िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 22228888 अमहायण अमहायण अमहायण अमहायण 1930 1930 1930 1930 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 प प प पटना टना टना टना 555575757575)))) पपपपटनाटनाटनाटना, , , , शुबवारशुबवारशुबवारशुबवार 11119999 ,दस.ब ,दस.ब ,दस.ब ,दस.बर र र र 2008200820082008 समाहरणालय, मुजफ्फरपुर (जिला स्थापना प्रशाखा) ——— आदेश
सं0 1304-श्री विजय कुमार झा, तत्कालीन लिपिक, प्रखंड कार्यालय, बोचहाँ में दिनांक-24.05.1995 को नाजिर के रूप में कार्यरत्त थे। वर्तमान में श्री झा निलंबित है तथा उनका अस्थायी मुख्यालय मुरौल प्रख्ांड है। प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ द्वारा अपने ज्ञापांक-1104, दिनांक-22.10.1995 से श्री विजय कुमार झा, पूर्व नाजिर के विरूद्ध प्रखंड नजारत के राशि मो0 561112.33 का किये गये दुर्विनियोग करने पर प्राथमिकी दर्ज कर कनूनी कार्रवाई करने की सूचना थाना प्रभारी, बोचहाँ को दिया। श्री झा उक्त गवन के आरोप में इस कार्यालय के ज्ञापांक-1147/स्था0 दिनांक-23.11.1995 से निलंबित किया गया। आरोपित कार्मिक श्री विजय कुमार झा, पूर्व नाजिर पर निम्न आरोप प्रपत्र-''क'' में गठित किया गया, जो निम्न प्रकार है। 1. दिनांक-24.05.1998 को श्री विजय कुमार झा प्रखंड विकास कार्यालय, बोचहाँ, मुजफ्फरपुर में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ श्री अशर्फी पटेल के अधीनस्थ नाजीर पद पर कार्यरत थे। 2. दिनांक-25.05.1995 को श्री विजय कुमार झा, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ श्री अशर्फी पटेल के साथ मिली भगत कर तथ्यों को छिपाते हुए रोकड़ वही में मात्र 9954.13 का ही प्रभार दिया गया और रोकड़ वहीं की स्थिति निम्न प्रकार दर्शाया गया जो मिथ्या एवं काल्पनिक था।
(क) चेक - 629.00 रू0 (ख) बैंको में जमा राशि - 17,42,671.63 रू0
(ग) अभिश्रव - 15,25,726.13 रू0
(घ) अग्रिम - 3,17,524.46 रू0 (ड़) नगद राशि - 9,954.13 रू0 कुल :- - 35,96,505.35 रू0
पैंतीस लाख छियानवें हजार पाँच सौ पाँच रूपयें एवं पैंतीस पैसे मात्र।2 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 3. दिनांक-24.05.1995 को श्री झा द्वारा बैंक में जमा राशि मो0 1742671.63 पैसा दिखाया गया जबकि वास्तव में उक्त तिथि को बैंको में मात्र मो0 1722496.63 उपलब्ध था । इस प्रकार उन्होंने प्रभार देते समय 20175.00 रूपयें अधिक दर्शाया है एवं सामान्य रोकड़ पंजी के अंतशेष के अनुरूप राशि दिखाने का धोखा एवं प्रयास किया है ।
4. श्री विजय कुमार झा उक्त तिथि तक निम्नलिखित विपत्रों के सामनें अंकित राशि को प्राप्ति शीर्ष में दर्ज नहीं कर सीधें बैक में जमा कर दिया है । ब्यौरा निम्न प्रकार है ।
(क) विपत्र संख्या 42/95-96 6,737.00 रू0
'' 18/95-96 60,000.00 रू0
कनारा बैंक एतवारपुर '' 28/95-96 1,77,774.00 रू0
(ख) विपत्र संख्या 217/93-94 7,500.00 रू0
'' 247/93-94 20,000.00 रू0 युनियन बैंक वाजितपुर मझौली '' 30/95-96 2,000.00 रू0
(ग) विपत्र संख्या 27/95-96 33,000.00 रू0 वैशाली क्षेत्रिय ग्रामीण बैंक उनसर कुल 3,07,011.00 रू0
(कुल तीन लाख सात हजार ग्यारह रूपये मात्र)
