहार करना हो तो —पया उक्त
पते पर ही करें। सम्पूर्ण गजट का वार्षिक एवं अर्द्धवार्षिक चन्दा 20 सितम्बर, 1997 से
क्रमशः रु0 3,075.00 एवं रु0 1,560.00 हो गया है।
3-गजट के प्रत्येक भाग का वार्षिक चन्दा प्रत्येक के सामने अलग-अलग अंकित
है। भाग-1 का वार्षिक चन्दा रु0 1,500.00 तथा छमाही चन्दा रु0 780,00 है। स्टोर्स-
पर्चेज का वार्षिक चन्दा रु0 1,425.00 तथा अर्द्धवार्षिक चन्दा रु0 750.00 है। इसके
अतिरिक्त प्रत्येक भाग का वार्षिक चन्दा रु0 975.00 तथा अर्द्धवार्षिक रु0 555.00 है।
प्रत्येक गजट अथवा गजट (साधारण अथवा असाधारण) के भागों के वार्षिक एवं
अर्द्धवार्षिक चन्दे की राशि में यदि कोई परिवर्तन किन्हीं अपरिहार्य कारणोंवश होता है
तो उसकी सूचना अलग से दी जायेगी।
4-उार प्रदेश राजपत्र (गजट) के स्थायी ग्राहकों को सूचित किया जाता है कि
वे अर्द्धवार्षिक और वार्षिक चन्दा समाप्त होने की तारीख से एक मास पूर्व ही अपना
नवीन चन्दा गजट के लिये इस कार्यालय को भेज देने की कृपा करें, जिससे गजट के
भेजने का क्रम टूटने न पावे और नियमित रूप से उन्हें हम गजट भेजते रहें। इससे
ग्राहकों को भी असुविधा नहीं होगी और वे निश्चित समय पर गजट प्राप्त कर सकेंगे।
इस सम्बन्ध में, मैं यह भी सूचित करना आवश्यक समझता हूं कि पूर्ण वर्ष के
ग्राहक अब जनवरी से दिसम्बर तक के लिये ही बनाये जायेंगे। इनके बीच के महीनों
में चन्दा प्राप्त होने पर ग्राहकों का नाम उसी वर्ष के जुलाई से दिसम्बर तक के लिये
तथा जैसी स्थिति होगी, अंकित किया जायेगा।
ग्राहकों से यह भी निवेदन है कि वे अपने पत्रों का उार शीघ्र पाने के लिये
पत्र-व्यवहार करते समय अपनी ग्राहक संख्या अवश्य लिखें अन्यथा उार देने में इस
कार्यालय को कठिनाई या विलम्ब हो सकता है।
अभिषेक प्रकाश,
निदेशक,
मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, विभाग,
उ0प्र0, प्रयागराज।
भाग 1 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 23भाग 1
विज्ञप्ति-अवकाश, नियुक्ति, स्थान-नियुक्ति, स्थानान्तरण, अधिकार और दूसरे वैयक्तिक नोटिस।
राजस्व विभाग
अनुभाग-14
अधिसूचना
25 अप्रैल, 2022 ई0
सं0 237/एक-14/2022-उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (उत्तर प्रदेश अधिनियम, संख्या 8 सन् 2012) की धारा-43 की उपधारा (2) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल घोषणा करती हैं कि नीचे अनुसूची में विनिर्दिष्ट जिला चन्दौली के 195 ग्राम, ग्रामीण आबादी के क्षेत्रों के सर्वेक्षण एवं अभिलेख क्रियाओं के प्रयोजनार्थ, इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशित किये जाने के दिनांक से, भारत सरकार की स्वामित्व योजना के अधीन रखे जायेंगे।
अनुसूची
जिला तहसील
ग्राम
1 2
3
चंदौली सकलडिहा भुपौली, सलेसपुर मु0 कैली, लच्छीयुर, सुरजनपुर, आराजी सुरजनपुर, नादीनिधौरा, ककरहदी, रामदत्तपुर, टाण्डाकलाँ, अमानी, गंगापुर, जूड़ाहरधन, डेरवा खुर्द, गंगबरार, बछौली, बीसूपुर, सिकरौरा खुर्द, कैली, दुल्लह चक, आराजीदीयरा, नौधरा, गंगबरार धानापुर, गंगबरार अमादपुर, गंगबरान नगवामेढवा, गंगबरान नगवा, विसम्भर चक, गंगबरारसोनहुली, पपरौल, गुरैनी, अहिकौरा, कान्धरपुर, निदिलपुर, मरफापुर, बहेरी, सिसौडाखुर्द, महुजी, दुर्गापुर, ओनावल, खोर, सैदपुरा, जलालपुर, बिशुनपुरा, परानपुर, गोकुलपुर, बिसुन्धरी, पिपरी, धानापुर, नोनार, कान्धरपुर, फेसुड़ा, पूरा (कटारूपुर),
'' चंदौली बाघो, वासूपुर, विसौरी, सुल्तानपुर, सरिहकोनिया, सोनवरसा, गोरारी, गोबर्धनपुर, विशुनपुरा, बहेरा, चुरमुली, बबुरी, भोपतपुर, गुम्मा, मैठी, सुदाँव, नरहन खुर्द, हलुआ, मानिक पुर, रेवई, पिपरी, कसवढ, डैना, ववुराखुर्द, कुसीखुर्द, घमिना खुर्द, बगदेइया, अरंगी, कुआं, अमड़ा, भदखरी, और औरइयापट्टीलाल, परसिया, रामपुर, जमुडा, जेवरियावाद, मनराजपुर, दैलू पट्टी, डोमरी, मुहम्मदपुर, कन्दवा, बेलवानी, परेवां, कजेहरा, खरगसीरपुर, चकमानिकपुर, मचखिया।
'' चकिया ददवल, शाहपुर, सेमरा, लोहरपुरवा, सहामतपुर, गनेशपुर, सीतापुर, विसौरा, पण्डी, आराजी करौदा, महलिया, सिकन्दरपुर, अमरा, सोनहुल, कटरिया, महादेव पुर खुर्द, मुजप्फरपुर, वहेलियापुर, भूसी—तपुरवा, अमांव, करनौल, बयापुर, सलावतपुर, घटमापुर, चकिया।
'' मुग़लसराय दयालपुर, सरेसर, नसीरपुर पट्टन, डेवढिल, रामपुर उर्फ करनपुर, झांसी, मकदूमपुर, जहाँगीरपुर, फतहपुर, नरियाँ, डाडी, सेमरा, कटेसर, कुण्डाखुर्द, सुल्तानीपुर, आदमपुर, मलोखर, भिसौड़ी, करवत, चौनपुर, हरिशंकरपुर, जलालपुर, हृदयपुर, हथेरवाँ, खजूरगांव, चकिया, बखरा, महावलपुर, पुरैनी, चांदीतारा, नीबूपुर, नाथूपुर, व्यासपुर, भुजहुआ, गोरईयां, खुटहाँ, गोविन्दपुर, मन्नापुर, कबीरपुर, दरियापुर/पंडितपुर, परोरवां, ऐरी, कमलापुर, भिटसिरिया, भोजापुर, डहिया, पटना, हमीदपुर (ता0कटेसर), गोपालपुर, ताहिरपुर, हेसामपुर, हिण्डवारी, कूदखुर्द, कूढ़कलां, अमोधपुर, नियामताबाद, बहादुरपुर, मझिया, सतपोखरी, अ0रहीमउर्फदुलहीपुर, मुगलचक, परसुरामपुर, हनुमानपुर, गिधौली, जगदीशपुर,24 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1 1 2
3
चंदौली नौगढ जयमोहनी पोस्ता, औखाँटाड़, सेहआनार, जमसोत, शिवपुर, चकचोडइया, झरिया उर्फ हरियावांध।
आज्ञा से, मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव।
REVENUE DEPARTMENT
Section -14
In pursuance of the provisions of clause (3) of Article-348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No. 237/1-14/2022, dated April, 25, 2022.
NOTIFICATION
April 25, 2022
No. 237/1-14/2022–In exercise of the powers under sub-section (2) of section 43 of the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 (U.P. Act no. 8 of 2012), the Governor is pleased to declare that the 195 Villages of District Chandauli specified in the Schedule below shall be placed under Svamitva Yojna of Government of India for the purpose of Survey and Record Operation of the Village Abadi areas with effect from the date of publication of this notification in the Gazette.
SCHEDULE
District Tehsil Village
1 2
3
Chandauli Sakaldiha Bhuseula, Salempur, Lechchipur, Surjanpur, Arazi Surjan, Nadi Nidhaura, Kakarahati, Ram Duttpur, Tanda Kalan, Amani, Gangapur, Zura Haradhari, Derawan Khurd, Gang Barar, Bachhauli, Bissupur, Sikraura Khurd, Kaili, Dulhachak, Arajidiyara, Naudhara, Gang Barar Dhanapur, Gangwara Amadpur, Gangwara Nakanwa Medhwa, Gang Barar Nagwa, Bisambhar Chak, Gang Barar Sonhuli, Papraul, Guraini, Ahikaura, Kaudharpur, Nidilpur, Marufapur, Baheri, Sisaura Khurd, Mahuji, Durgapur, Onawal, Khor, Saidpura, Jalalpur, Bisunpur, Paranpur, Gokulpur, Bisundhari, Pipari, Dhanapur, Nonar, Kadharpur, Fesura, Pura Katarupur,
Do. Chandauli Badho, Basupur, Bisauri, Sultanpur, Sirkoniya, Sonbarasa, Gorari, Gobardanpur, Bisunpura, Bahera, Churmuli, Baburi, Bhopatpur, Guma, Maidhi, Sudaw, Narhan Khurd, Halua, Manikpur, Rawai, Pipari, Kaswar, Daina, Babura Khurd, Kursi Khurd, Dhamina Khurd, Bagdeya, Arangi, Kuwa, Amara, Bhadkhari, Oaraiya Patti Lal, Parsiya, Rampur, Jamura, Jawariyabad, Manrajpur, Dulam Patti, Domari, Muhammadpur, Juthi, Belwani, Parewa, Kajehara, Khargasipur, Chakmanikpur, Machakhiya,भाग 1 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 25 1 2
3
Chandauli Chakia Dadwal, Shahpur, Semara, Lohar Purwa, Sahamatpur, Ganeshpur, Sitapur, Bisaura, Pandi, Araji Karaundha, Mahaliya, Sikandarpur, Amara, Sonhul, Kataria, Mahadeopur Khurd, Muzaffarpur, Baheliapur, Bhusikrit Purwa, Amaon, Karnaul, Vayapur, Salawatpur, Ghatamapur, Chakia,
Do. Mughalsarai Dayalpur, Saresar, Nasirpur Pattan, Deodil, Rampur Urf Karanpur, Jhhansi, Makadoompur, Jahangirpur, Fatahpur, Nariya, Dadi, Semara, Katesar, Kunda_Khurd, Sultanipur, Adampur, Malokhar, Bhisauri, Karwat, Chainpur, Harshankarpur, Jalalpur, Hirdaypur, Hathekawan, Khajurpur Gawan, Chakiya, Wakhara, Mahawalpur, Puraini, Chanditara, Neebupur, Nathupur, Vyaspur, Bhujhuwa, Goraiya, Khutaha, Govindpur, Mannapur, Kabirpur, Dariyapur Urf Panditpur, Pararwa, Ari, Kamalapur, Bhitsiriya, Bhojapur, Dahiya, Patana, Hamidpur, Gopalpur, Tahirpur, Hesampur, Hindwari, Kush Khurd, Kush Kala, Amogpur, Niyamatabad, Bahadurpur (CT), Madiya (CT), Satpokhari (CT), Dulhipur (CT), Mughalchak, Marsurampur, Hanumanpur, Gidhauli, Jagdispur,
Do. Naugarh Jatmohni Posta, Aurwatand, Sehuwanar, Jamsot, Sheopur, Chak Chuiya, Jhaaria Urf Haribandh.
By order,
Manoj Kumar Singh,
Additional Chief Secretary.
राजस्व विभाग
अनुभाग-14
अधिसूचना
25 अप्रैल, 2022 ई0
सं0 238/एक-14/2022-उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (उत्तर प्रदेश अधिनियम, संख्या 8 सन् 2012) की धारा-43 की उपधारा (2) के अधीन शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल घोषणा करती हैं कि नीचे अनुसूची में विनिर्दिष्ट जिला वाराणसी के 280 ग्राम, ग्रामीण आबादी के क्षेत्रों के सर्वेक्षण एवं अभिलेख क्रियाओं के प्रयोजनार्थ, इस अधिसूचना के गजट में प्रकाशित किये जाने के दिनांक से, भारत सरकार की स्वामित्व योजना के अधीन रखे जायेंगे।
अनुसूची
जिला तहसील
ग्राम
1 2
3
वाराणसी पिन्डारा चक बराई, कैथोली, रतनपुर दोयम, दान्दुपुर कोइलार, मधुमखिया, सारीपुर, हसनपुर, चिलबिला, रामपुर थाना, नदोय, आसमान पट्टी, छताँव, देवराई, औरावं, गाड़र, खुटहां, करमी, नोहरपुर, बेसही, पश्चिमपुर (अहरक), परसहा, चुरा पट्टी, भायठ, पुआरीकलाँ, हरीरामपुर, मधईपुर, सराय स्वामी, लुच्चेपुर, भटौली, अनौरा, परताप पटटी, आशापुर, वाजिदपुर, कोईराजपुर, चमांव।
26 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 11 2
3
वाराणसी वाराणसी लखनपुर, सुल्तानीपुर, बाबतपुर, देवरियां, उधोरामपुर, लक्ष्मीसेनपुर, डुडुवा, रैपुरा, नखवां, कैथी (रिकार्ड आपरेशन), राजवाड़ी, भगवानपुर खुर्द, पौहा, धौरहरा, पराना पट्टी, अजगरा, भरतपुर, आलमनगर, लोहगाजर, टेकुरी, रसूलपुर, गौरा गंगवार, तेवर, भटपुरवां कला, शिवरामपुर (शिवदासपुर, बेनीपुर खुर्द, अवरा, परजनपुर, महेशपुर, लखमी पुर, बेदौली, घमहापुर, भट्टी, मंगलपुर, नेवादा, बनकट, नाथूपुर, भिखारीपुर खुर्दट, कंचनपुर, नासिरपुर, छितौनी, टिकरी, नरोत्तमपुर कला, नैपुरा खुर्द, नुनांव, रमना, भीटी, टेकीपुर, अकथा, लमही, सोयेपुर, मझमिटिया, होलापुर, परमानन्द पुर, लोढान, तरना, भवानीपुर, दानियालपुर, गौरडीह, बर्थरागंगवरार, शिवदशा गंगवरार, लूठाकलां, लूठा खुर्द, शिवनाथपुर, सरसौल, मिश्रपुरा, धराधर, बकैनी, शिवदशा उपवार, कुकुढ़ा, गंगापुर, अम्बा, कादीपुर खुर्द, रेऊआ उर्फ चिरईगाँव, पतेरवा, हसनपुर, सिंहपुर, मुगदर पुर, खजुही, फरीदपुर, नवलपुर, सथवा, रजनहिया, सन्दहा, हिरामनपुर, रसूलगढ, प्रहलादपुर, चकनेवादा, कमौली, राजापुर, तातेपुर, सेहवार, बभनपुरा, मुस्तफाबाद, मोकलपुर, रामचंदीपुर, गोबरहां, चांदपुर, महेशपुर, ककरमत्ता, केशरीपुर, जलाली पट्टी, सीरगोवर्धन पुर, चितईपुर, भगवानपुर, लेटूपुर, आशापुर, सरायमोहाना, लोहता, लहरतारा, मड़ौली, कुतलूपुर, कोदोपुर, रामनगर, राल्हूपुर, अनौला, कुडाँव, रामपुर ढाब, अमरपुर, अलईपुर, कज्जाकपुर, आराजी लाइन, करौदी, काशी पुरा, कोनिया, घौसाबाद, चौका, छित्तूपुर खास, जैतपुरा, छिततूपुर तालुक लोहता, जोल्हा, टकसाल, तुलसीपुर, नगवां, नदेसर, नेवादा, पटीया, पलंगशहीद, बिरदोपुर, बी0एच0यू0, भदऊ, भदैनी, भेलू पुर, मकदुमपुर, शिवपुरवा, रामापुरा, रानीपुर, विनयका, सरायनंदन, लल्लापुरा, सरायहेड, शहरखास, हवीव पुरा, सोनारपुरा, मानपुरा, सरैता बाद, इन्द्रपुर, कठवतियां, कादीपुर, अनौली, गंज, घुरहूपुर, चकवीही, ताजपुर, दानियालपुर, दौलतपुर, जेलखाना (ना0जे0ए0), नरायनपुर, नवापुरा, परसुराम पुर, पहडिया, पहाड़पुर, पाण्डेयपुर, पुल कोहना, बनियापुर, बरईपुर, भगत पुर, भरलाई, भैसौडी, मवइया, महेशपुर, मीरापुर बसही, रमरेपुर, लछिमनपुर, लालपुर अनौला, सरसौड़ी, सिकरौल, सुध्दिपुर, हुकुलगंज, हुलासीपुर, कर्माजीतपुर, कमल गड़हा (ना0जे0ए0), काजी सहदुल्लापुर, काजीमण्डी, कोतवालपुरा (ना0जे0ए0), नरहरपुरा, बड़ागाँव तृतीय, बड़ागांव प्रथम, बागमालती, मंझनपुर, मालिक पट्टी (जेड0ए0), लच्छीपुरा, सरैया, खालिसपुर, बडगांव दुवितीय ना जे।
,, राजा तालाब हरभानपुर, बाजार कालिका, सोनवरसा, पचबनवा, सत्तरपुर, गोसाईपुर, बसावनचक, माधोपुर, बिहड़ा, चितरसेनपुर, बाजार तमाचावाद, देवापुर खुर्द, जमीन करधना, धन्नीपुर, कुन्डरिया, तरसांव, भड़ाव, कोरउत, खजुरी, रानीबाजार, चक दीहाराम, रामरायपुर, जमीन खुशीकत्थक, जमील सुलछन, जमीन टेकीकहार, सुईचक, जमीन हिकमतशाह, जमीनदर्शन, दरेखू, शहावाबाद, हरदत्तपुर, लछिरामपुर, तिलंगा, करनाडाडी, नकाइन, बेनी पुर, परमन्दापुर, जमीन सुछन, हृदयीपुर।
आज्ञा से, मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव।
भाग 1 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 27REVENUE DEPARTMENT
Section -14
In pursuance of the provisions of clause (3) of Article-348 of the Constitution, the Governor is pleased to order the publication of the following English translation of Notification No. 238/1-14/2022, dated April, 25, 2022.
NOTIFICATION
April 25, 2022
No. 238/1-14/2022–In exercise of the powers under sub-section (2) of section 43 of the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 (U.P. Act no. 8 of 2012), the Governor is pleased to declare that the 280 Villages of District Varanasi specified in the Schedule below shall be placed under Svamitva Yojna of Government of India for the purpose of Survey and Record Operation of the Village Abadi areas with effect from the date of publication of this notification in the Gazette.
SCHEDULE
District Tehsil Village
1 2
3
Varanasi Pindra Chak Barai, Kaithauli, Ratanpur, Dendup Sharipur, Hasanpur, Chilbila, Rampur, Nadoy, Asman Patti, Chhatacn, Deorai, Auraon, Gadar, Khuthan, Karmi, Noharpur, Beshipur, Pashchim Patti, Parsaha, Chiura Patti, Bhayath, Puari Kala, Harirampur, Maghaipur, Sarayswami, Luchchepur, Bhatauli, Anura, Pratap Patti, Ashapur, Wazidpur, Koirajpur, Chamawn,
Do. Varanasi Lakhanpur, Sultanipur, Babatpur, Deoriya, Udho Rampur, Lachmisenpur, Duduhan, Raipura, Nakhwan, Kaithi, Rajwari, Bhagwanpur Khurd, Pauha, Dhaurhara, Parana Patti, Azgara Khas, Bharatpur, Alamnagar, Lohagazar, Tekari, Rasulpur, Gaura Gangwar, Tewar, Bhatpurwa Kala, Shivrampur, Benipur Khurd, Aura, Parjanpur, Maheshpur, Lakhanipur, Berhauli, Ghamhapur, Bhatti, Mangalpur, Newada, Bankat, Nathupur, Bhikharipur Khurd, Kanchanpur, Nasiripur, Chhitauni, Tikari, Narottampur Kala, Naipura Khurd, Nuawn, Ramna, Bhitti, fekipur, Aitha, Lamhi, Soyepur, Majhmitia, Holapur, Parmanandpur, Lorhan, Tarna, Bhawanipur, Daniyalpur, Gaurdiha, Bartharra Gangwar, Sheodabha Gangwarar, Looth Kala, Looth Khurd, Sheonathpur, Sapsaul, Misripura, Dharadhar, Bakaini, Sheodas Uparwar, Kukraha, Gangapur, Amwa, Kadipur Khurd, Chiraigaon, Paterwa, Hasanpur, Singhpur, Mugdarpur, Khajuhi, Faridpur, Nawapur, Sathawan, Rajnahiya, Sandaha, Hiramanpur, Rasulgarh, Prahladpur, Chak Newada, Chamauli, Rajapur, Tatepur, Sehwar, Babhanpura, Mustafabad, Mokalpur, Ramchandipur, Gobrha, Chandpur (CT), Maheshpur (CT), Kakarmatta (CT), Kesaripur (CT), Jalal Patti (CT), Sir Gobardhan (CT), Chhitpur (CT), Bhagawanpur (CT), Lerhupur (CT), Asapur (CT), Sarai Mohana (CT), Lohta (CT), Lahartara (CT), Maruadih (CT), Kutalupur, kodopur, Ramnagar, Ralhoopur, Anaula, Kudaw, RampurDhaw, Amarpur, Alaipr, Kajiakpur,28 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1 1 2
3
Varanasi Varanasi Arajiline, Karoudi Kashipura, Koniya, Ghousabad, Chouka, Chhittupurkhas, Jaitpura, Chhittupur talukalohata, Jolha, Takasal, Tulasipur, Nagawa, Nadesar, Newada, Patiya, Palangshahid, Biradopur, B.H.U., Bhadaoo, Bhadaini, Bhelupur, Makdoompur, Shivpurva, Ramapura, Ranipur, Vinayka, Saraynandan, Lallapura, Sarayhed, Shaharkhas, Havivpura, Sonarpura, Manpura, Saraitabad, Indrapur, Kathawatiya, kadipur, Anouli, ganj, Ghurahoopur, Chakvihi, Tajpur, Daniyalpur, Doulatpur, Jalkhana (na.j.a), Narayanpur, Nayapura, Parasurampur, Pahariya, Paharpur, Pandeypur, Pulkohana, Baniyapur, Baraipur, Bhagatpur, Bharlai, Bhaisuori, Mavaiya, Maheshpur, Meerapur Basahi, Ramarepur, Lachhimanpur, Lalpur anoula, Sarsouri, Sikaroul, Sudhdipur, Hukulganj, Hulasipur, Karmajeetpur, Kamalgaraha (na.j.a), Kajisadullapur, Kajimandi, Kotvalpura (N.Z.A), Narahpura, Baragaw third, Baragaw first, Bagmalti, Manjhanpur, Malikpatti (J.A), Lachchhipura, Saraiya, Khalispur, Badagaon Second NZA,
Do. Raja Talab Harbhampur, Bazar Kalika, Sonbarsa, Pachabanawa, Sattanpur, Gosai Pur, Basawan Chak, Madhopur, Vihana, Chitarsenpur, Tamachabad, Dewapur Khurd, Jameen Kardhana, Dhanipur, Kundriya, Tarsawn, Bharaon, Coraut, Khajuri, Ranibazar, Chakdiharam, Ramraypur, Jamin Kushi Kaitthak, Jamin Sulchhan, Jamin Tekikahar, Suichak Jamin Hikmatshah, Jamindarsan, Darekhu, Sahawabad, Hardattpur, Laxirampur, Tilanga, Karnadadi, Nakain, Benipur (CT), Parmanandpur (CT), Jameen Sukshan, Hridaipur.
By order, Manoj Kumar Singh,
Additional Chief Secretary.
पी0एस0यू0पी0-41 हिन्दी गजट-भाग 1-2025 ई0।
मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज।
रजिस्टर्ड नं०-ए०डी०-4 लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू०पी०-41 (लाइसेन्स्ड टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट) प्रयागराज, शनिवार, 11 जनवरी, 2025 ई० (पौष 21, 1946 शक संवत्)
भाग 1-क
नियम, कार्य विधियां, आज्ञायें, विज्ञप्तियां इत्यादि, जिनको उत्तर प्रदेश के राज्यपाल महोदय, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष तथा राजस्व परिषद् ने जारी किया।
HIGH COURT OF JUDICATURE AT
No. 302/Admin.(Services)/2024–Sri Mohd.
ALLAHABAD
Shariq Siddique, Special Judge/Additional District &
NOTIFICATION
Sessions Judge, Jaunpur to be Additional District &
Sessions Judge, Jaunpur.
January 05, 2024
No. 300/Admin.(Services)/2024–Pursuant to No. 303/Admin.(Services)/2024–Sri Anil Kumar
Yadav-I, Additional District & Sessions Judge, Government Notification No. U.O.-102/VI-P-9-23-
Jaunpur to be Additional District & Sessions 332G/91 T.C.-1 dated 31.12.2023, Sri Avanish
Judge/Special Judge, Jaunpur for trying cases U/s 14 Kumar Rai, Additional District & Sessions Judge,
of the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes Gorakhpur is appointed/posted as Special Judge,
(Prevention of Atrocities) Act, 1989 (Act no. 33 of Anti Corruption, Court No. 4, Gorakhpur.
1989) in the exclusive special court.
No. 301/Admin.(Services)/2024–Sri Sarad Kumar
January 09, 2024
Tripathi, Additional District & Sessions Judge,
No. 304/Admin.(Services)/2024–Sri Arpit Panwar, Jaunpur to be Additional District & Sessions Judge/
Additional Civil Judge, Senior Division, Gorakhpur Special Judge, Jaunpur vice Sri Mohd. Shariq
to be Civil Judge (Senior Division) (Fast Track Siddique.
Court), Gorakhpur vice Sri Sachin Verma.
He is also appointed U/s 12-A of U.P. Essential
No. 305/Admin. (Services)/2024–Sri Sachin Commodities (Special Provisions) Act, 1981, as
Verma, Civil Judge (Senior Division) (Fast Track
Special Judge at Jaunpur against the special court Court), Gorakhpur to be Civil Judge, Senior
created for trying cases under the said Act.
Division, Bansgaon, Gorakhpur in the vacant court.
11 ख76 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क January 12, 2024
No. 311/Admin. (Services)/2024–In exercise of
the powers conferred under Clause 12-D (Note) of No. 306/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Financial Hand Book, Volume-V (Part-I), Chapter-II, U.P. Government Notification No. 52/2023/1038/
High Court of Judicature at Allahabad hereby Saat-Nyay-2-2023-216G/2007 T.C.-II dated
delegates Financial Powers to Sri Zafeer Ahmad, 18.12.2023, Sri Kunwar Divyadarshi, Additional
District & Sessions Judge, Amroha, till Sushri Civil Judge (Junior Division), Muzaffar Nagar is
Madhulika Chaudhary assumes charge of the office appointed/posted as Nyayadhikari, Gram Nyayalaya
of Principal Judge, Family Court, Amroha.
at tehsil Khatauli District Muzaffar Nagar.
January 31, 2024
No. 307/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 312/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification No. 52/2023/1038/ Saat-
U.P. Government Notification No./2024/43/VII- Nyay-2-2023-216G/2007 T.C.-II dated 18.12.2023,
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 30.01.2024, Sri Shikhar Agarwal, Additional Civil Judge (Junior
Sri Manu Gupta, Additional Civil Judge (Junior Division), Lakhimpur Kheri is appointed/posted as
Division), Raebareli is appointed/posted as Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Gola
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Unchahar District Lakhimpur Kheri in the newly created court,
District Raebareli in the newly created court, created created vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-
vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-2015- 2015-216G/2007 dated 24.11.2015.
216G/2007 dated 24.11.2015.
No. 308/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 313/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification No. 52/2023/1038/
U.P. Government Notification No./2024/43/VII- Saat-Nyay-2-2023-216G/2007 T.C.-II dated
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 30.01.2024, 18.12.2023, Sri Prabhat Kumar Dubey, Civil Judge,
Sri Tarif Mustafa Khan, Additional Civil Judge Junior Division (Fast Track Court), Sant Kabir
(Junior Division), Azamgarh is appointed/posted as Nagar is appointed/posted as Nyayadhikari, Gram
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Mehnagar Nyayalaya at tehsil Mehdawal District Sant Kabir
District Azamgarh in the newly created court, Nagar in the newly created court, created vide G.O.
created vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-
No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-2015-/216G/2007
2015-216G/2007 dated 24.11.2015.
dated 24.11.2015.
No. 314/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
January 25, 2024
U.P. Government Notification No./2024/43/VII-
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 30.01.2024, No. 309/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Sri Punit Mohan Das, Additional Civil Judge (Junior Government Notification No. HC-129/VI-P-9-
Division), Azamgarh is appointed/posted as 2023/Nyay-2 dated 19.01.2024, Sri Vipin Kumar-III,
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Lalganj Additional District & Sessions Judge, Gorakhpur is
District Azamgarh in the newly created court, appointed/posted as Special Judge, Anti-Corruption,
created vide G.O. No. 1532/VIl-Nyaya-2-2013- Court No. 5, Gorakhpur.
216G/2007 dated 17.02.2014.
January 27, 2024
No. 315/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 310/Admin. (Services)/2024–In exercise of
U.P. Government Notification No./2024/43/VII-
the powers conferred under Clause 12-D (Note) of
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 30.01.2024,
Financial Hand Book, Volume-V (Part-I), Chapter-II,
Sri Harsh Anand, Additional Civil Judge (Junior
High Court of Judicature at Allahabad hereby
Division), Azamgarh is appointed/posted as
delegates Financial Powers to Sri Ahsanullah Khan,
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Phoolpur
Additional District & Sessions Judge, Sonbhadra, till
District Azamgarh in the newly created court,
the new District & Sessions Judge assumes charge of created vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-
the office.
2015-216G/2007 dated 24.11.2015.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 77No. 316/Admin. (Services)/2024–Pursuant to High Court of Judicature at Allahabad hereby
U.P. Government Notification No./2024/43/VII- delegates Financial Powers to Smt. Anju Kanaujia,
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 30.01.2024, Additional Principal Judge, Family Court, Basti, till
Sri Ravindra Kumar Rawat, Additional Civil Judge the new Principal Judge, Family Court assumes
(Junior Division), Azamgarh is appointed/posted as charge of the office.
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Budhanpur
No. 323/Admin. (Services)/2024–In exercise of District Azamgarh in the newly created court,
the powers conferred under Clause 12-D (Note) of created vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-
Financial Hand Book, Volume-V (Part-I), Chapter-II, 2015-216G/2007 dated 24.11.2015.
High Court of Judicature at Allahabad hereby
February 06, 2024
delegates Financial Powers to Smt. Ekta Singh-I,
Additional Principal Judge, Family Court, Ayodhya No. 317/Admin. (Services)/2024–Sushri Rakhi
till the new Principal Judge, Family Court assumes Bhadoria, Additional Civil Judge (Junior Division),
charge of the office.
Budaun is appointed U/s 11(2) of the Code of
Criminal Procedure, 1973 (Act No. 2 of 1974) as No. 324/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Judicial Magistrate, First Class, Budaun vice Government O.M. No. 60/Do-4-2024 dated
Smt. Samriddhi Mishra.
02.02.2024, Sri Farrukh Inam Siddiqui, Additional
District & Sessions Judge, Chitrakoot is No. 318/Admin.(Services)/2024–Smt. Samriddhi
appointed/posted as Joint Secretary (Law), Uttar Mishra, Judicial Magistrate, First Class, Budaun to
Pradesh Public Service Commission, Prayagraj on be Additional Civil Judge (Junior Division), Budaun.
deputation basis.
No. 319/Admin. (Services)/2024–Sri Pankaj
No. 325/Admin. (Services)/2024–Smt. Pratibha Kumar Pandey, Additional Civil Judge (Junior
Saxena-II, Additional District & Sessions Judge, Division), Budaun is appointed U/s 11(2) of the
Bareilly to be Additional District & Sessions Code of Criminal Procedure, 1973 (Act No. 2 of
Judge/Special Judge, Anti-corruption VB-UPSEB, 1974) as Judicial Magistrate, First Class, Budaun
Bareilly vice Sri Rakesh Tripathi.
vice Smt. Manali Chandra.
No. 326/Admin. (Services)/2024–Sri Rakesh No. 320/Admin. (Services)/2024–Smt. Manali
Tripathi, Special Judge/Additional District & Chandra, Judicial Magistrate, First Class, Budaun to
Sessions Judge, Bareilly to be Additional District & be Civil Judge (Junior Division), Budaun in the
Sessions Judge, Bareilly.
vacant court.
No. 327/Admin. (Services)/2024–Km. Afshan, February 07, 2024
Additional District & Sessions Judge, Bareilly to be No. 321/Admin. (Services)/2024–In exercise of
Additional District & Sessions Judge/Special Judge, the powers conferred under Clause 12-D (Note) of
Bareilly vice Sri Ajay Kumar Shahi.
Financial Hand Book, Volume-V (Part-I), Chapter-II,
She is also appointed U/s 12-A of U.P. Essential High Court of Judicature at Allahabad hereby
Commodities (Special Provisions) Act, 1981, as delegates Financial Powers to Sri Anil Kumar-V,
Special Judge at Bareilly against the special court Additional District & Sessions Judge, Varanasi, till
created for trying cases under the said Act. the new District & Sessions Judge assumes charge of
the office.
No. 328/Admin. (Services)/2024–Sri Ajay
Kumar Shahi, Special Judge/Additional District & No. 322/Admin. (Services)/2024–In exercise of
Sessions Judge, Bareilly to be Additional District & the powers conferred under Clause 12-D (Note) of
Sessions Judge, Bareilly.
Financial Hand Book, Volume-V (Part-I), Chapter-II,78 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क No. 334/Admin. (Services)/2024–Pursuant to February 08, 2024
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II No. 329/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
-4-2024 dated 04.01.2024, Kamal Kant Tiwari S/o U.P. Government Notification No./2024/77/VII-
Shailesh Kumar Tiwari, candidate of Civil Judge, Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 07.02. 2024,
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Sri Saksham Shekhar, Additional Civil Judge (Junior
Division), Barabanki.
Division), Deoria is appointed/posted as
Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Salempur
No. 335/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
District Deoria in the newly created court, created
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-2015-
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Sonakshi Singhal
216G/2007 dated 24.11.2015.
D/o Anuj Singhal, candidate of Civil Judge, Junior
Division to be Additional Civil Judge (Junior No. 330/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification No./2024/77/VII- Division), Muzaffar Nagar.
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 07.02.2024,
No. 336/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Sri Hemendra Singh, Additional Civil Judge (Junior
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Division), Kaushambi is appointed/posted as
-4-2024 dated 04.01.2024, Tanay Akash S/o Ranjan Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Chail
Kumar, candidate of Civil Judge, Junior Division to District Kaushambi in the newly created court,
be Additional Civil Judge (Junior Division), Basti.
created vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-
No. 337/Admin. (Services)/2024–Pursuant to 2015-216G/2007 dated 24.11.2015.
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II February 15, 2024
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Abha Rani D/o
No. 331/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Shiv Shankar Prasad, candidate of Civil Judge,
U.P. Government Notification No./2024/89/VII-
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Nyay-2-2024-216G/2007 T.C.-II dated 14.02.2024,
Division), Basti.
Sri Pradumna Kumar Mishra, Additional Civil Judge
No. 338/Admin. (Services)/2024–Pursuant to (Junior Division), Bijnor is appointed/posted as
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Nyayadhikari, Gram Nyayalaya at tehsil Dhampur
-4-2024 dated 04.01.2024, Vinay Kumar Pandey S/o District Bijnor in the newly created court, created
Ashwani Kumar Pandey, candidate of Civil Judge, vide G.O. No. 25/2015/1462/VII-Nyay-2-2015-
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior 216G/2007 dated 24.11.2015.
Division), Jaunpur.
February 28, 2024
No. 339/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 332/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Pawan Kumar Sharma -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Nishi Gupta D/o
S/o Akshaiber Nath, candidate of Civil Judge, Junior Nirankar Gupta, candidate of Civil Judge, Junior
Division to be Additional Civil Judge (Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Division), Gorakhpur.
Division), Mahoba.
No. 340/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 333/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Ankita D/o Viresh -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Nidhi Mishra D/o
Kumar, candidate of Civil Judge, Junior Division to Hari Krishan Mishra, candidate of Civil Judge,
be Additional Civil Judge (Junior Division), Junior Division to be Additional Civil Judge Junior
Moradabad.
Division), Sant Kabir Nagar.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 79No. 341/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Arvind Kumar Dubey, candidate of Civil Judge,
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Akanksha Pathak Division), Shahjahanpur.
D/o Radhey Raman Pathak, candidate of Civil
No. 348/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Judge, Junior Division to be Additional Civil Judge
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II (Junior Division), Gorakhpur in the newly created
-4-2024 dated 04.01.2024, Pawan Singh Tomar S/o court created vide G.O. No. 10/2016/870/ Saat-
Bihari Singh Tomar, candidate of Civil Judge, Junior Nyay-2-2016-85G/2012 dated 06.07.2016.
Division to be Additional Civil Judge (Junior
No. 342/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Division), Banda.
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
No. 349/Admin. (Services)/2024–Pursuant to -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Shaifali
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Chandravanshi D/o Mahesh Chandravanshi,
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Neha Agrawal D/o candidate of Civil Judge, Junior Division to be
Rakesh Agrawal, candidate of Civil Judge, Junior Additional Civil Judge (Junior Division), Budaun.
Division to be Civil Judge, Junior Division (Fast No. 343/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Track Court), Mahoba against the Fast Track Court created under the scheme of 14th Finance -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Shailja D/o Raj
Commission.
Bahadur Singh Maurya, candidate of Civil Judge,
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
No. 350/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Division), Jalaun at Orai.
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Pragati D/o Sanjay No. 344/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Mani Tripathi, candidate of Civil Judge, Junior
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Shelly Sharan D/o Division to be Additional Civil Judge (Junior
Dayal Sharan, candidate of Civil Judge, Junior Division), Sultanpur.
Division to be Additional Civil Judge (Junior
No. 351/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Division), Hamirpur in the newly created court
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II created vide G.O. No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-
-4-2024 dated 04.01.2024, Akash Yadav S/o Kehar 2016-85G/2012 dated 06.07.2016.
Singh Yadav, candidate of Civil Judge, Junior
No. 345/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Division to be Additional Civil Judge (Junior U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Division), Lakhimpur Kheri.
-4-2024 dated 04.01.2024, Abhinav Tripathi S/o
No. 352/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Satya Prakash Tripathi, candidate of Civil Judge,
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Division), Sant Kabir Nagar.
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Sukriti Singh D/o
Suresh Singh, candidate of Civil Judge, Junior No. 346/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Division to be Additional Civil Judge Junior U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Division), Jaunpur.
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Prerna Yadav D/o
Ashok Kumar Yadav, candidate of Civil Judge,
No. 353/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Division), Jhansi.
-4-2024 dated 04.01.2024, Sachin Nayal S/o
No. 347/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Dinbandhu Nayal, candidate of Civil Judge, Junior
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II Division to be Additional Civil Judge (Junior
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Ayushi D/o
Division), Shahjahanpur.
80 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-कNo. 361/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 354/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Tanya Singh D/o -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Tanya Sharma D/o
Samar Pal Singh, candidate of Civil Judge, Junior Vijay Kumar Sharma, candidate of Civil Judge,
Division to be Additional Civil Judge (Junior
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Division), Shahjahanpur.
Division), Raebareli.
No. 355/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 362/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Piyush Kumar S/o Alok
-4-2024 dated 04.01.2024, Abhishek Jaiswal S/o Kumar Sinha, candidate of Civil Judge, Junior
Nawal Kishor Jaiswal, candidate of Civil Judge, Division to be Additional Civil Judge (Junior
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Division), Basti.
Division), Varanasi.
No. 356/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 363/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II -4-2024 dated 04.01.2024, Aarush S/o Shri Chandra
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Meghali Singh Pathak, candidate of Civil Judge, Junior Division to
D/o R. V. Singh, candidate of Civil Judge, Junior be Additional Civil Judge (Junior Division),
Division to be Additional Civil Judge (Junior Pratapgarh.
Division), Balrampur.
No. 357/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 364/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Vishal Thakur S/o U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Nandlal, candidate of Civil Judge, Junior Division to -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Akansha Singh
be Additional Civil Judge (Junior Division), Budaun. D/o Babu Singh, candidate of Civil Judge, Junior
Division to be Additional Civil Judge (Junior No. 358/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Division), Shahjahanpur.
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Isha Rai D/o Alok
No. 365/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
Rai, candidate of Civil Judge, Junior Division to be
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Additional Civil Judge (Junior Division), Chandauli.
-4-2024 dated 04.01.2024, Ankit Kumar S/o Surya
No. 359/Admin. (Services)/2024–Pursuant to Bux Singh, candidate of Civil Judge, Junior Division
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II to be Additional Civil Judge (Junior Division),
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Sonal Singh D/o Maharajganj in the newly created court created vide
Jai Bahadur Singh, candidate of Civil Judge, Junior
G.O. No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-2016-85G/2012
Division to be Additional Civil Judge (Junior
dated 06.07.2016.
Division), Maharajganj.
No. 366/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 360/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Rohit Patel S/o Sharvan -4-2024 dated 04.01.2024, Shubhanshu Das S/o
Patel, candidate of Civil Judge, Junior Division to be Vishwajeet Das, candidate of Civil Judge, Junior
Additional Civil Judge (Junior Division), Jaunpur in Division to be Additional Civil Judge (Junior
the newly created court created vide G.O. Division), Banda in the newly created court created
No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-2016-85G/2012 dated vide G.O. No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-2016-
06.07.2016.
85G/2012 dated 06.07.2016.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 81No. 374/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 367/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Amar Singh S/o Thakur -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Vyadisha Yadav
Prasad, candidate of Civil Judge, Junior Division to
D/o Anand Kumar, candidate of Civil Judge, Junior
be Additional Civil Judge (Junior Division),
Division to be Additional Civil Judge (Junior
Balrampur.
Division), Unnao.
No. 368/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 375/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Bhawna Tomer
-4-2024 dated 04.01.2024, Smt. Ruchi D/o Mangat D/o Pramod Tomer, candidate of Civil Judge, Junior
Singh, candidate of Civil Judge, Junior Division to Division to be Additional Civil Judge (Junior
be Additional Civil Judge (Junior Division), Etawah.
Division), Shahjahanpur.
No. 376/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 369/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Karishma Yadav -4-2024 dated 04.01.2024, Anshuman Vikram Singh
D/o Kailash Singh Yadav, candidate of Civil Judge, S/o Dhirendra Kumar Singh, candidate of Civil
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Judge, Junior Division to be Additional Civil Judge
Division), Varanasi.
Junior Division), Azamgarh.
No. 370/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 377/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II -4-2024 dated 04.01.2024, Mohd. Juned S/o Dilshad
-4-2024 dated 04.01.2024, Shreyansh Nigam S/o Ahmad, candidate of Civil Judge, Junior Division to
Rajesh Kumar, candidate of Civil Judge, Junior be Additional Civil Judge (Junior Division),
Division to be Additional Civil Judge (Junior Gorakhpur in the newly created court created vide
Division), Jhansi.
G.O. No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-2016-85G/2012
dated 06.07.2016.
No. 378/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II No. 371/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
-4-2024 dated 04.01.2024, Abhinav Kumar Dubey U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Ripudaman Singh S/o S/o Amresh Chandra, candidate of Civil Judge,
Subhash Chandra Singh, candidate of Civil Judge, Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Division), Sonbhadra.
Division), Azamgarh.
No. 379/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 372/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Ankita D/o Vijay -4-2024 dated 04.01.2024, Aman Rai S/o Anand
Shankar, candidate of Civil Judge, Junior Division to Kumar Rai, candidate of Civil Judge, Junior
be Additional Civil Judge (Junior Division), Division to be Additional Givil Judge (Junior
Pratapgarh.
Division), Jhansi.
No. 380/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 373/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Abhishek Swami S/o -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Anubala Sharma
Bhagwat Prasad Swami, candidate of Civil Judge, D/o Satguru Prasad Sharma, candidate of Civil
Judge, Junior Division to be Additional Civil Judge Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
(Junior Division), Sultanpur.
Division), Azamgarh.
82 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-कNo. 381/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 388/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Janhvi Tripathi -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Pratibha
D/o Pramod, candidate of Civil Judge, Junior Chawdhary D/o Late Laxman Prasad Chawdhary,
Division to be Additional Civil Judge (Junior candidate of Civil Judge, Junior Division to be
Division), Basti.
Additional Civil Judge (Junior Division), Azamgarh.
No. 389/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 382/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sudhanshu Singh S/o Raj -4-2024 dated 04.01.2024, Prateek Arya S/o Raj
Bahadur Singh Maurya, candidate of Civil Judge, Kumar Arya, candidate of Civil Judge, Junior
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Division), Jalaun at Orai.
Division), Sultanpur.
No. 390/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 383/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Hemant Kumar S/o Ram
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Pragati D/o
Singh, candidate of Civil Judge, Junior Division to
Kailash Chand, candidate of Civil Judge, Junior
be Additional Civil Judge (Junior Division),
Division to be Additional Civil Judge (Junior Kaushambi.
Division), Sitapur.
No. 391/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 384/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Kapil Sharma S/o U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Prakash Chand Sharma, candidate of Civil Judge, -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Akanksha Pushkar
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior D/o Dhani Ram, candidate of Civil Judge, Junior
Division), Etawah.
Division to be Additional, Civil Judge (Junior
Division), Shahjahanpur.
No. 392/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II No. 385/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
-4-2024 dated 04.01.2024, Shubham Malviya S/o U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
Ramesh Chandra Malviya, candidate of Civil Judge, -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Anamika D/o
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior Nandlal, candidate of Civil Judge, Junior Division to
Division), Jaunpur in the newly created court created be Additional Civil Judge (Junior Division),
vide G.O. No. 10/2016/870/Saat-Nyay-2-2016- Lakhimpur Kheri.
85G/2012 dated 06.07.2016.
No. 386/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 393/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Alekh Nandan S/o Kamta
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Abhilasha Saini
Prasad, candidate of Civil Judge, Junior Division to
D/o Suresh Chandra Saini, candidate of Civil Judge,
be Additional Civil Judge (Junior Division),
Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Pratapgarh.
Division), Azamgarh.
No. 387/Admin. (Services)/2024–Pursuant to No. 394/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Ruby Singh D/o -4-2024 dated 04.01.2024, Arpit Raj S/o Dhruva
Lekhraj Singh, candidate of Civil Judge, Junior Raj, candidate of Civil Judge, Junior Division to be
Division to be Additional Civil Judge (Junior Additional Civil Judge (Junior Division),
Division), Mainpuri.
Pratapgarh.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 83No. 395/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 398/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II -4-2024 dated 04.01.2024, Ramesht Dhar Dwivedi
-4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Ananya Singh D/o S/o Harinank Dwivedi, candidate of Civil Judge,
Raj Kumar, candidate of Civil Judge, Junior Junior Division to be Additional Civil Judge (Junior
Division to be Additional Civil Judge (Junior Division), Azamgarh.
Division), Moradabad.
No. 396/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
No. 399/Admin. (Services)/2024–Pursuant to U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
U.P. Government Notification/Appointment -4-2024 dated 04.01.2024, Sushri Tanya Saxena D/o
Kush Saxena, candidate of Civil Judge, Junior No. 112/II-4-2024 dated 19.02.2024, Sri Prashant
Division to be Additional Civil Judge (Junior Kumar S/o Sri Om Prakash, candidate of Civil
Division), Prayagraj.
Judge, Junior Division to be Additional Civil Judge
(Junior Division), Budaun.
No. 397/Admin. (Services)/2024–Pursuant to
U.P. Government Notification/Appointment No. 9/II
-4-2024 dated 04.01.2024, Akash S/o Sanjeev
Kumar, candidate of Civil Judge, Junior Division to
be Additional Civil Judge (Junior Division),
By order of the Hon'ble Court, Rajeev Bharti, Registrar General.
Pratapgarh.
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
ADMINISTRATIVE (E-1) SECTION
NOTIFICATION
December 10, 2024
No. 1030/XC-3/Admin. (E-1) Section/2025–In continuation of Court's Notification no. 721/XC-
3/Admin.(E-1)Sec./2025/Dated: Allahabad: 05.08.2024, the following list of holidays to be observed in the
High Court of Judicature at Allahabad including its Bench at Lucknow during the year 2025 is being
published for general information :
List of holidays to be observed in the High Court of Judicature at Allahabad
including its bench at Lucknow during the year 2025
Sl. No. Holidays Dates on which they fall Days of the Week No. of
days
1 2 3 4 5 1. New Year's Day January 01, 2025 Wednesday 1 2. Makar Sankranti January 14, 2025 Tuesday 1 3. Republic Day January 26, 2025 Sunday 1 4. Basant Panchami February 03, 2025 Monday 1 5. Mahashivratri February 26, 2025 Wednesday 1 6. Holi Holidays March 13 to 16, 2025 Thursday to Sunday 4
12 ख84 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
1 2 3 4 5
7. *Id-ul-Fitra March 31, 2025 Monday 1
8. Ram Navami April 06, 2025 Sunday 1
9. Ambedkar Jayanti April 14, 2025 Monday 1
10. Summer Vacation June 01 to 30, 2025 Sunday to Monday 30
11. *Id-ul-Zuha June 07, 2025 Saturday 1
12. *Moharram July 06, 2025 Sunday 1
13. Raksha Bandhan August 09, 2025 Saturday 1
14. Independence Day August 15, 2025 Friday 1
15. Janmashtami August 16, 2025 Saturday 1
16. *Barawafat September 06, 2025 Saturday 1
17. Dashehra Holidays September 28 to Sunday to Friday 6
October 03, 2025
18. Gandhi Jayanti October 02, 2025 Thursday 1
19. Deepawali Holidays October 19 to 24, 2025 Sunday to Friday 6
20. Guru Nanak Jayanti November 05, 2025 Wednesday 1
& Kartik Purnima
21. Winter Holidays December 22 to 31, 2025 Monday to Wednesday 10
NOTES-
1. The dates marked with asterisk (*) can be re-fixed according to the local visibility of the Moon. If there is no change, no notification shall be issued.
2. Second Saturday of each month will be a holiday.
3. Monday, January 13, 2025 on account of Paush Purnima, Wednesday, January 29, 2025 on account of Mauni Amavasya and Wednesday, February 12, 2025 on account of Maghi Purnima will be local holidays only for Allahabad.
4. Friday, March 28, 2025 will be a restricted holiday on account of Last Friday of Ramzan for Muslims only.
5. Friday, April 18, 2025 will be a restricted holiday on account of Good Friday for Christians only.
6. Tuesday, May 13, 2025 will be a local holiday on account of Mahavir-Ji-Ka-Mela only for Lucknow Bench of the Court.
7. The Court shall also sit on Saturday falling on April 05, 2025 both at Allahabad and Lucknow.
8. There is a separate list of holidays for the District Judiciary of Allahabad High Court.
By order of the Court,
(Sd.) ILLEGIBLE,
Rajeev Bharti, H.J.S.
Registrar General.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 85इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
प्रशासनिक (ई-1) अनुभाग
विज्ञप्ति
10 दिसम्बर, 2024 ई0
सं0 1031/XC-3/प्रशासनिक(ई-1)अनु0/2025-न्यायालय की विज्ञप्ति संख्या 722/XC-3/प्रशासनिक (ई-1)अनु0/2025 दिनांकः इलाहाबाद 05 अगस्त, 2024 के क्रम में निम्नलिखित अवकाश सूची जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ सहित वर्ष 2025 में बन्द रहेगा, सर्वसाधारण के सूचनार्थ प्रकाशित की जाती है।
अवकाशों की सूची जिनके अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ सहित वर्ष 2025 में बन्द रहेगा।
क्रम
संख्या
पर्व/छुटिटयों के
नाम
दिनांक सप्ताह के दिन दिवस की
संख्या
1 2 3 4 5 1. नव वर्ष दिवस 01 जनवरी, 2025 बुधवार 1 2. मकर संक्रान्ति 14 जनवरी, 2025 मंगलवार 1 3. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, 2025 रविवार 1 4. बसंत पंचमी 03 फरवरी, 2025 सोमवार 1 5. महाशिवरात्रि 26 फरवरी, 2025 बुधवार 1 6. होली अवकाश 13 से 16 मार्च, 2025 बृहस्पतिवार से रविवार 4 7. *ईद-उल-फ़ित्र 31 मार्च, 2025 सोमवार 1 8. रामनवमी 6 अप्रैल, 2025 रविवार 1 9. अम्बेडकर जयंती 14 अप्रैल, 2025 सोमवार 1 10. ग्रीष्मावकाश 1 से 30 जून, 2025 रविवार से सोमवार 30 11. *ईद-उल-जुहा 07 जून, 2025 शनिवार 1 12. *मोहर्रम 06 जुलाई, 2025 रविवार 1 13. रक्षाबंधन 09 अगस्त, 2025 शनिवार 1 14. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2025 शुक्रवार 1 15. जन्माष्टमी 16 अगस्त, 2025 शनिवार 1 16. *बारावफात 06 सितम्बर 2025 शनिवार 1 17. दशहरा अवकाश 28 सितम्बर से 03 रविवार से शुक्रवार 6
अक्टूबर, 2025
18. गांधी जयंती 02 अक्टूबर, 2025 बृहस्पतिवार 1 19. दीपावली अवकाश 19 से 24 अक्टूबर, 2025 रविवार से शुक्रवार 6 20. गुरूनानक जयंती एवं
05 नवम्बर, 2025 बुधवार 1 कार्तिक पूर्णिमा
21. शीतकालीन अवकाश 22 से 31 दिसम्बर, 2025 सोमवार से बुधवार 1086 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
टिप्पणी-
1- तारांकित (*) तिथियां स्थानीय चँद्र दर्शन के अनुसार पुनः निर्धारित की जा सकती है। यदि तिथियों में कोई परिवर्तन नहीं होगा, तो अधिसूचना जारी नहीं की जाएगी।
2- प्रत्येक मास के द्वितीय शनिवार को अवकाश रहेगा।
3- सोमवार, 13 जनवरी, 2025 को पौष पूर्णिमा के उपलक्ष्य में, बुधवार, 29 फरवरी, 2025 को मौनी अमावस्या के उपलक्ष्य में तथा बुधवार, 12 फरवरी, 2025 को माघी पूर्णिमा के उपलक्ष्य में, केवल इलाहाबाद के लिए स्थानीय अवकाश रहेगा।
4- शुक्रवार, 28 मार्च, 2025 को रमजान के अंतिम शुक्रवार के उपलक्ष्य में केवल मुसलमानों के लिए निर्बन्धित अवकाश रहेगा ।
5- शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2025 को गुड फ्राईडे के उपलक्ष्य में केवल ईसाइयों के लिए निर्बन्धित अवकाश रहेगा। 6- मंगलवार, 13 मई, 2025 को 'महावीर जी का मेला' के उपलक्ष्य में केवल लखनऊ पीठ के लिए स्थानीय अवकाश रहेगा।
7- शनिवार, 05 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद एवं लखनऊ में न्यायालय का कार्य-दिवस रहेगा। 8- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जनपद न्यायालयों के अवकाशों की सूची अलग से है।
न्यायालय की आज्ञा से, राजीव भारती, उ0न्या0से0 महानिबन्धक।
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
ADMINISTRATIVE (E-1) SECTION
NOTIFICATION
December 10, 2024
No. 1032/XC-4/Admin. (E-1)/2025–In continuation of Court's Notification no. 723/XC- 4/Admin.(E-1)Sec./2025/Dated: Allahabad: 05.08.2024, the following list of holidays to be observed in the District Judiciary of the High Court of Judicature at Allahabad during the year 2025 is being published for general information :
List of holidays to be observed in the District Judiciary of Allahabad High Court during the year 2025
Sl. No. Holidays Dates on which they fall Days of the Week No. of
days
1 2 3 4 5
1. Republic Day January 26, 2025 Sunday 1
2. Mahashivratri February 26, 2025 Wednesday 1
3. Holi Holidays March 13 & 14, 2025 Thursday & Friday 2भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 87
1 2 3 4 5 4. *Id-ul-Fitra March 31, 2025 Monday 1 5. Ram Navami April 06, 2025 Sunday 1 6. **Summer Vacation June 01 to 30, 2025 Sunday to Monday - 7. *Id-ul-Zuha June 07, 2025 Saturday 1 8. *Moharram July 06, 2025 Sunday 1 9. Independence Day August 15, 2025 Friday 1 10. Janmashtami August 16, 2025 Saturday 1 11. Gandhi Jayanti & Dashehra October 02, 2025 Thursday 1 12. Deepawali Holidays October 20 & 21, 2025 Monday & Tuesday 2 13. Christmas Day December 25, 2025 Thursday 1 14. Winter Holidays December 26 to 31, 2025 Friday to Wednesday 6
NOTES-
1. The dates marked with asterisk (*) can be re-fixed according to the Local visibility of the Moon.
2. Second Saturday of each month will be a holiday.
3. The District Judge shall declare five days local holidays in consultation with the District Magistrate.
4. Friday, March 28, 2025 will be a restricted holiday on account of Last Friday of Ramzan for Muslims only.
5. Friday, April 18, 2025 will be a restricted holiday on account of Good Friday for Christians only.
6. **Only Civil Work (except urgent matters) will be suspended during the period of Summer Vacation whereas the work related to criminal cases shall continue as usual.
7. In case any of the National or other holidays mentioned in the Calendar falls on Second Saturday or on a Sunday, it will be up to the District Judge to declare in its place additional days as holidays.
8. There shall not be less than 265 working days in the District Judiciary of Allahabad High Court in a year.
9. Every Fourth Saturday shall be holiday only for Judicial Officers but working day for all purposes for other staff of the District Judiciary of Allahabad High Court.
10. There is a separate list of holidays for the High Court.
By order of the Court,
(Sd.) ILLEGIBLE,
Rajeev Bharti, H.J.S.
Registrar General.
88 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-कइलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद
प्रशासनिक (ई-1) अनुभाग
विज्ञप्ति
10 दिसम्बर, 2024 ई0
सं0 1033/XC-4/प्रशासनिक(ई-1)अनु0/2025-न्यायालय की विज्ञप्ति संख्या 724/XC-4/प्रशासनिक(ई- 1)अनु0/2025 दिनांकः इलाहाबाद 05 अगस्त, 2024 के क्रम में निम्नलिखित अवकाश सूची जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जनपद न्यायालय वर्ष 2025 में बन्द रहेंगे, सर्वसाधारण के सूचनार्थ प्रकाशित की जाती है।
अवकाशों की सूची जिनके अनुसार इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जनपद न्यायालय वर्ष 2025 में बन्द रहेंगे।
क्रम
संख्या
पर्व/छुटिटयों के
नाम
दिनांक सप्ताह के दिन दिवस की
संख्या
1 2 3 4 5 1. गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, 2025 रविवार 1 2. महाशिवरात्रि 26 फरवरी, 2025 बुधवार 1 3. होली अवकाश 13 एवं 14 मार्च, 2025 बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार 2 4. *ईद-उल-फ़ित्र 31 मार्च, 2025 सोमवार 1 5. रामनवमी 6 अप्रैल, 2025 रविवार 1 6. **ग्रीष्मावकाश 1 से 30 जून, 2025 रविवार से सोमवार - 7. *ईद-उल-जुहा 07 जून, 2025 शनिवार 1 8. *मोहर्रम 06 जुलाई, 2025 रविवार 1 9. स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2025 शुक्रवार 1 10. जन्माष्टमी 16 अगस्त, 2025 शनिवार 1 11. गांधी जयंती एवं दशहरा 02 अक्टूबर, 2025 बृहस्पतिवार 1 12. दीपावली अवकाश 20 से 21 अक्टूबर, 2025 सोमवार एवं मंगलवार 2 13. क्रिसमस दिवस 25 दिसम्बर, 2025 बृहस्पतिवार 1 14. शीतकालीन अवकाश 26 से 31 दिसम्बर, 2025 शुक्रवार से बुधवार 6
टिप्पणी-
1- तारांकित (*) तिथियां स्थानीय चँद्र दर्शन के अनुसार पुनः निर्धारित की जा सकती है।
2- प्रत्येक मास के द्वितीय शनिवार को अवकाश रहेगा।
3- जनपद न्यायाधीश पाँच दिन का स्थानीय अवकाश जिला मजिस्ट्रेट से विचार-विमर्श करके निश्चित एवं घोषित करेंगे।
4- शुक्रवार, 28 मार्च, 2025 को रमजान के अंतिम शुक्रवार के उपलक्ष्य में केवल मुसलमानों के लिए निर्बन्धित अवकाश रहेगा ।
5- शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2025 को गुड फ्राईडे के उपलक्ष्य में केवल ईसाइयों के लिए निर्बन्धित अवकाश रहेगा।
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 896- **ग्रीष्मावकाश की अवधि में केवल सिविल कार्य (अत्यावश्यक मामलों को छोड़कर) स्थगित रहेंगे, जबकि आपराधिक मामलों की सुनवाई यथावत् जारी रहेगी ।
7- यदि कैलेण्डर में वर्णित कोई राष्ट्रीय या अन्य अवकाश, द्वितीय शनिवार या रविवार को पड़ता है, तो जनपद न्यायाधीश उसके स्थान पर अतिरिक्त दिवस को अवकाश के रुप में घोषित कर सकते हैं।
8- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जनपद न्यायालयों में कार्य-दिवस एक वर्ष में 265 दिन से कम नही रहेगा। 9- प्रत्येक मास के चतुर्थ शनिवार को केवल न्यायिक अधिकारियों के लिए अवकाश रहेगा परन्तु अन्य कर्मचारियों के लिए कार्य दिवस रहेगा।
10- उच्च न्यायालय के अवकाशों की सूची अलग से है।
न्यायालय की आज्ञा से, राजीव भारती, उ0न्या0से0 महानिबन्धक।
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, महराजगंज।
प्रभार प्रमाण-पत्र
11 सितम्बर, 2023 ई0
सं0 791/कोष0मह0/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि वरिष्ठ कोषाधिकारी, महराजगंज का पदाधिकार उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या-एस-2-733/दस-2023 लखनऊ, दिनांक 14 जुलाई, 2023 के अधीन जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है आज दिनॉक 11 सितम्बर, 2023 के पूर्वान्ह/अपरान्ह में हस्तान्तरित/ग्रहण किया।
मुक्त अधिकारी
शालिग्राम
मोचक अधिकारी
राज कुमार गुप्ता
प्रतिहस्ताक्षरित जिलाधिकारी, महराजगंज।
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, संत कबीर नगर। प्रभार प्रमाण-पत्र 07 अगस्त, 2023 ई0
सं0 134/कोष0/स0क0न0/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि वरिष्ठ कोषाधिकारी, संत कबीर नगर का पद भार वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 के आदेश संख्या-एस-2-749/दस-2023 लखनऊ, दिनांक 14 जुलाई, 2023 के क्रम में जैसा की व्यक्त किया गया है, आज दिनांक 07 अगस्त, 2023 के अपराह्न में ग्रहण कर लिया गया है।
मुक्त अधिकारी जगनारायण झा
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
संत कबीर नगर
मोचक अधिकारी
वैभव कुमार
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
संत कबीर नगर90 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, हरदोई।
प्रभार प्रमाण-पत्र
06 मार्च, 2024 ई0
सं0 2941/व0को0अ0(अधि0)/2023-24-प्रमाणित किया जाता हैं कि उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवायें) अनुभाग-2, लखनऊ के कार्यालय आदेश संख्या-10/2024/एस-2-I/307/दस-2024-29/2023 लखनऊ दिनांक 05 मार्च, 2024 द्वारा डा0 अनुराग द्विवेदी, वित्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा, अमरोहा को ग्रेड पे 6,600/- में पदोन्नति के उपरान्त वरिष्ठ कोषाधिकारी हरदोई के पद पर पदस्थापित/तैनात किया गया है, जिसके अनुपालन में जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है, वरिष्ठ कोषाधिकारी, हरदोई के पद पर प्रभार आज दिनांक 08 मार्च, 2024 को पूर्वान्ह/अपरान्ह में निम्नवत् हस्तान्तरित किया गया।
अवमुक्त अधिकारी सरोज कुमार प्रजापति,
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
हरदोई
मोचक अधिकारी डा0 अनुराग द्विवेदी,
व्रिष्ठ कोषाधिकारी,
हरदोई
(हा0) अस्पष्ट जिलाधिकारी, हरदोई।
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, कानपुर देहात
प्रभार प्रमाण-पत्र
03 जुलाई, 2023 ई0
सं0 604H/कोष0(दे0)/अधि0/प्रभार प्रमाण-पत्र/2023-उत्तर प्रदेश शासन, वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 के कार्यालय आदेश संख्या 36/2023/एस-2-596/दस-2023 लखनऊ दिनांक 30 जून, 2023 के अनुपालन में एवं तद्क्रम में जिलाधिकारी कानपुर देहात के आदेश दिनांक 03 जुलाई, 2023 के क्रम में मुख्य कोषाधिकारी, कानपुर देहात के पद का कार्यभार दिनांक 03 जुलाई, 2023 के अपरान्ह में हस्तानान्तरित किया गया।
अवमुक्त अधिकारी कृष्ण कुमार पाण्डेय,
मुख्य कोषाधिकारी,
कानपुर देहात
अवमोचक अधिकारी आशुतोष त्रिपाठी,
प्रभारी वरिष्ठ कोषाधिकारी,
कानपुर देहातभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 91
कार्यालय मुख्य कोषाधिकारी, कानपुर देहात
प्रभार प्रमाण-पत्र
29 अगस्त, 2023 ई0
सं0 921F/कोष0(दे0)/अधि0/प्रभार प्रमाण-पत्र/2023-उत्तर प्रदेश शासन, वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 के कार्यालय आदेश संख्या एस-2-911/दस-2023 लखनऊ दिनांक 23 अगस्त, 2023 के अनुपालन में एवं तद्क्रम में जिलाधिकारी, कानपुर देहात के आदेश दिनांक 29 अगस्त, 2023 के क्रम में वरिष्ठ कोषाधिकारी, कानपुर देहात के पद का कार्यभार दिनांक 29 अगस्त, 2023 के पूर्वान्ह में हस्तानान्तरित किया गया।
अवमुक्त अधिकारी आशुतोष त्रिपाठी,
प्रभारी वरिष्ठ कोषाधिकारी,
कानपुर देहात
अवमोचक अधिकारी संजय कुमार सिंह,
मुख्य कोषाधिकारी,
कानपुर देहात
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, अलीगढ़
प्रभार प्रमाण-पत्र
22 जुलाई, 2023 ई0
सं0 1812/अ0धि0/एम-37/कोष/अली0-प्रमाणित किया जाता है कि उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवायें) अनुभाग-2, लखनऊ के कार्यालय आदेश संख्या-एस-2-726/दस-2023 दिनांक 14 जुलाई, 2023 के अनुपालन में वरिष्ठ कोषाधिकारी अलीगढ़ के पद का कार्यभार जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है आज दिनांक 22 जुलाई, 2023 के अपराहन में एतद् द्वारा निम्नानुसार ग्रहण किया गया।
मुक्त अधिकारी
प्रिया सिंह
मोचक अधिकारी
योगेश कुमार
(हा0) अस्पष्ट
जिलाधिकारी,
अलीगढ़।
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, सोनभद्र
प्रभार प्रमाण-पत्र
17 जुलाई, 2023 ई0
सं0 379/को0सो0/स्था0-प्रभार/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवाएं) अनुभाग-2 के कार्यालय आदेश सं0-एस-2-685/दस-2023 दिनांक 14 जुलाई, 2023 के अनुपालन में वरिष्ठ
13 ख92 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क कोषाधिकारी सोनभद्र का पदाधिकार, जहाँ कि जैसा व्यक्त किया गया है, दिनांक 17 जुलाई, 2023 के पूर्वान्ह/अपरान्ह में निम्नवत हस्तान्तरित/अधिगृहीत किया गया।
अवमुक्त अधिकारी अजय कुमार सिंह,
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
सोनभद्र
अवमोचक अधिकारी अजय कुमार यादव,
वित्त एवं लेखाधिकारी,
बेसिक शिक्षा, सोनभद्र
प्रभार प्रमाण-पत्र
20 जुलाई, 2023 ई0
सं0 400/को0सो0/स्था0-प्रभार/2023-24-उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवाएं) अनुभाग-2 के कार्यालय आदेश सं0-एस-2-747/दस-2023 दिनांक 14 जुलाई, 2023 के अनुपालन में वरिष्ठ कोषाधिकारी सोनभद्र का पदाधिकार, जैसे कि यहां व्यक्त किया गया है, आज दिनांक 20 जुलाई, 2023 के पूर्वान्ह में निम्नवत हस्तान्तरित किया गया।
मुक्त अधिकारी अजय कुमार यादव,
वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा,
सोनभद्र
मोचक अधिकारी
इन्द्रभान सिंह,
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
सोनभद्र
कार्यालय जिला कोषाधिकारी, हाथरस
प्रभार प्रमाण-पत्र
23 जुलाई, 2021 ई0
सं0 804/कोष/अधि0-वित्त सेवायें अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या-40/2021/एस-2-1/79974-दस-2021 दिनांक 15 जुलाई, 2021 के अनुपालन में जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है, मेरे द्वारा आज दिनांक 23 जुलाई, 2021 के अपरान्ह में वरिष्ठ कोषाधिकारी हाथरस के पद का प्रभार निम्नानुसार हस्तान्तरित किया गया है।
मुक्त अधिकारी
शीलेन्द्र कुमार, वरिष्ठ कोषाधिकारी, हाथरस
मोचक अधिकारी सतीश कुमार,
वरिष्ठ कोषाधिकारी, हाथरसभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 93
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, फतेहपुर
प्रभार प्रमाण-पत्र
12 अप्रैल, 2023 ई0
सं0 454/कोष0/अधि0/प्रभार/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि निदेशक, कोषागार उ0प्र0 के कार्यालय आदेश आदेश सं0 483/36(1025)/2008/को0नि0/स्था0 दिनांक 26 मई, 2023 जिसके द्वारा श्री विमलेश यादव को निजी कार्य हेतु दिनांक 01 जून, 2023 से 09 जून, 2023 तक (कुल 09 दिनों) का अर्जित अवकाश स्वी—ति के साथ दिनांक 10 व 11 जून, 2023 को पड़ने वाले सार्वजनिक अवकाश को सफिक्स किये जाने के फलस्वरूप अवकाश का उपभोग करने के उपरान्त वापस लौटने पर वरिष्ठ कोषाधिकारी, फतेहपुर का पदभार, जैसा कि यहा व्यक्त किया जा रहा है, आज दिनांक 12 जून, 2023 के पूर्वान्ह में हस्तानान्तरित किया गया।
अवमुक्त अधिकारी
प्रवीण यादव,
वित्तीय परामर्शदाता
जिला पंचायत, फतेहपुर
अवमोचक अधिकारी
विमलेश यादव,
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
फतेहपुर
प्रभार प्रमाण-पत्र
31 मई, 2023 ई0
सं0 346/कोष0/अधि0/प्रभार/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि निदेशक, कोषागार उ0प्र0 के कार्यालय आदेश आदेश सं0 483/36(1025)/2008/को0नि0/स्था0 दिनांक 26 मई, 2023 जिसके द्वारा श्री विमलेश यादव को निजी कार्य हेतु दिनांक 01 जून, 2023 से 09 जून, 2023 तक (कुल 09 दिनों) का अर्जित अवकाश स्वी—ति के साथ दिनांक 10 व 11 जून, 2023 को पड़ने वाले सार्वजनिक अवकाश को सफिक्स किये जाने के फलस्वरूप वरिष्ठ कोषाधिकारी, फतेहपुर का पदभार, जैसा कि यहां व्यक्त किया जा रहा है, आज दिनांक 31 मई, 2023 के अपरान्ह में हस्तानान्तरित किया गया।
अवमुक्त अधिकारी
विमलेश यादव,
वरिष्ठ कोषाधिकारी,
फतेहपुर
अवमोचक अधिकारी
प्रवीण यादव,
वित्तीय परामर्शदाता
जिला पंचायत, फतेहपुर94 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
कार्यालय कोषागार, पीलीभीत
प्रभार प्रमाण-पत्र
06 जुलाई, 2023 ई0
सं0 741(5)/लेखा0अधि0/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि उ0प्र0 शासन, वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 लखनऊ के कार्यालय आदेश संख्या-36/2023/एस-2-596/दस-2023 दिनांक 30 जून, 2023 में प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बगैर कार्यमुक्त होकर नवीन तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने संबंधी निर्देशों के अनुपालन में वरिष्ठ कोषाधिकारी, पीलीभीत का पदभार जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है, आज दिनांक 06 जुलाई, 2023 के पूर्वान्ह् में हस्तान्तरित किया गया।
मुक्त अधिकारी
रेनू बौद्ध
मोचक अधिकारी सुधीर कुमार अग्रवाल
कार्यालय वरिष्ठ कोषाधिकारी, पीलीभीत
प्रभार प्रमाण-पत्र
22 जुलाई, 2023 ई0
सं0 754(7)/लेखा0अधि0/2023-24-प्रमाणित किया जाता है कि उत्तर प्रदेश शासन वित्त (सेवायें) अनुभाग-2 के आदेश संख्या-एस-2-745/दस-2023 लखनऊ, दिनांक 14 जुलाई, 2023 के अनुपालन में वरिष्ठ कोषाधिकारी, पीलीभीत का कार्यभार, जैसा कि यहाँ व्यक्त किया गया है आज दिनाक 22 जुलाई, 2023 के पूर्वाह्न/अपराह्न में हस्तान्तरित किया गया।
मुक्त अधिकारी सुधीर कुमार अग्रवाल
मोचक अधिकारी सुरेश कुमार यादव
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 95जनता के प्रयोजनार्थ, भूमि नियोजन की विज्ञप्तियां
कार्यालय जिलाधिकारी, प्रयागराज
प्रारूप-19
नियम-27 का उपनियम (1)
समुचित सरकार/कलेक्टर द्वारा घोषणा
[(अधिनियम की धारा-19 की उपधारा (1) के अन्तर्गत)]
उत्तर प्रदेश सरकार, प्रान्तीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग, प्रयागराज
अधिसूचना
28 दिसम्बर, 2024 ई0
सं0 559/आठ-सो0कु0-वि0भू0अ0अ0 (सं0सं0) प्रयागराज-भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा-11 की उपधारा (1) के अधीन उत्तर प्रदेश सरकार/कलेक्टर (समुचित सरकार के उद्देश्य हेतु) की राय है कि जनपद प्रयागराज में ग्राम सभा-शाहा उर्फ पीपलगांव (जनपद-प्रयागराज में प्रयागराज-कानपुर रेल खण्ड के बेगम बाजार-भगवतपुर मार्ग पर स्थित रेलवे क्रांसिंग संख्या 3ए पर निर्माणाधीन दो लेन रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु Section Officer, D9IAF) Government of India Department of Defence, Room No. 208-D South Block New Delhi letter no. Air HQ/S17726/32/ATS/227/D(IAF)/2023 dated 23.06.2023 द्वारा निम्न शर्तों के अनुसार रेल उपरिगामी सेतु का अवशेष कार्य पूर्ण करने हेतु NOC प्रदान की गई है :-
The recommencement of ROB work is concurred, subject to U.P. Govt. incurring the cost of the following towards extending the runway by 350m on other side & relocation of associated infrastructure at AF Stn, Prayagraj –
i. Acquisition of land measuring 350 m x 65 m (east of runway).
ii. Compensation to private owners on newly acquired land and for those structures forming obstacles as per obstacle limitation surfaces.
iii. Extension of runway by 350 meters and ancillary works.
iv. Re-installation of approach lights and navigational aids/ Airfield facilities belonging to AAI/IAF.
अधिशासी अभियन्ता, प्रान्तीय खण्ड, लोक निर्माण विभाग, प्रयागराज (आपेक्षक निकाय) की रिपोर्ट/प्रस्ताव दिनांक 22 नवम्बर, 2024 के द्वारा जनपद-प्रयागराज में प्रयागराज-कानपुर रेल खण्ड के बेगम बाजार-भगवतपुर मार्ग पर स्थित रेलवे क्रासिंग संख्या 3ए पर निर्माणाधीन दो लेन रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु भारतीय वायुसेना द्वारा दी गई अनापत्ति निहित में शर्तों के अनुसार भारतीय वायुसेना स्थित एयरपोर्ट के रनवे-विस्तार हेतु जनपद-प्रयागराज, तहसील सदर, परगना सदर, ग्राम शाहा उर्फ पीपलगांव की 0.461993 हे0 भूमि की आवश्यकता के दृष्टिगत समुचित सरकार/कलेक्टर द्वारा प्रारम्भिक अधिसूचना अधिनियम की धारा-11 की उपधारा (1) के अन्तर्गत अधिसूचना संख्या-500/आठ-सो0कु0-वि0भू0अ0अ0(सं0सं0) प्रयागराज, दिनांक 23 नवम्बर, 2024, उत्तर प्रदेश सरकार के साधारण गजट दिनांक 07 दिसम्बर, 2024 ई0 खण्ड 78, संख्या-49 में प्रकाशित तथा अन्तिम रूप से दैनिक समाचार-पत्र ''दैनिक जागरण'' व ''हिन्दुस्तान'' में दिनांक 27 नवम्बर, 2024 को प्रकाशित की गयी थी। उप जिलाधिकारी, सदर, प्रयागराज को परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन के उद्देश्य से प्रशासक नियुक्त किया गया था।
अधिसूचना की धारा-15 की उपधारा (2) के प्राविधानों के अनुपालन में कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के विचारोपरान्त धारा-19(1) के अन्तर्गत राज्यपाल घोषणा करने का निर्देश देते हैं कि उन्हें यह समाधान हो गया है कि अनुसूची ''क'' में वर्णित भूमि का क्षेत्रफल सार्वजनिक प्रयोजन हेतु आवश्यक है तथा अनुसूची ''ख'' में उल्लिखित जिला प्रयागराज, तहसील सदर के अर्जित ग्राम शाहा उर्फ पीपल गॉव में प्रयागराज-कानपुर रेल खण्ड के बेगम बाजार-96 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क भगवतपुर मार्ग पर स्थित रेलवे क्रांसिंग संख्या 3ए पर निर्माणाधीन दो लेन रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतुु परियोजना से किसी भी व्यक्ति या परिवार के विस्थापित होने की सम्भावना नही है। ऐसी दशा में पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन हेतु पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि शून्य है।
राज्यपाल अग्रेतर निर्देश देते हैं कि अधिनियम की धारा-19 की उपधारा (2) के अधीन जिला प्रयागराज के कलेक्टर को इस प्रभाव की घोषणा के प्रकाशन उपरान्त भूमि राज्य सरकार में समाहित होकर अधिशासी अभियन्ता, प्रान्तीय खण्ड,लो0नि0वि0, प्रयागराज को निर्माण हेतु हस्तगत करें-
अनुसूची
क्र0सं0 जिला तहसील ग्राम गाटा संख्या प्रस्तावित अर्जित
क्षेत्रफल
1 2 3 4 5 6
हेक्टेयर
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 97अनुसूची-ख
(विस्थापित परिवारों के लिए व्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि का विवरण)
जनपद तहसील परगना ग्राम भू-खण्ड सं0 पुनर्वासन हेतु चिन्हित
क्षेत्रफल (हे0 में)
1 2 3 4 5 6
उक्त योजना हेतु कोई भी भू-स्वामी विस्थापित नहीं हो रहा है। इसलिए भूमि चिन्हित किये जाने की आवश्यकता नहीं है।
कलेक्टर द्वारा घोषणा की अधिसूचना
[(अधिनियम की धारा-19 की उपधारा (1) के अन्तर्गत)] अधिशासी अभियन्ता, प्रान्तीय खण्ड,लोक निर्माण विभाग, प्रयागराज (आपेक्षित निकाय का नाम) के माध्यम से सार्वजनिक प्रयोजन हेतु जनपद-प्रयागराज में प्रयागराज-कानपुर रेल खण्ड के बेगम बाजार-भगवतपुर मार्ग पर स्थित रेलवे क्रांसिंग संख्या 3ए पर निर्माणाधीन दो लेन रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु जनपद-प्रयागराज, तहसील-सदर के ग्राम-शाहा उर्फ पीपलगॉव में प्रस्तावित भूमि के लिए प्रकाशित अधिसूचना संख्या-500/आठ-सो0कु0-वि0भू0अ0अ0 (सं0सं0) प्रयागराज, दिनांक 23 नवम्बर, 2024 के क्रम में मेरे द्वारा घोषणा का प्रकाशन कर दिया गया है। पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन योजना का सारांश निम्नवत है :-
अनुसूची ''ख'' में उल्लिखित जनपद प्रयागराज, तहसील सदर के अर्जित ग्राम शाहा उर्फ पीपलगांव में प्रस्तावित प्रयागराज-कानपुर रेल खण्ड के बेगम बाजार-भगवतपुर मार्ग पर स्थित रेलवे क्रांसिंग संख्या-3ए पर निर्माणाधीन दो लेन रेल उपरिगामी सेतु के निर्माण हेतु परियोजना से किसी भी व्यक्ति या परिवार के विस्थापित होने की सम्भावना नही है। ऐसी दशा में पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन हेतु पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि शून्य है।
रविन्द्र कुमार माँदड़, कलेक्टर, प्रयागराज।
GOVERNMENT OF UTTAR PRADESH
PROVINCIAL WORKS DIVISION DEPARTMENT, PRAYAGRAJ
Form-19
[Sub-rule (1) of the Rule 27]
Declaration By Appropriate Government/Collector
Under Sub-Section (1) of Section 19 of the Act
NOTIFICATION
December 28, 2024
No. 559/8-So.Ku.-S.L.A.O.(J.O.)PRG.--Under sub-section (1) of Section 11 of the Right to Fair Compensation and Transparency in Rehabilitation and Resettlement Act, 2013, whereas the Government of Uttar Pradesh/Collector (for the purpose of Appropriate Government) is satisfied that for the construction ROB at Crossing No. 3A at Km- 836/11-13 on Prayagraj- CNB Section on Bhagwatpur-Prayagraj -Kanpur Road (G.T. Road) in District. Prayagraj, Section officer, D9IAF) Government of India Department of Defence, Room No. 208-D South Block New Delhi letter no. Air HQ/S17726/32/ATS/227/D(IAF)/2023 dated 23.06.2023, under following terms & conditions, NOC has been provided.
98 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-कThe recommencement of ROB work is concurred, subject to U.P. Govt. incurring the cost of the following towards extending the runway by 350m on other side & relocation of associated infrastructure at AF Stn, Prayagraj –
i. Acquisition of land measuring 350 m x 65 m (east of runway). ii. Compensation to private owners on newly acquired land and for those structures forming obstacles as per obstacle limitation surfaces.
iii. Extension of runway by 350 meters and ancillary works. iv. Re-installation of approach lights and navigational aids/Airfield facilities belonging to AAI/IAF.
Whereas Preliminary Notification No. 500/8-So.Ku.-S.L.A.O.(J.O.) PRG., Dated 23.11.2024 was issued under sub-section (1) of Section 11 of the Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 (No. 30 of 2013) published in State Ordinary Gazette dated 07 December, 2024 , Khand 78, at No. 49, in respect of Area of 0.461993 Hect. in Village-Shaha Urf Pipalgaon, Tehsil-Sadar, District-Prayagraj of land is required for construction of Begam Bazar-Bhagwatpur ROB in Village Shaha Urf Pipalgaon (two lane) (Public Purpose) through Executive Engineer, Provincial Division, P.W.D., Prayagraj, U.P. and lastly published on daily news paper "Daink Jagran" & "Hindustan" dated 27.11.2024. The Deputy Collector /Assistant Collector, Sadar, Prayagraj was appointed as Administrator for the purpose of rehabilitation and resettlement of the project affected families.
After considering the report of the Collector submitted in pursuance to provision under sub-section (2) of the Section 15 of the Act, the Governor is pleased to declare under Section 19(1) of the Act that he is satisfied that the area of the land mentioned in the given schedule "A" is required for construction of Begam Bazar-Bhagwatpur ROB in Village Shaha Urf Pipalgaon (two lane) (Public Purpose) तथा अनुसूची ''ख'' में उल्लिखित जिला प्रयागराज, तहसील सदर के अर्जित ग्राम शाहा उर्फ पीपलगॉव में प्रयागराज में भारतीय वायुसेना स्थित एयरपोर्ट के रनवे-विस्तार हेतु उक्त मार्ग के निर्माण परियोजना से किसी भी व्यक्ति या परिवार के विस्थापित होने की सम्भावना नही है। ऐसी दशा में पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन हेतु पुर्नवासन एवं पुर्नव्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि शून्य है।
The Governor is further pleased under sub-section (2) of Section 19 of the Act, land is vested in Government of Uttar Pradesh/Executive Engineer, Provincial Division P.W.D., Prayagraj U.P. and direct the Collector of Prayagraj to give possession of the said acquired land.
SCHEDULE-A
Land Details
Sr.
District Tehsil Village Plot No. Area to be No.
acquired
1 2 3 4 5 6
Hectares
1 Prayagraj Sadar Shaha alias Pipalgaon 64 Mi 0.031000 2 Do. Do. Do. 90 0.011400 3 Do. Do. Do. 161 0.011433 4 Do. Do. Do. 161 0.011665 5 Do. Do. Do. 161 0.011665 6 Do. Do. Do. 161 0.011433 7 Do. Do. Do. 161 0.010266 8 Do. Do. Do. 161 0.006779 9 Do. Do. Do. 162 0.023000भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 99
1 2 3 4 5 6
Hectares
10 Prayagraj Sadar Shaha alias Pipalgaon 163 0.025224 11 Do. Do. Do. 163 0.015605 12 Do. Do. Do. 163 0.024618 13 Do. Do. Do. 163 0.007611 14 Do. Do. Do. 163 0.005460 15 Do. Do. Do. 165 0.175500 16 Do. Do. Do. 192 0.009072 17 Do. Do. Do. 192 0.018200 18 Do. Do. Do. 193 0.003883 19 Do. Do. Do. 193 0.003884 20 Do. Do. Do. 194 0.006734 21 Do. Do. Do. 194 0.006733 22 Do. Do. Do. 163 0.012600 23 Do. Do. Do. 163 0.012628 24 Do. Do. Do. 192 0.005600
Grand Total . . 0.461993
SCHEDULE-B
(Land identified as settlement area for displaced families)
Sr. No. District Tehsil Village Plot No. Area to be acquired
1 2 3 4 5 6
Hectares
1 Prayagraj Sadar Zero Zero Zero
NOTIFICATION OF DECLARATION BY COLLECTOR
(Under Sub-section 19 Sub Rule (1) of the Act)
By the order of declaration made under Government notification No. 500/8-So.Ku.-S.L.A.O. (J.O.) PRG., Dated 23.11.2024, for Area of 0.461993 Hect. in Village-Shaha Urf Pipalgaon, Tehsil-Sadar, District-Prayagraj of land is required for construction of Begam Bazar-Bhagwatpur ROB in Village-Shaha Urf Pipalgaon (two lane) (Public Purpose). through Executive Engineer, Provincial Division, P.W.D., Prayagraj, U.P., I hereby published he declaration made therein and summary of Rehabilitation and Resettlement scheme along with Government notification, a summary of the Rehabilation and Resettlement scheme is given below :
अनुसूची ''ख'' में उल्लिखित जिला प्रयागराज, तहसील सदर के अर्जित ग्राम शाहा उर्फ पीपलगॉव में प्रयागराज में भारतीय वायुसेना स्थित एयरपोर्ट के रनवे-विस्तार हेतु उक्त मार्ग के निर्माण परियोजना से किसी भी व्यक्ति या परिवार के विस्थापित होने की सम्भावना नही है। ऐसी दशा में पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन हेतु पुर्नवासन एवं पुर्नव्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित भूमि शून्य है।
(Sd.) ELLEGIBLE, Ravindra Kumar Mander, Collector, Prayagraj.
14 ख100 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
कार्यालय जिलाधिकारी, प्रयागराज
अधिसूचना
01 दिसम्बर, 2024 ई0
सं0 5819-मैं, रविन्द्र कुमार माँदड़, जिलाधिकारी, प्रयागराज, शासन के पत्र संख्या-3966/09 जनवरी, 2024- 408057 दिनांक 25 नवम्बर, 2024 में प्रदत्त निर्देश के क्रम में उत्तर प्रदेश प्रयागराज मेला प्राधिकरण, प्रयागराज अधिनियम, 2017 की धारा 2(ठ) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए एतद्द्वारा महाकुम्भ-2025 के आयोजन हेतु महाकुम्भ मेला जनपद घोषित किये जाने हेतु अधिसूचना जारी कर रहा हूँ।
महाकुम्भ मेला जनपद की सीमा निम्नलिखित होगी। अनुलग्नक-I में वर्णित राजस्व ग्रामों तथा सम्पूर्ण परेड क्षेत्र का क्षेत्रफल महाकुम्भ मेला जनपद/मेला क्षेत्र में सम्मिलित होगा।
महाकुम्भ मेला जनपद/मेला क्षेत्र में मेलाधिकारी, कुम्भ मेला, प्रयागराज को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-14(1) व अन्य सुसंगत धाराओं के अन्र्तगत एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट एवं उक्त संहिता के अधीन अथवा सम्प्रति (इन फोर्स) किसी अन्य कानून के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट के समस्त अधिकार तथा उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2006 (उ0प्र0 अधिनियम सं0-4, सन् 2016) द्वारा यथा संशोधित) की धारा-12 व अन्य सुसंगत धाराओं के अन्र्तगत उक्त जिले में अतिरिक्त कलेक्टर नियुक्त करते हुए समस्त श्रेणी के मुकदमों में कलेक्टर के समस्त अधिकारों का उपयोग करने और कलेक्टर के समस्त कार्य करने के अधिकार प्राप्त होंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
अनुलग्नक-1
महाकुम्भ मेला जनपद में सम्मिलित प्रयागराज जनपद के राजस्व ग्राम (तहसील सदर, सोरांव, फूलपुर एवं करछना) एवं सम्पूर्ण परेड क्षेत्र- तहसील सदर-
1- कुरेशी पुर उपरहार 2- कुरेशी पुर कछार 3- कीटगंज उपरहार 4- कीटगंज कछार 5- बराही पट्टी कछार 6- बम्हन पट्टी कछार 7- मुस्तफाबाद मुनकस्मा उपरहार 8- मुस्तफाबाद मुनकस्मा कछार 9- अली पट्टी 10- बस्की उपरहार 11- बस्की कछार 12- अल्लापुर बस्की कछार 13- बघाड़ा जहूरूद्दीन 14- करनपुर 15- बघाड़ा बालन 16- चकशेरखाँ कछार 17- शादियाबाद उपरहार 18- शादियाबाद कछार 19- चाँदपुर सलोरी उपरहार 20- चाँदपुर सलोरी कछारभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 101
तहसील सदर-
21- गोविन्दपुर उपरहार 22- पट्टीचिल्ला उपरहार 23- पट्टीचिल्ला कछार 24- आराजी बारूदखाना उपरहार 25- आराजी बारूदखाना कछार
तहसील सोरांव-
26- बेला कछार बारूदखाना 27- पड़िला 28- मनसैता
तहसील फूलपुर-
29- बेला सैलाबी कछार 30- औरहा उपरहार 31- सिहोरी उपरहार 32- सिहोरी कछार 33- इब्राहिमपुर उपरहार 34- इब्राहिमपुर कछार 35- एखलासपुर 36- रसूलपुर उपरहार 37- रसूलपुर कछार 38- फतेहपुर 39- चक जमाल 40- सोनौटी 41- बदरा 42- चक फातमा जमीन शेरडीह 43- पूरे सूरदास 44- झूंसी कोहना 45- हवेलिया 46- उस्तापुर महमूदाबाद उपरहार 47- उस्तापुर महमूदाबाद कछार 48- छतनाग कछार
तहसील करछना-
49- मदनुवा उपरहार 50- मदनुवा कछार 51- मवैया उपरहार 52- मवैया कछार 53- देवरख उपरहार 54- देवरख कछार 55- अरैल उपरहार 56- अरैल कछार 57- चक सैय्यद अरब दरवेश 58- चक अराजी खान आलम102 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
तहसील करछना-
59- माधोपुर उपरहार 60- माधोपुर कछार 61- जहाँगीराबाद उपरहार 62- जहाँगीराबाद कछार 63- महेवा पट्टी पूरब उपरहार 64- महेवा पट्टी पूरब कछार 65- महेवा पट्टी पश्चिम कछार 66- मीरखपुर कछार 67- सम्पूर्ण परेड क्षेत्र
रविन्द्र कुमार माँदड़, जिलाधिकारी, प्रयागराज।
OFFICE OF DISTRICT MAGISTRATE, PRAYAGRAJ
NOTIFICATION
December 01, 2024
No. 5819–I, Ravindra Kumar Mandar, District Magistrate, Prayagraj, in exercise of the powers conferred under Section 2 (1) of the Uttar Pradesh Prayagraj Mela Authority Prayagraj Act, 2017 in accordance with the directions given in Government letter no. 3966/9-1-2024-408057 dated 25.11.2024, hereby issuing a notification for declaring Mahakumbh Mela District for organizing Mahakumbh-2025.
The boundary of Mahakumbh Mela District area will be as follows:
Described Revenue villages at Annexure-l and the entire Parade area.
In the Mahakumbh Mela District, the Meladhikari, Kumbh Mela, Prayagraj will have all the powers of Executive Magistrate, District Magistrate and Additional District Magistrate under Section 14 (1) and other relevant sections of the Indian Civil Security Code 2023 and all the powers of District Magistrate under the said code or any other law for the time being in force and will have the right to exercise all the powers of the Collector in all categories of cases and to perform all the functions of the Collector under Section-12 and other relevant sections of the Uttar Pradesh Revenue Code, 2006 (as amended by the Uttar Pradesh Revenue Code (Amendment) Act, 2016 (U.P Act No. 4, 2016)) by appointing Additional Collector in the said District.
This order will come in force with immediate effect.
ANNEXURE-1
List of revenue villages together forming part of Mahakumbh Mela District-Revenue Villages in Tehsil-Sadar, Soraon, Phoolpur & Karchhana; District-Prayagraj including total Parade area.
Tehsil Sadar-
Sl. No Name of the Village-
1. Qureshi Pur Uparharभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 103
Tehsil Sadar-
2. Qureshi Pur Kachhar
3. Keetganj Uparhar
4. Keetganj Kachhar
5. Barahi Patti Kachhar
6. Bamhan Patti Kachhar
7. Mustafabad Munkasma Uparhar
8. Mustafabad Munkasma Kachhar
9. Ali Patti
10. Baski Uparhar
11. Baski Kachhar
12. Allahpur Baski Kachhar
13. Baghada Jahooruddin
14. Karanpur
15. Baghada Balan
16. Chaksherkhan Kachhar
17. Shadiyabad Uparhar
18. Shadiyabad Kachhar
19. Chandpur Salori Uparhar
20. Chandpur Salori Kachhar
21. Govindpur Uparhar
22. Pattichilla Uparhar
23. Pattichilla Kachhar
24. Araji Baroodkhana Uparhar
25. Araji Baroodkhana Kachhar
Tehsil Saraon-
26. Bela Kachhar Baroodkhana
27. Padila
28. Mansaita
Tehsil Phoolpur-
29. Bela Sailabi Kachhar
30. Auraha Uparhar
Tehsil Phoolpur-
31. Sihori Uparhar
32. Sihori Kachhar
33. Ibrahimpur Uparhar
34. Ibrahimpur Kachhar104 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क
Tehsil Phoolpur-
35. Ekhlaspur
36. Rasoolpur Uparhar
37. Rasoolpur Kachar
38. Fatehpur
39. Chak Jamal
40. Sonauti
41. Badra
42. Chak Fatma Zameen Sherdeeh
43. Poore Soordas
44. Jhunsi Kohna
45. Haveliya
46. Ustapur Mahmoodabad Uparhar
47. Ustapur Mahmoodabad Kachhar
48. Chhatnag Kachhar
Tehsil Karchhana-
49. Madanua Uparhar
50. Madanua Kachhar
51. Mavaiya Uparhar
52. Mavaiya Kachhar
53. Devrakh Uparhar
54. Devrakh Kachhar
55. Arail Uparhar
56. Arail Kachhar
57. Chak Saiyyad Arab Darves
58. Chak Araji Khan Alam
59. Madhopur Uparhar
60. Madhopur Kachhar
Tehsil Karchhana-
61. Jahangirabad Uparhar
62. Jahangirabad Kachhar
63. Maheva Patti Poorab Uparhar
64. Maheva Patti Poorab Kachhar
65. Maheva Patti Paschim Kachhar
66. Meerakhpur Kachhar
67. Total Parade Area
Ravindra Kumar Mandar, District Magistrate, Prayagraj.
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 105दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित कार्यालय, चकबन्दी आयुक्त, उत्तर प्रदेश, लखनऊ
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, 21 जून, 2024 ई0
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित सं0 3071/जी0-151/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होने के दिनांक से तहसील व परगना शिकारपुर जनपद सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
बुलन्दशहर के ग्राम याकूबपुर में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
हो गयी हैं।
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
सं0 3074/जी0-362/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
होने के दिनांक से तहसील धामपुर परगना अफजलगढ़ तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
जनपद बिजनौर के ग्राम मकसूदाबाद ए0 में चकबन्दी
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित सं0 3072/जी0-157/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होने के दिनांक से तहसील फरेन्दा परगना हवेली जनपद सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
महराजगंज के ग्राम करमहा, तप्पा-लेहड़ा में चकबन्दी सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
सं0 3075/जी0-362/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 होने के दिनांक से तहसील हर्रैया परगना बस्ती पश्चिम
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, जनपद बस्ती के ग्राम पेड़रिया में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार हो गयी हैं।
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सं0 3073/जी0-329/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
होने के दिनांक से तहसील फरेन्दा परगना हवेली जनपद
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
महराजगंज के ग्राम रसोइयां, तप्पा-लेहड़ा में चकबन्दी
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
106 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-ककरता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित सं0 3076/जी0-157/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
होने के दिनांक से तहसील फूलपुर परगना सिकन्दरा प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
जनपद प्रयागराज के ग्राम करम्हा में चकबन्दी क्रियाएं सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
समाप्त हो गयी हैं।
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
सं0 3079/जी0-164/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, होने के दिनांक से तहसील भाटपाररानी परगना सलेमपुर
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार मझौली जनपद देवरिया के ग्राम धरमखोर बाबू में
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित सं0 3077/जी0-157/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
होने के दिनांक से तहसील व परगना चायल जनपद प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
कौशाम्बी के ग्राम मलाक भारत में चकबन्दी क्रियाएं सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
समाप्त हो गयी हैं।
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
27 जून, 2024 ई0
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
सं0 3162/जी0-362-ए/2021-22/धारा-6(1)-उत्तर प्रदेश अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0-5- चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक होने के दिनांक से तहसील हर्रैया परगना बस्ती पश्चिम
19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का जनपद बस्ती के ग्राम रघुनाथपुर, तप्पा-हरदी में चकबन्दी
प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नौतनवा, जनपद
महराजगंज के ग्राम रानीपुर में उपर्युक्त अधिनियम की
सं0 3078/जी0-247/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
4359/जी0-610/2016-17 दिनांक 05 सितम्बर, 2016
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
सं0 3163/जी0-236/2022-23/धारा-6(1)-उत्तर दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापितभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 107 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का
प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नगीना, जनपद बिजनौर संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नगीना, जनपद बिजनौर के ग्राम नूरमोहम्मदपुर बी0ए0 में उपर्युक्त अधिनियम की के ग्राम मुर्तजाबाद में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4(2) धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या- के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-3054/जी0- 3845/जी0-610/2012 दिनांक 14 अगस्त, 2013 610/2023-24 दिनांक 21 जुलाई, 2023 एतद्द्वारा निरस्त एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
करता हूँ।
सं0 3164/जी0-153/2020-21/धारा-6(1)-उत्तर सं0 3167/जी0-48ए/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील फरीदपुर, जनपद बरेली संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील निजामाबाद, जनपद
आजमगढ़ के ग्राम अन्धौरी में उपर्युक्त अधिनियम की के ग्राम खल्लपुर में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4क(2)
धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या- के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-1342/जी0-
610/2012 दिनांक 24 मार्च, 2014 एतद्द्वारा निरस्त 2662/जी0-48/80 दिनांक 22 अप्रैल, 1981 एतद्द्वारा करता हूँ।
निरस्त करता हूँ।
सं0 3165/जी0-236/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर सं0 3168/जी0-173/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नगीना, जनपद बिजनौर संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील मोदीनगर, जनपद
गाजियाबाद के ग्राम सुराना में उपर्युक्त अधिनियम की के ग्राम शंकरपुर में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4(2) के
धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या- अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-3054/जी0-
610/2023-24 दिनांक 21 जुलाई, 2023 एतद्द्वारा निरस्त 3845/जी0-610/2012 दिनांक 14 अगस्त, 2013 करता हूँ।
एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
सं0 3166/जी0-236/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर सं0 3169/जी0-247/2023-24/धारा-52(1)-उत्तर प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
15 ख108 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-क तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, सं03172/जी0-158B/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार होने के दिनांक से तहसील फूलपुर परगना सिकन्दरा उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित जनपद प्रयागराज के ग्राम बाकराबाद में चकबन्दी क्रियाएं अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, समाप्त हो गयी हैं।
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
होने के दिनांक से तहसील व परगना ताखा जनपद सं0 3170/जी0-361/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
इटावा के ग्राम बनीहरदू में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
गयी हैं।
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, सं0 3173/जी0-161/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार होने के दिनांक से तहसील सदर परगना हवेली जनपद उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित जौनपुर के ग्राम सादात बिन्दुली में चकबन्दी क्रियाएं अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, समाप्त हो गयी हैं।
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
होने के दिनांक से तहसील व परगना अतर्रा जनपद बांदा सं0 3171/जी0-168/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
के ग्राम उमरेहड़ा में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 सं0 3174/जी0-201/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1, चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित होने के दिनांक से तहसील व परगना सदर जनपद अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार, प्रतापगढ़ के ग्राम कटराइन्द्रकुंवर में चकबन्दी क्रियाएं चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित समाप्त हो गयी हैं।
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशितभाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 109 होने के दिनांक से तहसील सदर परगना कन्तित जनपद तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
मीरजापुर के ग्राम भागदेवर में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
गयी हैं।
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित सं0 3175/जी0-163/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होने के दिनांक से तहसील बिलग्राम परगना साण्डी सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
जनपद हरदोई के ग्राम गंजरी में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
हो गयी हैं।
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
सं0 3178/जी0-61B/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958 करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
होने के दिनांक से तहसील हरदोई परगना गोपामऊ तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
जनपद हरदोई के ग्राम भैसरी में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
हो गयी हैं।
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित सं0 3176/जी0-233/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होने के दिनांक से तहसील व परगना चन्दौसी जनपद सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
सम्भल के ग्राम चोपा शोभापुर में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
हो गयी हैं।
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
सं0 3179/जी0-247/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
होने के दिनांक से तहसील शाहाबाद परगना पण्डरवा तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
जनपद हरदोई के ग्राम सरावर में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
हो गयी हैं।
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित सं0 3177/जी0-170/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होने के दिनांक से तहसील फूलपुर परगना सिकन्दरा सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
जनपद प्रयागराज के ग्राम उधोपुर खगिया में चकबन्दी सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
110 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-कसं0 3180/जी0-226/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर सं0 3255/जी0-250/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नकुड़, जनपद सहारनपुर अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
के ग्राम बालू में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4क(2) के चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-4188/जी0- करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
होने के दिनांक से तहसील व परगना बिधूना जनपद 250/64-06 दिनांक 13 नवम्बर, 2007 एतद्द्वारा निरस्त
औरैया के ग्राम पुनावर में चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो करता हूँ।
गयी हैं।
05 जुलाई, 2024 ई0
03 जुलाई, 2024 ई0
सं0 3307/जी0-एस0-592/2022-23-उत्तर प्रदेश सं0 3253/जी0-175/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर
जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0- प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक
19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का
प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील मुहम्मदाबाद गोहना,
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील छिबरामऊ, जनपद
जनपद मऊ के ग्राम अमारी में उपर्युक्त अधिनियम की
कन्नौज के ग्राम हरबल्लभपुर में उपर्युक्त अधिनियम की
धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-
धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या- 6297/जी0-175/59-91 दिनांक 31 मार्च, 2008
6084/जी0-610/2016-17 दिनांक 17 दिसम्बर, 2019 एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
सं0 3254/जी0-धारा-6(1)/2018-19(iii)-उत्तर
शुद्धि-पत्र
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन
सं0 3308/जी0-एस0-592/2022-23-उत्तर प्रदेश
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक
जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 की धारा-6(1) के 19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का
अन्तर्गत विज्ञप्ति संख्या-4110/जी0-158ए/65 दिनांक 28 प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी
जनवरी, 2009 द्वारा तहसील छिबरामऊ के ग्राम संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील धौलाना, जनपद हापुड़ के
हरबल्लभपुर, जनपद कन्नौज की चकबन्दी क्रियाओं में ग्राम समाना में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4क(2) के
सम्मिलित करने विशयक विज्ञप्ति संख्या-3986/जी0- अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-2656/जी0-
38/80 दिनांक 10 जुलाई, 1980 को निरस्त किया 610/2012 दिनांक 11 जुलाई, 2014 एतद्द्वारा निरस्त
करता हूँ।
गया था।
भाग 1-क ] उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 111चूंकि उक्त ग्राम में अधिनियम की धारा-24 के अधीन सं0-3311/जी0-610/2024-25(5)-उत्तर प्रदेश जोत
चकबन्दी अधिनियम-1953 (उ0प्र0, अधिनियम सं0-5-1954 कब्जा परिवर्तन की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी थी,
ई0) की धारा-4क की उप धारा-(2) के अधीन सरकारी जिसके परिणाम स्वरूप अधिनियम की धारा-30 के अधीन
विज्ञप्ति सं0-3741/सी0एच0आई0ई0-454/53 दिनांक 21 चकबन्दी योजना प्रवृत होकर नवीन प्रदिष्ट चकाें पर
अगस्त, 1963 द्वारा प्रतिनिहित अधिकारों का प्रयोग करके खातेदारों को भौमिक अधिकार उदभूत हो चुके थे। इस
तथा शासनादेश सं0 23/1-1-1(5)1991-टी0सी0-रा0-1, प्रकार ग्राम हरबल्लभपुर के सम्बन्ध में जारी धारा-6(1) की
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 के अनुसार खण्ड ख में किये गये विज्ञप्ति संख्या-4110/जी0-158ए/65 दिनांक 28 जनवरी,
प्राविधान के अन्तर्गत मैं, जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी 2009 अधिनियम की धारा-6(2) के प्राविधानों के विपरीत
संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित करता हूँ कि होने के कारण निरस्त की जाती है, फलस्वरूप ग्राम को
इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित होने के चकबन्दी क्रियाओं में सम्मिलित करने विषयक पूर्व की
दिनांक से जनपद गोरखपुर के निम्न ग्राम में चकबन्दी विज्ञप्ति संख्या-3986/जी0-38/80 दिनांक 10 जुलाई,
क्रियायें पुनः आरम्भ करने का निश्चय किया गया है-
1980 प्रभावी रहेगी।
ग्रामों की सूची
क्र0 जनपद तहसील परगन ग्राम का धारा जिसके
सं0 3309/जी0-28/2024-25/धारा-6(1)-उत्तर
ा नाम तहत प्रख्यापन
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
होना है।
सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन
1 2 3 4 5 6 सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक
19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का
1 गोरखपुर कैम्पियरगंज हवेली थवाईपार, धारा- 4क(2) प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी
/द्वितीय चक्र
तप्पा-
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील बिल्सी, जनपद बदायूं के
पचवारा
ग्राम पुसगवां में उपर्युक्त अधिनियम की धारा-4क(2) के
अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-3562/जी0-610/11
दिनांक 28 अगस्त, 2012 एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
सं0 3312/जी0-155/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
सं0 3310/जी0-250/2022-23/धारा-6(1)-उत्तर
सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
सं0-5-1954 ई0) की धारा-6 की उप धारा-(1) के अधीन
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
सरकारी विज्ञप्ति सं0-8313/आई0ए0-813/1954, दिनांक दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
19 अक्टूबर, 1956 द्वारा यथा प्रतिनिहित अधिकारों का उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
प्रयोग करते हुए मैं जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
संचालक, उत्तर प्रदेश, तहसील नकुड़, जनपद सहारनपुर चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
के ग्राम रानीपुर बरसी अहतमाल में उपर्युक्त अधिनियम करता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित
होने के दिनांक से तहसील सदर परगना शमशाबाद पूर्व की धारा-4क(2) के अधीन जारी की गई विज्ञप्ति संख्या-
जनपद फर्रुखाबाद के ग्राम फगुना अतनपुर में चकबन्दी 2656/जी0-610/2012 दिनांक 11 जुलाई, 2014
क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
एतद्द्वारा निरस्त करता हूँ।
112 उत्तर प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 1-ककरता हूँ कि इस विज्ञप्ति के सरकारी गजट में प्रकाशित सं0 3313/जी0-152-A/2024-25/धारा-52(1)-उत्तर
होने के दिनांक से तहसील कादीपुर परगना अल्देमऊ प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (उ0प्र0, अधिनियम
जनपद सुलतानपुर के ग्राम मालापुर जगदीशपुर में सं0-5-1954 ई0) की धारा-52(1) के अधीन सरकारी विज्ञप्ति
चकबन्दी क्रियाएं समाप्त हो गयी हैं।
सं0-1769/सी0एच0-1-91-58, दिनांक 07 अगस्त, 1958
तथा शासनादेश सं0 23/1/1-(5)1991-टी0सी0आर0-1,
दिनांक 01 अप्रैल, 1991 में किये गये प्राविधान के अनुसार
उपधारा (1-क) उपधारा (1) के अधीन यथा प्रतिनिहित
जी0एस0 नवीन कुमार, चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश।ह अधिकारों का प्रयोग करके मैं जी0एस0 नवीन कुमार,
चकबन्दी संचालक, उत्तर प्रदेश, एतद्द्वारा विज्ञापित
पी0एस0यू0पी0-41 हिन्दी गजट-भाग 1-क-2025 ई0।
मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज।
रजिस्टर्ड नं०-ए०डी०-4 लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू०पी०-41 (लाइसेन्स्ड टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट) प्रयागराज, शनिवार, 11 जनवरी, 2025 ई० (पौष 21, 1946 शक संवत्)
भाग 4
निदेशक, शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश
कार्यालय, सचिव, माध्यमिक षिक्षा परिषद्, उार प्रदेश, प्रयागराज
विज्ञप्ति
12 अगस्त, 2024 ई0
सं0 मा0शि0प0/परिषद्&9/386-सर्वसाधारण की जानकारी हेतु विज्ञापित एवं प्रसारित है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा शैक्षिक सत्र 2024-25 (परीक्षा वर्ष 2025) की हाईस्कूल (कक्षा 11 व 12) हेतु निम्नवत् पाठ्क्रम निर्धारित किया जाता है।
विषय-हिन्दी
(कक्षा-11)
पूर्णांक 100
इस विषय मेंं 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र तीन घण्टे का होगा। सम्पूर्ण प्रश्नपत्र दो खण्डों में विभाजित है- क- गद्य, पद्य, खण्ड काव्य, नाटक और कहानी। ख- संस्कृत- गद्य, पद्य, निबन्ध, काब्य सौन्दर्य के तत्व, संस्कृत व्याकरण और अनुवाद।
खण्ड-क (अंक-50)
1- हिन्दी गद्य का विकास-हिन्दी गद्य का उद्भव एवं विकास, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग 1×4=4 अंक
2- काव्य साहित्य का विकास-पद्य साहित्य का उद्भव एवं विकास, काल विभाजन, आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल
की प्रमुख प्रवृत्तियां, कवि एवं उनकी प्रमुख रचनाएं 1×4=4 अंक
3- सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम। 1×2=2 अंक
(सड़क सुरक्षा से ज्ञानात्मक बोधात्मक आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछें जायेगें)।
4- पाठय्क्रम में निर्धारित गद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न। 2×5=10 अंक
5- पाठय्क्रम में निर्धारित पद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न। 2×5=10 अंक
6(क)-संकलित गद्य के पाठों के लेखकों का जीवन परिचय, कृतियाँ तथा भाषा शैली (शब्द सीमा अधिकतम 80) 32=5 अंक
(ख) कवि परिचय, जीवनी, कृतियाँ, साहित्यिक विशेषताएँ-(शब्द सीमा अधिकतम 80) 32=5 अंक
7- कहानी-चरित्र-चित्रण, कहानी के तत्व एवं तथ्यों पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा अधिकतम 80) 5×1=5 अंक
8- नाटक-निर्धारित नाटक की विशेषताएँ एवं पात्रों के चरित्र चित्रण पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा अधिकतम 80) 5×1=5 अंक
1 ङ2 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
खण्ड-ख (अंक-50)
11=2 अंक
संस्कृत व्याकरण- (क्रम संख्या 12 एवं 13 से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे) 13- क-सन्धि-(1) स्वर सन्धि-एचोऽयवायावः एडः पदान्तादति, एङपररूपम् 1×3=3 अंक (2) व्यंजन सन्धि-स्तोः श्चुनाश्चुः, ष्टुनाष्टुः, झलांजशझशि, खरिच, मोऽनुस्वारः तोर्लि, अनुस्वारस्यययि पर सवर्णः। (3) विसर्ग सन्धि- विसर्जनीयस्य सः, सजुषोरूः, अतोरोरप्लुतादप्लुते, हशिच, रोरि। 11=2 अंक 11=2 अंक ख-समास-अव्ययीभाव, कर्मधारय, बहुब्रीहि। 14-(क) शब्दरूप (1) संज्ञा-आत्मन्, नामन, राजन्, जगत्, सरित्। (2) सर्वनाम- सर्व, इदम्, यद्।
(ख)-धातुरूप-लट्, लोट, विधिलिङ्ग, लङ, लृट-(परस्मैपदी) स्था, पा, नी, दा, कृ, चुर् 11=2 अंक (ग)-प्रत्यय (1) कृत-क्त, क्त्वा, तब्यत्, अनीयर् (2) तद्धित-त्व, मतुप, वतुप (घ)-विभक्ति परिचय-अभितः परितः, समयानिकषाहाप्रतियोगेऽपि, येनाड््रविकारः,सहयुक्तेऽप्रधाने, नमः स्वस्तिस्वाहा, स्वधालंबषट्योगाच्च, षष्ठीशेषे, यतश्चनिर्धारणम।
15-हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद।
निर्धारित पाठ्य वस्तु (माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा निर्धारित अंश) का अध्ययन करना होगा।
खण्ड-क
पुस्तक का नाम लेखक का नाम पाठ का नाम
1 2
3
गद्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र भारत वर्षोन्नति कैसे हो सकती है?
2-आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी महाकवि माघ का प्रभात वर्णन 3-श्याम सुन्दर दास भारतीय साहित्य की विशेषताएँ 4-सरदार पूर्ण सिंह आचरण की सभ्यता 5-डा0 सम्पूर्णानन्द शिक्षा का उद्देश्य 6-रायकृष्ण दास आनन्द की खोज, पागल पथिक 7-राहुल सांकृत्यायन अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा 8-रामबृक्ष बेनीपुरी गेहूं बनाम गुलाब 9- - - - सड़क सुरक्षा 10- - - - - गंगा की स्वच्छता एवं संरक्षण
काव्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-कबीरदास साखी, पदावली
2-मलिक मुहम्मद जायसी नागमती का वियोग वर्णन 3-सूरदास विनय, वात्सल्य, भ्रमरगीत 4-तुलसीदास भरत-महिमा, गीतावली, कवितावली,
दोहावली, विनय पत्रिका।
5-केशवदास स्वयंवर-कथा, विश्वामित्र और जनक की भेंट 6-कविवर बिहारी भक्ति एवं श्रृंगार। 7-महाकवि भूषण शिवा-शौर्य, छत्रसाल प्रशस्ति 8-विविधा सेनापति, देव, घनानन्दभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3 कथा साहित्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-प्रेमचन्द बलिदान
2-जयशंकर 'प्रसाद' आकाश दीप 3- भगवती चरण वर्मा प्रायश्चित 4-यशपाल समय 5-जैनेन्द्र कुमार ध्रुवयात्रा
नाटक (सहायक पुस्तक)
क्र0 सं0 पुस्तक तथा लेखक प्रकाशक अनुदानित जिले
1 कुहासा और किरण लेखक-
श्री विष्णु प्रभाकर
2 आन की मान लेखक- श्री हरिकृष्ण प्रेमी
3 गरूड़ ध्वज लेखक- लक्ष्मी नारायण मिश्र
4 सूत पुत्र लेखक-
डा0 गंगा सहाय "प्रेमी"
भारतीय साहित्य प्रकाशन, 204-ए वेस्ट एण्ड रोड, सदर, मेरठ। कौशाम्बी प्रकाशन, दारागंज, प्रयागराज साहित्य भवन, प्रा0लि0, 93, के0पी0 कक्कड़ रोड़, प्रयागराज। राम प्रसाद एण्ड सन्स, अस्पताल रोड, आगरा।
मेरठ, आजमगढ़, मुरादाबाद, बलिया, रायबरेली, झांसी, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूँ, पीलीभीत। वाराणसी, लखनऊ, इटावा, बरेली, फर्रूखाबाद, एटा, शाहजहांपुर, उन्नाव, हमीरपुर। आगरा, गोरखपुर, जौनपुर, फैजाबाद, बिजनौर, फतेहपुर, गोण्डा, सीतापुर, प्रतापगढ़, बहराइच, ललितपुर। प्रयागराज, सहारनपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, गाजीपुर, मैनपुरी, जालौन, हरदोई, बाराबंकी।
5 राज मुकुट लेखक-
श्री व्यथित "हृदय"
कानपुर, बुलन्दशहर, मथुरा, बस्ती, मिर्जापुर, देवरिया, बांदा, रामपुर।
सिम्बुल लैंग्वेज कारपोरेशन अस्पताल रोड़, आगरा नोट :-इसके अतिरिक्त अन्य जिलों/नवसृजित जिलों में नाटक पूर्व की भांति यथावत् पढ़ाये जायेंगे।
खण्ड-ख
संस्कृत दिग्दर्शिका
पाठ्य वस्तु
1-वन्दना 2-प्रयागः 3-सदाचारोपदेशः 4-हिमालयः 5-गीतामृतम् 6-चरैवेति-चरैवेति 7-विश्वबन्द्याः कवयः, 8-लोभः पापस्य कारणम। 9- चतुरश्चौर 10-सुभाषचन्द्रः।
विषय-सामान्य हिन्दी
(कक्षा-11)
पूर्णांक-100
की प्रमुख प्रवृत्तियां, कवि एवं उनकी रचनाएं।
इस विषय में 100 अंकों का एक प्रश्न-पत्र तीन घण्टे का होगा। सम्पूर्ण प्रश्नपत्र दो खण्डों में विभाजित है- क- गद्य, पद्य, खण्ड काव्य, नाटक और कहानी। ख- संस्कृत- गद्य, पद्य, निबन्ध, काब्य सौन्दर्य के तत्व, संस्कृत एवं हिन्दी व्याकरण और पत्रलेखन। खण्ड-क (अंक-50) 1- हिन्दी गद्य का विकास-हिन्दी गद्य का उद्भव एवं विकास, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग 1×4=4 अंक 2- काव्य साहित्य का विकास-पद्य साहित्य का उद्भव एवं विकास, काल विभाजन, आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल 1×4=4 अंक 1×2=2 अंक 3- सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम। (सड़क सुरक्षा से ज्ञानात्मक बोधात्मक आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जायेगें)। 4- पाठ्यक्रम में निर्धारित गद्यांशों पर आधारित पाँच प्रश्न।
2×5=10 अंक4 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
5-पाठ्यक्रम में निर्धारित पद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न। 2×5=10 अंक
6 (क)-पाठ्यक्रम में निर्धारित लेखकों का साहित्यिक परिचय एवं कृतियाँ। (शब्द सीमा अधिकतम-80) 32=5 अंक
(ख)-पाठ्यक्रम में निर्धारित कवियों का साहित्यिक परिचय एवं कृतियाँ। (शब्द सीमा अधिकतम-80) 32=5 अंक
7- पाठ्यक्रम में निर्धारित कहानियों का सारांश एवं उद्देश्य पर आधारित प्रश्न। (शब्द सीमा अधिकतम-80) 5×1=5 अंक
8- पाठ्यक्रम में निर्धारित नाटक की कथावस्तु एवं प्रमुख पात्रों का चरित्र चित्रण। (शब्द सीमा अधिकतम-80) 5×1=5 अंक
खण्ड-ख (अंक-50)
9-(क)-पाठय्क्रम में निर्धारित संस्कृत गद्य का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद। 25=7 अंक
(ख)-पाठय्क्रम में निर्धारित संस्कृत पद्य का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद। 25=7 अंक
10-लोकोक्तियों एवं मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य प्रयोग। 11=2 अंक
(क्रम संख्या 10 एवं 11 से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे)
11-(क)-संन्धि-(दीर्घ, गुण, यण, अयादि में से किन्हीं तीन सन्धियों से संबंधित शब्दों का सन्धि विच्छेद। 1×3=3 अंक
(ख) संस्कृत शब्दों में विभक्ति की पहचान- 11=2 अंक
संज्ञा-आत्मन्, नामन्, राजन,् जगत,् सरित्।
सर्वनाम- सर्व इदम् यद्।
12-(क)शब्दों में सूक्ष्म अन्तर। 11=2 अंक
(ख) अनेकार्थी शब्द। 11=2 अंक
(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (केवल दो शब्द) 11=2 अंक
(घ) वाक्यों में त्रुटिमार्जन (लिंग, वचन, कारक, काल एवं वर्तनी संबंधी त्रुटियाँ) 11=2 अंक
13-काव्य सौन्दर्य के तत्व- (क) रस-श्रृंगार, करुण, हास्य, वीर एवं शान्त रस के लक्षण एवं उदाहरण 11=2 अंक
(ख) अलंकार-(1) शब्दालंकार-अनुप्रास, यमक, श्लेष के लक्षण अथवा उदाहरण। 02 अंक
(2) अर्थालंकार-उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, भ्रान्तिमान एवं सन्देह के लक्षण अथवा उदाहरण।
(ग) छन्द-मात्रिक-चौपाई, दोहा, सोरठा, कुण्डलियां के लक्षण एवं उदाहरण। 11=2 अंक
14-पत्र लेखन (निम्नलिखित में से किसी एक पर)- 24=6 अंक
(1) नियुक्ति-आवेदन-पत्र
(2) बैंक से किसी व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त करने का आवेदन-पत्र।
(3) अपने नगर या गाँव की सफाई हेतु संबंधित अधिकारी को प्रार्थना-पत्र।
15-निबन्ध (विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, कृषि, सामाजिक एवं राजनैतिक चेतना, यातायात के नियम पर आधारित
जनसंख्या, स्वास्थ्य शिक्षा व पर्यावरण से सम्बन्धित) 27=9 अंक
पाठ्य वस्तु-खण्ड-क
सामान्य हिन्दी विषय के लिए निम्नलिखित पाठ्य वस्तु का अध्ययन करना होगाः-
पुस्तक का नाम लेखक का नाम पाठ का नाम
1
2
3
गद्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र भारत वर्षोन्नति कैसे हो सकती है?
2-आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी महाकवि माघ का प्रभात वर्णन 3-सरदार पूर्ण सिंह आचरण की सभ्यता 4-डा0 सम्पूर्णानन्द शिक्षा का उद्देश्य 5-राहुल सांकृत्यायन अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा 6-रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ बनाम गुलाब 7- ------ सड़क सुरक्षा 8- ------ गंगा की स्वच्छता एवं संरक्षण काव्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-संत कबीरदास साखी, पदावली
2-सूरदास विनय, वात्सल्य, भ्रमरगीत 3-गोस्वामी तुलसीदास भरत-महिमा, कवितावली, गीतावली,
दोहावली, विनय पत्रिका।
4-कविवर विहारी भक्ति एवं श्रृंगार 5-महाकवि भूषण शिवा-शौर्य, छत्रसाल प्रशस्ति कथा साहित्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-प्रेमचन्द बलिदान
2-जयशंकर 'प्रसाद' आकाश दीप 3-यशपाल समय 4-भगवती चरण वर्मा प्रायश्चितभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 5
नाटक (सहायक पुस्तक) प्रथम प्रश्न-पत्र
क्र0सं0 पुस्तक तथा लेखक प्रकाशक अनुदानित जिले
1 कुहासा और किरण लेखक-
श्री विष्णु प्रभाकर
2 आन की मान लेखक- श्री हरिकृष्ण प्रेमी
भारतीय साहित्य प्रकाशन, 204-ए वेस्ट एण्ड रोड, सदर, मेरठ कौशाम्बी प्रकाशन, दारागंज, प्रयागराज
3 गरूड़ ध्वज लेखक-
श्री लक्ष्मी नारायण मिश्र
4 सूत पुत्र लेखक-
डा0 गंगा सहाय "प्रेमी"
साहित्य भवन, प्रा0लि0, 93, के0पी0 कक्कड़ रोड़, प्रयागराज राम प्रसाद एण्ड सन्स, अस्पताल रोड़, आगरा
5 राज मुकुट लेखक- सिम्बुल लैंग्वेज कारपोरेशन अस्पताल रोड, आगरा
मेरठ, आजमगढ़, मुरादाबाद, बलिया, रायबरेली, झांसी, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, बदायूँ, पीलीभीत। वाराणसी, लखनऊ, इटावा, बरेली, फर्रुखाबाद, एटा, शाहजहांपुर, उन्नाव, हमीरपुर। आगरा, गोरखपुर, जौनपुर, फैजाबाद, बिजनौर, फतेहपुर, गोण्डा, सीतापुर, प्रतापगढ़, बहराइच, ललितपुर। प्रयागराज, सहारनपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, गाजीपुर, मैनपुरी, जालौन, हरदोई, बाराबंकी। कानपुर, बुलन्दशहर, मथुरा, बस्ती, मिर्जापुर, देवरिया, बांदा, रामपुर।
श्री व्यथित "हृदय" नोटः-इसके अतिरिक्त अन्य जिलों/नवसृजित जिलों में नाटक पूर्व की भांति यथावत् पढ़ाये जायेंगे।
सामान्य हिन्दी-खण्ड-ख
संस्कृत दिग्दर्शिका
संस्कृत हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु-
1-वन्दना 2-प्रयागः
3-सदाचारोपदेशः
4-हिमालयः 5-गीतामृतम् 6-लोभः पापस्य कारणम्
विषय-नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा
(कक्षा-11) पूर्णांक-50 अंक इस विषय की लिखित परीक्षा में एक प्रश्न-पत्र तीन घण्टे तथा 50 अंकों का होगा, इसके साथ ही 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। लिखित एवं प्रयोगात्मक में उत्तीर्ण होने के लिये विद्यार्थी को 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। इस विषय के प्राप्तांकों का योग, श्रेणी निर्धारण में नहीं किया जायेगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की खेल एवं शारीरिक शिक्षा की परीक्षा अग्रसारण/पंजीकरण अधिकारी द्वारा ली जायेगी। उद्देश्य-
1-बालकों का सर्वांगीण विकास एवं गुणों का उन्नयन। 2-छात्रों में स्वयं उत्तरदायित्व वहन, समय पालन एवं स्वस्थ नेतृत्व शक्ति का विकास। 3-सुदृढ शरीर का निर्माण करने हेतु शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं की अभिवृद्धि। 4-सहयोग, सहिष्णुता तथा विश्वबन्धुत्व की भावना का विकास। 5-छात्रों में भारतीय संस्कृति के प्रति अनुराग, राष्ट्रीय एकता एवं देशभक्ति की भावना का विकास। 6-भावी जीवन में जीविका के लिये तैयार करना।
नैतिक, खेल एवं शारीरिक शिक्षा
इकाई-1-नैतिकता के मूल तत्व-
30 अंक 05 अंक नैतिकता का तात्पर्य तथा स्वरूप, महत्व, परिवार, समाज राष्ट्र एवं विश्व के सन्दर्भ में नैतिकता के आधार पर सत्य, अहिंसा, प्रेम, ईमानदारी, स्वतंत्र चिंतन, आत्मसंयम, सहिष्णुता, परोपकार तथा सह.अस्तित्व आदि के व्यावहारिक पक्ष। इकाई-2-परिवार तथा समाज-
04 अंक परिवार के प्रति कर्तव्य विशेषकर परिवार में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों- दादा-दादी, नाना.नानी अथवा अभिभावकों के प्रति अधिक जागरूक एवं संवेदनशील रहना। माता.पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण.पोषण कल्याण कानून 2007 का संक्षिप्त ज्ञान। पारस्परिक संबंधों की रक्षा एवं निर्वाह, समाजसेवा का महत्व, अंध विश्वास एवं रूढ़ियों का उन्मूलन, सामाजिक दोषों का निराकरण, धूम्रपान, मद्यपान, दहेज, अशिक्षा, पारिवारिक उत्पीड़न तथा जाति.प्रथा।
6 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4इकाई-3-नागरिकता एवं भावनात्मक एकता-
03 अंक
नागरिकता का अर्थ, परिभाषा, नागरिक के कर्तव्य, परिवार एवं समाज के प्रति शिष्टाचार, विश्व.बन्धुत्व, सर्व धर्म.समभाव।
इकाई-4-
03 अंक
गुरू-शिष्य सम्बन्ध, वर्तमान शैक्षिक परिवेश में तनाव के कारण एवं निवारण।
इकाई-5-पर्यावरण, सुरक्षा एवं संरक्षण-
03 अंक पर्यावरण का अर्थ, परिभाषा एवं महत्व, मानव क्रिया.कलापों का पर्यावरण पर प्रभाव, जनसंख्या विस्फोट का पर्यावरण पर प्रभाव, प्राकृतिक आपदाओं का पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण सुरक्षा। इकाई-6-सड़क यातायात एवं सावधानियां-
03 अंक यातायात नियम एवं उनके पालन की आवश्यकता, संकेतों की जानकारी एवं अर्थ, पैदल एवं वाहन चालकों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां और होने वाली असावधानियां, यातायात में आने वाले अवरोध, उनका निदान एवं उपचार। इकाई-7-
03 अंक
भारतीय संविधान में उल्लिखित नागरिकों के मूल कर्तव्य एवं उनके अनुपालन हेतु दिशा निर्देश।
इकाई-8-बाल अधिकार-
03 अंक जीवन संरक्षण सहभागिता, विकास का अधिकार, भारतीय संविधान में बाल अधिकार संरक्षण, शिकायत प्रणाली, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, चाइल्ड लाइन, वीमेन पावन लाइन। इकाई-9-बाल संरक्षण-
03 अंक बाल सुरक्षा, बच्चा और परिवार, अवयस्क बालक/बालिकाओं को बुरी आदतों से बचने हेतु प्रेरित करना एवं उनसे होने वाले दुष्परिणामों से अवगत कराना। हानिकारक पारम्परिक प्रथायें, बाल विवाह, कन्या भू्रण हत्या, दहेज प्रथा, बाल मजदूरी, वैकल्पिक देखभाल, शिक्षा का अधिकार, पीड़ित बच्चों के अधिकार, यौन उत्पीड़न, शारीरिक दण्ड, परीक्षा का बोझ, स्कूलों में बच्चों का अधिकार।
पुस्तक-''मानव अधिकार अध्ययन'' प्रकाशक माइण्डशेयर
उद्देश्य :
(cid:1) विद्यार्थियों को 'योग' के लाभों से परिचित कराना और योग को उनकी दिनचर्या से जोड़ना। (cid:1) अभ्यासों एवं गतिविधियों के उत्तरोत्तर क्रम द्वारा उनका लाभ उठाकर, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पाने की सामथ्र्य का विकास करना।
(cid:1) सरल विषयवस्तुओं के माध्यम से आत्मजागरण की ओर उन्मुख करना। (cid:1) किशोरवय की समस्याओं एवं रोगों को समझकर 'योग निर्देशन' एवं 'आयुर्वेदीय उपचार' आहार एवं प्राकृतिक औषध द्वारा इनका निदान करने में समर्थ बनाना।
(cid:1) 'योग में जीविका के अवसर' के माध्यम से भविष्य में आजीविका के लक्ष्यों को निर्धारित करने में समर्थ बनाना। (cid:1) योगविषयक विचार एवं चिंतन को समझने की शक्ति विकसित करना। (cid:1) योग के माध्यम से विद्यार्थियों को सांस्कृतिक वातावरण एवं राष्ट्रीय मूल्याें के प्रति संवेदनशील बनाना।
योग शिक्षा- 20 अंक
2 अंक
1- योग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि • हिरण्यगर्भशास्त्र, सांख्य एवं औपनिषदिक प्राणविद्या के सन्दर्भ में योग के ऋषि पतंजलि तथा योगसूत्र का उद्भव एवं योगदर्शन की परम्परा
2-वर्तमान में योगशिक्षा का महत्व • योग का शरीर क्रियात्मक आधार 2 अंक
• योग एक विकासात्मक उत्प्रेरक
2 अंक
3-अष्टांग योग.धारणा एवं ध्यान • धारणा-प्रक्रिया, प्रयोजन व लाभ
• ध्यान
▪ ध्यान : स्वरूप, परिभाषा
4-अष्टचक्र एवं पंचकोश • अष्टचक्र
4 अंक
1. मूलाधार चक्र 2. स्वाधिष्ठान चक्र 3. मणिपुर चक्र 4. हृदय चक्र 5. अनाहत् चक्र 6. विशुद्धि चक्र 7. आज्ञा चक्र 8. सहस्त्रार चक्र
• पंचकोश
▪ पंचकोश क्या हैं? ▪ अन्नमय, मनोमय, प्राणमय, विज्ञानमय, आनन्दमयभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 7 5-किशोरवय में आहार.निर्देशन • किशोर वय में आहार 6-अनुशासन एवं समय प्रबन्धन अनुशासन
2 अंक
3 अंक
• क्या है?
• प्रकृति में सर्वत्र अनुशासन है
• प्राणी जगत में भी अनुशासन है
• अनुशासन के लिए क्या करें-
• सामान्य उपाय
• यौगिक उपाय
समय-प्रबन्धन
• समय-प्रबन्धन की आवश्यकता एवं उपयोगिता
• यौगिक उपाय
7- दुव्र्यसनों के प्रभाव • दुव्र्यसन क्या हैं ?
2 अंक
• योग से दुव्यर्सनों की समाप्ति
8-योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा • प्राकृतिक चिकित्सा क्या है?
3 अंक
• प्राकृतिक चिकित्सा की विधियाँ एवं लाभ-
1. जल चिकित्सा 2. वाष्प चिकित्सा 3. मृत्तिकोपचार 4. वायुसेवन 5. अभ्यंग 6. आतपोपचार 7. उपवास एवं विश्रमण
प्रयोगात्मक 50 अंक
1-आसन • खड़े होकर किए जाने वाले (Standing Posture) 4 अंक
▪ ताड़ासन, तिर्यकताड़ासन, वृक्षासन-I • बैठकर किए जाने वाले (Sitting Posture)
▪ सुखासन।
2. चन्द्र-नमस्कार • चन्द्र-नमस्कार 3 अंक
▪ परिचय
▪ यौगिक दृष्टिकोण
3-मुद्रा और स्वास्थ्य • मुद्राओं का महत्व 3 अंक
• मुद्रा के भेद
4-बन्ध और स्वास्थ्य • महाबन्ध 2 अंक
5-प्राणायाम परिचय • उज्जायी, उद्गीथ, शीतली, सीत्कारी 2 अंक
6-योगनिद्रा • योग निद्रा मनोवैज्ञानिक व्याख्या 2 अंक
7-त्राटक • प्रकार 4 अंक
▪ आन्तर त्राटक, बाह्य त्राटक, मध्य त्राटक
• अनिद्रा एवं त्राटक : त्राटक के उपचारात्मक अनुप्रयोग
8-निम्नलिखित स्वीकृत शारीरिक प्रक्रियाओं मे से किन्हीं 3 अथवा अधिक में नियमित अभ्यास- 30 अंक
क्रिकेट, बेसबाल, टेनिस, टेबल टेनिस, हाकी, बैडमिन्टन, बास्केटबाल, बाक्सिंग, एथलेटिक्स, कुश्ती, जूडो, जिम्नास्टिक,
दौडना साइकिलिंग, नौका चलाना, फ्लाइन्ग, स्केटिंग, घुडसवारी, शिविर निवास, खोज यात्रा का अभियान, बागवानी, लोक नृत्य।
महापुरूषों की जीवन गाथा का अध्ययन
1. राम प्रसाद ''बिस्मिल'' 2. भगत सिंह 3. डा0 भीमराव अम्बेडकर 4. सरदार वल्लभ भाई पटेल 5. पं0 दीनदयाल उपाध्याय 6. महाबीर जैन 7. महामना मदन मोहन मालवीय 8. अरविन्द घोष 9. राजा राम मोहन राय 10. सरोजनी नायडू 11. नाना साहब 12. महर्षि पतंजलि 13. शल्य चिकित्सक सुश्रुत 14. डा0 होमी जहॉगीर भाभा8 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
Subject – English
(Class – XI)
There will be One question paper of 100 marks. Section A–Reading-
questions.
Section B–Writing-
making enquiries etc) Section C – Grammar-
15 Marks 1. One long unseen passage followed by four short-answer questions and three vocabulary based 4x3=12 (Short Questions) 3x1=3 (Vocabulary) 20 Marks 05 2. Note making and summary 3. Article /Essay 08 4. Letter to the Editor/complaint letters/Business letter (Placing orders/booking or cancellation/ 07 25 Marks 5. Ten Questions (MCQ /very short answer type questions) based on Narration, Synthesis, Transformation, Syntax and vocabulary items like- idioms and phrases/phrasal verbs, synonyms, antonyms, one word substitution, homophones. 2x10=20
40 Marks
25 marks
Section D – Literature -
Hornbill – Text Book
Prose-
8. One long answer type question. 7. Two short answer type questions.
07 4+4=8 Poetry-
9. Three short answer type questions based on a given poetry extract. 2x3=6 04 10. Central idea. Note- Questions related to identification of the following figures of speech will be included in the poetry section-(Simile, Metaphor, Personification, Oxymoron, Apostrophe, Hyperbole, Onomatopoeia) Snapshot – Supplementary Reader -
12. One long answer type question. 11. Two short answer type questions.
15 marks 07 4+4=8 Prescribed Content-
Sl. No Lesson Name Writer/Poet 1 HORNBILL (Text Book)
1- Khushwant Singh 2- Gordon Cook and Alan East 3- A.R. Williams 4- Nani Palkhivala 5- Jayant Narlikar 6- Nick Middleton
Prose- 1- The Portrait of a Lady 2- We're Not Afraid to Die…..if We Can All Be Together 3- Discovering Tut: The Saga Continues 4- The Ailing Planet: The Green Movement's Role 5- The Adventure 6- Silk Road Poetry- 1- A Photograph 2- The Laburnum Top 3- The Voice of the Rain 4- Childhood 5- Father to son
1- Shirley Toulson 2- Ted Hughes 3- Walt Whitman 4- Markus Natten 5- Elizabeth Jennings 2 SNAPSHOTS (Supplementary Reader)
1- The Summer of the Beautiful White Horse 2- The Address 3- Mother's Day 4- Birth 5- The Tale of Melon City
1- William Saroyan 2- Marga Minco 3- J.B. Priestley 4- A.J. Cronin 5- Vikram Seth
Note- No book has been prescribed for grammar. Students can select any book recommended by the subject teacher.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 9संस्कृत
कक्षा-11
पूर्णांक-100
सामान्य निर्देश-संस्कृत विषय में 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र होगा। प्रश्न-पत्र के प्रत्येक खण्ड में निर्धारित अंकों के अन्तर्गत दीर्घ उत्तरीय, लघु उत्तरीय, अति लघु उत्तरीय एवं बहुविकल्पीय प्रश्नों का समावेश कर कई प्रश्न पूछे जायेंगे। प्रश्नपत्र में प्रश्नों के लिए निर्धारित अंक ही उत्तर के आकार की संक्षिप्तता या दीर्घता का द्योतक होगा। प्रत्येक प्रश्नपत्र के अन्तर्गत समाविष्ट पाठ्यक्रम का अंक विभाजन निम्नवत् होगाः-
20 अंक
खण्ड-क (गद्य)
चन्द्रापीडकथा (पूर्वार्द्ध)- आसीत् पुरा शूद्रको नाम राजा ............ सर्वरामणीयकानाम् एकनिवासभूताम्, कादम्बरीं ददर्श।
10 अंक
4 अंक
1. गद्यांश के आधार पर प्रश्नोत्तर। 2. कथात्मक पात्रों का चरित्र चित्रण (हिन्दी में, अधिकतम 100 शब्द)। 3. रचनाकार का जीवन परिचय एवं गद्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द)। 4 अंक 4. सन्दर्भित पुस्तक से सम्बन्धित बहुविकल्पीय प्रश्न।
खण्ड-ख (पद्य)
2 अंक 20 अंक रघुवंशमहाकाव्यम् (द्वितीय सर्ग)- श्लोक संख्या 01 से 40 तक।
1. किसी श्लोक की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7 2. किसी श्लोक की सन्दर्भसहित संस्कृत में व्याख्या। 25=7 3. कविपरिचय एवं काव्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द) 4 4. काव्यगत तथ्यों एवं भावों पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न। 2
खण्ड-ग (नाटक)
20 अंक अभिज्ञानशाकुन्तलम् (चतुर्थोऽङकः) प्रारम्भ से श्लोक संख्या 10 तक।
1. पाठगत नाटक के किसी गद्यांश अथवा पद्य की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7 2. पाठगत नाटक के अंशों से सूक्तिपरक पंक्ति की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7 3. कालिदास का जीवनपरिचय एवं नाट्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द)। 4 4. सन्दर्भित नाटक पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न। 2
खण्ड-घ (पत्र लेखन)
मित्र या सम्बन्धियों को पत्र, प्रार्थनापत्र आदि।
6
खण्ड-ङ (अलंकार) निम्नलिखित अलंकारों की सामान्य परिभाषा (हिन्दी या संस्कृत में) अथवा उदाहरण संस्कृत में-अनुप्रास एवं यमक। 4 खण्ड-च (व्याकरण)
1. अनुवाद - हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद। 2. कारक तथा विभक्ति। 3. समास। 4. सन्धि अथवा सन्धि-विच्छेद, नामोल्लेख, नियम। 5. शब्दरूप। 6. धातुरूप। 7. प्रत्यय।
8 4 4 4 4 4 2
निर्धारित पुस्तकें एवं पाठ्यवस्तु
खण्ड-क (गद्य)
महाकविबाणभट्टप्रणीतम् - कादम्बरीसारभूता 'चन्द्रापीडकथा' का पूर्वार्द्ध भाग- ''आसीत् पुरा शूद्रको नाम राजा ......................... सर्वरामणीयकानाम् एकनिवासभूताम्, कादम्बरीं ददर्श।''
खण्ड-ख (पद्य)
महाकविकालिदासप्रणीतम्-रघुवंशमहाकाव्यम् (द्वितीय सर्ग) श्लोक संख्या 01से 40 तक।
खण्ड-ग (नाटक)
महाकविकालिदासप्रणीतम्-अभिज्ञानशाकुन्तलम् (चतुर्थोऽङ्कः)
प्रारम्भ से लेकर पद्य संख्या 10 तक।
खण्ड-घ (पत्रलेखन)
मित्र या सम्बन्धियों को पत्र, प्रार्थनापत्र आदि।
2 ङ10 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
खण्ड-ङ (अलंकार)
निम्नलिखित अलंकारों की सामान्य परिभाषा (हिन्दी या संस्कृत में) अथवा उदाहरण संस्कृत में-अनुप्रास एवं यमक।
खण्ड-च (व्याकरण)
1. अनुवाद -
हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद।
2. कारक तथा विभक्ति - निम्नलिखित सूत्रों तथा वार्तिकों के आधार पर कारकों तथा विभक्तियों का ज्ञान - (क) प्रथमा विभक्ति (कर्ता कारक)
(1) स्वतंत्रः कर्त्ता। (2) प्रातिपदिकार्थलिंगपरिमाणवचनमात्रे प्रथमा। (ख) द्वितीया विभक्ति (कर्म कारक) (1) कर्तुरीप्सिततमं कर्म। (2) कर्मणि द्वितीया। (3) अकथितं च। (4) अधिशीङ्स्थासां कर्म। (5) अभितःपरितःसमयानिकषाहाप्रतियोगेऽपि। (वा0) (6) कालाध्वनोरत्यन्तसंयोगे। (ग) तृतीया विभक्ति (करण कारक) (1) साधकतमं करणम्। (2) कर्तृकरणयोस्तृतीया। (3) सहयुक्तेऽप्रधाने। (4) पृथग्विनानानाभिस्तृतीयाऽन्यतरस्याम्। (5) येनाङ्गविकारः।
3. समास - निम्नलिखित समासों का ज्ञान, परिभाषा तथा संस्कृत में विग्रहसहित उदाहरण- तत्पुरुष, कर्मधारय, बहुव्रीहि। 4. सन्धि - सन्धि, सन्धिविच्छेद, नामोल्लेख तथा नियम। निम्नलिखित सूत्रों के अनुसार संधियों का उदाहरण सहित ज्ञान। स्वरसन्धि- (1) इको यणचि, (2) एचोऽयवायावः, (3) आद्गुणः, (4) वृद्धिरेचि, (5) अकः सवर्णे दीर्घः, (6) एङि पररूपम् (7) एङः पदान्तादति 5. शब्दरूप- निम्नलिखित संज्ञा शब्दों का रूप - (अ) पुल्लिंग - राम, हरि, गुरु, पितृ, भगवत्, करिन्, राजन्, पति, सखि, विद्वस्, चन्द्रमस् । (आ) स्त्रीलिंग - रमा, मति, नदी, धेनु, वधू, वाच्, सरित्, श्री, स्त्री, अप्। 6. धातुरूप-दसों लकारों का सामान्य ज्ञान तथा निम्नलिखित धातुओं के लट्, लङ्, लोट्, विधिलिंग एवं लृट् में रूप। परस्मैपद- भू, पठ्, पा, गम्, दृश्, स्था, नी, अस्, नश्, आप्, शक्, इष्, प्रच्छ्, कृष के रूप। 7. प्रत्यय- क्तिन्, क्त्वा, ल्यप्, शतृ, शानच्, तुमुन्, यत्। टिप्पणी-संस्कृत देवनागरी लिपि में लिखी जायेगी।
विषय-उर्दू
(कक्षा-11)
इसमें एक प्रश्न-पत्र 100 अंको का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णाक-33 अंक
1-व्याख्या तशरीह (तीन इकतिबासात में दो की तशरीह) 2-नस्र नेगारो पर तनकीदी सवालात 3-खुलासा (गैरदरसी इकतबास) 4-तारीख नसरी असनाफ अदब 5-निबन्ध (मजमून)
खण्ड- क (गद्य) पूर्णांक 50 15 अंक 10 अंक 10 अंक 5 अंक 10 अंक खण्ड- ख (पद्य) पूर्णांक 50 15 अंक 10 अंक 5 अंक 1-तशरीहात (गजल और दूसरे असनाफ-ए-शेर) 2-शायरों पर तनकीदी सवालात 3-असनाफ शायरी 4-(अ) कवायद (व्याकरण) 5 अंक इल्मे बयान- ( तशबीह, कनाया इस्तीयराह, मजाजमुरसल)भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 11 इल्मे बदीअ-सनाए लफजी, सनाए मानवी, सलअते कल्ब, सायाकुत अदाद, तरसीअ, इहाम, तलमीह, इस्तेयारा, मरातुन नजीर, हुस्नए-तालील, तजाहुल आरफाना, सनाअत मुबालगा, सनाअततज़ाद, तजनीस, लफओनस्र, तनसीकुस सिफात, अवमाज।
(ब) मुहावरे और कहावतें 5-उर्दू जुबान व अदब का इरतिका
5 अंक 10 अंक
खण्ड-क
पाठ्यवस्तु
(नस्र)
1-मिर्जा गालिब के खतूत-
(1) मुंशी दाद खां सैयाह के नाम। (2) मुंशी हरगोपाल तफता के नाम।
2-सर सैयद अहमद खां-
(1) तहजीबुल एखलाक की अदबी खिदमात।
3-अल्लामा नजीर अहमद-
(1) एक अंग्रेज हाकिम से मुलाकात।
4-मौलाना अब्दुल हलीम शरर-
(1) लखनऊ में फुनून अदबिइया की तरक्की।
5-पं0 रतन नाथ सरशार-
(1) मुसाहिबों की नोक झोंक।
6-मुंशी प्रेमचन्द- (1) रोशनी
7-मौलाना अब्दुल माजिद दरियाबादी-
(1) अकबर की शायरी का मआशरती व इखलाकी पसमनजर।
8-मिर्जा फरहत उल्ला बेग-
(1) जौक, गालिब व मोमिन से मिलिये।
9-काजी अब्दुल गफ्फार- (1) उरूसुल बलाद। 10-प्रो0 रशीद अहमद सिद्दीकी-
(1) जिगर साहब।
11-पतरस बुखारी-
(1) सिनेमा का इश्क
12-कन्हैया लाल कपूर-
(1) बेतक्ल्लुफी
खण्ड-ख (पाठ्यवस्तु)
(नज्म) पद्य
गजल
सौदा, गालिब, जौक़, मोमिन, आरजू, रियाज खैराबादी, हसरत मुहानी, जिगर मुरादाबादी, फ़िराक गोरखपुरी मसनवी मसनवी मीर हसन
दास्तान हालात तबाह करने, मां-बाप की शहजादे के गायब होने पर।
शौक किदवई
तोता उड़ जाने पर अफ़सोस।
हफ़ीज जालंधरी
सेहरा की दुआ
कसीदा
कसीदह गालिब दर मदद बहादुरशाह।
अमीर मीनाई
दर मदह नवाब कल्ब अली खां बहादुर वालिए रामपुर।
मुनीर शिकोहाबादी
दर तहनियत गुस्ल सेहत नवाब तज्मुल हुसैन खान फर्रूखाबाद।
12 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4मरसिया
मीर अनीस
हजरत इमाम हुसैन का हजरत अब्बास को अलम सौपना (शुरू के 15 बन्द)
मिर्जा सलामत अली दवीर
(1) तलवार की काट। (2) शहादत हज़रत इमाम हुसैन अलैहस्सलाम
बृज नारायन चकबस्त
(1) मर्सिया गोखले
जोश मलीहाबादी
नज्म आवाज-ए-हक से एक एक्तेबास
कताआत व रूबाईयात हाली : असराफ़ और बुख्ल शिबली नोमानीः- गरबा नवाजी गुरबा नवाज़ी अल्लामा इकबाल
(1) मस्तिये किरदार (2) नसीहत
अख्तर
फ़ितरत
रूबाई
(1) हाली (2) अकबर (3) जोश (4) फ़िराक गोरखपुरी।
जदीद नज्म
(1) नजीर अकबराबादी : मेले की सैर (2) अकबर इलाहाबादी : रंग जमाना (3) इकबाल : सैर फ़लक (4) सफ़ी लखनवी : बहार (5) सीमाब अकबराबादी : ताजशबे तारीक में (6) जोश मलीहाबादी : अलबेली सुबह (7) एहसानबिन दानिश : वादि-ए-कश्मीर की एक सुबह खुतूत निगारी, इन्शाइया, नावेल निगारी, अफसाना निगारी, खाका निगारी इल्मे बयान-(तशबीह, अरकान-ए-तशबीह (सभी मिसालों के साथ) कनाया इस्तीयराह, मजाजमुरसल) इल्मे बदीअ-सनाए लफजी, सनाए मानवी, सनअते कल्ब, सायाकुतल अदाद, तरसीअ, इहाम, तलमीह, इस्तेयारा, मरातुन नजीर, हुस्नए-तालील, तजाहुल आरफाना, सनाअत मुबालगा, सनाअततज़ाद, तजनीस, लफओनस्र, तनसीकुस सिफात, अवमाज।
प्रचलित मुहावरात और जरबुल इमसाल (कहावतें)
विषय-गुजराती
(कक्षा-11)
20 अंक 20 अंक 20 अंक 20 अंक 10 अंक 10 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य विभाग (भाव निरूपण) 2-पद्य विभाग (भाव निरूपण) 3-गद्य विभाग (पाठ्य पुस्तक पर आधारित प्रश्न) 4-पद्य विभाग (पाठ्य पुस्तक पर आधारित कविताओं की समीक्षा) 5-व्याकरण 6-अपठित निर्धारित पुस्तकें- (1) गुजराती (प्रथम भाषा), (धोरण 11) गुजरात राज्य शाखा पाठ्य पुस्तक मण्डल विधायन, सेक्टर 10-ए, गांधी नगर (गुजरात) (2) गुजराती व्याकरण व आलेखन की माध्यमिक स्तर की कोई एक पुस्तक।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 13विषय-पंजाबी
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र 3 घंटे का होगा-
1. (1) पंजाबी लोक साहित्य (बहु-विकल्पीय, ठीक/गलत), 15 = 5 अंक 15 = 5 अंक (2) लोकगीत (3) अंंग्रेजी से पंजाबी में अनुवाद 15 = 5 अंक = 5 अंक (5) अंग्रेजी शब्दों को पंजाबी शब्दों में बनाओ। 2. पंजाबी की पुस्तक से लोकगीतों के बारे में पाठ अभ्यास से प्रश्न 21/24 = 10 अंक 3. पाठ्य पुस्तक में से किन्हीं दो लोक कथाओं का सार 52 = 10 अंक 4. (1) पाठ्यपुस्तक में दी गई तकनीकी शब्दावली में किन्हीं 5 शब्दों के अर्थ। 15 = 5 अंक (2) लोकगीत 15 = 5 अंक 5. किसी मसले अथवा घटना में से किसी एक पर किसी समाचार-पत्र के सम्पादक को पत्र लिखना (15) = 5 अंक 6. पाठ्य पुस्तक के अनुसार एक इश्तेहार अथवा आमंत्रण पत्र लिखना। = 10 अंक 7. किन्हीं तीन विषयों में से एक विषय पर 150 शब्दों की पैरा रचना करना। = 5 अंक 8. पाठ्यपुस्तक में से दस मुहावरों का अर्थ बनाकर वाक्यों में प्रयोग = 10 अंक 25 = 10 अंक 9. पंजाबी से हिन्दी में अनुवाद (पांच पंक्तियों) 10. हिन्दी से पंजाबी में अनुवाद (पांच पंक्तियों) 25 = 10 अंक निर्धारित पाठ्यपुस्तक लाजमी पंजाबी कक्षा-11 पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड साहबजादा अजीत सिंह
नगर-प्रकाशक-प्रकाशबुक डिपो हॉल बाजार अमृतसर
विषय-बंगला
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
(1) गद्य पाठ्य-पुस्तक (2) रचना (3) अपठित (4) सहायक पुस्तक (सामान्य प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे)
40 अंक 20 अंक 10 अंक 30 अंक संस्तुत पुस्तकें--
उच्च माध्यमिक बंगला संचयन (गद्य)-- पश्चिम बंग उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद् विश्व भारती, 6 आचार्य जगदीश बसु रोड, कलकत्ता--17। इस पुस्तक में से निम्नांकित पाठ पढ़ाये जायें-- 1-बंगदेशे नीलकर--प्यारी चांद मित्र। 2-सीतार बनवास--ईश्वर चन्द्र। 3-बाबू--बंकिम चन्द्र। 4-छोतीकाहिनी--रवीन्द्र नाथ। 5-शूद्र जागरण--विवेकानन्द। 6-शुभ उत्सव--बलेन्द्र नाथ। 7-नेश अभियान--शरत चन्द्र। 8-आरण्यक--विभूति भूषण।
सहायक पुस्तकें--
निम्नलिखित में से कम से कम एक पुस्तक पढ़ी जाय-- 1-छैलबेला--रवीन्द्र नाथ ठाकुर। 2-निष्कृति--शरत चन्द्र चटोपध्याय। सहायक पुस्तकों में से सामान्य प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे। उच्च माध्यमिक बंगला संचयन (कविता व नाटक)। पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा परिषद् विश्व भारती, जगदीश बसु रोड, कलकत्ता--17। इस पुस्तक में से निम्नलिखित कविता तथा नाट्यांश पढ़ाये जायें--05 अंक14 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
विषय-मराठी
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 08 अंक (1) गद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (गद्य भाग से एक) (2) गद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (कथा एवं एकांकी भाग से एक) 08 अंक 08 अंक (3) पद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (पद्य भाग से) 08 अंक (4) गद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (गद्य भाग से) (5) गद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (कथा एवं एकांकी भाग से) 08 अंक 08 अंक (6) पद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (पद्य भाग से) 12 अंक (7) निबन्ध- रहदारीचे नियम पाड़ा 10 अंक (8) अनुवाद मराठी से हिन्दी 10 अंक (9) विकारी-अविकारी शब्द 10 अंक (10) अलंकार (उपमा, अनुप्रास, यमक, अतिशयोक्ति) 10 अंक (11) पत्र
निर्धारित पुस्तकें--
1-युवक भारती (इयत्ता 11वीं)--महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा मण्डल, पुणे। 2-युवक भारती (इयत्ता 11वीं) उपर्युक्त दोनों पुस्तकों में से पद्य विभाग केवल। निबन्ध, व्याकरण तथा अपठित के लिए संस्तुत पुस्तकें--
1-मराठी लेखन, लेखक--प्रोफे0--केरंवीकर तथा खानवलकर (केशव भीकाजी डबले, समर्थ सदन गिरगांव, बम्बई-4) 2-मराठी भाषा प्रदीप, लेखक--प्रकाशन--अरुण प्रकाशक, मलकापुर, सी0 रेलवे (केवल व्याकरण भाग)।
विषय-असमी
कक्षा-11
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र तीन घण्टे का होगा। 1-गद्य . . 30 अंक 2-निबन्ध . . 20 अंक 3-पद्य . . 30 अंक 4-व्याकरण, अलंकार . . 20 अंक
निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें-
(गद्य)- 1- जीवन शांतिपर्व - सत्यनाथ वड़ा 2- असम और खेल धिमाली - नारायण शर्मा 1-आवश्यक असमीया कथा चयन, माध्यमिक शिक्षा परिषद्, आसाम। (पद्य)- 1- एखन चिरी - हेम बरूआ 2- लचित फुकन - देवकान्त बरूआ आवश्यक कविता चयन, माध्यमिक शिक्षा परिषद्, आसाम। आपदा प्रबन्धन - डा0 मदन मोहन सैकिया।
विषय-उड़िया
कक्षा-11
इस विषय में 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र होगा 1. गद्य 45 अंक 2. पद्य 30 अंक 3. व्याकरण 15 अंक 4. निबन्ध 10 अंक गद्य विस्तृत अध्ययन क पठित खण्ड की व्याख्या ख साधारण प्रश्न ग संक्षिप्त विवरण या टिप्पणीभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 15
निर्धारित पाठ में से पौराणिक, एतिहासिक, लाक्षणिक या भावनात्मक संदर्भ में) निम्नलिखित गद्य पाठों का अध्ययन करना होगा- (1) शरशु पदर गोपीनाथ महान्ति (2) झेलम नदी रे संधा-कुंज बिहारी दाश (3) मधुबाबु-चिन्तामणि आचाज्र्य (4) सेही स्मरणीय दिवस-हरे कृष्ण महताब सहायक पुस्तक में पठित अंश (एकांकी का) (1) अन्या चारित-प्राणबन्धु कर (2) भालु अदुब-विजय मिश्र (3) सीमित सम्पर्क-कार्तिक चन्द्र रथ पद्य 1 पद्य पर आधारित सामान्य प्रश्न 2- व्याख्या निम्नलिखित पद्य पाठों का अध्ययन करना होगा। 1. साहाड़ा बृख्य-सारला दास शाप मोचन- जगन्नाथदास 2. हिमकाल-दिनकृष्ण दास 3 मित्रता-उपेन्द्र भन्ज 4 5 पयरे पशुद्धि शरण-मिम मोइ व्याकरण - पद प्रकरण-विशेष्य, विशेषण, सर्वनाम, क्रिया। निबन्ध- पर्यावरण, जनसंख्या, ट्रैफिक रूल्स, प्रदूषण पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे। गद्य, पद्य एवं एकांकी का तथा व्याकरण निबन्ध के लिए पुस्तक- साहित्य ज्योति प्रकाशक- उड़िसा राज्य पाठ्य पुस्तक प्रणयन एवं प्रकाशन संस्था पुस्तक भवन भूवनेश्वर।
विषय-कन्नड़
कक्षा-11
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा--
1-सन्दर्भ सहित व्याख्या गद्य, पद्य, नाटक सहित 20 अंक
2-आलोचनात्मक प्रश्न-गद्य, पद्य, नाटक, सहित 20 अंक
3-सहायक पुस्तकें जिसका विस्तृत अध्ययन वांछनीय नहीं है 10 अंक
4-व्याकरण एवं लोकोक्तियाँ 10 अंक
5-भाषाभ्यास 25 अंक
6-निबन्ध 08 अंक
7-अपठित 07 अंक
निर्धारित पुस्तकें--
1- काव्य संगम-भाग-एक अपठित-- 2- सन्ना कटेगड 1-विमर्श, लेखक-मारुति वेण्कटेस आयंगर, भाग-1 मात्र, प्रकाशक-जीवन कार्यालय, बसवनगुड़ी, बंगलौर सिटी।
3- सुबन्ना लेखक-श्री निवास नास्ति वेंकटेश आयंकर, प्रकाशक-जीवन कार्यालय, बासवनगुड़ी, बंगलौर। 4-देवी चौधरानी-लेखक श्री निवास नास्ति वैंकेटेश आयंगर।
सूचना-कन्नड़ विषय के लिये निर्धारित सभी पुस्तकें सत्य शोधन पुस्तक भण्डार, बंगलौर से प्राप्त हो सकती है।
विषय-सिन्धी
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न.पत्र तीन घंटे का होगा।
भाग (अ)
गद्य, नाटक, निबंध सिन्धी साहित्यिक रत्नावली (सिन्धी नसुक खण्ड के पाठ 01 से 10)16 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 10
10 1–गद्यांश अथवा सूक्ति परक वाक्य का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या, साहित्यिक सौंदर्य एवं सीख। 1½151½1 10 2–लेखकों की जीवनी, साहित्यिक परिचय, भाषा शैली तथा कृतियों की समीक्षा। 22222 10 3–पाठों का सारांश (शब्द सीमा 75-100)। 05 4–तर्क संगत लघु उत्तरीय (शब्द सीमा 40-50) एक प्रश्न। 03 5–अति लघु उत्तरीय (शब्द सीमा 1-5) दो प्रश्न। 02 6–नाटक : पुकारू, लेखक डॉ0 प्रेम प्रकाश–सीन सं0 1 से 10 तक। इसमें निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित प्रश्न (शब्द सीमा 75-100)– (क) नाटक के तत्व एवं उनकी विशेषतायें। (ख) सारांश/विविध घटनायें। (ग) चरित्र-चित्रण या पात्रों की विशेषतायें। 7–निबंध : निम्नलिखित विषयों में से 225-250 शब्दों तक एक निबंध– (क) सिंधी भाषा। (ख) सिंधी पर्व। (ग) सिंधी महापुरुष। (ङ) सिंधी साहित्यकार। (च) सिंधी सामाजिक समस्यायें। पद्य, अनुवाद, उपन्यास
सिन्धी साहित्यिक रत्नावली (सिन्धी नज़्म खण्ड के पाठ 01 से 10)
05 05
05 05
10 8–पद्यांश अथवा सूक्ति परक वाक्य का संदर्भ, व्याख्या एवं काव्यगत सौंदर्य। 253 10 9–कवियों की जीवनी साहित्यिक परिचय, भाषा, शैली तथा कृतियों की समीक्षा। 22222 10 10–कविताओं पर आधारित 1 प्रश्न (शब्द सीमा 50-60)। 11–कविताओं पर आधारित 3 प्रश्न (शब्द सीमा 1-5)। 12–अनुवाद : (क) हिन्दी से सिंधी में पाँच वाक्य। (ख) सिंधी से हिन्दी में पाँच वाक्य। 13–उपन्यास : अझो, लेखक–हरी मोटवानी। निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित प्रश्न– (क) उपन्यास के तत्व एवं उनकी विशेषतायें। (ख) चरित्र-चित्रण। (ग) तथ्य एवं घटनायें। (घ) भाषा। (ङ) उपन्यास कला की दृष्टि से समीक्षा। (च) सारांश। पुस्तक :–
पुस्तक सिन्धी साहित्यिक रत्नावली सिन्धी (नसरू से नज़्म) संकलन संपादन-आतु टहिलयाणी प्राप्ति स्थान निम्नवत् संशोधित-सिंधी वेलफेयर सोसायटी, एस0जी0-1, राज्पाल प्लाजा, कानपुर रोड, आलमबाग, लखनऊ-226005
नाटक :– पुकारूं–लेखक–डॉ0 प्रेम प्रकाश, उपर्युक्त पुस्तक में उपलब्ध है। उपन्यास :– अझो लेखक–हरी मोटवाणी, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान में कक्षा 12 के लिये पाठ्य-पुस्तक निर्धारित है।
विषय-तमिल
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
(1) गद्य :
(1) सन्दर्भ तथा व्याख्या (2) लेखक परिचय, शैली, आलोचना आदि (3) कहानी सारांश अथवा अन्य सामान्य प्रश्न
05 अंक 05 अंक 10 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 17 20 अंक (2) निबन्ध : 05 अंक (3) (1) साधारण शब्दों तथा मुहावरों का प्रयोग (2) समास तथा सन्धि 05 अंक (3) शब्द-भेद (एक शब्द का भिन्न-भिन्न अर्थों सहित वाक्यों का प्रयोग) 10 अंक
(4) निर्धारित पुस्तकें :
(1) गद्य आधारित लघु प्रश्न (2) गद्य आधारित अति लघु प्रश्न (5) अनुवाद--(हिन्दी से तमिल)
05 अंक 15 अंक 10 अंक 10 अंक (तमिल से हिन्दी) पुस्तकें--तमिल पाठ्यपुस्तक कोर्स-11
विषय-तेलगू
(कक्षा-11)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य, पद्य, पर आलोचनात्मक प्रश्न 2-सन्दर्भ सहित व्याख्या 3-व्याकरण एवं लोकोक्तियां 4-निबन्ध
25 अंक 25 अंक 25 अंक 25 अंक निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें--
पद्य--1-करुण श्री, ले0 जे0 पाप्य शास्त्री (राम पब्लिशर्स, कंतुल रिस्ट्रीट, विजयवाड़ा-1, आ0 प्र0 से प्राप्त)। गद्य--नीतिचन्द्रिका--मित्रेवदन, लेखक--चिन्नसुयरि (वेंकट राम ऐण्ड कं0)।
व्याकरण--
4--आन्ध्र व्याकरणम् गा0 रा0 सीदरुलु।
विषय-मलयालम
कक्षा-11
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। (1) पठित गद्य तथा पद्य पर आधारित (2) निबन्ध (3) मुहावरे (4) व्याकरण (5) पत्र-लेखन (6) अंग्रेजी तथा हिन्दी से मलयालम में अनुवाद (7) प्रश्नोत्तर
30 अंक 20 अंक 10 अंक 10 अंक 10 अंक 10 अंक 10 अंक टिप्पणी--प्रश्न-पत्र में मलयालम साहित्य के इतिहास तथा चुने हुए अवतरणों पर आलोचनात्मक प्रश्न भी होंगे। निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें-- (गद्य)
1-गद्य केरली केरल विश्वविद्यालय। सभी पुस्तकें नेशनल बुक स्टाल, कोट्रटायम, केरल से प्राप्त हैं।
विषय-नेपाली
(कक्षा-11)
10 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य (ससन्दर्भ गद्यांश व्याख्या, लेखक परिचय और समीक्षा) (प्रारम्भिक 4 पाठ)। 20 अंक 2-पद्य (ससन्दर्भ पद्यांश व्याख्या, कवि परिचय और समीक्षा) (प्रारम्भिक 4 पाठ)। 20 अंक 3-नाटक (ससन्दर्भ अवतरण व्याख्या एवं हिरण्याकश्यपु भाग परिचय)। 10 अंक 4-अनुवाद नैपाली से संस्कृत 05 10 अंक संस्कृत से नैपाली 05 5-निबन्ध (पर्व, पर्यावरण सम्बन्धित) 6-पाठ सारांश (निर्धारित पाठ्यपुस्तक के निर्धारित पाठों का सारांश पाठ का संक्षिप्तीकरण अथवा विभिन्न पाठों पर आधारित तर्क संगत लघु उत्तरीय प्रश्न)
10 अंक
3 ङ18 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 7-छन्द (बसन्ततिलिका, द्रुत विलम्बित, मन्दाक्रान्ता, इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, उपजाति, वंशस्थ, शिखरिणी, शार्दूल विकीडित, भुजंग प्रयात)
10 अंक
10 अंक अलंकार- (यमक, अनुप्रास, श्लेष)। सन्धि- शब्द रूप एवं धातुरूप। शब्दरूप-राम, हरि, रमा। धातुरूप-भू, धातु के लट्, लङ्, लिङ्, लुट्, लोट् लकार के रूप। निर्धारित पाठ्य पुस्तक- 1-नेपाली गद्य चन्द्रिका, भाग-2, लेखक दिनेश चन्द्र, प्रकाशक जगदीश चन्द्र रेग्मी, नैपाली पुस्तक सदन, दुर्गाघाट, वाराणसी।
2-नेपाली पद्य चन्द्रिका, भाग-2, लेखक दिनेश चन्द्र, प्रकाशक जगदीश चन्द्र रेग्मी, नैपाली पुस्तक सदन, दुर्गाघाट, वाराणसी।
3-तरुण तपसी, 1-2 विश्राम रचयिता लेखनाथ पौडयाल, काठमाण्डू, नेपाल। 4-प्रहलाद (नाटक), बालकृष्ण समसाझा, प्रकाशन काठमाण्डू, नेपाल। 5-भिखारी, रचयिता लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा, साझा प्रकाशन, काठमाण्डू, नेपाल (निर्धारित पाठ भिखारी, यात्री)। सहायक ग्रन्थ- 1-छन्द, रस अलंकार-गोरखा पुस्तक भण्डार, वाराणसी। 2-शब्द धातु रूप छन्दसा तालिका, सम्पादक, विनोद राय पाठक, शारदा प्रकाशन संस्थान, वाराणसी। 3-लघु सिद्धान्त कौमुदी।
विषय-पालि
कक्षा-11
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य साम्फलसुत्तं 30 अंक 2-पद्य-धम्मपदं (जरावग्गो, अत्तवग्गो, लोकवग्गो, बुद्धवग्गो, सुखवग्गो, पियवग्गो, कोधवग्गो, मलवग्गो। 30 अंक 3-व्याकरण, निबन्ध तथा अनुवाद (1) व्याकरण--
(क) शब्द रूप--निम्नांकित संज्ञाओं तथा उनके अनुरूप अन्य शब्दों के रूप 10 अंक [1] पुल्लिंग--बुद्ध
[2] स्त्रीलिंग--लता, रत्ति [3] नपुंसकलिंग--फल (ख) धातु रूप--वर्तमान, भूत तथा भविष्यत काल में निम्नलिखित धातुओं के रूप भू, हस, पठ, गम, वद, रक्ख, पच, नम, दिस, बुध, रूच, सक, लिख, भुज, चुर।
(ग) सन्धियाँ--निम्नलिखित सूत्रों पर आधारित होंगी, परन्तु सूत्रों को कंठस्थ करना आवश्यक नहीं है। [क] स्वर सन्धि--(1) सरोलोपो सरो, (2) परोक्वचि, (3) न द्वे वा, (4) ए ओ नं [ख] व्यंजन सन्धि--(1) व्यंजने दीघरस्सा। [ग] निग्गहीतं सन्धि--(1) निग्गहीतं। (घ) समास--निम्नलिखित समासों की सामान्य परिभाषा तथा उदाहरण : [1] तत्पुरुष [2] कर्मधारय समास।
(2) निबन्ध--पालि भाषा में संक्षिप्त निबन्ध सरल सात वाक्यों में 10 अंक इसिपतनं, सिद्वत्थ कुमारो, लुम्बिनी, अरियो अट्ठडिको, यातायात-सुरक्खा।
(1) धम्मपदं--अनुवाद-भिक्षु डा0 धर्म रक्षित, प्रकाशक ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 19व्याकरण एवं पालि साहित्य के इतिहास के लिये संस्तुत पुस्तकें--
(1) पालि व्याकरण--लेखक-भिक्षु धर्म रक्षित, प्रकाशक--ज्ञान मण्डल लिमिटेड, कबीर चौरा, वाराणसी। (2) पालि महाव्याकरण--लेखक-भिक्षु जगदीश कश्यप--प्रकाशक--महाबोधि सोसाइटी सारनाथ, वाराणसी। (3) पालि साहित्य का इतिहास--लेखक-भिक्षु धर्मरक्षित, ज्ञानमण्डल लिमिटेड वाराणसी।
विषय-अरबी
(कक्षा-11)
10 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न पत्र 3 घण्टे का होगा (क) निर्धारित पद्य की उर्दू या अंग्रेजी में व्याख्या 20 अंक (ख) पाठ्यक्रम पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न, जिनके उत्तर उर्दू या अंग्रेजी में दिये जा सकते हैं 10 अंक 08 अंक (ग) व्याकरण 12 अंक (घ) उर्दू या हिन्दी या अंग्रेजी से अरबी में अनुवाद (च) निर्धारित गद्य की उर्दू या अंग्रेजी में व्याख्या 20 अंक (छ) पाठ्यक्रम पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न, जिनके उत्तर उर्दू या अंग्रेजी में दिये जा सकते हैं 08 अंक (ज) निबन्ध-जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं ट्राफिक रूल्स की जानकारी हेतु इन 12 अंक विषयों पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे। (झ) सहायक पुस्तक से व्याख्या निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें (गद्य तथा पद्य)-- 1-अतीबुल मुन्तखबात, लेखक-हाफिज सैय्यद जलालउद्दीन अहमद जाफरी (प्रकाशक-जाफरी ब्रदर्स, प्रयागराज)।
गद्य- पाठ संख्या- 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 एवं 10 पद्य- पाठ संख्या- 1, 2, 3, 5, 6, 8, 9 एवं 10
2-व्याकरण-असासे अरबी, लेखक-नईमुर्रहमान (प्रकाशक-किताबिस्तान, प्रयागराज)। सहायक पुस्तक- अदादरारी, भाग 2, लेखक-डा0 ए0एम0एन0 अली हसन, प्रकाशक-राम नारायण लाल बेनी माधव, प्रयागराज (केवल प्रारम्भ से 30 पृष्ठ पढ़ना है)।
या
मिनहाजुल अरबिया, भाग 4, लेखक-एस0 नबी हैदराबादी।
विषय-फारसी
(कक्षा-11)
10 अंक
12 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। (1) निर्धारित पाठ्य-पुस्तक से कविता का उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में व्याख्या 15 अंक (2) पाठ्य-पुस्तक पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न का उत्तर उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 15 अंक 08 अंक (3) व्याकरण (4) अनुवाद उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी से फारसी में 12 अंक (5) पठित पुस्तकों के किसी गद्य भाग की व्याख्या उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 20 अंक (6) पाठ्य-पुस्तक पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न का उत्तर उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 08 अंक (7) सहायक पुस्तक के किसी उद्धरण की व्याख्या (8) निबन्ध (जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं ट्रैफिक रूल्स की जानकारी हेतु इन विषयों पर भी प्रश्न निबन्ध के रूप में पूछे जायेंगे)। निर्धारित पाठ्य पुस्तकें--
(पद्य के लिये)
1-बहारिस्ताने फारसी, भाग-दो लेखक-खानम जाकिरा रईस, प्रकाशक-शहनाज पब्लिकेशन, शहमदगंज, बरेली।
(पद्य के लिये)
2-वहारिरताने फारसी, भाग दो, लेखक-खानम जाकिरा रईस, प्रकाशक-शहनाज पब्लिकेशन, शहमदगंज, बरेली।
निर्धारित पाठ्य पुस्तकें--
(पद्य)
शाहनामा फिरदौसी
1-हम्द खुदाये तआला। 2-निकुई।
20 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43-कोशिश। 4-बाखैरत मन्दानशी। 5-सुखने नर्म।
सादी गजलियात
1-दिल बदस्त हज अकबर अस्त। 2-कनात तवंगर कुनद मर्दरा। 3-गरीब आश्नाबाश। 4-परहेज़गार मैमार-ए-मुलक वाशन्द। 5-हमाकायनात अज्बैर आशाइशे मर्दुपस्त।
गजलियात
1-अबु तालिब कलीम काशानी।
रूबाईयात
उमर खय्याम
1-सरमद शहीद
ईरज मीरजा
1-मादर 2-कारगर वकारफर्मा
(गद्य)
1-इन्तेखाब अज गुलिस्ता (बहारिस्तान फारसी) 2-इन्तेखाब अज बहारिस्तान जामी 3-चमन-ए-फारसी, तीसरा हिस्सा(हम्द,सदपन्द लुकमान,हिकायत, कादिरनामा) 4-चिराग़ 5-कागज़ 6-वर्जिश 7-शौरा-ए-नामवर ईरान
संस्तुत पुस्तकें--
व्याकरण--मिसवाहुल कवायद, प्रथम भाग, लेखक--एम0 एच0 एस0 जलालुद्दीन अहमद जाफरी, प्रकाशक--अनवार अहमदी प्रेस, प्रयागराज।
''चमन-ए-फारसी, तीसरा हिस्सा'' लेखक अंजुम तनवीर-प्रकाशक जन्नतनिशां बुक डिपो सम्भली गेट, मुरादाबाद।
अनुवाद तथा निबन्ध--
जदीद रहनुमाय तरजुमा व कवायद फारसी, तृतीय भाग, लेखक--शाहरा जी अहमद, प्रकाशक--राम नारायण लाल बेनी माधव, प्रयागराज। सहायक पुस्तकें--
गुलदस्ता-ए-फारसी, लेखक हाफिज मुहम्मद अयूब खाँ, प्रकाशक--राम नारायण लाल बेनी माधव, प्रयागराज।
विषय-इतिहास
(कक्षा-11)
| प्रश्नो के प्रकार | प्रश्नों की संख्या | अंक | योग |
| बहुविकल्पीय प्रश्न | 10 | 1 | 10 |
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न | 5 | 2 | 10 |
| लघु उत्तरीय प्रश्न | 6 | 5 | 30 |
| दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | 3 | 10 | 30 |
| मानचित्र | 5 | 02 | 10 |
| ऐतिहासिक घटनाक्रम | 10 | 01 | 10 |
| प्रश्नों की संख्या-39 | योग-100 |
विश्व इतिहास के मूल आधार- अनुभाग-1ः प्रारम्भिक समाज 15 अंक 1. प्रारम्भिक शहर- लेखन कला और शहरी जीवन- इराक तीसरी सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के विशेष सन्दर्भ में। (क) शहरों का विकास (ख) प्रारम्भिक शहरी समाज की प्रकृति परिचर्चा-लेखन कला के विकास पर।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 21अनुभाग-2 : साम्राज्य 25 अंक 2. तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य रोमन साम्राज्य, 27 ई0पू0 से 600 ई0 के सन्दर्भ में। (क) राजनीतिक विकास (ख) आर्थिक समृद्धि (ग) धार्मिक सांस्कृतिक आधार (घ) उत्तरजीविता
परिचर्चा-दास प्रथा के विभिन्न आयाम।
3. यायावर (खानाबदोश) साम्राज्य- तेरहवीं से चौदहवीं शताब्दी के मंगोलों के विशेष संदर्भ में। (क) यायावरी (खानाबदोशी) की प्रकृति (ख) साम्राज्यों का निर्माण (ग) अन्य राज्यों से सम्बन्ध और विजयें
परिचर्चा-यायावार (खानाबदोश) समाजों और राज्य निर्माण के सम्बन्ध।
अनुभाग-3 : बदलती परम्परायें- 25 अंक 4. तीन वर्ग (श्रेणी) मुख्यतः पश्चिमी यूरोप, 13वीं से 16वीं शताब्दी के विशेष सन्दर्भ में। (क) सामन्ती समाज और अर्थव्यवस्था (ख) राज्यों का गठन (ग) चर्च और समाज
(घ) सामन्तवाद के पतन पर इतिहासकारों के विचार।
5. बदलती हुयी सांस्कृतिक परम्परायें- 14वीं से 17वीं शताब्दी के यूरोप के विशेष संदर्भ में- (क) साहित्य एवं कला में नये विचार एवं प्रतिमानों का उदय (ख) पूर्ववर्ती विचारों के साथ सहसम्बन्ध (ग) पश्चिम एशिया का योगदान
परिचर्चा-यूरोपीय पुनर्जागरण के विचार की वैधता पर इतिहासकारों के दृष्टिकोण।
अनुभाग-4ः आधुनिकीकरण की ओर 25 अंक
6. मूल निवासियों का विस्थापन
उत्तरी अमेरिका और ऑस्टे्रलिया, 18वीं से 20वीं शताब्दी के विशेष संदर्भ में।
(क) उत्तरी अमेरिका और ऑस्टे्रलिया में यूरोपीय उपनिवेश।
10 अंक
(ख) श्वेत उपनिवेशवादी समाजों का गठन (White Settler Socities) (ग) स्थानीय निवासियों (मूल निवासियों) का विस्थापन एवं दमन। परिचर्चा-यूरोपीय उपनिवेशवाद का मूल निवासियों पर प्रभाव' पर इतिहासकारों के दृष्टिकोण पर परिचर्चा। 7. आधुनिकीकरण के रास्ते- पूर्वी एशिया 19वीं और 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के विशेष संदर्भ में। (क) जापान में सैन्यवाद और आर्थिक विकास। (ख) चीन और साम्यवादी विकल्प। (ग) आधुनिकीकरण पर इतिहासकारों के विचार-विमर्श 8. मानचित्र कार्य 05 प्रश्न प्रत्येक 02 अंक 01 अंक सही उत्तर तथा 01 अंक सही स्थान हेतु निर्धारित है। दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिये मानचित्र कार्य के स्थान पर 05 प्रश्न प्रत्येक 02 अंकों के रखे जायेंगे।
विषय-नागरिक शास्त्र
(कक्षा-11) केवल प्रश्न-पत्र अधिकतम अंक : 100 समय : 3 घण्टे
| खण्ड 'क' | भारत का संविधान : सिद्धान्त और व्यवहार | अंक |
| 1. (1) | स ंविधान क्यूँ और कैसे और संविधान दर्शन | 10 |
| (2) | भारतीय संविधान में अधिकार | |
| 2. (1) (2) | चुनाव और प्रतिनिधित्व कार्यपालिका | 10 |
| 3. (1) | विधायिका | 10 |
| (2) | न्यायपालिका | |
| 4. (1) (2) | स ंघवाद स्थानीय शासन | 10 |
| 5. (1) (2) | स ंविधान : एक जीवंत दस्तावेज स ंविधान का राजनीतिक दर्शन | 10 |
| योग | 50 अंक | |
| खण्ड 'ख' राजनीतिक सिद्धान्त | 12 | |
| 6(1) | राजनीतिकः सिद्धान्तः एक परिचय | |
| (2) | स्वतंत्रता | |
| 7.(1) | समानता | 14 |
| (2) | सामाजिक न्याय | |
| 8.(1) | अधिकार | 12 |
| (2) | नागरिकता | |
| 9.(1) | राष्ट्रवाद | 12 |
| (2) | धर्मनिरपेक्षता | |
| योग | 50 अंक | |
| प्रश्नों के प्रकार | प्रश्नों की संख्या | अंक |
| बहुविकल्पीय प्रश्न | 10 | 1 |
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न | 10 | 2 |
| लघु उत्तरीय प्रश्न-1 | 06 | 5 |
| लघु उत्तरीय प्रश्न-2 | 04 | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | 02 | 8 |
| प्रश्नों की संख्या-32 | ||
| क्रमांक | प्रश्नों का प्रकार | अंक |
| 1. | ज्ञानात्मक | 40 |
| 2. | बोधात्मक | 40 |
| 3. | अनुप्रयोगात्मक | 20 |
| योग- | 100 | |
| क्रमांक | क्लिष्टता स्तर | अंक |
| 1. | सरल | 30 |
| 2. | सामान्य | 50 |
| 3. | कठिन | 20 |
| योग- | 100 | |
| खण्ड 'क' भारत का संविधान : सिद्धान्त एवं व्यवहार | 50 | |
| इकाई.I | (1) संविधान क्यूँ और कैसे? संविधान का दर्षन- स ंविधान क्यूँ और कैसे? संविधान का निर्माण,संविधान सभा, प्रक्रियात्मक उपलब्धि,संविधान दर्शन। (2) भारतीय संविधान में अधिकार- अधिकारों का महत्व; भारतीय संविधान में मूल अधिकार राज्य के नीति-निदेशक तत्व; मूल अधिकार एवं नीति-निदेशक तत्वो ं के पारस्परिक संबंध। | 10 अंक |
| इकाई-II | (1) चुनाव और प्रतिनिधित्व- च ुनाव और लोकतन्त्र, भारत में चुनाव प्रणाली, निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण, स्वतन्त्र और निष्पक्ष च ुनाव, चुनाव सुधार (2) कार्यपालिका- कार्यपालिका क्या है? विभिन्न प्रकार की कार्यपालिका; भारत में संसदीय कार्यपालिका; प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद; स्थायी कार्यपालिका : नौकरशाही। | 10 अ ं क |
| इकाई-III | (1) विधायिका- संसद की आवश्यकता क्यूँ होती है। द्विसदनात्मक संसद; संसद के कार्य तथा शक्तियाँ, विधायी कार्य; कार्यपालिका पर नियंत्रण; संसदीय समितियाँ : स्व नियमन। | 10 अ ं क |
| (2) न्यायपालिका- हमें एक स्वतंत्र न्यायपालिका की आवश्यकता क्यूँ है? न्यायपालिका की संरचना; न्यायिक सक्रियतावाद; न्यायपालिका एवं अधिकार; न्यायपालिका एवं संसद। | 10 अ ं क | |
| इकाई-IV | (1)संघवाद- संघवाद क्या है? भारतीय संविधान मे ं संघवाद; एक शक्तिशाली केन्द्र के साथ संघवाद; भारत की संघीय प्रणाली के विशेष प्रावधान। (2) स्थानीय शासन- हमे स्थानीय शासन की आवश्यकता क्यू है? भारत मे ं स्थानीय शासन का विकास, 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन, 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन का क्रियान्वयन। | 10 अ ं क |
| इकाई-V | (1) संविधान एक जीवंत दस्तावेज- क्या संविधान अपरिवर्तनीय होते हैं? संविधान मे ं संशोधन की प्रक्रिया। संविधान में इतने संशोधन क्यूँ किये गये? संविधान की मूल संरचना तथा उसका विकास। संविधान : एक जीवंत दस्तावेज के रूप में। (2) संविधान का राजनीतिक दर्शन- संविधान- लोकतान्त्रिक बदलाव का साधन, हमारे संविधान का राजनीतिक दर्शन क्या है? | 10 अ ं क |
| खण्ड 'ख' राजनीतिक सिद्धान्त | 50 अंक | |
| इकाई-VI | (1) राजनीतिक सिद्धान्त-एक परिचय राजनीति क्या है? राजनीतिक सिद्धान्त में हम क्या अध्ययन करते हैं? राजनीतिक सिद्धान्त को व्यवहार में लाना। राजनीतिक सिद्धान्त के अध्ययन का उद्देश्य। (2) स्वतन्त्रता- स्वतन्त्रता का आदर्श; स्वतन्त्रता क्या है? हमें प्रतिबन्धों की आवश्यकता क्यूँ है? 'हानि सिद्धांत'। नकारात्मक एवं सकारात्मक स्वन्तत्रता। | 12 अ ं क |
| इकाई-VII | (1) समानता- समानता का महत्व; समानता क्या है? समानता के विभिन्न आयाम; हम समानता को बढ़ावा कैसे दे सकते हैं? (2) सामाजिक न्याय- न्याय क्या है? न्याय की सुलभता (न्यायपूर्ण वितरण); निष्पक्ष न्याय; सामाजिक न्याय का अनुसरण। | 14 अ ं क |
| इकाई-VIII | (1) अधिकार- अधिकार क्या है? यह कहाँ से आते हैं? कानूनी अधिकार और राज्य; अधिकारों के प्रकार; अधिकार और उत्तरदायित्व। (2) नागरिकता- नागरिकता क्या है? नागरिकता और राष्ट्र, सार्वभौमिक नागरिकता, वैश्विक नागरिकता। | 12 अ ं क |
| इकाई-IX | (1) राष्ट्रवाद- राष्ट्र और राष्ट्रवाद; राष्ट्रीय आत्म-निर्णय ; राष्ट्रवाद और बहुलवाद। (2) धर्मनिरपेक्षता- धर्मनिरपेक्षता क्या है? धर्म-निरपेक्ष राज्य क्या है? धर्मनिरपेक्षता पर भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टिकोण। भारतीय धर्मनिरपेक्षताः आलोचना एवं तर्क। | 12 अ ं क |
विषय-अर्थशास्त्र
कक्षा-11
न्यूनतम उत्तीर्णांक-33 अंक
पूर्णांक-100
खण्ड-क सांख्यिकी : अर्थशास्त्र के संदर्भ में (1) परिचय। 05 अंक (2) आंकड़ों का संग्रहण, व्यवस्थीकरण एवं उनका प्रस्तुतिकरण। 20 अंक (3) सांख्यकीय उपकरण एवं उनका अर्थ। 13 अंक (4) सह सम्बन्ध। 06 अंक (5) सूचकांक 06 अंक खण्ड-ख - भारत का आर्थिक विकास (6) विकास के अनुभव (1947-1990) एवं 1991 से प्रारम्भ हुये आर्थिक सुधार। 17 अंक (7) भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ। 25 अंक (8) भारत का अपना विकास का अनुभव-पड़ोसी देशों से तुलना। 08 अंक खण्ड-क - सांख्यकी : अर्थव्यवस्था के सन्दर्भ में इकाई-1 (1) अर्थशास्त्र क्या है? 05 अंक (2) अर्थशास्त्र की परिभाषा, उसकी सम्भावनायें, कार्य एवं अर्थशास्त्र में सांख्यकी का महत्व।
इकाई-2 आंकड़ों का संग्रहण, व्यवस्थीकरण एवं प्रस्तुतिकरण 32 अंक (1) आंकड़ों का संग्रहण- आंकड़ों का स्रोत-प्रारम्भिक एवं द्वितियक आंकड़े। आधारभूत आंकड़ा किस प्रकार से एकत्र किया जाता है। निदर्शन (Sampling) का सिद्धान्त। निदर्शन एवं गैर निदर्शन त्रुटियां, विनिमय आंकड़ों के कुछ महत्वपूर्ण स्रोत। भारत की जनगणना एवं राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन। National Sample Survey Organisation.
(2) आंकड़ों का व्यवस्थीकरण - परिवर्तनशीलता का अर्थ एवं उनके प्रकार, बारंबारता बंटन। (3) आंकड़ों का प्रस्तुतिकरण - आंकड़ों का तालिकावार एवं आरेखीय प्रस्तुतिकरण (1) ज्यामितीय प्रकार-दंड आरेख, वृत्त चित्र (2) आवृत्ति आरेख - आयत चित्र (Histogram) बहुभुज (Polygram) एवं चाप विकर्ण (Ogive) (3) समय-श्रेणीक्रम - लेखा चित्र (Time- Series graph)
इकाई-3 सांख्यकीय उपकरण एवं उनके अर्थ 13 अंक केन्द्रीय प्रवृत्ति के मापन, माध्य ( सरल और भारित ) माध्यक एवं बहुलक। इकाई-4 सह सम्बन्ध 06 अंक इकाई-5 सूचकांक 06 अंक खण्ड-ख
भारत का आर्थिक विकास
इकाई-6 विकास के अनुभव(1947-1990)एवं आर्थिक सुधार वर्ष 1991 से 17 अंक 1- स्वतंत्रता प्राप्ति की संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति का संक्षिप्त परिचय। पंचवर्षीय योजनाओं के सामान्य लक्ष्य।
2- कृषि की प्रमुख विशेषतायें, समस्यायें एवं नीतियाँ। (ढाँचागत पक्ष एवं कृषि से संंबंधित नवीन रणनीतियाँ आदि) उद्योग (औद्योगिक लाईसेन्स आदि) एवं विदेश व्यापार
1991 से आर्थिक सुधार आवश्यकता एवं इसकी प्रमुख विशेषतायें- उदारीकरण, वैश्वीकरण एवं निजीकरण। उदारीकरण, वैश्वीकरण एवं निजीकरण नीति का मूल्याँकन। इकाई-7 भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ 25 अंक 1- ग्रामीण विकास - मुख्य बिन्दु-साख एवं विपणन-सहकारी समितियाँ, कृषि विविधता, वैकल्पिक खेती- जैविक खेती।
2- मानव पूंजी, उसका निर्माण- किस प्रकार से व्यक्ति साधन बन सकते हैं। आर्थिक विकास में मानव पूँजी की भूमिका, भारत में शिक्षा के क्षेत्र का विकास।
3- रोजगार- औपचारिक एवं गैर औपचारिक, वृद्धि एवं अन्य मुद्दे- समस्यायें एवं नीतियाँ - एक आलोचनात्मक विश्लेषण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 254- वहनीय आर्थिक विकास- अर्थ, आर्थिक विकास का संसाधनों एवं पर्यावरण पर प्रभाव जिसमें ग्लोबल वार्मिंग भी सम्मिलित है।
इकाई-8 भारत का विकास का अनुभव 08 अंक 1- पड़ोसी देशों से तुलना 2- भारत एवं पाकिस्तान 3- भारत एवं चीन मुद्दे - विकास, जनसंख्या, क्षेत्रवार विकास एंव अन्य विकास के संकेतक।
विषय-समाजशास्त्र
कक्षा-11
केवल प्रश्नपत्र
| इकाई | कालांश | अंक | |
| क | समाजशास्त्र का परिचय | ||
| 1. समाजशास्त्र, समाज और अन्य सामाजिक विज्ञानो ं के साथ उसका सम्बन्ध। | 20 | 10 | |
| 2. म ूल संकल्पना और समाजशास्त्र में उनका उपयोग। | 20 | 10 | |
| 3. सामाजिक संस्थाओं को समझना | 22 | 10 | |
| 4. स ंस्कृति और समाजीकरण | 18 | 10 | |
| 5. समाजशास्त्र की अनुसंधान विधियाँ | 20 | 10 | |
| योग | 120 | 50 | |
| ख | समाज को समझना | ||
| 6. सामाजिक संरचना स्तरीकरण और समाज म ं े सामाजिक प्रक्रियाएँ | 22 | 10 | |
| 7. ग ्रामीण तथा नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्था | 22 | 10 | |
| 8. पर्यावरण और समाज | 16 | 10 | |
| 9. पाश्चात्य समाजशास्त्रियो ं का परिचय | 20 | 10 | |
| 10. भारतीय समाजशास्त्री | 20 | 10 | |
| योग | 120 | 50 | |
| महायोग | 240 | 100 |
खण्ड-(क) समाजशास्त्र का परिचय-
इकाई-1 समाजशास्त्र, समाज और अन्य सामाजिक विज्ञानों के साथ उसका सम्बन्ध। 10 अंक
1. समाज का परिचय, व्यक्तिगत और समष्टि (समूह) बहु दृष्टिकोण। 2. समाजशास्त्र का परिचय, उद्भव, प्रकृति और क्षेत्र तथा अन्य से सम्बन्ध।
इकाई-2 मूल संकल्पना तथा समाजशास्त्र में उनका उपयोग 10 अंक
1. सामाजिक समाज और समूह 2. प्रस्थिति और भूमिका 3. सामाजिक स्तरीकरण 4. समाज और सामाजिक नियन्त्रण
इकाई-3 सामाजिक संस्थाओं को समझना 10 अंक
1. परिवार, विवाह और नातेदारी 2. आर्थिक संस्थाएॅं 3. राजनीतिक संस्थाएँ 4. धर्म एक सामाजिक संस्था के रूप में 5. शिक्षा एक सामाजिक संस्था के रूप में
इकाई-4 संस्कृति और सामाजीकरण 10 अंक
1. संस्कृति, मूल्य और मानदण्ड : साझा, मिश्रित एवं सहभागिता के आधार पर। 2. सामाजीकरण-अनुरूपता, संघर्ष और व्यक्तित्व का निर्माण।
इकाई-5 समाजशास्त्र की अनुसंधान विधियाँ 10 अंक
4 ङ26 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 1. विधियाँ : अवलोकन एवं सर्वेक्षण 2. यन्त्र और तकनीक, साक्षात्कार एवं प्रश्नावली 3. समाजशास्त्र के क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य का महत्व
खण्ड-(ख) समाज को समझना
इकाई-6 सामाजिक संरचना, स्तरीकरण और समाज में सामाजिक प्रक्रियाएँ 10 अंक
1. सामाजिक संरचना 2. सामाजिक स्तरीकरण : वर्ग, जाति, प्रजाति, लिंग 3. सामाजिक प्रक्रिया : सहयोग, प्रतिस्पर्धा, संघर्ष
इकाई-7 ग्रामीण और नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक व्यवस्थाएँ 10 अंक
1. सामाजिक परिवर्तन : अर्थ, प्रकार, कारण और परिणाम 2. सामाजिक व्यवस्था : प्रभुत्व, अधिकार और कानून : अपराध और हिंसा 3. गाँव, कस्बा और शहर : ग्रामीण और नगरीय समाज में परिवर्तन
इकाई-8 पर्यावरण और समाज 10 अंक
1. पारिस्थितिकी और समाज 2. पर्यावरणीय समस्यायें और सामाजिक प्रतिक्रियायें 3. सतत् विकास
इकाई-9 पाश्चात्य समाज शास्त्रियों का परिचय 10 अंक
1. कार्ल माक्र्स : वर्ग संघर्ष 2. इमाईल दुर्खीम : श्रम विभाजन और सामूहिक परिणाम की श्रेणी 3. मैक्स वेबर : नौकरशाही
इकाई-10 भारतीय समाजशास्त्री 10 अंक
1. जी0एस0 घूरिये : जाति एवं प्रजाति 2. डी0पी0 मुखर्जी : प्रथाएँ एवं परिवर्तन 3. ए0आर0 देसाई : राज्य 4. एम0एन0 श्रीनिवास : भारतीय गाँव नोट- एन0सी0ई0आर0टी0 द्वारा निम्नलिखित पुनर्संयोजित पाठ्यसामाग्री के आधार पर ही पाठ्यक्रम अध्ययन किया जाना है।
11 बॉक्स
19-20 क्रियाकलाप समाजशास्त्र परिचय पुस्तक में कोई परिवर्तन नहीं समाज का बोध अध्याय का नाम पृष्ठ सं0 हटाये गये विषय/अध्याय अध्याय 1-समाज में सामाजिक संरचना, स्तरीकरण और सामाजिक प्रक्रियाएं
विषय-शिक्षाशास्त्र
कक्षा-11
100 अंकों का एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे होगा। न्यूनतम उत्तीर्णाक -33
खण्ड-क अंक 50
(शिक्षाशास्त्र के सिद्धान्त एवं आधुनिक शैक्षिक विकास)
15 अंक
10 अंक 1 प्रस्तावना–शिक्षा का अर्थ प्रचलित एवं वैज्ञानिक शिक्षा का महत्व, आवश्यकता एवं उपयोगिता, शिक्षा का स्वरूप-औपचारिक एवं अनौपचारिक। 2 शिक्षा के उद्देश्य (क) व्यक्तिगत एवं सामाजिक, (ख) व्यावसायिक, हमारे देश की वर्तमान परिस्थितियों के सन्दर्भ में शिक्षा के उद्देश्य। 3 शिक्षा के अभिकरण शिक्षा अधिकारियों का वर्गीकरण, गृह, परिवार, विद्यालय, समुदाय, स्थानीय संस्थायें एवं राज्य। 4 शिक्षा प्रणालियां- मांटेसरी प्रणाली, किण्डरगार्डेन प्रणाली, डाल्टन प्रणाली, प्रोजेक्ट प्रणाली, बेसिक शिक्षा। 10 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 27 20 अंक खण्ड-ख (शिक्षा मनोविज्ञान) 50 अंक 1 शिक्षा मनोविज्ञान (क) अर्थ एवं क्षेत्र, (ख) उपयोगिता एवं महत्व। 20 अंक 2 बालक की वृद्धि तथा विकास (क) प्रारम्भिक बाल्यकाल-शारीरिक एवं मानसिक विकास, संवेगात्मक विकास भाषा का विकास एवं सामाजिक विकास, (ख) पूर्व किशोरावस्था एवं किशोरावस्था की अवस्थायें, शारीरिक एवं मानसिक विकास, संवेगात्मक विकास सामाजिक विकास। 3 व्यक्तिगत भेेद-शारीरिक, मानसिक एवं व्यक्तिगत भेद । 10 अंक पुस्तकें कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गई है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापकों के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
कक्षा-11
विषय-भूगोल
खंड क
भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत 35 अंक
इकाई- 1- भूगोल एक विषय के रूप में 30 अंक
1- भूगोल एक विषय के रूप में
भूगोल एक समाकलन विषय के रूप म,ें भूगोल की शाखाएं (विषय वस्तु या क्रमगत उपागम के आधार पर) भौतिक भूगोल एवं इसका महत्व
इकाई 2-पृथ्वी
2-पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास
आरंभिक सिद्धांत, पृथ्वी की उत्पत्ति, आधुनिक सिद्धांत-ब्रह्मांड की उत्पत्ति, तारों का निर्माण, ग्रहों का निर्माण, पृथ्वी का उद्भव, स्थलमंडल का विकास, वायु मंडल व जल मंडल का विकास, जीवन की उत्पत्ति।
3-पृथ्वी की आंतरिक संरचना
भूगर्भ की जानकारी एवं ज्वालामुखी के साधन, प्रत्यक्ष स्रोत, अप्रत्यक्ष स्रोत, भूकंप, भूकंपीय तरंगे, भूकंप के प्रकार व प्रभाव, पृथ्वी की संरचना, ज्वालामुखी एवं ज्वालामुखी निर्मित स्थलस्वरूप।
4-महासागर एवं महाद्वीपों का वितरण
महाद्वीपीय प्रवाह महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धान्त, महासागरीय स्थल की बनावट एवं मानचित्रण, भूकंप और ज्वालामुखी का वितरण, सागरीय अर्धस्थल का विस्तार , प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त प्रवाह दरें, संचालित करने वाले बल भारतीय प्लेट का संचलन, वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत ।
इकाई 3- भू आ—तियां
5-भू-आ—तिक प्रक्रियाएं
भू-आकृतिक प्रक्रियायें-अन्तर्जनित प्रकियाएँ-पटल विरूपण, ज्वालामुखीयता, बर्हिजनिक प्रकियाएँ-अपक्षय, वृहत संचलन, भूस्खलन, अपरदन एवं निक्षेपण, मृदा निर्माण ।
6- भू-आ—तियां तथा उनका विकास
प्रवाहित जल, भौम जल, हिमनद, तरंग व धाराएँ, पवनों द्वारा अपरदित स्थल रूप, निक्षेपित स्थल रूप।
इकाई 4-जलवायु
7- वायुमंडल का संघटन तथा संरचना
वायुमंडल का संघटन, मौसम एवं जलवायु तत्व।
28 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 48-सौर विकिरण ऊष्मा संतुलन एवं तापमान
सौर विकिरण, पृथ्वी की सतह पर सूर्यातप में विभिन्नता, वायुमंडल का तापन एवं शीतलन, पृथ्वी का उष्मा बजट, तापमान को प्रभावित (नियंत्रित) करने वाले कारक, तापमान का वितरण, तापमान का व्युत्क्रमण।
9-वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियां
वायु दाब वायुमण्डलीय दाब, वायुदाब में ऊध्र्वाधर विभिन्नता, वायुदाब का क्षैतिज वितरण, समुंद्र तल, वायुदाब का विश्व वितरण, पवनों की दिशा व वेग को प्रभावित करने वाले बल, वायुमण्डल का सामान्य परिसंचरण, वायु राशियाँ, वाताग्र, बर्हि उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, उष्णकटिबंधीय चक्रवात, तड़ित झंझा एवं टारनेडो।
10-वायुमंडल में जल
वाष्पीकरण तथा संघनन, ओस, तुषार, कोहरा एवं कुहासा, बादल, वर्षण, वर्षा के प्रकार एवं विश्व वितरण।
11-विश्व का जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन
कोपन की जलवायु वर्गीकरण की पद्धति, जलवायु परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन के कारण भूमंडलीय जलवायु परिवर्तन, भूमंडलीय उष्मन, ग्रीन हाउस प्रभाव।
इकाई 5 - महासागरीय जल
12- महासागरीय जल
जलीय चक्र, महासागरीय अधस्तल का उच्चावच एवं विभाजन, महासागरीय जल का तापमान, महासागरीय, जल की लवणता एवं प्रभावित करने वाले कारक लवणता का क्षैतिज एवं उध्र्वाधर वितरण।
13- महासागरीय जल संचलन
महासागरीय तरंगे, ज्वार भाटा एवं महासागरीय धाराओं के प्रकार तथा प्रभाव
इकाई 6 पृथ्वी पर जीवन
14-जैव विविधता एवं संरक्षण
अनुवांशिक जैव-विविधता, पादप एवं अन्य जीवो की विशेषताएं, जैव विविधता का ह्नास, जैव विविधता का संरक्षण,।
मानचित्र- पांच प्रश्न 05 अंक नोट- इकाई 1 से इकाई 6 तक से सम्बन्धित भू-–श्य/राजनैतिक और भौतिक मानचित्र का –श्यांकन - 1/2 अंक सही उत्तर एवं 1/2 अंक सही स्थान हेतु निर्धारित हैं।
खंड-
35 अंक
भारत-भौतिक पर्यावरण
खंड -1- प्रस्तावना
30 अंक
1-भारत- स्थिति
स्थिति- आकार, भारत एवं उसके पड़ोसी
खंड-२-भू आ—ति विज्ञान
2-संरचना तथा भू आ—ति विज्ञान
प्रायद्वीपीय खंड, हिमालय और अन्य अतिरिक्त प्रायदीपीय पर्वत मालाएं, सिंधु गंगा ब्रह्मपुत्र मैदान, भू-आ—ति, उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी पर्वतमाला, उत्तर का मैदान, पर्वतीय पठार, भारतीय मरुस्थल, तटीय मैदान, दीप समूह।
3- अपवाह तंत्र
भारत के अपवाह तंत्र, हिमालय अपवाह-हिमालय पर्वतीय अपवाह तंत्र का विकास, हिमालय अपवाह तंत्र की नदियां, सिंधु नदी तंत्र, गंगा नदी तंत्र, ब्रहमपुत्र नदीतंत्र प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र, प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र का उद्विकास, प्रायदीपीय नदी तंत्र, नदी जल उपयोग की सीमा।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 29खंड -3-जलवायु एवं प्रा—तिक वनस्पति
4-जलवायु
मानसून जलवायु में एकरूपता एवं विविधता, भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक, भारतीय मानसून की प्र—ति, मानसून का आरंभ, मानसून में विच्छेद ,मानसून का निवर्तन, ऋतुओं की लय, शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, दक्षिणी पश्चिमी मानसून की ऋतु, (वर्षा ऋतु), अरब सागर की मानसून पवनें , बंगाल की खाड़ी की मानसून पवनें, मानसून के निर्वतन की ऋतु, भारत की परंपरागत ऋतुएं, वर्षा का वितरण, मानसून और भारत का आर्थिक जीवन, भूमंडलीय तापन।
5-प्रा—तिक वनस्पति
वनों के प्रकार, वन संरक्षण, सामाजिक वानिकी, फार्म वानिकी, वन्य प्राणी, वन्य प्राणी संरक्षण, जीव मण्डल नीचय।
खंड -4-प्रा—तिक संकट तथा आपदाएं-कारण, परिणाम तथा प्रबंध
6-प्रा—तिक संकट तथा आपदाएं
प्रा—तिक आपदाओं का वर्गीकरण, भारत की प्रा—तिक आपदाएं-भूकंप, सुनामी, बाढ़, उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, सूखा, भारत में सूखे के प्रकार, भारत में सूखाग्रस्त क्षेत्र, सूखे के परिणाम, भूस्खलन, भूस्खलन के परिणाम ,निवारण, आपदा प्रबंधन, निष्कर्ष।
मानचित्र- पांच प्रश्न 05 अंक
नोट- खण्ड 1 से खण्ड 4 तक से सम्बन्धित भू –श्य/राजनैतिक और भौतिक मानचित्र का –श्यांकन - 1/2 अंक सही उत्तर एवं 1/2 अंक सही स्थान हेतु निर्धारित हैं।
खण्ड 'ग'
प्रयोगात्मक कार्य 30 अंक इकाई-1 - (i) मानचित्र का परिचय- मानचित्र बनाने की अनिवार्यतायें, मापनी प्रक्षेप, व्यापकीरण, अधिकल्पना, निर्माण तथा प्रस्तुति मानचित्र का इतिहास, मानचित्रों के प्रकार, मानचित्रों का उपयोग।
(ii) मानचित्र मापनी-मापनी क्या है, मापनी व्यक्त करने की विधियां, मापनी का रूपान्तरण
(iii) अक्षांश, देशान्तर और समय- अक्षांश समांतर, देशान्तर, याम्योत्तर, देशान्तर एवं समय, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा।
(iv) मानचित्र प्रक्षेप- मानचित्र प्रक्षेप की आवश्यकता, मानचित्र प्रक्षेप के तत्व, वर्गीकरण, कुछ चुने हुये मानचित्र प्रक्षेप, एक मानक अक्षांश रेखावाला शंकुप्रक्षेप, बेलनाकार समक्षेत्र बेलनाकार, प्रक्षेप, मर्केटर प्रक्षेप।
(v) स्थलाकृतिक मानचित्र- समोच्च रेखा पाश्र्वचित्र एवं भू-आकृतियां- ढाल, पहाड़ी, पठार घाटी (U एवं V आकार की), जलप्रपात, क्लिफ एवं स्थलाकृतिक मानचित्रों का निर्वचन महाखण्ड पर्वत स्कध।
(vi) सुदूर संवेदन का परिचय- सुदूर संवेदीय उपग्रह से प्राप्त चित्र आंकड़ों को अर्जित करने के चरण एवं संवेदन आंकड़ों को प्राप्त करना। (फोटोग्राफी एवं डिजिटल)
प्रयोगात्मक परीक्षा
अंक विभाजन
1- लिखित परीक्षा- 6 प्रश्नों में से किन्ही 4 प्रश्नों का उत्तर देना है। - 20 अंक 2- प्रयोगात्मक अभ्यास पुस्तिका
- 05 अंक 3- मौखिक परीक्षा
- 05 अंक30 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
विषय-गृहविज्ञान
(कक्षा-11)
केवल प्रश्नपत्र
इसमें 70 अंकों की लिखित एवं 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। न्यूनतम उत्तीर्णांक 23 एवं 10 कुल
33 अंक
(केवल बालिकाओं के लिये) 100 अंक
भाग-1
अध्याय 1- परिचय-मानव पारिस्थिति की और परिवार विज्ञान
विषय का उद्भव और जीवन की गुणवत्ता के प्रति इसकी प्रासंगिकता
इकाई-1 स्वयं को समझना-किशोरावस्था 20 अंक अध्याय-2 स्वयं को समझना
क. मुझे 'मैं' कौन बनाता है? ख. स्वयं का विकास एवं विशेषताएँ ग. पहचान पर प्रभाव-स्व बोध का विकास हम कैसे करते हैं?
