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असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 22221111 अमहायण अमहायण अमहायण अमहायण 1930 1930 1930 1930 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 प प प पटना टना टना टना 555560606060)))) पपपपटनाटनाटनाटना, , , , शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार 11112222 +दस-ब +दस-ब +दस-ब +दस-बर र र र 2008200820082008 [विध्ेयक संख्या-18/2008⁄ बिहार विधन-सभा सचिवालय
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vf/klwpuk 4 दिसम्बर 2008 संख्या-वि∫स∫वि∫-24/2008-2694/वि∫स∫—बिहार मूल्य वर्(ित कर ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2008, जो बिहार विधन सभा में दिनांक-4 दिसम्बर, 2008 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन-सभा की प्रिÕया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।
सुरेन्‹ प्रसाद शर्मा,
सचिव, बिहार विधन-सभा।
[foŒlŒfoŒ&18@2008] fcgkj ewY; of)Zr&dj ¼la'kks/ku½ fo/ks;d] 2008
प्रस्तावनाः- असाधारण स्थिति यथा प्राकृतिक आपदा में अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्ति देने तथा रिर्टन दायर करने और कर जमा करने की तारीख बढ़ाने हेतु प्रावधान करने के लिए बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम 2005 (अधिनियम संख्या-27/2005) में संषोधन करने हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ।-(1) यह अधिनियम बिहार मूल्य वर्द्धित कर (संषोधन) अधिनियम, 2008 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरंत प्रवृत्त होगा।
2. बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम 2005 (अधिनियम सं॰ 27/2005) की धारा-3 क क में संषोधन।- बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम 2005 (अधिनियम सं॰ 27/2005) की धारा-3 क क की उप-धारा (3) के बाद एक नयी उप-धारा (4) निम्न प्रकार से अन्तःस्थापित किया जायेगाः-
(4) इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार लोकहित में अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट निबर्धन एवं शर्त्तों के अध्यधीन अतिरिक्त कर के उदग्रहण से विमुक्ति दे सकेगी।2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 12 fnlEcj 2008 3. बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम 27/2005) की धारा-24 में संषोधन।-(1). बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 (अधिनियम संख्या 27/2005) की धारा-24 की उप धारा (6) में एक परन्तुक निम्न प्रकार से अन्तःस्थापित किया जायेगा :- ''परन्तु यह कि आपदा जैसी असाधारण स्थिति में आयुक्त किसी सामान्य या विषेष आदेष द्वारा अभिलिखित विषिष्ट कारणों से सामान्य रूप से या किसी क्षेत्र विषेष के व्यवसायियों के लिए उप धारा (6) में विवरणी या त्रैमासिक विवरण दाखिल करने की निर्धारित तारीख को किसी अवधि के लिए बढ़ा सकेंगे किन्तु यह वृद्धि तीन माह से अधिक नहीं होगी।
परन्तु यह भी कि राज्य सरकार विवरणी या त्रैमासिक विवरण दाखिल करने की नियत तिथि को निर्धारित तिथि से छह माह की अवधि तक बढ़ा सकेगी किन्तु एक बार में तीन माह से अधिक नहीं होगी।
(2). बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-24 की उप धारा (9) के खण्ड (ग) के बाद एक नया खण्ड (घ) निम्न प्रकार से अन्तःस्थापित किया जायेगाः-
''(घ) इस उप धारा के खण्ड (क) एवं (ख) में अन्तर्विर्निष्टि किसी बात के होते हुए भी आयुक्त आपदा जैसी असाधारण स्थिति में सामान्य या विषिष्ट आदेष द्वारा अभिलिखित विषिष्ट कारणों से सामान्य रूप से या किसी क्षेत्र विषेष के व्यवसायियों के लिए इस उप धारा के खण्ड (क) एवं (ख) में कर भुगतान हेतु नियत तारीख की अवधि को बढ़ा सकेंगे किन्तु यह वृद्धि 3 माह से अधिक नहीं होगी।
परन्तु राज्य सरकार इस उप धारा के खण्ड (क) एवं (ख) में यथा विहित कर भुगतान की नियत तारीख को छह माह तक की अवधि तक बढ़ा सकेगी किन्तु एक बार में तीन माह से अधिक नहीं होगी।''
4. निरसन एवं व्यावृत्ति।-(1) बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम (संषोधन) अध्यादेष, 2008 (बिहार अध्यादेष संख्या 3, 2008) इसके द्वारा निरसित किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के रहते हुए भी उक्त अध्यादेष के द्वारा या अधीन प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग में किया गया कोई कार्य या की गयी कोई कार्रवाई इस अधिनियम द्वारा या के अधीन प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किया गया या की गयी समझी जायेगी मानों यह अधिनियम उस दिन प्रवृत्त था जिस दिन ऐसा कार्य किया गया था या ऐसी कार्रवाई की गयी थी। ——— वित्तीय संलेख