इस प्रकार यदि बैंक में जमा उक्त रूपया 3,07,011.00 रोकड़ पंजी के आमद में लाई गई होती तो रोकड़ पंजी का अंतशेष 3,07,011.00 अधिक होता परन्तु आपके द्वारा श्री अशर्फी पटेल तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी के मिली भगत से यह राशि रोकड़ पंजी में ना लाकर एवं बैंक खाते में जमा दिखा कर 3,07,011.00 रूपयें के हद तक गवन को छिपाने का प्रयास किया गया । अतएव आप तत्कालीन नाजीर श्री विजय कुमार झा रोकड़ वहीयों का संधारण गलत करते रहे एवं अनियमितता बरतते रहें।
5. यूको बैंक, बोचहाँ एवं क्षेत्रिय ग्रामीण बैंक सरफुद्धीनपुर में सरकारी बचत खाते में अर्जित सूद क्रमशः 31,563.14 एवं 18,235.50 कुल 49,798.00 रोकड़ वही उनचास हजार सात सौ अन्ठानवें रूपयें चौसठ पैसे रोकड़ वही के आमद में श्री झा द्वारा नहीं दर्शाया एवं एकल ताले के माध्यम से मिली भगत कर गवन किया गया ।
6. दिनांक-25.05.1995 को प्रभार देते समय श्री झा द्वारा अभिश्रव पंजी पर 15,25,726.13 अंकित कर प्रभार सौंपा गया जो एक धोखाधड़ी का मामला है एवं सरासर मिथ्या है । अभिश्रव तत्कालीन नाजीर श्री झा के प्रभार में थे, उक्त तिथि को दर्शायी गयी अभिश्रव की स्थिति भ्रामक एवं धोखा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया आकड़ा मात्र है ।
दिनांक-07.03.1992 को अभिश्रव मात्र 12,78,768.64 दर्शाया गया है ।
दिनांक-04.05.1992 को यह 13,17,369.73 हो गया है जिस पर प्रखंड विकास पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है ।
फिर किसी अज्ञात तिथि को 74 अभिश्रव चढ़ा दिया गया है जिसका योग भी दर्ज नहीं किया गया है । जोड़ने पर यह 8,339.15 होता है । इस प्रकार कुल उपलब्ध अभिश्रव रू0 13,17,369.73रू0 8,339.
15 यथा रू0 13,25,708.88 है जबकि दिनांक-20.10.1994 को यह राशि बढ़ा कर रू0 14,78,760.64 किया3 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 गया है जिसपर प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अशर्फी पटेल का हस्ताक्षर है । इस प्रकार अभिश्रव पंजी में 14,68,768.64- 13,25,708.88 = 1,53,059.76 अंतशेष (बी0एफ0) बढ़ा दिया गया है, जो गवन है। 7. इस प्रकार उपरोक्त विवरणी के अनुसार श्री विजय कुमार झा अपने प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अशर्फी पटेल के मिली भगत से उक्त तिथि यथा 24.05.1995 तक कुल 530036.40 का गवन किया गया जिसका ब्यौरा निम्न है ।
1. बैंको में जमा राशि में बढ़ा कर दर्शायी राशि 20,175.00 2. राशि जो रोकड़ पंजी में नहीं ली गई 3,07,011.00 3. बचत खाते में जमा राशि पर अर्जित सूद की राशि 49,798.64 4. अभिश्रव
1,53,059.76
कुल :- रू0 5,30,044.40 (कुल पाँच लाख तीस हजार चौवालीस रूपयें चालीस पैसे) 8. जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के आदेश ज्ञापांक-385/स्था0, दिनांक-30.06.1995 के द्वारा प्रखंड नाजीर श्री झा का स्थानांतरण सहायक पद पर प्रखंड कार्यालय मुरौल में कर दिया गया। तदनुसार उपरोक्त आदेश के आलोक में ज्ञापांक-826, दिनांक-11.08.1995 द्वारा श्री झा को मुरौल प्रखंड के लिए विरमित कर दिया गया एवं निदेश दिया गया कि पारगमन अवधि में नजारत का प्रभार सौंप दें। परन्तु श्री विजय कुमार झा के द्वारा आदेश का उल्लंघन कर प्रभार उक्त अवधि में नहीं सौंपा गया । श्री विजय कुमार झा ने जानबुझ कर बिना प्रभार दिये प्रखंड नजारत बन्द कर मुरौल प्रखंड में योगदान कर लिये जिसके फलस्वरूप प्रखंड बोचहाँ का सरकारी कार्य बाधित हुआ एवं कार्यालय में सरकारी राशि के गवन एवं दुर्विनियोग के संबंध में जाँच का क्रम बाधित हुआ तथा प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक रूप से विलंब हुआ । 