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——— vf/klwpuk 5 दिसम्बर 2008
संख्या-वि∫स∫वि∫-27/2008-2709वि∫स∫—बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2008, जो बिहार विधन-सभा में दिनांक 5 दिसम्बर, 2008 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन-सभा की प्रिÕया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है।
सुरेन्‹ प्रसाद शर्मा,
सचिव, बिहार विधन-सभा।
[foŒlŒfoŒ&20@2008] बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2008 बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) में संषोधन करने के लिए विधेयक। भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में बिहार विधान मंडल द्वारा निम्नलिखिल रूप में यह अधिनियमित होः - 1॰ संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ। - (1) यह अधिनियम बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) अधिनियम, 2008 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरत प्रवृत्त होगा।
2॰ बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम 1996 में धारा 2 (थ) तथा (द) का जोड़ा जाना।-धारा-2 (त) के बाद निम्नलिखित जोड़ा जायेगा।-
(थ) "सहकारी बैंक"े से अभिप्रेत है बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 में यथा परिभाषित सहकारी बैंक; (द) "बीमाकृत बैंक"े से अभिप्रेत है डिपोजिट इंसोरंस तथा क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेषन अधिनियम 1961 2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 12 fnlEcj 2008 "अध्याय -अध्याय -अध्याय -अध्याय - VII क
सहकारी बैंकों के लिए विषेष उपबंधसहकारी बैंकों के लिए विषेष उपबंधसहकारी बैंकों के लिए विषेष उपबंधसहकारी बैंकों के लिए विषेष उपबंध
38 क। अध्याय का सहकारी बैंकों पर लागू होना। - (1) इस अध्याय के उपबंध इस अधिनियम के तहत निबंधित सहकारी बैंकों पर, इस अधिनियम के अन्य भागों में अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अतिरिक्त लागू होंगे। जहाँ प्रकट अथवा विवक्षित विसंगति का कोई प्रष्न उत्पन्न हो वहाँ इस अध्याय के उपबन्ध इस अधिनियम के अन्य भागों के उपबन्धों पर प्रभावी होंगे। (2) इस अध्याय के प्रयोजनार्थ निक्षेप बीमा निगम से तात्पर्य है निक्षेप बीमा एवं क्रेडिट गारंटी निगम अधिनियम, 1961 ( संख्या 47, 1961) के अधीन स्थापित निक्षेप बीमा एवं क्रेडिट गारंटी निगम तथा रिजर्व बैंक से तात्पर्य है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934, ( संख्या 2; 1934) के अधीन स्थापित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया।
38 ख। रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षा किये जाने पर निबंधक द्वारा कतिपय आदेष पारित किये जायेंगे।- (1) सहकारी बैंक जो बीमाकृत बैंक है, के मामले में निबंधक को निम्न शक्तियाँ प्रदत्त होंगे। (i) निक्षेप बीमा एवं क्रेेडिट गारंटी निगम अधिनियम, 1961 की धारा 13 D में वर्णित परिस्थितियों में रिजर्व बैंक द्वारा यदि रजिस्ट्रार से वैसी अपेक्षा की जाय तो वह किसी सहकारी बैंक के परिसमापन के लिए आदेष दे सकेगा।
(ii) जहाँ केन्द्रीय सरकार ने किसी सहकारिता बैंक के सम्बन्ध में, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (संख्या 10, 1949) की धारा - 45 की उप धारा (2) के अधीन अधिस्थगन आदेष दिया हो, वहाँ उसके सम्बन्ध में समझौता या व्यवस्था या पुर्ननिर्माण या समामेलन की स्कीम बनाई जाय।