बिहार मूल्य वर्द्धित-कर अधिनियम 2005 के वर्त्तमान प्रावधान ऐसे हैं कि किसी व्यवसायी विषेष के आवेदन पर उन्हें रिटर्न दायर करने की अवधि बढ़ाने का आदेष देने की शक्ति विहित पदाधिकारी तथा आयुक्त को प्रदत्त है, परन्तु किसी क्षेत्र विषेष के सभी व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान करने की अवधि विस्तार करने का अधिकार प्रदत्त नहीं है। राज्य में आए प्रा—तिक प्रकोप के कारण बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान ससमय करने में कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुये यह आवष्यक प्रतीत होता है कि उन्हें इस हेतु अधिक समय दिया जाय। इस हेतु बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-24 की उप धारा (6) में एक नया परंतुक जोड़ने तथा उप धारा (9) के खण्ड (ग) के पष्चात् एक नया उपखण्ड (घ) अन्तःस्थापित करने का निर्णय लिया गया। केन्द्र सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ित परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण हेतु 75 हजार टन चावल तथा 50 हजार टन गेहूँ का आवंटन राज्य सरकार को किया गया है। प्राप्त चावल एवं गेहूँ को वैट एवं अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्त करना है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 में वैट से विमुक्ति देने का प्रावधान है, परन्तु अनिधनियम की धारा 3-क क के अन्तर्गत देय अतिरिक्त कर से विमुक्ति देने का प्रावधान नहीं है। राज्य सरकार को अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्ति देने हेतु शक्ति प्रदत्त करते हुये अधिनियम की धारा -3 क क की उप धारा (3) के बाद एक नयी उप धारा (4) अन्तःस्थापित करने का निर्णय लिया गया। उपर्युक्त संषोधनों से किसी क्षेत्र विषेष के सभी व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान करने की अवधि विस्तार करने का अधिकार राज्य-सरकार तथा आयुक्त को प्राप्त हो जायेगी एवं देय अतिरिक्त कर से विमुक्ति देने की शक्ति राज्य-सरकार को प्राप्त हो जाएगी। विधेयक के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।
ह॰/-अस्पष्ट, भारसाधक सदस्य।3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 12 fnlEcj 2008
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बिहार मूल्य वर्द्धित-कर अधिनियम 2005 के वर्त्तमान प्रावधान ऐसे हैं कि किसी व्यवसायी विषेष के आवेदन पर उन्हें रिटर्न दायर करने की अवधि बढ़ाने का आदेष देने की शक्ति विहित पदाधिकारी तथा आयुक्त को प्रदत्त है, परन्तु किसी क्षेत्र विषेष के सभी व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान करने की अवधि विस्तार करने का अधिकार प्रदत्त नहीं है। राज्य में आए प्रा—तिक प्रकोप के कारण बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान ससमय करने में कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुये यह आवष्यक प्रतीत होता है कि उन्हें इस हेतु अधिक समय दिया जाय। इस हेतु बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 की धारा-24 की उप धारा (6) में एक नया परंतुक जोड़ने तथा उप धारा (9) के खण्ड (ग) के पष्चात् एक नया उपखण्ड (घ) अन्तःस्थापित करने का निर्णय लिया गया। केन्द्र सरकार द्वारा बाढ़ पीड़ित परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण हेतु 75 हजार टन चावल तथा 50 हजार टन गेहूँ का आवंटन राज्य सरकार को किया गया है। प्राप्त चावल एवं गेहूँ को वैट एवं अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्त करना है। बिहार मूल्य वर्द्धित कर अधिनियम, 2005 में वैट से विमुक्ति देने का प्रावधान है, परन्तु अनिधनियम की धारा-3 क क के अन्तर्गत देय अतिरिक्त कर से विमुक्ति देने का प्रावधान नहीं है। राज्य सरकार को अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्ति देने हेतु शक्ति प्रदत्त करते हुये अधिनियम की धारा-3 क क की उप धारा (3) के बाद एक नयी उप धारा (4) अन्तःस्थापित करने का निर्णय लिया गया। इस विधेयक को अधिनियमित करने का मुख्य उद्देष्य यही है कि आपदा जैसी असाधारण स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों के व्यवसायियों को रिटर्न दायर करने तथा स्वी—त कर का भुगतान ससमय करने में कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुये तथा अवधि विस्तार का अधिकार राज्य सरकार तथा आयुक्त को दी जाये एवं राज्य-सरकार को लोकहित में अतिरिक्त कर की देयता से विमुक्ति देने हेतु शक्ति प्रदान करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देष्य है, जिसे अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।
(सुशील कुमार मोदी) भारसाधक सदस्य।
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———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु+ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 560-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।