अध्याय 3- भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और स्वस्थता अध्याय 4- संसाधन प्रबंधन अध्याय 5- कपड़े-हमारे आस-पास अध्याय 6- संचार माध्यम और संचार कौशल इकाई-2 परिवार, समुदाय और समाज के प्रति समझ 20 अंक अध्याय 7- विविध संदर्भों में सरोकार और आवश्यकतायें
क. पोषण, स्वास्थ्य और स्वास्थता विज्ञान ख. संसाधन उपलब्धता और प्रबन्धन ग. भारत की वस्त्र परंपराएँ
भाग-2
इकाई 3- बाल्यावस्था 15 अंक अध्याय 8- उत्तरजीविता, वृद्धि तथा विकास अध्याय 9- पोषण, स्वास्थ्य तथा स्वास्थ्ता अध्याय 10- हमारे परिधान इकाई 4- वयस्कावस्था 15 अंक अध्याय 11- वित्तीय प्रबंधन एवं योजना अध्याय 12- वस्त्रों की देखभाल तथा रखरखाव
प्रयोगात्मक हेतु निर्देश
प्रयोगात्मक :- 30 अंक सिलाई कला- 5 अंक पाक कला- 5 अंक कढ़ाई कला- 5 अंक रंगाई कला (टाई एण्ड डाई)- 3 अंक प्रोजक्ट कार्य- 6 अंक मौखिक- 6 अंक
योग- 30 अंक
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम संबंधी विवरण :-
1. विभिन्न आयु वर्ग के अनुसार छात्राओं को शिक्षिका द्वारा निम्न दो नमूना (मॉडल) सिखाया जायेगा-
• सादा फ्राक या ब्लाउज़ • झबला या पेटीकोट
2. शिक्षिका हेतु निर्देश :- किसी आयु वर्ग के पोषकीय आवश्यकतानुसार आहार का प्रयोग कराकर छात्राओं को पोषण संबंधी जानकारी देगी।
3. भारत के पारंपरिक कढ़ाई के छः नमूने एवं बंधेज से 1 नमूना तैयार कराया जायेगा। 4. पाठों से निर्देशानुसार क्रियात्मक एवं प्रयोगात्मक कार्यों, प्रोजेक्ट, फाइल तैयार करायी जायेगी। 5. मौखिकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 31
विषय-मानवविज्ञान (एन्थ्रोपोलोजी)
कक्षा-11
(मानविकी, वैज्ञानिक वर्ग एवं व्यावसायिक वर्ग हेतु)
इस विषय की लिखित परीक्षा का न्यूनतम उत्तीर्णांक 23 एवं 10 कुल 33 एक प्रश्न-पत्र, 70 अंको
का तीन घण्टे का होगा। 30 अंक की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी।
अध्ययन का उद्देश्य--
1-समाज के विकास, उनके आधारभूत कारकों, विस्तार तथा विविधता की जानकारी प्राप्त करना तथा उसके भावरूप के बारे में निष्कर्ष निकालना।
2-प्राकृतिक पर्यावरण तथा मानव के मध्य अन्तःक्रिया को भारत तथा विश्व के सन्दर्भ में सामाजिक विकास पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को समझना, विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालने के लिए सक्षम बनाना।
3-समाज की समसामयिक समस्याओं के बारे में जानकारी करके निर्णय लेने की योग्यता प्राप्त करना। 4-मानव विकास और उसकी उपलब्धियाँ तथा विफलताओं को सजीव एवं प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत कर समाज के समाजवादी स्वरूप की स्थापना करना।
5-विश्व के पर्यावरणीय घटकों, विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों तथा उसके उपयोग की जानकारी प्राप्त करना तथा भविष्य के बारे में निष्कर्ष निकालना।
6-मानवविज्ञान नामक विषय के विकास तथा 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में हुये विभिन्न अध्ययनों से बनी मानव विज्ञान की रूपरेखा का ज्ञान विद्यार्थियों को देना।
7-मानवविज्ञान की विषय-वस्तु, विस्तार तथा विभिन्न शाखाओं का ज्ञान सरल तथा बोधगम्य भाषा के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राप्त कराना।
8-मानवविज्ञान एक लोकप्रिय तथा उपयोगी विषय है जो कि मानव जीवन के शारीरिक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक दोनों ही पक्षों के विकास पर प्रकाश डालता है। मानव जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। सभी पक्षों के तारतम्य का एकीकृत चित्र प्रस्तुत करना।
9-मानव के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन की समस्याओं को समझाने तथा सुलझाने की क्षमता का सृजन करना।
10-सभ्यता की मुख्य धारा से दूर बसे सरल जनजाति समाजों की विशिष्टता, विविधता एवं उनकी आधुनिक समस्याओं का ज्ञान देना जिससे उन्हें राष्ट्रीय जीवन की मुख्य धारा से जोड़ने के सफल प्रयास किये जा सके।
35 : अंक
खण्ड-क (सामाजिक मानवविज्ञान)
अंक भार
4 इकाई-1 मानवविज्ञान की परिभाषा, शाखायें तथा अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध। इकाई-2 सामाजिक एवं सांस्कृतिक मानव विज्ञान की परिभाषा एवं विषय क्षेत्र, सामाजिक
मानव विज्ञान एवं समाजशास्त्र में समानतायें एवं भिन्नतायें।
6
10 7 इकाई-3 विवाह परिभाषा, जनजातीय समाजों में प्रचलित विवाह के प्रकार--एक विवाह, बहु विवाह जनजातीय समाजों में प्रचलित जीवनसाथी चुनने के तरीके--अधिमान्य विवाह, समलिंगीय सहोदरज (पैरेलल कजिन) विवाह, विषमलिंगीय सहोदरज (क्रास कजिन) विवाह, वधु-धन एवं उसका महत्व। इकाई-4 परिवार-परिभाषा, प्रकार एवं कार्य। इकाई-5 नातेदारी व्यवस्था-क्लान (गोत्र सम समूह), लिनिएज (वंश समूह) का वर्णन, नातेदारी
के व्यवहार- प्रतिमान-परिहायें एवं परिहास सम्बन्ध।
8 सन्दर्भित पुस्तकें-- 1-डी0 एन0 मजूमदार एवं टी0 एन0 मदान--सामाजिक मानव शास्त्र : एक परिचय। 2-उमाशंकर मिश्र--सामाजिक-सांस्कृतिक मानव शास्त्र। उमाशंकर मिश्र--नृतत्व चिन्तन (पलका प्रकाशन)।
3-विजय शंकर उपाध्याय एवं विजय प्रकाश शर्मा-भारत की जनजातीय संस्कृति (मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी)। 4-शैपिरो एवं शैपिरो--मानव संस्कृति एवं समाज (Man Culture and Society)। 5-एम्बर एवं एम्बर--मानव विज्ञान (हिन्दी अनुवाद) यू0बी0सी0 सर्विसेज, दिल्ली। 6-गोपालशरण एवं आर0 पी0 श्रीवास्तव-मानव विज्ञान एवं समाजशास्त्र (इंगलिश)। न्यू रॉयल बुक कम्पनी, लखनऊ। 7-विजय शंकर उपाध्याय एवं गया पाण्डेय--सामाजिक सांस्कृतिक मानव शास्त्र, क्राउन पब्लिकेशन्स, रांची। 8-नीरजा सिंह एवं निशा शर्मा--परिचयात्मक मानव विज्ञान। 9-ए0आर0एन0 श्रीवास्तव-जनजातीय विकास के साठ वर्ष- प्रकाशक- 42/7 जवाहर लाल नेहरू रोड़, प्रयागराज।
32 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 435 : अंक
खण्ड-ख (प्रागैतिहासिक मानव विज्ञान)
अंक भार इकाई-1 प्रागैतिहास, अर्थ, विषय क्षेत्र, काल मापन विधियाँ--सापेक्ष एवं निरपेक्ष। 12 इकाई-2 यूरोपीय पाषाण काल की संस्कृतियों की परिचयात्मक-रूपरेखा, पुरा पाषाणकाल,
मध्य पाषाण काल एवं नव पाषाणकाल
12 इकाई-3 सिंधु घाटी की सभ्यता- उत्पत्ति, विस्तार, विशेषतायें, सांस्कृतिक, आर्थिक, नगर
नियोजन, विकास और पतन
11 सन्दर्भित पुस्तकें-- 1-परिचयात्मक मानव विज्ञान--नीरजा सिंह, निशा शर्मा। 2-What is Anthropology–Dr. A. R. N. Srivastava. 3-डी0 के0 भट्टाचार्या--यूरोपियन प्रागैतिहास (इंगलिश)। 4-उद्विकासीय मानव विज्ञान-डा0 विभा अग्निहोत्री। 5-V. Rami Reddy—Prehistory (English) Thirupati (Andhra Pradesh)
(प्रायोगिक मानव विज्ञान) पूर्णांक 30
पाठ्यक्रम
अंक भार 10 इकाई-1 कपाल एवं उपांग अस्थियों का रेखांकित एवं चिन्हित वर्णन मानव कपाल का नारंग का फ्रन्टालिस एवं नॉरमा लैटरैलिस पक्ष का रेखांकित
5 अंक चित्रण एवं 5 अंक सही नामांकन एवं वर्णन के लिए एवं चिन्हित वर्णन।
10 ]यूमरस, रेडियस, अल्ना, फीमर, टिबिया, फिबुला। इकाई-2 एन्थ्रोपोस्कोपी (मानववीक्षिकी) 5 व्यक्तियों के चेहरे पर निम्नलिखित सीमैटोस्कोपिक अवलोकन करना-- (क) मानव केश--स्वरूप, रंग, प्रकृति (फॉर्म, कलर एवं टैक्सचर) (ख) नासिका--मूल, सेतु, नथुने (रूट, ब्रिज, विंग्स) (ग) आँख--एपिकैन्थिक फोल्ड, नेत्र वर्ण (आई कलर) (घ) ओष्ठ (लिप)--मोटाई एवं वर्हिवर्तन (निचले होंठ का बाहर की ओर लटका
होना)
5 ओष्ठ की विद्यमानता (थिकनैस एवं इवरटेड ओष्ठ) (च) चेहरे की उद्गतहनुता (फेशियल प्रोग्नैथजम) इकाई-3 प्रायोगिक रिकार्ड (लैब बुक)-- इकाई 1, 2, 3 और 4 विद्यार्थियों को सिखाये जायेंगे तथा उस पर आधारित लैब
बुक होगी।
इकाई-4 मौखिक परीक्षा
5
कुल अंक . . 30
निर्देश-इकाई 1 में वर्णित कपाल एवं उपांग अस्थियों को चार्ट से देखकर रेखांकित एवं
चित्रित करना।
सन्दर्भ पुस्तकें-- (1) प्रयोगात्मक शारीरिक मानव विज्ञान--डा0 विभा अग्निहोत्री। (2) मानव अस्थि विज्ञान--हिन्दी रूपान्तर--अजय भगत एवं पोद्दार। (3) Physical Anthropology Practical--by B. M. Das & Ranjan Dek.
प्रयोगात्मक अंक विभाजन
मानव विज्ञान
अधिकतम अंक : 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 10 समय : 03 घण्टा
निर्धारित अंक 1-कपाल एवं उपांग अस्थियों का रेखांकित एवं चिन्हित करना-- 06 अंक (सही चित्रण हेतु 3 अंक तथा नामांकन व पहचान हेतु 3 अंक) 2-एन्थ्रोपोस्कोपी 3-मौखिकी--
04 अंक 05 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 33 55=10 अंक
05 अंक 4-प्रोजेक्ट कार्य-- (प) किसी सामाजिक विषय पर साक्षात्कार (पप) किसी सामाजिक विषय पर प्रश्नावली तैयार करना-- 5-प्रायोगिक रिकॉर्ड बुक-- नोट :--प्रोजेक्ट कार्य एवं प्रायोगिक रिकॉर्ड बुक परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।
विषय-सैन्य विज्ञान
कक्षा-11
पाठ्यक्रम का उद्देश्य सभी सामाजिक विज्ञानों में सैन्य विज्ञान एक जटिल एवं महत्वपूर्ण विज्ञान है। इसका अर्थ केवल सशक्त सेना संगठन, प्रतिष्ठान, शास्त्र अथवा सैनिक से ही नहीं अपितु उसकी जड़ें राष्ट्र के राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैली है। इसका क्षेत्र व्यापक एवं सभी प्रकार के ज्ञान से सम्बन्धित है। इसका एकांकी अध्ययन नहीं हो सकता। राष्ट्र की शक्ति, गरिमा और गौरव राष्ट्रीय मंच पर कैसे उभर सकती है तथा विश्व शान्ति और सह अस्तित्व स्थापित करने में भारत प्रमुख भूमिका निभा सकता है। यही इस विषय के पठन-पाठन का मुख्य उद्देश्य है। यह विषय सैन्य शिक्षा अथवा प्रशिक्षण से भिन्न है। सैन्य विज्ञान विषय में 70 अंको का एक लिखित प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। लिखित में उत्तीर्णांक 70 में से 23 अंक होंगे तथा प्रयोगात्मक परीक्षा के लिये 30 अंक में से 10 अंक होंगे। कुल में उत्तीर्णांक 33 अंक होंगे। लिखित तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में अलग-अलग उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
12 अंक
10 अंक 1-सैन्य विज्ञान : (अ) परिभाषा, क्षेत्र तथा महत्व। (ब) राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान से सम्बन्ध। 2-थल सेना : (अ) थल सेना का वर्गीकरण (लड़ाकू, सहायक तथा प्रशासनिक अंगों के आधार पर), आवश्यकता तथा सामान्य ज्ञान।
06 अंक
07 अंक (ब) पैदल सेना, कवचयुक्त सेना (टैंक) व तोपखाने की विशेषतायें तथा कार्य। (स) पैदल सेना, बटालियन का संगठन तथा कार्य। (द) शांति एवं युद्धकालीन थल सैन्य संगठन (केवल रूपरेखा)। (च) भारतीय सशस्त्र सेनायें आणविक प्रक्षेपात्र के संदर्भ में। 3-वायु सेना : (अ) भारतीय वायुसेना का संक्षिप्त इतिहास। (ब) वायु सेना के कार्य। (स) वायु सेना के विमानों के प्रकारों का सामान्य ज्ञान। 4-नौसेना : (अ) भारतीय स्वतंत्रता के समय नौसेना की स्थिति। (ब) भारतीय नौसेना के कार्य तथा पोतों के प्रकारों का सामान्य ज्ञान (विमान वाहन पोत, वाहन पोत, विध्वंसक-पोत तथा पनडुब्बियां, फ्रिगेट)।
12 अंक 5-भारतीय सैन्य इतिहास तथा युद्ध : (1) वैदिक तथा महाभारतकाल सैन्य व्यवस्था। (सैन्य व्यवस्था महाभारत के युद्ध के सन्दर्भ में)। (2) झेलम का युद्ध 326 ई0 पूर्व। (3) आचार्य चाणक्य द्वारा वर्णित मौर्य कालीन सैन्य व्यवस्था। 6-हिन्दू कालीन सैन्य व्यवस्था : 08 अंक (गुप्तकाल से हर्ष काल तक संक्षेप में)। 7-मुगल युग की सैन्य व्यवस्था : 08 अंक (केवल पानीपत के प्रथम युद्ध 1526 ई0 के सम्बन्ध में)। 8-राजपूत सैन्य व्यवस्था : 07 अंक (महाराणा प्रताप (हल्दी घाटी की लड़ाई के सन्दर्भ में)।
5 ङ34 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 पुस्तकें कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें। प्रयोगात्मक 30 अंक (1) मानचित्र पठन (1) सर्वेक्षण पत्रक (सर्वे ग्रिडमैप) का परिचय, परिभाषा, उपयोगिता, हाशिये की सूचनायें, सांकेतिक चिन्ह, ग्रिड तथा कन्टूर व्यवस्था।
(2) उत्तर दिशायें-प्रकार तथा दिशा ज्ञान के तरीके। (3) दिक्मान-परिभाषा तथा अन्तर परिवर्तन। (2) प्रिज्मैटिक दिक्सूचक, सर्विस प्रोटेक्टर तथा सशस्त्र सेनाओं के पद (1) मानचित्र दिशानुकूल करना (नक्शा सेट करना)। (2) तीनों सेनाओं के बेसिस ऑफ रैंक की पहचान। (3) प्रयोगात्मक कार्य की अभ्यास पुस्तिका। प्रयोगात्मक परीक्षाओं में अंकों का विवरण निम्नलिखित होगा। 20 अंक (क) मानचित्र पठन। 05 अंक (ख) प्रिज्मैटिक दिक्सूचक। (ग) प्रायोगिक अभ्यास-पुस्तिका। 05 अंक प्रिज्मैटिक दिक्सूचक, सर्विस प्रोटेक्टर तथा प्रायोगिक अभ्यास-पुस्तिका के अंक भौतिक परीक्षा पर भी आधारित होंगे। मानचित्र पठन के सभी प्रश्न-पत्र सर्वेक्षण पत्रांक पर ही होंगे।
सैन्य विज्ञान
अधिकतम अंक 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक 10 अंक समय 04 घण्टे नोट :एक टोली में परीक्षार्थियों की संख्या 20 से अधिक न हो। एक दिन में दो टोली से अधिक की परीक्षा न हो। निर्धारित अंक 1 मानचित्र परिचय-परिभाषा, प्रकार, हाशिये पर दी गयी सूचनाओं को वास्तविक मानचित्र पर पढ़ना तथा हाशिये की सूचनाओं के प्रकार
2 मानचित्र निर्देशांक-चार अंकीय एवं छः अंकीय निर्देशांक। 3 मापक की परिभाषा, मापक के प्रकार। 4 सरल मापक की रचना। 5 दिक्सूचक–नाम, विभिन्न पुर्जों के प्रकार तथा प्रयोग विधि। 6 मानचित्र दिशानुकूल करना। 7 मौखिक परीक्षा।
02 02 02 01 01 02 05 8 सांकेतिक चिन्ह-चार सांकेतिक चिन्हों को बनाना जिसमें एक सैनिक सांकेतिक चिन्ह अनिवार्य है।
02 02 03 03 02 9 उत्तर दिशाओं से सम्बन्धित प्रश्न। 10 मानचित्र पर ग्रिड दिक्मान नापना। 11 दिक्मानों के अन्र्तपरिवर्तन। 12 उत्तरान्तरों एवं विशिष्ट दिक्सूचक त्रुटि ज्ञात करना। 13 अभ्यास पुस्तिका।
कक्षा-11 तीन घण्टोें का एक लिखित प्रश्न-पत्र 50 अंकों का पूर्णांक होगा। 50 अंक पूर्णांक की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी।
संगीत (गायन) खण्ड-क (संगीत विज्ञान) पूर्णांक : 25 दो शास्त्रीय शब्दावली की परिभाषा और व्याख्या स्वर सप्तक का तारव (पिच), तीव्रता और गुण, शुद्ध और विकृत स्वर, श्रुतियां शुद्ध स्वरों का आन्दोलन और तार पर शुद्ध स्वरों का स्थान, अलाप, तान, मुर्की, कण कम्पन, मोड़, गमक, छूट, तानों के प्रकार (सपाट अलंकारिक आदि), आरोह, अवरोह पकड़ वक्र वादी का आलोचनात्मक अध्ययन। संवादी, अनुवादी, विवादी, वज्र्य नाद की परिभाषा एवं विशेषतायें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 35खण्ड-ख पूर्णांक : 25 (संगीत का इतिहास और रागों का अध्ययन) गीतों की शैलियां और प्रकार-ध््राुपद, तराना, सरगम गीत, भजन त्रिवट, चतुरंग, रागमाला और होली। घरानों का संक्षिप्त अध्ययन। प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए प्रस्तावित पाठ्यक्रम में रागों की विशेषतायें। स्वर विस्तार के माध्यम से रागों का विकास और भेद। कठिन अलंकारों की रचना। पाठ्यक्रम में प्रस्तावित तालों के बोलों का दुगुन, चौगुन का ज्ञान, तीनताल, झपताल, एक ताल। गीतों के आलाप, तान, बोलतान सहित लिपिबद्ध करने की योग्यता। छोटे स्वर समुदायों के आधार पर रागों को पहचानना और उनकी बढ़त की योग्यता। सामान्य संगीत सम्बन्धी किसी विषय पर छोटा निबन्ध। भारतीय संगीत में आशु रचना का स्थान। भारतीय संगीत साहित्य का संक्षिप्त इतिहास(प्राचीन काल)। सारंगदेव, तानसेन, अमीर खुसरों, भीमसेन जोशी, किशोरी अमोनकर एवं गंगूबाई हंगल की जीवनियां और भारतीय संगीत में उनका योगदान।
प्रयोगात्मक (गायन) 50 अंक (1) निम्नलिखित से रागों का विस्तृत अभ्यासभीमपलासी, भैरव, मालकोस। प्रत्येक में कम से कम एक द्रुत ख्याल तैयार होना चाहिये। उचित आलाप तान, मुर्की एवं अन्य लयपूर्ण तालबद्ध विस्तारण के साथ उनको गाने की योग्यता विद्यार्थी में अपेक्षित है। इन रागों में थोड़ी स्वतन्त्रता के साथ आशु रचना करने की शक्ति उन्हें दिखलानी चाहिये। कठिन तालबद्ध रूपों और निरर्थक वेग पर ही केवल नहीं, वरन् सही ध्वनि, उच्चावचन, स्पष्टता और गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति एवं लय के स्वाभाविक प्रवाह पर बल होना चाहिये। उक्त रागों के गीतों में कम से कम ध्रुपद अथवा धमार, एक विलम्बित ख्याल तथा एक तराना होगा। ध्रुपद और धमार में दुगुन, तिगुन और चौगुन गाने तथा लिखने की क्षमता होनी चाहिये। (2) दुर्गा, हिंडोल, बहार नामक रागों का सामान्य रूप में अभ्यास। आलाप तान आदि की आवश्यकता नहीं है। केवल स्थायी और अन्तरा पर्याप्त होगा। विद्यार्थियों में इन रागों में से प्रत्येक का आरोह, अवरोह और पकड़ गाने की योग्यता होनी चाहिये और जब धीमी गति में अभिव्यक्ति आलाप के द्वारा प्रस्तुत किये जायें तब उन्हें पहचानने की क्षमता होनी चाहिये। (3) निम्नलिखित में से प्रत्येक ताल में कम से कम एक गीत सीखना चाहिये। तीन ताल, झप ताल, एक ताल, चौताल। पाठ्यक्रम में प्रस्तावित सब तालों के ठेके ताल के साथ कहने एवं लिखने की योग्यता विद्यार्थी में होनी चाहिये। (4) छोटे स्वर समुदायों को जब आकार में गाया अथवा बजाया जाये, विद्यार्थियों में उनके स्वर बतलाने की योग्यता होनी चाहिये। यह स्वर समुदाय पाठ्यक्रम में प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन वाली रागों में से लिये जायेंगे। संगीत गायन के प्रत्येक विद्यार्थी में पाठ्यक्रम के सभी तालों का साधारण ठेका तबले पर बजाने की योग्यता होनी चाहिये। विशेष सूचना–अध्यापकों को वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षक के विचारार्थ प्रत्येक विद्यार्थी के कार्यों की एक आख्या बनानी चाहिये।
विषय-संगीत (वादन)
कक्षा-11
खण्ड-क (संगीत विज्ञान) 25 अंक
चिकारी, स्वर, तोड़ा तिहाई, जमजमा, पेशकारा, टुकड़ा मुखड़ा, पलटा, मोहरा, तिहाई, सम, ताली खाली भरी। विभिन्न प्रकार के भारतीय संगीत वाद्यों के ज्ञान के साथ जो विशेष वाद्य लिया गया है उसके विभिन्न अंगों एवं मिलाने का विशेष ज्ञान, तबला, पखावज, सितार, वायलिन, बांसुरी, वीणा, सरोद, सारंगी, दिलरूबा, इसराज। खण्ड-ख (संगीत का इतिहास और शैलियों का अध्ययन) 25 अंक (1) वाद्य पाठ्यक्रम हेतु प्रस्तावित रागों की विशेषतायें, स्वर विस्तार के माध्यम से रागों का विकास एवं भेद।
अथवा पाठ्यक्रम के तालों तीनताल, झपताल, सूलताल, एक ताल, चार ताल के विभिन्न लयों के साथ लयात्मक प्रकार, कठिन अलंकारों की रचना। लयकारियों में ताललिपि में लिखने की क्षमता। जैसे कायदा, परन, टुकड़ा। (2) तालों में कायदा, पलटा, तिहाई के साथ लिपिबद्ध करने की योग्यता।
36 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4अथवा गतों को स्वरलिपि में साधारण तोड़े एवं झाले के साथ लिखने की योग्यता। अल्प स्वर विस्तार अथवा ठेकों के कुछ बोलों के आधार पर रागों अथवा तालों को पहचानने की योग्यता। (3) विलम्बित और द्रुत गतें।
अथवा
बाजों के प्रकार (दिल्ली, अजराडा) (4) सामान्य संगीत सम्बन्धी विषयों पर संक्षिप्त निबन्ध। (5) भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास, भारतीय संगीतज्ञों सारंगदेव, तानसेन, अमीर खुसरो, पं0 विष्णु नारायण भात खण्डे , "भारत रत्न" पं0 रविशंकर, अल्लारक्खा खाँ, विलायत खां, एम0 राजम0 एवं पं0हरि प्रसाद चौरसिया जी का संगीत में योगदान और उनकी जीवनियाँ।
प्रयोगात्मक परीक्षा (वादन) 50 अंक
विद्यार्थी निम्नलिखत वाद्यों में से कोई भी एक ले सकता है : (1) तबला, (2) पखावज, (3) वीणा, (4) सितार, (5) सरोद, (6) सारंगी, (7) इसराज अथवा दिलरूबा, (8) वायलन, (9) बांसुरी, (10) गिटार (गिटार का पाठ्यक्रम सितार की भांति होगा)। प्रथम दो वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा योजना अन्य वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा योजना से भिन्न होगी। तबला या पखावज की प्रयोगात्मक परीक्षा 1–विद्यार्थियों को पर्याप्त बोल (ठेका पेशकार, परन, टुकड़े, तिहाइयां आदि) जानना चाहिये। ताल का पांच मिनट का आकर्षक प्रदर्शन देने की योग्यता होनी चाहिये। इस प्रकार के प्रदर्शन में किसी भी बोल की पुनरावृत्ति न हो वरन् वही बोल विभिन्न लयों और दूसरे प्रकार के तालों से निस्तारण के रूप में यदि जान पड़े तो बजाया जा सकता है। एक ठेके के बोल निश्चय ही दो क्रमिक टुकड़ों आदि के बीच दोहराये जा सकते हैं। एकांकी (सोलों) प्रदर्शन के लिये निम्नलिखित तालें पाठ्यक्रम में समाहित हैं- तीव्रा, तीनताल झपताल, एकताल, चारताल, सूलताल। 2–विद्यार्थियों की सरल धुनों के साथ, दादरा, कहरवा, तीनताल, रूपक, एकताल, चौताल और धमार में संगत करने की योग्यता होनी चाहिये। 3–जो वाद्य विद्यार्थी ले उन्हें मिलाने की योग्यता होनी चाहिये। 4–विभिन्न लयकारी जैसे कि दुगुन,तिगुन,चौगुन एवं आड़। परीक्षक के द्वारा पूछे गये तालों को अपने वाद्य में प्रस्तुत करना।
सितार आदि लय वाले वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा (1) निम्नलिखित 6 रागों में से प्रत्येक में एक गत मसीतखानी और एक रजाखानी जिसका विस्तार सहित अभ्यास होगा : भीमपलासी, भैरव और मालकौंस। चयनित वाय को उसकी विशेष गरिमा के साथ बजाना और अपनी गतों को और अधिक सुन्दर बजाना विद्यार्थियों से अपेक्षित है। उन रागों में आशु रचना करने की योग्यता होनी चाहिये। (2) पूर्वी, मारवा, तिलक कामोद, रागों में केवल एक गत बिना किसी विशेष विस्तार के बजाना। विद्यार्थियों को इनमें से प्रत्येक राग का आरोह-अवरोह और पकड़ बजाने की योग्यता होनी चाहिये और जब उन्हें धीमे अभिव्यक्ति आलापों द्वारा प्रस्तुत किया जाय तब पहचानने की योग्यता होनी चाहिये। (3) ऊपर दिये (1) और (2) में सभी गतें तीन ताल में हो सकती है लेकिन विद्यार्थियों को निम्नलिखित ठेकों से परिचित होना चाहिये और उन्हें ताली देते हुये कहना आना चाहिये। दादरा, कहरवा, रूपक। विशेष सूचना– गायन या वादन की प्रयोगात्मक परीक्षा के अंकों का बँटवारा निम्न प्रकार से होगा : संगीत गायन/वादन अधिकतम अंक–50 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–16 अंक समय–03 घण्टे एक समय में परीक्षा के लिये परीक्षार्थियों की संख्या पर प्रतिबन्ध यदि आवश्यक हो। इण्टरमीडिएट परीक्षा संगीत वादन परीक्षा एक दिन मेें क्रमशः 20-25 परीक्षार्थियों से अधिक न हो। प्रत्येक खण्ड का विवरण तथा निर्धारित अंक : 1–तबला और पखावज लेने वालों के लिये– 1–परीक्षार्थियों द्वारा चुने गये अपने ताल का प्रदर्शन। 2–पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताले। 3–पाठ्यक्रम में प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन की ताले।
15 05 10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 37 4–तालों का कहना और उनका बजाना। 05 5–परीक्षक द्वारा गायी गयी अथवा बजायी गयी धुनों के साथ संगत करने की योग्यता। 05 6–ताल पढ़ने की योग्यता। 05 05 7-सामान्य प्रभाव। नोट :–संगीत गायन के साथ हारमोनियम की संगत की अनुमति नहीं है। 2–तबला व पखावज के अलावा अन्य संगीत तंत्रवाद्य लेने वालों विद्यार्थियों के लिये - 1–विद्यार्थियों द्वारा चुने गये अपने रुचि के साथ गीत अथवा संगीत का प्रदर्शन। 15 2–विस्तृत अध्ययन के रागों के ऊपर पूछे गये आलाप। 10 3–पाठ्यक्रम में प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन की ताल। 05 4–पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताल। 05 5–राग और स्वर समूह को पहचानने की क्षमता। 05 6–परीक्षार्थियों की आवाज और उसका सामान्य प्रभाव। 05 7-सामान्य प्रभाव। 05 संस्तुत पुस्तकें 1-ताल परिचय भाग दो-जी0सी0 श्रीवास्तव, संगीत सदन प्रकाशन, इलाहाबाद। 2-तबला प्रवेशिका भाग दो-पी0 नारायन (केला प्रकाशन, इलाहाबाद)। 3-तबला परिचय भाग एक-आई0एन0 गोस्वामी (एन गोस्वामी, बरेली)। अध्यापकों के सन्दर्भ हेतु संस्तुत पुस्तकें
1-हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति-क्रमिक पुस्तक मालिका, भाग 2, 3 एवं 4, ले0 पं बी0एन0 भातखण्डे, संगीत प्रेस, हाथरस।
2-शास्त्र राग परिचय भाग दो-प्रकाशन नारायण (कला प्रकाशन, 240, मुट्ठीगंज, इलाहाबाद)। 3-राग परिचय भाग दो-हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, संगीत सदन प्रकाशन, 88, साउथ मलाका, इलाहाबाद।
ग्रन्थ शिल्प
कक्षा-11
लिखित परीक्षा में एक प्रश्न-पत्र 70 अंकों की एवं तीन घण्टे की अवधि का होगा। इसके
अतिरिक्त 30 अंक की प्रयोगात्मक परीक्षा छः घण्टे की अवधि में एक दिन में सम्पन्न होगी। उत्तीर्ण
होने के लिये लिखित और प्रयोगात्मक परीक्षा में कम से कम क्रमशः 2310=33 अंक होने चाहिये।
14 अंक
14 अंक
14 अंक
38 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 414 अंक
इकाई-5 1 निगेटिव बनाने की विधियां, धातु की प्लेट पर मुद्रण सतह बनाना। कैमरे का सिद्धान्त, हाफटोन एवं तिरंगी छपाई का सिद्धान्त। 2 ब्लॉक बनाने में रासायनिक पदार्थों के प्रयोग करते समय होने वाले प्रदूषण का निवारण। प्रयोगात्मक 30 अंक (1) सत्र कार्य (अ) प्रत्येक विद्यार्थी को प्रत्येक मॉडल बनाने का विवरण तैयार करना आवश्यक है। विवरण विषय अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा अवलोकित होगा।
(ब) बनाये जाने वाले मॉंडलों की सूची का चार्ट बनाया जाय और कक्षाओं में टांगा जाय। (स) प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा विषय से सम्बन्धित एक चार्ट भी तैयार करना आवश्यक है। (2) मौखिक परीक्षा विषय अध्यापक द्वारा कम से कम तीन प्रश्न प्रत्येक विद्यार्थी से पूछे जायेंगे।
प्रयोगात्मक कार्य के लिये 1 सरल तथा क्रमवत् अभ्यास विभिन्न आकारों के लिफाफे, राइटिंग पैड, पोर्टफोलियो, पत्रिकाओं के कवर, एक जुज का नोट बुक जिसका कवर सादा व दफ्ती लगा हो। कलण्डर, एलबम, ,खुली हुई फाइल तथा केस बनाना। 2 पुस्तक की मरम्मत करना जिसकी सिलाई केसिंग से ठीक हो। 3 पृष्ठ बनाने के लिये कागज की सीटों को सरल विधियों से मोड़ना।
4 एक सस्ती पुस्तक जिल्दसाजी टोप की सिलाई द्वारा करना तथा उसकी केस बाइन्डिंग करना। उस पुस्तक के ऊपर और नीचे रक्षक कागज लगाना। यह बाइन्डिंग निम्नलिखित क्रियाओं को करते हुए की जाये।
(1) पुरानी पुस्तक का एक-एक जुज अलग करना। (2) फटे हुये जुजों को साफ करना तथा मरम्मत करना, फटे हुये कागजों को सुधारना। (3) रक्षक कागजों को बनाना। (4) टेप सिलाई करना। (5) पीठ पर सरेस लगाना, उसके किनारे काटना, पीठ को गोल करना, ऊपर नीचे काटकर बराबर करना। (6) केस बनाना। (7) केस को पुस्तक पर चिपकाना। टिप्पणी (1) प्रत्येक सत्र में प्रत्येक परीक्षार्थियों द्वारा कम से कम दस मॉडल अवश्य बनाये जायें और इसके अतिरिक्त प्रत्येक को कम से कम दो उच्च कोटि के सुन्दर मॉडल अपनी इच्छानुसार बनाये जायें।
(2) सभी मॉडलों पर सजावट का कार्य किया जाये।
प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगा-
अधिकतम अंक 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक 10 अंक समय 06 घण्टे 1 मॉडल बनाना। 03 2 सजावट। 03 3 प्रेस कार्य 03 (अ) कम्पोजिंग। 03 (ब) प्रूफ रीडिंग कार्य। 03 4 मौखिक 04 5 फाइल रिकॉर्ड। 03 6 सत्रीय कार्य सतत् मूल्यांकन। 7 प्रोजेक्ट कार्य 08 योग=30 अंक पुस्तकें कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के वरिष्ठ विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 39विषय-काष्ठ शिल्प
कक्षा-11 इस विषय की लिखित परीक्षा में एक प्रश्न पत्र तीन घण्टे का होगा। प्रश्न पत्र 70 अंक का होगा। इसके अतिरिक्त 30 अंको की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। प्रयोगात्मक परीक्षा छः घण्टे की अवधि में एक दिन में सम्पन्न होगी। उत्तीर्ण होने के लिए लिखित एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में कम से कम क्रमशः 2310=33 अंक होने चाहिए।
प्रश्न पत्र अधिकतम अंक न्यूनतम अंक
1. लिखित-केवल प्रश्नपत्र 70 अंक 23 अंक 30 अंक 10 अंक 2. प्रयोगात्मक योग. . 100 अंक 33 अंक उत्तीर्ण होने के लिये लिखित तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में अलग-अलग उत्तीर्ण होने के साथ ही 33 अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। इकाई-एक 10 अंक 1. काष्ठशिल्प की परिभाषा, सिद्धान्त, महत्व उद्देश्य एवं फनर्रीचर का इतिहास। 2. काष्ठशिल्प में प्रयोग होने वाले यंत्र। यंत्र की परिभाषा एवं उनका वर्गीकरण। 3. खुरदरा काटने वाले यंत्रः- इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की आरियों का ज्ञान। जैसे- दाँतेां को बनाना, दांतों को सेट करना, दाँतों को तेज करना, 2.54 सेमी0 में दाँतों की संख्या, दाँतों का कोण तथा आरियों को चलाते समय ध्यान देने योग्य बातें।
4. रन्दने वाले यंत्रः- इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के रन्दों का ज्ञान। जैसेः- परीभाषा उनका प्रयोग, खराबियाँ, मुँह का कोण उनके भाग आदि। रन्दें में खरावियां तथा उनकों दूर करना। रन्दे को चलाते समय विशेष ध्यान देने योग्य बातें आदि।
इकाई-दो 10 अंक 1.छीलने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार की रुखानियों तथा ड्रा नाइफ का ज्ञान।
जैसे- रूखानियों के प्रकार, उनके भाग, कार्य तथा प्रयोग करते समय विशेष देने योग्य बातेंं।
2. खरोचने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के रेतियों का ज्ञान। दातों तथा कार्य के अनुसार रेतियों के प्रकार, उनके भाग, प्रयोग तथा सुरक्षा आदि का ज्ञान।
3. जाँच करने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत स्टे्रट एज, वाइडिंग स्ट्रिप, प्लम्ब सूई, स्प्रिट लेवेल, गुनिया, स्लाइडिंग बेवेल, माइटर स्क्वायर आदि का ज्ञान।
4. चिन्ह लगाने तथा नापने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के खतकस, दो फुटा, चिन्ह चाकू, विंग परकार स्केल आदि का ज्ञान।
इकाई-तीन 10 अंक 1. छेद करने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत बे्रस, हैण्ड ड्रिल, देशी ड्रिल, एवं ब्राडाल का ज्ञान। बे्रेस तथा हैण्ड ड्रिल में प्रयोग होने वाले बिट्स (BITS) का ज्ञान।
2. ठोकने तथा निकालने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत मुँगरी विभिन्न प्रक्रार के हथौड़े, जम्बूर, प्लायर्स, नेल पुलर, नेल पंच, पेचकस आदि का ज्ञान।
3. कसकर पकड़ने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत मेज बांक, आरी बांक छड़ सिकन्जा, जी सिकन्जा, बेन्च वाइस, बेन्च होल्ड फास्ट, तथा दस्ती पेंच आदि का ज्ञान।
इकाई-चार 10 अंक 1. पर्यावरण- पर्यावरण की परिभाषा प्रकार तथा काष्ठशिल्प प्रयोगशाला से होने वाले प्रदूषण, उनका स्वास्थ्य पर प्रभाव तथा बचाव के उपाय। वृक्ष हमारे मित्र, प्रदूषण दूर करने में इनसे प्राप्त सहायता।
2. लकड़ी में खराबियाँ-खराबियों के प्रकार तथा विस्तार से उनका वर्णन। 3. वृक्ष-वृक्ष के मुख्य भाग तथा उनके कार्य। 4. लकड़ी के व्यापार से राष्ट्रीय आय। आयात एवं निर्यात। इकाई-पाँच 10 अंक 1. वृक्षः वृक्ष के प्रकार तथा एक्सोजेनस वृक्ष के तने का व्यतस्त खण्ड। 2. वृक्षः वृक्ष का बढ़ना। 3. पेड़ काटने का उचित समय (मौसम), पेड़ काटने की उम्र तथा कटी हुई लकड़ियों के नाम व व्यापारिक आकार।
4. लट्ठे चीरना, लकड़ी के रेशे तथा अच्छी लकड़ी की पहचान (गुण)।
40 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4इकाई-छः 10 अंक 1. नमूनों (MODELS) को सजाने की विधियाँ- जैसेः- शेपिंग, खराद कार्य, तक्षण कला, ऐंठन एप्लीक का कार्य , इनलेइंग,, मोल्डिंग, विनियरिंग तथा स्टेन्सिलिंग का सम्पूर्ण ज्ञान।
2. आलेखन- आलेखन की परिभाषा, प्रकार एवं बनाने का सिद्धान्त। 3. मापनी- मापनी की परिभाषा प्रकार, मापनी बनाने का सम्पूर्ण ज्ञान। इकाई-सात 10 अंक 1. मोल्डिंग- मोल्डिंग की परिभाषा उनके प्रकर, नाप, अनुपात, तथा एक या कई को मिलाकर उनका प्रयोग।
2. सरेस- सरेस की परिभाषा, सरेस के प्रकार तथा सरेस वर्तन पशु सरेस पकाने तथा प्रयोग करने की विधि ।
3. तेल-काष्ठकला में प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के तेलों का ज्ञान ।
प्रयोगात्मक कार्य 30 अंक
1. प्रयोगात्मक कार्य में छात्रों से विभिन्न प्रकार के नमूने (MODELS) बनवाये जायेंगे। 2. छात्रों से सभी प्रकार के यंत्रों का क्रमानुसार प्रयोग करने का उचित अभ्यास करायें जायें। 3. छात्रों को प्रयोगात्मक परीक्षा सम्बन्धिति प्रश्नों के अभ्यास करायें जायें। प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगा- अधिकतम अंक-30 न्यूनतम उत्तीर्णांक-10 समय-6 घण्टे (एक दिन में) 1- लकड़ी का प्लेनिंग एवं शुद्वता 05 अंक 2 - माडल की तैयारी तथा सही बनाने की विधि 04 अंक 3- सही जोड़, कील एवं पेंच का प्रयोग 03 अंक 4- माडल की सही रूप रेखा 03 अंक 5- चिप कर्विंग 03 अंक 6- प्रोजेक्ट कार्य एवं मौखिक 08 अंक 7- सत्रीय कार्य एवं सतत् मूल्यांकन 04 अंक योग=30 अंक पुस्तकें कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के वरिष्ठ विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर ले।
विषय-सिलाई
कक्षा-11
लिखित परीक्षा में एक प्रश्न-पत्र 70 अंक व तीन घण्टे का होगा। इसके अतिरिक्त 30 अंकों की
एक प्रयोगात्मक परीक्षा होगी जिसमें मौखिक परीक्षा भी सम्मिलित है। प्रयोगात्मक परीक्षा 4 घण्टे से अधिक
न होगी। उत्तीर्ण होने के लिये लिखित और प्रयोगात्मक परीक्षा में कम से कम क्रमशः 2310=33 अंक
आने चाहिये।
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–भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 41 (i) ड, (ii)
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अधिकतम अंक 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक 10 अंक समय 04 घण्टे 1. दिये गये नापों के अनुसार वस्त्रों के विभिन्न भागों का चित्र बनाना (ड्राफ्टिंग) एवं कटाई करना। 06 06 2. वस्त्र की सिलाई, फिनिशिंग एवं प्रेसिंग। 03 3. मौखिक कार्य। 05 4. फाइल रिकार्ड। 06 5. सिलाई-बालिका, पुरूष एवं स्त्री के वस्त्र। 02 6. मशीन के विभिन्न भागों का ज्ञान। 02 7. सत्रीय कार्य एवं मौखिक कार्य।
6 ङ42 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
विषय-चित्रकला (आलेखन)
कक्षा-11
इसकी परीक्षा 100 अंको के एक प्रश्न-पत्र में होगी। न्यूनतम उत्तीर्णाक-33
खण्ड (क) इसमें 10 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न अनिवार्य पूॅछे जायेंगे। खण्ड (ख) 60 अंक अनिवार्य आलेखन-प्राकृतिक, अलंकारिक, आकृतियों पर आधारित विभिन्न प्रकार के दो या दो सेे अधिक आवृत्ति के मौलिक-रचनात्मक आलेखन। पुष्प जैसे गुलाब, कमल, सूरजमुखी, डहलिया, गुड़हल, पेन्जी आदि फूल, कलियां, पत्तियों आदि वस्तुयें जैसे मानव शंख, तितलियांं, हंस, हिरन, हाथी आदि का आधार लेकर आलेखन बनाना। कम से कम तीन रंग भरने हैं। उत्तम संगति के साथ। आलेखन वस्त्रों की छपाई, बुनाई, कढ़ाई, चर्म शिल्प, बर्तन, अल्पना व अन्य ज्यामिति आकार में बनाने होंगे। ग्राफ बना कर भी आलेखन बनाये जा सकते हैं। खण्ड (ग) 30 अंक वस्तु चित्रण अथवा स्मृति चित्रण अथवा प्राकृतिक चित्रण अथवा प्राकृतिक दृश्य चित्रण (Land Scape) में से कोई कोई एक खण्ड करना है-
वस्तु चित्रण- 30 अंक विभिन्न प्रकार के खेल से संबंधित उपकरण- बैट, बाल, हाकी, गेंद, फुटबाल, कृषि उपकरण-फावड़ा, हल, हंसिया, हथौड़ी आदि का चित्र बनाना-यह चित्रण इंक में प्रकाश, छाया तथा प्रतिछाया, पेन्सिल, पेस्टल, आयल पेंट, पोस्टर रंग, जल रंग अग्र भूमि तथा पृष्ठ भूमि दर्शाते हुए करना है। टिप्पणी-चित्र संयोजन 20 सेंमी0 से कम न हो। वस्तु समूह एक आयताकार व अन्य बेलनाकार या गोलाकार वस्तुआें का होना चाहिए। जिनका आपस में समन्वय भी होना चाहिए। वस्तुओं को कम से कम 40 सेंमी0 ऊंचाई पर रखा होना चाहिए।
अथवा
प्रकृति चित्रण- 30 अंक पुष्प जैसे-कमल, जीनिया, कैली, पेन्जी आदि की कलियां, डंठलों, पत्तियों तथा सम्पूर्ण पौधों के चित्र, प्राकृतिक रंगों में छाया, प्रकाश तथा प्रति छाया दर्शाते हुए बनाना। जल रंग या पोस्टर रंग का प्रयोग कर सकते हैंं। पौधे व पुष्प, पत्तियों के प्रत्येक अंग व जोड़ बनाने में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अथवा स्मृति चित्रण- 30 अंक वस्तु चित्रण या प्राकृतिक चित्रण के साथ-साथ स्मृति चित्रण सफेद कागज पर प्रकाश, छाया तथा प्रति छाया सहित निम्न वस्तुओं मे से किसी एक का चित्र बनाना होगा। जैसे खेल का सामान, मिट्टी की वस्तुयें तथा कृषि की साधारण उपयोगी वस्तुयें। नाप 15 सेंमी0 से अधिक नहीं।
(माध्यम पेन्सिल क्रेयान) अथवा प्राकृतिक दृश्य (Land Scape)- 30 अंक ग्रामीण जीवन साधारण झांकी, सामाजिक दृश्य, थोड़े प्राकृतिक पृष्ठ भूमि में बनाना है। माध्यम-जल रंग, पोस्टर रंग, ऑयल, आयल पेस्टल व कार्बन चारकोल पेन्सिल, नाप 25 सेंमी0 x 30 सेंमी0। पुस्तकें- कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
विषय-चित्रकला (प्रावैधिक)
कक्षा-11
इसकी परीक्षा 100 अंको के एक प्रश्नपत्र में होगी। न्यूनतम उत्तीर्णाक-33
खण्ड-क 10 अंको के अनिवार्य वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे।
कर्णवत पैमाना क्षेत्रफल सम्बन्धी निर्मेय दीर्घवृत्त। 60 अंक का अनिवार्य खण्ड (ख)- 9 अंक खण्ड- (ग) 9 अंक खण्ड- (घ) 9 अंक खण्ड- (च) 18 अंक खण्ड-(छः) 15 अंक
टिप्पणी-प्रत्येक खण्ड में से एक प्रश्न अनिवार्य है तथा कुल पांच प्रश्न करने होंगे।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 43खण्ड (ज) 30 अंक कोई एक खण्ड करना है। वस्तु चित्रण अथवा स्मृति चित्रण अथवा प्राकृतिक चित्रण अथवा प्राकृतिक दृश्य चित्रण (स्ंदक-बंचम)
वस्तु चित्रण-30 अंक विभिन्न प्रकार के खेल से संबंधित उपकरण- बैट, बाल, हाकी, गेंद, फुटबाल, कृषि उपकरण-फावड़ा, हल, हंसिया, हथौड़ी आदि का चित्र बनाना-यह चित्रण इंक में प्रकाश, छाया तथा प्रतिछाया, पेन्सिल, पेस्टल, आयल पेंट, पोस्टर रंग, जल रंग अग्र भूमि तथा पृष्ठ भूमि दर्शाते हुए करना है। टिप्पणी-चित्र संयोजन से 20 सेंमी0 से कम न हो। वस्तु समूह एक आयताकार व अन्य बेलनाकार या गोलाकार वस्तुआें का होना चाहिए। जिनका आपस में समन्वय भी होना चाहिए। वस्तुओं को कम से कम 40 सेंमी0 ऊंचाई पर रखा होना चाहिए।
अथवा
प्रकृति चित्रण-30 अंक पुष्प जैसे-कमल, जीनिया, कैली, पेन्जी आदि की कलियां, डंठलों, पत्तियों तथा सम्पूर्ण पौधे के चित्र, प्राकृतिक रंगों में छाया, प्रकाश तथा प्रति छाया दर्शाते हुए बनाना। जल रंग या पोस्टर रंग का प्रयोग कर सकते हैंं। पौधे व पुष्प, पत्तियों के प्रत्येक अंग व जोड़ बनाने में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अथवा स्मृति चित्रण-30 अंक वस्तु चित्रण या प्राकृतिक चित्रण के साथ-साथ स्मृति चित्रण सफेद कागज पर प्रकाश, छाया तथा प्रति छाया सहित निम्न वस्तुओं मे से किसी एक का चित्र बनाना होगा। जैसे खेल का सामान, मिट्टी की वस्तुयें तथा कृषि की साधारण उपयोगी वस्तुयें। नाप 15 सेंमी0 से अधिक नहीं।
(माध्यम पेन्सिल क्रेयान) अथवा प्राकृतिक दृश्य (Land Scape)-30 अंक ग्रामीण जीवन साधारण झांकी, सामाजिक दृश्य, थोड़े प्राकृतिक पृष्ठ भूमि में बनाना है। माध्यम-जल रंग, पोस्टर रंग, ऑयल, आयल पेस्टल व कार्बन चारकोल पेन्सिल, नाप 25 सेंमी0 ग 30 सेंमी0। पुस्तकें- कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
विषय-रंजन कला
कक्षा-11
इसमें एक प्रश्न-पत्र 100 अंकों का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णाक-33
खण्ड- क
70 अंक
मानव सिर का (Statue) प्रतिमा द्वारा रंगों में चित्रण मानव सिर की प्रतिमा बालक, वृद्ध जो प्लास्टर ऑफ पेरिस या मिट्टी की बनी हो। सम्मुख रखकर पेस्टिल, ऑयल पेस्टिल या क्रेयान इंक से चित्रण करना होगा। प्रकाश, छाया, प्रतिछाया प्रदर्शित करनी होगी।
अथवा
भारतीय चित्रकारी भारत के विशेष प्राचीन कलाकारों के चित्रों की सुगम सपाट प्रतिकृति तैयार करना। सरल अनुवृत्ति एक मानव व एक पशु-पक्षी से संयोजित रंग व रेखाओं में चित्रित करना। नाप : 20 सेमी0 × 30 सेमी0। प्रश्न-पत्र में चित्र कम से कम 15 सेमी0 लम्बाई में दिया जाय। खण्ड- ख 30 अंक रंगों में काल्पनिक चित्र संयोजन दैनिक व विद्यार्थी जीवन, सामाजिक, खेल, धार्मिक, दहेज, परिवार कल्याण व परिवार नियोजन, देशभक्ति। इसमें मानव चित्र उन्नत दृश्य में जिसमें नदी, वृक्ष, झोपड़ी, मकान इत्यादि भी सम्मिलित किये जायें। चित्र दो या अधिक रंगों में स्वतन्त्र शैली में सपाट रंग व रेखाओं द्वारा प्रकाशित किये जायें।
अथवा भारतीय चित्रकला का इतिहास भारतीय कला का प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक काल तक जो निम्नांकित उप शीर्षकों में विभाजित हो, विभिन्न कला केन्द्रों का इतिहास, आलोचनात्मक और तुलनात्मक/अध्ययन के साथ पढ़ाया जाय। प्रागैतिहासिक काल, बौद्ध काल, मध्यकाल। पुस्तकें कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श करके पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
44 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 425 अंक
विषय-नृत्य कला कक्षा-11 एक लिखित प्रश्न-पत्र तीन घण्टे और 50 अंकों का होगा। इसके अलावा 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। उत्तीर्ण होने के लिये विद्यार्थी को लिखित, प्रयोगात्मक और योग में क्रमशः कम से कम 17, 16 और 33 अंक पाना आवश्यक है। इकाई-1 निम्नलिखित में से किसी एक की परिभाषा और व्याख्या जहाँ सम्भव हो सके उदाहरण और चित्र देते हुये– कत्थक, भरतनाट्यम्। ताण्डव, सास्य, मुद्रा, मुद्राय गीत, भाव, कविता, कस्क-मस्क कटाक्ष निकास, अल्लारिपु, जेथि स्वरम्, शब्दम्, वर्णम्, पदम तिल्लाना, लय, विरामद्रुत, लघु, गुरु प्ल्त काकपद। लयकारियों के विभिन्न प्रकार हाथों के (संयुक्त), सात प्रकार की भ्रमरी गति, 8 प्रकार की चाल। इकाई-2 25 अंक कत्थक के भेद और विशेषतायें (मुरली की गति, मटकी, गागर) अथवा भरतनाट्यम् अलारिपु, जातिस्वरम्, शब्दम्, वर्णम्, पदम्। गतों टुकड़े, आमद परन, सलाम आदि को ताललिपि में लिखने की योग्यता जो नृत्य के साथ संगत के रूप में प्रयुक्त होता है। निम्नलिखित तालों के ठेकों, उनकी विभिन्न लयों जैसे-दुगुन, चौगुन का ज्ञान, झपताल, त्रिताल- नौ रसों का परिचय। नृत्य सम्बन्धी किसी भी सामान्य विषय पर छोटा निबन्ध। निम्नलिखित नृत्यकारों की जीवनियाँ- सितारा देवी, रामगोपाल, विन्दादीन, लच्छू महराज।
प्रयोगात्मक
50 अंक 1 टखने, घुटने, कमर, कन्ध, बाहों, कलाइयों, सिर, गर्दन, आंखों, भौहों की गतियों का अभ्यास, विभिन्न प्रकार की चालों का प्रदर्शन। 2 चौताल में सरल तत्तकार, गत, एक आमद, तीन चक्करदार परन। 10 टुकड़े और कवित तीन तालों में, एक गत दो परन। 3 तबले पर तीन ताल, झपताल के ठेके बनाने की योग्यता। कम से कम उपरोक्त तालों में से प्रत्येक में दो टुकड़े और सभी टुकड़े आदि को हाथ से ताली, खाली आदि दिखाते हुये सभी तालों को पहचानने और अनुगमन करने की योग्यता। 4 कथानक और पौराणिक नृत्य जैसे कृष्ण की जीवन घटनायें आदि से दो नृत्य।
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अल्लारिपु, जातिस्वरम्, शब्दम्, वर्णम् की भरत नाट्यम् नृत्य की श्रृंखला किन्हीं दो रागों में। पुस्तक : कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श करके पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
नृत्यकला
अधिकतम अंक 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक 16 अंक समय प्रति परीक्षार्थी 15-20 मि0 08 1 परीक्षार्थी का अपना चुना हुआ नृत्य। 2 परीक्षक द्वारा पूछे गये नृत्य खण्ड गत टुकड़े आदि विभिन्न तालों में बताना। 03 03 3 वेश, श्रृंगार, सज्जा, अन्य प्रसाधन आदि। 4 अभिव्यक्ति, संदेश, भाव आदि। 03 03 5 लयकारी, ताल, ज्ञान आदि। 6 नृत्य के टुकड़ों और ताल को विभिन्न लयों में हाथ से ताली आदि दिखाते हुये। 02 03 7 सामान्य धारण और नृत्य का प्रभाव। 05 8 रिकॉर्ड। 10 9 प्रोजेक्ट। 10 10 सत्रीय कार्य।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 45विषय-तर्कशास्त्र
कक्षा-11
उद्देश्य एवं लक्ष्य- माध्यमिक स्तर पर छात्रों को तर्कशास्त्र के तत्वों के शिक्षण का उद्देश्य, उनके मस्तिष्क की स्पष्ट, यथार्थ एवं क्रमबद्ध चिन्तन के लिए प्रस्तुत करना है। समग्ररूप से तर्कशास्त्र में पाठ्यक्रम निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति हेतु निर्धारित किया गया है-
(क) छात्रों को ऐसे मौलिक नियमों एवं सिद्धान्तों से परिचित कराना जो विचारों को नियन्त्रित करते हैं। (ख) उनको वैज्ञानिक शोधों में प्रयुक्त तार्किक प्रक्रियाओं से परिचित कराना। (ग) छात्रों को विचार प्रक्रिया में आये हुए दोषों को पकड़ने तथा उनसे बचने के योग्य बनाना। (घ) छात्रों में तार्किक दृष्टिकोण तथा तर्कसंगत विचार और सत्य के प्रति सम्मान उत्पन्न करना। उपर्युक्त उद्देश्यों एवं लक्ष्यों की पूर्ति हेतु पाठ्य वस्तु को प्रस्तुत करते समय अध्यापक को विचाराधीन प्रकरण के व्यावहारिक पक्ष पर विशेष बल देना तथा दैनिक जीवन से दृष्टान्त और उदाहरण देना अपेक्षित है। पाठ्यक्रम-
विषय-नेशनल कैडेट कार ( N.C.C.) कक्षा-11 नेशनल कैडेट कोर ( N.C.C.) शैक्षणिक विषय के रूप में पाठ्यक्रम का उद्देश्य- राष्ट्र निर्माण एवं विकास में छात्र/छात्राओं को उन्मुख करना, उनमें चरित्र निर्माण नेतृत्व के गुण और विशेष दक्षता (skill) दिलाने के साथ-साथ उनमें सुरक्षा, सामाजिक राजतैतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय स्वास्थ्य सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन जैसी समस्याओं और चुनौतियों के लिए जागरूक करना है, जिससे इनका भविष्य उज्ज्वल एवं उन्नतिशील तथा अनुशासित बन सके। नेशनल कैडेट कोर (N.C.C.) वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जायेगा। इसका केवल एक लिखित प्रश्नपत्र 70 अंक का होगा तथा 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी, कुल उत्तीर्ण अंक 33 होगा। लिखित तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में अलग-अलग उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा।
10 अंक
10 अंक
विषय-नेशनल कैडेट कार ( N.C.C.) कक्षा-11 पूर्णांक 70 अंक इकाई-1 नेशनल कैडेट कोर (क) उद्देश्य एवं लक्ष्य (ख) नेशनल कैडेट कोर की संरचना, इतिहास, प्रशिक्षण (ग) विभिन्न राज्यों में N.C.C. की पढ़ाई प्रगति, अवसर ज्ञान इकाई-2 राष्ट्रीय एकता एवं धर्म निरपेक्षता (क) राष्ट्रीय एकता का महत्व एवं आवश्यकता उपाय (ख) धर्म निरपेक्षता का अर्थ, परिभाषा, आवश्यकता, महत्व (ग) सांस्कृति का अर्थ एवं महत्व, परम्परा, रीति रिवाज (घ) विभिन्नता में एकता राष्ट्रवाद (ड.) 1857 का स्वतंत्रता संग्राम46 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
10 अंक
08 अंक
09 अंक
08 अंक
08 अंक
इकाई-3 सैन्य इतिहास एवं युद्ध (क) आधुनिक भारतीय थल सेना, संरचना एवं भूमिका (ख) भारतीय नौ सेना (ग) भारतीय वायु सेना इकाई-4 असैनिक चुनौतियॉ एवं संचार व्यवस्था (क) आतंकवाद, चुनौतियॉ एवं भावी रणनीति (ग) संचार की महत्व एवं आवश्यकता (ख) नक्सलवाद इकाई-5 आपदा प्रबंधन एवं आंतरिक चुनौतियॉ 07 अंक (क) सिविल डिफेंस संगठन एवं आपदा प्रबंधन संरचना आवश्यकता महत्व (ख) प्राकृतिक आपदा का अर्थ परिभाषा महत्व इकाई-6 सामाजिक जागरूकता एवं सामुदायिक विकास (क) मूलभूत सामाजिक सेवा की अवधारणा उसकी आवश्यकता (ख) सामाजिक कार्यों के प्रति रूचि के उन्मुख कार्य करना (ग) सड़क सुरक्षा के नियम एवं सड़क दुर्घटना के प्रति जागरूकता इकाई-7 स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता (क) स्वच्छता एवं स्वस्थ्य रहने की आवश्यकता एवं उपाय संसाधन (ख) मानव शरीर की संरचना एवं कार्य (ग) संक्रामक रोगों की पहचान एवं रोकथाम के उपाय इकाई-8 पर्यावरणीय एवं जल संरक्षण (क) प्राकृतिक संसाधन (ख) प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं प्रबंधन (ग) पानी का संरक्षण, वर्षा के पानी का संरक्षण
10 अंक
10 अंक
प्रयोगात्मक 30 अंक 1- मानचित्र पठन 10 अंक (क) सर्वेक्षण पत्रक (सर्वे ग्रिड मैप) का परिचय, परिभाषा, उपयोगिता हासिए की सूचनाएं, सांकेतिक चिन्ह, ग्रिड तथा कन्ट्रोल व्यवस्था (ख) उत्तर दिशाए- प्रकार तथा दिशा ज्ञान के तरीके (ग) दिक्मान- परिभाषा तथा अन्तर परिवर्तन 2- प्रिज्मैटिक दिक्सूचक सर्विस (क) मानचित्र दिशा अनुकूलन करना (नक्शा सेट करना) (ख) तीनों सेनाओं के वेसिस ऑफ रैंक की पहचान (ग) प्रयोगात्मक कार्य की अभ्यास पुस्तिका 3- मौखिकी परीक्षा एवं ड्रिल परीक्षा (Drill-test) प्रयोगात्मक परीक्षा में अंकों का विवरण निम्नलिखित होगाः- मानचित्र पठन-10 अंक प्रिज्मैटिक दिक्सूचक-10 अंक अभ्यास पुस्तिका-5 अंक मौखिकी परीक्षा-5 अंक
एन0सी0सी0 (प्रयोगात्मक) उपकरण एवं अन्य सामाग्री की सूची 1. टोपोशीट (मानचित्र) जिला एवं प्रदेश 2. सर्विस प्रोटेक्टर मार्क A 3. प्रिज्मैटिक दिक्सूचक (कम्पास) 4. नक्शे (मानचित्र) (अ) संकेतिक चिन्हों का मानचित्र (ब) भारत एवं पड़ोसी राष्ट्र (स) भारत भौगोलिक (द) भारत हिन्द महासागर 5. प्रयोगात्मक नोाटबुकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 47
विषय-मनोविज्ञान
कक्षा-11
100 अंकों का एक प्रश्न पत्र होगा जिसकी अवधि 3 घण्टे 15 मिनट होगी न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 अंकों का होगा।
अध्याय-1 मनोविज्ञान क्या है? 10 अंक
परिचय- मनोविज्ञान क्या है? मनोविज्ञान एक विद्याशाखा के रूप में, मनोविज्ञान एक प्राकृतिक विज्ञान के रूप में, मनोविज्ञान एक सामाजिक विज्ञान के रूप में, मन एवं व्यवहार की समझ, मनोविज्ञान विद्याशाखा की प्रसिद्ध धारणाएँ , मनोविज्ञान का विकास, आधुनिक मनोविज्ञान के विकास में कुछ रोचक घटनाएँ, भारत में मनोविज्ञान का विकास, मनोविज्ञान की शाखाएं, मनोविज्ञान एवं अन्य विद्या शाखाएँ, दैनंदिन जीवन में मनोविज्ञान। अध्याय-2 मनोविज्ञान में जाँच विधियाँ 12 अंक परिचय, मनोवैज्ञानिक जाँच के लक्ष्य, मनोवैज्ञानिक अनुसंधान के चरण, अनुसंधान के वैकल्पिक प्रतिमान, मनोवैज्ञानिक प्रदत्त का स्वरूप, मनोविज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण विधियाँः प्रेषण विधि, प्रयोग का एक उदाहरण, प्रायोगिक विधि, सहसम्बन्धात्मक अनुसंधान, सर्वेक्षण अनुसंधान, सर्वेक्षण विधि का उदाहरण, मनोवैज्ञानिक परीक्षण, व्यक्ति अध्ययन, प्रदत्त विश्लेक्षणः परिमाणात्मक विधि, गुणात्मक विधि, मनोवैज्ञानिक जाँच की सीमाएँ नैतिक मुद्देे। अध्याय-3 मानव विकास 15 अंक परिचय, विकास का अर्थ, विकास का जीवनपर्यन्त परिपेक्ष, संवृद्धि, विकास, परिपक्वता तथा क्रम विकास, विकास को प्रभावित करने वाले कारक, विकास का संदर्भ, विकासात्मक अवस्थाओं की समग्र दृष्टिः प्रसवपूर्व अवस्था, शैशवास्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था की चुनौतियाँ, प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था। अध्याय-4 संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ 13 अंक परिचय, जगत का ज्ञान, उद्दीपक का स्वरूप एवं विविधता, संवेदन प्रकारताओं का संक्षिप्त परिचय, अवधानिक प्रक्रियाएँः चयनात्मक अवधान विभक्त अवधान, संधृत अवधान, अवधान विस्तृति, अवधान न्यूवता अतिक्रिया विकार, प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएं, प्रत्यक्षण के प्रकमण उपागम, प्रत्यक्षणकर्ता, प्रात्यक्षिक संगठन के सिद्धान्त, स्थान, गहनता तथा दूरी प्रत्यक्षण, एकनेत्री तथा द्विनेत्री संकेत, प्रात्यक्षिक स्थैर्य, भ्रम, प्रत्यक्षण पर सांस्कृतिक-सामाजिक प्रभाव। अध्याय-5 अधिगम 15 अंक परिचय, अधिगम का स्वरूप, अधिगम के प्रतिमान, प्राचीन अनुबधन तथा इसके निर्धारक, क्रियाप्रसूत/नैमित्तिक अनुबंधन, क्रियाप्रसूत अनुबंधन के निर्धारक, प्राचीन तथा क्रियाप्रसूत अनुबंधनः भिन्नताएं, प्रमुख अधिगम प्रक्रियाएँ, अधिगत असहायपन, प्रेक्षणात्मक अधिगम, संज्ञानात्मक अधिगम, वाचिक अधिगम, कौशल अधिगम, अधिगम को सुगम बनाने वाले कारक, अधिगम अशक्तताएँ। अध्याय-6 मानव स्मृति 12 अंक परिचय, स्मृति का स्वरूप, सूचना प्रक्रमण उपागम, अवस्था मॉडल, स्मृति तंत्रः संवेदी, अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक स्मृतियाँ, कार्यकारी स्मृति, प्रक्रमण स्तर, दीर्घकालिक स्मृति के प्रकारः घोषणात्मक, प्रक्रियामूलक, घटनापरक एवं आर्थी, दीर्घकालिक स्मृति वर्गीकरण, स्मृति मापन की विधियाँ, विस्मरण के स्वरूप एवं कारणः चिन्ह, हा्रस, अवरोध एवं पुनरुद्धार की असफलता के कारण, विस्मरण, दमित स्मृतियाँ, स्मृति वृद्धिः प्रतिमाओं के उपयोग से स्मृति सहायक संकेत, संगठन के उपयोग से स्मृति सहायक संकेत। अध्याय-7 चिंतन 08 अंक परिचय, चिंतन का स्वरूप, चिंतन का आधारभूत तत्व, संस्कृति एवं चिंतन, चिंतन की प्रक्रिया, समस्या समाधान, तर्कना, निर्णयन, सर्जनात्मक चिंतन का स्वरूप एवं प्रक्रिया, पाश्र्विक चिंतन, सर्जनात्मक चिंतन के उपाय, विचार एवं भाषा, भाषा एवं भाषा के उपयोग का विकास, द्विभाषिकता एवं बहुभाषिता। अध्याय-8 अभिप्रेरणा एवं संवेग 15 अंक परिचय, अभिप्रेरणा का स्वरूप, अभिप्रेरकों के प्रकारः जैविक अभिप्रेरक, मनोसामाजिक अभिप्रेरक, मैस्लो का आवश्यकता पदानुक्रम, संवेगों का स्वरूप, संवेगों की अभिव्यक्ति, संस्कृति एवं संवेगात्मक अभिव्यक्ति, संस्कृति एवं संवेगों का नामकरण, निषेधात्मक संवेगों का प्रबंधन, अभिधातज उत्तर दबाव विकार, परीक्षा दुश्चिंता का प्रबंधन, विध्यात्मक संवेगों में वृद्धि।
विषय-कम्प्यूटर
कक्षा-11
इस विषय की लिखित परीक्षा 60 अंकों के एक प्रश्नपत्र तीन घंटे की समयावधि की होंगी। इसके अतिरिक्त 40 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु तीन घंटे की समयावधि निर्धारित होगी। उत्तीर्ण होने के लिये परीक्षार्थी को लिखित, प्रयोगात्मक तथा योग में न्यूनतम क्रमशः 20, 13 तथा 33 अंक प्राप्त करने होंगे। 1. कम्प्यटर फंडामेन्टलस और नम्बर सिस्टम 15 अंक 1.1 कम्प्यूटर क्या है उसके कार्य एवं उसके प्रकार का वर्णन 1.2 साफ्टवेयर एवं हार्डवेयर अवधारणा 1.3 संख्या प्रणाली (नम्बर सिस्टम) बाइनरी, ऑक्टल, हैक्सा एवं डेसिमल नम्बर सिस्टम 1.4 फ्लोटिंग प्वाइंट नम्बर्स48 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 1.5 विभिन्न अंक प्रणालियों के अंको का एक दूसरे में परिर्वतन 1.6 बूलियन बीजगणित स्वी—त तथ्य एवं प्राथमिक सिद्धान्त 1.7 ट्रूथ टेबिल (Truth Table) 1.8 लाजिंग गेट्स और उनके अनुप्रयोग 2. पाइथन प्रोग्रामिंग का परिचय 10 अंक 2.1 पाइथन भाषा का परिचय एवं विकास 2.2 डाटा टाइप््स 2.3 करेक्टर सेट 2.4 प्रोग्राम की संरचना 2.5 इनपुट एवं आउटपुट आपरेशन 2.6 कन्ट्रोल स्टेट्रमेंट 2.7 लूपिंग स्टेट्रमेंट 3. पाइथन में प्रोग्रामिंग 15 अंक 3.1. स्ट्रिंगः परिचय, इन्डेक्सिंग, बिल्ट इन फंक्शन (Built in function) के जरिये स्ट्रिंग आपरेशन 3.2. लिस्टस (List)ः परिचय, इन्डेक्सिंग, ट्रवेरसिंग (Traversing), लिस्ट के बिल्ट इन फंक्शन (Built in function) 3.3. टपल्स (Tuples) : परिचय, इन्डेक्सिंग, टै्रवर्सिग (Traversing) लूप के साथ, बिल्ट इन फंक्शन (Built in function) 3.4. डिक्सनरी (Dictionary)ः परिचय, इन्डेक्सिंग आपरेशन, ट्रैवर्सिग (Traversing) लूप के साथ, बिल्ट इन फंक्शन (Built in function) 4 आर्टिफीसियल इन्टेलीजेंस (AI) : 10 अंक 4.1 आर्टिफीसियल इन्टेलीजेंस का परिचय, उसका भविष्य, विशेषता एवं तत्व 4.2 आर्टिफीसियल इन्टेलीजेन्ट 4.3 टिपिकल आर्टिफीसियल इन्टेलीजेन्स द्वारा समस्या का समाधान 4.4 आर्टिफीसियल इन्टेलीजेन्स के उपयोग :- नेचुरल लग्ैंवेज प्रोसेसिंग (Natural language Processing), रोबोटिक्स, एक्सपर्ट सिस्टम, क्लासिफिकेशन एवम रिग्रेशन 5. उभरती हुई तकनीकियाँ 10 अंक 5.1 ब्लाक चेन टेक्नालाजी 5.2 डिजिटल क्रिप्टो करेंसी 5.3 ऑग्मेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी का परिचय 5.4 इन्टरनेट ऑफ थिग्स (IoT) 5.5 थ्रीडी प्रिन्टिंग 5.6 क्लाउड कम्प्यूटिंग
प्रयोगात्मक : अधिकतम अंक 40
20
1. यूनिट दो 02 के आधार पर चार 04 प्रोग्राम 2. यूनिट तीन (03) के आधार पर 04 चार प्रोग्राम 3. आर्टिफीसियल इन्टेलीजेंस (AI) के आधार पर मिनी प्रोजक्ट निर्देश • दो प्रयोग उपरोक्त के आधार पर 8x2=16 • उपरोक्त प्रयोग पर आधार मौखिकी 04 प्रोजेक्ट • मिनी प्रोजेटट (AI के आधार पर) 08 • प्रोजेक्ट आधार मौखिकी 04 • सत्रीय कार्य 08 विषय-गणित (कक्षा-11)
| क्रम | इकाई | अंक |
| 1. | समुच्चय तथा फलन | 29 |
| 2. | बीजगणित | 37 |
| 3. | निर्देशांक ज्यामिति | 15 |
| 4. | कलन | 07 |
| 5. | सांख्यिकी तथा प्रायिकता | 12 |
| योग... | 100 |
इकाई-1 : समुच्चय तथा फलन 29 अंक
1. समुच्चय :
समुच्चय तथा उसका निरूपण, रिक्त समुच्चय, परिमित तथा अपरिमित समुच्चय, समसमुच्चय, उपसमुच्चय, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय के उपसमुच्चय विशेषकर अन्तराल के रूप में (संकेतन सहित), अधिसमुच्चय, समष्टीय समुच्चय वेन आरेख, समुच्चयों का सम्मिलन तथा सर्वनिष्ठ, समुच्चयों का अन्तर, पूरक समुच्चय।
2. सम्बन्ध तथा फलन :
क्रमितयुग्म, समुच्चयों का कार्तीय गुणन, दो परिमित समुच्चयों के कार्तीय गुणन में अवयवों की संख्या, वास्तविक संख्याओं के समुच्चय का अपने से कार्तीय गुणन (RRR) तक सम्बन्ध की परिभाषा, चित्रीय आरेख, सम्बन्ध का प्रांत, सहप्रांत तथा परास। फलन एक विशेष प्रकार का सम्बन्ध, फलन का चित्रीय निरूपण, फलन का प्रांत, सहप्रांत तथा परास। वास्तविक मान फलन, इन फलनों का प्रांत तथा परास, अचर, तत्समक, बहुपद, परिमेयी, मापांक, चिन्ह, तथा महत्तम पूर्णांक फलन तथा उनके आरेख। फलनों का योग, अन्तर, गुणन तथा भागफल।
3. त्रिकोणमितीय फलन :
धनात्मक तथा ऋणात्मक कोण, कोणों की रेडियन तथा डिग्री में माप तथा उनका एक मापन से
122 xCosxSin
Sin (x + y) तथा Cos (x + y) की Sin x, Cos x तथा Sin y, Cos y के रूप में अभिव्यक्ति तथा उनके साधारण अनुप्रयोग।
निम्न प्रकार के तत्समकों का निगमन करना :
tantan yx
)tan( yx
tantan1 yxCot
yx 1cot
)(cot yx
cotcot xy 1
1
2 CosSinSinSin
2 1
2 1
2 CosCosCosCos
1
2 SinSinCosCos
2
50 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 42. शंकु परिच्छेद ः शंकु परिच्छेद की भूमिका, वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त, अतिपरवलय एक बिन्दु, एक सरल रेखा तथा प्रतिच्छेदी रेखाओं का एक युग्म, शंकु परिच्छेद के अपभ्रष्ट रूप में (केवल परिचय) वृत्त का मानक समीकरण। परवलय, दीर्घवृत्त तथा अतिपरवलय के मानक समीकरण तथा उनके सामान्य गुण।
3. त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय : त्रिविमीय अंतरिक्ष में निर्देशांक्ष तथा निर्देशांक तल, एक बिन्दु के निर्देशांक, दो बिन्दुओं के बीच की दूरी।
इकाई-4 कलन 07 अंक
1. सीमा तथा अवकलज :
अवकलन को दूरी के फलन के परिवर्तन की दर के रूप में परिभाषित करना। सीमा का सहजानुभूत बोध, बहुपदफलनों, परिमेय फलनों, त्रिकोणमितीय फलनों की सीमाएं। अवकलज की परिभाषा तथा फलनों के योग, अन्तर, गुणन तथा भाग द्वारा बने फलनों का अवकलन करना। बहुपद फलनों तथा त्रिकोणमितीय फलनों का अवकलज ज्ञात करना।
इकाई-6 सांख्यिकी तथा प्रायिकता 12 अंक 1. सांख्यिकी : प्रकीर्णन के माप, वर्गीकृत तथा अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्य विचलन, प्रसरण तथा मानक विचलन।
2. प्रायिकता :घटनाओं का घटित होना, घटित न होना, (not) तथा (ंंand) 'और' 'या' निःशेष घटनाएँ, परस्पर अपवर्जी घटनाएँ। प्रायिकता की अभिगृहीतीय दृष्टिकोण। पिछली कक्षा के प्रायिकता सिद्धान्तों से सम्बन्ध। एक घटना की प्रायिकता। 'not' 'and' तथा 'or' घटनाओं की प्रायिकता।
विषय-भौतिक विज्ञान
कक्षा-11
इसमें 70 अंक का एक प्रश्नपत्र तीन घंटे का होगा। 30 अंक की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी।
| 1 | भौतिक जगत तथा मापन | 01 अंक |
| 2 | शुद्ध गतिकी | 06 अंक |
| 3 | गति के नियम | 07 अंक |
| 4 | कार्य ऊर्जा तथा शक्ति | 07 अंक |
| 5 | दृढ़ पिण्ड तथा कणों के निकाय की गति | 07 अंक |
| 6 | गुरूत्वाकर्षण | 07 अंक |
इकाई 1 भौतिक जगत तथा मापन 01 अंक मापन की आवश्यकता, माप के मात्रक प्रणालियाँ S.I. प्रणाली, मात्रक- मूल तथा व्युत्पन्न मात्रक। यथार्थता तथा मापक यंत्रों की परिशुद्धता, सार्थक अंक। भौतिक राशियों की विमायें, विमीय विश्लेषण तथा इसके अनुप्रयोग। इकाई 2 शुद्ध गतिकी 06 अंक निर्देश फ्रेम (जड़त्वीय व अजड़त्वीय फ्रेम) सरल रेखा में गति, गति के वर्णन के लिये अवकलन तथा समाकलन की आरम्भिक संकल्पनायें। एक समान तथा असमान गति, माध्य चाल तथा तात्क्षणिक वेग। एक समान त्वरित गति, वेग-समय, स्थिति-समय ग्राफ, एक समान त्वरित गति के लिये सम्बन्ध (ग्राफीय विवेचना) अदिश और सदिश राशियाँ, स्थिति एवं विस्थापन सदिश, सदिश तथा संकेतन पद्धति, सदिश की समानता, सदिशों का वास्तविक संख्याओं से गुणन, सदिशों का जोड़ व घटाना। एकांक सदिश, किसी तल में सदिश का वियोजन समकोणिक घटक, सदिशों का अदिश तथा सदिश गुणनफल, एक समतल में गति, एक समान वेग तथा एक समान त्वरण के प्रकरण, प्रक्षेप्य गति, एक समान वृत्तीय गति। इकाई 3 गति के नियम 07 अंक बल की सहजानुभूत संकल्पना, जड़त्व न्यूटन के गति का पहला नियम, संवेग और न्यूटन के गति का दूसरा नियम, आवेग, न्यूटन के गति का तृतीय नियम, रेखीय संवेग संरक्षण नियम तथा इसके अनुप्रयोग, संगामी बलों का संतुलन, स्थैतिक तथा गतिज घर्षण, घर्षण के नियम, लोटनिक घर्षण, (Rolling Friction) स्नेहन एक समान वृत्तीय गति की गतिकी, अभिकेन्द्र बल, वृत्तीय गति के उदाहरण (समतल वृत्ताकार सड़कों पर वाहन, ढालू सड़कों पर वाहन)। इकाई 4 कार्य ऊर्जा तथा शक्ति 07 अंक नियत बल तथा परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य, गतिज ऊर्जा, कार्य ऊर्जा प्रमेय, शक्ति स्थितिज ऊर्जा की धारणा, कमानी की स्थितिज ऊर्जा, संरक्षी बल, असंरक्षी बल, एक व द्विविमीय तल में प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट, ऊध्र्वाधर वृत्त में गति।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 51| 1 | स्थूल द्रव्य के गुण | 10 अंक |
| 2 | ऊष्मागतिकी | 09 अंक |
| 3 | आदर्श गैस का व्यवहार तथा गैसों का अणुगति सिद्धान्त | 06 अंक |
| 4 | दोलन तथा तरंगें | 10 अंक |
इकाई 1 स्थूल द्रव्य के गुण 10 अंक प्रत्यास्थ व्यवहार, प्रतिबल विकृति संबंध, हुक का नियम, यंग गुणांक, आयतन प्रत्यास्था गुणांक, अपरूपण (Shear) दृढ़ता गुणांक, पॉयसन अनुपात, प्रत्यास्थ ऊर्जा, तरल स्तम्भ के कारण दाब, पास्कल का नियम तथा इसके अनुप्रयोग (द्रवचालित लिफ्ट तथा द्रवचालित ब्रेक), तरल दाब पर गुरूत्व का प्रभाव। श्यानता, स्टोक्स का नियम, सीमान्त वेग, धारारेखी तथा प्रक्षुब्ध प्रवाह, क्रांतिक वेग, बरनौली का प्रमेय तथा इसके अनुप्रयोग, पृष्ठ ऊर्जा और पृष्ठ तनाव, संपर्क कोंण, दाब आधिक्य पृष्ठ तनाव की धारणा का बूँदों, बुलबुलों तथा केशिका क्रिया में अनुप्रयोग। ऊष्मा, ताप, तापीय प्रसार, ठोस, द्रव व गैस का तापीय प्रसार, समतापी प्रक्रम, रूदोष्म प्रक्रम, असंगत (Anomalous) प्रसार और इसका प्रभाव, विशिष्ट ऊष्मा धारिता Cp, Cv, कैलोरीमिति, अवस्था परिवर्तन, विशिष्ट गुप्त ऊष्मा धारिता। ऊष्मा स्थानान्तरण चालन, संवहन और विकिरण, कृष्ण-पिंड विकिरण, अवशोषण और उत्सर्जन क्षमता और ऊष्मा चालकता, वीन का विस्थापन नियम, स्टीफेन का नियम। इकाई 2 ऊष्मागतिकी 09 अंक तापीय साम्य तथा ताप की परिभाषा (ऊष्मागतिकी का शून्य कोटि नियम), ऊष्मा, कार्य तथा आन्तरिक ऊर्जा, ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम समतापीय प्रक्रम, रूद्धोष्म प्रक्रम। ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम, उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम। इकाई 3 आदर्श गैस का व्यवहार तथा गैसों का अणुगति सिद्धान्त 06 अंक आदर्श गैस के लिये अवस्था का समीकरण, गैस के संपीडन में किया गया कार्य, गैसों का अणुगति सिद्धान्त अभिगृहीत, दाब की संकल्पना, गतिज ऊर्जा तथा ताप, गैस के अणुओं की वर्गमाध्य मूल चाल, स्वातंत्रय कोटि, ऊर्जा समविभाजन नियम (केवल प्रकथन) तथा गैसों की विशिष्ट ऊष्मा पर अनुप्रयोग, माध्य मुक्त पथ की संकल्पना, आवोग्राद्रो संख्या। इकाई 4 दोलन तथा तरें 10 अंक आवर्तीगति, आवर्तकाल, आवृत्ति, समय के फलन के रूप में विस्थापन, आवर्तीफलन, सरल आवर्त गति (S.H.M.) तथा इसका समीकरण, कला, कमानी के दोलन, प्रत्यानयन बल तथा बल स्थिरांक S.H.M. में ऊर्जा–गतिज तथा स्थितिज ऊर्जायें, सरल लोलक इसके आवर्तकाल के लिये व्यंजक की व्युत्पत्ति। तरंग गति, अनुदैध्र्य तथा अनुप्रस्थ तरंगें, तरंग गति की चाल, प्रगामी तरंग के लिये विस्थापन सम्बन्ध, तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त, तरंगों का परावर्तन, डोरियों तथा पाइपों में अप्रगामी तरंगे, मूल विधा तथा गुणवृत्तियाँ (Fundamental mode and Harmonics), विसपन्द ।
प्रयोगात्मक
प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगा–
भौतिक विज्ञान
अधिकतम अंक 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक 10 अंक समय 04 घण्टे 1 कोई दो प्रयोग (2 × 5) प्रत्येक खण्ड से एक प्रयोग। 10 05 2 प्रयोग पर आधारित मौखिकी। 04 3 प्रयोगात्मक रिकॉर्ड। 08 4 प्रोजेक्ट कार्य व उस पर आधारित मौखिकी। 5 सत्रीय कार्य–सतत् मूल्यांकन। 0352 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रत्येक प्रयोग के 05 अंक का वितरण निम्नवत् होगा
(1) क्रियात्मक कौशल (आवश्यक सावधानियाँ सहित) उपकरण का सामंजस्य व प्रेक्षण कौशल (शुद्ध प्रेक्षण)। 01 01 (2) प्रेक्षणों की पर्याप्त संख्या तथा उचित सारणीय। 01 (3) गणनात्मक कौशल अथवा ग्राफ बनाना। 01 (4) परिणाम/निष्कर्ष का शुद्ध मात्रक सहित कथन। 01 (5) आरेख (परिपथ, किरण आरेख, सैद्धान्तिक आरेख)।
प्रयोग सूची
(खण्ड-क)
1 वर्नियर कैलीपर्स की सहायता से किसी छोटी गोलीय/बेलनाकार वस्तु का व्यास ज्ञात करना। 2 स्क्रूगेज की सहायता से दिये गये तार का व्यास ज्ञात करना। 3 सदिशों के समान्तर चतुर्भुज नियम के उपयोग द्वारा दी गयी वस्तु का भार ज्ञात करना।
4 सरल लोलक का उपयोग करे L–T तथा L–T2 ग्राफ खींचना तथा उचित ग्राफ का उपयोग करके सेकण्ड्री लोलक की प्रभावी लम्बाई ज्ञात करना।
5-गोलाईमापी (Spherometer) की सहायता से किसी गोलीय तल की वक्रता त्रिज्या ज्ञात करना। 6-सरल लोलक द्वारा गुरुत्वीय त्वरण 'g' का मान ज्ञात करना।
7 गुटके तथा क्षैतिज पृष्ठ के बीच घर्षण गुणांक ज्ञात करने के लिये सीमान्त घर्षण तथा अभिलम्ब प्रतिक्रिया के बीच सम्बन्ध का अध्ययन करना तथा घर्षण गुणांक ज्ञात करना।
8 दिये गये तार के पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक ज्ञात करना। सर्ल के उपकरण की सहायता से। 9 लोड–विस्तार ग्राफ खींचकर किसी कुण्डलिनी कमानी का बल स्थिरांक ज्ञात करना। 10 कोशिकीय उन्नयन विधि द्वारा जल का पृष्ठ तनाव ज्ञात करना।
(खण्ड-ख)
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 53कक्षा-11 रसायन विज्ञान
| इकाई | शीर्षक | अंक |
| 1. | रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाऐ ं | 07 |
| 2. | परमाणु की संरचना | 08 |
| 3. | तत्त्वों का वर्गीकरण और गुणधर्मों में आवर्तिता | 07 |
| 4. | रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना | 07 |
| 5. | ऊष्मागतिकी | 06 |
| 6. | साम्यावस्था | 08 |
| 7. | अपचयोपचय अभिक्रियायें(रेडाक्स अभिक्रिया) | 07 |
| 8. | कार्बनिक रसायन : कुछ मूलभूत सिद्धान्त तथा तकनीके | 10 |
| 9. | हाइड्रोकार्बन | 10 |
| योग | 70 |
नोटः-इसमें 70 अंकों का एक प्रश्न पत्र 3 घण्टे का होगा एवं 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। इकाई 1-रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणायें 07 अंक सामान्य परिचय- रसायन विषय का महत्व और विस्तार द्रव्य की कणिक प्रकृति तक ऐतिहासिक पहुंच, रासायनिक संयोजन के नियम, डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त, तत्व, परमाणु और अणु की अवधारणा। परमाण्विक, आण्विक द्रव्यमान, मोल की अवधारणा और मोलर द्रव्यमान-प्रतिशत संघटन, मूलानुपाती एवं आण्विक-सूत्र, रासायनिक अभिक्रियायें, स्टॉइकियोमिट्री और उस पर आधारित गणनायें।
इकाई 2 - परमाणु की संरचना 08 अंक इलेक्ट्रॉन, प्रोटान और न्यूट्रॉन की खोज, परमाणु क्रमाँक, समस्थानिक और समभारिक, थॉमसन का मॉडल और इसकी सीमायें, रदरफोर्ड का मॉडल और इसकी सीमायें, बोर मॉडल और इसकी सीमायें, कोशों एवं उपकोशों की अवधारणा, द्रव्य एवं प्रकाश की द्वैत प्रकृति, दे ब्रॉग्ली सम्बन्ध, हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त, कक्षकों की अवधारणा, क्वान्टम संख्याए s, p और d कक्षकों की आकृतियाँ, कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने के नियम-आफबाऊ नियम, पाउली अपवर्जन नियम तथा हुन्ड का नियम, परमाणुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, अर्द्धभरित और पूर्ण भरित कक्षकों का स्थायित्व। इकाई 3 - तत्वों का वर्गीकरण और गुणधर्मों में आवर्तिता 07 अंक वर्गीकरण की सार्थकता, आवर्त सारणी के विकास का संक्षिप्त इतिहास, आधुनिक आवर्त नियम तथा आर्वत सारणी का वर्तमान स्वरूप, तत्वों के गुणधर्मों की आवर्ती प्रवृति-परमाणु त्रिज्यायें, आयनी त्रिज्यायें, अक्रिय गैस त्रिज्यायें, आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, विद्युत ऋणात्मकता, संयोजकता, 100 से अधिक परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का नामकरण। इकाई 4 - रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 07 अंक संयोजकता-इलेक्ट्रॉन, आयनिक आबंध, सहसंयोजक आबंध, आबंध प्राचल लुइस संरचना, सहसंयोजक आबंध का धु्रवीय गुण, आयनिक आबंध का सहसंयोजक गुण, संयोजकता आबंध सिद्धान्त, अनुनाद, सहसंयोजक अणुओं की ज्यामिति, VSEPR सिद्धान्त s, p तथा d कक्षकों और कुछ सामान्य अणुओं की आकृतियों को सम्मिलित करते हुए संकरण की अवधारणा, समनाभिकीय द्विपरमाणुक अणुओं के आबंधन का आण्विक कक्षक सिद्धान्त (केवल गुणात्मक परिचय), हाइड्रोजन आबंध। इकाई 5 - ऊष्मागतिकी 06 अंक निकाय की अवधारणा, निकाय के प्रकार, परिवेश, कार्य, ऊष्मा, ऊर्जा, विस्तीर्ण तथा गहन गुण, अवस्था फलन। ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम- आन्तरिक ऊर्जा और एन्थैल्पी (H), ऊष्माधारिता, विशिष्ट ऊष्मा, ∆U तथा ∆H का मापन, हेस का स्थिर ऊष्मा संकलन नियम, एन्थैल्पी-आबंध वियोजन, संभवन (विरचन), दहन, कणीकरण, ऊध्र्वपातन, प्रावस्था रूपान्तरण, आयनन तथा विलयन,तनुता ऊष्मा।
एन्ट्रापी का अवस्था फलन की भाँति परिचय, स्वतः प्रवर्तित और स्वतः अप्रवर्तित प्रक्रमों के लिये मुक्त ऊर्जा परिवर्तन, साम्य, साम्यावस्था हेतु मानदण्ड, ऊष्मागतिकी का द्वितीय तथा तृतीय नियम। (संक्षिप्त परिचय) इकाई 6 - साम्यावस्था 08 अंक भौतिकी और रासायनिक प्रक्रमों में साम्य, साम्य की गतिक प्रकृति, द्रव्यानुपाती क्रिया का नियम, साम्य स्थिराँक, साम्य को प्रभावित करने वाले कारक, लॅ शातैलिए का सिद्धान्त, आयनिक साम्य-अम्लों एवं क्षारकों का आयनन, प्रबल और दुर्बल वैद्युत् अपघट्य, आयनन की मात्रा, बहुक्षारकी अम्लों का आयनन, आयनन, अम्लीय शक्ति, pH की अवधारणा, हेन्डरसन समीकरण, लवणों का जलीय अपघटन (प्रारम्भिक विचार) बफर विलयन, विलेयता गुणनफल, समआयन प्रभाव उदाहरण सहित।
54 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4इकाई 7 - अपचयोपचय अभिक्रियायें (रेडाक्स अभिक्रिया) 07 अंक आक्सीकरण और अपचयन की अवधारणा, आक्सीकरण अपचयन अभिक्रियायें, आक्सीकरण संख्या, आक्सीकरण अपचयन अभिक्रियाओं की रासायनिक समीकरण को संतुलित करना (इलेक्ट्रॉन संख्या एवं आक्सीकरण संख्या के आधार पर) रेडाक्स अभिक्रियाओं के अनुप्रयोग। इकाई 8 - कार्बनिक रसायन-कुछ मूल सिद्धान्त और तकनीकें 10 अंक सामान्य परिचय, कार्बनिक यौगिकों का शोधन, गुणात्मक और मात्रात्मक विश्लेषण की विधियाँ, वर्गीकरण और कार्बनिक यौगिकों की IUPAC नाम पद्धति। सहसंयोजक बन्ध में इलेक्ट्रॉनिक विस्थापन-प्रेरणिक प्रभाव, इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव, अनुनाद और अति संयुग्मन।
सहसंयोजक आबंध का सम और विषम विदलन-मुक्त मूलक, कार्बोनियम आयन, कार्बोनायन, इलेक्ट्रान स्नेही तथा नाभिक स्नेही, कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि। इकाई 9 - हाइड्रोकार्बन 10 अंक हाइड्रोकार्बनों का वर्गीकरण- एल्केन- नाम पद्धति, समावयवता, संरूपण (केवल एथेन), भौतिक गुणधर्म, रासायनिक अभिक्रियायें, (हैलोजेनीकरण की मुक्त मूलक क्रियाविधि सहित) दहन और ताप अपघटन। एल्कीन- नाम पद्धति, द्विक आबंध की संरचना (एथीन) ज्यामितीय समावयवता, भौतिक गुणधर्म, विरचन की विधियाँ, रासायनिक अभिक्रियायें-हाइड्रोजन, हैलोजन, जल और हाइड्रोजन हैलाइड (मार्कोनीकॉफ के योग का नियम और पराक्साइड प्रभाव) का योग, ओजोनीकरण, आक्सीकरण, इलेक्ट्रान स्नेहीं योग की क्रियाविधि।
एल्काइन- नाम पद्धति, त्रिक आबंध की संरचना (एथाइन), भौतिक गुणधर्म, विरचन की विधियाँ, रासायनिक अभिक्रियायें- ऐल्काइनों की अम्लीय प्रकृति, हाइड्रोजन, हैलोजेन, हाइड्रोजन हैलाइड तथा जल के साथ योगात्मक अभिक्रियायें। ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन-परिचय, IUPAC नाम पद्धति, बेन्जीन- अनुनाद, एरोमैटिकता, रासायनिक गुण-धर्म, इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन की क्रियाविधि, नाइट्रेशन, सल्फोनेशन, हैलोजेनीकरण, फ्रीडल क्राफ्ट अभिक्रिया, ऐल्किलन एवं ऐसीटिलन, एकल प्रतिस्थापित बेन्जीन में क्रियात्मक समूह का निर्देशात्मक प्रभाव, कैंसरजनीयता और विषाक्तता।
रसायन विज्ञान प्रयोगात्मक परीक्षा
कक्षा-11 (प्रायोगिक कार्य)
| परीक्षा की मूल्यांकन योजना | पूर्णांक | |
| 1 | विषय वस्तु आधारित प्रयोग (1-4 तक) | 04 |
| 2 | आयतनमितीय विश्लेषण (5) | 08 |
| 3 | गुणात्मक विश्लेषण (6) (क) लवण विश्लेषण (ख) कार्बनिक योगिकों में तत्व का विश्लेषण | 06 02 |
| 4 | कक्षा रिकार्ड तथा प्रोजेक्ट कार्य | 05 |
| 5 | मौखिक परीक्षा | 05 |
| योग | 30 |
1. ग्लास नली या छड़ का काटना 2. ग्लास नली को मोड़ना 3. ग्लास नली से ग्लास जैट बनाना 4. कार्क में छेद करना
(2) रासायनिक पदार्थों का शोधन एवं लक्षण जैसे 1. कार्बनिक पदार्थों के गलनांक बिन्दु ज्ञात करना 2. कार्बनिक पदार्थों के क्वथनांक बिन्दु ज्ञात करना 3. निम्न में से किसी एक अशुद्ध प्रतिदर्श से क्रिस्टलन विधि द्वारा शुद्ध रूप में प्राप्त करना - फिटकरी, कापर सल्फेट, बेन्जोइक अम्ल
(3) pH परिवर्तन से सम्बंधित प्रयोग (कं) निम्न प्रयोगों में से कोई एक -
• फलों के रस, अम्लों, क्षारकों और लवणों की विभिन्न ज्ञात सान्द्रताओं के विलयनों का pH पत्र अथवा सार्वत्रिक सूचक द्वारा pH ज्ञात करना।
• समान सान्द्रण वाले प्रबल एवं दुर्बल अम्लों के विलयनों के pH मानों की तुलना करना। • सार्वत्रिक सूचक का प्रयोग करते हुए प्रबल अम्ल का प्रबल क्षार के साथ अनुमापन करने में pH परिवर्तन का अध्ययन करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 55(ख) दुर्बल अम्लों एवं दुर्बल क्षारों के लिए समआयन प्रभाव के द्वारा pH मान परिवर्तन का अध्ययन करना।
(4) रासायनिक साम्य निम्न में से कोई एक प्रयोग करना है - (1ं) फेरिक तथा थायो साइनेट आयनों वाले विलयनों की सान्द्रताओं में परिवर्तन (कमी या वृद्धि) करते हुए फेरिक आयनों तथा थायो साइनेट आयनों के मध्य साम्य में विस्थापन का अध्ययन करना।
(2) क्लोराइड आयन तथा हाइड्रेटेड कोबाल्ट आयन [Co(H2O)6]3+ वाले विलयनों की सान्द्रताओं में परिवर्तन करते हुए विलयनों के मध्य साम्य विस्थापन का अध्ययन करना।
(5) मात्रात्मक निर्धारण
• रासायनिक तुला का उपयोग करना सीखना • आक्सेलिक अम्ल का मानक विलयन तैयार करना • आक्सेलिक अम्ल के मानक विलयन के विरूद्ध अनुमापन द्वारा दिये गए अज्ञात सान्द्रण वाले सोडियम हाइड्रोक्साइड विलयन की सान्द्रता ज्ञात करना।
• सोडियम कार्बोनेट विलयन का मानक विलयन तैयार करना • सोडियम कार्बोनेट के मानक विलयन के विरूद्ध अनुमापन द्वारा दिए गए अज्ञात हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विलयन की सान्द्रता ज्ञात करना।
+
22 2 2
3 3 4
3
432
| इकाई | शीर्षक | अ ं क भार |
| 1 | सजीव जगत की विविधता | 07 |
| 2 | जंतुओं और पौधों की संरचनात्मक संघटना | 12 |
| 3 | कोशिका : संरचना और कार्य | 15 |
| 4 | पादप कार्यिकी | 18 |
| 5 | मानव कार्यिकी | 18 |
| योग | 70 |
इकाई - 1 सजीव जगत की विविधता 07 अंक
(i) सजीव जगत -
जैव विविधता, वर्गीकरण की आवश्यकता, जीवन के तीन डोमेन, वर्गिकी एवं वर्गीकरण विज्ञान, जातियों की संकल्पना एवं वर्गिकीय क्रमबद्धता, द्विनामनामकरण पद्धति,
(ii) जीव जगत का वर्गीकरण - पाँच जगत वर्गीकरण, मोनेरा, प्रोटिस्टा एवं फंजाई के प्रमुख लक्षण एवं प्रमुख समूहों में वर्गीकरण : लाइकेन, वाइरस एवं वाइराइड्स।
(iii) वनस्पति जगत - पौधों के प्रमुख लक्षण एवं प्रमुख समूहों में वर्गीकरण तथा उनके उदाहरण - एल्गी, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म (iv) जंतु जगत जंतुओं के प्रमुख लक्षण एवं वर्गीकरण, नानकार्डेट्स संघ तक एवं कार्डेट्स वर्ग तक (तीन से पाँच प्रमुख लक्षण एवं प्रत्येक के कम से कम दो उदाहरण)।
इकाई - 2 जंतुओं और पौधों की संरचनात्मक संघटना 12 अंक
(i) पुष्पी पौधों की शारीरिकी -
शारीरिकी
(ii) पुष्पी पौधों की आकारिकी - पुष्पी पादपों के विभिन्न भागों- जड़, तना, पत्ती, पुष्पक्रम, पुष्प, एक फैमिली का वर्णन-सोलेनेसी (iii) जंतुओं की संरचनात्मक संघटना - मेढ़क- विभिन्न तंत्रों (पाचन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, जनन तंत्र) की बाह्य आकारिकी एवं शारीरिकी तथा कार्य।
इकाई - 3 कोशिका : संरचना एवं कार्य 15 अंक
(i) कोशिका जीवन की इकाई -
कोशिका सिद्धान्त एवं कोशिका जीवन की आधारभूत इकाई, प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिका की संरचना, पादप एवं जंतु कोशिका, कोशिका झिल्ली, कोशिका भित्ती, कोशिका अंगक (संरचना एवं कार्य) - एंडोमैम्ब्रेन सिस्टम, अन्तः प्रद्रव्यी जालिका, गाल्जी काय, लाइसोसोम्स, रिक्तिका, माइटोकांड्रिया, राइबोसोम, लवक, माइक्रोबॉडीज, कोशिका कंकाल, सीलिया, फ्लैजिला, सैन्ट्रिओल्स (संरचना और कार्य) केन्द्रक, केन्द्रककला, क्रोमेटिन, केन्द्रिक।
(ii) जैविक अणु - सजीव कोशिकाओं का रासायनिक संगठन, जैविक अणु, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, न्यूक्लिक अम्ल की संरचना और कार्य। एन्जाइम-प्रकार। गुण एवं एन्जाइम क्रिया।
(iii) कोशिका चक्र एवं कोशिका विभाजन - कोशिका चक्र, सूत्री एवं अर्द्धसूत्री विभाजन एवं महत्व। इकाई - 4 पादप कर्यिकी 18 अंक (i) उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण - प्रकाश संश्लेषण स्वपोषी पोषण का एक माध्यम, प्रकाश संश्लेषण का क्षेत्र, प्रकाश संश्लेषण में प्रयुक्त वर्णक (प्रारम्भिक ज्ञान), प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश रासायनिक एवं जैव संश्लेषी प्रावस्था, चक्रीय एवं अचक्रीय फोटोफास्फोराइलेशन, रसायनी परासरण परिकल्पना, प्रकाशीय श्वसन, C3 एवं C4 पथ, प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक।
(ii) पौधों में श्वसन गैसों का आदान-प्रदान, कोशिकीय श्वसन- ग्लाइकोलिसिस, किण्वन (अवायवीय), TCA चक्र एवं इलैक्ट्रानिक स्थानान्तरण तंत्र (वायवीय), ऊर्जा सम्बन्ध - उत्पादित ATP अणुओं की संख्या, एंफीबोलिक पथ, श्वसन गुणांक।
(iii) पादप वृद्धि एवं परिवर्धन बीजों का अंकुरण, पादप वृद्धि की प्रावस्थाएं एवं पादप वृद्धि दर, वृद्धि-की-परिस्थितियाँ, विभेदीकरण- विविभेदीकरण, पुनर्विभेदीकरण-पादप कोशिका के विकास का वृद्धि क्रम, वृद्धि नियंत्रक-आक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, इथाइलीन, एबसिसिक एसिड (ABA),
इकाई - 5 मानव कार्यिकी 18 अंक (i) श्वसन एवं गैसों का विनिमय - जंतुओं में श्वसनांग, मानव का श्वसन तंत्र, श्वसन की क्रियाविधि एवं इसका नियंत्रण, गैसों का विनिमय, गैसों का परिवहन एवं श्वसन का नियमन, श्वसनीय आयतन, श्वसन के विकार - दमा, इम्फाइसिमा, व्यावसायिक श्वसन रोग।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 57(ii) परिसंचरण एवं देह तरल - रूधिर की संरचना, रूधिर वर्ग, रूधिर का जमना, लसिका की संरचना एवं कार्य, मानव परिसंचरण तंत्र-मानव हृदय की संरचना एवं रूधिर वाहिकाएं, कार्डियक चक्र (हृद चक्र) कार्डिएक आउट पुट, ई0सी0जी0, दोहरा परिसंचरण, हृद क्रिया का नियमन, परिसंचरण की विकृतियाँ-उच्च रक्त चाप, हृद धमनी रोग, एंजाइना पैक्टोरिस, हार्टफेल्योर। (iii) उत्सर्जी उत्पाद एवं निष्कासन उत्सर्जन की विधियाँ - एमीनोटेलिज्म, यूरिओटेलिज्म, यूरिकोटेलिज्म मानव उत्सर्जी तंत्र-संरचना और कार्य, मूत्र निर्माण, परासरण नियंत्रण, वृक्क क्रियाओं का नियमन रेनिन-एंजियोटेंसिन, अलिंदीय निट्रियेरेटिक कारक, ADH एवं डाइबिटीज इंसिपिडस, उत्सर्जन में अन्य अंगों की भूमिका, विकृतियाँ-यूरिमिया, रीनल फेलियर, रीनल केलकलाई, नैफ्राइटिस, डाइलिसिस एवं कृत्रिम वृक्क।
(iv) गमन एवं संचलन गति के प्रकार- पक्ष्माभि, कशाभि, पेशीय, कंकाल पेशियाँ- संकुचनशील प्रोटीन एवं पेशी संकुचन, कंकाल तंत्र एवं इसके कार्य, (प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम से सम्बन्धित प्रयोगों के साथ कराया जाय) संधियां पेशी और कंकाल तंत्र के विकार माइस्थेनिया ग्रेविष, टिटेनी, पेशीय दुष्पोषण, संधि शोथ, अस्थिसुषिरता, गाउट।
(v) तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वयन तंत्रिका कोशिका एवं तंत्रिकाएं, मानव का तंत्रिका तंत्र, केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, परिधीय तंत्रिका तंत्र, विसरल तंत्रिका तंत्र, तंत्रिकीय प्रेरणाओं का उत्पादन एवं संवहन
(vi) रासायनिक समन्वयन एवं नियंत्रण अन्तःस्त्रावी ग्रंथियाँ और हारमोन, मानव अन्तःस्त्रावी तंत्र-हाइपोथैलेमस, पीयूष, पीनियल, थायराइड, पैराथायराइड, एड्रीनल, अग्नाशय, जनद। हारमोन्स की क्रियाविधि (प्रारम्भिक ज्ञान) दूतवाहक एवं नियंत्रक के रूप में हारमोन्स का कार्य, अल्प एवं अतिक्रियाशीलता एवं सम्बन्धित विकृतियाँ-बौनापन, एक्रोमिगेली, क्रिटीनीज्म, ग्वाइटर, एक्सोप्थैलेमिक ग्वाइटर, मधुमेह, एडीसन रोग।
समय-3 घंटा
प्रयोगात्मक अंक-30
(क) प्रयोगों की सूची 1. जड़ के प्रकार (मूसला अथवा अपस्थानिक), तना (शाकीय अथवा काष्ठीय), पत्ती (व्यवस्था, आकृति, शिराविन्यास-सरल अथवा संयुक्त)।
2. द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री जड़ और तने की अनुप्रस्थ काट (स्लाइड) तैयार करना और उनका अध्ययन करना।
3. एक सामान्य पुष्पी पौधों (कुल-सोलेनेसी) का अध्ययन एवं वर्णन, पुष्प का विच्छेदन एवं पुष्पी चक्रों, अण्डाशय एवं परागकोष के कक्षों का प्रदर्शन (पुष्प सूत्र एवं पुष्प आरेख),
4. पेपर क्रोमेटोग्राफी द्वारा पादप वर्णकों को पृथक करना। 5. पुष्प मुकुलों, पत्ती, ऊतक एवं अंकुरणशील बीजों में श्वसन की दर का अध्ययन करना। 6. मूत्र में शर्करा की उपस्थिति ज्ञात करना। 7. मूत्र में एलब्यूमिन की उपस्थिति ज्ञात करना। 8. एपिडर्मिस छिलकों उदाहरण रियो पत्तियों में प्लाजमोलिसिस का अध्ययन करना। 9. पत्तियों की ऊपरी और निचली सतहों पर वाष्पोत्सर्जन की दर का तुलनात्मक अध्ययन करना। 10. शर्करा, स्टार्च, प्रोटीन और वसा की उपस्थिति के लिये परीक्षण करना। 11. आलू के परासरण मापी द्वारा परासरण का अध्ययन करना। 12. पत्तियों में ऊपरी और निचली सतहों पर रन्ध्रों का वितरण। 13. मूत्र में बाइल साल्ट की उपस्थिति ज्ञात करना। 14. मूत्र में यूरिया की उपस्थिति का परीक्षण करना। (ख) निम्नलिखित (स्पाटिंग) का अध्ययन/प्रेक्षण
1. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के भागों का अध्ययन। 2. प्रतिरूपों/स्लाइड/मॉडल का अध्ययन एवं कारण बताते हुये उनकी पहचान करना-जीवाणु, ऑसिलेटोरिया, स्पाइरोगाइरा, राइजोपस, मशरूम, यीस्ट, लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, पाइन, एक-एकबीजपत्री एवं द्विबीजपत्री पौधा, लाइकेन।
3. विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रमों की पहचान तथा अध्ययन। (साइमोज तथा रेसीमोज) 4. प्रतिरूपों का अध्ययन एवं कारण बताते हुये पहचान करना-अमीबा, हाइड्रा, लीवरफ्लूक, एस्केरिस, जोंक, केंचुआ, झींगा, रेशमकीट, मधुमक्खी, स्नेल, स्टारफिश, शार्क, रोहू, मेढक, छिपकली, कबूतर एवं खरगोश। 5. स्थायी स्लाइड की सहायता से प्याज के मूलाग्र की कोशिकाओं एवं जंतु कोशिका (टिड्डे) की कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन का अध्ययन।
6. मानव कंकाल तथा विभिन्न प्रकार की संधियों का अध्ययन।
8 ङ58 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (i)
6 (ii)
2 (i)
ड
(ii)
(i)
(ii)
(i) (ii)
23 (i) (ii)
(iii) सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम और व्यावसायिक उद्यमिता
(i)
3 ii
6
(i) -
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- – , ,भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 59 ड– ,
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(iii) सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम और व्यावसायिक उद्यमिता
सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग-सामान्य परिचय। भारत में सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यम की भूमिका एवं
समस्या। उद्यमिता विकास- परिचय एवं विशेषताएं व्यवस्थित गतिविधि, वैध एवं उद्देश्यपूर्ण गतिविधि,
नवाचार, उत्पादन प्रबंध, जोखिम उठाना। बौद्धिक सम्पदा अधिकार (I.P.R) आशय (परिचय), महत्व एवं
प्रकार-प्रकाशनाधिकार, व्यापार चिन्ह, भौगोलिक संकेत, पेटेंट, डिजाइन, पौधों की किस्में, अर्धचालक एकीकृत
परिपथ खाका डिजाइन।
3
i :
– –
ii :
60 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(i) (ii)
2
(i) (ii)
(i)
(ii)
(i)
(ii)
(i) ड (ii) ड
=
iii
2
1.1
1.2 6
11
1.3
13
1.4
1.5 15
2.1 (GAAP) 23
24
2.2भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 61 25
2.3
35
2.4
15
2.5
43
3.1
47
3.2
50
3.3
58
3.4
68
3.5
71
3.6
98
4.1
126
4.2 ()
129
4.3 ()
131
4.4 ()
133
4.5 ()
140
4.6
142
4.7
198
6.1
199
6.2
202
6.3
207
6.4
210
6.5
210
6.6
246
7.1
250
7.2
250
7.3
252
7.4
7.5 252
7.6 255
7.7 259
261
7.8
271
7.9 /
7.10 283
286
7.11
289
7.12
293
7.1362 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 –
9.1 357 9.2
9.3
9.4 9.5
9.6 -
9.7
10.1 10.2
10.3
10.4
10.5
10.6
10.7
10.8 ड
10.9 10.10 10.11
10.12
359 361 363 377 381 389
401 403 405 407 408 410 411 412 414 417 418 421 10.13 448 ड 14.1 ड
543
14.2 ड 544 14.3 -ड(00 ड) 14.4 ड
14.5 ड 545 555 557
14.6 डड 560 14.7 ड 14.8 14.9 ड 562 565 565
14.10 ड 568 14.11 ड-
577
7 ड 15.1 00 595 15.2 ड 601 15.3 15.4 15.5 607 630 638भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 63
कृषि-शस्य विज्ञान
कक्षा-11
(घ) कृषि वर्ग
भाग-1
(प्रथम वर्ष)
हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी- हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम व पुस्तकों की स्थिति वही रहेगी जो इस विवरण-पत्रिका में अनिवार्य विषय के अन्तर्गत ''मानविकी वर्ग'' के लिये निर्धारित है। परन्तु हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय की परीक्षा कृषि, भाग-एक (प्रथम वर्ष) में नहीं ली जायेगी। इस विषय की परीक्षा कृषि, भाग-दो (द्वितीय वर्ष) में दो वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर ली जायेगी।
कृषि-शस्य विज्ञान
प्रथम प्रश्न-पत्र
50 अंक
(शस्य विज्ञान-साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद)
सिद्धान्त- यूनिट 1
15 अंक फार्म की साधारण फसलें-गेहूं, धान, कपास, ज्वार, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, सरसों, अरहर, मटर, मूंगफली, सूर्यमुखी, चना, तम्बाकू, बरसीम, आलू और गन्ने का निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत अध्ययन- संस्तुत प्रजातियां, उनके मुख्य गुण, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्र, बोने का समय, बीज दर, बोने की विधि, खाद देना, सिंचाई करना, फसल रक्षा उपर्युक्त फसलों के खर-पतवार उनके नियंत्रण, मुख्य कीट एवं रोगों के लक्षण तथा निवारण, फसल काटना, मड़ाई, उपज तथा इनका बीजोत्पादन। यूनिट 2
10 अंक मिटि्टयां-मिटि्टयों की उत्पत्ति, मिटि्टयों का वर्गीकरण-बजरीली, बलुई, दोमट, सिल्ट तथा चिकनी मिट्टी, मिट्टी के भौतिक गुण। मिट्टी की रचना पर भौतिक एवं रासायनिक कारकों का प्रभाव। भूमि संरक्षण की विभिन्न विधियों के मूल सिद्धान्त। यूनिट 3
15 अंक खाद तथा खाद देना, पौधे की वृद्धि के लिये आवश्यक पोषक तत्व, खेत की मुख्य फसलों द्वारा मिट्टी से ली जाने वाली नाइट्रोजन, फासफोरस तथा पोटाश की मात्रा, खाद देने की आवश्यकता, जैव तथा अजैव खादें, फसलों तथा मिटि्टयों पर उनके प्रभाव सम्बन्धी अन्तर, खाद तथा उर्वरकों के डालने की विधियां, गोबर की खाद तथा कम्पोस्ट खाद का संरक्षण, हरी खाद की फसलें और उनके उपयोंग। निम्न खादों का अध्ययन, उर्वरकों एवं उनके प्रयोग विधियां- गोबर की खाद, कम्पोस्ट अरण्डी की खली, मूंगफली की खली, यूरिया, अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट, राक फास्फेट, पोटैशियम सल्फेट, म्यूरेट आफ पोटाश, मिश्रित खाद, डाई अमोनिया फास्फेट तथा जैविक खादें-बर्मीकल्चर ब्लू ग्रीन एल्गी, राईजोवियम कल्चर। यूनिट-4 (1) भूमि प्रयोग, जनसंख्या दबाव, वनों की क्षीणता, चारागाहों एवं फसलों
10 अंक 03 अंक का पर्यावरण पर प्रभाव।
(2) पर्यावरण की सामान्य जानकारी। पर्यावरण प्रदूषण का जलवायु, मृदा 03 अंक और आधुनिक कृषि पर प्रभाव, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के उपाय।
(3) नहरों द्वारा सिंचाई और जल क्रान्ति। 02 अंक (4) उर्वरकों एवं फसल सुरक्षा रसायन के प्रयोग का पर्यावरण पर प्रभाव। 02 अंक
प्रयोगात्मक
50 अंक
अंक की गणना-विभिन्न फसलों के लिये आवश्यक N. P. K. के आधार पर विभिन्न खादों एवं उर्वरकों की मात्रा का निर्धारण- उन फसलों का जो सैद्धान्तिक के अन्तर्गत दी है उगना और देखभाल, निम्न क्रियाओं का अभ्यास- (क) हल, कल्टीवेटर, हैरो, पाटा तथा रोलर से खेत तैयार करना। (ख) हाथ तथा सीड ड्रिल से बीज बोना। (ग) सिंचाई। (घ) हाथ तथा बैल चालित यंत्रों से निराई तथा गुड़ाई। (ङ) बैल चालित औजारों से मिट्टी चढ़ाना। (च) मड़ाई, ओसाई तथा चारा काटना।
64 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(छ) मिटि्टयों, बीजों, खर-पतवारों, खादों तथा उर्वरकों की पहचान। (ज) विभिन्न विधियों से खाद तथा उर्वरक देना। (झ) फसलों की उत्पादन लागत की गणना। () छात्र राजकीय फार्मों तथा किसानों की जोतों का अध्ययन करने भ्रमणार्थ जायेंगे। (ट) फार्म पर किये गये कार्य तथा भ्रमण स्थानों के अध्ययन का अभिलेख रखा जायेगा।
पुस्तकें-कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
शस्य विज्ञान (कृषि भाग-1) अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन निर्धारित अंक
1-बीज शैय्या का निर्माण 07 अंक 2-मौखिकी 08 अंक 3-(क) आंकिक प्रश्न द्वारा खाद की गणना करना 05 अंक (ख) फसलों की उत्पादन लागत की गणना करना 05 अंक
कुल -25 अंक 2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन 1-बीज, खर-पतवार खाद तथा फसलों की पहचान 10 अंक 2-अभ्यास पुस्तिका 08 अंक 3-प्रोजेक्ट 07 अंक कुल - 25 अंक
नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
कृषि-वनस्पति विज्ञान
कक्षा-11
द्वितीय प्रश्न-पत्र
50 अंक 15 अंक 1-सिद्धान्त इकाई-1 1-वनस्पति पादप अंगों की वाह्य आकारिकी-मूल स्तम्भ और पर्ण, उनके कार्य और रूपान्तर। 2-पुष्प की संरचना तथा उनके विभिन्न भागों का कार्य, पुष्पक्रम के विभिन्न प्रारूप। 3-परागण-परागण का प्रारूपिक अध्ययन विधि तथा क्रियाविधि। 4-निषेचन-क्रिया विधि का अध्ययन एवं द्विनिषेचन का महत्व। 5-फल के प्रारूप, उनके कार्य तथा प्रकीर्णन। 6-बीज की संरचना तथा अंकुरण (एक बीज पत्री तथा द्विबीज पत्री बीजों का प्रारम्भिक अंकुरण) बीज के प्रारूप, कार्य और प्रकीर्णन। बीज अंकुरण को प्रभावित करने वाले कारक। इकाई-2 10 अंक
10 अंक अन्तः आकारिकी-वनस्पति कोशिका संरचना, कोशिका के अन्तर्वस्तु, कोषकीय विभाजन ''सूत्रीय विभाजन (माइटोसिस) एवं अर्धसूत्रीय विभाजन (मियोसिस)' कोशिकाओं का ऊतक के रूप में संगठन तथा विभिन्न ऊतकों के कार्य। एक बीजपत्री और द्विबीज-पत्री मूल, स्तम्भ तथा पर्ण की आन्तरिक आकारिकी द्विबीज-पत्री, स्तम्भ और मूल में द्वितीय वृद्धि (Secondary Growth)। इकाई-3 1-पादप शरीर क्रिया (केवल प्रारम्भिक अध्ययन)। 2-(क) जल का पौधों द्वारा अन्तगर््रहण, मूल की संरचना। (ख) वाष्पोत्सर्जन तथा मूलीय दाब, उसका कार्य और महत्व।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 65(ग) कार्बन स्वांगीकरण, रंध्रों की संरचना और कार्य, कार्बन स्वांगीकरण की दक्ष कार्य क्रिया में सहायक कारक। (घ) प्रकाश संश्लेषण एवं पौधे-खाद्य पदार्थों का संग्रह एवं स्थानान्तरण। (ङ) श्वसन के प्रारूप और कार्य। इकाई-4 08 अंक वर्गीकरण वनस्पति विज्ञान और वनस्पति जगत का प्रारम्भिक परिचय जहां तक सम्भव हो सके क्षेत्रीय उद्यान के सामान्य पौधोें के वानस्पतिक (लक्षणों का अध्ययन) ग्रेमिनी, क्रूसीफेरी, लेगुमनेसी, कुकुरविटेसी, सोलैनेसी, माल्वेसी।
इकाई-5 07 अंक सूक्ष्म जैविकी का प्रारम्भिक अध्ययन- (क) वायरस। (ख) ब्लू ग्रीन एल्गी। (ग) फंजाई। (घ) वैक्टीरिया। (ङ) जन्तु (सूक्ष्म)।
प्रयोगात्मक
50 अंक
1-प्राथमिक अंगों के वाह्य अकारिकी का अध्ययन करने के लिये नवोद्भिद् का परीक्षण। 2-मूल, स्तम्भ तथा पर्ण के विभिन्न प्रारूपों के भागों और रूपान्तरों का अध्ययन। 3-सूक्ष्मदर्शी का प्रयोग। 4-प्रारूपिक एक बीज-पत्री तथा द्विबीज-पत्री, मूल और स्तम्भ का अभिरंजन अभ्यास के साथ मुक्तहस्त काट (कटिंग)। 5-बीजों का अध्ययन वाह्य तथा आन्तरिक, विभिन्न प्रकार के अंकुरण। 6-फलों तथा बीजों का परीक्षण और अभिज्ञान। आर्थिक एवं कृषि महत्व। 7-पादप शरीर क्रिया के वाष्पोत्सर्जन, कार्बन स्वांगीकरण प्रकाश संश्लेषण तथा श्वसन से सम्बन्धित साधारण प्रयोगों के प्रदर्शन।
8-पुष्पों और उनके भागों का परीक्षण, विच्छेदन और वर्णन। 9-पाठ्य विषय में दिये हुये फूलों के सामान्य क्षेत्रीय उद्यान के पौधों और आप्तृण के वाह्य वानस्पतिक लक्षणों का अध्ययन और अभिज्ञान।
10-पादक संग्रह (Plant Herbarium)। 11-ग्रेमिनी कुल, कुकुर विटेसी, मालवेसी कुल का वर्णन।
पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
वनस्पति विज्ञान (कृषि भाग-1)
अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 04 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन निर्धारित अंक
1-वस्तु पहचान 07 अंक 2-मौखिकी 08 अंक 3-किसी एक फूल तथा पौधों की पहचान 05 अंक 4-जड़ों की अनुप्रस्थ काट एवं एक रंगीन स्लाइड 05 अंक कुल-25 अंक 2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन 1-अभ्यास पुस्तिका 08 अंक 2-वनस्पति कार्य का परीक्षण 10 अंक 3-प्रोजेक्ट 07 अंक कुल-25 अंक नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
9 ङ66 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
कृषि-भौतिक एवं जलवायु विज्ञान
कक्षा-11
तृतीय प्रश्न-पत्र
सिद्धान्त
इकाई-1-सामान्य मात्रक, मापन, विमा, विमा के उपयोग, वर्नियर तथा सूक्ष्म मापी पैमाने, बलों का संगठन और विघटन बल, समान्तर बल, बल युग्म, बल का घूर्ण, बल साम्यवस्था। 10 अंक इकाई-2-वेग तथा त्वरण, संवेग, गति के नियम, गुरुत्वाधीन गति, गुरुत्वाजनित त्वरण, वृत्तीय गति, अपकेन्द्रीय तथा अभिकेन्द्रीय बल। उपग्रह का कक्षीय वेग, पलायन वेग, द्रवों पर दाब, कोशित्व तथा बल, तनाव, वायु मण्डलीय दाब, वायुदाबमापी, ठोस द्रव का आपेक्षिक घनत्व, घनत्व बोतल, निक्ल्सन हाइड्रोमीटर।
10 अंक इकाई-3-घर्षण और उनके नियमों के सरल उदाहरण, सरल मशीनें जैसे घिरी तथा उत्तोलक। साधारण पम्पों का कार्य चालन, कार्य शक्ति तथा ऊर्जा, ऊष्मा तथा ताप संवहन, संचालन तथा विकिरण ऊष्मा चालकता गुणांक, ऊष्मा, संवाहकर्ता, आपेक्षिक ऊष्मा, मिटि्टयों के विशेष संदर्भ में। ऊष्मा के कारण मिट्टी में भौतिक परिवर्तन, गुप्त ऊष्मा एवं कार्य में सम्बन्ध, औसांक, अपेक्षिक आदर््रता और इसका निवारण मेघ, कुहरा, कुहसा, पाला, हिम, ओला आदि की रचना मौसम पूर्वानुमान पर प्रारम्भिक विचार ऊष्मा और कार्य से सम्बन्ध।
10 अंक इकाई-4-प्रकाश संचरण के नियम, सम तथा गोली तलों से परावर्तन तथा वर्तन ताल (लेन्स) सूक्ष्मदर्शी अवरक्त, पराबैगनी तथा दृश्य विकिरण पर प्रारम्भिक विचार। व्यक्तिकरण एवं ध्रुवण की संक्षिप्त जानकारी, ध्वनि वेग आवृत्ति तरंग दैध्र्य में सम्बन्ध, अनुप्रस्थ, अनुदैध्र्य तरंग की परिभाषा, आवृत्ति तरंग, दैध्र्य में सम्बन्ध, अनुप्रस्थ, अनुदैध्र्य तरंग की परिभाषा, आवृत्ति आवर्तकाल में सम्बन्ध।
10 अंक इकाई-5-विद्युत् प्राथमिक तथा संचालक सेल, धारा, वोल्टता और प्रतिरोध विद्युत् शक्ति, शक्ति की यांत्रिक एवं विद्युत् मापकों के सम्बन्ध, विद्युत् मात्रक, विद्युत् के उपयोग। व्हीट स्टोन सेतु का सिद्धान्त, मीटरसेतु पोस्ट आफिस बाक्स, विभवमापी का संक्षिप्त अध्ययन।
10 अंक 50 अंक प्रयोगात्मक लम्बाई क्षेत्रफल सहित आयतन तथा घनत्व का शुद्ध निर्धारण, कैलीपर्स, पेंचमापी, तुला तथा वर्गीकृत-पत्र का प्रयोग, समान्तर चतुर्भुज का नियम का सत्यापन, उत्तोलक के सिद्धान्त का सत्यापन, द्रवों का आपेक्षिक घनत्व निकालना, ब्वायल वायुदाब मापी (बैरोमीटर) पढ़ने का अभ्यास। घनत्व बोतल का प्रयोग, यथार्थ तथा आभासी घनत्वों का निकालना एवं मिट्टी का रंध्रावकाश। विभिन्न तापमापक के गठन का अभ्यास, विशिष्ट ऊष्मा निकालना, गुप्त ऊष्मा निकालना, ओसांक तथा आपेक्षिक आदर््रता निकालना। प्रकाश का परावर्तन तथा वर्तन दर्पण के तालों (लेन्सों) का नाभ्यांतर (फोकस दूरी) निकालना, वर्तनांक निकालना। साधारण सेल बनाना, वोल्टामापी तथा अमापी की विधि एवं मीटर सेतु से प्रतिरोध की माप श्रेणी तथा माप समान्तर क्रम में लैम्पों का जोड़ना, पोस्ट आफिस, बाक्स आफिस द्वारा दिये गये अज्ञात प्रतिरोध का मान ज्ञात करना। संस्तुत पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान, विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
भौतिक एवं जलवायु विज्ञान (कृषि भाग-1) अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन निर्धारित अंक
1-एक प्रमुख एवं एक सहायक परीक्षण (10+7) 17 अंक 2-मौखिकी 08 अंक कुल- 25 अंक 2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन 1-अभ्यास पुस्तिका 08 अंक 2-प्रोजेक्ट तथा इस पर आधारित मौखिकी 10 अंक 3-सत्रीय प्रयोगात्मक कार्य 07 अंक कुल- 25 अंक व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 67कक्षा-11
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 50 अंक
(कृषि अभियन्त्रण)
सिद्धान्त
इकाई-1-कृषि यन्त्रों को बनाने में प्रयोग होने वाले लोहा (ढलवा लोहा, मृदु इस्पात, उच्च कार्बनयुक्त इस्पात), लकड़ी (साखू, शीशम, आम, बबूल) प्लास्टिक तथा टिन के प्रकार, विशेषता तथा गुण-दोष का अध्ययन।
05 अंक इकाई-2-हल-हलों के विभिन्न प्रकार यथा-देशी हल, मेस्टन हल, केयर हल, सावाश हल, वाहवाह हल, यू0 पी0 नं0-1 तथा यू0 पी0 नं0-2 हल, विक्ट्री हल, प्रजा हल-इनकी बनावट विभिन्न भाग एवं उनके कार्य रचना में प्रयोग होने वाली सामग्री, चौड़ाई, गहराई कम अधिक करना, खड़ी तथा पड़ी झिरी उनके कार्य, कार्य करते समय आवश्यक समन्जन एवं सावधानियां, विभिन्न हलों का तुलनात्मक अध्ययन, प्रचलन में व्यावहारिक बाधायें।
04 अंक इकाई-3-(अ) अन्य कृषि यन्त्र-कल्टीवेटर, हो, हैरो, खुरचनी (स्क्रेपर), पाटा, बीज तथा उर्वरक, ड्रिल, स्प्रेयर, डस्टर, त्रिफाली, बलचालित कटाई यन्त्र, शक्तिचालित थे्रसर, ओसाई पंखा के विभिन्न भाग एवं उनके कार्य। ट्रैक्टर-उसके प्रयोग, ट्रैक्टर चालन में आने वाली सामान्य समस्यायें और उनका निवारण। 03 अंक (ब) हस्त चालित तथा शक्ति चालित कुट्टी काटने की मशीन, बैल चालित तथा शक्ति चालित गन्ना, कोल्हू, बैल चालित आलू खोदक यन्त्र के कार्य प्रमुख भाग एवं उनके प्रयोग में सावधानियां एवं रख-रखाव
03 अंक इकाई-4-'डायनमोमीटर, उसकी बनावट और प्रयोग विधि तथा खिंचाव पर प्रभाव डालने वाले कारक। शक्ति चयन के खिंचाव के प्रभाव का महत्व तथा अश्व सामथ्र्य और उस पर आधारित आंकिक गणना का अध्ययन।''
10 अंक इकाई-5-(अ) जल उत्पादक (वाटर लिफ्टर), सेन्ट्रीफ्यूगल पम्प, टरबाइन पम्प, सबमर्सिबल (जलप्लवनीव) पम्प की बनावट, कार्य विधि, जल निष्कासन की मात्रा प्रतिदिन सिंचित क्षेत्रफल रुकावट एवं निदान, सावधानियां तथा रख-रखाव।
05 अंक (ब) एक सिलिण्डर डीजल इंजन एवं विद्युत् मोटर की बनावट, शक्ति उत्पन्न करने की कार्य विधि, साधारण व्यवधान तथा निदान, इंजन मोटर का चयन, रख-रखाव तथा सावधानियां। 05 अंक (स) कृषि में तालाब, कुआं, नलकूप का महत्व, निर्माण विधि, कमाण्ड क्षेत्र एवं रख-रखाव। इकाई-6-भू-परिष्करण- 05 अंंंंंक (अ) कर्षण के उद्देश्य, विधि प्रकार, समय तथा रासायनिक एवं भौतिक प्रभाव। 05 अंंंंंक (ब) जुताई की विधियां, गुण-दोष तथा प्रभाव, अन्तः कृषि की आवश्यकता, विभिन्न फसलों में अन्तः, कृषि हेतु प्रयोज्य कृषि यन्त्रों के नाम, रासायनिक एवं भौतिक प्रभाव तथा कृषि यन्त्रो पर आधारित आंकिक गणना।
इकाई-7-पट्टा घिरी और गेयर द्वारा शक्ति प्रेषण की विधि, सीमायें, सावधानियां तथा रख-रखाव। चाल एवं माप ज्ञात करने सम्बन्धी सामान्य प्रश्नों की गणना।
50 अंक प्रयोगात्मक (1) कार्यशाला के विभिन्न औजारों का परिचय, उपयोग, सही प्रयोग विधि तथा रख-रखाव का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना एवं नामांकित चित्र बनाना। (2) आंकिक गणना, खिंचाव, अश्व सामथ्र्य, जुताई एवं शक्ति प्रेषण पर आधारित। (3) कार्यशाला में कार्य-
(क) काष्ठ शिल्प-हंसिया, दराती, खुरपी, कुदाल, फावड़ा आदि यंत्रों के बेंट बनाना तथा फिट करना। (ख) साधारण लौहशाला कार्य-शीतल लोहे के ऊपर कार्य, पेचकस बनाना, वोल्ट तथा नट में चूड़ी बनाना। (ग) गरम लोहे से विभिन्न आकार बनाना, धार धरना तथा लोहे के दो भागों को जोड़ना, कृषि यंत्रों को पीट कर पैना करना।
(घ) सोल्डर (झालन) के द्वारा टिन के विभिन्न आकारों जैसे कीप को जोड़ना। (ङ) विद्युत् अथवा गैस वेल्डिंग से लोहे के टुकड़े को जोड़ना।
(4) (अ) विभिन्न प्रकार के हल, हैरो, कल्टीवेटर, हो, कुट्टी काटने की मशीन, गन्ना कोल्हू, डस्टर, स्प्रेयर, थ्रेसर, कटाई यंत्र (रीपर), ओसाई पंखा, बीज तथा उर्वरक ड्रिल की बनावट तथा विभिन्न भागों का व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करना और नामांकित चित्र बनाना। (ब) डीजल इंजन, विद्युत् मोटर तथा सेन्ट्रीफ्यूगल पम्प की बनावट, विभिन्न भाग तथा कार्य विधि का व्यावहारिक अध्ययन और नामांकित चित्र बनाना। (5) उपर्युक्त क्रम-2 (अ) पर उल्लिखित यंत्रों को खोलना, बांधना तथा उनका समन्जन करना।
68 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(ब) डीजल इंजन/विद्युत् मोटर से चालित सेन्ट्रीफ्यूगल पम्प द्वारा कुंआ, तालाब व नलकूप से पानी उठाना, जलस्राव और सिंचित क्षेत्र का मापन तथा लागत की गणना करना।
(6) मेस्टन हल, शावास हल, कल्टीवेटर, हैरो, गन्ना कोल्हू, कुट्टी काटने का यंत्र, पावर थ्रेसर, कुटाई यंत्र से स्वयं कार्य करना।
(7) कृषि यंत्रों का खिंचाव, हलों का आकार, हलों की खड़ी झिरी तथा पड़ी झिरी (वर्टिकल एवं होरीजेन्टल सेक्शन) का मापन। संस्तुत पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें।
कृषि अभियन्त्रण (कृषि भाग-एक) अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - निर्धारित अंक (1) मौखिक 07 अंक (2) यंत्रों का समायोजन 03 अंक (3) वस्तु पहचान 05 अंक (4) अभियन्त्रीय परिकलन 10 अंक (शक्ति प्रेषण, जुताई एवं अश्व शक्ति पर आधारित)
कुल- 25 अंक 2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - (1) कार्यशाला अभ्यास 10 अंक (2) अभ्यास पुस्तिका 08 अंक (3) प्रोजेक्ट 07 अंक कुल- 25 अंक व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
कक्षा-11
50 अंक
पंचम प्रश्न-पत्र
(कृषि-गणित तथा प्रारम्भिक सांख्यिकी)
सिद्धान्त
1-बीजगणित-घातांक सिद्धान्त, लघु गुणकों का व्यावहारिक ज्ञान, विवरण, समान्तर, गुणोत्तर तथा हरात्मक श्रेणियां क्रम संचय तथा संचय पर सरल प्रश्न।
05 अंक 2-त्रिकोणमिति-वृत्तीय फलनों की परिभाषा तथा उनके कोणों 00, 300, 450, 900, 1800 के वृत्तीय फलनों के माप को 90+B 180+B तथा किसी भी चिन्ह और माप के कोण के लिये वित्तीय फलन। 05 अंक दो कोणों के योग और अन्तर के ज्या, कोज्या और स्पंज्या के त्रिकोणमितीय अनुपात, ज्या और कोज्या के गुणनफलों का योग और अन्तर के रूप में व्यक्त करना। ऊंचाई एवं दूरी पर आधारित सरल प्रश्न।
3-ठोस ज्यामिति-आयताकार, ठोस, बेलन, शंकु तथा गोला के आयतन और पृष्ठ को ज्ञात करने में सूत्रों का प्रयोग।
10 अंक 4-निर्देशांक ज्यामिति-कात्तीय निर्देशांक, दो बिन्दुओं के बीच की दूरी एवं उन्हें दिये हुये अनुपात में विभाजित करने वाले चिन्ह के निर्देशांक, त्रिभुजों का क्षेत्रफल सरल रेखाओं एवं वृत्तों या उनके समीकरणों से आलेखन तथा इन पर प्रश्न।
10 अंक 5-सांख्यिकी-आंकड़ों का संग्रह, वर्गीकरण तथा सारिणीकरण बारम्बारता बंटन, केन्द्रीय माप, समान्तर माध्य, माध्यिका, बहुलक, माध्य विचलन तथा मानक विचलन। टीटेस्ट, कोरिलेयन। 20 अंक संस्तुत पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 69शस्य विज्ञान कक्षा-11 शस्य विज्ञान विषय में एक प्रश्न-पत्र 70 अंको का होगा। लिखित परीक्षा के अतिरिक्त 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी।
35 पूर्णांक
खण्ड-क
(कृषि शस्य विज्ञान-साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद)
1-मिटि्टयां-मिटि्टयों की उत्पत्ति, मिटि्टयों की बजरी, बलुई, दोमट, सिल्ट तथा चिकनी मिट्टी का वर्गीकरण, मिट्टी के भौतिक गुण, मिट्टी की रचना पर भौतिक एवं रासायनिक कारकों का प्रभाव। भूमि संरक्षण की विभिन्न विधियों के मूल सिद्धान्त एवं भूमि संरक्षण से लाभ।
15 अंक 2-खाद तथा खाद देने की विधि, पौधों की वृद्धि के लिये आवश्यक पोषाहार, खेत की मुख्य फसलों द्वारा मिट्टी से ली जाने वाली नाइट्रोजन, फासफोरस तथा पोटाश की मात्रा, खाद देने का समय, जैव तथा अजैव खाद फसलों का मिटि्टयों पर प्रभाव, खाद तथा उर्वरकों के डालने की विधियां, गोबर की खाद तथा कम्पोस्ट खाद का संरक्षण, हरी खाद तैयार करने वाली फसलें और उनका भूमि पर प्रभाव, निम्न खादों का अध्ययन तथा प्रति हेक्टेयर मात्रा की गणना करना-
20 अंक गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, अरण्डी खली, मूंगफली की खली, अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट, पोटैशियम सल्फेट, यूरिया, सी0 ए0 एन0 तथा मिश्रित खाद, डाई अमोनियम सल्फेट।
खण्ड-ख
35 अंक पूर्णांक
(सिंचाई, जल निकास एवं शाक तथा फल संवर्धन)
1-सिंचाई तथा जल निकास-फसलों को पानी की आवश्यकता, जलमान प्रसव एवं उसका मिट्टीकरण, आकार के सम्बन्ध, सिंचाई, जल के गुण और उनके प्रभाव।
10 अंक 2-सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां-भराव सिंचाई, थाला विधि सिचाई, बौछारी सिंचाई, उठाव सिंचाई एवं तोड़ सिंचाई, पट्टी सिंचाई (बार्डर विधि) प्रत्येक के लाभ और सीमायें। 10 अंक 3-सिंचाई-जल की माप की कटाव एवं कुलावा, हेक्टेयर, सेमी0, मीटर माप की प्रणाली। 08 अंक 4-जल निकास की आवश्यकता-मिट्टी में अतिनमी एवं जलभराव से हानियां, भूमि विकास एवं
07 अंक सुधार (क्षारीय तथा अम्लीय मिट्टियां बनना, रोकथाम एवं सुधार)। पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान सम्बन्धित विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
शस्य विज्ञान (व्यवसायिक वर्ग) अधिकतम अंक : 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 10 समय : 03 घंटा निर्धारित अंक 1-बीज या सब्जी के लिये बीज तैयार करना- 04 अंक 2-पहचान-मिट्टी, बीज, फल, खर-पतवार, खाद, रोग, दवायें- 04 अंक 3-फसलों का उत्पादन, लागत, उपज एवं लाभ की प्रति हेक्टेयर गणना करना- 03 अंक 4-प्रयोग आधारित मौखिकी- 04 अंक 5-वर्ष भर में किये गये कार्यों का सत्रीय मूल्यांकन- 05 अंक 6-जुताई, खेत तैयार करना (हल, कल्टीवेटर या हरी खाद)- 04 अंक 7-प्रोजेक्ट कार्य- 06 अंक
सामान्य आधारिक विषय-कक्षा-11 (व्यावसायिक वर्ग)
(पर्यावरणीय शिक्षा एवं ग्रामीण विकास)
(कक्षा-11)
परिचय- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अनुसाऱ2 स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य निम्नवत् हैं- 1-शिक्षा की विविध धाराओं के अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराना जिससे कि स्वरोजगार को बढ़ाया जा सके।
2-तकनीकी जनशक्ति की मांग और आपूर्ति के असंतुलन को कम करना। 3-लक्ष्यविहीन उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को एक विकल्प प्रदान करना।
सारांश में उपर्युक्त उद्देश्यों पर आधारित व्यावसायिक शिक्षा से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में ऐसे व्यक्तियों का निर्माण कर सकेगी, जिनके पास अपने स्वयं के विकास के विस्तृत ज्ञान का स्रोत एवं प्रशिक्षण होगा,70 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 युवा शक्ति को लाभकारी रोजगार देकर उनमें निरुत्साह की भावना को समाप्त करने अथवा कम करने में सहयोगी हो सकेगी, उद्यमिता के प्रति एक स्वस्थ भावना का विकास, आत्मविश्वास तथा व्यावसायिक जागरूकता उत्पन्न कर सकेगी। स्थूल रूप से व्यावसायिक शिक्षा केवल किसी एक व्यवसाय (ट्रेड) छात्रों में रुचि उत्पन्न कर ज्ञान बोध एवं कौशल प्राप्त करने की ओर ही नहीं आकर्षित करती है, वरन् इसके अतिरिक्त निम्नलिखित उद्देश्यों की भी शिक्षा प्रदान करती है-
1-वातावरण तथा वातावरण के विकास के प्रति जागरूकता। 2-वैज्ञानिक तथा तकनीकी परिवर्तनों के कारण वातावरण में होने वाले परिवर्तन के प्रति पहले से जानकारी होना।
3-अपने समाज की आवश्यकता तथा विकास के परिप्रेक्ष्य में व्यावसायिक शिक्षा जीवनपर्यन्त शिक्षा तंत्र के एक अंश के रूप में समझना।
व्यावसायिक शिक्षा छात्रों को वेतनभोगी अथवा स्वरोजगार दो प्रकार के व्यवसायों के लिये तैयार करती है किन्तु उनमें से अधिकांश छात्र स्वरोजगार हेतु अपने स्वयं के प्रतिष्ठानों को स्थापित करने में आवश्यक आत्मविश्वास की कमी रखते हैं, जबकि इसे स्वीकार किया जाना चाहिये कि आगामी आने वाले वर्षों के कुछ सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं का समाधान ढूढ़ने में स्वरोजगार की एक आवश्यक भूमिका होगी। अतः यह आवश्यक है कि व्यावसायिक शिक्षा को उद्यमिता विकास कार्यक्रमों द्वारा स्वरोजगार से जोड़ा जाये। आज की शिक्षण संस्थायें तथा समाजसेवी संस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को वेतनभोगी रोजगार के लिये तैयार करना है जिसके फलस्वरूप छात्रों में रचनात्मक; Creativity) लगन; Perseverance) स्वतंत्रता (Independence)] अन्तःदृष्टि (Visions) एवं नव-निर्माण की प्रवृत्ति (Innovativeness) जो उद्यमिता विकास के प्रमुख लक्षण हैं, उनको प्रोत्साहन नहीं मिल पाता है, जबकि व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य छात्रों द्वारा अपने व्यवसाय (ट्रेड) से सम्बन्धित उद्यमिता के अवसरों का आभास करना, स्वरोजगार के क्रिया-कलापों की व्यवस्था करना तथा अपने प्रतिष्ठानों को प्रभावी व्यवस्था करने में प्रशिक्षण दिया जाना है। उद्यमिता विकास के कार्यक्रमों के विशिष्ट रूप निम्नवत् हैं-
(1) छात्रों में वेतनभोगी रोजगार के अतिरिक्त विकल्प के रूप में उद्यमिता (स्वरोजगार) की अनुभूति एवं कल्पना करने की क्षमता का विकास करना।
(2) उद्यमिता (स्वरोजगार) प्रारम्भ करने हेतु प्रोत्साहित होकर उनमें भावना तथा क्षमतायें विकसित करना जो स्वरोजगार भविष्य को प्रारम्भ करने तथा उसकी स्थापना करने के लिये आवश्यक है।
(3) उद्यमिता (स्वरोजगार) के अवसरों को खोज करने के लिये अन्तर्दृष्टि का विकास करना। 4-उद्यम सम्बन्धी (स्वरोजगार), साहस को संगठित करने तथा उसे सफलतापूर्वक चलाने हेतु छात्रों में क्षमता का विकास करना। उपर्युक्त उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुये व्यावसायिक शिक्षा पढ़ने वाले छात्रों के लिये सामान्य आधारिक विषय के अन्तर्गत निम्नलिखित दो प्रमुख घटकों को रखा गया है-
(1) वातावरणीय शिक्षा तथा ग्रामीण विकास। (2) उद्यमिता का विकास।
सामान्य आधारिक विषय हेतु निर्धारित 15 प्रतिशत समय में से 5 प्रतिशत समय वातावरणीय शिक्षा तथा ग्रामीण विकास हेतु तथा 15 प्रतिशत समय उद्यमिता के विकास हेतु निर्धारित किया गया है। इनके पाठ्यक्रमों का विस्तार आगे किया जा रहा है। सामान्य आधारिक विषय में 100 अंकों का एक प्रश्न-पत्र तीन घंटे का होंगा।
खण्ड-क (50 अंक)
(पर्यावरणीय शिक्षा एवं ग्रामीण विकास)
(1) पर्यावरणीय शिक्षा-
(1) पर्यावरणीय संसाधन (शक्ति/ऊर्जा, वायु, जल, मिट्टी, खनिज, पौध तथा जन्तु) निहित क्षमता, सन्दोहन के प्रभाव।
8 अंक (2) संसाधनों और संख्या के मध्य जनसंख्या विस्फोट और असामंजस्य, आधारभूत मानव आवश्यकताओं और महत्वाकांक्षा उद्देश्यों की अभिलाषा को प्राप्त करने हेतु पर्यावरण की मांग और पर्यावरण पर इसका प्रभाव।
(3) औद्योगीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव-
8 अंक 4 अंक (क) प्राकृतिक दृश्य का अनुत्क्रमणीय परिवर्तन। (ख) पर्यावरण का अतिक्रमण/अवक्रमण और इनके प्रभाव।
(4) आधुनिक कृषि का पर्यावरण पर प्रभाव-
8 अंक क-अधिक उपज प्रदान करने वाली किस्मों का प्रयोग एवं अनुवांशिक स्रोतों से वंचित करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 71ख-नहर द्वारा सिंचाई और जलाक्रांति (वाटर लागिंग)। ग-उर्वरकों एवं कीटनाशकों का प्रयोग और पर्यावरण पर इसके प्रभाव। घ-कीटनाशकों के उत्पादन, भण्डारण, प्रेषण एवं निस्तारण में जोखिम उठाना।
(5) भूमि प्रयोग, मृदा अवक्रमण, जनसंख्या दबाव और वनों की क्षीणता, घास के मैदान एवं फसल के खेत। 4 अंक (6) जलवायु और मृदा का पर्यावरणीय प्रदूषण और जीवित संसार पर इसके प्रभाव। 2 अंक 2 अंक (7) खतरनाक औद्योगिक एवं कृषि उत्पाद-
7.1-उनके प्रयोग से सम्बन्धित सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धित आपदायें। 7.2-प्रयोग करने का पर्यावरण पर प्रभाव।
(8) चिकित्सीय तकनीकी का दुरुपयोग एवं दवाओं के दुरुपयोग। (9) सामग्रियों के गुण (जैव अवक्रमण और अवक्रमण रहित)।
2 अंक 2 अंक (2) ग्रामीण विकास- (1) भारतवर्ष में भूमि उपयोग के पाश्र्वदृश्य (चित्रण)। 2 अंक (2) आर्थिक पिछड़ेपन के कारण, गरीबी ग्रस्त क्षेत्र। 2 अंक (3) निवेशों (इनपुट) को सुधार कर कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उपाय। 2 अंक (4) वनारोपण-वन लगाना, सामाजिक एवं फार्म वानकी पर्यावरणीय सामाजिक और आर्थिक वृद्धि। 2 अंक (5) ग्रामीण कूड़े-कचरे का पुनः उपयोग जैसे गोबर गैस संयंत्र, कम्पोस्ट खाद का निर्माण। 2 अंक
(1) व्यवसाय में उद्यम का महत्व एवं उपादेयता। (2) उद्यमिता की विशेषतायें/महत्व/कार्य एवं प्रतिफल (पुरस्कार)।
(4) भारतीय संस्कृति में उद्यमिता, भारतीय संस्कृति का स्वरूप-
(1) उद्यमिता का महत्व तथा स्वरूप, भारतीय संस्कृति में उद्यमिता का महत्व तथा स्वरूप। (2) उत्पाद तथा उपयोगी अवधारणा। (3) सादा जीवन एवं उच्च विचार तद्नुसार आचरण।
2-उद्यमिता के मूल्य- 4 अंक (1) मूल्य एवं मानव व्यवहार से सम्बन्धित मूल्यों का बोध कराना। (2) उद्यमिता में मूल्यों का बोध- (1) नवीन स्थिति। (2) स्वतंत्रता। (3) समुन्नत प्रदर्शन। (4) कार्य के प्रति निष्ठा।
(3) उद्यमिता सम्बन्धी मूल्यों के क्रिया-कलापों को परिचित कराना। 3-विभिन्न प्रकार के उद्यमिता सम्बन्धी प्रवृत्तियों की धारणायें एवं उनकी सार्थकता- 6 अंक 1-कल्पना शक्ति/अन्तर्ज्ञान का प्रयोग। 2-सामान्य जोखिम उठाना। 3-अभिव्यक्ति एवं कार्य की स्वतंत्रता का लाभ उठाना। 4-आर्थिक अवसरों को खोजना। 5-सफलतापूर्वक पूरे किये गये कार्यों से संतुष्टि प्राप्त करना। 6-विश्वास करना कि ये पर्यावरण को परिवर्तित कर सकते हैं। 7-पहल करना। 8-स्थिति का विश्लेषण करना एवं कार्य योजना बनाना। 9-कार्य में लगे रहना। 10-क्रिया-कलाप। 4-व्यावहारिक क्षमतायें- 6 अंक 1-नवीन स्थिति से अवगत होना एवं जोखिम उठाना। 2-संदिग्धताओं को सहने की क्षमता। 3-समस्या-समाधान। 4-लगनशीलता।
72 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 45-स्तर/कार्य प्रदर्शन की गुणवत्ता। 6-सूचनाओं को प्राप्त करना। 7-व्यवस्थित योजना। 8-क्रिया-कलाप। 5-उद्यमिता अभिप्रेरणा- 8 अंक 1-स्वयं के बारे में आंकड़े एकत्रित करना। 2-उद्यमिता के व्यवस्था एवं अभिप्रेरणा के ढंग/तरीकों से परिचित कराना।
(1) उद्यमिता सम्बन्धी कौशल एवं व्यवहार का प्रत्यावाद/ज्ञान देना। 3-जोखिम उठाने की क्षमता, सफलता की आशा एवं असफलता का भय।
(1) पश्च-पोषण से सीखना।
4-समझाने की अभिप्रेरणा शक्ति, उपलब्धि, कल्पनायें, अभिप्रेरणा की प्रगाढ़ता, उपलब्धि, भाषा आदि। 5-व्यक्तिगत कार्यक्षमता-
(1) व्यक्तिगत जीवन का लक्ष्य। (2) उद्यमिता से इसका सम्बन्ध। (3) नियंत्रण के स्थान (बिन्दु)।
6-उद्यमिता के मूल्यों पर प्रत्यावाद करना (का ज्ञान देना)। 7-उपलब्धि योजना। 8-कार्य क्षमता पर प्रभाव। 9-उद्यमिता सम्बन्धी लक्ष्यों को निर्धारित करना- (1) उद्यमिता के उद्देश्य की सहभागिता। (2) उद्यमिता स्थापित करने हेतु उचित तरीकों का विकास। (3) कठिनाइयों का सामना करना। (4) सहायता प्राप्त करने की क्षमता में पुनर्बलन का विकास।
10-सृजनात्मकता। 11-समस्याओं का सामना करने की योग्यता को समझना एवं व्यवहार में लाना।
6-उद्यम चलाने की क्षमता- 8 अंक 1-परियोजना का निर्धारण-
1.1-बड़े पैमाने के उद्योग, मध्यमवर्गीय पैमाने के उद्योग एवं छोटे पैमाने के लिये उद्योग, लघु क्षेत्र, कुटीर उद्योग एवं ग्रामीण उद्योग की परिभाषायें।
1.2-परियोजनाओं का वर्गीकरण, निर्माण, कार्य सेवा, व्यापार करना, उपभोक्ता वस्तुयें, पूंजीगत वस्तु, सहायक वस्तु, प्रत्येक प्रकार के कार्यों का क्षेत्र एवं उनकी विशेषतायें।
2-केन्द्रीय एवं राज्य सरकार की नीतियां, एस0 एस0 आई0 लघु क्षेत्र और नये उद्यमों के लिये कार्यक्रम एवं प्रोत्साहन। 3-उद्योग धन्धे स्थापित करने के चरण। 4-वर्तमान एवं भावी उद्योग धन्धों की सहायता प्रदान करने वाली संस्थाओं के सम्बन्ध में जानकारी- 4.1-डी0 आई0 सी0। 4.2-उद्योग निदेशालय। 4.3-तकनीकी सलाहकारों का संगठन। 4.4-एस0 एफ0 सी0। 4.5-एस0 एस0 आई0 डी0 सी0। 4.6-आई0 डी0 सी0। 4.7-एस0 एस0 आई0 सी0। 4.8-एस0 आई0 एस0 आई0। 4.9-व्यापारी बैंक। 4.10-सहकारी बैंक। 4.11-के0 बी0 आई0 सी0 इत्यादि।
5-एस0 एस0 आई0 के क्षेत्र में अनन्य उत्पादन हेतु उत्पादित वस्तुओं का आरक्षण।
विद्यार्थियों को उत्पादित वस्तुओं की सूची बांट देनी चाहिये।
7-विपणन (बाजार) की स्थिति का पता लगाना- 4 अंक 1-विपणन (बाजार) की स्थिति ज्ञात करने की आवश्यकता एवं महत्व। 2-बाजार की स्थिति का पता लगाने के घटक एवं तकनीक-
2.1-उत्पाद की प्रकृति। 2.2-मांग विश्लेषण और उपभोक्ता की आवश्कयताओं का पता लगाना। 2.3-पूर्ति विश्लेषण और बाजार की स्थितियां।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 732.4-विपणन का अभ्यास, भण्डारण वितरण पैकिंग, साख नीति प्रेषण, व्यक्तिगत विपणन कला का चयन करना। 3-बाजार को समझना, बाजार का विभक्तीकरण, उत्पाद विश्लेषण। 4-उत्पाद का चयन करना और चयनित उत्पाद हेतु बाजार का सर्वेक्षण करना। 8-परियोजना का चयन- 6 अंक 1-परियोजना की पहचान के लिये पहचान हेतु विचार-विमर्श।
2-दिये गये विचारों के संक्षिप्तीकरण की प्रक्रिया। 3-उत्पादन के अन्तिम चुनाव के कारकों पर विचार करना, मांग प्रतियोगी उत्पादन के कारकों की उपलब्धियां, सरकारी नीति, सीमान्त लाभ इत्यादि।
4-क-शक्तियों, कमजोरियों, अवसरों एवं प्रशिक्षण का विश्लेषण- 4-क-1-शक्तियां और कमजोरियां। 4-क-2-व्यक्तिगत शक्तियों और कमजोरियों का मूल्यांकन। 4-क-3-मुद्रा। 4-क-4-बाजार। 4-क-5-तकनीकी ज्ञान की जानकारी। 4-ख-1-श्रम, सामग्री एवं क्षमतायें। 4-ख-2-अवसर एवं प्रशिक्षण। 4-ख-3-आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक एवं अन्तर्राष्ट्रीय पहलुओं की स्थिति के अध्ययन द्वारा प्रशिक्षण को पूर्ण करना एवं पर्यावरणीय छानबीन करना।
कक्षा-11
व्यावसायिक धाराओें (ट्रेड्स) का पाठ्यक्रम
(1) ट्रेड-खाद्य एवं फल संरक्षण
उद्देश्य- (1) फल/खाद्य औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। (2) अधिक उपज से खाने के बाद बचे हुये फल, सब्जी, दूध, मांस, मछली आदि का संरक्षण करना। (3) संरक्षण द्वारा पौष्टिक फल तथा खाद्य पदार्थों के सेवन से भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी को वर्ष भर पूरा करना। (4) संरक्षित फल/खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बढ़ाकर मूल्य बिक्री करना। (5) युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं के समय पैकेट तथा डिब्बा बन्द खाद्य पदार्थों को सुलभ कराना। (6) भारत में अधिक पाये जाने वाले फल/खाद्य पदार्थों को संरक्षित करके विदेशों में भेजकर बिक्री करके विदेशी मुद्रा कमाना। (7) विभिन्न पौष्टिक फल/खाद्य पदार्थों का उपयोग कर सन्तुलित आहार उपलब्ध करना और खान-पान की आदतों में सुधार लाना। (8) फल/खाद्य संरक्षण तकनीकी शिक्षा के द्वारा व्यक्तियों में दक्षता लाना। (9) फल/खाद्य संरक्षण से सम्बन्धित मशीनों/उपकरणों की जानकारी के बाद इन मशीन/उपकरण निर्माताओं को प्रोत्साहन देकर अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ावा देना। (10) शीघ्र नष्ट होने वाले पौष्टिक फल/खाद्य पदार्थों का ह्रास होने से बचाना। रोजगार के अवसर- (1) फल/खाद्य संरक्षण इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) फल/खाद्य संरक्षण में दक्षता प्राप्त करने के बाद छात्र अपना निजी व्यवसाय चला सकता है। (3) संरक्षित फल/खाद्य पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली मशीनों/उपकरणों का बिक्रय केन्द्र खोला जा सकता है। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक- 400 200 नोट-परीक्षार्थियों के प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
10 ङ74 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
(परिरक्षण-सिद्धान्त एवं विधियां)
1-व्यावसायिक शिक्षा-अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, आवश्यकता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का आर्थिक एवं सामाजिक महत्व।
20 2-भारत मेें फल/खाद्य संरक्षण उद्योग को वर्तमान स्तर एवं सम्भावनायें। फास्ट फूड-ढाबा व्यापार। 10 10 3-राष्ट्रीय शिक्षा निति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। 10 4-परिचय, विज्ञान तथा आवश्यकताएं- 10 5-परिरक्षण का सम्पूर्ण इतिहास।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(सूक्ष्म जीव विज्ञान)
(1) सूक्ष्म जीव-परिचय, वर्गीकरण-जीवाणु, खमीर, फफूंदा का विस्तृत अध्याय। 20 20 (2) सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता प्रभावित करने वाले कारक-
(क) फल, सब्जी के आन्तरिक जैव, रासायनिक गुण-पी एच (अम्लीयता, क्षारीयता), ऊष्मा की मात्रा, आक्सीडेशन रिडक्शन, पोषक तत्व, जीवाणु प्रतिरोधी तत्व एवं जैविक संरचना। (ख) वाह्य वातावरण-तापक्रम, सापेक्ष आदर््रता तथा वायु मण्डलीय गैस।
(3) एन्जाइम-परिचय, वर्गीकरण, एन्जाइम की क्रियाशीलता प्रभावित करने वाले कारक (पी एच, एन्जाइम की मात्रा, तापक्रम तथा पदार्थ का गाढ़ापन) एन्जाइम के प्रकार एवं उपयोग, ब्राउनिंग प्रतिक्रिया (एन्जाइम द्वारा तथा अन्य)
10 (4) किण्वीकरण (फरमेन्टेशन)-अल्कोहल, वाइन, सिरका, लैक्टिक एसिड, किण्वीकरण। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र (फल/खाद्य-प्रोसेसिंग एवं गुण नियंत्रण) 1-प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण)-अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य तथा आवश्यक मशीन/उपकरणों का सामान्य ज्ञान।
10 2-विभिन्न फलों की सब्जियों से कृतिम एवं प्राकृतिक साधनों से सुखाकर प्रोसेस करना। 10 10 3-खाद्य पदार्थों की आधुनिक विधि से प्रोसेसिंग करना। 4-डिब्बाबन्दी-परिरक्षण सिद्धान्त सब्जियों की डिब्बाबंदी 20 5-गुणवत्ता नियंत्रण-आइसक्रीम, पी0ओ0 (फ्रूट प्रोडक्ट आर्डर) पी0एफ0ए0 तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू0 एच0 ओ0) का मानक गुण नियंत्रण तकनीक।
10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र (खाद्य पोषण एवं स्वच्छता) 1-भोजन में पाये जाने वाले पोषक तत्व-वर्गीकरण, रासायनिक संगठन, स्रोत मात्रा, ऊर्जा की आवश्यकता, भोजन का पाचन, शोषण एवं चयापचय।
20 2-संतुलित आहार-अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व। 15 3-पोषक तत्वों की कमी तथा वृद्धि से होने वाले रोग-लक्षण एवं नियंत्रण। 15 4-स्वच्छता उपाय,स्वच्छता नियंत्रण तथा स्वच्छता उपकरण व उनका रख रखाव। 10
पंचम प्रश्न-पत्र (फल/खाद्य संरक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रसार) 1-उद्योगशाला स्थापित करने हेतु मूलभूत आवश्यकतायें-पूंजी, कार्य स्थल, आवागमन की सुविधा, कच्चे माल की उपलब्धि, पेयजल व्यवस्था, श्रमिकों की उपलब्धि, बजाार व्यवस्था, मशीनरी का चुनाव। 15 2-उद्योगशाला का वर्गीकरण-एफ0पी0ओ0 के अनुसार वृहत्, लघु एवं कुटीर उद्योगशालाओं के मानक, विन्यास एवं अनुज्ञा-पत्र प्राप्त करना।
15 3-प्रसार सम्पर्क एवं विधियां। 15 4-जनसंचार माध्यमों हेतु आलेख तैयार करना। 15
प्रयोगात्मक कार्य
दीर्घ प्रयोग-
1-चीनी द्वारा संरक्षित पदार्थ का निर्माण-
(1) मौसमी फलों में जैम, सेब, अनानास, आंवला, आम, स्ट्रावेरी, आड़ू, खुबानी, अलूचा तथा मिश्रित फलों का जैम तथा सुरक्षित फल के गूदे से जैम बनाना। (2) जेली-अमरूद, करौंदा, कैथा, सेब। (3) मार्मलेड-नींबू प्रजाति के फलों से (नींबू, संतरा, गलगल माल्टा, चकोतरा आदि)। (4) मुरब्बा-आंवला, सेब, आम, करौंदा, बेल, गाजर, पेठा आदि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 75(5) कैण्डी-(दानेदार व चमकदार) आंवला, अदरक, पेठा, बेल, करौंदा, चेरी, नींबू प्रजाति के छिलकों से निर्मित, पपीता एवं लौकी। (6) शर्बत-फलों के रस, फूल एवं सुगन्ध से निर्मित-गुलाब, केवड़ा, संतरा, नींबू, अंगूर, खस, चन्दन, बादाम एवं पंच मगज (खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा व कोहड़ा के बीज व पोस्ता दाना)। (7) फलों के बीज, टाफी, फ्रूट बार-आम, अमरूद, सेब, केला, मिल्क टाफी। (8) फलों व अनाजों से निर्मित लड्डू एवं बर्फी-आंवला, सोयाबीन, मूंगफली आदि। (9) चटनी-पपीता, सेब, आम, आंवला आदि।
2-आचार-
(1) प्रयोगशाला में तेलयुक्त तथा बिना तेल के विभिन्न फल एवं सब्जियों से अचार बनाना-आम व चने का मिश्रित अचार, आम, गोभी, गाजर, शलजम, मटर, सेम, टेन्टी, कटहल, करेला, आंवला, लहसुन, सूरन आदि।
(2) मीट का अचार। 2-(1) फल एवं सब्जियों के सास बनाना-सेब, गाजर, मिर्च (चिली सास), कद्दू (सीताफल)। (2) टमाटर से निर्मित-टमाटर कैचप, सास, प्यूरी, जूस। 3-सिरका निर्माण- (ं1) किण्वन द्वारा-प्रयोगशाला में विभिन्न फल रस एवं गुड़ से सिरका बनाना। (2) एसिटिक एसिड द्वारा-प्रयोगशाला में एसिटिक एसिड द्वारा नकली सिरका बनाना। 4-पेक्टिन परीक्षण करना। लघु प्रयोग-एक- 1-माप-तौल का ज्ञान-मैट्रिक (दशमलव) एवं घरेलू वस्तुयें जैसे-चम्मच, गिलास, कप, कटोरी, आदि द्वारा आनुपातिक मात्रा, तौल का ज्ञान, भौतिक तुला एवं रासायनिक तुला के प्रयोग एवं सावधानियों का ज्ञान। 2-प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले थर्मामीटर, तेल मीटर, रिफैक्टो मीटर, ब्रिक्स हाइड्रोमीटर, सैलिनोमीटर, लैक्टोमीटर, जूसर, पल्वर, क्राउन कार्क, कैनिंग मशीन का सामान्य ज्ञान तथा उपयोग विधि। 3-प्रयोगशाला में आसवन वाष्पीकरण, संघनन एवं रसाकर्षण (आस्मोसिस) का ज्ञान। 4-वणांक (पलांट पिगमेन्ट्स) पर ताप, एसिड (अम्ल) क्षार और धातु का प्रभाव। 5-प्राकृतिक एवं कृत्रिम खाद्य रंगों का सामान्य परीक्षण। 6-रासायनिक सुरक्षात्मक पदार्थों का ज्ञान। 7-अम्ल, क्षार के गुण तथा पी0एच0 मान का ज्ञान। 8-विभिन्न खाद्य पदार्थों से भण्डारण के समय में होने वाले परिवर्तन का प्रयोगात्मक ज्ञान। 9-पेक्टीन की मात्रा फल, सब्जियों से ज्ञात करने के लिये पेक्टीन परीक्षण का ज्ञान। 10-खाद्य पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त पदार्थों की अनुमानित मात्रा का ज्ञान। 11-खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा ज्ञात करना। 12-खाद्य पदार्थों में सल्फर डाई आक्साइड को ज्ञात करना। 13-खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा ज्ञात करना। लघु प्रयोग-दो- (1) सूक्ष्म दर्शक यन्त्र का प्रयोग, उनके विभिन्न भागों का ज्ञान। (2) मीडिया को तैयार करना। (3) कल्चर मीडिया बनाना। (4) कल्चर स्थानान्तरण व इन्क्युबेट करना व जीवाणुओं की कालोनी बनाना, टमाटर के विभिन्न पदार्थों में फफूंदी और मोल्ड की संख्या ज्ञात करना, इनके लिये हीमोसाटेमीटर का प्रयोग।
(5) स्लाइड बनाने के तरीके (सामान्य रंगों का प्रयोग)। (6) प्रयोगशाला में खमीर (ईस्ट) फफूंदी तथा बैक्टीरिया में अन्तर का परीक्षण। (7)प्रयोगशाला में खमीर (ईस्ट) फफूंदी तथा बैक्टीरिया की स्लाइड बनाना। (8) स्थानीय उद्योगशाला का निरीक्षण एवं सामान्य ज्ञान। (9) स्थानीय प्रयोगशाला की योजनाओं का रेखाचित्र, गृह स्तर इकाई, काटेज स्तर इकाई, लघु स्तर इकाई, बृहद् स्तर इकाई।
(10) प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों, मशीनों की सूची व उनका मूल्य। (11) समाचार व अन्य आलेख तैयार करना।
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा के लिये निर्धारित समय छः घन्टे प्रतिदिन (सम्पूर्ण परीक्षा दो दिनों में सम्पूर्ण होगी) (2) अधिकतम अंक 400 अंक (3) न्यूनतम उत्तीर्णांक 200 अंक76 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायेंगे- प्रयोग नम्बर 1 दीर्घ प्रयोग 80 अंक प्रयोग नम्बर 2 लघु प्रयोग 40 अंक प्रयोग नम्बर 3 लघु प्रयोग 40 अंक मौखिकी (वाइवा) 40 अंक योग . . 200 अंक
(1) सत्रीय कार्य (100 अंक) (क) विषय अध्यापक छात्र के पूरे सत्र में हुये मासिक, त्रैमासिक, छमाही तथा वार्षिक परीक्षाओं में छात्र को दक्षता के आधार पर अंक प्रदान करेंगे।
(ख) विषयाध्यापक छात्र के पूरे सत्र में उसके द्वारा तैयार किये गये
अभिलेख का मूल्यांकन करके अंक प्रदान करेगा।
(2) कार्य स्थल पर परीक्षण (100 अंक) विषयाध्यापक छात्र द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण काल में किये गये कार्य जैसे प्रयोगात्मक पुस्तिका, चार्ट तथा कम से कम दस उत्पाद पर अंक प्रदान करेंगे।
फल एवं खाद्य संरक्षण में प्रयोग होने वाली मशीन, साज-सज्जा उपकरण की सूची
क्रम-संख्या मशीन/उपकरण का नाम, विवरण मात्रा/संख्या अनुमानित
1
2
मूल्य 3 4 रु0 1 काउन्टर बैलेन्स वाट सहित (10 कि0 क्षमता) 1 1,500.00 2 एल्यू0 टाप वर्किंग टेबुल (6´×2½´× 3½´½) 1 8,000.00 1 20,000.00 3 हैण्ड कैन सीलर 4 क्राउन काकिंग मशीन, हैवी ड्यूटी (हैण्ड आपरेटेड) 1 1,500.00 1 15,000.00 5 विद्युत् चालित पल्पर (जूनियर मॉडल) 1 1,000.00 6 साधारण जूसर (टेबुल मॉडल) 1 3,000.00 7 कैनिंग रिटार्ट (01।2) डिब्बों वाला) 1 250.00 8 कैन टेस्टर/देय पम्प 9 कैन कटिंग मशीन 1 200.00 10 रिफ्रेक्टोमीटर (0-500, 50-850 रेंज का) 1 सेट (2 Nos.) 1,900.00 1 3,000.00 11 डीहाइड्रेटर 1 7,000.00 12 माइक्रोस्कोप 6 150.00 13 नींबू निचोड़, हिन्डालियम (Lime Squeezer) 1 200.00 14 ब्रिक्स हाइड्रोमीटर 1 100.00 15 जेल मीटर 16 थर्मामीटर, फारेनहाइट (जेली के लिये) 4 600.00 17 स्टे0 स्टील भगोने मय ढक्कन विभिन्न साइज 6 2,400.00 2 300.00 18 स्टे0 स्टील ग्रेटर 3 780.00 19 स्टे0 स्टील बेसिन 1 दर्जन 160.00 20 स्टे0 स्टील कांटे 6 240.00 21 स्टे0 स्टील परफोरेटेड स्पून 6 100.00 22 स्टे0 स्टील कटिंग चाकू 6 100.00 23 स्टे0 स्टील पीलिंग चाकू 6़6 250.00 24 स्टे0 स्टील पिटिंग/कोरिंग चाकू 1 350.00 25 स्टे0 स्टील पाइनएपिल कटिंग चाकू 1 दर्जन 240.00 26 स्टे0 स्टील टी स्पून 6 450.00 27 स्टे0 स्टील टेबुल स्पून 6 1,800.00 28 स्टे0 स्टील कुकिंग स्पून 3़3 150.00 29 स्टे0 स्टील ग्लासभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 77
1 2 3 4
रु0
30 स्टे0 स्टील क्वार्टर/फुल प्लेट 3़3 1.00
31 स्टे0 स्टील चलनी 2 1,600.00
32 स्टे0 स्टील पाइनएपिल पन्च व कोरर 1़1(2) 200.00
33 स्टे0 स्टील मग 1 50.00
34 एल्यू0 भगोने मय ढक्कन विभिन्न साइज 6 6,400.00
35 पिन्ट गीजर इनामेल्ड/प्लास्टिक (2) लीटर 2 130.00
36 केमिकल बैलेन्स 1 1,500.00
37 मिक्सी/ग्राइण्डर 1 2,000.00
38 पाउच सीलर 1 1,560.00
39 लोहे की आरी 1 70.00
40 कैन बाडी रिफार्मर, फ्लेन्जर सहित (विद्युत् चालित) 1 35,000.00
41 फ्रूट ऐण्ड वेजीटेबुल स्लाइसर 1 1,500.00
42 गैस भट्टी/बर्नर/चूल्हा मय गैस 1 सेट 12,500.00
43 पी0 एच0 मीटर 1 4,700.00
44 स्टोव पीतल (नं0 2 या 3) 4 2,500.00
45 लोहे का पोस्टल-नार्टर (खरल) 1 100.00
46 आम कटर 1 100.00
47 फस्र्ट-एड-बाक्स 1 500.00
48 लकड़ी का चम्मच (कुकिंग स्पून) 5 100.00
49 लकड़ी के लैडिल (लम्बे हत्थे का) 6 300.00
50 प्लास्टिक बाल्टी 4 400.00
51 प्लास्टिक बेसिंग 3 50.00
52 प्लास्टिक मग 3 50.00
प्रयोगशाला उपकरण-
अनुमानित मूल्य
रु0
1 ब्यूरेट स्टैण्ड सहित 6 600.00
2 पिपेट 6 300.00
3 बीकर 6 300.00
4 फ्लास्क 6 300.00
5 अन्य लैब उपकरण . . 500.00
6 रबर दस्ताने (नं0 10) 1 जोड़ा 50.00
7 जली बैग 2 100.00
योग . . 2,150.00
प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले सुगंध-
बांड सेम-Bush Co.
अनुमानित मूल्य रुपये
संतरा सुगंध 1×500 ml. 275.00
नींबू सुगंध 1×500 ml. 250.00
सेब सुगंध 1×500 ml. 300.00
अनानास सुगंध 1×500 ml. 300.00
आम सुगंध 1×500 ml. 300.00
केवड़ा सुगंध 1×500 ml. 450.00
खस सुगंध 1×500 ml. 300.00
गुलाब सुगंध 1×500 ml. 275.00
योग . . 2,450.00
78 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोेगशाला में प्रयुक्त होने वाले रंग-रसायन- खाद्य रंग-रसायन, सुगन्ध तथा कार्क लाल रंग, सन्तरा, अमरन्थ या स्ट्राबेरी पीला रंग, नींबू (टारट्राजान, सनसेट यलो) हरा रंग, सेब हरा Bailliant Blue
Bush Boske Allen, India Ltd.
अनुमानित मूल्य रुपये (1) अमरन्थ, संतरा लाल, नींबू पीला, सेब हरा 4×100 ग्राम 192.00 1×500 ग्राम 200.00 पोटैशियम मेटा बाई सल्फाइट 1×500 ग्राम 148.00 सोडियम बेन्जोट 1×1 कि0 ग्राम 150.00 साइट्रिक एसिड एसिटिक एसिड ग्लेसियन 1×5 कि0 ग्राम 300.00 क्राउन कार्क (PVC लाइनिंग) 144×5 ग्राम 200.00 योग . . 1,190.00
सन्दर्भ पुस्तकें
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य रु0 1 फल-तरकारी परिरक्षण
43.00 प्रौद्योगिकी
2 खाद्य संरक्षण, सिद्धान्त एवं
राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ, अकादमी द्वारा एस0 सदाशिव नायर एवं हरिश्चन्द्र शर्मा विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी बी0 आर0 वर्मा विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी
50.00 विधियां
(चौक)
3 खाद्य संरक्षण विज्ञान श्रीमती मधुबल स्वास्तिक प्रकाशन, आगरा 12.50 10.00 4 अचार, चटनी और मुरब्बा प्रकाशवती साधना पॉकेट बुक, दिल्ली, वितरक 12.50
विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी (प्रथम तथा द्वितीय भाग)
5 जीव रसायन डा0 सन्त कुमार कुक्का पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, मेरठ 8.50
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य रु0 6 जीव रसायन डा0 टी0 बी0 सिंह तदेव 25.00 20.00 7 व्यापारिक फल-सब्जी परिरक्षण (क्रूस) हिन्दी रूपान्तर हिन्दी प्रचारक संस्थान (चौक),
वाराणसी
11 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी कृष्ण कान्त कोठारी रंजना प्रकाशन मन्दिर, 12/13 सुई 8 आहार एवं पोषण विज्ञान ऊषा टण्डन तदेव 25.00 9 आहार एवं पोषण विज्ञान विमला वर्मा तदेव 25.00 10 फल परीक्षण सिद्धान्त एवं विधियां श्याम सुन्दर श्रीवास्तव किताब महल, इलाहाबाद 50.00 1988 18.00 1990 24.00 1988 12 व्यावहारिक फल, सब्जी परिरक्षण पनेराम आर्य एवं डा0 पदम प्रकाश रस्तोगी
कटरा, आगरा अनुवाद एवं प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर
13 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी एस0 सदाशिव नायर विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक,
14 फल तथा तरकारी परिरक्षण
प्रौद्योगिकी
15 प्रिजर्वेशन आफ फ्रूट एण्ड
वेजेटेबुल
एस0 सदाशिव नायर एवं डा0 हरिशचन्द्र शर्मा गिरधारी लाल एण्ड जी0 एल0 टण्डन
16 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी एच0 सी0 गुप्ता एवं
डी0 के0 गुप्ता
48.00 1988 वाराणसी 48.00 राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, 1987 जयपुर 15.00 इण्डियन काउन्सिल आफ एग्रीकल्चर 1988 रिसर्च इन्स्टीट्यूट, नई दिल्ली सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 10.00 1988भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 79 N.C.E.R.T., New Delhi
N.C.E.R.T., New Delhi ,,
18 Fruit Culture Instructronal- cum-Practical Manual 19 Fundamental of Fruit
17 फल संरक्षण एस0 एम0 भाटी बी0 के0 प्रकाशन, बड़ौत, मेरठ 10.00 1988 7.85 1988 8.45 1988 7.20 1988 7.82 1988 ,, 8.45 1988 Production Instruction-cum- Practical Manual
,,
20 Vegetable Crops Instruction- cum-Practical Manual
21 Fruit Veg. Preservation Principal and Practicess
नेशनल बुक डिस्ट्रीब्यूटिंग कं0, चमन स्टूडियो बिल्डिंग, चारबाग, लखनऊ
,, 7.20 1988 190.00 1988
Dr. R.P. Srivastava and Sri Sanjeev Kumar, Frazier M. C. Hills
22 Fruit Microbiology Frazier
M. C. Hills
(2) ट्रेड-पाक शास्त्र (कुकरी) कक्षा-11 उद्देश्य- (1) भोजन से प्राप्त होने वाले पौष्टिक तत्वों का ज्ञान कराना।
(2) मौसम, आवश्यकता, आय व मूल्य के आधार के अनुसार पौष्टिक भोजन बनाने की विधियों से अवगत कराना।
(3) बाजार में आसानी से बिक सकने वाले व्यंजन बनाने की क्षमता उत्पन्न करना। (4) राष्ट्र के विभिन्न भागों में खाये जाने वाले व्यंजनों की जानकारी देना।
(5) विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने की विधियों के आदान-प्रदान द्वारा राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करना।
(6) खाद्य वस्तुओं के संदूषण होने के कारणों से अवगत कराना। (7) समय के रचनात्मक सदुपयोग का बोध कराना। रोजगार के अवसर- (1) शाकाहारी भोजनालय स्थापित किया जा सकता है। (2) मांसाहारी भोजनालय स्थापित किया जा सकता है। (3) किसी होटल में नौकरी की जा सकती है। (4) पाक शास्त्र के प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित कर उनका संचालन किया जा सकता है।
(5) पाक शास्त्र से सम्बन्धित साहित्य तथा अद्यतन जानकारियां देने का सन्दर्भ केन्द्र स्थापित किया जा सकता है।
(6) पाक शास्त्र से सम्बन्धित आधुनिक उपकरणों/संयंत्रों का बिक्रय केन्द्र स्थापित किया जा सकता है। पाठ्यक्रम इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा : पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20 (ख) प्रयोगात्मक- 400 200 नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
80 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
1-व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य। 12 अंक 2-व्यावसायिक शिक्षा को सफल बनाने हेतु स्वास्थ्य का महत्व- 24 अंक घर तथा पास-पड़ोस की सफाई। घर के विभिन्न कक्ष तथा इसमें रखे वस्तुओं की सफाई, रख-रखाव एवं व्यवस्था। प्रदूषण के प्रकार, कारण, प्रदूषण से हानि और अपने स्तर पर प्रदूषण होने से रोकने के उपाय। पर्यावरण के अस्वच्छ होने पर होने वाली बीमारियों का ज्ञान, कारण एवं बचने के उपाय। बीमारियों या दुर्घटना के समय देने वाले प्राथमिक उपचार का साधारण ज्ञान।
3-बाल कल्याण- 24 अंक शिशु मृत्यु के कारण एवं रोकने के उपाय। प्रत्याशित माता की देख-रेख एवं प्रसव की तैयारी। माता और शिशु के स्वास्थ्य से सुखी परिवार की नींव-जानकारी देना। नवजात शिशु की देखभाल,स्तनपान और कालस्ट्रम का महत्व, पूरक आहार, टीकाकरण आदि का सम्पूर्ण ज्ञान। शिशु को होने वाली सामान्य बीमारियां-कारण, लक्षण, बचने के उपाय और घरेलू उपचार। दस्त होने पर जीवन रक्षक घोल की महत्ता एवं उसे बनाने की विधि (निर्जलीकरण और पुनर्जलीकरण)। मूल आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से होने और विकास की प्रक्रिया में योगदान करने की अधिक सक्षमता की प्राप्ति के लिये छोटे परिवार की महत्ता।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
[पाक शास्त्र (भाग-1),
1-पाक कला का इतिहास एवं उद्देश्य। 2-कच्चे माल का वर्गीकरण-
04 16 1-नमक। 2-तरल। 3-तेल व वसा। 4-रेजिंग एजेन्ट। 5-मिठास देने वाले पदार्थ (स्वीटनिंग)। 6-गाढ़ापन देने वाले पदार्थ (थिकेंनिग एजेन्ट)। 7-सुगन्ध व स्वाद देने वाले (फ्लेवर्स)। 8-अण्डे।
10 3-कुकरी टर्मस। 4-बेसिक सास-व्हाइट सास, ब्राउन सास, बेन्यूटे, तोलेन्डेज सास, मियोनीज, मेंटी सूप, वर्गीकरण तथा विस्तार एवं स्टाक, व्हाइट स्टाक एवं ब्राउन स्टाक। 10 5-सहभोज्य पदार्थ व सजावटें (एकमपेनिमेन्ट ऐण्ड गारमिशेज)। 10 6-बचे पदार्थों का पुनः प्रयोग जैसे रोटी, सब्जी, चावल, दाल, ब्रेड आदि का पुनः नये रूप में प्रयोग। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
पाक शास्त्र (भाग-2),
(1) खाद्य-पदार्थों के माप का ज्ञान।
10 (2) रसोई के उपकरण देख-रेख एवं प्रयोग में सावधानियां-फ्रिज, ओवन, मिक्सी, ग्रिल, फूड मिक्सर, सोलर कुकर। 10 (3) सलाद व सलाद ड्रेसिंग-साधारणसंयुक्त एवं भाग (सलाद के प्रकार)। 10 (4) सैण्डविच-प्रकार, बनाने की विधियां। 10 (5) कच्चे माल को खरीदने का ज्ञान-सब्जी, मांस, मछली, अनाज, दालें, मसाले, अण्डे। 10 10 (6) आर्डर विभाग और उसके कार्य।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(कमोडिटीज)
1-निम्नलिखित वस्तुओं का साधारण अध्ययन-
(1) चाय, काफी, कोको, दूध तथा अन्य पेय पदार्थ-गुण, पौष्टिक, मूल्य, प्रयोग। 10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 81 (2) अनाज एवं दालें-पौष्टिक, मूल्य प्रयोग जैसे गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंग, अरहर, चना आदि की दाल।
(3 रेजिंग एजेन्ट-बेकिंग पाउडर, सोडा, अण्डे। (4) खाने वाले रंग-प्राकृतिक व कृत्रिम प्रयोग। (5) सुगन्ध (एसेन्स)-केवड़ा, गुलाब जल, वैनिला व पाइनएपिल एसेन्स। (6) चीज-पनीर, प्रोसेस्ड चीज, प्रकार व प्राप्ति।
10 10 10 10 10
पंचम प्रश्न-पत्र
(पोषण एवं स्वास्थ्य विज्ञान)
(अ) न्यूट्रीशन
1-भोजन की आवश्यकता एवं महत्व-
10 (1) आवश्यकता-ऊर्जा प्राप्ति हेतु, शरीर निर्माण हेतु, शारीरिक सुरक्षा हेतु। (2) महत्व-शारीरिक, मानसिक, सामाजिक।
2-भोजन के विभिन्न पोशक तत्व-प्राप्ति के साधन, कार्य, दैनिक आवश्यकता, कमी से रोग- 10 (1) कार्बोहाइड्रेट। (2) प्रोटीन। (3) वसा। (4) खनिज लवण। (5) विटामिन। (6) जल।
3-विशेष अवस्थाओं के अनुसार भोज्य पदार्थ-
10 (1) बाल्यावस्था में भोजन। (2) युवावस्था में भोजन। (3) गर्भावस्था (गर्भवती माता)। (4) प्रसूता अवस्था में भोजन। (5) प्रौढ़ावस्था में भोजन। (6) वृद्धावस्था में भोजन।
(ब) हाईजीन (1) हाईजीन का अभिप्राय तथा रसोई में महत्व। (2) भोजन के संदूषण होने के कारण बचाव-जीवाणु, खमीर, फफूंदी। (3) जीवाणु-फैलने के माध्यम, विधियां व नियंत्रण। (4) व्यक्तिगत स्वच्छता (पर्सनल हाईजीन)।
10 10 06 04
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
1-भारतीय व्यंजन- (1) दाल मिक्स दाल, साग दाल, सूखी मसाला दाल, खड़ी दाल (मूंग व उड़द)। (2) मांस कोरमा, शामी कबाब,नर्गिसी कोफ्ता, मटर कीमा, हैदराबादी कीमा, रोगन जोश,मटन,प्याज आदि। (3) चटनी पिसी व पकी-आम, पुदीना, नारियल, टमाटर, सोंठ, नवरतन चटनी। (4) मीठा गुलाब जामुन, रसगुल्ले, इमरती, लड्डू, गुझिया, बर्फी, फिरनी। (5)स्नैक्स समोसा, कटलेट्स, मूंग व उड़द के बड़े, ब्रेड रोल्स, आलू रोल्स, मूंग दाल कबाब,कटहलके कबाब। (6) चाट फल की चाट, अंकुरित दालें, चना, मटर, दही-बड़ा, जल-जीरा, पपड़ी। 2-पाश्चात्य व्यंजन- (1) बेक्ड बेक्ड वेजीटेबिल, मैक्रोनी चीज, बेक्ड फिश, शेफर्ड पाई। (2) सॉस व्हाइट सॉस, ब्राउन सास, मेमोनीज सास, हालेन्डेज। (3) सलाद रशियन सलाद। 3-प्रान्तीय- (1) उत्तर भारतीय छोले-भटूरे, मक्खनी दाल (काली उड़द), फिश फ्राई। (2) दक्षिण भारतीय इडली, डोसा, सांभर, उपमा।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(अ) (1) परीक्षार्थियों द्वारा किये जाने वाले प्रयोग-
प्रयोग नं0 (अ) नाश्ते, लंच या डिनर के लिये 5 या 6 डिसेज का मीनू तैयार करना। प्रयोग नं0 (ब) विशेष अवसरों का मीनू जैसे जन्म-दिन पार्टी, त्योहार, विशेष अतिथि आदि (6 आइटम)।
11 ङ82 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (2) परोसने की कला। (3) व्यंजन की प्रस्तुति व मेज की व्यवस्था। (4) मौखिक। (5) प्रयोगात्मक पुस्तिका। (ब) (क) सत्रीय कार्य-
1-प्रोजेक्ट वर्क-रिपोर्ट और रिकार्ड्स। 2-कार्य-स्थल पर प्रशिक्षण।
छात्राओं को वर्ष के अन्त में एक विषय पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करना है जैसे-
1-सोयाबीन से बने पदार्थ। 2-पनीर से बने पदार्थ। 3-दाल से बने पदार्थ। 4-आलू से बने पदार्थ। 5-गेहूं, चने से बने पदार्थ आदि।
निर्देश- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घन्टे समय निर्धारित है। 2-प्रयोगात्मक परीक्षा उत्तीर्ण होने हेतु 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। 3-एक दिन में अधिक से अधिक 25 परीक्षार्थियों द्वारा ही परीक्षा सम्पन्न कराई जाय। संस्तुत पुस्तकें
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य रु0 1 भारतीय एवं पाश्चात्य पाक
हिन्दी प्रचारक संस्थान चौक, वाराणसी 100.00
सुश्री अनुपम चौहान
शास्त्र कला के सिद्धान्त एवं व्यंजन विधियां
2 आहार एवं पोषण विज्ञान श्रीमती ऊषा
25.00
टण्डन
स्वास्तिक प्रकाशन एवं पुस्तक विक्रेता, अस्पताल मार्ग, आगरा
. . युनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 21.00 3 पाक शास्त्र 4 मार्डन कुकरी 1 एंण्ड 2 . . ,, 130.00 5 सुगम पाक विज्ञान . . भारत प्रकाशन मन्दिर, जामा मस्जिद, मेरठ 25.00
(3) ट्रेड-परिधान रचना एवं सज्जा
कक्षा-11 उद्देश्य- (1) विभिन्न प्रकार के वस्त्रों को बाजार में उपलब्ध कराना। (2) विभिन्न आयु वर्गों हेतु वस्त्रों का चुनाव करना। (3) प्रचलित फैशन का विश्लेषण कर भविष्य के फैशन को बनाना। (4) विभिन्न प्रकार की डिजाइनों के कौशल का विकास करना।
(5) आधुनिक फैशनों के आधार पर विभिन्न प्रकार के आरामदायक, न्यूनतम कीमत, विभिन्न आयु वर्ग के लिये वस्त्रों को बनाना।
(6) छात्र-छात्राओं में विभिन्न प्रकार के निर्मित सुन्दर वस्त्रों के लिये प्रशंसा की भावना का विकास करना। (7) वस्त्र उद्योग में रोजगार प्राप्ति हेतु जागरूकता का विकास करना। (8) वस्त्र उद्योग हेतु स्वरोजगार एवं रोजगार सम्बन्धी जानकारी देना। (9) वस्त्र उद्योग के लिये आधुनिक उपकरणों से छात्रों को परिचित कराना। (10) समय, शक्ति और सामग्री का अधिकतम उपयोग करना। (11) छात्रों में टीम वर्क के लिये कार्य करने की आदतें और नैतिकता का विकास करना। रोजगार के अवसर- (1) परिधान रचना एवं सज्जा के किसी कारखाने/प्रतिष्ठान अथवा दुकान में रोजगार पा सकता है। (2) परिधान रचना एवं सज्जा के क्षेत्र में अद्यतन रेडीमेड वस्त्रों के निर्माण कार्य में स्वरोजगार प्रारम्भ कर सकता है। (3) होल सेल तथा रिटेल सेल का व्यवसाय चला सकता है। (4) परिधान रचना एवं सज्जा में निजी प्रशिक्षण केन्द्र चला सकता है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 83(5) परिधान रचना एवं सज्जा हेतु आवश्यक यंत्रों, उपकरणों एवं सामग्रियों की आपूर्ति करने का स्वरोजगार चला सकता है। (6) परिधान रचना एवं सज्जा से सम्बन्धित यंत्रों/उपकरणों के मरम्मत हेतु वर्कशाप चला सकता है। (7) यूनिफार्म तैयार करने हेतु वर्कशाप स्थापित करना। (8) विभिन्न कुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाना, जैसे ट्रेड डिजाइन, स्केजर, मशीन आपरेटर, फिनिश पैटर्न मेकर आदि। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा : पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20 (ख) प्रयोगात्मक- 400 200 नोट-परीक्षार्थियों के प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
1-व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य।
2-व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-
20 20 विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, सामज एवं देश को लाभ। समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी से निर्णय लेने और स्त्रियों को शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के अवसर। रोजगार ढूढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असंतुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान। मूल मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिये मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना।
(3) व्यावसायिक शिक्षा से सफल बनाने हेतु स्वास्थ्य का महत्व- 20
घर तथा पास-पड़ोस की सफाई। घर के विभिन्न कक्ष तथा उसमें रखे वस्तुओं की सफाई, रख-रखाव एवं व्यवस्था। समय, श्रम व पैसे की बचत हेतु उपकरणों का ज्ञान।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(तन्तुओं का ज्ञान)
(1) तन्तुओं का वर्गीकरण-
10 (क)- प्राकृतिक तन्तु-सूती, रेशमी, ऊनी। (ख) -मानव निर्मित तन्तु-रेशम, नायलॉन, टेरीकाट आदि।
(2) विभिन्न वस्तुओं से निर्मित वस्त्रों की बुनाई, रंगाई, छपाई, परिसज्जा एवं रंगों के मेल का ज्ञान। 30 (3) सिलाई में काम आने वाली वस्तुओं का ज्ञान-इंचीटेप, गुनिया, मिल्टन, चाक, अंगुस्ताना तथा विभिन्न प्रकार की कैचियां आदि।
20
तृतीय प्रश्न-पत्र
(सिलाई के सिद्धान्त)
(भाग-1)
(1) कुशल टेलर और कटर बनने के लिये योग्यतायें। (2) वस्त्र निर्माण के सिद्धान्त-
(क) चेस्ट सिस्टम नाम द्वारा वस्त्र निर्माण। (ख) सीधे सिस्टम नाम द्वारा वस्त्र निर्माण।
84 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(1) विभिन्न स्टैण्डर्ड नापों के चार्ट (शिशु, बालक, बालिकाओं तथा महिलाओं)। 12 (2) नाप लेते समय ध्यान देने योग्य बातें तथा सही नाप लेने के तरीकों का ज्ञान। 20 (3) सिलाई की मशीन के पुर्जों का ज्ञान (हाथ तथा पैर से चलने वाली, बिजली से चलने वाली मशीन तथा मशीन की साधारण खराबियों को दूर करना)।
28
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सिलाई के सिद्धान्त)
(भाग दो)
(1) कपड़ा काटने से पूर्व ड्राफ्टिंग एवं पेपर कटिंग के लाभ, पेपर कटिंग द्वारा पैटर्न तैयार करने की योग्यता। 30 (2) भिन्न-भिन्न नापों के परिधानों से अपनी आवश्यकतानुसार नाप के परिधान बनाने की योग्यता। 10 (3) कढ़ाई के विभिन्न टांके-काटन स्टिच (ले डी जो), क्रास स्टिच, चप स्टिच, कश्मीरी स्टिच, कट वर्क, पैच वर्क, वर्क नेट वर्क, रोज स्टिच शेड वर्क आदि। 20
पंचम प्रश्न-पत्र
(परिधान रचना एवं सज्जा)
(1) विभिन्न प्रकार के गले, कालर, चोक तथा अस्तर लगाने का ज्ञान। 26 (2) पाइपिंग झालर, लेस कढाई के टांकों, पेन्टिंग तथा वस्त्रों के मेल (काम्बीनेशन) से परिधान सज्जा का ज्ञान। 24 (3) पुराने एवं बिगड़े हुये आकार के वस्त्रों को नया रूप देकर वस्त्रों को संभालने की योग्यता। 10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप
(क)
(1) रफू करना, पैच लगाना, पाइपिंग बनाना एवं टांकना। (2) फाल बनाना एवं टांकना। नोट--उपरोक्त वस्त्रों को काट कर सिलना एवं सिले वस्त्रों की सज्जा करना।
(ख)
शिशुओं के प्रयोग में आने वाले वस्त्र--
(1) बिब, कलोट, चड्ढी, जांघिया। (2) सनसूट। (3) कम्बीनेशन सूट। नोट--उपरोक्त वस्तुओं के रेखाचित्र बनाना, काटकर सिलना एवं सिले वस्त्रों की सज्जा करना।
(ग)
बालक एवं बालिकाओं के वस्त्र-- (1) जांघिया, शमीज। (2) फ्राक। (3) कलीदार कुर्ता (बालक एवं बालिकाओं हेतु)। (4) बंगला कुर्ता (बालक एवं बालिकाओं हेतु)। नोट--उपरोक्त वस्त्रों का रेखाचित्र बनाना, वस्त्र काटना, सिलना एवं सज्जा करना।
(घ)
महिलाओं के वस्त्र--
(1) मैक्सी (2) गाउन (3) कप्तान (4) नाइट सूट (5) गरारा शरारा। नोट--उपरोक्त परिधानों का रेखाचित्र बनाना, काटना एवं सिलाई के साथ सिले वस्त्रों की सज्जा करना। टिप्पणी--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। प्रयोगात्मक परीक्षा का स्वरूप
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-- परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायं :
प्रयोग नं0 1 (बड़ा प्रयोग)। प्रयोग नं0 2 (बड़ा प्रयोग)। प्रयोग नं0 3 (छोटा प्रयोग)।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 85प्रयोग नं0 4 (छोटा प्रयोग)। (क) सत्रीय कार्य (सिले परिधान एवं रिकाड्र्स)। (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
4 5 रुपया 30.00 1 परिधान रचना एवं सज्जा श्रीमती इन्द्रजीत कौर विन्द्रा स्वास्तिक प्रकाशन एवं पुस्तक विक्रेता, अस्पताल मार्ग, आगरा 2 परिधान रचना एवं सज्जा श्रीमती इन्द्रजीत कौर विन्द्रा भारत प्रकाशन मन्दिर, मेरठ 18.00 70.00 3 प्रौद्योगिक गृह विज्ञान डा0 प्रमिला वर्मा एवं डा0 कान्ति
पाण्डेय
हिन्दी प्रचारक संस्थान, चौक, वाराणसी
4 स्पीडली होम ऐण्ड
-- यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 40.00 कामर्शियल टेलरिंग कोर्स 5 कटिंग ऐण्ड टेलरिंग पार्ट
-- तदेव 30.25 (1)
(4) टे्रड--धुलाई तथा रंगाई कक्षा-11 उद्देश्य-
(1) धुलाई एवं रंगाई को व्यावसायिक शिक्षा के प्रति रुचि, आत्मविश्वास एवं अवस्था उत्पन्न करके स्वयं अर्जन करने की क्षमता उत्पन्न करना।
(2) विभिन्न प्रकार के तन्तुओं की विशेषतायें, बनावट, बुनाई की जानकारी देते हुये वस्त्रों की धुलाई एवं रंगाई तथा सुरक्षा का पर्याप्त ज्ञान देना।
(3) धुलाई एवं रंगाई से आधुनिक उपकरणों के प्रयोग द्वारा समय, श्रम एवं धन की बचत का ज्ञान देना। (4) विभिन्न आयु, वर्ग एवं आयु के आधार पर वस्त्रों तथा रंगों के चयन का ज्ञान देना। (5) बाजार से सम्पर्क स्थापित करने का कौशल एवं आधुनिकीकरण का ज्ञान कराकर निर्मित वस्तुओं का उचित वितरण करने का ज्ञान देना। रोजगार के अवसर-- (1) ड्राई क्लीनर्स केन्द्र स्थापित किये जा सकते हैं। (2) धुलाई तथा रंगाई प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये जा सकते हैं। (3) रंगसाज स्वतः रोजगार कर सकता है। (4) किसी कारखाने/प्रतिष्ठान अथवा दुकान में काम कर सकता है। (5) धुलाई तथा रंगाई हेतु आवश्यक यन्त्रों, छपाई, उपकरणों, विभिन्न प्रकार के रंगों एवं सामग्रियों की आपूर्ति करने का स्व-रोजगार चला सकता है। पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
86 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
(1) व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य। 20 अंक (2) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-- 20 अंक विकासशील भारत की आवश्यकताओं, आंकाक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ। समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी से निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर।
रोजगार ढूंढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृ़द्धि का ज्ञान। मूल मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिये मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना। (3) व्यावसायिक शिक्षा को सफल बनाने हेतु स्वास्थ्य का महत्व-- 20 अंक घर तथा पास-पड़ोस की सफाई। घर के विभिन्न कक्ष तथा उसमें रखी वस्तुओं की सफाई, रख-रखाव एवं व्यवस्था।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(वस्त्र निर्माण एवं तन्तु)
(1) तन्तु का वर्गीकरण एवं परीक्षण--
16 (क) सब्जियों से प्राप्त होने वाले तन्तु। (ख) पशुओं से प्राप्त होने वाले तन्तु। (ग) खनिज से प्राप्त तन्तु। (घ) कृत्रिम तन्तु।
16 14 (2) तन्तु--विस्कस, एसिटेट, रेयान, नायलान। (3) धागों का वर्गीकरण--साधारण (सिंगल) प्लाई, फैन्सी। (4) वस्त्रों से सम्बन्धित तन्तु और कपड़े का अध्ययन।
14
तृतीय प्रश्न-पत्र
(धुलाई तकनीक)
12
12
12
12 1-(1) धुलाई के उद्देश्य एवं महत्व। (2) धुलाई के सिद्धान्त एवं धुलाई के सुझाव। 2-(1) धुलाई में रंगों का महत्व। (2) धुलाई के उपकरण (प्राचीन तथा आधुनिक)। 3-(1) जल तथा जल का धुलाई में महत्व। (2) कपड़े पर दाग एवं धब्बे। 4-(1) धुलाई के लिये महत्वपूर्ण आवश्यक सावधानियां। (2) प्रारम्भिक धुलाई तथा पारस्परिक धुलाई। 5-(1) धुलाई के प्रतिकर्मक तथा विरंजक शोधक पदार्थ, अन्य प्रतिकर्मक। 12 (2) अपमार्जक तथा संश्लेषित अपमार्जक।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(रंगाई तकनीक)
(1) कपड़े में रंगों का महत्व। (2) रंग तथा रंग योजना का अध्ययन। (3) रंगों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव एवं रासायनिक प्रभाव। (4) रंग और रंजक, पिगमेन्ट का ज्ञान। (5) विभिन्न प्रकार के रंग और कपड़े का अध्ययन। (6) रंग का कपड़ों पर प्रभाव। (7) रंगे हुये धागों और कपड़ों पर विभिन्न प्रकार के साबुन का प्रभाव। (8) पक्के एवं कच्चे रंग का अध्ययन।
6 8 8 8 8 8 8 6भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 87
पंचम प्रश्न-पत्र
(धुलाई-रंगाई का प्रबन्ध)
(1) रंगाई-धुलाई इकाई के प्रकार और आकार। 10 (2) रंगाई-धुलाई की इकाई को लगाने के लिए कार्यक्रम की योजना का निर्माण-- 20 (क) स्थान का चयन। (ख) भवन निर्माण की योजना। (ग) कारीगरों की संख्या की सूची। (घ) उपकरण की देख-भाल। (ङ) बजट बनाना।
(3) उद्योगों का वर्गीकरण एवं अर्थ, महत्व, उपयोगिता। (4) लघु उद्योग एवं वृहद उद्योग का अध्ययन।
20 10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप
(क)
(1) विभिन्न तन्तुओं का संग्रह एवं पहचान--
(क) वेजीटेबिल तन्तु। (ख) एनीमल तन्तु। (ग) खनिज तन्तु। (घ) कृत्रिम तन्तु।
(2) विस्कस, एसीटेट, रेयान, नाइलोन तन्तुओं का संग्रह। (3) विभिन्न धागों का संग्रह--
साधारण, प्लाई धागे।
(ख) (1) विभिन्न प्रकार के तन्तु और वस्त्र का परीक्षण--
(भौतिक एवं रासायनिक माध्यमों से)
(2) सूती कपड़ा--(सफेद और रंगीन)--
धोना, सुखाना, प्रेस करना, तह लगाना।
(3) रेशमी कपड़ा--(सफेद, रंगीन)। (4) कृत्रिम कपड़े--
धोना, सुखाना, प्रेस करना, तह लगाना।
(5) ऊनी कपड़े--
धोना, सुखाना, प्रेस करना, तह लगाना।
(ग)
(1) धागे रंगना--
सूती, रेशमी, ऊनी, कृ़त्रिम।
(2) चाय, काफी, हल्दी द्वारा 6"×6" के नमूने तैयार करना। (3) डायरेक्ट डाइस के विभिन्न रंगों के मिश्रण द्वारा बाधनी डिजाइन का नमूना बनाना--साइज 8"×2"A (4) नेप्थाल डाइस द्वारा कुशन कवर बनाना। (बारिक)।
(घ)
(1) रंगाई-धुलाई की विभिन्न इकाइयों में भ्रमण करना एवं उस पर प्रोजेक्ट कार्य दिखाना। प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा--
1-परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायेंगे--
(1) धुलाई (बड़ा प्रयोग), (2) रंगाई (बड़ा प्रयोग), (3) वस्त्र निर्माण एवं तन्तु, (4) रंगाई-धुलाई इकाई का प्रबन्ध, (5) मौखिक।
2--
(क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
नोट--(1) प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
(2) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घण्टे का समय निर्धारित है।
88 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम तथा पता मूल्य
1 2 3
1 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान प्रमिला वर्मा प्रकाशक-बिहार हिन्दी गं्रथी अकादमी,
4 5 रुपया 55.00
पटना, वितरक विश्वविद्यालय, प्रकाशन
2 वस्त्र विज्ञान एवं धुलाई श्री आनन्द शर्मा रिसर्च पब्लिकेशन्स, जयपुर--2, 40.00 कार्य
वितरक--विश्वविद्यालय, प्रकाशन
3 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान नीरजा यादव साहित्य प्रकाशन, आगरा, वितरक-- 25.00
विश्वविद्यालय, प्रकाशन
4 वस्त्र विज्ञान की रूपरेखा श्रीमती लोकेश्वरी शर्मा स्वास्तिक प्रकाशन, अस्पताल मार्ग, 15.00
आगरा--3
5 वस्त्र धुलाई विज्ञान श्रीमती लोकेश्वरी शर्मा यूनिवर्सल बुक सेलर, हजरतगंज, लखनऊ 33.00
(5) टे्रड--बेकिंग तथा कन्फेक्शनरी
कक्षा-11 उद्देश्य-- (1) बोध कराना कि सामान्यतः नाश्ते में प्रयोग किये जाने वाले बिस्कुट तथा केक आदि सरलता से कुटीर उद्योग स्थापित कर घर पर ही बनाये जा सकते हैं। (2) कम पूंजी में बेकिंग, कन्फेक्शनरी उद्योग स्थापित करने के कौशल का विकास करना। (3) बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पावरोटी आदि बनाने का कौशल विकसित करना। (4) जानकारी देना कि बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग ऐसे उत्तम खाद्य पदार्थ का निर्माण करता है जो सामन्य परिस्थितियों में ब्रेकफास्ट के रूप में प्रयुक्त होता ही है, प्राकृतिक आपदाओं के सयम तैयार लंच पैकेट्स के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है। (5) जानकारी देना कि उचित ढंग से तैयार किया गया बिस्कुट यदि सही ढंग से पैकिंग कर सीलनमुक्त स्थान पर सुरक्षित किया जाय तो वह पर्याप्त समय तक खाने योग्य रह सकता है। रोजगार के अवसर--
(1) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग में नौकरी मिल सकती है। (2) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग का कुटीर उद्योग स्थापित कर स्वरोजगार किया जा सकता है। (3) बेकिंग कन्फेक्शनरी हेतु कच्चे माल के क्रय-विक्रय का धन्धा चलाया जा सकता है। (4) बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पावरोटी आदि का होलसेल रिटेल सेल का व्यवसाय चलाया जा सकता है। (5) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग का प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया जा सकता है।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
(1) व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य-- 20 (2) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-- 20 विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षायें और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 89राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ।
समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी के निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर। रोजगार ढूढने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान। मूल मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिए मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना।
(3) व्यावसायिक शिक्षा को सफल बनाने हेतु स्वास्थ्य का महत्व-- 20 घर तथा पास-पड़ोस की सफाई। घर--विभिन्न कक्षा तथा उसमें रखे वस्तुओं की सफाई, रख-रखाव एवं व्यवस्था। समय, श्रम व पैसे के बचाव हेतु उपकरणों का साधारण ज्ञान। प्रदूषण के प्रकार, कारण/प्रदूषण से हानि और अपने स्तर पर प्रदूषण होने से रोकने के उपाय। पर्यावरण के स्वच्छ न होने वाली बीमारियों का ज्ञान, कारण एवं बचने के उपाय। बीमारियों या दुर्घटना के समय देने वाले प्राथमिक उपचार का साधारण-ज्ञान।
द्वितीय प्रश्न-पत्र (प्रारम्भिक बेकिंग) (1) गणना--सामान्य सूची-पत्र तोल व माप, अंग्रेजी व मीट्रिक नाप, थर्मामीटर की उपयोग विधि, सामान्य गणना, संक्षिप्त विधियां, मात्रा एवं मूल्य निर्धारण। 10 (2) बेकिंग विज्ञान का लक्ष्य व उद्देश्य। 10 (3) बेकरी उपकरण (ओवन बेकिंग)। 10 (4) विभिन्न भटिठयों (ओवन) की संरचना तथा कार्य विधि का सामान्य ज्ञान, बेकरी व कन्फेक्शनरी पदार्थों की बेकिंग तापक्रम, बेकिंग के अन्यान्य प्रभाव। 10 (5) बेकिंग विज्ञान का इतिहास। 10 (6) बेकिंग शब्दावली। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र (बेकिंग विज्ञान) (1) मैदा (फ्लोर)--संरचना का परिचय, प्रोटीन की प्रकृति, डबल रोटी का निर्माण व बेकिंग में ग्लूटने की तैयारी व क्रियात्मक महत्व, मैदे के गुणों का सामान्य परीक्षण (रंग ग्लूटने व जलारगाषण) विभिन्न मैदे की किस्में (भारतीय, अंग्रेजी, कनैंडियन, आस्टे्रलियन तथा गृह निर्मित) की प्रकृति का विवेचन, विविध आटे का सम्मिश्रण, फ्लोर आदि के विभिन्न बेक्ड पदार्थों के निर्माण में योग्यता। 16 vad
14 vad (2) खमीर (ईस्ट)--बेक्र्स ईस्ट का सामान्य ज्ञान--निर्माण डी के किण्वीकरण (फारमेन्टेशन) व क्रियात्मक में इसकी स्थिति, अवस्था का प्रभाव अधिक व अवधिक किण्वीकरण का डबलरोटी व अन्य किण्वीकृत पदार्थों पर प्रभाव, ईस्ट का भण्डारण।
(3) नमक (साल्ट)--नमक का संगठन, प्रयोग व प्रभाव, डबलरोटी व अन्य किण्वीकृत पदार्थों में नमक का प्रयोग, जीवाणुओं से क्षति व निदान।
16 vad (4) पानी (वाटर)--पानी कि किस्में, उसका व्यवहार तथा जलाकर्षण। 14 vad
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(पोषण विज्ञान)
(1) पोषण--अभिप्राय एवं स्तर--
पोषणात्मक विकारों का वर्गीकरण, अपर्याप्त पोषण, कुपोषण के कारण। 12 vad (2) कार्बोज-शर्करायुक्त भोजन-कार्बोज का वर्गीकरण, कार्बोज की प्राप्ति के साधन, कार्बोहाइडे्रट की अधिकता का दुष्परिणाम, कार्बोज की न्यूनता, कार्बोज के कार्य, कार्बोज की दैनिक आवश्यकता।
20 vad (3) वसा--वसा की प्रकृति तथा स्रोत, पोषण में वसा का स्थान, कार्य, वसा की दैनिक आवश्यकता।
16 vad (4) प्रोटीन--प्रोटीन का संगठन, प्रोटीन के स्रोत, प्राप्ति के स्रोतों के आधार पर प्रोटीन का वर्गीकरण, प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता।
12 vad
12 ङ90 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्न-पत्र
(फ्लोर कन्फेक्शनरी विज्ञान)
(1) कन्फेक्शनरी में प्रयोग होने वाली विभिन्न सामग्री। 10 (2) कन्फेक्शनरी फ्लोर, कन्फेक्शनरी में किस प्रकार के मैदे का प्रयोग किया जाता है 14 08 (3) लीविंग एजेन्ट्स। 08 (4) बेकिंग पाउडर 06 (5) केक बनाने के विभिन्न तरीके। 06 (6) अण्डा, दूध, पानी। 08 (7) सुगन्ध युक्त रंग।
प्रयोगात्मक--पाठ्यक्रम
(क)
(1) ब्रेड बनाने के विभिन्न तरीके--
(क) 100 प्रतिशत की स्पंज डी की विधि से (1) नार्मल डी की विधि से, (ख) स्पंज एण्ड डी विधि से। (ग) साल्टडिलेट विधि। (घ) नो टाइम डी विधि। (ङ) 70 प्रतिशत डी विधि।
(2) वन्स। (3) ब्रेड रोल्स। (4) फारमेनेटेड डी नट्स। (5) स्वीट डी रिच। (6) स्वीट डी लोन। (7) फ्रेन्च ब्रेड।
(ख)
(2) होलमील ब्रेड (4) डेनिस पेस्ट (6) सोयाबीन ब्रेड (8) मसाला ब्रेड (10) आलमण्ड रसियन रोल्स
(1) ब्राउन ब्रेड (3) व्हाइट ब्रेड (5) बियोच (7) ब्रेड स्टिक्स (9) बियाना ब्रेड (11) पीटिका
(ग)
(1) बटर स्पंज--फ्रूट केक, लदिरा केक, मेडिलियन्चे केक। (2) चिकनाई रहित स्पंज--स्विस रोल, टी फैंसीज, गैल्यूफीकासिम्पुल डेकोरेटिव पेस्ट्री। (3) एक पेस्ट्री और कलंकी पेस्ट्री--मटन या बेजिटेबिल पेटीज चीज डौज, खारा बिस्किट।
(घ)
(1) पोण्ड केक--वाइन एपिल, आक्साइड डाउन केक, ब्लैक फारेस्ट केक, चेक केक। (2) चिकनाई रहित स्पंज--मूल्लाग, बर्थ डे केक, गेटिव मोवा, गेटिव चाकलेट। (3) एफ एवं पलेकोपेस्ट्री--पालमियस, मार्बल केक, बिना अंडे का केक, अमेरिकन फास्टिंग, मिल्क टाफी चाकलेट फर्ज।
नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा--
परीक्षार्थी को चार प्रयोग दिये जायें--
प्रयोग--1 (बड़ा प्रयोग)--बेकरी (ईस्ट प्रोडक्ट) प्रयोग--2 (बड़ा प्रयोग)--केक आइसिंग के साथ प्रयोग--3 (छोटा प्रयोग)--बिस्किट बनाना प्रयोग--4 (छोटा प्रयोग) केक बनाना (5) मौखिक। (क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 91संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
सुश्री अतिउत्तमा चौहान विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक,
4 5 रुपया 1 टुडे कन्फेक्शनरी इण्डस्ट्रीज युनिवर्सल बुक सेन्टर, लखनऊ 30.00 2 दी सुगम बुक आफ बेकिंग तदेव 20.00 3 किचन गाइड तदेव 70.00 4 बेकिंग तथा कन्फेक्शनरी सिद्धान्त एवं विधियां
वाराणसी
(6) टे्रड--टेक्सटाइल डिजाइन कक्षा-11 उद्देश्य-- (1) विद्यार्थियों को टेक्साटाइल डिजाइन से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी देना। (2) विद्यार्थियों को बुनने, रंगने और छापने की विधियों व तरीकों से अवगत कराना।
(3) शासकीय और अशासकीय टेक्सटाइल डिजाइन उद्योग से सम्बन्धित पदों हेतु कुशल कर्मकारों का निर्माण करना। (4) इस उद्योग के द्वारा विद्यार्थियों को खेल-खेल में कार्य सिखाना एवं कार्य के प्रति एकाग्रता उत्पन्न करना। (5) व्यावसायिक कोर्स पूरा करने के बाद विद्यार्थी इस योग्य हो जायें कि वह स्वतः रोजगार स्थापित कर सकें। (6) विद्यार्थियों का विषय क्षेत्र में इस योग्य बनाना कि उसमें अपने ज्ञान, कौशल, अनुभव के आधार पर किसी विषय या विभिन्न रोजगारों को स्वतः संचालित करने की क्षमता का विकास हो सके।
रोजगार के अवसर--
(1) टेक्सटाइल डिजाइन की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् छात्र कताई-बुनाई, रंगाई व छपाई से सम्बन्धित लघु उद्योग धन्धें भी स्थापित कर सकता है। (2) स्वतः उत्पादित वस्तुओं की पूर्ति कर सकता है। (3) इस लघु उद्योग के द्वारा बेरोजगार लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकता है। (4) व्यावसायिक शिक्षा हेतु प्रशिक्षित शिक्षकों को उपलब्धि हो सकती है। (5) उपभोक्ता की रुचि के अनुसार नये डिजाइन तैयार कर सकता है।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
20 20
60 प्रथम प्रश्न-पत्र द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र
20 20 (ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
20 20 (1) व्यावसायिक शिक्षा का अर्थ एवं उद्देश्य-- (2) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-- --विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षायें और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व।
92 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4--व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ। --समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी के निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर। रोजगार ढूंढने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान। --मूल मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिए मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना। (3) व्यावसायिक शिक्षा को सफल बनाने हेतु स्वास्थ्य का महत्व--
20 --घर तथा पास-पड़ोस की सफाई। --घर के विभिन्न कक्ष तथा उसमें रखे वस्तुओं की सफाई, रख-रखाव एवं व्यवस्था। --समय, श्रम व पैसे के बचाव हेतु उपकरणों का साधारण ज्ञान। --प्रदूषण के प्रकार, कारण/प्रदूषण से हानि और अपने स्तर पर प्रदूषण होने से रोकने के उपाय। --पर्यावरण के स्वच्छ न होने वाली बीमारियों का ज्ञान, कारण एवं बचने के उपाय। --बीमारियों या दुर्घटना के समय देने वाले प्राथमिक उपचार का साधारण-ज्ञान।
(द्वितीय प्रश्न-पत्र)
(टेक्सटाइल डिजाइन)
(प्रारम्भिक डिजाइन)
(1) डिजाइन के सिद्धान्त। (2) रंगों का अध्ययन। (3) डिजाइन की उत्पत्ति एवं विकास। (4) डिजाइन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि। (5) धंडक का डिजाइनों में स्थान। (6) लाइन डाटेक ज्यामितीय आकारों का स्वरूप।
10 10 10 10 10 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(वस्त्रों के रेशे व कपड़ा निर्माण)
10 (1) रेशे का वर्गीकरण एवं परीक्षण--सब्जियों से प्राप्त होने वाले रेशे, पशुओं द्वारा प्राप्त होने वाले रेशे, खनिज से प्राप्त रेशे, मनुष्य निर्मित रेशे। (2) धागों रेशे--विसकल,एसीटेट, रेयान, नाइलान का वर्गीकरण--साधारण प्लाई। 10 (3) वस्त्रों से सम्बन्धित रेशे और कपड़ों का अध्ययन। 10 (4) प्रारम्भिक बुनाई, प्लेन, ट्रिल, साटन, डाइमण्ड, हनी काम्ब कारपेट इत्यादि। 10 (5) लूम का परिचय। 10 (6) कपड़े को फिनिश करने की विधि--साइजिंग, स्टे्रचिंग, ब्लीचिंग, चरखे का प्रयोग। 10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल क्राफ्ट)
06 06 06 06 (1) शिल्प का अर्थ एवं अध्ययन। (2) शिल्प और कला में भिन्नता। (3) टेक्सटाइल क्राफ्ट का कला से सम्बन्ध। (4) टेक्सटाइल क्राफ्ट की उपयोगिता एवं महत्व। (5) विभिन्न प्रिटिंग के उपकरण--आलू के ठप्पे, स्टेन्सिल, हैण्ड पेन्टिंग, लकड़ी के ठप्पे, स्क्रीन, ब्रश पेन्सिल
20 फ्रेम, टेबुल, स्केल, स्पंज, सहयोगी मेज, एक्सवीजी।
(6) छपाई की सावधानियां। (7) छपाई या बुनाई के बाकी कपड़े फिनिशिंग।
06 10
पंचम प्रश्न-पत्र
(वस्त्र निर्माण इकाई का प्रबन्ध--नौकरी प्रशिक्षण)
(1) टेक्सटाइल इण्डस्ट्री--प्रकार, आकार।
15भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 93 15 (2) एक फैक्ट्री या लघु बुनाई प्रिन्टिंग, स्पीनिंग ड्राई के लिये एक माडल प्लान बनाइये तथा स्थान, मजदूरी, उपकरण आदि सामग्री, बजट के बारे में विस्तृत वर्णन। (3) मार्केटिंग मैनेजमेन्ट। 10 10 (4) उपकरण की साधारण देख-भाल और मरम्मत का ज्ञान। (5) सेम्पिल पोर्ट फोलियो की आवश्यकता, विभिन्न प्रकार के पोर्ट फोलियो। 10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप)
(क)
धागों से साधारण सूती बुनाई-सिल्क, ऊनी, बुनाई, धागों की मजबूती (ट्वीस्ट एेंठन की जांच)।
(1) 30 से0मी0×30 से0मी0 दफ्ती पर सभी प्रारम्भिक बुनाई, किन्ही दो विरोधी रंग से ऊन के बुनकर तैयार करना।
(2) सभी साधारण रंगों के कपड़े पर रंग कर नमूना तैयार करना। (3) 30 से0मी0×30 से0मी0 के नमूने का अभ्यास दवेंज हाथ से छपाई (पेन्टिंग), ब्लाक छपाई, वांकिग। (4) विभिन्न कपड़ों की फिनीशिंग--कलफ लगाना, प्रेस करना, तह लगाना, बांधनी-तीन तरह की गाठों का संयोजन, तीन रंगों का उपयोग कपड़ा सूती (मारकीन)।
विषय--ज्यामितीय डिजाइन टेबल मेटस के लिये।
(ख) (1) पदार्थ चित्रण--प्रारम्भिक आकार, पारदर्शी और अपारदर्शी बर्तन, ठोस बर्तन, स्थिर वस्तुओं का चित्रण। माध्यम--पेन्सिल, वियान, पोस्टर रंग। माध्यम--जल, रंग, पेन्सिल, काली स्याही।
(2) प्राकृतिक चित्रण--फूल-पत्तियां-पेड़, दृश्य चिड़ियां, जानवर, सूखी टहनियां, मेवे, दालें मछलियां।
माध्यम--जल, रंग, पेन्सिल, काली स्याही।
(3) स्केचिंग--रेखाचित्र, वाह्य चित्रण। (4) डिजाइन--ज्यामितीय, प्लेसमेन्ट, पेजिली, ओजी, सेन्टर लाइन, लोक कला। (5) टेक्सचर--धागा, स्टेन्सिल, स्याही, मार्बल। (6) रंग योजना--रंग चक्र, एक रंगीय समदर्शी विपरीत खण्डित, विपरीत त्रिकोणीय, चौरेगी, कलर वैश्य टिण्ड और शैड, न्यूड्रल रंग, एकोमेटिक।
(ग) (1) कपड़े की छपाई रंगाई से पहले कपड़े की तैयारी--स्कारिंग-भिगोना, उबालना, (ऊनी, सिल्क और सूती) (2) विभिन्न विधियों द्वारा बांधनी बनाना--गांठ द्वारा, सिलाई द्वारा, तह द्वारा, दाल, चावल, मारबल इत्यादि। (3) लीनो पर डिजाइन बनाकर उपकरण से काटना। (4) पेपर कट स्क्रीन द्वारा स्क्रीन प्रिन्टिंग। (5) वाटिक प्रिन्टिंग--बाल हैंगिंग। (6) हैण्ड पेन्टिंग में (दुपट्टा, स्कार्फ)।
(घ)
(1) टेक्सटाइल इण्डस्ट्री छोटी-बड़ी बुनाई, ड्राइंग, प्रिन्टिंग, स्पिनिंग, उद्योग स्थानों का भ्रमण। नोट-(1) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
(2) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घंटे का समय निर्धारित है।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
1--
परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायेगेंं-- (क) प्रारम्भिक डिजाइन (बड़ा प्रयोग)। (ख) टेक्सटाइल क्राफ्ट (बड़ा प्रयोग)। (ग) वस्त्रों के रेशे व कपड़ों का निर्माण। (घ) वस्त्र निर्माण, इकाई का प्रबन्ध (छोटा प्रयोग)।
2--
(क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
94 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य 1 2 3 4 5
रुपया 1 वस्त्र विज्ञान के मूल सिद्धान्त जे0 पी0 शेरी विनोद पुस्तक मन्दिर, आगरा 20.00 प्रो0 प्रमिला वर्मा युनिवर्सल बुक डिपो, लखनऊ 20.00 2 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान
(तृतीय संस्करण)
3 हाउस होल्ड टैक्सटाइल दुर्गादत्त बुक कम्पनी, नई दिल्ली 75.00 27.00 4 भारतीय कसीदाकारी श्रीमती शिन्दे एवं कु0
पंडित
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द वल्लभ पंत, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, नैनीताल N.C.E.R.T 4-85