9. श्री विजय कुमार झा सरकारी राशि के गवन एवं जाँच के क्रम में कार्य बाधित होने के कारण विवश होकर इस कार्यालय के ज्ञापांक-836, दिनांक-14.08.1995 के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, मुरौल को श्री झा को प्रभार सौंपने के लिए इस कार्यालय में पुनः प्रतिनियुक्ति हेतु लिखा गया । तदुपरांत प्रखंड विकास पदाधिकारी, मुरौल के पत्रांक-661, दिनांक-31.08.1995 को प्रभार देने हेतु बोचहाँ प्रखंंड में योगदान किये एवं योगदान के पश्चात् श्री झा प्रभार देने में अनावश्यक रूप से विलंब करने लगे, तब बाध्य होकर इस कार्यालय के पत्रांक-1008, दिनांक-14.09.1995 द्वारा श्री झा को अंचल अंतिम रूप से चेतावनी दी गई कि दिनांक-16.09.1995 तक प्रभार नहीं सौंपने की स्थिति में जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को अवगत कराया जायेगा ।
10. श्री विजय कुमार झा तदुपरांत प्रभार सर्मपण के क्रम में श्री झा द्वारा संधारित रोकड़ पंजियों का प्रभार लेने के क्रम में नामित सहायक श्री विश्वनाथ रजक एवं प्रधान सहायक श्री पशुपति नाथ मिश्रा द्वारा आदेशानुसार बैंको मेें जमा राशि का सत्यापन करने के क्रम में पता चला कि श्री झा के द्वारा रोकड़ बही में दिखाये गये राशि मो0 रू0 1929215.69 के बदले भारी अंतर पाया गया । इस प्रकार श्री झा के द्वारा रोकड़ बही संधारण में अनियमितता बरती गई एवं वास्तविक स्थिति को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया एवं पुनः धोखा देने का प्रयास किया गया ।
11. श्री विजय कुमार झा दिनांक-16.09.1995 को बैंक से सत्यापन की सूचना पाकर बिना किसी सूचना के वह बिना छुट्टी लिये प्रखंड नजारत के अलमीरा में सभी रोकड़ पंजियों एवं आवश्यक कागजातों को बन्द कर अज्ञात जगह गायब हो गये जिससे प्रभार का कार्य बाधित हुआ ।
12. श्री विजय कुमार झा बिना छुट्टी व सूचना के दिनांक-16.09.1995 से गायब होने के पश्चात् पत्रांक-1/विशेष, दिनांक-29.09.1995 द्वारा उनके आने की प्रतीक्षा कर जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को अवगत कराते हुए नजारत का ताला तोड़कर प्रभार दिलाने का अनुरोध किया गया एवं यह भी अनुरोध किया4 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 गया कि जिला लेखा पदाधिकारी एवं कार्यालय अधीक्षक की प्रतिनियुक्ति किया जाय, ताकि उनके द्वारा जाँचोपरांत रोकड़ की सही स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सकें एवं तदनुसार कार्यवाही की जा सकें। जिस पर समाहर्त्ता महोदय ने अपने पत्रांक-977, दिनांक-12.10.1995 द्वारा अंचल अधिकारी, बोचहाँ को विशेष दण्डाधिकारी प्रतिनियुक्त कर प्रखंड नजारत का ताला तोड़कर इन्भेन्ट्री बनवा कर प्रभार दिलवाने का आदेश दिया । इस तरह श्री झा के द्वारा सरकारी कार्य में असहयोग किया गया एवं कार्य बाधित किया गया जिसके कारण प्राथमिकी दायर करने में अनावश्यक विलम्ब हुआ ।
13. तत्पश्चात् ताला तोड़ने के बाद रोकड़ बहियों की जाँच दिनांक-20.10.1995 को श्री डी0सी0 झा जिला लेखा पदाधिकारी एवं कार्यालय अधीक्षक तथा तत्कालिन प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ द्वारा किया गया । श्री झा द्वारा दिनांक-11.08.1995 को संधारित लेखा इस प्रकार पाया गया :-
(क) चेक - 629.00 रू0 (ख) बैंको में जमा राशि - 19,29,215.69 रू0 (ग) अभिश्रव - - (घ) अग्रिम - 3,17,524.46 रू0 (ड़) नगद राशि - - स्पष्ट है कि तत्कालीन नाजीर श्री विजय कुमार झा द्वारा काल्पनिक आकड़ा दिखाकर दिनांक-25.
