सहकारिता विभाग
———
अअध्धििाससूूचचननाा
16 सितम्बर 2008
सं॰1/निग॰को॰(रा॰आ॰))-28/2007
1/निग॰को॰(रा॰आ॰))-28/2007-3861—श्री वीरेन्द्र कुमार, सुपुत्र-स्व॰राजेष्वर महतो
श्री वीरेन्द्र कुमार, सुपुत्र-स्व॰राजेष्वर महतो, राजवंषीनगर, पटना, तत्कालीन उप-निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद को दिनांक 24॰07॰1992 को ज्योतिपुरम सहकारी गृह निर्माण समिति, खाजपुरा, पटना के अध्यक्ष श्र औरंगाबाद को दिनांक 24॰07॰1992 को ज्योतिपुरम सहकारी गृह निर्माण सि मति, खाजपुरा, पटना के अध्यक्ष श्री (पाँच हजार) रुपये घूस लेते, निगरानी दस्ते द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। श्री अमरेन्द्र प्रसाद से रुपये 5,000(पाँच हजार) रुपये घूस लेते, निगरानी दस्ते द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। श्री (पाँच हजार) रुपये घूस लेते, निगरानी दस्ते द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-032/1992 दिनांक 23॰07॰1992 दर्ज किया गया। कुमार के विरूद्ध निगरानी थाना काण्ड संख्या-032/1992 दिनांक 23॰07॰1992 दर्ज किया गया।
मान्नीय विषेष न्यायाधीष, निगरानी, पटना ने उपर्युक्त मामलों से संबंधित विषेष वाद संख्या-64/92 में मान्नीय विषेष न्यायाधीष, निगरानी, पटना ने उपर्युक्त मामलों से संबंधित विषेष वाद संख्या-64/92 में दिनांक 20॰12॰1999 को पारित आदेष के द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत श्री कुमार को दोषी मानते हुए, दिनांक 20॰12॰1999 को पारित आदेष के द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत श्री कुमार को दोषी मानते हुए, दिनांक 20॰12॰1999 को पारित आदेष के द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत श्री कुमार को दोषी मानते हुए, उन्हें तीन वर्षों का कारावास एवं रु 10,000
ुमार के द्वारा उक्त ाोर्ं का कारावास एवं रु 10,000(दस हजार) रूपये जुर्माना की सजा दी गयी। श्री कुमार के द्वारा उक्त पारित आदेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील संख्या- 11/2000 दायर किया गया जिसे पारित आदेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील संख्या- 11/2000 दायर किया गया जिसे पारित आदेष के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील संख्या- 11/2000 दायर किया गया जिसे माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा दिनांक 17॰01॰2000 को सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा दिनांक 17॰01॰2000 को सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा दिनांक 17॰01॰2000 को सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया गया।
कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के परिपत्र संख्य ा-7820 दिनांक 28॰10॰2003 में कार्मिक एवं प्रषासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के परिपत्र संख्या-7820 दिनांक 28॰10॰2003 में प्रावधान किया गया है कि अपील के लम्बित रहते हुए, आपराधिक मामले में दोषी करार दिये जाने पर, भारतीय प्रावधान किया गया है कि अपील के लम्बित रहते हुए, आपराधिक मामले में दोषी करार दिये जाने पर, भारतीय प्रावधान किया गया है कि अपील के लम्बित रहते हुए, आपराधिक मामले में दोषी करार दिये जाने पर, भारतीय संविधान की धारा-311(2) के तहत बर्खास्तगी आदि की कार्रवाई की जा सकती है। संविधान की धारा-311(2) के तहत बर्खास्तगी आदि की कार्रवाई की जा सकती है। 2 सहमति के आलोक में श्री वीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन उप निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना सम्प्रति जिला सहकारिता पदाधिकारी, औरंगाबाद जिनका विवरणी नीचे अंकित है, को अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
1॰ सरकारी सेवक का नाम ः- श्री वीरेन्द्र कुमार
2॰ सरकारी सेवक की जन्म तिथि ः- 02॰02॰1955
3॰ सरकारी सेवा धारण की तिथि ः- 12॰08॰1978
4॰ सरकारी सेवक के पिता का नाम ः- श्री राजेष्वर महतो,
5॰ स्थायी पता ः- राजवंषीनगर, पटना।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से,
देवकान्त दिवाकर,
सरकार के उप सचिव
-सह-मुख्य निगरानी पदाधिकारी।
————