N.C.E.R.T. New
Delhi
5 Textile care and design Examlar Instructional material for Classes XI and XII.
(7) टे्रड-बुनाई तकनीक
कक्षा-11 उद्देश्य- (1) विद्यार्थियों को बुनाई तकनीक से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी देना। (2) शासकीय और अशासकीय बुनाई उद्योग से सम्बन्धित पदों हेतु कुशल कर्मचारी का निर्माण करना।
(3) इस उद्योग के द्वारा विद्यार्थियों को खेल-खेल (Play way) में कार्य सिखाना एवं कार्य के प्रति एकाग्रता उत्पन्न करना।
(4) बुनाई तकनीक की शिक्षा, विकलांग एवं आंखों के न रहने वाले विद्यार्थी भी प्राप्त कर सकेंगे। (5) इस उद्योग से बेकारी (Unemployment) की समस्या भी हल होगी। (6) एक अच्छा नागरिक बन जायेगें। रोजगार के अवसर--
(1) इस उद्योग की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् विद्यार्थी नौकरी की तलाश में नहीं भटकेगा। (2) थोड़ी पूंजी से अपना कार्य प्रारम्भ कर सकता है। (3) अपने द्वारा उत्पादित वस्तुओं की खपत बाजार में कर सकेगा। (4) अपने साथ अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी कार्य में लगाकर पूरे परिवार का जीविकोपार्जन कर सकेगा। (5) सरकार इस उद्योग को चलाने हेतु अनुदान भी प्रदान करती है। (6) इस उद्योग की शिक्षा के बाद विद्यार्थी किसी कपड़ा मिल या छोटे कारखाने में रोजगार प्राप्त कर सकेगा।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
बुनाई सिद्धान्त
1--कपास की कृषि उपयुक्त भूमि, जलवायु आदि। 2--विश्व में कपास के प्रकार और उनका उल्लेख।
12 12भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 95 12 3--भारतीय कपास, उनकी उपज, क्षेत्र, किस्में। 4--पदार्थ सम्बन्धी गुण-यथा रेशों की लम्बाई, मोटाई, रंग, प्राकृतिक ऐंठन आदि। 12 5--वस्त्रोद्योग में प्रयोग होने वाली विभिन्न प्रकार के तन्तु जैसे कपास, ऊन, रेशम, खनिज-कृत्रिम। 12
द्वितीय प्रश्न-पत्र
बुनाई मैकेनिज्म
12 1--बुनाई मैकेनिज्म ( Weaving Mechanism) तथा कार्य तैयारी। --लच्छी सुलझाना, ताने की बाबिन भरना, नियम। 2--भरी बाबिन को कील में सजाना और विनियां में पिरोना, खूंटे गाड़ कर ताना करना। 12 3--ताना बनाने की मशीन पर ताना बनाना। 12 4--बेलन करना, बेलन करने की मशीन, बेलन पर ताना चढ़ाने की सावधानी। 12 5--डिजाइन के अनुसार ताने के सूतों को वय में भरना, कंघों में ताने के तारों को भरना। 12
तृतीय प्रश्न-पत्र [बुनाई आलेखन (Textile Design)] 1--ग्राफ की उपयोगिता, ग्राफ पर आलेख, भराव और पावड़ी बधाव दिखाना। 15 2--सादी बुनावट (Waprib Wefrable Matib)। 15 3--सादे कपड़े को सजाने की विधि, सादे कपड़े का प्रयोग और उसकी विशेषता। 15 4--Twill बुनावट, उसके प्रकार, प्रयोग तथा विशेषता Regular Twill, Pointed, Broken, 15 Reverse Fancy Diamond Twill इत्यादि।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बुनाई-गणित)
1--रेशम, ऊन, कपास के सूतों का अंक निकालने की विधि। 2--बटे सूत का प्राप्तांक निकालना।
40 20
पंचम प्रश्न-पत्र
(सम्बन्धित कला)
(1) हथकरघ यंत्रों और उपकरणों की चित्रकारी। 20 (2) साधारण तरह के आलेखन, उसका अनुपात में बड़ा एवं छोटा करना। 20 (3) फूल--पत्ती, पौधे, पक्षी एवं पशुओं का आकृतियों की सहायता से आलेखन बनाना। 20
प्रयोगात्मक कार्य (1) सूत की लच्छियों की खूंटी (Hauks shaks) की सहायता से सुलझाना। (2) चरखा के ऊपर सूत को चढ़ाकर चरखे की सहायता से ताने की बाबिन भरना। (3) भरी हुई बाबिनों की टट्ट (coceal) में सजाना एवं उन्हें बिनिया में पिरोना। (4) खूंटे गाड़कर मैदान हाल या बाग में ताना बनाना या बेलन की मशीन पर ताना बनाना। (5) ताने के तारों की डिजाइन के अनुसार वय में भरना और कंधी में भरना। (6) ताने की बीम तैयार होने के पश्चात् बुनाई के लिये उसे करघे पर चढ़ाना, निर्धारित डिजाइनों को बुनना।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा प्रत्येक छात्र, की वार्षिक परीक्षा हेतु प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष कम से कम तीन नमूने वाले बुने हुये रेशे पर बुनाई की विशेषताओं से युक्त चित्र संग्रही प्रधानाचार्य, बुनाई अध्यापक तथा प्रदर्शक के द्वारा हस्ताक्षरित और प्रमाणित होना चाहिये। वह कार्य बिना किसी सहायता के व्यक्ति विशेष द्वारा सम्पादित किया गया है।
जो मशीनें आधुनिक कारखाने में उपलब्ध हैं तथा पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं उनके सम्बन्ध में विद्यार्थी के ज्ञान क्षेत्र को बढ़ाने के लिये उन्हें स्वयं पर्यटन द्वारा देखने का अवसर प्रदान करना चाहिये।
1--प्रयोगात्मक परीक्षा के अंकों का विभाजन--
(1) तैयारी कार्य, (2) बुनाई, (3) मेकेनिज्म, (4) मौखिक।
96 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 42--
(1) सत्रीय कार्य (2) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
1 वस्त्र विज्ञान एवं
4 5 रुपया डा0 प्रमिला वर्मा विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक, वाराणसी 55.00 परिधान
2 वस्त्र विज्ञान एवं डा0 प्रमिला वर्मा युनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 55.00 परिधान
3 बुनाई पुस्तक श्री श्याम नारायण
08.00
श्रीवास्तव
नवीन पुस्तक भण्डार, दारागंज, इलाहाबाद
4 हाउस होल्ड टैक्सटाइल श्री दुर्गा दत्त बुक कम्पनी, नई दिल्ली 75.00 02.00 5 भारतीय कशीदाकारी श्रीमती सिन्द्रे एवं कु0
पंडित
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर, नैनीताल
(8) टे्रेड--नर्सरी शिक्षण का प्रशिक्षण एवं शिशु प्रबन्ध
कक्षा-11 उद्देश्य--
शिशु देश की सम्पत्ति हैं। प्रारम्भ से ही उनका उचित देख-भाल करना राष्ट्रीय कर्तव्य है। शिशु शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर उसके प्रसार से इस लक्ष्य की पूर्ति सम्भव है। प्राथमिक शिक्षा हेतु सार्वजनीकरण के लिये भी शिशु शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा के व्यावसायीकरण की दृष्टि सें भी इण्टरमीडिएट के पाठ्यक्रम में शिशु-शिक्षा विषय का समावेश कर हम छात्रों को स्वावलम्बी बनाने में सहायक होंगे इसके अतिरिक्त भावी माता-पिता अपनी संतान का लालन-पालन करने में इस विषय के अध्ययन में समर्थ होंगे।
इस पाठ्यक्रम का विशिष्ट उद्देश्य यह है कि छात्र/छात्रायें इस रूप में प्रशिक्षित हों कि वे शिशुशालाओं का संचालन स्वयं कर सके। पाठ्यक्रम का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि उनके शाला की गतिविधियों व कार्यक्रम के संचालन हेतु अपेक्षित ज्ञान क्षमता व सही दृष्टिकोण विकसित हो सके। स्कोप--
यह पाठ्यक्रम निश्चय ही छात्रों को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने व विभिन्न शिशुशालाओं में शिक्षण कार्य करने हेतु सक्षम बनायेगा। इस प्रकार यह विषय छात्रों को नौकरी के अवसर प्रदान करने तथा स्वयं शिशुशाला या बाल-बाड़ी खोलकर उसका संचालन कर स्वावलम्बी बनाने में समर्थ बनायेगा। पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
400
200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 97प्रथम प्रश्न-पत्र
(शिशु शिक्षा तथा विद्यालय संगठन)
खण्ड (क)
(1) पाश्चात्य व भारतीय संदर्भ में शिशु शिक्षा का विकास। (2) विभिन्न शिक्षाविदों के सिद्धान्त व शिशु शिक्षण प्रणालियां। (3) शिशु शिक्षा की आवश्यकता, उद्देश्य व स्वरूप। (4) शिशुशाला के प्रकार।
8 8 8 6
खण्ड (ख) (1) आदर्श शिशुशाला की योजना एवं निर्माण-ग्रामीण तथा शहरी दोनों। 10 (2) शिशुशाला की साज-सज्जा व खेल सामग्री। 10 (3) आयु वर्गानुसार--पाठ्यक्रम, समय विभाग चक्र व क्रिया--कलाप। 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र (बाल मनोविज्ञान) (1) बाल मनोविज्ञान-ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि,विषय विस्तार अध्ययन की विधियां तथा महत्व एवं उपयोगिता 12 (2) अभिवृद्धि तथा विकास--जन्म के पूर्व से लेकर किशोरावस्था तक। 12 (3) वंशानुक्रम तथा वातावरण। 12 (4) मूलप्रवृत्ति तथा जन्मजात सामान्य प्रवृतियां। 12 (5) शिशु विकास के प्रमुख पहलू--शारीरिक, संवेगात्मक, सामाजिक ज्ञानात्मक, बौद्धिक भाषा तथा कल्पना विकास।
12
तृतीय प्रश्न-पत्र
(शिशु स्वास्थ्य व शरीर विज्ञान)
खण्ड (क)
(1) शिशुशाला में स्वास्थ्य शिक्षा का अभिप्राय, क्षेत्र तथा महत्व। 16 (2) शिशु के सर्वागीण विकास में स्वास्थ्य का महत्व तथा शिशुशाला का योगदान। 14 खण्ड (ख) (1) विभिन्न ज्ञानेन्द्रियां, संरचना व कार्य, रोग कारण तथा बचने के उपाय व उपचार। 16 14 (2) निम्न अंग यंत्रों का अध्ययन--
स्नायु संस्थान, पाचन तथा विसर्जन तंत्र। श्वसन तंत्र, रक्त परिवहन तंत्र, प्रजनन प्रक्रिया।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
मुख्य शिक्षण विधियां (भाषा, गणित)
खण्ड (क)
(1) शिशु जीवन में भाषा का महत्व। 10 (2) भाषा विकास की अवस्थायें व प्रभावित करने वाले तथ्य और बाल शिक्षार्थियों के सिद्धान्त। 10 10 (3) भाषा कौशल, अवस्थायें (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना)।
खण्ड (ख)
(1) शिशु जीवन में गणित का महत्व। (2) गणित प्रत्यय बोध की आवश्यकतायें सिद्धान्त।
16 14
पंचम प्रश्न-पत्र
(शिशु शिक्षा की सहायक शिक्षण विधियां)
खण्ड (क)--सामाजिक विषय
(1) सामाजिक विषय शिक्षण का स्वरूप व महत्व। (2) आयु वर्गानुसार सामाजिक विषय का पाठ्यक्रम।
8 6
खण्ड (ख)--प्रकृति विज्ञान व विज्ञान
(1) प्रकृति विज्ञान व विज्ञान शिक्षण का स्वरूप एवं महत्व। (2) आयु वर्गानुसार प्रकृति विज्ञान व विज्ञान विषय का पाठ्यक्रम।
8 6
खण्ड (ग)--कला एवं हस्तकला
(1) शिशु जीवन में कला एवं हस्तकला का महत्व। (2) आयु वर्गानुसार कला एवं हस्तकला का पाठ्यक्रम।
8 6
13 ङ98 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
खण्ड (घ)
खेल व संगीत
(1) खेल व संगीत शिक्षण का महत्व। (2) आयु वर्गानुसार संगीत व खेल का पाठ्यक्रम। (3) शिशु विकास में संगीत व खेल का योगदान।
6 6 6
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम तथा प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(क) कला शिक्षण। (ख) कला, हस्तकला, सिलाई। (ग) सहायक उपकरणों का निर्माण। (घ) संगीत (भाव गीत, शिशु गीत) व खेल। (ङ) शिशु--विकास का व्यक्तिगत व सामूहिक निरीक्षण लेखा--
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा . . . . 200 अंक . . . . 200 अंक (2)
(क) सत्रीय कार्य पर-- (ख) कार्य-स्थल पर परीक्षण--
नोट : प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम मूल्य
1 2
3
1 शिशुशाला में भाषा व गणित वेदमणि दीक्षित पंकज प्रकाशन,
4 5 रुपया 30.00
2 बाल मनोविज्ञान बाल विज्ञान डा0 श्रीमती प्रीति वर्मा, डा0
35.00
डी0 एन0 श्रीवास्तव
इलाहाबाद विनोद पुस्तक मन्दिर, आगरा
3 मातृ कला एवं शिशु कला श्रीमती जी0 पी0 शेरी तदेव 22.00 52.50 4 बाल मनोविज्ञान एवं बाल
-- यूनिवर्सल बुक सेन्टर, विज्ञान
लखनऊ
5 स्वास्थ्य शिक्षा -- तदेव 25.00
(9) टे्रड--पुस्तकालय विज्ञान कक्षा-11
1--उद्देश्य--
(1) एक ही पुस्ताकलय कर्मी द्वारा चलाये जाने वाले पुस्तकालय की स्थापना करने, उसके संगठन, संचालन तथा व्यवस्था की योजना बनाने लायक दक्षता प्रदान करना।
(2) मध्यम आकार के पुस्तकालय में सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में कार्य कर पाने की दक्षता प्रदान करना।
(3) किसी बड़े पुस्तकालय में पुस्तकालय सहायक के रूप में कार्य करने लायक दक्षता प्रदान करना। (4) पुस्तकालय के विभिन्न अनुभागों में कार्य कर पाने लायक दक्षता प्रदान करना।
2--रोजगार के अवसर--
(क) वेतन भोगी रोजगार-- 1--ग्रामीण पुस्तकालय कम्यूनिटी सेन्टर, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र, अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र तथा पंचायत पुस्तकालयों में मुख्य हस्तान्तरण।
2--माध्यमिक विद्यालयों, ब्लाक, तहसील, तालुका पुस्तकालय में सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष। 3--माध्यमिक विद्यालयों, ब्लाक, तहसील, तालुका पुस्तकालयों में वर्गीकरण सहायक। 4--कैटलागर। 5--पुस्तकालय सहायक। 6--लैंडिंग सहायक।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 997--प्रतिछायांकन सहायक। 8--पुस्तकालय लिपिक। 9--पुस्तक प्रदाता। 10--जेनीटर। 11--पुस्तक संरक्षण सहायक।
(ख) स्वरोजगार--
1--पुस्तकालय लेखन-सामग्री निर्माता एवं पूर्तिकर्ता। 2--पुस्तकालय साज-सज्जा एवं उपकरण। 3--कीटनाशक दवाइयों के विक्रेता। 4--पुस्तकालय परामर्श सेवा। 5--शोध छात्रों के लिये वाङ्मय सूची तैयार करने का व्यवसाय। 6--प्रतिछायांकन का व्यवसाय। 7--पुस्तक विक्रय व्यवसाय।
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
20 20
60 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र (ख) प्रयोगात्मक-- 400
20 20 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
कार्यक्रम--प्रसार एवं प्रचार कार्य।
2--पुस्तकालय सहयोग, पुस्तकालय भवन, उपस्कर एवं उपकरण, पुस्तकालय वित्त व्यवस्था, पुस्तकालय कर्मचारी, भारत में पुस्तकालय आन्दोलन का इतिहास, पुस्तकालय अधिनियम, पुस्तकालय संघ पुस्तकालय सुरक्षा एवं संरक्षण।
30
द्वितीय प्रश्न-पत्र 1-(1) संदर्भ सामग्री, परिभाषा, प्रकार, श्रेणियाँ, विशिष्ट गुण। 20 (2) संदर्भ सामग्री के मूल्यांकन का सिद्धान्त एवं मूल्यांकन। 2-विविलियोग्राफ(वाङ्मय सूचियाँ), परिभाषा,आवश्यकता, उद्देश्य, क्षेत्र, प्रकार, फिजिकल विविलियोग्राफी, परिभाषा, 20 आवश्यकता, प्रकार, विधियां, डाक्यूमेन्टेशन, परिभाषा, आवश्यकता, प्रकार, शीर्ष-मेटेरियल, कार्यविधि, इन्फारमेशन सेन्टर-यूनेस्को, विनीत, निसात, इफला, इंसर्डोक। 3-संदर्भ सेवा के प्रकार, संदर्भ प्रश्नों के प्रकार, संदर्भ पुस्तकालयाध्यक्षों की योग्यतायें एवं गुण। 20100 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
तृतीय प्रश्न-पत्र
पुस्तकालय वर्गीकरण एवं सूचीकरण (सैद्धान्तिक)
वर्गीकरण--1--पुस्तकालय वर्गीकरण का परिचय, अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य। वर्गीकरण के सामान्य सिद्धान्त, 30 पदार्थ विष्लेषण, विभाजक, विशेषता, लोक (डा0 रंगनाथन का सिद्धान्त), ज्ञान वर्गीकरण के सिद्धान्त, ज्ञान वर्गीकरण, पुस्तकालय वर्गीकरण के सिद्धान्त, परिभाषा, पुस्तक वर्गीकरण की परम्परा, पुस्तक वर्गीकरण का महत्व, ज्ञान वर्गीकरण एवं पुस्तक वर्गीकरण/पुस्तक वर्गीकरण पद्धति के विशिष्ट अवयव, सारणी, सामान्य वर्ग रूप, वर्ग अंकन, सापेक्ष अनुक्रमणिका, सहायक सारणियां और तालिकायें।
2--पुस्तक वर्गीकरण, पद्धतियों का विकास, प्रमुख पुस्तक वर्गीकरण, पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय तथा ड्युई 30 दशमलव पद्धति एवं द्विबिन्दु वर्गीकरण पद्धति का अध्ययन।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
वर्गीकरण--प्रायोगिक (लिखित)
1-प्रायोगिक कार्य "हिन्दी डयूई दशमलव वर्गीकरण" अनुवादक प्रभु नारायण गोप के नवीनतम संस्करण से कराया जायेगा।
60 नोट-1--यह प्रश्न-पत्र भी अन्य लिखित प्रश्न-पत्रों की भांति होगा। 2--परीक्षा कक्ष में निर्धारित वर्गीकरण पद्धति की केवल सारणी प्रत्येक परीक्षार्थी को उपलब्ध की जायेगी।
पंचम प्रश्न-पत्र
सूचीकरण--प्रायोगिक (लिखित)
प्रायोगिक सूचीकरण ए0ए0सी0आर0-2 संहिता के अनुसार कराया जायेगा। विषय शीर्षक के निर्माण हेतु शेयर लिस्ट आफ सब्जेक्ट टे्रडिंग के अद्यतन संस्करण का प्रयोग किया जायेगा।
नोट-1--यह प्रश्न-पत्र भी अन्य प्रश्न-पत्रों की भांति होगा। 2--इस प्रश्न-पत्र हेतु उत्तर-पुस्तिका में एक ओर 3"×5" सूची-पत्र का प्रारूप मुद्रित होना चाहिये।
प्रारूप का नमूना निम्नवत् है--
5"
3"
यदि उपरोक्त प्रारूप को उत्तर-पुस्तिका पर मुद्रित कराना सम्भव न हो तो प्रत्येक परीक्षार्थी को वांछित संख्या से सूची-पत्रक उपलब्ध कराया जायेगा।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा की रूप-रेखा
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
1--सन्दर्भ सेवा प्रायोगिक-- संदर्भ सामग्री का मूल्यांकन करना विभिन्न प्रकार की वाङ्मय सूचियाँ तैयार करना फिजिकल विविलियोग्राफीज का ज्ञान करना डाक्यूमेन्टेशन के सोर्स मैटीरियल छात्रों को दिखाकर उनका परिचय करना 2--सन्दर्भ सेवा "वाङ्मय सूची एवं डाकूमेन्टेशन (प्रायोगिक)"-- 200 अंक डाक्यूमेन्टेशन लिस्ट तैयार करना इन्डेक्ंिसग करना ऐक्सटे्रक्ंिटग करना विविलियाग्राफी तैयार करना सत्रीय कार्यों का मूल्यांकन एवं मौखिक परीक्षा सत्रीय कार्यों पर कार्य स्थल (प्रयोगशाला) परीक्षक द्वाराभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 101 प्रयोग एवं मौखिक-- 1-वर्गीकरण प्रायोगिक 2-सूचीकरण प्रायोगिक 3-सन्दर्भ सेवा, वाङ्मय सूची 4-मौखिक नोट--(1) सत्रीय कार्यों का मूल्यांकन एवं मौखिक परीक्षा, प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम प्रश्न-पत्रों में निर्धारित पाठ्यक्रमों के अन्तर्गत ही ली जायेगी। (2) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता संस्करण
मूल्य
पुनर्मुद्रण वर्ष
1 2 3 4 5 6 रुपया 1988 25.00 1 ग्रन्थालय वर्गीकरण डा0 जी0डी0
भार्गव
2 सन्दर्भ सेवा सिद्धान्त और
1985 30.00 प्रयोग
के0 एस0 सुन्दरेखन
मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी) मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
3 पुस्तक चयन और संदर्भ
" " 1985 16.00 सेवा
4 सूचीकरण के सिद्धान्त गिरिजा कुमार,
1984 35.00
कृष्ण कुमार
5 पुस्तकालय संगठन एवं
1987 40.00 प्रशासन
डा0 राम शोभित प्रसाद सिंह
वाणी एजूकेान बुक्स, दिल्ली (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी) बिहार ग्रन्थ अकादमी, पटना (वितरक-विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
6 प्रलेखीय ग्रन्थ वर्णन एस0टी0 मूर्ति मध्य प्रदेश हिन्दी अकादमी, 1981 18.00
7 पुस्तकालय संगठन एवं
भोपाल राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी 1988 30.00 संचालन
8 ग्रन्थालय संचालन तथा
1989 70.00 प्रशासन
सुभाष चन्द्र वर्मा एवं श्याम नारायण श्रीवास्तव श्याम सुन्दर अग्रवाल
श्रीराम मेहरा एण्ड कम्पनी, हास्पिटल रोड, आगरा
9 पुस्तकालय विज्ञान कोष प्रभु नारायण गौड़ बिहार राष्ट्र भाषा परिषद् 1961 13.50 10 विद्यालय पुस्तकालय प्रभु नारायण गौड़ बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना 1977 09.50 1988 30.00 11 पुस्तकालय विज्ञान परिचय द्वारका प्रसाद
शास्त्री
साहित्य भवन प्रा0लि0, इलाहाबाद (वितरक-- विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
भास्करनाथ तिवारी विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक,
12 पुस्तक चयन एवं रचना चन्द्र कान्त शर्मा " 1975 25.00 13 वाङ्मय सूची और प्रलेखन द्वारका प्रसाद शास्त्री " 1983 25.00 1983 30.00 14 पुस्तकालय वर्गीकरण सिद्धान्त एवं प्रयोग
वाराणसी
15 पुस्तक वर्गीकरण भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 30.00 16 पुस्तक सूचीकरण सिद्धान्त भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 25.00 17 संदर्भ सेवा भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 15.00 1983 15.00 18 पुस्तकालय परिचय द्वारका प्रसाद
शास्त्री
विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक, वाराणसी102 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(10) टे्रड--बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्मिक (मेडिकल लेबोरेटरी तकनीक सहित)
कक्षा-11
उद्देश्य-
1--मानव शरीर की संरचना एवं कार्मिकी का ज्ञान प्राप्त करना। 2--स्वस्थ रहने के लिये स्वच्छता के नियमों का ज्ञान प्राप्त करना। 3--स्वास्थ्य रक्षा के क्रियाकलाप, प्राथमिक चिकित्सा सहायता और छोटे रोगों के उपचार का ज्ञान प्राप्त करना। 4--बीमारी के निदान व उपचार में चिकित्सक की सहायता करना। 5--प्रयोगशालाओं तथा चिकित्सा नीति शास्त्र के प्रबन्धन का ज्ञान प्राप्त करना। 6--विभिन्न परीक्षण करना एवं व्याख्या करना। 7--एक चिकित्सीय प्रयोगशाला व्यवस्थित कर चलाना। 8--स्वतन्त्र रूप से समस्याओं से निपटने के लिए सक्षमता एवं आरम्भिक चरणों को विकसित करना
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण) 60 अंक
इकाई-1-जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण 10 अंक स्वास्थ्य, बीमारी एवं पर्यावरण--स्वास्थ्य की संकल्पना, स्वास्थ्य की परिभाषा, बीमारी की संकल्पना, संक्रमक एवं संचारित होने वाली बीमारी, संचारित न होने वाली एवं विघटनकारी बीमारियां, पर्यावरण, कारक एवं परपोेषी के मध्य पारस्परिक क्रिया-परिणामतः बीमारियां एवं स्वास्थ्य, बीमारियों के संचारित होने के माध्यम-सम्पर्क, वायु से फैलने वाली, पानी द्वारा, रोगकारक द्वारा फैलने वाली बीमारियां, कृषि क्षेेत्र, सेवा में एवं प्रबन्धन सेवा में एवं औद्योगिक स्थिति में व्यावसायिक बीमारियां, स्वास्थ्य एवं बीमारियों के सन्दर्भ में पर्यावरण।
इकाई-2-दीर्घ पर्यावरण--भौतिक ग्रह, जल वायु, ऊष्मा, विकिरण। जैविक सूक्ष्मजीव, आर्थोपोड जीव 10 अंक जूनोसिस के विशेष सन्दर्भ में जन्तु, स्वास्थ्य की देखभाल के जीव वैज्ञानिक पर्यावरण की भूमिका। सामाजिक-समुदाय, परिवार सामाजिक स्तर, सामाजिक-आर्थिक स्तर एवं स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वास्थ्य का अन्तर्सम्बन्ध नेतृत्व।
सूक्ष्म पर्यावरण--प्रतिरक्षा एवं प्रतिरक्षीकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता में प्रशिक्षण, पारिवारिक स्तर पर पोषण एवं भोजन के सिद्धान्तों का उपयोग, नियंत्रण एवं रोकथाम। व्यक्तिगत, परिवार तथा सामुदायिक स्तर पर मध्यस्थता कार्यक्रम, भौतिक पर्यावरण के आस-पास केन्द्रित मध्यस्थता कार्यक्रम।
दीर्घ पर्यावरण--भौतिक ग्रह, जल-गुणवत्ता में सुधार, नदियों, जल स्रोतों के प्रदूषण का नियंत्रण, वातावरण प्रदूषण, स्वच्छता निपटान एवं सामुदायिक अपशिष्ट का पुनः चक्रीकरण। जीव वैज्ञानिक रोगकारक नियंत्रण। सामाजिक-सामुदायिक व्यवस्था जिसके द्वारा वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग किया जा सके।
लघु पर्यावरण--भोजन एवं पोषण व्यवहार के प्रति विशेष सन्दर्भ सहित पारिवारिक स्तर पर मध्यस्थता, परिवार का स्वच्छता व्यवहार, बच्चे की भोजन व सफाई प्रथा, गृह संभाल तथा दुर्घटना से रोक-थाम।
व्यक्तिगत स्तर पर मध्यस्थता--व्यक्तिगत स्वच्छता, दोषपूर्ण शारीरिक स्थिति में सुधार, धूम्रपान, भोजन व्यवहार, कम भोजन का व्यवहार, शराब पीना, नशीली दवा का सेवन, लैंगिक अविवेक जैसी व्यवहारगत आदतों में बदलाव।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 103कार्य के वातावरण में मध्यस्थता--संस्थागत, उपकरण, प्रक्रिया तथा उत्पाद सम्बन्धित खतरों को टालना, सुरक्षा तरीके, नियमित चिकित्सकीय परीक्षण, प्राथमिक सहायता स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति तन्त्र तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति।
स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति तन्त्र--प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, द्वितीयक व तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, प्रोत्साहन स्वास्थ्य देखभाल, रोकथाम, उपचारात्मक एवं पुनर्वास स्वास्थ्य रक्षा।
सामाजिक औषधि, समाजीकृत औषधि, बचाव की औषधि, सामुदायिक औषधि, जन स्वास्थ्य की संकल्पना।
इकाई-3-भारत में स्वास्थ्य नीति-- 20 अंक
स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति तन्त्र की व्यवस्था। 1--ग्राम स्तर--प्रशिक्षित जन्म सहायक, ग्राम स्वास्थ्य निदेशक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। 2--उपकेन्द्र स्तर--महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं उनके कार्य। 3--खण्डीय स्तर--पुरुष एवं महिला स्वास्थ्य निरीक्षक। 4--प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र--संस्था, कर्मचारी और कार्य। 5--सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र--संस्था, कर्मचारी और कार्य। 6--उप सम्भागीय स्तर--उप समभागीय अस्पताल। 7--जिला स्तर--जिला स्वास्थ्य संस्था, कर्मचारी व उनके कार्य। 8--राज्य स्तर--स्वास्थ्य विभाग, निदेशालय। 9--राष्ट्रीय स्तर--(क) स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार। (ख) राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम। (ग) सन्दर्भ एवं शीर्ष स्वास्थ्य संस्थायें एवं प्रयोगशालायें।
इकाई-4--अस्पताल व्यवस्था एवं पोषण 10 अंक अस्पताल का संगठन (प्रशासन)--प्रबन्धन, कार्य व उनके उपयोग, अस्पताल-परिभाषा (विश्व स्वास्थ्य संगठन), अस्पतालों के प्रकार (शासकीय, निजी स्वयंसेवी संस्थायें आदि), अस्पताल की सेवायें, (वाह्य रोगी विभाग/अन्तरंग रोगी विज्ञान/आपातकालीन गहन, देखभाल इकाई), रिटर्न रिपोर्ट तथा अस्पताल के अन्य अभिलेख (इण्डेण्ट पुस्तक, रजिस्टर, लाग बुक आदि), अस्पताल तथा समुदाय, अस्पताल के खतरे। इकाई-5-भोजन एवं पोषण 10 अंक पोषण के आरम्भिक विचार, विटामिनों, हारमोनो, खनिजों तथा टे्रस तत्वों का मूल ज्ञान, कमी से होने वाले रोग, पोषण की अनियमिततायें।
स्वास्थ्य शिक्षा--व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वास्थ्य शिक्षा के लक्ष्य व उद्देश्य, संचार-माध्यम।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(मानव शरीर क्रिया विज्ञान) 60 अंक
इकाई-1-शारीरिक
50 अंक मानव शरीर का सामान्य परिचय--शारीरिक परिभाषा, स्थलाकृतिक पदों की परिभाषा, शरीर के वर्णन में प्रयुक्त पर, शरीर के ऊतक व कोशिकाएं, ऊपरी व निम्न भुजाओं के जोड़, जोड़ों की संरचना, लिगामेण्ट, फेसिया व बुर्सा, पेशीय अस्थि तन्त्र (ऊपरी व निम्न सीमाएं), परिवहन तन्त्र, लसीका तंत्र (संरचना, कार्य, लसीका ग्रन्थि), श्वसन तंत्र (श्वसन मार्ग एवं अंग); पाचन तंत्र (प्राथमिक गुहिका संरचना); मूत्र प्रजनन तंत्र (पुरुष व महिला अंग, वृक्क संरचना); अंतःस्रावी तंत्र (नाम, स्थिति एवं कार्य); संवेदी अंग (आंख, नाक व कान); केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र। 2-सूक्ष्म जीव विज्ञान--सूक्ष्मदर्शी एवं सूक्ष्मदर्शिकी-परिचय, सूक्ष्म जीव वर्गीकरण, नमूनों का संग्रहण, महामारी का अध्ययन, स्थानान्तरण एवं संरक्षण। 10 अंक
तृतीय प्रश्न-पत्र
(चिकित्सा एवं जैव रसायन)
60 अंक इकाई-1-विश्लेषक जैव रसायन एवं उपकरण विज्ञान (20 अंक) विश्लेषक जैव रसायन--जैव रसायन, विश्लेषण, जैव रसायन के लक्ष्य एवं विस्तार, विलयन की परिभाषा, सान्द्रता व्यक्त करने की विधियाँ, तनुता सम्बन्धी समस्यायें, विशिष्ट गुरुत्व।
उपकरण विज्ञान--विश्लेषण तुला, अपकेन्द्रण यन्त्र, वर्णामिति व स्पेक्ट्रोफोटोमिति, ज्वाला फोटोमिति, क्रोमैटोग्राफी, विद्युत कण संचालन, रक्त गैस विश्लेषक, लाइफोलाइजर, फोटोमीटर, टी0टी0, टी0एस0एच0 आंकलन उपकरण।
104 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4इकाई-2-चयापचय
(30 अंक) कार्बोहाइडे्रट चयापचय--ग्लायकोलिसिस व टी0 सी0 ए0 चक्र, ग्लायकोजन चयापचय, ग्लकोजेनेसिस, रक्त ग्लूकोज अवस्थापन, रक्त ग्लूकोज का मापन, ग्लूकोज सहनशीलता, परीक्षण, मधुमेह, वृक्कीय ग्लायकोसूरिया। वसा चयापचय स्टीराइड्स-कॉलेस्टोरॉल, ट्राइग्लिसराइड, लिपोप्रोटीन, प्रोटीन चयापचय--यूरिया निर्माण, क्रिएटिनिन, प्रोटीनूरिया, एडमा, ट्रान्सएमिनेसेज, प्रोटीन का अवक्षेपण। इकाई-3-जल एवं खनिज चयापचय-
(10 अंक) गन्दा पानी, बाइकार्बोनेट व पी0 एच0, कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम, पोटेशियम, क्लोरीन, आयरन, आयोडीन, कुछ महत्वपूर्ण हारमानों के कार्य, चयापचय के जन्मजात मामले, कुछ उदाहरण।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र सूक्ष्म जैविकी 60 अंक इकाई-1-सूक्ष्म जीव विज्ञान (20 अंक) सूक्ष्म जीव विज्ञान तथा मूल प्रयोगशाला आवश्यकताओं का परिचय, सूक्ष्मजीव विज्ञान का परिचय, परिभाषा एवं विस्तार, सूक्ष्मजीव एवं उनका वर्गीकरण, जीवाणु संरचना, पोषण तथा वृद्धि आवश्यकतायें, जीवाण्विक विष एवं एन्जाइम, जीवाण्विक संक्रमण, जीवाण्विक अध्ययन, प्रयोगशाला आवश्यकतायें तथा सामान्य प्रयोगशाला उपकरणों का उपयोग-इन्क्यूबेटर, गर्म वायु का अँवन, जल ऊष्मक, अवायवीय जार, आटोक्लेव, निर्वात पम्प, माध्यम डालने का कक्ष, रेफ्रिजेरेटर, श्वसनमापी, अपकेन्द्रण यंत्र, सूक्ष्मदर्शी का सिद्धान्त-संचालन तथा उपयोग, निजमीकरण व विसंक्रमण, भौतिक रासायनिक एवं यांत्रिक विधियाँ, संदूषित माध्यम का निपटान, माध्यम का विसंक्रमण, सिरिंज, काँच का सामान, उपस्कर, संवर्धन माध्यम उनकी निर्मित व उपयोग, सूक्ष्म जैविक परीक्षण के लिए चिकित्सकीय सामग्री का संग्रहण, तकनीशियन के करने व न करने योग्य बिन्दु। इकाई-2-जीवाणु विज्ञान में प्रयोगशाला परीक्षण
20 अंक प्रयोगशाला परीक्षणों की विधियां, लटकती बूंद निर्मित, अभिरंजित निर्मित साधारण, ग्राम, जील नील्सन, अल्वर्ट स्पोर अभिरंजक, ऋणात्मक अभिरंजक, एक विसंक्रमित स्थानान्तरण, जीवाणुओं के संरोपण व पृथक्करण की विभिन्न तकनीकें, प्रयोगशाला में विभिन्न चिकित्सकीय प्रतिदर्शों के संवर्धन, अवायवीय संवर्धन, संवर्धन लक्षणों को पहचानना, जैव रासायनिक प्रतिक्रिया व सीरोटाइपिंग, प्रतिजैविक संवेदनशीलता परीक्षण, पानी का जीवाण्विक परीक्षण, दूध का जीवाण्विक परीक्षण। इकाई-3-विभिन्न जीवाणुओं को पहचानने की विधि-
20 अंक ग्राम धनात्मक कोकाई : स्टे्रफिलाकॉकस, स्टे्रप्टो कॉकस, निमोकोकाई, ग्राम ऋणात्मक कोकाई : मोनोकॉकस कोरीने बैक्टीरियम डिफ्थीरी, माइको बैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस, माइको बैक्टीरियम लैप्रस, क्लॉस्ट्रीडियम (अवायवीय बीजाणु धारण करने वाले बैसिलस)।
ग्राम ऋणात्मक बैसिली-(क) वायवीय तथा अविकल्पी अवायवीय ः एण्टेरो बैक्टीरिएसी य एस्चरिचिया कोलाई, साल्मानेला शिगेला, क्लेबसीला, एण्ट्रोबैक्टर : प्रोटीन समूह, ब्रुसेल्स, बोडेरेला, हीमोफिलस।
(ख) ऑक्सीडेज धनात्मक ग्लूकोज किण्वक : विब्रिओ कॉलेरी। (ग) ग्लूकोज आक्सीकारक : स्यूडोमोनास य स्पाइरो केक्टस, टे्रपेनोमा, लैप्टोस्पाइरा, बौरलिया।
पंचम प्रश्न-पत्र
(चिकित्सकीय रोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) 60 अंक
इकाई-1-रुधिर विज्ञान- 20 अंक रुधिर विज्ञान का परिचय-रक्त संग्रह, प्रति स्कंदक। लाल रक्त कोशा-हीमोसाइटोमीटर, विधियाँ, गणना। श्वेत रक्त कोशा-विधियाँ, गणना।
अवकल श्वेत रक्त कण संख्या-श्वेत कोशाओं की आकारिकी, सामान्य संख्या, रोमनोस्काय अभिरंजक, अभिरंजन विधि, गणना विधि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 105इओसिनोफिल परम संख्या-ई0 एस0 आर0, वेस्टरग्रेन की विधि, विन्टाँव विधि, ई0एस0आर0 को प्रभावित करने वाले कारक, महत्व एवं सीमायें, सामान्य स्तर।
हीमोग्लोबिन आंकलन-वर्णमिति, रासायनिक,गैसोमेट्रिक, एस0जी0, विधियां, चिकित्सकीय महत्व। प्लेटलेट्स-गणना व महत्व। रेटिकुलोसाइट गणना-विधि, आकार-प्रकार, सामान्य स्तर, सिकल कोशिका निर्मित। परासरण भंगुरता परीक्षण-स्क्रीनिंग, मात्रात्मक परीक्षण, सामान्य स्तर, भंगुरता को प्रभावित करने वाले कारक, व्याख्या सामान्य एवं असामान्य लाल कोशिकाओं की आकारिकी।
स्कंदन परीक्षण-स्कंदन की प्रक्रिया, कारक, परीक्षण, रक्तस्राव की अवधि य सम्पूर्ण रक्तस्राव की अवधि थक्का खींचने का परीक्षण, प्रोथ्रम्बिन समय, टार्निक्वेट परीक्षण, प्लेटलेट गणना।
इकाई-2-इम्युनोहिमेटोलाजी व रक्त बैंक प्रौद्योगिकी (20 अंक) परिचय व इतिहास-मानव रक्त समूह, एण्टीजन, उनकी अनुवांशिकता, एण्टोबॉडी व उनके स्रावक। ए0बी0ओ0 रक्त समूह-नामकरण, एण्टीजन के प्रकार, अनुवांशिकता का मार्ग, एण्टीबॉडी के प्रकार। अन्य रक्त समूह तंत्र-विपरीत मिलान व समूहन की तकनीक। कूम्ब परीक्षण-प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष, एण्टीबॉडी का टाइटे्रशन। रक्त आधान प्रविधि-कठिनाइयाँ, प्रकार, जांचें तथा आधान प्रतिक्रिया से बचाव, नवजात बच्चों में हीमोलायटिक बीमारी व परस्पर आधान। इकाई-3- (20 अंक) रक्त समूह-दाताओं का चयनव छांटना, रक्त संग्रह, उपयोग होने वाले विभिन्न प्रतिस्कंदक, रक्त का भंडारण, कोशिका पृथक्कारक उपकरण व रक्त के विभिन्न संघटकों का आधान, संगठन, संचालन तथा प्रशासन, रक्त बैंक।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम पूर्णांक-400
इकाई-1 उत्तीर्णांक-200 स्वास्थ्य, बीमारी एवं पर्यावरण-पानी की स्वच्छता, गुणवत्ता का मूल्यांकन, पानी की क्लोरीन मांग, पानी (कुएं) का विरेचन पाउडर द्वारा विसंक्रमण। शुष्क एवं गीले बल्ब थर्मामीटर का प्रदर्शन कैट थर्मामीटर,आरामदायक परिस्थितियों के लिए न्यूनतम-अधिकतम थर्मामीटर।
क्षेत्रीय कार्य-निम्नलिखित सामाजिक तथा पर्यावरणीय पक्षों पर विशेष संदर्भ सहित ग्रामों का सर्वेक्षण ः जनसंख्या (आयु, लिंग, व्यवसाय के समूह), बीमारी का आक्रमण, भोजन व पोषण प्रथायें, बीमारी के कारणों की जानकारी, अतिसार, मीजल्स, रात्रि-अंधत्व, एंगुलर स्टोमेटाइटिस, ज्वर, खुजली। उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी, ग्राम स्तरीय कार्यकर्ता उपकेन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, अन्य स्थानीय कार्यकर्ता, प्रतिरक्षीकरण स्थिति। मानवीय विष्ठा सहित अपशिष्ट निपटान प्रथायें : जल के स्रोत, उसका संग्रहण, भंडारण एवं उपयोग (आंकड़े संग्रह कर उनका विश्लेषण करने के लिए शिक्षक द्वारा एक प्रपत्र बनाकर छात्रों को दिया जाए।)
स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति तंत्र तथा अस्पताल संगठन-क्षेत्र के दौरे-उप केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामूहिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल चिकित्सकीय महाविद्यालय।
अस्पताल-वाह्य रोगी सुरक्षा इकाई, रक्त बैंक, चिकित्सीय प्रयोगशाला, प्रतिरक्षीकरण केन्द्र, रसोई, अस्पताल का अस्वीकृत, निपटान, पुनर्वास केन्द्र, केन्द्रीय विसंक्रमण, अभिलेख खण्ड।
चिकित्सीय महाविद्यालय-शारीरिक संग्रहालय, शरीर क्रिया विज्ञान प्रयोगशाला, रोग विज्ञान संग्रहालय।
इकाई-2-
शारीरिकी-अंगों के सतही चिन्हों का प्रदर्शन, हृदय, फेफड़े, यकृत, स्प्लीन, आमाशय, महत्वपूर्ण अस्थियां, धमनियां, शिरायें, तंत्रिकायें, जोड़। धमनियां-कैरोटिड, वैकियल, मेडियल, एण्टीरियर, टिबियल। शिरायें-जुगलर, क्यूबिटिल फीमोरेल सेफनेस।
तंत्रिकाएं-पश्च, आरिकुलर, अल्नर, लैटरल, पाँपलिटियल व साइटिक। अस्थि संरचनाएं-क्लैविकल, अग्र इलियम, शिखर, पश्च इलिचक शिखर, सुप्रास्टर्नल नॉच, स्टर्नम, पसलियाँ, मेरुदण्ड, अग्र एवं सुपीरियर, पटेला, टिबिया ट्यूबरकल। जोड़ तथा उनकी गतिशीलता, बॉल एवं साकेट जोड़, कंधे एवं कमर का जोड़ हिंज जोड़-कोहनी व घुटने का जोड़।
14 ङ106 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 सूक्ष्मदर्शियों का अध्ययन-साधारण एवं संयुक्त-उनके विभिन्न भाग एवं कार्य। कोशिकाओं के प्रकार एवं मूल प्रकार के ऊतक। हस्तन, भोजन व प्रजनन। पिंजरों की सफाई, शव परीक्षा एवं निपटान। विभिन्न माध्यमों की निर्मिति, डालना एवं भंडारण। लटकती बूंद का हस्तन।
ऊत्तक प्रौद्योगिकी
स्थिरीकरण, प्रसंसाधन, संचेतन व चयन, स्लाइडों को काटकर तैयार करना। चाकू तेज करना, स्थिरीकरण तैयार करना, विकल्सीकृत करने वाले द्रव, स्लाइड पर सेक्सन को चिपकाना, कोशिका विज्ञान आलेप की निर्मिति व स्थिरीकरण तथा पैपिन कोलाऊ अभिरंजन तकनीकें।
उपकरणों की सूची एवं मूल्य निर्धारण
क्र0 उपकरणों के नाम अनुमानित मूल्य
सं0
1 2 3
रु0
1 संयुक्त सूक्ष्मदर्शी 3,500
2 विसंक्रामक 1,500
3 हाट प्लेट (विद्युत) 1,000
4 बुन्सन बर्नर सहित गैस सिलिण्डर 800
5 स्पिरिट लैम्प 25-प्रति
6 मेज पर रखने योग्य अपकेन्द्रण यंत्र अथवा 12 बकेट सहित 200
7 रेफ्रिजरेटर 165 अथवा 230 ली0 5,000
8 कैलोरीमापी 1,500
9 गर्मवायु अवन 3,000
10 जल ऊष्मक 300
11 रिंगर टाइमर 1,500
12 विश्लेषक तुला 200
13 भौतिक तुला (2 या 5 कि0) 500
14 टाइपराइटर 3,000
15 फ्लेम फोटोमीटर 10,000
16 स्पेक्ट्रो फोटोमीटर 10,000
17 फ्लूओरोमीटर 10,000
18 छोटा गामा काउण्टर 14,000
19 वोल्टेज स्टेबलाइजर 500
20 बोर्टेक्स मिक्सर 400
21 आर0आई0ए0 ट्यूब अपकेन्द्रित करने के लिए अपकेन्द्रक यंत्र 4,000
22 पी0 एच0 मीटर 2,500
23 गर्म वायु ब्लोअर 2,000
24 37 से0 इन्क्यूबेटर 2,000
25 मफल भट्ठी 500
26 इलेक्ट्रो फोरेसिस 3,000
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 107
प्रयोगशाला सामग्री
क्र0सं0 सामग्री का नाम 1 2
अनुमानित मूल्य 3 रु0
7,500
7,500
27 सादी शीशे की स्लाइडें 28 नीडिल 29 स्पिरिट 30 रुई 31 स्पेसीमेन ट्यूब काड्र्स सहित 32 ग्लास स्प्रेडर 33 स्लाइड बाक्स पालीथीन 34 टेस्ट ट्यूब (माइरेक्स) 35 यूरीन फ्लैक्स 36 टेस्ट ट्यूब ब्रश 37 टेस्ट ट्यूब होल्डर 38 टेस्ट ट्यूब स्टैण्ड 39 स्पिरिट लैम्प 40 बीकर 41 यूरिनोमीटर 42 मैजरिंग सिलेण्डर 50 एम0एम0 43 थर्मामीटर 44 ड्रापर 45 फारसेप्स 46 काच ग्लास 47 पिपेट 48 पेनसिलीन बोतलें 49 शाहली डीमोग्लोबिनोमीटर 50 शाहली ग्रेड्एटेड पिपेट 51 छोटी ग्लास रॉड 52 ड्रापिंग पिपेट 53 एक्जाबेन्ट पेपर 54 लिंटमस पेपर 55 ब्यूरेट 56 ड्रापर बोतल 57 प्रयोगशाला रसायन
(11) टे्रड रंगीन फोटोग्राफी (कक्षा-11) फोटोग्राफी शिक्षण के उद्देश्य-
(1) यह एक ऐसा विषय है जिसकी कोई भाषा नहीं है अर्थात् अनपढ़ भी चित्रों से कहानी रच लेता है। (2) जनसंचार का सबसे प्रखर एवं सुन्दर माध्यम है। (3) स्वरोजगार के लिए सबसे सरल, महत्वपूर्ण उपकरण है। यह आवश्यक नहीं है कि स्वतः रोजगार के लिए अधिक विस्तृत ज्ञान हो। व्यावसायिक दृष्टिकोण से अत्यधिक धन अर्जन करने का अति सरल माध्यम है।
(अ) उपकरणों का क्रय-विक्रय। (ब) उपकरणों का रख-रखाव तथा उनके त्रुटियों का समाधान। (स) व्यावहारिक जीवन में (शादी ब्याह/उत्सव) छाया-चित्रण। (द) व्यवसायीकरण (स्टूडियो)।
(4) औद्योगिक क्षेत्र में इससे प्रखर तथा धनोपार्जन का सरल माध्यम दूसरा विषय नहीं।
(अ) फैशन फोटोग्राफी। (ब) मॉडलिंग। (स) औद्योगिक।
108 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(द) आन्तरिक छाया चित्रण। (य) भूगर्भ से रहस्यों का ज्ञान।
(5) इस बदलते हुए आधुनिक कम्प्यूटरीकृत युग में छाया-चित्रण विषय का एक अद्वितीय चमत्कार शल्य चिकित्सा एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण करने में योगदान।
(अ) जटिल से जटिल शरीर के अन्दर छिपे रोगों को जानना एवं निवारण, जैसे अल्ट्रासाउण्ड, एम0एम0आर0, जो कम्प्यूटर की मदद से शरीर के किसी भी भाग का थ्रीडाइमेन्शनल चित्र देने में सहायक।
(ब) मनोरंजन के क्षेत्र में इससे सुन्दर और बृहद कोई विषय नहीं है-जैसे छोटे बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्टून चित्र।
(स) वीडियो, टेलीवीजन, चलचित्रण एक प्रखर मनोरंजन का माध्यम जो पूरे संसार में देखे जा सकते हैं और सराहे भी जाते हैं।
(6) शिक्षण के क्षेत्र में छाया चित्रण से जटिल और सुन्दर कोई शास्त्र नहीं है क्योंकि इस विषय की गहराई से अध्ययन तभी सम्भव है जब छात्र भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, इलेक्ट्रॉनिक तथा रचनात्मक कला का ज्ञानी न हो।
(7) उच्चस्तरीय शिक्षण के लिए एक प्रभावशाली माध्यम से आज हमारा देश एवं पश्चिमी देशों में विशेष कर पठन पाठन के लिए उपयोग किया जा रहा है।
(8) भारत जैसे देश में सीमाओं पर रख-रखाव के लिए इन्फ्रारेड फोटोग्राफी के द्वारा देश की सुरक्षा की जा रही है।
(9) विभिन्न देश अपने मानचित्रों की छाया-चित्रण के माध्यम से अंकित करते हैं। देश की रक्षा के लिए अनुसंधान के कार्यों में विशेषकर लाभप्रद है।
(10) कला की दृष्टि से फोटोग्राफी एक सुन्दर माध्यम है जो न केवल स्वान्तः सुखाय है अपितु जनसमुदाय के लिए मनोरंजन एवं लोकप्रिय है।
(11) छाया-चित्रकार के रूप में छाया चित्रकार।
(अ) औद्योगिक गृहों में। (ब) मुद्रणालय में। (स) शोध संस्थाओं में। (द) संग्रहालय में। (य) विज्ञान अभिकरणों में। (र) कला भवनों में। (ल) वन्य जीवन छाया-चित्रकार के रूप में। (व) प्राकृतिक सौन्दर्य चित्रकार के रूप में कार्यरत है।
(12) अन्य कक्ष प्राविधिक छाया-चित्रण अध्यापक शैक्षिक संस्थानों में। (13) स्वतन्त्र रूप से छाया चित्रकारिता। (14) स्वतन्त्र रूप से छाया पत्रकारिता।
अ खेलकूद छाया चित्रकार। ब समाचार छाया चित्रकार। स अपराध छाया चित्रकार। द संसदीय समाचार छाया चित्रकार के रूप में।
पाठ्यक्रम
1-इस टे्रड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। 2-पाठ्यक्रम में दिये गये प्रयोगात्मक सूची के सभी प्रयोगों को करना अनिवार्य है। 3-अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (क) सैद्धान्तिक-- पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200 नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 109प्रथम प्रश्न-पत्र
छायाचित्रण परिचय-कैमरा
(1) फोटोग्राफी क्या है ?
30 अंक (क) छाया-चित्रण में पूर्व प्रयोग (ख) छाया-चित्रण का संक्षिप्त इतिहास (ग) छाया-चित्रण की उपयोगिता
(2) कैमरा के प्रकार तथा उसका प्रयोग :
30 अंक बॉक्स कैमरा, फोल्डिंग हैण्ड या स्टैण्ड, रिफ्लेक्स कैमरा-(1) सिंगल लेंस रिफ्लेक्स कैमरा, (2) ट्विन लेंस रिफ्लेक्स कैमरा मिनियेचर, सब-मिनियेचर, डिजिटल कैमरा, वीडियो कैमरा टी0एल0आर0 में अन्तर, कम्प्यूटर फोटोग्राफी, फोटो सीडी स्टीरियो स्कोपिक, पैनोरोमीक तथा अण्डर वाटर फोटो कैमरा। लार्ज कैमरा तथा मीडियम फारमेट कैमरा, ड्रोन कैमरा।
द्वितीय प्रश्न-पत्र डार्करूम-सेन्सीटिव मटेरियल 1-डार्करूम का ले आउट, उसके आवश्यक उपकरण तथा प्रयोग। 2-फोटो सेन्सीटिव सामग्री तथा उसकी विशेषतायें :
10 20 (क) फिल्म-फिल्मों का वर्गीकरण, फिल्म गति, ग्रेन साइज, रंगों के प्रति सुग्राहिता। (ख) पेपर-फोटोग्राफिक पेपर की विशेषतायें, ग्रेड, कन्ट्रास्ट सरफेस, पेपर आधार, आकार, बेट निगेटिव व पेपर का सम्बन्ध।
3-प्रकाश स्रोत-
10 (क) सूर्य का प्रकाश (ख) कृत्रिम प्रकाश
4-विभिन्न प्रकार के प्रकाश की दशाओं में विभिन्न शटर तथा अपरचर में सही उद्भासन
सम्बन्ध--
10 (क)व्युत्क्रमता का नियम तथा उसकी असफलता (ख)उद्भाशन की उदारता (ग)अभिलाक्षणिक वक्र
5-फिल्टर क्या है ?
10 (क)फिल्टर की विशेषतायें व प्रकार (ख)अल्ट्रा वायलेट, पोलराइजिंग, कलर करेक्शन, कलर कनवर्जन, स्काई लाइट, सोलर, द्रव्य मल्टी इमेज फिल्टर, इन्फ्रा रेड फिल्टर तथा उसके अनुप्रयोग।
तृतीय प्रश्न-पत्र
लेन्स का सामान्य परिचय
24 (1) लेन्स व उनके प्रकार। टेलीफोटो, वाइड ऐंगिल लेन्स, जूम लेन्स, माइक्रो लेन्स, सप्लीमेंट्री लेन्स, दर्पण लेन्स। (2) लेन्स द्वारा बने प्रतिबिम्बों के दोषों को चित्र सहित समझायें--
12 (क) वर्ण विपयन (ख) गोलीय विपयन (ग) कोमा (घ) एस्टेंन्मेटिज्म (ङ) कवेंचर (च) डिस्टारशन
12 (3) प्रकाश व उसके गुणों को चित्र सहित समझाइये- प्रकीर्णन, ध्रुवीकरण, विवर्तन, व्यक्तिकरण, अपवर्तन, किरणन, परिवेशन, पृथक्करण। (4) माइक्रो तथा मैक्रोलेन्स प्रयोग तथा लाभ।
12
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
प्रकाष स्रोत-प्रयोग
(1) प्रोटे्रट--
30 1-एक फोटोफ्लड बल्ब का प्रयोग110 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 2-दो फोटोफ्लड बल्ब का प्रयोग 3-तीन फोटो बल्ब का प्रयोग 4-रेम्बलेन्ट लाइट क्या है ? 5-ब्रैक लाइट 6-रिम लाइट 7-रिफ्लेक्टर का प्रयोग 8-बाउन्स लाइट का प्रयोग 9-एक अच्छी पोट्रेचर के लिए विभिन्न फोकल लेन्थ वाले लेन्स का प्रयोग 10-क्लोज अप, मुखाकृति कमर तक 3/4 तथा पूर्ण आकार का पोट्रेट
(2) उपलब्ध प्रकाश में छाया-चित्रण--
30 (क) सादे उपलब्ध प्राप्त प्रकाश का प्रयोग (ख) परावर्तित उपलब्ध प्रकाश का प्रयोग (ग) एक्स पोजर की समस्या एवं उसका निराकरण (घ) विषयवस्तु के मोममेन्ट की समस्या एवं समाधान (ङ) क्षेत्रीय गहनता का सम्बन्ध (शटर एवं अपरचर) एवं समाधान (च) कम्पेन्सेटिंग एक्सपोजर (छ) डेवलपिंग के विभिन्न तकनीकी एवं उचित तापक्रम में डेवलपिंग की क्रिया (ज) विषयवस्तु को दृष्टिगत रखते हुए उचित फिल्मों का चयन।
पंचम प्रश्न-पत्र
रंगीन छाया चित्रण
(1) रंगीन छाया-चित्रण :
20 रंग का सिद्धान्त रंगीन छाया-चित्रण की विधियां। धनात्मक विधि व्यय ऋणात्मक विधि।
(2) रंगीन फिल्म :
20 रिवसंल रंगीन फिल्म व निगेटिव रंगीन फिल्म। प्राथमिक रंगों का छायांकन। रंगीन निगेटिव फिल्म की प्रोसेसिंग। रिवसंल कलर फिल्म की प्रोसेसिंग। कलर कपल्र्स, कलर ताप, माइरिड पैमाना।
(3) रंगीन प्रिटिंग :
20 रंगीन प्रिटिंग पेपर की रचना। कलर प्रिटिंग की विधियां। घटाव व घनात्मक विधि। रंगीन प्रिन्ट बनाने के आवश्यक उपकरण। कलर इन्लार्जर।
टे्रड-रंगीन फोटोग्राफी
प्रयोगात्मक सूची
एक से 16 तक प्रयोग करने पर एक अच्छा सामान्य ज्ञान हो सकता है। प्रयोगात्मक पुस्तिका में सभी प्रयोग सफाई से लिखे जाने चाहिए, जिसे परीक्षा के समय परीक्षक को दिखाया जायेगा। सही तरीकों से प्रयोगों को करें तथा प्रत्येक प्रयोग को दो घण्टे की अवधि में समाप्त करें। कोई भी सामान व्यर्थ न करें। साथ उपकरणों को सावधानी से प्रयोग में लाएं। डेवलपर आदि को छितरायें नहीं, सभी प्रयोग में लाए गये बर्तनों को भली प्रकार धोकर सुखाकर रख दें।
(1) विभिन्न कैमरों का भली प्रकार निरीक्षण करें तथा प्रत्येक भागों को समझें तथा देखें कि वे किस प्रकार कार्य करते हैं। विभिन्न वस्तुओं को फोकस करें तथा देखें कि अपरचर की कम या अधिक करने से प्रकाश की मात्रा में क्या परिवर्तन आता है तथा क्षेत्र की गहराई (डेप्थ आफ फील्ड) में क्या असर पड़ता है।
(2) ए0जी0एफ0ए0 100 डेवलपरों तथा डी0 के0 23 को बनायें जो आगे चलकर प्रयोग में लाए जायेगेःभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 111 1 2 3 4 मेटाल 1 ग्राम फिल्म डेवलपर डी0के0 23 सोडियम सल्फाइड 13 ग्राम मेटाल 7.5 ग्राम हाइड्रोक्यूनान 3 ग्राम सोडियम सल्फाइड 100 ग्राम सोडियम कार्बोनेट 26 ग्राम पानी 1000 सी0सी0 पोटेशियम ब्रोमाइड 1 ग्राम - - पानी 1000 सी0सी0
सभी रासायनिक तत्वों को इसी क्रम में धो लें। इस प्रकार तैयार किया डेवलपर को भूरे रंग के बोतलों में कार्क लगाकर रखें। इस्तेमाल में लाने के लिए। भाग पानी तथा 1 भाग डेवलपर को लेना चाहिए। डेवलपिंग का समय 5 मिनट 65 फा0 पर तथा 3 मिनट 80 फा0 पर।
(3) अन्दर स्थित 3 या 4 वस्तुओं के चित्र खीचें। फिर डेवलप करें। इन वस्तुओं की कैमरे से दूरी प्रकाश की मात्रा, कोण, लेन्स का अपरचर, फिल्म की गति (ए0एस0ए0) कितना एक्सपोजर दिया, कौन सा डेवलेपर प्रयोग में लाया गया, तापमान, डेवलेपिंग का समय आदि को ध्यान में रखते हुए अच्छाइयों तथा कमियों का विश्लेषण करें। उदाहरण के लिए निम्न वस्तुओं का प्रयोग करें। फूल, फल, मिट्टी की आकृतियां, खिलौने, गुड़िया आदि।
125 ए0एस0ए0 की फिल्म को लेकर कैमरे में लोड करो और 250 वाट के दो लैम्प से वस्तु पर प्रकाश डालें तो हमारा एक्सपोज एफ0 5.6 पर 1/10 सेकेन्ड होगा। एक्सपोजर को प्रकाश की मात्रा तथा वस्तु से कैमरा की दूरी पर अधिक या कम किया जा सकता है।
बरसात तथा गरम मौसम में फिल्म को निम्न घोल में डालें जिससे फिल्म सख्त हो जायेगी और पिघलेगी नहीः फारमलान 40ः 1 सी0सी0 पानी 20 सी0सी0
(4) ऊपर के प्रयोग से प्राप्त निगेटिव की गैस लाइट पेपर पर प्रिन्ट करें। प्रयोग पुस्तिका में निगेटिव के घनत्व, मान्टरास्ट, पेपर का ग्रेड, प्रकाश की मात्रा, परिणाम, सावधानियों तथा दूरी के बारे में लिखें। (5) सूर्य के प्रकाश से 4 या 5 चित्र कैमरे से खीचें और इस प्रकार बने निगेटिव की पेपर में प्रिन्ट करें। (6) कुछ वस्तुओं को प्रकाश में लाकर 1/60 सेकेण्ड 1/30 सेकेण्ड, 1/15-1/10.1 सेकेण्ड तथा 10 सेकेण्ड का एक्सपोजर देकर चित्र खीचें तथा नार्मल समय के लिए डेवलप करें। प्राप्त निगेटिवों को ध्यान से देखें और विभिन्न समय में खीचे चित्रों की आलोचना करें कि अधिक या कम एक्सपोजर देने से क्या परिणाम होता है ?
(7) 4.5 चित्र सही नार्मल एक्सपोजर पर खीचें तथा इन्हें 1/4, 1/2, 1 तथा 2 गुना समय तक डेवलप करें। प्राप्त निगेटिवों की आलोचना करें कि नार्मल से कम तथा अधिक समय तक डेवलप से क्या अन्तर होता है ?
(8) 7 से प्राप्त निगेटिवों को-
(1) एक ही ग्रेड के पेपर पर प्रिन्ट करें। (2) सही ग्रेड के गैस लाइट पेपर पर प्रिन्ट करें। (3) ब्रोमाइड पेपर पर प्रिन्ट करें। निगेटिव सहित प्राप्त प्रिन्टों को क्रिटीसाइज करें।
प्रयोगात्मक परीक्षा
1-विभिन्न प्रकार के कैमरों के बनावट का अध्ययन। 2-विभिन्न प्रकार के कैमरों का संचालन। (क) कैमरा नियंत्रण एवं नियंत्रक। (ख) फिल्म लगाना। (ग) फिल्म निकालना। (घ) रिवाइडिंग आदि। 3-एपमपीजर समय पर शटर व्यीप तथा अपरचर के प्रभावों का अध्ययन। 4-फोकस की गहनता तथा क्षे की गहनता पर अपरचर का प्रभाव। 5-चित्र पर बाइड ऐंगिल तथा टेलीफोटो लेन्सों तथा नार्मल लेन्स का प्रभाव। 6-एक्सटेन्शन वायर तथा सेल्फ टाइमर का प्रयोग। 7-एक्सपोजर मीटर का प्रयोग। 8-ट्राइपाड का प्रयोग। 9-एन्लाजर की रचना का अध्ययन एवं संचालन।
112 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 410-सही उद्भासन का निर्धारण, एक्सपोजर मीटर का प्रयोग। 11-ओवर और अण्डर एक्सपोजर के प्रभावों का अध्ययन। 12-उद्भासन पर फिल्म की गति का प्रभाव। 13-विभिन्न ग्रेड्स के कागजों का प्रभाव। 14-चित्रों पर विभिन्न प्रकाश स्रोतों का प्रभाव। 15-विभिन्न ग्रेड्स की फिल्म के लिए उपयुक्त ग्रेड के कागज के चयन का अभ्यास। 16-विभिन्न रंगों के फिल्टरों का चित्र पर प्रभाव का अध्ययन। 17-फिल्म डेवलपमेन्ट का अभ्यास। 18-कागज डेवलपमेन्ट का अभ्यास। 19-विभिन्न आकारों में इन्लार्जमेन्ट बनाना। 20-विभिन्न डेवलपर्स के प्रभाव का अध्ययन।
प्रोजेक्ट वर्क
दिये गये निम्न प्रोजेक्ट कार्य में से किसी एक प्रोजेक्ट पर कार्य करना अनिवार्य है। स्टेज फोटोग्राफी (डांस, नाटक कलाकारों का छायाचित्रण, कुम्हार, फैशन, रचनात्मक टेबुलटाप, फोटोग्राम) वार्षिक परीक्षा में परीक्षक के समक्ष प्रोजेक्ट कार्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है। प्रोजेक्ट कार्य 20 अंकों का होगा।
उदाहरण- दिनांक
प्रयोग नं0 1
विषय-एक निगेटिव का कान्टेक्ट प्रिन्ट बनाना। उपकरण-कान्टेक्ट प्रिटिंग फ्रेम, निगेटिव। पेपर का प्रयोग-एग्फा सगल बेट नार्मल। एक्सपोजर-10 से0 60 वाट लैम्प से 3 फीट की दूरी पर। डेवलपिंग समय-90 से 68 फा0 ताप पर। फिक्सिंग समय-5 मिनट। घुलने का समय-1/2 घंटा बहते पानी में। परिणाम-उत्तम निरीक्षण-निगेटिव के कुछ अधिक एक्सपोज होने के कारण अधिक एक्सपोजर देना पड़ा जिससे सही प्रिन्ट बन सके। निगेटिव को हल्का सा रिड्यूस करने से निगेटिव के घनत्व को कम किया जा सकता है। सही टेस्ट स्ट्रिप निकाल कर सही डेवलपिंग समय ताप के अनुसार देना चाहिए। अधिक एक्सपोजर तथा अधिक डेवलपिंग किसी भी मूल्य पर नहीं करना चाहिए।
Date . .
Example . . Experiment No. 1
Object . . To prepare a contact print of a given negative.
Apparatus . . Contact printing frame.
Paper used . . Agla single wt. glossy, normal.
Exposure given . . 10 sec. from a 60 wt. lamp at a distance of 3 ft.
Developing time . . 120 sec. at temp 68o F.
Fixing time . . 6 Min.
Washing time . . 1/2 hour in running water.
Result . . Satisfactory.
Observation . . The negative was slightly over exposed hence a
longer exposure was required for a correct print.
By reducing the negative to lesser density this
over exposure problem can be solved.
Precautions . . Care must be taken in taking cut the test strips
and correct developing time must be given at the
temp. Over exposure and over developing must be avoided.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 113EQUIPMENT NECESSARY FOR COLOUR PHOTOGRAPHY
Sl. No. Equipment Make Country Cost 1 2 3 4 5
Rs.
1 Furnished Air-conditioned Studio (T.V. Video
1 35 mm. SLR Camera Nikon Japan complete 80,000.00 2 One Med Format Camera Mamiy ,, ,, 50,000.00 3 One Umatic Video Camera Betacam ,, ,, 1,50,000.00 4 One Vhsamera Sony ,, ,, 50,000.00 5 One color Head Enlargers Sony ,, ,, 60,000.00 6 One Multi Media Computers Wiper ,, ,, 50,000.00 7 One Color Head Enlargers Drust Italy complete 1,50,000.00 8 Four Black & White Enlargers KB India India 20,000.00 9 Six Electronic Lights Pro Blitz Japan 40,000.00 10 One Air-Conditioner Videocon India 40,000.00 11 Two Film Dryer Philips India 20,000.00 12 Refrigerator BPL India 25,000.00 13 Two Stereo Tape recorders BPL India 50,000.00 14 One Heavy Duty Generator Set Voltas India 50,000.00 . . 50,000.00 15 Miscellaneous Expenditures . . Total 88,50,000.00 40,00,000.00
Digital)
2 One Televison Camera 3 Complete Colour Lab.
1,50,00,000.00 20,00,000.00 Total 2,10,00,000.00 RECURRING
20 Umatic Tapes Panasonic Japan 30,000.00 40 VHS Tapes Panasonic Japan 20,000.00 40 Audio Tapes Sony Japan 10,000.00 Studio Back Grounds Sony Japan 10,000.00 Color Sensitive Material Kodak Germany 50,000.00 Black & White Sen Material Kodak Germany 80,000.00 Total 3,20,000.00
BOOKS RECOMMENDED
1. Photography Theory & Practice : L.P. Clerc Vol. I & II 2. The Reproduction of Color : R. W. G. Hunt 3. High Speed Photography & Photonics : Sidney F. Ray 4. Photographic Developing in Practice : Geoffrey Attridge 5. An Introduction to Color : Relph M. Evans 6. Instant Film Photography : Michael Freeman 7. Photographic Optics : Authur Cox 8. The Book of Nature Photography : Heather Angle 9. Male Photography : Michael Busselle 10. Basic Motion Picture Technology : L. Bernard happe 11. Photographic Evidence : S. G. Ehrtich 12. Photography in school : A Guil for Teachers : Robert Leggat 13. Fillming for Pleasure & Profit : Ches Livingstone 14. Motion Picture Camera Data : Dareid W. Samuelson 15. T. V. Lighting Method : Gerald Millerson 16. 16 mm. Film Cutting : John Burder 17. Script Continuity and the Production Secretary : Avril Rowlands 18. Motion Picture Film Processing : Domnic Oase 19. Basic T. V. Staging : Gerald Millerson 20. The Focal Guide to Cibachrome : Jack h. Coote
15 ङ114 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
21. The Focal Guide to Camera Accessories : Leonard Gaunt 22. Focal Guide to Larger Format Cameras : Sidney Ray 23. Photographic Skies : David Charles 24. Photo Guide to Portraits : Gunter Spitzing 25. Focal Guide to Color Film Processing : Derek Watkins 26. फोटोग्राफी, उसके सिद्धान्त तथा तकनीक ः हिमांश तिवारी
(12) टे्रड-रेडियो एवं रंगीन टेलीविजन
(कक्षा-11)
उद्देश्य-रेडियो एवं टेलीविजन आधुनिक युग में मनोरंजन का सशक्त माध्यम तो है ही साथ ही विश्व के एक छोर से दूसरे छोर तक अद्यतन सूचना तथा समाचार प्रसारित करने का भी सबल माध्यम है। आज यह विलासिता की वस्तु न रहकर ज्ञान संवर्धन के लिए आवश्यक आवश्यकता बनती जा रही है। इनकी मांग तथा सेवा का प्रसार तीव्रता से हो रहा है। अतः कुछ छात्रों को इस टे्रड में शिक्षण देना लाभकारी सिद्ध हो सकेगा। रोजगार के अवसर-
1-रेडियो तथा टेलीविजन निर्माण करने वाली कम्पनियों में नौकरी पा सकता है। 2-किसी रेडियो तथा टेलीविजन की दुकान पर रोजगार पा सकता है। 3-रेडियो तथा टेलीविजन की मरम्मत की दुकान खोलकर स्वरोजगार कर सकता है। 4-रेडियो तथा टेलीविजन के स्पेयर पाट्र्स की दुकान खोलकर स्वरोजगार कर सकता है। 5-डोर टू डोर सेवा के अन्तर्गत खराब रेडियो, ट्रान्जिस्टर एवं टेलीविजन सेट्स को लोगों के घर पर जाकर मरम्मत करके अच्छा धनोपार्जन कर सकता है। 6-रेडियो टेलीविजन टे्रनिंग सेन्टर खोल सकता है। 7-दो बैंड के रेडियो बनाना, स्टेपलाइजर तथा टी0 वी0 का निर्माण। पाठ्यक्रम-इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंको का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक- पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20 (ख) प्रयोगात्मक- 400 200 टीप-परीक्षार्थियों की लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
तरंग गति एवं ध्वनि का सिद्धान्त
1-यांत्रिक तरंगों की चाल-तरंग, तरंगों के प्रकार, अनुप्रस्थ तरंग, अनुदैध्र्य तरंग, अनुदैध्र्य
20 तरंगों के लिए न्यूटन का सूत्र/गैसों पर अनुप्रयोग, लाप्लास का संशोधन, दाब और ताप का प्रभाव, तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंगों की चाल।
2-प्रगामी तरंग-एक सरल हारमोनिक परिणामी तरंग का समीकरण, कला एवं कलान्तर, तरंग विस्थापन एवं भर्णवेग का ग्राफीय प्रदर्शन, अनुदैध्र्य तरंगों के दाब, परिणमन (गुणात्मक) तीब्रता आयाम में सम्बन्ध। 20 3-तरंगों का परावर्तन और अपवर्तन-रस्सी है स्पन्दोयं और पानी पर लहरों द्वारा एक ही माध्यम में अनेक तरंगों की परस्पर अनिर्भरता दो माध्यमों की सीमा पर अधिक परावर्तन और आंशिक परागमन। द्वितीयक वरंगिकाओं और नये तरंग अंगों के आधार पर परावर्तन और अपवर्तन की आख्या। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
विद्युत तथा विद्युत चुम्बकीय का सिद्धान्त
(क) विद्युत-
(1) वैद्युत क्षेत्र एवं विभव-इलेक्ट्रानों के स्थानान्तरण के फलस्वरूप धन तथा ऋण आवेश की उत्पत्ति, आवेश का
15भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 115 मात्रक-कूलाम, कूलाम के नियम, वैद्युत क्षेत्र, परीक्षण आवेश, वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता, बिन्दु आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र तीव्रता, विभवान्तर, विभव, बिन्दु आवेश के कारण विभव वैद्युत बल रेखायें, वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभवान्तर में सम्बन्ध, आवेशित खोखले गोलाकार चालक के कारण (क) चालक के बाहर, (ख) चालक के पृष्ठ पर, तथा (ग) चालक के भीतर, वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा विभव, दो समतल प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता।
(2) सरल परिपथ-परिपथ खुला तथा बन्द परिपथ वैद्युत सेल, सेल का आन्तरिक तथा वाह्य
15 प्ररिपथ सेल का विद्युत वाहक बल, सेल का टर्मिनल, विभवान्तर, सेल का आन्तरिक प्रतिरोध उनमें सम्बन्ध, किरचॉप का नियम, प्रतिरोधों का श्रेणी क्रम तथा समान्तर क्रम में संयोजन, समनि वि0 वा0 बल तथा समान आन्तरिक प्रतिरोधों के सेलों का श्रेणी क्रम, समान्तर क्रम तथा मिश्रित क्रम में संयोजन, हीट स्टोन ब्रिज। (ख) विद्युत चुम्बकत्व-
(1) गतिशील आवेश और चुम्बकीय क्षेत्र-छड़ चुम्बकीय एवं धारावाही परिनालिकाओं के
15 व्यवहारों की समानता। ऋजु धाराओं पर लगने वाले बल के आधार पर चुम्बकीय क्षेत्र का मापन किसी चुम्बकीय क्षेत्र में गतिशील आवेश पर लगने वाला बल लारेन्ज बल, बल का सूत्र F-Bqv sinϴ स्थापित करना। दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल चुम्बकीय बल क्षेत्र के आधार पर एम्पायर की परिभाषा, किसी वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र, किसी लम्बी धारावाही परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र (उत्पत्ति नहीं), चल कुन्डली धारामापी का सिद्धान्त, अमीटर तथा वोल्टमीटर में परिवर्तन करना। एक ऋजु धारा मीटर (डी0 सी0 इलेक्ट्रिक मोटर) का सिद्धान्त।
(2) चुम्बकत्व-एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बक पर बलयुग्म, चुम्बकीय द्विध्रुव की
15 संकल्पना द्विध्रुव आधूर्ण की क्षेत्र में बल युग्म के आधार पर परिभाषा, चुम्बकीय का युग्म परगावीय मॉडल, चुम्बकीय पदार्थ-अनु चुम्बकीय (Para Magnetic) प्रति चुम्बकीय (Dia Magnetic) तथा लौह चुम्बकीय ;Ferro Magnetic) छोटे छड़ चुम्बक द्वारा अनुदैध्र्य तथा अनुप्रस्थ दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र : पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटक, इनके स्रोत के विषय में सिद्धान्त।
तृतीय प्रश्न-पत्र
बेसिक इलेक्ट्रानिक्स
1-परमाणु संरचना-थॉमसन मॉडल, रदर फोर्ड का परमाणु मॉडल, परमाणु का बोर मॉडल। 10 2-वायर एवं स्विच-वायर के प्रकार, सरफेस स्विच, फ्लस स्विच, पुल स्विच, ग्रन्थ स्विच, पुशबटन स्विच, रोटरी
10 स्विच, नाइक स्विच, मेन स्विच।
3-प्रतिरोध-प्रतिरोध, मात्रक, प्रतिरोध के प्रकार-स्थिर प्रतिरोध, परिवर्ती प्रतिरोध, उदाहरण, कावेद
10 प्रतिरोध, मूलर कोड, कलर कोड के प्रतिरोध का मान ज्ञात करना।
4-इन्डक्टर-इन्डक्टर, इन्डक्टेन्स-सेल्फ, म्यूचुअल, मात्रक, इन्डक्टेन्स किन-किन बातों पर निर्भर करता है।
10 क्वायल, क्वायल का इन्डक्टन्स।
5-ट्रान्सफार्मर-ट्रान्सफार्मर का सिद्धान्त, संरचना, कार्य विधि वर्गीकरण। 10 6-इलेक्ट्रानिक्स में प्रयुक्त सामान्य युक्तियों के संक्षिप्त नाम और उनके प्रतीक चिन्ह-डायोड ट्रांजिस्टर, एस0सी0
10 आर0 लाउड स्पीकर, ट्रान्सफार्मर, संघारित्र, क्वायल, स्विच, माइक्रोफोन।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र ट्रांजिस्टर तथा ट्रांजिस्टर रेडियो (1) विद्युत धारा पावर सप्लाई-ब्लाक आरेख, ट्रान्सफार्मर, दिष्टकारी तथा फिल्टर का चयन, जेनर रेगुलेटर, ट्रांजिस्टर
20 प्रयुक्त रेगुलेटर, बैटरी एलीमिनेटर। (2) ट्रांजिस्टर-संरचना, प्रकार, धारा वहन प्रक्रिया, मुख्य अभिलक्षण वक्र (इनपुट व आउटपुट)। ट्रांजिस्टर तथा
20116 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 ट्रायोड में अन्तर। ट्रांजिस्टर पैरामोटर्स-L तथा B, प्रवर्धक के रूप में ट्रांजिस्टर का कार्य, विभिन्न ट्रांजिस्टर संरचनायें-उभयनिष्ठ आधार उभयनिष्ठ उत्सर्जन तथा उभयनिष्ठ ग्राही तथा उनमें अन्तर। ट्रांजिस्टर प्रवर्धक का परिपथ व उसकी कार्य विधि, गन, बैन्ड-परास तथा आवृति-अनुक्रिया वक्र।
(3) रेडियो तरंगे-माडुलन, माडुलन की आवश्यकता, सिद्धान्त तथा प्रकार, आयनमण्डल-रचना व उपयोगिता। आयन
20 मण्डल द्वारा रेडियो तरंगों का प्रसारण विभिन्न रेडियो बैण्ड, उनकी आवृत्तियां तथा प्रसारण सीमायें।
पंचम प्रश्न-पत्र
श्वेत-श्याम तथा रंगीन टेलीविजन
6 6 6 6 8 8 8 6 6 1-टेलीविजन का प्रसारण तथा ग्राह्यता प्रणाली। 2-एण्टीना-यागी एन्टीना का विवरण, ट्रांसमीशन लाइन, फीडर लाइन। 3-कैथोड किरन ट्यूब (श्वेत-श्याम तथा रंगीन दोनों)। 4-स्केनिंग राष्टर। 5-चैनल आवंटन (एलोकेशन)। 6-टेलीविजन की प्रसारण विधियां। 7-कम्पोजिट वीडियो सिगनल। 8-टेलीविजन रिसीवन का ब्लाक डायग्राम। 9-टेलीविजन के मुख्य नियन्त्रण (कन्ट्रोल)- (क) आपरेटिंग नियन्त्रक (ख) सर्विसिंग नियन्त्रण
प्रयोगात्मक कार्य का पाठ्यक्रम
1-मल्टीमीटर की सहायता से वोल्टेज, धारा तथा प्रतिरोध का मापन। 2-विभिन्न प्रकार के प्रतिरोधों को पहचानना तथा उनके मान निकालना। 3-विभिन्न प्रकार के धारित्रों को पहचानना तथा उनका मापन। 4-इन्डक्टर, ट्रांसफार्मर को पहचानना तथा मल्टीमीटर के द्वारा परीक्षण तथा मापन। 5-विभिन्न प्रकार के लाउडस्पीकरों में अन्तर तथा उनके उपयोग एवं परीक्षण। 6-विभिन्न प्रकार के डायोडों में अन्तर तथा उनका परीक्षण तथा पी0एन0 डायोड तथा अग्र पश्च प्रतिरोध ज्ञात करना।
7-मल्टीमीटर द्वारा ट्रांजिस्टर व एस0सी0आर0 के परीक्षण। 8-निम्न प्रकार की पावर सप्लाई बनाना तथा उनका परीक्षण- (अ) अनरेगुलेटेड। (ब) रेगुलेटेड। (स) एस0सी0आर0-युक्त। (द) स्वीचिंग मोड पावर सप्लाई (एस0 एम0 बी0 एस0)। 9-ट्रांजिस्टरों का उपयोग करके छोटे-छोटे परिपथ बनाना तथा उनका परीक्षण।
प्रोजेक्ट कार्य सूची
प्रोजेक्ट कार्य के लिए प्रोजेक्टों की सूची निम्नवत् है- 1-नियंत्रित पावर सप्लाई (0.30V, 1A)A 2-दो बैण्ड वाला अभिग्राही। 3-किट का प्रयोग करके टेप-रिकार्डर एसेम्बिल करना। 4- किट का प्रयोग करके श्वेत-श्याम टी0वी0 बनाना। इस सूची के अतिरिक्त विषय अध्यापक स्वविवेक सेे विषय से सम्बन्धित उपयुक्त प्रोजेक्ट भी बनवा सकते हैं।
शिक्षक विद्यार्थियों को समूह में प्रोजेक्ट आवंटन कर सकते हैं परन्तु प्रोजेक्ट बनाना अनिवार्य है।
प्रायोगिक अंकों का विभाजन निम्न प्रकार से प्रस्तावित है- आंतरिक परीक्षा 200 अंक प्रायोगिक परीक्षा 100 अंक प्रोजेक्ट 100 अंक योग... 200 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 117
रेडियों एवं रंगीन टेलीविजन तकनीक उपकरणों की सूची
उपकरण का नाम संख्या अनुमानित
क्रम अनुमानित
संख्या (ंमूल्य/अ0) मूल्य
1 2 3 4 5
रु0 रु0
1 सोल्डरिंग आइरन (25w. 35w) 25 35.00 875.00
2 कटर 25 10.00 250.00
3 नोज प्यायर 25 10.00 250.00
4 काम्बीनेशन प्यायर 25 15.00 375.00
5 स्क्रू ड्राइवर सेट (सेट आफ 16) 25 100.00 2500.00
6 चिमटी (टवीजर) 25 3.00 75.00
7 ब्रश (इंस्ट्रूमेन्ट साफ करने के लिए) 10 20.00 200.00
8 फाइल (रेती) (फलेंट, राउण्ड ट्रेगलर) 10 सेट 50.00 500.00
9 बेंच वाइस 5 50.00 250.00
10 हैण्ड ड्रिल 5 40.00 200.00
11 हेक्सा तथा हेक्सा ब्लेड 5 20.00 100.00
12 स्पेनर सेट (रिंच सेट) 5 75.00 375.00
13 हैमर (हथौड़ी छोटी) 5 20.00 100.00
14 टेस्टिंग बोर्ड (टेस्टिंग बोर्ड) (मेन्स बोर्ड) 10 40.00 400.00
(चार या पाँच प्लग साकेट वाला)
15 मल्टी मीटर (डिजिटल एलालांग) 10 225.00 2250.00
16 बैटरी एलिमिनेटर 15 125.00 1875.00
17 वोल्टेज रेगुलेटर (टी0 वी0 स्टेबलाइजर) 10 150.00 1500.00
18 श्वेत-श्याम 51 से0मी0 टी0वी0 सेट 2 3500.00 7000.00
19 श्वेत-श्याम 36 से0मी0 टी0वी0 सेट 5 1500.00 7500.00
20 सिगनल जेनरेटर (आर0 एफ0) 2 2500.00 5000.00
21 पैटर्न जेनरेटर 2 1500.00 3000.00
22 ट्रांजिस्टर किट 25 140.00 3500.00
23 टेपरिकार्डर (मोनो) 5 500.00 2500.00
24 टू इन वन (टेपरिकार्डर तथा ट्रांजिस्टर) 5 650.00 3250.00
25 रंगीन टेलीवीजन सेट (दो अलग-अलग प्रकार के) 2 7400.00 14800.00
26 इलेक्ट्रानिक कम्पोनेन्ट तथा सोल्डर . . . . 5000.00
27 कैथोड रे आस्सि कोस्कोप 2 14000.00 28000.00
28 आर0 सी0 एल0 ब्रिज 1 4000.00 4000.00
29 आडियो आस्सिलेटर 2 2000.00 4000.00
योग . . 96,925.00
पुस्तकें-
1-रेडियों एवं टेलीवीजन तकनीक-ले0 महेन्द्र सिंह, सबीर सिंह, भारत प्रकाशन मंदिर, 142ए, विजय नगर, वेस्टर्न कचेहरी रोड, मेरठ-मूल्य 125 रु0 लगभग।
2-टेलीवीजन इंजीनियरिंग-ले0 वाई0 डी0 शर्मा, भारत प्रकाशन एण्ड कम्पनी, वेस्टर्न कचेहरी रोड, मेरठ-मूल्य 100 रु0 लगभग।
3-रेडियों एवं टेलीवीजन तकनीक। 4-टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल। 5-टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल राज पब्लिकेशन, केदार काम्पलक्स, देहली गेट, मेरठ 6-कलर टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल प्रत्येक का मूल्य लगभग 25 रु0 7-रिमोट आपरेटिंग एण्ड सर्विसिंग मैनुअल 8-कलर कोड गाइड118 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 20 20
20 20
(13) टे्रड-ऑटोमोबाइल उद्देश्य– 1–अधिकांश जनसंख्या का निवास गाँव में है, जिनके लिये आने जाने का साधन तथा माल ढोने का साधन केवल वाहनों द्वारा ही उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसी जगहों में रेल उपलब्ध नहीं है, उन वाहनों की मरम्मत हेतु शहर में आना पड़ता है तथा अधिक धन खर्च होता है, जिसको बचाने के लिये ऑटोमोबाइल्स का प्रशिक्षण आवश्यक है। इसके द्वारा हम अपने वाहनों को ग्रामीण क्षेत्र में भी मरम्मत करने के बाद चला सकते हैं तथा अपव्यय को बचा सकते हैं। 2–बेरोजगारी दूर करने में सहायक होता है। स्कोप– 1–गैरेज खोल सकता है। 2–डिप्लोमा इंजी0 में द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले सकता है। 3–स्पेयर पार्ट्स की दुकान खोल सकता है। 4–किसी भी ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में नौकरी कर सकता है। 5–किसी भी संस्थान में एक वर्ष का अप्रेन्टिशशिप प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। पाठ्यक्रम– इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंका का विभाजन निम्नवत् रहेगा : (क) सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 300 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक 400 200
| क्षेत्रीय कार्य | कार्यस्थल पर प्रशिक्षण | |||||
| उपस्थिति अनुशासन | लिखित कार्य | दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे | मौखिकी | योग | प्रतिष्ठानों तथा शैक्षिक भ्रमण | योग |
| 10 | 20 | 50 | 20 | 100 | 100 | 200 |
| दीर्घ प्रयोग | दीर्घ प्रयोग | लघु प्रयोग | लघु प्रयोग | मौखिक प्रयोग के सूची के आधार पर | प्रैक्टिकल नोट बुक | योग |
| 1 | 2 | 1 | 2 | |||
| 40 | 40 | 20 | 20 | 40 | 40 | 200 |
प्रथम प्रश्न-पत्र
ऑटोमोबाइल्स का परिचय, इंजनों के प्रकार व पाटर््स पूर्णांक : 60 1. ऑटोमोबाइल्स का साधारण परिचय–परिचय, उद्देश्य, भारत में बनने वाली गाड़ियाँ, ऑटोमोबाइल्स का वर्गीकरण, कार, ट्रक आदि की विभिन्न प्रणालियों के नाम, चेचिस, बॉडी, फ्रेेम, ऑटोमोबाइल के कार्य करने का सिस्टम, सी0एन0जी0 चालित गाड़ी, जीरो प्रदूषण ऑटोमोबाइल की अवधारणा सोलर एनर्जी-चालित, हाइड्रोजन चालित, बैटरी चालित आदि गाडियों का संक्षिप्त वर्णन। 2. इंजन के विभिन्न भाग (पार्ट्स)–क्रेन्ककेश/सिलेण्डर ब्लॉक, सिलेण्डर लाइनर, पिस्टन, पिस्टन रिंग्स, पिस्टन पिन, कनेक्टिंग रांड, कैन्क, सिलेण्डर हेड, सिलेण्डर हेड की डिज़ाइन (I, H, F, L, T) गैसकेट्स, मेन वियरिंग, फ्लाई व्हील आदि के प्रकार, कार्य, उपयोग, पदार्थ का विवरण तथा इंजन के विभिन्न पाटर््स के ब्राण्ड नाम, जो भारत में निर्मित है।
20 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 119 3. इंजन का साधारण परिचय– स्पार्क इग्नीशन इंजिन की बनावट, इंजन के लिये प्रयुक्त तकनीकी शब्दावली, इंजन का वर्गीकरण, टू स्ट्रोक, फोर स्ट्रोक, स्पार्क इंजन, कार्यविधि, तुलना, सुपर चार्जर, काल्पनिक तथा वास्तविक पी0.वी0 (P-V) आरेख आदि का विवरण। 20 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
20 अंक
इंजन के सिस्टमों का विवरण एवं उनकी कार्य प्रणाली पूर्णांक : 60 1. कूलिंग सिस्टम–परिचय, कूलिंग की आवश्यकता एवं लाभ, विभिन्न कूलिंग प्रणालियों के प्रकार वायु कूलिंग, जल कूलिंग सिस्टमों के विवरण, कूलिंग सिस्टम के विभिन्न अवयव, रेडिएटर, रेडिएटर कैप, थर्मोस्टेट, शीतलक के प्रकार, उपयोग, सिस्टम की देखरेख तथा सावधानियाँ। 20 अंक 2. स्नेहन तथा स्नेहक–परिचय, स्नेहन की आवश्यकता एवं लाभ, इंजन में विभिन्न प्रकार की स्नेहन प्रणालियाँ (पैरायल, स्प्लेश, फोर्सफीड, लो दाब, हाई दाब, शुष्क सम्प, पूर्व स्नेहन प्रणाली) स्नेहकों के चारित्रिक गुण–धर्म जैसे श्यानता, श्यानता रेटिंग, फ्लैश प्वाइंट आदि, स्नेहकों के विभिन्न प्रकार जैसे मोनो ग्रेड, मल्टीग्रेड, SAE ग्रीस आदि फिल्टर, ऑयल पम्प, ऑयल टैंक उपरोक्त सभी के प्रकार, उपयोग, आवश्यकता आदि का विवरण। 3. फ्यूल सप्लाई सिस्टम (पेट्रोल एवं गैस)–परिचय, फ्यूल सप्लाई सिस्टम के प्रकार (गे्रविटी, फोर्स फीड) सिस्टम के मुख्य भाग, फ्यूल टैंक, फ्यूल फिल्टर, फ्यूल पम्प, एअर क्लीनर, कारबूरेटर का परिचय, कारबूरेटर के प्रकार (कार्टर, जैनिथ, सोलक्स) कारबूरेटर आन्तरिक भाग एवं पार्ट्स की जानकारी (जेट, फ्लोट, चोक, एक्सीलेटर, आयडियल स्क्रू, मिक्चर स्क्रू) वेन्चूरी प्रणाली आदि उपरोक्त के प्रकार, कार्य, आवश्यकता, उपयोग, रखरखाव की जानकारी/MPFI तथा DI सिस्टम।
20 अंक
तृतीय प्रश्न-पत्र
20 इंजन के विभिन्न कन्ट्रोल प्रणालियाँ, ट्रैफिक रूल एवं सुरक्षा के उपाय पूर्णांक : 60 1. वर्तमान मोटर वेहिकल ऐक्ट, ट्रैफिक रूल एवं संकेतों की जानकारी–मोटर वेहिकल ऐक्ट का संक्षिप्त परिचय, ड्राइविंग लाइसेन्स, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, इंशोरेन्स, सेल्स नई गाड़ियों का, गाड़ी के कागजात, सर्वेयर के कार्य, ट्रैफिक नियम तथा यातायात संकेत आदि का विवरण। 2. आवश्यक औजार एवं इंजन के मैकेनिकल पुर्जों की सर्विसिंग–परिचय, आवश्यक औजार, रिंग, सॉकिट, बॉक्स, पाइप, प्लग, पेचकस, रिंच, प्लास, हैक्सा, हथौड़ी, जैक, एडजेस्टिेबिल रिंच, श्वेज ब्लॉक, फाइल्स, चिजल्स, बेन्च वाइस, पुलर, निहाई, वर्नियर एवं माइक्रोमीटर, डाइलगेज आदि का विवरण। इंजन सिस्टम की सर्विसिंग, इंजन स्टार्ट करना, इंजन में आने वाले दोष तथा उनका निवारण। औजार बॉक्स, इन्सपैक्सन औजार, इन्शुलेशन टेप, ऑयल कैन मशीनगन (ग्रीसगन) बिजली के तार फीलरगेज, टार्करिंच आदि का संक्षिप्त विवरण। 20 3. सुरक्षा के उपाय–बम्पर, रूवार, एयर बैग, सेफ्टी बेल्ट, सेफ ड्राइविंग दर्पण, स्टीयरिंग लॉक, स्टीयरिंग पिन, बैक वजर, चाइल्ड प्रूफ डोर लॉक, रिमोट कन्ट्रोल लॉक, हेलमेट आदि का विवरण। 20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(मशीन ड्राइंग) पूर्णांक : 60
15 10 1. ड्राइंग का विषय परिचय–ड्राइंग उपकरण, अक्षर लेखन, मापनी, ड्राइंग कागज साइज, भार, विशिष्टियाँ, ड्राइंगसीट का आयोजन, विन्यास, मार्जिन, टाइटिल ब्लॉक, ड्राइंग बोर्ड। 2. विमांकन–विमांकन के प्रकार, विमा सिद्धान्त, स्थिति निर्धारण। 3. सहजीकरण-निरूपण और चिन्ह–रेखा के प्रकार, रेखाओं का निरूपण, पदार्थ के निरूपण एवं संकेत, वोल्ट, नट, चूड़ियों, गियर, स्प्रिंग के संकेत, पाइप, चैनल, धरन, छड़ों, वेल्डिंग के प्रकार एवं संकेत, रिवेट तथा वोल्ट ज्वाइन्ट, मशीनी भागों का निरूपण। 20 4. ज्यॉमिति संरचना–त्रिभुज पंचभुज, चतुर्भुज, पंच भुज, षट्भुज की रचना ज्यॉमिति विधि द्वारा करना। 15
पंचम प्रश्न-पत्र
मैकेनिकल गणित पूर्णांक : 60 1. वर्ग, वर्गमूल, प्रतिशत पर आधारित साधारण प्रश्न एवं यूनिट कन्वर्जन आदि। 8 2. शक्ति के संचरण–गीयर द्वारा, पट्टे द्वारा, घिरनी द्वारा एवं स्क्रूगेज पर आधारित साधारण गणना। 10 3. घनत्व निकालने का सूत्र तथा साधारण गणना। 7 4. ऊष्मा तथा ताप–परिभाषा, सूत्र तथा साधारण गणना। डीजल पेट्रोल का ऊष्मीय मान। 10 5. कटाई गति–परिभाषा, सूत्र तथा साधारण गणना। 8 6. बल आघूर्ण, यांत्रिक लाभ, उत्तोलक, साधारण गणना। 9 7. कार्य, शक्ति, ऊर्जा, वेग, त्वरण की परिभाषा तथा सूत्र पर आधारित साधारण गणना। 8120 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(अ) दीर्घ प्रयोग–
1–क्लच पैडिल प्ले को एडजस्ट करना, गाड़ी से गीयर बॉक्स तथा एसेम्बली को उतारना, क्लच एसेम्बली की सफाई, पुर्जों का निरीक्षण तथा फिट करना।
2–गीयर सिंक्रोनस मैकेनिज्म की सफाई, एसेम्बली, गीयर ऑयल बदलना आदि।
3–ब्रेक सिस्टम खोलना, ब्रेक शू बदलना, एसेम्बली, व्हील, सिलेण्डर को बांधना, खोलना, निरीक्षण करना, चारों पहियों को एडजस्ट करना। 4–मास्टर सिलेण्डर को उतारना, खोलना, सफाई करना, चेक करना, ब्रेक सिस्टम की एयर ब्लीडिंग करना।
5–किंग पिन तथा बुशों को खोलना, वियरिंग एडजस्ट करना, नये बुश या वियरिंग लगाना आदि। 6–गाड़ी से पहिया खोलना, रिम से टायर ट्यूब अलग करना, ट्यूब का पंचर बनाना। 7–फोर स्पीड गीयर बॉक्स तथा शीघ्र स्पीड बॉक्स खोलना, सफाई करना, निरीक्षण करना, फिट करना। 8–स्टियरिंग, गीयर बॉक्स खोलना, साफ करना, निरीक्षण करना, प्ले को एडजस्ट करना, अगले पहिये का एलाइनमेन्ट तथा टायर की घीसावट दूर करना। 9–रीयर ऐक्सिल असेम्बली को उतारना, खोलना, सफाई, निरीक्षण वियरिंग को उतारना, सफाई करना, ऑयल चेक करना एवं बदलना। 10–प्रोपेलर शाफ्ट और यूनिवर्सल ज्वाइन्ट की स्पीडिंग तथा घीसे पुर्जों का निरीक्षण करना तथा सावधानी पूर्वक फिट करना।
(ब) लघु प्रयोग– 1–इंजन हेड खोलना, फिट करना डिकार्बोनाइज करना। 2–इंजन हेड में वाल्व सीट काटना तथा फिट करना। 3–पिस्टन खोलकर साफ करना, निरीक्षण करके फिट करना। 4–सिलेण्डर के घिसाव की माप करना। 5–रेडियेटर की फ्लाशिंग, क्लीनिंग तथा साइज पाइप फिट करना। 6–वाटर पम्प की ओवरहॉलिंग करना। 7–थर्मोस्टेट वाल्व को टेस्ट करना, चेक करना तथा फिट करना। 8–इंजन स्टार्ट करके फैन बेल्ट चेक करना एवं एडजस्ट करना। 9–इलेक्ट्रिक सिस्टम का टेस्ट करना। 10–इग्नीशन टाइमिंग को सेट करना। 11–सेल्फ स्टार्टर की ओवरहॉलिंग करना। 12–डायनमो की ओवर हॉलिंग करना। 13–हाइड्रोमीटर तथा हाइटैट डिस्चार्ज मोटर द्वारा बैटरी टेस्ट करना।
उपकरणों की सूची
इंजन पाटर््स एवं मॉडल– 1–दो स्ट्रोक इंजन (पेट्रोल तथा डीजल) (मॉडल)–01 सेट। 2–चारस्ट्रोक इंजन (पेट्रोल तथा डीजल) (मॉडल)–01 सेट। 3–सिलेण्डर ब्लॉक। 4–सिलेण्डर। 5–सिलेण्डर हेड। 6–कनेक्टिंग रॉड। 7–कैन्क शाफ्ट। 8–कैम शाफ्ट। 9–पिस्टन, पिस्टन पिन तथा पिस्टन रिंग। 10–स्पार्क प्लग। 11–नोजल तथा पम्प। 12–वाल्व तथा टेपेड। 13– कार्बोरेटर। 14–रेडियेटर तथा वाटर पम्प।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 12115–गीयर बॉक्स। 16–डिफ्रेंशियल गीयर एवं रीयल एक्सल। 17–प्रोपेलर शाफ्ट। 18–व्हील, टायर, ट्यूब, रिम तथा फ्रंट एक्सल। 19–स्टेयरिंग सिस्टम। 20–शाक ऑब्जर्वर (स्प्रिंग तथा लीफ)। 21–फ्रेम तथा चेसिस। 22–फ्लाई व्हील तथा क्लच प्लेट। 23–ऑयल फिल्टर। 24–पैकिंग तथा गैसकिट। 25–ब्रेक सिस्टम (व्हील, व्हील सिलेण्टर तथा मास्टर सिलेण्टर)। 26–सेल्फ एवं डायनमों। 27–हॉर्न। 28–फ्यूल टैंक। 29–बैटरी। टूल्स– 1–पेचकस (विभिन्न प्रकार के) 05 2–रिंच (विभिन्न प्रकार के) 05 3–हथौड़ी (विभिन्न प्रकार के) 02 4–टार्करिंच (स्पेशल टाइप) 02 5–एल की सेट (एलेन की) 01 6–प्लास (विभिन्न प्रकार के) 04 7–छेनी (विभिन्न प्रकार की) 01 8–एडजेस्टेबिल रिंच 02 9–पाइप रिंच 02 10–जैक (स्क्रु तथा हाइड्रोलिंग) 02 सेट 11–ग्रीस गन 02 12–ऑयल कैन 05 13–वियरिंग पुलर 02 14–प्लग रिंच 02 15–हैक्सा 02 16–टैप तथा डाई 05 17–नट, बोल्ट तथा की 18–विभिन्न प्रकार की रेती 01 सेट 19–इन्सुलेशन टेप 01 20–तार 01 21–बल्ब (टेस्टिंग हेतु) 02 22–निहाई 01 23–मैगनेट पुलर 02 मीजरिंग (Measuring Tools)– 1–वर्नियर कैलिपर्स 02 2–माइक्रो मीटर 02 3–मल्टीमीटर 02 4–स्केल 02 5–ट्राई स्क्वायर 02 6–Iलग गैप गेज 02 7–फिलरगेज 02
16 ङ122 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 मशीन (एक सेट)– 1–प्लग टेस्टिंग मशीन। 2–वाशिंग मशीन। 3–कम्प्रेशर मशीन (हवा भरने हेतु)। 4–हवा चेक करने की मशीन। 5–हैण्ड ड्रिलिंग मशीन। 6–बाइस (बेन्च)। 7–हाइड्रोमीटर।
(14) ट्रेड-मधुमक्खी पालन (कक्षा-11) उद्देश्य-
(1) मधुमक्खी पालन औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। (2) शुद्ध मधु उत्पादन की मात्रा में वृद्धि करना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि। (3) बीमार एवं कमजोर व्यक्तियों के लिए उपयोगी वस्तु, औषधि एवं पौष्टिक पदार्थ की उपलब्धि में वृद्धि करना।
(4) निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में आय का एकमात्र साधन सिद्ध होना। (5) कम से कम पूंजी लगाकर अधिकतम आय प्राप्ति का उपयोगी स्रोत होना। (6) मधुमक्खी पालन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये सक्षम बनाना। (7) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म-निर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक बनाने में सहायक होना। (8) मधुमक्खी पालन उद्योग के यंत्रों, उपकरणों के उपयोग का समुचित ज्ञान प्राप्त करना।
रोजगार के अवसर-
(1) मौन पालन उद्योग इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) मौन पालन उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना अथवा मधु को बोतलों में भरना, पैंकिंग कर बाजार में आपूर्ति करने का कार्य करना।
(3) मधु एवं उससे उत्पाद की वस्तुओं का व्यापार कर सकता है, उनका होलसेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है।
(4) मधु भंडारण एवं बिक्री की दुकान खोल सकता है। (5) मौनचरों या फूलों की खेती करके फूल विक्रय का रोजगार कर सकता है। (6) मौन पालन उद्योग में आने वाले यन्त्रों एवं उपकरणों का निर्माण एवं विक्रय का उद्योग चला सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
100
300
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 20 200
नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
मधुमक्खी पालन उद्योग का सामान्य ज्ञान
(1) मधुमक्खी पालन का उद्देश्य तथा इतिहास, अन्य कुटीर उद्योगों में अन्तर तथा महत्व। 20 (2) भारतवर्ष एवं विदेशों में मौन पालन के विकास में योगदान देने वाली संस्थाओं का ज्ञान एवं साहित्य प्रकाशन।
20 (3) मौन प्रबन्ध का सिद्धान्त, सामान्य एवं विशेष मौन प्रबन्ध की जानकारी, जैसे धरछुट, बकछुट, लूटपाट तथा मौनों का रख रखाव।
20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 123
द्वितीय प्रश्न-पत्र
मधुमक्खी जैविकी, पालन एवं मौनचरों की व्यवस्था
10 (1) जन्तु जगत में मौन का स्थान। (2) मौनों की वाह्य एवं आन्तरिक रचना विशेषकर श्वसन, प्रजनन अंगों, डंक, सेन्स अंगों एवं पाचन तन्त्र का ज्ञान।
10 10 (3) प्रमुख मधुमक्खियों की पहिचान, तुलनात्मक अध्ययन। (4) मौन परिवार का संगठन, जीवन चक्र, विभिन्न सदस्यों का विकास। 10 (5) मौनों के छतों की रचना, विभिन्न प्रकार के कोष्ठ, उनकी स्थिति एवं पहचान। 10 (6) कीट के खाद्य आवश्यकताओं एवं वातावरण की अनुकूलता की जानकारी। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
मौनगृह तथा उपकरण
(1) विभिन्न प्रकार के मौनगृहों की बनावट, मौनगृह का विकास एवं विशेषता। 20 (2) मौनोंगृहों के निर्माण के सिद्धान्त तथा सामग्रियों का अनुमान लगाना। 20 (3 मौनोंगृहों के निर्माण में आने वाले औजारों के बारे में जानकारी तथा रखरखाव के बारे में ज्ञान। 20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
मधुमक्खी के शत्रु, बीमारियां एवं नियन्त्रण
(1) मौन के विभिन्न शत्रुओं की पहिचान तथा उनकी रोकथाम। 15 (2) मौनी छत्ता-धार प्रकोष्ठ, जीवन चक्र तथा हानि पहुंचाने वाले जीवों के बारे में जानकारी रखना। 15 (3) मनुष्य, बन्दर, छिपकली, चीटें, गिलहरी, भालू, चिड़िया इत्यादि शत्रुओं के विषय में जानकारी। 15 (4) मौनों के रोगों की पहिचान तथा बीमारी के बचाव के बारे में जानकारी रखना। 15
पंचम प्रश्न-पत्र मधुमक्खी पालन का आर्थिक महत्व, विपणन एवं प्रसार (1) मधु उत्पादन के सिद्धान्त तथा अन्य उत्पाद जैसे-मोम, प्रोपेलिस तथा मौनविष(बी-वेनम) का महत्व। विभिन्न प्रकार के मधु तथा शुद्धता की पहचाऩ।
(2) मधु, मोम तथा डंक के गुण एवं उपयोगिता। (3) मधु एवं मोम उत्पादन, परिष्करण। (4) मधु, मोम के विपणन की अनिवार्यतायें।
20 14 16 10
प्रायोगात्मक पाठ्यक्रम (1) मौन गृहों के रख-रखाव के सम्बन्ध में छात्रों की टोलियों से निरीक्षण कराना, चित्र बनाना तथा प्रयोगात्मक कार्य कराना।
(2) आधुनिक एवं प्राचीन मौन पालन का अन्तर तथा मौन वंशों के रख-रखाव के अन्तर को समझना और प्रयोगात्मक कार्य करना।
(3) सामान्य मौन प्रबन्ध-धरछूट, बकछूट, लूटपाट की जानकारी कराना तथा मौन वंशों को पकड़ना और मौन गृहों में बसाना।
(4) रानी विहीन मौन वंशों को रानी देना, रानी पैदा कराना तथा मौन वंशों का रिकार्ड रखना। (5) मौन के वाह्य एवं आन्तरिक शरीर की रचना का डिसेक्शन निरीक्षण एवं प्रयोगात्मक कापी से चित्र बनाना। (6) मौनों के जीवन चक्र, वार्षिक चक्र तैयार करना। (7) मौन गृहों के निर्माण की जानकारी करना तथा अन्तर को समझना एवं दिखाना। (8) मौन छत्ता मिल (मशीन की बनावट, मौनी छत्तावार तैयार कराना तथा उपयोगिता को बताना)। (9) मधु निष्कासन का कार्य कराना, चित्र तथा मधु निकालने का प्रयोगात्मक कार्य। नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय 5 घण्टे : (क) प्रयोगात्मक परीक्षा- (1)-
परीक्षार्थियों की तीन प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग)124 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (2)- (क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण संस्तुत पुस्तकें :-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण/
नाम
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 1. मुर्गी पालन, मधुमक्खी डा0 जय सिंह सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 25.00 1987-88 पालन एवं मत्स्य पालन
2. मधु के चमत्कार सैयद वाजिद
25.00 1989-90
हुसैन
3. सफल मौन पालन बच्ची सिंह
श्रीराम मेहरा एण्ड कं0 हास्पिटल रोड, आगरा रावत मौनालय, रानीखेत, अल्मोड़ा 60.00 1988
रावत
4. रोचक मौन पालन ,, ,, 15.00 1988 5. मौन पालन प्रश्नोत्तरी ,, ,, 10.00 1989 5.00 1988 6. प्रारम्भिक मौन पालन योगेश्वर सिंह राजकीय मधु मक्खी पालन केन्द्र,
ज्योली कोट, नैनीताल
7. बी-कीपिंग इन इण्डिया सरदार सिंह आई0 सी0 ए0 आर0 दिल्ली 16.00 1988 प्रो0 हरी सिंह कुक्का पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, मेरठ 7.00 1988 8. मधु मक्खी एवं मत्स्य
पालन
9. कुक्कुट, मधुमक्खी एवं ,, ,, 22.50 1988 मत्स्य पालन
(15) डेरी प्रौद्योगिकी
(कक्षा-11)
उद्देश्य-
(1) डेरी उद्योग के औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी दूर करना। (2) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद का उत्पादन बढ़ाना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना। (3) निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में निरन्तर आय का एक मात्र साधन। (4) डेरी उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन हेतु सक्षम बनाना। (5) दूध से नाना प्रकार की उपयोगी वस्तुयें बनाकर आय में वृद्धि एवं स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना। (6) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म निर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। (7) उत्तम कोटि का दूध उत्पाद तैयार कर वृहत् व्यापार में सहयोग तथा लघु उद्योगों में भारत की गरिमा बढ़ाने मेें सक्षम होना।
(8) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद से सम्बन्धित रसायनों, यन्त्रों, उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन में उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
(9) पौष्टिक खाद्य पदार्थों का निर्माण, इसे शुद्ध, स्वादिष्ट एवं सुपाच्य बनाना।
रोजगार के अवसर-
(1) डेरी उद्योग इकाईयों, सहकारी दुग्ध समितियों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) डेरी उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। (3) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद का व्यापार कर सकता है, इनके होलसेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है। (4) डेरी उद्योग की छोटी-छोटी इकाइयां खोलकर उत्पादन बढ़ाकर दुकान खोल सकता है। (5) दुग्ध से दुग्ध निर्मित वस्तुएं बनाने का छोटा उद्योग चला सकता है। (6) डेरी उद्योग से सम्बन्धित यंत्रों, उपकरणों का निर्माण एवं विक्रय उद्योग चला सकता है। (7) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद से सम्बन्धित सहकारी समितियां बनाकर स्वयं को तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 125 (क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 20 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
डेरी व्यवसाय
1-भारत में डेरी व्यवसाय की स्थिति। विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में डेरी विकास में योगदान। गांवाें एवं नगरों में दुग्ध उत्पादन एवं वितरण की समस्यायें एवं उनका समाधान। डेरी विकास की विविध योजनायें। श्वेत क्रांति, आपरेशन फ्लड प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय चरण। 20
15 2-डेरी सम्बन्धित सामानों, व्यवसाय करने वाली फर्मों के नाम। 3-डेरी सम्बन्धित प्रमुख अन्वेषक केन्द्रों एवं संगठनों के नाम। 15 4-डेरी कार्यालय की बनावट, कार्य प्रणाली एवं महत्ता की सामान्य जानकारी। 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र
दूध-विषेेषताएं एवं प्रसंस्करण
1-दूध की परिभाषा-संगठन, विभिन्न प्रकार के दूध, दूध का विस्तृत संगठन। दूध के भौतिक एवं सामान्य रासायनिक गुण। दूध की पौष्टिकता।
30 2-दूध का मानकीकरण, सम्भागीकरण, पास्चुरीकरण, निर्जीवीकरण। अवशीलन बोतल या पैकेट बन्दी। संग्रह परिवहन एवं वितरण।
30
तृतीय प्रश्न-पत्र दुग्ध पदार्थ 1-क्रीम, क्रीम की परिभाषा, संगठन एवं वर्गीकरण, क्रीम पृथक्करण का सिद्धान्त, क्रीम निकालने की विधियां, गुरुत्वाकर्षण एवं अपकेन्द्रीय विधि, क्रीम सेपरेटर की कार्य क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक। क्रीम में वसा प्रतिशत प्रभावित करने वाले कारक, मक्खन की परिभाषा, संगठन। मक्खन बनाने की विधियां-देशी विधि, संशोधित विधि एवं वैज्ञानिक विधि, क्रीम का चुनाव, क्रीम को पकाना, मन्थन, रंग मिलाना, मक्खन धोना, नमक मिलाना, अधिक जल निकालना, टिकिया बनाना एवं पैक करना, संग्रह, मक्खन का मूल्यांकन, मक्खन की खराबियां, उनके कारण एवं निदान। 30 30 2-बटर अम्ल की परिभाषा, संगठन एवं प्रयोग।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
प्रशीतन एवं शीतगृह प्रौद्योगिकी
1-प्रशीतन की परिभाषा, सिद्धान्त, प्रशीतन के प्रकार, प्राकृतिक एवं कृत्रिम प्रशीतन। प्राकृतिक की प्रयोग विधियां, कृत्रिम प्रशीतन, प्रशीतकारक, कृत्रिम प्रशीतन के सिद्धान्त, कृत्रिम प्रशीतन का वर्गीकरण।
60
पंचम प्रश्न-पत्र
दुग्ध निर्मित अन्य पदार्थ
15 1-संघनित दूध, वाष्पित दूध एवं दुग्ध चूर्ण की परिभाषा, संगठन, संग्रहण प्रयोग एवं मूल्यांकन की सामान्य जानकारी। 2-आइसक्रीम की परिभाषा, वर्गीकरण संगठन एवं खाद्य महत्ता, आइसक्रीम मिश्रण की तैयारी, पास्चुरीकरण, समांगीकरण, शीतन, हिमीकरण, दृढीकरण, पैकिंग संग्रह एवं मूल्यांकन तथा ओवर रन।
3-आइसक्रीम की खराबियां, कारण एवं निदान। 4-कुल्फी-परिभाषा, संगठन, खाद्य महत्ता एवं बनाने की विधि।
15 15 15
प्रयोगात्मक
चबूतरे पर किये जाने वाले परीक्षणों की जानकारी, परीक्षण- (1) दूध का आपेक्षित घनत्व ज्ञात करना।
(2) दूध एवं क्रीम की अम्लता प्रतिशत ज्ञात करना।
126 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(3) दूध एवं क्रीम की गरबर विधि से वसा प्रतिशत ज्ञात करना। (4) रिचमांड स्केल एवं सूत्र विधि से दूध का ठोस प्रतिशत ज्ञात करना। (5) उबलने पर दूध के फटने का प्रयोग। (6) अल्कोहल अवक्षेपण परीक्षण।
(7) मैथिलीन ब्लू परीक्षण। (8) फास्फटेज परीक्षण। (9) दूध में पानी अथवा सेपरेटा के अपमिश्रण का परिकलन। (10) क्रीम और दूध के मानकीकरण का परिकलन। (11) क्रीम की उदासीनीकरण एवं परिकलन। (12) ओवर रन का परिकलन। (13) डेरी के लेखा-जोखा की जानकारी।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा- (1)
परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (2) (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। संस्तुत पुस्तकें :- क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम मूल्य संस्करण/
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री- रु0 1 डेरी प्रौद्योगिकी (सिद्धान्त एवं एस0 एस0 भाटी बी0 के0 प्रकाशक, बड़ौत, मेरठ 15.00 1989-90 प्रयोग)
2 डेरी प्रौद्योगिकी डा0 एस0 पी0 रंजना प्रकाशन मन्दिर, आगरा 18.00 1989-90
गुप्ता
3 डेरी प्रौद्योगिकी आई0 जे0 जौहर रेखा प्रकाशन, मेरठ 16.00 1989-90 रोहित पब्लिकेशन, बड़ौत, मेरठ 15.00 1989-90 4 डेरी प्रौद्योगिकी (सिद्धान्त एवं
प्रयोग)
डा0 ए0 के0 गुप्ता एवं स्व0 सी0 गुप्ता
5 दुग्ध विपणन एवं दुग्ध पदार्थ आई0 जे0 जौहर सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 30.00 1989-90 6 डेरी रसायन एवं पशुपोषण डा0 विनय सिंह भारतीय भण्डार, बड़ौत, मेरठ 25.00 1989-90 7 दुग्ध विज्ञान भाटी एवं लवानिया वी0 के0 प्रकाशन, बड़ौत, मेरठ 35.00 1989-90 8 पशुपोषण एवं डेरी रसायन डा0 देव नारायण
25.00 1989
जय प्रकाश नाथ एण्ड कं0 मेरठ प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ
पाण्डे प्रकाशन निदेशालय 9 डेरी रसायन विज्ञान पंत नगर, नैनीताल, पंत कृषि प्रौद्योगिकी 36.00 1987
विश्वविद्यालय,
डा0 शिवाश्रय सिंह पंत नगर, नैनीताल N.C.E.R.T., New Delhi 9-56
N.C.E.R.T., New Delhi
10 Dairying Feeds and Feeding of D. Volume III. Instructional-cum- Practical Mannual
Ditto Ditto 13-45 11 Milk and Milk Products
Instructional-cum- Practical Manual.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 127(16) ट्रेड-रेशम कीटपालन
कक्षा-11
उद्देश्य- 1-रेशम कीटपालन औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-रेशम उत्पादन बढ़ाना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना। 3-निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में निरन्तर आय का एक मात्र साधन। 4-कम से कम पूंजी लगाकर अधिकतम आय प्राप्ति का सुलभ साधन होना। 5-रेशम कीटपालन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन हेतु सक्षम बनाना। 6-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म-निर्भर बनाने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। 7-उत्तम किस्म का रेशम उत्पादन कर विदेशी व्यापार में सहयोग तथा कुटीर उद्योगों में भारत की गरिमा बनाये रखने में सक्षम।
8-रेशम उत्पादन से सम्बन्धित रासायनिक पदार्थों, यंत्रों, उपकरणों तथा सेरी कल्चर का समुचित ज्ञान प्राप्त कर जीवन को उपयोगी बनाने में सहायक।
रोजगार के अवसर-
1-रेशम उद्योग इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-रेशम कीटपालन उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-रेशम उत्पादन कर रेशम का वृहत् व्यापार कर सकता है, इसका होल-सेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है।
4-विभिन्न प्रकार के रेशम उत्पादन, ग्रेडिंग, भण्डारण एवं बिक्री के लिए दुकान खोल सकता है। 5-रेशम की बनी वस्तुएं साड़ी इत्यादि का स्वतः निर्माण कर एक छोटा उद्योग चला सकता है। 6-रेशम कीटपालन उद्योग से सम्बन्धित यंत्रों, उपकरणों आदि का निर्माण एवं विक्रय उद्योग चला सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 20 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र रेशम कीट के भोज्य पौधों की खेती (1) रेशम उद्योग का इतिहास, प्रारम्भ एवं क्षेत्र, रेशम कीट के भोज्य पदार्थों की जानकारी एवं रोपण तथा वितरण।
16 (2) शहतूत के पौधों का वितरण-भारत वर्ष में उत्तर प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र। 14 (3) शहतूतबद्ध पादपों के लिए आवश्यक वातावरण, उपयुक्त भूमि, खेत की तैयारी, खाद की आवश्यकता।16 (4) प्रजनन-लैंगिक एवं अलैंगिक, विभिन्न विधियों की जानकारी।
14
द्वितीय प्रश्न-पत्र
रेशम कीट जैविकी, पालक एवं भोज्य पदार्थाें का संरक्षण
(1) रेशम कीट के जीवन चक्र का ज्ञान, अण्डा, लार्वा, प्यूपा, कीट का अध्ययन। 10 (2) कीट के खाद्य आवश्यकताओं की जानकारी, भोज्य पदार्थों की पत्तियों का विश्लेषण। 10 10 (3) कीट की पत्तियां का वर्गीकरण तथा उसके लक्षणों का ज्ञान। (4) प्रचलित कीट जाति का अध्ययन, उनके गुणों, लक्षणों का अन्य के सन्दर्भ में तुलनात्मक अध्ययन।
10128 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (5) कीट के पालन हेतु आवश्यक वातावरण, तापक्रम, नमी, वायु, प्रकाश का अध्ययन, प्रत्येक स्तर की आवश्यकताओं का ज्ञान।
10 (6) पालन-पोषण स्थिति, विभिन्न प्रकार के गृहों का ज्ञान, आवश्यक उपकरण, स्थानीय उपलब्ध साधनों का प्रयोग, पालन-पोषण, गृह की सफाई, उनका रोगाणुनाश (Disinfection) करना। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र रेशम कीट बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी (1) बीज के प्रकार-व्यावसायिक (Commercial), बीज जनन (Reproduction), बीज सुसुुप्ता (Hibernation), अण्डा, रेशम कीट जातियां।
15 (2) रेशम कीट-प्यूपा, कीट की वाह्य आकृति की जानकारी, कीट जनन क्रिया, निषेचन आदि की जानकारी। 15 (3) ग्रेनेज (Grainage) आवश्यकता, उपकरण, बीज कोकुन के गुणों की जानकारी, कोकुन की छटाई, सुरक्षा एवं भण्डारण, भण्डारण में कार्यक्रम, नमी, वायु की व्यवस्था की जानकारी। 15 (4) रेशम बीज उत्पादन की आधुनिक विधियों का महत्व एवं उपयोगिता। 15
चतुर्थ प्रश्न-पत्र रेशम निकालना, परीक्षण एवं कतान (1) कोकुन,कोकुन के गुण तथा कतान में उसका प्रभाव, मूल्यांकन, अनुपयोगी कोकुनों को अलग करना, सुखाना कोकुन सुखाने की विधियां, उसके गुण।
15 (2) कोकुन भण्डारण-आदर्श कोकुन भण्डारण, विभिन्न भण्डारण विधियों का तुलनात्मक अध्ययन। 15 (3) कतान की विभिन्न विधियां, कतान के विभिन्न उपकरण, चरखा, बेसिन, काटेज बेसिन, मलटीण्ड, सेमीआटोमेटिक रोलिंग, आटोमेटिक रोलिंग।
15 (4) रेषम धागा की गुणवत्ता की पहचान एवं विपणन) 15
पंचम प्रश्न-पत्र
रेशम प्रबन्ध एवं प्रसार
(1) रेशम उद्योग-राष्ट्रीय आय में स्थान, उपयोगिता, रेशम उद्योग सम्बन्धी कानून की जानकारी एवं अध्ययन। 15 (2) पंजिकायें-उद्योग के आय-व्यय के व्योरे हेतु विभिन्न पंजिकाओं का निर्माण एवं प्रयोग। 15 (3) संस्थायें-रेशम उद्योग में संलग्न विभिन्न आर्थिक/अनार्थिक संस्थायें, उनकी स्थिति तथा जानकारी 15 (4) आर्थिक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त ऋणों, सहायताओं की जानकारी तथा उनके सीमाओं का ज्ञान। 15
प्रयोगात्मक परीक्षा का पाठ्यक्रम
(प्रायोगिकी)
(1) मलेवरी, मूूंगा, टसर एवं ऐरी की पहचान।
(2) शहतूत की विभिन्न जातियाें का ज्ञान। (3) वानस्पतिक प्रजनन की जानकारी एवं अभ्यास। (4) यूनिग विधियाें की जानकारी। (5) शीट बेड तैयार करना। (6) बाम्बोमोरी (ठंउइवउवतप) की पहचान, उनकी वाह्य आकृति।
(7) उपकरणों का ज्ञान। (8) पालन गृहों की जानकारी। (9) शहतूत के रोगों की जानकारी व पहचान।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप.रेखा
समय-5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1)
परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग)
प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग)भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 129 (2) (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था में प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श ले पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
(17) ट्रेड-बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी (कक्षा-11) उद्देश्य- 1-बीजोत्पादन उद्योग के औद्योगिकीकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगार को दूर करना। 2-अधिकतम शुद्ध बीज तैयार करना, बिक्री बढ़ाना, उत्पादन बढ़ाने में सहयोग तथा आय में वृद्धि करना। 3-कम से कम पूंजी लगाकर प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना तथा आय का उत्तम स्रोत। 4-बीजोत्पादन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये स्वयं को सक्षम बनाना। 5-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म निर्भर बनाने एवं कुशल नागरिक निर्माण में योगदान देना। 6-बीज उत्पादन, रख-रखाव एवं वृहत् मात्रा में शुद्ध एवं उन्नतिशील बीजों का प्रसार कर पौधों को रोग मुक्त करना तथा हानिकारक कीट-पतंगों से बचाना।
7-बीजोत्पादन के नवीन वैज्ञानिक विधियों, यन्त्रों एवं उपकरणों का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
रोजगार के अवसर-
1-बीजोत्पादन उद्योग को विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-बीजोत्पादन उद्योग का स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-शुद्ध एवं उत्तम कोटि का बीज उत्पादन कर बिक्री या व्यवसाय चलाना या व्यापार करना। 4-बीज उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां खोलकर स्वयं विक्रय केन्द्र चला सकता है। 5-बीजोत्पादन उद्योग से सम्बन्धित यन्त्रों, उपकरणों एवं अन्य सामग्री विक्रय का उद्योग चला सकता है। 6-बीजोत्पादन एवं बिक्री सम्बन्धी समितियों को बना कर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 20 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
60 अंक
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बीजोत्पादन का आधारभूत ज्ञान एवं तकनीक)
(1) बीज की परिभाषा, बीज उत्पादन प्रौद्योगिकी का आर्थिक महत्व।
(3) पादप संवर्धन(Plant Propagation) की विभिन्न विधियां।
10 (2) फूलों के विभिन्न अंगों की जानकारी, परागीकरण ( Poollnation), निषेचन(Fertilization)। 12 14 12 (4) स्वपरागण पर परागण, सिंगल क्रास, डबल क्रास। (5) कटाई, मडाई, सुखाई, सफाई एवं भण्डारण में विभिन्न प्रकार की सावधानियां। 12
17 ङ130 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
60 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(धान्य, मोटे अनाज तथा चारे वाली फसलोें के बीज उत्पादन की विधि एवं तकनीकी)
फसलें, धान्य, गेहूं, धान, मक्का, मोटे अनाज, ज्वार, बाजरा, चारे वाली बरसीम और ज्वार
20 20 (1) उपरोक्त फसलों के लिये जलवायु तथा आवश्यक मृदा का प्रभाव। (2) खेत का चुनाव-विलयन (Isolation) आवश्यकतायें। (अ) स्वपरागण वाली फसलें-गेहूं, धान। (ब) पर परागण वाली फसलें-मक्का, बरसीम, ससवं। (स) आकस्मिक परागण वाली फसलें-ज्वार। (3) धान की नर्सरी बनाना तथा पौधों की रोपाई, बीज का निर्माण, बीज की मात्रा, बोने का समय, फसल बहुराई, बीजों का उपचार।
20 अंक
तृतीय प्रश्न-पत्र
दलहन, तिलहन, नकदी तथा रेशे वाली फसलों के बीज उत्पादन तकनीक
इकाई-1-
60 अंक 30 अंक (1) निम्नांकित फसलों का अध्ययन- दलहन-अरहर, मटर, चना। तिलहन-सरसों, सूर्यमुखी, अलसी। रेशे वाली फसलें-कपास, सनई। (2) उपरोक्त फसलों के पुष्प जैविकी का अध्ययन। (3) उपरोक्त फसलों के लिये जलवायु एवं मृदा का अध्ययन। (4) स्वपरागण परपरागण तथा आकस्मिक परागण वाले फसलों के लिये खेतों का चुनाव तथा विलंगन।
(5) तम्बाकू के लिये नर्सरी तैयार करना, मुख्य खेत की तैयारी, बीज की मात्रा, फसल आदि। (6) उपरोक्त फसलों के बीजों का उपचार।
इकाई-2-
30 अंक (1) उपरोक्त फसलों के शस्य विज्ञान सम्बन्धित अध्ययन। (2) गुणात्मक जांच-जातीय किस्मों का प्रमुख लक्षण, खेतों से निरीक्षण, संख्या तथा समय। (3) अनावश्यक पौधों का निष्कासन। (4) फसल एवं बीजों का मानक। (5) फसल की कटाई-कटाई की सावधानियां, पकने की स्थिति, बीज की नमी तथा फसल की स्थिति, कटाई के तरीके, मड़ाई, सफाई, सुखाई।
(6) फसल की मुख्य जातियां तथा किस्में तथा उनके विशेष गुण। (7) कपास तथा सूर्यमुखी के वर्ण संकर बीजों के उत्पादन का अध्ययन।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
60 अंक
सब्जी एवं पुष्पों के बीजोत्पादन में तकनीकी एवं बीज संसाधन
फसलें-टमाटर, आलू, लौकी, नेनुआ, मूली, फूलगोभी, भिण्डी, प्याज, गेंदा, गुलाब, हालीहाक,
नस्टरसियम कैण्टी, टपट-
7 1-उपरोक्त सब्जियों एवं पुष्पों के पुष्प जैविकी। 2-पुष्पक्रम एवं पुष्पों के फूलने का समय, अवधि तथा परागण सम्बन्धी ज्ञान,बीजषैया बनाने का तकनीक का ज्ञान।
11 7 3-उपरोक्त फसलों के कृषि सम्बन्धी क्रियाओं का अध्ययन। 4-जातीय किस्मों का प्रमुख लक्षण, खेतों का निरीक्षण संख्या तथा समय तथा आवश्यक पौधों का निष्कासन।
5-फसल मानक तथा बीज मानक।
7 7 6-फसल की कटाई, कटाई की सावधानियां, पकने की स्थिति, बीज की नमी, फसल की स्थिति, कटाई के तरीके, मड़ाई, सफाई, सुखाई।
7-फसल की मुख्य जातियां तथा किस्में, उनके विशेष गुण। 8-संकर वर्ण के बीजों का उत्पादन।
7 7 7भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 131
60 अंक
पंचम प्रश्न-पत्र बीज परीक्षण, भण्डारण, विपणन एवं प्रसार 1-बीज परीक्षण-उद्देश्य एवं महत्व, परीक्षण के उपकरण, प्रतिचयन, प्रक्रिया नमी परीक्षण, शुद्धता विश्लेषण।
12 2-बीज अंकुरण, सुषुप्तावस्था (Dormancy) का अध्ययन तथा उसको हटाने का उपाय। 12 3-अंकुरण परीक्षण तथा उसका मूल्यांकन,टेट्राजोलिय परीक्षण। 12 4-भण्डारण-उद्देश्य, बीज की आयु, बीज के भण्डारण में अंकुरण, क्षमता के कारक, भण्डारण का प्रबन्ध तथा स्वच्छता।
14 10 5-भण्डारण के डिजाइन। प्रयोगात्मक 1-परागण तथा निषेचन का प्रयोगात्मक अध्ययन। 2-बीजों का विश्लेषण तथा अंकुरण परीक्षण 3-मक्के में स्वसेचन, पुंकेसरी, पुष्पक्रम का बिलगाव तथा परागीकरण। 4-बीज, खाद, उपकरण, कीट तथा खर-पतवार नाशक रसायनों की पहचान।
5-विभिन्न फसलों के बीजों का उपचार का प्रायोगिक ज्ञान तथा सम्बन्ध। 6-धान की नर्सरी तैयार करना। 7-गेहूं, मक्का, बरसीम, ज्वार, बाजरा, ओट, अरहर, चना, मटर, सरसों, सूर्यमुखी, अलसी, कपास, गन्ना, तम्बाकू की बीज शैया तैयार करना।
8-विभिन्न फसलों के बीजों की शुद्धता की जांच तथा अंकुरण जांच। 9-सब्जी तथा पुष्पों के बीजों की पहचान व बीजोपचार तथा विभिन्न रसायनों का प्रयोग। 10-नर्सरी के विभिन्न सब्जी तथा पुष्पों को उगाना तथा रोपण। 11-विभिन्न सब्जियों एवं पुष्पों के लिए उद्यान विज्ञान सम्बन्धी क्रियाओं का प्रायोगिक ज्ञान। 12-निजी, सार्वजनिक सहकारी बीज निगम, अनुसंधान केन्द्रों का भ्रमण, विचार विमर्श तथा प्रशिक्षण। 13-उपर्युक्त पर मौखिक एवं रिकार्ड।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय-5 घण्टे (क) प्रयोगात्मक परीक्षा- परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने हेतु 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। संस्तुत पुस्तकें :- क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण/
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 रु0 1. बीज उत्पादन एवं
65.00 1989 डा0 रतन लाल अग्रवाल
प्रमाणीकरण, तृतीय संस्करण
2. बीज कार्य एवं बीज
19.50 1989 परीक्षण
डा0 रतन लाल अग्रवाल एवं डा0 फूल चन्द्र गुप्त
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
3. बीज उत्पादन एवं विपणन ,, ,, ,, 17.00 1989 का अर्थशास्त्र132 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (18) ट्रेड-फसल सुरक्षा सेवा (कक्षा-11) उद्देश्य- 1-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग के औद्योगिकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-फसल सुरक्षा सेवा द्वारा प्रति वर्ष हजारों टन खाद्यान्न को नष्ट होने से वंचित करके उत्पादन में वृद्धि करना। 3-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये स्वयं को सक्षम बनाना। 4-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करनें, आत्मनिर्भर बनानें एवं कुशल नागरिक निर्माण में योगदान देना। 5-फसल सुरक्षा सेवा सम्बन्धी रसायनों, यन्त्रों एवं उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
6-फसलों के हानिकारक रोग, बीमारियों एवं कीट-पतंगों को नष्ट कर शुद्ध एवं स्वस्थ उत्पादन प्राप्त करना तथा भविष्य के लिये रक्षित बनाना।
7-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग की इकाइयों में वृद्धि कर जनसाधारण तक इसके लाभ एवं महत्ता को पहुंचाना तथा प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष उत्पादन में वृद्धि करना।
रोजगार के अवसर-
1-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग को विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-फसल सुरक्षा सम्बन्धी अलग अलग इकाइयां खोलकर रसायनों, यन्त्रों एवं उपकरणों की बिक्री करने की दुकान चला सकता है।
4-फसल सुरक्षा सेवा की अलग-अलग समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
60 अंक
प्रथम प्रश्न-पत्र
फसल सुरक्षा सिद्धान्त
1-फसल सुरक्षा-5 विभिन्न विधियों का अध्ययन- 10 1-संवर्धन विधि। 10 2-यान्त्रिक। 10 3-रासायनिक विधि। 10 4-जैविक विधि। 5-कानूनी विधि। 05 6-कृषि उत्पादन में पादप रोगों का स्थान एवं महत्व, होने वाली हानियां एवं मूल्यांकन। 10 7-राज्य स्तर पर फसल सुरक्षा में संलग्न संगठनो का अध्ययन 05
60 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
फसलों के मुख्य रोग एवं निदान
16 16 14 1-प्रदेश के मुख्य फसलों, तरकारियों एवं फलों के रोगों का अध्ययन एवं उनके रोक-थाम के उपाय- (क) फसल-गेंहूं, ज्वार, कपास, गन्ना, मूंग, उर्द, चना। (ख) तरकारियां-मिर्च, लौकी, तरोई, कद्दू, मूली, गाजर। (ग) फल-बेर, केला, जामुन, सेब। 2-वायरस द्वारा उत्पन्न पादप रोगाें की जानकारी तथा उसका अध्ययन, फसल सुरक्षा के विभिन्न उपायों की जानकारी।
14भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 133
तृतीय प्रश्न-पत्र
60 अंक
खरपतवार नियन्त्रण एवं कृषि रसायनों का अध्ययन
1-फसल सुरक्षा में प्रयोग आने वाले निम्नांकित उपकरणों की जानकारी उनके विभिन्न भागों की पहचान।10 (अ) स्प्रेयर-हैण्ड स्प्रेयर, थाम्प्रेस्ड एयर नैपसेक स्प्रेयर, बकेट स्प्रेयर, पावर स्प्रेयर, फूट स्प्रेयर। (ब) डस्टर-पलेंजर टाइप, नैपसैक, पावर डस्टर। (स) स्प्रेयर-कम-डस्टर। (द) स्पीड ड्रेसिंग-उपकरण। 2-उपकरणों का रख-रखाव व उसकी व्यवस्था। 3-कवकनाशी रसायनों की पहचान व प्रयोग। 4-फसलों पर प्रयोग किये जाने वाले रसायनों की जानकारी व प्रयोग। 5-बीज शोधक रसायनों की जानकारी व प्रयोग। 6-खर-पतवारनाशी रसायनों के प्रयोग की जानकारी तथा पहचान।
10 10 10 10 10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
60 अंक
पादप नाषक कीट एवं अन्तर्राष्ट्रीय पादपनाशक जीवों का अध्ययन तथा उनकी रोक-थाम 1-अन्तर्राष्ट्रीय पादपनाशक जीवों में दीमक, चिड़ियों, घोंघा, बन्दर, खरगोश, गिलहरी तथा अन्य जंगली जानवरों द्वारा पहुंचाने वाली क्षति का ज्ञान एवं मूल्यांकन,उसकी रोक-थाम के विभिन्न निदानों की
40
60 अंक
पंचम प्रश्न-पत्र
अन्न भण्डारण के कीटों का अध्ययन एवं नियन्त्रण
1-कीटों द्वारा अनाज भण्डार में पहुंचे क्षति का ज्ञान एवं मूल्यांकन, उसका स्तर तथा वर्गीकरण- 30 प्रत्यक्ष क्षति, अप्रत्यक्ष क्षति की जानकारी तथा अध्ययन। 2-वैज्ञानिक भंडार गृहों की जानकारी कुढला या वखार तथा पूसा बिन।
30
प्रयोगात्मक
1-विभिन्न प्रकार के पादप रोगों एवं पादप कीटों का पहचान। 2-पादप रोगों, कीटों द्वारा क्षति ग्रस्त फसलों का मूल्यांकन। 3-विभिन्न रोगों की सूक्ष्मदर्शी यंत्रों द्वारा अध्ययन। 4-खरपतवारों की जानकारी एवं पहचान। 5-निमीटेड नाशक रसायनों की पहचान। 6-फसल सुरक्षा उपकरणों की पहचान। 7-कवकनाशी रसायनों की पहचान। 8-इमलशन मिश्रण बनाना। 9-कीट संकलन।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप.रेखा
समय-5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1)
परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (2) (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
134 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4संस्तुत पुस्तकें :- क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं मूल्य संस्करण
पता
4. वनस्पति सर्वेक्षण एवं पादप रोग
तदेव 22.50 1988 नियंत्रण
वर्ष 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री- रु0 1. आर्थिक कीट विज्ञान डा0 के0 पी0 सिंह सिंघल बुक डिपो, मेरठ 35.00 1989-90 2. प्लान्ट प्रोटेक्शन तदेव तदेव 22.50 1989 तदेव 25.00 1987 3. पादप रोग विज्ञान आर0 बी0 चिकारा एवं डा0 जीतेन्द्र चिकारा डा0 जी0 चन्द्र मोहन एवं डा0 आर0 सी0 मिश्र
22.50 1988
गोपाल प्रिंटिंग प्रेस, बड़ौत, मेरठ
5. कृषि कीट विज्ञान युगेश कुमार माथुर एवं कृष्ण दत्त उपाध्याय
6. नया कृषि कीट विज्ञान बी0 ए0 डेविड एवं
12.00 1987
एम0 एच0 डेविड
सेन्ट्रल बुक डिपो, इलाहाबाद
7. पादप रोग नियंत्रण प्रो0 बी0 पी0 सिंह कुक्का पब्लिशिंग हाउस, 22.50 1987
8. पादप रक्षा कीट नियंत्रण डा0 उपाध्याय एवं
बड़ौत, मेरठ तदेव 22.50 1987
माथुर
9. खरपतवार प्रो0 ओम प्रकाश तदेव 16.50 1987 तदेव 30.00 1987 10. प्लान्ट प्रोटेक्शन डा0 उपाध्याय एवं
11. फसलों के रोग (द्वितीय
50.00 1989 संस्करण)
माथुर
डा0 मुखोपाध्याय एवं
डा0 सिंह
प्रकाशन निदेशालय, गो0 ब0 पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
12. फसलों के रोगों की रोक-थाम डा0 संगम लाल तदेव 20.00 1989 तदेव 22.00 1989 13. फसलों के हानिकारक कीट डा0 बिन्दा प्रसाद
14. खरपतवार नियंत्रण (द्वितीय
खरे डा0 विष्णु मोहन भान तदेव 25.00 1989 संस्करण)
15- Weeds and Weed Control
7-75 1985
N.C.E.R.T.,
New Delhi
N.C.E.R.T., New Delhi
Instructional-cum-Practical Manual.
16- Fertilizers and Manures
Ditto Ditto 6-90 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
17- Agricultural Meteorology
Ditto Ditto 4-75 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
18- Water Management
Ditto Ditto 8-75 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
19- Crop Management
Ditto Ditto 10-10 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
Ditto Ditto 8-45 1985 20- Floriculture Instructional- cum-Practical Manual.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 135(19) ट्रेड-पौधशाला
कक्षा-11
उद्देश्य- 1-पौधशाला उद्योग का औद्योगीकरण देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-अधिकतम पौध तैयार करना, बिक्री बढ़ाना, वृक्षारोपण कर देश में वन उद्योग को प्रोत्साहन देना और आय में वृद्धि करना।
3-कम से कम पूंजी लगाकर प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन तथा वर्ष भर आय का उत्तम स्रोत। 4-पौधशाला उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिए सक्षम बनाना। 5-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करना, आत्मनिर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। 6-विभिन्न प्रकार के पौधों को बड़े पैमाने में उगाकर व्यापार बढ़ाना तथा देश की अनुभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम होना।
7-पौध उत्पादन, रख-रखाव एवं वृहत् मात्रा में परिवहन सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
8-देश की ऊसर भूमि सुधार, भूमि कटाव रोकने, वर्षा कराने, वायु मण्डल को शुद्ध करने तथा खाद्य समस्या को हल करने का उत्तम स्रोत एवं व्यवसाय।
रोजगार के अवसर-
1-पौधशाला उद्योग की विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-पौधशाला उद्योग में स्व-रोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-पौध उत्पादन, बिक्री आदि व्यवसाय या उनका व्यापार कर सकता है। 4-पौध उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां खोलकर, उत्पादन बढ़ाकर स्वयं दुकान खोल सकता है। 5-पौधशाला उद्योग से सम्बन्धित यन्त्रों, उपकरण एवं अन्य सामग्री विक्रय का उद्योग चला सकता है। 6-पौधशाला उत्पादन एवं बिक्री सम्बन्धी समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक- 400
20 20 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
60 अंक
प्रथम प्रश्न-पत्र
पौधशाला प्रौद्योगिकी की आधारभूत ज्ञान
10 1-पौधशाला-परिचय, परिभाषा, पौधशाला के प्रकार 2-पौधशाला-वर्तमान दशा में भविष्य एवं सम्भावनायें 10 3-पौधशाला का महत्व-प्रमुख पौधशालाओं का नाम तथा उनका अध्ययन। 10 4-पौधशाला में प्रयुक्त यंत्र एवं उपकरण। 10 5-पौध प्रवर्धन में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के पात्र यथा गमला, पालीथीन बैग, प्लगटे्र, प्लास्टिक कप आदि।10 6-पौध प्रवर्धन में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के पौध रोपण माध्यम यथा बालू, मिट्टी तथा लीफमोल्ड का मिश्रण, कोकोलीट, परलाइट, वर्मीकुलाइट, स्फेगनम मास घास आदि। 10
60 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
पौधशाला पौध प्रवर्धन
1-पौध प्रवर्धन की परिभाषा, इतिहास एवं महत्व। 12 2-पौध प्रवर्धन वर्गीकरण, लैंगिक व अलैंगिक प्रवर्धन विधियॉं, लाभ तथा हानियां। 12 3-टीषू कल्चर प्रवर्धन की नई तकनीकी। 12 4-फलों की व्यावसायिक प्रवर्धन विधियों का ज्ञान। 12 5-वृद्धि नियामक, उनका महत्व तथा वृद्धि, नियामकों की प्रयोग विधि।
12136 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
तृतीय प्रश्न-पत्र
60 अंक
पौधशाला प्रबन्ध, अलंकृत एवं शोभाकार पौधे
1-पौधशाला की स्थपना-स्थान का चुनाव, पौधशाला की योजना तथा रेखांकन पद्धतियॉं। 10 08 2-पौधशाला भूमि की तैयारी एवं भूमि शोधन। 08 3-मातृ वृक्ष-प्रमुख गुण, चुनाव एवं देखभाल। 08 4-मूल वृत्त तथा शाखा का चुनाव एवं तैयारी।
5-नर्सरी में पौध उगाना-स्थान का चुनाव, बीज शैय्या की तैयारी, बीज की बुआई, पालीथीन बैग में पौध उगाना तथा 10 पौध की देखभाल। 6--पौध रोपण-पौधषाला से पौध निकालने में सावधानियॉं, गमलोें, पालीथीन बैग तथा क्यारियों में रोपण।08 08 7--पौध सुरक्षा--रोग, कीट एवं प्रतिकूल मौसम से पौधों की सुरक्षा।
60 अंक
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
वानिकीय पौधों की पौधशाला
10 10 1--वानिकी--परिभाषा, वानिकी के प्रकार तथा योजनाएं। 2--वानिकी का उपयोग महत्व, वर्तमान दशा तथा भविष्य। 3--वानिकीय पौधों का उद्देश्य, ईंधन, उद्योग, इमारत लकड़ी, रबर, गोंद, बहुरोजा, रंग, औषधि देने वाले पौधे, दलदली क्षारीय, ऊसर भूमि वाले पौधे। भूमि कटाव तथा प्रदूषण रोकने वाले पौधे। 30 10 4--वानकीय पौधशाला से संबंधित प्रमुख संस्थान। 60 अंक
पंचम प्रश्न-पत्र
पौध विपणन एवं प्रसार
14 1--पौध विपणन--परिभाषा तथा विधियां। 2--पौधशाला अभिलेख--मातृवृक्ष रजिस्टर, कार्यक्रम अभिलेख, भण्डार पंजिका, कैशमेमो, बिल का 16 रख-रखाव एवं महत्व। 3--क्रय-विक्रय--सावधानियां, पैकिंग, भेजने का माध्यम, सामग्री तथा सावधानियाँ तथा तकनीक 16 14 4--मातृक्ष पंजिका तैयार करने की रूप रेखा।
प्रयोगात्मक
1--पौधशाला प्रवर्धन रचनाओं का अध्ययन। 2--पौधशाला यन्त्रों तथा उपकरणों का अध्ययन। 3--पौधशाला, भूमि मिश्रणों, पौधरोपण, माध्यमों का अध्ययन। 4--गमला मिश्रण तैयार करना तथा गमला भरना। 5--बीज शैया तैयार करना। 6--विभिन्न सब्जियों के बीजों को पहचाने व उनकी पौध तैयार करें। 7--बीज अंकुरण परीक्षण तथा जीवंतता परीक्षण। 8--प्रवर्धन तरीकों, भेंट कलम, गूटी कलम बांधना, कालिकायन के विभिन्न तरीकों का ज्ञान। 9--मूल वृत्त उगाना।
10--कालिका शाखा का चुनाव। 11--पौधशाला रेखांकन। 12--पौध रोपण। 13--क्यारी व गमले तैयार करना। 14-वृद्धि नियामकों से तना कृन्तनों का शोधन करना।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय--5 घण्टे प्रयोगात्मक परीक्षा-- (1) परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें--
प्रयोग--1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--2 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--3 (दीर्घ प्रयोग)
(2)
(क) सत्रीय कार्य (ख) कार्य-स्थल का प्रशिक्षण नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 137संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं पता मूल्य संस्करण वर्ष
1 2 3 4 5 6 रु0 सर्वश्री-- 1 पौधशाला व्यवसाय कृष्ण पंत कोठारी एवं
15.00 1989-90 आनन्द बिहारी श्रीवास्तव
रंजना प्रकाशन मन्दिर, 12/13, सूई कटरा, आगरा
2 भारत में पौधों की कृषि डा0 मुरारी लाल लवनिया सिंघल बुक डिपों, बड़ौत, मेरठ 20.00 1987 3 सब्जियाँ एवं पुष्पोत्पादन श्री वेम, श्री सिंह भारतीय भण्डार, बड़ौत, मेरठ 15.00 1988 4 भारत में फलोत्पादन श्री कृष्ण नारायण दुबे रामा पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, मेरठ 15.00 1988 12.00 1984 5 फल विज्ञान डा0 रामनाथ सिंह भारतीय कृषि अनुसंधान, परिषद,
6 फ्रूड नर्सरी प्रैक्टीसेज
15.00 1988 इन इन्डिया
एल0 बैधता रतीमन (अंग्रेजी)
कृषि वन, नई दिल्ली दि इण्डियन प्रिन्टर्स वर्ग, रानी झांसी रोड, नई दिल्ली
7 पौधशाला प्रौद्योगिकी डा0 ओमपाल सिंह अलंकार पुस्तक भवन, बड़ौत, मेरठ 16.00 1989
(20) टे्रड--भूमि संरक्षण कक्षा-11 उद्देश्य--
(1) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग के औद्योगीकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगाारी को दूर करना। (2) भूमि कटाव को रोकना, उनका सुधार करना तथा प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वृद्धि करके आर्थिक संकट से देश का बचाना।
(3) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग में दक्षता प्राप्त करके भविष्य में जीवकोपार्जन के लिए स्वयं को सक्षम बनाना। (4) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने आत्म निर्भर बनने एवं कुशल नागरिक के निर्माण में योगदान देना। (5) कृषि उत्पादन हेतु भूमि संरक्षित करना, सुधार करना तथा प्रतिवर्ष उनके क्षेत्रफल में वृद्धि करना। (6) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों एवं वैज्ञानिक विधियों की जानकारी अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
(7) प्रदेश की बंजर एवं अनुपयुक्त भूमि को उपयोगी एवं उपजाऊ बनाकर कृषि उत्पादन के योग्य बनाना।
वृक्षारोपण कर वन उद्योग को प्रोत्साहन देना।
रोजगार के अवसर-- (1) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग को विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार की इकाई खोलकर अपना निजी व्यवसाय चला सकता है। (3) भूमि सुधार सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों एवं रसायनों की बिक्री के व्यवसाय से दुकान चला सकता है। (4) देश की बंजर एवं अनुपयोगी भूमि को उपयोगी बनाकर खेती कर सकता है। (5) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार सम्बन्धी अलग-अलग समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है। पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
20 20
60 प्रथम प्रश्न-पत्र द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र (ख) प्रयोगात्मक-- 400
20 20 200
टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
18 ङ138 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
60 अंक
प्रथम प्रश्न-पत्र मृदा एवं जल मृदा परिभाषा, भौतिक एवं रासायनिक भ्रूण, मृदा गठन, मृदा घनत्व, मृदा सरन्धता, मृदा वर्ण, मृदा जल, मृदा जल वर्गीकरण, मृदा अन्तःक्षरण, अन्तःक्षरण को प्रभावित करने वाले कारक, अन्तःक्षरण ज्ञात करने की विधियां, पारिच्यवन, मृदा जल पारिगम्यता, पारिगम्यता को प्रभावित करने वाले कारक, अम्लीयता एवं क्षारीयता, मृदा उर्वरता।
60 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
मृदा क्षरण
मृदा क्षरण की परिभाषा, क्षरण के मुख्य अभिकर्ता, भूक्षरण की यांत्रिकी, भ्रूक्षरण के प्रकार, जल क्षरण, वर्षा बूँद क्षरण, पृष्टावाह क्षरण, अल्प क्षरित क्षरण, खड्ड या प्रवनालिका क्षरण, खण्ड विकास की प्रक्रियाएं, खड्डी का वर्गीकरण, सरिता में अपवाह का संचालन, भूस्खलन क्षरण, जल क्षरण को प्रभावित करने वाले कारक, जल क्षरण से होने वाली हानियाँं।
60 अंक
तृतीय प्रश्न-पत्र
भूमि संरक्षण
1-भूमि संरक्षण की परिभाषा एवं संरक्षण के उद्देश्य, भूमि संरक्षण सम्बन्धित अनुसंधान कार्यों का इतिहास, भूमि संरक्षण की मूल अवधारणा संरक्षण सर्वेक्षण, भूमि की दशाओं का अध्ययन, जलवायु की दशाओं का अध्ययन, मानचित्र इकाइयों का वर्गीकरण, भूमि प्रयोगशाला वर्गीकरण, शक्यता वर्ग, शक्यता उप वर्ग, शक्यता इकाई। 20 2-संरक्षण खेती, भूमि संरक्षण की शस्य वैज्ञानिक विधियां, आवरण, शस्योत्पादन, आवरण शस्यों के प्रकार, आवरण शस्योतपादन के लाभ एवं उनकी परिसीमाएं, संरक्षण, शस्यावर्तन, ले-कृषि, एक शस्य विधि, पटि्टका खेती, परिभाषा, पटि्टका खेती के प्रकार, समोच्च पटि्टका खेती, क्षेत्र पटि्टका खेती, अन्तस्य पटि्टका खेती। 20
3-समोच्च कृषि परिभाषा, समोच्च कृषि की उपयोगिता, समोच्च कृषि के प्रकार, समोच्च कृषि प्रणाली का आयोजन, समोच्च रेखा की स्थिति ज्ञात करना, समोच्च रेखा पर जुताई एवं बुआई, समोच्च कृषि की परिसीमाएं। 20
60 अंक
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
वायु क्षरण नियंत्रण
वायु क्षरण नियंत्रण के सिद्धान्त, वायु वेग के नियंत्रण, बात रोक एवं रक्षा पेटियां, रक्षा पेटियों से लाभ, रक्षा पेटियों की स्थिति, रक्षा पेटियों की सुरक्षा एवं देख-भाल, भू-परिक्ररण क्रियाएं, यांत्रिक सुरक्षा, रेत टीलों का स्थिरोकरण, संरक्षण क्षेत्र, पौध क्षेत्र के प्रकार, पौध क्षेत्र स्थान का चुनाव, पौध क्षेत्र का विकास एवं कर्षण, संरक्षण जलाशय, जलाशयों के प्रकार, जलाशय निर्माण की सारभूत आवश्यकताएं, अभिकरण सिद्धान्त, स्थिति विन्यास अनुरक्षण निर्माण, जलाशय निर्माण के आर्थिक लागत की गणना।
पंचम प्रश्न-पत्र
60 अंक
ऊसर भूमियों का सुधार एवं भूमि संरक्षण में वानिकी प्रबन्ध
ऊसर भूमियों का वर्गीकरण, ऊसर भूमियों के विकास की परिस्थितियों का अध्ययन, ऊसर भूमियों का प्रतिकूल प्रभाव, ऊसर भूमियों के सुधार सम्बन्धित मूल आवश्यकताएं, लवणीय भूमियों का सुधार, क्षारीय भूमियों का सुधार, विभिन्न फसलों की सहनशीलता सीमा सुधार के आर्थिक लागत की गणना।
प्रयोगात्मक
1--यांत्रिक विधि द्वार मृदाकरण के आकार को ज्ञात करना। 2--मृदा घनत्व ज्ञात करना। 3--मृदा में नमी की मात्रा ज्ञात करना। 4--मृदा का अन्तःक्षरण ज्ञात करना। 5--खड्ड की प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ आख्याओं का निर्माण। 6--मृदा के विभिन्न अवस्थाओं पर क्षरण का प्रभाव। 7--विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों का क्षेत्रफल ज्ञात करना। 8--दो विभिन्न स्थानों की क्षेत्रों का क्षेत्रफल ज्ञात करना। 9--पृथ्वी सतह पर किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच प्रोफाइल का रेखांकन करना।
10--किसी क्षेत्र के कन्टूर रेखा का रेखांकन करना। 11--कन्टूर रेखा का रेखांकन। 12--विभिन्न प्रकार के मेड़ की रचना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 139प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय--5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा--
(1)
परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें-- प्रयोग--1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--2 (लघु प्रयोग) प्रयोग--3 (लघु प्रयोग)
(2)
(क) सत्रीय कार्य (ख) कार्य-स्थल का प्रशिक्षण
नोटः--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं
मूल्य संस्करण
पता
वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार डा0 ओम प्रकाश सिंह सिंघल बुक, डिपो एवं पता 15.00 1988 प्रौद्योगिकी
2 भूमि एवं जल संरक्षण के
तदेव 30.00 1988 सिद्धान्त
3 मृदा एवं जल संरक्षण के
डा0 मिश्रा, शुक्ला एवं शुक्ला एस0 सी0 वर्मा मेसर्स भारतीय भण्डार 25.00 1987 सिद्धान्त
बड़ौत, मेरठ
4 कृषि अभियन्त्रण बी0 बी0 सिंह कुक्क पब्लिशिंग हाउस, 13.50 1988
बड़ौत, मेरठ
5 मृदा एवं जल संरक्षण के डा0 ओम प्रकाश तदेव 30.00 1983 मूल सिद्धान्त
6 मृदा विज्ञान डा0 सिंह एवं शर्मा तदेव 30.00 1987 50.00 1988 7 मृदा अपरदन एवं भूमि
संरक्षण
डा0 त्रिपाठी एवं सहयोगी
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
4.65 1988 8 भारत में मृदा संरक्षण श्री बसु एवं सहयोगी प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
(21) टे्रड--एकाउन्टेन्सी एवं अंकेक्षण
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
एकाउन्टेन्सी ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है। लेखा लिपिक, पुस्तकालय, रोकड़िया, रोकड़ लिपिकि, कैश काउन्टर लिपिक, लागत लिपिक और अंकेक्षण लिपिक।
उद्देश्य--
बहीखाता तथा लेखाशास्त्र के मूलभूत सिद्धान्तों का ज्ञान प्रदान करने, व्यापारिक निर्माणों तथा सेवा प्रदान करने वाली संस्थाओं में रखी जाने वाली पुस्तकों तथा उनके सम्बन्ध में ज्ञान प्रदान करना तथा व्यवहारिक तथा निर्माण कार्य में लगे हुये संगठनों के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले प्रपत्रों, लेखों तथा विशेष रूप से अन्तिम खातों तथा विवरणी के तैयार किये जाने के विषय में व्यावसायिक ज्ञान प्रदान करता है। साथ ही यह प्रबन्धकों की कमी लाभ तथा परिणामों को ज्ञात करने की विशेष कुशलता प्रदान करना है। इसी लिये परीक्षार्थी को सैद्धान्तिक ज्ञान के परिप्रेक्ष्य में एक गहन प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी प्राप्त करना होगा। पुस्तपालन तथा लेखा कर्म की पद्धति अंग्रेजी पद्धति, जैसे-बैंकों, बीमा कम्पनियों तथा अन्य संगठनों में रखी जाती है, से ही होगी।
140 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
1--लेखांकन सिद्धान्त--प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2--प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता-बही खाता-बहियों में खतौनी की विधि--I तलपट तैयार करना त्रुटियाँ और उनका सुधार। 10 3--रोकड़-पुस्तक--चेक सम्बन्धी लेेखे, चेक समाधान विवरण 10 4--विनिमय विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक ज्ञान तथा सम्बन्धी लेखे। 10 5--अन्तिम खातों को तैयार करना--समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
बहीखाते तथा लेखाशास्त्र--II
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
1--पूंजीगत एवं आयगत मदें। 10 2--गैर व्यावसायिक संस्थानों के खाते--प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20 3--ह्रास परिभाषा--ह्रासित करने की विभिन्न पद्धतियाँ। 20 4--संचय, प्रावधान और कोष। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
1--व्यावहारिक संगठन--अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 10 2--व्यावसायिक संगठन के प्रारूप--एक व्यवसाय, साझेदारी संगठन, संयुक्त स्कन्द कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम 20 3--कार्यालय संगठन--अर्थ महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय के
4--कार्यालय कार्य-विधि, नस्तीकरण--लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका विज्ञापन एवं विक्रय कल कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन। 20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 141
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
गणित तथा सांख्यिकी
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--अंकगणित की मुख्य संक्रियायें--साधारण तथा दशमलव पद्धति (निकटतम मान सहित)। 10 2--मापन की विभिन्न इकाइयाँ--क्षेत्रफल धारिता भार आयतन तथा समय। 10 सांख्यिकीय--
1--क्षेत्र तथा महत्व। 10 2--आँकड़ों का संग्रह। 10 3--बारम्बारता बंटन। 16 4--सांख्यिकी आंकड़ों का आलेखनीय निरूपण (दण्ड आरेख, वृत्त आरेख, आयत चित्र, चित्रीय विरूपण बारम्बारता बहुभुज, बारम्बारता सम्बन्धी बारम्बारता चक्र)। 14
पंचम प्रश्न-पत्र
अंकेक्षण
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--अंकेक्षण--परिभाषा, महत्व उद्देश्य--मुख्य एवं गौण उद्देश्य। 10 2--अंकेक्षण के प्रकार--सतत् वार्षिक आन्तरिक अंकेक्षण एवं वैधानिक अंकेक्षण। 10 3--अंकेक्षण की तैयारी--अंकेक्षण कार्य विधि का निर्धारण, अंकेक्षण कार्यक्रम, अंकेक्षण नोटबुक, नैत्यक जांच, परीक्षण जाँच। 10 4--आन्तरिक अवरोध--अर्थ, उद्देश्य, आन्तरिक अंकेक्षण से तुलना, आन्तरिक अवरोध को कुशल प्रणाली के मूलभूत सिद्धान्त। क्रय, विक्रय, नगद प्राप्ति एवं भुगतान तथा मजदूरी के सम्बन्ध में आन्तरिक अवरोध प्रणाली।16 5-प्रमाणन- अर्थ, उद्देश्य एवं चल-अचल सम्पत्तियों का सत्यापन एवं मूल्यांकन, दायित्वों का सत्यापन। 14
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक--400 न्यूनतम--200 बड़े प्रयोग--
छात्रों को बाउचर प्रदान किये जायें जिनकी सहायता से रोकड़ पुस्तक, खुदरा रोकड़, पुस्तक क्रय, पुस्तक विक्रय, पुस्तक बीजक, विक्रय विवरण एवं चालू खाता तैयार करना, विज्ञापन हेतु प्रपत्र तैयार करना, फार्म सी0 एवं फार्म 31 भरना। छोटे प्रयोग--
समय एवं श्रम बचाने वाले यन्त्रों की जानकारी एवं प्रयोग, जैसे--कलकुलेटर्स, डैटिंग मशीन, पंचिंग मशीन, चेक राइटिंग मशीन, ऐडिंग मशीन, टाइप रिकार्डर, स्टाप वाच, रेडी रेकनर आदि। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1-- (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) 80 अंक बड़े प्रयोग की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) 40 अंक छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी प्रयोगों की सूची के आधार पर 40 अंक पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों 40 अंक का संकलन। 2-- (क) सत्रीय कार्य (100)--
सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति अनुशासन 10 अंक लिखित कार्य 20 अंक दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे 50 अंक मौखिकी 20 अंक 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त 100 अंक श्रेणी के आधार पर।
142 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं
मूल्य संस्करण
पता
वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 माध्यमिक बही खाता एवं सिंह एवं अग्रवाल भारत प्र्रकाशन मन्दिर, 30.00 1989-90 लेखा-प्रपत्र प्रथम
मेरठ
2 माध्यमिक बही खाता एवं सिंह एवं अग्रवाल भारत प्रकाशन मन्दिर, 30.00 1989-90 लेखाशास्त्र-द्वितीय
मेरठ नवजीवन प्रकाशन, मेरठ 05.00 1989-90 3 बहीखाता एवं लेखाशास्त्र बी0 एस0 भट्टाचार्या एवं गोविल
4 अंकेक्षण बी0एस0
नवजीवन प्रकाशन, मेरठ 17.00 1989-90
भट्टाचार्या एवं गोविल
हिन्दी प्रचारक संस्थान 80.00 1989-90
(22) टे्रड--बैंकिंग कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
बैंकिंग धाराओं के अध्ययन के उपरान्त छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्ति करता है-- (1) क्लर्क, (2) रोकड़िया, (3) लिपिक तथा रोकड़िया, (4) गोदाम संरक्षक, (5) लिपिक तथा गोदाम संरक्षक, (6) रोकड़िया तथा गोदाम संरक्षक, (7) लिपिक तथा टाइपिस्ट। उद्देश्य--
वर्तमान परिस्थितियों में छात्रों का बैंकिंग के सैद्धान्तिक ज्ञान का होना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु उसे व्यावहारिक ज्ञान की भी अति आवश्यकता है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुये बैंकिंग के मूलभूत सिद्धान्त के अतिरिक्त छात्रों की बैंकिंग सेवा के लिये तैयार करना भी है। रोजगारपरक शिक्षा की ओर अग्रसर होने में यह कदम सहायक सिद्ध होगा। पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
60 20
60 20
60 300 20 100 (क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखा शास्त्र--I द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन चतुर्थ प्रश्न-पत्र--बैंकिंग पंचम प्रश्न-पत्र--बैंकिंग (ख) प्रयोगात्मक--
60 20 60 20 400 200 टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
1--लेखांकन सिद्धान्त--प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 143 2--प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता-बही खाता-बहियों में खतौनी की विधि- तलपट तैयार करना 10 त्रुटियाँ एवं उनका सुधार। 3--रोकड़-पुस्तक--चेक सम्बन्धी लेेखे, बैंक समाधान विवरण। 10 4--विनिमय विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक ज्ञान तथा सम्बन्धी लेखे। 10 5--अन्तिम खातों को तैयार करना--समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
1--कम्पनी खाते-- अंशों का निर्गमन तथा अपहरण, बोनस, अंश ऋण पत्रों का निर्गमन एंव शोधन कम्पनी से अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार)। 10 2--गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते--प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20 20 3--ह्रास परिभाषा--ह्रासित करने की विभिन्न पद्धतियाँ। 10 4--संचय (प्रावधान) और कोष।
तृतीय प्रश्न-पत्र
व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 10
20
10 1--व्यावसायिक संगठन--अर्थ, उद्देश्य, महत्व-- 2--व्यावहारिक संगठन के प्रारूप--एकल व्यवसाय, साझेदारी, संगठन संयुक्त स्कन्ध, कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम। 3--कार्यालय संगठन--अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय के स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4--कार्यालय कार्य विधि--विवरण, लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं विक्रय कला (कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन)।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
बैंकिंग
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 12 12 1--बैंक--परिमाण, संगठन एवं प्रबन्ध, कार्य, महत्व, भेद। 2--बैंक द्वारा साख निर्माण। 3--बैंकों की कार्य प्रणाली--बैंकों में खाता खोलने की विधि, बचत खाता, सावधि खाता, चालू खाता, गृह बचत खाता, आवृत्ति जमा खाता खोलते समय काम आने वाले प्रपत्र, खातों को बन्द करने की प्रक्रिया, लाकर्स का संचालन, खातों का हस्तान्तरण। 4--भारत की वर्तमान मुद्रा प्रणाली। 5--बैंकों में धोखाधड़ी एवं बचाव के उपाय।
12 12 12
पंचम प्रश्न-पत्र
बैंकिंग
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--भारतीय अधिकोषण--भारतीय बैंकिंग का विकास, बैंकों द्वारा पूंजी प्राप्ति के साधन एवं उसका विनियोजन नकद कोष, ऋण देते समय रखी जाने वाली जमानतें/ऋण देने के नये आयाम एवं प्राथमिकतायें।
15144 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 2--[क, रिजर्व बैंक--संगठन, कार्य, महत्व, सफलताएं एवं असफलताएं, व्यापारिक बैंकों से सम्बन्धी, रिजर्व बैंक एवं कृषि साख, साख नियंत्रण।
3--विदेशी विनिमय बैंक। 4--देशी बैंक, साहूकार एवं महाजन, चिट फण्ड।
16 [ख, स्टेट बैंक--स्थापना के उद्देश्य, संगठन, कार्य महत्च, सफलताएं एवं असफलताएं। 15 14
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
अधिकतम--400 अंक न्यूनतम--200 अंक बड़े प्रयोग--
1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र निर्ख-पत्र (कोटेशन), आदेश-पत्र, सूचना-पत्र, सन्दर्भ पत्र, क्रय आदेश-पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती-पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय-पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सरकारी पत्र, आवेदन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति पत्र। छोटे प्रयोग--
1-अनुक्रमणिका का निर्माण, चेकों का लिखना, निर्गमन करना एवं निर्गमन रजिस्टर में लेखा करना, चेकों का पृष्ठांकन एवं रेखांकन करना, चेकों की वैधता की जांच करना, पे-इन-स्लिप, विनियम पत्र, प्रतिज्ञा-पत्र, हुण्डी व टे्रजरी बिलों का लिखना, विभिन्न श्रम संघक-पत्रों का प्रयोग, रेडी-रेकनर द्वारा गणना, बाउचर कैश मेमो जमा तथा नाम पत्र भरना, बीजक, विक्रय विवरण तैयार करना, पत्र प्राप्ति पुस्तक, डाक-व्यय रजिस्टर, प्यून बुक तथा खुदरा रोकड़ बही का लिखना। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1-- (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोग की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी (40) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संगलन-- 40 अंक। 2-- (क) सत्रीय कार्य (100) अंक-- सत्रीय कार्य का विभाजन-- उपस्थिति अनुशासन 10 अंक लिखित कार्य 20 अंक दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे 50 अंक मौखिकी 20 अंक योग . . 100 अंक
(ख) औद्योगिकी प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर--100 अंक।
प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं
मूल्य संस्करण वर्ष
पता
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 बहीखाता तथा लेखा शास्त्र सिंह एवं अग्रवाल भारत प्र्रकाशन मन्दिर, 30.00 1888-89 बैंकिंग ग्रुप
मेरठ
25.00 1988-89 2 मुद्रा एवं बैंकिंग डा0 श्रीकान्त मिश्र श्रीराम मेहरा एण्ड कम्पनी, हास्पिटल रोड, आगरा--3 3 भारतीय मुद्रा तथा बैंकिंग विजय पाल सिंह भारत प्रकाशन मन्दिर, 35.00 1988-89
मेरठ
4 व्यावसायिक एवं कार्यालय
. . . . 28.00 1988-89 संगठन
5 भारतीय मुद्रा बैंकिंग . . . . 21.00 1988-89 6 व्यावसायिक बहीखाता . . . . 30.00 1988-89भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 145
(23) टे्रड--आशुलिपि एवं टंकण
(कक्षा-11) पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
आशुलिपि एवं टंकण ग्रुप का अध्ययन करने के उपरान्त छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है- (1) वेतन रोजगार--आशुलिपिक, टंकण, व्यक्तिगत सचिव, गोपनीय सचिव, कार्यालय सहायक, अधीक्षक लिपिक एवं टंकण, एल0 डी0 सी0, यू0 डी0 सी0 (समस्त पद सरकारी, अर्द्ध सरकारी एवं व्यक्तिगत संस्थानों में)। (2) स्वरोजगार--(अ) व्यावसायिक संस्थान (टंकण एवं आशुलिपि), (आ) व्यक्तिगत संस्थान (टंकण एवं बहुलिपिकरण तथा अंशकालीन कार्य)।
उद्देश्य--
1--छात्रों को आधुनिक युग में आशुलिपि एवं टंकण के महत्व का ज्ञान कराना। 2--छात्रों में आशुलिपि लेखन, पठन एवं रूपान्तर करने की क्षमता का विकास करना। 3--छात्रों में टंकण करने की क्षमता का विकास करना, साधारण विषय-वस्तु पत्र तालिका, विभिन्न प्रकार के व्यवसाय में प्रयुक्त प्रपत्र और प्रारूप प्रतिलिपि एवं प्रोडक्शन, टाइपिंग आदि। 4--छात्रों में व्यक्तिगत एवं कार्य आदतों का विकास करना। 5--छात्रों में टंकण की 40 शब्द प्रति मिनट एवं आशुलिपि की 120 शब्द प्रति मिनट की गति का विकास करना। 6--छात्रों को आधुनिक कार्यालय व्यावसायिक संगठन एवं विविध तथा व्यावहारिकता का अवबोध कराना। 7--छात्रों को तुरन्त रोजगार प्राप्त करने के लिये तैयार करना।
पाठ्यक्रम--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
60 20
60 20 (क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखा शास्त्र--I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--आशुलिपि एवं टंकण अंग्रेजी अथवा हिन्दी पंचम प्रश्न-पत्र--आशुलिपि एवं टंकण हिन्दी या अंग्रेजी (ख) प्रयोगात्मक--
400 200 टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I) अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--लेखांकन सिद्धान्त--प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2--प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता-बही, खाता-बहियों में खतौनी की विधि, तलपट तैयार 10 करना, त्रुटियाँ एवं उनका सुधार। 10 3--रोकड़-पुस्तक--चेक सम्बन्धी लेेखे, बैंक समाधान विवरण। 4--विनिमय विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखे। 10 5--अन्तिम खातों को तैयार करना, समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते--प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20
19 ङ146 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 2--ह्रास परिभाषा--ह्रासित करने की विभिन्न पद्धतियाँ। 3--संचय (प्रावधान) और कोष। 4--पूंजीगत तथा आयगत मदें।
20 10 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक
न्यूनतम--20 अंक 10
20
10 1--व्यावहारिक संगठन--अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 2--व्यावसायिक संगठन के प्रारूप--एकल व्यवसाय, साझेदारी, संगठन संयुक्त स्कन्ध, कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम। 3--कार्यालय संगठन--अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय के स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4--कार्यालय कार्य--विधि, नस्तीकरण, लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं विक्रय कला/कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(आशुलिपि एवं टंकण (हिन्दी)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
10
10
10 1-(क)-आशुलिपि का आधुनिक महत्व--विभिन्न प्रकार की आशुलिपियाँ जैसे ऋषि प्रणाली, टण्डन प्रणाली, जन प्रणाली, पिट्समैन प्रणाली आदि। (ख)--चित्र एवं संकेत, व्यंजन एवं उनको मिलाना--स्वर एवं संकेत स्वर, स्वरों के स्थान। 2-(क)--"त" वर्ग की दायीं, बायीं रेखाओं का प्रयोग "श", "य", "न" का प्रयोग। "स", "श", "ज" लिये वृत्त का प्रयोग। "त", "न", "र", "ल" के लिये आकड़ों का प्रयोग। (ख)-- "स्त" , "स्थ" , "ष्ठ" दार बार एवं "त्र" , "म्प" , "म्ब" के चाप। 3-(क)--शब्द चिन्ह, सर्वनाम, लिंग, वचन, स, स्व, ल, र का प्रयोग। (ख)--"त" और "त" को ऊपर और नीचे लिखने की दशाएं। 4-(क)--स्वरों का लोप करना, कटे हुये व्यंजन, त्रिध्वनिक, त्रिध्वनिक मात्राएं (ब्यंजनों को आधा करना, कट और दूना करना, वन सम, शन का प्रयोग। वक, लर, रर के आँकड़े।) 10 (ख)--प्रत्यय, उपसर्ग, संधि, संख्या, विराम आदि का संकेत। 5-(क)--वर्णाक्षरों को काटने या नये शब्द, जुटे शब्द वाक्यांश 1 से लेकर 12 तक वाक्यांशों की सूची। 10 (ख)--साधारण संक्षिप्त संकेत, उर्दू के कुछ प्रचलित शब्द तथा एक ही वर्ग के उच्चारित विभिन्न संकेत। 6-(क)--विभिन्न संस्थाओं में प्रयुक्त होने वाली प्रावैधिक शब्दावली, वाक्याँश, वाक्य एवं अनुच्छेद। 10 (ख)--आर्थिक एवं व्यावसायिक, कृषि, उद्योग, अधिकोषण, प्रमण्डल, स्कन्ध, विपणि, यातायात, डाक-तार एवं संचार।
नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
शार्ट हैण्ड टाइप (अंग्रेजी)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक Unit 1--The Consonants:--The vowels, Intervening vowels and position, Gramalogues, Punetuation, Alternative signs for "i" and "h" Dipthoungs, abbreviated "w" and Phraseography including tick; the.
10 Unit 2--Representing 'S' and "Z" with crce and sroks, large circles Saw and wacrosis' Iops 'st' and 'Str' Initial books to stranght srocks and curves 'N' and 'f ' hooks a alternative form 'f ' 'vs' etc, with intervening vowls, circle and roops find books the shu shocks.
10 Unit 3--The a spirate upward and downward 'r' 'I' and 'sh' Compound Consonats vowel Indication.
10 Unit 4--The Halving Principal the doubling principal, Dipthenine or two vowel signs medial semi circle Prefixces, Suffixes and Terminations, negative words. 10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 147 10 Unit 5—Note—taking, Transiation etc. shorthand in practice. Note—Trans reption in long hand on the typewriter also. Unit 6—Contractions, Special contractios, Figures, Proper names etc. Essentialvowels intersections Advanced phraseography. 10 नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
पंचम प्रश्न-पत्र
आशुलिपि एवं टंकण (हिन्दी)
इकाई--1
अधिकतम अंक--60 न्यूनतम अंक--20 20 (क) आधुनिक युग में टंकण का महत्व, टाइप मशीन एक लेखन यन्त्र के रूप में टंकण का व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत प्रयोग, महाविद्यालय में प्रवेश के लिये टंकण का महत्व, विभिन्न प्रकार की टाइप मशीन, हाथ से चलाने वाला टाइप राइटर, बिजली का टाइप राइटर, इलेक्ट्रानिक टाइप राइटर एवं वर्ड प्रोसेसर। टाइप राइटिंग के प्रकार, स्पर्श प्रणाली एवं दृश्य प्रणाली, इनके गुण-दोष।
(ख) टाइप करते समय सामग्री की व्यवस्था-टंकण के बैठने की उचित विधि टंकण मशीन के विभिन्न रूप में होने वाले कल पुर्जें एवं उनके प्रयोग।
परिचालन नियंत्रण--मार्जिन स्टाप्स पेपर गाइड पेपर रिलीज लाइन स्पेस गेज, सिलेण्डर, धम्ब व्हील, शिफ्ट की लाक तथा स्पेसवार।
टंकण मशीन में कागज लगाने की कला एवं कागज को बाहर निकालने की विधि। (ग) कल पटल (की-बोर्ड) का पूर्ण ज्ञान। वर्णमाला शब्द, वाक्यांश, वाक्य एवं लघु अनुच्छेदों का टंकण अंक एवं विभिन्न प्रकार के संकेतों का टंकण उन संकेतों का टंकण भी जो कल पटल में नहीं दिये गये हैं।
लम्बवत् एवं क्षैतिजिक मध्य में टंकण करना, गणितिक एवं अभ्यासिक स्थायीकरण। (घ) प्रूफ रीडिंग तथा अशुद्धियों का संशोधन। प्रूफ रीडिंग में प्रयुक्त होने वाले चिन्ह। संशोधन हेतु प्रयुक्त होने वाले विभिन्न वस्तुएं--रबर, रासायनिक कागज, रासायनिक द्रव्य पदार्थ, मशीन में किया गया सुधार टेप, संकुचन एवं विस्तार।
(च) टाइप मशीन की सुरक्षा व देख-भाल, टाइप मशीन की सफाई एवं तेल देना। रिबन का बदलना, लघु मरम्मत कार्य।
(छ) गति की गणना--स्टेट कापी राइटिंग एवं प्रोडक्शन, टाइपिंग गति प्रतियोगिता, भारतीय एवं विश्व टंकण के रिकार्ड।
(ज) टंकण की व्यक्तिगत आदतें--व्यक्तित्व प्रदर्शन, व्यक्तिगत रूप में स्वेच्छा, शीघ्रता एवं आदेशों का पालन।
इकाई--2
20 पत्रों को टंकण--खुले, बन्द एवं मिश्रित चिन्हों के साथ ब्लाक्ड, सेमी ब्लाक्ड एवं सिम्प्लीफाइड रूप में। लघु-पत्रों का टंकण--एक पन्ने के पत्र तथा एक से अधिक पन्ने के पत्रों का टंकण। लिफाफों, पोस्टकार्ड एवं अन्तर्देशीय-पत्र पर पता टाइप करना। पत्र में संलग्नक पत्रों का टंकण। लिफाफों, पोस्टकार्ड एवं अन्तर्देशीय-पत्र पर पता टाइप करना। पत्र में संलग्नक पत्रों को टाइप करना। इकाई--3
20 (क) तालिका टंकण--दो या दो से अधिक स्तम्भों को तालिका का टंकण। आर्थिक एवं लागत विवरणों का टंकण।
(ख) मुद्रित प्रारूपों पर टंकण जैसे--बीजक, बिल, निर्ख टेण्डर, तार आदि।
नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
FIFTH PAPER
Shorthand and Type (English)
Maximum Marks—60 Minimum Marks–20 Unit 1--(a) Importance of typewriting in modern age, typerwriting for vocational use and college preparatory.
20148 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 Various kinds of typewriters based on the make the type, the size, the language etc. manual typewriter, Electric typewriter, Electronic typerwriter, word processor.
System of typing, Touch system and sight system, their advantages and disadvantage. (b) Aranging the materials for typing and of the class procedure. Correct typing method, various parts of a typewriter and their uses, mainipulative control, margin stops, paper guide, paper release, line space gauge, cylinder knobs, shifts key, spacebar etc. Insertion and removal of paper in and out of the machine. (c) Covering the keyboard typing of alphabets, words, phrases sentences and small paragraphs, typing of number and symbol keys.
Typing of symbols not given on the key-board. (d) Centring horizontal, vertical mathematical and judgement placement. Proof reading and correction of errors, Proof correction marks of different types of erasing materials, erasures (rubber/pencil) chemical paper, chemical liquid, correction mistake within the machine, squeezing and spreading.
(e) Care and maintenance of typewriter oiling and cleaning of the machine. Change of ribbon. Minor repair work. (f) Calculation of speed. Straight copy of typing (SWAM, CWAM and NWAM) and production typing (G-PRAM and N-PRAM) and MVAM, Speed Compositions, Indian and world records in typing.
(g) Personal habits and work habits, Personal appearance, willingness, promptness, initiative trust, worthiness, punctuality, etc.
Following instructions and direction. Unit 2--Typing of letters, Blocked, Semi-blocked and NOMA simplified the open close and mixed punctuations.
20 Typing of short letters (small and full size letter papers) one page letter and letter running into more than one page.
Typing of addresses on envelops, inlands and postcards, including window display chain feed.
Typing of annexures and appendices to letter. Unit 3--(a) Tabular typing, Two column Table and Multiple columns table box etc. display of tabulation work.