05.1995 को प्रभार दिलाया गया एवं व्यक्गित प्रभार हेतु पदाधिकारी एवं भारग्राही को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया गया । यह विवरणी बिल्कुल ही गलत एवं मनगढ़न्त है ।
14. दिनांक-20.10.1995 को जिला लेखा पदाधिाकरी एवं अधोहस्ताक्षरी द्वारा रोकड़ पंजियों के जाँच के क्रम में पाया कि श्री झा ने जानबुझ कर धोखा देने एवं भ्रम में डालने के नियत से निम्नांकित विपत्रों के सामनें लिखी राशि को रोकड़ पंजी के प्राप्ति कॉलम में बगैर लाभ बैंक के सरकारी खाते में जमा कर दिया।
(क) विपत्र संख्या 107/95-96 रू0 15,7580.00
यू0बी0 आई, 04.08.1995 '' 108/95-96 रू0 11,85,375.00
इस प्रकार श्री झा द्वारा बैंकों में राशि बढ़ाकर और रोकड़ पंजी में राशि कम दिखाकर गवन को छिपाने का प्रयास किया गया । श्री झा इसी प्रकार रोकड़ पंजी संधारण कर दिग्भ्रमित करते रहें । 15. बैंको के वास्तविक सत्यापन के क्रम में जिला लेखा पदाधिकारी द्वारा निम्न ब्यौरा पाया गया। (क) चेक - रू0 629.00 (ख) बैंको में जमा राशि - रू0 15,60,348.65 (ग) अभिश्रव - रू0 15,25,726.13 (घ) काल्पनिक अग्रिम - रू0 3,17,524.46 - रू0 4,08,052.57 (ड़) नगद राशि (in the form of
S.L and defalcation)
कुल :- रू0 38,12,280.81 इस प्रकार श्री झा द्वारा तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी के मिली भगत से 408052.57 रूपयें का गवन किया गया है ।
16. श्री विजय कुमार झा ने जानबुझ कर रोकड़ बही में यूको बैंक, बोचहाँ एवं वैशाली क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सरफुद्धीनपुर के सरकारी बचत खाते में जमा राशि पर विभिन्न तिथियों को अर्जित की गई सूद की राशि को रोकड़ पंजी में समय-समय पर प्राप्ति कॉलम में बगैर लाये एवं सूद की राशि को छिपा कर5 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 एकल ताले में नगद राशि मो0 51722.64 रूपयें सरकारी राशि तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अशर्फी पटेल के साथ मिली भगत कर गवन कर लिया है ।
17. इसके अतिरिक्त जाँच के अनुसार एकल ताले में नगद के रूप में श्री झा के पास 4,08,052.57 रूपया होना चाहिए जिसे रोकड़ पंजी में नहीं दर्शाया गया है । यह नगद राशि प्रखंड के यूनियन बैंक मझौली एवं वैशाली क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक उनसर के खाते में गलत संग्रहण दिखाते हुए तथा यूको बैंक एवं वैशाली क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सरफुद्धीनपुर के सरकारी खाते में अर्जित सूद की राशि को रोकड़ पंजी के अंतशेष से छिपाते हुए एकल ताले की नगद राशि से तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, श्री अशर्फी पटेल के साथ मिली भगत कर गवन कर लिया है ।