(iii) यदि रिजर्व बैंक द्वारा अपेक्षा करने पर लोकहित में, अथवा किसी सहकारी बैंक के काम-काज निक्षेपकर्त्ताओं के हित में अहितकर होने देने से रोकने के लिए या सहकारी बैंक का उचित प्रबन्ध सुनिष्चित करने के लिए या अवक्रमण तथा प्रबंध समिति के निष्काषण की जाय तो रजिस्ट्रार, ऐसी शर्तो पर और कुल मिलाकर पाँच वर्षो से अनधिक ऐसी कालावधि के लिए जो रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर विर्निदिष्ट की जाय, उस सहकारी बैंक की प्रबन्ध समिति या अन्य प्रबन्ध निकाय को (चाहे वह जिस किसी नाम से भी कहा जाय) अतिष्ठित करने तथा उसके लिए प्रषासक नियुक्त करने का आदेष पारित करेगा। नियुक्त प्रषासक अपने कार्य काल की समाप्ति के बाद भी नये प्रबन्ध समिति के गठन के एक दिन पूर्व तक अपने पद पर बने रहेगें। प्रषासक को प्रबन्ध समिति की सारी शक्तियाँ प्रदत्त होगी, तथा वे निबंधक के सामान्य पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण में कार्य करेंगे। (2) बीमाकृत सहकारी बैंक के मामले में, सहकारी बैंक की सामान्य निकाय समझौता से संबंधित योजना, व्यवस्था या संविलयन या पुनर्निर्माण बिहार स्वावलम्बी सहकारी समितियाँ अधिनियम 1996 की धारा 11 के तहत रिजर्व बैंक की लिखित पूर्वानुमति के बिना निर्णय नहीं ले सकेगा।
(3) इस अधिनियम की धारा 43 के तहत सहकारी बैंक स्वतः अपने विधटन की स्वीकृति नहीं देगा या इस अधिनियम की धारा के अधीन गठित सहकारी न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा 44 के तहत किसी सहकारी बैंक के विधटन या समापन हेतु आदेष रिजर्व बैंक के लिखित पूर्वानुमति के बिना नहीं दे सकेगा।
(4) अधियाचना या रिजर्व बैंक की पूर्वानुमति के बाद उप धारा (1), (2) तथा (3) के तहत पारित आदेष के विरूद्ध कोई अपील या पुनरीक्षण या पुर्नविचार स्वीकार नहीं होगा। ऐसा आदेष या स्वीकृति पर किसी भी रीति से प्रष्न नहीं उठाया जायेगा।
38 ग। परिसमापक के द्वारा निक्षेप बीमा निगम की प्रतिपूिर्त।-जहाँ कोई सहकारी बैंक, बीमाकृत बैंक होने के नाते परिसमापित हो जाय या समापनाधीन कर लिया जाय और निक्षेप बीमा निगम उस अधिनियम की धारा-16 की उप धारा (1) के अधीन बीमाकृत बैंक के निक्षेपकर्त्ताओं को भुगतान करने की दायी हो जाय तो निक्षेप बीमा निगम को उस अधिनियम की धारा 21 में उपबन्धित सीमा तक और रीति से प्रतिपूर्ति की जायगी।"3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण)] 12 fnlEcj 2008
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
बिहार स्वावलम्बी सहकारी समितियाँ अधिनियम, 1996 के तहत् निबंधित शहरी सहकारी बैंक में जमाकर्त्ताओं की राषि भारतीय निक्षेप बीमा निगम द्वारा बीमित नहीं है। ऐसे बैंकों को भारतीय निक्षेप बीमा निगम अधिनियम, 1961 के तहत् आच्छादित किया जाना अपेक्षित था। बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2008 का प्रारूप तैयार किया गया है ताकि शहरी सहकारी बैंकों में जमाकर्त्ताओं के हितों की रक्षा हो सके और ऐसे बैंक अपने सदस्यों को बेहतर सेवा प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उपर्युक्त का प्रावधान करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देष्य है जिसे अधिनियमित कराना ही इसका अभीष्ठ है।
(गिरिराज सिंह), भारसाधक सदस्य।
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———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु+ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 562-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।