20 Typing of financial and costing statements. (b) Typing of printed forms lite invoices, bills, quotation, tenders, index cards, telegrams etc
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक--400
न्यूनतम--अंक 200 बड़े प्रयोग--
सूची--1 दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र निर्ख-पत्र (कोटेशन), आदेश-पत्र, सूचना-पत्र, सन्दर्भ-पत्र, क्रय आदेश-पत्र, बिक्रय पत्र ग्राहकों की क्रय हेतु प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति पत्र, शिकायत-पत्र, नश्ती-पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी पत्र, सरकारी पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सिफारशी पत्र, नौकरी हेतु आवेदन-पत्र साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति पत्र। आशुलिपि प्रायोगिक--
सूची--2-आशुलिपिक पटिट्काओं, मुद्रित आशुलिपि लेखों अथवा श्याम पट्ट पर लिखित लेखों को पढ़ना, कोल्ड नोट का पढ़ना। 3--पठित अथवा अपठित गद्याशों-पत्रों इत्यादि का श्रुति लेखन। 4--कैसेट, टेप रिकार्डर, नेट डिक्टेशन पद्धति तथा आशुलिपि रिकाडर््स आदि यंत्रों से श्रुति लेख। टंकण प्रयोगात्मक सूची--(ग)--1-कठिन शब्दों, मुहावरों, वाक्यों एवं कथाओं का टंकण। 2--संख्याओं, चिन्हों जो की-बोर्ड (Key Board) में न हो, का टंकण। 3--विभिन्न प्रकार के कागजों/पत्र शीर्षकों पर भिन्न-भिन्न ढंगों के छोटे एवं बड़े पत्रों का टंकण। 4--पोस्ट कार्डों, अन्तर्देशीय पत्रों एवं विभिन्न प्रकार के लिफाफों पर पतों का टंकण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1495--बहु संख्यक कालमों के साथ सारणियों का टंकण। 6--आमंत्रण पत्रों, मीनू कार्डों, कार्यक्रमों आदि का टंकण। 7--चाट्र्स, ग्राफ-पेपर्स आदि पर टंकण। 8--प्रूफ रीडिंग एवं अशुद्धियों का सुधार। 9--संस्थाओं एवं संगठनों में प्रयोग किये जाने वाले प्रपत्रों जैसे-विपत्र, बीजक, टेलीग्राम का फार्मस्, धनादेश स्वीकृति प्राप्ति चेक आदि पर टंकण।
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--
सूची "क" से सूची "ख" से सूची "ग" से मौखिक एवं रिकार्ड
2-- (क) सत्रीय कार्य
200 40 60 60 40 200 100
सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति अनुशासन लिखित कार्य दो वर्षों में 5 टेस्ट लिये जायेंगे मौखिक
10 20 50 20 100
(ख) औद्योगिक संस्थानों अथवा कार्यालयों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। नोट--1--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2--प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थलों का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
3--एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को करना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्यरूप में परिणत करना है। 4--कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (एम्पलायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (एम्पलायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 400 अंक का होगा।
5--प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा। 6--छात्रों को छात्रवृत्ति देने का प्राविधान होना चाहिये। 7--छात्रों को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण
वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 हिन्दी संकेत लिपि गया प्रसाद
14.00 1989
2 हिन्दी शार्ट हैण्ड
अनुपम प्रकाशक, शिवकुटी, इलाहाबाद युनिवर्सल बुक सेलर्स 12.25 1987 मैनुअल
अग्रवाल गया प्रसाद अग्रवाल
(24) टे्रड--विपणन तथा विक्रय कला
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
विपणन तथा विक्रय कला वर्ग का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकर के रोजगार कर सकता है-- 1--सामान्य विक्रेता, 2--विक्रय सहायक/काउन्टर विक्रेता, 3--निर्यात विक्रेता, 4--फुटकर विक्रेता,150 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 5--थोक विक्रेता, 6--विक्रय प्रतिनिधि, 7--विज्ञापन एजेन्सियों में कर्मचारी के रूप में।
उद्देश्य--
विपणन एवं विक्रय कला पाठ्यक्रम का उद्देश्य अच्छे विक्रेता तैयार करना है। इसके लिये उन्हें ग्राहकों के स्वागत करने उनकी आवश्यकताओं का पता लगाने तथा उन्हें पूरा करने, वस्तुओं के प्रदर्शन करने ग्राहकों के तर्कों तथा शंकाओं का समाधान करने, विक्रय व्यक्तित्व के विकास करने तथा विभिन्न विक्रय अभिकरणों के सम्बन्ध में पूर्ण ज्ञान प्रदान करना है। इसका उद्देश्य बाजार की दशाओं, समस्याओं एवं विक्रय प्रक्रियाओं के सम्बन्ध में भी ज्ञान देना है, जिससे व्यावहारिक जीवन में वे सफल विक्रेता बन सके। पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--विपणन तथा विक्रय कला 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र--विपणन तथा विक्रय कला 60 20 400 200 (ख) प्रयोगात्मक--
टीप--परीक्षार्थियों के प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम--प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--लेखांकन सिद्धान्त--प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2--प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता-बही खाता-बहियों में खतौनी की विधि I--तलपट 10 तैयार करना त्रुटियाँ एवं उनका सुधार। 3--रोकड़ पुस्तक, चेक सम्बन्धी लेेखे, बैंक समाधान विवरण। 10 4--विनिमय विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखे। 10 5--अन्तिम खातों को तैयार करना--समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाते तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक
न्यूनतम--20 अंक
खण्ड (क)--40 अंक
1--गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते--प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20 2--ह्रास परिभाषा--ह्रासित करने की विभिन्न पद्धतियाँ। 3--संचय (प्रावधान) और कोष। 4--पूंजीगत तथा आयगत मदें।
20 10 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 10 1--व्यावहारिक संगठन--अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 2--व्यावसायिक संगठन के प्रारूप, एकल व्यवसाय, साझेदारी, संगठन संयुक्त स्कन्ध कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम।
20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 151 10 3--कार्यालय संगठन--अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय के स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4--कार्यालय कार्य विधि, नस्तीकरण, लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं विक्रय कला कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(विपणन तथा विक्रय कला)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक (1) विपणन--परिभाषा, विचारधारा, विपणन के उद्देश्य, महत्व एवं विधियां (केन्द्रीयकरण, समीकरण एवं वितरण)।
10 (2) विपणन के कार्य--क्रय, विक्रय, परिवहन, संग्रहण, प्रमाणीकरण, श्रेणीयन तथा वित्त तथा जोखिम बाजार की सूचना।
10 10 (3) कृषि विपणन के पहलू, कृषि विपणन की आवश्यकता तथा महत्व। (4) कृषि बाजारों का संगठन तथा कार्यविधि। 10 (5) कृषि विपणन के अधिकरण (सहकारी विपणन, भारतीय खाद्य निगम, राज्य व्यापार निगम)। 10 10 (6) कृषि विपणन का वित्त प्रबन्ध।
पंचम प्रश्न-पत्र
(विपणन तथा विक्रय कला)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 10 (1) बाजार परिभाषा। (2) वितरण वाहिका--थोक एवं फुटकर विक्रय की रीतियां, श्रंखलाबद्ध दुकानें, विभागीय भण्डार, उपभोक्ता सहकारी भण्डार, सुपर बाजार तथा डाक द्वारा व्यापार।
10 10 10 (3) विक्रय कला--आधुनिक, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन में महत्व। (4) सफल विक्रेता के आवश्यक गुण। (5) विक्रय सेवा--विक्रय के पूर्व की क्रियायें, प्रदर्शन, विक्रय अवरोध, विक्रय के पश्चात् सेवा, विक्रय के विभाग एवं उसका संगठन।
(6) विक्रेताओं का चुनाव एवं प्रशिक्षण।
10 10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
अधिकतम--400 अंक न्यूनतम--200 अंक बड़े प्रयोग--
सूची--"क" दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश-पत्र, सूचना-पत्र, सन्दर्भ पत्र, क्रय आदेश-पत्र, विक्रय-पत्र, ग्राहकों के क्रय के लिए प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती-पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय पत्र, सरकारी पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सिफारशी पत्र नौकरी हेतु आवेदन-पत्र, नियुक्ति-पत्र। सूची (ख)--
बैंकों में खाता खोलने के लिये विभिन्न पत्रों को भरना, चेक का लिखना, बिल लिखना, बीजक बनाना, विक्रय प्रपत्र, डेविट नोट, क्रेडिट नोट, प्रतिक्षा पत्र (देशी-विदेशी), विज्ञापन के लिये प्रति तैयार करना, बाजार रिपोर्ट तैयार करना। छोटे प्रयोग-- सूची (क)--
फारवडिंग नोट करना, रेलवे रसीद (आर0आर0), निर्यात प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले प्रपत्रों को भरना, कन्साइनमेंट नोट भरना, जी0आर0 फार्म भरना, मनीआर्डर एवं तार फार्म भरना। सूची (ख)--
समय व श्रम बचाने वाले यंत्रों की जानकारी एवं प्रयोग जैसे कलकुलेटर्स, डेटिंग मशीन, पंचिग मशीन, चेक राइटिंग मशीन, एडिंग मशीन, रिकार्डर, स्टाम्प वाच, रेडी रेकनर आदि।
152 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
2-- (क) सत्रीय कार्य (100 अंक)
सत्रीय कार्यक्रम का विभाजन
20
उपस्थिति अनुशासन 10 लिखित कार्य 20 लिखित कार्य 50 मौखिकी योग . . 100 अंक
(ख) औद्योगिकी प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक।
प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं
मूल्य संस्करण
पता
वर्ष
30.00 1988-89 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 व्यापारिक संगठन पत्र-व्यवहार एवं बाजार वितरण भाग-1
पी0पी0 भार्गव श्री राम मेहरा एण्ड कम्पनी, हास्पिटल रोड, आगरा
पी0पी0 भार्गव " 30.00 1988-89 2 व्यापारिक संगठन पत्र-व्यवहार एवं बाजार विवरण, भाग-2
3 बाजार व्यवस्था पी0पी0 भार्गव यूनिवर्सल बुक डिपो, 35.00 1988
लखनऊ
(25) टे्रड--सचिवीय पद्धति
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
सचिवीय पद्धति ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है-- (1) व्यक्तिगत सहायक/सचिव। (2) लिपिक तथा टाइपिस्ट। (3) कार्यालय सहायक। (4) टेलीफोन आपरेटर। (5) स्वागतकर्त्ता
उद्देश्य-- आधुनिक व्यावसायिक गृहों में सचिवीय कार्य का महत्व तथा श्रम एवं समय संचय यंत्रों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। अतः सचिवीय कार्य में कार्यरत व्यक्तियों को निम्न के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान कराना इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य है--
(1) कार्यालय संगठन। (2) आगत एवं निर्गत पत्रों की कार्य विधि। (3) प्रपत्रों एवं प्रलेखों को सुरक्षित रखना एवं उपलब्ध कराना। (4) श्रम एवं समय संचय यंत्र। (5) कार्यालय स्टेशनरी की व्यवस्था। (6) सभा एवं सचिवीय कार्य। (7) बैंक, डाक-तार एवं परिवहन सेवायें। (8) व्यापारिक पत्र-व्यवहार एवं सचिवीय कार्य सम्बन्धी प्रपत्रों को तैयार करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 153पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन एवं समय निम्नवत् रहेगा--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता एवं लेखाशास्त्र--I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--सचिवीय पद्धति 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र--सचिवीय पद्धति 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-- 400 200
टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक (1) लेखाकंन सिद्धान्त प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरी लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 (2) प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता बही, खाता बहियों में खतौनी की विधि-1, तलपट तैयार 10 करना, त्रुटियों एवं उनका सुधार। (3) रोकड़ पुस्तक चेक सम्बन्धी लेखें, बैंक समाधान विवरण। 10 (4) विनिमय विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखें। 10 (5) अन्तिम खातों को तैयार करना, समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते-प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20 20 (2) ह्यस परिभाषा, हासिल करने की विभिन्न पद्धतियां। 10 (3) संचय (प्रावधान) और कोष। 10 (4) पूंजीगत एवं आयगत मदें।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 10 अंक (1) व्यावहारिक संगठन-अर्थ, उद्देश्य एवं महत्व। (2) व्यावसायिक संगठन के प्रारूप, एकल व्यवसाय, साझेदारी, संगठन, संयुक्त स्कन्ध कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम।
20 अंक (3) कार्यालय संगठन-अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय के स्थान चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग।
10 अंक (4) कार्यालय कार्य-विधि नस्तीकरण, लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं विक्रय कला, कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20 अंक
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सचिवीय पद्धति)
(1) कार्यालय प्रबन्ध, कार्यालय विधियां एवं व्यवहार के गुण-दोष।
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 10
20 ङ154 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (2) सभाओं एवं गोष्ठियों के सम्बन्ध में सचिवीय कार्य सभाओं को सम्पन्न कराने की कार्य विधि, सूचना, कार्य सूची सूक्ष्म तैयार करना, सभाओं के लिये न्यूनतम संख्या, सभा का स्थगन एवं समापन प्रस्ताव तथा सूक्ष्म।
10 (3) बैंक सम्बन्धी सेवायें, बैंक से सम्बन्धित आवश्यक प्रपत्रों का ज्ञान, चेक जमापर्ची भरना, चेक तथा बैंक ड्राफ्ट का रेखांकन एवं पृष्ठांकन, चालू खाता खोलना एवं बन्द करना, ऋण के लिये प्रार्थना-पत्र देना, बैंक ड्राफ्ट एवं धन प्रेषण सम्बन्धी सुविधाओं हेतु प्रपत्रों को भरना। 20 (4) डाक सेवायें-डाक सम्बन्धी सेवाओं की जानकारी मनीआर्डर, तार, रजिस्ट्री, पार्सल, वी0पी0पी0, पोस्टल आर्डर, रिकाडेंट डिलेवरी।
10 (5) यातायात सेवायें-रेलवे एवं हवाई जहाज से आरक्षण तथा निरस्तीकरण कराना। 10 पंचम प्रश्न-पत्र (सचिवीय पद्धति)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) टाइपिंग के प्रकार-स्पर्श प्रणाली एवं दृश्य प्रणाली, टाइपिंग के समय सामग्री की व्यवस्था, टंकण के लिये बैठने की कला, टंकण मशीन में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न कल-पुर्जों और उनका उपयोग, परिचालन, नियंत्रण, मार्जिन स्टाम्प पेपर, गाइड पेपर रिलीज, लाइन स्पेलगेज शिफ्ट की स्पेशवास आदि।
10 (2) कल पटल को पूरा करना, वर्णमाला शब्द वाक्यांश, वाक्य एवं लघु अनुच्छेदों का टंकण। 10 (3) अंक एवं विभिन्न प्रकार के संकेतों का टंकण, लम्बवत् एवं क्षैतिजिक मध्य में टंकण करना, गणितिक एवं अभ्यासिक (स्थायीकरण), प्रूफ रीडिंग तथा अशुद्धियों का संशोधन। 10 10 10 (4) पत्रों का टंकण ब्लाक्ड, सेमी ब्लाक्ड नीमा सिम्पलीफाइड रूप में। (5) तालिका टंकण दो या दो से अधिक स्तम्भ की तालिका का टंकण। (6) कार्बन कागज का उपयोग करते हुए प्रतिलिपियां टंकण द्वारा निकालना, स्टेंसिल काटना, विभिन्न उपकरणों का प्रयोग जैसे स्टेसिल पेन, स्केल, हस्ताक्षर प्लेट।
10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूंछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश पत्र, सूचना पत्र, सन्दर्भ पत्र, आदेश पत्र, विक्रय पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेषित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, नश्ती.पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी.पत्र, परिचय.पत्र, अर्द्ध सरकारी.पत्र, सिफारशी.पत्र, नौकरी हेतु आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र। छोटे प्रयोग- 1-व्यावसायिक गृहों में प्रयोग में आने वाली मशीनों एवं यंत्रों को देखना तथा उनका प्रयोग करना, टाइपराइटर, बहुलिपि पत्र, गणक यंत्र, पंचिग मशीन, कार्ड पैकिंग मशीन, चेक लिखने वाली मशीन, लिफाफे पर पता लिखने वाली मशीन, स्टेपलर, लिफाफा खोलने का यंत्र। प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन- (1)
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटेे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक से दो-दो। (ग) मौखिक (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
(2) (क) सत्रीय कार्य सत्रीय कार्य का विभाजन 100 अंक
उपस्थिति एवं अनुशासन 10 30 लिखने का कार्य 30 दो वर्षों में 5 टेस्ट लिए जायेंगे मौखिक
30
योग .. 100 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 155 (ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। नोट-(1) प्रयोगात्मक कार्य में विद्यार्थी को प्रश्न-पत्र 1 से 5 तक में अंकित सभी विषयों का व्यावहारिक ज्ञान देना होगा। प्रत्येक विद्यालय में यथा सम्भव अधिक से अधिक कार्यालयों में प्रयोग में आने वाली मशीनों और यंत्रों को रखना चाहिये, जिससे विद्यार्थी इनके परिचालन का ज्ञान प्राप्त कर सके। विद्यार्थियों को आधुनिक कार्यालयों में भी ले जाकर कार्यविधि का विस्तृत ज्ञान कराया जाना चाहिए। (2) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। (3) प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्यस्थलों का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। (4) एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को करना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इनका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य रूप में परिणत करना है। (5) कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (एम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (एम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 400 अंक का होगा। (6) प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा। (7) छात्रों को छात्रवृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। (8) छात्रों को कार्यस्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये, उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें 1-कार्यालय कार्य विधि-प्रकाशक-यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ, मूल्य 60.00 रु0।
(26) ट्रेड-बीमा
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगिता- बीमा ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है- (अ) वेतन रोजगार-
1-सहकारी समितियाें, सहायक के विभिन्न स्तरों पर कार्य कर सकता है। 2-विकास अधिकारी, सर्वेक्षक एवं पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर सकता है।
(ब) स्वतः रोजगार-
1-बीमा अभिकर्ता सलाहकार, कैरियर एजेन्ट। 2-बीमा प्रतिनिधि। 3-सर्वेक्षण। 4-दावा-भुगतान प्राप्ति सलाहकार। 5-पर्यवेक्षक एवं अन्वेषक।
उद्देश्य- 1-बीमा उद्योग में कार्य करने हेतु बीमा सम्बन्धी सिद्धान्त, व्यवहार एवं कार्य विधि का ज्ञान एवं विकास। 2-उपरोक्त रोजगारों के लिये पर्याप्त क्षमता एवं योग्यता का विकास करना। 3-जीवन के विभिन्न स्तरों पर उपरोक्त रोजगारों में संलग्न होने वाले व्यक्तियों के व्यक्तित्व का विकास। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के तीन प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-बीमा पंचम प्रश्न-पत्र-बीमा
(ख) प्रयोगात्मक-
60 20 60 20 400 200156 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक निम्न लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-लेखांकन सिद्धान्त-प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2-प्रारम्भिक लेखों की पुस्तकें तथा खाता बही, खाता बहियों में खतौनी की तिथि-1, तलपट तैयार करना एवं उनका सुधार।
10 3-रोकड़ पुस्तक, चेक सम्बन्धी लेखे, बैंक समाधान विवरण। 10 4-विनियम विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखा। 10 5-अन्तिम खातों को तैयार करना-समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते-प्राप्त तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 10 अंक 20 अंक 2-हास परिभाषा-हासित करने की विभिन्न पद्धतियां। 20 अंक 3-संचय (प्रावधान) और कोष। 10 अंक 4-पूंजीगत एवं आयगत मदें।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
10
20
10 1-व्यावसायिक संगठन, अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 2-व्यावसायिक संगठन के प्रारूप-एकल व्यवसाय, साझेदारी संगठन, संयुक्त स्कन्ध, कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम। 3-कार्यालय संगठन-अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4-कार्यालय कार्य-विधि, नस्तीकरण-लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमिका, विज्ञापन एवं विक्रयकला कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बीमा)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-कार्यालय अभिन्यास एवं कार्य दशायें-
20 1-उद्ेदश्य अभिन्यास के सिद्धान्त व अभिन्यास को प्रभावित करने वाले तत्व, उपकरण एवं मशीनें, फर्नीचर, प्रकाश एवं हवा के उपकरण, व्यक्तिगत उपकरण स्टेशनरी, टेलीफोन, लोक सम्बन्ध कार्यालय, पुस्तकालय, मशीन, यंत्र की मशीनें, डिक्टेटिंग मशीनें, बहुलिपिकरण यंत्र, प्रतिलिपिकरण यंत्र, पता लिखने की मशीन, हिसाब लगाने की मशीन, कार्ड को छिद्रित करने वाली मशीन, पत्र विभाग में काम आने वाली मशीनें, विद्युत कम्प्यूटर सेवा नियम, स्थापना विभागीय कार्य। 2-पत्र-व्यवहार कार्य विधि-
10 प्राप्ति एवं पे्रषण पुस्तकें तथा उनमें लेखा करना, टिकटों को लगाना, तार एवं पोस्ट आफिस, कम्पनी कार्यों के ज्ञान, टिकट रजिस्टर रखना। 3-कार्यालय पद्धति-
10 कार्यालय पद्धति के सिद्धान्त, सरलता, सुरक्षा, परिवर्तनशीलता, गलतियों का विरोध, गलतियों को कम करना तथा रोकथाम, निरीक्षण पद्धति, कार्यालय व्यवस्था, वाहन प्रबन्ध, पत्राचार, अनुसूचित पत्रों की व्यस्ति, व्यस्ति कैबिनेट प्रस्ताव, व्यस्ति बीमा पत्र, व्यस्ति।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 15710 4-अभिगोपन कार्य विधि- प्रथम प्रीमियम की प्राप्ति, प्रस्ताव की जांच, स्वीकृति-पत्र का निर्गमन, प्रीमियम दर का ज्ञान एवं जांच, तत्सम्बन्धी मैनुअल का अध्ययन, बीमा पत्र का निर्गमन, स्टैम्प डयूटी का ज्ञान, बीमा पत्र की शर्तें, नामांकन एवं अभिहस्तांकन, कवरनोट का निर्गमन, प्रीमियम रजिस्टर का ज्ञान, बीमा पत्र, डाकेट का ज्ञान, अभियोजन की शर्तें, पुनबीमा की सलाह, चिकित्सा। 5-पुनर्चालन की विभिन्न विधियां-
10 सामान्य पुनर्चालन या विशिष्ट पुनर्चालन।
पंचम प्रश्न-पत्र
(बीमा)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
10
10
10
10
10
10 1-जीवन बीमा निगम में विक्रय संगठन- शाखा प्रबन्धक-नियुक्ति, उसके कर्तव्य, चुनाव, योग्यता, प्रशिक्षण, पारिश्रमिक। सामान्य बीमा विक्रय संगठन। शाखा प्रबन्धक, सर्वेंक्षण एवं पर्यवेक्षक के कार्य। 2-विकास अधिकारी व निरीक्षक के कार्य- गुण, नियुक्ति, पारिश्रमिक, कर्तव्य एवं दायित्व, प्रशिक्षण नियंत्रण, प्रशिक्षण, पद्धति, पर्यवेक्षण की आवश्यकता एवं उद्देश्य व स्वरूप। 3-अभिकर्ता की नियुक्ति- भर्ती का क्रम, नियुक्ति की पद्धति, कमीशन, चुनाव, प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता, प्रक्रिया, कर्तव्य एवं दायित्व। 4-अभिकर्ता का पर्यवेक्षण एवं प्रेरणा- पर्यवेक्षण के गुण, पर्यवेक्षण की आवश्यकता, क्षेत्र, सिद्धान्त, पर्यवेक्षण की पद्धति, पर्यवेक्षण का स्तर प्रेरणा का तरीका, मनोबल सिद्धान्त। 5-अभिकर्ता का नियंत्रण- जीवन बीमा निगम (अभिकर्ता) नियम, 1972, अभिकर्ता के कार्य, नियुक्ति, योग्यता, प्रशिक्षण एवं परीक्षण, अभिकर्ता द्वारा प्राप्त किये जाने वाले व्यापार की न्यूनतम रकम, कमीशन का भुगतान, ग्रेच्युटी एवं अवधि बीमा, लाभ, अभिकर्ता, प्रसंविदा की समाप्ति, अनुज्ञापन के रद्द होने या नवीकरण न करने पर अभिकर्ता प्रसंविदा की समाप्ति। 6-कार्य क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के गुण- एक अच्छे प्रबन्धक के विशेष गुण, विकास अधिकारी के गुण एवं सफल अभिकर्ता के गुण।
प्रयोगात्मक
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना। पूंछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश पत्र, सूचना पत्र, सन्दर्भ पत्र, आदेश पत्र, विक्रय पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेषित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सिफारशी पत्र, नौकरी हेतु आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र। 2-पत्र व्यवहार सम्बन्ध-आने-जाने वाले पत्रोंं सम्बन्धी रजिस्टर जाने वाले पत्रों पर टिकट लगाना, तार सम्बन्धी पत्र, विभाग में प्रयोग की जाने वाली सभी मशीनों का संचालन। 3-अभिगोपन सम्बन्धी कार्य-प्रस्ताव की जांच करना, अभिगोपन सम्बन्धी सभी आवश्यकताओं का निरीक्षण, तत्सम्बन्धी कार्य करना, प्रीमियम दर निर्धारण तथा उससे सम्बन्धित मैनुअल की जानकारी कवर नोट तैयार करना सम्बन्धित रजिस्टर में लेखा करना, मैनुअल के आधार पर स्वीकृत पत्र का निर्गमन करना। छोटे प्रयोग-
सूची (क)
1-दावा रजिस्टर- दावा सम्बन्धी विभिन्न प्रपत्रों को तैयार करना, दावा प्रपत्र का निरीक्षण एवं भुगतान। 2-लेखा एवं खाता रखना- वेतन रजिस्टर रखना एवं लेखा भरना, कमीशन सम्बन्धी रजिस्टर एवं लेखा सेवा सम्बन्धी एवं गोपनीय अभिलेखों को रखना विभिन्न प्रकार के बाउचर एवं उसका लेखा करना।
158 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4सूची (ख)
1-कमीशन निर्धारण एवं विवरण तैयार करना। 2-स्टेशनरी-सभी प्रकार की स्टेशनरी का रख-रखाव, रजिस्टर में लेखा करना, बाउचर एवं प्रपत्र तैयार करना।
(ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
(1)--
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक से दो-दो। (ग) मौखिक (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
(2)-- (क) सत्रीय कार्य (100 अंक)- सत्रीय कार्यक्रम का विभाजन- अंक
उपस्थिति एवं अनुशासन 10 लिखित कार्य 20 दो वर्षों में 5 टेस्ट लिये जायेंगे 50 20 मौखिकी
योग .. 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को कराना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 400 अंक का होगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा। 6-छात्र को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्र को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :- 1-बीमा प्रकाशन-प्रकाशक-यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ मूल्य 16.50 रु0।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बीमा)
पंचम प्रश्न-पत्र
(बीमा)
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 159(27) ट्रेड-सहकारिता
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगितायें सहकारिता ग्रुप का अध्ययन करने के पश्चात् छात्रों को निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्ति में सहायता मिल सकती है- (अ) वेतन रोजगार-
(1) सहकारी समितियाें, सहायक के विभिन्न स्तरों पर कार्य कर सकता है। (2) प्राथमिक स्तर एवं केन्द्रीय स्तर के अधिकारी के रूप में कार्य कर सकता है। (3) सहकारी अन्वेषक एवं अंकेक्षण के रूप में कार्य कर सकता है।
(ब) स्वतः रोजगार-
(1) स्वतः व्यवसाय-उत्पादन, वितरण, उपभोग एवं वित्त के क्षेत्र में सहकारी समिति के निर्माण द्वारा। (2) अन्य सहकारी समितियाें के विभिन्न पक्षों पर परामर्शदाता के रूप में। (3) सहकारी समितियाें के प्रवर्तक के रूप में।
उद्देश्य-
(1) सहकारिता क्षेत्र में कार्य करने हेतु सहकारिता सम्बन्धी सिद्धान्त, व्यवहार एवं कार्य विधि का ज्ञान एवं विकास करना।
(2) सहकारिता के क्षेत्र में वेतन एवं स्वतः रोजगारों के लिये पर्याप्त क्षमता एवं योग्यता का विकास करना। (3) उपभोग एवं उत्पादन एवं वितरण के क्षेत्र में सहकारिता में संलग्न व्यक्तियों के ज्ञान एवं व्यक्तित्व का विकास करना।
(4) देश के आर्थिक व सामाजिक विकास में सहकारी आन्दोलन के महत्वपूर्ण योगदान से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के तीन प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 400 20 200
चतुर्थ प्रश्न-पत्र-सहकारिता 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र-सहकारिता 60 20
400 200
(ख) प्रयोगात्मक-
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-लेखांकन सिद्धान्त प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2-प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता बही, खाता बहियों में खतौनी की विधि-1, तलपट तैयार करना त्रुटि एवं उनका सुधार।
10 3-रोकड़ पुस्तक, चेक सम्बन्धी लेखे, बैंक समाधान विवरण। 10 4-विनियम विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखे। 10 5-अन्तिम खातों को तैयार करना-समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20160 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते-प्राप्ति तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 20 20 2-ह्यस परिभाषा-ह्यसित करने की विभिन्न पद्धतियां। 10 3-संचय (प्रावधान) और कोष। 10 4-पूंजीगत एवं आयगत मदें।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावहारिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
10
20
10 1-व्यावहारिक संगठन, अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 2-व्यावसायिक संगठन के प्रारूप-एकल व्यवसाय, साझेदारी संगठन, संयुक्त स्कन्ध, कम्पनी एवं सह भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम। 3-कार्यालय संगठन-अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4-कार्यालय कार्य-विधि, नस्तीकरण-लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं बिक्रयकला कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सहकारिता)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-सहकारिता-सहकारिता के प्रादुर्भाव, अर्थ, तत्व, सिद्धान्त, महत्व एवं सीमायें, सहकारिता बनाम पूंजीवाद, साम्यवाद तथा मिश्रित अर्थ व्यवस्था, समाजवादी व्यवस्था, संरचना में सहकारिता का स्थान। 20 2-निर्माण-सहकारी समितियों का निर्माण, विधि, भेद, अन्य व्यावसायिक संगठनों से तुलना, एकांकी व्यापार, साझेदारी संयुक्त स्कन्ध प्रमण्डल एवं लोक उपक्रम।
10 3-सहकारिता संगठन एवं प्रबन्ध-संगठन का अर्थ, सिद्धान्त, विधि, गुण-दोष, प्रबन्धकीय प्रक्रिया। 10 4-सहकारिता प्रशासन-विभिन्न स्तरों पर प्रशासन का वर्तमान स्वरूप प्राथमिक, केन्द्रीय एवं शीर्ष स्तर निबन्धक अधिकार, कार्य एवं नियुक्ति, जिला एवं ब्लाक स्तर पर सहकारी प्रशासन, सहायक निबन्धक, सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) एवं सचिव की समितियों के प्रशासन में भूमिका। 20
पंचम प्रश्न-पत्र
(सहकारिता)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-सहकारिता विकास एवं विधान-स्वतन्त्रता के पूर्व देश में सहकारी आन्दोलन, नियोजन काल में सहकारिता का विकास, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर सहकारी समितियां, उत्तर प्रदेश सहकारी समिति, अधिनियम, 1965 निबन्धन सदस्यता, अधिकारी एवं दायित्व प्रबन्ध/सहकारी समितियों के विशेषाधिकारी, सम्पत्तियों, कोष, अंकेक्षण, जांच पर्यवेक्षण, विवादों का निपटारा, समितियों का समापन। 20 20 2-सहकारी साख-
[अ] सहकारी ऋण समितियां-कृषि एवं गैर कृषि कार्य महत्व एवं विकास, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां, केन्द्रीय सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक, प्राथमिक भूमि विकास बैंक, केन्द्रीय भूमि विकास बैंक।
[ब] नगरीय सहकारी ऋण समितियां। [स] रिजर्व बैंक आफ इण्डिया व सहकारी साख, व्यापारिक बैंक एवं सहकारी समितियां, ग्रामीण बैंक एवं ग्रामीण साख समितियां।
3-सहकारिता विपणन-आवश्यकता, लाभ एवं सीमायें, प्राथमिक स्तर पर संगठन, संरचना, केन्द्रीय एवं शीर्ष स्तर पर संगठन, संरचना एवं कार्य सदस्यता, प्रबन्ध एवं वित्तीय प्रारूप-अंश पूंजी, ऋण पूंजी, विनियोग, ऋण एवं विपणन का अन्तर्सम्बन्ध, सहकारी विपणन की उपलब्धियां।
20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 161
प्रायोगिक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूंछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश पत्र, सूचना पत्र, सन्दर्भ पत्र, आदेश पत्र, विक्रय पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, नश्ती पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय.पत्र, सरकारी.पत्र, अर्द्ध सरकारी.पत्र, आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र। 2-सहकारी समितियों के निर्माण सम्बन्धी प्रपत्रों को भरना, निबन्धन सम्बन्धी कार्यवाही एवं प्रपत्रों का ज्ञान, सहकारी समितियों के विभिन्न प्रपत्रों को भरना, अनुक्रमणिका एवं रजिस्टर तैयार करना, सदस्यों द्वारा ऋण लेने के सम्बन्ध में निर्धारित कार्यवाही का ज्ञान। समितियों द्वारा वित्त प्राप्त करने एवं भुगतान सम्बन्धी प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान। छोटे प्रयोग- 1-ऋण सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त करना, विभिन्न प्रकार की प्रतिभूतियों का ज्ञान एवं मूल्यांकन की विधि का ज्ञान प्राप्त करना, ऋण अदायगी किस्तों का निर्धारण एवं भुगतान प्रक्रिया का ज्ञान करना, ऋण के आदेश या विलम्बित होने पर वैधानिक कार्यवाही का ज्ञान, भुगतान आदेश तैयार करना एवं उससे सम्बन्धित लेखे तैयार करना। 2-श्रम संचय यंत्रों का व्यावहारिक ज्ञान एवं रेडी रिकनर द्वारा गणना करना। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन- (1)
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक से दो-दो। (ग) मौखिकी (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
(2) (क) सत्रीय कार्य सत्रीय कार्य का विभाजन 100 अंक
उपस्थिति एवं अनुशासन 10 लिखित कार्य 20 दो वर्षों में 5 टेस्ट के आधार पर 50 20 मौखिकी
योग .. 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जॉब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों से उन कार्यों को कराना है जिससे उनमें रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 400 अंक का होगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा। 6-छात्र को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्र को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :- 1-सहकारिता-प्रकाश-साहित्य भवन, आगरा, मूल्य 35.00 रु0।
21 ङ162 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(28) ट्रेड-टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी
कक्षा-11
पाठ्यक्रम की उपयोगितायें- इस पाठ्यक्रम का अध्ययन करने वाले छात्र निम्न रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। टंकण (टाइपिस्ट) टंकण एवं लिपिक (टाइपिस्ट-कम-कलर्क) लोवर डिवीजन क्लर्क, अपर डिवीजन क्लर्क, लिपिक (क्लर्क) एवं स्व-रोजगार टंकण संस्था (टाइपिंग इन्स्टीट्यूट), कार्य टंकण (जांब टाइपिंग), अंश कालीन टंकण (पार्ट टाइम टाइपिस्ट) आदि। उद्देश्य- (1) छात्रों को आधुनिक युग में टंकण के महत्व, विकास और प्रभावों का ज्ञान कराना। (2) छात्रों को टंकण-बैठन (टाइपिंग पोस्चर), टंकण-सामग्री प्रबन्ध एवं कक्षा समाप्ति विधि, स्पर्श एवं युगकृति गति गणना का अवबोधन कराना। (3) छात्रों में निम्न क्षमताओं का विकास करना। यांत्रिक नियंत्रण (मैन्युपुलेटिव कन्ट्रोल) कागज को मशीन में लगाना व मशीन से निकालना, शब्द, वाक्यांश, वाक्य एवं अनुच्छेद टंकण, अंक एवं संकेत टंकण, मध्य टंकण (साफडटि) लम्बवत् एवं क्षैतिजिक-गणितात्मक एवं अनुमानित मध्य टंकण (मैथमेटिकल एवं जजमेन्ट प्लेसमेन्ट) पत्रों का विविध रूपों में टंकण, जैसे ब्लाक्ड स्टाइल, सेमी ब्लाक्ड स्टाइल, नोमा, सिम्प्लोफाइड (लें हक एवं मिश्रित पंकच्यूऐशन के साथ), सांख्यिकी टंकण (आर्थिक व्यावसायिक एवं लागत विवरण), प्रूफ रीडिंग एवं त्रुटि सुधार, सरकारी, अर्द्ध सरकारी एवं गैर सरकारी (व्यावसायिक आदि) संस्थाओं में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न पत्र, प्रपत्र प्रारूप एवं मुद्रित फार्मों पर टंकण एवं विचार टंकण (कम्पोजिंग एड दी टाइप राइटर) अर्थात् टंकण यंत्र के लेखन यंत्र के रूप में प्रयोग, भूरे फोते से टंकण (टाइपिंग फ्राम रेकजेडटेप) टंकण मशीन की सुरक्षा एवं देख-भाल, मशीन की सफाई करना और उसमें तेल डालना, फीता बदलना (चेजिंग दी रिबन), लघु मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर वर्क)। (4) छात्रों में अंग्रेजी टंकण की 40 शब्द प्रति मिनट और हिन्दी की 30 शब्द प्रति मिनट गति का विकास करना। (5) छात्रों में व्यक्तिगत एवं कार्य आदतों (पर्सनल ऐण्ड वर्क हैबिट्स) जैसे-व्यक्तिगत दिखावट (पर्सनल एपीयरेन्स)। सफाई शुद्धता, शीघ्रता, नियमितता, कर्तव्य परायणयता एवं निष्ठा, समय पाबन्दी, स्वेच्छा की भावना आदि का विकास करना, आदेशों/निर्देशों का पालन। (6) छात्रों को तुरन्त रोजगार के लिये तैयार करना। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में पांच-पांच घन्टे के तीन प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन एवं समय निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(ख) प्रयोगात्मक-
प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र-बीमा- टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र-बीमा- टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी 60 20
400 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-लेखांकन सिद्धान्त-प्रत्यय तथा अवधारणा, दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त। 10 2-प्रारम्भिक लेखा की पुस्तकें तथा खाता बही, खाता बहियों में खतौनी की तिथि-1, तलपट तैयार करना एवं उनका सुधार।
10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 163 10 3-रोकड़ पुस्तक, चेक सम्बन्धी लेखे, बैंक समाधान विवरण। 4-विनियम विपत्र सम्बन्धी सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान तथा तत्सम्बन्धी लेखे। 10 5-अन्तिम खातों को तैयार करना-समायोजनाओं सहित व्यापार एवं लाभ-हानि खाता तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करना।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-गैर व्यापारिक संस्थाओं के खाते-प्राप्त तथा भुगतान खाते, आय-व्यय खाते, अन्तिम खाते। 10 2-हृास परिभाषा-हृासित करने की विभिन्न पद्धतियां। 20 20 3-संचय (प्रावधान) और कोष। 10 4-पूंजीगत एवं आयगत मदें।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
10
20
10 1-व्यावसायिक संगठन-अर्थ, उद्देश्य, महत्व। 2-व्यावसायिक संगठन के प्रारूप-एकल व्यवसाय, साझेदारी संगठन, संयुक्त स्कन्ध, कम्पनी एवं सहकारी भण्डार, सार्वजनिक उपक्रम। 3-कार्यालय संगठन-अर्थ, महत्व एवं कार्य, एक अच्छे संगठन के महत्वपूर्ण तत्व, एक अच्छे कार्यालय स्थान के चुनाव के मुख्य तत्व, कार्यालय के विभाग। 4-कार्यालय कार्य-विधि, नस्तीकरण-लेटी एवं खड़ी फाइल, अनुक्रमणिका, विज्ञापन एवं विक्रय कला कार्य से सम्बन्धित संक्षिप्त आख्या लेखन।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(टंकण हिन्दी तथा अंग्रेजी)
इकाई-1-
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 10 आधुनिक युग में टंकण का महत्व, टाइप मशीन एवं लेखन यंत्र के रूप में, टंकण का व्यावसायिक एवं
10 व्यक्तिगत प्रयोग। विभिन्न प्रकार की टाइप मशीनें, हाथ से चलाने वाली टाइपराइटर, बिजली टाइपराइटर, इलेक्ट्रो टाइपराइटर एवं वर्ड प्रोसेसर। टाइप के प्रकार-स्पर्श प्रणाली व दृटा प्रणाली, इनके गुण-दोष। इकाई-2- टाइप करते समय सामग्री की व्यवस्था, टंकण करते समय बैठने की कला। टंकण मशीन में प्रयुक्त कल-पुर्जें एवं उनका प्रयोग। टंकण मशीन का परिचालन, नियन्त्रण-मार्जिन, स्टाप्स, पेपर गाइड, पेपर रिलीज, लाइन स्पेश गेज, सिलिण्डर वाच, शिफ्ट की स्पेसवार आदि, टंकण कागज लगाने की कला एवं कागज निकालने की विधि। इकाई-3- 10 कल पटल (की बोर्ड) को पूरा करना, वर्णमाला, शब्द, वाक्यांश, वाक्य एवं अनुच्छेदों की टंकण विधि बताना, उन संकेतों का टंकण जो कल-पटल में नहीं दिये गये हैं। इकाई-4- 10 लम्बवत् एवं क्षैतिजिक मध्य में टंकण करना। गणतिक एवं आभ्यासिक स्थायीकरण, प्रूफ रीडिंग में प्रयुक्त होने वाले चिन्ह, संशोधन हेतु प्रयुक्त होने वाली वस्तुएं, रबर, रासायनिक कागज, रासायनिक द्रव्य पदार्थ, मशीन में दिया हुआ सुधार, टह संकुचन एवं विस्तारण। इकाई-5- 10 पत्रों का टंकण, बन्द एवं मिश्रित चिन्हों (पंक्च्युएसन्स) के साथ ब्लाक्ड, सेमी ब्लाक्ड एवं नोमा सिम्प्लीफाइड रूप में। लघु पत्रों का टंकण, एक पन्ने का पत्र एवं एक पन्ने से अधिक पत्र का टंकण। लिफाफे व अन्तर्देशीय पत्र पर पते छापना, संलग्न पत्रों को टाइप करना। इकाई-6- 10 तालिका टंकण एवं उसका प्रदर्शन, कार्बन कागज का प्रयोग, प्रयोग की विधियां-मशीन पद्धति व डेस्क पद्धति, कार्बन प्रति पर अशुद्धि का संशोधन। नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
164 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पंचम प्रश्न-पत्र
(टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
15
15
15 Unit 1--(a) Importance of typewriting in modern era, type writing for vocational use, personal use and college preparatory. Various kinds of typewriters based on the make, the type, the size, the language etc., manual typewriter, word processor. Systems of typing--Touch system and sight system, thier advantages and disadvantages. (b) Arranging the materials for typing and end of the class procedure. Correct typing presirres operative. Various parts of typewriter and their uses Va. Manipulative control, margin steps, paper guide, paper release, line space guage, cylinder knobs, shift key, space bar etc. Insertion and removal of paper in/out of the machine. (c) Covering the key-board-Typing of alphabets, words, phrases, sentences and small paragraphs. Typing of number and symbol keys-typing of symbols not given on the key-board. Unit 2--(a) Centering horizontal and vertical mathematical and judgement placement. 15 Proof reading and correction of error, Proof correction marks, use of different type of erasing material, erasures (rubber, pencil), chemical paper, chemical liquid correction tape within the machine, squeezing and spreading. (b) Typing of letters--Blocked, semiblocked and NOMA simplified with open, closen and mixed punctuations, typing of short letters (small and/or full size letter papers) one page letter and letter running into more than one page. Typing of addresses on envelopes, inland and post cards including window display chain feed. Typing of annexures and appendices to letters. Unit 3-- (a) Tabular typing, two column table and multiple column, table box etc., display or tabulation work. Typing of financial and costing statements. (b) Use of carbon paper for taking out more than one copy. Methods of using carbon Machine Assembly Method and Desk Assembly Method. Correction of errors on the carbon copies (paper being in the machine and taken out of the machine). Unit 4--Stencil cutting., Its insertion in the machine, change of ribbon setter or removal or ribbon. Placement of subject matter use of different materials like a styles Scale slates signature pad etc. नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(हिन्दी टंकण)
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश.पत्र, सूचना.पत्र, कार्यालय.पत्र, आदेश.पत्र, विक्रय.पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेषित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, नश्ती पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी.पत्र, परिचय.पत्र, अर्द्ध सरकारी.पत्र, सिफारशी.पत्र, नौकरी हेतु आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र।
Practicals
ENGLISH TYPEWRITING
1--Typing of difficult words, phrases, sentences and paragraphs. 2--Typing for numbers and symbols not given in the key-board.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1653--Typing of short and long letters in various styles on different sizes of papers/letter head. 4--Typing of addresses on post cards, inlands and envelopes of various sizes. 5--Typing of tables with multiple columns. 6--Typing of invitations cards, menu cards programme etc. 7--Typing on charts, graph papers etc.
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1. सूची 'क' से सूची 'ख' से सूची 'ग' से मौखिक एवं रिकार्ड
200 अंक 40 अंक 60 अंक 60 अंक 40 अंक
2. (क) सत्रीय कार्य
100 अंक सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति एवं अनुशासन 10 अंक 20 अंक लिखित कार्य 50 अंक दो वर्षों में 5 टेस्ट के आधार पर 20 अंक मौखिकी
(ख) औद्योगिक संस्थानों अथवा कार्यालयों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों से उन कार्यों को कराना है जिससे उसे रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 400 अंक का होगा। वाह्य परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा। 6-छात्रों को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्रों को कार्यस्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण 1 2 3 4 5 6 1. अनुपम टाइपिंग मास्टर श्रीमती उषा
6.00 1989
गुप्ता
अनुपम प्रकाशक, शिवकुटी, इलाहाबाद
2. हिन्दी टाइपिंग राइटिंग ,, विष्णु आर्ट प्रेस, इलाहाबाद 12.00 1987 ,, सुपर पब्लिशर्स, लखनऊ 12.00 1987 3. हिन्दी टाइपिंग राइटिंग,
व्यावहारिक एवं सिद्धान्त
4. व्यावहारिक टंकण ,, उपकार प्रकाशक, आगरा 15.00 1987 5. सुपर टाइपिंग मास्टर (अंग्रेजी) ,, सुपर पब्लिशर्स, लखनऊ 6.00 1988
(29) टे्रड-मुद्रण
कक्षा-11
उद्देश्य- 1–विद्यार्थी को मुद्रण व्यवसाय से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी तथा प्रशिक्षण देना। 2–सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्रों में मुद्रण उद्योग हेतु कुशल कर्मियों का विकास करना। 3–शिक्षित कर्मियों के विकास द्वारा मुद्रण व्यवसाय में सुधार लाना।
166 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4100
300
25 25 25 25
समायोजन के अवसर– (1) वेतनभोगी– (क) कम्पोज़ीटर तथा कम्प्यूटर टाइप सेटिंग। (ख) मशीन ऑपरेटर (लेटर प्रेस आफसेट तथा ग्रेव्योर मशीनों के लिये)। (ग) बुक बाइन्डर। (घ) पू्रफ रीडर। (ङ) अन्य प्रेस कार्मिक। (2) स्वरोजगार– (क) छोटे पैमाने पर निजी मुद्रण व्यवसाय चलाना। (ख) निजी प्रकाशन व्यवसाय स्थापित करना। (ग) ज़िल्दबन्दी डिब्बे तथा लिफाफे आदि का निजी व्यवसाय चलाना। पाठ्यक्रम- (क) सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 75 द्वितीय प्रश्न-पत्र 75 तृतीय प्रश्न-पत्र 75 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 75 400 (ख) प्रयोगात्मक नोट–परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 25 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
75 अंक
अक्षर योजना
15 (1) विषय परिचय। (2) मापन प्रणाली–प्वाइंट प्रणाली, पाइका, एम तथा एन। 15 (3) टाइप–संरचना, विभिन्न आयाम, काया माप, सेट माप, टाइप फैमिली, सिरीज तथा फांट स्पेस। 15 (4) टाइप केस–संरचना (हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा) तथा विभिन्न प्रकार। 15 (5) अक्षरयोजन सम्बन्धी संयंत्र एवं साज-सज्जा–योजन आदि की धातु एवं काष्ठ निर्मित भरक सामग्री, पोषण यंत्र, मेज गैली रैक, केस रैक, लेड तथा रूल कर्तक, कोण कर्तक, गैली प्रूफ प्रेस, लेड, रूल तथा बॉर्डर आदि। 15
द्वितीय प्रश्न-पत्र
75 अंक
मुद्रण सम्बन्धी विविध प्रक्रियाऐ एवं मुद्रण सामग्रियाँ
15 (1) मुद्रण सम्बन्धी विविध प्रक्रियायें– i–चित्रों के अनुसार तथा मुद्रण द्वारा उनके पुनरोत्पादन की विधियों की रूपरेखा। 15 ii–पुनरोत्पादन कार्य में प्रयुक्त होने वाले उपकरण एवं साज-सज्जा–प्रोसेस कैमरा एवं आवश्यक संयंत्र (प्रिज्म, हाफटोन स्क्रीन आदि), डार्क रूम उपकरण, ब्लॉक मेकिंग तथा ऑफसेट प्लेट मेकिंग उपकरणों आदि का 15 संक्षिप्त परिचय। iii–ब्लॉक–विभिन्न प्रकार तथा उपयोग, ब्लॉक बनाने की सम्पूर्ण रूपरेखा। 15 (2) मुद्रण सामग्रियां– i–मुद्रण स्याही–वांछित गुण, प्रमुख अवयव तथा उनकी उपयोगिता, मुद्रण स्याहियों के विभिन्न प्रकार, उपयोग तथा रखरखाव। ii–कागज–मशीन द्वारा कागज के निर्माण की रूपरेखा, कागज के विभिन्न प्रकार एवं उपयोग, कागज पारस्परिक तथा आधुनिक माप, मुद्रण हेतु कागज के वांछनीय गुण, कागज पर आदर््रता तथा ताप का प्रभाव, कागज का रखरखाव। तृतीय प्रश्न-पत्र
15 75 अंक
प्रेस कार्य
1–परिचय– मुद्रण की उत्पत्ति एवं विकास, मानव सभ्यता पर मुद्रण का प्रभाव, भारतीय मुद्रण व्यवसाय की वर्तमान स्थिति तथा उसमें उपलब्ध रोजगार सुविधायें।
15भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 167 15
15 2–मुद्रण विधिया– मुद्रण की प्रमुख विधियाँ–लेटर प्रेस, ऑफसेट एवं ग्रेब्योर, उनके सिद्धान्त एवं विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिये उनकी उपयोगिता। 3–लेटर प्रेस मुद्रण– लेटर पे्रस मुद्रण की रूपरेखा, दाब लेने की विधियाँ (मेथड आफ टेकिंग इम्प्रेशन्स), लेटर प्रेस में प्रयुक्त होने वाली मशीनों के प्रकार एवं उनके कार्य करने के सिद्धान्त। 4–हस्तचलित प्लैेटन (हैण्ड फेड प्लैेटन)– संरचना, भरण (फीडिंग), मशीयन (इंकिंग), दाबन (इम्पे्रशन) तथा निकासी (डिलीवरी) की सुविधायें, प्लैेटन मशीन पर कार्य करने का वैज्ञानिक तरीका, मेकरेडी तथा छपाई, लेटर प्रेस मुद्रण का प्रमुख दोष, उनके रोक.थाम तथा उपचार।
30
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
20 (जिल्दबन्दी तथा परिष्करण क्रियायें) 75 अंंक (1) जिल्दबन्दी– परिभाषा, उद्देश्य एवं उपयोगिता, संक्षिप्त इतिहास। (2) जिल्दबन्दी सम्बन्धी संक्रियायें – ठीक मिलान, गणना, मोड़ना, मिसिल उठाना, मिसिल, मिलान, तार सिलाई, धागा सिलाई–विभिन्न प्रकार के कर्तन, कोर कर्तन, नक्शे तथा प्लेटों का उपचार, अस्तर कागज, विभिन्न प्रकार एवं उपयोगितायें। 25 (3) जिल्दबन्दी की विभिन्न शैलियां एवं प्रकार– सजिल्द एवं अजिल्द पुस्तकें, जिल्दबन्दी के प्रकार, सपाट-काट पुस्तकालय, जिल्दबन्दी, केस जिल्दबन्दी, आसंजक जिल्दबन्दी, सर्पिल जिल्दबन्दी।
30
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम (1) अक्षरयोजन सम्बन्धी साज-सज्जा, सामग्री का परिचय तथा उन्हें उपयोग में लाते समय होने वाली सावधानियाँ। (2) टाइप-केस का ले-आउट याद करना (हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में)। (3) विभिन्न प्रकार के टाइप तथा अन्य सम्बन्धित सामग्रियों का परिचय। (4) प्रेस कक्ष की साज-सज्जा का परिचय तथा उसके प्रयोग में की जाने वाली सुरक्षा सावधानियाँ। (5) प्लैेटन मशीन पर मेकरेडी कार्य–पैकिंग तथा डे्रसिंग, स्याही व्यवस्थित करना, फर्मा चढाना, पिन बांधना, दाब लेना तथा आवश्यक मिलान करना, छपाई। (6) ब्लॉक मुद्रण। (7) बहुरंगी कार्य। (8) प्लैेटन पर क्रीजिंग तथा कटिंग कार्य। (9) जिल्दबाजी की साज-सज्जा का परिचय तथा उसके प्रयोग में की जाने वाली आवश्यक सावधानियाँ। (10) पत्रकों का ठोंक मिलान (Gagging) तथा गिनती करना (Counting)। (11) हाथ द्वारा पत्रकों का वलन (Folding)। (12) मिसिल उठाना तथा मिसिल मिलान (Gathering Segioling)। (13) तार सिलाई। (14) धागा सिलाई–विभिन्न प्रकार–खांचित सिलाई (Sewing in Sewing), फीता सिलाई (Tap Sewing), प्रगरी सिलाई (Over Sewing)। (15)कवर छपाई। (16) कोर सज्जा (Edge decording)। (17) कवर लगाना। (18) केस निर्माण तथा केस लगाना। (19) कवर सज्जा–स्वर्ण छपाई (Gold toling) । (20) विविध स्टेशनरी कार्य। नोट :–प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य है।
168 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4संस्तुत पुस्तकें–
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम व पता मूल्य संस्करण 1 2 3 4 5 6 1 ज़िल्दबन्दी, मुद्रण तथा किशन चन्द्र राजपूत अनुपम प्रकाशन, 79-बी/1, 30.00 1979 परिकरण, खण्ड 1
शिवकुटी, इलाहाबाद
2 ज़िल्दबन्दी, मुद्रण तथा
,, ,, 40.00 1980 परिकरण, खण्ड 2
3 आधुनिक ग्रंथ शिल्प चन्द्र शेखर मिश्र ,, 15.00 1989 4 संयोजन शास्त्र ,, ,, 25.00 1989 5 अक्षर मुद्रण शास्त्र ,, ,, 40.00 1987 नागपाल ,, 40.00 1977 6 लागत परिकलन तथा
मूल्यांकन
,, 20.00 1977 7 प्रतिकरण विधियाँ राम कृष्ण जायसवाल
20-00 1981
C. S. Misra Anupam Prakashan, 93-
8 Letter Press Printing,
Part I.
B/1, Sheokuti, Allahabad.
Ditto Ditto 50-00 1986 9 Letter Press Printing,
Part II.
A. G. Goel Ditto 40-00 1980 10 Theory and Practice of
Composition.
B. D. Mendiratta Ditto 80-00 1983 11 Composing and
Typography Today.
40-00 1981 12 Indian Printing
V. S. Krishnamurthy
Anupam Prakashan, 93- B/1, Sheokuto, Allahabad.
Industry and Printing Technology Today.
25-00 - -
C. S. Misra Universal Book Seller,
13 Printeres Terminology. B. D. Mendiratta Ditto 115-30 1987 14 Writing and Printing
Ink Industry.
Lucknow.
(30) ट्रेड-कुलाल विज्ञान (कक्षा-11) उद्देश्य- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक स्तरोन्नयन हेतु व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के उद्देश्य निम्नवत् है :-
(1) बेरोजगारी एवं शिक्षित बेराजगारों की गंभीर समस्या के निदान हेतु शिक्षा में व्यावसायिक पुट देना। (2) छात्रों को स्वयं कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करना। (3) स्वरोजगार की प्रवृत्ति छात्रों में समाहित करना ताकि जीविकोपार्जन की समस्या उनके भावी जीवन की दिशा में कोई अवरोध न उत्पन्न कर सके।
(4) छात्रों में कौशलात्मक ज्ञान की जानकारी प्रदान करना। (5) छात्रों के अधिक से अधिक समय का उपयोग होने की दिशा में व्यावसायिक शिक्षा का माध्यम एक उपयुक्त एवं सर्वथा सार्थक कदम है, इस बात की जानकारी छात्रों को होना चाहिए।
(6) छात्रों का सर्वांगीण विकास की दिशा में व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य निहित है, छात्रों को इस ओर भी जानकारी प्रदान करना।
(7) विभिन्न प्रकार के यन्त्रों/उपकरणों एवं आधुनिक मशीनों में परिचित कराना एवं कार्य करने की दिशा में बढ़ावा देना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 169पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के तीन प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
34
प्रथम प्रश्न-पत्र 100 द्वितीय प्रश्न-पत्र 100 300 33 100 तृतीय प्रश्न-पत्र 100 (ख) प्रयोगात्मक- 400
33 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम 100 अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
100 अंक
खण्ड (क)-कुलाल विज्ञान का परिचय तथा महत्व एवं कुलालीय उद्योग की व्यवस्था तथा प्रबन्ध : (1) कुलाल विज्ञान एवं शाब्दिक अर्थ, कुलालीय कला का प्रचलन, परिचय एवं महत्व। 14 अंक (2) कुलाल विज्ञान विषय के अध्ययन की आवश्यकता, कुलाल उद्योग के प्रति प्रोत्साहन। 14 अंक (3) कुलाल विज्ञान के विभिन्न रूपों का अध्ययन। 14 अंक (4) कुलालीय उद्योग से सम्बन्धित कारखाने के प्रारम्भिक कार्य से पूर्व की जानकारी यथा : 15 अंके (क) पूंजी, (ख) उचित स्थान, (ग) श्रमिकों की सरलता, (घ) श्रमिकों की समस्या, (ङ) कच्चे मालों की प्राप्ति, (च) विक्रय की सुविधायें, कारखानें का हिसाब तथा उनका महत्व।
(5) उत्पादन मूल्य, निर्धारण, उत्पादन व्यय, प्रबन्ध व्यय सम्बन्धी, मूल्य उत्पादन पर ऊपरी व्यय तथा विक्रय पर ऊपरी व्यय, मूल्य निर्धारण सम्बन्धी गणनायें।
14 अंक 14 अंक (6) मृदा उद्योग में विभिन्न यन्त्रों के जीवनकाल तथा ह,ास। (7) आधुनिक विज्ञापन एवं प्रदर्शन कक्ष।
15 अंक
100 अंक
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(चीनी मिट्टी)
1-पृथ्वी का चिप्पड़ एवं खनिज। 2-चट्टानें यथा-आग्नेय चट्टानों का उद्गम एवं विशेषतायें-
15 अंक 25 अंक (1) आग्नेय चट्टानों के अन्तर्गत-ग्रेनाइट, बैसाल्ट क्वाटर््ज, फलभार, क्लोअर, स्पार, क्रायोलाइट का महत्व एवं भार में प्राप्ति।
(2) प्रस्तरीभूत चट्टानों का उद्गम एवं विशेषतायें : प्रस्तरीभूत चट्टानों के अन्र्तगत-जिप्सम, चूने का पत्थर, फिलिण्ट कोयला, क्लोरोफिक मान, कोयले के प्रकार पीठ लिगलाइट विटमिनश, कैनाल, ऐथसाइड का महत्व एवं प्राप्ति स्थान।
(3) रूपान्तरित चट्टानें-क्वार्टजाइट, संगमरमर, स्लेड।
3-मिटि्टयों के प्रकार-
25 अंक (1) प्राथमिक मिटि्टयां-चीनी मिट्टी, लेटेराइट। (2) द्वितीय मिटि्टयां- (क) अगालणीय-अग्निजित मिट्टी तथा माल। (ख) कांचीय मिट्टी-वाल फले, वेन्टोनाइट। (ग) गालनीय मिट्टी-स्थानीय मिट्टी।
18 अंक 4-चीनी मिट्टी को खानों से निकालना, चीनी मिट्टी में पाई जाने वाले अशुद्धियां, चीनी मिट्टी के धोने की आंग्ल विधि। 5-जिप्सम से प्लास्टर आफ पेरिस बनाने का सैद्धान्तिक ज्ञान, अच्छे प्लास्टर की विशेषतायें, जाक्रशन मशीन की बनावट एवं विशेषताये
17 अंक
22 ङ170 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
तृतीय प्रश्न-पत्र
100 अंक
काँच तथा एनामिल
खण्ड (क) काँच- 1-काँच का उपयोग, महत्व तथा किस्म।
09 अंक
09 अंक
09 अंक 2-काँच के प्रकार-सोडे चूने के कांच, पोटाश चूने के कांच, पोटाश सिन्दूर के कांच, सुहागे का कांच, फास्फेट सिलीकेट के कांच, रंगीन कांच, स्वरक्षित कांच। 3-कच्चे सामान तथा काच्यक तैयार करने का सैद्धान्तिक ज्ञान, कांच बनाने वाले पदार्थ, बुलेट या टूटा हुआ कांच परिक्ररण, रंग उड़ाने वाले पदार्थ, अपारदर्शक बनाने वाले पदार्थ की जानकारी। 09 अंक 4-बालू का चलनियों में विश्लेषण, कांच बनाने में विभिन्न रासायनिक पदार्थों का बनाना जैंसे-लेड आक्साइड बेरियम कार्बोंनेट एवं चूना, रंगीन कांच। 5-कांच के कच्चे सामान, ब्लू, सोडा, ऐश, पोटाश चूना, बेरियम कार्बोनेट, शोरा, सोहाग, सिन्दूर, कोबाल्ट आक्साइड, तांबे का आक्साइड, हड्डी राख आदि की जानकारी।
09 अंक 6-क्षारीय एवं अम्लीय कांच। 09 अंक 7-काच्यक का प्रावन-निबन्धन अवस्था, संयोजन अवस्था, परिष्करण अवस्था। 09 अंक
(रासायनिक परिवर्तन)
8-भटि्टयां तथा कांच द्रवण-पाट् भट्टी, टैंक भट्टी मफिल भट्टी, सुरंग भट्टी। 09 अंक 9-सामानों का निर्माण, निर्माण की विधियां-फूंकना, बेलना, खींचना, फारकास्ट विधि, कोलर्थन विधि, गेनर विधि। 09 अंक 10-एनील करना तथा सजावट-चैम्बर विधि, सुरंग विधि, सजावट-खुदाई, ओस जमाना, बालू द्वारा छीलना, चमक चढ़ाना, एनामिल चढ़ाना। दर्पण बनाना, काटना। 11-कांच के दोष-स्टोन, कार्ड, सीड, चिलमार्क, किम।
10 अंक 09 अंक
प्रायोगिक कार्य सम्बन्धी पाठ्यक्रम
(1) कच्चे मालों का पहचानना। (2) स्थानीय मिट्टी तथा अन्य मिटि्टयों में पानी का प्रतिशत ज्ञात करना तथा एरर वर्ग अंक की गणना। (3) स्थानीय मिट्टी की गूंथकर एवं बेजिंग करके कार्योंपयोगी बनाना। (4) स्थानीय मिट्टी का पैटर्न तैयार करना। (5) जिप्सम के प्लास्टर आफ पेरिस का निर्माण एवं प्लास्टर आफ पेरिस के गुणों का परीक्षण। (6) प्लास्टर आफ पेरिस के सांचों का निर्माण तथा मास्टर गोल्ड, प्रतिरूप सांचा एवं कार्यकारी सांचे का निर्माण। (7) चीनी मिट्टी को स्लिप तैयार करना एवं विद्युत विश्लेषण का आंकलन। (8) स्थानीय मिट्टी की स्लिप बनाना एवं ढलाई करके स्थानीय मिट्टी के बर्तन बनाना। (9) स्थानीय मिट्टी के बर्तनों को सुखाना, सवांरना एवं ऑवा में पकाना। (10) स्थानीय मिट्टी को लचीली अवस्था में जिगर जाली चाक पर पात्रों का निर्माण। (11) पात्रों को रंगना एवं सजाना। (12) चीनी मिट्टी को लचीली अवस्था में जिगर जाली, चाक पर पात्रों का निर्माण। (13) चीनी मिट्टी के पात्रों की कुललीय रंग से रंगना, रंग निर्माण का प्रायोगिक कार्य, धात्विक आक्साइड से विभिन्न रंगों की जानकारी का क्रियात्मक ज्ञान।
(14) बाड़ी मिश्रण से सम्बन्घित संगठन सूत्रों का क्रियात्मक ज्ञान। (15) लुक निर्माण से विभिन्न संगठनों सूत्रों का निर्माण सम्बन्धी प्रायोगिक ज्ञान। नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। पुस्तकें :- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें। (31) ट्रेड-कृत्रिम अंग अवयव तकनीक
कक्षा-11 इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के चार प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक 75 25
75 25
300 100
75 25 75 25 400 200 प्रथम प्रश्न-पत्र द्वितीय प्रश्न-पत्र तृतीय प्रश्न-पत्र चतुर्थ प्रश्न-पत्र (ख) प्रयोगात्मक-
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 25 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 171पाठ्यक्रम की रूप रेखा
प्रश्न-पत्र प्रथम-मानव शरीर एवं अस्थिशल्य (आर्थोपैडिक)
(क) मानव शारीरिकी (ख) शरीर क्रिया विज्ञान (ग) मानव रोग विज्ञान (घ) अस्थि शल्य (आर्थोपैडिक) (ङ) फिजिकल मेडिसिन एवं पुनर्वास
प्रश्न-पत्र द्वितीय-कार्यशाला (वर्कशाप)
(क) सामग्री, औजार एवं उपकरण कार्यशाला तकनीक (ख) अप्लाइड मैकेनिक्स एवं स्ट्रेग्य आफ मटेरियल (ग) कार्यशाला प्रशासन एवं प्रबन्ध
तृतीय प्रश्न-पत्र-आर्थोटिक
(क) आर्थोटिक लोवर (ख) आर्थोटिक अपर (ग) आर्थोटिक स्पाइन (घ) काइनोसियालोजी एवं बायोमैकेनिक्स
चतुर्थ प्रश्न-पत्र-प्रोस्थोटिक
(क) प्रोस्थोटिक ऊपरी (ख) प्रोस्थोटिक निचला (ग) एम्प्यूटेशन सर्जरी एवं प्रोस्थीसेस
प्रथम प्रश्न-पत्र
(मानव शरीर एवं अस्थि शल्य)
30 1-मानव शारीरिकी- 1-मानव शरीर का परिचय, प्रायोगिक शब्दावली। 2-मानव कंकाल की हडिड्यों का वर्गीकरण, हडिड्यों हेतु किये गये शब्दों (Description of termे) का वर्णन। 3-खोपड़ी वक्ष (स्कल एण्ड वर्टिकल कालम), कशेरूक दण्ड (वर्टिकल कालम), श्रोणिमेखला (पेल्विक गर्डिल)। 4-अग्रपादों का कंकाल स्केपुला, नयूनर्रा अल्पा रेडियन्स (कलाई व हाथ की हडिड्यां) 5-पश्चपादों को कंकाल इन्नीसिनेंट हाडस्फीवर टिबिया, फिबूला पाद (पैर) की हड्डी। 6-अग्रभाग के अंगों के जोड़ोें का वर्गीकरण। 7-एड़ी, घुटनों, टखना एवं पाद (पैर) के जोड़ (Joint of lower extremity)। 8-गले की मांसपेशियां, स्थित जोड़ क्रियाये और तन्त्रिकाओं का विवरण। 9-छाती की मांसपेशियां, जोड़ क्रियाये और तन्त्रिकाओं का विवरण। 10-पीठ की मांसपेशियों की स्थिति, जोड़ क्रियाये और तन्त्रिकाओं का विवरण। 11-उदर (अवडामेन) की मांसपेशियां, स्थिति, जोड़, क्रियाये और तन्त्रिकाओं का विवरण। 12-अग्रछोर के अंगों की मांसपेशियां, स्थिति, जोड़ एवं तन्त्रिकाओं का विवरण। 13-पश्च भाग के अंगों की मांसपेशियां, स्थिति, जोड़, और तन्त्रिकाओं का विवरण। 14-एनाटोमिकल निर्माण क्षेत्र और एविजला, एन्टोक्यविटल पैसेज, गले के टियूगल्र्स और फीमीरल पपलिटिएल स्पेस की अनुक्रमणिका।
30 15-निरीक्षण द्वारा जीवित शरीर में आकृतियों की पहचान। 2-मानव शरीर क्रिया विज्ञान- 1-शरीर क्रिया विज्ञान एवं शरीर के विभिन्न तन्त्रों (सिस्टम) का परिचय। 2-शरीर के देह गृहीय द्रव, कोशिकायें, ऊतक, जीव द्रव, साइटोप्लाज्म कान्डक्टीविटी, उत्तेजनशीलता (इरेटिबिलिटी)। 3-शरीर के सामान्य प्रारम्भिक ऊतक और उसके कार्य, हडिड्यों की वृद्धि और विकास। 4-पाचन तन्त्र। 5-परिसंचरण तन्त्र। 6-रक्त, रक्त की बनावट, रक्त के कार्य और रक्त का जमना (Cogulation)। 7-श्वसन एवं श्वसन तन्त्र। 8-उत्सर्जन तन्त्र। 9-तन्त्रिका तन्त्र पैरासिम्पैथोटिक, सिम्पैथेटिक। 10-विशिष्ट ज्ञानेन्द्रियां एवं त्वचा।
172 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 415 3-मानव रोग विज्ञान- 1-रोग विज्ञान का परिचय, सामान्य रोग विज्ञान। 2-उपलेमेशन के चिन्ह एवं लक्षण (सिस्टम), इन्फेमेशन के प्रकार, एक्यूट और क्रोनिक। 3-संक्रमण वैक्टीरिया और वाइरसेज इम्यूनिटी, प्रकार वर्गीकरण, संक्रमण पर नियंत्रण, संक्रमण के प्रभाव एवं उसके उपचार व रोक-थाम, एमीप्सिस, स्टारलाइजेशन, पायोजैनिक संक्रमण, फोड़े, जोड़ व हड्डी की टी0बी0 और प्रबन्ध इंगल इन्फेक्शन वैक्टीरियोमा इकोसिस और फाइलेरियोसिस संक्रमण, कोढ़ वाइरस का संक्रमण, पोलियोमा इलासिस प्रभाव। 4-घाव, घाव भरने के प्रकार और हड्डी से सम्बन्धित ट्यूमर्स। 5-परिसंचरण अव्यवस्था थोमवासिस इम्बेसिज्म थोमखी इनजाइटिस आपलिटरेन्स, अर्थास-सिलिटोसिस हाइपरटेंशन। 6-मैगाइन के प्रकार, कारण, चिन्ह, लक्षण और प्रबन्ध उपायचय (मेटाबोलिक), बेरी-बेरी, मधुमेह रोग, सूखा रोग, हावर और हाइपो पैरा थाइरोआडिज्म, आसटिओं फेरायिस। 7-जोड़ों के इम्फलेमेशन, आरथाराइटिस, वर्गीकरण और पैथोलोजी।
द्वितीय प्रश्न-पत्र कार्यशाला (वर्कशाप) 1-सामग्री, औजार और उपकरण, कार्यशाला तकनीक एवं अभ्यास- 40 अंक 1-कार्यशाला तकनीक का परिचय। 2-बेंचवर्क, बेन्च वाइस, लेग वाइस विभिन्न प्रकार के हथौड़े, विभिन्न प्रकार की रेतियां चौनेस, स्केपरस और उनके प्रयोग हैं आरियां रेन्चस सरप्लेट्स, एंगल प्लेट-बी, ब्लाक सेण्टर, पंचेज, डिवाइटरर्स और ट्रान्वेल्स की और सरफेस गाजेज इत्यादि। 3-नापने के औजार स्केल्स और टेप्स, कैलिपर्स, माइक्रोमीटर, वरनियर कैलिपर्स, गाजेज प्लग, गाजेज डायल, गाजेज वरनियर प्रोटेक्टर, साइने वार्म इण्टीकेटर। 4-रिवेटिंग, सोल्डरिंग, ब्रेजिंग और बेल्डिंग के मूल तत्व। 5-फोजिंग (ब्लैंक स्मिथी) भट्ठी औजार जो स्मिथी में प्रयोग किये जाते हैं। 6-ड्रिलिंग मशीन का चलाना, औजारों को पकड़ना एवं ड्रिल के प्रकार, रीमर्स और उसके प्रयोग, टेप्स और डाइज, प्रयोग के आन्तरिक और बाहरी डोरों का काटना, काउन्टर सिकिंग एवं काउन्टर बारिंग। 7-लेथ कार्य, लेथ कार्य में कटिंग हेतु प्रयोग किये जाने वाले औजार, टूल स्पीड फीड एवं कटाई की गहराई। 8-मिलिंग मशीन-मिलिंग मशीन के प्रकार और उनके कार्य और प्रयोग। 9-शेपिंग मशीन और उनके प्रयोग। 10-ग्राइडिंग-ग्राइडिंग व्हील और उसकी बनावट एवं आकार, हाथ से पीसने वाली मशीन का चुनाव गति एवं भराई, पीसने की मशीन के विभिन्न प्रकार। 11-फिनिशिंग प्रक्रिया, पालिस वर्किंग, तांबा निकिल और क्रोमियम का इलेक्ट्रोप्लेटिंग। 2-आर्थोटिक्स, प्रोसेथेटिक्स में प्रयोग आने वाली सामग्री एवं औजार- 35 अंक (क) रबड़-विभिन्न प्रकार उपयोग, डेन्सिटी, प्रोसेथेटिक्स और आर्थोटिक्स रिलाइलेन्सटिली। (ख) प्लास्टिक-प्रकार, शक्ति, इम्प्रेनेशन, लेमिनेशन, प्रोसेथेटिक और आरथोटिक की रंगाई एवं उसकी उपयोगिता। (ग) फेरस वस्तुएं, स्टील की विभिन्न किस्में और प्रोसेथेटिक और आर्थोटिक्स में उनका उपयोग। (घ) नान फेरस धातुएं और मिश्रित धातुएं (अलोए) अल्युमीनियम, प्रोस्थेटिक और आरथेटिक्स में उनका विभिन्न रूप से उपयोगिताएं।
(ङ) फैबरिक्स। (च) चमड़ा-प्रोन्थेटिक्स एवं आर्थोटिक्स में इनका उपयोग। (छ) प्लास्टर आफ पेरिस, बैन्डेज एवं पाउडर और अन्य प्रयोग में आने वाली सामग्रियां। (ज) एडहेसिव और बांधने वाली सामग्री। (झ) प्रोस्थेटिक्स और आर्थोटिक्स के कार्य में प्रयोग होने वाले विशिष्ट औजार एवं उपकरण।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(आर्थोटिक)
40 अंक
1-आर्थोटिक लोवर- 1-पाद आरथोसिस- (i) पाद (पैर) की आन्तरिक रचना एवं उनकी विकृतियां। (ii) आरथोटिक नुस्खे। (iii) जूते, बूट और उनके भाग एवं उनका प्रयोग।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 173(iv) जूतों का मोडीफिकेशन बाली निकल अपलीकेशन एवं निरीक्षण के सिद्धान्त (प्रोसीजर) पाद (पैर) का बायो मैकेनिक। 2-गुल्फ पादाय (C. T. E. V. Orthosis), आरथोसिस (HKFO. HKAFO, KAFO, KO, HO, AO)- (क) [i] आरथोटिक प्रबन्ध का परिचय। [ii] आरथोटिक सुझाव। [iii] आरथोटिक जांच। [iv] पश्य छोर के अंगों की विकृतियां।
[v] चलने का प्रशिक्षण उसमें विकृति एवं उन पर नियंत्रण।
(ख) [i] पश्य छोर के अंगों के आरथोटिक के विभिन्न पहलू एवं उनके कार्य। [ii] नाप लेने के सिद्धान्त, कम्पोनेन्ट चुनाव फैब्रिकेशन अलाइनमेन्ट फिटिंग और आरथोसिस की जांच। [iii] आरथोटिक चाल। [iv] पश्च भाग के अंग के आरथोसिस से सम्बन्धित अध्ययन हेतु प्रकाशन एवं इससे सम्बन्धित सूचना-पत्र प्राप्त करने के साधन।
35 अंक
2-आर्थोटिक अपर- 1-हाथ की आन्तरिक क्रियात्मक रचना और उसकी विकृतियां, आरथोटिक द्वारा उसका प्रबन्ध (मैनेजमेन्ट)। 2-क्रियात्मक स्पिलन्ट और भुजाओं का प्रयोग करने हेतु मरीज को किस प्रकार का प्रशिक्षण देना चाहिए। 3-निम्नलिखित का मेजरमेन्ट, सामग्रियों का कम्पोनेन्ट एवं चुनाव-फैब्रिकेशन व फिटिंग। (क) हाथ की स्टेटिक स्पिलिन्ट, अंगुलियाें के स्पिलिन्ट। (ख) हाथ के फेनल स्पिलिन्ट। (ग) क्रियात्मक फैक्शनल आर्म ब्रासेज। (घ) फीडर्स। (ङ) विशिष्ट सहायक विधियां (डिवाइसेज)। (च) मिलेट्रिक और अन्य बाहरी आरथोसिस के अंग। 4-फैक्शनल हाथ की जीव परिस्थिति की स्पिलिन्ट और आर्म आरथोसिस।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(प्रोस्थोटिक)
75 अंक
1-प्रोस्थेटिक ऊपरी- 1-एम्प्यूटेशन स्तर द्वारा वर्गीकरण। 2-केनजिनाइट स्केलेटल लिम्ब का वर्गीकरण एवं उनमें कमियां। 3- प्रोस्थेटिक वर्णन। 4-एम्प्यूटी प्रशिक्षण। 5-ऊपरी अंगों के प्रोस्थेटिक के विभिन्न कम्पोंनेंट नियंत्रण एवं हारनेस सिस्टम। 6-फैब्रिकेशन के सिद्धान्त और ऊपरी अंगों के प्रोस्थेटिक हेतु प्रक्रिया हारनेस और नियंत्रण। 7-ऊपरी अंगों के प्रोस्थेटिक की जांच एवं देखभाल। 8-ऊपरी अंगों के प्रोस्थेटिक का मापन, फिटिंग एवं एलाइनमेन्ट। 9-ऊपरी अंगों के प्रोस्थेटिक के प्रयोग हेतु बायमेकेनिक्स। 10-ऊपरी अंग के प्रोस्थेटिक के प्रयोग हेतु स्वरूप। 11-ऊपरी अंग के प्रोस्थेटिक के प्रयोग हेतु प्रशिक्षण। 12-वाह्य शक्ति द्वारा चालित प्रोस्थेटिक। 13-ऊपरी अंग के प्रोस्थेसिस के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने हेतु विभिन्न साधन एवं प्रकाशनों का अध्ययन।
(32) ट्रेड-इम्ब्राइडरी
कक्षा-11
उद्देश्य- 1-विभिन्न प्रकार की यन्त्र कलाओं में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों, साज-सामानों एवं सहायक सामग्री को चुनने में। 2-साज-सामान के रख-रखाव एवं उपयोग से सम्बन्धित कौशल के विकास में। 3-उपलब्ध स्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को सुनिश्चित करने में।
174 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 44-हस्त कढ़ाई के लिये कल्पनात्मक सौन्दर्य के ज्ञान का विकास करने में। 5-बाजार की नवीनतम प्रवृत्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित करने में। 6-योजना के निर्माण, संचालन, निर्देश और रख-रखाव में आत्म निर्भरता। 7-नियोजन ढंग से कार्य को विस्थापन करने में। 8-बण्डल के बांधने की विभिन्न विधियों का चुनाव करना। 9-पारस्परिक उद्योगों के विकास को समझना और उसे आत्मसात करना। 10-उपलब्ध साधनों और यन्त्र कलाओं से मूल डिजाइन की रचना करना। 11-आवश्यक सूचना देने के लिये साधारण संचार साधनों की तकनीक का प्रयोग करना। रोजगार के अवसर- 1-स्वरोजगार एवं मजदूरी रोजगार-
निम्नलिखित व्यवसाय स्वरोजगार की श्रेणी में आतें हैं अर्थात् (पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद अपनी इकाइयां लगा सकते हैं), मजदूरी रोजगार अर्थात् (दूसरों के लिये रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं)- (1) कढ़ाई करने वाला। (2) कढ़ाई के लिये डिजाइन बनाने वाला। (3) अभिरुचि कक्षायें चलाना (Hobby Classes)। 2-केवल मजदूरी रोजगार (Wage Employment)&
(1) संग्रहालय सहायक (टेक्सटाइल अनुभाग या कढ़ाई अनुभाग)। (2) निर्देश (कार्यानुभव के लिये/स्कूलों में हैण्ड इम्ब्राइडरी)।
इस पाठ्यक्रम की सफलता हेतु एक शिक्षक/प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक- 400 200 टीप-परीक्षार्थियों को लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल एवं डिजाइन)
6 1-टेक्सटाइल का सामान्य ज्ञान। 2-वस्त्रों का परिचय, कढ़ाई में प्रयोग किये जाने वाले यंत्रों का अध्ययन। 6 3-धागे का परिचय, चिकन एवं अन्य कढ़ाई में प्रयोग किये जाने वाले धागों का परिचय। 8 8 4-डिजाइन की परिभाषा, डिजाइन का सिद्धान्त। 8 5-डिजाइन नाम में उपयोगी सामग्री का अध्ययन। 8 6-परिप्रेक्ष्य के सिद्धान्त, वर्गीकरण परिप्रेक्ष्य का डिजाइन में प्रयोग। 8 7-रंग की परिभाषा, सिद्धान्त रंगचक्र का अध्ययन। 8 8-रंग योजना का विस्तृत अध्ययन।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(इम्ब्राइडरी)
1-भारतीय वस्त्र एवं कढ़ाई। 4 2-उत्तर प्रदेश के कढ़े हुये वस्त्र, चिकन, जरिजारदोजी सलमा, सितारा, सीप इत्यादि। 8 4 3-कढ़े हुये वस्त्रों की विशेषता। 8 4-चम्बा की कढ़ाई, कला, डिजाइन, विषयवस्तु, रंग योजना, स्टिच आदि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1755-पंजाब की फुलकारी, डिजाइन, रंग योजना, स्टिच वस्त्र इत्यादि। 6-मुकेश की कढ़ाई की डिजाइन, तकनीक विशेषता। 7-काठियावाड़ी फुलकारी परिचय, डिजाइन, स्टिच, रंग योजना, वस्त्र। 8-शीशेदार फुलकारी परिचय, डिजाइन, रंग योजना, वस्त्र स्टिच। 9-बिहार और बंगाल की कढ़ाई, कैन्थल डाका, नामदानी का कार्य, सुजनी।
6 6 8 8 8
तृतीय प्रश्न-पत्र
(हैण्ड इम्ब्राइडरी व चिकन
1-चिकन की कढ़ाई का परिचय-उत्पत्ति एवं विकास। 8 8 2-चिकन की कढ़ाई की विशेषतायें, महत्व। 8 3-चिकन कढ़ाई के वस्त्रों का अध्ययन। 8 4-चिकन कढ़ाई की स्टिच का विस्तृत अध्ययन। 6 5-चिकन कढ़ाई का वर्गीकरण। 8 6-चिकन कढ़ाई में प्रयोग किये जाने वाले डिजाइनों का विश्लेषण। 8 7-चिकन कढ़ाई के उदाहरण और उनकी समीक्षा। 6 8-चिकन कढ़ाई में आधुनिक परिवर्तन।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(एडवांस डिजाइन एवं इम्ब्राइडरी)
1-भारतीय परम्परा के पुराने वस्त्रों के कठिन डिजाइनों का विश्लेषण, इन डिजाइनों का आज के वस्त्र का 8 प्रभाव। 2-आधुनिक दुपट्टों का फैशन-रंग योजनायें, तकनीक इत्यादि का विस्तृत अध्ययन। 8 6 3-विभिन्न प्रकार के स्टाइलिंग कढ़े हुये दुपट्टों का अध्ययन। 4-स्कर्ट, ब्लाउज, लहंगा इत्यादि कटाई का फैशन के अनुसार अध्ययन। 6 5-फैशन के अनुसार कटे, आकर्षक ब्लाउज का अध्ययन, रंग योजना, तकनीक डिजाइन। 8 6-फैन्सी सलवार, सूट की कढ़ाई का अध्ययन, रंग योजना, तकनीक डिजाइन विश्लेषण। 8 7-कढ़ाई द्वारा तैयार की गयी विशिष्ट साड़ियों का अध्ययन, रंग योजना, तकनीक डिजाइन विश्लेषण। 8 8-एप्लीक वर्क से वस्त्रों का विशेष आकर्षण डिजाइनों का क्रमशः अध्ययन एवं आधुनिक फैशन के अनुसार डिजाइन का निर्माण करना।
8
पंचम प्रश्न-पत्र
(इम्ब्राइडरी उद्योग एवं प्रबन्ध)
6 1-इम्ब्राइडरी उद्योग के स्वरूप का अध्ययन। 8 2-विभिन्न प्रकार के इम्ब्राइडरी उद्योगों का अलग-अलग अध्ययन करना। 3-इम्ब्राइडरी उद्योग लगाने के लिये स्थान, वातावरण का चुनाव करना। 8 4-इम्ब्राइडरी उद्योग लगाने के लिये धन की सहायता के साधनों का विस्तृत अध्ययन करना। 8 5-उद्योग लगाने के लिये इम्ब्राइडरी के अलग-अलग उद्योग का माडल प्लान तैयार करना। 8 6-उद्योग के पोर्ट फोलियों का महत्व एवं आवश्यकता, लाभ। 6 7-अपने इम्ब्राइडरी उद्योग में उत्पादित किये जाने वाले वस्त्र और उनकी विशेषतायें। 8 8-कढ़े हुये वस्त्रों का मूल्य निर्धारित करना और लगाये गये उद्योग में उत्पादन की सूची तैयार करना। 8
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में- 1-कढ़ाई किये गये वस्त्रों को दिखाना एवं वस्त्रों को पहचान करना। 2-धागा एवं ऊन द्वारा कढ़े हुये वस्त्र तैयार करना। 3-डिजाइन का निर्माण करना। 4-सभी उपकरण एवं सामग्री का रेखाचित्र तैयार करना। 5-परिप्रेक्ष्य का विभिन्न रेखाचित्र तैयार करना। 6-रंग चक्र का निर्माण करना। 7-सभी रंग योजना का नमूना तैयार करना। द्वितीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-गोटा लगाकर वस्त्र पर डिजाइन तैयार करना (दुपट्टा)। 2-जरी की कढ़ाई के साथ गोटे का संयोजन (सूट या साड़ी)। 3-चम्बा की कला पर आधारित कढ़ाई डिजाइन का निर्माण।
176 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 44-चम्बा कढ़ाई से रूमाल का निर्माण। 5-सलमा, सितारा, सीप, मोती की कढ़ाई के वस्त्र तैयार करना। 6-मुकेश के कार्य का दुपट्टे या साड़ी पर प्रयोग। 7-(1) पंजाबी फुलकारी के लिये रंगीन डिजाइन का निर्माण करना। (2) कपड़े का प्रयोग। 8-(1) काठियावाड़ कढ़ाई के लिये डिजाइन का निर्माण। (2) बनी हुई डिजाइन का कपड़े का प्रयोग।
तृतीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-चिकन की कढ़ाई के लियें कपड़े की तैयारी करना, डिजाइनिंग, ट्रेसिंग इत्यादि। 2-चिकन की मुर्री, कढ़ाई के लिये शैडो वर्क का डिजाइन तैयार करना। 3-शैडो वर्क का कपड़े पर प्रयोग। 4-कसीदे के द्वारा चिकन की कढ़ाई करना, नमूना तैयार करना। 5-विभिन्न प्रकार के स्टिचों का अभ्यास एवं प्रयोग, नमूना तैयार करना। 6-मुर्रीकार चिकनकारी करना तथा नमूना तैयार करना। 7-जाली का प्रयोग डिजाइन में करना (नमूना तैयार करना)। 8-कामदार चिकन का प्रयोग, नमूना तैयार करना। 9-मलमल या आरगण्डी पर मुण्डी मुर्री, थपाली, ढोक इत्यादि का प्रयोग।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-कठिन एवं विशेष डिजाइन का निर्माण करना। 2-आकर्षक जरी के प्रयोग द्वारा दुपट्टे को डिजाइन करना, रंगीन कागज और गोटे द्वारा प्रस्तुत करना। 3-फुलकारी वर्क से कढ़े हुये दुपट्टे की डिजाइन तैयार करना। 4-विभिन्न प्रकार के लंहगों इत्यादि फैन्सी कढ़ाई के डिजाइनों का निर्माण करना (पेपर वर्क)। 5-ब्लाउज की डिजाइनों का कढ़ाई के अनुसार निर्माण करना (पेपर वर्क)। 6-सलवार सूट के कपड़े की आकर्षक डिजाइन तैयार करना (पेपर वर्क)। 7-चिकन वर्क की विशेष डिजाइन का निर्माण साड़ी के लिये करना (पेपर वर्क)।
पंचम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-विभिन्न प्रकार के कढ़ाई उद्योगों का भ्रमण करना, उद्योग की प्रक्रिया का विश्लेषण करना। 2-इम्ब्राइडरी दुकानों, कारीगरों द्वारा विशेष ज्ञान व अनुभव प्राप्त करना। 3-भ्रमण किये गये उद्योगों का अलग-अलग प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना। 4-उत्तर प्रदेश के कढ़ाई डिजाइन की पोर्ट फोलियो तैयार करना। 5-उत्तर प्रदेश के कढ़े हुये वस्त्रों की पोर्ट फोलियो तैयार करना। 6-गुजरात के कढ़ाई डिजाइन की पोर्ट फोलियो तैयार करना। 7-गुजरात, राजस्थान के विशेष कढ़े हुये वस्त्र को एकत्र करके आकर्षक पोर्ट फोलियो तैयार करना। 8-पंजाब के कढ़े हुये वस्त्रों के डिजाइन का पोर्ट फोलियो तैयार करना।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
इम्ब्राइडरी विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा का विभाजन निम्नवत् होगा- आन्तरिक मूल्यांकन-200 अंक
वाह्य परीक्षा की रूपरेखा-
नोट-समय 10 घंटा दो दिनों में (लघु प्रयोग दो दिये जाये, प्रत्येक का समय 2़2=4 घण्टे। दीर्घ प्रयोग एक दिया जाय, प्रयोग का समय 6 घण्टे)। लघु प्रयोग-
प्रयोग नं0 1 20 अंक 2 घण्टे प्रयोग नं0 2 20 अंक 2 घण्टे मौखिक 10 अंक - योग .. 50 अंक
दीर्घ प्रयोग-
प्रयोग नं0 1 130 अंक 6 घण्टे मौखिक 20 अंक - योग .. 150 अंक कुल योग .. 200 अंक प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
दीर्घ प्रयोग-
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1771-कढ़ाई के लिये रंगीन डिजाइन निर्माण करना कागज एवं कपड़े पर। 2-डाट्स, लाइन एवं ज्यामितीय आकारों पर आधारित डिजाइन का निर्माण करना एवं कपड़े का प्रयोग। 3-लोक कला पर आधारित डिजाइन की कढ़ाई करना। 4-पारम्परिक कढ़ाई परिधानों पर करना। 5-जरी की कढ़ाई के साथ गोटे की डिजाइन बनाना। 6-सलमा, सितारा, सीप, मोती की कढ़ाई करना। 7-मुकेश की कढ़ाई करना। 8-कैनवस कढ़ाई से छोटे कैनवस बनाना। 9-संयोजित कढ़ाई करना। 10-उल्टी बखिया, शैडी वर्क जाली के द्वारा कुर्ता या अन्य वस्त्र पर कढ़ाई करना। 11-दुपट्टा पर पारम्परिक चिकन की कढ़ाई करना। 12-ब्लाउज पर शीशे की सजावटी कढ़ाई करना। 13-एप्लीक वर्क की कढ़ाई दुपट्टा या मेजपोश पर करना।
लघु प्रयोग-
1-कढ़े हुये वस्त्रों की कढ़ाई एवं टांके की पहचान तथा टांका बनाना। 2-कलर स्कीम तैयार करना, कागज और कपड़े पर। 3-गोटा लगाकर वस्त्र पर डिजाइन तैयार करना। 4-चिकन की कढ़ाई के लिये वस्त्र को तैयार करना। 5-चिकन की कढ़ाई के लिये मुर्री, शैडो वर्क की डिजाइन तैयार करना। 6-जरीदार चिकन का नमूना बनाना (छोटा)। 7-कामदार चिकन का छोटा नमूना बनाना। 8-फैन्सी कढ़ाई के डिजाइन का निर्माण कागज पर करना। 9-फैन्सी सलवार सूट की आकर्षक कढ़ाई की डिजाइन का नमूना तैयार करना एवं कढ़ाई के टांकों और रंग को निश्चित करना।
10-मॉडल पर कढ़ाई के वस्त्र को डिस्प्ले करना। 11-तैयार पोर्ट फोलियो को दिखलाना।
नोट-परीक्षक पाठ्यक्रम से अन्य दीर्घ एवं लघु प्रयोग परीक्षार्थियों को दे सकते हैं। पुस्तकों की सूची-
(1) Indian Embroidary--Phylls Ackerman. (2) Phulkari--T. N. Mukarjee. (3) Indian Embroidary--Victoria Albert Museum. (4) Himanchal Embroidary--Subhashni Arya. (5) Phulkari from Bhatinda--Baljit Singh Gill.
(33) ट्रेड-हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग एवं वेजेटेबुल डाइंग
कक्षा-11
उद्देश्य-
1-विभिन्न प्रकार के तन्तुओं, धागों एवं वस्त्रों की पहचान एवं उनका चुनाव करने के योग्य बनाना। 2-रंगाई और हस्त ब्लाक छपाई की विभिन्न तकनीकों के लिये विभिन्न प्रकार के रंजकों, रंगों, धागों एवं कपड़ों की पहचान कराना तथा उनका चुनाव करने में सहायता प्रदान करना।
3-विभिन्न प्रकार की यंत्र कलाओं में प्रयोग किये जाने वाले साज-सज्जा उपकरणों तथा सहायक सामग्री का चुनाव करने में दक्ष बनाना।
4-साज सामान की रख-रखाव एवं उनके उपयोग के लिये दक्षता का विकास करना। 5-उपलब्ध उपकरणों के स्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को सुनिश्चित करना। 6-रंगाई, छपाई एवं डिजाइन के लिये कल्पनात्मक सौन्दर्य का विकास करना। 7-बाजार की प्रचलित नवीनतम फैशन प्रवृत्ति का परिचय करना। 8-योजना को स्थापित करने में उसके निर्देशन एवं रख-रखाव में आत्म-निर्भरता प्राप्त करना। 9-नियोजित ढंग के कार्य का विस्थापन करना। 10-कार्य को पूरा करने और बण्डल बांधने की विधियों से अवगत कराना। 11-उद्योग धन्धों के विकास को समझना और उसे बृद्धिमत्ता से ग्रहण करने की क्षमता का विकास करना।
23 ङ178 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 12-उपलब्ध साधनों और यंत्र कलाओं के मूल डिजाइन का निर्माण करने की कला का विकास करना। 13-सम्बन्धित व्यवसाय में कार्य करने वाले अन्य लोगों के साथ सहयोग करने की प्रवृत्ति का विकास करना। 14-सूचना देने के लिये प्रभावशाली एवं साधारण संचार साधनों की तकनीक से अवगत कराना।
स्वरोजगार के अवसर-
1-स्वरोजगार के अन्तर्गत अपनी इकाई स्वयं लगाकर व्यवसाय कर सकता है। 2-मजदूरी रोजगार जिसमें लोग दूसरे के लिये कार्य करते हैं, उसके लिये वह पारिश्रमिक पाते हैं। 3-रंगसाज बन सकते हैं। 4-डिजाइनर-(1) रंगाई का डिजाइनर। (2) ब्लाक छपाई का डिजाइनर। 5-हाबी कोर्स (अभिरुचि कक्षायें) केन्द्र खोला जा सकता है। 6-संग्रहालय सहायक (टेक्सटाइल अनुभाग) बन सकता है। 7-निर्देशक (कार्यानुभव हेतु स्कूल टेक्सटाइल क्राफ्ट हेतु)। 8-समापन तकनीशियन बन सकते हैं।
पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक- 400 200 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल विज्ञान एवं डिजाइन)
20 अंक
30 अंक 1-1-(क) तन्तु का परिचय, (ख) वर्गीकरण, (ग) परीक्षण। 2-(क) धागों का परिचय, (ख) धागे का वर्गीकरण। 2-1-(क) डिजाइन की परिभाषा- सिद्धान्त, आकार, लय, सादृश्य इत्यादि (ख) परिप्रेक्ष्य के सिद्धान्त, (ग) परिप्रेक्ष्य का वर्गीकरण, परिप्रेक्ष्य का डिजाइन में प्रयोग। 2-(क) रंग की परिभाषा एवं सिद्धान्त, (ख) रंग चक्र का निर्माण। 3-रंग योजना- (क) सहयोगी, (ख) विरोधी। 3-रंग का प्रभाव- 10 अंक (क) शेड, (ख) टिन्ट, (ग) टोन, (घ) रंग की वैल्यू, (ङ) गर्म रंग, (च) ठण्डे रंग।
द्वितीय प्रश्न-पत्र (ड्राइंग एवं कलर स्कीम) 1-1-डाई का वर्गीकरण, वेजिटेबिल, डायरेक्ट, एसिड बेसिक तथा मारडेण्ट पिगमेन्ट रिऐक्टिव ब्रेथाल डंडगो वाल तथा सल्फर रंगों का संक्षिप्त अध्ययन।
20 2-डायरेक्ट, बेसिक पेरिस मारडेण्टा डाई का अध्ययन। 2-1-रियेक्टिव डाई ठण्डी तथा गर्म रंगों का अध्ययन।
20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 179 10
10 2-एसिड तथा एसिड मारडेन्ट डाई का अध्ययन। 3-1-पिगमेन्ट एवं फ्लोरोमेन्ट पिगमेन्ट का अध्ययन। 2-इंडिमोसील तथा डिस्परसील रंगों का अध्ययन। 4-1-ब्रेथाल का अध्ययन, साल्ट तथा बेस से प्रतिक्रिया एवं सल्फर रंग। 2-ब्लीचिंग की विस्तृत जानकारी।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(एडवांस ब्लाक डिजाइनिंग)
20 1-1-उत्तर प्रदेश ब्लाक डिजाइनिंग एवं प्रिंटिंग- (क) आधुनिक एवं फैन्सी डिजाइन एवं छपाई। (ख) वर्तमान डिजाइन पर अन्य प्रदेशों का एवं पुरानी पारम्परिक डिजाइन का प्रभाव। 2-(क) किसी भी ंिडजाइन में एवं ब्लाक डिजाइन में भिन्नता। (ख) फैब्रिक स्ट्रक्चर का अर्थ, डिजाइनों का छोटा, बड़ा एवं पदार्थ आकार में तैयार करने की तकनीक।
14 2-राजस्थान की ब्लाक डिजाइन-स्थान, स्टाइल रंग योजना, कपड़ा तकनीक का अध्ययन। 3-काटन-केसमेन्ट, पॉपलीन, केम्ब्रिक पर बने ब्लाक डिजाइनों की विशेषता तथा महत्व। 16 काटन मोटे वस्त्रों के लिये उपर्युक्त डिजाइनों की विशेषता। 4-पतले वायल पर आरगन्डी सूती वस्त्रों पर उपर्युक्त डिजाइन का चुनाव विशेषता। 10 जाली वाले वस्त्र के लिये डिजाइन की विशेषता, महत्व।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग)
20
20 1-1-ब्लाक प्रिंटिंग की उत्पत्ति एवं विकास। 2-ब्लाक प्रिंटिंग का इतिहास। 2-1-ब्लाक प्रिंटिंग की तकनीक, सीमाओं का ज्ञान। 2-ब्लाक प्रिंटिंग का वर्गीकरण, डायरेक्ट डिस्चार्ज पिगमेंट। 3-ब्लाक बनाने के लिये लकड़ी का चुनाव करना और ब्लाक काटने से पहले लकड़ी को तैयार करना। 10 10 4-ब्लाक बनाने की तकनीक का अध्ययन।
पंचम प्रश्न-पत्र
(ब्लाक प्रिंटिंग उद्योग एवं प्रबन्ध)
1-1-ब्लाक प्रिंटिंग उद्योग-विभिन्न प्रकार के बड़े एवं छोटे उद्योग का विस्तृत अध्ययन। 20 2-उद्योग एवं लघु उद्योग लगाने के लिये आवश्यक बातों का विस्तृत अध्ययन। 10 2-छपे माल की बिक्री का माडल प्लान व बजट तैयार करना। 3-ब्लाक डिजाइनर उद्योग लगाना एवं माडल प्लान तैयार करना। 10 4-1-ब्लाक ड्राइंग उद्योग में लगने वाले उपकरण और सामग्री का अध्ययन। 20 2-ब्लाक प्रिंटिंग उद्योग में लगने वाले उपकरण और सामग्री का तकनीकी अध्ययन। 3-ब्लाक डिजाइनिंग में लगने वाले प्रत्येक उपकरण और सामग्री का तकनीकी ज्ञान।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में- 1-(क) तन्तुओं का परीक्षण। (ख) तन्तुओं का संग्रह।
2-(क) धागे की पहचान एवं वस्त्रों की पहचान।
(ख) धागों का नमूना फाइल तैयार करना।
3-(क) पदार्थ चित्रण, स्थित चित्रण, डिजाइन संयोजन।
(ख) प्रकृति चित्रण दृश्य, फल, पत्तियां, पशु-पक्षी।
4-(क) पदार्थ चित्रण पर आधारित डिजाइन संयोजन।
(ख) आकृति चित्रण पर आधारित संयोजन।
5-(क) डिजाइन में सहयोगी रंग योजना का प्रयोग।
(ख) डिजाइन में विरोधी रंग योजना का प्रयोग। 6-(क) डिजाइन में ठंडे रंगों का प्रयोग।
180 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(ख) डिजाइन में गर्म रंगों का प्रयोग। 7-प्रारम्भिक डिजाइन का निर्माण एवं इनका वस्त्र डिजाइन में प्रयोग। द्वितीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-इन रंगों से सूती कपड़ा रंगना तथा इनकी विशेषतयें देखना। 2-इन रंगों से रंगकर एवं छापकर सैम्पुल निकालना। 3-सिल्क रंगकर तथा छापकर सैम्पुल निकालना। 4-इन रंगों के लिये विशेष पेस्ट तैयार करना तथा छापना। 5-इन रंगों से रंगकर तथा छापकर देखना। 6-छापकर सैम्पुल निकालना।
तृतीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-आधुनिक एवं फैन्सी डिजाइन का निर्माण कार्य (कागज)। 2-ब्लाक की डिजाइन को कपड़े पर से बड़ा एवं छोटा करना (कागज)। 3-फैन्सी राजस्थानी स्टाइल की डिजाइन तैयार करना (कागज)। 4-काटन मोटे वस्त्रों के लिये आकर्षक डिजाइन का निर्माण कागज पर तैयार करें। कढ़ाई का प्रभाव वाली फैन्सी ब्लाक डिजाइन का निर्माण कागज पर करें।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-सूती दुपट्टे पर ब्लाक छपाई करना। 2-ड्रेस ;क्तमेेद्ध मैटीरियल का कपड़ा छापना। 3-टेबुल क्लाथ, मैट, डायनिंग सेट की छपाई करना। 4-वायल या आरगंडी की साड़ी छापना। 5-चादर पर ब्लाक प्रिंटिंग करना।
पंचम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-विभिन्न प्रकार के बड़े उद्योगों के भ्रमण का अनुभव प्राप्त करना और अपने उद्योग लगाने के लिये डायरी तैयार करना।
2-छोटी-छोटी इकाइयों को जाकर देखना और उनकी कार्य प्रणाली से सहायता प्राप्त कर रिपोर्ट बनाना। 3-प्रिंटिंग उद्योग का नक्शा तैयार करना। 4-डिजाइन स्टूडियो का नक्शा तैयार करना। 5-प्रिंटिंग मेज की डिजाइन तैयार करना। 6-ड्राइंग बोर्ड की डिजाइन तैयार करना विभिन्न प्रकार की नापों में। 7-डिजाइन से सम्पर्क स्थापित कर डिजाइन रिपोर्ट तैयार करना।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा का विभाजन निम्नवत् होगा- आन्तरिक मूल्यांकन 200 अंक
नोट-समय 10 घंटा (दो दिनों में)
(क) लघु प्रयोग दो दिये जायें, प्रत्येक का समय 2+2=4 घण्टे। (ख) दीर्घ प्रयोग दो दिये जायें, प्रत्येक का समय 3+3=6 घण्टे।
लघु प्रयोग- समय प्रयोग नं0 1 20 अंक 2 घण्टे प्रयोग नं0 2 20 अंक 2 घण्टे मौखिक 10 अंक - योग .. 50 अंक
(34) ट्रेड-मेटल क्राफ्ट
कक्षा-11
उद्देश्य-
1-दैनिक जीवन में धातु शिल्प के महत्व एवं उपयोगिता से छात्रों को परिचित कराना। 2-धातु चादर के कार्य एवं अलौह धातुओं के ढलाई के कार्यों में दक्षता प्राप्त करना। 3-छात्रों के मस्तिष्क में कलात्मक धातु शिल्प के द्वारा सौन्दर्यानुभूति को विकसित करना। 4-भारतीय संस्कृति एवं परम्परा में कलात्मक धातु शिल्प के महत्व से परिचित कराना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1815-छात्रों की सृजन शक्ति का विकास करना। 6-छात्रों में श्रम के प्रति निष्ठा एवं आदर की भावना उत्पन्न करना।
स्वरोजगार के अवसर-
1-स्व-रोजगार स्थापित करने के पूर्व किसी धातु शिल्प के उद्योग में एप्रेन्टिसशिप का जाब कर धनोपार्जन करना तथा वहां पर उद्योग के वातावरण में रहकर सम्बन्धित ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त करना।
2-धातु चादर से कलात्मक वस्तुओं की निर्माणशाला स्थापित कर सकता है। 3-अलौह धातुओं की कलात्मक ढलाई द्वारा वस्तुओं के निर्माण हेतु कुटीर उद्योग स्थापित कर सकता है। 4-इस शिल्प से सम्बन्धित वस्तुओं का बिक्रय केन्द्र खोल सकता है तथा सेल्समैन का कार्य कर सकता है।
पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक- 400 200 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(धातुओं का सामान्य ज्ञान)
15 15 15 1-धातु शिल्प का सामान्य उद्देश्य। 2-मानव जीवन में धातु का महत्व एवं प्रयोग। 3-धातु-अधातु में अन्तर। 4-विभिन्न धातुओं का ज्ञान-लोहा, तांबा, अल्यूमीनियम, जस्ता (रांगा), सोना, चांदी, सोना के गुण एवं उपयोग।
15
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(धातु शिल्प के सामान्य यंत्र व उपकरण एवं प्रक्रियाएं)
भाग (अ)
यंत्र : बैच वाइस, हैण्ड वाइस, स्क्राइवर, पंच, सेन्टर, पंच स्टील रूल, शीट व वायर, गेज, डिवाइडर, ट्राइम्बर एडजस्टेबिलीरिंच, मैलेट, हथौड़ी स्लिप शिथर, हैक्सा, छेनियां, रेतियां, निहाई, प्लास, स्क्रू ड्राइवर का ज्ञान व सही प्रयोग विधि व सुरक्षा। उपकरण : भट्ठी, धातु शिल्प कार्य बेंच, बेंच ग्राइन्डर, बेंच ड्रिल। धातु शिल्प की विभिन्न प्रक्रियाओं का ज्ञान- 1-पीट कर सीधा करना। 2-नापना व चिन्हित करना। 3-कटिंग व पैकिंग। 4-हैंगिग। 5-तार दबाना (वायरिंग)।
12 12 12 12 12
तृतीय प्रश्न-पत्र
डिजाइनिंग एवं सजावट का कार्य
भाग (अ)
1-फूल-पत्ती, कली, पशु-पक्षी, सीनरी, मानवीय आकृतियों के अलंकारिक आलेखन बनाना। 15 2-विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों का खींचना-त्रिभुज, आयत, वर्ग, समपंच भुज, समषट भुज, बेलनाकार, पतंगाकार आदि।
15 3-विभिन्न माडलों के धरातलीय चित्र तैयार करना। 15 4-साधार ट्रे, डिस, भस्म पात्र, फूलदान, कैण्डिल स्टैण्ड, लैम्प शेड आदि आकृतियां बनाना। 15182 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
ग्रुप (अ)
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
अलौह धातुओं का ढलाई कार्य
भाग-एक
1-अलौह धातुओं का ज्ञान। 10 2-अलौह धातुओं के ढलाई कार्य का इतिहास। 10 3-ढलाई के विभिन्न प्रकार के पैटर्न का ज्ञान। 10 4-मोल्डिंग बाक्स का प्रयोग। बेटिंग पिन, रोलिंग पिन व रबर आदि का प्रयोग। 10 5-कोर सैण्ड बनाने की विधि। 10 6-कोर द्वारा मोल्डिंग। 10
ग्रुप (ब)
पंचम प्रश्न-पत्र
अलौह धातुओं का ढलाई कार्य
भाग-दो
1-विभिन्न प्रकार की अलौह धातुओं के गुण व उपयोग-तांबा, अल्यूमीनियम, जस्ता, सीसा। 12 12 2-विभिन्न प्रकार की अलौह मिश्र धातुओं के गुण, संरचना व उपयोग। 3-विभिन्न धातुओं को तैयार करने की विधि-पीतल, ब्रोज, जर्मन सिल्वर। 12 4-ढलाई कार्य के लिये विभिन्न प्रकार की भटि्ठयों व उनके कार्य का ज्ञान, पिट फरनेस, आयल फायर्ड फरनेस, विद्युत से चलने वाली भट्ठी।
12 12 5-इनग्रेड पैटर्न की महीन बालू द्वारा ढलाई का ज्ञान। ग्रुप (ब) चतुर्थ प्रश्न-पत्र नक्कासी कार्य व रंग भराई का कार्य भाग-एक
नक्कासी कार्य-
1-नक्कासी कार्य का इतिहास। 2-नक्कासी कार्य का सामान्य ज्ञान। 3-नक्कासी कार्य के उपकरण एवं यंत्र। 4-नक्कासी के प्रकार। 5-नक्कासी की प्रक्रियाएं। 6-नक्कासी से पूर्व की तैयारियां। 7-नक्कासी में सावधानियां।
9 9 9 9 8 8 8
ग्रुप (ब)
पंचम प्रश्न-पत्र
नक्कासी एवं रंग भराई का कार्य
भाग-दो
रंग भराई का कार्य- 1-रंगों का सामान्य ज्ञान। 2-रंग भराई के उपकरण व यंत्र। 3-रंगों के प्रकार। 4-रंगों के चयन की विधि। 5-रंग भरने की प्रक्रिया। 6-रंगों की सफाई विधि।
10 10 10 10 10 10
प्रयोगात्मक कार्य का पाठ्यक्रम प्रयोगात्मक परीक्षा दो भागों में होगी। भाग (क) का प्रयोगात्मक कार्य धातु शिल्प के सभी छात्रों के लिये भाग (ख) का प्रयोगात्मक कार्य विशिष्ट ट्रेड से सम्बन्धित होगा।
विशिष्ट ट्रेड-अलौह धातुओं का ढलाई कार्य अथवा नक्कासी का कार्य व रंग भराई का कार्य।
भाग (क) का पाठ्यक्रम-
1-विभिन्न प्रकार की धातुओं एवं मिश्र धातुओं को पहचानना-लोहा, तांबा, टिन, जस्ता, अल्यूमीनियम, सोना, चांदी, पीतल, ब्रास, जर्मन सिल्वर।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1832-पाठ्यक्रम के अनुसार विभिन्न यंत्रों/उपकरणों के सही नाम जानना, पहचानना व प्रयोग करना। 3-यंत्रों की सहायता से धातु चादर व तार आदि की लम्बाई व मोटाई ज्ञात करना। 4-धातु की चादर व वस्तुओं पर निश्चित नाप व आकृति के अनुसार चिन्हांकन करना। 5-धातु की चादर को औजारों की सहायता से काटना। 6-पंच एवं ड्रिल के प्रयोग से छेद करना। 7-विभिन्न प्रकार के नट, बोल्ट, रिवेट को पहचानना व उनका प्रयोग जानना। 8-कच्चा टांका द्वारा जोड़ लगाने की क्रिया। 9-कच्चा टांका लगाने के पूर्व वस्तु/उपमान की तैयारी करना। 10-फ्लक्स तैयार करना व उसका प्रयोग करना। 11-कच्चा टांका लगाने के लिये भट्ठी तैयार करना। 12-ब्लो लैम्प का प्रयोग करना। 13-बिजली की कइया का प्रयोग जानना। 14-पक्का टांका लगाने की क्रिया जानना। 15-साधारण रिवेट द्वारा जोड़ लगाने की क्रिया-अल्यूमीनियम व अन्य रिवेट द्वारा जोड़ लगाना। 16-धातु वस्तुओं पर पॉलिशिंग का कार्य करना।
भाग (ख) (II) का पाठ्यक्रम-
(II) धातु शिल्प में नक्कासी कार्य व रंग भराई का कार्य-
1-नक्कासी कार्य में प्रयोग होने वाले उपकरणों के सही नाम जानना व पहचानना। 2-राल बनाकर तैयार करना। 3-नक्कासी के लिये नमूनों का निर्माण। 4-नक्कासी की गयी वस्तु की फिनिशिंग करना। 5-रंग भराई का कार्य करना। 6-रंगों की सफाई विधि जानना। प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन-
अंक आन्तरिक मूल्यांकन . . 200 वाह्य परीक्षा की रूपरेखा समय-10 घण्टा दो दिनों में मूल्यांकन-
(1) लघु प्रयोग-
अंक
(अ) प्रयोगात्मक कार्य भाग (क) की परीक्षा का मूल्यांकन 40 (ब) मौखिक प्रश्न 10 योग .. 50
(2) दीर्घ प्रयोग-
अंक प्रयोगात्मक कार्य भाग (ख) की परीक्षा का मूल्यांकन 150 जिसमें मौखिक प्रश्न सम्मिलित है 050 योग .. 200
प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से उपयुक्त पुस्तक का चयन करा लें।
(35) ट्रेड-कम्प्यूटर तकनीक एवं मेन्टेनेन्स
(डाटा इन्ट्री प्रासेस)
(कक्षा-11)
उद्देश्य-
आज के विज्ञान जगत में कम्प्यूटर का एक ऐसा स्थान है जो अद्वितीय है। चाहे कारखाना हो, शोध संस्थान हो, राजकीय अथवा निजी कार्य स्थान हो, कम्प्यूटर ने अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है। बैंकों में हिसाब-किताब,184 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 रेल आरक्षण-कार्य, परीक्षा कार्य आदि आज सामान्य बात हो गयी हैं अतः यह आवश्यक है कि हर शिक्षित नागरिक को कम्प्यूटर का ज्ञान हो। इस ट्रेड का मुख्य उद्देश्य कम्प्यूटर के बारे में जानकारी देना तथा कम्प्यूटर को बनाने व सुधारने के लिये अधिक संख्या में मानव संसाधन उपलब्ध कराना है। स्वरोजगार के अवसर-
1-कम्प्यूटर मैकेनिक के रूप में 2-कम्प्यूटर आपरेटर के रूप में 3-कम्प्यूटर टेस्टर्स के रूप में 4-D.T.P. आपरेटर्स के रूप में 5-प्रिंटिंग मैकेनिक के रूप में 6-कम्प्यूटर सुधारक के रूप में 7-डाटा एन्ट्री के रूप में 8-स्व व्यवसाय।
पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
(1) प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 (2) द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 (3) तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 (4) चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 (5) पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-कुल 400 अंकों की होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
आन्तरिक परीक्षा 200 अंक
75-साफ्टवेयर प्रयोग 75-हार्डवेयर प्रयोग 50-मौखिक (Viva) टीप-1-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
2-प्रयोगात्मक के आन्तरिक परीक्षा में सत्रीय मूल्यांकन तथा दो प्रोजेक्ट (एक साफ्टवेयर व एक हार्डवेयर) का होना अनिवार्य है। प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन आन्तरिक परीक्षण द्वारा होगा, परन्तु इन प्रोजेक्ट्स को वाह्य परीक्षक को भी दिखाया जायेगा।
प्रथम प्रश्न-पत्र
कम्प्यूटर परिचय
पूर्णाक 60
40 अंक
20 अंक
1-कम्प्यूटर फन्डामेन्टल्स (Computer Fundamentals) कम्प्यूटर एक परिचय, कम्प्यूटर के विकास का इतिहास, कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ, कम्प्यूटर के प्रकार, कम्प्यूटर का रेखाचित्र, कम्प्यूटर के प्रमुख कार्य, कम्प्यूटर की विशेषतायें, कम्प्यूटर साफ्टवेयर (सिस्टम एवं एप्लीकेशन)। 2-अंक प्रणाली (Number System) बाइनरी डेटा, बाइनरी अंक प्रणाली, दशमलव, आँक्टल, हैक्साडसिमल प्रणाली, बाइनरी एवं दशमलव में परस्पर सामान्य रूपान्तरण (फेक्शनल कन्वर्जन सहित)।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
आपरेटिंग सिस्टम
पूर्णाक 60
24 अंक
1-आपरेटिंग सिस्टम (Operating System) 26 अंक आपरेटिंग सिस्टम का परिचय, कार्य, प्रकार। विन्डोज आपरेटिंग सिस्टम का परिचय, लाइनेक्स आपरेटिंग सिस्टम का परिचय, विन्डोज एवं लाइनेक्स में अन्तर। 2-लाइनेक्स (Linux) लाइनेक्स का इतिहास, विशेषतायें, प्रारम्भ एवं समाप्त के कमांड, GUI इन्टरफेस, माउस का प्रयोग लाइनेक्स में।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 18510 अंक
3-कम्प्यूटर वायरस (Computer Virus) परिचय, वायरस क्या है ? वैक्सीन क्या है ? विशेषतायें, देखभाल व बचाव।
तृतीय प्रश्न-पत्र
कम्प्यूटर हार्डवेयर
पूर्णाक 60
20 अंक
14 अंक
16 अंक
10 अंक
1-मदर बोर्ड (Mother Board) मदर बोर्ड के विभिन्न डिजाइन, बसेज (Buses) व इनके प्रकार, बोर्ड स्थित कम्पोनेन्ट, बोर्ड के प्रकार, AT मिनी AT और ATX विभिन्न प्रकार के सॉकेट (Sockets) का परिचय, एक्सपेन्शन बसेज (Expansion Buses) (ISA, EISA, PCI, PCMCIA) एक्सटेन्शन बोर्ड और विभिन्न प्रकार के I/O पौट्र्स (Serial Parallel, ps/2, USB etc.)। 2-प्रासेसर्स (Processors) सी0पी0यू0, माइक्रो प्रोसेसर्स-16, 32 और 64 विट्स, सरल आर्किटेक्चर, सी0पी0यू0 संचालन, सी0पी0यू0 को लगाना, निकालना, पावर आवश्यकता एवं प्रकार होटसिक, आवृत्ति और अपग्रेडेशन। 3-मेमोरी (Memory) विभिन्न प्रकार की स्मृतियों का परिचय, प्राइमरी और सेकेण्डरी FPM की संकल्पना, EDO, SDRAM, SIMM, DIMM विभिन्न प्रकार के RAM का बोर्ड पर इन्स्टालेशन, स्टेटिक मेमोरी का परिचय यथा ROM, PROM, EPROM आन्तरिक व वाह्य मेमोरी हेरारकी। 4-बायोस (Bios) पावर-आन सेल्फटेस्ट, एरर कोड्स, बीप कोड्स, बायोस एक्सटेंशन, क्षमता एवं विकास, BIU पहचान, सिस्टम कान्फिगुरेशन और CMOै सेटअप।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
डी0टी0पी0 एवं ई0डी0पी0
पूर्णाक 60
20 अंक
20 अंक
20 अंक
1-डेस्क टाप पब्लिशिंग डी0टी0पी0 एक परिचय, डी0टी0पी0 के उपयोग और प्रिंटिंग डाक्यूमेन्ट बनाना, फान्ट्स, फेम्स, पेज ले-आउट WYSIWYG आदि का प्रयोग, वर्ड प्रोसेसिंग एवं डी0टी0पी0 की तुलना, मार्जिन बनाना, हेडर, फुटर, स्टाइलिंग द्वारा डाक्यूमेन्ट का सुन्दरीकरण। 2-एम0 एस0 वर्ड एम0 एस0 वर्ड का प्रारम्भ, डाक्यूमेन्ट की संरचना, सेव करना, फाइल को खोलना, संपादन, फारमेटिंग, हेडर व फुटर का लगाना, पृष्ठों का संख्याक्रम, टेबिल बनाना, प्रूफिंग करना एवं डाक्यूमेन्ट का प्रिन्ट स्वरूप तैयार करना, मेल-मर्ज की कार्य विधि एवं लाभ। 3-डी0टी0पी0 में पेज मेकर पेज मेकर का परिचय, इसका मीनू, स्टाइल, शीट बनाना, कन्टेन्ट्स तैयार करना, इसकी तालिका बनाना इन्डक्ंिसग करना एवं प्रिंटिंग के विभिन्न कमान्ड्स का उपयोग।
पंचम प्रश्न-पत्र
कम्प्यूटर मेन्टेनेन्स एण्ड नेटवर्किंग
20 अंक
पूर्णाक 60 इकाई-1-बेसिक इलेक्ट्रानिक्स-रेजिस्टर्स, कैपेसिटर्स, इन्डक्टर्स डायोड्स LEDS] 20 अंक डिस्प्ले डिवाइसेस ट्रांजिस्टर्स, ICS, SSI, MSI9, LSI, VLSI का सामान्य परिचय। इकाई-2-कम्प्यूटर एस0एम0पी0एस0 तथा कैबिनेट- ए0सी0 तथा डी0सी0 बोल्टता तथा धारा का परिचय पावर सप्लाई, रेटिंग, कार्य तथा आपरेशन कनेक्टर टाइप पावर सप्लाई का परीक्षण पावर सप्लाई सम्बन्धित समस्यायें एस0एम0पी0एस0 की ट्रबलशूटिंग
24 ङ186 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 20 अंक यू0पी0एस0 तथा सी0वी0टी0 कैबिनेट के प्रकार-लम्बवत (Vertical) तथा मिनी टावर इकाई-3-इनपुट डिवाइसेज- की-बोर्ड, इसके प्रकार, तकनीकी एवं ट्रबलशूटिंग माउस-प्रकार, इन्सटालेशन, इन्टरफेस टाइप (Serial Ps/2 USB Port) क्लीनिंग तथा ट्रबलशूटिंग
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम की सूची
हार्डवेयर प्रयोग
पूर्णाक 400
उत्तीर्णांक 200
1-कम्प्यूटर में विभिन्न वोल्टता का परीक्षण। 2-मदर बोर्ड की विस्तृत जानकारी और कम्पोनेन्ट की सूची तैयार करना। 3-CPU को लगाना व निकालना। 4-विभिन्न प्रकार की मेमोरी को लगाना। 5-BIOS का विस्तृत अध्ययन। 6-H/D, F/D फार्मेटिंग करना। 7-DOS की लोडिंग करना, उसके विभिन्न अंगों का पृथक अध्ययन करना। 8-माइक्रो कम्प्यूटर को एसेम्बल करना। 9-विभिन्न प्रकार के कनेक्टर्स बनाना। 10-विभिन्न ड्राइवर्स को लोड करना (माउस, की-बोर्ड, एच0डी0डी0, एफ0डी0डी0)। साफ्टवेयर प्रयोग
1-आपरेटिंग सिस्टम की लोडिंग-बिन्डोज व लाइनेक्स। 2-लाइनेक्स में डायरेक्ट्री बनाना। 3-ब्राउसिंग। 4-सरफिंग। 5-वेब का अध्ययन। 6-E-Mail को भेजना व पढ़ना। 7-IDs बनाना। 8-सिस्टम सिक्योरिटी, पासवडर््स, लाकिंग सिस्टम। 9-डाक्यूमेन्ट फाइल तैयार करना तथा उसकी फारमेटिंग करना-जिसमें लाइन स्पेसिंग, पैराग्राफ स्पेसिंग, टेब सेटिंग, इन्डेन्टिग एलाइनिंग करना, हेडर व फूटर और पेज नम्बरिंग करना। 10-डाक्यूमेन्ट में तालिका (Table) बनाना, टेबिल को Text में व Text को Table में परिवर्तित करना। 11-डाक्यूमेन्ट की प्रूफिंग करना, स्पेलिंग चेक करना, आटोमेटिक स्पेल चेक, टेक्स्ट, आटो करेक्ट (Auto Correct) व आटो फारमेट (Auto Format)। 12-वर्ड में मेलमर्ज (Mail Merge) करना, उनकी प्रिन्ट निकालना, इन्वेलप व मेलिंग लेबल्स (Mailing Lable) बनाना। 13-Page Maker में स्टाईल शीट बनाना व उसकी फारमेटिंग करना।
प्रोजेक्ट की सूची
साफ्टवेयर प्रोजेक्ट
1-कम्प्यूटर जनरेशन। 2-लाजिक गेट्स और उनका प्रयोग। 3-DOS & Windows का तुलनात्मक अध्ययन। 4 Windows व लाइनेक्स का तुलनात्मक अध्ययन। 5-विभिन्न प्रकार के वायरस व निदान। 6-लो-लेवल व हाई-लेवल भाषा का अध्ययन व उपयोग। 7-विभिन्न टोपोलॉजी का तुलनात्मक लाभ। 8-ईंटरनेट के प्रयोग। 9-प्रिन्टिंग के लिए डाक्यूमेन्ट्स तैयार करना। 10-लेटर टाइपिंग एवं कम्प्यूटर कम्पोजिंग के तुलनात्मक लाभ।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 18711-पोस्टर बनाना। 12-मेल-मर्ज और उसका प्रयोग। 13-वर्ड व पेजमेकर की तुलना।
हार्डवेयर प्रोजेक्ट
1-ROM BIOS का विस्तृत अध्ययन। 2-फ्लापी व ब्क्े की तुलना। 3-हार्ड डिस्क की कार्यविधि एवं इसके लाभ। 4-ड्राइवर्स विभिन्न प्रकार व आवश्यकता। 5-विभिन्न प्रकार की पावर सप्लाई का अध्ययन। 6-माइक्रो-इन्टिगरेशन। 7-एस0एम0पी0एस0 की बनावट एवं गुणवत्ता। 8-UPSऔर उसके लाभ। 9-ब्टज् व इसका लाभ। 10-की-बोर्ड टेक्नोलॉजी के प्रकार व भिन्नता। 11-कम्प्यूटर के कनेक्टिंग पाटर््स।
उपकरणों की सूची एवं मूल्य निर्धारण
उपकरण संख्या अनुमानित मूल्य क्र0 सं0 1 2 3 4
3
रु0 1 पी0 सी0 3 60,000.00 2 यू0 पी0 एस0 3 8,000.00 3 मल्टीमीटर 600.00 4 डिजीटल मल्टीमीटर 3 1,200.00 5 लॉजिक टेस्टर 5 1,000.00 9,000.00 6 एक्सपेरीमेन्टल माडयूल्स
3 3 3 3 3
(क) रेजिस्टर (Resistor) (ख) डायोड (ग) ट्रांजिस्टर (घ) पावर सप्लाई (ङ) I. C.
7 टूल्स
5,000.00 (क) शोल्डरिंग आयरन (ख) पेंचकस (ग) प्लास (घ) कटर (ङ) डी-शोल्ड पम्प (च) विभिन्न कनेक्टर्स (छ) फ्लैट केबिल्स
5 5 5 5 5 5 5
8 ऑसिलोस्कोप 1 10,000.00 9 फर्नीचर्स, बिजली कनेक्शन,
नेट कनेक्शन इत्यादि व अन्य
20,000.00
कुल योग (लगभग) . .
1,24,800.00
(एक लाख चौबीस हजार आठ
सौ मात्र)
188 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(36) ट्रेड--घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं रख-रखाव
(कक्षा-11)
उद्देश्य :-
(1) विद्युत उपकरणों की सामान्य जानकारी प्राप्त करना। (2) उपकरणों के अनुरक्षण एवं रख-रखाव का ज्ञान प्राप्त करना। (3) घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं अनुरक्षण से सम्बन्धित पदार्थों की जानकारी प्राप्त करना। (4) विद्युत मोटर एवं जनरेटर की सामान्य जानकारी प्राप्त करना। (5) बैटरी के बारे में जानकारी एवं उसका रख-रखाव का सामान्य ज्ञान प्राप्त करना। (6) स्वतंत्र रूप से घरेलू उपकरणों का परीक्षण करना एवं उनको सुधारने का ज्ञान प्राप्त करना। (7) विद्युत उपकरणों पर कार्य करते समय सुरक्षा सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त करना।
रोजगार अवसर-
1--स्वरोजगार एवं मजदूरी रोजगार :--
निम्नलिखित व्यवसाय स्वरोजगार की श्रेणी में आते हैं अर्थात् (पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद अपनी इकाइयां लगा सकते हैं) मजदूरी रोजगार अर्थात् दूसरों के लिये रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।
1-मोटर बाइन्डिग करने वाला। 2-जनरेटर मरम्मत करने वाला। 3-अभिरुचि कक्षायें चलाने वाला। 4-घरों की वायरिंग करने वाला। 5-स्वयं द्वारा उत्पादित सामग्री को बाजार में बेचने अथवा सप्लाई करने वाला। 6-सभी प्रकार के विद्युत उपकरणों की मरम्मत तथा रख-रखाव करने वाला।
2-केवल मजदूरी रोजगार :--
1-इलेक्ट्रीशियन (कार्यालय तथा उद्योग में) घरों की वायरिंग के लिए। 2-स्कूल या प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रशिक्षक के सहायक के रूप में। 3-सेल्समैन के रूप में। 4-उपकरणों के एसेम्बलर एवं सुधारक मिस्त्री के रूप में।
पाठ्यक्रम--
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और उनकी प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा।
(क) सैद्धान्तिक-- पूर्णांक उत्तीर्णांक (1) प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 (2) द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 (3) तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 (4) चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 (5) पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक- 400 200 नोट ः-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50ः अंक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
प्रारम्भिक विद्युत अभियांत्रिकी प्रथम-सी0सी0
पूर्णांक-60
इकाई
30 1-परिचय-विद्युत ऊर्जा, अवधारणा, इलेक्ट्रान सिद्धान्त, विद्युत विभवान्तर, विद्युत् उत्पादक स्रोत, विद्युत वाहक बल, विद्युत सुचालक एवं कुचालक, विद्युत धारा प्रवाह, ओम का नियम, प्रतिरोध के नियम, विशिष्ट प्रतिरोध, विशिष्ट चालकता, प्रतिरोध पर ताप का प्रभाव, सामान्य जानकारी एवं गणना-प्रश्न। 2-विद्युत धारा के उष्मीय प्रभाव, जूल की विद्युत तापन का नियम, विद्युत ऊर्जा की गणना, एनर्जी मीटर,विद्युत उश्मक की उष्मादक्षता की गणना। 15भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 189 15 3-बैटरी-विद्युत सेल एवं बैटरी, बैटरी की बनावट, कार्य, बैटरियों का संयोजन, बैटरियों के प्रकार, अच्छे सेल की विशेषतायें, प्राइमरी एवं द्वितीयक सेल, डिसचार्जिंग एवं चारजिंग, बैटरी का अनुरक्षण। द्वितीय प्रश्न-पत्र ए0 सी0 फन्डामेंटल एवं ए0 सी0 मशीनें
पूर्णांक-60
इकाई
1-विद्युत् चुम्बकत्व-चुम्बकीय क्षेत्र, चुम्बकीय फ्लक्स, चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व, विद्युतधारा युक्त चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र, दाहिनाहस्त अंगूठा नियम, कार्क पेंच नियम, परिनालिका के कारण चुम्बकीय क्षेत्र, विद्युत चुम्बक, चुम्बकत्व का सिद्धान्त, चुम्बकीय परिपथ, चुम्बकत्व वाहक बल, रिलैक्टेन्स, निरपेक्ष चुम्बकशीलता, आपस में सम्बन्ध, चुम्बकीय चक्र, चुम्बकीय हीसेट रेसिस,एवं स्टेरिसिस हानि, विद्युत गतिजबल, चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही कुण्डली का बलघूर्ण, विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण, प्रेरित विद्युतवाहक बल, इनडक्टेन्स, एडी करेन्ट (Eddy current)।
20 2-प्रत्यावर्ती धारा परिपथ-अवधारणा, उपयोग, लाभ, प्रत्यावर्ती धारा का उत्पादन/जनन, राशियों की परिभाषायें एवं सूत्र, प्रत्यावर्ती राशियों का कलीय प्रदर्शन, विद्युत भार शक्ति गुणांक (पावर फैक्टर), समान्तर एवं श्रेणी परिपथ प्रतिबाधा का सामान्य ज्ञान, त्रिकलीय प्रणाली, उत्पादन, राशियों में सम्बन्ध तथा कलीय आरेख का ज्ञान, प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में अनुवाद। 25 3-विद्युत मापन यंत्र-मापन यंत्रों का वर्गीकरण तथा कार्य सिद्धान्त। गैलवनोमीटर, एमीटर, बोल्टमीटर, मेगर, इनर्जीमीटर की बनावट, कार्य-सिद्धान्त एवं उपयोग। 15 तृतीय प्रश्न-पत्र घरेलू वायरिंग एवं मोटर वाइन्डिंग
इकाई
पूर्णांक-60
1-घरेलू वायरिंग का परिचय-वायरिंग परिचय, वायरिंग के प्रकार, सी0 टी0 एस0 या बैटन वायरिंग, क्लीट वायरिंग, उडेन केसिंग-केपिंग वायरिंग, लेड सीथेड वायरिंग, कन्ड्यूट पाइप वायरिंग (अ) कन्सील्ड कन्ड्यूट वायरिंग, (ब) सरफेस कन्ड्यूट वायरिंग, प्रत्येक वायरिंग की विशेषतायें, सीमायें उपयोग। वायरिंग प्रणाली के चयन के घटक, वायरिंग विधियाँ-लूप इन सिस्टेम, जंक्शन बाक्स सिस्टेम, वायरिंग प्रणाली में स्विच, फ्यूजों एवं तार का महत्व, सम्भावित दोष, उनके कारण एवं उपचार, वायरिंग से सम्बन्धित आई0ई0 नियम की जानकारी, लाइट, फैन एवं पावर सरकिट बनाने की जानकारी, विभिन्न प्रकार (प्वाइन्ट) की वायरिंग, वायरिंग के विशय, वायरिंग का परीक्षण-प्रतिरोध, विंसवाहक, सततता, अर्थिंग परीक्षण आदि। 30 2-वायरिंग की सामग्री-वायरिंग में प्रयोग होने वाले स्विच के प्रकार, सॉकेट के प्रकार, होल्डर के प्रकार, सीलिंगरोज के प्रकार, वायरिंग में प्रयोग होने वाले तारों की जानकारी, उडेन बोर्ड एवं सनमाइकाशीट के प्रकार एवं आकार की जानकारी, कन्ड्यूट एवं पी0वी0सी0 पाइप के गेज, लेन्थ एवं उपयोग की जानकारी, जंक्शनबाक्स, एल्बो, बैण्ड, टी इत्यादि की जानकारी, मेन स्विच के प्रकार एवं क्षमता, डिस्ट्रीव्यूशन बोर्ड के प्रकार, ऊर्जामीटर की जानकारी, विद्युत् घंटी के प्रकार, दोष एवं उपचार। 20 3-अर्थिंग-अर्थिंग का महत्व, अर्थिंग के प्रकार, अर्थिंग करने की विधियाँ, अर्थिंग में प्रयुक्त पदार्थ, अर्थिंग की टेस्टिंग, आर्थिंग के लाभ एवं आर्थिंग की आवश्यकता। 10 चतुर्थ प्रश्न-पत्र घरेलू विद्युतीय उपकरणों की बनावट एवं अनुरक्षण
इकाई
पूर्णांक-60 1-परिचय-विभिन्न प्रकार घरेलू विद्युतीय उपकरण का महत्व, नाम एवं इस्तेमाल। 15 2-वर्गीकरण-विद्युत मोटर चालित उपकरण-मिक्सी, टेबुल एवं सीलिंग पंखा, एक्जास्ट फैन, ब्लोअर, कूलर, वाशिंग मशीन, वाटर लिफ्टिंग मशीन पम्प। 30 गैर विद्युत् मोटर चालित उपकरण-गीजर, प्रेस, किचेन हीटर, ट्यूब लाइट, टेबुल लैम्प, घंटी, इमरजेन्सी लाइट, बैटरी चार्जर, मच्छर भगाने की मशीन, रोस्टर, रूम हीटर, ओवन, अमसेन हीटर, केतली, विद्युत गैस लाइटर आदि।
3-इन उपकरणों की बनावट, सम्बंध आरेख उत्पादनकर्ता, विशिष्टियाँ, क्रय तरीका कार्य-विधि तथा कार्य करते समय सावधानियाँ। 15190 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्न-पत्र
कार्यशाला गणना एवं अभियांत्रिकी पदार्थ
इकाई
पूर्णांक-60
1-वर्ग, वर्गमूल, क्षेत्रफल, आयतन, अनुपात, प्रतिशत के सामान्य प्रश्न, लॉग एवं एन्टीलॉग
निकालना।
20 2-गति, वेग, त्वरण, तापक्रम एवं उष्मा, बल। 10 3-ज्यामितीय ठोस का आयतन। (सामान्य अध्ययन मौलिक) 10 4-प्रतिबल, विकृति, प्रत्यास्थता, प्रत्यास्थता गुण, हुक का नियम, कर्तन प्रतिबल, आघूर्ण, जड़त्व महत्व एवं उपयोग।
10 5-स्प्रिंग के प्रकार, स्प्रिंग की बनावट, सामथ्र्य के सूत्र (कोई गणना नहीं), उपयोग 10 प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400
उत्तीर्णांक-200
1-ओम के नियम का सत्यापन। 2-प्रतिरोध के नियम का सत्यापन। 3-किरचाफ के नियम का सत्यापन। 4-बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध मापन। 5-एमीटर तथा बोल्ट मीटर द्वारा डी0 सी0 परिपथ में शक्ति मापन। 6-मल्टीमीटर द्वारा प्रतिरोध मापन तथा रंग के अनुसार सत्यापन। 7-मल्टीमीटर द्वारा धारा एवं वोल्टता मापन। 8-दिष्ट धारा मोटर का क्षेत्र तथा आरमेचर कुंडली का प्रतिरोध मापन। 9-क्लिप आन मीटर या टांगऐस्टर का अध्ययन। 10-मल्टीमीटर द्वारा प्रतिरोध धारा एवं बोल्ट मापन। 11-अमीटर, बोल्ट मीटर, वाट मीटर द्वारा एक कलीय परिपथ में शक्ति एवं शक्तिगुणक नापना। 12-त्रिकलीय परिपथ में धारा एवं बोल्टता मापन। 13-त्रिकलीय परिपथ में शक्ति मापन। 14-एक-कलीय परिणामिक की धु्रवीपत परीक्षण करना। 15-ऊर्जा मापी द्वारा विद्युत ऊर्जा मापन। 16-एक-कलीय परिणामिक की वोल्टता अनुपात ज्ञात करना। 17-एक-कलीय मोटर का अध्ययन करना। 18-त्रिकलीय प्रेरण मोटर का अध्ययन करना।
आवश्यक औजार एवं उपकरणों की सूची
क्रमां
नाम संख्या अनुमानित कीमत
क
1 2 3 4
रु0
1 ड्रिल मशीन (विद्युत चलित) 1 4500.00
2 वाइंन्डिंग मशीन 2 5000.00
3 हथौड़ी 2 सेट 200.00
4 ड्रिल सेट 2 सेट 200.00
5 फाइल सभी प्रकार के 2 सेट 200.00
6 चिजेल सभी प्रकार के 2 सेट 150.00
7 वाइस 4 900.00
8 टेप सेट 2 सेट 400.00
9 डाई 2 600.00
10 हैण्ड हैक्सा 4 200.00
11 सोल्डरिंग आयरन 5 1000.00
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 191
12 वेल्डिंग ट्रान्सफारमर 1 4000.00
13 रिवटेन औजार 1 सेट 400.00
14 पंच, वाइस 2 सेट 1400.00
15 मापन औजार 1 सेट 2000.00
16 वाट मीटर 2 3500.00
17 वोल्ट मीटर 5 3000.00
18 नेयर 2 2500.00
19 मल्टीमीटर (एनालाग) 2 550.00
20 मल्टी मीटर (डिजिटल) 2 1000.00
21 स्क्रू ड्राइवर सेट 2 200.00
22 रिंच सेट (स्पेनर सेट) 2 250.00
23 रिपेयरिंग किट 2 3000.00
24 मिक्सी 1 4000.00
25 वाशिंग मशीन 1 5000.00
26 छत का पंखा 1 1000.00
27 पेडेस्टल फैन 1 1000.00
28 इक्जास्ट फैन 1 3000.00
29 प्रेस प्रत्येक किस्म के 1 प्रत्येक 2000.00
30 कूलर पम्प 1 4000.00
31 घंटी 1 100.00
32 गीजर 1 3000.00
33 किचेन हीटर 1 100.00
34 टेबुल लैम्प 1 500.00
35 इमरजेन्सी लाइट 1 1000.00
36 ओवेन 1 4000.00
37 इमरशन हीटर 1 600.00
38 बैटरी चार्जर 1 500.00
योग . . 56050.00
विषय सन्दर्भ पुस्तकों की सूची :
लेखक प्रकाशक
3-आधारि वैधत अभियान्त्रिकी एम0 एल0 गुप्ता
1-आधारि वैधत अभियान्त्रिकी आर0 पी0 गुप्त नवभारत प्रकाशन, मेरठ 2-आधारि वैधत अभियान्त्रिकी टी0 डी0 विष्ट एशियनपब्लिकेशन, मुजफ्फरनगर धनपतराय एण्ड सन्स, नई दिल्ली
4-घरेलू उपकरणों का अनुरक्षण एवं रख-रखाव आर0 के0 लाल
5-
महेन्द्र भारद्वाज नवभारत प्रकाशन, मेरठ विद्युुत् उपकरणों एवं मशीनों का अनुरक्षण एवं रख-रखाव
6-विद्युत् उपकरणों एवं घरेलू उपकरणों का रख-रखाव एम0 एल0 आडवानी
न्यू हाइट्स पब्लिकेशन, नई दिल्ली
एम0 एल0 आडवानी 7-कार्यशाला गणना 8-संयत असुरक्षा एवं सुरक्षा इंजी0 आर0 के0 लाल
नवभारत प्रकाशन, मेरठ 9-विद्युत् उपकरणों का संस्थापन, अनुरक्षण एवं मरम्मत जग्गी शर्मा
(37) ट्रेड-खुदरा व्यापार (Retail Trading)
पाठ्यक्रम :-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा हैं। अंकों का विभाजन निम्नवत् है :-
192 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(अ) सैद्धान्तिक
प्रथम प्रश्न-पत्र-खुदरा व्यापार का परिचय -60 द्वितीय प्रश्न-पत्र-उत्पाद एवं उपभोक्ता सेवायें -60 तृतीय प्रश्न-पत्र-खुदरा व्यापार में भण्डारण एवं आपूर्ति -60 300 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-अर्थ व्यवस्था में खुदरा व्यापार -60 पंचम प्रश्न-पत्र-बहीखाता एवं लेखा शास्त्र -60
(ब) प्रयोगात्मक-
400 परीक्षार्थी को प्रत्येक प्रश्न-पत्र में उत्तीर्णांक न्यूनतम 25 अंक तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में 200 अंक पाना आवश्यक है।
नोट :-सैद्धान्तिक प्रश्न-पत्र में 33 प्रतिशत उत्तीर्णांक हैं तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। पाठ्यक्रम की उपयोगिता-
खुदरा व्यापार का देश की आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। छात्र-छात्राओं को खुदरा व्यापार के आशय एवं उपयोगिता तथा विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देना शैक्षिक पाठ्यक्रम के लिए अति आवश्यक है। पाठ्यक्रम की उपयोगिता हेतु निम्न बिन्दु महत्वपूर्ण हैं-
1-छात्र-छात्राओं को बिक्रय कला की जानकारी। 2-नये उत्पाद का प्रचार-प्रसार करने की कौशल का विकास 3-वस्तु की मांग उत्पन्न करने की तरीकों की जानकारी देना 4-उपभोक्ताओं की रुचि, आदत एवं फैशन आदि की जानकारी 5-एक अच्छे बिक्रेता के रूप में छात्रों को तैयार करना।
उद्देश्य-
खुदरा व्यापार के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में एक अच्छे व्यापारी के गुणों का विकास करना तथा इससे भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता मिलें उनके व्यक्तित्व का विकास करना अच्छेे बिक्रय करने की जानकारी देना। प्रतिस्पर्धात्मक व्यापार मे अपने कौशल एवं साहस से सामना करना तथा दिन-प्रतिदिन विकास करने में दक्ष होना।
प्रथम प्रश्न-पत्र
खुदरा व्यापार का परिचय
इकाई-1
पूर्णांक : 60
30 अंक
(क) प्रस्तावना। (ख) विनिमय का अर्थ एवं परिभाषा। (ग) व्यापार के विकास की अवस्थायें- आत्मनिर्भरता युग, पशुपालन युग, चारागाह युग, लघु एवं कुटीर उद्योग, वर्तमान औद्योगिक युग। (घ) वस्तु विनिमय की कठिनाई। (ङ) मुद्रा विनिमय एवं साख विनिमय।
इकाई-2
30 अंक
(क) व्यापार का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) व्यापार की विशेषतायें। (ग) व्यापार की सफलताओं के आवश्यक तत्व। (घ) सफल व्यापारी के गुण।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
उत्पाद एवं उपभोक्ता सेवायें
इकाई-1
पूर्णांक : 60
30 अंक
(क) उत्पाद का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) उत्पाद का महत्व। (ग) उत्पादों के प्रकार। (घ) उत्पाद प्रबंधन का अर्थ एवं महत्व। (ङ) उत्पाद प्रबंधन की विभिन्न विधियाँ। (च) उत्पाद प्रबंधन के उपकरण। (छ) उत्पादों में ब्रान्डिंग का महत्व।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 193इकाई-2
30 अंक
(क) उपभोक्ता का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) ग्राहक एवं उपभोक्ता में अन्तर। (ग) ग्राहक की आधार भूत आवश्यकताओं की पहचान। (घ) उपभोक्ता संरक्षण। तृतीय प्रश्न-पत्र खुदरा व्यापार में भण्डारण एवं आपूर्ति
इकाई-1
पूर्णांक : 60
30 अंक
(क) भण्डारण का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) भण्डारण का महत्व। (ग) भण्डारण की कमियाँ। (घ) भण्डारण के कमियों को दूर करने के सुझाव। (ङ) खुदरा व्यापार में भण्डारण की आवश्यकता।
इकाई-2
30 अंक
(क) भण्डार प्रबन्धन का अर्थ। (ख) भण्डार प्रबन्धन की आवश्यकता। (ग) भण्डार प्रबन्धन की विधियाँ। (घ) भण्डार प्रबन्धन का महत्व। (ङ) खुदरा व्यापार में भण्डार प्रबन्धन की आवश्यकता एवं महत्व। चतुर्थ प्रश्न-पत्र अर्थव्यवस्था में खुदरा व्यापार
इकाई-1
पूर्णांक : 60
30 अंक
(क) भारतीय अर्थव्यवस्था एवं खुदरा व्यापार। (ख) भारतीय अर्थव्यवस्था में खुदरा व्यापार का महत्व। (ग) खुदरा व्यापार की सरकारी नीति। (घ) अन्तर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में खुदरा व्यापार का महत्व। (ङ) खुदरा व्यापार एवं अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग। (च) खुदरा व्यापार की चुनौतियाँ।
इकाई-2
30 अंक
(क) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का तात्पर्य। (ख) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का महत्व। (ग) भारत के खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश। (घ) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एवं सरकारी नीतियाँ। (ङ) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के पक्ष एवं विपक्ष में तर्क। पंचम प्रश्न-पत्र बहीखाता एवं लेखाशास्त्र
इकाई-1 विषय प्रवेश
पूर्णांक : 60
30 अंक
(क) पुस्तपालन एवं लेखाकर्म का इतिहास। (ख) पुस्तपालन एवं लेखाकर्म का अर्थ एवं दोनों में अन्तर। (ग) पुस्तपालन की प्रणालियाँ। (घ) लेखांकन की प्रथायें एवं अवधारणायें। (ङ) दोहरा लेखा प्रणाली का अर्थ, लक्षण एवं लाभ-दोष। (च) महत्वपूर्ण शब्दों का स्पष्टीकरण।
इकाई-2 जर्नल एवं जर्नल के विभाग
30 अंक
(क) जर्नल का आशय। (ख) लेखा करने का नियम। (ग) संयुक्त लेखे।
25 ङ194 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (घ) महत्वपूर्ण पुस्तक-रोकड़ पुस्तक, क्रय पुस्तक, विक्रय पुस्तक, क्रय वापसी पुस्तक, विक्रय वापसी पुस्तक, प्राप्त बिल पुस्तक, देय बिल पुस्तक एवं मुख्य जर्नल।
(ङ) बैंक सम्बन्धी लेन-देन। ट्रेेड खुदरा व्यापार खुदरा व्यापार निर्माताओं, उत्पादकों एवं थोक व्यापारियों को उपभोक्ता से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। खुदरा व्यापार का भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। खुदरा व्यापार में व्यापारी का उपभोक्ता से सीधा सम्बन्ध होने के कारण उपभोक्ता के रुचि, आय, फैशन आदि की जानकारी प्राप्त करके उत्पादकों को अपने उत्पाद का पैमाना निर्धारित करने में सहयोग प्रदान करता है और वहीं दूसरी ओर नये-नये उत्पाद की जानकारी अपने महत्वपूर्ण विक्रय कला कौशल के आधार पर उपभोक्ता तक पहुँचाता है और वस्तु की मांग उत्पन्न करता है। खुदरा व्यापार का प्रयोगात्मक स्वरूप
1-वस्तुओं का प्रभावी व आकर्षक ढंग से प्रस्तुतीकरण 2-विक्रयकला में दक्षता का ज्ञान देना- (क) ग्राहकों के प्रति अच्छा व्यवहार। (ख) विक्रय योग्य वस्तु की पूर्ण जानकारी देना। (ग) ग्राहकों द्वारा वस्तु के सम्बन्ध में मांगी गयी जानकारी का सम्यक उत्तर देना। 3-ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए उनकी सूची एवं ग्राहक कार्ड बनाना। 4-महत्वपूर्ण अवसरों पर उन्हें बधाई कार्ड भेजना। 5-वस्तु की मांग उत्पन्न करने के नये तरीकों की खोज करना। 6-छात्र-छात्राओं में बिक्रय कला का ज्ञान कराने के लिए विद्यालय स्तर पर स्टॉल लगाना। 7-छात्रों को वस्तु की सैम्पलिंग करके वस्तु के विषय में जानकारी देना। 8-वस्तु की लागत कम करने के लिये नये-नये तरीकों की खोज करना।
9-बिक्रय के सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए विद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन करना तथा वस्तु के प्रति रुचि उत्पन्न करने के लिए ग्राहकों की संगोष्ठी का आयोजन करने सम्बन्धी ज्ञान देना।
नोट :-
वर्ष के दौरान आन्तरिक एवं वा]य परीक्षा के अन्तर्गत छात्र-छात्राओं से निम्न कार्य कराये जायें- 1-छात्र-छात्राओं से प्रोजेक्ट कार्य कराकर उसकी फाईल बनायें। 2-चार्ट के माध्यम से प्रस्तुतीकरण करना। 3-छात्र-छात्राओं द्वारा मॉडल भी बनवाया जाये। 4-छात्र-छात्राओं से किसी नये उत्पाद के विज्ञापन की तकनीकियाँ प्रस्तुत करने की विधि पर डिबेट कराया जाये।
5-नये उत्पाद को बाजार में छात्र-छात्राओं से उपभोक्ताओं को जानकारी दिलवाना। 6-बाजार सर्वेक्षण कराकर उपभोक्ता की रुचि, आय, प्रचलित फैशन आदि की जानकारी प्राप्त करना।
आवश्यक उपकरण
1-कम्प्यूटर प्रोजेक्टर 2-चार्ट पेपर 3-फाइलें 4-सादा कागज 5-दैनिक उपभोग से सम्बन्धित प्रमुख उत्पाद।
टे्रड 38-सुरक्षा ( Security )
(कक्षा-11) उद्देश्य-
1-छात्र-छात्राओं में सुरक्षा चेतना एवं सुरक्षा के प्रति दायित्व बोध का विकास करना। 2-छात्र-छात्राओं मे सम्प्रेषण क्षमता एवं व्यक्तित्व का चतुर्दिक विकास करना। 3-प्राकृतिक आपदा एवं आपातकालीन स्थितिजन्य चुनौतियों से निपटने हेतु सक्षम एवं सेवायें अर्पित करने हेतु तत्पर बनाना।
4-उत्पादन/कार्यस्थलों में सुरक्षा परिवेश को बेहतर बनाकर जीवन स्थितियों (Living Conditions) को सुगम एवं जनहानि कम करना।
5-छात्र-छात्राओं में प्राथमिक उपचार का कौशल विकसित कर, दुर्घटना/आपातकाल मे जरूरतमंदों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने हेतु सक्षम बनाना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1956-सार्वजनिक/औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की समझ विकसित कर, कार्यस्थल की सुरक्षा को प्रभावी बनाने में योगदान देना तथा सुरक्षा के रोजगार क्षेत्र में छात्र/छात्राओं को अर्ह बनाना।
रोजगार के अवसर
1-पाठ्यक्रम में दक्षता हासिल करने के उपरान्त छात्र/छात्रायें सुरक्षा बल, सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं के रोजगार क्षेत्र में सेवायोजन प्राप्त कर सकेंगे।
2-आपदा प्रबन्धन, नागरिक सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार के साथ देश के नागरिक होने के दायित्व का निर्वहन भी कर सकेंगे।
प्रश्न-पत्र-प्रथम
आपदा प्रबन्धन
पूर्णांक : 60
20 अंक
1-आपदा : अर्थ, प्रकृति, कारण एवं प्रभाव 2-आपदा का वर्गीकरण : भूकम्प, बाढ़ एवं जलभराव, चक्रवात, सूखा और अकाल, भू तथा हिमस्खलन, आग और जंगल की आग, औद्योगिक और प्रोद्योगिकीय आपदा, महामारी। 40 अंक
प्रश्न-पत्र-द्वितीय सुरक्षा
पूर्णांक : 60 1-सुरक्षा : अर्थ, परिभाषा एवं कार्यक्षेत्र 10 अंक 2-सुरक्षा-वैश्विक परिवेश : क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा परिवेश एवं सुरक्षा के आसन्न खतरे 20 अंक 3-भारतीय सुरक्षा ः आन्तरिक एवं वा]य सुरक्षा परिदृश्य, भारतीय सुरक्षा के वा]य एवं आन्तरिक खतरे, सीमा विवाद। भारतीय सुरक्षा के आन्तरिक खतरे यथा नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, धार्मिक उग्रवाद, भारतीय सुरक्षा के वा]य खतरे यथा : राज्य प्रायोजित आतंकवाद, पाकिस्तान-चीन गठजोड़ से खतरा। 20 अंक 4-भारतीय सशस्त्र सेनाओं का संगठनात्मक ढाँचा ः स्थल सेना की शान्तिकालीन एवं युद्धकालीन विरचना, पदनाम। वायुसेना एवं नौसेना की कमाण्ड विरचना, पदनाम। 10 अंक
प्रश्न-पत्र-तृतीय
कार्य स्थलीय स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपाय
पूर्णांक : 60
कार्यस्थल (उद्योग, प्रतिष्ठान, बाजार, कार्यालय आदि) में स्वास्थ्य सम्बन्धी सामान्य जोखिम एवं खतरों की पहचान- 8 1-कार्यस्थल में सामान्य खतरों के कारण। 8 2-कार्यस्थल में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सम्बन्धित खतरे। 3-कार्यस्थल में तकनीकी खतरे। 8 4-औजारों एवं भारी मशीन, ऊँचाई, विद्युत उपकरणों, भार ढोने आदि से उपजने वाले खतरे। 9 5-प्राकृतिक आपदा, जलवायुवीय परिस्थितियाँ, सामाजिक एवं कानूनी कार्यवाही से सम्बन्धित खतरे। 9 6-उत्पादन, प्रौद्योगिकी, वित्त, बाजार एवं उपभोक्ता से सम्बन्धित खतरे। 9 7-आणविक, जैविक, रासायनिक, पर्यावरणीय, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक खतरों में अन्तर। 9
प्रश्न-पत्र-चतुर्थ
युद्ध में विज्ञान एवं तकनीकी
1-विज्ञान और समाज
पूर्णांक : 60
40 अंक
• विज्ञान, तकनीकी और समाज में अन्तर्सम्बन्ध : विभिन्न ऐतिहासिक परिपे्रक्ष्य में। • सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका : 2-आधुनिक युद्ध की प्रकृति : परम्परागत एवं अपराम्परागत युद्ध।
20 अंक
प्रश्न-पत्र-पंचम
नागरिक सुरक्षा
पूर्णांक : 60 1-नागरिक सुरक्षा : ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, स्थापना, उद्देश्य एवं रूपरेखा 30 अंक196 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 नागरिक सुरक्षा : क्रियाविधि
• आधुनिक युद्ध की प्रकृति का परिचय, हवाई हमले की चेतावनी, हवाई हमले से बचाव। • बम के प्रकार, प्रभाव एवं डिस्पोजल • आग : परिभाषा, सिद्धान्त एवं प्रकार • विभिन्न प्रकार की आग बुझाने के तरीके एवं प्रयुक्त उपकरण। • अग्निशमन सेवा, फायर टेण्डर एवं फायर कन्ट्रोल रूम
2-प्राथमिक चिकित्सा
30 अंक
• परिभाषा, प्राथमिक चिकित्सा के नियम, प्राथमिक चिकित्सा के गुण, विभिन्न प्रकार की युद्ध एवं शान्ति कालीन परिस्थितियों (दम घुटना, डूबना, जलना, कुत्ते का काटना, कीड़ों द्वारा डंक मारना, साँप का काटना, रक्त स्राव-बाहरी एवं आन्तरिक, लू लगना, मिरगी, बेहोशी एवं सदमा, विष पान पर, कृत्रिम श्वांस, कार्डियो पल्मोनरी रिसा) में प्राथमिक चिकित्सा।
• घाव, प्रकार एवं उपचार • हड्डी का टूटना : प्रकार, लक्षण एवं प्राथमिक उपचार प्रायोगिक
400 अंक
1-कार्यस्थल (मार्केट प्लेस, कार्यालय, उद्योग, प्रतिष्ठान, मुख्यालय आदि की सुरक्षा के आयाम, खतरे निवारण) पर केस स्टडी।
2-छात्र समूह द्वारा किसी निकटवर्ती कार्य स्थल पर जाकर वहाँ की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं एवं प्रयुक्त/अपेक्षित उपकरणों का अध्ययन, मूल्यांकन हेतु प्रस्तुत करना।
3-कार्यस्थल की सुरक्षा में प्रयुक्त उपकरण (सी0सी0टी0वी0, फिंगर प्रिंन्ट, स्कैनर, आइरिश स्कैनर, फेस स्कैनर) का अध्ययन एवं रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
4-निकटवर्ती कार्यस्थल (मार्केट प्लेस, कार्यालय, उद्योग, प्रतिष्ठान, मुख्यालय आदि) का भ्रमण कर भारी मशीन से उत्पन्न खतरों यथा स्वास्थ्य, सफाई, घातक तत्व का उत्सर्जन, अधिक ऊँचाई पर कार्य करने के जोखिम बिजली/आग से खतरों का अध्ययन एवं केस स्टडी।
5-प्राकृतिक विनाश, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक एवं विधिक कार्यवाही जनित खतरों का अध्ययन एवं आख्या।
6-उत्पादन, तकनीकी, वित्त, सामाजिक, बाजार एवं उपभोक्ता जनित खतरों का अध्ययन एवं केस स्टडी। उपकरण
| S.No. | Specifications | Rate | Supplier |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1. | Liquid Prismatic Compass MK-III A | Rs. 6.000 | Ordnance Factory Raipur, Dehradun, (Uttarakhand) |
| 2. | Toposheet (Gridded) | Rs. 75 | Surveyor General of India, Hathibarkala, Dehradun |
| 3. | CCTV | ||
| 4. | Finger Print Scanner | ||
| 5. | Irish Scanner | ||
| 6. | Face Scanner | ||
| 7. | Door Scanner | ||
| 8. | Fire Party : a. Pocket Line-12 b. Bucket-2 c. Helmet-16 d. Fireman Axe-2 | ||
| 9. | First Aid Kit | ||
| 10. | Blanket-3 | ||
| 11. | Stretcher-5 | ||
| 12. | Spillers-One set | ||
| 13. | Torch-1 | ||
| 14. | Tripod-12 | ||
| 15. | Extension Ladder 35'-One | ||
| 16. | Rope-200' One | ||
| 17. | Rope-100'-One | ||
| 18. | Wooden Shaft-2 | ||
| 19. | Iron Picket-2 | ||
| 20. | Hammer-1 | ||
| 21. | Pulley-1 (Single Sheaf) | ||
| 22. | Pulley-1 (Double Sheaf) | ||
| 23. | Snatch Clock-1 |
निम्नवत् होगा।
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 20
पंचम प्रश्न पत्र 60 20
(ख) प्रायोगिक
400
200
| S.N. | Practical | Marks Allotted |
| 1 | कार्यस्थल की विजिट, किसी एक समस्या/बिन्दु पर केस स्टडी अथवा आख्या तैयार करना। | 50 |
| 2 | रक्षा सेनाओ ं द्वारा प्रयुक्त यौद्धिक उपकरण/आपदा प्रबन्धन/नागरिक सुरक्षा में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की स्पाटिटंग। | 50 |
| 3 | नागरिक सुरक्षा/आपदा प्रबन्धन/प्राथमिक उपचार की मॉक ड्रिल या मॉक टेस्ट | 50 |
| 4 | मौखिकी | 50 |
| योग . . | 200 |
परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य होगा।
टे्रड-39 मोबाइल रिपेयरिंग
(कक्षा-11)
1. सैद्धान्तिक - 300 अंक 2. प्रयोगात्मक - 400 अंक
1- सैद्धान्तिक--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
प्रथम प्रश्न पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 20 पंचम प्रश्न पत्र 60 20
2-प्रयोगात्मक
400 (सत्रीय कार्य के अन्तर्गत प्रोजेक्ट समाहित है।)
मोबाइल रिपेयरिंग
उद्देश्य-शिक्षा के उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयोग व सुधार नवीन अवधारणाओं पर आधारित है जिसके परिणाम स्वरूप शिक्षा में समयानुकूल गुणात्मक एवं मात्रात्मक परिवर्तन सापेक्षिक अर्थ में आधुनिकता के प्रतीक रहे हैं। वर्तमान समय सूचना संचार का युग है, जिसमें मोबाइल रिपेयरिंग शिक्षा के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को198 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 रोजगार व स्वरोजगार की असीम सम्भावनाएँ प्र्रस्तुत व उपलब्ध करा रहा है। इस विषय के अध्ययन व प्रयोग से छात्र/छात्राएँ तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
• विद्यार्थियों में उद्यमिता के गुणों का विकास। • विद्यार्थियों में रोजगार/स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना। • मोबाइल शाप को मैनेज करना। • तकनीशियन के रूप में सफलता पूर्वक कार्य करना। • उच्चशिक्षा में इसका प्रयोग करना।
प्रथम प्रश्नपत्र
बेसिक इलेक्ट्रानिक (मोबाइल के सन्दर्भ में)
1. मोबाइल का परिचय
पूर्णांक : 60
30 अंक
मोबाइल का इतिहास, प्रमुख Features, LCD, Speaker, Microphone, Keypad, Sim Card, Memory Card, Charger, USB, Battery, Antenna, Vibrator मल्टीमीटर का प्रयोग। 2. इलेक्ट्रिकल के सिद्धान्त
30 अंक
विद्युतधारा, विभव, विभवान्तर, अर्थींग (Earthing), विद्युतवाहक बल, स्रोत (Source), Active and Passive Element, प्रतिरोध, संधारित्र, प्रेरकत्व (Inductor), प्रतिरोध और संधारित्र के समायोजन का समतुल्य मान, ओम का सिद्धान्त, किरचॉफ का सिद्धान्त (धारा और विभव के सन्दर्भ में)।
द्वितीय प्रश्नपत्र
Hardware (भाग-1)
1. मोबाइल का संचार माध्यम
पूर्णांक : 60
30 अंक
मोबाइल से मोबाइल का संचार, मोबाइल से लैण्ड लाइन का संचार, लैण्ड लाइन से मोबाइल का संचार, मोबाइल कम्पनी के नाम और मॉडल, IC के नाम की जानकारी और मोबइल परिपथ की जानकारी (SMD और BGA) और सामान्य कार्य प्रणाली। Assembling और Dissembling अलग-अलग मोबाइल की। 2. कम्प्यूटर के प्रारम्भिक प्रयोग मोबाइल पद्धति में
30 अंक
कम्प्यूटर की परिभाषा और उसके विभिन्न भागों की जानकारी, Block diagram On/Off Step of Computer, कम्प्यूटर को क्रियान्वित करना, कम्प्यूटर के माध्यम से Mobile के साफ्टवेयर को क्रियान्वित करना। आपरेटिंग सिस्टम और उसके प्रकार।
तृतीय प्रश्नपत्र
Hardware (भाग-2)
1. सामान्य कमियों को ढूँढ़ना व निस्तारण-1
पूर्णांक : 60
30 अंक
मोबाइल असेम्बलिंग और डिअसेम्बलिंग, वाह्य कम्पोनेंट का परीक्षण, रिपेयरिंग और component को बदलना (जैसे बैटरी, चार्जर, डिस्प्लेय, स्पीकर)। अल्ट्रासोनिक विधि द्वारा Printed Circuit Board की सफाई करना। कीपैड की रिपेयरिंग और बदलना (Keypad button not working, Hang, Few Specific button not working). 2. सामान्य कमियों को ढूँढ़ना व निस्तारण-2
30 अंक
मोबाइल के फीचर्स को सेट करना (जैसे-Menu Setting, Wallpaper Setting, Screen Saver setting, Key pad lock setting, Profile Setting, Security Setting, Network setting) Microphone, Vibrator, Antena, Ringer इत्यादि की जाँच रिपेयरिंग और उनका बदलना। डिसप्ले समस्या का विस्तारित अध्ययन।
चतुर्थ प्रश्नपत्र
Software
1. साफ्टवेयर
पूर्णांक : 60
35 अंक
परिचय, कार्य व प्रकार, मोबाइल में प्रयुक्त आपरेटिंग सिस्टम का परिचय, कार्य व प्रकार, अत्याधुनिक मोबाइल आपरेटिंग सिस्टम की जानकारी एप्लीकेशन साफ्टवेयर की जानकारी प्रकार व संक्षिप्त कार्य, utility software रिपेयरिंग साफ्टवेयर का परिचय, प्रकार व कार्य की जानकारी आपरेटिंग साफ्टवेयर व एप्लीकेशन साफ्टवेयर में अन्तर।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 1992. वायरस
10 अंक
मोबाइल वायरस क्या है? इसका कार्य व प्रकार एवं इसके लक्षण, वायरस से सुरक्षा, एण्टीवायरस का परिचय, प्रकार व कार्य अत्याधुनिक एण्टीवायरस की जानकारी। 3. फ्लैशर (Flasher)
15 अंक
फ्लैशर का परिचय, फ्लैशर के प्रकार, फ्लैशर के कार्य अत्याधुनिक फ्लैशर की जानकारी, व्यक्तिगत जीवन में फ्लैशर का उपयोग।
पंचम प्रश्नपत्र
अत्याधुनिक मोबाइल तकनीकी
1. ॅपतमसमेे का परिचय
पूर्णांक : 60
30 अंक
Wireless Network, Wireless Data, Wireless LAN, Movement from mobile to Mobile and hand over to other, Mobile की आवृत्ति की रेंजए, FDMA, TDMA और CDMA के सिद्धान्त और उसमें अन्तर GSM CDMA technique के service provider के नाम 4G, GPS और GPRS के सिद्धान्त। 2. Mobile Accessory की अत्याधुनिक तकनीक 30 अंक Blue tooth, Wi-Fi, Data transfer और कैमरा मॉडूयल की आधुनिक तकनीक, उनकी Functioning और प्रकार। Business Phones/PDA च्ीवदमे के दोष और उनका निराकरण Assembling और Dissembling of communicator and PDA phones.
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम की सूची
1. हार्डवेयर
1. मोबाइल के विभिन्न वोल्टेज का परीक्षण। 2. मल्टीमीटर, लॉजिक टेस्टर का परीक्षण करना। 3. पावर केबिल एवं सप्लाई का परीक्षण करना। 4. बेसिक सर्किट बोर्ड का परीक्षण करना। 5. डायोड एवं ट्राजिस्टर का परीक्षण।
2. साफ्टवेयर
1. नेटवर्क 2. सेट का एसेम्बल (संयोजित) करना। 3. ट्रबल शूटिंग व मोबाइल की मरम्मत करना। 4. सुरक्षा एवं रख-रखाव (विभिन्न प्रकार के ऐन्टीवायरस प्रोग्राम साफ्टवेयर लोड करना)
प्रोजेक्ट की सूची
साफ्टवेयर
1. विभिन्न प्रकार के आपरेटिंग सिस्टम का तुलनात्मक अध्ययन। 2. मोबाइल में प्रयुक्त किए जाने वाले टूल्स का प्रयोग। 3. मोबाइल में प्रयुक्त किए जाने वाले साफ्टवेयर का अध्ययन। 4. ड्राइवर व उनके प्रयोग।
हार्डवेयर
1. बेसिक सर्किट बोर्ड का अध्ययन करना। 2. मल्टीमीटर व लॉजिकटेस्टर की कार्यविधि। 3. डायोड एवं ट्रांजिस्टर का अध्ययन करना। 4. विभिन्न प्रकार के सोलडरिंग आइरन का अध्ययन करना। 5. विभिन्न प्रकार के बैटरी व उनकी कार्य क्षमता।
नोट :-
उपरोक्त प्रोजेक्ट के अतिरिक्त विषय से सम्बन्धि अध्यापक/अध्यापिकायें नए प्रोजेक्ट भी जोड़ सकते हैं।
Mobile Repairing Tools
1. Screw Driver (Kit) 2. Multi meter 3. Soldering Iron 4. Magnifier 5. Hot Air Gun/SMD 6. Soldering Paste200 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 7. Chimti 8. Brush 9. Faceplate 10. Suction Cup 11. Connector 12. Cable 13. Block Diagram of Different Mobile Set 14. Books (Mobile Repairing & Maintenance) 15. Computer System (For Installing/Downloading Software, Ringtone, Sing tone & Driver etc.) 16. Cleanner 17. Nose Plass 18. Plucker.
टे्रड-40-पर्यटन एवं आतिथ्य
(कक्षा-11)
300 अंक 400 अंक
1. सैद्धान्तिक 2. प्रयोगात्मक 1. सैद्धान्तिक
2. प्रयोगात्मक
प्राप्तांक प्रथम प्रश्न पत्र 60 अंक द्वितीय प्रश्न पत्र 60 अंक 60 अंक तृतीय प्रश्न पत्र 60 अंक चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 अंक पंचम प्रश्न पत्र 400 अंक
प्रथम प्रश्नपत्र
पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग-परिचय
An Introduction to Tourism & Hospitality Industry पूर्णांक : 60 1. पर्यटन का उद्भव तथा विकास। प्राचीन भारत में पर्यटन। औद्योगिकरण तथा पर्यटन में
30 अंक सम्बन्ध। आधुनिक पर्यटन की स्थिति तथा सम्भावनाएँ। Growth and Development of Tourism. Tourism in Ancient India. Relationship between Tourism and Industrialisation. Status and prospects of Tourism in Modern India.
2. पर्यटन की महत्ता-सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक गुणात्मक प्रभाव। 30 अंक पर्यटन की आधारभूत संरचना-प्रकार, रूप एवं महत्व। पर्यटन तथा पर्यावरण। Significance of Tourism-Socio-cultural and Economic. Multiplier Effect Tourism Infrastructure-Types, Forms and Significance Tourism and Environment.
द्वितीय प्रश्नपत्र
यात्रा एवं पर्यटन में आधार पाठ्यक्रम
30 अंक Fundamentals of Travel & Tourism पूर्णांक : 60 1. पर्यटन की अवधारणा, पर्यटन परिघटना, परिभाषा, पर्यटक, सैलानी तथा यात्रा में अन्तर, पर्यटन की प्रकृति (स्वरूप) तथा विशेषतायें, प्रकार-इन बाउन्ड, आउट बाउन्ड, घरेलू, अन्तर्राष्ट्रीय, एफ0आई0टी0 (FIT) और जी0आई0टी0 (GIT) Tourism-Concept, Phenomenon, definition, Tourist, Excursionist, travelers difference, Nature and characteristics of Tourism. Types- Inbound, Outbound, Domestic, International, Free Individual Tourist (Fit), Group Inclusive Tourist (GIT).
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 2012. पर्यटन के आधार, प्रभावी कारक, उत्प्रेरक, आधार क्षमता, पर्यटन के घटक, पर्यटन माँग। 30 अंक Basis of Tourism, Enfluencing Factors, Motivating Factors, Carrying capacity, Components of Tourism, Tourism demand.
तृतीय प्रश्नपत्र
यात्रा एवं पर्यटन : व्यवसाय तथा संचालन
Travel and Tourism : Business & Operation पूर्णांक : 60 1. भारत में पर्यटन संसाधन, पर्यटन उत्पाद की अवधारणा, परिभाषा, प्रकृति, लक्षण तथा सम्भावनाएँ। उपभोक्ता वस्तुओं तथा पर्यटन उत्पाद में अन्तर। उत्तर प्रदेश में पर्यटन संसाधनों की समीक्षा तथा उपलब्धता (प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक, साहसिक तथा कृत्रिम आदि) उत्तर प्रदेश के पर्यटक सर्किट। 30 अंक Concept of Tourism Resources and Tourism Products, Definition, Nature, Characteristics and Future Prospects in India. Evaluation and Availability of Tourism Products in Uttar Pradesh (Natural, Cultural, Historical, Religious Adventure and Artificial Tourism Products). Tourist Circuits of Uttar Pradesh.
2. टे्रवेल एजेन्सी/एजेन्ट तथा टूर आपरेटर का संक्षिप्त परिचय, कार्य तथा संगठनात्मक ढाँचा। किसी राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय टे्रवेल एजेन्सी की केस स्टडी। इन्टरनेट तथा कम्प्यूटरीकरण का पर्यटन पर प्रभाव तथा टे्रवेल एजेन्सी में उपयोगिता। ऑनलाइन टे्रवेल एजेन्सी की धारणा। किसी टे्रवेल एजेन्सी की मान्यता हेतु अपनायी जाने वाली प्रक्रिया का अध्ययन। 30 अंक Introduction to Travel Agency/Agents and Tour operators and its organizational Structure,. Case Study of any National/International Travel Agency. Impacts of Internet and Computerisation on Tourism Business and its utility for a Travel Agency, Concept of Online Travel Agencies. Study of the Procedure for Approval of the Travel Agency.
चतुर्थ प्रश्नपत्र
(अ) फ्रंट ऑफिस-Front Office
1- Introduction to Front Office. फ्रंट ऑफिस का परिचय
पूर्णांक : 60 20 अंक • Organization of Front Office.फ्रंट ऑफिस का संगठन • Layout & Equipment of Front Office. फ्रंट ऑफिस का खाका व विभिन्न सामग्री। • Use of Computers and their application. कम्प्यूटर का प्रयोग व अनुप्रयोग। • Duties and Responsibilities.कार्य एवं जिम्मेदारियाँ • Qualities of Front Office staff- फ्रंट ऑफिस स्टाफ के गुण।
2. Type of Plans (Meals/Room)- प्लान के प्रकार (मील्स/रूम) 20 अंक • Reception-रिसेप्शन (स्वागत कक्ष) • Reservation, Mode, Source, Steps, group reservation, Discount-आरक्षण, मोड, स्त्रोत, चरण, समूह, आरक्षण, छूट।
• Registration.पंजीकरण। • Guest History folio- अतिथि इतिहास, फोलियो। • Types of register, forms and records. रजिस्टर के प्रकार, फॉर्म, रिकार्ड
3. Guest cycle (Pre arrival, Arrival, stay, Departure, Post Departure)- अतिथि चक्र (आगमन से पहले, आगमन, ठहरना, प्रस्थान, प्रस्थान के उपरान्त) 20 अंक • Bell Desk: (Bell Boy, Concierge, Paging System, Left Baggage, Scannty Baggage.बेल डेस्कः (बेल ब्वॉय, कॉन सियार्ज, पेजिंग सिस्टम, छूटा, सामान, अल्प सामान)।
• Communication : Telephone Etiquette, English speaking, Personality Development (संचार, टेलीफोन शिष्टाचार, अंग्रेजी बोलना, व्यक्तित्व विकास।
26 ङ202 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्नपत्र
(A) Food & Beverage Service
पूर्णांक : 60 1. Introduction to food & Beverage Service. खाद्य एवं पेय सेवा का परिचय 12 अंक • Organization Chart.संगठनात्मक ढाँचा का लेखा चित्र • Attributes, Etiquettes and Grooming.विशेषता, शिष्टाचार और ग्रूमिंग • Service Equipments : (Liven, Furniture, Chinaware, Glassware, Flatware, Shapes and sizes)- सेवाओं में आनेवाले उपकरण : (लिनन, फर्नीचर, चायनावेयर, ग्लासवेयर, फ्लैटवेयर, आकार व प्रकार) 2. Mis-en-place, Mis-en-scene. मीसाँ प्ला, मीसाँ सा।
12 अंक • Types of Restaurants.रेस्त्रां के प्रकार • Lay out of Restaurants-रेस्त्रां का ले आउट • Types of menu.मेन्यू के प्रकार • Types of service. सर्विस के प्रकार
3. French Classical Menu (11 Course)- फ्रैन्च क्लासिकल मैन्यू (ग्यारह कोर्स) 12 अंक
24 अंक • Types of Meals-मील्स के प्रकार • Still Room & Silver Room.स्टिल रूम एवं सिल्वर रूम • Kitchen Stewarding.किचन स्टीवर्डिंग 4. Bar Operation. बार ऑपरेशन
• Classification of Beveage.पेय पदार्थों का वर्गीकरण • Spirits- स्प्रीट • Cocktails and Mocktails.कॉकटेल व मॉकटेल • Wine- वाइन • Wine Service.वाइन सेवा • Accompainments-सह भोज्य-पदार्थ • Event Management.इवेन्ट मैनेजमेन्ट • F & B Service Terminology.एफ एण्ड बी शब्दावली
Instructions for Practical
Each student shall go on the Industrial job training in an industry like hotel, air lines, travel agencies, museaum Govt. Tourism Office etc for 4 to 6 weeks. The student will get a certificate from training providers and will prepare a detailed Report of training which will be evaluated for Max 50 Marks by external examiner in the presence of Internal examiner Viva Voce on the job training report will be for max 50 marks and that will be conducted by External Examiner in the presence of Internal Examiner.
Practical on the spot on hotel/Catering/Tourism etc. will be carried out for max 100 marks by external examiner.
For Internal examination-5 periodical Tests/Practical/assignments etc. may be held as per college convenience at certain regular interval for max 20 Marks each, total 100 marks. While a detailed dissertation work assigned by Internal Examiner will be submitted by students and it will be evaluated for max 100 marks.
Summary of Practical Exam
External - Industrial Training Report - 50
Exam - Viva on Report - 50
On the spot Practical - 100
Total = 200
Internal Periodical Test 5 @ 20 marks - 100
Exam Dissertation work - 100
Total= 200
Suggestions for Practical/Assignment
Dissertation work may be done on the theme of Govt. policies related with hotel, airlines, travel trade etc. Museums, Fort, Palaces, tourist attractions, fairs & Festival, Kumbha Mela, Ganga, Yamuna,भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 203 Golden Triangle, World Haritage Sites, Histroical monuments, Heritage Hotels, Amusement Parks, Wild life National Parks, Bird Sancturary, Sport Tourism (Common wealth Games, formula 1 Race), Olympic etc. Other on the spot practical/Test may include Practicals related with Food production, service, Food and Bevarage, House keeping or making of tourism brouchures (Graphic & hand made), any model or exhibition or chart, photography, videography (Audio visual) presentation of tourism product, event, activities etc.
प्रयोगात्मक कार्य
[A] Front Office (फ्रंट ऑफिस)
1. फोन द्वारा रूम का आरक्षण करना। 2. पंजीकरण के दौरान अतिथि से बातचीत करना। 3. विशेष परिस्थिति का सामना करना। 4. दुर्घटना परिस्थिति का सामना करना। (अ) मृत्यु के दौरान (ब) बीमारी के दौरान (स) आराम के समय 5. आरक्षण के प्रमुख चरण। 6. अतिथि की शिकायतों को निपटाना।
[B] Food & Baverage Service
1. किसी रेस्टोरेन्ट में गेस्ट का स्वागत करना। 2- Mis-en-sence rFkk Mis-en-Place 3. टेबल सेट-अप करना (ब्रेक फास्ट के लिए)
(अ) कॉन्टिनेन्टल (ब) इंग्लिश
4. टेबल सेट-अप करना
(a) Table-de-Kode (b) A-La-cart
5. रेस्टोरेन्ट में Order लेना। 6. K.O.T. तथा B.O.T. काटना 7. एकम्पनीमेन्ट को प्रस्तुत करना। 8. वाइन सर्विस करना। 9. ब्रेक फास्ट के लिए सर्विस टे्र तैयार करना। 10- Room Service का Order लेना। 11. Billing Procedures 12. बूफे सेटअप करना। 13. नैपकीन के विभिन्न प्रकार के फोल्ड बनाना।
उपकरणों की सूची
[A] FOOD PRODUCTION
1. Three burner cooking range 2. Chinese cooking range 3. Tandoor 4. Single burner cooking range 5. 3 or 4 Stainless Steel Tables 6. A Salamander 7. A Griller 8. A Toaster 9. An Oven
10. Chopping Boards 11. Different Types of Knives
[B] FOOD & BEVERAGE SERVICES
1. 3 or 4 Restaurant Table Lay out with chair, Table Cloths, Naprons, serviette, Cruet set, Bud Vases.
2. Different types of Crockery like full plates, Quarter plates, Dessert plates, Cups & Saucers, Cutler like AP Spoon, AP knives, AP Forks, Tea Spoon, Dessert spoons & Dessert Forks, Glass wares like Water Goblets, Hi-Balls, Juice Glasses, Beer Goblet, Pilsner, Roly Poly, OTR Glass, Brandy Balloon, tom Collins, Red Wine Glass, White wine Glass, Champagne Sauceer, Champagne Tulip, etc.
204 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43. A side station. 4. Some bottles of wines, scoeches, Rum, Gin, Vodka and Beer (for demo purpose and to show the service styles)
5. A peg measures 6. A wine opener, bottle openers
[C] FRONT OFFICE
1. 5 wall clocks for different country timings 2. A reception counter where students can stand keep the front office documents. 3. A computer.
[D] HOUSE KEEPING
1. Some brooms and brushes. 2. Mops with handle. 3. Vacuum cleaner. 4. Some detergents and chemicals for washing and cleaning purpose. 5. Maids trolley for housekeeping training and to keep the items. 6. Glass cleaner/Toilet Cleaner things.
[E] HOSPITALITY, TRAVEL & TOURISM
1. Map-India world and local maps. 2. Related Guide Book. 3. Camera-still and Video. 4. List and photo of fort. palace, historical monuments, National park and bird sanctuary.
व्यवसायिक वर्ग अधिकतम अंक : 400 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 200 समय निर्धारित अंक (क) दो बड़े प्रयोग-बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2×40) 80 अंक (ख) दो छोटे प्रयोग-छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2×20) 40 अंक 40 अंक (ग) मौखिकी : प्रयोगों की सूची के आधार पर (घ) प्रैक्टिकल नोटबुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन 40 अंक सत्रीय कार्य 100 अंक सत्रीय कार्य विभाजन : 10 अंक (1) उपस्थिति अनुशासन 20 अंक (2) लिखित कार्य (3) दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिए जायेंगे (5×10) 50 अंक (4) मौखिकी 20 अंक (ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं शैक्षणिक भ्रमण द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक
(41) ट्रेड-IT/ITes–आई0टी0/आई0टी0ई0एस0
(कक्षा-11) उद्देश्य- आज के विज्ञान जगत में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का अभूतपूर्व स्थान है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयाम सामाजिक रूप से प्रतिस्थापित हो चुके हैं। जैसे-मोबाइल, इण्टरनेट आदि। देश को डिजिटल इंडिया का स्वरूप देने में इनका विशेष योगदान अवश्यम्भावी है। सूचना प्रौद्यागिकी मूलतः व्यवहारिक ज्ञान पर आधारित है एवं इसके अनेकों उपयोग विश्वव्यापी है। रोजगार के अवसर- सूचना एवं प्रौद्यागिकी पाठ्यक्रम के माध्यम से, समाज के प्रत्येक वर्ग को रोजगार एवं स्वरोजगार की असीमित सम्भावनायें बन सकती हैं। इस विषय के अध्ययन व प्रयोग से छात्र/छात्राएं तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उदाहरणस्वरूप-साफ्टवेयर कम्पनियों में तकनीकी सदस्य के रूप में योगदान देना, बिजनेश मार्केटिंग में रोजगार के अवसर इत्यादि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 205पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा-
300
100
20 20 20 20 20
सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक 1-प्रथम प्रश्न-पत्र 60 2-द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 3-तृतीय प्रश्न-पत्र 60 4-चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 5-पंचम प्रश्न-पत्र 60
प्रयोगात्मक- कुल 400 अंकों की होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- टीप- परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम् उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक ळें
प्रथम प्रश्न-पत्र
सूचना प्रौद्यागिकी पूर्णांक-60
20 अंक
20 अंक
20 अंक
इकाई-1 सूचना प्रौद्योगिकी का परिचय-प्रौद्यागिकी की मूलभूत विचारधारा, डाटा प्रोसेसिंग, डाटा, सूचना, ज्ञान। कम्प्यूटर का परिचय ः वर्गीकरण, इतिहास, कम्प्यूटर के प्रकार, कम्प्यूटर तंत्र के तत्व, कम्प्यूटर तंत्र के रेखाचित्र, विभिन्न इकाई का परिचय, हार्डवेयर, सी0पी0यू0, मेमोरी, इनपुट एवं आउटपुट, डिवाइस, सहायक मेमोरी डिवाइस, साफ्टवेयर-सिस्टम एवं एप्लिेकेशन, साफ्टवेयर, यूटिलिटी पैकेज, कम्प्यूटर तंत्र का वर्गीकरण। इकाई-2 सूचना प्रौद्यागिकी का प्रयोग-घरेलू, शिक्षा, प्रशिक्षण, मनोरंज, विज्ञान इत्यादि। सूचना प्रौद्योगिकी के यंत्र का परिचय, आपरेटिंग सिस्टम, प्रोग्रामिंग भाषा, फीचर एवं ट्रेण्ड्स (Feature and Trends) इकाई-3 वर्ड प्रोसेसिंग, बेसिक इडिटिंग, फारमेटिंग, कापिंग एवं मूविंग टेक्सट एवं आब्जेक्ट, इडिटिंग फीचर्स पैराग्राफ फारमेटिंग, टेबल लिस्ट, पेज फारमेटिंग, ग्राफ, चित्र एवं टेबल कन्टेन्ट को इन्सर्ट करना, उन्नत टूल्स।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
IT इनेबल सर्विसेस पूर्णांक-60
10 अंक
इकाई-1 IT इनेबल सर्विसेस का परिचय, चिकित्सीय, लीगल, ई-बैंकिंग, ई-बिजनेस, मेडिकल ट्रान्सक्रिप्शन एवं मेडिकल एप्लिकेशन।
30 अंक
इकाई-2 डाटा बेस प्रबंधन सिस्टम-मूलभूत विचारधारा, डाटाबेस एवं डाटाबेस उपभोक्ता, डाटा बेस की विशेषताएं, डाटाबेस तंत्र,, विचारधारा एवं आर्किटेक्चर, डाटा माडल्स, स्क्रीमास एवं इन्सटेन्सेज, सब स्कीमास, डाटा डिक्शनरीज। इकाई-3 20 अंक रिलेशनल डाटाबेस भाषाएं (DDL, DML, व्यूज] bfEcMsM SQL) SQL में डाटा की परिभाषा SQL में व्;w एवं क्वेरीज] SQL में कन्सट्रेन्डस एवं इन्डेक्सेस।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(वेब प्रोग्रामिंग) पूर्णांक-60
20 अंक
20 अंक
इकाई-1 एल्गोरिथम एवं इसकी विशेषताएं, डिसीजन एवं लूप्स का प्रयोग करते हुए एल्गोरिथम बनाना, एल्गोरिथम को विकसित करना, विभिन्न प्राब्लम्स के लिए फ्लोचार्ट खींचना, प्राब्लम्स साल्विंग विधि। इकाई-2 आब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंग OOP का परिचय, OOP के आधारभूत तथ्य, OOP के मूलभूत गुण, OOP के लाभ, OOP के अनुप्रयोग।
206 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 420 अंक
इकाई-3 जावा का परिचय, जावा प्रोग्रामिंग : डेटा के प्रकार, वेरिएबुल, कान्स्टेन्ट आपरेटर्स, कन्ट्रोल स्टेटमेन्ट्स (IG, Switch, loops), की बोर्ड से इनपुट को कैसे पढ़ना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
IT बिजनेस एप्लिेकेशन पूर्णांक-60
20 अंक
20 अंक
20 अंक
इकाई-1 ई-कामर्स का परिचय, ई-कामर्स की विचारधारा, ई-कामर्स का विस्तृत इतिहास, ई-कामर्स का प्रभाव ई-कामर्स लाभ एवं सीमाएं, ई-कामर्स का वर्गीकरण, अन्तर संगठित ई-कामर्स, वाह्य संगठित, ई-कामर्स, बिजनेस से बिजनेस, ई-कामर्स, बिजनेस से कस्टमर, ई-कामर्स, मोबाइल कामर्स इत्यादि, ई-कामर्स के अनुप्रयोग। इकाई-2 ई-कामर्स की संरचना, ई-कामर्स का प्रारूप, I-Way विचारधारा, Ec इनैब्लर्स, इंटरनेट संरचना, TCP/IP शूट कलाइंट/सर्वर माडल, वर्ड वाइड वेब के आर्किटेक्चरल कम्पोनेन्ट में संशोधन, प्राक्सी सर्वर्स, इन्टरनेट काल सेण्ट्रर्स, ई-कामर्स के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, फायर वाल्स। इकाई-3 इलेक्ट्रानिक भुगतान, मनी का परिचय, नेचर आफ मनी, इलेक्ट्रानिक भुगतान क्षेत्र का विवरण, पूर्वकालिक भुगतान उपकरण की सीमाएं, 203 इलेक्ट्राानिक भुगतान क्षेत्र के तथ्य, भुगतान की महत्वपूर्ण विधियां, इलेक्ट्रानिक भुगतान तंत्र की आवश्यकताएं, आनलाइन भुगतान क्षेत्र, क्रेडिट/डेबिट कार्ड से भुगतान।
पंचम प्रश्न-पत्र
(आधुनिक संचार तंत्र) पूर्णांक-60
20 अंक
20 अंक
20 अंक
इकाई-1 इन्टरनेट, वेब के विकास, वेब को शासित करने हेतु प्रोटोकाल, HTTP एवं URL क्लाइंट सर्वर तकनीक का परिचय, वेबसाइट्स वेब पेज एवं ब्राउजर्स वेब पे के प्रकार, ब्राउजर्स के प्रकार। इकाई-2 ई-मेल का अनुप्रयोग, चैट रूम्स, न्यूज फोरम, सोशल नेटवर्किंग माध्यम, गुगल मानचित्र, GPै तकनीकी एवं इसके अनुप्रयोग। इकाई-3 वेब निर्माण एवं मार्कअप भाषाएं : टेक्सट एवं HTML, HTML डाक्ूयमेन्ट फीचर, HTML में डाक्यूमेन्ट्स स्ट्रक्चरिंग, HTML में स्पेशल टैग्स DHTML के सहायता से अस्थायी वेब पेज बनाना।
प्रयोगात्मक
400 अंक
1 Word का विस्तृत प्रयोगात्मक अध्ययन सटल वेब साइट बनाना और उसे प्रदर्शित करना।
IT/ITes
उपकरणों की सूची
हार्डवेयर-
• कम्प्यूटर • प्रिन्टर • स्कैनर • माडम • इन्टरनेट कनेक्शन • UPS
साफ्टवेयर-
• HTML और लाइनेक्स आपरेटिंग सिस्टम • MS-Office • JAVA • HTML इत्यादि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 207(42) ट्रेड-हेल्थ केयर
स्वास्थ्य देखभाल
(कक्षा-11)
प्रथम प्रश्नपत्र
चिकित्सालय प्रबन्धन प्रणाली
पूर्णांकः 60 अंक
10 अंक
इकाई-1 • चिकित्सालय में रोगियों की भर्ती में सामान्य ड्यूटी सहायक की भूमिका और
उत्तरदायित्व।
• मरीज के भर्ती होने के फार्म(प्रपत्र) को भरने का ज्ञान।
इकाई-2
10 अंक
• मरीज और सम्बन्धित व्यक्तियों से मरीज के विषय में जानकारी प्राप्त करने
की प्रभावी विधियां।
• गर्भावस्था के मामलों में जानकारी प्राप्त करने का ज्ञान।
10 अंक
इकाई-3 • मरीज के शारीरिक परीक्षण का विस्तार में ज्ञान।
• लम्बाई, भार, Pulse (नब्ज) रक्तचाप, तापमान, श्वसन दर का सामान्य
परीक्षण।
• निरीक्षण की तकनीकी द्वारा विशिष्ट शारीरिक भागों का परीक्षण जैसे- छाती,
उदर
➢ Palpation (पैलपेशन) - छू के देखना ➢ Percussion (परक्यूशन) - उंगलियों से ➢ Auscultation (असकुलेटेशन) - स्टेथोस्कोप द्वारा
10 अंक
इकाई-4 विभिन्न प्रकार के नमूनों जैसे- रक्त, मूत्र, मल, मवाद/फाहा(स्वैब), थूक को
एकत्र करने की तकनीकी
10 अंक
इकाई-5 मरीज को वाह्य रोगी विभाग Out Patient Department (ओ0पी0डी0) से रोगी विभाग In Patient Department (आई0पी0डी0) भेजने का ज्ञान।
निरीक्षण के लिये पहिया कुर्सी(व्हीलचेयर), ट्राली, एम्बूलेन्स से ले जाना।
10 अंक
इकाई-6 • वार्ड में मरीज को आरामदायक स्थिति में रखने के लिये बिस्तर की विभिन्न
स्थितियों का वर्णन।
• बिस्तर तैयार करने की विधियां। • मरीज के कमरे में रद्दी कागज टोकरी के महत्व का वर्णन। •
द्वितीय प्रश्नपत्र
दवा देने के तरीके और उनका प्रबन्धन
पूर्णांकः 60 अंक
10 अंक
इकाई-1 • रोगी के शरीर में दवा पहुचाने के विभिन्न मार्ग।
• मौखिक, IM, IV, राइलिस ट्यूब, मलाशय द्वारा (Per rectal), अधर-त्वचीय (Subcutaneous,) अन्र्तत्वचीय ( Intradermal)।
• नाक, पेट, छोटी आत (enteral) से दवा देने का
महत्व।
इकाई-2
10 अंक
• विभिन्न पारम्परिक विधियों से दवा देने के लाभ एवं
हानियां।
• MDI, DPI तथा दवा देने के नये (novel)
तरीको का ज्ञान।
208 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4• दवा देने के पारत्वचीय (transdermal) नियंत्रित
(controlled) तरीको तथा परासरणीय दाब नियंत्रण (osmotic pressure control) का ज्ञान।
10 अंक
इकाई-3 • दवाओं के विभिन्न समूहो को सूचीबद्ध करना।
• दवाओं के लेबल पर लिखे निर्देशों को पढ़ने का
ज्ञान।
10 अंक
इकाई-4 विभिन्न प्रकार के एलर्जी का ज्ञान।
दी गई दवाओं का रिकार्ड रखने का कानूनी पक्ष।
05 अंक
इकाई-5 मेडिकेशन चार्ट में प्रयुक्त मानक संक्षिप्त रूपों (abbreviations) का ज्ञान।
15 अंक
इकाई-6 • दवाओं का निस्तारण करने की तकनीके।
• दवा देने में भूल को नियंत्रित करने के निरोधक
उपाय।
• संक्रमण को नियंत्रित करने के उपाय।
तृतीय प्रश्नपत्र
सूक्ष्मजीव विज्ञान, रोगाणुनाशन तथा विसंक्रमीकरण
पूर्णांकः 60 अंक इकाई-1 10 अंक • विभिन्न प्रकार के विसंक्रमीकरण।
• संगामी अथवा समवर्ती (कानकरेन्ट) और आखिरी(ट्रर्मिनल) विसंक्रमीकरण के बीच अन्तर।
इकाई-2
10 अंक
• सुंगधित करण(फ्यूमिगेशन) की प्रक्रिया का वर्णन। • सल्य क्रिया कक्ष में संक्रमण नियंत्रण की आदर्श स्थिति। • सल्य क्रिया कक्ष में सामान्य ड्यूटी सहायक के कत्र्तव्य।
10 अंक
इकाई-3 • स्टेन्स (दागों) को हटाने और अस्पताल के विभिन्न भागों की सफाई की विधियां।
• अस्पताल में रबड़ और प्लास्टिक के औजारो के देखभाल की विधियां।
10 अंक
इकाई-4 अपुतिता (Asepsiेs) और विपरीत पुतिता (Antisepsisे)।
संक्रमण को रोकने में हस्त स्वच्छता का महत्व और विधियां।
10 अंक
इकाई-5 संक्रमण फैलने की विधियां- ➢ वायु द्वारा ➢ जल द्वारा ➢ वाहक द्वारा (Vector Borne) ➢ प्रत्यक्ष सम्पर्क फैलाव (संक्रमण) क्रॉस (Cross) संक्रमण का महत्व ।
10 अंक
इकाई-6 विभिन्न प्रकार की पटि्टया तथा उन्हें बाधने की विधियां।
पट्टी बाधने के सामान्य नियम।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 209चतुर्थ प्रश्नपत्र
आपातकालीन सेवाओं का संचालन
पूर्णांकः 60 अंक 10 अंक इकाई-1 • आपातकालीन भर्ती प्रक्रिया और इसमे सामान्य ड्यूटी सहायक क
• आपातकालीन कक्ष से मरीज को मुक्त करना।
(discharge)
इकाई-2
• सामुहिक आपातकालीन भर्तियों की स्थिति में निर्देश एवं
03 अंक
नियंत्रण तन्त्र। ( Command and Control System) का महत्व।
Triage तथा Triage में वर्ण कूट (Colour Coding) क
09 अंक
महत्व।
सफेद - बचाया ही नही जा सकता। हरा - तत्काल चिकित्सा/ध्यान देने की आवश्यकता नही
है।
पीला - गम्भीर, तत्काल चिकित्सा/ध्यान देने की
आवश्यकता है।
लाल - अति गम्भीर, तत्काल ICU चिकित्सा की
आवश्यकता।
08 अंक
इकाई-3 • अस्पताल के बाहर तथा अन्दर मरीज को लाना- ले जाना।
• लाने- ले जाने के दौरान मरीज की देखभाल।
10 अंक
इकाई-4 • स्थिरीकरण (Immobilzation) की विभिन्न विधियां-
खपच्ची-फट्टी (Splint) त्वचा संकर्षण (Skin Traction) कंकाल संकर्षण (Skeletal Traction) मेरूदण्ड दबाव हटाना (Spinal decompression)
10 अंक
इकाई-5 प्रसूति में आपातकालीन स्थितियों के प्रकार तथा उनकी पहचान एवं प्रबन्धन मे सामान्य ड्यूटी सहायक की भूमिका। रक्तस्राव, आकस्मिक दौरे (Seizures) , झटका (Shock) आदि
10 अंक
इकाई-6 बच्चों से सम्बन्धित आपातकालीन स्थितियां।
- घुटन (Suffocation) - श्वास रोधन (Choking) - मुॅह, गला, नाक, कान, ऑख में कोई बाहरी वस्तु डाल लेना।
पंचम प्रश्नपत्र फिजियोथेरेपी पूर्णांकः 60 अंक इकाई-1
10 अंक
• फिजियोथेरेपी की मूलभूत सिन्द्धान्तों का ज्ञान। • मरीज की विभिन्न स्थितियों में फिजियोथेरेपी की आवश्यकता
की पहचान।
27 ङ210 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
इकाई-2 • अच्छे शरीर तन्त्र की तकनीके एवं सिद्धान्त। 10 अंक
इकाई-3 10 अंक
• व्यायाम के उद्देश्य और उनका महत्व।
• शारीरिक व्यायाम करते समय बरती जाने वाली सावधानियॉ।
10 अंक
इकाई-4 • सक्रिय गति विस्तार(Active Range of Motion-Rom)
व्यायाम का ज्ञान। • सक्रिय त्वउ व्यायाम के चयन के मानदण्ड तथा प्रकार।
10 अंक
इकाई-5 • निष्क्रिय गति विस्तार व्यायाम का ज्ञान।
• निष्क्रिय त्वउ व्यायाम कराते समय रखी जाने वाली सावधानियॉ।
10 अंक इकाई-6 • श्वसन और खांसने सम्बन्धी व्यायामों का ज्ञान।
• छाती और उदर सम्बन्धी बीमारियाें में खतरा और खांसने सम्बन्धी व्यायामों का महत्व।
प्रायोगिक कार्य पूर्णांक-400
1- मरीज भर्ती फार्म बनाना। 2- मरीज के परीक्षण का प्रायोगिक प्रदर्शन।
3- रक्त, मूत्र, मल के नमूनों को एकत्रित करने की आवश्यक शर्तों का चित्र सहित चार्ट तैयार करना। 4- मरीज का बिस्तर बनाने का प्रायोगिक प्रदर्शन। 5- रोल प्ले- भर्ती के समय सामान्य ड्यूटी सहायक कैसे मरीज एवं उसके सम्बन्धित के साथ अन्तर्क्रिया करता है।
6- मरीजो के कक्ष में सामान्य मरीजों एवं गम्भीर मरीजो के लिए आवश्यक वस्तुओं का चार्ट तैयार करना।
7- मरीज को दवा दिये जाने के विभिन्न प्रकारो का चार्ट/फाइल तैयार करना। 8- विभिन्न प्रकार की औषधियों की उदाहरण सहित सूची(लिस्ट) तैयार करना। 9- मेडिकेशन चार्ट में, उनके पूर्ण रूप सहित आदर्श संक्षिप्त रूप (Abbreviations) की लिस्ट बनाना। 10- अस्पताल में प्रयोग किये गये विभिन्न प्रकार के कीटाणु नाशकों की परियोजना(प्रोजेक्ट)/चार्ट बनाना।
11- चित्रों का प्रयोग करके संक्रमण के प्रसार की विधियों का वर्णन। 12- शल्यक्रिया कक्ष विसंक्रमणीकरण की विभिन्न विधियों के निरीक्षण के लिए नजदीकी अस्पताल में जाना।
13- घाव की पट्टी करने का प्रायोगिक प्रदर्शन। 14- रंग कोडिंग के उल्लेख सहित ट्राइएज(गम्भीर रोगियों को पहले चिकित्सा देना) का प्रवाह चार्ट खीचना।
15- स्थिरीकरण के विभिन्न प्रकारों एवं उन स्थितियों का जिनमें इसका प्रयोग होता है, का चार्ट बनाना। 16- आपातकालीन कक्ष में मरीज की भर्ती और उस समय सामान्य ड्यूटी सहायक से कैसे व्यवहार की उम्मीद की जाती है, का रोल प्ले।
17- सक्रिय त्व्ड व्यायाम के प्रकारो की लिस्ट बनाना। 18- निष्क्रिय व्यायाम के प्रकारो की लिस्ट(सूची) बनाना। 19- शरीर के विभिन्न भागों जैसे गर्दन, कन्धा, कोहनी, उंगलियां, घुटने, कूल्हे, एडी आदि की सक्रिय त्व्ड व्यायाम। प्रत्येक छात्र के लिए दो व्यायाम।
20- शरीर के विभिन्न भागों के लिए निष्क्रिय OM व्यायाम। प्रत्येक छात्र के लिए दो व्यायाम। एक छात्र को मरीज की भूमिका दी जा सकती है।
21- हाथ या पैर में चोट लगने पर घाव की मरहम पट्टी करने का प्रदर्शन। 22- व्च्क् में मरीज तथा उसके सम्बन्धितों के साथ सामान्य ड्यूटी सहायक (GDA) के व्यवहार का प्रदर्शन। मरीज के रोग का इतिहास, ऊचाई, भार, नाड़ी, तापमान आदि लेने का प्रदर्शन। 23- मरीज का बिस्तर तैयार करना। 24- ट्राइएज(triage) तथा Colour Coding के ज्ञान का व्यवहारिक प्रदर्शन।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 211पूर्णांक 100
कक्षा-12
खण्ड-क
(अंक-50)
1-हिन्दी गद्य का विकास-हिन्दी गद्य का उद्भव एवं विकास, शुक्लयुग, शुक्लोत्तर युग, हिन्दी गद्य की प्रमुख विधाएं-निबंध, उपन्यास कहानी, आलोचना इत्यादि।
1X5=5 अंक
1X5=5 अंक 2-काव्य साहित्य का विकास (आधुनिक काल- भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, नयी कविता इत्यादि)
3-पाठ्यक्रम में निर्धारित गद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न।
2X5=10 अंक
2X5=10 अंक 4- पाठ्यक्रम में निर्धारित पद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न।
5(क)-संकलित गद्य के पाठों के लेखकों का परिचय, कृतियाँ तथा भाषा शैली (शब्द सीमा अधिकतम-80) 3+2=5 अंक (ख) कवि परिचय, कृतियाँ, साहित्यिक विशेषताएँ-(शब्द सीमा अधिकतम-80) 3+2=5 अंक
5x1=5 अंक 6- कहानी-चरित्र-चित्रण, कहानी के तत्व एवं तथ्यों पर आधारित (लघु उत्तरीय प्रश्न)(शब्द सीमा अधिकतम-80)
7-खण्ड काव्य-निम्नलिखित पर आधारित लघु उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा अधिकतम-80) 5x1=5 अंक (क) खण्ड काव्य की विशेषताएं (ख) पात्रों का चरित्र-चित्रण (ग) प्रमुख घटनाओं पर आधारित प्रश्न।
खण्ड-ख (अंक-50)
8(क)-पठित पाठ्य पुस्तक के निर्धारित पाठों के संस्कृत गद्य का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद 2+5=7 अंक (ख)-पठित पाठ्य पुस्तक के निर्धारित पाठों के संस्कृत पद्य का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद 2+5=7 अंक 9-पाठों पर आधारित अति लघु उत्तरीय प्रश्नों का संस्कृत में उत्तर (कोई दो प्रश्न करना है)। 2+2=4 अंक 10-काव्य सौन्दर्य के तत्व-
(क) सभी रस-(परिभाषा, उदाहरण एवं पहचान) 1+1=2 अंक (ख) अलंकार (1) शब्दालंकार-अनुप्रास, यमक, श्लेष (परिभाषा एवं उदाहरण) 2 अंक (2) अर्थालंकार-उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, सन्देह, भ्रान्तिमान, अनन्वय, प्रतीप, दृष्टान्त तथा अतिशयोक्ति (परिभाषा एवं उदाहरण)
(ग) छन्द (1) मात्रिक-चौपाई, दोहा, सोरठा, रोला, कुण्डलिया, हरिगीतिका, वरवै (लक्षण एवं उदाहरण)
(2) वर्णवृत्त-इन्द्रवज्रा, उपेन्द्रवज्रा, सवैया, मंतगमंद, सुमुखी, सुन्दरी, बसन्ततिलका (लक्षण एवं उदाहरण)
(3) मुक्तक-मनहर (लक्षण एवं उदाहरण)
1+1=2 अंक 11-निबन्ध-हिन्दी में मौलिक अभिव्यक्ति दिये हुए विषय पर निबन्ध, (जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा, यातायात के नियम आदि की जानकारी हेतु इन विषयों पर भी निबन्ध पूछे जायेंगें)। 2+7=9 अंक
संस्कृत व्याकरण- (क्रम संख्या-12 एवं 13 से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे)
12 क-सन्धि-(1) स्वर सन्धि-एचोऽयवायावः एडः पदान्तादति, एङपररूपम् 1x3=3 अंक (2) व्यंजन-स्तोः श्चुनाश्चुः, ष्टुनाष्टुः, झलांजशझशि, खरिच, मोऽनुस्वारः, तोर्लि, अनुस्वारस्यययि पर सवर्णः।
(3) विसर्ग-विसर्जनीयस्य सः, सरयजुवोरुः, अतोरोरप्लुतादप्लुते, हशिच, रोरि।
ख-समास-अव्ययीभाव, कर्मधारय, बहुव्रीहि।
1+1=2 अंक212 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 13 क-प्रत्यय (1) कृत-क्त, क्त्वा, तब्यत्, अनीयर्। 1+1=2 अंक (2) तद्धित-त्व, मतुप, वतुप।
ख-विभक्तिपरिचय-अभितः परितः, समयानिकषाहाप्रतियोगेऽपि, येनाङ्गविकारः, सहयुक्तेऽप्रधाने, नमः स्वस्तिस्वाहा स्वधालंबषट्योगाच्च, षष्ठीशेषे, यतश्चनिर्धारणम्। 1+1=2 अंक 14 पत्र लेखन- पत्रों के प्रकार (1) औपचारिक पत्र (2) अनौपचारिक पत्र 8x1=8 अंक औपचारिक पत्र- आवेदन/प्रार्थना पत्र/ कार्यालयी पत्र/व्यावसायिक पत्र
अनौपचारिक पत्र- व्यक्तिगत/पारिवारिक/सामाजिक पत्र
खण्ड-क
पुस्तक का नाम लेखक का नाम पाठ का नाम
1
2
3
गद्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-बासुदेव शरण अग्रवाल राष्ट्र का स्वरूप
3-कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' राबर्ट नर्सिंग होम में
4-डॉ0 हजारी प्रसाद द्विवेदी अशोक के फूल
5-पं0दीनदयाल उपाध्याय सिद्धांत और नीति के सम्पादित अंश 6-प्रो0 जी0 सुन्दर रेड्डी भाषा और आधुनिकता
7-डा0 ए0पी0जे0अब्दुल कलाम तेजस्वी मन के सम्पादित अंश 8-जैनेन्द्र कुमार
भाग्य और पुरूषार्थ
9-हरिशंकर परसाई
निंदा रस
काव्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-भारतेन्दु हरिश्चन्द्र प्रेम माधुरी, यमुना-छवि
2-जगन्नाथदास "रत्नाकर" उध्दव प्रसंग, गंगावतरण
3-अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' पवन दूतिका
4-मैथिलीशरण गुप्त कैकेयी का अनुताप, गीत
5-जयशंकर प्रसाद गीत, श्रद्धा-मनु
6-सूर्यकान्त त्रिपाठी "निराला" बादल-राग, सन्ध्या-सुन्दरी 7-सुमित्रा नन्दन पंत नौका विहार, बापू के प्रति, परिवर्तन 8-महादेवी वर्मा गीत
9-रामधारी सिंह "दिनकर"
अभिनव-मनुष्य, पुरूरवा, उर्वशी 10-सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय मैने आहुति बनकर देखा, हिरोशिमा 11-विविधा
नरेन्द्र शर्मा मधु की एक बूंद
भवानी प्रसाद मिश्र बूंद टपकी एक नभ से
गजानन माधव मुक्ति बोध मुझे कदम-कदम पर
गिरिजा कुमार माथुर चित्रमय धरती
धर्मवीर भारतीः सांझ के बादल
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 2131-फणीश्वर नाथ ''रेणु'' पंचलाइट
कथा साहित्य हेतु निर्धारित
पाठ्य वस्तु 2-अमरकांत बहादुर
3-शिव प्रसाद सिंह कर्मनाशा की हार
4-भीष्म साहनी खून का रिश्ता
5-शिवानी लाटी
खण्ड काव्य (सहायक पुस्तक)
खण्ड काव्य
पुस्तक तथा लेखक प्रकाशक अनुदानित जिले
क्र0
सं0
1 मुक्ति यज्ञ-लेखक-
राधा कृष्ण प्रकाशन 2, अन्सारी रोड,
दरियागंज, नई दिल्ली
कानपुर, जौनपुर, मुरादाबाद, फैजाबाद, एटा, ललितपुर।
श्री सुमित्रा नन्दन पन्त
2 सत्य की जीत-लेखक- ज्वाला प्रसाद विद्या सागर, 129, के0पी0 कक्कड़ रोड़, प्रयागराज।
झांसी, बदायूँ, प्रतापगढ़, रामपुर, पीलीभीत, लखनऊ, इटावा, बलिया, बिजनौर।
श्री द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
3 रश्मि रथी लेखक-
वाराणसी, बुलन्दशहर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, फतेहपुर, उन्नाव, देवरिया।
उदयांचल, पटना, वितरक-लोक भारती 15-ए, महात्मा गांधी मार्ग, प्रयागराज।
रामधारी सिंह "दिनकर"
4 आलोकवृत्त लेखक- कमल प्रकाशन, 105 मुकुन्दीगंज, प्रतापगढ़।
प्रयागराज, अलीगढ़, सहारनपुर, फर्रूखाबाद, मैनपुरी, मिर्जापुर, सीतापुर।
श्री गुलाब खण्डेलवाल
5 त्याग पथी लेखक-
साहित्यकार संघ, दारागंज,
प्रयागराज।
श्री रामेश्वर शुक्ल "अंचल"
आगरा, गोरखपुर, गाजीपुर, बरेली, सुल्तानपुर, जालौन, लखीमपुर खीरी, गोण्डा, शाहजहांपुर, बाराबंकी।
6 श्रवण कुमार लेखक- गौतम बन्धु गोइन रोड, लखनऊ मेरठ, आजमगढ़, बस्ती, रायबरेली, हरदोई,
बांदा, बहराइच, हमीरपुर।
श्री शिव बालक शुक्ल
नोट :-इसके अतिरिक्त अन्य जिलों/नवसृजित जिलों में खण्ड काव्य पूर्व की भांति यथावत् पढ़ाये जायेंगे।
खण्ड-ख
संस्कृत दिग्दर्शिका
पाठ्य वस्तु
1-भोजस्यौदार्यम्
2-संस्कृत भाषायाः महत्वम्
3-आत्मज्ञः एवं सर्वज्ञः
4-ऋतुवर्णनम
5-जातक कथा
6-नृपति दिलीपः
7-महर्षि दयानंदः
8-सुभाषित रत्नानि
9-महामना मालवीयः
10-पंचशीलसिद्धान्ताः
11-दूत वाक्यम्214 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
सामान्य हिन्दी
कक्षा-12
पूर्णांक 100
खण्ड-क (अंक-50)
1-हिन्दी गद्य का विकास -हिन्दी गद्य का उद्भव एवं विकास, शुक्लयुग, शुक्लोत्तर युग, हिन्दी गद्य की प्रमुख विधाएं-निबंध, उपन्यास कहानी, आलोचना इत्यादि।
1X5=5 अंक 2- काव्य साहित्य का विकास -(आधुनिक काल- भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, प्रगतिवाद, नयी कविता इत्यादि)
1X5=5 अंक
2x5=10 अंक 3-पाठ्यक्रम में निर्धारित गद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न।
4-पाठ्यक्रम में निर्धारित पद्यांशों पर आधारित पांच प्रश्न।
2x5=10 अंक 5 (क)-पाठ्यक्रम में निर्धारित लेखकों का साहित्यिक परिचय एवं कृतियाँ।(शब्द सीमा अधिकतम-80) 3+2=5 अंक (ख)-पाठ्यक्रम में निर्धारित कवियोंं का साहित्यिक परिचय एवं कृतियाँ।(शब्द सीमा अधिकतम-80) 3+2=5 अंक 6-पाठ्यक्रम में निर्धारित कहानियों का सारांश एवं उद्देश्य पर आधारित प्रश्न (शब्द सीमा अधिकतम-80) 5x1=5 अंक
5X1=5 अंक 7-पाठ्यक्रम में निर्धारित खण्डकाव्य की कथावस्तु एवं प्रमुख पात्रों का चरित्र चित्रण (शब्द सीमा अधिकतम-80)।
खण्ड-ख (अंक-50)
8(क)-पाठ्यक्रम में निर्धारित संस्कृत गद्य का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद। 2+5=7 अंक (ख)-पाठ्यक्रम में निर्धारित संस्कृत पद्य का संदर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद। 2+5=7 अंक 9-लोकोक्तियों एवं मुहावरों के अर्थ एवं वाक्य प्रयोग।
1+1=2 अंक 10-अपठित गद्यांश/पद्यांश-
05 अंक
1+1=2 अंक 11 (क)- शब्दों में सूक्ष्म अन्तर।
(ख) अनेकार्थी शब्द।
1+1=02 अंक (ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द(वाक्यांश) (केवल दो)
1+1=2 अंक (घ) वाक्यों में त्रुटिमार्जन (लिंग, वचन, कारक, काल एवं वर्तनी संबंधी त्रुटियाँ) 1+1=2 अंक 12- काव्य सौन्दर्य के तत्व (क)रस-श्रृंगार, करुण, हास्य, वीर एवं शान्त रस के लक्षण एवं उदाहरण 02 अंक (ख) अलंकार-(1) शब्दालंकार-अनुप्रास, यमक, श्लेष के लक्षण एवं उदाहरण। 1+1=2 अंक (2) अर्थालंकार-उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, भ्रान्तिमान एवं संदेह के लक्षण एवं उदाहरण।
(ग) छन्द-मात्रिक-चौपाई, दोहा, सोरठा, कुण्डलियां के लक्षण एवं उदाहरण। 1+1=2 अंक
2+4=6 अंक 13-पत्र लेखन (निम्नलिखित में से किसी एक पर)-
(1) नियुक्ति-आवेदन-पत्र
(2) बैंक से किसी व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्त करने का आवेदन-पत्र।
(3) अपने नगर या गाँव की सफाई हेतु संबंधित अधिकारी को प्रार्थना-पत्र।
14-निबन्ध (विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, कृषि, सामाजिक एवं राजनैतिक चेतना, यातायात के नियम पर आधारित जनसंख्या, स्वास्थ्य शिक्षा व पर्यावरण से सम्बन्धित)।
2+7=9 अंकभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 215
पाठ्य वस्तु-
सामान्य हिन्दी विषय के लिए निम्नलिखित पाठ्य वस्तु का अध्ययन करना होगाः-
पुस्तक का नाम लेखक का नाम पाठ का नाम
1
2
3
गद्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-बासुदेव शरण अग्रवाल
2-डॉ0 हजारी प्रसाद द्विवेदी 3-प्रो0 जी0 सुन्दर रेड्डी 4- डॉ0ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम 5-कन्हैया लाल मिश्र ''प्रभाकर'' 6-हरिशंकर परसाई
राष्ट्र का स्वरूप अशोक के फूल भाषा और आधुनिकता तेजस्वी मन के सम्पादित अंश राबर्ट नर्सिंग होम में निंदा रस
काव्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु 1-अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' पवन दूतिका
कथा साहित्य हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु
2-मैथिलीशरण गुप्त कैकेयी का अनुताप, गीत 3-जयशंकर प्रसाद श्रद्धा-मनु , गीत 4-सुमित्रा नन्दन पंत नौका विहार, बापू के प्रति, परिवर्तन 5-महादेवी वर्मा गीत 6-रामधारी सिंह ''दिनकर'' अभिनव-मनुष्य, पुरूरवा, उर्वशी 7-सच्चिदानन्द हीरानंद वात्सायन ''अज्ञेय'' मैंने आहुति बनकर देखा, हिरोशिमा 1-जैनेन्द्र कुमार ध्रुव यात्रा पंचलाइट 2-फणीश्वर नाथ ''रेणु'' 3-शिवानी लाटी 4-अमरकांत बहादुर
पुस्तक तथा लेखक प्रकाशक अनुदानित जिले
खण्ड काव्य (सहायक पुस्तक)
खण्ड काव्य
क्र0
सं0
1 मुक्ति यज्ञ-लेखक-
श्री सुमित्रा नन्दन पन्त
2 सत्य की जीत-लेखक-
श्री द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
3 रश्मि रथी लेखक-
रामधारी सिंह "दिनकर"
कानपुर, जौनपुर, मुरादाबाद, फैजाबाद, एटा, ललितपुर। लखनऊ, इटावा, बलिया, विजनौर, झांसी, बदायूँ, प्रतापगढ़, रामपुर, पीलीभीत। वाराणसी, बुलन्दशहर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, फतेहपुर, उन्नाव, देवरिया। प्रयागराज, अलीगढ़, सहारनपुर, फर्रूखाबाद, मैनपुरी, मिर्जापुर, सीतापुर।
4 आलोकवृत्त लेखक- श्री गुलाब खण्डेवाल 5 त्याग पथी लेखक-
श्री रामेश्वर शुक्ल "अंचल"
राधा कृष्ण प्रकाशन 2, अन्सारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली ज्वाला प्रसाद विद्या सागर, 129, के0पी0 कक्कड़ रोड, प्रयागराज। उदयांचल, पटना, वितरक-लोक भारती 15-ए, महात्मा गांधी मार्ग, प्रयागराज। कमल प्रकाशन, 105 मुकुन्दीगंज, प्रतापगढ़। साहित्यकार संघ, दारागंज, प्रयागराज। आगरा, गोरखपुर, गाजीपुर, बरेली, सुल्तानपुर, जालौन, लखीमपुर खीरी, गोण्डा, शाहजहांपुर, बाराबंकी।
गौतम बन्धु गोइन रोड, लखनऊ मेरठ, आजमगढ़, बस्ती, रायबरेली, 6 श्रवण कुमार लेखक- श्री शिव बालक शुक्ल
हरदोई, बांदा, बहराइच, हमीरपुर।
नोटः- इसके अतिरिक्त अन्य जिलों/नवसृजित जिलों में खण्ड काव्य पूर्व की भांति यथावत् पढ़ाये जायेंगे।
खण्ड-ख, संस्कृत हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु-
संस्कृत हेतु निर्धारित पाठ्य वस्तु- 1-भौजस्योदार्यम
2-आत्मज्ञः एवं सर्वज्ञः 3-संस्कृत भाषायाः महत्वम्
4-जातक कथा
5-सुभाषित रत्नानि 6-महामना मालवीयः 7-पंचशील-सिद्धान्ताः216 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
कक्षा-12
नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा पूर्णांक-50 अंक इस विषय की लिखित परीक्षा में एक प्रश्न.पत्र तीन घण्टे तथा 50 अंकों का होगा, इसके साथ ही 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। लिखित एवं प्रयोगात्मक में उत्तीर्ण होने के लिये विद्यार्थी को 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। इस विषय के प्राप्तांकों का योग, श्रेणी निर्धारण में नहीं किया जायेगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की खेल एवं शारीरिक शिक्षा की परीक्षा अग्रसारण/पंजीकरण अधिकारी द्वारा ली जायेगी। उद्देश्य-
1-बालकों का सर्वांगीण विकास एवं गुणों का उन्नयन। 2-छात्रों में स्वयं उत्तरदायित्व वहन, समय पालन एवं स्वस्थ नेतृत्व शक्ति का विकास। 3-सुदृढ शरीर का निर्माण करने हेतु शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं की अभिवृद्धि। 4-सहयोग, सहिष्णुता तथा विश्वबन्धुत्व की भावना का विकास। 5-छात्रों में भारतीय संस्कृति के प्रति अनुराग, राष्ट्रीय एकता एवं देशभक्ति की भावना का विकास। 6-भावी जीवन में जीविका के लिये तैयार करना।
खेल एवं शारीरिक शिक्षा 13 अंक
2 अंक
इकाई-1-भारत में शारीकि शिक्षा का स्वरूप एवं विकास-
भारत में खेल एवं शारीरिक शिक्षा का विकास (स्वतंत्रता से पूर्व), शारीरिक शिक्षा का आधुनिक स्वरूप (स्वतंत्रता के बाद), वर्तमान राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा नीति। इकाई-2-शारीरिक वृद्धि एवं विकास-
2 अंक
वृद्धि एवं विकास के विभिन्न स्तर, विभिन्न आयु वर्ग की शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक विशेषतायें, किशोरावस्था की समस्यायें एवं समाधान, शारीरिक स्वस्थता एवं विकास को प्रभावित करने वाले कारक। इकाई-3-ड्रग्स एवं डोपिंग-
2 अंक
ड्रग्स का अर्थ, खिलाड़ियों द्वारा ड्रग्स का प्रयोग क्यों? खिलाड़ियों पर ड्रग्स का कुप्रभाव एवं उपचार, खिलाड़ियों द्वारा प्रयोग किये जानेे वाले ड्रग्स एवं उनका प्रभाव, डोपिंग का अर्थ, रक्त डोपिंग एवं इससे बचाव। इकाई-4-व्यक्तित्व एवं नेतृत्व-
2 अंक
अर्थ, परिभाषा एवं उत्तम व्यक्तित्व की विशेषतायें, व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करने वाले कारक, वंशानुक्रम, वातावरण एवं समाज, व्यक्तित्व विकास में शारीरिक शिक्षा की भूमिका, उत्तम नेतृत्व की विशेषतायें, खिलाड़ियों में व्यक्तित्व एवं नेतृत्व विकास की विधियांं। इकाई-5-प्रमुख खेल-
1 अंक
क्रिकेट, हॉकी, फुटबाल, बास्केटबाल, बैडमिन्टन, टेबुल.टेनिस, टेनिस, हैण्डबाल, वालीबाल विभिन्न खेलों के नियम, मैदानों की माप, सम्बन्धित खेलों की मुख्य तालिका। इकाई-6-विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगितायें-
2 अंक
राष्ट्रमण्डल खेल, एशियन खेल, एफ्रोएशियन खेल एवं ओलम्पिक।
इकाई-7-खेल पुरस्कार-
2 अंक
अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद पुरस्कार, सी0के0 नायडू पुरस्कार, मेजर ध्यान चन्द्र खेल रत्न पुरस्कार आदि।
नैतिक शिक्षा 17 अंक इकाई-8-मानव अधिकार- 7 अंक मानव अधिकारों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा, मानव अधिकार और भारत का संविधान, महात्मा गांधी और मानवाधिकार। इकाई-9-मौलिक अधिकार- 8 अंक समानता, स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता, शोषण से संरक्षण, सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार, संवैधानिक उपचारों, शिक्षा का मौलिक अधिकार, सूचना का अधिकार, शिकायत प्रणाली, मानव अधिकार आयोग, चाइल्ड लाइन, वीमेन पावर लाइन। इकाई-10-शारीरिक सुरक्षा- 2 अंक शारीरिक सुरक्षा में नशें का सेवन न कर, दो पहिया/चार पहिया वाहन, वाहन चालक न चलायें, ट्रैफिक सिग्नल नियमों को न तोडे़, दूसरे वाहन को ओवरटेक न करें। साथ ही अपने निर्धारित लेन/साइड से इतर में वाहन न चलायें।
पुस्तक-''मानव अधिकार अध्ययन'' प्रकाशक ''माइंडशेयर''।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 217योग शिक्षा 20 अंक
10-योग परम्परा एवं उसका 4 अंक विकास
• प्राचीन युग
• मध्यकालीन युग
• आधुनिक युग
11-अष्टांगयोग-समाधि • समाधि का अर्थ, परिभाषा 2 अंक 12-शारीरिक एवं मानसिक 4 अंक
▪ वैदिक मान्यता
स्वास्थ्य
▪ पारम्परिक मान्यता
▪ आधुनिक मान्यता
13-किशोरवय की समस्याएँ एवं 2 अंक
• ▪ मानसिक परिवर्तन, समस्याएँ एवं उलझनें
रोग : योग निर्देशन 14-युवामन एवं समस्याएँ
योग निर्देशन • आत्मसंयम (ब्रह्मचर्य) का अर्थ
2 अंक
▪ युवावर्ग की समस्याएँ, योग निर्देशन
चरित्र-निर्माण, आत्मसंयम एवं योग
15-योग एवं आयुर्वेद चिकित्सा • आयुर्वेद क्या है?