18. दिनांक-11.08.1995 को अभिश्रव पंजी के अनुसार 15,25,726.13 रूपयें दर्शाया गया है, जिसे रोकड़ पंजी के वर्जिकृत विवरणी में नहीं दर्शाया गया है । पूर्व में इसकी जाँच करने पर पाया गया कि अभिश्रव पंजी में दिनांक-07.03.1992 को अंतशेष 12,78,768.64 रूपया दर्शाया गया है । फिर भी दिनांक-04.05.1992 को अभिश्रव 1317369.73 रूपया दर्शाया गया है, किन्तु तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है । पुनः बगैर तिथि के 74 अभिश्रव कुल मो0 8339.15 रूपया का पंजी में दर्ज किेया गया है जिसे शामिल कर कुल अभिश्रव 13,25,708.88 रूपया होता है, किन्तु सीधे एक साल बाद दिनांक-20.10.1994 को इसके बदले 14,78,768.64 रूपया तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी के हस्ताक्षर के साथ दिखाया गया है । इस प्रकार 1,53,059.76 रूपयें बगैर अभिश्रव पंजी में अभिश्रवों को चढ़ाये बढ़ा कर दिखा दिया गया है, जो तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अशर्फी पटेल एवं नाजीर श्री विजय कुमार झा द्वारा गवन किया गया है ।
19. श्री विजय कुमार झा, तत्कालीन नाजीर एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, श्री अशर्फी पटेल ने मिली भगत कर बैंक खातों के अर्जित सूद की राशि एवं एकल ताले की कुल मो0 4,08,052.57 रूपये तथा अभिश्रव के रूप में 1,53,059.76 रूपयें कुल मिलाकर 5,61,112.33 रूपयें (पाँच लाख एकसठ हजार एक सौ बारह रूपया तेतीस पैसा) मात्र का धोखाधड़ी करते हुए मिली भगत कर गवन कर लिया गया है । इस कार्यालय के पत्रांक-47/स्था0, दिनांक-17.01.1997 द्वारा श्री आर0 के राय, तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
श्री आर0 के राय जिला पंचायत राज पदाधिकारी के स्थानांतरण होने के पश्चात् जिला पदाधिकारी के आदेश ज्ञापांक-1487/स्था0 दिनांक-22.11.1997 द्वारा जिला विकास पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया ।
श्री डी0एन0 राय, जिला विकास पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर द्वारा पत्र संख्या-1589, दिनांक- 24.08.1998 से सूचित किया गया कि श्री झा अपने स्थाई पता एवं हाल के पता पर भी लापता पाये गये तथा समाचार पत्र में स्पष्टीकरण देने हेतु सूचना का प्रकाशन कराने का निदेश दिया गया ।
पत्रांक-202/स्था0, दिनांक-16.09.1998 से पटना से प्रकाशित हिन्दी दैनिक समाचार पत्र में स्पष्टीकरण देने हेतु श्री झा के नाम से सूचना का प्रकाशन हेतु भेजा गया । पुनः पत्रांक-220मु0/स्था0, दिनांक-05.10.
