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vf/klwpuk 8 दिसम्बर 2008 संख्या-वि∫स∫वि∫-29/2008-2721वि∫स∫—बिहार सरकारी परिसर ;आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखलीद्ध ;संशोध्नद्ध विध्ेयक, 2008, जो बिहार विधन सभा में दिनांक-8 दिसम्बर, 2008 को पुरःस्थापित हुआ था, बिहार विधन सभा की प्रिÕया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-116 के अन्तर्गत उ∞ेश्य और हेतु सहित प्रकाशित किया जाता है। सुरेन्‹ प्रसाद शर्मा,
सचिव, बिहार विधन-सभा।
[foŒlŒfoŒ&23@2008] बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) विधेयक-2008 बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसुली एवं वेदखली) अधिनियम, 1956 (अधिनियम 20, 1956) में संशोधन हेतु विधेयक।
भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भः-(1) यह अधिनियम बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली एवं बेदखली) (संशोधन) अधिनियम-2008 कहा जा सकेगा। 2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 12 दिसम्बर 2008 ''(3) राज्य सरकार विभिन्न विभागों/प्राधिकारों/बोर्डो/आयोगों/ वैधानिक निकायों को कार्यालय उपयोग हेतु आदेश में नियत अवधि के लिये सरकारी परिसरों का आवंटन कर सकेगी।''
3. बिहार अधिनियम 20, 1956 की धारा-12 का प्रतिस्थापन- इस अधिनियम की धारा-12 को निम्न प्रकार से प्र्रतिस्थापित किया जायेगा, यथाः-
''12, दण्ड एवं प्रक्रिया- (1) इस अधिनियम की किसी धारा अथवा किसी नियम अथवा इसके अंतर्गत निर्गत आदेश द्वारा प्रदत्त शक्ति के कार्यान्वयन में अवरोध पैदा करना या अवरोध पैदा करने में सहायक होना एक अपराध होगा और कोई व्यक्ति ऐसा अपराध करेगा वह दो साल तक की सजा या दस हजार रूपये तक के दण्ड या दोनों का भागी होगा। यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम की किसी धारा अथवा किसी नियम अथवा इसके अन्तर्गत निर्गत आदेश का उल्लघंन करता है, अथवा इस अधिनयम के अन्तर्गत या इसके द्वारा प्रदत्त शक्ति के वैधानिक कार्यान्वयन में अवरोध पैदा करता है, अथवा एतद्प्रकार के उल्लंघन अथवा अवरोध में साथ देता है, वह धारा 5 के अन्तर्गत क्षति की वसूली के पूर्वाग्रह के बिना दो वर्षों तक कारावास अथवा 10,000/- (दस हजार रूपये) तक के जुर्माना अथवा दोनो के लिए दण्डनीय होगा।
(2) उपधारा (1) के तहत राज्य सरकार की पूर्वानुमति से सक्षम प्राधिकार द्वारा अपराध गठन के लिखित प्रतिवेदन की स्थिति को छोड़कर अन्य स्थिति में किसी न्यायालय द्वारा सजा की कार्रवाई को न तो प्रारंभ किया जा सकेगा या संज्ञान लिया जा सकेगा।
(3) प्रथम श्रेणी के न्यायिक दण्डाधिकारी से अन्यून कोटि के न्यायालय द्वारा उपधारा (1) के तहत वर्णित अपराध के लिये कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
4. बिहार अधिनियम 20, 1956 की धारा-12 के बाद नयी धारा का अंतःस्थापनः-उक्त अधिनियम में धारा-12 के बाद निम्नलिखित नयी धारा अंतःस्थापित की जायेगी, यथाः-
''12ए-अपराध का संज्ञेय और गैर-जमानती होना- इस अधिनियम की धारा 12(1) के तहत वर्णित प्रत्येक अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती होगा।''
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उदेश्य एवं हेतु
माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन याचिका सिविल अपील संख्या-4064/04 एस.डी. बन्दी बनाम डिवीजनल ट्राफिक ऑफिसर कर्नाटक स्टेट रोड ट्रॉसपोर्ट कारपोरेशन एवं अन्य में दिनांक-19.09.2007 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह आदेश पारित किया गया कि सरकारी परिसर में अवैध कब्जा/अवैध आवासन को संज्ञेय अपराध की कोटि में लाया जाय एवं तदनुसार कानून की धाराओं में आवश्यक संशोधन किया जाय। एतद् हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विकास आयुक्त, प्रधान सचिव, वित्त विभाग/गृह विभाग, विधि सचिव एवं आरक्षी महानिदेशक के साथ हुये विमर्शोपरान्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर किये जाने वाले प्रतिशपथ पत्र पर महाधिवक्ता बिहार का अनुमोदन प्राप्त किया गया। प्रतिशपथ पत्र में यह उल्लिखित किया गया कि अगले विधानमंडलीय सत्र के पूर्व इस संशोधन से संबंधित कार्रवाई कर ली जायेगी। तदनुसार यह विधेयक प्रस्तावित है।
प्रस्तावित विधेयक में बिहार सरकारी परिसर (किराया, वसूली एवं बेदखली) अधिनियम 1956 की धारा-2A में एक नई उप धारा(3) जोड़ी गयी है ताकि सरकार आवश्यकता एवं उपलब्धता के अनुसार सरकारी परिसर को विभिन्न विभागों/प्राधिकारी/ बोर्डों/आयोगों/वैधानिक निकायों को आदेशित समय के लिये आवंटित किया जा सके। अधिनियम 1956 की धारा-(12) को पुरःस्थापित किया गया है ताकि अधिनियम की किसी धारा के अन्तर्गत जारी नियम या आदेश का किसी व्यक्ति द्वारा उल्लंघन किये जाने पर दंड के रूप में 2 साल की सजा या 10 हजार रूपया वसूलने या दोनों कार्रवाई की जा सकें।3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 12 दिसम्बर 2008 अधिनियम 1956 की धारा 12 के बाद एक नयी धारा 12A जोड़ी गयी है ताकि अवैध आवासन को संज्ञेय अपराध की कोटि में रखा जा सकें। इस अधिनियम का मुख्य उदेश्य यही है कि सरकारी परिसर को अवैध कब्जा की सम्भावना को कम से कम किया जा सके तथा आवश्यकतानुसार राज्य सरकार नियत अवधि के लिये सरकारी परिसर को सरकारी/अर्द्धसरकारी/वैधानिक संस्थाओं को आवंटित कर सके। इस हेतु विधेयक को अधिनियमित करना ही इस विधेयक का मुख्य उदेश्य है।
(छेदी पासवान) भारसाधक सदस्य।
सच्ची प्रति
पटना दिनांक-8 दिसम्बर, 2008
सुरेन्द्र प्रसाद शर्मा सचिव, बिहार विधान-सभा।
———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु+ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 565-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।