6 अंक
पद्धति
• आयुर्वेद : अर्थ एवं परिभाषा • आयुर्वेद चिकित्सा की विशेषताएँ • आयुर्वेद का विषय क्षेत्र
प्रयोगात्मक 50 अंक 1-आसन और स्वास्थ्य • पेट के बल किए जाने वाले आसन (Prone Posture)-विपरीत नौकासन,
भेकासन। 7 अंक
2-प्राणायाम एवं स्वास्थ्य • कर्णरोगान्तक, सूर्यभेदी, चन्द्रभेदी तथा पूर्व के अभ्यास। 6 अंक 3-योगनिद्रा • चित्त की वृत्तियाँ 7 अंक
• बीटा, अल्फा, थीटा एवं डेल्टा तरंगे खेल एवं शारीरिक शिक्षा 30 अंक निम्नलिखित दक्षता स्तर को प्राप्त करना-
| प्रथम परीक्षण | द्वितीय परीक्षण | तृतीय परीक्षण | चतुर्थ परीक्षण | पांचवां परीक्षण | छठां परीक्षण | सातवां परीक्षण | ||
| 101 गज की दौड़ एवं सूर्य नमस्कार | ऊंची कूद | काल्टिंग और स्फूर्ति लम्बी कूद | मलखम्ब हर एक की तीन उड़ान (सादी, बगली, मुरैली), रस्सी चढ़ना किसी प्रकार से | होविंग और पेट की कसरत (आसन) | 1 मील की दौड़ | गोला फेकना (12 पौन्ड) | ||
| सेकेन्ड | बार | फीट | दीमा या बार | मिनट फीट | ||||
| 5.11 | 10 | 4'9'' | सर व हाथ स्ंिप्रग 4 खानो के ऊपर से | 16'12'' (दो बार) | 10 पुल अप | 10 शीर्षासन | 6.5 | 30 |
| 3.5.12 | 9 | 4'7'' | हाथ स्ंिप्रग 4 खानो के ऊपर से | 15'10'' | 11'11''9'' | 9 हलासन | 7 | 25 |
| 4.12.5 | 8 | 4'6'' | गोता लगना पूरे बाक्स के ऊपर से | 15'6'' | '' 8'' | 8 धनुराशन | 7.5 | 22 |
| 3.5 | 13 | 7'4'' | गोता लगना 3 खानो के ऊपर से | 14'9'' | '' 7'' | 7 शलभासन | 8 | 20 |
| 3 | 13.5 | 64'2'' | गोता लगना 3 खानो के ऊपर से | 13'8'' | '' 6'' पुल अप | 6 पश्चिमो ं -तानासन | 8.5 | 18 |
| 2.5 | 14 | 53'13'' | हाथ व सर स्ंिप्रग खानो के ऊपर से | 12'12'' | ''(एक बार) | हाथो के बल आगे गिराना, मोड़ना सर्वांगसन 5 व सीधा करना 6 बार | - | - |
| 2 | 14.5 | 43'6'' | गोता लगना 3 खानो के ऊपर से और 1 लुढ़की आगे खाना | 11'11'' | '' 5'' | 4 भुजंगासन | 9.5 | 15 |
| 1.5 | 15 | 33'4'' | गोता लगना 2 खानो के ऊपर से | 10'10'' | '' 4'' | 2 पद्मासन | 10 | 14 |
| 5 | 15.5 | 23'2'' | गोता लगना 1 खानो के ऊपर से | 9'9'' | '' 3'' | 2 कोणासन | 10.5 13 | |
| 5 | 15 | 1'3'' | आगे लुढ़कना | 8'7'' | '' 2'' | 1 ताडासन | 11 | 12 |
28 ङ218 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
महापुरूषों की जीवन गाथा का अध्ययन
1. रामकृष्ण "परमहंस" 2. अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी 3. राजगुरू 4. रवीन्द्र नाथ टैगोर 5. लाल बहादुर शास्त्री 6. रानी लक्ष्मी बाई 7. महाराणा प्रताप 8. बंकिम चन्द्र चटर्जी 9. आदि शंकराचार्य 10. गुरू नानक देव 11. डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम 12. रामानुजाचार्य 13. पाणिनी 14. आर्यभट्ट 15. सी0 वी0 रमन
Subject- English
(Class-XII)
There will be one question paper of 100 marks. Section A- Reading
15marks.
1. One long unseen passage followed by four short answer type questions and three vocabulary questions.
Section B- writing
4x3=12(short answer questions) 3x1=3(vocabulary) 20 marks
2. Article (Descriptive, Argumentative/ autobiographical) -100 to 150 words
10
enquiries etc) Section C- Grammar
3. Letter to the Editor/ complaint letters/Business letter (Placing orders / Booking or cancellation / making 10 25 marks.
5. Translation from Hindi to English-7 to 8 Sentences
4. Ten questions (MCQ and very short answer type questions) based on Narration, Synthesis, Transformation, Syntax, Idioms and Phrases/ phrasal Verbs, Synonyms, Antonyms, One word substitution, Homophones 10x2=20 5 40 marks Section D- Literature Flamingo- Text book Prose
6. Two short answer type questions 7. One long answer type question
4+4=8 7 Poetry
8. Three very short answer type questions based on the given poetry extract- 3x2=6 Note- (Questions related to identification of the following figures of speech will be included in the poetry section
Simile, Metaphor, Personification, Oxymoron, Apostrophe, Hyperbole, Onomatopoeia).
9. Central idea of the given poem
4 Vistas- Supplementary Reader
10. Two short answer type questions. 11. One long answer type question
4+4=8 7भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 219
Following books are prescribed:-
Flamingo- Text Book
PROSE-
1. The Last Lesson Alphonse Daudet 2. Lost Spring Anees Jung 3. Deep Water William Douglas 4. The Rattrap Selma Lagerlof 5. Indigo Louis Fischer 6. Poets And Pancakes Ashokamitran 7. The Interview-Part I And Part II Christopher Silvester 8. Going Places A.R. Barton
POETRY-
John Keats
1. My Mother At Sixty-Six Kamala Das 2. Keeping Quiet Pablo Neruda 3. A Thing Of Beauty 4. A Road Side Stand Robert Frost 5. Aunt Jennifer's Tigers Adrienne Rich
Jack Finney
Vistas- Supplementary Reader- 1. The Third Level 2. The Tiger King Kalki 3. Journey to the end of the Earth Tishani Doshi 4. The Enemy Pearl S. Buck 5. On the Face of it Susan Hill 6. Memories of Childhood Zitkala Sa & Bama
Note- No book has been prescribed for grammar. Students can select any book recommended by the subject teacher.
संस्कृत कक्षा-12 सामान्य निर्देश- संस्कृत विषय में 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र होगा। प्रश्न-पत्र के प्रत्येक खण्ड में निर्धारित अंकों के अन्तर्गत दीर्घ उत्तरीय, लघु उत्तरीय, एवं बहुविकल्पीय प्रश्नों का समावेश कर कई प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रश्नपत्र में प्रश्नों के लिए निर्धारित अंक ही उत्तर के आकार की संक्षिप्तता या दीर्घता का द्योतक होगा। प्रत्येक प्रश्नपत्र के अन्तर्गत समाविष्ट पाठ्यक्रम का अंक विभाजन निम्नवत् होगाः- खण्ड-क (गद्य) 20 अंक चन्द्रापीडकथा उत्तरार्द्ध-(सा तु समुत्थाय महाश्वेतां ............... जग्रन्थ बाणभट्टस्य वाक्यैरेव कथामिमाम्।। इति)
1. गद्यांश के आधार पर प्रश्नोत्तर। 5x2꞊ 10 अंक 2. कथात्मक पात्रों का चरित्रचित्रण (हिन्दी में, अधिकतम 100 शब्द)। 4 3. रचनाकार का जीवनपरिचय एवं गद्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द)। 4 4. सन्दर्भित पुस्तक से सम्बन्धित बहुविकल्पीय प्रश्न।
2x1=2
खण्ड-ख (पद्य)
20 अंक रधुवंशमहाकाव्यम् (द्वितीयः सर्गः)- (श्लोक संख्या-41 से समाप्तिपर्यन्त)
1. किसी श्लोक की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7
2. किसी श्लोक की सन्दर्भसहित संस्कृत में व्याख्या। 25=7
3. कवि-परिचय एवं काव्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द)। 4
4. काव्यगत तथ्यों एवं भावों पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न। 2x1=2
खण्ड-ग (नाटक) 20 अंक
अभिज्ञानशाकुन्तलम् (चतुर्थोऽङ्कः)-(आकाशे) रम्यान्तरः कमलिनीहरितैः......इत्यादि श्लोक से अंक की समाप्ति तक।
1. पाठगत नाटक के किसी गद्यांश अथवा पद्य की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7
2. पाठगत नाटक के अंशों से सूक्तिपरक पंक्ति की सन्दर्भसहित हिन्दी में व्याख्या। 25=7
3. नाटककार का जीवन परिचय एवं नाट्यशैली (हिन्दी अथवा संस्कृत में, अधिकतम 100 शब्द)। 4
4. सन्दर्भित पुस्तक से सम्बन्धित बहुविकल्पीय प्रश्न। 2x1=2
220 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
खण्ड-घ (निबन्ध)
यातायात के नियम आदि।
विभिन्न विषयों पर संस्कृत में निबन्ध (10 पंक्तियाँ)-संस्कृत साहित्य, जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा, 10 अंक
खण्ड-ङ (अलंकार)
निम्नलिखित अलंकारों की सामान्य परिभाषा (हिन्दी या संस्कृत में) अथवा उदाहरण संस्कृत में-उपमा तथा रूपक। 2 अंक
खण्ड-च (व्याकरण)
1. अनुवाद - ऐसे हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद जहाँ उपपद विभक्तियों का 4x2=8
प्रयोग हो।
2. कारक तथा विभक्ति। 21=3
3. समास। 21=3
4. सन्धि । 21=3
5. शब्दरूप। 21=3
6. धातुरूप। 21=3
7. प्रत्यय। 21=3
8. वाच्य परिवर्तन। 2
निर्धारित पुस्तकें एवं पाठ्यवस्तु
खण्ड-क (गद्य)
महाकविबाणभट्टप्रणीतकादम्बरी-सारभूता, 'चन्द्रापीडकथा' का उत्तरार्द्ध भाग-'सा तु समुत्थाय महाश्वेतां .............
जग्रन्थ बाणभट्टस्य वाक्यैरेव कथामिमाम्।। इति।
खण्ड-ख (पद्य) महाकविकालिदासप्रणीतम्-रघुवंशमहाकाव्यम् (द्वितीयः सर्गः)
श्लोक संख्या 41 से समाप्तिपर्यन्त।
खण्ड-ग (नाटक)
महाकविकालिदासप्रणीतम्-अभिज्ञानशाकुन्तलम् (चतुर्थोऽङ्कः)-(आकाशे) रम्यान्तरः कमलिनीहरितैः ...... इत्यादि श्लोक से अंक की समाप्ति तक।
खण्ड-घ (निबन्ध)
विभिन्न विषयों पर संस्कृत में निबन्ध (10 पंक्तियाँ) यथा 1-सदाचारः 2-सत्सङ्गतिः 3-परोपकारः 4-विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् 5-संस्कृतभाषायाः महत्वम् 6-पर्यावरण सुरक्षा 7-महाकविकालिदासः 8-श्रम एव विजयते् 9-अहिंसा परमो धर्मः 10-भारतदेशः 11-जनसंख्या-समस्या 12-स्वास्थ्य शिक्षा 13-यातायात सुरक्षा 14-स्वच्छताभियानम्। खण्ड-ङ (अलंकार)
निम्नलिखित अलंकारों की सामान्य परिभाषा (हिन्दी या संस्कृत में) अथवा उदाहरण संस्कृत में-उपमा तथा रूपक।
खण्ड-च (व्याकरण)
1. अनुवाद -
ऐसे हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद जहाँ उपपद विभक्तियों का प्रयोग हो।
2. कारक तथा विभक्ति -
निम्नलिखित सूत्रों तथा वार्तिकों के आधार पर कारकों तथा विभक्तियों का ज्ञान -
(क) चतुर्थी विभक्ति (सम्प्रदान कारक)
(1) कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम् ।
(2) चतुर्थी सम्प्रदाने।
(3) रुच्यर्थानां प्रीयमाणः।
(4) क्रुधदु्रहेष्र्यासूयार्थानां यं प्रति कोपः।
(5) स्पृहेरीप्सितः।
(6) नमःस्वस्तिस्वाहास्वधाऽलंवषड्योगाच्च।
(ख) पंचमी विभक्ति (अपादान कारक)
(1) ध्रुवमापायेऽपादानम्।
(2) अपादाने पंचमी।
(3) जुगुप्साविरामप्रमादार्थानामुपसंख्यानम्(वा0)।
(4) भीत्रार्थानां भयहेतुः।
(5) आख्यातोपयोगे।
(ग) षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध कारक)
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 221
(1) षष्ठी शेषे। (2) षष्ठी हेतुप्रयोगे। (3) क्तस्य च वर्तमाने। (4) षष्ठी चानादरे। (घ) सप्तमी विभक्ति (अधिकरण कारक) (1) आधारोऽधिकरणम्। (2) सप्तम्यधिकरणे च। (3) साध्वसाधुप्रयोगे च (वा0)। (4) यतश्च निर्धारणम्।
3. समास - निम्नांकित समासों की परिभाषा अथवा संस्कृत में विग्रहसहित समास का नाम। (1) द्वन्द्वः, (2) अव्ययीभावः, (3) द्विगुः। 4. सन्धि-सन्धि, सन्धिविच्छेद, नामोल्लेख तथा नियम ज्ञान। निम्नलिखित सूत्रों के अनुसार सन्धियों का उदाहरणसहित ज्ञान। (क) व्यंजन सन्धि या हल् सन्धि-(1) स्तोः श्चुना श्चुः (2) ष्टुना ष्टुः (3) झलां जशोऽन्ते (4) खरि च (5) मोऽनुस्वारः (6) झलां जश् झशि (7) तोर्लि (8) अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः। (ख) विसर्ग सन्धि-(1) विसर्जनीयस्य सः (2) ससजुषो रुः (3) खरवसानयोर्विसर्जनीयः (4) वा शरि (5) अतो रोरप्लुतादप्लुते (6) हशि च (7) रो रि (8) ढ्रलोपे पूर्वस्य दीर्घोऽणः। 5. शब्दरूप- (अ) नपुंसक लिंग- गृह, वारि, दधि, मधु, नामन्, मनस्, जगत्, ब्रह्मन्, धनुस्। (आ) सर्वनाम- सर्व, तद्, यद्, किम्, युष्मद्, अस्मद्, इदम्, एतत्, अदस्, भवत्। (इ) 01 से 100 तक संख्यावाचक शब्द तथा कति के रूप। 6. धातुरूप- निम्नलिखित धातुओं के लट्, लङ्, लोट्, विधिलिंङ एवं लृट् लकार में रूप। (अ) आत्मनेपद्-सेव्, लभ्, वृध्, भाष्, शी, विद्। (आ) उभयपद- नी, याच्, दा, ग्रह्, ज्ञा, चुर्, श्रि, क्री, धा। 7. प्रत्यय-ल्युट्, ण्वुल्, तुमुन्, क्त्वा, अनीयर्, टाप्, ङीष्। 8. वाच्यपरिवर्तन- वाक्यों में कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य एवं भाववाच्य पदों का वाच्यपरिवर्तन।
विशय-उर्दू
(कक्षा-12)
इसमें 100 अंको का एक प्रश्नपत्र होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 अंक
1-व्याख्या तशरीह (तीन इकतिबासात में दो की तशरीह) 2-नस्र निगारों पर तनक़ीदी सवालात 3-खुलासा (गैर दरसी इकतबास) 4-तारीख नसरी असनाफ अदब 5-निबन्ध (मजमून)
खण्ड-क (गद्य) पूर्णांक 50 15 अंक 10 अंक 10 अंक 5 अंक 10 अंक खण्ड-ख (पद्य) पूर्णांक 50 15 अंक 10 अंक 5 अंक 5 अंक 1-तशरीहात (गज़ल और दूसरे असनाफ-ए-शायरी) की तशरीहात 2-शायरों पर तनकीदी सवालात 3-असनाफ शायरी 4-(अ) कवायद (व्याकरण) (सनअतें) अलंकार-(तशबीह, इस्तेआरा मरातुन नजीर हुस्नए-तालील, तजाहुल-ए-आरफाना तलमीह, मजाज़ मुरसल, मुबालग़ा, तजाद)
(ब) मुहावरे व जर्बुल इमसाल (कहावतें) 5-उर्दू जुबान व अदब का इरतिक़ा
5 अंक 10 अंक
पाठ्यवस्तु गद्य
नस्र (गद्य) 1-मीर अम्मन किस्सा मुल्क नीम रोज के शहजादे का 2-मिर्जा गाल़िब के खुतूत नवाब अनवार उद्दौला सादउद्दीन खां बहादुर शफ़क के नाम 3-मौलाना मुहम्मद हुसैन 'आजाद'222 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 उर्दू शायरी के पांच दौर 4-मौलाना अल्ताफ़ हुसैन 'हाली' गज़ल की इस्लाह 5-अल्लामा राशिदुल खैरी करबला का नन्हा शहीद 6-मौलाना अबुल कलाम आज़ाद हिकायत बादह व तिरयाक 7-मौलाना अब्दुल हक अदब उर्दू व चकबस्त 8-आले अहमद सुरूर नया अदबी शऊर
(नज्म) पद्य 1-गजलियात ख्वाजामीर दर्द, मीरतक़ीमीर, गालिब, अमीरमीनाई, चकबस्त, फ़ानीबदायूनी, असगरगोण्डवी, मजाज़, जजबी, नशूर वाहिदी (शुरू की तीन गजलें) 2-मसनवियात 1-दास्तान वारिद होना, बेनजीर का बाग में बदे्र मुनीर के 2-दयाशंकर नसीम (हम्द, नात व मुनकबत) आवारा होना बकावली का ताजुल मुलूक गुलची की तलाश में। 3-ब्याह होना बकावली का ताजुल मुलूक के साथ। मसनवी तराना-ए-शौक 4-इकबाल -साकीनामा 5-अली सरदार जाफ़री-साजे़ हयात कसायद जौक : दर मदह अबू जफ़र बहादुर शाह गालिब : कसीदह, दरमदह बहादुर शाह जफर मरासी 1-मीर अनीस-हज़रत इमाम हुसैन का हजरत अब्बास को अलम सौंपना। बाद के सभी बन्द 2-मिर्जा सलामत अली दबीर-तुलुए सुबह 3-सफी लखनवी-मरसिया हाली 4-असरारूल हक मजाज ताजे वतन का लाले दरखशां चला गया। (गांधी जी की मौत से मुतास्सिर होकर) कताअत 1-अकबर इलाहाबादी-खत्म वहार, मशरिक व मगरिब, नई रोशनी, कश-मकश 2-अल्लामा इकबाल (मुल्ला और बहिश्त) 3-जोश-इंतेजार, माज़रत 4-अख्तर-ताज, टैगोर की शायरी
रूबाईयात मीर अनीस, प्यारे मियां साहब रशीद, अमजद हैदराबादी मनजूमात 1-हाली-इकबाल मन्दी की अलामत 2-अकबर-लबे साहिल और मौज 3-चकबस्त-आसफउद्दौला का इमामबाड़ा 4-इकबाल अल्लामा (शुआए उम्मीद) 5-जोश (आवाज़ की सीढ़ियां) 6-अफसर मेरठी-तुलुए खुर्शीद ए-नव 7-अख्तर-शिरानी-नगम-ए-ज़िन्दगी। असनाफे नस्र- दास्तान, मकतूबेगारी, तजकारनेगारी, तनकीदनेगारी, मजमूननेगारी, खाकानेगारी। असनाफे शायरी-गजल, कसीदा, मरसिया, मसनवी, रूबाई, कताआत, नज्म नेगारी कवायद (सनाए व बदाए)भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 223 मोबालगा, हुस्ने कलाम और बलागत, इस्तेआरा, मराअतुन्नजीर, तलमीह, मरातुन नज़ीर, हुस्न-ए-तालील, तलमीह, इहाम, लफ व नशर, तजाद, तजनीस, तनसीकुस्सिफात, कनाया, मेजाजमुरसल, तजाहुल ए आरिफाना मुहावरात एवं जरबुल इमसाल (कहावतें)
विशय-गुजराती
(कक्षा-12)
20 अंक 20 अंक 20 अंक 20 अंक 10 अंक 10 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य विभाग (भाव निरूपण) 2-पद्य विभाग (भाव निरूपण) 3-गद्य विभाग (पाठ्य पुस्तक पर आधारित प्रश्न) 4-पद्य विभाग (पाठ्य पुस्तक पर आधारित कविताओं की समीक्षा) 5-रस, छन्द तथा अलंकार 6-निबन्ध निर्धारित पुस्तकें- (1) गुजराती (धोरण 12) गुजरात राज्य शाखा पाठ्य पुस्तक मण्डल विधायन, सेक्टर 10-ए, गांधी नगर (गुजरात)
विशय-पंजाबी
(कक्षा-12)
(शत-प्रतिशत पाठ्यक्रम)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
6 अंक
इकाई-1 (1) पंजाबी सभियाचार की जान पहचान (लेखक की रचना, रचना के
लेखक, सही/गलत, बहुविकल्पीय प्रष्न, रिक्त स्थान पूर्ति प्रष्न,
एक से शब्दों के उत्तर वाले प्रष्न)
2 अंक
(2) कविता-(कविता का नाम एवं रचना)
(3) कहानी-(पात्रों के बारे में)
3 अंक
(4) कहानी (अखौता) पांच अधूरी कहावतों को पूरा करना है। 5 अंक
24 अंक
इकाई-2 पंजाबी भाग-12 के सभियाचार के पाठों के अभ्यास प्रश्नों में से किन्हीं
दस प्रश्नों में से आठ प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। (83)
इकाई-3 कार्य व्यवहार के पत्रों में से दो विषयों में से किसी एक विषय पर पत्र
5 अंक
लेखन।
इकाई-4 पाठ्य पुस्तक के एक अंश की लगभग एक तिहाई शब्दों में संक्षिप्त रचना
5 अंक
करनी होगी तथा उसका शीर्षक लिखना होगा।
इकाई-5 तीन में से किसी दो को कोष-तरतीब के लिखना। 2½+2½=5
अंक
इकाई-6 किन्हीं दस वाक्यों में से सात वाक्यों को बदल कर लिखना। (1x7) 7 अंक
इकाई-7 पाठ्य पुस्तक में से दी गई किन्हीं तीन कविताओं में से किसी एक का
5 अंक
केन्द्रीय भाव लिखना।
इकाई-8 पाठ्य पुस्तक में से दी गई कहानियों में से किसी एक कहानी का सार
7 अंक
लिखना।
10 अंक
इकाई-9 पाठ्यपुस्तक में से दिये गये सभियाचार की जान-पहचान में से दिये गये
दो लेखों में से एक का सार लगभग 150 शब्दों में लिखना।
इकाई-10 पंजाबी से हिन्दी में अनुवाद (8 पंक्तियाँ) (1x8) 08 अंक
इकाई-11 हिन्दी से पंजाबी में अनुवाद (8 पंक्तियाँ) (1x8) 08 अंक
निर्धारित पाठ्यपुस्तक- लाजमी पंजाबी कक्षा-12
सम्पादक श्रीमती रजिन्दर चौहान प्रकाशक पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड
साहिबजादा अजीत सिंह नगर पंजाब- स्थान-प्रकाश बुक डिपो, हॉल
बाजार, अमृतसर।
224 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4बंगला (केवल प्रश्नपत्र)
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
(1) पद्य पाठ्य-पुस्तक
40 अंक (2) नाटक
30 अंक (3) आधुनिक बंगला साहित्य का संक्षिप्त इतिहास 19वीं सदी
20 अंक (4) अलंकार :
10 अंक निम्नलिखित अलंकारों का अध्ययन किया जाय :
अनुप्रास, यमक, श्लेष, रूपक, उत्पे्रक्षा, व्यतिरेक, सन्देह, व्याजस्तुति, अप्रस्तुत, प्रशंसा, अर्थान्तरन्यास, अपहुनति, श्वभयोक्ति, अतिश्योक्ति।
संस्तुत पुस्तकें--
उच्च माध्यमिक बंगला संचयन (कविता व नाटक)--
पश्चिम बंग माध्यमिक शिक्षा परिषद् विश्व भारती, 6 आचार्य जगदीश बसु रोड, कोलकाता --17।
कवितायें--
1-पूर्वराग--चण्डीदास।
2-हरगोरोर संसार--भारत चन्द्र।
3-रावणेर रण सज्जा--मधुसूदन दत्त।
4-मानव वन्दना--अक्षय कुमार बड़ाल।
5-ओरा काज करे--रवीन्द्र नाथ ठाकुर।
6-वर्ष बोधन--सत्येन्द्र नाथ दत्त।
7-रवीन्द्र नाथेर प्रति--बुद्धदेव बसु।
8-बुलान मंडलेर प्रति कालकेतु--कवि कंकन मुकुन्दराम चक्रवर्ती।
9-कौचडाव--यतीन्द्र नाथ सेन गुप्ता।
10-जीवन वन्दना--काजी नज़रूल इस्लाम।
11-घोषणा--सुभाष मुखोपाध्याय।
12-अठारों बहोर वयत्र--सुकान्त भट्टाचार्य।
नाटक--
1-कर्ण कुन्ती संवाद--रवीन्द्र नाथ।
2-स्टाचु--मन्मथ राय।
3-आधुनिक बंगला साहित्य-इति वृत्त-अषित कुमार बंदोपाध्याय।
संस्तुत पुस्तकें--
1-An up-to-date Bengali Composition
1-अशोकनाथ भट्टाचार्य, माडर्न बुक एजेन्सी, कोलकाता--17।
2- बंगला द्वितीय पत्र (द्वितीय खण्ड) कनके बन्दोपाध्याय, स्टूडेन्टस बुक सप्लाई, 1 कालेज स्क्वायर-72भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 225
विषय-मराठी
(कक्षा-12)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
(1) गद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (गद्य भाग से एक)
08 अंक (2) गद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (कथा भाग)
08 अंक (3) पद्यांश की सन्दर्भ सहित व्याख्या (पद्य भाग से एक)
08 अंक (4) गद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (गद्य भाग से)
08 अंक (5) गद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (कथा भाग)
08 अंक (6) पद्य पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न (पद्य भाग से)
08 अंक (7) सारांश लेखन
15 अंक (8) म्हणी व वाक्प्रचार
10 अंक (9) रस, छन्द एवं अलंकारों पर आधारित प्रश्न 15 अंक (10) व्याकरण (लिंग, वचन)
12 अंक निर्धारित पुस्तकें--
1-युवक भारती (इयत्ता 12वीं)--महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक मण्डल, पुणे।
2-मराठी लेखन, लेखक--प्रोफे0--केरंवीकर तथा खानवलकर, ढवले प्रकाशन, मुम्बई।
3-मराठी भाषा प्रदीप, स्नेहल तावरे, स्नेहवर्धन, प्रकाशन, पुणे।
असमी
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र होगा।
1-गद्य . . 20 अंक 2-पद्य . . 20 अंक 3-नाटक . . 20 अंक 4-व्याकरण . . 20 अंक 5-निबन्ध (जनसंख्या, पर्यावरण, ट्राफिक रूल्स, आपदा प्रबन्धन पर प्रश्न पूछे जायेंगे।) 20 अंक
निर्धारित पुस्तक-
1-साहित्य कौशल-असम हायर सेेकेण्डरी एजूकेशन काऊसिंल ज्योति प्रकाशन जसवन्त रोड, गुवाहाटी निर्धारित पाठ-
गद्य- 1-सप्तरथ श्रतिकर विज्ञान विप्लव एवं न्यूटन-डा0 कुलिन्द्र पाठक।
2-अहोहुतुकि प्रीति-डा0 बनिकन काग्ती।
पद्य- 1-नाट्यघर-नलिन बाला देवी।
2-विश्वखुनिकर-मफीजउद्दीन अहमद हजारिका।
नाटक- 1-विभूति कोइना-ज्योति प्रसाद अग्रवाल।
29 ङ226 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
उड़िया
कक्षा-12
उड़िया-केवल प्रश्नपत्र
45 अंक 30 अंक 15 अंक 10 अंक
30 अंक 15 अंक
20 अंक
10 अंक इस विषय में 100 अंको का एक प्रश्नपत्र होगा। पूर्णाक 100 1 गद्य 2 पद्य 3 व्याकरण 4 निबन्ध 1-गद्य 1. गद्य पर आधारित प्रश्न 2. सहायक पुस्तकों पर आधारित प्रश्न निर्धारित पुस्तक 1. प्रबन्ध प्रकाश- लेखक रत्नाकर पति सहायक पुस्तकों में से पठित अंक 1. छमाण आठ गुन्ठ-लेखक-फकीर मोहन सेनापति 2. कला पाहाड़-लेखक अश्विनी कुमार घोष 2-पद्य- 1 पद्य पर आधारित प्रश्न 2-व्याख्या निर्धारित पुस्तक 1. चिलिका-लेखक-राधानाथ राय 2. तपस्वनी-लेखक-गंगाधर मेहर 3. कला जादू-लेखक-गदाबरीस मिश्र 3-व्याकरण-अलंकार, उपमा, उत्प्रेक्षा, यमक, विशेषोक्ति, अनुप्रास, विभावना । 15 निबन्ध-पर्यावरण, जनसंख्या, प्रदूषण, ट्रैफिक रूल्स पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे। 10
कन्नड़
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा-- 20 अंक 1-सन्दर्भ सहित व्याख्या पद्य एवं नाटक 20 अंक 2-आलोचनात्मक प्रश्न-पद्य एवं नाटक 10 अंक 3-सहायक पुस्तकें जिसका विस्तृत अध्ययन वांछनीय नहीं है 10 अंक 4-व्याकरण एवं लोकोक्तियाँ 5-भाषाभ्यास 25 अंक 6-निबन्ध (पर्यावरण, जनसंख्या, प्रदूषण एवं टै्रफिक रूल्स पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे।) 08 अंक 07 अंक 7-अपठित
निर्धारित पुस्तकें--
1-काव्य संगम-भाग दो 2-मिंकू तिमन्ना काग, 100 पद, लेखक--डी0 बी0 गुंडप्पा, प्रकाशक--काव्यालय प्रकाशन, मैसूर।
नाटक--
1-गदायुद्ध नाटकम्, लेखक--बी0 एम0 काटिया, प्रकाशक--विश्व साहित्य, मैसूर।
आलोचनात्मक--
1-विमर्श, लेखक--मारुति वेण्कटेस आयंगर, भाग-1 मात्र, प्रकाशक--जीवन कार्यालय, बसवनगुड़ी, बंगलौर सिटी।
अपठित-- सन्ना कटैगुडू
सिन्धी
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न.पत्र तीन घंटे का होगा। गद्य, नाटक, निबंध सिन्धी साहित्यिक रत्नावली (सिन्धी नसुक खण्ड के पाठ 11 से 20)भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 227 05 03 02
10 1–गद्यांश अथवा सूक्ति परक वाक्य का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या, साहित्यिक सौंदर्य एवं सीख। 1½151½1 10 2–लेखकों की जीवनी, साहित्यिक परिचय, भाषा शैली तथा कृतियों की समीक्षा। 22222 10 3–पाठों का सारांश (शब्द सीमा 75-100)। 4–तर्क संगत लघु उत्तरीय (शब्द सीमा 40-50) एक प्रश्न। 5–अति लघु उत्तरीय (शब्द सीमा 1-5) दो प्रश्न। 6–नाटक : पुकारू, लेखक डॉ0 प्रेम प्रकाश-(सीन सं0 11 से 22) इसमें निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित प्रश्न (शब्द सीमा 75-100)– 10 (क) नाटक के तत्व एवं उनकी विशेषतायें। (ख) सारांश/विविध घटनायें। (ग) चरित्र-चित्रण या पात्रों की विशेषतायें। 7–निबंध : निम्नलिखित विषयों में से 225-250 शब्दों तक एक निबंध (क) सिंधी भाषा। (ख) सिंधी पर्व। (ग) सिंधी महापुरुष। (ङ) सिंधी साहित्यकार। (च) सिंधी सामाजिक समस्यायें। (छः) यातायात सुरक्षा
पद्य, अनुवाद, उपन्यास सिन्धी साहित्यिक रत्नावली (सिन्धी नज़्म खण्ड के पाठ 11 से 23)
05 05
05 05
10 1–पद्यांश अथवा सूक्ति परक वाक्य का संदर्भ, व्याख्या एवं काव्यगत सौंदर्य। 253 10 2–कवियों की जीवनी साहित्यिक परिचय, भाषा, शैली तथा कृतियों की समीक्षा। 22222 10 3–कविताओं पर आधारित 1 प्रश्न (शब्द सीमा 50-60)। 4–कविताओं पर आधारित 3 प्रश्न (शब्द सीमा 1-5)। 5–अनुवाद : (क) हिन्दी से सिंधी में पाँच वाक्य। (ख) सिंधी से हिन्दी में पाँच वाक्य। 6–उपन्यास : अझो, लेखक–हरी मोटवानी। निम्नलिखित तथ्यों पर आधारित प्रश्न– (क) उपन्यास के तत्व एवं उनकी विशेषतायें। (ख) चरित्र-चित्रण। (ग) तथ्य एवं घटनायें। (घ) भाषा। (ङ) उपन्यास कला की दृष्टि से समीक्षा। (च) सारांश। पुस्तक :– सिन्धी साहित्यिक रत्नावली कक्षा-11 के लिये सिन्धी नसरू-ए-नज्म संकलन, संपादक आतु टहिलियाणी। संषोधित प्राप्ति स्थान सिन्धी वेलफेयर सोसायटी, एस,जी-1 राजपाल प्लाजा, कानपुर रोड, आलमबाग लखनऊ। नाटक :– पुकारूं–लेखक–डॉ0 प्रेम प्रकाश, उपर्युक्त पुस्तक में उपलब्ध है। उपन्यास :– अझो लेखक–हरी मोटवानी, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान में कक्षा 12 के लिये पाठ्य-पुस्तक निर्धारित है।
228 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4तमिल (केवल प्रश्नपत्र)
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
1-पद्य :
(1) सन्दर्भ तथा व्याख्या (2) लेखक परिचय, शैली, आलोचना आदि (3) कविता सारांश अथवा अन्य सामान्य प्रश्न
4- (1) पद्य पर आधारित लघु प्रश्न (2) पद्य पर आधारित अति लघु प्रश्न 5-अनुवाद--(हिन्दी से तमिल)
05 अंक 05 अंक 10 अंक 2-निबन्ध : (पर्यावरण, जनसंख्या, प्रदूषण तथा ट्रैफिक रूल्स पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे।) 20 अंक 05 अंक 3- (1) साधारण शब्दों तथा मुहावरों का प्रयोग (2) समास तथा सन्धि 05 अंक (3) शब्द-भेद (एक शब्द का भिन्न-भिन्न अर्थों सहित वाक्यों में प्रयोग) 10 अंक 05 अंक 15 अंक 10 अंक 10 अंक (तमिल से हिन्दी) सहायक पुस्तकें--तमिल पाठ्यपुस्तक
तेलगू (केवल प्रश्नपत्र)
कक्षा-12
25 अंक 25 अंक 25 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-गद्य एवं पद्य पर आलोचनात्मक प्रश्न 2-सन्दर्भ सहित व्याख्या 3-व्याकरण एवं लोकोक्तियां 4-निबन्ध (जनसंख्या, ट्रैफिक रूल्स, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर भी प्रश्न पूछे जायेंगे।) 25 अंक निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें--
पद्य--करुण श्री, ले0 जे0 पाप्य शास्त्री (राम पब्लिशर्स, कंतुल रिस्ट्रीट, विजयवाड़ा-1, आ0 प्र0 से प्राप्त)। गद्य--नीतिचन्द्रिका--मित्रेवदन, लेखक--चिन्नसुयरि (वेंकट राम ऐण्ड कं0)।
व्याकरण--
आन्ध्र व्याकरणम् गा0 रा0 सीदरुलु।
मलयालम (केवल प्रश्नपत्र)
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 30 अंक (1) पठित पद्य पर आधारित (2) निबन्ध ( पर्यावरण, प्रदूषण एवं ट्रैफिक रूल्स पर आधारित निबन्ध भी पूछे जायेंगे।) 20 अंक 10 अंक (3) मुहावरे 10 अंक (4) व्याकरण 10 अंक (5) पत्र-लेखन 10 अंक (6) अंग्रेजी से मलयालम में अनुवाद 10 अंक (7) प्रश्नोत्तर
निर्धारित पुस्तक-
1-कालतिन्दे कर्नाटी, लेखक-प्रो0 मुन्टशेरि।
विषय-नेपाली
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
1-गद्य (पंचम पाठ से अन्तिम पाठ तक) (ससन्दर्भ गद्यांश व्याख्या, लेखक परिचय और समीक्षा) 20 अंक
2-पद्य (पंचम पाठ से अन्तिम पाठ तक) (सन्दर्भ सहित पद्यांश व्याख्या, कवि परिचय और समीक्षा) 20 अंक
3-नाटक (ससन्दर्भ अवतरण व्याख्या एवं हिरण्यकशिपु को छोड़कर नाटक के शेष पात्रों का परिचय) 10 अंक
4-अनुवाद नैपाली से संस्कृत 05
संस्कृत से नैपाली 05 10 अंक
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 229
5-निबन्ध (विजयदशमी, फागुपूर्णिमा, जन्माष्टमी, तिहार, जलप्रदूषण, मृद् प्रदूषण, में किसी एक विषय में) 10 अंक 6-पाठ सारांश (निर्धारित पाठ्यपुस्तक के निर्धारित पाठों का सारांश पाठ का
10 अंक संक्षिप्तीकरण अथवा विभिन्न पाठों पर आधारित तर्क संगत लघु उत्तरीय प्रश्न)
7-छन्द (उपेन्द्रवज्रा, उपजाति, वंशस्थ, शिखरिणी, षार्दूल विक्रीडित, भुजंग प्रयण) 10 अंक 8-अलंकार-- 10 अंक (उपमा, रूपक, दृष्टान्त, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अर्थान्तरन्यास, विरोधाभास) सन्धि, शब्द रूप एवं धातुरूप (गुणसन्धि, वृद्धिसन्धि, विसर्गसन्धि) शब्दरूप--आत्मन, अस्मद्, युष्मद्, तद् धातुरूप--(पठ्, गम् धातु के लट्, लिङ्, लृट्, लोट् लकार के रूप) निर्धारित पाठ्य-पुस्तक--
1-नेपाली गद्य चन्द्रिका, भाग-2 (पंचम पाठ से अन्तिम पाठ तक), लेखक दिनेश चन्द्र, प्रकाशक जगदीश चन्द्र रेग्मी, नेपाली पुस्तक सदन, दुर्गाघाट, वाराणसी।
2-नेपाली पद्य चन्द्रिका, भाग-2 (पंचम पाठ से अन्तिम पाठ तक), लेखक दिनेश चन्द्र, प्रकाशक जगदीश चन्द्र रेग्मी, नेपाली पुस्तक सदन, दुर्गाघाट, वाराणसी।
3-तरुण तपसी, (3-5 विश्राम) रचयिता लेखनाथ पौडयाल, काठमाण्डू, नेपाल। 4-प्रहलाद (नाटक), बालकृष्ण समसाझा, प्रकाशन काठमाण्डू, नेपाल। 5-भिखारी--रचयिता--लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा, साझा प्रकाशन, काठमाण्डू, नेपाल (निर्धारित पाठ वन, घांसी) 6-सहायक ग्रन्थ-- (1) छन्द, रस अलंकार--गोरखा पुस्तक भण्डार, वाराणसी। (2) शब्द धातु रूप छन्दसा तालिका सम्पादक, विनोद राय पाठक, शारद प्रकाशन संस्थान, वाराणसी। (3) लघु सिद्धान्त कौमुदी
विषय-पालि
कक्षा-12
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा।
(1) गद्य-- महापरिनिब्बान सुत्तं (सम्पूर्ण) 30 अंक (2)पद्य--(क) धम्मपद (धम्मट्ठवग्गो, मग्गवग्गो,पकिण्णकवग्गो, निरयवग्गो,नागवग्गो, तण्हावग्गो, भिक्खुवग्गो, ब्राह्मणवग्गो) 30 अंक (ख) चरियापिटक (दानपारमिता के अन्तर्गत छः से दस चर्याएं)
[1] पुल्लिंग--मुनि, भिक्खु
[2] स्त्रीलिंग--इत्थी [3] नपुंसकलिंग--अट्ठि, आयु (ख) धातु रूप--वर्तमान, भूत तथा भविष्यत् काल में निम्नलिखित धातुओं के रूप पठ, गम, रक्ख, पच, नम, बुध, सक, लिख, भुज, कथ, पूज। (ग) सन्धियाँ--निम्नलिखित सूत्रों पर आधारित होंगी, परन्तु सूत्रों को कंठस्थ करना
आवश्यक नहीं है।
[क] स्वर सन्धि--(1) परोक्वचि, (2) ए ओ नं [ख] व्यंजन सन्धि--(1) सरम्हा। [ग] निग्गहीतं सन्धि--(1) लोपो। (घ) समास--निम्नलिखित समासों की सामान्य परिभाषा तथा उदाहरण : [1] बहुब्रीहि समास [2] द्वन्द्व समास।
10 अंक (ii) निबन्ध--पालि भाषा में संक्षिप्त निबन्ध सरल सात वाक्यों में भगवाबुद्धो, कुसिनारा, राजा असोको, बोधगया, चत्तारि अरियसच्चानि, यातायात-सुरक्खा। (iii) अनुवाद--हिन्दी वाक्यों का पालि में रूपान्तरण (अनुवाद का उद्देश्य छात्र/छात्राओं को पालि भाषा में वाक्य रचना एवं पालि भाषा के संगठन/पद्धति से परिचित कराना है)। 10 अंक (4) पालि साहित्य का इतिहास द्वितीय बौद्ध संगीति, तृतीय बौद्ध संगीति, विनय पिटक। 10 अंक नोट :- अनुवाद के लिये कोई पाठ्य-पुस्तक निर्धारित नहीं है।
230 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4विषय-अरबी
(कक्षा-12)
इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न पत्र 3 घण्टे का होगा
1-निर्धारित पद्य की उर्दू या अंग्रेजी में व्याख्या 20 अंक 2-पाठ्यक्रम पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न, जिनके उत्तर उर्दू या अंग्रेजी में दिये जा सकते हैं। 10 अंक 08 अंक 3-व्याकरण 12 अंक 4-उर्दू या हिन्दी या अंग्रेजी से अरबी में अनुवाद 5-निर्धारित गद्य की उर्दू या अंग्रेजी में व्याख्या 20 अंक 6-पाठ्यक्रम पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न, जिनके उत्तर उर्दू या अंग्रेजी में दिये जा सकते हैं 08 अंक 7-निबन्ध-जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं ट्राफिक रूल्स की जानकारी हेतु इन विषयों पर भी निबन्ध पूछे जायेंगे। 12 अंक 8-सहायक पुस्तक से व्याख्या 10 अंक निर्धारित पाठ्य-पुस्तकें (गद्य तथा पद्य)--
अतीबुल मुनतखबात, लेखक-हाफिज सैय्यद जलालउद्दीन अहमद जाफरी (प्रकाशक-जाफरी ब्रदर्स, प्रयागराज)। 1-गद्य-पाठ-11, 13, 14, 15, 16, 20, 21, 22, 23, 24 2-व्याकरण-असासे अरबी, लेखक-नईमुर्रहमान (प्रकाशक-किताबिस्तान, प्रयागराज)। 3-पद्य-पाठ-11, 12, 13, 14, 15, 17, 18, 19 सहायक पुस्तक-
अद्दरारी, भाग 2, लेखक-डा0 ए0एम0एन0 अली हसन, प्रकाशक-राम नारायण लाल बेनी माधव, प्रयागराज (केवल प्रारम्भ से 30 पृष्ठ पढ़ना है)।
या मिनहाजुल अरबिया, भाग 4, लेखक-एस0 नबी हैदराबादी।
विषय-फारसी
(कक्षा-12)
10 अंक
12 अंक इस विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। 1-निर्धारित पाठ्य-पुस्तक से कविता का उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में व्याख्या 15 अंक 2-पाठ्य-पुस्तक पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न का उत्तर उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 15 अंक 08 अंक 3-व्याकरण 4-अनुवाद उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी से फारसी में 12 अंक 5-पठित पुस्तकों के किसी गद्य भाग की व्याख्या उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 20 अंक 6-पाठ्य-पुस्तक पर आधारित आलोचनात्मक प्रश्न का उत्तर उर्दू अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में 08 अंक 7-सहायक पुस्तक के किसी उद्धरण की व्याख्या 8-निबन्ध (जनसंख्या, पर्यावरण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं ट्रैफिक रूल्स की जानकारी हेतु इन विषयों पर भी निबन्ध के रूप में पूछे जायेंगे)। निर्धारित पाठ्य पुस्तकें--
(पद्य के लिये)
1-बहारिस्ताने फारसी, भाग-दो, लेखक--खानम जाकिरा रईस, प्रकाशक--शहनाज पब्लिकेशन, शहमदगंज, बरेली।
(गद्य के लिये) 2- बहारिस्ताने फारसी, भाग-दो, लेखक--खानम जाकिरा रईस, प्रकाशक--शहनाज पब्लिकेशन, शहमदगंज, बरेली। 3-व्याकरण-मिसबाहुल कवायद प्रथम भाग लेखक-एम0एच0 जलालउद्दीन जाफरी-प्रकाशक अनवार अहमदी प्रेस, प्रयागराज। 4-अनुवाद तथा निबन्ध-जदीद रहनुमाय तरजुमा व कवायद फारसी-तृतीय भाग लेखक शाहराजी अहमद-प्रकाशक रामनारायन लाल बेनी माधव, प्रयागराज। 5-सहायक पुस्तक- गुलदस्तये फ़ारसी-लेखक हाफ़िज मुहम्मद खां-प्रकाशक राम नारायन लाल बेनी माधव, प्रयागराज।
निर्धारित पाठ्यवस्तु
पद्य
1-मौलाना रूम-मसनवी 2-बोस्तान-ए-सादी 1-रौज़ा ए सुल्तानभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 231 2-दिले दर्द मंदा बद आवर जेबन्द 3-बरहाल-ए-आम-तताबुलनकुनैद 3-गजलियात-शेखसादी शीराजी 4-ऐराकी हमदानी-गजलियात 5-सलमान साऊजी-गजलियात 6-ख्वाजा हाफ़िज शीराजी-गजलियात
रूबाईयात अबु सईद अबुलखैर क़तात 1-शर्फ़े मर्द 2-तासीर-ए-हमनशीनी 3-सोहबते नेकां सईद नफ़ीसी 1-पैगामे शायर-बेदुख्तराने इमरोज सियावस कसराई 1-बाग़-ए-काली गद्य 1- इंतेख़ाब अज़ इखलाक ए मोहसिनी 2- इन्तेख़ाब अज जवामउल हिकायत 3-इन्तेखाब अज रिसाले दिलकुश-उबैद ज़ाकानी। 4-इन्तेखाब अज लतायेफ़ उत तवायफफ-मौलाना फखरूद्दीन अली आसफी। 5-चमन-ए-फारसी तीसरा हिस्सा लेखक अंजुम तनवीर 6-निबन्ध- 1- पर्यावरण, स्वास्थ्य व शिक्षा 2-अतात-ए-वालदैन 3- दोस्तों की गुुफ्तगू 4-मदरसा-ए-मां 5- ट्रैफिक रूल्स प्रकाषक-जन्नतनिषां बुक डिपो, सम्भली गेट, मुरादाबाद।
| प्रश्नों के प्रकार | प्रश्नों की संख्या | अंक | कुल अंक |
| बहुविकल्पीय प्रश्न | 10 | 1 | 10 |
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न | 5 | 2 | 10 |
| लघु उत्तरीय प्रश्न | 6 | 5 | 30 |
| दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | 3 | 10 | 30 |
| मानचित्र | 5 | 02 | 10 |
| ऐतिहासिक घटनाक्रम | 10 | 01 | 10 |
| प्रश्नों की संख्या-39 | योग - 100 |
कक्षा-12 इतिहास
इसमें 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र होगा।
भाग-1 30 अंक
विषय -1 ईटें मनके तथा अस्थियाँ ( हड़प्पा सभ्यता) प्रथम शहर की कहानी - हड़प्पा का पुरातत्व सिंहावलोकन - प्रारम्भिक नगरीय केन्द्र हड़प्पा सभ्यता के खोज की कहानी उद्धरण - प्रमुख स्थानों के पुरातात्विक विवरण विमर्श (चर्चा) - इतिहासकारों और पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा किस प्रकार उपयोग किया गया।
232 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4विषय -2 राजा किसान और नगर राजनीतिक और आर्थिक इतिहास- शिलालेख किस प्रकार इतिहास का निर्माण करते हैं। सिंहावलोकन - मौर्य काल से गुप्त काल तक का राजनैतिक, आर्थिक इतिहास। खोज की कहानी- शिलालेख और लिपि का (स्पष्टीकरण)। अभिज्ञान। राजनीतिक और आर्थिक इतिहास की अवधारणा में परिवर्तन। उद्धरण - अशोक के शिलालेख और गुप्तकालीन भूमिदान। विचार विमर्श- इतिहासकारों द्वारा शिलालेख की विवेचना।
विषय -3 बंधुत्व जाति तथा वर्ग सामाजिक इतिहास- महाभारत के सन्दर्भ में।
सिंहावलोकन - जाति, वर्ग, बन्धुत्व और लिंग के सन्दर्भ में सामाजिक इतिहास। खोज की कहानी-महाभारत के सन्दर्भ में इसका प्रवर्तन और संचरण (प्रकाशन)। उद्धरण - महाभारत से। इतिहासकारों द्वारा इसे किस रूप में व्याख्यायित किया गया। विचार विमर्श- सामाजिक इतिहास के पुनर्निर्माण के अन्य स्त्रोत।
विषय -4 विचारक, विष्वास और इमारतें।
बौद्ध धर्म का इतिहास : साँची स्तूप सिंहावलोकन - वैदिक धर्म, जैन धर्म, वैष्णव धर्म, शैव धर्म के संक्षिप्त इतिहास का अवलोकन। मुख्यतः बौद्धधर्म खोज की कहानी- बौद्ध धर्म के सन्दर्भ में साँची स्तूप के खोज की कहानी। उद्धरण - साँची स्तूप की शिल्पकला का पुनर्निर्माण। विचार विमर्श - इतिहासकारों द्वारा शिल्प-कला का प्रयोग किस प्रकार किया गया। बौद्ध धर्म के इतिहास के पुनर्निर्माण के अन्य स्त्रोत।
भाग-2 30 अंक विशय-5 यात्रियों के नजरिये।
यात्रियों के विवरण के आधार पर मध्यकालीन समाज- सिंहावलोकन - (1) यात्रियों के विवरण के आधार पर सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की रूपरेखा। लेखन की कहानी- उनका यात्रा विवरण- कहाँ की यात्रा की, क्यों की, क्या लिखा, किसके बारे में लिखा उद्धरण - अलबरूनी, इब्नबतूता, बर्नियर से। विचार विमर्श- उनके यात्रा विवरण क्या बता रहे हैं और किस प्रकार इतिहासकारों ने उसे व्याख्यायित किया है।
विशय-6 भक्ति,सूफी,परम्परायें।
धार्मिक इतिहास- भक्ति और सूफी परम्परा। सिंहावलोकन - (1) धार्मिक विकास की रूपरेखा।
(2) भक्ति और सूफी सन्तों के विचार और व्यवहार।
संचरण (बदलाव) की कहानी- किस प्रकार भक्ति और सूफी कृतियों को संरक्षित किया गया। उद्धरण - चुने हुये भक्ति-सूफी रचनाओं का सार। विचार विमर्श- इतिहासकारों द्वारा की गयी विवेचना।
विशय-7 एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर।
नव स्थापत्य - हम्पी सिंहावलोकन - (1) विजय नगर कालीन नई इमारतों की रूपरेखा, मन्दिर, किले एवं सिंचाई सुविधायें। (2) स्थापत्य और राजनीतिक व्यवस्था के बीच सम्बन्ध। खोज की कहानी- हम्पी की खोज किस प्रकार हुयी। उद्धरण - हम्पी की इमारतों का दृश्य। विचार विमर्श- इतिहासकारों द्वारा इन इमारतों की संरचना का विश्लेषण और विवेचना।
विशय-8 किसान जमीदार और राज्य।
कृषि सम्बन्ध - आईन-ए-अकबरी के परिप्रेक्ष्य में। सिंहावलोकन - (1) सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में कृषि सम्बन्धी संरचना। (2) कृषि में तत्कालीन परिवर्तन का ढाँचा।
खोज की कहानी- आईन-ए-अकबरी का संकलन तथा अनुवाद सम्बन्धी विवरण। उद्धरण - आईन-ए-अकबरी से
विचार विमर्श-इतिहासकारों ने इतिहास के पुनर्निर्माण में आईन- ए-अकबरी का किस प्रकार प्रयोग किया।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 233भाग-3 30 अंक
विशय-9 उपनिवेषवाद और देहात।
उपनिवेशवाद और ग्रामीण समाज-सरकारी प्रतिवेदनों से साक्ष्य। सिंहावलोकन - (1) 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जमींदारों, किसानों और कलाकारों का जीवन वृत्तान्त।
(2) ईस्ट इण्डिया कम्पनी, राजस्व व्यवस्था और सर्वेक्षण।
(3) 19वीं शताब्दी में परिवर्तन। सरकारी दस्तावेजों की कहानी- ग्रामीण समाज में सरकारी जाँच क्यों की गयी, का विवरण। विवरणों के प्रकार और प्रस्तुत प्रतिवेदन।
उद्धरण - फिरमिंगर्स का पंचम प्रतिवेदन, फ्रांसिस बुकानन-हैमिल्टन और दक्कन दंगा रिपोर्ट। विचार विमर्श- सरकारी दस्तावेज क्या कह रहे हैं और क्या नहीं, इतिहासकारों ने किस प्रकार इसका उपयोग किया।
विशय-10 विद्रोही और राज।
1857 ई0 का चित्रण- सिंहावलोकन - (1) 1857-58 की घटनायें। (2) इन घटनाओं को किस प्रकार संरक्षित और चित्रित किया गया। मुख्यतः - लखनऊ। उद्धरण - 1857ई0 के चित्र, समकालीन विवरणों का उद्धरण (अंश) विचार विमर्श- 1857ई0 के दृश्यों ने किस प्रकार अंग्रेजों के परामर्श को परिभाषित किया।
विशय-11 महात्मा गांधी और राश्ट्रीय आन्दोलन। समकालीन विचारकों की दृष्टि में महात्मा गाँधी।
सिंहावलोकन - (1) राष्ट्रवादी आन्दोलन 1918-48 ई0 (2) गाँधीवादी राजनीति की प्रकृति और नेतृत्व मुख्यतः - (केन्द्रित) - 1931 ई0 में महात्मा गाँधी। उद्धरण -अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों की रिपोर्ट (आख्या)और अन्य समकालीन लेख। विचार विमर्श- समाचार पत्र किस प्रकार ऐतिहासिक स्त्रोत हो सकते हैं।
विशय-12 संविधान का निर्माण-
सिंहावलोकन - (1) स्वतंत्रता और नूतन राष्ट्रीय राज्य। (2) संविधान का निर्माण मुख्यतः - संविधान सभा के विचार-विमर्श उद्धरण - विचार विमर्श से। विचार विमर्श- विचार-विमर्श से क्या निष्कर्ष निकला और उसे किस प्रकार विश्लेषित किया गया।
मानचित्र कार्य- 05 प्रष्न 10 अंक 01 अंक सही उत्तर तथा 01 अंक सही स्थान अंकन हेतु निर्धारित है। दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिये मानचित्र कार्य के स्थान पर 05 प्रश्न प्रत्येक 02 अंकों के रखे जायेंगे।
विषय : नागरिक शास्त्र
(कक्षा-12)
| खण्ड 'क' | समकालीन विश्व राजनीति | अंक |
| इकाई-एक- | 1 दो ध्रुवीयता का अंत | 20 |
| 2 सत्ता के समकालीन केन्द्र | ||
| 3 समकालीन दक्षिण एशिया | ||
| इकाई-दो- 1 अन्तर्राष्ट्रीय संगठन | 15 | |
| 2 समकालीन विश्व मे ं सुरक्षा | ||
| इकाई-तीन- 1 2 | पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन वैश्वीकरण | 15 |
| योग | 50 अंक | |
| खण्ड 'ख' | स्वतन्त्र भारत में राजनीति | |
| इकाई-चार- 1 | राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ | 16 |
| 2 | एक दल के प्रभुत्व का दौर | |
| 3 नियोजित विकास की राजनीति |
30 ङ234 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
| इकाई-पांच- 1 | भारत के विदेश सम्बन्ध | 18 |
| 2 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियॉ और पुनस्र्थापना | ||
| 3 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट | ||
| इकाई-छः- 1 | क्षेत्रीय आकांक्षाएँ | 16 |
| 2 | भारतीय राजनीति : नए बदलाव | |
| योग | 50 अंक |
कक्षा-12
| प्रश्नों के प्रकार | प्रश्नों की संख्या | अंक | कुल अंक |
| बहुविकल्पीय प्रश्न | 10 | 1 | 10 |
| अतिलघु उत्तरीय प्रश्न | 10 | 2 | 20 |
| लघु उत्तरीय प्रश्न | 06 | 5 | 30 |
| दीर्घ लघु उत्तरीय प्रश्न | 04 | 6 | 24 |
| दीर्घ उत्तरीय प्रश्न | 02 | 8 | 16 |
| प्रश्नों की संख्या-32 | योग - 100 | ||
| क्रमांक | प्रश्नों का प्रकार | अंक | अनुमानित प्रतिशत |
| 1. | ज्ञानात्मक | 40 | 40% |
| 2. | बोधात्मक | 40 | 40% |
| 3. | अनुप्रयोगात्मक | 20 | 20% |
| योग- | 100 | 100% | |
| क्रमांक | क्लिष्टता स्तर | अंक | प्रतिशत |
| 1. | सरल | 30 | 30% |
| 2. | सामान्य | 50 | 50% |
| 3. | कठिन | 20 | 20% |
| योग- | 100 | 100% |
नागरिक शास्त्र पूर्णांक : 100 अंक
कक्षा-12
खण्ड 'क' : समकालीन विश्व राजनीति पूर्णांक : 50
इकाई- I
20 अंक (1) दो ध्रुवीयता का अंत-
विश्व राजनीति में नई सत्ताएँ : रुस, बाल्कन राज्य, केन्द्रीय एशियाई राज्य; उत्तर-साम्यवादी शासनकाल में लोकतांत्रिक राजनीति और पूँजीवाद का प्रवेश। रूस एवं उत्तर-साम्यवादी राज्यों के साथ भारत के सम्बन्ध।
(2) सत्ता के समकालीन केन्द्र-
उत्तर-माओ युग में चीन का आर्थिक शक्ति के रूप में उदय; यूरोपीय संघ का निर्माण एवं विस्तार। आसियान, चीन के साथ भारत के बदलते सम्बन्ध।
(3) समकालीन दक्षिण एशिया (उत्तर शीत युद्ध युग में)-
पाकिस्तान और नेपाल का लोकतान्त्रिकरण। श्रीलंका का नस्लीय (प्रजातीय) संघर्ष; क्षेत्र पर आर्थिक वैश्वीकरण का प्रभाव। दक्षिण एशिया में संघर्ष एवं शांति के लिये प्रयास। भारत के पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध।
इकाई- II (1) अन्तर्राष्ट्रीय संगठन-
15 अंक संयुक्त राष्ट्र संघ का पुनर्गठन एवं भविष्य। पुनर्गठित संयुक्त राष्ट्र संघ मेंभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 235 भारत की स्थिति। नये अन्तर्राष्ट्रीय कर्त्ताओं का उदय; नये अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठन, गैर सरकारी संगठन। (2) समकालीन विश्व में सुरक्षा- सुरक्षा की पारम्परिक धारणा; निःशस्त्रीकरण की राजनीति। गैर-पारम्परिक या मानवीय सुरक्षा; वैश्विक गरीबी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा। मानव अधिकार और पारगमन (पलायन) के मुद्दे।
इकाई- III
15 अंक (1) पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन-
पर्यावरणीय आन्दोलन और वैश्विक- पर्यावरणीय मानकों का मूल्यांकन। संसाधनों की भू-राजनीति (पारंपरिक एवं अन्य संसाधनों पर संघर्ष) मूलवासियों के अधिकार। वैश्विक पर्यावरणीय विचार में भारत का पक्ष। (2) वैश्वीकरण- आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक घोषणा- पत्र। वैश्वीकरण विरोधी आन्दोलन। वैश्वीकरण के कार्यक्षेत्र के रूप में भारत और इसके विरूद्ध संघर्ष।
खण्ड 'ख' : स्वतन्त्र भारत में राजनीति
50 अंक 16 अंक इकाई- IV (1) राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ- राष्ट्र-निर्माण में नेहरू का दृष्टिकोण; विभाजन की विरासत : शरणार्थियों के पुनर्वास की चुनौती, कश्मीर की समस्या; राज्यों का गठन एवं पुनर्गठन; भाषा पर राजनीतिक संघर्ष। (2) एक दल के प्रभुत्व का दौर-
प्रथम तीन आम चुनाव; राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रभुत्व की प्रकृति; राज्य स्तर पर असमान प्रभुत्व; कांग्रेस की गठबन्धीय प्रकृति। प्रमुख विपक्षी दल।
(3) नियोजित विकास की राजनीति-
18 अंक इकाई- V
पंचवर्षीय योजनायें, राज्य-क्षेत्र का विस्तार एवं नये आर्थिक हितों का उदय, पंचवर्षीय योजनाओं की कमियाँ एवं विलम्ब के कारण। (1) भारत के विदेश सम्बन्ध- नेहरू की विदेश नीति; भारत-चीन युद्ध 1962; भारत-पाक युद्ध 1965 एवं 1971; भारत का परमाणु कार्यक्रम; विश्व राजनीति में बदलते सम्बन्ध।
(2) कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियॉ और पुनस्र्थापना
नेहरू के बाद की राजनीतिक परिपाटी; गैर कांग्रेसवाद और 1967 का चुनावी विचलन; (पलट) कांग्रेस का विभाजन एवं पुनर्गठन; कांग्रेस की 1971 के चुनावों में विजय।
(3) लोकतांत्रिक व्यवस्था के संकट-
गुजरात का नवनिर्माण आन्दोलन एवं बिहार का आन्दोलन; न्याय पालिका से संघर्ष, आपातकाल ः प्रकरण (प्रसंग); संवैधानिक एवं संविधानेत्तर आयाम (पहलू); आपातकाल का विरोध। 1977 के चुनाव और जनता पार्टी का उदय (उत्त्पत्ति)।
16 अंक इकाई- VI (1) क्षेत्रीय आकांक्षाएँ -
क्षेत्रीय दलों का उदय; पंजाब संकट एवं 1984 के सिक्ख विरोधी दंगे। कश्मीर की स्थिति, पूर्वाेत्तर में चुनौतियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ।
(2) भारतीय राजनीति : नये बदलाव-
1990 में भागीदारी की लहर। जनता दल एवं भारतीय जनता पार्टी का उदय; क्षेत्रीय दलों की बढ़ी भूमिका और गठबंधन की राजनीति ः राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठनबंधन (NDA) (1998-2004), संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) (2004-2014), राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) (2014 से अब तक)। मण्डल आयोग की रिपोर्ट लागू करना, साम्प्रदायिकता, धर्म निरपेक्षता और लोक तन्त्र।
236 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4कक्षा-12 अर्थशास्त्र
केवल प्रश्नपत्र -पूर्णांक - 100
खण्ड-क : परिचयात्मक सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics) 1- परिचय 4 अंक 2- उपभोक्ता संतुलन एवं मांग 18 अंक 3- उत्पादनकर्ता का व्यवहार एवं आपूर्ति 18 अंक 4- बाजारों के प्रकार एवं साधारण युक्तियों के साथ आदर्श प्रतिस्पर्धा
की स्थिति में मूल्य निर्धारण 10 अंक
खण्ड-ख : परिचयात्मक वृहत अर्थशास्त्र (Macro Economics) 1- राष्ट्रीय आय एवं पूर्ण योग 12 अंक 2- मुद्रा एवं बैंकिंग 8 अंक 3- आय एवं रोजगार का निर्धारण 14 अंक 4- सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था 8 अंक 5- भुगतान संतुलन 8 अंक खण्ड-क : परिचयात्मक सूक्ष्म अर्थशास्त्र 1-परिचय- सूक्ष्म एवं वृहत अर्थशास्त्र-अर्थ, सकारात्मक अर्थशास्त्र एवं नियामक अर्थशास्त्र। अर्थव्यवस्था क्या है? अर्थशास्त्र की केन्द्रीक समस्यायें। 4 अंक क्या, कैसे और किसके लिये उत्पादन किया जाय। उत्पादन की अवधारणा, उत्पादन संभावना फ्रंटियर एवं अवसर लागत।
2-उपभोक्ता संतुलन एवं मांग : 18 अंक उपभोक्ता संतुलन- उपयोगिता का अर्थ, सीमांत उपयोगिता, सीमांत उपयोगिता क्षीणता का नियम, सीमांत उपयोगिता विश्लेषण द्वारा उपभोक्ता संतुलन संबंधी स्थितियाँ।
उपभोक्ता संतुलन का तटस्थता वक्र द्वारा विश्लेषण - उपभोक्ता का बजट- (बजट सेट एवं बजट लाइन) उपभोक्ता की प्राथमिकतायें (तटस्थता वक्र एवं उदासीनता मानचित्र) एवं उपभोक्ता संतुलन की स्थितियाँ।
मांग, बाजार मांग, मांग के निर्धारक, मांग अनुसूची, मांग वक्र एवं उसकी ढलान, मांग वक्र में गतिविधियाँ एवं मांग वक्र का खिसकना, मांग लोच की कीमत- मांग लोच की कीमत को प्रभावित करने वाले कारक, मांग लोच की कीमत का मापन, प्रतिशत-परिवर्तन प्रणाली।
इकाई-3 उत्पादनकर्ता का व्यवहार एवं आपूर्ति 18 अंक उत्पादन परिभाषा- अर्थ, अंशकालिक एवं दीर्घकालिक कुल उत्पाद, औसत उत्पाद, सीमांत उत्पाद। लागत-अंशकालिक लागत, कुल लागत, कुल निर्धारित लागत, कुल परिवर्तनशील लागत, औसत लागत, औसत निर्धानित लागत, औसत परिवर्तनशील लागत एवं सीमांत लागत- अर्थ एवं उनके संबंध।
राजस्व -कुल, औसत एवं सीमांत राजस्व- अर्थ एवं उनके संबंध। उत्पादनकर्ता का संतुलन-अर्थ एवं सीमांत राजस्व एवं सीमांत लागत के क्रम उसकी स्थितियां। आपूर्ति, बाजार आपूर्ति, आपूर्ति के निर्धारक, आपूर्ति सारणी, आपूर्ति वक्र एवं उसकी ढ़लान, आपूर्ति वक्र में गतिविधियाँ एवं आपूर्ति वक्र का खिसकना। आपूर्ति लोच की कीमत, आपूर्ति लोच की कीमत का मापन, प्रतिशत-परिवर्तन प्रणाली।
इकाई-4 बाजारों के प्रकार एवं साधारण युक्तियों के साथ आदर्श प्रतिस्पर्धा की स्थिति में मूल्य निर्धारण 10 अंक आदर्श प्रतिस्पर्धा- विशेषतायें, बाजार संतुलन के निर्धारक एवं उनके खिसकने की मांग एवं आपूर्ति पर असर।
मांग एवं आपूर्ति के साधारण प्रयोग- मूल्य नियंत्रण, न्यूनतम मूल्य आधार
खण्ड-ख परिचयात्मक वृहद् अर्थशास्त्र इकाई-5 राष्ट्रीय आय एवं संबंधित आँकड़े 12 अंक कुछ आधारभूत संकल्पनायें- उपभोग में आने वाली वस्तुयें, पंूंजीगत माल, अंतिम माल। मध्यवर्ती माल, स्टाक एवं प्रवाह, आधारभूत निवेश एवं मूल्य ह्रास। आय का परिपत्र प्रवाह (दो क्षेत्र मॉडल) राष्ट्रीय आय की गणना करने की विधियाँ- उत्पादन गणना विधि, आय गणना विधि, उपयोग बचत विधि या व्यय विधि।
राष्ट्रीय आय से संबंधित आंकड़े- बाजार भाव पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पादन एवं शुद्ध घरेलू उत्पाद।
कारक लागत पर वास्तविक एवं न्यूनतम सकल घरेलू उत्पाद।
सकल घरेलू उत्पाद एवं कल्याण। इकाई-6 मुद्रा एवं बैंकिंग- 8 अंक मुद्रा- परिभाषा एवं मुद्रा की आपूर्ति। जनसाधारण के आधिपत्य में मुद्रा एवं वाणिज्यिक बैंकों द्वारा शुद्ध मांग के अनुरूप धारित कुल जमा राशि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 237वाणिज्यिक बैंकिंग प्रणाली द्वारा मुद्रा का सृजन। केन्द्रीय बैंक एवं उसके कार्य। (भारतीय रिजर्व बैंक का उधाहरण) मुद्रा जारी करने वाला बैंक, राजकीय बैंक, सामुदायिक बैंकों को वित्तीय सेवायें प्रदान करने वाले बैंक।
मुद्रा की मांग और आपूर्ति की तरलता पर बैंक द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार नियंत्रण। नकद आरक्षित अनुपात, साविधिक चल निधि अनुपात, रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, खुली बाजारू गतिविधियाँ। निवेशक द्वारा अपनी नकदी के प्रति दी जाने वाली न्यूनतम प्रतिभूति।
इकाई-7 आय एवं रोजगार का निर्धारण- 14 अंक कुल तैयार उत्पाद एवं सेवायें एवं उसके अवयव। उपभोग की ओर झुकाव एवं बचत की ओर झुकाव (औसत एवं सीमित) अल्पाकालिक कुल उत्पादन एवं कुल आपूर्ति संतुलन। पूर्णकालिक रोजगार का अर्थ एवं अनैच्छिक रोजगार। अत्यधिक मांग एवं न्यून मांग की समस्यायें एवं इन्हें सुधारने के उपाय। होने वाले शासकीय व्यय में परिवर्तन।
कर एवं मुद्रा आपूर्ति।
इकाई-8 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था- 8 अंक सरकारी बजट- अर्थ, उद्देश्य एवं उसके अवयव। प्राप्तियों का वर्गीकरण- राजस्व प्राप्तियाँ एवं पूंजीगत प्राप्तियाँ। व्यय का वर्गीकरण- राजस्व व्यय एवं पंूंजीगत व्यय। शासकीय घाटों के प्रकार- राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा, एवं प्राथमिक घाटा एवं उनका अर्थ। इकाई-9 भुगतान संतुलन- 9 अंक भुगतान संतुलन खाता- अर्थ एवं उसके अवयव, भुगतान संतुलन। घाटा-अर्थ। विदेशी मुद्रा विनिमय- स्थिर एवं लचीली दरों का अर्थ एवं कामयाब चल।
विषय-समाजशास्त्र
कक्षा-12
केवल प्रश्नपत्र समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 100
| इकाई | अंक | |
| क | भारतीय समाज | |
| 1. भारतीय समाज का परिचय | 04 | |
| 2. भारतीय समाज की जनसांख्यिकी संरचना | 06 | |
| 3. सामाजिक संस्थायें : निरंतरता और परिवर्तन | 08 | |
| 4. बाजार एक सामाजिक संस्था के रूप में | 06 | |
| 5. सामाजिक असमानता और बहिष्कार का ढाँचा(स्तर) | 08 | |
| 6. सांस्कृतिक विभिन्नताओ ं की चुनौती | 10 | |
| 7. परियोजना कार्य के लिए सुझाव | 08 | |
| योग | 50 | |
| ख | भारत में परिवर्तन और विकास | |
| 8. संरचनात्मक परिवर्तन | 05 | |
| 9. सांस्कृतिक परिवर्तन | 06 | |
| 10. स्ंविधान एवं सामाजिक परिवर्तन | 07 | |
| 11. ग ्रामीण समाज में परिवर्तन और विकास | 07 | |
| 12. औद्योगिक समाज मे ं परिवर्तन और विकास | 06 | |
| 13. भूमण्डलीकरण और सामाजिक परिवर्तन | 05 | |
| 14. जनसम्पर्क माध्यम और सूचना | 06 | |
| 15. सामाजिक आन्दोलन | 08 | |
| योग | 50 | |
| महायोग | 100 |
खण्ड-(क) भारतीय समाज
इकाई-1 भारतीय समाज का परिचय 04 अंक
1 उपनिवेशवाद, राष्ट्रीयता, वर्ग और समुदाय
इकाई-2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीसंरचना 06 अंक
1 जनसांख्यिकी की संकल्पना और सिद्धान्त 2 ग्रामीण नगरीय शहर, सहसम्बन्ध एवं विभाजन
इकाई-3 सामाजिक संस्थायें : निरन्तरता और परिवर्तन 08 अंक
1. जाति प्रथा, जनजातीय समुदाय 2. परिवार और नातेदारी
इकाई-4 बाजार एक सामाजिक संस्था के रूप में 06 अंक
1. बाजार और अर्थव्यवस्था पर सामाजिक दृष्टिकोण 2. भूमण्डलीकरण : स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में अन्र्तजुड़ाव
इकाई-5 सामाजिक असमानता और बहिष्कार का ढाँचा 08 अंक
1. जातिगत पूर्वाग्रह, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्ग 2. जनजातीय समुदाय को हाशिये पर रखना 3. दिव्यांगों का संघर्ष
इकाई-6 सांस्कृतिक विभिन्नताओं की चुनौतियाँ 10 अंक
1. सांस्कृतिक समुदाय और राष्ट्र-राज्य 2. साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद और जातिवाद की समस्याएँ 3. राष्ट्र-राज्य एवं धर्म सम्बन्धी मुद्दो की पहचान एवं समस्याएँ 4. राज्य और नागरिक समाज 5. साम्प्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता एवं राष्ट्र-राज्य
इकाई-7 परियोजना कार्य के लिए सुझाव 08 अंक
1. सर्वेक्षण प्रणाली, साक्षात्कार, प्रेक्षण तथा समसामयिक पद्धतियों का सम्मिश्रण। 2. छोटी शोध परियोजनाओं के लिए सम्भावित प्रकरण एवं विषय।
खण्ड-(ख) भारत में परिवर्तन एवं विकास
इकाई-8 संरचनात्मक परिवर्तन 05 अंक
1. उपनिवेशवाद, औद्योगीकरण, नगरीकरण,
इकाई-9 सांस्कृतिक परिवर्तन 06 अंक
1. विभिन्न प्रकार के सामाजिक परिवर्तन 2. सामाजिक सुधार आन्दोलन और कानून
इकाई-10 संविधान एवं सामाजिक परिवर्तन 07 अंक
1. संविधान सामाजिक परिवर्तन के एक यंत्र के रूप में 2. पंचायत राज और सामाजिक परिवर्तन की चुनौतियाँ 3. राजनैतिक दल, समूहों का दबाव और जनतांत्रिक राजनीति
इकाई-11 ग्रामीण समाज में परिवर्तन एवं विकास 07 अंक
1. भूमि सुधार हरित क्रान्ति और उभरता कृषक समाज 2. कृषक सामाजिक संरचना, भारत में जाति और वर्ग 3. भूमि सुधार 4. हरित क्रान्ति और इसका सामाजिक परिणाम 5. ग्रामीण समाज में परिवर्तन 6. भूमण्डलीकरण, उदारीकरण और ग्रामीण समाज
इकाई-12 औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास 06 अंक
1. योजनाबद्ध औद्योगीकरण से उदारीकरण की ओर 2. व्यवसाय प्राप्त करना 3. कार्य पद्धति
इकाई-13 भूमण्डलीकरण और सामाजिक परिवर्तन 05 अंक
1. भूमण्डलीकरण के आयाम
इकाई-14 जन सम्पर्क माध्यम एवं संचार 06 अंक
1. जन सम्पर्क माध्यम के प्रकार- दूरदर्शन, रेडियो एवं समाचार पत्र 2. जन सम्पर्क माध्यम का बदलता स्वरूपभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 239
इकाई-15 सामाजिक आन्दोलन 08 अंक
1. सामाजिक आन्दोलन का वर्गीकरण 2. वर्ग आधारित आन्दोलन : श्रमिक और कृषक वर्ग आधारित 3. जाति आधारित आन्दोलन : दलित आन्दोलन, पिछड़ी जाति आंदोलन एवं इसके क्रम में उच्च जाति की प्रतिक्रिया
4. स्वतंत्र भारत में महिला आन्दोलन। 5. जनजातीय आन्दोलन 6. पर्यावरणीय आन्दोलन 7. दहेज प्रथा वास्तविकता, अर्थ एवं उसका विकृतरूप तथा समाज पर उसका कुप्रभाव तथा इसका निवारण।
विषय-शिक्षाशास्त्र
कक्षा-12
100 अंकों का एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33
खण्ड-क (अंक 50)
(आधुनिक शैक्षिक विचारधारा का विकास)
20 अंक इकाई-1–शैक्षिक विचारधारा का विकास (क) प्राचीन, मध्यकालीन एवं अर्वाचीन समय में शिक्षा का संक्षिप्त पुनर्निरीक्षण। (ख) भारतीय शिक्षक पंडित मदन मोहन मालवीय, एनीबेसेन्ट, महात्मा गांधी और रवीन्द्र नाथ टैगोर। इकाई-2–(क) पर्यावरण शिक्षा अवधारणा स्वरूप, आवश्यकता, महत्व, प्रदूषण की समस्यायें एवं उनका निराकरण। 15 अंक (ख) पर्यावरण को प्रभावित करने वाली प्राकतिक आपदायें यथा आग, सूखा, बाढ़, भूकम्प, समुद्री लहरें, सड़क दुर्घटनाएँ आदि की मूलभूत जानकारियां, उनके प्रभाव तथा बचाव के उपाय।
इकाई-3–शिक्षा की समस्यायें शिक्षा का प्रसार, शैक्षिक स्तर, बालिकाओं की शिक्षा एवं सामाजिक शिक्षा, जनसंख्या। 15 अंक 50 अंक
खण्ड-ख
(शिक्षा मनोविज्ञान) इकाई-1–सीखना (क) अर्थ, सीखने की प्रक्रिया, प्रयास एवं त्रुटि, सूझ्, सम्बन्ध, प्रत्यावर्तन के सिद्धान्त, सीखने के लिये नियम, (ख) प्रेरणा, अर्थ एवं सीखने में इनका स्थान, (ग) रूचि, (घ) पुरस्कार एवं दण्ड। 20 अंक इकाई-2–मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य के व्यावसायिक निर्देशन उनके अर्थ एवं महत्व। 15 अंक इकाई-3–परीक्षण एवं निर्देशन (क) बुद्धि का सामान्य ज्ञान, अर्थ, स्वरूप एवं वर्गीकरण एवं परीक्षण। 15 अंक (ख) उपलब्धि परीक्षण एवं प्रकार व्यक्तित्व-अर्थ, प्रकार तथा व्यक्तित्व परीक्षण। (ग) शैक्षिक एवं व्यावसायिक निर्देशन-उनके अर्थ एवं महत्व। पुस्तकें– कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गई है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापकों के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
कक्षा 12
विषय-भूगोल
खंड क
लिखित (केवल प्रश्न पत्र) 70 अंक प्रयोगात्मक 30 अंक 35 अंक मानव भूगोल के मूल सिद्धांत 30 अंक इकाई -1 अध्याय 1 1-मानव भूगोल-प्र—ति एवं विषय क्षेत्र मानव का प्रा—तिकरण एवं प्र—ति का मानवीकरण, मानव भूगोल के क्षेत्र और उपक्षेत्र। इकाई-2 अध्याय 2 2-विश्व जनसंख्या- वितरण घनत्व और वृद्धि जनसंख्या वितरण के प्रारूप ,जनसंख्या का घनत्व, जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक, जनसंख्या वृ॰ि, जनसंख्या परिवर्तन के घटक, जनांकिकीय संक्रमण, जनसंख्या नियंत्रण के उपाय। अध्याय 3240 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 3-मानव विकास अवधारणा, वृद्धि और विकास, मानव विकास के चार स्तंभ, मानव विकास के उपागम, मानव विकास का मापन, अंतरर्राष्ट्रीय तुलनाएं। इकाई -3 अध्याय 4 4-प्राथमिक क्रियाएं आखेट एवं भोजन संग्रह, पशुचारण, —षि, निर्वाह —षि, आधुनिक —षि, रोपण, विस्तृत वाणिज्य अनाज, कृषि, डेयरी भूमध्य सागरीय, बाजार के लिए सब्जी एवं उद्यान कृषि, सहकारी कृषि, सामूहिक कृषि, —षि तथा संबंधित क्रियाओं में संलग्न लोग, खनन की विधियाँ।
अध्याय 5 5-द्वितीयक क्रियाएं विनिर्माण, विनिर्माण आधुनिक विशेषताएं, कौशल का विशिष्टीकरण एवं उत्पादन की विधियाँ, प्रौद्योगिकीय नवाचार, संगठानात्मक ढांचा एवं स्तरीकरण, अनियमित भौगोलिक वितरण, बाजार तक अभिगम्यता, विनिर्माण उद्योगों का वर्गीकरण-आकार पर आधारित उद्योग, कच्चे माल पर आधारित उद्योग, उत्पादन/उत्पाद आधारित उद्योग, स्वामित्व के आधार पर उद्योग, उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग की संकल्पना। अध्याय 6 6-तृतीयक और चतुर्थ क्रियाकलाप तृतीयक क्रियाकलापों के प्रकार, व्यापार और वाणिज्य, परिवहन, परिवहन को प्रभावित करने वाले कारक, संचार सेवायें दूर संचार सेवाएं, तृतीयक क्रियाओं में संलग्न लोग, कुछ चयनित उदाहरण- पर्यटन, पर्यटक प्रदेश, पर्यटक आकर्षण, भारत में समुद्रपार रोगियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, चतुर्थ क्रियाकलाप, पंचम क्रियाकलाप, बाह्यस्त्रोतन, अंकीय विभाजक। अध्याय -7 7-परिवहन एवं संचार परिवहन, परिवहन की विधाएँ, सड़क परिवहन, महामार्ग सीमावर्ती सड़के, रेलमार्ग, पारमहाद्वीय रेलमार्ग, जल परिवहन, समुद्री मार्ग, महत्वपूर्ण समुद्रीमार्ग, आंतरिक जलमार्ग, वायु परिवहन, अंतर महाद्वीपीय वायुमार्ग, पाइपलाइन, संचार, उपग्रह संचार , साइबरस्पेस-इंटरनेट। अध्याय 8 8-अंतरर्राष्ट्रीय व्यापार अंतरर्राष्ट्रीय व्यापार का इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार, व्यापार संतुलन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रकार, मुक्त व्यापार की स्थिति, विश्व व्यापार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से सम्बन्धित मामले, पत्तन, अंतरर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार, पत्तन और पत्तन के प्रकार । मानचित्र- पांच प्रश्न 05 अंक नोट- इकाई 1 से इकाई 3 तक से सम्बन्धित भू –श्य/राजनैतिक और भौतिक मानचित्र का –श्यांकन - 1/2 अंक सही उत्तर एवं 1/2 अंक सही स्थान हेतु निर्धारित हैं –ष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए मानचित्र कार्य के स्थान पर पांच प्रश्न रखे जाएंगे जो मानचित्र से संबंधित होंगे।
खंड - ख
35 अंक
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 2414-जल-संसाधन भारत के जल संसाधन, धरातलीय जल संसाधन, भौम जल संसाधन, लैगून और पश्च जल, जल की माँग और उपयोगिता, संभावित जल समस्या, जल के गुणों का ह्रास, जल संरक्षण और प्रबंधन, जल प्रदूषण का निवारण, जल का पुनः चक्र और पुनः उपयोग, जल संभर प्रबंधन, वर्षा जल संग्रहण। 5-खनिज तथा ऊर्जा संसाधन खनिज संसाधनों के प्रकार, वितरण, लौह खनिज, लौह अयस्क, मैगनीज, अलौह खनिज, बॉकसाइड, तांबा, अधात्विक खनिज अभ्रक, ऊर्जा संसाधन, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत, नाभिकीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वरीय या तंरग ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, जैव ऊर्जा, खनिज संसाधनों का संरक्षण। 6-भारत के संदर्भ में नियोजन और सतत पोषणीय विकास लक्ष्य क्षेत्र नियोेजन, पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, सूखा संभावित क्षेत्र विकास कार्यक्रम, केस अध्ययन-भरमौर क्षेत्र में समन्वित जनजातीय विकास कार्यक्रम, सतत पोषणीय विकास, केस अध्ययन-इन्दिरा गांधी नहर कमान क्षेत्र, सतत पोषणीय विकास को बढ़ावा देने वाले उपाय। इकाई- IV 7-परिवहन तथा संचार परिवहन एवं संचार, स्थल परिवहन- सड़क परिवहन, रेल परिवहन, जल परिवहन तथा वायु परिवहन, तेल तथा गैस पाइपलाइन, संचार जाल, वैयक्तिक संचार तंत्र, जन संचार तंत्र। 8-अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारत के निर्यात-संघटन, आयात संघटन के बदलते प्रारूप, व्यापार की दिशा, समुद्री पत्तन-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में, पत्तन एवं हवाई अड्डे। इकाई- V 9-भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएं पर्यावरण प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, नगरीय अपशिष्ट निपटान, ग्रामीण-शहरी प्रवास, केस अध्ययन, गंदी बस्तियों की समस्याएं, भू निम्नीकरण, केस अध्ययन नमामि गंगे कार्यक्रम। मानचित्र-पांच प्रश्न 05 अंक नोट-इकाई 1 से 5 इकाई तक से संबंधित भू –श्य राजनीतिक और भौतिक मानचित्र का –श्यांकन-1/2 अंक सही उत्तर एवं 1/2 अंक सही स्थान हेतु निर्धारित है। –ष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए मानचित्र कार्य के स्थान पर पांच प्रश्न रखे जाएंगे जो मानचित्र से संबंधित होंगे।
खण्ड -ग 30 अंक
प्रयोगात्मक
अध्याय-१ 1-आंकड़ें-स्त्रोत तथा संकलन प्राथमिक द्वितीयक तथा अन्य स्त्रोत, आंकड़ों का सारणीयन, वर्गीकरण, ओजाइव, आवृत्ति बहुभुज। अध्याय-२- 2-आंकड़ों का प्रक्रमण केंद्रीय प्रवृत्ति के माप, माध्य ,माध्यिका, बहुलक एवं इनकी तुलना। अध्याय -3 3-आंकड़ों का आलेखीय निरूपण (प्रस्तुतीकरण) चित्रों का निर्माण, दंड आरेख, आरेख तथा फ्लोचार्ट, विषय आधारित थीमैटिक मानचित्र, बिंदु निर्माण, कोरोप्लाथ तथा आइसोप्लेथ मानचित्र। अध्याय 4 4-स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी भौगोलिक सूचना तंत्र एवं घटक, सॉफ्टवेयर, स्थानिक आंकड़ों का प्रारूप, रेखा पुंज तथा सदिश आंकड़े, भौगोलिक सूचनातंत्र की क्रियाओं का अनुक्रम।
प्रयोगात्मक अंक विभाजन
न्यूनतम अंक - 10
अधिकतम अंक - 30
बा]य मूल्याँकन- 15 अंक
निर्धारित अंक-
1. लिखित परीक्षा-6 प्रश्नों में से केवल 4 प्रश्न - 10 अंक
2. मौखिक परीक्षा, अभ्यास पुस्तिका माडल/चार्ट - 05 अंक
31 ङ242 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
आन्तरिक मूल्यांकन - 15 अंक
1
मॉडल/चार्ट
05 अंक
2. प्रयोगात्मक अभ्यास पुस्तिका एवं मौखिकी
- - 05+05 अंक
खण्डों का मूल्यांकन आन्तरिक व बा]य परीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया
जायेगा।
गृहविज्ञान
कक्षा -12
इसमें 70 अंकों की लिखित एवं 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। न्यूनतम उत्तीर्णांक 23 एवं 10 कुल 33 अंक
(केवल बालिकाओं के लिये) पूर्णांक- 100 अंक
भाग-1
इकाई 1 कार्य, आजीविका तथा जीविका 10 अध्याय 1 कार्य, आजीविका तथा जीविका इकाई 2 पोषण, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी 15 अध्याय 2 नैदानिक पोषण और आहारिकी अध्याय 3 जनपोषण तथा स्वास्थ्य अध्याय 4 खाद्य प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी अध्याय 5 खाद्य गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा इकाई 3 मानव विकास और परिवार अध्ययन 15 अध्याय 6 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा अध्याय 7 बच्चों, युवाओं और वृद्धजनों के लिए सहायक सेवाओं, संस्थानों और कार्यक्रमों का प्रबंधन
भाग-2
इकाई 4 वस्त्र एवं परिधान अध्याय 8 वस्त्र एवं परिधान के लिए डिजाइन 10 अध्याय 9 फैशन डिजाइन और व्यापार अध्याय 10 संस्थाओं में वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव इकाइर््र 5 संसाधन प्रबंधन 10 अध्याय 11 आतिथ्य प्रबंधन अध्याय 12 उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण इकाई 6 संचार एवं विस्तार 10 अध्याय 13 विकास संचार तथा पत्रकारिता अध्याय 14 निगमित संप्रेषण तथा जनसंपर्क
गृह विज्ञान- प्रयोगात्मक 30 अंक अधिकतम अंक-30 न्यूनतम अंक-10 समयः 05 घंटा वाह्य मूल्यांकन आन्तरिक मूल्यांकन 1-पाक कला- 04 अंक सत्रीय कार्य (सिलाई एवं प्रोजेक्ट)- 06 अंक 2-सिलाई- 04 अंक पाक कला (पाठ्यक्रम पर आधारित)- 06 अंक 3-सत्रीय कार्य-04 अंक मौखिक- 03 अंक 4-मौखिक- 03 अंक (मौखिक सभी इकाईयों से होना अनिवार्य है।)भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 243 प्रयोगात्मक : 1-विनिर्मित खाद्य-अचार, जैम, मुरब्बा, पापड़ एवं बड़ी बनाना। 2- एक खाद्य सेवा प्रतिष्ठान या स्कूल कैंटीन माध्यान्ह् भोजन साप्ताहिक योजना हेतु व्यंजन सूची तैयार करना। कम से कम चार मीठा एवं चार नमकीन व्यंजन विधि लिखें। ध्यान रहे पोषण एवं सुरक्षा का होना आवश्यक हैेेै। इसके बनाने में दूध, हरी व ताजी सब्जी, फल, छेना तथा खोवे का प्रयोग किया जा सकता है। 3- नैदानिक भोजन एवं पोषण के दृष्टिकोण से किसी दो बीमारी हेतु नैदानिक आहार आयोजन करें। एक व्यंजन भी तैयार करें। 4- सिलाई एवं धुलाई से सम्बन्धित प्रोजेक्ट फाइल तैयार करायें। पाठों से सम्बन्धित दो फाइल अवश्य तैयार करायी जाय।
ड्राफ्टिंग एवं काटना सिलना शिक्षिका द्वारा बताया जायेगा।
5- सिलाई- सलवार- कुर्ता (लेडीज) या मरदानी कमीज या बुशर्ट 6- एक बेडशीट पर पारम्परिक कढ़ाई के नमूने बनवाये जाय। पाठों से सम्बन्धित प्रोजेक्ट कार्य एवं क्रियाकलापों का मूल्यांकन कार्य शिक्षिका अपने देख-रेख में करायेंगी। चार्ट, पोस्टर एवं अनुपयोगी वस्तुओं द्वारा दो उपयोगी वस्तुओं के नमूने भी तैयार कराया जाय।
नोट- 1- शिक्षिका द्वारा प्रत्येक परीक्षार्थी के कार्य को बाह्य परीक्षक के सामने प्रस्तुत कराया जाय। 2- बाह्य परीक्षक के समक्ष प्रत्येक परीक्षार्थी से मॉडल बनाने हेतु 1 मीटर कपड़ा ही मंगाया जाय। इस निर्णय का पालन करना अनिवार्य है। (कक्षा-11 एवं 12 में सिलाये गये सिलाई के नमूनों में कोई एक मॉडल तैयार कराया जा सकता है) 3- 50 प्रतिशत अंक आन्तरिक परीक्षक द्वारा प्रदान किये जायेंगे। शेष 50 प्रतिशत बाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे। 4- व्यक्तिगत परीक्षार्थी को निर्धारित केन्द्र द्वारा उक्त कार्य पूर्ण कराये जायेंगे।
मानवविज्ञान (एन्थ्रोपोलोजी)
कक्षा-12
इस विषय की लिखित परीक्षा में एक प्रश्न-पत्र 70 अंकों का तीन घण्टे का होंगा। इसके
अतिरिक्त 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा भी होंगी। उत्तीर्ण होने के लिए परीक्षार्थी को लिखित में 23
अंक, प्रयोगात्मक में 10 अंक तथा योग में 33 अंक न्यूनतम प्राप्त करना आवश्यक होगा।
अध्ययन का उद्देश्य--
1-समाज के विकास, उनके आधारभूत कारकों, विस्तार तथा विविधता की जानकारी प्राप्त करना तथा उसके भावरूप के बारे में निष्कर्ष निकालना।
2-प्राकृतिक पर्यावरण तथा मानव के मध्य अन्तःक्रिया को भारत तथा विश्व के सन्दर्भ में सामाजिक विकास पर पड़ने वाले उसके प्रभाव को समझना, विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालने के लिए सक्षम बनाना।
3-समाज की समसामयिक समस्याओं के बारे में जानकारी करके निर्णय लेने की योग्यता प्राप्त करना। 4-मानव विकास और उसकी उपलब्धियाँ तथा विफलताओं को सजीव एवं प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत कर समाज के समाजवादी स्वरूप की स्थापना करना।
5-विश्व के पर्यावरणीय घटकों, विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों तथा उसके उपयोग की जानकारी प्राप्त करना तथा भविष्य के बारे में निष्कर्ष निकालना।
6-मानवविज्ञान नामक विषय के विकास तथा 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में हुये विभिन्न अध्ययनों से बनी मानवविज्ञान की रूपरेखा का ज्ञान विद्यार्थियों को देना।
7-मानवविज्ञान की विषय-वस्तु, विस्तार तथा विभिन्न शाखाओं का ज्ञान सरल तथा बोधगम्य भाषा के माध्यम से विद्यार्थियों को प्राप्त कराना।
8-मानवविज्ञान एक लोकप्रिय तथा उपयोगी विषय है जो कि मानव जीवन के शारीरिक तथा सामाजिक सांस्कृतिक दोनों ही पक्षों के विकास पर प्रकाश डालता है। मानव जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। सभी पक्षों के तारतम्य का एकीकृत चित्र प्रस्तुत करना।
9-मानव के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन की समस्याओं को समझाने तथा सुलझाने की क्षमता का सृजन करना।
244 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 410-सभ्यता की मुख्य धारा से दूर बसे सरल जनजाति समाजों की विशिष्टता, विविधता एवं उनकी आधुनिक समस्याओं का ज्ञान देना जिससे उन्हें राष्ट्रीय जीवन की मुख्य धारा से जोड़ने के सफल प्रयास किये जा सके।
खण्ड-क 35 : अंक
(सामाजिक सांस्कृतिक मानवविज्ञान)
अंक भार इकाई-1 मानवविज्ञान की उपयोगिता, निम्नलिखित की मानव वैज्ञानिक परिभाषायें--संस्कृति, समाज एवं समुदाय, समिति, संस्था, संस्कृति एवं सभ्यता, जाति एवं वर्ग, सांस्कृतिक-सापेक्षवाद। 10
इकाई-2 जादू, धर्म एवं विज्ञान की अवधारणा तथा उनमें समानता एवं भिन्नताएं। 06 इकाई-3 धर्म की उत्पत्ति के सिद्धान्त, आत्मावाद तथा जीवित सत्तावाद, टोटमवाद एवं टैबू। 08 इकाई-4 जनजातीय अर्थव्यवस्था, विशेषतायें एवं उनके प्रकार, विनिमय एवं बाजार। 06 05 इकाई-5 राज्य विहीन समाज एवं उनकी विशेषतायें। सन्दर्भित पुस्तकें-- 1-डी0 एन0 मजूमदार एवं टी0 एन0 मदान--सामाजिक मानव शास्त्र :एक परिचय। 2-उमाशंकर मिश्र--सामाजिक-सांस्कृतिक मानव शास्त्र। 3-उमाशंकर मिश्र--नृतत्व चिन्तन (पलका प्रकाशन)।
4-विजय शंकर उपाध्याय एवं विजय प्रकाश शर्मा--भारत की जनजातीय संस्कृति
(मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी)।
5-शैपिरो एवं शैपिरो--मानव संस्कृति एवं समाज (Man Culture and Society)। 6-एम्बर एवं एम्बर--मानव विज्ञान (हिन्दी अनुवाद) यू0बी0सी0 सर्विसेज, दिल्ली। 7-गोपालशरण एवं आर0 पी0 श्रीवास्तव--मानव विज्ञान एवं समाजशास्त्र (इंगलिश)।
न्यू रॉयल बुक कम्पनी, लखनऊ।
8-विजय शंकर उपाध्याय एवं गया पाण्डेय--सामाजिक सांस्कृतिक मानव शास्त्र,
क्राउन पब्लिकेशन्स, रांची।
9-विजय शंकर उपाध्याय एवं गया पाण्डेय--जनजातीय विकास (मध्य प्रदेश हिन्दी
ग्रन्थ अकादमी)।
10-विनय कुमार श्रीवास्तव--सामाजिक सांस्कृतिक मानव शास्त्र। 11-प्रो0 ए0आर0एन0 श्रीवास्तव -सामाजिक सांस्कृतिक मानव शास्त्र। 12-डा0 नीरजा सिंह - परिचयात्मक मानव विज्ञान। 13-ए0आर0एन0 श्रीवास्तव-जनजातीय विकास के साठ वर्ष, प्रकाषक- 42/7
जवाहरलाल नेहरूरोड़,प्रयागराज।
खण्ड-ख
(शारीरिक मानवविज्ञान)
अंक भार इकाई-1 शारीरिक मानवविज्ञान का अर्थ, विषय क्षेत्र एवं अन्य प्रकृति विज्ञानों से सम्बन्ध। 4 इकाई-2 जैविक उद्विकास के सिद्धान्त, लैमार्कवाद, डार्विनवाद तथा संश्लेषणात्मक सिद्धान्त। 6 इकाई-3 प्राणि जगत में मानव का स्थान और प्राइमेट गण की उद्विकासीय विशेषतायें। 5 इकाई-4 जीवाश्मीकरण तथा मानव के जीवाश्म पूर्वज-आस्ट्रेलोपिथेकस, होमोइरेक्ट्स,
6 4 होमोनियंडरथल तथा होमोसेपियन्स इकाई-5 कोशिका संरचना एवं कोशिका विभाजन। इकाई-6 मेंडल के आनुवंशिकीय नियम--प्रभाविता, अप्रभाविता एवं पृथक्करण का नियम। अलिंग
सूत्रीय एवं लिंग सूत्रीय आनुवंशिकता, ए,बी,ओ रक्त समूह, वर्णान्धता एवं हीमोफीलिया। 5 इकाई-7 प्रजाति अवधारणा एवं विशेषतायें, प्रजातीय वर्गीकरण के आधार, विश्व की तीन प्रमुख
मानव प्रजातियाँ, उनकी शारीरिक विशेषतायें एवं भौगोलिक वितरण।
5 सन्दर्भित पुस्तकें-- 1-बी0 आर0 के0 शुक्ला एवं सुधा रस्तोगी--मानव उद्विकास (भारत बुक सेण्टर)। 2-सुधा रस्तोगी एवं बी0 आर0 के0 शुक्ला--मानव आनुवंशिकी एवं प्रजातीय विविधता (भारत बुक सेण्टर)। 3-पी0 दास शर्मा--Human Evolution(English), रांची-झारखण्ड। 4-आनुवांशिक मान विज्ञान-उदय प्रताप सिंह। 5-यू0 पी0 सिंह--जैविक मानवविज्ञान (लखनऊ प्रकाशन)। 6-रिपुदमन सिंह--शारीरिक मानवविज्ञान।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 245(प्रायोगिक मानवविज्ञान) पूर्णांक 30
इकाई-1 किसी सामाजिक विषय पर साक्षात्कार अनुसूची (इन्टरव्यू शेड्यूल) बनाना एवं पाँच व्यक्तियों का साक्षात्कार लेकर उस पर एक संक्षिप्त प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करना।
10 इकाई-2 किसी सामाजिक विषय पर प्रश्नावली बनाना और पाँच व्यक्तियों से भरवाकर
संक्षिप्त प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार करना।
10 परीक्षा में इकाई 3 या 4 में कोई एक करना होगा। 5 इकाई-3 प्रायोगिक रिकार्ड (लैब बुक)-- इकाई 1 और 2 विद्यार्थियों को सिखाये जायेंगे तथा उस पर आधारित लैब बुक होगी। इकाई-4 मौखिक परीक्षा (Viva-voce) 5
कुल अंक . . 30
निर्देश-इकाई 1 में वर्णित कपाल एवं उपांग अस्थियों को चार्ट से देखकर रेखांकित एवं
चित्रित करना।
सन्दर्भ पुस्तकें-- (1) सामाजिक अनुसंधान एवं सर्वेक्षण--एस0 आर0 बाजपेई (2) प्रयोगात्मक मानव विज्ञान- डा0 विभा अग्निहोत्री।
मानवविज्ञान
निर्धारित अंक
04 अंक 05 अंक
55=10 अंक
05 अंक अधिकतम अंक : 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 10 समय : 03 घण्टा वा]य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन अंक--15 1-कपाल एवं उपांग अस्थियों का रेखांकित एवं चिन्हित करना-- 06 अंक (सही चित्रण हेतु 3 अंक तथा नामांकन व पहचान हेतु 3 अंक) 2-एन्थ्रोपोस्कोपी 3-मौखिकी-- आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन अंक--15 4-प्रोजेक्ट कार्य-- (क) किसी सामाजिक विषय पर साक्षात्कार (ख) किसी सामाजिक विषय पर प्रश्नावली तैयार करना-- 5-प्रायोगिक रिकार्ड बुक-- नोट :--प्रोजेक्ट कार्य एवं प्रायोगिक रिकार्ड बुक परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वा]य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
विषय-सैन्य विज्ञान
कक्षा-12
पाठ्यक्रम का उद्देश्य– सभी सामाजिक विज्ञानों में सैन्य विज्ञान एक जटिल एवं महत्वपूर्ण विज्ञान है। इसका अर्थ केवल सशक्त सेना संगठन, प्रतिष्ठान, शास्त्र अथवा सैनिक से ही नहीं अपितु उसकी जड़ें राष्ट्र को राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैली है। इसका क्षेत्र व्यापक एवं सभी प्रकार के ज्ञान से सम्बन्धित है। इसका एकांकी अध्ययन नहीं हो सकता। राष्ट्र की शक्ति, गरिमा और गौरव राष्ट्रीय मंच पर कैसे उभर सकती है तथा विश्व शान्ति और सह अस्तित्व स्थापित करने में भारत प्रमुख भूमिका निभा सकता है। यही इस विषय के पठन-पाठन का मुख्य उद्देश्य है। यह विषय सैन्य शिक्षा अथवा प्रशिक्षण से भिन्न है। सैन्य विज्ञान विषय का केवल एक प्रश्न पत्र 70 अंको का होगा। 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। लिखित में उत्तीर्णांक 70 में से 23 अंक होंगे तथा प्रयोगात्मक परीक्षा के लिये 30 अंक में से 10 अंक होंगे। कुल में उत्तीर्णांक 33 अंक होंगे। लिखित तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में अलग-अलग उत्तीर्ण होना आवश्यक है।
246 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 410 अंक
10 अंक
08 अंक
07 अंक इकाई-1–राष्ट्रीय सुरक्षा : (अ) अर्थ, क्षेत्र एवं तत्व (प्राथमिक विज्ञान)। (ब) सीमाओं से लगने वाले राष्ट्र तथा उनके साथ राजनैतिक तथा सैन्य सम्बन्ध। (स) राष्ट्रीय सुरक्षा नीति निर्धारण प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय। इकाई-2–द्वितीय रक्षात्मक पंक्ति : (अ) आवश्यकता। (ब) निम्न संगठनों का सामान्य ज्ञान (क) आर्मी रिजर्व। (ख) प्रादेशिक सेना (टी0ए0)। (ग) एन0सी0सी0। इकाई-3–नागरिक सुरक्षा : (अ) आवश्यकता। (ब) संगठन। (स) कार्य। इकाई-4–सैन्य विज्ञान–मनोविज्ञान : (अ) नेतृत्व। (ब) मनोबल। (स) अनुशासन। इकाई-5-मराठा युग की सैन्य व्यवस्था– 08 अंक (शिवाजी के सन्दर्भ में)। इकाई-6-सिक्ख सैन्य पद्धति– 08 अंक (महाराणा रणजीत सिंह के सन्दर्भ में)। इकाई-7-भारत में अंग्रेजी व्यवस्था– 09 अंक (प्लासी की लड़ाई के सन्दर्भ में), प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, 1857 (संग्राम के आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक कारणों तथा स्वतंत्रता संग्राम में निष्कर्षों के आधार पर पुनर्गठन)।
20 05 05 इकाई-8–युद्ध के सिद्धान्त। 10 अंक (1) भारत-चीन युद्ध, 1962। (2) भारत-पाक युद्ध, 1965। (3) भारत-पाक युद्ध, 1971। (4) कारगिल युद्ध, 1999। प्रयोगात्मक 30 अंक (1) मानचित्र पठन– (1) मापक परिभाषा, साधारण मापक की संरचना। (2) जालीय निर्देशांक (ग्रिड रिफरेन्स)–चार तथा छः अंक का। (2) प्रिज्मैटिक दिक्सूचक, सर्विस प्रोटेक्टर– (1) प्रिज्मैटिक दिक्सूचक का परिचय, उपयोग। (2) दिक्मान ज्ञात करना। (3) राशि में चलने के लिये दिक्सूचक सेट करना तथा चलाना। (4) सर्विस प्रोटेक्टर का परिचय तथा प्रयोग। (5) प्रयोगात्मक कार्य की अभ्यास पुस्तिका। 3-प्रयोगात्मक परीक्षाओं में अंकों का विवरण निम्नलिखित होगा (1) मानचित्र पठन। (2) प्रिज्मैटिक दिक्सूचक। (3) प्रायोगिक अभ्यास-पुस्तिका। पुस्तकें– कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
सैन्य विज्ञान
अधिकतम अंक–30 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–10 अंक समय –04 घण्टे नोट :–एक टोली में परीक्षार्थियों की संख्या 20 से अधिक न हो। एक दिन में दो टोली से अधिक की परीक्षा न हो।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 247वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन–15 अंक निर्धारित अंक– 1–मानचित्र परिचय परिभाषा, प्रकार, हाशिये पर दी गयी सूचनाओं को वास्तविक मानचित्र पर पढ़ना तथा हाशिये की सूचनाओं के प्रकार
02 02 02 02 02 02 03 2–मानचित्र निर्देशांक चार अंकीय एवं छः अंकीय निर्देशांक। 3–मापक की परिभाषा, मापक के प्रकार। 4–सरल मापक की रचना। 5–दिक्सूचक–नाम, विभिन्न पुर्जों के प्रकार तथा प्रयोग विधि। 6–मानचित्र दिशानुकूल करना। 7–मौखिक परीक्षा। आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन– 15 अंक 1–सांकेतिक चिन्ह–चार सांकेतिक चिन्हों को बनाना जिसमें एक सैनिक सांकेतिक चिन्ह अनिवार्य है। 02 2–उत्तर दिशाओं से सम्बन्धित प्रश्न। 02 3–मानचित्र पर ग्रिड दिक्मान नापना। 03 4–दिक्मानों के अन्र्तपरिवर्तन। 03 5–उत्तरान्तरों एवं विशिष्ट दिक्सूचक त्रुटि ज्ञात करना। 02 6–अभ्यास पुस्तिका। 03 व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय हों।
संगीत (गायन)
कक्षा-12
खण्ड-क (संगीत विज्ञान) पूर्णांक : 25
तीन घण्टे का एक प्र्र्र्र्रश्नपत्र 50 अंको का होगा। 50 पूर्णांक की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। लिखित में 17 तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में 16 तथा योग में 33 अंक पाना आवश्यक होगा।
संगीत (गायन)
खण्ड-क (संगीत विज्ञान) पूर्णांक : 25
इकाई-1-श्रुतियां वीणा के 36 तार पर शुद्ध स्वरों का स्थान इकाई-2-पूर्व राग, उत्तर राग, सन्धि प्रकाश राग, आश्रय राग, परमेल, प्रवेशक राग। उत्तर और दक्षिण भारत के थाटों का वर्गीकरण और उससे रागों की उत्पत्ति।
इकाई-3-अंश, न्यास, अल्पत्व, बहुत्व, तान एवं तान के प्रकार। इकाई-4-भारत की हिन्दुस्तानी और कर्नाटक पद्धतियों के स्वरों एवं श्रुतियों का तुलनात्मक अध्ययन। इकाई-5-पूर्व तानपुरे के विभिन्न अंगों का ज्ञान, उसका मिलाना, उसके अधिस्वर आदि।
पूर्णांक : 25 खण्ड-ख (संगीत का इतिहास और रागों का अध्ययन) इकाई-1-गीतों की शैलियां और प्रकार--ध्रुपद, धमार, ख्याल (विलम्बित और द्रुत), टप्पा, ठुमरी, तराना।
ग्वालियर घराने की विशेषता।
इकाई-2-प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए प्रस्तावित पाठ्यक्रम में रागों की विशेषतायें। इकाई-3-स्वर विस्तार के माध्यम से रागों का विकास और भेद। कठिन अलंकारों की रचना। इकाई-4-पाठ्यक्रम में प्रस्तावित तालों के बोलों का दुगुन, तिगुन, चौगुन का ज्ञान तीन ताल, एक ताल, चार ताल, धमार।
इकाई-5-गीतों के आलाप, तान, बोलतान सहित लिपिबद्ध करने की क्षमता। इकाई-6-छोटे स्वर समुदायों के आधार पर रागों को पहचानना और उनकी बढ़त की योग्यता। इकाई-7-संगीत सम्बन्धी विषय पर निबन्ध। इकाई-8-भारतीय संगीत साहित्य का संक्षिप्त इतिहास। मध्यकाल एवं आधुनिक काल। इकाई-9-भातखण्डे, विष्णुदिगम्बर, गोपालनायक, पं0 जसराज एवं एम0एस0 सुब्बालक्ष्मी की जीवनियां और भारतीय संगीत में उनका योगदान।
248 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रयोगात्मक (गायन) 50 अंक (1) निम्नलिखित रागों का विस्तृत अभ्यास वृन्दावनी सारंग। प्रत्येक में कम से कम एक द्रुत ख्याल तैयार होना चाहिए। उचित अलाप तान, मुर्की एवं अन्य लयपूर्ण तालबद्ध विस्तारण के साथ उनको गाने की योग्यता विद्यार्थी में अपेक्षित है। कठिन तालबद्ध रूपों और निरर्थक वेग पर ही केवल नहीं, वरन् सही ध्वनि, उच्चावचन, स्पष्टता और गरिमापूर्ण अभिव्यक्ति एवं लय के स्वाभाविक प्रवाह पर बल होना चाहिये। उक्त रागों के गीतों में कम से कम एक धमार, एव विलम्बित ख्याल व तराना होगा। धमार में दुगुन, तिगुन और चौगुन लयकारी होने की क्षमता होनी चाहिए। (2) गौड़-सारंग पूर्वी हमीर, रागों का सामान्य रूप में अभ्यास। उक्त में अलाप तान की आवश्यकता नहीं है। केवल स्थायी और अन्तरा पर्याप्त है। प्रत्येक रागों में आरोह, अवरोह और पकड़ गाने की योग्यता होनी चाहिये धीमी गति में अलाप करने पर उन्हें पहचानने की क्षमता विद्यार्थियों में होनी चाहिये। (3) निम्नलिखित तालों में कम से कम एक गीत सीखना चाहिये। तीन ताल, झप ताल, एक ताल, और धमार। पाठ्यक्रम में प्रस्तावित सब तालों के ठेके ताल के साथ कहने एवं लिखने की योग्यता विद्यार्थी में होनी चाहिये। (4) पाठ्यक्रम में प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन के रागों में छोटे स्वर समुदाय की जब आकार में गाया तब स्वर पहचानने की योग्यता होनी चाहिए। विद्यार्थी में पाठ्यक्रम के सभी तालों का ठेका तबले पर बजाने की योग्यता होनी चाहिये। विशेष सूचना–अध्यापकों को वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षक के विचारार्थ प्रत्येक विद्यार्थी के कार्यों की एक आख्या बनानी चाहिये।
विषय-संगीत (वादन)
कक्षा-12
पूर्णांक–25 खण्ड-क (संगीत विज्ञान) पूर्णांक–25 संगीत गायन में प्रस्तावित पाठ्यक्रम के अलावा निम्नलिखित और रहेगा : चिकारी, खरज, तोड़ा, तिहाई, जमजमा, पेशकारा, टुकड़ा मुखड़ा, परन, तिहाई लय के प्रकार। सपाट, कूट, अलंकारिक, गमक, सूत, घसीट का विस्तृत अध्ययन। परन गत, तिहाई, तिहाई के प्रकार कायदा, पलटा, लय और उसके प्रकार, लयकारी और उसके विभिन्न प्रकारों की परिभाषा तथा अंकों में लिखने की योग्यता। भारतीय वाद्यों में जैसे-तबला, पखावज, सितार, वायलिन, गिटार, बांसुरी, वीणा, सरोद, सारगी, इसराज अथवा दिलरूबा वाद्यों के ज्ञान के साथ जो विशेष वाद्य लिया है। उसके विभिन्न अंगों एवं मिलान का विशेष ज्ञान। खण्ड-ख (संगीत का इतिहास और शैलियों का अध्ययन) (1) वाद्य पाठ्यक्रम हेतु प्रस्तावित राग (केदार, वृन्दावनी, सांरग, जौनपुरी) की विशेषतायें, स्वर विस्तार के माध्यम से रागों का विस्तार एवं भेद।
अथवा पाठ्यक्रम के तालों (आड़ा चारताल, तीनताल, धमार के विभिन्न लयों के साथ गजझंपा, सवारी जतताल) लयात्मक प्रकार, कठिन अलंकारों की रचना। विभिन्न लयकारियों को ताललिपि में लिखने की क्षमता। जैसे कायदा, परन, टुकड़ा तिहाई, पेशकारा, लिपिबद्ध करने की क्षमता।
अथवा पाठ्यक्रमों में निर्धारित रागों में गतों को स्वरलिपि बद्ध करने की क्षमता एवं साधारण तोड़ें एवं झाले के साथ लिखने की योग्यता। (2) विलम्बित और द्रुत लय तथा लय का ज्ञान।
अथवा
बाजों के प्रकार (बनारस, फर्रूखाबाद) (3) सामान्य संगीत सम्बन्धी विषयों पर संक्षिप्त निबन्ध। (4) भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास (मध्यकाल एवं आधुनिक) भारतीय संगीतज्ञों की जीवनी एवं उनके योगदान-विष्णु दिगम्बर प्लुष्कर, गोपाल नायक, पं0 सामता प्रसाद, पं0 रविशंकर एवं पन्ना लाल घोष, पं0विष्णूनारायण भातखण्डे।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 249प्रयोगात्मक परीक्षा (वादन) 50 अंक विद्यार्थी निम्नलिखत वाद्यों में से कोई भी एक ले सकता है : (1) तबला, (2) पखावज, (3) वीणा, (4) सितार, (5) सरोद, (6) सारंगी, (7) इसराज अथवा दिलरूबा, (8) वायलन, (9) बांसुरी, (10) गिटार (गिटार का पाठ्यक्रम सितार की भाँति होगा)। प्रथम दो वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा योजना अन्य वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा योजना से भिन्न होगी। तबला या पखावज की प्रयोगात्मक परीक्षा 1- विद्यार्थियों को पर्याप्त बोल (ठेका, पेशकार, परन, टुकड़े, तिहाइयां आदि) जानना चाहिये। ताल का पांच मिनट का आकर्षक प्रदर्शन देने की योग्यता होनी चाहिये। इस प्रकार के प्रदर्शन में किसी भी बोल की पुनरावृत्ति न हो वरन् वही बोल विभिन्न लयों और दूसरे प्रकार के तालों से निस्तारण के रूप में यदि जान पड़े तो बजाया जा सकता है। एक ठेके के बोल निश्चय ही दो क्रमिक टुकड़ों आदि के बीच दोहराये जा सकते हैं। एकांकी (सोलों) प्रदर्शन के लिये निम्नलिखित तालें पाठ्यक्रम में है। तीनताल, धमार, आड़ाचार ताल, दीपचन्दी, गजझम्पा, सवारी और मतताल। 2- विद्यार्थियों की सरल धुनों के साथ, दीपचन्दी, झपताल, एकताल, चौताल और धमार से संगत करने की योग्यता होनी चाहिये। 3- जो वाद्य विद्यार्थी ले उन्हें मिलाने की योग्यता होनी चाहिये। 4- विभिन्न लयकारी जैसे कि दो मात्राओं को तीन में, तीन मात्राओं को चार मात्राओं में। ठुमरी शैली की संगत अपने वाद्य (तबला) पर विभिन्न प्रकार की लड़ी और लग्गी के साथ करने की योग्यता होनी चाहिये।
सितार आदि लय वाले वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा निम्नलिखित 3 रागों में से प्रत्येक में एक गत मसीतखानी और एक रजाखानी जिसका विस्तार सहित अभ्यास होगा : वृन्दावनी सारंग, केदार, जौनपुरी। वाद्य को गरिमा के साथ बजाने की योग्यता। (2) कामोद, हमीर, बहार रागों में केवल एक गत बिना किसी विशेष विस्तार के बजाना। विद्यार्थियों को इनमें से प्रत्येक राग का आरोह-अवरोह और पकड़ बजाने की योग्यता होनी चाहिये और जब उन्हें धीमें अभिव्यक्ति अलापों द्वारा प्रस्तुत किया जाय तब पहचानने की योग्यता होनी चाहिये। (3) उपरोक्त गतें तीनताल में हो सकती है। झपताल, एकताल, चौताल, धमार और त्रिताल का ज्ञान।
संगीत गायन/वादन
03
05 10 10 अधिकतम अंक–50 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–16 अंक समय –06 घण्टे एक समय में परीक्षा के लिये परीक्षार्थियों की संख्या पर प्रतिबन्ध आवश्यक है। इण्टरमीडिएट परीक्षा संगीत वादन परीक्षा एक दिन मेें क्रमशः 20-25 परीक्षार्थियों से अधिक न हो। प्रत्येक खण्ड का विवरण तथा निर्धारित अंक : 1–तबला और पखावज लेने वालों के लिये– (क) वाह्य मूल्यांकन–25 अंक 1–परीक्षार्थियों द्वारा चुने गये अपने ताल का प्रदर्शन। 08 2–पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताले। 03 3–पाठ्यक्रम में प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन की ताले। 05 4–तालों का कहना और उनका बजाना। 03 5–परीक्षक द्वारा गायी गयी अथवा बजायी गयी धुनों के साथ संगत करने की योग्यता। 03 6–वाद्य मिलाने की योग्यता। (ख) आन्तरिक मूल्यांकन–25 अंक 1–रिकॉर्ड। 2–प्रोजेक्ट। 3–सत्रीय कार्य। नोट :–संगीत गायन के साथ हारमोनियम की संगत की अनुमति नहीं है। 2 तबला व पखावज के अलावा अन्य संगीत तंत्रवाद्य लेने वाले विद्यार्थियों के लिये- 1–विद्यार्थियों द्वारा चुने गये अपने रुचि के साथ गीत अथवा संगीत का प्रदर्शन। 08 2–विस्तृत अध्ययन के रागों के ऊपर पूछे गये अलाप। 03
32 ङ250 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 3–पाठ्यक्रम में प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन की ताल। 4–पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताल। 5–राग और स्वर समूह को पहचानने की क्षमता। 6–परीक्षार्थियों की आवाज और उसका सामान्य प्रभाव।
05 03 03 03 व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा (1) व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे। (2) अध्यापक को प्रत्येक विद्यार्थी के कार्य का वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षकों के विचारार्थ रखने के लिये अभिलेख रखना होगा।
ग्रन्थ शिल्प
(कक्षा-12)
इसमें 70 अंको का एक प्रश्नपत्र तथा 30 अंको की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। उत्तीर्ण होने हेतु लिखित परीक्षा तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में पृथक्-पृथक 23 एवं 10 कुल 33 अंक प्राप्त करना आवश्यक है। ग्रंथ शिल्प एवं सम्बन्धित कला में जिसमें मौखिक एवं वर्ष भर का कार्य भी सम्मिलित होगा।
इकाई-1– 10 अंक 1–कला और शिल्प का सम्बन्ध। ग्रन्थ शिल्प में कला का महत्व। 2– ग्रन्थ शिल्प की परिभाषा, भारतीय अलंकारिक कला का इतिहास। उपयोगी कलायें एवं आकार। इकाई-2– 10 अंक 1–डिजाइन संरचनात्मक तथा अलंकारिक सिद्धान्त एवं उनके विभिन्न रूप एवं आकार । इकाई-3 10 अंक 1–सजावट का माध्यम पेन और ब्रश, कागज काटकर स्टेन्सिल प्रिन्टिंग, अबरी (नियंत्रित तथा अनियंत्रित) गोल्ड टूलिंग, स्क्रीन प्रिटिंग। इकाई-4– 20 अंक 1-अक्षर लिखना (हिन्दी तथा अंग्रेजी)। 2–कम्प्यूटर का प्रारम्भिक ज्ञान, पुस्तक आवरण की रूपरेखा को कम्प्यूटर द्वारा बनाना। इकाई-5– 20 अंक 1 कम्प्यूटर द्वारा एक रंगीय तथा बहुरंगीय आवरण की डिजाइन तैयार करना। 2–पुस्तकों के आवरण पर वारनिश, लैमिनेशन तथा यू0वी0 पर्त लगाकर आकर्षक बनाना।
प्रयोगात्मक 30 अंक (1) सत्र कार्य– (अ) प्रत्येक विद्यार्थी को प्रत्येक मॉडल बनाने का विवरण तैयार करना आवश्यक है। विवरण विषय अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा अवलोकित होगा और प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। इसके लिये बाहय परीक्षक द्वारा अंक निर्धारित किये जायेंगे।
(ब) बनाये जाने वाले माडलों की सूची का चार्ट बनाया जाय और कक्षाओं में टांगा जाय। (स) प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा विषय से सम्बन्धित एक चार्ट भी तैयार करना आवश्यक है। (2) मौखिक परीक्षा– प्रत्येक परीक्षक द्वारा कम से कम तीन प्रश्न प्रत्येक विद्यार्थी से पूछे जायेंगे। इसके लिये सभी अंक प्रधान परीक्षक द्वारा निर्धारित किये जायेंगे। (3) प्रयोगात्मक– वाह्य परीक्षक द्वारा एक मॉडल (जो छः घंटे में तैयार हो जाय) दिया जायेगा। 1–(अ) लैटर प्रेस की छपाई में कम्पोजिंग करना एक मिनट में पाँच शब्द की रफ्तार से, प्रूफ निकालना, प्रूफ पढ़ना तथा सुधारना। (ब) उच्च सुन्दर मॉडल बनाना, जैसे सुन्दर चित्र मंजूषा (एलबम), बस्ते (पोर्टफोलियो)। आभूषण पेटी, श्रृंगारदान आदि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 251(स) नई या पुरानी पुस्तकों को दो भांति से पुनः बाइण्डिंग करना, जैसे पुस्तकालय वाली बाइण्डिंग और लोचदार बाइण्डिंग जो फीते पर की गयी हो, पूरी आधी वे केवल पीठ पर कपड़ा, जिल्दसाजी वाला लगाकर जिसमें निम्नलिखित सभी तरीके शामिल हों पुरानी पुस्तक की सिलाई को तोड़ना, सफाई करना, फटे जुजों की मरम्मत करना, रक्षक कागजों को बनाना और फीते पर सिलाई करना। पीठ पर सरेस लगाना, पीठ को गोल करना व किनारे काटना, ऊपर व नीचे के लिये दफ्ती काटना। पीठ गोल करने के लिये गोलाई बनाना। जिल्दसाजी के कपड़े से उसे मढ़ना, रक्षक कागज को ऊपर नीचे जोड़ना व सुन्दरता के साथ उसे सम्पूर्ण करना।
(द) इसी प्रकार की सम्पूर्ण क्रिया, आधी पूरी व चौथाई प्रकार की जिल्दसाजी में व चमड़े, रैक्सीन की जिल्दसाजी में की जाय। (य) लेटर पैड का छापना सारी छपाई की क्रिया प्रारम्भ से अन्त तक जैसे कम्पोज करना, छापना, प्रूफ तथा शुद्ध करना, तथा हाथ के प्रूफ प्रेस द्वारा छापना या छोटे ट्रेडिल मशीन पर उसे छापना। सम्बन्धित कला (1) विभिन्न प्रकार के सभी सजावट के माध्यम से मॉडलों को सजाना। (2) हिन्दी व अंग्रेजी के अक्षरों को लिखना। (3) मॉडलों व औजारों के चित्र खींचना। (4) कम्पोज किये हुये मैटर को अलंकारिक तरीके से छपाई के लिये बनाना। (5) रक्षक कागजों तथा पुस्तकों के आवरण पृष्ठ को सजाना। (6) सजावट के विभिन्न माध्यम द्वारा सजावट करना जिसमें लकड़ी के ठप्पे, लिनोनियम के ठप्पे व हाफ-टोन आदि शामिल हों।
टिप्पणी– (1) प्रत्येक सत्र में प्रत्येक परीक्षार्थियों द्वारा कम से कम दस मॉडल अवश्य बनाये जायें और इसके अतिरिक्त प्रत्येक को कम से कम दो उच्च कोटि के सुन्दर मॉडल अपनी इच्छानुसार बनाये जायें।
(2) सभी मॉडलों पर सजावट का कार्य स्वयं किया जाये। (3) अध्यापकों को प्रत्येक परीक्षार्थियों के कार्य के विषय में एक रिपोर्ट प्रयोगात्मक परीक्षक के लिये रखनी चाहिये।
प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगाः- अधिकतम अंक–30 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–10 अंक समय –06 घण्टे (1) वाह्य परीक्षक द्वारा देय– 15 अंक 1–मॉडल बनाना। 03 2–सजावट। 03 3–प्रेस कार्य। (क) कम्पोजिंग। (ख) प्रूफ रीडिंग कार्य। 4–मौखिक कार्य। (2) आंतरिक मूल्यांकन देय– 1–फाइल रिकॉर्ड। 2–सत्रीय कार्य सतत् मूल्यांकन। 3–प्रोजेक्ट कार्य एवं मौखिकी।
03 03 03 15 अंक 04 03 08
नोट- विषय अध्यापक प्रत्येक छात्र के कार्यों की एक रिपोर्ट तैयार करके वा]य प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष अवश्य प्रस्तुत करें।
पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित व संस्तुत नहीं की गई है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रमानुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के संबंधित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक के रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे। शेष पचास प्रतिशत अंक वा]य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
252 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4विषय-काष्ठशिल्प
कक्षा-12 पूर्णांक -100 लिखित परीक्षा में एक प्रश्न-पत्र 70 अंक का तीन घंटे का होगा। इसके अतिरिक्त 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा जिसमें मौखिक परीक्षा भी सम्मिलित है, होगी। प्रयोगात्मक परीक्षा 6 घण्टे से अधिक न होगी। उत्तीर्ण होने के लिये लिखित और प्रयोगात्म कमसे कम क्रमशः 2310=33 अंक आने चाहिये।
इकाई-एक 10 अंक 1. सहयोग देने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत बेन्च हुक, पिन बोर्ड, शूटिंग बोर्ड, माइटर बोर्ड, माइटर बाक्स बेन्च स्टापर, डावेल, डावेल प्लेट, कार्क रबर, कार्य करने की मेज आदि का ज्ञान।
2. सफाई करने वाले यंत्र- इसके अन्तर्गत स्क्रेपर, रेगमाल तथा रेगमाल तैयार करने का ज्ञान। 3. यंत्रों को तेज करनाः-इसके अन्र्तगत काष्ठशिल्प के विभिन्न प्रकार के यंत्रों को तेज करने का सम्पूर्ण ज्ञान।
सान लगाने की एमरी पहिया तथा पत्थर के पहिया, आयल स्टोन, आयल स्टोन स्लिप्स आदि का ज्ञान ।
इकाई-दो 10 अंक 1. काष्ठशिल्प में प्रयोग होने वाली मशीने-इसके अन्र्तगत बैण्ड सा मशीन, सर्कुलर सा मशीन, खराद मशीन, मोल्डिंग मशीन, रन्दा करने की मशीन, रेगमाल करने की मशीन तथ यूनिवर्सल वुड वर्किंक मशीन, मर्टिस मशीन का ज्ञान।
2. धातु वस्तुएँ- इसके अन्तर्गत कील, पेंच, कब्जे, बोल्ट-नट, क्लैम्ब, इमलिया-कुण्डा, ताले, इस्क्यूचियन, चटखनी, हत्था तथा मूँठ, डोर बोल्ट, हुक तथा आई, स्टे, कास्टर्स, बाल कैच, फ्लस बोल्ट, मिरर क्लिप आदि का ज्ञान।
इकाई-तीन 10 अंक 1. काष्ठशिल्प में प्रयोग होने वाली लकड़ियाँ- लकड़ी के प्रकार, रंग, वजन प्रति घन फुट, प्राप्ति स्थान तथा उनका प्रयोग। लकड़ियां जैसेः- आम, शीशम, सागौन, देवदार, साखू, चीड़ नीम, महुआ, तुनू, इबोनी, रोजवुड, अखरोट, विजयसाल, ऐस, बबूल, बीच वुड, ओक, सेमल, बिर्च, हल्दू आदि।
2. प्लाई वुड- प्लाईवुड की परिभाषा, प्रकार (लकड़ी की प्रकृति के आधार पर, सरेस के आधार पर, पर्तों की संख्या के आधार पर, परतों की व्यवस्था के आधार पर) बनाने की विधि तथा उसकी उपयोगिता।
3 काष्ठ परिरक्षण परिभाषा सुरक्षित रखने की विधि तथा काष्ठ परिरक्षण में प्रयोग होने वाले विविध मसाले। इकाई-चार 10 अंक 1. डस्ट बोर्ड, सनमाइका तथा फेवीकोल का साधारण ज्ञान। 2. लकड़ी तथा लट्ठे की नाप ज्ञात करना। लकड़ी तथा लट्ठे का मूल्य ज्ञात करना। 3. मानक मापः-' घरेलू सामग्रियों (FURNITURE) की मानक माप का ज्ञान। जैसे- साधारण सन्दूक, आलमारी, कुर्सी, मेज, स्टूल, चारपाई, तखत, सेन्टर टेबुल, पलंग, ड्राइंग बोर्ड, डाइनिंग टेबुल, पेग टेबुल, पेपर टे्र, टी टे्र आदि।
इकाई-पाँच 10 अंक 1. लकड़ी सुखाना- परिभाषा, सुखाने के प्रकार तथा सुखाने की विधि का सम्पूर्ण ज्ञान। 2. लकड़ी के जोड़-जोड़ की परिभाषा, जोड़ो के प्रकार, उनकी उपयोगिता, बनाने की विधि एवं उचित स्थानों पर उनका प्रयोग।
इकाई-छः 10 अंक 1. नमूनों (MODEL), जोड़ो तथा यंत्रों आदि का रुढ़ सममापीय प्रक्षेप या प्रामाणिक सममापीय प्रक्षेप चित्र बनाना।
2. नमूनों, जोड़ो तथा यंत्रों आदि का समलेखीय प्रक्षेप चित्र या लाम्बिक प्रक्षेप चित्र बनाना। 3. धातु सामग्री (METAL FITTINGS), यंत्रों, जोड़ों आदि का मुक्त हस्त रेखा चित्र बनाना तथा उसमें काले व सफेद शेड देना ।
इकाई-सात 10 अंक 1. रेखा चित्र- रेखा चित्र के यंत्रो तथा रेखा चित्र में प्रयोग होने वाली रेखाओं का ज्ञान। 2. अक्षर लेखनः अक्ष्र लेखन का महत्व तथा अक्षर लेखन के प्रकार, हिन्दी तथा अंग्रेजी के बड़े छाप वाले अक्षरों की तिरछी लिखाई या रचना करने की विधि।
3. पॉलिश, वार्निश तथा पेन्ट-
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 253(अ) पालिशः पालिश के यंत्र, पालिश के पदार्थ, पालिश के प्रकार, पालिश तैयार तथा प्रयोग करने की विधि। स्टेनिंग, रेशे भरना, फयूमिंग, आयलिंग, तेल वाली लकड़ी पर पालिश करना। काष्ठ सामग्री से धब्बे हटाना, पुरानी पालिश छुड़ाना तथा पालिश करने से लाभ आदि का ज्ञान।
(ब) वार्निशः वार्निश की परिभाषा, वार्निश का अर्थ, वार्निश की उपयोगिता तथा आवश्यकता, वार्निश के अन्र्तगत पैदा होने वाले प्रमुख दोष। वार्निश करने से लाभ आदि का ज्ञान।
(स) पेन्टः पेन्टिंग, पेन्टिंग की आवश्यकता, पेन्ट, अच्छे पेन्ट के लक्षण, पेन्ट हटाने के लिए सामान्य पदार्थ तथा पेन्ट करने से लाभ आदि का ज्ञान।
प्रयोगात्मक कार्य 30 अंक
1. नमूने (MODEL) की बनावट, लकड़ी से लेकर पॉलिश, वार्निश तथा पेन्ट तक की पूरी होनी चाहिए। 2. जो नमूने बनवाये जायें उसमें आवश्यक जोड़ तथा मेटल फिटिंग्स का उचित प्रयोग होना चाहिए। 3. छात्रों को विभिन्न प्रकार के नमूनों के नाप अनुपात व आकार स्वयं निर्धारित करना चाहिए। 4. प्रयोगात्मक परीक्षा में वाल बै्रकेट, लेटर रैक, लैम्प स्टैण्ड, विभिन्न प्रकार के टे्र, मोमबत्ती स्टैण्ड, टावेल रोलर, बुक रैक, फलावर पॉट स्टैण्ड मथानी आदि मॉडल बनवाये जांये।
प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगा-
अधिकतम् अंक-30 न्यूनतम उत्तीर्णांक-10 समय - 06 घण्टे (एक दिन में) (अ) बा]य परीक्षक द्वारा देय अंक-15 1. मॉडल की तैयारी, सही बनाने की विधि 03 अंक 2. सही जोड़ 03 अंक 3. मॉडल की सही रूप रेखा 03 अंक 4. चिप कार्विंग 02 अंक 5. मौखिक 04 अंक योग =15 अंक (ब) आन्तरिक मूल्यांकन- 15 अंक 1. प्रोजेक्ट कार्य 06 अंक 2. रिपोर्ट तैयार करना 05 अंक 3. सत्रीय कार्य एवं सतत् मूल्यांकन 04 अंक नोट- विषय अध्यापक प्रत्येक छात्र के कार्यों की एक रिपोर्ट तैयार करके वा]य प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष अवश्य प्रस्तुत करें।
पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित व संस्तुत नहीं की गई है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रमानुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के संबंधित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक के रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे। शेष पचास प्रतिशत अंक वा]य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
विषय-सिलाई
कक्षा-12 पूर्णाक 100 अंक
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,-254 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 , , , , (ड)
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भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 255चित्रकला (आलेखन)
कक्षा-12
इसमें 100 अंको का एक प्रश्न-पत्र 3 घण्टे का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 खण्ड-क इसमें 10 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे। खण्ड-ख आलेखन 60 अंक अनिवार्य।
आलेखन-प्राकृतिक, अलंकारिक, आकृतियों पर आधारित विभिन्न प्रकार के दो या दो सेे अधिक आवृत्ति के मौलिक-रचनात्मक आलेखन। पुष्प जैसे गुलाब, कमल, सूरजमुखी, डहलिया, गुड़हल, पेन्जी आदि फूल, कलियां, पत्तियों आदि वस्तुयें जैसे मानव शंख, तितलियांं, हंस, हिरन, हाथी आदि का आधार लेकर आलेखन बनाना। कम से कम तीन रंग भरने हैं। उत्तम संगति के साथ। आलेखन वस्त्रों की छपाई, बुनाई, कढ़ाई, चर्म शिल्प, बर्तन, अल्पना व अन्य ज्यामिति आकार में बनाने होंगे। ग्राफ बना कर भी आलेखन बनाये जा सकते हैं।
खण्ड-ग (कोईं एक खण्ड) वस्तु चित्रण अथवा स्मृति चित्रण 30 अंक अथवा प्रकृति चित्रण 30 अंक अथवा प्राकृतिक दृश्य (लैण्डस्केप) 30 अंक।
वस्तु चित्रण 30 अंक विभिन्न प्रकार की वस्तुयें जो साधारण प्रयोग मेंं आती हैं और जो बेलनाकार, आयताकार तथा सामान्य आकार की होेती है जैसे घरेलू बर्तन, क्राकरी, दीपक, लालटेन, बोतलें, गिलास, जूते, अटैची, थरमस, छतरी, पैकेट, फल, सब्जी आदि का चित्र बनाना-यह चित्रण इंक में प्रकाश, छाया तथा प्रतिछाया, पेन्सिल, पेस्टल, आयल पेंट, पोस्टर रंग, जल रंग अग्र भूमि तथा पृष्ठ भूमि दर्शाते हुए करना है। टिप्पणी-चित्र संयोजन 20 सेमी0 से कम न हो। वस्तु समूह एक आयताकार व अन्य बेलनाकार या गोलाकार वस्तुआें का होना चाहिए। जिनका आपस में समन्वय भी होना चाहिए। वस्तुओं को कम से कम 40 सेंमी0 ऊंचाई पर रखा होना चाहिए।
अथवा
30 अंक
प्रकृति चित्रण पुष्प जैसे-कनेर, गुड़हल, पेन्जी, कलियां, डंठलों, पत्तियों तथा सम्पूर्ण पौधे के चित्र, प्राकृतिक रंगों में छाया, प्रकाश तथा प्रति छाया दर्शाते हुए बनाना। जल रंग या पोस्टर रंग का प्रयोग कर सकते हैंं। पौधे व पुष्प, पत्तियों के प्रत्येक अंग व जोड़ बनाने में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
30 अंक
अथवा स्मृति चित्रण वस्तु चित्रण या प्राकृतिक चित्रण के साथ-साथ स्मृति चित्रण सफेद कागज पर प्रकाश, छाया तथा प्रति छाया सहित निम्न वस्तुओं मे से किसी एक का चित्र बनाना होगा। घरेलू बर्तन, क्राकरी, शीशे व एनमल अन्य दैनिक जीवन की छोटी-छोटी वस्तुएं या सरल पशु-पक्षी जेैसे कुत्ता, बिल्ली, खरगोश, हिरन, हाथी, पक्षी, बत्तख, मोर, तोता, मुर्गा, कबूतर, हंस, नाप 15 सेंमी0 से अधिक नहीं। (माध्यम पेन्सिल क्रेयान)
अथवा
प्राकृतिक दृश्य (Land Scape) 30 अंक उच्चतर प्राकृतिक दृश्य जैसे उषाकाल, मध्यकाल कोई ऋतु प्रभाव, जिसमें मानव, पशु-पक्षी, झोपड़ियों, आकाश का समावेश हो या ग्रामीण जीवन की साधारण झांकी, सामाजिक दृश्य, थोडे़ प्राकृतिक पृष्ठभूमि में बनाना है। माध्यम-जल रंग, पोस्टर रंग, ऑयल, ऑयल पेस्टल व कार्बन चारकोल पेन्सिल, नाप 25 सेंमी0 x 30 सेंमी0। पुस्तकें- कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
विषय-चित्रकला (प्राविधिक)
कक्षा-12
इसमें 100 अकों का एक प्रश्नपत्र 3 घण्टे का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33
खण्ड-अ
इसमें 10 अंकों के प्राविधिक कला से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जायेंगे। 60 अंक अनिवार्य खण्ड-ब- 12 अंक,खण्ड-स- 16 अंक, खण्ड-द-16 अंक, खण्ड-इ 16 अंक,256 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
खण्ड-ब
12 अंक हिन्दी तथा अंग्रेजी के बड़े (CAPITAL) प्रकाश व छायायुक्त अक्षर, रोमन, आधुनिक। साथ-साथ तिरछी लिखावट में एक वाक्य।
कर्णवत पैमाना
खण्ड-स 16 अंक
क्षेत्रफल सम्बन्धित निर्मेय। दीर्घवृत्त, परवलय तथा अतिपरवलय। खण्ड-द 16 अंक सूची, स्तम्भ तथा समपाश्र्व, ठोसों के प्रक्षेप तथा बेलन, गोला, घन ठोस ज्यामितीय, शंकु का लाम्बिक प्रक्षेप।
खण्ड-ई 16 अंक
अक्षर के काठ तथा ठोसों के सममितीय चित्र।
खण्ड-फ खण्ड-फ 30 अंक, (कोई एक खण्ड करना है) वस्तु चित्रण 30 अंक अथवा स्मृति चित्रण 30 अंक अथवा प्रकृति चित्रण 30 अंक अथवा प्राकृतिक दृश्य (लैण्डस्केप) 30 अंक। वस्तु चित्रण 30 अंक विभिन्न प्रकार की वस्तुयें जो साधारण प्रयोग मेंं आती हैं और जो बेलनाकार, आयताकार तथा सामान्य आकार की होेती है जैसे घरेलू बर्तन, क्राकरी, दीपक, लालटेन, बोतलें, गिलास, जूते, अटैची, थरमस, छतरी, पैकेट, फल, सब्जी आदि का चित्र बनाना-यह चित्रण इंक में प्रकाश, छाया तथा प्रतिछाया, पेन्सिल, पेस्टल, आयल पेंट, पोस्टर रंग, जल रंग अग्र भूमि तथा पृष्ठ भूमि दर्शाते हुए करना है। टिप्पणी-चित्र संयोजन 20 सेंमी0 से कम न हो। वस्तु समूह एक आयताकार व अन्य बेलनाकार या गोलाकार वस्तुआें का होना चाहिए। जिनका आपस में समन्वय भी होना चाहिए। वस्तुओं को कम से कम 40 सेंमी0 ऊंचाई पर रखा होना चाहिए।
अथवा
30 अंक
प्रकृति चित्रण पुष्प जैसे-कनेर, गुड़हल, पेन्जी, कलियां, डंठलों, पत्तियों तथा सम्पूर्ण पौधे के चित्र, प्राकृतिक रंगों में छाया, प्रकाश तथा प्रति छाया दर्शाते हुए बनाना। जल रंग या पोस्टर रंग का प्रयोग कर सकते हैंं। पौधे व पुष्प, पत्तियों के प्रत्येक अंग व जोड़ बनाने में विशेष ध्यान रखना चाहिए।
30 अंक
अथवा स्मृति चित्रण वस्तु चित्रण या प्राकृतिक चित्रण के साथ-साथ स्मृति चित्रण सफेद कागज पर प्रकाश, छाया तथा प्रति छाया सहित निम्न वस्तुओं मे से किसी एक का चित्र बनाना होगा। घरेलू बर्तन, क्राकरी, शीशे व एनमल अन्य दैनिक जीवन की छोटी-छोटी वस्तुएं या सरल पशु-पक्षी जेैसे कुत्ता, बिल्ली, खरगोश, हिरन, हाथी, पक्षी, बत्तख, मोर, तोता, मुर्गा, कबूतर, हंस, नाप 15 सेंमी0 से अधिक नहीं। (माध्यम पेन्सिल क्रेयान)
अथवा
प्राकृतिक दृश्य (Land Scape) 30 अंक उच्चतर प्राकृतिक दृश्य जैसे उषाकाल, मध्यकाल कोई ऋतु प्रभाव, जिसमें मानव, पशु-पक्षी, झोपड़ियों, आकाश का समावेश हो या ग्रामीण जीवन की साधारण झांकी, सामाजिक दृश्य, थोडे़ प्राकृतिक पृष्ठभूमि में बनाना है। माध्यम-जल रंग, पोस्टर रंग, ऑयल, ऑयल पेस्टल व कार्बन चारकोल पेन्सिल, नाप 25 सेंमी0 x 30 सेंमी0। पुस्तकें- कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
तर्कशास्त्र- कक्षा-12
10 10 इसमें 100 अंकों का एक प्रश्न पत्र तीन घंटे का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 1-तर्कशास्त्र तथा उनका वर्गीकरण 10 2-उक्तियों का तार्किक स्वरूप, अन्तरानुमान की प्रकृति एवं स्वरूप, अन्तरानुमान के विभिन्न स्वरूपों से 10 संबंधित दोष प्रकरण, अन्तरानुमान के प्रकार। 3-न्याय वाक्य : आकार एवं संयोग। 4-मिश्र न्याय वाक्य 5-न्याय वाक्यों के नियमों के उल्लंघन से उत्पन्न दोष 6-प्राक्कल्पना एवं साम्यानुमान
10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 257 10 7-व्यवस्था एवं नियमों का संस्थापन 8-वर्गीकरण 10 9-आगमनात्मक युक्तियों के विश्लेषण एवं आगमनात्मक पद्धति का प्रयोग, आगमन तर्क से संबंधित दोष प्रकरण 10 10-प्रायोगिक अथवा आगमन की विधियां 10 पुस्तक-
कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
विशय-रंजन कला
कक्षा-12
इसमें एक प्रश्न-पत्र तीन घण्टे का 100 अंकों का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33
खण्ड-क (अनिवार्य) 70 अंक मानव सिर का (Statue) प्रतिमा द्वारा रंगों में चित्रण– (क) मानव चेहरे का अनुपात एवं भाव के अनुसार अभिव्यंजना (30 अंक) (ख) प्रकाश, छाया एवं प्रतिच्छाया (त्रिआयामी) का सही प्रयोग (30 अंक) (ग) प्रतिमा के पीछे लगे पर्दे पर छाया, प्रकाश एवं प्रतिच्छाया को दर्शाना (10 अंक) अथवा
भारतीय चित्रकारी– (क)सटीक रेखांकन- 20 अंक (ख) अनुरूपता- 15 अंक (ग) प्रभावी रंग संयोजन एवं सामान्जस्य- 20 अंक (घ) सम्पूर्ण अभिव्यक्ति एवं फिनिशिंग- 15 अंक। खण्ड-ख 30 अंक रंगों में काल्पनिक चित्र संयोजन–ग्रामीण घटनाओं का उन्नत भाव प्रकाशन अथवा चित्र जैसे–ग्रामवाला गड़रिया, हलवाहा, किसान, माली, दूधवाला, भाजी बेचने वाला या फेरी वाला, खेल उत्सव आदि। इसमें मानव चित्र उन्नत दृश्य में जिसमें नदी, वृक्ष, झोपड़ी, मकान इत्यादि भी सम्मिलित किये जायें। चित्र दो या अधिक रंगों में स्वतन्त्र शैली में सपाट रंग व रेखाओं द्वारा प्रकाशित किये जायें।
अथवा भारतीय चित्रकला का इतिहास–भारतीय कला के निम्नांकित उपशीर्षकों में विभाजित हो, विभिन्न कला केन्द्रों का इतिहास, आलोचनात्मक और तुलनात्मक/अध्ययन के साथ पढ़ाया जाय। मुगल काल, राजपूत काल, पुनर्जागरण काल, बंगाल स्कूल व विशेष प्रख्यात भारतीय कलाकारों का जीवन परिचय। पुस्तकें–कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श करके पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
विषय-नृत्य कला कक्षा-12 एक लिखित प्रश्न-पत्र तीन घण्टे का और 50 अंकों का होगा। इसके अलावा 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। उत्तीर्ण होने के लिये विद्यार्थी को लिखित, प्रयोगात्मक और योग में क्रमशः कम से कम 1716 कुल 33 अंक पाना आवश्यक है। निम्नलिखित में से किसी एक की परिभाषा और व्याख्या जहाँ सम्भव हो सके उदाहरण और चित्र देते हुये–कत्थक, भरतनाट्यम्, मनीपुरी और कथकली। कथक के साथ मनीपुरी तथा कथकली का परिचय- 1–अभिनय, आंगिक, वाचिक, अहाय, सात्विक, कस्क-मस्क कटाक्ष थिल्लन, लय, विरामद्रुत, घूंघट अंचल। 10 अंक 2–हाथों के (संयुक्त), 33 प्रकार और इनका प्रयोग देवताओं के हाथों की स्थितियों जैसे ब्रह्मा, शिव, विष्णु, सरस्वती, पार्वती, लक्ष्मी, गणेश, कार्तिकेय, इन्द्र, अग्नि, यम, वरुण, व्यास, कुबेर अवतारों के हाथों की स्थितियां विभिन्न सम्बन्धों को प्रदर्शित करने वाले हाथों की स्थितियाँ। पाँच प्रकार की कुन्द। 15 अंक 3– लखनऊ घराने और जयपुर घराने की कथक नृत्यों में गतों, टुकड़ों, मानों, प्रदर्शन आदि में मुख्य भेद अथवा कथकली अथवा मणीपुरी नृत्य। 15 अंक 4–आमद, परन आदि को ताल लिपि में लिखने की योग्यता। तीवरा, एकताल, चारताल, आड़ा चारताल, धमारी त्रिताल के ठेकों को दुगुन, तिगुन, चौगुन में लिखना। स्थायी भाव, संचारी अनुुभाव एवं रसों का पूर्ण ज्ञान। 10 अंक
33 ङ258 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 नृत्य सम्बन्धी किसी विषय पर निबन्ध लिखने की क्षमता– निम्नलिखित नृत्यकारों की जीवनिया– उदय शंकर, गोपीकृष्ण, कालका प्रसाद, अच्छन महाराज, शम्भू महाराज, जयलाल, सोनल मान सिंह।
प्रयोगात्मक 50 अंक
1–टखने, घुटने, कमर, कन्ध, बाहों, कलाइयों, सिर, गर्दन, आंखों, भौहों की कठिन गतियों का अभ्यास, विभिन्न प्रकार की चालों का प्रदर्शन, भावों का अभिव्यक्तिकरण, नृत्य और मुद्राओं द्वारा भाव, जैसे वीर, करुण, हास्य आदि दिखाना। 2–धमार, आड़ा, चौताल में सरल तत्कार, थाट, एक आमद, तीन चक्करदार परन। 10 टुकड़े और कवित तीन तालों में, एक गत दो परन और चार टुकड़े झपताल में एक गत और दो टुकड़े चौताल में। 3–तबले पर तीन ताल के अतिरिक्त तीवरा, आड़ा, चौताल, धमार एक चौताल, ताल के ठेके बनाने की योग्यता। कम से कम उपरोक्त तालों में से प्रत्येक में दो टुकड़े और नृत्य के लिए नृत्य के सभी टुकड़े आदि का पढ़ना और हाथ से ताली, खाली आदि दिखाते हुये सभी तालों का देना और नृत्य से तालों को पहचानने, पकड़ने और अनुगमन करने की योग्यता। 4–कथानक और पौराणिक नृत्य जैसे श्रीकृष्ण की जीवन घटनायें आदि से दो नृत्य। 5–विस्तृत कत्थक नृत्य, गोवर्धन लीला, माखन चोरी, कठिन टुकड़ों अथवा तोड़ों का उसमें प्रदर्शन।
या
वर्णम्, पद्म, थिल्लन की भरत नाट्यम् नृत्य की श्रृंखला–किन्हीं दो रागों में। सूचना :–प्रयोगात्मक परीक्षा में अंकों का क्रम निम्नवत् होगा– 15 विद्यार्थी का अपना चुना हुआ नृत्य। परीक्षक द्वारा पूछे गये नृत्य खण्ड गत–टुकड़े आदि विभिन्न तालों में। 10 5 अभिव्यक्ति, संवेग, भाव आदि। 5 वेश, श्रृंगार, सज्जा अन्य प्रसाधन आदि। लयकारी, ताल ज्ञान आदि। 5 नृत्य के टुकड़ों और ताल के ठेकों का विभिन्न लयों में हाथ से ताली खाली आदि दिखलाते हुये। 5 सामान्य धारणा और नृत्य का प्रभाव। 5 सूचना :–अध्यापकों को प्रत्येक विद्यार्थी के कार्य का लेखा वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करने के लिये तैयार करना चाहिये। पुस्तक :–कोई भी पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। विद्यालयों के प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श करके पाठ्यक्रम के के के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
अधिकतम अंक–50 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–16 अंक समय–प्रति परीक्षार्थी 15-20 मि0
25 अंक (1) वाह्य मूल्यांकन– 1–परीक्षार्थी का अपना चुना हुआ नृत्य। 08 2–परीक्षक द्वारा पूछे गये नृत्य खण्ड गत टुकड़े आदि विभिन्न तालों में बताना। 03 3–वेश, श्रृंगार, सज्जा, अन्य प्रसाधन आदि। 03 4–अभिव्यक्ति, संदेश, भाव आदि। 03 5–लयकारी, ताल, ज्ञान आदि। 03 6–नृत्य के टुकड़ों और ताल को विभिन्न लयों में हाथ से ताली आदि दिखाते हुये। 02 7–सामान्य धारण और नृत्य का प्रभाव। 03 25 अंक (2) आंतरिक मूल्यांकन– 1–रिकॉर्ड। 05 2–प्रोजेक्ट। 10 3–सत्रीय कार्य। 10
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 259नेशनल कैडेट कोर
कक्षा-12
नेशनल कैेडेट कोर (N.C.C.) शैक्षणिक विषय के रूप में पाठ्यक्रम का उद्देश्य- राष्ट्र निर्माण एवं विकास में छात्र/छात्राओं को उन्मुख करना, उनमें चरित्र निर्माण नेतृत्व के गुण और विशेष दक्षता (skill) दिलाने के साथ-साथ उनमें सुरक्षा, सामाजिक राजतैतिक, आर्थिक, पर्यावरणीय, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन जैसी समस्याओं और चुनौतियों के लिए जागरूक करना है, जिससे इनका भविष्य उज्ज्वल एवं उन्नतिशील तथा अनुशासित बन सके। नेशनल कैडेट कोर (N.C.C.) वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जायेगा। इसका केवल एक लिखित प्रश्नपत्र 70 अंक का होगा तथा 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी, कुल उत्तीर्ण अंक 33 होगा। लिखित तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में अलग-अलग उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा।
नेशनल कैडेट कोर
कक्षा-12 पूर्णांक 70 अंक
इकाई-1 राष्ट्रीय एकता एवं धर्म निरपेक्षता 10 अंक (क) राष्ट्रीय एकता एवं देशभक्ति (ख) धर्म निरपेक्षता के बुनियादी मूल्य (ग) राष्ट्रीय हित का अर्थ एवं आवश्यकता (घ) विभिन्नता में एकता इकाई-2 व्यक्तित्व विकास एवं नेतृत्व 10 अंक (क) बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास (ख) नेतृत्व के विकास का महत्व उपाय एवं आवश्यकता (ग) समय प्रबंधन, साक्षात्कार में दक्षता प्रवीण होने की उपाय (घ) चरित्र निर्माण का महत्व एवं समाज में उपयोग इकाई-3 सैन्य इतिहास एवं युद्ध (क) आधुनिक भारतीय सेनाएं (ख) भारतीय युद्ध-झेलम का संग्राम 326, पानीपत का संग्राम 1526,1761 10 अंक (ग) भारत- पाकिस्तान युद्ध 1948, 1965,1971, कारगिल संघर्ष 1999 (घ) भारतीय सेना के वीर सपूत (मेजर सैतान सिंह, ब्रिगेडियर उसमान, वीर अब्दुल हमीद, कारगिल के हीरो परमवीर चक्र विजेता योगेन्द्र यादव, संजय (जीवित) इकाई-4 असैनिक चुनौतियॉ एवं संचार व्यवस्था 10 अंक (क) साइबर क्राइम (ख) कम्प्यूटर का बौेद्धिक प्रयोग (ग) प्रभावी संचार के सिद्धान्त एवं उपयोग तथा आवश्यकता (घ) समय प्रबंधन इकाई-5 आपदा प्रबंधन एवं आंतरिक चुनौतियॉ 08 अंक (क) प्राकृतिक आपदा एवं उसका प्रबंधन (ख) भूकम्प के प्रति जागरूकता एवं बचाने के उपाय (ग) चक्रवात (तूफान) के प्रति जागरूकता एवं बचाव (घ) बाढ़ के प्रति जागरूकता एवं बचाने के बचाव इकाई-6 सामाजिक जागरूकता एवं सामुदायिक विकास 08 अंक (क) सामाजिक कार्यों के प्रति युवाओं की भूमिका एवं रूझान (ख) ग्रामीण विकास एवं कार्यक्रम (ग) आंतरिक चुनौतियों की अवधारणा, दायित्व एवं जागरूकता (घ) एड्स के प्रति जागरूकता पैदा करना एवं बचाव के उपाय (ङ) सड़क सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने और सड़क दुर्घटना के मामलों को कम करने के उपाय। इकाई-7 स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता 07 अंक (क) युवाओं में व्यक्तिगत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना (ख) मानव शरीर की संरचना एवं ज्ञान (ग) हाईजीन के प्रति जागरूकता एवं आवश्यकता बताना (घ) भोजन एवं हाइजीन के प्रति जागरूकता इकाई-8 पर्यावरणीय एवं जल संरक्षण (क) कान्सेप्ट ऑफ ससटनेबुल डेवलपमेंट 07 अंक260 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (ख) प्राकृतिक संसाधन उसका प्रबंधन (ग) जल संरक्षण की आवश्यकता एवं महत्व (घ) बरसात के पानी की संरक्षण प्रयोगात्मक 30 अंक (15 अंक बाह्य, 15 आंतरिक) इकाई-1 मानचित्र अध्ययन (5 अंक बाह्य, 5 आंतरिक) इकाई-2 क्षेत्रफल एवं युद्धकला (5 बाह्य, 5 आंतरिक ) (क) भूमिका अध्ययन (ख) दूरी का मापन इकाई-3 दिक्मान(10 अंक ) (क) दिक्मान की संरचना आवश्यकता एवं उपयोग मौखिक एवं ड्रिल परीक्षण (Drill Test) एन0सी0सी0 (प्रयोगात्मक) उपकरण एवं अन्य सामाग्री की सूची
1. टोपोशीट (मानचित्र) जिला एवं प्रदेश 2. सर्विस प्रोटेक्टर मार्क A 3. प्रिज्मैटिक दिक्सूचक (कम्पास) 4. नक्शे (मानचित्र)
(अ) संकेतिक चिन्हों का मानचित्र (ब) भारत एवं पड़ोसी राष्ट्र (स) भारत भौगोलिक (द) भारत हिन्द महासागर
5. प्रयोगात्मक नोटबुक
विषय-मनोविज्ञान
कक्षा-12
100 अंकों का एक प्रश्नपत्र होगा जिसकी अवधि 3 घण्टे 15 मिनट होगी। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 अंकों का होगा। अध्याय-1 मनोवैज्ञानिक गुणों में विभिन्नताएँ- 15 अंक परिचय, मानव प्रकार्यों में व्यक्तिगत भिन्नतायें, मनोवैज्ञानिक गुणों का मूल्यांकन बुद्धि, बुद्धि का सिद्धान्त, बुद्धि में व्यक्तिगत भिन्नतायें, संस्कृति तथा बुद्धि, सांवेगिक बुद्धि, विशिष्ट योग्यताएँ, सर्जनात्मकता। अध्याय-2 आत्म एवं व्यक्तित्व- 18 अंक परिचय, आत्म एवं व्यक्तित्व, आत्म का संप्रत्यय, आत्म के संज्ञानात्मक एवं व्यवहारात्मक पक्ष, संस्कृति एवं आत्म, व्यक्तित्व का संप्रत्यय, व्यक्तित्व के अध्ययन के प्रमुख उपागम, व्यक्तित्व का मूल्यांकन। अध्याय-3 जीवन की चुनौतियों का सामना- 15 अंक परिचय, दबाव की प्रकृति, प्रकार एवं श्रोत, मनोवैज्ञानिक प्रकार्य तथा स्वास्थ्य पर दबाब का प्रभाव, दबाव का सामना करना, सकारात्मक स्वास्थ्य तथा कुशल-क्षेम का उन्नयन। अध्याय-4 मनोवैज्ञानिक विकार- 15 अंक परिचय, अपसामान्यता तथा मनोवैज्ञानिक विकार के संप्रत्यय, मनोवैज्ञानिक विकारों का वर्गीकरण, अप सामान्य व्यवहार के अंतनिहित कारक, प्रमुख मनोवैज्ञानिक विकार। अध्याय-5 चिकित्सा उपागम- 10 अंक मनश्चिकित्सा की प्रकृति एवं प्रक्रिया-चिकित्सात्मक संबन्ध, चिकित्सा के प्रकार-सेवार्थी के समस्या-निरूपण में अंतर्निहित चरण, व्यवहार चिकित्सा, विश्रांति की विधियाँ, संज्ञानात्मक चिकित्सा, मानवतावादी-अस्तित्व परक चिकित्सा, वैकल्पिक चिकित्सा, मानसिक रोगियों का पुनः स्थापन। अध्याय-6 अभिवृत्ति एवं सामाजिक संज्ञान- 15 अंक परिचय, सामाजिक व्यवहार की व्याख्या करना, अभिवृत्ति की प्रकृति एवं घटक, अभिवृत्ति निर्माण एवं परिवर्तन, अभिवृत्ति निर्माण, अभिवृत्ति परिवर्तन, अभिवृत्ति-व्यवहार संबंध, पूर्वाग्रह एवं भेदभाव, पूर्वाग्रह नियंत्रण की युक्तियाँ। अध्याय-7 सामाजिक प्रभाव एवं समूह प्रक्रम- 12 अंक परिचय, समूह की प्रकृति एवं इसका निर्माण, समूह चिंतन, समूह के प्रकार, न्युनतम समूह प्रतिमान प्रयोग, व्यक्ति के व्यवहार पर समूह प्रभाव-सामाजिक स्वैराचार, समूह ध्रुवीकरण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 261विशय-कम्प्यूटर
कक्षा-12
इस विषय की लिखित परीक्षा 60 अंकों के एक प्रश्नपत्र तीन घंटे की समयावधि की होंगी। इसके अतिरिक्त 40 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु तीन घंटे की समयावधि निर्धारित होगी। उत्तीर्ण होने के लिये परीक्षार्थी को लिखित, प्रयोगात्मक तथा योग में न्यूनतम क्रमशः 20, 13 तथा 33 अंक प्राप्त करने होंगे।
15 1. ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड का परिचय 1.1 परिचय- आवश्यकता, लक्षण एवं तत्व 1.2 क्लासेस- आवश्यकता, प्रकार एवं उपयोग 1.3 ऑब्जेक्ट- आवश्यकता, प्रकार एवं उपयोग 1.4 इन्हेरिटेंस- आवश्यकता, प्रकार एवं उपयोग 1.5 स्ट्रकचर प्रोग्रामिंग एवं ऑबजेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग का तुलनात्मक अध्ययन
2. कोर जावा लैंग्वेज का परिचय 15 2.1 जावा के मूल तत्वः इतिहास, विशेषताएं एवं उपयोग, जावा के कंपोनेंट के प्रकार जैसे जे.डी.के, जे.आर.ई एवं जे.बी.एम का परिचय
2.2 जावा आधारित प्रोग्राम का निर्माण : डाटा टाइप, वैरियेबल्स, लिटरल एवं उस पर आधारित प्रोग्राम का निर्माण, प्रोग्राम का कंपाइलेशन एवं एग्जीक्यूशन
2.3 इनपुट/आउटपुट आधारित प्रोग्राम बनानाः इनपुट/आउटपुट का महत्व, उसके लिए आवश्यक पैकेज एवं क्लासेस का अध्ययन, और उस पर आधारित प्रोग्राम बनाना
2.4 मेथड ः मेथड ओवरलोडिंग, कंस्ट्रक्टर, अवधारणा, प्रकार एवं निर्धारण करने की विधियों पर आधारित प्रोग्राम का निर्माण,
2.5 इनहेरिटेंस : अवधारणा, प्रकार एवं निर्धारण करने की विधियों पर आधारित प्रोग्राम का निर्माण 2.6 एनकैप्सूलेशन : अवधारणा, प्रकार एवं निर्धारण करने की विधियों पर आधारित प्रोग्राम का निर्माण 2.7 इंटरफेस, ऑब्स्ट्रक्शन, एक्सट्रैक्शन अवधारणा 3. एडवांस जावा लैंग्वेज का परिचय 10 3.1. एरे (Arrays), स्ट्रिंग, पैकेज, मल्टीथे्रडिंग, एक्सेप्शन हैंडलिंग, मैनिपुलेशन ए.डब्ल्यू.टी (AWT) : अवधारणा, उपयोग, महतव पर आधारित संक्षिप्त परिचय एवं प्रोग्राम निर्माण 4 रोबोटिक्स का परिचय 10 4.1 परिचय, वर्गीकरण, कॉम्पोनेंट्स : अवधारणा 4.2 नियंत्रण, प्रोग्रामिंग तथा अनुप्रयोग 5. ड्रोन टेक्नोलॉजी का परिचय 10 5.1 परिचय, वर्गीकरण, कॉम्पोनेंट्स : अवधारणा 5.2 कैलिब्रेशन, अनुप्रयोग, उड़ान क्षेत्र एवं संचालन
प्रयोगात्मक
अधिकतम अंक 40
(A) निम्नलिखित पर आधारित किन्हीं दो प्रोग्राम को तैयार करना 10 1. क्लासेस एवं ऑब्जेक्ट पर आधारित प्रोग्राम 2. डाटा टाइप, वेरिएबल, लिटरल एवं उस पर आधारित प्रोग्रामिंग 3. इनपुट/आउटपुट पर आधारित प्रोग्राम 4. मेथड ओवरलोडिंग कंस्ट्रक्टर पर आधारित प्रोग्राम 5. इन्हेरिटेंस तथा एनकैप्सूलेशन पर आधारित प्रोग्राम 6. एरे तथा स्ट्रिंग मैनिपुलेशन पर आधारित प्रोग्राम
(B) प्रोजेक्ट : निम्नलिखित पर आधारित एक प्रोग्राम को तैयार करना 15 1. रोबोटिक पर आधारित सूक्ष्म प्रोजेक्ट 2. ड्रोन टेकनोलॉजी पर आधारित सूक्ष्म प्रोजेक्ट (C) सत्रीय कार्य पर आधारित आंतरिक मूल्यांकन 10 (D) मौखिक मूल्यांकन 05262 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
विषय- गणित
(कक्षा-12)
| क्रम | इकाई | अंक |
| 1. | सम्बन्ध तथा फलन | 10 |
| 2. | बीजगणित | 15 |
| 3. | कलन | 44 |
| 4. | सदिश तथा त्रिविमीय ज्यामिति | 18 |
| 5. | रैखिक प्रोग्रामन | 05 |
| 6. | प्रायिकता | 08 |
| योग | 100 |
इकाई-1 : सम्बन्ध तथा फलन 10 अंक 1. सम्बन्ध तथा फलन : सम्बन्धों के प्रकार : स्वतुल्य, सममित, संक्रामक तथा तुल्यता सम्बन्ध, फलनो के प्रकार, एकैकी तथा आच्छादक फलन, फलनों का संयोजन एवं व्युत्क्रमणीय फलन।
2. प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन : परिभाषा, परिसर, प्रांत, मुख्य मान शाखायें, प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के आलेख, प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों के गुणधर्म।
इकाई-2 : बीजगणित 15 अंक 1. आव्यूह ः संकल्पना, संकेतन, क्रम, समानता, आव्यूहों के प्रकार, शून्य तथा तत्समक आव्यूह, आव्यूह का परिवर्त, सममित तथा विषम सममित आव्यूह। आव्यूह पर संक्रियाएँ : योग तथा गुणन और अदिश गुणन। योग, गुणन तथा अदिश गुणन के साधारण गुणधर्म। आव्यूहों के गुणन की अक्रमविनिमेयता तथा अशून्य आव्यूहों का अस्तित्व जिनका गुणन एक शून्य आव्यूह है (क्रम 2 के वर्ग आव्यूहों तक सीमित)। व्युत्क्रमणीय आव्यूह तथा व्युत्क्रम की अद्वितीयता यदि उसका अस्तित्व है (यहाँ सभी आव्यूहों के अवयव वास्तविक संख्याएँ हैं)। 2. सारणिक : एक वर्ग आव्यूह का सारणिक (33 क्रम के वर्ग आव्यूह तक), उपसारणिक तथा सहखण्ड, सारणिकों का अनुप्रयोग त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने में, सहखण्डज आव्यूह तथा आव्यूह का व्युत्क्रम। संगत, असंगत तथा उदाहरणों द्वारा रैखिक समीकरण निकाय के हलों की संख्या ज्ञात करना। दो अथवा तीन चरों में रैखिक समीकरण निकाय को (जिनका अद्वितीय हल हो) आव्यूह के प्रतिलोम का प्रयोग कर हल करना।
इकाई-3 : कलन 44 अंक 1. सततता तथा अवकलनीयता : सततता, संतत फलनों का बीजगणित तथा अवकलनीयता संयुक्त फलनों का अवकलन, श्रृंखला नियम, अस्पष्ट फलनों का अवकलन, चर घातांकी तथा लघुगणकीय फलनों की संकल्पना तथा उनका अवकलन। लघुगणकीय अवकलन, प्राचल रूप में व्यक्त फलनों का अवकलन, द्वितीय क्रम के अवकलन, प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों का अवकलन।
2. अवकलनों के अनुप्रयोग : अवकलनों के अनुप्रयोग, परिवर्तन की दर, वृद्धि/ह्रास मान फलन, उच्चतम तथा निम्नतम (प्रथम अवकल परीक्षण की ज्यामितीय प्रेरणा तथा द्वितीय अवकल परीक्षण उपपत्ति लायक टूल) सरल प्रश्न (जो विषय के मूलभूत सिद्धान्तों की समझ दर्शाते हैं तथा वास्तविक जीवन से सम्बन्धित हों)। 3. समाकलन ः समाकलन, अवकलन के व्युत्क्रम प्रक्रम के रूप में, कई प्रकार के फलनों का समाकलन-प्रतिस्थापन द्वारा, आंशिक भिन्नों द्वारा, खंडशः द्वारा, केवल निम्न प्रकार के सरल समाकलनों का मान ज्ञात करना तथा उन पर आधारित प्रश्न -
q px
q px
cbx ax
dx
,
, dx
dx ,
dx 2 2
2222
dx
dx
dx
dx
,
2 222 2 22
dx , bcosxa
ax
xa
cbxax
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 2634. समाकलनों के अनुप्रयोग - अनुप्रयोग ः साधारण वक्रों के अन्तर्गत क्षेत्रफल ज्ञात करना, विशेषतया रेखाएँ, वृत्त/परवलय/दीर्घवृत्त (केवल मानक रूप में) का क्षेत्रफल, अवकल समीकण -परिभाषा, कोटि एवं घात, अवकल समीकरण का व्यापक एवं विशिष्ट हल, पृथक्करणीय चर के तरीके द्वारा अवकल समीकरणों का हल, प्रथम कोटि एवं प्रथम घात वाले समघातीय अवकल समीकरणों का हल निम्न प्रकार के रैखिक अवकल समीकरणों का हल
dy
,qpy
जहाँ p और q, xके फलन हैं।
dx dx
,qpx
जहाँ p और q, y के फलन हैं।
dy
इकाई-4 : सदिश तथा त्रिविमीय ज्यामिति 18 अंक
1. सदिश :
सदिश तथा अदिश, एक सदिश का परिमाण व दिशा, सदिशों के दिक् कोसाइन/दिक् अनुपात, सदिशों के प्रकार (समान, मात्रक, शून्य, समान्तर तथा संरेख सदिश) किसी बिन्दु का स्थिति सदिश, ऋणात्मक सदिश, एक सदिश के घटक, सदिशों का योगफल, एक सदिश का अदिश से गुणन, दो बिन्दुओं को मिलाने वाले रेखाखण्ड को एक दिये हुए अनुपात में बाँटने वाले बिन्दु का स्थिति सदिश, परिभाषा, ज्यामितीय व्याख्या, सदिशों के अदिश गुणनफल के गुण और अनुप्रयोग, सदिशों के सदिश गुणनफल, एक सदिश का किसी रेखा पर प्रक्षेप।
2. त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय - दो बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा के दिक् कोसाइन/दिक् अनुपात। एक रेखा का कार्तीय तथा सदिश समीकरण, अन्तरिक्ष में रेखा का समीकरण, समतलीय तथा विषमतलीय रेखाएँ, दो रेखाओं के बीच की न्यूनतम दूरी। दो रेखाओं के बीच का कोण। इकाई-5 : रैखिक प्रोग्रामन 05 अंक 1. रैखिक प्रोग्रामन : भूमिका, सम्बन्धित पदों, जैसे-व्यवरोध, उद्देश्य फलन, इष्टतः, हल की परिभाषाएँ, दो चरों में दी गयी समस्याओं का आलेखीय हल, सुसंगत तथा असुसंगत क्षेत्र, सुसंगत तथा असुसंगत हल, इष्टतम सुसंगत हल।
इकाई-6 : प्रायिकता 08 अंक सशर्त, (सप्रतिबन्ध) प्रायिकता, प्रायिकता का गुणन नियम, स्वतंत्र घटनाएँ, कुल प्रायिकता, बेज़ प्रमेय।
विशय-भौतिक विज्ञान पूर्णांक 100
कक्षा-12
इसमें 70 अंकों का एक प्रश्न-पत्र तथा 30 अंकों का प्रयोगात्मक होगा।
न्यूनतम उत्तीर्णाक 2310=33 अंक
खण्ड-क
इकाई शीर्षक अंक 1 स्थिर विद्युतकी 08 2 धारा विद्युत 07 3 धारा का चुम्बकीय प्रभाव तथा चुम्बकत्व 08 4 वैद्युत चुम्बकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धारायें 08 5 वैद्युत चुम्बकीय तरंगे 04
कुल अंक . . 35 अंक
खण्ड-ख
इकाई शीर्षक अंक 1 प्रकाशिकी 13 2 द्रव्य और द्वैत प्रकृति 06 3 परमाणु तथा नाभिक 08 4 इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ 08
कुल अंक . . 35 अंक
264 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 408 अंक
07 अंक
04 अंक इकाई 1–स्थिर विद्युतिकी वैद्युत आवेश, आवेश का संरक्षण, कूलॉम नियम–दो बिन्दु आवेशों के बीच बल, बहुत आवेशों के बीच बल, अध्यारोपण सिद्धान्त तथा सतत् आवेश वितरण। विद्युत क्षेत्र, विद्युत आवेश के कारण वैद्युत् क्षेत्र, विद्युत् क्षेत्र रेखायें, वैद्युत् द्विध्रुव, द्विध्रुव के कारण वैद्युत क्षेत्र, एक समान वैद्युत् क्षेत्र में द्विध्रुव पर बल आघूर्ण। वैद्युत् फ्लक्स, गाउस नियम का प्रकथन तथा अनन्त लम्बाई के एक समान आवेशित सीधे तार, एक समान आवेशित अनन्त समतल चादर तथा एक समान आवेशित पतले गोलीय खोल (के भीतर तथा बाहर) विद्युत् क्षेत्र ज्ञात करने में इस नियम का अनुप्रयोग, वैद्युत् विभव, विभवान्तर, किसी बिन्दु आवेश, वैद्युत् द्विध्रुव, आवेशों के निकाय के कारण वैद्युत् विभव, समविभव पृष्ठ, किसी स्थिर वैद्युत् क्षेत्र में दो बिन्दु आवेशों के निकाय तथा वैद्युत् द्विध्रुव की स्थिर वैद्युत् स्थितिज ऊर्जा, चालक तथा विद्युत् रोधी, किसी चालक के भीतर मुक्त आवेश तथा बद्ध आवेश, परावैद्युत् पदार्थ तथा वैद्युत् ध्रुवण, संधारित्र तथा धारिता, श्रेणीक्रम तथा समान्तर क्रम में संधारित्रों का संयोजन, पटि्टकाओं के बीच परावैद्युत् माध्यम होने अथवा न होने पर किसी समान्तर पटि्टका संधारित्र की धारिता, संधारित्र में संचित ऊर्जा। इकाई 2–धारा विद्युत् विद्युत् धारा, धात्विक चालक में वैद्युत् आवेशों का प्रवाह, अपवाह वेग (Drift Velocity), गतिशीलता तथा इनका विद्युत् धारा से सम्बन्ध, ओम का नियम, वैद्युत् प्रतिरोध V-I अभिलक्षण (रैखिक तथा अरैखिक) विद्युत् ऊर्जा और शक्ति, वैद्युत् प्रतिरोधकता तथा चालकता, प्रतिरोध की ताप निर्भरता, सेलों का आन्तरिक प्रतिरोध, सेल का वि0वा0बल (e.m.f.) तथा विभवान्तर, सेलों का श्रेणीक्रम तथा समान्तर संयोजन, किरचॉफ का नियम तथा इसके अनुप्रयोग व्हीटस्टोन सेतु। इकाई 3–विद्युत् धारा का चुम्बकीय प्रभाव तथा चुम्बकत्व 08 अंक चुम्बकीय क्षेत्र की संकल्पना, ओस्र्टेड का प्रयोग, बायोसेवर्ट नियम तथा धारावाही लूप में इसका अनुप्रयोग, ऐम्पियर का नियम तथा इसका अनन्त लम्बाई के सीधे तार में अनुप्रयोग, सीधी परिनलिका, एक समान विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल, एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल, दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल–एम्पियर की परिभाषा– एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में धारावाही लूप द्वारा बल आघूर्ण का अनुभव, चल–कुण्डली गैल्वेनोमीटर इसकी धारा सुग्राह्यता तथा इसका अमीटर तथा वोल्टमीटर में रूपान्तरण, धारा लूप चुम्बकीय द्विध्रुव के रूप में तथा इसका चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण, चुम्बकीय द्विध्रुव (छड़ चुम्बक) के कारण इसके अक्ष के अनुदिश तथा अक्ष के अभिलम्बत् चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता, एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय द्विध्रुव (छड़ चुम्बक) पर बल आघूर्ण, तुल्यांकी परिनालिका के रूप में छड़ चुम्बक, चुम्बकीय क्षेत्र रेखायें, अनुचुम्बकीय, प्रतिचुम्बकीय तथा लौह चुम्बकीय पदार्थ उदाहरणों सहित, परिनालिका। इकाई 4–वैद्युत् चुम्बकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धारायें 08 अंक वैद्युत् चुम्बकीय प्रेरण–फैराडे के नियम, प्रेरित e.m.f. तथा धारा, लेंज का नियम, स्वप्रेरण तथा अन्योन्य प्रेरण, प्रत्यावर्ती धारा, प्रत्यावर्ती धारा तथा वोल्टता के शिखर तथा वर्गमाध्यमूल मान, प्रतिघात तथा प्रतिबाधा, श्रेणीबद्ध LCR परिपथ अनुनाद, AC परिपथों में शक्ति, शक्ति गुणांक, वाटहीन धारा, AC जनित्र तथा ट्रान्सफार्मर। इकाई 5–वैद्युत् चुम्बकीय तरंगे विस्थापन धारा की आवश्यकता, वैद्युत् चुम्बकीय तरंगें, तथा इनके अभिलक्षण (केवल गुणात्मक संकल्पना) वैद्युत् चुम्बकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति, वैद्युत् चुम्बकीय स्पेक्ट्रम (रेडियो तरंगे, सूक्ष्म तरंगे, अवरक्त, दृश्य, पराबैंगनी, X किरणें, गामा किरणें) इनके उपयोग के विषय में मौलिक तथ्यों सहित।
खण्ड-ख
13 अंक इकाई 1–प्रकाशिकी प्रकाश का परावर्तन, गोलीय दर्पण, दर्पण सूत्र, प्रकाश का अपवर्तन, पूर्ण आन्तरिक परावर्तन तथा इसके अनुप्रयोग, प्रकाशिक तन्तु, गोलीय पृष्ठों पर अपवर्तन, लेंस, पतले लेंसों का सूत्र, लेंस मेकर सूत्र, आवर्धन, लेंस की शक्ति, सम्पर्क में रखें पतले लेंसों का संयोजन, प्रिज्म से होकर प्रकाश का अपवर्तन। प्रकाश का प्रकीर्णन–सूक्ष्मदर्शी तथा खगोलीय दूरदर्शक (परावर्ती तथा अपवर्ती) तथा इनकी आवर्धन क्षमतायें तरंग, तरंग प्रकाशिकी तरगांग्र तथा हाइगेन्स का सिद्धान्त, तरंगाग्रों के उपयोग द्वारा समतल तरंगों का समतल पृष्ठों पर परावर्तन तथा अपवर्तन, हाइगेन्स सिद्धान्त के उपयोग द्वारा परावर्तन तथा अपवर्तन के नियमों का सत्यापन, व्यतिकरण, यंग का द्विझिरी प्रयोग तथा फ्रिंज चौड़ाई के लिये व्यंजक, (सूत्र की व्युत्पत्ति नहीं करना है) कला संबद्ध स्रोत तथा प्रकाश का प्रतिपालित व्यतिकरण, एकल झिरी के कारण विवर्तन, (केवल गुणात्मक अध्ययन) केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई, ध्रुवण, (अपवर्तन द्वारा ध्रुवण) समतल ध्रुवित प्रकाश, पोलरॉयडों का उपयोग।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 26508 अंक इकाई 2–द्रव्य तथा विकिरणों की द्वैत प्रकृति 06 अंक विकिरणों की द्वैत प्रकृति, प्रकाश विद्युत् प्रभाव, हर्ट्ज तथा लेनार्ड प्रेक्षण, आइस्टीन प्रकाश वैद्युत् समीकरण, प्रकाश की कणात्मक प्रकृति द्रव्य तरंगेकणों की तरंगात्मक प्रकृति, दी-ब्रॉग्ली सम्बन्ध। इकाई 3–परमाणु तथा नाभिक एल्फा–कण प्रकीर्णन प्रयोग, परमाणु का रदरफोर्ड मॉडल, बोर मॉडल, ऊर्जा- स्तर, हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम (गुणात्मक अध्ययन) नाभिकों की संरचना एवं आकार, परमाणु द्रव्यमान समस्थानिक, समभारिक, समन्यूट्रॉनिक, द्रव्यमान–ऊर्जा सम्बन्ध, द्रव्यमान क्षति, बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन तथा द्रव्यमान संख्या के साथ इसमेें परिवर्तन, नाभिकीय विघटन और संलयन। इकाई 4–इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ (गुणांत्मक आख्या मात्र) 08 अंक ठोसों में ऊर्जा बैन्ड, चालक, कुचालक तथा अर्धचालक, अर्धचालक डायोड, I-V अभिलाक्षणिक (अग्रदिशिक तथा पश्चदिशिक वायसन में) (In forward and reverse bias) डायोड दिष्टकारी के रूप में।
प्रयोगात्मक
प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन निम्नवत् होगा–
भौतिक विज्ञान
04 08 03
01 01 01 01 अधिकतम अंक–30 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक–10 अंक समय–04 घण्टे (1) वाह्य मूल्यांकन– 1–कोई दो प्रयोग (2×5) (खण्ड -क एवं खण्ड-ख में से एक-एक प्रयोग) 10 2–प्रयोग पर आधारित मौखिकी। 05 (2) आंतरिक मूल्यांकन– 1-प्रयोगात्मक रिकॉर्ड। 2-प्रोजेक्ट कार्य व उस पर आधारित मौखिकी। 3-सत्रीय कार्य-सतत् मूल्यांकन। (3) प्रत्येक प्रयोग के 05 अंक का वितरण निम्नवत् होगा– (1) क्रियात्मक कौशल (आवश्यक सावधानियाँ सहित) उपकरण का सामंजस्य व प्रेक्षण कौशल (शुद्ध प्रेक्षण)। 01 (2) प्रेक्षणों की पर्याप्त संख्या तथा उचित सारणीय। (3) गणनात्मक कौशल अथवा ग्राफ बनाना। (4) परिणाम/निष्कर्ष का शुद्ध मात्रक सहित कथन। (5) आरेख (परिपथ, किरण आरेख, सैद्धान्तिक आरेख)। नोट :–व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के रिकॉर्ड व सत्रीय कार्य के अंकों के स्थान पर प्रोजेक्ट कार्य में 15 अंक होंगे। छात्रों का मूल्यांकन आन्तरिक तथा वाह्य परीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। सतत् मूल्यांकन में विषय अध्यापक प्रत्येक छात्रों द्वारा किये गये प्रयोगों की सूची बनाकर वाह्य परीक्षक के सम्मुख प्रस्तुत करें तथा किये गये प्रयोगों की संख्या के आधार पर ही अंक दिये जायेंगे।
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
खण्ड-क प्रयोग सूची
1–चल–सूक्ष्मदर्शी द्वारा कांच के गुटके का अपवर्तनांक ज्ञात करना। 2–समतल दर्पण तथा उत्तल लेंस द्वारा किसी द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात करना।
3–अवतल दर्पण के प्रकरण में u के विभिन्न मानों के लिये v का मान ज्ञात करके अवतल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात करना। 4–अमीटर तथा वोल्टमीटर द्वारा ओम के नियम का सत्यापन करना तथा तार के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध ज्ञात करना।
5–उत्तल लेंस का उपयोग करके उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात करना। 6–u तथा v अथवा 1/uतथा 1/vके बीच ग्राफ खींचकर किसी उत्तल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना। 7–उत्तल लेंस का उपयोग करके अवतल लेंस की फोकस दूरी ज्ञात करना।
8–दिये गये प्रिज्म के लिये आपतन कोण तथा विचलन कोण के बीच ग्राफ खींचकर न्यूनतम विचलन कोण ज्ञात करना तथा प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक ज्ञात करना।
34 ङ266 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 9–मीटर सेतु द्वारा किसी दिये गये तार का प्रतिरोध ज्ञात करके उसके पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध ज्ञात करना।
10–मीटर सेतु द्वारा प्रतिरोधकों के (श्रेणी/समान्तर) संयोजनों के नियमों का सत्यापन करना। 11–वोल्टमीटर तथा प्रतिरोध बॉक्स की सहायता से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना।
खण्ड-ख
12–विभवमापी द्वारा दो दिये गये प्राथमिक सेलों की विद्युत् वाहक बलों की तुलना करना। 13–विभवमापी द्वारा दिये गये प्राथमिक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना। 14–विस्थापन विधि से उत्तल लेंस की फोकल दूरी ज्ञात करना। 15-अर्द्ध विक्षेपण विधि द्वारा धारामापी का प्रतिरोध एवं दक्षतांक ज्ञात करना।
16-दिये गये धारामापी (जिसका प्रतिरोध एवं दक्षतांक ज्ञात हो) को वांछित परिषर अमीटर से रूपान्तरण करना।
17-दिये गये धारामापी को वांछित परिषर के वोल्ट मीटर में रूपान्तरित करना। 19-जेनर डायोड का अभिलक्षणिक वक्र खीचना। 18-pn डायोड का अभिलक्षणिक वक्र खीचना एवं अग्रअभिनति प्रतिरोध ज्ञात करना। 20-जेनर डायोड के अभिलक्षणिक वक्र की सहायता से उत्क्रम भंजन वोल्टता ज्ञात करना।
21–किसी उभयनिष्ठ–उत्सर्जक pnp अथवा npn ट्राँजिस्टर के अभिलाक्षणिकों का अध्ययन करना तथा धारा एवं वोल्टता लाब्धियों के मान ज्ञात करना।
विशय-रसायन विज्ञान
कक्षा-12
प्रश्न पत्र बनाने की योजना
1. बहुविकल्पीय क, ख, ग, घ, ङ, च 16 06
2. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 2 अक) 24 08
3. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 2 अक) 24 08
4. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 3 अक) 34 12
5. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 4 अक) 44 16
6. क, ख (प्रत्येक प्रश्न 5 अक) 52 10
7. क, ख (प्रत्येक प्रश्न 5 अक) 52 10
योग. . 70
नोटः- कम से कम 8 अंक के आंकिक प्रश्न पूछे जाय।
समय- 3ः00 घण्टा केवल प्रष्न पत्र अंक 70
| इकाई | शीर्शक | अंक |
| 1 | विलयन | 08 |
| 2 | वैद्युत रसायन | 07 |
| 3 | रासायनिक बलगतिकी | 07 |
| 4 | d और f- ब्लॉक के तत्व | 06 |
| 5 | उपसहसंयोजन यौगिक | 07 |
| 6 | हैलोएल्केन और हैलोएरीन | 07 |
| 7 | ऐल्कोहॉल, फिनॉल एवं ईथर | 07 |
| 8 | एल्डिहाइड कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल | 08 |
| 9 | ऐमीन | 06 |
| 10 | जैव अणु | 07 |
| योग... | 70 |
2310=33 अंक
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 267इकाई 1 - विलयन 08 अंक विलयनों के प्रकार, ठोसों के द्रवों में बने विलयन की सान्द्रता को व्यक्त करना, गैसों की द्रवों में विलेयता, ठोस विलयन, अणु संख्य गुणधर्म-वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन, राउल्ट का नियम, क्वथनांक का उन्नयन, हिमांक का अवनमन, परासरण दाब, अणु संख्य गुणधर्मों द्वारा आण्विक द्रव्यमान ज्ञात करना, असामान्य आण्विक द्रव्यमान, वान्ट हाफ गुणांक।
इकाई 2 - वैद्युत रसायन 07 अंक
ऑक्सीकरण- अपचयन अभिक्रियायें, वैद्युत अपघटनी विलयनों का चालकत्व, विशिष्ट एवं मोलर
चालकता, सान्द्रता के साथ चालकत्व में परिवर्तन, कोलराउश नियम, वैद्युत अपघटन और वैद्युत् अपघटन
के नियम (प्रारम्भिक विचार) शुष्क सेल, वैद्युत अपघटनी सेल और गैल्वनी सेल, सीसा संचायक सेल, सेल
का विद्युत् वाहक बल, मानक इलेक्ट्रोड विभव, नस्र्ट समीकरण और रासायनिक सेलों में इसका अनुप्रयोग,
गिब्स मुक्त ऊर्जा और सेल के EMF में परिवर्तन के मध्य सम्बन्ध, ईंधन सेल, संक्षारण।
इकाई 3 - रासायनिक बलगतिकी 07 अंक
अभिक्रिया का वेग (औसत और तात्क्षणिक), अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कारक-सान्द्रता,
ताप, उत्प्रेरक, अभिक्रिया की कोटि और आण्विकता, वेग नियम और विशिष्ट दर स्थिराँक, समाकलित वेग
समीकरण और अर्द्धआयु (केवल शून्य और प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिये), संघट्ट सिद्धान्त की
अवधारणा (प्रारम्भिक परिचय, गणितीय विवेचना नहीं), सक्रियण ऊर्जा, आरहेनियस समीकरण।
इकाई 4 -d औरfब्लॉक के तत्व 06 अंक
सामान्य परिचय, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संक्रमण धातुओं के अभिलक्षण और उपलब्धता, संक्रमण
धातुओं की प्रथम श्रेणी के गुणधर्मों में सामान्य प्रवृत्तियाँ, धात्विक अभिलक्षण, आयनन एन्थैल्पी,
ऑक्सीकरण अवस्थायें, आयनिक त्रिज्या, वर्ण, उत्प्रेरकीय गुण, चुम्बकीय गुणधर्म, अंतराकाशी यौगिक,
मिश्रधातु बनाना, K2Cr2O7 और KMnO4 का विरचन, गुणधर्म।
लैन्थेनॉयड- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थायें, रासायनिक अभिक्रियाशीलता लैन्थेनायड
आकुंचन और इसके प्रभाव।
एक्टिनॉयड- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थायें तथा लैन्थेनॉयड से तुलना।
इकाई 5 - उपसहसंयोजन यौगिक 07 अंक
उपसहसंयोजन यौगिक- परिचय, लिगैन्ड, उपसहसंयोजन संख्या, वर्ण, चुम्बकीय गुणधर्म और
आकृतियाँ, एक नाभिकीय उपसह संयोजन यौगिकों का IUPAC पद्धति से नामकरण, आबंधन, वर्नर का
सिद्धान्त, VBT और CFT, संरचना एवं त्रिविम समावयवता, धातुओं के निष्कर्षण, गुणात्मक विश्लेषण और
जैविक निकायों में उपसहसंयोजन यौगिकों का महत्व।
इकाई 6 - हैलोएल्केन और हैलोएरीन 07 अंक
हैलोएल्केन- नाम पद्धति, C-X आबंध की प्रकृति, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म, प्रतिस्थापन
अभिक्रियाओं की क्रियाविधि, धु्रवण घूर्णन।
हैलोएरीन-C-X आबंध की प्रकृति, प्रतिस्थापन अभिक्रियायें (केवल मोनो प्रतिस्थापित यौगिकों में
हैलोजन का दैशिक प्रभाव)
डाइक्लोरोमेथेन, ट्राइक्लोरोमेथेन, टेट्राक्लोरोमेथेन, आयडोफार्म, फ्रिऑन और डी0डी0टी0 के
उपयोग और पर्यावरण पर प्रभाव।
इकाई 7 - ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 07 अंक
ऐल्कोहॉल- नाम पद्धति, विरचन की विधियाँ, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म (केवल प्राथमिक
ऐल्कोहॉलों का) प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहालों की पहचान करना, निर्जलन की क्रियाविधि,
मेथेनॉल एवं एथेनॉल के उपयोग।
फिनॉल- नाम पद्धति, विरचन की विधियाँ, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म, फीनॉल की अम्लीय
प्रकृति, इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं, फीनॉल के उपयोग।
ईथर- नाम पद्धति, विरचन की विधियाँ, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म, उपयोग।
268 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4इकाई 8 - ऐल्डिहाइड कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 08 अंक
ऐल्डिहाइड और कीटोन-नाम पद्धति, कार्बोनिल समूह की प्रकृति, विरचन की विधियाँ, भौतिक और
रासायनिक गुणधर्म, नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रिया की क्रिया विधि, ऐल्डिहाइडों के ऐल्फा
हाइड्रोजन की क्रियाशीलता, उपयोग।
कार्बोक्सिलिक अम्ल-नाम पद्धति, अम्लीय प्रकृति, विरचन की विधियां, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म, उपयोग।
इकाई 9 - ऐमीन 06 अंक
ऐमीन- नाम पद्धति, वर्गीकरण, संरचना, विरचन की विधियाँ, भौतिक और रासायनिक गुणधर्म,
उपयोग, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों की पहचान करना।
डाइऐजोनियम लवण- विरचन, रासायनिक अभिक्रियाएं तथा कार्बनिक रसायन में इसका
संश्लेषणात्मक महत्व।
इकाई 10 - जैव अणु 07 अंक
कार्बोहाइड्रेट-वर्गीकरण (ऐल्डोज और कीटोज), मोनोसैकेराइड (ग्लूकोज और फ्रक्टोज), D-L विन्यास,
ओलिगोसैकेराइड (सुक्रोज, लैक्टोज, माल्टोज), पॉलिसैकेराइड (स्टार्च, सेल्युलोज, ग्लाइकोजन) महत्व।
प्रोटीन-ऐमीनो अम्लों का प्रारम्भिक परिचय, पेप्टाइड आबन्ध, पॉलिपेप्टाइड, प्रोटीन, प्रोटीन की
प्राथमिक संरचना, द्वितीयक संरचना, तृतीयक संरचना और चतुष्क संरचना (केवल गुणात्मक परिचय)
प्रोटीनों का विकृतीकरण, एन्जाइम, हारमोन- प्रारंभिक विचार(संरचना छोड़ कर)
विटामिन- वर्गीकरण और प्रकार्य,
न्यूक्लिक अम्ल-DNA और RNA।
| 1. | गुणात्मक विश्लेषण (सरल लवण) | 04 अंक |
| 2. | आयतनमितीय विश्लेषण (सरल अनुमापन) | 04 अंक |
| 3. | विषयवस्तु आधारित प्रयोग | 03 अंक |
| 4. | मौखिक परीक्षा | 04 अंक |
| कुल योग | 15 अंक | |
| 1. | प्रोजेक्ट एवं मौखिकी | 08 अंक |
| 2. | कक्षा रिकार्ड | 04 अंक |
| 3. | विषयवस्तु आधारित प्रयोग | 03 अंक |
| कुल योग | 15 अंक |
प्रायोगिक पाठ्यक्रम वा]य परीक्षक
1. गुणात्मक विश्लेषण-
दिये गये अकार्बनिक मिश्रण में एक धनायन तथा एक ऋणायन का परीक्षण करना-
+ (अविलेय लवण न दिये जायें)
2. आयतनमितीय विश्लेषण-
निम्न मानक विलयनों के विरूद्ध पोटेशियम परमेग्नेट विलयन का अनुमापन कर इसकी
सान्द्रण/मोलरता ज्ञात करना (छात्रों से मानक विलयन स्वयं पदार्थ तुलवाकर बनवाया जाये)
(अ) आक्सेलिक अम्ल
(ब) फेरस अमोनियम सल्फेट
3. विषयवस्तु आधारित प्रयोग-
(क) क्रोमेटोग्राफी-
(1) पेपर क्रोमेटोग्राफी द्वारा पत्तियों एवं फूलों के रस से रंगीन-कणों (पिगमेन्ट्स) को अलग
करना तथा Rf मान ज्ञात करना।
(2) दो धनायनों वाले अकार्बनिक मिश्रण से घटकों को पृथक करना (कृपया इस हेतु Rfमानों
में पर्याप्त भिन्नता वाले घटक मिश्रण दिये जायें)
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 269(ख) कार्बनिक यौगिकों में उपस्थित क्रियात्मक समूह का परीक्षण करना-
असंतृप्ता, ऐलकोहॉलिक, फिनॉलिक (-OH) एल्डीहाइड (-CHO), कीटोनिक (C=O),
कार्बोक्सिलिक (-COOH), एमीनो (प्राथमिक समूह)
(ग) शुद्ध अवस्था में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीनों की दिये गये खाद्य पदार्थ में उपस्थिति की जाँच करना। (घ) सतह रसायन (1) एक द्रव स्नेही तथा द्रव विरोधी सॉल का निर्माण करना- द्रव स्नेही सॉल-स्टार्च, गोंद तथा अण्डे की एल्ब्युमिन (जर्दी) द्रव विरोधी सॉल-एल्युमीनियम हाइड्राक्साइड, फैरिक हाइड्राक्साइड, आर्सिनियम सल्फाइड। (2) उपर्युक्त तैयार की गई सॉल का अपोहन (डॉयलायसिस) (3) पायसीकारक पदार्थों का विभिन्न तेलों के पायसों पर स्थिरीकरण के प्रभाव का अध्ययन करना। आन्तरिक मूल्यांकन का पाठ्यक्रम- (क) अकार्बनिक यौगिकों का विरचन- (1) द्विक-लवण निर्माण-फेरस अमोनियम सल्फेट अथवा पोटाश एलम (फिटकरी) (2) पोटेशियम फेरिक आक्सलेट का निर्माण (ख) कार्बनिक यौगिकों का विरचन- निम्न में से कोई एक- (1) ऐसीटेनिलाइड (2) डाई बेन्जल एसीटोन (3) p-नाइट्रो ऐसीटेनिलाइड (4) ऐनीलीन ऐलो या 2-नेफ्थाऐनीलीन रंजक (ग) रासायनिक बलगतिकी (1) सोडियम थायोसल्फेट तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के मध्य अभिक्रिया दर पर ताप और
सान्द्रण के प्रभाव का अध्ययन करना।
(2) निम्न में से किसी एक अभिक्रिया की क्रिया दर का अध्ययन-
(i) आयोडाइड आयनों वाले विभिन्न सान्द्रण के विलयनों पर सामान्य तापक्रम पर
हाइड्रोजन पराक्साइड की क्रिया का अध्ययन करना।
(ii) स्टार्च विलयन सूचक का उपयोग करते हुए सोडियम सल्फाइट (Na2SO3) तथा
पोटेशियम आयोडेट (KIO3) के मध्य क्रिया का अध्ययन करना।
270 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4विशय-जीव विज्ञान
कक्षा-12
इसमें 100 अंकों का एक प्रश्नपत्र 70 लिखित एवं 30 प्रयोगात्मक का होगा।
समय-3 घंटा
अंक-70
| इकाई | शीर्षक | अंक भार |
| 1 | जनन | 14 |
| 2 | आनुवंशिकी और विकास | 18 |
| 3 | जीव विज्ञान और मानव कल्याण | 14 |
| 4 | जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग | 10 |
| 5 | पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण | 14 |
| योग... | 70 |
इकाई - 1 : जनन 14 अंक
(1) पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन -
पुष्प की संरचना, नर एवं मादा युग्मकोद्भिद का विकास, परागण- प्रकार, अभिकर्मक एवं
उदाहरण, बहिःप्रजनन युक्तियाँ, पराग स्त्रीकेसर संकर्षण, दोहरा निषेचन, निषेचन पश्च घटनाएं-
भ्रूणपोष एवं भ्रूण का परिवर्धन, बीज का विकास एवं फल का निर्माण, विशेष विधियाँ- एपोमिक्सिस
(असंगजनता) अनिषेकफलन, बहुभ्रूणता, बीज प्रकीर्णन का महत्व एवं फल निर्माण
(2) मानव जनन -
नर एवं मादा जनन तंत्र, वृषण एवं अंडाशय की सूक्ष्मदर्शीय शरीर रचना, युग्मकजनन-
शुक्राणुजनन एवं अंडजनन मासिक चक्र, निषेचन, भ्रूणीय परिवर्धन (ब्लास्टोसाइट निर्माण तक)
अंतर्रोपण, सगर्भता एवं प्लैसेंटा निर्माण (सामान्य ज्ञान) प्रसव एवं दुग्ध स्रवण (सामान्य परिचय)
(3) जनन स्वास्थ्य-
जनन स्वास्थ्य की आवश्यकता एवं यौन संचरित रोगों की रोकथाम, परिवार नियोजन-आवश्यकता
एवं विधियाँ, गर्भ निरोध एवं चिकित्सीय सगर्भता समापन (MTP) एमीनोसेंटेसिस, बंध्यता एवं
सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ-IVF, ZIFT, GIFT(सामान्य जागरूकता के लिये प्रारम्भिक ज्ञान)
इकाई - 2 : आनुवंशिकी और विकास 18 अंक
(1) वंशागति और विविधता- मेंडलीय वंशागति, मेंडलीय अनुपात से विचलन-अपूर्ण प्रभाविता,
सहप्रभाविता, गुणनात्मक विकल्पी एवं रूधिर वर्गों की वंशागति, प्लीओट्रोफी, बहुजीनी वंशागति का
प्रारम्भिक ज्ञान, वंशागति का क्रोमोसोम सिद्धान्त, क्रोमोसोम्स और जीन, लिंग निर्धारण - मनुष्य,
पक्षी, मधुमक्खी सहलग्नता और जीन विनिमय, लिंग सहलग्न वंशागति - हीमोफीलिया, वर्णान्धता,
मनुष्य में मेंडलीय विकार - थैलेसेमिया, मनुष्य में गुणसूत्रीय विकार -डाउन सिन्ड्रोम, टर्नर एवं
क्लीनफैल्टर सिन्ड्रोम।
(2) वंशागति का आणविक आधार -
आनुवंशिक पदार्थ की खोज एवं डी0एन0ए0 एक आनुवंशिक पदार्थ, डी0एन0ए0 व आर0एन0ए0 की
संरचना, डी0एन0ए0 पैकेजिंग, डी0एन0ए0 प्रतिकृतियन, सेन्ट्रल डोगोमा, अनुलेखन, आनुवंशिक कूट,
रूपान्तरण, जीन अभिव्यक्ति एवं नियमन, लैक ओपेरान, जीनोम एवं मानव जीनोम प्रोजेक्ट,
डी0एन0ए0 फिंगर प्रिंटिंग।
(3) विकास -जीवन की उत्पत्ति, जैव विकास एवं जैव विकास के प्रमाण - पुराजीवी, तुलनात्मक शरीर
रचना, भ्रौणिकी एवं आणविक प्रमाण, डार्विन का योगदान, Modern Synthetic Theory, विकास