1998 से सूचना प्रकाशित करने हेतु महानिदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग, बिहार, पटना को सूचित किया गया ।
जिला विकास पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के स्थानांतरण होने के पश्चात् इस कार्यालय के पत्रांक-177, दिनांक-01.04.2000 से श्री डी0एन0 झा उप-समाहर्त्ता, मुजफ्फरपुर को श्री झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया ।
विभागीय कार्यवाही में श्री झा द्वारा न तो उपस्थिति दी गई न ही स्पष्टीकरण सम्र्पित किया गया । दैनिक सामाचार पत्र के माध्यम से भी सूचना प्रकाशित कराया गया । दैनिक सामाचार पत्र में सूचना प्रकाशन के बाद भी श्री विजय कुमार झा द्वारा उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रखा गया । संचालन पदाधिकारी द्वारा एक पक्षीय सुनवाई कर दिनांक-05.09.2001 को अपना प्रतिवेदन समर्पित किया, जिसमें उन्होंने श्री विजय कुमार झा के विरूद्ध आरोप को साबित पाया और संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्व नाजिर, बोचहाँ प्रखंड को6 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 सेवा से बर्खास्त करने का अनुशंसा किया गया । साथ ही बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग अधिनियम के अधीन उनसे दुर्विनियोग की गई सरकारी राशि की उगाही करने की अनुशंसा की गई । संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में आरोपित कार्मिक से दिनांक-05.06.2003 को द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया । आरोपित कार्मिक के द्वारा इन्भेन्ट्री सूची एवं अंकेक्षण प्रतिवेदन की मांग की गई जो आरोपित कार्मिक द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर देने हेतु एक महीने के समय की मांग की गई । पुनः जबाब अप्राप्त रहने के कारण आरोपित कार्मिक को पत्रांक-355, दिनांक-26.03.2004 एवं 480, दिनांक-03.06.2004 पुनः 731 दिनांक-22.07.2004 एवं 863, दिनांक-13.08.2004 से द्वितीय कारण पृच्छा देने हेतु सूचना निर्गत किया गया । आरोपित कार्मिक द्वारा दिनांक-28.08.2004 को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया । द्वितीय कारण पृच्छा प्राप्त होने के पश्चात् समीक्षोपरांत पुनः संचालन पदाधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया । श्री विजय कुमार झा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु इस कार्यालय के पत्रांक-150, दिनांक-16.03.2005 से उप-समाहर्त्ता प्रभारी, जिला विधि प्रशाखा, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया । उनके स्थानांतरण के पश्चात् पत्रांक-726, दिनांक-02.05.2006 से मूल अभिलेख वापस किया गया । तत्पश्चात् इस कार्यालय के पत्रांक-531, दिनांक-29.06.2006 से जिला शस्त्र दण्डाधिकारी, मुजफ्फरपुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया । उनके विभागीय अभिलेख मूल में वापस करने के पश्चात् श्री प्रहलाद ठाकुर अपर समाहर्त्ता को पत्रांक-242, दिनांक-04.03.2008 से संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया । उन्हें निदेश दिया गया कि 45 दिनों के अन्दर अपना जाँच प्रतिवेदन देना सुनिश्चित करें । इस बीच श्री विजय कुमार झा गवन के आरोप में दर्ज किये गये प्राथमिकी में दिनांक-03.01.2002 को जेल भी गये । श्री प्रहलाद ठाकुर, अपर समाहर्त्ता द्वारा अपना प्रतिवेदन दिनांक-19.09.2008 को समर्पित किया । उन्होंने भी श्री विजय कुमार झा के विरूद्ध लगाये गये आरोपों को सही पाया और श्री विजय कुमार झा द्वारा समर्पित कारण पृच्छा को भ्रामक एवं स्वीकार योग्य नहीं बताया । संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में श्री विजय कुमार झा से द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया । श्री विजय कुमार झा को सुनवाई हेतु दिनांक- 30.10.2008 को उपस्थित होने का निदेश दिया गया । श्री विजय कुमार झा, अधोहस्ताक्षरी के समक्ष दिनांक-30.10.2008 को उपस्थित हुए । उन्होंने अपना एक और कारण पृच्छा समर्पित किया जिसके आलोक में कुछ कागजात की मांग की । श्री झा द्वारा मांगे गये कागजात जो जिला स्थापना प्रशाखा में उपलब्ध थे उन कागजातों को श्री झा को उपलब्ध करा दिया