की क्रियाविधि-विभिन्नताएं (उत्परिवर्तन एवं पुनर्योजन) एवं प्राकृतिक चयन, प्राकृतिक चयन के
प्रकार, जीन प्रवाह एवं आनुवंशिक अपवाह, हार्डी वेनबर्ग सिद्धान्त, अनुकूली विकिरण, मानव का
विकास।
इकाई - 3 जीव विज्ञान और मानव कल्याण 14 अंक
(1) मानव स्वास्थ्य और रोग-
रोग जनक, मानव में रोग उत्पन्न करने वाले परजीवी (मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिएसिस,
एस्केरिएसिस, टायफाइड, जुकाम, न्यूमोनिया, अमीबाइसिस रिंग वार्म) एवं उनकी रोकथाम। प्रतिरक्षा
विज्ञान की मूलभूत संकल्पनाएं -टीके, कैंसर, एच0आई0वी0 और एड्स, यौवनावस्था- नशीले
पदार्थ (ड्रग) और एल्कोहाल का कुप्रयोग।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 271(2) मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव-
घरेलू खाद्य उत्पादों में, औद्योगिक उत्पादन, वाहित मल उपचार, ऊर्जा उत्पादन, जैव नियंत्रक
कारक के रूप में एवं जैव उर्वरक ं,
इकाई - 4 जैव प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोग 10 अंक
(1) जैव प्रौद्योगिकी - सिद्धान्त एवं प्रक्रम-
आनुवंशिक इंजीनियरिंग (पुनर्योगज DNA तकनीक)
(2) जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग -
जैव प्रौद्योगिकी का स्वास्थ्य एवं कृषि में उपयोग, मानव इंसुलिन और वैक्सीन उत्पादन, जीन
चिकित्सा, आनुवंशिकीय रुपान्तरित जीव - बी0टी0 (BT) फसलें, ट्रांसजीनिक जीव, जैव सुरक्षा
समस्याएं, बायोपायरेसी एवं पेटेंट।
इकाई - 5 पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण 14 अंक
(1) जीव और समष्टियां -
समष्टि, समष्टि पारस्परिक क्रियाएं-सहोपकारिता, स्पर्धा, परभक्षण, परजीविता, समष्टि गुण-वृद्धि,
जन्म एवं मृत्युदर, आयु वितरण।
(2) पारितंत्र-संरचना (स्वरूप), घटक, उत्पादकता एवं अपघटन, ऊर्जा प्रवाह, पारिस्थितिक
पिरामिड-जीव संख्या, भार एवं ऊर्जा के पिरामिड
(3) जैव विविधता एवं संरक्षण -
जैव विविधता की संंकल्पना, जैव विविधता के प्रतिरूप, जैव विविधता का महत्व, क्षति एवं जैव
विविधता का संरक्षण- हाट स्पाट, संकटग्रस्त जीव, विलुप्ति, रैड डाटा बुक, बायोस्फीयर रिजर्व,
राष्ट्रीय उद्यान, सेन्चुरीज।
प्रयोगात्मक
अंक-30
समय-3 घंटा (क) प्रयोगों की सूची 1 क्वाड्रेट विधि द्वारा पादप समष्टि घनत्व का अध्ययन करना। 2 क्वाड्रेट विधि द्वारा पादप समष्टि frequency का अध्ययन करना। 3 स्लाइड पर पराग अंकुरण का अध्ययन। 4 समसूत्री विभाजन का अध्ययन करने के लिए प्याज के मूलाग्र की अस्थायी स्लाइड बनाना। 5 उपलब्ध पादप सामग्री जैसे-पालक, हरी मटर, पपीता आदि से DN। को पृथक करना। (ख) निम्नलिखित का अध्ययन/प्रेक्षण (स्पाटिंग) 1 एक स्थायी स्लाइड की सहायता से वर्तिकाग्र पर पराग अंकुरण का अध्ययन करना। 2 नियंत्रित परागत,बंध्यीकरण, टैंगिग और बैगिग का अभ्यास। 3 विभिन्न कारकों (वायु, कीट, पक्षी) के द्वारा परागण के लिए पुष्पों में पाये जाने वाले अनुकूलनों का अध्ययन करना।
4 स्थायी स्लाइडों की सहायता से वृषण और अंडाशय की अनुप्रस्थ काट में युग्मक परिवर्धन की
विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन (किसी भी स्तनधारी)।
5 स्थायी स्लाइड की सहायता से प्याज की मुकुल कोशिका अथवा टिड्डे के वृषण में अर्द्धसूत्री
विभाजन का अध्ययन करना।
6 स्थायी स्लाइड की सहायता से स्तनधारी के ब्लास्टुला की अनुप्रस्थ काट का अध्ययन करना।
7 किसी पौधे के विभिन्न रंग एवं आकार के बीजों की सहायता से मेंडलीय वंषागति का अध्ययन करना।
8 तैयार वंशावली चार्ट की सहायता से आनुवंशिक विशेषताओं (जैसे-जीभ को गोल करना, रूधिर
वर्ग, विंडोपीक, वर्णान्धता आदि) का अध्ययन करना।
9 स्थायी स्लाइड अथवा प्रतिरूप की सहायता से सामान्य - रोग कारक जंतु जैसे- एस्केरिस, एंटअमीबा,
प्लाजमोडियम, रिंग वर्म की पहचान। उनके द्वारा उत्पन्न रोगों के लक्षणों पर टिप्पणी लिखना।
10 लिग्यूमिनस पादपों के जड़ मॉडयूल में सिम्बोलिक एसोसिएसन का मॉडल स्पेसिमेन द्वारा प्रदर्षन।
11 समजात तथा समवृत्ति अंगों के उदाहरण का फ्लैस कार्ड मॉडल द्वारा प्रदर्षन।
प्रयोगात्मक कक्षा-12
अंक-30
- 5 अंक
- 6 अंक
समय-3 घंटा
बा]य परीक्षक
1. स्लाइड निर्माण
2. स्पाटिंग
3. सत्रीय कार्य संकलन एवं मौखिकी 22=4 अंक
योग - 15 अंक
272 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4आंतरिक परीक्षक
4. एक दीर्घ प्रयोग (प्रयो0 सं0 1, 4, 5, 6) - 5 अंक
5. एक लघु प्रयोग (प्रयो0 2, 3, 4) - 4 अंक
6. प्रोजेक्ट कार्य मौखिकी - 42=6 अंक
- 15 अंक
- 30 अंक
नोटः- छात्रों का मूल्यांकन आन्तरिक एवं वा]य परीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा। अभ्यास
पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य परीक्षार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना
अनिवार्य होगा।
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु उन विद्यालयों के संबंधित विषयों के
अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आंतरिक परीक्षक के रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक
प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वा]य परीक्षक द्वारा देय होंगे
(ग) वाणिज्य वर्ग
व्यवसाय अध्ययन
कक्षा-12
भाग-1 (प्रबन्ध के सिद्धान्त और कार्य) ➱ प्रबन्ध की प्रकृति एवं महत्व- अवधारणा, प्रबंध की विशेषताएँ, उद्देश्य, महत्व, प्रबंध की प्रकृति, प्रबंध एक कला, प्रबंध एक विज्ञान के रूप में, प्रबंध एक पेशे के रूप में, पेशे की विशेषताएं, प्रबंध के स्तर, प्रबंध के कार्य, समन्वय-प्रबंध का सार है, समन्वय की प्रकृति, समन्वय का महत्व, इक्कीसवीं शताब्दी में प्रबंधन। 05 अंक ➱ प्रबन्ध के सिद्धान्त- प्रबंध के सिद्धांत-एक अवधारणा, प्रबंध के सिद्धांतों की प्रकृति, प्रबंध के सिद्धांतों का महत्व, वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत, वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीक, कार्यात्मक फोरमैनशिप, कार्य का प्रमापीकरण एवं सरलीकरण, कार्य पद्धति अध्ययन, गति अध्ययन, समय अध्ययन, थकान अध्ययन, विभेदात्मक पारिश्रमिक प्रणाली, फेयॉल के प्रबन्ध के सिद्धान्त, समन्वय की परिभाषाएँ, फेयॉल बनाम टेलर तुलना। 05 अंक ➱ व्यावसायिक पर्यावरण- व्यावसायिक पर्यावरण का अर्थ, व्यावसायिक पर्यावरण का महत्व, पर्यावरण के आयाम, भारत में आर्थिक पर्यावरण, उदारीकरण।, निजीकरण, वैश्वीकरण, विमुद्रीकरण-आशय, विशेषताएँ। 10 अंक ➱ नियोजन- नियोजन का अर्थ, नियोजन का महत्व, नियोजन की विशेषताएं, नियोजन की सीमाएं, नियोजन प्रक्रिया, नियोजन के प्रकार, योजनाओं के प्रकार-एकल प्रयोग योजना।, स्थायी योजना- उद्देश्य, व्यूह-रचना, नीति, प्रक्रिया, 07 अंक विधि, नियम, कार्यक्रम, बजट। ➱संगठन- अर्थ, संगठन की अवधारणा, संगठन प्रक्रिया में कदम, संगठन का महत्व।,संगठन ढ़ांचा- संगठन ढाँचों के प्रकार, (कार्यात्मक संगठन, प्रभागीय संगठन)। औपचारिक एवं अनौपचारिक संगठन, अंतरण, अधिकार अंतरण के तत्व, अंतरण का महत्व, केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण, विकेंद्रीकरण-आशय एवं महत्व। 10 अंक ➱ नियुक्तिकरण- अर्थ, नियुक्तिकरण की आवश्यकता तथा महत्व, नियुक्तिकरण मानव संसाधन प्रबंधन के अंग के रूप में, मानव संसाधन प्रबंध का क्रम विकास, नियुक्तिकरण प्रक्रिया, नियुक्तिकरण के विभिन्न पहलू।, भर्ती-आशय, भर्ती के स्त्रोत, आंतरिक स्त्रोतों के लाभ, आंतरिक स्त्रोत की कमियाँ, बाह्य स्त्रोत, बाह्य स्त्रोत के लाभ, बाह्य स्त्रोत की कमियाँ/सीमाएँ।, चयन-आशय, चयन प्रक्रिया।, प्रशिक्षण तथा विकास, प्रशिक्षण विधियाँ, ऑन द जॉब विधियाँ, ऑफ द जॉब विधियाँ। 07 अंक ➱ निर्देशन- अर्थ, विशेषताएँ, निर्देशन का महत्व, निर्देशन के सिद्धान्त, निर्देशन के तत्व।, पर्यवेक्षण, पर्यवेक्षण के महत्व।, अभिप्रेरणा-अर्थ, अभिप्रेरणा की प्रक्रिया, अभिप्रेरणा का महत्व।, मास्लो की आवश्यकता-क्रम अभिप्रेरणा का सिद्धांत, वित्तीय तथा गैर वित्तीय प्रोत्साहन, वित्तीय प्रोत्साहन, गैर वित्तीय प्रोत्साहन।, नेतृत्व-आशय, नेतृत्व की विशेषताएँ, नेतृत्व का महत्व, नेतृत्व शैली।, संप्रेषण-आशय, संप्रेषण प्रक्रिया के तत्व, संप्रेषण का महत्व।, औपचारिक तथा अनौपचारिक संप्रेषण।, अंगूरीलता तंत्र, प्रभावी संप्रेषण में बाधाएँ, संकेतिक/संकेतीय बाधाएँ, मनोवैज्ञानिक बाधाएँ, संगठनिक बाधाएँ, व्यक्तिगत बाधाएँ, प्रभावी संप्रेषण के लिये सुधार 10 अंक ➱ नियन्त्रण- नियंत्रण का अर्थ, नियंत्रण का महत्व, नियंत्रण की सीमाएँ, नियोजन एवं नियंत्रण में संबंध, नियंत्रण 06 अंक प्रक्रिया।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 273भाग-2 (व्यवसाय वित्त एवं विपणन) ➱ व्यावसायिक वित्त- व्यावसायिक वित का अर्थ।, वित्तीय प्रबंध-भूमिका एवं उद्देश्य।, वित्तीय निर्णय।, वित्तीय नियोजन-आशय एवं महत्व।, पूँजी संरचना-आशय एवं पूँजी संरचना को प्रभावित करने वाले कारक, स्थायी एवं कार्यशील पूँजी।, स्थायी एवं कार्यशील पूँजी आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक। 12 अंक ➱ विपणन-आशय, विशेषताएँ। विपणन प्रबंध-आशय, विपणन की अवधारणाएं, विपणन के कार्य।, विपणन मिश्र एवं तत्व। उत्पाद-आशय एवं वर्गीकरण। ब्राडिंग-आशय, एक अच्छे ब्राण्ड नाम की विशेषताएँ।, पैकेजिंग-आशय, पेकेजिंग के स्तर, पैकेजिंग का महत्व, पैकेजिंग के कार्य।, लेवलिंग-आशय एवं कार्य।, मूल्य निर्धारण- आशय एवं निर्धारक तत्व। भौतिक वितरण-आशय एवं घटक।, प्रवर्तन मिश्र।, विज्ञापन-आशय, विशेषताएं, लाभ, आलोचना। वैयक्तिक विक्रय-आशय, विशेषताएं, लाभ, वैयक्तिक विक्रय की भूमिका (व्यवसायीको लाभ, ग्राहकों के लिये महत्व, समाज के लिये महत्व)। विक्रय संवर्धन-आशय, लाभ, सीमाएं, विक्रय संवर्धन की सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाली क्रियाएं।, विज्ञापन एवं वैयक्तिक विक्रय में अन्तर। जनसम्पर्क-आशय, भूमिका, कार्य-प्रचार-आशय एवं विशेषताएं। 16 अंक ➱ उपभोक्ता संरक्षण- आशय, महत्व, आवश्यकता।, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019-परिचय, उपभोक्ता कौन है, उपभोक्ता अधिकार, उपभोक्ताओं के उत्तरदायित्व, उपभोक्ता संरक्षण के तरीके और साधन, उपभोक्ता, संरक्षण के अन्तर्गत निवारण, अभिकरण अथवा एजेन्सियाँ, (जिला आयोग, राज्य आयोग, राष्ट्रीय आयोग) उपलब्ध राहत, उपभोक्ता 12 अंक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका।
विषय-लेखाशास्त्र
कक्षा-12
भाग-1
➢ साझेदारी लेखांकन-आधारभूत अवधारणाएं-साझेदारी की प्रकृति, साझेदारी विलेख, लेखांकन हेतु अनुकूल प्रावधान, साझेदारी खातों के विशिष्ट पहलू, साझेदारों के पूँजी खातों का अनुरक्षण, साझेदारों के बीच लाभ का विभाजन, लाभ एवं हानि विनियोग खाता, पूँजी पर ब्याज का परिकलन, पूँजी में परिवर्तन एवं आहरण, आहरणों 06 अंक पर ब्याज, एक साझेदार को लाभ की गारंटी, पूर्व समायोजन।
➢ साझेदारी फर्म का पुर्नगठनः साझेदार की प्रवेश-साझेदारी फर्म के पुर्नगठन के प्रकार, साझेदार का प्रवेश, नया लाभ विभाजन अनुपात, त्याग अुनपात, ख्याति-ख्याति का अर्थ, ख्याति के मूल्य को प्रभावित करने वाले घटक, ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता, ख्याति मूल्यांकन की विधियाँ, औसत लाभ विधि, अधि लाभ विधि, पूँजी करण विधि, ख्याति का व्यवहार- जब नया साझेदार ख्याति की धनराशि नगद लेकर आता है, जब नया साझेदार पूर्णतः अथवा आंशिक ख्याति नहीं लेकर आता है, प्रच्छन ख्याति, संचित लाभों और हानियों का समायोजन, परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन और दायित्वों का पुनर्निर्धारण, पूँजी का समायोजन, वर्तमान 13 अंक साझेदारों के लाभ विभाजन अनुपात में परिवर्तन। ➢ साझेदारी फर्म का पुर्नगठन-साझेदार की सेवानिवृत्ति/मृत्यु-सेवानिवृत्त/मृत्त साझेदार को देय राशि का निर्धारण, नया लाभ विभाजन अनुपात, अभिलाभ अनुपात, ख्याति का व्यवहार-जब ख्याति पुस्तकों में विद्यमान नहीं है, प्रच्छन,ख्याति परिसंपत्तियों तथा दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन के लिये समायोजन, संचित लाभों तथा हानियों का समायोजन, जब साझेदार वर्ष के मध्य सेवानिवृत्त होता है, सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि का निपटारा, साझेदारों की पूँजी का समायोजन, साझेदार की मृत्यु। 13 अंक ➢ साझेदारी फर्म का विघटन-साझेदारी का विघटन, फर्म का विघटन, खातों का निपटारा, लेखांकन व्यवहार। 13 अंक
भाग-2 ➢ अंशपूृ्ँजी के लिये लेखांकन- कम्पनी का विशेषताएं, कंपनी के प्रकार, कंपनी की अंशपूँजी, अंशपूँजी का वर्गीकरण, अंशों की श्रेणियाँ एवं प्रकृति, अधिमानी अंश, समता अंश, अंशों का निर्गमन, लेखांकन व्यवहार-बकाया माँग, अग्रिम माँग खाता, अधि-अभिदान, अंशों का न्यून अभिदान, अंशों का अधि-मूल्य पर निर्गमन, अंशों का बट्टे पर निर्गमन, रोकड़ के अतिरिक्त प्रतिफल में अंशों का निर्गमन। अंशों का हरण, 13 अंक -हरण किये गए अंशों का पुनः निर्गमन
➢ ऋणपत्रों का निर्गमन -मोचन उपखण्ड-1-़ऋणपत्रों का आशय, प्रकार, अंश और ऋणपत्र के बीच अन्तर, ऋणपत्रों के प्रकार-(सुरक्षा के दृष्टिकोण से, अवधि के दृष्टिकोण से,) परिवर्तनीयता के दृष्टिकोण से, कूपन दर के दृष्टिकोण से, पंजीकरण
35 ङ274 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 के दृष्टिकोण से, ऋणपत्रों का निर्गम-रोकड़ के लिये ऋणपत्र का निर्गम-बट्टे पर ऋणपत्र का निर्गमन, प्रीमियम पर निर्गमित ऋणपत्र, अधि-अभिदान, रोकड़ के अतिरिक्त अन्य प्रतिफल पर ऋणपत्रों का निर्गमन, ऋणपत्रों का संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में निर्गमन, ऋणपत्रों को निर्गमित करने की शर्तें, ऋणपत्रों पर ब्याज, 12 अंक लेखांकन व्यवहार, ऋण पत्र निर्गम पर बट्टा/हानि का अपलेखन
➢ कम्पनी को वित्तीय विवरण- वित्तीय विवरणों का अर्थ, वित्तीय विवरणों की प्रकृति, वित्तीय विवरणों के उद्देश्य, वित्तीय विवरणों के प्रकार, तुलन पत्र का प्रारूप एवं विषय सामाग्री,प्रकटन की प्रमुख विशेषताएं, अंशधारक निधियां, अंशपूँजी, आरक्षितियाँ और अधिशेष, अंश वारंट के प्रति प्राप्त धन, चालू एवं गैर चालू वर्गीकरण, चालू/गैर-चालू में विभेद, अंश आवेदन राशि बकाया आबंटन, ऋण अस्थगित कर परिसंपत्तियाँ अथवा देयताएँ, व्यापार देय, प्रस्तावित लाभांश, प्रावधान, स्थायी परिसंपत्तियाँ, निवेश, रहतिया, व्यापारिक प्राप्य, रोकड़ एवं रोकड़ तुल्यांक, लाभ हानि विवरण का प्रारूप एवं विषय सामग्री, वित्तीय विवरणों की उपयोगिता 12 अंक एवं महत्व, वित्तीय विवरणों की सीमाएं। ➢ लेखांकन अनुपात-लेखांकन अनुपात का अर्थ, अनुपात विश्लेषण के उद्देश्य, अनुपात विश्लेषण के लाभ, अनुपात विश्लेषण की सीमाएं, अनुपातों के प्रकार, द्रवता अनुपात, चालू अनुपात, तरल अनुपात, ऋण शोधन क्षमता अनुपात-ऋण समता अनुपात, ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात, स्वामित्व अनुपात, कुल परिसंपत्तियों पर ऋण अनुपात, ब्याज व्याप्ति अनुपात, क्रियाशीलता (या आवर्त) अनुपात, रहतिया आवर्त अनुपात, व्यापारिक प्राप्य आवर्त अनुपात, व्यापारिक देय आवर्त अनुपात, निवल परिसंपत्तियाँ अथवा (विनियोजित पूँजी) आवर्त अनुपात, लाभ प्रदता अनुपात, सकल लाभ अनुपात, प्रचालन अनुपात, प्रचालन लाभ अनुपात, निवल लाभ अनुपात, नियोजित पूँजी अथवा निवेश पर प्रत्याय, अंश धारक निधि पर प्रत्याय, प्रति अंश अर्जन, प्रति अंश पुस्तक मूल्य, लाभांश भुगतान अनुपात, मूल्य अर्जन अनुपात।, लाभांश भुगतान अनुपात। 09 अंक ➢ रोकड़ प्रवाह विवरण -रोकड़ प्रवाह विवरण के उद्देश्य, रोकड़ प्रवाह विवरण के लाभ, रोकड़ एवं रोकड़ तुल्यराशियाँ, रोकड़ प्रवाह, रोकड़ प्रवाह विवरण को तैयार करने हेतु क्रियाकलापों का वर्गीकरण-प्रचालन क्रियाकलाप से रोकड़, निवेश क्रियाकलापों से रोकड़, वित्तीय क्रियाकलापों से रोकड़, कुछ विशिष्ट (व्यक्तिगत) मदों का व्यवहार।, प्रचालन क्रियाकलापों से रोकड़ प्रवाह की गणना-अप्रत्यक्ष विधि, निवेश एवं वित्तीय क्रियाकलापों से रोकड़ प्रवाह की गणना, रोकड़ प्रवाह विवरण का निर्माण। 09 अंक
(घ) कृषि वर्ग
भाग-1
(प्रथम वर्ष)
हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी- हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम व पुस्तकों की स्थिति वही रहेगी जो इस विवरण-पत्रिका में अनिवार्य विषय के अन्तर्गत ''मानविकी वर्ग'' के लिये निर्धारित है। परन्तु हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय की परीक्षा कृषि, भाग-एक (प्रथम वर्ष) में नहीं ली जायेगी। इस विषय की परीक्षा कृषि, भाग-दो (द्वितीय वर्ष) में दो वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर ली जायेगी।
कृषि भाग-दो (द्वितीय वर्ष)
शस्य विज्ञान
षष्ठम् प्रश्न-पत्र
शस्य विज्ञान (सिंचाई, जल निकास एवं शाक तथा फल संवर्धन)-
1-सिंचाई तथा जल निकास-फसलों को पानी की आवश्यकता, जलमान प्रस्ताव एवं उसका मृदा गठन से सम्बन्ध, सिंचाई जल के अपव्यय की रोकथाम, सिंचाई जल के गुण और उनके प्रभाव। 10 2-सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां-भराव सिंचाई, थाला विधि, बौछारी सिंचाई, ड्रिप सिंचाई, उठाव सिंचाई एवं तोड़ सिंचाई, पट्टी सिंचाई (वार्डर विधि) प्रत्येक के लाभ और सीमायें।
05 3-सिंचाई जल की माप-बी कटाव एवं कुलावा हेक्टेयर, से0 मी0, मीटर माप की प्रणाली। 05 4-जल निकास की आवश्यकता-मिट्टी में अति नमी से हानियां, भूमि विकार एवं सुधार (क्षारीय तथा अम्लीय मिटि्टयां, उनका बनना, रोकथाम एवं सुधार, प्रक्षेत्र फार्म) प्रबन्ध की सामान्य जानकारी। 05 5-दैवी आपदायें-बाढ़, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, उपलवृष्टि, भूकम्प आदि का स्वरूप, संवेदनशील क्षेत्र, हानि, नियंत्रण के उपाय।
05भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 275 6-शाक तथा फल संवर्द्धन-निम्नलिखित शाकों तथा फलों की फसलों का अध्ययन, संस्तुत प्रजातियां तथा उनके मुख्य गुण, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्र, बोने का समय, बीज बोने की विधि, खाद देना, सिंचाई करना, रोग एवं कीट पहचान एवं निवारण, उपज एवं बीजोत्पादन।
20 (क) गोभी वर्गीय फसलें-फूल गोभी, पत्ता गोभी, गांठ गोभी। (ख) बल्व फसलें-प्याज, लहसुन। (ग) कुकुरबिट-करेला, लौकी, खरबूजा, कद्दू, तुरई। (घ) जड़ फसलें-गाजर, मूली, शकरकन्द, शलजम। (ङ) मशरूम की खेती। (च) लेग्यूम-मटर। (छ) मसाले-लाल मिर्च। (ज) विविध-बैगन, भिण्डी, टमाटर। (झ) केला, सेव, लीची, बेर, आम, अमरूद, नींबू, पपीता, आड़ू। () पुष्प उत्पादन-गेंदा, गुलाब, गुलदाउदी।
प्रयोगात्मक शाक फसलों को उगाना और उनकी बाद की देखभाल, नर्सरी तैयार करना और उनके बीज उत्पादन (सिद्धान्त) निम्नलिखित क्रियाओं में अभ्यास-
(क) एक वर्षीय शाक फसलों की बीज शायिका की विभिन्न यंत्रों द्वारा तैयारी। (ख) हाथ तथा बैलों से चलित यंत्रों द्वारा अंतरकर्षण। (ग) प्रतिचयन विधि से उपज का अनुमान। (घ) विभिन्न विधियों से सिंचाई तथा सिंचाई की लागत। (ङ) खाद तथा उर्वरकों के शाक फसलों के संदर्भ में प्रयोग की विधियां। (च) शाक-भाजी के बीज तथा सम्बन्धित खर-पतवारों की पहचान। (छ) शाक-भाजी के मुख्य बीमारियों तथा कीटों की पहचान। (ज) बीमारियों तथा कीड़ों के निवारण के लिये दवाइयों का घोल बनाना तथा डस्टर एवं स्प्रेयर का प्रयोग। छात्र राजकीय फार्मों तथा किसानों के शाक फार्मों में अध्ययन करने भ्रमणार्थ जायेंगे। प्रयोगात्मक कार्य, फसलों का मुख्य अवलोकनों तथा भ्रमण स्थानों के अध्ययन का अभिलेख रखा जायेगा। पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें। अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक निर्धारित अंक
1-बीज शैय्या का निर्माण 08 अंक 2-मौखिकी 07 अंक 3-(क) आंकिक प्रश्न द्वारा खाद की गणना करना- 05 अंक (ख) फसलों की सिंचाई से सम्बन्धित आंकिक प्रश्न- 05 अंक
2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक 1-बीज, खर-पतवार, खाद तथा फसलों की पहचान 10 अंक 2-अभ्यास पुस्तिका 08 अंक 3-प्रोजेक्ट 07 अंक नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
सप्तम प्रश्न-पत्र
(कृषि-अर्थशास्त्र)
सिद्धान्त
1-प्रारम्भिक अर्थशास्त्र-सिद्धान्त, अर्थशास्त्र का अर्थ और क्षेत्र, अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध, राष्ट्रीय नियोजन में कृषि अर्थशास्त्र का महत्व।
15276 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 उत्पादन के उपादान, प्रतिफल नियम, प्रदेश के प्रमुख उत्पादन आंकड़े-
भूमि-इसकी विशेषतायें, भूमि का उत्पादन के साधन के रूप में महत्व, सघन तथा विस्तृत खेती। श्रम-श्रम की विशेषतायें, श्रम का संयोजन, श्रम की दक्षता, गतिशीलता। पूंजी-पूंजी का वर्गीकरण, कृषि में पूंजी का महत्व। संगठन-प्रबन्ध और उत्तम कृषि उत्पादन के उपादानों का संयोजन।
(2) विनिमय-परिभाषा एवं प्रकार, विनिमय के लाभ, बाजार के प्रकार, बाजार और सामान्य मूल्य, मांग और पूर्ति का नियम, मूल्य का सिद्धान्त, द्रव्य, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के सिद्धान्त।
10 (3) वितरण-परिभाषा एवं निर्धारण के सिद्धान्त-लगान, मजदूरी, ब्याज और लाभ। 05 (4) उपभोग-परिभाषा, आवश्यकतायें उनके लक्षण, ह्रासमान, तुष्टिगुण नियम, मांग का नियम, मूल्य सापेक्षता और जीवन स्तर।
05 (5) सहकारिता का प्रारम्भिक ज्ञान, सहकारिता के सिद्धान्त, विभिन्न प्रकार की सहकारी समितियां, उनके संगठन एक धंधी बनाम बहुधंधी सहकारी समितियां, भूमि विकास बैंक एवं ग्रामीण बैंकों का कृषि में योगदान। 05 (6) प्रारम्भिक ग्रामीण समाजशास्त्र, ग्राम जीव का उद्भव और विकास, ग्रामों का सामाजिक गठन, विभिन्न सामुदाियक संस्थाओं के कार्य, ग्राम शिक्षा, सामाजिक गतिशीलता तथा सामाजिक परिवर्तन। जनसंख्या दबाव एवं बेरोजगारी समस्या का समाधान। ग्राम पंचायत का गठन एवं ग्राम विकास में योगदान। 05 (7) पंचवर्षीय योजना में कृषि का स्थान, प्रदेश में कृषि उत्पादन के प्रमुख आंकड़े। 05 पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें।
10
10
10
अष्टम् प्रश्न-पत्र (कृषि-जन्तु विज्ञान) सिद्धान्त 1-(अ) जीव द्रव्य का रासायनिक संगठन, भौतिक गुण एवं जैविक गुण। सजीव, निर्जीव में भेद। 10 (ब) अमीबा/पैरामीशियम जैसे-जन्तुओं द्वारा जीवित पदार्थ का अध्ययन। 2-निम्नलिखित के वाह्य आकार, स्वभाव तथा जीवन-वृत्त का अध्ययन- (क) अकशेरुकीय-गोलकृमि, केचुआ, तिलचट्टा, रेशम का कीट, मधुमक्खी एवं दीमक। (ख) कशेरुकीय-किसी एक पक्षी तथा एक स्तनधारी (गिलहरी या खरगोश)। 3-निम्नलिखित की आन्तरिक संरचना- केचुआ, तिलचट्टा तथा खरगोश। 4-(क) स्तनधारी के आमाशय, फुफ्फुस, वृक्क तथा रुधिर की आन्तरिक संरचना का प्रारम्भिक अध्ययन। 10 (ख) पाचन, श्वसन तथा उत्सर्जन की क्रिया-विज्ञान का साधारण ज्ञान। 5-(क) अनुच्छेद-2 के जन्तुओं का वर्गीकरण। (ख) मानव अनुवांशिकी का प्रारम्भिक ज्ञान लिंग निर्धारण, हीमोफिलिया, वर्णान्धता।। (ग) कोशा विभाजन का महत्व, अर्ध सूत्री विभाजन।
06 06
प्रयोगात्मक 1-सिद्धान्त पाठ्यक्रम के अन्तर्गत अनुच्छेद 1(क), 2(क) व 2(ख) के जन्तुओं की पहचान। 10 2-सिद्धान्त पाठ्यक्रम के अन्तर्गत 2 के जन्तुओें का वाह्य आकार एवं जीवन वृत्त का अध्ययन दीमक, तिलचट्टा गोलकृमि। 3-प्रोजेक्ट कार्य- (क) कृषि फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जन्तुओं की सूची। (प्रत्येक फाइलम से कम से कम एक जन्तु) तैयार करें। (ख) फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले किन्हीं दो जन्तुओं के मुखांगों का चार्ट/मॉडल के माध्यम से अध्ययन अकशेरुकी अथवा पक्षी या स्तनधारी के संदर्भ में, नोट-विषय अध्यापक छात्र की सुविधानुसार प्रोजेक्ट कार्य निर्धारित करेंगे। 4-स्पॉट पहचान (06 स्पॉट)-
12 (क) स्थायी स्लाइड का अध्ययन-सिद्धान्त पाठ्यक्रम-4(क) के अन्तर्गत उल्लिखित
पदार्थों के स्थायी आरोपण का अध्ययन, सूक्ष्मदर्शीय ज्ञान वृक्क की अनुप्रस्थ काट।
(ख) उत्तर प्रदेश में पाये जाने वाले कृषि महत्व के साधारण पक्षियों की पहचान,
वर्गीकरण का ज्ञान तथा उनके नाम।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 2775-सत्रीय कार्य-
08 प्रयोगात्मक उत्तर पुस्तिका जो कि अध्यापक द्वारा हस्ताक्षरित हो तथा जिसमें परीक्षार्थी
का वास्तविक कार्य हो, प्रस्तुत करना होगा।
6-मौखिक-
08 (क) मौखिक प्रश्न-सैद्धान्तिक भाग में दिये गये पाठ्यक्रम के अन्तर्गत सामान्य ज्ञान
सम्बन्धी प्रश्न आधारित होंगे।
(ख) सम्बन्धित जन्तुओं का संग्रह।
पुस्तकें-
कोई पुस्तक संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक निर्धारित अंक
1-जन्तुओं एवं वस्तुओं की पहचान- 07 अंक 2-दिये गये पदार्थों का सूक्ष्म विवेचन- 05 अंक 3-सूक्ष्मदर्शीय स्लाइड की पहचान- 07 अंक 4-मौखिक 06 अंक
2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक 5-प्रोजेक्ट कार्य- 08 अंक 6-अभ्यास पुस्तिका- 10 अंक 7-मौखिक एवं सत्रीय कार्य (प्रयोगात्मक)- 07 अंक नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
कक्षा-12
नवम् प्रश्न-पत्र
(पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान)
सिद्धान्त
10
10 05
10 1-पशुओं के प्रमुख नस्लों के विवरण का अध्ययन, उदाहराणार्थ-गाय, भैंस, बकरी, भेड़ तथा मुर्गी। गायों और बैलों के शरीर की वाह्य रचना और उनका शारीरिक क्रिया से सम्बन्ध, पशुओं की आयु आंकना। उत्तम दूध देती गाय तथा भैंस के लक्षण, बैल और सांड़ों के लक्षण और उनका गुणांकन-पत्र विधि से चयन। 10 2-गाभिन गाय, ब्याने के समय गाय, नवजात बच्चों, हाल की ब्यानी गायों और दूध देती गायों तथा मुर्गियों की देख-रेख और प्रबन्ध सम्बन्धी सामान्य सिद्धान्त, पशुओं का बंध्याकरण (बधियाकरण)। 05 3-विभिन्न वर्ग के पशुओं तथा बछड़ा-बछड़ी, गाभिन गायों, दूध देती गायों, सांड़ों और बैलों तथा मुर्गियों के लिये आहार सम्बन्धी सामान्य सिद्धान्त। विभिन्न प्रकार के चारों और दानों को वर्ष भर सस्ती उपलब्धि पर सामान्य विचार। गायों को दोहने के लिये साफ करना और तैयार करना, गौशालाओं की सफाई और रोगाणु रहित करने पर सामान्य विचार। दोहन के सिद्धान्त और विधियों तथा दूध का स्वच्छता से उत्पादन, कृत्रिम दूध की पहचान, दूध अभिलेखण। 4-दूध से बनने वाले पदार्थों जैसे क्रीम, मक्खन, पनीर, दही, आइसक्रीम, घी की सामान्य जानकारी। आपरेशन फ्लड की संक्षिप्त जानकारी। 5-पशु प्रजनन, उद्देश्य एवं विधियों की सामान्य जानकारी। 6-पशु चिकित्सा व्यवहार में प्रमुख साधारण औषधियों और उनकी प्रयोग विधि। उपचार के लिये पशुओं को सम्भालना, गिराना और बांधना, बछड़ों को बधिया करना। पशुओं में होने वाले रोग-खुरपका, मुंहपका, गलाघोंटू, थनैला, अफारा, रानीेखेत बीमारियों के लक्षण एवं बचाव। प्रयोगात्मक
1-गाय और बैलों की वाह्य शरीर रचना। 2-गाय, बैल और भैंस की आयु आंकना।
278 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43-उत्तम गाय, भैंस, सांड़ और बैलों के लक्षणों का अध्ययन। 4-संतुलित आहार बनाना। पशु आहार के बाजार भावों पर मौखिक प्रश्न। 5-विभिन्न वर्गों के पशुओं के बाजार भाव पर मौखिक प्रश्न। 6-पशुओं की शल्य क्रिया करने, नाल लगाने और बधिया करने के लिये संभालना, गिराना और बांधना। 7-पशु चिकित्सा, व्यवहार में प्रयुक्त साधारण औषधियों की जानकारी और उनकी प्रयोग विधि। 8-पालतू पशुओं की ताप, नाड़ी और श्वास गति को ज्ञात करना। 9-डेरी फार्म पर रखे जाने वाले विभिन्न अभिलेखों की जानकारी। 10-वर्ष भर में किये गये प्रयोगात्मक कार्य का अभिलेख। पुस्तकें-
कोई पुस्तक संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें। अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक निर्धारित अंक
1-आहार परिकलन- 10 अंक 2-पशु प्रबन्ध- (क) पशु का नियंत्रण करना व गिराना- 04 अंक (ख) पालतू पशुओं के तापक्रम, नाड़ी व श्वसन का ज्ञान 04 अंक 3-मौखिक- 07 अंक
2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक 1-वाह्य अंगों की पहचान- 05 अंक 2-आहार परिकलन- 05 अंक 3-औषधि एवं यंत्रों की पहचान- 08 अंक 4-अभ्यास पुस्तिका 07 अंक व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
दशम् प्रश्न-पत्र
(कृषि रसायन)
सिद्धान्त
प्रश्न-पत्र निम्नलिखित प्रकार से तीन भागों में विभाजित होगा-(1) भौतिक रसायन, (2) अकार्बनिक
10 रसायन तथा (3) कार्बनिक रसायन। 1-भौतिक रसायन- (1) भौतिक व रसायनिक परिवर्तन। (2) रसायनिक संयोग के नियम (आंकिक प्रश्न रहित)। द्रव की अविनाशिता का नियम, स्थिर अनुपात का नियम, गुणित अनुपात का नियम, व्युत्क्रम अनुपात का नियम व गैसों का आयतन सम्बन्धी नियम। उपरिलिखित नियमों की आधुनिक परमाणु सिद्धान्त के आधार पर व्याख्या। (3) परमाणु सिद्धान्त, आधुनिक एवं प्राचीन धारणायें (प्रारम्भिक विचार)। (4) निम्नलिखित की परिभाषा, सरल व्याख्या व परस्पर सम्बन्ध-संयोजकता, परमाणु भार, अणुभार एवं तुल्यांक भार। (5) परमाणु की रचना एवं रेडियो एक्टीविटी। (6) एवोग्रेड्रों की परिकल्पना और उसके उपयोग।
2-(1) आयनवाद-सिद्धान्त, परमाणु और आयन में अन्तर और निम्न की आयनवाद की सहायता से
05 व्याख्या वैद्युत् अपघटन, अम्ल, क्षार, लवण, जल, अपघटन और उदासीनीकरण। (2) आक्सीकरण एवं अपचयन। (3) मृदा परीक्षण की सामान्य जानकारी- चभ् मान, जीवांश पदार्थ एवं मृदा के अम्लीय, क्षारीय गुणों का तुलनात्मक अध्ययन।
अकार्बनिक रसायन
05 3-तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण- जल-स्थायी एवं अस्थायी कठोरता व कठोर जल को मृदु बनाने की विधियां। जल की सिंचाई कार्य में उपयुक्तता।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 279निम्न तत्व उनके यौगिकों की उपस्थिति गुण व उपयोगिता के विशेष सन्दर्भ में। 4-अध्ययन-नाइट्रोजन, अमोनिया, नाइट्रिक अम्ल, कार्बन, कार्बन डाई आक्साइड, फास्फोरस, फास्फोरिक अम्ल गंधक, सल्फर डाई आक्साइड, सल्फ्यूरिक अम्ल, क्लोरीन, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल। 15 निम्नलिखित के प्राप्ति स्थल गुण और उपयोग तथा पौधों में कार्य, सोडियम, सोडियम क्लोराइड, सोडियम कार्बोनेट, सोडियम बाई कार्बोनेट, सोडियम नाइट्रेट, पोटैशियम, पोटैशियम नाइट्रेट, पोटैशियम सल्फेट, कैल्षियम आक्साइड, कैलशियम कार्बोनेट, कैलशियम सल्फेट, लोहा, आयरन सल्फेट, एल्यूमिनियम फास्फेट, एल्यूमिनियम सल्फेट।
नाइट्रोजन चक्र, भूमि में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण एवं फास्फोरस एवं पोटाश का पौधों में कार्य, कृषि में उपयोग होने वाली सामान्य खादें।
कार्बनिक रसायन 5-कार्बनिक रसायन की परिभाषा एवं महत्व, कार्बनिक यौगिकों की रचना एवं स्रोत, भौतिक गुण,
15 वर्गीकरण तथा नामकरण। निम्नलिखित यौगिकों का सामान्य ज्ञान, सामान्य सूत्र बनाने की सरल विधियां, सामान्य गुण तथा मुख्य-मुख्य उपयोग, रचनात्मक सूत्र (खनिज तेल, वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन को छोड़कर)। हाइड्रोजन कार्बन-संतृप्त तथा असंतृप्त। अल्कोहल-एथिल अल्कोहल तथा ग्लिसरीन। एल्डीहाइड तथा कीटोन-फार्मेल्डीहाइड, एसिटेल्डीहाइड, एसीटोन। अमीन तथा अमाइड-मेथिल तथा एथिल अमीन, यूरिया। अम्ल-एसिटिक, ब्यूटिरिक, लैक्टिक तथा आक्जैलिक अम्ल। वसा तथा तेल, साबुन एवं साबुनीकरण कार्बोहाइड्रेट-ग्लूकोस, फ्रक्टोस, ईक्षु शर्करा स्टार्च, बेन्जोन तथा फिनोल के बनाने की सामान्य विधियां तथा सामान्य गुण।
प्रयोगात्मक
अकार्बनिक
(1) निम्नलिखित की गुणात्मक अभिक्रियायें- क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड, नाइट्रेट, सल्फेट, सल्फाइड, कार्बोनेट, फास्फेट, सीसा, तांबा, आर्सेनिक, लोहा, एल्यूमिनियम, जस्ता, मैगनीज, कैल्शियम, बेरियम, मैगनीशियम, सोडियम, पोटैशियम और अमोनियम। जल या खनिज अम्लों में घुलनशील सरल मिश्रणों का जिसमें विभिन्न वर्गों के उपर्युक्त दो से अधिक अम्लीय और दो से अधिक क्षारीयमूलक न हों, का गुणात्मक विश्लेषण (साधारण विश्लेषण में व्यतिकरण न करने वाले)। (2) उपयुक्त मानक विलयन को प्रमाणिक मानकर अम्लीय तथा क्षारीय घोलों का बनाना तथा इनका मानकीकरण। सल्फ्यूरिक, हाइड्रोक्लोरिक, आक्जेलिक अम्लों, सोडियम कार्बोनेट, सोडा बाइकार्बोनेट तथा सोडियम हाइड्राक्साइडों का आयतन अनुमापन कार्बोनेट और हाइड्राक्साइडों का इनके मिश्रणों में आयतनी अनुमापन। पोटैशियम परमैगनेट द्वारा फेरस अमोनियम सल्फेट का आयतनिक अनुमापन। (3) मृदा परीक्षण-pHमान तथा अम्लीय क्षारीय मृदा की पहचान करना।
कार्बनिक
निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों की पहचान- कार्बनिक यौगिकों में तत्वों एवं क्रियाशील समूहों का परीक्षण। साधारण परीक्षणों द्वारा निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों की पहचान-एथिल एलकोहल, आक्जेलिक अम्ल, द्राक्षशर्करा, फल शर्करा, ईख शर्करा, स्टार्च तथा प्रोटीन। संस्तुत पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक निर्धारित अंक
1-अकार्बनिक भौतिक तथा गुणात्मक विश्लेषण- 06 अंक 2-कार्बनिक यौगिकों की पहचान- 05 अंक 3-अभ्यासी अनुमापन- 06 अंक 4-मौखिकी- 08 अंक
2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक 1-रसायनों का अपचयन, उपचयन, अनुमापन- 10 अंक280 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 2-प्रोजेक्ट कार्य- 08 अंक 3-अभ्यास पुस्तिका- 07 अंक व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
शस्य विज्ञान(व्यावसायिक वर्ग) कक्षा-12 इण्टरमीडिएट व्यावसायिक शिक्षा की परीक्षा का पाठ्यक्रम [अध्याय-चौदह (क) के संदर्भ में, निम्नलिखित विषयों का पाठ्यक्रम, पुस्तकें एवं अंक विभाजन वैसा ही है, जैसा कि इण्टरमीडिएट परीक्षा के अन्तर्गत निर्धारित है- सामान्य हिन्दी, अरबी, अर्थशास्त्र, आसामी, इतिहास, उर्दू, उड़िया, अंग्रेजी, कन्नड़, गणित, गृह विज्ञान, गुजराती, चित्रकला, तर्कशास्त्र, तमिल, तेलगू, नागरिक शास्त्र, नेपाली, पालि, पंजाबी, फारसी, बंगला, भूगोल, मनोविज्ञान, मराठी, मलयालम, समाज शास्त्र, संगीत (वादन), संगीत (गायन), संस्कृत, सिन्धी, सैन्य विज्ञान, शिक्षा शास्त्र, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, व्यापारिक संगठन एवं पत्र-व्यवहार, औद्योगिक संगठन, अर्थशास्त्र तथा वाणिज्य भूगोल एवं गणित तथा प्रारम्भिक सांख्यिकी। टीप-जिन विषयों में प्रयोगात्मक परीक्षा निर्धारत है उनके अंक विभाजन व समयावधि वर्तमान में प्रचलित पाठ्यक्रमानुसार ही होगा।
शस्य विज्ञान(व्यावसायिक वर्ग)-कक्षा-12 शस्य विज्ञान विषय में एक लिखित प्रश्न-पत्र 70 अंकों का समय तीन घंटे का होगा। जिसमें कृषि शस्य विज्ञान-साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद तथा शस्य विज्ञान-सिंचाई जल निकास एवं शाक तथा फल संवर्धन होगा। लिखित परीक्षा के अतिरिक्त 30 अंकों की एक प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। न्यूनतम उत्तीर्णांक 2310 = 33 प्रश्न-पत्रों के अंकों तथा समय का विभाजन निम्नवत् होगा-
प्रश्न-पत्र पूर्णांक न्यूनतम
उत्तीर्णांक
35 खण्ड-क-कृषि शस्य विज्ञान-साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद 35 23 खण्ड-ख-शस्य विज्ञान-सिंचाई, जल निकास एवं शाक तथा फल संवर्धन प्रयोगात्मक परीक्षा
30 10 लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा के योग में 33 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
खण्ड-क -35 पूर्णांक
(कृषि शस्य विज्ञान-साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद)
सिद्धान्त
1-शस्य विज्ञान कार्य की साधारण फसलें, मिट्टी तथा खाद। फार्म की साधारण फसलें गेहूं, धान, कपास, ज्वार, बाजरा, मक्का, सोयाबीन, सरसों, अरहर, मटर, मूंगफली, चना, तम्बाकू, बरसीम, आलू, टमाटर और गन्ने के निम्न शीर्षकों के अन्तर्गत अध्ययन।
20 2-संस्तुत प्रजातियां, उनके मुख्य गुण, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्र, बोने का समय, बीजदर, बोने की विधि, खाद देना, सिंचाई करना, फसल रक्षा, उपर्युक्त फसलों के खर-पतवार, मुख्य कीट एवं रोगों के लक्षण तथा निवारण, फसल काटना, गहाई तथा उपज।
15
खण्ड-ख -35 पूर्णांक
(शाक तथा फल संवर्धन)
सिंचाई
20 1-शाक तथा फल संवर्धन-निम्नलिखित शाकों तथा फलों की फसलों का अध्ययन, संस्तुत प्रजातियां तथा उनके मुख्य गुण, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्र, बोने का समय, बीज बोने की विधि, खाद देना, सिंचाई करना, रोग एवं कीट पहचान एवं निवारण- (क) गोभी वर्षीय फसलें-फूल गोभी, पात गोभी, गांठ गोभी। (ख) बल्ब फसलें-प्याज, लहसुन।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 281(ग) क्यूकर बिट-करेला, लौकी, खरबूज, कद्दू, तुरई। (घ) जड़ फसलें-गाजर, मूली, शकरकन्द, शलजम।
(ङ) केला, सेब, लीची, बेर, आम, अमरूद, नींबू, पपीता, आलू। 15
प्रयोगात्मक
प्रयोगात्मक परीक्षा में अंक वितरण निम्नवत् होगा- अंक 1-जुताई, खेत तैयार करना (हल, कल्टीवेटर या हरी खाद) 4 2-बीज या सब्जी के लिये बीज तैयार करना 6 3-पहचान-मिट्टी, बीज, फल, खर-पतवार, खाद, रोग, दवायें 6 4-फसलों के उत्पादन, लागत, उपज एवं लाभ का प्रति हेक्टेयर गणना करना 4 5-प्रयोगात्मक कार्य से सम्बन्धित मौखिक प्रश्न 4 6-वर्ष भर में किये गये कार्य का सत्रीय मूल्यांकन 6
योग 30 शाक, फसलों का उगाना और उनकी बाद की देखभाल, नर्सरी तैयार करना और उनके बीज उत्पादन सिद्धान्त के प्रश्न-पत्र में फसलों का प्रयोगात्मक कार्य। निम्नलिखित क्रियाओं का अध्ययन-
(क) एक वर्षीय शाक फसलों की बीज शायिका का विभिन्न यंत्रों द्वारा तैयारी। (ख) हाथ तथा बैलों से चालित यंत्रों द्वारा अन्तःकर्षण। (ग) प्रति चयन विधि से उपज का अनुमान। (घ) विभिन्न विधियों से सिंचाई तथा सिंचाई की लागत। (ङ) खाद तथा उर्वरकों के शाक फसलों के सन्दर्भ मेंं प्रयोेग की विधियां। (च) शाक-भाजी के बीज तथा सम्बन्धित खर पतवारों की पहचान। (छ) शाक-भाजी के मुख्य बीमारियों तथा कीटों की पहचान। (ज) बीमारियों तथा कीड़ों के निवारण के लिये दवाइयों का घोल बनाना तथा डास्टर एवं स्प्रेयर का प्रयोग।
छात्र राजकीय फार्मों तथा किसानों के शाक फार्मों में अध्ययन करने भ्रमणार्थ जायेंगे। पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान सम्बन्धित विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें। अधिकतम अंक : 30 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 10 समय : 03 घंटा 1-वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 15 अंक निर्धारित अंक 1-बीज या सब्जी के लिये बीज तैयार करना- 04 अंक 2-पहचान-मिट्टी, बीज, फल, खर-पतवार, खाद, रोग, दवायें- 04 अंक 3-फसलों का उत्पादन, लागत, उपज एवं लाभ की प्रति हेक्टेयर गणना करना- 03 अंक 4-प्रयोग आधारित मौखिकी- 04 अंक 2-आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 15 अंक 1-वर्ष भर में किये गये कार्यों का सत्रीय मूल्यांकन- 05 अंक 2-जुताई, खेत तैयार करना (हल, कल्टीवेटर या हरी खाद)- 04 अंक 3-प्रोजेक्ट कार्य- 06 अंक नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
सामान्य आधारिक विषय
(पर्यावरणीय शिक्षा एवं ग्रामीण विकास)
(व्यावसायिक वर्ग)-कक्षा-12
परिचय- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अनुसार ़2 स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य निम्नवत् हैं- 1-शिक्षा की विविध धाराओं के अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराना जिससे कि स्वरोजगार को बढ़ाया जा सके।
36 ङ282 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 2-तकनीकी जनशक्ति की मांग और आपूर्ति के असंतुलन को कम करना। 3-लक्ष्यविहीन उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को एक विकल्प प्रदान करना।
सारांश में उपर्युक्त उद्देश्यों पर आधारित व्यावसायिक शिक्षा से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में ऐसे व्यक्तियों का निर्माण कर सकेगी, जिनके पास आपने स्वयं के विकास के विस्तृत ज्ञान का स्रोत एवं प्रशिक्षण होगा, युवा शक्ति को लाभकारी रोजगार देकर उनमें निरुत्साह की भावना को समाप्त करने अथवा कम करने में सहयोगी हो सकेगी, उद्यमिता के प्रति एक स्वस्थ भावना का विकास, आत्मविश्वास तथा व्यावसायिक जागरूकता उत्पन्न कर सकेगी। स्थूल रूप से व्यावसायिक शिक्षा केवल किसी एक व्यवसाय (ट्रेड) छात्रों में रुचि उत्पन्न कर ज्ञान बोध एवं कौशल प्राप्त करने की ओर ही नहीं आकर्षित करती है, वरन् इसके अतिरिक्त निम्नलिखित उद्देश्यों की भी शिक्षा प्रदान करती है-
1-वातावरण तथा वातावरण के विकास के प्रति जागरूकता। 2-वैज्ञानिक तथा तकनीकी परिवर्तनों के कारण वातावरण में होने वाले परिवर्तन के प्रति पहले से जानकारी होना।
3-अपने समाज की आवश्यकता तथा विकास के परिप्रेक्ष्य में व्यावसायिक शिक्षा जीवनपर्यन्त शिक्षा तंत्र के एक अंश के रूप में समझना।
व्यावसायिक शिक्षा छात्रों को वेतनभोगी अथवा स्वरोजगार दो प्रकार के व्यवसायों के लिये तैयार करती है किन्तु उनमें से अधिकांश छात्र स्वरोजगार हेतु अपने स्वयं के प्रतिष्ठानों को स्थापित करने में आवश्यक आत्मविश्वास की कमी रखते हैं, जबकि इसे स्वीकार किया जाना चाहिये कि आगामी आने वाले वर्षों के कुछ सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं का समाधान ढूढ़ने में स्वरोजगार की एक आवश्यक भूमिका होगी। अतः यह आवश्यक है कि व्यावसायिक शिक्षा को उद्यमिता विकास कार्यक्रमों द्वारा स्वरोजगार से जोड़ा जाये। आज की शिक्षण संस्थायें तथा समाजसेवी संस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य छात्रों को वेतनभोगी रोजगार के लिये तैयार करना है जिसके फलस्वरूप छात्रों में रचनात्मक (Creativity), लगन (Perseverance), स्वतंत्रता (Independence), अन्तःदृष्टि (Visions) एवं नव-निर्माण की प्रवृत्ति (Innerativeness) जो उद्यमिता विकास के प्रमुख लक्षण हैं, उनको प्रोत्साहन नहीं मिल पाता है, जबकि व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य छात्रों द्वारा अपने व्यवसाय (ट्रेड) से सम्बन्धित उद्यमिता के अवसरों का आभास करना, स्वरोजगार के क्रिया-कलापों की व्यवस्था करना तथा अपने प्रतिष्ठानों को प्रभावी व्यवस्था करने में प्रशिक्षण दिया जाना है। उद्यमिता विकास के कार्यक्रमों के विशिष्ट रूप निम्नवत् हैं-
(1) छात्रों में वेतनभोगी रोजगार के अतिरिक्त विकल्प के रूप में उद्यमिता (स्वरोजगार) की अनुभूति एवं कल्पना करने की क्षमता का विकास करना।
(2) उद्यमिता (स्वरोजगार) प्रारम्भ करने हेतु प्रोत्साहित होकर उनमें भावना तथा क्षमतायें विकसित करना जो स्वरोजगार भविष्य को प्रारम्भ करने तथा उसकी स्थापना करने के लिये आवश्यक है।
(3) उद्यमिता (स्वरोजगार) के अवसरों को खोज करने के लिये अन्तर्दृष्टि का विकास करना। 4-उद्यम सम्बन्धी (स्वरोजगार), साहस को संगठित करने तथा उसे सफलतापूर्वक चलाने हेतु छात्रों में क्षमता का विकास करना। उपर्युक्त उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुये व्यावसायिक शिक्षा पढ़ने वाले छात्रों के लिये सामान्य आधारिक विषय के अन्तर्गत निम्नलिखित दो प्रमुख घटकों को रखा गया है-
(1) वातावरणीय शिक्षा तथा ग्रामीण विकास। (2) उद्यमिता का विकास।
सामान्य आधारिक विषय हेतु निर्धारित 15 प्रतिशत समय में से 5 प्रतिशत समय वातावरणीय शिक्षा तथा ग्रामीण विकास हेतु तथा 15 प्रतिशत समय उद्यमिता के विकास हेतु निर्धारित किया गया है। सामान्य आधारिक विषय में 100 अंकों का केवल एक प्रश्न-पत्र तीन घन्टे का होगा। न्यूनतम उत्तीर्णांक 33
खण्ड-क (50 अंक)
(पर्यावरणीय शिक्षा एवं ग्रामीण विकास)
10 (क) पर्यावरणीय शिक्षा- (1) प्रारूपिक पर्यावरणीय समस्यायें- 1-वनों का काटा जाना। 2-वीरान कर देना। 3-भू-स्खलन। 4-जल स्रोतों का गाद जमाना एवं सूखना। 5-नदियों एवं झीलों का प्रदूषण। 6-विषैले पदार्थ।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 283(2) व्यावसायिक संकट-
10 1-संगठनीय जोखिमें (संकट)। 2-औजार सम्बन्धी जोखिमें। 3-प्रक्रिया सम्बन्धी जोखिमें। 4-उत्पाद सम्बन्धी जोखिमें।
(3) पर्यावरणीय क्रिया (कार्य)-
10 1-स्रोतों का पर्यावरणीय संरक्षण एवं सुरक्षा। 2-प्रदूषण नियंत्रण 3-पर्यावरणीय प्रदूषण सम्बन्धी नियम एवं शर्तें। 4-अनुपयोगी वस्तुओं का निस्तारण। 5-वांछित प्रेषण एवं स्वच्छता संबंधी उपाय अभ्यास। 6-स्वास्थ्य लाभ पुनः उपयोग में लाना और प्रतिस्थापन। 7-परिस्थितकीय स्वास्थ्य लाभ, सामाजिक एवं कृषि वानिकी। 8-सामुदायिक क्रिया-कलाप। 9-प्रकृति के तालमेल में रहना एवं पर्यावरणीय आचार शास्त्र।
(4) व्यावसायिक सुरक्षा-
06 1-अग्नि सुरक्षा। 2-औजारों और सामग्रियों का सुरक्षित प्रयोग। 3-प्रयोगशाला, कार्यशाला और कार्य क्षेत्र में सुरक्षा हेतु आवश्यक सावधानियां। 4-प्राथमिक उपचार। 5-सुरक्षित प्रबन्ध।
04 (5) भारतीय संस्कृति का अभिमान्य तत्व, पर्यावरण, प्रकृति आधारित जीवन व्यवस्था। (ख) ग्रामीण विकास-
(1) समुदाय के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य एवं सेवाओं का प्रावधान, स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रावधान, पर्यावरण स्वच्छता सफाई का सुधार, संक्रामक रोगों, माता-शिशु सुरक्षा एवं विद्यालय स्वास्थ्य सेवाओं पर नियंत्रण एन0 पी0 समुदाय में वांछित स्वास्थ्य, पोषण एवं पर्यावरण स्वच्छता के उपायों का विकास।
06 (2) ग्रामीण विकास हेतु उत्तरदायी माध्यमों का अनुकूलीकरण (समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम का लघु कृषक विकास एजेन्सी, सीमान्त किसान विकास एजेन्सी इत्यादि)।
(3) ग्रामीण उद्योगों का नवीनीकरण एवं विकास।
02 02
खण्ड-ख (50 अंक)
उद्यमिता विकास
10 1-परियोजना निर्माण- 1-परियोजना की आख्या तैयार करने की आवश्यकता। 2-परियोजना की आख्या के तत्व (चरण)। 3-विनियोग की सम्भावनाओं, उत्पादन और बाजार के पहलुओं तथा प्रबन्धकीय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुये परियोजना के आकार का निर्धारण। 4-स्थान एवं मशीन का चुनाव। 5-मजदूर और कच्चे माल की आवश्यकताओं की परियोजना में वांछनीय सूचनाओं के रूप में निर्धारित करना (प्रतिदर्श योजना आख्या)। 6-परियोजना की लागत का अनुमान लगाना। उत्पादन की लागत की अवधारणा, कार्यकारी पूंजी की आवश्यक और लाभांश तथा सूची नियंत्रण की संकल्पना। 7-ब्रेक-इवन-विश्लेषण और लाभकारिता की दर- उपयोग में लाये जाने की क्षमता का सूचक। राजस्व बिक्रय सूचक। 8-समय का निर्धारण, परियोजना का संचालन और तकनीक की समीक्षा (कार्य विश्लेषण)। 9-प्रारूपिक परियोजना की आख्याओं का अध्ययन जैसे उपभोक्ता-सामग्री, पूंजी-सामग्री, सहायक सामग्री और सेवायें। 10-बैंकों और आर्थिक संस्थाओं की आवश्यकतायें। 11-परियोजना का मूल्यांकन तकनीक, आर्थिक, वित्तीय, वाणिज्य और प्रबन्धकीय पहलू। 12-अभ्यास सत्र (समान प्रकार के उत्पादोें की परियोजना की आख्या के निर्माण करने हेतु विद्यार्थियों को अभ्यास करना चाहिये)।
284 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 402
06
08 2-प्रोत्साहन की उपलब्धता एवं प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं की सहायता करना- 06 1-छोटे-छोटे उद्यमों की सहायता करने एवं उन्हें आगे बढ़ाने हेतु संस्थागत कार्यों की भूमिका एवं महत्व को समझना। 2-सहयोगियों का क्षेत्र एवं लाभ तथा विभिन्न संस्थाओं की प्रेरणादायक कार्य योजनायें। 3-उद्यम में सहयोग करने वाली संस्थाओं के प्रार्थना-पत्रों की रूपरेखा और प्रक्रिया को समझना। 3-संसाधन जुटाना- 1-विशिष्ट उत्पाद आवश्यकताओं सहित वित्त कच्चा माल एवं कार्यकर्ता आदि को एकत्र करना। 2-विशिष्ट उत्पाद के सम्बन्ध में कार्य का विश्लेषण करना। 4-इकाई की स्थापना- 1-उद्यम स्थापित करने हेतु प्रक्रियायें, कानूनी आवश्यकतायें। 2-संस्थाओं (फर्म) का पंजीकरण। 3-आकार, स्थिति, खाका, सफाई, बीमा आदि। 5-उद्यमों का प्रबन्ध- 1-निर्णय देना-
1-समस्याओं को परिभाषित करना, सूचना एकत्र करना, सूचनाओं का विश्लेषण करना, विकल्प को पहचानना एवं विकल्प का चयन करना। 2-निर्णय लेने की प्रक्रिया पर एक समस्याभ्यास करना। 2-प्रबन्ध का संचालन-
1-खरीददारी करना, सामग्री की योजना चलाना एवं ए0जी0सी0 और ई0ओ0क्यू0 का विश्लेषण करना। 2-वस्तुओं की (निकासी निर्गमन) एवं भण्डारों का लेखा-जोखा रखना। 3-सामग्री की उपलब्धता एवं नियंत्रक। 4-गुणवत्ता नियंत्रण एवं संचालन का नियंत्रण। 5-योजना पर विचार-विमर्श करना एवं एक लघु समस्या के उदाहरण हेतु समय निर्धारित करना। 3-वित्तीय प्रबन्ध- 6-लेखा-जोखा और बहीखाता
08 1-दोहरी प्रविष्टि के सिद्धान्त, बहीखाता का मूल अभिलेख, अन्तिम लेखा-जोखा के संचालन, वित्तीय कथनों को समझाना। 2-लागत की धारणा, अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष तथा सीमान्त लागतें, मूल्य निर्धारण। 3-बजट तैयार करना और नियंत्रण करना। 4-समस्या के रूप में एक लघु इकाई का मुख्य बजट तैयार करना। 5-कार्य में लगने वाली पूंजी को प्राप्त करने हेतु वित्तीय समस्यायें।
4-बाजार प्रबन्ध- 7-बाजार प्रबन्ध की धारणा
10 1-चार आधार-(क) उत्पाद, (ख) कीमत, (ग) उन्नति, (घ) भौतिक वितरण। 2-पैकेज करना (पैकेजिंग)। 3-उपभोक्तओं की आवश्यकताओं को समझना। 4-वितरण के स्रोत, मूल बिक्रय एजेन्ट, थोक बिक्रेता एवं भण्डारी वितरक। 5-लघु उद्योगों के पूरकों हेतु सरकारी क्रय प्रक्रिया। 6-विक्रय की उन्नति और विज्ञापन करना। 7-विक्रय कला-एक अच्छे विक्रेता की विशेषतायें एवं ग्राहक से उनका व्यवहार।
5-औद्योगिक सम्बन्ध एवं कार्यकर्ताओं का प्रबन्ध-
1-भर्ती की विधियां एवं प्रक्रियायें। 2-मजदूरी एवं प्रेरणायें। 3-मूल्य निर्धारण एवं प्रशिक्षण। 4-नियोजक (मालिक) एवं कर्मचारी के सम्बन्ध।
6-वृद्धि एवं विकास, आधुनिकीकरण एवं विविधता-
1-वृद्धि की धारणा एवं महत्व, विकास एवं आधुनिकीकरण के तरीकों की प्राप्ति। 2-लघु व्यवसाय की वृद्धि एवं उद्यम की समस्याओं पर विचार-विमार्श।
7-औद्योगिक स्थानों का निरीक्षण एवं परियोजना की आख्या का प्रस्तुतीकरण। पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान सम्बन्धित विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 285(1) टे्रड-फल एवं खाद्य संरक्षण
कक्षा-12
उद्देश्य- (1) फल/खाद्य औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। (2) अधिक उपज से खाने के बाद बचे हुये फल, सब्जी, दूध, मांस, मछली आदि का संरक्षण करना। (3) संरक्षण द्वारा पौष्टिक फल तथा खाद्य पदार्थों के सेवन से भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी को वर्ष भर पूरा करना। (4) संरक्षित फल/खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बढ़ाकर मूल्य बिक्री करना। (5) युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं के समय पैकेट तथा डिब्बा बन्द खाद्य पदार्थों को सुलभ कराना। (6) भारत में अधिक पाये जाने वाले फल/खाद्य पदार्थों को संरक्षित करके विदेशों में भेजकर बिक्री करके विदेशी मुद्रा कमाना। (7) विभिन्न पौष्टिक फल/खाद्य पदार्थों का उपयोग कर सन्तुलित आहार उपलब्ध करना और खान-पान की आदतों में सुधार लाना। (8) फल/खाद्य संरक्षण तकनीकी शिक्षा के द्वारा व्यक्तियों में दक्षता लाना। (9) फल/खाद्य संरक्षण से सम्बन्धित मशीनों/उपकरणों की जानकारी के बाद इन मशीन/उपकरण निर्माताओं को प्रोत्साहन देकर अप्रत्यक्ष रोजगार को बढ़ावा देना। (10) शीघ्र नष्ट होने वाले पोष्टिक फल/खाद्य पदार्थों का ह्रास होने से बचाना। रोजगार के अवसर- (1) फल/खाद्य संरक्षण इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) फल/खाद्य संरक्षण में दक्षता प्राप्त करने के बाद छात्र अपना निजी व्यवसाय चला सकता है। (3) संरक्षित फल/खाद्य पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली मशीनों/उपकरणों का बिक्रय केन्द्र खोला जा सकता है। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 वाह्य परीक्षा 200
नोट-परीक्षार्थियों के प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(परिरक्षण-सिद्धान्त एवं विधियां)
1-परिरक्षण के मूल सिद्धान्त-
(1) अस्थाई-(एसेप्सिस, आदर््रता, वायु अपवर्जन आदर््रता, मृदु प्रतिरोधियों, मोम लेपन द्वारा परिरक्षण विधियां)
10 (2) स्थायी-ऊष्मा परिरक्षण, सुखाना (निर्जलीकरण) धूप एवं कृत्रिम निर्जलीकरण, प्रतिरोधी वस्तु (जैसे शर्करा, लवण, एसिटिक एसिड) फर्मेन्टेशन, हिमीकरण एवं विकिरण। 10 3-रासायनिक शास्त्र के मूल सिद्धान्त-माड़, वसा, शर्करा, प्रोटीन, ठोस, द्रव, गैस का सामान्य ज्ञान, रासायनिक
10 परिवर्तन, उत्प्रेरक पदार्थ, अम्ल, क्षार एवं पी एच-मूल्य तथा रसाकर्षण तथा जल विश्लेषण का ज्ञान।
4-खाद्य संयोगी-
(1) रासायनिक परिरक्षक-परिभाषा, प्रयोग एवं सावधानियां (सोडियम बेन्जोएट, पोटैशियम मेटा बाई सल्फाइट) यथा भारत में परिरक्षक प्रयोग करने की सीमा।
10 (2) अन्य संयोगी जैसे इमल्सीफायर, कलरिंग एजेन्ट, स्टेबलाइजिंग एवं थिकनिंग एजेन्ट, प्रोषक प्रतिपूरक, फ्लेवर, गरम मसाले आदि।
20286 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(सूक्ष्म जीव विज्ञान)
(1) खाद्य विषाक्तता-अवधारणा विषाक्तता के प्रकार, परिणाम-
20 (क) जीवाणु विषाक्तता (वोटूलाइनम, क्लास्ट्रीडियम, पेरीफैजेन्स, स्टेफाइलो कोकई, साल्मनलता संक्रमण, वेसिल्स सेरियस विषाक्तता एवं रोकने के उपाय) खाद्य पदार्थों की सुरक्षा, उचित प्रसंस्करण प्रतिरोधी विष दवाओं का उपयोग तथा प्रशीतन।
(2) अकार्बनिक रासायनिक विषाक्तता-(कापर, सीसा, टिन, जिंक, नाइट्राइट, कोबाल्ट, पोटैशियम बोमेट, कैडमीथम द्वारा विषाक्तता)।
10 (3) डिब्बा बन्द एवं संरक्षित पदार्थों के खराब होने के कारण, प्रकार एवं बचाव। 20 (4) विभिन्न प्रकार के संरक्षित खाद्य पदार्थों में होने वाली जैविक व अजैविक खराबियों के प्रकार एवं रोकथाम।
10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(फल/खाद्य-प्रोसेसिंग एवं गुण नियंत्रण)
1-हिमीकरण द्वारा मीट/पोल्ट्री से बने उत्पादों की परिरक्षण विधियां। 10 2-विभिन्न अंचार जैसे मीट, मछली, चना, मशरूम तथा अन्य फल-सब्जी-परिरक्षण विधियां। 10 3-डिब्बाबन्दी-परिरक्षण सिद्धान्त तथा मांस, मछली, मसालेदार सब्जी, पुलाव, रसगुल्ला तथा फल जैसे-आम, अनानास, नाशपाती आदि एवं सब्जी जैसे-हरी मटर, चना मक्का, मशरूम आदि विधियां।
10 4-विभिन्न फल, सब्जी जैसे-आंवला, अंगूर, सेब, खुबानी, आम, आदि एवं मटर, गोभी, करेला तथा अनाज के निर्मित पदार्थ (चिप्स, पापड़, बरी, नूडल्स) परिरक्षण विधियां (धूप, कृत्रिम साधनों द्वारा सुखाना)।
15 5-सिरका-परिभाषा, वर्गीकरण, विभिन्न प्रकार के सिरका, जनित सिरका के निर्माण सिद्धान्त, विधियां।
6-अन्य आधुनिक तकनीक-
05 10 (क) हिमीकरण द्वारा सब्जी तथा खाद्य पदार्थ-परिरक्षण विधियां। (ख) सान्द्रीकरण से फलों के रसों का संरक्षण-विधियां (ग) एसेप्तिंग पैकेजिंग-फलों/सब्जी तथा अन्य खाद्य पदार्थ की परिरक्षण विधियां।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र (खाद्य पोषण एवं स्वच्छता) 1-मेनू प्लानिंग-परोसे जाने वाले व्यक्तियों के अनुसार, मौसम के अनुसार उपलब्ध फल/खाद्य पदार्थों के अनुसार, शिशुओं, धात्री माता, वृद्ध एवं बीमार व्यक्तियों के लिये मेनूप्लानिंग। 10 2-पोषक तत्वों की कमी तथा वृद्धि से होने वाले रोग-लक्षण एवं नियंत्रण। 10 3-फल/खाद्य पदार्थ की प्रोसेसिंग/ताप का पौष्टिकता एवं विन्यास (टेक्सचर) पर प्रभाव। 10 10 4-स्वच्छता-
(क) व्यक्तिगत स्वच्छता। (ख) फल/खाद्य प्रसंस्करण उद्योगशालाओं के स्वच्छता मानक-फर्श, जल निकासी का प्रबन्ध, दीवार, छत, फ्लाई प्रूफ, जालीदार दरवाजे-खिड़कियां।
पंचम प्रश्न-पत्र (फल/खाद्य संरक्षण प्रयोगशाला, विपणन एवं प्रसार) 1-विपणन व्यवस्था-उत्पाद के विपणन का परिचय, पैकेज एवं पैकेजिंग बाण्ड, नाम एवं ट्रेड मार्क, उत्पादन की कीमत निर्धारण, भण्डार (फल, सब्जी, अन्न से बने उत्पाद, मांस, मछली, दूध एवं दूध से बने उत्पाद का भण्डारण, भण्डारण तरीके-शुष्क एवं शीत भण्डार), वितरण व्यवस्था, विक्रय प्रवर्तन/संवर्द्धन। 20 2-विज्ञापन एवं प्रसार-विज्ञापन माध्यम (समाचार-पत्र, पत्रिका, मेला, प्रदर्शनी, रेडियो, टी0वी0, सिनेमा एवं अन्य माध्यम) जन स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर ऊंचा उठाने हेतु प्रसार कार्यक्रम जैसेभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 287 बैठक, गोष्ठी, प्रदर्शन, समूह चर्चा का आयोजन कर जनसमूह से सम्पर्क, स्थापन विचार-विमर्श एवं शिक्षित करना। 10
सुझाव। फल एवं खाद्य संरक्षण उद्योगों को सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधायें। 20
प्रयोगात्मक कार्य
दीर्घ प्रयोग- 1-सुखाकर- (1) डिहाईड्रेशन तथा डिहाईड्रेटर (ड्रायर) का ज्ञान। (2) प्रयोगशाला में विभिन्न फल एवं सब्जियों को सुखाना। (3) प्रयोगशाला में फल, सब्जी व अनाजों के चिप्स, पापड़, बड़ी, नूडल्स। (4) प्रयोगशाला में इडली, डोसा, ढोकला, पाउडर बनाना। 2-ताप द्वारा संरक्षण- (i) डिब्बाबन्दी (कैनिंग)-
(1) डिब्बा बन्द करने की मशीन (डिक्सी कैन सीमर) के विभिन्न भागों का ज्ञान। (2) प्रेशर कुकर (रिर्टार) की कार्य प्रणाली एवं सावधानी का विस्तृत ज्ञान। (3) प्रयोगशाला में मौसमी फलों की डिब्बाबन्दी। (4) प्रयोगशाला में मौसमी सब्जियों की डिब्बाबन्दी। (5) प्रयोगशाला में छेने के रसगुल्ले की डिब्बाबन्दी। (6) प्रयोगशाला में मीट (मांस), मछली, छोला, पोलाव एवं मसालेदार सब्जी की डिब्बाबन्दी। (7) प्रयोगाशाला में मटन, मशरूम की डिब्बाबन्दी। (8) प्रयोगशाला में मशरूम करी की डिब्बाबन्दी।
(ii) बाटलिंग-प्रयोगशाला में मटर, हरा चना और मक्का की बाटलिंग। 3-कट आउट रिपोर्ट- (1) प्रयोगशाला में उत्पादित जार एवं बोतल में संरक्षित पदार्थ की कट आउट रिपोर्ट। (2) प्रयोगशाला में डिब्बाबन्द पदार्थों की कट आउट रिपोर्ट, वैक्युम, प्रेशर, गेज, कैनटेस्टर, सीम परीक्षण। 4-विभिन्न डिब्बाबन्द पदार्थों का इन्क्यूवेटर द्वारा इन्क्यूवेशन एवं भण्डारण का ज्ञान। 5-उद्योगशाला अवशेष पदार्थों से योग्य पदार्थ निर्मित करना जैसे सिरका, जैम, टाफी, चटनी, नींबू प्रजाति के फलों के छिलकों से कैन्डी, सुगन्ध पाउडर बनाना।
लघु प्रयोग-एक- 1-अम्ल, क्षार के गुण तथा पी0एच0 मान का ज्ञान। 2-विभिन्न खाद्य पदार्थों से भण्डारण के समय में होने वाले परिवर्तन का प्रयोगात्मक ज्ञान। 3-पेक्टीन की मात्रा फल, सब्जियों से ज्ञात करने के लिये पेक्टीन परीक्षण का ज्ञान। 4-खाद्य पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त पदार्थों की अनुमानित मात्रा का ज्ञान। 5-खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा ज्ञात करना। 6-खाद्य पदार्थों में सल्फर डाई आक्साइड को ज्ञात करना। 7-खाद्य पदार्थों में चीनी की मात्रा ज्ञात करना। लघु प्रयोग-दो- (1) सूक्ष्म दर्शक यन्त्र का प्रयोग, उनके विभिन्न भागों का ज्ञान। (2) मिडिया को तैयार करना। (3) कल्चर मिडिया बनाना। (4) कल्चर स्थानान्तरण व इन्क्युबेट करना व जीवाणुओं की कालोनी बनाना, टमाटर के विभिन्न पदार्थों में फफूंदी और मोल्ड की संख्या ज्ञात करना, इनके लिये हीमोसाटेमीटर का प्रयोग।
(5) स्लाइड बनाने के तरीके (सामान्य रंगों का प्रयोग)। (6) प्रयोगशाला में खमीर (ईस्ट) फफूंदी तथा बैक्टीरिया में अन्तर का परीक्षण। (7) प्रयोगशाला में खमीर (ईस्ट) फफूंदी तथा बैक्टीरिया की स्लाइड बनाना। (8) स्थानीय उद्योगशाला का निरीक्षण एवं सामान्य ज्ञान। (9) स्थानीय प्रयोगशाला की योजनाओं का रेखाचित्र, गृह स्तर इकाई, काटेज स्तर इकाई, लघु स्तर इकाई, बृहद् स्तर इकाई।
(10) प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों, मशीनों की सूची व उनका मूल्य। (11) जनसंचार माध्यमों हेतु आलेख व विज्ञापन बनाना।
288 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा के लिये निर्धारित समय छः घन्टे प्रतिदिन (सम्पूर्ण परीक्षा दो दिनों में सम्पूर्ण होगी) (2) अधिकतम अंक 400 अंक (3) न्यूनतम उत्तीर्णांक 200 अंक (अ) वाह्य परीक्षा--200 अंक छः घन्टे प्रतिदिन-समय-परीक्षक समय विभाजन अपने स्तर से कर लें। परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायेंगे- प्रयोग नम्बर 1 दीर्घ प्रयोग 80 अंक प्रयोग नम्बर 2 लघु प्रयोग 40 अंक प्रयोग नम्बर 3 लघु प्रयोग 40 अंक मौखिकी (वाइवा) 40 अंक योग . . 200 अंक
(ब) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--200 अंक (1) सत्रीय कार्य (100 अंक) (क) विषय अध्यापक छात्र के पूरे सत्र में हुये मासिक, त्रैमासिक, छमाही तथा वार्षिक परीक्षाओं में छात्र को दक्षता के आधार पर अंक प्रदान करेंगे।
(ख) विषयाध्यापक छात्र के पूरे सत्र में उसके द्वारा तैयार किये
गये अभिलेख का मूल्यांकन करके अंक प्रदान करेगा।
(2) कार्य स्थल पर परीक्षण (100 अंक) विषयाध्यापक छात्र द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण काल में किये गये कार्य जैसे प्रयोगात्मक पुस्तिका, चार्ट तथा कम से कम दस उत्पाद पर अंक प्रदान करेंगे (जिसे वाह्य परीक्षक को भी परीक्षा के समय दिखाया जायेगा)।
फल एवं खाद्य संरक्षण में प्रयोग होने वाली मशीन, साज-सज्जा उपकरण की सूची क्रम-संख्या मशीन/उपकरण का नाम, विवरण मात्रा/संख्या अनुमानित मूल्य 1
2
3 4 रु0 1 काउन्टर बैलेन्स वाट सहित (10 कि0 क्षमता) 1 1,500.00 1 8,000.00 2 एल्यू0 टाप वर्किंग टेबुल (6´×2½´× 3½´) 3 हैण्ड कैन सीलर 1 20,000.00 4 क्राउन काकिंग मशीन, हैवी ड्यूटी (हैण्ड आपरेटेड) 1 1,500.00 1 15,000.00 5 विद्युत् चालित पल्पर (जूनियर मॉडल) 1 1,000.00 6 साधारण जूसर (टेबुल मॉडल) 1 3,000.00 7 कैनिंग रिटार्ट (01A2) डिब्बों वाला) 1 250.00 8 कैन टेस्टर/देय पम्प 9 कैन कटिंग मशीन 1 200.00 10 रिफ्रेक्टोमीटर (0-500, 50-850 रेंज का) 1 सेट (2 Nos.) 1,900.00 1 3,000.00 11 डीहाइड्रेटर 1 7,000.00 12 माइक्रोस्कोप 6 150.00 13 नींबू निचोड़, हिन्डालियम (Lime Squeezer) 1 200.00 14 ब्रिक्स हाइड्रोमीटर 1 100.00 15 जेल मीटर 16 थर्मामीटर, फारेनहाइट (जेली के लिये) 4 600.00 17 स्टे0 स्टील भगोने मय ढक्कन विभिन्न साइज 6 2,400.00 2 300.00 18 स्टे0 स्टील ग्रेटर 3 780.00 19 स्टे0 स्टील बेसिन 1 दर्जन 160.00 20 स्टे0 स्टील कांटे 6 240.00 21 स्टे0 स्टील परफोरेटेड स्पून 6 100.00 22 स्टे0 स्टील कटिंग चाकू 6 100.00 23 स्टे0 स्टील पीलिंग चाकू 6़6 250.00 24 स्टे0 स्टील पिटिंग/कोरिंग चाकू 1 350.00 25 स्टे0 स्टील पाइनएपिल कटिंग चाकूभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 289 290 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 प्रयोेगशाला में प्रयुक्त होने वाले रंग-रसायन- खाद्य रंग-रसायन, सुगन्ध तथा कार्क लाल रंग, सन्तरा, अमरन्थ या स्ट्राबेरी पीला रंग, नींबू (टारट्राजान, सनसेट यलो) हरा रंग, सेब हरा Bailliant Blue
Bush Boske Allen, India Ltd.
अनुमानित मूल्य रुपये (1) अमरन्थ, संतरा लाल, नींबू पीला, सेब हरा 4×100 ग्राम 192.00 1×500 ग्राम 200.00 पोटैशियम मेटा बाई सल्फाइट 1×500 ग्राम 148.00 सोडियम बेन्जोट 1×1 कि0 ग्राम 150.00 साइट्रिक एसिड 1×5 कि0 ग्राम 300.00 एसिटिक एसिड ग्लेसियन 144×5 ग्राम 200.00 क्राउन कार्क (च्टब् लाइनिंग) योग . . 1,190.00
सन्दर्भ पुस्तकें
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य रु0 1 फल-तरकारी परिरक्षण प्रौद्योगिकी एस0 सदाशिव
43.00
नायर एवं हरिश्चन्द्र
शर्मा
राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ, अकादमी द्वारा विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी
2 खाद्य संरक्षण, सिद्धान्त एवं विधियां बी0 आर0 वर्मा विश्वविद्यालय प्रकाशन, 50.00
वाराणसी (चौक)
3 खाद्य संरक्षण विज्ञान श्रीमती मधुबल स्वास्तिक प्रकाशन, आगरा 12.50
4 अचार, चटनी और मुरब्बा प्रकाशवती साधना पॉकेट बुक, दिल्ली, 10.00
वितरक विश्वविद्यालय प्रकाशन, 12.50
वाराणसी (प्रथम तथा द्वितीय
भाग)
5 जीव रसायन डा0 सन्त कुमार कुक्का पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, 8.50
मेरठ
6 जीव रसायन डा0 टी0 बी0 सिंह तदेव 25.00
7 व्यापारिक फल-सब्जी परिरक्षण (क्रूस) हिन्दी हिन्दी प्रचारक संस्थान (चौक), 20.00
रूपान्तर वाराणसी
8 आहार एवं पोषण विज्ञान ऊषा टण्डन तदेव 25.00
9 आहार एवं पोषण विज्ञान विमला वर्मा तदेव 25.00
10 फल परीक्षण सिद्धान्त एवं विधियां श्याम सुन्दर किताब महल, इलाहाबाद 50.00
श्रीवास्तव 1988
11 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी कृष्ण कान्त कोठारी रंजना प्रकाशन मन्दिर, 12/13 18.00
सुई कटरा, आगरा 1990
12 व्यावहारिक फल, सब्जी परिरक्षण पनेराम आर्य एवं अनुवाद एवं प्रकाशन निदेशालय, 24.00
डा0 पदम प्रकाश गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं 1988
रस्तोगी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,
पन्तनगर
13 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी एस0 सदाशिव विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक, 48.00
नायर वाराणसी 1988
14 फल तथा तरकारी परिरक्षण एस0 सदाशिव राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, 48.00
प्रौद्योगिकी नायर एवं डा0 जयपुर 1987
हरिशचन्द्र शर्मा
15 प्रिजर्वेशन आफ फ्रूट एण्ड गिरधारी लाल एण्ड इण्डियन काउन्सिल आफ 15.00
वेजेटेबुल जी0 एल0 टण्डन एग्रीकल्चर रिसर्च इन्स्टीट्यूट, 1988
नई दिल्ली
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 291
16 फल संरक्षण प्रौद्योगिकी एच0 सी0 गुप्ता एवं
डी0 के0 गुप्ता
18 Fruit Culture Instructronal-
cum-Practical Manual
N.C.E.R.T.,
New Delhi
N.C.E.R.T., New Delhi
,,
19 Fundamental of Fruit
सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 10.00 1988 17 फल संरक्षण एस0 एम0 भाटी बी0 के0 प्रकाशन, बड़ौत, मेरठ 10.00 1988 7.85 1988 8.45 1988 7.20 1988 7.82 1988 ,, 8.45 1988 Production Instruction-cum- Practical Manual
,,
20 Vegetable Crops Instruction- cum-Practical Manual
नेशनल बुक डिस्ट्रीब्यूटिंग कं0, चमन स्टूडियो बिल्डिंग, चारबाग, लखनऊ
21 Fruit Veg. Preservation Principal and Practicess
,, 7.20 1988 190.00 1988
Dr. R.P. Srivastava and Sri Sanjeev Kumar, Frazier M. C. Hills
22 Fruit Microbiology Frazier
M. C. Hills
(2) ट्रेड-पाक शास्त्र (कुकरी)
कक्षा-12
उद्देश्य- (1) भोजन से प्राप्त होने वाले पौष्टिक तत्वों का ज्ञान कराना। (2) मौसम, आवश्यकता, आय व मूल्य के आधार के अनुसार पौष्टिक भोजन बनाने की विधियों से अवगत कराना। (3) बाजार में आसानी से बिक सकने वाले व्यंजन बनाने की क्षमता उत्पन्न करना। (4) राष्ट्र के विभिन्न भागों में खाये जाने वाले व्यंजनों की जानकारी देना। (5) विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने की विधियों के आदान-प्रदान द्वारा राष्ट्रीय एकता की भावना जागृत करना। (6) खाद्य वस्तुओं के संदूषण होने के कारणों से अवगत कराना। (7) समय के रचनात्मक सदुपयोग का बोध कराना। रोजगार के अवसर- (1) शाकाहारी भोजनालय स्थापित किया जा सकता है। (2) मांसाहारी भोजनालय स्थापित किया जा सकता है। (3) किसी होटल में नौकरी की जा सकती है। (4) पाक शास्त्र के प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित कर उनका संचालन किया जा सकता है। (5) पाक शास्त्र से सम्बन्धित साहित्य तथा अद्यतन जानकारियां देने का सन्दर्भ केन्द्र स्थापित किया जा सकता है। (6) पाक शास्त्र से सम्बन्धित आधुनिक उपकरणों/संयंत्रों का बिक्रय केन्द्र स्थापित किया जा सकता है। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
292 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 वाह्य परीक्षा 200
नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान) 1-व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ- 20 विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षायें और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व, व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ।
समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों का समान भागीदारी से निर्णय लेने और स्त्रियों को शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर।
रोजगार ढूढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असंतुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान।
मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिये मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना।
2-स्वास्थ्यवर्धक भोजन की जानकारी- 20 भोजन के विभिन्न तत्व, उनकी आवश्यकता, प्राप्ति के स्रोत और कमी से होने वाले रोग।
जीवन के विभिन्न अवस्था में भोजन की आवश्यकता, प्रकार एवं मात्रा-शिशु, बालक, स्त्री, पुरुष, वृद्धावस्था, धात्री मां, रोगी, श्रमिक, किसान आदि।
3-आत्म निर्भर बनाकर व्यवसाय द्वारा किये जाने वाले स्वरोजगार या विभिन्न कार्य क्षेत्रों में संवैधानिक रोजगारों के अवसरों का ज्ञान- 20 अपने क्षेत्र में प्राप्त कच्ची वस्तुओं और उनके निर्मित पदार्थों जिसका अन्य स्थानों मेंं अधिक मूल्य आदि का ज्ञान।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
पाक शास्त्र(भाग-1)
10
10 10 (1) खाना बनाने की विधियां-उबालना, भूनना, तलना, भाप द्वारा बेकिंग, ग्रिलिंग, स्टूयूइंग, बेजिंग, पोच तथा मांस, मछली, सब्जी, अण्डे, चीज के सम्बन्ध में इनका विशेष प्रयोग (स्पेशल ऐप्लीकेशन)। 10 (2) तैयार पदार्थ की संरचना (स्ट्रक्चर आफ फूड)-फर्म व क्लोब, शीट व कम्बली, हल्का व समान स्पजो, पलेकी चिकना (स्मूथ)। (3) मीनू प्लानिंग-एक दिन की, एक सप्ताह, विभिन्न अवसरों के लिये जैसे सामूहिक मीनू पैक्ड लंच, कैन्टीन आदि के लिये। (4) रसोई की व्यवस्था-देशी शैली, विदेशी शैली। (5) दैनिक आहार (नाश्ता, लंच, डिनर)-विभिन्न अवस्थाओं के लिये भोजन जैसे शिशु, विद्यार्थी, वयस्क, वृद्ध, गर्भावस्था, रोगी।
10 (अ) भारतीय-खोये की बर्फी, मालपुआ, चने की दाल का हलुआ, मूंग की दाल का हलुआ, गुड़ व लड्डू, आटे का लड्डू, खोये का लड्डू, गुझिया, ब्रेड रोल, सेव, सैण्डविच, रोटी, सब्जी, खीर, सलाद, रायता, चटनी, पुलाव।
(6) पाश्चात्य-क्रीम आफ कार्न सूप, टोमैटो सूप, वेक्ड, वेजीटेबुल क्रीम्ड पोटेटो, स्पिनेंच सूपले, पाई डिसेज, रशियन सलाद।
10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 293
तृतीय प्रश्न-पत्र
पाक शास्त्र (भाग-2)
(1) ओडो या क्षुधावर्धक पदार्थ-सिंगल एवं एसीटेड सोडा, आडो डिसेज। 10 (2) ठण्डे सास-मियोनीज, हालेन्डेज तथा कम्पाउण्ड बटर्स। 10 10 (3) मेज की व्यवस्था तथा भोजन परोसना। (4) रसोई-जगह का चयन, निर्माण (कान्सट्रक्शन), संवातन (वेन्टीलेशन), प्रकाश की व्यवस्था, पानी निकास की व्यवस्था। 10 (5) खाद्य-पदार्थों का भण्डारण-
10 (अ) शुष्क भण्डारण। (ब) कोल्ड स्टोरेज। (स) फ्रोजेन फूड स्टोरेज (फूड कास्टिंग)।
(6) तैयार डिश का मूल्य निकालना।
10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(कमोडिटीज)
(1) वसा एवं तेल-प्रकार, कार्य पौष्टिक मूल्य (फैट्स ऐण्ड आयल) प्राप्ति व दोनों में अन्तर। 16 16 (2) मसाले (स्पाइस) गर्म एवं ठण्डे मसाले, महत्व। (3) शर्करा (सुगर)-विभिन्न अवस्थायें-चाशनी, विभिन्न तार की साफ्ट व हार्ड बाल, जैली चीनी (कैरेमल)। 08 (4) नमक-प्राप्ति, महत्व, लाभ व प्रयोग। 10 (5) गाढ़ापन देने वाले पदार्थ-प्याज, अरारोट, धनिया, नारियल, खसखस-प्रयोग व लाभ। 10
पंचम प्रश्न-पत्र
(पोषण एवं स्वास्थ्य विज्ञान)
(अ) न्यूट्रीशन
16 1-भोजन का पाचन और अवशोषण (Digestion and Absorbtion)। 2-विभिन्न बीमारियों में भोजन (डाइट)- जैसे-हृदय सम्बन्धी रोग (हार्ट डिजीजेस), मधुमेह(डाईबिटीज), अतिसार (डायरिया),रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) एवं पाचन सम्बन्धी अन्य विकार (स्टमक डिसआर्डर्स)।
16
(ब) हायजीन
10 08 (3) भोजन विषाक्तता (फूड प्वायजनिंग)-कारण, प्रकार, बचाव, लक्षण। (4) भोजन का रख-रखाव, भण्डारण-पकाने के दौरान एवं पश्चात्। (5) बर्तनों की धुलाई (डिश वाशिंग)- डिटर्जेन्ट, स्टील, शीशे, तामचीनी, लोहे, पीतल, एल्यूमिनियम, लकड़ी, मुरादाबादी इत्यादि।
10
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
1-भारतीय व्यंजन- (1) चावल बिरयानी, शाही पुलाव, बेजीटेबल पुलाव, तिरंगा पुलाव, कोकोनट यलो राइस, पी गुलाब मटर। (2) रोटी पूड़ी, कचौड़ी, भरवा पराठे, नान मुगलई, पराठा, रोटी आदि।
(3) सब्जी बेजीटेबल कोरमा, कोफ्ते, भरवा सब्जी, खोया, पनीर, विभिन्न प्रकार की रसेदार, सूखी सब्जी, भरता।
(4) रायता बूंदी, लौकी, खीर, टमाटर, पोदीना, आलू, बथुआ, ककड़ी, केला आदि। (5) सलाद सलाद काटना व सजाना। (6) पेय पदार्थ चाय, कोेल्ड व गर्म काफी, आम का पना, लस्सी, काकटेल। 2-पाश्चात्य व्यंजन- (1) सूप क्रीम आम टोमैटो सूप, मिक्स्ड वेजीटेबिल सूप, पालक का सूप, दाल (लेन्टिन) सूप। (2) पुडिंग ब्रेड बटर पुडिंग, बेक्ड कोकोनट पुडिंग, फ्रूट कस्टर्ड, फ्रूट क्रीम। (3) नूडिल्स चाऊमीन। 3-प्रान्तीय- (1) उत्तर भारतीय ढोकला। (2) दक्षिण भारतीय इडली, नारियल चटनी।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(अ)(1) परीक्षार्थियों द्वारा किये जाने वाले प्रयोग-
प्रयोग नं0 (अ) नाश्ते, लंच या डिनर के लिये 5 या 6 डिसेज का मीनू तैयार करना। प्रयोग नं0 (ब) विशेष अवसरों का मीनू जैसे जन्म-दिन पार्टी, त्योहार, विशेष अतिथि आदि (6 आइटम)।
294 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(2) परोसने की कला। (3) व्यंजन की प्रस्तुति व मेज की व्यवस्था। (4) मौखिक। (5) प्रयोगात्मक पुस्तिका। (ब) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन- (क) सत्रीय कार्य-
1-प्रोजेक्ट वर्क-रिपोर्ट और रिकार्ड्स। 2-कार्य-स्थल पर प्रशिक्षण।
छात्राओं को वर्ष के अन्त में एक विषय पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट जमा करना है जैसे-
1-सोयाबीन से बने पदार्थ। 2-पनीर से बने पदार्थ। 3-दाल से बने पदार्थ। 4-आलू से बने पदार्थ। 5-गेहूं, चने से बने पदार्थ आदि।
निर्देश- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घन्टे समय निर्धारित है। 2-प्रयोगात्मक परीक्षा उत्तीर्ण होने हेतु 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। 3-एक दिन में अधिक से अधिक 25 परीक्षार्थियों द्वारा ही परीक्षा सम्पन्न कराई जाय। संस्तुत पुस्तकें
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य रु0 1 भारतीय एवं पाश्चात्य पाक
हिन्दी प्रचारक संस्थान चौक, वाराणसी 100.00
सुश्री अनुपम चौहान
शास्त्र कला के सिद्धान्त एवं व्यंजन विधियां
2 आहार एवं पोषण विज्ञान श्रीमती ऊषा
25.00
टण्डन
स्वास्तिक प्रकाशन एवं पुस्तक विक्रेता, अस्पताल मार्ग, आगरा
3 पाक शास्त्र . . युनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 21.00 4 मार्डन कुकरी 1 एंण्ड 2 . . ,, 130.00 5 सुगम पाक विज्ञान . . भारत प्रकाशन मन्दिर, जामा मस्जिद, मेरठ 25.00
(3) टे्रड- परिधान रचना एवं सज्जा
कक्षा-12
उद्देश्य- (1) विभिन्न प्रकार के वस्त्रों को बाजार में उपलब्ध कराना। (2) विभिन्न आयु वर्गों हेतु वस्त्रों का चुनाव करना। (3) प्रचलित फैशन का विश्लेषण कर भविष्य के फैशन को बनाना। (4) विभिन्न प्रकार की डिजाइनों के कौशल का विकास करना।
(5) आधुनिक फैशनों के आधार पर विभिन्न प्रकार के आरामदायक, न्यूनतम कीमत, विभिन्न आयु वर्ग के लिये वस्त्रों को बनाना।
(6) छात्र-छात्राओं में विभिन्न प्रकार के निर्मित सुन्दर वस्त्रों के लिये प्रशंसा की भावना का विकास करना। (7) वस्त्र उद्योग में रोजगार प्राप्ति हेतु जागरूकता का विकास करना। (8) वस्त्र उद्योग हेतु स्वरोजगार एवं रोजगार सम्बन्धी जानकारी देना। (9) वस्त्र उद्योग के लिये आधुनिक उपकरणों से छात्रों को परिचित कराना। (10) समय, शक्ति और सामग्री का अधिकतम उपयोग करना। (11) छात्रों में टीम वर्क के लिये कार्य करने की आदतें और नैतिकता का विकास करना। रोजगार के अवसर- (1) परिधान रचना एवं सज्जा के किसी कारखाने/प्रतिष्ठान अथवा दुकान में रोजगार पा सकता है। (2) परिधान रचना एवं सज्जा के क्षेत्र में अद्यतन रेडीमेड वस्त्रों के निर्माण कार्य में स्वरोजगार प्रारम्भ कर सकता है। (3) होल सेल तथा रिटेल सेल का व्यवसाय चला सकता है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 295(4) परिधान रचना एवं सज्जा में निजी प्रशिक्षण केन्द्र चला सकता है। (5) परिधान रचना एवं सज्जा हेतु आवश्यक यंत्रों, उपकरणों एवं सामग्रियों की आपूर्ति करने का स्वरोजगार चला सकता है।
(6) परिधान रचना एवं सज्जा से सम्बन्धित यंत्रों/उपकरणों के मरम्मत हेतु वर्कशाप चला सकता है। (7) यूनिफार्म तैयार करने हेतु वर्कशाप स्थापित करना। (8) विभिन्न कुशल श्रमिकों को रोजगार दिलाना, जैसे ट्रेड डिजाइन, स्केजर, मशीन आपरेटर, फिनिश पैटर्न मेकर आदि। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा : पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 वाह्य परीक्षा 200
नोट-परीक्षार्थियों के प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
1-व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-
20 अंक विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ। समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी से निर्णय लेने और स्त्रियों को शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के अवसर।
रोजगार ढूढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असंतुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान।
मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिए मौलिक और भावनात्मक सुरक्षा की सुदृढ़ बनाना।
(2) स्वास्थ्यवर्धक भोजन की जानकारी- 20 अंक भोजन के विभिन्न तत्व, उनकी आवश्यकता, प्राप्ति के स्रोत और कमी से होने वाले रोग। जीवन के विभिन्न अवस्था में भोजन की आवश्यकता, प्रकार एवं मात्रा-शिशु, बालक, स्त्री, पुरुष, वृद्धावस्था, गर्भावस्था, धात्री मां, रोगी, श्रमिक, किसान आदि।
(3) आत्म निर्भर बनाकर व्यवसाय द्वारा किये जाने वाले स्वरोजगार या विभिन्न कार्य, क्षेत्रों में सवैतनिक रोजगारों के अवसरों का ज्ञान- 20 अंक अपने क्षेत्र में प्राप्त कच्ची वस्तु और उनसे निर्मित पदार्थों जिनका अन्य स्थानोें में अधिक मूल्य आदि का ज्ञान।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(तन्तुओं का ज्ञान)
(1) तन्तुओं का वर्गीकरण- 12 प्राकृतिक तन्तु-सूती, रेशमी, ऊनी।
(2)तन्तुओं पर विभिन्न तत्वों का प्रभाव-पानी, दूध, ताप(आग) तथा रासायनिक पदार्थ(क्षार, अम्ल)। 08 अंक (3) सिलाई योग्य वस्त्र, उनकी विशेषतायें, वस्त्र सिलने के पूर्व तैयारियां(श्रिंग करना, प्रेस करना आदि) 20 (4) सिलाई में काम आने वाली वस्तुओं का ज्ञान-इंचीटेप, गुनिया, मिल्टन, चाक, अंगुस्ताना तथा विभिन्न प्रकार की कैचियां आदि। 20 अंक296 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
तृतीय प्रश्न-पत्र
(सिलाई के सिद्धान्त)
(भाग-1)
(1) कुशल टेलर और कटर बनने के लिये योग्यतायें। 20 अंक (2) वस्त्र निर्माण के सिद्धान्त- 20 अंक (क) चेस्ट सिस्टम नाम द्वारा वस्त्र निर्माण। (ख) सीधे सिस्टम नाम द्वारा वस्त्र निर्माण।
(3) सामान्य कन्धा, झुका हुआ कन्धा, ऊंचा कन्धा, सामान्य तथा असामान्य व्यक्तियों की नापें, तोंदिल, कूबड़ 20 अंक शरीर वाले व्यक्ति आदि।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सिलाई के सिद्धान्त)
(भाग दो)
पंचम प्रश्न-पत्र
(परिधान रचना एवं सज्जा)
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप
(क)
(1) एप्रेन, बेबी तकिया, बेबी चादर, बेबी ब्लैंकेट एवं बिछाने की गद्दी। (2) कैरिंग बैग, बेबी बाटल कवर। नोट--उपरोक्त वस्त्रों को काट कर सिलना एवं सिले वस्त्रों की सज्जा करना।
(ख)
शिशुओं के प्रयोग में आने वाले वस्त्र--
(1) झबला, शमीज। (2) बेबी फ्राक। (3) टोपी, मोजा (बुटीज)। नोट--उपरोक्त वस्तुओं के रेखाचित्र बनाना, काटकर सिलना एवं सिले वस्त्रों की सज्जा करना।
(ग)
बालक एवं बालिकाओं के वस्त्र--
(1) स्कर्ट टाप। (2) सलवार, कुर्ता। (3) चूड़ीदार पैजामा। (4) बंगला कुर्ता (बालक एवं बालिकाओं हेतु)। नोट--उपरोक्त वस्त्रों का रेखाचित्र बनाना, वस्त्र काटना, सिलना एवं सज्जा करना।
(घ)
महिलाओं के वस्त्र--
(1) ब्लाउज (2) पेटीकोट (3) नाइटी नोट--उपरोक्त परिधानों का रेखाचित्र बनाना, काटना एवं सिलाई के साथ सिले वस्त्रों की सज्जा करना। टिप्पणी--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 297प्रयोगात्मक परीक्षा का स्वरूप
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा--
(1) वाह्य परीक्षा :
परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायं :
प्रयोग नं0 1 (बड़ा प्रयोग)। प्रयोग नं0 2 (बड़ा प्रयोग)। प्रयोग नं0 3 (छोटा प्रयोग)। प्रयोग नं0 4 (छोटा प्रयोग)।
(2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--
(क) सत्रीय कार्य (सिले परिधान एवं रिकाड्र्स)। (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3 4 5
रुपया
1 परिधान रचना एवं सज्जा श्रीमती इन्द्रजीत कौर विन्द्रा स्वास्तिक प्रकाशन एवं पुस्तक विक्रेता, 30.00
अस्पताल मार्ग, आगरा
2 परिधान रचना एवं सज्जा श्रीमती इन्द्रजीत कौर विन्द्रा भारत प्रकाशन मन्दिर, मेरठ 18.00
3 प्रौद्योगिक गृह विज्ञान डा0 प्रमिला वर्मा एवं हिन्दी प्रचारक संस्थान, चौक, वाराणसी 70.00
डा0 कान्ति पाण्डेय
4 स्पीडली होम ऐण्ड -- यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 40.00
कामर्शियल टेलरिंग कोर्स
5 कटिंग ऐण्ड टेलरिंग पार्ट -- तदेव 30.25
(1)
(4) टे्रड-धुलाई तथा रंगाई
उद्देश्य--
(1) धुलाई एवं रंगाई को व्यावसायिक शिक्षा के प्रति रुचि, आत्मविश्वास एवं अवस्था उत्पन्न करके स्वयं अर्जन करने की क्षमता उत्पन्न करना।
(2) विभिन्न प्रकार के तन्तुओं की विशेषतायें, बनावट, बुनाई की जानकारी देते हुये वस्त्रों की धुलाई एवं रंगाई तथा सुरक्षा का पर्याप्त ज्ञान देना।
(3) धुलाई एवं रंगाई से आधुनिक उपकरणों के प्रयोग द्वारा समय, श्रम एवं धन की बचत का ज्ञान देना। (4) विभिन्न आयु, वर्ग एवं आयु के आधार पर वस्त्रों तथा रंगों के चयन का ज्ञान देना। (5) बाजार से सम्पर्क स्थापित करने का कौशल एवं आधुनिकीकरण का ज्ञान कराकर निर्मित वस्तुओं का उचित वितरण करने का ज्ञान देना। रोजगार के अवसर-- (1) ड्राई क्लीनर्स केन्द्र स्थापित किये जा सकते हैं। (2) धुलाई तथा रंगाई प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये जा सकते हैं। (3) रंगसाज स्वतः रोजगार कर सकता है। (4) किसी कारखाने/प्रतिष्ठान अथवा दुकान में काम कर सकता है। (5) धुलाई तथा रंगाई हेतु आवश्यक यन्त्रों, छपाई, उपकरणों, विभिन्न प्रकार के रंगों एवं सामग्रियों की आपूर्ति करने का स्व-रोजगार चला सकता है।
38 ङ298 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
(1) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-- 20 विकासशील भारत की आवश्यकताओं, आंकाक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज व देश को लाभ।
समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी से निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर।
रोजगार ढूंढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृ़द्धि का ज्ञान। मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिये मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना। (2) स्वास्थ्यवर्धक भोजन की जानकारी-- 20 भोजन के विभिन्न तत्व, उनकी आवश्यकता, प्राप्ति के स्रोत और कमी से होने वाले रोग। जीवन के विभिन्न अवस्था में भोजन की आवश्यकता, प्रकार एवं मात्रा--शिशु, बालक, स्त्री, पुरुष, वृद्धावस्था, गर्भावस्था, धात्री मां, रोगी, श्रमिक, किसान आदि। (3) आत्म निर्भर बनाकर व्यवसाय द्वारा किये जाने वाले स्वरोजगार या विभिन्न कार्य क्षेत्रों में सवैतनिक रोजगार के अवसरों का ज्ञान-- 20 अपने क्षेत्र में प्राप्त कच्ची वस्तुओं और उनसे निर्मित पदार्थों, जिनका अन्य स्थानों में मूल्य आदि का ज्ञान।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(वस्त्र निर्माण एवं तन्तु)
(1) विभिन्न धागों का ज्ञान--सूती, रेशमी, ऊनी, कृत्रिम। (2) विभिन्न कपड़ों का ज्ञान--सूती, रेशमी, ऊनी, कृत्रिम। (3) विभिन्न डाई (रंग) का विभिन्न कपड़े हेतु आवश्यकता। (4) वस्त्र रसायन और तन्तु विज्ञान का सामान्य ज्ञान। (5) कपड़ें की फिनिशिंग करना--
12 12 16 10 10 माइनिंग, स्टे्रचिंग, ब्लीचिंग, चरक।
10
तृतीय प्रश्न-पत्र (धुलाई तकनीक) (1) विभिन्न प्रकार के वस्त्रों की साधारण धुलाई के नियम-- (क) सूती--रंगीन एवं सफेद (कच्चे एवं पक्के रंग)। (ख) रेशमी--सफेद एवं रंगीन (कच्चे एवं पक्के रंग)। (ग) ऊनी--सफेद एवं रंगीन (कच्चे एवं पक्के रंग)। (घ) कृत्रिम--सफेद एवं रंगीन (कच्चे एवं पक्के रंग)।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 29908 06 10 06 (2) सूखी धुलाई तकनीक, उपकरण। (3) सूखी धुलाई में काम आने वाले पम्प एवं मशीन। (4) सूखी धुलाई द्वारा वस्त्रों को तैयार करना। (5) विभिन्न प्रकार के क्लफ-- आरारोट, साबूदाना, मैदा, चावल, आलू, गोंद, चरक। 08 (6) नील तैयार करना एवं लगाना तथा इस्त्री करना। (7) विभिन्न प्रकार के धब्बे मिटाना-- 06 चाय, काफी, चाकलेट, घास, हल्दी, जैक, रक्त, मशीन का तेल, कालिख, स्याही, पेन्ट, पान, अण्डा। (8) जर्बिल वाटर, आक्जेलिक एसिड, चोकर का पानी, सोप जैली, सर्फ तथा साबुन बनाना। 06
चतुर्थ प्रश्न-पत्र (रंगाई तकनीक) (1) विभिन्न प्रकार के रंग का अध्ययन एवं रंगों का कपड़ों पर प्रभाव और रंगों का स्थायित्व। 20 (क) न्यू डल डाइस (रंग)। (ख) एसिड डाइस (रंग)। (ग) प्रारम्भिक और डायरेक्ट (रंग)। (घ) बाट डाइस (रंग)। (ङ) रिपेटिव डाइस (रंग)। (च) नेप्थान डाइस (रंग)। (छ) माडेन्ड डाइस (रंग)। (ज) मिनिरल डाइस (रंग)।
(2) सूती कपड़े के रंग और रंगने की विभिन्न तकनीक। 08 (3) रेशमी कपड़े का रंग और रंगने की तकनीक। 08 (4) ऊनी कपड़े के रंग और रंगने की तकनीक। 08 (5) सिन्थैटिक कपड़े के रंग और रंगने की तकनीक। 08 (6) रंगाई के बाद कपड़े की फिनिशिंग। 08
पंचम प्रश्न-पत्र
(धुलाई-रंगाई का प्रबन्ध)
(1) उद्योग और समाज। 12 (2) रंगाई-धुलाई इकाई की रूप-रेखा बनाने का ज्ञान। 12 (3) रंगाई-धुलाई इकाई में शेड कार्ड का स्थान। 12 (4) रंगाई-धुलाई द्वारा छोटे रोजगार। 12 (5) रंगाई-धुलाई इकाई को सफल बनाने हेतु मुख्य आवश्यक सुझाव। 12
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप
(क)
(1) उपर्युक्त तन्तु और धागे के संग्रह का कलात्मक शैली में फाइल बनाना। (2) विभिन्न प्रकार के वस्त्र एवं शेड कार्ड को संग्रहीत करके प्रोजेक्ट कार्य करना।
(ख)
(1) नील लगाना, कलफ लगाना, साबुन बनाना, सोप-जैली, आक्जेलिक एसिड, जैविल वाटर तैयार करना। (2) विभिन्न प्रकार के रफू और मरम्मत करना। (3) कच्चे रंग और पक्के रंग को धोने की तकनीक। (4) सूखी धुलाई--
बनारसी व जरी वाले कपड़े, रेशमी और कढ़े एवं बने हुये कपड़े, ऊनी कोट, कम्बल, दरी, कालीन, शाल, स्वेटर। (5) दाग छुड़ाना एवं चरक चढ़ाना एवं तह लगाना। (6) दाग--चाय, काफी, हल्दी, जंक, रक्त, मशीन का तेल, कालिख/स्याही, पेन्ट, अण्डा, पान, इत्यादि।
(ग)
(1) विभिन्न कपड़ों को रंगना--
(क) सूती--
मारकीन, वायल, (मलमल), केम्ब्रिक, खादी, वाशिंग शीट, पापलीन, रूबिया।
300 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(ख) रेशमी--
रेशमी धागे, साटन, शुद्ध रेशम के कपड़े।
(ग) ऊनी--
शुद्ध ऊन, नायलान, कैश्मिलान।
(घ) कृत्रिम वस्त्र--
टेरीकाट, टेरी रूबिया, नायलोन, पालिएस्टर, कृत्रिम रेशम (प्रत्येक डाइस में छात्राओं को स्वयं सामग्री बनानी है)। (2) विभिन्न शेड कार्ड (कैटलाग) का निर्माण--
(क) काटन शेड कार्ड। (ख) सिल्क शेड कार्ड। (ग) कृत्रिम शेड कार्ड।
(प्रत्येक शेड कार्ड में हल्के रंगों के दस टोन्स और गहरे रंग के दस टोन्स तैयार करें।) (घ)
(1) रंगाई-धुलाई की विभिन्न इकाइयों में भ्रमण करना एवं उस पर प्रोजेक्ट कार्य दिखाना। (2) क्राफ्ट शिल्प द्वारा रंगाई-धुलाई इकाई का प्रदर्शन। प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा-- 1--वाह्य परीक्षण--
परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायेंगे--
(1) धुलाई (बड़ा प्रयोग), (2) रंगाई (बड़ा प्रयोग), (3) वस्त्र निर्माण एवं तन्तु, (4) रंगाई-धुलाई इकाई का प्रबन्ध, (5) मौखिक।
2--सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--
(क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण। नोट--(1) प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
(2) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घण्टे का समय निर्धारित है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम तथा पता मूल्य
1 2 3
4 5 रुपया 55.00 1 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान प्रमिला वर्मा प्रकाशक-बिहार हिन्दी गं्रथी अकादमी, पटना, वितरक विश्वविद्यालय, प्रकाशन
2 वस्त्र विज्ञान एवं धुलाई
40.00 कार्य
25.00
श्री आनन्द शर्मा रिसर्च पब्लिकेशन्स, जयपुर--2, वितरक--विश्वविद्यालय, प्रकाशन 3 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान नीरजा यादव साहित्य प्रकाशन, आगरा, वितरक--विश्वविद्यालय, प्रकाशन 4 वस्त्र विज्ञान की रूपरेखा श्रीमती लोकेश्वरी शर्मा स्वास्तिक प्रकाशन, अस्पताल 15.00
मार्ग, आगरा--3
5 वस्त्र धुलाई विज्ञान श्रीमती लोकेश्वरी शर्मा यूनिवर्सल बुक सेलर, हजरतगंज, 33.00
लखनऊ
(5) टे्रड--बेकिंग तथा कन्फेक्शनरी
कक्षा-12
उद्देश्य--
(1) बोध कराना कि सामान्यतः नाश्ते में प्रयोग किये जाने वाले बिस्कुट तथा केक आदि सरलता से कुटीर उद्योग स्थापित कर घर पर ही बनाये जा सकते हैं।
(2) कम पूंजी में बेकिंग, कन्फेक्शनरी उद्योग स्थापित करने के कौशल का विकास करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 301(3) बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पावरोटी आदि बनाने का कौशल विकसित करना।
(4) जानकारी देना कि बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग ऐसे उत्तम खाद्य पदार्थ का निर्माण करता है जो सामन्य परिस्थितियों में ब्रेकफास्ट के रूप में प्रयुक्त होता ही है, प्राकृतिक आपदाओं के समय तैयार लंच पैकेट्स के रूप में भी उपलब्ध कराया जाता है। (5) जानकारी देना कि उचित ढंग से तैयार किया गया बिस्कुट यदि सही ढंग से पैकिंग कर सीलनयुक्त स्थान पर सुरक्षित किया जाय तो वह पर्याप्त समय तक खाने योग्य रह सकता है।
रोजगार के अवसर--
(1) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग में नौकरी मिल सकती है। (2) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग का कुटीर उद्योग स्थापित कर स्वरोजगार किया जा सकता है। (3) बेकिंग कन्फेक्शनरी हेतु कच्चे माल के क्रय-विक्रय का धन्धा चलाया जा सकता है। (4) बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, पावरोटी आदि का होलसेल रिटेल सेल का व्यवसाय चलाया जा सकता है। (5) बेकिंग कन्फेक्शनरी उद्योग का प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया जा सकता है।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
(1) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ-- 20 विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षायें और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व। व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ।
समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी के निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर। रोजगार ढूढ़ने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान। मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिए मौलिक और भावनात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना।
(2) स्वास्थ्य वर्धक भोजन की जानकारी-- 20 भोजन से विभिन्न तत्व, उनकी आवश्यकता, प्राप्ति के स्रोत और कमी से होने वाले रोग। जीवन के विभिन्न अवस्था में भोजन की आवश्यकता, प्रकार एवं मात्रा, शिशु, बालक, स्त्री, पुरुष, वृद्धावस्था, गर्भावस्था, धात्री माँ, रोगी, श्रमिक, किसान आदि।
(3) आत्मनिर्भर बनाकर व्यवसाय द्वारा किये जाने वाले स्वरोजगार या विभिन्न कार्य क्षेत्रों में सार्वजनिक रोजगारों के अवसरों का ज्ञान। अपने क्षेत्र में प्राप्त कच्ची वस्तुओं और उनसे निर्मित पदार्थों जिसका अन्य स्थानों में अधिक मूल्य आदि का ज्ञान। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(प्रारम्भिक बेकिंग)
(1) खाद्यान्न--गेहूँ की सरंचना--गेहूँ उत्पादक मुख्य देश--गेहूँ के विशिष्ट गुण। 12 (2) पीसना (मिलिंग)--पीसने की विविध प्रक्रिया का विस्तृत विवरण--रोलर मिक्स व स्टोन मिल्स की क्रियात्मक विशेषतायें। 12302 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 (3) ब्रेड बनाने की विविध विधियां-- 12 [1] स्टेडी विधि, [2] साल्ट डिजाइन विधि, [3] नो टाइम विधि। [4] स्पंज की विधि,
(4) बे्रेड बनाने की प्रक्रियायें-- 24 [1] फुलाई फारमेट, [2] मिक्सिंग, [3] मोडिंल, नीडिंग, [4] प्रथम फारमेनेरेशन, [5] पंचिंग। [6] डिवाइडिंग एण्ड राउडिंग, [7] इण्टरमीडिएट प्रूफ, [8] मोल्ंिडग एवं पैनिंग, [9] प्रूफिंग, [10] बेकिंग, [11] कूलिंग, [12] स्लाइसिंग, [13] रैपिंग
तृतीय प्रश्न-पत्र (बेकिंग विज्ञान) (1) पदार्थों की विशिष्टता मापदण्ड-खमीरयुक्त डबलरोटी में पदार्थ की उत्तमता की वृद्धि में सहायक पदार्थ वसा, शक्कर, साल्ट, अण्डा, सोयाफ्लेर, ग्लाईसी, रोज, मोनोस्टेरियेट (जी0 एम0 एम0) का प्रयोग विभिन्न (ए0पी0पी0) मिश्रण। 10 (2) ब्रेड का बासीपन। 10 (3) ब्रेड में लगने वाली बीमारी, रोग और मोल्ड और इसके निवारण के उपाय। 10 (4) कच्चे माल का बेकरी में प्रयोग और उसका भण्डारण। 10 (5) बेकरी ले आउट। 10 (6) बेकरी एकाउण्ट्स जनरल। 10 चतुर्थ प्रश्न-पत्र (पोषण विज्ञान)
(1) विटामिन--(जल में घुलनशील)--
16 विटामिन की महत्ता, वर्गीकरण, उपयोगिता, स्रोत, दैनिक आवश्यकता। विटामिन वसा में घुलनशील।
(2) जल--जल का संगठन, जल का वर्गीकरण, जल का कार्य, शरीर में जल का संतुलन, दैनिक आवश्यकता।
14 (3) खनिज लवण--मानव शरीर की रचना में खनिज लवण के कार्य, खनिज लवण की प्राप्ति के साधन, दैनिक आवश्यकता। 16 (4) व्यक्तिगत स्वच्छता-बीमारियां। उनके लक्षण तथा स्वास्थ्यवर्धक भोजन। 14 पंचम प्रश्न-पत्र (फ्लोर कन्फेक्शनरी विज्ञान)
(1) कन्फैक्शनरी चीनी का प्रयोग। (2) वसा एवं तेल (फैट एवं आयल)। (3) पेस्ट्री बनाने के भिन्न-भिन्न प्रकार। (4) रेस्पो बैलेन्स। (5) चिकनाई (शार्टनिंग) का प्रयोग। (6) कोको एवं चाकलेट। (7) केक के चारित्रिक गुण ज्ञात करना। (8) केक के दोष और उनको दूर करने की विधियां।
8 8 8 8 7 7 7 7भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 303
प्रयोगात्मक--पाठ्यक्रम
(क)
(1) मिल्क ब्रेड। (2) राक्षजिनिंग ब्रेड। (3) लन्च रोल्स। (4) बेसिक बन्स डी। (5) सेवरिन डी। (6) क्रेक फास्ट रोल। (7) हाट क्रास बन्स। (8) फ्रूट बन्स।
(ख)
(2) मफिन्स
(1) किशन्ट रोल्ड (3) किशन्ट एवं वाटर रोल्स (4) केसर रोल्स (5) एच रोल्स (7) विजा (9) डेनिस पेस्टीहन्स
(6) रिफ्स्टेड रोल्स (8) फ्रूट ब्रेड (10) बलका (11) फीजन डी प्रोडक्ट
(ग)
(1) शार्टकस्ट पेस्ट्री--जैम वर्ड लेमन कस्टर्ड, अमेरिकन वालटन पाई। (2) बिस्किट्स--चाकलेट मार्शल कुकीज, कोकोनट, कुकीज, जीरा बिस्किट काजू, बिस्किट मेल्टिंग मोमोन्टेंस। (3) आइसिंग--बटर आइसिंग, ग्लास आइसिंग, रोयल आइसिंग, चाकलेट आइसिंग, फान्डेन्ट आइसिंग, अमेरिकन कास्टिंग मासमेली।
(घ)
(1) फैंसी केक्स--रोज बास्केट, मैनेस्वय बास्केट बट फ्लाई, दीवार घड़ी रैबिट। (2) श्यू पेस्ट--चाकलेट, एकलेयर्स, प्रोफिट रोल शुचियड। (3) बिस्किट कुकीज--टाइनर--बिस्किट, पाइपिंग बिस्किट, नान खटाई, पनीर बिस्किट, आलमाण्ड बिस्किट, ड्राई कलर बिस्किट, कोकोनेट मैकोन्स।
नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा--
परीक्षार्थी को चार प्रयोग दिये जायें--
प्रयोग--1 (बड़ा प्रयोग)--बेकरी (ईस्ट प्रोडक्ट) प्रयोग--2 (बड़ा प्रयोग)--केक आइसिंग के साथ प्रयोग--3 (छोटा प्रयोग)--बिस्किट बनाना प्रयोग--4 (छोटा प्रयोग) केक बनाना (5) मौखिक।
2--सतत् मूल्यांकन-- (क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
सुश्री अतिउत्तमा चौहान विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक,
4 5 रुपया 1 टुडे कन्फेक्शनरी इण्डस्ट्रीज युनिवर्सल बुक सेन्टर, लखनऊ 30.00 2 दी सुगम बुक आफ बेकिंग तदेव 20.00 3 किचन गाइड तदेव 70.00 4 बेकिंग तथा कन्फेक्शनरी सिद्धान्त एवं विधियां
वाराणसी304 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(6) टे्रड-टेक्सटाइल डिजाइन
कक्षा-12
उद्देश्य-- (1) विद्यार्थियों को टेक्साटाइल डिजाइन से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी देना। (2) विद्यार्थियों को बुनने, रंगने और छापने की विधियों व तरीकों से अवगत कराना। (3) शासकीय और अशासकीय टेक्सटाइल डिजाइन उद्योग से सम्बन्धित पदों हेतु कुशल कर्मकारों का निर्माण करना। (4) इस उद्योग के द्वारा विद्यार्थियों को खेल-खेल में कार्य सिखाना एवं कार्य के प्रति एकाग्रता उत्पन्न करना। (5) व्यावसायिक कोर्स पूरा करने के बाद विद्यार्थी इस योग्य हो जायें कि वह स्वतः रोजगार स्थापित कर सकें। (6) विद्यार्थियों का विषय क्षेत्र में इस योग्य बनाना कि उसमें अपने ज्ञान, कौशल, अनुभव के आधार पर किसी विषय या विभिन्न रोजगारों को स्वतः संचालित करने की क्षमता का विकास हो सके। रोजगार के अवसर--
(1) टेक्सटाइल डिजाइन की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् छात्र कताई-बुनाई, रंगाई व छपाई से सम्बन्धित लघु उद्योग धन्धें भी स्थापित कर सकता है।
(2) स्वतः उत्पादित वस्तुओं की पूर्ति कर सकता है। (3) इस लघु उद्योग के द्वारा बेरोजगार लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकता है। (4) व्यावसायिक शिक्षा हेतु प्रशिक्षित शिक्षकों को उपलब्धि हो सकती है। (5) उपभोक्ता की रुचि के अनुसार नये डिजाइन तैयार कर सकता है।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(गृह विज्ञान का सामान्य ज्ञान)
(1) व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता एवं लाभ--
20 --विकासशील भारत की आवश्यकतायें, आकांक्षायें और अपेक्षाओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक शिक्षा का स्थान। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा का महत्व।
--व्यावसायिक शिक्षा से छात्र, समाज एवं देश को लाभ। --समाज के गुणात्मक सुधार को सुनिश्चित करने हेतु पुरुष और स्त्री दोनों समान भागीदारी के निर्णय लेने और स्त्रियों की शिक्षा और आर्थिक स्वतन्त्रता के अवसर। रोजगार ढूंढने वाले और रोजगार के अवसरों के बीच असन्तुलन उत्पन्न करती जनसंख्या वृद्धि का ज्ञान।
--मानव मूल्य के साथ-साथ परिवार की खुशी और समाज कल्याण हेतु भविष्य के लिए मौलिक और भावात्मक सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना।
(2) स्वास्थ्य वर्धक भोजन की जानकारी-- 20 --भोजन के विभिन्न तत्व, उनकी आवश्यकता, प्राप्ति के स्रोत और कमी से होने वाले रोग।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 305--जीवन के विभिन्न अवस्था में भोजन की आवश्यकता, प्रकार एवं मात्रा, शिशु, बालक, स्त्री, पुरुष, वृद्धावस्था, गर्भावस्था, धात्री माँ, रोगी, श्रमिक, किसान आदि। (3) आत्मनिर्भर बनाकर व्यवसाय द्वारा किये जाने वाले स्वरोजगार या विभिन्न कार्य क्षेत्रों में सार्वजनिक रोजगारों के अवसरों का ज्ञान। 20 अपने क्षेत्र में प्राप्त कच्ची वस्तुओं और उनसे निर्मित पदार्थों जिसका अन्य स्थानों में अधिक मूल्य का ज्ञान।
(द्वितीय प्रश्न-पत्र)
(टेक्सटाइल डिजाइन)
(प्रारम्भिक डिजाइन)
10 (1) विभिन्न प्रकार के डिजाइनों का विश्लेषण। (2) परिप्रेक्ष्य के सिद्धान्त एवं वर्गीकरण। 10 (3) प्रारम्भिक टेक्सटाइल डिजाइन--उत्पत्ति एवं विभिन्न प्रकार की छपाई एवं बुनाई। 10 (4) विभिन्न प्रान्तीय डिजाइनों का अध्ययन--कढ़ाई, छपाई एवं बुनाई। 20 (5) विभिन्न प्रकार के प्लेसमेन्ट और उनका प्रयोग।
10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(वस्त्रों के रेशे व कपड़ा निर्माण)
(1) विभिन्न प्रकार की प्रिटिंग की विधि :
10 साधारण प्रिटिंग, डिस्चार्ज प्रिटिंग (आक्सीकरण व रेडक्शन द्वारा), रोलर, प्रिटिंग (चूनी और मल्टी रोलर) विधि--लाभ-हानि, स्क्रीन प्रिटिंग विधि एनामल (फोटो ग्राफिक), विभिन्न प्रकार के ब्लाक एवं सामग्री।
(2) डाई का वर्गीकरण--डायरेक्ट, बेसिक सल्फर, वैट, डाईज एैक्टर, डिस्पर्स, नेपथाल/क्रीम डेक्लब्ध डायरेक्ट डाईरिपमेन्ट।
(3) विभिन्न डाई की विभिन्न कपड़ों हेतु उपयोगिता। (4) थिकनिम एजेन्ट्स के बारे में सामान्य ज्ञान। (5) टेक्सटाइल रसायन और फाइबर सांइस का प्रारम्भिक ज्ञान। (6) रंग फेड (फीका) होने के कारण।
10 10 10 10 10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल क्राफ्ट)
10 10 (1) बुनाई का उपकरण। (2) विभिन्न राज्यों की कढ़ाई का अध्ययन। (3) छपाई का इतिहास एवं उत्पत्ति--बांधनी, ब्लाक वाटिका, स्क्रीन, हैण्ड पेन्टिंग, छपाई का महत्व, छपाई की विधियों के गुण व दोष।
15 (4) बुनाई--विभिन्न प्रकार के धागों का विस्तार से वर्णन। सब्जियों द्वारा, पशु द्वारा, खनिज द्वारा 15 कृत्रिम विभिन्न धागों की जांच करना। धागे--धागे सिंगिल, यार्न, प्लाई, फैन्सी यार्न। टेबुल लूम और पेडल लूम की विशेषतायें। विभिन्न प्रारम्भिक बुनाई ग्राफ पेपर पर बनायें।
(5) कपड़ा निर्माण का विस्तृत वर्णन।
10
पंचम प्रश्न-पत्र
(वस्त्र निर्माण इकाई का प्रबन्ध--नौकरी प्रशिक्षण)
(1) छात्रों का रोजगार के स्थान पर प्रशिक्षण। (2) वस्त्र निर्माण इकाई का बजट निर्माण। (3) वस्त्र निर्माण इकाई की योजना बनाना। (4) विभिन्न प्रकार की इकाई का प्रभाव एवं रिपोर्ट।
15 15 15 15
39 ङ306 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(प्रयोगात्मक क्रिया-कलाप)
(क)
(1) काटन, सिल्क, ऊन की उपयुक्त डाई से रंगाई, वस्त्रों का चयन, सूती, दुपट्टा सिल्क स्कार्फ, ऊनी स्वेटर या कोट। (2) सेम्पल फाइल। (3) रोलर प्रिन्टिंग करने वाली फैक्ट्री में शैक्षिक भ्रमण।
(ख)
(1) डिजाइनों का निर्माण (छपाई)--
(क) लंचेन सेट, (ख) टावेल सेट, (ग) एप्रन, (घ) सोफे और पर्दे (पेपर वर्क)।
विषयः फूल-पत्तियां, ज्योमितीय फल और सब्जी, अमूर्त। टेक्सचर--पशु-पक्षी, पतंग और गुब्बारे, खिलौने, अक्षर का संयोजन, हाथ की लिखाई, संगीत के उपकरण, नाव और जहाज, धारियां और चेक, समुद्री वृक्ष, शेल और मछलियां। विधि--स्टेन्सिल, स्प्रे, डबिंग, हैण्ड प्रिन्टिंग, ब्लाक प्रिन्टिंग, स्क्रीन प्रिन्टिंग। (2) बुनाई--उपयुक्त डिजाइन का निर्माण बुनाई के लिये करें।
(ग)
(1) करघे का प्रयोग। (2) प्रारम्भिक बुनाई को ब्लेज कागज पर बनायें--प्लेन, ट्रिल, साटन। (3) तीन प्रारम्भिक बुनाई द्वारा कपड़े का नमूना तैयार करना। (4) (अ) कपड़े की छपाई (प्रत्येक की पांच रफ डिजाइन)।
विषय--पुष्प (पर्दे के लिये), विधि--स्क्रीन प्रिन्टिंग, कपड़ा--काटन-साटन, रंग--दो या तीन, स्थान--आल ओवर।
(ब) विषय--सेण्टर लाइन (टेबुल क्लाथ),
रंग कपड़ा--केसमेन्ट, रंग--दो (आउट लाइन सहित), विधि--ब्लाक प्रिन्टिंग।
(स) विषय--ज्यामिति डिजाइन परिधान के लिये
कपड़ा--सूती (फाइन खादी), रंग--एक रंगीय, प्लेसमेन्ट--हाफ ड्राप, विधि--पेपर कट स्क्रीन।
(द) विभिन्न राज्यों की कढ़ाई।
(घ)
(1) टेक्सटाइल इण्डस्ट्री छोटी-बड़ी बुनाई, ड्राइंग, प्रिन्टिंग, स्पिनिंग, उद्योग स्थानों का भ्रमण। (2) इण्डस्ट्रीज की प्रोजेक्ट रिपोर्ट (प्रत्येक छात्र को बनाना है)। (3) वर्क पोर्ट फोलियो को बनाना और दिखाना, बुनाइ्र एवं करघे के लिये। नोट--(1) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
(2) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु 10 घंटे का समय निर्धारित है।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
(1) वाह्य परीक्षा--
परीक्षार्थियों को चार प्रयोग दिये जायेगेंं-- (क) प्रारम्भिक डिजाइन (बड़ा प्रयोग)। (ख) टेक्सटाइल क्राफ्ट (बड़ा प्रयोग)। (ग) वस्त्रों के रेशे व कपड़ों का निर्माण। (घ) वस्त्र निर्माण, इकाई का प्रबन्ध (छोटा प्रयोग)।
2--सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--
(क) सत्रीय कार्य, (ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 307संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
1 वस्त्र विज्ञान के मूल
4 5 रुपया जे0 पी0 शेरी विनोद पुस्तक मन्दिर, आगरा 20.00 सिद्धान्त
2 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान प्रो0 प्रमिला वर्मा युनिवर्सल बुक डिपो, लखनऊ 20.00 (तृतीय संस्करण)
3 हाउस होल्ड टैक्सटाइल दुर्गादत्त बुक कम्पनी, नई दिल्ली 75.00 27.00 4 भारतीय कसीदाकारी श्रीमती शिन्दे एवं कु0 पंडित प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द वल्लभ पंत, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, नैनीताल
N.C.E.R.T. New Delhi N.C.E.R.T 4-85 5 Textile care and design Examlar Instructional material for Classes XI and XII.
(7) टे्रड--बुनाई तकनीक
कक्षा-12
उद्देश्य-- (1) विद्यार्थियों को बुनाई तकनीक से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी देना। (2) शासकीय और अशासकीय बुनाई उद्योग से सम्बन्धित पदों हेतु कुशल कर्मचारी का निर्माण करना। (3) इस उद्योग के द्वारा विद्यार्थियों को खेल-खेल (Play way) में कार्य सिखाना एवं कार्य के प्रति एकाग्रता उत्पन्न करना। (4) बुनाई तकनीक की शिक्षा, विकलांग एवं आंखों के न रहने वाले विद्यार्थी भी प्राप्त कर सकेंगे। (5) इस उद्योग से बेकारी (Unemployment) की समस्या भी हल होगी। (6) एक अच्छा नागरिक बन जायेगें। रोजगार के अवसर--
(1) इस उद्योग की शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् विद्यार्थी नौकरी की तलाश में नहीं भटकेगा। (2) थोड़ी पूंजी से अपना कार्य प्रारम्भ कर सकता है। (3) अपने द्वारा उत्पादित वस्तुओं की खपत बाजार में कर सकेगा। (4) अपने साथ अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी कार्य में लगाकर पूरे परिवार का जीविकोपार्जन कर सकेगा। (5) सरकार इस उद्योग को चलाने हेतु अनुदान भी प्रदान करती है। (6) इस उद्योग की शिक्षा के बाद विद्यार्थी किसी कपड़ा मिल या छोटे कारखाने में रोजगार प्राप्त कर सकेगा।
पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
308 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र बुनाई सिद्धान्त 1--सूत पर माड़ी देना, विभिन्न प्रकार के माड़ी पदार्थ, लच्छी पर माड़ी लगाना तथा ताने पर माड़ी लगाना। 12 2--विभिन्न प्रकार के ऊन, वानस्पतिक प्राणिज, खनिज तन्तु आदि। 12 12 3--रेशम के उत्पादन, सिल्क रीडिंग। 12 4--खनिज, तन्तु, ऐस्वेस्टस, सोने-चाँदी, के तार आदि। 12 5--वस्त्र उद्योग में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न प्रकार के करघे।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
बुनाई मैकेनिज्म
12 12 1--ताने का करघे पर चढ़ाना, पावड़ी, बधाव होल्डो को बांधना। 2--बाने की बाबिन भरना, उसे ढरकी में लगाकर कपड़ा बुनना। 3--शुद्ध किनारा, वस्त्र का अच्छा पोत, अच्छा दम बनाना, रोलर और बफर का कार्य। कपड़े की अशुद्धियां कारण एवं निवारण। 12 4--कपड़ा तैयार होने के पश्चात् उसे साफ करना और कुंदी करके बाजार में उपयुक्त करना। 12 12 5--करघे का मुख्य एवं गौड़ चाले।
तृतीय प्रश्न-पत्र बुनाई आलेखन (Textile Design) 1--ग्राफ की उपयोगिता, ग्राफ पर आलेख, भराव और पावड़ी बधॅाव दिखाना। 15 15 2--विभिन्न प्रकार के कपड़ों की तुलनात्मक विवेचना। 15 3--तौलिया का आलेखन, हनी कुम्ब, हल्का बैंक। 15 4--अतिरिक्त ताने की सहायता से अक्षर लिखना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बुनाई-गणित)
40 1--वय और कंधी का अंक निकालना। 2--किसी कपड़े में भान बनाने में ताने बाने के सूतों का भार ज्ञात करना। 20
पंचम प्रश्न-पत्र
(सम्बन्धित कला)
(1) रंग--विभिन्न प्रकार के रंगों की पहचान करना। 15 (2) रंगों की संगति--एक रंग, समान रंग, विरोधी रंग, मन्यभूत रंग, उन्नत रंग, संगतियां 15 15 (3) टोन, टिन्ट, शेड आदि की विवेचना। 15 (4) आस्टवाल्ड रंग, वृत्त, प्रकाश एवं पदार्थ रंग।
प्रयोगात्मक कार्य
(1) ताने की बीम तैयार होने के पश्चात् बुनाई के लिये उसे करघे पर चढ़ाना, निर्धारित डिजाइनों को बुनना। (2) पुली जक का प्रयोग, पावड़ी बधाव। (3) बुनाई की प्रारम्भिक क्रियायें, दम बनाना, वाना फेकना, ठोकना। (4) करघे के भाग और उनके कार्य जैसे पावड़ी, पैासार, लीज रीड आदि। शटल का बाहर भागना, कपड़े में मुख्य दोष व उनका निराकरण। (5) विद्यार्थियों के किये गये प्रयोगात्मक कार्य का लेखा तैयार करना चाहिये जो प्रदर्शक द्वारा हस्ताक्षरित हो तथा बुनाई अध्यापक द्वारा भी हस्ताक्षरित हो जिसे प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष रखा जायें।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
प्रत्येक छात्र, की वार्षिक परीक्षा हेतु प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष कम से कम तीन नमूने वाले बुने हुये रेशे पर बुनाई की विशेषताओं से युक्त चित्र संग्रही प्रधानाचार्य, बुनाई अध्यापक तथा प्रदर्शक के द्वारा हस्ताक्षरित और प्रमाणित होना चाहिये। वह कार्य बिना किसी सहायता के व्यक्ति विशेष द्वारा सम्पादित किया गया है।
जो मशीनें आधुनिक कारखाने में उपलब्ध हैं तथा पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं उनके सम्बन्ध में विद्यार्थी के ज्ञान क्षेत्र को बढ़ाने के लिये उन्हें स्वयं पर्यटन द्वारा देखने का अवसर प्रदान करना चाहिये।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3091--वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षा के अंकों का विभाजन-- 200 अंक (1) तैयारी कार्य, (2) बुनाई, (3) मेकेनिज्म, (4) मौखिक।
2--आन्तरिक मूल्यांकन-- 200 अंक (1) सत्रीय कार्य (2) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण।
नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य
1 2 3
1 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान डा0 प्रमिला वर्मा विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक,
4 5 रुपया 55.00
वाराणसी
2 वस्त्र विज्ञान एवं परिधान डा0 प्रमिला वर्मा युनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 55.00 08.00 3 बुनाई पुस्तक श्री श्याम नारायण श्रीवास्तव नवीन पुस्तक भण्डार, दारागंज,
इलाहाबाद
4 हाउस होल्ड टैक्सटाइल श्री दुर्गा दत्त बुक कम्पनी, नई दिल्ली 75.00 02.00 5 भारतीय कशीदाकारी श्रीमती सिन्द्रे एवं कु0 पंडित प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर, नैनीताल
(8) टे्रेड--नर्सरी शिक्षण का प्रशिक्षण एवं शिशु प्रबन्ध
कक्षा-12
उद्देश्य--
शिशु देश की सम्पत्ति हैं। प्रारम्भ से ही उनका उचित देख-भाल करना राष्ट्रीय कर्तव्य है। शिशु शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर उसके प्रसार से इस लक्ष्य की पूर्ति सम्भव है। प्राथमिक शिक्षा हेतु सार्वजनीकरण के लिये भी शिशु शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा के व्यावसायीकरण की दृष्टि सें भी इण्टरमीडिएट के पाठ्यक्रम में शिशु-शिक्षा विषय का समावेश कर हम छात्रों को स्वावलम्बी बनाने में सहायक होंगे इसके अतिरिक्त भावी माता-पिता अपनी संतान का लालन-पालन करने में इस विषय के अध्ययन में समर्थ होंगे।
इस पाठ्यक्रम का विशिष्ट उद्देश्य यह है कि छात्र/छात्रायें इस रूप में प्रशिक्षित हों कि वे शिशुशालाओं का संचालन स्वयं कर सके। पाठ्यक्रम का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि उनके शाला की गतिविधियों व कार्यक्रम के संचालन हेतु अपेक्षित ज्ञान क्षमता व सही दृष्टिकोण विकसित हो सके। स्कोप--
यह पाठ्यक्रम निश्चय ही छात्रों को आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनाने व विभिन्न शिशुशालाओं में शिक्षण कार्य करने हेतु सक्षम बनायेगा। इस प्रकार यह विषय छात्रों को नौकरी के अवसर प्रदान करने तथा स्वयं शिशुशाला या बाल-बाड़ी खोलकर उसका संचालन कर स्वावलम्बी बनाने में समर्थ बनायेगा। पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
310 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
(शिशु शिक्षा तथा विद्यालय संगठन)
खण्ड (क)
(1) शिशुशाला में शिक्षकों व बालकों का सम्बन्ध व अनुशासन। (2) शिशु समस्या व निदान। (3) शिशु शिक्षण की प्रमुख पद्धतियां।
10 10 10
खण्ड (ख)
(1) शिशुशाला व समाज का पारस्परिक सहयोग। (2) शिशुशाला के संघ। (3) शिशुशाला के अभिलेख व प्रपत्र।
10 10 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बाल मनोविज्ञान)
08 08 13 08 09 (1) आदत। (2) सीखना। (3) अवधान रुचि व रूझान। (4) व्यक्तित्व। (5) विसंतुलित व समस्या बालक। (6) शैशव काल में खेल का महत्व, सिद्वान्त, प्रकार तथा प्रभावित करने वाले अंग। 14
तृतीय प्रश्न-पत्र
(शिशु स्वास्थ्य व शरीर विज्ञान)
खण्ड (क)
(1) स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले तथ्य। 14 (2) शिशुशाला में स्वच्छता की व्यवस्था व्यक्तिगत विद्यालयी व्यवस्था। 16 खण्ड (ख) (1) शारीरिक विकृतियां--पोलियो और चपटा पैर कारण एवं लक्षण। 10 10 (2) शिशुओं के प्रमुख रोग--संवर्गी, सामान्य। 10 (3) प्राथमिक चिकित्सा।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
मुख्य शिक्षण विधियां (भाषा, गणित)
खण्ड (क)
(1) भाषा शिक्षण की विधियां। (2) शिशु साहित्य। (3) भाषा दोष सुधारों के उपाय। (4) शिशु पुस्तकालय।
10 06 08 06
खण्ड (ख)
(1) गणित शिक्षण की विधियां। (2) शिशुशाला में गणित का विषय विस्तार।
16 14
पंचम प्रश्न-पत्र
(षिषु षिक्षा की सहायक शिक्षण विधियां)
खण्ड (क)--सामाजिक विषय
(1) शिशु का सामाजिक परिवेश--इतिहास, भूगोल। (2) सामाजिक विषय शिक्षण की विधियां।
08 06
खण्ड (ख)--प्रकृति विज्ञान व विज्ञान (1) शिशु का प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक परिवेश--उद्यान, बाल उद्यान विज्ञान उपकरण। 08 06 (2) शिक्षण विधियां।
खण्ड (ग)--कला एवं हस्तकला
(1) कला तथा हस्तकला के लिये उचित परिवेश, निर्माण। (2) शिक्षण विधियां।
08 06भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 311
खण्ड (घ)
खेल व संगीत
(1) शिक्षण विधियां--खेल, संगीत। (2) शिशु खेल एवं संगीत।
08 10 प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम तथा प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(क) कला शिक्षण। (ख) कला, हस्तकला, सिलाई। (ग) सहायक उपकरणों का निर्माण। (घ) संगीत (भाव गीत, शिशु गीत) व खेल। (ङ) शिशु--विकास का व्यक्तिगत व सामूहिक निरीक्षण लेखा--
(1) वाह्य परीक्षा . . . . 200 अंक (2) आन्तरिक मूल्यांकन . . . . 200 अंक (क) सत्रीय कार्य पर-- (ख) कार्य-स्थल पर परीक्षण--
नोट : प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम मूल्य 1 2 3 4 5
रुपया 1 शिशुशाला में भाषा व गणित वेदमणि दीक्षित पंकज प्रकाशन, इलाहाबाद 30.00 विनोद पुस्तक मन्दिर, आगरा 35.00 2 बाल मनोविज्ञान बाल विज्ञान डा0 श्रीमती प्रीति वर्मा,
डा0 डी0 एन0 श्रीवास्तव 3 मातृ कला एवं शिशु कला श्रीमती जी0 पी0 शेरी तदेव 22.00 4 बाल मनोविज्ञान एवं बाल विज्ञान -- यूनिवर्सल बुक सेन्टर, लखनऊ 52.50 5 स्वास्थ्य शिक्षा -- तदेव 25.00
(9) टे्रड--पुस्तकालय विज्ञान
1--उद्देश्य--
(1) एक ही पुस्तकालय कर्मी द्वारा चलाये जाने वाले पुस्तकालय की स्थापना करने, उसके संगठन, संचालन तथा व्यवस्था की योजना बनाने लायक दक्षता प्रदान करना। (2) मध्यम आकार के पुस्तकालय में सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में कार्य कर पाने की दक्षता प्रदान करना। (3) किसी बड़े पुस्तकालय में पुस्तकालय सहायक के रूप में कार्य करने लायक दक्षता प्रदान करना। (4) पुस्तकालय के विभिन्न अनुभागों में कार्य कर पाने लायक दक्षता प्रदान करना।
2--रोजगार के अवसर--
(क) वेतन भोगी रोजगार-- 1--ग्रामीण पुस्तकालय कम्यूनिटी सेन्टर, प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र, अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र तथा पंचायत पुस्तकालयों में मुख्य हस्तान्तरण।
2--माध्यमिक विद्यालयों, ब्लाक, तहसील, तालुका पुस्तकालय में सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष। 3--माध्यमिक विद्यालयों, ब्लाक, तहसील, तालुका पुस्तकालयों में वर्गीकरण सहायक। 4--कैटलागर। 5--पुस्तकालय सहायक। 6--लैंडिंग सहायक। 7--प्रतिछायांकन सहायक। 8--पुस्तकालय लिपिक। 9--पुस्तक प्रदाता। 10--जेनीटर। 11--पुस्तक संरक्षण सहायक।
(ख) स्वरोजगार--
1--पुस्तकालय लेखन-सामग्री निर्माता एवं पूर्तिकर्ता। 2--पुस्तकालय साज-सज्जा एवं उपकरण।
312 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43--कीटनाशक दवाइयों के विक्रेता। 4--पुस्तकालय परामर्श सेवा। 5--शोध छात्रों के लिये वाङ्मय सूची तैयार करने का व्यवसाय। 6--प्रतिछायांकन का व्यवसाय। 7--पुस्तक विक्रय व्यवसाय।
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
पुस्तकालय संगठन एवं संचालन--सैद्धान्तिक
1-संचालन--1--विषय प्रवेश, पुस्तकालय संचालन के सामान्य सिद्धान्त, पुस्तकालय समिति, पुस्तकालय 30 अध्ययन सामग्री, चयन एवं क्रयादेश, उपयोग के लिये सुनियोजन, वल्क व्यवस्था एवं प्रदर्शन, पुस्तकालय में निर्गम-आगम प्रणाली।
2--पत्र-पत्रिकायें एवं अन्य अध्ययन सामग्री, सन्दर्भ सेवा की व्यवस्था, संख्या सत्यापन, सांख्यिकी, 30 आय-व्ययक तथा आर्थिक विवरण, वार्षिक प्रतिवेदन।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
संदर्भ सेवा/वाङ्मय सूची एवं डाक्यूमेन्टेशन (सैद्धान्तिक),
द्वितीय प्रश्न-पत्र
1-पुस्तकालय विज्ञान के पंच सूत्रों का संदर्भ सेवा, वाङ्मय सूची एवं डाक्यूमेन्टेशन में प्रयोग। 20 2-संदर्भ सेवा के प्रकार, अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन संदर्भ सेवा, सामयिक सूचना संदर्भ सेवा, संदर्भ प्रश्नों के प्रकार। 20 वाङ्मय सूचियों के विभिन्न रूप एंव प्रकार। वाङ्मय सूची सेवा। 3-डाक्यूमेन्टेशन, इंडेक्सिंग, ऐब्सट्रैकिंग एवं रिप्रोग्रैफिक सेवायें। 20
तृतीय प्रश्न-पत्र
पुस्तकालय वर्गीकरण एवं सूचीकरण (सैद्धान्तिक)
1--पुस्तक वर्गीकरण, पद्धतियों का विकास, प्रमुख पुस्तक वर्गीकरण, पद्धतियों का संक्षिप्त परिचय तथा ड्युई दशमलव पद्धति एवं द्विबिन्दु का अध्ययन। 20 2--सूचीकरण-1--विषय प्रवेश, सूची का अर्थ एवं परिभाषा, आवश्यकता, महत्व एवं उद्देश्य, सूची के स्वरूप, सूची के भेद (प्रकार), सूची संलेख--अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व, संलेख के प्रकार, विभिन्न संलेखों की प्रविष्टियां, प्रविष्टियों के सूचक स्रोत। 20 3--विषय शीर्षक संलेख, विश्लेषणात्मक संलेख, सूची संहिताओं का विकास एवं प्रमुख संहिताओं का संक्षिप्त अध्ययन, सूचीकरण के उपकरण, संलेखों का व्यवस्थापन, केन्द्रीयकृत एवं सहकारी सूचीकरण, संघ सूची। 20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 313
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
1--(1) दशमलव वर्गीकरण प्रणाली का प्रायोगिक कार्य। 30 (2) दशमलव वर्गीकरण के अनुसार अंकों को जोड़ कर शीर्षक निर्माण। (3) अंकानुक्रम बनाना। 2--(1) निर्धारित वर्गीकरण पद्धति द्वारा वर्गांक बनाना। 30 (2) वर्गांकों को चुन कर सही आंकलन करना। (3) तालिका एवं सारिणी द्वारा रूप रेखा तैयार करना।
पंचम प्रश्न-पत्र
30 अंक
30 अंक इकाई-1 1-सूची पत्रक का प्रारूप तैयार करना। 2-एंग्लो अमेरिकन कैटलाग रुल्स-2 के अनुसार सूचीकरण। 3-लिस्ट आफ सब्जेक्ट हेडिंग का प्रयोग। इकाई-2 1-लेखक का नाम मुख्य संलेख में इन्ट्री करना। 2-वर्गांकों की क्रमानुसार लिखना। 3-A.A.C.R.-2 द्वारा ट्रेसिंग ज्ञात करना।
प्रायोगिक सूचीकरण ए0ए0सी0आर0-2 संहिता के अनुसार कराया जायेगा। विषय शीर्षक के निर्माण हेतु शेयर लिस्ट आफ सब्जेक्ट टे्रडिंग के अद्यतन संस्करण का प्रयोग किया जायेगा।
नोट-1--यह प्रश्न-पत्र भी अन्य प्रश्न-पत्रों की भांति होगा। 2--इस प्रश्न-पत्र हेतु उत्तर-पुस्तिका में एक ओर 3"×5" सूची-पत्र का प्रारूप मुद्रित होना चाहिये।
प्रारूप का नमूना निम्नवत् है--
5"
3"
यदि उपरोक्त प्रारूप को उत्तर-पुस्तिका पर मुद्रित कराना सम्भव न हो तो प्रत्येक परीक्षार्थी को वांछित संख्या से सूची-पत्रक उपलब्ध कराया जायेगा।
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता संस्करण
मूल्य
पुनर्मुद्रण वर्ष
1 2 3 4 5 6 रुपया 1987 30.00 1 पुस्तकालय वर्गीकरण सिद्धान्त और प्रयोग
द्वारका प्रसाद शास्त्री
साहित्य भवन प्रा0लि0, इलाहाबाद (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
2 पुस्तक चयन और संदर्भ
" " 1985 16.00 सेवा
3 सूचीकरण के सिद्धान्त गिरिजा कुमार,
1984 35.00
कृष्ण कुमार
4 पुस्तकालय संगठन एवं
1987 40.00 प्रशासन
डा0 राम शोभित प्रसाद सिंह
वाणी एजूकेान बुक्स, दिल्ली (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी) बिहार ग्रन्थ अकादमी, पटना (वितरक-विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
5 प्रलेखीय ग्रन्थ वर्णन एस0टी0 मूर्ति मध्य प्रदेश हिन्दी अकादमी, 1981 18.00
6 पुस्तकालय संगठन एवं
1988 30.00 संचालन
भोपाल राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी
सुभाष चन्द्र वर्मा एवं श्याम नारायण श्रीवास्तव
40 ङ314 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
7 ग्रन्थालय संचालन तथा श्याम सुन्दर श्रीराम मेहरा एण्ड कम्पनी, 1989 70.00
प्रशासन अग्रवाल हास्पिटल रोड, आगरा
8 पुस्तकालय विज्ञान कोष प्रभु नारायण गौड़ बिहार राष्ट्र भाषा परिषद् 1961 13.50
9 विद्यालय पुस्तकालय प्रभु नारायण गौड़ बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, 1977 09.50
पटना
10 पुस्तकालय विज्ञान द्वारका प्रसाद साहित्य भवन प्रा0लि0, 1988 30.00
परिचय शास्त्री इलाहाबाद
(वितरक--विश्वविद्यालय
प्रकाशन, वाराणसी)
11 पुस्तक चयन एवं रचना चन्द्र कान्त शर्मा " 1975 25.00
12 वाङ्मय सूची और द्वारका प्रसाद " 1983 25.00
प्रलेखन शास्त्री
13 पुस्तकालय वर्गीकरण भास्करनाथ तिवारी विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक, 1983 30.00
सिद्धान्त एवं प्रयोग वाराणसी
14 पुस्तक वर्गीकरण भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 30.00
15 पुस्तक सूचीकरण भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 25.00
सिद्धान्त
16 संदर्भ सेवा भास्करनाथ तिवारी यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ 1983 15.00
17 पुस्तकालय परिचय द्वारका प्रसाद विश्वविद्यालय प्रकाशन, चौक, 1983 15.00
शास्त्री वाराणसी
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा की रूप-रेखा
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
1--सन्दर्भ सेवा प्रायोगिक--
संदर्भ सामग्री का मूल्यांकन करना विभिन्न प्रकार की वाङ्मय सूचियाँ तैयार करना फिजिकल विविलियोग्राफीज का ज्ञान करना डाक्यूमेन्टेशन के सोर्स मैटीरियल छात्रों को दिखाकर उनका परिचय कराना
2--सन्दर्भ सेवा "वाङ्मय सूची एवं डाकूमेन्टेशन (प्रायोगिक)"-- 200 अंक
डाक्यूमेन्टेशन लिस्ट तैयार करना इन्डेक्ंिसग करना ऐक्सटे्रक्ंिटग करना विविलियोग्राफी तैयार करना सत्रीय कार्यों का मूल्यांकन एवं मौखिक परीक्षा आन्तरिक एवं वाह्य आन्तरिक परीक्षा सत्रीय कार्यों पर कार्य स्थल (प्रयोगशाला) परीक्षक द्वारा वाह्य परीक्षा
प्रयोग एवं मौखिक--
200 अंक
1--वर्गीकरण प्रायोगिक 2--सूचीकरण प्रायोगिक 3--सन्दर्भ सेवा, वाङ्मय सूची 4--मौखिक
नोट--(1) सत्रीय कार्यों का मूल्यांकन एवं मौखिक परीक्षा, प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम प्रश्न-पत्रों में निर्धारित पाठ्यक्रमों के अन्तर्गत ही ली जायेगी।
(2) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 315संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं
मूल्य
पता
संस्करण
पुनर्मुद्रण वर्ष
1 2 3 4 5 6 रुपया 1988 25.00 1 ग्रन्थालय वर्गीकरण डा0 जी0 डी0
भार्गव
2 सन्दर्भ सेवा सिद्धान्त और
1985 30.00 प्रयोग
के0 एस0 सुन्दरेखन
मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी) मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल (वितरक--विश्वविद्यालय प्रकाशन, वाराणसी)
संदर्भ सामग्री, परिभाषा, प्रकार, श्रेणियाँ, विशिष्ट गुण। संदर्भ सामग्री के मूल्यांकन का सिद्धान्त एवं मूल्यांकन। विविलियोग्राफी (वाङ्मय सूचियाँ), परिभाषा, आवश्यकता, उद्देश्य, क्षेत्र, प्रकार, फिजिकल विविलियोग्राफी, परिभाषा, आवश्यकता, प्रकार, विधियां, डाक्यूमेन्टेशन, परिभाषा, आवश्यकता, प्रकार, शीर्ष-मेटेरियल, कार्यविधि, इन्फारमेशन सेन्टर-यूनेस्को, विनीत, आई0बी0, इफला, इल्सडाक।
2--पुस्तकालय विज्ञान के पंच सूत्रों का संदर्भ सेवा, वाङ्मय सूची एवं डाक्यूमेन्टेशन में प्रयोग। संदर्भ सेवा के प्रकार, संदर्भ प्रश्नों के प्रकार, संदर्भ पुस्तकालयाध्यक्षों की योग्यतायें एवं गुण। वाङ्मय सूचियों के विभिन्न रूप एंव प्रकार। वाङ्मय सूची सेवा। डाक्यूमेन्टेशन, इंडेक्सिंग, ऐब्सट्रैकिंग एवं रिप्रोग्रैफिक सेवायें।
(10) टे्रड--बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्मिक (मेडिकल लेबोरेटरी तकनीक सहित)
कक्षा-12
उद्देश्य--
1--मानव शरीर की संरचना एवं कार्यिकी का ज्ञान प्राप्त करना। 2--स्वस्थ रहने के लिये स्वच्छता के नियमों का ज्ञान प्राप्त करना। 3--स्वास्थ्य रक्षा के क्रियाकलाप, प्राथमिक चिकित्सा सहायता और छोटे रोगों के उपचार का ज्ञान प्राप्त करना। 4--बीमारी के निदान व उपचार में चिकित्सक की सहायता करना। 5--प्रयोगशालाओं तथा चिकित्सा नीति शास्त्र के प्रबन्धन का ज्ञान प्राप्त करना। 6--विभिन्न परीक्षण करना एवं व्याख्या करना। 7--एक चिकित्सीय प्रयोगशाला व्यवस्थित कर चलाना। 8--स्वतन्त्र रूप से समस्याओं से निपटने के लिए सक्षमता एवं आरम्भिक चरणों को विकसित करना।
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
316 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
(जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण) 60 अंक
इकाई-1--प्राथमिक सहायता 20 अंक
परिभाषा, साधारण प्राथमिक चिकित्सा एवं किट सामग्री, आघात, कोमा तथा उसका प्रबन्धन, रक्तस्राव का नियंत्रण, रोगी की टूटी हड्डी को जोड़कर जमाये रखने के लिये खपच्ची बांधना, घायल को स्थानान्तरित करना, अचेत होते रोगी को तत्काल प्राथमिक सहायता।
इकाई-2-प्रयोगशाला प्रबन्धन एवं नीति शास्त्र 20 अंक
स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति में प्रयोगशाला की भूमिका--सामान्य मानव स्वास्थ्य व बीमारियां, प्रकार, निदान की प्रक्रिया, विभिन्न स्तरों की प्रयोगशालायें, कर्मचारियों के कर्तव्य व उत्तरदायित्व।
भारत में स्वास्थ्य रक्षा आपूर्ति तन्त्र की प्रयोगशाला सेवायें, भारत में स्वास्थ्य प्रशासन तन्त्र, राष्ट्रीय राज्य, जिला, ग्राम स्तर पर, भारत में स्वयंसेवी स्वास्थ्य संगठन, भारत में स्वास्थ्य कार्यक्रम।
प्रयोगशाला योजना--सामान्य सिद्धान्त, लक्ष्य, संचालन, आंकड़े, बाजार सामान्यतया, अस्पताल/प्रयोगशाला सम्बन्ध प्रतियोगिता प्रयोगशाला के रूल, विभिन्न स्तरों पर योजना, अस्पताल/प्रयोगशाला सेवाओं की योजना के लिए निर्देशक सिद्धान्त, कारक कार्यकारी दृष्टिकोण संचालन मांग, अस्पताल/प्रयोगशाला के विभाग, सामान्य क्षेत्र, संकल्पना क्षेत्र स्थान की आवश्यकता, एक मूल स्वास्थ्य प्रयोगशाला की योजना।
प्रयोगशाला संगठन--सामान्य सिद्धान्त घटक एक कार्य, कर्मचारी कार्य विवरण; कार्य विशिष्टतायें, कार्य तालिका व्यक्तिगत पुनः व्यवस्था तथा कार्य भार, मूल्यांकन, कांच के सामानों, उपकरणों व रसायनों की देखभाल, कांच के सामान की देखभाल एवं सफाई, साधारण कांच के सामान बनाना, उपकरणों व उपस्करों की देखभाल, प्रयोगशाला रसायन, उनका उचित उपयोग व देखभाल, उचित भण्डारण व लेबिल लगाना।
इकाई-3 20 अंक
प्रतिदर्श हस्तन--सामान्य सिद्धान्त, संग्रहण तकनीक तथा रखने के पात्र, प्रतिदर्शों के प्रकार, प्रविष्टि स्थानान्तरण व वितरण एवं पुनः प्रतिदर्श निपटान, संरक्षण।
प्रयोगशाला सुरक्षा--सामान्य सिद्धान्त खतरे सुरक्षा कार्यक्रम, प्राथमिक सहायता सुरक्षा, उपाय यांत्रिक विद्युत रासायनिक, जीव वैज्ञानिक रेडियोधर्मिता।
संचार--जन सम्बन्ध, रोगी फिजिशियन, नर्सिंग कर्मचारी, बिक्री प्रतिनिधि, अन्य कर्मचारी निवेदन/प्रतिवेदन प्रपत्र निरन्तर शिक्षा विधि मूल्यांकन व चयन।
गुणवत्ता नियंत्रक--सामान्य सिद्धान्त, अविश्लेषक कार्य, अनुमति विशिष्टतायें, प्रतिदर्श विशिष्टतायें, परीक्षणों का विवरण, विश्लेषण कार्य विधि, उपकरण, अभिकर्मक व सामग्री, नियंत्रण क्षमता, परीक्षण।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(मानव शरीर क्रिया विज्ञान)
60 अंक इकाई-1--शरीर क्रिया विज्ञान 40 अंक पाचन श्वसन संचरण तंत्रिका तंत्र के कार्य एवं क्रिया विधि अंतः स्रावी ग्रन्थियों की भूमिका तापनियमन का शरीर क्रिया विज्ञान प्रजनन (मूत्र प्रजनन तंत्र) दृष्टि श्रवण और वाणी का शरीर क्रिया विज्ञान
इकाई-2--जैव विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान 10 अंक
जैव विज्ञान--जैव विज्ञान की परिभाषा, आरम्भिक विचार/सम्पूर्ण दृश्य-कार्बोहाइडे्रट वसा, प्रोटीन के सामान्य चयापचय का, विभिन्न प्रकार के एन्जाइम व उनके कार्य।
सूक्ष्म जीव विज्ञान--सूक्ष्मदर्शी एवं सूक्ष्मदर्शिकी-परिचय, सूक्ष्म जीव वर्गीकरण, नमूनों का संग्रहण, महामारी का अध्ययन, स्थानान्तरण एवं संरक्षण। इकाई-3--
10 अंक रोग विज्ञान--रोग विज्ञान का परिचय, परिभाषा, ज्वलनशील, निओप्लास्टिक, चयापचयिक, जन्मजात प्रकारों का वर्गीकरण वर्णन।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 317तृतीय प्रश्न-पत्र
(चिकित्सा एवं जैव रसायन)
60 अंक इकाई-1-अंगों के कार्य परीक्षण 20 अंक वृक्क कार्य परीक्षण-मूत्र-सामान्य संघटक, 24 घण्टों का संग्रहण, संरक्षण, भौतिक लक्षण, स्पष्टीकरण परीक्षण, यकृत कार्य परीक्षण, आमाशय कार्य परीक्षण, सी0 एस0 एफ0 के जैव रसायन परीक्षण, पैन्क्रिएटिक कार्य परीक्षण, चिकित्सीय एन्जाइम विज्ञान तथा संगठन।
इकाई-2-चिकित्सीय एन्जाइम विज्ञान-एन्जाइम एवं कोएन्जाइम, एन्जाइम गतिविधि निर्धारण के सिद्धान्त, महत्वपूर्ण सीरम एन्जाइम विज्ञान के सिद्धान्त (फास्फेटेज, ट्रान्सफेरेसेज, ग्लायकोसिलेटेड एन्जाइम, लैक्टिक डीहाइड्रोजिनस, क्रिएटिनाइज क्राइनेज), सीरम एन्जाइमों के चिकित्सकीय उपयोग। संगठन ः प्रतिदर्शों का संग्रहण एवं स्थानान्तरण चिकित्सीय जैव रसायन में गुणवत्ता का विश्वास, स्वचालन, किटों का उपयोग तथा मूल्य नियंत्रण।
20 अंक इकाई-3-विषाणु विज्ञान एवं सीरोलॉजी-वर्गीकरण, सामान्य गुण, विषाणुओं का संवर्धन तथा रोग।
कारकता, प्रतिरक्षी गुण, प्रतिजन, प्रतिकाय, प्रतिजन प्रतिक्रिया तथा बीमारी के निदान में इनका उपयोग। सिद्धान्त, विधि तथा कम्प्लीमेन्ट, स्थिरीकरण प्रतिक्रियायें, अतिसंवेदनशील प्रतिक्रियाओं का सिद्धान्त एवं वर्गीकरण, टीके-वर्गीकरण एवं टीकों का उपयोग। एग्लूटिनेशन, अवक्षेपण, उदासीनीकरण। 20 अंक
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सूक्ष्म जैविकी)
60 अंक
इकाई-1-सीरोलॉजी एवं कवक विज्ञान 30 अंक
विषाणु विज्ञान एवं कवक विज्ञान-वर्गीकरण, सामान्य गुण, विषाणुओं का संवर्धन व रोगकारकता। प्रतिरक्षी गुण, प्रतिजन, प्रतिकाय, प्रतिजन, प्रतिकाय प्रतिक्रिया तथा बीमारी के निदान में उनका उपयोग। सिद्धान्त, विधि, एग्लुटिनेशन अवक्षेपण, उदासीनीकरण तथा कॉम्प्लीमेण्ट, स्थिरीकरण प्रतिक्रियायें, अतिसंवेदनशील प्रतिक्रियाओं का सिद्धान्त एवं वर्गीकरण, टीके--वर्गीकरण एवं टीकों का उपयोग।
परजीवी विज्ञान एवं कवक विज्ञान-आकारिकी, जीवन चक्र, रोगकारकता तथा प्रयोगशाला निदान--ई हिस्टोलाइटिका, ई कोलाई, गिएरिडी, ट्राइकामोनास, प्लाजमोडिया, लीशमैनिया, हुक वर्म, राउण्ड वर्म, ह्वीप वर्म, टेप वर्म, थ्रेड वर्म, एकिनोकाकस ग्रेनुलोमस, ड्रैकनकुलस।
वाऊ चेरिया, वैन्क्राफ्टी आदि के विष्ठा संवर्धन का संरक्षण-सिद्धान्त एवं विधि, रोगकारी कवकों की अकारिकी एवं संवर्धनकण्डिडा, एस्पर्मिलस, डर्मेटोफा।
इकाई-2-ऊतक प्रौद्योगिकी 30 अंक परिचय--कोशिका, ऊतक व उनके कार्य, इनके परीक्षण की विधियां, ऊतकों का स्थिरीकरण, स्थिरीकारकों का वर्गीकरण, साधारण, स्थिरीकारक व उनके गुण, सूक्ष्म शारीरिकी स्थिरीकारक, कोशिकीय स्थिरीकारक तथा ऊतक रासायनिक स्थिरीकारक, ऊतक प्रसंस्करण, प्रतिदर्श संग्रहरण, लेबल करना, स्थिरीकरण, निर्जलन, स्पष्ट करना, संससेचन, अनतः स्थापना, सैक्शन काटना, माइक्रोटोम व उनके चाकू काटने की तकनीकें, सेक्शनों का आरोपण, हिमीकृत खण्ड, अभिरंजन रंग व उनके गुण, अभिरंजन का सिद्धान्त, हिमेटाक्सिलीन व इओसिन के साथ अभिरंजन तकनीकें, सामान्य एवं विशेष अभिरंजन, विकैल्सीकरण, सिथरीकरण, अंतिम बिन्दु निकालना, उदासीनीकरण व प्रसंसाधन, एक्स फोलिएटिव कोशिका विज्ञान, प्रतिदर्शी के प्रकार व संरक्षण, आलोपों की निर्मित व स्थिरीकरण, पैपिनकोलाड स्थिरीकरण, संरक्षण, प्रदर्शन, शव परीक्षा तकनीक, सहायता अंगों का संरक्षण व ऊतक का प्रसंसाधन, अपशिष्ट निपटान व प्रयोगशाला में सुरक्षा।
पंचम प्रश्न-पत्र
(चिकित्सकीय रोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
60 अंक
इकाई-1-चिकित्सकीय रोग विज्ञान 40 अंक
चिकित्सकीय रोग विज्ञान मूत्र विश्लेषण--सामान्य संघटक, भौतिक परीक्षण, रासायनिक व सूक्ष्मदर्शीय परीक्षण। विष्ठा विश्लेषण--सामान्य संघटक, असामान्य संघटक। बलगम विश्लेषण--भौतिक सूक्ष्मदर्शी, रासायनिक वर्गीकरण। वीर्य विश्लेषण--भौतिक गुण, आकारिकी गतिशीलता।
318 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4रुधिर विज्ञान रुधिर विज्ञान का परिचय--रक्त संग्रह, प्रति स्कंदक। लाल रक्त कोशिकाएं--हीमोसाइटोमीटर, विधियाँ, गणना। श्वेत रक्त कोशिकाएं--विधियाँ, गणना।
रुधिर विश्लेषण--हीमोग्लोबिन मात्रा आंकलन, लाल रुधिर कोशिकाओं की आकारकी तथा गणना, श्वेत रुधिर कोशिकाओं की सम्पूर्ण गणना, T.L.C., D.L.C., प्लेटलेट गणना, E.S.R., परीक्षण, रुधिर समूह की जांच।
इकाई-2- 20 अंक सीरोलॉजी-सीरम ग्लूकोज का निर्धारण। सीरम बिलोरुबिन-कुल व प्रत्यक्ष बिलोरुबिन का निर्धारण। सीरम लिपिड-सीरम कोलेस्ट्राल का निर्धारण, जी0टी0टी0 प्रोटीन रहित नाईट्रोजनस योगिक-सीरम यूरिया, यूरिक एसिड व क्रिटनीन का निर्धारण, सीरम प्रोटीन, ए0जी0 अनुपात, सीरम एंजाइम-ट्रांस ऐमीनोज, (जी0ओ0टी0, जी0पी0टी0) फास्फेट्स (एल्कलाइन) व एसिड फास्फेट्स का निर्धारण। एमाएलेज का निर्धारण। सीरम कैलशियम, फास्फोरस, सोडियम, पोटेशियम क्लोराइड का निर्धारण।
विडाल व वी0डी0आर0एस0, ब्रुसल्ला एग्लूटिनेशन परीक्षण।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400 उत्तीर्णांक-200 इकाई-1-चिकित्सा प्रयोगशाला- पिपेट, स्लाइड, कवरस्लिप, सिरिंज, सुइयां, रक्त कोशिका गणक, तनुकारक, पिपेट, स्लाइड, जीवाष्विक परीक्षणों में प्रयुक्त कांच के सामान साफ करना, पाश्चर पिपेट, विडोलक, कांच की ट्यूब मोड़ना तथा धाबन बोतल आदि बनाना, उपकरणों के उपयोग व देख-रेख की विधि का प्रदर्शन, सुरक्षा तरीकों का प्रदर्शन। संक्रामक कारकों जैसे-HBsAg (हिपैटाइटिस-बी) व एड्स के सुरक्षित हस्टन का प्रदर्शन। प्राथमिक सहायता-प्राथमिक सहायता किट व उसकी सामग्रियों की पहचान, विभिन्न प्रकार की पटि्टयों व खपच्चियों को बांधना। भोजन एवं पोषण- निम्नलिखित भोज्य पदार्थों की पहचान एवं उनका पोषण मूल्य-अनाज, दालें, अण्डा, दूध, फल, हरी व पत्तेदार सब्जियां, मेवा, मछली, मांस, वसा एवं तेल। विभिन्न शरीर क्रियात्मक अवस्थाओं के लिए भोजन तालिका का प्रदर्शन-वयस्क (कम श्रम तथा कठोर परिश्रम वाले) गर्भवती महिला, स्तरपान कराने वाली महिला, शिशु विद्यालय जाने के पूर्व तथा बाद के बच्चों का भोजन। इकाई-2-शरीर क्रिया विज्ञान- सूक्ष्मदर्शियों का अध्ययन (पूर्व में शारीरिकी में सम्मिलित) रक्त आलेप, लीशमैन का अभिरंजन, श्वेत रक्त कणों के प्रकार तथा उनकी अवकल गणना, नब्ज, तापमान तथा श्वसन अभिलेखित करना (टी0पी0आर0) तालिका की देखभाल व्यायाम का टी0पी0आर0 पर प्रभाव (यह कक्षा के विद्यार्थियों के मध्य किया जा सकता है) रक्तचाप उपकरण (पारे वाला) का प्रदर्शन तथा रक्तचाप अभिलिखित करना। रोग विज्ञान- रोग विज्ञान संग्रहालय का दौरा। जैव विज्ञान- प्रयोगशाला के कांच के सामानों से परिचित होना द्रव मापन तथा ठोस पदार्थ तौलने की मूल तकनीकें, कांच के सामानों की सफाई, ठोस व द्रवों को प्रथक करना। इकाई-3-प्रोटीन रहित नाइट्रोजन्स यौगिक- सीरम यूरिया, यूरिक अम्ल व क्रिटिनीन का निर्धारण, सीरम प्रोटीन व ए0जी0 अनुपात का निर्धारित, सीरम इलेक्ट्रोफोरेसिस एवं जिंक सल्फेट, टर्बिडिटी परीक्षण। सीरम एन्जाइम- (क) ट्रांस एमिबेज (जी0ओ0टी0 व जी0पी0टी0) का निर्धारण। (ख) फास्फेटेज (एल्कलाइन व एसिड फास्फेटेज) का निर्धारण। (ग) एमायलेजेज का निर्धारण। सीरम बिलिरुबिन-कुल व प्रत्यक्ष विलिरुबिन का निर्धारण। सीरम लिपिड-सीरम कोलेस्ट्राल का निर्धारण। यकृत कार्य परीक्षण-यकृत कार्य परीक्षण। अन्य शारीरिक द्रवों पर मैदानिक परीक्षण।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 319इकाई-4 विषाणु विज्ञान-उर्वर अण्डे में संरोपण व विभिन्न मार्गों से संरोपण। कवक विज्ञान-गोले, आलेप व संवर्धन द्वारा कवकीय परीक्षण। ऊतक प्रोद्योगिकी-स्थिरीकरण, प्रसंसाधन, संचेतन व चयन स्लाइडों को काटकर तैयार करना, चाकू तेज करना, स्थिरीकारक तैयार करना, विकैल्सीकृत करने वाले द्रव, स्लाइड पर सेक्शन को चिपकाना, कोशिका विज्ञान, आलेप को निर्मित व स्थिरीकरण तथा पपिन कोलाऊ अभिरंजन तकनीकें, पिंजरों की सफाई, शव परीक्षा एवं निपटान।
इकाई-5 चिकित्सकीय रोग विज्ञान- अण्ड, पुरी, अमीबा, वसा कण, एक्जूडेट के लिए विष्ठा परीक्षण। नियमित मूत्र की जांच। बलगम-विश्लेषण। वीर्य-शुक्राणुओं की अकारिकी, गणना, गतिशीलता। सीरोलोजी-विडाल, बी0डी0आर0एल0, ब्रूसल्ला-एग्लूटिनेशन परीक्षण, आर0आई0ए0सी0आर0पी0ए0एस0ओ0 पाल बू्रनेल परीक्षण के लिए सालमोनेला निर्मित। परजीवियों के परीक्षण के लिए विष्ठा सामग्री का संग्रहण, संरक्षण व स्थानान्तरण अभिरंजित व अन अभिरंजित विष्ठा सामग्री की निर्मित, विष्ठा की सान्द्रता तकनीकें। परजीवियों का संरक्षण, विष्ठा में अण्डे व पुटी पहचानना।
उपकरणों की सूची एवं मूल्य निर्धारण
क्र0 उपकरणों के नाम अनुमानित मूल्य
सं0
1 2 3
रु0
1 संयुक्त सूक्ष्मदर्शी 3,500
2 विसंक्रामक 1,500
3 हाट प्लेट (विद्युत) 1,000
4 बुन्सन बर्नर सहित गैस सिलिण्डर 800
5 स्पिरिट लैम्प 25-प्रति
6 मेज पर रखने योग्य अपकेन्द्रण यंत्र अथवा 12 बकेट सहित 200
7 रेफ्रिजरेटर 165 अथवा 230 ली0 5,000
8 कैलोरीमापी 1,500
9 गर्मवायु अवन 3,000
10 जल ऊष्मक 300
11 रिंगर टाइमर 1,500
12 विश्लेषक तुला 200
13 भौतिक तुला (2 या 5 कि0) 500
14 टाइपराइटर 3,000
15 फ्लेम फोटोमीटर 10,000
16 स्पेक्ट्रो फोटोमीटर 10,000
17 फ्लूओरोमीटर 10,000
18 छोटा गामा काउण्टर 14,000
19 वोल्टेज स्टेबलाइजर 500
20 बोर्टेक्स मिक्सर 400
21 आर0आई0ए0 ट्यूब अपकेन्द्रित करने के लिए अपकेन्द्रक यंत्र 4,000
22 पी0 एच0 मीटर 2,500
23 गर्म वायु ब्लोअर 2,000
24 37से0 इन्क्यूबेटर 2,000
25 मफल भट्ठी 500
26 इलेक्ट्रो फोरेसिस 3,000
320 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोगशाला सामग्री
क्र0सं0 सामग्री का नाम 1 2
अनुमानित मूल्य 3 रु0
7,500
7,500
27 सादी शीशे की स्लाइडें 28 नीडिल 29 स्पिरिट 30 रुई 31 स्पेसीमेन ट्यूब काड्र्स सहित 32 ग्लास स्प्रेडर 33 स्लाइड बाक्स पालीथीन 34 टेस्ट ट्यूब (माइरेक्स) 35 यूरीन फ्लैक्स 36 टेस्ट ट्यूब ब्रश 37 टेस्ट ट्यूब होल्डर 38 टेस्ट ट्यूब स्टैण्ड 39 स्पिरिट लैम्प 40 बीकर 41 यूरिनोमीटर 42 मैजरिंग सिलेण्डर 50 एम0एम0 43 थर्मामीटर 44 ड्रापर 45 फारसेप्स 46 कांच ग्लास 47 पिपेट 48 पेनसिलीन बोतलें 49 शाहली डीमोग्लोबिनोमीटर 50 शाहली ग्रेड्एटेड पिपेट 51 छोटी ग्लास रॉड 52 ड्रापिंग पिपेट 53 एक्जार्बेन्ट पेपर 54 लिंटमस पेपर 55 ब्यूरेट 56 ड्रापर बोतल 57 प्रयोगशाला रसायन
(11) टे्रड रंगीन फोटोग्राफी
कक्षा-12
फोटोग्राफी शिक्षण के उद्देश्य-
(1) यह एक ऐसा विषय है जिसकी कोई भाषा नहीं है अर्थात् अनपढ़ भी चित्रों से कहानी रच लेता है। (2) जनसंचार का सबसे प्रखर एवं सुन्दर माध्यम है। (3) स्वरोजगार के लिए सबसे सरल, महत्वपूर्ण उपकरण है। यह आवश्यक नहीं है कि स्वतः रोजगार के लिए अधिक विस्तृत ज्ञान हो। व्यावसायिक दृष्टिकोण से अत्यधिक धन अर्जन करने का अति सरल माध्यम है।
(अ) उपकरणों का क्रय-बिक्रय। (ब) उपकरणों का रख-रखाव तथा उनके त्रुटियों का समाधान। (स) व्यावहारिक जीवन में (शादी ब्याह/उत्सव) छाया-चित्रण। (द) व्यवसायीकरण (स्टूडियो)।
(4) औद्योगिक क्षेत्र में इससे प्रखर तथा धनोपार्जन का सरल माध्यम दूसरा विषय नहीं।
(अ) फैशन फोटोग्राफी। (ब) माडलिंग। (स) औद्योगिक।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 321(द) अन्तरिक छाया चित्रण। (य) भूगर्भ से रहस्यों का ज्ञान।
(5) इस बदलते हुए आधुनिक कम्प्यूटरीकृत युग में छाया-चित्रण विषय का एक अद्वितीय चमत्कार शल्य चिकित्सा एवं मनोवैज्ञानिक चित्रण करने में योगदान।
(अ) जटिल से जटिल शरीर के अन्दर छिपे रोगों को जानना एवं निवारण, जैसे अल्ट्रासाउण्ड, एम0एम0आर0, जो कम्प्यूटर की मदद से शरीर के किसी भी भाग का थ्रीडाइमेन्शनल चित्र देने में सहायक।
(ब) मनोरंजन के क्षेत्र में इससे सुन्दर और बृहद कोई विषय नहीं है-जैसे छोटे बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्टून चित्र।
(स) वीडियो, टेलीवीजन, चलचित्रण एक प्रखर मनोरंजन का माध्यम जो पूरे संसार में देखे जा सकते हैं और सराहे भी जाते हैं।
(6) शिक्षण के क्षेत्र में छाया चित्रण से जटिल और सुन्दर कोई शास्त्र नहीं है क्योंकि इस विषय की गहराई से अध्ययन तभी सम्भव है जब छात्र भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, इलेक्ट्रॉनिक तथा रचनात्मक कला का ज्ञानी न हो।
(7) उच्चस्तरीय शिक्षण के लिए एक प्रभावशाली माध्यम से आज हमारा देश एवं पश्चिमी देशों में विशेष कर पठन पाठन के लिए उपयोग किया जा रहा है।
(8) भारत जैसे देश में सीमाओं पर रख-रखाव के लिए इन्फ्रारेड फोटोग्राफी के द्वारा देश की सुरक्षा की जा रही है। (9) विभिन्न देश अपने मानचित्रों को छाया-चित्रण के माध्यम से अंकित करते हैं। देश की रक्षा के लिए अनुसंधान के कार्यों में विशेषकर लाभप्रद है।
(10) कला की दृष्टि से फोटोग्राफी एक सुन्दर माध्यम है जो न केवल स्वान्तः सुखाय है अपितु जनसमुदाय के लिए मनोरंजन एवं लोकप्रिय है।
(11) छाया-चित्रकार के रूप में छाया चित्रकार।
(अ) औद्योगिक गृहों में। (ब) मुद्रणालय में। (स) शोध संस्थाओं में। (द) संग्रहालय में। (य) विज्ञान अभिकरणों में। (र) कला भवनों में। (ल) वन्य जीवन छाया-चित्रकार के रूप में। (व) प्राकृतिक सौन्दर्य चित्रकार के रूप में कार्यरत है।
(12) अन्य कक्ष प्राविधिक छाया-चित्रण अध्यापक शैक्षिक संस्थानों में। (13) स्वतन्त्र रूप से छाया चित्रकारिता।
(अ) खेलकूद छाया चित्रकार। (ब) समाचार छाया चित्रकार। (स) अपराध छाया चित्रकार। (द) संसदीय समाचार छाया चित्रकार के रूप में।
पाठ्यक्रम
1-इस टे्रड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी।
2-पाठ्यक्रम में दिये गये प्रयोगात्मक सूची के सभी प्रयोगों को करना अनिवार्य है।
3-अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
वाह्य परीक्षा 200
नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
41 ङ322 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
कैमरा-मुख्य भाग
(1) लेंस-फोकल लेंथ, अपरचर, क्षेत्र की गहनता, रिजाल्विंग पावर, पर्सपेक्टिव, ऐंगिल आफ ब्यू, आकृति आकार।
10 (2) शटर तथा शटर स्पीड-रोटेटिंग डिस्कशटर, कम्प्यूटर शटर, फोकल प्लेन शटर, शटर सिक्रोनाइजेशन।
10 (3) व्यू फाइण्डर तथा रेन्ज फाइन्डर-डायरेक्ट विजन, ग्राउण्ड ग्लास तथा दर्पण, ग्राउण्ड ग्लास और प्रिज्म, रेन्ज फाइण्डर।
10 (4) फोकसिंग डिवाइस-फिक्स्ड फोकसिंग, लेंस माउण्ट फोकसिंग, ग्राउण्ड ग्लास फोकसिंग, रेन्ज फाइण्डर फोकसिंग, रिफ्लेक्सफोकसिंग तथा पेन्टाप्रिज्म फोकसिंग।
10 (5) फिल्म ट्रान्सपोर्ट मैकेनिजम-(1) मैनुअल, (2) ऑटो वाइन्डिंग। 10 (6) एक्सपोजर काउण्टर, फ्लेस कन्टेक्ट, एम0 काटैक्ट (M.contact sistem) सेल्फ टाइमर। 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र
डेवलपिंग
1-फोटोग्राफिक रसायन-डेवलपर, स्टाप बाथ, फिक्सर, हार्डनर, वेटिंग एजेन्ट। 18 18 2-फिल्म प्रोसेसिंग-
(क) विभिन्न विधियां (ख) विभिन्न प्रकार के डेवलपर (ग) विशेष डेवलपर-ट्रापिकल, भौतिक, मोनोवाथ।
3-समय ताप व हिलाने का डेवलपर पर प्रभाव, अण्डर तथा ओवर डेवलेपमेन्ट। 8 8 4-निगेटिव की कमियां, रिडेक्शन, इन्टेन्सीफिकेशन। 8 5-फॉग व उसके प्रकार व उनका निवारण।
तृतीय प्रश्न-पत्र
प्रिंिटंग
24 (1) प्रिटिंग की विशिष्ट विधियां : वर्निग, डाजिंग, विगनिटिंग, डिस्टार्शन, करेक्शन, डिफ्युजन या साफ्ट फोकस, फोटोग्राफ, बासरिलोफ सोलराईजेशन,
(2) रंग संस्कार तथा उसके प्रकाश-रसायनिक, धातुविध, डाई टोनिंग, राटचिंग व फिनिशिंग। 12 (3) सम्बद्ध उपसाधन : कैमरा स्टैण्ड (ट्राईपॉड) पेनिंग टिल्ट हेड, लेन्स हुड, केबिल, रिलीज, एक्सपोजर, मीटर, एक्सटेंशन टयूब, एक्सटेंशन बैलोज, टेली कनवर्टर।
24
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
इन्डोर फोटोग्राफी
(1) स्टिललाइफ तथा टेबल टाप फोटोग्राफी-
20 (अ) विभिन्न प्रकार के वस्तुओं के आकार टेक्सचर तथा टोन्स के लिए छाया चित्रण। (ब) विभिन्न प्रकार के वस्तु उनके समूह तथा रख-रखाव की व्यवस्था प्रकाश के परिप्रेक्ष्य मेंः (2) फ्लैश फोटोग्राफी :
40 (अ) परिचय, सिद्धान्त, प्रकार, प्रयोग एवं आधुनिक युग में इसका महत्व। (ब) फ्लैश यूनिट क्या है तथा इसके प्रकारों का अध्ययन (स) विषयवस्तु पर डाइरेक्ट फ्लैश की व्यवस्था एवं उचित डाइग्राम के माध्यम से अध्ययन। (द) मल्टीपल फ्लैश क्या है एवं इसके प्रयोग। (य) फिल-इन फ्लैश क्या है एवं प्रयोग। (र) फ्लैश से सम्बद्ध उपसाधनों का प्रयोग, एक्सपोजर तथा उसकी समस्यायें।
पंचम प्रश्न-पत्र
चलचित्रण फोटोग्राफी
(1) सिनेमेटोग्राफी-
40 (अ) इतिहास, सिद्धान्त तथा आधुनिक भारत में बुनियादी तकनीक। (ब) रचनात्मक सिनेमेटोग्राफी की कला-गति का कम्पोजीशन (फ्रेम के अन्दर/फ्रेम के बाहर)।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 323(स) चलचित्र के क्षेत्र में तीव्र गति फोटोग्राफी का योगदान, स्टाप मोशन तथा टाइम लेप्स, फेड, आउट-फेड इन डिजाल्व, कट का चलचित्र में महत्व।
(द) चलचित्र के क्षेत्र में ऐनिमेशन (कार्टून छाया चित्रण) तथा अन्य विशिष्ट तकनीकी का प्रयोग। (य) चलचित्र फोटोग्राफी की प्रोसेसिंग तकनीक तथा आवश्यक उपकरण का अध्ययन। (र) एडिटिंग, टाइटिलिंग तथा प्रजेन्टेशन। (ल) ध्वनि, अंकन प्रणाली तथा तकनीक। (व) चलचित्र फोटोग्राफी में दूरदर्शन और वीडियो कैमरा के आधारभूत सिद्धान्त, तकनीक एवं प्रणाली। सिक्रोनाइज्ड स्टेप्स।
(2) कॉपीइंग-
20 कॉपीइंग के लिए उपकरण। उपयुक्त कैमरा और फिल्म। प्रकाश व्यवस्था। निगेटिव और डुप्लीकेट ट्रान्सपेन्सीज (स्लाइड) का निर्माण।
टे्रड-रंगीन फोटोग्राफी
प्रयोगात्मक सूची
(1) 125 ए0एस0ए0 को पैक्रोमेटिक फिल्म से एक लाल गुलाबों के गुलदस्ते को जिसमें हरी पत्तियां हो तथा पृष्ठभूमि में नीली स्क्रीन है, चित्र, निम्न फिल्टरों के द्वारा खीचें।
(1) पीला फिल्टर, (2) नारंगी फिल्टर (3) गहरा लाल। आउट डोर चित्र लेने के लिए निम्न सारिणी का प्रयोग करेंगे तो सभी चित्र सही एक्सपोज होंगे।
जितनी फिल्म की गति होगी उसी के अनुसार शटर स्पीड लें। उदाहरण यदि हमारी फिल्म 125 ए0एस0ए0 की है तो शटर स्पीड 1/25 से0 होंगेः
शटर स्पीड-सेक0
125
चमकता सूर्य चमकता सूर्य सूर्य बादलों से घिरा काले बादल बरान्डे में वस्तु साफ आकाश बादल युक्त आकाश अत्यधिक हल्की कोई परछाई नहीं
परछाई
गहरी परछाई हल्की परछाई अपरचर एफ0 16 एफ0 11 एफ0 8 एफ0 5.6 एफ0 4 ऊपर स्थित दशा में विभिन्न चित्र खींचे, डेवलप करें तथा उनके प्रिन्ट बनायें। इस प्रकार प्राप्त निगेटिवों को प्रिन्ट करके क्रिटीसाइज करें। (2) कुछ अच्छे निगेटिवों को लें और उनके ब्रोमाइड पेपर पर 2, 4, 8, 4, 6 गुना इनलार्जमेंट बनायें।
(1) विभिन्न आकार के अच्छे प्रिन्टों को निम्न ओनिंग घोलों में टोन करें। 2.(1) सीपिंया टोन-सोडियम सल्फाइड द्वारा प्रिन्ट को निम्न घोल में ब्लीच करें- पोटाशियम ब्रोमाइड 5 ग्राम पोटाशियम फेरीसायनाइड 1 ग्राम पानी 100 सी0सी0 ब्लीचिंग के उपरान्त प्रिन्ट को भली-भाँति पानी में धो लें। अब प्रिन्ट को साोडियम सल्फाइड 4 ग्राम पानी 100 सी0सी0 के घोल में डाल दें। प्रिन्ट भूरा या सीपिया टोन में आ जायेगा।
नोट-(i) सोडियम सल्फाइड घोल में उत्पन्न गैस फोटोग्राफी सम्बन्धित वस्तुओं के लिए हानिकारक है इस प्रयाोग को खुले स्थान पर करें। (ii) सोडियम सल्फाइड घोल को कमजोर न होने दें। कमजोर घोल अच्छे टोन नहीं देता है। 20 प्रतिशत घोल भी अधिक समय तक नहीं टिकता है। यह अपनी ताकत को धीरे-धीरे खोता जाता है।
(iii) सोडियम सल्फाइड घोल को कमजोर न होने दें। कमजाोर घोल अच्छे टोन नहीं देता है। 20 प्रतिशत घोल भी अधिक समय तक नहीं टिकता है। यह अपनी ताकत को धीरे-धीरे खोता जाता है।
324 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 42.(2) हाइपो-एलम-द्वारा सीपिया टोनिंग। सर्व प्रथम प्रिन्ट को फार्मलीन या एलम के घोल में सख्त (हार्ड) कर लें। हाइपो 40 ग्राम पानी 200 सी0सी0 इस घोल में 10 ग्राम एलम को मिलायें। प्रयोग के लिए इस घोल का ताप 40 डिग्री से0 से 50 डिग्री से0 तक होना चाहिए अर्थात् घोल अधिक गरम होना चाहिए। इस घोल की खास बात है कि वह दो चार प्रिन्ट को टोन करने के उपरान्त ही उत्तम फल देता है। अतः कुछ पुराने खराब प्रिन्टों की इस घोल में टोन कर लेना चाहिए फिर जिस प्रिन्ट को टोन करना हो उसे इस घोल में ढाल लें। इस कार्य में 10-30 मिनट का समय लग सकता है। ठंडे पानी का प्रयोग न करें।
2.(3) कापर सल्फेट द्वारा टोनिंग- घोल ए-कापर सल्फेड 1 ग्राम पोटेशियम साइटे्रट 5 ग्राम पानी 100 सी0सी0 घोल-बी पोटेशियम सल्फेट 8 ग्राम पोटासियम साइटे्रट 5 ग्राम पानी 100 सी0सी0 प्रयोग के लिए ए तथा बी को बराबर मात्रा में ले। इस ए़बी घोल में प्रिन्ट को डाले तथा उचित टोन आने पर निकाल लें।
2.(4) नीला टोन- घोल ए पोटेशियम फेरी सायनाइड 2 ग्राम गन्धक का सान्द्र तेजाब 4 बूंद घोल बी फेरिक अमोनियम साइटे्रट 2 ग्राम गन्धक का तेजाब सान्द्र 4 बूंद
इस्तेमाल के लिए ए़बी को बराबर मात्रा में लें। इस घोल में प्रिन्ट तुरन्त नीले हो जाते है अतः इस घोल को 3 गुना पानी में डिल्यूट कर लेनी चाहिए। (3) घटाव (रिडक्स्न) फारमर रिड्यूसर घोल ए हाइपो 10 ग्राम पानी 100 सी0सी0 घोल बी पोटेशिमय फेरी सायनाइड 2 ग्राम पानी 100 सी0सी0 प्रयोग के लिए 5 सी0सी0 ए का तथा 5 सी0सी0 बी को लेकर तुरन्त इस्तेमाल करें अन्यथा यह घोल धीरे-धीरे खराब हो जायेगा।
अधिक डेवलप तथा अधिक एक्सपोजर वाले निगेटिव या प्रिन्ट को सही घनत्व में लाने के लिए इस घोल में निगेटिव या प्रिन्ट डालकर हिलाते रहते हैं उचित धनत्व आने पर उन्हें पानी से भली प्रकार धो लेते हैं और फिर सुखा लेते हैं।
(4) तीब्रीकरण, इनटेन्ससीफिकेशन वाइक्रोमेट विधि-जो भी निगेटिव अण्डर डेवलप रह जाय उसे नार्मल बनाने के लिए वाइक्रोमेट इनटेन्सिफायर का प्रयोग करते हैं।
सर्वप्रथम निगेटिव को-
पोटेशियम डाइक्रोमेट 1 ग्राम पानी 100 सी0सी0 एच0सी0एल0 कान्क0 5 सी0सी0 के घोल में ब्लीच कर लें।
ब्लीचिंग के उपरान्त फिल्म को तब तक धोवें जब तक पीला रंग हट न जाय। अब किसी नार्मल डेवलेपर में निगेटिव को डेवलप कर लें। इस क्रिया को तब तक दुहरावे जब तक इच्छित घनत्व प्राप्त न हो जाय।
(5) रूप चित्र (पोटे्रट) विभिन्न स्थिति के प्रकाश (अरेंजमेन्ट) व्यवस्था में बनायें। उदाहरण-45 डिग्री 60 डिग्री साइट आदि। (6) किसी घनी (ओवर एक्सपोज्ड तथा डेवलप) निगेटिव के घनत्व को खुरचकर कम करें रिटचिंग मीडियम से पेन्सिल का कार्य करें। निगेटिव के चमकीले सतह पर लाल रंग लगा कर उसे हल्का करें। ब्रोमाइड पेपर पर आए पिन होल को पेन्सिल या ब्रश द्वारा निकालें तथा उभाड़ें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 325(7) फोटोग्राफ या शैडोग्राम या बिना कैमरे के चित्र बनाना। विभिन्न वस्तुओं को (पत्ती, कांच के खिलौने, गले की चेन आदि) को ब्रोमाइड पेपर के ऊपर डार्क रूम में सजा लें अब सफेद प्रकाश को या लाइट को एक या दो सेकेण्ड के लिए जला दें। फिर पेपर को डेवलप कर फिक्स कर लें। फोटोग्राफ तैयार।
प्रयोगात्मक परीक्षा
1-कान्टेक्ट प्रिन्ट बनाना। 2-प्रिन्ट की वाशिंग, ग्लेजिंग तथा फिनिशिंग। 3-दस प्रिन्टस 7 ग 9 इंच का विभिन्न विषयों पर एक पोर्टफोलियो तैयार करना। 4-प्रिंटिग की नियंत्रित विधि। 5-डोजिंग, वर्निग आदि का प्रयोग करके इन्लार्जमेन्ट बनाना। 6-लार्ज तथा मीडियम फारमेट के कैमरों का प्रयाोग। 7-विभिन्न व्यवस्थाओं और पृष्ठ भूमियों के साथ पोटे्रट। 8-सिर और कन्धा (पूरा चेहरा, 3/4 चेहरा और प्रोफाइल)। 9-3/4 तथा पूरे आकार का पोटे्रट। 10-विभिन्न दूरियों, आकारों तथा रंगों के तीन से पाँच वस्तु का छाया चित्रांकन। 11-एक सीधे फ्लैश का प्रयोग। 12-बाउन्स फ्लैश का प्रयोग। 13-अम्ब्रैला फ्लैश का प्रयोग। 14-विभिन्न प्रकाश दशाओं में रंगीन फिल्मों का उद्भासन। 15-उद्भासन फिल्टर सहित तथा फिल्टर रहित। 16-फिल्म प्रोसेसिंग तथा प्रिन्टिग। 17-कलर निगेटिव बनाना तथा ट्रान्सपेरेन्सीज (स्लाइड) की डुप्लीकेटिंग। 18-रंगीन छाया चित्रण-कार्यशालाओं का परिभ्रमण तथा आख्या तैयार करना। 19-सिनेमेटोग्राफी-कार्यशाला के परिभ्रमण तथा आख्या तैयार करना। 20-मूवी कैमरे की जानकारी तथा संचालन एवं अनुरक्षण। प्रोजेक्ट वर्क
दिये गये निम्न प्रोजेक्ट कार्य में से किसी एक प्रोजेक्ट पर कार्य करना अनिवार्य है। स्टेज फोटोग्राफी (डांस, नाटक कलाकारों का छायाचित्रण, कुम्हार, फैशन, रचनात्मक टेबुलटाप, फोटोग्राम) वार्षिक परीक्षा में परीक्षक के समक्ष प्रोजेक्ट कार्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है। प्रोजेक्ट कार्य 20 अंकों का होगा।
उदाहरण- दिनांक
प्रयोग नं0 1
विषय-एक निगेटिव का कान्टेक्ट प्रिन्ट बनाना। उपकरण-कान्टेक्ट प्रिटिंग फ्रेम, निगेटिव। पेपर का प्रयोग-एग्फा सगल बेट नार्मल। एक्सपोजर-10 से0 60 वाट लैम्प से 3 फीट की दूरी पर। डेवलपिंग समय-90 से 68 फा0 ताप पर। फिक्सिंग समय-5 मिनट। घुलने का समय-1/2 घंटा बहते पानी में। परिणाम-उत्तम निरीक्षण-निगेटिव के कुछ अधिक एक्सपोज होने के कारण अधिक एक्सपोजर देना पड़ा जिससे सही प्रिन्ट बन सके। निगेटिव को हल्का सा रिड्यूस करने से निगेटिव के घनत्व को कम किया जा सकता है। सही टेस्ट स्ट्रिप निकाल कर सही डेवलपिंग समय ताप के अनुसार देना चाहिए। अधिक एक्सपोजर तथा अधिक डेवलपिंग किसी भी मूल्य पर नहीं करना चाहिए।
Date . . Example . . Experiment No. 1 Object . . To prepare a contact print of a given negative. Apparatus . . Contact printing frame. Paper used . . Agla single wt. glossy, normal. Exposure given . . 10 sec. from a 60 wt. lamp at a distance of 3 ft.
Developing time . . 120 sec. at temp 68o F.
326 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4Fixing time . . 6 Min. Washing time . . 1/2 hour in running water. Result . . Satisfactory. Observation . . The negative was slightly over exposed hence a longer exposure was required for a correct print. By reducing the negative to lesser density this over exposure problem can be solved. Precautions . . Care must be taken in taking cut the test strips and correct developing time must be given at the temp. Over exposure and over developing must be avoided. EQUIPMENT NECESSARY FOR COLOUR PHOTOGRAPHY
Sl. no. Equipment Make Country Cost 1 2 3 4 5
Rs.
1 Furnished Air-conditioned Studio (T.V. Video
1 35 mm. SLR Camera Nikon Japan complete 80,000.00 2 One Med Format Camera Mamiy ,, ,, 50,000.00 3 One Umatic Video Camera Betacam ,, ,, 1,50,000.00 4 One VHS Camera Sony ,, ,, 50,000.00 5 One color Head Enlargers Sony ,, ,, 60,000.00 6 One Multi Media Computers Wiper ,, ,, 50,000.00 7 One Color Head Enlargers Drust Italy complete 1,50,000.00 8 Four Black & White Enlargers KB India India 20,000.00 9 Six Electronic Lights Pro Blitz Japan 40,000.00 10 One Air-Conditioner Videocon India 40,000.00 11 Two Film Dryer Philips India 20,000.00 12 Refrigerator BPL India 25,000.00 13 Two Stereo Tape recorders BPL India 50,000.00 14 One Heavy Duty Generator Set Voltas India 50,000.00 . . 50,000.00 15 Miscellaneous Expenditures . . Total 88,50,000.00 40,00,000.00
Digital)
2 One Televison Camera 3 Complete Colour Lab.
1,50,00,000.00 20,00,000.00 Total 2,10,00,000.00 RECURRING
20 Umatic Tapes Panasonic Japan 30,000.00 40 VHS Tapes Panasonic Japan 20,000.00 40 Audio Tapes Sony Japan 10,000.00 Studio Back Grounds Sony Japan 10,000.00 Color Sensitive Material Kodak Germany 50,000.00 Black & White Sen Material Kodak Germany 80,000.00 Total 3,20,000.00
BOOKS RECOMMENDED
1. Photography Theory & Practice : L.P. Clerc Vol. I & II 2. The Reproduction of Color : R. W. G. Hunt 3. High Speed Photography & Photonics : Sidney F. Ray 4. Photographic Developing in Practice : Geoffrey Attridge 5. An Introduction to Color : Relph M. Evans 6. Instant Film Photography : Michael Freeman 7. Photographic Optics : Authur Cox 8. The Book of Nature Photography : Heather Angle 9. Male Photography : Michael Busselle 10. Basic Motion Picture Technology : L. Bernard happeभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 327
11. Photographic Evidence : S. G. Ehrtich 12. Photography in school : A Guil for Teachers : Robert Leggat 13. Fillming for Pleasure & Profit : Ches Livingstone 14. Motion Picture Camera Data : Dareid W. Samuelson 15. T. V. Lighting Method : Gerald Millerson 16. 16 mm. Film Cutting : John Burder 17. Script Continuity and the Production Secretary : Avril Rowlands 18. Motion Picture Film Processing : Domnic Oase 19. Basic T. V. Staging : Gerald Millerson 20. The Focal Guide to Cibachrome : Jack h. Coote 21. The Focal Guide to Camera Accessories : Leonard Gaunt 22. Focal Guide to Larger Format Cameras : Sidney Ray 23. Photographic Skies : David Charles 24. Photo Guide to Portraits : Gunter Spitzing 25. Focal Guide to Color Film Processing : Derek Watkins 26. फोटोग्राफी, उसके सिद्धान्त तथा तकनीक ः हिमांश तिवारी
(12) टे्रड-रेडियो एवं रंगीन टेलीविजन
कक्षा-12
उद्देश्य-रेडियो एवं टेलीविजन आधुनिक युग में मनोरंजन का सशक्त माध्यम तो है ही साथ ही विश्व के एक छोर से दूसरे छोर तक अद्यतन सूचना तथा समाचार प्रसारित करने का भी सबल माध्यम है। आज यह विलासिता की वस्तु न रहकर ज्ञान संवर्धन के लिए आवश्यक आवश्यकता बनती जा रही है। इनकी मांग तथा सेवा का प्रसार तीब्रता से हो रहा है। अतः कुछ छात्रों को इस टे्रड में शिक्षण देना लाभकारी सिद्ध हो सकेगा। रोजगार के अवसर-
1-रेडियो तथा टेलीविजन निर्माण करने वाली कम्पनियों में नौकरी पा सकता है। 2-किसी रेडियो तथा टेलीविजन की दुकान पर रोजगार पा सकता है। 3-रेडियो तथा टेलीविजन की मरम्मत की दुकान खोलकर स्वरोजगार कर सकता है। 4-रेडियो तथा टेलीविजन के स्पेयर पाट्र्स की दुकान खोलकर स्वरोजगार कर सकता है। 5-डोर टू डोर सेवा के अन्तर्गत खराब रेडियो, ट्रान्जिस्टर एवं टेलीविजन सेट्स को लोगों के घर पर जाकर मरम्मत करके अच्छा धनोपार्जन कर सकता है। 6-रेडियो टेलीविजन टे्रनिंग सेन्टर खोल सकता है। 7-दो बैंड के रेडियो बनाना, स्टेबलाइजर तथा टी0 वी0 का निर्माण। पाठ्यक्रम-इस टे्रड में तीन-तीन घंटे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंको का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक- पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20 (ख) प्रयोगात्मक- आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 बाह्य परीक्षा 200
बाह्य परीक्षा हेतु
100 अंक प्रयोगात्मक कार्य 100 अंक प्रोजेक्ट कार्य
टीप-परीक्षार्थियों की लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
328 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4प्रथम प्रश्न-पत्र
(तरंग गति एवं ध्वनि का सिद्धान्त)
1-तरंगों का अध्यारोपण-दो स्रोतों के कारण स्पेस में व्यक्तिकरण, विवर्तन की संकल्पना, विस्पन्द की घटना, विस्पन्दों की गणना।
20 2-अप्रगामी तरंगें-बद्ध माध्यम, अप्रगामी तरंगे, निस्पंद और प्रस्पन्द, बद्ध माध्यम के कम्पनी की लाक्षणिक प्रवृत्तियां, डोरी एवं आयु स्तम्भों के क्रस (अनत्य संशोधन जैसी बारीकियां नहीं) सोनो मीटर, मैल्डिस का प्रयोग, अनुनाद स्तम्भ और कुन्द नलिका।
20 20 3-डाप्लर का सिद्धान्त-आभासी आवृत्ति की गणना करना। (1) जब प्रेक्षक, स्रोत की ओर गतिमान हो। (2) जब प्रेक्षक से दूर जा रहा हो।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(विद्युत तथा विद्युत् चुम्बकत्व का सिद्धान्त)
(क) विद्युत्-
(1) धारिता-धारिता की परिभाषा, गोलाकार चालक की धारिता, आवेशित चालक की ऊर्जा, संघारित्र का सिद्धान्त, समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता, गोलाकार संघारित्र की धारिता, श्रेणी क्रम तथा समान्तर क्रम में संघारित्रों का संयोजना, संधारित्र की ऊर्जा।
15
15 (2) वैद्युत चालन-अम्ल, क्षार तथा लवण के जलीय विलयन में वैद्युत चालन (आयतन वैद्युत अपघटन फैराडे के वैद्युत अपघटन के नियम, फैराडे संख्या) गैसों में वैद्युत चालन, धातुओं में वैद्युत चालन, ओम का नियम, धारा घनत्व, प्रतिरोध, विशिष्ट प्रतिरोध चालकता, विशिष्ट चालकता, ताप परिवर्तन का प्रतिरोध तथा विशिष्ट प्रतिरोध पर प्रभाव, प्रतिरोध का ताप गुणांक। (ख) विद्युत् चुम्बकत्व-
(1) विद्युत चुम्बकीय प्रेरणा-चुम्बकीय फ्लक्स, विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के लिए फैराडे का नियम से प्रेरित विद्युत वाहक बल का लारेंज बलों के आधार पर व्याख्या। विद्युत धारा जनित्र (डायनमों) ए0सी0, डी0सी0 का सिद्धान्त। स्वप्रेरण, स्वप्रेरकत्व पर क्रोड के पदार्थ का प्रभाव। प्रेरणीय परिपथ में धारा के उत्थान और क्षेत्र का ग्राफीय वर्णन (उपपत्ति नहीं) अन्योन्य प्रेरण को परिभाषाओं, क्रोड पदार्थ पर निर्भरता, ट्रान्सफार्मर (गुणात्मक) सरल धारा मीटर का प्रतिकूल विद्युत वाहक बल।
15 (2) प्रत्यावर्ती धारा परिपथ-वोल्टता तथा धारा का समय के प्रति ग्राफीय चित्रण। वोल्टा एवं धारा तथा धारा में कलान्तर। वर्ग माध्य मूल मान अश्व शक्ति वाल्हीन धारा चोक, कुण्डली। किसी परिपथ में कम्पन एवं आवृत्ति (एक स्प्रिंग पर लगे पिण्ड के कम्पनों से तुलना)।
15
तृतीय प्रश्न-पत्र
(बेसिक इलेक्ट्रानिक्स)
10 1-विद्युत एवं विद्युत स्त्रोत-विद्युत धारा के प्रकार-दिष्ट धारा, प्रत्यावर्ती धारा, दिष्ट धारा एवं प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत। 2-संधारित्र तथा उसके प्रकार-संधारित्र या पारिग्र (कपिसटर या कण्डेन्सर), मात्रक संधारित्र पर विभिन्न कारकों का प्रभाव, कार्य विभव, संधारित्र के प्रकार-स्थायी, परिवर्ती, अर्द्ध परिवर्ती, बनावट के आधार पर-माइका, पेपर सिरेनिक, पोलिस्टर, इलेक्ट्रोलाइटिक, वाय गैन्ग, ट्रिमर या पेडर, संधारित्रों का संयोजन।
10 10 3-लाउड स्पीकर-संरचना, कार्यविधि, आडियो आवर्ती, अनुक्रिया चक्र। 4-मल्टीमीटर-संरचना, कार्यविधि, वोल्टमीटर, अमीटर, ओम मापी की तरह, उपयोग, सुग्राहिता, गुण-दोष।
10 5-अर्द्ध चालक-शुद्ध चालक, अशुद्ध अर्द्ध चालक-पी0 तथा एन0 प्रकार के अर्द्ध चालक, इलेक्ट्रानिक संरचना। बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक आवेशवाही।
10 6-डायोड-निर्यात डायोड-संरचना व अभिलक्षण वक्र, पी0एन0 सन्धि डायोड-संरचना, कार्यविधि तथा अभिलक्षण वक्र। निर्वात डायोड तथा पी0एन0 सन्धि डायोड में अन्तर। डायोड के उपयोगदिष्टकारी तथा संसूचक के रूप में। सेतु दिष्टकारी-परिपथ, कार्यविधि, निवेशों तथा निर्गत तरंग रूप। 10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(ट्रांजिस्टर तथा ट्रांजिस्टर रेडियो)
(1) ट्रांजिस्टर अभिग्राही-अभिग्राही का ब्लाक आरेख व कार्य-विधि, विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत विवरण रेडियो आवृत्ति प्रवर्धक, कनवनेर, आई0एफ0 प्रवर्धक, डिटेक्टर तथा श्रवय प्रवर्धक। 20 (2) टेप रेकार्डर-आडियोटेप रिकार्डर के मुख्य भाग तथा उनकी कार्य-प्रणाली। 20 (3) दोष निवारण-ट्रांजिस्टर अभिग्राही की विभिन्न अवस्थाओं के प्रमुख दोष व निवारण, टेप-रिकार्डर में संभावित दोष व उनका निवारण।
20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 329
पंचम प्रश्न-पत्र
(श्वेत-श्याम तथा रंगीन टेलीविजन)
1-श्वेत-श्याम टेलीविजन के निम्न संभागों की कार्य विधि एवं दोष, टी0वी0 पावर सप्लाई टी0वी0 के कामन सेक्शन, वीडियों सेक्शन, आडियो सेक्शन, सिन्क सेक्शन, ए0जी0सी0 (स्वचालित गेन कन्ट्रोल), होरिजन्टल सेक्शन, वर्टिकल सेक्शन तथा ई0एच0टी0 (एक्सट्रा हाई टेंशन) सेक्शन। 9 2-श्वेत-श्याम टेलीविजन तथा रंगीन टी0वी0 में मुख्य अन्तर प्राथमिक रंग, कलर मिक्सिंग थ्योरी, सेचुरेशन क्रामिनेन्श स्यूमिनेन्स, ह्यू।
9 3-सालिड स्टेट-रंगीन टेलीविजन के विभिन्न भाग, उनके कार्य एवं मुख्य दोष। रिमोट कन्ट्रोल की सामान्य जानकारी।
9 4-टेलीविजन बूस्टर की कार्य प्रणाली तथा उसका टेलीविजन में उपयोग तथा आवश्यकता। 9 8 5-केबिल टेलीविजन की सामान्य जानकारी। 8 6-टेलीविजन मरम्मत के लिए आवश्यक उपकरण। 8 7-टेलीविजन मरम्मत की दुकान के लिए आवश्यक सामग्री।
प्रयोगात्मक कार्य का पाठ्यक्रम
1-दो बैंड के ट्रांजिस्टर अभिग्राही को बनाना तथा उनका परीक्षण करना। (अ) मीडियम बैण्ड तथा शार्ट वेव। अथवा (ब) मीडियम बैण्ड तथा एफ0 एम0। 2-बैण्ड स्विच की वायरिंग करना। 3-अभिग्राही का एलाइनमेन्ट करना। 4-अभिग्राही में दोष निवारण। 5-श्वेत-श्याम टेलीविजन किट की सहायता से असेम्बल करना तथा उनके दोष निवारण निकालना। 6-पैटर्न जनरेटर की सहायता से टेलीविजन का एलाइनमेन्ट। 7-टेलीविजन में बूस्टर का उपयोग तथा उनका परीक्षण। 8-विभिन्न प्रकार के एण्टीना की जानकारी तथा उपयोग। 9-रंगीन टेलीविजन के विभिन्न भागों में मल्टीमीटर के द्वारा परीक्षण करना तथा दोष निवारण करना। 10-टेलीविजन में रिमोट लगाना।
प्रोजेक्ट कार्य सूची
प्रोजेक्ट कार्य के लिए प्रोजेक्टों की सूची निम्नवत् है- 1-नियंत्रित पावर सप्लाई (o. 30v, 1A)। 2-दो बैण्ड वाला अभिग्राही। 3-किट का प्रयोग करके टेप-रिकार्डर एसेम्बिल करना। 4- किट का प्रयोग करके श्वेत-श्याम टी0वी0 बनाना। 5-10 वाट का शक्ति प्रवर्धक। 6-टी0वी0 के लिए प्रयोग में आने वाला स्थायीकारक (स्टेबिलाइजर)। 7-टी0वी0 प्रदर्शन (डिमांस्ट्रेशन) माडल जिसमें दोष-निवारण किया जा सके। इस सूची के अतिरिक्त विषय अध्यापक स्वविवेक से विषय से सम्बन्धित उपयुक्त प्रोजेक्ट भी बनवा सकते हैं।
शिक्षक विद्यार्थियों को समूह में प्रोजेक्ट आवंटन कर सकते हैं परन्तु प्रोजेक्ट बनाना अनिवार्य है।
प्रायोगिक अंकों का विभाजन निम्न प्रकार से प्रस्तावित है- आंतरिक परीक्षा 200 अंक बाह्य परीक्षा प्रायोगिक परीक्षा 100 अंक प्रोजेक्ट 100 अंक योग... 200 अंक
42 ङ330 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
रेडियों एवं रंगीन टेलीविजन तकनीक उपकरणों की सूची
क्रम-संख्या उपकरण का नाम संख्या अनुमानित अनुमानित
(a) मूल्य/अ0 मूल्य
1 2 3 4 5
रु0 रु0
1 सोल्डरिंग आइरन (25w. 35w) 25 35.00 875.00
2 कटर 25 10.00 250.00
3 नोज प्लायर 25 10.00 250.00
4 काम्बीनेशन प्लायर 25 15.00 375.00
5 स्क्रू ड्राइवर सेट (सेट आफ 16) 25 100.00 2500.00
6 चिमटी (टवीजर) 25 3.00 75.00
7 ब्रश (इंस्टूमेन्ट साफ करने के लिए) 10 20.00 200.00
8 फाइल (रेती) (फलेंट, राउण्ड ट्रेगलर) 10 सेट 50.00 500.00
9 बेंच वाइस 5 50.00 250.00
10 हैण्ड ड्रिल 5 40.00 200.00
11 हेक्सा तथा हेक्सा ब्लेड 5 20.00 100.00
12 स्पेनर सेट (रिंच सेट) 5 75.00 375.00
13 हैमर (हथौड़ी छोटी) 5 20.00 100.00
14 टेस्टिंग बोर्ड (टेस्टिंग बोर्ड) (मेन्स बोर्ड) 10 40.00 400.00
(चार या पाँच प्लग साकेट वाला)
15 मल्टी मीटर (डिजिटल एनालाग) 10 225.00 2250.00
16 बैटरी एलिमिनेटर 15 125.00 1875.00
17 वोल्टेज रेगुलेटर (टी0 वी0 स्टेबिलाइजर) 10 150.00 1500.00
18 श्वेत-श्याम 51 से0मी0 वी0 सेट 2 3500.00 7000.00
19 श्वेत-श्याम 36 से0मी0 टी0वी0 सेट 5 1500.00 7500.00
20 सिगनल जेनरेटर (आर0 एफ0) 2 2500.00 5000.00
21 पैटर्न जेनरेटर 2 1500.00 3000.00
22 ट्रांजिस्टर किट 25 140.00 3500.00
23 टेपरिकार्डर (मोनो) 5 500.00 2500.00
24 टू इन वन (टेपरिकार्डर तथा ट्रांजिस्टर) 5 650.00 3250.00
25 रंगीन टेलीवीजन सेट (दो अलग-अलग प्रकार 2 7400.00 14800.00
के)
26 इलेक्ट्रानिक कम्पोनेन्ट तथा सोल्डर . . . . 5000.00
27 कैथोड रे आस्सिकोस्कोप 2 14000.00 28000.00
28 आर0 सी0 एल0 ब्रिज 1 4000.00 4000.00
29 आडियो आस्सिलेटर 2 2000.00 4000.00
योग . . 96,925.00
पुस्तकें-
1-रेडियों एवं टेलीवीजन तकनीक-ले0 महेन्द्र सिंह, सबीर सिंह, भारत प्रकाशन मंदिर, 142ए, विजय नगर, वेस्टर्न कचेहरी रोड, मेरठ-मूल्य 125 रु0 लगभग।
2-टेलीवीजन इंजीनियरिंग-ले0 वाई0 डी0 शर्मा, भारत प्रकाशन एण्ड कम्पनी, वेस्टर्न कचेहरी रोड, मेरठ- मूल्य 100 रु0 लगभग।
3-रेडियों एवं टेलीवीजन तकनीक। 4-टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल। 5-टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल राज पब्लिकेशन, केदार काम्पलक्स, देहली गेट, मेरठ 6-कलर टेलीवीजन सर्विसिंग मैनुअल प्रत्येक का मूल्य लगभग 25 रु0 7-रिमोट आपरेटिंग एण्ड सर्विसिंग मैनुअल 8-कलर कोड गाइडभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 331
(13) टे्रड-ऑटोमोबाइल
कक्षा-12
100
300
20 20 20 20 20
200
400
उद्देश्य– 1–अधिकांश जनसंख्या का निवास गाँव में है, जिनके लिये आने जाने का साधन तथा माल ढोने का साधन केवल वाहनों द्वारा ही उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसी जगहों में रेल उपलब्ध नहीं है, उन वाहनों की मरम्मत हेतु शहर में आना पड़ता है तथा अधिक धन खर्च होता है, जिसको बचाने के लिये ऑटोमोबाइल्स का प्रशिक्षण आवश्यक है। इसके द्वारा हम अपने वाहनों को ग्रामीण क्षेत्र में भी मरम्मत करने के बाद चला सकते हैं तथा अपव्यय को बचा सकते हैं। 2–बेरोजगारी दूर करने में सहायक होता है। स्कोप– 1–गैरेज खोल सकता है। 2–डिप्लोमा इंजी0 में द्वितीय वर्ष में प्रवेश ले सकता है। 3–स्पेयर पार्ट्स की दुकान खोल सकता है। 4–किसी भी ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में नौकरी कर सकता है। 5–किसी भी संस्थान में एक वर्ष का अप्रेन्टिशशिप प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। पाठ्यक्रम– इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंका का विभाजन निम्नवत् रहेगा : (क) सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60 (ख) प्रयोगात्मक आन्तरिक परीक्षा 200 वाह्य परीक्षा 200 आन्तरिक परीक्षा के अंक आन्तरिक परीक्षक द्वारा दिये जायेंगे। जिसका विवरण निम्न है :
| क्षेत्रीय कार्य | कार्यस्थल पर प्रशिक्षण | |||||
| उपस्थिति अनुशासन | लिखित कार्य | दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे | मौखिकी | योग | प्रतिष्ठानों तथा शैक्षिक भ्रमण | योग |
| 10 | 20 | 50 | 20 | 100 | 100 | 200 |
वाह्य परीक्षा के अंक परिषद् द्वारा नियुक्त परीक्षक द्वारा दिये जायेंगे। अंक विभाजन–
| दीर्घ प्रयोग | दीर्घ प्रयोग | लघु प्रयोग | लघु प्रयोग | मौखिक प्रयोग के सूची के आधार पर | प्रैक्टिकल नोट बुक | योग |
| 1 | 2 | 1 | 2 | |||
| 40 | 40 | 20 | 20 | 40 | 40 | 200 |
प्रथम प्रश्न-पत्र
20 (ऑटोमोबाइल्स का परिचय इंजनों के प्रकार व पाटर््स) पूर्णांक : 60 1. कम्प्रेशन इग्नीशन इंजन–उद्देश्य, इंजन की बनावट (टू स्ट्रोक इंजन, फोर स्ट्रोक इंजन) टू तथा फोर स्ट्रोक इंजन कार्यविधि, दो तथा चार स्ट्रोक इंजनों में अन्तर, डीजल तथा पेट्रोल इंजन में अन्तर, सुपर चार्जर, नाकिंग, डिटोनेशन, काल्पनिक तथा वास्तविक P-V आरेख आदि विवरण। 2. वाल्व ऑपरेटिंग मैकेनिज्म–वाल्व, प्रणाली की आवश्यकता एवं कार्य, विभिन्न प्रकार के वाल्व ऑपरेटिंग मैकेनिज्म (स्लाइडिंग वाल्व, ओवर हेड लिफ्टिंग आदि) पुशराड, रॉकेट आर्म, स्प्रिंग, वाल्व सीट, वाल्व गाइड आदि का विवरण।
20332 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 3. इन्टेक, एग्जास्ट एवं साइलेन्सर–इनटेक सिस्टम, इन्टेक मेनी फोल्ड, एग्जास्ट सिस्टम, एग्जास्ट मेनी फोल्ड, साइलेन्सर, साइलेन्सर के प्रकार, मफलर, मफलर के प्रकार, कैटेलिक कन्वर्टर, ऑटोमोबाइल्स में प्रदूषण रहित व्यवस्था हेतु विभिन्न यूरो के बारे में विवरण।
20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
20
20 (इंजन के सिस्टमों का विवरण एवं उनकी कार्य प्रणाली) पूर्णांक : 60 1. फ्यूल सप्लाई सिस्टम (डीजल)–परिचय, इंजेक्शन से तात्पर्य, फ्यूल फीड पम्प, फ्यूल इंजेक्शन पम्प, फ्यूल इन्जेक्टर, फ्यूल फिल्टर, गवर्नर, गवर्नर के प्रकार, नोजल के कार्य का विवरण व विभिन्न प्रकार की नॉजल, उपरोक्त सभी के प्रकार, कार्य, उपयोग, रखरखाव आदि का विवरण। 2. इग्नीशन सिस्टम एवं विद्युत्–परिचय, इग्नीशन सिस्टम के कार्य, इग्नीशन सिस्टम के प्रकार (मैग्नेटिक तथा बैटरी इग्नीशन) इग्नीशन क्वॉयल, कन्डेन्सर, डिस्ट्रीब्यूटर, रेग्यूलेटर, स्पार्क प्लग, स्पार्क प्लग के प्रकार, ग्लो प्लग, ऑक्टेन, सीटेन नम्बर, ईंधन का ऊष्मीयमान, विभिन्न प्रकार के इंजनों के फायरिंग आर्डर आदि कार्य प्रभार, भाग, उपयोग, रखरखाव एवं सावधानियों का विवरण। 3. सहायक उपकरण–परिचय, डायनमों, सेल्फ, अल्टरनेटर, चालमापी, कट आउट, रिले, हॉर्न, इन्डीकेटर, बल्ब, फ्लैशर, मेन स्वीच, दर्पण, सनवाइजर, वीड स्क्रीन वाइजर, वातानुकूलन, बैटरी, बैटरी के भाग, बैटरी की टेस्टिंग, चार्जिंग उपरोक्त सभी के कार्य, रखरखाव आदि का विवरण।
20
तृतीय प्रश्न-पत्र
20
20 (इंजन के विभिन्न कन्ट्रोल प्रणालियाँ, ट्रैफिक रूल एवं सुरक्षा के उपाय) पूर्णांक : 60 1. पारेषण सिस्टम–क्लच, क्लचों के प्रकार, क्लच के भाग, सिंगिल व मल्टी प्लेट क्लचों का विवरण, रखरखाव दोष एवं दोष निवारण आदि का विवरण। गीयर बॉक्स, गीयर बॉक्स के प्रकार तथा उनके विवरण, पॉवर स्थानान्तरण (चेन ड्राइव, गीयर, बेल्ट ड्राइव) यूनिवर्सल (हुक्स) ज्वाइन्ट, प्रोपेलर शाफ्ट, डिफरेन्सियल गीयर, रीयर एक्सल आदि, प्रकार, कार्य, उपयोग, रखरखाव एवं सावधानियों का विवरण। 2. स्टेयरिंग, फ्रन्ट एक्सल तथा सस्पेन्शन–स्टेयरिंग, स्टेयरिंग के प्रकार (वर्ग और सेक्टर, वर्ग तथा रोलर, वर्ग तथा नट वर्ग तथा वर्ग व्हील, वर्ग और नट विद सरकुलेटिंग बाल टाइप) क्लोप्सविल कॉलम, अकरमैन स्टेयरिंग, पॉवर स्टेयरिंग, स्टेयरिंग व्हील, स्टेयरिंग ज्योमेट्री (कॉस्टर, कैम्बर, कम्बाइन्ड एंगल, किंग पिन, इनक्लीनेशन, टो इन टो आउट) स्प्रिंग, स्प्रिंग के प्रकार, शॉक एबजार्वर, शॉक एबजार्वर के प्रकार, स्वतंत्र सस्पेंशन, फ्रन्ट एक्सल, फ्रन्ट एक्सल के भाग आदि के प्रकार, कार्य, उपयोग, रखरखाव एवं सावधानियों का विवरण। 3. ब्रेक सिस्टम–परिचय, ब्रेक की आवश्यकता, ब्रेक के प्रकार, (मैकेनिकल, हाइड्रोलिक, इलेक्ट्रिक, मैग्नेटिक, एयर ब्रेक, वैक्यूम तथा डिस्क ब्रेक, पॉवर एवं पार्किंग ब्रेक) ब्रेक सिस्टम के भाग (ड्रम, ब्रेक लाइनिंग, ब्रेक केबिलया, ब्रेक रॉड, मास्टर सिलेण्डर, व्हील, सिलेण्डर, ब्रेक का समंजन, ब्रेक शू, ब्रेक सिस्टम का ब्लीड करना, ब्रेक एडजस्टमेन्ट, व्हील, रिम, टायर, टायर के प्रकार (रेडियल, ट्यूबलेस ट्रैक्टर) टायर का रोटेशन, ब्रेक ऑयल एवं ट्यूब आदि का विवरण, उपयोग, कार्य, रखरखाव एवं सावधानियों का अध्ययन। 20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(मशीन ड्राइंग) पूर्णांक : 60
15
10
15 20 1. रेखाओं तथा ठोसों के प्रक्षेप–लम्ब कोणीय (आर्थोग्राफिक) आइसोमैट्रिक प्रक्षेप, प्रथम कोणीय तथा तृतीय कोणीय प्रक्षेप में अन्तर, साधारण ठोस पदार्थों (शंकु, बेलन, वृत्त, गोला, प्रिज्म, पिरामिड आदि क्षैतिज तथा ऊध्र्वातल तल पर साधारण प्रक्षेप। 2. सतहों पर विकास–परिचय, विकास की विधियाँ, सतहों का विकास (शंकु, घन, बेलन, प्रिज्म, पिरामिड) बिना कटिंग किये। 3. लम्ब कोणीय प्रक्षेप (Orthography)–परिचय, ऐलिवेशन प्लान, साइड व्यू, तल का सिद्धान्त, प्रथम कोण प्रक्षेप तथा तृतीय कोणीय प्रक्षेप, प्रथम तथा तृतीय प्रक्षेप में अन्तर। 4. मुक्त हस्त ड्राइंग– (अ) विभिन्न प्रकार के फास्टनर्स– नट, बोल्ट, रिवेट, चाभी, कॉटर, स्टड, स्पन्स्ड शाफ्ट, फाउन्डेशन वोल्ट।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 333(ब) औज़ार– रिन्च, पेचकस, हथौड़ी, गुनिया, कैलीपर्स (वर्नियर, इनसाइड, आउट साइड, जैनी) माइक्रोमीटर, साधारण स्केल, हैण्ड वाइस, हैक्सा, सीमागेज, रीयर, साइनवार, टेननसा, वायरगेज, फिलरगेज, प्लास आदि।
(स) साधारण मशीन पार्ट्स– पिस्टन, वाल्व, स्पार्क प्लग, ग्लोप्लग, फिल्टर, अप्रस्थ काट टायर, दो स्ट्रोक तथा चार स्ट्रोक इंजन की क्रियाविधि, वाल्व टायमिंग डायग्राम, कनेक्टिंग, पेट्रोल सिस्टम, सस्पेन्शन सिस्टम, प्रोपलर शाफ्ट, डिफरेन्शियल, गवर्नर, इन्जेक्टर, डीजल सिस्टम, लाइटिंग सिस्टम आदि की हस्तमुक्त ड्राइंग।
(द) चूड़ियाँ– चूड़ियों के भाग, प्रकार, उनके संकेत।
पंचम प्रश्न-पत्र
(मैकेनिकल गणित) पूर्णांक : 60
06 1. इंजन क्षमता की गणना यदि बोर एवं स्ट्रोक दिया हो साधारण गणना। 08 2. कूलिंग सिस्टम पर आधारित साधारण गणना। 08 3. इग्नीशन क्वॉयल पर आधारित साधारण गणना। 4. लीफ तथा क्वॉयल स्प्रिंग पर आधारित साधारण गणना तथा स्प्रिंग का सामथ्र्य ज्ञात करना। 10 5. अन्तर्दहन इंजन के लिये IHP, BHP, FHP में सम्बन्ध इस पर आधारित साधारण गणना। 10 08 6. ब्रेक सिस्टम में पास्कल लॉ पर आधारित साधारण गणना। 10 7. प्रतिवल, विकृति, प्रत्यास्थता के प्रकार, सूत्र आधारित साधारण गणना।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(अ) दीर्घ प्रयोग– 1–ओवर हीटिंग के लिये कूलिंग सिस्टम की जांच करना, रेडियेटर खोलना, सफाई करना, कैनवेल्ट एडजस्ट करना। 2–कार्बोरेटर तथा फ्यूल पम्प की सफाई करना, निरीक्षण करना, फिट करना। फिल्टर तथा एअर क्लीनर की सफाई तथा पुनः फिट करना। 3–इंजेक्शन सिस्टम में लगे इन्जेक्टर, नॉजल, पम्प फिल्टर आदि को चेक करना, सफाई करना एवं फिट करना। 4–इंजन खोलना, चेक करना, सफाई करना, खराब पाटर््स बदलना, पुनः फिट करना तथा स्टार्ट करके चेक करना। 5–फ्रेम तथा चेसिस का निरीक्षण, सस्पेन्शन स्प्रिंग तथा शाक एब्जार्बर की सर्विसिंग करना तथा फिट करना। 6–फ्लाई व्हील तथा प्रेशर प्लेट कोर्जिंग करना, रिंग गीयर को फ्लाई व्हील से उतारना तथा चेक करके चढ़ाना, क्लच प्लेट को दुबारा लाइनिंग करना, फिट करना। 7–एअर ब्रेक एडजस्ट करना, एअर कम्प्रेशन टैक यूनिट तथा व्हील ब्रेक एडजस्ट करना, पाइप लाइन की हवा का लीकेज देखना तथा उसे दूर करना। 8–हाइड्रोलिक बे्रक, वैक्यूम वूस्टर का उतारना, सही करना, ब्रेक वैक्यूम सहायक को एडजस्ट करना। 9–गैस किट पैकिंग जैसे लॉक नट स्प्लिट पिन, लॉक वाशर, वायर लॉक आदि चेक करना तथा फिट करना। 10–इंजन के ऑयल सर्किट का पता करना और ऑयल पम्प, ऑयल फिल्टर की सर्विसिंग और प्रेशर के लिये वाल्वसेट करना। (ब) लघु प्रयोग– 1–हेड तथा वैक लाइट एडजस्ट करना। 2–बैटरी की सर्विसिंग करना, डिस्टिलवाटर भरना, बैटरी चार्ज करना। 3–कार्बोरेटर की ओवरहॉलिंग तथा आइडियल स्पीड पर सेट करना। 4–इलेक्ट्रिकल्स हॉर्स को एडजस्ट करना। 5–एअर क्लीनर की ओवरहॉलिंग करना। 6–फ्यूल टैंक की सफाई करना। 7–इंजन की ट्यूनिंग करना तथा टेस्ट करना।
334 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 48–मोटर साइकिल की सर्विसिंग तथा रिपेयरिंग करना। 9–इन्जेक्टर की ओवरहॉलिंग करना, चेक करना, फिट करना। 10–स्टीयरिंग, सस्पेंशन तथा ट्रांसमीशन सिस्टम का अध्ययन करना। 11–मैकेनिकल पम्प की ओवरहॉलिंग करना। 12–अमीटर, वोल्टमीटर का प्रयोग करना।
उपकरणों की सूची
इंजन पाटर््स एवं मॉडल– 1–दो स्ट्रोक इंजन (पेट्रोल तथा डीजल) (मॉडल)–01 सेट। 2–चारस्ट्रोक इंजन (पेट्रोल तथा डीजल) (मॉडल)–01 सेट। 3–सिलेण्डर ब्लॉक। 4–सिलेण्डर। 5–सिलेण्डर हेड। 6–कनेक्टिंग रॉड। 7–कैन्क शाफ्ट। 8–कैम शाफ्ट। 9–पिस्टन, पिस्टन पिन तथा पिस्टन रिंग। 10–स्पार्क प्लग। 11–नॉजल तथा पम्प। 12–वाल्व तथा टेपेड। 13. कार्बोरेटर। 14–रेडियेटर तथा वाटर पम्प। 15–गीयर बॉक्स। 16–डिफ्रेंशियल गीयर एवं रीयल एक्सल। 17–प्रोपेलर शाफ्ट। 18–व्हील, टायर, ट्यूब, रिम तथा फ्रंट एक्सल। 19–स्टेयरिंग सिस्टम। 20–शाक एब्जार्बर (स्प्रिंग तथा लीफ)। 21–फ्रेम तथा चेसिस। 22–फ्लाई व्हील तथा क्लच प्लेट। 23–ऑयल फिल्टर। 24–पैकिंग तथा गैसकिट। 25–ब्रेक सिस्टम (व्हील, व्हील सिलेण्टर तथा मास्टर सिलेण्टर)। 26–सेल्फ एवं डायनमों। 27–हॉर्न। 28–फ्यूल टैंक। 29–बैटरी। टूल्स– 1–पेचकस (विभिन्न प्रकार के) 05 2–रिंच (विभिन्न प्रकार के) 05 3–हथौड़ी (विभिन्न प्रकार के) 02 4–टार्करिंच (स्पेशल टाइप) 02 5–एल की सेट (एलेन की) 01 6–प्लास (विभिन्न प्रकार के) 04 7–छेनी (विभिन्न प्रकार की) 01 8–एडजेस्टेबिल रिंच 02भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 335 9–पाइप रिंच 02 10–जैक (स्क्रु तथा हाइड्रोलिंग) 02 सेट 11–ग्रीस गन 02 12–ऑयल कैन 05 13–वियरिंग पुलर 02 14–प्लग रिंच 02 15–हैक्सा 02 16–टैप तथा डाई 05 17–नट, बोल्ट तथा की 18–विभिन्न प्रकार की रेती 01 सेट 19–इन्सुलेशन टेप 01 20–तार 01 21–बल्ब (टेस्टिंग हेतु) 02 22–निहाई 01 23–मैगनेट पुलर 02 मीजरिंग (Measuring Tools)– 1–वर्नियर कैपिलर्स 02 2–माइक्रो मीटर 02 3–मल्टीमीटर 02 4–स्केल 02 5–ट्राई स्क्वायर 02 6–प्लग गैप गेज 02 7–फिलरगेज 02 मशीन (एक सेट)– 1–प्लग टेस्टिंग मशीन। 2–वाशिंग मशीन। 3–कम्प्रेशर मशीन (हवा भरने हेतु)। 4–हवा चेक करने की मशीन। 5–हैण्ड ड्रिलिंग मशीन। 6–बाइस (बेन्च)। 7–हाइड्रोमीटर।
(14) ट्रेड-मधुमक्खी पालन
कक्षा-12
उद्देश्य-
(1) मधुमक्खी पालन औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। (2) शुद्ध मधु उत्पादन की मात्रा में वृद्धि करना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि। (3) बीमार एवं कमजोर व्यक्तियों के लिए उपयोगी वस्तु, औषधि एवं पौष्टिक पदार्थ की उपलब्धि में वृद्धि करना।
(4) निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में आय का एकमात्र साधन सिद्ध होना। (5) कम से कम पूंजी लगाकर अधिकतम आय प्राप्ति का उपयोगी स्रोत होना। (6) मधुमक्खी पालन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये सक्षम बनाना। (7) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म-निर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक बनाने में सहायक होना। (8) मधुमक्खी पालन उद्योग के यंत्रों, उपकरणों के उपयोग का समुचित ज्ञान प्राप्त करना।
रोजगार के अवसर-
(1) मौन पालन उद्योग इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना।
336 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(2) मौन पालन उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना अथवा मधु को बोतलों में भरना, पैंकिंग कर बाजार में आपूर्ति करने का कार्य करना।
(3) मधु एवं उससे उत्पाद की वस्तुओं का व्यापार कर सकता है, उनका होलसेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है।
(4) मधु भंडारण एवं बिक्री की दुकान खोल सकता है। (5) मौनचरों या फूलों की खेती करके फूल विक्रय का रोजगार कर सकता है। (6) मौन पालन उद्योग में आने वाले यन्त्रों एवं उपकरणों का निर्माण एवं विक्रय का उद्योग चला सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300
100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
400
200 आन्तरिक परीक्षा 200 बाह्य परीक्षा 200
नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(मधुमक्खी पालन उद्योग का सामान्य ज्ञान)
(1) मौन पालन, आर्थिक महत्व एवं ग्रामीण विकास में योगदान। 20 (2) मधुमक्खी कालोनी का ज्ञान एवं रानी, कमेरी एवं नर मधुमक्खी में अन्तर। 20 (3) भारतीय परिस्थितियों में इस उद्योग का प्रान्तीय एवं राष्ट्रीय विकास की सम्भावनायें एवं समाधान। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(मधुमक्खी जैविकी, पालन एवं मौनचरों की व्यवस्था)
(1) मौन के परिवार की रानी, कमेरी एवं नर मधुमक्खी का पालन व्यवस्था एवं मौन वंष के संगठन का ज्ञान।
10 (2) मौनचरों की उपयोगिता का ज्ञान, व्यवस्था, उगाये गये मौनचरों का अध्ययन, पहचान तथा वार्षिक चक्र एवं बागवानी
10 तथा कृषि फसलों का महत्व। (3) जंगली मौनचरों का अध्ययन, पहचान एवं वार्षिक चक्र तैयार करना, सामान्य एवं विशेष मौनचरों का अध्ययन।
10 (4) कृषि एवं बागवानी फसल का नाम (जिससे मधुमक्खियों को मकरन्द एवं पराग मिलता है)। 10 (5) मकरन्द (Nector), पराग (Poelen) स्राव के कारण तथा स्राव को प्रभावित करने वाले कारकों एवं मकरन्द ग्रन्थि का मौनों के लिये उपयोग।
(6) स्वयं परागण एवं पर-परागण के सिद्धान्त तथा महत्व।
10 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(मौनगृह तथा उपकरण)
(1) मोंमी छत्ताधार मिंल, मोंमी छत्ताधार तैयार करना तथा उनके बारे मे सैद्धान्तिक जानकारी। 15 (2) मधु निष्कासन यन्त्र का सिद्धान्त एवं मधु निष्कासन विधि तथा मधु निष्कासन यन्त्र के प्रकार। 15 (3) छोटे मौन उपकरणों का ज्ञान, उपकरणों की बनावट, पहचानना एवं चौखट निर्माण का सिद्धान्त। 15 15 (4) प्राचीन तथा आधुनिक मौनगृहों में अन्तर, उपयोगिता तथा महत्व।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 337चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(मधुमक्खी के शत्रु, बीमारियां एवं नियन्त्रण)
(1) शिशु एवं वयस्क मौन की बीमारियों का ज्ञान, पहचान नियन्त्रण तथा उपचार। 20 (2) मौनों में लगने वाले वायरस बीमारी की जानकारी, बचाव तथा उपचार। 20 (3) बैरोवा माइट की पहचान, रोग फैलाना तथा उपचार इत्यादि।
20
पंचम प्रश्न-पत्र
(मधुमक्खी पालन का आर्थिक महत्व, विपणन एवं प्रसार)
(1) मौन पालन का प्रचार एवं सिद्धान्त, गोष्ठियों, प्रदर्शनियों द्वारा जनहित तक फैलाना एवं उनकी आवश्यकताओं से
अवगत कराना।
15 (2) मौन पालन विकास में सहकारी समितियों का योगदान, आर्थिक सहायता, मौन पालन प्रषिक्षण का महत्व एवं ग्रामीण
एजेन्सियों की उपयोगिता।
15 (3) मधु एवं मोम का विपणन, व्यवस्था तथा भारतीय मानक संस्थाओं का योगदान। 15 (4) मौन पालन की समस्यायें तथा समाधान। 15
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(1) मौन गृह निर्माण में काम आने वाले यंत्रों, मौन उपकरण का चित्र बनाना तथा प्रयोगात्मक (जानकारी कराना)।
(2) सामान्य मौन घरों की जानकारी, पहचान तथा वार्षिक चक्र मेें तैयार करना तथा जंगली मौन घरों की पहचान तथा वार्षिक चक्र में तैयार करना।
(3) मौसमी फूलों के विषय में जानकारी करना, मुख्य फूलों का चित्रांकन करना।
(4) मौनों के शत्रुओं की पहचान, उनसे बच-बचाव का प्रयोगात्मक ज्ञान कराना।
(5) मौनों के विभिन्न रोगों की पहचान कराना, पूर्ण जानकारी कराना तथा उनके रोक-थाम का प्रयोगात्मक ज्ञान करना।
(6) मधु एकत्रित करना, सुरक्षित रखना, परिष्करण एवं भण्डारण विधि का ज्ञान देना।
(7) मधु के महत्व का ज्ञान, पैकिंग कराना तथा विपणन की पूर्ण जानकारी कराना।
(8) मौन पालन विकास में सहकारी समितियों का योगदान, सहकारी सहायता का प्रशिक्षण, इसका आर्थिक महत्व, विपणन एवं प्रसार।
नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय 5 घण्टे :
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1) बाह्य परीक्षा-
परीक्षार्थियों की तीन प्रयोग दिये जायें-
प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग)
प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग)
प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग)
(1) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन-
(क) सत्रीय कार्य,
(ख) कार्य स्थल पर प्रशिक्षण
43 ङ338 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
संस्तुत पुस्तकें :-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण/
नाम
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 1. मुर्गी पालन, मधुमक्खी डा0 जय सिंह सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 25.00 1987-88 पालन एवं मत्स्य पालन
2. मधु के चमत्कार सैयद वाजिद
25.00 1989-90
हुसैन
3. सफल मौन पालन बच्ची सिंह
श्रीराम मेहरा एण्ड कं0 हास्पिटल रोड, आगरा रावत मौनालय, रानीखेत, अल्मोड़ा 60.00 1988
रावत
4. रोचक मौन पालन ,, ,, 15.00 1988 5. मौन पालन प्रश्नोत्तरी ,, ,, 10.00 1989 5.00 1988 6. प्रारम्भिक मौन पालन योगेश्वर सिंह राजकीय मधु मक्खी पालन केन्द्र,
ज्योली कोट, नैनीताल
7. बी-कीपिंग इन इण्डिया सरदार सिंह आई0 सी0 ए0 आर0 दिल्ली 16.00 1988 प्रो0 हरी सिंह कुक्का पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, मेरठ 7.00 1988 8. मधु मक्खी एवं मत्स्य
पालन
9. कुक्कुट, मधुमक्खी एवं ,, ,, 22.50 1988 मत्स्य पालन
(15) ट्रेड-डेरी प्रौद्योगिकी
कक्षा-12
उद्देश्य-
(1) डेरी उद्योग के औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी दूर करना। (2) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद का उत्पादन बढ़ाना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना। (3) निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में निरन्तर आय का एक मात्र साधन। (4) डेरी उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन हेतु सक्षम बनाना। (5) दूध से नाना प्रकार की उपयोगी वस्तुयें बनाकर आय में वृद्वि एवं स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना। (6) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म निर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। (7) उत्तम कोटि का दूध उत्पाद तैयार कर वृहत् व्यापार में सहयोग तथा लघु उद्योगों में भारत की गरिमा बढ़ाने में सक्षम होना।
(8) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद से सम्बन्धित रसायनों, यन्त्रों, उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
(9) पौष्टिक खाद्य पदार्थों का निर्माण, इसे शुद्ध, स्वादिष्ट एवं सुपाच्य बनाना।
रोजगार के अवसर-
(1) डेरी उद्योग इकाईयों, सहकारी दुग्ध समितियों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) डेरी उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। (3) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद का व्यापार कर सकता है, इनके होलसेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है। (4) डेरी उद्योग की छोटी-छोटी इकाइयां खोलकर उत्पादन बढ़ाकर दुकान खोल सकता है। (5) दुग्ध से दुग्ध निर्मित वस्तुएं बनाने का छोटा उद्योग चला सकता है। (6) डेरी उद्योग से सम्बन्धित यंत्रों, उपकरणों का निर्माण एवं विक्रय उद्योग चला सकता है। (7) दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद से सम्बन्धित सहकारी समितियां बनाकर स्वयं को तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 339पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
400
200 आन्तरिक परीक्षा 200 वाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(डेरी सहकारिका, मानक एवं सूक्ष्म जैविकी)
1-भारत में डेरी सहकारिता, सहकारी समितियों का गठन, सहकारी दुग्ध संघ, सहकारी दुग्ध फेडरेशन, डेरी विकास बोर्ड। 20
20 2-दुग्ध मानक-विभिन्न राज्यों के दूध एवं दुग्ध पदार्थो के मानक। 3-स्वच्छ दुग्ध उत्पादन एवं रख-रखाव-दूध से फैलने वाली बीमारियाें, दूध को छानना एवं ठंडा करना जीवाणुओं का सामान्य ज्ञान। दूध जीवाणुओं का वर्गीकरण। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र (डेरी सज्जा एवं गुण नियन्त्रण) 1-डेरी सज्जा का निर्जीवीकरण। डेरी बर्तनों एवं उपकरणों के धोने का सिद्धान्त, धावन विलयन के गुण तथा विशेषतायें-क्षारशोधक एवं अम्लशोधक, डेरी सज्जा पर इनका प्रभाव। डेरी सज्जा हेतु उपयुक्त धातु एवं काष्ठ।
20 2-दुग्ध गुण नियंत्रण, दुग्ध चबूतरा परीक्षण एवं नैमी परीक्षण, दुग्ध परिरक्षी एवं उनके गुण, दुग्ध अपमिश्रण
3-विभिन्न दुग्ध पेय एवं उनके बनाने की विधियां।
दुग्ध अपमिश्रण को ज्ञात करने की भौतिक, रसायनिक एवं जैविकी विधियां। 20 20
तृतीय प्रश्न-पत्र
(दुग्ध पदार्थ)
1-घी की परिभाषा, संगठन एवं बनाने की विधियां, देशी विधि, क्रीम से घी बनाना, मक्खन से घी बनाना, घी की खाद्य महत्ता, घी के निर्यातांक, घी में अपमिश्रण एवं उनकी पहचान, घी का संग्रह एवं संरक्षण। 30 2-निम्नलिखित दुग्ध पदार्थों की परिभाषा, संगठन एवं उनके बनाने की सामान्य विषयों एवं संग्रह की जानकारी।
दही, खोवा, छेना, पनीर।
30
चतुर्थ प्रश्न-पत्र (प्रशीतन एवं शीतगृह प्रौद्योगिकी) 1-कृत्रिम प्रशीतन, मशीन के भागों की जानकारी, मशीन के कार्य को प्रभावित करने वाले कारक, प्रशीतन का प्रयोग।
सीधी विस्तार पद्धति, लवण जल पद्धति, लवण जल के गुण, लवण जल की देखभाल। 30 2-शीत गृहों एवं प्रशीतन केन्द्रों के निर्माण का सामान्य सिद्धान्त एवं विधि, शीत गृहों की सुरक्षा एवं सावधानी, प्रशीतन केन्द्रों में प्रयुक्त उपकरण।
30340 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्न-पत्र
(दुग्ध निर्मित अन्य पदार्थ)
1-चीज की परिभाषा-संगठन एवं खाद्य महत्ता, चीज का वर्गीकरण।
10 2-बनाने की विधि-पैंकिंग, परिपक्वन, संग्रह एवं मूल्यांकन।
10 3-निम्न लिखित मिठाइयों की बनाने की विधियां, संगठन पैंकिंग एवं संग्रह, पेड़ा, बरफी, गुलाबजामुन, रसगुल्ला, रसमलाई, संदेश, खुरचन, रबड़ी, बासुन्धरी, श्रीखण्ड, लस्सी, मट्ठा, मखनिया दूध एवं छाछ का संगठन एवं गोषिता, योगहर्ट की परिभाषा, संगठन एवं बनाने की विधि। 30 4-खीर, सुगन्धित दूध बनाने की सामान्य जानकारी।
10
प्रयोगात्मक
दुग्ध पदार्थ-अभियान्त्रिकी एवं प्रौद्योगिकी
(1) क्रीम सेपरेटर के विविध भागों की जानकारी।
(2) क्रीम सेपरेटर से क्रीम निकालने की जानकारी।
(3) मक्खन, घी एवं आइस कैण्डी बनाने की जानकारी।
(4) दही, खोवा, छेना, पनीर, लस्सी, श्रीखण्ड बनाने की जानकारी।
(5) सुगंधित दूध एवं खीर तैयार करने की जानकारी।
(6) निम्नलिखित मिठाइयों के बनाने की जानकारी-
पेड़ा, बरफी, गुलाबजामुन, रबड़ी, खुरचन, मलाई, वासुन्धरी, सन्देश एवं रसगुल्ला।
(7) प्रशीतन व ब्वायलर के रख-रखाव एवं संचालन की जानकारी।
(8) डेरी, प्रयोगशाला, डेरी प्लान्ट एवं उसके उपकरणों की सप्लाई।
(9) डेरी से प्रयुक्त होने वाले विभिन्न रसायनों के तैयारी करने की जानकारी।
(10) डेरी के माप तौल एवं तुला संचालन की जानकारी।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
(1) प्रयोगात्मक परीक्षा-
[1] बाह्य परीक्षा-
परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें-
प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग)
प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग)
प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग)
(2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन-
(क) सत्रीय कार्य
(ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण
नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 341संस्तुत पुस्तकें :-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम मूल्य संस्करण/
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री- रु0 1 डेरी प्रौद्योगिकी (सिद्धान्त एवं एस0 एस0 भाटी बी0 के0 प्रकाशक, बड़ौत, मेरठ 15.00 1989-90 प्रयोग)
2 डेरी प्रौद्योगिकी डा0 एस0 पी0 रंजना प्रकाशन मन्दिर, आगरा 18.00 1989-90
गुप्ता
3 डेरी प्रौद्योगिकी आई0 जे0 जौहर रेखा प्रकाशन, मेरठ 16.00 1989-90 रोहित पब्लिकेशन, बड़ौत, मेरठ 15.00 1989-90 4 डेरी प्रौद्योगिकी (सिद्धान्त एवं
प्रयोग)
डा0 ए0 के0 गुप्ता एवं स्व0 सी0 गुप्ता
5 दुग्ध विपणन एवं दुग्ध पदार्थ आई0 जे0 जौहर सिंघल बुक डिपो, बड़ौत, मेरठ 30.00 1989-90 6 डेरी रसायन एवं पशुपोषण डा0 विनय सिंह भारतीय भण्डार, बड़ौत, मेरठ 25.00 1989-90 7 दुग्ध विज्ञान भाटी एवं लवानिया वी0 के0 प्रकाशन, बड़ौत, मेरठ 35.00 1989-90 8 पशुपोषण एवं डेरी रसायन डा0 देव नारायण
25.00 1989
जय प्रकाश नाथ एण्ड कं0 मेरठ प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ
पाण्डे प्रकाशन निदेशालय
9 डेरी रसायन विज्ञान पंत नगर, नैनीताल, पंत कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, 36.00 1987 डा0 शिवाश्रय सिंह पंत नगर, नैनीताल
N.C.E.R.T., New Delhi -- 9-56
N.C.E.R.T., New Delhi
10 Dairying Feeds and Feeding of D. Volume III. Instructional-cum- Practical Mannual
Ditto Ditto
-- 13-45 11 Milk and Milk Products
Instructional-cum- Practical Manual.
(16) ट्रेड-रेशम कीटपालन
कक्षा-12
उद्देश्य- 1-रेशम कीटपालन औद्योगीकरण द्वारा देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-रेशम उत्पादन बढ़ाना, बिक्री बढ़ाना तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना। 3-निर्धनों के लिये सम्पूर्ण वर्ष में निरन्तर आय का एक मात्र साधन। 4-कम से कम पूंजी लगाकर अधिकतम आय प्राप्ति का सुलभ साधन होना। 5-रेशम कीटपालन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन हेतु सक्षम बनाना। 6-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म-निर्भर बनाने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। 7-उत्तम किस्म का रेशम उत्पादन कर विदेशी व्यापार में सहयोग तथा कुटीर उद्योगों में भारत की गरिमा बनाये रखने में सक्षम।
8-रेशम उत्पादन से सम्बन्धित रासायनिक पदार्थों, यंत्रों, उपकरणों तथा सेरी कल्चर का समुचित ज्ञान प्राप्त कर जीवन को उपयोगी बनाने में सहायक।
रोजगार के अवसर-
1-रेशम उद्योग इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-रेशम कीटपालन उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-रेशम उत्पादन कर रेशम का वृहत् व्यापार कर सकता है, इसका होल-सेल या रिटेल सेल का कार्य कर सकता है।
4-विभिन्न प्रकार के रेशम उत्पादन, ग्रेडिंग, भण्डारण एवं बिक्री दुकान खोल सकता है। 5-रेशम की बनी वस्तुएं साड़ी इत्यादि का स्वतः निर्माण कर एक छोटा उद्योग चला सकता है। 6-रेशम कीटपालन उद्योग से सम्बन्धित यंत्रों, उपकरणों आदि का निर्माण एवं विक्रय उद्योग चला सकता है।
342 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
400
200 आन्तरिक परीक्षा 200 बाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(रेशम कीट के भोज्य पौधों की खेती)
(1) शहतूत की विभिन्न उन्नतिशील जातियों की जानकारी-उत्तर प्रदेश में होने वाली जातियों का नाम व ज्ञान।
16 (2) शहतूत के पौधों के लिये नर्सरी तैयार करना, भूमि का चयन, सिंचाई, खाद आदि की व्यवस्था। 14 (3) नर्सरी से पौधों का स्थानान्तरण-पौधों से पौधों की दूरी, भू-परिष्करण के प्रकार एवं पौध उत्पादन में महत्व। (4) शहतूत की खेती का आर्थिक दृष्टि से अध्ययन एवं महत्व।
16 14
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(रेशम कीट जैविकी, पालक एवं भोज्य पदार्थाें का संरक्षण)
(1) रेशम कीट के रोग व्याधियों की जानकारी, पहचान, रोक-थाम, रासायनिक पदार्थों का उपयोग रसायनों को तैयार करना एवं नियन्त्रण या उपचार।
8 (2) कीटों की सेवा ब्रसिंग की विधियां, विभिन्न आयु वर्ग के कीटों का पालन-पोषण की विधि। 8 (3) शहतूत के पौधोें में लगने वाले विभिन्न रोगों की जानकारी, पहचान एवं रोकथाम तथा उपचार। 8 (4) कवक नाशक, कीटनाशी रसायनों की जानकारी, प्रयोग हेतु उसकी तैयारी, विधियों की जानकारी एवं सावधानियाें का ज्ञान। 9 (5) शहतूत के रूप राट, रस्ट, लीफस्पाट, पाउडरी मिल्ड्यू, लक्षण एवं पहचान तथा उपचार। 9 (6) जैसिड्स, (Jassids) घिप्स बिहारी, हेयरी कैटर पिलर, दीमक, कटवर्म का अध्ययन, पहचान एवं रोक-थाम तथा रासायनिक नियन्त्रण। (7) ग्रेसरी द्वारा क्षति, उसका अध्ययन एवं मूल्यांकन।
9 9
तृतीय प्रश्न-पत्र
(रेशम कीट बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी)
(1) कीट का निकालना, लैंगिक भेदों की जानकारी, पेपरिंग का समय, द्वितीय पेपरिंग। 20 (2) कीट का परीक्षण-अण्डों को साफ करना, रोगाणु नाशकीय करना, अम्लीय उपचार, अण्डों का सेना। 20 20 (3) बीजोत्पादन का श्रेणीकरण आर्थिक महत्व विपरण।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(रेशम निकालना, परीक्षण एवं कतान)
(1) सिल्कवेस्ट का एकत्रीकरण एवं सुरक्षित रखना, सिल्क का परीक्षण, उसकी कमी की जानकारी तथा उसकी 15 क्षति का मूल्यांकन।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 34315 (2) प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की देख-रेख एवं रख-रखाव। (3) अच्छे धागा की पहचान एवं गुण नियन्त्रण। 15 (4) अनुपयुक्त रेशम धागा की उपयोगिता। 15
पंचम प्रश्न-पत्र
(रेशम प्रबन्ध एवं प्रसार)
(1) फसल बीमा, सहायता हेतु विभिन्न योजनाओं का ज्ञान। (2) रेशम उद्योग एवं सहकारिता।
16 14 (3) रेशम विपणन-सिद्धान्त,मूल्यांकन,समस्यायें, रेगूलेड बाजार, गुण व अवगुण, मूल्यों का मानकीकरण। 16 (4) प्रसार-उद्देश्य, प्रसार की विधियां, प्रशिक्षण एवं निरीक्षण व्यक्तिगत, सामूहिक सम्पर्क, श्रव्य-दृश्य प्रदर्शन का प्रयोग, तकनीकी संगठनों की जानकारी, बाई प्रोडक्टस का प्रयोग। 14
प्रयोगात्मक परीक्षा का पाठ्यक्रम
(प्रायोगिकी)
(1) हानिकारक जीवाणुओं की पहचान, संकलन। (2) कीटों के पकड़ने के उपकरण। (3) कोकुन की छंटाई। (4) कोकुन का मूल्यांकन, अच्छे कोकुनों की पहचान। (5) कतान के लिये निर्धारित उपकरण, उसका रख-रखाव, प्रयोग। (6) आर्थिक संस्थानों की जानकारी। (7) संस्थाओं द्वारा प्रदत्त सुविधाओं की जानकारी। (8) रेशम उत्पादन केन्द्रों की जानकारी। (9) विभिन्न कोकुनों के लक्षणों का ज्ञान। (10) रेशम का विपणन-समस्यायें एवं समाधान।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप.रेखा
समय-5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1) बाह्य परीक्षा-
परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन- (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
पुस्तकें- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था में प्रधान विषय अध्यापक से परामर्श ले पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
(17) ट्रेड-बीजोत्पादन प्रौद्योगिकी
कक्षा-12
उद्देश्य- 1-बीजोत्पादन उद्योग के औद्योगिकीकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-अधिकतम शुद्ध बीज तैयार करना, बिक्री बढ़ाना, उत्पादन बढ़ाने में सहयोग तथा आय में वृद्धि करना। 3-कम से कम पूंजी लगाकर प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना तथा आय का उत्तम स्रोत। 4-बीजोत्पादन उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये स्वयं को सक्षम बनाना। 5-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने, आत्म निर्भर बनाने एवं कुशल नागरिक निर्माण में योगदान देना।
344 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 46-बीज उत्पादन, रख-रखाव एवं वृहत् मात्रा में शुद्ध एवं उन्नतिशील बीजों का प्रसार कर पौधों को रोग मुक्त करना तथा हानिकारक कीट-पतंगों से बचाना।
7-बीजोत्पादन के नवीन वैज्ञानिक विधियों, यन्त्रों एवं उपकरणों का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
रोजगार के अवसर-
1-बीजोत्पादन उद्योग की विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-बीजोत्पादन उद्योग का स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-शुद्ध एवं उत्तम कोटि का बीज उत्पादन कर बिक्री या व्यवसाय चलाना या व्यापार करना। 4-बीज उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां खोलकर स्वयं विक्रय केन्द्र चला सकता है। 5-बीजोत्पादन उद्योग से सम्बन्धित यन्त्रों, उपकरणों एवं अन्य सामग्री विक्रय का उद्योग चला सकता है। 6-बीजोत्पादन एवं बिक्री सम्बन्धी समितियों को बना कर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 20 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
400
200 आन्तरिक परीक्षा 200 वाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बीजोत्पादन का आधारभूत ज्ञान एवं तकनीक)
(1)संकर बीज उत्पादन के लाभ तथा तकनीक का आधारभूत ज्ञान।
12 (2) बीजोत्पादन को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक-क्षेत्र का चुनाव तथा अभिन्यास वातावरण(आदर््रता वायुवेग आदि कृषि के कार्य (भूपरिष्करण, बोआई, बीज की मात्रा, खाद उर्वरक, सिंचाई, फसल सुरक्षा, रोगिग)।
14 (3) शुद्ध बीज के गुणों की जानकारी, प्रजाति की शुद्धता, स्वच्छता, नमी, अंकुरण, रोगविहीन आदि। 12 (4) बीज प्रमाणीकरण-बीज की श्रेणीयां, प्रमाणीकरण की एजेन्सियां, प्रमाणीकरण मानक, कटाई, मडाई, सफाई तथा भण्डारण, भण्डारण के समय निरीक्षण।
12 (5) बीज निरीक्षण का महत्व, बीज निरीक्षक के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व, बीज सम्बन्धी कानून, नियम तथा विभिन्न संस्थायें। 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(धान्य, मोटे अनाज तथा चारे वाली फसलोें के बीज उत्पादन की विधि एवं तकनीकी)
फसलें, धान्य, गेहूं, धान, मक्का, मोटे अनाज, ज्वार, बाजरा, चारे वाली बरसीम और ज्वार
(1) उपरोक्त फसलों के लिये जलवायु तथा आवश्यक मृदा का प्रभाव। (2) खेत का चुनाव-विलयन (Isolation) आवश्यकतायें। (अ) स्वपरागण वाली फसलें-गेहूं, धान। (ब) पर परागण वाली फसलें-मक्का, बरसीम, ससवं। (स) आकस्मिक परागण वाली फसलें-ज्वार।
इकाई-1 (1) निराई-गुड़ाई, खर-पतवारों, कीटों तथा बीमारियों की रोकथाम।
(2) खाद तथा उर्वरकों का प्रयोग।
8 8भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 345 (3) सिंचाई का प्रबन्ध।
8 (4) गुणना नियन्त्रण, जातीय किस्मों का लक्षण, खेत में निरीक्षण की संख्या तथा समय, रोगिंग, फसल एवं बीज में मृतक। 8 (5) कटाई-फसलों के पकने की अवस्था तथा समय, मड़ाइ्र, सफाई तथा सुखाई। 8 10 इकाई-2 (1) खेत में जातीय किस्मों के प्रमुख लक्षण एवं उनकी पहचान। (2) वर्ण संकर मक्का, ज्वार, बाजरों के बीजों का व्यावसायिक उत्पादन के विशेष तरीके। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(दलहन, तिलहन, नकदी तथा रेशे वाली फसलों के बीज उत्पादन तकनीक)
4
5 5 (1) निम्नांकित फसलों के बीज उत्पादन की तकनीक का ज्ञान- तिलहन-सरसों, सूर्यमुखी, मूॅगफली, सोयाबीन रेशे वाली फसलें-कपास, सनई। (2) उपरोक्त फसलों के फूलों का वैज्ञानिक अध्ययन। (3) उपरोक्त फसलों के लिये जलवायु एवं मृदा का अध्ययन। (4) स्वपरागण परपरागण तथा आकस्मिक परागण वाले फसलों के लिये खेतों का चुनाव तथा विलंगन।5 (5) उपरोक्त फसलों के बीजों का उपचार। 5 5 (6) उपरोक्त फसलों के शस्य विज्ञान सम्बन्धित अध्ययन। (7) गुणात्मक जांच-जातीय किस्मों का प्रमुख लक्षण, खेतों से निरीक्षण, संख्या तथा समय। 5 4 (8) अनावश्यक पौधों का निष्कासन। 4 (9) फसल एवं बीजों का मानक। (10) फसल की कटाई-कटाई की सावधानियां, पकने की स्थिति, बीज की नमी तथा फसल की स्थिति, कटाई के तरीके, मड़ाई, सफाई, सुखाई।
8 (11) फसल की मुख्य जातियां तथा किस्में तथा उनके विशेष गुण। 5 (12) कपास तथा सूर्यमुखी के वर्ण संकर बीजों के उत्पादन का अध्ययन। 5
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सब्जी एवं पुष्पों के बीजोत्पादन में तकनीकी एवं बीज संसाधन)
बीज संसाधन-
10 1-बीज संसाधन का महत्व, संशोधित बीजों के प्रकार तथा गुण। 2-संसाधन सम्बन्धी उपकरणों का अध्ययन। 10 3-सब्जियों एवं पुष्पों की पौधषाला तैयार करना। 6 6 4-बीजों की सुखाई, सफाई आदि। 6 5-बीजों का वर्गीकरण। 5 6-बीज उपचारक। 6 7-बीज मिश्रण। 5 8-मुख्य फसलों के बीजों का संसाधन क्रम। 6 9-बीज संसाधन उपकरणों का रख-रखाव तथा उपयोग।
पंचम प्रश्न-पत्र
(बीज परीक्षण, भण्डारण, विपणन एवं प्रसार)
इकाई-1 1-बीज उद्योग, निजी, सार्वजनिक तथा सरकारी बीज निगम के विषय में जानकारी। 10 2-मांग की भविष्यवाणी-बीजों के संचय, बोने का समय, उपलब्धता, क्षेत्र में ग्राहकों की संख्या, बीज मूल्य तथा बाजार में मांग का अनुमान।
इकाई-2 1-बीजों के उत्पादन का खर्च निकालना।
10 2-क्षेत्र के विभिन्न प्रकार के बीजों की मात्रा तथा क्षेत्रफल का अनुमान। 3-बीज उद्योग के लिये धन की उपलब्धता, भूमि की उपलब्धता तथा ठेके पर प्रोत्साहन सहित उपलब्धता।
इकाई-3 1-विपणन-बीज सलाहकार केन्द्र बाजार में मांग का पता लगाना, जनता से सम्बन्ध स्थापन, ग्राहकों को आकर्षित करने के उपाय, क्षेत्र में बीजों के बारे में सूचना प्रसारित करना। 10 2-अंकुरण परीक्षण तथा उसका मूल्यांकन, बीज जैव क्षमता हेतु ट्र्ेटाजोलिय परीक्षण। 10 20 इकाई-4 1-प्रसार-विज्ञापन के तरीके, ग्राहकों से विचार-विमर्श।
2-तकनीकी सेवायें-बीज तथा उपकरणों की उपलब्धता, भण्डारण, खाद एव उर्वरकों की उपलब्धता, फसल सुरक्षा सम्बन्धी सेवा की उपलब्धता।
44 ङ346 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोगात्मक
1-मंसत्वहरण कला, परागीकरण, प्रसंस्करण का प्रयोगात्मक ज्ञान।
2-खड़ी फसल में विभिन्न जातियों व प्रजातियों की पहचान। 3-खेत में विभिन्न फसल मानकों का निरीक्षण, रोगिंग का प्रमाणीकरण। 4-फसल की कटाई, मड़ाई, सुखाई, सफाई, पैंकिंग, लेवेलिंग। 5-खाद, उर्वरक, बीज की शुद्धता आदि सम्बन्धी गणना। 6-सब्जी तथा पुष्पों के बीजों की पहचान व बीजोपचार तथा विभिन्न रसायनों का प्रयोग। 7-बीजों के वर्गीकरण करने वाले उपकरणों का प्रयोग। 8-सब्जी तथा पुष्पों के बीजों का पैकेट बनाना तथा लेवेलिंग। 9-बीज परीक्षण के लिए विभिन्न उपकरणों का प्रयोग। 10-फसल सुरक्षा तथा बीज सुरक्षा का प्रायोगिक ज्ञान। 11-उपर्युक्त पर मौखिक एवं रिकार्ड।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय-5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1) वाह्य परीक्षा-
परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन- (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने हेतु 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा।
संस्तुत पुस्तकें :- क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण/
पुनर्मुद्रण वर्ष 1 2 3 4 5 6 रु0
65.00 1989 डा0 रतन लाल अग्रवाल
1. बीज उत्पादन एवं प्रमाणीकरण, तृतीय संस्करण
2. बीज कार्य एवं बीज
19.50 1989 परीक्षण
डा0 रतन लाल अग्रवाल एवं डा0 फूल चन्द्र गुप्त
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
3. बीज उत्पादन एवं विपणन ,, ,, ,, 17.00 1989 का अर्थशास्त्र
(18) ट्रेड-फसल सुरक्षा सेवा
कक्षा-12
उद्देश्य- 1-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग के औद्योगिकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-फसल सुरक्षा सेवा द्वारा प्रति वर्ष हजारों टन खाद्यान्न को नष्ट होने से वंचित करके उत्पादन में वृद्धि करना। 3-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिये स्वयं को सक्षम बनाना। 4-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करनें, आत्मनिर्भर बनानें एवं कुशल नागरिक निर्माण में योगदान देना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3475-फसल सुरक्षा सेवा सम्बन्धी रसायनों, यन्त्रों एवं उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
6-फसलों के हानिकारक रोग, बीमारियों एवं कीट-पतंगों को नष्ट कर शुद्ध एवं स्वस्थ उत्पादन प्राप्त करना तथा भविष्य के लिये रक्षित बनाना।
7-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग की इकाइयों में वृद्धि कर जनसाधारण तक इसके लाभ एवं महत्ता को पहुंचाना तथा प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष उत्पादन में वृद्धि करना।
रोजगार के अवसर-
1-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग की विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-फसल सुरक्षा सेवा उद्योग में स्वरोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-फसल सुरक्षा सम्बन्धी अलग अलग इकाइयां खोलकर रसायनों, यन्त्रों एवं उपकरणों की बिक्री करने की दुकान चला सकता है।
4-फसल सुरक्षा सेवा की अलग-अलग समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 वाह्य परीक्षा 200 400
200 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(फसल सुरक्षा सिद्धान्त)
(1) फसलों को क्षति पहुंचाने वाले कारकों की जानकारी तथा निदान के उपाय। 20 (क) प्राकृतिक कारक-पाला, ओला वृष्टि, बाढ़, सूखा तथा आग। (ख) रोग, कीट तथा खरपतवार। (ग) प-पक्षी। (2) फसल सुरक्षा का महत्व, लाभ तथा सीमायें। 05 (3) फसल सुरक्षा सेवा-उद्देश्य, कार्यविधि तथा कृषकों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी। 10 (4) राष्ट्र स्तर पर फसल सुरक्षा में संलग्न संगठनों की जानकारी तथा उनकी कार्य विधि। 10 (5) फसल सुरक्षा की विभिन्न समस्यायें तथा निदान के उपायों की जानकारी। 05 (6) फसल सुरक्षा में उपयोग में लाये जाने वाले यंत्र/उपकरण (डस्टर, स्प्रेयर, फ्यूमीगेटर) की जनकारी तथा रख-रखाव के उपाय। 10
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(फसलों के मुख्य रोग एवं नियंत्रण उपाय)
1-प्रदेश के मुख्य फसलों, सब्जियों एवं फलों के रोगों का अध्ययन एवं उनके नियंत्रण के उपाय- 25 (अ) फसलें-धान, मक्का, अरहर, गेहूं, मटर, सरसों। (ब) सब्जियां-आलू, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, गोभी, खरबूजा। (स) फल-आम, अमरूद, पपीता, नींबू, लीची, सेब। 2-उपरोक्त फसलों की प्रतिरोधी प्रजातियों की जानकारी एवं उगाने की विधि का ज्ञान। 10 3-आवृत्त जीवी- परजीवी पौधों (Angio sperm parasitic plant) की जानकारी तथा उससे होने वाली क्षति की रोक-थाम के उपाय।
05 05 4-निमेटोड्स द्वारा फसलों की क्षति का मूल्यांकन एवं नियंत्रण उपाय। 5-कवक महामारी की जानकारी एवं नियंत्रण उपाय। 05 6-कवकनाशी रसायनों की जानकारी तथा प्रयोग करते समय सावधानियां, बीजशोधन विधि का ज्ञान तथा लाभ। 10348 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 तृतीय प्रश्न-पत्र (खरपतवार नियंत्रण तथा कृषि रसायनों का अध्ययन) 1-खरीफ, रवी, जायद तथा बारहमासी खरपतवारों का अध्ययन, उनका वर्गीकरण तथा खरपतवारों द्वारा क्षति की प्रकृति का ज्ञान। 15 2-खरपतवारी नियंत्रण की विभिन्न विधियों का ज्ञान। 10 3-प्रमुख फसलों में उगने वाले खरपतवारों की जानकारी तथा रोकथाम के उपाय-धान, मक्का, गेहूं, सरसों, आलू, टमाटर, मूंगफली, गोभी। 15 10 4-कृषि रसायनोें की जानकारी- (अ) कवकनाशी रसायन। (ब) कीटनाशी रसायन। (स) खरपतवारनाशी रसायन। (द) जिंक सल्फेट। 5-कृषि रसायनों का घोल बनाने की विधि तथा सावधानियां, कृषि रसायनों के छिड़काव व मुरकाव विधि का ज्ञान तथा प्रयोग करते समय सावधानियां। 10 (य) चना-कैटर पिलर, कटवर्म। (र) उर्द मूंग-रेड हेयर, कैटर पिलर। (ल) गन्ना-लीफ हायर (पायरिका), टायशूट बोरर, कर बोरर। (व) मूंगफली-सूरल पोची (Surul puchi)। (श) सरसों-एसिड। (ष) आम-मीलीबग, हायर, फ्रूट फ्लाई। (स) आलू-वीटल।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(पादपनाषक कीट एवं अन्तर्राष्ट्रीय पादपनाशक जीवों का अध्ययन)
1-पादपनाशी कीटों का ज्ञान एवं वर्गीकरण। 10 2-प्रमुख फसलों को क्षति पहुंचाने वाले कीटों का अध्ययन एवं नियंत्रण उपाय- 20 (क) धान-गन्धीबग, जगस्टेम वोरर, आर्मीवर्म। (ख) मक्का, ज्वार, बाजरा-स्टेमवोरर, ग्रास हापर। (ग) चना, मटर-कैटर पिलर, कटवर्म। (घ) गेहूं-पिक बोरर। (ङ) गन्ना-लीफ हायर (पायरिका), टायषूट बोरर, स्टेम बोरर। (च) मूंगफली-सूरल पोची (ैनतनस चनबीप)। (छ) सरसों-एसिड। (ज) आम-मिलीबग, हायर, फ्रूट फ्लाई। (झ) आलू-बीटिल, माहू। () बैगन-तना तथा फल भेदक, जैसिड। (ट) गोभी-आरा मन्खी, माहू, फ्ली बीटिल, सूॅडी। 3-कीट महामारी की समयबद्ध जानकारी तथा नियंत्रण उपाय। 05 4-अन्तर्राष्ट्रीय पादपनाशी जीव-नीलगाय, लोमड़ी, गिलहरी, चूहे, जंगली सुअर, गीदड़-के निवास,क्षति प्रकृति तथा नियंत्रण उपायों का अध्ययन। 10 5-अनतर्राष्ट्रीय पादपनाशी जीवों द्वारा क्षति का मूल्यांकन। 05 6-टिड्डी-दल (लोकस्ट) की उत्पत्ति, क्षति की प्रकृति, क्षति का अनुमान लगाना तथा नियंत्रण के उपाय। 10
पंचम प्रश्न-पत्र
(अन्न भण्डारण के कीटों का अध्ययन एवं नियंत्रण)
1-भंडार गृहों के प्रकार, भंडारण से पहले भंडारगृहों की सफाई का महत्व तथा सफाई की विधियॉं। 10 2-अन्न भंडारण की विभिन्न विधियॉं, भंडार गृह में फ्यूमीगेषन (धूम्रीकरण) की विधि, धूम्रकों (रसायनों) के नाम , मात्रा, लाभ तथा सावधानियों का ज्ञान। 20 3-भंडार गृह में भंडारित अनाज में निम्नलिखित कीटों द्वारा क्षति की प्रकृति, क्षति का मूल्यांकन, उसका स्तर एवं वर्गीकरण, प्रत्यक्ष क्षति एवं अप्रत्यक्ष क्षति की जानकारी तथा नियंत्रण उपाय- 25 (अ) राइस विविल।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 349(ब) लेसर ग्रेन बोरर। (स) खपरा बीटिल। (द) रस्ट रेड फ्लोर बीटिल। (य) चूहा एवं दीमक। (र) दालों की बीटिल। 4-राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत अन्न भण्डारण ऐजेन्सियों का अध्ययन। 05
प्रयोगात्मक
1-कीट-जीवन-चक्र का निर्माण। 2-बेट्स तैयार करना। 3-साइनोगैस पम्प का प्रयोग एवं उपकरण की देख-रेख एवं रख-रखाव। 4-कीटनाशी रसायनों को तैयार करना। 5-रसायनों की पहचान, ध्रुवीकरण की प्रक्रिया। 6-भण्डारण में प्रयोग में आने वाले रसायन। 7-भण्डारण के विभिन्न कीटों एवं रोगों की पहचान। 8-उपकरणों का प्रयोग तथा उसके खोलने तथा बांधने के अभ्यास।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूप-रेखा
समय-5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा-
(1) बाह्य परीक्षा-
परीक्षार्थियों को 3 प्रयोग दिये जायें- प्रयोग संख्या 1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग संख्या 2 (लघु प्रयोग) प्रयोग संख्या 3 (लघु प्रयोग) (2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन- (क) सत्रीय कार्य (ख) कार्यस्थल पर प्रशिक्षण नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। संस्तुत पुस्तकें :- क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं मूल्य संस्करण
पता
4. वनस्पति सर्वेक्षण एवं पादप रोग
तदेव 22.50 1988 नियंत्रण
वर्ष 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री- रु0 1. आर्थिक कीट विज्ञान डा0 के0 पी0 सिंह सिंघल बुक डिपो, मेरठ 35.00 1989-90 2. प्लान्ट प्रोटेक्शन तदेव तदेव 22.50 1989 तदेव 25.00 1987 3. पादप रोग विज्ञान आर0 बी0 चिकारा एवं डा0 जीतेन्द्र चिकारा डा0 जी0 चन्द्र मोहन एवं डा0 आर0 सी0 मिश्र
22.50 1988
गोपाल प्रिंटिंग प्रेस, बड़ौत, मेरठ
5. कृषि कीट विज्ञान युगेश कुमार माथुर एवं कृष्ण दत्त उपाध्याय
6. नया कृषि कीट विज्ञान बी0 ए0 डेविड एवं
12.00 1987
एम0 एच0 डेविड
सेन्ट्रल बुक डिपो, इलाहाबाद
7. पादप रोग नियंत्रण प्रो0 बी0 पी0 सिंह कुक्का पब्लिशिंग हाउस, 22.50 1987
8. पादप रक्षा कीट नियंत्रण डा0 उपाध्याय एवं
बड़ौत, मेरठ तदेव 22.50 1987
माथुर
9. खरपतवार प्रो0 ओम प्रकाश तदेव 16.50 1987350 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 10. प्लान्ट प्रोटेक्शन डा0 उपाध्याय एवं तदेव 30.00 1987
11. फसलों के रोग (द्वितीय
50.00 1989 संस्करण)
माथुर
डा0 मुखोपाध्याय एवं
डा0 सिंह
प्रकाशन निदेशालय, गो0 ब0 पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
12. फसलों के रोगों की रोक-थाम डा0 संगम लाल तदेव 20.00 1989 तदेव 22.00 1989 13. फसलों के हानिकारक कीट डा0 बिन्दा प्रसाद
14. खरपतवार नियंत्रण (द्वितीय
खरे डा0 विष्णु मोहन भान तदेव 25.00 1989 संस्करण)
15. Weeds and Weed Control
7-75 1985
N.C.E.R.T.,
New Delhi
N.C.E.R.T., New Delhi
Instructional-cum-Practical Manual.
16. Fertilizers and Manures
Ditto Ditto 6-90 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
17. Agricultural Meteorology
Ditto Ditto 4-75 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
18. Water Management
Ditto Ditto 8-75 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
19. Crop Management
Ditto Ditto 10-10 1985 Instructional-cum-Practical Manual.
Ditto Ditto 8-45 1985 20. Floriculture Instructional- cum-Practical Manual.
(19) ट्रेड-पौधशाला
(कक्षा-12)
उद्देश्य- 1-पौधशाला उद्योग का औद्योगीकरण देश की बढ़ती हुई बेरोजगारी को दूर करना। 2-अधिकतम पौध तैयार करना, बिक्री बढ़ाना, वृक्षारोपण कर देश में वन उद्योग को प्रोत्साहन देना और आय में वृद्धि करना।
3-कम से कम पूंजी लगाकर प्रति हेक्टेयर अधिकतम उत्पादन तथा वर्ष भर आय का उत्तम स्रोत। 4-पौधशाला उद्योग में दक्षता प्राप्त कर भविष्य में जीविकोपार्जन के लिए सक्षम बनाना। 5-श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करना, आत्मनिर्भर बनने एवं एक कुशल नागरिक निर्माण में सहायक होना। 6-विभिन्न प्रकार के पौधों को बड़े पैमाने में उगाकर व्यापार बढ़ाना तथा देश की अनुभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम होना।
7-पौध उत्पादन, रख-रखाव एवं वृहत् मात्रा में परिवहन सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों आदि का समुचित ज्ञान प्राप्त कर अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
8-देश की ऊसर भूमि सुधार, भूमि कटाव रोकने, वर्षा कराने, वायु मण्डल को शुद्ध करने तथा खाद्य समस्या को हल करने का उत्तम स्रोत एवं व्यवसाय।
रोजगार के अवसर-
1-पौधशाला उद्योग की विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। 2-पौधशाला उद्योग में स्व-रोजगार या अपना निजी व्यवसाय चलाना। 3-पौध उत्पादन, बिक्री आदि व्यवसाय या उनका व्यापार कर सकता है। 4-पौध उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां खोलकर, उत्पादन बढ़ाकर स्वयं दुकान खोल सकता है। 5-पौधशाला उद्योग से सम्बन्धित यन्त्रों, उपकरण एवं अन्य सामग्री विक्रय का उद्योग चला सकता है। 6-पौधशाला उत्पादन एवं बिक्री सम्बन्धी समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 351पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पांच प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
20
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 पंचम प्रश्न-पत्र 60
20 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 बाह्य परीक्षा 200 400 200 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (पौधशाला प्रौद्योगिकी का आधारभूत ज्ञान) 1-पौधशाला का महत्व-प्रमुख पौधशालाओं का नाम तथा उनका अध्ययन। 10 2-पौधशालाओं का वर्गीकरण, एक वर्षीय, द्विवर्षीय तथा बहुवर्षीय पौधों के लिये, रबी, खरीफ, जायद, सब्जी फसलों की पौधशाला, साधारण मिश्रित एवं विशेष पौधशाला, फल, फूल तथा सब्जियों की पौधशाला। 20 3-पौधशाला के अंग-सात वृक्ष क्षेत्र, बीज सेवा क्षेत्र, गमला क्षेत्र, प्रतिरोपण क्षेत्र, ग्रीन हाउस, प्रवाहन क्षेत्र 20 4-ग्रीन हाउस-ग्लास हाउस, पाली हाउस, गैस व प्रवाहन क्षेत्र। 10 द्वितीय प्रश्न-पत्र (पौधशाला पौध प्रवर्धन) 1-लैंगिक प्रजनन-परिभाषा, लाभ, हानियां, शुद्ध बीज की प्राप्ति एवं चुनाव, बीज परीक्षण, अंकुरण क्षमता, जीवन्तता, अंकुरण प्रभावित करने वाले कारण, अंकुरण पूर्व बीज शोधन इतिहास व महत्व। 20 2-अलैंगिक वानस्पतिक प्रजनन-परिभाषा, लाभ, हानियां, कटिंग द्वारा जड़, तना तथा पत्ती प्रवर्धन विधियां परिवर्तित अंगों जैसे बल्ब, राइजोम ट्यूमर, फाम, सकर, गुटी, प्रबर्धन-हवा गुटी, भूमि गुटी विधि, कम बांध विधियां-साधारण भेंट कलम, जीप भेंट कलम, जीनियर भेंट कलम, गुन्टी एवं खुर भेट कलम। 20 10 3-कालिकायन-टी शील्ड कालिकायन, बेच रिंग कालिकायन। 4-टीशू कल्चर प्रवर्धन तकनीकी-टीशू कल्चर, कोषिका कल्चर, कैलश कल्चर आदि। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र (पौधशाला प्रबन्ध, अलंकृत एवं शोभाकार पौधे) 1--अलंकृत बागवानी--परिभाषा, इतिहास व महत्व 10 2--शोभाकार पौधों का वर्गीकरण 10 3--मौसमी फल, पौधशाला तथा उसकी देखभाल। 10 4--किनारीदार झाड़ीनुमा तथा शोभाकार वृक्षों की पौधशाला तथा उनकी देखभाल। 10 5--कैक्टस--आर्किड्स, पाम फर्न, जलीय पौधों की पौधशाला तथा उनकी देखभाल। 10 6--फाइकस वर्ग के शोभाकार पौधे। 10
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(वानिकीय पौधों की पौधशाला)
1--वानिकी पौधों का प्रवर्धन तथा उनकी पौधशाला विधि। 2--वानिकी पेड़ों के बीज तथा संग्रह बीज भण्डारण विधियां। 3--वानिकीय पौध प्रतिरोपण तथा देख-रेख।
20 20 20
पंचम प्रश्न-पत्र
(पौध विपणन एवं प्रसार)
1--क्रय-विक्रय--सावधानियां, पैकिंग, नामकरण भेजने का माध्यम, सामग्री तथा सावधानियाँ। 14 2--पौधशाला रजिस्टे्रशन, लाइसेन्स, गुण प्रभावीकरण, प्रक्रिया तथा उनके मापदण्ड, प्लान्ट क्वाइन्टाइन नियम। 26 3--पौधशाला प्रसार--लोकप्रियता, वृद्धि के तरीके, विज्ञापन के माध्यम, समय तथा विषय वस्तु। 20352 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रयोगात्मक
1--प्रवर्धन तरीकों, भेंट कलम, गूटी कलम बांधना, कालिकायन के विभिन्न तरीकों का ज्ञान। 2--कालिका शाखा का चुनाव। 3--अलंकृत एवं शोभाकार पौधों की पहचान। 4--मौसमी फूलों की पहचान। 5--लतर झाड़ीनुमा, पाम पद वैक्टरस की पहचान। 6--अलंकृत पौधों का प्रवर्धन। 7--पौध उठाना। 8--पौध पैकिंग करना। 9--पौध ढलाई के तरीके। 10--अभिलेख तैयार करना। 11--वानिकीय पौधों की पहचान। 12--गड्ढे बनाना, वृक्ष रोपाई।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय--5 घण्टे प्रयोगात्मक परीक्षा--
(1) बाह्य परीक्षा-- परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें--
प्रयोग--1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--2 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--3 (दीर्घ प्रयोग)
(2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--
(क) सत्रीय कार्य (ख) कार्य-स्थल का प्रशिक्षण नोट--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं
मूल्य संस्करण
पता
वर्ष
15.00 1989-90
रंजना प्रकाशन मन्दिर, 12/13, सूई कटरा, आगरा
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 पौधशाला व्यवसाय कृष्ण पंत कोठारी एवं आनन्द बिहारी श्रीवास्तव
2 भारत में पौधों की कृषि डा0 मुरारी लाल
20.00 1987
लवनिया
सिंघल बुक डिपों, बड़ौत, मेरठ
3 सब्जियाँ एवं पुष्पोत्पादन श्री वेम, श्री सिंह भारतीय भण्डार, बड़ौत, 15.00 1988
4 भारत में फलोत्पादन श्री कृष्ण नारायण
15.00 1988
दुबे
मेरठ रामा पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, मेरठ
12.00 1984
6 फ्रूड नर्सरी प्रैक्टीसेज इन
15.00 1988 इन्डिया
एल0 बैधता
रतीमन (अंग्रेजी)
5 फल विज्ञान डा0 रामनाथ सिंह भारतीय कृषि अनुसंधान, परिषद, कृषि वन, नई दिल्ली दि इण्डियन प्रिन्टर्स वर्ग, रानी झांसी रोड, नई दिल्ली 7 पौधशाला प्रौद्योगिकी डा0 ओमपाल सिंह अलंकार पुस्तक भवन, 16.00 1989
बड़ौत, मेरठभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 353
(20) ट्रेड-भूमि संरक्षण
कक्षा- 12
उद्देश्य--
(1) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग के औद्योगीकरण से देश की बढ़ती हुई बेरोजगाारी को दूर करना। (2) भूमि कटाव को रोकना, उनका सुधार करना तथा प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वृद्धि करके आर्थिक संकट से देश का बचाना।
(3) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग में दक्षता प्राप्त करके भविष्य में जीवकोपार्जन के लिए स्वयं को सक्षम बनाना।
(4) श्रम के प्रति आस्था उत्पन्न करने आत्म निर्भर बनने एवं कुशल नागरिक के निर्माण में योगदान देना। (5) कृषि उत्पादन हेतु भूमि संरक्षित करना, सुधार करना तथा प्रतिवर्ष उनके क्षेत्रफल में वृद्धि करना। (6) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों एवं वैज्ञानिक विधियों की जानकारी अपने निजी जीवन को उपयोगी बनाने में सक्षम होना।
(7) प्रदेश की बंजर एवं अनुपयुक्त भूमि को उपयोगी एवं उपजाऊ बनाकर कृषि उत्पादन के योग्य बनाना।
वृक्षारोपण कर वन उद्योग को प्रोत्साहन देना। रोजगार के अवसर-- (1) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार उद्योग को विभिन्न इकाइयों में रोजगार मिलने की सम्भावना। (2) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार की इकाई खोलकर अपना निजी व्यवसाय चला सकता है। (3) भूमि सुधार सम्बन्धी यन्त्रों, उपकरणों एवं रसायनों की बिक्री के व्यवसाय से दुकान चला सकता है। (4) देश की बंजर एवं अनुपयोगी भूमि को उपयोगी बनाकर खेती कर सकता है। (5) भूमि संरक्षण एवं भूमि सुधार सम्बन्धी अलग-अलग समितियां बनाकर स्वयं तथा अन्य को रोजगार उपलब्ध करा सकता है। पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
(क) सैद्धान्तिक-- पूर्णांक उत्तीर्णांक
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
बाह्य परीक्षा 200
टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(मृदा एवं जल)
1-बाह्य क्षेत्र, वाह्य क्षेत्र का वर्गीकरण, बाह्य क्षेत्र प्रबन्ध, जलीय चक्र के मुख्य घटक, वर्षण के प्रकार, वर्षण का प्राक्कलन, वर्षामापी यन्त्र का अध्ययन, जलवृष्टि की विशेषतायें। 30 2-अपवाह परिभाषा, प्रभावित करने वाले कारक, अपवाह दर का प्राक्कलन, परिक्षेत्र विधि, अपवाह की माप, धारामापी विधि, ब्लब विधि, बियर विधि, बेग एवं क्षेत्रफल विधि।
30
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(मृदा क्षरण)
1-वायु क्षरण, वायु क्षरण की यांत्रिकी, संचालन का उपक्रमण, परिवहन की प्रक्रिया, निलम्बन उत्पतन, पृष्ठ सर्पण, निक्षेपण, वायु क्षरण को प्रभावित करने वाले कारक, वायु क्षरण व हानियाँ। 30 2-भू-क्षरण द्वारा मृदा हानि का प्राक्कलन, भारत में भू-क्षरण की समस्याएं, खड्ड क्षरण की समस्या, भारत में खड्ड क्षरण की समस्या एवं खड्ड की समस्या एवं खड्ड क्षरित क्षेत्र, वायु क्षरण की समस्या, सागरीय क्षरण की समस्या।
30
45 ङ354 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
तृतीय प्रश्न-पत्र
(भूमि संरक्षण)
1-वृक्ष संरक्षण की यांत्रिकी विधियां, मेडबन्दी मेड़ों के प्रकार, समोच्च मेड़बन्दी, समोच्च मेड़ों के कार्य, मेड़ों का अभिकल्पन, ढाल की प्रवणता, अन्तराल मेड़ों का आकार एवं अनुप्रस्थ काट, मेड़ों को ऊँचा, पाश्र्व ढाल, शीर्ष चौड़ाई, मेड़ों का आकार, चौड़ाई, समोच्च मेड़ों को प्रभावित करने वाले कारक, मेड़ों की स्थिति का निर्माण एवं प्रबन्ध, मेड़ निर्माण के आर्थिक लागत की गणना।
20 2-वेदिका खेती--परिभाषा, वेदिकाओं के कार्य, वेदिकाओं के प्रकार, सोपान वेदिका, कटक एवं नाली वेदिका, सोपान वेदिका के प्रकार एवं उनकी उपयोगिता, वेदिकाओं का अभिकल्पन, अन्तकरण, वेदिका प्रवणता, वेदिका लम्बाई, वेदिका की अनुप्रस्थ काट, वेदिका निर्माण एवं निर्माण के आर्थिक लागत की गणना। 20 3-समतलीकरण--परिभाषा, समतलीकरण की विधियाँ, समतलीकरण के उपयुक्त यंत्रों का अध्ययन, समतलीकरण की आर्थिक लागत की गणना, खड्ड नियंत्रण, नियंत्रण के सिद्धान्त, नियंत्रण उपायों के उद्देश्य, नियंत्रण की विधियाँ, वानस्पतिक विधियाँ, यांत्रिक विधियाँ, अस्थायी रचनाएं, स्थायी रचनाएं। 20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(वायु क्षरण नियंत्रण)
1-शुष्क खेती, परिभाषा, भारत में शुष्क क्षेत्रों का वितरण, शुष्क खेती सम्बन्धित सुझाव, शुष्क क्षेत्र के लिये फसलों का चयन।
30 2-घासदार जल मार्ग, जल मार्गों का उपयोग, जल मार्गों का अभिकलन बहाव की समस्या, जल मार्ग की आकृति, उपयुक्त घासों का चुनाव, जल मार्गों का निर्माण एवं निर्माण के आर्थिक लागत की गणना। 30
पंचम प्रश्न-पत्र
(ऊसर भूमियों का सुधार एवं भूमि संरक्षण में वानिकी प्रबन्ध)
1-वनों का प्रभाव, वनों के प्रकार, विभिन्न परिस्थितियों में वन रोपण के लिये संस्तुत जातियां, क्षेत्र वानिकी वन सुरक्षा, आधुनिक जीवन में वनों का योगदान, वनों का पर्यावरण पर प्रभाव, वर्गीकरण की सरकारी नीति एवं उनकी उपयोगिता।
30 2-भूमि संरक्षण, सिंचाई परिभाषा, उद्देश्य, फसल की जल मांग, सिंचाई आवृत्ति, सिंचाई की जल क्षमता की नाप, विभिन्न फसलों एवं क्षेत्रों के लिये सम्पूर्ण जल आयतन का प्राक्कलन, सिंचाई की विधियाँ। 30
प्रयोगात्मक
1--सोपान वेदिका का निर्माण। 2--कन्टूर एवं वेदिका नाली का निर्माण। 3--समतलीकरण। 4--विभिन्न क्षेत्रों में रक्षा पेटियों का निर्माण। 5--विभिन्न प्रकार के पौधशाला का निर्माण। 6--पौधशाला में पौधों का कर्षण। 7--जल-मार्गों का निर्माण। 8--विभिन्न प्रकार के पौधों एवं बीज की पहचान। 9--पी0 एच0 ज्ञान करना। 10--नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं मृदा के मुख्य तत्वों को ज्ञात करना। 11--ऊसर सुधार का व्यावसायिक ज्ञान। 12--विभिन्न संरक्षण रचनाओं का कार्य स्थल पर अवलोकन।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
समय--5 घण्टे
(क) प्रयोगात्मक परीक्षा--
(1) बाह्य परीक्षा--
परीक्षार्थियों को तीन प्रयोग दिये जायें-- प्रयोग--1 (दीर्घ प्रयोग) प्रयोग--2 (लघु प्रयोग) प्रयोग--3 (लघु प्रयोग)
(2) सतत् आन्तरिक मूल्यांकन--
(क) सत्रीय कार्य (ख) कार्य-स्थल का प्रशिक्षण
नोटः--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 355संस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 भूमि संरक्षण एवं भूमि
सिंघल बुक, डिपो एवं पता 15.00 1988 सुधार प्रौद्योगिकी 2 भूमि एवं जल संरक्षण के
तदेव 30.00 1988 सिद्धान्त
3 मृदा एवं जल संरक्षण के
डा0 ओम प्रकाश सिंह डा0 मिश्रा, शुक्ला एवं शुक्ला एस0 सी0 वर्मा मेसर्स भारतीय भण्डार बड़ौत, मेरठ 25.00 1987 सिद्धान्त
4 कृषि अभियन्त्रण बी0 बी0 सिंह कुक्क पब्लिशिंग हाउस, बड़ौत, 13.50 1988
मेरठ
5 मृदा एवं जल संरक्षण के डा0 ओम प्रकाश तदेव 30.00 1983 मूल सिद्धान्त
6 मृदा विज्ञान डा0 सिंह एवं
तदेव 30.00 1987
7 मृदा अपरदन एवं भूमि
50.00 1988 संरक्षण
शर्मा डा0 त्रिपाठी एवं सहयोगी
8 भारत में मृदा संरक्षण श्री बसु एवं
4.65 1988
सहयोगी
प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल प्रकाशन निदेशालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पन्तनगर, नैनीताल
(21) ट्रेड-एकाउन्टेसी एवं अंकेक्षण
कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
एकाउन्टेन्सी ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है। लेखा लिपिक, पुस्तकालय, रोकड़िया, रोकड़ लिपिक, कैश काउन्टर लिपिक, लागत लिपिक और अंकेक्षण लिपिक।
उद्देश्य--
बहीखाता तथा लेखाशास्त्र के मूलभूत सिद्धान्तों का ज्ञान प्रदान करने, व्यापारिक निर्माणों तथा सेवा प्रदान करने वाली संस्थाओं में रखी जाने वाली पुस्तकों तथा उनके सम्बन्ध में ज्ञान प्रदान करना तथा व्यवहारिक तथा निर्माण कार्य में लगे हुये संगठनों के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले प्रपत्रों, लेखों तथा विशेष रूप से अन्तिम खातों तथा विवरणी के तैयार किये जाने के विषय में व्यावसायिक ज्ञान प्रदान करता है। साथ ही यह प्रबन्धकों की कमी, लाभ तथा परिणामों को ज्ञात करने की विशेष कुशलता प्रदान करना है। इसी लिये परीक्षार्थी को सैद्धान्तिक ज्ञान के परिप्रेक्ष्य में एक गहन प्रयोगात्मक प्रशिक्षण भी प्राप्त करना होगा। पुस्तपालन तथा लेखा कर्म की पद्धति अंग्रेजी पद्धति, जैसे-बैंकों, बीमा कम्पनियों तथा अन्य संगठनों में रखी जाती है, से ही होगी। पाठ्यक्रम- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20
पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक--
आन्तरिक परीक्षा 200
400 200
बाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं
प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
356 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2--साझेदारी फर्म के खाते--प्रवेश, निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3--भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाते तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--कम्पनी खाते मिश्रण, संविलयन तथा पुनर्निर्माण को छोड़कर अंकों के निगमन तथा आहरण ऋण--पत्रों केनिर्गम तथा शोध-भारतीय कम्पनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अनुसार अन्तिम खाते तैयार करना। 20 2--लागत लेखांकन--परिभाषा, महत्व तथा पद्धतियाँ, उद्देश्य। 3--लागत के मुख्य तत्व--
20 20 1--सामग्री--क्रय तथा स्टोर स्रोतों का चयन, क्रय आदेश, स्टाक का स्तर, सामग्री का निर्गमन सतत सम्पत्ति सूची पत्र नियंत्रण।
2--श्रम--समय रखना, मजदूरी भुगतान हेतु विभिन्न समय निर्धारण पद्धतियां। 3--उपरिव्यय (Over Heads)--कारखाने का उपरिव्यय तथा विक्रय एवं वितरण उपरिव्यय। 4--लागत, विवरण तथा निविदा तैयार करना।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
20
20 1--कार्यालय उपकरण--श्रम, बचत उपकरण। 2--विवरण के माध्यम--थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 3--बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(गणित तथा सांख्यिकी)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--दर अनुपात तथा प्रतिशत एवं व्यासायिक समस्याओं में उनके अनुप्रयोग। 14 2--साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज से परिकलन तथा बैंकों एवं अन्य अभिकरण द्वारा ब्याज ज्ञात करने के लिये प्रयोग की गयी तालिका रेडीरेकनर का प्रयोग। 16 3--केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप--समान्तर माध्य (औसत), माध्यिका, बहुलक, ज्यामितीय माध्य, हरात्मक माध्य। 10 10 4--विचलन की मापों--मानक विचलन। 10 5--सूचनांक तथा इसका उपयोग।
पंचम प्रश्न-पत्र
(अंकेक्षण)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--मूल्यांकन एवं सत्यापन--अर्थ, उद्देश्य एवं चल-अचल सम्पत्तियों का सत्यापन एवं मूल्यांकन, दायित्वों का सत्यापन। 16 2--अंकेक्षण--गुण एवं योग्यतायें, नियुक्ति कर्त्तव्य, अधिकार एवं दायित्व। 14 3--विशिष्ट अंकेक्षण--साझेदारी फर्म, एकांकी व्यापार एवं सहकारी समितियों का अंकेक्षण-शिक्षण संस्थायें। 20 10 4--अंकेक्षण प्रतिवेदन--स्वच्छ एवं मर्यादित प्रतिवेदन।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 357प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक--400 न्यूनतम--200 बड़े प्रयोग--
1--दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र निर्श-पत्र (कोटेशन), आदेश-पत्र, सूचना-पत्र, सन्दर्भ पत्र, क्रय आदेश-पत्र, विक्रय पत्र ग्राहकों की क्रय हेतु प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे पत्र, स्मृति पत्र, शिकायत-पत्र, गश्ती-पत्र, बीमा एजेन्सी सम्बन्धी पत्र, बैंक एवं बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय-पत्र, सरकारी पत्र, सिफारसी पत्र, नौकरी हेतु आवेदन-पत्र साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति पत्र।
2--नकद रसीद, डेविट नोट क्रेडिट नोट, विनिमय विपत्र, प्रतिज्ञा पत्र, चेक-पे-इन स्लिप, हुण्डी, चेक, ड्राफ्ट, आर0आर0 टेलीग्राफ, मनीआर्डर फार्म, टे्रजरी फार्म, बी0एम0--9, प्यून बुक, मास्टर रोल, स्टाक रजिस्टर, लीव एकाउण्ट। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा 200 अंक-- (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) 80 अंक बड़े प्रयोग की सूची के प्रत्येक खण्ड में दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) 40 अंक छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी प्रयोगों की सूची के आधार पर 40 अंक पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों 40 अंक का संकलन। 2--आन्तरिक परीक्षा (200)-- (क) सत्रीय कार्य (100)--
सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति अनुशासन 10 अंक लिखित कार्य 20 अंक दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे 50 अंक मौखिकी 20 अंक कुल 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त 100 अंक श्रेणी के आधार पर।
प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं
मूल्य संस्करण
पता
वर्ष
1 2 3 4 5 6
सर्वश्री-- रु0
1 माध्यमिक बही खाता एवं सिंह एवं अग्रवाल भारत प्र्रकाशन मन्दिर, 30.00 1989-90
लेखा-प्रपत्र प्रथम मेरठ
2 माध्यमिक बही खाता एवं सिंह एवं अग्रवाल भारत प्रकाशन मन्दिर, 30.00 1989-90
लेखाशास्त्र-द्वितीय मेरठ
3 बहीखाता एवं लेखाशास्त्र बी0 एस0 भट्टाचार्या एवं नवजीवन प्रकाशन, मेरठ 05.00 1989-90
गोविल
4 अंकेक्षण बी0एस0 भट्टाचार्या एवं नवजीवन प्रकाशन, मेरठ 17.00 1989-90
गोविल
हिन्दी प्रचारक संस्थान 80.00 1989-90
(22) ट्रेड-बैकिंग
कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
बैंकिंग धाराओं के अध्ययन के उपरान्त छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्ति करता है-- (1) क्लर्क, (2) रोकड़िया, (3) लिपिक तथा रोकड़िया, (4) गोदाम संरक्षक, (5) लिपिक तथा गोदाम संरक्षक, (6) रोकड़िया तथा गोदाम संरक्षक, (7) लिपिक तथा टाइपिस्ट। उद्देश्य--
वर्तमान परिस्थितियों में छात्रों का बैंकिंग के सैद्धान्तिक ज्ञान का होना ही पर्याप्त नहीं है, अपितु उसे व्यावहारिक ज्ञान की भी अति आवश्यकता है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुये बैंकिंग के मूलभूत सिद्धान्त के358 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 अतिरिक्त छात्रों को बैंकिंग सेवा के लिये तैयार करना भी है। रोजगारपरक शिक्षा की ओर अग्रसर होने में यह कदम सहायक सिद्ध होगा। पाठ्यक्रम-- इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा :
पूर्णांक उत्तीर्णांक
60 20
60 20
60 300 20 100 (क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखा शास्त्र--I द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन चतुर्थ प्रश्न-पत्र--बैंकिंग पंचम प्रश्न-पत्र--बैंकिंग (ख) प्रयोगात्मक-- आन्तरिक परीक्षा
60 20 60 20
200
400 200 बाह्य परीक्षा
200
टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2--साझेदारी फर्म के खाते--प्रवेश, निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3--भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाते तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--कम्पनी खाते--अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस, अंश ऋण पत्रों का निर्गमन एंव शोधन कम्पनी 40 से अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार)। 2--बैंक सम्बन्धी लेखे। 10 3--बैंकिंग कम्पनियों के लाभ-हानि, खाता एवं चिट्ठा, बैंकिंग अधिनियम के अनुसार। 10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--कार्यालय उपकरण--श्रम, बचत, उपकरणं 20 2--विवरण के माध्यम थोक व्यापार, फुटकर व्यापार,श्रंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार20 20 3--बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बैंकिंग)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--भारतीय मुद्रा बाजार एवं वित्त बाजार--मुख्य अंक, दोष, सुधार के उपाय। 10 2--साख एवं साख पत्र-साख का अर्थ, भेद अनुकूल परिस्थितियां, विनिमय विपत्र, प्रतिज्ञा-पत्र, हुण्डी, बैंक ड्राफ्ट, स्वीकृति पत्र एवं चेक/चेक के प्रकार, भेद, रेखांकन, बेचान एवं अनावरण। 40 10 3--विदेशी मुद्रा का क्रय एवं विक्रय।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 359पंचम प्रश्न-पत्र
(बैंकिंग)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
10 1--बैंकों का राष्ट्रीयकरण। 2-सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, कृषक सेवा समितियाँ, लीड बैंक, भूमि विकास बैंक, डाक विभाग की बैंकिंग सेवायें।
25 3--समाशोधन गृह--बैंकों द्वारा चेकों एवं बिलों आदि का समाशोधन महत्व, संग्रहकर्त्ता (बैंक) द्वारा रखी जाने वाली सावधानियां 25
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
अधिकतम--400 अंक न्यूनतम--200 अंक बड़े प्रयोग--
1--बैंकों में खाते खोलने के विभिन्न प्रपत्रों को भरना एवं निकासी प्रपत्रों का पासबुक एवं लेजर खातों में लेखा करना, पासबुक में ब्याज की गणना एवं चढ़ाना, पे-इन-स्लिप द्वारा जमा धनराशि का लेजर खातों में प्रविष्टि करना, बैंक ड्राफ्ट, एस0टी0 टी0टी0 एवं पे-आर्डर तैयार करना तथा उनकी पोस्टिंग कराना, ऋण सम्बन्धी आवश्यक प्रपत्रों को भरना। छोटे प्रयोग--
2--साप्ताहिक विवरण, रिर्टन तैयार करना एवं प्रधान कार्यालय भेजना, बैंकों के खातों का रख-रखाव तथा बैंक सम्बन्धी रोकड़ बही, लेजर, तलपट तथा अन्तिम खातों का निर्माण तथा बी0एम0--9 भरना।
(ख) अनुक्रमणिका का निर्माण, चेकों का लिखना, निर्गमन करना एवं निर्गमन रजिस्टर में लेखा करना, चेकों का पृष्ठांकन एवं रेखांकन करना, चेकों की वैधता की जांच करना, पे-इन-स्लिप, विनियम पत्र, प्रतिज्ञा-पत्र, हुण्डी व टे्रजरी बिलों का लिखना, विभिन्न श्रम संघक-पत्रों का प्रयोग, रेडी-रेकनर द्वारा गणना, बाउचर कैश मेमो जमा तथा नाम पत्र भरना, बीजक, विक्रय विवरण तैयार करना, पत्र प्राप्ति पुस्तक, डाक-व्यय रजिस्टर, प्यून बुक तथा खुदरा रोकड़ बही का लिखना। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा 200 अंक-- (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोग की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी (40) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन--40 अंक। 2--आन्तरिक परीक्षा (200)-- (क) सत्रीय कार्य (100) अंक-- सत्रीय कार्य का विभाजन-- उपस्थिति अनुशासन 10 अंक लिखित कार्य 20 अंक दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिये जायेंगे 50 अंक मौखिकी 20 अंक योग . . 100 अंक
(ख) औद्योगिकी प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर--100 अंक।
प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशन का नाम एवं पता मूल्य संस्करण वर्ष
सिंह एवं अग्रवाल भारत प्र्रकाशन मन्दिर, मेरठ 30.00 1888-89 1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 बहीखाता तथा लेखा शास्त्र बैंकिंग ग्रुप
25.00 1988-89 2 मुद्रा एवं बैंकिंग डा0 श्रीकान्त मिश्र श्रीराम मेहरा एण्ड कम्पनी, हास्पिटल रोड, आगरा--3
3 भारतीय मुद्रा तथा बैंकिंग विजय पाल सिंह भारत प्रकाशन मन्दिर, मेरठ 35.00 1988-89 . . . . 28.00 1988-89 4 व्यावसायिक एवं
कार्यालय संगठन
5 भारतीय मुद्रा बैंकिंग . . . . 21.00 1988-89 6 व्यावसायिक बहीखाता . . . . 30.00 1988-89360 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(23) टे्रड-आशुलिपि एवं टंकण
कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
आशुलिपि एवं टंकण ग्रुप का अध्ययन करने के उपरान्त छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है-- (1) वेतन रोजगार--आशुलिपिक, टंकण, व्यक्तिगत सचिव, गोपनीय सचिव, कार्यालय सहायक, अधीक्षक लिपिक एवं टंकण, एल0 डी0 सी0, यू0 डी0 सी0 (समस्त पद सरकारी, अर्द्ध सरकारी एवं व्यक्तिगत संस्थानों में)।
(2) स्वरोजगार--(अ) व्यावसायिक संस्थान (टंकण एवं आशुलिपि), (आ) व्यक्तिगत संस्थान (टंकण एवं बहुलिपिकरण तथा अंशकालीन कार्य)। उद्देश्य--
1--छात्रों को आधुनिक युग में आशुलिपि एवं टंकण के महत्व का ज्ञान कराना। 2--छात्रों में आशुलिपि लेखन, पठन एवं रूपान्तर करने की क्षमता का विकास करना। 3--छात्रों में टंकण करने की क्षमता का विकास करना, साधारण विषय-वस्तु पत्र तालिका, विभिन्न प्रकार के व्यवसाय में प्रयुक्त प्रपत्र और प्रारूप प्रतिलिपि एवं प्रोडक्शन, टाइपिंग आदि।
4--छात्रों में व्यक्तिगत एवं कार्य आदतों का विकास करना। 5--छात्रों में टंकण की 40 शब्द प्रति मिनट एवं आशुलिपि की 120 शब्द प्रति मिनट की गति का विकास करना। 6--छात्रों को आधुनिक कार्यालय व्यावसायिक संगठन एवं विविध तथा व्यावहारिकता का अवबोध कराना। 7--छात्रों को तुरन्त रोजगार प्राप्त करने के लिये तैयार करना।
पाठ्यक्रम--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
60 20
60 20 (क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखा शास्त्र--I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--आशुलिपि एवं टंकण अंग्रेजी अथवा हिन्दी पंचम प्रश्न-पत्र--आशुलिपि एवं टंकण हिन्दी या अंग्रेजी (ख) प्रयोगात्मक-- आन्तरिक परीक्षा
200
400 200 बाह्य परीक्षा
200 टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2--साझेदारी फर्म के खाते--प्रवेश, निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3--भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-- II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--कम्पनी खाते-- अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस, अंश ऋण-पत्रों का निर्गमन एवं शोधन, कम्पनी 40 के अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार)। 2--इकहरा लेखा प्रणाली। 10 3--उधार क्रय विक्रय निकालना (देय बिल एवं प्राप्त बिल खाते सहित)। 10भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 361
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
20 1--कार्यालय उपकरण--श्रम, बचत/उपकरण। 2--विवरण के माध्यम--थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 20 20 3--बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(आशुलिपि एवं टंकण (हिन्दी)
इकाई-1 1--अन्तर्देशीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार, बीमा, व्यावहारिक-पत्र।
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 20 2--जल सेना एवं पुलिस सम्बन्धी प्रलेख। 3--भारतीय शासन पद्धति, व्यवस्थापिका सभा, स्वायत्त शासन विभाग, विभिन्न प्रकार की राजनैतिक संस्था सम्बन्धी लेख।
इकाई-2 1--नगर एवं प्रान्तों के नाम, प्रवास भारतवासी शब्दावली।
20 2--अन्तर्राष्ट्रीय शब्दावली। 3--शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग सम्बन्धी प्रलेख।
इकाई-3 1--न्याय विभाग एवं बालचर मण्डल सम्बन्धी प्रलेख।
20 2--ग्रह, नक्षत्र आदि सम्बन्धी प्रलेख। 3--हिन्दी साहित्य सम्बन्धी प्रलेख।
नोट-केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
शार्ट हैण्ड टाइप (अंग्रेजी)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक Unit 1—Business Phrases, Insurances, Banking, Railway, Stock booking and shipping phrases etc. 10 Unit 2—Technical Theological, Political phrases, Phrases used in other walk of life special words. 10 Unit 3—Office like dictation direct or through recorded devices like tapereabid as dictations means radio, T.V. etc. of official, business and personal correspondance, notingr confidential matter filling of various kinds of proformas used in organizations and institution. 20 Unit 4—Transcriptions on the typewriter of the seen and unseen materials related to the works of a steno-typist in various organizations as mentioned from unit 1 to unit 4. 20 नोट-केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
पंचम प्रश्न-पत्र
आशुलिपि एवं टंकण (हिन्दी)
इकाई--1
अधिकतम अंक--60 न्यूनतम अंक--20 20 कार्बन कागज का प्रयोग--इसके प्रयोग की विधियाँ, मशीन पद्धति एवं डेस्क पद्धति। कार्बन-प्रति की अशुद्धि का संशोधन। इकाई--2
20 स्टेन्सिल काटना--रिबन को हटाना अथवा रिबन प्लेट में परिवर्तन करना। विषय वस्तु को ठीक रूप में व्यवस्थित करना। प्रूफ रीडिंग एवं संशोधन, द्रव्य द्वारा सुधार। विभिन्न प्रकार के उपकरणों का प्रयोग, जैसे--लोहे का पेन, स्केल, स्लेट एवं हस्ताक्षर प्लेट। इकाई--3
20 (क) टाइप मशीन पर टेप किये हुए बिक्रय से टाइप करना। (ख) प्रोडक्शन टाइपिंग--हस्तलिखित मूल लेख का टंकण। साधारण, असाधारण, मैन्युस्क्रिप्ट, आदेश, नश्ती-पत्र, सूचनाएं, स्मृति-पत्र, विज्ञान, साक्षात्कार-पत्र, नियुक्ति-पत्र आदि का टंकण। ग्राफ कागज पर टंकण। नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
46 ङ362 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
FIFTH PAPER
Shorthand and Type (English)
Maximum Marks—60 Minimum Marks–20 Unit 1--(a) Importance of typewriting in modern age, typerwriting for vocational use and 30 college preparatory. Various kinds of typewriters based on the make the type, the size, the language etc. manual typewriter, Electric typewriter, Electronic typerwriter, word processor.
System of typing, Touch system and sight system, their advantages and disadvantage. (b) Aranging the materials for typing and of the class procedure. Correct typing method, various parts of a typewriter and their uses, manipulative control, margin stops, paper guide, paper release, line space gauge, cylinder knobs, shifts key, spacebar etc.
Insertion and removal of paper in and out of the machine. (c) Covering the keyboard typing of alphabets, words, phrases sentences and small paragraphs, typing of number and symbol keys.
Typing of symbols not given on the key-board. (d) Centring horizontal, vertical mathematical and judgement placement. Proof reading and correction of errors, Proof correction marks of different types of erasing materials, erasures (rubber/pencil) chemical paper, chemical liquid, correction mistake within the machine, squeezing and spreading.
(e) Care and maintenance of typewriter oiling and cleaning of the machine. Change of ribbon. Minor repair work. (f) Calculation of speed. Straight copy of typing (SWAM, CWAM and NWAM) and production typing (G-PRAM and N-PRAM) and MVAM, Speed Compositions, Indian and world records in typing.
(g) Personal habits and work habits, Personal appearance, willingness, promptness, initiative trust, worthiness, punctuality, etc.
Following instructions and direction. Unit 2--Typing of letters, Blocked, Semi-blocked and NOMA simplified the open close and mixed punctuations. 15 Typing of short letters (small and full size letter papers) one page letter and letter running into more than one page. Typing of addresses on envelops, inlands and postcards, including window display chain feed. Typing of annexures and appendices to letter. Unit 3--(a) Tabular typing, Two column Table and Multiple columns table box etc. display 15 of tabulation work. Typing of financial and costing statements. (b) Typing of printed forms like invoices, bills, quotation, tenders, index cards, telegrams etc. नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक--400
न्यूनतम--अंक 200 1--कार्यालय शैली--कार्यालय हेतु संशोधन सहित श्रुति लेखन, टंकण पर उन्हें अनुमोदित करना एवं टंकित सामग्री को हस्ताक्षर हेतु प्रस्तुत करना।
2--आशुलिपि दीर्घलिपि एवं टंकण यन्त्र पर अनुवाद करना, टंकण यंत्र पर अनुवाद करने पर विशेष बल ना दिया जाय।
3--शब्द चिन्हों, विशेष शब्दों, शब्द सूक्ष्मों, वाक्यांशों (जिसमें उच्च वाक्यांश शामिल) का आशुलिपि में लिखना एवं अनुवाद करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3634--आशुलिपि पटिट्का एवं हस्तलिखित टंकित/मुद्रित सामग्री का छात्रों द्वारा डिक्टेशन देना। 5--आशुलिपि नोटों को अनुवादित होने के बाद उन पर चिन्ह लगाना और फाइल करना।
टंकण प्रयोगात्मक
1--विभ्रमित पाण्डुलिपियों से टंकण। 2--स्टेन्सिल काटना। 3--टाइप मशीन पर प्रतिवेदन/सूक्ष्मों इत्यादि को कम्पोज करना। 4--रिबन को बदलना। 5--टाइप मशीन की सफाई एवं तेल देना। 6--छोटे-छोटे मरम्मत कार्य करना।
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा
सूची "क" से सूची "ख" से सूची "ग" से मौखिक एवं रिकार्ड
2--आन्तरिक परीक्षक द्वारा (क) सत्रीय कार्य
200 40 60 60 40 200 100
सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति अनुशासन लिखित कार्य दो वर्षों में 5 टेस्ट लिये जायेंगे मौखिक
10 20 50 20 100
(ख) औद्योगिक संस्थानों अथवा कार्यालयों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। नोट--1--प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2--प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थलों का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
3--एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को करना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्यरूप में परिणत करना है। 4--कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (एम्पलायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (एम्पलायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 200 अंक का होगा। वाह्य परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा।
5--प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा जिसे वाह्य परीक्षक परीक्षण कार्य करते समय ध्यान में रखेगा।
6--छात्रों को छात्रवृत्ति देने का प्राविधान होना चाहिये। 7--छात्रों को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण
वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 हिन्दी संकेत लिपि गया प्रसाद
14.00 1989
2 हिन्दी शार्ट हैण्ड
अनुपम प्रकाशक, शिवकुटी, इलाहाबाद युनिवर्सल बुक सेलर्स 12.25 1987 मैनुअल
अग्रवाल गया प्रसाद अग्रवाल364 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(24) ट्रेड-विपणन तथा विक्रय कला
कक्षा-12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
विपणन तथा विक्रय कला वर्ग का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकर के रोजगार कर सकता है-- 1--सामान्य विक्रेता, 2--विक्रय सहायक/काउन्टर विक्रेता, 3--निर्यात विक्रेता, 4--फुटकर विक्रेता, 5--थोक विक्रेता, 6--विक्रय प्रतिनिधि, 7--विज्ञापन एजेन्सियों में कर्मचारी के रूप में।
उद्देश्य--
विपणन एवं विक्रय कला पाठ्यक्रम का उद्देश्य अच्छे विक्रेता तैयार करना है। इसके लिये उन्हें ग्राहकों के स्वागत करने उनकी आवश्यकताओं का पता लगाने तथा उन्हें पूरा करने, वस्तुओं के प्रदर्शन करने, ग्राहकों के तर्कों तथा शंकाओं का समाधान करने, विक्रय व्यक्तित्व के विकास करने तथा विभिन्न विक्रय अभिकरणों के सम्बन्ध में पूर्ण ज्ञान प्रदान करना है। इसका उद्देश्य बाजार की दशाओं, समस्याओं एवं विक्रय प्रक्रियाओं के सम्बन्ध में भी ज्ञान देना है, जिससे व्यावहारिक जीवन में वे सफल विक्रेता बन सके।
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--विपणन तथा विक्रय कला 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र--विपणन तथा विक्रय कला 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-- आन्तरिक परीक्षा
200
400 200 बाह्य परीक्षा
200
टीप--परीक्षार्थियों के प्रत्येक प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम--प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--प्रेषण संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2--साझेदारी फर्म के खाते--प्रवेश, निवृत्त, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3--भारतीय बही खाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाते तथा लेखाशास्त्र--II)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक 1--कम्पनी खाते-- अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस, अंश ऋण पत्रों का निर्गमन एंव शोधन कम्पनी के अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार)।
20 2--इकहरा लेखा प्रणाली। 20 3--उधार क्रय-विक्रय निकालना (देय बिल एवं प्राप्त बिल खाते सहित)। 20भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 365
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक
20 1--कार्यालय उपकरण, श्रम, बचत, उपकरण। 2--विवरण के माध्यम, थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 20 20 3--बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(विपणन तथा विक्रय कला)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक (1) कृषि विपणन व्यवस्था के दोष तथा सरकार द्वारा उठाये गये कदम (सार्वजनिक वितरण प्रणााली, मण्डी समिति तथा संगठन)।
10 10 (2) औद्योगिक वितरण की आवश्यकता एवं महत्व तथा विभिन्न पहलू। (3) औद्योगिक विपणन के विभिन्न अभिकरण। 10 (4) महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पादनों का विपणन, सीमेन्ट, लोहा तथा इस्पात एवं चीनी। 10 (5) निर्यात विपणन, निर्यात नीति, निर्यात प्रक्रिया, निर्यात विपणन की समस्यायें, निर्यात सम्बन्धन तथा उसके लिए उठाये गये कदम।
20
पंचम प्रश्न-पत्र
(विपणन तथा विक्रय कला)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक (1) वैज्ञानिक विज्ञापन का अर्थ, आधुनिक व्यापार के महत्व, विज्ञापन के आर्थिक एवं सामाजिक महत्व। 20 10 (2) विपणन के माध्यम। 10 (3) विभिन्न प्रकार की विज्ञापन प्रतियों की तैयारी एवं सीमायें। 10 (4) उपभोक्ता संरक्षण एवं एम0आर0टी0पी0 ऐक्ट के सन्दर्भ में। 10 (5) बाजार रिपोर्ट की तैयारी एवं निर्वाचन।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
अधिकतम--400 अंक न्यूनतम--200 अंक बड़े प्रयोग--
सूची--"क" दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश-पत्र, सूचना-पत्र, सन्दर्भ पत्र, क्रय आदेश-पत्र, विक्रय-पत्र, ग्राहकों के क्रय के लिए प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती-पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय पत्र, सरकारी पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सिफारशी पत्र नौकरी हेतु आवेदन-पत्र, नियुक्ति-पत्र। सूची (ख)--
बैंकों में खाता खोलने के लिये विभिन्न पत्रों को भरना, चेक का लिखना, बिल लिखना, बीजक बनाना, विक्रय प्रपत्र, डेविट नोट, क्रेडिट नोट, प्रतिक्षा पत्र (देशी-विदेशी), विज्ञापन के लिये प्रति तैयार करना, बाजार रिपोर्ट तैयार करना। छोटे प्रयोग-- सूची (क)--
फारवर्डिंग नोट करना, रेलवे रसीद (आर0आर0), निर्यात प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले प्रपत्रों को भरना, कन्साइनमेंट नोट भरना, जी0आर0 फार्म भरना, मनीआर्डर एवं तार फार्म भरना। सूची (ख)--
समय व श्रम बचाने वाले यंत्रों की जानकारी एवं प्रयोग जैसे कलकुलेटर्स, डेटिंग मशीन, पंचिग मशीन, चेक राइटिंग मशीन, एडिंग मशीन, रिकार्डर, स्टाम्प वाच, रेडी रेकनर आदि।
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
1--बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा- 200 अंक (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ग) मौखिकी (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
2--आन्तरिक परीक्षा--200 अंक
(क) सत्रीय कार्य (100 अंक)366 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
सत्रीय कार्यक्रम का विभाजन
20
अंक उपस्थिति अनुशासन 10 लिखित कार्य 20 लिखित कार्य 50 मौखिकी योग. . 100 अंक
(ख) औद्योगिकी प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक।
प्रस्तुत पुस्तकें--
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण वर्ष
1 2 3 4 5 6 सर्वश्री-- रु0 1 व्यापारिक संगठन पत्र-व्यवहार एवं पी0पी0 भार्गव श्री राम मेहरा एण्ड कम्पनी, 30.00 1988-89 बाजार वितरण भाग-1
हास्पिटल रोड, आगरा
2 व्यापारिक संगठन पत्र-व्यवहार एवं पी0पी0 भार्गव " 30.00 1988-89 बाजार विवरण, भाग-2
3 बाजार व्यवस्था पी0पी0 भार्गव यूनिवर्सल बुक डिपो, लखनऊ 35.00 1988 (25)-ट्रेड सचिव पद्धति कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता--
सचिवीय पद्धति ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है-- (1) व्यक्तिगत सहायक/सचिव। (2) लिपिक तथा टाइपिस्ट। (3) कार्यालय सहायक। (4) टेलीफोन आपरेटर। (5) स्वागतकर्त्ता
उद्देश्य-- आधुनिक व्यावसायिक गृहों में सचिवीय कार्य का महत्व तथा श्रम एवं समय संचय यंत्रों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। अतः सचिवीय कार्य में कार्यरत व्यक्तियों को निम्न के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक ज्ञान कराना इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य है--
(1) कार्यालय संगठन। (2) आगत एवं निर्गत पत्रों की कार्य विधि। (3) प्रपत्रों एवं प्रलेखों को सुरक्षित रखना एवं उपलब्ध कराना। (4) श्रम एवं समय संचय यंत्र। (5) कार्यालय स्टेशनरी की व्यवस्था। (6) सभा एवं सचिवीय कार्य। (7) बैंक, डाक-तार एवं परिवहन सेवायें। (8) व्यापारिक पत्र-व्यवहार एवं सचिवीय कार्य सम्बन्धी प्रपत्रों को तैयार करना।
पाठ्यक्रम--
इस टे्रड में पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन एवं समय निम्नवत् रहेगा--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
60 20 60 20 (क) सैद्धान्तिक-- प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता एवं लेखाशास्त्र--प् 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--प्प् 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र--व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र--सचिवीय पद्धति पंचम प्रश्न-पत्र--सचिवीय पद्धति (ख) प्रयोगात्मक-- आन्तरिक परीक्षा
200
400 200 बाह्य परीक्षा
200 टीप--परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 367सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र--I)
अधिकतम--60 अंक न्यूनतम--20 अंक (1) प्रेषण संयुक्त, साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 (2) साझेदारी फर्म के खाते-प्रवेश निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 (3) भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) कम्पनी खाते-अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस अंश, ऋण पत्रों का निर्गमन एवं शोधन कम्पनी के 20 अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार)। (2) इकहरा लेखा प्रणाली-उधार क्रय एवं विक्रय निकालना, देय बिल एवं प्राप्त बिल खाते सहित। 20 20 (3) बैंक सम्बन्धी लेखे।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) कार्यालय उपकरण-श्रम, बचत, उपकरण। 20 (2) वितरण के माध्यम-थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 20 20 (3) बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सचिवीय पद्धति)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) मानवीय सम्बन्धों के सम्बन्ध में कर्मचारियों की भूमिका, सामान्य व्यक्तियों से सम्बन्ध व्यवहार, उच्च अधिकारियोें से सम्बन्ध व्यवहार, सहयोगियों से व्यवहार, सम्प्रेषण शिष्टाचार। 20 (2) सूचनाएं एवं पूछताछ-आगन्तुकों एवं ग्राहकों का स्वागत, उनके प्रति नम्रता बनाये रखना, व्यवसाय में 20 गोपनीयता का महत्व। (3) सरकारी एवं अर्द्ध सरकारी संस्थाओं जैसे आयकर, बिक्रीकर, उत्पादनकर, पूर्ति विभाग, उद्योग विभाग, 20 नगरपालिका या महापालिका से पत्र-व्यवहार।
पंचम प्रश्न-पत्र
(सचिवीय पद्धति)
आदेश, निरस्तीकरण, संदर्भ, शिकायत आदि।
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 (1) पत्र लेखन-महत्व, अनिवार्यता। 10 (2) व्यावसायिक पत्र व्यवहार-व्यावसायिक पत्र के विभिन्न भाग, व्यावसायिक पत्रों को लिखना, पूंछ-ताछ 10 (3) विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक संस्थाओं, परिवहन, बीमा, संचार एवं बैंकों आदि से पत्र-व्यवहार करना। 20 (4) व्यावसायिक संस्था में नियुक्ति सम्बन्धी पत्र-व्यवहार, साक्षात्कार, नियुक्ति, पदभार ग्रहण करना, 20 स्पष्टीकरण आदि।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- बैंक सम्बन्धी प्रपत्रों, चेक जमा पर्ची, पृष्ठाकंन, रेखांकन, ड्राफ्ट एवं धन प्रेषण सम्बन्धी प्रपत्रों का प्रयोग, डाक सेवाओं से सम्बन्धित प्रपत्रों को भरना। रेलवे एवं हवाई जहाज में आरक्षण एवं निरस्तीकरण प्रपत्रों को भरना।
368 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4कार्यालय में प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के प्रपत्रों के प्रारूपों को भरवाना, टी0ए0 बिल, पेबिल, बीजक, डेविट एवं क्रेडिट नोट, इन्डेन्ट, टेन्डर, आने व जाने वाली डाक का रजिस्टर भरना इत्यादि। छोटे प्रयोग- टेलीफोन, टेलेक्स, टेलीप्रिन्टर, इन्टरकाम, पी0बी0एक्स0 का कार्य ज्ञान, टेलीफोन डाइरेक्टरी देखना, कार्यालय कार्य का व्यावहारिक प्रदर्शन (नस्तीकरण एवं अनुक्रमणिका की विभिन्न विधियों का प्रयोग), कार्यालय में स्वागत के कार्य का व्यावहारिक ज्ञान। प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन- (1) बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा-200 अंक
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटेे प्रयोगों की सूची से दो-दो। (ग) मौखिक (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
(2) आन्तरिक परीक्षा-200 अंक (क) सत्रीय कार्य (100 अंक)-
सत्रीय कार्यक्रम का विभाजन 100 अंक 10 उपस्थिति एवं अनुशासन लिखने का कार्य 30 दो वर्षों में 5 टेस्ट लिए जायेंगे 30 30 मौखिक
योग .. 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। नोट-(1) प्रयोगात्मक कार्य में विद्यार्थी को प्रश्न-पत्र 1 से 5 तक में अंकित सभी विषयों का व्यावहारिक ज्ञान देना होगा। प्रत्येक विद्यालय में यथा सम्भव अधिक से अधिक कार्यालयों में प्रयोग में आने वाली मशीनों और यंत्रों को रखना चाहिये, जिससे विद्यार्थी इनके परिचालन का ज्ञान प्राप्त कर सके। विद्यार्थियों को आधुनिक कार्यालयों में भी ले जाकर कार्यविधि का विस्तृत ज्ञान कराया जाना चाहिए। (2) प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। (3) प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्यस्थलों का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। (4) एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को करना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इनका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य रूप में परिणत करना है। (5) कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (एम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (एम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 200 अंक का होगा। वाह्य परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा। (6) प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा जिसे वाह्य परीक्षक परीक्षण कार्य करते समय ध्यान में रखेगा। (7) छात्रों को छात्रवृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। (8) छात्रों को कार्यस्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये, उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें 1-कार्यालय कार्य विधि-प्रकाशक-यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ, मूल्य 60.00 रु0।
(26)-ट्रेड बीमा
कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगिता- बीमा ग्रुप का अध्ययन करने के बाद छात्र निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्त कर सकता है- (अ) वेतन रोजगार-
1-सहकारी समितियाें, सहायक के विभिन्न स्तरों पर कार्य कर सकता है। 2-विकास अधिकारी, सर्वेक्षक एवं पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर सकता है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 369(ब) स्वतः रोजगार-
1-बीमा अभिकर्ता सलाहकार, कैरियर एजेन्ट। 2-बीमा प्रतिनिधि। 3-सर्वेक्षण। 4-दावा-भुगतान प्राप्ति सलाहकार। 5-पर्यवेक्षक एवं अन्वेषक।
उद्देश्य- 1-बीमा उद्योग में कार्य करने हेतु बीमा सम्बन्धी सिद्धान्त, व्यवहार एवं कार्य विधि का ज्ञान एवं विकास। 2-उपरोक्त रोजगारों के लिये पर्याप्त क्षमता एवं योग्यता का विकास करना। 3-जीवन के विभिन्न स्तरों पर उपरोक्त रोजगारों में संलग्न होने वाले व्यक्तियों के व्यक्तित्व का विकास। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पॉच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-प् 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-प्प् 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-बीमा पंचम प्रश्न-पत्र-बीमा
60 20 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-
400 200 आन्तरिक परीक्षा बाह्य परीक्षा
200 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक निम्न लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2-साझेदारी फर्म के खाते-प्रवेश निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3-भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-कम्पनी खाते-अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस अंश, ऋण-पत्रों को निर्गमन एवं शोधन, कम्पनी के 20 अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार) 2-बीमा कम्पनियों के खाते-जीवन बीमा मूल्यांकन, लाभ-हानि खाता एवं आर्थिक चिट्ठा। 20 20 3-सामान्य बीमा कम्पनियों का लाभ-हानि तथा आर्थिक चिट्ठा।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
20 1-कार्यालय उपक्रम-श्रम, बचत, उपकरण। 2-विपणन के माध्यम-थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 20 3-बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
20
47 ङ370 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(बीमा)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-बीमा पत्र-धारकों की सेवा-
10 उम्र की स्वीकृति, नामांकन एवं अभिहस्तांकन, परिवर्तन एवं अस्वीकृति परिवर्तन एवं स्वीकृति परिवर्तन, ऋण लेने की पद्धति, तत्सम्बन्धी रजिस्टर रखना, प्रमाण-पत्र पंजिका में लेख, बीमा की शर्तों में परिवर्तन प्रीमियम भुगतान की विधियां, प्रीमियम दर, बीमा-पत्र के भेद, बीमा पत्र में परिवर्तन। 2-दावे का भुगतान-
20 मृत्यु पर दावे का भुगतान, मृत्यु दावों के प्रकार, मृत्यु का वैकल्पिक प्रमाण, अभ्यर्थन के रकम की गणना, परिपक्वता पर भुगतान दावों का पंजीकरण, छटनी सम्बन्धी प्रपत्रों का ज्ञान, कुल दावों की राशि निर्धारण व जांच, ऋण की वापसी, शुद्ध दावों की राशि का निर्धारण।
3-खाते रखना-
10 पुस्तकालय एवं खातों का प्रारम्भिक ज्ञान, मैनुअल, विभिन्न सांख्यिकीय पद्धतियों का ज्ञान, कमीशन, वेतन, दावे का भुगतान, सम्बन्धित लम्बे प्रीमियम व ब्याज सम्बन्धी लेखे। जीवन बीमा निगम, मैनुअल का ज्ञान, सामान्य बीमा के विभिन्न मैनुअल का ज्ञान। शाखा कार्यालय एवं विभागीय कार्यालय में रखे जाने वाले खातों का ज्ञान। 4-बीमा पत्र के प्रकार-
10 जीवन बीमा पत्र के भेद, बीमा-पत्र, कुछ प्रमुख जीवन बीमा पत्र एवं वार्षिक बीमा-पत्र के प्रमुख स्वभावों का ज्ञान, सामान्य बीमा-पत्र के भेद, अग्नि बीमा, सामूहिक बीमा पत्र, व्यापक बीमा पत्र, चोरी बीमा, दुर्घटना बीमा, फसल बीमा, मोटर बीमा, पशु बीमा। 5-भारत में बीमा उद्गम एवं विकास-
10 जीवन बीमा, राष्ट्रीकरण, उद्देश्य, उपलब्धि, पुनर्गठन, सामान्य बीमा राष्ट्रीकरण, वर्तमान स्थिति, भावी सम्भावनायें।
पंचम प्रश्न-पत्र
(बीमा)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
10
10
10
10
10
10 1-बीमा विक्रय विधि- बीमा पत्र के नियोजित खोज, मानवीय आवश्कताओं का विश्लेषण, बीमा पत्रों का वर्गीकरण एवं पहंुंच, साक्षात्कार के क्रम और समापन। 2-तर्क एवं आक्षेपों का उत्तर- मुख्य तर्क, कार्य तर्क, विनियोग तर्क, रोजगार तर्क, आक्षेपों के स्तर, आक्षेप दूर करने के तरीके, आक्षेपों के प्रकार एवं उत्तर, विभिन्न बीमा पत्रों का ज्ञान और ग्राहकों की आवश्यकतानुसार उनके खरीदने का सुझाव। 3-नये व्यापार का अभियोजन- प्रस्ताव-प्रपत्र तैयार करना-प्रस्ताव पत्र की जांच, प्रस्ताव-प्रपत्र का पंजीयन, जोखिम का चुनाव, जोखिम सूचना के स्रोत, जोखिम का वर्गीकरण एवं विधि, चिकित्सा सम्बन्धी क्रम एवं प्रपत्रों का ज्ञान, प्रीमियम एवं प्रस्ताव प्रपत्रों का शाखा कार्यालय भेजना, स्वीकृत करना। 4-बीमा पत्रधारियों की सेवा- बीमा पत्रधारियों की बीमा प्रपत्र की रकम में विस्तार, बीमा पत्र प्रीमियम में परिवर्तन, ऋण समर्पण मूल्य नामांकन एवं अभिहस्तान्तरण तथा दावा के भुगतान सम्बन्धी सेवायें, नवीकरण विधियों का ज्ञान, बीमा जब्ती, बीमा जब्ती की हानियां रोकने के उपाय। 5-अभिकर्ता प्रबन्ध- आयकर नियमों का ज्ञान एवं सम्पदा कर, विभिन्न अधिकारियों से सम्पर्क स्थापित करना। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा का विकास-बीमा विकास की सम्भावनायें, ग्रामीण सामाजिक एवं आर्थिक ज्ञान, विभिन्न प्रकार की बीमा पत्र, जैसे-जनता व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, पशु एवं फसल बीमा पत्र, चोरी एवं लूट-पाट, जीवन बीमा पत्र का ज्ञान। 6-सर्वेक्षण एवं दावे का भुगतान- क्षति का मूल्यांकन एवं वर्गीकरण, भुगतान के तरीके, कुल बीमा राशि का निर्धारण, हृास का निर्धारण, बाजार मूल्य का निर्धारण एवं शत्रु हानि का निर्धारण। हानि के कारणों का पता लगाना, तत्सम्बन्धी अधिनियमों व नियमों का ज्ञान।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 371प्रयोगात्मक
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-पूंछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश पत्र, सूचना पत्र, सन्दर्भ पत्र, आदेश पत्र, विक्रय पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेषित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय पत्र, अर्द्ध सरकारी पत्र, सिफारशी पत्र, नौकरी हेतु आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र। 2-प्रीमियम निर्धारण करना, प्रीमियम प्राप्त करना, रसीद निर्गमन करना, रजिस्टर में लेखा करना, चेकों को बैंकों में जमा करना, बैंक सम्बन्धी विवरण तैयार करना।
सूची (क)
1-लेखा एवं खाता रखना- वेतन रजिस्टर रखना एवं लेखा भरना, कमीशन सम्बन्धी रजिस्टर एवं लेखा सेवा सम्बन्धी एवं गोपनीय अभिलेखों को रखना विभिन्न प्रकार के बाउचर एवं उसका लेखा करना।
सूची (ख)
1-अभिकर्ताओं के साथ क्षेत्र में जाकर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना। 2-साक्षात्कार, लगूचा, आक्षेपों का उत्तर विभिन्न तालिकाओं के प्रीमियम बताना, एजेन्ट द्वारा बीमा धारियों की सेवाएं।
(ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
(1) बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा-200 अंक
(क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक से दो-दो। (ग) मौखिक (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
(2) आन्तरिक परीक्षा-200 अंक (क) सत्रीय कार्य (100 अंक)- सत्रीय कार्यक्रम का विभाजन- अंक
उपस्थिति एवं अनुशासन 10 20 लिखित कार्य दो वर्षों में 5 टेस्ट लिये जायेंगे 50 20 मौखिकी
योग .. 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों को उन कार्यों को कराना है जिससे उस रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 200 अंक का होगा। वाहृय परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा जिसे वाहृय परीक्षक परीक्षण कार्य करते समय ध्यान रखेगा। 6-छात्र को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्र को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :- 1-बीमा प्रकाशन-प्रकाशक-यूनिवर्सल बुक सेलर, लखनऊ मूल्य 16.50 रु0।
372 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(27) ट्रेड-सहकारिता
कक्षा-12
पाठ्यक्रम की उपयोगितायें सहकारिता ग्रुप का अध्ययन करने के पश्चात् छात्रों को निम्न प्रकार के रोजगार प्राप्ति में सहायता मिल सकती है- (अ) वेतन रोजगार-
(1) सहकारी समितियाें, सहायक के विभिन्न स्तरों पर कार्य कर सकता है। (2) प्राथमिक स्तर एवं केन्द्रीय स्तर के अधिकारी के रूप में कार्य कर सकता है। (3) सहकारी अन्वेषक एवं अंकेक्षण के रूप में कार्य कर सकता है।
(ब) स्वतः रोजगार-
(1) स्वतः व्यवसाय-उत्पादन, वितरण, उपभोग एवं वित्त के क्षेत्र में सहकारी समिति के निर्माण द्वारा। (2) अन्य सहकारी समितियाें के विभिन्न पक्षों पर परामर्शदाता के रूप में। (3) सहकारी समितियाें के प्रवर्तक के रूप में।
उद्देश्य-
(1) सहकारिता क्षेत्र में कार्य करने हेतु सहकारिता सम्बन्धी सिद्धान्त, व्यवहार एवं कार्य विधि का ज्ञान एवं विकास करना।
(2) सहकारिता के क्षेत्र में वेतन एवं स्वतः रोजगारों के लिये पर्याप्त क्षमता एवं योग्यता का विकास करना। (3) उपभोग एवं उत्पादन एवं वितरण के क्षेत्र में सहकारिता में संलग्न व्यक्तियों के ज्ञान एवं व्यक्तित्व का विकास करना।
(4) देश के आर्थिक व सामाजिक विकास में सहकारी आन्दोलन के महत्वपूर्ण योगदान से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पॉच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-प् 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-प्प् 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-सहकारिता पंचम प्रश्न-पत्र-सहकारिता
60 20 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-
400 200 आन्तरिक परीक्षा बाह्य परीक्षा
200 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2-साझेदारी फर्म के खाते-प्रवेश निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3-भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-कम्पनी खाते-अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस अंश, ऋण-पत्रों का निर्गमन एवं शोधन, कम्पनी के 20 अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1958 के अनुसार) 2-इकहरा लेखा प्रणाली उधार, क्रय एवं बिक्रय निकालना, देय बिल एवं प्राप्त बिल। 20 20 3-सहकारिता समितियों सम्बन्धी लेखें।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 373तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 20 1-कार्यालय उपक्रम-श्रम, बचत, उपकरण। 2-विवरण के माध्यम-थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार।20 3-बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(सहकारिता)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-निर्वाचन एवं निर्वाचित अधिकारियों द्वारा प्रशासन-प्राथमिक सहकारी समितियों में निर्वाचन की प्रक्रिया तथा निर्वाचित व्यक्तियों द्वारा प्रशासन।
20 2-समस्यायें एवं सुझाव-दायित्व की समस्या, एकांकी एवं संघीय संगठन, एक उद्देशीय एवं बहुउद्ेदशीय से द्विवर्गीय समस्यायें, वित्तीय एवं प्रशासकीय, गैर सरकारी योगदान, विभिन्न सहकारी समितियों के समन्वय सम्बन्धी समस्या, विभिन्न समस्याओं से सम्बन्धित सुझाव, उत्पादन विवरण, उद्योग एवं वित्त के अन्त मध्य समन्वयन। 20 3-सहकारी नेतृत्व-नेतृत्व के आवश्यक गुण, इसकी समस्यायें, सहकारिता, शिक्षण, महत्व, पद्धतियां, सरकारी एवं गैर सरकारी प्रशिक्षण।
20
पंचम प्रश्न-पत्र
(सहकारिता)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-उपभोक्ता सहकारी समितियां-प्रारूप, प्रकार, कार्य, महत्व एवं विकास, उपभोक्ता समितियां, संगठन प्रबन्ध, सदस्यता, वित्त व्यवस्था एवं सरकारी नियंत्रण, ऋण, रिपोर्ट समस्यायें एवं सुझाव। 20 2-अन्य सहकारी समितियां-भवन निर्माण सहकारी समितियां, श्रम सहकारी समितियां, औद्योगिक सहकारी समितियां, दुग्ध, मत्स्य, कुक्कुट पालन आदि।
10 3-सहकारी समितियों के निबन्धन सम्बन्धी प्रालेख, सहकारी समितियों के वित्तीय विवरण सम्बन्ध प्रलेख, कार्यवाहक पुस्तक।
10 4-सहकारी समितियों के वित्तीय विवरण सम्बन्धी प्रलेख-लाभ-हानि खाता, आर्थिक चिट्ठा, अंकेक्षण रिपोर्ट इत्यादि।
20
प्रायोगिक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 बड़े प्रयोग- 1-दिये गये निर्देशों के अनुसार पत्र तैयार करना, पूंछ-ताछ के पत्र, निर्ख (कोटेशन), आदेश पत्र, सूचना पत्र, सन्दर्भ पत्र, आदेश पत्र, विक्रय पत्र, ग्राहकों को क्रय हेतु प्रेरित करने वाले पत्र, तकादे के पत्र, स्मृति-पत्र, शिकायती-पत्र, गश्ती पत्र, एजेन्सी सम्बन्धी-पत्र, बैंक व बीमा सम्बन्धी पत्र, परिचय.पत्र, सरकारी.पत्र, अर्द्ध सरकारी.पत्र, आवदेन-पत्र, साक्षात्कार पत्र, नियुक्ति-पत्र। 2-सचिवीय कार्य प्रणाली का ज्ञान-कार्य सूची तैयार करना, सभा बुलाना, सभा की कार्यवाही का संचालन एवं सभा सूक्ष्म (मिनट) तैयार करना। 3-सहकारी बैंकों में पे-इन स्लिप, पास-बुक, रजिस्टर एवं चेकों की जांच करना एवं भवनों, पास-बुक के व्यवहारों का ज्ञान प्राप्त करना, वाउचर, कैश-मेमो, जमा तथा नाम पत्र, खाता विवरण, साप्ताहिक रिटर्न आदि तैयार करना एवं प्रधान कार्यालय भेजना। छोटे प्रयोग- 4-श्रम संचय यंत्रों का व्यावहारिक ज्ञान एवं रेडी रिकनर द्वारा गणना करना। (ग) प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन- (1) बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा-200 अंक (क) चार बड़े प्रयोग (20+20+20+20) बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से दो-दो। (ख) चार छोटे प्रयोग (10+10+10+10) छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक से दो-दो। (ग) मौखिकी (40 अंक) प्रयोगों की सूची के आधार पर। (घ) प्रैक्टिकल नोट-बुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन (40 अंक)।
374 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(2) आन्तरिक परीक्षा-200 अंक (क) सत्रीय कार्य (100 अंक)-
सत्रीय कार्य का विभाजन 100 अंक उपस्थिति एवं अनुशासन 10 20 लिखित कार्य दो वर्षों में 5 टेस्ट के आधार पर 50 20 मौखिकी
योग .. 100 अंक
(ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों से उन कार्यों को कराना है जिससे उसे रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 200 अंक का होगा। वाहृय परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा जिसे वाह्यय परीक्षक परीक्षण कार्य करते समय ध्यान रखेगा। 6-छात्र को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्र को कार्य स्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :- 1-सहकारिता-प्रकाश-साहित्य भवन, आगरा, मूल्य 35.00 रु0।
(28) ट्रेड-टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी
कक्षा- 12
पाठ्यक्रम की उपयोगितायें- इस पाठ्यक्रम का अध्ययन करने वाले छात्र निम्न रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। टंकक (टाइपिस्ट) टंकक एवं लिपिक (टाइपिस्ट-कम-कलर्क) लोवर डिवीजन क्लर्क, अपर डिवीजन क्लर्क, लिपिक (क्लर्क) एवं स्व-रोजगार टंकण संस्था (टाइपिंग इन्स्टीट्यूट), कार्य टंकण (जांब टाइपिंग), अंश कालीन टंकण (पार्ट टाइम टाइपिस्ट) आदि। उद्देश्य- (1) छात्रों को आधुनिक युग में टंकण के महत्व, विकास और प्रभावों का ज्ञान कराना। (2) छात्रों को टंकण-बैठन (टाइपिंग पोस्चर), टंकण-सामग्री प्रबन्ध एवं कक्षा समाप्ति विधि, स्पर्श एवं युगकृति गति गणना का अवबोधन कराना। (3) छात्रों में निम्न क्षमताओं का विकास करना। यांत्रिक नियंत्रण (मैन्युपुलेटिव कन्ट्रोल) कागज को मशीन में लगाना व मशीन से निकालना, शब्द, वाक्यांश, वाक्य एवं अनुच्छेद टंकण, अंक एवं संकेत टंकण, मध्य टंकण (साफडटि) लम्बवत् एवं क्षैतिजिक-गणितात्मक एवं अनुमानित मध्य टंकण (मैथमेटिकल एवं जजमेन्ट प्लेसमेन्ट) पत्रों का विविध रूपों में टंकण, जैसे ब्लाक्ड स्टाइल, सेमी ब्लाक्ड स्टाइल, नोमा, सिम्प्लोफाइड (लें हक एवं मिश्रित पंकच्यूऐशन के साथ), सांख्यिकी टंकण (आर्थिक व्यावसायिक एवं लागत विवरण), प्रूफ रीडिंग एवं त्रुटि सुधार, सरकारी, अर्द्ध सरकारी एवं गैर सरकारी (व्यावसायिक आदि) संस्थाओं में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न पत्र, प्रपत्र प्रारूप एवं मुद्रित फार्मों पर टंकण एवं विचार टंकण (कम्पोजिंग एड दी टाइप राइटर) अर्थात् टंकण यंत्र के लेखन यंत्र के रूप में प्रयोग, भूरे फोते से टंकण (टाइपिंग फ्राम रेकजेडटेप) टंकण मशीन को सुरक्षा एवं देख-भाल, मशीन की सफाई करना और उसमें तेल डालना, फीता बदलना (चेजिंग दी रिबन), लघु मरम्मत कार्य (माइनर रिपेयर वर्क)। (4) छात्रों में अंग्रेजी टंकण की 40 शब्द प्रति मिनट और हिन्दी की 30 शब्द प्रति मिनट गति के विकास करना। (5) छात्रों में व्यक्तिगत एवं कार्य आदतों (पर्सनल ऐण्ड वर्क हैबिट्स) जैसे-व्यक्तिगत दिखावट (पर्सनल एपीयरेन्स)। सफाई शुद्धता, शीघ्रता, नियमितता, कर्तव्य परायणयता एवं निष्ठा, समय पाबन्दी, स्वेच्छा की भावना आदि का विकास करना, आदेशों/निर्देशों का पालन। (6) छात्रों को तुरन्त रोजगार के लिये तैयार करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 375पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के पॉच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन एवं समय निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र-बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र-व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-बीमा- टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र-बीमा- टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी 60 20 (ख) प्रयोगात्मक-
400 200 आन्तरिक परीक्षा बाह्य परीक्षा
200 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
सैद्धान्तिक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-I)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-प्रेषण, संयुक्त साहस खाते, चालू हिसाब और औसत भुगतान विधि। 20 2-साझेदारी फर्म के खाते-प्रवेश निवृत्ति, मृत्यु तथा साझेदारी समापन की दशा में। 20 3-भारतीय बहीखाता पद्धति के सैद्धान्तिक अध्ययन और बहियों का प्रयोग। 20
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(बहीखाता तथा लेखाशास्त्र-II)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20 1-कम्पनी खाते-अंशों का निर्गमन तथा आहरण, बोनस अंश, ऋण-पत्रों को निर्गमन एवं शोधन, कम्पनी के अन्तिम खाते (कम्पनी अधिनियम, 1956 के अनुसार) 40 2-इकहरा लेखा प्रणाली उधार, क्रय एवं विक्रय निकालना, देय बिल एवं प्राप्त बिल। 20
तृतीय प्रश्न-पत्र
(व्यावसायिक एवं कार्यालय संगठन)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
20 1-कार्यालय उपक्रम-श्रम, बचत, उपकरण। 2-विपणन के माध्यम-थोक व्यापार, फुटकर व्यापार, श्रृंखला दुकानें, विभागीय भण्डार, डाक द्वारा व्यापार। 20 3-बीजक (देशी तथा विदेशी) तथा बिक्री विवरण तैयार करना।
20
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(टंकण हिन्दी तथा अंग्रेजी)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
15
15
15 इकाई-1- स्टेन्सिल काटना-रिबन को हटाना अथवा रिंबन सेट में परिवर्तन करना, विषयवस्तु को ठीक रूप से व्यवस्थित करना, प्रूफ रीडिंग एवं संशोधन द्रव्य द्वारा सुधार, विभिन्न प्रकार के उपकरणों का प्रयोग जैसे-स्टाइल्स पेन, स्केल, स्लेट एवं हस्ताक्षर प्लेट। इकाई-2- मुद्रित प्रारूपों का टंकण जैसे बीजक, बिल, निर्ख, टेण्डर, तार आदि। टाइप मशीन पर सोचकर टाइप करना, टेप किये हुये विषय से टाइप करना। इकाई-3- टाइप किये हुये प्रपत्र की गति गणना, गति प्रतियोगिता एवं छात्रों को भारतीय एवं विश्व टंकण के रिकार्ड का ज्ञान कराना।
376 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 415 इकाई-4- टंकक के व्यक्तिगत कार्य एवं आदतें, व्यक्तिगत गुण-स्वेच्छा, शीघ्रता एवं आदेशों का पालन। नोट-इस प्रश्न-पत्र में केवल सैद्धान्तिक (लिखित) प्रश्न पूछे जायेंगे टाइप मशीन का प्रयोग प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा है।
पंचम प्रश्न-पत्र
(टंकण हिन्दी एवं अंग्रेजी)
अधिकतम अंक-60 न्यूनतम अंक-20
20 Unit 1--(a) Typing on printed for like invoices, bills quotations tenders indexcards telegrams etc. 20 (b) Composing at the typewriter (using type writing as a writing tools), drafting the subject matter at type writer directly. Typing from recorded tapes. Unit 2--(a) Producting Typing. Typing of simple and confuse manuscript. 20 Typing of orders circulars notice memoranda notes, advertisements interview letters appointment letter etc. Typing of bibliography. Type on graph papers. (c) Care and maintenances of typewriter, oiling and cleaning of the machine change of ribbon, minor repair work. Unit 3--(a) Calculation of speed straight copy typing (GWAM, CWAMJ and NWAM and production typing G-PRAM and N-PRAM) and MWAM. speed competition, Indian and word records in typing. (b) personal habits and work habits, Personal appearance, willingness, promptness, initiative, Trust worthingess, Punctuality etc. Following instructions/directions.
नोट- केवल सैद्वांतिक प्रश्न ही पूछे जायेगे। टाइप मशीन का प्रयोग केवल प्रयोगात्मक परीक्षा में ही किया जायेगा।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(हिन्दी टंकण)
पूर्णांक-400 न्यूनतम अंक-200 1-कठिन शब्दों, मुहावरों, वाक्यों एवं कथांशो की टंकण। 2-संख्याओं एवं चिन्हों जो की-बोर्ड (ज्ञमल.ठवंतक) में न हो, का टंकण। 3-विभिन्न आकार के कागजों/पत्र शीर्षकों पर भिन्न-भिन्न ढंगों के छोटे एवं बड़े पत्रों का टंकण। 4-पोस्टकार्डों अन्तर्देशीय-पत्रों एवं विभिन्न प्रकार के लिफाफों पर पतों का टंकण। 5-बहुसंख्यक कालमों के साथ सारणियों का टंकण। 6-आमन्त्रण-पत्रों, मीनू कार्डों, कार्यक्रमों आदि का टंकण। 7-चाटर््स, ग्राफ पेपर्स आदि पर टंकण। 8-प्रूफ रीडिंग एवं अशुद्धियों का सुधार। 9-संस्थानों एवं संगठनों में प्रयोग किये जाने वाले प्रपत्रों जैसे-विपत्र, बीजक, टेलीग्राम फाम्र्स, धनादेश फार्म, प्राप्ति स्वीकृति कार्ड, चेक इत्यादि पर टंकण।
10-विभूषित पाण्डुलिपियों के टंकण। 11-स्टेन्सिल काटना। 12-टाइप मशीन पर प्रतिवेदनों, सूक्ष्मों इत्यादि का कम्पोज करना। 13-रिबन को बदलना। 14-टाइप मशीन की सफाई एवं तेल देना। 15-छोटे-छोटे मरम्मत कार्य करना।
Practicals
ENGLISH TYPEWRITING
1--Proof reading and corrections of errors. 2--Typing on forms used in institutions and organisations like bills, invoices, telegram form. (a) M.O., acknowledgement cards, cheque etc.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3773--Typing from confused manuscript. 4--Cutting the stencil. 5--Composing reports, minutes, etc. at the typewriters. 6--Changing of ribbon. 7--Oiling and cleaning the machine. 8--Minor repair work.
प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु अंक विभाजन
200 अंक 40 अंक 60 अंक 60 अंक 40 अंक
1. बाह्य परीक्षक द्वारा परीक्षा सूची 'क' से सूची 'ख' से सूची 'ग' से मौखिक एवं रिकार्ड 2. आन्तरिक परीक्षा (क) सत्रीय कार्य
100 अंक सत्रीय कार्य का विभाजन उपस्थिति एवं अनुशासन 10 अंक 20 अंक लिखित कार्य 50 अंक दो वर्षों में 5 टेस्ट के आधार पर 20 अंक मौखिकी
(ख) औद्योगिक संस्थानों अथवा कार्यालयों द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक। टीप- 1-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। 2-प्रत्येक धारा के लिये 4 या 5 कार्य-स्थल का चयन करना होगा और एक कार्य-स्थल पर 4 या 5 छात्र ही एक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। 3-एक रोजगार (जाब) से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के कार्यों का अवलोकन करके छात्रों से उन कार्यों को कराना है जिससे उसे रोजगार से सम्बन्धित योग्यताओं एवं क्षमताओं का विकास तथा आदतों का निर्माण किया जा सके। इसका उद्देश्य छात्रों में अर्जित सैद्धान्तिक ज्ञान एवं प्रयोगात्मक कार्यों को कार्य के रूप में परिणित करना है। 4-कार्य का निरीक्षण अध्यापक तथा स्वामी (इम्प्लायर) द्वारा किया जायेगा। परीक्षण कार्य अध्यापक/स्वामी (इम्प्लायर) की अनुशंसा के आधार पर किया जायेगा। यह 200 अंक का होगा। वाह्य परीक्षक द्वारा शेष 200 अंक में परीक्षण किया जायेगा। 5-प्रत्येक छात्र प्रयोगात्मक कार्यों का पूर्ण लेखा रखेगा जिसे वाह्य परीक्षक परीक्षण कार्य करते समय ध्यान में रखेगा। 6-छात्रों को छात्र-वृत्ति देने का प्रावधान होना चाहिये। 7-छात्रों को कार्यस्थल पर पूर्ण समय तक रहना चाहिये। उन्हें प्रतिदिन विद्यालय आने या जाने की आवश्यकता नहीं है। संस्तुत पुस्तकें :-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम एवं पता मूल्य संस्करण 1 2 3 4 5 6 1. अनुपम टाइपिंग मास्टर श्रीमती उषा
6.00 1989
गुप्ता
अनुपम प्रकाशक, शिवकुटी, इलाहाबाद
2. हिन्दी टाइपिंग राइटिंग ,, विष्णु आर्ट प्रेस, इलाहाबाद 12.00 1987 ,, सुपर पब्लिशर्स, लखनऊ 12.00 1987 3. हिन्दी टाइपिंग राइटिंग, व्यावहारिक एवं सिद्धान्त
4. व्यावहारिक टंकण ,, उपकार प्रकाशक, आगरा 15.00 1987 5. सुपर टाइपिंग मास्टर (अंग्रेजी) ,, सुपर पब्लिशर्स, लखनऊ 6.00 1988
(29) टे्रड-मुद्रण
कक्षा-12
उद्देश्य– 1–विद्यार्थी को मुद्रण व्यवसाय से सम्बन्धित रोजगार की जानकारी तथा प्रशिक्षण देना। 2–सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्रों में मुद्रण उद्योग हेतु कुशल कर्मियों का विकास करना। 3–शिक्षित कर्मियों के विकास द्वारा मुद्रण व्यवसाय में सुधार लाना।
48 ङ378 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 300
100
25 25 25 25
400
समायोजन के अवसर– (1) वेतनभोगी– (क) कम्पोज़ीटर। (ख) मशीन ऑपरेटर। (ग) बुक बाइन्डर। (घ) पू्रफ रीडर। (ङ) अन्य प्रेस कार्मिक। (2) स्वरोजगार- (क) छोटे पैमाने पर निजी मुद्रण व्यवसाय चलाना। (ख) निजी प्रकाशन व्यवसाय स्थापित करना। (ग) ज़िल्दबन्दी, डिब्बे तथा लिफाफे आदि का निजी व्यवसाय चलाना। पाठ्यक्रम– (क) सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक प्रथम प्रश्न-पत्र 75 द्वितीय प्रश्न-पत्र 75 तृतीय प्रश्न-पत्र 75 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 75 (ख) प्रयोगात्मक आन्तरिक परीक्षा 200 वाह्य परीक्षा 200 नोट-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 25 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
15
15
15
प्रथम प्रश्न-पत्र (अक्षर योजना) (1) अक्षर योजन की विधियों का संक्षिप्त परिचय, हस्त अक्षरयोजन, यांत्रिक अक्षरयोजन तथा फोटो अक्षरयोजन। (2) अक्षरयोजन के सिद्धान्त-योजन का माप बांधना, पाठ्य वस्तु का अक्षरयोजन, पैरा इन्डेशन, शब्दों के मध्य स्पेस लगाना, पंक्ति पूरी करना, पंक्ति के अन्त में शब्दों का विभाजन, बड़े (कैपिटल तथा स्माल कैपिटल) अक्षरों का प्रयोग, काले तथा तिरछे अक्षरों का प्रयोग। संदर्भ चिन्ह, विभिन्न प्रकार तथा उपयोग, संयुक्ताक्षर तथा उनके उपयोग, कविता तथा टेबिल सम्बन्धी अक्षरयोजन, प्रूफ उठाना, टाइप वितरण। 15 (3) प्रूफ पढ़ना–प्रूफ के प्रकार, प्रूफ वाचक तथा कॉपी धारक, प्रूफ रीडिंग चिन्ह, प्रूफ पढ़ते समय की सावधानियाँ। (4) विविध अक्षरयोजन कार्य-निमंत्रण-पत्र, लेटरहेड, बिल फॉर्म, रसीदें, पोस्टर, समाचार पत्र आदि के मुद्रण हेतु अक्षरयोजन। (5) आकलन कार्य-निर्धारित पुस्तकें तथा पत्रिकायें लम्बाई की पंक्ति में दिये हुये माप के टाइप के ''एन'' की संख्या ज्ञात करना, पृष्ठ की लम्बाई में पंक्तियों की संख्या ज्ञात करना। कम्प्यूटर सेटिंग में एक पृष्ठ के शब्दों का आकलन।
15
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(मुद्रण सम्बन्धी विविध प्रक्रिया एवं मुद्रण सामग्रियाँ)
15 (1) मुद्रण सम्बन्धी विविध प्रक्रियायें- 1–ऑफसेट प्लेट-लिथोग्राफी का सिद्धान्त, ऑफसेट प्लेट के उपयोग तथा उनके बनाने की सम्पूर्ण प्रक्रियायें। 15 2–डाई कार्य-परिचय, डाई इम्बोसिंग, प्रिंटिंग, कटिंग तथा क्रीजिंग, डाई के विभिन्न प्रकार तथा उनके उपयोग। 15 (2) मुद्रण सामग्रियां- 1–बोर्ड दफ्ती-विविध प्रकार, उनके उपयोग तथा रख-रखाव। 2–आवरण सामग्री-कागज, कपड़ा, ऑयल क्लॉथ, रैक्सीन, चमड़ा, सेन्थेटिक आवरण के विभिन्न प्रकार, उपयोग तथा रख-रखाव। 15 3–सिलाई सामग्री-धागा, तार, डोरा तथा फीता-वांछनीय गुण, प्रकार एवं उपयोग। 15भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 379
तृतीय प्रश्न-पत्र
(प्रेस कार्य)
15
15
15
15
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(जिल्दबन्दी तथा परिष्करण क्रियायें)
15
25
15
20 (1) डिब्बाबन्दी तथा लिफाफा बनाना- विभिन्न प्रकार, उपयोगिता, उपकरण एवं संक्रियायें। (2) विविध संक्रियायें- पंचिंग, परफोरेटिंग, आलेटिंग, इंडक्ंिसग, राउण्ड कारनरिंग, लेबुल पंचिंग, क्रीजिंग आदि की उपयोगिता, उपकरण एवं सामाग्रियां। (3) पुस्तकों की आवरण सज्जा- विभिन्न प्रकार उपयोगितायें, प्रयोग होने वाले उपकरण, सामग्रियां तथा संक्रियायें। (4) रेखण कार्य- विभिन्न प्रकार के रेखण कार्य, उपकरण एवं उपयोग, प्रयोग होने वाले यंत्रों का वर्णन।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
(1) अक्षरयोजन कार्य- (क) किताबी-एकल तथा बहुस्तम्भी कार्य, पेज मेकअप। (ख) कविता सम्बन्धी कार्य। (ग) जॉब सम्बन्धी कार्य-निमंत्रण पत्र, विजिटिंग कार्ड, लेटर हेड, रसीदें, फॉर्म इत्यादि। (घ) बहुरंगी कार्य हेतु टाइप मैटर का पृथक्करण। (2) प्रूफ उठाना-प्रूफ पढ़ना तथा तद्नुसार मैटर का शोधन। (3) वितरण कार्य। (4) पृष्ठायोजन अभ्यास-दो, चार तथा आठ पृष्ठों का पृष्ठायोजन। (5) पाषण-एक, दो, चार तथा आठ पृष्ठों का पाषण। (6) प्लेटन मशीन पर विविध मुद्रण कार्यों का अभ्यास-विजिटिंग कार्ड, निमन्त्रण-पत्र, विभिन्न प्रकार के फार्म, शीर्ष पत्रक (लेटर हेड)। (7) प्लेटन पर क्रीजिंग तथा कटिंग कार्य। (8) तार सिलाई। (9) धागा सिलाई-विभिन्न प्रकार-खांचित सिलाई (Sewing in Sewing), फीता सिलाई (Tap Sewing), प्रगरी सिलाई (Over Sewing)। (10) कोर छपाई। (11) कोर सज्जा (Edge decording)। (12) कवर लगाना। (13) केस निर्माण तथा केस लगाना। (14) कवर सज्जा-स्वर्ण छपाई (Gold toling), मसिहीन छपाई। (15) विविध स्टेशनरी कार्य। नोट :- प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य है।
380 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4संयुक्त पुस्तकें-
क्रमांक पुस्तक का नाम लेखक का नाम प्रकाशक का नाम व पता मूल्य संस्करण 1 2 3 4 5 6 1 ज़िल्दबन्दी, मुद्रण तथा किशन चन्द्र राजपुत अनुपम प्रकाशन, 79-बी/1, 30.00 1979 परिकरण, खण्ड 1
शिवकुटी, इलाहाबाद
2 ज़िल्दबन्दी, मुद्रण तथा
,, ,, 40.00 1980 परिकरण, खण्ड 2
3 आधुनिक ग्रंथ शिल्प चन्द्र शेखर मिश्र ,, 15.00 1989 4 संयोजन शास्त्र ,, ,, 25.00 1989 5 अक्षर मुद्रण शास्त्र ,, ,, 40.00 1987 नागपाल ,, 40.00 1977 6 लागत परिकलन तथा
मूल्यांकन
7 प्रतिकरण विधियाँ राम कृष्ण जायसवाल ,, 20.00 1977 8 Letter Press Printing, Part I. C. S. Misra Anupam Prakashan, 93-B/1, 20-00 1981
Sheokuti, Allahabad.
9 Letter Press Printing, Part II. Ditto Ditto 50-00 1986 10 Theory and Practice of A. G. Goel Ditto 40-00 1980 Composition.
B. D. Mendiratta Ditto 80-00 1983 11 Composing and Typography
Today.
V. S. Krishnamurthy Anupam Prakashan, 93-B/1, 40-00 1981 12 Indian Printing Industry and
Printing Technology Today.
Sheokuto, Allahabad.
C. S. Misra Universal Book Seller, Lucknow. 25-00 - - 13 Printeres Terminology. B. D. Mendiratta Ditto 115-30 1987 14 Writing and Printing Ink
Industry.
(30) ट्रेड-कुलाल विज्ञान
कक्षा-12
उद्देश्य- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल कार्यान्वयन के परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक स्तरोन्नयन हेतु व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के उद्देश्य निम्नवत् है :-
(1) बेरोजगारी एवं शिक्षित बेराजगारों की गंभीर समस्या के निदान हेतु शिक्षा में व्यावसायिक पुट देना। (2) छात्रों को स्वयं कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करना। (3) स्वरोजगार की प्रवृत्ति छात्रों में समाहित करना ताकि जीविकोपार्जन की समस्या उनके भावी जीवन की दिशा में कोई अवरोध न उत्पन्न कर सके।
(4) छात्रों में कौशलात्मक ज्ञान की जानकारी प्रदान करना। (5) छात्रों के अधिक से अधिक समय का उपयोग होने की दिशा में व्यावसायिक शिक्षा का माध्यम एक उपयुक्त एवं सर्वथा सार्थक कदम है, इस बात की जानकारी छात्रों को होना चाहिए।
(6) छात्रों का सर्वांगीण विकास की दिशा में व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य निहित है, छात्रों को इस ओर भी जानकारी प्रदान करना।
(7) विभिन्न प्रकार के यन्त्रों/उपकरणों एवं आधुनिक मशीनों में में परिचित कराना एवं कार्य करने की दिशा में बढ़ावा देना। (8) शोध प्रवृत्ति का जागरण ही व्यावसायिक पाठ्यक्रम का सफल द्योतक है।
पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के तीन प्रश्न-पत्र और भी प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
(क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक
34
प्रथम प्रश्न-पत्र 100 द्वितीय प्रश्न-पत्र 100 300 33 100 तृतीय प्रश्न-पत्र 100
33
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 बाह्य परीक्षा 200 400
200 टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 381प्रथम प्रश्न-पत्र
(स्थानीय मिट्टी)
17
17 (1) स्थानीय मिट्टी का प्रयोग एवं महत्व। (2) स्थानीय मिट्टी का परिशोधन, मिट्टी को कूटना, चलनी से छानना से सम्बन्धित जानकारी प्रदान करना। 17 (3) स्थानीय मिट्टी की स्लिप बनाना एवं स्थानीय मिट्टी की विभिन्न अवस्थाओं जैसे-रोलिंग स्टेज, प्लास्टिक स्टेज तथा लोवर लिमिट आफ फ्लुडिटी निकालने का सैद्धान्तिक ज्ञान। (4) स्थानीय मिट्टी की नीडिंग एवं वर्जिग से सम्बन्घित जानकारी प्रदान करना तथा तत्सम्बन्धी नीडिंग 17 मशीन एवं परानिल मशीन का सैद्धान्तिक ज्ञान। (5) स्थानीय मिट्टी के माडल (Model) बनाने का सैद्धान्तिक ज्ञान। 16 (6) लचीली व्यवस्था में मिट्टी का उपयोग-दबाकर खिलौना बनाने से सम्बन्धित। 16
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(चीनी मिट्टी)
1-पैटर्न बनाने की विधियां-माडलिंग इन द राउन्ड, वर्किंग इन लोरिलांक, खराद मशीन एवं जिगर जाली मशीन पर माडल खरादने का सैद्धान्तिक ज्ञान। 17 17 2-प्लास्टर आफ पेरिस से सांचे बनाने की विधियों का सैद्धान्तिक ज्ञान। 3-मास्टर गोल्ड से प्रति रूप एवं कार्यकारी सांचा बनाने का सैद्धान्तिक ज्ञान। 17 4-अध्ययन की सुगमता की दृष्टि से बर्तनों का विभाजन-यथा सटेराकोटा अर्वेन वेयर, स्टोन वेयर, 17 पोर्सलेन एवं अगीलनीय (वर्गीकरण के अन्तर्गत)। 5-चीनी मिट्टी के पात्रों के निर्माण में कच्चे मालोें का उपयोग तथा अगालनीय द्रान्क, रंग विद्युत विश्लेष्य। 16 6-बाडी मिश्रण निर्माण की जानकारी एवं विभिन्न संगठक सूत्रों का ज्ञान, बाडी मिश्रण निर्माण हेतु कच्चे माल का तौलना बलन्जर मशीन का उपयोग, बालबिल का उपयोग।
16
तृतीय प्रश्न-पत्र
एनामिल
14 एनामिल- 1-इतिहास तथा वर्गीकरण-सीना तामचीनी। 2-कच्चे सीसा यथा एनामिल तैयार करना, आगालनीय, द्रावक, अपारदर्शीये रंग, प्लावक, विद्युत विश्लेषण व एनामिल के लिये धातु। 14 3-मीना के प्रकार, तांभ्र चीनी के प्रकार, विभिन्न प्रकार के एनामिल की रचना, पाटमिल की संरचना एवं उपयोग। 14 4-धातुओं की सफाई तथा उस पर एनामिल चढ़ाना, एनामिल बनाने के लिये लोहे की चादरों को साफ करना, एनामिल चढ़ाने की विधियां। 14 5-भटि्ठयां-पड़िया भट्ठी, डेक भट्ठी, मफिल भट्ठी, सुरंग भट्ठी, आदि में एनामिल पकाने का ज्ञान। 14 14 6-एनामिल पकाना-एनामिल करना आदि का सैद्धान्तिक ज्ञान। 7-एनामिल के दोष-छाले तथा एगशेल फिश स्केल्स तथा उच्चारण निर्धारण ताम्र चिन्ह, बट्कना तथा बाल रेखायें, सिमटना आदि की जानकारी।
16
प्रायोगिक कार्य सम्बन्धी पाठ्यक्रम
(1) लुक निर्माण से सम्बन्घित संगठन सूत्रों का शोध एवं परीक्षण। (2) लुक करने की विधियाें का क्रियात्मक ज्ञान। (3) चीनी मिट्टी के पात्रों को पकाना एवं तापक्रप मापन का प्रयोगात्मक परीक्षण। (4) प्रयोगशाला में सेंगर एवं फायर ब्रेक तैयार करना। (5) चाक के निर्माण का क्रियात्मक ज्ञान। (6) बालू का विश्लेषण व विभिन्न प्रकार की नम्बर वाली चलनियों से। (7) काच्यक तैयार करना। (8) रंगीन कांच बनाना। (9) एनामिल से सम्बन्धित धातुओं की सफाई तथा उन पर एनामिल चढ़ाना। (10) एनामिल के लिये स्टेंसिल काटना एवं एनामिल पटि्टका में ब्रश की सहायता से स्टेंसिल का उपयोग करना। (11) भट्ठी में एनामिल पकाना। (12) उत्पादन सम्बन्धी गणनाओं का प्रायोगिक ज्ञान। (13) प्रयोगशाला में सेंगर एवं ईंट के टुकड़े की रन्ध्रता निकालना।
382 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4(14) प्लास्टर आफ पेरिस की सजावटी तस्वीरों का निर्माण। (15) प्रयोगशाला में सेंगर शंकु तैयार करना। (16) प्रयोगशाला में दर्पण का निर्माण एवं ऐचिंग विधि द्वारा कांच की सजावट करना। नोट :-प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। पुस्तकें :- कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप उपयुक्त पुस्तक का चयन कर लें।
(31) ट्रेड-कृत्रिम अंग अवयव तकनीक
(कक्षा- 12)
इस ट्रेड में तीन-तीन घन्टे के चार प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (क) सैद्धान्तिक-
पूर्णांक उत्तीर्णांक 75 25
75 25
300 100 प्रथम प्रश्न-पत्र द्वितीय प्रश्न-पत्र तृतीय प्रश्न-पत्र चतुर्थ प्रश्न-पत्र
75 25 75 25
(ख) प्रयोगात्मक-
400 200 आन्तरिक परीक्षा बाह्य परीक्षा
200 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 25 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
पाठ्यक्रम की रूप रेखा
प्रश्न-पत्र प्रथम-मानव शरीर एवं अस्थिशल्य (आर्थोपैडिक)
(क) मानव शारीरिकी (ख) शरीर क्रिया विज्ञान (ग) मानव रोग विज्ञान (घ) अस्थि शल्य (आर्थोपैडिक) (ङ) फिजिकल मेडिसिन एवं पुनर्वास
प्रश्न-पत्र द्वितीय-कार्यशाला (वर्कशाप)
(क) सामग्री, औजार एवं उपकरण कार्यशाला तकनीक (ख) अप्लाइड मैकेनिक्स एवं स्ट्रेग्य आफ मटेरियल (ग) कार्यशाला प्रशासन एवं प्रबन्ध
तृतीय प्रश्न-पत्र-आर्थोटिक
(क) आर्थोटिक लोवर (ख) आर्थोटिक अपर (ग) आर्थोटिक स्पाइन (घ) काइनोसियालोजी एवं बायोमैकेनिक्स
चतुर्थ प्रश्न-पत्र-प्रोस्थोटिक
(क) प्रोस्थोटिक ऊपरी (ख) प्रोस्थोटिक निचला (ग) एम्प्यूटेशन सर्जरी एवं प्रोस्थीसेस
प्रथम प्रश्न-पत्र
(मानव शरीर एवं अस्थि शल्य)
25 (1) मानव रोग विज्ञान- 1-रोग विज्ञान का परिचय, सामान्य रोग विज्ञान। 2-इन्पलेमेशन के चिन्ह एवं लक्षण (सिस्टम), इन्पलेमेशन के प्रकार, एक्यूट और क्रोनिक। 3-संक्रमण वैक्टीरिया और वाइरसेज इम्येनिटी, प्रकार वर्गीकरण, संक्रमण पर नियंत्रण, संक्रमण के प्रभाव एवं उसके उपचार व रोक-थाम, एमीप्सिस, स्टरलाईजेशन, पायोजैनिक संक्रमण, फोड़े, जोड़ व हड्डीभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 383 25
25 की टी0बी0 और प्रबन्ध इंगल इन्फेक्शन वैक्टीरियोमा इकोसिस और फाइलेरियोसिस संक्रमण, कोढ़ वाइरस का संक्रमण, पोलियोमा इलासिस प्रभाव। 4-घाव, घाव भरने के प्रकार और हड्डी से सम्बन्धित ट्यूमर्स। 5-परिसंचरण अव्यवस्था थोमवासिस इम्बेसिज्म थोमखी इनजाइटिस आपलिटरेन्स, अर्थास- सिलिटोसिस हाइपरटेंशन। 6-मैगाइन के प्रकार, कारण, चिन्ह, लक्षण और प्रबन्ध उपायचर्या (मेटाबोलिक), बेरी-बेरी, मधुमेह रोग, सूखा रोग, हावर और हाइपो पैरा थाइरोआडिज्म, आसटिओं पैरायिस। 7-जोड़ों के इम्फलेमेशन, आरथाराइटिस, वर्गीकरण और पैथोलोजी। (2) अस्थिशल्य (अर्थोपेडिक)- 1- अर्थोपेडिक का परिचय एवं सिद्धान्त। 2-कन्जानिंटल विकृतियां। 3-तन्त्रिका तंत्र के रोग। 4-पोलियों मिलाइटिस। 5-प्रोब्स्टेड्रिल और स्पेस्टिक पैरा। 6-हैबी प्लीजिया एवं पैरा पिलोजिया। 7-पायोजेनिक इन्फेक्शन, क्षय रोग, कोढ़ (संक्रमण)। 8-क्रोमिक और रोमीलायड अर्थराइटिस। 9-आसटेर और न्यूरौपैथिक आरथराइटिस। 10-सूखा रोग (त्पबामजे)। 11-हड्डी का ट्यूमर। 12-ट्राउमा ऊपरी एवं निचले अंगों का टूटना एवं उसका प्रबन्ध (मैनेजमेन्ट)। 13-स्प्पाइन का टूटना एवं डिसलोकेशन। (3) फिजिकल मैडिसन एवं रीहैवीलिएशन- 1-फिजिकल मैडिसिन एवं रीहैवीलिएशन का परिचय। 2-मांस पेशियों का चार्ट बनाना। 3-एलेक्ट्रोथिरेपी। 4-हाइड्रो-थिरेपी। 5-एम्यूट्रीज के प्रबन्ध में उपर लिखे प्रकरणों का प्रयोग। 6-न्यूरों मेसबुलर रोग, उनके प्रकार एवं प्रबन्ध। 7-जोड़ों के दर्द (आर्थराइटिस) उनके प्रकार एवं प्रबन्ध। 8-बैसाखी एवं उनका प्रयोग, चाल के विभिन्न प्रकार। 9-स्टीम्प वी0 के0/ए0के0, घुटने, कुहनियां, हाथ कलाई व टखने की वैन्डेजिम। 10-गार्टट्रेडिंग आर्थोसिस एवं प्रोथोसिस लगाये हुए मरीजों के विश्लेषण। 11-प्रयोग में आने वाले उपकरणों का उपयोग।
12
द्वितीय प्रश्न-पत्र (कार्यशाला वर्कशाप) 1-व्यवहारिक यांत्रिकी (Applied mechanics and strength of materials) तथा पदार्थों की सामथ्र्य- 12 1-सरल प्रतिबल तथा विकृति (सिम्पल स्ट्रेप्स एण्ड स्ट्रेन), सरल प्रतिबल एवं विकृति की परिभाषाएं- प्रत्यास्थता गुणांक (Modnlous of Elasticity) अनुदध्र्य (Longitudins) पाश्र्वीय विकृति प्रतिबल, विकृति वक्र, विकृति तथा भार (Stress strain-cirve formula relating no load and strains) से सम्बन्धित सूत्र। 2-ज्यामितीय लक्ष्य (Geometrical Properties)- ठोस की घूर्णन त्रिज्या (Relating Radius) तथा जड़त्व आघूर्ण (Moment of inertia) की परिभाषाएं, पटलों के केन्द्रक (Centre) तथा जड़त्व आघूर्ण की परिभाषाएं, नियमित पटलों जैसे आयत (Rectangular) त्रिभुज (Triangular) तथा वृत्त (Circle) के सूत्रों का सरल कथन, समान्तर (Paralled) तथा अभिलम्ब अक्षों (Vertical Axis) के नियम। 2-अपरूपण (Shear Movement)- स्वतन्त्र तथा बन्धन (Banding) गतियां, दण्डों (Bars) का वर्गीकरण, भारों (Weights) के प्रकार, अपरूपण प्रतिबल तथा विकृति की परिभाषाएं, अपरूपण गुणांक (Co-efficient of Shear Force), अपरूपण बल (Shear Force) तथा बंकन (Bending) का सम्बन्ध।
384 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 412
09
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07 3-सरल अंकन का सिद्धान्त (Therory of banding Movement)- अंकन प्रतिबल (Banding Stress) की परिभाषा, उदासीन अंक (Natural Axis), सहायक तन्तु प्रतिबल का आधूर्ण (Moxement of assistant fivre stress), संकेन्द्रित भर (Co-centered weight), मुक्त क्रैन्टीलीवर एवं सरल आधारित दण्डों पर सरल प्रश्न (simple problems of cantiliver and simple supported becams) 4-मरोड़ अथवा ऐंठन (Tension and Twist)- मरोड़ की परिभाषा, ऐंठन के कोण (Angle of Twist), ध्रुवीय जड़त्व आधूर्ण (Tolar moment of inertis), ठोसों एवं छड़ों में मरोड़ के संप्रेषण (Simple problems to determined Ironsmission in solids, bars only) ज्ञात करने से सम्बन्धित समस्यायें। 5-स्प्रिंग (Spring)- स्ंिप्रगों के विभिन्न प्रकार, प्रोस्थेटिक तथा आर्थोटिक्स में स्ंिप्रगों का प्रयोग तथा समस्यायें। 6-रिबेट किये गये जोड़ (Rivetted Junction)- रिबेट किये गये जोड़ों के प्रकार, जोड़ की सामर्थ (Strength of joints), होविंग का सूत्र (Howin's formula) सामान्य समस्यायें। 7-घर्षण (Friction)- घर्षण के सिद्धान्त, स्थेटिक तथा गतिज घर्षण के गुणांक (Static and dynamic co-efficient) तथा सामान्य प्रश्न। 8-आरेखीय स्थतिकी (Graphic Station)- वेक्टर (Vector) जो कि अंकन प्रणाली (Bow's Notation), समान्तर बलों हेतु रज्जू बहुभुज (Fornicular Polygen for parrallel forces)।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(आर्थोटिक)
25
25
25 (1) आर्थोटिक अपर- 1-हाथ की आन्तरिक क्रियात्मक रचना और उसकी विकृतियां, आरथोटिक द्वारा उसका प्रबन्ध (मैनेजमेन्ट)। 2-क्रियात्मक स्पिलन्ट और भुजाओं का प्रयोग करने हेतु मरीज को किस प्रकार का प्रशिक्षण देना चाहिए। 3-निम्नलिखित का मेजरमेन्ट, सामग्रियों का कम्पोनेन्ट एवं चुनाव-फैब्रिकेशन व फिटिंग। (क) हाथ की स्टेटिक स्पिलिन्ट, अंगुलियाें के स्पिलिन्ट। (ख) हाथ के फेनल स्पिलिन्ट। (ग) क्रियात्मक फैक्शनल आर्म ब्रासेज। (घ) फीडर्स। (ङ) विशिष्ट सहायक विधियां (डिवाइसेज)। (च) मिलेट्रिक और अन्य बाहरी आरथोसिस के अंग। 4-फैक्शनल हाथ की जीव परिस्थिति की स्पिलिन्ट और आर्म आरथोसिस। (2) आर्थोटिक स्पाइन- 1-ट्रैक की आन्तरिक रचना। 2-आरथोटिक विधि की शारीरिक विज्ञान के आधार। 3-लम्बर और फोरेंसिक दशा का आरथोटिक उपचार। 4-सरवाइकल दशा के आरथोटिक उपचार। 5-स्पाइनल आरथोसिस के सुझाव एवं नुस्खे। 6-स्कोलिओसिस के उपचार एवं वाह्य सहारे का प्रयोग। 7-एस0 डब्ल्यू0 प्रोसेस के प्रयोगकर्ताओं हेतु अभ्यास। 8-स्पाइनल केसेज के कम्पोनेन्ट। 9-कारसेट्म। 10-सरवाइकल उपकरण। 11-एम0 डब्ल्यू0 ब्रेसेज, बोस्टन ब्रेसेज। 12-स्याइत की जीव यांत्रिक (बायोमेकेनिकल)। 13-आरथोसिस से सम्बन्धित पूर्ण सूचना प्राप्त करने हेतु प्रकाशकों का अध्ययन। (3) काइनिसियोलाजी एवं बायोमेकेनिकल- 1-काइनिसियोलाजी और बायोमेकेनिकल की परिभाषा। 2-काइनिसियोलाजी की उत्पत्ति एवं विकास।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 3853-काइनेटिक्स एवं काइनेमेटिक्स की परिभाषा। 4-मानव शरीर का गुरूत्वाकर्षण (आकर्षण का केन्द्र)। 5-सेगमेन्ट भासस और अंगों का घनत्व। 6-पूरे शरीर के गुरूत्वाकर्षण (केन्द्र का आकर्षण)। 7-आकर्षण केन्द्र का सेगमेन्ट। 8-मानव गतियों की उत्पत्ति एवं उनके महत्व। 9-परिस्थितियों का विश्लेषण। 10-शरीर के जोड़ और अंगों की गतिविधि। 11-ओपेन एवं ब्लीज्ड पेन सिस्टम। 12-फोर बार मेकेनिज्म। 13-जोड़ों की गतिविधियों का मापन। 14-स्पाइन की मेकेनिज्म। 15-लम्बर विशनमेन्टेरी। 16-लोकोमेशन अध्ययन। 17-पश्व छोर के अंगों की जीव यांत्रिकी (बायोमेकेनिज्म)। 18-अग्रछोर के अंगों की जीव यांत्रिकी (बायोमेकेनिज्म)। 19-पल्थी माने की जीव यांत्रिकी (बायोमेकेनिज्म)।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(प्रोस्थोटिक)
40 (1) प्रोस्थेटिक निचला- 1-एम्प्यूटेशन के लेबिल का वर्गीकरण। 2-केन्जिनाइटल स्केलेट्स लिम्ब का वर्गीकरण एवं उनकी कमियां। 3-प्रोस्थेटिक क्लीनिक प्रक्रिया (प्रोसीजर)। 4-प्रोस्थेटिक नुस्खे। 5-इमिजिएट एवं अर्ली प्रोस्थेटिक प्रबन्ध। 6-जी0 के0 एवं ए0 के0 प्रोस्थेटिक कम्पोनेन्ट। 7-स्टम्प नाप का परीक्षण कास्ट टेकिंग पी0 ओ0 पी0 सुधार फेब्रिकेशन एलाइनमेन्ट एवं फिटिंग। 8-प्रोस्थेसिस के साथ लगे हुये एम्प्यूटीज का चाल विश्लेषण। 9-प्रोस्थेसिस की जांच। 10-प्रोस्थेसिस की देखभाल एवं रख-रखाव। 11-हिप डिसआरटिक्येलेशन और सेमीपालिक्टामी। 12-प्रोस्थेसिस की बायोमैकेनिकल। 13-फलुइड नियंत्रण और माप्यूलर एवं आधुनिक प्रोस्थेसिस। 14-वक्यटिंग प्रोस्थेसिस का विकास। 15-निचले अंग की प्रोस्थेसिस के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने हेतु विभिन्न प्रकाशनों का अध्ययन।
35 (2) वाह्य शारीरिक अंगों को काटकर अलग करने की शल्य चिकित्सा- 1-एम्प्यूटेशन सर्जरी का परिचय एवं संकेत। 2-एम्प्यूटेशन के सिद्धान्त, प्रकार एवं तकनीक। 3-बच्चों एवं प्रौढ़ों में एक्प्यूटेशन निचली एवं ऊपरी अवयव। 4-निचले अवयव में एम्प्यूटेशन और इसकी विशेषतायें। 5-आपरेशन के बाद स्टम्प की देखभाल, अच्छे स्टम्प को बनाना। 6-परीक्षण एवं सलाह नुस्खे। 7-स्टम्प हरमोटोलोजी। 8-सामान्य चर्म रोग और उनके प्रबन्ध स्टम्प, हाइजीन, आधुनिक एम्प्यूटेशन। 9-आधुनिक एम्प्यूटेशन। 10-निचले अवयव के एम्प्यूटेशन के लिये आपरेशन के बाद प्रोस्थेसिस तुरन्त भरना।
49 ङ386 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
(32) ट्रेड-इम्ब्राइडरी
(कक्षा- 12)
उद्देश्य- 1-विभिन्न प्रकार की यन्त्र कलाओं में प्रयोग किये जाने वाले उपकरणों, साज-सामानों एवं सहायक सामग्री को चुनने में। 2-साज-सामान के रख-रखाव एवं उपयोग से सम्बन्धित कौशल के विकास में। 3-उपलब्ध स्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को सुनिश्चित करने में। 4-हस्त कढ़ाई के लिये कल्पनात्मक सौन्दर्य के ज्ञान का विकास करने में। 5-बाजार की नवीनतम प्रवृत्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित करने में। 6-योजना के निर्माण, संचालन, निर्देश और रख-रखाव में आत्म निर्भरता। 7-नियोजन ढंग से कार्य को विस्थापन करने में। 8-बण्डल के बांधने की विभिन्न विधियों का चुनाव करना। 9-पारस्परिक उद्योगों के विकास को समझना और उसे आत्मसात करना। 10-उपलब्ध साधनों और यन्त्र कलाओं से मूल डिजाइन की रचना करना। 11-आवश्यक सूचना देने के लिये साधारण संचार साधनों की तकनीक का प्रयोग करना। रोजगार के अवसर- 1-स्वरोजगार एवं मजदूरी रोजगार-
निम्नलिखित व्यवसाय स्वरोजगार की श्रेणी में आतें हैं अर्थात् (पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद अपनी इकाइयां लगा सकते हैं), मजदूरी रोजगार अर्थात् (दूसरों के लिये रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं)- (1) कढ़ाई करने वाला। (2) कढ़ाई के लिये डिजाइन बनाने वाला। (3) अभिरुचि कक्षायें चलाना (Hobby Classes)।
2-केवल मजदूरी रोजगार (Wage Employment)&
(1) संग्रहालय सहायक (टेक्सटाइल अनुभाग या कढ़ाई अनुभाग)। (2) निर्देश (कार्यानुभव के लिये/स्कूलों में हैण्ड इम्ब्राइडरी)।
इस पाठ्यक्रम की सफलता हेतु एक शिक्षक/प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है। पाठ्यक्रम- इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 बाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल एवं डिजाइन)
8 1-रंग का प्रभाव, रोड, टिन्ट, टोन रंग की वैल्यू, गर्म एवं ठंडे रंग। 2-भारतीय डिजाइन की उत्पत्ति एवं प्रारम्भिक डिजाइन का अध्ययन। 8 3-चिकन एवं अन्य कढ़ाई में प्रयोग किये जाने वाले डिजाइनों से अवगत कराना। 8 8 4-अन्य कढ़ाई की डिजाइन एवं चिकन वर्क की भिन्नता का अध्ययन। 10 5-लोक कला व अािदवासी लोक कलाओं का परिचय एवं ज्ञान।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 38710 6-कढ़ाई के डिजाइनों की विशेषता एवं महत्व। 7-विभिन्न प्रकार के वस्त्र एवं उन पर की जाने वाली आधुनिक कढ़ाइयां। 8
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(इम्ब्राइडरी)
1-कश्मीर का कसीदा-नमदा का डिजाइन, वस्त्र रंग योजना। 2-कश्मीर का जायेदार डिजाइन, रंग योजना, वस्त्र स्टिच। 3-पैचवर्क कढ़ाई के प्रकार, तकनीकी विशेषता। 4-ज्यामितीय डिजाइन, स्टिच, रंग योजना, विषयवस्तु, वस्त्र। 5-कढ़ाई के स्टिच एवं उनका वस्त्र पर प्रयोग। 6-भारतीय लोक कला और इस पर आधारित डिजाइनों का अध्ययन। 7-चिकन द्वारा बनाये गये वस्त्रों का अध्ययन। 8-कढ़ाई करने से पहले की तैयारी एवं सावधानी। 9-कढ़ाई करने के बाद वस्त्र की धुलाई एवं देखभाल का ज्ञान।
6 8 6 8 8 6 8 4 6
तृतीय प्रश्न-पत्र
(हैण्ड इम्ब्राइडरी व चिकन वर्क)
1-चिकन कढ़ाई की प्रमुख कसीदाकारी। 8 2-चिकन कढ़ाई के लिये उपकरण का ज्ञान एवं उसकी मरम्मत तथा सावधानियां। 6 3-चिकन कढ़ाई में प्रयोग होने वाले सामग्रियों का विस्तृत अध्ययन। 6 4-चिकन कढ़ाई के कसीदाकारों की आर्थिक एवं व्यावसायिक स्थिति का ज्ञान। 6 8 5-चिकन कढ़ाई के प्रमुख तकनीक का विस्तृत अध्ययन। 8 6-तैयार वस्त्र की फिनिशिंग प्रक्रिया का अध्ययन। 10 7-तैयार वस्त्र का मूल्य निर्धारित करना। 8 8-चिकन कढ़ाई पर अन्य डिजाइनों का प्रभाव एवं परिवर्तनशीलता।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(एडवांस डिजाइन एवं इम्ब्राइडरी)
1-उत्सव पार्टी के उपयुक्त कढ़े हुये स्पेशल वस्त्रों का अध्ययन, तकनीक डिजाइन, विश्लेषण। 10 8 2-आकर्षक कढ़ाई के लिये कारीगर की विशेषतायें। 6 3-कढ़ाई के लिऐ धागों की विशेषतायें। 4-कढ़ाई का धुलाई में महत्व एवं विधि। 6 5-विभिन्न प्रकार के स्टिच एवं मिले-जुले स्टिच पर आधारित एडवांस कढ़ाई डिजाइन। 10 10 6-आधुनिक कढ़ाई के डिजाइनों का विश्लेषण एवं महत्व। 10 7-पुराने कढ़े वस्त्रों का आधुनिक फैशन पर प्रभाव।
पंचम प्रश्न-पत्र
(इम्ब्राइडरी उद्योग एवं प्रबन्ध)
1-स्वरोजगार करने के लिये व्यक्ति का आन्तरिक एवं वाह्य विकास करना। 6 6 2-मार्केटिंग मैनेजमेन्ट का विस्तृत अध्ययन। 8 3-इम्ब्राइडरी उद्योग में मार्केटिंग मैनेजमेन्ट की भूमिका। 4-इम्ब्राइडरी उद्योग में उत्पादित वस्त्र को बाजार में बेचने में आवश्यक सावधानी का अध्ययन। 8 8 5-कढ़े हुये वस्त्रों का एक्सपोर्ट करने की विधियों का अध्ययन करना। 8 6-सफल इम्ब्राइडरी उद्योग लगाने के लिये आवश्यक सुझाव। 8 7-इम्ब्राइडरी के छोटे-छोटे रोजगार की रूपरेखा तैयार करना। 8 8-प्रत्येक रोजगार का अनुमानित बजट तैयार करना।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में- 1-कढ़ाई के डिजाइनों में रंग का प्रभाव दिखाना। 2-डाट्स, लाइन एवं ज्यामितीय आकारों पर आधारित डिजाइन का निर्माण करना।
388 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43-विभिन्न प्रकार के डिजाइन का अवलोकन करना। 4-स्केच करना, फूल पत्तियां, पेड़, मकान, प्राकृतिक दृश्य, पशु-पक्षी आदि की ड्राइंग अभ्यास करना। 5-सभी ड्राइंग से कढ़ाई से डिजाइन का निर्माण करना। 6-लोक कला पर आधारित डिजाइनों का निर्माण करना। 7-डिजाइनों के ऊपर एलबम का निर्माण करना। 8-विभिन्न प्रकार के स्टिच एवं टांकों का अभ्यास करना।
द्वितीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-(1) शीशेदार फुलकारी के लिये डिजाइन का निर्माण। (2) बनी हुई डिजाइन का कपड़े का प्रयोग। 2-कैनवस कढ़ाई से छोटे कैनवस का निर्माण। 3-नमदा की डिजाइन बनाकर वस्त्र का प्रयोग। 4-सामान्य पैच-वर्क कढ़ाई। 5-मैटी पर डिजाइन व कढ़ाई का कार्य। 6-विभिन्न प्रकार के स्टिच का नमूना तैयार करना। 7-एफ्लीक वर्क, कढ़ाई का प्रयोग। 8-कढ़ाई द्वारा बाल वेसिंग का निर्माण करना। 9-संयोजित कढ़ाई द्वारा आकर्षक वस्त्रों का निर्माण करना।
तृतीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-उल्टी बखिया शेडो वर्क, जाली के द्वारा कुर्ते या नाइटी और चिकन कढ़ाई करना। 2-साड़ी के लिये पारम्परिक चिकन की कढ़ाई करना, पेजली या अन्य डिजाइन का प्रयोग। 3-सीधी बखिया द्वारा कुर्ते की डिजाइनदार चिकन कढ़ाई। 4-टेबुल मैट्स पर चिकन कढ़ाई करना। 5-मुर्री वर्क से लेडीज कुर्ते की डिजाइन करना। 6-साड़ी पर कामदानी चिकन का प्रयोग। 7-लेडीज सूट पर कामदानी चिकन का प्रयोग।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-एप्लीक वर्क की कढ़ाई का डिजाइन निर्माण करना (पेपर कोलाज वर्क)। 2-शादी-विवाह के लिये कढ़ाई की डिजाइन का निर्माण कर प्रस्तुत करना। 3-एडवांस डिजाइनों का संग्रह करना एवं उस पर आधारित डिजाइनों का निर्माण करना। 4-माडल पर कढ़ाई के वस्त्रों को डिस्प्ले करना। 5-कढ़े हुये कपड़ों की प्रदर्शनी करना। 6-एडवांस डिजाइन को पेपर कोलाज द्वारा डिस्प्ले करना। 7-आधुनिक कढ़ाई के फैशन डिजाइनों का मैगजीन कटिंग कलेक्शन कर एलबम तैयार करना। 8-पुराने डिजाइन और आधुनिक कढ़ाई डिजाइन का अन्तर डिजाइनों द्वारा प्रस्तुत करें।
पंचम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-पंजाबी कटे हुये वस्त्रों की पोर्ट फोलियो तैयार करना। 2-कश्मीर के प्रमुख डिजाइनों का पोर्ट फोलियो तैयार करना। 3-कश्मीरी कसीदा का पोर्ट फोलियो तैयार करना। 4-भारतीय कढ़े हुये कारपेट की डिजाइन का पोर्ट फोलियो तैयार करना। 5-कढ़े हुये बाल हैंगिंग की डिजाइन की फाइल तैयार करना। 6-विभिन्न प्रकार के कसीदा डिजाइनकारों से बात करके डिजाइनिंग रिपोर्ट तैयार करना। 7-कसीदाकारों से मिलकर विशेष तकनीक का अध्ययन करना एवं रिपोर्ट तैयार करना। 8-(क) उद्योग में ले जाकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना। (ख) बनाई गयी वस्तुओं की बिक्री प्रदर्शन आयोजित करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 389प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
इम्ब्राइडरी विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा का विभाजन निम्नवत् होगा- आन्तरिक मूल्यांकन 200 अंक वाह्य परीक्षक मूल्यांकन 200 अंक 400 अंक
बाह्य परीक्षा की रूपरेखा-
नोट-समय 10 घंटा दो दिनों में (लघु प्रयोग दो दिये जांय, प्रत्येक का समय 2+2=4 घण्टे। दीर्घ प्रयोग एक दिया जाय, प्रयोग का समय 6 घण्टे)। लघु प्रयोग-
प्रयोग नं0 1 20 अंक 2 घण्टे प्रयोग नं0 2 20 अंक 2 घण्टे मौखिक 10 अंक - योग .. 50 अंक
दीर्घ प्रयोग-
प्रयोग नं0 1 130 अंक 6 घण्टे मौखिक 20 अंक - योग .. 150 अंक कुल योग .. 200 अंक प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
दीर्घ प्रयोग-
1-कढ़ाई के लिये रंगीन डिजाइन निर्माण करना कागज एवं कपड़े पर। 2-डाट्स, लाइन एवं ज्यामितीय आकारों पर आधारित डिजाइन का निर्माण करना एवं कपड़े का प्रयोग। 3-लोक कला पर आधारित डिजाइन की कढ़ाई करना। 4-पारम्परिक कढ़ाई परिधानों पर करना। 5-जरी की कढ़ाई के साथ गोटे की डिजाइन बनाना। 6-सलमा, सितारा, सीप, मोती की कढ़ाई करना। 7-मुकेश की कढ़ाई करना। 8-कैनवस कढ़ाई से छोटे कैनवस बनाना। 9-संयोजित कढ़ाई करना। 10-उल्टी बखिया, गैण्डो वर्क जाली के द्वारा कुर्ता या अन्य वस्त्र पर कढ़ाई करना। 11-दुपट्टा पर पारम्परिक चिकन की कढ़ाई करना। 12-ब्लाउज पर शीशे की सजावटी कढ़ाई करना। 13-एप्लीक वर्क की कढ़ाई दुपट्टा या मेजपोश पर करना।
लघु प्रयोग-
1-कढ़े हुये वस्त्रों की कढ़ाई एवं टांके की पहचान तथा टांका बनाना। 2-कलर स्कीम तैयार करना, कागज और कपड़े पर। 3-गोटा लगाकर वस्त्र पर डिजाइन तैयार करना। 4-चिकन की कढ़ाई के लिये वस्त्र को तैयार करना। 5-चिकन की कढ़ाई के लिये मुर्री, शैडो वर्क की डिजाइन तैयार करना। 6-जरीदार चिकन का नमूना बनाना (छोटा)। 7-कामदार चिकन का छोटा नमूना बनाना। 8-फैन्सी कढ़ाई के डिजाइन का निर्माण कागज पर करना। 9-फैन्सी सलवार सूट की आकर्षक कढ़ाई की डिजाइन का नमूना तैयार करना एवं कढ़ाई के टांकों और रंग को निश्चित करना।
10-माडल पर कढ़ाई के वस्त्र को डिस्प्ले करना। 11-तैयार पोर्ट फोलियो को दिखलाना।
नोट-परीक्षक पाठ्यक्रम से अन्य दीर्घ एवं लघु प्रयोग परीक्षार्थियों को दे सकते हैं।
390 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पुस्तकों की सूची-
(1) Indian Embroidary--Phylls Ackerman. (2) Phulkari--T. N. Mukarjee. (3) Indian Embroidary--Victoria Albert Museum. (4) Himanchal Embroidary--Subhashni Arya. (5) Phulkari from Bhatinda--Baljit Singh Gill.
(33) ट्रेड-हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग एवं वेजिटेबुल डाइंग
(कक्षा- 12)
उद्देश्य-
1-विभिन्न प्रकार के तन्तुओं, धागों एवं वस्त्रों की पहचान एवं उनका चुनाव करने के योग्य बनाना। 2-रंगाई और हस्त ब्लाक छपाई की विभिन्न तकनीकों के लिये विभिन्न प्रकार के रंजकों, रंगों, धागों एवं कपड़ों की पहचान कराना तथा उनका चुनाव करने में सहायता प्रदान करना।
3-विभिन्न प्रकार की यंत्र कलाओं में प्रयोग किये जाने वाले साज-सज्जा उपकरणों तथा सहायक सामग्री का चुनाव करने में दक्ष बनाना।
4-साज सामान की रख-रखाव एवं उनके उपयोग के लिये दक्षता का विकास करना। 5-उपलब्ध उपकरणों के स्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को सुनिश्चित करना। 6-रंगाई, छपाई एवं डिजाइन के लिये कल्पनात्मक सौन्दर्य का विकास करना। 7-बाजार की प्रचलित नवीनतम फैशन प्रवृत्ति का परिचय करना। 8-योजना को स्थापित करने में उसके निर्देशन एवं रख-रखाव में आत्म-निर्भरता प्राप्त करना। 9-नियोजित ढंग के कार्य का विस्थापन करना। 10-कार्य को पूरा करने और बण्डल बांधने की विधियों से अवगत कराना। 11-उद्योग धन्धों के विकास को समझना और उसे बुद्धिमत्ता से ग्रहण करने की क्षमता का विकास करना। 12-उपलब्ध साधनों और यंत्र कलाओं के मूल डिजाइन का निर्माण करने की कला का विकास करना। 13-सम्बन्धित व्यवसाय में कार्य करने वाले अन्य लोगों के साथ सहयोग करने की प्रवृत्ति का विकास करना। 14-सूचना देने के लिये प्रभावशाली एवं साधारण संचार साधनों की तकनीक से अवगत कराना।
स्वरोजगार के अवसर-
1-स्वरोजगार के अन्तर्गत अपनी इकाई स्वयं लगाकर व्यवसाय कर सकता है। 2-मजदूरी रोजगार जिसमें लोग दूसरे के लिये कार्य करते हैं, उसके लिये वह पारिश्रमिक पाते हैं। 3-रंगसाज बन सकते हैं। 4-डिजाइनर-(1) रंगाई का डिजाइनर। (2) ब्लाक छपाई का डिजाइनर। 5-हाबी कोर्स (अभिरुचि कक्षायें) केन्द्र खोला जा सकता है। 6-संग्रहालय सहायक (टेक्सटाइल अनुभाग) बन सकता है। 7-निर्देशक (कार्यानुभव हेतु स्कूल टेक्सटाइल क्राफ्ट हेतु)। 8-समापन तकनीशियन बन सकते हैं।
पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 वाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 391प्रथम प्रश्न-पत्र
(टेक्सटाइल विज्ञान एवं डिजाइन)
इकाई-1 1-प्रारम्भिक डिजाइन, लाइन डाट्स, धारियां एवं प्रयोग।
20 2-आलेखन के मूल तत्व- (क) रंग, (ख) आकार, (ग) हारमनी, (घ) वैलेन्स, (ङ) डिजाइन के मूल तत्वों की भूमिका।
3-डिजाइन में उपकरणों का अध्ययन एवं प्रयोग प्रक्रिया का वर्णन। इकाई-2 1-डिजाइन प्रयोग सामग्री की सूची एवं उसका प्रयोग तथा सावधानियां। 10 2-प्रागैतिहासिक, मध्यकालीन, आधुनिक कशीदाकरी, कालीन फुलकारी वाली डिजाइनों का अध्ययन।
10 इकाई-3 1-लोक कला और लोक कला पर आधारित वस्त्र डिजाइन का अध्ययन। इकाई-4 1-मध्यकालीन वस्त्र डिजाइन का अध्ययन।
20 2-आधुनिक कालीन वस्त्र डिजाइन का अध्ययन एवं इससे निर्मित कसीदाकारी डिजाइन।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(ड्राइंग एवं कलर स्कीम)
इकाई-1 1-डाई तैयार करने में प्रयोग होने वाले उपकरणों का अध्ययन।
20 2-डाई तैयार करने में उपयोगी सामग्री एवं उसे प्रयोग करने की तकनीक।
इकाई-2 1-पिं्रटिंग में प्रयोग किये जाने वाले रंग को पक्का करने की तकनीक एवं स्थायित्व सम्बन्धी विशेष जानकारी। 20 2-प्रिंटिंग के बाद कपड़े की फिनिशिंग करना।
इकाई-3 1-डाई में प्रयोग होने वाले केमिकल का प्रयोग एवं प्रभाव, गोंद, सकेफिक्स, बाउम्डर एसिड, यूरिया इत्यादि। 10 इकाई-4 1-वनस्पति रंगों से रंगाई एवं छपाई।
10
तृतीय प्रश्न-पत्र
(एडवांस ब्लाक डिजाइनिंग)
इकाई-1 1-अधिक रंगों वाले ब्ब्लाक छपाई की विशेषता और उसका मार्केट वैल्यू। 20 2-चंदेरी फैन्सी साड़ियों पर की गयी ब्लाक डिजाइनों का अध्ययन एवं विशेषता। शिफान तथा जार्जेट साड़ी और दुपट्टों पर बनी हुयी चुनरी पर आधारित ब्लाक डिजाइन-रंग योजना तकनीक।
इकाई-2 1-रेशमी सलवार कुर्ते पर की गयी ब्लाक प्रिंटिंग डिजाइनों की विशेषता। 16 सिल्क साड़ी की आधुनिक ब्लाक डिजाइनों का विश्लेषण, अन्य तकनीक का प्रभाव एवं महत्व।
इकाई-3 1-ब्लाक प्रिंटिंग में ब्लाक की डिजाइन के अनुसार तैयार करना एवं ब्लाक की छपाई के लिये तैयार करना। 14 इकाई-4 1-डिजाइन में पशु-पक्षी का प्रयोग एवं ब्लाक प्रिंटिंग में इस प्रकार की डिजाइनों का महत्व। 10 मानव आकृति पर आधारित ब्लाक डिजाइन का प्रयोग एवं महत्व।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग)
10 इकाई-1 1-ब्लाक बनाने में उपयोगी उपकरणों का ज्ञान। इकाई-2 1-छपाई करने से पहले कपड़े की छपाई के लिये तैयार करना।
20 2-छपाई के बाद ब्लाक का रख-रखाव व सफाई।
इकाई-3 1-छपाई मेज की सावधानी एवं छपाई मेज की विशेषतायें।
20 2-ब्लाक प्रिंटिंग में रंग योजना के नियमों का विस्तृत अध्ययन।
इकाई-4 1-ब्लाक प्रिंटिंग डिजाइन में रंग योजना की भूमिका।
10392 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्न-पत्र
(ब्लाक प्रिंटिंग उद्योग एवं प्रबन्ध)
इकाई-1 1-विद्यार्थी को रोजगार करने हेतु आन्तरिक मनोबल एवं वाह्य विकास करना। 20 2-उत्पादन एवं उत्पादन की विशेषता का ज्ञान।
10
10 इकाई-2 1-प्रबन्ध की परिभाषा एवं मार्केटिंग मैनेजमेण्ट का परिचय। इकाई-3 1-विपणन का अध्ययन, मार्केट का व्यावहारिक अनुभव। इकाई-4 1-उद्योग प्रारम्भ करने हेतु ऋण प्राप्त करने के नियमों का अध्ययन करना। 05 05 2-उत्पादित वस्तु के एक्सपोर्ट विक्रय की नियमावली का अध्ययन। इकाई-5 1-डिस्प्ले करने के लिये आवश्यक बातों का अध्ययन। 2-डिस्प्ले करने हेतु आवश्यक उपकरणों की सूची एवं इनका प्रयोग।
05 05
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
प्रथम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में- 1-प्रारम्भिक डिजाइन का निर्माण एवं इनका वस्त्र डिजाइन में प्रयोग।
2-(क) इन्टेन्सिटी रंग का प्रयोग एवं चार्ट।
(ख) डिजाइन में इन्टेन्सिटी रंग का प्रयोग। 3-डिजाइन में अनेक माध्यमों का प्रयोग-क्रयान आयल रंग, निब वर्क स्याही आदि।
4-टेक्चर निर्माण, पेपर, वेबंस पेपर तथा पेपर पर बनी डिजाइनों को लकड़ी के ब्लाक पर उतारना। 5-ब्लाक से इन डिजाइनों के सैम्पुल छापना या कागज पर बनाकर दिखाना। 6-बार्डर और खुली चेक की रिपोर्ट करना। 7-आल ओवर डिजाइन को रिपोर्ट करना। 8-धारियों पर आधारित डिजाइन का निर्माण एवं रिपीट।
द्वितीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-कई तरह के कपड़ों की ब्लीचिंग करना। 2-चादर के लिये ब्लाक डिजाइनों/डिजाइन में दो रंग का प्रयोग। 3-रजाई के खोल के लिये ब्लाक डिजाइन का निर्माण। 4-गोटा की साड़ी के लिये ब्लाक डिजाइन को तैयार करना। 5-छपे कपड़ों को हैण्ड फिनिश करके दिखाना। 6-इनको बनाने की प्रयोगात्मक विधि। 7-इन रंगों से सूती कपड़ा रंगकर तथा छापकर सैम्पुल निकालना।
तृतीय प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-वायल या आरगंडी वस्त्र के लिये आकर्षक और आधुनिक डिजाइन का निर्माण कार्य। वायल जाली वाले वस्त्र पर छापने योग्य डिजाइन का निर्माण।
2-5 या 6 रंग योजना वाले सुन्दर ब्लाक डिजाइन का निर्माण। 3-चंदेरी साड़ी के लिये सुन्दर डिजाइन का निर्माण पूरे सेट के साथ करना, आल ओवर आंचल, बार्डर चुनरी डिजाइन पर आधारित शिफान या जार्जेट साड़ी के लिये ब्लाक डिजाइन का निर्माण कागज पर करना। 4-रेशम वस्त्र के लिये आल ओवर डिजाइन का निर्माण कागज पर करना। रेशमी साड़ी के लिये बार्डर आल ओवर आंचल का ब्लाक डिजाइन का निर्माण कागज पर करना।
5-पशु और पक्षी पर आधारित वाल हैंगिंग के लिये ब्लाक डिजाइन का निर्माण कार्य। मानव आकृति पर आधारित सुन्दर डिजाइन का निर्माण (कागज पर प्रयोग)।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-आसान डिजाइनों का ब्लाक तैयार करना। 2-सिल्क का दुपट्टा या साड़ी छापना। 3-प्रयोगात्मक रूप से कार्य करना। 4-पारस्परिक ब्लाक छपाई पर आधारित बेड कवर की छपाई करना। 5-आल ओवर डिजाइन के ब्लाक द्वारा टैपेस्ट्री हेतु वस्त्र की छपाई। 6-आकर्षक फैशन के अनुसार ब्लाक छपाई द्वारा साड़ी तैयार करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 393पंचम प्रश्न-पत्र के सन्दर्भ में-
1-ड्राइंग उद्योग की छोटी रूपरेखा तैयार कर प्रयोग करना। 2-मार्केट में तैयार माल की सप्लाई करना और लगाये गये मूल्यों से लाभ की सूची तैयार करना। 3-बनाये वस्त्रों का मूल्य बाजार भाव से निर्धारित करना। 4-बनाये गये रंगों का मूल्य निर्धारित करना। 5-तैयार वस्तुओं को डिस्प्ले करना। 6-डिस्प्ले करने के लिये 8-12 वर्ष का माडल तैयार करना। 7-डिस्प्ले हेतु 13 से 25 वर्ष का माडल तैयार करना।
प्रयोगात्मक परीक्षा की रूपरेखा
हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा का विभाजन निम्नवत् होगा- आन्तरिक मूल्यांकन 200 अंक वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन 200 अंक योग .. 400 अंक
वाह्य परीक्षा की रूपरेखा-
नोट-समय 10 घंटा (दो दिनों में) (क) लघु प्रयोग दो दिये जायें, प्रत्येक का समय 2+2=4 घण्टे। (ख) दीर्घ प्रयोग दो दिये जायें, प्रत्येक का समय 3+3=6 घण्टे।
लघु प्रयोग- समय प्रयोग नं0 1 20 अंक 2 घण्टे प्रयोग नं0 2 20 अंक 2 घण्टे मौखिक 10 अंक - योग .. 50 अंक
दीर्घ प्रयोग- समय प्रयोग नं0 1 65 अंक 3 घण्टे प्रयोग नं0 2 65 अंक 3 घण्टे मौखिक 20 अंक - योग .. 150 अंक सम्पूर्ण योग .. 200 अंक प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
(अ) दीर्घ प्रयोग-
1-डिजाइन में पांच या छः रंगों का प्रयोग। 2-फैन्सी साड़ी के लिये ब्लाक डिजाइन का निर्माण करना। 3-फैन्सी प्रान्तीय डिजाइनों का कागज पर निर्माण करना एवं कपड़े पर छापना। 4-मोटे कपड़े की डिजाइन का कागज पर निर्माण एवं कपड़े पर छपाई करना। 5-सिल्क के कपड़े के लिये कागज पर डिजाइन निर्माण करना एवं कपड़े पर छापना। 6-अत्यन्त आधुनिक नये डिजाइनों का कागज पर निर्माण करना एवं फैन्सी वस्त्रों पर छपाई करना।
(ब) लघु प्रयोग-
1-विभिन्न प्रकार के रंग संयोजन करना। 2-सिल्क की छपाई के लिये रंग को तैयार करना। 3-इंडिगो सेल, डिस्पर सील रंग तैयार करना। 4-ब्रेन्थाल रंग तैयार करना। 5-एसिड तथा एसिड मारडेन्ट डाई तैयार करना।
नोट-परीक्षक पाठ्यक्रम से अन्य दीर्घ एवं लघु प्रयोग परीक्षार्थियों को दे सकते हैं।
50 ङ394 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पुस्तकें-
1. Chemical I Processing of Cotton and
Polyester Cotton Blends
ATIRA ATIRA
2. Chemical Technology of Fibrous
Materials
J. R. MODI Research Associate and A. R. GARDE, Assistant Director F. SADOV M. RORCHAGIN A. MATETSKY
Rs. 20.00 3- lwrh oL= NikbZ ys[kd&Hkwnso 'kekZ 4. Principles of Cotton Printing By--D. G. KALE
Rs. 25.00 5. Technology of Textile Processing vol. IV,
Technology of Printing
Pub.--Mahajan Bros. Super Market Ahmedabad. By--Dr. V. A. SHENAI Pub.--Mahajan Bros. Super Market Ahmedabad.