गया । अन्य कागजात उपलब्ध कराने का निदेश प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ को दिया गया, जिसकी प्रति श्री विजय कुमार झा को देते हुए यह निदेश दिया गया कि वें संबंधित कागजात प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ से प्राप्त कर दिनांक- 28.11.2008 को अपना अंतिम कारण पृच्छा देना सुनिश्चित करें, किन्तु श्री झा द्वारा कोई जबाब नहीं दिया गया । इस प्रकार श्री झा पुरे विभागीय कार्यवाही के दौरान असहयोग किया गया । साथ ही किसी न किसी प्रकार के कागजात की मांग कर जबाब देने में टाल-मटोल करते रहें । इससे यह भी स्पष्ट होता है कि श्री झा को अपने बचाव में कोई ठोस जबाब नहीं है एवं वें मात्र कागजातों की मांग कर समय लेना चाहते है । यदि श्री झा के समक्ष आरोपो के संबंध में एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य के आलोक में कोई ठोस सबुत होता तो वें निश्चित रूप से संचालन पदाधिकारी के संबंध अथवा अधोहस्ताक्षरी के समक्ष प्रस्तुत किये होते । श्री झा अपने विभागीय कार्यवाही के दौरान भी संचालन पदाधिकारी को आवश्यक सहयोग नहीं दिये जिसके कारण पुनः संचालन पदाधिकारी नियुक्त कर विभागीय कार्यवाही का संचालन किया गया । उक्त संचालन पदाधिकारी के समक्ष भी कोई ठोस साक्ष्य/सबुत समर्पित नहीं किये और संचालन पदाधिकारी द्वारा उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण को भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया गया । इस प्रकार यह स्पष्ट है कि श्री झा को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है यदि कोई कागजात/सबुत प्रस्तुत करना होता तो श्री झा अधोहस्ताक्षरी के द्वारा दिये गये समय दिनांक-28.11.2008 तक अपना पक्ष समर्पित करते किन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया जाना यह बतलाता है कि वें मात्र समय लेने के इच्छुक है और बचाव में कुछ नहीं समर्पित करते है । जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के आदेश दिनांक-07.03.2002 के आलोक में पत्रांक-269, दिनांक-16.03.02 द्वारा श्री विजय कुमार झा के द्वारा गवन की गई राशि के वसूली हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी, बोचहाँ को निलाम-पत्र दायर करने का निदेश दिया गया ।7 (cid:18)बहार गजट, (असाधारण), 19 दिसम्बर 2008 श्री विजय कुमार झा द्वारा उपरोक्त किये गये गवन के आरोप की जाँच जिला लेखा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर एवं कार्यालय अधीक्षक से करायी गई । उन्होंने पत्रांक-1596, दिनांक-20.01.1995 से सम्पुष्ट किया कि आरोपित कार्मिक द्वारा 5,61,112.33 रूपयें का गवन किया गया है ।
उर्युक्त तथ्यों, परिस्थितियों एवं सम्य्क विवेचन तथा जाँच प्रतिवेदन के अवलोकन के उपरांत जाँच प्रतिवेदन से संतुष्ट होते हुए श्री विजय कुमार झा, तत्कालीन नाजीर, बोचहाँ प्रखंड के विरूद्ध सरकारी राशि मो0 561112.33 रूपयें के गवन एवं रोकड़ बही में गड़बड़ी प्रमाणित होने के आधार पर आरोपित कार्मिक श्री विजय कुमार झा के विरूद्ध वित्तीय कदाचार को प्रमाणित पाते हुए उनके विरूद्ध वृहत दण्ड के लिए दोष सिद्ध होने के आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (X) के अन्तर्गत प्रदत शक्तियों के अध्यायीन पत्र निर्गत की तिथि से श्री विजय कुमार झा, तत्कालीन नाजीर, बोचहाँ प्रखंड को सेवा से बर्खास्त किया जाता है ।
श्री झा को निलंबन अवधि में जीवन-निर्वाह भत्ता के अलावे कुछ भी देय नहीं होगा । श्री विजय कुमार झा से संबधित ब्यौरा निम्न प्रकार है :- 1. सरकारी सेवक का नाम - श्री विजय कुमार झा 2. पिता का नाम - स्व0 काशीनाथ झा 3. जन्मतिथि - 14.03.1950
4. सरकारी सेवा में प्रथम नियुक्ति
की तिथि - 16.01.1974 5. वेतनमान - 1400-2300
6. स्थायी पता -ग्रामपोस्ट-मैलाम, थाना-झंझारपुर, जिला-मधुबनी।
7. वर्तमान पता- -ग्रामपोस्टथाना-अहियापुर, जिला-मुजफ्फरपुर।
ह0-अस्पष्ट,
जिला पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर
———— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु,ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 575-571+000-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।