Rs. 15.00
(34) ट्रेड-मेटल क्राफ्ट
(कक्षा- 12)
उद्देश्य-
1-दैनिक जीवन में धातु शिल्प के महत्व एवं उपयोगिता से छात्रों को परिचित कराना। 2-धातु चादर के कार्य एवं अलौह धातुओं के ढलाई के कार्यों में दक्षता प्राप्त करना। 3-छात्रों के मस्तिष्क में कलात्मक धातु शिल्प के द्वारा सौन्दर्यानुभूति को विकसित करना। 4-भारतीय संस्कृति एवं परम्परा में कलात्मक धातु शिल्प के महत्व से परिचित कराना। 5-छात्रों की सृजन शक्ति का विकास करना। 6-छात्रों में श्रम के प्रति निष्ठा एवं आदर की भावना उत्पन्न करना।
स्वरोजगार के अवसर-
1-स्व-रोजगार स्थापित करने के पूर्व किसी धातु शिल्प के उद्योग में एप्रेन्टिसशिप का जाब कर धनोपार्जन करना तथा वहां पर उद्योग के वातावरण में रहकर सम्बन्धित ज्ञान एवं अनुभव प्राप्त करना।
2-धातु चादर से कलात्मक वस्तुओं की निर्माणशाला स्थापित कर सकता है। 3-अलौह धातुओं की कलात्मक ढलाई द्वारा वस्तुओं के निर्माण हेतु कुटीर उद्योग स्थापित कर सकता है। 4-इस शिल्प से सम्बनिधत वस्तुओं का बिक्रय केन्द्र खोल सकता है तथा सेल्समैन का कार्य कर सकता है।
पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
आन्तरिक परीक्षा 200 400 200 वाह्य परीक्षा 200
टीप-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र (धातुओं का सामान्य ज्ञान) 1-मिश्र धातु की परिभाषा, मिश्र धातु बनाने के उद्देश्य और उसके गुण तथा उपयोग, विभिन्न प्रकार की पीतल, उनके गुण उपयोग।
12 12 2-विभिन्न प्रकार की धातु चादरों का ज्ञान। 3-अल्यूमीनियम, तांबा व पीतल के व्यावहारिक कार्य हेतु विभिन्न रूप-तार, चादर, पटरी, ट्यूब, गोल व चौकोर पाइन, ऐंगिल आदि।
12भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 395 4-धातु की लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन, परिमिति की गणना, आपेक्षित घनत्व की सहायता से मात्रा ज्ञात कर मूल्य निकालना।
12 5-भारत में कलात्मक धातु कला का महत्व एवं कलात्मक धातु कला के प्रमुख कार्य स्थल, मुरादाबाद का विशेष सन्दर्भ और उनके निर्यात की सम्भावनायें।
12
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(धातु शिल्प के सामान्य यंत्र व उपकरण एवं प्रक्रियाएं)
भाग-अ
10 1-स्क्रेपिंग। 10 2-पैचिंग व ड्रिलिंग। 3-शेप मेकिंग-हाइलोइंग, रेजिंग, क्रीजिंग व शिकिंग। 10 4-ज्वाइंटिंग-रिवेटिंग, सोल्डरिंग, ब्रेजिंग, वेल्डिंग, नट-बोल्ट या सीम जोड़। 10 5-तापीय क्रियाएं-एनीयलिंग, टैम्परिंग, नारमलाइजिंग व केसहाडिनिंग का ज्ञान। 10 10 6-इलेक्ट्रोप्लेटिंग।
तृतीय प्रश्न-पत्र (डिजाइनिंग एवं साजवट का कार्य) भाग-अ 1-अलंकरण की विधियां-स्क्रेपिंग, इंग्रेविंग, इनेमलिंग, एचिंग, एम्बालिंग, वुलीवर्क, मीनाकारी, लकरिंग रिपाउच वर्क, टेम्पर कलर की विधियों का ज्ञान कराना।
30 उपर्युक्त क्रियाओं में प्रयुक्त उपकरणों की जानकारी व सही प्रयोग विधि। 2-धातु वस्तु पर पॉलिशिंग का कार्य व प्रयुक्त सामग्री तथा क्रियाविधि की जानाकरी-वफ, एमरो से फलगविपालिंग कम्पाउण्ड।
30 विशेष-चतुर्थ एवं पंचम प्रश्न-पत्र के लिये निम्नलिखित ग्रुप (अ) अथवा ग्रुप (ब) का चयन करना होगा।
ग्रुप (अ) चतुर्थ प्रश्न-पत्र (अलौह धातुओं का ढलाई कार्य) 1-अलौह धातुओं की ढलाई में प्रयुक्त उपकरणों की सही प्रयोग विधि का ज्ञान धरिया (क्रसिबुल), विभिन्न प्रकार की सड़सी, हथौड़ा, पैथर या पोडली, सब्बल, धौंकनी (ब्लोवर), हाथ का ब्लोवर, बिजली का ब्लोवर।
12 12 2-ढलाई कार्य में प्रयुक्त विभिन्न प्रकार की बालू का ज्ञान। 3-बालू मिक्स्चर तैयार करने की विधि। बालू मिक्स्चर तैयार करने की वस्तुओं का ज्ञान-जैसे शीरा, बिरोजा तेल आदि, फेलिंग सैण्ड, पाटिंग पाउडर।
4-माल गलाने की विधियां-धरिया द्वारा माल गलाने की विधि। 5-गले माल की सफाई का ज्ञान-फ्लेक्स का कार्य एवं प्रयोग।
12 12 12 प्रोजेक्ट वर्क-
1-ढलाई कार्य के इतिहास के ऊपर चित्र सहित एक रिपोर्ट लगभग आठ सफों की लिखें। 2-ढलाई के विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में आठ से दस सफों का चित्र सहित वर्णन कीजिये।
ग्रुप (अ) पंचम प्रश्न-पत्र (अलौह धातुओं का ढलाई कार्य) भाग-दो 1-पीतल के अन्दर अशुद्धियों का प्रभाव, ढली हुई वस्तुओं में पायी जाने वाली विभिन्न प्रकार की खराबियों व उनको दूर करने की विधियां। 10 2-ढली हुई वस्तुओं की चिपिंग का ज्ञान 10 3-ढली हुई वस्तुओं पर रासायनिक फिनिशिंग का ज्ञान। 10 4-ढली हुई वस्तुओं का मूल्य निर्धारण। 10 5-ढली हुई अलौह धातु को कलात्मक वस्तुओं के प्रमुख कार्य स्थल की जानकारी। 10 6-लास्ट वैक्स प्रोसेस, आइसनोग्राफी एवं ढोकरा क्राफ्ट। 10 प्रोजेक्ट वर्क-
1-कम से कम दो अलौह धातु की ढलाई से पांच-पांच माडल का निर्माण। 2-लास्ट वैक्स प्रोसेस/आइसनोग्राफी/ढोकरा क्राफ्ट के द्वारा एक वस्तु का निर्माण।
396 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 43-ढलाई, लास्ट वैक्स प्रोसेस, आइसनोग्राफी, ढोकरा क्राफ्ट में से किसी एक से सम्बन्धित क्षेत्र का ज्ञान करना और उस पर सफों की रिपोर्ट तैयार करना। ग्रुप (ब) चतुर्थ प्रश्न-पत्र नक्कासी कार्य व रंग भराई का कार्य भाग-एक
12 1-नक्कासी के उपयोग एवं लाभ। 12 2-नक्कासी के लिये विभिन्न नमूनों के निर्माण। 3-नक्कासी की फिनिशिंग। 12 4-निर्मित धातु वस्तुओं का मूल्य निकालना तथा लागत बचत का ब्यौरा बनाना। 12 12 5-निर्मित धातु वस्तुओं के विक्रय केन्द्रों की जानकारी।
प्रोजेक्ट वर्क-
1-बच्चे दो साइज के कम से कम 5 गमलों तथा 5 प्लेटों को नक्कासी की विधि द्वारा तैयार करेंगे। 2-नक्कासी से सम्बन्धित किन्हीं दो स्थलों के बारे में 6 से 7 सफों की रिपोर्ट तैयार करना।
ग्रुप (ब)
पंचम प्रश्न-पत्र
(नक्कासी एवं रंग भराई का कार्य)
भाग-दो
10 10 10 10 10 10 1-स्प्रे पेन्ट की जानकारी। 2-फिनिशिंग (छपाई) करने की विधि। 3-तैयार वस्तुओं के रख-रखाव व पैकिंग का ज्ञान। 4-निर्मित वस्तुओं का मूल्य निकालना। 5-निर्मित धातु की वस्तुओं के बिक्रय केन्द्रों की जानकारी। 6-फैन्सी आइटम का ज्ञान तथा उनके सजावट का तरीका। प्रोजेक्ट वर्क-
1-बच्चे दो साइज के कम से कम पांच गमलों व पांच प्लेटों को इनमिलिंग द्वारा तैयार करेंगे। 2-इनमिलिंग से सम्बन्धित किन्हीं दो स्थलों के बारे में छः-सात सफों की रिपोर्ट तैयार करना।
प्रयोगात्मक कार्य का पाठ्यक्रम प्रयोगात्मक परीक्षा दो भागों में होगी। भाग (क) का प्रयोगात्मक कार्य धातु शिल्प के सभी छात्रों के लिये भाग (ख) का प्रयोगात्मक कार्य विशिष्ट ट्रेड से सम्बन्धित होगा।
विशिष्ट ट्रेड-अलौह धातुओं का ढलाई कार्य अथवा नक्कासी का कार्य व रंग भराई का कार्य।
भाग (क) का पाठ्यक्रम-
भाग (ख) (I) का पाठ्यक्रम-
(I) अलौह धातुओं का ढलाई कार्य-
1-अलौह धातुओं की ढलाई कार्य में प्रयुक्त यंत्रों/उपकरणों के सही नाम जानना और पहचानना। 2-बालू मिक्चर तैयार करना। 3-फेसिंग सैण्ड तैयार करना। 4-मोल्डिंग वैक्स का सही प्रयोग करना। 5-कोर सैण्ड तैयार करना। 6-कोर द्वारा मोल्डिंग करना। 7-भट्ठी में माल गलाना। 8-माल गलते समय धातु की गन्दगी साफ करना। 9-ढली हुई वस्तु की चिपिंग करना। 10-इन्ग्रेन्ड पैटर्न की महीन बालू द्वारा ढलाई करना। 11-ढली हुई वस्तु की फिनिशिंग करना। नोट-1-प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा पूरे सत्र में कम से कम दो अलौह धातु से पांच मॉडलों/वस्तुओं का पूर्ण रूप से निर्माण किया जाना चाहिये तथा इसे वाह्य परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिये।
2-प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा पूरे सत्र में किये गये अन्य प्रयोगात्मक कार्य/निर्मित वस्तुओं का विस्तृत लेखा/रिपोर्ट विषय अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित कराकर प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष रखा जाय।
3-विषय अध्यापक एवं प्रधानाचार्य द्वारा यह प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये कि मॉडल/वस्तु का निर्माण अमुक छात्र द्वारा ही किया गया है।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 397भाग (ख) (II) का पाठ्यक्रम-
1-स्प्रे पेंटिंग करना। 2-सफाई करना। 3-निर्मित वस्तुओं का मूल्य निकालना। 4-निर्मित वस्तुओं की पैकिंग करना। नोट-1-पूर्ण सत्र में प्रत्येक छात्र द्वारा दो साइज के कम से कम 5 गमले तथा 5 प्लेटें जो नक्कासी व रंग भराई की विधि से तैयार की गयी हो, वाह्य परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया जाये।
2-प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा पूरे सत्र में किये गये प्रयोगात्मक कार्य/निर्मित वस्तुओं का विस्तृत लेखा/रिपोर्ट विषय अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित कराकर प्रयोगात्मक परीक्षक के समक्ष रखा जाये।
3-विषय अध्यापक एवं प्रधानाचार्य द्वारा यह प्रमाण-पत्र दिया जाना चाहिये कि मॉडल/वस्तु का निर्माण अमुक छात्र द्वारा ही किया गया है। प्रयोगात्मक परीक्षा का अंक विभाजन-
अंक आन्तरिक मूल्यांकन . . 200 वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन . . 200 योग .. 400 वाह्य परीक्षा की रूपरेखा समय-10 घण्टा दो दिनों में मूल्यांकन-
(1) लघु प्रयोग-
अंक
(अ) प्रयोगात्मक कार्य भाग (क) की परीक्षा का मूल्यांकन 40 (ब) मौखिक प्रश्न 10 योग .. 50
(2) दीर्घ प्रयोग-
अंक प्रयोगात्मक कार्य भाग (ख) की परीक्षा का मूल्यांकन .150 जिसमें मौखिक प्रश्न सम्मिलित है 50 योग .. 200
प्रयोगात्मक परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है।
पुस्तकें-
कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं है। संस्था के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से उपयुक्त पुस्तक का चयन करा लें।
(35) ट्रेड-कम्प्यूटर तकनीक एवं मेन्टेनेन्स
(कक्षा- 12)
उद्देश्य-
आज के विज्ञान जगत में कम्प्यूटर का एक ऐसा स्थान है जो अद्वितीय है। चाहे कारखाना हो, शोध संस्थान हो, राजकीय अथवा निजी कार्य स्थान हो, कम्प्यूटर ने अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया है। बैंकों में हिसाब-किताब, रेल आरक्षण-कार्य, परीक्षा कार्य आदि आज सामान्य बात हो गयी हैं अतः यह आवश्यक है कि हर शिक्षित नागरिक को कम्प्यूटर का ज्ञान हो। इस ट्रेड का मुख्य उद्देश्य कम्प्यूटर के बारे में जानकारी देना तथा कम्प्यूटर को बनाने व सुधारने के लिये अधिक संख्या में मानव संसाधन उपलब्ध कराना है। स्वरोजगार के अवसर-
1-कम्प्यूटर मैकेनिक के रूप में 2-कम्प्यूटर आपरेटर के रूप में 3-कम्प्यूटर टेस्टर्स के रूप में 4-D.T.P. आपरेटर्स के रूप में 5-प्रिंटिंग मैकेनिक के रूप में 6-कम्प्यूटर सुधारक के रूप में 7-डाटा एन्ट्री के रूप में 8-स्व व्यवसाय।
398 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4पाठ्यक्रम-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा- पूर्णांक उत्तीर्णांक (क) सैद्धान्तिक-
(1) प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 (2) द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 (3) तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 (4) चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 (5) पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-कुल 400 अंकों की होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् रहेगा-
आन्तरिक परीक्षा 200 अंक वाह्य परीक्षा 200 अंक
75-साफ्टवेयर प्रयोग 75-हार्डवेयर प्रयोग 50-मौखिक (Viva) टीप-1-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
2-प्रयोगात्मक के आन्तरिक परीक्षा में सत्रीय मूल्यांकन तथा दो प्रोजेक्ट (एक साफ्टवेयर व एक हार्डवेयर) का होना अनिवार्य है। प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन आन्तरिक परीक्षण द्वारा होगा, परन्तु इन प्रोजेक्ट्स को वाह्य परीक्षक को भी दिखाया जायेगा।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(कम्प्यूटर परिचय)
पूर्णाक 60
20 अंक
40 अंक
1-बाइनरी अर्थमेटिक (Binary Arithmetic) बिट्स निबल्स, बाइट्स बर्ड लेन्थ, कैरेक्टर रिप्रेजेन्टेशन आस्की (ASCII)] कैरेक्टर्स कोड्स, साधारण बाइनरी अर्थमेटिक (जोड़, घटाना, गुणा, भाग) कम्प्यूटर लॉजिक, बूलियन आपरेशन्स। 2-लॉजिक गेट्स (Logic Gate) लॉजिकल आपरेटर्स, NOT.AND.OR.NOR.NAND.EXOR गेट्स एवं उनके Truth टेबिल्स।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(आपरेटिंग सिस्टम) पूर्णाक 60
10 अंक
20 अंक
30 अंक
1-ट्रान्सलेटर्स (Translaters) एसेम्बलर्स (Assemblers)] इण्टरप्रेटर्स (Interpreters)] कम्पाइलर्स (Compilers) का अध्ययन करना। 2-कम्प्यूटर नेटवर्क (Computer Network) कम्प्यूटर नेटवर्किंग परिचय, प्रकार LAN, WAN, MAN नेटवर्क टॉपोलॉजी-स्टर, रिंग, बस, ट्री, नेटवर्क टॉपोलॉजी, कम्प्यूटर नेटवर्किंग का प्रयोग। 3-इन्टरनेट (Internet) इन्टरनेट का परिचय, इतिहास, HTTPका परिचय,का परिचय एवं वेबसाइट पहचान, विभिन्न प्रकार के प्रोटोकाल (TCX/IP) उपयोग, इन्टरनेट से जुड़ना, वेब ब्राउसिंग, E-Mail और अटैचमेन्ट (ई-मेल एकाउन्ट, पढ़ना, भेजना, बाहर आना), User ID का परिचय प्रयोग।
तृतीय प्रश्न-पत्र
(कम्प्यूटर हार्डवेयर)
पूर्णाक 60
24 अंक
1-हार्ड-डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) हार्ड-डिस्क टेक्नालॉजी, संकल्पना, क्षमता, रोटेशन, स्पीड एण्ड डाटा-ट्रान्सफर रेट्स, मीडिया, R/W हेड्स, FAT फारमेटिंग, पार्टीशनिंग, एच0 डी0डी0 का इन्स्टालेशन कलसटर्स H/D के प्रकार (IDE, EIDE, SCSI)Aभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 399
16 अंक
20 अंक
2-फ्लापी एण्ड CD ड्राइव (Floppy and CD Drive) फ्लापी के प्रकार, क्षमता एवं बचाव-एफ0डी0डी0 का परिचय-इन्स्टालेशन और ट्रबलशूटिंग ब्क् ड्राइव-उनके लाभ और क्षमता, डी0वी0डी0 का परिचय। 3-मॉनिटर्स (Monitors) मॉनिटर्स का परिचय, प्रकार (VGA, EGA, SVGA) प्रमुख पैरामीटर, वीडियो RAM, AGP, 3D एक्सिलरेटर्स, मॉनिटर्स का ट्रबलशूटिंग, फ्लैट स्क्रीन डिस्प्ले-एक परिचय, प्रकार।
चतुर्थ प्रश्न-पत्र
(डी0टी0पी0 एवं ई0डी0पी0)
पूर्णाक 60
20 अंक
40 अंक
1-एम0 एस0 एक्सेल एम0 एस0 एक्सेल का परिचय, इसकी शुरुआत, वर्कशीट की संरचना, इसको सेव करना, खोलना और इसकी फाइल पर विभिन्न प्रकार के आपरेशन्स जैसे एडीटिंग, प्रिंटिंग सूत्रों एवं फलन का प्रयोग, ऐरेज और नामांकित रेन्जेस का प्रयोग करना। चार्ट्स बनाना, मेक्रोज तथा फाम्र्स का उपयोग करना। 2-ई0डी0पी0 डेटा का परिचय, डेटाबेस का परिचय, रिलेशनल डेटाबेस कापरिचय एवं लाभ, फाक्स प्रो का परिचय, फाक्स प्रो द्वारा कार्य करना, डेटाबेस संरचना, डेटाबेस की फाइल्स बनाना, इनको सेव करना एवं खोलना, फाइल में संशोधन-संरचना एवं विषयक संशोधन, सम्पादन तथा डेटा जोड़ना, डेटा समीक्षा, इन्डेक्सिंग एक्सप्रेशन एवं क्वेरी का उपयोग, रिपोर्ट बनाना, लेबल्स तैयार करना, आर0 डी0 (Relational Database) के प्रयोग, स्मृति, वैरियबिल (Variable)] फंक्शन एवं फाक्स प्रो के उपयोग द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रयोग।
पंचम प्रश्न-पत्र
(कम्प्यूटर मेन्टेनेन्स एण्ड नेटवर्किंग)
पूर्णाक 60
20 अंक
10 अंक
20 अंक
10 अंक इकाई-1-प्रिन्टर्स- डाट मैट्रिक्स प्रिन्टर्स-विभिन्न पाटर््स की पहचान व क्लीनिंग बबल-जेट तथा इंकजेट प्रिन्टर्स-इसके पाटर््स की पहचान काट्रिज (Cartridge) की रिफिलिंग व पुनस्र्थापन लेजर प्रिन्टर्स-टोनर काट्रिज का पुनस्र्थापन, इन्स्टालेशन एवं ट्रबलशूटिंग इकाई-2-मोडेम्स- सिद्धान्त, कार्यविधि, प्रकार एवं उपयोग पैरामीटर्स (गति, त्रुटियों एवं उनका संशोधन) इन्स्टालेशन तथा ट्रबलशूटिंग इकाई-3-बेसिक्स आफ नेटवर्किंग- नेटवर्किंग का परिचय, नेटवर्क मीडिया, केबलिंग, नेटवर्क इन्टरफेस कार्ड (NIC) मीडिया एक्सेस मेथड्स कनेक्टिविटी डिवाइसेज, रिपीटर्स, हब्स/स्विचेज क्लाएन्टसरवर की संकल्पना इकाई-4-टेस्टिंग टूल्स- मल्टीमीटर, लाजिक टेस्टर, क्लिपिंग टूल्स, आसिलोस्कोप
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम की सूची
(हार्डवेयर प्रयोग)
पूर्णाक 400
उत्तीर्णांक 200
1-प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम व समान्तर क्रम में लगाना। 2-Capacitor व Inductors को Testing करना। 3-डायोड व ट्रांजिस्टर का अभिलाक्षणिक वक्र खींचना। 4-पावर सप्लाई का परीक्षण करना। 5-UPS & CVT का परीक्षण करना।
400 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 46-की-बोर्ड का परीक्षण करना। 7-माउस का परीक्षण करना। 8-DMP (Dot Matrix Printer) का अध्ययन करना। 9-मल्टीमीटर व लाजिक टेस्टर्स से प्रयोग करना। 10-ट्रबलशूटिंग व PC की मरम्मत करना।
(साफ्टवेयर प्रयोग)
1-पेज ले आउट सेट करना। 2-टेबल ऑफ कन्टेन्ट्स को तैयार करना। 3-सेलेक्टेड व सम्पूर्ण शीट प्रिन्ट करना। 4-Excelमें Number, Text Date and Timeके प्रयोग से वर्कशीट बनाना। सेल्स (Cellे), रास (Roूे) एवं कालम्स (Columns) को इन्सर्ट व डिलीट करना, फारमूला प्रयोग करना जिसमें रिलेटिव (Relative) एबसोल्यूट (Absolute) व मिक्स्ड (Mixed) रिफरेसिंग का उपयोग हो।
5-चार्ट बनाना, सुधारना, इन्सर्ट डिलीट करना। 6-साधारण एवं मीनू मेक्रोस को बनाना व चलाना। 7-सेलेक्टेड व सम्पूर्ण वर्कशीट को प्रिन्ट करना। चार्ट को प्रिन्ट करना। 8-डाटाबेस स्ट्रक्चर बनाना, सुधारना व कापी करना। डाटा जोड़ना, सम्पादन एवं समीक्षा। 9-डाटाबेस को क्वेरी (Query) करना व इन्डेक्सिंग करना। 10-रिपोर्ट फाइल बनाना। 11-मेलिंग-लेबल बनाना। 12-फाक्स-प्रो (Fox Pro) का इस्तेमाल करते हुए साधारण प्रोग्रामों का निर्माण करना व परीक्षण।
प्रोजेक्ट की सूची
(साफ्टवेयर प्रोजेक्ट)
1-एक्सेल व लोट्स 1-2-3 की तुलना। 2-फलन एवं माइक्रोस का विस्तृत अध्ययन। 3-एक्सेल का प्रयोग करके चार्ट व ग्राफ की तुलना। 4-विभिन्न प्रकार के फाइल और उनका प्रयोग। 5-फाइल प्रोटेक्शन। 6-रिपोर्ट तैयार करना। 7-लेबल तैयार करना। 8-स्पेल-चेक के प्रकार व गुणवत्ता। 9-विभिन्न प्रकार के डाटाबेस। 10-Fox Proव अन्य Data baseकी तुलना। 11-विभिन्न प्रकार की लो-लेवल भाषायें और उनकी आवश्यकता। 12-हाई-लेवल भाषायें और उनके विभिन्न लाभ।
(हार्डवेयर प्रोजेक्ट)
1-DMPकी कार्यविधि। 2-लेसर प्रिन्टर्स का प्रयोग व लाभ। 3-मोडम में गुणवत्ता एवं गति का प्रभाव। 4-LAN,MAN, WANकी तुलना। 5-हब्स व स्विच का अध्ययन। 6-मल्टीमीटर की कार्यविधि। 7-आक्सिलोस्कोप का सिद्धान्त। 8-फ्लैट स्क्रीन मानीटर्स। 9-लॉजिक एनालाजर्स। 10-इन्ट्रानेट व इन्टरनेट।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 401उपकरणों की सूची एवं मूल्य निर्धारण
उपकरण संख्या अनुमानित मूल्य
क्र0 सं0 1 2 3 4 रु0 1 पी0 सी0 3 2 यू0 पी0 एस0 3 3 3 मल्टीमीटर 4 डिजीटल मल्टीमीटर 3 5 लॉजिक टेस्टर 5 6 एक्सपेरीमेन्टल माडयूल्स
60,000.00 8,000.00 600.00 1,200.00 1,000.00 9,000.00
3 3 3 3 3
(क) रेजिस्टर (Resistor) (ख) डायोड (ग) ट्रांजिस्टर (घ) पावर सप्लाई (ङ) I. C.
7 टूल्स
5,000.00 (क) शोल्डरिंग आयरन (ख) पेंचकस (ग) प्लास (घ) कटर (ङ) डी-शोल्ड पम्प (च) विभिन्न कनेक्टर्स (छ) फ्लैट केबिल्स
10,000.00
5 5 5 5 5 5 5 8 ऑसिलोस्कोप 1 9 फर्नीचर्स, बिजली कनेक्शन,
नेट कनेक्शन इत्यादि व अन्य
20,000.00 कुल योग (लगभग) . . 1,24,800.00
(एक लाख चौबीस हजार आठ सौ मात्र)
(36) ट्रेड-घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं रख-रखाव
कक्षा- 12 पूर्णांक-60
उद्देश्य :--
(1) विद्युत उपकरणों की सामान्य जानकारी प्राप्त करना। (2) उपकरणों के अनुरक्षण एवं रख-रखाव का ज्ञान प्राप्त करना। (3) घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत एवं अनुरक्षण से सम्बन्धित पदार्थों की जानकारी प्राप्त करना। (4) विद्युत मोटर एवं जनरेटर की सामान्य जानकारी प्राप्त करना। (5) बैटरी के बारे में जानकारी एवं उसका रख-रखाव का सामान्य ज्ञान प्राप्त करना। (6) स्वतंत्र रूप से घरेलू उपकरणों का परीक्षण करना एवं उनको सुधारने का ज्ञान प्राप्त करना। (7) विद्युत उपकरणों पर कार्य करते समय सुरक्षा सम्बन्धी ज्ञान प्राप्त करना।
रोजगार अवसर-
1--स्वरोजगार एवं मजदूरी रोजगार :--
निम्नलिखित व्यवसाय स्वरोजगार की श्रेणी में आते हैं अर्थात् (पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद अपनी इकाइयां लगा सकते हैं) मजदूरी रोजगार अर्थात् दूसरों के लिये रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।
1-मोटर बाइन्डिग करने वाला। 2-जनरेटर मरम्मत करने वाला। 3-अभिरुचि कक्षायें चलाने वाला। 4-घरों की वायरिंग करने वाला। 5-स्वयं द्वारा उत्पादित सामग्री को बाजार में बेचने अथवा सप्लाई करने वाला। 6-सभी प्रकार के विद्युत उपकरणों की मरम्मत तथा रख-रखाव करने वाला।
51 ङ402 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
2-केवल मजदूरी रोजगार :--
1-इलेक्ट्रीशियन (कार्यालय तथा उद्योग में) घरों की वायरिंग के लिए। 2-स्कूल या प्रशिक्षण केन्द्रों में प्रशिक्षक के सहायक के रूप में। 3-सेल्समैन के रूप में। 4-उपकरणों के एसेम्बलर एवं सुधारक मिस्त्री के रूप में।
पाठ्यक्रम--
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और उनकी प्रयोगात्मक परीक्षा होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा।
(क) सैद्धान्तिक पूर्णांक उत्तीर्णांक (1) प्रथम प्रश्न-पत्र 60 20 (2) द्वितीय प्रश्न-पत्र 60 20 (3) तृतीय प्रश्न-पत्र 60 300 20 100 (4) चतुर्थ प्रश्न-पत्र 60 20 (5) पंचम प्रश्न-पत्र 60 20
(ख) प्रयोगात्मक-
200 400
(1) आन्तरिक परीक्षा 200 अंक (2) वा]य परीक्षा 200 अंक
नोट ः-परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न-पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50% अंक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(प्रारम्भिक विद्युत अभियांत्रिकी प्रथम-सी0सी0)
पूर्णांक-60
इकाई
1-दिष्ट धारा परिपथ-श्रेणी परिपथ एवं समान्तर परिपथ, किरचाफ का नियम, अधिकतम शक्ति स्थानान्तरण प्रमेय, गणना के सामान्य प्रश्न।
30 2-स्थिर वैद्युतिकी-कुलम्ब के नियम, विद्युत् आवेश, गाउस के नियम, संघनित्र, बनावट, कार्य विधि धारिता (कैपीसिटेन्स)।
16 3-डी0सी0 मशीन-दिष्ट धारा जनित्र का सिद्धान्त, डी0सी0 मशीनों की संरचना, डी0सी0 मोटर की बनावट एवं कार्य विधि, उपयोग, किस्म तथा अनुरक्षण, स्टार्टर। 14
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(ए0 सी0 फन्डामेंटल एवं ए0 सी0 मशीनें)
पूर्णांक-60
इकाई
1-प्रत्यावर्ती धारा मशीनें-ट्रान्सफारमर का कार्य सिद्धान्त, बनावट, उपयोग एवं
2-विद्युत वितरण एवं संचारण व्यवस्था का सामान्य परिचय। 3-विद्युत सुरक्षा एवं प्राथमिक उपचार-नियम एवं सावधानियां।
किस्में/सिनक्रोनस मोटर, संरचना, कार्यविधि एवं उपयोग, रोटेटिंग मोटर, प्रेरण मोटर-सिंगल फेज एवं तीन फेज मोटर का सामान्य ज्ञान, ए0सी0 मोटर के स्टार्टर का ज्ञान। 30 16 14
तृतीय प्रश्न-पत्र
(घरेलू वायरिंग एवं मोटर वाइन्डिंग)
इकाई
पूर्णांक-60
1-फ्यूज-विद्युत परिपथ में फ्यूज का महत्व, फ्यूज के प्रकार, फ्यूज बनाने में प्रयुक्त पदार्थ, परिपथ में फ्यूज न होने की स्थिति में हानियाँ, फ्यूज की रेटिंग, फ्यूज बाँधना। 16 2-विद्युत् प्रकाश स्रोत-आर्क लैम्प, तापदीप्त बल्ब, गैसीय विसर्जन बल्ब, नियोजन बल्ब, सोडियम वाष्प बल्ब, मरकरी पेपर लैम्प, फ्लूरोसेन्ट ट्यूब, बनावट-सहायक सामग्री एवं परिपथ आरेख। 14 3-आरमेचर बाइन्डिंग-विद्युत मोटरों की बाइंन्डिग एवं रिवाइंन्डिंग का अर्थ एवं आवश्यकता, प्रयुक्त पदार्थ एवं आवश्यक उपकरण तथा औजार, ए0 सी0 और डी0 सी0 वाइन्डिंग में उपयोगभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 403 किये जाने वाले टम्र्स, मशीन की फिर से वाइन्डिंग करने की विधि ए0 सी0 मशीन स्टेटर वाइंन्डिंग का डेटा प्रत्येक ग्रुप में क्वायल्स को व्यवस्थित करने के नियम, वाइन्डिंग डायग्राम बनाने की विधि, डी0 सी0 आरमेचर वाइन्डिंग की किस्में, ए0 सी0 वाइन्डिंग की किस्में, डी0 सी0 आरमेचर में दोष ज्ञात करना, मशीन की वाइन्डिंग करने के पश्चात् वाइन्डिंग की वार्निशिंग एवं तप्तन।
30 चतुर्थ प्रश्न-पत्र (घरेलू विद्युतीय उपकरणों की बनावट एवं अनुरक्षण)
इकाई
पूर्णांक-60
अंक
1-अनुरक्षण, मरम्मत कार्य-अनुरक्षण से तात्पर्य लाभ, विभिन्न प्रकार के अनुरक्षण-बचाव अनुरक्षण एवं कार्य भंग अनुरक्षण, मरम्मत, ओवरहालिंग सर्विसिंग, निरीक्षण आदि। 30 उपकरणों में टूट-फूट के कारण एवं बचाव, संरक्षण से बचाव, स्पेयर पुर्जों का चयन, स्वीकरण परीक्षण।
2-सम्भावित दोष एवं निराकरण-ऊपर वर्णित उपकरणों में सम्भावित दोष, उनके कारण तथा बचाव, टूट-फूट की मरम्मत, सोल्डरिंग, बेन्डिंग, इलेक्ट्राप्लेटिंग, रिवेटन, पेन्टिंग, वाइन्डिंग, फिटिंग कार्य एवं बेंच कार्य का संक्षिप्त परिचय, जनरेटर का रख-रखाव। 20 3-मरम्मत के लिए आवश्यक औजार-पहचान, बनावट, विशिष्टियाँ, उपयोग एवं सुरक्षा
पंचम प्रश्न-पत्र
कार्यशाला गणना एवं अभियांत्रिकी पदार्थ पूर्णांक-60
इकाई
अंक 1-विद्युत् ऊर्जा की गणना तथा लागत निकालना एवं विद्युत् मशीन और उपकरणों की मरम्मत सम्बन्धी इस्टीमेट तैयार करना।
20 2-विद्युत् औजाराें के मुक्त हस्त चित्र, विद्युत् सामग्री, उपकरण मशीन इत्यादि के संकेत चिन्ह। 10 3-सुरक्षा सावधानी एवं आद्यात उपचार 10 4-(क) अभियांत्रिकी पदार्थ संवाहक सामग्री-ताँबा और एल्युमिनियम कम अवरोधक क्षमता वाली सामग्री उनकी विद्युतीय विशेषतायें, चालक तथा कुचालन में अन्तर, डाईइलेक्ट्रिक सामग्री-विशेषतायें एवं उनका उपयोग, इन्सुलेटिंग मैटेरियल-कागज, प्लास्टिक आवरण वाले कागज, एम्पायर क्लाथ, लेदराइज कागज, रबड़, पी0 वी0 सी0 पोरसलीन, वैकेलाइट, फाइवर, वार्निश और पेन्ट उनकी विशेषतायें तथा उपयोग।
20 (ख) चुम्बकीय सामग्री-फैरोमेगनेटिक सामग्री, नर्म और सख्त चुम्बकीय सामग्री, चुम्बकीय सामग्री की हानियाँ तथा हानियों को कम करने की प्रक्रिया।
(ग) इलेक्ट्रानिक्स के मूल सिद्धान्त तथा आधुनिक घरेलू उपकरणों में इसकी उपयोगिता, घरेलू उपकरणों मे लगाये जाने वाले इलेक्ट्रानिक्स कम्पोनेन्ट, उनकी पहचान करना एवं लगाना तथा परीक्षण करना।
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम
पूर्णांक-400
उत्तीर्णांक-200
1-एक-कलीय एवं त्रिकलीय मोटर स्टार्टर का अध्ययन। 2-कक्ष बोर्ड पर लगी नमूना वायरिंग सामग्री का अध्ययन एवं पहचान। 3-सिरीज बोर्ड बनाने का अभ्यास। 4-एक प्वाइन्ट की वायरिंग करना। 5-फ्लोरासियेन्ट ट्यूबराड फिटिंग की वायरिंग करना। 6-ढाई प्वाइंट की वायरिंग करना। 7-जीना (स्टेयर केस) पर की जाने वाली वायरिंग करना। 8-विद्युत् बल्ब की झालर बनाना। 9-अर्थिंग करना। 10-छत के पंखों की रिवाइन्डिंग करना। 11-क्षैतिज कूलर पम्प की रिवाइन्डिंग करना। 12-ऊध्र्वाधर कूलर पम्प की रिवाइन्डिंग करना। 13-वाशिंग मशीन की मोटर की रिवाइन्डिंग करना।
404 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 414-मिक्सी की मोटर की रिवाइन्डिंग करना। 15-एक्जास्ट पंखे की रिवाइन्डिंग करना। 16-पैडिस्टल पंखे की रिवाइन्डिंग करना। 17-निम्नलिखित घरेलू विद्युत उपकरणों की सफाई मरम्मत करना, उनकी डिसेम्बली एवं असेम्बली का अभ्यास : (ए) मिक्सी (बी) वाशिंग मशीन (सी) छत का पंखा (डी) पैडिस्टल पंखा (इ) एग्जास्ट फैन (एफ) इस्त्री (प्रेस आयरन) (जी) कूलर पम्प (एच) विद्युत् घंटी (आई) गीजर (जे) इमरजेन्सी लाइट 18-रिवेटन, सोल्डरिंग, फाइलिंग वेल्डिंग अभ्यास।
आवश्यक औजार एवं उपकरणों की सूची
क्रमांक नाम संख्या अनुमानित कीमत
1 2 3 4
रु0
1 ड्रिल मशीन (विद्युत चलित) 1 4500.00
2 वाइंन्डिंग मशीन 2 5000.00
3 हथौड़ी 2 सेट 200.00
4 ड्रिल सेट 2 सेट 200.00
5 फाइल सभी प्रकार के 2 सेट 200.00
6 चिजेल सभी प्रकार के 2 सेट 150.00
7 वाइस 4 900.00
8 टेप सेट 2 सेट 400.00
9 डाई 2 600.00
10 हैण्ड हैक्सा 4 200.00
11 सोल्डरिंग आयरन 5 1000.00
12 वेल्डिंग ट्रान्सफारमर 1 4000.00
13 रिवटेन औजार 1 सेट 400.00
14 पंच, वाइस 2 सेट 1400.00
15 मापन औजार 1 सेट 2000.00
16 वाट मीटर 2 3500.00
17 वोल्ट मीटर 5 3000.00
18 नेयर 2 2500.00
19 मल्टीमीटर (एनालाग) 2 550.00
20 मल्टी मीटर (डिजिटल) 2 1000.00
21 स्क्रू ड्राइवर सेट 2 200.00
22 रिंच सेट (स्पेनर सेट) 2 250.00
23 रिपेयरिंग किट 2 3000.00
24 मिक्सी 1 4000.00
25 वाशिंग मशीन 1 5000.00
26 छत का पंखा 1 1000.00
27 पेडेस्टल फैन 1 1000.00
28 इक्जास्ट फैन 1 3000.00
29 प्रेस प्रत्येक किस्म के 1 प्रत्येक 2000.00
30 कूलर पम्प 1 4000.00
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 405
31 घंटी 1 100.00
32 गीजर 1 3000.00
33 किचेन हीटर 1 100.00
34 टेबुल लैम्प 1 500.00
35 इमरजेन्सी लाइट 1 1000.00
36 ओवेन 1 4000.00
37 इमरशन हीटर 1 600.00
38 बैटरी चार्जर 1 500.00
योग . . 56050.00
विषय सन्दर्भ पुस्तकों की सूची :
लेखक प्रकाशक
1- आधारि वैधत अभियान्त्रिकी आर0 पी0 गुप्त नवभारत प्रकाशन, मेरठ 2- आधारि वैधत अभियान्त्रिकी टी0 डी0 विष्ट एशियनपब्लिकेशन, मुजफ्फरनगर
3- आधारि वैधत अभियान्त्रिकी एम0 एल0 गुप्ता
धनपतराय एण्ड सन्स, नई दिल्ली
4- घरेलू उपकरणों का अनुरक्षण एवं रख-रखाव आर0 के0 लाल
5-
महेन्द्र भारद्वाज नवभारत प्रकाशन, मेरठ विद्युुत् उपकरणों एवं मशीनों का अनुरक्षण एवं रख-रखाव
6- विद्युत् उपकरणों एवं घरेलू उपकरणों का रख-रखाव एम0 एल0 आडवानी
न्यू हाइट्स पब्लिकेशन, नई दिल्ली
7- कार्यशाला गणना एम0 एल0 आडवानी 8- संयत असुरक्षा एवं सुरक्षा इंजी0 आर0 के0 लाल 9- विद्युत् उपकरणों का संस्थापन, अनुरक्षण एवं मरम्मत जग्गी शर्मा नवभारत प्रकाशन, मेरठ
(37)-ट्रेड-खुदरा व्यापार (Retail Trading)
कक्षा- 12
पूर्णांक : 60
पाठ्यक्रम :-
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे के पाँच प्रश्न-पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा हैं। अंकों का विभाजन निम्नवत् है :-
(अ) सैद्धान्तिक
प्रथम प्रश्न-पत्र-खुदरा व्यापार का परिचय -60 द्वितीय प्रश्न-पत्र-उत्पाद एवं उपभोक्ता सेवायें -60 तृतीय प्रश्न-पत्र-खुदरा व्यापार में भण्डारण एवं आपर्ति -60 300 चतुर्थ प्रश्न-पत्र-अर्थ व्यवस्था में खुदरा व्यापार -60 पंचम प्रश्न-पत्र-बहीखाता एवं लेखा शास्त्र -60
(ब) प्रयोगात्मक
400
(क) आन्तरिक परीक्षा -200 (ख) वा]य परीक्षा 200
परीक्षार्थी को प्रत्येक प्रश्न-पत्र में उत्तीर्णांक न्यूनतम 20 अंक तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में 200 अंक पाना आवश्यक है।
नोट :- सैद्धान्तिक प्रश्न-पत्र में 33 प्रतिशत उत्तीर्णांक हैं तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक पाना आवश्यक है। पाठ्यक्रम की उपयोगिता-
खुदरा व्यापार का देश की आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। छात्र-छात्राओं को खुदरा व्यापार के आशय एवं उपयोगिता तथा विभिन्न पहलुओं पर जानकारी देना शैक्षिक पाठ्यक्रम के लिए अति आवश्यक है। पाठ्यक्रम की उपयोगिता हेतु निम्न बिन्दु महत्वपूर्ण हैं-
1-छात्र-छात्राओं को विक्रय कला की जानकारी। 2-नये उत्पाद का प्रचार-प्रसार करने के कौशल का विकास406 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 3-वस्तु की मांग उत्पन्न करने की तरीकों की जानकारी देना 4-उपभोक्ताओं की रुचि, आदत एवं फैशन आदि की जानकारी 5-एक अच्छे विक्रेता के रूप में छात्रों को तैयार करना।
उद्देश्य-
खुदरा व्यापार के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में एक अच्छे व्यापारी के गुणों का विकास करना तथा इससे भविष्य में स्वरोजगार स्थापित करने में सहायता मिलें उनके व्यक्तित्व का विकास करना अच्छेे बिक्रय करने की जानकारी देना। प्रतिस्पर्धात्मक व्यापार मे अपने कौशल एवं साहस से सामना करना तथा दिन-प्रतिदिन विकास करने में दक्ष होना।
प्रथम प्रश्न-पत्र
खुदरा व्यापार का परिचय
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
(क) खुदरा व्यापार का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) खुदरा व्यापार की विशेषतायें। (ग) खुदरा व्यापार के गुण एवं दोष। (घ) खुदरा व्यापार का महत्व।
इकाई-2
20 अंक
(क) खुदरा व्यापार के स्वरूप। (अ) छोटे पैमाने के खुदरा व्यापार। (क) फेरी वाले। (ख) एक मूल्य की दुकानें। (ग) साधारण दुकानें। (ब) बड़े पैमाने की खुदरा व्यापार। (क) सुपर बाजार। (ख) विभागीय भण्डार। (ग) श्रृंखलाबद्ध दुकानें। (घ) उपभोक्ता सहकारी भण्डार। (ङ) डाक द्वारा व्यापार। (च) इन्टरनेट द्वारा व्यापार। (छ) विक्रय मशीन। (ज) किराया कर पद्धति। (झ) किस्त भुगतान पद्धति।
इकाई-3
20 अंक
फुटकर व्यापार की सेवायें- (क) उत्पादकों के प्रति सेवायें। (ख) थोक व्यापारियों के प्रति सेवायें। (ग) उपभोक्ता एवं समाज के प्रति सेवायें।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
उत्पाद एवं उपभोक्ता सेवायें
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
(क) बाजार का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) बाजार के प्रकार। (अ) पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में। (ब) अपूर्ण प्रतियोगिता की दशा में। (स) एकाधिकार की दशा में। (ग) मूल्य निर्धारण- (अ) पूर्ण प्रतियोगिता की दशा में। (ब) अपूर्ण प्रतियोगिता की दशा में। (स) एकाधिकार की दशा में।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 407इकाई-2
20 अंक
(क) खुदरा व्यापार में विपणन की भूमिका। (ख) विपणन की उत्पत्ति एवं परिभाषा। (ग) विपणन के लक्षण। (घ) विपणन का महत्व। (ङ) विपणन का सिद्धान्त। (च) उत्पाद एवं सेवा विपणन में अन्तर।
इकाई-3
20 अंक
(क) विज्ञापन का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) विज्ञापन के प्रकार। (ग) विज्ञापन का महत्व। (घ) खुदरा व्यापार में विज्ञापन का महत्व। तृतीय प्रश्न-पत्र खुदरा व्यापार में भण्डारण एवं आपूर्ति
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
(क) भण्डार गृह की स्वच्छता। (ख) स्वच्छता की आवश्यकता। (ग) स्वच्छता का महत्व। (घ) स्वच्छता हेतु उपयोग में आने वाले उपकरण। (ङ) स्वच्छता एवं स्वास्थ्य में सम्बन्ध।
इकाई-2
20 अंक
(क) भण्डार गृहों के सुरक्षात्मक उपायों का अनुरक्षण। (ख) भण्डार गृहों के सम्भावित खतरे। (ग) सुरक्षात्मक उपाय। (घ) सुरक्षा की आवश्यकता। (ङ) सुरक्षात्मक उपायों हेतु प्रशिक्षण।
इकाई-3
20 अंक
(क) आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन। (ख) आपूर्ति श्रृंखला प्रबन्धन की संरचना। (ग) खुदरा वितरण माध्यम। (घ) मांग पूर्वानुमान। (ङ) सामग्री प्रबन्धन। (च) सामग्री आपूर्ति श्रृंखला एवं प्रौद्योगिकी। चतुर्थ प्रश्न-पत्र अर्थ व्यवस्था में खुदरा व्यापार
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
(क) रोजगार का आशय। (ख) खुदरा व्यापार में रोजगार की सम्भावना। (ग) खुदरा व्यापार में रोजगार के आवश्यक पात्रता/दक्षता। (घ) खुदरा व्यापार में कार्यरत कार्मिकों के कार्य एवं उत्तरदायित्व।
इकाई-2
20 अंक
(क) संचार का अर्थ एवं परिभाषा। (ख) संचार चक्र। (ग) संचार के विभिन्न तत्व। (घ) संचार में बाधायें। (ङ) खुदरा व्यापार में संचार का महत्व।
इकाई-3
20 अंक
(क) सूचना प्रौद्योगिकी का आशय। (ख) खुदरा व्यापार में सूचना प्रौद्योगिकी का महत्व। (ग) सूचना प्रौद्योगिकी की प्रयुक्त तकनीकियाँ (ई0सी0एस0, क्रेडिट कार्ड, डेविट कार्ड, आनलाइन खरीददारी एवं भुगतान)408 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
पंचम प्रश्न-पत्र
बहीखाता एवं लेखाशास्त्र
पूर्णांक : 60
20 अंक
इकाई-1 खाता बही एवं तलपट (क) खाता बही की आवश्यकता एवं अर्थ। (ख) लेखों को खतियाना। (ग) खातों की बाकी निकालना। (घ) तलपट का अर्थ। (ङ) तलपट बनाने की विधियाँ। (च) तलपट द्वारा प्रकट होने वाली एवं न प्रकट होने वाली अशुद्धियाँ। (छ) उचन्त खाता।
इकाई-2 अन्तिम खाता समायोजनाओं सहित
20 अंक
20 अंक
(क) अन्तिम खाते का आशय। (ख) प्रमुख समायोजनायें। (ग) व्यापार खाता (समायोजना सहित)। (घ) लाभ-हानि खाता (समायोजना सहित)। (ङ) आर्थिक चिट्ठा (समायोजना सहित)। इकाई-3 भारतीय बहीखाता प्रणाली (क) भारतीय बहीखाता प्रणाली का अर्थ। (ख) विशेषतायें। (ग) लाभ-दोष। (घ) प्रमुख बहियाँ-कच्ची रोकड़ बही, पक्की रोकड़ बही, जमा नकल बही व नाम नकल बही। प्रयोगात्मक खुदरा व्यापार निर्माताओं, उत्पादकों एवं थोक व्यापारियों को उपभोक्ता से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। खुदरा व्यापार का भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। खुदरा व्यापार में व्यापारी का उपभोक्ता से सीधा सम्बन्ध होने के कारण उपभोक्ता के रुचि, आय, फैशन आदि की जानकारी प्राप्त करके उत्पादकों को अपने उत्पाद का पैमाना निर्धारित करने में सहयोग प्रदान करता है और वहीं दूसरी ओर नये-नये उत्पाद की जानकारी अपने महत्वपूर्ण विक्रय कला कौशल के आधार पर उपभोक्ता तक पहुँचाता है और वस्तु की मांग उत्पन्न करता है। खुदरा व्यापार का प्रयोगात्मक स्वरूप
1-छात्र-छात्राओं को शहर के प्रतिष्ठित खुदरा व्यापार केन्द्र में भ्रमण कराना। 2-छात्र-छात्राओं को विज्ञापन के नये-नये तकनीकियों से अवगत कराना। 3-छात्र-छात्राओं को वस्तुओं के सुरक्षित रख-रखाव के तकनीक का ज्ञान देना। 4-छात्र-छात्राओं को वस्तु के बिक्रय का दीर्घकालिक लाभ के विषय में सोचने तथा व्यापार में ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के तकनीक पर विचार करना।
5-कम लाभ पर अधिक बिक्रय बढ़ाने की कला को विकसित करना। 6-छात्र-छात्राओं को व्यापार के अनुचित एवं फिजूल खर्चे रोकने तथा न्यूनतम लागत के आधार पर व्यापार चलाने का प्रशिक्षण देना।
7-छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रकार के खुदरा व्यापार से सम्बन्धित सरकारी नियमों एवं लाइसेंन्सिंग की जानकारी देना।
8-छात्र-छात्राओं को खुदरा व्यापार से सम्बन्धित विभिन्न वस्तुओं के सम्बन्ध में राष्ट्रीय नीति की भी जानकारी देना।
9-अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के सम्बन्ध में छात्र-छात्राओं को ज्ञान कराना तथा आयात निर्यात नीति की भी जानकारी देना।
10-छात्र-छात्राओं को व्यापार के उतार-चढ़ाव के प्रभाव एवं दुष्प्रभाव से निपटने की क्षमता को विकसित करना।
नोट :-
वर्ष के दौरान आन्तरिक एवं वा]य परीक्षा के अन्तर्गत छात्र-छात्राओं से निम्न कार्य कराये जायें- 1-छात्र-छात्राओं से प्रोजेक्ट कार्य कराकर उसकी फाईल बनायें। 2-चार्ट के माध्यम से प्रस्तुतीकरण करना। 3-छात्र-छात्राओं द्वारा मॉडल भी बनवाया जाये।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 4094-छात्र-छात्राओं से किसी नये उत्पाद के विज्ञापन की तकनीकियाँ प्रस्तुत करने की विधि पर डिबेट कराया जाये।
5-नये उत्पाद को बाजार में छात्र-छात्राओं से उपभोक्ताओं को जानकारी दिलवाना। 6-बाजार सर्वेक्षण कराकर उपभोक्ता की रुचि, आय, प्रचलित फैशन आदि की जानकारी प्राप्त करना।
आवश्यक उपकरण
1-कम्प्यूटर प्रोजेक्टर 2-चार्ट पेपर 3-फाइलें 4-सादा कागज 5-दैनिक उपभोग से सम्बन्धित प्रमुख उत्पाद।
(38) टे्रड-सुरक्षा (Security)
कक्षा- 12
उद्देश्य-
1-छात्र-छात्राओं में सुरक्षा चेतना एवं सुरक्षा के प्रति दायित्व बोध का विकास करना। 2-छात्र-छात्राओं मे सम्प्रेषण क्षमता एवं व्यक्तित्व का चतुर्दिक विकास करना। 3-प्राकृतिक आपदा एवं आपातकालीन स्थितिजन्य चुनौतियों से निपटने हेतु सक्षम एवं सेवायें अर्पित करने हेतु तत्पर बनाना।
4-उत्पादन/कार्यस्थलों में सुरक्षा परिवेश को बेहतर बनाकर जीवन स्थितियों (Living Conditions) को सुगम एवं जनहानि कम करना।
5-छात्र-छात्राओं में प्राथमिक उपचार का कौशल विकसित कर, दुर्घटना/आपातकाल मे जरूरतमंदों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने हेतु सक्षम बनाना।
6-सार्वजनिक/औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की समझ विकसित कर, कार्यस्थल की सुरक्षा को प्रभावी बनाने में योगदान देना तथा सुरक्षा के रोजगार क्षेत्र में छात्र/छात्राओं को अर्ह बनाना।
रोजगार के अवसर
1-पाठ्यक्रम में दक्षता हासिल करने के उपरान्त छात्र/छात्रायें सुरक्षा बल, सार्वजनिक एवं निजी उद्योग, स्वास्थ्य सेवाओं के रोजगार क्षेत्र में सेवायोजन प्राप्त कर सकेंगे।
2-आपदा प्रबन्धन, नागरिक सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार के साथ देश के नागरिक होने के दायित्व का निर्वहन भी कर सकेंगे।
प्रश्न-पत्र-प्रथम
आपदा प्रबन्धन
पूर्णांक : 60
1-आपदा सम्बन्धी तैयारी : आपदा का अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन नियोजन, संचार, आपदास्पद स्थितियों में नेतृत्व, उपयोगी वस्तुओं का भण्डारण एवं प्रभावी वितरण, सामुदायिक भागेदारी एवं जन जागरुकता कार्यक्रम। 20 अंक 2-आपदा प्रबन्धन : विभिन्न अभिकरणों की भूमिका, जिला प्रशासन, सैनिक एवं अर्द्धसैनिक बल, गैर सरकारी संगठन, जन संचार माध्यम।
20 अंक
3-राहत कार्य, हताहत प्रबन्धन एवं पुनर्वास : हताहतों/प्रभावितों को खोजना, बचाना, पीड़ितों के लिए बसेरा, पशुधन और राहत कार्य, मलबे को हटाना और मृतकों का संस्कार, अग्नि नियंत्रण, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवायें, पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास, आपदा जन्य हानि का मूल्यांकन एवं समीक्षा। 20 अंक द्वितीय-प्रश्न-पत्र प्रश्न-पत्र-द्वितीय
सुरक्षा
पूर्णांक : 60
1-भारतीय सुरक्षा में सहायक सेनाओं/अर्द्धसैनिक बल की भूमिका : तटरक्षक सेना, सीमा सुरक्षा बल, भारतीय तिब्बत सीमा बल, सशस्त्र सीमा बल, असम राइफल्स, केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स तथा राज्य के सुरक्षा बल।
15 अंक 2-रक्षा की द्वितीय पंक्ति : राष्ट्रीय कैडेट कोर, राष्ट्रीय राइफल्स, प्रादेशिक सेना। 05 अंक
52 ङ410 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 3-सशस्त्र सेना की चयन प्रक्रिया एवं प्रशिक्षण : भारतीय स्थल सेना, नौसेना एवं वायु सेना के प्रवेश की चयन प्रक्रिया, अर्हता शर्तें एवं प्रशिक्षण केन्द्र ः भारतीय रक्षा अकादमी, खडगवासला, भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून आदि।
25 अंक
4-केन्द्र एवं राज्य स्तर पर संचालित आसूचना संस्थायें (Intelligence Agencies) ः देश की सुरक्षा में आसूचना तंत्र का महत्व, इतिहास एवं वर्तमान में संचालित आसूचना संस्थाओं की आधारित जानकारी। 10 अंक 5-भारतीय सुरक्षा में व्यक्तिगत सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका 05 अंक प्रश्न-पत्र-तृतीय कार्य स्थलीय स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपाय
1-खतरों से सम्बन्धित जोखिम का आकलन।
पूर्णांक : 60
40 अंक
• कार्यस्थलीय स्वास्थ्य की प्रावस्थायें एवं सुरक्षात्मक रणनीति। • जोखिम प्रबन्धन के विभिन्न चरण। • कार्यस्थल में जोखिम की तीव्रता को प्रभावित करने वाले कारक। • कार्यस्थल में खतरों के आकलन से सम्बन्धित विचारणीय तत्व।
20 अंक
2-कार्यस्थल में खतरों से सुरक्षा के उपाय। • आपातकालीन प्रतिक्रिया के विभिन्न तत्व • कार्यस्थल में खतरों से सुरक्षा के विभिन्न साधन एवं प्रभावी उपाय।
प्रश्न-पत्र-चतुर्थ
युद्ध में विज्ञान एवं तकनीकी
1-नवीन सैन्य तकनीकी (भारत के सन्दर्भ में)
पूर्णांक : 60
20 अंक
• निर्देशित प्रक्षेपात्रों के प्रकार एवं भारत में उनका विकास। • इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणालियाँ एवं तकनीकी। • इलेक्ट्रानिक विरोधी उपाय (Electronic Counter Measures) • संकुलन (Jamming) : प्रकार एवं विधियाँ। • इलेक्ट्रानिक विरोधी-विरोधी उपाय (इलेक्ट्रानिक विरोधी उपाय Electronic Counter Counter Measures) 2-भारत की रक्षा सामथ्र्य एवं उत्पादन
20 अंक
• भारत के रक्षा प्रतिष्ठान एवं आयुद्ध निर्माणी : उत्पादन एवं उपलब्धियाँ • भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
20 अंक
3-भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम एवं उपलब्धियाँ
प्रश्न-पत्र-पंचम
नागरिक सुरक्षा
1-बचाव (रेस्क्यू)
पूर्णांक : 60
20 अंक
• बचाव की आपातकालीन विधियाँ (Emergency Method of Rescue) • एक बचाव कर्ता द्वारा, दो बचाव कर्ता द्वारा, चार बचाव कर्ता द्वारा • इम्प्रोवाइज्ड स्ट्रेचर-दो बांस एवं एक कम्बल से स्ट्रेचर तैयार करना • ऊँचे भवनों से घायलों को निकालना (Rescue from High Ris Building) ः पावर मैन लिफ्ट, चेयर नाट, दो रस्सियों के सहारे स्ट्रेचर उतारना (Sliding Stretcher on two parallel ropes), सीढ़ी के सहारे उतारना (Sliding Stretcher down the ladder), हिन्ज मेथड, टू प्वाइन्ट मेथड, फ्लाइंग 20 अंक 2-विस्थापन (Evacuation)
• हवाई हमले या आपदा के समय जनता को सुरक्षित स्थान पर ले जाना। • शरण स्थलों का चिन्हांकन एवं स्थापना • पूछताछ केन्द्र की स्थापना • विस्थापितों के लिए भोजन एवं वस्त्र की व्यवस्था • पब्लिक एड्रेस सिस्टमभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 411
3-सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing)
20 अंक
• आम जनता का स्थानीय पुलिस से बेहतर समन्वय, शान्ति व्यवस्था एवं अपराध नियन्त्रण में पुलिस को सहयोग, सम्भ्रान्त नागरिकों की पुलिस के साथ बैठक।
• अपने गली मोहल्ले में संदिग्धों पर नजर रखना एवं संदिग्ध व्यक्ति/अग्रिम घटना की आशंका होने पर यथा समय सूचना पुलिस को देना।
• मुहल्ला सुरक्षा समितियों का गठन • राष्ट्रीय पर्वों को सोल्लास मनाकर आम जनता में राष्ट्रीय एकता की भावना को जागृत करना।
प्रायोगिक
400 अंक
1-निकटवर्ती रक्षा प्रतिष्ठान/अर्द्ध सैनिक बल मुख्यालय/आतंकवादी विरोधी प्रशिक्षण केन्द्र आदि का भ्रमण एवं बटालियन स्तर तक प्रयुक्त होने वाले रक्षा आयुध/उपकरण/सामग्री, रणनीति/समरतन्त्र का अध्ययन एवं रिपोर्ट तैयार करना।
2-विद्यालय के स्थान का मानचित्र अध्ययन एवं मानचित्र अध्ययन में प्रयुक्त उपकरण यथा तरल त्रिपाश्र्व दर्शी का प्रयोग।
3-स्थल सेना/नौ सेना/वायु सेना में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों यथा टैंक, जलयान एवं यौद्धिक विमान में मॉडल पर आधारित स्पाटिंग।
4-छात्रों द्वारा कृत्रिम हवाई हमले से बचाव का प्रदर्शन 5-विस्थापन की माक ड्रिल 6-छात्रों द्वारा अग्निशमन दल, प्राथमिक एवं बचाव के तीन दल अलग-अलग बनवा कर ड्रिल करवाई जाय।
| S.No. | Specifications | Rate | Supplier |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1. | Liquid Prismatic Compass MK-III A | Rs. 6.000 | Ordnance Factory Raipur, Dehradun, (Uttarakhand) |
| 2. | Toposheet (Gridded) | Rs. 75 | Surveyor General of India, Hathibarkala, Dehradun |
| 3. | CCTV | ||
| 4. | Finger Print Scanner | ||
| 5. | Irish Scanner | ||
| 6. | Face Scanner | ||
| 7. | Door Scanner | ||
| 8. | Fire Party : a. Pocket Line-12 b. Bucket-2 c. Helmet-16 d. Fireman Axe-2 | ||
| 9. | First Aid Kit | ||
| 10. | Blanket-3 | ||
| 11. | Stretcher-5 | ||
| 12. | Spillers-One set | ||
| 13. | Torch-1 | ||
| 14. | Tripod-12 | ||
| 15. | Extension Ladder 35'-One | ||
| 16. | Rope-200' One | ||
| 17. | Rope-100'-One | ||
| 18. | Wooden Shaft-2 | ||
| 19. | Iron Picket-2 | ||
| 20. | Hammer-1 | ||
| 21. | Pulley-1 (Single Sheaf) | ||
| 22. | Pulley-1 (Double Sheaf) | ||
| 23. | Snatch Clock-1 |
इस टे्रड में तीन-तीन घण्टे के पांच प्रश्न-पत्र और उनकी प्रायोगिक परीक्षा होगी। अंकों का विभाजन निम्नवत् होगा।
पूर्णांक उत्तीर्णांक
(क) सैद्धान्तिक--
प्रथम प्रश्न पत्र 60 20
द्वितीय प्रश्न पत्र 60 20
तृतीय प्रश्न पत्र 60 300 20 100
चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 20
पंचम प्रश्न पत्र 60 20
(ख) प्रायोगिक
पूर्णांक उत्तीर्णांक
आन्तरिक परीक्षा 200
वाह्य परीक्षा 200 400 200
| S.N. | Practical | Marks Allotted |
| 1 | कार्यस्थल की विजिट, किसी एक समस्या/बिन्दु पर केस स्टडी अथवा आख्या तैयार करना। | 50 |
| 2 | रक्षा सेनाओ ं द्वारा प्रयुक्त यौद्धिक उपकरण/आपदा प्रबन्धन/नागरिक सुरक्षा में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की स्पाटिटंग। | 50 |
| 3 | नागरिक सुरक्षा/आपदा प्रबन्धन/प्राथमिक उपचार की मॉक ड्रिल या मॉक टेस्ट | 50 |
| 4 | मौखिकी | 50 |
| योग . . | 200 |
परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य होगा।
(39) टे्रड-मोबाइल रिपेयरिंग
कक्षा-12
1. सैद्धान्तिक - 300 अंक 2. प्रयोगात्मक - 400 अंक
1- सैद्धान्तिक--
पूर्णांक उत्तीर्णांक
प्रथम प्रश्न पत्र 60 20 द्वितीय प्रश्न पत्र 60 20 तृतीय प्रश्न पत्र 60 300 20 100 चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 20 पंचम प्रश्न पत्र 60 20
2-प्रयोगात्मक
400
आन्तरिक वाह्य
200 अंक (सत्रीय कार्य के अन्तर्गत प्रोजेक्ट समाहित 200 अंक
है।
मोबाइल रिपेयरिंग
उद्देश्य-शिक्षा के उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयोग व सुधार नवीन अवधारणाओं पर आधारित है जिसके परिणाम स्वरूप शिक्षा में समायनुकूल गुणात्मक एवं मात्रात्मक परिवर्तन सापेक्षिक अर्थ में आधुनिकता के प्रतीक रहे हैं। वर्तमान समय सूचना संचार का युग है, जिसमें मोबाइल रिपेयरिंग शिक्षा के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को रोजगार व स्वरोजगार की असीम सम्भावनाएँ प्र्रस्तुत व उपलब्ध करा रहा है। इस विषय के अध्ययन व प्रयोग से छात्र/छात्राएँ तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
• विद्यार्थियों में उद्यमिता के गुणों का विकास। • विद्यार्थियों में रोजगार/स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना। • मोबाइल शाप को मैनेज करना। • तकनीशियन के रूप में सफलता पूर्वक कार्य करना। • उच्चशिक्षा में इसका प्रयोग करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 413प्रथम प्रश्नपत्र
बेसिक इलेक्ट्रानिक (मोबाइल के सन्दर्भ में)
1. इलेक्ट्रिानिक्स के सिद्धान्त
पूर्णांक : 60
20 अंक
परमाणु संरचना, आवेश Hole, के सन्दर्भ में सामान्य ज्ञान, Semi Conductor Material (P type, N type), Diode, Zenor Diode, Trasistor, Mosfet की कार्य प्रणाली। Rectifier circuit (Semi, full, Bridge Rectifier), Resistance Colour Coding, Fundamental of Bands. 2. Integrated Ciruit के सिद्धान्त
20 अंक
Semi Conductor Material, P type & N type doping Basic circuit board, IC, PCB, RAM, ROM, Analog और Digital Singnal के बीच में अन्तर Binary Coding. 3. Communication System(संचार पद्धति) का परिचय
20 अंक
Logic Gates, Moduling techniques, Amplitude Modulation, Frequency modulation, Time division, Multiplexing, GSM, technique, CDMA तकनीक, द्वितीय और तृतीय जनरेसन का परिचय।
Smart Phone का परिचय।
द्वितीय प्रश्नपत्र
Hardware(भाग-1)
1. मोबाइल के मुख्य भाग-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
सामान्य जानकारी-Ringer, Vibrator, Microphone, Speaker, Keypad, Scrolling switch, Joy Stick, LCD और LED का परिपथ और कार्यप्रणाली। बैटरी के प्रकार, Battery connector और चार्जिंग Connector की जानकारी। 2. मोबाइल के मुख्य भाग-2
20 अंक
विद्युत प्रबन्धन, प्रोसेसर, बेस बैंड प्रोसेसर, चार्ज सर्किट, आर0 एफ0 सर्किट, मेमोरी कीपैड बैकेलाइट, आडियो, ब्लूटूथ रेडियो, टी-फ्लैस कार्ड, कैमरा माड्यूल, X601 सेन्सर का कनेक्टर। 3. मोबाइल की Accessories
20 अंक
विभिन्न प्रकार के कैमरा का उपयोग Blue Tooth और Wi-Fi-, Ear Piece, Multimedia पद्धति VGA और Mega Pixel की जानकारी Outer data interface, Card reader अलग-अलग प्रकार की ICs की पहचान और उसकी जानकारी।
तृतीय प्रश्नपत्र
Hardware(भाग-2)
1. हार्डवेयर की कमियों का निस्तारण
पूर्णांक : 60
20 अंक
प्रयोग किऐ जाने वाले घटकों की शुद्धता की जाँच करना और उनका Specificationer से Diode, Zenor diode, Resistor, Capacitor, Indutor) SMD और उनके भागों का परीक्षण करना। SMD parts को बदलने में प्रयोग की जाने वाली सावधानियाँ। BGA तथा IC की Rebalance installations. 2. मोबाइल तकनीकी में प्रयोग होने वाले उपकरणों की जानकारी 20 अंक बैटरी बूस्टर और हॉट एयर गन की कार्यप्रणाली और उनका उपयोग। विभिन्न प्रकार के Soldering उपकरणों का प्रयोग करके Soldering desoldering करना। Jumpering तकनीक, चिप लेवल रिपेयर करना। Single layer और Multilayer PCB का परिचय। 3. मोबाइल की अन्य समस्याओं का निस्तारण
20 अंक
सिमकार्ड की समस्या (ERROR SIM or INSERT SIM) Mobile का Automatically turn off होना, Network की समस्या (NOT SHOWING NETWORK BAR) विभिन्न संदेश का डिस्प्ले- CALL ENDED होना और उसका अर्थ- LEMITED SERVICE NO ACCESS EMERGENCY CALL NO NETWORK FOUND NO SERVICE CALL FAILED SEARCHING DEAD HANDSET (TOTAL DEAD WATER LOCK), Problem in Hands Free Socket और LED की समस्या। विभिन्न प्रकार के मोबाइल सेट के फीचर्स का तुलनात्मक अध्ययन (NOKIA, LG, SAMSUNG)414 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
चतुर्थ प्रश्नपत्र
Software
1. फार्मेटिंग (Formating)
पूर्णांक : 60
20 अंक
फार्मेटिंग किसे कहते हैं? इसका अर्थ, इसके लिए प्रयुक्त आवश्यक निर्देश, आन्तरिक व वाह्य मेमोरी फार्मेटिंग के आवश्यक जानकारी, विभिन्न प्रकार के हैंडसेट की फार्मेटिंग के लिए आवश्यक निर्देश, भिन्न प्रकार के आपरेटिंग सिस्टम को फार्मेट करने की विधि। 2. डाउनलोडिंग व इन्सटालेशन
20 अंक
रिंगटोन, सिंगटोन, गेम, वालपेपर कनवर्टर, फाइल, डेक्शनरी इत्यादि की डाउनलोडिंग इण्टरनेट एवं ब्लूटूथ की सहायता से डाउनलोडिंग व इन्सटालेशन में आवश्यक सावधानियाँ एवं निर्देश। 3. अनलाकिंग
20 अंक
सिम लॉक, फोन लॉक, प्राइवेंसी लॉक की कार्यविधि एवं लॉकिंग का वर्णन, सिक्रेट कोड का प्रयोग, आई फोन अनलाकिंग।
पंचम प्रश्नपत्र
अत्याधुनिक मोबाइल तकनीकी
1- Single Band/Dual Band/Trai bandकी जानकारी
पूर्णांक : 60
20 अंक
Mobileकी क्षमता, मोबाइल के विभिन्न मॉडल और उनके प्रकार का तुलनात्मक अध्ययन, CDM। और GSMकी कार्यप्रणाली के बीच में तुलनात्मक अध्ययनSecret Codeका इस्तेमाल। 2. अत्याधुनिक तकनीक-1
20 अंक
Dongles Upgradation, Complete Software repairing using advance Dongles (On Line/Off Line), SMD Station Practice, Safety technique on replacing SMD parts, Mobile Technique esa Voice Singat Structureका विवरण।Androidका उपयोग। 3. अत्याधुनिक तकनीक (कार्यप्रणाली व निस्तारण)-2
20 अंक
• अत्याधुनिक नवीनतम Features o Application • जम्फर तकनीक व सेटिंग • अत्याधुनिक Trouble Shootingतकनीक का प्रयोग व कार्यप्रणाली • विभिन्न प्रकार के मदरबोर्ड (नवीनतम) की कार्यप्रणाली • ESD सुरक्षा • हार्डवेयर व साफ्टवेयर तकनीक का निस्तारण • टै्रकिंग से निस्तारण
प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम की सूची
1. हार्डवेयर
1. जम्परिंग तकनीक 2. स्क्रू ड्राइवर, सोल्डरिंग एवं आयरिंग का प्रयोग 3. विभिन्न सेक्शन की सर्किट की चेकिंग (चार्जिंग), की पैड सेक्शन, डिस्प्ले सेक्शन, स्पीकर, कैमरा, माइक आदि।
4. विभिन्न प्रकार की बैटरी पहचान व मापन।
5. मोबाइल के L.C.D.तथा L.E.D. को लगाना। 6. विभिन्न प्रकार के मैमोरी की पहचान करना।
2. साफ्टवेयर
1. विभिन्न प्रकार के साफ्टवेयर, रिंग टोन, सिंग टोन आदि को डाउनलोड करना। 2. फाइलों को ट्रांसफर करना। (P.C. to Mobile) 3. P.U.K. कोड एवं पासवर्ड तोड़ना 4. इन्टरनेट के प्रयोग से विभिन्न प्रकार के नये फीचर को जोड़ना एवं डाउन लोड करना।
5. ब्लू टूथ, वाई-फाई व अन्य नये तकनीकों का प्रयोग करना।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 415प्रोजेक्ट की सूची
साफ्टवेयर
1. रिंगटोन व सिंगटोन का तुलनात्मक अध्ययन करना। 2. विभिन्न प्रकार के लाकिंग व अनलाकिंग का प्रयोग। 3. सेट को असेम्बल करना। 4. सुरक्षा व प्रबन्धन। 5. इन्टरनेट का प्रयोग।
हार्डवेयर
1. LCDकी गुणवत्ता एवं लाभ। 2. LED की गुणवत्ता एवं लाभ। 3. जम्फरिंग तकनीक व उनकी कार्यविधि। 4. पावर केबिल सप्लाई की कार्य विधि एवं इसके लाभ।
5. इण्टरनेट की कार्य विधि व उनके लाभ।
नोट :-
उपरोक्त प्रोजेक्ट के अतिरिक्त विषय से सम्बन्धि अध्यापक/अध्यापिकायें नए प्रोजेक्ट भी जोड़ सकते हैं।
Mobile Repairing Tools
1. Screw Driver (Kit) 2. Multi meter 3. Soldering Iron 4. Magnifier 5. Hot Air Gun/SMD 6. Soldering Paste 7. Chimti 8. Brush 9. Faceplate 10. Suction Cup 11. Connector 12. Cable 13. Block Diagram of Different Mobile Set 14. Books (Mobile Repairing & Maintenance) 15. Computer System (For Installing/Downloading Software, Ringtone, Sing tone & Driver etc.) 16. Cleanner 17. Nose Plass 18. Plucker.
(40) टे्रड-पर्यटन एवं आतिथ्य कक्षा- 12 प्रथम प्रश्नपत्र 300 अंक 400 अंक
1. सैद्धान्तिक 2. प्रयोगात्मक 1. सैद्धान्तिक
न्यूनतम प्राप्तांक प्रथम प्रश्न पत्र 60 अंक 20 अंक द्वितीय प्रश्न पत्र 60 अंक 20 अंक तृतीय प्रश्न पत्र 60 अंक 300 20 अंक 100 चतुर्थ प्रश्न पत्र पंचम प्रश्न पत्र
60 अंक 20 अंक 60 अंक 20 अंक 2. प्रयोगात्मक
200
400
आन्तरिक मूल्यांकन 200 अंक वाह्य मूल्यांकन 200 अंक416 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
प्रथम प्रश्नपत्र
पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग-परिचय
An Introduction to Tourism & Hospitality Industry पूर्णांक : 60
1. आवास-अवधारणा, प्रकार, रूप व महत्व, भारत में पर्यटक आवास की बदलती आवश्यकताएँ। होटलों का इतिहास व प्रकार, होटल उद्योग का विकास, होटल उद्योग में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की भूमिका।20 अंक Accomodation : Concept, Types, Form and Significance, Changing pattern of Accomodation Needs in India. History of Hotels, Types of Hotels, Growth of Hotel Industry, Role of Public and Private Sector in Hotel Industry.
2. भारत में पर्यटन व आतिथ्य उद्योग के विकास में तकनीकी की भूमिका, कम्प्यूटरीकृत आरक्षण लाभ तथा
20 अंक सीमाएँ। Role of Technology in growth of Tourism and Hospitality Industry in India. Computerized Reservation System-Advantage and Limitations.
3. पर्यटन एवं आतिथ्य उद्योग में नैतिक एवं विधिक मुद्दे।
20 अंक Ethical and Legal's sues Tourism and Hospitality Industry.
द्वितीय प्रश्नपत्र
यात्रा एवं पर्यटन में आधार पाठ्यक्रम
Fundamentals of Travel & Tourism पूर्णांक : 60
20 अंक
1. भारत में यातायात के प्रमुख साधान-
Major Transportation Systems in India. (अ) वायुयातायात-प्रमुख सरकारी तथा प्राइवेट एअर लाइन्स
Air Transport&Main Public and Private Air Lines.
(ब) प्रमुख पर्यटक रेलगाड़ियाँ-पैलेस आन ह्वील, डेकन ओडीसी, बुद्धिस्ट स्पेशल आदि।
Major Tourist Trains-Palace on Wheels, Deccan Odyssy, Buddhist special etc. (स) सड़क यातायात सामान्य परिचय
Road Transport-General Introduction.
2. पर्यटन में उभरते हुए आयाम तथा प्रवृत्तियाँ-
20 अंक Emerging Dimension and Trends in Tourism- MICEपर्यटन, व्यावसायिक पर्यटन, चिकित्सा, खेल तथा विशेष रूचि पर्यटन आदि। MICE (Meeting, Incentive, Conference, Exhibition), Business Tourism, Medical Tourism, Sports Tourism and special Area Interest Tourism etc.
3. पर्यटन संगठन
20 अंक Tourism Organisations. भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन का संक्षिप्त परिचय। विश्व पर्यटन संगठन(WTO), International Association of Travel Agents का संक्षिप्त परिचय। (IATA) TAAI (Travel Agents Association of India)और IATO (Indian Association of Tour Operators) o FHRAI (Federation of Hotel & Restaurant Association of India)का संक्षिप्त परिचय।
तृतीय प्रश्नपत्र
यात्रा एवं पर्यटन : व्यवसाय तथा संचालन
Travel and Tourism : Business & Operation पूर्णांक : 60
20 अंक 1. पैकेज टूर की अवधारणा, परिभाषाए लाभ तथा सीमाएँ। टेलरमेड तथा रेडीमेड यात्रा। आइटिनरेरी बनाना। टूर कॉस्टिंग। यात्रा दस्तावेज/अभिलेख-वीजा, पासपोर्ट, स्वास्थ्य बीमा, यात्रा बीमा, बैगेज नियम, टैक्स तथा अन्य। Package Tour-Concept, Definition, Advantage and limitations Tailor made and Readymade Tours. Itinerary Preparation. Tour Costing. Travel Documents : Visa, Passport, Health Insurance, Travel Insurance, Baggage Rules. Tax related formalities etc.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 41720 अंक 2. गाइडों और यात्रा मार्ग निर्देशकों की परिभाषा, गाइड की भूमिका, गाइडिंग एक तकनीक, यात्रा का मार्ग निर्देशन। पर्यटन सूचना विभिन्न स्रोत-सूचना का महत्व सूचना के स्रोत सरकारी एजेसियाँ, निजी एजेंसियाँ प्रचार माध्यम। Guides and Escorts-Concept, Definition, Role of Guides, Guiding-a Technique, Escorting. Tourist Information-Different Sources & their significance-Government Agencies Private Agencies publicity media.
3. टे्रवेल एजेन्सी, होटल, एअर लाइन्स परिवहन तथा पर्यटन के अन्य घटकों में आपसी सम्बन्ध तथा व्यवस्था।
20 अंक पर्यटन व्यवसाय में हो रहे बदलाव तथा चुनौतियों का अध्ययन। Linkages & Arrangement with hotels, airlines and transport agencies and other segments of tourism sector. Study of changing pattern and challenges in tourism sector.
चतुर्थ प्रश्नपत्र पूर्णांक : 60
हाउस कीपिंग-House Keeping
1. Introduction to Front Office.फ्रंट ऑफिस का परिचय
10 अंक • Organization.संगठन • Duties and Responsibilities.कार्य एवं जिम्मेदारियाँ • Various Sections-विभिन्न प्रकार के अनुभाग
2- Cleaning Equipment.सफाई के उपकरण
20 अंक • Cleaning Agents-सफाई में काम आने वाले पदार्थ • Stain Removal-धब्बों को छुड़ाना • Cleaning Procedure-सफाई की प्रक्रिया • Linen-लिनन • Laundry-लाण्ड्री • House Keeping Terminology-हाउसकीपिंग शब्दावली
3. Uniform Room-यूनीफार्म कक्ष
20 अंक • Types of Services : (Morning, Evening, Second, Maid Cart)-सर्विस के प्रकार (सुबह, शाम, द्वितीय, मेड कार्ट)
• Types of Rooms-कक्ष के प्रकार • Public Area-सार्वजनिक स्थल • Weekly/Seasonal Cleaning Procedure-साप्ताहिक/मौसमी सफाई प्रक्रिया
4. V.I.P. Room Arrangements-वी0आई0पी0 कक्ष व्यवस्था 10 अंक • Par Stok :पार स्टॉक • Pest Control :पेस्ट नियंत्रण • Waste desposal :अपशिष्ट निस्तारण
पंचम प्रश्नपत्र पूर्णांक : 60
Food & Beverage Production
1. Introduction to Food Production-खाद्य उत्पादन का परिचय 12 अंक • Organization Chart-संगठन लेखा चित्र • Duties & responsibilites.कार्य और जिम्मेदारियाँ • Layout of Kitchen (Small, large)-किचेन लेआउट (छोटे व बड़े) • Utencils and Equipment.बर्तन व उपकरण
2. Definition of Cooking.पकाने की विधियाँ
12 अंक
53 ङ418 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4
• Types of Herbs, Spices, Seeds.हब्र्स के प्रकार, मसाले, बीज
• Stock-स्टॉक
• Sauce-सॉस
• Vegetable cuts.सब्जियों के कट
3. Egg Cookery-एग कुकरी 24 अंक
• Fish (Selection, cut,Types)-मछली (चयन, कट, प्रकार)
• Poultry (Selection, Cut, Types)-पोल्ट्री (चयन, कट, प्रकार)
• Mutton (Selection, cut, Types)-मटन (चयन, कट, प्रकार)
• Sausages-सॉसेज
• Sandwich-सैन्डविच
• Salad-सलाद
• Dressing and Seasoning.डे्रसिंग व सीजनिंग
• Bakery & Confectionery-बेकरी व कन्फेक्शनरी
• Recipes (Indian & Continental)-रेसीपी (भारतीय व कॉन्टीनेन्टल)
4. Menu Planning.मैन्यू योजना 12 अंक
• Catering Cycle.कैटरिंग चक्र
• Singnificance of Uniforms in Kitchen.किचन में यूनिफार्म का महत्व
• Food & Beverage Production Terminology.खाद्य व पेय उत्पादों की शब्दावली
Instructions for Practical
Each student shall go on the Industrial job training in an industry like hotel, air lines, travel agencies, museaum Govt. Tourism Office etc for 4 to 6 weeks. The student will get a certificate from training providers and will prepare a detailed Report of training which will be evaluated for Max 50 Marks by external examiner in the presence of Internal examiner Viva Voce on the job training report will be for max 50 marks and that will be conducted by External Examiner in the presence of Internal Examiner.
Practical on the spot on hotel/Catering/Tourism etc. will be carried out for max 100 marks by external examiner.
For Internal examination-5 periodical Tests/Practical/assignments etc. may be held as per college convenience at certain regular interval for max 20 Marks each, total 100 marks. While a detailed dissertation work assigned by Internal Examiner will be submitted by students and it will be evaluated for max 100 marks.
Summary of Practical Exam
External - Industrial Training Report - 50
Exam - Viva on Report - 50
On the spot Practical - 100
Total = 200
Internal Periodical Test 5 @ 20 marks - 100
Exam Dissertation work - 100
Total= 200
Suggestions for Practical/Assignment
Dissertation work may be done on the theme of Govt. policies related with hotel, airlines, travel trade etc. Museums, Fort, Palaces, tourist attractions, fairs & Festival, Kumbha Mela, Ganga, Yamuna, Golden Triangle, World Haritage Sites, Histroical monuments, Heritage Hotels, Amusement Parks, Wild life National Parks, Bird Sancturary, Sport Tourism (Common wealth Games, formula 1 Race), Olympic etc. Other on the spot practical/Test may include Practicals related with Food production, service, Food and Bevarage, House keeping or making of tourism brouchures (Graphic & hand made), any model or exhibition or chart, photography, videography (Audio visual) presentation of tourism product, event, activities etc.
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 419प्रयोगात्मक कार्य
[A] House Keeping
400 अंक 1. विभिन्न प्रकार के सतह पर क्लीनिंग एजेन्टों का प्रयोग। 2. ब्रासों करना। 3. बेड मेकिंग। 4. डी0एन0डी0 रूम को हैंडिल करना। 5. मॉर्निंग सर्विस, ईवनिंग सर्विस और सेकेण्ड सर्विस 6. डी0एल0 रूम प्रोसिजर 7. Lost -Found प्रोसिजर
[B] Food Production
1. विभिन्न प्रकार के कट दर्शाना (फिश, मटन, चिकन) 2. पाँच कोर्स मैन्यू 4 लोगों के लिए बनाना। 3. विभिन्न सलाद बनाना (रशियन) 4. कढ़ाई पनीर, मलाई कोफ्ता, मटर पनीर, शाही पनीर, चिकन दो प्याजा, मटन रोगन जोश, तन्दुरी चिकन इत्यादि।
5. सूप बनाना, चिक, टोमैटो, मुलगत्वानी इत्यादि। 6. केक, बिस्कुट, ब्रेड इत्यादि। 7. फ्रूट पंच, शेक, मॉकटेल, इत्यादि। 8. बेज मन्चूरियन, स्वीट तथा सॉर (खट्टा) सूप बनाना इत्यादि।
उपकरणों की सूची
[A] FOOD PRODUCTION
1. Three burner cooking range 2. Chinese cooking range 3. Tandoor 4. Single burner cooking range 5. 3 or 4 Stainless Steel Tables 6. A Salamander 7. A Griller 8. A Toaster 9. An Oven
10. Chopping Boards 11. Different Types of Knives
[B] FOOD & BEVERAGE SERVICES 1. 3 or 4 Restaurant Table Lay out with chair, Table Cloths, Naprons, serviette, Cruet set, Bud Vases. 2. Different types of Crockery like full plates, Quarter plates, Dessert plates, Cups & Saucers, Cutler like AP Spoon, AP knives, AP Forks, Tea Spoon, Dessert spoons & Dessert Forks, Glass wares like Water Goblets, Hi-Balls, Juice Glasses, Beer Goblet, Pilsner, Roly Poly, OTR Glass, Brandy Balloon, tom Collins, Red Wine Glass, White wine Glass, Champagne Sauceer, Champagne Tulip, etc. 3. A side station. 4. Some bottles of wines, scoeches, Rum, Gin, Vodka and Beer (for demo purpose and to show the service styles)
5. A peg measures 6. A wine opener, bottle openers
[C] FRONT OFFICE
1. 5 wall clocks for different country timings 2. A reception counter where students can stand keep the front office documents. 3. A computer.
420 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4[D] HOUSE KEEPING
1. Some brooms and brushes. 2. Mops with handle. 3. Vacuum cleaner. 4. Some detergents and chemicals for washing and cleaning purpose. 5. Maids trolley for housekeeping training and to keep the items. 6. Glass cleaner/Toilet Cleaner things.
[E] HOSPITALITY, TRAVEL & TOURISM
1. Map-India world and local maps. 2. Related Guide Book. 3. Camera-still and Video. 4. List and photo of fort. palace, historical monuments, National park and bird sanctuary.
व्यवसायिक वर्ग
100 अंक अधिकतम अंक : 400 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 200 समय वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन-200 अंक निर्धारित अंक (क) दो बड़े प्रयोग-बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2×40) 80 अंक (ख) दो छोटे प्रयोग-छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2×20) 40 अंक 40 अंक (ग) मौखिकी : प्रयोगों की सूची के आधार पर (घ) प्रैक्टिकल नोटबुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन 40 अंक आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन-200 अंक (क) सत्रीय कार्य सत्रीय कार्य विभाजन : (i) उपस्थिति अनुशासन 10 अंक (ii) लिखित कार्य 20 अंक (iii) दो वर्षों में पाँच टेस्ट लिए जायेंगे (5×10) 50 अंक (iv) मौखिकी 20 अंक (ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं शैक्षणिक भ्रमण द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
(41) टे्रड-आई0टी0/आई0टी0ई0एस0
कक्षा- 12
पूर्णांक : 60
उद्देश्य
आज के विज्ञान जगत में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का अभूतपूर्व स्थान है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के विभिन्न आयाम सामाजिक रूप से प्रतिस्थापित हो चुके हैं। जैसे मोबाइल इन्टरनेट आदि। देश को डिजिटल इंडिया का स्वरूप देने में इनका विशेष योगदान अवश्यम्भावी है। सूचना प्रौद्योगिकी मूलतः व्यवहारिक ज्ञान पर आधारित है एवं इसके अनेकों उपयोग विश्वव्यापी है।
रोजगार के अवसर
सूचना एवं प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को रोजगार एवं स्वरोजगार की, असीमित सम्भावनायें बन सकती हैं। इस विषय के अध्ययन व प्रयोग से छात्र/छात्रायें तकनीकी रूप से आत्मनिर्भरबन सकते हैं। उदाहरण स्वरूप साफ्टवेयर कम्पनियों में तकनीकी सदस्य के रूप में योगदान देना, बिजनेस मार्केंटिंग में रोजगार के अवसर इत्यादि।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 421पाठ्यक्रम
इस ट्रेड में तीन-तीन घण्टे का पांच प्रश्न पत्र और प्रयोगात्मक परीक्षा भी होगी। अंको का विभाजन निम्नवत् होगा-
300
100
सैद्धान्तिक पूर्णांक 1-प्रथम प्रश्न पत्र 60 2-द्वितीय प्रश्न पत्र 60 3-तृतीय प्रश्न पत्र 60 4-चतुर्थ प्रश्न पत्र 60 5-पंचम प्रश्न पत्र 60
उत्तीर्णांक 20 20 20 20 20
प्रयोगात्मक
कुल 400 अंको की होगी। अंको का विभाजन निम्नवत् रहेगा- (1) आन्तरिक परीक्षा - 200 अंक (2) वाहय परीक्षा - 200 अंक
टीप
परीक्षार्थियों को प्रत्येक लिखित प्रश्न पत्र में न्यूनतम उत्तीर्णांक 20 तथा योग में 33 प्रतिशत अंक एवं प्रयोगात्मक परीक्षा में 50 प्रतिशत उत्तीर्णांक पाना आवश्यक है।
प्रथम प्रश्न-पत्र
(सूचना प्रौद्योगिकी)
(एडवान्स)
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
ऑपरेटिंग सिस्टम का उद्देश्य एवं कार्य, ऑपरेटिंग सिस्टम का उद्भव, आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास, माइक्रोसाफ्ट विंडोज का परिचय, लाइनेक्स एन्ड्रॉयड, बूटिंग प्रॉसेस। इकाई-2
20 अंक
स्प्रेडसीट, ब्लैंक अथवा नयी वर्कबुक को खोलना, सामान्य संगठन, हाइलाइट्स एवं मेन फंक्शन्स, होम, इन्सर्ट, पेज लेआउट, सूत्रों, एक्सेस हेल्प फंक्शन का उपयोग, क्वीक एसेस टूलबार की कस्टमाइजिंग करना, टेम्पल्ट्ेस का प्रयोग करना और बनाना, राइट माउस क्लिक, सेविंग, पेज सेट अप एवं प्रिंटिंग, हेडर एवं फुट्रस का प्रयोग। इकाई-3
20 अंक
पावर प्वांइट प्रस्तुतीकरण, मूलभूत प्रस्तुतीकरण को बनाना और बिल्डिंग ब्लॉक्स करना। टेक्सट, थीम एवं स्टाइल्स, चाट्र्स, ग्राफ्स एवं टेबल्स के साथ कार्य करना।
द्वितीय प्रश्न-पत्र
(I T इनेबल सर्विसेस)
(एडवान्स)
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
एक्सेस बेसिक्स, डाटाबेस संरचना, टेबल्स, कीज, रिकार्ड में रूपान्तरण, डाटाबेस का निर्माण, क्यूरीज परिभाषित करना, क्यूरीज बनाना एवं रूपान्तरित करना, मल्टिपल टेबल क्यूरीज को बनाना। इकाई-2
20 अंक
फार्मस एवं रिपोटर््स, फार्म पर कार्य, सॉर्ट, रिट्रीव, डाटा विश्लेषण, रिपोर्ट पर कार्य, अन्य एप्लिकेसन पर एसेस।
इकाई-3
20 अंक
ICT एवं एप्लिकेशन, कम्युनिकेशन तंत्र का परिचय, डिवाइसेज, सुविधाएं एवं विभिन्न डिवाइसेज की तुलना। तृतीय प्रश्न-पत्र (वेब प्रोग्रामिंग) (एडवान्स)
इकाई-1
पूर्णांक : 60
20 अंक
आबजेक्ट्स, क्लासेज एवं मेथड्स, कन्शट्रक्टिंग आब्जेक्ट्स, आब्जेक्ट रिफेरेन्सेज, जावा क्लासेज, स्टैटिक मेथड्स, स्टैटिक फील्ड, स्कोप, स्ट्रिंग्स का परिचय, मेथड्स, मेथड ओवर लोडिंग, कन्सट्रक्टर ओवर लोडिंग, दिस (जीपे) का प्रयोग। इकाई-2
20 अंक
एक्सेपशन, हैन्डलिंग, एक्सेपशन का महत्व, थ्रोइंग एक्सेपशन, चेक्ड एवं अनचेक्ड एक्सेपपशन, फाईल एवं स्ट्रीक्स, स्ट्रीक्स, रीडर्स एवं ग्रैफिक्स का परिचय। इकाई-3
20 अंक
आधुनिक जावा, जावा बीन्स एवं एप्लेट्स, जावा, डाटा बेस कनेक्टीविटी।
422 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4चतुर्थ प्रश्न पत्र
(IT बिजनेस एप्लिकेशन)
(एडवान्स)
इकाई-1
पूर्णांक 60
20 अंक साइबर सुरक्षा, नेटवर्क एवं ट्रान्सेकशन सुरक्षा में साइबर सुरक्षा के इशूज, क्रिप्टोग्रैफी एवं क्रिप्टानालीसिस, सिमेट्रिक एवं पब्लिक की (Key) क्रिप्टोग्राफी सिस्टम, अथेन्टिकेशन प्रोटोकाल, डिजिटल प्रमाण पत्र, डिजिटल हस्ताक्षर, ई-मेल सुरक्षा। इकाई-2
ई-बैकिंग के परिचय, NEFT, RTGS, फारेन ट्रेड, मोबाइल बैकिंग और ई बैकिंग के सुरक्षा तथ्य। 20 अंक इकाई-3
मैनेजिरयल बिहेवियर का संगठनात्मक प्रारूप, स्तर का आर्गेनाइजेशनल, कामर्शियल परिचय। 20 अंक
पंचम प्रश्न पत्र
(आधुनिक संचार तन्त्र)
इकाई-1
पूर्णांक 60
साइबर लॉज ;Cyber laws)का परिचय, भारत में साइबर लॉ वेब में सुरक्षा सम्भावना,
20 अंक बिजनेस ओरिएन्टेड एप्रोच आफ इफेक्टिव वेबसाइट्स। इकाई-2
वायलेस संचार तंत्र का परिचय, सेलुलर विचारधारा, मोबाइल, रेडियो, प्रोपेगेशन, GSM नेटवर्क
20 अंक आर्किटेक्चर, मोबाइल डॉटा नेटवर्कस, CDMA डिजिटल सेलुलर स्टैण्डर्ड। इकाई-3
XML का परिचय, फ्रन्ट पेज/डी्रमव्यूवर (Dream Vivewer) डिजाइन करना फ्लैश के मदद से एनिमेशन का परिचय तैयार करना, वेब पब्लिशिंग एवं वेबसाइट होस्टिंग।
20 अंक
प्रयोगात्मक 400 अंक
1-म्गबमस का विस्तृत प्रयोगात्मक अध्ययन कोर/ब्लू। 2-पावर प्वांइट का विस्तृत प्रयोगात्मक अध्ययन। 3-JAVA का प्रयोग करते हुये सरल प्रोग्रामिंग करना और परीक्षण करना।
उपकरणों की सूची
हार्डवेयर- - कम्प्यूटर - प्रिन्टर -स्कैनर - मॉडम - इन्टरनेट कनेक्शन -UPS साफ्टवेयर Windows और लाइनेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम- -MS Office -JAVA -HTML इत्यादि।
(42) ट्रेड-स्वास्थ्य देखभाल
कक्षा-12
प्रथम प्रश्नपत्र
चिकित्सीय अभिलेख तथा अभिलेखीकरण
पूर्णांक : 60
इकाई-1
10 अंक
• निर्णय विश्लेषण में अभिलेखीकरण का महत्व रोगी की दशा के अभिलेखीकरण के आधार पर आगे की कार्यवाही के सम्बन्ध में निर्णय लेना। • गुणवत्तापूर्ण सेवाओं में अभिलेखीकरण का महत्व।
भाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 423इकाई-2
10 अंक
• चिकित्सीय अभिलेखों को सहेजने में गोपनीयता का महत्व। • चिकित्सीय अभिलेखों में तिथि तथा समय नोट किये जाने का महत्व (विशेष रूप से रोगी की मृत्यु से जुड़े कानूनी मुद्दों में)
इकाई-3
10 अंक
• LAMA (Leaving Against Medical Advice) की व्याख्या। • पारी ड्यूटी (Shift Duty) बदलने पर नोट्स का महत्व (एक पारी में एकत्र सूचना को दूसरी पारी के कर्मचारी को सौंपना)
• रोगी के स्थानान्तरण तथा मुक्त करने (discharge) सम्बन्धी नोट्स का उद्देश्य।
इकाई-4
10 अंक • चिकित्सालयों द्वारा सहेजे जाने वाले अभिलेख तथा चिकित्सा विधिक(medicolegal) एवं यातायात दुर्घटना के मामलों में इनका महत्व।
इकाई-5
10 अंक
• सामान्य ड्यूटी सहायक के लिये समय प्रबन्धन का महत्व। • समय प्रबन्धन के लिये कार्य की प्राथमिकता तय करना तथा इसकी तकनीके।
इकाई-6
10 अंक
• तनाव की परिभाषा तथा चिकित्सालय के वातावरण में तनाव प्रबन्धन के तरीके। • सामान्य ड्यूटी सहायक के लिये आवश्यक तनाव प्रबंधन कौशल
द्वितीय प्रश्न पत्र
वृद्धों तथा शिशुओं की देखभाल में सामान्य ड्यूटी सहायक की
भूमिका
इकाई-1
पूर्णांक : 60
10 अंक
• वृद्धावस्था के परिचय के साथ विभिन्न आयु समूहों का वर्णन। • वृद्धावस्था में मानव शरीर में आने वाले परिवर्तन।
इकाई-2
10 अंक
• वृद्धजनों की मूलभूत आवश्यकताएं तथा उनकी देखभाल किये जाने के कारण। • वृद्धजनों की सुरक्षा सम्बन्धी आवश्यकताएँ
इकाई-3
10 अंक
• वृद्धजनों की भोजन एवं तरल पदार्थ सम्बन्धी आवश्यकताएँ (पोषण) • वृद्धजनों को बेहतर तरीके से भोजन कराने के लिये आवश्यक बातें।
इकाई-4
10 अंक
• वृद्धावस्था में सामान्य स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे- माँसपेशियों एवं हडि्डयों की कमजोरी, चलने में कठिनाई, स्मृतिह्यास आदि।
• त्वचा, नाखून, दृष्टि, श्रवण सम्बन्धी समस्याएँ।
इकाई-5
10 अंक
• 18 वर्ष से पूर्व की विभिन्न अवस्थाएं जैसे नवजात शिशु शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था।
• शिशुओं तथा बालकों की अधिगम क्षमताओं (learning abilities) की विभिन्न अवस्थाएँ।
इकाई-6
10 अंक
• नवजात शिशुओं एवं बालकों की पोषण एवं जलयोजन (hydration) सम्बन्धी आवश्यकताएँ। • निम्न के संदर्भ में बालकों की सुरक्षा आवश्यकताएँ- आग, गिरना, नुकीली चीजें, छोटे खिलौने, छोटे खाद्य पदार्थ जैसे चना मूॅगफली आदि जो बच्चे नाक या कान में डाल लेते है।
424 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4तृतीय प्रश्न पत्र
जैव अपशिष्ट प्रबन्धन
पूर्णांक : 60
इकाई-1 10 अंक
• जैव चिकित्सीय अपशिष्ट। • चिकित्सालय कर्मियों तथा सामान्य जनों के संदर्भ में चिकित्सालय अपशिष्ट प्रबंधन का महत्व। • पर्यावरण संरक्षण में जैव चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबन्धन की भूमिका।
इकाई-2
10 अंक
• जैव चिकित्सीय अपशिष्ट के स्त्रोत। • जैव चिकित्सीय अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले क्षेत्रों की पहचान-वार्ड तथा गहन चिकित्सा इकाई (ICU), ऑपरेशन कक्ष, प्रयोगशाला (पैथालॉजी, एक्स-रे)
इकाई-3 10 अंक
• जैव चिकित्सीय अपशिष्ट के निस्तारण की विधियाँ। • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा संस्तुत वर्ण कूट मापदण्डों (Colour coding Criteria) के अनुरूप अपशिष्ट के वर्ण कूअ मापदण्ड का महत्व।
इकाई-4 10 अंक
• जैव चिकित्सीय अपशिष्ट के परिवहन (transportation) की प्रक्रिया। • निम्न के निस्तारण में अन्तर। • (क) सामान्य अपशिष्ट - खाद्य पदार्थ, कागज, पॉलीथीन, दवाओं के रैपर (Wrapper) • (ख) जैव चिकित्सीय अपशिष्ट
इकाई-5 10 अंक
• चिकित्सालय अपशिष्ट प्रबंधन समिति के कार्य। • जैव चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन में चिकित्सा अधीक्षक तथा मैट्रन की भूमिका।
इकाई-6 10 अंक
• चिकित्सालय अपशिष्ट प्रबंधन हेतु विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों का प्रशिक्षण एवं इसका महत्व।
चतुर्थ प्रश्न पत्र
शल्य चिकित्सा कक्ष
पूर्णांक : 60
इकाई-1 10 अंक • शल्य चिकित्सा कक्ष का वर्णन। • शल्य चिकित्सा कक्ष योजना के उद्देश्य।
इकाई-2 10 अंक • शल्य चिकित्सा कक्ष के विभिन्न क्षेत्र (clean zone)तथा उनका महत्व।
(क) स्वच्छ क्षेत्र (clean zone) (ख) गंदा गलियारा (dirty corridor)
इकाई-3 10 अंक • शल्य चिकित्सा कक्ष के लिये आवश्यक विभिन्न वर्गों ( categorieे) के कर्मचारी। • शल्य चिकित्सा कक्ष में शल्य चिकित्सा तकनीषियन, नर्स तथा सामान्य ड्यूटी सहायक के कार्य।
इकाई-4 10 अंक • शल्य चिकित्सा कक्ष में उपकरणों के रख-रखाव की प्रक्रिया। • शल्य क्रिया ( surgery) के पूर्व • शल्य क्रिया के पष्चातभाग 4 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 425 इकाई-5 10 अंक • सूची प्रबंधन (inventory management) के संदर्भ में शल्य चिकित्सा कक्ष के रख-रखाव की नीति तथा प्रक्रिया।
• शल्य चिकित्सा कक्ष में शल्य क्रिया के प्रकरणों (cases) तथा जीवाणुनाषन (sterelization) का इकाई-6 10 अंक • शल्यक्रिया से पूर्व रोगी को तैयार करने में सामान्य ड्यूटी सहायक के कार्य। • कलाई पट्टी (wrist band) का महत्व तथा पट्टी पर अंकित की जाने वाली सूचनाएँ। • शल्यक्रिया के बाद की अवधि में सामान्य ड्यूटी सहायक द्वारा रोगी की देखभाल
पंचम प्रश्न पत्र
आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया में सामान्य ड्यूटी
सहायक की भूमिका
पूर्णांक : 60
इकाई-1 10 अंक
• आपदा एवं इसके प्रकार। • आपदा प्रबंधन का महत्व।
इकाई-2 10 अंक • आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरण, आपदा प्रबंधन संबंधी पद तथा चेतावनी संकेतक।
इकाई-3 10 अंक • आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (Emergency Response Team-ERT) का संगठन तथा भूमिका। • ERT के सदस्य। • ERT द्वारा प्रयोग किये जाने वाले उपकरण।
इकाई-4 10 अंक • बचाव तथा निष्क्रमण (evacuation)अभ्यास के लाभ। • बचाव तथा निष्क्रमण अभ्यास की विधियाँ
इकाई-5 10 अंक • आग की घटनाओं में बचाव की विधियाँ। • आग से निपटने के लिये चिकित्सालय में लगाए जाने वाले उपकरण। • चिकित्सालय में आग के कारण तथा आग बुझाने की विधियाँ।
इकाई-6 10 अंक • भूकम्प तथा बहुमंजिला इमारत के ढहने की स्थिति में समाज के लिये खतरे तथा हानियाँ। • बहुमंजिला आवासीय इमारतों में भूकम्प से बचने के लिये पहले से तैयारी करने के उपाय।
प्रयोगात्मक कार्य
पूर्णांक : 400
- चिकित्सालय में सुरक्षित रखे जाने वाले अभिलेखों के देखने/जानकारी प्राप्त करने के लिये चिकित्सालय का भ्रमण।
- OPD वार्ड, शल्य चिकित्सा कक्ष (OT) तथा ICU में रखे जाने वाले अभिलेखों का प्रतिदर्ष (sample copy) बनाना।
- मनुष्य की विभिन्न अवस्थाओं को प्रदर्षित करने के लिये चार्ट बनाना। - वृद्ध जनों की सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की फाइल बनाना। - बच्चों की सुरक्षा आवश्यकताओं को प्रदर्षित करने के लिये चित्र बनाना/चिपकाना। - जैव अपशिष्ट प्रबंधन हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित Colour Coding Criteria की फाइल बनाना।
54 ङ426 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 4 - सामान्य अपशिष्ट तथा जैव चिकित्सीय अपशिष्ट के निस्तारण में अन्तर प्रदर्षित करने के लिये चार्ट बनाना।
- शल्यक्रिया कक्ष की कार्यप्रणाली देखने के लिये निकट के चिकित्सालय का भ्रमण करना। - शल्यक्रिया कक्ष में कर्मचारियों के कर्तव्यों का चार्ट बनाना। - प्रयोगात्मक फाइल में रिस्ट बैण्ड चिपकाना और इसका वर्णन करना। - निकट के अग्निशमन केन्द्र(Fire Station) का भ्रमण करना। - आपदा से बचाव कीMock Drill तथाERTकी भूमिका। - बचाव कार्य में आवश्यक उपकरणों की सूची बनाना। - ऑपरेशन कक्ष में उपकरणों की देखभाल- विभिन्न पदार्थों से बने उपकरण जैसे प्लास्टिक कीsuction tube, धातु के बने शल्य क्रिया उपकरण, रूई, गॉज, पट्टी इत्यादि का रखरखाव तथा इन्हें विशाणुहीन/विसंक्रमित (sterilize) करने सम्बन्धी प्रयोग।
- शल्यक्रिया से पूर्व मरीज को शल्यक्रिया हेतु तैयार करना- - चिकिल्सालय के कपड़े पहनाना। शल्यक्रिया वाले अंग की शेविंग करना। -intravenous cannulaफिक्स करना। - उपरोक्त से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। - छात्र द्वारा Wrist bandपर आवश्यक सूचनाएं लिखना। - आपदा प्रबंधन- आग, भूकम्प, इमारत गिरने की स्थिति में छात्रों द्वारा बचाव कार्य का प्रदर्शन।
&WHO ds Colour Coding मानकों के अनुसार विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों को अलग करना।
व्यावसायिक वर्ग
अधिकतम अंक-400 न्यूनतम अंक-200 समय वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन-200 अंक निर्धारित अंक (क) दो बड़े प्रयोग-बड़े प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2 × 40)। 80 अंक (ख) दो छोटे प्रयोग-छोटे प्रयोगों की सूची के प्रत्येक खण्ड से एक-एक (2 × 20)। 40 अंक 40 अंक (ग) मौखिकी प्रयोगों की सूची के आधार पर। 40 अंक (घ) प्रैक्टिल नोटबुक एवं विभिन्न प्रपत्रों का संकलन।
100 अंक आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन-200 अंक (क)सत्रीय कार्य सत्रीय कार्य विभाजन-
(i) उपस्थिति अनुशासन (ii) लिखित कार्य (iii) दो वर्षों में पांच टेस्ट लिए जायेंगे (5 × 10)। (iv) मौखिकी
10 अंक 20 अंक 50 अंक 20 अंक (ख) औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं शैक्षणिक भ्रमण द्वारा प्रदत्त श्रेणी के आधार पर 100 अंक व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज।
पी0एस0यू0पी0-41 हिन्दी गजट-भाग 3-2025 ई0।
मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज।
रजिस्टर्ड नं०-ए०डी०-4 लाइसेन्स सं०-डब्ल्यू०पी०-41 (लाइसेन्स्ड टू पोस्ट बिदाउट प्रीपेमेन्ट) प्रयागराज, शनिवार, 11 जनवरी, 2025 ई० (पौष 21, 1946 शक संवत्)
भाग 8 नगरपालिका परिषद्, नगर पंचायत, सरकारी कागज-पत्र, दबाई हुई रूई की गांठों का विवरण-पत्र, जन्म-मरण के आंकड़े, रोगग्रस्त होने वालों और मरने वालों के आंकड़े, फसल और ऋतु सम्बन्धी रिपोर्ट,
बाजार-भाव, सूचना, विज्ञापन इत्यादि।
NOTICE
No Legal Responsibility is accepted for the Publication of Advertisements/Public Notices in this Part of the Gazette of Uttar Pradesh. Persons Notifying the Advertisements/Public Notices will remain Solely, Responsible for the Legal Consequences and also for any other Misrepresentation etc.
By Order, Director.
कार्यालय, नगरपालिका परिषद बांगरमऊ-उन्नाव
22 नवम्बर, 2023 ई0
विविधकर (शुल्क) उपविधि नियमावली-2023
सं0 1828/विविधकर शुल्क उपविधि/2023-24-उ0प्र0 अधिनियम, 1916 की धारा-298 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियाें का प्रयोग करते हुये नगरपालिका परिषद, बांगरमऊ द्वारा विविध कर (शुल्क) उपविधि नियमावली-2023 उपविधि नगर पालिका परिषद बांगरमऊ-उन्नाव द्वारा नगर पालिका की सीमा के अन्तर्गत विविध कर शुल्क उपविधि नियमावली 2023 प्रस्तावित करते हुए नगर पालिका परिषद बांगरमऊ बोर्ड द्वारा दिनांक 08 सितम्बर, 2023 प्रस्ताव संख्या 03 द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया। उपरोक्त नियमावली धारा-301 के अन्तर्गत प्रकाशन के पश्चात उसके किसी बिन्दु या सभी बिन्दुओ पर किसी व्यक्ति/समूह को आपत्ति हो या सुझाव होे तो अपनी लिखित आपत्ति/सुझाव नगर पालिका कार्यालय में प्रकाशन तिथि के 30 दिन के अन्दर प्राप्त करा सकता है। तत्क्रम में दैनिक समाचार-पत्र हिन्दुस्तान दिनांक 23 नवम्बर, 2023 एवं अमर उजाला दिनांक 23 नवम्बर, 2023 को प्रकाशित कराकर 30 दिवस के अन्दर आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित किया गया। निर्धारित समयावधि 30 दिन के अन्दर प्राप्त आपत्तियों को दिनांक 26 दिसम्बर, 2023 को सुना गया। प्राप्त आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण किया गया।
तत्क्रम में नगर पालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा बोर्ड दिनांक 18 जनवरी, 2024 प्रस्ताव संख्या 03 सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गयी। निम्नलिखित उपविधि को गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी माना जायेगा।
8 ट54 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8
विविधकर (शुल्क) उपविधि नियमावली-2023
उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा-298 जो नगरपालिका परिषद पर प्रवृत्त है के अन्तर्गत नगर परिषद बांगरमऊ उन्नाव में विविधकर (शुल्क) उपविधि नियमावली-2023 कहलायेगी, जिसका विवरण निम्नानुसार है- 1- संक्षिप्त नाम, प्रसार एवं प्रारम्भः-
1 यह उपविधि विविधकर (शुल्क) उपविधि नियमावली-2023 कहलायेगी।
2 यह नगर परिषद बांगरमऊ, उन्नाव की सीमा में प्रवृत्त होगा।
3 यह उपविधि उ0प्र0 राजपत्र मेंं प्रकाशन होने के दिनांक से नगर परिषद बांगरमऊ, उन्नाव मेंं प्रवृत्त होगा। 2- परिभाषायेंः- विषय या प्रयोग मेंं कोई शर्त प्रतिकूल न होने पर इस अधिनियम मेंं उल्लिखित शब्द का अर्थ यह पढ़ा व समझा जायेगा।
1 अधिनियम का तात्पर्य उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम 1916 से है।
2 अधिशासी अधिकारी का तात्पर्य नगर परिषद बांगरमऊ उन्नाव के अधिशासी अधिकारी से है।
3 नगरपालिका परिषद का तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ से है।
4 अध्यक्ष/प्रशासक का तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अध्यक्ष/प्रशासक से है।
5 नियमावली से तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की विविधकर/नियमावली से है।
6 बोर्ड का तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के निर्वाचित बोर्ड से हैं।
7 फीस से तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में वर्णित मदाें पर लगायी गई फीस से है।
3- नामान्तरण शुल्क/विलम्ब शुल्कः-
(क) नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा-147 के अन्तर्गत दिये गये कोई विवरण (दाखिल-खारिज) प्रार्थना-पत्र नगरपालिका परिषद द्वारा निर्धारित फार्म पर ही स्वीकार किये जायेंगे। कर निर्धारण की सूची मेंं अंकित स्वामित्व मेंं संशोधन हेतु ऐसे प्रार्थना-पत्र जो विरासत/रजिस्टर्ड वसीयतनामा एवं मा0 न्यायालय से जारी निर्णयों के आधार पर प्रस्तुत किये जायेंगे। उन पर आवेदक को नामान्तरण (दाखिल-खारिज) शुल्क निम्न प्रकार होगी।
1 विरासत शुल्क रु0 2,000/-
2 रजिस्टर्ड वसीयतनामा/न्यायालय निर्णय रु0 3,000/-
3 01 से 49999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 1,000/-
4 50,000 से 99,999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 2,000/-
5 1,00,000 से 2,99,999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 4,000/-
6 3,00,000 से 4,99,999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 5,000/-
7 5,00,000 से 9,99,999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 6,000/-
8 10,00,000 से 14,99,999 बाजारू मालियत बैनामा नामान्तरण शुल्क रु0 9,000/-
9 15,00,000 से अधिक बाजारू मालियत नामान्तरण शुल्क रु0 15,000/-
(ख) प्रकाशन फीस स्वयं आवेदक द्वारा देय होगी।
(घ) कर निर्धारण सूची मेंं स्वामित्व संशोधन (दाखिल-खारिज) हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करने की निर्धारित अवधि 03 माह (90 दिन) व्यतीत हो जाने के पश्चात् अथवा आवेदनकर्ता जिस तिथि को नामान्तरणभाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 55 कराने का अधिकार प्राप्त हो गया था। उस तिथि से 03 माह (90 दिन) व्यतीत हो जाने के पश्चात् प्रस्तुत किये जाने वाले प्रार्थना-पत्र पर रु0 2,000 (दो हजार) प्रति वर्ष की दर से विलम्ब शुल्क देय होगा। विलम्ब शुल्क में छूट देने का अधिकार अधिशासी अधिकारी में निहित होगा।
10 गृहकर/जलकर उपविधि 2005 में धारा-1 से 11 तक में वर्णित विधि के अतिरिक्त जो भी प्रकरण आयेगा। उन सभी का निराकरण नगरपालिका अधिनियम 1917 मेंं वर्णित धाराओ तथा समय-समय पर शासनादेशों द्वारा किये गये निर्देशों के अनुसार किया जायेगा।
11 जलमूल्य वसूली
(क) उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश संख्या 1010-19-2-96(2)-96 दिनांक 08 जनवरी, 1997 के द्वारा नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 2़98 के अन्तर्गत की दरें प्रस्तावित है-
क्रमांक घरेलू दरें (रु0 प्रतिमाह) वर्तमान घरेलू संशोधित दरें (रु0 प्रतिमाह) 1 2
3
1 50.00
70.00
व्यावसायिक दरें (रु0 प्रतिमाह) वर्तमान व्यवसायिक संशोधित दरें (रु0 प्रतिमाह) 2 50.00
100.00
(ख) वसूली अवधि 01 अप्रैल से 31 मार्च होगी।
(ग) नगरपालिका परिषद वार्षिक बिल वितरण कराकर वसूली करायेगी।
(घ) नगरपालिका परिषद समुचित अभिलेख प्रत्येक वित्तीय वर्षवार अनुरक्षित रखेगी। जिसमेंं- 1-डिमाण्ड रजिस्ट्रार को तैयार करना।
2-निर्धारित समय मेंं बिल तैयार कर वितरित करना।
नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सम्पूर्ण सीमा के अन्दर क्षेत्रों मेंं
अचल सम्पत्तियाें की हस्तान्तरण सम्बन्धी नियमावली - 2023
1 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमाआें के अन्दर यदि कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार की अचल सम्पत्ति का हस्तान्तरण (लेखा ट्रान्सफर डीड) क्रय अथवा रेहननामा (बन्धकनामा) भारतीय स्टाम्प एक्ट-1899 संख्या 2 2 के अधीन करता है। वह तब तक नही कर पायेगा जब तक सभी हस्तान्तरण की जाने वाली या बन्धक की जाने वाली अचल सम्पत्ति के मूल्य पर 02 प्रतिशत शुल्क का भुगतान कार्यालय, नगरपालिका परिषद, बांगरमऊ मेंं जमा कर दे।
दण्ड
यू0पी0 म्यूनिसिपैलिटीज एक्ट-1916 की धारा-299(1) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकाराें का प्रयोग करते हुये नगरपालिका परिषद बांगरमऊ यह आदेश देती है कि इस नियमावली में किसी प्रकार का उल्लंखन करने मेंं रु0 5,000.00 (पॉच हजार मात्र) दण्ड किया जायेगा और यदि अपराध निरन्तर जारी रहे तो अतिरिक्त अर्थ दण्ड लगाया जायेगा जो प्रथम दोष सिद्ध हो जाने पर किसी अपराधी द्वारा निरन्तर अपराध जारी रखा है तो रु0 100.00 प्रतिदिन मात्र हो सकता है।
भवन नक्षा स्वीकृति सम्बन्धी नियमावली
परिभाषाएें-
भवन- भवन का तात्पर्य वह स्थान है जो चारों ओर या किसी भी साइड से घिरा हुआ है।
56 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8व्यावसायिक भवन- जिस भवन में किसी प्रकार का व्यवसाय होता हो।
गोदाम- जिस भवन में क्रय विक्रय के लिये किसी भी प्रकार का माल एकत्र किया जाता हो तथा रखा जाता हो।
रिहायसी भवन-जिस भवन मेंं कोई परिवार रहता हो या परिवार के रहने के योग्य हो।
सामाजिक भवन-जो किसी भी सरकारी कार्यालय के रूप मेंं अस्पताल, विश्राम घर, स्कूल, पुस्तकालय, वाचनालय या अन्य किसी शासकीय प्रयोग में आता हो।
हॉल-भवन के अन्दर या बाहर बड़ा कमरा जो सामूहिक प्रयोग के लिये बनाया गया हो जिसकी लम्बाई 5×5 मी0 से कम न हो।
कमरा-भवन का वह कमरा होगा जो सोने बैठने व अन्य किसी प्रकार के कार्यो मेंं प्रयोग होता हो। जिसका माप कम से कम 4×3 मी0 होगा।
स्टोर-वह कमरा जिसमें गृहस्थी का सामान एकत्रित किया जाता है। जिनका नाप कम से कम 3×2मी0 हो।
रसोई-जो केवल क्षमता खाना बनाने के प्रयोग मेंं आता हो। उसका नाप 1.1×2 डेढ मी0 हो।
स्नानगृह-जो नहाने व कपड़े धोने के लिये प्रयोग किया जाता है।
बरामदा-भवन का बाहरी भाग जो केवल पिलर पर छाया गया हो और आगे से बन्द न होता हो।
शौचालय- जो शौचालय के प्रयोग होता हो।
छज्जा-वह ऊपरी भाग जो धूप पानी रोकने के लिये छत से लेवल पर बाहर निकाला गया हो।
जंगला-जो लोहे की सरिया द्वारा बन्द हो तथा जिसकेे द्वारा निकासी न होती हो।
खिड़की-वह स्थान जिसके द्वारा दो कमरे मिल सकते है हवा आदि के लिये मेन रास्ते मेंं भी खुलती हो।
फर्ष-भवन का वह निचला भाग जो समतल हो।
छत-भवन का वह भाग जिससे कमरा छत के ऊपर से ढका हो, चाहे वो ईट पत्थर लिन्टर आदि का हो।
अलमारी-कमरे मेंं जो दीवाल मेंं फिक्स किये जाने के बाद कोई सामान रखने के काम आता हो।
वाटिका-भवन का वह खुला भाग जिसमेंं साग, सब्जी या फुलवारी लगाई जाती हो। या उठने बैठने के काम मेंं प्रयोग किया जाता हो।
1 यह कि नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमान्तर्गत कोई भी व्यक्ति नगरपालिका परिषद की बिना पूर्व अनुमति के कोई भी भवन निर्माण नही करायेगा, न अहाता, मैरिज अन्य किसी भी प्रकार के भवन का रूप देगा।
2 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ से स्वीकृत हेतु निम्न प्रक्रिया अपनानी होगी।
(क) स्वीकृत चाहने हेतु एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करेगा जो कि रु0 10 के स्टाम्प पेपर पर होगा।
(ख) इस प्रार्थना-पत्र के नाम प्रार्थी को स्केली मानचित्रो में भूमि का पूर्ण विवरण दिया जायेगा तथा यह भी दर्शाया जायेगा कि बनाने से पूर्व भूमि की दशा क्या है। एवं भूमि का कितना क्षेत्रफल है।
(ग) प्रार्थी इस मानचित्र के साथ एक प्रमाण-पत्र इस आशय का प्रस्तुत करेगा। यह भूमि जहॉ निर्माण कार्य कराना चाहता है उसकी अपनी है। उसका ब्यौरा प्रस्तुत करेगा।
(घ) प्रार्थना-पत्र में निर्माण का विवरण देते हुये यह स्पष्ट करेगा कि वह मरम्मत या फेरबदल या ऊपरी भाग का पूर्व नव निर्माण कराना चाहता है।
(ङ)़ जिस ड्राफ्टमैन से नक्शा बनवायेगा उसी से भवन की अनुमानित लागत का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 57(च) नक्शा ग्राफ पेपर या ब्लू प्रिंट होेगें और तीसरा नक्शा जो नगरपालिका परिषद में रखा जायेगा कोई भी भवन निर्माण सरकारी सड़क या नाली के बाहरी किनारे से 03 फीट भूमि को छोडकर किया जायेगा। तथा तंग गलियों में 02 फीट भूमि छोडकर निर्माण कार्य किया जायेगा।
3 इस प्रकार की खिड़की या जंगला न लगायी जायेगी। जिसकी कि बराबर में रहने वालो को बेपर्दगी हो।
4 भवन से निकलने वाला अतिरिक्त जल की निकासी भवन निर्माता द्वारा पाइप के माध्यम से ही सरकारी नाली तक पहुंचाया जायेगा। यदि वहॉ पर सरकारी नाली नही है। तो प्रार्थी को उसके लिये सोकपिट अपनी ही भूमि पर बनवाना होगा।
स्वीकृति की विधियॉ
1 जब प्रार्थी मय नक्शे के अपना प्रार्थना-पत्र कार्यालय में प्रस्तुत करेगा सर्वप्रथम उसका इन्द्राज निर्माण रजिस्टर में किया जायेगा तथा उक्त प्रार्थना-पत्र पर राजस्व विभाग की रिपोर्ट ली जावेगी, जो राजस्व के लिपिक इन्स्पेक्टर इस प्रकार की रिपोर्ट देगा कि इस भूमि या भवन का स्वामी हमारे रिकार्ड में वही इन्द्राज है जो प्रार्थना दे रहा है तथा इस मकान पर भवन का नगरपालिका परिषद का कोई भी किसी प्रकार टैक्स आदि अवशेष नही है।
2 भवन नक्शा स्वीकृति के लिये अधिशासी अधिकारी सक्षम अधिकारी होगा। यह आज्ञा केवल 01 वर्ष के लिये होगी यदि इस निश्चित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नही होता है तो प्रार्थी कारण स्पष्ट करते हुए पुनः नगरपालिका परिषद में अवधि बढाने हेतु प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत करेगा और जो पूर्व फीस जमा की है उसका 1/2 आधा भाग पुनः फीस के रूप में जमा करनी होगी। यह अवधि 6 माह से अधिक नही बढ़ाई जावेगी। इस छह माह की अवधि बढ़ाने के लिये अधिशासी अधिकारी सक्षम अधिकारी होगा।
3 जैसे ही भवन का निर्माण कार्य समाप्त होगा वैसे ही प्रार्थी नगरपालिका परिषद को अवगत करायेगा तथा नगरपालिका परिषद द्वारा कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करेगा इसके बाद ही भवन रहने योग्य माना जावेगा।
दरें भवन निर्माण
1 व्यवसायिक भवन 400 वर्ग फिट तक रु0 10.00 प्रति फिट आच्छादित
2 व्यवसायिक भवन 400 वर्ग फिट से ऊपर रु0 14.00 प्रति वर्ग फिट
3 गोदाम 400 वर्ग फिट तक रु0 10.00 प्रति वर्ग फिट
4 गोदाम 400 वर्ग फिट से ऊपर रु0 14.00 प्रति वर्ग फिट
5 होटल या विश्राम गृह 400 वर्ग फिट तक रु0 12.00 प्रति वर्ग फिट
6 होटल या विश्राम गृह 400 वर्ग फिट से ऊपर रु0 14.00 प्रति वर्ग फिट
7 रिहायशी भवन 1000 वर्ग फिट तक रु0 10.00 प्रति वर्ग मी0
8 रिहायशी भवन 1000 वर्ग फिट से ऊपर
3000 वर्ग फिट से तक रु0 12.00 प्रति वर्ग फिट
9 रिहायशी भवन 3000 वर्ग फिट से ऊपर रु0 14.00 प्रति वर्ग फिट
4000 वर्ग फिट तक
10 रिहायशी भवन 4000 वर्ग फिट से ऊपर रु0 15.00 प्रति वर्ग फिट
यदि कोई दुकान, रेस्टोरेन्ट या गोदाम किसी सामाजिक या धार्मिक संस्था के द्वारा बनाया जा रहा है तो उससे फीस की दरें उपरोक्त दरों की 1/2 होगी। मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, गिरिजाघर, आदि जिससे किराये आदि की आय न हो, वह शुल्क मुक्त होंगे।
11 यदि प्लाट की बाउन्ड्री ही बनानी है तो उसके लिये मात्र रु0 1,000.00, (रुपया एक हजार मात्र) फीस देय होगी58 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 12 निर्माण का प्रार्थना-पत्र आने की तिथि के 60 दिन के भीतर स्वीकृति देना अनिवार्य होगा। यदि समिति को कोई आपत्ति है तो प्रार्थी को अवगत कराया जायेगा अन्यथा प्रार्थी वाद गुजरने मियाद 60 दिन समिति को एक सूचना- पत्र प्रस्तुत करेगा जिसका समय 7 दिन का होगा इसके बाद वह अपना निर्माण कार्य आरम्भ कर देगा।
13 समिति को यह पूरा अधिकार होगा कि उचित कारण दर्शाते हुए यह किसी भवन निर्माण की आज्ञा न दें।
14 प्रार्थी का यदि नक्शा स्वीकृत हो जाने के बाद कोई परिवर्तन है तो पुनः दूसरा नक्शा तथा स्वीकृति नक्शा जिस पर उसे आज्ञा प्राप्त हो चुकी है, प्रस्तुत करेगा तथा उपरोक्त अंकित फीस का 1/2 भाग जमा करेगा।
15 स्वीकृति देने के बाद यदि कोई जनहित में उक्त स्वीकृति को रद्द करना उचित समझता है तो पूरे कारण को स्पष्ट करते हुए भू-स्वामी को नोटिस दें, और नोटिस देकर आज्ञा को रद्द कर सकता है जिसकी अपील अन्दर मियाद 30 दिन जिलाधिकारी को प्रस्तुत की जा सकती है।
16 मरम्मत जिसमें केवल प्लास्टर आदि या छत रुकनी हो के लिये रु0 100.00 (एक सौ रुपया मात्र) फीस तथा सादे कागज पर प्रार्थना-पत्र देगा यदि प्रार्थी पुरानी बुनियादों पर भी क्षतिग्रस्त होने के कारण छत बदलवाना चाहता है तो उसे रु0 1,000.00 (एक हजार रुपया मात्र) फीस जमा करेगा यदि नीचे की मंजिल बनी है और प्रार्थी दूसरी मंजिल बनाना चाहता है तो उसके उपविधियों में वर्णित पूर्ण प्रक्रिया अपनानी होगी।
17 सड़क पर निर्माण मलबा डालने पर हर 50 वर्ग फिट पर 30 दिन के लिये रु0 1,000.00 (एक हजार रुपया) देय होगा। उसके लिये नियमानुसार कार्य आरम्भ करने से पूर्व अधिशासी अधिकारी द्वारा प्रार्थना-पत्र देकर स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। कार्य समाप्त होने पर सड़क पर पड़ा मैटेरियल साफ करायेंगे और गढडे आदि भरवा देना होगा। यदि यातायात में रुकावट होती है तो अधिशासी अधिकारी का पूर्ण अधिकार होगा कि वे बिना कारण बताये दी गई आज्ञा रद्द कर दें, जमाशुदा धनराशि वापस न की जायेगी।
18 कोई भी प्रोजेक्शन इस प्रकार निर्माण न किया जायेगा के जिसका बरसाती पानी पूरे भाग में बहता हो जिसकी निकासी एक स्थान से दूसरे स्थान को सुरक्षा पाइप से सुरक्षित पाइप के द्वारा होगी।
दण्ड
उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा 298(1) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद बांगरमऊ यह निर्देश देती है कि उपरोक्त उपविधि के किसी भी प्रकार का उल्लंघन करने पर दण्ड दिया जायेगा जो रु0 1,000.00 (एक हजार रुपया) तक हो सकता है। यदि उल्लंघन निरन्तर जारी रहे तो ऐसे प्रत्येक दिन के लिये, जिसके बारे में यह सिद्ध हो जाये कि अपराधी अपराधकर्ता है, रु0 100.00 (एक सौ रुपये) प्रतिदिन अतिरिक्त अर्थ दण्ड दिया जा सकता है। और जुर्माना अदा न करने पर तीन मास तक का कारावास का दण्ड की सक्षम न्यायालय द्वारा किया जा सकता है।
सफाई कर निर्धारण की प्रक्रिया-
नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 140 के अन्तर्गत परिभाषित वार्षिक मूल्य के आधार पर सफाई कर का निर्धारण निम्नानुसार किया जायेगा।
1. सरकारी भवनों/विधालयों/शैक्षिक संस्थानों/प्रतिष्ठानों/मैरिज हाल/गेस्ट हाउसों/धर्मशालाओं पर जो गृहकर, जलकर की परिधि में है, उन पर वार्षिक मूल्य का 08 प्रतिशत सफाई कर देय होगा।
2. सरकारी भवनाें/विद्यालयों/शैक्षिक संस्थानों/प्रतिष्ठानाें/मैरिज हाल/गेस्ट हाउसों/धर्मशालाओं पर जो गृहकर की परिधि में है, उन पर वार्षिक मूल्य का 22 प्रतिशत सफाई कर देय होगा।
3. सरकारी भवनाें/विद्यालयों/शैक्षिक संस्थानों/प्रतिष्ठानों/मैरिज हाल/गेस्ट हाउसों/धर्मशालाओं पर जो जलकर की परिधि में है, उन पर वार्षिक मूल्य का 22 प्रतिशत सफाई कर देय होगा।
1-सफाई कर में छूट-
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 59नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अध्यक्ष को विशेष परिस्थितियों में वार्षिक मूल्यांकन पर छूट देने का विशेष अधिकार होगा।
(1) कर दाता द्वारा 01 अप्रैल, से 30 सितम्बर, तक (सफाई कर) जमा करने पर वर्तमान मांग पर 10 प्रतिशत छूट दिया जायेगा। 01 अक्टूबर से कोई छूट देय नही होगी तथा 31 मार्च, तक देय कर का भुगतान न करने पर बकाया मांग पर 10 प्रतिशत अधिभार अधिरोपित करते हुये अगले वित्तीय वर्ष की मांग निर्धारित की जायेगी।
(2)-सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाने हेतु समस्त भवनों स्वामी/अध्यासी/नागरिकों द्वारा स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिये एवं स्वच्छता बनाये रखने के लिये निम्न उत्तरादायित्वों का निर्वहन करना पडे़गा। उत्तरदायित्वों का निर्वहन न करने पर निर्धारित सफाई कर देेना होगा।
क्र0 दायित्व सफाई कर
1 2
3
1 नगर क्षेत्र के अन्तर्गत सफाई कार्य करने के उपरान्त सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालना, कूड़ा फेकना, गन्दगी फैलाना प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रथम प्रकरण मे रु0 500 व द्वितीय प्रकरण मे रु0 1,000 व तृतीय प्रकरण में रु0 5,000 सफाई कर देय होगा।
2 नगरपालिका परिषद के नाला/नालियो में कूड़ा
आदि डालना/फैकना प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रथम प्रकरण में रु0 500 व द्वितीय प्रकरण में रु0 1,000 व तृतीय प्रकरण में रु0 5,000 सफाई कर देय होगा।
3 नगरपालिका परिषद के नाला/नालियो मेंं गोबर/मलमूत्र चारा आदि फेकना/बहाना प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रथम प्रकरण में रु0 500 व द्वितीय प्रकरण में रु0 1,000 व तृतीय प्रकरण में रु0 5,000 सफाई कर देय होगा।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर रु0 10,000 का सफाई कर प्रतिमाह देय होगा।
4 नगरपालिका परिषद के नाला/नालियों में शौचालय के मानव मल/मूत्र को सीधे खुले मेंं प्रवाहित करना प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर रु0 5,000 का सफाई कर प्रति प्रकरण देय होगा।
5 नगरपालिका परिषद सीमान्तर्गत सार्वजनिक/व्यक्तिगत स्थान पर कूड़ा/अन्य कोई अवशेष जलाना प्रतिबन्धित किया जाता है।
6 नगर सीमा क्षेत्र के अन्तर्गत खुले में शौच करना
प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर रु0 500 का सफाई कर प्रति प्रकरण देय होगा।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रतिट्राली रु0 500 का सफाई कर प्रति प्रकरण देय होगा।
7 नगर क्षेत्र में भवन निर्माण कार्य मेंं प्रयोग के बाद अनुपयोगी सामग्री को सड़क पर डालना प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर रु0 20,000 मासिक सफाई कर देय होगा।
8 समस्त आवासीय/अनावासीय भवनों/अन्य निर्माण गतिविधियो मेंं जिसमें 25 से अधिक निर्माण श्रमिक/कार्मिक कार्य कर रहे है। उनके लिये आवश्यक होगा कि उनके द्वारा शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जायेगी।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रथम प्रकरण में रु0 100 व द्वितीय प्रकरण में रु0 200 एवं तृतीय प्रकरण में रु0 1,000 सफाई कर देय होगा।
9 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले समस्त सैलून स्वामी द्वारा व्यक्तियो के बाल काटने के उपरान्त सार्वजनिक स्थान/नालियों में डालने को प्रतिबन्धित किया जाता है।
60 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 81 2
3
10 समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5000 वर्ग मी0 का क्षेत्र है। स्थानीय निकाय के साथ भागीदारी करके नियमानुसार श्रोत स्तर पर ही उत्पादको द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिष्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थाें को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहको को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित किया जायेगा। अपशिष्ट के अपशिष्ट अंश को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट संग्राहको अथवा अभिकरण/संस्था को सौपा जायेगा।
समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5,000 वर्ग मी0 का क्षेत्र है। यदि उनके द्वारा साफलिड बेस्ट मेंनेजमेंन्ट नियम-2016 के अनुसार कार्यवाही नही की जाती है। तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा रु0 1,00,000 (रु0 एक लाख मात्र) मासिक आधार पर श्रोत स्तर पर ही सम्बन्धित भवन स्वामी/अध्यासी/प्रतिष्ठान केे परिसर मेंं उत्पादको द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने मेंं सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थाें को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहको को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित कियें जाने का शुल्क लेगी। उक्त प्रक्रिया का पालन करने वाले समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5000 वर्ग मी0 का क्षेत्र है को उक्त निर्धारण सफाई कर देना अनिवार्य होगा जिन भवन/अध्यासी/प्रतिष्ठान के परिसर में स्वतः व्यवस्था कर ली गयी है। उनको उक्त सफाई कर से छूट प्रदान की जायेगी।
11 समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5000 वर्ग मी0 से 10000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। स्थानीय निकाय के साथ भागीदारी करके नियमानुसार श्रोत स्तर पर ही उत्पादकों द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित किया जायेगा। अपशिष्ट के अपशिष्ट अंश को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट संग्राहको अथवा अभिकरण/संस्था को सौपा जायेगा।
समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5000 वर्ग मी0 से 10000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। यदि उनके द्वारा साफलिड बेस्ट मैनेजमेन्ट नियम 2016 के अनुसार कार्यवाही नही की जाती है। तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा रु0 2,00,000 (दो लाख मात्र) मासिक आधार पर श्रोत स्तर पर ही सम्बन्धित भवन स्वामी/अध्यासी/प्रतिष्ठान केे परिसर में उत्पादकों द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप मेंं संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थाें को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपंेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित कियें जाने का शुल्क लेगी। उक्त प्रक्रिया का पालन करने वाले समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 5000 वर्ग मी0 से 10000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है को उक्त निर्धारण सफाई कर देना अनिवार्य होगा जिन भवन/अध्यासी/प्रतिष्ठान के परिसर मेंं स्वतः व्यवस्था कर ली गयी है। उनको उक्त सफाई कर से छूट प्रदान की जायेगी।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 611 2
3
12 समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 10000 वर्ग मी0 से 15000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। स्थानीय निकाय के साथ भागीदारी करके नियमानुसार श्रोत स्तर पर ही उत्पादकाें द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने मेंं सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थो को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंष को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित किया जायेगा। अपशिष्ट के अवशिष्ट अंश को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट संग्राहकों अथवा अभिकरण/संस्था को सौपा जायेगा।
समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 10000 वर्ग मी0 से 15000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। यदि उनके द्वारा साफलिड बेस्ट मैनेजमेन्ट नियम 2016 के अनुसार कार्यवाही नहीं की जाती है। तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा रु0 3,00,000 (रु0 तीन लाख मात्र) मासिक आधार पर श्रोत स्तर पर ही सम्बन्धित भवन स्वामी/अध्यासी/प्रतिष्ठान केे परिसर में उत्पादकों द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने मे सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहको को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित कियें जाने का शुल्क लेगी। उक्त प्रक्रिया का पालन करने वाले समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 10000 वर्ग मी0 से 15000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है को उक्त निर्धारण सफाई कर देना अनिवार्य होगा जिन भवन/अध्यासी/प्रतिष्ठान के परिसर में स्वतः व्यवस्था कर ली गयी है। उनको उक्त सफई कर से छूट प्रदान की जायेगी।
13 समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 15000 वर्ग मी0 से 20000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। स्थानीय निकाय के साथ भागीदारी करके नियमानुसार श्रोत स्तर पर ही उत्पादकाें द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहको को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित किया जायेगा। अपशिष्ट के अवशिष्ट अंश को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट संग्राहको अथवा अभिकरण/संस्था को सौपा जायेगा।
समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 15000 वर्ग मी0 से 20000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है। यदि उनके द्वारा साफलिड बेस्ट मैनेजमेन्ट नियम 2016 के अनुसार कार्यवाही नही की जाती है। तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा रु0 4,00,000 (रु0 चार लाख मात्र) मासिक आधार पर श्रोत स्तर पर ही सम्बन्धित भवन स्वामी/अध्यासी/प्रतिष्ठान केे परिसर में उत्पादको द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित कियें जाने का शुल्क लेगी। उक्त प्रक्रिया का पालन करने वाले समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 15000 वर्ग मी0 से 20000 वर्ग मी0 तक का क्षेत्र है को उक्त निर्धारण सफाई कर देना अनिवार्य होगा जिन भवन/अध्यासी/प्रतिष्ठान के परिसर में स्वतः व्यवस्था कर ली गयी है। उनको उक्त सफई कर से छूट प्रदान की जायेगी।
9 ट62 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 1
2
3
14 समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 20000 वर्ग मी0 से अधिक का क्षेत्र है। स्थानीय निकाय के साथ भागीदारी करके नियमानुसार श्रोत स्तर पर ही उत्पादको द्वारा जनित अपशिष्ट का पृथक्करण सुनिश्चित करेंगे। पृथक्कृत अपशिष्ट को भिन्न रूप में संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे।
समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 20000 वर्ग मी0 से अधिक का क्षेत्र है। यदि उनके द्वारा साफलिड बेस्ट मैनेजमेन्ट नियम 2016 के अनुसार कार्यवाही नही की जाती है। तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा रु0 5,00,000 (रु0 पॉच लाख मात्र) मासिक आधार पर श्रोत स्तर पर ही सम्बन्धित भवन स्वामी/अध्यासी/प्रतिष्ठान केे परिसर में उत्पादको द्वारा जनित अपषिष्ट का पृथक्करण सुनिष्चित करेंगे। पृथक्कृत अपषिष्ट को भिन्न रूप मे संग्रहित किये जाने में सहायता प्रदान करेंगे और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थों को या तो अधिकृत अपशिष्ट संग्राहकों को अथवा अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ता को सौपेंगे। जहां तक जहां तक सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित किया जायेगा। अपशिष्ट के अवशिष्ट अंश को स्थानीय निकाय द्वारा निर्देशित अपशिष्ट संग्राहको अथवा अभिकरण/संस्था को सौपा जायेगा।
सम्भव हो अपशिष्ट के जैव-निम्नीकरणीय (बायोडिग्रडेबल) अंश को परिसर के अन्दर ही कम्पोस्टिंग अथवा जैव मिथेनेशन के माध्यम से प्रसंस्करित, शोधित व निस्तारित कियें जाने का शुल्क लेगी। उक्त प्रक्रिया का पालन करने वाले समस्त निवासी समुदाय, संस्थान, होटल, एवं रेस्टोरेन्ट जिनके पास 20000 वर्ग मी0 से अधिक का क्षेत्र है। को उक्त निर्धारण सफाई कर देना अनिवार्य होगा जिन भवन/अध्यासी /प्रतिष्ठान के परिसर मे स्वतः व्यवस्था कर ली गयी है। उनको उक्त सफई कर से छूट प्रदान की जायेगी।
उक्त कार्य के लिये सफाई व्यवस्था हेतु अतिरिक्त सफाई कर रु0 50 प्रति पशु सफाई कर देय होगा।
15 सार्वजनिक स्थान/वयक्तिगत स्थान/सड़क मार्ग पर दूध का चट्टा लगा करके दूध निकालने का कार्य करके नगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को प्रभावित करना/गन्दगी करना सार्वजनिक मार्ग पर गोबर फैलाना प्रतिबन्धित है।
16 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ क्षेत्र में खुले में सीवर सेक्सन मशीन से नालियों/खुले मंें शौचालय के अवशेष डालने पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित किया जाता है।
उक्त कार्य के लिये अगर कोई व्यक्ति पाया जाता है, तो उस पर रु0 5,000 जुर्माना नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा वसूला जायेगा।
उक्त दायित्व का अनुपालन न करने पर प्रथम प्रकरण मे रु0 500 व द्वितीय प्रकरण में रु0 1,000 व तृतीय प्रकरण मे रु0 5,000 सफाई कर देय होगा।
17 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ क्षेत्र के अन्तर्गत इत्र कारखानों में इत्र बनने के उपरान्त बचे हुये अनुपयोगी सामग्री पदार्थ/खश/मेंहदी आदि के अवशेष नालियों में बहाना अथवा सावर्जनिक स्थान पर डालना प्रतिबन्धित किया जाता है।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 631
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3
प्रति आयोजन रु0 500 सफाई कर देय होगा, आयोजन की सूचना न देने की स्थिति में सफाई कर 1,000 देय होगा।
18 धर्मशालाआें मे धार्मिक, राजनैतिक, शादी विवाह आदि अन्य गतिविधिया आयोजित की जाती है। जिसमें अपशिष्ट उत्पन्न किया जाता है। धर्मशालाओं द्वारा शुल्क लिया गया है। सम्बन्धित भवन स्वामी/प्रबन्धक को सूचना नगरपालिका परिषद बांगरमऊ को प्रति आयोजन की देनी होगी।
प्रति आयोजन रू0 5,000 सफाई कर देय होगा, आयोजन की सूचना न देने की स्थिति मे सफाई कर रु0 10,000 देय होगा।
19 मैरिजहाल/गेस्टहाउस/होटल/बारातघर/स्कूल/कालेज तथा ऐसे अन्य परिसर जहां पर सामुहिक रूप से लोगों को एकत्रित करके कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जिसके उपरान्त वहां पर अपशिष्ट उत्पन्न होता है। सम्बन्धित भवन स्वामी/प्रबन्धक को सूचना नगरपालिका परिषद बांगरमऊ को प्रति आयोजन की देनी होगी।
ऐसा न करने पर रु0 5,000 सफाई कर देय होगा एवं 01 वर्ष पश्चात् शौचालय/प्रशाधन की व्यवस्था न करने पर रु0 5,000 प्रतिमाह देय होगा।
20 समस्त प्रकार के ऐसे भवन प्रतिष्ठान, अनावासीय परिसर जिसमें 05 से अधिक दुकाने है। जिसमें व्यवसायिक गतिविधियॉ संचालित है। उनको व्यवसायिक श्रेणी में मानते हुये सम्बन्धित परिसरों में महिला शौचालय/प्रशाधन की व्यवस्था 06 माह के अन्दर करना अनिवार्य होगा।
5-नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के सभी हितबद्व पक्षकार यदि उक्त दायित्वो का पालन नही करते है तो नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा अपने स्तर से नगर क्षेत्र के ऐसे समस्त हितबद्व पक्षकारों का सर्वे कराने का कार्य कर अनुभाग द्वारा कराकर सर्वे उपरान्त एक माह की सूचना सम्बन्धित हितबद्व पक्षकार को देकर मांग कायम करने का अधिकार होगा। उक्त प्रक्रिया का अनुपालन करने के लिये कर अधीक्षक/राजस्व निरीक्षक/कर समाहर्ता को अधिकृत किया जाता है। इनके न होने पर उक्त दायित्वों का निर्वाहन अधिशासी अधिकारी द्वारा किया जायेगा। तथा वसूली से सम्बन्धित कार्यवाहियां नगरपालिका अधिनियम 1916 के अध्याय 05 के अन्तर्गत दी गई व्यवस्था के अनुसार अनुमन्य होगी।
शस्ति
उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा-299,307 मे दिये गये प्राविधानो के अधीन उक्त नियमावली के किसी नियम का उल्लंघन किया जाता है। तो जुर्माना रु0 1,000 (रु0 एक हजार मात्र) बसूल किया जायेगा। और जब ऐसा उल्लंघन निरन्तर किया जाता है, तो प्रथम दोष सिद्ध के दिन से प्रत्येक दिन के लिये रु0 100 (रु0 एक सौ मात्र) अतिरिक्त देय होगा तथा 299 व 307 के उपरान्त के उपबन्ध लागू होंगे।
उ0प्र0 पथ विक्रेता जीविका संरक्षण नियमावली
निदेशक स्थानीय निकाय उ0प्र0 8वॉ तल इन्दिरा भवन लखनऊ पत्र सं0 3/773सा0/पथ विक्रय/2017 दिनॉक 22 मई 2017 तथा मा0 उच्च न्यायालय द्वारा सिविल मिस रिट पिटीशन सं0 53235/2016 दिलीप पासवान बनाम राज्य व अन्य के अनुपालन के क्रम में नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा अपनी सीमा में फेरी नीति/पथ विक्रेता/जीविका संरक्षण नियमावली की विरचना की जाती है।
नगरपालिका परिषद सीमा में पथकर नियमावली के अनुसार 2×2 वर्ग मी0 ढकेल/रेहड़ी/फड़ आदि लगाने पर निम्न दरें लागू होगी।
प्रतिदिन दरें मासिक दरें वार्षिक दरें
रु0 50 मात्र प्रतिदिन रु0 1,000 मात्र मासिक रु0 8,000 मात्र वार्षिक64 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 1. नगर पालिका परिषद, बांगरमऊ की सीमा के अन्तर्गत प्रत्येक रेहड़ी लगाने वाले व्यक्ति को नगरपालिका परिषद में अपना पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा।
2. नगर पालिका परिषद द्वारा प्रत्येक रेहड़ी लगाने वाले का फोटोयुक्त पहचान-पत्र जारी करेगी।
3. नगर पालिका परिषद द्वारा नियत किये गये स्थान पर ही पथ विक्रेता अपनी रेहड़ी/फड़/ठेला आदि लगा सकेगा।
दण्ड
उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा-299(1) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद बांगरमऊ यह आदेश देती है कि इस नियमावली में किसी प्रकार का उल्लंघन करने पर रु0 10,000.00 (दस हजार रुपया) मात्र तक आर्थिक दण्ड दिया जा सकता है। और यदि अपराध निरन्तर जारी रहे तो अतिरिक्त अर्थ दण्ड लगाया जायेगा जो प्रथम दोष सिद्ध होने के दिनांक से यह सिद्ध हो जाने पर किसी अपराधी के द्वारा निरन्तर अपराध जारी रखने पर रु0 100.00 (एक सौ रुपया) मात्र प्रतिदिन हो सकता है।
नगरपालिका परिषद द्वारा मोबाइल टावर, विद्युत ट्रान्सफार्मर, बिजलीघर, कोल्ड
स्टोरेज आदि पर शुल्क निर्धारण हेतु उपविधियॉ।
शासनादेष दिनॉक 27 अक्टूबर 1994 द्वारा निधार्रित कर/षुल्क दरें।
क्रमांक मद का नाम शासनादेश दिनांक 27 अक्टूबर, 1994 द्वारा निर्धारित दर
1 ट्रांसफार्मर रु0 500 रुपये/वर्ष
2 विद्युत ग्रह रु0 50 रु0/गज
3 कोल्ड स्टोरेज रु0 10,000 रुपये/वर्ष
4 मोबाइल टॉवर रु0 10,000 रुपये/वर्ष
दण्ड
यू0पी0म्युनिसिपैलिटीज एक्ट, 1916 की धारा 299(1) के अन्र्तगत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद बांगरमऊ ये आदेश देती है कि इस नियमावली में किसी प्रकार का उल्लंघन करने पर रु0 15,000/- (पन्द्रह हजार रुपया मात्र) दण्ड किया जायेगा और यदि अपराध निरन्तर जारी रहे तो अतिरिक्त अर्थ दण्ड लगाया जायेगा। जो प्रथम दोष सिद्ध होने के दिनांक से यह सिद्ध हो जाने पर किसी भी अपराधी द्वारा निरन्तर अपराध जारी रखा है तो रु0 100.00 प्रतिदिन मात्र होगा।
विविध लाइसेंन्सिंग नियमावली
नगरपालिका परिषद वि0/उपविधियॉ-संयुक्त प्रान्त नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 298 में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद बांगरमऊ उन्नाव में दुकानों व अन्य लाइसेन्सिंग की नियमित एवं नियन्त्रित करने हेतु निम्नलिखित उपनियम बनाये हैं-
उपविधि
1. संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ और प्रवृत्ति-
(1) यह नियमावली नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमान्तर्गत वाणिज्य नियंत्रण लाइसेंस व अन्य शुल्क उपनियमावली 2023 कहलायेगी।
(ख) यह नियमावली सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी मानी जावेगी।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 65उपनियम
1 यह नियम नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमा के अन्तर्गत लागू होंगे।
2 नियमावली में निर्धारित दरें धनराशि शुल्क के रूप में कार्यालय नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में अदा करके लाइसेन्स प्राप्त कर लिया जायेगा।
3 लाइसेन्स शुल्क की अवधि प्रतिवर्ष 01 अप्रैल, से 31 मार्च, तक होगी।
4 लाइसेन्स शुल्क वर्ष के प्रथम माह अप्रैल, में देय होगी।
5 नियमावली तालिका में वर्णित मदों पर शुल्क लिये जाने की सूची तैयार करने का अधिकार अधिषासी अधिकारी नगरपालिका परिषद बांगरमऊ को है।
6 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अध्यक्ष/अधिशासी अधिकारी/अधिकृत कर्मचारी किसी भी समय दुकान के लाइसेन्स का निरीक्षण कर सकते है। और प्रत्येक दुकान के अन्दर आवष्यक स्थिति में प्रवेश कर सकते है।
7 अधिशासी अधिकारी/अधिकृत कर्मचारी सभी लाइसेन्स निर्गत कर सकता है।
8 जो शुल्क इस तालिका में नही है उन्हें सम्बन्धित व्यवसाय के समकक्ष मानकर उसी के अनुरूप लाइसेन्स शुल्क लिया जायेगा।
9 इस नियम के प्रभावी होते ही पूर्व से प्रभावी लाइसेन्स उपनियमावली की शुल्कों की दरें स्वतः ही निरस्त हो जायेंगी।
10 प्रत्येक व्यवसाय का लाइसेन्स लेना अनिवार्य होगा।
तालिका विवरण
क्र0सं0
धनराशि (रु0) में 1 2
3
रु0 1 होटल रेस्टोरेन्ट -
(1) होटल लाजिंग तथा गेस्ट हाउस 10 शय्या तक तथा बारात घर 15,000 (2) होटल लाजिंग तथा गेस्ट हाउस 11 शय्या से 20 शैय्या तक 12,000 (3) होटल ढाबा (भोजन)
10,000 (4) सामान्य होटल (नाश्ता)
5,000 2 नर्सिंग होम
(1) नर्सिंग होम/अस्पताल (20 बेड तक)
20,000 (2) नर्सिंग होम/अस्पताल (20 बेड से ऊपर)
30,000 (3) पैथोलोजी सेन्टर
5,000 (4) एक्सरे क्लीनिक
3,000 (5) डेन्टल क्लीनिक
8,000 (6) प्राइवेट क्लीनिक
4,00066 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 1
2
3
रु0
3 परिवहन
(1) ट्रान्सपोर्ट (बिना वाहन के एजेन्सी) (2) ट्रान्सपोर्ट टै्रक्टर एजेन्सी (वाहन सहित) (3) ऑटो रिक्शा
(4) मिनी बस
(5) बस
(6) तांगा
(7) ई-रिक्शा किराये पर
(8) ई-रिक्शा निजी चलित
(9) ठेला/ठेली
(10) हाथठेला
(11) बैलगाडी/भैंसा गाडी
(12) ट्राली
5,000 10,000 1,000 1,500 2,500 500 100 200 500 100 100 1,500 (13) अन्य चार पहियों के वाहन तथा व्यापारिक प्रयोग हेतु सभी वाहन 1,500 3 परिवहन
(1) मोटर वाहन ऐजेन्सी (सेल्स सर्विस) (2)स्कूटर/मोटर साइकिल ऐजेन्सी (3) साइकिल की दुकान
20,000 10,000 5,000 4 पैट्रोलियम
(1)मिटटी के तेल की दुकान 100 गेलेन तक (2)मिटटी के तेल की दुकान 100 गैलेन से अधिक (3)पैट्रोल पम्प/डीजल पम्प थ्रो (आयल काम्पनी) (4)दुकान अन्य पैट्रोलियम उत्पाद
1,000 रु0
5,000 5 अन्य व्यवसाय
1- धुलाई गृह (लाण्ड्री)
2- ड्राई क्लीनर
3- साबुन फैक्ट्री
4- गुड़ गोदाम
5- कंकड़ तथा सुर्खी का भट्टा
2,000 3,000 5,000 2,500 5,000भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 67
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रु0
6- चूना 2,000
7- पेठा बनाने का कारखाना 5,000
8- ईट भट्टा 5,000
9- जूता बनाने वाला कारखाना 3,000
10-लोेहा व्यापारी, टिम्बर मर्चेन्ट सीमेन्ट ईट बालू (थोक मौरंग बालू) मारबल टाइल्स
हार्डवेयर 20,000
11- बिजली सामान के विक्रेता 5,000
12- कपड़ा फुटकर एंव थोक व्यापारी 10,000
13- चाय के थोक विक्रेता 5,000
14- नट फैक्ट्री 1,500
15- खाल एंव बाल उतारने वालों पर 500
16- वेटरिंग 5,000
17- बेकरी 5,000
18- बेकरी (पावर) 7,000
19- हेयर कंटिंग सैलून 1,000
20- ब्यूटी पार्लर 5,000
21- कुकिंग गैस एजेन्सी 20,000
22- जनरल मर्चेन्ट (फुटकर एंव थोक) 8,000
23- कोयला थोक विक्रेता 5,000
24- मसाला/पान मसाला फक्ट्री 5,000
25- कोयला फुटकर विक्रेता 2,000
26- पेन्ट की दुकान (रंग रोगन) 10,000
27- ज्वैलर्स (बड़े) 5 लाख टर्न ओवर से अधिक 10,000
28- ज्वैलर्स (छोटे) 5 लाख टर्न ओवर से कम 3,000
29- विज्ञापन एजेन्सी 10,000
30- डेरी फार्म 2,000
31- भूसा फार्म थोक 5,000
32- भूसा विक्रेता फुटकर 2,000
33- ऑडियो लाइब्रेरी 5,000
34- वीडियो लाइब्रेरी 5,000
68 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8
1 2 3
रु0
35- केबिल टी0वी0 10,000
36- आर्केटेक्ट कन्सलटेन्ट विधि एकाउन्टेट कास्ट एकाउन्टेट 5,000
37- फाइनेन्स कम्पनी चिटफण्ड 6,000
38- इश्योरेन्स कम्पनी प्रति शाखा 12,000
39- फाउण्डिंग कम्पनी/इंजीनियरिंग इण्डस्ट्रियल 5,000
40- ढलाई भटटी , खराद मशीन 5,000
41- पशु वध ( छोटा) 3,000
42- पशु बड़ा 5,000
43- सब्जी गोदाम/फल गोदाम 5,000
44- हड्डी, खाल सींग, चमड़ा, खांडसारी आदि फुटकर विक्रेता 1,000
45- बीयर की दुकान 8,000
46- शीरा फैक्ट्री 5,000
47- टेन्ट हाउस 8,000
6 छुकान
1- पान/तम्बाकू की दुकान 500
2- चाय की दुकान 200
3- जनरल मर्चेन्ट की दुकान 1,000
4- किताबों की थोक दुकान 10,000
5- किताबो की फुटकर दुकान 5,000
6- न्यूज पेपर विक्रेता 500
7- लकड़ी की टाल थोक विक्रेता 10,000
8- लकड़ी की टाल फुटकर विक्रेता 5,000
9- टिम्बर मर्चेन्ट 5,000
10- रेडियो मैकेनिक, टी0वी0 मरम्मत 2,000
11- टी0वी0 शॉप/ इलैैक्ट्रॉनिक वस्तुऐं 5,000
12- फर्टिलाइजर (शॉप) 5,000
13- फर्टिलाइजर फैक्ट्री 2,000
15- मिठाई की दुकान 5,000
16- पानी बतासा की दुकान 500
17- ड्राई फ्रुट की दुकान 5,000
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 69
1 2 3
रु0
18- गैस फिलिंग प्लान्ट 10,000
19- गैस फिलिंग दुकान (छोटी) 5,000
20- सब्जी की दुकान/फल की दुकान 500
21- ड्राई फ्रुट की फुटकर दुकान 500
22- बिल्डर्स (रजिस्टर्ड) 10,000
23- मसाले की थोक विक्रेता 10,000
24- मसाले के फुटकर की दुकान 2,000
25- पीतल एंव स्टील बर्तन/पीतल से बनी वस्तुओं के थोक विक्रेता 10,000
26-पीतल एंव स्टील बर्तन/पीतल से बनी वस्तुओं के फुटकर विक्रेता 5,000
27- देशी शराब की प्रति दुकान 10,000
28- अग्रेजी शराब की दुकान 15,000
29- पशु वधशाला (स्लाटर हाउस) 5,000
30- भैंस भैंस ा (बड़ा) पशु मांस की दुकान 5,000
31- बकरा/बकरी (छोटा) पशु मांस की दुकान 2,000
32- फर्नीचर की दुकान (शोरूम) 5,000
33- क्रॉकरी विक्रेता 1,000
34- चूड़ी विक्रेता 1,000
35- जूता (चमड़ा,प्लास्टिक) विक्रेता 2,000
36- ग्लास फैक्ट्री /कांच से सामग्री बनाने वाली समस्त फैक्ट्री 5,000
(38) अंग्रेजी व आयुर्वेदिक दवा की दुकान फुटकर/थोक
(39) रस्सी/बान/बॉस बल्ली आदि की दुकान
(40) अन्य सभी प्रकार की दुकान एवं प्रतिष्ठान
(41) अन्य सभी प्रकार की फैक्टरियॉ, स्पेलर सरसों आदि
7 पषुपालन
(1) छोटा जानवर
(2) बड़ा जानवर
(3) प्रतिदिन खुराकी छोटे जानवर बकरी आदि
(4) प्रतिदिन खुराकी बडे़ जानवर गाय, भैंस, घोड़े आदि
10 ट
2,000 500 500 3,000 100.00 200.00 50.00 200.0070 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8
1 2
3
रु0
8 डेरी एवं दुग्ध उत्पादन
(1) दुग्ध डेरी 100 से अधिक पशु (गाय, भैंस) 20,000
(2) दुग्ध डेरी 20 से 100 पशु तक (गाय, भैंस) 10,000
(3) दुग्ध डेरी 5 से 20 पशु तक (गाय, भैंस) 5,000
9 विविध
(1) आटा चक्की 1,000
(2) आरा मशीन 5,000
(3) आइस फैक्टी्र 1,000
(4) गाड़ी धुलाई सेन्टर 2,000
(5) गैरेज 2,000
(6) राइस मिल 10,000
(7) आटा मिल 5,000
(8) प्रिटिंग प्रैस 2,000
(9) धर्मकॉटा 2,000
(10) लाइट ठेकेदार 3,000
(11) कम्प्यूटर हार्डवेयर 2,000
(12) मोबाइल की दुकान 2,000
(13) केवल ऑपरेटर 3,000
विलम्ब शुल्क
सभी दुकानों व कारखानों पर प्रतिमाह रु0 100.00 (एक सौ रुपया मात्र) विलम्ब शुल्क देय होगा।
दण्ड
नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 298 (1) के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नगरपालिका परिषद यह आदेश देती है कि उपरोक्त नियमों का उल्लंघन करने वालों पर रु0 1,000.00 (एक हजार रुपया) तक का जुर्माना किया जा सकता है। यदि उल्लंघन बराबर जारी रखा तो प्रथम दोष सिद्ध के दिनॉक से रु0 100 (एक सौ रुपया मात्र) प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना किया जा सकता है और जुर्माना अदा न करने पर तीन मास तक का कारावास का दण्ड भी सक्षम न्यायालय द्वारा दिया जा सकता है।
जलमूल्य/जलकर आदि सम्बन्धी नियमावली
1. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में घरेलू जल उपभोक्ताओं से जल-मूल्य रु0 50 (पचास रु0 मात्र) प्रतिमाह एवं व्यवसायिक उपभोक्ताओं से रु0 100 (एक सौ रुपया मात्र) तथा प्रति नये जल संयोजन पर संयोजन शुल्क रु0 1200 वसूल किया जायेगा।
2. कस्बा क्षेत्र के अन्दर आर0ओ0 प्लान्ट व्यवसायियों के लिये जो अपनी बोरिंग (समर्सेबिल) से आर0ओ0 प्लान्ट की व्यवस्था करते हैं। उनसे अनुमति शुल्क रु0 5,000 (पॉच हजार रुपया) मात्र तथा सम्भरण शुल्क रु0 200 (दो सौभाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 71 रुपया मात्र) प्रतिमाह वसूल किया जायेगा। निजी समरसेविल लगाने पर संभरण शुल्क रु 50 मात्र प्रतिमाह वसूल किया जायेगा।
3. जलापूर्ति हेतु निकाय टैंकर उपयोग शुल्क (नगरपालिका परिषद की सीमा में बारात/तिलक आदि कार्य हेतु) रु0 500 मात्र प्रति चक्कर नगरपालिका परिषद की सीमा क्षेत्र में निर्माण कार्य हेतु रु0 700 मात्र प्रति चक्कर प्रतिदिन देय होगा। नगरपालिका सीमा क्षेत्र से बाहर उपयोग शुल्क रु0 700 मात्र प्रति चक्कर देय होगा।
विविध नियमावली
1. प्रमाण-पत्र नामांकन के पश्चात् निर्गत प्रमाण-पत्र अदेयता प्रमाण-पत्र, चरित्र प्रमाण-पत्र, अन्य प्रमाण-पत्र (जन्म-मृत्यु को छोडकर) रु0 200 (दो सौ रुपया) मात्र प्रति प्रमाण-पत्र देय होगा।
2. कर निर्धारण पंजिका नकल शुल्क रु0 100 (एक सौ रुपया) मात्र तत्काल तथा रु0 200 (दो सौ रुपया) मात्र प्रति नकल देय होगा।
3. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ सीमा में आयोजित नुमाइश/मेला निजी जमीन मकान आदि पर अनापत्ति प्रमाण- पत्र शुल्क रु0 10,000 (दस हजार रुपया) मात्र वार्षिक देय होगा।
4. नगरपालिका परिषद की सीमा में स्थित नाला/नाली/सड़क/अन्य सार्वजनिक सम्पत्ति पर अवैध कब्जा पाये जाने पर पेनाल्टी शुल्क रु0 10,000 (दस हजार रुपया) मात्र तक हो सकता है पुनरावृत्ति करने पर पेनाल्टी शुल्क रु0 50,000 (पचास हजार रुपया) मात्र चार्ज किया जायेगा।
5. नगरपालिका परिषद की सीमा के अन्तर्गत नगरपालिका परिषद की दुकानें/भूखण्ड आदि के किराये का पुनः निर्धारण प्रति पॉच वर्ष में किया जायेगा। जिन आवंटित दुकानों की समय-सीमा उल्लिखित नही है उनके किराये का निर्धारण भी प्रति पॉच वर्ष में किया जायेगा।
6. नगरपालिका परिषद की दुकान/भू-खण्ड आदि का किरायानामा स्टाम्प अधिनियम के अनुसार रजिस्टर्ड कराना होगा।
7. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमा के अन्तर्गत भैस, गाय, सुअर इत्यादि सभी प्रकार के पालतू जावनर को खुला छोड़ने पर पकड़े जाने पर रु0 1,000 का जुर्माना देय होगा। और पुनः जानवरो का पकडे़ जाने पर पशुपालक के खिलाफ एफ0आई0आर0 दर्ज करते हुये जानवरों को गौशालाआें में भेज दिया जायेगा।
8. 40 माइक्रोन मोटाई से कम की मोटाई की पॉलीथीन प्रयोग करने पर पैनाल्टी रु0 500/ प्रति प्रकरण। और शासन के शासनादेशानुसार समय-समय पर संशोधित कर जुर्माना लगाया जायेगा।
9. नगर में चिन्हित स्थानाें पर लगाये गये कूड़ेदान में ही कूड़ा डाले, यदि बाहर कूड़ा फेकने पर पकड़े जाने पर रु0 500 का जुर्माना देय होगा।
10. भवन स्वामियों द्वारा नल की टोटी खुली पायी जाने पर जुर्माना रु0 100 प्रति प्रकरण।
11. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमा मे निर्मित होने वाले सार्वजनिक शौचालय के टायलेट प्रयोक्ता प्रति व्यक्ति रु0 05 एवं बाथरुम प्रयोक्ता यूजर चार्ज रु0 10 प्रति व्यक्ति किया जायेगा।
12. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ सीमा में गलियों मे बाधे गये जानवराें को पकड़े जाने पर शुल्क रु0 500/प्रति प्रकरण।
13. नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की हर्ष वैन का किराया प्रति चक्कर रु0 400 (रुपया चार सौ मात्र) देय होगा।
स्वमूल्यांकन (स्वकर निर्धारण) नियमावली-2023
उ0प्र0 अधिनियम, 1916 की धारा-298 मे प्रदत्त शक्तियो का प्रयोग करते हुये नगरपालिका परिषद बांगरमऊ उन्नाव के सीमा हेतु स्वमूल्यांकन (स्वकर निर्धारण) नियमावली-2023 का प्रस्तावित करती है। उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम (संसोधन) 2011 की धारा 128(1), 140(1), 140(क) के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों एवं नगर विकास अनुभाग-972 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ के शासनादेश संख्या 135/9-9-11-190 द्वि0रा0वि0आ0 /04, दिनांक 18 मार्च, 2011 तथा उत्तर प्रदेश शासन नगर विकास अनुभाग-9 दिनांक 08 जून 2017 के अनुपालन मे नगर सीमान्तर्गत भवनों/भूमियों तथा सम्पत्तियाें के द्विवर्षीय/आकस्मिक गृहकर निर्धारण हेतु स्वमूल्याकन (स्वकर) निर्धारण नियमावली वर्ष 2023 बनायी है। उसके किसी बिन्दु या सभी बिन्दुओं पर किसी व्यक्ति/समूह को आपत्ति हो या सुझाव नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के प्रकाशन तिथि के 30 दिन के अन्दर (.....................) दें। जिसका नियमानुसार निस्तारण किया जायेगा, परन्तु 30 दिन के बाद प्राप्त आपत्ति/सुझाव पर कोई विचार नही किया जायेगा। नगरपालिका परिषद बांगरमऊ को प्राप्त आपत्ति/सुझाव का निस्तारण के पश्चात् उक्त प्रस्तावित स्वमूल्यांकन (स्वकर निर्धारण) नियमावली-2023 उ0प्र0 राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी मानी जायेगी।
उपविधि
संक्षिप्त नाम, प्रसार एवं प्रारम्भः-
1. यह उपविधि स्वमूल्यांकन (स्वकर निर्धारण) नियमावली-2023 नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के नाम से जानी जायेगी।
2. अर्थ-स्वकर निर्धारण प्रणाली के तहत भवन स्वामी स्वयं ही अपने भवन की माप कर इस नियमावली में उल्लिखित दराें के आधार पर आगणन की भवन पर निर्धारण कर सकेगा।
3. परिभाषायेंः- इस नियमावली में-
1. नगरपालिका परिषद से तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ उन्नाव से है।
2. अधिनियम का तात्पर्य उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम 1916 से है।
3. अधिषासी अधिकारी का तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अधिषासी अधिकारी से है।
4. अध्यक्ष/प्रषासक का तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अध्यक्ष/प्रशासक से है।
5. सम्पत्ति से तात्पर्य नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमा में स्थित भूमि, या भवन दोनाें से है।
6. स्वकर निर्धारण से तात्पर्य किसी स्वामी या अध्यासी द्वारा इस नियमावली से संलग्न प्रपत्र-क में दाखिल किये जाने वाले स्वतः निर्धारण विवरण से है।
7. आवासीय भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसकी प्रत्येक ईकाई उसमें रहने वाले व्यक्ति के अध्यासन में हो और आवासीय उपयोग का प्रविधान हो किन्तु उसमें व्यवसायिक उददेष्य से उपयोग के लिये होटल लाज या किसी अन्य प्रकार के भवन सम्मिलित न हो।
8. अनावासीय भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसमें प्रयोग व्यवसायिक/औद्यौगिक/गैर आवासीय गतिविधियॉ संचालित हो रही है।
9. मिश्रित भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसमें आवासीय के साथ-साथ व्यवसायिक/औद्योगिक/गैर आवासीय गतिविधियॉ संचालित हो रही है।
10. पक्का भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसकी दीवाल ईट,/पत्थर या ऐसे ही किसी अन्य सामग्री से निर्मित हो तथा जिसकी छत आर0सी0सी0 या आर0बी0सी0 पद्धति से निर्मित हो।
11. अन्य पक्का भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसकी छत कड़ी पटियां एवं गार्डराें तथा लोहा/सीमेन्ट/फाईवर की चादर से निर्मित हो।
12. कच्चा भवन से तात्पर्य ऐसे भवन से है जिसकी छत अस्थाई साधनों या छप्पर आदि से निर्मित हो।
13. मासिक किराया दर से तात्पर्य नगरपालिका परिषद द्वारा वार्ड वार निर्धारित भवनों/भूमि के कारपेट एरिया/आच्छादित क्षेत्रफल के लियेक निर्धारित प्रतिवर्ग फुट मासिक किराये से है।
14. वार्षिक मूल्य से तात्पर्य अधिनियिम की धारा 140 के अधीन निर्दिष्ट वार्षिक मूल्य से है।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 7315. आच्छादित क्षेत्रफल सें तात्पर्य कुर्सी क्षेत्र के ऊपर निर्मित भवन के प्रत्येक तल के कुल आच्छादित क्षेत्र से है।
16. कारपेट एरिया से तात्पर्य अधिनियम की धारा की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण मे निर्दिष्ट कारपेट एरिया से है।
17. मार्ग की चौड़ाई से तात्पर्य सार्वजनिक मार्ग के दोनों ओर स्थित सरकारी नाली नाला के बीच की दूरी से है।
18. अधिसूचित बैंक से तात्पर्य कर की धनराशि को जमा करने के लिये नगरपालिका परिषद बांगरमऊ अधिसूचित बैंक या बैंको से है।
4-कारपेट एरिया की गणना नियमानुसार की जायेगी-
(क) कमरे आन्तरिक की गणना नियमानुसार की जायेगी।
(ख) आच्छादित बरामदा आन्तरिक आयाम की पूर्ण माप।
(ग) बालकनी, कोरीडोर रसोई व भण्डार गृह आन्तरिक आयाम की 50 फीसदी माप।
(घ) गैराज आन्तरिक आयाम की एक चौथाई माप।
(ड) स्नानगृह शौचालय पोर्टकों और जीने से आच्छादित क्षेत्र कारपेट एरिया का भाग ही होगा।
अथवा
कारपेट एरिया आच्छादित क्षेत्रफल का 80 प्रतिशत भाग
5-वार्षिक मूल्य की गणना निम्नानुसार की जायेगी।
(क) आवासीय भवनों के वार्षिक मूल्य की गणना- वार्षिक मूल्य कारपेट एरिया निर्धारित क्षेत्रफल का मासिक किराया दर 12 प्रतिशत भाग
(ख) अनावासीय/व्यवसायिक भवनों के वार्षिक मूल्य की गणना- वार्षिक मूल्य आच्छादित क्षेत्रफल/भूमि का खुला क्षेत्रफल निर्धारित प्रति ईकाई का क्षेत्रफल किराया दर 4 (गुणक) 12
(ग) औधोगिक ईकाई के भवन/भूमि की वार्षिक मूल्य की गणना- वार्षिक मूल्य आच्छादित क्षेत्रफल/भूमि का खुला क्षेत्रफल निर्धारित प्रति ईकाई का क्षेत्रफल किराया दर 2 (गुणक) 12
6-स्वतः अध्यासित भवनों के लिये छूट-
(क) 10 वर्ष तक के पुराने भवनों के वार्षिक मूल्याकन मे 25 प्रतिशत की छूट अनुमन्य होगी।
(ख) 10 वर्ष से 20 वर्ष तक के पुराने भवनों के वार्षिक मूल्याकन मे 32.5 प्रतिशत की छूट अनुमन्य होगी।
(ग) 20 वर्ष से अधिक पुराने भवनों के वार्षिक मूल्याकन में 40 प्रतिशत की छूट अनुमन्य होगी।
7-किराये पर उठे आवासीय भवन-
(क) (1) 10 वर्ष तक के पुराने भवनाें के वार्षिक मूल्याकंन में 25 प्रतिशत अधिक समझा जायेगा।
(2) 10 वर्ष से 20 वर्ष तक के पुराने भवनों के वार्षिक मूल्याकन में 12.5 प्रतिशत अधिक समझा जायेगा।
(3) 20 वर्ष से अधिक पुराने भवनों के वार्षिक मूल्याकंन मे आगणित वार्षिक मूल्यांकन के बराबर समझा जायेगा।
(ख) किराये पर उठे अनावासीय/औद्योगिक/व्यवसायिक भवन का मूल्यांकन अनुबन्ध में उल्लखित वास्तिवित किराये या मासिक किराया दर (प्रति वर्गफुट) मूल्यांकन जो अधिक है। पर किया जायेगा।
(ग) भवन में कई मंजिल होने की दशा में प्रत्येक मंजिल का वार्षिक किराया मूल्य उपरोक्त विधि से ही ज्ञात किया जायेगा।
74 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 88- सामान्य कर
(1) वार्षिक किराया मूल्यांकन (ARV) का गृहकर 10 प्रतिशत एवं जलकर 05 प्रतिशत होगा।
(2) निर्धारित तिथि तक प्रपत्र-ख न जमा करने पर रु0 5,000/- (रुपये पांच हजार मात्र) तक अर्थदण्ड देय होगा।
9-रेन्ट कन्ट्रोल के मकान-
रेन्ट कन्ट्रोल अधिनियम 1972 के अधीन आने वाले अवासीय भवनों पर नगरपालिका परिषद बांगरमऊ प्रत्येक करों की गणना के लिये वार्षिक किराये का निर्धारण रेट कन्ट्रोल अधिनियम के अन्तर्गत नही होगा। बल्कि अब इसके किराये का निर्धारण उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम 1916 के प्राविधानों के अनुसार किया जायेगा। ऐसे भवनाें के करो की देयता अब किरायेदारी की होगी।
(क) जिन भवनो ंमें किरायेदारों और सर्वे में भवन स्वामी का पता नही चलता है तो ऐसे भवनों में किरायेदार/अध्यासी को ही गृहकर का भुगतान करना होगा।
10- छूट-
स्वामी द्वारा अध्यासित ऐसा कोई भवन जो 30 वर्गमीटर पर निर्मित किया हो उसका करापोरेट एरिया 15 वर्गमीटर तक तथा उसके स्वामित्व मे नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में कोई अन्य भवन न हों, गृहकर से मुक्त होगा।
11- प्रपत्र कब-कब भरना होगा-
(क) जब कभी भवन स्वामी द्वारा भवन को किराये पर दिया जायेगा या किराये से वापस अपने अध्यासन मे किया जायेगा इसके तीन सप्ताह के भीतर प्रपत्र-क में पुनः विवरण प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।
(ख) जब किसी भवन के कारपेट एरिया या भूमि का क्षेत्रफल या दोनों मे परिवर्तन अथवा परिवर्धन किया जायेगा तो उसके लिए तीन माह के भीतर यथास्थिति भवन/भू-स्वामी द्वारा अथवा अध्यासित द्वारा प्रपत्र-क मे विवरण भरना होगा।
(ग) गलत सूचना देने पर रु0 5,000/- (रुपये पांच हजार मात्र) तक का आर्थिक दण्ड देय होगा।
(घ) जिन भवन/भू-स्वामियों/अध्यासियों द्वारा कर निर्धारण का विकल्प नही अपनाया जायेगा उनके सम्बन्ध में कर का निर्धारण व वसूली की कार्यवाही नियमानुसार की जायेगी।
10-अनावासीय/गैर आवासीय भवन से तात्पर्य-
(1) सभी प्रकार की फुटकर दुकाने, शौरुम, कृषि उपकरणों के विक्रय केन्द्र, शीतगृह, सिनेमा, व मल्टिप्लेक्स पी0ओ0सी0, पैट्रोल व डीजल फिलिंग स्टेशन, गोदाम, बैंक वाणिज्य कार्यालय नर्सिंग होम, अस्पताल, बारातघर, होटल, रेस्टोरेन्ट, गेस्ट हाउस, राजकीय अर्धराजकीय, स्थानीय निकाय कार्यालय, अतिथिगृह, लाजिंग बोर्डिग हाउस, छात्रावास डाकघर, पुलिस स्टेशन, चौकी अग्निशमन केन्द्र व अन्य व्यवसायिक/भूमि से है।
(2) सभी प्रकार की औधोगिक इकाइयो/भूमि से है।
11-वार्षिक मूल्यांकन के आधार पर आंगणित कर से सम्बन्धित आधारभूत तथ्य-
(क) नगरपालिका परिषद बांगरमऊ के अधिशासी अधिकारी द्वारा नगरपालिका परिषद क्षेत्र या उसके भाग में नियमावली मे विहित रीति के अनुसार क्षेत्रवार समय-समय पर किराया दर और कर निर्धारण सूची तैयार करवायेगे। (संशोधित धारा 141)भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 75 (ख) सर्वेक्षण के दौरान आवासीय/व्यवसायिक/औधोगिक भवनों के पृथक-पृथक भवन संख्याये आवंटित की जायेगी। यदि किसी भवन मे आवासीय एवं व्यवसायिक दोनो गतिबिधियॉ पाई जाती है तो इन दोनो पृथक-पृथक भवन संख्याये आवंटित की जायेगी।
(घ) अनावासीय/व्यवासायिक/औद्योगिक भवनों पर कर निर्धारण नियमावली में उल्लिखित नियमाें के अनुसार किया जायेगा।
13-कोई भी व्यक्ति यदि नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की सीमा में स्थित भवन/भूमि का स्वामी अध्यासी है तो वे भवन/भूमि में सम्पत्तिकर का निर्धारित मासिक किरायेदारों (प्रतिवर्ग फुट) के आधार पर स्वयं मूल्यांकन द्वारा कर लेगे। इसके लिये नगरपालिका परिषद बांगरमऊ से आवेदन-पत्र (प्रपत्र क और प्रपत्र ख) प्राप्त कर अपने मकान का ब्यौरा देकर उपविधि में दी गयी निर्धारित दर के अनुसार स्वकर का निर्धारण करेंगे।
14-आवेदन-पत्र (प्रपत्र क और प्रपत्र ख) नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है।
15-भवन/भूमि के स्वामी/अध्यासी द्वारा स्वकर निर्धारण का विकल्प नही करवाया जायेगा तो उसके सम्बन्ध में स्वकर निर्धारण के अन्तर्गत वसूली की कार्यवाही नियमानुसार नगरपालिका परिषद बांगरमऊ उन्नाव द्वारा की जायेगी।
16- भवन/भूमि के स्वामी/अध्यासी द्वारा आवेदन-पत्र (प्रपत्र क और प्रपत्र ख) में गलत तथ्य सूचना देने पर उसको स्वयं रु0 1,000/- (रुपये एक हजार मात्र) से अधिक अर्थदण्ड देय होगा।
17-कर निर्धारण दर-
(1) गृहकर की देयता वार्षिक होगी जो वार्षिक मूल्य का 10 प्रतिशत होगा।
(2) जलकर की देयता वार्षिक होगी जो वार्षिक मूल्य का 5 प्रतिशत होगा
18-करों का भुगतान-
(1) अधिशासी अधिकारी या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई अधिकारी बनाये गये नियम अधीन निर्धारित भवन/भूमि (सम्पत्ति) कर के भुगतान हेतु स्वामी/अध्यासी को बिल भेजेगा, जिसमे एक ऐसा दिनांक निर्दिष्ट होगा, नगरपालिका परिषद बांगरमऊ में कर का भुगतान किया जायेगा। स्वकर निर्धारण का भुगतान सार्वजनिक सूचना द्वारा सूचित किये जाने पर भी निर्धारित तिथि तक किया जायेगा। निर्धारित अवधि में भुगतान न करने की दशा में उपविधि में दी गई शास्ति तथा नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 173(क) के भी अनुसार कर की वसूली की जायेगी।
(2) जिन भवनाें/भूमि को नगरपालिका परिषद बांगरमऊ द्वारा भवन/भूमि की संज्ञा दी जा चुकी है। उन्हें भी प्रपत्र क और प्रपत्र ख पर उपरोक्तानुसार भरकर जमा करना अनिवार्य है। तथा उनके भवन/भूमि पर यदि कोई पूर्व का बकाया है तो प्रपत्र क अनुसार देय कर एवं पूर्व बकाया कर भी जमा करेंगे।
(3) जब किसी भवन मेंं निर्माण या पुनःनिर्माण के फलस्वरुप कारपेट एरिया/भूमि के क्षेत्रफल अथवा दोनों में कोई परिवर्तन या परिवर्द्धन किया जाता है तो उसके निर्माण के समापन या अध्यासन के दिनांक से 03 माह के अन्दर यथा स्थिति भवन स्वामी/अध्यासी द्वारा प्रपत्र ख में ही पुनः विवरण प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।
(4) जब कभी भवन स्वामी द्वारा अध्यासित भवन को किराये पर दिया गया हो, या किराये से वापस अपने अध्यासन में लिया गया होतो इसके तीन माह के अन्दर प्रपत्र ख में ही पुनः विवरण प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।
19-करो में छूट-
गृहकर एवं जलकर का भुगतान भवन/भू-खण्ड स्वामी-अध्यासी द्वारा माह सितम्बर तक जमा करने पर गृहकर में 10 प्रतिशत तथा जलकर में 05 प्रतिशत की छूट अनुमन्य होगी। इसके पश्चात् कर जमा करने पर कोई छूट अनुमन्य नही होगी किन्तु वित्तीय वर्ष की समाप्ति के उपरान्त करों का भुगतान भवन/भू-खण्ड76 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 स्वामी-अध्यासी/किरायेदार को 20 प्रतिशत की दर से सरचार्ज देय होगा। जिसमेंं भुगतान न जमा करनें पर प्रतिवर्ष सरचार्ज में स्वतः वृद्धि होती रहेगी। और बिल उपलब्ध कराने के 06 माह बाद बकाये की वसूली भू- राजस्व के बकाये की भांति कराने हेतु अधिशासी अधिकारी बाध्य होगा। (नगरपालिका अधिनियिम 1916 धारा-139)
20-मकानों को दर्ज करने सम्बन्धी-
कोई भी व्यक्ति किसी भी समय किसी भी भवन या भूमि पर अपना नाम अध्यासी अथवा स्वामी के रुप में अंकित करना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होगा और यदि उसके नाम के सम्बन्ध में कोई आवेदन निरस्त करने हेतु विचाराधीन है तो उसका उल्लेख लिखित रुप में किया जायेगा अन्यथा उसके बाद कर सूची में आवेदन के अनुसार नाम कर निर्धारण सूची में अंकित कर दिया जायेगा।
21-नगरपालिका परिषद बांगरमऊ की ओर से अधिशासी अधिकारी जैसी भी परिस्थिति हो नगरपालिका अधिनियम 1916 की धारा 158(1)(2) के अन्तर्गत पत्र भेजकर किसी भवन/भूमि स्वामी को उसकी सम्पत्ति आदि के बारे में विवरण प्रस्तुत करने तथा अन्य दस्तावेज मांगने व प्राप्त करने का अधिकार होगा।
22-(क) निकाय के अधिषासी अधिकारी द्वारा अपनी सीमान्तर्गत भवनो/भूमियों को वार्षिक मूल्याकंन निम्न दरों (प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह) पर निर्धारित किया जायेगा।
अधिषासी अधिकारी नगरपालिका परिषद, बांगरमऊ द्वारा निर्धारित मासिक किराया प्रति वर्गफिट
(रुपये) मेंं।
पक्का भवन
अन्य पक्का भवन कच्चा भवन भूमि के भवन की प्रकृति
सम्बन्ध मेंं (R.C.C./R.B.छत)
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11
फर्श की प्रकृति
पक्का फर्श
पक्का फर्श
पक्का फर्श
कच्चा खाली प्लाट
कच्चा पत्थर/ टाइल्स/ मुजाइक
कच्चा पत्थर/ टाइल्स/ मुजाइक
पत्थर/ टाइल्स / मुजाइक
सड़क की चौड़ाई
4.50 4.00 2.00 4.00 2.50 1.00 3.00 2.00 0.80 0.80 (क) (15 फिट से अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित भवन)
3.60 3.50 1.75 3.00 2.00 0.90 2.50 1.50 0.60 0.60 (ख) (15 फिट से 10 फिट चौड़ी सड़क पर स्थित भवन)
3.00 2.75 1.50 2.50 1.80 0.80 2.00 1.00 0.50 0.40 (ग) (10 फिट चौड़ी सड़क पर स्थित भवन)भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 77
शस्ति
उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 की धारा-299(1) के द्वारा प्रदत्त अधिकारो का प्रयोग करते हुये नगरपालिका परिषद, बांगरमऊ यह निर्देश देती है कि-
(1) जो व्यक्ति इस उपविधि का उल्लंघन करने के लिये दुष्प्रेरित करेगा, उसे रु0 1,000/- (रुपये एक हजार मात्र) के अर्थदण्ड से दण्डित किया जा सकता है और जब ऐसा उल्लंघन निरन्तर किये जाने की स्थिति में प्रथम दोष सिद्ध के दिनांक के पश्चात् ऐसे प्रत्येक दिन के लिये जिसमें अपराधी का अपराध करते रहना सिद्ध होगा रु0 50.00 (रुपये पचास मात्र) तक हो सकेगा।
(2) उप नियम 01 मेंं निर्दिष्ट किसी बात के होते हुये भी उपविधि के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का प्रशमन अपराध के लिये नियत अर्थदण्ड की अन्यून एक तिहाई धनराशि और अनधिक आधी धनराशि की वसूली पर अधिशासी अधिकारी या उसके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी द्वारा किया जा सकता है।
(राम जी), अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद, बांगरमऊ-उन्नाव।
कुकरेटी, बाल मुंकुन्द ठाकुर व हरीश नाथ गोस्वामी थे।
सूचना
पार्टनरशिप रिकोन्स्टीटयूशन डीड दि0 02 दिसम्बर, 2024 सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि M/s के अनुसार पार्टनर बाल मुंकुन्द ठाकुर सेवानिवृत्त हो गये
है। फर्म में वर्तमान पार्टनर-1- आशुतोष कुकरेटी 2.
हरीश नाथ गोस्वामी है व फर्म का पता परिवर्तित कर
ए-1, एफ 102ए सेक्टर-59, नोएडा, जनपद
गौतमबुद्धनगर उ0प्र0-201301 किया गया है।
आशुतोष कुकरेटी, पार्टनर।
PSH INFRA TECH, पता-172, Sec-6 Chiranjiv Vihar Ghaziabad, 201002 पंजीकरण संख्या- GHA/0019374 दि0 03 अक्टूबर, 2024 है। पार्टनरशिप डीड 20 जनवरी, 2017 के अनुसार पार्टनर 1- अन्वेश गुप्ता 2- अंकित गोयल थे। एग्रीमेन्ट मोडिफाईग दि पार्टनरशिप डीड (संशोधित डीड) दिनांक 31 दिसम्बर, 2022, प्रभावी दि0 01 जनवरी, 2023 के अनुसार कपिल चौधरी नवीन साझीदार की हैसियत से सम्मलित करते
हुये फर्म का पता-Plot No-108, Shop No-27
सूचना
Mahalaxmi Market Prakash Industrial Estate,
Sahibabad Ghaziabad U.P.-201005 किया गया है।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि फर्म
मेसर्स पकीजा इन्डस्ट्रीज पता विलेज डांडी हमीर पो0
आ0 रिछा जिला बरेली उतर प्रदेश जिसकी पंजीकरण अन्वेश गुप्ता, पार्टनर।
सं0- B-9697 में से तीन साझेदार 1. मो0 फुरकान पुत्र
श्री मोहम्मद सुलेमान 2. मो0 जाहिद पुत्र श्री मो0 युनुस 3.
सूचना
श्रीमती जैबुन निशा पत्नी स्व0 खलील अहमद दिनांक
01 जुलाई, 2024 को स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हो गये है।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि M/s
सेवानिवृत्ति के पश्चात तीनो सेवानिवृत्त साझेदारों का फर्म JSPARK, पता- Office No. OC, 1226 Wing-A
पर व फर्म का सेवानिवृत्त तीनो साझेदारों पर कोई शेष Floor, 12th Gaur City, Greater Noida West,
बकाया नही है। वर्तमान में उपरोक्त फर्म में कुल दो Gautam Buddha Nagar-201301 पंजीकरण संख्या-
साझेदार क्रमशः 1. सनी उर रहमान पुत्र श्री दाउद जीबीएन/0015303 दि0 05 जून, 2023 है। पार्टनरशिप
अहमद व 2. मो0 मुन्तसिर पुत्र श्री दाउद अहमद है।
डीड दि0 21 अप्रैल, 2023 के अनुसार पार्टनर आशुतोष
11 ट78 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8 एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
मो0 मुन्तसिर,
ने रिटायरमेंट लेकर अपनी साझीदारी समाप्त कर ली है एवं उक्त दिनांक को फर्म में श्री सुधा शर्मा सम्मिलित हो गयी है। रिटायरमेंट लेने वाले पार्टनर की उक्त फर्म पर अब कोई लेनदारी/देनदारी नही है। फर्म में वर्तमान में छः पार्टनर श्री मनोज कुमार, श्री मंजीत सिंह, श्रीमती रिहाना रियाज खान, श्री विरेश कुमार, श्री राजवीर एवं श्रीमती सुधा शर्मा हैं।
साझेदार, मेसर्स पकीजा इन्डस्ट्रीज, पता-विलेज डांडी हमीर, पो0 आ0 रिछा जिला बरेली उतर प्रदेश।
सूचना
मनोज कुमार, पार्टनर, मेसर्स एम0बी0आर0 हॉस्पिटल, ग्राम शरीफपुर, तह0 व जिला-सम्भल उ0प्र0।
सूचना
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है मेसर्स Shanti Highway Petroleum, Chamarua, Kulpahad, Dist-Mahoba- U.P. वर्तमान में पंजीकृत फर्म जिसके साझेदारों का विवरण निम्न प्रकार है-
1. Kamlesh Kumar Kushwaha
2. Rajeev Kumar Jain
दिनांक 11 नवम्बर, 2024 से साझेदारों की आपसी सहमती द्वारा फर्म को बंद किया जा रहा है।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है मेसर्स एन0आर0 इंडस्ट्रीज, पता-बी-75 सेक्टर-10 नोएडा, गौतमबुद्धनगर की साझेदारी में श्री राजेश कुमार जैन, श्रीमती बीना जैन एवं श्री नवीन जैन साझीदार थे तथा श्री राजेश कुमार जैन की मृत्यु दिनांक 31 मई, 2024 को हो गयी थी संशोधित साझेदारी डीड दिनांक 28 नवम्बर 2024 के अनुसार फर्म में दो नये पार्टनर श्री संजय जैन एवं श्री विजय कुमार जैन सम्मिलित हो गये है। तथा संशोधित साझेदारी डीड दिनांक 28 नवम्बर, 2024 के अनुसार फर्म में श्रीमती बीना जैन, श्री नवीन जैन, श्री संजय जैन एवं श्री विजय कुमार जैन चार पार्टनर वर्तमान में कार्यरत रहेगे। श्रीमती बीना जैन, श्री नवीन जैन, श्री संजय जैन एवं श्री विजय कुमार जैन उपरोक्त फर्म में साझीदार है।
एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
नवीन जैन, साझीदार, मेसर्स एन0आर0 इंडस्ट्रीज, पता-बी-75 सेक्टर-10 नोएडा, गौतमबुद्धनगर।
Rajeev Kumar Jain साझेदार, मेसर्स Shanti Highway Petroleum, Chamarua, Kulpahad, Dist-Mahoba- U.P.
सूचना
सूचना
सूचित किया जाता है कि साझेदारी फर्म मे0 श्री राम प्लास्टिक सी 57, फाउण्ड्री नगर, आगरा में परिवर्तन की सूचना इस प्रकार है-
यह है कि दिनांक 12 अक्टूबर, 2024 को श्रीमती रितिका अग्रवाल पत्नी श्री रचित बंसल निवासी-सी-72 कमला नगर, आगरा को फर्म की साझेदारी में सम्मिलित सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है मेसर्स एम0बी0आर0 हॉस्पिटल, ग्राम शरीफपुर, तह0 व जिला- सम्भल पंजीकरण सं0-SBU/0013001 नामक फर्म में पंजीकरण के समय पांच पार्टनर श्री मनोज कुमार, श्री मंजीत सिंह, श्री मनवीर सिंह, श्रीमती रिहाना रियाज खान एवं श्री विरेश कुमार थे। फर्म में दिनांक 17 फरवरी, 2024 को दो पार्टनर श्री राजवीर एवं श्री मुश्ताक अहमद हाजम सम्मिलित हो गये है। दिनांक 05 दिसम्बर, 2024 को पार्टनर श्री मनवीर सिंह एवं श्री मुश्ताक अहमद हाजमभाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 79 एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि
उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं
मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
गौरी शंकर जायसवाल, पुत्र श्री महेश प्रसाद जायसवाल, हुमांयूपुर उत्तरी पो0 गोरखनाथ, गोरखपुर।
कर लिया गया है तथा उक्त दिनांक को ही फर्म के साझेदार श्री दिलीप कुमार मित्तल पुत्र श्री गनेश चन्द मित्तल निवासी-106 अनुपम रॉयल अपार्टमैन्ट, विजय नगर कॉलोनी, आगरा, श्रीमती नीना बंसल पुत्री स्व0 पन्नालाल बंसल निवासी-सी-72 कमला नगर आगरा तथा श्री रचित बंसल पुत्र स्व0 विपिन बंसल निवासी-उपरोक्त फर्म की साझेदारी से स्वेच्छा से पृथक हो गये है। अब फर्म में श्रीमती शिल्पी बंसल तथा श्रीमती रितिका अग्रवाल साझेदार है।
सूचना
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरी
पुत्री का सही नाम वंशिका गुप्ता पुत्री रवि कुमार है जो शिल्पी बंसल, मे0 श्री राम प्लास्टिक, सी-75, फाउण्ड्री नगर, आगरा।
उसके शैक्षिक अभिलेख में अंकित है। त्रुटिवश मेरी पुत्री
के आधार कार्ड संख्या-4464 2132 6858 में मेरी पुत्री का
सूचना
नाम वर्तिका गुप्ता पुत्री रवि कुमार गुप्ता अंकित हो गया
है जो कि गलत है। भविष्य में मेरी पुत्री को उसके सही
नाम वंशिका गुप्ता पुत्री रवि कुमार के नाम से जाना व सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरा तथा मेरी पत्नी का सही नाम क्रमशः सुनील सूर्यमनी
पहचाना जाय।
शुक्ला (SUNIL SURYAMANI SHUKLA) ज्ञान
एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि शीला (GYANASHILA) है जो हम लोगो के आधार कार्ड पैन कार्ड में अंकित है त्रुटिवश मेरे पुत्र के हाईस्कूल
उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं
मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
के सह अंक प्रमाण पत्र (अनुक्रमांक-23187883) में मेरा नाम सुनील शुक्ला तथा पत्नी का नाम शीला शुक्ला अंकित हो गया है जो कि गलत है।
एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
रवि कुमार, पुत्र रमेश चन्द्र गुप्ता, निवासी-डंकीनगंज, तहसील-सदर, महुआरिया मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश।
सूचना
सुनील सूर्यमनी शुक्ला ग्राम बिरधौलपुर पो0 रायपुर, जिला जौनपुर उ0प्र0।
सूचित हो कि मेरे शैक्षिक अभिलेखोें एवं ए0 एन0
एम0 की सर्विस बुक में मेरा नाम प्रियंका पत्नी अवधेश
सूचना
कुमार वर्मा अंकित है जो कि मेरा सही नाम है। जबकि
मेरे आधार कार्ड में मेरा नाम त्रुटिवश प्रियंका वर्मा पत्नी
अवधेश कुमार वर्मा अंकित हो गया है जो कि गलत है।
प्रियंका,
पत्नी अवधेश कुमार वर्मा निवासी-ग्राम सरतेजपुर, विकास खण्ड जयसिंहपुर, परगना बराैंसा, तहसील जयसिंहपुर, जनपद सुलतानपुर।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरी पुत्री का सही नाम आरोही जायसवाल पुत्री गौरी शंकर जायसवाल है जो उसके शैक्षिक अभिलेख में अंकित है, त्रुटिवश मेरी पुत्री के आधार कार्ड संख्या-6379 9808 4296 में उसका नाम हर्षिता जायसवाल अंकित हो गया है जो कि गलत है, भविष्य में मेरी पुत्री को उसके सही नाम आरोही जायसवाल पुत्री गौरी शंकर जायसवाल के नाम से जाना व पहचाना जाए।
80 उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) [ भाग 8सूचना
सूचना
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरा
सही नाम जान्हवी यादव पुत्री जीत लाल है जो मेरे
शैक्षिक अभिलेख में अंकित है त्रुटिवश मेरे आधार कार्ड
संख्या-9956 1730 0237 में मेरा नाम बबली यादव
अंकित हो गया है जो मेरा घरेलू नाम है भविष्य मे मुझे
मेरे सही नाम जान्हवी यादव पुत्री जीत लाल पत्नी अनिल सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरे पिता का सही नाम रवि प्रकाश जायसवाल जो उनके आधार कार्ड में अंकित है त्रुटिवश मेरे हाई स्कूल अंकपत्र व प्रमाण पत्र (2021 अनुक्रमांक-23251332) में मेरे पिता का नाम रवि प्रकाश अंकित हो गया है जो कि गलत है। उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी हैे।
कुमार के नाम से जाना व पहचाना जाय।
एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि
उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं गौरव जायसवाल, निवासी-55, मोरी दारागंज, प्रयागराज उ0प्र0।
मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
सूचना
जान्हवी यादव, पत्नी अनिल कुमार, पता-259 मऊ सरैया अशोक नगर, इलाहाबाद।
सूचना
सूचित किया जाता है कि मेरी पुत्री का सही नाम सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरा सही नाम सुमित्रा देवी पत्नी बेचन राम है, जो मेरे पति के सेवा से सम्बन्धित अभिलेख में तथा परिवार रजिस्टर में अंकित है त्रुटिवश मेरे आधार कार्ड सं0-8401 2160 5057 में मेरा नाम कुन्ती पत्नी बेचन अंकित हो गया है, जो कि गलत है। भविष्य में मुझे मेरे सही नाम सुमित्रा देवी पत्नी स्व0 बेचन राम के नाम से जाना व पहचाना जाय।
प्रियल कुशवाहा पुत्री रामनरेश कुशवाहा है जो उसके
शैक्षिक अभिलेख में अंकित है। त्रुटिवश मेरी पुत्री के
आधार कार्ड संख्या-6553 9299 8497 में उसका नाम एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उपर्युक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
पल्लवी कुशवाहा अंकित हो गया है जो कि गलत है।
भविष्य में मेरी पुत्री को उसके सही नाम प्रियल कुशवाहा
पुत्री रामनरेश कुशवाहा के नाम से जाना व पहचाना
जाये।
सुमित्रा देवी, पत्नी स्व0 बेचन राम, ग्राम जयापुर, पो0 जयापुर, जिला वाराणसी।
सूचना
रामनरेश कुशवाहा, पुत्र गौरीशंकर कुशवाहा, पता-ठाकुर नगर वार्ड नं0-2 सलेमपुर, पोस्ट सलेमपुर, जिला देवरिया उ0प्र0।
सूचना
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरे पुत्र का सही नाम शाश्वत शुक्ला पुत्र सूरज कुमार शुक्ला है जो उसके शैक्षिक अभिलेख में अंकित है त्रुटिवश मेरे पुत्र के आधार कार्ड संख्या-2136 4080 7121 में उसका नाम गौरव शुक्ला अंकित हो गया है जो गलत है भविष्य में मेरे पुत्र को उसके सही नाम शाश्वत शुक्ला पुत्र सूरज कुमार शुक्ला के नाम से जाना व पहचाना जाय।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि मेरा सही नाम नीरज सिंह पुत्र रज्जन लाल है जो मेरे शैक्षिक अभिलेख में अंकित है त्रुटिवश मेरे आधार कार्ड सं0-2589 8562 4015 में मेरा नाम मोहित कुमार अंकित हो गया है जो कि गलत है। भविष्य में मुझे मेरे सही नाम नीरज सिंह पुत्र रज्जन लाल के नाम से जाना व पहचाना जाए।
सूरज कुमार शुक्ला, नि0 बाबूपुर साथर, पो0 सिरसा, तहसील-हण्डिया, जनपद प्रयागराज।
भाग 8 ] उार प्रदेश गजट, 11 जनवरी, 2025 ई0 (पौष 21, 1946 शक संवत्) 81एतद् द्वारा यह भी प्रमाणित किया जाता है कि उपरोक्त के सम्बन्ध में समस्त विधिक औपचारिकताएं स्वयं मेरे द्वारा पूर्ण की गयी है।
स्वाती चड्ढा, पत्नी अनुपम सोबती, 18/10 करेला बाग कालोनी, तुलसीपुर प्रयागराज।
सूचना
नीरज सिंह, पता- ग्राम बरमपुर, पोस्ट अमौेली, थाना-चाँदपुर, जनपद फतेहपुर उत्तर प्रदेश।
सूचना
मेरे आधार संख्या- 8971 6397 1012 में मेरा नाम चनरी देवी गलत अंकित हो गया है। मेरा सही नाम चंद्रकली पत्नी स्व0 नंदलाल निवासिनी-ग्राम कपसा, फूलपुर, प्रयागराज है। मुझेे इसी नाम से जाना पहचाना जाय।
चन्द्रकली, ग्राम कपसा, फूलपुर, प्रयागराज।
सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि सही नाम स्वाति चड्ढा है जो मेरे शैक्षिक अभिलेख आधार कार्ड, पैन कार्ड में अंकित है। त्रुटिवश मेरी पुत्री के हाई स्कूल के अंक प्रमाण पत्र अनुक्रमांक 23267182 में मेरा नाम स्वाती सोबती अंकित हो गया है जो कि गलत है।
पी0एस0यू0पी0-41 हिन्दी गजट-भाग 8-2025 ई0।
मुद्रक एवं प्रकाशक-निदेशक, मुद्रण एवं लेखन-सामग्री, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज।
- ↩
- 3 161 ↩
- 18 193 ↩
- 10 163 ↩
- 2 90 ↩
- 15 165 ↩
- 16 192 ↩
- 19 193 ↩
- 20 194 ↩
- योग . . ↩
- 22 163 ↩
- 21 194 ↩
- 9 162 ↩
- 14 163 ↩
- 17 192 ↩
- 8 161 ↩
- 4 161 7 161 ↩
- 5 161 6 161 ↩
- 23 163 ↩
- 24 192 ↩
- 12 163 ↩
- 13 163 ↩
- 11 163 ↩
- ↩
- Sin 2x, Cos 2x, tan 2x, Sin 3x, Cos 3x तथा tan 3x से सम्बन्धित तत्समक। इकाई-2 बीजगणित 37 अंक 1. सम्मिश्र संख्याएँ तथा द्विघात समीकरण ः सम्मिश्र संख्याओं की आवश्यकता, विशेषतया के लाने की प्रेरणा सभी द्विघात समीकरणों को हल न कर पाने की अयोग्यता पर। सम्मिश्र संख्याएं, सम्मिश्र संख्याएं के बीजीय गुणधर्मों का संक्षिप्त विवरण एक ऋण वास्तविक संख्या के वर्गमूल, समिमश्र संख्या का मापांक और संयुग्मी, आरगंड तल और धु्रवीय निरूपण। 2. रैखिक असमिकाएँ : रैखिक असमिकाएँ, एक चर में रैखिक असमिकाओं का बीजीय हल तथा उसका संख्या रेखा पर निरूपण। 3. क्रमचय तथा संचय : गणना का आधारभूत सिद्धान्त, फैक्टोरियल (n!), क्रमचय तथा संचय, nPr तथा nCr सूत्रों की व्युत्पत्ति तथा उनके सम्बन्ध। साधारण अनुप्रयोग। 4. द्विपद प्रमेय : ऐतिहासिक वर्णन, द्विपद प्रमेय का धन पूर्णांकीय घातांकों के लिए कथन तथा उत्पत्ति। पास्कल का त्रिभुज नियम, सरल अनुप्रयोग। 5. अनुक्रम तथा श्रेणी : अनुक्रम तथा श्रेणी, गुणोत्तर श्रेणी, गुणोत्तर श्रेणी के सामान्य पद, समान्तर तथा गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम n पदों का योग, अनन्त गुणोत्तर श्रेणी और उसके योग, गुणोत्तर माध्य, समान्तर माध्य और गुणोत्तर माध्य के बीच सम्बन्ध। इकाई-3 निर्देशांक ज्यामिति 15 अंक 1. सरल रेखा ः पिछली कक्षाओं से द्वि-आयामी संकल्पनाओं (2D) का दोहराना। एक रेखा की ढाल तथा दो रेखाओं के बीच का कोण। रेखा के समीकरण के विविध रूप : अक्षों के समान्तर, बिन्दु-ढाल रूप, ढाल अन्तः खण्ड रूप, दो बिन्दु रूप, अन्तःखण्ड रूप। एक बिन्दु की एक रेखा से दूरी, दो समान्तर रेखाओं के बीच की दूरी। 7 ङ ↩
- तथा T के मध्य ग्राफ खींचना। 14 अनुनाद नली का उपयोग करके दो अनुनाद स्थितियों द्वारा कक्ष ताप पर वायु में ध्वनि की चाल ज्ञात करना तथा अन्त्य संघारित ज्ञात करना। 15 P तथा V एवं P तथा 1/v के बीच ग्राफ खींचकर नियत ताप पर वायु के नमूने के लिये दाब के साथ आयतन में परिवर्तन का अध्ययन करना। 16 किसी दी गयी गोल वस्तु का सीमान्त वेग मापकर दिये गये श्यान द्रव का श्यानता गुणांक ज्ञात करना। 17 न्यूटन के शीतलन नियम का सत्यापन करना। 18 स्प्रिंग के लिये भार तथा लम्बाई में वृद्धि के बीच वक्र खींचकर बल नियतांक ज्ञात करना। 19-स्वरमापी की सहायता से किसी दिये गये स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करना। 20-अनुनाद नली का उपयोग करके किये गये दो स्वरित्र की आवृत्तियों की तुलना करना तथा अन्य संशोधन ज्ञात करना। विषय-रसायन विज्ञान कक्षा-11 प्रश्न पत्र बनाने की योजना 1. बहुविकल्पीय क, ख, ग, घ, ङ, च 2. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 2 अक) 3. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 2 अक) 4. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 3 अक) 5. क, ख, ग, घ (प्रत्येक प्रश्न 4 अक) 6. क, ख (प्रत्येक प्रश्न 5 अक) 7. क, ख (प्रत्येक प्रश्न 5 अक) 16 06 24 08 24 08 34 12 44 16 52 10 52 10 नोटः- कम से कम 08 अंक के आंकिक प्रश्न पूछे जाये ↩
- +, Cu +, As +, Ni +, Zn +, Co +, ऋणायन - (अम्लीय मूलक) - COOCHOCPOIBrClNONOSOSOSCO ,,,,,,,,,, 2 42 ↩
- +, Al +, Fe +, Mn (नोट - अघुलनशील लवण न दिये जायें) (ख) कार्बनिक योगिकों में नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरीन, तत्वों का परीक्षण करना। प्रयोगशाला तथा अन्य स्रोतों पर आधारित प्रयोग-परीक्षणों का वैज्ञानिक अन्वेषण करना तथा सीखना। सुझाये गए कुछ प्रोजेक्ट्स- दूषित जल मेंं सल्फाइड आयनों का परीक्षण करते हुए बैक्टीरियाओं (रोगाणुओं) का पता लगाना। जल की शुद्धिकरण की विधियों का अध्ययन करना। जल की कठोरता, तथा क्लोराइड, फ्लोराइड और लौह आयनों का परीक्षण करना तथा अनुमति सीमा से परे क्षेत्रीय बदलाव के तहत पेयजल में इनकी उपस्थिति का पता लगाना। विभिन्न कपड़ा धोने वाले साबुनों की झाग उत्पन्न करने की शक्ति तथा इन पर सोडियम कार्बोनेट की मात्रा डालने पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना। चाय की पत्ती के विभिन्न प्रतिदर्शों में अम्लीयता का अध्ययन करना। विभिन्न द्रवों के वाष्पन की दर ज्ञात करना। रेशों की तन्य शक्ति पर अम्ल एवं क्षारों के प्रभाव का अध्ययन करना। फलों एवं सब्जियों के रसों का विश्लेषण कर उनकी अम्लीयता का पता लगाना। (नोटः- दस कालखण्डों के बराबर समय लेने वाली किसी अन्य प्रोजेक्ट को भी शिक्षक का अनुमोदन प्राप्त होने पर चुना जा सकता है।) विषय- जीव विज्ञान कक्षा-11 केवल प्रश्नपत्र ↩
- cbx ax cbx ax cbxax dxcbxaxdpxdxaxdxxa , , , dx ,, , bsinx a a x कलन का आधारभूत प्रमेय (बिना उपपत्ति के), निश्चित समाकलन, प्रतिस्थापन द्वारा निश्चित समाकलनों का मान ज्ञान करना, निश्चित समाकलों के मूल गुणधर्म तथा उसके मान ज्ञात करना। ↩
- +Cu +, As +, Ni +, Zn +, Co +, Ca +, Sr +, Ba +, Mg +, NH4 ऋणायन-(अम्लीय मूलक)- ↩
- +, Al +Fe +Mn ↩
- +//Cu +/Cu मेंCuSO4 or ZnSO4 के विद्युत अपघट्य की सामान्य ताप पर सान्द्रण में परिवर्तन के साथ सेल के विभव में बदलाव का अध्ययन करना। प्रोजेक्ट-आन्तरिक मूल्यांकन अन्य स्रोतों सहित प्रयोगशाला परीक्षण आधारित वैज्ञानिक अन्वेषण- (1) अमरूद फल में पकने की विभिन्न स्तरों पर आक्सलेेट आयनों की उपस्थिति का अध्ययन करना। (2) दूध के विभिन्न प्रतिदर्शों में केसीन की मात्रा का पता लगाना। (3) दही निर्माण तथा इस पर तापक्रम के प्रभाव के सन्दर्भ में सोयाबीन दूध और प्राकृतिक दूध की तुलना करना। (4) विभिन्न दशाओं में खाद्य पदार्थ परिरक्षण के रूप में पोटेशियम बाइसल्फेट के प्रभाव का अध्ययन (तापक्रम, सान्द्रण और समय आदि दशाओं के प्रभाव का अध्ययन)। (5) सेलाइवा-एमाइलेज के स्टार्च पाचन में ताप का प्रभाव तथा pHके प्रभाव के संदर्भ में अध्ययन। (6) गेहूँ आटा, चना आटा, आलू रस, गाजर रस आदि पदार्थों पर किण्डवन दर का तुलनात्मक अध्ययन। (7) वसा, तेल मक्खन, शक्कर, हल्दी, मिर्च आदि पदार्थों में सामान्य खाद्य मिलावट वाले पदार्थोें का अध्ययन। नोट- लगभग दस कालखण्डो का समय लगाने वाले अन्य शोध प्रोजेक्टस पर षिक्षक द्वारा अनुमति देने पर चयन किया जा सकेगा। ↩
- + ꞊ ↩
- 200.00 32 स्टे0 स्टील पाइनएपिल पन्च व कोरर 1 50.00 33 स्टे0 स्टील मग 6 6,400.00 34 एल्यू0 भगोने मय ढक्कन विभिन्न साइज 2 130.00 35 पिन्ट गीजर इनामेल्ड/प्लास्टिक (2) लीटर 1 1,500.00 36 केमिकल बैलेन्स 1 2,000.00 37 मिक्सी/ग्राइण्डर 1 1,560.00 38 पाउच सीलर 39 लोहे की आरी 1 70.00 40 कैन बाडी रिफार्मर, फ्लेन्जर सहित (विद्युत् चालित) 1 35,000.00 1 1,500.00 41 फ्रूट ऐण्ड वेजीटेबुल स्लाइसर 1 सेट 12,500.00 42 गैस भट्टी/बर्नर/चूल्हा मय गैस 1 4,700.00 43 पी0 एच0 मीटर 4 2,500.00 44 स्टोव पीतल (नं0 2 या 3) 1 100.00 45 लोहे का पोस्टल-नार्टर (खरल) 1 100.00 46 आम कटर 1 500.00 47 फस्र्ट-एड-बाक्स 5 100.00 48 लकड़ी का चम्मच (कुकिंग स्पून) 6 300.00 49 लकड़ी के लैडिल (लम्बे हत्थे का) 4 400.00 50 प्लास्टिक बाल्टी 3 50.00 51 प्लास्टिक बेसिंग 3 50.00 52 प्लास्टिक मग प्रयोगशाला उपकरण- 1 ब्यूरेट स्टैण्ड सहित 2 पिपेट 3 बीकर 4 फ्लास्क 5 अन्य लैब उपकरण 6 रबर दस्ताने (नं0 10) 7 जली बैग अनुमानित मूल्य रु0 6 600.00 6 300.00 6 300.00 6 300.00 . . 500.00 1 जोड़ा 50.00 2 100.00 योग . . 2,150.00 प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले सुगंध- बांड सेम-Bush Co. अनुमानित मूल्य रुपये संतरा सुगंध 1×500 ml. 275.00 1×500 ml. 250.00 नींबू सुगंध 1×500 ml. 300.00 सेब सुगंध अनानास सुगंध 1×500 ml. 300.00 आम सुगंध 1×500 ml. 300.00 केवड़ा सुगंध 1×500 ml. 450.00 1×500 ml. 300.00 खस सुगंध गुलाब सुगंध 1×500 ml. 275.00 योग . . 2,450.00 37 ङ ↩